JAC Class 12 History Important Questions Chapter 15 संविधान का निर्माण : एक नए युग की शुरुआत

Jharkhand Board JAC Class 12 History Important Questions Chapter 15 संविधान का निर्माण : एक नए युग की शुरुआत Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 History Important Questions Chapter 15 संविधान का निर्माण : एक नए युग की शुरुआत

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. भारतीय संविधान कब अस्तित्व में आया था?
(क) 26 जनवरी, 1949
(ख) 26 जनवरी, 1930
(ग) 26 जनवरी, 1950
(घ) 26 जनवरी, 1948
उत्तर:
(ग) 26 जनवरी, 1950

2. संविधान सभा के अध्यक्ष थे –
(क) डॉ. भीमराव अम्बेडकर
(ख) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ग) जवाहर लाल नेहरू
(घ) पट्टाभि सीतारमैया
उत्तर:
(ख) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

3. संविधान सभा के कुल कितने सत्र हुए थे –
(क) 11
(ग) 21
(ख) 19
(घ) 17
उत्तर:
(क) 11

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4. संविधान सभा के कितने प्रतिशत सदस्य काँग्रेस के भी सदस्य थे –
(क) 95 प्रतिशत
(ख) 75 प्रतिशत
(ग) 82 प्रतिशत
(घ) 62 प्रतिशत
उत्तर:
(ग) 82 प्रतिशत

5. भारतीय संविधान सभा को कब से कब तक के मध्य सूत्रबद्ध किया गया –
(क) दिसम्बर, 1946 से दिसम्बर, 1949 के बीच
(ख) जनवरी 1947 से अक्टूबर 1949 के बीच
(ग) दिसम्बर, 1945 से दिसम्बर, 1948 के बीच
(घ) सितम्बर, 1946 से दिसम्बर, 1949 के बीच
उत्तर:
(क) दिसम्बर, 1946 से दिसम्बर, 1949 के बीच

6. संविधान पर तीन साल तक चली बहस के बाद हस्ताक्षर किए गए –
(क) दिसम्बर, 1949 में
(ख) दिसम्बर, 1948 में
(ग) अक्टूबर, 1949 में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) दिसम्बर, 1949 में

7. संविधान सभा के कितने दिन बैठकों में गए –
(क) 169 दिन
(ग) 175 दिन
(ख) 165 दिन
(घ) 140 दिन
उत्तर:
(ख) 165 दिन

8. रॉयल इण्डियन नेवी के सिपाहियों ने विद्रोह किया था –
(क) 1946 के बसंत में
(ख) 1942 के बसंत में
(ग) 1947 के बसंत में
(घ) 1944 के बसंत में
उत्तर:
(क) 1946 के बसंत में

9. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे –
(क) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ख) डॉ. भीमराव अम्बेडकर
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) सरदार पटेल
उत्तर:
(ख) डॉ. भीमराव अम्बेडकर

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10. विश्व का सबसे बड़ा संविधान निम्न में से किस देश का है?
(क) चीन
(ग) रूस
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) भारत
उत्तर:
(घ) भारत

11. संविधान सभा का उद्देश्य प्रस्ताव किसने पढ़ा था?
(क) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ख) जवाहर लाल नेहरू
(ग) गोविन्द वल्लभ पंत
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर:
(ख) जवाहर लाल नेहरू

12. “हम सिर्फ नकल करने वाले नहीं हैं।” यह कथन किसका है?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) वल्लभ भाई पटेल
(घ) भीमराव अम्बेडकर
उत्तर:
(क) जवाहरलाल नेहरू

13. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन में गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट के तहत निम्न में से किस वर्ष में प्रान्तीय संसद के चुनाव हुए थे?
(क) 1935
(ग) 1946
(ख) 1937
(घ) 1947
उत्तर:
(क) 1935

14. ” अंग्रेज तो चले गए, लेकिन जाते-जाते शरारत क बीज बो गए।” संविधान सभा में यह किसने कहा था?
(क) नेहरू ने
(ख) सरदार पटेल ने
(ग) जी.बी. पंत ने
(घ) जिन्ना ने
उत्तर:
(ख) सरदार पटेल ने

15. निम्न में से संविधान सभा के किस सदस्य को लगता था कि पृथक निर्वाचिका आत्मघाती साबित होगी?
(क) बेगम ऐजाज रसूल
(ख) भीमराव अम्बेडकर
(ग) एन. जी. रंगा
(घ) जे.बी. पन्त
उत्तर:
(क) बेगम ऐजाज रसूल

16. राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान किस राजनेता ने दमित जातियों के लिए पृथक् निर्वाचिकाओं की माँग की थी ?
(क) भीमराव अम्बेडकर
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) जवाहरलाल नेहरू
(च) सुभाषचन्द्र बोस
उत्तर:
(क) भीमराव अम्बेडकर

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17. महात्मा गाँधी समर्थक थे-
(क) हिन्दुस्तानी भाषा के
(ख) हिन्दी के
(ग) उर्दू के
(घ) संस्कृत के
उत्तर:
(क) हिन्दुस्तानी भाषा के

18. “दक्षिण में हिन्दी का विरोध बहुत अधिक है।” यह कथन किसका है?
(क) दुर्गाबाई
(ख) बेगम एजाज रसूल
(घ) सन्तनम
(ग) पं. नेहरू
उत्तर:
(क) दुर्गाबाई

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. संविधान सभा में कुल ……………. सदस्य थे।
2. ……………. को मुस्लिम लीग द्वारा ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस ‘का ऐलान किया।
3. संविधान सभा का अधिवेशन ……………. को शुरू हुआ।
4. ……………. के दिन पाकिस्तान स्वतन्त्र हुआ तथा ……………. में जश्न हुआ।
5. भारत के संविधान को दिसम्बर नवम्बर ……………. के बीच सूत्रबद्ध किया गया।
6. बिर्रिश राज के दौरान उपमहाद्वीप का लगभग-क. ……………. भू-भाग नवाबों और रजवाड़ों के नियन्न्नण में था।
7. 13 दिसम्बर, 1946 को ……………. ने संविधान सभा के सामने उद्देश्र प्रस्ताव पेश किया।
8. गणराज्य शब्द में ……………. शब्द पहले से ही निहित होता है।
9. गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट के अन्तर्गत 1937 में चुनाव हुए तो कांगेस की सरकार 11 में से ……………. प्रान्तों में बनी।
10. ……………. के अनुसार जनसंख्या की दृष्टि से हरिजन अल्पसंख्यक नहीं है।
11. अनुच्छेद ……………. पर केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के सारे अधिकार अपने हाथ में लेने का अधिकार है।
12. ……………. द्वारा सदन को यह बताया गया कि दक्षिण में हिन्दी का विरोध बहुत ज्यादा है।
उत्तर:
1. 300
2. 16 अगस्त, 1946
3. 9 दिसम्बर, 1946
4. 14 अगस्त, 1947 कराची
5. 1946, 19496. एक तिहाई
7. जवाहरलाल नेहरू
8. लोकतान्त्रिक
9. 8
10. नागप्पा
11. 356
12. दुर्गाबाई

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान कब अस्तित्व में आया?
उत्तर:
26 जनवरी, 1950 को

प्रश्न 2.
भारत को स्वतंत्रता कब मिली?
उत्तर:
15 अगस्त, 1947 को

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प्रश्न 3.
रॉयल इंडियन नेवी के सिपाहियों ने विद्रोह कब और कहाँ किया ?
उत्तर:
1946 में बम्बई तथा अन्य शहरों में।

प्रश्न 4.
संविधान सभा में कितने सदस्य थे?
उत्तर:
तीन सौ।

प्रश्न 5.
संविधान सभा के तीन प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए जिनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण रही।
उत्तर:
(1) पं. जवाहरलाल नेहरू
(2) बॅ. राजेन्द्र प्रसाद
(3) वल्लभभाई पटेल।

प्रश्न 6.
सरकारें सरकारी कागजों से नहीं बनतीं। सरकार जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति होती है? यह कथन किसका था?
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरू का।

प्रश्न 7.
पृथक निर्वाचिका का समर्थन करने वाले एक सदस्य का नाम लिखिए।
उत्तर:
समर्थन करने वाले सदस्य मद्रास के बी. पोकर बहादुर थे।

प्रश्न 8.
पृथक् निर्वाचिका का विरोध करने वाले एक सदस्य का नाम लिखिए।
उत्तर:
आर.वी. धुलेकर।

प्रश्न 9.
“अंग्रेज तो चले गए, मगर जाते-जाते शरारत के बीज बो गए।” यह कथन किसका था?
उत्तर:
सरदार वल्लभ भाई पटेल का ।

प्रश्न 10.
एन. जी. रंगा के अनुसार कौन लोग असली अल्पसंख्यक थे?
उत्तर:
आदिवासी ।

प्रश्न 11.
किस अनुच्छेद के अनुसार गवर्नर की सिफारिश पर केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के समस्त अधिकार अपने हाथ में लेने का अधिकार था ?
उत्तर:
अनुच्छेद 356

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प्रश्न 12.
महात्मा गाँधी किस भाषा को राष्ट्रीय भाषा बनाना चाहते थे?
उत्तर:
हिन्दुस्तानी भाषा को।

प्रश्न 13.
दो सदस्यों के नाम लिखिए जिन्होंने शक्तिशाली केन्द्र की हिमायत की थी?
उत्तर:
(1) डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा
(2) बालकृष्ण शर्मा।

प्रश्न 14.
किस आदिवासी नेता ने विधायिका में आदिवासियों को पृथक् निर्वाचिका का अधिकार दिए जाने की माँग की थी?
उत्तर:
जयपाल सिंह ने।

प्रश्न 15.
पृथक् निर्वाचिका का विरोध करने वाले दो सदस्यों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(2) गोविन्द वल्लभ पंत ।

प्रश्न 16.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद किसकी सलाह पर डॉ. अम्बेडकर को केन्द्रीय विधिमन्त्री बनाया गया था ?
उत्तर:
महात्मा गाँधी की सलाह पर

प्रश्न 17.
इस भूमिका में डॉ. अम्बेडकर ने किसके रूप में काम किया?
उत्तर:
संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में।

प्रश्न 18.
भारत के राष्ट्रीय ध्वज में किन रंगों की तीन बराबर चौड़ाई वाली पट्टियाँ हैं ?
उत्तर:
केसरिया, सफेद तथा गहरे हरे रंग की । प्रश्न 19. संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे? उत्तर- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ।

प्रश्न 20.
संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर:
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर।

प्रश्न 21.
कौनसी सूची के विषय केवल राज्य सरकार के अन्तर्गत आते हैं?
उत्तर:
राज्य सूची के।

प्रश्न 22.
भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू किया गया?
उत्तर:
26 जनवरी, 1930 को भारत में पहली बार स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया था। अतः 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया।

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प्रश्न 23.
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के मुख्य आदर्श क्या हैं ?
उत्तर:
(1) न्याय
(2) स्वतन्त्रता
(3) समानता तथा
(4) अल्पसंख्यकों, पिछड़े तथा जनजातीय लोगों के लिए रक्षात्मक प्रावधान।

प्रश्न 24
विभाजित नवजात भारत राष्ट्र के सामने दो गंभीर समस्याएँ क्या थीं?
उत्तर:
(1) बर्बर हिंसा को समाप्त कर सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करना।
(2) देशी रियासतों के एकीकरण की समस्या।

प्रश्न 25.
भारत में हुए विभिन्न आन्दोलनों का एक अहम पहलू कौनसा था ?
उत्तर:
हिन्दू-मुस्लिम एकता।

प्रश्न 26.
संविधान सभा के सदस्यों को कैसे चुना गया?
उत्तर:
प्रान्तीय संसदों से संविधान सभा के सदस्यों को चुना गया।

प्रश्न 27.
नयी संविधान सभा में कौनसा दल प्रभावशाली था?
उत्तर:
कांग्रेस।

प्रश्न 28.
भारतीय संविधान के संवैधानिक सलाहकार कौन थे?
उत्तर:
बी.एन. राव ।

प्रश्न 29.
ब्रिटिश शासन में किन सुधारों के तहत प्रान्तीय विधायिकाओं में सीमित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था लागू की गयी थी?
उत्तर:
मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधारों के तहत।

प्रश्न 30.
मद्रास की दक्षायणी वेलायुधान देश के कमजोर वर्ग के लिए क्या चाहती थी?
उत्तर:
मद्रास की दक्षायणी वेलायुधान देश के कमजोर वर्गों हेतु नैतिक सुरक्षा का आवरण चाहती थी।

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प्रश्न 31.
क्या संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक मताधिकार के आधार पर हुआ था ?
उत्तर:
नहीं, संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक मताधिकार के आधार पर नहीं हुआ था।

प्रश्न 32.
संविधान सभा के सदस्यों को किसने चुना
उत्तर:
1945-46 में भारत के प्रांतों के निर्वाचित सांसदों ने संविधान सभा के सदस्यों को चुना ।

प्रश्न 33.
विभाजन के बाद बनी नई संविधान सभा में कौनसा दल सर्वाधिक प्रभावशाली था?
उत्तर:
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस नामक राजनैतिक दल

प्रश्न 34.
संविधान सभा में किन छह सदस्यों की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही?
उत्तर:
(1) जवाहर लाल नेहरू
(2) वल्लभ भाई पटेल
(3) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(4) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
(5) के. एम. मुंशी और
(6) अल्लादि कृष्णा स्वामी अय्यर।

प्रश्न 35.
संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव कब और किसने प्रस्तुत किया?
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसम्बर, 1946 को सभा के सामने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

प्रश्न 36.
संविधान के मसविदे में कितनी सूचियाँ बनायी गई थीं, उनके नाम लिखिये।
उत्तर:
संविधान के मसविदे में तीन सूचियाँ –
(1) केन्द्रीय सूची
(2) राज्य सूची और
(3) समवर्ती सूची बनाई गई थीं।

प्रश्न 37.
केन्द्रीय सूची के विषय किस सरकार के अधीन हैं?
उत्तर:
केन्द्रीय सूची के विषय केवल केन्द्र सरकार के अधीन हैं।

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प्रश्न 38.
संविधान के कोई दो केन्द्रीय अभिलक्षण लिखिये।
उत्तर:
(1) वयस्क मताधिकार
(2) धर्मनिरपेक्षता पर बल

प्रश्न 39.
संविधान क्या है?
उत्तर:
संविधान एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसी भी देश का शासन चलाया जाता है।

प्रश्न 40.
भारत का संविधान कब बन कर तैयार हुआ?
उत्तर:
भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ।

प्रश्न 41.
संविधान की प्रस्तावना का अर्थ समझाते हुए उसका महत्त्व बताइये।
उत्तर:
संविधान की प्रस्तावना के द्वारा संविधान का परिचय कराया जाता है, प्रस्तावना इसे सरकार को मार्ग- दर्शन प्राप्त होता है।

प्रश्न 42.
भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता शब्द कब जोड़ा गया ?
उत्तर:
भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता शब्द 1976 में 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।

प्रश्न 43.
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हैं, वह किसी भी धर्म को राजधर्म घोषित नहीं करेगा।

प्रश्न 44.
महिलाओं के लिए न्याय की माँग किसने की थी?
उत्तर:
बम्बई की हंसा मेहता

प्रश्न 45.
हंसा मेहता ने महिलाओं के लिए किस प्रकार के न्याय की मांग की थी?
उत्तर:
हंसा मेहता ने महिलाओं के लिए सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय की मांग की थी।

प्रश्न 46.
हिन्दुस्तानी भाषा के प्रश्न पर महात्मा गाँधी को क्या लगता था?
उत्तर:
महात्मा गाँधी को लगता था कि हिन्दुस्तानी भाषा विविध समुदायों के मध्य संचार की आदर्श भाषा हो सकती है।

प्रश्न 47.
हमारे संविधान ने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान कर रखी है। इस धार्मिक स्वतंत्रता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इसका अर्थ है कि व्यक्ति स्वेच्छा से किसी भी धर्म को अपना सकता है और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है।

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प्रश्न 48.
देशी रियासतों का एकीकरण किसके नेतृत्व में हुआ?
उत्तर:
देशी रियासतों का एकीकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। प्रश्न 49 समानता का अधिकार क्या है ? उत्तर- इस अधिकार के तहत कानून की दृष्टि में सभी समान होंगे। सरकारी नौकरी पाने का सभी को समान अवसर मिलेगा।

प्रश्न 50.
भारतीय संविधान के आधारभूत सिद्धान्त व मान्यताएँ क्या थीं?
उत्तर:
संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी लोकतांत्रिक गणराज्य होगा, जिसमें वयस्क मताधिकार के आधार पर एक संसदीय प्रणाली होगी।

प्रश्न 51.
संविधान सभा में राष्ट्रीय ध्वज का प्रस्ताव किसने पेश किया था?
उत्तर:
संविधान सभा में पं. जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव के साथ-साथ राष्ट्रीय ध्वज का प्रस्ताव भी पेश किया था।

प्रश्न 52.
शाही भारतीय सेना के सिपाहियों ने कब विद्रोह किया?
उत्तर:
1946 ई. के बसंत में

प्रश्न 53.
पृथक् निर्वाचिका के सवाल पर गोविन्द बल्लभ पंत ने क्या कहा था?
उत्तर:
गोविन्द वल्लभ पंत के अनुसार पृथक् निर्वाचिका अल्पसंख्यकों के लिए आत्मघाती होगी।

प्रश्न 54.
आप कैसे कह सकते हैं कि सारे मुसलमान पृथक् निर्वाचिका के पक्ष में नहीं थे?
उत्तर:
बेगम एजाज रसूल के अनुसार पृथक् निर्वाचिका आत्मघाती साबित होगी क्योंकि इससे अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों से कट जाएँगे।

प्रश्न 55.
संविधान सभा की भाषा समिति ने राष्ट्रभाषा के सवाल पर क्या सुझाव दिया?
उत्तर;
भाषा समिति ने सुझाव दिया कि देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भारत की राजकीय भाषा होगी।

प्रश्न 56.
संविधान निर्माण सभा के प्रमुख चार सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • जवाहरलाल नेहरू
  • सरदार पटेल
  • मौलाना अबुल कलाम आजाद।

प्रश्न 57.
संविधान सभा की प्रथम बैठक कब आयोजित की गई ?
उत्तर:
संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को आयोजित की गई।

प्रश्न 58.
भारत को कैब स्वतन्त्रता प्राप्त हुई ?
उत्तर:
15 अगस्त, 1947 को

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले त्रिगुट का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(1) पं. जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव को प्रस्तुत करते हुए स्वतन्त्र भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
(2) सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कई महत्त्वपूर्ण रिपोर्टों के प्रारूप लिखने में विशेष सहायता की।
(3) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और संविधान सभा में चर्चा को रचनात्मक बनाए रखा।

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प्रश्न 2.
हमारा संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू किया गया? सकारण उत्तर दीजिये।
उत्तर:
हमारा संविधान नवम्बर, 1949 को बनकर तैयार हो गया था लेकिन उसे 2 महीने बाद 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। इसके पीछे यह कारण निहित है कि काँग्रेस के 1929 के दिसम्बर में लाहौर में आयोजित अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की तथा 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस मनाने की घोषणा की। 26 जनवरी 1930 को औपनिवेशिक भारत में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

प्रश्न 3.
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व न्यायिक अयोग्यता रखते हैं, क्यों?
उत्तर:
भारत के संविधान के भाग संख्या 4 में नागरिकों के लिए कुछ गारंटी दी गई हैं लेकिन ये न्याय योग्य नहीं हैं। इन्हें राज्य के नीति-निर्देशक तत्व कहा जाता है। इन्हें लागू करना पूर्णतः राज्य की इच्छा पर निर्भर करता है। इन्हें लागू करने के लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही नागरिक उन्हें लागू करवाने हेतु न्यायालय की शरण में जा सकता है।

प्रश्न 4.
भारतीय संविधान की रूपरेखा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत की संविधान सभा का गठन 1946 की कैबिनेट मिशन योजना के अन्तर्गत हुआ। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इस सभा के अध्यक्ष बनाए गए। उद्देश्य स्वतंत्र भारत के लिए एक था भारतीय संविधान सभा के संविधान सभा का प्रमुख संविधान का निर्माण करना अधिवेशन के 9 दिसम्बर, 1946 से 26 नवम्बर, 1949 तक कुल 11 सत्र हुए। मूल संविधान 395 धाराओं 22 भागों और आठ अनुसूचियों में बँटा हुआ है, जिसमें 90 हजार शब्द हैं।

प्रश्न 5.
संविधान सभा ने सम्पूर्ण देश का प्रतिनिधित्व किया तो भी यह एक ही पार्टी का समूह बनकर क्यों रह गयी ?
उत्तर:
संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव 1946 ई. के प्रान्तीय चुनावों के आधार पर किया गया था। संविधान सभा में भारत के ब्रिटिश प्रान्तों द्वारा भेजे गये सदस्यों के अतिरिक्त रियासतों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे। मुस्लिम लीग ने स्वतन्त्रता के पूर्व की संविधान सभा की बैठकों का बहिष्कार किया जिसके कारण इस दौर में संविधान सभा एक ही पार्टी का समूह बनकर रह गई थी। संविधान सभा के 82 प्रतिशत सदस्य कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे।

प्रश्न 6.
आप कैसे कह सकते हैं कि समस्त मुसलमान पृथक निर्वाचिका की माँग के समर्थन में नहीं थे?
उत्तर:
बेगम ऐजाज रसूल के संविधान सभा में दिए गए भाषण के आधार पर हम कह सकते हैं कि समस्त मुसलमान पृथक् निर्वाचिका के समर्थन में नहीं थे बेगम ऐजाज रसूल को लगता था कि पृथक् निर्वाचिका आत्मघाती सिद्ध होगी। क्योंकि इससे अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों से कट जायेंगे।

प्रश्न 7.
संविधान में केन्द्र को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए किए गए किन्हीं तीन प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर;

  • केन्द्रीय सूची में बहुत अधिक विषय रखे गये।
  • खनिज पदार्थों एवं आधारभूत उद्योगों पर केन्द्र सरकार का ही नियन्त्रण रखा गया।
  • अनुच्छेद 356 के तहत राज्यपाल की सिफारिश पर केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के समस्त अधिकार अपने हाथ में लेने का अधिकार दिया गया।

प्रश्न 8.
संविधान सभा में हुई चर्चाएँ जनमत से कैसे प्रभावित होती थी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • जब संविधान सभा में बहस होती थी तो विभिन्न पक्षों के तर्क समाचार-पत्रों में छपते थे तथा समस्त प्रस्तावों पर सार्वजनिक रूप से बहस चलती थी। इस तरह प्रेस में होने वाली इस आलोचना तथा जवाबी आलोचना से किसी मुद्दे पर बनने वाली सहमति या असहमति पर गहरा प्रभाव पड़ता था।
  • सामूहिक सहभागिता बनाने के लिए देश की जनता के सुझाव भी आमन्त्रित किये जाते थे।
  • कई भाषायी अल्पसंख्यक अपनी मातृभाषा की रक्षा की माँग करते थे।
  • धार्मिक अल्पसंख्यक अपने विशेष हित सुरक्षित करवाना चाहते थे और दलित जाति के लोग शोषण के अन्त की माँग करते हुए राजकीय संस्थाओं में आरक्षण चाहते थे।

प्रश्न 9.
भारतीय संविधान निर्माण से पहले के वर्ष काफी उथल-पुथल वाले थे क्यों ?
अथवा
“संविधान निर्माण के पूर्व के वर्ष उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे थे।” उदाहरण देकर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
15 अगस्त, 1947 को मिली आजादी के साथ ही देश को दो टुकड़ों में बाँट दिया गया। लोगों के मस्तिष्क में 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन की यादें अभी भी जीवित थीं, जो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सबसे बड़ा जन आन्दोलन था। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा विदेशी सहायता से देश को स्वतंत्र कराने के प्रयास लोगों को बखूबी याद थे। 1946 के बसंत में बम्बई तथा अन्य शहरों में रॉयल इण्डियन नेवी (शाही भारतीय नौसेना) के सिपाहियों द्वारा किया जाने वाला विद्रोह भी उल्लेखनीय था।

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प्रश्न 10.
स्वतन्त्रता के समय देशी रियासतों की समस्याओं का वर्णन कीजिये।
अथवा
नवजात राष्ट्र के सामने देशी रजवाड़ों के एकीकरण की समस्या बहुत ही गंभीर थी। विवेचना कीजिये।
उत्तर:
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का लगभग एक-तिहाई भू-भाग ऐसे नवाबों और रजवाड़ों के नियन्त्रण में था, जो ब्रिटिश ताज की अधीनता स्वीकार कर चुके थे। उन्हें काफी स्वतंत्रता प्राप्त थी अंग्रेजों के भारत से चले जाने के बाद इन राजाओं और नवाबों की संवैधानिक स्थिति बहुत विचित्र हो गई थी। एक प्रेक्षक ने कहा था कि कुछ शासक तो अनेक टुकड़ों में बटे भारत में स्वतन्त्र सत्ता का सपना देख रहे थे।

प्रश्न 11.
एक शक्तिशाली केन्द्र सरकार के पक्ष में नेहरूजी ने जो बयान दिया था उसे लिखिए।
उत्तर:
नेहरूजी शक्तिशाली केन्द्र के पक्ष में थे। उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को लिखे पत्र में कहा था, “अब जबकि विभाजन एक हकीकत बन चुका है…… एक दुर्बल केन्द्रीय शासन व्यवस्था देश के लिए हानिकारक सिद्ध होगी क्योंकि ऐसा केन्द्र शान्ति स्थापित करने में आम सरोकारों के बीच समन्वय स्थापित करने में और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश के लिए आवाज उठाने में सक्षम नहीं होगा।”

प्रश्न 12.
संविधान निर्माण से पूर्व के कुछ आन्दोलनों का महत्त्वपूर्ण पहलू किस तरह से व्यापक हिन्दू-मुस्लिम एकता को धारण किए हुए था? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संविधान निर्माण से पूर्व के कुछ आन्दोलनों का एक अहम पहलू व्यापक हिन्दू-मुस्लिम एकता इन जन आन्दोलनों का एक अहम पहलू था। इसके विपरीत काँग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों प्रमुख राजनैतिक दल धार्मिक सौहार्द और सामाजिक सामंजस्य स्थापित करने के लिए सुलह-सफाई की कोशिशों में असफल होते जा रहे थे। अगस्त, 1946 में कलकत्ता में शुरू हुई हिंसा के साथ उत्तरी और पूर्वी भारत में लगभग साल भर चलने वाले दंगा- फसाद भड़क उठे ।

प्रश्न 13.
एक शक्तिशाली केन्द्र के विषय में के. सन्तनम के विचार लिखिए।
उत्तर:
एक शक्तिशाली केन्द्र के विषय में के. सन्तनम ने कहा कि न केवल राज्यों को बल्कि केन्द्र को मजबूत बनाने के लिए भी शक्तियों का पुनर्वितरण आवश्यक है। यदि केन्द्र के पास आवश्यकता से अधिक जिम्मेदारियाँ होंगी तो वह प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाएगा। उसके कुछ दायित्वों को राज्यों को सौंपने से केन्द्र अधिक मजबूत हो सकता है।

प्रश्न 14.
भारतीय संविधान सभा की भाषा समिति राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर क्या सुझाव दिया?
उत्तर:
राष्ट्रभाषा के सवाल पर संविधान सभा की भाषा समिति ने सुझाव दिया कि देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भारत की राजकीय भाषा होगी। परन्तु इस फार्मूले को समिति ने घोषित नहीं किया था। हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए। पहले 15 वर्षों तक राजकीय कार्यों में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा।

प्रश्न 15.
अगस्त 1947 का अवसर अनेक मुसलमानों, हिन्दुओं और सिक्खों के लिए निर्मम चुनाव का क्षण किस तरह से था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर;
15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्रता दिवस पर आनन्द व उम्मीद का वातावरण था परन्तु भारत के बहुत से मुसलमानों और पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं तथा सिखों के लिए यह एक निर्मम क्षण था उन्हें मृत्यु अथवा अपनी पीढ़ियों की पुरानी जगह छोड़ने के बीच चुनाव करना था। करोड़ों की संख्या में शरणार्थी इधर से उधर जा रहे थे। मुसलमान पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान की ओर तो हिन्दू व सिख पश्चिमी बंगाल एवं पूर्वी पंजाब की ओर बड़े जा रहे थे। उन लोगों में अनेक कभी मंजिल तक ही नहीं पहुँच सके और बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

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प्रश्न 16.
एक शक्तिशाली केन्द्र सरकार के पक्ष में नेहरूजी ने संविधान सभा में क्या बयान दिया? टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संविधान सभा में केन्द्र व राज्य सरकारों के अधिकारों को लेकर काफी बहस हुई शक्तिशाली केन्द्र के पक्ष में नेहरूजी ने अपने विचार प्रकट किये थे। उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को लिखे पत्र में कहा था- ” अब जबकि विभाजन एक हकीकत बन चुका है। एक कमजोर केन्द्रीय शासन व्यवस्था देश के लिए हानिकारक सिद्ध होगी क्योंकि ऐसा केन्द्र शान्ति स्थापित करने में आम सरोकारों के मध्य समन्वय स्थापित करने में और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश के लिए आवाज उठाने में सक्षम नहीं होगा। इसलिए राज्यों से केन्द्र को अधिक ताकतवर बनाना ही ठीक होगा।”

प्रश्न 17.
17 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को नेहरूजी ने संविधान सभा में जो भाषण दिया था उसके एक महत्त्वपूर्ण अंश की संक्षिप्त व्याख्या अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
14 अगस्त, 1947 को मध्य रात्रि में नेहरूजी ने संविधान सभा में भाषण देते हुए कहा था –
“बहुत समय पहले हमने नियति से साक्षात्कार किया था और अब समय आ चुका है कि हम अपने उस संकल्प को न केवल पूर्ण रूप से या समग्रता में बल्कि उल्लेखनीय रूप से साकार करें अर्द्धरात्रि के इस क्षण में जब दुनिया सो रही है, भारत जीवन और स्वतंत्रता की ओर जाग रहा है।”

प्रश्न 18.
उद्देश्य प्रस्ताव का स्वागत करते हुए आदिवासी प्रतिनिधि जयपाल सिंह ने जो विचार प्रकट किए उन्हें संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अगर भारतीय समाज में कोई ऐसा समूह है –
जिसके साथ सही व्यवहार नहीं किया गया है तो वह मेरा समूह है जिसे पिछले 6000 वर्षों से अपमानित किया जा रहा है और उपेक्षा का शिकार हो रहा है। आदिवासी कबीले संख्या की दृष्टि से अल्पसंख्यक नहीं हैं लेकिन उन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। उन्हें उनके चरागाहों व जंगलों से बचत कर दिया गया है। हम आपके साथ मेलजोल चाहते हैं। आदिवासियों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है।

प्रश्न 19.
नई संविधान सभा में काँग्रेस प्रभावशाली क्यों थी?
उत्तर:

  1. प्रांतीय चुनावों में काँग्रेस ने सामान्य चुनाव क्षेत्रों में भारी जीत प्राप्त की।
  2. यद्यपि मुस्लिम लीग को अधिकांश आरक्षित मुस्लिम सीटें मिल गई थीं, लेकिन लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार कर दिया था और वह पाकिस्तान की माँग जारी रखे हुए थी।
  3. प्रारम्भ में समाजवादी भी संविधान सभा से परे रहे क्योंकि वे उसे अँग्रेजों की बनाई संस्था मानते थे। वे मानते थे कि इस सभा का वाकई स्वायत्त होना असम्भव है।
  4. संविधान सभा के 82 प्रतिशत सदस्य काँग्रेस पार्टी के ही सदस्य थे।

प्रश्न 20.
भारतीय संविधान की रूपरेखा को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
भारत के संविधान हेतु संविधान सभा का गठन त 1946 ई. के कैबिनेट मिशन योजना के अन्तर्गत हुआ। इस त संविधान सभा में 300 सदस्य थे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को इस न संविधान सभा का अध्यक्ष बनाया गया था। भारतीय संविधान को 9 दिसम्बर, 1946 से 26 नवम्बर, 1949 के मध्य सूत्रबद्ध किया गया। संविधान सभा के कुल 11 सत्र हुए जिनमें 165 दिन बैठकों में गए मूल संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियाँ थीं जिनके बाद में कई संशोधन हो चुके हैं। यह विश्व का सबसे लम्बा संविधान है जो 26 जनवरी, 1950 को अस्तित्व में आया।

प्रश्न 21.
नेहरूजी ने अपने उद्देश्य प्रस्ताव में अमेरिकी व फ्रांसीसी संविधान सभाओं से हमको प्रेरणा लेने की बात कही है। क्यों?
उत्तर:
नेहरूजी ने अपने उद्देश्य प्रस्ताव में अमेरिकी व फ्रांसीसी संविधान सभाओं का उल्लेख करते हुए कहा ” कि जिस प्रकार उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए संविधान के निर्माण का कार्य पूर्ण किया है उसी प्रकार हम भी उन संविधान सभाओं की तरह ही अपना संविधान बनाकर ही दम लेंगे चाहे इसके मार्ग में कितनी ही परेशानियाँ एवं रुकावटें आएँ हम भी उनकी ही तरह एक कालजयी संविधान का निर्माण करेंगे जो हमारी जनता के स्वभाव के अनुकूल होकर उनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करेगा। हमारा संविधान भी उन संविधानों की तरह ही लोकतन्त्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष एवं आर्थिक-सामाजिक न्याय को स्थापना करने वाला होगा।

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प्रश्न 22.
नेहरू ने अमेरिकी संविधान निर्माताओं और फ्रांसीसी संविधान निर्माताओं का उल्लेख उद्देश्य प्रस्ताव में किसलिए किया?
उत्तर:
नेहरू ने अमेरिका संविधान निर्माण की प्रक्रिया के सम्बन्ध में कहा कि अमेरिकी राष्ट्र निर्माताओं ने एक ऐसा संविधान रचा जो डेढ़ सदी से भी ज्यादा समय से कसौटी पर खरा उतर रहा है। उन्होंने संविधान पर आधारित एक महान् राष्ट्र गढ़ा। दूसरे, नेहरू ने उस संविधान सभा का उल्लेख किया जो स्वतंत्रता के इतने सारे संघर्ष लड़ने वाले पेरिस के भव्य एवं खूबसूरत शहर में जुटी थी उस संविधान सभा ने अनेक मुश्किलों का सामना किया।

प्रश्न 23.
” संविधान सभा अंग्रेजों की बनाई हुई है और वह अंग्रेजों की योजना को साकार करने का काम कर रही है।” सोमनाथ लाहिड़ी के इस कथन पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
संविधान सभा के कम्युनिस्ट सदस्य सोमनाथ लाहिड़ी का कहना था कि संविधान सभा अंग्रेजों की बनाई हुई है और वह अंग्रेजों की योजना को साकार करने का काम कर रही है न केवल ब्रिटिश योजना ने भावी संविधान बना दिया है, बल्कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि मामूली से मामूली मतभेद के लिए भी संघीय न्यायालय जाना होगा।

प्रश्न 24.
भारतीय संविधान में विषयों की तीन सूचियों और अनुच्छेद 356 का उल्लेख करें।
अथवा
संविधान के अनुसार केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बँटवारा किस प्रकार किया गया?
अथवा
संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का संक्षिप्त वर्णन करें।
अथवा
राज्य सूची के विषय में आप क्या जानते हैं ? समवर्ती सूची पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
संविधान के मसविदे में समस्त विषयों की तीन सूचियाँ बनाई गई हैं। ये हैं –
(1) केन्द्रीय या संघ सूची
(2) राज्य सूची और
(3) समवर्ती सूची यथा
(1) केन्द्रीय सूची में दिए गए विषय केवल केन्द्र सरकार के अधीन रखे गए हैं। राज्य सूची
(2) अन्तर्गत रखे गये हैं। के विषय केवल राज्य सरकारों के
(3) समवर्ती सूची में दिए गए केन्द्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
अनुच्छेद 356 में गवर्नर की सिफारिश पर केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के समस्त अधिकार अपने हाथ में लेने का अधिकार दिया गया है।

प्रश्न 25.
केन्द्र को अधिक शक्तिशाली बनाने वाले प्रावधानों का उल्लेख कीजिये ।
उत्तर:
(1) अन्य संघों की तुलना में केन्द्रीय सूची में बहुत ज्यादा विषयों को केवल केन्द्रीय नियन्त्रण में रखा गया है।
(2) समवर्ती सूची में भी प्रान्तों की इच्छाओं की उपेक्षा करते हुए बहुत ज्यादा विषय रखे गये हैं तथा राज्य की तुलना में केन्द्र को वरीयता दी गई है।
(3) खनिज पदार्थों तथा प्रमुख उद्योगों पर भी केन्द्र सरकार को ही नियन्त्रण दिया गया है।
(4) अनुच्छेद 356 में गवर्नर की सिफारिश पर केन्द्र सरकार को राज्य सरकार के सारे अधिकार अपने हाथ में लेने का अधिकार दिया गया है।

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प्रश्न 26.
संविधान में राजकोषीय संघवाद की क्या व्यवस्था की गई है?
उत्तर:
(1) कुछ करों (जैसे सीमा शुल्क और कम्पनी कर) से होने वाली सारी आय केन्द्र सरकार के पास रखी गई है।
(2) कुछ अन्य मामलों में (जैसे- आय कर और आबकारी शुल्क) में होने वाली आय राज्य और केन्द्र सरकार के बीच बाँट दी गई है।
(3) कुछ अन्य मामलों (जैसे- राज्य स्तरीय शुल्क) से होने वाली आय पूरी तरह राज्यों को सौंप दी गई है। (4) राज्य सरकारों को अपने स्तर पर भी कुछ अधिभार और कर वसूलने का अधिकार दिया गया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान सभा में पृथक् निर्वाचिका की माँग किसके लिए की गई थी? यह माँग किसने उठाई तथा इसका क्या परिणाम रहा?
उत्तर:
पृथक निर्वाचिका की माँग अल्पसंख्यकों के लिए विभिन्न नेताओं ने समय-समय पर संविधान सभा में अपने तर्क देते हुए उठाई थी, उनकी माँग का विरोध भी किया गया।

(1) बी. पोकर बहादुर की माँग-27 अगस्त, 1947 को पास के थी. पोकर बहादुर ने पृथक् निर्वाचिका बनाए रखने के पक्ष में एक प्रभावशाली भाषण दिया। बहादुर कहा कि अल्पसंख्यक सब जगह होते हैं, हम उन्हें चाहकर भी हटा नहीं सकते। हमें जरूरत एक ऐसे ढाँचे की है जिसके भीतर अल्पसंख्यक भी औरों के साथ सद्भाव से रह सकें और समुदायों के बीच मतभेद कम से कम हों।

(2) एन. जी. रंगा का बयान-रंगा ने कहा था कि तथाकथित पाकिस्तानी प्रान्तों में रहने वाले हिन्दू, सिख यहाँ तक कि मुसलमान भी अल्पसंख्यक नहीं हैं। असली अल्पसंख्यक तो यहाँ की जनता है।

(3) जयपाल सिंह का बयान-जयपाल सिंह आदिवासी नेता थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी कबीले संख्या की दृष्टि से अल्पसंख्यक नहीं हैं लेकिन उन्हें संरक्षण की जरूरत है। वे विधायिका में आदिवासियों के प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षण की व्यवस्था चाहते थे।

(4) डॉ. अम्बेडकर की माँग डॉ. अम्बेडकर ने राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान पृथक् निर्वाचिका की माँग की थी।

(5) नागप्पा का बयान मद्रास के सदस्य जे. नागप्पा ने पृथक निर्वाचिका की माँग उठाई।

(6) के. जे. खाण्डेलकर का बयान-खाण्डेलकर ने कहा था—“हमें हजारों साल तक दबाया गया है। इस हद तक दबाया गया कि हमारे दिमाग, हमारी देह काम नहीं करती और अब हमारा हृदय भी भावशून्य हो चुका है।

” पृथक् निर्वाचिका का विरोध –
(1) पं. गोविन्द वल्लभ पंत के विचार-यह प्रस्ताव न केवल राष्ट्र के लिए बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए भी खतरनाक है। उनका मानना था कि पृथक निर्वाचिका अल्पसंख्यकों के लिए आत्मघाती साबित होगी, जो उन्हें कमजोर बना देगी और शासन में उन्हें प्रभावी हिस्सेदारी नहीं मिल पायेगी।

(2) बेगम एजाज रसूल के विचार बेगम एजज रसूल को लगता था कि पृथक निर्वाचिका आत्मघाती साबित होगी क्योंकि इससे अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों से कट जाएँगे।

(3) महात्मा गाँधी द्वारा विरोध-गाँधीजी ने यह कहते हुए अपना विरोध प्रकट किया था कि पृथक् निर्वाचिका की माँग करने से ये समुदाय शेष समुदायों से हमेशा के लिए कट जाएँगे। संविधान सभा का सुझाव-संविधान सभा ने अंततः यह सुझाव दिया कि अस्पृश्यता का उन्मूलन किया जाए, हिन्दू मन्दिरों के द्वार सभी जातियों के लिए खोल दिए जाएँ और निचली जातियों को विधायिकाओं और सरकारी नौकरियाँ में आरक्षण दिया जाए।

प्रश्न 2.
संविधान निर्माण से पूर्व के वर्ष भारत के लिए बहुत उथल-पुथल बाल थे।” उपर्युक्त कथन के समर्थन में उदाहरण सहित अपना तर्क लिखिए।
उत्तर:
इसमें कोई सन्देह नहीं है कि संविधान निर्माण से पूर्व के वर्ष भारत के लिए बहुत उथल-पुथल वाले थे। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं –
(1) 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतन्त्र तो हो गया, परन्तु इसके साथ ही इसे दो भागों भारत व पाकिस्तान के रूप में विभाजित भी कर दिया गया।

(2) लोगों की याद में 1942 भारत छोड़ो आन्दोलन अभी भी जीवित था जो ब्रिटिश औपनिवेशिक राज्य के विरुद्ध सम्भवतः सबसे व्यापक जनान्दोलन था

