JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

Jharkhand Board JAC Class 10 Sanskrit Solutions अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 10th Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा एतदाधारित प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया यथानिर्देशं लिखत।
(निम्न गद्यांश को पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में दीजिए।)

1. सरदार भगतसिंहः क्रान्तिकारिणां यूनां नेतृत्वं स्वातन्त्र्य सङ्गरे कृतवान्। सोऽभूत् च आदर्शभूतो भारतीयः युवा-वर्गस्य। न केवलं भगतसिंहः स्वतन्त्रतासंग्रामे संलग्नः आसीत्, तस्य समग्र परिवारः स्वतन्त्रतायुद्धे प्रवृत्तः आसीत्। सरदार भगतसिंहस्य जन्म-समये तस्य जनकः सरदार किशनसिंहो योऽभूत् स्वतन्त्रता सैनिकः सः कारागारे गौराङ्गैः निपातितः। स्वतन्त्रता सैनिकोऽस्य पितृव्यः सरदार अजीत सिंहः निर्वासितश्चासीत्। 1907 ई० वर्षे सितम्बरमासे, लॉयलपुर मण्डले बङ्गाख्ये ग्रामे सरदार भगतसिंहस्य जन्म बभूव। प्राथमिकी शिक्षा चास्य ग्रामे एव अभूत्। उच्चाध्ययनायायं लाहौर नगरं गतवान्। अध्ययन समकालमेव भगतसिंहोऽपि क्रान्तिकारिणां संसर्गे समागतः देशभक्ति-भावनया सोऽध्ययनं मध्ये विहाय दिल्ली-नगरं प्रत्यागच्छत्। तत्राय ‘दैनिक अर्जुन’ इत्याख्ये समाचार पत्रे संवाददातृ रूपेण कार्यमकरोत।

(सरदार भगतसिंह ने स्वाधीनता संग्राम में क्रान्तिकारी जवानों का नेतृत्व किया था। वह भारतीय युवावर्ग का आदर्श हो गया था। न केवल भगतसिंह स्वतन्त्रता संग्राम में संलग्न था, उसका सारा परिवार स्वतन्त्रतायुद्ध में लगा हुआ था। सरदार भगतसिंह के जन्म के समय उसके पिता सरदार किशनसिंह जो स्वतन्त्रता सैनिक हो गये थे, वे अंग्रेजों ने जेल में डाल दिये। स्वतन्त्रता सेनानी इनके चाचा सरदार अजीत सिंह को निर्वासित कर दिया था।

1907 ई. वर्ष में सितम्बर माह में लायलपुर मण्डल में बड़ा नाम के गाँव में भगतसिंह का जन्म हुआ। और इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में ही हुई। ये उच्च अध्ययन के लिए लाहौर नगर को गये। अध्ययन के समय ही भगतसिंह भी क्रान्तिकारियों के स पर्क में आए। देशभक्ति की भावना से (प्रेरित होकर) वह अध्ययन बीच में छोड़कर दिल्ली नगर लौट आये। वहाँ पर ‘दैनिक अर्जुन’ इस नाम के समाचार-पत्र में संवाददाता के रूप में कार्य किया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए) –
(i) सरदार भगतसिंहः स्वातन्त्र्यसङ्गरे केषां नेतृत्वं कृतवान्?
(सरदार भगतसिंह ने स्वतन्त्रता-संग्राम में किनका नेतृत्व किया?
उत्तरम् :
क्रान्तिकारिणां यूनाम् (क्रान्तिकारी जवानों का।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) भगतसिंहस्य जनकस्य किं नाम आसीत्?
(भगतसिंह के पिता का क्या नाम था?)
उत्तरम् :
सरदार किशनसिंहः।

(iii) भगतसिंहेन कस्मिन् समाचारपत्रे संवाददातरूपेण कार्यमकरोत्?
(भगतसिंह ने किस अखबार में संवाददाता के रूप में काम किया?)
उत्तरम् :
‘दैनिक अर्जुन’ इत्याख्ये। (‘दैनिक अर्जुन’ नाम के।)

(iv) भगतसिंहस्य प्राथमिकी शिक्षा कुत्र अभूत ?
(भगतसिंह की प्रारम्भिक शिक्षा कहाँ हुई?)
उत्तरम् :
बङ्गाख्ये ग्रामे। (बंगा नाम के गाँव में।)

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) सरदार भगतसिंहस्य पितृव्यस्य किं नाम आसीत्?
(सरदार भगतसिंह के चाचा का नाम क्या था?)
उत्तरम् :
सरदार भगतसिंहस्य पितृव्यस्य नाम सरदार अजीत सिंहः आसीत्।
(सरदार भगतसिंह के चाचा का नाम सरदार अजीतसिंह था।)

(ii) भगतसिंहः उच्चाध्ययनाय कुत्र गतवान्?
(भगतसिंह उच्च शिक्षा के लिए कहाँ गया?)
उत्तरम् :
भगतसिंहः उच्चाध्ययनाय लाहौर नगरं गतवान्।
(भगतसिंह उच्च शिक्षा के लिये लाहौर गया।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) भगतसिंहः कदा क्रान्तिकारिणां संसर्गे समागतः?
(भगतसिंह कब क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आया?)
उत्तरम् :
भगतसिंहः अध्ययन समकालमेव क्रान्तिकारिणां संसर्गे समागतः।
(भगतसिंह अध्ययन के समय ही क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आया।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
क्रान्तिवीरः सरदार भगतसिंहः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
सरदार भगतसिंहः स्वातन्त्र्य-सैनिकोऽभवतः तस्य सम्पूर्ण परिवारः एक स्वातन्त्र्य सङ्गरे प्रवृत्तोऽभव स्वातन्त्र्य सैनिकः किशन सिंह गौराङ्गैः कारागारे निपातित पितृव्यश्च निर्वासितः बङ्गा ग्रामे जातः असौ ग्रामे एव प्राथमिकी शिक्षा प्राप्य उच्च शिक्षार्थ लाहौरम् अगच्छत्। अध्ययनकाले एव अयं क्रान्तिवीरः अभवत् दैनिक अर्जुनस्य च सम्वाददातारूपेण कार्यमकरोत्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशं प्रश्नान्
उत्तरत :
(निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-)
(i) ‘सोऽभूच्चादर्शभूतो……।’ वाक्ये कर्तृपदं किमस्ति?
(अ) सः
(ब) अभूत
(स) च
(द) आदर्शभूतो।
उत्तरम् :
(अ) सः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘प्राथिमिकी शिक्षा’ अत्र विशेषणपदं किम् अस्ति?
(अ) प्राथमिकी
(ब) शिक्षा
(स) पूर्णा
(द) ग्रामे।
उत्तरम् :
(अ) प्राथमिकी

(iii) ‘तस्य समग्रः परिवारः स्वातन्त्र्य-युद्धे प्रवृत्तः आसीत्।’ अत्र ‘तस्य’ सर्वनाम-स्थाने संज्ञापदं लिखत।
(अ) सरदार भगतसिंहस्य
(ब) सरदार किशनसिंहस्य
(स) सरदार अजयसिंहस्य
(द) सरदार अजीत सिंहस्य।
उत्तरम् :
(अ) सरदार भगतसिंहस्य

(iv) ‘परतन्त्रता’ इत्यस्य पदस्य विलोमपदमनुच्छेदात् चित्वा लिखत –
(अ) स्वतन्त्रता
(ब) स्वाधीनता
(स) पराधीनता
(द) स्वातन्त्र्यम्।
उत्तरम् :
(अ) स्वतन्त्रता

2. संस्कृत भाषायाः वैज्ञानिकतां विचार्य एव सङ्गणक-विशेषज्ञाः कथयन्ति यत् संस्कृतम् एव सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमाभाषा विद्यते। अस्याः वाङ्मयं वेदैः पुराणैः नीति शास्त्रैः चिकित्सा शास्त्रादिभिश्च समृद्धमस्ति। कालिदास सदृशानां विश्वकवीनां काव्य सौन्दर्यम् अनुपमम्। चाणक्य रचितम् अर्थशास्त्रम् जगति प्रसिद्धमस्ति। गणितशास्त्रे शून्यस्य प्रतिपादनं सर्वप्रथमं भास्कराचार्यः सिद्धान्त शिरोमणी अकरोत्। चिकित्साशास्त्रे चरक सुश्रुतयोः योगदानं विश्व प्रसिद्धम्। भारत सर्वकारस्य विभिन्नेषु विभागेषु संस्कृतस्य सूक्तयः ध्येयवाक्यरूपेण स्वीकृताः सन्ति। भारतसर्वकारस्य राजचिहने प्रयुक्तां सूक्तिं- ‘सत्यमेव जयते’ सर्वे जानन्ति। एवमेव राष्ट्रिय शैक्षिकानुसन्धान प्रशिक्षण परिषदः ध्येय वाक्यं ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ वर्तते।

(संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता पर विचार करके ही कम्प्यूटर के विशेषज्ञों ने कहा है कि संस्कृत ही कम्प्यूटर के लिए सबसे उत्तम भाषा है। इसका साहित्य वेदों, पुराणों, नीतिशास्त्रों और चिकित्सा आदि शास्त्रों से समृद्ध है। कालिदास जैसे विश्वकवियों का काव्य सौन्दर्य अतुलनीय है। चाणक्य द्वारा रचा गया अर्थशास्त्र संसार में प्रसिद्ध है। गणित शास्त्र में शून्य का प्रतिपादन सर्वप्रथम भास्कराचार्य ने सिद्धान्त शिरोमणि में किया। चिकित्सा शास्त्र में चरक और सुश्रुत का योगदान संसार में प्रसिद्ध है। भारत सरकार के विभिन्न विभागों में संस्कृत की सूक्तियाँ ध्येय वाक्य के रूप में स्वीकार की गई हैं। भारत सरकार के राजचिहन में प्रयोग की गई सूक्ति-“सत्यमेव जयते’ को सभी जानते हैं। इसी प्रकार राष्ट्रिय शैक्षिक अनुसन्धान प्रशिक्षण परिषद का ध्येयवाक्य है – “विद्ययाऽमृतमश्नुते’ (विद्या से अमृत प्राप्त होता है।) (संस्कृत में ही है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) अर्थशास्त्र केन रचितम्? (अर्थशास्त्र की रचना किसने की?)
उत्तरम् :
चाणक्येन (चाणक्य के द्वारा)।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) शन्यस्य प्रतिपादनं सर्वप्रथम भास्कराचार्यः का अकरोत?
(शून्य का प्रतिपादन सबसे पहले भास्कराचार्य ने कहाँ किया?)
उत्तरम् :
सिद्धान्तशिरोमणौ (सिद्धान्त शिरोमणि में)।

(iii) कस्य कृते संस्कृतमेव सर्वोत्तमा भाषा विद्यते?
(किसके लिए संस्कृत ही सबसे उत्तम भाषा है?)
उत्तरम् :
सङ्गणकस्य कृते (कंप्यूटर के लिए)।

(iv) चिकित्सा शास्त्रे कयोः योगदानं विश्वप्रसिद्धम्?
(चिकित्सा शास्त्र में किनका योगदान विश्व-विख्यात है?)
उत्तरम् :
चरकसुश्रुतयोः (चरक और सुश्रुत का)।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत –
(पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) भारत सर्वकारस्य राजचिह्न किम् अस्ति?
(भारत सरकार का राजचिह्न क्या है?)
उत्तरम् :
‘सत्यमेव जयते’ इति भारत सर्वकारस्य राज-चिह्नम्।
(‘सत्य की विजय होती है’ यह भारत सरकार का राज चिह्न है।)

(ii) ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ कस्य ध्येयवाक्यम्?
(‘विद्या से अमृत प्राप्त होता है’ यह किसका ध्येयवाक्य है?)
उत्तरम् :
‘राष्ट्रिय शैक्षिकानुसन्धान प्रशिक्षण परिषदः ध्येयवाक्यं ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ वर्तते।
(राष्ट्रिय शैक्षिक अनुसन्धान प्रशिक्षण परिषद का ध्येय वाक्य ‘विद्या से अमृत प्राप्त होता है।’)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) केषां कवीनां काव्य सौन्दर्यम् अनुपमम्?
(किन कवियों का काव्य सौन्दर्य अनुपम है?)
उत्तरम् :
कालिदास सदृशानां विश्वकवीनां काव्य सौन्दर्यमम् अनुपमम्।
(कालिदास जैसे विश्व-कवियों का काव्य- सौन्दर्य अनुपम है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत –
(इस अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
संस्कृत भाषायाः महत्वम्/संस्कृत भाषायाः महनीयता।
(संस्कृत भाषा का महत्त्व)।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
सङ्गणकाय संस्कृतभाषा एव सरलतमा। अस्य वाङ्मयं वेदादिषु सर्व शास्त्रेषु समृद्धमस्ति। संस्कृत भाषया काव्यशास्त्र-काव्य-अर्थशास्त्र, विज्ञान, गणितादिषु सर्वेषु विषयेषु विद्वद्भिः प्रभूतं लिखितम्। कालिदास-चाणक्य भास्कर-चरके-सुश्रुतादयः संस्कृतस्यैव स्तम्भाः अभवन् । अस्याः भाषायाः ध्येयवाक्यरूपेण अनेका सूक्तयः अनेकत्र ध्येयवाक्यरूपेण स्वीकृताः सन्ति। ‘सत्यमेव जयते’ ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ इत्यादीनि वाक्यानि विश्वं विश्रुतानि सन्ति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशं प्रश्नान् उत्तरत – (निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-)
(i) ‘सङ्गणकविशेषज्ञाः कथयन्ति’ अत्र कर्तृपदमस्ति
(अ) सङ्गणकः
(ब) विशेषज्ञाः
(स) सङ्गणकविशेषज्ञाः
(द) कथयन्ति
उत्तरम् :
(स) सङ्गणकविशेषज्ञाः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘सर्वोत्तमा भाषा विद्यते’ अत्र विशेषणपदमस्ति –
(अ) सर्व
(ब) उत्तमा
(स) विद्यते
(द) सर्वोत्तमा
उत्तरम् :
(द) सर्वोत्तमा

(iii) ‘सूक्तयः स्वीकृताः सन्ति’ इत्यत्र संज्ञापदम् अस्ति –
(अ) सूक्तयः
(ब) स्वीकृताः
(स) सन्ति
(द) कश्चिन्न
उत्तरम् :
(अ) सूक्तयः

(iv) ‘अविचार्य’ इत्यस्य विलोमपद अनुच्छेदात् चित्वा लिखत्।
(अ) विचार्य
(ब) अनुपमम्
(स) स्वीकृत
(द) अश्नुते
उत्तरम् :
(अ) विचार्य

3. विवेकानन्दस्य जन्म कालिकाता नगरे अभवत्। तस्य पिता विश्वनाथ दत्तः माता च भुवनेश्वरी देवी आस्ताम्। तस्य प्रथमं नाम नरेन्द्रः आसीत्। नरेन्द्र बाल्याद् एव क्रीडापटुः, दयालुः, विचारशीलः च आसीत्। ‘ईश्वरः अस्ति न वा इति शङ्का आसीत्। शास्त्राणाम् अध्ययनेन बहूनां साधूनां च समीपं गत्वा अपि शङ्का परिहारः न अभवत्। अन्ते च श्री रामकृष्ण परमहंसस्य सकाशात् तस्य सन्देह-परिहारः अभवत्। परमहंसस्य दिव्य प्रभावेण आकृष्टः सः तस्य शिष्यः अभवत्। सः विश्वधर्म सम्मेलने भागं ग्रहीतुम् अमेरिका देशस्य शिकागो नगरंगतवान्। तत्र विविधदेशीयान् जनानुद्दिश्य हिन्दु-धर्म-विषये भाषणं कृतवान्। सः भारतीयान् ‘उत्तिष्ठ जाग्रत, दीनदेवो भव, दरिद्र देवोभव’-इति संबोधितवान्। अमूल्याः तस्योपदेशाः।

(विवेकानन्द का जन्म कालिकाता नगर में हुआ। उनके पिता विश्वनाथ दत्त तथा माता भुवनेश्वरी देवी थे। उनका पहला (बचपन का) नाम नरेन्द्र था। नरेन्द्र बचपन से ही खेलने में चतुर, दयालु और विचारशील था। ‘ईश्वर है अथवा नहीं’ यह उसकी शंका थी। शास्त्रों के अध्ययन से और बहुत से साधुओं के पास जाकर भी शङ्का का निराक श्रीरामकृष्ण परमहंस के पास से उनके सन्देह का समाधान हुआ। परमहंस के दिव्य प्रभाव से आकर्षित हुआ वह उसका शिष्य हो गया। वह विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका देश के शिकागो नगर को गया। वहाँ विभिन्न देशों के लोगों को लक्ष्य करके हिन्दू धर्म के विषय में भाषण किया। उन्होंने भारतीयों से उठो, जागो, दीनों के देवता, दरिद्रों के देवता हो, ऐसा संबोधित किया। उनके उपदेश अमूल्य हैं।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) विवेकानन्दस्य जन्म कुत्र अभवत्?
(विवेकानन्द का जन्म कहाँ हुआ था?)
उत्तरम् :
कालिकातानगरे ।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) विवेकानन्दस्य प्रथमं नाम किम् आसीत्?
(विवेकानन्द का पहला नाम क्या था?)
उत्तरम् :
नरेन्द्रः ।

(iii) नरेन्द्रः कस्य प्रभावेण आकृष्टः अभवत्?
(नरेन्द्र किसके प्रभाव से आकर्षित हुआ?)
उत्तरम् :
श्रीरामकृष्ण परमहंसस्य।

(iv) विश्वधर्म सम्मेलनः कुत्र आयोजितः?
(विश्वधर्म सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ?)
उत्तरम् :
अमेरिकादेशस्य शिकागोनगरे।
(अमेरिका देश के शिकागो नगर में।)

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-) ।
(i) नरेन्द्रः’बाल्यकाले कीदृशः आसीत्?
(नरेन्द्र बचपन में कैसा था?)
उत्तरम् :
नरेन्द्रः बाल्यकाले क्रीडापटुः, दयालुः विचारशीलः च आसीत्।
(नरेन्द्र बचपन में खेलने में चतुर, दयालु और विचारशील था।)

(ii) नरेन्द्रस्य ईश्वरविषयक शङ्कायाः परिहारः कुत्र अभवत् ?
(नरेन्द्र की ईश्वर सम्बन्धी शंका का समाधान कहाँ हुआ?)
उत्तरम् :
नरेन्द्रस्य ईश्वरविषयक शङ्काया परिहारः श्रीरामकृष्ण परमहंसस्य सकाशात् अभवत्।
(नरेन्द्र की ईश्वर सम्बन्धी शंका का निराकरण श्री रामकृष्ण परमहंस के पास से हुआ।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) विवेकानन्दः शिकागो सम्मेलने के विषयम् आश्रित्य भाषणं कृतवान्?
(विवेकानन्द ने शिकागो सम्मेलन में किस विषय के आधार पर भाषण दिया?)
उत्तरम् :
विवेकानन्दः हिन्दुधर्म-विषयम् आश्रित्य भाषणं कृतवान्।
(विवेकानन्द ने हिन्दूधर्म के विषय का आश्रय लेकर भाषण दिया।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
विवेकानन्दः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
कालिकाता नगरे जातस्य भुवनेश्वरी देवी विश्वनाथयो रात्मजस्य प्रथमं नाम नरेन्द्रः आसीत्। सः बाल्याद् एव क्रीडादिषु कार्येषु पटुः विचारशीलः जिज्ञासुः च आसीत्। सः शस्त्रामध्येता ईश्वर चिन्तकः सत्यान्वेषक: चाभवत्। शंका निवारणत्वात् असौ रामकृष्ण परमहंसस्य शिष्योऽभवत्। सः विश्वधर्म सम्मेलने अमेरिका देशे भारतस्य धर्म तत्वम् प्रकाशितवान्। हिन्दूधर्मः विश्वविश्रुतः कृतः तस्योपदेश आसीत्- उत्तिष्ठ जाग्रत दरिद्रदेवोभव।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशं प्रश्नान् उत्तरत –
(निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-)
(i) ‘ईश्वरः अस्ति नास्ति वा’ अत्र ‘अस्ति’ क्रियापदस्य कर्ता अस्ति –
(अ) ईश्वर
(ब) अस्ति
(स) नास्ति
(द) वा
उत्तरम् :
(अ) ईश्वर

(ii) ‘उपदेशाः’ इत्यस्य विशेष्य पदस्य विशेषण पदं अस्ति –
(अ) अमूल्याः
(ब) तस्य
(स) उपदेशाः
(द) विशेष्याः
उत्तरम् :
(अ) अमूल्याः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) ‘अमूल्याः तस्पोपदेशाः’ वाक्ये ‘तस्य’ सर्वनाम पद प्रयुक्तम् –
(अ) रामकृष्ण परमहंसस्य
(ब) स्वामी विवेकानन्दस्य
(स) विश्वनाथ दत्तस्य
(द) भुवनेश्वरी देव्या
उत्तरम् :
(ब) स्वामी विवेकानन्दस्य

(iv) ‘दरिद्रदेवो भव’ अत्र ‘दरिद्र’ पदस्य पर्याय पद अस्ति
(अ) दरिद्रः
(ब) निर्धन
(स) संपन्नः
(द) धनिकः
उत्तरम् :
(ब) निर्धन

4. एकदा द्रोणाचार्यः कौरवान् पाण्डवान् च पाठमेकम् अपाठयत्। ‘सत्यं वद धर्म चर।’ अग्रिमे दिने सर्वे शिष्याः पाठं कण्ठस्थी कृत्य गुरुम् अश्रावयन्। किन्तु युधिष्ठिरः तूष्णीम् एव अतिष्ठत्। आचार्येण पृष्टः सः प्रत्युवाच-‘मया पाठः न स्मृतः’ उत्तरं श्रुत्वा सर्वेऽपि सहपाठिनः अहसन्। गुरुः च रुष्टः अभवत्। पञ्चमे दिवसे युधिष्ठिरः गुरवे न्यवेदयत् यन्मया सम्पूर्णः पाठः स्मृतः। गुरु अपृच्छत्- “लघीयान आसीत् एषः पाठः। किमर्थं चिरात् स्मृतः?” सः अवदत्- “हे गुरो? वचसा तु पाठैः स्मृतः आसीत्, परं प्रमादेन हास्येन वा अनेकवारम् असत्यम् अवदम्। ह्यः प्रभृति मया असत्य वचनं न भाषितम्। अधुना दृढतया वक्तुं शक्नोमि, यत् मया भवता पठितः पाठः स्मृतः।” इदं श्रुत्वा प्रीतः दोण: अवदत्-त्वं धन्योऽसि यः पाठं व्यवहारे आनीतवान्। त्वया एव पाठस्य अर्थः ज्ञातः बोधितः च?” वस्तुतः प्रयोगं विना ज्ञानं तु भारम् एव भवति।

(एक दिन द्रोणाचार्य ने कौरव और पाण्डवों को एक पाठ पढ़ाया। ‘सत्य बोलो। धर्म का आचरण करो।’ अगले दिन सभी शिष्यों ने पाठ को कण्ठस्थ कर गुरुजी को सुना दिया। किन्तु युधिष्ठिर चुप ही रहा । आचार्य के पूछे जाने पर वह
‘मैंने पाठ याद नहीं किया।’ उत्तर को सुनकर सभी सहपाठी हँस पड़े और गुरु नाराज हो गये। पाँचवें दिन युधिष्ठिर ने गुरुजी से निवेदन किया कि मैंने सम्पूर्ण पाठ याद कर लिया है। गुरु जी ने पूछा- यह पाठ तो छोटा-सा था, इतनी देर से किसलिए याद हुआ? वह बोला- गुरुजी! वाणी से तो पाठ याद हो गया था परन्तु लापरवाही अथवा हँसी-मजाक में अनेक बार झूठ बोला । कल से मैंने असत्य वचन नहीं बोला है । अब मैं दृढ़ता के साथ कह सकता हूँ कि मैंने आपके द्वारा पढ़ाया हुआ पाठ याद कर लिया। यह सुनकर प्रसन्न हुए गुरुजी बोले- “तुम धन्य हो, जिसने पाठ को व्यवहार में लाया। तुमने ही पाठ का अर्थ जाना है और समझा है ।” वास्तव में प्रयोग (व्यवहार) के बिना विद्या (ज्ञान) भार है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कौरवपांडवानां गुरुः कः आसीत्?
(कौरव पांडवों का गुरु कौन था?)
उत्तरम् :
द्रोणाचार्यः (द्रोणाचार्य।)

(ii) पाठः केन न स्मृतः ?
(पाठ किसने याद नहीं किया?)
उत्तरम् :
युधिष्ठिरेण (युधिष्ठिर ने।)

(ii) प्रयोगं विना ज्ञानं कीदृशम् ?
(प्रयोग के बिना ज्ञान कैसा होता है?)
उत्तरम् :
भारम् (भार)।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) युधिष्ठिरेण कः पाठः न स्मृतः ?
(युधिष्ठिर ने कौन-सा पाठ याद नहीं किया?)
उत्तरम् :
सत्यं वद धर्मं चर (सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो।)

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) कीदृशं ज्ञानं भारम्?
(कैसा ज्ञान भार होता है?)
उत्तरम् :
प्रयोगं विना ज्ञानं भारम् (व्यवहार के बिना ज्ञान भार है।)

(ii) प्रीतः द्रोणः युधिष्ठिरं किम् अवदत्?
(प्रसन्न द्रोण ने युधिष्ठिर से क्या कहा?)
उत्तरम् :
प्रीतः द्रोणः युधिष्ठिरम् अवदत् यत् त्वं धन्योऽसि यः पाठं व्यवहारे आनीतवान् त्वया एव पाठस्य अर्थः ज्ञान: बोधि तश्च।” (प्रसन्न द्रोण ने युधिष्ठिर से कहा-तुम धन्य हो जो पाठ को व्यवहार में लाये। तुमने ही पाठ को जाना और समझा है।)

(ii) सहपाठिन: कस्मात् अहसन्?
(सहपाठी किसलिए हँसे?)
उत्तरम् :
‘मया पाठं न स्मृतः’ इति युधिष्ठिरस्य उत्तरं श्रुत्वा सहपाठिनः अहसन्।
(‘मैंने पाठ याद नहीं किया’ युधिष्ठिर के इस उत्तर को सुनकर सहपाठी हँस पड़े।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
ज्ञानं भारं प्रयोगं विना। (प्रयोग के बिना ज्ञान भार है।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
द्रोणाचार्यः शिष्यान् पाठमपाठयत् ‘सत्यं वद धर्मं चर’। सर्वे पाठं कण्ठस्थी कृत्य अश्रावयन् परञ्च युधिष्ठिर ना
श्रवयत्, ‘न मया स्मृत।’ पञ्चमे दिवसे न श्रावयत् गुरौ पृष्ठे सोऽवदत्- हे गुरो! वचनातु मया स्मृतः परञ्च अनेक
वारं असत्यम् अवदम्। ह्योऽहं नासत्यमपदम् अतः इदानीं सुदृढोऽस्मि। उत्तरं श्रुत्वा क्रुद्धो गुरुः प्रसन्नोऽभवत्। – धन्योऽसि। पाठं व्यवहारम् आनीय एव स्मृतः मतः। यतः प्रयोगं विना तु ज्ञानं भारम् एव।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘अपाठयत्’ क्रियापदस्य कर्ता अनुच्छेदे अस्ति –
(अ) द्रोणाचार्यः
(ब) युधिष्ठिरः
(स) दुर्योधनः
(द) अर्जुनः
उत्तरम् :
(अ) द्रोणाचार्यः

(ii) ‘प्रीतः द्रोणः’ इत्यनयोः विशेष्य पदमस्ति –
(अ) प्रीतः
(ब) द्रोणः
(स) युधिष्ठिरः
(द) अर्जुनः
उत्तरम् :
(ब) द्रोणः

(iii) मया पाठ: न स्मृतः’ वाक्ये मया सर्वनाम पदं प्रयुक्तम्
(अ) द्रोणाचार्याय
(ब) अर्जुनाय
(स) युधिष्ठिराय
(द) भीमाय
उत्तरम् :
(स) युधिष्ठिराय

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘त्वं धन्योऽसि’ अत्र ‘तत्वं’ पदस्य विलोम पदमस्ति
(अ) त्वम्
(ब) धन्यः
(स) वयं
(द) अन्यत्
उत्तरम् :
(स) वयं

5. कस्मिंश्चिद् वने कोऽपि काकः निवसति स्म। वर्षायाः अभावे वने कुत्रापि जलं नासीत्। नद्यः तडागाः च जलविहीनाः आसन्। एकदाः काकः अति पिपासितः आसीत्। सः इतस्त: अपश्यत् परञ्च न कुत्रापि जलाशयः दृष्टः। सः जलस्य अन्वेषणे इतस्ततः अभ्रमत्। यावत् असौ पिपासितः काकः ग्रामे गच्छति तावत् दूरे एकं घटम् अपश्यत्। काकः घटस्य समीपम् अगच्छत्। घटस्य उपरि अतिष्ठत्। सोऽपश्यत् यत् घटे जलम् अत्यल्पम् आसीत् अतः दूरम् आसीत।

सः चञ्च्वा जलं न पातुम् अशक्नोत्। किञ्चिद दूरे प्रस्तर खण्डान् दृष्ट्वा सः उपायम् अचिन्तयत्। स एकैकम् प्रस्तर खण्ड स्व चञ्च्वा आनयत् तानि प्रस्तरखण्डानि घटे न्यक्षिपत्। यथायथा पाषाण खण्डानि जले न्यमज्जन् तथा-तथा एव जलस्तरः उपरि आगच्छत्। उपर्यागतं जलमवलोक्य काकः अति प्रसन्नः जातः। सः जलम् पीतवान् मुक्तगगने च उड्डीयत। उड्डीयमानः काकोऽचिन्तयत्- उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।

(किसी जंगल में कोई कौआ रहता था। वर्षा के अभाव में वन में कहीं पानी नहीं था। नदी-तालाब जलविहीन थे। एक दिन वह कौवा बहुत प्यासा था। उसने इधर-उधर देखा परन्तु कहीं भी जलाशय दिखाई नहीं पड़ा। वह जल की खोज में इधर-उधर घूमने लगा। जैसे ही वह प्यासा कौआ गाँव को गया वैसे ही दूर पर एक घड़े को देखा। कौआ घड़े के पास गया, घड़े के ऊपर बैठा। उसने देखा कि घड़े में जल बहुत थोड़ा था, अत: दूर था। वह चोंच से पानी नहीं पी सका।

कुछ दूरी पर पत्थर के टुकड़ों (कंकड़ों) को देखकर उसने उपाय सोचा। वह एक-एक कंकड़ चोंच में लाया, उन कंकड़ों को घड़े में डाल दिया। जैसे-जैसे कंकड़ पानी में डूबे वैसे-वैसे ही जलस्तर ऊपर आ गया। ऊपर आये हुए पानी को देखकर कौआ बहुत प्रसन्न हुआ। उसने पानी पिया और मुक्त गगन में उड़ गया। उड़ते हुए कौवे ने सोचा- उद्यम (परिश्रम) से ही कार्य सिद्ध होते हैं, न कि मनोरथ से।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) नद्यः तडागाः कीदृशाः आसन्? (नदी-तालाब कैसे थे?)
(ii) कांक घटे कानि न्यक्षिपत्? (कौआ ने घड़े में क्या डाले?)
(iii) घटे कियत् जलम् आसीत? (घड़े में कितना पानी था?)
(iv) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति? (कार्य किससे सिद्ध होते हैं?)
उत्तरम् :
(i) जलविहीनाः
(ii) प्रस्तरखण्डानि
(iii) अत्यल्पम्
(iv) उद्यमेन।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) उड्डीयमानः काकः किम् अचिन्तयत्? (उड़ते हुए कौए ने क्या सोचा?)
(ii) उपर्यागतं जलमवलोक्य काकः कीदृशः अभवत्? (ऊपर आये पानी को देखकर कौआ कैसा हो गया?)
(iii) काकः किम् उपायम् अचिन्तयत्? (कौआ ने क्या उपाय सोचा?)
उत्तरम् :
(i) सोऽचिन्तयत् यत् उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
(उसने सोचा-उद्यम (परिश्रम) से ही कार्य सिद्ध होते हैं, न कि मनोरथ से।)
(ii) काकः प्रसन्नः अभवत्। (कौआ प्रसन्न हो गया।)
(iii) काकः चञ्च्वा एकैकं प्रस्तर खण्डम् आनीय घटे न्यक्षिपत्।
(कौआ ने चोंच से एक-एक कंकड़ लाकर घड़े में डाला।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि/पिपासितः काकः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
वर्षायाः अभावे शुष्केषु जलाशयेषु एकः काकः जलस्यान्वेषणे सर्वत्र अभ्रभात्। ग्रामे एक घटं दृष्टवान्। घटेऽत्यल्पं जलम् आसीत्। अतः चञ्च्वा जलं न पातुम् शक्नोत्। किंचिद्रात् प्रस्तरखण्डान् आनीय घटे न्यक्षिपत्। जलम् उपरि आगच्छत्। काक जलं पीत्वा अति प्रसन्नः सन् आकाशे विचरन्नवदत्- उद्यमेन हि सिद्यन्ति कार्याणि न च मनोरथैः।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘जलं नासीत्’ अनयोः कर्तृपदम् अस्ति
(अ) जलम्
(ब) न
(स) आसीत्
(द) जलविहीनाः
उत्तरम् :
(अ) जलम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘काकः अति पिपासितः आसीत्’ अत्र काकस्य विशेषण पदम् अस्ति
(अ) काकः
(ब) अति
(स) पिपासितः
(द) अस्ति ।
उत्तरम् :
(स) पिपासितः

(iii) ‘सोऽपश्यत्’ अत्र ‘सः’ इति सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम् –
(अ) घटः
(ब) जलम्
(स) काकः
(द) प्रस्तर खण्डम्
उत्तरम् :
(स) काकः

(iv) ‘तृषितः’ इति पदस्य पर्यायवाचि पदं गद्यांशे प्रयुक्तम् –
(अ) पिपासितः
(ब) जलविहीनः
(स) अत्यल्पम्
(द) इतस्ततः
उत्तरम् :
(अ) पिपासितः

6. एकस्य भिक्षुकस्य भिक्षापात्रे अञ्जलि परिमिताः तण्डुलाः आसन्। सः अवदत् – ‘भगवन्। दयां कुरु। कथम् अनेन उदरपूर्तिः भविष्यति?” तदैव अन्यः भिक्षुकः तत्र आगच्छति वदति च, ‘भिक्षां देहि!’ क्रुद्धः प्रथमः भिक्षुकः अगर्जत्- ‘रे भिक्षुक! भिक्षुकम् एव भिक्षां याचते? तव लज्जा नास्ति?” द्वितीयः भिक्षुकः उक्तवान्- “तव भिक्षा पात्रे अञ्जलि परिमिताः तण्डुलाः, मम तु पात्रं रिक्तम्। दयां कुरु। अर्धं देहि।” प्रथमः भिक्षुकः तत् न स्वीकृतवान्।

द्वितीयः भिक्षुकः पुनः अवदत्, “भो कृपणः मा भव। केवलम् एकं तण्डुलं देहि।” प्रथमः भिक्षुकः तस्मै एकमेव तण्डुलं ददाति। द्वितीये भिक्षुके गते सति प्रथमः भिक्षुकः भिक्षापात्रे तण्डुलाकारं स्वर्णकणं पश्यति। आश्चर्यचकितः शिरः ताडयन् सः पश्चात्तापम् अकरोत्-धिक माम, धिङ् मम मूर्खताम्।”

(एक भिक्षुक के भिक्षापात्र में अञ्जलि भर चावल थे। वह बोला-भगवान् दया करो। इससे कैसे पेट भरेगा? तभी दूसरा भिक्षुक वहाँ आ जाता है और कहता है- ‘भिक्षा दो।’ क्रुद्ध होकर पहला भिखारी गरजा- अरे भिखारी! भिखारी से ही भीख माँगता है? तुझे शर्म नहीं आती (तेरे शर्म नहीं है)। दूसरा भिक्षुक बोला- “तेरे भिक्षा पात्र में अंजलि भर चावल तो हैं, मेरा पात्र तो खाली (ही) है।

दया करो। आधा दे दो। पहले भिक्षुक ने यह स्वीकार नहीं किया। दूसरा भिक्षुक फिर बोला- “अरे कंजूस मत हो। केवल एक चावल दे दे।” पहला भिक्षुक उसे एक ही चावल देता है। दूसरे भिक्षुक के चले जाने पर पहला भिक्षुक भिक्षापात्र में चावल के आकार का सोने का कण देखता है । आश्चर्यचकित हुआ सिर पीटता हुआ वह पश्चात्ताप करने लगा- धिक्कार है मुझे, मेरी मूर्खता को धिक्कार है।”)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) भिक्षुकस्य भिक्षापात्रे कियत्परिमिता तण्डुलं आसन्? (भिक्षुक के भिक्षापात्र में कितने चावल थे?)
(ii) द्वितीयो भिक्षुकः कं भिक्षाम् अयाचत? (दूसरे भिखारी ने किससे भीख माँगी?)
(iii) द्वितीया भिक्षकः प्रथमं कति तण्डलानि अयाचत? (दसरे भिक्षक ने पहले से कितने चावल माँगे?)
(iv) द्वितीये भिक्षुके गते सति प्रथमः भिक्षुकः स्वभिक्षापात्रे किम् अपश्यत्?
(दूसरे भिक्षुक के चले जाने पर पहले भिक्षुक ने अपने भिक्षापात्र में क्या देखा?)
उत्तरम् :
(i) अञ्जलि परिमिताः
(ii) प्रथमं भिक्षुकम्
(iii) एक तण्डुलम्
(iv) स्वर्णकणम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) प्रथमः भिक्षुकः भगवन्तं किम् अयाचत? (पहले भिखारी ने भगवान से क्या माँगा?)
(ii) प्रथमः भिक्षुकः किम् अगर्जत? (पहला भिक्षुक क्या गरजा?)
(iii) द्वितीयः भिक्षुकः प्रथमं कति तण्डुलानि अयाचत? (दूसरे भिखारी ने पहले से कितने चावल माँगे?)
उत्तरम् :
(i) सोऽयाचत, भगवन् दयां कुरु। कथम् अनेन उदरपूर्तिः भविष्यति?
(उसने याचना की- भगवन् ! दया करो। इससे पेट पूर्ति कैसे होगी?)
(ii) प्रथमः भिक्षुकः अगर्जत्- रे भिक्षुक! भिक्षुकमेव भिक्षां याचते। तव लज्जा नास्ति?
(पहले भिक्षुक ने गर्जना की- अरे भिक्षुक! भिक्षुक से ही भिक्षा माँगता है। तेरे कोई शर्म नहीं है?)
(iii) द्वितीय भिक्षुकः प्रथम भिक्षुकं एकमेव तण्डुलम् अयाचत् ।
(दूसरे भिखारी ने पहले भिखारी से. एक ही चावल माँगा।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत – (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
उदारतायाः फलम् (उदारता का फल)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
एकस्य भिक्षुकस्य भिक्षापात्रे अञ्जलि मात्र तण्डुला आसन्। द्वितीय भिक्षुकः तम् अय द्वितीयोवदत् तव पात्रेषु अञ्जलिपूर्ण तण्डुलाः सन्ति मम पात्रे तु एकमपिनास्ति अत्र एकमेव तण्डुलम् यच्छ। प्रथम एकमेव तण्डुलम् अयच्छत् द्वितीये भिक्षुके गते सति प्रथमः स्व पात्रम् अपश्यत् यत् तत्र एक तण्डुलाकारं स्वर्णकण आसीत्। साश्चर्यमसौ पश्चात्तापम् करोत्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘भविष्यति’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति
(अ) अञ्जलि
(ब) उदरपूर्तिः
(स) भिक्षा
(द) कथम्
उत्तरम् :
(ब) उदरपूर्तिः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘क्रुद्धः प्रथमः भिक्षुकः अगर्जत्’ अत्र विशेष्यपदमस्ति
(अ) प्रथमः
(ब) क्रुद्धः
(स) भिक्षुकः
(द) अगर्जत्
उत्तरम् :
(स) भिक्षुकः

(iii) “धिक् मम मूर्खताम्’ अत्र ‘मय’ इति सर्वनाम पद कस्मै प्रयुक्तम् –
(अ) प्रथम भिक्षुकाय
(ब) द्वितीय भिक्षुकाय
(स) तण्डुलेभ्यः
(द) याचाय
उत्तरम् :
(अ) प्रथम भिक्षुकाय

(iv) ‘दयां कुरु’ अत्र ‘दयां’ पदस्य विलोमपदमस्ति –
(अ) दयाम्
(ब) अदयां
(स) भिक्षां
(द) देहि
उत्तरम् :
(ब) अदयां

7. परेषां प्राणिनामुपकारः परोपकारोऽस्ति। परस्य हित सम्पादनं मनसा वाचा कर्मणा च अन्येषां हितानुष्ठानमेव परोपकार शब्देन गृह्यते। संसारे परोपकारः एव सः गुणो विद्यते, येन मनुष्येषु सुखस्य प्रतिष्ठा वर्तते। परोपकारेण हृदयं पवित्र सरलं, सरसं, सदयं च भवति। सत्पुरुषा कदापि स्वार्थपराः न भवन्ति। ते परेषां दुःखं स्वीयं दुःखं मत्वा तन्नाशाय यतन्ते। सज्जनाः परोपकारेण एव प्रसन्नाः भवन्ति। परोपकार-भावनैव दधीचिः देवानां हिताय स्वकीयानि अस्थीनि ददौ। महाराजशिविः कपोत रक्षणार्थ स्वमांसं श्येनाय प्रादात्। अस्माकं शास्त्रेषु परोपकारस्य महत्ता वर्णिता। प्रकृतिरपि परोपकारस्यै शिक्षा ददाति। अतः सर्वेरपि सर्वदा परोपकारः करणीयः।

(दूसरे प्राणियों का उपकार परोपकार है। दूसरे का हित-सम्पादन और मन-वाणी और कर्म से दूसरों का हितकार्य ही परोपकार शब्द से ग्रहण किया जाता है । संसार में परोपकार ही वह गुण है जिससे मनुष्यों में सुख की प्रतिष्ठा होती है। परोपकार से हृदय पवित्र, सरल, सरस और दयालु होता है। सज्जन कभी स्वार्थ के लिए तत्पर नहीं होते। वे दूसरों के दुख को अपना दुःख मानकर उसको दूर करने का प्रयत्न करते हैं। सज्जन परोपकार से ही प्रसन्न होते हैं। परोपकार भावना से ही दधीचि ने देवताओं के हित के लिए अपनी हड्डियों को दे दिया। महाराज शिवि ने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस बाज के लिए दे दिया। हमारे शास्त्रों में परोपकार की महिमा वर्णित है। प्रकृति भी परोपकार की शिक्षा देती है। अतः सभी को हमेशा परोपकार करना चाहिए।) प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)

(i) के स्वार्थतत्पराः न भवन्ति ? (कौन स्वार्थ तत्पर नहीं होते?)
(ii) देवानां हिताय स्वकीयानि अस्थीनि कः ददौ? (देवताओं के हित के लिए अपनी हड्डियाँ किसने दे दी? )
(iii) मनुष्येषु परोपकारेण किं भवति? (मनुष्यों में परोपकार से क्या होता है?)
(iv) महाराजशिविः कपोत रक्षणार्थं स्वमांसं कस्मै प्रादात्?
(महाराज शिवि ने कबूतर की रक्षार्थ अपना मांस किसको दिया?)
उत्तरम् :
(i) सत्पुरुषाः
(ii) दधीचिः
(iii) सुखस्य प्रतिष्ठा
(iv) श्येनाय।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) परोपकारः कः अस्ति? (परोपकार क्या है?)
(ii) महाराज शिविः परोपकाराय किम् अकरोत?
(महाराज शिवि ने परोपकार में क्या किया?)
(iii) प्रकृति किं शिक्षते? (प्रकृति किसकी शिक्षा देती है?)
उत्तरम् :
(i) परेषां प्राणिनाम् उपकारः परोपकारः अस्ति।
(दूसरे प्राणियों का उपकार परोपकार है।)
(ii) महाराज शिवि परोपकाराय कपोतरक्षणार्थं श्येनाय स्वमांसं ददौ।
(महाराज शिवि ने परोपकार के लिए बाज को अपना मांस दे दिया।)
(ii) प्रकृति परोपकारस्य एव शिक्षां ददाति।
(प्रकृति परोपकार की ही शिक्षा देती है।)

प्रश्न 3.
अस्य गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
(इस गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
परोपकारस्य महत्वम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
मनसा वचसा कर्मणा च परेषां हित सम्पादनमेव परोपकारः इति कथ्यते। अनेनैव संसारे मनुष्य प्रतिष्ठति। दयादयः गुणाः भवन्ति। सञ्जनाः स्वार्थं परित्यज्यासि परेषां दुःखं स्वकीय मन्यते। ते परोपकारेणैव प्रसीदन्ति न तु स्वार्थ सिद्धि पूर्णेन। महर्षि दधीचिः महाराजाशिविस्य इत्यादय परोपकारस्य निदर्शनानि सन्ति। प्रकृति अपि परोपकारमेवशिक्षति। तस्या प्रत्येकम् अङ्गमेव परोपकारे निरतः अस्ति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘प्रकृतिरपि परोपकारस्यैव शिक्षा ………’ अत्र कर्तृ पदमस्ति
(अ) सत्पुरुषाः
(ब) परोपकारिणः
(स) प्रकृतिः
(स) सज्जनाः
उत्तरम् :
(स) प्रकृतिः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘अपरमित सुखस्य प्रतिष्ठा वर्तते’ अत्र विशेष्य पदमस्ति
(अ) सुखस्य
(ब) प्रतिष्ठा
(स) वर्तते
(द) मनुष्येषु
उत्तरम् :
(अ) सुखस्य

(iii) ‘ते परेषां दुःखं …….’ अत्र ‘ते’ सर्वनाम पदस्य स्थाने संज्ञा पदं भवेत
(अ) सत्पुरुषा
(ब) वृक्षाः
(स) प्रकृतेः अंगानि
(द) दुर्जनाः
उत्तरम् :
(अ) सत्पुरुषा

(iv) ‘कठिन’ इति पदस्य विलोम पदं भवति
(अ) सरसम्
(ब) सदयम्
(स) सरलम्
(द) पवित्रम्
उत्तरम् :
(स) सरलम्

8. मेवाडराज्यं बहूनां शूराणां जन्मभूमिः। तस्य राजा राणाप्रतापः सिंहासनम् आरूढ़वान्। हस्तच्युतानां भागानां प्रति प्राप्तिः कथमिति विचिन्त्य सः पुर प्रमुखाणां सभामायोजितवान्। तत्र सः प्रतिज्ञां कृतवान्- ‘चित्तौड़स्थानं यावत् न प्रति प्राप्स्यामि तावत् सुवर्ण पात्रे भोजनं न करिष्यामि। राजप्रासादे वासं न करिष्यामि। मृदुतल्ये शयनम् अपि न करिष्यामि’ इति। तदा पुर प्रमुखाः अवदन् वयम् अपि सुख-साधनानि त्यक्ष्याम। देशाय यथा शक्ति धनं दास्यामः। अस्मत्पुत्रान् सैन्यं प्रति प्रेषयिष्यामः इति। तदनन्तरं ग्राम प्रमुखाः अवदन्- वयं धान्यागारं धान्येन परिपूरयिष्यामः। ग्रामे आयुधानि सज्जीकरिष्यामः। युवकान् युद्धकलां बोधयिष्यामः। अद्यैव कार्यारम्भः करिष्यामः।

