JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न–दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखो
1. 2011 जनगणना के अनुसार भारत में औसत जनसंख्या घनत्व है –
(A) 216
(B) 382
(C) 221
(D) 350
उत्तर:
(B) 382

2. किस राज्य में सर्वाधिक जनसंख्या है?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) पश्चिम बंगाल
(C) केरल
(D) पंजाब।
उत्तर:
(A) उत्तर प्रदेश

3. किस राज्य में सर्वाधिक लिंगानुपात है?
(A) केरल
(B) हिमाचल प्रदेश
(C) उड़ीसा
(D) तमिलनाडु।
उत्तर:
(A) केरल

4. भारत का विश्व जनंसख्या में कौन-सा स्थान है?
(A) पहला
(B) दूसरा
(C) पांचवां
(D) सातवां।
उत्तर:
(B) दूसरा

5. भारत में प्रति दशक जनसंख्या वृद्धि दर है?
(A) 15.3%
(B) 17.3%
(C) 19.3%
(D) 21.3%.
उत्तर:
(D) 21.3%.

6. भारत में पहली सम्पूर्ण जनगणना कब हुई?
(A) 1871
(B) 1881
(C) 1891
(D) 1861.
उत्तर:
(B) 1881

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7. भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग है?
(A) 10.7%
(B) 12.7%
(C) 16.7%
(D) 18.7%.
उत्तर:
(C) 16.7%

8. किस राज्य में सबसे कम जनसंख्या है?
(A) हरियाणा
(B) राजस्थान
(C) सिक्किम
(D) मिज़ोरम।
उत्तर:
(C) सिक्किम

9. भारत में कितने मिलियन नगर हैं?
(A) 25
(B) 27
(C) 30
(D) 53.
उत्तर:
(D) 53.

10. भारत में 2011 में औसत लिंगानुपात था
(A) 910
(B) 923
(C) 940
(D) 953.
उत्तर:
(C) 940

11. भारत में औसत जीवन प्रत्याश कितनी है?
(A) 55 वर्ष
(B) 60 वर्ष
(C) 65 वर्ष
(D) 70 वर्ष।
उत्तर:
(C) 65 वर्ष

12. भारत में साक्षरता दर है
(A) 55%
(B) 60%
(C) 74%
(D) 67%.
उत्तर:
(C) 74%

13. भारत में कृषकों का प्रतिशत है
(A) 48%
(B) 50%
(C) 54%
(D) 58%.
उत्तर:
(D) 58%.

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14. भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व है
(A) जम्मू-कश्मीर
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) राजस्थान
(D) नागालैंड।
उत्तर:
(B) अरुणाचल प्रदेश

15. भारत की जनसंख्या कितने वर्षों में दुगुनी होती है ?
(A) 32 वर्ष
(B) 34 वर्ष
(C) 36 वर्ष
(D) 38 वर्ष।
उत्तर:
(C) 36 वर्ष

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
121.02 करोड़। (विश्व की 17.5% जनसंख्या)।

प्रश्न 2.
जनसंख्या तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का संसार में स्थान बताओ।
उत्तर:
जनसंख्या : दूसरा स्थान क्षेत्रफल : सातवां स्थान (विश्व का 2.4% क्षेत्रफल)।

प्रश्न 3.
भारत में पहली पूर्ण जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1881 में।

प्रश्न 4.
भारत में औसत जनसंख्या घनत्व कितना है ?
उत्तर:
382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।

प्रश्न 5.
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व किस राज्य में है?
उत्तर:
बिहार-1102 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।।

प्रश्न 6.
भारत में औसत वार्षिक जनसंख्या वृद्धि कितनी है?
उत्तर:
1.76 प्रतिशत।

प्रश्न 7.
भारत में जन्म-दर तथा मृत्यु-दर कितनी है ?
उत्तर:
जन्म-दर 26 प्रति हजार तथा मृत्यु-दर 9 प्रति हजार व्यक्ति है।

प्रश्न 8.
भारत में राज्यस्तर पर जनसंख्या वृद्धि किस राज्य में कम है ?
उत्तर:
केरल-4.9% प्रति दशक।

प्रश्न 9.
विगत शताब्दी में भारत की जनसंख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर:
78 करोड़।

प्रश्न 10.
संसार में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बताओ।
उत्तर:
चीन-134 करोड़।

प्रश्न 11.
भारत में पहली अपूर्ण जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1872 ई० में।

प्रश्न 12.
भारत की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग ग्रामीण है?
उत्तर:
68.8%

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प्रश्न 13.
भारत में गाँवों की कुल संख्या कितनी है ?
उत्तर:
580781

प्रश्न 14.
भारत के किस राज्य में सर्वाधिक जनसंख्या है ?
उत्तर:
भारत में उत्तर प्रदेश राज्य में 19.95 करोड़ जनसंख्या है जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है।

प्रश्न 15.
भारत के किस राज्य में सबसे कम जनसंख्या है?
उत्तर:
सिक्किम राज्य में 6.07 लाख।

प्रश्न 16.
भारत के कितने राज्यों में 5 करोड़ से अधिक जनसंख्या प्रत्येक राज्य में है?
उत्तर:
10 राज्य।

प्रश्न 17.
भारत के पाँच राज्य बताओ जिनमें देश की आधे से अधिक जनसंख्या निवास करती है।
उत्तर:
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश।

प्रश्न 18.
जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से विश्व के तीन बड़े देश बताओ।
उत्तर:

  1. बांग्लादेश-849 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
  2. जापान-334 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
  3. भारत-382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।

प्रश्न 19.
100 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से कम घनत्व वाले तीन राज्य बताओ।
उत्तर:
सिक्किम (86), मिजोरम (52) तथा अरुणाचल प्रदेश (17)।

प्रश्न 20.
उच्च घनत्व के तीन समूह बताओ।
उत्तर:
उत्तरी मैदान, पूर्वी तट, डेल्टा क्षेत्र।

प्रश्न 21.
जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों के तीन समूह बताओ।
उत्तर:

  1. भौतिक कारक
  2. सामाजिक-आर्थिक कारक
  3. जनांकिकीय कारक।

प्रश्न 22.
जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले चार भौतिक कारक बताओ।
उत्तर:

  1. धरातल
  2. मृदा
  3. जलवायु
  4. खनिजों की सुलभता।

प्रश्न 23.
जनांकिकीय कारकों के तीन तत्त्व बताओ।
उत्तर:

  1. प्रजनन दर
  2. मृत्यु-दर
  3. प्रवास।

प्रश्न 24.
जनसंख्या वृद्धि दर किसे कहते हैं ?
उत्तर:
दो समय बिन्दुओं के मध्य जनसंख्या में होने वाले शुद्ध परिवर्तन को वृद्धि दर कहते हैं।

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प्रश्न 25.
वृद्धि दर के दो प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. ऋणात्मक वृद्धि दर-जब समय अवधि में जनसंख्या घटती है तो उसे ऋणात्मक वृद्धि दर कहते हैं।
  2. धनात्मक वृद्धि दर-जब जनसंख्या बढ़ती है तो इसे धनात्मक वृद्धि दर कहते हैं।

प्रश्न 26.
विगत शताब्दी में भारत की जनसंख्या में कितने गुणा वृद्धि हुई है?
उत्तर:
चार गुणा (कुल वृद्धि 78 करोड़)।

प्रश्न 27.
1991 तथा 2001 की अवधि में देश की जनसंख्या वृद्धि दर कितनी थी?
उत्तर:
21.34 प्रतिशत प्रति दशक तथा 1.93 प्रतिशत प्रतिवर्ष।

प्रश्न 28.
भारत के किस राज्य में जनसंख्या वृद्धि दर, उच्चतम तथा निम्नतम है?
उत्तर:
मेघालय में 27.8 प्रतिशत तथा केरल में 40.9 प्रतिशत।

प्रश्न 29.
भारत में ग्रामीण जनसंख्या का सबसे अधिक प्रतिशत किस राज्य में है?
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश (94.50 प्रतिशत)।

प्रश्न 30.
अधिक नगरीय जनसंख्या वृद्धि वाले 4 राज्य बताओ।
उत्तर:
हरियाणा, नागालैंड, तमिलनाडु, सिक्किम।

प्रश्न 31.
नगरीकरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या से नगरीय जनसंख्या में समाज के बदलने की प्रक्रिया को नगरीकरण कहते हैं।

प्रश्न 32.
भारत में सर्वाधिक नगरीकृत राज्य कौन-सा है ?
उत्तर:
गोवा (49.77 प्रतिशत)।

प्रश्न 33.
किस आयु वर्ग की जनसंख्या को श्रमजीवी (कार्यरत ) कहा जाता है?
उत्तर:
प्रौढ़ वर्ग 15-59 वर्ष तक (56.7 प्रतिशत)।

प्रश्न 34.
आश्रित अनुपात किसे कहते हैं ? भारत में यह कितना है?
उत्तर:
किशोर, वृद्ध जनसंख्या तथा प्रौढ़ जनसंख्या के बीच अनुपात को आश्रित अनुपात कहते हैं। भारत में यह अनुपात 79.4 प्रतिशत है।

प्रश्न 35.
लिंग-अनुपात किस प्रकार एक सामाजिक संकेतक है ?
उत्तर:
लिंग-अनुपात समाज में पुरुषों और स्त्रियों के मध्य विद्यमान असमानता का माप है।

प्रश्न 36.
भारत की कुल जनसंख्या में पुरुष तथा स्त्रियां कितनी संख्या में हैं?
उत्तर:
पुरुष 62 करोड़, स्त्रियां 59 करोड़।

प्रश्न 37.
भारत में औसत लिंगानुपात कितना है?
उत्तर:
940

प्रश्न 38.
भारत में सबसे अधिक लिंगानुपात किस राज्य में है?
उत्तर:
केरल राज्य में 1084।

प्रश्न 39.
भारत में सबसे कम लिंगानुपात किस राज्य में है?
उत्तर:
हरियाणा में 877।

प्रश्न 40.
किसी व्यक्ति के व्यवसाय का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यवसाय वह कार्य या व्यापार है जिससे कोई व्यक्ति अपनी रोजी रोटी कमाता है।

प्रश्न 41.
भारत में लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या है?
उत्तर:
भारत में 67.4 प्रतिशत कामगार कृषि कार्य करते हैं।

प्रश्न 42.
क्या कारण है कि कृषि कामगारों का अनुपात निरन्तर घट रहा है?
उत्तर:
भारत में कृषि कामगारों का अनुपात 1971 में 69.49 प्रतिशत से घटकर 2001 में 58.4 प्रतिशत रह गया – है। इसका मुख्य कारण है कि घरेलू उद्योगों में कामगारों की संख्या बढ़ रही है।

प्रश्न 43.
गैर-कृषि कार्य क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:
विनिर्माण, व्यापार, परिवहन, भंडारण तथा संचार।

प्रश्न 44.
संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएं सूचीबद्ध हैं?
उत्तर;
22 भाषाएं।

प्रश्न 45.
भारत किन चार धर्मों का जन्म स्थान रहा है?
उत्तर:
हिन्दू, बौद्ध, जैन तथा सिक्ख धर्म।

प्रश्न 46.
भारत में कौन-सी भाषा सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है?
उत्तर:
हिंदी (33.73 करोड़)।

प्रश्न 47.
भारत में द्राविड़ भाषा बोलने वाले लोगों का कितना प्रतिशत है?
उत्तर:
20% I

प्रश्न 48.
भारत में हिंदू धर्म के अनुयायी कितने % लोग हैं ?
उत्तर:
68.76 करोड़ (82.0%)।

प्रश्न 49.
भारत के किस राज्य में सिक्ख धर्म जनसंख्या का संकेंद्रण है?
उत्तर:
पंजाब।

प्रश्न 50.
भारत के किस राज्य में बौद्ध जनसंख्या अधिक है?
उत्तर:
महाराष्ट्र में।

प्रश्न 51.
भारत के किस राज्य में जैन धर्म जनसंख्या अधिक है?
उत्तर:
महाराष्ट्र में।

प्रश्न 52.
भारत के दो उच्च घनत्व वाले राज्यों के नाम लिखो (400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक)
उत्तर:
बिहार तथा केरल।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत की जनसंख्या का विशाल आकार है’ इसके पक्ष में दो तथ्य बताओ।
उत्तर:

  1. भारत का विश्व जनसंख्या में दूसरा स्थान है।
  2. भारत की जनसंख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया की संयुक्त जनसंख्या से भी अधिक है।

प्रश्न 2.
भारत में कई सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक उलझनें हैं। तीन कारण बताओ।
उत्तर:

  1. विशाल जनसंख्या
  2. सीमित संसाधन
  3. जनसंख्या वृद्धि दर का अधिक होना।

प्रश्न 3.
भारत में सामाजिक आर्थिक विकास प्रक्रिया और गति को प्रभावित करने वाले चार कारक बताओ।
उत्तर:

  1. विशाल जनसंख्या
  2. जातीय विविधता
  3. अत्यधिक ग्रामीण स्वरूप
  4. जनसंख्या का असमान वितरण।

प्रश्न 4.
‘भारत गाँवों का देश है। स्पष्ट करो तथा दो तथ्य बताओ।
उत्तर:
(i) भारत में 68.8% लोग गाँवों में रहते हैं।
(ii) भारत में गाँवों की संख्या 580781 है।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 5.
दिल्ली राज्य में 2011 में कुल जनसंख्या 1,67,53,235 तथा क्षेत्रफल 1483 वर्ग कि०मी० था। जनसंख्या घनत्व ज्ञात करो।
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व =
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 4
= 11297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

प्रश्न 6.
भारत तथा चीन में जनसंख्या तथा जनसंख्या घनत्व की तुलना करो।
उत्तर:
चीन में कल जनसंख्या 134 करोड है जबकि भारत में कुल जनसंख्या 121.02 करोड है। भारत में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है जबकि चीन में जनसंख्या घनत्व 140 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। इस प्रकार चीन में कुल जनसंख्या अधिक है जबकि भारत में जनसंख्या घनत्व अधिक है।

प्रश्न 7.
‘अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य गंगा और सतलज के मैदान में स्थित हैं।’ उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
पश्चिमी बंगाल (1029 व्यक्ति) तथा बिहार (1102 व्यक्ति) भारत के दो बड़े घने बसे प्रदेश उत्तरी मैदान में हैं। उत्तर प्रदेश (20 करोड़ जनसंख्या) भारत की सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहां जनसंख्या घनत्व 828 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० हैं। पंजाब में 550 तथा हरियाणा में 573 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० घनत्व है।

प्रश्न 8.
‘भारत की जनसंख्या असमान रूप से वितरित है’ तीन उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या का वितरण असमान है।

  1. पर्वतों, मरुस्थलों तथा वन-प्रदेशों में जनसंख्या कम है।
  2. समतल एवं उपजाऊ क्षेत्र के राज्यों में जनसंख्या अधिक है।
  3. जलोढ़ मैदानों तथा तटीय मैदानों में जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 9.
‘जनसंख्या का घनत्व भूमि पर जनसंख्या के दबाव का वास्तविक परिचायक नहीं है’। एक राज्य का उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर;
घनत्व से केवल सामान्य दशा का पता चलता है। इससे सामाजिक व आर्थिक कारकों के प्रभाव का ज्ञान नहीं होता। मध्य प्रदेश एक विशाल जनसंख्या वाला राज्य है। (236 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०)। इस राज्य का अधिकतर भाग ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी तथा वनों से ढका प्रदेश है। यदि कृषि भूमि पर विचार किया जाए तो मध्य प्रदेश सघन जनसंख्या वाला राज्य बन जाता है।

प्रश्न 10.
औसत घनत्व की दृष्टि से कितने प्रकार के जनसंख्या घनत्व के क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है?
उत्तर:

  1. उच्च घनत्व वाले जिले-400 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
  2. मध्यम घनत्व वाले जिले-200 से 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०।
  3. निम्न घनत्व वाले जिले-200 व्यक्ति से कम प्रति वर्ग कि०मी०।

प्रश्न 11.
विरल (निम्न) जनसंख्या वाले क्षेत्र बताओ। यहां निम्न घनत्व के क्या कारण हैं ?
उत्तर:
200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से कम घनत्व वाले क्षेत्र विरल जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं।

  1. राजस्थान के कुछ क्षेत्र
  2. मध्य प्रदेश
  3. छत्तीसगढ़
  4. पश्चिमी उड़ीसा
  5. पूर्वी कर्नाटक
  6. आंध्र प्रदेश का मध्यवर्ती भाग।

इस प्रकार निम्न घनत्व का यह क्षेत्र अरावली पर्वत श्रेणी से लेकर पूर्व में उड़ीसा तक फैला हुआ है।

निम्न घनत्व के कारण –

  1. पहाड़ी ऊबड़-खाबड़ धरातल
  2. कम उपजाऊ मृदा
  3. कम वर्षा
  4. वनाच्छादित प्रदेश
  5. मरुस्थलीय क्षेत्र।

प्रश्न 12.
सामाजिक-आर्थिक कारकों के प्रभाव से उच्च घनत्व वाले दो प्रकार के क्षेत्र बताओ तथा कारण स्पष्ट करो।
उत्तर:
सामाजिक-आर्थिक कारकों का प्रभाव क्रिया-कलापों पर पड़ता है। इसलिए अधिक नगरीयकरण तथा औद्योगिक विकास के कारण मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली में उच्च घनत्व है। अधिक उपज देने वाली फ़सलों की खेती (हरित क्रान्ति) के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा तथा पंजाब में उच्च घनत्व है।

प्रश्न 13.
‘भारत के दक्षिणी राज्यों में जन्म-दर अपेक्षाकृति कम है’। कारण बताओ।
उत्तर:
भारत के उत्तरी राज्यों में वृद्धि दर अधिक है, परन्तु दक्षिणी राज्यों में जन्म दर कम होने के कारण वृद्धि दर कम है।
कारण –

  1. दक्षिणी राज्यों में उच्च साक्षरता दर
  2. अधिक नगरीय जनसंख्या
  3. अधिक आर्थिक विकास।

प्रश्न 14.
जनसंख्या संघटन से क्या अभिप्राय है? इसके प्रमुख घटक बताओ।
उत्तर:
जनसंख्या संघटन – जनसंख्या की भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विशेषताओं को जनसंख्या का संघटन कहते हैं। इसे आयु, लिंग, निवास स्थान, भाषा, धर्म, वैवाहिक स्थिति, मानव प्रजातीयता, साक्षरता, शिक्षा और व्यावसायिक संरचना प्रमुख घटक हैं।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 15.
भारत की नगरीय जनसंख्या वृद्धि के विभिन्न चरण बताओ।
उत्तर:
भारतीय नगरीय जनसंख्या का अनुपात सन् 1901 से निरन्तर बढ़ रहा है।

  1. 1901 से 1941 तक यह वृद्धि दर 13.38% थी।
  2. 1941 से 1971 तक यह वृद्धि दर 19.90% थी।
  3. 1971 से 2001 तक यह वृद्धि दर 27.78% हो गई।

प्रश्न 16.
भारत में उच्च नगरीकरण तथा निम्न नगरीकरण के क्षेत्र बताओ।
उत्तर:

  1. भारत में दक्षिणी, पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी राज्यों में।
  2. उत्तरी, मध्य भारत, उत्तर पूर्वी राज्यों में नगरीकरण निम्न हैं।

प्रश्न 17.
किन पांच राज्यों में भारत की नगरीय जनसंख्या का आधे से अधिक भाग रहता है? उत्तर प्रदेश राज्य की स्थिति क्या है?
उत्तर:
पांच राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में भारत की नगरीय जनसंख्या का 51 प्रतिशत भाग रहता है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है परन्तु यहां केवल 20.78 प्रतिशत जनसंख्या ही नगरों में रहती है। यह ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण है।

प्रश्न 18.
भारत में किशोर जनसंख्या वर्ग का अनुपात कितना है ? इसके अधिक होने के तीन कारण बताओ।
उत्तर:
भारत में किशोर वर्ग (15 वर्ष से कम आयु) का प्रतिशत 36.5 है। किशोर जनसंख्या के अधिक अनुपात के मुख्य कारण हैं:

  1. उच्च जन्म दर
  2. तीव्रता से घटती शिशु मृत्यु दर
  3. निरन्तर घटती बाल मृत्यु दर।

प्रश्न 19.
‘भारत में लिंगानुपात दक्षिण से उत्तर की ओर तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटता है। उदाहरण सहित स्पष्ट करो।
अथवा
भारत में लिंगानुपात संघटन के प्रादेशिक प्रतिरूपों का वर्णन करें। उत्तर-भारत के राज्यों में लिंगानुपात में बहुत भिन्नता पाई जाती है।

  1. केरल राज्य में सबसे अधिक लिंगानुपात 1084 है।
  2. पाण्डिचेरी केन्द्र शासित प्रदेश में लिंगानुपात 1001 है।
  3. दक्षिणी राज्यों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है। तमिलनाडु राज्य में 987, आन्ध्र प्रदेश 978, उड़ीसा 972, कर्नाटक 965, गोवा 961, झारखण्ड 941 है।।
  4. उत्तरी भारत तथा मध्य भारत के राज्यों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। महाराष्ट्र 922, राजस्थान 921, गुजरात 920, बिहार 919, मध्य प्रदेश 919, उत्तर प्रदेश 898, पंजाब 893, हरियाणा 877 है। इससे स्पष्ट है कि भारत में लिंगानुपात दक्षिण से उत्तर की ओर कम तथा पूर्व से पश्चिम की ओर घटता है।

प्रश्न 20.
लिंगानुपात घटने के चार कारण बताओ।
उत्तर:

  1. लड़कियों की तुलना में अधिक लड़कों का जन्म लेना।
  2. शैश्यावस्था में कन्या शिशओं की मृत्यु और बच्चों के जन्म के समय अधिक स्त्रियों की मृत्य।
  3. स्त्रियों की सामान्य उपेक्षा के कारण बचपन में उनकी अधिक मृत्यु दर।
  4. गर्भावस्था में स्त्री-शिशु होने पर भ्रूण हत्या।

प्रश्न 21.
काम की अवधि के आधार पर भारत की जनसंख्या को तीन वर्गों में बांटो।
उत्तर:
काम की अवधि के आधार पर भारत की जनसंख्या को तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है –

  1. मुख्य कामगार (Main worker) मुख्य कामगार वह है जो वर्ष में छ: महीने या 183 दिन तक आर्थिक रूप से उत्पादक कार्य में शारीरिक या मानसिक रूप से भाग लेता है। देश में कामगारों का अनुपात 30.5% है।
  2. सीमांत कामगार (Marginal worker) वह है जो वर्ष में 183 दिनों से कम दिनों में उत्पादक कार्य में भाग लेता है। देश में सीमान्त कामगारों की अनुपात 8.7% है।
  3. गैर-कामगार (Non worker)-जो वर्ष भर अपनी आजीविका के लिए कोई काम नहीं करता। देश में गैर कामगार 60.8% है।

प्रश्न 22.
स्त्रियों की सहभागिता दर कम होने के कारण बताओ।
उत्तर:
भारत में स्त्रियों की सहभागिता दर केवल 14.68 प्रतिशत है। इस निम्न सहभागिता दर के निम्नलिखित कारण हैं:

  1. सम्मिलित परिवार व्यवस्था
  2. स्त्रियों में शिक्षा का निम्न स्तर
  3. बारंबार शिशु जन्म
  4. रोज़गार के सीमित अवसर
  5. स्त्रियों पर परिवार की अधिक ज़िम्मेदारी।

प्रश्न 23.
भारत के कामगारों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटो।
उत्तर:

  1. कृषक
  2. खेतिहर मज़दूर
  3. घरेलू औद्योगिक कामगार
  4. अन्य कामगार।

प्रश्न 24.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के दो घटक कौन-से हैं ? प्रत्येक घटक के प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के दो घटक हैं –
(i) प्राकृतिक
(ii) अभिप्रेरित। प्राकृतिक घटक-प्राकृतिक वृद्धि का विश्लेषण अशोधित जन्म और मृत्यु दर को निर्धारित किया जाता है।
अभिप्रेरित घटक-अभिप्रेरित घटक किसी दिए गए क्षेत्र में लोगों के अन्तवर्ती व बहिवर्ती संचलन द्वारा स्पष्ट किया जाता है।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 25.
भारत के सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य का नाम बताइए और उसका घनत्व भी लिखिए।
उत्तर:
बिहार राज्य में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व है जो कि 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग कि. मी. है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत का विश्व में जनसंख्या के आकार तथा घनत्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर:
भारत की कुल जनसंख्या सन् 2011 में 121.02 करोड़ थी। भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। भारत में औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है तथा भारत का विश्व में तीसरा स्थान है।

प्रश्न 2.
चार राज्य बताओ जिनकी देश में जनसंख्या सर्वाधिक है। इनकी जनसंख्या तथा क्षेत्रफल की तुलना करो।
उत्तर:

क्रम राज्यजनसंख्याक्षेत्रफल (लाख वर्ग कि०मी०)
(1) उत्तर प्रदेश19.95 करोड़2.40 ,,
(2) महाराष्ट्र11.2 ,,3.07 ,,
(3) बिहार10.3 ,,0.94 ,,
(4) पश्चिमी बंगाल9.1 ,,0.88 ,,

प्रति जनगणना में भारत में जनसंख्या घनत्व लगातार क्यों बढ़ रहा है ? .
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि दर पहले की अपेक्षा कम है। परन्तु कुल जनसंख्या में अधिक वृद्धि जनसंख्या को एक विशाल आधार प्रदान कर रही है। इसी बड़े आधार के कारण जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ रहा है जबकि भूमि संसाधन सीमित हैं।

प्रश्न 4.
भारत में कौन-से क्षेत्र जनसंख्या निवास के लिए आकर्षक नहीं हैं ?
उत्तर:
पर्वतीय प्रदेश, शुष्क प्रदेश तथा वन प्रदेश जनसंख्या के लिए आकर्षण नहीं रखते। इस वर्ग में लगभग 167 जिले हैं जहां जनसंख्या कम है।

प्रश्न 5.
उत्तरी राज्यों तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों में कृषि पर ग्रामीण जनसंख्या का दबाव अधिक क्यों है ?
उत्तर:
केवल कृषिकृत भूमि ही जनसंख्या दबाव सहार सकती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में कृषिकृत भूमि कम है। इसलिए इन राज्यों में जनसंख्या कम है। ये राज्य पहाड़ी तथा वनाच्छादित हैं। धरातल कटा-फटा है। उत्तरी राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या बहुत अधिक है जो कृषि में लगी हुई है। इसलिए यहाँ कृषि पर जनसंख्या दबाव अधिक है।

प्रश्न 6.
भारत में जनसंख्या इतिहास को चार अवस्थाओं में बांटो।
उत्तर:
भारत का जनसंख्या इतिहास निम्नलिखित चार अवस्थाओं में बांटा जा सकता है –

जन्म दर-मृत्यु दरमुख्य लक्षण:उच्च जन्म दर
(1) 1921 से पूर्वजनसंख्या में नगण्य वृद्धितथा उच्च मृत्यु दर
(2) 1921-1951धीमी गति से वृद्धिउच्च जन्म दर तथा घटती मृत्यु दर
(3) 1951-1981तीव्र गति से वृद्धितीव्र गति से मृत्यु दर का कम होना
(4) 1981 से आगेवृद्धि दर का कम होनाकम जन्म दर तथा कम मृत्यु दर

प्रश्न 7.
सतलुज गंगा मैदान जनसंख्या के संकेन्द्रण के क्या कारण हैं ?
उत्तर:
सतलुज गंगा मैदान में उत्तर प्रदेश, बिहार पश्चिमी बंगाल, हरियाणा, पंजाब तथा दिल्ली क्षेत्र में जनसंख्या संकेन्द्रण हैं। यहां जनसंख्या घनत्व 400-700 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० के बीच है। यह एक उन्नत कृषि का प्रदेश है। जहां वर्ष में 2-3 फ़सलें उत्पन्न की जाती हैं। यहाँ मिट्टी उपजाऊ है तथा जलवायु अनुकूल है। जल सिंचाई सुविधाओं के कारण कृषि उन्नत है। दिल्ली तथा कोलकाता के इर्द-गिर्द औद्योगिक तथा नगरीय विकास के कारण जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 8.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले सामाजिक आर्थिक कारकों का वर्णन करो।
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व भौतिक कारकों पर निर्भर करता है। इनमें भूमि, जलवायु तथा मृदा शामिल हैं। परन्तु आधुनिक समय में सामाजिक-आर्थिक कारक प्रौद्योगिकी के प्रयोग के द्वारा जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। उच्च नगरीयकरण तथा औद्योगिक विकास के प्रभाव से मुम्बई, कोलकाता तथा दिल्ली क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व आधार हैं। कृषि प्रदेशों में हरित क्रान्ति के प्रयोग से पंजाब तथा हरियाणा प्रदेश में जनसंख्या घनत्व अधिक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर जनसंख्या प्रवास बढ़ रहा है। लोग रोज़गार की तलाश में प्रवास करते हैं। शिक्षा केन्द्र भी जनसंख्या को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।।

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प्रश्न 9.
भारत के किन राज्यों में जनसंख्या कम है ?
उत्तर:
भौतिक कारक जनसंख्या वृद्धि दर की सीमा निर्धारित करते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिमी उड़ीसा, कर्नाटक तथा आन्ध्र प्रदेश में जनसंख्या कम है। पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर पूर्वी राज्यों में जनसंख्या कम है।

प्रश्न 10.
जनसंख्या वृद्धि से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में जनसंख्या में एक निश्चित समय में परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। यह जन्म दर तथा मृत्यु दर में अन्तर होता है। प्रवास के कारण भी जनसंख्या में वृद्धि होती है।

प्रश्न 11.
भारत में जन्म दर तथा मृत्यु दर की प्रवृत्तियां किस प्रकार जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करती रही हैं ?
उत्तर:
1921-51 की अवधि में जनसंख्या वृद्धि धीमी गति से रही है। जन्म दर उच्च तथा परन्तु मृत्यु दर भी कई महामारियों के कारण उच्च थी। 1951-81 की अवधि में जनसंख्या तीव्र गति से विस्फोटात्मक दर से बढ़ी। चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु दर बहुत कम हो गई। 1981 के पश्चात् वृद्धि दर फिर घटने लगी क्योंकि जन्म दर कम हो गया है। अब जन्म दर तथा मृत्यु दर में अन्तर केवल 17 प्रति हज़ार है।

प्रश्न 12.
भारत में सबसे अधिक जनसंख्या तथा अधिकतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य बताओ।
उत्तर:
जनसंख्या-सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में सबसे अधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश राज्य में है। यहां कुल जनसंख्या 19.95 करोड़ है। यह भारत की कुल जनसंख्या का 16% भाग है। ख्या घनत्व-भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व (सन् 2011) बिहार राज्य में 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

प्रश्न 13.
भारत की जनसंख्या में मोटे तौर पर पुरुषों का प्रभुत्व क्यों है ?
उत्तर:
20वीं शताब्दी में महिलाओं की जनसंख्या का अनुपात निरन्तर घटता रहा है। सामाजिक कारणों से परिवार में लड़कियों की उपेक्षा की जाती रही है। ठीक प्रकार से लालन-पालन न होने के कारण लड़कियों में बीमारियों का प्रकोप अधिक है तथा बहुत-सी महिलाएं प्रसव के समय ही मर जाती हैं। पुरुष संख्या 62 करोड़ तथा स्त्री संख्या 59 करोड़ है।

प्रश्न 14.
भारत के किन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अत्यधिक निम्न है और क्यों ?
उत्तर:
“पर्यावरण की प्रतिकूल दशाओं के कारण उत्तर तथा उत्तर-पूर्व के पहाड़ी राज्यों में जनसंख्या का घनत्व बहुत कम है। सिक्किम में 86, नागालैंड में 119, जम्मू-कश्मीर में 124, मेघालय में 132, मणिपुर में 122, अरुणाचल प्रदेश में 17, मिज़ोरम में 52, हिमाचल प्रदेश में 123 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। इन राज्यों में पर्वतीय धरातल, वनों के अधिक विस्तार, यातायात के साधनों की कमी तथा प्रतिकूल जलवायु के कारण जनसंख्या घनत्व कम है।

प्रश्न 15.
जनसंख्या परिवर्तन के आधारभूत घटक कौन-से हैं ?
उत्तर:
समय के साथ-साथ किसी भी देश की जनसंख्या घटती-बढ़ती है। जनसंख्या भी अन्य प्राणियों की भांति स्थिर नहीं रहती है। यह परिवर्तन तीन कारकों पर निर्भर करता है

  1. जन्म दर (Birth rate)
  2. मृत्यु दर (Death rate)
  3. जनसंख्या प्रवास (Migration)

जन्म दर अधिक होने से जनसंख्या बढ़ती है, जबकि मृत्यु दर बढ़ने से जनसंख्या कम होती है। जन्म दर तथा मृत्यु .. दर के अन्तर को प्राकृतिक वृद्धि कहा जाता है। जब जन्म दर मृत्यु दर से अधिक होती है तो उसे धनात्मक प्राकृतिक वृद्धि (Positive Natural Growth) कहा जाता है। दूसरे देशों में प्रवास के कारण जनसंख्या कम होती है। दूसरे देशों से आने वाले लोगों या अप्रवास के कारण जनसंख्या में वृद्धि होती है। समय के साथ होने वाले जनसंख्या परिवर्तन … को जनसंख्या वृद्धि (Population Growth) कहा जाता है।

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प्रश्न 16.
भारत में जनसंख्या वृद्धि दर कितनी है ? नगरों तथा महानगरों में वृद्धि दर औसत से अधिक क्यों है ?
उत्तर:
भारत में 2001-2010 के दशक में जनसंख्या की औसत वृद्धि दर 1.67% रही है। देश में कुल जनसंख्या में 1830 लाख की वृद्धि हुई है। नगरों तथा महानगरों में यह वृद्धि दर औसत से बहुत अधिक है। नगरों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। नगरों के बाहर स्थित उप-नगर तथा ग्राम भी नगरों में मिल गए हैं। रोजगार तथा अच्छे रहन-सहन की तलाश में गांवों में से लोग शहरों की ओर प्रवास कर रहे हैं। इसलिए नगरों में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है जबकि ग्रामीण जनसंख्या में वृद्धि दर कम है।

प्रश्न 17.
भारत में जनसंख्या के क्षेत्रीय वितरण की असमानता के दो उदाहरण दो।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का क्षेत्रीय वितरण बहुत असमान है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक जनसंख्या है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल तथा आन्ध्र प्रदेश में कुल मिलाकर देश की लगभग आधी जनसंख्या निवास करती है। उत्तर प्रदेश अकेले राज्य में इतनी जनसंख्या है जितनी दक्षिण के तीन राज्यों केरल, कर्नाटक व तमिलनाडु में मिलती है। दिल्ली की जनसंख्या सभी केन्द्र शासित प्रदेशों की कुल जनसंख्या से अधिक है। मध्य प्रदेश भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। यहां देश के 14% क्षेत्रफल में केवल 7.6% लोग रहते हैं तथा जनसंख्या की दृष्टि से इसका छठा स्थान है।

प्रश्न 18.
अंक गणितीय घनत्व जनसंख्या के घनत्व का एक संवेदनशील माप क्यों नहीं है ?
उत्तर:
किसी देश की कुल जनसंख्या तथा उसके कुल क्षेत्रफल के अनुपात को उस देश की जनसंख्या का अंक गणितीय घनत्व (Arithmatic Density) कहा जाता है। यह पद्धति सरल है तथा अधिक प्रयोग की जाती है परन्तु यह एक अपरिष्कृत (Crude) विधि है तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्रयोग नहीं की जा सकती। यह एक संवेदनशील माप (Sensitive Index) नहीं है। इस विधि में देश के कुल क्षेत्रफल को उपयोग में लाया जाता है। परन्तु बहुत-से क्षेत्र ऐसे भी होते हैं जहां एक भी व्यक्ति नहीं रहता। इन्हें नकारात्मक प्रदेश (Negative Areas) कहते हैं। मनुष्य केवल चुने हुए प्रदेशों में रहता है जहां प्राकृतिक संसाधन सुगमता से प्राप्त हों। पहाड़ी, वन, दलदल, रेगिस्तान आदि प्रदेशों की ओर ध्यान नहीं दिया जाता जबकि वहां मानव निवास सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 19.
भारत की जनसंख्या का घनत्व लगातार क्यों बढ़ रहा है ?
उत्तर:
भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। यह संसार के घने बसे हुए क्षेत्रों में से एक है। भारत की जनसंख्या का घनत्व 1921 से लगातार बढ़ता जा रहा है।

वर्षजनसंख्या घनत्व प्रति व्यक्ति

वर्ग कि०मी०

192181
193190
1941103
1951117
1961142
1971177
1981221
1991267
2001313
2011382

प्रत्येक जनगणना में जनसंख्या वृद्धि के कारण जनसंख्या घनत्व बढ़ता जा रहा है, परन्तु क्षेत्रफल में वृद्धि नहीं होती। देश का क्षेत्रफल वहीं का वहीं रहता है। जनसंख्या घनत्व कुल जनसंख्या तथा क्षेत्रफल में अनुपात होता है। इसलिए जनसंख्या की सघनता बढ़ रही है। देश में कृषि पर अत्यधिक निर्भरता है। इसलिए कृषि में वृद्धि न होने के कारण भी ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व बढ़ता जा रहा है। इसे कम करने के लिए अर्थ-व्यवस्था में विविधता आवश्यक है।

प्रश्न 20.
भारत में जनसंख्या के घनत्व में पाई जाने वाली विभिन्नता के प्रमुख कारण क्या हैं ?
उत्तर:
भारत में जनसंख्या घनत्व में क्षेत्रीय प्रतिरूप में पर्याप्त विभिन्नताएं पाई जाती हैं। पर्यावरण की प्रतिकूल दशाओं के कारण उत्तर-पूर्वी भारत में औसत घनत्व 60 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से कम है। मध्यवर्ती भारत में यह घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। उत्तरी मैदान में पंजाब से पश्चिमी बंगाल की मेखला में अधिक घनत्व है। इस जनसंख्या घनत्व की विभिन्नता के मुख्य कारक उच्चावच, जलवायु, जल-आपूर्ति, मिट्टी की उर्वरता तथा कृषि उत्पादकता है। इन कारकों का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त जनांकिकी, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, ऐतिहासिक कारकों के योगदान आदि का जनसंख्या के घनत्व पर काफ़ी प्रभाव पड़ता है।

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प्रश्न 21.
‘जनसंख्या का संकेन्द्रण सूचकांक’ से क्या अभिप्राय है ? यह किस प्रकार जनसंख्या के असमान वितरण को प्रदर्शित करता है ?
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है। यदि हम प्रत्येक राज्य की जनसंख्या का देश की कुल जनसंख्या के अनुपात को देखें तो यह तथ्य और भी स्पष्ट हो जाता है। इसे जनसंख्या का संकेन्द्रण सूचकांक (Index of Concentration) कहते हैं। संकेन्द्रण सूचकांक से अभिप्राय है-देश की कुल जनसंख्या में किसी राज्य की जनसंख्या का अनुपात। जैसे उत्तर प्रदेश की जनसंख्या का संकेन्द्रण सूचकांक है –
उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या = 1995 लाख भारत की कुल जनसंख्या = 12102 लाख
सकन्द्रण सूचकाक = \(\frac {1995}{12102}\) = \(\frac {1995}{12102}\) x 100 = 19.8%
यह संकेन्द्रण सूचकांक नागालैण्ड में 0.1 प्रतिशत, मेघालय में 0.19 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 0.87 प्रतिशत है। पश्चिमी बंगाल के घने बसे राज्य में 8 प्रतिशत है। पंजाब तथा हरियाणा के कृषि विकसित प्रदेश में क्रमश: 1.9 प्रतिशत तथा 2.4 प्रतिशत है। इस प्रकार संकेन्द्रण सूचकांक देश में जनसंख्या घनत्व के क्षेत्रीय वितरण के असमान रूप को स्पष्ट करता है।

प्रश्न 22.
गंगा के मैदान में जनसंख्या के वितरण की दो विशेषताएं बताओ। इस क्षेत्र में वर्षा वितरण किस प्रकार जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है ?
उत्तर:
भारत की कुल जनसंख्या का अधिकतर भाग गंगा के मैदान में निवास करता है। पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल में भारत की कुल जनसंख्या का 50% भाग निवास करता है। इस मैदान में पश्चिम से पूर्व की ओर जनसंख्या घनत्व बढ़ता जाता है। जैसे पंजाब (550), उत्तर प्रदेश (828), बिहार (1102), पश्चिमी बंगाल (1029) । यह इस तथ्य से मेल खाता है कि इस मैदान में वर्षा की मात्रा भी पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है।

प्रश्न 23.
भारतीय जनसंख्या की आयु संरचना के तीन प्रमुख लक्षणों का विवरण दीजिए।
उत्तर:

  1. भारत में कुल जनसंख्या में 0-14 वर्ष की आयु वर्ग की अधिकता है। कुल जनसंख्या का लगभग 40% निम्न आयु वर्ग का है।
  2. भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 67% भाग आश्रित वर्ग में है जबकि 33% लोग श्रमिक हैं।
  3. 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की संख्या 12% है।

प्रश्न 24.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के इतिहास में सन् 1921 और सन् 1951 सबसे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं ?
अथवा
विगत 100 वर्षों में भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में इस शताब्दी में जनसंख्या बड़ी तीव्र गति से बढ़ रही है। सन् 1901 से 1981 तक के समय में जनसंख्या तिगुनी हुई है। जनसंख्या वृद्धि में कई उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। सन् 1901 से 1921 तक जनसंख्या में बहुत कम वृद्धि हुई थी। इन 20 वर्षों में जनसंख्या में केवल 129 लाख की वृद्धि हुई। सन् 1921 में जनसंख्या 0.3 प्रतिशत की दर से कम हुई। इसका मुख्य कारण यह था कि देश के विभिन्न भागों में अकाल (1920), प्लेग आदि महामारियों (1918) तथा विश्व युद्ध (1914) के कारण बहुत-से लोगों की मृत्यु हुई। परन्तु सन् 1921 के पश्चात् जनसंख्या धीमी और निश्चित गति से बढ़ती रही।

इसलिए 1921 को जनसंख्या वृद्धि के इतिहास में जनांकिकीय विभाजक कहा गया है।1921 से 1951 तक जनसंख्या धीमी परन्तु निश्चित गति से बढ़ती रही। 1951 के अन्त तक यह वृद्धि 1.3% की दर से हुई। इन तीस वर्षों में जनसंख्या में लगभग 11 करोड़ की वृद्धि हुई। 1951 का वर्ष इसलिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है चूंकि इसके पश्चात् जनसंख्या में बड़ी तेज़ी से वृद्धि हुई। 1951 तक जनसंख्या वृद्धि के पहले चरण का अन्त हो गया। 1961 से 1991 तक तीस वर्ष के समय में जनसंख्या लगभग दुगुनी हो गई और कुल जनसंख्या 43 करोड़ से . बढ़ कर 84 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि दर 2.4% प्रति वर्ष रही है। 2001-10 के दशक में वृद्धि दर 1.67% रही। वृद्धि दर की वितरण -भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में बड़े पैमाने पर प्रादेशिक अन्तर पाए जाते हैं।
(i) उच्च वृद्धि दर वाले राज्य एक सतत पेटी में स्थित हैं जो देश के उत्तरी आधे भाग में स्थित है।
(ii) भारत में निम्नतम जनसंख्या वृद्धि दर केरल राज्य में 9.43 प्रतिशत थी जबकि उच्चतम वृद्धि दर नागालैंड राज्य में 64.53 प्रतिशत थी।

कम जनसंख्या वृद्धि दर के प्रदेश

राज्यवृद्धि दर
केरल4.9
तमिलनाडु15.6
आन्ध्र प्रदेश11.1
गोवा8.2
उड़ीसा14.0
कर्नाटक15.7
हिमाचल प्रदेश12.8
पश्चिम बंगाल13.9
असम16.9
पंजाब13.7
नागालैंड0.5

उच्च जनसंख्या वृद्धि दर के प्रदेश

राज्यवृद्धि दर
सिक्किम12.4
मेघालय27.8
मिज़ोरम22.8
बिहार25.1
राजस्थान21.4
हरियाणा19.9
अरुणाचल प्रदेश25.9
उत्तर प्रदेश20.1
मध्य प्रदेश20.3
महाराष्ट्र16.0

कुल मिलाकर देश के 20 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय औसत से अधिक वृद्धि हुई है।

भारत में जनसंख्या वृद्धि (2001-2011)

वर्षजनसंख्या (लाखों में)प्रति दशक (प्रतिशत वृद्धि)
19012383– 01.01
19112520+ 05.75
19212512– 00.30
19312789+ 11.00
19413185+ 14.23
19513610+ 13.31.
19614391+ 21.52
19715479+ 24.80
19816338+ 24.75
19918439+ 23.50
200110270+ 19.30
2011121.02+ 17.7

India Population (in millions): 1901-2011
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 1
Percentage decádal growth rates of population, India: 1951-1961 to 2W01-2011
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 2

प्रश्न 25.
भारत में जनसंख्या की तीव्र वृद्धि का मुख्य कारण क्या है ?
उत्तर:
सन् 1901 से 1921 तक भारत में जनसंख्या लगभग स्थिर रही है। इसके पश्चात् विशेषकर सन् 1951 से जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। भारत में जनसंख्या वृद्धि के निम्नलिखित कारण हैं –
1. मृत्यु दर में कमी-भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के कारण कई महामारियों पर नियन्त्र है। सूखे, बाढ़ों तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली मृत्यु में भी कमी हुई है। मृत्यु दर 47 से कम हो कर सन् 2001 में 8.4 व्यक्ति प्रति हज़ार हो गई है।

2. जन्म दर में कमी-जन्म दर में भी थोड़ी-सी कमी हुई है। जन्म दर 46 से कम होकर 27 व्यक्ति प्रति हज़ार हो गई है। इसका जनसंख्या की कमी पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है। निश्चित गति से कम होती हुई मृत्यु संख्या तीव्र जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है।

3. जीवन प्रत्याशा में वृद्धि-जीवन प्रत्याशा का औसत 23 वर्ष से बढ़ कर 65 वर्ष हो गया है। फलस्वरूप देश की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।

4. शिशु मृत्यु दर में कमी-एक साल से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु संख्या जो पहले 250 थी, घट कर 70 प्रति हज़ार हो गई है। यह भी जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है।

5. अन्य कारण-विदेशों से आ कर भारत में बसने वाले लोगों के कारण जनसंख्या में वृद्धि हुई है। इसी कारण बाल-विवाह, अशिक्षा, भाग्यवादी विचार, निर्धनता, परिवार नियोजन की कमी आदि कारणों के प्रभाव से जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।

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प्रश्न 26.
जनसंख्या की गणना से क्या अभिप्राय है ? यह कितने वर्ष बाद की जाती है ?
उत्तर:
जनसंख्या की गणना-संसार के सभी देशों में जनसंख्या सम्बन्धी आंकड़े जनगणना द्वारा एकत्रित किये जाते हैं। भारत में सबसे पहली जनगणना 1872 में की गई थी। यद्यपि प्रथम पूर्ण जनगणना 1881 में हुई थी। उस समय से जनगणना नियमित रूप से 10 वर्ष के अन्तराल पर की जाती है। जनसंख्या की गणना एक जटिल प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत जनगणना के समय देश में रहने वाले सभी लोगों के पूर्ण जनसांख्यिकीय आंकड़ों का एकत्रीकरण, संकलन तथा प्रकाशन किया जाता है। जनगणना में कई सुधारों के पश्चात् भारतीय जनगणना विश्व में उत्तम मानी जाती है।

प्रश्न 27.
भारत में 2001-2010 के दशक में जनसंख्या वृद्धि के मुख्य तथ्यों का वर्णन करो।
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि (Population Growth) –

  1. भारत में 2001-2010 के दशक में औसत जनसंख्या वृद्धि दर 16.76 प्रतिशत थी।
  2. भारत में औसत वार्षिक वृद्धि दर 1.67 प्रतिशत थी।
  3. 2001-2010 दशक में भारत की जनसंख्या में कुल वृद्धि 18.4 करोड़ थी।
  4. इस वृद्धि दर से भारत की जनसंख्या 36 वर्ष में दुगुनी हो जाएगी।

वृद्धि दर की वितरण – भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में बड़े पैमाने पर प्रादेशिक अन्तर पाए जाते हैं।

  1. उच्च वृद्धि दर वाले राज्य एक सतत पेटी में स्थित हैं जो देश के उत्तरी आधे भाग में स्थित है।
  2. भारत में निम्नतम जनसंख्या वृद्धि दर केरल राज्य में 4.9 प्रतिशत थी जबकि उच्चतम वृद्धि दर मेघालय राज्य में 27.8 प्रतिशत थी।
  3. कुल मिलाकर देश के 20 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय औसत से अधिक वृद्धि हुई है।
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प्रश्न 28.
जनांकिकीय संक्रमण से क्या अभिप्राय है? इसकी विभिन्न अवस्थाएं बताओ।
उत्तर:
जनांकिकीय संक्रमण (Demographic Transition) – किसी समाज की जनसंख्या के परिवर्तन की प्रक्रिया को जनांकिकीय संक्रान्ति कहते हैं। इस संक्रान्ति का आरम्भ, मध्य और अन्त होता है। इसकी चार अवस्थाएं होती हैं –

अवस्थामृत्यु-दरजन्म-दरवृद्धि दर
1. प्रथमउच्च मृत्यु-दरउच्च जन्म-दरनिम्न वृद्धि दर
2. द्वितीयमृत्यु-दर का घटनाउच्च जन्म-दरअति उच्च वृद्धि दर
3. तृतीयमृत्यु-दर कम होनातेज़ी से घटनावृद्धि दर का घटना
4. चतुर्थमृत्यु-दर कमजन्म-दर कमवृद्धि दर कम

प्रश्न 29.
भारत के जनांकिकीय इतिहास का चार अवस्थाओं में विभाजन कीजिए।
उत्तर:
भारत के जनांकिकीय इतिहास को निम्नलिखित चार अवस्थाओं में विभाजित किया जा सकता है –
(i) 1921 से पूर्व – इस अवधि में जनसंख्या वृद्धि बहुत धीमी थी। जन्म दर तथा मृत्यु-दर दोनों ही उच्च थे। इस अध्ययन के आधार पर सन् 1921 को जनांकिकीय विभाजक (Demographic Divide) कहा जाता है।

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(ii) 1921 और 1951 के मध्य – इस अवधि में उच्च जन्म-दर तथा घटती मृत्यु-दर के कारण जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हुई। स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के कारण प्लेग, हैजा, मलेरिया आदि महामारियों के कारण होने वाली मौतें घट गईं। परिवहन के विकसित साधनों द्वारा खाद्यान्न भेजने से अकाल के कारण भी मौतें घट गईं। इसे मृत्यु प्रेरित वृद्धि (Mortality induced growth) कहते हैं।

(iii) 1951 और 1981 के मध्य – इस अवधि में तीव्र गति से वृद्धि के कारण भारत की जनसंख्या लगभग दुगुनी हो गई। स्वास्थ्य सेवाओं के अधिक सुधार के कारण जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर तेजी से घटी। इस प्रकार यह प्रजनन प्रेरित वृद्धि (Faculity induced growth) थी।

(iv) 1981 के पश्चात् – इस अवधि में जन्म-दर कम होने तथा कम मृत्यु-दर के कारण वृद्धि दर में क्रमिक ह्रास हुआ, इस अवधि में जन्म-दर तेजी से घटी। यह 1981 में 34 प्रति हजार से घटकर 1999 में 26 प्रति हज़ार हो गई। यह प्रवृत्ति छोटे परिवार (Small Family) के प्रति अपने रुझान व सकारात्मक संकेत है।

प्रश्न 30.
भारत के लोगों की भाषाओं एवं बोलियों में अत्यधिक विविधता क्यों पाई जाती है ?
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। इस देश के लोगों की भाषा तथा बोली में अत्यधिक विविधता पाई जाती है। भारत की इतनी विस्तृत भूमि पर विशाल जन-समूह को देखते हुए यह विविधता आश्चर्यजनक नहीं है। यह विविधता भारत में विभिन्न जाति समूहों की विविधता के कारण उत्पन्न हुई है। भारतीय उप-महाद्वीप को आबाद करने की क्रिया एक लम्बे समय में सम्पन्न हुई है। इस समय में एशिया के निकटवर्ती प्रदेशों से विभिन्न जाति समूह भारत में आए। प्रत्येक मानव समूह द्वारा अपनी-अपनी भाषा के विकास के कारण सारे देश में अनेक भाषाएँ पाई जाती हैं। अलग-अलग प्रदेश में विभिन्न भाषाओं का विकास हुआ है। इन भाषाओं के आधार पर विभिन्न प्रदेशों की पहचान की जा सकती है।

प्रश्न 31.
देश के किन भागों में लिंग अनुपात अधिक तथा किन भागों में कम है ?
उत्तर:
देश में सबसे अधिक लिंग अनुपात केरल राज्य में 1084 स्त्रियां प्रति हज़ार पुरुष है जबकि राष्ट्रीय औसत लिंग अनुपात 940 है। राष्ट्रीय औसत से कम लिंग अनुपात, निम्नलिखित राज्यों में है कम लिंग अनुपात वाले राज्य-सिक्किम (889), नागालैंड (931), हरियाणा (877), पंजाब (893), उत्तर प्रदेश (898), जम्मू-कश्मीर (883), पश्चिमी बंगाल (947), राजस्थान (926), अरुणाचल प्रदेश (920), बिहार (926), असम (991) है।

मध्य प्रदेश (930), महाराष्ट्र (925), गुजरात (918), जम्मू कश्मीर (908)। लिंग अनपात वाले राज्य-राष्टीय औसत से अधिक लिंग अनपात निम्नलिखित राज्यों में है उड़ीसा (978), आन्ध्र प्रदेश (972), तमिलनाडु (995), कर्नाटक (968), हिमाचल प्रदेश (974), मेघालय (966), गोआ (968), केरल (1084) है। पांडिचेरी (1038), छत्तीसगढ़ (991), मणिपुर (997), उत्तराखण्ड (963), त्रिपुरा (900), झारखण्ड (947), मिजोरम (973)।

प्रश्न 32.
लिंग अनुपात से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
किसी भी देश के सामाजिक विकास के लिए लिंग संरचना का ज्ञान आवश्यक है। प्रति हज़ार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या के अनुपात को लिंग अनुपात (Sex Ratio) कहा जाता है। भारत में लिंग अनुपात निरन्तर कम होता जा रहा है। सन् 1901 में यह अनुपात 972 प्रति हज़ार पुरुष था जबकि 2011 में यह संख्या घट कर 940 हो गई है। भारत में केवल केरल राज्य में ही स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां एक हजार पुरुषों के पीछे 1084 स्त्रियां हैं।

प्रश्न 33.
‘सन् 1901 के बाद लिंगानुपात सामान्यतः घटता जा रहा है।’ इस कथन का विश्लेषण आलोचनात्मक रूप में कीजिए और इस घटती हुई प्रवृत्ति के कारण भी बताइए।
अथवा
विगत शताब्दी में लिंगानुपात की प्रवृति बताओ।
उत्तर:
सन् 1901 के बाद से जनगणनाओं में भारत में लिंग अनुपात लगातार घटता जा रहा है। 1901 में यह लिंगानुपात 972 प्रति हज़ार पुरुष था, 2011 में यह घट कर 940 हो गया है। यह प्रवृत्ति हमारी सामाजिक बुराइयों के कारण है। भारत में जनसंख्या की लिंग संरचना पर कई तत्त्वों का विशेष प्रभाव पड़ा है। हमारे समाज में पुरुषों को अधिक महत्त्व देने की प्रथा है। स्त्रियों को समान अधिकार दिलाने के लिए शिक्षा का प्रचार तथा विवाह योग्य आयु को बढ़ाना आवश्यक है।