(3) विदेशी सहायता से सशस्त्र संघर्ष द्वारा के ता पाने के लिए सुभाष चन्द्र बोस द्वारा किए गए प्रयत्न भी लोगों को याद थे।

(4) सन् 1946 में बम्बई व देश के अन्य शहरों में रॉयल्स इण्डिया नेवी (शाही भारतीय नौसेना) के सिपाहियों का विद्रोह भी लोगों को बार-बार आन्दोलित कर रहा था। लोगों की सहानुभूति इन सिपाहियों के साथ थी।

(5) 1940 के दशक के अन्तिम वर्षों में देश के विभिन्न भागों में किसानों व मजदूरों के आन्दोलन भी हो रहे थे।

(6) हिन्दू मुस्लिम एकता विभिन्न जनान्दोलनों का एक महत्त्वपूर्ण पहलू था। इसके विपरीत कांग्रेस व मुस्लिम लीग दोनों ही मुख्य राजनीतिक दल धार्मिक सद्भावना और सामाजिक तालमेल स्थापित करने में सफल नहीं हो पा रहे थे।

(7) 16 अगस्त, 1946 में मुस्लिम लीग द्वारा प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस मनाने की घोषणा से कलकत्ता में हिंसा भड़क उठी।

(8) देश के भारत व पाकिस्तान के रूप में विभाजन की घोषणा के पश्चात् असंख्य लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने लगे। जिससे शरणार्थियों की समस्या खड़ी हो गई थी।

(9) 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्रता दिवस पर आनन्द और उम्मीद का वातावरण था। लेकिन भारत के मुसलमानों व पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं व सिखों के लिए यह एक निर्मम क्षण था। मुसलमान पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान की ओर तो हिन्दू और सिख पश्चिमी बंगाल तथा पूर्वी पंजाब की ओर बढ़ रहे थे।

(10) नवजात राष्ट्र के समक्ष एक और समस्या देशी रियासतों को लेकर थी। ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के शासन काल के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप का लगभग एक-तिहाई भू-भाग ऐसे नवाबों और रजवाड़ों के नियन्त्रण में था जो ब्रिटिश ताज की अधीनता स्वीकार कर चुके थे

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प्रश्न 3.
संविधान सभा में पृथक् निर्वाचिकाओं की माँग के जवाब में सरदार पटेल, धुलेकर तथा गोविन्द वल्लभ पंत आदि प्रमुख कांग्रेसी सदस्यों ने अनेक दलीलें प्रस्तुत कीं। इन दलीलों के पीछे कौनसी चिन्ता काम कर रही थी? अन्त में क्या सहमति बनी?
उत्तर:
पृथक् निर्वाचिकाओं की मांग के विरोध में दी गई समस्त दलीलों के पीछे एक एकीकृत राज्य के निर्माण की चिन्ता काम कर रही थी। वह इस प्रकार थी –
(1) व्यक्ति को नागरिक बनाना तथा प्रत्येक समूह को राष्ट्र का अंग बनाना-राजनीतिक एकता और राष्ट्र की स्थापना करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को राज्य के नागरिक के सांचे में ढालना था, हर समूह को राष्ट्र भीतर समाहित किया जाना था।

(2) नागरिकों में राज्य के प्रति निष्ठा का होना- संविधान नागरिकों को अधिकार देगा परन्तु नागरिकों को भी राज्य के प्रति अपनी निष्ठा का वचन लेना होगा।

(3) सभी समुदायों के सदस्यों को राज्य के सामान्य सदस्यों के रूप में काम करना-समुदायों को सांस्कृतिक इकाइयों के रूप में मान्यता दी जा सकती थी और उन्हें सांस्कृतिक अधिकारों का आश्वासन दिया जा सकता था मगर राजनीतिक रूप से सभी समुदायों के सदस्यों को राज्य के सामान्य सदस्य के रूप में काम करना था अन्यथा उनकी निष्ठाएँ विभाजित होतीं। पंत ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि, “हमारे भीतर यह आत्मघाती और अपमानजनक आदत बनी हुई है कि हम कभी नागरिक के रूप में नहीं सोचते बल्कि समुदाय के रूप में ही सोच पाते हैं…….। हमें याद रखना चाहिए कि महत्व केवल नागरिक का होता है। सामाजिक पिरामिड का आधार भी और उसकी चोटी भी नागरिक ही होता है।”

(4) एक शक्तिशाली राष्ट्र व शक्तिशाली राज्य की स्थापना-जब सामुदायिक अधिकारों का महत्त्व रेखांकित किया जा रहा था, उस समय भी बहुत सारे राष्ट्रवादियों में यह भय सिर उठाने लगा था कि इससे निष्ठाएँ खण्डित होंगी और एक शक्तिशाली राष्ट्र व शक्तिशाली राज्य की स्थापना नहीं हो पायेगी।

(5) कुछ मुसलमान भी पृथक् निर्वाचिका की मांग के समर्थन में नहीं-सारे मुसलमान भी पृथक् निर्वाचिका की मांग के समर्थन में नहीं थे। उदाहरण के लिए बेगम एजाज रसूल को लगता था कि पृथक निर्वाचिका आत्मघाती साबित होगी क्योंकि इससे अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों से कट जायेंगे।

पृथक् निर्वाचिका की माँग पर निर्णय सन् 1949 तक संविधान सभा के ज्यादातर सदस्य इस बात पर सहमत हो गए थे कि पृथक् निर्वाचिका का प्रस्ताव अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ जाता है। इसकी बजाय मुसलमानों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि राजनीतिक व्यवस्था में उनको एक निर्णायक आवाज मिल सके।

प्रश्न 4.
संविधान सभा के ऐसे दो महत्त्वपूर्ण अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए जिन पर संविधान सभा में काफी हद तक सहमति थी।
उत्तर:
व्यापक सहमति वाले महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण – भारतीय संविधान गहन विवादों और परिचर्चाओं से गुजरते हुए बना उसके कई प्रावधान लेन-देन की प्रक्रिया के जरिए बनाए गए थे उन पर सहमति तब बन पाई जब सदस्यों ने दो विरोधी विचारों के बीच की जमीन तैयार कर ली लेकिन संविधान के कुछ ऐसे महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण भी हैं, जिन पर संविधान सभा में काफी हद तक सहमति थी। यथा –

(1) वयस्क मताधिकार संविधान का एक केन्द्रीय अभिलक्षण वयस्क मताधिकार है। इस पर संविधान सभा में प्रायः आम सहमति थी यह सहमति प्रत्येक वयस्क भारतीय को मताधिकार देने पर थी। इसके पीछे एक खास किस्म का भरोसा था जिसके पूर्व उदाहरण अन्य देश के इतिहास में नहीं थे। दूसरे लोकतंत्रों में पूर्ण वयस्क मताधिकार धीरे-धीरे कई चरणों से गुजरते हुए, लोगों को मिला। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में शुरू-शुरू में मताधिकार केवल सम्पत्ति रखने वाले पुरुषों को ही दिया गया, फिर पढ़े-लिखे पुरुषों को इस विशेष वर्ग में शामिल किया गया। लम्बे व कटु संघर्षो के बाद श्रमिक व किसान वर्ग के पुरुषों को मताधिकार मिल पाया। ऐसा अधिकार पाने के लिए महिलाओं को और भी लम्बा संघर्ष करना पड़ा।

(2) धर्मनिरपेक्षता पर बल – हमारे संविधान का दूसरा महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण था-
धर्मनिरपेक्षता पर बल। संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता के गुण तो नहीं गाए गए थे परन्तु संविधान व समाज को चलाने के लिए भारतीय सन्दर्भों में उसके मुख्य अभिलक्षणों का जिक्र आदर्श रूप में किया गया था। ऐसा मूल अधिकारों की श्रृंखला को रचने के जरिये किया गया, विशेषकर ‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’ (अनुच्छेद 25-28), ‘सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार’ (अनुच्छेद 29-30) एवं ‘समानता का अधिकार’ (अनुच्छेद 14, 16, 17)।

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यथा –
(1) राज्य ने सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार की गारन्टी दी और उन्हें हितैषी संस्थाएँ बनाने का अधिकार भी दिया। और सरकारी स्कूलों व
(2) राज्य ने अपने आपको विभिन्न धार्मिक समुदायों से दूर रखने की कोशिश की कॉलेजों में अनिवार्य धार्मिक शिक्षा पर रोक लगा दी।
(3) सरकार ने रोजगार में धार्मिक भेदभाव को अवैध ठहराया।
(4) राज्य धार्मिक समुदायों से जुड़े सामाजिक सुधार मुं कार्यक्रमों के लिए अवश्य कुछ कानूनी गुंजाइश अर्थात् राज्य ने उसमें दखल देने की गुंजाइश रखी। ऐसा करके ही अस्पृश्यता पर कानूनी रोक लग पायी और इसी कारण इ व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों में परिवर्तन हो पाये।
(5) भारतीय राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता में राज्य व धर्म के बीच पूर्ण विच्छेद नहीं रहा। संविधान सभा ने इन दोनों के बीच एक विवेकपूर्ण फासला बनाने की कोशिश की है।

प्रश्न 5.
संविधान सभा के क्रियाकलापों में किन- किन सदस्यों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण थी? उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर:
संविधान सभा के कुल 300 सदस्यों में से 6 सदस्यों की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण थी। इनके नाम है –

  1. पं. जवाहरलाल नेहरू
  2. सरदार वल्लभ भाई पटेल
  3. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  4. डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर
  5. के.एम. मुंशी
  6. अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर।

(1) पं. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में 13 दिसम्बर, 1946 को एक निर्णायक प्रस्ताव ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था। यह एक ऐतिहासिक प्रस्ताव था जिसमें स्वतन्त्र भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की गयी थी तथा यह फ्रेमवर्क सुझाया गया था जिसके तहत संविधान का कार्य आगे बढ़ना था। पं. नेहरू ने संविधान सभा में झण्डा प्रस्ताव भी पेश किया था। नेहरू ने कहा था कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज केसरिया, सफेद एवं गहरे हरे रंग की तीन बराबर पट्टियों वाला तिरंगा झण्डा होगा जिसके मध्य में गहरे नीले रंग का चक्र होगा।

(2) जवाहरलाल नेहरू के विपरीत वल्लभ भाई पटेल की भूमिका परदे के पीछे की थी उन्होंने अनेक प्रतिवेदनों के प्रारूप लिखे।

(3) भारत के प्रथम राष्ट्रपति तथा संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सभा की चर्चाओं को रचनात्मक दिशा की ओर ले जाते थे। वे इस बात का भी ध्यान रखते थे कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

(4) कांग्रेस के इस त्रिगुट के अतिरिक्त प्रसिद्ध विधिवेत्ता एवं अर्थशास्त्री डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर भी संविधान सभा के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे भीमराव रामजी अम्बेडकर पर संविधान में संविधान के प्रारूप को पारित करवाने की जिम्मेदारी थी।

(5) संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के साथ-साथ दो अन्य प्रसिद्ध वकील कार्य कर रहे थे, इनमें से एक गुजरात के के.एम. मुंशी तो द्वितीय मद्रास के अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर थे।

(6) संविधान सभा में इन छः सदस्यों के अतिरिक्त दो प्रशासनिक अधिकारी भी महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। इनमें से एक बी. एन. राव संविधान सभा अथवा भारत के संवैधानिक सलाहकार थे। संविधान सभा में एस.एन. मुखर्जी की स्थिति भी अत्यधिक महत्त्वपूर्ण थी। वे संविधान सभा में मुख्य योजनाकार की भूमिका निभा रहे थे।

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प्रश्न 6.
संविधान सभा के गठन का विवेचन कीजिये।
अथवा
संविधान सभा के निर्माण और कार्यप्रणाली की म चर्चा कीजिये।
अथवा
संविधान सभा कैसे घटित हुई थी?
उत्तर:
संविधान सभा का गठन संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव सार्वभौमिक 3 मताधिकार के आधार पर नहीं हुआ था। 1945-46 की सर्दियों में भारत के प्रान्तों में चुनाव हुए थे। इसके पश्चात् में प्रान्तीय संसदों ने संविधान सभा के सदस्यों को चुना।

(1) नई संविधान सभा में कांग्रेस का प्रभावशाली या होना नई संविधान सभा में कांग्रेस प्रभावशाली थी। रू प्रान्तीय चुनावों में कांग्रेस ने सामान्य चुनाव क्षेत्रों में भारी क विजय प्राप्त की और मुस्लिम लीग को अधिकांश आरक्षित मुस्लिम सीटें मिल गई। परन्तु मुस्लिम लीग ने संविधान गा सभा का बहिष्कार उचित समझा और एक अन्य संविधान बनाकर उसने पाकिस्तान के निर्माण की माँग जारी रखी। प्रारम्भ में समाजवादी भी संविधान सभा से दूर रहे क्योंकि वे उसे अंग्रेजों के द्वारा बनाई हुई संस्था मानते थे। इन सभी कारणों से संविधान सभा के 82 प्रतिशत सदस्य के कांग्रेस पार्टी के ही सदस्य थे।

(2) कांग्रेस में मतभेद – सभी कांग्रेस सदस्य एकमत ते नहीं थे कई निर्णायक मुद्दों पर उनके भिन्न-भिन्न मत थे। सर कई कांग्रेसी समाजवाद से प्रेरित थे तो कई जमींदारी के समर्थक थे। कई कांग्रेसी समाजवाद से प्रेरित थे तो कई अन्य जमींदारी के समर्थक थे कुछ साम्प्रदायिक दलों के निकट थे, तो कुछ पक्के धर्मनिरपेक्ष थे राष्ट्रीय आन्दोलन के कारण कांग्रेसी बाद-विवाद करना और मतभेदों पर बातचीत कर समझौतों की खोज करना सीख गए थे। संविधान सभा में भी कांग्रेस सदस्यों ने इसी प्रकार का दृष्टिकोण अपनाया।

(3) संविधान सभा में हुई चर्चाओं का जनमत से प्रभावित होना-संविधान सभा में हुई चर्चाएँ जनमत से भी प्रभावित होती थीं। जब संविधान सभा में बहस होती थी, तो विभिन्न पक्षों के तर्क समाचार-पत्रों में भी प्रकाशित होते थे और समस्त प्रस्तावों पर सार्वजनिक रूप से बहस चलती थी। इस प्रकार की आलोचना और जवाबी आलोचना में किसी मुद्दे पर बनने वाली सहमति या असहमति पर गहरा प्रभाव पड़ता था।

(4) सामूहिक सहभागिता-सामूहिक सहभागिता बनाने के लिए जनता के सुझाव भी मांगे जाते थे। कई भाषाई अल्पसंख्यक अपनी मातृभाषा की रक्षा की मांग करते थे। धार्मिक अल्पसंख्यक अपने विशेष हित सुरक्षित करवाना चाहते थे और दलित वर्गों के लोग शोषण के अन्त की माँग करते हुए सरकारी संस्थाओं में आरक्षण चाहते थे।

प्रश्न 7.
संविधान सभा में विभिन्न सदस्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिकाओं की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
संविधान सभा में विभिन्न सदस्यों की भूमिका संविधान सभा में तीन सौ सदस्य थे। इनमें निम्नलिखित 6 सदस्यों की भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण रही –
(1) पं. जवाहरलाल नेहरू-पं. जवाहरलाल नेहरू ने सविधान सभा में 13 दिसम्बर, 1946 को एक निर्णायक प्रस्ताव ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ को प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने स्वतन्त्र भारत के संविधान के मूल आदर्शों की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। उन्होंने यह प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया था कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज केसरिया, सफेद और गहरे रंग की तीन बराबर चौड़ाई वाली पट्टियों का तिरंगा झंडा होगा जिसके बीच में गहरे नीले रंग का चक्र होगा।

(2) सरदार वल्लभ भाई पटेल- सरदार वल्लभ भाई पटेल ने मुख्य रूप से परदे के पीछे कई महत्त्वपूर्ण कार्य किये। उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण रिपोर्टों के प्रारूप लिखने में विशेष सहायता की और कई परस्पर विरोधी विचारों के बीच सहमति उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(3) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। उनकी ये जिम्मेदारियाँ थीं कि संविधान सभा में चर्चा रचनात्मक दिशा ले और सभी सदस्यों को अपनी बात कहने का अवसर मिले।

(4) डॉ. भीमराव अम्बेडकर डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक प्रख्यात विधिवेत्ता तथा अर्थशास्त्री थे। वह संविधान सभा के सबसे महत्त्वपूर्ण सदस्यों में से एक थे। स्वतन्त्रता प्राप्त करने के बाद महात्मा गांधी की सलाह पर डॉ. अम्बेडकर को केन्द्रीय विधिमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया था। इस भूमिका में उन्होंने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके पास सभा में संविधान के प्रारूप को पारित करवाने की जिम्मेदारी थी।

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 15 संविधान का निर्माण : एक नए युग की शुरुआत

(5) के. एम. मुंशी डॉ. अम्बेडकर के साथ दो अन्य वकील भी कार्य कर रहे थे। एक गुजरात के के. एम. मुंशी थे तथा दूसरे मद्रास के अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर। इन- दोनों ने संविधान के प्रारूप पर महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए।

(6) दो प्रशासनिक अधिकारी-उपरोक्त 6 सदस्यों को दो प्रशासनिक अधिकारियों ने महत्त्वपूर्ण सहायता दी। इनमें से एक बी. एन. राव थे। वह भारत सरकार के संवैधानिक सलाहकार थे और उन्होंने अन्य देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन करके कई चर्चा- पत्र तैयार किए थे। दूसरे अधिकारी एस.एन. मुखर्जी थे। इनकी भूमिका मुख्य योजनाकार की थी। मुखर्जी जटिल प्रस्तावों को स्पष्ट वैधिक भाषा में व्यक्त करने की क्षमता रखते थे।

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 14 विभाजन को समझना : राजनीति, स्मृति, अनुभव

Jharkhand Board JAC Class 12 History Important Questions Chapter 14 विभाजन को समझना : राजनीति, स्मृति, अनुभव Important Questions and Answers.

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बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. मुस्लिम लीग ने प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस मनाने की घोषणा की थी –
(क) 16 अगस्त, 1948
(ख) 16 अगस्त, 1946
(ग) 12 अगस्त, 1942
(घ) 15 अगस्त, 1944
उत्तर:
(ख) 16 अगस्त, 1946

2. ‘पाकिस्तान’ नाम के प्रस्ताव को सर्वप्रथम जिसने प्रस्तुत किया था, वह था-
(क) चौधरी रहमत अली
(ख) चौधरी मोहम्मद अली
(ग) चौधरी इनायत अली
(घ) चौधरी लियाकत अली
उत्तर:
(क) चौधरी रहमत अली

3. शुद्धि आन्दोलन चलाने वाली संस्था थी –
(क) ब्रह्म समाज
(ग) हिन्दू महासभा
(ख) आर्य समाज
(घ) कॉंग्रेस पार्टी
उत्तर:
(ख) आर्य समाज

4. भारत विभाजन से लगभग कितने लोगों को उजड़ कर दूसरी जगह जाने को मजबूर होना पड़ा –
(क) लगभग दो करोड़ से ज्यादा
(ख) लगभग डेढ़ करोड़
(ग) चार करोड़ से ज्यादा
(घ) पचास लाख से ज्यादा
उत्तर:
(ख) लगभग डेढ़ करोड़

5. भारत विभाजन के समय जो नस्ली सफाया हुआ, वह कारगुजारी थी –
(क) धार्मिक समुदायों के स्वयंभू प्रतिनिधियों की
(ख) सरकारी निकार्यों की
(ग) अंग्रेजों की
(घ) सेना की
उत्तर:
(क) धार्मिक समुदायों के स्वयंभू प्रतिनिधियों की

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6. “मैं तो सिर्फ अपने अब्बा पर चढ़ा हुआ कर्ज चुका रहा हूँ।” यह किसने कहा था –
(क) अब्दुल रज्जाक ने
(ख) अब्दुल लतीफ ने
(ग) मोहम्मद अली ने
(घ) शौकत अली ने
उत्तर:
(ख) अब्दुल लतीफ ने

7. अब्दुल लतीफ के अब्बा की मदद की थी –
(क) एक हिन्दू ने
(ख) एक सिख ने
(ग) एक हिन्दू माई ने
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) एक हिन्दू माई ने

8. औपनिवेशिक भारत में हिन्दू और मुसलमान दो पृथक् राष्ट्र थे। यह सोच थी-
(क) रहमत अली की
(ख) मोहम्मद अली जिन्ना की
(ग) लियाकत अली की
(घ) मौलाना आजाद की
उत्तर:
(ख) मोहम्मद अली जिन्ना की

9. काँग्रेस और मुस्लिम लीग का लखनऊ समझौता कब हुआ था?
(क) 1915 में
(ख) 1916 में
(ग) 1919 में
(घ) 1917 में
उत्तर:
(ख) 1916 में

10. होलोकॉस्ट क्या है?
(क) बँटवारा
(ख) संघर्ष
(ग) मित्रता
(घ) संगठन
उत्तर:
(क) बँटवारा

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11. मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई थी?
(क) 1904 में
(ख) 1906 में
(ग) 1912 में.
(घ) 1984 में
उत्तर:
(ख) 1906 में

12. 1937 में के प्रान्तीय चुनावों में कांग्रेस को निम्न में से कितने प्रान्तों में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था ?
(क) 4
(ग) 6
(ख) 5
(घ) 7
उत्तर:
(ख) 5

13. पाकिस्तान नाम सर्वप्रथम दिया था
(क) मोहम्मद अली जिन्ना ने
(ख) मोहम्मद इकबाल ने
(ग) खान अब्दुल गफ्फार खान ने
(घ) चौधरी रहमत अली ने
उत्तर:
(घ) चौधरी रहमत अली ने

14. पंजाब में हिन्दू मुस्लिम एवं सिक्ख भू-स्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली राजनैतिक पार्टी थी –
(क) हिन्दू महासभा
(ग) मुस्लिम लीग
(ख) कांग्रेस
(घ) यूनियनिस्ट पार्टी
उत्तर:
(घ) यूनियनिस्ट पार्टी

15. सीमान्त गांधी कहा जाता था –
(क) जिन्ना को
(ख) महात्मा गाँधी को
(ग) खान अब्दुल गफ्फार खान को
(घ) सुशीला नायर को
उत्तर:
(ग) खान अब्दुल गफ्फार खान को

16. गाँधीजी के दिल्ली आगमन को “बड़ी लम्बी और कठोर गर्मी के बाद बरसात की फुहारों के आने” जैसा महसूस किया था –
(क) जवाहर लाल नेहरू
(ख) शाहिद अहमद देहलवी ने
(ग) जिन्ना से
(घ) खान अब्दुल गफ्फार खान ने
उत्तर:
(ख) शाहिद अहमद देहलवी ने

17. द्वि-राष्ट्र सिद्धान्त किसने दिया था?
(क) रहमत अली
(ग) महात्मा गाँधी
(ख) मोहम्मद अली जिन्ना
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ख) मोहम्मद अली जिन्ना

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18. “लव इज स्ट्रांगर देन हेट, ए रिमेम्बरेंस ऑफ 1947” नामक संस्मरण के लेखक हैं –
(क) डॉ. सुखदेव सिंह
(ख) डॉ. रवीन्द्र
(घ) महात्मा गाँधी
(ग) जिन्ना
उत्तर:
(क) डॉ. सुखदेव सिंह

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. विभाजन की वजह से लाखों लोग …………… खनकर रह गए।
2. पत्रकार आर. एम. मर्फी के अनुसार हिन्दू काले, कायर ……………. तथा शाकाहारी होते हैं।
3. …………….. में नात्सी जर्मनी में लोगों को मारने के लिए सरकारी मुहिम चली थी।
4. ……………… समझौता दिसम्बर 1916 में हुआ था।
5. ……………….. लखनक समझौता ……………… और ……………… के बीच हुआ था।
6. कुछ विद्वानों के अनुसार देश का बँटवारा एक ऐसी साम्प्रदायिक राजनीति का आखिरी बिन्दु था जो ……………… वीं शताब्दी के प्रारस्भिक दशकों में शुरू हुई।
7. ………………. का तात्पर्य है वह राजनीति जो धार्मिकसमुदायों के बीच विरोध और झगड़े पैदा करती है।
8. बहु-धार्मिक देश में ‘धार्मिक राष्ट्रवाद’ शब्दों का अर्थ भी ………………. के करीब-करीब हो सकता है।
9. मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में ………………. में हुआ था।
उत्तर:
1. शरणार्थी
2. बहु-ईश्वरवादी
3. 1947- 48
4. लखनऊ
5. कांग्रेस, मुस्लिम लीग
6. 20
7. साम्प्रदायिकता
8 साम्प्रदायिकता
9. ढाका
10. 1915
11. 1937
12. यूनियनिस्ट
13. 1942
14. प्रत्यक्ष कार्यवाही।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सीमान्त गाँधी किसे कहा जाता है ?
उत्तर:
खान अब्दुल गफ्फार खान।

प्रश्न 2.
सर्वप्रथम उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में मुस्लिम राज्य की माँग किसने की थी?
उत्तर:
मुहम्मद इकबाल ने।

प्रश्न 3.
1971 में बंगाली मुसलमानों द्वारा पाकिस्तान से अलग होने का फैसला लेकर जिला के किस सिद्धान्त को नकार दिया था?
उत्तर:
द्विराष्ट्र सिद्धान्त को।

प्रश्न 4.
नोआखली वर्तमान में किस देश में स्थित है?
उत्तर:
बांग्लादेश में।

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प्रश्न 5.
उन दो नेताओं के नाम लिखिये जो अन्त तक भारत के विभाजन का विरोध करते रहे।
उत्तर:
(1) महात्मा गाँधी
(2) खान अब्दुल गफ्फार खान।

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रतापूर्व का ‘संयुक्त प्रान्त’ वर्तमान में कौन-से राज्य के नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 7.
जर्मन होलोकास्ट और भारत के विभाजन में क्या अन्तर था?
उत्तर:
जर्मनी में भीषण विनाशलीला हेतु नाजी सरकार उत्तरदायी थी, भारत के विभाजन के लिए धार्मिक नेता उत्तरदायी थे।

प्रश्न 8.
आर्य समाज का मुख्य नारा क्या था?
उत्तर:
शुद्धि आन्दोलन।

प्रश्न 9.
“मैं तो सिर्फ अपने अब्बा पर चढ़ा हुआ कर्ज चुका रहा हूँ।” यह किसने कहा था और किससे कहा था?
उत्तर:
(1) अब्दुल लतीफ ने
(2) शोधकर्ता से।

प्रश्न 10.
1947 के बँटवारे को लोग किन नामों से पुकारते हैं?
उत्तर:
‘मार्शल लॉ’, ‘मारामारी’, ‘रौला’ एवं ‘हुल्लड़’।

प्रश्न 11.
जर्मन होलोकास्ट’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नाजी शासन के दौरान जर्मनी में गैर-जर्मन लोगों का संहार।

प्रश्न 12.
किस अधिनियम में सर्वप्रथम मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था की गई ?
उत्तर:
1909 के मिण्टये मार्ले सुधारों में।

प्रश्न 13.
कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता कब हुआ?
उत्तर:
दिसम्बर, 1916 में।

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प्रश्न 14.
लखनऊ समझौता किस-किसके बीच हुआ?
उत्तर:
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच

प्रश्न 15.
हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच किन बातों से साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ?
उत्तर:

  • मस्जिद के सामने संगीत
  • गोरक्षा आन्दोलन
  • शुद्धि आन्दोलन।

प्रश्न 16.
हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच मुसलमानों की किन गतिविधियों से दोनों सम्प्रदायों में तनाव उत्पन्न हुआ?
उत्तर:
(1) तबलीग (प्रचार) और
(2) तंजीम (संगठन) के विस्तार से

प्रश्न 17.
मुस्लिम लीग की स्थापना कब हुई ?
उत्तर:
1906 ई. में।

प्रश्न 18.
मुस्लिम लीग की स्थापना कहाँ हुई?
उत्तर:
ढाका में।

प्रश्न 19.
हिन्दू महासभा की स्थापना कब हुई ?
उत्तर:
1915

प्रश्न 20.
मुस्लिम लीग ने ‘पाकिस्तान’ का प्रस्ताव कब पास किया था?
उत्तर:
23 मार्च, 1940 को

प्रश्न 21.
‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा’ इस गीत की रचना किसने की थी?
उत्तर:
मुहम्मद इकबाल ने।

प्रश्न 22.
सर्वप्रथम ‘पाकिस्तान’ का उल्लेख किसने किया था?
उत्तर:
केम्ब्रिज के एक मुस्लिम छात्र चौधरी रहमत अली ने

प्रश्न 23.
1930 के मुस्लिम लीग के अधिवेशन में किसने ‘उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य’ की स्थापना पर जोर दिया था?
उत्तर:
मुहम्मद इकबाल ने।

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प्रश्न 24.
ब्रिटिश सरकार ने केबिनेट मिशन दिल्ली कब भेजा ? इसमें कितने सदस्य थे?
उत्तर:
(1) मार्च 1946 में
(2) तीन सदस्य।

प्रश्न 25.
सीमान्त गाँधी’ या ‘फ्रंटियर गाँधी’ किन्हें कहा जाता था?
उत्तर:
खान अब्दुल गफ्फार खान

‘प्रश्न 26.
मुस्लिम लीग द्वारा ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ कब मनाने की घोषणा की गई थी?
उत्तर:
16 अगस्त, 1946 को

प्रश्न 27.
गाँधीजी द्वारा दिल्ली में दंगाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने पर किसने कहा था कि ” अब दिल्ली बच जायेगी।”
उत्तर:
शाहिद अहमद देहलवी ने

प्रश्न 28.
‘पंजाबी सेंचुरी’ के रचयिता कौन थे ?
उत्तर:
प्रकाश टण्डन।

प्रश्न 29.
‘द अदर साइड ऑफ वाइलेंस’ की रचना किसने की थी?
उत्तर:
उर्वशी बुटालिया ने।

प्रश्न 30.
‘मुहब्बत नफरत से ज्यादा ताकतवर होती है 1947 की यादें’ के रचयिता कौन थे?
उत्तर:
डॉ. खुशदेवसिंह।

प्रश्न 31.
भारत के बँटवारे के दौरान के महाध्वंस और यूरोप के नात्सी महाध्वंस में प्रमुख अन्तर क्या है?
उत्तर:
भारत के बँटवारे का महाध्वंस धार्मिक समुदायों के स्वयंभू प्रतिनिधियों की कारगुजारी था जबकि यूरोपीय महाध्वंस सरकार की कारगुजारी था।

प्रश्न 32.
विभाजन की स्मृतियों, घृणाओं और छवियों की आज क्या भूमिका है?
उत्तर:
विभाजन की स्मृतियाँ छवियाँ आज भी सरहद के दोनों तरफ के लोगों के इतिहास व सम्बन्धों को तय करती हैं।

प्रश्न 33.
किसी धार्मिक जुलूस के द्वारा नमाज के समय मस्जिद के बाहर संगीत बजाए जाने से हिन्दू- मुस्लिम हिंसा क्यों हो सकती थी?
उत्तर:
नमाज के समय मस्जिद के सामने संगीत बजाने को रूढ़िवादी मुसलमान अपनी नमाज या इबादत में खलल मानते हैं।

प्रश्न 34.
साम्प्रदायिकता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सांप्रदायिकता धार्मिक अस्मिता का विशेष तरह से राजनीतिकरण है जो धार्मिक समुदायों में झगड़े पैदा करवाने की कोशिश करती है।

प्रश्न 35.
1937 के चुनावों के बाद जिन्ना की प्रमुख जिद क्या थी?
उत्तर:
जिला की जिद थी कि मुस्लिम लीग को ही मुसलमानों का एकमात्र प्रवक्ता माना जाये।

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प्रश्न 36.
1937 के चुनावों के बाद संयुक्त प्रान्त में काँग्रेस पार्टी ने गठबंधन सरकार बनाने के बारे में मुस्लिम लीग के प्रस्ताव को खारिज क्यों कर दिया था?
उत्तर:
संयुक्त प्रान्त में कॉंग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त था तथा जमींदारी प्रथा के सम्बन्ध में दोनों के विचारों में अन्तर था।

प्रश्न 37.
मुस्लिम लीग ने उपमहाद्वीप में मुस्लिम- बहुल इलाकों के लिए कुछ स्वायत्तता की मांग का प्रस्ताव कब पेश किया?
उत्तर:
23 मार्च, 1940 को

प्रश्न 38.
1945 में अँग्रेजों के एक केन्द्रीय कार्यकारिणी सभा बनाने के प्रस्ताव पर वार्ता जिन्ना की किस जिद के कारण टूट गई?
उत्तर:
जिन्ना इस बात पर अड़े रहे कि कार्यकारिणी सभा के मुस्लिम सदस्यों का चुनाव करने का अधिकार मुस्लिम लीग का होगा।

प्रश्न 39.
किस मिशन के प्रस्ताव को लीग और काँग्रेस द्वारा स्वीकार नहीं करने पर विभाजन कमोबेश अनिवार्य हो गया था?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने पर विभाजन कमोबेश अनिवार्य हो गया था।

प्रश्न 40.
कैबिनेट मिशन योजना की असफलता के बाद मुस्लिम लीग ने क्या कार्यवाही की ?
उत्तर:
लीग ने पाकिस्तान की अपनी माँग को मनवाने हेतु 16 अगस्त, 1946 को ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाने का फैसला किया।

प्रश्न 41.
सन् 1947 में भारत विभाजन के दो कारण लिखिये।
उत्तर:
(1) अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’
(2) कैबिनेट मिशन की विफलता।

प्रश्न 42.
द्विराष्ट्र सिद्धान्त का क्या अर्थ है?
उत्तर:
द्विराष्ट्र सिद्धान्त का अर्थ है कि हिन्दू और मुसलमानों के दो अलग-अलग राष्ट्र (देश) हैं वे एक साथ नहीं रह सकते।

प्रश्न 43.
मुस्लिम लीग ने क्रिप्स प्रस्ताव को क्यों अस्वीकार किया?
उत्तर:
मुस्लिम लीग के अनुसार इस प्रस्ताव में उसकी प्रमुख माँग पाकिस्तान के निर्माण का कहीं भी जिक्र नहीं था।

प्रश्न 44.
अब्दुल लतीफ खाँ शोधार्थी की मदद क्यों करते थे?
उत्तर:
एक हिन्दू बूढ़ी माई ने अब्दुल लतीफ खाँ के वालिद की दंगाइयों से जान बचाई थी।

प्रश्न 45.
हिन्दू महासभा के बारे में आप क्या जानते हैं? लिखिए।
उत्तर:
हिन्दू महासभा की स्थापना 1915 में हिन्दू समाज में एक ता पैदा करने के उद्देश्य से की गई।

प्रश्न 46.
यूनियनिस्ट पार्टी क्या थी?
उत्तर:
यह पंजाब में हिन्दू-मुस्लिम और सिख भू- स्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक राजनीतिक पार्टी थी।

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प्रश्न 47.
मुस्लिम लीग के 1930 में अधिवेशन के अध्यक्षीय भाषण में मोहम्मद इकबाल ने क्या माँग की थी?
उत्तर:
पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को एकीकृत, शिथिल भारतीय संघ के अन्दर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना करना।

प्रश्न 48.
1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन का अंग्रेजों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर:
अंग्रेजों को संभावित सत्ता हस्तान्तरण के बारे में भारतीय पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा।

प्रश्न 49.
अंग्रेजी शिक्षा भारतीयों के लिए किस प्रकार लाभदायक सिद्ध हुई?
उत्तर:
(1) भारतीय अंग्रेजी साहित्य, विज्ञान, गणित तथा तकनीकी विषयों के ज्ञान से परिचित हुए। (2) इसने राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया।

प्रश्न 50.
मार्च, 1947 में काँग्रेस हाईकमान ने किस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी थी?
उत्तर:
पंजाब को मुस्लिम बहुल और हिन्दू/ सिख बहुल दो हिस्सों में बाँटने के प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी देना।

प्रश्न 51.
भारत विभाजन के समय साम्प्रदायिक दंगों के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग होता है?
उत्तर:
मॉर्शल लॉ, मारामारी, रौला या हुल्लड़ आदि।

प्रश्न 52.
दिल्ली में गाँधीजी के अनशन में आश्चर्यजनक बात क्या थी?
उत्तर:
दिल्ली अनशन में आश्चर्यजनक बात यह थी कि पाकिस्तान से आए शरणार्थी चाहे वे हिन्दू हों या सिख, अनशन में साथ बैठते थे।

प्रश्न 53.
समकालीन प्रेक्षकों और विद्वानों ने 1947 के दंगों में हुई विनाशलीला को देखते हुए इसे महाध्वंस (होलोकास्ट) क्यों कहा है?
उत्तर:
वे इस सामूहिक जनसंहार की भयानकता को उजागर करना चाहते हैं।

प्रश्न 54.
थुआ गाँव का हादसा क्या था?
उत्तर:
थुआ गाँव की 90 स्वियों ने शत्रुओं के हाथों में पड़ने की बजाय कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी थी।

प्रश्न 55.
डॉ. खुशदेवसिंह क्यों प्रसिद्ध थे?
उत्तर:
डॉ. खुशदेवसिंह ने धर्मपुर (हिमाचल प्रदेश) में रहते हुए हिन्दुओं, सिक्खों तथा मुसलमानों को भोजन और आश्रय प्रदान किया।

प्रश्न 56.
आर्य समाज का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर:
आर्य समाज वैदिक ज्ञान का पुनरुत्थान कर उसको विज्ञान की आधुनिक शिक्षा से जोड़ना चाहता था।

प्रश्न 57.
अविभाजित भारत में दूसरी बार प्रान्तीय चुनाव कब हुए?
उत्तर:
1946 ई. में।

प्रश्न 58.
गुरुद्वारा शीशगंज में गाँधीजी ने किस बात को शर्मनाक बताया?
उत्तर:
गाँधीजी ने इस बात को शर्मनाक बताया कि दिल्ली का दिल कहलाने वाले चाँदनी चौक में उन्हें एक भी मुसलमान दिखाई नहीं दिया।

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प्रश्न 59.
किस मिशन के प्रस्ताव को कांग्रेस व मुस्लिम लीग द्वारा स्वीकार न किये जाने के कारण विभाजन अनिवार्य- सा हो गया था ?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन प्रस्ताव।

प्रश्न 60.
उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य की स्थापना की माँग किसने की थी और कब की थी?
उत्तर:
1930 में मोहम्मद इकबाल ने।

प्रश्न 61.
केबिनेट मिशन की दो सिफारिशों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) एक शिथिल त्रिस्तरीय महासंघ का निर्माण करना।
(2) संविधान सभा का चुनाव करना।

प्रश्न 62.
साम्प्रदायिक दंगों से पीड़ित लोगों को सान्त्वना देने के लिए गाँधीजी ने किन स्थानों की यात्रा की?
उत्तर:
गांधीजी ने नोआखली (वर्तमान बांग्लादेश), बिहार, कोलकाता तथा दिल्ली की यात्राएं कीं।

प्रश्न 63.
“हमारे लिए इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है कि चाँदनी चौक में एक भी मुसलमान नहीं है।” यह किसका कथन था?
उत्तर:
यह कथन गाँधीजी का था।

प्रश्न 64.
दिल्ली में गाँधीजी के अनशन का असर “आसमान की बिजली जैसा रहा”, यह कथन किसका था?
उत्तर:
यह कथन मौलाना आजाद का था।

प्रश्न 65.
‘प्रेम घृणा से अधिक शक्तिशाली होता है : 1947 की यादें’ नामक पुस्तक में किसके संस्मरण संकलित है?
उत्तर:
डॉ. खुशदेवसिंह के।

प्रश्न 66.
कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन की सिफारिशों को क्यों स्वीकार नहीं किया?
उत्तर:
कांग्रेस की माँग थी कि प्रान्तों को अपनी इच्छा का समूह चुनने का अधिकार मिलना चाहिए।

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प्रश्न 67.
मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन की सिफारिशों को क्यों नहीं माना?
उत्तर:
मुस्लिम लीग की माँग थी कि प्रान्तों की समूहबद्धता अनिवार्य होनी चाहिए।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1947 में विभाजन के दौरान हुई भीषण विनाशलीला को ‘महाध्वंस’ (होलोकॉस्ट) क्यों कहा कि जाता है?
उत्तर:
कुछ प्रेक्षकों ने विभाजन के दौरान हुई हत्याओं, बलात्कार, आगजनी तथा लूटपाट को ‘महाध्वंस’ लम (होलोकास्ट) की संज्ञा दी है। वे इस शब्द के द्वारा – सामूहिक जनसंहार की भयानकता को उजागर करना चाहते हैं। यह हादसा इतना भीषण था कि ‘विभाजन’ या ‘बँटवारे’ से उसके समस्त पहलू सामने नहीं आते। जहाँ नाजी जर्मनी में महाध्वंस सरकार के द्वारा किया गया, वहाँ भारत में यह महाध्वंस धार्मिक समुदायों के स्वयंभू प्रतिनिधियों की कारगुजारी थी।

प्रश्न 2.
हिन्दू महासभा के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
हिन्दू महासभा की स्थापना 1915 में हुई। यह एक हिन्दू पार्टी थी जो कमोबेश उत्तर भारत तक सीमित रही यह पार्टी हिन्दुओं के बीच जाति एवं सम्प्रदाय के फर्कों को खत्म कर पैदा करने की कोशिश करती थी अस्मिता को मुस्लिम अस्मिता के करने का प्रयास करती थी। हिन्दू समाज में एकता हिन्दू महासभा, हिन्दू विरोध में परिभाषित

प्रश्न 3.
कैबिनेट मिशन के प्रमुख सुझाव क्या थे?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन के प्रमुख सुझाव निम्नलिखित –
(1) इस कैबिनेट मिशन ने तीन महीने तक भारत का दौरा किया और एक ढीले-ढाले त्रिस्तरीय महासंघ का सुझाव दिया। इसमें भारत एकीकृत ही रहने वाला था जिसकी केन्द्रीय सरकार काफी कमजोर होती और उसके पास केवल विदेश, रक्षा और संचार का जिम्मा होता।