(मेवाड़ राज्य बहुत से वीरों की जन्मभूमि है। उसका राजा राणा प्रताप सिंहासन पर आरूढ़ हुआ, हाथ से निकले हुए भागों की वापिस प्राप्ति कैसे हो ? यह सोचकर उसनें नगर प्रमुखों की सभा आयोजित की। वहाँ उसने प्रतिज्ञा की- चित्तौड़ स्थान को जब तक वापिस प्राप्त नहीं कर लूँगा तब तक सोने की थाली में भोजन नहीं करूंगा। राजमहल में निवास नहीं करूँगा। कोमल गद्दों पर शयन भी नहीं करूंगा। तब पुर-प्रमुखों ने कहा- हम भी सुख-साधनों को त्यागेंगे। देश के लिए यथा शक्ति धन देंगे। अपने पुत्रों को सेना में भेजेंगे। इसके बाद ग्राम प्रमुखों ने कहा- हम धान्यागारों को धान से भरपूर कर देंगे। गाँव में हथियार तैयार करेंगे। जवानों को युद्ध कला का ज्ञान करायेंगे। आज ही कार्य आरंभ करेंगे।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) राणा प्रतापः कस्य राज्यस्य राजा आनीत? (राणा प्रताप किस राज्य के राजा थे?)
(ii) ‘सुवर्ण पात्रे भोजनं न करिष्यामिक प्रतिज्ञां कृतवान् ।
(‘सोने की थाली में भोजन नहीं करना’ यह प्रतिज्ञा किसने की?)
(iii) मेवाड़ राज्यं केषां जन्मभूमिः? (मेवाड़ राज्य किनकी जन्मभूमि है?)
(iv) धान्यागारं के पूरयिष्यन्ति? (धान्यागार को कौन भरेंगे?)
उत्तरम् :
(i) मेवाड़राज्यस्य
(ii) महाराणा प्रतापः
(iii) शूराणाम्
(iv) ग्रामप्रमुखाः ।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) मेवाड़ राज्यं केषां जन्मभूमिः?
(मेवाड़ राज किनकी जन्मभूमि है?)
(ii) कः पुरप्रमुखाणां सभाम् आयोजितवान् ?
(पुर प्रमुखों की सभा किसने आयोजित की?)
(iii) महाराणा किं विचिन्त्य पुरप्रमुखानां सभाम् आयोजितवान् ? ।
(महाराणा ने क्या सोचकर पुर-प्रमुखों की सभा आयोजित की?) ।
उत्तरम् :
(i) मेवाडराज्यं शूराणां जन्मभूमिः।
(मेवाड़ राज्य शूरवीरों की जन्मभूमि है।)
(ii) महाराणाप्रतापः पुरप्रमुखानां सभामायोजितवान्।
(महाराणा प्रताप ने पुरप्रमुखों की सभा का आयोजन किया।)
(iii) हस्तच्युताना भागाना प्रतिप्राप्ति कथ भवेत् इति विचिन्त्य प्रतापः पुर प्रमुखाना सभामायोजितवान्।

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
महाराणा प्रतापः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीक
उत्तरम् :
मेवाड़ राज्ये बहवः शूराः अभवन्। प्रतापादयोऽनेके सिंहासनम् आरूढ़वन्तः। सभायां प्रतापः प्रतिज्ञातवान् चित्तौड राज्यमेव प्राप्य स्वर्णपात्रे भोजनं न करिष्यामि। प्रासादे न निवत्स्यामि मृदुतल्पे न शयिष्ये पुर प्रमुखाः अपि सुखसाधनानि अत्यजन। धन-पुत्र-धान्य-आयुधादीन प्रदाय प्रतिज्ञात वन्त युद्धाय च तत्पराः आसन्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘तत्र सः प्रतिज्ञां कृतवान्’ इत्यस्मिन् वाक्ये क्रिया पदमस्ति
(अ) कृतवान्
(ब) तत्र
(स) सः
(द) प्रतिज्ञाम्
उत्तरम् :
(अ) कृतवान्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘मृदुतल्पे’ इत्यनयोः विशेषण पदमस्ति
(अ) तल्पे
(ब) मृदु
(स) प्रसाद
(द) स्वपात्राणि
उत्तरम् :
(ब) मृदु

(iii) ‘तदा पुर प्रमुखाः अवदन’ अस्मिन् वाक्ये संज्ञापदमस्ति
(अ) तदा
(ब) अवदन्
(स) वदन्
(द) पुरप्रमुखाः
उत्तरम् :
(द) पुरप्रमुखाः

(iv) ‘वयं धान्यागारं धान्येन पूरयिष्यामः’ अत्र ‘धान्येन’ पदस्य पर्याय पदमस्ति
(अ) अन्नेन
(ब) धान्यागारम्
(स) धान्यम्
(द) पूरयिष्यामः
उत्तरम् :
(अ) अन्नेन

9. शाक्यवंशीयः शुद्धोदनः नाम कश्चिद् राजा आसीत्। कपिलवस्तु नाम तस्य राजधानी आसीत्। अस्य एव राज्ञः सुपुत्रः सिद्धार्थः आसीत्। सः बाल्यकालाद् एव अति करुणापरः आसीत्। तस्य मनः क्रीडायाम् आखेटे वा नारमत। एवं स्वपुत्रस्य राजभोगं प्रति वैराग्यं दृष्ट्वा शुद्धोदनः चिन्तितः अभवत्। सः सिद्धार्थस्य यौवनारम्भे एव विवाहम् अकरोत्। तस्य पत्नी यशोधरा सुन्दरी साध्वी च आसीत्। शीघ्रमेव तयोः राहुल: नाम पुत्रः अंजायत।

एकदा सिद्धार्थः भ्रमणाय नगरात् बहिः अगच्छत्। तत्र सः एकं वृद्धम् एकं रोगार्तम्, एकं मृत पुरुषम् एकं च संन्यासिनम् अपश्यत्। एतान् दृष्ट्वा तस्य मनसि वैराग्यम् उत्पन्नम् अभवत्। ततः सः स्वधर्मपत्नीम् अबोधं सुतं राहुलं राज्यं च त्यक्त्वा गृहात् निरगच्छत्। सः कठिनं तपः अकरोत्। तपसः प्रभावात् सः बुद्धः अभवत्। अहिंसा पालनं तस्य प्रमुखा शिक्षा आसीत्। सः जनानां कल्याणाय बौद्ध-धर्मस्य प्रचारम् अकरोत्।

(शाक्यवंश का शुद्धोदन नाम का कोई राजा था। कपिलवस्तु नाम की उसकी राजधानी थी। इसी राजा का सुपुत्र सिद्धार्थ था। वह बचपन से ही अत्यन्त दयालु था। उसका मन खेल और मृगया में नहीं लगता था। इस प्रकार अपने बेटे को राजभोग के प्रति वैराग्य देखकर शुद्धोदन चिन्तित हुआ। उसने सिद्धार्थ का यौवन के आरम्भ में ही विवाह कर दिया। उसकी पत्नी यशोधरा सुन्दर और साध्वी थी। शीघ्र ही उन दोनों के राहुल नाम का पुत्र हुआ। एक दिन सिद्धार्थ भ्रमण के लिए नगर से बाहर गया। वहाँ उसने एक बुड्ढे, एक रोग से पीड़ित, एक मरे हुए पुरुष को और एक संन्यासी को देखा। इनको देखकर उसके मन में वैराग्य पैदा हो गया। तब वह अपनी पत्नी, अबोध पुत्र राहुल और राज्य को त्याग कर घर से निकल गया। उसने कठोर तप किया। तप के प्रभाव से वह बुद्ध हो गया। अहिंसा-पालन इसकी प्रमुख शिक्षा थी। उसने लोगों के कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का प्रचार किया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) शाक्यवंशीय नृपस्य किम्, नाम आसीत्?
(शाक्यवंशीय राजा का क्या नाम था?)
(ii) शुद्धोदनस्य किं नाम राजधानी आसीत्?
(शुद्धोदन की राजधानी का क्या नाम था?)
(iii) शुद्धोदनस्य आत्मजः काः आसीत?
(शुद्धोदन का पुत्र कौन था?)
(iv) सिद्धार्थः बाल्यकालात् कीदृशः आसीत्?
(सिद्धार्थ बचपन में कैसा था?)
उत्तरम् :
(i) शुद्धोदनः
(ii) कपिलवस्तु
(iii) सिद्धार्थः
(iv) करुणापरः।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) सिद्धार्थः किमर्थं बौद्ध धर्मस्य प्रचारमकरोत् ? (सिद्धार्थ ने बौद्ध धर्म का प्रचार किसलिए किया?)
(ii) नगरात् बहिः मार्गे सिद्धार्थः किमपश्यत्? (नगर से बाहर मार्ग में सिद्धार्थ ने क्या देखा?)
(iii) बुद्धस्य प्रमुखा शिक्षा का आसीत्? (बुद्ध की प्रमुख शिक्षा क्या थी?)
उत्तरम् :
(i) सः जनानां कल्याणाय बौद्धधर्मस्यप्रचारमकरोत् ? (उन्होंने लोक-कल्याण हेतु बौद्ध धर्म का प्रचार किया।)
(ii) नगरात् बहिः सिद्धार्थः एकं वृद्धं, एकं मृतं, एकं रोगार्तम् एकं संन्यासिन चापश्यत् ।
(नगर के बाहर सिद्धार्थ ने एक बुड्ढे, एक मृत, एक बीमार और एक संन्यासी को देखा।)
(ii) अहिंसापालने तस्य प्रमुखा शिक्षा आसीत्। (अहिंसा का पालन करना उसकी प्रमुख शिक्षा थी।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
बुद्धस्य वैराग्यम् (बुद्ध का वैराग्य)।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
कपिलवस्तु राज्यस्य शासकस्य शुद्धोदनस्य पुत्रस्य नाम सिद्धार्थः आसीत्। सः बाल्यादेव करुणापरः क्रीडाखेटादिभ्यो विरक्तः आसीत्। वैराग्यं दृष्ट्वा नृपः तस्य विवाहमकरोत्। पुत्रः राहुलोऽपि अजायत। सिद्धार्थः भ्रमणाय वनमगच्छत् तत्रैकदा एकं वृद्ध, रोगार्तम् मृतम् संन्यासिनं च अपश्यत्। एतान् दृष्ट्वा वैराग्योऽजायत, गृहस्थं त्यक्त्वा गृहात् निरगच्छत् तपसासौ बोध प्राप्तवान् बौद्धधर्मं च संस्थाप्य प्रचारमकरोत।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘अरमत्’ क्रियायाः कर्तृपदमनुच्छेदे प्रयुक्तमस्ति
(अ) शुद्धोदनः
(ब) सिद्धार्थः
(स) कपिलवस्तु
(द) यशोधरायाः
उत्तरम् :
(ब) सिद्धार्थः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘तस्य प्रमुख शिक्षा आसीत्’ अत्र विशेषण पदमस्ति
(अ) तस्य
(ब) प्रमुख
(स) शिक्षा
(द) आसीत्
उत्तरम् :
(ब) प्रमुख

(iii) ‘तस्य मनः’ अत्र ‘तस्य’ इति सर्वनाम पदं प्रयुक्तम् –
(अ) सिद्धार्थाय
(ब) शुद्धोदनाय
(स) यशोधरायै
(द) वैराग्याय
उत्तरम् :
(स) यशोधरायै

(iv) ‘वैराग्यम् उत्पन्नम् अभवत्’ अत्र ‘उत्पन्नम्’ पदस्य विलोमपदम् अस्ति
(अ) वैराग्यम्
(ब) उत्पन्नम्
(स) नष्टम्
(द) न किञ्चित्
उत्तरम् :
(अ) वैराग्यम्

10. नगरस्य समीपे एकस्मिन् वने एकः सिंहः निवसति स्म। एकदा तस्य गुहायाम् एकः मूषकः प्राविशत्। सः सिंहस्य शरीरस्योपरि इतस्तततोऽधावत्। कुपितः सिंहः तं मूषकं करे गृह्णाति स्म। भीतः मूषकः सिंहाय मोक्तु न्यवेदयत् अवदत च भो मृगराज! मां मा मारय, कदाचिदहं भवतः सहायतां करिष्यामि। सिंहः अहसत् अवदत् च-“लघुमूषक त्वं मम कथं सहायतां करिष्यसि? अस्तु, इदानीन्तु त्वां मोचयामि।” इत्युक्त्वा सिंहः मूषकम् अमुञ्चत्। एकदा कोऽपि व्याधः जालं प्रसारयति, सिंहः जाले पतित: बहिरागमनाय प्रयत्नं अकरोत्। तस्य गर्जनं श्रुत्वा मूषकः विलात् बहिरागत्य दन्तैः च जालं अकर्तयत् बन्धनमुक्तः सिंह: ‘मित्रं तु लघु अपि वरम्’ इति ब्रुवन् वने निर्गतः।

(नगर के समीप एक वन में एक शेर रहता था। एक दिन उसकी गुफा में एक चहा घुस गया। वह सिंह के शरीर पर इधर-उधर दौड़ने लगा। नाराज हुए उस शेर ने चूहे को पकड़ लिया। डरे हुए चूहे ने सिंह छोड़ने के लिए निवेदन किया और बोला- हे मृगराज! मुझे मत मारो, कभी मैं आपकी सहायता करूँगा। सिंह हँसा और बोला- छोटा-सा चूहा तू मेरी क्या सहायता करेगा? खैर, अब तो तुम्हें छोड़ देता हूँ, ऐसा कहकर सिंह ने चूहे को छोड़ दिया। एक दिन किसी बधिक ने जाल ।। सिंह जाल में पड़ा हुआ बाहर आने का प्रयत्न करने लगा। उसकी गर्जना को सुनकर चूहे ने बिल से बाहर आकर दाँतों से जाल काट दिया। बन्धन से मुक्त शेर ‘मित्र तो छोटा-सा भी श्रेष्ठ होता है’ कहता हुआ वन में निकल गया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए) –
(i) नगरस्य समीपे कः निवसति स्म? (नगर के समीप कौन रहता था?)
(ii) सिंहस्य गुहायां कः प्राविशत्? (सिंह की गुफा में कौन घुस गया?)
(ii) मूषकः सिंहाय कस्मै निवेदयति? (चूहा सिंह को किसलिए निवेदन करता है?)
(iv) सिंहः कुत्र बद्धः? (सिंह कहाँ बँध गया?) ।
उत्तरम् :
(i) सिंहः
(ii) मूषकः
(iii) मोक्तुम्
(iv) जाले/पाशे।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) मूषकः सिंहस्योपरि किं कृतवान् ? (चूहे ने शेर के ऊपर क्या किया?)
(ii) भीत: मूषकः कथं निवेदयति? (डरा हुआ चूहा कैसे निवेदन करता है?)
(iii) सिंह: मषकं कथम उपहसति? (सिंह चहा पर कैसे उपहास करता है?)
उत्तरम् :
(i) मूषकः सिंहस्योपरि इतस्ततः धावति। (सिंह के ऊपर चूहा इधर-उधर दौड़ता है।)
(ii) हे मृगराज! मां मा मारय। कदाचिद् अहं भवतः सहायतां करिष्यामि।
(हे मृगराज! मुझे मत मारो। कदाचित् मैं आपकी सहायता करूँगा।)
(ii) लघुमूषकः त्वम्, मम कथं सहायतां करिष्यति? अस्तु इदानीं तु त्वां मोचयामि। ।
(तुम छोटे से चूहे, मेरी कैसे सहायता करोगे? खैर अब तो तुम्हें मैं छोड़ देता हूँ।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
मित्रं तु लघु अपि वरम्। (मित्र तो छोटा-सा ही अच्छा।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
सिंहस्य गुहायाम् एकदा एक मूषकः प्राविशत्। मूषकः तस्योपरि अधावत्, स तम् गृह्णाति स्म हन्तुं चेच्छति।
मूषको न्यवेदयतः मां मा मारय, अहं कदाचित् ते सहायतां करिष्यामि। सिंहः उपहस्य तं त्यजति। एकदा मूषकः सिंहस्य गर्जनाम् अश्रृणोत्। सः तत्र अगच्छत् व्याधस्य पाशे पतितं तं सिंह मोचयति। सिंहोऽवदत्-“मित्र तु लघु अपि वरम्।”

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘सः सिंहस्योपरि धावति’ अत्र अनयोः क्रियापदम् अस्ति
(अ) व्याधः
(ब) धावतिः
(स) सिंहः
(द) जालः
उत्तरम् :
(ब) धावतिः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘भीतः मूषकः’ अत्र भीत: कस्य पदस्य विशेषम्
(अ) मूषकस्य
(ब) सिंहस्य
(स) व्याधस्य
(द) जालस्य
उत्तरम् :
(अ) मूषकस्य

(iii) ‘बद्ध सिंहः’ अत्र संज्ञापदमस्ति
(अ) व्याधः
(ब) मृगराज
(स) सिंहः
(द) न कश्चिद्
उत्तरम् :
(स) सिंहः

(iv) ‘दूरे’ इति पदस्य अनुच्छेदे विलोम पदमस्ति
(अ) समीपे
(ब) करे
(स) जाले
(द) वने
उत्तरम् :
(अ) समीपे

11. कालिदासः मेघदूतं रचितवान। मेघदूते मानसून विज्ञानस्य अद्भुतं वर्णनम् अस्ति। मानसून-समय: आषाढ़मासात् आरभते। श्याममेघान् दृष्ट्वा सर्वे जनाः प्रसन्ना भवन्ति। मयूराः नृत्यन्ति। मानसून मेघाः सर्वेषा जीवानां कष्टम् अपहरन्ति। मेघानां जलं वनस्पतिभ्यः, पशु-पक्षिभ्यः किं वा सर्वेभ्यः प्राणिभ्यः जीवनं प्रयच्छति। मेघजलैः भूमेः उर्वराशक्तिः वा ति। क्षेत्राणां सिञ्चनं भवति। गगने यदा कदा इन्द्रधनुः अपि दृश्यते। वायुः शीतलः भवति। शुष्क भूमौ वर्षायाः बिन्दवः पतन्ति। भूमेः सुगन्धितं वाष्पं निर्गच्छति। कदम्ब पुष्पाणि विकसन्ति। तेषु भ्रमरा गुञ्जन्ति। हरिणाः प्रसन्ना सन्तः इतस्ततः धावन्ति।

चातका जलबिन्दून गगने एव पिवन्ति। बलाकाः पंक्तिं बद्ध्वा आकाशे उड्डीयन्ते। मेघदूते मेघः विरहि यक्ष सन्देशं नेतुं प्रार्थते। अत्र कालिदासः वायुमार्गस्य ज्ञानवर्धकं वर्णनं करोति। (कालिदास ने मेघदूत की रचना की। मेघदूत में मानसून विज्ञान का अद्भुत वर्णन है। मानसून का समय आषाढ़ माह से आरम्भ होता है। काले मेघों को देखकर सभी लोग प्रसन्न होते हैं। मोर नाचते हैं। मानसून के मेघ सभी जीवों के कष्ट का हरण करते हैं। मेघों का जल वनस्पतियों, पशु-पक्षियों अधिक तो क्या सभी प्राणियों को जीवन प्रदान करते हैं। मेघ के जल से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

खेतों की सिंचाई होती है। आकाश में जब कभी इन्द्रधनुष भी दिखाई देता है। वायु शीतल होती है। सूखी धरती पर वर्षा की बूंदें पड़ती हैं । भूमि से सुगन्धित भाप निकलती है। कदम्ब के फूल खिलते हैं। उन पर भौरे गूंजते हैं। हिरन प्रसन्न हुए इधर-उधर दौड़ते हैं। पपीहे जल बिन्दुओं को आकाश में ही पीते हैं। बगुले कतार बनाकर आकाश में उड़ते हैं। मेघदूत में मेघ से विरही यक्ष सन्देश ले. जाने के लिए प्रार्थना करता है। यहाँ कालिदास वायुमार्ग का ज्ञान-वर्धक वर्णन करता है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) मेघानां जलं प्राणिभ्यः किं प्रयच्छति? (बादलों का जल प्राणियों को क्या देता है?)
(ii) भ्रमराः कुत्र गुञ्जन्ति? (भौरे कहाँ गूंजते हैं?)
(iii) मेघ जलैः किं वर्धते? (बादल-जल से क्या बढ़ता है?)
(iv) वर्षाकाले वायु कीदृशी भवति ? (वर्षाकाल में हवा कैसी होती है?)
उत्तरम् :
(i) जीवनम्
(ii) कदम्ब पुष्पेषु
(ii) भूमेः उर्वरा शक्तिः
(iv) शीतलः।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) मेघदूतं कः रचितवान्? (मेघदूत को किसने रचा?)
(ii) मानसनमेघाः केषां कष्टम् अपहरन्ति? (मानसून के बादल किनके कष्ट को हरण करते हैं?)
(iii) मेघदूते कस्य वर्णनम् अस्ति? (मेघदूत में किसका वर्णन है?)
उत्तरम् :
(i) मेघदूतं कालिदासः रचितवान्। (मेघदूत की रचना कालिदास ने की।)
(iii) मानसून मेघाः सर्वेषां जीवानां कष्टम् अपहरन्ति। (मानसून के बादल सब जीवों के कष्ट का हरण करते हैं।)
(iii) मेघदूते मानसून विज्ञानस्य अद्भुतं वर्णनम् अस्ति। (मेघदूत में मानसून विज्ञान का अनोखा वर्णन है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
कालिदासस्य मेघदूतकाव्यम्। (कालिदास का मेघदूत काव्य।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
कालिदासस्य मेघदूत काव्ये मानसून विज्ञानस्य अद्भुतम् वर्णनम् अस्ति। पृथिव्या शोभा वर्धते। मेघैः प्रदत्तेन जलेन . मनुष्या, पशवः, खगाः, वृक्षाः, पादपा च प्रसन्नाः भवन्ति। इन्द्रधनुः शोभते गगने वायुः शीतलः भवति। भूमेः
सुगन्धिः प्रसराति हरिणाः बालकाः च प्रसन्ना सन्तः इतस्ततः भ्रम्यन्ति धावन्ति च आनन्देन। मेघदूतम् वायुमार्गस्य
ज्ञानं वर्धयति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘धावन्ति’ इति क्रियापदस्य कर्ता अस्ति –
(अ) भ्रमराः
(ब) मेघाः
(स) हरिणाः
(द) चातकाः
उत्तरम् :
(स) हरिणाः

(ii) ‘ज्ञानवर्धकम्’ इति कस्य विशेषणम्?
(अ) मानसून विज्ञानस्य
(ब) वायु मार्गस्य
(स) प्रकृति चित्रणस्य
(द) विरहि यक्षस्य।
उत्तरम् :
(ब) वायु मार्गस्य

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) ‘तेषु भ्रमरा गुञ्जन्ति’ यहाँ तेषु सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(अ) कदम्ब पुष्पेषु
(ब) श्याम मेघेषु
(स) क्षेत्रेषु
(द) गगने
उत्तरम् :
(अ) कदम्ब पुष्पेषु

(iv) ‘उर्वरा शक्तिः वर्धते’ अत्र ‘उर्वरा’ पदस्य विलोमपदमस्ति
(अ) उर्वरा
(ब) शक्तिः
(स) अनुर्वरा
(द) भूमेः
उत्तरम् :
(स) अनुर्वरा

12. सुबुद्धिः दुर्बुद्धिश्च द्वौ धनिको आस्ताम्। सुबुद्धेः विशालं भवनम् आसीत्। तस्य अनेके उद्योगाः चलन्ति स्म। अत एव सः सर्वदा प्रसन्नचित्तः ईश्वरं स्मरन् आनन्दे निमग्नः भवति स्थ। दुर्बुद्धि तावत् लोभी आसीत्। अधिकाधिकं धन-संग्रहं कर्तुम् इच्छति स्म। सर्वदा असन्तुष्टः, क्रुद्धः दुःखी च भवति स्म। एकदा दुर्बुद्धिः कार्यवशात् सुबुद्धेः गृहम् अगच्छत्। आनन्द-मग्नं तं दृष्ट्वा अपृच्छत्- “भवतः आनन्दरूप शान्तिः च किं रहस्य?” सुबुद्धिः उवाच-“मित्र! मम चत्वारः अंगरक्षकाः सन्ति। प्रथमः सत्यं यत् माम् अपराधात् सदा रक्षति। द्वितीयः स्नेहः, अहं सर्वान् कर्मचारिणः पुत्रवत् मन्ये। तृतीयः न्यायः, यः माम् अन्यायात् रक्षति। चतुर्थः त्यागः मां दानाय प्रेरयति। अतः एतेषां सहायतया अहं सर्वदा, आनन्देन जीवामि लोकहितं च करोमि इति।” दुर्बुद्धि श्रद्धया तस्य चरणयोऽपतत्।

(सुबुद्धि और दुर्बुद्धि नाम के दो धनवान थे। सुबुद्धि का विशाल भवन था। उसके अनेक उद्योग चलते थे। अतः एक वह हमेशा प्रसन्न रहता था और ईश्वर का स्मरण करता हुआ आनन्द में डूबा रहता था। दुर्बुद्धि तो लोभी था। अधिक से अधिक धन संग्रह करना चाहता था। हमेशा असन्तुष्ट, क्रुद्ध और दुखी रहता था। एक दिन दुर्बुद्धि काम से सुबुद्धि के घर गया। उसको आनन्दमग्न देखकर पूछा- आपके आनन्द और शान्ति का क्या रहस्य है? सुबुद्धि ने कहा- “मित्र! मेरे चार अंगरक्षक हैं- पहला सत्य जो मेरी अपराध से सदैव रक्षा करता है। दूसरा स्नेह, मैं सभी कर्मचारियों से पुत्र की तरह व्यवहार करता हूँ। तीसरा न्याय जो मेरी अन्याय से रक्षा करता है। चौथा त्याग मुझे दान के लिए प्रेरित करता है। अतः इनकी सहायता से मैं सदैव आनन्द में जीता हूँ और लोक-कल्याण करता हूँ।” दुर्बुद्धि श्रद्धा से उसके चरणों में गिर गया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) सुबुद्धेः कति अङ्गरक्षकाः आसन्? (सुबुद्धि के कितने अंगरक्षक थे?)
(ii) सबद्धिः सर्वदा कस्मिन निमग्नः भवति स्म? (सबद्धि सदा किसमें डूबा रहता था?)
(iii) दुर्बुद्धिः किमर्थं सुबुद्धेः गृहम् आगच्छत? (दुर्बुद्धि किसलिए सुबुद्धि के घर आया?)
(iv) द्वितीयस्य अंगरक्षकस्य किम् नाम आसीत्? (दूसरे अंगरक्षक का क्या नाम था?)
उत्तरम् :
(i) चत्वारः
(ii) आनन्दे
(iii) कार्यवशात्
(iv) स्नेह।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) दुर्बुद्धिः सर्वदा कस्य संग्रहं कर्तुम् इच्छति स्म?
(दुर्बुद्धि सदा क्या संग्रह करना चाहता था?)
(ii) सुबुद्धिः सर्वान् कर्मचारिणः कथं मन्यते स्म?
(सुबुद्धि सभी कर्मचारियों को कैसे मानता था?)
(iii) सुबुद्धेः चत्वारः रक्षकाः के सन्ति ?
(सुबुद्धि के चार रक्षक कौन हैं?)
उत्तरम् :
(i) दुर्बुद्धि सर्वदा अधिकाधिकं धन-संग्रहं कर्तुम् इच्छति स्म।
(दुर्बुद्धि सदा अधिक धन-संग्रह करना चा
(ii) सुबुद्धिः सर्वान् कर्मचारिणः पुत्रवत् मन्यते स्म।
(सुबुद्धि सब कर्मचारियों को पुत्रवत् मानता था।)
(iii) सत्यं, स्नेहः, न्यायः त्यागः च एते चत्वारः अंगरक्षकाः।
(सत्य, स्नेह, न्याय और त्याग ये चार अंगरक्षक हैं।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
सुबुद्धिदेव जयते।
(सुबुद्धि की ही विजय होती है।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
सुबुद्धि दुर्बुद्धिश्च द्वौ धनिकौ आस्ताम् सुबुद्धि सुखी आसीत्, दुर्बुद्धिश्च लोभी दुःखी आसीत्। अति धन संचिते अपि सः असन्तुष्टः क्रुद्ध, दुखी आसीत, एकदा दुर्बुद्धिः सुबुद्धि तस्य आनन्दस्य कारणमपृच्छत्। सुबुद्धिः उवाच मित्र! मम सत्य-स्नेह-न्याय-त्यागाः इति चत्वारः सेवकाः सन्ति ये माम् अन्यायात् पक्षपातात्, उपराधात् रक्षन्ति त्यागः दानाय प्रेरयति। अतोऽहम् आनन्दितः अस्मि। दुर्बुद्धिः श्रद्धया तस्य चरणयोपपत्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘चलन्ति स्म’ क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति –
(अ) उद्योगाः
(ब) अङ्गरक्षकाः
(स) कर्मचारिणः
(द) सहायतया
उत्तरम् :
(अ) उद्योगाः

(ii) ‘सर्वान्’ इति विशेषणपदस्य विशेष्यमस्ति –
(अ) अङ्गरक्षकाः
(ब) कर्मचारिणः
(स) अन्यायाः
(द) सहायकाः
उत्तरम् :
(ब) कर्मचारिणः

(iii) ‘एतेषां सहायतया’ इत्यत्र एतेषां सर्वनाम पदं केभ्यः प्रयुक्तम् –
(अ) कर्मचारिणाम्
(ब) अङ्गरक्षकाणाम्
(स) उद्योगानाम्
(द) अन्यायानाम्
उत्तरम् :
(ब) अङ्गरक्षकाणाम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘मां दानाय प्रेरयति’ अत्र ‘दानाय’ पदस्य विलोमपदमस्ति –
(अ) माम्
(ब) दानाय
(स) सञ्चायः
(द) त्यागः
उत्तरम् :
(स) सञ्चायः

13. एकदा एकः वैदेशिकः प्रथम राष्ट्रपतेः श्री राजेन्द्र प्रसादस्य गृहं प्राप्तवान्। राष्ट्रपतेः परिचारकः तम् आतिथ्यगृहे प्रतीक्षितुम् अकथयत् तम् असूचयत् च यद् राष्ट्रपति महोदयः सम्प्रति पूजां कुर्वन्ति। सः अतिथिः ज्ञातुम् ऐच्छत् यद् राष्ट्रपतिः कथं करोति पूजाम्? सङ्कोचं कुर्वन् अपि सः अन्तः पूजागृह प्रविष्टः राष्ट्रपतेः समक्षं विद्यमानं मृत् पिण्डम् अवलोक्य सः अवन्दत श्रद्धया च तत्र उपविशत्। ‘पूजां परिसमाप्य राष्ट्रपति महोदयः पूजागृहे स्थिते तम् दृष्ट्वा प्रसन्नः अभवत्। ससम्मानं तय् अन्तः अनयत्। आगन्तुकस्य ललाटे विद्यमानं भावं दृष्ट्वा श्री राजेन्द्र महोदयः तस्य कौतूहल विज्ञाय तस्मै सम्बोधयत् एतद् मृत्पिण्ड भारतस्य भूम्याः प्रतीकम् अस्ति। एतेन मृत्पिण्डेन. एव भारतीया महती अन्नात्मिकां सम्पदां प्राप्नुवन्नि। अत एव वयं मृत्तिकायाः कणेषु ईश्वरस्य दर्शनपि कुर्मः। अस्माकं विचारे तु मानवेषु पशु-पक्षिषु, पाषाणेषु, वृक्षादिषु किंवा अचेतनेषु अपि ईश्वरस्य सत्ता अस्ति।

(एक दिन एक विदेशी प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद के घर पर पहुँच गया। राष्ट्रपति के सेवक ने उसको अतिथि गृह में प्रतीक्षा करने के लिए कह दिया और उसे सूचित कर दिया कि राष्ट्रपति महोदय अभी पूजा कर रहे हैं। वह अतिथि यह जानना चाहता था कि राष्ट्रपति पूजा कैसे करते हैं? संकोच करते हुए भी वह पूजागृह में प्रवेश हो गया। राष्ट्रपति के समक्ष विद्यमान मिट्टी के ढेले को देखकर उसने वन्दना की और श्रद्धापूर्वक बैठ गया। पूजा को समाप्त करके राष्ट्रपति माहेदय ने पूजागृह में बैठे उसको देखकर प्रसन्न हुए। सम्मानपूर्वक उसे अन्दर ले गये। आगन्तुक के ललाट पर विद्यमान भाव को देखकर श्री राजेन्द्र महोदय ने उसके कुतूहल को जानकर उसे संबोधित किया कि यह मिट्टी का ढेल भारत की भूमि का प्रतीक है। इस मिट्टी के ढेले से ही भारतीय बहत-सी अन्नात्म सम्पदा प्राप्त करते हैं। अतएव हम मिट्टी के कणों में भी ईश्वर के विचार से तो मानव, पशु, पक्षी, पत्थर, वृक्षादि और तो क्या अचेतनों में भी ईश्वर की सत्ता है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कः श्री राजेन्द्र प्रसादस्य गृहं प्राप्तवान् ?
(श्री राजेन्द्र प्रसाद के घर कौन पहुँच गया?)
(ii) भारत भूम्याः प्रतीक किम् अस्ति?
(भारतभूमि का प्रतीक क्या है?)
(ii) कस्याः कणेषु वयम् ईश्वर दर्शनं कुर्मः?
(किसके कणों में हम ईश्वर के दर्शन करते हैं?)
(iv) किं कुर्वन् आगन्तुकः पूजागृहं प्रविष्ट:?
(क्या करता हुआ आगन्तुक पूजागृह में घुस गया?)
उत्तरम् :
(i) वैदेशिक :
(i) मृत्पिण्डम्
(iii) मृत्तिकायाः
(iv) सङ्कोचम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) राष्ट्रपति महोदयः आगन्तुकं कुत्र दृष्ट्वा प्रसन्नः?
(राष्ट्रपति महोदय आगन्तुक को कहाँ देखकर प्रसन्न हुए?)
(ii) राजेन्द्र प्रसाद महोदयः आगन्तुकस्य कौतूहलं विज्ञाय तस्मै किं सम्बोधयत?
(राजेन्द्र प्रसाद जी ने आगन्तुक के कुतूहल को जानकर उसको क्या संबोधित किया?)
(iii) अतिथि महोदयः किं ज्ञातुम् ऐच्छत्? (अतिथि महोदय क्या जानना चाहते थे?)
उत्तरम् :
(i) तं पूजागृहे स्थितं दृष्ट्वा राष्ट्रपति महोदयः प्रसन्नः अभवत् ?
(उसे पूजागृह में बैठा देखकर राष्ट्रपति महोदय प्रसन्न हो गये।)
(ii) एतत्मृतपिण्डं भारतस्य भूम्याः प्रतीकम् अस्ति, एतेन भारतीया अन्न सम्पदां प्राप्नुवन्ति अतः वयं मृत्कणेषु ईश्वरस्य दर्शनं कुर्मः। (यह मिट्टी का पिण्ड भारतभूमि का प्रतीक है। इससे भारतीय अन्न सम्पदा को प्राप्त करते हैं। अतः हम मिट्टी के कणों में ईश्वर के दर्शन करते हैं।
(iii) अतिथि महोदयः ज्ञातुमैच्छत् यत् राष्ट्रपति महोदयः कथं करोति पूजाम्?
(अतिथि महोदय जानना चाहते थे कि राष्ट्रपति महोदय कैसे पूजा करते हैं?)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
ईश्वरः सर्वव्यापकः। (ईश्वर सर्वव्यापक है।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
एक: वैदेशिकः राष्ट्रपतेः डॉ. राजेन्द्र प्रसादस्य गृहम् आगच्छत्। तदा सः पूजां करोति स्म। परिचायक प्रतीक्षितुं न्यवेदयतः परञ्च सः तस्य पूजा विधि दृष्टुम् इच्छति स्म अतः पूजा गृहं प्रविष्ट, पूजाविधौ सम्पन्ने आगतः राष्ट्रपतिम् अपृच्छत् महोदय! किमिदं मृत्पिण्डम् त्वं पूजयसि? मित्र! एष भारत भूम्याः प्रतीकमस्ति। एषा भारतीया मृदा एव भारतीयेभ्यः अन्नादिकं प्रदाय उदरं पूरयति पालयति च। वयं भारतस्य सर्वेषु वस्तुषु ईश्वरस्य सत्तां पश्यामः। अतः ईश्वरः सर्वव्यापकः।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘प्राप्नुवन्ति’ अस्याः क्रियापदस्य कर्तृपदम् अस्ति –
(अ) अन्नात्मिकां
(ब) सम्पदाम्
(स) भारतीयाः
(द) महती
उत्तरम् :
(स) भारतीयाः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘भावम्’ इति विशेष्यस्य अत्र विशेषण पदम् अस्ति –
(अ) आगन्तुकस्य
(ब) ललाटे
(स) विद्यमानम्
(द) भावम्
उत्तरम् :
(स) विद्यमानम्

(iii) ‘मृत्पिण्डं दृष्ट्वा सोऽवन्दत’ अत्र सः इति सर्वनाम पदं प्रयुक्तम्
(अ) राजेन्द्र प्रसादः
(ब) परिचायकः
(स) आगन्तुकः
(द) वैदेशिक:
उत्तरम् :
(द) वैदेशिक:

(iv) ‘तं दृष्ट्वा प्रसन्नः अभवत् अत्र ‘प्रसन्न’ शब्दस्य विलोमपदम् अस्ति
(अ) अप्रसन्नः
(ब) दृष्ट्वा
(स) प्रसन्नः
(द) अभवत्।
उत्तरम् :
(अ) अप्रसन्नः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

14. षट् कारणानि श्रियं विनाशयन्ति। प्रथमं कारणम् अस्ति असत्यम्। यः नरः असत्यं वदति तस्य कोऽपि जन: विश्वासं न करोति। निष्ठुरता अस्ति द्वितीयं कारणम्। उक्तं च – सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।’ तृतीयं कारणं अस्ति कृतघ्नता। जीवने अनेके जनाः अस्मान् उपकुर्वन्ति। प्रायः जनाः उपकारिण विस्मरन्ति, प्रत्युपकारं न कुर्वन्ति। एतादृशः स्वभावः कृतघ्नता इति उच्यते। आलस्यम् अपरः महान् दोषः, ‘आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।’ अहंकारः मनुष्या मतिं नाशयति। अहङ्कारी मनुष्यः सर्वदा आत्मप्रसंशाम् एव करोति। न कदापि कस्यचित् उपकारं करोति व्यसनानि अपि श्रियं हरन्ति। ये मद्यपानं कुर्वन्ति तेषाम् आत्मबलं, बुद्धिबलं, शारीरिक बलं च नश्यति। अतः बुद्धिमान् एतान् दोषान् सर्वथा त्यजेत्।

(छ: कारण लक्ष्मी के विनाशक होते हैं। पहला कारण है असत्य। जो मनुष्य झूठ बोलता है उसका कोई विश्वास नहीं करता। निष्ठुरता दूसरा कारण है। कहा भी गया है- सत्य बोलना चाहिए (परन्तु) प्रिय या मधुर सत्य ही बोलना चाहिए। अप्रिय (कटु) सत्य भी नहीं बोलना चाहिए। तीसरा कारण है- कृतघ्नता। जीवन में अनेक लोग हमारा उपकार करते हैं। प्रायः लोग उपकारी को भूल जाते हैं, उसके बदले में उसका उपकार नहीं करते हैं। इस प्रकार का स्वभाव कृतघ्नता कहलाता है। आलस्य एक अन्य महान् दोष है। आलस्य मनुष्यों का शरीर में ही स्थित महान् शत्रु हैं। अहंकार (घमंड) मनुष्य की मति को नष्ट करता है। अहंकारी मनुष्य हमेशा आत्मप्रशंसा ही करता है। कभी किसी का उपकार नहीं करता है। दुर्व्यसन भी लक्ष्मी का हरण करते हैं, जो लोग मद्यपान करते हैं उनका आत्म-बल, बुद्धिबल और शारीरिक बल नष्ट हो जाता है। अतः बुद्धिमान को ये दोष हमेशा त्याग देने चाहिए।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कति कारणानि श्रियं विनाशयन्ति ?
(कितने कारण लक्ष्मी का विनाश करते हैं?)
(ii) लक्ष्मी विनाशस्य किं प्रथम कारणम्?
(लक्ष्मी विनाश का पहला कारण क्या है?)
(iii) कीदृशं सत्यं ब्रूयात् ?
(कैसा सत्य बोलना चाहिए?)
(iv) मनुष्याणां कः शरीरस्थो रिपुः?
(मनुष्यों के शरीर में स्थित शत्रु कौन है?)
उत्तरम् :
(i) षड्
(ii) असत्यम्
(iii) प्रियम्
(iv) आलस्यम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) असत्य वादनेन का हानिः?
(असत्य बोलने से क्या हानि है?)
(ii) कीदृशाः जनाः कृतघ्नाः भवन्ति?
(कैसे मनुष्य कृतघ्न होते हैं?)
(iii) मद्यपानं किं किं हरति?
(मद्यपान क्या-क्या हरण करता है?)
उत्तरम् :
(i) यः असत्यं वदति तस्य कोऽपि विश्वासं न करोति।।
(जो झूठ बोलता है उस पर कोई विश्वास नहीं करता है।)
(ii) यो जनाः उपकारिणं विस्मरन्ति प्रत्युपकारं न कुर्वन्ति ते कृतघ्नाः भवन्ति।
(जो लोग उपकारी को भूल जाते हैं तथा बदले में उपकार नहीं करते, वे कृतघ्न होते हैं।)
(ii) मद्यपानं मानवस्य आत्मबलं, बुद्धिबलं शारीरिकं बलं च हरति।
(मद्यपान मानव के आत्मबल, बुद्धिबल और शारीरिक बल को हर लेता है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
षड्दोषान् वर्जयेत्। (छः दोषों को त्यागना चाहिए।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
षट् कारणानि श्रियं विनाशयन्ति असत्यात् न तस्मिन् कोऽपि विश्वसिति निष्ठुरता प्रियताम्, कृतघ्नता प्रत्युपकारं
विस्मारयति, आलस्यं मानवस्य महान् शत्रुः अहंकारश्च मानवस्य मतिं नाशयति आत्मश्लाघां करोति परहितम् अकृत्वा व्यसनेषु पतित्वा आत्मबलं, बुद्धिबलं शारीरिक शक्ति च नश्यति। त्याज्याः एते दोषाः।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘…..प्रत्युपकारं न कुर्वन्ति’ अत्र ‘कुर्वन्ति’ क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति –
(अ) अहंकारिणः जनाः
(ब) व्यसनिनः
(स) कृतघ्नजनाः
(द) अलसाः जना।
उत्तरम् :
(स) कृतघ्नजनाः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘प्रथमं कारणम्’ इत्यनयोः विशेषणपदमस्ति –
(अ) प्रथमम्
(ब) कारणम्
(स) अस्ति
(द) असत्यम्
उत्तरम् :
(अ) प्रथमम्

(iii) ‘तस्य कोऽपिजनः विश्वासं न करोति’ अत्र ‘तस्य’ सर्वनाम पदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) असत्य वादिनः नरस्य
(ब) कृतघ्नस्य
(स) निष्ठुरस्य
(द) अलसस्य।
उत्तरम् :
(अ) असत्य वादिनः नरस्य

(iv) ‘अहङ्कारः मनुष्यस्य मतिं नाशयति’ ‘मतिं’ शब्दस्य पर्यायपदमस्ति
(अ) अहङ्कारः
(ब) मनुष्यस्य
(स) मतिम्
(द) बुद्धिं
उत्तरम् :
(द) बुद्धिं

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

15. अस्माकं देशस्य उत्तरस्यां दिशि पर्वतराजः हिमालयः अस्ति। अस्य पर्वतस्य श्रृंखला विस्तृता वर्तते। सः ‘पर्वतराज’ इति कथ्यते। संसारस्य उच्चतमः पर्वतः अस्ति। अयं सर्वदा हिमाच्छादितः भवति। सः भारतदेशस्य मुकुटमिव रक्षकः च अस्ति। अनेकाः नद्यः इतः एव निःसरन्ति। नदीषु पवित्रतमा गङ्गा अपि हिमालयात् एव प्रभवति। अनेकानि तीर्थस्थलानि हिमालय क्षेत्रे वर्तन्ते। वस्तुतः हिमालयः तपोभूमिः अस्ति। पुरा अनेके जनाः तत्र तपः कृतवन्तः।

अत्रत्यं वातावरणं मनोहरं शान्तं चित्ताकर्षकं च भवति। हिमालयस्य विविधाः वनस्पतयः ओषधिनिर्माणे उपर सन्ति। तत्र दुर्लभ रत्नानि मिलन्ति बहुमूल्यं काष्ठं च तत्र प्राप्यते। हिमालय क्षेत्रे बहूनि मन्दिराणि सन्ति। प्रतिवर्ष भक्ताः श्रद्धालयः, पर्यटनशीलाः जनाश्च मन्दिरेषु अर्चनां कुर्वन्ति, स्वास्थ्यलाभमपि प्राप्नुवन्ति। अस्य हिमालयस्य महत्वम् आध्यात्मिक-दृष्ट्या, पर्यावरण-दृष्ट्या भारतस्य रक्षा-दृष्ट्या च अपि वर्तते। अतः अयं पर्वतराजः हिमालयः अस्माकं गौरवम् अस्ति।

(हमारे देश की उत्तर दिशा में पर्वतराज हिमालय है। इस पर्वत की श्रृंखला विस्तृत है। वह ‘पर्वतराज’ कहलाता है। संसार का सबसे ऊँचा पर्वत है। यह हमेशा बर्फ से ढका रहता है। वह भारतदेश के मुकुट की तरह और रक्षक है। अनेक नंदियाँ इसी से निकलती हैं। नदियों में पावनतम गंगा भी हिमालय से ही निकलती है। हिमालय के क्षेत्र में अनेक तीर्थस्थल हैं। वास्तव में हिमालय तपोभूमि है। पहले अनेक लोग यहाँ तप किया करते थे।

यहाँ का वातावरण मनोहर, शान्त और चित्ताकर्षक है। हिमालय की विविध वनस्पतियाँ ओषधि बनाने में उपयोगी हैं। वहाँ दुर्लभ रत्न भी मिलते हैं। बहुमूल्य लकड़ी भी वहाँ प्राप्त होती है। हिमालय के क्षेत्र में बहुत से मन्दिर हैं। प्रतिवर्ष भक्त, श्रद्धालु और पर्यटनशील लोग मन्दिरों में अर्चना करते हैं, स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त करते हैं। इस हिमालय का महत्व आध्यात्मिक, पर्यावरण और भारत की रक्षा की दृष्टि से भी है। अतः यह पर्वतराज हिमालय हमारा गौरव है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) अस्माकं देशस्य उत्तरस्यां दिशि किं नाम पर्वतः अस्ति ?
(हमारे देश की उत्तर दिशा में किस नाम का पर्वत है?)
(ii) हिमालय पर्वत श्रृंखला कीदृशी अस्ति?
(हिमालय पर्वत श्रृंखला कैसी है?)
(iii) भारतदेशस्य मुकुटमिव रक्षकः च कः ?
(भारत देश का मुकुट की तरह और रक्षक कौन है?
(iv) हिमालय कस्य भूमिः ?
(हिमालय किसकी भूमि है ?)
उत्तरम् :
(i) हिमालयः नाम
(ii) विस्तृता
(iii) हिमालयः
(iv) तपोभूमिः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) काभि दृष्टिभिः हिमालयस्य महत्वम् अस्ति ?
(किन दृष्टियों से हिमालय का महत्व है?)
(ii) जनाः मन्दिरेषु किं कुर्वन्ति ?
(लोग मन्दिरों में क्या करते हैं?)
(ii) हिमालयस्य वातावरणं कीदृश अस्ति?
(हिमालय का वातावरण कैसा है?)
उत्तरम् :
(i) आध्यात्मिक-पर्यावरण-रक्षा दृष्टिभिः हिमालयः महत्वपूर्णः अस्ति।
(अध्यात्म, पर्यावरण-रक्षा की दृष्टि से हिमालय महत्वपूर्ण है।)
(ii) मन्दिरेषु अर्चनां कुर्वन्ति स्वास्थ्य लाभं च प्राप्नुवन्ति ।
(मंदिरों में पूजा करते हैं और स्वास्थ्य- लाभ प्राप्त करते हैं।)
(iii) हिमालयस्य वातावरणं मनोहरं, शान्तं, चित्ताकर्षकं च अस्ति।
(हिमालय का वातावरण मनोहर, शांत और चित्ताकर्षक है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
पर्वतराज हिमालयः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
भारतस्य उत्तरस्यां दिशि हिमालयः अस्ति विस्तारात् पर्वतराजः, हिमाच्छादनात् हिमालय सर्वोच्चत्वात् भारतस्य
मुकुटमिव अस्य नद्यः पावनं जलं, वनानि औषधानि यच्छन्ति तीर्थानि पावनं कुर्वति। अनेकेषु देवालयेषुजनाः
स्वइष्टानाम् अर्चनां कुर्वन्ति। स्वास्थ्य एव आध्यात्मिक लाभेन सह भारत रक्षकोऽपि। भारत गौरवस्य प्रतीतोऽयम्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘तीर्थानि पावनं कुर्वति’ वाक्ये क्रियापदमस्ति –
(अ) तीर्थानि
(ब) पावन
(स) कुर्वति
(द) पवित्र
उत्तरम् :
(स) कुर्वति

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘श्रृंखला विस्तृता वर्तते’ अत्र विशेषण पदमस्ति?
(अ) श्रृंखला
(ब) विस्तृता
(स) वर्तते
(द) अस्य
उत्तरम् :
(ब) विस्तृता

(iii) ‘अस्य पर्वतस्य’ इत्यत्र ‘अस्य’ सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम्
(अ) हिमालयस्य
(ब) आडावलस्य
(स) ऋष्यमूकस्य
(द) चित्रकूटस्य
उत्तरम् :
(अ) हिमालयस्य

(iv) ‘उद्भवति’ पदस्य पर्यायवाचिपदम् अनुच्छेदे अस्ति
(अ) प्रभवति
(ब) प्राप्यते
(स) प्राप्नुवन्ति
(द) वर्तते
उत्तरम् :
(अ) प्रभवति