स्त्रियों की स्थिति, स्वास्थ्य और शिक्षा की उपेक्षा होती है। प्रत्येक आयु वर्ग में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की अधिक मृत्यु होती है। प्रसव के दौरान स्त्रियों की मृत्यु के कारण लिंग अनुपात और भी कम हो जाता है। कई प्रदेशों में श्रमिक पुरुषों के बाहर प्रवास से भी स्त्रियों का अनुपात बढ़ जाता है। मध्य प्रदेश, उड़ीसा और आन्ध्र प्रदेश राज्यों में बड़ी संख्या में बाहर से आकर काम करने वाली स्त्रियों के कारण लिंग अनुपात बढ़ जाता है। कई औद्योगिक प्रदेशों में अप्रवासी पुरुषों की अधिकता के कारण जनसंख्या में लिंग अनुपात कम रह जाता है।

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प्रश्न 34.
भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना के मुख्य लक्षणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
व्यवसाय (Occupation) – व्यवसाय से अभिप्राय है वह कार्य जिससे व्यक्ति अपनी रोजी रोटी कमाता E. . है। भारत में सामान्य रूप से व्यवसायों को तीन वर्गों में बांटा जाता है –

  • प्राथमिक
  • द्वितीयक
  • तृतीयक।

भारत की व्यावसायिक संरचना (Occupational Structure) –
(i) भारत में 2001 में दो तिहाई मुख्य कामगार (67.4 प्रतिशत) कृषि कार्यों में लगे हुए हैं।
(ii) भारत में कामगारों को निम्न चार श्रेणियों में बांटा जाता है।
(क) कृषक
(ख) खेतीहर मजदूर
(ग) घरेलू, औद्योगिक कामगार
(घ) अन्य कामगार।
(iii) गैर-कृषि कार्यों में विनिर्माण, व्यापार, परिवहन, संचार, भंडारण मुख्य व्यवसाय हैं जिनमें केवल 12.1 प्रतिशत लोग काम करते हैं।
(iv) श्रम शक्ति में 38.72 प्रतिशत किसान तथा 26.09 प्रतिशत खेतीहर मजदूर थे।
(v) देश में कृषि कामगारों का अनुपात घट रहा है। यह अनुपात 1971 में 69.49 से घटकर 2001 में 58.4 प्रतिशत रह गया है।

भारत-कामगारों की व्यावसायिक संरचना (प्रतिशत)-2001

व्यवसायव्यक्तिपुरुषस्त्री
1. कृषक31.7131.3432.50
2. कृषीय श्रमिक22.6920.8239.43
3. घरेलू उद्योग4.073.026.37
4. अन्य कामगार37.5844.7221.70
5. योग100.00100.00100.00

प्रश्न 35.
भारत में आयु संरचना की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
भारत में जनगणना के अनुसार 5 आयु वर्ग हैं –

आयु वर्गकुल जनसंख्या का प्रतिशत
1. 0-14 वर्ष40%
2. 15-29″26%
3. 30-39″12%
4. 40-49″10%
5. 50-59″6%
6. 60 वर्ष से अधिक6%

श्रमजीवी वर्ग 15-59 वर्ष तक है जबकि महिला वर्ग में प्रजनन आयु वर्ग 15-49 वर्ष है।

मुख्य विशेषताएं –
(i) जहां तक जनसंख्या की आयु संरचना का संबंध है, भारत की कुल जनसंख्या के लगभग एक-चौथाई की आयु 10 वर्ष से कम है।
(2) लगभग 21 प्रतिशत जनसंख्या 10-19 आयु वर्ग में है। यहां यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि देश की 47 प्रतिशत जनसंख्या 20 वर्ष से कम आयु के लोगों की है।
(3) मापनी के दूसरे सिरे पर केवल 7 प्रतिशत जनसंख्या 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले लोगों की है। इससे यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि देश की 93 प्रतिशत जनसंख्या 60 वर्ष से कम आयु की है।
(4) यह स्पष्ट है कि 37.25 प्रतिशत जनसंख्या 15 वर्ष से कम है।
(5) 15-29 वर्ष की आयु वाले युवा वर्ग की है।
(6) सिर्फ 16 प्रतिशत जनसंख्या 40-49 वर्ष के मध्यम आयु वर्ग में है।
(7) आयु संरचना में अन्तःप्रादेशिक और अन्तर्राज्यीय अंतर है जिन्हें 1991 के जनगणना के प्रासंगिक सारणियों के अध्ययन द्वारा समझा जा सकता है।

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प्रश्न 36.
आर्थिक स्तर की दृष्टि से भारतीय जनंसख्या के तीन वर्ग कौन-से हैं ? प्रत्येक वर्ग की मुख्य विशेषता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक स्तर की दृष्टि से भारतीय जनसंख्या को निम्नलिखित तीन वर्गों में बांटा जाता है
1. मुख्य श्रमिक (Main worker)
2. सीमांत श्रमिक (Marginal worker)
3. अश्रमिक (Non workers)

विशेषताएं –

1. मुख्य श्रमिक-वह व्यक्ति है जो एक वर्ष में कम-से-कम 183 दिन काम करता है। इसे कार्यशील जनसंख्या कहते हैं।
2. सीमान्त श्रमिक-वह व्यक्ति जो एक वर्ष में 183 दिनों से कम दिन काम करता है। मुख्य तथा सीमान्त श्रमिक 39% है।
3. अश्रमिक-वह व्यक्ति है जो अपने भरण-पोषण के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है। भारत में 61% जनसंख्या अश्रमिक वर्ग से जुड़ी है। इसे आश्रित (Dependent) जनसंख्या कहते हैं।

प्रश्न 37.
‘विशाल जनसंख्या प्राकृतिक तथा मानव संसाधनों पर एक बोझ है।’ व्याख्या करो।
उत्तर:
भारत में विशाल जनसंख्या है, 121.02 करोड़ जनसंख्या विश्व का 16.7% भाग है। अधिक जनसंख्या के कारण कई सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। मानव तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप निर्धनता तथा बेरोजगारी बढ़ रही है। वातावरण का प्रदूषण एक गम्भीर रूप धारण कर रहा है। जातीय विविधता, अत्यधिक ग्रामीण स्वरूप तथा असमान वितरण सामाजिक आर्थिक विकास की गति को धीमा कर रहा है। भारतीय कृषि इस तीव्र गति से बढ़ रही जनसंख्या का भरण-पोषण नहीं कर सकती।

प्रश्न 38.
कोई ऐसे तीन मूल्य आधारित तथ्य लिखें जो ‘भारत की जनसंख्या के असमान रूप से वितरण’ के लिए उत्तरदाई हैं।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या के वितरण के उत्तरदाई कारण –
(i) पर्वतों, मरुस्थलों तथा वन-प्रदेशों में कठोर जलवायु होने से जनसंख्या कम है।
(ii) बड़े क्षेत्र के राज्यों में तथा अधिक विकसित राज्यों में मूल सुविधाओं की उपलब्धता के कारण जनसंख्या अधिक है।
(iii) जलोढ मैदानों तथा तटीय मैदानों में उपज या रोजगार के साधन अधिक उपलब्ध हैं जिनके चलते इनकी जनसंख्या अधिक है।

प्रश्न 39.
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में कौन से मूल्य आधारित तथ्य अन्तर स्पष्ट करने में सहायक हैं ?
उत्तर:

नगरीय जनसंख्या (Urban Population)ग्रामीण जनसंख्या (Rural Population)
(i) मुख्य

व्यवसाय

(1) इन लोगों का मुख्य व्यवसाय निर्माण उद्योग तथा व्यापार होता है।(1) इन लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि तथा पशु-पालन होता है।
(ii) उपलब्ध

सुविधाएँ

(2) नगरीय जनसंख्या को परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा आदि सेवाएं प्राप्त होती हैं।(2) ग्रामीण जनसंख्या को आधुनिक सुविधाएं प्राप्त नहीं होती हैं।
(iii) जनसंख्या

घनत्व

(3) इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता हैं।(3) इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक नहीं होता है।

 

अन्तर स्पष्ट करो

प्रश्न 1.
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:

उत्पादक जनसंख्या (Productive Population)आश्रित जनसंख्या (Dependent Population)
(1) लाभदायक आर्थिक क्रियाओं में कार्य करने वाले लोगों को उत्पादक जनसंख्या कहा जाता है।(1) जो लोग किसी आर्थिक क्रिया में सहयोग नहीं देते, उन्हें आश्रित जनसंख्या कहा जाता है।
(2) ऐसे जन-समुदाय को श्रमिक बल कहा जाता है।(2) ऐसे जन-समुदाय को अश्रमिक बल कहा जाता हैं।
(3) ये लोग 15-60 वर्ष की आयु वर्ग से होते हैं।(3) इस वर्ग में 60 वर्ष की आयु से अधिक के व्यक्ति तथा 15 वर्ष से कम के बच्चे शामिल होते हैं।
(4) ये लोग स्वयं कुछ कार्य करके अपना जीवन निर्वाह करते हैं।(4) ये लोग बेरोज़गार होते हैं तथा श्रमिक लोगों पर आश्रित होते हैं।
(5) भारत में लगभग 33% लोग श्रमिक हैं।(5) भारत में लगभग 67% लोग आश्रित हैं।

प्रश्न 2.
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:

नगरीय जनसंख्या (Urban Population)ग्रामीण जनसंख्या (Rural Population)
(1) इन लोगों का मुख्य व्यवसाय निर्माण उद्योग तथा व्यापार होता है।(1) इन लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि तथा पशु पालन होता है।
(2) नगरीय जनसंख्या को परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा आदि सेवाएं प्राप्त होती हैं।(2) ग्रामीण जनसंख्या को आधुनिक सुविधाएं प्राप्त नहीं होती हैं।
(3) इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।(3) इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक नहीं होता है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या का अंकगणितीय तथा फिजियोलॉजिकल (कायिक) घनत्व में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:

अंकगणितीय घनत्व (Arithmatical Density)फिजियोलॉजिकल (कायिक) घनत्व (Physiological Density)
(1) इस पद्धति द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल पर व्यक्तियों की संख्या प्रकट की जाती है।(1) इस पद्धति द्वारा कुल जनसंख्या तथा कुल कृषि भूमि के अनुपात को प्रकट किया जाता है।
(2) भारत में फिजियोलॉजिकल घनत्व (2011) JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 10(2) भारत का अंकगणितीय घनत्व (2011) = JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 11
(3) इससे जनसंख्या वितरण की भिन्नताओं का पता चलता है।(3) इस पद्धति से कृषि भूमि पर निर्भर लोगों की संख्या का पता चलता है।

निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
“जनसंख्या के घनत्व” से क्या अभिप्राय है ? जनसंख्या का घनत्व किन तत्त्वों पर निर्भर करता है ? उदाहरण दो।
उत्तर:
जनसंख्या का घनत्व (Density of Population) – किसी प्रदेश की जनसंख्या और भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। इससे किसी प्रदेश में लोगों की सघनता का पता चलता है। यह घनत्व प्रति वर्ग मील या प्रति वर्ग किलोमीटर द्वारा प्रकट किया जाता है। एक वर्ग किलोमीटर या एक वर्ग मील में औसत रूप से जितने लोग रहते हैं, जनसंख्या का घनत्व कहलाता है। भारत में जनसंख्या का स्थानिक वितरण बहुत असमान है।

जनसंख्या का घनत्व प्रायः खाद्य पदार्थों की सुविधा तथा रोजगार की प्राप्ति पर निर्भर करता है। प्राकृतिक सुविधाओं का महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है परन्तु कई प्रकार के भौतिक, सामाजिक, राजनीतिक तथा ऐतिहासिक कारण मिलकर जनसंख्या के घनत्व पर प्रभाव डालते हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिमी बंगाल घने बसे राज्य हैं परन्तु हिमाचल, सिक्किम, नागालैण्ड, अरुणाचल विरल जनसंख्या प्रदेश हैं।

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जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है –
(क) भौतिक कारक
(ख) सामाजिक आर्थिक कारक
(ग) जनांकिकीय कारक

(क) भौतिक कारण (Natural Factors)
1. धरातल (Land) – किसी देश में पर्वत, मैदान तथा पठार जनसंख्या के घनत्व पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं। पर्वतीय भागों में समतल भूमि की कमी, कठोर जलवायु, यातायात के कम साधनों तथा कृषि के अभाव के कारण जनसंख्या कम होती है। इसीलिए हिमाचल प्रदेश, मेघालय कम जनसंख्या वाले प्रदेश हैं। मैदानी प्रदेशों में कृषि, जल सिंचाई, यातायात, व्यापार तथा जीवन निर्वाह की सुविधाओं के कारण घनी जनसंख्या मिलती है। संसार की 80%
जनसंख्या मैदानों में निवास करती है। गंगा का मैदान घनी जनसंख्या वाला क्षेत्र है।

2. जलवायु (Climate) – तापमान तथा वर्षा जनसंख्या के घनत्व पर स्पष्ट प्रभाव डालते हैं। अधिक ठण्डे या अधिक गर्म क्षेत्रों में कम जनसंख्या होती है। इसीलिए संसार के उष्ण तथा शीत मरुस्थल व ध्रुवीय प्रदेश लगभग खाली हैं। राजस्थान मरुस्थल में कम जनसंख्या मिलती है। यहां मानसूनी जलवायु के प्रदेशों में घनी जनसंख्या मिलती है। यहां पर्याप्त वर्षा कृषि के उपयुक्त होती है। उत्तरी मैदान के पांच राज्यों में देश की कुल जनसंख्या का 1/2 भाग निवास करत

3. मिट्टी (Soil) – गहरी उपजाऊ मिट्टी में कृषि उत्पादन अधिक होता है। इन प्रदेशों में अधिक लोगों को भोजन प्राप्त करने की क्षमता होती है। नदी घाटियों की कछारी मिट्टी में चावल का अधिक उत्पादन होने के कारण अधिक जनसंख्या मिलती है। गंगा नदी के उपजाऊ मैदानों में जनसंख्या का अधिक जमाव है। लावा मिट्टी के उपजाऊपन के कारण ही महाराष्ट्र में घनी जनसंख्या है।

4. खनिज पदार्थ (Minerals) – खनिज पदार्थ लोगों के आकर्षण का केन्द्र होते हैं। कोयला, तेल, लोहा, सोना आदि खनिज पदार्थों वाले क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है। भारत में दामोदर घाटी में खनिजों के विशाल भण्डार के कारण घनी जनसंख्या है। जिन क्षेत्रों में कोयला, तेल तथा पन-बिजली के शक्ति साधनों का अधिक विकास होता है, वहां औद्योगिक विकास . के कारण अधिक जनसंख्या मिलती है; जैसे
जमशेदपुर।।

5. नदियां और जल प्राप्ति (River and Water Supply) – नदियां जल का मुख्य साधन होती हैं। इनका जल पीने, जल-सिंचाई, उद्योग-धन्धों तथा यातायात के लिए प्रयोग किया जाता है। इन सुविधाओं के कारण नदियों के किनारों पर अधिक जनसंख्या मिलती है। इसीलिए कई प्राचीन शहर, जैसे-कोलकाता, दिल्ली, आगरा तथा इलाहाबाद नदियों के किनारे ही स्थित हैं।

(ख) आर्थिक कारण (Economic Factors):
6. खेतीबाड़ी (Agriculture) – अधिक कृषि उत्पादन वाले क्षेत्रों में अधिक भोजन प्राप्ति के कारण घनी जनसंख्या होती है। चावल उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों में साल में तीन-तीन फसलों के कारण अधिक लोगों का निर्वाह हो सकता है। इसीलिए उत्तरी मैदान में अधिक जनसंख्या है। जहां आधुनिक अधिक उपज वाली फसलों के कारण पंजाब आदि राज्यों में अधिक जनसंख्या घनत्व है।

7. उद्योग (Industries) – औद्योगिक विकास से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। औद्योगिक नगरों के निकट बहुत-सी बस्तियां बस जाती हैं तथा जनसंख्या अधिक हो जाती है। दामोदर घाटी में औद्योगिक विकास के कारण ही अधिक जनसंख्या है। इन क्षेत्रों में अधिक व्यापार के कारण भी घनी जनसंख्या होती है।

8. यातायात के साधनों की सुविधा (Easy Means of Transportation) – यातायात के साधनों की सुविधाओं के कारण उद्योगों, कृषि तथा व्यापार का विकास होता है। तटीय क्षेत्रों में जल मार्ग की सुविधा के कारण संसार की अधिकतर जनसंख्या निवास करती है। पर्वतीय भागों तथा कई भीतरी प्रदेशों में यातायात के साधनों की कमी के कारण कम जनसंख्या होती है।

9. नगरीय विकास (Urban Development) – किसी नगर के विकास के कारण उद्योग, व्यापार तथा परिवहन विकास हो जाता है। शिक्षा, मनोरंजन आदि सुविधाओं के कारण नगरों में तेजी से जनसंख्या बढ़ जाती है।

(ग) जनांकिकीय कारक (Demographic factors) – प्रजनन दर, मृत्यु दर तथा प्रवाह, नगरीकरण जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या वितरण की विभिन्नता तथा इसके कारणों का वर्णन करो।
अथवा
भारत की जनसंख्या घनत्व का राज्य स्तरीय विश्लेषण करें।
उत्तर:
जनसंख्या का वितरण (Distribution of Population) – भारत क्षेत्रफल के आधार पर संसार में सातवां बड़ा देश है परन्तु जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 102.8 करोड़ थी तथा जनसंख्या घनत्व 323 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० था। भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है। देश में प्राकृतिक तथा आर्थिक दशाओं की विभिन्नता के कारण जनसंख्या के वितरण तथा घनत्व में बहुत विभिन्नता है। गंगा-सतलुज के उपजाऊ मैदान में देश के 23% क्षेत्र में 52% जनसंख्या का संकेन्द्रण है जबकि हिमालय के पर्वतीय भाग में 13% क्षेत्र में केवल 2% जनसंख्या निवास करती है।

केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व 9340 (भारत में सबसे अधिक) है। जबकि अरुणाचल प्रदेश में केवल 13 (भारत में सबसे कम) है। सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहां 16 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं। भारत में जनसंख्या का घनत्व, धरातल; मिट्टी के उपजाऊपन, वर्षा की मात्रा तथा जल सिंचाई पर निर्भर करता है। भारत मूलतः कृषि प्रधान देश है। इसलिए अधिक घनत्व उन प्रदेशों में पाया जाता है जहां भूमि की कृषि उत्पादन क्षमता अधिक है। जनसंख्या का घनत्व वर्षा की मात्रा पर निर्भर करता है। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों में भी जनसंख्या घनत्व बढ़ता जा रहा है।

CountryPopulation (In millions)
1. China1341.0
2. India1,210.2
3. U.S.A.308.7
4. Indonesia237.6
5. Brazil190.7
6. Pakistan184.8
7. BangladeshI 64.4
8. Nigeria158.3
9. Russian Fed.I 404
10. Japan128.1
11. Other Countries2844.7
12. World6908.7

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 5
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 6
जनसंख्या का घनत्व (Density of Population) – किसी प्रदेश की जनसंख्या तथा भूमि के क्षेत्रफल के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। इसे निम्न प्रकार से प्रकट किया जाता है कि एक वर्ग कि०मी० में औसत रूप से कितने व्यक्ति रहते हैं।
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 7
उदाहरण के लिए भारत का कुल क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग कि०मी० है तथा जनसंख्या 121.7 करोड़ है। इस प्रकार भारत की औसत जनसंख्या
JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन - 8
= 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
भारत को जनसंख्या के घनत्व के आधार पर क्रमशः तीन भागों में बांटा जा सकता है –

1. अधिक घनत्व वाले क्षेत्र (Densely Populated Areas):
इस भाग में वे राज्य शामिल हैं जहां जनसंख्या घनत्व 500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है। अधिक घनत्व वाले क्षेत्र प्रायद्वीपीय भारत के चारों ओर एक मेखला बनाते हैं। पंजाब से लेकर गंगा के डेल्टा तक जनसंख्या का घनत्व अधिक है। एक अनुमान है कि इस भाग के 17% क्षेत्रफल में 43% जनसंख्या निवास करती है। इस क्षेत्र के तीन समूह हैं –
राज्यवार जनसंख्या वितरण-2011

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेशकुल क्षेत्र (वर्ग कि०मी०)भारत के कुल क्षेत्रफल का % भागकुल जनसंख्याभारत की कुल जनसंख्या का % भागघनत्व प्रति वर्ग कि०मी०
1. उत्तर प्रदेश2409287.3319,95,81,47716.49828
2. महाराष्ट्र3077139.3611,23,72,9729.29365
3. बिहार941639.8610,38,04,6378.581102
4. पश्चिमी बंगाल887525.79,12,47,7367.551029
5. आन्ध्र प्रदेश275045.8.378,46,65,5337.00308
तथा तेलंगाना1300553.967,25,97,5656.00236
6. तमिलनाडु3082459.387,21,38,9585.96555
7. मध्य प्रदेश34223910.416,86,21,0125.67201
8. राजस्थान1917915.836,11,30,7045.05319
9. कर्नाटक1960245.966,03,83,6284.99308
10. गुजरात1557074.744,19,47,3583.47269
11. ओडिशा388631.183,33,87,6772.76859
12. केरल797142.423,29,66,2382.72414
13. झारखण्ड784382.393,11,69,2722.58397
14. असम503621.532,77,04, 2362.29550
15. पंजाब442121.342,55,40,1962.11573
16. हरियाणा1351914.112,53,53,0812.09189
17. छत्तीसगढ़1430.051,67,53,2351.3811297
18. दिल्ली*2222366.761,25,48,9261.04.124
19. जम्मू तथा कश्मीर534831.63101,16,7520.84159
20. उत्तराखंड14830.05167,53,235.38..11297
21. हिमाचल प्रदेश2222366.761,25,48,9261.04124
22. त्रिपुरा534831.63101,16,7520.84159
23. मणिपुर556731.6968,56,5090.57124
24. मेघालय104860.3236,71,0320.30350
25. नागालैण्ड223270.6829,640070.24132
26. गोवा224290.6827,21,7560.22122
27. अरुणाचल प्रदेश165790.519,80,6020.16119
28. पॉडिचेरी*37020.1114,57,7230.12394
29. मिजोरम837432.5513,82,6110.1117
30. चण्डीगढ़*0.1412,44,4640.102598

(1) पश्चिमी तटीय मैदान – इस भाग में केरल प्रदेश में घनत्व 859 व्यक्ति प्रति वर्ग कि. मी. है।
कारण –
(i) अधिक वर्षा
(2) मैदानी भाग तथा उपजाऊ मिट्टी
(3) चावल की अधिक उपज
(4) उद्योगों के लिए जल विद्युत्
(5) उत्तम बन्दरगाहों का होना
(6) जलवायु पर समुद्र का समकारी प्रभाव।

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(ii) पश्चिमी बंगाल-इस भाग में घनत्व 1029 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है।
कारण –
(1) गंगा नदी का उपजाऊ डेल्टा
(2) अधिक वर्षा
(3) चावल की वर्ष में तीन फसलें
जनसंख्या घनत्व व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०-2011

राज्यघनत्वराज्यघनत्व
पश्चिमी बंगाल1029उत्तर प्रदेश828
केरल859तमिलनाडु555
बिहार1102पंजाब550
हरियाणा573

कारण –
(4) कोयले के भण्डार
(5) प्रमुख उद्योगों का स्थित होना।

(iii) उत्तरी मैदान-इस भाग में विभिन्न प्रदेशों के घनत्व बिहार (1102), उत्तर प्रदेश (828), पंजाब (550), हरियाणा (573) व्यक्ति प्रति वर्ग कि. मी०।. .
कारण –
(1) सतलुज, गंगा आदि नदियों के उपजाऊ मैदान
(2) पर्याप्त वर्षा तथा स्वास्थ्यप्रद जलवायु
(3) जल सिंचाई की सुविधाएं
(4) कृषि के लिए आदर्श दशाएं
(5) व्यापार, यातायात तथा उद्योगों का विकास
(6) नगरों का अधिक होना।

(iv) पूर्वी तट – इस भाग में तमिलनाडु प्रदेश में घनत्व 555 व्यक्ति वर्ग कि० मी० है। महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, डेल्टा में अधिक घनत्व के समूह हैं ।
कारण –
(1) नदियों के उपजाऊ डेल्टा
(2) उद्योगों की अधिकता.
(3) गर्म आर्द्र जलवायु
(4) चावल का अधिक उत्पादन
(5) दोनों ऋतुओं में वर्षा
(6) जल सिंचाई की सुविधा।

2. साधारण घनत्व वाले क्षेत्र (Moderately Populated Areas) –
इस भाग में वे राज्य शामिल हैं जिनका घनत्व 250 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। मुख्य रूप से ये प्रदेश पूर्वी तथा पश्चिमी घाट, अरावली पर्वत तथा गंगा के मैदान की सीमाओं के अन्तर्गत स्थित है।

जनसंख्या घनत्व – व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० – 2011

राज्यजनसंख्या घनत्व
गोआ399
जनसंख्या घनत्व397
त्रिपुरा365
आन्ध्र प्रदेश350
असम308
कर्नाटक319
महाराष्ट्र308
गुजरात269
उड़ीसा399

कारण –
(1) इन भागों में पथरीला या रेतीला धरातल होने के कारण कृषि उन्नत नहीं है।
(2) कृषि के लिए वर्षा पर्याप्त नहीं है। कुछ क्षेत्रों में हरित क्रान्ति के कारण जनसंख्या अधिक है।
(3) उद्योग उन्नत नहीं हैं।
(4) यातायात के साधन उन्नत नहीं हैं।
(5) परन्तु जंल सिंचाई, लावा मिट्टी औद्योगिक विकास तथा खनिज पदार्थों के कारण साधारण जनसंख्या मिलती है।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

3. कम घनत्व वाले क्षेत्र (Sparsely Populated Areas):
इस भाग में वे पान्त शामिल हैं जिनका घनत्व 250 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से कम है।

(i) उत्तर-पूर्वी भारत – इस भाग में मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश तथा मिज़ोरम शामिल हैं।
व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०-2011

राज्यघनत्व
मणिपुर122
मेघालय132
नागालैंड119
सिक्किम86
मिजोरम52
अरुणाचल प्रदेश17

कारण –
(1) असमतल तथा पर्वतीय धरातल
(2) वन प्रदेश की अधिकता
(3) मलेरिया का प्रकोप
(4) उद्योगों का पिछड़ापन
(5) सीमा प्रान्त होने के कारण असुरक्षित
(6) यातायात के साधनों की कमी
(7) ब्रह्मपुत्र नदी की भयानक बाढ़ों से हानि ।

(ii) कच्छ तथा राजस्थान प्रदेश-इस भाग में राजस्थान का थार का मरुस्थल तथा खाड़ी कच्छ के प्रदेश शामिल हैं।
कारण –
(1) कम वर्षा
(2) कठोर जलवायु
(3) मरुस्थलीय भूमि के कारण कृषि का अभाव
(4) खनिज तथा उद्योगों की कमी
(5) जल सिंचाई के साधनों की कमी
(6) गुजरात की खाड़ी तथा कच्छ क्षेत्र का दलदली होना।

(iii) जम्मू – कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश-हिमालय पर्वत के पहाड़ी क्षेत्र में जनसंख्या बहुत कम है। हिमाचल प्रदेश में 123 घनत्व है तथा जम्मू-कश्मीर में 124 है।
कारण –
(1) शीतकाल में अत्यन्त सर्दी
(2) बर्फ से ढके प्रदेश का होना
(3) पथरीली धरातल के कारण कृषि क्षेत्र
(4) यातायात के साधनों की कमी
(5) वनों का अधिक.विस्तार
(6) सीमान्त प्रदेश का होना
(7) उद्योगों की कमी।

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(iv) मध्य प्रदेश – इस प्रान्त में कुछ भागों में बहुत कम जनसंख्या है। मध्य प्रदेश में जनसंख्या घनत्व 196 है।

प्रश्न 3.
भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति की विवेचना विशेष रूप से स्वतन्त्रता के बाद के वर्षों के संदर्भ में कीजिए।
उत्तर:
नगरीकरण (Urbanisation) –
प्राय: नगर की परिभाषा जनगणना के अनुसार की जाती है। नगर में वे सभी क्षेत्र होते हैं जहां नगरपालिकाएं आदि स्थापित हों, जनसंख्या कम-से-कम 5000 हो तथा 75% श्रमिक वर्ग ऐसी क्रियाओं में लगा हो जो कृषि से सम्बन्धित न हो। भारत वास्तव में ग्रामों का देश है। गांव ही भारतीय संस्कृति के आधार रहे हैं। भारत के नगरीय जनसंख्या का विशाल आकार है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 37 करोड़ 70 लाख लोग नगरों में रहते हैं। यह जनसंख्या संयुक्त राज्य अमेरिका की नगरीय जनसंख्या के लगभग बराबर है। भारत का संसार में नगरीय जनसंख्या की दृष्टि से पहला स्थान है। परन्तु भारत में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत अन्य देशों की तुलना में कम है। जैसे –

देशोंनगरीय जनसंख्या %
संयुक्त राज्य अमेरिका75.00
ब्राजील75.00
जापान77.00
ऑस्ट्रेलिया85.00
भारत27.75
पाकिस्तान32.00
चीन39.00
विश्व45.00

नगरीय जनसंख्या में वृद्धि – भारत की जनसंख्या की तीव्र वृद्धि की साथ-साथ नगरीय जनसंख्या में भी वृद्धि हुई है। पिछले 80 वर्षों में (1901-1981) देश की कुल जनसंख्या में 3 गुना वृद्धि हुई है जबकि इसी समय में नगरीय जनसंख्या 6 गुना अधिक हो गई है।

वर्षनगरीय जनसंख्या का प्रतिशत
190110.84
191110.29
192111.17
193111.99
194113.85
195117.29
196117.97
197119.90
198123.31
199125.72
200127.75
201131.2

1901 से 1961 तक नगरीय जनसंख्या में मन्द गति से वृद्धि हुई है। परन्तु 1961 से 1981 तक 20 वर्षों में नगरीय जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। यह जनसंख्या 7.8 करोड़ से बढ़ कर 15.6 करोड़ हो गई है। नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 17.9 से बढ़ कर 23.3 हो गया है। सन् 2001 में नगरीय जनसंख्या 27.7% थी। 2011 में नगरीय जनसंख्य 31.2% थी। भारत में नगरीकरण में नगरों के विकास का विशेष योगदान रहा है। औद्योगिक क्रान्ति के कारण कई नगरों का विकास हुआ है। भारतीय जनगणना के अनुसार नगरों को छ: वर्गों में बांटा गया है।

वर्गजनसंख्या
प्रथम1 लाख से अधिक
द्वितीय50,000 से 99,999 तक
तृतीय20,000 से 49,999 तक
चतुर्थ10,000 से 19,999 तक
पंचम5000 से 9,999
षष्टम5000 से कम

स्वतन्त्रता के पश्चात् बड़े नगरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जबकि छोटे नगरों की संख्या कम हो रही है। 2001 में देश में 4689 नगरों में से 500 प्रथम वर्ग के नगर थे। 1901 में एक लाख से अधिक जनसंख्या के प्रथम वर्ग केवल 24 थे। देश में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या 53 है जिसमें कुल जनसंख्या लगभग 10 करोड़ है जो भारत की कुल नगरीय जनसंख्या का एक तिहाई भाग है। कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे, कानपुर, नागपुर, जयपुर, लखनऊ दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर (Million Towns) हैं।

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प्रश्न 4.
भारत के भाषा परिवारों के भौगोलिक वितरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
भारत के लोगों की भाषाओं में अत्यधिक विविधता है। भारत के लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं को निम्नलिखित चार भाषा परिवारों (Language Families) में बांटा जाता है –
1. आग्नेय (आस्ट्रिक) परिवार (Austric Family) – ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं के उप-परिवार में आग्नेय भाषाएं शामिल की जाती हैं। भारत में लगभग 62 लाख लोगों द्वारा ये भाषाएं बोली जाती हैं। इस परिवार की भाषाएं मुख्यतः जन-जातीय वर्गों द्वारा बोली जाती हैं।
(क) मुण्डा भाषा जो मुख्यतः संथाल परगना, मयूरभंज, रांची, बेतुल तथा बौद्ध खोडमहाल जन-जातीय जिलों में बोली जाती है।
(ख) मान खमेर वर्ग की खासी बोली मेघालय की खासी एवं जैन्तिया पहाड़ियों के क्षेत्र में बोली जाती है।
(ग) मान रुमेर वर्ग की खासी बोली निकोबार द्वीप में बोली जाती है।

2. चीनी-तिब्बती परिवार (Sino-Tibetan Family) – भारत में हिमालय तथा उप-हिमालयी क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषाएं चीनी-तिब्बती परिवार में शामिल की जाती हैं। ये भाषाएं तीन उप-वर्गों में बांटी जाती हैं –
(क) तिब्बती-हिमालयी वर्ग की भाषाएं लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और भटान में बोली जाती हैं। इस वर्ग में तिब्बती, बाल्ती, लद्दाखी, किन्नौरी, लेपचा आदि भाषाएं गिनी जाती हैं। इन समस्त भाषाओं में लद्दाखी बोलने वाले लोगों की संख्या सब से अधिक है।
(ख) उत्तर असमी वर्ग में 6 प्रमुख बोलियां जैसे अका, उफला, अबोर, मिरी, मिश्मी तथा मिशिंग सम्मिलित हैं।
ये भाषाएं अरुणाचल प्रदेश में बोली जाती हैं।
(ग) असमी-बर्मी वर्ग की भाषाओं में बोरों, नागा, कोचिन, कुकिचिन, बर्मी भाषाएं सम्मिलित हैं। ये भाषाएं हिन्द- . बर्मा सीमा तथा उत्तर-पूर्वी भारत में नागालैंड, लुशाई, मिजोरम, गारो तथा मणिपुर क्षेत्र में बोली जाती हैं।

3. द्राविड़ परिवार (Dravidian Family) – इस परिवार की भाषाएं मुख्यतः प्रायद्वीपीय पठार तथा छोटा नागपुर पठार के क्षेत्रों में बोली जाती हैं। इस परिवार में तेलुगु, तमिल, कन्नड़ तथा मलयालम मुख्य भाषाएं हैं। आंध्र प्रदेश में तेलुगु, तमिलनाडु में तमिल, कर्नाटक में कन्नड़ तथा केरल में मलयालम मुख्य भाषाएं हैं। इसके अतिरिक्त तलु, तुलकुरगी, पारजी, खोड़, कुरुख तथा मालती जैसी गौण भाषाएं भी इस परिवार में शामिल की जाती हैं। इस परिवार की भाषाओं में कम विविधता पाई जाती है।

4. आर्य परिवार (Aryan Family) – इसे भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार भी कहा जाता है। भारत की अधिकांश जनसंख्या आर्य परिवार की भाषाएं बोलती है। इस परिवार की मुख्य भाषा हिन्दी है जो भारत की बहुसंख्यक जनता द्वारा बोली जाती है। भाषाओं के संदर्भ में हिन्दी का विश्व में चौथा स्थान है। भारत के उत्तरी मैदान में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा हरियाणा मुख्य हिन्दी भाषी प्रदेश हैं। इन प्रदेशों में उर्दू तथा हिन्दोर है। इस परिवार की अन्य भाषाएं विभिन्न प्रदेशों में महत्त्वपूर्ण हैं। पश्चिमी भारत में कच्छी एवं सिंधी, दक्षिणी भारत में मराठी गवं कोंकण, पूर्वी भारत में उड़िया, बिहारी, बंगाली तथा उत्तर-पश्चिमी भाग में पंजाबी, राजस्थानी तथा मारवाड़ी मुख्य भाषाएं हैं।

भारत-1991 में अनुसूचित भागाओं का बोलने वालों की तलनात्मक संख्या

भाषाबोलने वालों की संख्या (करोड़)कुल जनसंख्या का (प्रतिशत)
1. हिन्दी33.7340.42
2. बांग्ला6.96830
3. तेलुगु6.607.37
4. मराठी6.257.45
5. तमिल5.30632
6. उर्दू4.345.18
7. गुजराती4.074.85
8. कन्नड़3.283.91
9. मलयालम3.043.62
10. उड़िया2.813.35
11. पंजाबी2.342.79
12. असमिया1.311.56
13. सिंधी0.210.25
14. नेपाली0.210.25
15. कोंकणी0.180.21
16. मणिपुरी0.120.15
17. कश्मीरी60 हज़ार0.01
18. संस्कृति50 हजार0.01

प्रश्न 5.
भारतीय जनसंख्या के धार्मिक संगठन और स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
अथवा
भारत की जनसंख्या के धार्मिक संघटन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
धार्मिक संगठन-भारत की जनसंख्या का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी धार्मिक आस्थाओं की विविधता है। यह सामान्यतः जानी हुई बात है कि भारत का प्रमुख धर्म हिन्दू धर्म है। भारत में समय-समय पर दूसरे धर्म भी (ईसाई, यहूदी, पारसी, इस्लाम) क्रम में आते रहे हैं और भारतीय जनसंख्या के कुछ वर्ग उन्हें अपनाते भी रहे हैं।
(1) भारत में सबसे पहले प्रवेश करने वाला ईसाई धर्म था। ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह पता चलता है कि सीरियन ईसाई भारत के पश्चिमी तट पर पहली सदी ईस्वी में ही आ गये थे।
(2) अरब व्यापारियों द्वारा इस्लाम का संदेश भारत के पश्चिमी तट पर रहने वाले लोगों तक मुस्लिम आक्रमण से पहले ही आ गया था।
(3) बौद्ध धर्म जो कभी भारत का एक महत्त्वपूर्ण धर्म था अब केवल कुछ छोटे क्षेत्रों में ही सीमित है।

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इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भारतीय जनसंख्या का धार्मिक संगठन धर्म परिवर्तन, प्रवास तथा देश विभाजन के कारण परिवर्तित होता रहा है। भारत के मुख्य धार्मिक समूहों में हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध एवं जैन सम्मिलित किये जाते हैं। यद्यपि यहूदी, पारसी आदि जैसे दूसरे धर्मावलम्बी भी यहाँ पाये जाते हैं। कई जन-जातीय समुदाय जीववाद एवं टोटेमवाद पर विश्वास रखते हैं। भारत में कुल जनसंख्या में 82 प्रतिशत हिन्दू धर्मालम्बी हैं।

ये देश के सभी भागों में पाये जाते हैं, परन्तु कुछ जिलों में इनकी संख्या मुस्लिम, ईसाइयों, बौद्धों या सिक्खों की अपेक्षा कम है। अल्प संख्यकों में सबसे अधिक संख्या मुस्लिमों की है जो भारत की जनसंख्या का 12.12 प्रतिशत हैं। ईसाइयों की जनसंख्या 2.34 प्रतिशत है जबकि सिक्ख कुल जनसंख्या का केवल 1.93 प्रतिशत हैं। बौद्ध एवं जैन कुल जनसंख्या का क्रमश: 0.76 तथा 0.39 प्रतिशत हैं।

1. हिन्दू – हिन्दू धर्म भारत में सभी स्थानों पर पाया जाता है।
(क) उड़ीसा तथा मध्य प्रदेश में इनका प्रतिशत 95% से भी अधिक है।
(ख) उत्तर प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश में यह प्रतिशत लगभग 95% है। मिज़ोरम में केवल 5% है।
(ग) मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु तथा आन्ध्र प्रदेश में यह प्रतिशत 90% है। परन्तु पंजाब, जम्मू कश्मीर, मेघालय, नागालैंड में यह अल्प संख्या में है।

2. मुस्लिम – 1991 की जनगणना के अनुसार देश में मुसलमानों की संख्या 101.59 मिलियन थी जो देश की कुल जनसंख्या का 12.12 प्रतिशत थी। मुस्लिम संकेन्द्रण के प्रमुख क्षेत्रों में कश्मीर घाटी, ऊपरी गंगा मैदान के कुछ भाग (उत्तर प्रदेश) तथा पश्चिमी बंगाल के कई जिले हैं। यहां मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 20 से 46 प्रतिशत तक पाया जाता है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में कुल जनसंख्या का 61.40 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या है। ऊपरी गंगा मैदान के कई जिलों में मुस्लिम आबादी काफ़ी है।

3. ईसाई – भारत के 1 करोड़ 96 लाख ईसाइयों में से लगभग 29% लाख केरल में ही रहते हैं। ईसाइयों के संकेन्द्रण के अन्य क्षेत्र गोवा तथा तमिलनाडु हैं। गोवा की जनसंख्या का लगभग 30 प्रतिशत ईसाई धर्मावलम्बी है। सा एवं बिहार के कई जन-जातीय जिलों में ईसाई जनसंख्या का अनुपात महत्त्वपूर्ण है। इसी प्रकार मेघालय, मिज़ोरम, नागालैण्ड तथा मणिपुर में ईसाई जनसंख्या का अनुपात काफ़ी अधिक है। उदाहरण के लिए नागालैण्ड की कुल संख्या में, ईसाई जनसंख्या का अनुपात 87.47 प्रतिशत है। इसके बाद मिज़ोरम में यह अनुपात 85.73 प्रतिशत है। मेघालय के जिलों एवं मणिपुर के कुछ जिलों में यह अनुपात काफ़ी अधिक (50-98 प्रतिशत) पाया जाता है। उत्तर प्रदेश एवं पंजाब के कई जिलों में ईसाई थोडी संख्या में पाये जाते हैं।

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4. सिक्ख-1991 की जनगणना में सिक्खों की संख्या 1 करोड़ 62 लाख दिखाई गई। वैसे तो भारत का कोई ऐसा भाग नहीं है जहां सिक्ख न रहते हों। परन्तु इनका अधिकतम संकेन्द्रण पंजाब तथा उससे संलग्न हरियाणा के जिलों में है। यह बात स्पष्ट है क्योंकि सिक्ख धर्म का उद्भव पंजाब में हुआ। उत्तर प्रदेश के तराई में, राजस्थान के गंगानगर, अलवर तथा भरतपुर में सिक्खों के संकेन्द्रण के छोटे-छोटे पॉकेट हैं। दिल्ली की कुल जनसंख्या का 4.84 प्रतिशत सिक्ख हैं। दूसरे राज्यों के नगरों में भी सिक्ख कम संख्या में रहते हैं।

5. बौद्ध, जैन तथा पारसी – भारत में लगभग 64 लाख बौद्ध, 35 लाख जैन तथा लगभग 72 हज़ार पारसी रहते हैं। भारत में कुल बौद्ध जनसंख्या का 79 प्रतिशत केवल महाराष्ट्र में रहता है। ये लोग बहुधा नव-बौद्ध हैं जो बाबा साहिब अंबेडकर के आन्दोलन से प्रभावित होकर बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन करके बौद्ध बने थे।

बौद्ध संकेन्द्रण के परम्परागत क्षेत्र लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश तथा त्रिपुरा हैं। भारत की कुल जैन जनसंख्या में से 28.80 प्रतिशत महाराष्ट्र 16.78 प्रतिशत राजस्थान में तथा 14.65 प्रतिशत गुजरात में रहते हैं। इन तीनों राज्यों को मिलाकर देश की कुल जैन जनसंख्या के 60.23 प्रतिशत पाये जाते हैं। जैनों के बारे में यह एक रोचक तथ्य है कि उनकी अधिकांश संख्या नगरों में रहती है। पारसी देश का सबसे छोटा धार्मिक समूह है। इनका अधिकतम संकेन्द्रण भारत के पश्चिमी भागों-महाराष्ट्र और गुजरात में है।

प्रश्न 6.
लिंगानुपात से आप क्या समझते हैं ? भारत में लिंगानुपात के प्रादेशिक वितरण का वर्णन करो।
उत्तर:
लिंगानुपात (Sex Ratio) – किसी भी देश के सामाजिक विकास के लिए लिंग संरचना का ज्ञान आवश्यक है। प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियां के अनुपात को लिंग अनुपात (Sex Ratio) कहा जाता है। भारत में लिंग अनुपात निरन्तर कम होता जा रहा है। सन् 1901 में यह अनुपात 972 प्रति हजार पुरुष था और जबकि 2001 में यह संख्या घट कर 933 हो गई है तथा 2011 में 940 हो गई। भारत में केवल केरल राज्य में ही स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां एक हजार पुरुषों के पीछे 1084 स्त्रियां हैं। देश में सबसे अधिक लिंग अनुपात केरल राज्य में 1084 स्त्रियां प्रति हज़ार पुरुष है जबकि राष्ट्रीय औसत लिंग अनुपात 940 है। राष्ट्रीय औसत से कम लिंग अनुपात निम्नलिखित राज्यों में है कम लिंग अनुपात वाले राज्य-सिक्किम (889), नागालैंड (931), हरियाणा (877), पंजाब (893), उत्तर प्रदेश (898), जम्मू-कश्मीर (883), पश्चिमी बंगाल (947), राजस्थान (926), अरुणाचल प्रदेश (920), असम (954) है। मध्य प्रदेश (930), महाराष्ट्र (925), गुजरात (918), बिहार (916), उत्तर प्रदेश (908)।
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JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ

JAC Class 10 Hindi पतझर में टूटी पत्तियाँ Textbook Questions and Answers

मौखिक –

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न 1.
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है ?
अथवा
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग-अलग कैसे हैं ? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोने में क्या अंतर है ?
उत्तर :
शुद्ध सोना बिलकुल शुद्ध होता हैं; इसमें किसी तरह की कोई मिलावट नहीं होती। इसके विपरीत गिन्नी के सोने में ताँबा मिला होता है। इसी कारण वह अधिक चमकदार और मज़बूत होता है।

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प्रश्न 2.
प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जो शुद्ध आदर्शों के साथ-साथ व्यावहारिकता का भी प्रयोग करते हैं, उन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट कहते हैं।

प्रश्न 3.
पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है ?
उत्तर :
पाठ के अनुसार शुद्ध आदर्श है-‘अपने सिद्धांतों, सत्य आदि का पालन करना’। इसमें व्यंवहारवाद के लिए कोई स्थान नहीं होता।

प्रश्न 4.
लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड़’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
उत्तर :
जापानियों का दिमाग बहुत तेज्ञ गति से चलता है। वे हर काम को जल्दी निपय देना चाहते हैं। इसी कारण लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात कही है।

प्रश्न 5.
जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं ?
उत्तर :
जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

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प्रश्न 6.
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है ?
उत्तर :
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान पर पूरी तरह से शांति होती है। यही उस स्थान की मुख्य विशेषता है।

लिखित –

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्याकहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
उत्तर :
लेखक के अनुसार शुद्ध आदर्श सोने के समान खो होते है। सोने की तरह ही उनमें पूर्ण शुद्धता होती है। अतः वे सोने के समान मूल्यवान हैं। दूसरी ओर व्यावहारिकता ताँबे के समान है, जो शुद्ध आदर्शरूपी सोने में मिलकर उसे चमक प्रदान करती है। व्यावहारिकता ताँबे के समान ऊपरी तौर पर चमकदार होती है।

प्रश्न 2.
चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण बंग से पूरी की ?
उत्तर :
जापानी विधि से चाय पिलाने वाले को चाजीन कहा गया है। जब लेखक और उसके मित्र वहाँ चाय पीने गए, तो उसने कमर झुकाकर प्रणाम किया और उन्हें बैठने की जगह दिखाई। उसके बाद अँगीठी सुलगाकर उसने चायदानी रखी। वह दूसरे कमरे में जाकर बर्तन लेकर आया और उन बर्तनों को उसने तौलिए से साफ़ किया। इन्हीं क्रियाओं को उसने अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से पूरा किया था।

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प्रश्न 3.
‘टी-सेंरेमनी’ में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों ?
उत्तर :
‘टी-सेंरेमनी’ में तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था। ‘ टी-सेंरमनी’ की मुख्य विशेषता वहाँ की शांति होती है। यदि अधिक व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाए, तो वहाँ शांति भंग होने की आशंका रहती है। एक समय में तीन व्यक्ति ही शांतिपूर्ण चाय पीने के उस ढंग का सही आनंद उठा सकते हैं।

प्रश्न 4.
चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयय में क्या परिवर्तन महसूल किया?
उत्तर :
चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसके दिमाग के दौड़ने की गति धीर-धीर कम हो रही थी। कुछ देर बाद दिमाग की गति बिलकुल बंद हो गई और उसका दिमाग पूरी तरह शांत हो गया। लेखक को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वह अनंतकाल में जी रहा है। उसे अपने चारों ओर इसनी शांति महसूस हो रही थी कि उसे सन्नाटा भी साफ़ सुनाई दे रहा था।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
गाधीजी में नेतृत्व की अद्भुत कमता थी; उदाहरण साित्त इस बात की पुष्टि कीजिए।
उत्तर :
गंधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। यह बात उनके अहिंसात्मक आंदोलनों से स्पष्ट हो जाती है। वे अकेले चलते थे और लाखोंलोग उनके पीछे हो जाते थे। नमक का कानून तोड़ने के लिए जब उन्होंने जनता का आहवान किया तो उनके नेतृत्व में हज़ारों लोग उनके साथ पैदल ही दाँडी यात्रा पर निकल पड़े थे। इसी प्रकार से असहयोग आंदोलन के समय भी उनकी एक आवाज़ पर देश के हज़ारों नौज़वान अपनी पढ़ाई छोड़कर उनके नेतृत्व में आंदोलन के पथ पर चल पड़े थे।

प्रश्न 2.
आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं ? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
मेरे विचार में ईमानदारी, सत्य बोलना, अहिंसा, पारस्परिक प्रेमभाव, सदाचार, परिश्रम करना, निरंतर कर्म करते रहना, मानव धर्म का पालन करना, देश और समाज के प्रति निष्ठावान रहना, दूसरों की सहायता करना आदि शाश्वत मूल्य हैं। वर्तमान समय में जबकि सर्वत्र भ्रष्टाचार, अनाचार, हिंसा, द्वेष, आलसीपन, कदाचार आदि दुर्भावों का बोलबाला है, हम इन शाश्वत मूल्यों को अपनाकरं अपना, अपने परिवार, समाज तथा देश का नाम ऊँचा कर सकते हैं। ये शाश्वत मूल्य ही हमें सद्मार्ग दिखा सकते हैं।

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प्रश्न 3.
अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब –
1. शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
2. शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
उत्तर :
1. एक बार एक सज्जन हमारे घर का दरवाज़ा खटखटा रहे थे। मैंने बाहर जाकर देखा। वे पिताजी के बारे में पूछ रहे थे। मैंने उन्हें बैठक में बैठाया और पिताजी को बुला लाया। उन सज्जन के जाने के बाद पिताजी ने मुझे डाँटा और कहा कि बिना मुझसे पूछे किसी को भी अंदर मत लाया करो। मैंने काम अच्छा किया था, परंतु मुझे फल उसके अनुसार नहीं मिला। इसके विपरीत एक बार मैं कक्षा का काम करके नहीं गया। जब अध्यापक जी ने पूछा कि काम क्यों नहीं किया, तो मैंने स्पष्ट उत्तर दे दिया कि कल मेरी तबियत खराब थी। मेरे सत्य बोलने पर अध्यापक जी ने मुझे कोई दंड नहीं दिया। यह मेरे सत्य बोलने का अच्छा फल था।

2. एक बार मैं अपनी दुकान पर बैठा हुआ था; पिंताजी कहीं गए हुए थे। एक ग्राहक कुछ सामान लेने आया। उसका कुल मूल्य दो हज़ार रुपये बना। ग्राहक इस पर कुछ रियायत चाहता था। मुझे ज्ञात था कि इस सामान की बिक्री पर हमें लगभग तीस प्रतिशत लाभ हो रहा है। मैंने उसे दस प्रतिशत की छूट दे दी। इस प्रकार मैंने अपने आदर्शों की रक्षा करते हुए अपनी व्यवहारिकता से लाभ लिया और ग्राहक को भी प्रसन्न कर दिया। अब वह व्यक्ति सदा हमारी दुकान से ही सामान खरीदता है।

प्रश्न 4.
‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कुछ लोगों का मत है कि गांधीजी ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ थे। वे व्यावहारिकता को पहचानते थे। उन्होंने केवल आदर्शों का सहारा नहीं लिया, बल्कि वे आदर्शों के साथ-साथ व्यावहारिकता को मिलाकर चले। लेखक के अनुसार इसके लिए गांधीजी ने कभी भी अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने दिया। वे अपने आदर्शों को उसी ऊँचाई पर रखते थे; उन्हें नीचे नहीं गिराते थे। उन्होंने व्यावहारिकता को ऊँचा उठाकर उसे आदर्शों की ऊँचाई तक पहुँचाया। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि उन्होंने कभी भी सोने में ताँबा मिलाने का प्रयत्न नहीं किया बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाई। उन्होंने अपनी व्यावहारिकता को ऊँचा उठाकर आदर्शों के रूप में प्रतिष्ठित किया।

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प्रश्न 5.
‘गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है ?
उत्तर :
‘गिन्नी का सोना’ पाठ के माध्यम में लेखक बताना चाहता है कि जीवन में व्यवहारवादी लोग लाभ-हानि का हिसाब-किताब लगाने में अधिक निपुण होते हैं। इसलिए वे आदर्शवादी लोगों से कहीं आगे निकल जाते हैं, परंतु समाज की दृष्टि में उनका महत्व अधिक नहीं होता है। इसके विपरीत जो आदर्शवादी व्यक्ति हैं, वे व्यवहारिकता को अपने आदर्शों के अनुरूप ढाल लेते हैं और अपने साथ-साथ समाज की भी उन्नति करते हैं। इसलिए जीवन में आदर्शोन्मुखी व्यावहारिकता का ही अधिक महत्व है।

प्रश्न 6.
लेखक के मित्र ने जापानी लोगों के मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए ? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर :
लेखक के मित्र ने बताया कि जापान में मानसिक रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। इसका कारण जापानी लोगों के जीवन का तेज़ गति से चलना है। वे लोग दौड़ रहे हैं। उनका दिमाग निरंतर कार्यशील रहता है। उसने यह भी बताया कि जापानी अब अमेरिका से आगे बढ़ने की होड़ में लगे हैं। वे एक महीने का काम एक दिन में करने का प्रयत् करते हैं। उनका दिमाग लगातार कुछ नया करने के लिए सोचता रहता है।

इससे धीरे-धीरे उनके दिमाग पर तनाव बढ़ रहा है और वे मानसिक रोग के शिकार हो रहे हैं। मेरे विचार से जीवन में संघर्ष करना और आगे बढ़ना अच्छी बात है, किंतु अपने आपको केवल दूसरे से आगे बढ़ने के लिए निरंतर काम में उलझाए रखना उचित नहीं है। काम के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।

प्रश्न 7.
लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक का मत है कि हम अकसर बीते हुए दिनों के बारे में सोचते हैं या भविष्य के रंगीन सपनों में डूबे रहते हैं। वास्तव में सत्य केवल वर्तमान है और हमें उसी में जीना चाहिए। अतीत को हम चाहकर भी लौटा नहीं सकते और भविष्य को हमने देखा नहीं है। आने वाला कल कैसा होगा, कोई नहीं जानता।