(2) संविधान सभा का चुनाव करते हुए मौजूदा प्रान्तीय सभाओं को तीन हिस्सों में समूहबद्ध किया जाना था हिन्दू बहुल प्रान्तों को समूह ‘क’ पश्चिमोत्तर मुस्लिम बहुल प्रान्तों को समूह ‘ख’ और पूर्वोत्तर (असम सहित ) के मुस्लिम बहुल प्रान्तों को समूह ‘ग’ में रखा गया था।

(3) प्रान्तों के इन खण्डों या समूहों को मिला कर क्षेत्रीय इकाइयों का गठन किया जाना था माध्यमिक स्तर की कार्यकारी और विधायी शक्तियाँ उनके पास ही रहने वाली थी।

प्रश्न 4.
साम्प्रदायिकता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साम्प्रदायिकता उस राजनीति को कहा जाता है, जो धार्मिक समुदायों के बीच विरोध और झगड़े पैदा करती है। ऐसी राजनीति धार्मिक पहचान को बुनियादी और अटल मानती है। साम्प्रदायिकता किसी चिह्नित ‘गैर’ के विरुद्ध घृणा की राजनीति को पोषित करती है। मुस्लिम साम्प्रदायिकता हिन्दुओं को ‘गैर’ बताकर उनका विरोध करती है तथा हिन्दू साम्प्रदायिकता मुसलमानों को गैर बताकर उनका विरोध करती है। साम्प्रदायिकता धार्मिक अस्मिता का विशेष प्रकार से राजनीतिकरण है।

प्रश्न 5.
बँटवारे में औरतों की बरामदगी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
घंटवारे के दौरान स्त्रियों के साथ बलात्कार हुए, उनका अपहरण किया गया, उन्हें बार-बार खरीदा- बेचा गया तथा अनजान परिस्थितियों में अजनबियों के साथ एक नया जीवन बसर करने के लिए विवश किया गया। बहुत सी स्त्रियों को जबरदस्ती घर बिठा ली गई तथा उन्हें उनके नये परिवारों से छीनकर पुनः पुराने परिवारों या स्थानों पर भेज दिया गया। इस अभियान में लगभग 30,000 स्त्रियों को बरामद किया गया, इनमें से 22,000 मुस्लिम स्त्रियों को भारत से तथा 8,000 हिन्दू स्त्रियों को पाकिस्तान से निकाला गया।

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प्रश्न 6.
डॉ. खुशदेवसिंह के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
डॉ. खुशदेवसिंह एक सिक्ख डॉक्टर थे तथा तपेदिक के विशेषज्ञ थे वे विभाजन के दौरान धर्मपुर (हिमाचल प्रदेश) में नियुक्त थे। उन्होंने दिन-रात लगकर असंख्य प्रवासी मुसलमानों सिक्खों हिन्दुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन, आश्रय और सुरक्षा प्रदान की। उन पर लोगों का ऐसा ही विश्वास था जैसा दिल्ली और कई जगह के मुसलमानों को गाँधीजी पर था।

प्रश्न 7.
” बँटवारे के समय हुई हिंसा से पीड़ित लोग तिनकों में अपनी जिन्दगी दोबारा खड़ी करने के लिए मजबूर हो गये।” इस कथन के सन्दर्भ में एक मार्मिक चित्रण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त कथन के सन्दर्भ की मार्मिक चित्रण को हम निम्न उदाहरणों द्वारा समझ सकते हैं-

  • भारत विभाजन में कई लाख लोग मारे गये और न जाने कितनी महिलाओं का बलात्कार एवं अपहरण हुआ।
  • करोड़ों लोग उजड़ गये। कुछ रातों-रात अजनबी जमीन पर शरणार्थी बनकर रह गए।
  • लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को भारत और पाकिस्तान के मध्य रातों-रात खड़ी कर दी गई सीमा के इस या उस पार जाना पड़ा। जैसे ही उन्होंने इस ‘छाया सीमा’ से ठोकर खाई, वे बेघर बार हो गये।
  • पलक झपकते ही उनकी धन सम्पत्ति हाथ से जाती रही।
  • उनके मित्र तथा रिश्तेदार बिछड़ गए। वे अपनी मकानों, खेतों तथा कारोबार से वंचित हो गए।

प्रश्न 8.
1920 व 1930 ई. के दशकों में कौन- कौनसे मुद्दे हिन्दू व मुसलमानों के मध्य तनाव का कारण बने?
अथवा
20 वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में साम्प्रदायिक अस्मिता के पक्की होने के अन्य कारण क्या थे?
उत्तर:
20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में साम्प्रदायिक अस्मिताएँ कई अन्य कारणों से भी ज्यादा पक्की हुई. 1920 और 1930 के दशकों में कई घटनाओं की वजह से तनाव उभरे मुसलमानों को ‘मस्जिद के सामने संगीत’, गो-रक्षा आन्दोलन, और आर्य समाज की शुद्धि की कोशिशें (यानी कि नव-मुसलमानों को फिर से हिन्दू बनाना) जैसे मुद्दों पर गुस्सा आया। दूसरी ओर हिन्दू 1923 के बाद तबलीग (प्रचार) और तंजीम के विस्तार से उत्तेजित हुए। जैसे-जैसे मध्यमवर्गीय प्रचारक और साम्प्रदायिक कार्यकर्ता अपने समुदायों में लोगों को दूसरे समुदायों के खिलाफ लामबंद करते हुए, ज्यादा एकजुटता बनाने लगे, देश के विभिन्न भागों में दंगे फैलते हुए।

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प्रश्न 9.
संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में काँग्रेस ने मुस्लिम लीग के गठबंधन प्रस्ताव को क्यों खारिज कर दिया?
उत्तर:
प्रथमतः, संयुक्त प्रांत में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। लीग वहाँ गठबंधन सरकार बनाना चाहती थी जिसे काँग्रेस ने स्वीकार नहीं किया, क्योंकि काँग्रेस को बहुमत के लिए दूसरे दल के साथ गठबंधन की आवश्यकता नहीं थी। दूसरे, इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि काँग्रेस पार्टी जमींदारी प्रथा को खत्म करना चाहती थी और मुस्लिम लीग जमींदारी प्रथा का समर्थन करती हुई प्रतीत होती थी। तीसरे, मुस्लिम लीग मुसलमानों की एकमात्र प्रवक्ता होने पर बल दे रही थी।

प्रश्न 10.
पाकिस्तान का नाम का प्रस्ताव सर्वप्रथम किसने रखा था? लिखिए।
उत्तर”
पाकिस्तान अथवा पाकस्तान (पंजाब, अफगानिस्तान, कश्मीर, सिन्ध और बिलोचिस्तान) नाम सबसे पहले कैम्ब्रिज में पढ़ने वाले पंजाबी मुसलमान छात्र चौधरी रहमत अली ने 1933 और 1935 में लिखित अपने दो पचों में गढ़ा। रहमत अली इस नई इकाई के लिए अलग राष्ट्रीय हैसियत चाहता था। 1930 के दशक में किसी ने भी उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। यहाँ तक कि मुस्लिम लीग तथा अन्य मुस्लिम नेताओं ने भी उसके इस विचार को खारिज कर दिया था।

प्रश्न 11.
पाकिस्तान का प्रस्ताव कब रखा गया? क्या सभी मुस्लिम नेता पाकिस्तान निर्माण या विभाजन के पक्ष में थे?
उत्तर:
23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए कुछ स्वायत्तता की माँग का प्रस्ताव पेश किया। इस अस्पष्ट से प्रस्ताव में कहीं भी विभाजन या पाकिस्तान का जिक्र नहीं था बल्कि इस प्रस्ताव को लिखने वाले पंजाब के प्रधानमंत्री सिकन्दर हयात खान ने 1 मार्च, 1941 को पंजाब असेम्बली में अपने भाषण में कहा था कि “वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध करते हैं जिसमें यहाँ मुस्लिम राज और बाकी जंगह हिन्दू राज होगा।”

प्रश्न 12.
क्या ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ गीत के लेखक मो. इकबाल अलग पाकिस्तान निर्माण के पक्ष में थे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1930 में मुस्लिम लीग के अध्यक्षीय भाषण में मो. इकबाल ने ‘उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य’ की आवश्यकता पर जोर दिया था। अपने भाषण में इकबाल एक नए देश के उदय पर नहीं बल्कि पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को एकीकृत शिथिल भारतीय संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना पर जोर दे रहे थे। इससे स्पष्ट होता है कि मो. इकबाल विभाजन के पक्ष में नहीं थे।

प्रश्न 13.
क्या मुस्लिम नेताओं और स्वयं जिन्ना ने पाकिस्तान की माँग को गंभीरता से उठाया था? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर:
प्रारम्भ में मुस्लिम नेताओं तथा स्वयं मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की माँग को गंभीरता से नहीं उठाया था क्योंकि जिना इस माँग को एक सौदेबाजी के पैंतरे के रूप में प्रयोग कर रहे थे। उनका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा काँग्रेस को मिलने वाली रिवायतों पर रोक लगाने तथा मुसलमानों के लिए और रियायतें हासिल करना था। द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण अंग्रेजों को स्वतन्त्रता के बारे में औपचारिक वार्ताएँ कुछ समय के लिए टालनी पड़ीं।

प्रश्न 14.
1945 में दोबारा शुरू हुई वार्ताएँ क्यों टूट गई?
उत्तर:
(1) अँग्रेज इस बात पर सहमत हुए कि एक केन्द्रीय कार्यकारिणी सभा बनाई जाएगी, जिसके सभी सदस्य भारतीय होंगे सिवाय वायसराव और सशस्त्र सेनाओं के सेनापति के।
(2) लेकिन यह वार्ता टूट गई। जिना इस बात पर अड़े हुए थे कि कार्यकारिणी सभा के मुस्लिम सदस्यों का चुनाव

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प्रश्न 8.
1920 व 1930 ई. के दशकों में कौन- कौनसे मुद्दे हिन्दू व मुसलमानों के मध्य तनाव का कारण बने?
अथवा
20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में साम्प्रदायिक अस्मिता के पक्की होने के अन्य कारण क्या थे?
उत्तर:
20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में साम्प्रदायिक अस्मिताएँ कई अन्य कारणों से भी ज्यादा पक्की हुई. 1920 और 1930 के दशकों में कई घटनाओं की वजह से तनाव उभरे मुसलमानों को ‘मस्जिद के सामने संगीत’, गो-रक्षा आन्दोलन, और आर्य समाज की शुद्धि की कोशिशें (यानी कि नव-मुसलमानों को फिर से हिन्दू बनाना) जैसे मुद्दों पर गुस्सा आया। दूसरी ओर हिन्दू 1923 के बाद तबलीग (प्रचार) और तंजीम के विस्तार से उत्तेजित हुए। जैसे-जैसे मध्यमवर्गीय प्रचारक और साम्प्रदायिक कार्यकर्ता अपने समुदायों में लोगों को दूसरे समुदायों के खिलाफ लामबंद करते हुए ज्यादा एकजुटता बनाने लगे, देश के विभिन्न भागों में दंगे फैलते हुए।

प्रश्न 9.
संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में काँग्रेस ने मुस्लिम लीग के गठबंधन प्रस्ताव को क्यों खारिज कर दिया ?
उत्त:
प्रथमत:, संयुक्त प्रांत में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। लीग वहाँ गठबंधन सरकार बनाना चाहती थी जिसे काँग्रेस ने स्वीकार नहीं किया, क्योंकि काँग्रेस को बहुमत के लिए दूसरे दल के साथ गठबंधन की आवश्यकता नहीं थी। दूसरे, इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि काँग्रेस पार्टी जमींदारी प्रथा को खत्म करना चाहती थी और मुस्लिम लीग जमींदारी प्रथा का समर्थन करती हुई प्रतीत होती थी। तीसरे, मुस्लिम लीग मुसलमानों की एकमात्र प्रवक्ता होने पर बल दे रही थी।

प्रश्न 10.
पाकिस्तान का नाम का प्रस्ताव सर्वप्रथम किसने रखा था? लिखिए।
उत्तर:
पाकिस्तान अथवा पाकस्तान (पंजाब, अफगानिस्तान, कश्मीर, सिन्ध और बिलोचिस्तान) नाम सबसे पहले कैम्ब्रिज में पढ़ने वाले पंजाबी मुसलमान छात्र चौधरी रहमत अली ने 1933 और 1935 में लिखित अपने दो पचों में गढ़ा। रहमत अली इस नई इकाई के लिए अलग राष्ट्रीय हैसियत चाहता था। 1930 के दशक में किसी ने भी उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। यहाँ तक कि मुस्लिम लीग तथा अन्य मुस्लिम नेताओं ने भी उसके इस विचार को खारिज कर दिया था।

प्रश्न 11.
पाकिस्तान का प्रस्ताव कब रखा गया? क्या सभी मुस्लिम नेता पाकिस्तान निर्माण या विभाजन के पक्ष में थे?
उत्तर:
23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए कुछ स्वायत्तता की माँग का प्रस्ताव पेश किया। इस अस्पष्ट से प्रस्ताव में कहीं भी विभाजन या पाकिस्तान का जिक्र नहीं था बल्कि इस प्रस्ताव को लिखने वाले पंजाब के प्रधानमंत्री सिकन्दर हयात खान ने 1 मार्च, 1941 को पंजाब असेम्बली में अपने भाषण में कहा था कि “वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध करते हैं जिसमें यहाँ मुस्लिम राज और बाकी जंगह हिन्दू राज होगा।”

प्रश्न 12.
क्या ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’ गीत के लेखक मो. इकबाल अलग पाकिस्तान निर्माण के पक्ष में थे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1930 में मुस्लिम लीग के अध्यक्षीय भाषण में मो. इकबाल ने ‘उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य’ की आवश्यकता पर जोर दिया था। अपने भाषण में इकबाल एक नए देश के उदय पर नहीं बल्कि पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को एकीकृत शिथिल भारतीय संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना पर जोर दे रहे थे। इससे स्पष्ट होता है कि मो. इकबाल विभाजन के पक्ष में नहीं थे।

प्रश्न 13.
क्या मुस्लिम नेताओं और स्वयं जिन्ना ने पाकिस्तान की माँग को गंभीरता से उठाया था? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर:
प्रारम्भ में मुस्लिम नेताओं तथा स्वयं मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की माँग को गंभीरता से नहीं उठाया था क्योंकि जिन्ना इस माँग को एक सौदेबाजी के पैंतरे के रूप में प्रयोग कर रहे थे। उनका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा काँग्रेस को मिलने वाली रिवायतों पर रोक लगाने तथा मुसलमानों के लिए और रियायतें हासिल करना था। द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण अंग्रेजों को स्वतन्त्रता के बारे में औपचारिक वार्ताएं कुछ समय के लिए टालनी पड़ीं।

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प्रश्न 14.
1945 में दोबारा शुरू हुई वार्ताएँ क्यों टूट गई?
उत्तर:
(1) अँग्रेज इस बात पर सहमत हुए कि एक केन्द्रीय कार्यकारिणी सभा बनाई जाएगी, जिसके सभी सदस्य भारतीय होंगे सिवाय वायसराव और सशस्त्र सेनाओं के सेनापति के।
(2) लेकिन यह वार्ता टूट गई। जिना इस बात पर अड़े हुए थे कि कार्यकारिणी सभा के मुस्लिम सदस्यों का चुनाव करने का अधिकार मुस्लिम लीग के अलावा और किसी को नहीं है। उनका कहना था कि अगर मुस्लिम सदस्य किसी फैसले का विरोध करते हैं तो उसे कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति से ही पारित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 15.
उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल का उत्तरी- पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य से क्या आशय था?
उत्तर:
1930 ई. में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण देते हुए उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल ने उत्तरी- पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य की आवश्यकता पर जोर दिया था परन्तु इस भाषण में इकबाल एक नए देश के उदय पर नहीं बल्कि पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को भारतीय संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना पर जोर दे रहे थे।

प्रश्न 16.
विभाजन के लिए भारत को कितने भागों में वर्गीकृत किया गया था ? नाम लिखिए।
उत्तर:
विभाजन के लिए भारत को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया, जो निम्नलिखित हैं – समूह ‘क’-हिन्दू बहुल प्रान्त समूह ‘ख’- पश्चिमोत्तर मुस्लिम बहुल प्रान्त समूह ‘ग’ असम सहित पूर्वोत्तर के मुस्लिम प्रान्त।

प्रश्न 17.
यूनियनिस्ट पार्टी क्या थी? इसके प्रमुख नेता का नाम बताइए कैबिनेट मिशन योजना से अपना समर्थन वापस लेने के पश्चात् मुस्लिम लीग ने क्या कार्यवाही की?
उत्तर:
यूनियनिस्ट पार्टी पंजाब में हिन्दू, मुस्लिम एवं सिख भूस्वामियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली राजनीतिक पार्टी थी। यह पार्टी 1923 से 1947 के मध्य बहुत अधिक शक्तिशाली थी। इस पार्टी के प्रमुख नेता, सिकन्दर हयात खान थे जो पंजाब के प्रधानमन्त्री भी रहे थे। कैबिनेट मिशन योजना से अपना समर्थन वापस लेने के पश्चात् मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की अपनी माँग को वास्तविकता प्रदान करने के लिए 16 अगस्त, 1946 को प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस मनाने का फैसला किया।

प्रश्न 18.
उर्दू के प्रतिभाशाली कहानीकार सआदत हसन मंटो ने अपने लेखन के बारे में क्या कहा?
उत्तर:
सआदत हसन मंटो ने लिखा है, “लम्बे अर्से तक मैं देश के बँटवारे से अपनी उथल-पुथल के नतीजों को स्वीकार करने से इनकार करता रहा महसूस तो मैं अब भी यही करता पर मुझे लगता है कि आखिरकार मैंने अपने आप पर तरस खाए या हताश हुए बगैर उस खौफनाक सच्चाई को मंजूर कर लिया है। इस प्रक्रिया में मैंने इंसान के बनाए हुए लहू के इस समंदर से अनोखी आय (चमक) वाले मोतियों को निकालने की कोशिश की।”

प्रश्न 19.
विभाजन के बारे में बहुत सी कहानी, कविता और फिल्में लिखी व बनाई गई हैं, उनमें से कुछ का संक्षेप में वर्णन कीजिये।
उत्तर:
विभाजन से सम्बन्धित यहाँ पर हम विभिन्न भाषाओं के लेखकों तथा उनकी रचनाओं के नाम दे रहे हैं।
उर्दू-सआदत हसन मंटो, राजेन्दर सिंह बेदी, इंतेजार हुसैन, फैज अहमद फैज दास।
हिन्दी-भीष्म साहनी (तमस), कमलेश्वर, राही मासूम रजा (नीम का पेड़)।
पंजाबी-संत सिंह सेखो, अमृता प्रीतम
बंगला-नरेन्द्रनाथ मित्रा, सैयद वली उल्ला, दिनेश

प्रश्न 20.
काँग्रेस ने भारत विभाजन को किस उद्देश्य से स्वीकार किया?
अथवा
क्या भारत का विभाजन अपरिहार्य था ? स्पष्ट करें।
उत्तर:
(1) कैबिनेट मिशन की असफलता के बाद विभाजन कमोबेश अपरिहार्य हो गया था। महात्मा गाँधी और खान अब्दुल गफ्फार खान को छोड़कर शेष सभी कांग्रेसी नेता विभाजन को अब अवश्यंभावी परिणाम मान चुके थे।
(2) लोग द्वारा प्रत्यक्ष कार्यवाही का फैसला लेने से कलकत्ता में दंगे भड़क गये थे जिन्होंने देश की शान्ति भंग कर दी थी। शीघ्र शान्ति की स्थापना हेतु कांग्रेस नेताओं को बँटवारे के लिए अपनी सहमति देनी पड़ी।

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प्रश्न 21.
1946 के प्रान्तीय चुनावों में काँग्रेस और मुस्लिम लीग की स्थिति में क्या अन्तर आया?
उत्तर:
(1) 1946 के प्रान्तीय चुनावों में सामान्य सीटों पर तो काँग्रेस को एकतरफा सफलता मिली। 91.3 प्रतिशत गैर मुस्लिम वोट काँग्रेस के खाते में गये।
(2) मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर मुस्लिम लीग को भी ऐसी ही बेजोड़ सफलता मिनी मध्य प्रान्त में उसने सभी 30 आरक्षित सीटें जीतीं और मुस्लिम वोटों में से 86.6 प्रतिशत उसके उम्मीदवारों को मिले। सभी प्रान्तों की कुल 509 आरक्षित सीटों में से 442 सीटें मुस्लिम लीग के पास गई।

प्रश्न 22.
कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव को कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मानने से क्यों इन्कार कर दिया था?
उत्तर:
(1) कांग्रेस चाहती थी कि प्रान्तों को अपनी इच्छा का समूह चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। कांग्रेस इस बात से भी असन्तुष्ट थी कि प्रारम्भ में प्रान्तों की समूहबद्धता अनिवार्य होगी परन्तु संविधान बन जाने के बाद उनके पास समूहों से निकलने का अधिकार होगा। (2) मुस्लिम लीग की माँग थी कि प्रान्तों की समूहबद्धता अनिवार्य हो जिसमें समूह ‘ख’ तथा ‘ग’ के पास भविष्य में संघ से अलग होने का अधिकार होना चाहिए।

प्रश्न 23.
” अंग्रेजों द्वारा 1909 ई. में मुसलमानों के लिए बनाए गए पृथक् चुनाव क्षेत्रों का साम्प्रदायिक राजनीति की प्रकृति पर गहरा प्रभाव पड़ा।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कुछ विद्वानों का तर्क है कि अंग्रेजों द्वारा 1909 ई. में मुसलमानों के लिए बनाए गए पृथक् चुनाव क्षेत्रों (जिनका 1919 में विस्तार किया गया) का साम्प्रदायिक राजनीति की प्रकृति पर गहरा प्रभाव पड़ा पृथक् चुनाव क्षेत्रों की व्यवस्था से मुसलमान विशेष चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधि चुन सकते थे। इस व्यवस्था में राजनेताओं को लालच रहता था कि वह सामुदायिक नारों का प्रयोग करें एवं अपने धार्मिक समुदाय के व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँचाएँ। इसी प्रकार से उभरती हुई आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था में धार्मिक अस्मिताओं का सक्रिय प्रयोग होने लगा। अब सामुदायिक अस्मिताओं का सम्बन्ध केवल विश्वास एवं आस्था के अन्तर से नहीं था बल्कि अब धार्मिक अस्मिताएँ समुदायों के मध्य बढ़ रहे विरोधों से जुड़ गई। यद्यपि भारतीय राजनीति पर पृथक् चुनाव क्षेत्रों का बहुत प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 24.
क्या कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों को स्वीकार किया? संक्षेप में बताइए ।
उत्तर:
प्रारम्भ में कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया लेकिन यह समझौता अधिक दिनों तक नहीं चल पाया, कांग्रेस चाहती थी कि प्रान्तों को अपनी इच्छा का समूह चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। कांग्रेस कैबिनेट मिशन के इस स्पष्टीकरण से भी सन्तुष्ट नहीं थी कि प्रारम्भ में यह समूहबद्धता अनिवार्य होगी लेकिन एक बार संविधान बन जाने के उपरान्त उनके पास समूहों से, निकलने का अधिकार प्राप्त होगा और परिवर्तित परिस्थितियों में नए चुनाव कराए जाएँगे। अन्ततः कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों को अस्वीकार कर लिया।

प्रश्न 25.
मार्च, 1947 से लगभग साल भर तक देश में रक्तपात चलता रहा।” इसका क्या कारण था?
उत्तर:
लगभग साल भर तक देश में रक्तपात चलते रहने का प्रमुख कारण यह था कि शासन की संस्थाएँ बिखर चुकी थीं। शासन-तन्त्र पूरी तरह नष्ट हो चुका था। अंग्रेज अधिकारी निर्णय लेना नहीं चाहते थे और हस्तक्षेप करने में संकोच कर रहे थे किसी को भी ज्ञात नहीं था कि सत्ता किसके हाथ में है और पीड़ित लोग कहाँ शिकायत करें। भारतीय दलों के अधिकांश नेता स्वतन्त्रता के बारे में जारी वार्ताओं में व्यस्त थे। अंग्रेज भारत छोड़ने की तैयारी में लगे थे।

प्रश्न 26.
1947 के विभाजन में क्षेत्रीय विविधताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  • विभाजन का सबसे खूनी और विनाशकारी रूप पंजाब में देखा गया
  • उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और हैदराबाद (आन्ध्र प्रदेश) के बहुत सारे परिवार पचास के दशक तथा साठ के दशक के प्रारम्भिक वर्षों में भी पाकिस्तान जाकर बसते रहे।
  • बंगाल में लोगों का पलायन अधिक लम्बे समय तक चलता रहा। लोग अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के आर-पार जाते रहे।
  • पंजाब और बंगाल में स्त्रियों और लड़कियों पर अत्याचार किए गए।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके अनुसार क्या भारत विभाजन आवश्यक था? विस्तार से उल्लेख कीजिए।
अथवा
भारत विभाजन की माँग के प्रति काँग्रेस और गाँधीजी के रवैये की विवेचना कीजिए। आखिरकार विभाजन की माँग क्यों स्वीकार कर ली गई?
उत्तर:
भारत विभाजन की माँग के प्रति काँग्रेस और गाँधीजी का रवैया – कैबिनेट मिशन योजना तक तो काँग्रेस और गाँधीजी दोनों का दृष्टिकोण भारत विभाजन के प्रति नकारात्मक था। वे किसी भी कीमत पर भारत को विभाजन नहीं चाहते थे।

विभाजन की माँग को स्वीकार करने के कारण –
काँग्रेस द्वारा भारत विभाजन की माँग को निम्न कारणों से स्वीकार कर लिया गया –

(1) ब्रिटिश सरकार की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति-1909 में ब्रिटिश सरकार ने सांप्रदायिक चुनाव पद्धति लागू कर भारत विभाजन के बीज बोए और फिर वह निरन्तर जिन्ना व मुस्लिम लीग को प्रश्रय देते रहे और जिन्ना की हठ को स्वीकार करते हुए, माउंटबेटन योजना में विभाजन की घोषणा कर दी। इस प्रकार विभाजन की स्थिति अचानक स्वतंत्रता व सत्ता हस्तांतरण के साथ आयी। उस समय उसे स्वीकार करने के अलावा कोई अन्य विकल्प काँग्रेस के पास नहीं रह गया था।

(2) साम्प्रदायिक तनाव-920 और 1930 के दशकों में कई घटनाओं के कारण साम्प्रदायिक तनावों में वृद्धि हुई। मुसलमान मस्जिद के सामने संगीत, गोरक्षा आन्दोलन, आर्य समाज द्वारा संचालित शुद्धि आन्दोलन आदि से नाराज थे। दूसरी ओर हिन्दू तबलीग (प्रचार) और तंजीम (संगठन) के विस्तार से नाराज थे। इससे साम्प्रदायिक तनाव को प्रोत्साहन मिला।.

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 14 विभाजन को समझना : राजनीति, स्मृति, अनुभव

(3) पाकिस्तान की माँग-23 मार्च, 1940 को मुस्लिम लीग ने लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए स्वायत्ता की माँग का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

(4) अंतरिम सरकार की विफलता-अंतरिम सरकार में सम्मिलित मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों ने कदम-कदम पर रुकावटें पैदा कर उसे विफल कर दिया।

(5) 1946 के चुनावों में लीग को आरक्षित सीटों पर मिली अच्छी सफलता-1946 में दुबारा हुए प्रांतीय चुनावों में कुल 509 आरक्षित सीटों में से 442 मुस्लिम लीग के पास गई थीं। अब वह मुस्लिम मतदाताओं के बीच सबसे प्रभुत्वशाली पार्टी के रूप में उभरी थी।

(6) ब्रिटिश सरकार की धमकी-20 फरवरी, 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड एटली ने घोषणा की कि जून, 1948 तक अंग्रेज भारत छोड़ देंगे।

(7) साम्प्रदायिक दंगे-मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की अपनी माँग को मनवाने के लिए 16 अगस्त, 1946 को ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाने की घोषणा कर दी। उस दिन कलकत्ता में भीषण दंगा भड़क उठा जिसमें हजारों लोग मारे गए।

प्रश्न 2.
दिल्ली अब बच जायेगी।” 1947 के साम्प्रदायिक दंगों के संदर्भ में गाँधीजी के लिए कहे गए उक्त कथन की सत्यता सिद्ध कीजिये।
अथवा
सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में गाँधीजी के योगदान का वर्णन कीजिए।
अथवा
स्वतंत्रता प्राप्त होने के साथ भड़के सांप्रदायिक दंगों में गाँधीजी ने कैसे अकेली फौज की तरह कार्य किया? लिखिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ-साथ सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे हिन्दू और मुसलमान दोनों आपसी भाई चारे को भूल गए। इस सारी उथल-पुथल में सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करने के लिए एक आदमी की बहादुराना कोशिशें आखिरकार रंग लाने लगीं।
(1) अहिंसा का सहारा-77 साल के बुजुर्ग गांधीजी ने अपने जीवनपर्यन्त सिद्धान्त को एक बार फिर आजमाया और अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया।

(2) गाँधीजी की पदयात्रा- गाँधीजी पूर्वी बंगाल के नोआखली (वर्तमान बांग्लादेश) से बिहार तक के गाँवों में उसके बाद कलकत्ता व दिल्ली के दंगों में झुलसी झोंपड़- पट्टियों की यात्रा पर निकल पड़े।

(3) गांधीजी पूर्वी बंगाल में-अक्टूबर, 1946 में पूर्वी बंगाल के मुसलमान हिन्दुओं को अपना निशाना बना रहे थे। गाँधी वहाँ पैदल गाँव-गाँव घूमे और स्थानीय मुसलमानों को समझाया कि ये हिन्दुओं को न मारें तथा उनकी रक्षा करें।

(4) गाँधीजी दिल्ली में दिल्ली में गाँधीजी ने दोनों समुदायों को भरोसा दिलाया तथा पारस्परिक विश्वास और भरोसा कायम रखने की सलाह दी।

(5) गाँधीजी शीशगंज गुरुद्वारे में 28 नवम्बर, 1947 को गुरुनानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारा शीशगंज में सिखों की एक सभा को संबोधित करने गये तो उन्होंने देखा कि दिल्ली का दिल कहलाने वाले चाँदनी चौक में एक भी मुसलमान सड़क पर नहीं था।
गाँधीजी अनशन पर मुसलमानों को शहर से बाहर खदेड़ने की सोच से तंग आकर उन्होंने अनशन शुरू किया। इस अनशन में उनके साथ पाकिस्तान से आए शरणार्थी हिन्दू व सिख भी बैठते थे।

मौलाना आजाद ने लिखा है कि “इस अनशन का असर ‘आसमानी बिजली’ की तरह हुआ।” लोगों को मुसलमानों के सफाए की बात में निरर्थकता दिखाई देने लगी। मगर हिंसा का यह नंगा नाच आखिरकार गाँधीजी के बलिदान के साथ ही खत्म हुआ। इस प्रकार हम देखते हैं कि जो कार्य एक फौज नहीं कर सकती थी उसे बुजुर्ग गाँधीजी ने अपने अकेले दम पर करके दिखाया। इसलिए उन्हें एक अकेली फौज कहकर सम्मानित किया गया।

प्रश्न 3.
शोधकर्ता के सामने लाहौर विश्वविद्यालय में जो घटनाएँ घटित हुई उनका वर्णन करते हुए बताइए कि इन घटनाओं से क्या निष्कर्ष निकला?
उत्तर:
शोधकर्ता पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर में विभाजन के समय हुए दंगों के विषय पर शोध करने गया था। वह भारतीय नागरिक था लेकिन वह स्वयं को दक्षिण एशियाई नागरिक मानता था। उसके मन में हिन्दुस्तान या पाकिस्तान का कोई भेदभाव नहीं था। शोध करते समय उसके सामने तीन घटनाएँ घटित हुईं जिनसे अलग-अलग निष्कर्ष निकलते हैं। प्रथम घटना” मैं तो सिर्फ अपने अब्बा पर चढ़े हुए कर्ज को चुका रहा हूँ।”

शोधकर्ता विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पुस्तकालय में जाया करता था तो वहाँ अब्दुल लतीफ नामक धर्मनिष्ठ अधेड़ आयु का व्यक्ति उसकी बहुत मदद करता था। जब शोधकर्ता ने उससे मदद देने के आरे में जानकारी चाही तो उसका जवाब सुनकर शोधकर्ता अवाक् रह गया। अब्दुल लतीफ जानते थे कि शोधकर्ता भारतीय है जहाँ बँटवारे में उसका पूरा खानदान खत्म हो गया था सिवाय उसके पिता के उसके पिता की जान एक बुजुर्ग हिन्दू महिला ने बचाई थी इसलिए वह अपने को ऋणी मानते हुए शोधकर्ता की मदद कर रहा था।

इस घटना से पता चलता है कि अब्दुल लतीफ एक दयालु और एहसानमंद व्यक्ति था जिसके मन में भारत के प्रति नफरत नहीं थी। यह घटना बताती है कि अब्दुल लतीफ मजहब के बजाय इंसानी रिश्ते को महत्व देने वाला व्यक्ति था। वह मजहबी दंगों को सिर्फ एक पागलपन मानता था। दूसरी घटना “बरसों हो गए, मैं किसी पंजाबी मुसलमान से नहीं मिला।”

शोधकर्ता के सामने दूसरी घटना लाहौर के एक यूथ हॉस्टल के मैनेजर के साथ घटी जिसने भारतीय होने के कारण शोधकर्ता को हॉस्टल में स्थान देने से मना कर दिया लेकिन शोधकर्ता को चाय पिलाई और अपने साथ दिल्ली में घटी घटना सुनाई। जब वह एक सरदार पहाड़गंज का पता पूछता है तो सरदार उसे रुकने को कहता है।

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मैनेजर उसकी आवाज से डर गया कि अब यह सरदार मुझे खत्म कर देगा क्योंकि उसने अपना नाम इकबाल अहमद तथा निवासी लाहौर बताया था लेकिन उसका डर सही नहीं था। सरदार ने आते ही उसे अपनी बाँहों में कसकर भींच लिया और वह भीगी आँखों से बोला “बरसों हो गए, मैं किसी पंजाबी मुसलमान से नहीं मिला। मैं मिलने को तरस रहा था पर यहाँ पंजाबी बोलने वाले मुसलमान मिलते ही नहीं।” इस घटना से पता चलता है कि विभाजन के बाद भी हिन्दू और मुसलमान एक-दूसरे से मिलने के लिए आतुर रहते थे।

तीसरी घटना-“ना, नहीं तुम कभी हमारे नहीं हो सकते।” शोधकर्ता को लाहौर में एक व्यक्ति मिला जो धोखे से उसे पाकिस्तानी समझ कर उसे वहीं रहने की जिद करने लगा लेकन शोधकर्ता ने बताया कि वह पाकिस्तानी नहीं है, हिन्दुस्तानी है यह सुनते ही उसके मुँह से न चाहते हुए ये शब्द निकले, “ना, नहीं तुम कभी हमारे नहीं हो सकते। तुम्हारे लोगों (भारतीयों) ने हमारे पूरे गाँव को 1947 में साफ कर दिया था। हम कट्टर दुश्मन हैं और हमेशा रहेंगे।” यह घटना बताती है कि तीसरा व्यक्ति मजहब को महत्त्व दे रहा था, उसके अन्दर भारत के प्रति अपार घृणा थी। उसमें इंसानियत का जज्बा (भावना नहीं था।

प्रश्न 4.
“देश के विभाजन के दौरान जहाँ दोनों तरफ मारकाट मची थी वहीं पर कुछ लोग पीड़ितों की मदद करके मानवता और सद्भावना की मिसाल कायम कर रहे थे।” अपनी पाठ्यपुस्तक में से पढ़ी हुई किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए।
अथवा
डॉ. खुशदेव सिंह मानवता व सद्भावना की जिन्दा मिसाल थे। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
देश में बँटवारे के समय दंगों के दौरान जहाँ लोग निर्दोषों का खून बहा रहे थे वहीं दूसरी तरफ डॉ. खुशदेव सिंह जैसे लोग बिना जाति और मजहब का विचार किए पीड़ितों की सेवा में जी-जान से जुटे थे पीड़ितों को राहत पहुँचाना ही उनका मजहब था और ईमान था इतिहासकारों ने अगणित कहानियाँ उजागर की हैं कि किस तरह बहुत सारे लोग बँटवारे के समय एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। ये आपसी हमदर्दी और साझेदारी नए मौकों के खुलने और सदमों पर विजय की कहानियाँ हैं। डॉ. खुशदेव सिंह की कहानी भी इसी प्रकार की कहानी है –

डॉ.खुशदेव सिंह – डॉ. खुशदेव सिंह हमारे सामने एक बेहतरीन मिसाल हैं। डॉ. खुशदेव सिंह एक सिख डॉक्टर थे जो तपेदिक (टी.बी. रोग के विशेषज्ञ थे। वे उस समय धर्मपुर में तैनात थे जो आजकल हिमाचल प्रदेश में है। दिन- रात लगकर डॉ. सिंह ने असंख्य प्रवासी मुसलमानों, सिखों और हिन्दुओं को बिना किसी भेदभाव के एक कोमल स्पर्श, भोजन, आश्रय और सुरक्षा प्रदान की।

धर्मपुर के लोगों में उनके इंसानी जज्बे और सहृदयता के प्रति गहरी आस्था और विश्वास पैदा हो गया था। उन पर लोगों को वैसा ही भरोसा था जैसा दिल्ली और कई जगह के मुसलमानों को गाँधीजी पर था। एक मुस्लिम मुहम्मद उमर ने अपनी चिट्ठी में डॉ. खुशदेव सिंह को लिखा था, “पूरी विनम्रता से मैं यह कहना चाहता हूँ कि मुझे आपके अलावा किसी की शरण में सुरक्षा दिखाई नहीं देती। इसलिए मेहरबानी करके आप मुझे अपने अस्पताल में एक सीट दे दीजिए।”

डॉ. खुशदेव सिंह के संस्मरण – डॉ. खुशदेव सिंह द्वारा किए गए अथक प्रयासों के बारे में उनके संस्मरणों लव इज स्ट्रांगर दैन हेट ए रिमेम्बेरेन्स ऑफ 1947 ( मुहब्बत नफरत से ज्यादा ताकतवर होती है-1947 की यादें) से पता चलता है। यहाँ डॉक्टर साहब ने अपने कामों को बयान करते हुए लिखा है कि यह ” एक इंसान होने के नाते बिरादर इंसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए मेरी एक छोटी सी कोशिश थी।”

उन्होंने 1949 में कराची की दो संक्षिप्त यात्राओं का गर्व से जिक्र किया है। उनके पुराने दोस्तों और धर्मपुर में उनसे मदद लेने वालों को कराची हवाई अड्डे पर उनके साथ कुछ यादगार घंटे बिताने का मौका मिला। पहले से उन्हें जानने वाले 6 पुलिस कांस्टेबल उन्हें लेकर हवाई जहाज तक गए और जहाज पर चढ़ते हुए उन्हें सलामी दी। “मैंने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। मेरी आँखों में आँसू छलक आए थे।”

प्रश्न 5.
भारत विभाजन को गृहयुद्ध या महाध्वंस क्यों कहा गया है? यह महाध्वंस नात्सी महाध्वंस से किस रूप में भिन्न है?
उत्तर:
भारत विभाजन – गृहयुद्ध तथा महाध्वंस के रूप में –
भारत विभाजन के दौरान जो चौतरफा हिंसा हुई, उसमें कई लाख लोग मारे गये न जाने कितनी औरतों का बलात्कार और अपहरण हुआ। मोटे रूप से इसमें मरने वालों की संख्या दो लाख से पाँच लाख तक रही तथा लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को एक सरहद से दूसरी सरहद में जाना पड़ा इसे एक सामान्य विभाजन, एक व्यवस्थित संवैधानिक फैसला तथा आपसी रजामंदी के आधार पर इलाके और सम्पत्तियों का सामान्य बँटवारा भर नहीं कहा जा सकता।

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गृहयुद्ध – कुछ इतिहासकारों ने इसे 16 माह का गृहयुद्ध कहा है। उनका तर्क रहा है कि पाले के दोनों तरफ पूरी की पूरी जनसंख्या का दुश्मनों की तरह सफाया कर देने के लिए सुनियोजित कोशिशें की जा रही थीं और इसके लिए संगठित गिरोह कमर कसे खड़े थे। जिन्दा बच जाने वाले लोग इस विभाजन के दौर को इन शब्दों में व्यक्त करते हैं- माशल-ला (मार्शल लॉ)’. ‘मारामारी’, ‘रौला’ या ‘हुल्लड़’।

महाध्वंस (होलोकॉस्ट) – विभाजन के दौरान हुई हत्याओं, बलात्कार, आगजनी और लूटपाट को देखते हुए समकालीन प्रेक्षकों और विद्वानों ने इसके लिए ‘मराध्वंस’ शब्द का उल्लेख करते हुए इस सामूहिक जनसंहार की भयानकता को रेखांकित किया है। एक दृष्टि से देखें तो भारत विभाजन की इस भीषणता को ‘महाध्वंस’ शब्द से ही समझा जा सकता है क्योंकि यह हादसा इतना जघन्य था कि ‘विभाजन’, ‘बंटवारे’ जैसे शब्दों से उसके सारे पहलू सामने नहीं आते। इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि यूरोपीय महाध्वंस (नात्सी जर्मन महाध्वंस) की तरह हमारे समकालीन सरोकारों में भी विभाजन का इतना ज्यादा जिक्र क्यों आता है?