16.लालबहादुर शास्त्रि-महोदयस्य नाम को न जानाति? भारतस्य द्वितीयः प्रधानमन्त्री लालबहादुर शास्त्री उत्तरप्रदेशस्य वाराणसी जनपदे जन्म प्राप्तवान्। 1904 तमे ईसवीये वर्षे अक्टूबर मासस्य 2 दिनांक तस्य जन्म अभवत्। तस्य जनकस्य नाम शारदा प्रसादः मातुश्च नाम रामदुलारी आसीत्। बाल्यावस्थायामेव तस्य पितुः देहावसान जातम्। सः वाराणसीस्थे हरिश्चन्द्र विद्यालये, शिक्षा प्राप्तवान्। उच्च शिक्षा तु सः काशी विद्यापीठे गृहीतवान्। महात्मागान्धी महोदयस्य नेतृत्वे सञ्चालिते स्वतन्त्रता आन्दोलने सोऽपि प्रविष्टवान्। वर्षद्वयात्मकं कारावासम् अपि प्राप्तवान्। गुणैः जनतायाः श्रद्धाभाजनम् अभूत्। स्वतन्त्रभारते विविधानि पदानि अलङ्कुर्वन् असौ भारतस्य द्वितीयः प्रधानमन्त्री अभवत्। 1966 तमे ईसवीये वर्षे जनवरीमासस्य। 11 तमे दिनाङ्के तस्य देहावसानं जातम्।

(लालबहादुर शास्त्री महोदय का नाम कौन नहीं जानता। भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री लालबहादुर शास्त्री ने उत्तरप्रदेश के वाराणसी जनपद में जन्म लिया। उनका जन्म 2 अक्टूबर सन् 1904 ईसवी वर्ष में हुआ। उनके पिताजी का नाम शारदाप्रसाद और माँ का नाम रामदुलारी था। बचपन में ही उनके पिताजी का देहावसान हो गया। उन्होंने वाराणसी स्थित हरिश्चन्द्र विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। उच्च शिक्षा उन्होंने काशी विद्यापीठ में ग्रहण की। महात्मा गांधी महोदय के नेतृत्व में संचालित स्वतन्त्रता आन्दोलन में भी वे प्रविष्ट हुए। दो वर्ष का कारावास भी प्राप्त किया। गुणों से जनता के श्रद्धा-पात्र हो गये। स्वतन्त्र भारत में विविध पदों को अलंकृत करते हुए भारत के दूसरे प्रधानमन्त्री हुए। 11 जनवरी सन् 1966 ईस्वी वर्ष में उका देहावसान हो गया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) भारतस्य द्वितीयः प्रधानमंत्री कः आसीत?
(भारत का द्वितीय प्रधानमंत्री कौन था?)
(ii) लालबहादुर शास्त्रिणः जन्म कदा अभवत्?
(लालबहादुर शास्त्री का जन्म कब हुआ?
(iii) लालबहादुर शास्त्रिणः पितुः नाम किमासीत्?
(लालबहादुर शास्त्री के पिताजी का नाम क्या था?)
(iv) शास्त्रिमहाभागः कस्मिन् जनपदे अजायता?
(शास्त्री जी किस जनपद में पैदा हुए?)
उत्तरम् :
(i) लालबहादुर शास्त्री
(ii) 2 अक्टूबर 1904
(iii) शारदा प्रसादः
(iv) वाराणसी जनपदे।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) लालबहादुर शास्त्रि महाभागः कदा दिवंगतः?
(लाल बहादुर शास्त्री कब दिवंगत हुए?)
(ii) शास्त्रि महाभागः कियत् कालं कारावासे अतिष्ठत्?
(शास्त्री जी कितने दिन कारावास में रहे?)
(iii) शास्त्रि महोदयस्य उच्चशिक्षा कुत्र अभवत्?
(शास्त्री जी की उच्च शिक्षा कहाँ हुई?)
उत्तरम् :
(i) 1966 तमे ईसवीये वर्षे जनवरी मासस्य एकादश दिवसे दिवंगतः।
(ii) सः वर्षद्वयात्मकं कारावासम् प्राप्तवान्।
(iii) शास्त्रि महाभागस्य उच्चशिक्षा काशी विद्यापीठे अभवत्।

प्रश्न 3.
अस्य अनच्छेदस्य उपयक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
लालबहादुर शास्त्री महाभागः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
भारतस्य द्वितीय प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री वाराणसी जनपदे 1904 तमे अक्टूबर मासे द्वितीये दिवसे जन्म लेभे। रामदुलारी शारदा प्रसादयोऽयं सुतः तत्रैव विद्यालयी शिक्षा प्राप्य उच्च शिक्षामसौ काशी विद्यापीठ प्राप्तवान्। स्वातन्त्र्य संग्रामे प्रविश्य सोऽपि वर्षद्वयात्मकं कारावासं प्राप्तवान्। गुणैः जनतायाः श्रद्धाभाजनमभवत्। स्वतन्त्र भारते विविधानि पदानि प्राप्यासौ प्रधनमन्त्री पदमलंकृतवान्। 11-1-1960 तमे देहावसानं जातम्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘अभूत्’ इति क्रियापदस्य कर्ता अनुच्छेदानुसारमस्ति
(अ) शारदाप्रसादः
(ब) रामदुलारी
(स) लालबहादुर शास्त्री
(द) श्रद्धाभाजनम्
उत्तरम् :
(स) लालबहादुर शास्त्री

(ii) ‘उच्चशिक्षा’ इत्यनयो विशेषण पदमस्ति
(अ) उच्च
(ब) शिक्षा
(स) काशी
(द) विद्यापीठ
उत्तरम् :
(अ) उच्च

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) ‘तस्य जन्म अभवत्’ तस्य सर्वनाम पदस्य स्थाने संज्ञापदं भवेत
(अ) शारदा प्रसादस्य
(ब) रामदुलार्याः
(स) लाल बहादुर शास्त्रिण
(द) भारतस्य
उत्तरम् :
(स) लाल बहादुर शास्त्रिण

(iv) ‘अलभत’ इति क्रियापदस्य पर्यायवाचिपदं अनुच्छेदे अस्ति –
(अ) प्राप्तवान्
(ब) अभवत्
(स) गृहीतवान्
(द) अभूत
उत्तरम् :
(अ) प्राप्तवान्

17. गौः भारतीय-संस्कृतेः प्रधानः पशुः अस्ति। वेदेषु-शास्त्रेषु इतिहासे लोकमान्यतायां च सर्वत्र अस्याः विषये श्रद्धापूर्ण वर्णनं प्राप्यते। भारते गौः माता इव पूज्या भवति। यथा माता स्व-दुग्धेन शिशून् पालयति तथैव गौ अपि दुग्ध धृतादिदानेन अस्माकं शरीरं बुद्धिं च पोषयति। भारतवासिनः जनाः आदरेण श्रद्धया चं गोपालनं कुर्वन्ति। गौः अस्माकं कृते बहु उपयोगिनी अस्ति। सा अस्माकं कृते दुग्धं ददाति। तेन दुग्धेन दधि तक्रं मिष्ठान्नं घृतमादि निर्माय तस्य सेवनेन च वयं स्वस्थाः पुष्टाः भवामः। गावः अस्माकं क्षेत्राणि कर्षन्तिं। येन कृषिकार्यं प्रचलति। तस्य गोमयस्य इन्धनरूपेण प्रयोगः भवति। गोमयस्य, गोमूत्रस्य च उपयोगः औषधिनिर्माणे, सुगन्धवर्तिका निर्माणे, कीटनाशक द्रव्य निर्माणे इत्यादिषु कर्मसु भवति। एवं प्रकारेण गावः मानवानां सर्वदैव उपकारं कुर्वन्ति।

(गाय भारतीय संस्कृति का प्रधान पशु है। वेदों, शास्त्रों, इतिहास और लोकमान्यता में सब जगह इसके विषय में श्रद्धापूर्ण वर्णन प्राप्त होता है। भारत में गाय माता की तरह पूजी जाती है। जैसे माता अपने दूध से शिशुओं को पालती है उसी प्रकार गाय भी दूध-घी आदि देकर हमारे शरीर और बुद्धि का पोषण करती है। भारतवासी लोग आदर और श्रद्धा से गोपालन करते हैं। गाय हमारे लिए बहुत उपयोगी होती है। वह हमारे लिये दूध देती है। उस दूध से दही, छाछ, मिठाई, घी आदि बनाकर उसके सेवन से हम स्वस्थ और पुष्ट होते हैं। गायें (बैल) हमारे खेतों को जोतते हैं जिससे कृषिकार्य चलता है। उसके गोबर का ईंधन के रूप में प्रयोग होता है। गाय के गोबर और मूत्र का उपयोग औषधि निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, कीटनाशक निर्माण आदि कार्यों में होता है। इस प्रकार से गायें मानवों का सदैव उपकार करती हैं।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) भारतीय संस्कृतेः प्रधानपशुः कः?
(भारतीय संस्कृति का प्रधानपशु कौन है?)
(ii) भारतं गौः केषु पूज्यते?
(भारत में गौ किसकी तरह पूजी जाती है?)
(iii) गौः अस्माकं कृते किं ददाति?
(गाय हमारे लिए क्या देती है?)
(iv) गावः सर्वत्र कीदृशं वर्णनम् प्राप्यते?
(गाय का सब जगह कैसा वर्णन मिलता है?)
उत्तरम् :
(i) गौः
(ii) मातेव
(iii) दुग्धम्
(iv) श्रद्धापूर्णम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) गोमयस्य गोमूत्रस्य च प्रयोगः कुत्र भवति?
(गोबर और गोमूत्र का प्रयोग कहाँ होता है?)
(ii) धेनोः गोमस्य केन रूपेण प्रयोगः भवति?
(गाय के गोबर का किस रूप में प्रयोग होता है?)
(iii) गौः अस्मान् कथं पोषयति? (गाय हमारा पोषण कैसे करती है?)
उत्तरम् :
(i) औषधि निर्माण, सुगन्धवर्तिका निर्माणे, कीटनाशक द्रव्य निर्माणे इत्यादिषु गोमयस्य गोमूत्रस्य च प्रयोगः भवति।
(औषधि-निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, कीटनाशक द्रव्य निर्माण इत्यादि में गोमय और गौमूत्र का प्रयोग होता है।)
(i) धेनो गोमयम् इन्धनरूपेण प्रयुज्यते।
(गाय के गोबर का ईंधन के रूप में प्रयोग होता है।)
(iii) यथा माता शिशून स्वदुग्धेन पालयति तथैव गौः दुग्धघृतादि दानेन अस्माकं शरीरं बुद्धिं च पोषयति।
(जैसे माता अपने दूध से बालक को पालती है, उसी प्रकार गाय दूध, घी देकर हमारे शरीर व बुद्धि का पोषण करती है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
गावः महत्वम् (गाय का महत्व)।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
गौः भारतीय संस्कृतेः प्रधानः पशु। संस्कृत साहित्ये गौः मातेव पूज्या प्रतिष्ठापिता। सा मातेव दुग्धादिभिः पौष्टिक पदार्थैः शिशून् बालान् च पालयति। तस्या दुग्धेन दधि, तक्र, घृतं, नवनीतादयः प्राप्यन्ते। तस्य सेवनेन मानवः हृष्ट-पुष्टश्च भवति। तस्य पञ्चगव्योऽपि औषधिरूपेण हितकरः। गोमयः इंधन रूपेण प्रयुज्यते। धेनो पञ्चगव्यं . पवित्रं, कीटनाशकं, रोगावरोधक पावनं च भवति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘घृतस्य सेवनेन कः लाभः भवति?’ अत्र भवति क्रियापदस्य कर्ता अस्ति –
(अ) घृतस्य
(ब) सेवनेन
(स) कः
(द) लाभ:
उत्तरम् :
(द) लाभ:

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘पूज्या गौः’ अत्र विशेषणपदमस्ति
(अ) पूज्याः
(ब) गौःर्जा
(स) धेनुः
(द) पूज्याः गौ
उत्तरम् :
(अ) पूज्याः

(iii) ‘सा अस्माकं कृते दुग्धं ददाति’ अत्र ‘सा’ इति सर्वनाम पदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) माता
(ब) गौः
(स) महिषी
(द) अजा
उत्तरम् :
(ब) गौः

(iv) ‘धेनुः’ इति पदस्य स्थाने गद्यांशे किं पदं प्रयुक्तम्?
(अ) गौः
(ब) पशु
(स) माता
(द) गो
उत्तरम् :
(ब) पशु

18. अद्य औद्योगिक विकासात् नगराणां विकासात् च जायते पर्यावरण प्रदूषितम्। अतः अद्य नागरिकाणां कर्त्तव्यमस्ति यद् वयं पर्यावरण संरक्षणार्थ प्रयत्नं कुर्मः तत्कृते वयं स्वच्छतां च धारयामः। महात्मागांधि महोदयस्यापि स्वच्छतोपरि विशेषः आग्रहे आसीत्। साम्प्रतमपि सर्वकारेण ‘स्वच्छ भारताभियानम्’ प्रचालितम्। तस्योद्देश्यमपि पर्यावरणस्य संरक्षण अस्ति। एवमेव नदीतडागवापीनां जलस्य स्वच्छतायाः प्रेरणा वयं ‘नमामि गड़े’ इति अभियानेन ग्रहीतुं शक्नुमः। वयम् अस्मिन् अभियाने सहभागितां च कृत्वा भारतस्य नवस्वरूपं प्रकटीकर्तुं शक्नुमः। एतस्य कृते वयं अवकरस्य समुचितं निस्तारणं कुर्मः। जनान् शौचालय निर्माणाय प्रेरणाय। जलाशयेषु स्वच्छतामाचरामः सार्वजनिक स्थानेषु प्रदूषणं न कुर्मः। प्रदूषणकराणां पदार्थानां प्रयोगं न कुर्मः। जनजागरणे सहायतां कुर्मः।

(आज औद्योगिक और नगरों के विकास से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। अतः आज नागरिकों का कर्त्तव्य है कि हम पर्यावरण-संरक्षण का प्रयत्न करें। उसके लिए हम सफाई रखें। महात्मा गांधी का भी स्वच्छता के ऊपर बहुत आग्रह था। अब भी सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत’ अभियान चलाया गया है। उसका उद्देश्य भी पर्यावरण का संरक्षण ही है। इसी प्रकार नदी, तालाव, बावड़ियों के जल की स्वच्छता की प्रेरणा हम ‘नमामि गंगे’ अभियान से ले सकते हैं और हम इस अभियान में सहभागिता करके भारत का नया स्वरूप प्रकट कर सकते हैं। इसके लिए हम कूड़े का उचित निस्तारण करें, लोगों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित करें। जलाशयों में स्वच्छता रखें, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदूषण न करें। प्रदूषण करने वाले पदार्थों का प्रयोग न करें। जनजागरण में सहायता करें।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) पर्यावरणस्य संरक्षणार्थं वयं किं धारयामः?
(पर्यावरण के संरक्षण के लिए हम क्या धारण करें?)
(ii) सर्वकारेण किम् अभियान सञ्चालितम् ?
(सरकार द्वारा क्या अभियान चलाया जा रहा है?)
(ii) स्वच्छभारत अभियानस्य किमुद्देश्यम्?
(स्वच्छ भारत अभियान का क्या उद्देश्य है?)
(iv) स्वच्छतायाः प्रेरणा के ग्रहीतुं शक्यते?
(स्वच्छता की प्रेरणा किससे ली जा सकती है?)
उत्तरम् :
(i) स्वच्छताम्
(ii) स्वच्छभारताभियानम्
(ii) पर्यावरणसंरक्षणम्
(iv) ‘नमामि गङ्गे’ इति अभियानात्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) पर्यावरण प्रदूषणं कस्मात् जायते?
(पर्यावरण प्रदूषण किससे पैदा होता है?)
(ii) नागरिकाणां किं कर्त्तव्यम् अस्ति?
(नागरिकों का क्या कर्त्तव्य है?)
(iii) महात्मागान्धिनः अपि कस्योपरि विशेष आग्रहः आसीत्?
(महात्मा गाँधी का किस पर विशेष आग्रह था?)
उत्तरम् :
(i) औद्योगिक विकासात् नगराणां च विकासात् पर्यावरण प्रदूषणं जायते।
(औद्योगिक विकास से और नगरों के विकास से पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न होता है।)
(ii) नागरिकाणां कर्त्तव्यम् अस्ति पर्यावरण संरक्षणार्थं प्रयत्न कुर्वन्तु ।
(पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयत्न करना नागरिकों का कर्तव्य है।)
(iii) महात्मागान्धिन स्वच्छतायाः उपरि विशेष आग्रह आसीत्।
(महात्मा गांधी का स्वच्छता के ऊपर विशेष आग्रह था।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
पर्यावरण संरक्षणम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
औद्योगिक विकासेन सदैवं पर्यावरण प्रदूषणं वर्धते। पर्यावरण रक्षणं नागरिकानां कर्त्तव्यम् अस्ति। पर्यावरण संरक्षण उद्देश्येन एव स्वच्छता, अभियानमपि सर्वकारेण सञ्चालितम् अस्ति। जलाशयानां जल-संरक्षणम् अपि नमामि गंगेन अभियानेन प्रवर्तते। एतस्य कृते अवकरस्य निस्तारणं करणीयम्। शौचालयानां निर्माण करणीयम्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘प्रयोग न कुर्मः’ अत्र ‘कुर्मः’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदम् अस्ति –
(अ) प्रदूषणकराणाम्
(ब) पदार्थानाम्
(स) वयम्
(द) प्रयोगम्
उत्तरम् :
(स) वयम्

(ii) ‘स्वच्छभारतम्’ इत्यनयो विशेषणपदम् अस्ति –
(अ) स्वच्छ
(ब) भारतम्
(स) साम्प्रतम्
(द) सर्वकारेण
उत्तरम् :
(अ) स्वच्छ

(iii) ‘तस्योद्देश्यमपि’ अत्र ‘तस्य’ इति सर्वनामपदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) नमामि गङ्गे
(ब) स्वच्छ भारताभियानम्
(स) शौचालय निर्माणम्
(द) अवकर निस्तारणम्।
उत्तरम् :
(ब) स्वच्छ भारताभियानम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘अधुना’ इति पदस्य पर्यायवाचिपदं गद्यांशेऽस्ति –
(अ) अद्य
(ब) साम्प्रतम्
(स) आग्रहे
(द) अभियाने
उत्तरम् :
(ब) साम्प्रतम्

19. हृद्यया मनोरमया च रीत्या राज्यधर्मस्य लोकव्यवहारस्य च शिक्षार्थमेव पञ्चतन्त्रं प्रवृत्तम्। विष्णु शर्मणा संस्कृत भाषया लिखिताः पञ्चतन्त्र कथा: जगतः सर्वाधिक भाषासु अनूदिताः सन्ति। विष्णुशर्मा अमरशक्ति नामकस्य नृपस्य त्रीन् पुत्रान् षड्भिः मासै: राजनीतिं शिक्षायितुम् ग्रन्थमिमं रचितवान्। षष्ठ शताब्द्यां लिखितोऽयं ग्रन्थः अतीव लोकप्रियः वर्तते। अस्य कथा: नीतिं शिक्षयन्त्यः मनोरञ्जनमपि कुर्वन्ति पाठकानाम्। पञ्चतन्त्राणां नामानि मित्रभेदः मित्रसम्प्राप्तिः, काकोलूकीयः लब्धप्रणाशः, अपरिक्षित कारकञ्चं सन्ति। पञ्चतन्त्रस्य कथासु पशुपक्ष्यादीनि एव पात्राणि सन्ति तथापि तेषां माध्यमेन सर्वसाधरणोपयोगिनः व्यवहार-ज्ञानस्य मनोहररीत्या अत्र वर्णनं कृतम्।

(हार्दिक और मन को अच्छी लगने वाली रीति से राजधर्म और लोक-व्यवहार की शिक्षा के लिए पंचतन्त्र प्रवृत्त हुआ। विष्णु शर्मा द्वारा संस्कृत भाषा में लिखे गये पंचतन्त्र की कथायें संसार में सबसे अधिक भाषाओं में अनूदित हैं। विष्णु शर्मा ने अमरशक्ति नाम के राजा के तीन पुत्रों को छ: महीने में राजनीति को सिखाने के लिए इस ग्रन्थ को रचा। छटी शताब्दी में लिखा गया यह ग्रन्थ अत्यन्त लोकप्रिय है। इसकी कथाएँ पाठकों की नीति सिखाती हुई मनोरञ्जन भी करती हैं। पंचतन्त्रों के नाम हैं- मित्र भेद, मित्र सम्प्राप्ति, काकोलूकीय, लब्ध प्रणाश तथा अपरीक्षित कारक। पंचतन्त्र की कथाओं में पशु-पक्षी आदि ही पात्र हैं। फिर भी उनके माध्यम से सर्व-साधारण के उपयोगी व्यावहारिक ज्ञान का मनोहर रीति से यहाँ वर्णन किया गया है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) ‘पञ्चतन्त्रम्’ इति ग्रन्थं केन रचितम्?
(पंचतन्त्र ग्रंथ की रचना किसने की?)
(ii) विष्णुशर्मा कस्य नृपस्य पुत्रान् पाठितवान्?
(विष्णु शर्मा ने किस राजा के पुत्रों को पढ़ाया?)
(iii) पञ्चतन्त्रम् कति तन्त्राणि सन्ति?
(पंचतन्त्र में कितने तन्त्र हैं?)
(iv) अमरशक्तिः नृपस्य कति पुत्रा आसन्?
(अमर शक्ति राजा के कितने पुत्र थे?)
उत्तरम् :
(i) विष्णुशर्माणा
(ii) अमरशक्तेः
(iii) पञ्च
(iv) त्रयः।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) पञ्चतन्त्राणाम् नामानि लिखत।
(पाँच तन्त्रों के नाम लिखिए।)
(ii) पञ्चतन्त्राणाम् ख्यातिः किं प्रमाणम्?
(पंचतन्त्र की ख्याति का क्या प्रमाण है?)
(ii) पञ्चतन्त्रं कदा लिखितम?
(पंचतंत्र कब लिखा गया?)
उत्तरम् :
(i) मित्रभेदः, मित्र सम्प्राप्तिः, काकोलूकीयः, लब्धप्रणाशः अपरीक्षित कारकञ्चेति पञ्चतन्त्राणां नामानि।
(मित्र सम्प्राप्ति, काकोलूकीयः, लब्ध प्रणाशः और अपरीक्षित कारक ये पाँच तंत्रों के नाम हैं।)
(ii) जगतः सर्वाधिक भाषासु अनूदितः इति अस्य ख्यातिः प्रमाणम्।।
(संसार की अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ, यह इसकी ख्याति का प्रमाण है।)
(iii) पञ्चतन्त्रं नामग्रन्थं षष्ठ शताब्दयां रचितम्।
(पञ्चतन्त्र नामक ग्रंथ छठवीं शताब्दी में रचा गया।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
पञ्चतन्त्रम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
पं. विष्णु शर्मणः संस्कृत भाषया लिखितम् पञ्चतन्त्र-नाम ग्रन्थं बालानां कृते लिखितम्। अस्य कथाः सर्वासु प्रमुखासु भाषासु अनूदिताः। आभिः कथाभिः षड्मासे एक राजनीतिज्ञाः कृताः। अस्य कथाः नीति, राजनीति कूटनीतिं च शिक्षन्ति। अस्य पञ्चतन्त्राणि सन्ति-मित्रभेदः, मित्रसम्प्राप्तिः, काकोलूकीयः लब्ध प्रणाश: अपरीक्षित कारकञ्च। अस्य कथानां पात्राणि प्रायः जन्तवः एव।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘अनूदिताः सन्ति’ सन्ति क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति
(अ) तन्त्राणि
(ब) कथाः
(स) पात्राणि
(द) भाषासु
उत्तरम् :
(ब) कथाः

(ii) ‘ग्रन्थः अतीव लोकप्रियः वर्तते’ एतेषु पदेषु विशेषणपदम् अस्ति –
(अ) ग्रन्थः
(ब) अतीव
(स) लोकप्रिय
(द) वर्तते
उत्तरम् :
(स) लोकप्रिय

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) ‘अस्य कथाः’ अत्र ‘अस्य’ इति सर्वनामपदं कस्य संज्ञायाः स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) विष्णु शर्मणः
(ब) पञ्चतन्त्रस्य
(स) मित्रभेदस्य
(द) काकोलूकीयस्य
उत्तरम् :
(ब) पञ्चतन्त्रस्य

(iv) ‘संसारस्य’ इति पदस्य अनुच्छेद पर्यायवाचि पदम् अस्ति
(अ) लोक व्यवहारस्य
(ब) जगत:
(स) लोकप्रियः
(द) व्यवहारज्ञानं
उत्तरम् :
ब) जगत:

20. एतद्विज्ञानस्य युगमस्ति। मानव जीवनस्य प्रत्येकस्मिन् क्षेत्रे विज्ञानमस्माकं महदुपकारं करोति। शिक्षाया क्षेत्रे विज्ञानेन महती उन्नतिकृता। मुद्रण यन्त्रेण पुस्तकानि मुद्रितानि भवन्ति। समाचारपत्राणि च प्रकाश्यन्ते। दूरदर्शनमपि शिक्षायाः प्रभावोत्पादकं साधनस्ति। सूचनायाः क्षेत्रे तु अनेन क्रान्तिकारीणि परिवर्तनानि कृतानि। अनेन मनोरञ्जनेन सह देशविदेशानां वृत्तमपि ज्ञायते। सङ्गणकयन्त्रम् आकाशवाणी चापि एवस्मिन् कार्ये सहाय्यौ भवतः। विज्ञानेन अस्माकं यात्रा सुकराभवत्। शकटात् आरभ्य राकेटयानपर्यन्तं सर्वमेव विज्ञानेन एव प्रदत्तम्। भूभागे वयं वाष्पयानादिभिः विविधैः यानैः यथेच्छं भ्रमामः वायुयानेन आकाशे खगवत् विचरामः जलयानेन च जलचरैरिव प्रगाढे सागरे संतरामः। इदानीं तु चन्द्रलोकस्यापि यात्रा अन्तरिक्ष यानेन सम्भवति।

(यह विज्ञान का युग है। मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान हमारा महान् उपकार करता है। शिक्षा के क्षेत्र में विज्ञान ने महान उन्नति की है। छापेखाने से अनेकों पुस्तकें छपी हैं और समाचार-पत्र प्रकाशित किये जाते हैं। दूरदर्शन भी शिक्षा का प्रभावी साधन है। सूचना के क्षेत्र में इसने क्रान्तिकारी परिवर्तन किये हैं। इससे मनोरञ्जन के साथ-साथ देश-विदेश के समाचार भी जाने जाते हैं। कम्प्यूटर और आकाशवाणी भी इस विषय में सहायक हुई है। विज्ञान से हमारी यात्रा सरल हो गई है। बैलगाड़ी से लेकर राकेट तक सब कुछ विज्ञान द्वारा ही दिया गया है । धरती के भाग को हम रेलगाड़ी आदि विविध वाहनों से इच्छानुसार भ्रमण करते हैं। वायुयान से आकाश में पक्षी की तरह विचरण करते हैं तथा जलयान से जलचरों की तरह गहरे सागर में तैरते हैं। अब तो चन्द्रलोक की यात्रा भी अन्तरिक्ष यान से सम्भव है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कस्य युगमेतत्?
(यह किसका युग है?)
(ii) शिक्षायाः प्रभावोत्पादकं साधनं किमस्ति?
(शिक्षा का प्रभावोत्पादक साधन क्या है?)
(iii) सूचनायाः क्षेत्र केन क्रान्तिकारीणि परिवर्तनानि कृतानि?
(सूचना के क्षेत्र में किसने क्रान्तिकारी परिवर्तन किये हैं?)
(iv) दूरदर्शनेन मनोरञ्जन सह किमन्यत् ज्ञायते?
(दूरदर्शन से मनोरंजन के साथ और क्या जाना जाता है?)
उत्तरम् :
(i) विज्ञानस्य
(ii) दूरदर्शनम्
(iii) दूरदर्शनेन
(iv) देशविदेशानां वृत्तम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) विज्ञानेन मानवस्य यात्रा कीदृशी जाता?
(विज्ञान से मानव की यात्रा कैसी हो गई?)
(ii) वृत्तज्ञाने दूरदर्शनस्य के सहायकाः भवन्ति?
(समाचार जानने में दूरदर्शन के सहायक कौन होते हैं?)
(iii) दूरदर्शनम् सूचनायाः क्षेत्रे किं कृतम्?
(दूरदर्शन ने सूचना के क्षेत्र में क्या किया?)
उत्तरम् :
(1) विज्ञानेन मानवस्य यात्रा सुकरा अभवत्।
(विज्ञान से मानव की यात्रा सरल हो गई है।)
(ii) सङ्गणक-आकाशवाणी चापि अस्मिन् वृत्तज्ञाने सहाय्यौ भवतः।
(कंप्यूटर और आकाशवाणी भी समाचार जानने में सहायक होते हैं।)
(iii) सूचनायाः क्षेत्रे तु दूरदर्शनेन क्रान्तिकारीणि परिवर्तनानि कृतानि।
(सूचना के क्षेत्र में तो दूरदर्शन ने क्रांतिकारी परिवर्तन किया है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
विज्ञानस्य महत्वम् (विज्ञान का महत्व)।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
अस्मिन् युगे विज्ञानस्य महती आवश्यकता वर्तते। शिक्षायाः क्षेत्रे मुद्रण, समाचार पत्राणि, दूरदर्शनं च प्रभावोत्पादकानि च साधनानि सन्ति। सूचना-मनोरञ्जनादिषु कार्येषु, सङ्गणकयन्त्रम् आकाशवाणी च सहाय्यौ भवतः। वाष्पयान, – वायुयान, जलयानादिभि वयं स्थले जले आकाशे च स्वैरं विचरामः। चन्द्रलोकस्यापि यात्रा सम्भवति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘सागरे सन्तरामः’ अत्र ‘सन्तरामः’ क्रियाया कर्ता अस्ति –
(अ) वयम्
(ब) वायुयानैः
(स) जलयानैः
(द) चन्द्रयानैः
उत्तरम् :
(अ) वयम्

(ii) ‘महदुपकारकम्’ इत्यनयोः पदयोः विशेषण पदं अस्ति
(अ) महत्
(ब) उपकारकम्
(स) विज्ञानम्
(द) अस्माकम्
उत्तरम् :
(अ) महत्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iii) ‘अनेन क्रान्तिकारीणि …..।’ अत्र ‘अनेन’ इति सर्वनाम पदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) विज्ञानेन
(ब) दूरदर्शनेन
(स) आकाशवाण्या
(द) मुद्रणेन
उत्तरम् :
(ब) दूरदर्शनेन

(iv) ‘जले आकाशे च स्वैरं विचरामः” अत्र आकाशे पदस्य पर्यायपदमस्ति
(अ) जले
(ब) नभे
(स) आकाशे
(द) स्वैरं
उत्तरम् :
(ब) नभे

21. एकस्मिन् राज्ये एकः नृपः शासनं करोति स्म। तस्य अङ्गरक्षकः एकः वानरः आसीत्। वानरः स्वामिभक्तः आसीत्। नृपोऽपि तस्मिन् वानरे प्रभूतं विश्वासं करोति स्म। किन्तु वानरः मूर्खः आसीत्। एकदा नृपः सुप्तः आसीत्। वानरः तं व्यजनं करोति स्म। तस्मिन् समये नृपस्य वक्षस्थले एका मक्षिका अतिष्ठत। वानरः वारं-वारं तां मक्षिकाम् अपसारयितुं प्रायतत। परन्तु सा मक्षिका पुनः नृपस्य ग्रीवायाम् उपविशति स्म। मक्षिका दृष्ट्वा वानरः कुपितः अभवत्। मूर्ख वानरः मक्षिकायाः उपरि प्रहारम् अकरोत्। मक्षिका तु ततः उड्डीयते स्म। परञ्च खड्गप्रहारेण नृपस्य ग्रीवाम् अच्छिनत्। तेन नृपस्य मृत्युः अभवत्। अतः मूर्खस्य मित्रता घातिका भवति।

(एक राज्य में एक राजा शासन करता था। उसका अंगरक्षक एक बन्दर था। वानर स्वामिभक्त था। राजा भी उस बन्दर पर बहुत विश्वास करता था। किन्तु वानर मूर्ख था। एक दिन राजा सोया हुआ था। वानर उसे पंखा झुला रहा था। अर्थात् हवा कर रहा था। उसी समय राजा के वक्षस्थल पर एक मक्खी आ बैठी। वानर ने बार-बार उस मक्खी को हटाने (उड़ाने) का प्रयत्न किया। परन्तु वह मक्खी पुनः राजा की गर्दन पर बैठ गई। मक्खी को देखकर वानर नाराज हुआ। मूर्ख वानर ने मक्खी पर प्रहार किया। मक्खी तो वहाँ से उड़ गई परन्तु तलवार के प्रहार से राजा की गर्दन कट गई। उससे राजा की मृत्यु हो गई। अतः मूर्ख की मित्रता घातक होती है।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) नृपस्य अपरक्षकः कः आसीत्?
(राजा का अंगरक्षक कौन था?)
(ii) वानरः कीदशः आसीत् ?
(वानर कैसा था?)
(iii) नृपः कस्मिन् विश्वसिति स्म?
(राजा किस पर विश्वास करता था?)
(iv) एकदा सप्ते नपे वानरः किं करोति स्म?
(एक दिन राजा के सो जाने पर बन्दर क्या कर रहा था?)
उत्तरम् :
(i) वानरः
(ii) स्वामिभक्तः
(iii) वानरे
(iv) व्यजनं करोति

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) नृपस्य मृत्यु कथम् अभवत्? (राजा की मौत कैसे हो गई?)
(ii) मर्खस्य मित्रता कीदशी भवति? (मर्ख की मित्रता कैसी होती है?)
(iii) वानरः कुपितः कथमभवत्? (वानर नाराज क्यों हो गया?)
उत्तरम् :
(i) मक्षिका नृपस्य ग्रीवायाम् अतिष्ठत। वानरः ते अपसारयितुमैच्छत अतः खड्गेन प्रहारम् अकरोत् नृपः च हतः।
(मक्खी राजा की गर्दन पर बैठी। बन्दर ने उसे हटाने की इच्छा से तलवार से प्रहार किया और राजा मर गया।)
(ii) मूर्खस्य मित्रता घातिका भवति। (मूर्ख की मित्रता घातक होती है।)
(iii) ग्रीवायाम् उपविष्टां मक्षिका दृष्ट्वा वानरः कुपितः अभवत।
(गर्दन पर बैठी मक्खी को देखकर बंदर क्रोधित हो गया ।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
मूर्खस्य मित्रता घातिका।
(मूर्ख की मित्रता घातक है।)

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
कस्यचित् शासकस्य अङ्गरक्षकः वानरः आसीत्। स्वामिभक्त गुणात् सः नृपस्य विश्वासपात्रम् आसीत्, परञ्च सः मूर्खः आसीत्। एकदा नृपः शेते स्म। एका मक्षिका तस्य वक्षे उड्डीयते स्म। वानरः ताम् अपासरत् परञ्च न अपासरत्। सः क्रुद्ध सन् खड्गेन तस्योपरि प्रहारमकरोत् । तेन नृपः हतः ‘मूर्खस्य मैत्री घातिका भवति।’

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘नृपः शासनं करोति’ अत्रं ‘करोति’ क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति
(अ) वानरः
(ब) नृपः
(स) अङ्गरक्षकः
(द) मक्षिका
उत्तरम् :
(ब) नृपः

(ii) ‘क्रुद्धः वानरः’ अत्र विशेषणपदम् अस्ति –
(अ) क्रुद्धः वानरः
(ब) क्रुद्धः
(स) मर्कटः
(द) वानरः
उत्तरम् :
(द) वानरः

(iii) ‘वानरः तं व्यजनं करोति स्म’ अत्र ‘तम्’ इति सर्वनामपदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम्?
(अ) वानरम्
(ब) नृपम्
(स) मक्षिकाम्
(द) ग्रीवाम्
उत्तरम् :
(ब) नृपम्

(iv) ‘जागृतः’ इति पदस्य विलोमपदं अनुच्छेद अस्ति –
(अ) कुपितः
(ब) घातिका
(स) सुप्तः
(द) स्थिता
उत्तरम् :
(स) सुप्तः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

22. जिवायाः माधुर्यं स्वर्ग प्रापयति, जिह्वायाः कटुता नरके पातयति। एक एव शब्दः जीवनं विभूषयेत्, अन्यः एकः शब्दः जीवनं नाशयेत। एकदा द्वयोः धनिनोः मध्ये विवादः उत्पन्नः जातः। तौ न्यायालयं गतौ। एक धनिकः अचिन्तयत् अहं लक्ष्यं रुप्यकाणि न्यायाधीशाय यच्छामि इति। सः स्यूते लक्ष रुप्यकाणि स्थापयित्वा न्यायाधीशस्य गृहम् गतवान्। न्यायाधीशः तस्य मन्तव्यं ज्ञात्वा क्रुद्धः अभवत्। धनिकः अवदत्-भोः मत् सदृशाः लक्षरुप्यकाणां दातारः दुर्लभा एव।” न्यायाधीशः अवदत् – “लक्षरुप्यकाणां दातारः कदाचित् अन्येऽपि भवेयुः परन्तु लक्ष रुप्यकाणां निराकारः मत्सदृशाः अन्ये विरला एवं अतः कृपया गच्छतु। न्याय स्थानं मलिनं मा कुरु। लज्जितः धनिकः धनस्यूत गृहीत्वा ततः निर्गतः।

(जिह्वा की मधुरता स्वर्ग प्राप्त करा देती है (तो) जिह्वा की कटुता नरक में गिरा सकती है। एक ही शब्द जीवन को विभूषित कर दे (तो) अन्य एक शब्द जीवन को नष्ट कर दे। एक बार दो धनवानों में विवाद हो गया। दोनों न्यायालय में गये। एक धनिक सोचता था- मैं लाख रुपये न्यायाधीश को दे देता हूँ। वह थैले में लाख रुपये रखकर न्यायाधीश के घर गया। न्यायाधीश उसके मन्तव्य को जानकर नाराज हो गया। धनिक बोला- अरे! मेरे समान लाख रुपयों के दाता दुर्लभ ही हैं। न्यायाधीश ने कहा- “लाख रुपयों के दाता कदाचिद् अन्य भी हों परन्तु लाख रुपयों को त्यागने वाले मेरे जैसे अन्य विरले ही होते हैं। अत: कृपया (यहाँ से) चले जाओ। न्याय के स्थान को मलिन (अपवित्र) मत करो।” शर्मिन्दा हुआ धनिक धन का थैला लेकर वहाँ से निकल गया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) धनिकः धनम् आदाय कस्य गृहं गतवान्?
(धनिक धन लेकर किसके घर गया।)
(ii) कस्याः कटुता नरके पातयति?
(किसका कड़वापन नरक में गिरा देता है?)
(ii) केषां निराकारः विरला एव?
(किसके मना करने वाले विरले ही होते हैं?)
(iv) एक एव शब्दः किं विभूषयेत?
(एक ही शब्द क्या विभूषित कर दे?)
उत्तरम् :
(i) न्यायाधीशस्य
(ii) जिह्वायाः
(iii) लक्षरुप्याकाणाम्
(iv) जीवनम्।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) कः न्याय स्थानं मलिनं कर्तुम् इच्छति स्म?
(कौन न्याय स्थान को मलिन करना चाहता था?)
(i) न्यायाधीशः किमर्थं क्रुद्धः अभवत्?
(न्यायाधीश क्यों नाराज हुआ?)
(iii) जिहवाया माधय॑स्य कटतायाः च का परिणतिः?
(जिहवा की मधुरता और कट्ता का क्या परिणाम होता है?)
उत्तरम् :
(i) धनिकः एक लक्षम् उत्कोचं दत्त्वा न्यायस्थानं मलिनं कर्तुम् इच्छति स्म।
(धनी एक लाख रुपये रिश्वत देकर न्यायस्थान को मलिन करना चाहता था।)
(ii) न्यायाधीशः धनिकस्य उत्कोच दानस्य मन्तव्यं ज्ञात्वा क्रुद्धेऽभवत्।
(न्यायाधीश धनी के धन दाव के मन्तव्य को जानकर क्रोधित हुआ।)
(iii) जिह्वायाः माधुर्यं स्वर्गं प्रापयति, कटुता च नरके पातयति।
(जिह्वा की मधुरता स्वर्ग प्राप्त कराती है और कटुता नरक।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
जिह्वायाः माधुर्यं स्वर्गं प्रापयति, कटुता च नरके पातयति।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
मनुष्यः मधुरैः वचनैः स्वर्ग कटुभि च नरकं प्राप्नोति। विवदमानौ धनिनौ न्यायालयं गतौ। तयोः एकः धनेन प्रभावितं कर्तुम् ऐच्छत्। अतः स्यूते लक्ष रुप्यकम् अनयत् परन्तु न्यायाधीशः तं श्रुत्वा क्रुद्धोऽभवत् लक्ष रुप्यकाणां च निराकरणम् अकरोत्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘कुरु’ क्रियापदस्य कर्तृपदम् अस्ति –
(अ) न्यायाधीशः,
(ब) प्रथमः धनिकः
(स) द्वितीय धनिकः
(द) त्वम्
उत्तरम् :
(द) त्वम्

(ii) ‘लज्जितः’ इति पदं कस्य विशेषणम्?
(अ) प्रथमः धनिकः
(ब) द्वितीयः धनिकः
(स) न्यायाधीशः
(द) अन्यः
उत्तरम् :
(अ) प्रथमः धनिकः

(iii) ‘तौ न्यायालयं गतौ’ इति वाक्ये ‘तौ’ इति पदं काभ्याम् प्रयुक्तम्?
(अ) धनिकाय
(ब) द्वितीय धनिकाय
(स) धनिकाभ्याम्
(द) न्यायाधीशाय
उत्तरम् :
(स) धनिकाभ्याम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘अतः कृपया गच्छतु’ अत्र गच्छतु पदस्य विलोमपदं लिखत्। –
(अ) अत्रः
(ब) कृपयाः
(स) आगच्छतु
(द) गम्यताम्
उत्तरम् :
(स) आगच्छतु

23. भारते गुरु-शिष्य-परम्परा प्राचीना वर्तते। गुरोः सन्निधौ अनेके महापुरुषा अभवन्। अस्यां परम्परायाम् एक: प्रमुखः वर्तते समर्थ गुरु रामदास शिववीरयोः। यथा विवेकानन्दः परमहंसस्य आशीर्वादेन स्व जिज्ञासायाः समाधान प्राप्य देशस्य प्रतिष्ठा पुनः स्थापितवान तथैव शिवाजी महाराजः गुरोः सान्निध्ये मार्गदर्शनं प्राप्य स्वराज्यस्य स्थापनां कृतवान्। एतादृशानि अनेकानि उदाहरणानि भारते वर्तन्ते। वयमपि एतानि उदाहरणानि अनुसृत्य जीवने गुरोः महत्वं स्वीकृत्य स्वशिक्षकानां सम्मानं कुर्मः। गुरुं प्रति सम्मान प्रकटयितुं भारते गुरुपूर्णिमोत्सवः शिक्षक दिवसस्य च आयोजनं भवति। यथा विवेकानन्दः विश्वपटले भारतस्य श्रेष्ठतां स्वाचरणेन कृत्यैः ज्ञानेन च स्थापितवान्। सः भारतीय ज्ञानं संस्कृतिं च श्रेष्ठतमां मन्यते स्म। तथैव अनेके महापुरुषाः सन्ति ये विभिन्न प्रकारेण देशस्य गौरवं वर्धितवन्तः।

(भारत में गुरु-शिष्य परम्परा प्राचीन है। गुरु के सान्निध्य में अनेक महापुरुष हो गये, इस परम्परा में एक प्रमुख है समर्थ गुरु रामदास शिवाजी का। जैसे विवेकानन्द ने परमहंस के आशीर्वाद से अपनी जिज्ञासा का समाधान प्राप्त कर देश की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित किया उसी प्रकार शिवाजी महाराज ने गुरु के सान्निध्य में मार्गदर्शन प्राप्त कर स्वराज्य की स्थापना की। इस प्रकार के अनेक उदाहरण भारत में हैं। हम भी इन उदाहरणों का अनुसरण करके जीवन में गुरु के महत्व को स्वीकार कर अपने शिक्षकों का सम्मान करें। गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत में गुरुपूर्णिमा उत्सव और शिक्षक दिवस का आयोजन होता है। जिस प्रकार विवेकानन्द ने विश्वपटल पर भारत की श्रेष्ठता अपने आचरण, कृत्यों और ज्ञान से स्थापित की। वह भारतीय ज्ञान और संस्कृति को श्रेष्ठतम मानते थे। उसी प्रकार अनेक महापुरुष हैं, जिन्होंने विभिन्न प्रकार से देश के गौरव को बढ़ाया।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) गुरो सन्निधौ जनाः के अभवन्? (गुरु के सान्निध्य में लोग क्या हो गये?)
(ii) शिववीरस्य गुरोः किन्नाम आसीत्? (शिवाजी के गुरु का क्या नाम था?)
(iii) विवेकानन्दः कस्य शिष्यः आसीत्? (विवेकानंद किसके शिष्य थे?)
(iv) भारतीय संस्कृति कः श्रेष्ठतमा मन्यते स्म? (भारतीय संस्कृति को श्रेष्ठतम किसने माना?)
उत्तरम् :
(i) महापुरुषाः
(ii) समर्थगुरु रामदास
(ii) रामकृष्ण परमहंसस्य
(iv) विवेकानन्द।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) विवेकानन्दः किं स्थापितवान्?
(विवेकानन्द ने क्या स्थापित किया?)
(ii) गुरु-शिष्य सम्मान प्रकटयितुं के महोत्सवाः आयोज्यन्ते?
(गुरु-शिष्य सम्मान प्रकट करने के लिए कौन से महोत्सव आयोजित किए जाते हैं?)
(ii) शिवाजी: गुरोः सान्निध्ये मार्गदर्शन प्राप्य किम् अकरोत?
(शिवाजी ने गुरु के सान्निध्य में मार्गदर्शन पाकर क्या किया?)
उत्तरम :
(i) देशस्य प्रतिष्ठा पुनः स्थापितवान्। (देश की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की।)
(ii) गुरु-शिष्य सम्मान प्रकटयितुं गुरुपूर्णिमा च शिक्षक दिवसयोः आयोजनं क्रियते।
(गुरु-शिष्य सम्मान प्रकट करने के लिए गुरुपूर्णिमा और शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है।)
(iii) स्वराज्यस्य स्थापनाम् अकरोत्। (स्वराज की स्थापना की।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
गुरु-शिष्य परम्परा/गुरोः महत्वम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
भारते गुरु-शिष्य परम्परा प्राचीना अस्ति। अनेके गुरु-शिष्याः अभवन्। ये भारतस्य नाम-प्रतिष्ठाम् अकुर्वन्
यथा – समर्थ गुरु रामदासः परमहंसश्च स्वाशीर्वादेन शिवराजं विवेकानन्दं च शिखरमगमयगताम्। एकानि अनेकानि उदाहरणानि सन्ति गुरुपूर्णिमादिषु अनेकेषु पर्वसु एवः परंपरा शिष्यैः वर्ध्यते। अस्माभिः अपि प्रवर्धनीया।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘कृतवान्’ इति क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति
(अ) समर्थ गुरु रामदासः
(ब) रामकृष्ण परमहंस
(स) शिवाजी
(द) अहम्
उत्तरम् :
(स) शिवाजी

(ii) ‘परम्परा प्राचीना वर्तते’ एतेषु पदेषु विशेषणम् अस्ति
(अ) परम्परा
(ब) प्राचीना
(स) वर्तते
(द) भारते
उत्तरम् :
(ब) प्राचीना

(iii) ‘ज्ञातुमिच्छायाः’ इति पदस्य स्थाने अनुच्छेदे पदं प्रयुक्तम् –
(अ) सन्निधौ
(ब) परम्परा
(स) जिज्ञासायाः
(द) अनुसृत्य
उत्तरम् :
(स) जिज्ञासायाः

(iv) ‘नवीना’ इति पदस्य विलोमपदम् अस्ति –
(अ) परम्परा
(ब) प्रमुखा
(स) प्राचीना
(द) भारतीया
उत्तरम् :
(अ) परम्परा

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

24. अद्य स्वस्थं स्वच्छं पर्यावरणस्य आवश्यकता वर्तते। पर्यावरणस्य रक्षा धर्मसम्मतमेव अस्ति। इति अस्माकं ऋषयः प्रतिपादितवन्तः। आवश्यकं वर्तते यद् वयं स्वजीवनं सन्तुलितं कुर्मः। प्रकृतेः संसाधनानां संरक्षणं कुर्मः। अपशिष्ट पदार्थानामवकरस्य वा निक्षेपण सावधानेन कुर्मः। अद्य प्रदूषणाद् निवारणार्थ सर्वकारेण महान्तः प्रयासाः क्रियन्ते। तेषु प्रयासेषु वयमपि सहभागिने: भवाम। अधिकाधिक वृक्षारोपणं तेषां संरक्षणंचं कुर्मः। प्राकृतिक जलस्रोतानां सुरक्षां कुर्मः। अनेन एव सौरोर्जायाः वायूर्जायाः च उपयोगं कुर्मः। सर्वत्र स्वच्छता च पालयामः। जीवमात्रस्य संरक्षणं कुर्मः। नदीतडागवापीना च स्वच्छतां स्थापयामः। ध्वनि विस्तारकयंत्राणां उपयोगं अवरोधयामः। पर्यावरणस्य महत्वमावश्यकतां च संस्मृत्य सर्वे वयं तस्य संरक्षणाय प्रयत्नं करिष्यामः। तर्हि विश्वः सुखी-सम्पन्नश्च भविष्यति। तदैव अस्माकं ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।’ कामना सफला भविष्यति।