अतः अतीत और भविष्य के बारे में सोचकर अपने आपको दुखी करने का कोई लाभ नहीं है। वर्तमान, जो सामने दिखाई दे रहा है, उसी को सत्य मानकर उसका भरपूर आनंद उठाने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान के एक-एक पल को जीना ही वास्तव में जीवन जीना है। इसी आधार पर लेखक ने वर्तमान जीवन में जीने के लिए कहा है।

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(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

I

प्रश्न 1.
1. समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
2. जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों’ के जीवन से आदर्श धंरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।
II
3. हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं, तब अपने आप से लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।
4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से की कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
I
उत्तर :
1. लेखक यहाँ स्पष्ट करना चाहता है कि समाज को शाश्वत मूल्य देने का श्रेय आदर्शवादी लोगों को है। वे अपने आदर्शों से समाज को एक आदर्श मार्ग दिखाते हैं और उन्हें उस पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आदर्शवादी लोग समाज को जीने और रहने योग्य बनाते हैं। वे समाज को निरंतर एक दिशा देकर ऊँचा उठाने का प्रयास करते है। उन्हीं के कारण ही समाज में सद्गुणों का विकास होता है।

2. लेखक कहता है कि जो लोग आदर्शों के साथ-साथ व्यावहारिकता को भी लेकर चलते हैं, उन्हें ‘ प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहा जाता है। ऐसे लोग आदर्शों को केवल थोड़ा-सा अपनाते हैं। जब व्यावहारिकता का वर्णन होने लगता है, तो ये लोग धीरे-धीरे अपने आदर्शों को छोड़ते चले जाते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही सामने आने लगती। जिन आदर्शों की वे बात करते हैं, वे कहीं भी दिखाई नहीं देते।

II

3. यहाँ लेखक ने अपने जापानी मित्र के माध्यम से जापान के लोगों के बारे में बताया है कि उनके जीवन की रफ़्तार अत्यंत तेज़ है। वे लोग निरंतर दौड़ते प्रतीत होते हैं। लेखक कहता है कि यह रफ्तार उनके जीवन में ही नहीं अपितु चलने और बोलने में भी है। उनका दिमाग निरंतर कुछ-न-कुछ सोचता रहता है। वे प्रत्येक क्षण कुछ-न-कुछ करते रहते हैं। यहाँ तक कि जब वे अकेले होते हैं, तो भी वे अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

4. लेखक के कहने का आशय है कि जापानी विधि से चाय बनाने वाला व्यक्ति प्रत्येक कार्य अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से कर रहा था। उसकी क्रियाओं को देखकर ऐसा अनुभव हो रहा था मानो जयजयवंती नामक मधुर राग बज रहा हो। उसकी इन क्रियाओं को देखकर एक मधुरता और अपनेपन का अहसास होता था। चाय बनाने वाले व्यक्ति की समस्त क्रियाएँ एकदम गरिमापूर्ण एवं अनूठी थीं, जो मन को शांति प्रदान करती थीं।

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भाषा-अध्ययन –

I

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए –
व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत
उत्तर :
व्यावहारिकता – प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यावहारिकता का ज्ञान जरूरी है।
आदर्श – हमें अपने जीवन में कुछ आदर्श अपनाने चाहिएँ।
सूझबूझ – सूझबूझ से लिए गए निर्णय सदैव लाभकारी होते हैं।
विलक्षण – सचिन में विलक्षण प्रतिभा है।
शाश्वत ईश्वर का नाम शाश्वत है।

प्रश्न 2.
‘लाभ-हानि’ का विग्रह इस प्रकार होगा-लाभ और हानि
यहाँ द्वंद्व समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। दोनों पदों के बीच योजक शब्द का लोप करने के लिए योजक चिहून लगाया जाता है। आगे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए –
(क) माता-पिता = ………..
(ङ) अन्न-जल = ………..
(ख) पाप-पुण्य = ………..
(च) घर-बाहर = ………..
(ग) सुख-दुख = ………..
(ए) देश-विदेश = ………..
(घ) रात-दिन = ………..
उत्तर :
(क) माता-पिता = माता और पिता
(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(ग) सुख-दुख = सुख और दुख
(घ) रात-दिन = रात और दिन
(ङ) अन्न-जल = अन्न और जल
(च) घर-बाहर = घर और बाहर
(छ) देश-विदेश = देश और विदेश

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प्रश्न 3.
नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए –
(क) सफल = ………….
(ख) विलक्षण = ………
(ग) व्यावहारिक = …………
(घ) सजग = …………..
(ङ) आदर्शवादी = ……….
(च) शुद्ध = ………..
उत्तर :
(क) सफल = सफलता
(ख) विलक्षण = विलक्षणता
(ग) व्यावहारिक = व्यावहारिकता
(घ) सजग = सजगता
(ङ) आदर्शवादी = आदर्शवादिता
(च) शुद्ध = शुद्धता

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए –
(क) शुद्ध सोना अलग है।
(ख) बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।
ऊपर दिए गए वाक्यों में सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दूसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भो में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
उत्तर, कर, अंक, नग
उत्तर :

  • उत्तर – इन सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  • उत्तर – ध्रुव तारा उत्तर दिशा में दिखाई देता है। कर
  • इस पुल का उद्घाटन नेताजी के कर-कमलों से हुआ।
  • कर – हमें समय पर आय कर जमा करवाना चाहिए।
  • अंक – तुमने परीक्षा में कितने अंक प्राप्त किए हैं?
  • अंक – बालक दौड़कर माँ के अंक में छिप गया।
  • नग – रेखा की अंगूठी में कई नग जड़े हैं।
  • नग – नगराज हिमालय हमारे देश की उत्तर दिशा में है।

II

प्रश्न 5.
नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए –
(क) 1. अँगीठी सुलगायी।
2. उस पर चायदानी रखी।
1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।
2. तौलिये से बरतन साफ़ किए।
उत्तर :
(क) अँगीठी सुलगायी और उस पर चायदानी रखी।
(ख) चाय तैयार हुई और उसने प्यालों में भरी।
(ग) बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया और उन्हें तौलिये से साफ़ किया।

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प्रश्न 6.
नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए –
(क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है।
2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था।
2. उसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।
उत्तर :
(क) चाय पीने की यह एक विधि है, जिसे जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था, जिसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) जैसे ही चाय तैयार हुई, उसने उसे प्यालों में भरकर प्याले हमारे सामने रख दिए।

योग्यता-विस्तार –

प्रश्न 1.
I. गांधीजी के आदर्शों पर आधारित पुस्तकें पढ़िए ; जैसे-महात्मा गांधी द्वारा रचित ‘सत्य के प्रयोग’ और गिरिराज किशोर द्वारा रचित उपन्यास ‘गिरमिटिया’।
उत्तर
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 2.
II. पाठ में वर्णित ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

परियोजना-कार्य – 

प्रश्न 1.
भारत के नक्शे पर वे स्थान अंकित कीजिए जहाँ चाय की पैदावार होती है। इन स्थानों से संबंधित भौगोलिक स्थितियाँ क्या हैं और अलग-अलग जगह की चाय की क्या विशेषताएँ हैं, इनका पता लगाइए और परियोजना पुस्तिका में लगाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करें।

JAC Class 10 Hindi पतझर में टूटी पत्तियाँ Important Questions and Answers

निबंधात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1.
कुछ लोगों का गांधी जी के बारे में क्या कहना है ? ‘गिन्नी का सोना’ प्रसंग के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक कहता है कि कुछ लोग गांधीजी को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ अर्थात व्यावहारिक आदर्शवादी मानते हैं। ऐसे लोगों का गांधी जी के बारे में यह कहना यह है कि वे व्यावहारिकता से भली-भाँति परिचित थे। उन्हें समय और अवसर को देखकर कार्य करने की पूरी समझ थी। वे व्यावहारिकता की असली कीमत जानते थे। इसी कारण वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके। यदि उन्हें व्यावहारिकता की समझ न होती, तो वे केवल कल्पना में ही रहते और लोग भी उनके पीछे-पीछे न चलते।

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प्रश्न 2.
लेखक ने व्यवहारवादियों और आदर्शवादियों में क्या अंतर बताया है ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार व्यवहारवादी हमेशा समय और अवसर का लाभ उठाते हैं। वे सदा सजग रहते हैं और इसी कारण उन्हें सफलता भी अधिक मिलती है। वे अपने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति करने में अन्य लोगों से बहुत आगे रहते हैं। दूसरी ओर आदर्शवादी केवल अपना भला नहीं करते अपितु दूसरों को भी अपने साथ उन्नति के मार्ग पर लेकर चलते हैं। आदर्शवादी सदैव समाज को सही दिशा देने का प्रयास करते हैं। जहाँ आदर्शवादियों ने समाज को ऊपर उठाया है, वहीं व्यवहारवादियों ने समाज को सदा गिराया ही है।

प्रश्न 3.
‘व्यक्ति विशेष की उन्नति समाज की उन्नति है’-विषय पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
किसी भी समाज की उन्नति उसके व्यक्तियों पर निर्भर करती है। यदि व्यक्ति उन्नति करता है, तो समाज की उन्नति अपने आप हो जाती है। एक व्यक्ति से परिवार बनता है, परिवारों से गाँव बनता है और गाँवों से देश व समाज का निर्माण होता है। एक व्यक्ति की उन्नति का प्रभाव सीधे समाज पर पड़ता है। व्यक्ति समाज की सबसे छोटी इकाई है, किंतु इसका सीधा संबंध समाज से है। अत: कहा: जा सकता है कि व्यक्ति विशेष की उन्नति समाज की उन्नति है।

प्रश्न 4.
‘गिन्नी का सोना’ प्रसंग का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘गिन्नी का सोना’ प्रसंग में लेखक ने व्यवहारवादी लोगों को गिन्नी के सोने के समान बताया है। जिस प्रकार गिन्नी के सोने में शदध सोने और ताँबे का मिश्रण होता है, उसी प्रकार व्यवहारवादी लोगों में भी आदर्शों और व्यावहारिकता का मिश्रण होता है। लेखक का मानना जाता है, तो वह गलत है। लेखक का मत है कि पूर्ण व्यवहारवादी लोगों से समाज का कल्याण नहीं हो सकता। व्यावहारिकता से समाज का कभी लाभ नहीं होता। व्यावहारिकता व्यक्ति को सफलता तो दिला सकती है, किंतु समाज का कल्याण केवल आदर्शवादिता से ही संभव है।

लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट से तात्पर्य है-‘शुद्ध आदर्शों के साथ-साथ व्यावहारिकता का प्रयोग करने वाले।’ शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने के समान होते हैं, किंतु कुछ लोग उनमें व्यावहारिकता का थोड़ा-सा ताँबा लगाकर काम चलाते हैं। इस स्थिति में इन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट कहा जाता है।

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प्रश्न 2.
मानवीय जीवन की रफ़्तार क्यों बढ़ गई है?
उत्तर :
मानवीय जीवन की रफ्तार इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि इस संसार में कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ रहा है। कोई किसी से बोलता नहीं बल्कि बक रहा है। अकेलेपन में भी हम अपने आप से ही बड़बड़ाते रहते हैं।

प्रश्न 3.
मानव होने के नाते हम प्रायः कहाँ उलझे रहते हैं ?
उत्तर :
मानव एक चिंतनशील एवं कल्पनाशील प्राणी है, इसलिए कभी हम गुजरे हुए दिनों की खट्टी-मिट्ठी यादों में उलझे रहते हैं, तो कभी भविष्य के रंगीन सपने देखते हैं। हम या तो भूतकाल में खोए रहते हैं या फिर भविष्य के बारे में सोचते हैं।

प्रश्न 4.
लेखक की दृष्टि में सत्य क्या है?
उत्तर :
लेखक की दृष्टि में मनुष्य के सामने जो वर्तमान हैं, वही सत्य है। इसलिए हमें केवल उसी में जीना चाहिए। वास्तव में भूतकाल और भविष्यकाल दोनों ही मिथ्या हैं। उनके बारे में सोचने से कोई लाभ नहीं है।

प्रश्न 5.
‘गिन्नी का सोना’ पाठ में लेखक ने किसे और क्यों श्रेष्ठ बताया है?
उत्तर :
का सोना’ पाठ में लेखक ने आदर्शवादियों और व्यवहारवादियों में से आदर्शवादियों को श्रेष्ठ बताया है। आदर्शवादी इसलिए श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वे स्वयं भी उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होते हैं और अन्य लोगों को भी उन्नति के मार्ग पर अपने साथ ले जाते हैं।

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प्रश्न 6.
समाज को आदर्शवादियों ने क्या दिया है? उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
समाज को आदर्शवादियों ने शाश्वत मूल्यों की भेंट दी है। ये शाश्वत मूल्य मानव को भटकने से बचाएँगे; उन्हें सद्मार्ग दिखाएंगे। उन्हें जीवन में आने वाले कष्टों से लड़ने की शक्ति तथा साहस प्रदान करेंगे।

प्रश्न 7.
‘झेन की देन’ पाठ में लेखक ने चाय पीने के विषय में क्या जानकारी दी है?
उत्तर :
‘झेन की देन’ पाठ में लेखक बताता है कि जापान में चाय पीने का ढंग बड़ा ही निराला था। वहाँ चाय पीने की जगह एकदम शांतिपूर्ण थी। लेखक और उसके मित्रों को प्याले में दो बूट चाय लाकर दी गई। इस चाय को उन्होंने धीरे-धीरे बूंद-बूंद करके लगभग डेढ़ घंटे में पीया।

प्रश्न 8.
लेखक को चाय पीते समय किस बात का ज्ञान हुआ?
उत्तर :
लेखक को चाय पीते समय ज्ञान हुआ कि मनुष्य व्यर्थ में ही भूतकाल और भविष्यकाल की चिंता में उलझा रहता है, जबकि वास्तविकता तो वर्तमान है जो हमारे सामने घट रहा है। वह यह भी बताता है कि जो वर्तमान को जीता है, वही सही अर्थों में आनंद को प्राप्त करता है।

प्रश्न 9.
जापान में किस प्रकार की बीमारियाँ हैं और वहाँ के कितने प्रतिशत लोग इससे बीमार हैं?
उत्तर :
लेखक के अनुसार जापान में मानसिक बीमारियाँ अधिक हैं। वहाँ के लोग निरंतर दिमागी-कार्य में डूबे रहते हैं। मस्तिष्क का ज़रूरत से अधिक प्रयोग करने के कारण वे मानसिक बीमारियों के शिकार हो गए हैं। पाठ के अनुसार वहाँ के लगभग अस्सी प्रतिशत लोग मनोरोगी हैं।

प्रश्न 10.
लेखक ने ‘टी-सेरेमनी’ में चाय पीते समय क्या निर्णय लिया?
उत्तर :
लेखक ने टी-सेरेमनी में चाय पीते-पीते यह निर्णय लिया कि अब वह कभी भी अतीत और भविष्य के बारे में नहीं सोचेगा। उसे लगा कि जो वर्तमान हमारे सामने है, वही सत्य है। भूतकाल और भविष्य दोनों ही मिथ्या हैं। क्योंकि भूतकाल चला गया है, जो कभी लौटकर नहीं आएगा और भविष्य अभी आया ही नहीं है। अतः इन दोनों के बारे में सोचना छोड़कर वर्तमान में जीने में ही वास्तविक आनंद है।

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प्रश्न 11.
‘टी सेरेमनी’ की तैयारी और उसके प्रभाव पर चर्चा कीजिए।
अथवा
चा-नो-मू की पूरी प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
अथवा
टी-सेरेमेनी क्या है?
उत्तर :
जापान में चाय पीने की एक विशेष विधि है, जिससे मस्तिष्क का तनाव कम हो जाता है। इस विधि को ‘चा-नो-मू’ कहते हैं। ‘टी-सेरेमनी’ में चाय पिलानेवाला अँगीठी सलगाने से लेकर प्याले में चाय डालने तक की सभी क्रियाएँ अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से करता है। इस सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता। यहाँ का वातावरण शांतिपूर्ण होता है।

प्याले में दो-दो घूट चाय दी जाती है, जिसे बूंद-बूंद करके लगभग डेढ़ घंटे में पीया जाता है। यह चाय पीने के बाद ऐसा अनुभव होता है जैसे दिमाग के दौड़ने की गति धीरे-धीरे कम हो गई है। कुछ देर बाद दिमाग बिलकुल शांत हो जाता है और ऐसा लगता है जैसे अनंतकाल में जी रहे हों। अपने चारों ओर इतनी शांति महसूस होती है कि सन्नाटा भी साफ सुनाई देता है।

प्रश्न 12.
जापान में मानसिक रोग के क्या कारण बताए हैं? उससे होने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए लिखिए कि इसमें ‘टी सेरेमनी’ की क्या उपयोगिता है?
उत्तर :
जापान में मानसिक रोग का प्रमुख कारण वहाँ के लोगों का निरंतर दिमागी कार्यों में डूबे रहना है। वे आगे बढ़ने की होड़ में एक महीने का काम एक दिन में करने का प्रयास करते हैं, जिससे उनके दिमाग पर तनाव बढ़ जाता है और वे मानसिक न जाते हैं। ‘टी सेरेमनी’ में चाय-पान करते समय अतीत और भविष्य की न सोचकर वर्तमान में जीने का संकल्प किया जाता है, जिससे सभी प्रकार के मानसिक तनावों से मुक्ति मिल जाती है। ‘टी सेरेमनी’ का शांतिपूर्ण वातावरण और एक-एक घुट लेकर चाय पीने से वे वर्तमान में जी कर तनाव रहित हो जाते हैं।

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
असल में दोनों काल मिथ्या हैं। एक चला गया है, दूसरा आया नहीं है। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते उस दिन मेरे दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था और वह अनंत काल जितना विस्तृत था।
(क) गद्यांश में किन दो कालों के बारे में बात की गई है और उनकी क्या विशेषता है?
(ख) लेखक ने किस काल को सत्य माना है और क्यों?
(ग) गद्यांश से लेखक क्या समझाना चाहता है?
उत्तर :
(क) गद्यांश में भूत और भविष्य कालों के बारे में बात की गई है। भूतकाल बीत गया है और भविष्य काल अभी आया नहीं है, इसलिए इनके विषय में विचार करना व्यर्थ है।
(ख) लेखक ने वर्तमान काल को सत्य माना है क्योंकि वही हमारे सामने सत्य स्वरूप में उपस्थित है। इसलिए हमें वर्तमान में ही जीना चाहिए।
(ग) इस गद्यांश से लेखक यह समझाना चाहता है कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए, भूत और भविष्य के विषय में सोच कर परेशान नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 14.
भूत, भविष्य और वर्तमान में किसे सत्य माना गया है?
उत्तर :
लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, क्योंकि वहीं हमारे सामने सत्य स्वरूप में उपस्थित है।

पतझर में टूटी पत्तियाँ Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन – रवींद्र केलेकर का जन्म 7 मार्च सन 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ था। छात्र जीवन से ही इनका झुकाव गोवा को मुक्त करवाने की ओर था। इसी कारण वे गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए। केलेकर की रुचि पत्रकारिता में भी रही। ये गांधीवादी दर्शन से बहुत प्रभावित थे। इनके लेखन पर भी इसका प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है। रवींद्र केलेकर को समय-समय पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें गोवा कला अकादमी द्वारा दिया गया साहित्य पुरस्कार भी शामिल है।

रचनाएँ – रवींद्र केलेकर ने हिंदी के साथ-साथ कोंकणी और मराठी भाषा में भी लिखा है। इन्होंने अपनी रचनाओं में जनजीवन के विविध पक्षों, मान्यताओं और व्यक्तिगत विचारों को देश और समाज के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है। इनके द्वारा की गई टिप्पणियों में चिंतन की मौलिकता के साथ-साथ मानवीय सत्य तक पहुँचने की सहज चेष्टा है। इनके गद्य की एक विशेषता थोड़े में ही बहुत कुछ कह देना है। सरल और थोड़े शब्दों में लिखना कठिन काम माना जाता है, किंतु रवींद्र केलेकर ने यह कार्य अपनी रचनाओं में बड़ी सरलता से कर दिखाया है।

इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं उजवादाचे सूर, समिधा, सांगली ओथांबे (कोंकणी); कोंकणीचे राजकरण, जापान जसा दिसला (मराठी); पतझर में टूटी पत्तियाँ(हिंदी)। – रवींद्र केलेकर ने काका कालेलकर की अनेक पुस्तकों का संपादन और अनुवाद भी किया है।

भाषा-शैली – रवींद्र केलेकर की भाषा-शैली अत्यंत सरल, स्पष्ट और सरस है। सामान्य पाठक भी इनकी भाषा को सरलता से समझ लेता है। वे बहुत ही नपे-तुले शब्दों में अपनी बात को समझाते हैं। उनकी भाषा में कहीं भी नीरसता का अनुभव नहीं होता। भाषा क में प्रवाहमयता और प्रभावोत्पादकता सर्वत्र दिखाई देती है।

इनकी भाषा में तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी सभी शब्दों का मिश्रण है। इनकी भाषा की सरलता और सहजता देखते ही बनती है; उदाहरणस्वरूप-“अक्सर हम या तो गुज़रे हुए दिनों की खट्टी मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। एक चला गया है, दूसरा आया नहीं है।” रवींद्र केलेकर की शैली की विशेषता उसकी संक्षिप्तता है। कहीं-कहीं उन्होंने आत्मकथात्मक शैली और कहीं सूक्ति शैली का भी प्रयोग किया है।

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पाठ का सार :

प्रस्तुत पाठ में लेखक रवींद्र केलेकर ने दो अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से एक जागरूक और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा दी है। पहले प्रसंग ‘गिन्नी का सोना’ में लेखक ने जीवन में अपने लिए सुख-साधन जुटाने वालों के स्थान पर उन लोगों का अधिक महत्व बताया है, जो संसार को जीने और रहने योग्य बनाते हैं। दूसरे प्रसंग ‘झेन की देन’ में बौद्ध दर्शन में वर्णित शांतिपूर्ण जीवन के विषय में बताया गया है।

I. गिन्नी का सोना –

इस प्रसंग में लेखक कहता है कि गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से भिन्न होता है। इसमें ताँबा मिला होता है। यह चमकदार और अधिक मज़बूत होता है। शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने के समान होते हैं। कुछ लोग शुद्ध आदर्शों में व्यावहारिकता का मिश्रण करते हैं। ऐसे लोगों को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहा जाता है। लेखक कहता है कि कुछ लोग गांधीजी को ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहते हैं, किंतु गांधीजी व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर ले जाते थे। इस प्रकार वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसका मूल्य बढ़ा दिया करते थे।

लेखक ने आदर्शवादियों और व्यवहारवादियों में से आदर्शवादियों को श्रेष्ठ बताया है। आदर्शवादी स्वयं भी उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होते हैं और अन्य लोगों को भी उन्नति के मार्ग पर अपने साथ ले जाते हैं। समाज को शाश्वत मूल्यों की देन आदर्शवादियों की ही है।

II. झेन की देन –

प्रस्तुत प्रसंग में लेखक कहता है कि जापानी लोगों को मानसिक बीमारियाँ अधिक होती हैं। इसका कारण यह है कि जापान में जीवन की गति बहुत तेज़ है। उनका मस्तिष्क निरंतर क्रियाशील रहता है, जिससे वे तनाव और मानसिक रोगों के शिकार हो जाते हैं। लेखक बताता है कि जापान में चाय पीने की एक विशेष विधि है, जिससे मस्तिष्क का तनाव कम होता है। जापान में इस विधि को चा-नो-यू कहते हैं। लेखक अपने मित्रों के साथ एक ‘टी सेरेमनी’ में जाता है। वहाँ चाय पिलाने वाला उनका स्वागत करता है और अँगीठी सुलगाने से लेकर प्याले में चाय डालने तक की सभी क्रियाएँ अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से करता है।

लेखक कहता है कि इस विधि से चाय पीने की मुख्य विशेषता वहाँ का शांतिपूर्ण वातावरण है। वहाँ तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता। लेखक और उसके मित्रों को वहाँ प्याले में दो-दो घूँट चाय दी गई, जिसे उन्होंने बूँद-बूँद करके लगभग डेढ़ घंटे में पीया। तब लेखक ने अनुभव किया कि वहाँ का वातावरण अत्यंत शांत होने के कारण उनके मस्तिष्क की गति भी धीरे-धीरे धीमी हो गई थी।

लेखक को लगा जैसे वह अनंतकाल में जी रहा है। लेखक को चाय पीते हुए भी ज्ञान हुआ कि मनुष्य व्यर्थ में ही भूतकाल और भविष्यकाल में उलझा रहता है। वास्तविक सत्य तो वर्तमान है, जो हमारे सामने घटित हो रहा है। वर्तमान में जीना ही जीवन का वास्तविक आनंद उठाना है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 16 पतझर में टूटी पत्तियाँ

कठिन शब्दों के अर्थ :

व्यावहारिकता – समय और अवसर देखकर कार्य करने की सुझ, चंद लोग – कुछ लोग, प्रैक्टिकल आइडियॉलिस्ट – व्यावहारिक आदर्शवादी, बखान – वर्णन करना, बयान करना, सूझ-बुझ – काम करने की समझ, स्तर – श्रेणी, के स्तर – के बेराबर, सजग – सचेत, कीमत – मूल्य, शाश्वत – जो सदैव एक सा रहे, जो बदला न जा सके, शुद्ध सोना – 24 कैरेट का (बिना मिलावट का) सोना, गिन्नी का सोना 22 कैरेट (सोने में ताँबा मिला हुआ) का सोना, जिससे गहने बनवाए जाते हैं, अस्सी फ़ीसदी – अस्सी प्रतिशत,

मानसिक – मस्तिष्क संबंधी, दिमागी, मनोरुग्ण – तनाव के कारण मन से अस्वस्थ, रु़्तार – गति, प्रतिस्पदर्धा – होड़, स्पीड – गति, टी-सेंरेमनी – जापान में चाय पीने का विशेष आयोजन, तातामी – चटाई, चा-नो-यू – जापानी भाषा में टी-सेरमनी का नाम, पर्णकुटी – पत्तों से बनी कुटिया, बेढब-सा – बेडौल, चाजीन – जापानी विधि से चाय पिलाने वाला, गरिमापूर्ण – सलीके से, भंगिमा – मुद्रा, जयजयवंती – एक राग का नाम, खदबदाना – उबलना, सिलसिला – क्रम, उलझन – असमंजस की स्थिति, अनंतकाल – वह काल जिसका अंत न हो, सन्नाटा – खामोशी, मिध्या – भ्रम, विस्तृत – विशाल।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

Jharkhand Board JAC Class 9 Sanskrit Solutions रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 9th Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

(अ) लघुकथा

सामान्य-परिचय-लघुकथा दो प्रकार से लिखी जाती है- मञ्जूषा

में दिये गये शब्दों में से उचित शब्दों का चयन करके रिक्त स्थानों की पूर्ति करके कथा-लेखन पूरा करना होता है अथवा दिये गये कथा-चित्रों के अनुसार कथा-लेखन करना होता है। चित्र-वर्णन में कोई भी सामान्य चित्र देकर उसका वर्णन करने को कहा जाता है। यह वर्णन मञ्जूषा में दिये गये शब्दों की सहायता से करना होता है। अत: इस प्रश्न का उत्तर लिखने के लिए छात्रों को निरन्तर अभ्यास करना चाहिए।
यहाँ पर लघुकथा तथा चित्र-वर्णन को कुछ उदाहरणों द्वारा समझाया गया है। इनका अभ्यास करने से इस विषय में निपुणता प्राप्त की जा सकती है।

अभ्यास:

प्रश्न: 1.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकदा राजा विक्रमादित्य: योगिवेश…….. राज्यपर्यटन कर्तुम् अगच्छत्। परिभ्रमन् स: एक नगरं …………..। तत्र नदीतटे एक:…………… आसीत्। तत्र…………….. पुराणकथां शृण्वन्ति स्म। तदानीम् एव एक: वृद्धः स्वपुत्रेण सह नद्याः ………………. प्रवाहितः। स: ……………… त्राहि माम् इति आकारितवान् किन्तु तत्र उपस्थित-……………. सविस्मयं तं वृद्धं पश्यन्ति। तस्य ……………. श्रत्वाऽपि तयोः प्राणरक्षा ………………… न करोति। तदा नप: विक्रमादित्य : नदी…………….”पुत्रेण सह तं वृद्धम् अतिप्रवाहात् …………… तटम् आनीतवान्। स्वस्थो ……………….. वृद्धः विक्रमाय आशिषं दत्वा पुत्रेण सह ……………. गतः। सत्यम् एव उक्तम्- “यस्तु ………………”पुरुषः, सः विद्वान्।”

[संकेतसूची/मञ्जूषा- देवालयः, प्रवाहेणं, धृत्वा, त्राहि माम्, प्राप्तवान्, नगरवासिनः, प्रविश्य, स्वगृहं, आकृष्य, चीत्कार, नगरजनाः, कोऽपि, क्रियावान्, भूत्वा।]

एकदा राजा विक्रमादित्यः योगिवेशं धृत्वा राज्यपर्यटनं कर्तुम् अगच्छत्। परिभ्रमन् स: एक नगरं प्राप्तवान्। तत्र नदीतटे एक: देवालयः आसीत्। तत्र नगरबासिनः पुराणकथां शृण्वन्ति स्म। तदानीम् एव एक वृद्धः स्वपुत्रेण सह नद्या: प्रवाहेण प्रवाहितः सः त्राहि माम् इति आकारितवान् किन्तु, तत्र उपस्थित-नगरजना: सविस्मयं तं वृद्धं पश्यन्ति। तस्य चीत्कार श्रुत्वाऽपि तयोः प्राणरक्षा कोऽपि न करोति। तदा नृपः विक्रमादित्यः नीं प्रविश्य पुत्रेण सह तं वृद्धम् अतिप्रवाहात् आकृष्य तटम् आनीतवान्। स्वस्थो भूत्वा वृद्ध: विक्रमाय आशिष दत्वा पुत्रेण सह स्वगृहं गतः। सत्यम् एव उक्तम्-“यस्तु क्रियावान् पुरुषः, सः विद्वान्।”

हिन्दी-अनुवाद – एक समय राजा विक्रमादित्य योगी का वेश धारण करके राज्य का पर्यटन करने के लिए गए। घूमते हुए वे एक नगर में पहुँचे। वहाँ नदी के किनारे पर एक मन्दिर था। वहाँ नगरवासी पुराण-कथा सुन रहे थे। उसी समय एक वृद्ध अपने पुत्र के साथ नदी के प्रवाह में बह गया। वह “मुझे बचाओ” “मुझे बचाओं” इस प्रकार जोर-जोर से चिल्लाने लगा, परन्तु वहाँ उपस्थित नगर के लोग उसे आश्चर्य से देखते रहे। उसकी चीत्कार सुनकर किसी ने भी उन दोनों के प्राणों की रक्षा नहीं की। तब राजा विक्रमादित्य नदी में प्रवेश करके पुत्र सहित उस वृद्ध को महाप्रवाह से खींचकर किनारे पर लाये। स्वस्थ होकर वृद्ध, राजा विक्रमादित्य को आशीर्वाद देकर, अपने पुत्र के साथ अपने घर चला गया। सत्य ही कहा गया है कि “जो क्रियावान् पुरुष है, वही विद्वान् है।”

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 2.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिये गये शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
……… एक : वृक्षः आसीत्। तत्र स्वपरिश्रमेण निर्मितेषु…………….. खगा: वसन्ति स्म। तस्मिन्। ……….. कश्चित् वानरः अपि निवसति स्म। एकदा महती………………. अभवत्। सः वानर : जलेन अतीब……………… च अभवत्। खगा: ………….’कम्पमानं वानरम् अवदन् – “भो बानर ! त्वं कष्टम् अनुभवसि। तत् कथं ………….. निर्माण न करोषि?” वानरः तेषां खगानाम् एतत् वचनं श्रुत्वा अचिन्तयत्-अहो! एते…………. खगा: मां निन्दन्ति। अत: स: वानर : खगानां ………….. वृक्षात् अध: ………..। खगानां नीडै: सह तेषाम् अण्डानि अपि नष्यनि।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – गृहस्य, गंगातीरे, वृक्षतले, वृष्टिः, शीतेन, गृहस्य, नीडेषु, आई: कम्पितः, अपातयत्, नीडानि, क्षुद्राः]
उत्तरम् :
गंगातीरे एक: वृक्ष: आसीत्। तत्र स्वपरिश्रमेण निर्मितेषु नीडेषु खगा: बसन्ति स्म। तस्मिन् वृक्षतले कश्चित् वानरः अपि निवसति स्म। एकदा महती वृष्टिः अभवत्। स: वानर : जलेन अतीव आर्द्रः कम्पित: च अभवत्। खगा: शीतेन कम्पमान वानरम् अवदन्-“भो वानर! त्वं कष्ट अनुभवसि। तत् कथं गृहस्य निर्माण न करोषि?” वानरः एतत् वचनं श्रुत्वा अचिन्तयत्-“अहो! एते क्षद्राः खगा: मां निन्दन्ति।” अत: स: वानर : खगानां नीडानि वृक्षात् अध: अपातयत्। खगानां नीडैः सह तेषाम् अण्डानि अपि नष्टानि।

हिन्दी-अनुवाद – गंगा नदी के तट पर एक वृक्ष था। वहाँ पर अपने परिश्रम से बनाये हुए घोंसलों में पक्षी रहते थे। उस वृक्ष के नीचे एक बन्दर भी रहता था। एक बार बहुत जोर की वर्षा हुई। वर्षा के जल से वह बन्दर बहुत भीग गया और काँपने लगा। पक्षियों ने ठण्ड से काँपते हुए उस अन्दर से कहा-“हे वानर ! तुम कष्ट का अनुभव करते हो। अपना घर क्यों नहीं बना लेते?” बन्दर ने उन पक्षियों के इस प्रकार के वचन सुनकर सोचा-“अरे! ये क्षुद्र पक्षी मेरी निन्दा करते हैं।” अत: उस बन्दर ने पक्षियों के घोंसले वृक्ष से नीचे गिरा दिये। पक्षियों के घोंसले गिर जाने से उनके अण्डे भी नष्ट हो गये।

प्रश्न: 3.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा में (दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
महात्मागान्धिन: जन्म गुर्जर …………… पोरबन्दरे अभवत्। तस्य …………. कर्मचन्दगांधी माता च पुतलीबाई आसीत्। तौ ……………… आस्ताम्। गांधिन: स्वभाव: अपि ………………. एव अतिसरल: आसीत्। सः भारतवर्षे अन्यदेशे च शिक्षा प्राप्य देशसेवाया: कार्ये ………………. अभवत्। तस्य भगीरथ ………. …….अद्य भारतवर्ष: स्वतन्त्रः अस्ति। अतएव सः …………….. उच्यते। स: सत्यस्य अहिंसाया: च साक्षात् मूर्तिः आसीत्। सः जनान् प्रति सत्यम् अहिंसां च ……………….। स: हरिजनोद्धार-स्त्रीशिक्षा भारतीयकलाकौशलस्योन्नत्यादिभ्यः बहूनि कार्याणि अकरोत्। भारतदेश: ………………. तं ऋणी भविष्यति।
[संकेतसूची/मञ्जूषा-सरलस्वभावौ, राष्ट्रपिता, प्रदेशे, संलग्नः, जनकः, प्रयत्नेन, सदैव, बहूनि, उपदिष्टवान्, बाल्यकालेन]
उत्तरम् :
महात्मागान्धिनः जन्म गुर्जरप्रदेशे पोरबन्दरे अभवत्। तस्य जनकः कर्मचन्दगांधी माता च पुतलीबाई आसीत्। तौ सरलस्वभावी आस्ताम्। गान्धिनः स्वभावः अपि बाल्यकालेन एव अतिसरल: आसीत्। सः भारतवर्षे अन्यदेशे च शिक्षा प्राप्य देशसेवाया: कायें संलग्नः अभवत्। तस्य भगीरथप्रयत्नेन अद्य भारतवर्षः स्वतन्त्रः अस्ति। अतएव सः ‘राष्ट्रपिता’ उच्यते। सः सत्यस्य अहिंसायाः च साक्षात् मूर्ति : आसीत्। सः जनान् प्रति सत्यम् अहिंसा च उपदिष्टवान्। स: हरिजनोद्धार-स्त्रीशिक्षा-भारतीय कलाकौशलस्योन्नत्यादिभ्यः बहूनि कार्याणि अकरोत्। भारतदेश: सदैव तं ऋणी भविष्यति।

हिन्दी-अनुवाद – महात्मागाँधी का जन्म गुजरात प्रदेश में पोरबन्दर में हुआ था। उनके पिता कर्मचन्दगाँधी और माता पुतलीबाई थी। वे दोनों सरल स्वभाव के थे। गाँधी जी का स्वभाव भी बचपन से ही अत्यन्त सरल था। भारतवर्ष एवं विदेश में शिक्षा प्राप्त करके वे देश-सेवा के कार्य में संलग्न हो गये। उनके भगीरथ प्रयास से आज भारतवर्ष स्वतन्त्र है। अतएव उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहा जाता है। वे सत्य और अहिंसा की साक्षात् मूर्ति थे। उन्होंने लोगों को सत्य और अहिंसा का उपदेश दिया। उन्होंने हरिजनों का उद्धार, स्त्रीशिक्षा, भारतीय कला-कौशल की उन्नति आदि के लिए बहुत से कार्य किये। भारत देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।

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प्रश्न: 4.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकदा गरु: द्रोणाचार्य: स्वस्य सर्वांन शिष्यान धनर्विद्या………….। स: वक्ष स्थितं कञ्चित ……………… दर्शयित्वा शिष्यान अवदत्-अस्य नेत्रे लक्ष्य……….। गुरोः आज्ञा ………….. सर्वे शिष्याः लक्ष्यं”…”प्रयत्नम् अकुर्वन्। तदानीम् द्रोणाचार्य: तान्….”यूयं किं पश्यथ? शिष्याः उत्तरं दत्तवन्त:-गुरुदेव! वयं खगं……..। इति उत्तरं श्रुत्वा गुरोः सन्तोष: न अभवत्। तदा सः अर्जुनम् ………. अपृच्छत्- ‘भो अर्जुन! त्व किं पश्यसि? अर्जुनः अवदत्-हे गुरो! अहं खगस्य नेत्रं

पश्यामि। अर्जुनस्य लक्ष्य प्रति …………… दृष्ट्वा गुरु: द्रोणाचार्य : अतिप्रसन्नः भूत्वा तस्मै”……….. दत्तवान् यत् त्वं श्रेष्ठ: ……………. भविष्यसि। अर्जुन: गुरवे अनमत्। अतएव अर्जुनः द्रोणाचार्यस्य प्रियः शिष्यः अभवत्।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – साधयत, प्राप्य, अशिक्षयत्, पश्यामः, धनुर्धरः, खगं, साधितुम, आशिषं, एकाग्रता, आहूय, अपृच्छत्।
उत्तरम् :
एकदा गुरुः द्रोणाचार्यः स्वस्य सर्वान् शिष्यान् धनुर्विद्याम् अशिक्षत। सः वृक्षे स्थितं कञ्चित् खगं दर्शयित्वा शिष्यान् अवदत्-“अस्य नेत्रे लक्ष्य सिध्यत।” गुरोः आज्ञां प्राप्य सर्वे शिष्या: लक्ष्य साधितुं प्रबत्नम् अकुर्वन्। तदानी द्रोणाचार्य: तान अपृच्छत-“यूयं किं पश्यथ?” शिष्या: उत्तरं दत्तवन्त:-“गुरुदेव! वयं खगं पश्यामः।” इति उत्तरं श्रुत्वा गुरुः सन्तुष्ट; न अभवत्। तदा सः अर्जुनम् आहूय अपृच्छत् – “भो अर्जुन ! त्वं किं पश्यसि?” अर्जुनः अवदत्- “हे गुरो! अहं खगस्य नेत्रं पश्यामि।”
अर्जुनस्य लक्ष्य प्रति एकाग्रतां दृष्ट्वा गुरु: द्रोणाचार्य: अतिप्रसन्नः भूत्वा तस्मै आशिषं दत्तवान् यत् त्वं श्रेष्ठः धनुर्धरः भविष्यसि। अर्जुन: गुरवे अनमत्। अतएव अर्जुन: द्रोणाचार्यस्य प्रिय: शिष्यः अभवत्।

हिन्दी-अनुवाद – एक समय गुरु द्रोणाचार्य अपने सभी शिष्यों को धनुर्विद्या सिखा रहे थे। वृक्ष पर स्थित किसी पक्षी को दिखाकर वह बोले-इसकी आँख पर निशाना लगाओ। गुरु की आज्ञा पाकर सभी शिष्यों ने निशाना लगाने का प्रयास किया। उस समय द्रोणाचार्य ने उनसे पूछा-“तुम सब क्या देख रहे हो?” शिष्यों ने उत्तर दिया-“गुरुदेव! हम पक्षी को देख रहे हैं।” इस उत्तर को सुनकर गुरु को सन्तोष नहीं हुआ। तब उन्होंने अर्जुन को बुलाकर पुछा-“हे अर्जुन ! तुम क्या देख रहे हो?” अर्जुन ने कहा-“हे गुरुदेव! मैं पक्षी की आँख देख रहा हूँ।” अर्जुन की लक्ष्य के प्रति एकाग्रता देखकर गुरु द्रोणाचार्य ने अतिप्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया कि तुम श्रेष्ठ धनुर्धर होओगे। अर्जन ने गरु को प्रणाम किया। अतएव अर्जन द्रोणाचार्य का प्रिय शिष्य हो गया।

प्रश्न: 5.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (के शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
कस्मिश्चित् ग्रामे एक:……………….. निवसति स्म। सः नित्यमेव रात्रौ क्षेत्रं गत्वा पशभ्यः शस्य रक्षति स्म। एकदा सः …………….. प्रत्यागच्छति स्म। दिवस: अति ……………. आसीत्। …………….. तु शीत: अतितरः आसीत्। स: मार्गे एक………सर्पम् अपश्यत्। करुणोपेतः कृषक: तं ……………. गृहीत्वा गृहम् आनयत्। सः तम् अग्ने: समीपं …………। शीघ्रमेव असौ ………….. प्राप्य गतिमान् अभवत्। कृषकस्य…….तत्रैव क्रीडति स्म।. सर्प: तं द्रष्टुम् ऐच्छत्। भीतो कृषक: पुत्ररक्षार्थं दण्डेन अहन्।
[संकेतसूची/मञ्जूषा-पुत्रोऽपि, स्थापितवान्, शीत:, उष्णता, कृषकः, शीतपीडितं, सर्प, हस्ते, कृतघ्नः, क्षेत्रात्, प्रात:काले]
उत्तरम् :
कस्मिश्चित् ग्रामे एक: कृषकः निवसति स्म। स: नित्यमेव रात्रौ क्षेत्रं गत्वा पशुभ्यः शस्यं रक्षति स्म। एकदा स: क्षेत्रात् प्रत्यागच्छति स्म। दिवस: अति शीत: आसीत्। प्रात:काले तु शीत: अतितरः आसीत्। सः मार्गे एक शीतपीडितं सर्पम् अपश्यत्। करुणोपेतः कृषक: तं हस्ते गृहीत्वा गृहम् आनयत्। सः तम् अग्ने: समीपं स्थापितवान्। शीघ्रमेव असौ उष्णतां प्राप्य गतिमान् अभवत्। कृषकस्य पुत्रोऽपि तत्रैव क्रीडति स्म। कृतघ्नः सर्प: तं दष्टुम् ऐच्छत्। भीतो कृषक: पुत्ररक्षार्थं दण्डेन सर्पम् अहन्।

हिन्दी-अनुवाद – किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज ही रात में खेत में जाकर पशुओं से फसल की रक्षा करता था। एक समय वह खेत से लौट रहा था। उस दिन अधिक ठण्ड थी। सुबह तो ठण्ड बहुत अधिक थी। उसने मार्ग में ठण्ड से पीड़ित एक सर्प को देखा। करुणायुक्त किसान उसे हाथ में लेकर घर आया। उसने उसको (सर्प को) अग्नि के समीप रख दिया। गर्मी पाकर वह सर्प शीघ्र ही गतिमान हो गया। किसान का पत्र भी वहीं खेल रहा था। कृतघ्न सर्प ने उसे डसना चाहा। डरे हुए किसान ने पुत्र की रक्षा के लिए डण्डे से सर्प को मार दिया।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 6.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः चितपदैः पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा के उचित शब्दों से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
कस्मिंश्चित् ग्रामे एका विडाली……….. सा प्रतिदिनं बहू ………….. अभक्षत्। एवं स्वविनाशं दृष्ट्वा ………… स्वप्राणरक्षार्थम् एकां सभाम् आयोजितवन्तः। सभायां मूषका: इम …………… अकुर्वन् यत् यदि विडाल्या: …………… घण्टिकाबन्धनं भविष्यति तदा तस्याः श्रुत्वां वयं स्वबिलं गामिष्यामः। एवं श्रुत्वा तेषु मूषकेषु एक; वृद्धः मूषक: किञ्चित् विचारयन् तान् ………….. क: तस्याः ग्रीवायां ……………. करिष्यति?” तदानीम् एव विडाली आगता। मूषकाः स्वबिलं ……………..।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – निर्णयम्, मूषकाः, अभवत्, अपृच्छत्, नादं, मूषकान्, घण्टिकाबन्धनं, ग्रीवायां, पलायिताः]
उत्तरम् :
कस्मिंश्चित् ग्रामे एका विडाली अवसत्। सा प्रतिदिनं बहून मूषकान् अभक्षत्। एवं स्वविनाशं दृष्ट्वा मूषका: स्वप्राणरक्षार्थम् एका सभाम् आयोजितवन्तः। सभायां मूषका: इमं निर्णयम् अकुर्वन् यत् यदि विडाल्या: ग्रीवायां घण्टिकाबन्धन भविष्यति तदा तस्याः नादं श्रुत्वा वयं स्वबिलं गमिष्यामः। एवं श्रुत्वा तेषु मूषकेषु एक: वृद्धः मूषक: किञ्चित् विचारयन् तान् अपृच्छत्-“क: तस्या: ग्रीवायां घण्टिकाबन्धनं करिष्यति?” तदानीम् एव विडाली आगता। ता दृष्ट्वैव सर्वे मूषकाः स्वबिलं पलायिताः।

हिन्दी-अनुवाद – किसी गाँव में एक बिल्ली रहती थी। वह हर रोज बहुत से चूहों को खाती थी। इस प्रकार अपना विनाश देखकर चूहों ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए एक सभा का आयोजन किया। सभा में चूहों ने यह निर्णय किया कि यदि बिल्ली के गले में घण्टी बँध जायेगी तो हम सब उसकी आवाज सुनकर अपने बिल में चले जायेंगे। यह सुनकर उन चूहों में से एक बूढ़े चूहे ने कुछ सोचते हुए उन सबसे पूछा-“उस बिल्ली के गले में घण्टी कौन बाँधेगा?” तभी बिल्ली आ गयी। उसे देखते ही सब चूहे अपने-अपने बिल में भाग गये।

प्रश्न: 7.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो
कस्मिंश्चित् बने………….. वसति स्म। एकदा स: ………….. अभवत्। सः ………….. अन्वेष्टुम् वने इतस्तत: अनमत् किन्तु सुदूरं यावत् ……………. कमपि जलाशयं न अपश्यत्। तदानीमेव सः………….. अलभत। तस्मिन् घटे…………… आसीत्। अत: स: जलं……….. असमर्थ: अभवत्। सः एकम् …………. अचिन्तयत्। सः दूरात् पाषाणखण्डानि …………… घटे अक्षिपत्। एवं क्रमेण जलम् उपरि …………. जलं च पीत्वा सः…………”अभवत्। उद्यमेन काक: स्वप्रयोजने सफलः अभवत्। उक्तं च “उद्यमेन हि …………”कार्याणि न मनोरथैः।’
[संकेतसूची/मञ्जूषा- जलाशयम्, एकः काकः, कुत्रापि, स्वल्पं जलं, पिपासया आकुलः, आनीय, एकं घटं, समागच्छत्, – | पातुम्, सिध्यन्ति, सुखी, उपायम्।]
उत्तरम् :
कस्मिंश्चित् वने एकः काकः वसति स्म। एकदा सः पिपासया आकुलः अभवत्। सः जलाशयम् अन्वेष्टुं वने इतस्ततः अभ्रमत् किन्तु सुदूरं यावत् कुत्रापि कमपि जलाशयं न अपश्यत्। तदानीमेव सः एक घटम् अलभत। तस्मिन् घटे स्वल्पं जलम् आसीत्। अतः सः जलं पातुम् असमर्थः अभवत्। सः एकम् उपायम् अचिन्तयत्। सः दूरात् पाषाणखण्डानि आनीय घटे अक्षिपत्। एवं क्रमेण जलम् उपरि समागच्छत् जलं च पीत्वा सः सुखी अभवत्। उद्यमेन काकः स्वप्नयोजने सफल: अभवत्। उक्तं च-‘उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।’

हिन्दी-अनुवाद – किसी वन में एक कौआ रहता था। एक बार वह प्यास से व्याकुल हुआ। वह जलाशय की खोज में वन में इधर-उधर घूमा किन्तु दूर तक कहीं भी कोई भी जलाशय न मिला। उसी समय उसे एक घड़ा मिला। उस घड़े में बहुत कम जल था। अत: वह जल पीने में असमर्थ था। उसने एक उपाय सोचा। उसने दूर से कंकड़ लाकर घड़े में डाल दिये। इस प्रकार जल क्रमशः ऊपर आ गया और जल पीकर वह सुखी हुआ। उद्यम से कौआ अपने प्रयोजन में सफल हुआ। कहा गया है-‘उद्यम करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं, मनोरथों से नहीं।’

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 8.
मञ्जूषायाः सहायतया रिक्तस्थानानि पूरयित्वा कथां उत्तरपुस्तिकायां लिखत (मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से रिक्त स्थानों को पूर्ण कर कथा को उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकस्मिन् वने एका …………..:वसति स्म। एकदा सा भोजनस्य अभावे ……………….. अभवत्। भोजनार्थं सा बने ……………… भ्रमन्ती उद्यानम् आगच्छत्। तत्र एकां ………… अपश्यत्। तस्यां लतायां …………….. द्राक्षाफलानि आसन्। तानि दृष्ट्वा सा ………… अभवत्। सा उत्लुत्य नैकवारं द्राक्षाफलानि…………”प्रयत्नम् अकरोत् किन्तु………….”सा सफला न अभवत्। निराशां प्राप्य लोमशा प्रत्यागच्छत् अवदत् च-“द्राक्षाफलानि अहं न खादामि, तानि तु अम्लानि सन्ति।”
संकेतसूची/मञ्जूषा-इतस्ततः, अतिप्रसन्ना, लोमशा, अनेकानि, क्षुधापीडिता, द्राक्षालताम्, दूरस्थात्, खादितुम्, द्राक्षाफलानि
उत्तरम् :
एकस्मिन् वने एका लोमशा वसति स्म। एकदा सा भोजनस्य अभावे क्षुधापीडिता अभवत्। भोजनार्थ सा बने ती उद्यानम् आगच्छत्। तत्र एका द्राक्षालताम् अपश्यत्। तस्या लतायाम् अनेकानि द्राक्षाफलानि आसन्। तानि दृष्ट्वा सा अतिप्रसन्ना अभवत्। सा उत्प्लुत्य नैकवारं द्राक्षाफलानि खादितुम् प्रयत्नम् अकरोत् किन्तु दूरस्थात् सा सफला न अभवत्। निराशां प्राप्य लोमशा प्रत्यागच्छत् अवदत् च-द्राक्षाफलानि अहं न खादामि तानि तु अम्लानि सन्ति।

हिन्दी-अनुवाद – एक वन में एक लोमड़ी रहती थी। एक समय भोजन के अभाव में वह भूख से पीड़ित हुई। भोजन के लिए वन में इधर-उधर घूमती हुई वह बगीचे में आई। वहाँ उसने एक अंगूर की बेल को देखा। उस बेल पर अनेक अंगूर थे। उन्हें देखकर वह अति प्रसन्न हुई। उसने अनेक बार उछलकर अंगूरों को खाने का प्रयत्न किया किन्तु दूर होने से वह सफल न हुई। निराश होकर लोमड़ी लौट आयो और बोली, “मैं अगर नही खाता हूँ, व तो खट्ट है।”

प्रश्न: 9.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः उचितपदैः पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण करके उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
प्राचीनकाले शिवि: नाम राजा अभवत्। स: ………… आसीत्। सः अनेकान् यज्ञान् कृत्वा ………. प्राप्तवान्। इन्द्रः तस्य कीर्ति श्रुत्वा ……………. आप्तवान्। एकदा स: नृपस्य धर्म…………. अचिन्तयत्। सः अग्निना सह नृपस्य ………… आगच्छत्। इन्द्रः श्येन: अग्निः च ………….. भूत्वा भक्ष्य-भक्षकरूपेण उभौ तत्र आगच्छताम्। कपोत: नृपं …………… येन प्रभो! श्येन: मां खादितुम् इच्छति। त्वं धर्मतत्वज्ञः असि, मां शरणागतं रक्ष। श्येनः अवदत्- अयं कपोत: मम ……………. अस्ति। यदि अहम् इमं न खादिष्यामि तर्हि ……………. मरिष्यामि। ततः नृपः स्वशरीरात् मांसम्……….. श्येनाय अयच्छत्। तुलायां धृतं मांस तु कपोतात् न्यूनम् आसीत्। तदा शिविः स्वस्य सर्वम् एव…………. अर्पयत्। नृपस्य धर्मव्रतं दृष्ट्वा इन्द्रः अग्नि: च प्रसन्नौ भूत्वा……… अगच्छताम्। तस्मात् कालात् अस्मिन् संसारे नृपस्य शिवः धर्मपरायणस्य ……………. श्रेष्ठा ख्यातिः जाता।
[संकेतसूची/मञ्जूषा-परीक्षितुम, धर्मपरायणः, ग्लानिं, समक्षम्, ख्यातिम्, निश्चयमेव, कपोतः, देह, प्रार्थयते, उत्कृत्य, शरणागत-रक्षकस्य, स्वर्गलोक, भोजनम्]
उत्तरम् :
प्राचीनकाले शिविः नाम राजा अभवत्। सः धर्मपरायणः आसीत्। सः अनेकान् यज्ञान् कृत्वा ख्याति प्राप्तवान्। इन्द्रः तस्य कीर्ति श्रुत्वा ग्लानिम् आप्तवान्। एकदा सः नृपस्य धर्म परीक्षितुम् अचिन्तयत्। सः अग्निना सह नृपस्य समक्षम् आगच्छत्। इन्द्रः श्येन: अग्नि: च कपोत: भूत्वा भक्ष्यभक्षकरूपेण उभौ तत्र आगच्छताम्। कपोत: नृपं प्रार्थयते “प्रभो! श्येनः मां खादितुम् इच्छति। त्वं धर्मतत्वज्ञः असि, मां शरणागतं रक्षा” श्येनः अवदत्-“अयं कपोत: मम भोजनम् अस्ति। यदि अहम् इमं न खादिष्यामि तर्हि निश्चयमेव मरिष्यामि।” तत: नृपः स्वशरीरात् मांसम् उत्कृत्य श्येनाय अयच्छत्। तुलाया धृतं मासं तु कपोतात् न्यूनम् आसीत्। तदा शिविः स्वस्य सर्वम् एव देहम् अर्पयत्। नृपस्य धर्मव्रतं दृष्ट्वा इन्द्रः अग्नि: च प्रसन्नौ भूत्वा स्वर्गलोकम् अगच्छताम्। तस्मात् कालात् अस्मिन् संसारे नपस्य शिवे: धर्मपरायणस्य शरणागतरक्षकस्य च रूपेण श्रेष्ठा ख्याति: जाता।