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यूरोपीय महाध्वंस और भारत-विभाजन के महाध्वंस में अन्तर यूरोपीय महाध्वंस और भारत विभाजन के महाध्वंस में एक गुणात्मक अन्तर सरकारी भूमिका को लेकर था। 1947-49 में विभाजन के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में जनसफाए की कोई सरकारी मुहिम नहीं चली थी जबकि नारसी जर्मनी के महाध्वंस में सरकार मुख्य भूमिका निभा रही थी। वहाँ लोगों को मारने के लिए नियन्त्रण और संगठन की तमाम आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन भारत विभाजन के समय जो नस्ली सफाया हुआ वह सरकारी निकायों की नहीं बल्कि धार्मिक समुदायों के स्वयंभू प्रतिनिधियों की कारगुजारी थी।

प्रश्न 6.
सांप्रदायिकता से क्या अभिप्राय है? क्या भारत-पाक बँटवारा प्रत्यक्ष रूप से सांप्रदायिक तनावों का ही परिणाम है?
उत्तर:
सांप्रदायिकता से आशय सांप्रदायिकता उस राजनीति को कहा जाता हैं जो धार्मिक समुदायों के बीच विरोध और झगड़े पैदा करती है। यथा –
(1) ऐसी राजनीति धार्मिक पहचान को बुनियादी और अटल मानती है सांप्रदायिक राजनीतिज्ञ शर्मिक पहचान को मजबूत बनाना चाहते हैं। वे इसे लोगों की एक स्वाभाविक अस्मिता मानकर पेश करते हैं, मानो लोग ऐसी पहचान लेकर पैदा हुए हों, मानो ये अस्मिताएँ इतिहास और समय के दौर से गुजरते हुए बदलती नहीं हैं।

(2) सांप्रदायिकता किसी भी समुदाय में एकता पैदा करने के लिए आंतरिक अन्तरों को दबाती है उस समुदाय की एकता पर जोर देती है और उस समुदाय को किसी न किसी अन्य समुदाय के विरुद्ध लड़ने के लिए प्रेरित करती है।

(3) सांप्रदायिकता किसी चिह्नित ‘गैर’ के विरुद्ध घृणा की राजनीति को पोषित करती है। उदाहरण के लिए मुस्लिम सांप्रदायिकता हिन्दुओं को ‘गैर’ बताकर उनका विरोध करती है और ऐसे ही हिन्दू सांप्रदायिकता मुसलमानों को गैर बताकर उनके विरुद्ध डटी रहती है। इस पारस्परिक घृणा से हिंसा की राजनीति को बढ़ावा मिलता है।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि सांप्रदायिकता धार्मिक अस्मिता का विशेष तरह से राजनीतिकरण है जो धार्मिक समुदायों में परस्पर घृणा फैलाकर झगड़े पैदा करवाने की कोशिश करता है तथा हिंसा की राजनीति को बढ़ावा देता है किसी भी बहुधार्मिक देश में ‘धार्मिक राष्ट्रवाद’ शब्दों का अर्थ भी सांप्रदायिकता के करीब-करीब हो सकता है। ऐसे देश में यदि कोई व्यक्ति किसी धार्मिक समुदाय को राष्ट्र मानता है, तो वह विरोध और झगड़ों के बीज बो रहा है।

प्रश्न 7.
“भारत का बँटवारा एक साम्प्रदायिक राजनीति का आखिरी बिन्दु था।” इस कथन की समालोचना कीजिए।
उत्तर:
भारत का बँटवारा एक साम्प्रदायिक राजनीति का आखिरी बिन्दु कुछ विद्वानों की मान्यता है कि भारत का बँटवारा एक ऐसी साम्प्रदायिक राजनीति का आखिरी बिन्दु था, जो बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में शुरू हुई। इसकी पुष्टि अग्रलिखित तथ्यों से होती है –
(1) मुसलमानों के लिए बनाए गए पृथक् निर्वाचन क्षेत्र अंग्रेजों द्वारा 1909 में मुसलमानों के लिए बनाए गए पृथक् चुनाव क्षेत्रों का सांप्रदायिक राजनीति की प्रकृति पर गहरा प्रभाव पड़ा पृथक् चुनाव क्षेत्रों की वजह से मुसलमान विशेष चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधि चुन सकते थे। इस व्यवस्था में राजनीतिज्ञों ने सामुदायिक नारों का इस्तेमाल किया तथा अपने धार्मिक समुदाय के व्यक्तियों को नाजायज तरीके से लाभ पहुँचाने की कोशिश की। इससे धार्मिक अस्मिताओं का क्रियाशील प्रयोग होने लगा। इस प्रकार सांप्रदायिक चुनावी राजनीति ने इन धार्मिक अस्मिताओं को अधिक गहरा तथा पक्का किया और अब धार्मिक अस्मिताएँ समुदायों के बीच हो रहे विरोधों से जुड़ गई।

(2) अंग्रेजों की फूट डालो और शासन करो नीति-ब्रिटिश साम्राज्य को स्थायी रूप से बनाये रखने के लिए ब्रिटिश सरकार ने ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति अपनाई ।

(3) 1920-30 के दशक में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव-कुछ इतिहासकारों का मत है कि 1920-30 के दशकों में कई घटनाओं की वजह से हिन्दू-मुसलमानों में तनाव उभरे। जैसे- मुसलमानों को ‘मस्जिद के सामने संगीत’, ‘गो-रक्षा आन्दोलन’ और आर्य समाज की ‘शुद्धि’ की कोशिशें जैसे मुद्दों पर गुस्सा आया तो हिन्दू 1923 के बाद के तबलीग (प्रचार) और तंजीम (संगठन) के विस्तार से उत्तेजित हुए।

जैसे-जैसे मध्यवर्गीय प्रचारक और सांप्रदायिक कार्यकर्ता अपने-अपने समुदायों में लोगों को दूसरे समुदाय के खिलाफ एकजुट करते हुए ज्यादा एकजुटता बनाने लगे, वैसे-वैसे देश के विभिन्न भागों में दंगे फैलते गए, समुदायों के बीच भेदभाव गहरे होते गए और हिंसात्मक गतिविधियों में वृद्धि होने लगी।

(4) साम्प्रदायिक दंगे-मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की अपनी माँग को मनवाने के लिए 16 अगस्त, 1946 को ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ मनाने की घोषणा कर दी। उस दिन कलकत्ता में भीषण दंगा भड़क उठा जिसमें हजारों लोग मारे गए। इससे भी साम्प्रदायिकता को बढ़ावा मिला।

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भारत-पाक बँटवारा प्रत्यक्ष रूप से सांप्रदायिक तनावों का परिणाम नहीं से हुआ इस सबके बावजूद यह कहना गलत है कि बँटवारा केवल सीधे-सीधे बढ़ते हुए सांप्रदायिक तनावों की वजह ‘क्योंकि सांप्रदायिक कलह तो 1947 से पहले भी होती थी, पर इसके कारण लाखों लोगों के घर नहीं उजड़े। अतः पहले की साम्प्रदायिक राजनीति और विभाजन में गुणात्मक अन्तर है। बँटवारे के पीछे ब्रिटिश शासन के आखिरी दशक की घटनाएँ उत्तरदायी रही हैं।

प्रश्न 8.
भारत के विभाजन में ब्रिटिश शासन के अन्तिम दशक के कौन-कौन से कारकों को प्रमुख उत्तरदायी माना जाता है?
उत्तर:
भारत के विभाजन के उत्तरदायी कारक- ब्रिटिश शासन के अन्तिम दशक में निम्नलिखित घटनाओं व कारकों को भारत के विभाजन के लिए उत्तरदायी माना जाता है –
(1) 1937 के प्रांतीय चुनाव और कॉंग्रेस मंत्रालय- प्रांतीय संसदों के गठन के लिए 1937 में पहली बार चुनाव कराए गए। इन चुनावों में कांग्रेस के परिणाम अच्छे रहे। उसने 11 में से 7 प्रांतों में अपनी सरकारें बनाई। मुसलमानों के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्रों में कांग्रेस और लीग दोनों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इन चुनावों के बाद मंत्रिमण्डल के निर्माण में काँग्रेस ने जिस तरह मुस्लिम लीग की उपेक्षा की, उसने पाकिस्तान के निर्माण की नींव रख दी।

(2) काँग्रेस के मुस्लिम जनसम्पर्क कार्यक्रम की असफलता-1937 के चुनावों के बाद काँग्रेस को अपने ‘मुस्लिम जनसम्पर्क’ कार्यक्रम में कोई खास सफलता नहीं मिल पायी थी।

(3) मुस्लिम लीग का पाकिस्तान प्रस्ताव, 1940-पाकिस्तान की स्थापना की माँग धीरे-धीरे ठोस रूप ले रही थी। 23 मार्च, 1940 को मुस्लिम लीग ने उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए कुछ स्वायत्तता की माँग का प्रस्ताव पेश किया। यह भारत के विभाजन या पृथक् पाकिस्तान राष्ट्र की माँग नहीं थी, बल्कि पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम बहुल इलाकों को एकीकृत किन्तु शिथिल भारत- संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना की माँग थी।

(4) 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन और भारत-की स्वतंत्रता के लिए वार्तायें आरम्भ 1942 के शुरू हुए विशाल भारत छोड़ो आन्दोलन के परिणामस्वरूप अंग्रेजों को भारत की स्वतंत्रता के बारे में भारतीयों से बातें करने के लिए झुकना पड़ा और उसके अफसरों को संभावित सत्ता हस्तान्तरण के बारे में भारतीय पक्षों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार होना पड़ा। सत्ता के हस्तान्तरण का पेचीदा प्रश्न ही विभाजन का प्रमुख कारक
बना।

(5) जिन्ना की हठधर्मिता-1945 में वार्ताओं के दौरान अंग्रेज इस बात पर सहमत हुए कि एक केन्द्रीय कार्यकारिणी सभा बनायी जायेगी जिसके सभी सदस्य भारतीय होंगे सिवाय वायसराय और सशस्त्र सेनाओं के सेनापति के उनकी राय में यह पूर्ण स्वतंत्रता की ओर शुरुआती कदम था लेकिन सत्ता हस्तान्तरण के बारे में जिना की इस हठधर्मिता के कारण वार्ता टूट गई क्योंकि वे इस बात पर अड़े हुए थे कि कार्यकारिणी सभा के मुस्लिम सदस्यों का चुनाव करने का अधिकार मुस्लिम लीग के अलावा और किसी को नहीं है।

(6) कैबिनेट मिशन की असफलता मार्च, 1946 में ब्रिटिश मंत्रिमंडल ने लीग की माँग का अध्ययन करने एवं स्वतंत्र भारत के लिए एक उचित राजनीतिक रूपरेखा सुझाने के लिए कैबिनेट मिशन दिल्ली भेजा, जिसने भारत का दौरा कर एक ढीले-ढाले त्रिस्तरीय महासंघ का सुझाव दिया। काँग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों दलों ने इसे अस्वीकृत कर दिया।

(7) काँग्रेस द्वारा विभाजन को स्वीकार करना-यह एक बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव था क्योंकि इसके बाद विभाजन कमोबेश अपरिहार्य हो गया था। काँग्रेस के ज्यादातर नेता इसे शासद मगर अवश्यंभावी परिणाम मान चुके थे। गाँधीजी और खान अब्दुल गफ्फार खान ही अब केवल विभाजन के विरोधी रह गये थे। मार्च, 1947 में काँग्रेस हाईकमान ने पंजाब को मुस्लिम बहुल हिन्दू- सिख बहुल दो हिस्सों में बाँटने के प्रस्ताव की मंजूरी दे दी।

प्रश्न 9.
1937 में प्रान्तीय चुनाव व कांग्रेस की भूमिका पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
1937 में प्रान्तीय चुनाव व कांग्रेस की भूमिका प्रान्तीय संसदों के गठन के लिए 1937 में पहली बार चुनाव कराये गए। इन चुनावों में मताधिकार केवल 10 से 12 प्रतिशत लोगों के पास था। इन चुनावों में कांग्रेस की स्थिति अच्छी रही। उसने 11 प्रान्तों में से 5 प्रान्तों में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया और 7 प्रान्तों में अपनी सरकार बनाई। मुसलमानों के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्रों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा परन्तु मुस्लिम लीग को भी इन क्षेत्रों में बहुत अच्छी सफलता नहीं मिली। उसे इस चुनाव में सम्पूर्ण मुस्लिम वोट का केवल 44 प्रतिशत हिस्सा ही मिला। उत्तर पश्चिमी सीमा प्रान्त में उसे एक सीट भी नहीं मिली। पंजाब की 84 आरक्षित सीटों में उसे केवल 2 प्राप्त हुई और सिन्ध में से 13 प्राप्त हुई।

संयुक्त प्रान्त में मुस्लिम लीग द्वारा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास संयुक्त प्रान्त में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहती थी। परन्तु यहाँ कांग्रेस का सम्पूर्ण बहुमत था इसलिए उसने मुस्लिम लीग की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम लीग की यह मान्यता थी कि मुस्लिम हितों का प्रतिनिधित्व एक मुस्लिम दल ही कर सकता है और कांग्रेस एक हिन्दू दल है। मुहम्मद अली जिन्ना इस जिद्द पर अड़े हुए थे कि मुस्लिम लीग को मुसलमानों का एकमात्र प्रवक्ता माना जाए। परन्तु जिन्ना की इस बात से बहुत कम लोग सहमत थे।

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 14 विभाजन को समझना : राजनीति, स्मृति, अनुभव

कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा इस खाई को गहरा करना – कांग्रेस मंत्रालयों ने भी इस खाई को और गहरा कर दिया। संयुक्त प्रान्त में पार्टी ने गठबन्धन सरकार बनाने के सम्बन्ध में मुस्लिम लीग के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया था क्योंकि मुस्लिम लीग जमींदारी प्रथा का समर्थन कर रही थी जबकि कांग्रेस जमींदारी प्रथा को समाप्त करना चाहती थी।

कांग्रेस को मुस्लिम जनसम्पर्क कार्यक्रम में सफलता न मिलना – कांग्रेस को अपने मुस्लिम जनसम्पर्क कार्यक्रम में भी सफलता नहीं मिली। इस प्रकार कांग्रेस के धर्मनिरपेक्ष और एडियल बयानों से रूढ़िवादी मुसलमान और मुसलमान भू-स्वामी तो चिन्ता में ही पड़ गए, कांग्रेस मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने में भी सफल नहीं हो पाई। मौलाना आजाद ने 1937 में यह प्रश्न किया था कि कांग्रेस के सदस्यों को मुस्लिम लीग में शामिल होने की छूट तो नहीं है परन्तु उन्हें हिन्दू महासभा में शामिल होने से नहीं रोका जाता है। उनका कहना था कि कम से कम मध्य प्रान्त (वर्तमान मध्य प्रदेश) में यही स्थिति थी।

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 13 महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन : सविनय अवज्ञा और उससे आगे

Jharkhand Board JAC Class 12 History Important Questions Chapter 13 महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन : सविनय अवज्ञा और उससे आगे Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 History Important Questions Chapter 12 महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन : सविनय अवज्ञा और उससे आगे

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. गाँधीजी दक्षिणी अफ्रीका से भारत वापस आए
(क) जनवरी, 1915 में
(ख) मार्च, 1915 में
(ग) दिसम्बर, 1915 में
(घ) सितम्बर, 1915 में
उत्तर:
(क) जनवरी, 1915 में

2. गाँधीजी ने अपना पहला सत्याग्रह किया था –
(क) दक्षिणी अमेरिका में
(ख) दक्षिणी अफ्रीका में
(ग) दक्षिणी आस्ट्रेलिया में
(घ) दक्षिणी भारत में
उत्तर:
(ख) दक्षिणी अफ्रीका में

3. गाँधीजी के राजनीतिक गुरु थे –
(क) बाल गंगाधर तिलक
(ख) महादेव गोविन्द रानाडे
(ग) गोपालकृष्ण गोखले
(घ) वल्लभ भाई पटेल
उत्तर:
(ग) गोपालकृष्ण गोखले

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4. गाँधीजी ने फसल चौपट होने पर लगान माफ करने की माँग कहाँ की ?
(क) सूरत में
(ख) चंपारन में
(ग) बिहार में
(घ) खेड़ा में
उत्तर:
(घ) खेड़ा में

5. जलियाँवाला बाग काण्ड हुआ था –
(क) लाहौर में।
(ख) अमृतसर में
(ग) कराची में
(घ) कलकत्ता में
उत्तर:
(ख) अमृतसर में

6. खिलाफत आन्दोलन चलाने वाले नेता थे –
(क) मोहम्मद अली व शौकत अली
(ख) जिला- जवाहरलाल
(ग) गाँधीजी और सरदार पटेल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) मोहम्मद अली व शौकत अली

7. काला विधेयक किसे कहा जाता है?
(क) इलबर्ट
(ख) रॉलेट एक्ट
(ग) शिक्षा बिल
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) रॉलेट एक्ट

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8. सरकारी आँकड़ों के अनुसार 1921 में कुल हड़तालें हुई –
(क) 496
(ख) 396
(ग) 284
(घ) 398
उत्तर:
(ख) 396

9. गाँधीजी ने नमक यात्रा (दांडी मार्च) की थी –
(क) मार्च, 1930 में
(ख) जून, 1931 में
(ग) मार्च, 1931 में
(घ) अप्रैल, 1930 में
उत्तर:
(क) मार्च, 1930 में

10. अमृतसर में जलियाँवाला बाग काण्ड हुआ था-
(क) 13 अप्रैल, 1919 में
(ख) 14 फरवरी, 1919 में
(ग) 17 अप्रैल, 1919 में
(घ) 25 दिसम्बर, 1919 में
उत्तर:
(क) 13 अप्रैल, 1919 में

11. भारतीय राष्ट्र का पिता माना गया है-
(क) महात्मा गाँधी को
(ख) पं. जवाहरलाल नेहरू कॉ
(ग) सुभाष चन्द्र बोस को
(घ) सरदार वल्लभ भाई पटेल को
उत्तर:
(क) महात्मा गाँधी को

12. निम्न में से किस राष्ट्रवादी नेता ने सम्पूर्ण देशभर में रॉलट एक्ट के खिलाफ एक अभियान चलाया था?
(क) पं. जवाहरलाल नेहरू
(ख) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) सरदार पटेल
उत्तर:
(ग) महात्मा गाँधी

13. चरखे के साथ भारतीय राष्ट्रवाद की सर्वाधिक स्थायी पहचान बन गए।
(क) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ख) पं. जवाहरलाल नेहरू
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) शहिद अमीन
उत्तर:
(ग) महात्मा गाँधी

14. निम्न में से किस वर्ष अंग्रेज सदस्यों वाला साइमन कमीशन भारत आया था –
(क) सन् 1928
(ग) सन् 1936
(ख) सन् 1930
(घ) सन् 1942
उत्तर:
(क) सन् 1928

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15. कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की घोषणा अपने किस अधिवेशन में की थी?
(क) सूरत अधिवेशन
(ख) लाहौर अधिवेशन
(ग) बम्बई अधिवेशन
(घ) नागपुर अधिवेशन
उत्तर:
(क) सूरत अधिवेशन

16. गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ –
(क) लखनऊ में
(ग) लन्दन में
(ख) कोलम्बो में
(घ) जयपुर
उत्तर:
(ग) लन्दन में

17. निम्न में से किस वर्ष नया गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट पारित हुआ?
(क) सन् 1935
(ग) सन् 1940
(ख) सन् 1936
(घ) सन् 1956
उत्तर:
(क) सन् 1935

18. निम्न में से किस गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गाँधी ने निम्न जातियों के लिए पृथक निर्वाचिका की माँग का विरोध किया –
(क) प्रथम
(ख) द्वितीय
(ग) तृतीय
(घ) चतुर्थ
उत्तर:
(ख) द्वितीय

19. “मुझे सम्राट का सर्वोच्च मन्त्री इसलिए नहीं नियुक्त किया गया है कि मैं ब्रिटिश साम्राज्य के टुकड़े-टुकड़े कर दूँ।” यह कथन किस ब्रितानी प्रधानमन्त्री का था?
(क) विंस्टन चर्चिल
(ख) मारग्रेट पैचर
(ग) जेम्स मैकडोनाल्ड
(घ) लार्ड वेवेल
उत्तर:
(क) विंस्टन चर्चिल

20. ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन कब प्रारम्भ हुआ?
(क) अप्रैल, 1941 में
(ख) अगस्त, 1942 में
(ग) जनवरी, 1943 में
(घ) अक्टूबर, 1946 में
उत्तर:
(ख) अगस्त, 1942 में

21. निम्न में से किस राजनेता द्वारा ‘ए बंच ऑफ लेटर्स’ का संकलन किया गया-
(क) जवाहरलाल नेहरू द्वारा
(ख) महात्मा गाँधी द्वारा
(ग) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा
(घ) डॉ. राधाकृष्णन द्वारा
उत्तर:
(क) जवाहरलाल नेहरू द्वारा

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1. मोहनदास करमचंद गाँधी दो दशक रहने के बाद …………… में अपनी गृहभूमि भारत वापस आ गए।
2. गाँधीजी ने सन् ……………. में भारत छोड़ा था।
3. ……………. भी गाँधीजी की तरह गुजराती मूल के लंदन में प्रशिक्षित वकील थे।
4. गांधीजी ने …………….. एक्ट के खिलाफ अभियान चलाया।
5. ……………. आन्दोलन मुहम्मद अली और शौकत अली के नेतृत्व में भारतीय मुसलमानों का एक आन्दोलन था।
6. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक 1921 में …………… हुई जिनमें ‘लाख श्रमिक शामिल थे।
7. …………… के विद्रोह के बाद पहली बार ……………… आन्दोलन के परिणामस्वरूप अंग्रेजी राज की नींव हिल गई।
8. फरवरी 1922 में किसानों के एक समूह ने संयुक्त प्रान्त के ……………. पुरवा में एक पुलिस स्टेशन पर आक्रमण कर उसमें आग लगा दी।
9. गाँधीजी को मार्च, 1922 में ……………. के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया
10. 1929 में दिसम्बर के अन्त में कांग्रेस ने अपना वार्षिक अधिवेशन …………… शहर में किया।
उत्तर:
1 जनवरी, 1915
2. 1893
3 मोहम्मद अली जिन्ना
4. गॅलेट
5. खिलाफत
6. 396
6 7.1857, असहयोग
8. चौरी-चौरा
9 राजद्रोह
10 लाहौर।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कौनसा कानून ‘काला कानून’ कहलाता था ?
उत्तर:
रॉलेट एक्ट।

प्रश्न 2.
गांधीजी के लिए ‘महात्मा’ शब्द का प्रयोग किसने किया?
उत्तर:
गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने।

प्रश्न 3.
खिलाफत का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
खिलाफत का उद्देश्य था-खलीफा पद की पुनर्स्थापना करना।

प्रश्न 4.
चौरी-चौरा कांड कहाँ हुआ था?
उत्तर:
उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक जगह पर।

प्रश्न 5.
दांडी मार्च कब और कितने सदस्यों के साथ गांधीजी ने शुरू किया?
उत्तर:
12 मार्च, 1930 को 78 सदस्यों के साथ।

प्रश्न 6.
तृतीय गोलमेज सम्मेलन के विचार-विमर्श की परिणति किस कानून के रूप में सामने आयी ?
उत्तर:
1935 का भारत सरकार कानून।

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प्रश्न 7.
महात्मा गाँधी के तीन सत्याग्रह आन्दोलनों का उल्लेख कीजिए जो असहयोग आन्दोलन से पहले प्रारम्भ किये गये थे।
उत्तर:

  • चंपारन सत्याग्रह
  • अहमदाबाद सत्याग्रह
  • खेड़ा सत्याग्रह।

प्रश्न 8.
हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए गाँधीजी द्वारा किस आन्दोलन का समर्थन किया गया?
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन का।

प्रश्न 9.
गाँधीजी द्वारा कौन से गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया गया?
उत्तर:
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में।

प्रश्न 10.
पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव काँग्रेस के किस अधिवेशन में जारी किया गया?
उत्तर:
1929 के लाहौर अधिवेशन में।

प्रश्न 11.
1905-07 के स्वदेशी आन्दोलन ने कौन से तीन उग्रवादी काँग्रेसी नेताओं को जन्म दिया?
उत्तर:

  • बाल गंगाधर तिलक
  • विपिनचन्द्र पाल और
  • लाला लाजपत राय।

प्रश्न 12.
1915 से पहले के काँग्रेस के किन्हीं दो प्रमुख उदारवादी नेताओं के नाम लिखिये।
उत्तर:
(1) गोपालकृष्ण गोखले
(2) सुरेन्द्रनाथ बनर्जी।

प्रश्न 13.
भारत में गाँधीजी की पहली महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक उपस्थिति कब हुई ?
उत्तर:
फरवरी, 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में।

प्रश्न 14.
असहयोग आन्दोलन का क्या प्रभाव हुआ?
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन के बाद भारतीय राष्ट्रवाद जन-आन्दोलन में बदल गया।

प्रश्न 15.
16 अगस्त, 1946 को जिला ने पाकिस्तान की स्थापना की माँग के समर्थन में कौनसा दिवस मनाने का आह्वान किया?
उत्तर:
प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस।

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प्रश्न 16.
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अन्तर्गत गाँधीजी द्वारा संचालित आन्दोलनों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • असहयोग आन्दोलन
  • सविनय अवज्ञा आन्दोलन
  • भारत छोड़ो आन्दोलन।

प्रश्न 17.
गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन कब स्थगित किया?
उत्तर:
12 फरवरी, 1922 को

प्रश्न 18.
गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन क्यों स्थगित कर दिया?
उत्तर:
चौरी-चौरा की हिंसात्मक घटना के कारण।

प्रश्न 19.
किस उद्योगपति ने राष्ट्रीय आन्दोलन का खुला समर्थन किया?
उत्तर:
जी. डी. बिड़ला ने।

प्रश्न 20.
गांधीजी किन नामों से पुकारे जाते थे?
उत्तर:
‘गाँधी बाबा’, ‘गाँधी महाराज’, ‘महात्मा’ के नामों से।

प्रश्न 21.
कांग्रेस ने अपना वार्षिक अधिवेशन लाहौर में कब किया?
उत्तर:
1929 में दिसम्बर के अन्त में।

प्रश्न 22.
दिसम्बर, 1929 में कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन किसकी अध्यक्षता में आयोजित किया गया?
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में।

प्रश्न 23.
सम्पूर्ण देश में ‘स्वतन्त्रता दिवस’ कब मनाया गया?
उत्तर:
26 जनवरी, 19301

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प्रश्न 24.
गाँधीजी ने दाण्डी मार्च कब शुरू किया और किस स्थान से किया ?
उत्तर:
(1) 12 मार्च, 1930 को
(2) साबरमती आश्रम से।

प्रश्न 25.
गांधीजी ने नमक सत्याग्रह कब शुरू किया ?
उत्तर:
6 अप्रैल, 1930 को दाण्डी यात्रा की समाप्ति पर नमक बनाकर।

प्रश्न 26.
नमक- कर कानून को तोड़ने की घोषणा गाँधीजी ने कब की थी और कहाँ की थी?
उत्तर:
(1) 5 अप्रैल, 1930 को
(2) झण्डी में

प्रश्न 27.
नमक सत्याग्रह में किस महिला ने बढ़- चढ़कर हिस्सा लिया था?
उत्तर:
कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने।

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प्रश्न 28.
किस महिला ने गाँधीजी को सलाह दी थी कि वह अपने आन्दोलन को पुरुषों तक ही सीमित न रखें?
उत्तर:
कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने।

प्रश्न 29.
पहला गोलमेज सम्मेलन कब आयोजित किया गया और कहाँ किया गया?
उत्तर:
(1) नवम्बर 1930 में।
(2) लन्दन में।

प्रश्न 30.
गाँधी-इरविन समझौता कब हुआ ?
उत्तर:
5 मार्च, 1931 को

प्रश्न 31.
दूसरा गोलमेज सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किया गया?
उत्तर:
(1) दिसम्बर, 1931 में
(2) लन्दन में।

प्रश्न 32.
गाँधीजी किस गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए?
उत्तर:
दूसरे गोलमेज सम्मेलन में।

प्रश्न 33.
गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट कब पारित हुआ?
उत्तर:
1935 में

प्रश्न 34.
1937 के आम चुनाव में कितने प्रान्तों में से कांग्रेस के प्रधानमंत्री सत्ता में आए ?
उत्तर:
11 प्रान्तों में से 8 प्रान्तों के प्रधानमंत्री।

प्रश्न 35.
कांग्रेसी मन्त्रिमण्डलों ने कब त्याग-पत्र दे दिया ?
उत्तर:
अक्टूबर, 1939 में।

प्रश्न 36.
दलितों को पृथक् निर्वाचिका का अधिकार दिए जाने की माँग किस दलित नेता ने की थी?
उत्तर:
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर।

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प्रश्न 37.
मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान के निर्माण की माँग कब की थी?
उत्तर:
मार्च, 1940 में

प्रश्न 38.
“मैं सम्राट का सर्वोच्च मन्त्री इसलिए नहीं नियुक्त किया गया हूँ कि मैं ब्रिटिश साम्राज्य के टुकड़े- टुकड़े कर दूँ।” यह किसका कथन था ?
उत्तर:
ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का।

प्रश्न 39.
सर स्टेफर्ड क्रिप्स भारत कब आए?
उत्तर:
मार्च, 1942 में।

प्रश्न 40.
ब्रिटिश सरकार ने स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत क्यों भेजा था ?
उत्तर:
राजनीतिक गतिरोध को दूर करने हेतु।

प्रश्न 41.
भारत छोड़ो आन्दोलन’ कब व किसने आरम्भ किया?
उत्तर:
(1) 8 अगस्त, 1942 को
(2) गाँधीजी ने।

प्रश्न 42.
कांग्रेस के किस नेता ने भारत छोड़ो आन्दोलन में भूमिगत प्रतिरोध गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया ?
उत्तर:
जय प्रकाश नारायण ने।

प्रश्न 43.
ऐसे दो स्थानों के नाम लिखिए जहाँ आन्दोलनकारियों ने अपनी स्वतन्त्र सरकारें स्थापित कर ली थीं।
उत्तर:
(1) सतास
(2) मेदिनीपुर।

प्रश्न 44.
कैबिनेट मिशन भारत कब आया ?
उत्तर:
23 मार्च, 1946

प्रश्न 45.
पाकिस्तान के निर्माण के लिए मुस्लिम लीग ने ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ का कब आह्वान किया?
उत्तर:
16 अगस्त, 19461

प्रश्न 46.
दिल्ली में संविधान सभा के अध्यक्ष ने गाँधीजी को किसकी उपाधि प्रदान की थी?
उत्तर:
‘राष्ट्रपिता’ की।

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प्रश्न 47.
गाँधीजी के जीवनी लेखक कौन थे?
उत्तर:
जी. डी. तेन्दुलकर।

प्रश्न 48.
खेड़ा में गाँधीजी ने किसानों के लिए क्या किया?
उत्तर:
गांधीजी ने खेड़ा में फसल चौपट होने पर राज्य सरकार से किसानों का लगान माफ करने की माँग की।

प्रश्न 49.
दाण्डी मार्च पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को नमक कानून हेतु साबरमती आश्रम से दाण्डी की यात्रा 24 दिनों में पूरी की।

प्रश्न 50.
“महात्मा गाँधी जन नेता थे।” इस कथन की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
गाँधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आन्दोलन में हजारों किसानों, मजदूरों, कारीगरों, बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। वे आम लोगों की तरह रहते थे।

प्रश्न 51.
रॉलेट एक्ट क्या था?
उत्तर:
इसके अनुसार किसी को भी बिना कारण बताए जेल में अनिश्चित काल के लिए बन्द किया जा सकता था।

प्रश्न 52.
दक्षिणी अफ्रीका से लौटने पर किसने महात्मा गाँधी को क्या सलाह दी थी?
उत्तर:
गोपाल कृष्ण गोखले ने गाँधीजी को एक वर्ष तक ब्रिटिश भारत की यात्रा करने की सलाह दी थी।

प्रश्न 53.
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन सफल क्यों नहीं हुआ?
उत्तर:
भारत की स्वतन्त्रता की माँग को स्वीकार न करने तथा साम्प्रदायिकता की समस्या का समाधान न होने के कारण।

प्रश्न 54.
दक्षिण अफ्रीका ने ही गाँधीजी को ‘महात्मा’ बनाया। यह कथन किस इतिहासकार का है?
उत्तर:
चन्द्रन देवनेसन ने।

प्रश्न 55.
खिलाफत आन्दोलन क्या था?
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन तुर्की के खलीफा की पुनर्स्थापना के लिए भारतीय मुसलमानों का एक आन्दोलन था।

प्रश्न 56.
असहयोग आन्दोलन के दो कारण बताइये।
उत्तर:
(1) रॉलेट एक्ट’ के कारण भारतीयों में असन्तोष था
(2) जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड के कारण भारतीयों में आक्रोश व्याप्त था।

प्रश्न 57.
चौरीचौरा की घटना क्या थी?
उत्तर:
फरवरी, 1922 में सत्याग्रहियों द्वारा चौरी- चौरा (गोरखपुर) में पुलिस थाने में आग लगा दी जिससे 22 पुलिसकर्मी (एक थानेदार तथा इक्कीस सिपाही) जलकर मर गये।

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नाम
प्रश्न 58.
गाँधीजी के चार प्रमुख सहयोगियों के लिखिए जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया।
उत्तर:

  • सरदार वल्लभ भाई पटेल
  • सुभाष चन्द्र बोस
  • जवाहर लाल नेहरू
  • अबुल कलाम आजाद।

प्रश्न 59.
असहयोग आन्दोलन के दो प्रभाव बताइये।
उत्तर:
(1) राष्ट्रीय आन्दोलन का क्षेत्र व्यापक हो गया।
(2) राष्ट्रवाद का सन्देश भारत के सुदूर भागों तक फैल गया।

प्रश्न 60.
गांधीजी के दो सामाजिक सुधारों का उल्लेख कीजिये
उत्तर:
(1) छुआछूत के उन्मूलन पर बल देना।
(2) बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने पर बल देना ।

प्रश्न 61.
गांधीजी ने चरखा चलाने पर क्यों बल दिया? कोई दो तर्क दीजिये।
अथवा
चरखा राष्ट्रवाद का प्रतीक क्यों चुना गया ?
उत्तर:
(1) चरखा गरीबों को पूरक आय दे सकता था
(2) यह लोगों को स्वावलम्बी बना सकता था।

प्रश्न 62.
1929 में दिसम्बर के अना में आयोजित कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन किन दो दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
(1) जवाहरलाल नेहरू का अध्यक्ष के रूप मैं चुनाव
(2) ‘पूर्ण स्वराज’ की उद्घोषणा।

प्रश्न 63.
‘स्वतन्त्रता दिवस’ मनाए जाने के तुरन्त बाद महात्मा गाँधी ने क्या घोषणा की थी?
उत्तर:
गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए एक यात्रा का नेतृत्व करने की घोषणा की।

प्रश्न 64.
गाँधीजी ने नमक कानून को किसकी संज्ञा दी थी?
उत्तर:
ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित कानूनों में से एक कानून की।

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प्रश्न 65.
गाँधीजी ने नमक-कानून के विरुद्ध आन्दोलन करने का क्यों निश्चय किया?
उत्तर:
(1) घरेलू प्रयोग के लिए भी नमक बनाना निषिद्ध था।
(2) लोगों को ऊंचे दाम पर नमक खरीदने के लिए बाध्य किया गया।

प्रश्न 66.
गाँधीजी के अनुसार नमक विरोध का प्रतीक क्यों था?.
अथवा
गाँधीजी ने नमक सत्याग्रह क्यों शुरू किया?
उत्तर:
(1) नमक एकाधिकार लोगों को ग्राम उद्योग से वंचित करता था
(2) भूखे लोगों से हजार प्रतिशत से अधिक की वसूली करना।

प्रश्न 67.
नमक सत्याग्रह के दो कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) वकीलों द्वारा ब्रिटिश अदालतों का बहिष्कार करना
(2) विद्यार्थियों द्वारा सरकारी शिक्षा संस्थानों का बहिष्कार करना।

प्रश्न 68.
नमक सत्याग्रह के दौरान गाँधीजी ने क्या आह्वान किया था?
उत्तर:
(1) स्थानीय अधिकारी सरकारी नौकरियाँ छोड़कर स्वतन्त्रता संघर्ष में शामिल हों ।
(2) ऊंची जाति के लोग दलितों की सेवा करें।

प्रश्न 69.
अमेरिकी समाचार पत्रिका ‘टाइम’ ने क्या कहकर गाँधीजी का मजाक उड़ाया था?
उत्तर:
पत्रिका ने गाँधीजी के ‘तकुए जैसे शरीर तथा ‘मकड़ी जैसे पेडू’ का मजाक उड़ाया था।

प्रश्न 70.
नमक सत्याग्रह की दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
(1) यह पहला राष्ट्रीय आन्दोलन था जिसमें महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
(2) यह आन्दोलन पूर्ण अहिंसात्मक था।

प्रश्न 71.
जालियाँवाला बाग कहाँ स्थित है?
उत्तर:
अमृतसर में

प्रश्न 72.
खिलाफत आन्दोलन का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
खलीफा पद की पुनर्स्थापना करना।

प्रश्न 73.
चौरी-चौरा काण्ड कर्ब व कहाँ हुआ था?
उत्तर:
5 फरवरी, 1922 में गोरखपुर।

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प्रश्न 74.
साइमन कमीशन भारत क्यों आया?
उत्तर:
भारतीय उपनिवेश को स्थितियों की जाँच- पड़ताल करने के लिए।

प्रश्न 75.
बरदौली में किसान सत्याग्रह किस वर्ष हुआ?
उत्तर:
सन् 1928 में।

प्रश्न 76.
26 जनवरी 1930 को स्वतन्त्रता दिवस मनाए जाने के पश्चात् गाँधीजी ने क्या घोषणा की?
उत्तर:
गाँधीजी ने यह घोषणा की कि वे ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित कानून को तोड़ने के लिए एक यात्रा का नेतृत्व करेंगे।

प्रश्न 77.
गाँधीजी ने अपनी नमक यात्रा की पूर्व सूचना किस अंग्रेज वायसराय को दी थी?
उत्तर:
लॉर्ड इर्बिन को।

प्रश्न 78.
अखिल बंगाल सविनय अवज्ञा परिषद् का गठन किसने किया?
उत्तर:
जे. एम. सेन गुप्ता ने

प्रश्न 79.
गाँधी-इरविन समझौते की दो शर्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) गाँधीजी सविनय अवज्ञा आन्दोलन को वापस ले लेंगे।
(2) ब्रिटिश सत्याग्रहियों को मुक्त कर देगी।
सरकार बन्दी बनाए गए

प्रश्न 80.
गाँधीजी को लन्दन से खाली हाथ क्यों लौटना पड़ा?
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतन्त्रता प्रदान करने का आश्वासन नहीं दिया तथा वह साम्प्रदायिकता की समस्या हल नहीं कर सकी।

प्रश्न 81.
गाँधीजी ने निम्न जातियों के लिए पृथक् निर्वाचिका की मांग का विरोध क्यों किया ?
उत्तर:
पृथक् निर्वाचिका की माँग से दलितों का समाज की मुख्य धारा में एकीकरण नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 82.
कांग्रेसी मन्त्रिमण्डलों ने क्यों त्याग-पत्र दे दिया?
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार ने द्वितीय युद्ध के बाद भारत को स्वतन्त्रता देने की कांग्रेस की माँग को अस्वीकार कर दिया था।

प्रश्न 83.
दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गाँधीजी को किन तीन दलों ने चुनौती दी थी?
उत्तर:
(1) मुस्लिम लीग
(2) राजे-रजवाड़े
(3) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर।

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प्रश्न 84.
कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के किस सिद्धान्त को कभी स्वीकार नहीं किया?
उत्तर:
दो राष्ट्र सिद्धान्त’।

प्रश्न 85.
किस व्यक्ति ने गाँधीजी की हत्या की भी और कब?
उत्तर:
30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने।

प्रश्न 86.
अमेरिका की टाइम पत्रिका’ ने गांधीजी के बलिदान की तुलना किससे की थी?
उत्तर:
अब्राहम लिंकन के बलिदान से।

प्रश्न 87.
किस समाचार-पत्र में गाँधीजी उन पत्रों को प्रकाशित करते थे, जो उन्हें लोगों से मिलते थे?
उत्तर:
‘हरिजन’ में।

प्रश्न 88.
पं. जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान उन्हें लिखे गए पत्रों का एक संकलन तैयार किया था। उसे उन्होंने किस नाम से प्रकाशित किया?
उत्तर:
‘ए बंच ऑफ ओल्ड लेटर्स’ (पुराने पत्रों का पुलिन्दा) ।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
गाँधीजी के दक्षिण अफ्रीका में उनके द्वारा किए गए कार्यों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका की सरकार के रंग भेदभाव के विरोध में सत्याग्रह का सहारा लिया। उन्होंने वहाँ विभिन्न धर्मों के बीच सौहार्द बढ़ाने का प्रयास किया। गाँधीजी ने उच्च जातीय भारतीयों से दलितों एवं महिलाओं के प्रति भेदभाव का व्यवहार न करने के लिए चेतावनी दी। वास्तव में दक्षिण अफ्रीका ही उनके सत्याग्रह की प्रथम पाठशाला बना तथा उसने ही उन्हें ‘महात्मा’ बना दिया।

प्रश्न 2.
गाँधीजी के रचनात्मक कार्यों पर एक टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
गांधीजी ने बुनियादी शिक्षा, ग्राम उद्योग संघ, तालीमी संघ और गौ रक्षा संप स्थापित किये। उन्होंने समाज में फैली शोषण व्यवस्था को समाप्त करने पर बल दिया। उन्होंने कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए कार्य किया। चरखा और खादी उनके आर्थिक तंत्र के मुख्य आधार थे। उन्होंने दलितोद्धार, शराबबन्दी, नारी सशक्तिकरण तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता को प्रोत्साहन दिया।

प्रश्न 3.
“दक्षिण अफ्रीका ने ही गाँधीजी को महात्मा बनाया।” यह कथन किसका है? इसके पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
इतिहासकार चंदन देवनेसन ने कहा था कि गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में ही पहली बार अहिंसात्मक विरोध के अपने विशेष तरीकों की प्रयोग किया जिसे सत्याग्रह का नाम दिया गया। यहीं पर उन्होंने विभिन्न धर्मों के मध्य सद्भावना बढ़ाने का प्रयास किया तथा उच्च जातीय भारतीयों को दलितों एवं महिलाओं के प्रति भेदभाव के व्यवहार के लिए चेतावनी दी।