(आज स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता है। पर्यावरण की रक्षा धर्मसम्मत है। ऐसा हमारे ऋषियों ने प्रतिपादन किया है। आवश्यक है कि हम अपना जीवन सन्तुलित करें। प्रकृति के संसाधनों का संरक्षण करें। उच्छिष्ट पदार्थों अथवा कूड़े-करकट को सावधानी से फेंकें (डालें)। आज प्रदूषण के निवारण के लिए सरकार ने महान प्रयास किए हैं। उन प्रयासों में हम सभी सहयोगी हों। अधिकाधिक वृक्षों का आरोपण तथा संरक्षण करें। प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा करें। इससे इस प्रकार सौर ऊर्जा और वायु ऊर्जा का उपयोग करें। सर्वत्र स्वच्छता का पालन करें। जीवमात्र का संरक्षण करें। नदी-तालाब और वावड़ियों में सफाई स्थापित करें। ध्वनि विस्तारक यन्त्रों का प्रयोग रोकें। पर्यावरण का महत्व और आवश्यकता के महत्व को याद कर हम सभी उसकी सुरक्षा के लिए प्रयत्न करेंगे तो विश्व सुखी और समृद्ध होगा। तभी हमारा ‘सभी सुखी हों और नीरोग हों।’ की कामना सफल होगी।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) अद्य कीदृशस्य पर्यावरणस्य आवश्यकता वर्तते?
(आज कैसे पर्यावरण की आवश्यकता है?)
(ii) ‘पर्यावरणस्य रक्षा धर्मसम्मतमेक’ इति के प्रतिपादयन्ति।’
(‘पर्यावरण की रक्षा धर्मसम्मत ही है’ यह किसने प्रतिपादित किया है?)
(iii) कस्य ऊर्जायाः प्रयोगः कर्तव्यः?
(किस ऊर्जा का प्रयोग करना चाहिए?)
(iv) वयं स्वजीवनं कीदृशं कुर्मः?
(हम अ जीवन कैसा करें?)
उत्तरम् :
(i) स्वस्थं-स्वच्छं
(ii) ऋषयः
(iii) सौरोर्जायाः वायूर्जायाः च
(iv) सन्तुलितम्।

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) अद्य कस्य आवश्यकता वर्तते?
(आज किसकी आवश्यकता है?)
(ii) जीवनस्य आवश्यकं किं वर्तते?
(जीवन के लिए आवश्यक क्या है?)
(ii) पर्यावरण-प्रदूषण-निवारणाय मानवेन किं करणीयम्? एकं कार्यं लिखत।
(पर्यावरण प्रदूषण निवारण के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए? एक कार्य लिखिये।)
उत्तरम् :
(i) अद्य स्वस्थं-स्वच्छं पर्यावरणस्य आवश्यकता वर्तते।
(आज स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता है।)
(ii) आवश्यकं वर्तते यद् वयं स्व-जीवनं सन्तुलितं कुर्मः।
(आवश्यकता है कि हम अपने जीवन को संतुलित करें।)
(iii) अधिकाधिक वृक्षारोपण तेषां संरक्षणं च मानवेन करणीयम्।
(अधिकाधिक वृक्षारोपण, उनका संरक्षण मनुष्यों को करना चाहिए।)

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
पर्यावरणम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
पर्यावरण रक्षणं धर्मसम्मतम्। प्रकृते रक्षणं अपशिष्टस्य अपसारणं वृक्षारोपणं च करणीयाः कार्याः। जल-स्वच्छता पर्यावरण संरक्षणम् अस्माभि अवश्यमेव करणीयम्। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया इति इच्छा स्वस्थ पर्यावरणेन एक सम्भाव्या अस्ति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत- (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) वयम् सहभागिनः भवामः प्रयासेषु। अत्र ‘भवामः’ क्रियापदस्य कर्तृपदम् अस्ति
(अ) वयम्
(ब) सहभागिनः
(स) भवामः
(द) प्रयासेषु।
उत्तरम् :
(अ) वयम्

(ii) ‘स्वच्छ पर्यावरणम्’ अत्र किं पदं विशेष्यम्
(अ) स्वच्छ
(ब) पर्यावरणम्
(स) स्वच्छपर्यावरणम्
(द) अन्यत्
उत्तरम् :
(ब) पर्यावरणम्

(iii) ‘सर्वे भवन्त सखिनः’ अत्र ‘सर्वे’ कस्य पदस्य सर्वनामपदम वर्तते –
(अ) भवन्तु
(ब) सुखिन्
(स) प्राणिनाम्
(द) वृक्षानाम्
उत्तरम् :
(स) प्राणिनाम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘दुःखिनः’ इति पदस्य अनुच्छेदात् विलोम पदं लिखत
(अ) सन्तुलितं
(ब) सुखिनः
(स) सहभागिनः
(द) सम्पन्ना
उत्तरम् :
(ब) सुखिनः

25. अस्त्युज्जयिन्यां माधवो नाम विप्रः। एकदा तस्य भार्या स्वबालापत्यस्य रक्षार्थं तमवस्थाप्य स्नातुं गता। अथ ब्राह्मणो राज्ञा श्राद्धार्थे निमन्त्रितः। ब्राह्मणस्तु सहजदारिद्रयात् अचिन्तयत्-यदि सरवरं न गच्छामि तदान्यः कश्चित् श्राद्धार्थं वृतो भवेत्। परन्तु बालकस्य अत्र रक्षको नास्ति। तत् किं करोमि? भवतु चिरकाल पालितम् इयं पुत्रविशेष नकुलं बाल रक्षायां व्यवस्थाप्य गच्छामि। तथा कृत्वा सः गतः। ततः तेन नकुलेन बालसमीपम् उपसर्पन कृष्ण सर्पो दृष्टः। स तं व्यापाद्य खण्डशः कृतवान्। अत्रान्तरे ब्राह्मणोऽपि श्राद्धं कृत्वा गृहमुपावृतः ब्राह्मणं दृष्ट्वा नकुलो रक्त विलिप्त मुखपादः तच्चरणयोः अलुठत्। विप्रस्तथाविधं तं दृष्ट्वा बालकोऽनेन खादित इति अवधार्य कोपात् नकुलं व्यापादितवान्। अनन्तरं यावत उपसृत्यापत्यं पश्यति तावत् बालकः सर्पश्च व्यापादितः तिष्ठति। ततः तमोपकारकं नकुलं मृतं निरीक्ष्य आत्मानं मुषितं मन्यमानः ब्राह्मण परम विषादमगमत्।

(उज्जयिनी में एक माधव नाम का ब्राह्मण था। एक दिन इसकी पत्नी अपने छोटे बच्चे की रक्षा के लिए उसे रखकर स्नान करने चली गई। इसके बाद ब्राह्मण राजा द्वारा श्राद्ध के लिए निमन्त्रित कर लिया गया। ब्राह्मण स्वाभाविक रूप से दरिद्री होने के कारण सोचने लगा- यदि मैं जल्दी नहीं जाता हूँ तो दूसरा कोई श्राद्ध को ले जायेगा। परन्तु यहाँ बालक का कोई रक्षक नहीं है। तो क्या करूँ । खैर बहुत समय से पाले हुए इस. विशेष नेवला को बच्चे की रक्षा के लिए रखकर जाता हूँ। ऐसा ही करके वह गया। तब उस नेवले ने बालक के समीप रेंगता हुआ एक काला साँप देखा।

उस (नेवले) ने उसको मार कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया। इसके बाद ब्राह्मण भी श्राद्ध करके घर आ गया। ब्राह्मण को देखकर खून से लथपथ मुख वाला नेवला उसके पैरों में लोटने लगा। ब्राह्मण ने इस प्रकार के उसको देखकर ‘बालक को इसने खा लिया है।’ ऐसा समझकर क्रोध के कारण नेवले को मार दिया। इसके पश्चात् जब पास जाकर बालक को देखता है तो बालक अच्छी तरह तथा सर्प मरा हुआ पड़ा है। तब उस उपकार करने वाले नेवले को मरा हुआ देखकर अपने को ठगा मानता हुआ ब्राह्मण बहुत दुखी हुआ।

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) उज्जयिन्यां किन्नाम विप्रः अस्ति?
(उज्जयिनी में किस नाम का विप्र है?)
(ii) एकदा तस्य भार्या कुत्र अगच्छत्?
(एक दिन उसकी पत्नी कहाँ गई?)
(iii) ‘नकुल रक्षायां व्यवस्थाप्य माधवः कुत्र अगच्छत्?
(नेवले को रक्षा व्यवस्था में छोड़कर माधव कहाँ गया?)
(iv) नकुलेन बालकस्य समीपे किं दृष्टम्?
(नेवले ने बच्चे के पास क्या देखा?)
उत्तरम् :
(i) माधवः
(ii) स्नातुम्
(iii) श्राद्धाय
(iv) कृष्णसर्पम्।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) “राज्ञः निमन्त्रणं प्राप्य किम् अचिन्तयत्?
(राजा के निमन्त्रण को पाकर ब्राह्मण ने क्या सोचा?)
(ii) माधवः बालकस्य रक्षायां के व्यवस्थापयत्?
(माधव ने बालक की रक्षा-व्यवस्था में किसको रखा?)
(iii) उपसर्पन कृष्णसर्पम् दृष्ट्वा नकुलः किमकरोत्?
(रेंगते साँप को देखकर नेवले ने क्या किया?)
उत्तरम् :
(i) यदि सत्वरं न गच्छामि तदन्यः कश्चित् श्राद्धाय व्रतो भवेत्।
(यदि जल्दी नहीं जाता हूँ, तो कोई और श्राद्ध को ले जाएगा।)
(ii) माधवः बालकस्य रक्षायां नकुलं व्यवस्थापयत्।
(माधव ने बालक की रक्षा में नकुल की व्यवस्था की।)
(iii) नकुलेन कृष्ण सर्पः व्यापाद्य खण्डशः कृतः।
(नेवले ने काले साँप को मारकर टुकड़े-टुकड़े कर दिया।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत। (इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
अविवेकं परमापदा/सहसा विदधीत न क्रियाम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
विप्रस्य भार्या नकुलं पुत्रस्य रक्षार्थं नियुज्य जलाशये स्नातुम् अगच्छत् तदैव सः राज्ञा निमन्त्रितः श्राद्धाय अगच्छत्। सः नकुलं बालके रक्षितुं नियुज्य अगच्छत्। तदैव एकः सर्पः तत्रागतः। नकुलेन सर्पः हतः द्वारे च अगच्छत्। भार्या नकुलम् अपश्यत् बालकस्य हन्तारं च ज्ञात्वा तम् अहनत्। बालकस्य समीपे गते सा अपश्यत् यत् तम नकुलेन हतः एक: सर्पः आसीत्। सा सर्वम् अजानत् यत् तेन अज्ञानात् नकुलः हतः। बालकः तत्र सुरक्षितः आसीत्।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘ब्राह्मणः परम विषादम् अगमत्’ अत्र ‘अगमत्’ क्रियायाः कर्तपदम् अस्ति –
(अ) बालकः
(ब) नकुलः
(स) सर्पः
(द) ब्राह्मण (माधव:)
उत्तरम् :
(अ) बालकः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) तमुपकारकम् नकुलम् अयं किं विशेषण पदम्?
(अ) माधवम्
(ब) सर्पम्
(स) नकुलम्
(द) भार्याम्
उत्तरम् :
(स) नकुलम्

(iii) ‘तथा कृत्वा सः गत:’ अत्र ‘सः’ इति सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(अ) माधवाय
(ब) बालाय
(स) नकुलाय
(द) सर्पाय
उत्तरम् :
(अ) माधवाय

(iv) ‘पुत्रस्य’ इति पदस्य पर्यायपदमस्ति –
(अ) आत्मजस्य
(ब) अपत्यस्य
(स) बालस्य
(द) बालकस्य
उत्तरम् :
(ब) अपत्यस्य

26. देशाटनं मानवायं अतिहितकरम्। देशाटनस्य बहवः गुणाः भवन्ति। नानादेशजलवायु प्रभावेण अस्माकं स्वास्थ्य लाभः भवति। देशान्तर कला कौशल-ज्ञानेन वयं स्वदेशमपि कला कौशल सम्पन्नं कुर्मः अधिकोन्नतस्य देशस्य नागरिकाः प्रायः पर्यटनप्रिया भवन्ति। ब्रिटिश शासनकाले शासकाः भारतीयानाम् देशाटनरुविं नोत्साहयन्ति स्म। भारतीयाश्च प्रेरणां बिना न किमपि कुर्वन्ति इति सर्वविदितम्। परमधुना न वयं परतन्त्राः, अतः शासकानामेतत् कर्तव्यमापद्यते यत्रे भारतीयानां देशाटनं प्रति अभिरुचिं प्रोत्साहयेयुः। अधुना बहवः भारतीयाश्छात्रा अमरीका इङ्गलैण्ड, रूस प्रभृति देशेषु विविध कला कौशल ज्ञानार्जनाय गताः सन्ति। स्वदेशमागत्य ते स्वोपार्जितज्ञानेन स्वदेशामवश्यमेव उन्नमयिष्यन्ति इति जानीमः।

(देशाटन मनुष्य के लिए अति हितकर होता है। देशाटन के बहुत से गुण होते हैं। विविध देशों की जलवायु के प्रभाव से हमें स्वास्थ्य लाभ हो गया है। दूसरे देशों के कला-कौशल के ज्ञान से हम अपने देश को भी कला-कौशल से सम्पन्न करते हैं। अधिक उन्नत देश के नागरिक प्रायः पर्यटन प्रिय होते हैं। अंग्रेजी शासन काल में शासकों ने भारतीयों की देशाटन रुचि को उत्साहित नहीं किया और भारतीय बिना प्रेरणा के कुछ नहीं करते हैं, यह सर्वविदित है। लेकिन अब हम परतन्त्र नहीं हैं। अतः शासकों का यह कर्तव्य हो जाता है कि वे भारतीयों की देशाटन के प्रति अभिरुचि को प्रोत्साहित करें। आजकल बहुत से भारतीय छात्र अमेरिका, इंग्लैण्ड, रूस आदि देशों में विविध कला-कौशल ज्ञानार्जन के लिए गये हुए हैं। अपने देश में आकर वे अपने उपार्जित ज्ञान से अपने देश को अवश्य उन्नत करेंगे, ऐसा हम जानते हैं।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कस्य बहवः गुणाः भवन्ति?
(किसके बहुत से गुण होते हैं?)
(ii) अधिकोन्नतस्य देशस्य नागरिकाः कीदृशाः भवन्ति?
(अधिक उन्नत देश के नगारिक कैसे होते हैं?)
(ii) भारतीयाः कां विना न किमपि कुर्वन्ति?
(भारतीय किसके बिना कुछ नहीं कर सकते?)
(iv) कदा शासकाः भारतीयानां देशाटन रुचिं नोत्साहन्ति स्म?
(कब शासक भारतीयों की देशाटन की रुचि को उत्साहित नहीं करते थे?)
उत्तरम् :
(i) देशाटनस्य
(ii) पर्यटनप्रियाः
(iii) प्रेरणाम्
(iv) ब्रिटिशशासनकाले।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) अस्माकं स्वास्थ्य लाभ: केन भवति?
(हमारा स्वास्थय लाभ किससे होता है?)
(ii) देशान्तरकला कौशल ज्ञाननेन वयं कि कुर्मः?
(दूसरे देश के कला-कौशल के ज्ञान से हम क्या करें?)
(iii) अद्य शासकानां किं कर्त्तव्यम् आपद्यते?
(आज शासकों का क्या कर्त्तव्य आ पड़ा है?)
उत्तरम् :
(i) नानादेश जलवायु प्रभावेण अस्माकं लाभो भवति।
(अनेक देश की जलवायु के प्रभाव से हमको लाभ होता है।)
(ii) वयं स्वदेशमपि कला-कौशल सम्पन्नं कुर्मः।
(हम अपने देश को भी कला-कौशल से संपन्न करें।)
(iii) यत्रे भारतीयानां देशाटनं प्रत्यभि रुचिं प्रोत्साहयेयुः।
(यहाँ भारतीयों की देशाटन के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करें।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
देशाटनस्य महत्वम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
देशाटनेन मनुष्यः स्वास्थ्य लाभ, ज्ञान लाभं, व्यवहार, कलाकौशलं च प्राप्य स्वदेशं च वर्धयति। यदा वयं परतन्त्राः आसन् तदा देशाटनाय रुचिः नासीत् परञ्च इदानीं तु वयं स्वाधीना स्मः अतएव अनेके भारतीयाः छात्रा अध्येतुम् अन्य देशान् गच्छन्ति तथा ज्ञान, कला, संस्कृति च ज्ञात्वा स्वदेशं संवर्धयन्ति।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘नागरिकाः प्रायः पर्यटनप्रियाः भवन्ति’ अत्र ‘भवन्ति’ क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति –
(अ). नागरिकाः
(ब) प्रायः
(स) पर्यटन
(द) प्रियाः
उत्तरम् :
(अ). नागरिकाः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) ‘अनेक’ जनाः अत्र विशेषणपदमस्ति –
(अ) बहवः
(ब) प्रायः
(स) जनाः
(द) विना।
उत्तरम् :
(स) जनाः

(iii) ‘ते अध्येतुम् गच्छन्ति’ अत्र ‘ते’ सर्वनामपदस्य संज्ञापद भवति –
(अ) तेन
(ब) अध्येतुम्
(स) गच्छन्ति
(द) छात्रा
उत्तरम् :
(द) छात्रा

(iv) ‘स्वतन्त्रता’ इति पदस्य विलोमार्थक पदम् अस्ति –
(अ) परतन्त्राः
(ब) देशान्तरम्
(स) शासकाः
(द) भारतीयाः
उत्तरम् :
(अ) परतन्त्राः

27. आतङ्कवादः आधुनिक विश्वस्य गुरुतमा समस्या अस्ति। संसारस्य प्रत्येकं देशः आतङ्कवादेन येन केन प्रकारेण पीडितः अस्ति। आतङ्कवादः विनाशस्य सा लीला या विश्वं ग्रसितुं तत्परा अस्ति। आतङ्कवादेन विश्वस्य अनेकानि क्षेत्राणि रक्तविलिप्तानि सन्ति। अनेन अनेके निर्दोषाः जनाः प्राणान् अत्यजन्। महिलाः विधवाः जाताः। बालाश्च अनाथाः अभवन्। सर्वशक्तिमान् अमेरिकादेशोऽपि अनेन सन्तप्तः अस्ति। भारतदेशस्तु आतङ्कवादेन्य अनेकैः वर्षेः पीड़ितः वर्तते। आतलवादस्य राक्षसस्य विनाशाय मिलित्वा एव प्रयत्नाः समाधेयां: अन्यथा एषा समस्या सुरसा मुखम् इव प्रतिदिनं वृद्धिं पास्यति।

(आतङ्कवाद आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। संसार का प्रत्येक देश आतङ्कवाद से जिस किसी भी प्रकार से पीड़ित है। आतङ्कवाद विनाश की वह लीला है जो संसार को ग्रसित करने के लिए तत्पर है। आतङ्कवाद से संसार के अनेक क्षेत्र रक्त से लथपथ हैं। इससे अनेक निर्दोष लोगों ने प्राणों को त्याग दिया। महिलाएं विधवा हो गई । बच्चे अनाथ हो गये। सर्वशक्तिमान अमेरिका देश भी इससे सन्तप्त है। भारत देश तो आतङ्कवाद से अनेकों वर्षों से पीड़ित है। आतवाद में तो वे ही लोग सम्मिलित हैं जो स्वार्थपूर्ति करना चाहते हैं और संसार में अशान्त वातावरण देखना चाहते हैं। शान्तिप्रिय देशों द्वारा आतङ्कवाद के असुर के विनाश करने के लिए मिलकर प्रयत्न करना चाहिए, अन्यथा यह समस्या सुरसा के मुख की तरह से प्रतिदिन बढ़ती जायेगी।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) आधुनिक विश्वस्य गुरुतमा समस्या का?
(आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी समस्या क्या है?)
(i) आतङ्कवादस्य प्रमुख कारणं किम् उक्तम्?
(आतंकवाद का प्रमुख कारण क्या कहा गया है?)
(iii) आतङ्कवादः किमिव प्रतिदिनं बुद्धिं यास्यति?
(आतंकवाद किसकी तरह प्रतिदिन वृद्धि को प्राप्त होगा?)
(iv) अनुच्छेदे कः देशः सर्वशक्तिमान् इति उक्तः?
(अनुच्छेद में किस देश को सर्वशक्तिमान् कहा गया है?)
उत्तरम् :
(i) आतङ्कवादः
(ii) स्वार्थः
(iii) सुरसामुखमिव
(iv) अमेरिकादेशः।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत- (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) आतङ्कवादः कीदृशी लीला अस्ति?
(आतङ्कवाद कैसी लीला है?)
(ii) शान्तिप्रियैः देशैः आतङ्कवादस्य समस्या समाधानुं किं कर्त्तव्यम्?
(शान्तिप्रिय देशों को आतंकवाद की समस्या के समाधान के लिए क्या करना चाहिए?)
(iii) आतङ्कवादे के जनाः सम्मिलिताः भवन्ति?
(आतंकवाद में कौन लोग सम्मिलित होते हैं?)
उत्तरम् :
(i) आतङ्कवादः विनाशस्य लीला या विश्वं ग्रसितुं तत्परा अस्ति।
(ii) सर्वेः मिलित्वा एव प्रयत्नाः समाधेयाः।
(iii) आतङ्कवादे तु एव जनाः सम्मिलिताः, ये स्वार्थपूर्ति कर्तुम् इच्छन्ति, संसारे च अशान्तेः वातावरणं द्रष्टुम् इच्छन्ति।

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
आतङ्कवादः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
आतङ्कवादेन प्रत्येकं देशः पीडितः। आतङ्कवादः विनाश लीलां कुर्वन् रक्तविलिप्तानि करोति। निर्दोष जनाः निष्प्राणाः भवन्ति। समर्थैः देशैः एषा समस्या समाधेया। एषः सुरसा-मुखमेव प्रतिदिनं वर्धते एव।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘ये स्वार्थपूर्तिम् इच्छन्ति’ अत्र ‘इच्छन्ति’ क्रियापदस्य कर्तृपदमस्ति –
(अ) अनेके
(ब) ये
(स) निर्दोषाः
(द) अनाथाः
उत्तरम् :
(ब) ये

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(ii) विश्वस्य गुरुतरा समस्या अस्ति। अत्र ‘गुरुतमा’ इति पदं कस्य पदस्य विशेषणम्?
(अ) विश्वस्य
(ब) समस्यायाः
(स) अस्ति
(द) गुरु
उत्तरम् :
(ब) समस्यायाः

(ii) ‘अनेन सन्तप्तः अस्ति’ अत्र अनेन सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम् –
(अ) विनाशेन
(ब) आतङ्वादेन
(स) समस्यया
(द) पीडिता
उत्तरम् :
(स) समस्यया

(iv) ‘लघुतमा’ इति पदस्य विलोमपदं गद्यांशेऽस्ति –
(अ) गुरुतमा
(ब) समस्या
(स) तत्परा
(द) अन्यथा
उत्तरम् :
(अ) गुरुतमा

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

28. दीपावली अस्माकं राष्ट्रियोत्सवः वर्तते। अस्मिन् उत्सवे सर्वेजनाः परस्परं भेदभावं विस्मृत्य आनन्दमग्नाः भवन्ति। त्रेतायुगे कैकेय्याः वरयाचनात् अयोध्यायाः राज्ञा दशरथेन रामाय चतुर्दशानां वर्षाणां वनवासः प्रदत्तः। श्रीरामः अस्मिन्नेव दिवसे सीतालक्ष्मणाभ्यां सह अयोध्या प्रत्यावर्तितवान्। तान् स्वागतं व्याहतम् अयोध्यावासिनः नगरे सर्वत्र दीपा प्रज्वलितवन्तः। तदा आरभ्य अधावधि प्रतिवर्ष कार्तिक मासे अमावस्यायां तिथौ भारते दीपावली महोत्सवः महता उत्साहेन आयोजितः भवति। दीपावल्या जनाः गृहाणि परिष्कर्वन्ति। अस्मिन्नवसरे ते स्वमित्रेभ्यः बन्धुभ्यश्च उपहारान् यच्छन्ति, परस्परम् अभिनन्दन्ति च। बालकेभ्यः मिष्ठान्नं यच्छन्ति । सर्वेजनाः लक्ष्मी-गणेशयोः पूजनं कुर्वन्ति। पितरः स्व सन्ततिभ्य स्फोटकानि ददति। अस्मिन् महोत्सवे सर्वे सर्वेभ्यः सुखाय समृखये च शुभेच्छाः प्रकटयन्ति।

(दीपावली हमारा राष्ट्रीय उत्सव है। इस उत्सव में सभी लोग आपस में भेदभाव भूलकर आननदमग्न हो जाते हैं। त्रेतायुग में कैकेई के वर माँगने के कारण अयोध्या के राजा दशरथ ने राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास दिया। श्रीराम इसी दिन सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापिस लौटे थे। उनका स्वागत करने के लिए अयोध्यावासियों ने सब जगह दीप जलाये। तभी से लेकर आज तक प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में अमावस्या को भारत में दीपावली महोत्सव महान् उत्साह के साथ आयोजित होता है। दीपावली पर लोग घरों की सफाई करते हैं। इस अवसर पर वे अपने मित्रों और भाई-बन्धुओं के लिए उपहार प्रदान करते हैं और परस्पर अभिनन्दन करते हैं। बालकों के लिए मिठाइयाँ दी जाती हैं। सभी लोग लक्ष्मी-गणेश का पूजन करते हैं। माता-पिता अपनी सन्तान को पटाखे देते हैं। इस महोत्सव पर सभी सबके लिए सुख और समृद्धि के लिए शुभेच्छाएँ प्रकट करते हैं।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) कस्याः वरयाचनात् दशरथेन रामाय वनवास प्रदत्तः?
(किसके वर माँगने के कारण दशरथ ने राम के लिए वनवास प्रदान किया।)
(ii) श्रीरामः काभ्यां सह अयोध्यां प्रत्यावर्तितवान्?
(श्रीराम किनके साथ अयोध्या लौटे?)
(iii) कदा जनाः गृहाणि परिष्कुर्वन्ति?
(कब लोग घरों की सफाई करते हैं?)
(iv) पितरः स्वसन्ततिभ्यः कानि ददति?
(माता-पितादि अपनी सन्तान को क्या देते हैं ?)
उत्तरम् :
(i) कैकेय्याः
(ii) सीतालक्ष्मणाभ्याम्
(ii) दीपावल्याम्
(iv) स्फोटकानि।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) सर्वेजनाः किं विस्मृत्य आनन्दमग्नाः भवन्ति?
(सब लोग क्या भूलकर आनन्दमग्न हो जाते हैं? )
(ii) दशरथेन रामाय कति वर्षाणां वनवासः प्रदत्तः।
(दशरथ ने राम को कितने वर्ष का वनवास दिया?)
(iii) भारते कदा दीपावली महोत्सवः आयोजितः भवति?
(भारत में कब दीपावली का त्योहार आयोजित होता है?)
उत्तरम् :
(i) सर्वेजनाः परस्परं भेदभावं विस्मृत्य आनन्दमग्नाः भवन्ति।
(सब लोग परस्पर भेदभाव को भूलकर आनन्दमग्न होते हैं।)
(ii) दशरथेन रामाय चतुर्दशानां वर्षाणां वनवासः प्रदत्तः।
(दशरथ ने राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास दिया।)
(iii) भारते प्रतिवर्ष कार्तिक मासे अमावस्यायां तिथौ दीपावली महोत्सवः आयोजितः भवति।
(भारत में प्रतिवर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को दीपावली महोत्सव आयोजित होता है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
दीपावली-महोत्सवः।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
दीपावली उत्सवे सर्वेजनाः उच्चनीचयोः भेद-भावं त्यक्त्वा महता उत्साहने महोत्सव आयोजयन्ति। पितुः दशरथस्या देशेन वनं गतः रामः यदा अयोध्याम्आगच्छत् तदा सर्वे अयोध्यावासिनः दीपान् प्रज्वाल्य स्वागतंमकुर्वन्। ततः अस्मिन् अवसरे जनाः गृहाणि परिष्कुर्वन्ति, सज्जयन्ति, उपहारान् यच्छन्ति, अभिनन्दन्ति, बालकेभ्यः मिष्ठान्नं वितरन्ति ‘सर्वे सर्वेभ्यः वर्धापनं वितरन्ति।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘मिष्ठान्नं यच्छन्ति’ अत्र किं क्रियापदम् –
(अ) मिष्ठान्नम्
(ब) यच्छन्ति
(स) पूजनं कुर्वन्ति
(द) स्फोटकानि ददति
उत्तरम् :
(ब) यच्छन्ति

(ii) ‘राष्ट्रीयोत्सवः’ इत्यत्र किं विशेषण पदम् –
(अ) राष्ट्रीयः
(ब) उत्सवः
(स) दीपावली
(द) महोत्सवः
उत्तरम् :
अ) राष्ट्रीयः

(iii) ‘अस्मिन् अवसरे’ अत्र अस्मिन्’ इति सर्वनामपदं कस्य स्थाने प्रयुक्तम् –
(अ) उत्सवे
(ब) त्रेतायुगे
(स) दीपावल्याम्
(द) महोत्सवम्
उत्तरम् :
(स) दीपावल्याम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘स्मृत्वा’ इति पदस्य विलोमपदं गद्यांशेऽस्ति –
(अ) विस्मृत्वा
(ब) स्मृत्वा
(स) विस्मृत्य
(द) व्याहृत्य
उत्तरम् :
(स) विस्मृत्य

29. तस्य परिवारस्य आर्थिक स्थितिः समीचीना नासीत्। सः न्यूनातिन्यून समये अधिकाधिकपुस्तकानाम् अध्ययनं करोति स्म। 11 वर्षात्मके वयसि सः कुमारसम्भवम् रघुवंशादि साहित्यिक ग्रन्थानां व्याख्या कर्तुं समर्थः अभवत्। कक्षायां प्रथम स्थानं लब्धवान्। अस्मात् कारणात् शासनेन तस्मै छात्रवृत्तिः प्रदत्ता। सः स्व-अपेक्षया अपि अधिकम् अभावग्रस्तं जीवनं यः छात्र जीवति स्म तस्य सहाय्यं करोति स्म।।

एकदा सः मातरम् उक्तवान्-अम्बगृहस्य सर्वाणि कार्याणि त्वमेकाकीरोषि, कोऽपि सेवकः नास्ति। अतः अद्य आरभ्य अहमेव भोजनं पक्ष्यामि। माता पुत्रस्य निश्चयं दृष्ट्वा आह्लादिता अभवत्। भोजन पाकात् अतिरिच्य सः गृहनिर्मितं वस्त्र धृत्वा अपि धनस्य सञ्चय करोति स्म। सञ्चितं धनम् अपरेषां सहाय्यार्थं व्ययं करोति स्म। अयम् ईश्वरचन्द्रः विद्यासागर अग्रे महान् त्यागी सेवाभावी श्रमनिष्ठः च अभवत्।।

(उस परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वे थोड़े से थोड़े समय में अधिक से अधिक पुस्तकों का अध्ययन करते थे। ग्यारह वर्ष की उम्र में वे कुमारसंभव, रघुवंश आदि साहित्यिक ग्रन्थों की व्याख्या करने के लिए समर्थ हो गये थे। कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, इस कारण से सरकार ने उनके लिए छात्रवृत्ति प्रदान की। वे अपनी अपेक्षाकृत अधिक अभावग्रस्त जीवन जो छात्र जी रहे थे, उनकी सहायता करते थे।

एक दिन वे’माँ से बोले- माँ घर के सारे काम तुम अकेली ही करती हो, कोई नौकर नहीं है। अतः आज से लेकर मैं ही भोजन पकाऊँगा। माता पुत्र के निश्चय को देखकर आह्लादित हुई। भोजन पकाने के अलावा वह घर में बने हुए वस्त्र पहनकर भी धन संचय करते थे। संचित धन का दूसरों की सहायता के लिए व्यय करते थे। ये ईश्वरचन्द्र विद्यासागर आगे चलकर महान त्यागी, सेवाभावी और परिश्रमी हुए।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) विद्यासागरः कक्षायां किं स्थान प्राप्तवान्?
(विद्यासागर ने कक्षा में कौन-सा स्थान प्राप्त किया?)
(ii) विद्यासागराय केन छात्रवृत्तिः प्रदत्ता?
(विद्यासागर को किसने छात्रवृत्ति दी?)
(iii) विद्यासागरस्य निर्णयं श्रुत्वा माता किमन्वभवत्?
(विद्यासागर के निर्णय को सुनकर माता ने कैसा अनुभव.किया?)
(iv) विद्यासागरः कीदृक् वस्त्राणि धारयति स्म?
(विद्यासागर कैसे वस्त्र पहनते थे?)
उत्तरम् :
(i) प्रथमम्
(ii) शासनेन
(iii) आह्लादम्
(iv) गृहनिर्मितानि।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) विद्यासागरः कथम् अध्ययनं करोति स्म?
(विद्यासागर कैसे अध्ययन करता था?)
(ii) एकादश वर्षदेशीयोऽसौ किं कर्तुं समर्थेऽभवत्?
(ग्यारह वर्ष की उम्र में वह क्या करने में समर्थ हो गया?)
(iii) विद्यासागरः स्वः अर्जितं धनं कथं व्ययते स्म?
(विद्यासागर अर्जित धन को कैसे खर्च करता था?)
उत्तरम् :
(i) सः न्यूनातिन्यून समये अधिकाधिक पुस्तकानाम् अध्ययनं करोति स्म।
(वह कम से कम समय में अधिकाधिक पुस्तकों का अध्ययन करता था।)
(ii) एकादश वयसि सः कुमारसम्भवम् रघुवंशादि साहित्यिक ग्रन्थानां व्याख्यां कर्तुं समर्थः अभवत्। (ग्यारह
वर्ष की उम्र में उसने कुमारसंभव, रघुवंश आदि साहित्यिक ग्रंथों की व्याख्या करने में समर्थ हो गया।)
(iii) सः अर्जितं धनं स्व अपेक्षया अपि अधिकं अभावग्रस्तं जीवनं य छात्रः जीवति स्म तस्य सहाय्यं करोति स्म।’
(वह अर्जित धन को अपनी अपेक्षा अधिक अभावग्रस्त जीवन वाले जो छात्र थे, उनकी सहायता करते थे।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
ईश्वरचन्द्र विद्यासागरस्य महनीयता।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
ईश्वर चन्द्र विद्यासागरः बाल्यकाले निर्धनः आसीत्। अल्पकाले एव प्रभूतं साहित्यं पठति स्म। एकादशवर्षे कुमार सम्भवस्य टीका सम्पादितवान्। सः छात्रवृत्ति प्राप्तवान् परन्तु अन्येषामपि सहाय्यं करोति स्म। माता नाधिकपीडिता भवेत् अतः भोजनं स्वयमेव पचति स्म। गृहनिर्मितं वस्त्रं धारयति स्म। सञ्चितं धनं अन्येभ्यः निर्धनेभ्य एव ददाति स्म।।

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘भोजनं पक्ष्यामि’ अत्र ‘पक्ष्यामि’ क्रियापदस्य कर्ता अस्ति
(अ) माता
(ब) श्रमनिष्ठ
(स) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर (अहम)
(द) शिष्य
उत्तरम् :
(स) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर (अहम)

(ii) ‘अभावग्रस्तं जीवनम्’ इत्यत्र विशेषण पदमस्ति –
(अ) जीवनम्
(ब) अभावग्रस्तम्
(स) अभाव
(द) ग्रस्तम्
उत्तरम् :
(ब) अभावग्रस्तम्

(iii) ‘तस्य परिवारस्य’ अत्र ‘तस्य’ इति सर्वनाम पदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(अ) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
(ब) सेवाभावी
(स) कर्मनिष्ठ
(द) परिवारस्य
उत्तरम् :
(अ) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘माता’ इति पदस्य विलोम पदं अस्ति –
(अ) जननी
(ब) पिता
(स) अम्बा
(द) भगिनी
उत्तरम् :
(ब) पिता

30. भारतीय संविधानस्य निर्माणं 1949 ईसवीये वर्षे नवम्बर मासस्य 26 दिनाङ्के सम्पन्नमभवत्। 1950 ईसवीये वर्षे जनवरी मासस्य 26 दिनांके देशेन स्वीकृतम्। संविधान सभायाः अध्यक्षः डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रारूपाध्यक्षः डॉ. भीमराव अम्बेडकरश्चासीत्। अस्माकं संविधानं विश्वस्य विशालं संविधानमस्ति। लिखिते अस्मिन् संविधाने 395 अनुच्छेदाः 10 अनुसूच्यश्च सन्ति। अस्माकं संविधानं सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्नं पंथनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्यस्य स्वरूपं देशस्य कृते प्रददाति। अत्रत्यं लोकतन्त्र संसदीय व्यवस्थानुरूपं कार्यं करोति यत्र नागरिकाणां मूलाधिकाराः कर्त्तव्याणि च लिखितानि सन्ति। अस्माकं संविधानम् न्यायिक-पुनरवलोकनस्य अधिकारमपि अस्मभ्यं प्रददाति। समये-समये आवश्यकताम् अनुभूय अस्मिन् संविधाने परिवर्तनम् संशोधनं च भवति। इदानं संशोधनानि जातानि।

(भारतीय संविधान का निर्माण सन् 1949 ई. वर्ष में नवम्बर माह की 26 तारीख को सम्पन्न हुआ। सन् 1950 ई. वर्ष में 26 जनवरी को देश ने इसे स्वीकार किया। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और प्रारूपाध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। हमारा संविधान विश्व का विशाल संविधान है। इस लिखित संविधान में 395 अनुच्छेद और 10 अनुसूचियाँ हैं। हमारा संविधान सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न (सम्प्रभुतासम्पन्न) सम्प्रदाय-निरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य का स्वरूप देश के लिए प्रदान करता है।

यहाँ का लोकतन्त्र संसदीय व्यवस्था के अनुरूप कार्य करता है। जहाँ पर नागरिकों के मूल अधिकार और कर्त्तव्य लिखे हुए हैं। हमारा संविधान न्यायिक पुनरावलोकन का भी हमें अधिकार प्रदान करता है। समय-समय पर आवश्यकता का अनुभव करके इस संविधान में परिवर्तन और संशोधन भी होते हैं। अभी तक 80 संशोधन हो चुके हैं।)

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(i) भारतीय संविधानस्य निर्माणं कदा सम्पन्नं अभवत्?
(भारतीय संविधान का निर्माण कब सम्पन्न हुआ?)
(ii) भारतीय संविधान राष्ट्रिण कदा स्वीकृतम्?
(भारतीय संविधान राष्ट्र ने कब स्वीकार किया?)
(iii) संविधान सभायाः अध्यक्षः कः आसीत्?
(संविधान सभा का अध्यक्ष कौन था?)
(iv) संविधान सभायां डॉ. भीमराव अम्बेडकरस्य किं पदम् आसीत्?
(संविधान सभा में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का क्या पद था ?)
उत्तरम् :
(i) 26 नवम्बर 1949 ई. तमे
(ii) 26 जनवरी 1950 ई. वर्षे
(iii) डॉ. राजेन्द्र प्रसादः
(iv) प्रारूपाध्यक्षः

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 2.
पूर्णवाक्येन उत्तरत – (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए-)
(i) अस्माकं लिखिते संविधाने कति अनुच्छेदाः अनुसूचयश्च सन्ति?
(हमारे लिखित संविधान में कितने अनुच्छेद और अनुसूचियाँ हैं?)
(ii) अस्माकं संविधानं देशस्य कृते कीदृशं स्वरूपं प्रददाति?
(हमारा संविधान देश के लिए कैसा स्वरूप प्रदान करता है?)
(iii) अत्रत्यं लोकतन्त्रं कथं कार्यं करोति? (यहाँ का लोकतन्त्र कैसे काम करता है?)
उत्तरम् :
(i) अस्माकं लिखिते संविधाने 395 अनुच्छेदाः 10 अनुसूच्यः च सन्ति।
(हमारे लिखित संविधान में 395 अनुच्छेद और 10 अनुसूची हैं।)
(ii) अस्माकं संविधानं सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्नं पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्यस्य स्वरूपं देशस्य कते प्रददाति।
(हमारा संविधान संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक-गणराज्य का स्वरूप देश के लिए प्रदान करता है।)
(iii) अत्रत्यं लोकतन्त्रं संसदीय व्यवस्थानुरूपं कार्यं करोति।
(यहाँ का लोकतंत्र संसदीय व्यवस्था के अनुरूप कार्य करता है।)

प्रश्न 3.
अस्य अनुच्छेदस्य उपयुक्तं शीर्षकं लिखत।
(इस अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।)
उत्तरम् :
अस्माकं संविधानम्।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त गद्यांशस्य संक्षिप्तीकरणं कुरुत।
उत्तरम् :
भारतीय संविधानस्य निर्माणं 26-11-1949 तमे स्वीकृतिश्च 26-1-1950 दिनाङ्के अभवत्। लिखितेऽस्मिन् संविधाने अनुच्छेदाः 395 अनुसूच्यश्च 10 सन्ति। विश्वस्य विशालं संविधानं सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्नं पंथनिरपेक्षं लोकतान्त्रिक गणराज्यस्य स्वरूपाय देशाय प्रददाति। अत्र नागरिकाणां मूलाधिकाराः कर्त्तव्यानि च सन्ति। एषः न्यायिक पुनरावलोकनस्य अधिकारं ददाति परिवर्तनीय संशोधनीय परिवर्धनीय च अस्ति।

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

प्रश्न 5.
यथानिर्देशम् उत्तरत – (निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-)
(i) ‘अधिकारमपि अस्मभ्यं ददाति’ अत्र ‘ददाति’ क्रियायाः कर्तामस्ति –
(अ) अधिकारम्
(ब) अस्मभ्यं
(स) संविधानम्
(द) देश:
उत्तरम् :
(स) संविधानम्

(ii) ‘सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्नम्’ अत्र विशेषणपदमस्ति –
(अ) सम्पूर्णम्
(ब) प्रभुत्वसम्पन्नम्
(स) संविधानम्
(द) देशः
उत्तरम् :
(अ) सम्पूर्णम्

(iii) ‘अस्माकं संविधानम् अत्र ‘अस्माकम्’ इति सर्वनामपदस्य स्थानने संज्ञा पदं भविष्यति –
(अ) भारतीयानाम्
(ब) सांसदानाम्
(स) अधिकारिणाम्
(द) संविधान सभा-सदस्याणाम्
उत्तरम् :
(अ) भारतीयानाम्

JAC Class 10 Sanskrit अपठित-अवबोधनम् अपठित गद्यांशः

(iv) ‘संसारस्य’ इति पदस्य स्थाने किं पर्याय पदं प्रयुक्तम्?
(अ) जगतः
(ब) विश्वस्य
(स) संविधानस्य
(द) मासस्य
उत्तरम् :
(ब) विश्वस्य

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 Food Security in India

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 Food Security in India

→ Meaning of Food Security

  • Food is as essential for living as air is for breathing.
  • Food security means availability, accessibility and affordability of food to all people at all times.
  • Food security depends on the Public Distribution System and government vigilance ana action at times when this security is threatened.
  • Food security is ensured in a country only if: (i) enough food is available for all the persons (ii) All persons have the capacity to buy food of acceptable quality and (iii) These is no barrier on access to food.

→ Why Food security

  • The poorest section of the society might be food insecure most of the times while persons above the poverty line might also be food insecure when the country faces a national disaster.
  • The most devastating famine that occurred in Independent India was the ’Famine of Bengal’ in 1943.
  • Nothing like the Bengal Famine has happened in India again but there are places like Ralahandi and Kashipur in Odisha where famine-like conditions have been eyisting for many years.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 Food Security in India

→ Who are Food Insecure

  • The worst-affected groups suffering from food and nutrition insecurity in Inuia are landless people, traditional artisans, providers of traditional servicer, petty self -employed workers and beggars.
  • The people affected by natural disasters who have to migrate to other areas in search of work are also among the most food-insecure people.
  • The food-insecure people are disproportionately large in the states of Uttar Pradesh (eastern mid southeastern parts), Bihar, Jharkhand, Odisha, West Bengal, Chattisgarh, parts of Madhya Pradesh and Maharashtra.
  • The attainment of food security involves eliminating current hunger and reducing the risks of future hunger.
  • There are two aspects of hunger: (i) Chronic, hunger, (ii) Seasoned hunger.
  • After independence Indian policy makers adopted all measures to achieve self-sufficiency in food grains
  • India adopted a new strategy in agriclture which resulted in the Green Revolstion

→ Feed Security in India

  • The Government has designed a food- security system. This system has two components: (a) Buffer Stock, (b) Public Distribution System.
  • The Food Corporation of India purchaser wheat and rice from the farmers in stetaf where there is surplus production, and stores it in warehouses. It is known as Buffer Stock.
  • The food procured by the Food Corporation of India (FCI) is distributed through government regulated ration shops among the poorer sections of the society. This is called the Public Distribution System.
  • The introduction of Rationing in India dates back to the 1940s against the backdrop of the Bengal Famine.
  • In the wake of the high incidence of poverty levels, three important food intervention programmes were introduced: (i) Public Distribution System, (ii) Integrated Child Development Services, (iii) Food for Work Programme.

→ Current Status of Public Distribution System

  • In the beginning, the coverage of PDS was universal with no discrimination between the poor and non-poor.
  • Over the years, the policy related to PDS has been revised to make it more efficient and targetted.
  • In 1992, a Revamped Public Distribution System (RPDS) was started in 1700 blocks of the country to provide the benefits of PDS in remote and backward areas.
  • In 1997, a Targetted Public Distribution System (TPDS) was introduced to target the poor in all areas’, with a lower issue price for foodgrains for them compared to the price paid by non-poor people.
  • Further in year 2000, two special Schemes—Antyodaya Anna Yojana (AAY) and Annapurna Scheme (APS) were launched.
  • In 2014, the stock of wheat and rice with FCI was 65.3 million tonnes which was much more than the minimum buffer aorms.
  • The rising minimum support prices have raised the cost of procuring food grains by the government.
  • PDS dealers are sometimes found resorting to malpractices like diverting the grains to open market to get better margin, selling poor quality grains at ration shops, irregular opening of the shops, etc.

→ Role of Cooperatives in food security

  • The role played by cooperatives in food security of India is important especially in the southern and western parts of the country.
  • The cooperative societies set up shops to sell low—priced goods to poor people.
  • In Delhi, Mother Dairy is making good progress in providing milk and vegetables to the consumers at controlled rates decided by government of Delhi.
  • Amul is another success story of cooperatives in milk and milk products from Gujarat. It has brought about the white revolution in the country.
  • In Maharashtra, Academy of Development Science (ADS) has facilitated a network of NGOs for setting up grain banks in different regions.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 Food Security in India

→ Food Security: Food security means availability, accessibility and affordability of food to all people at all times.

→ Availability of Food: It means food production within the country, food in ports and the previous years’ stock stored in government granaries.

→ Accessibility of food: It means food is within reach of every person

→ Availability of Food: It means food production within the country, food in ports and the previous years’ stock stored in government granaries.

→ Accessibility of food: It means food is within reach of every person

→ Calamity: An event causing great and often sudden damage or distress, e.g. flood, drought, famine, etc.

→ Drought A prolonged period of abnormally low rainfall, leading to a shortage of water.

→ Famine: It is a situation in which large number of people have little or no food and many of them die.

→ Malnutrition is a condition that results from eating a diet in which certain nutrients are lacking or in wrong proportions.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 Food Security in India

→ Buffer stock: It is the stock of food grains (wheat and rice) procured by government (through FCI) from surplus producing states for distribution (through PDS) to deficit states and the poorest section of society.

→ Food Corporation of India (FCI) lt is an organization created and run by the Government of India. Its function is to maintain sufficient buffer stock in the country and affect price stabilisation.

→ Minimum Support Price (MSP): Tt is declared by the government every year before the sowing season to provide incentives to the farmers for raising the production of these crops.

→ Public Distribution System (PDS) The system of distribution of food procured by the FCI among the poorer section of society is called the public distribution system (PDS).

→ Ration Shops: Ration shops keep stock of food grains, sugar and kerosene oil to be sold to people at a price lower than the market price.