हिन्दी-अनुवाद – प्राचीनकाल में शिवि नाम के राजा हुए। वह धर्मपरायण थे। उन्होंने अनेक यज्ञ करके ख्याति प्राप्त की। इन्द्र उनकी कीर्ति को सुनकर ग्लानि से भर गया। एक बार उसने राजा की परीक्षा करने के लिए सोचा। वह अग्नि के थ राजा के पास आया। इन्द्र बाज और अग्नि कबूतर बनकर भक्ष्य और भक्षक रूप में वे दोनों वहाँ आये। कबूतर ने राजा से विनती की – “प्रभु! बाज मुझे खाना चाहता है। तुम धर्म को जानने वाले हो, मुझ शरण आये हुए की रक्षा करो।” बाज बोला-“यह कबूतर मेरा भोजन है। यदि मैं इसे नहीं खाऊँगा तो मैं निश्चय ही मर जाऊँगा।” तब राजा ने अपने शरीर से मांस काटकर बाज को दिया। मांस तराजू पर रखा तो कबूतर से कम था। तब शिवि ने अपना पूरा शरीर ही अर्पण कर दिया। राजा का धर्मव्रत देखकर अग्नि और इन्द्र प्रसन्न होकर स्वर्गलोक चले गये। उसी समय से इस संसार में राजा शिवि की धर्मपरायण, शरणागतरक्षक के रूप में श्रेष्ठ ख्याति हो गयी।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 10.
अधोलिखितायां लघकथायां विलप्तानि पदानि मञ्जषायाः चित्वा रिक्तस्थानानि पुरयत (निम्नलिखित लघुकथा में विलुप्त शब्दों को मञ्जूषा में दिए गए शब्दों से चुनकर रिक्त स्थानों को भरो-)
कस्यचित् मनुष्यस्य ………………. एक: गजः आसीत्। सः जलं पातुं स्नातुं च …………….. सरित: तटम् अगच्छत्। तत्र – आपणिकाः मार्गे तस्मै किमपि. “यच्छन्ति स्म। मार्गे एकस्य ……………… आपणम् आसीत्। सः वस्त्राणि सीव्यति स्म। ……………… एकदा सौचिकस्य पुत्र: गजस्य करे ………………… अभिनत्। क्रुद्धः सन् गज: सरितः तटम् अगच्छत्। तत्र स्नात्वा जलं च पीत्वा ……………. पङ्किलं जलम् आनयत्। सौचिकस्य आपणे ……………. वस्त्रेषु असिंचत्। तदा सौचिकस्य पुत्रः …………. अनुभूय अतिखिन्नः अभवत्। सः गजं क्षमाम् अयाचत्।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – सौचिकस्य, प्रतिदिनं, खादितुं, गृहे, स्वकरे, आत्मग्लानि, सूचिकाम्, स्यूतेषु]
उत्तरम् :
कस्यचित् मनुष्यस्य गृहे एक: गजः आसीत्। सः जलं पातुं स्नातुं च प्रतिदिनं सरितः तटम् अगच्छत्। तत्र आपणिका: मार्गे तस्मै किमपि खादितुं यच्छन्ति स्म। मार्गे एकस्य सौचिकस्य आपणम् आसीत्। सः वस्त्राणि सीव्यति स्म। एकदा सौचिकस्य पुत्र: गजस्य करे सूचिकाम् अभिनत्। क्रुद्धः सन् गजः सरित: तटम् अगच्छत्। तत्र स्नात्वा जलं च पीत्वा स्वकरे पङ्किलं जलम् आनयत्। सौचिकस्य आपणे स्यूतेषु वस्त्रेषु असिंचत्। तदा सौचिकस्य पुत्रः आत्मग्लानिम् अनुभूय अतिखिन्नः अभवत्। सः गजं क्षमाम् अयाचत्।

हिन्दी-अनुवाद: – किसी मनुष्य के घर में एक हाथी था। वह जल पीने के लिए और नहाने के लिए प्रतिदिन नदी के तट पर जाता था। वहाँ मार्ग में दुकानदार उसे कुछ भी खाने के लिए देत थे। मार्ग में एक दर्जी की दुकान थी। वह कपड़े सिलता था। एक बार दर्जी के पुत्र ने हाथी की सैंड में सुई चुभो दी। क्रोधित होकर हाथी नदी के तट पर गया। वह नहाकर और जल पीकर अपनी सँड़ में कीचड़युक्त जल ले आया और दर्जी की दुकान पर सिले हुए वस्त्रों पर छिड़क दिया। तब दर्जी का पुत्र आत्मग्लानि का अनुभव कर बहुत दु:खी हुआ। उसने हाथी से क्षमायाचना की।

प्रश्न: 11.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण कर उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकदा सप्तर्षय: …………….. अगच्छन्। एक ……………. स्वरं तेषां कर्णेषु अपतत् “तिष्ठन्तु। युष्माकं सर्वाणि …………….. मह्यं यच्छ।” ऋषयः तम् अपृच्छन्-“क: त्वम्?” सः अवदत्-“अहं रत्नाकर: नाम…………..”अस्मि।” ऋषयः पुन: अपृच्छन्-“केषां कृते त्व………………”करोषि? इदं निन्दितं कर्म येषां कृते करोषि तान् पृच्छ कि तेऽपि दस्युकर्मणः …………….. “लप्स्यन्ते? गच्छ वत्स! अस्मासु विश्वासं कुरु। वयं अत्रैव त्वां…………”करिष्याम:” स: दस्यु: सर्वान् परिवारजनान् अपृच्छत्। ते सर्वे उत्तरम् अददुः- “य: घोरतमं पापं……………. स एव अधं फलं प्राप्यति।” रत्नाकर: विस्मितः अभवत्। सः कम्पितपादाभ्यां सप्तर्षीणां ……………. अपतत्। ऋषयः रत्नाकराय ……………… अयच्छन्। त्रयोदशवर्षाणि अनन्तरम् ऋषयः पुनः तत्र आगताः। सर्वत्र रामनाम ……………… भवति स्म। सः मन्त्रध्वनिः वल्मीकात् आगच्छति स्म। ऋषयः वल्मीकात् रत्नाकर’……………… अवदन-पुत्र! त्वं धन्य: असि। त्वम् एतावत् वर्षाणि…………….. निवसन राममन्त्रम् अजपः। अत: त्वं वाल्मीकिः इति नाम्ना अस्मिन् संसारे ……………….. भविष्यति। कालान्तरेण सः एव आदिकविवाल्मीकिनाम्ना प्रसिद्धोऽभवत्। आदिकाव्यस्य ………………… रचयिता अयम् एव आसीत्।।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – दस्युः, सघनवनम्, पापफलं, वस्तूनि, घोरतम, प्रतीक्षा, दस्युकर्म, चरणेषु, राममन्त्रं, करिष्यति,। वल्मीके, प्रसिद्धः, गुञ्जायमानं, रामायणस्य, समुद्धृत्य।]
उत्तरम् :
एकदा सप्तर्षयः सघनवनम् अगच्छन्। एक घोरतमं स्वरं तेषां कर्णेषु अपतत्-“तिष्ठन्तु ! युष्माकं सर्वाणि वस्तूनि मह्यं यच्छ।” ऋषयः तम् अपृच्छन्-“क: त्वम् ?” सः अवदत्-“अहं रत्नाकरः नाम दस्युः अस्मि।” ऋषयः पुनः अपृच्छन्-“केषां कृते त्वं दस्युकर्म करोषि! इदं निन्दितं कर्म येषां कृते करोषि तान् प्रच्छ कि तेऽपि दस्युकर्मण: पापफल लप्सयन्ते ? गच्छ वत्स! अस्मासु विश्वासं कुरु। वर्य अत्रैव त्वां प्रतीक्षा करिष्यामः।” सः दस्युः सर्वान् परिवारजनान् अपृच्छत्। ते सर्वे उत्तरम् अददात् “य: घोरतमं पापं करिष्यति।

सः एव अधं फलं प्राप्स्यति।” रत्नाकरः विस्मितः अभवत्। स: कम्पितपादाभ्यां सप्तर्षीणां चरणेषु अपतत्। ऋषयः रत्नाकराय राममन्त्रम् अयच्छन्। त्रयोदशवर्षाणि अनन्तरम् ऋषयः पुनः तत्र आगताः। सर्वत्र रामनाम गुञ्जायमानं भवति स्म। स मन्त्रध्वनि: वल्मीकात् आगच्छति स्म। ऋषयः वल्मीकात् रत्नाकरं समुद्धृत्य अवदन्- “पुत्र त्वं धन्यः असि। त्वम् एतावत् वर्षाणि वल्मीके निवसन् राममन्त्रम् अजपः। अत: त्वं वाल्मीकिः इति नाम्ना अस्मिन् संसारे प्रसिद्धः भविष्यति।” कालान्तरेण स: एव आदिकविवाल्मीकिनाम्ना प्रसिद्धोऽभवत् आदिकाव्यस्य रामायणस्य रचयिता अयम् एव आसीत्।

हिन्दी-अनुवाद – एक बार सप्त ऋषि घने जंगल में जा रहे थे। एक भयंकर शब्द उनके कानों में पड़ा-“रुको! अपनी सभी वस्तुएँ मुझे दे दो।” ऋषियों ने उससे पूछा-“तुम कौन हो?” वह बोला-“मैं रत्नाकर नाम का डाकू हूँ।” ऋषियों ने पुनः पूछा-“तुम किनके लिए डाकूका काम करते हो? यह निन्दित काम जिनके लिए करते हो उन्हें पूछो कि क्या वे भी डाकू के कार्य करने से प्राप्त होने वाले पापरूपी फल को भोगेंगे। जाओ पुत्र! हम पर विश्वास करो। हम सब यहीं तुम्हारी प्रतीक्षा करेंगे।” उस डाकू ने सभी परिवारीजनों से पूछा।

उन सभी ने उत्तर दिया-“जो घोर पाप करेगा, वही नीच फल भोगेगा।” रत्नाकर विस्मित हो गया। वह कौपते पैरों से ऋषियों के चरणों में गिर पड़ा। ऋषियों ने रत्नाकर को राममन्त्र दिया। तेरह वर्ष बाद ऋषि पुन: वहाँ आये। सर्वत्र रामनाम गुञ्जायमान हो रहा था। वह मन्त्रध्वनि मिट्टी के ढेर से आ रही थी। ऋषियों ने मिट्टी के ढेर से रत्नाकर को निकालकर कहा-“पुत्र! तुम धन्य हो! तुमने इतने वर्ष मिट्टी के ढेर में रहकर राममन्त्र का जाप किया। अत: तुम इस संसार में वाल्मीकि के नाम से प्रसिद्ध होओगे।” कुछ समय बाद वही आदिकवि वाल्मीकि के नाम से प्रसिद्ध हुए। आदिकाव्य रामायण के रचयिता ये ही थे।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 12.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः उचितपदैः पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) के उचित शब्दों से पूर्ण कर उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकस्मिन् वनप्रदेशे एक: सिंहः …………… स्म। एकदा स: वृक्षस्य …………….. स्वपिति स्म। तस्य वृक्षस्य अधः एक: ……………….. अपि बिलं कृत्वा वसति स्म। तौ अतिस्नेहेन तत्र निवसतः स्म। एकदा मूषक : ………………… निष्कृत्य सुप्तस्य सिंहस्य पृष्ठमारुह्य तस्य केशान् अकृन्तत्। जाग्रतः सिहं मूषकं हस्ते …………. अवदत्। “को असि? मम् केशान् कृन्तसि अहं त्वां हनिष्यामि।” मूषकोऽपि भीत: सन् अकथयत् – “विपत्काले अहं तव साहाय्यं करिष्यामि।” एकदा सिंहः …………… जातः। सः तदा आत्मानम् असहायं मत्वा अति दुःखी …………….। अस्मिन् विपत्काले स: ……………… अस्मरत्। तस्य गर्जनं ………………. मूषक: स्वबिलात् बहिः ………………… सिंहस्य समीपम् आगच्छत्। सः पाशं स्वतीक्ष्णदन्तः छित्वा तं मित्रं …………….. अकरोत। तदा सिंह: मषक: च प्रसन्नौ अभवताम।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – पाशमुक्तम्, वसति, निर्गत्य, छयायां, बिलात्, श्रुत्वा, पाशबद्धः, अभवत्, गृहीत्वा, स्वमित्रं, मूषक:]
उत्तरम् :
एकस्मिन् वनप्रदेशे एक: सिंहः वसति स्म। एकदा स: वृक्षस्य छायायां स्वपिति स्म। तस्य वृक्षस्य अध: एक: मूषकः अपि बिलं कृत्वा वसति स्म। तौ अतिस्नेहेन तत्र निवसतः स्म। एकदा मूषक: बिलात् निष्कृत्य सुप्तस्य सिंहस्य पृष्ठमारुह्य तस्य केशान् अकृन्तत्। जाग्रतः सिंहः मूषकं हस्ते गृहीत्वा अवदत्-“को असि? मम् केशान् कृन्तसि। अहं त्वां हनिष्यामि।” मुषको अपि भीत: सन् अकथयत-“विपत्काले अहं तव साहाय्यं करिष्यामि।” एकदा सिंहः पाशब सः तदा आत्मानम् असहायं मत्वा अति दु:खी अभवत्। अस्मिन् विपत्काले स: स्वमित्रम् अस्मरत्। तस्य गर्जनं श्र त्वा मूषक: स्वबिलात् बहिः निर्गत्य सिंहस्य समीपम् आगच्छत्। स: पाशं स्वतीक्ष्णदन्तैः छित्त्वा तं मित्रं पाशमुक्तम् अकरोत्। तदा सिंह: मृषक: च प्रसन्नौ अभवताम्।

हिन्दी-अनुवाद – एक वन प्रदेश में एक शेर रहता था। एक समय वह वक्ष की छाया में सो रहा था। उस वृक्ष के नीचे एक चूहा भी बिल बनाकर रहता था। वे दोनों वहाँ बहुत प्रेम से रहते थे। एक समय चूहा अपने बिल से निकलकर सोते हुए शेर की पीठ पर चढ़कर उसके बाल काटने लगा। जागकर शेर ने चूहे को हाथ में पकड़कर कहा-“कौन हो? मेरे बालों को काटते हो? मैं तुम्हें मार दूंगा।” चूहा भी डरता हुआ बोला-“विपत्ति में मैं तुम्हारी सहायता करूँगा।” एक बार शेर जाल में फंस गया। उस समय वह स्वयं को असहाय मानकर बहुत दु:खी हुआ। इस विपत्ति काल में उसने अपने मित्र को याद किया। उसकी गर्जना सुनकर चूहा अपने बिल से बाहर निकलकर शेर के पास आया। उसने जाल को अपने तेज दाँतों से काटकर मित्र को जाल से मुक्त कर दिया। तब शेर और चूहा दोनों प्रसन्न हुए।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न 13.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण कर उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकस्मिन् …………. एकः काकः निवसति स्म। तस्य वृक्षस्य समीपे एका लोमशा अपि निवसति स्म। एकदा सः काक: एका ………….. आनयत्। लोमशा तं दृष्ट्वा केनापि ……………. रोटिकां गृहीतुम् ऐच्छत्। सा वृक्षस्य अधः ………….. काकं च अवदत्-‘तात! मया श्रुतं त्वम् अति मधुरं गायसि।” काक : आत्मनः ……………….. श्रुत्वा प्रसन्न: अभवत्। सगर्वोऽयं काकः यावत् गायति तावत् विवृतात् ………………. रोटिका भूमौ अपतत्। लोमशा तां नीत्वा ततः अगच्छत्। मूर्खः काकः ……………… पश्चात्तापम् अकरोत्।
[संकेतसूची/मञ्जूषा- प्रशंसां, रोटिका, मुखात्, वृक्षे, स्वमूर्खतायाः, अतिष्ठत्, उपायेन]
उत्तरम् :
एकस्मिन् वक्षे एकः काकः निवसति स्म। तस्य वृक्षस्य समीपे एका लोमशा अपि निवसति स्म। एकदा सः काक: एका रोटिकाम् आनयत्। लोमशा तं दृष्ट्वा केनापि उपायेन रोटिकां गृहीतुम् ऐच्छत्। सा वृक्षस्य अधः अतिष्ठत् कार्क च अवदत्-‘तात! मया श्रुतं त्वम् अति मधुरं गायसि।’ काकः आत्मनः प्रशंसां श्रुत्वा प्रसन्नः अभवत्। सगर्वोऽयं काकः विवृतात् मुखात् रोटिका भूमौ अपतत्। लोमशा तां नीत्वा ततः अगच्छत्। मूर्खकाकः स्वमूर्खताया: पश्चात्तापम् अकरोत्।

हिन्दी-अनुवाद – एक वृक्ष पर एक कौआ रहता था। उस वृक्ष के समीप एक लोमड़ी भी रहती थी। एक दिन वह कौआ एक रोटी लाया। लोमड़ी ने उसे देखकर किसी भी उपाय से रोटी को लेना चाहा। वह वृक्ष के नीचे बैठ गई और कौए से बोली-‘तात! मैंने सुना है तुम बहुत मीठा गाते हो।’ कौआ अपनी प्रशंसा सुनकर प्रसन्न हो गया। गर्व के साथ कौए ने गाने के लिए जैसे ही मुख खोला, वैसे ही रोटी जमीन पर गिर गई। लोमड़ी उसे लेकर वहाँ से चली गई। मुर्ख कौआ ने अपनी मूर्खता पर पश्चात्ताप किया।

प्रश्न 14.
अधोलिखितां कथां मञ्जूषायाः सहायतया पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा (में दिए गए शब्दों) की सहायता से पूर्ण कर उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
उत्तरप्रदेशे अयोध्या नगरी अस्ति। तत्र प्राचीनकाले …………… नृपः राज्यम् अकरोत्। तस्य चत्वारः ……………. आसन् रामः, लक्ष्मणः, भरत: शत्रुघ्नः च। ऋषिः …………… रामलक्ष्मणौ स्वस्य आश्रमम् अनयत्। तौ ………….. विश्वामित्रात् अशिक्षेतां, ततः मिथिलायां चतुर्णाम् अपि राजपुत्राणां विवाहः अभवत्। मिथिलानृपः ………….. रामाय अयच्छत्। तस्याः नाम सीता आसीत्। पितुः आज्ञया राज्यं ……………. राम: वनम् अगच्छत्। तेन सह सीता लक्ष्मणश्च अगच्छन्ताम्। ऋषिभिः सह ते वने …………..। तत्र रावण: सीतां ………… अहरत्। सीताम् अन्वेष्टुम् रामलक्ष्मणौ वने अभ्रमताम्। तौ बालिनः नगरी ……………… अगच्छताम्। वानरराजः सुग्रीव : तयोः मित्रम् अभवत्। ………… हनुमान् सागरपारं गत्वा लंकायां ……………. अपश्यत्। वानरा: सागरे …………….. अकुर्वन्। राम-रावण-युद्धः अभवत्। युद्धे रावण: हतः।
[संकेतसूची/मञ्जूषा – शास्त्रविद्या, स्वज्येष्ठां सुतां, दशरथः, त्यक्त्वा, पुत्राः, अवसन्, विश्वामित्रः, पवनपुत्रः, सेतुनिर्माण, | सीतां, किष्किन्धाम्, कपटेन]
उत्तरम् :
उत्तरप्रदेशे अयोध्या नगरी अस्ति। तत्र प्राचीनकाले दशरथः नृपः राज्यम् अकरोत्। तस्य चत्वारः पुत्राः आसन्-राम:, लक्ष्मणः, भरतः शत्रुघ्नः च। ऋषिः विश्वामित्र: रामलक्ष्मणौ स्वस्य आश्रमम् अनयत्। तौ शास्त्रविद्यां विश्वामित्रात् अशिक्षेताम् ततः मिथिलायां चतुर्णाम् अपि राजपुत्राणां विवाहः अभवत्। मिथिलानृपः स्वज्येष्ठां सुतां रामाय अयच्छत्। तस्याः नाम सीता आसीत्।

पितुः आज्ञया राज्यं त्यक्त्वा राम: वनम् अगच्छत्। तेन सह सीता लक्ष्मणश्च अगच्छताम्। ऋषिभिः सह ते वने अवसन्। तत्र रावणः सीतां कपटेन अहरत्। सीताम् अन्वेष्टुम् रामलक्ष्मणौ वने अभ्रमताम्। तौ बालिन: नगरौं किष्किन्धाम् अगच्छताम्। वानरराजः सुग्रीवः तयोः मित्रम् अभवत्। पवनपुत्रः हनुमान् सागरपारं गत्वा लंकायां सीताम् अपश्यत्। वानराः सागरे सेतुनिर्माणम् अकुर्वन्। राम-रावण-युद्धः अभवत्। युद्धे रावणः हतः।

हिन्दी-अनुवाद – उत्तरप्रदेश में अयोध्या नगरी है। प्राचीनकाल में वहाँ राजा दशरथ राज्य करते थे। उनके चार पुत्र थे-राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अपने आश्रम ले गये। उन दोनों ने शास्त्रविद्या विश्वामित्र से सीखी। तब जनकपुरी में चारों राजकुमारों का विवाह हुआ। राजा जनक ने अपनी बड़ी पुत्री को श्री राम को दिया। उसका नाम सीता था।

पिता की आज्ञा से राज्य को त्यागकर राम वन में गये। उनके साथ सीता और लक्ष्मण गये। ऋषियों के साथ वे वन में रहते थे। वहाँ रावण ने कपट से सीता का हरण कर लिया। सीता को खोजने के लिए राम-लक्ष्मण वन-वन घूमे। वे दोनों बालि की नगरी किष्किन्धा गये। वानरराज सुग्रीव उनके मित्र हुए। पवनपुत्र हनुमान् ने सागर पार जाकर लंका में सीता को देखा। वानरों ने समुद्र पर सेतु-निर्माण किया। राम-रावण का युद्ध हुआ। युद्ध में रावण मारा गया।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 15.
अधोलिखितां कथा मञ्जूषायाः उचितपदैः पूरयित्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत (निम्नलिखित कथा को मञ्जूषा के उचित शब्दों से पूर्ण कर उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
एकस्मिन् ………… वने एक: वटवृक्षः आसीत्। तस्मिन् वृक्षे एकः ………….. आसीत्। तस्मिन् वायस-दम्पतिः ………. निवसति स्म। तस्य वृक्षस्य अधस्तात् एव एकस्मिन् बिले कृष्णसर्पः आसीत्। सः तयोः ………… अपत्यानि अखादत्। एकदा काकः शृगालेन महाराज्ञा: रत्नजटितं स्वर्णहारम् अपहत्य आनयत्। मित्रेण शृगालेन परामृष्टः काकः तं ……….. सर्पस्य बिले अक्षिपत्। राजपुरुषाः हारम् ………… इतस्तत: भ्रमन्तः वृक्षस्य समीपम् आगच्छन्। सर्पस्य बिले हारं दृष्ट्वा तं चौर ……….. बिलं च खनित्वा ते सर्पम् …………..। एवं मित्रस्य सत्यपरामर्शेन सदुपायेन च वायसदम्पती स्वशावकान् अरक्षताम्।
[संकेतसूची/मञ्जूषा-नवजातानि, कोटरः, स्वर्णहारं, निर्जने, अन्वेष्टुम्, सुखेन, परामृष्टः, अनन्, मत्वा।]
उत्तरम् :
एकस्मिन् निर्जने वने एक: वटवृक्षः आसीत्। तस्मिन् वृक्षे एकः कोटरः आसीत्। तस्मिन् वायस-दम्पती: सुखेन न्यबसताम्। तस्य वृक्षस्य अधस्तात् एव एकस्मिन् बिले कृष्णसर्पः आसीत्। सः तयोः नवजातानि अपत्यानि अखादत्। एकदा काकः शृगालेन परामृष्टः महाराज्ञा: रत्नजटितं स्वर्णहारम् अपहत्य आनयत्। मित्रेण शृगालेन परामृष्टः काकः तं स्वर्णहरं सर्पस्य बिले अक्षिपत्। राजपुरुषाः हारम् अन्वेष्टुम् इतस्ततः भ्रमन्तः वृक्षस्य समीपम् आगच्छन्। सर्पस्य बिले हारं दृष्ट्वा तं चौरं मत्वा बिलं च खनित्वा ते सर्पम् अनन्। एवं मित्रस्य सत्यपरामर्शेन सदुपायेन च वायसदम्पती स्वशावकान् अरक्षताम्।

हिन्दी-अनुवाद – एक निर्जन वन में एक बरगद का पेड़ था। उस वृक्ष पर एक कोटर था। उसमें काक-दम्पति सुख से रहते थे। उस वृक्ष के नीचे ही एक बिल में काला सर्प था। वह काक दम्पति के नवजात बच्चों को खा जाता था। एक दिन कौआ गीदड़ के परामर्श से महारानी का रत्नजटित सोने का हार चुराकर लाया। मित्र गीदड़ के परामर्श से कौए ने उस हार को सर्प के बिल पर फेंक दिया। राजा के आदमी उस हार को खोजने के लिए इधर-उधर घूमते हुए वृक्ष के समीप आये। सर्प के बिल पर हार देखकर उसको चोर समझकर और बिल को खोदकर उन्होंने सर्प को मार दिया। इस प्रकार मित्र की सच्ची सलाह से और सही उपाय से काक-दम्पति ने अपने शावकों की रक्षा की।

(ब) चित्रवर्णनम्

चित्र वर्णन में कोई भी सामान्य चित्र देकर उसका वर्णन करने के लिए कहा जाता है। यह वर्णन मञ्जूषा शब्द-सूची में दिये गये शब्दों की सहायता से करना होता है। इस तरह के प्रश्नों का उत्तर लिखते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. वर्णन में भूमिका अथवा उपसंहार नहीं देना चाहिए।
  2. चित्र में दिये गये विषय पर ही वर्णन करना चाहिए।
  3. विषय का आरम्भ शीघ्र करना चाहिए।
  4. वाक्यों में परस्पर सम्बन्ध होना चाहिए।
  5. भाषा-शैली सरल, रोचक तथा प्रवाहमयी होनी चाहिए।

आपके अभ्यासार्थ हमने ‘चित्रवर्णनम्’ से सम्बन्धित कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर (हिन्दी अनुवाद सहित) यहाँ दिये हैं –

प्रश्न: 1.
इदं चित्रं पश्य। चित्रम् आधृत्य शब्द-सूच्या:/मञ्जूषायाः सहायतया पञ्चवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(इस चित्र को देखो। चित्र को आधार बनाकर शब्द-सूची/मञ्जूषा की सहायता से पाँच वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 1
[शब्दसूची/मञ्जूषा-अयम्, विद्यालयः, सुन्दरः, समीपे, वृक्षाः, कक्षाः, गच्छामि, मित्रेण सह, प्रतिदिनं]
उत्तरम् :
1. अयं मम विद्यालयः अस्ति। (यह मेरा विद्यालय है।)
2. मम विद्यालयः सुन्दरः अस्ति। (मेरा विद्यालय सुन्दर है।)
3. विद्यालयः मम गृहस्य समीपे अस्ति। (विद्यालय मेरे घर के पास है।)
4. विद्यालयं परितः बहवः वृक्षाः सन्ति। (विद्यालय के चारों और बहुत से पेड़ हैं।)
5. विद्यालये पञ्चविंशतिः (25) कक्षा: सन्ति, अहं प्रतिदिनं मित्रेण सह विद्यालयं गच्छामि।
(विद्यालय में 25 कक्षायें हैं, मैं प्रतिदिन मित्र के साथ विद्यालय जाता हूँ।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 2.
चित्रम् आधृत्य अधः प्रदत्तशब्दसूच्या:/मञ्जूषायाः सहायतया उत्तरपुस्तिकायां पञ्चवाक्यानि लिखत –
(चित्र के आधार पर नीचे दी गई मञ्जुषा/शब्द-सूची की सहायता से उत्तरपुस्तिका में पाँच वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 2
[शब्दसूची/मञ्जूषा – इद, गृहम्, सर्वतः, पुष्पाणि, वृक्षेषु, मन्दिरं, प्रात:काले, पूजा, वयं कुर्मः]
उत्तरम् :
1. इदं मम गृहम् अस्ति। (यह मेरा घर है।)
2. गृहं सर्वतः सुन्दरवृक्षाः सन्ति। (घर के चारों ओर सुन्दर पेड़ है।)
3. वृक्षेषु बहूनि पुष्पाणि भवन्ति। (पेड़ों पर बहुत से फूल हैं।)
4. मम गृहे मन्दिरम् अस्ति। ( मेरे घर में मन्दिर है।)
5. वयं प्रात:काले तत्र पूजां कुर्मः। (हम सुबह वहाँ पूजा करते हैं।)

प्रश्न: 3.
अधः प्रदत्तं चित्रम् आधृत्व मञ्जूषायां शब्दसूच्यां प्रदत्तशब्दानां सहायतया पञ्चसंस्कृतवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र के आधार पर मंजूषा/शब्दसूची में दिये गये शब्दों की सहायता से संस्कृत के पाँच वाक्य उत्तर पुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 3
[शब्दसूची/मञ्जूषा- कृषकः, क्षेत्रेषु, वृषभाभ्यां, हलं, कर्षति, बीजेभ्यः, कर्तति, अन्नदाता, उद्भवन्ति, शस्यानि]
उत्तरम् :
1. कृषकः क्षेत्रेषु वृषभाभ्यां हलं कर्षति। (किसान खेतों में दो बैलों से हल चलाता है।)
2. स: क्षेत्रेषु बीजानि वपति। (वह खेतों में बीजों को बोता है।)
3. बीजेभ्यः शस्यानि उद्भवन्ति। (बीजों से फसल उत्पन्न होती है।)
4. यदा शस्यानि पक्वन्ति तदा कृषक: तानि कर्तति। (जब फसल पकती है तब किसान उन्हें काटता
5. कृषक: ‘अन्नदाता’ कथ्यते। (किसान ‘अन्नदाता’ कहा जाता है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 4.
चित्रम् आधृत्य अध: प्रदत्त शब्द-सूच्या/मञ्जूषायाः सहायतया उत्तरपुस्तिकायां पञ्चवाक्यानि लिखत –
(चित्र के आधार पर नीचे दी गई शब्द-सूची/मञ्जूषा की सहायता से उत्तरपुस्तिका में पाँच वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 4
[शब्दसूची/मञ्जूषा-वर्षाकाले, वृक्षः, भवति, शुद्ध, अस्माकं , वृक्षारोपणं, पर्यावरणं, मित्राणि, कर्तव्यम्, रक्षणम्।]
उत्तरम् :
1. वृक्षाः अस्माकं मित्राणि सन्ति। (पेड़ हमारे मित्र है।)
2. वृक्षः पर्यावरणं शुद्धं भवति। (पेड़ों से पर्यावरण शुद्ध होता है।)
3. वृक्षैः भूमेः रक्षणं भवति। (पेड़ों से भूमि की रक्षा होती है।)
4. वृक्षारोपणम् अस्माक कर्तव्यम्। (पेड़ उगाना हमारा कर्तव्य है।)
5. प्रतिवर्ष वर्षाकाले जनाः वृक्षारोपणं कुर्वन्ति। (प्रत्येक वर्ष वर्षा के समय में लोग पेड़ उगाते हैं।)

प्रश्नः 5.
अधः प्रदत्तं चित्रं दृष्ट्वा उत्तरपुस्तिकायां मञ्जूषायाः/शब्द-सूच्या: सहायतया पञ्चवाक्यानि लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र को देखकर उत्तरपुस्तिका में मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से पाँच वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 5
[शब्दसूची/मञ्जूषा-क्रीडाक्षेत्रम्, बालकाः, कन्दुकेन, अत्र, प्रतिदिनम्, कोड़ार्थम्, आगच्छन्ति, त्रयः, पश्यामः, अतिप्रसन्नाः] उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे वयम् एकं क्रीडाक्षेत्रं पश्यामः। (इस चित्र में हम एक खेल का मैदान देखते हैं।)
2. अन त्रयः बालका: कन्दुकेन क्रीडन्ति। (यहाँ तीन लड़के गेंद से खेल रहे हैं।)
3. क्रीडाक्षेत्रे प्रतिदिनं बालकाः क्रीडार्थम् आगच्छन्ति। (खेल के मैदान में प्रतिदिन लड़के खेलने के लिए आते हैं।)
4. बालकाः अत्र क्रीडित्वा अतिप्रसन्नाः भवन्ति। (लड़के यहाँ खेलकर अत्यधिक खुश होते हैं।)
5. क्रीडाक्षेत्रं परितः अनेकाः वृक्षाः सन्ति। (खेल के मैदान के चारों ओर बहुत से पेड़ हैं।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 6.
इदं चित्रं पश्यतु। चित्रम् आधृत्य मञ्जूषायाः/शब्द-सूच्या: सहायतया पञ्चवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत-(इस चित्र को देखो। चित्र के आधार पर दी गई मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से पाँच वाक्य उत्तरपुस्तिका में – लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 6
[मञ्जूषा/शब्दसूची-जनाः, परस्परं, फाल्गुनमासस्य, गायन्ति, नृत्यन्ति च, गलेन मिलन्ति, रक्तपीतादिवर्णैः, मिष्ठान्नं, द्वेष, विस्मृत्य]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे होलिकोत्सवः आयोज्यते। (इस चित्र में होली का त्योहार मनाया जा रहा है।)
2. इदं महापर्व फाल्गुनमासस्य पौर्णमास्यां भवति। (यह महान् त्योहार फाल्गन के महीने की पूर्णिमा में होता
3. अस्मिन् दिने जनाः रक्तपीतादिवर्णैः क्रीडन्ति, गायन्ति, नृत्यन्ति च। (इस दिन लोग लाल-पीले आदि रंगों से खेलते हैं, गाते हैं और नाचते हैं।)
4. अस्मिन् दिने गृहे-गृहे मिष्ठान्नं पच्यते। (इस दिन घर-घर में मिठाई बनती है।)
5. जनाः परस्परं द्वेषं विस्मृत्य गलेन मिलन्ति। (लोग आपस में ईर्ष्या को भुलाकर गले से मिलते हैं।)

प्रश्न: 7.
अधः दत्तं चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषा/शब्दसूच्याः सहायतया पञ्चवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र को देखकर, दी गयी मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से पाँच वाक्य उत्तर पुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 7
[मञ्जूषा/शब्दसूची-कार्यालयं, मोहनः, ग्रामात्, आगच्छति, यतः, पादपाः, ग्रामे, बसयानं, परिवारजनैः, रेणुपूर्णः, वातावरणम्]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे मोहनः कार्यालयं गच्छति। (इस चित्र में मोहन कार्यालय जा रहा है।)
2. स: ग्रामात् आगच्छति, तत्र सः परिवारजनैः सह निवसति। (वह गाँव से आता है, वहाँ बह
परिवार के लोगों के साथ रहता है।)
3. अस्मिन् ग्रामे बसयानं न चलति यतः अयं मार्ग: रेणुपूर्णः अस्ति। (इस गाँव में बस-गाड़ी नहीं चलती है क्योंकि यह रास्ता धूल से भरा हुआ है।)
4. मार्गे बहवः पादपाः सन्ति। (रास्ता में बहुत से पेड़ हैं।)
5. ग्रामस्य वातावरणं शुद्धं भवति। (गाँव का वातावरण शुद्ध होता है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 8.
अधः प्रदत्त चित्रस्य वर्णनं मञ्जूषायां/शब्दसूच्यां लिखितपदानां प्रयोगं कृत्वा पञ्चवाक्येषु संस्कृतेन कुरु –
(नीचे दिये गये चित्र का वर्णन मञ्जूषा/शब्दसूची में लिखित पदों का प्रयोग करके पाँच वाक्यों में संस्कृत में करो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 8
[मञ्जूषा/शब्दसूची-द्वे बालिके, नृत्यशाला, नृत्यतः, पश्यामः, ते, प्रतिदिनम्, आगच्छतः, गृहात्, कुरुतः, शिक्षिका]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे वयं नृत्यशाला पश्यामः। (इस चित्र में हम नाच-घर को देख रहे हैं।)
2. अत्र द्वे बालिके नृत्यतः। (यहाँ दो लड़कियाँ नाच रही हैं।)
3. शिक्षिका ते नृत्यं शिक्षयति। (अध्यापिका उन दोनों को नाच सिखा रही है।)
4. ते प्रतिदिनं गृहात् आगच्छतः नृत्यस्य अभ्यासं च कुरुतः। (वे दोनों प्रतिदिन घर से आती हैं और नृत्य का अभ्यास करती हैं।)
5. ते नृत्यं कुरुतः। (वे दोनों नाच रही हैं।)

प्रश्न: 9.
चित्रम् आधृत्य अधः प्रदत्त शब्दसूच्याः/मञ्जूषाः सहायतया उत्तरपुस्तिकायां पञ्चवाक्यानि लिखत –
(चित्र के आधार पर नीचे दी गई मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से उत्तरपुस्तिका में पाँच वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 9
[मञ्जूषा/शब्दसूची-सरस्वती, हस्ते, धारयति, कमलासने, सूर्योदयसमये, अस्माकं, सरोवरे, राष्ट्रियपुष्पं, विष्णुः, विकसति]
उत्तरम् :
1. अस्मिन चित्रे कमलपष्यम् अस्ति। (इस चित्र में कमल का फूल है।)
2. कमलम् अस्माकं राष्ट्रियपुष्पम् अस्ति। (कमल हमारा राष्ट्रीय फूल है।)
3. सूर्योदयसमये सरोवरे कमलं विकसति। (सूर्योदय के समय में तालाब में कमल खिलता है।)
4. माता सरस्वती कमलासने तिष्ठति। (माँ सरस्वती कमल के आसन पर विराजती है।)
5. भगवान् विष्णुः कमल हस्ते धारयति। (भगवान् विष्णु कमल को हाथ में धारण करते हैं।)

प्रश्न: 10.
अध: प्रदत्तं चित्रम् आधृत्य मञ्जूषायां/शब्दसूच्यां प्रदत्त शब्दानां सहायतया पञ्चसंस्कृतवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र के आधार पर मञ्जूषा/शब्दसूची में दिये गये शब्दों की सहायता से पाँच संस्कृत वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 10
[मञ्जूषा/शब्दसूची-कुम्भकारः, घट, शीतलं, मृत्तिका, नामात्, विक्रेतुम्, नगरम्, गच्छति, आनयति, वनात् सुन्न।]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे एक: कुम्भकारः अस्ति। (इस चित्र में एक कुम्हार है।)
2. सः घटम् अन्यानि पात्राणि च रचयति। (वह घड़ा और बर्तनों को बना रहा है।)
3. घटे जलं शीतलं भवति। (घड़े में पानी ठंडा रहता है।)
4. कुम्भकार : वनात् मृत्तिकाम् आनयति। (कुम्हार जंगल से मिट्टी लाता है।)
5. सः घटं विक्रेतुं ग्रामात् नगरं गच्छति। (वह घड़ा बेचने को गाँव से शहर जाता है।)

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प्रश्न: 11.
अधोदतं चित्रं पश्यत। मञ्जूषा/शब्द-सूच्या सहायतया चित्रम् आधृत्य संस्कृतेन पञ्चवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र को देखो। मञ्जूषा/शब्दसूची की सहायता से चित्र के आधार पर संस्कृत के पाँच वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 11
[मञ्जूषा/शब्दसूची-जलाशयः, तरन्ति, मनोरमम्, दृश्य, वर्तिकाः रमणीयः, बहवः वृक्षा पर्वतः, शीतलवायुः]
उत्तरम् :
1. एतस्मिन् चित्रे एक: जलाशयः रमणीय: पर्वतः च स्तः। (इस चित्र में एक तालाब और सुन्दर पर्वत है।)
2. जलाशये वर्तिकाः तरन्ति। (तालाब में बतखें तैर रही हैं।)
3. जलाशयस्य तटे बहवः वृक्षाः सन्ति। (तालाब के किनारे पर बहुत से पेड़ हैं।)
4. अत्र शीतलवायुः प्रवहति। (यहाँ ठंडी हवा चल रही है।)
5. जलाशयस्य दृश्यं मनोरमम् अस्ति। (तालाब का दृश्य मन को हरने वाला है।)

प्रश्न: 12.
अधः दत्तं चित्रम् दृष्ट्वा उत्तरपुस्तिकायां मञ्जूषा/शब्द-सूच्यां सहायतया पञ्चवाक्यानि लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र को देखकर उत्तरपुस्तिका में मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से पाँच वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 12
[मञ्जूषा/शब्दसूची-शिक्षिका, श्यामपट्ट, शाटिका, व्यक्तित्वम्, वयं, सर्वे, कुर्मः, पाठयति, सम्मान, अस्मान्।]
उत्तरम् :
1. इयम् अस्माकं शिक्षिका अस्ति। (यह हमारी अध्यापिका है।)
2. सा शाटिकां धारयति। (वह साड़ी पहने हुयी है।)
3. सा अस्मान् श्यामपट्ट-सहायतया पाठयति। (वह हमको श्यामपट्ट की सहायता से पढ़ा रही है।)
4. तस्याः व्यक्तित्वम् आकर्षकम् अस्ति। (उसका व्यक्तित्व आकर्षक है।)
5. वयं सर्वे छात्रा: तस्याः सम्मानं कुर्मः। (हम सभी विद्यार्थी उसका आदर करते हैं।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 13.
अधः प्रदत्तं चित्रम् आधृत्य मञ्जूषायां/शब्दसूच्यां प्रदत्तशब्दानां सहायतया पञ्चसंस्कृतवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत –
(नीचे दिये गये चित्र के आधार पर मञ्जूषा/शब्दसूची में दिये गये शब्दों की सहायता से पाँच संस्कृत के वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 13
[मञ्जूषा/शब्दसूची – चित्रकारी, नारी, प्रकृतिचित्रणं, कुरुतः, वार्तालापं, चित्रयति, अपरं, परस्परं, तूलिकया]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे द्वौ चित्रकारौ स्तः। (इस चित्र में दो चित्रकार हैं।)
2. अत्र एक: चित्रकार: नारी चित्रयति अपरः च प्रकृतिचित्रणं करोति। (यहाँ एक चित्रकार स्त्री का
चित्र बना रहा है और दूसरा प्रकृति का चित्र बना रहा है।)
3. तौ परस्परं वार्तालापं कुरुतः। (वे दोनों आपस में बात-चीत कर रहे हैं।)
4. तौ तलिकया चित्रं पुरयतः। (वे दोनों तूलिका (ब्रश) से चित्र पूरा बना रहे हैं।)
5. तयो: चित्रणं सुन्दरम् अस्ति। (उन दोनों का चित्रण सुन्दर है।)

प्रश्न: 14.
अधः प्रदत्त चित्रस्य वर्णनं मञ्जूषायां लिखितपदानां प्रयोगं कृत्वा पञ्चवाक्यैः क्रियताम् –
(नीचे दिये गये चित्र का वर्णन मञ्जूषा (शब्दसूची) में लिखित शब्दों का प्रयोग करके पाँच वाक्यों द्वारा करो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 14
[मञ्जूषा/शब्दसूची-माता, पुत्रः, पृच्छति, भोजनकक्षे, अद्य, मोदकम्, यच्छति, मह्यम्, उपस्थिता, रोचते]
उत्तरम् :
1. माता पुत्रेण सह भोजनकक्षे उपस्थिता। (माँ पुत्र के साथ भोजन-कक्ष में उपस्थित है।)
2. सा पुत्राय भोजनं यच्छति। (बह पुत्र के लिये खाना दे रही है।)
3. पुत्र: जननी पृच्छति-अद्य किं पचसि? (पुत्र माँ से पूछता है-आज क्या बना रही हो?)
4. जननी कथयति-अद्य मिष्ठान्नम् पचामि। (माँ कहती है-आज मिठाई बना रही हूँ।)
5. पुत्र: जननी कथयति-महयं मोदकं रोचते। (पुत्र माँ से कहता है-मुझे लड्डू अच्छा लगता है।)

प्रश्न: 15.
पञ्चसु संस्कृतवाक्येषु मञ्जूषायां/शब्दसूच्या प्रदत्तानां पदसहायतया अधः दत्तस्य चित्रस्य वर्णनं कुरुत-
(पाँच संस्कृत वाक्यों में मञ्जूषा/शब्दसूची में दिये हुए शब्दों की सहायता से नीचे दिये गये चित्र का वर्णन करो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 15
[मञ्जूषा/शब्दसूची-महापर्व, मिष्ठान्नम्, लक्ष्मीपूजनम्, अमावस्यायां, स्फोटक पदार्थान्, प्रज्ज्वालयति, गृहं, अलङ्कुर्वन्ति]
उत्तरम् :
1. इदं चित्रं हिन्दूनां महापर्व दीपावल्याः अस्ति। (यह चित्र हिन्दुओं के महान् त्योहार दीपावली का है।)
2. इदं पर्व कार्तिकमासस्य अमावस्यायां भवति। (यह त्योहार कार्तिक महीने की अमावस्या को होता है।)
3. अस्मिन् दिवसे जनाः स्वगृहाणि अलङ्कुर्वन्ति, दीपकान् प्रज्ज्वालयन्ति लक्ष्मीपूजनं च कुन्ति।
(इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, दीपकों को जलाते हैं और लक्ष्मी का पूजन करते हैं।)
4. सर्वे जनाः परस्परं मिष्ठान्न वितरन्ति। (सभी लोग आपस में मिठाई बाँटते हैं।)
5. अस्मिन चित्रे एका महिला स्वगृहे दीपान प्रज्ज्वालयति एक: बालक:च स्फोटकपदार्थान विस्फोटयति।
(इस चित्र में एक औरत अपने घर में दीपकों को जला रही है और एक बालक पराखे चला रहा है)

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प्रश्न: 16.
पञ्चसंस्कृतवाक्येषु मञ्जूषायां प्रदत्तानां पदानां सहायतया चित्रस्य वर्णनं कुरुत –
(पाँच संस्कृत के वाक्यों में मञ्जूषा (शब्दसूची) में दिये शब्दों की सहायता से चित्र का वर्णन करो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 16
[मञ्जूषा/शब्दसूची-अतिविस्तृतः, धर्माणां, भारतवर्षे , षड्ऋतवः, उत्सवाः, पृथक्-पृथक्, आयोज्यन्ते, अस्माकम्]
उत्तरम् :
1. भारतबर्षम् अस्माकं देशः अस्ति। (भारत हमारा देश है।)
2. अयं देश: अतिविस्तृतः अस्ति। (यह देश अत्यधिक फैला हुआ है।)
3. अत्र षड्ऋतवः भवन्ति। (यहाँ छ: ऋतुएँ होती है।)
4. भारतवर्षे पृथक-पृथक धर्माणां जनाः निवसन्ति। (भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं।)
5. अत्र बहवः उत्सवाः आयोज्यन्ते। (यहाँ बहुत से त्योहार मनाये जाते हैं।)

प्रश्न: 17.
चित्रं दृष्ट्वा दत्तानां शब्दानां सहायतया चित्रस्य वर्णनं पञ्चसंस्कृतवाक्येषु कुरुत –
(चित्र को देखकर दिये गये शब्दों की सहायता से चित्र का वर्णन पाँच संस्कृत वाक्यों में करो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 17
[मञ्जूषा/शब्दसूची-गृहस्य, दूरदर्शनम्, साधारण:. आसन्दिकायां, कुरुतः, वार्तालापं, स्वमित्रेण, आयाति]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे मोहन: स्वमित्रेण सह दूरदर्शनं पश्यति। (इस चित्र में मोहन अपने मित्र के साथ दूरदर्शन (टी. वी.) देख रहा है।)
2. दूरदर्शने कश्चित् समाचार: आयाति। (दूरदर्शन में कोई समाचार आ रहा है।)
3. तौ आसन्दिकायां तिष्ठतः। (वे दोनों कुर्सी पर बैठे हुए हैं।)
4. गृहस्य अयं कक्ष: साधारणः अस्ति। (घर का यह साधारण कमरा है)
5. तो दूरदर्शने आगतस्य समाचारस्य विषये वार्तालापं कुरुतः। (वे दोनों दूरदर्शन में आये समाचार के बारे में बात-चीत कर रहे हैं।)

प्रश्न: 18.
इदं चित्रम् आधृत्य मञ्जूषायाः/शब्दसूच्याः सहायतया उत्तरपुस्तिकायां पञ्च-संस्कृतवाक्यानि लिखत (इस चित्र के आधार पर मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से उत्तरपुस्तिका में पाँच संस्कृत-वाक्य लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 18
[मञ्जूषा/शब्दसूची-रमा, पोलिकाः, पाकशालायां, पचति, सूप-ओदनं, स्वपरिवारेण, कृत्वा, तृप्तं, स्थिता, जनाः]
उत्तरम् :
1. इयं रमा अस्ति। (यह रमा है।)
2. सा पाकशालायां स्थिता। (वह रसोईघर में स्थित है।)
3. सा पोलिकाः सूप-ओदनं च पचति। (वह झोल और भात बना रही है।)
4. सा प्रतिदिनं स्वपरिवारेण सह भोजनं करोति। (वह प्रतिदिन अपने परिवार के साथ खाना खाती है।)
5. सर्वेः जनाः भोजनं कृत्वा तृप्तं भवन्ति। (सब लोग भोजन करके सन्तुष्ट हो जाते हैं।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 19.
अधोदत्तं चित्रम् आधृत्य मञ्जूषाया:/शब्दसूच्या: सहायतया उत्तरपुस्तिकायां पञ्चवाक्यानि सस्कृतभाषाया लिखत-नाचे दिये गये चित्र के आधार पर मञ्जूषा/शब्दसूची की सहायता से उत्तरपुस्तिका में पांच वाक्य संस्कृत भाषा में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 19
[मञ्जूषा/शब्दसूची – कञ्चुकं, सीव्यति, पादयाम, निपुणा, वस्त्राणि, सूचिकया, क्रीणन्ति, निर्मितानि]
उत्तरम् :
1. इयम् उमा अस्ति। (यह उमा है।)
2. सा सूचिकया वस्त्राणि सीव्यति। (वह सूई से (मशीन से) कपड़ों को सी रही है।)
3. सा कञ्चुकं पादयामं च सीव्यति। (वह कुर्ता और पाजामा सी रही है।)
4. सा स्वकार्ये निपुणा अस्ति। (वह अपने काम में होशियार है।)
5. जनाः तया निर्मितानि वस्त्राणि कीणन्ति। (लोग उसके द्वारा बने वस्त्रों को खरीदते हैं।)

प्रश्न: 20.
अध: दत्तं चित्रम् आधृत्य शब्दसूच्याः सहायतया पञ्च संस्कृतवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत (नीचे दिये गये चित्र के आधार पर शब्द-सूची की सहायता से पाँच संस्कृत के वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 20
[मञ्जूषा/शब्दसूची-आकाशे, खगान्, वृक्षे, निवसन्ति, नीडेषु, विचरन्ति, स्वनिर्मितेषु, सायंकाले, शोभते, स्वनीडान्।]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे वयं खगान् पश्यामः। (इस चित्र में हम चिड़ियों को देख रहे हैं।)
2. ते वृक्षे स्वनिर्मितेषु नीडेषु निवसन्ति। (वे पेड़ पर घोंसलों में रहती हैं।)
3. अस्मिन् चित्रे खगा: आकाशे विचरन्ति। (इस चित्र में चिड़ियाँ आकाश में उड़ रही हैं।)
4. सायंकाले ते सर्वे स्वनीडान् गच्छन्ति। (सन्ध्या के समय वे सब अपने घोंसलों को चली जाती हैं।)
5. खग: आकाशः शोभते। (पक्षियों से आकाश शोभित हो रहा है।)

प्रश्न: 21.
अधोदत्तं चित्रं पश्यत। मजषायाः/शब्दसच्याः सहायतया चित्रम् आधुत्य संस्कृतेन पञ्चवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत-(नीचे दिये गये चित्र को देखो। मञ्जूषा/शब्द-सूची की सहायता से चित्र के आधार पर संस्कृत में पाँच बाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 21
[मञ्जूषा/शब्दसूची-वृष्टिजलेन, विद्यालयात्, आर्द्रः, मयूराः, मधुरगीतं, मेघाः, कोकिलः, वर्षाकाले, गायति]
उत्तरम् :
1. अस्मिन् चित्रे वृष्टिः भवति। (इस चित्र में वर्षा हो रही है।)
2. स: बालक: विद्यालयात् गृहं गच्छति। (वह बालक विद्यालय से घर जा रहा है।) 3. स: वृष्टिजलेन आईः भवति। (वह वर्षा के पानी से भीग रहा है।)
4. आकाशे मेघाः गर्जन्ति तान् च दृष्ट्वा मयूराः नृत्यन्ति। (आकाश में बादल गरजते हैं। उनको देखकर मोर नाच रहे हैं।)
5. वर्षाकाले कोकिल: मधुरंगीतं गायति। (वर्षा के समय में कोयल मीठा गाना गाती है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 22.
अधः प्रदत्त चित्रम् आधृत्य मञ्जूषायां/शब्दसूच्यां सहायतया पञ्चसंस्कृतवाक्यानि उत्तरपुस्तिकायां लिखत-(नीचे दिये गये चित्र के आधार पर मञ्जूषा/शब्द-सूची में दिये गये शब्दों की सहायता से पाँच संस्कृत के वाक्य उत्तरपुस्तिका में लिखो।)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 22
[मञ्जूषा/शब्दसूची-शिक्षकः, बालकाः, श्यामपट्टे, आदरं, छात्रान्, त्रयः, पाठयति, कुर्वन्ति, शिक्षकस्य, कक्षायाम्।]
उत्तरम् :
1. इयं एक कक्षा कक्षः अस्ति। (यह एक कक्षा कक्ष है।)
2. कक्षायां त्रयः बालकाः पठन्ति। (कक्षा में तीन लड़के पढ़ रहे हैं।)
3. शिक्षकः तान् छात्रान् पाठयति। (अध्यापक उन विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं।)
4. स: श्यामपट्टे लिखति। (बह श्यामपट्ट पर लिख रहे हैं।)
5. सर्वे छात्रा: शिक्षकस्य आदरं कुर्वन्ति। (सब विद्यार्थी अध्यापक जी का सम्मान करते हैं।)

प्रश्न: 23.
अधः मञ्जूषायां/शब्दसूच्यां प्रदत्तशब्दानां सहायतया ‘ग्राम्य जीवनम्’ इति विषयम् अधिकृत्य पञ्चवाक्येषु संस्कृतेन एकम् अनुच्छेदं लिखत-(नीचे मञ्जूषा/शब्द-सूची में दिये गये शब्दों की सहायता से ‘ग्राम्य जीवनम्’ विषय पर संस्कृत में पाँच वाक्यों का एक अनुच्छेद लिखो।)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 23
[मञ्जूषा/शब्दसूची- ग्रामीणाः, शुद्धं, स्वास्थ्यप्रदं, निश्छलं, ग्रामप्रधानः, जलवायुः, वस्तूनि, अतिसरलम्, लभन्ते]
उत्तरम् :
1. भारतवर्षम् ग्रामप्रधान: देशः अस्ति। (भारतवर्ष ग्राम प्रधान देश है।)
2. ये जनाः नामेषु निवसन्ति, ते ग्रामीणाः कथ्यन्ते। (जो लोग गाँव में रहते हैं, उन्हें ग्रामीण कहते हैं।)
3. ग्रामीणानां जीवनं निश्छलम् अतिसरलञ्च भवति। (ग्रामीणों का जीवन निश्छल और अति सरल होता है।)
4. अत्र जलवायुः शुद्धं स्वास्थ्यप्रदं च भवति। (यहाँ जलवायु शुद्ध और स्वास्थ्यप्रद होती है।)
5. अत: ते सदैव स्वास्थ्यप्रदानि वस्तूनि लभन्ते। (अत: वे सदैव स्वास्थ्यप्रद वस्तुएँ प्राप्त करते हैं।)