प्रश्न 4.
गाँधीजी ने खिलाफत आन्दोलन को असहयोग आन्दोलन का अंग क्यों बनाया?
उत्तर:
गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन को विस्तार एवं मजबूती देने के लिए खिलाफत आन्दोलन को इसका अंग बनाया। उन्हें यह विश्वास था कि असहयोग को खिलाफत के साथ मिलाने से भारत के दो प्रमुख धार्मिक समुदाय हिन्दू और मुसलमान आपस में मिलकर औपनिवेशिक शासन का अन्त कर देंगे।

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प्रश्न 5.
महात्मा गाँधी के अमरीकी जीवनी लेखक लुई फिशर ने गाँधीजी के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर:
लुई फिशर ने लिखा कि “असहयोग भारत और गाँधीजी के जीवन के एक युग का ही नाम हो गया। असहयोग शान्ति की दृष्टि से नकारात्मक किन्तु प्रभाव की दृष्टि से सकारात्मक था। इसके लिए प्रतिवाद, परित्याग एवं स्व- अनुशासन आवश्यक थे। यह स्वशासन के लिए एक प्रशिक्षण था।”

प्रश्न 6.
दलितों के लिए पृथक् निर्वाचन क्षेत्र का विरोध गाँधीजी द्वारा क्यों किया गया था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गोलमेज सम्मेलन के दौरान गांधीजी ने दमित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा था, “अस्पृश्यों के लिए पृथक् निर्वाचिका का प्रावधान करने से उनकी दासता स्थायी रूप ले लेगी। क्या आप चाहते हैं कि ‘अस्पृश्य’ हमेशा ‘अस्पृश्य’ ही बने रहें? पृथक् निर्वाचिका से उनके प्रति कलंक का यह भाव अधिक मजबूत हो जायेगा। जरूरत इस बात की है कि अस्पृश्यतां का विनाश किया जाए।

प्रश्न 7.
1939 में कॉंग्रेस मंत्रिमण्डल ने सरकार से इस्तीफा क्यों दिया?
उत्तर:
1937 में सीमित मताधिकार के आधार पर हुए चुनावों में काँग्रेस की 11 में से 8 प्रांतों में सरकारें बनीं। सितम्बर, 1939 में दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया। महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि अगर अंग्रेज युद्ध की समाप्ति पर स्वतंत्रता देने को राजी हों तो काँग्रेस उनके युद्ध प्रयासों में सहायता दे सकती है सरकार ने कांग्रेस का प्रस्ताव खारिज कर दिया। इसके विरोध में काँग्रेस ममण्डलों ने अक्टूबर, 1939 में इस्तीफा दे दिया।

प्रश्न 8.
प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ का आह्वान किसने किया था और इसका क्या परिणाम रहा?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन की असफलता के बाद जिना ने पाकिस्तान की स्थापना के लिए लीग की माँग के समर्थन में एक ‘प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस’ का आह्वान किया। इसके लिए 16 अगस्त, 1946 का दिन तय किया गया। उसी दिन कलकत्ता में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। यह हिंसा कलकत्ता से शुरू होकर ग्रामीण बंगाल, बिहार, संयुक्त प्रांत तथा पंजाब तक फैल गई। कुछ स्थानों पर हिन्दुओं ने मुसलमानों को तथा मुसलमानों ने हिन्दुओं को अपना निशाना बनाया।

प्रश्न 9.
“महात्मा गाँधी भारतीय राष्ट्र के पिता थे।” कैसे?
उत्तर:
गाँधीजी भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में भाग लेने वाले सभी नेताओं में सर्वाधिक प्रभावशाली और सम्मानित थे। उन्होंने किसानों, मजदूरों, कारीगरों, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों, हिन्दुओं, मुसलमानों, सभी भारतीयों को संगठित किया और उनमें राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार किया। उन्होंने 1920 से 1947 तक असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन एवं भारत छोड़ो आन्दोलन का नेतृत्व किया और सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रवाद का और स्वाधीनता प्राप्त करने का जोश भर दिया।

प्रश्न 10.
गाँधी इर्विन समझौता कब हुआ? इसकी शर्तें बताइए। रैडिकल राष्ट्रवादियों ने गाँधी इर्विन समझौते की आलोचना क्यों की?
उत्तर:
गाँधी इर्विन समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ था। इस समझौते में निम्न बातों पर सहमति बनी –

  1. सविनय अवज्ञा आन्दोलन को वापस लेना
  2. समस्त राजनैतिक कैदियों की रिहाई
  3. तटीय क्षेत्रों में नमक उत्पादन की अनुमति देना।

रैडिकल राष्ट्रवादियों ने गांधी इर्विन समझौते की आलोचना की। क्योंकि गाँधीजी अंग्रेजी वायसराय से भारतीयों के लिए राजनीतिक स्वतन्त्रता का आश्वासन प्राप्त नहीं कर पाये थे। गाँधीजी को इस सम्भावित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केवल वार्ताओं का आश्वासन मिला था।

प्रश्न 11.
क्रिप्स मिशन भारत कब आया ? क्रिप्स वार्ता क्यों टूट गयी?
उत्तर:
क्रिप्स मिशन मार्च, 1942 में भारत आया। सर स्टेफर्ड क्रिप्स के साथ वार्ता में कांग्रेस ने इस बात पर बल दिया कि यदि धुरी शक्तियों के विरुद्ध ब्रिटेन कांग्रेस का समर्थन चाहता है तो उसे व्यवसाय की कार्यकारी परिषद में किसी भारतीय को रक्षा सदस्य नियुक्त करना होगा। ब्रिटिश सरकार द्वारा असहमति देने पर यह वार्ता टूट गयी।

प्रश्न 12.
गाँधीजी के प्रारम्भिक जीवन तथा दक्षिण अफ्रीका में उनके कार्यकलापों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सन् 1915 से पूर्व लगभग 22 वर्षों तक मोहनदास करमचंद गाँधी (महात्मा गाँधी) विदेशों में रहे। इन वर्षों का अधिकांश हिस्सा उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में व्यतीत किया। गाँधीजी एक वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका गए थे और बाद में वे इस क्षेत्र के भारतीय समुदायों के नेता बन गए। गाँधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रथम बार वहाँ की सरकार की रंग-भेद एवं जातीय भेद के विरुद्ध सत्याग्रह के रूप में अपना अहिंसात्मक तरीके से विरोध किया तथा विभिन्न धर्मों के मध्य सौहार्द बढ़ाने का प्रयास किया।

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प्रश्न 13.
रॉलेट एक्ट सत्याग्रह से ही गाँधीजी एक सच्चे राष्ट्रीय नेता बन गए।” व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
गांधीजी ने ‘रॉलेट एक्ट’ के विरुद्ध सम्पूर्ण देश में आन्दोलन चलाया। इसकी सफलता से उत्साहित होकर गाँधीजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध ‘असहयोग आन्दोलन’ की माँग कर दी। जो लोग भारतीय उपनिवेशवाद को समाप्त करना चाहते थे, उनसे आग्रह किया गया कि वे स्कूलों, कालेजों तथा न्यायालयों का बहिष्कार करें तथा कर न चुकाएँ। गाँधीजी ने कहा कि असहयोग आन्दोलन के द्वारा भारत एक वर्ष के भीतर स्वराज प्राप्त कर लेगा।

प्रश्न 14.
खिलाफत आन्दोलन’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन (1919-1920) मुहम्मद अली और शौकत अली के नेतृत्व में संचालित भारतीय मुसलमानों का एक आन्दोलन था। इस आन्दोलन की निम्नलिखित मांगें थीं—पूर्व में आटोमन साम्राज्य के सभी इस्लामी पवित्र स्थानों पर तुर्की सुल्तान अथवा खलीफा का नियन्त्रण बना रहे जजीरात-उल-अरब इस्लामी सम्प्रभुता के अधीन रहे तथा खलीफा के पास काफी क्षेत्र हों। गाँधीजी ने खिलाफत आन्दोलन का समर्थन किया।

प्रश्न 15.
26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस को किस रूप में मनाए जाने की गाँधीजी ने अपील की?
उत्तर:
गाँधीजी ने सुझाव दिया कि 26 जनवरी को सभी गाँवों और शहरों में स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाए, संगोष्ठियां आयोजित की जाएं तथा राष्ट्रीय ध्वज को फहराए जाने से समारोहों की शुरुआत की जाए। दिन में सूत कातने, दलितों की सेवा करने, हिन्दुओं व मुसलमानों के पुनर्मिलन आदि के कार्यक्रम आयोजित किये जाएं। इस दिन लोग यह प्रतिज्ञा लेंगे कि भारतीय लोगों को भी स्वतन्त्रता प्राप्त करने का अधिकार है।

प्रश्न 16.
गाँधीजी ने नमक सत्याग्रह क्यों शुरू किया?
उत्तर:

  1. प्रत्येक भारतीय के घर में नमक का प्रयोग होता था, परन्तु उन्हें घरेलू प्रयोग के लिए नमक बनाने का अधिकार नहीं था
  2. उन्हें दुकानों से ऊँचे दाम पर नमक खरीदने के लिए बाध्य किया जाता था।
  3. नमक के उत्पादन तथा बिक्री पर सरकार का एकाधिकार था, जो बहुत अलोकप्रिय था।
  4. यह भारतीयों को बहुमूल्य सुलभ ग्राम उद्योग से वंचित करता था।
  5. यह राष्ट्रीय सम्पदा के लिए विनाशकारी था।

प्रश्न 17.
लन्दन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गाँधीजी के दावे को किन तीन पार्टियों से चुनौती सहन करनी पड़ी?
उत्तर:
(1) मुस्लिम लीग का कहना था कि वह मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हित में काम करती है। कांग्रेस मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हित में काम नहीं करती है।
(2) राजे-रजवाड़ों का दावा था कि कांग्रेस का उनके नियन्त्रण वाले भू-भाग पर कोई अधिकार नहीं है।
(3) डॉ. भीमराव अम्बेडकर का कहना था कि गांधीजी और कांग्रेस पार्टी दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

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प्रश्न 18.
स्टेफर्ड क्रिप्स मिशन क्यों असफल हो गया?
उत्तर:
मार्च, 1942 में ब्रिटिश सरकार ने स्टेफर्ड क्रिप्स को वार्ता हेतु भारत भेजा। कांग्रेस ने इस बात पर बल दिया कि यदि धुरी शक्तियों से भारत की रक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार कांग्रेस का समर्थन चाहती है, तो वायसराय को सबसे पहले अपनी कार्यकारी परिषद में किसी भारतीय को एक रक्षा-सदस्य के रूप में नियुक्त करना चाहिए। इसी बात पर वार्ता टूट गई और स्टेफर्ड क्रिप्स खाली हाथ स्वदेश लौट गए।

प्रश्न 19.
नमक सत्याग्रह का महत्त्व प्रतिपादित कीजिये।
उत्तर:

  1. इस घटना ने गाँधीजी को संसार भर में प्रसिद्ध कर दिया।
  2. इस सत्याग्रह में भारतीय महिलाओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। स्वियों ने शराब की दुकानों तथा विदेशी वस्त्रों की दुकानों पर धरना दिया और अपने आप को गिरफ्तारी के लिए पेश किया।
  3. इस सत्याग्रह से अंग्रेजों को पता चल गया कि अब उनका राज बहुत दिन नहीं टिक सकेगा और उन्हें भारतीयों को भी सत्ता में हिस्सा देना पड़ेगा।

प्रश्न 20.
महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन वापस क्यों लिया?
उत्तर:
5 फरवरी, 1922 को उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी-चौरा नामक गाँव में पुलिस ने कांग्रेस के सत्याग्रहियों पर गोलियाँ चलाई, तो भीड़ क्रुद्ध हो उठी और उसने एक थाने में आग लगा दी। इसके फलस्वरूप एक थानेदार तथा 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई। चौरी- चौरा की इस हिंसात्मक घटना से गाँधीजी को प्रबल आघात पहुँचा और उन्होंने असहयोग आन्दोलन को स्थगित कर दिया।

प्रश्न 21.
दाण्डी यात्रा की प्रमुख घटनाओं की न्व्याख्या कीजिये। भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
12 मार्च, 1930 को गाँधीजी ने अपने 78 आश्रमवासियों को लेकर साबरमती आश्रम से दाण्डी नामक स्थान की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने अपनी यात्रा पैदल चल कर 24 दिन में तय की। 6 अप्रैल, 1930 को वहाँ उन्होंने नमक बनाकर कानून का उल्लंघन किया। इस प्रकार सम्पूर्ण भारत में नमक सत्याग्रह शुरू हो गया। इस आन्दोलन ने राष्ट्रीय आन्दोलन को व्यापक बनाया, स्वियों में जागृति पैदा की इस आन्दोलन से अंग्रेजों को पता चल गया कि अब उनका राज बहुत दिनों तक नहीं टिक सकेगा।

प्रश्न 22.
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
रॉलेट एक्ट तथा अपने लोकप्रिय नेताओं की गिरफ्तारी के विरुद्ध 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में लोगों ने एक सार्वजनिक सभा आयोजित की जनरल डायर ने शान्तिप्रिय तथा निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दिया। इस बर्बरतापूर्ण कार्यवाही में 400 लोग मारे गए तथा सैकड़ों लोग घायल हो गए। इससे भारतीय जनता में तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ और सम्पूर्ण देश में इस हत्याकाण्ड की कटु आलोचना की गई।

प्रश्न 23.
“चम्पारन, अहमदाबाद एवं खेड़ा में की गई पहल ने गाँधीजी को एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभारा।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चम्पारन, अहमदाबाद एवं खेड़ा में की गई पहल ने गाँधीजी को एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभारा। गाँधीजी में गरीबों के प्रति गहरी सहानुभूति थी। वर्ष 1917 का अधिकांश समय महात्मा गाँधी को बिहार के चम्पारन जिले में किसानों के लिए काश्तकारी की सुरक्षा साथ-साथ अपनी पसन्द की फसल उपजाने की स्वतन्त्रता दिलाने में बीता। गाँधीजी ने भारत में सत्याग्रह का पहला प्रयोग 1917 ई. में चम्पारन में ही किया था।

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वर्ष 1918 ई. में गाँधीजी गुजरात के अपने गृह राज्य में दो अभियानों में व्यस्त रहे। सर्वप्रथम उन्होंने अहमदाबाद के एक श्रम विवाद में हस्तक्षेप करके कपड़ा मिलों में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए काम करने की बेहतर स्थितियों की माँग की। इसके पश्चात् उन्होंने खेड़ा में फसल चौपट होने पर राज्य में किसानों का लगान माफ करने की माँग की। इस प्रकार कहा जा सकता है कि इन आन्दोलनों ने गाँधीजी को एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभारा।

प्रश्न 24.
असहयोग आन्दोलन से भारतीयों ने क्या उम्मीदें लगा रखी थीं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1920 ई. के कलकत्ता अधिवेशन में महात्मा गाँधी के प्रस्ताव ‘असहयोग आन्दोलन’ से भारतवासियों को अत्यधिक आशाएँ थीं। इसे हम निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से समझ सकते हैं –

  1. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से देशी वस्तुओं को बढ़ावा मिलेगा।
  2. सरकारी उत्सवों का बहिष्कार कर देशी उत्सवों को प्रोत्साहन तथा पुनः प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।
  3. साम्प्रदायिक रूप से हिन्दू तथा मुस्लिमों में एकता स्थापित होगी।
  4. राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधने तथा राष्ट्रवाद को बढ़ाने में सहायता प्राप्त होगी।
  5. इस आन्दोलन से विभिन्न भारतीय नेताओं को एक मंच अवश्य प्राप्त होगा।

प्रश्न 25.
खिलाफत आन्दोलन की प्रमुख मांगों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन (1919-20 ) मुहम्मद अली जिन्ना एवं शौकत अली के नेतृत्व में भारतीय मुसलमानों का एक आन्दोलन था। इस आन्दोलन की प्रमुख माँगें निम्नलिखित थीं –

  • पहले के ऑटोमन साम्राज्य के समस्त इस्लामी पवित्र स्थानों पर तुर्की के सुल्तान अथवा खलीफा का नियन्त्रण बना रहे।
  • जजीरात-उल-अरब ( अरब, सीरिया, इराक, फिलिस्तीन ) इस्लामी सम्प्रभुता के अधीन रहें।
  • खलीफा के पास इतने क्षेत्र हों कि वह इस्लामी विश्वास को सुरक्षित रखने योग्य बना सके।

प्रश्न 26.
मार्च 1922 में महात्मा गाँधी को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तारी के पश्चात् सजा सुनाते समय जस्टिस एन. ब्रूमफील्ड ने क्या टिप्पणी की?
उत्तर:
मार्च 1922 ई. में महात्मा गाँधीजी को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर जाँच की कार्यवाही करने वाली समिति की अध्यक्षता करने वाले जज जस्टिस सी. एन. ब्रूमफील्ड ने उन्हें सजा सुनाते समय महत्त्वपूर्ण भाषण दिया। जज ने अपनी टिप्पणी में लिखा ” इस बात को नकारना असम्भव होगा कि मैंने आज तक जिनकी जांच की है या करूंगा आप उनसे अलग श्रेणी के हैं इस तथ्य को नकारना असम्भव होगा कि आपके लाखों देशवासियों की दृष्टि में आप एक महान् देश-भक्त व नेता हैं।

यहाँ तक कि राजनीति में जो लोग आपसे अलग विचार रखते हैं वे भी आपको उच्च आदर्शों और पवित्र जीवन वाले व्यक्ति के रूप में देखते हैं।” चूँकि गाँधीजी ने कानून की अवहेलना की थी अतः उस न्यायपीठ के लिए गाँधीजी को 6 वर्ष की सजा सुनाया जाना आवश्यक था। लेकिन जज ब्रूमफील्ड ने कहा कि “यदि भारत में घट रही घटनाओं की वजह से सरकार के लिए सजा के इन वर्षों कराना सम्भव हुआ तो इससे नहीं होगा।” में कमी और आपको मुक्त मुझसे ज्यादा कोई प्रसन्न

प्रश्न 27.
कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दिसम्बर, 1929 में पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर में कांग्रेस का अधिवेशन शुरू हुआ। इसके अनुसार, 26 जनवरी, 1930 को देश के विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर और देशभक्ति के गीत गाकर ‘स्वतन्त्रता दिवस’ मनाया गया। यह अधिवेशन दो दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण था –
(1) पं. जवाहरलाल नेहरू का अध्यक्ष के रूप में चुनाव, जो बुवा पीढ़ी को नेतृत्व की छड़ी सौंपने का प्रतीक था।
(2) इसमें पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई।

प्रश्न 28.
दाण्डी यात्रा के समय गाँधीजी ने वसना गाँव में ऊँची जाति वालों को संबोधित करते हुए क्या कहा था?
उत्तर:
गांधीजी ने उच्च जाति के लोगों से कहा, “यदि आप स्वराज के हक में आवाज उठाते हैं तो आपको दलितों की सेवा करनी पड़ेगी। सिर्फ नमक कर या अन्य करों की समाप्ति से ही स्वराज नहीं मिल जायेगा। स्वराज के लिए आपको अपनी उन गलतियों के लिए प्रायश्चित करना पड़ेगा जो आपने दलितों के साथ की हैं। स्वराज के लिए हिन्दू, मुसलमान, पारसी और सिक्ख सबको एकजुट होना पड़ेगा। ये स्वराज प्राप्त करने की सीढ़ियाँ हैं।”

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प्रश्न 29.
गाँधीजी और नेहरूजी के आग्रह पर काँग्रेस ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कौनसा प्रस्ताव पारित किया था?
उत्तर:
काँग्रेस ने ‘दो राष्ट्र सिद्धान्त’ को कभी स्वीकार नहीं किया था। जब उसे अपनी इच्छा के विरुद्ध विभाजन पर मंजूरी देनी पड़ी तो भी उसका दृढ़ विश्वास था कि “भारत बहुत सारे धर्मों और नस्लों का देश है और उसे ऐसे ही बनाए रखना चाहिए।” पाकिस्तान में हालात जो भी रहें, भारत “एक लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होगा जहाँ सभी नागरिकों को पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगे तथा धर्म के आधार पर भेदभाव के बिना सभी को राज्य के द्वारा संरक्षण का अधिकार होगा।”

प्रश्न 30.
भारत विभाजन के समय हुए दंगों में गाँधीजी ने लोगों से क्या अपील की ?
उत्तर:
गांधीजी के जीवनी लेखक डी. जी. तेंदुलकर ने लिखा है कि सितम्बर और अक्टूबर के दौरान गाँधीजी “पीड़ितों को सांत्वना देते हुए अस्पतालों और शरणार्थी शिविरों में चक्कर लगा रहे थे।” उन्होंने “सिवानों, हेन्दुओं और मुसलमानों से अपील की कि वे अतीत को भुलाकर अपनी पीड़ा पर ध्यान देने के बजाय एक दूसरे के प्रति भाईचारे का हाथ बढ़ाने तथा शान्ति से रहने का संकल्प लें।”

प्रश्न 31.
गाँधीजी का भारत में राष्ट्रवाद के आधार को और अधिक व्यापक बनाने में किस प्रकार सफल रहे?
उत्तर:
महात्मा गाँधी का जनता से अनुरोध निस्सन्देह कपट से मुक्त था। भारतीय राजनीतिक के सन्दर्भ में तो बिना किसी संकोच के यह कहा जा सकता है कि वह अपने प्रयत्नों से राष्ट्रवाद के आधार को और अधिक व्यापक बनाने में सफल रहे। निम्न बिन्दुओं से यह तथ्य स्पष्ट है –

  • गाँधीजी के नेतृत्व में भारत के विभिन्न भागों में कांग्रेस की नयी शाखाएँ खोली गयीं।
  • रजवाड़ों में राष्ट्रवादी सिद्धान्त को बढ़ावा देने के लिए प्रजामण्डलों की स्थापना की गई। हम
  • गाँधीजी ने राष्ट्रवादी सन्देश का प्रसारे अंग्रेजी भाषा में करने की बजाय मातृभाषा में करने को प्रोत्साहन दिया।

प्रश्न 32.
1943 में हुए सतारा आन्दोलन की महानता और विशेषता का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1943 में महाराष्ट्र में सतारा जिले के कुछ नेताओं ने सेवा दलों और तूफान दलों (ग्रामीण इकाई) के साथ मिलकर एक प्रति (समानान्तर ) सरकार की स्थापना कर ली थी। उन्होंने सतारा में जन अदालतों का आयोजन किया और सम्पूर्ण महाराष्ट्र में रचनात्मक कार्य किए। कुनबी किसानों के दबदबे और दलितों के सहयोग से चलने वाली सतारा की प्रति सरकार, ब्रिटिश सरकार द्वारा किए जा रहे दमन के बावजूद 1946 के चुनाव तक चलती रही।

प्रश्न 33.
आप कैसे कह सकते हैं कि गाँधीजी सर्वसाधारण के पक्षधर एवं हिमायती थे? 1916 से 1918 के मध्य की घटनाओं से इस कथन की पुष्टि कीजिये।
उत्तर:
(1) फरवरी, 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन के समय गाँधीजी ने बोलते समय मजदूरों और गरीबों की उपेक्षा किये जाने की आलोचना की।
(2) गाँधीजी ने कहा कि हमारे लिए स्वशासन या स्वराज का तब तक कोई अर्थ नहीं है जब तक हम किसानों से उनके श्रम का लगभग सम्पूर्ण लाभ स्वयं या अन्य लोगों को ले लेने की अनुमति देते रहेंगे। दिसम्बर, 1916 में उन्होंने चंपारन में तथा 1918 में अहमदाबाद और खेड़ा में सत्याग्रह किये।

प्रश्न 34.
1919 में पास किए गए रौलेट एक्ट के प्रति भारतीय जनमानस की प्रतिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1919 में रॉलेट एक्ट पास किया गया जिसके अनुसार –
(1) अंग्रेज बिना किसी कारण के भारतीयों को गिरफ्तार कर सकते थे तथा बिना मुकदमा चलाए उन्हें जेल में रख सकते थे।
(2) पंजाब जाते समय गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया तथा स्थानीय नेता भी गिरफ्तार कर लिए गए।
(3) 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थी व निर्दोष जनता पर गोलियां चलवाई। इस भीषण नरसंहार में 400 लोग मारे गए।

प्रश्न 35.
गाँधीजी की दाण्डी यात्रा के बारे में विभिन्न स्रोतों द्वारा किन-किन बातों का पता लगा? लिखिए।
उत्तर:
(1) 12 मार्च, 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दाण्डी के लिए कूच किया।
(2) पुलिस रिपोर्ट के अनुसार जगह-जगह गाँधीजी ने भाषण दिए जिसमें दलितों को उनका हक देने, सभी धर्मावलम्बियों को एकजुट होने का आह्वान किया।
(3) अमेरिकी पत्रिका टाइम ने पहले गांधीजी के कमजोर शरीर का मजाक उड़ाया। परन्तु बाद में टाइम ने लिखा कि यात्रा को भारी जनसमर्थन मिल रहा है।

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प्रश्न 36.
दलितों के उत्थान में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के प्रमुख योगदानों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
डॉ. अम्बेडकर दलितों के मसीहा थे। उन्होंने अपना तन-मन-धन दलितों के उत्थान में लगा दिया। उन्होंने प्रथम गोलमेज कान्फ्रेन्स में भाग लिया और उनकी दयनीय दशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में सवर्ण हिन्दुओं द्वारा दलितों के शोषण किए जाने की निन्दा की और उनके लिए पृथक् निर्वाचिका की माँग की। उन्होंने दलितों के लिए स्कूल खुलवाये।

प्रश्न 37.
“भारत छोड़ो आन्दोलन सही मायने में जन-आन्दोलन था?” समालोचना कीजिये।
उत्तर:
अगस्त, 1942 में गाँधीजी ने अपना तीसरा बड़ा आन्दोलन ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ प्रारम्भ किया। यह आन्दोलन सही मायने में एक जन आन्दोलन था जिसमें लाखों आम हिन्दुस्तानी शामिल थे। इस आन्दोलन ने युवा वर्ग को बहुत बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने अपने कॉलेज छोड़कर जेल का रास्ता अपनाया। इस आन्दोलन के दौरान सतारा में स्वतंत्र’ सरकार भी बनी, जो 1946 तक चलती रही। वस्तुतः 1942 का आन्दोलन वास्तव में जन-आन्दोलन था।

प्रश्न 38.
जस्टिस सी. एन. बूमफील्ड ने गाँधीजी को सजा सुनाते हुए क्या कहा?
उत्तर:
जस्टिस सी. अपनी टिप्पणी में लिखा, “इस तथ्य को नकारना असम्भव होगा कि आपके लाखों देशवासियों की दृष्टि में आप एक महान देशभक्त और नेता हैं। यहाँ तक कि राजनीति में जो लोग आपसे भिन्न विचार रखते हैं वे भी आपको उच्च आदर्शों और पवित्र जीवन वाले व्यक्ति के रूप में देखते हैं। चूँकि गाँधीजी ने कानून की अवहेलना की थी, अतः उस न्यायपीठ के लिए गाँधीजी को 6 वर्षों की जेल की सजा सुनाया जाना जरूरी था।”

प्रश्न 39.
“गाँधीजी भारतीय राष्ट्रवाद को सम्पूर्ण भारतीय लोगों का और अधिक अच्छे ढंग से प्रतिनिधित्व करने में सक्षम बनाना चाहते थे।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गाँधीजी ने महसूस किया कि भारतीय राष्ट्रवाद वकीलों, डॉक्टरों और जमींदारों जैसे विशिष्ट वर्गों द्वारा निर्मित था। फरवरी, 1916 में गाँधीजी ने बनारस हिन्दू ‘विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कहा था कि “हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकती है, न तो वकील, न डॉक्टर, न ही जमींदार इसे सुरक्षित रख सकते हैं।” अतः गाँधीजी लाखों किसानों और मजदूरों को भारतीय राष्ट्रवाद का अभिन्न अंग बनाना चाहते थे।

प्रश्न 40.
गाँधीजी के बारे में कौनसी चमत्कारिक शक्तियों की अफवाहें फैली हुई थीं?
उत्तर:
(1) गाँधीजी के बारे में यह अफवाह भी फैली हुई थी कि उन्हें राजा द्वारा किसानों के दुःखों एवं कष्टों के निवारण के लिए भेजा गया था तथा उनके पास सभी स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों को अस्वीकृत करने की शक्ति थी
(2) गांधीजी की शक्ति ब्रिटिश सम्राट से उत्कृष्ट है और उनके आगमन से ब्रिटिश शासक जिलों से भाग जायेंगे। (3) गाँधीजी की आलोचना करने वाले गाँवों के लोगों के घर गिर गए या उनकी फसलें नष्ट हो गई।

प्रश्न 41.
गाँधीजी सामान्य जन से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
गांधीजी आम लोगों की तरह रहते थे, उनकी ही तरह के वस्त्र पहनते थे तथा उनकी भाषा में बोलते थे। गाँधीजी लोगों के बीच एक साधारण धोती में जाते थे। वे किसानों, मजदूरों, कारीगरों, गरीबों, दलितों से गहरी सहानुभूति रखते थे। वे प्रतिदिन कुछ समय के लिए चरखा चलाते थे। वे मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम में कोई भेद नहीं मानते थे।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए –
(1) रॉलेट एक्ट
(ii) खिलाफत आन्दोलन।
उत्तर:
(i) रॉलेट एक्ट यद्यपि प्रथम विश्व- बुद्ध (1914-18) के दौरान भारतवासियों ने अंग्रेजों की तन-मन-धन से सहायता की थी, परन्तु विश्वयुद्ध की समाप्ति के पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को कुचलने के लिए कठोर कानून बनाये। 1919 में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट पास किया जिसके अनुसार किसी भी भारतीय को बिना किसी जाँच के कारावास में बन्द किया जा सकता था। रॉलेट एक्ट के पारित किये जाने से गाँधीजी को प्रबल आघात पहुँचा। उन्होंने इस काले कानून के विरुद्ध एक देशव्यापी अभियान चलाया। गाँधीजी की अपील पर अनेक नगरों में हड़ताल की गई।

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दिल्ली में लोगों ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध एक जुलूस निकाला जिस पर पुलिस ने गोलियाँ चलाई जिससे अनेक लोग मारे गए। गाँधीजी को पलवल (हरियाणा) नामक रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया। इससे भारतवासियों में तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ। पंजाब के लोगों ने रॉलेट एक्ट का घोर विरोध किया।

ब्रिटिश सरकार ने अमृतसर के स्थानीय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में लोगों ने एक विशाल सभा आयोजित की। एक अंग्रेज ब्रिगेडियर डाबर ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलवार्थी, जिससे 400 से अधिक लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए, इस पर गाँधीजी ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध असहयोग आन्दोलन चलाने का निर्णय किया।

(ii) खिलाफत आन्दोलन खिलाफत आन्दोलन (1919-20 ) मुहम्मद अली एवं शौकत अली के नेतृत्व में भारतीय मुसलमानों का एक आन्दोलन था।

इस आन्दोलन की प्रमुख माँगें निम्नलिखित –

  • पहले के आटोमन साम्राज्य के सभी इस्लामी पवित्र स्थानों पर तुर्की सुल्तान अथवा खलीफा का नियन्त्रण बना रहे।
  • जंजीरात-उल-अरब इस्लामी सम्प्रभुता के अधीन रहे।
  • खलीफा के पास इतने क्षेत्र हों कि वह इस्लामी विश्वास को सुरक्षित रखने योग्य बन सके।

गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन को सफल बनाने के लिए खिलाफत आन्दोलन को इसका अंग बनाया। उन्होंने हिन्दुओं और मुसलमानों में एकता उत्पन्न करने के लिए खिलाफत आन्दोलन का समर्थन किया।

प्रश्न 2.
तीनों गोलमेज सम्मेलनों के विषय में विस्तारपूर्वक लिखिए।
उत्तर:
तीनों गोलमेज सम्मेलनों को निम्नलिखित शीर्षकों के माध्यम से समझ सकते हैं –
(1) प्रथम गोलमेज सम्मेलन भारतीय संविधान पर विचार करने के लिये लन्दन में 12 नवम्बर, 1930 को प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में कुल 57 भारतीयों ने भागीदारी की। यह वह समय था जब भारत के प्रायः सभी प्रमुख नेता सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण जेल में बन्द थे। इस सम्मेलन में प्रायः कुछ साम्प्रदायिक समस्याओं पर ही चर्चा हुई। इस सम्मेलन में दुर्भाग्य से कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।

(2) द्वितीय गोलमेज सम्मेलन – प्रथम गोलमेज सम्मेलन की असफलता के उपरान्त द्वितीय गोलमेज सम्मेलन की सफलता के लिये अंग्रेजों ने अत्यधिक प्रयास किये, इसके लिये उन्होंने गाँधीजी को रिहा कर दिया। यहाँ गाँधी- इर्विन में समझौता हुआ था। गाँधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया। 7 सितम्बर, 1931 को लन्दन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया।

इसमें गाँधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। गाँधीजी का कहना था कि उनकी पार्टी भारत का प्रतिनिधित्व करती है, परन्तु उनके इस दावे को तीन पार्टियों ने चुनौती दी थी। इस सम्मेलन में भाग ले रहे मुस्लिम लीग के जिन्ना का कहना था कि उनकी पार्टी मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हित में काम करती है। अनेक रियासतों के प्रतिनिधि भी इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए। उनका दावा था कि कांग्रेस का उनके नियन्त्रण वाले भू-भाग पर कोई प्रभुत्व नहीं है। तीसरी चुनौती डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर की ओर से थी। उनका कहना था कि गांधीजी व कांग्रेस पार्टी निचली जातियों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।

(3) तृतीय गोलमेज सम्मेलन-जिन दिनों भारत में महात्मा गाँधी ने सशक्तता के साथ सविनय अवज्ञा आन्दोलन चला रखा था उसी समय लन्दन में तृतीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इंग्लैण्ड की एक मुख्य लेबर पार्टी ने इसमें भाग नहीं लिया। भारत में कांग्रेस पार्टी ने भी इस सम्मेलन का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था। वे भारतीय प्रतिनिधि जो सिर्फ अंग्रेजों की हाँ में हाँ मिलाते थे, ने इस सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में लिये गये निर्णयों को श्वेत-पत्र के रूप में प्रकाशित किया गया। इस श्वेत-पत्र के आधार पर 1935 का भारत सरकार अधिनियम पारित किया गया। कांग्रेस के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।

प्रश्न 3.
असहयोग आन्दोलन एक तरह का प्रतिरोध कैसे था? उल्लेख कीजिए।
अथवा
असहयोग आन्दोलन के कारणों का मूल्यांकन कीजिए।
अथवा
महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रमों एवं प्रगति पर एक निबन्ध लिखिए।
अथवा
महात्मा गाँधी द्वारा संचालित असहयोग आन्दोलन कब आरम्भ हुआ? इसके उद्देश्य तथा कार्यक्रम क्या थे? यह आन्दोलन क्यों समाप्त हुआ?
अथवा
असहयोग आन्दोलन पर एक लेख लिखिए। उत्तर- असहयोग आन्दोलन के कारण 1920 में गांधीजी द्वारा संचालित असहयोग आन्दोलन के निम्नलिखित कारण थे –
(1) रॉलेट एक्ट 1919 में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट पारित किया जिसके अनुसार किसी भी भारतीय को बिना मुकदमा चलाए जेल में बन्द किया जा सकता था। गाँधीजी ने देशभर में ‘रॉलेट एक्ट’ के विरुद्ध एक अभियान चलाया। पंजाब जाते समय गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया।

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(2) जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड-13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक सार्वजनिक सभा आयोजित की गई। जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दिया। इस बर्बरतापूर्ण कार्यवाही में 400 लोग मारे गए तथा सैकड़ों लोग घायल हो गए।

(3) खिलाफत आन्दोलन-गाँधीजी ने हिन्दुओं और मुसलमानों में एकता उत्पन्न करने के लिए खिलाफत आन्दोलन का समर्थन किया। असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रमों के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें सम्मिलित थीं –

  • सरकारी स्कूलों तथा कॉलेजों का बहिष्कार करना
  • सरकारी उपाधियों तथा अवैतनिक पदों का बहिष्कार करना
  • सरकारी न्यायालयों का बहिष्कार करना
  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना तथा स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना।

आन्दोलन की प्रगति ( असहयोग आन्दोलन प्रतिरोध के रूप में ) – कलकत्ता अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन के प्रस्ताव को बहुमत से स्वीकार कर लिया गया। हजारों विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों तथा कॉलेजों का बहिष्कार किया तथा वकीलों ने अदालत जाने मना कर दिया। अनेक नगरों में हड़तालें हुई। 1921 में 396 हड़तालें हुई जिनमें 6 लाख श्रमिक शामिल थे। उत्तरी आंध्र के पहाड़ी लोगों ने वन्य कानूनों का उल्लंघन किया। अवध के किसानों ने कर नहीं चुकाया। स्वदेशी का प्रचार हुआ और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया गया। सरकार ने अनेक कांग्रेसी नेताओं को जेलों में बन्द कर दिया।

चौरी-चौरा काण्ड-5 फरवरी, 1922 को उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी-चौरा नामक गाँव में पुलिस ने कांग्रेस के सत्याग्रहियों पर गोलियाँ चलाई तो भीड़ क्रुद्ध हो उठी और उसने एक थाने में आग लगा दी। इसके फलस्वरूप एक थानेदार तथा 21 सिपाहियों की मृत्यु हो गई। चौरी-चौरा काण्ड से गाँधीजी को प्रबल आघात पहुँचा और उन्होंने असहयोग आन्दोलन को स्थगित कर दिया। 10 मार्च, 1922 को सरकार ने गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया और न्यायाधीश ग्रूमफील्ड ने उन्हें 6 वर्ष के कारावास की सजा दी।

असहयोग आन्दोलन का महत्त्व एवं प्रभाव –
(1) सकारात्मक आन्दोलन लुई फिशर के अनुसार असहयोग भारत और गाँधीजी के जीवन के एक युग का ही नाम हो गया। असहयोग शान्ति की दृष्टि से नकारात्मक किन्तु प्रभाव की दृष्टि से बहुत सकारात्मक था। इसके लिए प्रतिवाद, परित्याग तथा स्व-अनुशासन आवश्यक थे यह स्वशासन के लिए एक प्रशिक्षण था।

(2) अंग्रेजी शासन की नींव हिलना-1857 के विद्रोह के बाद पहली बार असहयोग आन्दोलन के परिणामस्वरूप अंग्रेजी शासन की नींव हिल गई।

(3) जन-आन्दोलन-असहयोग आन्दोलन ने राष्ट्रीय आन्दोलन को व्यापक एवं जनप्रिय बना दिया।

(4) राष्ट्रीयता का प्रसार असहयोग आन्दोलन ने देशवासियों में राष्ट्रीयता का प्रसार किया 1922 तक गाँधीजी ने भारतीय राष्ट्रवाद को एकदम परिवर्तित कर दिया।

प्रश्न 4.
ब्रिटिश सरकार ने गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन क्यों किया? काँग्रेस का इन सम्मेलनों के प्रति क्या रुख रहा? इनका क्या परिणाम निकला?
अथवा
गोलमेज सम्मेलन क्यों आयोजित किये गए? इनके कार्यों की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
पृष्ठभूमि भारत में लागू किए जाने वाले संवैधानिक सुधारों के बारे में चर्चा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने तीन बार गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन लंदन में किया। लेकिन इन सम्मेलनों का कोई भी सार्थक परिणाम नहीं निकला।

(1) प्रथम गोलमेज सम्मेलन – भारतीय राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से 1930 में प्रथम गोलमेज सम्मेलन का लंदन में आयोजन किया गया। इसमें ब्रिटिश सरकार के समर्थक मुस्लिम लीग तथा हिन्दू महासभा के प्रतिनिधि भी शामिल हुए लेकिन कॉंग्रेस का कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ क्योंकि उस समय सविनय अवज्ञा आन्दोलन चल रहा था। आधारभूत मुद्दों पर किसी सहमति के बिना 1931 में यह सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। कॉंग्रेस की गैरहाजिरी में यह सम्मेलन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।

(2) द्वितीय गोलमेज सम्मेलन – 1931 के आखिर में दूसरा गोलमेज सम्मेलन लन्दन में आयोजित किया गया। इसमें गाँधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। इस सम्मेलन में गांधीजी ने मुस्लिम लीग की पृथक् निर्वाचिका की माँग का विरोध करते हुए पूर्ण स्वराज्य की माँग की। गाँधीजी का कहना था कि उनका दल सम्पूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व करता है।

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परन्तु मुस्लिम लीग, राजे- रजवाड़ों तथा डॉ. अम्बेडकर ने गाँधीजी के दावे को चुनौती दी। मुस्लिम लीग के अनुसार कांग्रेस मुसलमानों का, राजे- रजवाड़ों के अनुसार कांग्रेस देशी रियासतों का तथा डॉ. अम्बेडकर के अनुसार कांग्रेस दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इस प्रकार दूसरा सम्मेलन भी किसी परिणाम पर नहीं पहुँचा और गाँधीजी को खाली हाथ लौटना पड़ा।

(3) तृतीय गोलमेज सम्मेलन राजनीतिक स्थिति की समीक्षा के लिए तथा संवैधानिक सुधार लागू करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1932 में तीसरा गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। काँग्रेस ने इसमें भाग नहीं लिया। इसमें इंग्लैण्ड के एक मुख्य राजनीतिक दल लेबर पार्टी ने भी भाग नहीं लिया। इसमें कुछ ऐसे भारतीय प्रतिनिधि सम्मिलित हुए जो अंग्रेजों की हाँ में हाँ मिलाते थे। अन्त में तीनों गोलमेज सम्मेलनों में हुई चर्चाओं के आधार पर ब्रिटिश सरकार ने 1933 में एक श्वेत पत्र जारी किया, जिसके आधार पर 1935 का भारत सरकार का अधिनियम पारित किया गया।

प्रश्न 5.
“भारत छोड़ो आन्दोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ गाँधीजी का तीसरा बड़ा आन्दोलन था।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
क्रिप्स मिशन की विफलता के पश्चात् महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपना तीसरा बड़ा आन्दोलन छेड़ने का फैसला किया। अगस्त, 1942 ई. में शुरू किए गए इस आन्दोलन को ‘अंग्रेज भारत छोड़ो’ के नाम से जाना गया।

भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ करने के कारण –
(i) अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीति- सितम्बर, 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध प्रारम्भ हो गया। महात्मा गाँधी व जवाहरलाल नेहरू दोनों ही हिटलर व नात्सियों के आलोचक थे। तदनुरूप उन्होंने फैसला किया कि यदि अंग्रेज युद्ध समाप्त होने के पश्चात् भारत को स्वतन्त्रता देने पर सहमत हों तो कांग्रेस उनके बुद्ध प्रयासों में सहायता दे सकती है। ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम ने अंग्रेजी साम्राज्यवादी नीति के विरुद्ध आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु प्रोत्साहित किया।

(i) क्रिप्स मिशन की असफलता द्वितीय विश्व युद्ध में कांग्रेस व गाँधीजी का समर्थन प्राप्त करने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमन्त्री विंस्टन चर्चिल ने अपने एक | मन्त्री सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। क्रिप्स के साथ वार्ता में कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि यदि धुरी शक्तियों से भारत की रक्षा के लिए ब्रिटिश शासन कांग्रेस का समर्थन चाहता है तो वायसराय को सबसे पहले अपनी कार्यकारी परिषद् में किसी भारतीय को एक रक्षा सदस्य के रूप में नियुक्त करना चाहिए। इसी बात पर वार्ता टूट गयी। क्रिप्स मिशन की विफलता के पश्चात् गाँधीजी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ करने का फैसला किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारम्भ-9 अगस्त, 1942 ई. को गाँधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ हो गया। अंग्रेजों ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए बड़ी कठोरता से काम लिया। कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया तथा सभाओं, जुलूसों व समाचार-पत्रों पर कठोर प्रतिबन्ध लगा दिए गए। इसके बावजूद देशभर के युवा कार्यकर्ता हड़तालों एवं तोड़फोड़ की कार्यवाहियों के माध्यम से आन्दोलन चलाते रहे। कांग्रेस में जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी सदस्य भूमिगत होकर अपनी गतिविधियों को चलाते रहे।
आन्दोलन का अन्त-अंग्रेजों ने भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रति कठोर रवैया अपनाया फिर भी इस विद्रोह का दमन करने में साल भर से अधिक समय लग गया।

आन्दोलन का महत्त्व भारत छोड़ो आन्दोलन में लाखों की संख्या में आम भारतीयों ने भाग लिया तथा हड़तालों एवं तोड़-फोड़ के माध्यम से आन्दोलन को आगे बढ़ाते रहे। इस आन्दोलन के कारण भारत की ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार यह बात अच्छी तरह जान गई कि जनता में कितना व्यापक असन्तोष है। सरकार समझ गई कि अब वह भारत में ज्यादा दिनों तक शासन नहीं कर पायेगी।

प्रश्न 6.
भारत को स्वतंत्र कराने में गाँधीजी के योगदान का वर्णन कीजिए।’
अथवा
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी के योगदान का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
भारत को स्वतंत्र कराने में गाँधीजी का योगदान भारत को आजादी दिलाने में गाँधीजी की भूमिका मुख्य थी। उन्होंने सत्याग्रह और शान्तिपूर्ण अहिंसा का सहारा लेकर ताकतवर ब्रिटिश साम्राज्य को झुकने पर मजबूर कर दिया। भारत को स्वतंत्र कराने में गांधीजी के योगदान को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है –
(1) भारतीय राष्ट्र के पिता-राष्ट्रवाद के इतिहास में प्रायः एक अकेले व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण के साथ जोड़कर देखा जाता है। महात्मा गाँधी को भारतीय राष्ट्र का ‘पिता’ माना गया है क्योंकि गाँधीजी स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लेने वाले सभी नेताओं में सर्वाधिक प्रभावी और सम्मानित थे।

(2) भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलनों का कुशलतापूर्वक संचालन –

  • असहयोग आन्दोलन – 1920 में गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन चलाया जिसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। उनके कहने पर भारतीयों ने चाहे वे क्लर्क थे, वकील थे या कारीगर थे, सबने अपना काम करना बन्द कर दिया। विद्यार्थियों ने विद्यालय जाना छोड़ दिया। सभी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।
  • सविनय अवज्ञा आन्दोलन – 1930 में गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने नमक कानून तोड़ा जिसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा।
  • भारत छोड़ो आन्दोलन अगस्त – 1942 में गाँधीजी ने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू किया। गाँधीजी ने इसके लिए ‘करो या मरो’ का नारा बुलन्द किया था।

(3) स्वदेशी आन्दोलन – गाँधीजी ने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलनों के अन्तर्गत स्वदेशी आन्दोलन का समर्थन किया।

(4) भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को विशिष्टवर्गीय आन्दोलन से जनांदोलन बनाया-भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गाँधीजी का सबसे बड़ा योगदान राष्ट्रीय आन्दोलन को जन-आन्दोलन में परिणत करने का था। गाँधीजी ने अपनी पहली महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक सभा, जो फरवरी, 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में हुई, में अपने भाषण में मजदूर गरीबों की ओर ध्यान न देने के कारण भारतीय विशिष्ट वर्ग को आड़े हाथों लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी वेशभूषा को गरीब भारतीयों की वेशभूषा के अनुरूप ढाला ताकि गरीब जनता उसे अपने जैसा समझते हुए राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़े इसके अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न धर्मों के बीच सौहार्द बढ़ाने का प्रयास किया।

(5) समाज सुधारक गाँधीजी महान समाज सुधारक भी थे। उनका विश्वास था कि स्वतंत्रता के योग्य बनने के लिए भारतीयों को बाल विवाह और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त होना पड़ेगा। एक मत के भारतीयों को दूसरे मत के भारतीयों के लिए सच्चा संयम लाना होगा और इस प्रकार उन्होंने हिन्दू-मुसलमानों के बीच सौहार्द पर बल दिया। उन्होंने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी के अपनाने तथा खादी पहनने पर बल दिया।

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(6) हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक गाँधीजी हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने साम्प्रदायिक दंगों का घोर विरोध किया और देश में शान्ति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता बनाये रखने के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान कर दिया।

प्रश्न 7.
महात्मा गाँधी केवल राजनीतिक नेता ही नहीं थे, वे एक समाज सुधारक तथा आर्थिक सुधारक भी थे। स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
एक राजनीतिज्ञ के रूप में गांधीजी का महत्त्व तब पता चलता है जब उन्होंने अहिंसक आन्दोलन चलाकर एक साम्राज्यवादी ताकत को हिलाकर रख दिया और देश को आजादी दिलाकर ही दम लिया लेकिन वे एक समाज सुधारक और आर्थिक सुधारक भी थे। यथा –
(1) गाँधीजी एक समाज सुधारक के रूप में- प्रथमतः, गाँधीजी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित की तथा उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए एकजुट किया। इसका उदाहरण खिलाफत आन्दोलन के साथ असहयोग आन्दोलन को जोड़ना था। दूसरे, समाज सुधारक के रूप में उन्होंने जातीय प्रथा का। विरोध किया। उन्होंने यथासम्भव दलितों का उद्धार किया तथा पहली बार अछूतों को हरिजन नाम से संबोधित किया। उनके उद्धार के लिए हरिजन नामक पत्र निकाला। ये छुआछूत के विरुद्ध लड़े तथा सभी वर्गों और धर्मों से सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बनाने पर बल दिया। तीसरे, उन्होंने बाल विवाह, छुआछूत का विरोध किया तथा भारतीयों को मत-मतांतरों के बीच सच्चा संगम लाने पर बल दिया।

(2) आर्थिक सुधारक के रूप में एक आर्थिक सुधारक के रूप में उन्होंने निम्न प्रमुख कार्य किए
(i) आर्थिक स्थिति के सुधार के लिए उन्होंने चरखा चलाने तथा खादी पहनने पर बल दिया जिससे देशी कपड़ा उद्योग को बढ़ावा मिला। गाँवों के विकास और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिन्हें छोटी पूँजी से परिवार के सदस्य घर से चलाकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते थे। उन्होंने मशीनीकरण की नीति का विरोध किया। वे इस बात के विरुद्ध थे कि धन का केन्द्रीकरण केवल कुछ ही लोगों के हाथों में हो जाए।

(ii) उन्होंने अहमदाबाद के मिल मजदूरों को अपना वेतन बढ़वाने के लिए हड़ताल करने को कहा तथा भारत के सभी वर्गों में आर्थिक समानता लाने पर जोर दिया।

(iii) गाँधीजी किसानों के हित के लिए लड़े तथा उनकी रक्षा के लिए स्वयं आगे आए। चंपारन सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह इसके उदाहरण हैं। गाँधीजी के उपर्युक्त कार्यों के आधार पर हम सकते हैं कि गाँधीजी केवल एक राजनीतिक नेता ही नहीं थे अपितु वे समाज सुधारक तथा आर्थिक सुधारक के रूप में भी हमारे सामने आए वे आजादी दिलाने के साथ-साथ देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिति में भी सुधार लाए।

प्रश्न 8.
“1919 तक महात्मा गाँधी ऐसे राष्ट्रवादी के रूप में उभर चुके थे, जिनमें गरीबों के प्रति गहरी सहानुभूति थी।” उदाहरण सहित कथन को सिद्ध कीजिए।
अथवा
भारत में गाँधीजी द्वारा किए गए शुरुआती सत्याग्रहों का वर्णन कीजिए। ये सत्याग्रह गाँधीजी के राजनीतिक जीवन में कहाँ तक सहायक हुए ?
अथवा
चम्पारन सत्याग्रह का संक्षिप्त विवरण दीजिये।
उत्तर:
1915 में दक्षिणी अफ्रीका से भारत लौटने के बाद गाँधीजी ने प्रारम्भ में कई सत्याग्रह किए जिनका विवरण इस प्रकार है –
(1) चम्पारन सत्याग्रह – गाँधीजी ने अपना प्रथम सत्याग्रह 1917 में बिहार के चंपारन नामक स्थान पर किया। वहाँ पर जो किसान नील की खेती करते थे उन पर यूरोपीय निलहे बहुत अत्याचार करते थे। उन किसानों ने गाँधीजी को अपनी समस्या बताई। इस पर गाँधीजी चंपारन पहुँचे। अन्त में सरकार ने किसानों की शिकायतों को दूर करने हेतु कदम उठाये।

(2) खेड़ा सत्याग्रह – 1918 में गुजरात के खेड़ा जिले में फसल खराब होने से किसानों की हालत खराब हो गई। किसानों ने लगान देने से मना कर दिया। गाँधीजी ने उनकी बात का समर्थन किया। यहाँ भी सरकार को झुकना पड़ा और यह निर्णय लिया गया कि जो किसान लगान देने में सक्षम हैं उन्हें ही जमा कराने का आदेश दें। अतः कुछ समय बाद यह आन्दोलन खत्म हो गया।

(3) अहमदाबाद के मिल मजदूरों का संघर्ष – 1918 में अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों ने अपने वेतन को | बढ़वाने के लिए मिल मालिकों से कहा लेकिन मिल- मालिकों ने मना कर दिया। इस पर मजदूरों ने हड़ताल कर दी। गाँधीजी ने मिल मजदूरों की माँग को जायज बताया और अनशन शुरू कर दिया। अन्त में मिल मालिकों ने उनकी बात मान ली। गाँधीजी ने अपना अनशन समाप्त कर दिया तथा हड़ताल भी खत्म हो गई।

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(4) सर्वसाधारण के प्रति सहानुभूति-गाँधीजी की आम भारतीयों के प्रति गहरी सहानुभूति थी वे किसानों के शोषण से दुःखी थे। फरवरी, 1916 में उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कहा था कि “हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकती है, न तो वकील, न डॉक्टर, न ही जमींदार इसे सुरक्षित रख सकते हैं।” गाँधीजी का कहना था कि हमारे लिए स्वशासन या स्वराज का तब तक कोई अर्थ नहीं है, जब तक हम किसानों से उनके श्रम का लगभग सम्पूर्ण लाभ स्वयं या अन्य लोगों को ले लेने की अनुमति देते रहेंगे।

(5) रोलेट एक्ट सत्याग्रह 1919 में गाँधीजी ने ‘रोलेट एक्ट’ के विरुद्ध सम्पूर्ण देश में सत्याग्रह चलाया। दिल्ली और अनेक शहरों में लोगों ने सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया और विशाल जुलूस निकाले पंजाब जाते समय गाँधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अतिरिक्त हजारों कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर दिया गया। उपर्युक्त आन्दोलनों का कुशल नेतृत्व करने के कारण गाँधीजी भारत के राजनीतिक आकाश पर छा गये और एक जननेता के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। 1919 तक गाँधीजी ऐसे राष्ट्रवादी के रूप में उभर चुके थे, जिनमें गरीबों के प्रति गहरी सहानुभूति थी।

प्रश्न 9.
1930 में गाँधीजी द्वारा संचालित सविनय अवज्ञा आन्दोलन का वर्णन कीजिये। यह आन्दोलन कहाँ तक सफल हुआ?

अथवा
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का वर्णन कीजिये। इसका हमारे स्वतन्त्रता संग्राम पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आन्दोलन गाँधीजी के नेतृत्व में संचालित सविनय अवज्ञा आन्दोलन के निम्नलिखित कारण थे –
1. साइमन कमीशन – 3 फरवरी, 1928 को साइमन कमीशन जब बम्बई पहुँचा तो उसका प्रबल विरोध हुआ क्योंकि इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था। सरकार की दमनकारी नीति के कारण जनता में तीव्र आक्रोश व्याप्त था।

2. पूर्ण स्वराज्य की माँग-दिसम्बर, 1929 में पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर में कॉंग्रेस का अधिवेशन शुरू हुआ। 31 दिसम्बर, 1929 को अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पास किया गया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन (दांडी यात्रा) का प्रारम्भ स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने के तुरन्त बाद गाँधीजी ने घोषणा की कि वे ब्रिटिश भारत के सर्वाधिक घृणित ‘नमक- कानून’ को तोड़ने के लिए एक यात्रा का नेतृत्व करेंगे। नमक पर राज्य का एकाधिपत्य बहुत अलोकप्रिय था। लोगों को दुकानों से ऊँचे दाम पर नमक खरीदने के लिए बाध्य किया जाता था। यह राष्ट्रीय सम्पदा के लिए विनाशकारी था। नमक कर लोगों को बहुमूल्य सुलभ ग्राम उद्योग से वंचित करता था।

12 मार्च, 1930 को गाँधीजी ने अपने 78 आश्रमवासियों को साथ लेकर साबरमती आश्रम से दांडी (डाण्डी) नामक स्थान की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने लगभग 200 मील की यात्रा पैदल चलकर 24 दिन में तब की 5 अप्रैल, 1930 को वे दाण्डी पहुँचे और 6 अप्रैल को वहाँ उन्होंने मुट्ठीभर नमक बनाकर कानून का उल्लंघन किया और सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की प्रगति –

  1. देश के विशाल भाग में किसानों ने दमनकारी औपनिवेशिक वन कानूनों का उल्लंघन किया।
  2. कुछ कस्बों में फैक्ट्री कामगार हड़ताल पर चले गये।
  3. वकीलों ने ब्रिटिश अदालतों का बहिष्कार किया।
  4. विद्यार्थियों ने सरकारी शिक्षा संस्थाओं में पढ़ने से इनकार कर दिया।
  5. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना, विदेशी वस्त्रों की होली जलाना तथा स्वदेशी का प्रयोग करना, सविनय अवज्ञा आन्दोलन का एक अन्य कार्यक्रम था।

(1) अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीति- सितम्बर, 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया। कांग्रेस ने अंग्रेजों को युद्ध में समर्थन देने के लिए दो प्रमुख माँगें प्रस्तुत की –

  •  युद्ध की समाप्ति के बाद भारत को स्वतंत्रता प्रदान की जाए।
  • युद्धकाल में केन्द्र में भारतीयों की राष्ट्रीय सरकार का गठन किया जाए। ब्रिटिश सरकार ने इन मांगों को ठुकरा दिया। अन्ततः 1939 में 8 प्रांतों में कॉंग्रेसी मंत्रिमण्डलों ने त्याग पत्र दे दिया और उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय कर लिया।

(2) क्रिप्स मिशन की विफलता – द्वितीय विश्व युद्ध में काँग्रेस का सहयोग प्राप्त करने की दृष्टि से चर्चिल ने अपने एक मंत्री सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। क्रिप्स के साथ वार्ता में कांग्रेस ने इस बात पर जोर दिया कि अगर धुरी शक्तियों से भारत की रक्षा के लिए ब्रिटिश शासन काँग्रेस का समर्थन चाहता है तो वायसराय को सबसे पहले अपनी कार्यकारी परिषद में किसी भारतीय को एक रक्षा सदस्य के रूप में नियुक्त करना चाहिए। इसी बात पर वार्ता टूट गई। क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गाँधीजी ने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आन्दोलन शुरू करने का फैसला लिया। भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारम्भ- 8 अगस्त, 1942 को मुम्बई में काँग्रेस के विशेष अधिवेशन में गाँधीजी का ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पास कर दिया गया।

JAC Class 12 History Important Questions Chapter 13 महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन : सविनय अवज्ञा और उससे आगे

आन्दोलन की प्रगति – सरकार ने भारत छोड़ो आन्दोलन की घोषणा के बाद 9 अगस्त, 1942 को ही गांधीजी, नेहरूजी आदि अनेक प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बावजूद सम्पूर्ण भारत में हड़तालें और सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। काँग्रेस में जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी सदस्य भूमिगत प्रतिरोध गतिविधियों में सबसे ज्यादा सक्रिय थे।
पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में ‘स्वतंत्र’ सरकार (प्रति सरकार) की स्थापना कर दी गई थी।

आन्दोलन का अन्त- अंग्रेजों ने आन्दोलन के प्रति सख्त रवैया अपनाया, फिर भी इस विद्रोह को दबाने में सरकार को सालभर से अधिक समय लगा। भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्त्व और परिणाम इस आन्दोलन के निम्न प्रमुख परिणाम निकले –

(1) भारत में राजनीतिक जागृति- भारत छोड़ो आन्दोलन सही मायने में एक जन-आन्दोलन था जिसमें लाखों आम हिन्दुस्तानी शामिल थे। इसके फलस्वरूप भारत में राजनीतिक जागृति में वृद्धि हुई। अब ब्रिटिश सरकार को पता चल गया कि अब वह भारत में अधिक दिनों तक शासन नहीं कर पाएगी।

(2) राष्ट्रीय आन्दोलन में युवकों का प्रवेश – इस आन्दोलन ने युवाओं को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने अपने कॉलेज छोड़कर जेल का रास्ता अपनाया।

(3) मुस्लिम लीग ने पंजाब व सिन्ध में अपनी पहचान बनाई – इस आन्दोलन के परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग को पंजाब तथा सिन्ध में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

Jharkhand Board JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट Important Questions and Answers.

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बहुचयनात्मक प्रश्न

1. जनता पार्टी के शासनकाल में भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
(क) चौ. देवीलाल
(ख) चौ. चरण सिंह
(ग) मोरारजी देसाई
(घ) ए.बी. वाजपेयी
उत्तर:
(ग) मोरारजी देसाई

2. श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल की घोषणा कब की थी?
(क) 18 जून, 1975
(ख) 25 जून, 1975
(ग) 5 जुलाई, 1975
(घ) 10 जून, 1975
उत्तर:
(ख) 25 जून, 1975

3. भारत में प्रतिबद्ध नौकरशाही तथा प्रतिबद्ध न्यायपालिका की घोषणा को किसने जन्म दिया?
(क) इंदिरा गाँधी
(ख) लालबहादुर शास्त्री
(ग) मोरारजी देसाई
(घ) जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(क) इंदिरा गाँधी

4. समग्र क्रान्ति के प्रतिपादक कौन थे?
(क) जयप्रकाश नारायण
(ख) मोरारजी देसाई
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर:
(क) जयप्रकाश नारायण

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5. निम्न में से नक्सलवादी आन्दोलन से किसका सम्बन्ध है?
(क) सुरेश कलमाड़ी
(ख) चारु मजूमदार
(ग) ममता बैनर्जी
(घ) जयललिता
उत्तर:
(ख) चारु मजूमदार

6. आपातकाल के समय भारत के राष्ट्रपति कौन थे?
(क) ज्ञानी जेलसिंह
(ख) फखरुद्दीन अली अहमद
(ग) आर. वैंकटरमन
(घ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
उत्तर:
(ख) फखरुद्दीन अली अहमद

7. शाह आयोग की स्थापना कब की गई ?
(क) 1977
(ख) 1978
(ग) 1985
(घ) 1980
उत्तर:
(क) 1977

8. 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने कौनसा नारा दिया?
(क) जय जवान जय किसान
(ख) अच्छे दिन
(ग) गरीबी हटाओ
(घ) कट्टर सोच नहीं युवा जोश
उत्तर:
(ग) गरीबी हटाओ

9. आपातकाल का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
(क) अनुच्छेद 350
(ख) अनुच्छेद 42
(ग) अनुच्छेद 351
(घ) अनुच्छेद 352
उत्तर:
(ग) गरीबी हटाओ

10. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार आपातकाल की घोषणा कौन कर सकता है?
(क) राष्ट्रपति
(ख) प्रधानमंत्री
(ग) लोकसभा अध्यक्ष
(घ) राज्यसभा अध्यक्ष
उत्तर:
(क) राष्ट्रपति

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. सामाजिक और सांप्रदायिक गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर सरकार ने आपातकाल के दौरान …………………और ……….. पर प्रतिबंध लगा दिया।
उत्तर:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जमात-ए-इस्लामी

2. …………………और ………………जैसे अखबारों ने प्रेस पर लगी सेंसरशिप का विरोध किया।
उत्तर:
इंडियन एक्सप्रेस, स्टेट्समैन

3. संविधान के 42वें अनुच्छेद में संशोधन करते हुए देश की विधायिका का कार्यकाल 6 से ………………..साल कर दिया गया।
उत्तर:
6

4. वर्तमान स्थिति में अंदरूनी आपातकाल सिर्फ ………………… की स्थिति में लगाया जा सकता है।
उत्तर:
सशस्त्र विद्रोह

5. काँग्रेस पार्टी में टूट के पश्चात् मोरारजी देसाई ……………………. पार्टी में शामिल हुए।
उत्तर:
काँग्रेस (ओ)

6. चौधरी चरण सिंह ने ……………………..पार्टी की स्थापना की।
उत्तर:
लोकदल

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा का पाँचवाँ आम चुनाव किस वर्ष में हुआ था ?
उत्तर:
1971 में।
प्रश्न 2. भारत में आन्तरिक आपातकाल के समय प्रधानमंत्री कौन था ?
उत्तर:
श्रीमती इंदिरा गाँधी।

प्रश्न 3.
बिहार आन्दोलन के प्रमुख नेता कौन थे?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण।

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प्रश्न 4.
1975 में आपातकाल संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत लगाया गया?
अथवा
25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा संविधान के किस अनुच्छेद के तहत की गई?
उत्तर:
अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत।

प्रश्न 5.
आपातकाल लागू करने का तात्कालिक कारण क्या था?
उत्तर:
आपातकाल लागू करने का तात्कालिक कारण था। श्रीमती इन्दिरा गाँधी के निर्वाचन को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अवैध घोषित करना तथा विपक्षी दलों द्वारा उनके इस्तीफे की माँग करना।

प्रश्न 6.
लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक कौंन बना?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण।

प्रश्न 7.
प्रतिबद्ध न्यायपालिका से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रतिबद्ध न्यायपालिका से अभिप्राय है कि न्यायपालिका शासक दल और उसकी नीतियों के प्रति निष्ठावान रहे।

प्रश्न 8.
शाह आयोग का गठन किसलिए किया गया?
उत्तर:
आपातकाल की जाँच हेतु।

प्रश्न 9.
भारत में आपातकाल की जाँच के लिए किस आयोग का गठन किया गया?
उत्तर:
शाह आयोग का।

प्रश्न 10.
1977 के चुनावों में कौनसी पार्टी की करारी हार हुई?
उत्तर:
कांग्रेस पार्टी की।

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प्रश्न 11.
देश के प्रथम गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर:
मोरारजी देसाई।

प्रश्न 12.
1975 में किस नेता ने सेना, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को आह्वान किया कि वे सरकार के अनैतिक व अवैधानिक आदेशों का पालन न करें।
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण ने।

प्रश्न 13.
किस वर्ष नागरिक स्वतन्त्रता एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए संघ का नाम बदल कर नागरिक स्वतन्त्रताओं के लिए लोगों का संघ रख दिया गया?
उत्त
सन् 1980 में।

प्रश्न 14.
1973 में किस न्यायाधीश को तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी करके भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया?
उत्तर:
न्यायाधीश ए. एन. रे।

प्रश्न 15.
केशवानंद भारती मुकदमे का निर्णय कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1973 में।

प्रश्न 16.
किस मुकदमे में संविधान के मूलभूत ढाँचे की धारणा का जन्म हुआ?
उत्तर:
केशवानंद भारती मुकदमा।

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प्रश्न 17.
जनता पार्टी की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1977।

प्रश्न 18.
1977 का चुनाव विपक्ष ने किस नारे से लड़ा?
उत्तर:
लोकतन्त्र बचाओ नारे से।

प्रश्न 19.
आपातकाल की अवधि कब तक रही?
उत्तर;
1975 से 1977 तक।

प्रश्न 20.
1975 में भारत में आपातकाल की घोषणा किसने की थी?
उत्तर:
1975 में भारत में आपातकाल की घोषणा श्रीमती इन्दिरा गाँधी की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने की थी।

प्रश्न 21.
1974 की रेल हड़ताल के प्रमुख नेता कौन थे?
उत्तर
जार्ज फर्नांडिस ।

प्रश्न 22.
1970 के दशक के किन दो वर्षों में कीमतों में अधिक वृद्धि हुई?
उत्तर:
1973 और 1974 के दो वर्षों में।

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प्रश्न 23.
1974 के बिहार आन्दोलन का प्रमुख नारा क्या था?
उत्तर:
” सम्पूर्ण क्रान्ति अब नारा है— भावी इतिहास हमारा है। ”

प्रश्न 24.
जनता पार्टी के पतन का कोई एक कारण बताएँ।
उत्तर:
जनता पार्टी की आन्तरिक गुटबाजी|

प्रश्न 25.
1977 के चुनावों में जनता पार्टी को कुल कितनी सीटें प्राप्त हुईं?
उत्तर:
कुल 295 सीटें प्राप्त हुईं?

प्रश्न 26.
1977 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को कितनी सीटें प्राप्त हुईं?
उत्तर:
कुल 154 सीटें मिलीं।

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प्रश्न 27.
प्रेस सेंसरशिप से आप क्या समझते हैं?
अथवा
प्रेस सेंसरशिप क्या है?
उत्तर:
प्रेस सेंसरशिप के अन्तर्गत अखबारों को कोई भी खबर छापने से पहले उसकी अनुमति सरकार से लेना अनिवार्य है।

प्रश्न 28.
अनुच्छेद 352 क्या है?
उत्तर:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत देश में आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। 1962, 1971 एवं 1975 में की गई आपात की घोषणा अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत ही की गई थी।

प्रश्न 29.
शाह आयोग की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
शाह आयोग की स्थापना आपातकाल के दौरान की गई कार्यवाही तथा सत्ता के दुरुपयोग, अतिचार और कदाचार के विविध पहलुओं की जाँच करने के लिए की गई।

प्रश्न 30.
1977 में स्वतन्त्रता से सम्बन्धित किस संगठन का निर्माण हुआ?
उत्तर:
1977 में स्वतन्त्रता से सम्बन्धित नागरिक स्वतन्त्रता एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए लोगों के संघ का निर्माण हुआ।

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प्रश्न 31.
किस भारतीय नेता ने वचनबद्ध नौकरशाही एवं वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा को जन्म दिया?
उत्तर:
श्रीमती इंदिरा गाँधी ने वचनबद्ध नौकरशाही एवं वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा का प्रतिपादन किया।

प्रश्न 32.
1980 के मध्यावधि चुनाव क्यों करवाने पड़े?
उत्तर:
जनता पार्टी की सरकार की अक्षमता एवं अस्थिरता के कारण 1980 के मध्यावधि चुनाव करवाने पड़े।

प्रश्न 33.
शाह आयोग के अनुसार निवारक नजरबंदी के कानून के तहत कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?
उत्तर:
शाह आयोग के अनुसार एक लाख ग्यारह हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

प्रश्न 34.
जनता पार्टी के किन्हीं चार प्रमुख नेताओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
जनता पार्टी के चार प्रमुख नेता थे। मोरारजी देसाई, चरणसिंह, जयप्रकाश नारायण, सिकन्दर बख्त।

प्रश्न 35.
समग्र क्रान्ति से क्या अभिप्राय है? इसके प्रतिपादक कौन थे?
उत्तर:
समग्र क्रान्ति का अर्थ है चारों तरफ परिवर्तन। इसके प्रतिपादक जयप्रकाश नारायण थे।

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प्रश्न 36.
जयप्रकाश नारायण की समग्र क्रान्ति के चार पहलू कौन-कौनसे हैं?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण की समग्र क्रान्ति के चार पहलू हैं। संघर्ष, निर्माण, प्रचार, संगठन।

प्रश्न 37.
निवारक नजरबंदी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
निवारक नजरबंदी अधिनियम के अंतर्गत सरकार उन लोगों को हिरासत में ले सकती है जिन पर भविष्य में अपराध करने की आशंका होती है।

प्रश्न 38.
आपातकाल के विरोध का प्रतीक कौन बन गया था?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण।

प्रश्न 39.
रेल हड़ताल कब हुई थी?
उत्तर:
1974

प्रश्न 40.
किस हिंदी लेखक ने आपातकाल के विरोध में पद्मश्री की पदवी लौटा दी?
उत्तर:
फणीश्वरनाथ ‘रेणु’।

प्रश्न 41.
1975 के आपातकाल की वजह क्या बताई गई?
उत्तर:
अंदरूनी गड़बड़ी।

प्रश्न 42.
1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी और संजय गाँधी ने चुनाव किस क्षेत्र से लड़े?
उत्तर:
1977 के चुनाव में इंदिरा रायबरेली से तथा संजय गाँधी अमेठी से चुनाव लड़े।

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प्रश्न 43.
1971 के चुनाव में काँग्रेस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर:
353

प्रश्न 44.
1974 के बिहार आंदोलन का नारा क्या था?
उत्तर:
सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है भावी इतिहास हमारा है।

प्रश्न 45.
1974 के मार्च महीने में बिहार के छात्रों द्वारा आंदोलन क्यों छेड़ा गया ?
उत्तर:
1974 के मार्च महीने में बढ़ती हुई कीमतों, खाद्यान्न के अभाव, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार के छात्रों ने आंदोलन छेड़ा।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1977 के चुनावों में कौन-कौनसी पार्टियाँ विजयी रहीं?
उत्तर:
1977 के लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी विजयी रही। इस पार्टी की सरकार में मोरारजी देसाई भारत के प्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री बने। जनता पार्टी और उसके साथी दलों को लोकसभा की कुल 542 सीटों में से 330 सीटें मिलीं। खुद जनता पार्टी अकेले 295 सीटों पर विजयी रही और उसे स्पष्ट बहुमत मिला।

प्रश्न 2.
आपातकाल के कोई दो कारण बताइये।
उत्तर:
आपातकाल के कारण है।

  1. आंतरिक गड़बड़ी के आधार पर 1975 में आपातकाल घोषित किया गया।
  2. श्रीमती गाँधी के चुनावों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित करना तथा विपक्षी दलों द्वारा श्रीमती गाँधी से इस्तीफे की माँग करना।

प्रश्न 3.
जयप्रकाश नारायण की समग्र क्रान्ति पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण के अनुसार समग्र क्रान्ति का अर्थ है। चारों तरफ परिवर्तन। जयप्रकाश नारायण ने समग्र क्रान्ति के चार पहलू बताये निर्माण, प्रचार संगठन और संघर्ष वर्तमान स्थिति के सम्बन्ध में उनका मत था कि हमें निर्माण कार्य पर ध्यान देना होगा। युवा वर्ग दहेज, जाति-भेद, अस्पृश्यता, सम्प्रदायवाद आदि के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करें।

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प्रश्न 4.
1974 की रेल हड़ताल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1974 में रेल की सबसे बड़ी और राष्ट्रव्यापी हड़ताल हुई। रेलवे कर्मचारियों के संघर्ष से संबंधित राष्ट्रीय समन्वय समिति ने जॉर्ज फर्नान्डिस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों की एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। बोनस और सेवा से जुड़ी शर्तों के संबंध में अपनी माँगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए हड़ताल का यह आह्वान किया गया था। सरकार इन माँगों के खिलाफ थी। ऐसे में भारत के इस सबसे बड़े सार्वजनिक उद्यम के कर्मचारी 1974 के मई महीने में हड़ताल पर चले गए।

प्रश्न 5.
वचनबद्ध न्यायपालिका से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वचनबद्ध न्यायपालिका: ऐसी न्यायपालिका जो एक दल विशेष या सरकार विशेष के प्रति वफादार हो तथा उसके निर्देशों एवं आदेशों के अनुसार ही चले, उसे वचनबद्ध न्यायपालिका कहा जाता है।

प्रश्न 6.
भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतन्त्रता हेतु क्या-क्या प्रावधान किये गये हैं?
उत्तर:
न्यायपालिका की स्वतन्त्रता हेतु संवैधानिक उपबन्ध निम्न हैं।

  1. न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  2. न्यायाधीशों की योग्यता का संविधान में वर्णन किया गया है।
  3. न्यायाधीश एक निश्चित आयु पर सेवानिवृत्त होते हैं।
  4. न्यायाधीशों को केवल महाभियोग द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है।

प्रश्न 7.
बिहार आन्दोलन क्या था?
उत्तर:
बिहार आन्दोलन:
बिहार आन्दोलन सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाया गया। जयप्रकाश नारायण ने इसे पूर्ण या व्यापक क्रान्ति भी कहा है। जयप्रकाश ने 1975 में बिहार के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि बिहार आन्दोलन का उद्देश्य समाज एवं व्यक्ति के सभी पक्षों में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन लाना

प्रश्न 8.
गुजरात आन्दोलन 1974 को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1974 के जनवरी माह में गुजरात के छात्रों ने खाद्यान्न, खाद्य तेल तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती हुई कीमत तथा उच्च पदों पर जारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया। इस आन्दोलन में बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ भी शरीक हो गईं। फलतः गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।

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प्रश्न 9.
1977 के चुनावों में जनता पार्टी की जीत के कोई दो कारण लिखिए।
अथवा
1977 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की पराजय के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1977 में जनता पार्टी की जीत व कांग्रेस की हार के कारण निम्न हैं।

  1. इन्दिरा गाँधी की घटती लोकप्रियता: श्रीमती गाँधी द्वारा की गई आपातकाल की घोषणा से उनकी लोकप्रियता घट गई थी। इससे कांग्रेस की हार हुई
  2. जयप्रकाश नारायण का व्यक्तित्व: जयप्रकाश नारायण इस दौर के सबसे करिश्माई व्यक्तित्व थे। उन्हें अपार जन समर्थन प्राप्त था। जनता पार्टी को जिताने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

प्रश्न 10.
संक्षेप में बताइए कि 1975-76 के 18 माह के आपातकाल के दौरान क्या-क्या हुआ था?
उत्तर:
इंदिरा सरकार ने गरीबों के हित के लिए बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की और उसे तेजी से लागू करने का प्रयास किया। इस कार्यक्रम में भूमि सुधार, भू-पुनर्वितरण, खेतीहर मजदूरों के पारिश्रमिक पर पुनर्विचार, प्रबंधन में कामगारों की भागीदारी, बंधुआ मजदूरी की समाप्ति इत्यादि मामले शामिल थे। देश के बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया। प्रेस पर कई तरह की पाबंदी लगाई। प्रेस सेंसरशिप का बड़ा ढाँचा तैयार किया । झुग्गी-झोंपड़ियों को हटा दिया गया। इस काल के दौरान पुलिस की यातनाएँ और पुलिस हिरासत में यातनाएँ दी गईं। अनिवार्य रूप से नसबंदी के कार्यक्रम चलाए गए।

प्रश्न 11.
नागरिक स्वतन्त्रता के संगठनों की किन्हीं दो समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. प्रायः नागरिक स्वतन्त्रता के संगठनों को राष्ट्रविरोधी कहकर इनकी आलोचना की जाती है।
  2. कुछ तथाकथित ऐसे समाज सुधार भी इन संगठनों से जुड़ गए हैं, जिनके लिए यह केवल एक व्यवसाय है।

प्रश्न 12.
चारू मजूमदार कौन थे?
उत्तर:
चारू मजूमदार:
चारु मजूमदार एक क्रान्तिकारी समाजवादी नेता थे। उनका जन्म 1918 में हुआ। उन्होंने सी. पी. आई. पार्टी छोड़कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की स्थापना की। यह पार्टी नक्सलवादी आन्दोलन की प्रेरणास्रोत बनी। वे क्रान्तिकारी हिंसा के समर्थक थे।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 6 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

प्रश्न 13.
लोकनायक जयप्रकाश नारायण का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जन्म 1902 में हुआ। उन्होंने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की । उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया । स्वतन्त्रता के बाद उन्होंने नेहरू मन्त्रिमण्डल में शामिल होने से मना किया। वे बिहार आन्दोलन के प्रमुख नेता थे। 1979 में उनकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 14.
जगजीवन राम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जगजीवन राम: जगजीवन राम भारत के महान् स्वतन्त्रता सेनानी और बिहार राज्य के उच्चकोटि के कांग्रेसी नेता थे। इनका जन्म 1908 में हुआ। ये स्वतन्त्र भारत के पहले केंद्रीय मंत्रिमण्डल में श्रम मंत्री बने। 1952 से 1977 तक उन्होंने अनेक मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। वे देश की संविधान सभा के सदस्य थे। वे 1952 से लेकर मृत्युपर्यन्त तक सांसद रहे। 1977 से 1979 तक देश के उपप्रधानमंत्री पद पर रहे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन दलितों की सेवा में बिताया और उनकी सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते थे। 1986 में उनका निधन हो गया।

प्रश्न 15.
चौधरी चरणसिंह के जीवन पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
चौधरी चरणसिंह: चौधरी चरणसिंह का जन्म 1902 में हुआ। वे महान् स्वतन्त्रता सेनानी और प्रारम्भ में उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। वे ग्रामीण एवं कृषि विकास की नीति और कार्यक्रमों के कट्टर समर्थक थे। 1967 में कांग्रेस पार्टी को छोड़कर उन्होंने भारतीय क्रान्ति दल का गठन किया। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने वे जयप्रकाश के क्रांति आन्दोलन से जुड़े और 1977 में जनता पार्टी के संस्थापकों में से एक थे। 1977 से 1979 तक वे भारत के उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री रहे। उन्होंने लोक दल की स्थापना की। वे कुछ महीनों के लिए जुलाई, 1979 से जनवरी, 1980 के बीच भारत के प्रधानमंत्री रहे। चौधरी चरणसिंह का निधन 1987 में हुआ।

प्रश्न 16.
मोरारजी देसाई का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मोरारजी देसाई: मोरारजी देसाई एक महान् स्वतन्त्रता सेनानी और गांधीवादी नेता थे। इनका जन्म 1896 में हुआ। वे बम्बई (वर्तमान में मुम्बई ) राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 1966 में कांग्रेस संसदीय पार्टी का नेतृत्व सम्भाला। वे 1967-1969 तक देश के उपप्रधानमंत्री रहे । वे कांग्रेस पार्टी में सिंडिकेट के एक प्रमुख सदस्य थे। बाद में जनता पार्टी के द्वारा प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए और वे देश में पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1977 से 1979 के मध्य लगभग 18 महीने इस पद पर कार्य किया। 1995 में उनका देहान्त हो गया।

प्रश्न 17.
प्रतिबद्ध नौकरशाही पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रतिबद्ध नौकरशाही: प्रतिबद्ध नौकरशाही का अर्थ है कि नौकरशाही किसी विशिष्ट राजनीतिक दल के सिद्धान्तों एवं नीतियों से बंधी हुई रहती है और उस दल के निर्देशन में ही कार्य करती है। प्रतिबद्ध नौकरशाही निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र होकर कार्य नहीं करती। इसका कार्य किसी दल विशेष की योजनाओं को बिना कोई प्रश्न उठाए आँखें मूंद कर लागू करना होता है। लोकतान्त्रिक देशों में नौकरशाही प्रतिबद्ध नहीं होती। परन्तु साम्यवादी देशों में जैसे कि चीन में वचनबद्ध नौकरशाही पायी जाती है। भारत में प्रतिबद्ध नौकरशाही से आशय किसी दल के सिद्धान्तों के प्रति वचनबद्ध न होकर संविधान के प्रति वचनबद्धता ह ।

प्रश्न 18.
भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा का उदय कैसे हुआ?
उत्तर:
भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका का उदय: केशवानन्द भारती मुकदमे की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय की एक 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने की। 13 में से 9 न्यायाधीशों ने यह निर्णय दिया कि संसद मौलिक अधिकारों सहित संविधान में संशोधन कर सकती है, परन्तु संविधान के मूलभूत ढाँचे में परिवर्तन नहीं कर सकती। इस निर्णय से सरकार एवं न्यायपालिका में मतभेद बढ़ गए, क्योंकि 1973 में सरकार का नेतृत्व श्रीमती इंदिरा गाँधी कर रही थीं। अतः यह विवाद श्रीमती गांधी एवं न्यायालय के बीच हुआ जिसमें जीत न्यायालय की हुई क्योंकि न्यायालय ने संसद की संविधान में संशोधन करने की शक्ति को सीमित कर दिया। इसी कारण श्रीमती गाँधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा को आगे बढ़ाया। 1975 में आपातकाल के समय वचनबद्ध न्यायपालिका का सिद्धान्त कार्यपालिका का सिद्धान्त बन गया।