→ Subsidy: Subsidy is a payment that a government makes to a producer to supplement the market price of commodity.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge 

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Introduction

  • Poverty is one of the most difficult challenges faced by independent India.
  • Poverty trends in India and the world are illustrated through the concept of the poverty line.
  • The poor could be landless labourers in villages or people living in overcrowded slums in cities. They could be daily wage workers at construction sites or child workers in roadside eateries. They could also be beggars with children in tatters.
  • Every fourth person in India is poor. This means roughly 270 million (Or 27 Crore) people in India live in poverty (2011-12).
  • India is the largest single country of the poor in the world.
  • Mahatma Gandhi always insisted that India would be truly independent only when the poorest of its people become free from human suffering.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Poverty as seen by social scientists

  • Social scientists analyse poverty from many aspects besides levels of income and consumption. These aspects are: (i) Poor level of literacy (ii) lack of general resistance due to malnutrition, (iii) Lack of faccess to healthcare, (iv) Lack of job opportunities (v) Lack of access to safe drinking water, sanitation, etc.

→ Indicators for poverty

  • The most commonly used indicators for poverty analysis are social exclusion and vulnerability.

→ Social exclusion

  • Social exclusion means living in a poor surrounding with poor people, excluded from enjoying social equality with better-off people in better surroundings.
  • In India, caste system is based on social exclusion. People belonging to certain castes were prevented from enjoying equal opportunities. This caused more poverty than that caused by lower income.

→ Vulnerability

  • Vulnerability to poverty is a measure, which describes the greater probability of certain communities of becoming or remaining poor in the coming time, e.g. members of a backward caste or individual like widow or a physically handicapped person.
  • Vulnerability is determined by various options available to different communities in terms of assets, education, job, health, etc and analyses their ability to face various risks like natural disasters.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Poverty line

  • Poverty line is an imaginary line used by any country to determine its poverty. It varies from time to time, place to place and country to country.
  • The most common method of determining poverty is income or consumption levels.
  • A person is considered poor if his or her income or consumption level falls belong a given minimum level necessary to fulfil their basic needs.
  • In India, the present formula for food requirement while estimating the poverty line is based on the desired calorie requirement.
  • The calorie needs vary depending on age, sex and the type of work that a person does.
  • The accepted average of calorie requirement in India is 2400 calories per person per day in rural areas and 2100 calories per person per day in urban areas.
  • The poverty line is estimated periodically (normally every five years) by conducting sample surveys. These surveys are carried out by the National Sample Survey Organisation (NSSO).

→ Poverty Estimates

  • There is decline in poverty ratios in India from about 45% in 1993-94 to 37.2% in 2004-05.
  • The percentage of people living under poverty line declined in the earlier two decades (1973-1993). The number of poor declined from 407 million in 2004-05 to 270 million in 2011-12.

→ Vulnerable Groups

  • The proportion of people below poverty line is also not same for all social groups and economic categories in India.
  • Social groups which are most vulnerable to poverty are scheduled caste and scheduled tribe households.
  • The most vulnerable economic groups are the rural agricultural labourer households and the urban casual labourer households.
  • There is also inequality of incomes within a family.
  • In poor families all suffer but women, elderly people and female infants suffer more than others.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Inter-state Disparities

  • The proportion of poor people is not the same in every state.
  • In 2011-12 estimates, all India Head Count Ratio (HCR) was 21.9%.
  • The states like Madhya Pradesh. Assam, Uttar Pradesh, Bihar and Odisha had a higher poverty level than the all-India average.
  • Bihar and Odisha continue to be the two poorest states with poverty ratios of 33.7% and 32.6% respectively.
  • Along with rural poverty, urban poverty is also high in Odisha, Madhya Pradesh, Bihar and Uttar Pradesh.
  • Punjab and Haryana have succeeded in reducing poverty with the help of high agricultural growth rates.
  • Kerala has focussed more on human resource development.
  • In West Bengal, land reform measures have helped in reducing poverty.
  • In Andhra Pradesh and Tamil Nadu public distribution of foodgrains could have been responsible for the improvement.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Global Poverty Scenario

  • Although, extreme economic poverty has reduced in the world from 36% in 1990 to 10% in 2015 (as per the World Bank), still there are vast regional differences.
  • Poverty declined substantially in China and South East Asian countries as a result of economic growth and massive investments in human resource development.
  • In the countries of South Asia the decline in poverty levels has not been as rapid.
  • Poverty has also resurfaced in some of the former socialist countries like Russia where officially it was non-existent earlier.
  • One historical reason for the widespread poverty in India is the low level of economic development under the British colonial administration.
  • The failure at both the fronts : promotion of economic growth and population control has perpetuated the cycle of poverty in India.
  • With the extension of irrigation and the Green Revolution, many job opportunities were created in the agricultural sector.
  • The industries did provide some jobs but these were not enough to absorb all the job seekers.
  • The huge income inequalities has been another feature of high poverty rates.
  • The major cause of poverty in India has been lack of land resources.
  • In order to fulfil social obligations and observe religious ceremonies, people in India, including the very poor, spend a lot of money.
  • The high level of indebtedness is both the cause and effect of poverty.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Anti-Poverty Measures

  • Removal of poverty has been one of the major objectives of Indian development strategy.
  • The current anti-poverty strategy of the government is based on two measures: (i) promotion of economic growth, (ii) targetted anti-poverty programmes.
  • Since the eighties, India’s economic growth has been one of the fastest in the world.
  • There is a strong link between economic growth and poverty reduction
  • Economic growth increases opportunities and provides the resources needed to invest in human development. However, the poor may not be able to take direct advantage of the opportunities created by economic growth.
  • Growth in the agricultural sector is much below expectations.
  • Many schemes were formulated to reduce poverty directly and indirectly. Some of them are as mentioned below:
    • Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 (MNREGA): Aims to provide 100 days of wage employment to every household to ensure livelihood security in rural areas.
    • Prime Minister Rozgar Yojana (PMRY), 1993: The aim of the programme is to create self-employment opportunities for educated unemployed youth in rural areas and small towns.
    • Rural Employment Generation Programme (REGP), 1995: The aim of the programme is to create self-employment opportunities in rural areas and small towns.
    • Swaranajayanti Gram Swarozgar Yojana, 1999 (SGSY): The programme aims at bringing the assisted poor families above the poverty line by organising them into self-help groups through a mix of bank credit and government subsidy.
    • Pardhanmantri Gramodaya Yojana (PMGY), 2000: Under this, additional central assistance is given to states for basic services such as primary health, primary education, rural shelter, rural drinking water and rural electrification.
    • Antyodya Anna Yojana (AAY), 2000: Under this scheme one crore of the poorest among the BPL families covered under the targetted public distribution system were identified.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ The Challenges Ahead

  • Poverty reduction is still a major challenge in India, due to the wide differences in poverty levels between various regions as well as rural and urban areas.
  • Certain social and economic groups are more vulnerable to poverty.
  • Poverty levels are expected to be lower in the next 10-15 years.
  • In addition to anti-Poverty measures governments should focus on the following to reduce poverty, (i) Higher economic growth (ii) Universal free elementary education (iii) Decrease in population growth (iv) Empowerment of women and the weaker sections.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

→ Poverty: It is a situation where a person fails to satisfy minimum human needs concerning food, clothing, housing, education and health.

→ Caloric requirement: The quantity of food that is capable of producing the required amount of energy needed by a normal person to live and work. In urban areas, this is 2100 calories and in rural areas, it is 2400 calories per person, per day.

→ NSSO: National Sample Survey Organisation. It is the largest organisation in India conducting regular socio-economic surveys.

→ World Bank: It is an international organisation dedicated to providing finance, advice and research to developing nations to aid their economic advancement.

→ HCR: Head Count Ratio. It is the proportion of a population that lives below the poverty line.

→ South-Asia: Comprises of India, Pakistan, Sri Lanka, Nepal, Bangladesh and Bhutan.

→ Economic Growth: It is a term which defines an increase in real output of a country.

→ Sustainable development: It has been defined in many ways, but the most frequently quoted definition is from Our Common Future, also known as the Brundtland report: “Sustainable development is development that meets the needs of the present without compromising the ability of future generations to meet their own needs”.

→ Minimum Subsistence level of living: Is when a person’s bare necessities of food, shelter and clothing are taken care of.

→ Reasonable level of living: Is when these and more are taken care of and he can indulge in making certain selective lifestyle choices.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 People as Resource

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 People as Resource

→ Introduction

  • Population as an asset for the economy rather than liability.
  • Population becomes human capital when the investment is made in the form of education, training and medical care.
  • Working population of a country, their existing productive skills and abilities are known as ‘People as Resource’.
  • This productive nature of population helps to develop the Gross National Product (GNP) of a country through its abilities. So, it is also known as ‘Human Resource.
  • When the existing human resource is further developed by making it more educated and healthy, we call it human capital formation.
  • Investment in human capital (through eduction, training and medical care) yields a return in the same way as investment in physical capital.
  • Human capital is, in one way,superior to other resources, like land and physical capital.
  • In the case of Sakai, eduction added to the quality of his labour. This enhanced his total productivity in the form of salary and further added to the growth of the nation’s economy.
  • In the case of Vilas, there was no education or healthcare in the early part of his life. He spent his life selling fish like his mother: hence, he earns the same amount as an unskilled labourer.
  • Investment in human resources through education and medical care can give high rates of return in the future.
  • Educated parents invest more heavily on the education of their child.
  • Developed countries invest heavily on their people, especially in the field of education and health.

→ Economic Activities by Men and Women

  • Economic activities have been classified into three sectors: (i) Primary sector, (ii) Secondary sector, (iii) Tertiary sector.
  • Primary sector includes agriculture, forestry, animal husbandry, fishing, poultry farming, mining and quarrying.
  • Manufacturing is included in the secondary sector.
  • Trade, transport, communication, banking, health, tourism, services, insurance etc. come under tertiary sector.
  • Economic activities is of two types: (i) market activities (ii) non-market activities.
  • Market activities involve remuneration to the person who performs an activity for pay or profit, e.g. Production of goods or services including government services.
  • Non-market activities involve production for self-consumption.
  • The household work done by women is not included in the National Income.
  • Education helps individuals to make better use of the economic opportunities available before them.
  • Education and skill are the major determinants of the earning of any individual in the market.
  • Women are paid less as compared to men.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 People as Resource

→ Quality of population

  • The quality of population depends upon the literacy rate, health of a person indicated by life expectancy and skill formation acquired by the people of the country.
  • Education provides new aspirations and develops higher values of life and new horizons for individuals.
  • There is a provision made for providing universal access, retention and quality in elemen-tary education with special emphasis on girls.
  • Sarva Shiksha Abhiyan, Bridge courses, Back-to-school campaign, Mid-day meal scheme are such programmes which have been initiated to increase the enrolment in elementary education.

→ Health

  • The health of a person helps him to realise his potential and his ability to fight illness.
  • Our National Policy aims at improving the accessibility of healthcare, family welfare and nutritional service with special focus on the under-privileged segment of population.
  • During the last 50 years, India has built up a vast health care manpower and infrastructure base.

→ The results are:

  • Life expectancy has increased to over 68.3 years in the year 2014.
  • Infant Mortality Rate (IMR) has come down from 147 in the year 1951 to 34 in the year 2016.
  • Crude Birth rate (CBR) has dropped to 20.4 and Crude Death Rate (CDR) to 6.4 his the same duration of time.

→ Unemployment

  • Unemployment exists when people who are willing to work at the going wages cannot find jobs.
  • The work force includes all people from the age of 15 years to 59 years.
  • In the case of India, there is unemployment in both rural and urban areas.
  • In rural areas, there is seasonal and disguised unemployment; urban areas have mostly educated unemployment.
  • Seasonal unemployment happens when people are not able to find jobs during some months of the year, people dependent upon agriculture usually face such kind of problem,
  • When all the people appear to be employed, but the work requires less number of persons, the unemployment is disguised. For example, a small farmer’s entire family is working on his plot, although all may not be required to do so.
  • In urban areas, many young people with matriculation, graduation and post-graduation degrees are not able to find jobs.
  • Unemployment has a harmful impact on the overall growth of an economy.
  • Increase in unemployment is an indicator of a depressed economy. It also wastes the human resource ™hich could have been gainfully employed.
  • In case of India, statistically, the unemployment rate is low.
  • Agriculture is the most-labour absorbing sector of the economy but employment in this sector has declined because of disguised unemployment. The surplus people have moved to work in the secondary and tertiary sectors.
  • Small-scale manufacturing absorbs most of the labour in the secondary sector.
  • New employment opportunities are emerging in the tertiary sector in information technology

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 People as Resource

→ Resource: The collective wealth of a country or its means of producing wealth.

→ Gross National Product: The total value of goods produced and services provided by a country during one year, equal to the gross domestic product plus the net income from foreign investments.

→ Virtuous cycle: A condition in which a favourable circumstance or result gives rise to another that subsequently supports the first condition. Economic growth is one such cycle.

→ Vicious cycle: A condition in which an unfavourable circumstance or result gives rise to another that subsequently supports the first infavourable condition. A spiral of inflation is one such cycle.

→ Economic Activities: Those activities which are done for earning money are known as economic activities.

→ Non-economic Activities: Those activities which are done to meet the emotional and psychological requirements are called non-economic activities.

→ Literacy rate: This is the percentage of people above the age of 7 years with the ability to read and write with understanding.

→ National income: The national in income is the total amount of income accruing to a country from economic activities in a year’s time. It includes payments made to all resources, either in the form of wages, interest, rent and profits. The progress of a country can be determined by the growth of the national income of the country.

→ Infant Mortality Rate: Infant Mortality Rate is the number death of deaths of children under one year of age per 1000 live births.

→ Crude Birth Rate: Crude birth rate is the number of babies bom there for every 1,000 people during a particular period of time.

→ Death Rate: Death Rate is the number of people per 1,000 who die during a particular period of time.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 The Story of Village Palampur

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 The Story of Village Palampur

→ Introduction

  • The story of village Palampur is a narrative story based on a research study by Gilbert Etiena of a village in Bulandshahar district (Uttar Pradesh).
  • The purjpsse of the story of village Palampur, an imaginative village, is to introduce some basic concepts relating to production like-farming, small scale manufacturing, dairy, transport etc.
  • These production activities need various types of resources such as; natural resources, man-made resources, man-power, money etc.
  • Farming is the main activity in Palampur.
  • Palampur is well-connected with neighbouring villages and towns. An all weather road and many kinds of transport are visible on this road like, bullock carts, motorcycles, jeeps, tractors and trucks etc.
  • Palampur has about 450 families belonging to several different castes.
  • The dalits comprise one-third of the population of the village. Their houses are made of mud and straw.
  • Palampur has a fairly well-developed system of roads, transport, electricity, irrigation, school and health centre.
  • In villages across India, farming is the main production activity. The other production
  • activities are small-scale manufacturing, transport, shop-keeping etc.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 The Story of Village Palampur

→ Organisation of Production

  • The aim of production is to produce the goods and services that we need.
  • The factors of production are land, labour, physical capital and human capital.
  • Land is the first requirement for produciton and the second is labour.
  • Physical capital includes tools, machines, buildings, i.e., fixed capital and raw materials and money in hand, i.e., working capital.
  • Knowledge and enterprise come under human capital. It is required to put together all the above inputs to produce the output.

→ Land is fixecT

  • 75% per cent people of Palampur are dependent on farming for their livelihood.
  • There has been no expansion in land area under cultivation in Palampur since 1960.
  • The standard unit of measuring land is hectare, though in the villages it is measured in local units as bigha, guintha etc.

→ Ways to grow more from the same land

  • In Palampur, all land is cultivated. No land is left idle.
  • During the rainy season, farmers of Palampur grow jowar, bajra, potato, wheat and
    sugarcane.
  • During the winter season, fields are sown with wheat. From the produced wheat, farmers keep enough wheat for their family’s consumption and sell the rest of the wheat in the market at Raiganj.
  • A part of land is also devoted to sugarcane production, which is harvested once every year.
  • Farmers in Palampur are able to grow three different crops in a year due to a well- developed system of irrigation.
  • The first few tubewells were installed by the government in Palampur.
  • Of the total cultivated area in the country, a little less than 40 per cent is irrigated even today. In the remaining area, farming is largely dependent on rainfall.
  • To grow more than one crop on a piece of land during the year is called multiple cropping.
  • Multiple cropping is the most common way of increasing production on a given piece of land.
  • The Green Revolution in the late 1960s introduced the Indian farmer to cultivation of wheat and rice using high yielding varieties of seeds.
  • Farmers of Punjab, Haryana and Western Uttar Pradesh were the first to try out the
    modern farming methods in India. .
  • In Palampur, with the use of HYV seeds, the yield of wheat went up to 3200 kg per hectare as compared to 1300 kg per hectare with the traditional seeds.
  • Farmer now had greater amounts of surplus wheat to sell in the markets.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 The Story of Village Palampur

→ Sustenance of land

  • Modern farming methods have overused the natural resources base.
  • The Green Revolution is associated with the loss of soil fertility in many areas due to increased use of chemical fertilizers.
  • Chemical fertilizers kill the bacteria and micro organisms on the soil and reduce its fertility.
  • About one-third population of Palampur is landless while most of them are dalits.

→ Availability of labour

  • Farming requires a great deal of hard work.
  • Small farmers along with their families cultivate their own fields. Medium and large farmers hire farm labourers to work on their fields.
  • Farm labourers come either from landless families or families cultivating small plots of land.
  • These labourers can be paid in cash or in objects like crops; sometimes they get meals also.
  • Wages vary widely from region to region, from crop to crop and from one farm activity toanotfe
  • There is also a wide variation in the duration of employment.

→ Capital needed in farming.

  • As modern farming methods require a great deal of capital, the farmer needs more money for it.
  • Mostly, small farmers have to borrow money ffom large farmers or the village money lenders or traders to arrange modern farming methods.
  • The rate of interest on such loans is»very high. They are put to great distress to repay the loan.

→ Sale of surplus farm products

  • The large and medium farmers of Palampur retain a part of the produced grain for their own use and sell the surplus in the market.
  • The farmers earn a good amount of money through this sale.
  • They use this money to purchase inputs for the next farming season, purchase capital equipment or even give loans to small farmers.

→ Non-Farm Activities in Palampur

  • Only 25 per cent of the people working in Palampur are engaged in activities other than agriculture.
  • There is a variety of non-agricultural activities in the village, e.g., dairy farming, manufacturing activities, shop keeping, transportation, computer education, jaggery production, etc.

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 The Story of Village Palampur

→ Manufacturing: It is the process of making products, or goods from raw materials by the use of manual labour or machinery.

→ Resources: Commodities or services used to produce goods and services.

→ Bogeys: A kind of transport made of wood and drawn by buffaloes.

→ Dalits: People belonging to lower castet are known as Dalits or SCs.

→ Irrigation: The artificial application of water to land to assist in the production of crops by tubewells, canals and tanks, etc. .

→ Kharif: The autumn crop sown at the begining of summer rains.

→ Rabi: The spring crop sown in winter.

→ Multiple Cropping: To grow more than one crop on a piece of land during the same year is known as multiple cropping.

→ Yield: An amount of crop produced in a given piece of land during a single season.

→ Green Revolution: It is a revolution in the field of agriculture in the late 1960s. It introduced the Indian farmers to the moden methods of farming to increase agricultural production.

→ HYV seeds: High yielding varities of seeds which promise to produce much greater amounts of grain than traditional seeds.

→ Chemical Fertilisers: It is a substance applied to soils or directly to plants to provide ^ nutrients, optimum for their growth and development.

→ Surplus: An amount of something left over when requirements have been met. It is an excess of production or supply.

→ Production activity: The creation of value or wealth by producing goodg and services,

→ Moneylender: A person who lends money which has to be paid back .at a high rate of interest.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

JAC Board Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Introduction

  • A democratic government has to be periodically elected by the people in a free and fair manner.
  • A democracy must be based on institutions that follow certain rules and porcedures.
  • These elements are necessary but not sufficient for a democracy.
  • Elections and institutions need to be combined with a third element-enjoyment of rights to make a government democratic.
  • When the socially recognised claims (rights) are written into law in democracy they are called democratic rights.
  • This chapter deals with democratic rights and their significance.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Life without rights

  • The importance of rights can be judged by the one whose life has absence of rights.
  • The following three examples state what it means to live in the absence of rights:

→ Prison in Goantanamo Bay

  • About 600 people were secretly picked up by the United States of America’s forces from all over the world and put in a prison in Goantanamo Bay, near cuba.
  • According to the American Government, they were enemies of the United State and linked to the attack on New york on 11th September, 2001,
  • As a result, there was no trial before any magistrate in the United State, nor could these prisoners approach courts in their own country.
  • Amnesty international, reported that the prisoners were being tortured in ways that violated the United States of America’s laws. Despite the provisions of international treaties, prisoners were being denied the treatment.

→ Citizens Rights in saudi Arabia

  • Saudi Arabia is ruled over by a hereditary king and the people have no role in electing or changing their rulers.
  • The king selects the legislature as well as the executive.
  • He appoints the judges and can change any of their decisions.
  • Citizens cannot form political parties or any political organisation
  • Media cannot report anything that the monarch does not like.
  • There is not freedom of religion. Every citizen is required to be muslim. Non-muslim residents can follow their religion in private, but not in public.
  • Women are subjected to many public restrictions. The testimony of one man is considerd equal to that of two women.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Ethnic Massacre in Kosovo

  • Kosovo was a province of yugoslavia before its split.
  • In yugoslavia, serbs were in majority and Albanians were in minority.
  • A democratically elected serb leader Slobodan milosevic wanted to dominate the country.
  • Serbs thought that the albanians, (the ethnic minority group) should leave the country or accept the dominance of serbs.

→ Rights in a Democracy

  • Everyone wants a system where at least a minimum asurance is guaranteed to all whether he/she is powerful or weak, rich or poor, majority or minority.

→ What are rights?

  • Rights are reasonable claims of persons recognised in society and sanctioned by law.

→ Why do we need rights in a democracy?

  • Rights are necessary for the very sustenance of a democracy.
  • In a democracy, every citizen has the rights to vote and the rights to be elected to government.
  • Rights protect minorities from the oppression of majority. They ensure that majority cannot do whatever it wishes to do.

→ Right in the Indian constitution

  • Some rights which are fundamental to our life are given a special status in Indian constitution. They are called Fundamental Rights.
  • Our constitution provides six fundamental rights.

→ Right to equality

  • The constitution says that the government shall not deny the equality before the law or the equal protection of the laws to any person in India. It means that the laws apply in the same manner to all, regardless of a person’s status. This is called the rule of law.
  • Right to equality is the foundation of any democracy. It means that no person is above the law.
  • The government shall not discriminate against any citizen on grounds only of religion race, caste, sex or place of birth.
  • Every citizen shall have access to public places like shops, restaurants, hotels, and cinema halls.
  • The government of India has provided reservation for scheduled castes (SCs), scheduled Tribes (STs) and other backward classes (OBCS). But these reservations are not against the right to equality.
  • The constitution directs the government to put an end to the practice of untouchability. It is the extrerr 3 form of social discrimination.

→ Right to freedom

  • Freedom mean absence of constraint. In practical life, it means absence of interference in our affairs h others be it other individuals or the government.
  • Under the Indian constitution, all citizens have’the right to: (i) Freedom of speech and expression (ii) Assembly in a peaceful manner (iii) form associations, unions and cooperative societies (iv) Move freely throughout the country, (v) Reside in any part of the country (vi) practice any profession or to carry on any occupation, trade or business.
  • Freedom is not unlimited license to do what one wants. The government can impose certain reasonable restrictions on our freedom in the larger interests of the society.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Right Against Exploitation

  • Constitution makers thought it is necessary to write down certain clear provisions to prevent exploitation of the weaker sections of the society.
  • The constitution mentions three specific evils and declares these illegal.
  • First, the constitution prohibits ‘traffic’ in human beings. Traffic here means selling and buying of human beings, usually, women or children, for immoral purposes.
  • Second, our constitution also prohibits forced labour or begar in any form. Begar is a practice where the worker is forced to render service to the master free of charge or at a nominal remuneration.
  • Third the constitution prohibits child labour. No one can employ a child below the age of 14 to work in any factory or mine or any other hazardous work, such as railways and ports.

→ Right to Freedom of Religion

  • Every person has right to profess, practice and propagate the religion he or she believes in.
  • Every religious group or sect is free to manage its religious affairs. Freedom to propagate one’s religion, does not mean that a person has right to compl another person to convert into his religion by means of force, around inducement or allurement.
  • India is a secular state. A secular state is one that does not establish any one religion as official religion. In India no privilege or favor is provided to any particular religion.

→ Cultural and Educational Right

  • The following cultural and educational rights for minoritis are specified by our constitution.
  • Any section of citizens with a distinct language or culture have a right to conserve it
  • Admission to any educational institution maintained by government or receiving government aid cannot be denied to any citizen on the grounds of religion or language
  • All minorities have the right to establish and administer educational institution of their choice.

→ How can we secure these rights?

  • The fundamental rights in the constitution are important because they are enforceable.
  • We have a right to seek the enforcement of these mentioned rights. This is called the right to constitutional remedies.
  • This right makes other rights effective when any of the fundamental rights are violated then citizen can directly approach the supreme court or the high court of a state.
  • That is why Dr. Ambedkar called the right to constitutional remedies the heart and soul of our constitution.
  • The supreme court and high courts have the power to issue directions, order or writs for the enforcement of the fundamental rights.
  • They can also award compensation to the victims and punishment to the violators.
  • In case of any violation of fundamental right the aggrieved person can go to a court for remedy. But now, any person can go to court against the violation of the fundamental right. If it is of social or public interest, It is called public Interset litigation (PIL).
  • Under the PIL any citizen or group of citizens can approach the supreme court or a high court for the protection of public interest against a particular law or action of the judges even on a postcard. The court will take up the matter if the judges find it in public interest against a particular court law or action of the government.

→ Expanding Scope of Rights

  • From time to time the courts gave judgements of expand the scope of right, certain rights like right to freedom of press, sight to information and right to education are derived from the fundamental rights.
  • According to the right to education every child has the right to get elementary education.
  • According to right to information, any body can demand information regarding the functions of a government department or official.
  • Constitution provides many rights which may not be fundamental right e.g. the right to property, right to vote in election are not fundamental rights but these are constitutional rights.
  • Human rights are universal moral claims that may or may not have been recognised by laws.
  • Some international covenants have contributed to the expansion of rights.
  • The national human rights commission (NHIRC) focuses on helping the victims to secure their human rights.
  • International covenant on Economic social and cultural right.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Rights

  • The international covenant recognises many rights that are not directly a part of the fundamental rights in the Indian constitution.
  • This has not yet become an international treaty but human right activists all over the world see, this as a standard of human rights. These include.
    • Right to work i.e., opportunity to everyone to earn livelihood by working.
    • Right to safe and healthy working conditions. Fair wages that can provide decent standard of living for the workers and their families.
    • Right to adequate standard of living including adequate food, clothing and housing.
    • Right to social security and insurance.
    • Right to health i.e., medical care during illness, special care for woman during child birth and prevention of epidemics.
    • Right to education i.e., free and compulsary primary education, equal access to higher education.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 Democratic Rights

→ Amnesty International: An international organisation of volunteers who campaigns for human rights. This organisation brings out independent reports on the violation of human rights all over the world.

→ Ethnic group: An ethnic group is a human population whose members usually identify with each other on the basis of a common ancestry. People of an ethnic group are united by cultural practices, religious beliefs and historical memories.

→ Claim: Demand for legal or moral entitlements a person makes on fellow citizens, society or the government.

→ Dalit: A person who belongs to the castes which were considered low and not touchable by others. Dalits are also known by other names such as the scheduled castes, depressed classes etc.

→ Begar: It is a practice where a worker is forced to render service to the ‘master’ free of charge or at a nominal remuneration.

→ Traffic: Selling and buying of men, women or children for immoral purposes.

→ Writ: A formal document containing an order of the court to the government issued only by High Court or the Supreme Court.

→ Summon: An order issued by a court asking a person to appear before it.

→ Convenant: Promise made by the individuals, groups or countries to uphold a rule or principle. It is legally binding on the signatories to the agreement or statement.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

JAC Board Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ Introduction

  • Democracy is not just about people electing their rulers.
  • In a democracy the rulers have to follow some rules and procedures. They have to work with and within institutions.
  • In this process we come across three institutions that play a key role in major decisions Legislature, executive and judiciary.
  • In this chapter, we will understand how all the institutions together carry on the work of the government.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ How is a major policy decision taken?

  • The government issues hundreds of orders every day on different matters.
  • President is the head of the state and is the highest formal authority in the country.
  • Prime Minister is the head of the government and actually exercises all governmental powers.
  • Parliament consists of the President and two houses, Lok Sabha and Rajya Sabha.
  • The Prime Minister must have the support of a majority of Lok Sabha members.
  • The Government of India had appointed the second Backward classes. Commission in 1979. It was harded by B.P. Mandal.
  • The commission gave its report in 1980 and made many recommendations, one of these was that 27 per cent of government jobs be reserved for the socially and educationally backward classes.

→ Need for Political Institutions

  • To attend all the tasks, several arrangements are made in all modern democracies. Such arrangements are called institutions. The constitution of any country lays down basic rules on the powers and functions of each institution.
  • In our country there are three institutions running the different tasks: (a) The Prime Minister and the cabinet are institutions that take all important policy decisions, (b) The Civil servants, working together are responsible for taking steps to implement the minister’s decisions, (c) Supreme Court is an institution where disputes between citizens and the government are finally settled.
  • Institutions involve rules and regulations. Institutions make it difficult to have a good decision taken very quickly. But they also make it equally difficult to rush through a bad decision. That is why democratic government insist on institutions.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ Parliament

  • In India, a national assembly of elected representatives is called Parliament. At the state level this is called State Legislature or Legislative Assembly.
  • Parliament is the final authority for making laws in our country.
  • Parliaments all over the world exercise some control over those who run the government.
  • Parliaments control all the money that governments have.
  • Parliament is the highest forum of discussion and debate on public issues and national policy in any democratic country.

→ Two Houses of Parliament

  • In our country, the Parliament consists of two Houses. The two Houses are known as the Council of States (Rajya Sabha) and the House of the People (Lok Sabha).
  • Lok Sabha (House of the people) or lower chamber: It is usually directly elected by the people and exercises the real power on behalf of the people.
  • Rajya Sabha (Council of states) or upper chamber: It is indirectly elected and perform special functions such as interest of various states,regions federal units.
  • Our constitution gives some special powers to Rajya Sabha but on the most of the matters the Lok Sabha exercises supreme power.

→ Political Executive

  • At different levels of any government, we find functionaries who take day-to-day decisions but do not exercise supreme power on behalf of the people. All those functionaries are collectively known as the Executive.

→ Political and Permanent Executive

  • In our country, two categories make up the executive. One that is elected by the people for a specific period, is called the Political Executive. In the second category, people are appointed on a long term basis. This is called the permanent executive or civil services.
  • The political executive has more power than the permanent executive.
  • This is because the political executive is elected by the people and in a democracy will of people is supreme. They are answerable to the people for all consequences of their decision.

→ Prime Minister and Council of Ministers

  • Prime Minister is the most important political institution in the country. The President appoints the leader of the majority party or the coalition of parties that commands a majority in the Lok Sabha, as Prime Minister.
  • Council of Ministers is the official name for the body that includes all the Ministers mainly Cabinet Ministers, Ministers of state with independent charge and Minister of State.
  • Every ministry has secretaries, who are civil servants.
  • No Minister can openly criticise any decision of the government.

→ Powers of the Prime Minister

  • As head of the government, the Prime Minister has wide ranging powers.
  • He chairs cabinet meetings and coordinates the work of different departments.
  • The Prime Minister distributes and redistributes work to the ministers. He also has the power to dismiss ministers.
  • However, in recent years the rise of coalition politics has imposed certain constraints on the power of the Prime Minister.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ The President

  • The President is the supreme commander of the defence forces of India.
  • The Presidental system
  • Presidents all over the world are not always nominal executives like the President of India. In many countries of the world, the president is both the head of the state and the head of the government. The President of the United States of America is the most well known example of this kind of president.

→ The Judiciary

  • All the courts at different levels in a country put together are called the judiciary. The Indian Judiciary consists of a Supreme Court for the entire nation. High Courts in the states, District Courts and the courts at local level.
  • The judges of the Supreme Court and the High Courts are appointed by the President on the advice of the Prime Minister and in consultation with the Chief Justice of the Supreme Court. A judge can be removed only by an impeachment motion passed separately by two-thirds members of the two Houses of the Parliament.
  • The Supreme Court and the High Courts have the power to interpret the constitution of the country.
  • The powers and the independence of the Indian judiciary allow it to act as the guardian of the Fundamental Rights.
  • Courts have given several judgements and directives to protect public interest and human rights. Any one can approach the courts if public interest is hurt by the actions of government. This is called public interest litigation.

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ Democracy: It is a form of government which is chosen by the people to work for their welfare.

→ Legislature: An assembly of people’s representatives with the powers to enact laws for a country. In addition to enacting laws, legislatures have authority to raise taxes and adopt the budget and other money bills.

→ Executive: A body of persons having authority to initiate major policies, make decisions and implement them on the basis of the constitution and laws of the country.

→ Judiciary: An institution empowered to administer justice and provide a mechanism for the resolution of legal disputes. All the courts in the country are collectively referred to as judiciary.

→ Government: A set of institutions that have the power to make, implement and inter pret laws so as to ensure an orderly life. In its broad sense, government administers and supervises over citizens and resources of a country.

→ State: Political association occupying a definite territory, having an organised government and possessing power to make domestic and foreign policies. In common speech, the terms country, nation and state are used as synonyms.

→ Government order: It means any order, judgement, injunction, decree, stipulation or determination issued, promulgated or entered by or with any governmental authority of competent jurisdiction.

→ Office Memorandum: A communication issued by an appropriate authority stating the policy or decision of the government.

→ Parliament: The group of people who are elected to make and change the laws of a country is called the parliament.

→ Lok Sabha: The Lok Sabha or house of the people is the power house of the parliament of India.

→ Rajya Sabha: The Rajya Sabha or council of states is the upper house of the parliament
of India.

→ Reservations: A policy that declares some positions in government employment and educational institutions ‘reserved’ for people and communities who have been discriminated against, are disadvantaged and backward.

→ Supreme Court: The highest judicial court in a country.

→ Political Institution: A set of procedures for regulating the conduct of government and political life in the country.

→ Cabinet: The most important ministers in governments, who have regular meetings with the Prime Minister.

→ High Court: The highest judicial court in a state..

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 Working of Institutions

→ Indra sawhney: Indra sawhney became a household name in 1992 after her challenge to Narasimha Rao’s forward quata more led the supreme court to impose a 50% cap on caste based reservations.

→ B.P. Mandal: Bindheshwari Prasad Mandal (B.P. Mandal) was an Indian Politician who chaired mandal commission. He served as Chief Minister of Bihar.

→ V.P. Singh: Vishwanath Pratap singh (V.P. singh) was an Indian politician. He was the 7th Prime Minister of India from 1989 to 1990.

→ Pt. Jawaharlal Nehru: He was an independence activist and subsequently, the first Prime Minister of India and a central figure in Indian politics before and after independence. As the Prime Minister, he exercised many pomets as he had great influence over the people.

→ Indira Gandhi: She was an Indian politician and a central figure at the Indian National Congress. She was the first and, to date, the only female Prime Minister of India.

→ Pranab Mukheijee: He is an Indian politician who served as the 13th President of India from 2012 to 2017.

→ Nerendra Modi: Narendra Damodardas Modi is an Indian politician serving as the current Prime Minister of India since 2014. He was the chief minister of Gujarat from 2001 to 2014 and is the member of parliament for Varanasi.

→ Justice J.S. Khehar: Jagdish Sing Khehar was the 44th Chief Justice of India. He is the first Chief Justice of India from the Sikh community.

→ Ramnath Kovind: He is an Indian politician currently serving as the 14th President of India, in office since 25 july 2017. Previously he had served as the Governor of Bihar from 2015 to 2017.

→ Coalition Government: A government formed by an alliance of two or more political parties, usually when no single party enjoys majority support of the members in a legislature.

JAC Class 9 Social Science Notes

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

Jharkhand Board JAC Class 10 Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 अन्योक्तयः Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

JAC Class 10th Sanskrit अन्योक्तयः Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिए)
(क) कस्य शोभा एकेन राजहंसेन भवति?
(किसकी शोभा एक राजहंस से होती है?)
उत्तरम् :
सरसः (सरोवर की)।

(ख) सरसः तीरे के वसन्ति?
(तालाब के किनारे कौन रहते हैं?)
उत्तरम् :
वकसहस्रम् (हजारों बगुले)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

(ग) कः पिपासः प्रियते?
(कौन प्यासा मर जाता है?)
उत्तरम् :
चातकः (पपीहा)।

(घ) के रसाल मुकुलानि समाश्रयन्ते ?
(आम की मंजरियों का आश्रय कौन लेते हैं ?)
उत्तरम् :
भृङ्गाः (भौरे)।

(ङ) अम्भोदाः कुत्र सन्ति? (बादल कहाँ हैं?)
उत्तरम् :
गगने (आकाश में)।

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)
(क) सरसः शोभा केन भवति ?
(तालाब की शोभा किससे होती है ?)
उत्तरम् :
सरसः शोभा एकेन एव राजहंसेन भवति।
(तालाब की शोभा एक ही राजहंस से होती है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

(ख) चातकः किमर्थं मानी कथ्यते ?
(चातक किस अर्थ में स्वाभिमानी है?)
उत्तरम् :
चातकः तृषितः मरणम् आप्नोति परञ्च सर्वान् वारिदान् न याचते, केवलं पुरन्दरं याचते।
(चातक प्यासा मर जाता है, लेकिन अन्य बादलों से नहीं माँगता, केवल इन्द्र से माँगता है।)

(ग) मीनः कदा दीनां गतिं प्राप्नोति ?
(मछली कब दीन गति को प्राप्त होती है ?)
उत्तरम् :
यदा सरः सङ्कोचमञ्चति तदा मीन: दीनां गतिं प्राप्नोति।
(जब तालाब सूख जाता है तब मछली दीन दशा को प्राप्त होती है।)

(घ) कानि पूरयित्वा जलदः रिक्तः भवति ?
(किन्हें भरकर बादल खाली हो जाता है ?)
उत्तरम् :
नानानदीनदशतानि पूरयित्वा जलदः रिक्तः भवति।
(अनेक नदी और सैकड़ों नदों को भरकर बादल खाली हो जाता है।)

(ङ) वृष्टिभिः वसुधां के आर्द्रयन्ति ?
(वर्षा से धरती को कौन गीला कर देते हैं ?)
उत्तरम् :
अम्भोदाः वृष्टिभिः वसुधां आर्द्रयन्ति।
(बादल वर्षा से धरती को गीला कर देते हैं।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 3.
अधोलिखितवाक्येष रेखाकितपदानि आधुत्य प्रश्ननिर्माणं करुत –
(निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) मालाकारः तोयैः तरोः पुष्टिं करोति।
(माली जल से वृक्ष का पोषण करता है।)
उत्तरम् :
मालाकार: कैः तरोः पुष्टिं करोति ?
(माली किनसे वृक्ष का पोषण करता है ?)
(ख) भृङ्गाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते।
(भौरे आम के बौर का आश्रय लेते हैं।)
उत्तरम् :
भृङ्गाः कानि समाश्रयन्ते ?
(भौरे किनका आश्रय लेते हैं ?)
(ग) पतङ्गाः अम्बरपथम् आपेदिरे।
(पक्षियों ने आकाश मार्ग पाया।)
उत्तरम् :
के अम्बरपथं आपेदिरे ?
(किन्होंने आकाश मार्ग पाया ?)
(घ) जलदः नानानदीनदशतानि पूरयित्वा रिक्तोऽस्ति।
(बादल अनेक नदी और सैकड़ों नदों को भरकर खाली है।)
उत्तरम् :
कः नानानदीनदशतानि पूरयित्वा रिक्तोऽस्ति ?
(कौन अनेक नदी और सैकड़ों नदों को भरकर खाली है ?)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

(ङ) चातकः वने वसति। (पपीहा वन में रहता है।)
उत्तरम् :
चातकः कुत्र वसति ? (पपीहा कहाँ रहता है ?)

प्रश्न 4.
अधोलिखितयो श्लोकयोः भावार्थ संस्कृतभाषया लिखत –
(निम्नलिखित श्लोकों का भावार्थ संस्कृत भाषा में लिखिये)
(अ) तोयैरल्पेरपि ………… वारिदेन।।
उत्तरम् :
भावार्थ – सुयोग्यः समर्थः एव व्यक्ति कार्य सम्यग् रूपेण सम्पादयितुं शक्नोति। यथा हि कवि पण्डित राज कथयति-‘रे उद्यानपाल! यं वृक्षं त्वं सकरुणं प्रचण्ड ग्रीष्म? अल्पैः जलै, अर्थात् आवश्यकतानुसारमसिञ्चः, एवम् असौ वृक्षः शनैः पालितः, किं तत् कार्यम् समर्थोऽसन् वृष्टिः धारा प्रवाहेण प्रभूतेन जलेन कर्तुं शक्नोति।

यथावश्यकमेव पोषणम् अपेक्ष्यते।’ (सुयोग्य और समर्थ व्यक्ति ही कार्य सुचारु रूप से सम्पन्न कर सकता है। जैसा कि कवि पण्डितराज कहते हैं- ‘हे माली! जिस वृक्ष को तुमने करुणा के साथ प्रचण्ड ग्रीष्म ऋतु में आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा पानी देकर पाला था, क्या इस कार्य में समर्थ होते हुये भी वर्षा (अनावश्यक) बहुत से धारा प्रवाह जल से कर सकता है। सभी यथावश्यक पोषण की अपेक्षा करते हैं।)

(आ) रे रे चातक ………………….. दीनं वचः।

भावार्थ: – श्लोकेऽस्मिन् कवि चातकस्य माध्यमेन कथयति यत् सर्वे धनिकाः समृद्धाः वा जनाः दातारः न भवन्ति अतः यं कञ्चित् मानवं मा याचनां कुरु यथा हि कविः भर्तहरि कथयति – ‘रे रे चातक! सावहितः सन् शृणु मित्र। आकाशे अनेके मेघाः आयान्ति यान्ति च परञ्च तेषु केचनैव वर्षन्ति। एवं एव संसारे अनेके धनिका समृद्धाः च मानवा आयान्ति यान्ति च। तेषु केचन यच्छन्ति अन्ये तु व्यर्थमेव आत्मानं प्रदर्शयन्ति। अतोऽहं ब्रवीमि यत् त्वम यं कञ्चनं पश्यति तस्य सम्मुखं याचनाय मा गच्छ। सु दानभावोपेतं जनं ज्ञात्वा एवं याचनाय हस्तौ प्रसारय।

यथा सर्वे वारिदाः चातकाय स्वाति बिन्दुं न दातुं शक्नोति तथैव सर्वे जनाः याचकाय दान न दातुं शक्नुवन्ति। (इस श्लोक में कवि चातक के माध्यम से कहता है कि सभी धनवान या समद्ध लोग दानदाता नहीं होते। अतः जिस किसी मानव से मत याचना करो। जैसा कि कवि भर्तृहरि कहता है-‘ओ चातक! सावधान होकर सुन। मित्र! आकाश में अनेक मेघ आते हैं और चले जाते हैं। उनमें से कुछ ही देते हैं अन्य तो व्यर्थ ही अपना दिखावा करते हैं। अतः मैं चाहता हूँ कि तुम जिस किसी को देखो उसी के सामने याचना के लिये मत जाओ। (अच्छे दान भाव से युक्त व्यक्ति को जानकर याचना के लिये हाथ फैलाओ। जैसे सभी बादल चातक को स्वाति की बूंद नहीं दे सकते हैं वैसे ही सभी लोग याचक को दान नहीं दे सकते हैं।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 5.
अधोलिखित श्लोकयोः अन्वयं लिखत। (निम्नलिखित श्लोकों का अन्वय लिखो)
(अ) आपेदिरे …………. कतमां गतिमभ्युपैति।
अन्वयः – पतङ्गाः परितः अम्बरपथम् आपेदिरे, भृङ्गाः रसाल मुकलानि समाश्रयन्ते। सरः त्वयि सङ्कोचम् अञ्चति, हन्त दीन-दीनः मीनः नु कतमां गतिम् अभ्युपैतु।

(आ) आश्वास्य ………….. सैवतवोत्तमा श्रीः।।
अन्वयः – तपनोष्णतप्तम् पर्वतकुलम् आश्वास्य उदाम दावविधुराणि काननानि च आश्वास्य नाना नदी गतानि पूरयित्वा च हे जलद। यत् रिक्तः असि तव सा एव उत्तमा श्रीः।

प्रश्न 6.
उदाहरणमनुसृत्य सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत –
(उदाहरण के अनुसार सन्धि/सन्धि-विच्छेद कीजिए)
(i) यथा – अन्य + उक्तयः = अन्योक्तयः।
(क) …………. + ………….. = निपीतान्यम्बूनि।
(ख) …………. + उपकारः = कृतोपकारः।
(ग) तपन + …………… = तपनोष्णतप्तम्।
(घ) तव + उत्तमा = …………………।
(ङ) न + एतादृशाः = …………………।
उत्तरम् :
(क) निपीतानि + अम्बूनि = निपीतान्यम्बूनि।
(ख) कृत + उपकारः = कृतोपकारः।
(ग) तपन + उष्णतप्तम् = तपनोष्णतप्तम्।
(घ) तव + उत्तमा = तवोत्तमा।
(ङ) न + एतादृशाः = नैतादृशाः।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

(ii) यथा – पिपासितः + अपि = पिपासितोऽपि।
(क) ……………. + ……………… = कोऽपि।
(ख) ……………. + ………………. = रिक्तोऽसि।
(ग) मीनः + अयम् = ………………।
(घ) सर्वे + आदि = …………
उत्तरम् :
(क) कः + अपि = कोऽपि।
(ख) रिक्तः + असि = रिक्तोऽसि।
(ग) मीनः + अयम् = मीनोऽयम्।
(घ) सर्वे + ऽपि = ………………..