प्रश्न: 24.
‘वृक्षाणां महत्त्वम्’ इति विषयम् अधिकृत्य मञ्जूषाया/शब्दसूच्याः पदानि चित्त्वा पञ्चवाक्यानि संस्कृतभाषायां लिखत –
(‘वृक्षों का महत्त्व’ इस विषय पर मञ्जूषा /शब्द-सूची से शब्दों को चुनकर पाँच बाक्य संस्कृत भाषा में लिखो-)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 24
[मञ्जूषा/शब्दसूची-पर्यावरणं, प्रयच्छन्ति, काष्ठानि, आघातं, गृहीत्वा, विमुञ्चन्ति, प्रसन्नाः, अस्मभ्यम्, औषधिम्।]
उत्तरम् :
1. वृक्षा: पर्यावरणं शुद्धं कुर्वन्ति। (वृक्ष पर्यावरण को शुद्ध करते हैं।)
2. वृक्षः वयं फलानि औषधिं च प्राप्नुमः। (वृक्षों से हम फल और औषधि प्राप्त करते हैं।)
3. देवदारुनिम्बादिवृक्षाः अस्मभ्यं काष्ठानि प्रयच्छन्ति ! (देवदारु, नीम आदि के वृक्ष हमें लकड़ी देते हैं।)
4. वृक्षाः परोपकाराय फलन्ति, आघातं सहन्ते तथापि प्रसन्नाः भवन्ति। (वृक्ष परोपकार के लिए फलते हैं, आघात सहते हैं फिर भी प्रसन्न होते हैं।)
5. वृक्षाः दूषितवायु गृहीत्वा शुद्धप्राणवायुं विमुञ्चन्ति। (वृक्ष दूषित वायु ग्रहण करके शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ते हैं।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम्

प्रश्न: 25.
‘धेनुः’ इति विषयम् अधिकृत्य मञ्जूषायां प्रदत्तपदानां सहायतया पञ्चवाक्यानि संस्कृतेन लिखत –
(‘धेनु:’ विषय पर मञ्जूषा में दिये गये शब्दों की सहायता से पाँच वाक्य संस्कृत में लिखो-)
JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारितलघुकथा, चित्रवर्णनम् 25
[मञ्जूषा/शब्दसूची-शास्त्रेषु, नवनीतम्, गोमयेन, दधि, क्षेत्रस्य, भूमि:, घृतं, पोषयति, निदानं]
उत्तरम् :
1. धेनुः अस्मभ्यम् अति उपयोगी पशुः अस्ति। (गाय हमारे लिए अति उपयोगी पशु है।)
2. अस्याः महत्त्व शास्त्रेषु अपि वर्णितम्। (इसका महत्त्व शास्त्रों में भी वर्णित है।)
3. यथा माता बालकान् पालयति तथैव धेनुरपि स्वदुग्धेन अस्मान् पोषयति। (जैसे माता अपने बालक का पालन करती है वैसे ही गाय अपने दूध से हमारा पोषण करती है।)
4. अस्याः दुग्धेन दधि, घृतं नवनीतं च प्राप्यन्ते। (इसके दूध से दही, घी और मक्खन प्राप्त होता है।)
5. अस्याः गोमयेन क्षेत्रस्य भूमिः उर्वरा भवति, गोमूत्रेण च नानाविध-रोगाणां निदानं क्रियते। (इसके गोबर से खेत की भूमि उपजाऊ होती है और गोमूत्र से अनेक रोगों का निदान किया जाता है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

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JAC Board Class 9th Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करते समय कर्ता, कर्म, क्रिया तथा अन्य शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कर्ता जिस पुरुष या वचन में हो, उसी के अनुरूप पुरुष, वचन तथा काल के अनुसार क्रिया का प्रयोग करना चाहिए। हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करते समय निम्न बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए –

1. कारक:

संज्ञा और सर्वनाम के वे रूप जो वाक्य में आये अन्य शब्दों के साथ उनके सम्बन्ध को बताते हैं, ‘कारक’ कहलाते हैं। मुख्य रूप से कारक छः प्रकार के होते हैं, किन्तु ‘सम्बन्ध’ और ‘सम्बोधन’ सहित ये आठ प्रकार के होते हैं। संस्कृत में इन्हें ‘विभक्ति’ भी कहते हैं। इन विभक्तियों के चिह्न प्रकार हैं –

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 1

नोट – जिस शब्द के आगे जो चिह्न लगा हो, उसके अनुसार विभक्ति का प्रयोग करते हैं। जैसे राम ने यहाँ पर राम के आगे ‘ने’ चिह्न है। अतः राम शब्द में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग करते हुए ‘रामः’ लिखा जायेगा। ‘रावण को’ यहाँ पर रावण के आगे ‘को’ यह द्वितीया विभक्ति का चिह्न है। अतः ‘रावण’ शब्द में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग करके ‘रावणम्’ लिखा जायेगा।

‘बाण के द्वारा’ यहाँ पर बाण शब्द के बाद ‘के द्वारा यह तृतीया का चिह्न लगा है। अतः ‘बाणेन’ का प्रयोग किया जायेगा। इसी प्रकार अन्य विभक्तियों के प्रयोग के विषय में समझना चाहिए।

यह बात विशेष ध्यान रखने की है कि जिस पुरुष तथा वचन का कर्ता होगा, उसी पुरुष तथा वचन की क्रिया भी प्रयोग की जायेगी। जैसे –
‘पठमि’ इस वाक्य में कर्ता, ‘अहम्’ उत्तम पुरुष तथा एकवचन है तो क्रिया भी उत्तम पुरुष, एकवचन की है। अतः ‘पठामि’ का प्रयोग किया गया है।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

2. पुरुष

पुरुष तीन होते हैं, जो निम्न हैं –
(अ) प्रथम पुरुष – जिस व्यक्ति के विषय में बात की जाय, उसे प्रथम पुरुष कहते हैं। इसे अन्य पुरुष भी कहते हैं। जैसे – सः = वह। तौ = वे दोनों। ते = वे सब। रामः = राम। बालकः = बालक। कः = कौन। भवान् = आप (पुं.)। भवती = आप (स्त्री.)।
(ब) मध्यम पुरुष – जिस व्यक्ति से बात की जाती है, उसे मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे
अहम् = मैं। आवाम् = हम दोनों। वयम् = हम सब।

3. वचन।

संस्कत में तीन वचन माने गये हैं –
(अ) एकवचन जो केवल एक व्यक्ति अथवा एक वस्तु का बोध कराये, उसे एकवचन कहते हैं। एकवचन के कर्ता के साथ एकवचन की क्रिया का प्रयोग किया जाता है। जैसे – ‘ अहं गच्छामि’ इस वाक्य में एकवचन कर्ता, ‘अहम्’ तथा एकवचन की क्रिया ‘गच्छामि’ का प्रयोग किया गया है।

(ब) द्विवचन – दो व्यक्ति अथवा वस्तुओं का बोध कराने के लिए द्विवचन का प्रयोग होता है। जैसे ‘आवाम’ तथा क्रिया ‘पठावः’ दोनों ही द्विवचन में प्रयुक्त हैं।।

(स) बहुवचन – तीन या तीन से अधिक व्यक्ति अथवा वस्तुओं का बोध कराने के लिये बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। जैसे-‘वयम् पठामः’ इस वाक्य में अनेक का बोध होता है। अतः कर्ता ‘वयम्’ तथा क्रिया ‘पठामः’ दोनों ही बहुवचन में प्रयुक्त हैं।

4. लिंग

संस्कृत में लिंग तीन होते हैं –
(अ) पुल्लिंग – जो शब्द पुरुष-जाति का बोध कराता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं। जैसे ‘रामः काशी गच्छति’ (राम काशी जाता है) में ‘राम’ पुल्लिंग है।
(ब) स्त्रीलिंग – जो शब्द स्त्री-जाति का बोध कराये, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं। जैसे गीता गृहं गच्छति’ (गीता घर जाती है।) इस वाक्य में ‘गीता’ स्त्रीलिंग है।
(स) नपुंसकलिंग – जो शब्द नपुंसकत्व (न स्त्री, न पुरुष) का बोध कराये, उसे नपुंसक-लिंग कहते हैं। जैसे धनम्, वनम्, फलम्, पुस्तकम, ज्ञानम्, दधि, मधु आदि।

5. धातु

क्रिया अपने मूल रूप में धातु कही जाती है। जैसे-गम् = जाना, हस् = हँसना। कृ – करना, पृच्छ = पूछना। ‘भ्वादयो धातवः’ सूत्र के अनुसार क्रियावाची-‘भू’, ‘गम्’, ‘पठ्’ आदि की धातु संज्ञा होती है।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

6. लकार

लकार – ये क्रिया की विभिन्न अवस्थाओं तथा कालों (भूत, भविष्य, वर्तमान) का बोध कराते हैं। लकार दस हैं, इनमें पाँच प्रमुख लकारों का विवरण निम्नवत् है :
(क) लट् लकार (वर्तमान काल) – इस काल में कोई भी कार्य प्रचलित अवस्था में ही रहता है। कार्य की समाप्ति नहीं होती। वर्तमान काल में लट् लकार का प्रयोग होता है। इस काल में वाक्य के अन्त में ‘ता है’, ‘ती है’, ‘ते हैं’ का प्रयोग होता है जैसे –

राम पुस्तक पढ़ता है। – (रामः पुस्तकं पठति।)
बालक हँसता है। – (बालकः हसति।)
हम गेंद से खेलते हैं। – (वयं कन्दुकेन क्रीडामः।)
छात्र दौड़ते हैं। – (छात्राः धावन्ति।)
गीता घर जाती है। – (गीता गृहं गच्छति।)

(ख) लङ् लकार (भूतकाल)-जिसमें कार्य की समाप्ति हो जाती है, उसे भूतकाल कहते हैं। भूतकाल में लङ् लकार का प्रयोग होता है। जैसे –
राम गाँव गया। – (रामः ग्रामम् अगच्छत् ।)
मैंने रामायण पढ़ी। – (अहम् रामायणम् अपठम्।)
मोहन वाराणसी गया। – (मोहनः वाराणीसम् अगच्छत्।)
राम राजा हुए। – (रामः राजा अभवत्।)
उसने यह कार्य किया। – (सः इदं कार्यम् अकरोत्।)।

(ग) लृट् लकार (भविष्यत् काल) – इसमें कार्य आगे आने वाले समय में होता है। इस काल के सूचक वर्ण गा, गी, गे आते हैं। जैसे –

राम आयेगा। (रामः आगमिष्यति।)
मोहन वाराणसी जायेगा। (मोहनः वाराणसीं गमिष्यति।)
वह पुस्तक पढ़ेगा। (सः पुस्तकं पठिष्यति।)
रमा जल पियेगी। (रमा जलं पास्यति।)

(घ) लोट् लकार (आज्ञार्थक) – इसमें आज्ञा या अनुमति का बोध होता है। आशीर्वाद आदि के अर्थ में भी इस लकार का प्रयोग होता है। जैसे –

वह विद्यालय जाये। (सः विद्यालयं गच्छतु।)
तुम घर जाओ। (त्वं गृहं गच्छ।)
तुम चिरंजीवी होओ। (त्वं चिरंजीवी भव।)
राम पुस्तक पढ़े। (रामः पुस्तकं पठतु।)
जल्दी आओ। (शीघ्रम् आगच्छ।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

(ङ) विधिलिङ् लकार – ‘चाहिए’ के अर्थ में इस लकार का प्रयोग किया जाता है। इससे निमन्त्रण, आमन्त्रण तथा सम्भावना आदि का भी बोध होता है। जैसे –

उसे वहाँ जाना चाहिए। (सः तत्र गच्छेत्।)
तुम्हें अपना पाठ पढ़ना चाहिए। (त्वं स्वपाठं पंठेः।)
मुझे वहाँ जाना चाहिए। (अहं तत्र गच्छेयम्।)

हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करते समय सर्वप्रथम कर्ता को खोजना चाहिए। कर्ता जिस पुरुष एवं वचन का हो, उसी पुरुष एवं वचन की क्रिया भी प्रयोग करनी चाहिए।

कर्ता – कार्य करने वाले को कर्ता कहते हैं। जैसे-‘देवदत्तः पुस्तकं पठति’ यहाँ पर पढ़ने का काम करने वाला देवदत्त है। अतः देवदत्त कर्ता है।

कर्म – कर्ता जिस काम को करे वह कर्म है। जैसे ‘भक्तः हरिं भजति’ में भजन रूपी कार्य करने वाला भक्त है। वह हरि को भजता है। अतः हरि कर्म है।

क्रिया – जिससे किसी कार्य का करना या होना प्रकट हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे-जाना, पढ़ना, हँसना, खेलना आदि क्रियाएँ हैं।

निम्न तालिका से पुरुष एवं वचनों के 3-3 प्रकारों का ज्ञान भलीभाँति सम्भव है –

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 2

इस प्रकार स्पष्ट है कि कर्ता के इन प्रारूपों के अनुसार प्रत्येक लकार में तीनों पुरुषों एवं तीनों वचनों के लिए क्रिया के भी ‘नौ’ ही रूप होते हैं। अब निम्नतालिका से कर्ता एवं क्रिया के समन्वय को समझिये –

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 3

नोट – संज्ञा शब्दों को प्रथम पुरुष मानकर उनके साथ क्रियाओं का प्रयोग करना चाहिए। निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा कर्ता के अनुरूप क्रिया-पदों का प्रयोग करना सीखें –

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 4

नोट भवान् एवं भवती को प्रथम पुरुष मानकर इनके साथ प्रथम पुरुष की ही क्रिया का प्रयोग करना चाहिए।

सर्वनामों का तीनों लिंगों में प्रयोग

संज्ञा के बदले में या संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। जैसे अहम् = मैं। त्वम् = तुम। अयम् = यह। कः = कौन। यः = जो। सा = वह। तत् = वह। सः = वह आदि। केवल ‘अपने और तुम्हारे’ बोधक ‘अस्मद् और ‘युष्मद्’ सर्वनामों का प्रयोग तीनों लिंगों में एक रूप ही रहता है, शेष का पृथक् रूप रहता है।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

प्रथम पुरुष तद् सर्वनाम (वह-वे) का प्रयोग

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 5

जब कर्ता प्रथम पुरुष का हो तो क्रिया भी प्रथम पुरुष की ही प्रयोग की जाती है। जैसे –

वे सब फल हैं।
तानि फलानि सन्ति।
वह जल पीता है। – सः जलं पिबति।
वे दोनों लिखते हैं। – तौ हसतः।
वे दोनों हँसते हैं। – ते लिखन्ति।

स्त्रीलिंग प्रथम पुरुष में –

वह पढ़ती है। – सा पठति।
वे दोनों जाती हैं। – ते गच्छतः।
वे सब हँसती हैं। – ताः हसन्ति।

नपुंसकलिंग प्रथम पुरुष में –

वह घर है। – तद् गृहम् अस्ति।
वे दोनों पुस्तकें हैं। – ते पुस्तके स्तः।
वे सब फल हैं। – तानि फलानि सन्ति।

विद्यार्थी इस श्लोक को कण्ठस्थ करें :

उत्तमाः पुरुषाः ज्ञेयाः – अहम् आवाम् वयम् सदा।
मध्यमाः त्वम् युवाम् यूयम्, अन्ये तु प्रथमाः स्मृताः।।

अर्थात् अहम्, आवाम्, वयम् – उत्तम पुरुषः; त्वम्, युवाम्, यूयम् – मध्यम पुरुष; (शेष) अन्य सभी सदा प्रथम पुरुष जानने चाहिए।

उदाहरण – लट् लकार (वर्तमान काल) (गम् धातु = जाना) का प्रयोग

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

प्रथम पुरुष

1 सः गच्छति। वह जाता है।
1 तौ गच्छतः। वे दोनों जाते हैं।
1 ते गच्छन्ति। वे सब जाते हैं।

मध्यम पुरुष

1. त्वं गच्छसि। तुम जाते हो।
2. युवां गच्छथः। तुम दोनों जाते हो।
3. यूयं गच्छथ। तुम सब जाते हो।

उत्तम पुरुष

1. अहं गच्छामि मैं जाता है।
2. आवां गच्छावः। हम दोनों जाते हैं।
3. वयं गच्छामः। हम सब जाते हैं।

उपर्युक्त उदाहरणों में ‘प्रथम पुरुष’ के कर्ता-पद क्रमशः ‘सः, तौ, ते’ दिये गये हैं। इनके स्थान पर किसी भी संज्ञा-सर्वनाम के रूप रखे जा सकते हैं। जैसे – गोविन्दः गच्छति, बालकौ गच्छतः, मयूराः नृत्यन्ति।

अभ्यास 1

  1. आलोक दौड़ता है।
  2. गोविन्द पढ़ता है।
  3. अर्चना खेलती है।
  4. बालक दौड़ता है।
  5. सिंह आता है।
  6. वह प्रात:काल उठता है।
  7. राधा दूध पीती है।
  8. श्याम हँसता है।
  9. बन्दर फल खाता है।
  10. हाथी जाते हैं।
  11. दो बालक पढते हैं।
  12. विनोद और प्रमोद पढ़ते हैं।
  13. दो किसान जोतते हैं।
  14. दो हिरन दौड़ते हैं।
  15. दो बालक क्या करते हैं?
  16. वे विद्यालय जाते हैं।
  17. ग्रामीण हृष्ट-पुष्ट होते हैं।
  18. सब मोर क्या करते हैं?
  19. सब बकरियाँ चरती हैं।
  20. ये सब फूल खिलते हैं।

उत्तर :

  1. आलोक: धावति।
  2. गोविन्दः पठति।
  3. अर्चना क्रीडति।
  4. बालकः धावति।
  5. सिंहः आगच्छति।
  6. स: प्रात:काले उत्तिष्ठति।
  7. राधा दुग्धं पिबति।
  8. श्यामः हसति।
  9. कपिः फलं खादति।
  10. करिण: गच्छन्ति।
  11. बालकौ पठतः।
  12. विनोदः प्रमोद पठतः
  13. कृषको कर्षतः।
  14. मृगौ धावतः।
  15. बालकौ किं कुरुतः?
  16. ते विद्यालयं गच्छन्ति।
  17. ग्रामीणाः हृष्ट-पुष्टाः भवन्ति।
  18. सर्वे मयूराः किं कुर्वन्ति ?
  19. सर्वाः अजाः चरन्तिः।
  20. एतानि सर्वाणि पुष्पाणि विकसन्ति।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 2

  1. तुम क्या देखते हो?
  2. तुम दोनों कब खेलते हो?
  3. तुम सब क्या पढ़ते हो?
  4. क्या तुम चित्र देखते हो?
  5. तुम दोनों क्या लिखते हो?
  6. तुम सब फल खाते हो।
  7. तुम बाजार जाते हो।
  8. तुम दोनों क्यों दौड़ते हो?
  9. तुम सब पानी क्यों पीते हो?
  10. तुम क्यों हँसते हो?
  11. क्या तुम दोनों गीत गाते हो?

उत्तर :

  1. त्वं कि पश्यसि?
  2. युवां कदा क्रीडथः?
  3. ययं किं पठथ?
  4. किं त्वं चित्रं पश्यसि?
  5. यवां किं लिखथः?
  6. यूयं फलं भक्षयथ।
  7. त्वम् आपणं गच्छसि।
  8. युवां किमर्थं धावथः?
  9. यूयं जलं किमर्थं पिबथ?
  10. त्वं किमर्थं हससि?
  11. किं युवां गीतं गायथः?
  12. यूयं कुत्र वसथ?

अभ्यास 3

  1. मैं फल खाता हूँ।
  2. हम दोनों बाजार जाते हैं।
  3. हम सब गीत गाते हैं।
  4. मैं कार्य करता हूँ।
  5. हम दोनों खेलते हैं।
  6. हम सब खेल के मैदान में खेलते हैं।
  7. मैं एक चित्र देखता हूँ।
  8. हम दोनों विद्यालय जाते हैं।
  9. हम सब दूध पीते हैं।
  10. मैं घर में पढ़ता हूँ।

उत्तर :

  1. अहं फलं भक्षयामि।
  2. आवाम आपणं गच्छावः।
  3. वयं गीतं गायामः।
  4. अहं कार्यं करोमि।
  5. आवां क्रीडावः।
  6. वयं क्रीडाक्षेत्रे क्रीडामः।
  7. अहम् एकं चित्रं पश्यामि।
  8. आवां विद्यालयं गच्छावः।
  9. वयं दुग्धं पिबामः।
  10. अहं गृहे पठामि।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 4

  1. आलोक कक्षा में पढ़ता है।
  2. वह बैठता है।
  3. तुम मैदान में खेलते हो।
  4. विनोद मेरा मित्र है।
  5. यही धर्म है।
  6. मैं पुल बनाता हूँ।
  7. देवता यहाँ जन्म लेना चाहते हैं।
  8. भाई उपहार देता है।
  9. कृष्ण सहायात करते हैं।
  10. हाथी मतवाला है।

उत्तर :

  1. आलोक: कक्षायां पठति।
  2. सः उपविशति।
  3. त्वं क्षेत्रे क्रीडसि।
  4. विनोदः मम मित्रम् अस्ति।
  5. एषः एव धर्मः अस्ति।
  6. अहं सेतुनिर्माणं करोमि।
  7. देवाः अत्र जन्म इच्छन्ति।
  8. भ्राता उपहारं यच्छति।
  9. कृष्ण: सहायता करोति।
  10. करी मत्तः अस्ति।

उदाहरण – लङ् लकार (भूतकाल) में (पठ् धातु = पढ़ना) का प्रयोग

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 6

अभ्यास 5

  1. ब्राह्मण गाँव को आया।
  2. तपोदत्त ब्राह्मण था।
  3. लड़की ने पुस्तक पढ़ी।
  4. वे दोनों कहाँ गये?
  5. वे सब कब दौड़े?
  6. हरि ने पानी पिया।
  7. वे दोनों विद्यालय गये।
  8. मैं वहाँ दौड़ा।
  9. छात्रों ने चित्र देखा।
  10. उसने पत्र लिखा।
  11. वह अपने घर गया।
  12. हम सबने पाठ पढ़ा।

उत्तर :

  1. विप्रः ग्रामम् आगछत्।
  2. तपोदत्तः विप्रः आसीत्।
  3. बालिका पुस्तकम् अपठत्।
  4. तौ कुत्र अगच्छताम्?
  5. ते कदा अधावन्?
  6. हरिः जलम् अपिबत्।
  7. तौ विद्यालयम् अगच्छताम्
  8. अहं तत्र अधावम्।
  9. छात्राः चित्रम् अपश्यन्।
  10. सः पत्रम् अलिखत्।
  11. सः स्वगृहम् अगच्छत्।
  12. वयं पाठम् अपठाम्।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 6

  1. ब्राह्मण कौन था?
  2. इन्द्र ने क्या किया?
  3. तपोदत्त ने तप किया।
  4. उसने नदी में स्नान किया।
  5. बालक भयभीत हो गये।
  6. अर्जुन ने कृष्ण से कहा।
  7. नल द्यूत में हार गया।
  8. दमयन्ती वन गयी।
  9. हाथी अन्धा हो गया।
  10. मेरा मित्र उपस्थित था।

उत्तर :

  1. ब्राह्मणः कः आसीत् ?
  2. इन्द्रः किम् अकरोत् ?
  3. तपोदत्तः तपः अकरोत्।
  4. सः नद्यां स्नानम् अकरोत्।
  5. बालकाः भयभीताः अभवन्।
  6. अर्जुनः कृष्णम् अकथय।
  7. नलः द्यूते पराजितः अभवत्।
  8. दमयन्ती वनम् अगच्छत्।
  9. करी अन्धः अभवत्।
  10. मम मित्रम् उपस्थितम् आसीत्।

नोट – लट् लकार की क्रिया में ‘स्म’ लगाकर लङ्लकार (भूतकाल) में अनुवाद किया जा सकता है। जैसे –
1. वन में सिंह रहता था।
2. बालक खेल रहा था। वने सिंहः निवसति स्म।
बालकः क्रीडति स्म।

उदाहरण – लट् लकार (भविष्यत् काल) (लिख धात् = लिखना) का प्रयोग

प्रथम पुरुष

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 7

अभ्यास 7

  1. लेखराज पढ़ेगा।
  2. हरीमोहन शाम को लिखेगा।
  3. लड़कियाँ खेलेंगी।
  4. मैं बाजार जाऊँगा।
  5. हम दोनों दूध पियेंगे।
  6. तुम यहाँ क्या करोगे?
  7. तुम दोनों चित्र देखोगे।
  8. तुम सब क्या खाओगे?
  9. मोर नृत्य करेगा।
  10. हम दोनों खेत को जायेंगे।
  11. किसान खेत जोतेगा।
  12. बालक खेल के मैदान खेलेंगे।

उत्तर :

  1. लेखरामः पठिष्यति।
  2. हरीमोहनः सायंकाले लेखिष्यति।
  3. बलिकाः क्रीडिष्यति।
  4. अहम् आपणं गमिष्यामि।
  5. आवां दुग्धं पास्यावः।
  6. त्वम् यत्र किं करियसि?
  7. युवा चित्रं द्रक्ष्यथः
  8. यूयं किं भक्षयिष्यथ?
  9. मयूरः नृत्यं करिष्यति।
  10. आवां क्षेत्रं गमिष्यावः।
  11. कृषकः क्षेत्र कमंति।
  12. बालकाः क्रीडाक्षेत्रे क्रीडिष्यन्ति।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 8

  1. तुम सुख अनुभव करोगे।
  2. वे दोनों गाँव में रहेंगे।
  3. वह कक्षा में प्रथम आयेगा।
  4. वह कहाँ जायेगी।
  5. मैं ब्रज की रक्षा करूँगा।
  6. मैं मित्र से मिलूँगा।
  7. मैं फिर नहीं आऊँगा।
  8. मैं प्रयत्न करूँगा।
  9. मैं गुणों को कहूँगा।
  10. वे सभी सुखी होंगे।

उत्तर :

  1. त्वं सुखम् अनुभविष्यसि।
  2. तौ ग्रामे वसिष्यतः।
  3. सः कक्षायां प्रथमः आगमिष्यति।
  4. सा कुत्र गमिष्यति?
  5. अहं व्रजं रक्षिष्यामि।
  6. अहं मित्रेण मेलिष्यामि।
  7. अहं पुनः न आगमिष्यामि।
  8. अहं प्रयत्न करिष्यामि।
  9. अहं गुणान् कथपिष्यामि।
  10. ते सर्वे सुखिनः भविष्यन्ति।

उदाहरण – लोट् लकार (आज्ञार्थक) (कथ् धातु = कहना)

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 8

अभ्यास 9

  1. सुशीला जाये।
  2. विद्यार्थी खेलें।
  3. ईश्वर रक्षा करे।
  4. तुम युद्ध करो।
  5. लड़कियाँ नाचें।
  6. क्या हम जायें?
  7. इस समय छात्र पढ़ें।
  8. नौकर जायें।
  9. लड़के दौड़ें।
  10. क्या मैं जाऊँ ?
  11. क्या हम सब खेलें?
  12. वे सब न हँसे।
  13. अब तुम खेलो।
  14. तुम दोनों पढ़ो।

उत्तर :

  1. सुशीला गच्छतु।
  2. छात्राः क्रीडन्तु।
  3. ईश्वरः रक्षतु।
  4. त्वं युद्धं कुरु।
  5. बालिकाः नृत्यं कुर्वन्तु।
  6. किं वयं गच्छाम?
  7. इदानी छात्राः पठन्तु।
  8. सेवकाः गच्छन्तु।
  9. बालकाः धावन्तु।
  10. किम् अहं गच्छानि?
  11. किं वयं क्रीडाम?
  12. ते न हसन्तु।
  13. इदानीं त्वं क्रीड।
  14. युवां पठतम्।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 10

  1. तुम दोनों मत हँसो।
  2. तुम सब दौड़ो।
  3. नर्तकियों नाचें।
  4. तुम मत हँसो।
  5. तुम यहाँ आओ।
  6. वहाँ मत जाओ।
  7. दौड़ो मत।
  8. मत हँसो।
  9. आओ, नाचो।
  10. पाठ पढ़ो।
  11. अब खेलो मत, पढ़ो।
  12. सबात्र पढ़ें।
  13. तुम वहाँ जाओ।
  14. दो छात्र दौड़ें।

उत्तर :

  1. युवां मा हसतम्।
  2. यूयं धावत।
  3. नर्तक्यः नृत्यन्तु।
  4. त्वं मा हस।
  5. त्वम् अत्र आगच्छ।
  6. तत्र मा गच्छ।
  7. मा धाव।
  8. मा हस।
  9. आगच्छ, नृत्यं कुरु।
  10. पाठं पठ।
  11. अधुना मा क्रीड, पठ।
  12. सर्वे छात्राः पठन्तु।
  13. त्वं तत्र गच्छ।
  14. छात्रौ धावताम्।

अभ्यास 11

  1. जलपान कीजिये।
  2. अब देश की रक्षा करो।
  3. आप स्वयम्वर में जायें।
  4. जुआ नहीं खेलो।
  5. रक्षाबन्धन उत्सव कब हो?
  6. बिना ज्ञा प्रवेश न करो।
  7. स्वामिभक्त बनो।
  8. कक्षा में झगड़ा मत करो।
  9. ब्रज की रक्षा करो।
  10. स्वच्छ जल पियो।

उत्तर :

  1. जलपानं कुरु।
  2. अधुना देशस्य रक्षां कुरु।
  3. भवान् स्वयंवरे गच्छतु।
  4. द्यूतं मा क्रीड।
  5. रक्षाबन्धनोत्सवः कदा भवतु?
  6. आज्ञां बिना मा प्रविश।
  7. स्वामिभक्तः भव।
  8. कक्षायां कलहं मा कुरु।
  9. व्रजस्य रक्षां कुरु।
  10. स्वच्छं जलं पिब।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

उदाहरण – विधिलिङ् लकार (प्रेरणार्थक-चाहिए के अर्थ में)
स्था (तिष्ठ) = ठहरना का प्रयोग

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम् 9

नोट – विधिलिङ् लकार में कर्ता में कर्म कारक जैसा चिह्न लगा रहता है। जैसे – उसे, उन दोनों को, तुमको आदि। किन्तु ये कार्य के करने वाले (कर्ता) हैं। अत: इनमें प्रथमा विभक्ति (कर्ता कारक) का ही प्रयोग किया जाता है।

अभ्यास 12

  1. उसे पढ़ना चाहिए।
  2. तुम्हें सत्य बोलना चाहिए।
  3. राजेश को खेलना चाहिए।
  4. उसे लज्जा नहीं करनी चाहिए।
  5. तुमको खाना चाहिए।
  6. उसे देश की रक्षा करनी चाहिए।
  7. तुमको चित्र देखना चाहिए।
  8. छात्रों को पढ़ना चाहिए।
  9. मुझे पत्र लिखना चाहिए।
  10. विमला को हँसना चाहिए।
  11. हम दोनों को गाना चाहिए।
  12. तुम्हें जाना चाहिए।

उत्तर :

  1. सः पठेत्।
  2. त्वं सत्यं वदेः।
  3. राजेश क्रीडेत्
  4. सः लज्जा न कुर्यात्।
  5. त्वं भक्षयः।
  6. सः देशस्य रक्षां कुर्यात्।
  7. त्वं चित्रं पश्येः
  8. छात्राः पठेयुः।
  9. अहं पत्रं लिखेयम्।
  10. विमला हसेत्।
  11. आवां गायेव।
  12. त्वं गच्छेः।

JAC Class 9 Sanskrit रचना अनुवाद-प्रकरणम्

अभ्यास 13

  1. हमें देश की रक्षा करनी चाहिए।
  2. उसे घर जाना चाहिए।
  3. उसे सदैव सत्य बोलना चाहिए।
  4. उसे हरिजनों का उद्धार करना चाहिए।
  5. छात्रों को हमेशा खेलना चाहिए।
  6. विद्वान् की पूजा करनी चाहिए।
  7. तुम्हें कक्षा में पढ़ना चाहिए।
  8. तुम्हें डरना नहीं चाहिए।
  9. मुझे कलह नहीं करनी चाहिए।
  10. हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए।

उत्तर :

  1. वयं देशस्य रक्षां कुर्याम्।
  2. सः गृहं गच्छेत्।
  3. सः सदैव सत्यं वदेत्।
  4. सः हरिजनानाम् उद्धार कुर्यात्।
  5. छात्राः सदैव क्रीडेयुः।
  6. प्राज्ञस्य पूजां कुर्यात्।
  7. त्वं कक्षायां पठेः।
  8. त्वं भयं न कुर्याः।
  9. अहं कलहं न कुर्याम्।
  10. वयं असत्यं न वदेम।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Vyakaran शब्द और पद में अंतर Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 10 Hindi Vyakaran शब्द और पद में अंतर

  • शब्द भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है।
  • शब्द को व्याकरण के नियमों के अनुसार किसी वाक्य में प्रयोग करने पर वह पद बन जाता है।
  • एक से अधिक पद जुड़कर एक ही व्याकरणिक इकाई का काम करने पर पदबंध कहलाते हैं।
  • शब्द का वर्गीकरण

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर 1

प्रश्न 1.
शब्द किसे कहते हैं ?
उत्तर :
शब्द वर्गों के मेल से बनाइ गई भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। जैसे-राम, रावण, मारना।

प्रश्न 2.
शब्द का प्रत्यक्ष रूप किसे कहते हैं?
उत्तर :
भाषा में जब शब्द कर्ता में बिना परसर्ग के आता है तो वह अपने मूल रूप में आता है। इसे शब्द का प्रत्यक्ष रूप कहते हैं। जैसे-वह, लड़का, मैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर

प्रश्न 3.
कोशीय शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर :
जिस शब्द का अर्थ शब्दकोश से प्राप्त हो जाए उसे कोशीय शब्द कहते हैं। जैसे-मनुष्य, घोड़ा।

प्रश्न 4.
व्याकरणिक शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर :
व्याकरणिक शब्द उस शब्द को कहते हैं जो व्याकरणिक कार्य करता है। जैसे-‘मुझसे आजकल विद्यालय नहीं जाया जाता।’ इस वाक्य में जाता शब्द व्याकरणिक शब्द है।

प्रश्न 5.
पद किसे कहते हैं ?
अथवा
शब्द वाक्य में प्रयुक्त होने पर क्या कहलाता है ?
उत्तर :
जब किसी शब्द को व्याकरण के नियमों के अनुसार किसी वाक्य में प्रयोग किया जाता है तब वह पद बन जाता है। जैसे-राम, रावण, मारा शब्द है। इनमें विभक्तियों, परसर्ग, प्रत्यय आदि को जोड़ कर पद बन जाता है। जैसे-राम ने रावण को मारः।

प्रश्न 6.
पद के कितने और कौन-कौन से भेद हैं?
उत्तर :
पद के पाँच भेद संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय हैं।

प्रश्न 7.
शब्द और पद में क्या अंतर है?
उत्तर :
शब्द भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है और वाक्य के बाहर रहता है, परंतु जब शब्द वाक्य के अंग के रूप में प्रयोग किया जाता है तो इसे पद कहते हैं। जैसे-‘लड़का, मैदान, खेलना’ शब्द हैं। इन शब्दों से यह वाक्य बनाने पर-‘लड़के मैदान में खेलते हैं’-ये पद बन जाते हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर

प्रश्न 8.
पदबंध किसे कहते हैं?
उत्तर :
पदबंध का शाब्दिक अर्थ है-पदों में बँधा हुआ। जब एक से अधिक पद मिलकर एक इकाई के रूप में व्याकरणिक कार्य करते हैं तो वे पदबंध कहलाते हैं। जैसे चिडिया सोने के पिंजरे में बंद है। इस वाक्य में सोने का पिंजरा पदबंध है। पदबंध वाक्यांश मात्र होते हैं, काव्य नहीं। पदबंध में एक से अधिक पदों का योग होता है और ये पद आपस में जुड़े होते हैं।

प्रश्न 9.
शब्द के सभी भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शब्द और शब्दावली वर्गीकरण निम्नलिखित दृष्टियों से किया जा सकता है –
(क) अर्थ की दृष्टि से वर्गीकरण –
अर्थ की दृष्टि से निम्नलिखित चार भेद किए जाते हैं –
(i) एकार्थी – जिन शब्दों का प्रयोग केवल एक अर्थ में ही होता है, उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं। जैसे
पुस्तक, पेड़, घर, घोड़ा, पत्थर आदि।
(ii) अनेकार्थी – जो शब्द एक से अधिक अर्थ बताने में समर्थ हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं। इन शब्दों का प्रयोग जिस संदर्भ में किया जाएगा,
ये उसी के अनुसार अर्थ देंगे। जैसे –
काल – समय, मृत्यु।
अर्क – सूर्य, आक का पौधा।
(iii) पर्यायवाची या समानार्थी – जिन शब्दों के अर्थों में समानता हो, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं।
जैसे – कमल-जलज, नीरज, अंबुज, सरोज।
आदमी – नर, मनुष्य, मानव।
(iv) विपरीतार्थी – विपरीत अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों को विपरीतार्थी अथवा विलोम शब्द कहते हैं। जैसे
आशा-निराशा
अँधेरा – उजाला हँसना-रोना
गुण – दोष

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर

(ख) इतिहास की दृष्टि से वर्गीकरण –

इतिहास की दृष्टि से शब्दों के पाँच भेद हैं –
(i) तत्सम – तत्सम शब्द का अर्थ है – तत् (उसके) + सम (समान) अर्थात् उसके समान जो शब्द संस्कृत के मूल रूपों के समान ही हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तत्सम कहते हैं। इनका प्रयोग हिंदी में भी उसी रूप में किया जाता है, जिस रूप में संस्कृत में किया जाता है। जैसे –
नेत्र, जल, पवन, सूर्य, आत्मा, माता, भवन, नयन, आशा, सर्प, पुत्र, हास, कार्य, यदि आदि।

(ii) तद्भव – तद्भव शब्द का अर्थ है तत् (उससे) + भव (पैदा हुआ) जो शब्द संस्कृत के मूल रूपों से बिगड़ कर हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं, जैसे-दुध से दुग्ध, घोटक से घोड़ा, आम्र से आम, अंधे से अंधा, कर्म से काम, माता से माँ, सर्प से साँप, सप्त से सात, रत्न से रतन, भक्त से भगत।

(iii) देशज – देशज का अर्थ होता है देश + ज अर्थात् देश में जन्मा। लोकभाषाओं से आए हुए शब्द देशज कहलाते हैं। कदाचित् ये शब्द बोलचाल से बने हैं।
जैसे – पेड़, खिड़की, अटकल, तेंदुआ, लोटा, डिबिया, जूता, खोट, फुनगी आदि।

(iv) विदेशज – जो शब्द विदेशी भाषाओं से लिए गए हैं, उन्हें विदेशज कहते हैं।
अंग्रेज़ी – डॉक्टर, नर्स, स्टेशन, प्लेटफ़ॉर्म, पेंसिल, बटन, फ़ीस, मोटर, कॉलेज, ट्रेन, ट्रक, कार, बस, स्कूटर, फ्रीज आदि।
फ़ारसी – दुकान, ईमान, ज़हर, किशमिश, उम्मीद, फ़र्श, जहाज, कागज, ज़मींदार, बीमार, सब्जी, दीवार आदि।
अरबी – कीमत, फ़ैसला, कायदा, तरफ़, नहर, कसरत, नशा, वकील, वज़न, कानून, तकदीर, खराब, कत्ल, फौज़, नज़र, खत आदि।
तुर्की – तगमा, तोप, लाश, चाकू, उर्दू, कैंची, बेग़म, गलीचा, बावर्ची, बहादुर, चम्मच, कैंची, कुली, कुरता आदि।
पुर्तगाली – तंबाकू, पेड़ा, गिरिजा, कमीज, तौलिया, बालटी, मेज़, कमरा, अलमारी, संतरा, साबुन, चाबी, आलपीन, कप्तान आदि।
फ्रांसीसी – कारतूस, कूपन, अंग्रेज़।

(v) संकर-दो भाषाओं के शब्दों के मिश्रण से बने शब्द संकर शब्द कहलाते हैं।
यथा – जाँचकर्ता-जाँच (हिंदी) कर्ता (संस्कृत)
सज़ाप्राप्त – सज़ा (फ़ारसी) प्राप्त (संस्कृत)
रेलगाड़ी – रेल (अंग्रेज़ी) गाड़ी (हिंदी) उद्गम के आधार पर शब्दों की एक और कोटि हिंदी शब्दावली में पाई जाती है जिसे अनुकरणात्मक या ध्वन्यात्मक कहते हैं।
यथा – हिनहिनाना, चहचहाना, खड़खड़ाना, भिनभिनाना आदि।

(ग) रचना की दृष्टि से वर्गीकरण

प्रयोग के आधार पर शब्दों के भेद तीन प्रकार के होते हैं –
(i) मूल अथवा रूढ़ शब्द – जो शब्द किसी अन्य शब्द के संयोग से नहीं बनते हैं और अपने आप में पूर्ण होते हैं उन्हें रूढ़ अथवा मूल शब्द कहते हैं। ये शब्द किसी विशेष अर्थ के लिए रूढ़ या प्रसिद्ध हो जाते हैं। इनके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते।
जैसे – घड़ा, घोड़ा, काला, जल, कमल, कपड़ा, घास, दिन, घर, किताब, मुंह।

(ii) यौगिक – दो शब्दों के संयोग से जो सार्थक शब्द बनते हैं, उन्हें यौगिक कहते हैं। दूसरे शब्दों में यौगिक शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें रूढ़ शब्द के अतिरिक्त प्रत्यय, उपसर्ग या एक अन्य रूढ़ शब्द अवश्य होता है अर्थात ये दो अंशों को जोड़ने से बनते हैं, जिनमें एक शब्द आवश्यक रूप से रूढ़ होता है। जैसे-नमकीन-इसमें नमक रूढ़ तथा ईन प्रत्यय है।
जैसे – गतिमान, विचारवान, पाठशाला, विद्यालय, प्रधानमंत्री, गाड़ीवान, पानवाला, घुड़सवार, बैलगाड़ी, स्नानघर, अनपढ़, बदचलन ।

(iii) योगरूढ़ – दो शब्दों के योग से बनने पर भी किसी एक निश्चित अर्थ में रूढ़ हो जाने वाले शब्द योगरूढ़ कहलाते हैं।
जैसे – चारपाई, तिपाई, जलज (जल + ज = कमल), दशानन (दस + आनन = रावण), जलद (जल + द= बादल), जलधि (जल + धि = समुद्र)।

(घ) रूपांतरण की दृष्टि से शब्दों के भेद –

(i) विकारी शब्द – जिन शब्दों के रूप में विकार (परिवर्तन) उत्पन्न हो जाता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया-ये चार प्रकार के शब्द विकारी कहलाते हैं। इनमें लिंग, वचन एवं कारक आदि के कारण विकारी उत्पन्न हो जाता है।

(ii) अविकारी शब्द-जिन शब्दों के रूप में विकार (परिवर्तन) उत्पन्न नहीं होता और जो अपने मूल में बने रहते हैं, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं। अविकारी शब्द को अव्यय भी कहा जाता है। क्रिया-विशेषण, समुच्चयबोधक, संबंधसूचक तथा विस्मयादिबोधक-ये चार प्रकार के शब्द अविकारी कहलाते हैं। क्रिया-विशेषण इधर समुच्चयबोधक और संबंधसूचक के ऊपर विस्मयादिबोधक ओह।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण शब्द और पद में अंतर

(ङ) प्रयोग की दृष्टि से –

प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण निम्नलिखित दो वर्गों में किया जाता है –
(i) सामान्य शब्द – आम जन-जीवन में प्रयोग होने वाले शब्द सामान्य शब्द कहलाते हैं; जैसे-दाल, भात, खाट, लोटा, सुबह, हाथ, पाँव, घर, मैदान।
(ii) पारिभाषिक शब्द – जो शब्द ज्ञान-विज्ञान अथवा विभिन्न व्यवसायों में विशेष अर्थों में प्रयोग किए जाते हैं, पारिभाषिक शब्द कहलाते हैं। इन्हें
तकनीकी शब्द भी कहते हैं. जैसे-संज्ञा. सर्वनाम, रसायन, समाजशास्त्र, अधीक्षक।

प्रश्न 10.
शब्द पद कब बन जाता है? उदाहरण देकर तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
उत्तर :
शब्द को जब व्याकरण के नियमों के अनुसार वाक्य में प्रयोग करते हैं तब वह पद बन जाता है, जैसे-राम, रावण, मारा शब्द हैं। इनसे बना वाक्य-राम ने रावण को मारा। पद है।

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

Jharkhand Board JAC Class 9 Sanskrit Solutions रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम् Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 9th Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

प्रदत्त संकेतानुसारं अनुच्छेदलेखनम् कुरुत – (दिये गए संकेतों के अनुसार अनुच्छेद लेखन करिए-)

1. महाकविः कालिदासः
[संकेतसूची-महाकविः कालिदासः श्रेष्ठतमः कविः, सप्त-कृतयः, प्रसिद्धतमं नाटक, उपमा-प्रयोगः, वैदर्भी रीतिः, महाकाव्यद्वयं, खण्डकाव्यद्वयं, कलापक्ष:, भावपक्षः, विश्वसाहित्ये स्थानम्।]
उत्तरम् :
महाकविः कालिदासः संस्कृत-साहित्यस्य श्रेष्ठतम कविः अस्ति। तस्य स्थानं विश्वस्य उत्कृष्टेषु कविषु गण्यते। महाकवि कालिदासस्य प्रतिभा सर्वतोमुखी आसीत्। एषः महाकविः कदा कुत्र च अभवत् इत्यपि न निश्चितम्। श्रत्यानुसारेण कालिदासः महाराज्ञः विक्रमादित्यस्य नवरत्नेषु अन्यतमः आसीत्। तेन महाकाव्यद्वयं लिखितम् कुमारसम्भवम्, रघुवंशम् च। खण्डकाव्यद्वयं लिखितम्-ऋतु संहारम्, मेघदूतम् च। नाटक त्रयमपि लिखितम् मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम् अभिज्ञान शाकुन्तलम् च।

उपमाप्रयोगे प्रकृतिचित्रणे च कालिदासः निपुणः अस्ति। अभिज्ञान शाकुन्तलं नाटकं कालिदासस्य सर्वश्रेष्ठः कृति अस्ति। अस्मिन् नाटके कलापक्षः भावपक्षश्च नैपुण्येन प्रस्तुतं कुर्वते। अतः अभिज्ञान शाकुन्तलं नाटकास्य विश्वसाहित्ये महत्वपूर्ण स्थानं स्वीकृतः। कालिदास्य काव्येषु वैदर्भीरीतिः प्रसादगुणश्च स्तः। कथितमपि वैदर्भीरीतिसंदर्भ कालिदासो विशिष्यते। तस्य शैली लालित्ययुक्ता परिष्कृता च अस्ति। कालिदासस्य कवितायां क्लिष्टता कृत्रिमता च न स्तः। तस्य भाषा समास रहिता अथवा अल्प समास युक्ता भवति।

(महाकवि कालिदास संस्कृत साहित्य के श्रेष्ठतम कवि हैं। उनका स्थान विश्व के उत्कृष्ट कवियों में गिना जाता है। महाकवि कालीदास की प्रतिभा सर्वतोमुखी थी। ये महाकवि कब कहाँ हुए-यह भी निश्चित नहीं है लेकिन भारतीय जनश्रुति के अनुसार कलिदास महाराज विक्रमादित्य के नवरत्नों में अन्यतम थे। अब कालिदास की सात कृतियाँ उपलब्ध हैं। उन्होंने दो महाकाव्य-कुमारसम्भवम् और रघुवंशम् लिखे। दो खण्डकाव्य-ऋतुसंहार और मेघदूत लिखे। तीन नाटक भी लिखे-मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम् और अभिज्ञान शाकुलन्तलम्। अभिज्ञान शाकुन्तलम् नाटक कालिदास की सर्वश्रेष्ठ कृति है।

इस नाटक में कलापक्ष तथा भावपक्ष निपुणता से प्रस्तुत हैं। अत: अभिज्ञान शाकुन्तलम् नाटक का विश्व साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान स्वीकार किया गया है। उपमा के प्रयोग और प्रकृति के चित्रण में कालिदास निपुण हैं। कालिदास के काव्यों में वैदर्भी रीति और प्रसाद गुण हैं। कहा भी है-वैदर्भी रीति के संदर्भ में कालिदास विशिष्ट हैं। उनकी शैली लालित्ययुक्त और परिष्कृत है। कालिदास की कविता में क्लिष्टता और कृत्रिमता नहीं हैं। उनकी भाषा समासरहित अथवा अल्प समासयुक्त होती है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

2. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
[संकेतसूची – जगति, जन्मभूमिश्च, महत्वपूर्णे, सर्वे मानवाः, स्नेहं भवति, स्वजन्मभूमि, स्मरत्येव, स्वाभाविकोऽनुरागः, मातृभूमिः भारत, ‘दुर्लभं भारते जन्म’, रामकृष्णादयः, प्रकृते: मधुरतराणि।]
उत्तरम् :
एतस्मिन् जगति जननी जन्मभूमिश्च एव सर्वोत्तमे भवतः। बालकस्य कृते एते एव अतीव महत्वपूर्णे भवतः। सर्वे मानवाः जानन्त्येव यत् मातरि मातृभूमौ च यादृशं स्नेहं भवति न तादृशमन्यस्मिन् कस्मिन्नपि वस्तुनि। यत्र कुत्रापि गत्वा नानाविधानि सुखानि च लब्ध्वा अपि मानवः स्वजन्मभूमि स्मरत्येव। कथं न स्मरिष्यति, भवति हि स्वाभाविको स्नेहः तस्य। सर्वस्यापि स्वदेशे स्वाभाविकोऽनुराग: जायते। अस्माकं मातृभूमिः भारत देशोऽस्ति। देवाः अपि अत्र जन्म कांक्षन्ते। ‘दुर्लभं भारते जन्म’ इत्यपि कथयन्ति। रामकृष्णादयः परमेश्वराः अत्रैव जन्म लेभिरे। अत्र सर्वत्र प्रकृतेः मधुरतराणि दृश्यानि सन्ति।

(इस संसार में माता और मातृभूमि ही सबसे बढ़कर होती हैं। बालक के लिए ये दोनों ही अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं। सभी लोग जानते हैं कि माता और मातृभूमि पर जैसा स्नेह होता है, वैसा किसी भी अन्य वस्तु पर नहीं। किसी भी स्थान पर जाकर भी अनेक प्रकार के सुख प्राप्त करके भी मनुष्य अपनी जन्मभूमि का स्मरण करता ही है। क्यों नहीं स्मरण करेगा उसका मातृभूमि पर स्वाभाविक स्नेह जो होता है। सभी का अपने देश पर स्वाभाविक अनुराग होता है। भारतवर्ष हमारी मातृभूमि है। देवता भी यहां पर जन्म की अभिलाषा रखते हैं। ‘भारतवर्ष में जन्म दुर्लभ है’ ऐसा भी कहते हैं। राम-कृष्ण आदि परमेश्वर के अवतार यहीं पर हुए थे। यहां सर्वत्र प्रकृति के मनोहर दृश्य हैं।)

3. यथादृष्टिः तथा सृष्टिः
[संकेतसूची-गुणवन्तं, अहङ्कारी, गुरुः द्रोणाचार्यः, अन्विष्य, आहूय, भ्रान्त्वा, आदिष्टवान्, आनय, मत्तः युधिष्ठिरांय, गुणहीनं।]
उत्तरम् :
एकदा गुरुः द्रोणाचार्य: दुर्योधनम् आय आदिशत्- “वत्स! नगरे सर्वाधिकं गुणवन्तं जनम् अन्विष्य आन्य।’ दुर्योधनः अहङ्कारी आसीत्। सः सर्वत्र भ्रान्त्वा आगच्छत् अवदत् च-“भगवन् ! मत्तः गुणवत्तरः कोऽपि नास्ति इति।” आचार्यः पुनः युधिष्ठिरम् आहूय आदिष्टवान्-“वत्स! नगरे सर्वाधिक गुणहीनं जनम् अन्विष्य आनय इति।” युधिष्ठिरः आगत्य अवदत्-“प्रभो! मत्तः गुणहीनः नगरे कोऽपि नास्ति।” आचार्यः युधिष्ठिराय आशिषम् अयच्छत् “प्रियपुत्र! तव कीर्तिः कदापि न नंक्ष्यति। नूनं सत्यमेव उच्यते – यथा दृष्टिः तथा सृष्टिः। (एक दिन गुरु द्रोणाचार्य ने दुर्योधन को बुलाकर आदेश दिया-“पुत्र! नगर में सबसे अधिक गुणवान मनुष्य को ढूँढ़कर लाओ।”दुर्योधन अहंकारी था। वह सब जगह घूमकर आया और बोला-“भगवन् ! मुझसे अधिक गुणवान् कोई नहीं है।” आचार्य ने फिर युधिष्ठिर को बुलाकर आदेश दिया-“पुत्र! नगर में सबसे अधिक गुणहीन व्यक्ति ढूँढ़कर लाओ।” युधिष्ठिर आकर बोला-“प्रभो! मुझसे अधिक गुणहीन नगर में कोई नहीं है।” आचार्य ने युधिष्ठिर को आशीर्वाद दिया – “प्रियपुत्र! तुम्हारी कीर्ति कभी भी नष्ट नहीं होगी।” निश्चित रूप से सत्य ही कहा जाता है-जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।)

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4. अम्लानि द्राक्षाफलानि।
[सकतसची जम्बक अतिशय कः, अतिश्रान्त, अन्वेषणे, द्राक्षाफलानि, लतायाम्, विशालवृक्षे, लम्बितानि, प्रायतत् उत्प्लुत्य: द्राक्षास्तवकम्, अम्लानि, मह्यं।]
उत्तरम् :
एकस्मिन् उद्याने विशालवृक्षे द्राक्षालता आरूढा आसीत्। एकः जम्बुक: भोजनस्य अन्वेषणे इतस्ततः अभ्रमत्। लतायां द्राक्षाफलानि उच्चतरे स्थाने लम्बितानि आसन्। शृगालः अनेकशः प्रायतत परञ्च सर्वं व्यर्थमेव अभवत्। पुनः पुनः उत्प्लुत्य अपि सः द्राक्षाफलानि न प्राप्नोत्। सः अतिश्रान्तः अभवत्। निराशः शृगालः द्राक्षास्तवकम् अप्राप्यं मत्वा लानि अनिन्दत्। सः अवदत्- “अम्लानि सन्ति द्राक्षाफलानि, नैतानि मह्य रोचन्ते।” इत्युक्त्वा शृगाल: वनम् अगच्छत्।

(एक बाग में एक विशाल वृक्ष पर अंगूर की बेल चढ़ी हुई थी। एक गीदड़ भोजन की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था। बेल में अंगूर ऊँचे स्थान पर लटक रहे थे। गीदड़ ने अनेक बार प्रयत्न किया, परन्तु सब व्यर्थ रहा। बार-बार उछलकर भी वह अंगूर न पा सका। वह बहुत थक गया। निराश गीदड़ अंगूर के गुच्छे को अप्राप्य मानकर अंगूरों की निन्दा करने लगा। वह बोला-“अंगूर खट्टे हैं, मुझे ये अच्छे नहीं लगते।” यह कहकर गीदड़ वन में चला गया।)