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प्रश्न 19.
भारत में वचनबद्ध (प्रतिबद्ध ) न्यायपालिका के लिए सरकार द्वारा प्रयोग किये गये किन्हीं तीन उपायों का वर्णन करें।
अथवा
भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा को उदाहरण सहित समझाइये
उत्तर:
भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका के उदाहरण- भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं।

  1. न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी: श्रीमती गाँधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति में तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करके श्री ए. एन. रे को सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
  2. न्यायाधीशों का स्थानान्तरण: श्रीमती गाँधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों के स्थानान्तरण का सहारा लिया। उन्होंने 1981 में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश इस्माइल को केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाकर भेजा।
  3. अन्य पदों पर नियुक्तियाँ: सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में से उन्हें राज्यपाल, राजदूत, मन्त्री या किसी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो सरकार के प्रति वफादार थ।

प्रश्न 20.
उन कारकों का उल्लेख कीजिए जिनके कारण पिछड़े राज्यों में नक्सली आन्दोलन हुआ।
उत्तर:

  1. बंधुआ मजदूरी।
  2. जमींदारों द्वारा शोषण।
  3. बाहरी लोगों द्वारा संसाधनों का शोषण।

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प्रश्न 21.
भारत के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आप आपातकाल की आलोचना किन आधारों पर करते हैं?
अथवा
भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल के कोई चार दुष्प्रभाव बताइये।
उत्तर:
भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल के दुष्प्रभाव: भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल के निम्नलिखित दुष्प्रभाव पड़े; जिनके कारण हम आपातकाल की आलोचना करते हैं।

  1. लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का ठप होना- आपातकाल में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार के विरोध करने की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को ठप कर दिया गया।
  2. निवारक नजरबंदी कानून का दुरुपयोग – आपातकाल में निवारक नजरबंदी कानून का दुरुपयोग करते हुए लगभग 1 लाख 11 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन्हें अपनी गिरफ्तारी की चुनौती का अधिकार भी नहीं दिया गया।
  3. प्रेस पर नियंत्रण: आपातकाल के दौरान सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी।
  4. संविधान का 42वाँ संशोधन: आपातकाल के दौरान ही संविधान का 42वाँ संशोधन पारित हुआ । इसके जरिये संविधान के अनेक हिस्सों में बदलाव किये गये।

प्रश्न 22.
आपातकाल के सबकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आपातकाल के सबक: आपातकाल से भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को निम्न सबक मिले-

  1. विरोधी दलों और मतदाताओं ने जितनी अपनी राजनीतिक जागृति दिखाई, इससे साबित हो गया कि बड़े से बड़ा तानाशाह नेता भी भारत से लोकतन्त्र विदा नहीं कर सकता।
  2. आपातकाल के बाद संविधान में अच्छे सुधार किए गए। अब आपातकाल सशक्त स्थिति में लगाया जा सकता था । ऐसा तभी हो सकता था जब मन्त्रिमण्डल लिखित रूप से राष्ट्रपति को ऐसा परामर्श दे।
  3. आपातकाल में भी न्यायालयों में व्यक्ति के नागरिक अधिकारों की रक्षा करने की भूमिका सक्रिय रहेगी और नागरिक अधिकारों की रक्षा तत्परता से होने लगी।

प्रश्न 23.
जनता पार्टी की सरकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जनता पार्टी की सरकार- जनता पार्टी की सरकार के सम्बन्ध में निम्नलिखित विचार प्रकट किये जा सकते हैं।

  1. 1977 के चुनावों के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार में कोई तालमेल नहीं था। पहले प्रधानमंत्री के पद को लेकर मोरारजी देसाई, चरणसिंह और जगजीवन राम में खींचतान हुई। अंतत: मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।
  2. जनता पार्टी अनेक राजनैतिक दलों का संगठन था। इन दलों में निरन्तर खींचा-तानी बनी रही और यह दल कुछ ही महीनों तक अपनी एकता बनाए रख सका।
  3. इस पार्टी की सरकार के पास एक निश्चित दिशा या दीर्घकालीन कल्याणकारी बहुजनप्रिय कार्यक्रम या सर्वमान्य नेतृत्व या न्यूनतम साध्य कार्यक्रम नहीं था।
  4. 18 मास के पश्चात् मोरारजी देसाई को त्यागपत्र देना पड़ा। 1980 के नए चुनावों में जनता पार्टी की हार हुई और कांग्रेस पुनः सत्ता में आयी।

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प्रश्न 24.
विरोधी दलों के विरोध तथा कांग्रेस की टूट ने आपातकाल की पृष्ठभूमि कैसे तैयार की?
उत्तर:
आपातकाल की पृष्ठभूमि के कारण:

  1. 1967 के चुनावों के बाद कुछ प्रान्तों में विरोधी दलों या संयुक्त विरोधी दलों की सरकार बनी। वे केन्द्र में सत्ता में आना चाहते थे।
  2. कांग्रेस के विपक्ष में जो दल थे उन्हें लग रहा था कि सरकारी प्राधिकार को निजी प्राधिकार मान कर इस्तेमाल किया जा रहा है और राजनीति हद से ज्यादा व्यक्तिगत होती जा रही है।
  3. कांग्रेस टूट से इंदिरा गाँधी और उनके विरोधियों के बीच मतभेद गहरे हो गये थे।
  4. इस अवधि में न्यायपालिका और सरकार के आपसी रिश्तों में भी तनाव आए। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की कई पहलकदमियों को संविधान के विरुद्ध माना सरकार ने न्यायपालिका को प्रगति विरोधी बताया तथा 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्रीमती इन्दिरा गाँधी के चुनाव को अवैध करार दिया था।
  5. जयप्रकाश नारायण समग्र क्रान्ति की बात कर रहे थे। ऐसी सभी घटनाओं ने आपातकाल के लिए पृष्ठभूमि तैयार की।

प्रश्न 25.
“ 1967 के बाद देश की कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के सम्बन्धों में आए तनावों ने आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की थी।” इस कथन को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर;
1967 के बाद भारत में श्रीमती इंदिरा गाँधी एक कद्दावर नेता के रूप में उभरीं और 1973-74 तक उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी लेकिन इस दौर में दलगत प्रतिस्पर्धा कहीं ज्यादा तीखी और ध्रुवीकृत हो चली थी। इस अवधि में न्यायपालिका और सरकार के सम्बन्धों में तनाव आए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की कई पहलकदमियों को संविधान के विरुद्ध माना कांग्रेस पार्टी का मानना था कि अदालत का यह रवैया लोकतन्त्र के सिद्धान्तों और संसद की सर्वोच्चता के विरुद्ध है। कांग्रेस ने यह आरोप भी लगाया कि अदालत एक यथास्थितिवादी संस्था है और यह संस्था गरीबों को लाभ पहुँचाने वाले कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने की राह में रोड़ा अटका रही है।

प्रश्न 26.
आपातकाल के संवैधानिक एवं उत्तर संवैधानिक पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आपातकाल के संवैधानिक एवं उत्तर: संवैधानिक पक्ष- आपातकाल के समय कुछ संवैधानिक एवं उत्तर संवैधानिक पक्ष भी सामने आए। श्रीमती गांधी ने संविधान में 39वाँ संवैधानिक संशोधन किया। इस संशोधन द्वारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं स्पीकर के चुनाव से सम्बन्धित मुकदमों की सुनवाई की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति समाप्त कर दी गई।

इस संशोधन को पास करने का मुख्य उद्देश्य श्रीमती गाँधी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय से राहत दिलाना था।  विरोधी पक्ष ने 39 वें संशोधन को संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध बताया परन्तु उच्च न्यायालय की पीठ के पाँच में से चार न्यायाधीशों ने 39वें संशोधन को वैध ठहराया तथा इस संशोधन के आधार पर श्रीमती गाँधी के निर्वाचन को पूर्ण रूप से वैध ठहराया।

प्रश्न 27.
बिहार आन्दोलन की घटनाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बिहार आन्दोलन: बिहार आन्दोलन प्रशासन में भ्रष्टाचारी एवं अयोग्य कर्मचारियों के विरुद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाया गया आन्दोलन था। 1974 में इस आन्दोलन का श्रीगणेश हुआ । इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य समाज एवं व्यक्ति के सभी पक्षों में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन लाना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इस आन्दोलन को एक लम्बे समय तक चलाए जाने पर बल दिया गया था।

बिहार आन्दोलन में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को भी हल करने का प्रयास किया गया। जयप्रकाश नारायण ने बिहार आन्दोलन के चार पक्षों का वर्णन किया  प्रथम संघर्ष, द्वितीय निर्माण, तृतीय प्रचार तथा चतुर्थ संगठन । जयप्रकाश नारायण ने तत्कालीन परिस्थितियों में निर्माण कार्य पर अधिक जोर दिया।

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प्रश्न 28.
आपातकाल के संदर्भ में विवादों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
आपातकाल के संदर्भ में विवाद: आपातकाल के संदर्भ में सरकार तथा विपक्षी दलों के बीच विवाद निम्नलिखित थे।
(अ) आपातकाल लगाना उचित था।: आपातकाल के औचित्य के सम्बन्ध में सरकार के तर्क ये थे:

  1. भारत में लोकतंत्र है और विपक्षी दलों को निर्वाचित शासक दल अपनी नीतियों के अनुसार शासन चलाने दें। देश में लगातार गैर-संसदीय राजनीति से अस्थिरता पैदा होती है।
  2. षडयंत्रकारी ताकतें सरकार के प्रगतिशील कार्यक्रमों में अडंगे लगा रही थीं।
  3. ये ताकतें श्रीमती गाँधी को गैर-संवैधानिक साधनों के बूते सत्ता से बेदखल करना चाहती थी।

(ब) आपातकाल लगाना अनुचित था आपातकाल लगाना अनुचित था। इसके सम्बन्ध में विपक्षी दलों के तर्क येथे

  1. भारत में स्वतंत्रता के आंदोलन से लेकर लगातार भारत में जन आंदोलन का एक सिलसिला रहा है तथा लोकतंत्र में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार के विरोध का अधिकार होना चाहिए। इनके कारण आपातकाल लगाना अनुचित था। किया।
  2. जन आंदोलनों से खतरा देश की एकता और अखंडता को नहीं, बल्कि शासक दल और प्रधानमंत्री को था।
  3. श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने निजी ताकतों को बचाने के लिए संवैधानिक आपातकालीन प्रावधानों का दुरुपयोग अतः आपातकाल लागू करना अनुचित था।

प्रश्न 29.
नक्सली आंदोलन के दो परिणामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नक्सली आंध्रप्रदेश, पश्चिमी बंगाल, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मार्क्सवादी और लेनिनवादी कृषि कार्यकर्ता थे जिन्होंने आर्थिक अन्याय और असमानता के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन किए और किसानों को भूमि का पुनर्वितरण करने की माँग की।

प्रश्न 30.
बिहार में 1974 के छात्र आंदोलन के कारकों को स्पष्ट कीजिए। जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन के लिए क्या शर्तें रखीं?
उत्तर:
बिहार आंदोलन के निम्न कारण थे।
बढ़ती हुई कीमत। सर्वोच्चता के विरुद्ध है। कांग्रेस ने यह आरोप भी लगाया कि अदालत एक यथास्थितिवादी संस्था है और यह संस्था गरीबों को लाभ पहुँचाने वाले कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने की राह में रोड़ा अटका रही है।

प्रश्न 26.
आपातकाल के संवैधानिक एवं उत्तर संवैधानिक पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आपातकाल के संवैधानिक एवं उत्तर: संवैधानिक पक्ष- आपातकाल के समय कुछ संवैधानिक एवं उत्तर संवैधानिक पक्ष भी सामने आए। श्रीमती गांधी ने संविधान में 39वाँ संवैधानिक संशोधन किया। इस संशोधन द्वारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं स्पीकर के चुनाव से सम्बन्धित मुकदमों की सुनवाई की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति समाप्त कर दी गई। इस संशोधन को पास करने का मुख्य उद्देश्य श्रीमती गाँधी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय से राहत दिलाना था। विरोधी पक्ष ने 39 वें संशोधन को संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध बताया परन्तु उच्च न्यायालय की पीठ के पाँच में से चार न्यायाधीशों ने 39वें संशोधन को वैध ठहराया तथा इस संशोधन के आधार पर श्रीमती गाँधी के निर्वाचन को पूर्ण रूप से वैध ठहराया।

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प्रश्न 27.
बिहार आन्दोलन की घटनाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बिहार आन्दोलन: बिहार आन्दोलन प्रशासन में भ्रष्टाचारी एवं अयोग्य कर्मचारियों के विरुद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाया गया आन्दोलन था। 1974 में इस आन्दोलन का श्रीगणेश हुआ। इस आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य समाज एवं व्यक्ति के सभी पक्षों में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन लाना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इस आन्दोलन को एक लम्बे समय तक चलाए जाने पर बल दिया गया था।

बिहार आन्दोलन में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को भी हल करने का प्रयास किया गया। जयप्रकाश नारायण ने बिहार आन्दोलन के चार पक्षों का वर्णन किया प्रथम संघर्ष, द्वितीय निर्माण, तृतीय प्रचार तथा चतुर्थ संगठन। जयप्रकाश नारायण ने तत्कालीन परिस्थितियों में निर्माण कार्य पर अधिक जोर दिया।

प्रश्न 28.
आपातकाल के संदर्भ में विवादों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
आपातकाल के संदर्भ में विवाद: आपातकाल के संदर्भ में सरकार तथा विपक्षी दलों के बीच विवाद निम्नलिखित थे।
(अ) आपातकाल लगाना उचित था आपातकाल के औचित्य के सम्बन्ध में सरकार के तर्क ये थे।

  1. भारत में लोकतंत्र है और विपक्षी दलों को निर्वाचित शासक दल अपनी नीतियों के अनुसार शासन चलाने दें। देश में लगातार गैर-संसदीय राजनीति से अस्थिरता पैदा होती है।
  2. षडयंत्रकारी ताकतें सरकार के प्रगतिशील कार्यक्रमों में अडंगे लगा रही थीं।
  3. ये ताकतें श्रीमती गाँधी को गैर-संवैधानिक साधनों के बूते सत्ता से बेदखल करना चाहती थी।

(ब) आपातकाल लगाना अनुचित था। आपातकाल लगाना अनुचित था। इसके सम्बन्ध में विपक्षी दलों के तर्क येथे

  1. भारत में स्वतंत्रता के आंदोलन से लेकर लगातार भारत में जन आंदोलन का एक सिलसिला रहा है। तथा लोकतंत्र में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार के विरोध का अधिकार होना चाहिए। इनके कारण आपातकाल लगाना अनुचित था।
  2. जन आंदोलनों से खतरा देश की एकता और अखंडता को नहीं, बल्कि शासक दल और प्रधानमंत्री को था।
  3. श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने निजी ताकतों को बचाने के लिए संवैधानिक आपातकालीन प्रावधानों का दुरुपयोग अतः आपातकाल लागू करना अनुचित था।

प्रश्न 29.
नक्सली आंदोलन के दो परिणामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नक्सली आंध्रप्रदेश, पश्चिमी बंगाल, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मार्क्सवादी और लेनिनवादी कृषि कार्यकर्ता थे जिन्होंने आर्थिक अन्याय और असमानता के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन किए और किसानों को भूमि का पुनर्वितरण करने की माँग की।

प्रश्न 30.
बिहार में 1974 के छात्र आंदोलन के कारकों को स्पष्ट कीजिए। जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन के लिए क्या शर्तें रखीं?
उत्तर:
बिहार आंदोलन के निम्न कारण थे।

  1. बढ़ती हुई कीमत।
  2. खाद्यान्न के अभाव।
  3. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार में वृद्धि।

छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुवाई के लिए जयप्रकाश नारायण को बुलावा भेजा। जेपी ने छात्रों का निमंत्रण इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन अहिंसक रहेगा और अपने को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखेगा।

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प्रश्न 31.
गुजरात के छात्र आंदोलन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
गुजरात के छात्र आंदोलन के राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव हुए। इस आंदोलन में बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ भी शरीक हो गईं। इस प्रकार आंदोलन ने विकराल रूप धारण कर लिया। ऐसे में गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। राज्य में दुबारा विधानसभा के चुनाव की माँग उठने लगी।

प्रश्न 32.
जयप्रकाश नारायण द्वारा बिहार के छात्रों के आंदोलन में साथ देने का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण द्वारा बिहार आंदोलन के साथ जुड़ते ही इस आंदोलन ने राजनीतिक चरित्र ग्रहण किया और राष्ट्रव्यापी अपील आई। जीवन के हर क्षेत्र के लोग आंदोलन से जुड़ गए। बिहार की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग की। बिहार की सरकार के खिलाफ लगातार घेराव, बंद और हड़ताल का एक सिलसिला चल पड़ा। इस आंदोलन का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ा।

प्रश्न 33.
आपातकाल की घोषणा के साथ राजनीति में क्या बदलाव आता है?
उत्तर:
आपातकाल की घोषणा के साथ ही शक्तियों के बँटवारे का संघीय ढाँचा व्यावहारिक तौर पर निष्प्रभावी हो जाता है और सारी शक्तियाँ केन्द्र सरकार के हाथ में चली आती हैं। दूसरे, सरकार चाहे तो ऐसी स्थिति में किसी एक अथवा सभी मौलिक अधिकारों पर रोक लगा सकती है अथवा उनमें कटौती कर सकती है।

प्रश्न 34.
आपातकाल के संदर्भ में दो विवादों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. आपातकाल भारतीय राजनीति का सर्वाधिक विवादास्पद प्रकरण है। इसके दो विवाद निम्न हैं।
  2. खाद्यान्न के अभाव।
  3. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार में वृद्धि।

छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुवाई के लिए जयप्रकाश नारायण को बुलावा भेजा। जेपी ने छात्रों का निमंत्रण इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन अहिंसक रहेगा और अपने को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखेगा।

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प्रश्न 31.
गुजरात के छात्र आंदोलन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
गुजरात के छात्र आंदोलन के राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव हुए। इस आंदोलन में बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ भी शरीक हो गईं। इस प्रकार आंदोलन ने विकराल रूप धारण कर लिया। ऐसे में गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। राज्य में दुबारा विधानसभा के चुनाव की माँग उठने लगी।

प्रश्न 32.
जयप्रकाश नारायण द्वारा बिहार के छात्रों के आंदोलन में साथ देने का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
जयप्रकाश नारायण द्वारा बिहार आंदोलन के साथ जुड़ते ही इस आंदोलन ने राजनीतिक चरित्र ग्रहण किया और राष्ट्रव्यापी अपील आई। जीवन के हर क्षेत्र के लोग आंदोलन से जुड़ गए। बिहार की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग की। बिहार की सरकार के खिलाफ लगातार घेराव, बंद और हड़ताल का एक सिलसिला चल पड़ा। इस आंदोलन का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ा।

प्रश्न 33.
आपातकाल की घोषणा के साथ राजनीति में क्या बदलाव आता है?
उत्तर:
आपातकाल की घोषणा के साथ ही शक्तियों के बँटवारे का संघीय ढाँचा व्यावहारिक तौर पर निष्प्रभावी हो जाता है और सारी शक्तियाँ केन्द्र सरकार के हाथ में चली आती हैं। दूसरे, सरकार चाहे तो ऐसी स्थिति में किसी एक अथवा सभी मौलिक अधिकारों पर रोक लगा सकती है अथवा उनमें कटौती कर सकती है।

प्रश्न 34.
आपातकाल के संदर्भ में दो विवादों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आपातकाल भारतीय राजनीति का सर्वाधिक विवादास्पद प्रकरण है। इसके दो विवाद निम्न हैं।

  1. आपातकाल की घोषणा की जरूरत को लेकर विभिन्न दृष्टिकोणों का होना।
  2. सरकार ने संविधान प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करके व्यावहारिक तौर पर लोकतांत्रिक कामकाज को ठप्प कर दिया था।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1975 में आंतरिक आपातकाल क्यों घोषित किया गया? इस दौरान कौनसे परिणाम महसूस किये गये? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
भारतीय सरकार के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के क्या कारण थे? आपातकाल की घोषणा से पूर्व क्या घटनाएँ घटित हुई थीं? कीजिए।
अथवा
1975 में श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लागू किये गये आपातकाल की घोषणा के प्रमुख कारणों का वर्णन
उत्तर:

  • आपातकाल के कारण 1975 में आन्तरिक राष्ट्रीय आपातकाल के प्रमुख ‘कारण निम्नलिखित हैं।
    1. 1971 के युद्ध में अत्यधिक व्यय: 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा बांग्लादेशी शरणार्थियों पर हुए व्यय का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा। इससे लोगों में असन्तोष फैल गया।
    2. कृषिगत तथा औद्योगिक उत्पादन में कमी: 1972-1973 में भारत में फसल भी अच्छी नहीं हुई तथा औद्योगिक उत्पादन में भी निरन्तर कमी आ रही थी। इससे कृषक तथा औद्योगिक कर्मचारियों में असन्तोष बढ़ रहा था।
    3. रेलवे की हड़ताल: 1975 में की गई आपातकालीन घोषणा का एक कारण रेलवे कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल भी थी जिससे यातायात व्यवस्था बिल्कुल खराब हो गई।
    4. बिहार आंदोलन: जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में किया जा रहा बिहार आन्दोलन भी 1975 में आपातकाल की घोषणा का एक प्रमुख कारण था।
    5. श्रीमती गाँधी के चुनाव को अवैध घोषित करना: 1975 के आपातकाल का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनके निर्वाचन को अवैध घोषित करना था। इसके बाद विपक्षी दल श्रीमती गाँधी के त्यागपत्र की माँग करने लगा।
  • आपातकाल के दौरान महंसूस किये गए परिणाम:
    1. आपातकाल की घोषणा की जरूरत को लेकर विभिन्न दृष्टिकोणों का होना।
    2. सरकार ने संविधान प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करके व्यावहारिक तौर पर लोकतांत्रिक कामकाज को ठप्प कर दिया था।
  • आपातकाल के दौरान महसूस किये गए परिणाम:दिया
    1. आपातकाल में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार का विरोध करने की लोकतांत्रिक प्रणाली को ठप्प कर
    2. इस काल में निवारक नजरबंदी कानून का दुरुपयोग किया गया।
    3. इस दौरान सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी।
    4. इस दौरान 42वें संविधान संशोधन के द्वारा संविधान के अनेक हिस्सों में बदलाव किये गये।

प्रश्न 2.
1977 में कांग्रेस पार्टी की पराजय के प्रमुख कारणों का विवेचन कीजिए।
उत्तर;
1977 में कांग्रेस की पराजय के कारण 1977 के चुनावों में कांग्रेस की पराजय के पीछे निम्नलिखित कारण जिम्मेदार रहे।

  1. आपातकाल की घोषणा: श्रीमती गाँधी द्वारा लागू किये गये आपातकाल के विरुद्ध सभी गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दल एकजुट हो गये।
  2. आपातकाल के दौरान अत्याचार: श्रीमती गाँधी ने आपातकाल के दौरान मीसा कानून तथा अनिवार्य नसबंदी के द्वारा लोगों पर अनेक अत्याचार किये। इससे लोगों में कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध असन्तोष पैदा हुआ।
  3. कीमतों में अत्यधिक वृद्धि: श्रीमती गाँधी की सरकार सभी प्रकार के उपाय करके भी कीमतों की वृद्धि को नहीं रोक पा रही थी तथा 1971 के चुनावों में उनके द्वारा दिया गया गरीबी हटाओ का नारा भी दम तोड़ता नजर आ रहा था।
  4. प्रेस पर प्रतिबन्ध: आपातकाल के समय श्रीमती गाँधी ने प्रेस पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इस तरह के प्रतिबन्ध से भी लोगों में असन्तोष था।
  5. कर्मचारियों की दयनीय स्थिति: तत्कालीन समय में वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि से सरकारी कर्मचारियों की दशा खराब होने लगी थी। वे सरकार से नाराज हो गए थे।
  6. जगजीवन राम का त्यागपत्र: आपातकाल के समय जगजीवन राम जैसे श्रीमती गाँधी के वफादार नेता भी उनके साथ नहीं रहे तथा कांग्रेस एवं सरकार से त्यागपत्र दे दिया।

प्रश्न 3.
1977 के लोकसभा चुनावों के किन्हीं तीन महत्त्वपूर्ण परिणामों एवं निष्कर्षों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1977 के लोकसभा चुनावों के निष्कर्ष एवं परिणाम: 1977 के चुनावों के कुछ निष्कर्ष इस प्रकार हैं।

  1. कांग्रेस पार्टी के एकाधिकार की समाप्ति: 1977 के चुनावों का सबसे महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा पिछले तीन दशकों से चली आ रही कांग्रेसी सत्ता का एकाधिकार समाप्त हो गया।
  2. केन्द्र में प्रथम गैर-कांग्रेस सरकार का निर्माण: 1977 के चुनावों के पश्चात् केन्द्र में पहली बार गैर- कांग्रेस सरकार का निर्माण हुआ। विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी के झण्डे के नीचे गठबन्धन सरकार का निर्माण किया। जनता पार्टी को मार्च, 1977 के लोकसभा के चुनाव में भारी सफलता प्राप्त हुई। 542 सीटों में से जनता पार्टी गठबन्धन को 330 सीटें मिलीं। इस प्रकार जनता पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी, अतः जनता पार्टी की सरकार बनी।
  3. पिछड़े वर्गों की भलाई का मुद्दा प्रभावी हो गया: 1977 के चुनावों के बाद अप्रत्यक्ष रूप से पिछड़े वर्गों की भलाई का मुद्दा भारतीय राजनीति पर हावी होना शुरू हुआ क्योंकि 1977 के चुनाव परिणामों पर पिछड़ी जातियों के मतदान का असर पड़ा था।

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प्रश्न 4.
नागरिक स्वतन्त्रताओं के संगठनों के उदय का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नागरिक स्वतन्त्रताओं के संगठनों का उदय: आपातकाल से पूर्व तथा इसके पश्चात् नागरिक स्वतन्त्रता संगठनों के उदय एवं प्रसार में कुछ प्रगति हुई, जिसका वर्णन इस प्रकार है।
1. नव निर्माण समिति का गठन:
जयप्रकाश नारायण ने बिहार आंदोलन के समय दलविहीन लोकतन्त्र तथा सम्पूर्ण क्रान्ति का नारा दिया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने विनोबा भावे के भूदान आन्दोलन को भी इसमें शामिल किया। जयप्रकाश नारायण ने इसके लिए गुजरात एवं बिहार के युवा छात्रों को शामिल किया तथा एक नवनिर्माण समिति का गठन किया। इस समिति का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार को समाप्त करना था।

2. नक्सलवादी संगठनों का उदय:
नक्सलवादी पद्धति बंगाल, केरल एवं आन्ध्रप्रदेश में सक्रिय थी। नक्सलवादी वामदलों से अलग हुआ गुट था, क्योंकि इनका वामदलों से मोह भंग हो गया था। इन्होंने लोगों की स्वतन्त्रता एवं माँगों पूरा करने के लिए हिंसा का सहारा लिया, परन्तु सरकारों ने इस प्रकार के आन्दोलन को समाप्त करने के लिए बल प्रयोग का सहारा लिया।

3. नागरिक स्वतन्त्रता एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए लोगों का संघ: नागरिक स्वतन्त्रता एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए लोगों के संघ का उदय अक्टूबर, 1976 में हुआ। संगठन ने न केवल आपातकाल में बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहने के लिए कहा। 1980 में नागरिक स्वतन्त्रता एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों के लिए लोगों के संघ का नाम बदलकर ‘नागरिक स्वतन्त्रताओं के लिए लोगों का संघ’ रख दिया गया तथा इस संगठन का प्रचार-प्रसार पूरे देश में किया गया। यह संगठन नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनमत तैयार करवाता था।

प्रश्न 5.
वचनबद्ध न्यायपालिका से आप क्या समझते हैं? श्रीमती इन्दिरा गाँधी की सरकार ने इसके लिए क्या प्रयत्न किये?
उत्तर:
वचनबद्ध न्यायपालिका: वचनबद्ध न्यायपालिका से तात्पर्य न्यायपालिका का सरकार के प्रति प्रतिबद्ध होना या सरकार की नीतियों का आंख मूंद कर पालन करने से है। वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए सरकार द्वारा प्रयोग किए गए उपाय थे तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती गांधी की सरकार ने न्यायपालिका की वचनबद्धता के लिए अग्रलिखित उपाय किये

  1. न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता के सिद्धान्त की अनदेखी: श्रीमती गाँधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी की तथा उन न्यायाधीशों को पदोन्नत किया, जो सरकार के प्रति वफादार थे।
  2. न्यायाधीशों का स्थानान्तरण: श्रीमती गाँधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों के स्थानान्तरण का सहारा भी लिया।
  3. न्यायपालिका की आलोचना: न्यायाधीशों द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों की प्रायः अधिकारियों द्वारा आलोचना की जाती थी, जबकि ऐसा किया जाना संविधान के विरुद्ध था।
  4. अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति: सरकार अस्थायी तौर पर न्यायाधीशों की नियुक्ति करके न्यायाधीशों की कार्यप्रणाली एवं व्यवहार का अध्ययन करती थी, कि वह सरकार के पक्ष में कार्य कर रहा है, या विपक्ष में।
  5. अन्य पदों पर नियुक्तियाँ: सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में से उन्हें राज्यपाल, राजदूत या किसी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो सरकार के प्रति वफादार थे अथवा सरकार की नीतियों के अनुसार चलते थे।
  6. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का प्रावधान: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक प्रावधानों को भी वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए प्रयोग किया गया।

प्रश्न 6.
नक्सलवादी आन्दोलन क्या है? भारतीय राजनीति में इसकी भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
अथवा
नक्सलवादी आन्दोलन पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
1. नक्सलवादी आन्दोलन की पृष्ठभूमि:
पश्चिम बंगाल के पर्वतीय जिले दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी पुलिस थाने के इलाके में 1967 में एक किसान विद्रोह उठ खड़ा हुआ। इस विद्रोह की अगुवाई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेताओं ने की। नक्सलबाड़ी पुलिस थाने से शुरू होने वाला यह आंदोलन भारत के कई राज्यों में फैल गया। इस आंदोलन को नक्सलवादी आंदोलन के रूप में जाना जाता है।

2. सी.पी.आई. से अलग होना और गुरिल्ला युद्ध प्रणाली को अपनाना:
1969 में नक्सलवादी सी. पी. आई. (एम.) से अलग हो गए और उन्होंने सी.पी.आई. (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) नाम से एक नई पार्टी ‘चारु मजूमदार’ के नेतृत्व में बनायी। इस पार्टी की दलील थी कि भारत में लोकतन्त्र एक छलावा है। इस पार्टी ने क्रान्ति करने के लिए गोरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनायी।

3. नक्सलवादियों के कार्यक्रम:
नक्सलवादी आंदोलन ने धनी भूस्वामियों से जमीन बलपूर्वक छीन कर गरीब और भूमिहीन लोगों को दी। इस आंदोलन के समर्थक अपने राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसक साधनों के इस्तेमाल के पक्ष में दलील देते थे।

4. नक्सलवाद का प्रसार एवं प्रभाव:
1970 के दशक में भारत में 9 राज्यों के लगभग 75 जिले नक्सलवाद की हिंसा से प्रभावित हुए। इनमें अधिकांश बहुत पिछड़े इलाके हैं और यहाँ आदिवासियों की संख्या बहुत अधिक है। नक्सलवादी हिंसा व नक्सल विरोधी कार्यवाहियों में अब तक हजारों लोग जान गँवा चुके हैं।

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प्रश्न 7.
निम्न बिन्दुओं का वर्णन आपातकाल 1975 की पृष्ठभूमि के संदर्भ में कीजिए
(अ) गुजरात व बिहार आंदोलन
(ब) सरकार व न्यायपालिका में संघर्ष।
उत्तर:
( अ ) गुजरात आंदोलन:
गुजरांत में नव निर्माण आंदोलन के प्रभावस्वरूप गुजरात के मुख्यमंत्री को त्यागपत्र देना पड़ा। आपातकाल की घोषणा का यह भी एक कारण बना। बिहार आंदोलन बिहार आंदोलन प्रशासन में भ्रष्टाचारी व अयोग्य कर्मचारियों के विरुद्ध लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाया गया आंदोलन था। बिहार आंदोलन में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को भी हल करने का प्रयास किया गया। यह बिहार आंदोलन भी 1975 में आपातकाल की घोषणा का एक प्रमुख कारण बना।

(ब) सरकार व न्यापालिका में संघर्ष:
1973-74 की अवधि में न्यायपालिका और सरकार के सम्बन्धों में भी तनाव आए। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की नई पहलकदमियों को संविधान के विरुद्ध माना। सरकार का मानना था कि अदालत का यह रवैया लोकतंत्र के सिद्धान्तों और संसद की सर्वोच्चता के विरुद्ध है। यह सरकार के गरीबों को लाभ पहुँचाने वाले कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने की राह में रोड़ा अटका रही है। इसके साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्रीमती गाँधी के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया तथा श्रीमती गाँधी को छ: वर्ष तक संसद की सदस्यता न ग्रहण करने की सजा दी गई। सरकार और न्यायपालिका के इस संघर्ष ने आपातकाल की घोषणा की पूर्ण पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

प्रश्न 8.
1975 के आपातकालीन घोषणा और क्रियान्वयन से देश के राजनैतिक माहौल, प्रेस, नागरिक अधिकारों, न्यायपालिका के निर्णयों और संविधान पर क्या प्रभाव पड़े? विस्तार में लिखिए ।
उत्तर:
इंदिरा सरकार के आपातकाल की घोषणा पर विरोध- आंदोलनों में कमी आई क्योंकि आपातकाल के दौरान अनेक विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। राजनीतिक माहौल तनावग्रस्त हो गया था। आपातकालीन प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी। इसे प्रेस सेंसरशिप के नाम से जाना गया। सामाजिक और सांप्रदायिक गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जमात-ए- इस्लामी जैसे संगठनों पर रोक लगा दी। आपातकालीन प्रावधानों के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक अधिकार निष्प्रभावी हो गए।

उनके पास यह अधिकार भी नहीं रहा कि मौलिक अधिकारों की बहाली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएँ। निवारक नजरबंदी के अंतर्गत लोगों को गिरफ्तार इसलिए नहीं किया जाता था कि उन्होंने कोई अपराध किया है बल्कि इसके विपरीत, इस प्रावधान के अंतर्गत लोगों को इस आशंका से गिरफ्तार किया जाता था कि भविष्य में वे कोई अपराध कर सकते हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत सरकार ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ कीं। गिरफ्तार लोग अपनी गिरफ्तारी को चुनौती नहीं दे पाते थे। गिरफ्तार लोगों अथवा उनके पक्ष से किन्हीं और ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में कई मामले दायर किए, किन्तु सरकार का कहना था कि गिरफ्तार लोगों को कोई कारण बताना कतई जरूरी नहीं है।

अनेक उच्च न्यायालयों ने फैसला दिया कि आपातकाल की घोषणा के बावजूद अदालत किसी व्यक्ति द्वारा दायर की गई ऐसी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को विचार के लिए स्वीकार कर सकती है। परंतु 1976 के अप्रैल माह में सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को उलट दिया और सरकार की दलील को सही ठहराया। इसका सामान्य शब्दों में यही अर्थ था कि आपातकाल के दौरान सरकार, नागरिक से जीवन और आजादी का अधिकार वापस ले सकती है। आपातकाल के समय जो नेता गिरफ्तारी से बच गए थे वे भूमिगत हो गए और सरकार के खिलाफ मुहिम चलाई।

पद्मभूषण से सम्मानित कन्नड़ लेखक शिवम कारंत और पद्मश्री से सम्मानित हिन्दी लेखक फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ ने अपनी-अपनी पदवी वापस कर दी। संसद ने संविधान के सामने कई नई चुनौतियाँ खड़ी कीं। इंदिरा गाँधी के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले की पृष्ठभूमि में संशोधन हुआ। इस संशोधन के अनुसार प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के निर्वाचन को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। आपातकाल के दौरान ही संविधान में 42वाँ संशोधन किया गया।

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प्रश्न 9.
बिहार आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए संक्षिप्त सार लिखिए।
उत्तर:
बिहार के आंदोलन के समय वहाँ पर काँग्रेस की सरकार थी। यहाँ आंदोलन छात्र आंदोलन के रूप में शुरू हुआ। यह आंदोलन न केवल बिहार तक बल्कि अनेक वर्षों तक राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डालने वाला साबित हुआ। बिहार आंदोलन के कारण 1974 के मार्च माह में बढ़ती हुई कीमतों, खाद्यान्न के अभाव, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार के छात्रों ने आंदोलन छेड़ दिया। आंदोलन के क्रम में उन्होंने जयप्रकाश नारायण को बुलावा भेजा। जेपी तब सक्रिय राजनीति छोड़ चुके थे और सामाजिक कार्यों में लगे थे। छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुवाई के लिए जयप्रकाश नारायण को बुलावा भेजा।

जेपी ने छात्रों का निमंत्रण इस शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन अहिंसक रहेगा और अपने को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखेगा। इस प्रकार छात्र आंदोलन ने एक राजनीतिक चरित्र ग्रहण किया और उसके भीतर राष्ट्रव्यापी अपील आई जीवन के हर क्षेत्र के लोग अब आंदोलन से आ जुड़े। आंदोलन की प्रगति और सार जयप्रकाश नारायण ने बिहार की कांग्रेस को बर्खास्त करने की माँग की। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दायरे में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया ताकि ‘सच्चे लोकतंत्र’ की स्थापना की जा सके। बिहार की सरकार के खिलाफ लगातार घेराव, बंद और हड़ताल का एक सिलसिला चल पड़ा। बहराल, सरकार ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। 1974 के बिहार आंदोलन का एक प्रसिद्ध नारा था, “संपूर्ण क्रांति अब नारा है- भावी इतिहास हमारा है।”

प्रभाव-आंदोलन का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ना शुरू हुआ। जयप्रकाश नारायण चाहते थे यह आंदोलन देश के दूसरे हिस्से में भी फैले। जेपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के साथ ही साथ रेलवे के कर्मचारियों ने भी एक राष्ट्रवादी हड़ताल का आह्वान किया। इससे देश के रोजमर्रा के कामकाज के ठप्प हो जाने का खतरा पैदा हो गया। 1975 में जेपी ने जनता के ‘संसद मार्च’ का नेतृत्व किया। देश की राजधानी में अब तक इतनी बड़ी रैली नहीं हुई थी। जेपी को भारतीय जनसंघ, काँगेस (ओ), भारतीय लोकदल, सोशलिस्ट पार्टी जैसे गैर- काँग्रेसी का समर्थन मिला। इन दलों ने जेपी को इंदिरा के विकल्प के रूप में पेश किया।

टिप्पणी-जेपी के विचारों और उनके द्वारा अपनायी नई जन-प्रतिरोध की रणनीति की आलोचनाएँ भी मुखर हुईं गुजरात और बिहार, दोनों ही राज्यों के आंदोलन को कांग्रेस विरोधी आंदोलन माना गया। कहा गया कि ये आंदोलन राज्य सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि इंदिरा गाँधी के नेतृत्व के खिलाफ चलाए गए हैं। इंदिरा गाधी का मानना था कि ये आंदोलन उनके प्रति व्यक्तिगत विरोध से प्रेरित हैं।

प्रश्न 10.
1975 के आपातकाल से सीखे गए तीन सबकों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:

  1. 1975 की आपातकाल से एकबारगी भारतीय लोकतंत्र की ताकत और कमजोरियाँ उजागर हो गईं। हालाँकि बहुत से पर्यवेक्षक मानते हैं कि आपातकाल के दौरान भारत लोकतांत्रिक नहीं रह गया था। लेकिन यह भी ध्यान देने की बात है कि थोड़े ही दिनों के अंदर कामकाज फिर से लोकतांत्रिक ढर्रे पर लौट आया। इस तरह आपातकाल का एक सबक तो यही है कि भारत से लोकतंत्र को विदा कर पाना बहुत कठिन हैं।
  2. आपातकाल से संविधान में वर्णित आपातकाल के प्रावधानों के कुछ अर्थगत उलझाव भी प्रकट हुए, जिन्हें बाद में सुधार लिया गया। अब ‘अंदरूनी’ आपातकाल सिर्फ ‘सशस्त्र विद्रोह’ की स्थिति में लगाया जा सकता है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि आपातकाल की धारणा की सलाह मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को लिखित में दे।
  3. आपातकाल से हर कोई नागरिक अधिकारों के प्रति ज्यादा सचेत हुआ। आपातकाल की सम्पत्ति के बाद अदालतों ने व्यक्ति के नागरिक अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई।  यपालिका आपातकाल के वक्त नागरिक अधिकारों की रक्षा में तत्पर हो गई। आपातकाल के बाद नागरिक अधिकारों के कई संगठन वजूद में आए।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

Jharkhand Board JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

बहुचयनात्मक प्रश्न

1. कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व केन्द्र में कब तक रहा?
(क) 1947 से 1990 तक
(ग) 1947 से 1977 तक
(ख) 1947 से 1960 तक
(घ) 1947 से 1980 तक।
उत्तर:
(ग) 1947 से 1977 तक

2. किस वर्ष इन्दिरा गाँधी ने सोवियत संघ के साथ बीस वर्ष के लिए शान्ति, मित्रता तथा सहयोग की सन्धि पर हस्ताक्षर किए थे?
(कं) जून, 1972
(ख) अक्टूबर, 1977
(ग) अगस्त, 1947
(घ) अंगस्त, 1971
उत्तर:
(घ) अंगस्त, 1971

3. गरीबी हटाओ का नारा किसने दिया?
(क) सुभाषचन्द्र बोस ने
(ख) लाल बहादुर शास्त्री ने
(ग) जवाहरलाल नेहरू ने
(घ) इन्दिरा गाँधी ने।
उत्तर:
(घ) इन्दिरा गाँधी ने।

4. भारत ने प्रथम परमाणु परीक्षण कब किया?
(क) 1974
(ख) 1975
(ग) 1976
(घ) 1977
उत्तर:
(क) 1974