(iii) यथा – सरस: + भवेत् = सरसोभवेत्।
(क) खगः + मानी – ……………।
(ख) …………. + नु = मीनो नु।
(ग) पिपासितः + वा = ………..।
(घ) …………. + ………. = पुरुतोमा।
उत्तरम् :
(क) खगः + मानी = खगो मानी।
(ख) मीनः + नु = मीनो नु।
(ग) पिपासितः + वा = पिपासितोवा।
(घ) पुरतः + मा = पुरुतोमा।

(iv) यथा – मुनिः + अपि = मुनिरपि।
(क) तोयैः + अल्पैः = …………..।
(ख) ………… + अपि = अल्पैरपि।
(ग) तरोः + अपि = ………………।
(घ) ………. + आर्द्रचन्ति = वृष्टिमिरार्द्रयन्ति।
उत्तरम् :
(क) तोयैः + अल्पैः = तोयैरल्पैः
(ख) अल्पैः + अपि = अल्पैरपि
(ग) तरोः + अपि = तरोरपि।
(घ) वृष्टिमिः + आर्द्रयन्ति = वृष्टिमिरार्द्रयन्ति।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 7.
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितैः विग्रहपदैः समस्तपदानि रचयत –
(उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित विग्रह पदों से समस्त पद बनाइए)
JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः 1

JAC Class 10th Sanskrit अन्योक्तयः Important Questions and Answers

शब्दार्थ चयनम् –

अधोलिखित वाक्येषु रेखांकित पदानां प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थ चित्वा लिखत –

प्रश्न 1.
एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत्।
(अ) तडागस्य
(ब) कटु
(स) सरसः
(द) जलदः
उत्तरम् :
(अ) तडागस्य

प्रश्न 2.
न सा. बकसहस्रेण परितस्तीरवासिना।
(अ) भवेत्
(ब) अभितः
(स) शृगालः
(द) भवति
उत्तरम् :
(ब) अभितः

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 3.
भुक्ता मृणालपटली भवता निपीता।
(अ) भवता
(ब) युक्ता
(स) खादिता
(द) अम्बूनि
उत्तरम् :
(स) खादिता

प्रश्न 4.
न्यम्बूनि यत्र नलिनानि निषेवितानि।
(अ) राजहंस
(ब) सरोवरस्य
(स) भविता
(द) सेवितानि
उत्तरम् :
(द) सेवितानि

प्रश्न 5.
तोवैरल्यैरपि करुणया भीमभानौ निदाघे।
(अ) ग्रीष्मकाले
(ब) भानवेः
(स) निर्दय
(घ) भवता
उत्तरम् :
(अ) ग्रीष्मकाले

प्रश्न 6.
व्यरचि भवता या तरोरस्य पुष्टिः।
(अ) विश्वतः
(ब) कृता
(स) जनयितुम्
(द) शक्या
उत्तरम् :
(ब) कृता

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 7.
भृङ्गा रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते।
(अ) आपेदिरे
(ब) समाश्रयन्ते
(स) द्विरेफा
(द) दीनदीनः
उत्तरम् :
(स) द्विरेफा

प्रश्न 8.
एक एव खगो मानी वने वसति चातकः।
(अ) पिपासितः
(ब) पुरन्दरम्
(स) याचते
(द) स्तोककः
उत्तरम् :
(द) स्तोककः

प्रश्न 9.
यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः।
(अ) वद
(ब) बहवः
(स) आर्द्रयन्ति
(द) पश्यसि
उत्तरम् :
(अ) वद

प्रश्न 10.
नानानदीनदशतानि च पूरयित्वा।
(अ) पूर्णिमाया
(ब) पूरणी:
(स) आश्वास्य
(द) पूर्णं कृत्वा
उत्तरम् :
(स) आश्वास्य

संस्कृतमाध्यमेन प्रश्नोत्तराणि –

एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 1.
राजहंसोऽत्र कस्य प्रतीकः ?
(राजहंस यहाँ किसका प्रतीक है ?)
उत्तरम् :
सज्जनस्य (सज्जन का)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 2.
कविः ‘बकसहस्रम्’ कं कथयति ?
(कवि ‘बकसहस्रम्’ किसे कहता है ?)
उत्तरम् :
मूर्खान् (मूरों को)।

प्रश्न 3.
मालाकारेण तरोः पुष्टिः कैः कृता ?
(माली ने वृक्ष का पोषण किनसे किया ?)
उत्तरम् :
तोयैः (जल से)।

प्रश्न 4.
मालाकारः कथं तोयैः वृक्षस्य पुष्टिः व्यरचि ?
(माली ने किस प्रकार पानी से वृक्ष की पुष्टि की ?)
उत्तरम् :
करुणया (करुणा से)।

प्रश्न 5.
सङ्कचिते सरोवरे पतङ्गाः कुत्र आपेदिरे ?
(सरोवर के सूख जाने पर पक्षी कहाँ गये ?)
उत्तरम् :
अम्बरपथम् (आकाश मार्ग में)।

प्रश्न 6.
कीदृशः चातकः पिपासितो म्रियते ?
(कैसा चातक प्यासा मरता है ?)
उत्तरम् :
मानी (स्वाभिमानी)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 7.
कविः कं सम्बोध्य श्लोकं अरचयत् ?
(कवि किसको संबोधित करके श्लोक की रचना करता है?)
उत्तरम् :
मेघः (बादल)।

प्रश्न 8.
काननानि कः आश्वास्यति ?
(जंगलों को कौन आश्वस्त करता है ?)
उत्तरम् :
जलदः (बादल)।

प्रश्न 9.
कविः मित्रः इति शब्देन के सम्बोधयति ?
(कवि ‘मित्र’ इस शब्द से किसको संबोधित करता है?)
उत्तरम् :
चातकः (पपीहा को)।

प्रश्न 10.
केचिद् अम्भोदाः कथं गर्जन्ति ?
(कुछ बादल कैसे गर्जते हैं ?)
उत्तरम् :
वृथा (व्यर्थ ही)।

प्रश्न 11.
एकेन राजहंसेन कस्य शोभा भवेत् ?
(एक हंस से किसकी शोभा होती है?)
उत्तरम् :
सरसः (तालाब की)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 12.
सरसः तीरवासिनः के सन्ति ?
(तालाब के किनारे वास करने वाले कौन हैं ?)
उत्तरम् :
बकसहस्रम् (हजारों बगुले)।

प्रश्न 13.
मृणालपटली केन भुक्ता ?
(कमलनालों का समूह किसके द्वारा खाया गया है ?)
उत्तरम् :
राजहंसेन (राजहंस के द्वारा)।

प्रश्न 14.
राजहंसेन कानि निपीतानि ?
(राजहंस ने किन्हें पीया ?)
उत्तरम् :
अम्बूनि (जल)।

प्रश्न 15.
तरोः पुष्टिः केन कृतः ?
(वृक्ष का पोषण किसके द्वारा किया गया है ?)
उत्तरम् :
मालाकारेण (माली द्वारा)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 16.
मालाकारेण तरोः कदा पुष्टिः कृता ?
(माली ने वृक्ष का पोषण कब किया ?)
उत्तरंम् :
निदाघे (गर्मी में)।

प्रश्न 17.
सङ्कुचिते सरोवरे परितः अम्बरपथं कः आपेदिरे ?
(सरोवर के सूख जाने पर चारों ओर आकाशमार्ग को कौन प्राप्त कर लेते हैं ?)
उत्तरम् :
पतङ्गाः (पक्षी)।

प्रश्न 18.
रसालमुकुलानि के समाश्रयन्ते ?
(आम की मजरी को आश्रय कौन लेते हैं ?)
उत्तरम् :
भृङ्गाः (भौरे)।

प्रश्न 19.
एकः एव मानी वने कः वसति ?
(एक ही स्वाभिमानी वन में कौन निवास करता है ?)
उत्तरम् :
खगः (पक्षी)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 20.
पुरन्दरात् कः याचते ?
(इन्द्र से कौन माँगता है ?)
उत्तरम् :
चातकः (पपीहा)।

प्रश्न 21.
कः नदी नद शतानि पूरयति ?
(कौन सैकड़ों नद-नदियों को भर देता है ?)
उत्तरम् :
जलदः (बादल)।

प्रश्न 22.
तपनोष्णतप्तम् किम् ?
(सूर्य की गर्मी से कौन तपी है ?)
उत्तरम् :
पर्वतकुलम् (पर्वतों के समूह)।

प्रश्न 23.
के वृष्टिभः वसुधां आर्द्रयन्ति ?
(कौन बरसकर धरती को गीला कर देते हैं ?)
उत्तरम् :
अम्भोदाः (बादल)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 24.
कीदृशं वचः मा ब्रूहिः ?
(कैसे वचन मत बोलो?)
उत्तरम् :
दीनंवचः (दीन वचन)।

पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 25.
कृतोपकारः कः भविष्यति ?
(उपकार करने वाला कौन होगा ?)
उत्तरम् :
कृतोपकारः राजहंसः भविष्यति।
(उपकार करने वाला राजहंस होगा।)

प्रश्न 26.
धारासारान् कः विकिरति।
(जलधाराओं को कौन बरसाता है ?)
उत्तरम् :
धारासारान् वारिदः विकिरति।
(जलधाराओं को बादल बरसाता है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 27.
चातकः मानी कथम् ?
(चातक मानी कैसे है ?)
उत्तरम् :
चातकः पिपासितो म्रियते पुरन्दरम् वा याचते।
(चातक या तो प्यासा मरता है या इन्द्र से याचना करता है।)

प्रश्न 28.
जलदः कान् पूरयति ? (बादल किनको भरता है?)
उत्तरम :
जलदः नानानदीनदशतानि पूरयति।
(बादल अनेक नदी और सैकड़ों नदों को भरता है।)

प्रश्न 29.
कविः श्रोतारं किं कारणाद् वर्जयति?
(कवि श्रोताओं को किस कारण रोकता है?)
उत्तरम् :
कवि श्रोतारं वर्जयति-मा ब्रूहि दीनं वचः
(कवि सुनने वालों को रोकता है–किसी के सामने दीन वचन मत बोलो)।

प्रश्न 30.
सरसः शोभा केन न भवति ?
(तालाब की शोभा किससे नहीं होती ?)
उत्तरम् :
सरसः शोभा परितः तीरवासिना बकसहस्रेण न भवति।
(तालाब की शोभा चारों ओर किनारे पर बैठे हजारों बगलों से नहीं होती।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 31.
राजहंसेन कानि निषेवितानि ?
(राजहंस द्वारा किनका सेवन किया गया ?)
उत्तरम् :
राजहंसेन नलिनानि निषेवितानि।
(राजहंस ने कमलनालों का सेवन किया।)

प्रश्न 32.
मालाकार: केन प्रकारेण तरोः पुष्टिं करोति ?
(माली किस प्रकार से वृक्ष की पुष्टि करता है ?)
उत्तरम् :
मालाकार: निदाघे अल्पैः तोयैः अपि करुणया तरोः पुष्टिं करोति।
(माली गर्मी में थोड़े जल से भी करुणा के साथ वृक्ष का पोषण करता है।)

प्रश्न 33.
सरोवरे सङ्कुचिते भृङ्गाः कानि समाश्रयन्ते ?
(सरोवर के सूख जाने पर भौरे किनका आश्रय ले लेते हैं?)
उत्तरम् :
सरोवरे सङ्कुचिते भृङ्गाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते।
(सरोवर के सूख जाने पर भौरे आम की मंजरी का आश्रय ले लेते हैं।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

प्रश्न 34.
वने कः वसति ?
(वन में कौन रहता है ?)
उत्तरम् :
वने एकः मानी खगः चातकः वसति।
(वन में एक स्वाभिमानी पक्षी चातक रहता है।)

प्रश्न 35.
जलदः कीदृशानि काननानि आवश्स्य रिक्तो भवति ?
(बादल वनों को किस प्रकार आश्वस्त करके जलहीन (खाली) हो जाता है?)
उत्तरम् :
जलदः रिक्तोभवति उद्दामदावविधुराणि काननानि आश्वस्तं करोति।
(बादल खाली होकर दावाग्नि से नष्ट हुए वनों को आश्वस्त करता है।)

प्रश्न 36.
कवि के सम्बोध्य श्लोकं कथयति ?
(कवि श्लोक किसको सम्बोधित करके कहता है?)
उत्तरम् :
कवि चातकः सम्बोध्य श्लोक कथयति।
(कवि श्लोक चातक को सम्बोधित करके कहता है।

अन्वय-लेखनम् –

अधोलिखितश्लोकस्यान्वयमाश्रित्य रिक्तस्थानानि मञ्जूषातः समुचितपदानि चित्वा पूरयत।
(नीचे लिखे श्लोक के अन्वय के आधार पर रिक्तस्थानों की पूर्ति मंजूषा से उचित पद चुनकर कीजिए।)

1. एकेन ……….. ………… तीरवासिना।। .
मञ्जूषा – तीरवासिना, राजहंसेन, सा, शोभा।
एकेन (i) …………. सरस: या (ii) …………. भवेत् परितः (iii) …………. बकसहस्रेण (iv) …………. (शोभा) न (भवति)।
उत्तरम् :
(i) राजहंसेन (ii) शोभा (iii) तीरवासिना (iv) सा।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

2. भुक्ता …………………. कृतोपकारः।।
मञ्जूषा – निषेवितानि, अम्बूनि, मृणालपटली, कृतोपकारः।
यत्र भवता (i) ………… भुक्ता, (ii) ………… निपीतानि नलिनानि (iii) ………… रे राजहंस ! तस्य सरोवरस्य केन कृत्येन (iv) …………. भविता असि, वद।
उत्तरम् :
(i) मृणालपटली (ii) अम्बूनि (iii) निषेवितानि (iv) कृतोपकारः।

3. तोयैरल्पैरपि………………………. वारिदेन।।
मञ्जूषा – प्रावृषेण्येन, भीमभानौ, विकिरता, करुणया।
हे मालाकार ! (i) …………. निदाघे अल्पैः तोयैः अपि भवता (ii) …………. अस्य तरोः या पुष्टिः व्यरचि। वारां (iii) …………. विश्वतः धारासारान् अपि (iv) …………. वारिदेन इह जनयितुं सा किं शक्या।
उत्तरम् :
(i) भीमभानौ (ii) करुणया (iii) प्रावृषेण्येन (iv) विकिरता।

4. आपेदिरेऽम्बरपथं ………………… गतिमभ्युपैतु।।
मञ्जूषा – कतमां, भृङ्गाः, परितः, अञ्चति। (सङ्कुचिते सरोवरे)
पतङ्गाः (i) …………. अम्बरपथम् आपेदिरे, (ii) …………. रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। सरः त्वयि सङ्कोचम् (iii) …………., हन्त दानदान: मीनः नु (iv) ………….गतिम् अभ्युपतु।।
उत्तरम् :
(i) परितः (ii) भृङ्गाः (iii) अञ्चति (iv) कतमां।

5. एक एव खगो ……………………….. पुरन्दरम्।।
मञ्जूषा – पुरन्दरं, चातकः, एव, पिपासितः।
एक: (i) ……….. मानी खगः (ii) ……….. वने वसति वा (iii) ……….. म्रियते (ii) ………… याचते।।
उत्तरम् :
(i) एव (ii) चातकः (iii) पिपासितः (iv) पुरन्दरं।।

6. आश्वास्य पर्वतकुलं ……….. …… तवोत्तमा श्रीः।।
मञ्जूषा – काननानि, पर्वतकुलम्, उत्तमा, जलद।
तपनोष्णतप्तम् (i) ……….. आश्वास्य उद्दामदावविधुराणि (ii) ……….. च (आश्वास्य) नानानदीनदशतानि पूरयित्वा च हे (ii) ……….. ! यत् रिक्तः असि तव सा एव (ii) ……….. श्रीः।
उत्तरम् :
(i) पर्वतकुलम् (ii) काननानि (iii) जलद (iv) उत्तमा।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

7. रे रे चातक ! ……………………….. दान …….. दीनं वचः।।
मञ्जूषा – एतादृशाः, अम्भोदाः, श्रूयताम, आर्द्रयन्ति।
रे रे मित्र चातक ! सावधानमनसा क्षणं (i) …………. गगने हि बहवः (ii) …………. सन्ति, सर्वेऽपि (iii) … ” ………. न (सन्ति) केचित् वसुधां वृष्टिभिः (iv) …………. केचित् वृथा गर्जन्ति, यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतः दीनं वचः मा ब्रूहि।
उत्तरम् :
(i) श्रूयताम् (ii) अम्भोदाः (iii) एतादृशाः (iv) आर्द्रयन्ति।

प्रश्ननिर्माणम् –

अधोलिखित वाक्येषु स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

1. सरसः शोभा राजहंसेन भवेत्.। (तालाब की शोभा राजहंस से होनी चाहिए।)
2. राजहंसेन सरोवरस्य नलिनानि निषेवितानि। (राजहंस द्वारा सरोवर के कमलनालों का सेवन किया गया।)
3. भृङ्गाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। (भौरे आम के बौर का आश्रय लेते हैं।)
4. पतङ्गाः परितः अम्बरपथं आपेदिरे। (पक्षी चारों ओर आकाश में पहुँच गए।)
5. सरसि संकोचम् अञ्चति मीन: दु:खीभवति। (तालाब के सूख जाने पर मछली दःखी होती है।)
6. मानी चातकः वने वसति। (स्वाभिमानी चातक वन में रहता है।)
7. चातक: पुरन्दरं याचते। (पपीहा इन्द्र से याचना करता है।)।
8. जलदः तपनोष्णतप्तं पर्वतकुलम् आश्वासयति। (बादल सूर्य से सन्तप्त पर्वत समूहों को आश्वस्त करता है।) .
9. जलदः नानानदीनदशतानि पूरयित्वा रिक्तो भवति। (बादल सैकड़ों नदी-नदों को भरकर रिक्त होता है।)
10. वारिदाः वृष्टिभिः वसुधाम् आर्द्रयन्ति। (बादल वर्षा से धरती को गीला करते हैं।)
उत्तराणि :
1. सरसः शोभा केन भवेत् ?
2. राजहंसेन सरोवरस्य कानि निषेवितानि ?
3. भृङ्गाः कानि समाश्रयन्ते ?
4. पतङ्गाः परितः कम् आपेदिरे ?
5. सरसि सङ्कोचमञ्चति कः दुःखी भवति ?
6. मानी चातकः कुत्र वसति ?
7. चातकः कम् याचते ?
8. जलदः के आश्वासयति ?
9. जलदः कानि पूरयित्वा रिक्तो भवति ?
10. वारिदाः काभिः वसुधाम् आर्द्रयन्ति ?

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

भावार्थ-लेखनम् –

अधोलिखित पद्यांश संस्कृते भावार्थ लिखत –

1. एकेन राजहंसेन या ………………………. परितस्तीरवासिना।।
भावार्थ – एकेन मरालेन सरोवरस्य सौन्दर्य स्मात् परञ्च अभितः तट उषितैः सहस्रवकैः सा शोभा न सम्भवति।

2. भुक्ता मृणालपटली भवता …………………………… भवितासि कृतोपकारः।।
भावार्थ – यस्मिन् स्थाने त्वया श्रीमता कमलनाल समूह खादितः नि:शेषाणि जलानि पीतानि कमलानां सेवनं कृतम् रे मराल! अमुष्य तडागस्य केन कार्येण तस्य हितकारकः भविष्यसि (कथं तस्योपकारं करिष्यसि) कथय कथं भविष्यति।

3. तोयैरल्पैरपि करुणया ……………………….. विकिरता विश्वतो वारिदेन।।
भावार्थ – हे उद्यान पाल! भयंकर प्रचण्ड सूर्ये प्रतप्ते ग्रीष्मौ किञ्चित जलेन अपि त्वया अनुकम्पया त्वया एतस्य वृक्षस्य यत्पोषणं त्वया कृतम् किं वर्षा कालिकेन सर्वतः जलधारा वर्षयता जलदेन कर्तुं शक्यते।

4. आपेदिरेऽम्बरपथं परितः …………………………………. कतमां गतिमभ्युपैतु।।
भावार्थ – शुष्के सरसि खगाः सर्वतः आकाशमार्गम् प्राप्नुवन्ति, भ्रमराः रसालानां मञ्जरीणां शरणं गृह्णन्ति। हे सरोवर! त्वयि जलाभावेसति हा अतिदीनाः मत्स्याः कां स्थिति प्राप्स्यन्ति अर्थात् तेषां न कोऽपि आश्रयः।

5. एक एव खगो मानी ……………………….. याचते वा पुरन्दरम्।।
भावार्थ – एकः एव स्वाभिमानी पक्षी सारङ्ग स्तोकको वा कानने निवसति, सः तृषितः मरणम् आप्नोति अन्यथा इन्द्रं देवराजमेव याचनां करोति। (सर्वान् अन्यान् वारिदान् न याचते)।

6. आश्वास्य पर्वतकुलं ………………. यज्जलद ! सैव तवोत्तमा श्रीः।।
भावार्थ – सूर्यस्य उष्णतया प्रतप्तम् गिरिणाम् समूहे विश्वासम् उत्पाद्य विश्वस्तं वा विधायः, उन्नत काष्ठ रहितानि वनानि च समाश्वास्य, अनेकाषां सरितां महानदानां शतानां च कलेवरान् पूर्ण विधाय हे वारिद् ! यत्त्वम् स्वकीयं सर्वं त्यक्त्वा जलहीनो जातोऽसि असावेव ते श्रेष्ठतमा शोभा तदैव ते महनीयता।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

7. रे रे चातक ! सावधानमनसा ………………………………. मा ब्रूहि दीनं वचः।।
भावार्थ – हे सुहृद सारङ्ग! सावहितः सन् किञ्चित् कालम् आकर्णताम् यतः आकाशे अनेके वारिदाः सन्ति (विद्यन्ते) परञ्च निः शेषाः एव न वर्तन्ते एवं विधा। केचिद् तु धराम् वर्षायाः जलेन सिञ्चन्ति यावत् केचन तु व्यर्थमेव गर्जनां कुर्वन्ति अतः त्वं यं यं वारिदं ईक्षसे अमुष्य अमुष्य सम्मुखे याचनायाः करुणं वचनं न वद अर्थात् तं न याचस्व।

अधोलिखितानां सूक्तीनां भावबोधनं सरलसंस्कृतभाषया लिखत –
(निम्नलिखित सूक्तियों का भावबोधन सरल संस्कृत भाषा में लिखिए-)

(i) एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत् न सा बकसहस्रेण।
भावार्थः – यथा एकेन एव हंसेन सरोवरस्य सौन्दर्यं वर्धते न तु सहस्रः बकैः तथैव एकेन एव सज्जनेन पण्डितेन सभायाः शोभा वर्धते न च सहस्रः मूर्खः। (जैसे एक ही हंस से सरोवर का सौन्दर्य बढ़ जाता है न कि हजारों बगुलों से, इसी प्रकार एक ही सज्जन या विद्वान् से सभा की शोभा बढ़ जाती है न कि हजारों मूों से।)

(ii) एक एव खगो मानी वने वसति चातकः।
पिपासितो वा म्रियते याचते वा पुरन्दरम्।।
भावार्थ: – यथा स्वाभिमानी चातकः वने निवसन्नपि तृषया मृत्यु प्राप्नोति परञ्च स्वातिबिन्दुं विना अन्यं जलं न पिबति तथैव धीराः जनाः अपि मरणासन्ने अपि कस्माद् अपि न याचन्ते, ते परमात्मानम् एव याचन्ते। (जिस प्रकार स्वाभिमानी चातक वन में रहते हुए भी प्यास से मृत्यु को प्राप्त हो जाता है परन्तु स्वाति की बूँद के अतिरिक्त अन्य जल नहीं पीता, उसी प्रकार धीर पुरुष मरने की स्थिति में भी किसी से माँगते नहीं, वे परमात्मा से ही याचना करते हैं।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

(iii) यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो माहदानं वचः।
भावार्थ: – कविः चातकस्य व्याजेन मानवाय उपदिशति यत् संसार बहवः धनाढ्याः सन्ति परन्तु ते सर्वे उदारहदयं दातारः न भवन्ति.अत: यं यं पश्यसि त त मा याचे। (कवि बातक के बहाने मनुष्य को उपदेश देता है कि संसार में बहुत से धनवान् हैं परन्तु सभी उदार हृदय दाता नहीं हैं अतः जिस-जिस को देखो उसी-उसी से मत माँगो।)

अन्योक्तयः Summary and Translation in Hindi

पाठ-परिचय – अन्योक्ति का अर्थ है- अन्य (दूसरे) को लक्ष्य करके कही गई बात अर्थात् किसी की प्रशंसा अथवा निन्दा प्रत्यक्ष रूप से कहने की अपेक्षा किसी अन्य को माध्यम बनाकर कहना। कवियों की ऐसी अभिव्यक्ति को ही अन्योक्ति कहते हैं। ये उक्तियाँ (कथन) अत्यन्त मार्मिक होती हैं जो सीधे लक्ष्य का भेदन करती हैं। प्रस्तुत पाठ में ऐसी ही सात अन्योक्तियाँ विविध ग्रन्थों से संकलित की गई हैं जिनमें राजहंस, कोकिल, मेघ, मालाकार, सरोवर तथा चातकं के माध्यम से मानव को परोपकार आदि सवृत्तियों एवं सत्कर्मों में प्रवृत्त होने के लिए प्रेरित किया गया है। पाठ में संकलित अन्योक्तियों में छठी अन्योक्ति महाकवि माघ के ‘शिशुपालवध’ महाकाव्य से तथा सातवीं अन्योक्ति महाकवि भर्तहरि के ‘नीतिशतक’ से ली गई है तथा शेष पाँच पण्डितराज जगन्नाथ के ‘भामिनीविलास’ के अन्योक्ति भाग से संकलित हैं।

मूलपाठः,अन्वयः,शब्दार्थाः, सप्रसंग हिन्दी-अनुवादः।

1 एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत्।
न सा बकसहस्रेण परितस्तीरवासिना।।1।।

अन्वयः – एकेन राजहंसेन सरसः या शोभा भवेत्। परितः तीरवासिना बकसहस्रेण सा (शोभा) न (भवति)।

शब्दार्थाः – एकेन राजहंसेन = एकेन मरालेन (एक हंस से), सरसः = तडागस्य, सरोवरस्य (तालाब की), या शोभा = या सौन्दर्यवृद्धिः, श्रीः (जो शोभा), भवेत् = स्यात् (होनी चाहिए), परितः = अभितः (चारों ओर), तीरवासिना = तटे स्थितैः उषितैः (किनारे पर वास करने वाले), बकसहस्त्रेण = सहस्त्रैः बकैः, बकानां सहस्रेण (हजारों बगुलों से), सा = असौ शोभा (वह शोभा) न भवति = (नहीं होती है)।।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक शेमुषी के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह श्लोक पण्डितराज जगन्नाथ कृत ‘भामिनी विलास’ ग्रन्थ से संकलित है। इस श्लोक में कवि पण्डितराज जगन्नाथ सज्जन-दुर्जन का भेद वर्णन करते हैं।

हिन्दी-अनुवादः – एक (ही) हंस से तालाब की जो शोभा होनी चाहिए, चारों ओर किनारे पर रहने वाले हजारों बगुलों से वह शोभा नहीं होती।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

2. भुक्ता मृणालपटली भवता निपीता न्यम्बूनि यत्र नलिनानि निषेवितानि।
रे राजहंस ! वद तस्य सरोवरस्य, कृत्येन केन भवितासि कृतोपकारः।।2।।

अन्वयः – यत्र भवता मृणालपटली भुक्ता, अम्बूनि निपीतानि नलिनानि निषेवितानि। रे राजहंस ! तस्य सरोवरस्य केन कृत्येन कृतोपकारः भविता असि, वद।।

शब्दार्थाः – यत्र = यस्मिन् स्थाने (जहाँ), भवता = त्वया श्रीमता (आपके द्वारा), मृणालपटली = कमलनाल समूहः (कमलनालों का समूह), भुक्ता = खादिता (खाया गया, भोगा गया), अम्बूनि = जलानि (जल), निपीतानि = निःशेषेण पीतानि, सम्पूर्णरूपेण पीतानि, सम्यक् पीतानि (भलीभाँति पीया गया), नलिनानि = कमलानि (कमलों को), निषेवितानि = सेवितानि (सेवन किए गए), रे राजहंस! = रे मराल ! (अरे राजहंस!), तस्य = अमुष्य (उस), सरोवरस्य = तडागस्य, सरसः (सरोवर का, तालाब का), केन कृत्येन – केन कार्येण (किस कार्य से), कृतोपकारः = कृतः उपकारः येन सः सम्पादितोपकारः, हितकारकः (उपकार किया हुआ, प्रत्युपकार करने वाला), भविता असि = भविष्यति (होगा), वद = ब्रूहि, कथय (बोलो)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक शेमुषी के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह श्लोक पण्डितराज जगन्नाथ विरचित ‘भामिनी विलास’ ग्रन्थ से संकलित है। इसमें कवि राजहंस के बहाने मनुष्य को प्रत्युपकार करने हेतु प्रेरित करता है।

हिन्दी-अनुवादः – जहाँ आपके द्वारा कमलनालों का समूह खाया गया, जल भलीभाँति पिया गया, कमलों का सेवन किया गया। हे राजहंस! उस तालाब का किस कार्य से प्रत्युपकार करने वाले होंगे अर्थात् उसका प्रत्युपकार किस कार्य से करेंगे।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

3. तोयैरल्यैरपि करुणया भीमभानौ निदाघे, मालाकार ! व्यरचि भवता या तरोरस्य पुष्टिः।
सा किं शक्या जनयितुमिह प्रावृषेण्येन वारां, धारासारानपि विकिरता विश्वतो वारिदेन।।3।।

अन्वयः – हे मालाकार! भीमभानौ निदाघे अल्पैः तोयैः अपि भवता करुणया अस्य तरोः या पुष्टिः व्यरचि। वारां प्रावृषेण्येन विश्वतः धारासारान् अपि विकिरता वारिदेन इह जनयितुम् सा (पुष्टि:) किं शक्या।।

शब्दार्थाः – हे मालाकार ! = हे उद्यानपाल, हे सक्कार ! (अरे माली!), भीमभानौ = भीमः भानुः यस्मिन् सः भीमभानुः, तस्मिन् अति तीक्ष्णांशुमति तपति (ग्रीष्मकाल में सूर्य के अत्यधिक तपने पर), निदाघे = ग्रीष्मकाले (ग्रीष्म काल में), अल्पैः तोयैः अपि = किञ्चित् जलेन अपि (थोड़े पानी से भी), भवता = त्वया (आपके द्वारा), करुणया = अनुकम्पया, दयया (करुणा द्वारा, करुणा के साथ, दया से), अस्य तरोः = एतस्य वृक्षस्य (इस वृक्ष की), या पुष्टिः = या पुष्टता, या वृद्धिः, यत्पोषणम् (जो पोषण), व्यरचि = कृता, कृतम्, रचना क्रियते (की जाती है, की गई), वाराम् = जलानां (जलों के), प्रावृषेण्येन = वर्षाकालिकेन (वर्षाकालिक, वर्षाकाल के), विश्वतः = सर्वतः (सभी ओर), धारासारान् अपि = धाराणाम् आसारा अपि (जलधाराओं के प्रवाहों को भी), विकिरता = जलं वर्षयता (जल बरसाते हुए), वारिदेन = जलदेन (बादल द्वारा), इह = अस्मिन् संसारे (इस संसार में), जनयितुम् = उत्पादयितुम् (उत्पन्न/पैदा करने के लिए), सा पुष्टिः = तत्पोषणम् (वह पुष्टि), किम् शक्या = अपि सम्भवा, सम्भवति (क्या सम्भव है)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी शेमुषी पाठ्यपुस्तक के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पद्य पण्डितराज जगन्नाथ रचित ‘भामिनी विलास’ काव्य से संकलित है। इस पद्य में कवि माली के बहाने से एक अच्छे पालनकर्ता के लक्षण बताता है।

हिन्दी-अनुवादः – अरे माली ! सूर्य के अत्यधिक तपने वाले ग्रीष्मकाल में थोड़े पानी से भी आपके द्वारा करुणा के साथ इस वृक्ष का जो पोषण किया गया है (किया जाता है) वर्षा-कालिक जल की सभी ओर से जलधाराओं के प्रवाह से भी जल बरसाते हुए बादल के द्वारा इस संसार में उस पोषण को पैदा करने में समर्थ है क्या ?

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

4. आपेदिरेऽम्बरपथं परितः पतङ्गाः, भृङ्गा रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते।
सङ्कोचमञ्चति सरस्त्वयि दीनदीनो, मीनो नु हन्त कतमां गतिमभ्युपैतु।।4।।

अन्वयः – (सङ्कुचिते सरोवरे) पतङ्गाः परितः अम्बरपथम् आपेदिरे, भृङ्गाः रसालमुकुलानि समाश्रयन्ते। सरः त्वयि सङ्कोचम् अञ्चति, हन्त दीनदीन: मीनः नु कतमां गतिम् अभ्युपैतु।।

शब्दार्थाः – [सङ्कुचिते सरोवरे (सरोवर के सूख जाने पर)] पतङ्गाः = खगाः (पक्षी), परितः = सर्वतः, (सभी ओर), अम्बरपथम् = आकाशमार्गम् (आकाश मार्ग को), आपेदिरे = प्राप्तवन्तः, प्राप्नुवन्ति (प्राप्त कर लिए/लेते हैं), भृङ्गाः = भ्रमराः, द्विरेफाः (भौरे, भँवरे), रसालमुकुलानि = रसालानाम् आम्राणां मुकुलानि मञ्जरीम मञ्जाः मञ्जरीणाम् (आम की मञ्जरियों को/का), समाश्रयन्ते = शरणं प्राप्नुवन्ति (आश्रय लेते हैं), सरः = हे सरोवर ! हे तडाग ! (हे तालाब !), त्वयि = ते, तव भवति (तेरे), सङ्कोचम् अञ्चति = सङ्कचिते सति गच्छति (तुम्हारे संकुचित हो जाने पर, सूखकर जल कम हो जाने पर), हन्त = खेदः (खेद है), दीनदीनः = अतिदीनः (बेचारा), मीनः नुः = मत्स्यः , मत्स्यगणः (मछलियाँ), कतमां गतिम् = कां स्थितिं (किस गति को), अभ्युपैतु = प्राप्नोतु (प्राप्त करें)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी शेमुषी पाठ्यपुस्तक के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पद्य पण्डितराज जगन्नाथ कृत् ‘भामिनी विलास’ काव्य से संकलित है। इस पद्य में कवि तालाब के माध्यम से मानव को उसकी स्थिति से अवगत कराते हुये कहता है। जैसे तालाब के सूख जाने पर सभी जीव उसे अकेला छोड़कर चले जाते हैं। वैसे मनुष्य को भी स्वार्थ पूरा होने पर छोड़ जाते हैं।

हिन्दी-अनुवादः – (सरोवर के सूख जाने पर) पक्षी चारों ओर आकाश मार्ग को प्राप्त कर लेते हैं अर्थात् आकाश में उड़ जाते हैं। भौरे आम की मञ्जरी का आश्रय ले लेते हैं (प्राप्त कर लेते हैं) हे तालाब ! तुम्हारे संकुचित हो जाने पर (सूख जाने पर) खेद है बेचारी मछलियाँ किस गति को प्राप्त करें (करेंगी)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

5. एक एव खगो मानी वने वसति चातकः।
पिपासितो वा म्रियते याचते वा पुरन्दरम्।।5।।

अन्वयः – एकः एव मानी खग: चातक: वने वसति वा पिपासितः म्रियते पुरन्दरं याचते।।

शब्दार्थाः — एक एव मानी = एक एव स्वाभिमानी (एक ही स्वाभिमानी), खगः = पक्षी, अण्डजः (पक्षी), चातकः = स्तोककः, सारङ्गः (पपीहा), वने = कानने (वन में), वसति = निवसति (रहता है), वा = अथवा (अथवा), पिपासितः = तृषितः (प्यासा), म्रियते = मरणं प्राप्नोति, मृत्युं लभते, मृत्युं वृणोति (मर जाता है), पुरन्दरम् = इन्द्रम् (इन्द्र से), याचते = याचनां करोति (माँगता है, याचना करता है)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी शेमुषी पाठ्यपुस्तक के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पद्य पण्डितराज जगन्नाथ रचित ‘भामिनीविलास’ ग्रन्थ से लिया गया है। इस श्लोक में कवि चातक पक्षी के माध्यम से स्वाभिमान को कायम रखने के लिये कहता है।

हिन्दी-अनुवादः – एक ही स्वाभिमानी पक्षी पपीहा वन में निवास करता है (वह) या तो प्यासा (ही) मर जाता है अथवा इन्द्र से याचना करता है (किसी अन्य से नहीं)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

6. आश्वास्य पर्वतकुलं तपनोष्णतप्तमुद्दामदावविधुराणि च काननानि।
नानानदीनदशतानि च पूरयित्वा, रिक्तोऽसि यज्जलद ! सैव तवोत्तमा श्रीः।।6।।

अन्वयः – तपनोष्णतप्तम् पर्वतकुलम् आश्वास्य उद्दामदावविधुराणि काननानि च (आश्वास्य) नानानदीनदशतानि पूरयित्वा च हे जलद ! यत् रिक्तः असि तव सा एव उत्तमा श्रीः।

शब्दार्थाः – तपनोष्णतप्तम् = सूर्यस्य उष्णतया प्रतप्तम् (सूर्य की गर्मी से तपे हुए), पर्वतकुलम् = गिरीणाम् समूहम् (पर्वतों के समूह को), आश्वास्य = विश्वासम् उत्पाद्य, समाश्वास्य सन्तोष्य (सन्तुष्ट/आश्वस्त करके), उद्दामदाववि धुराणि = उन्नतकाष्ठरहितानि (ऊँचे काष्ठों अर्थात् वृक्षों से रहित), काननानि च = बनानि च (और वनों को), [आश्वास्य = समाश्वास्य (आश्वस्त करके)], नानानदीनदशतानि = अनेकसरितः नदानां शतानि च (अनेक नदियों और सैकड़ों नदों को), पूरयित्वा च = पूर्णं कृत्वा च (और पूर्ण करके, भरकर), हे जलद ! – हे वारिद ! (हे मेघ !), यत् रिक्तः असि = यत्त्वम् जलहीनः जातोऽसि (जो तुम जलहीन हो गए हो), तव सा एव = तेऽअसावेव (तेरी वही), उत्तमा श्रीः = श्रेष्ठा/श्रेष्ठतमा शोभा (अस्ति), (उत्तम शोभा है)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च- यह पद्य हमारी शेमुषी पाठ्यपुस्तक के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पद्य महाकवि माघकृत ‘शिशुपालवधम्’ महाकाव्य से संकलित है। इस श्लोक में कवि जलद (मेघ) के माध्यम से मानव को दान और परोपकार के लिये प्रेरित करता है।

हिन्दी-अनुवादः – सूर्य की गर्मी से तपे हुए पर्वतों के समूह को सन्तुष्ट करके और ऊँचे काष्ठों अर्थात् वृक्षों से रहित वनों को आश्वस्त करके अनेक नदियों और सैकड़ों नदों को भरकर हे मेघ ! जो तुम जलहीन (खाली) हो गएं हो, वही तुम्हारी उत्तम शोभा है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

7. रे रे चातक ! सावधानमनसा मित्र क्षणं श्रूयता –
मम्भोदा बहवो हि सन्ति गगने सर्वेऽपि नैतादृशाः।
केचिद् वृष्टिभिरार्द्रयन्ति वसुधां गर्जन्ति केचिद् वृथा,
यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वचः।।7।।

अन्वयः – रे रे मित्र चातक ! सावधानमनसा क्षणं श्रूयताम, गगने हि बहवः अम्भोदाः सन्ति, सर्वेऽपि एतादृशाः न (सन्ति), केचित् वसुधां वृष्टिभिः आर्द्रयन्ति, केचित् वृथा गजेन्ति, (त्व म्) यं यं पश्यसि तस्य तस्य पुरतः दीनं वचः मा ब्रूहि।

शब्दार्थाः – रे मित्र चातक! = हे सुहृद् सारङ्ग ! (हैं मित्र पपीहे !), सावधानमनसा = सावहितः सन् (सावधान मन से), क्षणम् = क्षणमात्रम्, किञ्चित् कालम् (क्षणभर), श्रूयताम् = आकण्यताम् श्रुणुहि (सुनिए), गगने = आकाशे (आकाश में). हि = यतः (क्योंकि). बहवः = अनेके (बहत से). अभीदाः – वारिदाः (बादल हैं). सर्वेऽपि = निः शेषाः अपि (सभी), एतादृशाः = एवं विधाः (इस प्रकार के), न सन्ति = नहि वर्तन्ते (नहीं हैं), केचित् वसुधां = केचन् पृथिवी, धरातलं (धरती को), वृष्टिभिः = वर्षया जलेन (पानी बरसाकर), आद्रयन्ति – आद्रं कुर्वन्ति, सिञ्चन्ति, क्लेदयन्ति (गीला कर देते हैं), केचित् – केचन (कुछ), वृथा = व्यर्थमेव (व्यर्थ ही), गर्जन्ति = गर्जनं कुर्वन्ति (गरजते है), [त्वम् = तुम], यं यं पश्यसि = यं यम् ईक्षसे (जिस जिसको देखते हो), तस्य तस्य पुरुतः = अमुष्य अमुष्य सम्मुखे, समक्षे (उस उसके सामने), दीनं वचः = करुणवचनं (दीन वचन), मा. न (मत), ब्रूहि = वद (बोलो)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 12 अन्योक्तयः

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह पद्य हमारी शेमुषी पाठ्यपुस्तक के ‘अन्योक्तयः’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह श्लोक कवि नीतिकार भर्तृहरि रचित नीति शतक से संकलित है। इस श्लोक में कवि नीतिकार मानव को चातक के माध्यम से उपदेश देता है जिस किसी के सामने हाथ मत फैलाओ क्योंकि सभी धार्मिक (बादल) दाता नहीं होते।

हिन्दी-अनुवादः – हे मित्र पपीहे ! सावधान मन से (ध्यान से) क्षणभर सुनिए कि आकाश में बहुत से बादल हैं (परन्तु) सभी इस प्रकार के नहीं हैं। कुछ तो पानी बरसाकर धरती को गीला कर देते हैं (और) कुछ व्यर्थ ही गर्जते हैं। तुम जिस जिस को देखो उस उसके सामने दीन वचन मत बोलो अर्थात् याचना मत करो।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

Jharkhand Board JAC Class 10 Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

JAC Class 10th Sanskrit प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिये)
(क) कः चन्दन दासं दृष्टुम् इच्छति?
(चन्दनदास से कौन मिलना चाहता है?)
उत्तरम् :
चाणक्यः।

(ख) चन्दनदासस्य वणिज्या कीदृशी आसीत्?
(चन्दनदास का व्यापार कैसा था?)
उत्तरम् :
अखण्डिता (बाधा रहित)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

(ग) किं दोषम् उत्पादयति?
(क्या दोष पैदा करता है?)
उत्तरम् :
गृहजन प्रच्छादनम्। (घरवालों को छुपाना)।

(घ) चाणक्य के द्रष्टुम् इच्छति?
(चाणक्य किससे मिलना चाहता है?)
उत्तरम् :
चन्दनदासम् (चन्दन दास का)।

(ङ) कः शङ्कनीयः भवति ?
(कौन शंका के योग्य होता है?)
उत्तरम् :
अत्यादरः (अधिक आदर)।

प्रश्न 2.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत –
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)
(क) चन्दनदासः कस्य गहजनं स्वगृहे रक्षति स्म ?
(चन्दनदास किसके परिवारवालों को अपने घर में रखता था ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासः अमात्यराक्षसस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षति स्म।
(चन्दनदास अमात्य राक्षस के परिवार के लोगों को अपने घर में रखता था।)

(ख) तृणानां केन सह विरोधः अस्ति ?
(तिनको का किसके साथ विरोध है ?)
उत्तरम् :
तृणानाम् अग्निना सह विरोधः अस्ति।
(तिनकों का अग्नि के साथ विरोध है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

(ग) पाठेऽस्मिन् चन्दनदासस्य तुलना केन सह कृता ?
(इस पाठ में चन्दनदास की तुलना किसके साथ की गई है?)
उत्तरम् :
पाठेऽस्मिन् चन्दनदासस्य तुलना शिविना सह कृता।
(इस पाठ में चन्दनदास की तुलना शिवि के साथ की गई है।)

(घ) प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियं के इच्छन्ति ?
(कौन (लोग) प्रसन्नस्वभाव वालों से उपकार का बदला चाहते हैं ?)
उत्तरम् :
प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियं राजानः इच्छन्ति। (राजा (लोग) प्रसन्न स्वभाव वालों से उपकार का बदला चाहते

(ङ) कस्य प्रसादेन चन्दनदासस्य वणिज्या अखण्डिता ? (किसकी कृपा से चन्दनदास का व्यापार निर्बाध था ?)
उत्तरम् :
आर्यचाणक्यस्य प्रसादेन चन्दनदासस्य वणिज्या अखण्डिता।
(आर्य चाणक्य की कृपा से चन्दनदास का व्यापार निर्बाध था।)

प्रश्न 3.
स्थूलाक्षरपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(मोटे छपे शब्दों के आधार पर प्रश्न-निर्माण कीजिए)
(क) शिविना विना इदं दुष्करं कार्यं कः कुर्यात्
(शिवि के बिना यह दुष्कर कर्म कौन करे।)
उत्तरम् : केन विना इदं दुष्करं कार्य कः कुर्यात् ?
(किसके बिना यह दुष्कर कर्म कौन करे ?)

(ख) प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृत्।
(प्राणों से भी प्यारा मित्र (होता है)।)
उत्तरम् :
प्राणेभ्योऽपि प्रियः कः ?
(प्राणों से भी प्यारा कौन है?)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

(ग) आर्यस्य प्रसादेनं मे वणिज्या अखण्डिता।
(आर्य की कृपा से मेरा व्यापार निर्बाध है।)
उत्तरम् :
कस्य प्रसादेन मे वणिज्या अखण्डिता।
(किसकी कृपा से मेरा व्यापार निर्बाध है ?)

(घ) प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः राजानः प्रतिप्रियमिच्छन्ति।
(प्रसन्नस्वभाव वालों से राजा लोग प्रत्युपकार का बदला चाहते
उत्तरम् :
प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः के प्रतिप्रियमिच्छन्ति ?
(प्रसन्न स्वभाव वालों से कौन प्रत्युपकार का बदला चाहते हैं ?)

(ङ) तणानाम् अग्निना सह विरोधो भवति।
(तिनकों का आग के साथ विरोध होता है।)
उत्तरम् :
केषाम् अग्निना सह विरोधो भवति ?
(किनका अग्नि के साथ विरोध होता है ?)