5. चतुरः काकः
[सङ्केत सूची-घटम्, अन्वेषणे, पिपासितः, तत्र, अल्पम्, अपश्यत्, उपरि, उपायम्, इतस्ततः, अक्षिपत् पाषाणखण्डानि, पीत्वा।]
उत्तरम् :
एकः काकः पिपासितः आसीत्। जलस्य अन्वेषणे सः इतस्ततः अभ्रमत्। सः दूरे एकं घटम् अपश्यत्। काकः तत्र अगच्छत्। सः घटस्य उपरि अतिष्ठत् घटे च अपश्यत्। घटे अल्पम् जलम् आसीत्। सः एकम् उपायम् अचिन्तयत् पाषाणखण्डानि च आनयत्। तानि पाषाणखण्डानि स: घटे अक्षिपत्। जलम् उपरि आगच्छत्। जलं पीत्वा सन्तुष्टः स उड्डयन् अचिन्तयत् च-“उद्यमेन हि कार्याणि सिद्धयन्ति।”

(एक कौआ प्यासा था। जल की खोज में वह इधर-उधर घूम रहा था। उसने दूर एक घड़ा देखा। कौआ वहाँ गया। वह घड़े के ऊपर बैठ गया और घड़े में देखा। घड़े में थोड़ा पानी था। उसने एक उपाय सोचा और पत्थर के टुकड़े लाया। उसने उन पत्थर के टुकड़ों को घड़े में डाला। पानी ऊपर आ गया। पानी पीकर वह सन्तुष्ट हुआ और उड़ता हुआ सोचने लगा-“परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं।”)

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6. देवः सर्वत्र वर्तते
[सङ्केत सूची – एक गुरुकुलम्। तत्र एकः गुरुः। गुरुः महापण्डितः। एकः बालकः आगच्छति, वदति-‘अहं भवतः। शिष्यः भवितम इच्छामि।’ गुरुः वदति-तदर्थम एका परीक्षा अस्ति। शिष्यः वदति -भवत्। गरुः प्रच्छति-देवः कुत्र पपास। अस्ति? शिष्य वदति-देवः सर्वत्र अस्ति। सः कुत्र नास्ति इति भवान् एव वदतु’ इति। गुरुः सन्तुष्टः भवति। बालकः।। तस्य शिष्यः भवति।]
उत्तरम् :
वृक्षैः आच्छादितस्य नागपर्वतस्य सुरम्यायाम् उपत्यकायाम् एक पवित्रं सुविशाल च। गुरुकुलमस्ति श्रीउपेन्द्रसरस्वतीमहोदयः तत्र गुरुः। तस्य पाण्डित्यस्य प्रसिद्धिः सुदूरप्रदेशेषु अपि विश्रुता। आश्रमस्थितानां बालकानां योगक्षेमं चिन्तयति स्म स गुरुः। एकदा एकः बालकः श्री उपेन्द्रसरस्वतीम् आगत्य वदति-‘अहं भवतः शिष्यः भवितुम् इच्छामि।’ गुरुः सूक्ष्मदृष्ट्या आपादमस्तकं तं बालकं पश्यति वदति च-‘तदर्थम् एका परीक्षा अस्ति’। बालकः वदति-‘अहं परीक्षायै सन्नद्धो अस्मि, भवत् सा परीक्षा।’ गुरुः पृच्छति-‘देवः कुत्र अस्ति ?’ बालकः वदति-‘देवः सर्वत्र अस्ति’। “सः कुत्र नास्ति इति भवान् एव वदतु।” गुरुः उत्तरेण सन्तुष्टः भवति। सः बालकं शिष्यं स्वीकरोति। बालकः तस्य शिष्यः भवति। शिक्षाप्राप्त्यनन्तरं सः विश्रुतः न्यायाप्रियः न्यायाधीशः भवति।

(वृक्षों से ढके हुए नागपर्वत की सुरम्य उपत्यका में एक पवित्र और विशाल गुरुकुल है। श्री उपेन्द्र सरस्वती महोदय वहाँ गुरु हैं। उनके पाण्डित्य की प्रसिद्धि सुदूर प्रदेश में सुनी जाती थी। आश्रम में स्थित बालकों के योग-क्षेम को ही वे गुरुजी सोचते रहते थे। एक दिन एक बालक श्री उपेन्द्र सरस्वती के पास आकर कहता है-“मैं आपका शिष्य होना चाहता हूँ।” गुरु सूक्ष्म दृष्टि से पैरों से सिर तक बालक को देखता है और कहता है-“उसके वास्ते एक परीक्षा है।” बालक कहता है-“मैं परीक्षा के लिए तैयार हूँ। होने दो वह परीक्षा।” गुरु पूछता है-‘ईश्वर कहाँ है ?’ बालक कहता है-“ईश्वर सब जगह है। वह कहाँ नहीं है। यह बात आप ही बताएँ।” गुरुजी उत्तर से सन्तुष्ट हो जाते हैं। वे बालक को शिष्य स्वीकार कर लेते हैं। बालक उनका शिष्य हो जाता है। शिक्षा प्राप्ति के बाद वह प्रसिद्ध न्यायप्रिय न्यायाधीश होता है।)

7. सन्तोषः परमं धनम्
[सहतसूची-एक: धनिकः। अपारम् ऐश्वर्यम्। किन्तु सुख नास्ति। निर्धनस्य गृहे धनं नास्ति। प्रतिदिनं भोजनं नास्ति। नास्ता। एकदा निर्धनः सन्तोषेण गायति। धनिकः पृच्छति-धनं नास्ति भोजनं नास्ति तथापि सन्तोषः अस्ति। एतत किमर्थम्। निर्धनः वदति-“एषः वसन्तकालः सर्वत्र सौन्दर्यम्। अतः सन्तोषेण गायामि। भवान् यत् नास्ति तत् पश्यति। अतः। सर्वदा चिन्तां करोति इति।”]
उत्तरम् :
राजनगरे एक धनिकः प्रतिवसित स्म। तस्य धनिकस्य सुविशालं शोभनं गृहम् आसीत्। तस्य अपारम् ऐश्वर्यम् आसीत्। गृहे व्यापारे च कापि न्यूनता नासीत्। तथापि सः धनिकः सुखी नासीत्। सः सर्वदा चिन्तितः अभवत् तस्य व्यापारस्य उत्तरोत्तर विवर्धनाय। तस्य गृहस्य पार्वे एव एकस्य निर्धनस्य कुटीरम् आसीत्, तदपि जीर्णम् आसीत्, गृहोपकरणानि अपि न सन्ति एव। निर्धनस्य धनमपि नासीत्। प्रतिदिनं तेन भोजनमपि न लभ्यते स्म। एकदा निर्धनेन कुत्रापि भोजनं न लब्धं। गृहं प्रतिनिवृत्य सः कुटीरस्य अग्रे उपविष्टः।

प्रकृतिसौन्दर्य, पक्षिशावकान्, हरित्पर्णानि पुष्पाणि च वीक्ष्य तेन गानम् आरब्धम्। तद्गानं श्रुत्वा धनिकः अपि तत्र आयातः। किञ्चिद् विचिन्त्य सः धनिकः तं पृष्टवान्-‘किं भोजनं लब्धमद्य।’ निर्धनेन कथितम्-‘भोजनं तु न लब्धमेव। किन्तु तेन किम्, कदाचित् भोजनं न लभ्यते अपि।’ धनिकः आश्चर्यान्वितः जातः। तेन कथितम्-‘भवतः धनं नास्ति भोजनं नास्ति तथापि सन्तोषः अस्ति। मम पार्वे धनम् अस्ति। ऐश्वर्यम् अस्ति तथापि अहं सुखं न लभे। एतत् किमर्थम्? इति।’

तदा निर्धनेन उक्तम्-“महोदय! एषः वसन्तकालः, सर्वत्र सौन्दर्यम् अस्ति। अहं तत् पश्यामि गायामि च। यत् अस्ति तत् अहं पश्यामि। यद् लभ्यते तेनैव सन्तोष अनुभवामि। भवान् तु यत् नास्ति तस्य चिन्तां करोति। सर्वदा यत् न लब्धं तस्य विषये चिन्तयति, अप्राप्य च तं सदा दुःखितो भवति। यद् भवत्सन्निधे अस्ति तत् न पश्यति भवान्, इति दुःखस्य कारणम्।”

(राजनगर में एक धनवान रहता था। उस धनवान का विशाल सुन्दर घर था। उसके पास अपार ऐश्वर्य था। घर में और व्यापार में कोई भी कमी नहीं थी। फिर भी वह धनवान सुखी नहीं था। वह हमेशा चिन्तित रहता अपने उसके व्यापार को निरन्तर बढ़ाने के लिए। उसके घर के पास ही एक गरीब की कटिया थी। वह भी जीर्ण-शीर्ण उपकरण भी नहीं थे। निर्धन के घर में धन भी नहीं था।

प्रत्येक दिन उसे भोजन भी नहीं मिलता था। एक दिन निर्धन को कहीं भोजन प्राप्त नहीं हुआ। घर लौटकर वह कुटिया के आगे बैठ गया। प्रकृति की सुन्दरता पक्षियों के बच्चों, हरे पत्तों और फूलों को देखकर उसने गाना आरम्भ कर दिया। उस गाने को सुनकर धनिक भी वहाँ आ गया। कुछ सोचकर उस धनवान ने उससे पूछा-‘क्या आज भोजन मिल गया ? निर्धन ने कहा- भोजन तो प्राप्त नहीं हुआ।

लेकिन उससे क्या?। कभी भोजन नहीं भी मिलता है। धनवान आश्चर्यचकित हो गया, उसने कहा-“आपके पास धन नहीं है, भोजन नहीं है फिर भी सन्तोष है। मेरे पास में धन है, ऐश्वर्य है, फिर भी मैं सुख प्राप्त नहीं करता। ऐसा क्यों है ?”

तब निर्धन ने कहा-“महोदय! यह बसन्त काल है, सर्वत्र सौन्दर्य है। मैं उसे देखता हूँ और गाता हूँ। जो है उसे मैं देखता हूँ। जो प्राप्त हो जाता है, उसी पर सन्तोष करता हूँ। आप जो नहीं है, उसकी चिन्ता करते हैं। हमेशा जो प्राप्त नहीं हुआ है, उसके विषय में सोचते हैं। उसे न पाकर दुःखी रहते हैं। जो तुम्हारे पास है उसे नहीं देखते हैं आप। यही दुःख का कारण है।”)

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8. विचित्रा गतिः कर्मणाम्
[सङ्केतसूची-भिक्षाटनं, सम्पादयति, विश्वनाथदर्शनाय, गङ्गानदी, अपहरणभया स्थापयति, शिवलिङ्ग, स्नानात् पूर्व। तटम् आगच्छति, शिवलिङ्गान्, खेदम् अनुभवति, दैवहतकस्तत्रैष।]
उत्तरम् :
एकः भिक्षुकः आसीत्। सः गृहं गृहं गत्वा प्रतिदिनं भिक्षां याचते स्म। शनैः शनैः सः अधिकं धनं सम्पादितवान्। अधुना काशी गत्वा विश्वनाथदर्शनं कर्तव्यम् इति सः चिन्तितवान्। विश्वनाथदर्शनार्थ सः काशी गच्छति। देवदर्शनात्पूर्वं सः स्नानं कर्तुं गङ्गा नदीं गच्छति। किन्तु स्नानसमये चौरः मम धनम् अपहिरष्यति इति चिन्ता आसीत् तस्य। अनन्तरः तेन एक: उपायः चिन्तितः। गङ्गातटे सिकतायां गर्तं कृत्वा तत्र तेन धनपात्रं स्थापितम्। उपरि एक सिकतानिर्मितं शिवलिंगम् अभिज्ञानाय स्थापितं च। तस्य विचार आसीत् अनेन मम धनपात्रं कोऽपि न स्पृक्ष्यति इति। सः स्नानार्थं गतवान्। तदा एव एकः अन्यः यात्रिकः तत्र आगतः।

तेन दृष्टं यत् एकः नद्यां स्नानं करोति तीरे च शिवलिङ्ग स्थापितमस्ति। सः मनसि चिन्तित्वान यत् काश्यां जनाः तटे शिवलिगं स्थाप्य स्नानार्थं गच्छन्ति इति परम्परा स्यात्। सः अपि शिवलिङ्ग स्थाप्य स्नातुं अगच्छत्। अनेनैव प्रकारेण अन्येऽपि यात्रिका: शिवलिङ्गस्थापनां अकुर्वन्। यदा भिक्षुकः स्नानं कृत्वा तटे आगतः तेन अनेकानि शिवलिङ्गानि दृष्टानि। तेन स्थापितं शिवलिङ्गं कुत्रास्ति इति अभिज्ञानम् असम्भवं जातम्। तेन अवगतं-मम धनं नष्टमिति। खेदं अनुभवन सः चिन्तितवान-“प्रायो गच्छति यत्र दैवहतकस्तत्रैव यान्त्यापदः”। अहो विचित्रा कर्मणां गतिः।

(एक भिक्षुक था। वह प्रतिदिन घर-घर जाकर भीख मांगा करता था। धीरे-धीरे उसने अधिक धन इकट्ठा कर लिया। अब काशी जाकर विश्वनाथजी के दर्शन करने चाहिए. ऐसा उसने सोचा। विश्वनाथ दर्शन के लिए वह काशी जाता है। देवदर्शन से पूर्व वह स्नान करने के लिए गंगा नदी पर जाता है। किन्तु स्नान के समय चोर मेरा धन चुरा ले जायेंगे, ऐसी उसे चिन्ता थी। बाद में उसने एक उपाय सोचा। गंगा के किनारे बालू में एक गड्ढा खोद कर वहाँ उसने धन के पात्र को रख दिया, ऊपर एक बालू से बना शिवलिंग पहचान के लिए स्थापित कर दिया।

उसका विचार था-इससे मेरे धन पात्र को कोई स्पर्श नहीं करेगा। वह स्नान के लिए चला गया। तभी एक दुसरा यात्री वहाँ आ गया। उसने देखा स्नान करता है और किनारे पर शिवलिंग स्थापित है। वह मन में सोचता है कि काशी में मनुष्य किनारे पर शिवलिंग की स्थापना करके स्नान के लिए जाते हैं। यह एक परम्परा होगी। वह भी शिवलिंग की स्थापना करके स्नान के लिए चला गया। इसी प्रकार से अन्य यात्रियों ने शिवलिंग की स्थापना की।

जब भिक्षुक स्नान कर तट पर आया तो उसने अनेकों शिवलिंग देखे। उसके द्वारा स्थापित शिवलिंग कहाँ है।’ यह पहचानना मुश्किल हो गया। उसने जान लिया-मेरा धन नष्ट हो गया। खेद का अनुभव करते हुए वह सोचने लगा-प्रायः जहाँ दुर्भाग्य जाता है, वहीं आपत्ति आ जाती है। अरे कर्मों की गति बड़ी विचित्र है।)

9. संघे शक्तिः कलौयुगे

[सङ्केतसूची-कृषकः, चत्वारः पुत्राः, कलहप्रियाः, पिता शिक्षते, न शृण्वन्तिः, यष्टिकापुञ्चं त्रोटयितुं समर्थाः, एकका नोटयन्ते, जनकः शिक्षते, स्वीकुर्वन्ति।]
उत्तरम् :
एकस्मिन् ग्रामे एकः कृषक: निवसति स्म। तस्य चत्वारः पुत्राः आसन्। तेषु परस्परं कलहं प्रवर्तते स्म। कृषकः तान् कलहं न कर्तुम् अशिक्षयत। परन्तु ते उपेक्षमाणाः न शण्वन शिक्षाम। कृषकेण एकम उपायं चिन्तितम। सः यष्टिकानाम् एकं भारमानयत्। सः तं यष्टिकापुञ्चं त्रोटयितुम् पुत्रान् आदिशत्। क्रमशः सर्वेऽयतन्तः। परञ्च न त्रोटयितुम् अशक्नुवन्। कृषकः एकैकां यष्टिकां त्रोटयितु मादिशत्। सर्वेः अनेकाः यष्टिकाः त्रोटिताः। तदा कृषको ब्रूते-“यूयं चेत् कलहं कृत्वा असंगठिताः भविष्यन्ति तर्हि अन्याः दुर्जनाः युष्मान् हनिष्यन्ति।”

(एक गाँव में एक किसान रहता था। उसके चार बेटे थे। उनमें आपस में झगड़ा रहता था। किसान ने उन्हें झगड़ा न करने की शिक्षा दी। परन्तु उन्होंने उपेक्षा करते हुए एक नहीं सुनी। किसान ने एक उपाय सोचा। वह लकड़ियों का एक भार (गट्ठर) लाया। उसने लकड़ियों के समूह (गट्ठर) को तोड़ने का आदेश दिया। क्रमशः सभी ने यत्न किया परन्तु नहीं तोड़ सके। किसान ने एक-एक लकड़ी को तोड़ने का आदेश दिया। सभी ने अनेकों लकड़ियाँ तोड़ र्दी। तब किसान ने कहा-“तुम यदि झगड़ा करके असंगठित रहोगे तो दूसरे दुर्जन तुम्हें मार देंगे।”

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10. पञ्चमः पुत्रः नास्ति
[सङ्केतसूची-काचित् वृद्धा, चत्वार गावाः, सैन्ये योजयति, सैन्याय प्रेषितवती, मृतौ, ग्रामजनाः, कथयन्ति, किमिति ( रोदनम्, देशसेवार्थं]
उत्तरम् :
बाघशूरग्रामे एका एकाकिनी वृद्धा निवसति। सा सर्वेषां प्रीतिपात्रं, श्रद्धास्पदं च। सा सर्वदैव ईदृशी एकाकिनी नासीत्। तस्याः गृहमपि पुत्रैः सन्ततिभिः पूर्णम् तेषां क्रीडाभिः परिपूर्ण च आसीत्। तस्याः चत्वारः पुत्राः आसन्। सा देशसेवायै ज्येष्ठपुत्रं सैन्ये योजितवती। भारतपाकयुद्धे शत्रू मारयन् सः वीरगति प्राप्तवान्। तदैव सा स्वद्वितीयं तृतीयं चापि पुत्रौ देशसेवार्थं सैन्ये प्रेषितवती। भारतपाकयोः द्वितीयं युद्ध आसीत् तदा तस्याः एकः पुत्रः देशस्य उत्तरक्षेत्रे अपरः पुत्रः च छम्बक्षेत्रे सीमायाम् शत्रूणां हननं कुर्वन्तौ वीरगति प्राप्तवन्तौ।

तथापि एकः पुत्रः तस्याः समीपे आसीत्। सा वीरवृद्धा तमपि चतुर्थं पुत्रं सैन्ये योजनार्थं ग्रामप्रमुखं निवेदितवती। ग्रामप्रमुखः तां एतस्मात् कार्यात् निवारयन् अकथयत्-यत् भवत्याः एषः एकः एव पुत्रः अवशिष्टः। एनम् अन्यकार्ये योजयतु इति। किन्तु तया सः पुत्रः अपि सैन्ये प्रेषितः। कारगिलयुद्धे तस्य मरणवार्ता श्रुत्वा वृद्धायाः नेत्रे अश्रुपूर्णे जाते। ग्रामग्रमुखेन कथितं यत् अधुना किमर्थं रोदनम्। पूर्वं त्वया सैन्ये पुत्रप्रेषणं न करणीयम् आसीत्। तदा अनया वृद्धया कथितं यत् पुत्रस्य मरणवार्तां श्रुत्वा न रोदिमि। पञ्चमः पुत्रः देशसेवार्थं नास्ति खलु इति रोदामि। अद्यापि एषा वृद्धा वीरभावेन सर्वासां ग्रामस्त्रीणां बालिकानां च योगक्षेमाय प्रयतते।

(बाघशूर गाँव में एक अकेली वृद्धा निवास करती है। वह सबकी प्रेमपात्र और श्रद्धास्पद है। वह हमेशा ही इस प्रकार अकेली नहीं थी। उसका घर भी उसके पुत्रों, सन्तानों से परिपूर्ण और उनकी क्रीड़ाओं से भरपूर था। उसके चार पुत्र थे। उसने देशसेवा के लिए बड़े बेटे को सेना में भेज दिया। भारत-पाक युद्ध में शत्रुओं को मारता हुआ वह वीरगति को प्राप्त हो गया। तभी उसने अपने दूसरे और तीसरे पुत्रों को देशसेवा के लिए सेना में भेज दिया। भारत-पाक में दूसरा युद्ध था तब उसका एक पुत्र देश के उत्तर क्षेत्र में और दूसरा पुत्र छम्ब क्षेत्र में सीमा पर शत्रुओं को मारते हुए वीर गति को प्राप्त हो गये। फिर भी एक पुत्र उसके पास था।

उस वीर वृद्धा ने उस चौथे पुत्र को भी सेना में भेजने के लिए गाँव के मुखिया से निवेदन किया। ग्राम-प्रमुख ने उसको इस कार्य से रोकते हुए कहा कि आपका यह एक ही पुत्र शेष रह गया है। इसको अन्य कार्य में लगाओ। परन्तु उसने उस पुत्र को भी सेना में भेज दिया। कारगिल युद्ध में उसकी मृत्यु का समाचार सुनकर वृद्धा की आँखें अश्रुपूरित हो गईं। ग्राम-प्रमुख ने कहा कि अब रुदन क्यों। पहले तुम्हें पुत्र को सेना में नहीं भेजना चाहिए था। तब इस वृद्धा ने कहा-पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर नहीं रो रही हूँ। वास्तव में पाँचवा पुत्र देशसेवा के लिए नहीं है। इसलिए रो रही हूँ। आज भी यह वृद्धा वीरता के भाव से सारी ग्रामीण स्त्रियों और बालिकाओं के योग क्षेम का प्रयत्न करती है।)

11. कर्त्तव्यनिष्ठः गोपबन्धुदासः।
[सङ्केतसूची-महती वृष्टिः, विश्रान्ति, जलावेगः, हाहाकारः, प्राणान् रक्षित गृहगमनसमये, मुसलाधाररूपेण, दृढस्वरेण,। औषधं, आपद्ग्रस्ताः, गतवान्, बहुदिनेभ्यः, अङ्के।]
उत्तरम् :
एकदा महती वृष्टिः आरब्धा। आदिनं मेघाः विश्रान्तिः नैव प्राप्तवन्तः। निरन्तर वृष्टिकारणात् जलावेगः तीव्रः आसीत्। प्रवाहकारणात्: सर्वत्र जनानां हाहाकारः आसीत्। सर्वे स्वपरिवारजनानां स्वस्य च प्राणान् रक्षितुं प्रयत्नशीला: आसन्। एकः जनः सेवायां निरतः आसीत्। रात्रौ गृहगमनसमये वरुण: रुद्रावतारं प्राप्तवान्। वृष्टि मुसलाधार रूपेण वर्षति स्म। तस्य जनस्य गृहस्य परिस्थितिः अपि गंभीरा आसीत्।

तस्य एकः पुत्रः आसीत्। बहुदिनेभ्यः रुग्णः वेदनां सोढुम् अशक्तः सः मातुः अङ्के शयितवान् आसीत्। माता पुत्रस्य दशां दृष्ट्वा रोदति। पिता अपि द्वन्द्वे आसीत्। स्वीयः रुग्णः पुत्रः अपरत्र सहस्राधिकाः जनाः कष्टे सन्ति। कर्तव्यपरायणः सः छत्रं गृहीत्वा बहिः गतवान्। गमनसमये पत्नी रुदती पृष्टवती-पुत्रं पश्यतु. अहं किं करिष्यामि ? सः दृढ़स्वरेण उक्तवान्-अहमपि किं करिष्यामि? औषधं दत्तम्। इतः परं भगवदिच्छा। अयन्त्र अपि बाला: आपदग्रस्ताः। भगवतः इच्छानुसारं भवतु-इत्युक्त्वा गतवान्। रात्रौ पुत्रः मृतः। रुदन्त्याः मातुः समीपम् आगत्य अन्ये सान्त्वनं कृतवन्तः। एतादृशः कर्तव्यनिष्ठः आसीत् श्री गोपबन्धुदासः, उत्कलमणि : ओरिस्साजनपदीयः।

(एक दिन महान् वृष्टि आरम्भ हुई। पूरे दिन मेघ रुके नहीं। निरन्तर वर्षा के कारण जल का आवेग तीव्र हो गया। प्रवाह के कारण सब जगह लोगों में हाहाकार मचा था। सभी अपने परिवार-जनों और अपने प्राणों की रक्षा करने में प्रयत्नशील थे। एक व्यक्ति सेवा में निरत था। रात में घर जाने के समय वरुण ने रुद्रावतार प्राप्त किया। वर्षा मूसलाधार होने लगी। उस व्यक्ति के घर की परिस्थिति भी गम्भीर थी। उसका एक बेटा था। बहुत दिनों से बीमार था। वह वेदना को सहन करने में असमर्थ था। माँ की गोद में सो रहा था।

माता पुत्र की दशा को देखकर रोती है। पिता भी द्वन्द्ध में था। एक ओर अपना बीमार पुत्र और दूसरी ओर हजारों से अधिक लोग कष्ट में हैं। वह कर्तव्य-परायण छाता लेकर बाहर गया। जाते समय रोती हुई पत्नी पूछ बैठी। पुत्र को देखो, मैं क्या करूंगी ? उसने दृढ़ स्वर में कहा-मैं भी क्या करूंगा ? दवाई दे दी है। इसके बाद ईश्वर इच्छा। और जगह भी बालक आपद्ग्रस्त हैं। ईश्वर की इच्छानुसार हो, ऐसा कहकर चला गया। रात में पुत्र मर गया। रोती हुई माता के समीप आकर अन्य लोग सान्वना देने लगे। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ थे श्री गोपबन्धुदास, उड़ीसा के रत्न (उत्कलमणि), उड़ीसा जनपदवासी।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

12. कालातिक्रमं त्याज्यम्
लीक सङ्केतसूची-श्रेष्ठी, कर्मचारिणः, विलम्बेन, आयाति, पृच्छति, घटिकायन्त्रस्य, कथयति, नवीनं क्रीणीष्व, नियोजमिष्यामि।
उत्तरम् :
कर्णपुर नाम्नि नगरे एकः श्रेष्ठी आसीत्। तस्य प्रभूतं धनम् आसीत्। तस्य बहवः उद्योगशालाः आसन्। तासु उद्योग शालासु अनेके कर्मचारिणः आसन्। श्रेष्ठी नियमपालने दृढ़ः आसीत्। स कणं क्षणं वा व्यर्थं न करोति। सः सर्वान् काल-पालनम् अपेक्षते स्म। तस्य कर्मचारिषु आसीत् एकः काल-पालनं प्रति उदासीनः। सः सदैव विलम्बेन कार्यालयम् आयाति। किमपि मिथ्या निमित्तं कथयति।

एकदा असौ कर्मचारी विलम्बेन कार्यालयम् आगच्छत्। श्रेष्ठी तम् आयान्तम् अपश्यत्। श्रेष्ठी तम् अपृच्छत्-कथं विलम्बेन आयाति ? किमत्र विलम्बस्य कारणम् ? कर्मचारी प्रकोष्टे बद्धं घटिकायन्त्रं पश्यति कथयति च-“अहो! मे घटिकायन्त्रं विलम्बेन चलति। अनेन कारणेन एव मम कालानिपातः। श्रेष्ठी कथयति-त्वं नवीनं घटिकायन्त्रं क्रीणीष्व अथवा अहं नवीनं कर्मचारिणं नियोजयिष्यामि। कर्मचारी क्षमाम् अयाचयत् प्रत्यश्रणोत् च यत् भविष्ये अहं कदापि विलम्बेन न आयास्यामि।

(कर्णपुर नामक नगर में एक सेठ था। उसके पास बहुत-सा धन था। उसकी बहुत-सी उद्योगशालाएँ थीं। उन उद्योगशालाओं में अनेक कर्मचारी थे। सेठ नियमपालन में दृढ़ था। वह कण और क्षण को व्यर्थ नहीं गँवाता था। वह सबसे समय पर आने की अपेक्षा करता था। उन कर्मचारियों में एक समय-पालन के प्रति उदासीन था। वह सदैव देर से आता है और कोई भी मिथ्या बहाना बना देता है।

एक दिन वह कर्मचारी विलम्ब से कार्यालय आया। सेठ ने उसे आते हुए देख लिया। सेठ ने उससे पूछा-‘देर से कैसे आ रहे हो ? देर का क्या कारण है? कर्मचारी कलाई में बँधी घड़ी को देखता है और कहता है-अरे, मेरी घड़ी तो विलम्ब से (लेट) चल रही है। इसी कारण से विलम्ब हो गया है। सेठ कहता है-तुम नयी घड़ी खरीद लो अथवा मैं नया कर्मचारी नियुक्त कर लूँगा। कर्मचारी ने क्षमा-याचना कर ली और वायदा किया कि भविष्य में मैं देर से नहीं आऊँगा।

13. गुप्तधनस्य रहस्यम्
[सङ्केतसूची-मृत्युशय्यायां, तस्य पुत्राः, कलहशीलाः, वृद्धः, गुप्तं धनमिति, प्राप्नोति, क्षेत्रेषु, खननं कुर्वन्ति, धनं न प्राप्तम्, बीजानि वन्ति, वृष्टिः समीचीना। प्रभूतं धान्यं, गुप्तधनस्य।]
उत्तरम् :
रामपुर ग्रामे एकः कृषक: निवसति स्म। सः अतिजीर्णः आसीत् रुग्णश्च। तस्य चत्वारः पुत्राः आसन्। ते कलहशीलाः निरुद्योगिनः च आसन्। क्षेत्रापि अकृष्टानि अनुप्तबीजानि च तिष्ठन्ति। कृषक: तान् मुहुर्मुहुः कथयति कृषि . कर्मणि निरताय। परञ्च ते: तु कलहम् एव कुर्वन्ति। एकदा वृद्धः कृषक: मरणासन्नः भवति। सः स्वात्मजान् आहूय कथयति-पुत्राः इदानीम् अहं प्राणान् त्युक्तमपि इच्छामि। न मे सन्निधम् किञ्चिद् धनम्। यत् किञ्चिद् धनम् अस्ति तत्तु मे क्षेत्रेषु निखातम् अस्ति। एवं त्रुरुन्नेव असौ वृद्धः दिवंगतः।

पुत्राः अन्तिमसंस्कारं श्राद्धम् च विधाय अचिन्तयन्-क्षेत्रेषु धनमस्ति अतः तानि खनितव्यानि। चत्वारः एव भ्रातरः क्षेत्राणि खनितुम् आरब्धाः। सर्वत्र एव खनितं गम्भीरतम परञ्च न किञ्चिद् धनम् प्राप्तम्। धन-प्राप्तेः आशा त्यक्त्वा ते मौनम् अतिष्ठन्। तदा एव तत्र आगच्छत् एकः अन्यः वृद्धः। सोऽवदत्-‘क्षेत्राणि तु युष्माभिः कृष्टानि खनितानि एव। यदि धनं नोपलब्धवन्तः तर्हि एतेषु बीजानि एव वपन्तु। किञ्चित् शस्यं लप्स्यन्ति एव।

ते तथा एव अकुर्वन्। सर्वेषु क्षेत्रेषु बीजानि वपन्ति। वृष्टिः समीचीना आसीत्। तेन क्षेत्रेषु समृद्धं शस्यम् अजायत्। काले प्राप्ते प्रभूतं धान्यम् अभवत्। अन्नराशिम् अवलोक्य ते प्रसन्नाः अभवन्, पितुः वचनस्य अभिप्राय ज्ञातम्। तदा केनापि वृद्धन कथितम्-भूमौ तु प्रभूत धन निखात परञ्च उद्यमेन (परिश्रमेण) एव लब्धु शक्यते।

(रामपुर गाँव में एक किसान रहता था। वह बहत वृद्ध था और बीमार था। उसके चार बेटे थे। वे झगडालू और थे। खेत बिना जुते और बिना बुवे पड़े थे। किसान उनसे बार-बार कहता है-खेती का काम करो, परन्तु वे तो कलह ही करते रहते हैं। एक दिन वृद्ध किसान मरणासन्न होता है। वह मृत्युशय्या पर ही सोता हुआ अपने बेटों को बुलाकर कहता है- पुत्रो! अब मैं प्राण त्यागना चाहता हूँ। मेरे पास धन नहीं है, जो-कुछ धन है वह खेतों में गड़ा हुआ है। इस प्रकार कहता हुआ वह वृद्ध दिवंगत हो गया।

बेटे अन्तिम संस्कार और श्राद्ध करके सोचने लगे-खेतों में धन है, अतः उन्हें खोदना चाहिए। चारों भाई खेतों को खोदने लगे। सब जगह गहरा से गहरा खोदा परन्तु कोई धन प्राप्त नहीं हुआ। धन प्राप्ति की आशा त्याग कर वे मौन बैठ गये। तभी वहाँ एक अन्य वृद्ध आ गया। वह बोला-खेत तो तुमने जोत और खोद ही दिये हैं, यदि हआ तो इनमें बीज ही बो दो। कछ तो फसल प्राप्त कर ही लोगे।

उन्होंने वैसा ही किया। सभी खेतों में बीज बोते हैं। वर्षा अच्छी हो गई थी। उससे खेतों में अच्छी फसल हुई। बहुत सा धान्य प्राप्त हुआ। अन्न राशि को देखकर वे प्रसन्न हो गये तथा पिता के वचनों का अभिप्राय समझे। तब किसी वृद्ध ने कहा-धरती में बहुत सारा धन गड़ा है, परन्तु परिश्रम से ही प्राप्त किया जा सकता है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

14. अहिंसा परमोधर्मः
[सङ्केतसूची-अहिंसाधर्मस्यैव, निन्दनीयम्, कर्त्तव्यम्, बुद्धस्य, धर्मेऽहिंसायाः, आततायिरूपेणायान्तम्, कटुवाकप्रयोगश्च,। अहिंसापालनस्य, भगवता, हन्यात्, पूज्यस्थानमासीत्, दुर्भावः, निरपराधानां।]
उत्तरम् :
निरपराधानां प्राणिनां हिंसनं न कर्त्तव्यम्, इत्यहिंसायाः भावः। अस्माकं धर्मेऽहिंसाया: स्थानं महत्त्वपूर्णमस्ति। अहिंसाधर्मस्यैव पालनेन भगवतः बुद्धस्य गणना दशावतारेषु क्रियते। भगवान् महावीरोऽपि अहिंसाधर्मस्यैव पालनेन सर्वेषां पूज्यस्थानमासीत्। निरपराधस्य कस्यापि जन्तोः हिंसनं नूनं निन्दनीयम्। अहिंसायाः पालनं मनसा, वाचा कर्मणा च कर्त्तव्यम्। कस्यापि विषये दुर्भावः कटुवाक्प्रयोगश्च हिंसैव गण्यते। भारतीयसंस्कृतौ केवलं धार्मिक-क्षेत्रे अहिंसापालनस्य महिमा गीत: नहि राजनीतिके व्यवहारे। स्मृतिकृता भगवता मनुना स्पष्टमेवोल्लिखितं यत् गुरूं, बालं वृद्धं वापि आततायिः रूपेणायान्तम् अविचारयन्नेव हन्यात्।

(निरपराध प्राणियों की हिंसा नहीं करनी चाहिए, यह अहिंसा का भाव है। हमारे धर्म में अहिंसा का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। अहिंसा-धर्म के पालन से ही भगवान बुद्ध की गणना दस अवतारों में की जाती है। भगवान् महावीर भी अहिंसा का ही पालन करने से सभी लोगों के सम्मान के पात्र थे। किसी भी निरपराध प्राणी की हिंसा करना निश्चय ही निन्दा करने योग्य है। अहिंसा का पालन मन से, वाणी से और कर्म से करना चाहिए।

किसी के भी बारे में बुरा विचार रखना और कठोर वचनों का प्रयोग करना हिंसा ही गिनी जाती है। भारतीय संस्कृति में केवल धर्म के क्षेत्र में अहिंसा-पालन की महिमा गाई गई है, न कि राजनीति के व्यवहार में। स्मृति-ग्रन्थ के रचनाकार भगवान् मनु ने स्पष्ट ही उल्लेख किया है कि आतातायी के रूप में आये हुए गुरु, बालक अथवा वृद्ध को भी बिना हुए सोचे ही मार देना चाहिए।)

15. वृक्षाणां महत्वम्
[कुर्वन्ति, बुभुक्षिातनां, खगमृगजलचरनराः, वर्षाशीतातपैः, सुखानि प्राणिनः,। पुष्पन्ति, नियन्ते, विचरन्ति, समाश्रयो।]
उत्तरम् :
वृक्षाः भूमौ उद्भवन्ति। वृक्षाः अपि मनुष्य इव भुक्त्वा पीत्वा च जीवन्ति। मूलानि वृक्षाणां मुखानि भवन्ति। ते पादैः जल पिबन्ति अतएव ‘पादपाः’ कथ्यन्ते। तेषां मूलानि भूमितः रसं गृहीत्वा सर्वान् अवयवान् नयन्ति, तेन ते प्रवर्धन्ते, पुष्पन्ति, फलन्ति च। वृक्षाः अपि वर्षाशीतातपैः प्रभाविताः भवन्ति। तेऽपि सुखानि दुःखानि च अनुभवन्ति। तेषु अपि प्राणा: भवन्ति, अतएव ते प्राणिनः इव जायन्ते, वर्धन्ते, पुष्पन्ति, फलन्ति म्रियन्ते च।

ते कदापि खगमगजलचरनराः इव न विचरन्ति अतः अचराः कथ्यन्ते। बहूपकारं कुर्वन्ति वृक्षाः प्राणिनाम्। ते अशरणानां शरणम्, बुभुक्षितानां भोजनम्, संतप्तानां समाश्रयाः, वश्रामगृहाणि सुखिना सोख्योपकरणानि अच्छत्रिणा छत्रम्, निरालम्बिना आलम्बनम्, प्राणवायुभिः प्राणदातारः, वृष्टिकारकाः, मृद्रक्षकाः, सुहृदश्च जगतः। वृक्षारोपणं वृक्षरक्षणं च अस्माकं रक्षायै परमावश्यकम्।

(वृक्ष भूमि पर उगते हैं। वृक्ष भी मनुष्य की तरह खाकर और पीकर जीवित रहते हैं। जड़ें वृक्षों की मुख होती हैं। वे पैरों से जल पीते हैं, इसलिए ‘पादप’ कहलाते हैं। उनकी जड़ें धरती से रस ग्रहण करके सभी अंगों में ले जाती हैं, उससे वे बढ़ते हैं, खिलते हैं और फलते हैं। वृक्ष भी वर्षा, सर्दी, धूप से प्रभावित होते हैं। वे भी सुख और दुःख का अनुभव करते हैं। उनमें भी प्राण होते हैं। अतएव वे प्राणियों की भाँति जन्म लेते हैं, बढ़ते हैं, फूलते, फलते और मरते हैं।

वे कभी भी पक्षी, पशु, जलचर और मनुष्यों की तरह विचरण नहीं करते हैं, अत: अचर कहलाते हैं। वृक्ष प्राणियों का बहुत उपकार करते हैं। वे अशरणों के शरण दाता हैं, भूखों के भोजन, संतप्तों के आश्रय, थके हुओं के विश्रामगृह, सुखियों के सुख-उपकरण, छत्ररहितों के छत्र, बेसहारों के सहारे, प्राणवायु द्वारा प्राण देने वाले, वर्षा करने वाले, मिट्टी की रक्षा करने वाले और जगत् के मित्र हैं। वृक्षारोपण और वृक्षों की रक्षा करना हमारी रक्षा के लिए परम आवश्यक है।)

16. प्रभातदृश्यम्।
[सङ्केतसूची-सर्वजीवान्, वृक्षशाखासु, स्फूर्तिमान्, प्रकृतिप्राङ्गणे, सत्त्वगुणस्य, साम्राज्य, भ्रमणार्थ, भवति, सूर्योदयात्, ओषधिः परमानंद, सर्वप्राणिषु, साफल्याय।]
उत्तरम् :
प्रभातकालः अतिमनोरमः भवति। सूर्योदयात् प्राक् उत्थाय प्रकोष्ठात् बहिः आगत्य प्रकृतिप्राङ्गणे विचरणम् उत्तमः ओषधिः। ये जनाः सूर्योदयात् प्राक् उत्थाय भ्रमणार्थं गच्छन्ति ते अरुणोदयं प्रेक्ष्य परमानन्दं अनुभवन्ति। रात्रौ वृक्षशाखासु निलीनाः खगाः अरुणोदयकाले कलरवं कुवन्ति। आकाशपटले लालिमायाः साम्राज्यं भवति। शनैः शनैः भगवान् भास्करः रक्तस्थालीवत् दृष्टिगोचरः भवति। प्रभातकालः सर्वजीवान् स्व-स्व कार्येषु योजयति। प्रभाते शरीरं स्फूर्तिमान् भवति। धार्मिकाः कथयन्ति यत् प्रात:काले सर्वप्राणिषु सत्वगुणस्य विवृद्धिर्भवति। एतस्मिन् काले कृतं कार्यं साफल्याय भवति।

समय अत्यन्त मनोरम होता है। सूर्योदय से पूर्व उठकर कमरे से बाहर आकर प्रकृति के आँगन में विचरण करना उत्तम औषधि है। जो लोग सूर्योदय से पहले उठकर घूमने के लिए जाते हैं, वे सूर्योदय देखकर परम आनन्द का अनुभव करते हैं। रात में वृक्षों की शाखाओं में छुपे हुए पक्षी सूर्योदय के समय कलरव करते हैं। आकाशपटल में लालिमा का साम्राज्य होता है। धीरे-धीरे भगवान भास्कर लाल थाली की तरह दृष्टिगोचर होते हैं। प्रभातकाल सभी जीवों को अपने-अपने कार्यों में लगा देता है। प्रभात में शरीर फुर्तीला होता है। धार्मिक (लोग) कहते हैं कि प्रभात काल में सभी प्राणियों में सत्वगुण की. वृद्धि होती है। इस समय में किया हुआ कार्य सफलता के लिए होता है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

17. होलिकोत्सवः
[सङ्केतसूची-होलिकोत्सवस्य, अग्निना, तेषु प्रमुखः, स्वयमेव, निर्देशन, भूत्वा, आयोजिताः, दहनेन, हिरण्यकशिपोः,। सम्बद्धः, वरप्रभावेण, प्रह्लाद, प्रज्ज्वलितेन, स्मृतिरूपेण।]
उत्तरम् :
अस्माकं देशे अनेके उत्सवाः आयोजिताः भवन्ति, होलिकोत्सवः तेषु प्रमुखः अस्ति। भारतीयसंस्कृती होलिकोत्सवस्य विशिष्टं महत्वं वर्तते। हिरण्यकशिपोः भगिन्या: होलिकायाः दहनेन अयम् उत्सवः सम्बद्धः अस्ति। सा देवस्य वरप्रभावेण अग्निना दग्धा न भवति स्म। अतएव हिरण्यकशिपोः निर्देशेन सा प्रहलादम् अङ्के उपावेश्य अग्नौ उपविष्टवती।

परन्तु प्रह्लादस्य भक्त्या प्रसन्नो भूत्वा नारायणः प्रहलादं रक्षितवान्। प्रज्ज्वलितेन अग्निना सा स्वयमेव दग्धा। तस्याः घटनायाः स्मृतिरूपेण प्रतिवर्ष फाल्गुन-पूर्णिमावसरे होलिकोत्सवः भवति। – (हमारे देश में अनेक उत्सव आयोजित होते हैं। होलिकोत्सव उनमें से प्रमुख है। भारतीय संस्कृति में होली के उत्सव का विशेष महत्व होता है। हिरण्यकशिपु की बहिन होलिका के दहन से यह उत्सव सम्बन्ध रखता है।

वह देवता के वर के से अग्नि से जलती नहीं थी। अतः हिरण्यकशिपु के निर्देशानुसार वह प्रहलाद को गोद में बैठाकर आग में बैठ गई। परन्तु प्रहलाद की भक्ति से प्रसन्न होकर नारायण ने प्रहलाद की रक्षा की। जलती हुई आग के द्वारा वह स्वयं ही जला दी गई। उस घटना की स्मृति के रूप में फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर होली का उत्सव होता है।)

18. विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवः
[सङ्केतसूची-प्रतियोगितासु, वार्षिकोत्सवः, राजकीयः, अस्माकं, व्यवस्था, विद्यालयस्य, शतप्रतिशतः, मुख्यातिथिः।]
उत्तरम् :
अस्माकं विद्यालयः राजकीयः विद्यालयः अस्ति। अत्र पठनस्य तु श्रेष्ठा व्यवस्था अस्ति. एव, युगपदेव क्रीडानामपि सुलभा व्यवस्था अस्ति। अतएव अस्माकं विद्यालयस्य सर्वासां कक्षाणां परिणामः शतप्रतिशतं भवति। क्रीडानां प्रतियोगितासु अपि अस्माकं विद्यालयस्य छात्राः बहून् पुरस्कारान् अलभन्त। अस्माकं विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवः परह्यः सम्पन्नो जातः। अस्माक प्रदेशस्य राज्यपाल: मुख्यातिथिः आसीत्।

(हमारा विद्यालय राजकीय विद्यालय है। यहाँ पढ़ाई की तो श्रेष्ठ व्यवस्था है ही साथ-साथ खेलों की भी व्यवस्था सुलभ है। इसलिए हमारे विद्यालय की सभी कक्षाओं का परिणाम शत-प्रतिशत रहता है। खेल प्रतियोगिताओं में भी हमारे विद्यालय के छात्रों ने बहुत पुरस्कार प्राप्त किये। हमारे विद्यालय का वार्षिक उत्सव परसों सम्पन्न हुआ। हमारे प्रदेश के राज्यपाल मुख्य अतिथि थे।)

19. चलभाषितयंत्रम्।
[सङ्केतसूची-आरूढाः, युवकाः, कक्षासु, यन्त्रम्, चलन्तः, आविष्कारः, नवीनतमान्, कार्येषु, अधिकतमा, लोकप्रियं,। कर्मकराः, कर्णभूषणं, प्रवचनं, अविवेकपूर्णः, दुर्घटना, दुष्प्रयोगेण।]
उत्तरम् :
वैज्ञानिकाः सञ्चारसाधनेषु प्रतिदिनं नवीनतमान् आविष्कारान् कुर्वन्ति येन सन्देशप्रेषणे अधिकतमा सुविधा स्यात्। चलभाषितयन्त्रम् (मोबाइल-सैलफोन) तादृशमेव लोकप्रियं यन्त्रम्। बालोः, वृद्धाः, युवकाः, पुरुषाः, महिलाः नागरिकाः, ग्रामीणाः कर्मकराः च सर्वेषाम् एव एतत् कर्णभूषणं जातम्। यानानि आरूढाः, कार्यालयेषु कार्य कुर्वन्तः, मार्गेषु चलन्तः, सभागारेषु प्रवचनं शृण्वन्तः जनाः अस्य ध्वनिं श्रुत्वा वार्तामग्नाः भवन्ति। अविवेकपूर्णः अस्य प्रयोगः कार्येषु व्यवधानं करोति। मार्गेषु दुर्घटनाः भवन्ति। सभागारेषु, कक्षासु अन्य स्थानेषु च अव्यवस्था भवति। सत्यमस्ति यत् आविष्कार: कदापि हानिकरः न, परन्तु तस्य दुष्प्रयोगेण जीवनस्य शान्ति: नश्यति।

(वैज्ञानिक संचार के साधनों में प्रतिदिन नवीनतम आविष्कार कर रहे हैं जिससे सन्देश भेजने में अधिकतम सुविधा हो। मोबाइल-सैलफोन इसी प्रकार का लोकप्रिय यन्त्र है। बच्चे, वृद्ध, युवा, पुरुष, स्त्रियाँ, नगरवासी, ग्रामीण और कर्मचारी (नौकर) सभी का यह कान का आभूषण बन गया है। वाहनों पर आरूढ़, कार्यालय में काम करते हुए, मार्गों पर चलते हुए सभागारों में प्रवचन सुनते हुए लोग इसकी आवाज सुनकर बात करने में मग्न हो जाते हैं। इसका अविवेकपूर्ण प्रयोग कार्यों में अड़चन पैदा करता है। मार्गों में दुर्घटनाएँ होती हैं। सभागारों में, कक्षाओं में और अन्य स्थानों पर अव्यवस्था होती है। यह सच है कि आविष्कार कभी हानिकारक नहीं’ परन्तु उसका दुष्प्रयोग करने से जीवन की शान्ति नष्ट हो जाती है।)

JAC Class 9 Sanskrit रचना संकेताधारित अनुच्छेदलेखनम्

20. धनस्य महत्त्वम्
[सङ्केतसूची-हरिष्यति, महत्वम्, भोजनम्, धनस्य, धनार्जन, अधिकाधिक, प्रच्छादनाय, प्रयोग, जीवननिवहिः, लोभेन,। दु:खमेव, रक्षणे, उचितसाधनैः, कुर्याम, असहायाः।]
उत्तरम् :
जीवने धनस्य अत्यधिक महत्वम् अस्ति। धनेन जीवननिर्वाहः भवति। धनं विना वयं कथं भोजनम् अपि प्राप्तुं शक्नुमः? परन्तु यदि लोभेन वयम् अन्धः भूत्वा अधिकाधिकं धनं प्राप्तुम् इच्छामः, अनुचितसाधनानां प्रयोगं कुर्मः, तर्हि तेन धनेन दुःखमेव भविष्यति। तस्य रक्षणे एव समय: व्यतीतः भवति। कोऽपि तद् हरिष्यति इति चिन्ताप्रतिक्षणं वर्धते। धनाभिमानं विवेकं नाशयति। कृष्णधनस्य प्रच्छादनाय महान् क्लेशः भवति। अतः वयम् उचितसाधनैः एवं धनार्जनं कुर्याम, कस्मै अपि ईां न कुर्याम अपितु यथाशक्ति ये असहाया: सन्ति-तेषां-साहाय्यं कुर्याम। त्यागेन एव धनस्य संरक्षणं भवति।

(जीवन में धन का अत्यधिक महत्व होता है। धन से जीवन-निर्वाह होता है। धन के बिना हम भोजन भी कैसे प्राप्त कर सकते हैं? परन्तु यदि हम लोभ से अन्धे होकर अधिकाधिक धन प्राप्त करना चाहते हैं, अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं, होगा। उसके संरक्षण में ही समय व्यतीत होता है। कोई उसका हरण कर लेगा, इस प्रकार की चिन्ता प्रतिक्षण बढ़ती है। धन का अभिमान विवेक का नाश करता है। काले धन को छिपाने में महान् कष्ट होता है। अतः हमें उचित साधनों से ही धनार्जन करना चाहिए, किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए, अपितु जो असहाय हैं-उनकी यथाशक्तिक सहायता करनी चाहिए। त्याग से ही धन की रक्षा होती है।)

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions अपठित बोध अपठित काव्यांश Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

अपठित-बोध के अंतर्गत विद्यार्थी को किसी को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर का चयन करना होता है। इन प्रश्नों का उत्तर देने से पूर्व अपठित को अच्छी प्रकार से पढ़कर समझ लेना चाहिए। जिन प्रश्नों के उत्तर पूछे गए हैं वे उसी में ही। छिपे रहते हैं। सटीक विकल्प का चयन करना चाहिए। अपठित का शीर्षक भी पूछा जाता है। शीर्षक अपठित में व्यक्त भावों के अनुरूप होना चाहिए। शीर्षक-चयन से अपठित का मूल-भाव भी स्पष्ट होना चाहिए। मुख्य भावार्थ का विकल्प भावों को स्पष्ट करने वाला होना चाहिए। 10 अभ्यास के लिए कुछ यहाँ दिए जा रहे हैं –

अपठित काव्यास के महत्तपूर्ण उदाहरण :

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प वाले उत्तर चुनिए –

1. चाह नहीं, मैं सरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ।
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि! डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना, वनमाली उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ पर जाएँ वीर अनेक।

1. प्रस्तुत पंक्तियों का शीर्षक है –
(क) सुरबाला का गहना
(ख) पुष्प की अभिलाषा
(ग) सम्राट
(घ) मातृभूमि
उत्तर :
(ख) पुण्य की अभिलाषा

2. कवि ने किसके माध्यम से देश-भक्ति का संदेश दिया है?
(क) भाग्य
(ख) वनमाली
(ग) फूल
(घ) ये सभी
उत्तर :
(ग) फूल

3. कवि द्वारा देश भक्ति का कौन-सा संदेश दिया गया है?
(क) श्रम करने का
(ख) ज्ञान प्राप्त करने का
(ग) सर्वस्व न्योछावर करने का
(घ) स्व-कल्याण करने का
उत्तर :
(ग) सर्वस्व न्योछावर करने का

4. पुष्प को किस बात की चाह नहीं है?
(क) देवबालाओं के शृंगार करने
(ख) प्रेमी की माला में गँथने
(ग) सम्राटों के शवों को सजाने तथा देवों पर अर्पित होने
(घ) ये सभी विकल्प
उत्तर :
(घ) ये सभी विकल्प

5. पुष्प किनके चरणों पर समर्पित होकर जीवन की सार्थकता प्रमाणित करना चाहता है?
(क) देशभक्तों के चरणों पर
(ख) भगवान के चरणों पर
(ग) देशवासियों के चरणों पर
(घ) महिलाओं के चरणों पर
उत्तर :
(क) देशभक्तों के चरणों पर

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

2. आँधियों ने गोद में हमको खिलाया है न भूलो;
कंटकों ने सिर हमें सादर झुकाया है न भूलो;
सिंधु का मथ कर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए;
औ’ हमारे तेज से सूरज लजाया है न भूलो!
वे हमीं तो हैं कि इक हुँकार से यह भूमि काँपी,
वे हमीं तो हैं, जिन्होंने तीन डग में सृष्टि नापी,
और वे भी हम, कि जिनकी सभ्यता के विजयरथ की
धूल उड़कर छोड़ आई छाप अपनी विश्वव्यापी!