प्रश्न 4.
यथानिर्देशमुत्तरत् –
(क) ‘अखण्डिता मे वणिज्या’- अस्मिन् वाक्ये क्रियापदं किम्?
(ख) पूर्वम् ‘अनृतम्’ इदानीम् आसीत् इति परस्परविरुद्ध वचने – अस्मात् वाक्यात् ‘अधुना’ इति पदस्य समानार्थकपदं चित्वा लिखत।
(ग) ‘आर्य! किं मे भयं दर्शयसि’ अत्र ‘आर्य’ इति सम्बोधनपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(घ) ‘प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः’ अस्मिन् वाक्ये कर्तृपदं किम्?
(ङ). तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे’ अस्मिन् वाक्ये विशेष्यपदं किम्?
उत्तरम् :
(क) अखण्डिता
(ख) इदानीम्
(ग) चाणक्याय
(घ) राजानः
(ङ) गृहे।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 5. निर्देशानुसारम् सन्धि/सन्धिविच्छेदं कुरुत –
(निर्देश के अनुसार सन्धि/सन्धि-विच्छेद कीजिए)
(क) यथा – कः + अपि = कोऽपि
प्राणेभ्यः + अपि = …………
………. + अस्मि = सज्जोऽस्मि
आत्मनः + ………. = आत्मनोऽधिकारसदृशम्।
उत्तरम् :
प्राणेभ्यः + अपि = प्राणेभ्योऽपि
सज्जः + अस्मि = सज्जोऽस्मि
आत्मनः + अधिकारसदृशम् = आत्मनोऽधिकारसदृशम्।

(ख) यथा – सत् + चित् = सच्चित्।
शरत् + चन्द्रः = ……………..।
कदाचित् + च = ……………..।
उत्तरम् :
शरत् + चन्द्रः = शरच्चन्द्रः।
कदाचित् + च = कदाचिच्च।

प्रश्न 6.
कोष्ठकेषु दत्तयोः पदयोः शुद्धं विकल्पं विचित्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
(कोष्ठकों में दिए हुए दो पदों में से शुद्ध विकल्प चुनकर रिक्तस्थानों की पूर्ति कीजिए)
(क) …………… विना इदं दुष्करं कः कुर्यात् ? (चन्दनदासस्य/चन्दनदासेन)
उत्तरम् :
चन्दनदासेन

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

(ख) …………… इदं वृत्तान्तं निवेदयामि। (गुरवे/गुरोः)
उत्तरम् :
गुरवे

(ग) आर्यस्य ……….. अखण्डिता मे वणिज्या। (प्रसादात्/प्रसादेन)
उत्तरम् :
प्रसादेन

(घ) अलम् ……………। (कलहेन/कलहात्)
उत्तरम् :
कलहेन।

(ङ) वीरः …………… बालं रक्षति। (सिंहेन/सिंहात्)
उत्तरम् :
सिंहात्।

(च) ………. भीतः मम भ्राता सोपानात् अपतत्।। (कुक्कुरेण/कुक्कुरात्)
उत्तरम् :
कुक्कुरात्।

(छ) छात्रः …………… प्रश्नं पृच्छति। (आचार्यम्/आचार्येण)
उत्तरम् :
आचार्यम्।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 7.
अधोदत्तमञ्जूषातः समुचितपदानि गृहीत्वा विलोमपदानि लिखत –
(नीचे दिए गए मञ्जूषा (बॉक्स) से उचित पद लेकर विलोम पद लिखिए)
[असत्यम्, पश्चात्, गुणः, आदरः, तदानीम्, तत्र पदानि]
(क) अनादरः ………..
(ख) गुणः ………..
(ग) पश्चात् ………..
(घ) असत्यम् ………..
(ङ) तदानीम् ………..
(च) तत्र ………..
उत्तराणि :
(क) आदरः
(ख) दोषः
(ग) पूर्वम्
(घ) सत्यम्
(ङ) इदानीम्
(च) अत्र

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 8.
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितानि पदानि प्रयुज्य पञ्चवाक्यानि रचयत –
(उदाहरण के अनुसार निम्न पदों का प्रयोग करके पाँच वाक्य बनाइए-)
यथा – निष्क्रम्य – शिक्षिका पुस्तकालयात् निष्क्रम्य कक्षां प्रविशति।
पदानि –
(क) उपसृत्य ……………….
(ख) प्रविश्य ………………
(ग) द्रष्टुम् …………………
(घ) इदानीम् ……………..
(ङ) अत्र ………………
उत्तराणि :
(क) उपसत्य स आह, एषः श्रेष्ठी चन्दनदासः।
(ख) वने प्रविश्य रामः पर्णकुटीम् अरचयत्।
(ग) अहं त्वां द्रष्टुम् इच्छामि।
(घ) इदानीं भवान् कुत्र गच्छति ?
(ङ) अत्र मम विद्यालयः स्थितः।

JAC Class 10th Sanskrit प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् Important Questions and Answers

शब्दार्थ चयनम् –

अधोलिखित वाक्येषु रेखांकित पदानां प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थ चित्वा लिखत –

प्रश्न 1.
वत्स ! मणिकारश्रेष्ठिनं चन्दनदासमिदानीं द्रष्टुमिच्छामि।
(अ) रत्नकार
(ब) तथेति
(स) श्रेष्ठिन्
(द) परिक्रामतः
उत्तरम् :
(अ) रत्नकार

प्रश्न 2.
उपाध्याय ! अयं श्रेष्ठी चन्दनदासः।
(अ) स्वागतं ते
(ब) गुरुदेव
(स) आत्मगतम्
(द) वणिज्या
उत्तरम् :
(ब) गुरुदेव

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 3.
नन्दस्यैव अर्थसम्बन्धः प्रीतिमुत्पादयति।
(अ) नन्दराज्यम्
(ब) नन्दस्यैव
(स) धनस्य सम्बधः
(द) उत्पादयति
उत्तरम् :
(स) धनस्य सम्बधः

प्रश्न 4.
पुनरधन्यो राज्ञो विरुद्ध इति आर्येणावगम्यते ?
(अ) श्रेष्ठिन्!
(ब) आज्ञापयतु
(स) प्रथमम्
(द) नृपस्य
उत्तरम् :
(द) नृपस्य

प्रश्न 5.
अयमीदृशो विरोधः यत् त्वमद्यापि-
(अ) मतभेदः
(ब) राजापथ्यकारिणः
(स) स्वगृहे
(द) निवेदितम्
उत्तरम् :
(अ) मतभेदः

प्रश्न 6.
गृहेषु गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति।
(अ) इच्छतामपि
(ब) स्थापयित्वा
(स) दोषमुत्पादयति।
(द) परस्परं
उत्तरम् :
(ब) स्थापयित्वा

प्रश्न 7.
भो श्रेष्ठिन् ! शिरसि भयम्, अतिदूरं तत्प्रतिकारः।
(अ) इदानीम्
(ब) कथम् न
(स) मस्तके
(द) तंदुलः
उत्तरम् :
(स) मस्तके

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 8.
चन्दनदास ! एष एव ते निश्चयः ?
(अ),समर्पयामि
(ब) अयम्
(स) त्वम्
(द) तव
उत्तरम् :
(द) तव

प्रश्न 9.
क इदं दुष्करं कुर्यादिदानीं शिविना विना –
(अ) कठिन।
(ब) स्वगतम्
(स) साधुः
(द) अतिदूरम्
उत्तरम् :
(अ) कठिन।

प्रश्न 10.
ननु भवता प्रष्टव्याः स्मः –
(अ) निश्चितमेव
(ब) राज्ञो विरुद्धः
(स) प्रथमम्
(घ) पिधाय
उत्तरम् :
(अ) निश्चितमेव

संस्कृतमाध्यमेन प्रश्नोत्तराणि –

एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 1.
चाणकस्य कृपया कस्य वणिज्या अखण्डिता ?
(चाणक्य की कृपा से किसका व्यापार बाधारहित था ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासस्य (चन्दनदास का)।

प्रश्न 2.
कः सम्बन्धः प्रीतिमुत्पादयति ?
(कौनसा सम्बन्ध प्रेम पैदा करता है ?)
उत्तरम् :
अर्थसम्बन्धः (धन का संबंध)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 3.
कुत्र अविरुद्धवृत्तिः ?
(कहाँ विरोध रहित स्वभाव वाले बनो ?)
उत्तरम् :
राजनि (राजा के प्रति)।

प्रश्न 4.
केन चन्दनदासो राज्ञो विरुद्ध इति अवगम्यते ?
(कौन ‘चन्दनदास राजा के विरुद्ध है’ यह जानता है? )
उत्तरम् :
चाणक्यः (चाणक्य)।

प्रश्न 5.
अमात्यराक्षसस्य गृहजनः का क्या गृहे असीत ?
(अमात्य राक्षस के घरवाले किसके घर में थे ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासस्य (चन्दनदास के)।

प्रश्न 6.
चन्दनदासानुसारम् अलीकम चायनसाय क्रेन निवेदितम् ?
(चन्दनदास के अनुसार चाणवले मिथ्या किसने कहा ?)
उत्तरम् :
केनाप्यनार्येण (किलो दुष्ट थे)।

प्रश्न 7.
चन्दनदासस्य दुष्कर कार्य किमामील ?
(चन्दनदास का दुष्कर कार्य क्या था ?)
उत्तरम् :
निश्चयः (निश्चय)।

प्रश्न 8.
‘क इदं दुष्करं कुर्यादिदानीं शिविना विना’ अत्र किं क्रियापदम् ?
(‘क इदं दुष्करं कुर्यादिदानी शिविना विना’ यहाँ क्रियापद क्या है ?)
उत्तरम् :
कुर्यात् (करे)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 9.
मणिकारश्रेष्ठिनं कः द्रष्टुम् इच्छति ?
(जौहरी सेठ से कौन मिलना चाहता है ?)
उत्तरम् :
चाणक्यः (चाणक्य)।

प्रश्न 10.
चाणक्यः कं द्रष्टुम् इच्छति ?
(चाणक्य किससे मिलना चाहता है ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासम् (चन्दनदास से)।

प्रश्न 11.
चाणक्यानुसारं चन्दनदासः राजानं प्रति कीदृशः भवितव्य ?
(चाणक्य के अनुसार चन्दनदास राजा के प्रति कैसा हो?)
उत्तरम् :
अविरुद्धवृत्तिर्भव (विरोध रहित स्वभाव वाले।)

प्रश्न 12.
कस्तावत् प्रथमम् ? (कौन प्रमुख है?)
उत्तरम् :
भवान् (आप, चन्दनदास)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 13.
के भीताः देशान्तरं व्रजन्ति ?
(डरे हुए कौन परदेश जाते हैं ?)
उत्तरम् :
राजपुरुषाः (राजपुरुष)।

प्रश्न 14.
चाणक्यानुसारं चन्दनदासस्य वचने कीदृशे आस्ताम् ?
(चाणक्य के अनुसार चन्दनदास के दोनों वचन कैसे थे ?)
उत्तरम् :
परस्परविरुद्धे (दोनों परस्पर विरुद्ध)।

प्रश्न 15.
चन्दनदासः कस्य गृहजनं न समर्पयति ?
(चन्दनदास किसके परिवारीजनों को नहीं सौंपता है?)
उत्तरम् :
राक्षसस्य (राक्षस के)।

प्रश्न 16.
अस्मिन् नाट्यांशे चन्दनदासस्य तुलना केन सह कृता ?
(इस नाट्यांश में चन्दनदास कीतुलना किसके साथ की गई है ?)
उत्तरम् :
शिविना (शिवि से)।

पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 17.
चन्दनदासः काम् आज्ञाम् इच्छति ?
(चन्दनदास क्या आज्ञा चाहता है ?)
उत्तरम् :
चन्दनदास: ‘किं कियत् च अस्मज्जनादिश्यते’ इति आज्ञाम् इच्छति।
(चन्दनदास ने ‘क्या और कितना हम लोगों को आदेश दिया जाता है’ ऐसी आज्ञा चाहता है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 18.
चन्दनदासेन चाणक्यः किं प्रष्टव्यः ?
(चन्दनदास से चाणक्य क्या पूछता है?)
उत्तरम् :
यो श्रेष्ठिन ! स चापरिक्लेशः कथमाविर्भवति ?
(सेठजी, वह सुख किस प्रकार प्राप्त होता है ?)

प्रश्न 19.
चन्दनदासः कर्णौ पिधाय किम् अवदत्?
(चन्दनदास कानों को ढंककर क्या बोला ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासः कर्णौ पिधाय अवदत्-शान्तं पापम्, शान्तं पापम्। कीदृशस्तृणानामाग्निना सह विरोधः?
(कानों पर हाथ रखकर चन्दनदास ने कहा- पाप शान्त हो, पाप शांत हो तिनकों के साथ आग का कैसा विरोध ?)

प्रश्न 20.
अमात्यराक्षसस्य गृहजनविषये चन्दनदासः कथं स्वीकरोति ?
(अमात्य राक्षस के घरवालों के विषय में चन्दनदास कैसे स्वीकार करता है ?)
उत्तरम् :
‘तस्मिन् समये तु अमात्यराक्षसस्य गृहजनः मम गृहे आसीत्’ इदानीं क्व गतः, न जानामि।
(उस समय तो अमात्य राक्षस के घरवाले मेरे घर में थे, अब कहाँ गये, नहीं जानता हूँ।)

प्रश्न 21.
चन्दनदासः कोऽस्ति ?
(चन्दनदास कौन है ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासः मणिकारः श्रेष्ठी अस्ति।
(चन्दनदास जौहरी सेठ है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्न 22.
अविरुद्धवत्तिः कस्मिन भवेत ?
(किसके प्रति अनकल व्यवहार करने वाला होना चाहिए ?)
उत्तरम् :
राजनि अविरुद्धवृत्तिर्भवेत्।
(राजा के प्रति अनुकूल व्यवहार करने वाला होना चाहिए।)

प्रश्न 23.
भीताः पूर्वराजपुरुषाः किं कुर्वन्ति ?
(डरे हुए पूर्व राजपुरुष क्या करते हैं?)
उत्तरम् :
भीताः पूर्वराजपुरुषाः पौराणामिच्छतामपि गृहेषु गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति।
(डरे हुए पूर्व राजपुरुष नगरवासियों के चाहने पर भी उनके घरों पर स्वजनों को रखकर परदेश चले जाते हैं।)

प्रश्न 24.
“किं मे भयं दर्शयसि” इति कः कं प्रति कथयति?
(…. कौन किसके प्रति कहता है ?)
उत्तरम् :
चन्दनदासः चाणक्यं प्रति कथयति।
(चन्दनदास चाणक्य के प्रति कहता है।)

अन्वय-लेखनम् –

अधोलिखितश्लोकस्यान्वयमाश्रित्य रिक्तस्थानानि मञ्जूषातः समुचितपदानि चित्वा पूरयत।
(नीचे लिखे श्लोक के अन्वय के आधार पर रिक्तस्थानों की पूर्ति मंजूषा से उचित पद चुनकर कीजिए।)
सुलभेष्वर्थलाभेषु ……………. …………………. शिविना विना।।

मञ्जूषा – सुलभेषु, संवेदने, शिविना, कः।

परस्य (i)……… अर्थलाभेषु (ii)……… इदं दुष्करं कर्म जने (लोके) (iii)……… विना (iv)……… कुर्यात्।
उत्तरम् :
(i) संवेदने (ii) सुलभेषु (iii) शिविनाः (iv) कः।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

प्रश्ननिर्माणम् –

अधोलिखित वाक्येषु स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

1. चाणक्यः मणिकारश्रेष्ठिनं चन्दनदासं द्रष्टुमिच्छति।
(चाणक्य रत्नकार चन्दनदास को देखना चाहता है।)
2. शिष्यः चन्दनदासेन सह प्रविशति।
(शिष्य चन्दनदास के साथ प्रवेश करता है।)
3. आर्यस्य प्रसादेन अखण्डिता मे वणिज्या।
(आर्य की कृपा से मेरा व्यापार निर्विघ्न है।)
4. राजानः प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति।
(राजा लोग प्रसन्न प्रकृति वाले का प्रत्युपकार करते हैं।)
5. नन्दस्य अर्थसम्बन्धः प्रीतिमुत्पादयति।
(नन्द का अर्थ सम्बन्ध प्रीति पैदा करता है।)
6. राजनि अविरुद्धवृत्तिर्भवेत्।
(राजा में विरोधी प्रवृत्ति वाला नहीं होना चाहिए।)
7. भीताः पूर्वराजपुरुषाः गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति।
(डरे हुए पूर्व राजपुरुष घरवालों (स्वजनों) को रखकर परदेश चले जाते हैं।)
8. अग्निना सह तृणानां विरोधः।
(अग्नि के साथ तिनकों (घास) का विरोध है।)
9. प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहत्।
(प्राणों से भी प्रिय स्वजन होता है।)
(माध्यमिक परीक्षा, 2013)
10. अत्यादरः शङ्कनीयः।
(अधिक आदर शंका करने योग्य होता है।)
उत्तराणि :
1. चाणक्यः कं द्रष्टुम् इच्छति ?
2. शिष्यः केन सह प्रविशति ?
3. कस्य प्रसादेन अखण्डिता मे वणिज्या ?
4. राजानः काभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति ?
5. कस्य अर्थसम्बन्धः प्रीतिम् उत्पादयति ?
6. कस्मिन् अविरुद्धवृत्तिर्भवेत् ?
7. के गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति ?
8. केन सह तृणानां विरोधः ?
9. कः प्राणेभ्योऽपि प्रियः ?
10. कः शङ्कनीयः ?

भावार्थ-लेखनम् –

अधोलिखित पद्यांश संस्कृते भावार्थं लिखत सुलभेष्वर्थलाभेषु ……………………………कुर्यादिदानीं शिविना विना।।

भावार्थ – अन्यस्य वस्तु समर्पिते कृते, धन प्राप्तेषु, सहजेषु सत्सु एतत् स्वार्थं त्यक्त्वा परस्य वस्तु रक्षणं-कर्त्तव्यम् लोके कठिनम्, शिविमन्तरेण कः सम्पादयेत्।।

अधोलिखितानां सूक्तीनां भावबोधनं सरलसंस्कृतभाषया लिखत –
(निम्नलिखित सूक्तियों का भावबोध सरल संस्कृत भाषा में लिखिए-)

(i) अत्यादरः शङ्कनीयः।

भावार्थः – यः मनुष्यः अत्यधिकम् आदरं करोति, सः वञ्चनप्रयोजनेन करोति अतः अत्यधिक: आदरः शङ्कां जनयति। (जो मनुष्य अत्यधिक आदर करता है, वह छलने के प्रयोजन से करता है। अत: अधिक आदर शंका को पैदा करता है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

(ii) प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः।

भावार्थ: – प्रसन्नेभ्यः प्रजाजनेभ्यः नृपाः प्रतिकाररूपेण आत्मानं प्रति अपि प्रियम् एव इच्छन्ति।
(प्रसन्न प्रजाजनों से राजा लोग बदले में अपने लिए भी प्रिय ही चाहते हैं।)

(iii) राजनि अविरुद्धवृत्तिर्भव।

भावार्थ: – प्रजाजनैः सदैव राजानं प्रति अनुकूलवृत्तिः एव भवेत्।
(प्रजाजनों को सदैव राजा के प्रति अनुकूल व्यवहार वाला ही होना चाहिए।)

(iv) कः पुनरधन्यो राज्ञो विरुद्धः।

भावार्थ: – कोऽपि मनुष्यः नृपस्य प्रतिकूलं कार्यं न कुर्यात्। यः नृपस्य विरुद्धः भवति सः धन्यः न भवति। (किसी भी मनुष्य को राजा के प्रतिकूल कार्य नहीं करना चाहिए। जो राजा के विरुद्ध होता है वह धन्य नहीं होता।)

(v) कीदृशस्तृणानाम् अग्निना सह विरोधः।

भावार्थ: – अग्निः तु तृणान् ज्वालयति, यतः असौ सामर्थ्यवान् भवति अत: अग्निना सह तृणानां विरोधः कथं सम्भवति तथैव नृपैः सह अपि प्रजाजनानां वैरम् अपि असम्भवः। (आग तो घास को जलाती है। क्योंकि वह सामर्थ्यवान् होती है अतः आग के साथ तिनकों का विरोध कैसे सम्भव हो सकता है। उसी प्रकार राजाओं के साथ प्रजाजनों का वैर भी असम्भव है।)

प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद् Summary and Translation in Hindi

पाठ-परिचय – ‘काव्येषु नाटकं रम्यम्’ ऐसी उक्ति प्रसिद्ध है। संस्कृत साहित्य में नाटकों की एक लम्बी श्रृंखला है जिसमें विविध नाटकों की कड़ियाँ जुड़ी हुई हैं। इन्हीं नाटकों में कूटनीति एवं राजनीति से भरपूर एक प्रसिद्ध नाटक है ‘मुद्राराक्षसम्’। प्रस्तुत पाठ ‘प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्’ महाकवि विशाखदत्त रचित ‘मुद्राराक्षसम्’ के प्रथम अंक से सङ्कलित है। नन्दवंश का विनाश करने के बाद उसके हितैषियों को खोज-खोजकर पकड़वाने के क्रम में चाणक्य, अमात्य राक्षस एवं उसके परिजनों की जानकारी प्राप्त करने के लिए चन्दनदास से वार्तालाप करते हैं किन्तु चाणक्य को अमात्य राक्षस के विषय में कोई सुराग न देता हुआ चन्दनदास अपनी मित्रता पर दृढ़ रहता है।

उसके मैत्री भाव से प्रसन्न होते हुए भी चाणक्य जब उसे राजदण्ड का भय दिखाता है तब चन्दनदास राजदण्ड भोगने के लिए सहर्ष प्रस्तुत हो जाता है। इस प्रकार अपने मित्र के लिए प्राणों का भी उत्सर्ग करने के लिए तत्पर चन्दनदास अपनी सुहृद्-निष्ठा का एक ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

मूलपाठः,शब्दार्थाः, सप्रसंग हिन्दी-अनुवादः

1.

  • चाणक्यः – वत्स ! मणिकारश्रेष्ठिनं चन्दनदासमिदानीं द्रष्टुमिच्छामि।
  • शिष्यः – तथेति (निष्क्रम्य चन्दनदासेन सह प्रविश्य) इतः इतः श्रेष्ठिन् (उभौ परिक्रामतः)
  • शिष्यः – (उपसृत्य) उपाध्याय ! अयं श्रेष्ठी चन्दनदासः।
  • चन्दनदासः – जयत्वार्यः
  • चाणक्यः – श्रेष्ठिन् ! स्वागतं ते। अपि प्रचीयन्ते संव्यवहाराणां वृद्धिलाभाः ?
  • चन्दनदासः – (आत्मगतम्) अत्यादरः शङ्कनीयः। (प्रकाशम्) अथ किम्। आर्यस्य प्रसादेन अखण्डिता मे वणिज्या।
  • चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन् ! प्रीताभ्यः प्रकृतिभ्यः प्रतिप्रियमिच्छन्ति राजानः।
  • चन्दनदासः – आज्ञापयतु आर्यः, किं कियत् च अस्मज्जनादिष्यते इति।

शब्दार्थाः = वत्स ! = पुत्र ! (बेटा)। मणिकारश्रेष्ठिनम् = रत्नकारं वणिजम्, रत्नानां व्यवसायिनम् (रत्नों के व्यापारी)। चन्दनदासमिदानीम् = चन्दनदास इत्याख्यम् अधुना (चन्दनदास नामक को अब)। द्रष्टुमिच्छामि = परामृष्टुं वाञ्छामि (मिलना चाहता हूँ )। तथेति = तथैव भवतु (वैसा ही हो)। निष्क्रम्य = बहिर्गत्वा (बाहर निकलकर)। चन्दनदासेन सह प्रविष्य = चन्दनदासेन श्रेष्ठिना सार्धं प्रवेशं कृत्वा (चन्दनदास के साथ प्रवेश करके)। इतः इतः = अत्र एहि (इधर-इधर आएँ)।

श्रेष्ठिन् = हे धनिक ! (हे सेठ जी !)। उभौ = द्वावेव (दोनों)। परिक्रामतः = घूमते हैं। उपसृत्य = समीपं गत्वा (पास जाकर)। उपाध्याय ! = हे गुरुदेव ! (हे गुरु जी !)। अयम् = एषः (यह)। श्रेष्ठी = धनिकः (सेठ)। जयत्वार्यः = विजयतामार्यः (आर्य की जय हो)। स्वागतं ते = अभिनन्दन भवतः (आपका स्वागत है)। अपि = किम् (क्या)। प्रचीयन्ते = वृद्धिं प्राप्नुवन्ति (बढ़ रहे हैं)। संव्यवहाराणां = व्यापाराणाम् (व्यापारों का)। वृद्धिलाभाः = लाभ वृद्धयः (लाभांशों की वृद्धि)। आत्मगतम् = मनसि एव (मन ही मन)। अत्यादरः = अत्यधिक: सम्मानः (अत्यधिक आदर)।

शङ्कनीयः = सन्देहास्पदम् (शंका करने योग्य है)। प्रकाशम् = प्रकटम् (सबके समक्ष)। अथ किम् = आम् कथन्न (जी हाँ, क्यों नहीं)। आर्यस्य = श्रीमतः (आर्य की)। प्रसादेन = कृपया (कृपा से)। अखण्डिताः = निर्बाधः (बाधा रहित हैं)। मे = मम (मेरे)। वणिज्या = व्यवसायाः वाणिज्यम् (व्यापार)। भो श्रेष्ठिन्! = रे धनिक ! (अरे सेठ जी !)। प्रीताभ्यः = प्रसन्नाभ्यः (प्रसन्नजनों के प्रति)। प्रकृतिभ्यः = प्रजायैः (प्रजा के लिये)। प्रतिप्रियमिच्छन्ति = प्रत्युपकारम् वाञ्छन्ति (उपकार के बदले उपकार करना चाहते हैं)। राजानः = नृपाः (राजा लोग)। आज्ञापयतु आर्यः = श्रेष्ठजनः आज्ञां देहि, आदिशतु (आर्य आज्ञा दें, आदेश दें)। किं कियत् च = किं कियन्मानञ्च (क्या और कितना)। अस्मज्जनादिष्यते = अस्मभ्यम् आज्ञां दीयते (हमें आज्ञा दी जाती है)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह नाट्यांश हमारी शेमुषी पाठ्य-पुस्तक के ‘प्राणेभ्योऽपि प्रियः सहृद’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पाठ महाकवि विशाखदत्त रचित ‘मुद्राराक्षसम्’ नाटक के पहले अंक से सङ्कलित है। इस नाट्यांश में चाणक्य मणिकार चन्दनदास से मिलना चाहता है परन्तु चन्दनदास इस अत्यादर में शङ्का करता है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

हिन्दी-अनुवादः :

  • चाणक्य – बेटा (वत्स) ! अब मैं रत्नों के व्यापारी चन्दनदास से मिलना चाहता हूँ।
  • शिष्य – वैसा ही हो। (बाहर निकलकर और चन्दनदास के साथ प्रवेश करके) इधर, इधर (आइए) सेठ जी ! (दोनों घूमते हैं)।
  • शिष्य – (पास जाकर) गुरुदेव ! यह सेठ चन्दनदास है।
  • चन्दनदास – आर्य की जय हो।
  • चाणक्य – सेठ जी ! आपका स्वागत है। क्या व्यापार में आपकी लाभवृद्धियाँ बढ़ रही हैं ?
  • चन्दनदास – (मन ही मन) अत्यधिक आदर शंका करने योग्य होता है। (प्रकट में) जी हाँ, आर्य की कृपा से मेरे व्यापार बाधारहित हैं।
  • चाणक्य – अरे सेठ जी ! प्रसन्न स्वभाव से लोगों के लिए राजा प्रत्युपकार चाहते हैं।
  • चन्दनदास – आर्य आज्ञा दें, क्या और कितना हमारे लिए आदेश दिया जाता है।

2 चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन् ! चन्द्रगुप्तराज्यमिदं न नन्दराज्यम्। नन्दस्यैव अर्थसम्बन्धः प्रीतिमुत्पादयति।
चन्द्रगुप्तस्य तु भवतामपरिक्लेश एव।
चन्दनदासः – (सहर्षम्) आर्य ! अनुगृहीतोऽस्मि।
चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन् ! स चापरिक्लेशः कथमाविर्भवति इति ननु भवता प्रष्टव्याः स्मः।
चन्दनदासः – आज्ञापयतु आयः।।
चाणक्यः – राजनि अविरुद्धवृत्तिर्भव।
चन्दनदासः – आर्य ! कः पुनरधन्यो राज्ञो विरुद्ध इति आर्येणावगम्यते ?
चाणक्यः – भवानेव तावत् प्रथमम्।
चन्दनदासः – (कर्णी पिधाय) शान्तं पापम्, शान्तं पापम्। कीदृशस्तृणानामग्निना सह विरोध: ?

शब्दार्थाः – भो श्रेष्ठिन् = हे धनिक ! (अरे सेठ जी)। चन्द्रगुप्तराज्यमिदम् = चन्द्रगुप्तस्य एतद् शासनम् (यह चन्द्रगुप्त का राज्य है)। न नन्दराज्यम् = न तु नंदस्य शासनम् (न कि नन्द का राज्य)। नन्दस्यैव = नन्दस्य राज्यम् एव (नंद के राज्य में ही)। अर्थसम्बन्धः = धनस्य सम्बन्धः (धन के प्रति लगाव)। प्रीतिमुत्पादयति = स्नेहं जनयति (स्नेह पैदा करता है)। चन्द्रगुप्तस्य तु = चन्द्रगुप्तमौर्यस्य तु (चन्द्रगुप्त मौर्य का तो)। भवताम् = युष्माकम् (आपका)। अपरिक्लेश एव = दुःखाभावः एव (दुःख का अभाव ही है)। सहर्षम् = प्रसन्नतासहितम् (प्रसन्नता के साथ)। अ = श्रीमन् ! (हे श्रीमान् जी!)।

अनगृहीतोऽस्मि = सानुकम्पोऽस्मि (अनुगृहीत हुआ हूँ )। भो श्रेष्ठिन! = हे वणिक ! (अरे सेठ जी!)। स चापरिक्लेशः = असौ च दुःखाभावः (और वह दुःख का अभाव)। कथमाविर्भवति = कथम् अवतरितः (कैसे अवतरित होता है)। इति ननु भवता = एवं निश्चितमेव त्वया (इस प्रकार निश्चय ही आपके द्वारा)। प्रष्टव्याः स्मः = प्रष्टुं योग्याः स्मः (पूछने योग्य हैं)। आज्ञापयतु आर्यः = आर्यः आदिशतु (आर्य आदेश दें)। राजनि = नृपे (राजा में, राजा के प्रति)। अविरुद्धवत्तिर्भव = अविरुद्धस्वभावः भव (विरोध-रहित स्वभाव वाले बनो)।

आर्य ! = हे श्रीमन् !(हे श्रीमान् जी!)। कः पुनरधन्यो = पुनः कः हतभाग्यः (फिर कौन अभागा)। राज्ञो विरुद्धः = नृपस्य विरोधे (राजा के विरोध में)। अस्ति = है। इति आर्येणावगम्यते – इति देवेन ज्ञायते (इसे श्रीमान् द्वारा जाना जाता है, अर्थात् आप इसे जानते हैं)। भवान् एव = त्वम् एव, श्रीमान् एव (आप ही)। तावत् = तर्हि (तो)। प्रथमम् = प्रमुखः (प्रमुख हैं)। कर्णी = श्रवणौ (कानों को)। पिधाय = आच्छाद्य (बन्द करके)। शान्तं पापम् = अघः नश्यतु (पाप शान्त हो)। कीदृशस्तृणानामग्निना सह विरोधः = अनलेन सह घासस्य/तृणस्य कीदृशः मतभेदः (अग्नि के साथ तिनके का क्या विरोध)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह नाट्यांश हमारी शेमुषी पाठ्य-पुस्तक के ‘प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्’ पाठ से लिया गया है। मूलत: यह पाठ महाकवि विशाखदत्त रचित ‘मुद्राराक्षसम्’ नाटक के प्रथम अंक से सङ्कलित है। इस नाट्यांश में चाणक्य और चन्दनदास के संवाद के बहाने प्रसंग आरंभ किया जाता है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

हिन्दी-अनुवादः –

  • चाणक्य – अरे सेठ जी ! यह चन्द्रगुप्त मौर्य का राज्य है न कि नन्द का राज्य। नन्द के राज्य में ही धन के प्रति लगाव स्नेह पैदा करता है। चन्द्रगुप्त मौर्य के (राज्य में) तो आपको दुःख का अभाव ही है।
  • चन्दनदास – (प्रसन्नता के साथ) आर्य ! मैं अनुगृहीत हुआ।
  • चाणक्य – अरे सेठ जी ! और वह दुःख का अभाव अति सुख कैसे उत्पन्न होता है, यह आपको निश्चित ही हमसे पूछना चाहिए।
  • चन्दनदास – आर्य ! आदेश दें।
  • चाणक्य – राजा के प्रति अविरोधी (विरोधहीन अर्थात् अनुकूल) व्यवहार वाले बनो।
  • चन्दनदास – आर्य ! फिर ऐसा कौन अभागा है जो राजा का विरोधी हो। ऐसा श्रीमान् जानते ही हैं आप ही बताएँ।
  • चाणक्य – प्रथम (प्रमुख) तो आप ही हैं।
  • चन्दनदास – (कानों को बन्द करके अर्थात् कानों पर हाथ रखकर) पाप शान्त हो, पाप शान्त हो (अरे राम, राम) तिनकों के साथ आग का कैसा विरोध ?

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

3 चाणक्यः – अयमीदृशो विरोधः यत् त्वमद्यापि राजापथ्यकारिणोऽमात्यराक्षसस्य गृहजनं स्वगृहे रक्षसि।
चन्दनदासः – आर्य ! अलीकमेतत्। केनाप्यनार्येण आर्याय निवेदितम्।।
चाणक्यः – भो श्रेष्ठिन् ! अलमाशङ्कया। भीताः पूर्वराजपुरुषाः पौराणामिच्छतामपि गृहेषु गृहजनं निक्षिप्य देशान्तरं व्रजन्ति। ततस्तत्तच्छादनं दोषमुत्पादयति।
चन्दनदासः – एवं नु इदम्। तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे अमात्यराक्षसस्य गृहजन इति।
चाणक्यः – पूर्वम् ‘अनृतम्’, इदानीम् ‘आसीत्’ इति परस्परविरुद्ध वचने।
चन्दनदासः – आर्य ! तस्मिन् समये आसीदस्मद्गृहे अमात्यराक्षस्य गृहजन इति।

शब्दार्थाः – अयम् = एषः (यह)। ईदृशो = अस्य प्रकारस्य, एतद्विधः (ऐसा, इस प्रकार का)। विरोधः = मतभेदः (विरोध)। यत् त्वमद्यापि = यद् भवान् अधुनापि (कि आप अब, आज भी)। राजापथ्यकारिणः = नृपस्य अपकारिणः (राजा का अहित करने वाले)। अमात्यराक्षसस्य = मन्त्रिणः राक्षसस्य (मन्त्री राक्षस के)। गृहजनम् = परिवारिजनम् (परिवार वालों की)। स्वगृहे = आत्मनः भवने (अपने घर में)। रक्षसि = रक्षां करोति (रक्षा करते हो)। आर्य ! = (हे महोदय!)। अलीकमेतत् = असत्यम् इदम्, अनृतमिदम् (यह झूठ है)। केनाप्यनार्येण = कोऽपि दुष्टः (किसी दुष्ट ने)।

आर्याय = महोदयाय (आर्य से)। निवेदितम् = निवेदितवान् (निवेदन किया है; कहा है)। भो श्रेष्ठिन् = रे धनिक ! (अरे सेठजी)। अलमाशङ्कया = सन्देहस्य आवश्यकता न वर्तते, सन्देहं मा कुरु (शङ्का मत करो)। भीताः = भयाक्रान्ताः (डरे हुए)। पूर्वराजपुरुषाः = पूर्वराज्ञः सैनिकाः, पूर्वनृपस्य सेवकाः (भूतपूर्व राजा के सैनिक)। पौराणाम् = नगरवासिनाम् (नगरवासियों के)। इच्छतामपि = वाञ्छतामपि, इच्छुकानामपि (चाहने वालों के भी)। गृहेषु = भवनेषु (घरों में)। गृहजनम् = परिवारिजनान् (परिवार के लोगों को)। निक्षिप्य = स्थापयित्वा (रखकर)।

देशान्तरम् = परदेशम् (परदेश को)। व्रजन्ति = गच्छन्ति, प्रस्थानं कुर्वन्ति (चले जाते हैं)। ततः = तत्पश्चात् (उसके बाद)। तत् आच्छादनम् = तस्य गोपायनम् (उसे छिपाना, छुपाकर रखना)। दोषमुत्पादयति = अपराधं जनयति (अपराध को जन्म देता है, पैदा करता है)। एवं नु इदम् = नैवम् एत् (ऐसा नहीं है)। तस्मिन् समये = तदा (उस समय)। अस्मद् गृहे = अस्माकम् आवासे (हमारे घर पर)। अमात्यराक्षसस्य = मन्त्रिणः राक्षसस्य (अमात्य राक्षस के)। गृहजनः = परिजनः (परिवार के लोग)। आसीत् = अवर्तत (थे)। पूर्वम् = पूर्वकाले, प्रथमस्तु (पहले तो)। अनृतम् = मिथ्या, असत्यम् (झूठ)। इदानीम् = अधुना (अब)।

आसीत् = अवर्तत (था)। इति परस्परं = एवम् अन्यान्ययोः (इस प्रकार एक दूसरे .के)। विरुद्ध वचने = विपरीतकथने (विपरीत वचन होने पर)। आर्य ! = हे श्रीमन् ! (हे महोदय!)। तस्मिन् समये = तस्मिन् काले, तदा (तब, उस समय)। अस्मद्गृहे = अस्माकम् आवासे (हमारे घर में)। अमात्यराक्षसस्य = मन्त्रिणः राक्षसस्य (अमात्य राक्षस के)। गृहजनः = परिजनः (परिवार के लोग)। आसीत् = अवर्तत (था/थे)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह नाट्यांश हमारी शेमुषी पाठ्य-पुस्तक के ‘प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पाठ महाकवि विशाखदत्त रचित ‘मुद्राराक्षसम्’ नाटक के प्रथम अंक से सङ्कलित है। इस नाट्यांश में चाणक्य अपने कथ्य को चन्दनदास से कहता है और अन्वेषण आरम्भ कर देता है।।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

हिन्दी-अनुवादः :

  • चाणक्य – यह ऐसा विरोध है कि आप अब भी राजा का अहित करने वाले मन्त्री राक्षस के परिवारवालों को अपने घर में छुपाकर रक्षा करते हैं।
  • चन्दनदास – आर्य ! यह (बिल्कुल) झूठ है। किसी दुष्ट ने (आपसे) ऐसा कह दिया है।
  • चाणक्य – अरे सेठ जी ! शंका मत करो। भूतपूर्व राजा के डरे हुए सैनिक चाहने वाले नगरवासियों के घरों में अपने परिजनों को भी रखकर परदेश को जाते हैं। तब उस अमात्य राक्षस का छुपाना दोष या अपराध को जन्म देता है।
  • चन्दनदास – ऐसा नहीं है, उस समय हमारे घर में अमात्य राक्षस के परिवार के लोग थे।
  • चाणक्य – पहले ‘अनृतम्’ (झूठ) अब ‘आसीत्’ (थे) इस प्रकार आपस में (परस्पर) विरोधी वचन है।
  • चन्दनदास – आर्य ! उस समय (तब) हमारे घर में अमात्य राक्षस के परिवार वाले थे (अब नहीं हैं)।

4. चाणक्यः – अथेदानी क्व गतः ?
चन्दनदासः – न जानामि।
चाणक्यः – कथं न ज्ञायते नाम ? भो श्रेष्ठिन् ! शिरसि भयम्, अतिदूरं तत्प्रतिकारः।
चन्दनदासः – आर्य! किं मे भयं दर्शयसि ? सन्तमपि गेहे अमात्यराक्षसस्य गृहजनं न समर्पयामि, किं पुनरसन्तम् ?
चाणक्यः – चन्दनदास ! एष एव ते निश्चयः ?
चन्दनदासः – बाढम्, एष एव मे निश्चयः।
चाणक्यः – (स्वगतम्) साधु ! चन्दनदास साधु।

सुलभेष्वर्थलाभेषु परसंवेदने जने।
क इदं दुष्करं कुर्यादिदानीं शिविना विना।।

शब्दार्थाः – अथ = एतत्पश्चात् (तो फिर)। इदानीम् = अधुना (अब)। क्व – कुत्र (कहाँ)। गतः = प्रस्थितः यातः (गए)। न जानामि = न मया ज्ञायते (नहीं जानता, मुझे पता नहीं)। कथम् न = कस्मात् न (क्यों नहीं)। ज्ञायते नाम = अवगम्यते (जानते हो)। भो श्रेष्ठिन् ! = रे धनिक ! (अरे सेठजी)। शिरसि = मस्तके (सिर पर)। भयम् = भीतिः (डर है)। तत्प्रतिकारं = तस्योपचारम् (उसका उपचार)। अतिदूरम् = अत्यधिकं दूरे स्थितम् (बहुत दूर पर है)। आर्य! = (हे महोदय)। किं मे भयं दर्शयति = अपि मां भयभीतं करोषि (क्या मुझे डरा रहे हो)।

सन्तमपि गेहे = गृहे विद्यमानं अपि (घर में होते हुए भी)। अमात्यराक्षसस्य = मन्त्रिणः राक्षसस्य (अमात्य राक्षस के)। गृहजनम् = परिवारस्य सदस्यान् (परिवारीजनों को)। न समर्पयामि = न प्रत्यर्पयामि (नहीं लौटाता)। किं पुनरसन्तम् = किं पुनः न निवसन्तम् (न रहने वालों का तो कहना क्या)। एष एव = अयमेव (यही)। ते = तव (तेरा)। निश्चयः = संकल्पः (निश्चय है)। बाढम् = आम् (हाँ)। एषः एव = अयमेव (यही)। मे = मम (मेरा)। निश्चयः = दृढसंकल्पः (निश्चय है)। स्वगतम् = आत्मगतम् (मन ही मन)। साधुः धन्यः = अतिसुन्दरम् (बहुत अच्छे, निश्चय ही, धन्य हो)। चन्दनदास साधु = धन्योऽसि चन्दनदास! (चन्दनदास, तुम धन्य हो)।

सुलभेष्वर्थलाभेषु …………………………. शिविना विना।।

अन्वयः – परस्य संवेदने अर्थलाभेषु सुलभेषु इदं दुष्करं कर्म जने (लोके) शिविना विना कः कुर्यात्।

शब्दार्थाः – परस्य = अन्यस्य (दूसरे की वस्तु को)। संवेदने = समर्पणे कृते सति (समर्पित करने पर)। सुलभेषु = धन प्राप्तेषु सहजेषु सत्सु (धन की प्राप्ति आसान हो जाने पर भी)। इदम् = एतद् स्वार्थं त्यक्त्वा परस्य वस्तुरक्षणम् (यह)। कर्म = कर्त्तव्यम् (कार्य)। जने = लोके (मनुष्यों में)। दुष्करम् = कठिनम् (मुश्किल है)। शिविना विना = शिविमन्तरेण (दानवीर शिवि के अतिरिक्त)। कः कुर्यात् = कः सम्पादयेत् (कौन करे)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह नाट्यांश हमारी शेमुषी पाठ्य-पुस्तक के ‘प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्’ पाठ से लिया गया है। मूलतः यह पाठ महाकवि विशाखदत्त रचित नाटक ‘मुद्राराक्षसम्’ नाटक के प्रथम अंक से सङ्कलित किया गया है। इस अंश में चाणक्य और चन्दनदास का संवाद विवाद में परिवर्तित हो जाता है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुहृद्

हिन्दी-अनुवादः :

  • चाणक्य – तो अब कहाँ गए ?
  • चन्दनदास – मैं नहीं जानता (मुझे पता नहीं)।
  • चाणक्य – क्यों नहीं जानते हो। अरे सेठजी, डर तो सिर पर सवार है और (उसका) उपाय बहुत दूर है।
  • चन्दनदास – आर्य ! क्या मुझे डरा रहे हैं ? घर में होते हुए भी अमात्य राक्षस के परिवार के लोगों को नहीं दे सकता हूँ फिर न होने पर तो कहना ही क्या ?
  • चाणक्य – चन्दनदास ! क्या तुम्हारा यही निश्चय है ?
  • चन्दनदास – हाँ, मेरा यही निश्चय है।
  • चाणक्य – (मन ही मन) धन्य हो चन्दनदास, तुम धन्य हो।
    दूसरे की वस्तु को समर्पित करने पर धन की प्राप्ति आसान हो जाने पर भी यह (स्वार्थ त्यागकर दूसरे की वस्तु की रक्षा करने का) कार्य मनुष्यों में अत्यन्त कठिन कार्य है। दानवीर शिवि के (तुम्हारे) अलावा (अतिरिक्त) इसे और कौन करे।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

Jharkhand Board JAC Class 10 Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 10 भूकम्पविभीषिका Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

JAC Class 10th Sanskrit भूकम्पविभीषिका Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखिये)
(क) कस्य दारुण विभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती?
(किसकी दारुण विभीषिका ने गुजरात क्षेत्र को ध्वंसावशेषों में परिणित कर दिया?)
(ख) कीदृशानि भवनानि धाराशायीनि जातानि?
(कैसे भवन धराशायी हो जाते हैं?)
(ग) दुर्वार-जलधाराभिः किमुपस्थितम्?
(कठिनाई से रोके जाने वाली जल धाराओं ने क्या उपस्थित कर दिया?)
(घ) कस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति?
(किसको शान्त करने का स्थिर उपाय नहीं है?)
(ङ) कीदृशाः प्राणिनः भूकम्पेन निहन्यन्ते ?
(कैसे प्राणी भूकम्प द्वारा नष्ट कर दिये जाते हैं ?)
उत्तराणि :
(क) भूकम्पस्य (भूकम्प की)
(ख) बहुभूमिकानि (बहुमञ्जिले)
(ग) महाप्लावनदृश्यम् (महान बाढ़ के दृश्य को)
(घ) भूकम्पस्य (भूकम्प के)
(ङ) विवशा (मजबूर)

प्रश्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत –
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)
(क) समस्तराष्ट्र कीदृक् उल्लासे मग्नम् आसीत् ?
(सारा राष्ट्र कैसे उल्लास में मग्न था ?)
उत्तरम् :
समस्तराष्ट्रं नृत्य-गीतवादित्राणाम् उल्लासे मग्नम् आसीत्।।
(सम्पूर्ण राष्ट्र नाच-गान और वादनों के उल्लास में डूबा हुआ था।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

(ख) भूकम्पस्य केन्द्रभूतं किं जनपदः आसीत् ?
(भूकम्प का केन्द्रस्थित जनपद कौन-सा था ?)
उत्तरम् :
भूकम्पस्य केन्द्रभूतं कच्छजनपदः आसीत्।
(भूकम्प का केन्द्रस्थित भुज जनपद था।)

(ग) पृथिव्याः स्खलनात् किं जायते ?
(पृथ्वी के स्खलन से क्या पैदा होता है ?)
उत्तरम् :
पृथिव्याः स्खलनात् बहुभूमिकानि भवनानि क्षणेनैव पतन्ति। विद्युद्दीपस्तम्भाः पतन्ति। गृहसोपानमार्गाः विशीर्यन्ते।
भूमिः फालद्वये विभक्ता भवति। भूमिग दुपरि निस्सरन्तीभिः दुर्वारजलधाराभिः महाप्लावनदृश्यम् उपतिष्ठति। (पृथ्वी के अपने स्थान से खिसकने (हिलने) से बहुमंजिले मकान पलभर में गिर जाते हैं। बिजली के खम्भे गिर जाते हैं। घरों की सीढ़ियाँ टूटकर बिखर जाती हैं। भूमि दो भागों में बँट जाती है। पृथ्वी के भीतरी भाग से निकलने वाली अनियंत्रित जलधाराओं से बाढ़ जैसा दृश्य उपस्थित हो जाता है।)।

(घ) समग्रो विश्वः कैः आतङ्कितः दृश्यते ?
(सम्पूर्ण विश्व किनसे आतङ्कित दिखाई देता है ?)।
उत्तरम् :
समग्रो विश्वः भूकम्पैः आतङ्कितः दृश्यते।
(सम्पूर्ण संसार भूकम्पों से आतङ्कित दिखाई देता है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

(ङ) केषां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते ?
(किनके विस्फोटों से भी भूकम्प पैदा होता है ?)
उत्तरम् :
ज्वालामुखपर्वतानां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते। (ज्वालामुखी पर्वतों के विस्फोटों से भी भूकम्प पैदा होता है।)

प्रश्न 3.
रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्नों का निर्माण कीजिए-)
(क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती।।
(भूकम्प की विभीषिका ने विशेषतः कच्छ जिले को ध्वंसावशेषों में परिवर्तित कर दिया।)
उत्तरम् :
भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं केषु परिवर्तितवती ?
(भूकम्प की विभीषिका ने विशेषतः कच्छ जिले को किसमें परिवर्तित कर दिया ?)

(ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्याः अन्तर्गर्भे, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते।
(वैज्ञानिक कहते हैं कि पृथ्वी के गर्भ में पत्थर की शिलाओं के रगड़ने से कम्पन पैदा होता है।)
उत्तरम् :
के कथयन्ति यत् पृथिव्याः अन्तर्गर्भ, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते ?
(कौन कहते हैं कि पृथ्वी के गर्भ में पत्थर की शिलाओं की रगड़ से कंपन पैदा होता है ?)

(ग) विवशाः प्राणिनः आकाशे पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते।
(विवश प्राणी आकाश में चींटी की तरह मारे जाते हैं।)
उत्तरम् :
विवशाः प्राणिनः कस्मिन् स्थाने (कुत्र) पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते ?
(विवश प्राणी किस स्थान पर (कहाँ) चींटी की तरह मारे जाते हैं ?)

(घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे घटिता।
(ऐसी भयानक घटना गढ़वाल क्षेत्र में घटी थी।)
उत्तरम् :
कीदृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे घटिता ?
(कैसी भयानक घटना गढ़वाल क्षेत्र में घटी थी ?)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

(ङ) तदिदानीम् भूकम्पकारणं विचारणीयं तिष्ठति।
(तो अब भूकम्प का कारण विचारणीय है।)
उत्तरम् :
तदिदानीम् किं विचारणीयं तिष्ठति ?
(तो अब क्या विचारणीय है ?)

प्रश्न 4.
‘भूकम्पविषये’ पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदं लिखत – (भूकम्प के विषय में पाँच वाक्यों का अनुच्छेद लिखिये-)
उत्तरम् :
भूकम्पेन प्रकृतेः सन्तोलनं नश्यति। प्रकृतेः असन्तोलनस्य भीषणः परिणामः भवति। भूकम्पेन बहुभूमिकानि भवनानि क्षणमात्रेण ध्वस्तानि भवन्ति। पतितेषु भवनेषु बहवः प्राणिनः मृत्युं प्राप्नुवन्ति। एवं भूकम्पेन भीषणा क्षतिः भवति। (भूकम्प से प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ जाता है। प्रकृति के असंतुलन का भीषण परिणाम होता है। भूकम्प से बहुमंजिले मकान पलभर में गिर जाते हैं। गिरे हुए मकानों में बहुत-से प्राणी मर जाते हैं। इस प्रकार भूकम्प से भयंकर हानि होती है।)

प्रश्न 5.
कोष्ठकेष दत्तेष धातष निर्देशानसारं परिवर्तनं विधाय रिक्तस्थानानि परयत –
(कोष्ठक में दी हुई धातुओं में निर्देश के अनुसार परिवर्तन करके रिक्तस्थानों की पूर्ति कीजिए)
(क) समग्रं भारतं उल्लासे मग्नः ……………. (अस् + लट् लकारे)
(ख) भूकम्पविभीषिका कच्छजनपदं विनष्टं …………. (कृ + क्तवतु + ङीप्)
(ग) क्षणेनैव प्राणिनः गृहविहीनाः ………….. (भू + लङ्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
(घ) शान्तानि पञ्चतत्त्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्याम् ………. (भू + लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
(ङ) मानवाः ……………….. यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं करणीयं न वा? (पृच्छ + लट्, प्रथमपुरुष, बहुवचन)
(च) नदीवेगेन ग्रामाः तदुदरे ……………… (सम् + आ + विश् + विधिलिङ्, प्रथमपुरुष, एकवचन)
उत्तरम् :
(क) अस्ति
(ख) कृतवती
(ग) अभवन्
(घ) भवन्ति
(ङ) पृच्छन्ति
(च) समाविशे

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 6.
(अ) सन्धिं/सन्धिविच्छेदं च कुरुत (सन्धि तथा सन्धि-विच्छेद कीजिए।)
(अ) परसवर्णसन्धिनियमानुसारम् (परसवर्ण सन्धि के नियमानुसार)
(क) किञ्च = ………..+ च।
(ख) ………… = नगरम् + तु।
(ग) विपन्नञ्च = ……….. + ……….।
(घ) ………… = किम् + नु।
(ङ) भुजनगरन्तु = …………… + ………..।
(च) ………… = सम् + चयः।
उत्तर :
(क) किञ्च = किं + च।
(ख) नगरन्तु = नगरम् + तु।
(ग) विपन्नञ्च = विपन्नम् + च।
(घ) किन्नु = किम् + नु।
(ङ) भुजनगरन्तु = भुजनगरम् + तु।
(च) सञ्चयः = सम् + चयः।

(आ) विसर्गसन्धिनियमानसारम (विसर्गसन्धि के नियमानुसार)
(क) शिशवस्तु = …….. + …….।
(ख)………… = विस्फोटैः + अपि।
(ग) सहस्रशोऽन्ये =……….+ अन्ये।
(घ) विचित्रोऽयम् = विचित्रः + ……।
(ङ) ……… = भूकम्पः + जायते।
(च) वामनकल्य एव = …….. + ……..।
उत्तरम् :
(क) शिशवस्तु = शिशवः + तु।
(ख) विस्फोटैरपि = विस्फोट: + अपि।
(ग) सहस्रशोऽन्ये = सहस्रशः + अन्ये।
(घ) विचित्रोऽयम् = विचित्रः + अयम्।
(ङ) भूकम्पो जायते = भूकम्प: + जायते।
(च) वामनकल्प एव = वामनकल्पः + एव।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 7.
(अ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे विलोमपदानि, तयोः संयोगं करुत
(‘क’ स्तम्भ में दिए गए पदों को ‘ख’ स्तम्भ में दिए गए उनके विलोम पदों से मिलाइए-)
(क) – (ख)
सम्पन्नम् – प्रविशन्तीभिः
ध्वस्तभवनेषु – सुचिरेणैव
निस्सरन्तीभिः – विपन्नम्
निर्माय – नवनिर्मितभवनेषु
क्षणेनैव – विनाश्य
उत्तर :
(क) – (ख)
सम्पन्नम् – विपन्नम्
ध्वस्तभवनेषु – नवनिर्मितभवनेषु
निस्सरन्तीभिः – प्रविशन्तीभिः
निर्माय – विनाश्य
क्षणेनैव – सुचिरेणैव

(आ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे समानार्थकपदानि तयोः संयोगं कुरुत- (माध्यमिक परीक्षा, 2013) (‘क’ स्तम्भ में पद दिए हुए हैं और ‘ख’ स्तम्भ में उनके समानार्थी पद हैं, उन दोनों का मेल कीजिए-)
(क) – (ख)
पर्याकुलम् – नष्टाः
विशीर्णाः – क्रोधयुक्ताम्
उगिरन्तः – संत्रोट्य
विदार्य – व्याकुलम्
प्रकुपिताम् – प्रकटयन्तः
उत्तर :
(क) – (ख)
पर्याकुलम् – व्याकुलम्
विशीर्णाः – नष्टाः
उगिरन्तः – प्रकटयन्तः
विदार्य – संत्रोट्य
प्रकुपिताम् – क्रोधयुक्ताम्

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 8.
(अ) उदाहरणमनुसृत्य प्रकृति-प्रत्ययोः विभागं कुरुत
(उदाहरण के अनुसार प्रकृति-प्रत्यय को पृथक् कीजिए-)
यथा – परिवर्तितवती – परि + वृत् + क्तवतु + ङीप् (स्त्री)

  • धृतवान् – …………. + …………..
  • हसन् …………. + …………..
  • विशीर्णा – वि + श + क्त + ………..
  • प्रचलन्ती – …………. + ………….. + शतृ + ङीप् (स्त्री)
  • हतः – …………. + …………..

उत्तरम् :

  • धृतवान् ‘- धृ + क्तवतु
  • हसन् – हस् + शत्र
  • विशीर्णा – वि + शृ + क्त + टाप् (स्त्री)
  • प्रचलन्ती – प्र + चल् + शतृ + ङीप् (स्त्री)
  • हतः – हन् + क्त

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

(आ) पाठात् विचित्य समस्तपदानि लिखत – (पाठ से चुनकर समस्त पद लिखिए-)
(क) महत् च तत् कम्पनम् = …………
(ख) दारुणा च सा विभीषिका = …………
(ग) ध्वस्तेषु च तेषु भवनेषु = …………
(घ) प्राक्तने च तस्मिन् युगे = ………
(ङ) महत् च तत् राष्ट्र तस्मिन् = …………
उत्तरम् :
(क) महाकम्पनम्
(ख) दारुणविभीषिका
(ग) ध्वस्तभवनेषु
(घ) प्राक्तनयुगे
(ङ) महाराष्ट्रे।

JAC Class 10th Sanskrit भूकम्पविभीषिका Important Questions and Answers

शब्दार्थ चयनम् –

अधोलिखित वाक्येषु रेखांकित पदानां प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थ चित्वा लिखत –

प्रश्न 1.
भारतराष्ट्र नृत्य-गीत-वादित्राणाम् उल्लासे मग्नमासीत् –
(अ) प्रसन्नतायाम्
(ब) प्रमादे
(स) भग्न
(द) दुखे
उत्तरम् :
(अ) प्रसन्नतायाम्

प्रश्न 2.
विशीर्णाः गृहसोपान-मार्गाः।
(अ) विभीषिका
(ब) नष्य
(स) विशेषेण
(द) भूकम्पस्य
उत्तरम् :
(ब) नष्य

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 3.
फालद्वये विभक्ता
(अ) संपुज्य
(ब) धराः
(स) विभाजिता
(द) निस्सरन्तीभिः
उत्तरम् :
(स) विभाजिता

प्रश्न 4.
द्वित्राणि दिनानि जीवनं धारितवन्तः।
(अ) सहस्रमिताः
(ब) सहायतार्थम्
(स) मृतप्रायाः
(द) प्राणान्.
उत्तरम् :
(द) प्राणान्.

प्रश्न 5.
इयमासीत् भैरवविभीषिका कच्छभूकम्पस्य।
(अ) भीषण
(ब) ऋजु
(स) दुर्बलः
(द) कटु
उत्तरम् :
(अ) भीषण

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 6.
तदैव भयावहकम्पनं धराया
(अ) प्रकम्पते
(ब) प्रथिव्याः
(स) कथयन्ति
(द) संघर्षण
उत्तरम् :
(ब) प्रथिव्याः

प्रश्न 7.
विस्फोटैरपि भूकम्पो जायत इति कथयन्ति- .
(अ) कथम्
(ब) सञ्चयम्
(स) वदन्ति
(द) सर्वमेव
उत्तरम् :
(स) वदन्ति

प्रश्न 8.
ज्वालामुगिरन्त एते पर्वता अपि भीषणं भूकम्पं जनयन्ति।
(अ) नदीवेगेन
(ब) ग्रामाः
(स) पर्वताः
(द) उत्पादयन्ति
उत्तरम् :
(द) उत्पादयन्ति

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 9.
यद्यपि दैवः प्रकोपो भूकम्पो नाम
(अ) ईश्वरीयः
(ब) उपशमनस्य
(स) कोऽपि
(द) तथापि
उत्तरम् :
(अ) ईश्वरीयः

प्रश्न 10.
अशान्तानि खलु तान्येव महाविनाशम् उपस्थापयन्ति।
(अ) तटबन्धम्
(ब) वस्तुतः
(स) मित्र
(घ) रिपुः
उत्तरम् :
(ब) वस्तुतः

संस्कृतमाध्यमेन प्रश्नोत्तराणि –

एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 1.
भूकम्पेन भुजनगरं कीदृशं जातम् ?
(भुजनगर भूकम्प से कैसा हो गया?)
उत्तरम् :
खण्ड-खण्डम् (टुकड़े-टुकड़े)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 2.
कीदृशानि भवनानि धराशायीनि जातानि ?
(कैसे भवन धराशायी हो गये ?)
उत्तरम् :
बहुभूमिकानि (बहुमंजिले)।

प्रश्न 3.
भूकम्पेन क्षणेन कति मानवाः मृताः ?
(भूकम्प से क्षणभर में कितने मनुष्य मर गये ?)
उत्तरम् :
सहस्रमिताः (हजारों)।

प्रश्न 4.
ध्वस्तभवनेषु सम्पीडिताः मानवाः किं कुर्वन् आसन् ?
(ध्वस्त भवनों में पीड़ित मनुष्य क्या कर रहे थे ?)
उत्तरम् :
करुणक्रन्दनम् (करुण क्रन्दन)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 5.
बृहत्यः पाषाणशिलाः कस्मात् कारणात् त्रुट्यन्ति ?
(विशाल पत्थर की शिलाएँ किस कारण से टूटती हैं ?)
उत्तरम् :
संघर्षणवशात् (घर्षण के कारण)।

प्रश्न 6.
पृथिव्याः स्खलनात् किं जायते ?
(पृथ्वी के स्खलन से क्या होता है ?)
उत्तरम् :
महाविनाशम् (महाविनाश)।

प्रश्न 7.
अग्निः शिलादिसञ्चयं किं करोति ?
(आग शिला आदि संचय का क्या करती है ?)
उत्तरम् :
क्वथयति (उबाल देती है)।

प्रश्न 8.
गगनं केन आवृणोति? (आकाश किससे ढक जाता है ?)
उत्तरम् :
धूमभस्माभ्याम् (धुआँ और राख से)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 9.
प्रकृतेः असन्तुलनवशात् किं सम्भवति ?
(प्रकृति के असन्तुलन के कारण क्या होता है ?)
उत्तरम् :
भूकम्पः (पृथ्वी का हिलना)।

प्रश्न 10.
एकस्मिन् स्थले किं न पुञ्जीकरणीयम् ?
(एक जगह पर क्या एकत्रित नहीं करना चाहिए ?)
उत्तरम् :
नदीजलम् (नदियों का पानी)।

प्रश्न 11.
भूकम्पावसरे भारतराष्ट्र केषाम् उल्लासे मग्नमासीत् ?
(भूकम्प के अवसर पर भारत राष्ट्र किसके उल्लास में डूबा हुआ था ?)
उत्तरम् :
गणतन्त्र-दिवस-पर्वणि (गणतन्त्र दिवस समारोह में)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 12.
भूकम्पस्य दारुण-विभीषिका कस्मिन् जनपदे आसीत् ?
(भूकम्प की भयंकर घटना किस जिले में थी ?)
उत्तरम् :
कच्छजनपदे (कच्छ जिले में)।

प्रश्न 13.
कति फाले विभक्ता भूमिः ?
(भूमि कितने भागों में बँट गई ?)
उत्तरम् :
फालद्वये (दो भागों में)।

प्रश्न 14.
भूमिग दुपरि निस्सरन्तीभिः दुरजलधाराभिः किं दृश्यम् उपस्थितम् ?
(धरती के भीतरी भाग से ऊपर निकलती अनियंत्रित जलधाराओं से क्या दृश्य उपस्थित हो गया ?)
उत्तरम् :
महाप्लावनम् (भयंकर बाढ़ का)।

प्रश्न 15.
कच्छजनपदे कस्य भैरवविभीषिका आसीत् ?
(कच्छजनपद में किसकी भयंकर विभीषिका थी ?)
उत्तरम् :
भूकम्पस्य (भूकम्प की)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 16.
कस्याः अन्तर्गर्भे बृहत्यः पाषाणशिलाः विद्यमानाः भवन्ति ?
(किसके भीतरी भाग में पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाएँ मौजूद होती हैं ?)
उत्तरम् :
पृथिव्याः (धरती के)।

प्रश्न 17.
ग्रामाः नगराणि च कस्मिन् समाविशन्ति ?
(गाँव और नगर किसमें समाविष्ट हो जाते हैं ?)
उत्तरम् :
लावारसोदरे (लावे के अन्दर)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 18.
केषां विस्फोटैः भूकम्पः जायते ?
(किनके विस्फोट से भूकंप पैदा होता है ?)
उत्तरम् :
ज्वालामुखपर्वतानाम् (ज्वालामुखी पहाड़ों के)।

प्रश्न 19.
अद्यापि विज्ञानगर्वितः मानवः कीदृशः अस्ति ?
(आज भी विज्ञान से गर्वित मानव कैसा है ?)
उत्तरम् :
वामनकल्पः (बौना-सा)।

प्रश्न 20.
केषां प्रकोपः भूकम्पः अस्ति ?
(भूकम्प किनका प्रकोप है ?)
उत्तरम् :
देवानाम् (देवताओं का)।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 21.
भूकम्पेन कच्छजनपदस्य का दशा अभवत् ?
(भूकम्प से कच्छ जिले की क्या स्थिति हो गई ?)
उत्तरम् :
भूकम्पेन कच्छ जनपदं ध्वंसावशेषु परिवर्तितम्।
(भूकम्प से कच्छ जिला खण्डहरों में बदल गया।)

प्रश्न 22.
सहस्रमिता: प्राणिनः कथं मृताः ?
(हजारों प्राणी कैसे मर गये ?)
उत्तरम् :
भूकम्पस्य विभीषिकया सहस्रमिताः प्राणिनः मृताः।
(भूकम्प की विभीषिका से हजारों प्राणी मर गये।)

प्रश्न 23.
भूकम्पात् किं भवति ?
(भूकम्प से क्या होता है ?)
उत्तरम् :
भूकम्पात् अपार-जन-धन-हानिः भवति।
(भूकम्प से अपार जन और धन की हानि होती है।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 24.
पृथिव्याः गर्भे विद्यमानोऽग्निः किं करोति?
(धरती के गर्भ में स्थित आग क्या करती है ?)
उत्तरम् :
पृथिव्याः गर्भे विद्यमानोऽग्निः खनिजमृत्तिकाशिलादि सञ्चयं क्वथयति।
(पृथ्वी के गर्भ में स्थित आग खनिज-मिट्टी की शिलाओं के संचय को उबालती है।)

प्रश्न 25.
मानवः वामनकल्पः कुत्र भवति ? (मनुष्य बौने के समान कहाँ होता है ?)
प्रकत्याः समक्षं मानवः वामनकल्पः एव भवति।
(प्रकृति के समक्ष मानव बौना-सा ही होता है।)

प्रश्न 26.
भूकम्पेन गुर्जरराज्यं कीदृशम् अभवत् ?
(भूकम्प से गुजरात राज्य कैसा हो गया ?)
उत्तरम् :
भूकम्पेन गुर्जर-राज्यं पर्याकुलं, विपर्यस्तं क्रन्दनविकलं च जातम्।
(भूकम्प से गुजरात राज्य चारों ओर से व्याकुल, अस्त-व्यस्त तथा क्रन्दन से व्याकुल हो गया।)

प्रश्न 27.
महाप्लावनदृश्यं कथम् उपस्थितम्? (महाप्लावन का दृश्य कैसे उपस्थित हो गया ?)
उत्तरम् :
भूमिगर्भाद् उपरि निस्सरन्तीभिः दुरिजलधाराभिः महाप्लावनदृश्यम् उपस्थितम्।
(भूमि के गर्भ से ऊपर निकलती कठिनाई से रोकने योग्य जल की धाराओं से महाप्लावन का दृश्य उपस्थित हो गया।)

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

प्रश्न 28.
कश्मीरप्रान्ते कदा महाकम्पनम् आगतम् ?
(कश्मीर प्रान्त में महाभूकम्प कब आया ?)
उत्तरम् :
कश्मीरप्रान्ते पञ्चोत्तरद्विसहस्रख्रीष्टाब्दे भूकम्पम् आगतम्।
(कश्मीर प्रान्त में 2005 ई. में भूकम्प आया।)

प्रश्न 29.
भूकम्पः कैः अपि जायते ?
(भूकम्प किनसे भी पैदा होता है ?)
उत्तरम् :
भूकम्पः ज्वालामुखपर्वतानां विस्फोटः अपि जायते।
(भूकम्प ज्वालामुखी पर्वतों के विस्फोटों से भी पैदा होता है।)

प्रश्न 30.
कस्य स्थिरोपायो न दृश्यते ?
(किसका स्थायी उपचार नहीं दिखाई देता ?)
उत्तरम् :
भूकम्पोपशमनस्य कोऽपि स्थिरोपायः न दृश्यते।
(भूकम्प शान्ति का कोई स्थिर उपाय नहीं दिखाई देता।)

प्रश्ननिर्माणम् –

अधोलिखित वाक्येषु स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –

1. गुर्जरराज्ये एकोत्तरद्विसहस्त्रख्रीष्टाब्दे भूकम्पः जातः।
(गुजरात में 2001 ई. में भूकम्प आया।)
2. भूकम्पेन बहुभूमिकानि भवनानि क्षणेनैव धराशायीनि जातानि।
(भूकम्प से बहुमञ्जिले मकान क्षणभर में धराशायी हो गए।)
3. भूकम्पेन फालद्वये भूमिः विभक्ता।
(भूकम्प से धरती दो भागों में विभक्त हो गई।)
4. जलधाराभिः महाप्लावनदृश्यम् उपस्थितम्।
(जल की धाराओं से महान् बाढ़ का दृश्य पैदा हो गया।)
5. सहस्रमिताः प्राणिनस्तु क्षणेनैव भूकम्पेन मृताः।
(हजारों प्राणी क्षणभर में ही भूकम्प से मारे गए।)
6. ध्वस्तभवनेषु सम्पीडिताः क्रन्दन्ति स्म।
(ध्वस्त भवनों में पीड़ित (लोग) क्रन्दन कर रहे थे।)
7. शिशवः ईश्वरकृपया जीवनं धारितवन्तः।
(बच्चे ईश्वर की कृपा से जीवन धारण किए हुए थे।)
8. कश्मीरप्रान्ते पञ्चोत्तरद्विसहस्त्रख्रीष्टाब्दे धरायाः महत्कम्पनं जातम्।।
(कश्मीर प्रान्त में 2005 ई. में धरती का महान् कम्पन हुआ।)
9. कश्मीरे धरायाः महत्कम्पनात् लक्षपरिमिताः जनाः अकालकालकवलिताः।
(कश्मीर में धरती के महान् कम्पन से लाखों लोग असमय में काल के ग्रास बन गए।)
10. महाकम्पनेन महाविनाशदृश्यम् समुत्पद्यते।
(महाकम्पन से महाविनाश का दृश्य पैदा हो जाता है।)
उत्तराणि :
1. गुर्जरराज्ये कदा भूकम्पः जातः ?
2. भूकम्पेन कानि क्षणेनैव धराशायीनि जातानि ?
3. केन फालद्वये भूमिः विभक्ता ?
4. काभिः महाप्लावनदृश्यमुपस्थितम् ?
5. कति प्राणिनः क्षणेनैव भूकम्पेन मृताः ?
6. केषु सम्पीडिताः क्रन्दन्ति स्म ?
7. शिशवः कया जीवनं धारितवन्तः ?
8. कश्मीरप्रान्ते कदा धरायाः महत्कम्पनं जातम् ?
9. कश्मीरे जनाः अकालकालकवलिताः ?
10. केन महाविनाशदृश्यं समुत्पद्यते ?

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

पाठसार लेखनम –

प्रश्न :
‘भूकम्पविभीषिका’ इति पाठस्य सारांश: हिन्दीभाषायां लिखत।
उत्तरम् :
ईसवी सन् 2001 में गणतन्त्र दिवस समारोह में जिस समय सम्पूर्ण भारत देश तल्लीन था, उस समय अनायास ही धरती हिलने के भयंकर त्रास ने सारे ही गुजरात प्रदेश को विशेष रूप से कच्छ नाम के जनपद को खण्डहरों में बदल दिया था। केन्द्र बना भुजनामक नगर तो मिट्टी के खिलौने की तरह चकनाचूर हो गया था। अनेक मंजिलों वाले भवन तो क्षणमात्र में ही धराशायी हो गये। जल की धाराओं से महान् बाढ़ का दृश्य उपस्थित हो गया।

हजारों की संख्या में जीवधारी क्षण मात्र में ही मारे गये। घरों के नष्ट हो जाने पर पीड़ित हजारों की संख्या में दूसरे सहयोग के लिये अति करुण क्रन्दन कर रहे थे। हे विधाता! भूख से सूखे गले वाले मरणासन्न कुछ बच्चे भगवान् की कृपा से दो-तीन दिन तक ही प्राणों को धारण कर सके। कच्छ क्षेत्र में उत्पन्न भूकम्प की भयानक आपत्ति की यह स्थिति थी। ईशवी सन् 2005 में भी कश्मीर प्रदेश और पाकिस्तान देश में महान् भूकम्प आया।

जिसमें लाखों की संख्या में मानव असमय में ही मर गये। ‘धरती किस कारण से हिलती है। वैज्ञानिक इस विषय में कहते हैं कि पृथ्वी के आन्तरिक भाग में विद्यमान विशाल पत्थर की चट्टानें जिस समय आपस में टकराने से दुकड़े-टुकड़े हो जाती है उस समय भयंकर विचलन होता है। विचलन से उत्पन्न कम्पन्न उसी समय पृथ्वी के बाहरी तल पर आकर महान् कम्पन पैदा करता है। जिसके कारण अतिविनाश का दृश्य उत्पन्न हो जाता है।

ज्वालामुखी पर्वतों के विस्फोटों से भी भूकम्प होता है। ऐसा भूगर्भ रहस्य वेत्ताओं ने कहा है। भूकम्प दैवी प्रकोप है। परन्तु इसका कोई स्थायी शान्ति का कोई उपचार नजर नहीं आता है। प्रकृति के सामने आज भी मनुष्य बौना है। परंतु फिर भी भूकम्प के रहस्य को जानने वाले वैज्ञानिक कहते हैं कि बहुमञ्जिले भवनों का निर्माण नहीं करना चाहिये। पानी के बाँधों का निर्माण करके बड़ी मात्रा में नदी के जल को एक जगह संग्रह नहीं करना चाहिये। नहीं तो सन्तुलन के अभाव में भूकम्प सम्भव है।

भूकम्पविभीषिका Summary and Translation in Hindi

पाठ-परिचय – प्रकृति ने जहाँ हमें अनेक प्रकार के भौतिक सुख-साधन उपलब्ध कराए हैं, वहीं अनेक आपदाएँ भी प्रदान की हैं। कभी किसी महामारी की आपदा, बाढ़ तथा सूखे की आपदा या तूफान के रूप में भयंकर प्रलय। ये सभी आपदाएँ देखते-ही-देखते महाविनाश करके मानव-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती हैं। इन्हीं भयङ्कर आपदाओं में से एक है- भूकम्प। भूकम्प में पृथ्वी अकस्मात् काँपने लगती है। फलस्वरूप विशालकाय निर्माण, बहुमंजिले भवन, सड़कें और बिजली के खम्भे आदि गिरकर महाविनाश का कारण बनते हैं। प्रस्तुत पाठ इसी आपदा पर आधारित है। इस पाठ के माध्यम से बताया गया है कि किसी भी आपदा में बिना किसी घबराहट के, हिम्मत के साथ किस प्रकार हम अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकते हैं।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

मूलपाठः,शब्दार्थाः, सप्रसंग हिन्दी-अनुवादः

1. एकोत्तरद्विसहस्रनीष्टाब्दे (2001 ईस्वीये वर्षे) गणतन्त्र-दिवस-पर्वणि यदा समग्रमपि भारतराष्ट्र नृत्य-गीत-वादित्राणाम् उल्लासे मग्नमासीत् तदाकस्मादेव गुर्जर-राज्यं पर्याकुलं, विपर्यस्तम्, क्रन्दनविकलं, विपन्नञ्च जातम्। भूकम्पस्य दारुण-विभीषिका समस्तमपि गुर्जरक्षेत्रं विशेषेण च कच्छजनपदं ध्वंसावशेषु परिवर्तितवती। भूकम्पस्य केन्द्रभूतं भुजनगरं तु मृत्तिकाक्रीडनकमिव खण्डखण्डम् जातम्। बहुभूमिकानि भवनानि क्षणेनैव धराशायीनि जातानि। उत्खाता विद्युद्दीपस्तम्भाः। विशीर्णाः गृहसोपान-मार्गाः।

शब्दार्थाः – एकोत्तर द्विसहस्रख्रीष्टाब्दे = 2001 ईस्वीये वर्षे (सन् 2001 ईग्वी वर्ष में)। गणतन्त्र-दिवस-पर्वणि = गणतन्त्रदिवसोत्सवे (गणतन्त्र दिवस समारोह में)। यदा = यस्मिन् काले जब)। समग्रमपि भारतराष्ट्रम् = सम्पूर्णोऽपि भारतदेशः (सारा भारत राष्ट्र)। नृत्य-गीत-वादित्राणाम् = नर्तनस्य, गानस्य वाद्यवादनस्य च (नाच-गाने और बाजे बजाने के)। उल्लासे = प्रसन्नतायाम् (खुशी में)। मग्नमासीत् = तल्लीनः निमग्नः, व्यापृतः वा अवर्तत (डूबा हुआ था)। तदा = तस्मिन् काले (तब)। अकस्मादेव = अनायासमेव (अचानक ही)। गुर्जर-राज्यम् = गुजराताख्यं प्रान्तम् (गुजरात प्रान्त)। पर्याकुलम् = परितः व्याकुलम् (चारों ओर से बेचैन)। विपर्यस्तम् = अस्तव्यस्तम् (अस्तव्यस्त)। क्रन्दनविकलम् = चीत्कारेण व्याकुलम् (क्रन्दन, रुदन से बेचैन)।

विपन्नम् = विपत्तियुक्तम्, विपत्तिग्रस्तम् (मुसीबत में)। जातम् = अभवत्, अजायत (हो गया, पड़ गया)। भूकम्पस्य = धरादोलनस्य (धरती हिलने की)। दारुण = भयङ्करः (भयानक)। विभीषिका = त्रासः (भयंकर घटना ने)। समस्तमपि = सम्पूर्णमपि (सारे)। गुर्जरक्षेत्रम् = गुजरातप्रदेशम् (गुजरात प्रान्त को)। विशेषेण च = विशेषरूपेण च (और विशेष रूप से)। कच्छजनपदम् = कच्छाख्यं जनपदम् (कच्छ जिले को)। ध्वंसावशेषु = नाशोपरान्त-अवशिष्टेषु भग्नावशिष्टेषु (विनाश के बाद बचे हुए खंडहरों में)। परिवर्तितवती = परिणितम् अकरोत् (बदल दिया, परिणत कर दिया)। भूकम्पस्य = धरादोलनस्य (धरती हिलने के)। केन्द्रभूतम् = मध्येस्थितम् (मध्य में या केन्द्र स्थित)। भुजनगरं तु = भुजनामकं पुरं तु (भुजनगर तो)।

मृत्तिका-क्रीडनकमिव = (मिट्टी के खिलौने की तरह)। खण्डखण्डम् = विखण्डितम् (टुकड़े-टुकड़े)। जातम् = अभवत् (हो गया)। बहुभूमिकानि भवनानि = बहव्यः भूमिकाः येषु तानि भवनानि, अनेकतलगृहाणि (बहुमंजिले मकान)। क्षणेनैव = क्षणमात्रकालेन एव (क्षणभर में ही)। धराशायीनि जातानि = पृथिव्यां पतितानि (धरती पर गिर गए)। उत्खाताः = उत्पाटिताः (उखड़ गए)। विधुदीपस्तम्भाः = दामिनी-दीप-यूपाः (बिजली के खंभे)। विशीर्णाः = नष्टाः (टूट गए)। गृहसोपान-मार्गाः = भवनस्य आरोहणपद्धत्यः (झीने, सीढ़ियाँ)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह गद्यांश हमारी ‘शेमुषी’ पाठ्य पुस्तक के ‘भूकम्पविभीषिका’ पाठ से उद्धृत है। यह पाठ भूकम्प की विभीषिका को दर्शाता है।

हिन्दी-अनुवादः – सन् 2001 ईस्वी वर्ष में जब सारा भारत राष्ट्र गणतन्त्र दिवस समारोह में नाचने, गाने और बजाने की खुशी में डूबा हुआ था तब अचानक ही गुजरात नामक प्रदेश चारों ओर से बेचैन, अस्तव्यस्त, क्रन्दन-रुदन से व्याकुल तथा विपत्तिग्रस्त हो गया। भूकम्प की भयंकर घटना ने सम्पूर्ण गुजरात प्रान्त को विशेष रूप से कच्छ जिले को भग्नावशेषों-खण्डहरों में बदल दिया। धरती हिलने के मध्य भाग में (केन्द्र में) स्थित भुज नामक नगर तो मिट्टी के खिलौने की तरह टुकड़े-टुकड़े हो गया। बहु-मंजिले मकान क्षण-भर में ही धराशायी हो गए अर्थात् गिर गए। बिजली के खम्भे उखड़ गए (और) झीने टूटकर बिखर गए अर्थात् मकानों में ऊपर जाने के लिए बनी सीढ़ियों के टुकड़े-टुकड़े हो गए।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

2. फालद्वये विभक्ता भूमिः। भूमिग दुपरि निस्सरन्तीभिः दुरजलधाराभिः महाप्लावनदृश्यम् उपस्थितम्। सहस्रमिताः प्राणिनस्तु क्षणेनैव मृताः। ध्व इम्पीडिताः सहस्रशोऽन्ये सहायतार्थं करुणकरुणं क्रन्दन्ति स्म। हा दैव ! क्षत्क्षामकण्ठाः मृतप्रायाः केचन शिशवस्तु ईश्वरकृपया एव द्वित्राणि दिनानि जीवनं धारितवन्तः।

शब्दार्थाः – फालद्वये = खण्डद्वये, द्वयोः खण्डयोः (दो भागों में)। विभक्ता = विभाजिता (बँटी हुई)। भूमिः = धरा (धरती)। भूमिग दुपरि = पृथिव्या गर्भात् (धरती के अन्दर से)। निस्सरन्तीभिः = निर्गच्छन्तीभिः (निकलती हुई)। दुर्वार = दुःखेन निवारयितुं योग्यम् (अनियन्त्रित, जिनको रोकना कठिन है; न रोके जाने योग्य)। जलधाराभिः = तोयधाराभिः (पानी की धाराओं से)। महाप्लावनदृश्यम् = महत्प्लावनस्य दृश्यम् (भयंकर बाढ़ का दृश्य)। उपस्थितम् = प्रस्तुतम्, उपस्थितोऽजायत् (उपस्थित हो गया था)। सहस्रमिताः = सहस्रसंख्यकाः, सहस्रपरिमिताः (हजारों की संख्या में)। प्राणिनस्तु = जीवधारिणः तु (प्राणी तो)। क्षणेनैव = पलमात्रेण एव (पलभर में ही)। मृताः = हताः (मारे गए)।

ध्वस्तभवनेषु = विनष्टावासेषु, गृहेषु (गिरे हुए भवनों में)। सम्पीडिताः = पीडिताः (पीडित)। सहस्रशोऽन्ये = सहस्रसंख्यकाः अपरे (हजारों दूसरे)। सहायतार्थम् = सहयोगार्थम् (सहायता के लिए)। करुणकरुणम् = अतिकरुणया (करुणामय)। क्रन्दन्ति स्म = क्रन्दनं कुर्वन्ति स्म (क्रन्दन कर रहे थे)। हा दैव ! = हा विधातः ! (हाय विधाता)। क्षुत्क्षामकण्ठाः = क्षुधाक्षामः कण्ठाः येषाम् ते, बुभुक्षया दुर्बलस्वरः (भूख से दुर्बल स्वर वाले)। मृतप्रायाः = मरणासन्नाः (मरणासन्न)। केचन् = केचिद् (कुछ)। शिशवस्तु = बालाः तु (छोटे बच्चे तो)। ईश्वरकृपया एव = भगवत्कृपया एव (ईश्वर की कृपा से ही)। द्वित्राणि दिनानि = द्वे त्रीणि दिनानि वा (दो या तीन दिन)। जीवनम् =प्राणान् (प्राणों को)। धारितवन्तः =धृतवन्तः (धारण किया)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह गद्यांश हमारी ‘शेमुषी’ पाठ्य-पुस्तक के ‘भूकम्पविभीषिका’ पाठ से लिया गया है। गद्यांश में भूकम्प द्वारा किये गये विनाश का चित्रण है।

हिन्दी-अनुवादः – धरती दो भागों में बँट गई। बैंटी हुई धरती के अन्दर से निकलती हुई न रोके जाने योग्य पानी की धाराओं से भयंकर बाढ़ का-सा दृश्य उपस्थित हो गया था। हजारों की संख्या में जीवधारी (प्राणी) तो पल-भर में ही मारे गए। गिरे हुए (ध्वस्त) भवनों में पीड़ित हजारों दूसरे सहयोग के लिए (सहायता के लिए) करुणापूर्ण क्रन्दन कर रहे थे। हाय विधाता ! भूख से दुर्बल कण्ठ (स्वर) वाले मरणासन्न कुछ बालक तो ईश्वर की कृपा से ही दो-तीन दिन प्राणों (जीवन) को धारण किए रहे अर्थात् जीवित रहे।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

3. इयमासीत् भैरवविभीषिका कच्छभूकम्पस्य। पञ्चोत्तरद्विसहस्त्रनीष्टाब्दे (2005 ईस्वीये वर्षे) अपि कश्मीरप्रान्ते पाकिस्तानदेशे च धरायाः महत्कम्पनं जातम्। यस्मात्कारणात् लक्षपरिमिताः जनाः अकालकालकवलिताः। पृथ्वी कस्मात्प्रकम्पते वैज्ञानिकाः इति विषये कथयन्ति यत् पृथिव्या अन्तर्गर्भे विद्यमानाः बृहत्यः पाषाणशिला यदा संघर्षणवशात् त्रुट्यन्ति तदा जायते भीषणं संस्खलनम, संस्खलनजन्यं कम्पनञ्च। तदैव भयावहकम्पनं धराया उपरितलमप्यागत्य महाकम्पनं जनयति येन महाविनाशदृश्यं समुत्पद्यते।

शब्दार्थाः – इयम् = एषा (यह ऐसी)। कच्छभूकम्पस्य = कच्छक्षेत्रे आगतस्य धरादोलनस्य (कच्छ क्षेत्र में आए भूकम्प की)। भैरवविभीषिका = भीषणा आपदा (भयंकर घटना, भयावह आपदा)। आसीत् = अवर्तत (थी)। पञ्चोत्तरद्विसहस्रख्रीष्टाब्दे = 2005 ईस्वीये वर्षे (सन् 2005 ई. वर्ष में)। अपि = (भी)। कश्मीरप्रान्ते = शारदादेशे (कश्मीर में)। पाकिस्तानदेशे च = (पाकिस्तान देश में, और पाकिस्तान में)। धरायाः = भुवः, (पृथ्वी का)। महत्कम्पनम् = प्रभूतं महद्दोलनमजायत (बहुत अधिक कम्पन हुआ)। यस्मात् कारणात् = यस्मात् हेतोः (जिस कारण से, जिससे)।

लक्षपरिमिताः = शतसहस्रमिताः, शतसहस्रसंख्यकाः (लाखों की संख्या में)। जनाः = मनुष्याः, मानवाः (लोग)। अकालकालकवलिताः = असमये एव दिवंगताः (अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए, असमय ही मर गये)। पृथ्वी = धरा (धरती)। कस्मात् = केन कारणेन (किस कारण से)। प्रकम्पते = दोलायते (हिलती है)। वैज्ञानिकाः = विज्ञानवेत्तारः (मौसम विज्ञान के जानकार)। इति विषये = अस्मिन् सन्दर्भे (इस विषय में)। कथयन्ति = वदन्ति (बोलते हैं, कहते हैं)। यत् = (कि)। पृथिव्याः अन्तर्गर्भे = धरायाः निम्नभागे, आन्तरिकभागे वा (पृथ्वी के केन्द्र भाग में)।

विद्यमानाः = उपस्थिताः (विद्यमान, मौजूद)। बृहत्यः = विशाला: (बड़ी-बड़ी)। पाषाण-शिलाः = प्रस्तर या भीतरी पट्टिकाः (पत्थर की शिलाएँ)। यदा = यस्मिन् काले (जब)। संघर्षणवशात् = परस्परघर्षणात् (आपस में टकराने से)। त्रुटयन्ति = भञ्जन्ति, खण्डखण्डं भवन्ति (टुकड़े-टुकड़े होती हैं)। तदा = तस्मिन् काले (तब)। भीषणं = भयंकरम् (भयंकर)। संस्खलनम् = विचलनम् (खिसकना, दूर हटना)। जायते = भवति (होता है)। संस्खलनजन्यम् = विचलनात् उत्पन्नम् (खिसकने से उत्पन्न)।

कम्पनञ्च = दोलनञ्च (हिलना, काँपना)। तदैव = तस्मिन्नेव काले (उसी समय, तभी)। भयावहकम्पनम् = भयंकरम् दोलनम् (भयानक कंपन)। धरायाः = पृथिव्याः (धरती के)। उपरितलमप्यागत्य = बाह्य तलं प्राप्य (ऊपर के तल पर आकर)। महाकम्पनम् = महद्दोलनम् (अत्यधिक कम्पन)। जनयति = उत्पन्नं करोति (पैदा करता है)। येन = येन कारणेन (जिससे)। महाविनाशदृश्यम् = (महाविनाश का दृश्य)। समुत्पद्यते = प्रादुर्भवति, उद्भवति (पैदा होता है)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह गद्यांश हमारी ‘शेमुषी’ पाठ्य-पुस्तक के ‘भूकम्पविभीषिका’ पाठ से उद्धृत है। इस गद्यांश में सन् 2005 ईसवी में आये भूकम्प की भयानक विभीषिका का चित्रण है।

हिन्दी-अनुवादः- यह कच्छक्षेत्र में आई भूकम्प की भयंकर आपदा (घटना) थी। सन् 2005 ई. में भी कश्मीर प्रान्त में और पाकिस्तान देश में पृथ्वी का बहुत अधिक कम्पन हुआ, जिससे लाखों की संख्या में लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए अर्थात् असमय में ही मर गए। धरती किस कारण से काँपती है। मौसम विज्ञान के जानकार इस विषय में कहते हैं कि पृथ्वी के आन्तरिक (भीतरी) भाग में विद्यमान बड़ी-बड़ी पत्थर की शिलाएँ जब आपस में टकराने से टूटती हैं (टुकड़े-टुकड़े होती हैं) तब भयंकर स्खलन होता है। स्खलन से कम्पन उत्पन्न होता है। तभी भयानक कम्पन पृथ्वी के ऊपरी तल पर आकर अत्यधिक कम्पन उत्पन्न करता है, जिससे अत्यधिक विनाश का दृश्य पैदा होता है।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

4. ज्वालामुखपर्वतानां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायत इति कथयन्ति भूकम्पविशेषज्ञाः। पृथिव्याः गर्भे विद्यमानोऽग्निर्यदा खनिजमृत्तिकाशिलादिसञ्चयं क्वथयति तदा तत्सर्वमेव लावारसताम् उपेत्य दुरगत्या धरां पर्वतं वा विदार्य बहिनिष्क्रामति। धूमभस्मावृतं जायते तदा गगनम्। सेल्सियस-ताप-मात्राया अष्टशताङ्कता मुपगतोऽयं लावारसो यदा नदीवेगेन प्रवहति तदा पार्श्वस्थग्रामा नगराणि वा तदुदरे क्षणेनैव समाविशन्ति। निहन्यन्ते च विवशाः प्राणिनः। ज्वालामुदगिरन्त एते पर्वता अपि भीषणं भूकम्पं जनयन्ति।।

शब्दार्थाः – ज्वालामुखपर्वतानाम् = अग्न्याननगिरीणाम् (ज्वालामुखी पर्वतों के)। विस्फोटैरपि = विस्फोटै: अपि (विस्फोटों से भी)। भूकम्पो जायते = धरादोलनं भवति (धरती में कम्पन होता है) (इति = ऐसा)। भूकम्प-विशेषज्ञाः = भुवः कम्पन-रहस्यस्य ज्ञातारः (भूमि के काँपने के रहस्य को जानने वाले)। कथयन्ति = वदन्ति, आहुः, ब्रुवन्ति (कहते हैं)। पृथिव्याः = धरायाः (धरती के)। गर्भे = आन्तरिक-भागे (भीतरी भाग में)। विद्यमानः = स्थितः (उपस्थित)। अग्निः = अनलः, पावकः, हुताशनम् (आग)। यदा = यस्मिन् काले (जब)। खनिज = उत्खननात् प्राप्तं द्रव्यम् (खनिज)। मृत्तिका = मृद् (मिट्टी)। शिलादिसञ्चयम् = प्रस्तरपट्टिकादीनां संग्रहम् (शिला आदि के संचय को)। क्वथयति = उत्तप्तं करोति (उबालती है, तपाती है)। तदा = ततः (तब)। तत्सर्वमेव = तत्सम्पूर्णं, सकलमेव (वह सब ही)।

लावारसताम् = खनिद्रव-रसत्वम्, लावाद्रवत्वम् (लावा द्रवत्व को)। उपेत्य = प्राप्य (प्राप्त करके)। दुर्वारगत्या = अनियन्त्रित-वेगेन (अनियन्त्रित वेग से)। धराम् = पृथिवीम् (धरती को)। वा = अथवा। पर्वतम् = गिरिम् (पहाड़ को)। विदार्य = विदीर्णं कृत्वा (फाड़कर)। बहिर्निष्क्रामति = बहिर् निस्सरति, उपर्यागच्छति (बाहर निकलता है)। तदा = तस्मिन् काले (तब, उस समय)। गगनम् = आकाशमण्डलम् (आकाश)। धूमभस्मावृतं जायते = धूमेन, भस्मेन च आवृतं भवति (धुआँ और राख से ढक जाता है)। सेल्सियसतापमात्रायाः = तापस्य परिमाणमस्य सेल्सियसः (ताप के परिमाण की मात्रा का सेल्सियस)। अष्टशताकताम् = अष्टशत-अङ्कपर्यन्तम् (800 डिग्री तक)। उपगतो = उपेतः (प्राप्त हुआ)। अयम् = एषः (यह)। लावारसः = खनिद्रवप्रवाहः (लावा)। यदा = यस्मिन् काले (जिस समय)।

नदीवेगेन = तटिनी गत्या (नदी के वेग से)। प्रवहति = द्रवति (बहता है)। तदा = तरिमन् काले (उस समय)। पार्श्वस्थ = (समीप)। स्थिता: ग्रामाः = निकटस्थग्रामाः (पास या समीप में स्थित, आस-पास के)। ग्रामाः नगराणि वा = वसत्यः, पुराणि वा (गाँव अथवा नगर)। तदुदरे = तत् कुक्षौ, जठरे (उसके पेट में)। क्षणेनैव = पलमात्रेणैव (क्षणमात्र में ही)। समाविशन्ति = अन्तः गच्छन्ति, समाविष्टाः भवन्ति (समा जाते हैं)। निहन्यन्ते = म्रियन्ते (मारे जाते हैं)। विवशाः प्राणिनश्च = अवशाः जीव-जन्तवः (बेबस जीव-जन्तु)। ज्वालामुगिरन्तः = अग्निं प्रकटयन्तः वमन्तः (आग उगलते हुए)। एते पर्वताः = इमे गिरयः (ये पर्वत)। अपि = (भी)। भीषणम् = भयंकरम् (भयावह)। भूकम्पं जनयन्ति = धरादोलनं उत्पादयन्ति (भूकम्प को पैदा करते हैं)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह गद्यांश हमारी ‘शेमुषी’ पाठ्य-पुस्तक के ‘भूकम्पविभीषिका’ पाठ से उद्धृत है। इस गद्यांश में भूकम्प के कारणों का उल्लेख किया गया है। ज्वालामुखी पर्वत का विस्फोट इनमें से प्रमुख है।

हिन्दी-अनुवादः – ज्वालामुखी पर्वतों के विस्फोटों से भी धरती काँपती (हिलती) है, ऐसा भूमि के काँपने के रहस्य को जानने वाले कहते हैं। धरती के गर्भ में स्थित आग जब खनिज, मिट्टी, शिला आदि के संचय (समूह) को उबालती (तपाती) है, तब वह सब ही लावा-द्रवत्व को प्राप्त होकर अनियन्त्रित वेग (गति) से धरती अथवा पहाड़ को फाड़कर (चीरकर) बाहर निकलता है। उस समय आकाश धुएँ और राख से ढक जाता है। ताप के परिमाण की मात्रा 800° सेल्सियस तक पहुँचा हुआ यह लावा जब नदी के वेग से बहता है, उस समय आस-पास के गाँव अथवा शहर उसके पेट में (गर्भ में) क्षणमात्र में समाविष्ट (विलीन) हो जाते हैं। विवश (बेबस) जीव-जन्तु मारे जाते हैं। आग उगलते हुए ये पर्वत भी भयंकर भूकम्प को पैदा करते हैं।

JAC Class 10 Sanskrit Solutions Chapter 10 भूकम्पविभीषिका

5 यद्यपि दैवः प्रकोपो भूकम्पो नाम, तस्योपशमनस्य न कोऽपि स्थिरोपायो दृश्यते। प्रकृति-समक्षमद्यापि विज्ञानगर्वितो मानवः वामनकल्प एव तथापि भूकम्परहस्यज्ञाः कथयन्ति यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं न करणीयम्। तटबन्ध निर्माय बृहन्मानं नदीजलमपि नैकस्मिन् स्थले पुञ्जीकरणीयम् अन्यथा असन्तुलनवशाद् भूकम्पस्सम्भवति। वस्तुतः शान्तानि एव पञ्चतत्त्वानि क्षितिजलपावकसमीरगगनानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां कल्पन्ते। अशान्तानि खलु तान्येव महाविनाशम् उपस्थापयन्ति।

शब्दार्थाः – भूकम्पः = धरादोलनम् (धरती का हिलना)। दैवः = ईश्वरीय (दैवीय)। प्रकोपः = प्रकृष्टः कोप: (अत्यधिक कोप है)। तस्य = (उसके)। उपशमनस्य = शान्तेः (शान्त करने का)। कोऽपि = कश्चिदपि (कोई भी)। स्थिरोपायो = स्थायी उपचारः (स्थायी इलाज)। न दृश्यते = न लक्ष्यते (दिखाई नहीं देता है)। प्रकृतिसमक्षम् = प्रकृत्याः, निसर्गस्य सम्मुखे (प्रकृति के सामने)। अद्यापि = अधुनापि, इदानीमपि (आज भी)। मानवः = मनुष्यः (मनुष्य)। वामनकल्प एव = ह्रस्वकायः सदृशः ह्रस्वः (बौने की तरह ही)। (अस्ति = है।) तथापि = पुनरपि (फिर भी)। भूकम्परहस्यज्ञाः = धरादोलनरहस्यविदः (धरती हिलने के रहस्य को जानने वाले)। कथयन्ति = ब्रुवन्ति, आहुः (कहते हैं)। यत् = कि। बहुभूमिकभवननिर्माणम् = अनेकतलोपेतानां गृहाणां सर्जनम् [अनेक तलों से (मंजिलों से) युक्त घरों का निर्माण)। न करणीयः = न कर्त्तव्यम् (नहीं करना चाहिए)।

तटबन्धम् = जलबंधम् (बाँध)। निर्माय = निर्माणं कृत्वा (बनाकर)। बृहन्मात्रम् = विशालमात्रम् (बहुत मात्रा में)। नदीजलमपि = सरित्तोयमपि (नदी का पानी भी)। एकस्मिन् स्थले = एकस्मिन्नेव स्थाने (एक ही स्थान पर)। न पुञ्जीकरणीयम् = नैकत्र करणीयम्, संग्रहणीयम् (इकट्ठा नहीं करना चाहिए)। अन्यथा = नहीं तो। असन्तुलनवशात् = सन्तुलनाभावात् (सन्तुलन के अभाव में)। भूकम्पः = धरादोलनम् (धरती का हिलना)। सम्भवति = सम्भाव्यमस्ति (सम्भव होता है)। वस्तुतः = यथार्थतः (वास्तव में)। शान्तानि एव = प्रशान्तान्येव (प्रशान्त ही)। पञ्चतत्त्वानि = पृथिव्यादिनि पञ्चतत्त्वानि (धरती आदि पाँच तत्त्व)।

क्षितिजलपावकसमीरगगनानि = पृथ्वी, आपः, अग्निः, वायुः, आकाशादीनि (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश आदि)। भूतलस्य = धरातलस्य (पृथ्वीतल की)। योगक्षेमाभ्यां = अप्राप्तस्य प्राप्तिः, योगः प्राप्तस्य रक्षणम् (क्षेमः) ताभ्याम् (अप्राप्त की प्राप्ति और प्राप्त की रक्षा)। कल्पन्ते = रचयन्ति (रचना करते हैं)। अशान्तानि = शमनाभावे (शान्ति के अभाव में)। खलु = वस्तुतः (वास्तव में)। तान्येव = अमूनि एव (वे ही)। महाविनाशम् = महाप्रलयं (महान् विनाश को)। उपस्थापयन्ति = उपस्थितं कुर्वन्ति (उपस्थित करते हैं)।

सन्दर्भ-प्रसङ्गश्च – यह गद्यांश हमारी ‘शेमुषी’ पाठ्य पुस्तक के ‘भूकम्पविभीषिका’ पाठ से उद्धृत है। इस गद्यांश में भूकम्प के अन्य कारणों को दर्शाया है।

हिन्दी-अनुवादः – यद्यपि धरती का हिलना एक ईश्वरीय प्रकोप है, तथापि उसको शान्त करने का कोई स्थायी उपचार दिखाई नहीं देता है। प्रकृति के सामने आज भी मनुष्य बौने के समान ही है। फिर भी धरती हिलने के रहस्य को जानने वाले (लोग) कहते हैं कि हमें बहुमंजिले मकान नहीं बनाने चाहिए (और) बाँधों का निर्माण करके अत्यधिक मात्रा में नदी का जल भी एक जगह इकट्ठा नहीं करना चाहिए, नहीं तो असन्तुलन होने के कारण या सन्तुलन के अभाव में धरती का हिलना सम्भव है। वास्तव में पाँचों प्रशान्त तत्त्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश पृथ्वी तल के योग (अप्राप्त की प्राप्ति) और क्षेम (प्राप्त की रक्षा) की रचना करते हैं; अर्थात् उपर्युक्त पाँचों तत्त्वों के शान्तिपूर्ण सन्तुलन में ही पृथ्वी की कुशलता निहित है। अशान्त होने पर वास्तव में वे ही तत्त्व पृथ्वी पर महाविनाश उपस्थित कर देते हैं।