1. पंक्तियों का उचित शीर्षक है
(क) आँधिया
(ख) सिंधु
(ग) वीर पुरुष
(घ) विजय रथ
उत्तर :
(ग) वीर पुरुष

2. ‘कंटकों ने सिर हमें सादर झुकाया है’ पंक्ति का भाव है
(क) वीर भारतीयों के समक्ष मुसीबतें भी नमन करती हैं।
(ख) काँटों की चुभन दुखदाई प्रतीत होती है।
(ग) काँटों के चुभने से ही मुसीबतें आती हैं।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(क) वीर भारतीयों के समक्ष मुसीबतें भी नमन करती हैं।

3. भारतीयों के तेज़ के सम्मुख कौन लज्जित हो जाता है?
(क) शत्रु
(ख) सूर्य
(ग) चाँद
(घ) नभ
उत्तर :
(ख) सूर्य

4. कविता की किस पंक्ति में समुद्र मंथन का जिक्र हुआ है?
(क) वे हमीं तो हैं कि इक हुँकार से यह भूमि काँपी।
(ख) सिंधु का मथकर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए।
(ग) और वे भी हम, कि जिनकी सभ्यता के विजय रथ की।
(घ) आँधियों ने गोद में हमको खिलाया है न भूलो।
उत्तर :
(ख) सिंधु का मथकर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए।

5. मुसीबतों के प्रतीक कौन-से शब्द हैं?
(क) आँधी, संघर्ष और कंटक
(ख) हुँकार, सृष्टि, डग
(ग) सिंधु, सूरज, सभ्यता
(घ) धूल, रथ, डग
उत्तर :
(क) आँधी, संघर्ष और कंटक

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

3. हिमालय के आँगन में उसे प्रथम किरणों का दे उपहार।
उषा ने हँस अभिनंदन किया और पहनाया हीरक हार।
जगे हम, लगे जगाने विश्व लोक में फैला फिर आलोक।
व्योम-तम-पुंज हुआ तब नष्ट, अखिल संसृति हो उठी अशोक।
विमल प्राणी ने वीणा ली कमल कोमल कर में सप्रीत।
सप्तस्वर सप्तसिंधु में उठे, छिड़ा तब मधुर साम-संगीत।
बचाकर बीज रूप से सृष्टि, नाव पर झेल प्रलय का शीत।
अरुण-केतन लेकर निज हाथ वरुण पथ में हम बढ़े अभीत।

1. प्रस्तुत पंक्तियों का उचित शीर्षक कौन-सा है
(क) हमारा प्यारा भारतवर्ष
(ख) व्योम-तम-पुंज
(ग) सप्तस्वर
(घ) वरुण पथ
उत्तर :
(क) हमारा प्यारा भारतवर्ष

2. काव्यांश का उचित उद्देश्य क्या है?
(क) भारत के विश्व-संस्कृति के प्रथम उद्घोषक के रूप में चित्रित करना
(ख) भारत की गौरव-गाथा का प्रचार करना
(ग) अज्ञानता का शोक बताना
(घ) सूर्य की किरणों को ज्ञान का प्रतीक बताना
उत्तर :
(क) भारत को विश्व-संस्कृति के प्रथम उद्घोषक के रूप में चित्रित करना

3. भारत ने किसके प्रसार के द्वारा विश्व को शोक रहित बना दिया है?
(क) तकनीकी
(ख) मुद्रा
(ग) संदेश
(घ) ज्ञान
उत्तर :
(घ) ज्ञान

4. सूर्योदय की किरणें सबसे पहले कहाँ पड़ती हैं?
(क) सागर पर
(ख) हिमालय पर
(ग) नभ पर
(घ) मरुस्थल पर
उत्तर :
(ख) हिमालय पर

5. सिंधु यानी सागरों की संख्या कितनी बताई गई है?
(क) पाँच
(ख) छह
(ग) सात
(घ) आठ
उत्तर :
(ग) सात

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

4. तितली, तितली! कहाँ चली हो नंदन-वन की रानी-सी?
वन-उपवन में, गिरि-कानन में फिरती हो दीवानी-सी।
फूल-फूल पर, अटक-अटक कर करती कुछ मनमानी-सी।
पत्ती-पत्ती से कहती कुछ अपनी प्रणय कहानी-सी।
यह मस्ती, इतनी चंचलता किसे अलि! तुमने पाई?
कहाँ जा रही हो इस निर्जर मदिर उषा में अलसाई?
सोते ही सोते मीठी-सी सुधि तुमको किसकी आई?
जो चल पड़ी जाग तुम झटपट लेते-लेते अंगड़ाई।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक है –
(क) उपवन
(ख) तितली रानी
(ग) प्रणय कहानी
(घ) चंचलता
उत्तर :
(ख) तितली रानी

2. कवि तितली को कहाँ की रानी कहकर संबोधित कर रहा है?
(क) स्वर्ग की रानी
(ख) रात की रानी
(ग) नंदनवन की रानी
(घ) जल की रानी
उत्तर :
(ग) नंदनवन की रानी

3. तितली रानी किसके समान वन-उपवन में भटकती रहती है?
(क) बालिका के समान
(ख) चंचल हवा के समान
(ग) दीवानी के समान
(घ) भ्रामरी के समान
उत्तर :
(ग) दीवानी के समान

4. तितली किस समय आलस्य से भरकर अंगड़ाई लेते हुए किसी से मिलने जा रही है?
(क) प्रभात की बेला में
(ख) अपराहन में
(ग) सायंकालीन बेला में
(घ) रात्रि में
उत्तर :
(क) प्रभात की बेला में

5. तितली अपनी प्रणय कहानी किससे कहती फिरती है?
(क) पत्ती-पत्ती से
(ख) फूल-फूल से
(ग) वन-उपवन से
(घ) ये सभी विकल्प
उत्तर :
(घ) ये सभी विकल्प

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

5. रोमांचित-सी लगती वसुधा आई जी गेहूँ में बाली,
अरहर-सनई की सोने की किंकिणियाँ हैं शोभाशाली।
उड़ती भीनी तैलाक्त गंध फूली सरसों पीली-पीली,
लो, हरित धरा से झाँक रही नीलम की कलि, तीसी नीली।
अब रजत स्वर्ण मंजरियों से लद गई आम तरु की डाली,
झर रहे ढाँक, पीपल के दल हो उठी कोकिला मतवाली।

1. प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक है –
(क) फूली सरसों
(ख) ग्रामश्री
(ग) हरित धरा
(घ) स्वर्ण मंजरियाँ
उत्तर :
(ख) ग्रामश्री

2. धरती रोमांचित लग रही है क्योंकि
(क) बरसात हो गई है।
(ख) जौ-गेहूँ में बालियाँ आ गई हैं।
(ग) बीजों में अंकुरण हो गया है।
(घ) उसकी मिट्टी में उर्वरता आ गई है।
उत्तर :
(ख) जौ-गेहूँ में बालियाँ आ गई हैं।

3. वातावरण में किसके तेल की सगंध आ रही है?
(क) सरसों के तेल की
(ख) मूंगफली के तेल की
(ग) तिल के तेल की
(घ) अलसी के तेल की
उत्तर :
(क) सरसों के तेल की

4. किस वृक्ष की डालियाँ सुनहरे बौरों से लद गई हैं?
(क) महुआ
(ख) नीम
(ग) आम
(घ) जामुन
उत्तर :
(ग) आम

5. ‘नीलम की कलि’ किन्हें कहा गया है?
(क) अलसी पर खिली नीली कलियों को कहा गया है।
(ख) पीली सरसों पर खिली लाल कलियों को कहा गया है।
(ग) आम की हरी बौरों में नीली कलियों को कहा गया है।
(घ) नीलम पत्थर को कहा गया है।
उत्तर :
(क) अलसी पर खिली नीली कलियों को कहा गया है।

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

6. यह लघु सरिता का बहता जल, कितना शीतल, कितना निर्मल।
हिमगिरि के हिम से निकल-निकल, यह विमल दूध-सा हिम का जल
कर-कर निनाद कल-कल, छल-छल, बहता आता नीचे पल-पल।
तन का चंचल, मन का विह्वल, यह लघु सरिता का बहता जल।
निर्मल जल की यह तेज धार, करके कितनी श्रृंखला पार,
बहती रहती है लगातार, गिरती-उठती है बार-बार।
रखता है तन में इतना बल, यह लघु सरिता का बहता जल।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) सरिता का बहता जल
(ख) निर्मलता
(ग) चंचलता
(घ) विह्वलता
उत्तर :
(क) सरिता का बहता जल

2. सरिता का जल कहाँ से निकलकर मैदानों तक आ जाता है?
(क) सागर से
(ख) हिमालय से
(ग) खाड़ी से
(घ) पाताल से
उत्तर :
(ख) हिमालय से

3. हिमालय से निकलते हुए जल का रंग कैसा बताया गया है?
(क) मटमैला
(ख) पीला
(ग) दूधिया
(घ) भूरा
उत्तर :
(ग) दूधिया

4. ‘कर-कर निनाद कल-कल, छल-छल’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक अलंकार
(ख) श्लेष अलंकार
(ग) उपमा अलंकार
(घ) अनुप्रास अलंकार
उत्तर :
(घ) अनुप्रास अलंकार

5. काव्यांश का उद्देश्य क्या है?
(क) वीरतापूर्वक सामना करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ना
(ख) बाधाओं से दूर भागने की कोशिश करना
(ग) सरिता के जल से आचमन करना
(घ) सरिता के जल से स्वयं को पवित्र करना
उत्तर :
(क) बाधाओं का वीरतापूर्वक सामना करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ना

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

7. भारत के शीश हिमालय को, है मेरा बारंबार नमन!
सबसे पहले जिसके माथे पर-सूरज तिलक लगाता है,
जिसके यश को सागर अपनी अनगिन लहरों से गाता है,
जिसकी ऊँचाई पर, मैं ही क्या गर्वित भारत माता है,
जननी के इस गौरव गिरि की आरती सजाता नील गगन!

1. कवि ने हिमालय को क्या कहा है?
(क) अधिपति
(ख) नागमणि
(ग) भारत का शीश
(घ) भारत का भाल
उत्तर :
(ग) भारत का शीश

2. उपयुक्त शीर्षक चुनिए
(क) हिमालय
(ख) भारत देश
(ग) जननी
(घ) नील गगन
उत्तर :
(क) हिमालय

3. कवि किसे बार-बार नमन करता है?
(क) भारत-माता को
(ख) हिमालय को
(ग) अपनी जननी को
(घ) सागर को
उत्तर :
(ख) हिमालय को

4. हिमालय के यश का गान कौन कर रही हैं?
(क) भारत की महिलाएँ
(ख) औषधियाँ
(ग) सागर की लहरें
(घ) ऊँची लताएँ
उत्तर :
(ग) सागर की लहरें

5. भारत-माता को हिमालय की किस बात पर गर्व है?
(क) सबसे साफ़-सुथरा होने के कारण
(ख) सबसे ऊँचा होने के कारण
(ग) सबसे हरा-भरा होने के कारण।
(घ) गुणकारी औषधियों की मौजूदगी के कारण
उत्तर :
(ख) सबसे ऊँचा होने के कारण

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8. वे मुसकाते फूल नहीं-जिनको आता है मुरझाना,
वे तारों के दीप नहीं-जिनको भाता है बुझ जाना,
वे नीलम से मेघ, नहीं-जिनको है घुल जाने की चाह,
वह अनंत ऋतुराज, नहीं-जिससे देखी जाने की राह!
वे सूने से नयन नहीं-जिनमें बनते आँसू मोती,
वह प्राणों की सेज, नहीं-जिनमें बेसुध पीड़ा सोती।
ऐसा तेरा लोक, वेदना नहीं, नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं-जिसने जाना मिटने का स्वाद!
क्या अमरों का लोक मिलेगा तेरी करुणा का उपहार?
रहने दो हे देव! अरे यह मेरा मिटने का अधिकार!

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) मुसकाते फूल
(ख) मिटने का अधिकार
(ग) ऋतुराज वसंत
(घ) मोती के समान आँसू
उत्तर :
(ख) मिटने का अधिकार

2. वसंत ऋतु कब अर्थहीन हो जाती है?
(क) जब अर्ध यौवन पर आ जाती है।
(ख) जब समय-सीमा को त्याग कर परे साल बनी रहती है।
(ग) जब वह यौवन की अवहेलना करती है।
(घ) जब वह समय से पहले चली जाती है।
उत्तर :
(ख) जब समय सीमा को त्यागकर पूरे साल बनी रहती है।

3. कवि ने संसार को क्या कहा है?
(क) प्राणों की सेज
(ख) तारों का दीप
(ग) वेदना का लोक
(घ) आस्था का संगम
उत्तर :
(ग) वेदना का लोक

4. काव्यांश का उद्देश्य है
(क) विपत्तियों का हँसकर सामना कर आत्म-बलिदान देना
(ख) विपत्तियों को आने न देना
(ग) विपत्तियों पर नियंत्रण लगाना
(घ) मिटने के स्वाद का आनंद लेना
उत्तर :
(क) विपत्तियों का हँसकर सामना कर आत्म-बलिदान देना

5. प्रभु की करुणा का उपहार किसे मिल सकता है?
(क) जो अमर हो गए हैं।
(ख) जो गुमनाम हो गए हैं।
(ग) जो अचानक मिट गए हैं।
(घ) जो जीवन के आनंद में लिप्त हो गए हैं।
उत्तर :
(क) जो अमर हो गए हैं।

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

9. आवश्यकता की पुकार को श्रुति ने श्रवण किया है?
कहो, करो ने आगे बढ़ किसको साहाय्य दिया है?
आर्तनाद तक कभी पदों ने क्या तुमको पहुँचाया?
क्या नैराश्य-निमग्न जनों को तुमने कंठ लगाया?
पैदा कर जिस देश जाति ने तुमको पाला-पोसा।
किए हुए है वह निज हित का तुमसे बड़ा भरोसा।
उससे होना उऋण प्रथम है सत्कर्तव्य तुम्हारा।
फिर दे सकते हो वसुधा को शेष स्वजीवन सारा।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए –
(क) आवश्यकता की पुकार
(ख) आर्तनाद
(ग) स्वजीवन
(घ) सत्कर्तव्य
उत्तर :
(घ) सत्कर्तव्य

2. आवश्यकता की पुकार क्या है?
(क) ज़रूरतमंद की आवश्यकता की पुकार सुनकर उसकी पूर्ति करना
(ख) किसी की भी आवश्यकता की पुकार सुनकर उसकी पूर्ति करना
(ग) गैर-ज़रूरतमंद की आवश्यकता की पूर्ति करना
(घ) ये सभी विकल्प सही हैं
उत्तर :
(क) ज़रूरतमंद की आवश्यकता की पुकार सुनकर उसकी पूर्ति करना

3. मनुष्य का प्रथम कर्तव्य क्या है?
(क) देश-जाति के ऋण से दबकर शांत रहना
(ख) देश-जाति के ऋण से मुक्त होकर उसकी सेवा करना
(ग) देश की स्वार्थ की भावना से सेवा करना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(ख) देश-जाति के ऋण से मुक्त होकर उसकी सेवा करना

4. किन लोगों को गले लगाकर सांत्वना देनी चाहिए?
(क) निराश लोगों को
(ख) बेसुध लोगों को
(ग) पिछड़े लोगों को
(घ) असहाय लोगों को
उत्तर :
(क) निराश लोगों को

5. हमें क्या सुनकर सहायता करनी चाहिए?
(क) करुण पुकार
(ख) कराह
(ग) वेदना की पुकार
(घ) ये सभी विकल्प सही हैं
उत्तर :
(घ) ये सभी विकल्प सही हैं

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

10. मैं तो वही खिलौना लूंगा, मचल गया दीना का लाल।
खेल रहा था जिसको लेकर, राजकुमार उछाल-उछाल।
व्यथित हो उठी मां बेचारी, था सुस्वर्ण निर्मित वह तो।
खेल इसी से लाल, नहीं है, राजा के घर भी यह तो।
राजा के घर नहीं, नहीं माँ, तू मुझको बहकाती है।
इस मिट्टी से खेलेगा क्या, राजपुत्र तू ही कह तो।
फेंक दिया मिट्टी में उसने, मिट्टी का गुड्डा तत्काल।
मैं तो वही खिलौना लूँगा, मचल गया दीना का लाल।

1. कविता का उपयुक्त शीर्षक है –
(क) दीना का लाल
(ख) खिलौना
(ग) राजकुमार
(घ) खेल
उत्तर :
(ख) खिलौना

2. माँ ने बेटे को क्या समझाने का प्रयास किया है?
(क) ऐसा खिलौना तो ढूँढने से नहीं मिलेगा।
(ख) ऐसा खिलौना तो राजकुमार के पास भी नहीं होगा।
(ग) ऐसा खिलौना तो बाजार में भी नहीं मिलेगा।
(घ) ये सभी विकल्प सही हैं।
उत्तर :
(ख) ऐसा खिलौना तो राजकुमार के पास भी नहीं होगा।

3. दीना का लाल क्या लेना चाहता है?
(क) सस्ता खिलौना
(ख) मखमल का खिलौना
(ग) राजकुमार के खिलौने जैसा
(घ) स्वचालित खिलौना
उत्तर :
(ग) राजकुमार के खिलौने जैसा

4. दीना के लाल ने मिट्टी का गुड्डा कहाँ फेंक दिया?
(क) छत पर
(ख) मिट्टी में
(ग) द्वार पर
(घ) घास में
उत्तर :
(ख) मिट्टी में

5. ‘तू’ मुझको बहकाती है। पंक्ति में ‘तू’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) पिता
(ख) माता
(ग) बेटा
(घ) राजकुमार
उत्तर :
(ख) माता

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11. “माँ, कह एक कहानी!’
‘बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?’
‘कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी।
कह माँ, कह लेटी ही लेटी, राजा था या रानी?
माँ, कह एक कहानी?’
‘सुन, उपवन में बड़े सवेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे।
जहाँ सुरभि मनमानी।”जहाँ सुरभि मनमानी! हाँ माँ, यही कहानी।’
‘वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे,
हलके झोंके हिले-मले थे, लहराता था पानी।’
‘लहराता था पानी! हाँ, हाँ, यही कहानी।’

1. बेटा किससे कहानी कहने के लिए कह रहा है?
(क) माँ से
(ख) पिता से
(ग) नानी से
(घ) दादी से
उत्तर :
(क) माँ से

2. दासी ने बेटे को क्या बताया?
(क) उसकी माँ नानी की बहन है।
(ख) उसकी माँ नानी की बेटी है।
(ग) उसकी माँ नानी की बहू है।
(घ) उसकी माँ दादी की बेटी है।
उत्तर :
(ख) उसकी माँ की बेटी है।

3. माँ कहानी की शुरुआत कहाँ से करती है?
(क) पिता के उपवन घूमने से
(ख) नानी के बाग से
(ग) नदी-किनारे से
(घ) स्वयं की सुबह की सैर से
उत्तर :
(क) पिता के उपवन घूमने से

4. ओस की बूंदें कहाँ झलक रही थीं?
(क) रंगीन फ़र्श पर
(ख) रंगीन फूलों पर
(ग) पेड़ की सूखी डालों पर
(घ) फलों पर
उत्तर :
(ख) रंगीन फूलों पर

5. उपवन में किसे मनमानी करते बताया गया है?
(क) राजकुमारी को
(ख) माँ को
(ग) तितली
(घ) सुरभि
उत्तर :
(घ) सुरभि

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

12. रात यों कहने लगा मुझ से गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है!
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता है,
और फिर बेचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?
मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते;
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) अनोखा जीव
(ख) चाँद और कवि
(ग) चाँदनी
(घ) उलझन
उत्तर :
(ख) चाँद और कवि

2. चाँद ने मनष्य को क्या कहा?
(क) विचित्र प्राणी
(ख) ज्ञानशील प्राणी
(ग) भोला-भाला प्राणी
(घ) विवेकशून्य प्राणी
उत्तर :
(क) विचित्र प्राणी

3. कवि हमेशा कहाँ खोया रहता है?
(क) यथार्थ लोक में
(ख) परलोक में
(ग) कल्पना लोक में
(घ) स्वर्गलोक में
उत्तर :
(ग) कल्पना लोक में

4. चाँद स्वयं के बारे में क्या बताता है?
(क) एकदम नया
(ख) बहुत पुराना
(ग) शीतल करने वाला
(घ) चाँदनी देने वाला
उत्तर :
(ख) बहुत पुराना

5. चाँद ने किसे मरते और जन्म लेते देखा है?
(क) सूर्य भगवान को
(ख) सप्तर्षि को
(ग) प्रथम पुरुष मनु को
(घ) राजा इक्ष्वाकु को
उत्तर :
(ग) प्रथम पुरुष मनु को

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13. हम अनिकेतन, हम अनिकेतन।
हम तो रमते राम हमारा क्या घर, क्या दर, कैसा वेतन?
अब तक इतनी यों ही काटी, अब क्या सीखें नव परिपाटी।
कौन बनाए आज घरौंदा, हाथों चुन-चुन कंकड़-माटी।
ठाठ फ़कीराना है अपना बाघंबर सोहे अपने तन।
देखे महल, झोंपड़े देखे, देखे हास-विलास मजे के।
संग्रह के सब विग्रह देखे, अँचे नहीं कुछ अपने लेखे।
लालच लगा कभी, पर हिय में मच न सका शोणित-उद्वेलन।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए –
(क) फ़कीराना ठाठ
(ख) हम अनिकेतन
(ग) नव परिपाटी
(घ) हास-विलास
उत्तर :
(ख) हम अनिकेतन

2. कवि किसके प्रति रुचि नहीं रखता?
(क) वैभव और विलास के प्रति
(ख) भ्रमण
(ग) विरक्तता
(घ) फकीराना ठाठ
उत्तर :
(ख) वैभव और विलास के प्रति

3. व्यक्ति में भटकाव और बेचैनी किस कारण होती है?
(क) मोह के कारण
(ख) अशांति के कारण
(ग) वैभव के कारण
(घ) ये सभी विकल्प
उत्तर :
(ग) वैभव के कारण

4. वैभव के प्रति रुचि रखने वाला व्यक्ति प्रायः कैसा होता है?
(क) परोपकारी
(ख) धनवान
(ग) परस्वार्थी
(घ) स्वार्थी-आत्मकेंद्रित
उत्तर :
(घ) स्वार्थी-आत्मकेंद्रित

5. विरक्त लोगों के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(क) ये साधु स्वभाव के होते हैं।
(ख) ये लालची नहीं होते हैं।
(ग) इनमें संग्रह करने की भावना होती है।
(घ) ये एक स्थान में टिककर नहीं रहते।
उत्तर :
(ग) इनमें संग्रह करने की भावना होती है।

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

14. हे ग्राम-देवता नमस्कार!
सोने-चाँदी से नहीं किंतु तुमने मिट्टी से किया प्यार
हे ग्राम-देवता नमस्कार!
जन-कोलाहल से दूर कहीं एकाकी सिमटा-सा निवास
रवि-शशि का उतना नहीं कि जितना प्राणों को होता प्रकाश।
श्रम-वैभव के बल पर करते हो जड़ में चेतन का विकास।
दानों-दानों से फूट रहे सौ-सौ दानों के हरे हास।
यह है न पसीने की धारा, यह गंगा की है धवल धार।
हे ग्राम-देवता नमस्कार!

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) मिट्टी से प्यार
(ख) कोलाहल
(ग) ग्राम-देवता
(घ) श्रम-वैभव
उत्तर :
(क) ग्राम-देवता

2. ग्राम-देवता कहाँ रहता है?
(क) मंदिर में
(ख) पहाड़ में
(ग) महल में
(घ) छोटी-सी कुटिया में
उत्तर :
(घ) छोटी-सी कुटिया में

3. ग्राम-देवता किससे प्यार करता है?
(क) भक्तों से
(ख) मिट्टी से
(ग) प्रसाद से
(घ) फल-मेवों से
उत्तर :
(ख) मिट्टी से

4. ग्राम-देवता क्या करके धरती को चेतन बना देता है?
(क) धरती में अन्न पैदा कर
(ख) बारिश करवाकर
(ग) फसल काटकर
(घ) अन्न बाँटकर
उत्तर :
(क) धरती में अन्न पैदा कर

5. ग्राम-देवता के परिश्रम से निकलने वाले पसीने को क्या बताया गया है?
(क) आकाशगंगा
(ख) गंगा की उज्जवल धारा
(ग) चूने की लकीर
(घ) दूध की सफ़ेद धारा
उत्तर :
(ख) गंगा की उज्जवल धारा

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

15. जग में सचर-अचर जितने हैं, सारे कर्म निरत हैं।
धुन है एक न एक सभी को, सबके निश्चित व्रत हैं।
जीवन-भर आतप वह वसुधा पर छाया करता है।
तुच्छ पत्र की भी स्वकर्म में कैसी तत्परता है।
रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता।
सब हैं लगे कर्म में, कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता।
है उद्देश्य नितांत तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।
उसी पूर्ति में वह करता है अंत कर्ममय तन का।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक है
(क) सचर-अचर
(ख) वसुधा
(ग) कर्म करो
(घ) कर्ममय तन
उत्तर :
(ग) कर्म करो

2. सांसारिक लोग किस धुन में लगे हुए हैं?
(क) लक्ष्य-प्राप्ति की
(ख) भोग-विलास की
(ग) व्रत करने की
(घ) कर्म करने की
उत्तर :
(क) लक्ष्य-प्राप्ति की

3. संसार को तेज़ की प्राप्ति किससे होती है?
(क) ज्ञान से
(ख) वैभव से
(ग) अग्नि से
(घ) सूर्य से
उत्तर :
(घ) सूर्य से

4. अमृत के समान शीतलता कौन प्रदान करता है?
(क) जाड़ा
(ख) वसंत
(ग) चंद्रमा
(घ) समीर
उत्तर :
(ग) चंदमा

5. काव्यांश में कवि का उद्देश्य क्या है?
(क) सदा कर्म करते रहना
(ख) सदा अच्छे समय की प्रतीक्षा करना
(ग) ज़रूरत पड़ने पर कर्म करना
(घ) मनमर्जी कर्म करते रहना
उत्तर :
(क) सदा कर्म करते रहना

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16. इतने ऊँचे उठो कि जितना उछा गगन है।
देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से
सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से
जाति-भेद की, धर्म-वेस की
काले गोरे रंग-द्वेष की
काले गोरे रंग-द्वेष की
ज्वालाओं से जलते जग में
इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है।

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) दुनिया
(ख) जाति-भेद
(ग) इतने ऊँचे उठो
(घ) रंग-द्वेष
उत्तर :
(ग) इतने ऊँचे उठो

2. कवि मनुष्य को किसके समान ऊँचे उठने को कह रहा है?
(क) हिमालय
(ख) आसमान
(ग) सूर्य
(घ) चाँद
उत्तर :
(ख) आसमान

3. ऊँचे विचारों वाला मनुष्य क्या करता है?
(क) स्वयं को अलग रखता है।
(ख) सर्व-कल्याण की भावना रखता है।
(ग) सिर्फ़ परिचितों के कल्याण की भावना रखता है।
(घ) मनमौजी होकर अपने लोगों का कल्याण करता है।
उत्तर :
(ख) सर्व-कल्याण की भावना रखता है।

4. संसार किस भेद-भाव से ग्रस्त है?
(क) जाति-धर्म
(ख) वेश-भूषा
(ग) काले-मोटे रंग
(घ) ये सभी विकल्प
उत्तर :
(घ) ये सभी विकल्प

5. भेदभाव को दूर करने के लिए कवि ने क्या कहा है?
(क) ममता की भावना का प्रचार करना
(ख) द्वेष-भावना का प्रचार करना
(ग) हीन भावना का प्रचार करना
(घ) ये सभी विकल्प
उत्तर :
(क) ममता की भावना का प्रचार करना

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17. ऊषा की सुकुमार रश्मि से रंचित थी जिसकी चितवन,
प्रात-स्वप्न-सा कहाँ खो गया वह मेरा भोला बचपन!
मृदुल सुनहरी चंचलता वह आज कहाँ है! लीन हुई,
यौवन की मोहलक सरिता में, क्या पीड़ा की मीन हुई!
सरल हंसी जिसमें सोती थी पड़ी हुई पीड़ा चुपचाप,
आज अश्रु से लिखती उर में अतीत का भूला इतिह्मस!

1. काव्यांश का उचित शीर्षक चुनिए
(क) सरिता
(ख) उषा की रश्मि
(ग) मेरा बचपन
(घ) इतिहास
उत्तर :
(ग) मेरा बचपन

2. कवि अपने बचपन के दिनों को क्या कहता है?
(क) अतीत का भूला इतिहास
(ख) नव लिखित इतिहास
(ग) अविस्मृत यादें
(घ) स्वर्णिम स्मृतियाँ
उत्तर :
(क) अतीत का भूला इतिहास

3. कवि की बचपन की चंचलता किसमें बदल गई है?
(क) मुसीबतों में
(ख) कठिन दिनचर्या में
(ग) यौवन की गंभीरता में ।
(घ) यौवन की सुकुमारता में
उत्तर :
(ग) अतीत की गंभीरता में

4. कवि अपने बचपन की यादों को हृदय पर किससे लिख रहा है?
(क) स्याही से
(ख) अश्रु से
(ग) पंख से
(घ) पेन से
उत्तर :
(ख) अश्रु से

JAC Class 10 Hindi अपठित बोध अपठित काव्यांश

5. कवि ने बचपन को किसके समान खो दिया है?
(क) हवा के समान
(ख) दिवा-स्वप्न के समान
(ग) बहुमूल्य हीरे के समान
(घ) रात्रि के स्वप्न के समान
उत्तर :
(ख) दिवा-स्वप्न के समान

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

JAC Class 10 Hindi बड़े भाई साहब Textbook Questions and Answers

मौखिक – 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न 1.
कथा-नायक की रुचि किन कार्यों में थी?
उत्तर :
कथा-नायक की रुचि खेलने-कूदने और मौज-मस्ती के कार्यों में थी। उसे कंकरियाँ उछालना व कागज़ की तितलियाँ उड़ाना अच्छा लगता है। कभी-कभी वह इधर-उधर घूमता था और कभी तरह-तरह के खेल खेलता था। उसकी पढ़ने में बिलकुल भी रुचि न थी।

प्रश्न 2.
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?
उत्तर :
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल यही पूछते थे कि अब तक तुम कहाँ थे? उसके बाद वे लंबा-चौड़ा भाषण दिया करते थे।

प्रश्न 3.
दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर :
दूसरी बार पास होने पर छोटा भाई बड़े भाई की सहनशीलता का अनुचित लाभ उठाने लगा। वह पहले से अधिक स्वच्छंद हो गया। वह अपना अधिक समय खेल-कूद में ही लगाने लगा।

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प्रश्न 4.
बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?
उत्तर :
बड़े भाई साहब लेखक से उम्र में पाँच साल बड़े थे। वे नौवीं कक्षा में पढ़ते थे।

प्रश्न 5.
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?
उत्तर :
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कॉपी और किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों की तसवीरें बनाया करते थे। कभी-कभी एक ही नाम, शब्द या वाक्य को कई बार लिखते थे और कभी ऐसी शब्द-रचना कर देते थे, जिसका कोई अर्थ और सामंजस्य नहीं होता था।

लिखित –

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30) शब्दों में लिखिए –

प्रश्न 1.
छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?
उत्तर :
बड़े भाई द्वारा बुरी तरह लताड़े जाने पर छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बना लिया। टाइम-टेबिल बनाते समय उसने सोचा कि अब वह खूब मन लगाकर पढ़ेगा और खेलकूद की ओर ध्यान नहीं देगा। उसने टाइम-टेबिल में खेलकूद का समय भी निर्धारित नहीं किया। लेकिन जैसे ही उसने टाइम-टेबिल का पालन करना चाहा, उसे खेलकूद की याद सताने लगी। उसे मैदान की सुखद हरियाली, हवा के हल्के-हल्के झोंके तथा कबड्डी व वॉलीबॉल आदि खेलों का आनंद अपनी ओर खींचने लगा। इस कारण छोटा भाई टाइम-टेबिल बनाकर भी उसका पालन नहीं कर पाया।

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प्रश्न 2.
एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई के सामने पहुंचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर :
एक दिन जब छोटा भाई गुल्ली-डंडा खेलने के बाद भोजन के समय लौटा, तो बड़े भाई साहब उस पर बहुत क्रोधित हुए। उन्हो डाँटते-फटकारते हुए कई तरह से समझाने का प्रयास किया। बड़े भाई साहब ने छोटे भाई से कहा कि उसे अपने पास होने का घमंड नहीं करना चाहिए। उन्होंने अनेक घमंडी लोगों और राजाओं के उदाहरण देकर उसे बताया कि घमंड करने से बड़े-से-बड़े व्यक्ति का भी नाश हो जाता है। उन्होंने उसके परीक्षा में पास होने को भी केवल एक संयोग बताया। बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को खेलों से दूर रहने की नसीहत दी।

प्रश्न 3.
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं ?
उत्तर :
बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे। बड़ा होने के नाते वे हर समय यही कोशिश करते कि वे जो कुछ भी करें, वह उनके छोटे भाई के लिए एक उदाहरण बन जाए। वे सदा अपने आपको एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे। उन्हें लगता था कि वे जैसा आचरण करेंगे, उनका छोटा भाई भी वैसा ही आचरण करेगा। अतः अपने छोटे भाई को अच्छी शिक्षा देने की चाह के कारण बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।

प्रश्न 4.
बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?
उत्तर :
बड़े भाई साहब छोटे भाई को पढ़ने-लिखने की सलाह देते थे। उनकी इच्छा थी कि जिस प्रकार वे हर उनका छोटा भाई भी अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगाए। उन्हें अपने छोटे भाई का खेलना और इधर-उधर घूमना अच्छा नहीं लगता था। बड़े भाई साहब चाहते थे कि उनका छोटा भाई पढ़-लिखकर विद्वान बने। इसी कारण वे उसे खेलकूद छोड़कर पढ़ने की सलाह दिया करते थे।

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प्रश्न 5.
छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
उत्तर :
लेखक के दूसरी बार पास होने और बड़े भाई साहब के फेल होने पर बड़े भाई साहब का व्यवहार नरम पड़ गया। वे अब लेखक को कम डाँटते थे। लेखक उनके नरम व्यवहार के कारण पहले से अधिक स्वच्छंद हो गया। उसने पढ़ने-लिखने के स्थान पर मौज-मस्ती करना शुरू कर दिया। वह अपना सारा समय पतंगबाजी और अन्य खेलों में लगाने लगा।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60) शब्दों में लिखिए –

प्रश्न 1.
बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए। उत्तर :
बड़े भाई साहब के साथ उनका छोटा भाई भी होस्टल में रहता था। बड़े भाई साहब हर समय पढ़ते रहते थे। वे चाहते थे कि उनका छोटा भाई भी खूब पढ़े, किंतु छोटे भाई का ध्यान पढ़ाई की बजाय खेलों में अधिक था। वे उसे निरंतर डाँटते-फटकारते रहते। उनकी डाँट-फटकार का प्रभाव यह हुआ कि छोटा भाई कक्षा में अव्वल आया। यदि बड़े भाई साहब उसे न डाँटते, तो उसका अव्वल आना संभव नहीं था।

बड़े भाई साहब ने स्वयं को आदर्श रूप में प्रस्तुत करते हुए स्वयं को सभी प्रकार के खेलों से दूर रखा। उन्होंने एक पिता के समान छोटे भाई पर पूरा नियंत्रण रखा और उसे पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित किया। यदि बड़े भाई साहब छोटे भाई को न डाँटते, तो वह पढ़ने-लिखने में अपना ध्यान बिलकुल न लगाता और अव्वल आना तो दूर, वह पास भी न हो पाता। निश्चित रूप से छोटे भाई के अव्वल आने में बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार का पूरा योगदान था।

प्रश्न 2.
‘बड़े भाई साहब’ पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है ? क्या आप उनके विच्चार से सहमत हैं ?
अथवा
‘बड़े भाई साहब’ कहानी के आधार पर लगभग 100 शब्दों में लिखिए कि लेखक ने समूची शिक्षा प्रणाली के किन पहलुओं: पर व्यंग्य किया है? आपके विचारों से इसका क्या समाधान हो सकता है? तर्कपूर्ण उत्तर लिखिए।
उत्तर :
बड़े भाई साहब पाठ में लेखक ने शिक्षा के विभिन्न तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है। लेखक के अनुसार आजकल विद्यार्थियों को जो कुछ भी पढाया जा रहा है, उससे उनके वास्तविक जीवन का कोई लेना-देना नहीं है। इसे पढकर उन्हें जीवन में कोई विशेष लाभ: भी नहीं होता, किंतु परीक्षा पास करने के लिए विद्यार्थियों को यह सब रटना पड़ता है। लेखक कहता है कि इतिहास में अंग्रेजों का इतिहास पढ़ाया जाता है।

इस इतिहास का वर्तमान से कोई संबंध नहीं है और इसे पढ़कर विद्यार्थी कोई बहुत बड़ा नाम भी नहीं कमा लेखक की यह बात बिलकुल सही है कि विद्यार्थियों को आजकल जो कुछ पढ़ाया जा रहा है, वह उचित नहीं है। यह पढ़ाई-लिखाई उनके जीवन में कोई बदलाव लाने वाली नहीं है। यह पढ़ाई उन्हें किसी प्रकार से आत्मनिर्भर बनाने में भी सक्षम नहीं है। अतः हम लेखक के विचारों से पूर्णत: सहमत हैं।

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प्रश्न 3.
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
उत्तर :
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ अनुभव से आती है। उनका मत है कि किताबें पढ़ने से मनुष्य विद्या तो ग्रहण कर सकता है, किंतु जीवन जीने की समझ जिंदगी के अनुभव से आती है। अधिक पढ़ा-लिखा होने से व्यक्ति विद्वान तो बन सकता है, लेकिन जीवन जीने के लिए जीवन की समझ की भी ज़रूरत होती है, जो केवल अनुभव से ही प्राप्त की जा सकती है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी अनुभवी हो सकता है चाहे उसने किताबें न पढ़ी हों, किंतु उसे भी अपने अनुभव से जिंदगी की बहुत समझ होती है। उसे उसके जीवन में घटने वाली घटनाएँ ही अनुभवी बनाती हैं। बड़े भाई साहब जीवन के इसी अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्व देते हैं।

प्रश्न 4.
छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई ?
उत्तर :
परीक्षा में दूसरी बार भी पास होने पर छोटा भाई पढ़ाई-लिखाई से दूर हो गया। एक दिन जब वह एक पतंग के पीछे दौड़ रहा था, तो बड़े भाई साहब ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने उसे बुरी तरह फटकारा। उनके द्वारा दिए गए तर्क और उदाहरण इतने सटीक थे कि छोटा भाई हैरान रह गया। बड़े भाई साहब ने उसे बताया कि केवल किताबी ज्ञान पा लेने से कोई महान नहीं बन जाता, बल्कि जीवन की समझ अनुभव से आती है।

बड़े भाई साहब छोटे भाई को बड़े ही सुंदर ढंग से समझाते हैं कि पढ़-लिखकर पास होना और जीवन की समझ होना-दोनों अलग-अलग बातें हैं। वे चाहे परीक्षा में पास न हुए हों, किंतु उनके पास जीवन का अनुभव अधिक है। परीक्षा में केवल पास होना ही बड़ी बात नहीं है अपितु अच्छे-बुरे समय में अपने आपको उसके अनुसार ढाल लेना बड़ी बात है।

बड़े भाई साहब उसे अपनी माता, दादा और हेडमास्टर साहब का उदाहरण देकर समझाते हैं कि जीवन में अनुभव की अधिक आवश्यकता है और उनके पास उससे कहीं ज्यादा अनुभव है। बड़े भाई साहब की ऐसी विद्वत्तापूर्ण बातों को सुनकर छोटे भाई के मन में उनके प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई थी।

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प्रश्न 5.
बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
(i) छोटे भाई का हितैषी – बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई का भला चाहने वाले हैं। वे निरंतर उसे अच्छाई की ओर प्रेरित करते हैं। वे स्वयं को उसके सामने एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे चाहते हैं कि उनका छोटा भाई किसी तरह से पढ़-लिख जाए। इसी कारण वे क्रोधित भी होते हैं और उस पर पूरा नियंत्रण भी रखते हैं।

(ii) गंभीर – बड़े भाई साहब गंभीर प्रवृत्ति के हैं। वे हर समय किताबों में खोए रहते हैं। वे अपने छोटे भाई के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते हैं, इसलिए वे सदा अध्ययनशील रहते हैं। उनका गंभीर स्वभाव ही उन्हें विशिष्टता प्रदान करता है।

(iii) वाक् कला में निपुण – बड़े भाई साहब वाक् कला में निपुण हैं। वे अपने छोटे भाई को ऐसे-ऐसे उदाहरण देकर बताते हैं कि वह उनके आगे नतमस्तक हो जाता है। उन्हें शब्दों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करना आता है। यही कारण है कि वे अपने छोटे भाई पर अपना पूरा दबदबा बनाए रखते हैं।

(iv) वर्तमान शिक्षा-प्रणाली का विरोधी – बड़े भाई साहब वर्तमान शिक्षा-प्रणाली के विरोधी हैं। उनके अनुसार यह शिक्षा प्रणाली किसी प्रकार से भी लाभदायक नहीं है। यह विद्यार्थियों को कोरा किताबी ज्ञान देती है, जिसका वास्तविक जीवन में कोई लाभ नहीं होता। विद्यार्थी को ऐसी-ऐसी बातें पढ़ाई जाती हैं, जिनका उसके भावी जीवन से कोई संबंध नहीं होता। वे ऐसी शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य करते हुए इसे दूर करने की बात कहते हैं।

प्रश्न 6.
बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है ?
उत्तर :
बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से जिंदगी के अनुभव को महत्वपूर्ण कहा है। उनके अनुसार किताबी ज्ञान से जीवन जीने की समझ नहीं आती। इससे जीवन की वास्तविकताओं का सामना भी नहीं किया जा सकता। किताबी ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति परिपक्व नहीं हो पाता। उनका मत है कि व्यक्ति अपनी जिंदगी के अनुभव से ही सबकुछ सीखता है। बहुत-से कम पढ़े-लिखे लोग भी; जिन्हें जिंदगी का अनुभव होता है; पढ़े-लिखे लोगों से अधिक समझदार होते हैं। जिंदगी का अनुभव हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम बनाता है। व्यक्ति अपने अनुभव के आधार पर बड़े-से-बड़े कार्य को भी सरलता स से कर लेता है। जिंदगी का अनुभव हमें इतना परिपक्व बना देता है कि हम अपनी मुसीबतों को भी सरलता से झेल लेते हैं, जबकि से कर ले किताबी ज्ञान प्राप्त करने वाला व्यक्ति मुसीबतों में अपना धैर्य खो देता है। इसी कारण बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान स महत्वपण कहा है।

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प्रश्न 7.
बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि –
(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।
(ख) भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।
(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।
(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
उत्तर :
(क) छोटा भाई अपने बड़े भाई की डाँट-डपट को चुपचाप सहन करता है। दूसरी बार भी बड़े भाई साहब के फेल होने पर जब छोटा भाई परीक्षा में पास हो जाता है, तो वह खेलकूद में अधिक ध्यान लगाने लगता है। तब भी वह बड़े भाई साहब से छिपकर पतंगबाज़ी आदि करता है। इससे पता चलता है कि छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।

(ख) भाई साहब अपने छोटे भाई को अनेक उदाहरण देकर घमंड न करने और जीवन में आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं। जब वे छोटे भाई को अपनी माता, दादा और हेडमास्टर साहब के विषय में बताते हैं, तो उनके द्वारा कही गई तर्कपूर्ण एवं सटीक बातों से पता चलता है कि उन्हें जिंदगी का अच्छा अनुभव है।

(ग) पाठ के अंत में जब भाई साहब एक पतंग की डोर को उछलकर पकड़ लेते हैं और होस्टल की ओर दौड़ते हैं, तो उनके इस व्यवहार से पता चलता है कि बड़े भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।

(घ) छोटे भाई साहब को समय-समय पर पढ़ने-लिखने की ओर ध्यान लगाने के लिए कहते हैं। वे उसे समझाते हुए कहते हैं कि वे उसे किसी भी सूरत में गलत राह पर चलने नहीं देंगे। भाई साहब स्वयं एक आदर्श बनकर लेखक को जीवन में परिश्रम करने की शिक्षा देते हैं। उनकी डाँट-फटकार के पीछे भी उनका उद्देश्य लेखक का भला चाहना है। इससे स्पष्ट है कि बड़े भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1.
इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
उत्तर :
राक्षा में पास हाना काई है। बड़ी बात तो बुद्धि का विकास करना है। यदि कोई व्यक्ति अनेक परीक्षाएँ पास कर ले, किंतु उसे अच्छे-बुरे में अंतर करना न आए तो उसकी पढ़ाई व्यर्थ है। पुस्तकों को पढ़कर उसके ज्ञान से अपनी बुद्धि का विकास करना ही असली विद्या है।

प्रश्न 2.
फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
उत्तर :
प्रस्तुत कथन छोटे भाई का है। वह अपने बड़े भाई से छिपकर खेलने जाया करता था। उसे पता था कि यदि उसके भाई साहब को पता चल जाएगा तो वे उसे बुरी तरह फटकारेंगे, किंतु छोटे भाई को खेल-कूद से इतना अधिक मोह था कि वह चाहकर भी खेल-कूद को नहीं छोड़ सकता था।

लेखक कहता है कि जिस प्रकार मौत और विपत्ति से घिरा हुआ मनुष्य भी मोह-माया के बंधनों से नहीं निकल पाता, उसी प्रकार बड़े भाई साहब की फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी छोटा भाई अपने खेल-कूद को नहीं छोड़ सकता था। वह अपने खेलकूद के कारण अनेक प्रकार की डाँट-फटकार सहन करता था, लेकिन खेलकूद का मोह छोड़ पाना उसके लिए संभव नहीं था।

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प्रश्न 3.
बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने ?
उत्तर :
इस पंक्ति से लेखक का आशय है कि किसी भी मज़बूत मकान के लिए मज़बूत नींव का होना आवश्यक है। यदि नींव कमजोर होगी, तो उस पर बना मकान भी कमजोर ही होगा। नींव जितनी मज़बूत होगी, उस पर बना मकान भी उतना ही मज़बूत होगा। उसी तरह किसी भी मज़बूत व्यक्तित्व के निर्माण के लिए उसकी नींव का बहुत बड़ा योगदान होता है। अत: नींव को मजबूत बनाना चाहिए।

प्रश्न 4.
आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
उत्तर :
लेखक कहता है कि एक दिन वह एक कटी हुई पतंग को लूटने के लिए उसके पीछे दौड़ रहा था। उस समय उसकी आँखें आसमान की ओर थीं और उसका मन उस कटी हुई पतंग की ओर लगा हुआ था। पतंग धीरे-धीरे हवा में लहराती हुई नीचे की ओर गिरने को थी। उस समय वह पतंग ऐसी प्रतीत हो रही थी, जैसे कोई पवित्र व शांत आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से धरती पर नया जन्म लेने के लिए उतर रही हो।

भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए –
नसीहत, रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब
उत्तर

  • नसीहत – उपदेश, सीख
  • रोष – क्रोध, गुस्सा
  • आज़ादी – स्वतंत्रता, स्वाधीनता
  • राजा – नरेश, नृप
  • ताज्जुब – हैरानी, आश्चर्य

प्रश्न 2.
प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। इसीलिए इनकी कहानियाँ रोचक और प्रभावपूर्ण होती हैं। इस कहानी में आप देखेंगे कि हर अनुच्छेद में दो-तीन मुहावरों का प्रयोग किया गया है। उदाहरणतः इन वाक्यों को देखिए और ध्यान से पढ़िए –
मेरा जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था।
भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति बाण चलाते कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती। वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँखफोड़ पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहत और फ़जीहत का अवसर मिल जाता।
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा।
उत्तर :

  • सिर पर नंगी तलवार लटकना – युद्ध-क्षेत्र में सैनिकों के सिर पर सदा नंगी तलवार लटकती रहती है।
  • आड़े हाथों लेना – जब रमेश द्वारा मोहन पर लगाए आरोप झूठे निकले, तो मोहन ने उसे आड़े हाथों लिया।
  • अंधे के हाथ बटेर लगना – सोहन कम पढ़ा-लिखा है, किंतु उसे सरकारी नौकरी मिल गई है। सच है कि अंधे के हाथों बटेर लग गई।
  • लोहे के चने चबाना – जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ते हैं।
  • दाँतों पसीना आना – आई०ए०एस० की परीक्षा पास करने में दाँतों पसीना आ जाता है।
  • ऐरा-गैरा नत्थू खैरा – एवरेस्ट पर चढ़ना ऐरे-गैरे नत्थू खैरे का काम नहीं है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए –
JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब 1
तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रातःकाल, विद्ववान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिल
उत्तर :
JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब 2

प्रश्न 4.
क्रियाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-सकर्मक और अकर्मक।
सकर्मक क्रिया – वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा रहती है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं; जैसे –
शीला ने सेब खाया।
मोहन पानी पी रहा है।
अकर्मक क्रिया – वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं; जैसे- शीला हँसती है।
बच्चा रो रहा है।
नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है-सकर्मक या अकर्मक? लिखिए –
(ख) सकर्मक क्रिया
(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।
(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा।
(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।
(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।
(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।
उत्तर :
(क) सकर्मक क्रिया
(ख) सकर्मक क्रिया
(ग) सकर्मक क्रिया
(घ) सकर्मक क्रिया
(ङ) सकर्मक क्रिया
(च) अकर्मक क्रिया

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 5.
‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए –
विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार
उत्तर :
विचार + इक = वैचारिक
इतिहास + इक = ऐतिहासिक
संसार + इक = सांसारिक
दिन + इक = दैनिक
नीति + इक = नैतिक
प्रयोग + इक = प्रयोगिक
अधिकार + इक = अधिकारिक

योग्यता विस्तार –

प्रश्न 1.
प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इनमें से कहानियाँ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। कुछ कहानियों का मंचन भी कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 2.
शिक्षा रटंत विद्या नहीं है-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

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प्रश्न 3.
क्या पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ चल सकते हैं कक्षा में इस पर वाद-विवाद कार्यक्रम आयोजित कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

प्रश्न 4.
क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है? इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

परियोजना कार्य – 

प्रश्न 1.
कहानी में जिंदगी से प्राप्त अनुभवों को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है। अपने माता-पिता, बड़े भाई-बहनों या अन्य बुजुर्ग/बड़े सदस्यों से उनके जीवन के बारे में बातचीत कीजिए और पता लगाइए कि बेहतर ढंग से जिंदगी जीने के लिए क्या काम आया-समझदारी/पुराने अनुभव या किताबी पढ़ाई ?
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2.
आपकी छोटी बहिन/छोटा भाई छात्रावास में रहती/रहता है। उसकी पढ़ाई-लिखाई के संबंध में उसे एक पत्र लिखिए। उत्तर :
15-सी, कर्ण विहार
पुणे 4 जनवरी, 20……
प्रिय दुष्यंत
शुभाशीष!
मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम खूब मन लगाकर पढ़ रहे हो। तुम दसवीं कक्षा में आ गए हो। अब तुम्हें पढ़ाई-लिखाई की ओर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है। छात्रावास में रहने वाले अपने साथियों के साथ बैठकर खूब पढ़ा करो। यदि अब तुम मेहनत कर लोगे, तो तुम्हें जीवन भर इसका लाभ मिलेगा। दसवीं की पढ़ाई थोड़ी कठिन है। ऐसे में तुम्हें अपने आपको मानसिक रूप से तैयार करके खूब पढ़ाई करनी होगी। मैं आशा करता हूँ कि तुम अच्छे लड़कों की संगति में बैठकर पढ़ाई में ध्यान लगाते होगे। छात्रावास में तुम पर घरवालों का कोई अधिक नियंत्रण नहीं है। ऐसे में तुम्हें स्वयं ही अपनी जिम्मेवारी समझकर खूब पढ़ना-लिखना होगा। मुझे विश्वास है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी तुम अच्छे अंकों से पास हो जाओगे। पढ़ाई में पूरा मन लगाना।
तुम्हारा बड़ा भाई
गौतम

JAC Class 10 Hindi बड़े भाई साहब Important Questions and Answers

निबंधात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1.
बड़े भाई साहब छोटे भाई को अपना उदाहरण किस रूप में देते हैं ?
उत्तर :
छोटे भाई की खेलकूद में अधिक रुचि होने के कारण बड़े भाई साहब उसे डाँटते-फटकारते हैं। वे उसे उनसे सबक लेने की बात कहते हैं। वे अपने आपको उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि वे परीक्षा में पास होने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। वे किसी मेले-तमाशे में नहीं जाते। प्रतिदिन होने वाले हॉंकी और क्रिकेट के मैचों से दूर रहते हैं। उनके इस प्रकार के तौर-तरीकों से उसे सीख लेनी चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं कर सकता, तो उसे पढ़ाई-लिखाई छोड़कर वापस घर चले जाना चाहिए।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 2.
छोटे भाई की खेलकूद के प्रति रुचि की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर :
छोटा भाई खेलकूद में अत्ययिक रुचि होने के कारण सदा बड़े भाई साहब से तिरस्कार पाता था। यद्यपि वह उनसे छिपकर खेलता था, फिर भी पकड़ा जाता था और बड़े भाई साहब उसे बुरी तरह फटकारते थे। छोटे भाई की खेलकूद में रुचि की तुलना मौत और विपत्ति के बीच फँसे उस व्यक्ति से की गई है, जो मोह-माया के बंधनों में जकड़ा हुआ है। जिस प्रकार व्यक्ति विपत्ति और मृत्यु के बीच फँसे होने पर भी मोह-माया को नहीं छोड़ पाता, उसी प्रकार छोटा भाई भी ब्रे़े भाई साहब द्वारा अनेक प्रकार से अपमानित होने पर भी खेलकुद को छोड़ पाने में असमर्थ था।

प्रश्न 3.
बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को घमंड न करने की नसीहत किस प्रकार दी?
उत्तर :
बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को रावण के उदाहरण के माध्यम से घमंड न करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि रावण भूमंडल का स्वामी था। वह ऐसा चक्रवर्ती राजा था कि बड़े-बड़े देवता भी उसकी गुलामी करते थे। अग्नि और वरुण देवता भी उसके सेवक थे। ऐसे चक्रवर्ती राजा का भी घमंड के कारण अंत हो गया और उसका नामो-निशान तक मिट गया। वे कहते हैं कि घमंड सभी कुकर्मों में सबसे बड़ा है। मनुष्य को कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए। जो अभिमान करता है, उसका शीघ्र ही अंत हो जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने शैतान और शाहेरूम का उदाहरण देकर भी अपने छोटे भाई को घमंड न करने की नसीहत दी।

प्रश्न 4.
छोटे भाई को बाजार में पतंग लूटते देखकर बड़े भाई साहब ने उसे कैसे डाँटा?
उत्तर :
एक दिन जब छोटा भाई पतंग लूटने के लिए दौड़ रहा था, तो बाजार से लौटते अपने बड़े भाई साहब से टकरा गया। बड़े भाई साहब उसे देखते ही क्रोधित हो गए। उन्होंने उसे डाँटते हुए कहा कि वह जिस आठवीं कक्षा में है, वह कोई छोटी कक्षा नहीं है। उसे अपनी पोजीशन का ख्याल रखना चाहिए। इस कक्षा को पास करके पहले जमाने में लोग नायब तहसीलदार बन जाया करते थे और आज भी अनेक आठवीं पास करने वाले लीडर और समाचार-पत्रों के संपादक हैं। अत: उसे अब आठवीं कक्षा में आने पर बाज़ारी लड़कों के साथ पतंग लूटते घूमना शोभा नहीं देता।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 5.
बड़े भाई साहब ने हेडमास्टर साहब और उनकी माँ का उदाहरण किस संदर्भ में दिया है ?
उत्तर :
बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई को समझाते हुए कहते हैं कि किताबी ज्ञान की अपेक्षा जीवन का अनुभव अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने हेडमास्टर साहब और उनकी माँ का उदाहरण दिया है। वे कहते हैं कि हेडमास्टर साहब एम० ए० पास हैं, किंतु उनके घर का सारा प्रबंध उनकी माँ के हाथों में है। जब वे घर का प्रबंध करते थे, तो सदा कर्जदार रहते थे; किंतु उनकी माँ उतने ही धन से उनके घर का सारा प्रबंध बड़ी सहजता से कर लेती हैं। इसका कारण यह है कि उनकी माँ को जिंदगी की समझ है। अतः किताबी ज्ञान और जीवन के अनुभव में से जीवन का अनुभव श्रेष्ठ है।

प्रश्न 6.
कहानी के आधार पर बताइए कि लेखक ने अंग्रेज़ी की शिक्षा पर अपने क्या विचार प्रकट किए हैं?
उत्तर :
कहानी में अंग्रेजी भाषा के बारे में बताते हुए बड़े भाई साहब कहते हैं कि अंग्रेजी पढ़ना कोई आसान काम नहीं है और न ही इसे समझने के लिए दिन-रात एक करने पड़ते हैं। देर-देर तक पढ़ना पड़ता है। किताबों में आँखें गड़ाकर बैठना पडता है। न चाहते हुए भी अपना खन जलाना पडता है। इसकी कठिनाई इसी से समझो कि इसे बोल पाना और लिखना सभी के बस की बात नहीं है। यदि आसान होता तो सभी अंग्रेजी के विद्वान बन गए होते। दूसरों को क्या देखोगे, मुझे ही देखो। दिन-रात अंग्रेज़ी को पढ़ता हूँ; सारा दिमाग इसी में लगाकर रखता हूँ, फिर भी फेल हो जाता हूँ। इसी से अंदाज़ा लगा लो कि यह कितनी कठिन है।

प्रश्न 7.
कहानी में निहित संदेश को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
कहानी में निहित संदेश यह है कि जिंदगी का अनुभव किसी भी पुस्तकीय ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है। जीवन जीने की समझ जितनी अनुभव से आ सकती है, उतनी किताबी ज्ञान से कभी नहीं आ सकती। अनुभव जीवन की वास्तविकताओं से हमारा आमना-सामना करवाता है, लेकिन पुस्तकीय ज्ञान वास्तविकताओं से कोसों दूर होता है। पुस्तकीय ज्ञान व्यक्ति में धैर्य की परिभाषा तो अवश्य भर देता है, लेकिन धैर्य धारण करने की शक्ति उसे अनुभव से ही आती है। अनुभव व्यक्ति को परिपक्व बनाता है, जिससे वह हर कठिनाई का सामना बड़ी दृढ़ता और सूझ-बूझ के साथ करता है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 8.
‘बड़े भाई साहब’ कहानी के आधार पर छोटे भाई की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
‘बड़े भाई साहब’ कहानी में छोटे भाई को एक आम विद्यार्थी के समान चित्रित किया गया है। वह सारा दिन खेलता-कूदता है। उसकी खेलने में अत्यधिक रुचि है। उसे सारा दिन मौज-मस्ती के अतिरिक्त कुछ और नहीं सूझता था। सारे दिन में वह एक घंटे से भी कम समय पढ़ता था, लेकिन फिर भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो जाता था। वह कुशाग्र बुद्धि का स्वामी था। उसके मन में अपने बड़े भाई के प्रति बहुत आदर-सम्मान की भावना थी। खेल-कूद न छोड़ पाने के कारण उसे अपने बड़े भाई की डाँट-फटकार भी सुननी पड़ती थी।

लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘बड़े भाई साहब’ किस प्रकार की कहानी है? लेखक इसके द्वारा क्या स्पष्ट करना चाहता है?
उत्तर :
‘बड़े भाई साहब’ कहानी मुंशी प्रेमचंद के द्वारा आत्मकथात्मक शैली में लिखी एक श्रेष्ठ कहानी है। इस कहानी में लेखक ने बड़े भाई साहब के माध्यम से घर में बड़े भाई की आदर्शवादिता के कारण उसके बचपन के तिरोहित होने की बात कही गई है। लेखक इस कहानी के द्वारा यह स्पष्ट करना चाहता है कि घर के बड़े लोग अपने से छोटों को सही मार्ग दिखाने के लिए अनेक प्रकार के सामाजिक समझोते करते हैं।

प्रश्न 2.
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ से हमें प्रेम और सौहार्द की शिक्षा मिलती है। हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने से छोटों को दुत्कारकर नहीं अपितु प्यार से समझाना चाहिए। हमें उन्हें अपमानित नहीं करना चाहिए। उनकी बातों को भी हमें प्रमुखता के साथ सुनना चाहिए। उनकी त्रुटियों को उन्हें प्यार से बताकर दूर करना चाहिए। उन्हें कभी इस बात का भान नहीं होना चाहिए कि बड़ों के सामने उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं।

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प्रश्न 3.
कहानी में यह कैसे पता चलता है कि छोटा भाई बड़े भाई का बहुत आदर-सम्मान करता था?
उत्तर :
कहानी में ऐसे बहुत-से स्थान हैं, जहाँ यह पता चलता है कि छोटा भाई बड़े भाई के प्रति अपने हृदय में कितना आदर-भाव रखता है। बड़े भाई द्वारा अपमानित करने पर भी वह और चुपचाप खड़ा रहता है। वह उनसे सवाल-जवाब नहीं करता। वह बड़े भाई की बातों को आदेश मानकर उन पर अमल करने का प्रयास करता है। वह श्रद्धावश उनके प्रति नतमस्तक हो जाता है।

प्रश्न 4.
बड़े भाई साहब का छोटे भाई के प्रति कैसा व्यवहार था?
उत्तर :
बड़े भाई साहब और उनके छोटे भाई में पाँच वर्ष का अंतर था। बड़े भाई साहब स्वभाव से क्रोधी थे। वे छोटे भाई को अत्यधिक खेलने-कूदने में रुचि लेने के कारण उसे बहुत डाँट-फटकार लगाते थे। वे उस समय का सदुपयोग करने तथा मन लगाकर पढ़ने की सलाह देते थे।

प्रश्न 5.
बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई को उनसे क्या सीख लेने को कहते थे?
उत्तर :
बड़े भाई का मानना था कि वे स्वयं बहुत मेहनती हैं; लगनशील हैं। वे सारा दिन पढ़ाई में लगे रहते हैं। वे खेल-कूद से भी दूर रहते हैं। अतः उनके छोटे भाई को उनसे सीख लेते हुए अपनी दिनचर्या उनके अनुसार बनाकर कड़ी मेहनत करनी चाहिए। व्यर्थ में इधर-उधर की बातों तथा खेल-कूद में समय नहीं गँवाना चाहिए।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

प्रश्न 6.
बड़े भाई साहब की बातों का छोटे भाई पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
बड़े भाई की बातें सुनकर छोटे भाई का मन निराशा से भर जाता है; उसे आत्मग्लानि होने लगती है; वह स्वयं को सुधारना चाहता है; बड़े भाई द्वारा दिखाए मार्ग पर चलना चाहता है। अतः वह खूब मन लगाकर पढ़ने का निश्चय करता है। वह एक टाइम-टेबिल का भी निर्माण करता है, किंतु जल्दी ही उसका टाइम-टेबिल खेल-कूद की भेट चढ़ जाता है। वह फिर से खेलने-कूदने में मस्त हो जाता है।

प्रश्न 7.
किताबी ज्ञान के विषय में बड़े भाई साहब के क्या विचार थे?
उत्तर :
बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई को समझाते हुए कहते हैं कि जीवन में व्यक्ति का अनुभव किताबी ज्ञान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्हें उससे कहीं ज्यादा अनुभव था। वे जीवन में किताबी ज्ञान की बजाय समझ को अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए कहते हैं कि यह समझ केवल अनुभव से ही प्राप्त की जा सकती है, न कि किताबी ज्ञान से।

बड़े भाई साहब Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन-प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे प्रथम लेखक हैं, जिन्होंने साहित्य का नाता जनजीवन से जोड़ा। उन्होंने अपने कथा साहित्य को सामान्य जन के चित्रण द्वारा सजीव बना दिया है। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त आर्थिक और सामाजिक विषमता को बड़ी निकटता से देखा था। यही कारण है कि उनके उपन्यासों एवं कहानियों में जीवन की यथार्थ अभिव्यक्ति का सजीव चित्रण उपलब्ध होता है। प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही नामक गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था।

आरंभ में वे नवाबराय के नाम से उर्दू में लिखते थे। बदलते युग के प्रभाव ने उनको हिंदी की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने सदा वही लिखा, जो उनकी आत्मा ने कहा। वे मुंबई में पटकथा लेखक के रूप में अधिक समय तक इसलिए कार्य नहीं कर पाए क्योंकि वहाँ उन्हें फिल्म निर्माताओं के निर्देशों के अनुसार लिखना पड़ता था। उन्हें तो स्वतंत्र लिखना ही अच्छा लगता था। जीवन में निरंतर विकट परिस्थितियों का सामना करने के कारण प्रेमचंद का शरीर जर्जर होता चला गया। निरंतर साहित्य साधना करते हुए 8 अक्टूबर सन 1936 को उनका स्वर्गवास हो गया।

रचनाएँ – प्रेमचंद प्रमुख रूप से कथाकार थे। उन्होंने जो कुछ भी लिखा, वह समाज की मुँह बोलती तसवीर है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया; परंतु निर्धन, पीड़ित एवं पिछड़े हुए वर्ग के प्रति उनकी विशेष सहानुभूति थी। उन्होंने शोषक एवं शोषित दोनों वर्गों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं उपन्यास-वरदान, सेवा-सदन, प्रेमाश्रय, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, प्रतिज्ञा, गबन, कर्मभूमि, गोदान एवं मंगल सूत्र (अपूर्ण)।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

कहानी संग्रह – प्रेमचंद ने लगभग 400 कहानियों की रचना की। उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ ‘मानसरोवर’ कहानी संग्रह के आठ भागों में संकलित हैं।
नाटक – कर्बला, संग्राम और प्रेम की वेदी।
निबंध संग्रह – कुछ विचार।
भाषा-शैली – भाषा-शैली की दृष्टि से ‘बड़े भाई साहब’ कहानी प्रेमचंद की अन्य रचनाओं की भाँति उच्च कोटि की रचना है। उनकी भाषा बहुत सरल, सहज और आम बोलचाल की भाषा है, जो भावाभिव्यक्ति में पूर्णतः सक्षम है।

भाषा पूर्ण रूप से पात्रानुकूल है। इस कहानी में तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों का सुंदर मिश्रण है। कथा-संगठन, चरित्र-चित्रण एवं कथोपकथन की दृष्टि से भाषा बेजोड़ है। भाषा में मुहावरों, लोकोक्तियों तथा सूक्तियों के प्रयोग से सजीवता आ गई है। इस कहानी में उन्होंने आड़े हाथों लेना, घाव पर नमक छिड़कना, नामों-निशान मिटा देना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा, सिर फिरना, अंधे के हाथ बटेर लगना, दाँतों पसीना आना, लोहे के चने चबाना, पापड़ बेलना, आटे-दाल का भाव मालूम होना, गाँठ बाँधना जैसे अनेक मुहावरों का सटीक प्रयोग किया है।

देशज शब्दों के प्रयोग से उन्होंने भाषा को प्रसंगानुकूल बनाकर प्रवाहमयी बना दिया है। ‘बड़े भाई साहब’ कहानी आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई है, जिसमें कथानायक स्वयं कहानी सुना रहा है। कहीं-कहीं संवादात्मक शैली का प्रयोग है, जिससे कहानी में नाटकीयता आ गई है। शैली में सरसता और रोचकता सर्वत्र विद्यमान है।

पाठका सार –

‘बड़े भाई साहब’ कहानी प्रेमचंद द्वारा आत्मकथात्मक शैली में लिखी एक श्रेष्ठ कहानी है। इस कहानी में उन्होंने बड़े भाई साहब के माध्यम से घर में बड़े भाई की आदर्शवादिता के कारण उनके बचपन के तिरोहित होने की बात कही है। बड़ा भाई सदा छोटे भाई के सामने अपना आदर्श रूप दिखाने के कारण कई बार अपने ही बचपन को खो देता है। बड़े भाई साहब और उनके छोटे भाई में पाँच वर्ष का अंतर है, किंतु वे अपने छोटे भाई से केवल तीन कक्षाएँ ही आगे हैं।

बड़े भाई साहब सदा पढ़ाई में डूबे रहते हैं, लेकिन उनके छोटे भाई का खेलकूद में अधिक मन लगाता है। दोनों भाई होस्टल में रहते हैं। बड़े भाई साहब प्राय: छोटे भाई को उसकी खेलकूद में अधिक रुचि के कारण डाँटते रहते हैं। वे उसे उनसे सीख लेने की बात कहते हैं। उनका कहना है कि वे बहुत मेहनत करते हैं; खेलकूद और खेल-तमाशों से दूर रहते हैं, इसलिए उसे उनसे सबक लेना चाहिए। वे छोटे भाई से कहते हैं कि यदि वह मेहनत नहीं कर सकता, तो उसे घर वापस लौट जाना चाहिए।

उनकी ऐसी बातें सुनकर छोटा भाई निराश हो जाता है। कुछ देर बाद वह जी लगाकर पढ़ने का निश्चय करता है और एक टाइम-टेबिल बना लेता है। वह अपने इस टाइम-टेबिल में खेलकूद को कोई स्थान नहीं देता, लेकिन शीघ्र ही उसका टाइम-टेबिल खेलकूद की भेंट चढ़ जाता है और वह फिर से खेलकूद में मस्त हो जाता है। बड़े भाई साहब की डाँट और तिरस्कार से भी वह अपने खेलकूद को नहीं छोड़ पाता।

कुछ समय बाद वार्षिक परीक्षाएँ हुईं। बड़े भाई साहब कठिन परिश्रम करके भी फेल हो गए, किंतु छोटा भाई प्रथम श्रेणी से पास हो गया। धीरे-धीरे छोटा भाई खेलकूद में अधिक मन लगाने लगा। बड़े भाई साहब से यह देखा नहीं गया। वे उसे रावण का उदाहरण देकर समझाते हैं कि घमंड नहीं करना चाहिए। घमंड करने से रावण जैसे चक्रवर्ती राजा का भी अस्तित्व मिट गया था; शैतान और शाहेरूम भी अभिमान के कारण नष्ट हो गए थे।

छोटा भाई उनके इन उपदेशों को चुपचाप सुनता रहा। वे कहते हैं कि उनकी नौवीं कक्षा की पढ़ाई बहुत कठिन है। अंग्रेजी, इतिहास, गणित तथा हिंदी आदि विषयों में पास होने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने अपनी कक्षा की पढ़ाई का ऐसा भयंकर चित्र खींचा कि छोटा भाई बुरी तरह से डर गया। दोबारा वार्षिक परीक्षाएँ हुईं। इस बार भी बड़े भाई साहब फेल हो गए और छोटा भाई पास हो गया। बड़े भाई साहब बहुत दुखी हुए।

छोटे भाई की अपने बारे में यह धारणा बन गई कि वह चाहे पढ़े या न पढ़े, लेकिन पास हो ही जाएगा। अतः उसने पढ़ाई करना बंद करके खेलकूद में ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। बड़े भाई साहब भी अब उसे कम डाँटते थे। धीरे-धीरे छोटे भाई की स्वच्छंदता बढ़ती गई। उसे पतंगबाजी का नया शौक लग गया। अब वह सारा समय पतंगबाजी में नष्ट करने लगा, किंतु वह अपने इस शौक को बड़े भाई साहब से छिपकर पूरा करता था।

एक दिन वह एक पतंग लूटने के लिए पतंग के पीछे-पीछे दौड़ रहा था कि अचानक बाजार से लौट रहे बड़े भाई साहब से टकरा गया। उन्होंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे डाँटते हुए कहा कि अब वह आठवीं कक्षा में है। अतः उसे अपनी पोजीशन का ख्याल करना चाहिए। पहले ज़माने में तो आठवीं पास नायब तहसीलदार तक बन जाया करते थे। बड़े भाई साहब उसे समझाते हुए कहते हैं कि जीवन में किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का अनुभव होता है और उन्हें उससे कहीं ज्यादा अनुभव है।

वे अपनी माँ, दादा अपने स्कूल के हेडमास्टर साहब और उनकी माँ का उदाहरण देकर बताते हैं कि जिंदगी में केवल किताबी ज्ञान से ही काम नहीं चलता अपितु जिंदगी की समझ भी जरूरी होती है, जो केवल अनुभव से आती है। … बड़े भाई साहब के ऐसा समझाने पर छोटा भाई उनके आगे नतमस्तक होकर कहता है कि वे जो कुछ कह रहे हैं, वह बिलकुल सच है। बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई को गले लगा लेते हैं।

वे कहते हैं कि उनका भी मन खेलने-कूदने का करता है, लेकिन यदि वे ही खेलने-कूदने लगेंगे तो उसे क्या शिक्षा दे पाएँगे? तभी उनके ऊपर से एक कटी हुई पतंग गुजरती है, जिसकी डोर नीचे लटक रही थी। बड़े भाई साहब ने लंबे होने के कारण उसकी डोर पकड़ ली और तेजी से होस्टल की ओर दौड़ पड़े। उनका छोटा भाई भी उनके पीछे-पीछे दौड़ रहा था।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 बड़े भाई साहब

कठिन शब्दों के अर्थ :

दरजा – श्रेणी, तालीम – शिक्षा, बुनियाद – नींव, पुख्ता — मज़बूत, तंबीह – डाँट-डपट, हुक्म – आदेश, सामंजस्य – तालमेल, मसलन – उदाहरणतः, इबारत – लेख, चेष्टा – कोशिश, जमात – कक्षा, होस्टल – छात्रावास, हर्फ – अक्षर, मिहनत (मेहनत) – परिश्रम, सबक – सीख, बर्बाद – नष्ट, लताड़ – डाँट-डपट, निपुण – कुशल, सूक्ति-बाण – व्यंग्यात्मक कथन, तीखी बातें, चटपट – उसी क्षण, टाइम-टेबिल – समय-सारणी, स्कीम – योजना, अमल करना – पालन करना, अवहेलना – तिरस्कार, नसीहत – सलाह, फजीहत – अपमान, तिरस्कार – उपेक्षा, विपत्ति – मुसीबत, सालाना इम्तिहान – वार्षिक परीक्षा, हमदर्दी – सहानुभूति,

लज्जास्पद – शर्मनाक, शरीक – शामिल, ज़ाहिर – स्पष्ट, आतंक- भय, अव्वल – प्रथम, असल – वास्तविक, आधिपत्य – साम्राज्य, स्वाधीन – स्वतंत्र, महीप – राजा, कुकर्म – बुरा काम, अभिमान – घमंड, निर्दयी – क्रूर, मुमतहीन – परीक्षक, परवाह – चिंता, फायदा – लाभ, प्रयोजन – उद्देश्य, खुराफ़त – व्यर्थ की बातें, हिमाकत – बेवकूफ़ी, किफ़ायत – बचत (से), दुरुपयोग – अनुचित उपयोग, निःस्वाद – बिना स्वाद का, ताज्जुब – आश्चर्य, हैरानी, टास्क – कार्य, जलील – अपमानित, प्राणांतक – प्राण लेने वाला,

प्राणों का अंत करने वाला, कांतिहीन – चेहरे पर चमक न होना, स्वच्छंदता – आज़ादी, सहिष्णुता – सहनशीलता, कनकौआ – पतंग, अदब – इज्जत, पथिक – यात्री, मिडलची – आठवीं पास, जहीन – प्रतिभावान, महज़ – केवल, समकक्ष – बराबर, तुजुर्बा – अनुभव, मरज़ – बीमारी, बदहवास – बेहाल, मुहताज (मोहताज) – दूसरे पर आश्रित होना, कुटुंब – परिवार, इंतज़ाम – प्रबंध, बेराह – बुरा रास्ता, लघुता – छोटापन, जी – मन।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Question 1.
Plot the point (3, 4) on a graph paper.
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry - 1
Let XX’ and YY’ be the coordinate axes. Here given point is P(3, 4). First we move 3 units along OX as 3 is positive and we arrive at a point M. Now from M we move 4 units vertically upward as 4 is positive. Then we arrive at P(3, 4).

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Question 2.
Write the quadrants for the following points.
(i) A(3, 4)
(ii) B(-2, 3)
(iii) C(-5, -2)
(iv) D(4, -3)
(v) E(-5, -5)
Solution :
(i) Here both coordinates are positive therefore point A lies in Ist quadrant.
(ii) Here x-coordinate is negative and y-coordinate is positive therefore point B lies in 2nd quadrant.
(iii) Here both coordinates are negative therefore point lies in 3rd quadrant.
(iv) Here x-coordinate is positive and y-coordinate is negative therefore point D lies in 4th quadrant.
(v) Here both corrdinates are negative therfore point E lies in 3rd quadrant.

Question 3.
Plot the following points on the graph paper.
(i) A(2, 5)
(ii) B(-5, -7)
(iii) C(3, -2)
(iv) D(0, 5)
(v) E(5, 0)
Solution :
Let XOX’ and YOY’ be the coordinate axes.
Then the given points may be plotted as given below:
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry - 2

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Question 4.
Find the distance between
(i) (5, 3) and (3, 2)
(ii) (-1, 4) and (2, -3)
(iii) (a, b) and (-b, a)
Solution :
Let d1, d2, d3 be the required distances. By using the distance formula, we have
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry - 3

Multiple Choice Questions

Question 1.
The abscissa of a point is the distance of the point from :
(a) x-axis
(b) y-axis
(c) Origin
(d) None of these
Solution :
(b) y-axis

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Question 2.
The y-coordinate of a point is the distance of that point from:
(a) x-axis
(b) y-axis
(c) Origin
(d) None of these
Solution :
(a) x-axis

Question 3.
If both coordinates of any point are negative then that point will lie in:
(a) First quadrant
(b) Second quadrant
(c) Third quadrant
(d) Fourth quadrant
Solution :
(c) Third quadrant

Question 4.
If the abscissa of any point is zero then that point will lie:
(a) on x-axis
(b) on y-axis
(c) at origin
(d) None of these
Solution :
(b) on y-axis

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 3 Coordinate Geometry

Question 5.
The distance of the point (3, 5) from x-axis is:
(a) \(\sqrt{34}\)
(b) 3
(c) 5
(d) None of these
Solution :
(c) 5

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 1.
Find the value of:
(i) 36x2 + 49y2 + 84xy, when x = 3, y = 6
(ii) 25x2 + 16y2 – 40xy, when x = 6, y = 7
Solution :
(i) 36x2 + 49y2 + 84xy
= (6x)2 + (7y)2 + 2 × (6x) × (7y)
= (6x + 7y)2
= (6 × 3 + 7 × 6)2 [When x = 3, y = 6]
= (18 + 42)2 = (60)2 = 3600

(ii) 25x2 + 16y2 – 40xy
= (5x)2 + (4y)2 – 2 × (5x) × (4y)
= (5x – 4y)2
= (5 × 6 – 4 × 7)2 [When x = 6, y = 7]
= (30 – 28)2 = 22 = 4

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 2.
If x2 + \(\frac{1}{x^2}\) = 23, find the value of (x + \(\frac {1}{x}\)), where x > 0
Solution :
x2 + \(\frac{1}{x^2}\) = 23 …. (i)
⇒ x2 + \(\frac{1}{x^2}\) + 2 = 25
[Adding 2 on both sides of (i)]
⇒ (x2) + (\(\frac {1}{x}\))2 + 2 × x × \(\frac {1}{x}\) = 25
⇒ (x + \(\frac {1}{x}\))2 = (5)2
⇒ x + \(\frac {1}{x}\) = 5 (∵ x > 0)

Question 3.
Prove that a2 + b2 + c2 – ab – bc – ca = \(\frac {1}{2}\) [(a – b)2 + (b – c)2 + (c – a)2].
Solution :
Here, L.H.S. = a2 + b2 + c2 – ab – bc – ca
= \(\frac {1}{2}\) [2a2 + 2b2 + 2c2 – 2ab – 2bc – 2ca]
= \(\frac {1}{2}\) [(a2 – 2ab + b2) + (b2 – 2bc + c2) + (c2 – 2ca + a2)]
= \(\frac {1}{2}\) [(a2 – 2ab + b2) + (b2 – 2bc + c2) + (c2 – 2ca + a2)]
= \(\frac {1}{2}\) [(a – b)2 + (b – c)2 + (c – a)2]
= R.H.S
Hence, proved.

Question 4.
Evaluate :
(i) (107)2
(ii) (94)2
(iii) (0.99)2
Solution :
(i) (107)2 = (100 + 7)2
= (100)2 + (7)2 + 2 × 100 × 7
= 10000 + 49 + 1400 = 11449

(ii) (94)2
= (100 – 6)2 = (100)2 + (6)2 – 2 × 100 × 6
= 10000 + 36 – 1200 = 8836

(iii) (0.99)2
= (1 – 0.01)2 = (1)2 + (0.01)2 – 2 × 1 × 0.01
= 1 + 0.0001 -0.02 = 0.9801

NOTE: We may extend the formula for squaring a binomial to the squaring of a trinomial as given below. (a + b + c) = (a + (b + c)]2 = a2 + (b + c)2 + 2 × a × (b + c)
[Using the identity for the square of binomial]
= a2 + b2 + c2 + 2bc + 2a (b + c)
[Using (b + c)2 = b2 + c2 + 2bc]
= a2 + b2 + d2 + 2bc + 2ab + 2ac
[Using the distributive law]
= a2 + b2 + c2 + 2ab + 2bc + 2ac
∴ (a + b + c)2 = a2 + b2 + c2 + 2ab + 2bc + 2ac

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 5.
Simplify : (3x + 4)3 – (3x – 4)3.
Solution :
We have
(3x + 4)3 – (3x – 4)3 = [(3x)3 + (4)3 + 3 × 3x × 4 × (3x + 4)] – [(3x)3 – (4)3 – 3 × 3x × 4 × (3x – 4)]
= [27x3 + 64 + 36x (3x + 4)] – [27x3 – 64 – 36x (3x – 4)]
= [27x3 + 64 + 108x2 + 144x] – [27x3 – 64 – 108x2 + 144x]
= 27x3 + 64 + 108x2 + 144x – 27x3 + 64 + 108x2 – 144x
= 128 + 216x2
∴ (3x + 4)3 – (3x – 4)3 = 128 + 216x2

Question 6.
Evaluate:
(i) (1005)3
(ii) (997)3
Solution :
(i) (1005)3 = (1000 + 5)3
= (1000)3 + (5)3 + 3 × 1000 × 5 × (1000 + 5)
= 1000000000 + 125 + 15000 × (1000 + 5)
= 1000000000 + 125 + 15000000 + 75000
= 1015075125

(ii) (997)3 = (1000 – 3)3
= (1000)3 – (3)3 – 3 × 1000 × 3 × (1000 – 3)
= 1000000000 – 27 – 9000 × (1000 – 3)
= 1000000000 – 27 – 9000000 + 27000
= 991026973

Question 7.
If x – \(\frac {1}{x}\) = 5, find the value of x3 – \(\frac{1}{\mathrm{x}^3}\).
Solution :
We have, x – \(\frac {1}{x}\) = 5 ……….(i)
(x – \(\frac {1}{x}\))3 = (5)3
[Cubing both sides of (i)]
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 1

Question 8.
Find the products of the following expressions :
(i) (4x + 3y) (16x2 – 12xy + 9y2)
(ii) (5x – 2y) (25x2 + 10xy + 4y2)
Solution :
(i) (4x + 3y) (16x2 – 12xy + 9y2)
= (4x + 3y) [(4x)2 – (4x) × (3y) + (3y)2]
We know that (a + b) (a2 – ab + b2)
= a3 + b3 [Where a = 4x, b = 3y]
= (4x)3 + (3y)3 = 64x3 + 27y3

(ii) (5x – 2y) (25x2 + 10xy + 4y2)
= (5x – 2y) [(5x)2 + (5x) × (2y) + (2y)2]
We know that (a – b)(a2 + ab + b2)
= a3 – b3 [Where a = 5x, b = 2y]
= (5x)3 – (2y)3 = 125x3 – 8y3

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 9.
Simplify:
\(\frac{\left(a^2-b^2\right)^3+\left(b^2-c^2\right)^3+\left(c^2-a^2\right)^3}{(a-b)^3+(b-c)^3+(c-a)^3}\)
Solution :
Here (a2 – b2) + (b2 – c2) + (c2 – a2) = 0
∴ (a2 – b2)3 + (b2 – c2)3 + (c2 – a2)3
= 3(a2 – b2)(b2 – c2) (c2 – a2)
= 3(a – b)(a + b)(b – c)(b + c) (c – a) (c + a)
Also, (a – b) + (b – c) + (c – a) = 0
∴ (a – b)3 + (b – c)3 + (c – a)3
= 3(a – b)(b – c)(c – a)
∴ Given expression
= \(\frac{3(a-b)(a+b)(b-c)(b+c)(c-a)(c-b)}{3(a-b)(b-c)(c-b)}\)
= (a + b)(b + c)(c + a)

Question 10.
Prove that : (x – y)3 + (y – z)3 + (z – x)3 = 3(x – y) (y – z) (z – x).
Solution :
Let (x – y) = a, (y – z) = b and (z – x) = c.
Then, a + b + c
= (x – y) + (y – z) + (z – x) = 0
∴ a3 + b3 + c3 = 3abc
Or (x – y)3 + (y – z)3 + (z – x)3
= 3(x – y) (y – z) (z – x)

Question 11.
Find the value of (28)3 + (-78)3 + (50)3
Solution :
Let a = 28, b = – 78, c = 50
Then, a + b + c = 28 – 78 + 50 = 0
∴ a3 + b3 + c3 = 3abc
So, (28)3 + (-78)3 + (50)3 = 3 × 28 × (-78) × 50
= – 327600

Question 12.
If a + b + c = 9 and ab + bc + ac = 26, find the value of a3 + b3 + c3 – 3abc.
Solution :
We have a + b + c = 9 ……(i)
⇒ (a + b + c)2 = 81
[On squaring both sides of (i)]
⇒ a2 + b2 + c2 + 2(ab + bc + ac) = 81
⇒ a2 + b2 + c2 + 2 × 26 = 81
[∵ ab + bc + ac = 26]
⇒ a2 + b2 + c2 = (81 – 52)
⇒ a2 + b2 + c2 = 29
Now, we have
a3 + b3 + c3 – 3abc
= (a + b + c)(a2 + b2 + c2 – ab – bc – ac)
= (a + b + c)[(a2 + b2 + c2) – (ab + bc + ac)]
= 9 × [(29 – 26)] = (9 × 3) = 27

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 13.
Find the following products:
(i) (x + 2) (x + 3)
(ii) (x + 7) (x – 2)
(iii) (y – 4) (y – 3)
(iv) (y – 7) (y + 3)
(v) (2x – 3) (2x + 5)
(vi) (3x + 4) (3x – 5)
Solution :
Using the identity: (x + a) (x + b)
= x2 + (a + b) x + ab, we have
(i) (x + 2)(x + 3) = x2 + (2 + 3) x + 2 × 3
= x2 + 5x + 6,

(ii) (x + 7)(x – 2) = (x + 7)(x + (-2))
= x2 + {7 + (-2)} x + 7 × (-2)
= x2 + 5x – 14.

(iii) (y – 4) (y – 3) = {y + (-4)} {y + (-3)
= y2 + {(-4) + (-3)} y + (-4) × (-3)
= y2 – 7y + 12

(iv) (y – 7)(y + 3) = {y + (-7)} (y + 3)
= y2 +{(-7) + 3} y + (-7) × 3
= y2 – 4y – 21

(v) (2x – 3) (2x + 5)
= (y – 3) (y + 5), where y = 2x
= {y + (-3)} (y + 5)
= y2 + {(-3) + 5} y + (-3) × 5
= y2 + 2y – 15
= (2x)2 + 2 × 2x – 15
= 4x2 + 4x – 15.

(vi) (3x + 4) (3x – 5)
= (y + 4) (y – 5), where y = 3x
= (y + 4) {y + (-5)}
= y2 + {4 + (-5)} y + 4 × (-5)
= y2 – y – 20 = (3x)2 – 3x – 20
= 9x2 – 3x – 20

Question 14.
Evaluate:
(i) 35 × 37
(ii) 103 × 96
Solution :
(i) 35 × 37 = (40 – 5) (40 – 3)
= (40 + (-5)) (40+ (-3))
= 402 + (- 5 – 3) × 40 + (- 5 × – 3)
= 1600 – 320 + 15
= 1615 – 320
= 1295

(ii) 103 × 96 = (100 + 3) [100 + (-4)]
= 1002 + (3 + (-4)) × 100 + (3 × – 4)
= 10000 – 100 – 12
= 9888

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 15.
Factorise : 81a2b2c2 + 64a2b2 – 144a2b2c
Solution :
81a2b2c2 + 64a6b2 – 144a2b2c
= [9abc]2 – 2 [9abc][8a3b] + [8a3b]2
= [9abc – 8a3b]2 = a2b2 [9c – 8a2]2
= a2b2(9c – 8a2) (9c – 8a2)

Question 16.
Factorise :
(3a – \(\frac {1}{b}\))2 – 6(3a – \(\frac {1}{b}\)) + 9 + (c + \(\frac {1}{b}\) – 2a) (3a – \(\frac {1}{b}\) – 3)
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 2

Question 17.
Factorise: 4(2a + 3b – 4c)2 – (a – 4b + 5c)2
Solution :
4(2a + 3b – 4c)2 – (a – 4b + 5c)2
= [2(2a + 3b – 4c)]2 – (a – 4b + 5c)2
= (4a + 6b – 8c)2 – (a – 4b + 5c)2
= [4a + 6b – 8c + a – 4b + 5c] [4a + 6b – 8c – a + 4b – 5c]
= (5a + 2b – 3c) (3a + 10b – 13c)

Question 18.
Factorise: 4x2 + \(\frac{1}{4 x^2}\) + 2 – 9y2
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 3

Question 19.
Factorise :
a4 + \(\frac{1}{a^4}\) – 3.
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 4

Question 20.
Factorise : x4 + x2y2 + y4
Solution :
x4 + x2y2 + y4 = (x2)2 + 2.x2.y2 + (y2)2 – x2y2
= (x2 + y2)2 – (xy)2
= (x2 + y2 + xy) (x2 + y2 – xy)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 21.
Factorise: 64a13b + 343ab13.
Solution :
64a13b + 343ab13 = ab[64a12 + 343b12)
= ab[(4a4)3 + (7b4)3]
= ab[4a4 + 7b4) [(4a4)2 – (4a4) (7b4) + (7b4)2]
= ab[4a4 + 7b4][16a8 – 28a4b4 + 49b8]

Question 22.
Factorise : p3q2x4 + 3p2qx3 + 3px2 + \(\frac {x}{q}\) – q2r3x
Solution :
In above question, if we take common then it may become in the form of a3 + b3.
∴ p3q2x4 + 3p2qx3 + 3px2 + \(\frac {x}{q}\) – q2r3x
= \(\frac {x}{q}\) [p3q3x3 + 3p2q2x2 + 3pqx + 1 – q3r3]
= \(\frac {x}{q}\)(pqx)3 + 3(pqx)2 × 1 + 3pqx × (1)2 + (1)3 – q3r3]
Let pqx = A and 1 = B
= \(\frac {x}{q}\) [A3 + 3A2B + 3AB2 + B3 – q3r3]
= \(\frac {x}{q}\) [(pqx + 1) – (qr)3]
= [pqx + 1 – qr] (pqx + 1)2 + (pqx + 1)qr + (ar)]
= [pqx + 1 – qr] [p2q2x + 1 + 2pqx + pqxr + 4r + q2r2]

Question 23.
Factorise : x3 – 6x2 + 32
Solution :
x3 + 32 – 6x2 = x3 + 8 + 24 – 6x2
= [(x)3 + (2)3] + 6[4 – x2]
= (x + 2) [x2 – 2x + 4] + 6[2 + x] [2 – x]
= (x + 2) [x2 – 2x + 4 + 6(2 – x)]
= (x + 2) [x2 – 2x + 4 + 12 – 6x]
= (x + 2) (x2 – 8x + 16)
= (x + 2) (x – 4)2
= (x + 2) (x – 4) (x – 4)

Question 24.
Show that x = 2 is a zero of 2x3 + x2 – 7x – 6.
Solution :
p(x) = 2x3 + x2 – 7x – 6
p(2) = 2(2)3 + (2)2 – 7(2) – 6
= 16 + 4 – 14 – 6 = 0
Hence x = 2 is a zero of p(x).

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 25.
If x = \(\frac {4}{3}\) is a zero of the polynomial f(x) = 6x3 – 11x2 + kx – 20 then find the value of k.
Solution :
f(x) = 6x3 – 11x + kx – 20
x = \(\frac {4}{3}\) is a zero of f(x)
⇒ f(\(\frac {4}{3}\)) = 0
⇒ 6(\(\frac {4}{3}\))3 – 11(\(\frac {4}{3}\))2 + k(\(\frac {4}{3}\)) – 20 = 0
⇒ 6 × \(\frac{64}{9 \times 3}\) – 11 × \(\frac {16}{9}\) + \(\frac {4k}{3}\) – 20 = 0
⇒ 128 – 176 + 12k – 180 = 0
⇒ 12k + 128 – 356 = 0
⇒ 12k = 228
⇒ k = 19

Question 26.
If x = 2 and x = 0 are two zeroes of the polynomial f(x) = 2x3 – 5x2 + ax + b, find the values of a and b.
Solution :
f(2) = 2(2)3 – 5(2)2 + a(2) + b = 0
⇒ 16 – 20 + 2a + b = 0
⇒ 2a + b = 4 ………..(i)
⇒ f(0) = 2(0)3 – 5(0)2 + a(0) + b = 0
⇒ b = 0
So, 2a = 4 ⇒ a = 2 [using (i)]
Hence, a = 2, b = 0

Question 27.
Find the remainder when f(x) = x3 – 6x2 + 2x – 4 is divided by g(x) = 1 – 2x.
Solution :
1 – 2x = 0
2x = 1
x = \(\frac {1}{2}\)
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 5

Question 28.
The polynomials ax3 + 3x2 – 13 and 2x3 – 5x + a are divided by x + 2 if the remainder in each case is the same, find the value of a.
Solution :
p(x) = ax3 + 3x2 – 13 and q(x) = 2x3 – 5x + a
x + 2 = 0
⇒ x = – 2
p(-2) = q(-2)
⇒ a(-2)3 + 3(-2)2 – 13 = 2(-2)3 – 5(-2) + a
⇒ – 8a + 12 – 13 = – 16 + 10 + a
⇒ – 9a = -5
⇒ a = \(\frac {5}{9}\)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 29.
Show that x + 1 and 2x – 3 are factors of 2x3 – 9x2 + x + 12.
Solution :
To prove that (x + 1) and (2x – 3) are factors of p(x) = 2x3 – 9x2 + x + 12, it is sufficient to show that p(-1) and P(\(\frac {3}{2}\)) both are equal to zero.
p(-1) = 2(-1)3 – 9(-1)2 + (-1) + 12
= – 2 – 9 – 1 + 12 = – 12 + 12 = 0
p(\(\frac {3}{2}\)) = 2(\(\frac {3}{2}\))3 – 9(\(\frac {3}{2}\))2 + \(\frac {3}{2}\) + 12
= \(\frac{27}{4}-\frac{81}{4}+\frac{3}{2}\) + 12
= \(\frac{27-81+6+48}{4}=\frac{81-81}{4}\) = 0
Hence, (x + 1) and (2x – 3) are the factors
2x3 – 9x2 + x + 12.

Question 30.
Find α and β if x + 1 and x + 2 are factors of p(x) = x3 + 3x2 – 2αx + β.
Solution :
When we put x + 1 = 0 or x = – 1 and x + 2 = 0 or x = – 2 in p(x)
Then, p(-1) = 0 and p(-2) = 0 as x + 1 and x + 2 are factors of p(x)
Therefore, p(-1) = (-1)3 + 3(-1)2 – 2α(-1) + β = 0
⇒ – 1 + 3 + 2α + B = 0
⇒ β = – 2α – 2 ….(i)
And, p(-2) = (-2)3 + 3(-2)2 – 2α(-2) + β = 0
⇒ – 8 + 12 + 4α + β = 0
⇒ β = – 4α – 4 ….(ii)
From equations (i) and (ii),
– 2α – 2 = – 4α – 4
⇒ 2α = -2
⇒ α = – 1
Put α = -1 in equation (i)
⇒ β = – 2(-1) – 2 = 2 – 2 =0.
Hence, α = – 1, β = 0.

Question 31.
Using factor theorem, factorize:
p(x) = 2x4 – 7x3 – 13x2 + 63x – 45
Solution :
45 has ± 1, ± 3, ± 5, ± 9, ± 15, ± 45 as its factors
If we put x = 1 in p(x)
p(1) = 2(1)4 – 7(1)3 – 13(1)2 + 63(1) – 45
= 2 – 7 – 13 + 63 – 45
= 65 – 65 = 0
∴ x – 1 is a factor of p(x) by factor theorem
Similarly, if we put x = 3 in p(x)
p(3) = 2(3)4 – 7(3)3 – 13(3)2 + 63(3) – 45
= 162 – 189 – 117 + 189 – 45
= 162 – 162 = 0
Hence, x – 3 is the factor of p(x) by factor theorem.
p(x) = 2x4 – 7x3 – 13x2 + 63x – 45
= 2x4 – 2x3 – 5x3 + 5x2 – 18x2 + 18x + 45x – 45
∴ p(x) = 2x3(x – 1) – 5x2(x – 1) – 18x(x – 1) + 45(x – 1)
⇒ p(x) = (x – 1)(2x3 – 5x2 – 18x + 45)
⇒ p(x)= (x – 1)(2x3 – 6x2 + x2 – 3x – 15x + 45]
⇒ p(x) =(x – 1)[2x3(x – 3) + x(x – 3) – 15(x – 3)]
⇒ p(x) = (x – 1)(x – 3)(2x2 + x – 15)
⇒ p(x) = (x – 1)(x – 3)(2x2 + 6x – 5x – 15)
⇒ p(x) = (x – 1)(x – 3)[2x(x + 3) – 5(x + 3)]
⇒ p(x) = (x – 1)(x – 3)(x + 3)(2x – 5)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 32.
Factorise : x2 – 31x + 220.
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials - 6

Question 33.
Factorise :
2x2 + 12\(\sqrt{2}\)x + 35.
Solution :
2x2 + 12\(\sqrt{2}\)x + 35
Product ac = 70 and b = 12\(\sqrt{2}\)
∴ Split the middle term as 7\(\sqrt{2}\) and 5\(\sqrt{2}\).
⇒ 2x2 + 12\(\sqrt{2}\) x + 35
= 2x2 + 7\(\sqrt{2}\)x + 5\(\sqrt{2}\)x + 35
= \(\sqrt{2}\)x[\(\sqrt{2}\)x + 7] + 5[\(\sqrt{2}\)x + 7]
= [\(\sqrt{2}\)x + 5]\(\sqrt{2}\)x + 7]

Question 34.
Factorise: x2 – 14x + 24.
Solution :
Product ac = 24 and b = – 14
∴ Split the middle term as – 12 and – 2
⇒ x2 – 14x + 24 = x2 – 12x – 2x + 24
⇒ x(x – 12) – 2(x – 12) = (x – 12)(x – 2)

Question 35.
Factorise :
x2 – \(\frac {13}{24}\)x – \(\frac {1}{12}\)
Solution :
x2 – \(\frac {13}{24}\)x – \(\frac {1}{12}\) = \(\frac {1}{24}\) (24x2 – 13x – 2)
ac = – 48 and b = – 13
∴ Wesplit the middle term as – 16x + 3x.
= \(\frac {1}{24}\)(24x2 – 16x + 3x – 2)
= \(\frac {1}{24}\)[8x(3x – 2) + 1(3x – 2)]
= \(\frac {1}{24}\)(3x – 2)(8x + 1)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 36.
Factorise : \(\frac {3}{2}\)x2 – 8x – \(\frac {35}{2}\)
Solution :
= \(\frac {1}{2}\)(3x2 – 16x – 35)
= \(\frac {1}{2}\)(3x2 – 21x + 5x – 35)
= \(\frac {1}{2}\)[3x(x – 7) + 5(x – 7)]
= \(\frac {1}{2}\)(x – 7)(3x + 5)

Question 37.
If f(x) = 2x3 – 13x2 + 17x + 12 then find out the value of f(-2) and f(3).
Solution :
f(x) = 2x2 – 13x2 + 17x + 12
f(-2) = 2(-2)3 – 13(-2)2 + 17 (-2) + 12
= – 16 – 52 – 34 + 12
= – 90
f(3) = 2(3)3 – 13(3)2 + 17(3) + 12
= 54 – 117 + 51 + 12
= 0

Question 8.
Factorise: – 8 + 9(a – b)6 – (a – b)12
Solution :
– 8 + 9(a – b)6 – (a – b)12
Let (a – b)6 = x
Then – 8 + 9x – x2 = – (x2 – 9x + 8)
= – (x2 – 8x – x + 8)
= – (x – 8)(x – 1)
= – [(a – b)6 – 8][(a – b)6 – 1]
= [1 – (a – b)6][(a – b)6 – 8]
= [(1)3 – {(a – b)2}3][{(a – b)2}3 – (2)3]
= [1 – (a – b)2][1 + (a – b)4 + (a – b)2][(a – b)2 – 2][(a – b)4 + 4 + 2(a – b)2]

Multiple Choice Questions

Question 1.
The product of (x + a) (x + b) is:
(a) x2 + (a + b) x + ab
(b) x2 – (a – b) x + ab
(c) a2 + (a – b)x + ab
(d) x2 + (a – b)x – ab
Solution :
(a) x2 + (a + b) x + ab

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 2.
The value of 150 × 98 is :
(a) 10047
(b) 14800
(c) 14700
(d) 10470
Solution :
(c) 14700

Question 3.
The expansion of (x + y – z)2 is :
(a) x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx
(b) x2 + y2 – z2 – 2xy + yz + 2zx
(c) x2 + y2 + z2 + 2xy – 2yz – 2zx
(d) x2 + y2 – z2 + 2zy – 2yz – 2zx
Solution :
(c) x2 + y2 + z2 + 2xy – 2yz – 2zx

Question 4.
The value of (x + 2y + 2z)2 + (x – 2y – 2z)2 is :
(a) 2x2 + 8y2 + 8z2
(b) 2x2 + 8y2 + 8z2 + 8xyz
(c) 2x2 + 8y2 + 8z2 – 8yz
(d) 2x2 + 8y2 + 8z2 + 16yz
Solution :
(d) 2x2 + 8y2 + 8z2 + 16yz

Question 5.
The value of 25x2 + 16y2 + 40xy at x = 1 and y = – 1 is :
(a) 81
(b) – 49
(c) 1
(d) None of these
Solution :
(c) 1

Question 6.
On simplifying (a + b)3 + (a – b)3 + 6a(a2 – b2) we get:
(a) 8a2
(b) 8a2b
(c) 8a3b
(d) 8a3
Solution :
(d) 8a3

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 7.
Find the value of \(\frac{a^3+b^3+c^3-3 a b c}{a b+b c+c a-a^2-b^2-c^2}\) when a = – 5, b = – 6, c = 10.
(a) 1
(b) -1
(c) 2
(d) -2
Solution :
(a) 1

Question 8.
In method of factorisation of an algebraic expression, which of the following statements is false?
(a) Taking out a common factor from two or more terms.
(b) Taking out a common factor from a group of terms.
(c) By using remainder theorem.
(d) By using standard identities.
Solution :
(c) By using remainder theorem.

Question 9.
Factors of (a + b)3 – (a – b)3 is:
(a) 2ab(3a2 + b2)
(b) ab(3a2 + b2)
(c) 2b(3a2 + b2)
(d) 3a2 + b2
Solution :
(c) 2b(3a2 + b2)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 10.
Degree of zero polynomial is :
(a) 0
(b) 1
(c) Both 0 and 1
(d) Not defined
Solution :
(d) Not defined

Question 11.
Factors of (42 – x – x2) are:
(a) (x – 7)(x – 6)
(b) (x + 7)(x – 6)
(c) (x + 7)(6 – x)
(d) (x + 7) (x + 6)
Solution :
(c) (x + 7)(6 – x)

Question 12.
Factors of (x2 + \(\frac{x}{6}-\frac{1}{6}\)) are :
(a) \(\frac {1}{6}\)(2x + 1)(3x + 1)
(b) \(\frac {1}{6}\)(2x + 1)(3x – 1)
(c) \(\frac {1}{6}\)(2x – 1) (3x – 1)
(d) \(\frac {1}{6}\)(2x – 1)(3x + 1)
Solution :
(d) \(\frac {1}{6}\)(2x – 1)(3x + 1)

Question 13.
Factors of polynomial x3 – 3x2 – 10x + 24 are:
(a) (x – 2)(x + 3)(x – 4)
(b) (x + 2)(x + 3)(x + 4)
(c) (x + 2)(x – 3)(x – 4)
(d) (x – 2)(x – 3)(x – 4)
Solution :
(a) (x – 2)(x + 3)(x – 4)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 2 Polynomials

Question 14.
If (x + a) is a factor of x2 + px + q and x2 + mx + n then the value of a is :
(a) \(\frac{m-p}{n-q}\)
(b) \(\frac{n-q}{m-p}\)
(c) \(\frac{n+q}{m+p}\)
(d) \(\frac{m+p}{n+q}\)
Solution :
(b) \(\frac{n-q}{m-p}\)

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.3

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Exercise 1.3

Question 1.
Write the following in decimal form and say what kind of decimal expansion each has:
(i) \(\frac{36}{100}\)
(ii) \(\frac{1}{11}\)
(iii) \(4 \frac{1}{8}\)
(iv) \(\frac{3}{13}\)
(v) \(\frac{2}{11}\)
(vi) \(\frac{329}{400}\)
Answer:
(i) \(\frac{36}{100}\) = 0.36 (Terminating)

(ii) \(\frac{1}{11}\) = 0.09090909… = \(0 . \overline{09}\) (Non-terminating and repeating)

(iii) \(4 \frac{1}{8}\) = \(\frac{33}{8}\) =4.125 (Terminating)

(iv) \(\frac{3}{13}\) = 0.230769230769… = \(0 . \overline{230769}\) (Non-terminating and repeating)

(v) \(\frac{2}{11}\) = 0.181818181818… = \(0 . \overline{18}\) (Non-terminating and repeating)

(vi) \(\frac{329}{400}\) = 0.8225 (Terminating)

Question 2.
You know that \(\frac{1}{7}\) = 0.142857. Can you predict what the decimal expansion of \(\frac{2}{7}, \frac{3}{7}, \frac{4}{7}, \frac{5}{7}, \frac{6}{7}, \frac{3}{7}, \frac{4}{7}, \frac{5}{7}, \frac{6}{7}\) are without actually doing the long division? If so, how?
[Hint: Study the remainders while finding the value of \(\frac{1}{7}\) carefully.]
Answer:
Yes, We can do this by:

\(\frac{2}{7}=2 \times \frac{1}{7}=2 \times 0 . \overline{142857}=0 . \overline{285714}\)
\(\frac{3}{7}=3 \times \frac{1}{7}=3 \times 0 . \overline{142857}=0 . \overline{428571}\)
\(\frac{4}{7}=4 \times \frac{1}{7}=4 \times 0 . \overline{142857}=0 . \overline{571428}\)
\(\frac{5}{7}=5 \times \frac{1}{7}=5 \times 0 . \overline{142857}=0 . \overline{714285}\)
\(\frac{6}{7}=6 \times \frac{1}{7}=6 \times 0 . \overline{142857}=0 . \overline{857142}\)

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.2

Question 3.
Express the following in the form p/q, where p and q are integers and q ≠ 0.
(i) \(0 . \overline{6}\)
(ii) \(0 . 4 \overline{7}\)
(iii) \(0 . \overline{001}\)
Answer:
(i) \(0 . \overline{6}\) = 0.666…
Let x = 0.666…
∴ 10x = 6.66…
∴ 10x = 6 + 0.66…
∴ 10x = 6 + 0.666…
∴ 10x = 6 + x
∴ 9x = 6
x = \(\frac{2}{3}\)

(ii) \(0 . 4 \overline{7}\) = 0.4777… = \(\frac{4}{10}\) + \(\frac{0.777}{10}\)
Let x = 0.777…
∴ 10x = 7.77…
∴ 10x = 7.777…
∴ 10x = 7 + 0.777…
∴ 10x = 7 + x
∴ x = \(\frac{7}{9}\)
\(0 . 4 \overline{7}\) = \(\frac{4}{10}\) + \(\frac{0.777}{10}\) = \(\frac{4}{10}\) + \(\frac{7}{90}\)
= \(\frac{36}{90}\) + \(\frac{7}{90}\) = \(\frac{43}{90}\)

(iii) \(0 . \overline{001}\) =0.001001…
Let x = 0.001001…
∴ 1000x = 1.001….
∴ 1000x = 1.001001…
∴ 1000x = 1 + 0.001001 …
∴ l000x= 1 + X
∴ 999x = 1
x = \(\frac{1}{999}\)

Question 4.
Express 0.99999…in the form \(\frac{p}{q}\). Are you surprised by your answer? With your teacher and classmates discuss why the answer makes sense.
Answer:
Let x = 0.9999…
10x = 9.999…
∴ 10x = 9.9999…
∴ 10x = 9 + 0.9999…
∴ 10x = 9 + x
∴ 9x = 9
x = 1
The difference between 1 and 0.999999 is 0.000001 which is negligible. Thus, 0.999… is too much near 1. Therefore, the answer 1 can be justified.

Question 5.
What can the maximum number of digits be in the repeating block of digits in the decimal expansion of 1/17? Perform the division to check your answer.
Answer:
\(\frac{1}{17}\) = 0.05882352941176470588…
= \(0 . \overline{0588235294117647}\)
There are 16 digits in the repeating block of the decimal expansion of \(\frac{1}{17}\)

Question 6.
Look at several examples of rational numbers in the form \(\frac{p}{q}\) (q ≠ 0), where p and q are integers with no common factors other than 1 and having terminating decimal representations (expansions). Can you guess what property q must satisfy?
Answer:
We observe that when q is 2, 4, 5, 8, 10,… then the decimal expansion is terminating. For example:
\(\frac{1}{2}\) = 0.5, denominator q = 21
\(\frac{4}{5}\) = 0.8, denominator q = 51
We can observe that terminating decimal may be obtained in the situation where prime factorisation of the denominator of the given fractions has the power of 2 only or 5 only or both.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 1 Number Systems Ex 1.2

Question 7.
Write three numbers whose decimal expansions are non-terminating non-recurring.
Answer:
Three numbers whose decimal expansions are non-terminating non-recurring are:
(i) 0.303003000300003…
(ii) 0.505005000500005…
(iii) 0.7207200720007200007200000…

Question 8.
Find three different irrational numbers between the rational numbers \(\frac{5}{7}\) and \(\frac{9}{11}\).
Answer:
\(\frac{5}{7}\) = \(0 . \overline{714285}\)

\(\frac{9}{11}\) = \(0 . \overline{81}\)
Three different irrational numbers are:
0.73073007300073000073…
0.75075007500075000075…
0.76076007600076000076…

Question 9.
Classify the following numbers as rational or irrational:
(i) \(\sqrt{23}\)
(ii) \(\sqrt{225}\)
(iii) 0.3796
(iv) 7.478478…
(v) 1.101001000100001…
Answer:
(i) \(\sqrt{23}\) = 4.79583152331…
Since the decimal expansion is non-terminating and non-recurring therefore, it is an irrational number.

(ii) \(\sqrt{225}\) = 15 = \(\frac{15}{1}\)
The number is rational number as it can represented in \(\frac{p}{q}\) form where p, q ∈ Z and q ≠ 0.

(iii) 0.3796
Since the decimal expansion is terminating therefore, it is a rational number.

(iv) 7.478478… = \(7 . \overline{478}\)
Since, this decimal expansion is non-terminating recurring, therefore, it is a rational number.

(v) 1.101001000100001…
Since the decimal expansion is non-terminating and non-repeating, therefore, it is an irrational number.