5. ‘जय जवान जय किसान’ का नारा किसने दिया-
(क) लाल बहादुर शास्त्री ने
(ख) इंदिरा गाँधी ने
(ग) जवाहरलाल नेहरू ने
(घ) मोरारजी देसाई ने।
उत्तर:
(क) लाल बहादुर शास्त्री ने

6. बांग्लादेश का निर्माण हुआ
(क) सन् 1966 में
(ख) सन् 1970 में
(ग) सन् 1971 में
(घ) इन्दिरा गाँधी ने।
उत्तर:
(ग) सन् 1971 में

1. निम्नलिखित का मिलान कीजिए

1. जवाहरलाल नेहरू के उपरान्त (क) 1966
2. ताशकन्द समझौता (ख) लालबहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमन्त्री बने।
3. मोरारजी का सम्बन्ध (ग) सिंडीकेट से
4. बांग्लादेश का निर्माण (घ) 1971
5. वी.वी. गिरि (ङ) आन्ध्र प्रदेश के मजदूर नेता
6. कर्पूरी ठाकुर (च) बिहार के नेता

उत्तर:

1. जवाहरलाल नेहरू के उपरान्त (ख) लालबहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमन्त्री बने।
2. ताशकन्द समझौता (क) 1966
3. मोरारजी का सम्बन्ध (ग) सिंडीकेट से
4. बांग्लादेश का निर्माण (घ) 1971
5. वी.वी. गिरि (ङ) बिहार के नेता
6. कर्पूरी ठाकुर (च) आन्ध्र प्रदेश के मजदूर नेता


रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

1. ………………….. में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु हो गई।
उत्तर:
1964

2. 1960 के दशक को ………………… की संज्ञा दी गई।
उत्तर:
खतरनाक दशक

3. लाल बहादुर शास्त्री ……………. से ………………… तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
उत्तर:
1964, 1966

4. 10 जनवरी ……………. को ……………….. में शास्त्रीजी का निधन हो गया।
उत्तर:
1966, ताशकंद

5. सी. नटराजन अन्नादुरई ने 1949 में ……………….. का बतौर राजनीतिक पार्टी गठन किया।
उत्तर:
द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम

6. पंजाब में बनी संयुक्त विधायक दल की सरकार को ……………….. की सरकार कहा गया।
उत्तर:
पॉपुलर यूनाइटेड फ्रंट

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1967 में कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेताओं के समूह को किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर:
सिंडिकेट।

प्रश्न 2.
‘जय जवान जय किसान’ का नारा किसने दिया?
उत्तर:
लाल बहादुर शास्त्री ने।

प्रश्न 3.
1971 के चुनावों में कांग्रेसी नेताओं को कुल कितनी सीटें प्राप्त हुईं?
उत्तर:
352 सीटें प्राप्त हुईं।

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प्रश्न 4.
विरोधी दलों को लगा कि इन्दिरा गाँधी की अनुभवहीनता और कांग्रेस की आन्तरिक गुटबन्दी से उन्हें कांग्रेस को सत्ता से हटाने का एक अवसर मिला। राम मनोहर लोहिया ने इस रणनीति को क्या नाम दिया?
उत्तर:
गैर-कांग्रेसवाद।

प्रश्न 5.
चन्द्रशेखर, चरणजीत यादव, मोहन धारिया तथा कृष्णकान्त जैसे नेता किस गुट में शामिल थे?
उत्तर:
युवा तुर्क गुट में

प्रश्न 6.
कामराज, एस.के. पाटिल तथा निजलिंगप्पा जैसे नेता किस समूह के सदस्य माने जाते थे?
उत्तर:
सिंडिकेट

प्रश्न 7.
प्रारम्भ में कांग्रेस का चुनाव चिह्न क्या था तथा वर्तमान में इस दल का चिह्न क्या है?
उत्तर:
प्रारम्भ में कांग्रेस का चुनाव चिह्न बैलों की जोड़ी था और वर्तमान में हाथ का निशान है।

प्रश्न 8.
कांग्रेस का विभाजन कब हुआ? अथवा कांग्रेस में पहली फूट कब पड़ी?
उत्तर:
1969 में।

प्रश्न 9.
चौथे आम चुनावों के पश्चात् केन्द्र में किस पार्टी की सरकार बनी?
उत्तर:
चौथे आम चुनाव के पश्चात् केन्द्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी।

प्रश्न 10.
लाल बहादुर शास्त्री का उत्तराधिकारी कौन बना?
उत्तर:
श्रीमती इन्दिरा गाँधी।

प्रश्न 11.
1969 में राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए इन्दिरा गाँधी ने किस उम्मीदवार का साथ दिया था?
उत्तर:
श्रीमती गांधी ने निर्दलीय उम्मीदवार वी.वी. गिरि का साथ दिया।

प्रश्न 12.
दस सूत्री कार्यक्रम कब लागू किया गया?
उत्तर:
दस सूत्री कार्यक्रम 1967 में लागू किया गया।

प्रश्न 13.
पाँचवीं लोकसभा के चुनाव कब हुए?
उत्तर:
पाँचवीं लोकसभा के चुनाव 1971 में हुए।

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प्रश्न 14.
1971 में कांग्रेस (आर) का नेतृत्व किस नेता ने किया?
उत्तर:
1971 में कांग्रेस (आर) का नेतृत्व श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया।

प्रश्न 15.
कांग्रेस ऑर्गनाइजेशन से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
1969 के नवंबर तक सिंडिकेट की अगुवाई वाले कांग्रेसी खेमे को कांग्रेस ऑर्गनाइजेशन कहा जाता था।

प्रश्न 16.
पुरानी कांग्रेस से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मोरारजी देसाई के समर्थक कांग्रेस के समूह को पुरानी कांग्रेस की संज्ञा दी गई।

प्रश्न 17.
गैर-कांग्रेसवाद से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यह वह राजनीतिक विचारधारा है जो मुख्यतः कांग्रेस विरोधी और उसे सत्ता से अलग करने के लिए समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया द्वारा प्रस्तुत की गई।

प्रश्न 18.
कांग्रेस सिंडिकेट से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कांग्रेस पार्टी के नेता जिनमें कामराज, एस. के. पाटिल, निजलिंगप्पा तथा मोरारजी देसाई (इनमें कुछ को हम इंदिरा विरोधी भी कह सकते हैं) आदि के समूह को कांग्रेस सिंडिकेट के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 19.
प्रिवी पर्स से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भूतपूर्व देशी राजाओं को दिए जाने वाले विशेष भत्ते आदि को प्रिवी पर्स के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 20.
लोकसभा का पाँचवाँ आम चुनाव कब हुआ था?
उत्तर:
1971 में। इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाले गुट को कांग्रेस का रिक्विजिस्ट खेमा कहा जाता है।

प्रश्न 21.
ग्रैंड अलायंस से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कांग्रेस (ओ) और इंदिरा विरोधी विपक्षी पार्टियों और गैर-साम्यवादी दलों को ग्रैंड अलायंस की संज्ञा दी जाती है।

प्रश्न 22.
कामराज योजना क्या थी?
उत्तर:
कामराज योजना के अनुसार 1963 में सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी के पदों से त्यागपत्र दे दिया ताकि उनकी जगह युवा कार्यकर्ताओं को दी जा सके।

प्रश्न 23.
आया राम-गया राम राजनीति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आया राम-गया राम से अभिप्राय नेताओं द्वारा अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए निरन्तर दल-बदल करना है।

प्रश्न 24.
10 सूत्री कार्यक्रम कब और क्यों लागू किया गया?
उत्तर:
10 सूत्री कार्यक्रम श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा 1967 में कांग्रेस की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के लिए लागू किया गया।

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प्रश्न 25.
राजनीतिक भूकम्प से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
1967 के चुनावों में कांग्रेस को केन्द्र एवं राज्य स्तर पर हुई गहरी हानि को चुनाव विश्लेषकों ने कांग्रेस के लिए इसे राजनीतिक भूकम्प कहा।

प्रश्न 26.
किंगमेकर किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी नेता को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं को किंगमेकर कहा है।

प्रश्न 27.
1971 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत का क्या कारण था?
उत्तर:
1971 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत का मुख्य कारण श्रीमती इंदिरा गांधी का चमत्कारिक नेतृत्व कांग्रेस की समाजवादी नीतियाँ तथा गरीबी हटाओ का नारा था।

प्रश्न 28.
कांग्रेस में युवा तुर्क के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
युवा तुर्क कांग्रेस में युवाओं से सम्बन्धित था। इसमें चन्द्रशेखर, चरणजीत यादव, मोहन धारिया, कृष्णकान्त एवं आर. के. सिन्हा जैसे युवा कांग्रेसी शामिल थे।

प्रश्न 29.
किन्हीं चार राज्यों के नाम लिखिए जहाँ 1967 के चुनाव के बाद कांग्रेसी सरकारें बनीं।
उत्तर:
महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात।

प्रश्न 30.
किन्हीं चार राज्यों के नाम लिखिए जहाँ 1967 के चुनावों के बाद गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं।
उत्तर:
पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल

प्रश्न 31.
राममनोहर लोहिया कौन थे?
उत्तर:
राममनोहर लोहिया समाजवादी नेता एवं विचारक थे। 1963 से 1967 तक लोकसभा के सदस्य रहे। वे गैर-कांग्रेसवाद के रणनीतिकार थे। उन्होंने नेहरू की नीतियों का विरोध किया।

प्रश्न 32.
ताशकन्द समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दो महान् राष्ट्राध्यक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री
  2. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान।

प्रश्न 33.
प्रिवी पर्स की समाप्ति कब हुई?
उत्तर:
1971 में कांग्रेस को मिली जीत के बाद इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करवाकर प्रिवी पर्स की समाप्ति करवा दी।

प्रश्न 34.
इंदिरा गाँधी की हत्या कब की गई?
उत्तर:
इदिरा गाँधी की हत्या 31 अक्टूबर, 1984 के दिन हुई थी।

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प्रश्न 35.
मद्रास प्रांत को अब किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
तमिलनाडु।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पण्डित जवाहरलाल नेहरू का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन था ?
उत्तर:
जवाहरलाल की मृत्यु के बाद लालबहादुर शास्त्री को नेहरू का उत्तराधिकारी बनाया गया। शास्त्री लगभग 18 महीने प्रधानमंत्री पद पर रहे। उनके शासन काल में 1965 का पाकिस्तान युद्ध हुआ। भारत को शानदार सफलता प्राप्त हुई। शास्त्रीजी ने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया। इस प्रकार शास्त्री एक प्रधान समझौताकर्ता, मध्यस्थ तथा समन्वयकार थे।

प्रश्न 2.
लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद भारत का प्रधानमंत्री कौन बना?
उत्तर:
लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद श्रीमती कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया, गरीबी को हटाने के लिए कार्यक्रम घोषित किया, देश की सेनाओं का आधुनिकीकरण किया तथा 1974 में पोकरण में ऐतिहासिक परमाणु विस्फोट किया। 1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में हराया, जिसके कारण बांग्लादेश नाम का एक नया देश अस्तित्व में आया।

प्रश्न 3.
1966 में कांग्रेस दल के वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री के पद के लिए श्रीमती गाँधी का साथ क्यों दिया?
उत्तर:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संभवतः यह सोचकर 1966 में श्रीमती गाँधी का साथ प्रधानमंत्री पद के लिए दिया कि प्रशासनिक और राजनैतिक मामलों में खास अनुभव नहीं होने के कारण समर्थन व दिशा निर्देशन के लिए वे उन पर निर्भर रहेंगी।

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प्रश्न 4.
1967 के चौथे आम चुनाव में कांग्रेस दल की मुख्य चुनौतियाँ बताइये।
उत्तर:
1967 के चौथे आम चुनाव में कांग्रेस दल की मुख्य चुनौतियाँ इस प्रकार रहीं।

  1. राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा अब गहन हो गई थी और ऐसे में कांग्रेस को अपना प्रभुत्व बरकरार रखने में मुश्किलें आ रही थीं।
  2. विपक्ष अब पहले की अपेक्षा कम विभाजित तथा कहीं ज्यादा ताकतवर था। गैर-कांग्रेसवाद के नारे के साथ वह काफी एकजुट हो गया था।
  3. कांग्रेस को अन्दरूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा था क्योंकि यह पार्टी के अन्दर विभिन्नता को थाम कर नहीं चल पा रही थी।

प्रश्न 5.
भारत में सम्पन्न चौथे आम चुनाव परिणामों की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
अथवा
भारत में 1967 के चुनाव परिणामों को राजनीतिक भूचाल क्यों कहा गया?
उत्तर:
चौथे आम चुनाव के परिणाम इस प्रकार रहे।

  1. इन चुनावों में भारतीय मतदाताओं ने कांग्रेस को वैसा समर्थन नहीं दिया, जो पहले तीन आम चुनावों में दिया था।
  2. लोकसभा की कुल 520 सीटों में से कांग्रेस को केवल 283 सीटें ही मिल पाईं तथा मत प्रतिशत में भी भारी गिरावट आई।
  3. इन्दिरा गाँधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री चुनाव हार गये थे।
  4. इसके साथ-साथ कांग्रेस को 8 राज्य विधानसभाओं में भी हार का सामना करना पड़ा। इसलिए अनेक राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इन अप्रत्याशित चुनाव परिणामों को राजनीतिक भूचाल की संज्ञा दी।

प्रश्न 6.
1969 में राष्ट्रपति के निर्वाचन में श्रीमती इंदिरा गांधी ने किस उम्मीदवार का साथ दिया?
उत्तर:
1969 के राष्ट्रपति के चुनाव में इंदिरा गांधी ने निर्दलीय उम्मीदवार वी. वी. गिरि का साथ दिया और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी चुनाव हार गए। यह चुनाव श्रीमती गाँधी का कांग्रेस में वर्चस्व स्थापित करने में मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

प्रश्न 7.
कांग्रेस की फूट (विभाजन) के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. 1967 के चुनावों में मिली हार के बाद कुछ कांग्रेसी दक्षिणपंथी दलों के साथ जबकि कुछ कांग्रेसी वामपंथी दलों के साथ समझौते का समर्थन कर रहे थे, जिससे कांग्रेस में मतभेद बढ़ा
  2. कांग्रेस पार्टी के प्रमुख सदस्यों में 1967 में होने वाले राष्ट्रपति के चुनावों को लेकर मतभेद था जो अन्ततः कांग्रेस के विभाजन का तात्कालिक कारण बना।

प्रश्न 8.
कांग्रेस की फूट के पश्चात् कौनसे दो राजनीतिक दल उभरे?
उत्तर:
1969 में कांग्रेस विभाजन के पश्चात् जो दो राजनीतिक दल सामने आए उनके नाम कांग्रेस (आर) (Congress Requisitioned) तथा कांग्रेस (ओ) (Congress Organisation) थे। कांग्रेस (आर) का नेतृत्व श्रीमती गाँधी कर रही थीं, वहीं कांग्रेस (ओ) का नेतृत्व सिंडिकेट कर रहा था जिसके अध्यक्ष निजलिंगप्पा थे। गई?

प्रश्न 9.
आया राम गया राम’ किस वर्ष से संबंधित घटना है तथा यह टिप्पणी किस व्यक्ति के सम्बन्ध में की
उत्तर:
‘आया राम गया राम’ सन् 1967 के वर्ष से संबंधित घटना है। ‘आया राम गया राम’ नामक टिप्पणी कांग्रेस के हरियाणा राज्य के एक विधायक गया लाल के सम्बन्ध में की गई थी जिसने एक पखवाड़े के अन्दर तीन दफा अपनी पार्टी बदली।

प्रश्न 10.
1960 के दशक में कांग्रेस प्रणाली को पहली बार चुनौती क्यों मिली?
उत्तर:
कांग्रेस प्रणाली को 1960 के दशक में पहली बार चुनौती मिली क्योंकि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा गहन हो चली थी और ऐसे में कांग्रेस को अपना प्रभुत्व बरकरार रखने में मुश्किलें आ रही थीं। विपक्ष अब पहले की अपेक्षा कम विभाजित – और ज्यादा ताकतवर था । कांग्रेस को अंदरूनी चुनौतियाँ भी झेलनी पड़ीं, क्योंकि अब यह पार्टी अपने अंदर की विभिन्नता को एक साथ थामकर नहीं चल पा रही थी।

प्रश्न 11.
1969-1971 के दौरान इन्दिरा गाँधी की सरकार द्वारा सामना किये जाने वाली किन्हीं दो समस्याओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने सन् 1969-71 के दौरान निम्नलिखित दो चुनौतियों का सामना किया।

  1. उन्हें सिंडिकेट (मोरारजी देसाई के प्रभुत्व वाले कांग्रेस का दक्षिणपंथी गुट) के प्रभाव से मुक्त होकर अपना निजी मुकाम बनाने की चुनौती थी।
  2. कांग्रेस ने 1967 के चुनावों में जो जमीन खोई थी उसे वापस हासिल करना था।

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प्रश्न 12.
पांचवीं लोकसभा के चुनावों पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
पांचवीं लोकसभा के चुनाव 1971 में सम्पन्न हुए और चुनावों में श्रीमती गाँधी की कांग्रेस (आर) पार्टी ने शानदार सफलता प्राप्त की। लोकसभा की 518 सीटों में से कांग्रेस ने अकेले ही 352 सीटें जीतीं। इन चुनावों में कांग्रेस ने अपनी विरोधी पार्टियों को बुरी तरह से हराया।

प्रश्न 13.
किसने पाँचवीं लोकसभा निर्वाचन के समय ‘गरीबी हटाओ’ का नारा बुलन्द किया?
उत्तर:
1971 के पांचवीं लोकसभा के चुनावों में श्रीमती इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा बुलन्द किया। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में भारी सफलता हासिल की तथा 352 स्थानों पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस (ओ) ने केवल 10 प्रतिशत मत तथा केवल 16 स्थान प्राप्त किए।

प्रश्न 14.
पांचवीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की जीत के दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  1. 1971 में पांचवीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की जीत का सबसे बड़ा कारण श्रीमती गाँधी का चमत्कारिक नेतृत्व था।
  2. 1971 में श्रीमती गांधी की जीत का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण इनके द्वारा की गई समाजवादी नीति सम्बन्धी पहल तथा ‘गरीबी हटाओ’ का नारा था।

प्रश्न 15.
सिंडिकेट पर दक्षिणपंथियों से गुप्त समझौते करने के आरोप क्यों लगे?
उत्तर:
कांग्रेस ने जब राष्ट्रपति पद के लिए नीलम संजीव रेड्डी को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया, तो कार्यवाहक राष्ट्रपति वी. वी. गिरि ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी तथा श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अंतरात्मा के आधार पर. मत देने की बात कहकर वी.वी. गिरि का समर्थन कर दिया, तो निजलिंगप्पा ने जनसंघ तथा स्वतन्त्र पार्टी

प्रश्न 7.
कांग्रेस की फूट ( विभाजन) के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. 1967 के चुनावों में मिली हार के बाद कुछ कांग्रेसी दक्षिणपंथी दलों के साथ जबकि कुछ कांग्रेसी वामपंथी दलों के साथ समझौते का समर्थन कर रहे थे, जिससे कांग्रेस में मतभेद बढ़ा।
  2. कांग्रेस पार्टी के प्रमुख सदस्यों में 1967 में होने वाले राष्ट्रपति के चुनावों को लेकर मतभेद था जो अन्ततः कांग्रेस के विभाजन का तात्कालिक कारण बना।

प्रश्न 8.
कांग्रेस की फूट के पश्चात् कौनसे दो राजनीतिक दल उभरे?
उत्तर:
969 में कांग्रेस विभाजन के पश्चात् जो दो राजनीतिक दल सामने आए उनके नाम कांग्रेस (आर) (Congress Requisitioned) तथा कांग्रेस (ओ) (Congress Organisation) थे। कांग्रेस (आर) का नेतृत्व श्रीमती गाँधी कर रही थीं, वहीं कांग्रेस (ओ) का नेतृत्व सिंडिकेट कर रहा था जिसके अध्यक्ष निजलिंगप्पा थे गई?

प्रश्न 9.
आया राम गया राम’ किस वर्ष से संबंधित घटना है तथा यह टिप्पणी किस व्यक्ति के सम्बन्ध में की गई?
उत्तर:
‘आया राम गया राम’ सन् 1967 के वर्ष से संबंधित घटना है। ‘ आया राम गया राम’ नामक टिप्पणी कांग्रेस के हरियाणा राज्य के एक विधायक गया लाल के सम्बन्ध में की गई थी जिसने एक पखवाड़े के अन्दर तीन दफा अपनी पार्टी बदली।

प्रश्न 10.
1960 के दशक में कांग्रेस प्रणाली को पहली बार चुनौती क्यों मिली?
उत्तर:
कांग्रेस प्रणाली को 1960 के दशक में पहली बार चुनौती मिली क्योंकि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा गहन हो चली थी और ऐसे में कांग्रेस को अपना प्रभुत्व बरकरार रखने में मुश्किलें आ रही थीं। विपक्ष अब पहले की अपेक्षा कम विभाजित और ज्यादा ताकतवर था। कांग्रेस को अंदरूनी चुनौतियाँ भी झेलनी पड़ीं, क्योंकि अब यह पार्टी अपने अंदर की विभिन्नता को एक साथ थामकर नहीं चल पा रही थी।

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प्रश्न 11.
1969-1971 के दौरान इन्दिरा गाँधी की सरकार द्वारा सामना किये जाने वाली किन्हीं दो समस्याओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने सन् 1969-71 के दौरान निम्नलिखित दो चुनौतियों का सामना।

  1. उन्हें सिंडिकेट (मोरारजी देसाई के प्रभुत्व वाले कांग्रेस का दक्षिणपंथी गुट) के प्रभाव से मुक्त होकर अपना निजी मुकाम बनाने की चुनौती थी।
  2. कांग्रेस ने 1967 के चुनावों में जो जमीन खोई थी उसे वापस हासिल करना था।

प्रश्न 12.
पांचवीं लोकसभा के चुनावों पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
पांचवीं लोकसभा के चुनाव 1971 में सम्पन्न हुए और चुनावों में श्रीमती गाँधी की कांग्रेस (आर) पार्टी ने शानदार सफलता प्राप्त की। लोकसभा की 518 सीटों में से कांग्रेस ने अकेले ही 352 सीटें जीतीं। इन चुनावों में कांग्रेस ने अपनी विरोधी पार्टियों को बुरी तरह से हराया।

प्रश्न 13.
किसने पाँचवीं लोकसभा निर्वाचन के समय ‘गरीबी हटाओ’ का नारा बुलन्द किया?
उत्तर:
1971 के पांचवीं लोकसभा के चुनावों में श्रीमती इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा बुलन्द किया। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में भारी सफलता हासिल की तथा 352 स्थानों पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस (ओ) ने केवल 10 प्रतिशत मत तथा केवल 16 स्थान प्राप्त किए।

प्रश्न 14.
पांचवीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की जीत के दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  1. 1971 में पांचवीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की जीत का सबसे बड़ा कारण श्रीमती गाँधी का चमत्कारिक नेतृत्व था।
  2. 1971 में श्रीमती गांधी की जीत का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण इनके द्वारा की गई समाजवादी नीति सम्बन्धी पहल तथा ‘गरीबी हटाओ’ का नारा था।

प्रश्न 15.
सिंडिकेट पर दक्षिणपंथियों से गुप्त समझौते करने के आरोप क्यों लगे?
उत्तर:
कांग्रेस ने जब राष्ट्रपति पद के लिए नीलम संजीव रेड्डी को आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया, तो कार्यवाहक राष्ट्रपति वी. वी. गिरि ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी तथा श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अंतरात्मा के आधार पर मत देने की बात कहकर वी.वी. गिरि का समर्थन कर दिया, तो निजलिंगप्पा ने जनसंघ तथा स्वतन्त्र पार्टी जैसे दक्षिणपंथी पार्टियों से अनुरोध किया कि वे अपना मत नीलम संजीव रेड्डी के पक्ष में डालें । इस पर जगजीवन राम तथा फखरुद्दीन अहमद ने सिंडीकेट पर दक्षिणपंथियों के साथ गुप्त समझौता करने का आरोप लगाया।

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प्रश्न 16.
लालबहादुर शास्त्री के जीवन पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
श्री लालबहादुर शास्त्री ( 1904-1966 ):
श्री लालबहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में हुआ। 1930 से स्वतन्त्रता आंदोलन में भागीदारी की और उत्तरप्रदेश मंत्रिमण्डल में मंत्री रहे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के महासचिव का पदभार सँभाला। वे 1951 – 56 तक केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद पर रहे। इसी दौरान रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। 1957-64 के बीच वह मंत्री पद पर रहे। जून, 1964 से अक्टूबर, 1966 तक वह भारत के प्रधानमंत्री पद पर रहे तथा

1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया तथा जीत हासिल की। उन्होंने देश में हरित क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए प्रयोग किया तथा भारत को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर देश बनाया। लेकिन शास्त्रीजी का देहान्त 10 अक्टूबर, 1966 को ताशकंद के उजबेग शहर में हो गया। वे प्रधानमंत्री पद पर अधिक समय तक नहीं रहे परंतु वे एक युद्धवीर साबित हुए।

प्रश्न 17.
श्रीमती इंदिरा गांधी के जीवन का संक्षिप्त परिचय देते हुए लाल बहादुर शास्त्री के उत्तराधिकारी के रूप में श्रीमती गाँधी पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
श्रीमती इन्दिरा गाँधी का संक्षिप्त परिचय – इंदिरा प्रियदर्शनी 1917 में जवाहर लाल नेहरू के परिवार में उत्पन्न हुईं। वह शास्त्रीजी के देहान्त के पश्चात् पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 1966 से 1977 तक और फिर 1980 से 1984 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में स्वतंत्रता आंदोलन में श्रीमती गाँधी की भागीदारी रहीं। 1958 में वह कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर आसीन हुईं तथा 1964 से 1966 तक शास्त्री मंत्रिमण्डल में केन्द्रीय मन्त्री पद पर रहीं।

1967, 1971 और 1980 के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने श्रीमती गाँधी के नेतृत्व में सफलता प्राप्त की। उन्होंने ‘गरीबी हटाओ’ का लुभावना नारा दिया, 1971 में युद्ध में विजय का श्रेय और प्रिवी पर्स की समाप्ति, बैंकों के राष्ट्रीयकरण, आण्विक परीक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के कदम उठाए। 31 अक्टूबर, 1984 के दिन इनकी हत्या कर दी गई।

प्रश्न 18.
दल-बदल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
आया राम-गया राम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दल-बदल – भारत की राजनीति में ध्यानाकर्षण करने वाली कुरीति ( बुराई ) दल-बदल रही है। 1967 के आम चुनाव की एक खास बात दल-बदल की रही। इस विशेषता के कारण कई राज्यों में सरकारों के बनने और बिगड़ने की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ दृष्टिगोचर हुईं। जब कोई जनप्रतिनिधि किसी विशेष राजनैतिक पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर चुनाव लड़े और वह चुनाव जीत जाए और अपने स्वार्थ के लिए या किसी अन्य कारण से मूल दल छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाए, इसे दल-बदल कहते हैं। 1967 के सामान्य चुनावों के बाद कांग्रेस को छोड़ने वाले विधायकों ने तीन राज्यों हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में गैर-कांग्रेसी सरकारों को गठित करने में अहम भूमिका निभाई। इस दल-बदल के कारण ही देश में एक मुहावरा या लोकोक्ति – ‘ आया राम-गया राम’ बहुत प्रसिद्ध हो गया।

प्रश्न 19.
के. कामराज कौन थे? उनके जीवन के बारे में संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर:
के. कामराज़ का जन्म 1903 में हुआ था। वे देश के महान स्वतन्त्रता एक प्रमुख नेता के रूप में अत्यधिक ख्याति प्राप्त की। सेनानी थे। उन्होंने कांग्रेस के उन्हें मद्रास (तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री के पद पर रहने का सौभाग्य मिला। मद्रास प्रान्त में शिक्षा का प्रसार और स्कूली बच्चों को दोपहर का भोजन देने की योजना लागू करने के लिए उन्हें अत्यधिक ख्याति प्राप्त हुई। उन्होंने 1963 में कामराज योजना नाम से मशहूर एक प्रस्ताव रखा जिसके अंतर्गत उन्होंने सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को त्यागपत्र दे देने का सुझाव दिया, ताकि जो अपेक्षाकृत कांग्रेस पार्टी के युवा कार्यकर्ता हैं वे पार्टी की कमान संभाल सकें। वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। 1975 में उनका देहान्त हो गया।

प्रश्न 20.
1967 के गैर-कांग्रेसवाद एवं चुनावी बदलाव का वर्णन करें।
अथवा
1967 में हुए चौथे आम चुनाव पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
1967 के चौथे आम चुनावों में भारतीय मतदाताओं ने कांग्रेस को वैसा समर्थन नहीं दिया जो पहले तीन आम चुनावों में दिया था। केन्द्र में जहाँ कांग्रेस मुश्किल से बहुमत प्राप्त कर पाई वहीं 8 राज्य विधान सभाओं (बिहार, केरल, मद्रास, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल) में हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा की कुल 520 सीटों में से कांग्रेस को केवल 283 सीटें ही मिल पाईं।

अतः जिस कांग्रेस पार्टी ने पहले तीन आम चुनावों में जिन विरोधी दलों को बुरी तरह से हराया वे दल चौथे लोकसभा चुनाव में बहुत अधिक सीटों पर चुनाव जीत गए। इसी तरह राज्यों में भी कांग्रेस की स्थिति 1967 के आम चुनावों में ठीक नहीं थी। 1967 के चुनाव बहुत बड़े उलट-फेर वाले रहे। पहली बार भारत में बड़े पैमाने पर गैर-कांग्रेसवाद की लहर चली तथा राज्यों में कांग्रेस का एकाधिकार समाप्त हो गया।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

प्रश्न 21.
इंदिरा गांधी बनाम सिंडिकेट पर टिप्पणी लिखिए। इंदिरा गांधी बनाम सिंडिकेट
उत्तर:
सन् 1967 के आम चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद कुछ कांग्रेसी दक्षिणपंथी दलों के साथ जबकि कुछ कांग्रेसी वामपंथी दलों के साथ समझौते का समर्थन कर रहे थे। दक्षिणपंथी दलों के साथ समर्थन का पक्ष लेने वाले नेताओं में रामराज, एस. के. पाटिल, निजलिंगप्पा तथा मोरारजी देसाई प्रमुख थे। इनके समूह को सिण्डीकेट के नाम से जाना जाता है। वामपंथी दलों के साथ समझौते के समर्थक युवा तुर्क कांग्रेसी तथा प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी थीं।

इन दोनों के बीच मतभेद 1967 में राष्ट्रपति के पद के प्रत्याशी को लेकर मतभेद हुए जो पार्टी के विभाजन का कारण बने, 1969 में श्रीमती गाँधी द्वारा मोरारजी देसाई से वित्त विभाग वापस लेने के कारण श्रीमती इन्दिरा गाँधी और सिंडिकेट के बीच मतभेद अत्यन्त बढ़ गये। फलतः 1969 में कांग्रेस का विभाजन हो गया।

प्रश्न 22.
1969 में कांग्रेस पार्टी में विभाजन के क्या कारण थे?
अथवा
1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के प्रमुख कारणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कांग्रेस पार्टी के विभाजन के कारण: 1969 में कांग्रेस पार्टी में विभाजन या फूट के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. दक्षिणपंथी एवं वामपंथी विषय पर कलह: कांग्रेस के सदस्यों में इस बात पर मतभेद मुखर हो गया था कि वे वामपंथी दलों के साथ मिलकर लड़े या दक्षिणपंथी दलों के साथ।
  2. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के विषय में मतभेद: कांग्रेस में 1967 में होने वाले राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी को लेकर मतभेद था जो पार्टी के विभाजन का कारण बना।
  3. युवा तुर्क और सिण्डीकेट के बीच कलह: युवा तुर्क और सिण्डीकेट के मध्य मतभेद था। जहाँ युवा तुर्क बैंकों के राष्ट्रीयकरण एवं राजाओं के प्रिवी पर्स को समाप्त करने के पक्ष में था वहीं सिण्डीकेट इसका विरोध कर रहा था।
  4. मोरारजी देसाई से वित्त विभाग वापस लेना: 1969 में श्रीमती गाँधी द्वारा मोरारजी देसाई से वित्त विभाग वापस लेने के कारण भी मतभेद बढ़ा।

प्रश्न 23.
1971 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की पुनर्स्थापना के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
1971 के चुनाव के बाद किन कारणों से कांग्रेस की पुनर्स्थापना हुई?
अथवा
पाँचवीं लोकसभा (1971) में कांग्रेस पार्टी की जीत के मूल कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पांचवीं लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की विजय के कारण: पांचवीं लोकसभा में कांग्रेस की विजय के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. श्रीमती गांधी का चमत्कारिक नेतृत्व:1971 के चुनावों में कांग्रेस के पीछे श्रीमती गांधी के चमत्कारिक नेतृत्व का हाथ रहा।
  2. समाजवादी नीतियाँ: 1971 के चुनावों में श्रीमती गांधी ने समाजवादी नीतियाँ अपनायीं। उन्होंने प्रत्येक चुनाव रैली में समाजवाद के विषय में बढ़-चढ़ कर बातें कीं।
  3. गरीबी हटाओ का नारा: इस नारे के बल पर श्रीमती गांधी ने अधिकांश गरीबों के वोट बटोरे।
  4. कांग्रेस दल पर श्रीमती गांधी की पकड़: 1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के पश्चात् श्रीमती गाँधी पूरी तरह पार्टी पर छा गईं। कोई भी नेता उनकी आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता था।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

प्रश्न 24.
1971 के चुनाव के परिणामस्वरूप बदली हुई कांग्रेस व्यवस्था की प्रकृति कैसी थी?
उत्तर:
1971 के चुनाव के बाद कांग्रेस व्यवस्था की प्रकृति: 1971 के चुनाव के बाद बदली हुई कांग्रेस व्यवस्था की प्रकृति निम्नलिखित थी।

  1. 1971 के चुनाव के पश्चात् श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने कांग्रेस को अपने ऊपर निर्भर बना दिया। अब यहाँ उनके आदेश सर्वोपरि बनने प्रारंभ हुए। सिंडीकेट जैसे अनौपचारिक प्रभावशाली नेताओं का समूह राजनीतिक मंच से गायब हो गया।
  2. 1971 के पश्चात् कांग्रेस का संगठन भिन्न-भिन्न विचारधाराओं वाले समूहों के समावेशी किस्म का नहीं रहा। अब यह अनन्य एकाधिकारिता वाला बन गया था।
  3. इन्दिरा गाँधी अब धनी उद्योगपतियों, सौदागरों तथा राजनीतिज्ञों के समूह अथवा सिंडीकेट के हाथों अब कठपुतली नहीं रहीं।

प्रश्न 25.
गरीबी हटाओ की राजनीति से आप क्या समझते हैं?
अथवा
गरीबी हटाओ की राजनीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
गरीबी हटाओ की राजनीति:
1971 के चुनावों में श्रीमती इंदिरा गाँधी के गरीबी हटाओ के नारे को मतदाताओं ने अधिक पसन्द करते हुए श्रीमती गांधी को भारी विजय दिलाई। गरीबी हटाओ कार्यक्रम के अन्तर्गत 1970- 1971 से नीतियाँ एवं कार्यक्रम बनाये जाने लगे तथा इस कार्यक्रम पर अधिक से अधिक धन खर्च किया जाने लगा। परन्तु 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध एवं विश्व स्तर पर पैदा हुए तेल संकट के कारण श्रीमती गाँधी ने गरीबी हटाओ कार्यक्रम की राशि में कटौती करना शुरू कर दिया जिससे यह नारा कमजोर पड़ने लगा और केवल पांच साल के अन्दर श्रीमती गाँधी की गरीबी हटाओ की राजनीति असफल हो गई । परिणामतः 1977 के चुनावों में श्रीमती गांधी को पराजय का सामना करना पड़ा तथा जनता पार्टी को सत्ता प्राप्त हुई।

प्रश्न 26.
प्रारंभ में कांग्रेस का चुनाव चिह्न क्या था? कितने वर्ष बाद कांग्रेस फूट का शिकार बनी? अब इस दल का चुनाव चिह्न क्या है?
उत्तर:
प्रारंभ में कांग्रेस का चुनाव चिह्न दो बैलों की जोड़ी था। आजादी के 22 वर्ष गुजरते गुजरते कांग्रेस में व्यापक फूट हो गई थी। अब इस दल का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा है।

प्रश्न 27.
राममनोहर लोहिया का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
राममनोहर लोहिया: राममनोहर लोहिया का जन्म 1910 में हुआ। वे समाजवादी नेता एवं विचारक थे तथा स्वतन्त्रता सेनानी एवं सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य थे। वे मूल पार्टी में विभाजन के बाद सोशलिस्ट पार्टी एवं बाद में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता बने। 1963 से 1967 तक लोकसभा सांसद रहे। वे ‘मैन काइंड’ एवं ‘जन’ के सम्पादक बने। गैर-यूरोपीय समाजवादी सिद्धान्त के विकास में उनका मौलिक योगदान रहा।

वे भारतीय राजनीति के क्षितिज पर गैर- कांग्रेसवादी विचारधारा के संयोजनकर्ता और रणनीतिकार के रूप में उभरे। उन्होंने जीवन भर दलित और पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिए जाने की वकालत की। उन्होंने प्रारम्भ में नेहरू के खिलाफ मोर्चा खोला। भाषा की दृष्टि से वे अंग्रेजी के घोर विरोधी थे। उनका देहान्त 1967 में हुआ।

प्रश्न 28.
प्रिवी पर्स से आप क्या समझते हैं? इस व्यवस्था की समाप्ति के विभिन्न प्रयासों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
प्रिवी पर्स का क्या अर्थ है? 1970 में इंदिरा गाँधी इसे क्यों समाप्त कर देना चाहती थीं? प्रिवी पर्स की समाप्ति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रिवी पर्स से आशय भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय देशी रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया तथा इनके तत्कालीन शासकों को जीवनयापन हेतु विशेष धनराशि एवं भत्ते दिये जाने की व्यवस्था की गई। इसे प्रिवी पर्स के नाम से जाना जाता है। प्रिवीपर्स की समाप्ति श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार ने प्रिवी पर्स को समाप्त करने के लिए 1970 में संविधान में संशोधन का प्रयास किया, लेकिन राज्य सभा में यह मंजूरी नहीं पा सका। इसके बाद सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया, लेकिन इसे सर्वोच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया। श्रीमती गांधी ने इसे 1971 के चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाया और 1971 में मिली भारी जीत के बाद संविधान में संशोधन किया गया। इस प्रकार प्रिवी पर्स की समाप्ति की राह में मौजूदा कानूनी अड़चनें समाप्त हुईं।

प्रश्न 29.
1971 के चुनावों में इंदिरा गाँधी की नाटकीय जीत के लिए कौन-कौनसे प्रमुख कारक जिम्मेदार थे?
उत्तर:
हालाँकि 1971 के चुनावी मुकाबले में काँग्रेस की स्थिति अत्यंत ही कमजोर थी, इसके बावजूद नयी काँग्रेस के साथ एक ऐसी बात थी, जिसका उसके बड़े विपक्षियों के पास अभाव था। नयी काँग्रेस के पास एक मुद्दा था; एक एजेंडा और कार्यक्रम था। विपक्ष के ‘इंदिरा हटाओ’ के विपरीत इंदिरा गाँधी ने लोगों के सामने ‘गरीबी हटाओ’ नामक सकारात्मक कार्यक्रम रखा। यह इंदिरा गाँधी की नाटकीय जीत के लिए एक प्रमुख कारक साबित हुआ।

प्रश्न 30.
लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन क्यों दिया?
उत्तर:
लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री के रूप में समर्थन दिया क्योंकि।

  1. इंदिरा गाँधी जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं और वह पूर्व में काँग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी थीं तथा शास्त्री के मंत्रिमंडल में मंत्री भी रह चुकी थीं।
  2. वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि इंदिरा गाँधी की प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभवहीनता उन्हें समर्थन और मार्गदर्शन के लिए उन पर निर्भर होने पर मजबूर करेंगी और श्रीमती गाँधी उनकी सलाहों पर अमल करेंगी।

प्रश्न 31.
1967 में इंदिरा गाँधी सरकार ने भारतीय रुपये का अवमूल्यन क्यों किया?
उत्तर:
इंदिरा गाँधी सरकार ने 1967 के आर्थिक संकट की जाँच के लिए भारतीय रुपये का अवमूल्यन किया। परिणामतः 1 अमरीकी डॉलर की कीमत 5 रुपये थी जो बढ़कर 7 रुपये हो गई।

  1. आर्थिक स्थिति की विकटता के कारण कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई।
  2. लोग आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, खाद्यान्न की कमी, बढ़ती हुई बेरोजगारी और देश की दयनीय आर्थिक स्थिति को लेकर विरोध पर उतर आए।
  3. साम्यवादी और समाजवादी पार्टी ने व्यापक समानता के लिए संघर्ष छेड़ दिया।

प्रश्न 32.
काँग्रेस को दूसरी बार राजनीतिक उत्तराधिकार की चुनौती का सामना कैसे करना पड़ा?
उत्तर:
काँग्रेस को दूसरी बार राजनीतिक उत्तराधिकार की चुनौती का सामना लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के उपरांत करना पड़ा।

  1. यह चुनौती मोरारजी देसाई और इंदिरा गाँधी के बीच एक गुप्तदान के माध्यम से हल करने के लिए एक गहन प्रतियोगिता के साथ शुरू हुई।
  2. इस चुनाव में इंदिरा गाँधी ने मोरारजी देसाई को हरा दिया था। उन्हें कांग्रेस पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने अपना मत दिया था।
  3. नेतृत्व के लिए प्रतिस्पर्धा के बावजूद पार्टी में सत्ता का हस्तांतरण बड़े शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो गया।

प्रश्न 33.
गठबंधन के नए युग में संयुक्त विधायक दल की स्थिति क्या थी?
उत्तर:
1967 के चुनावों से गठबंधन की परिघटना सामने आयी। क्योंकि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था, इसलिए अनेक गैर-कांग्रेसी पार्टियों ने एकजुट होकर संयुक्त विधायक दल बनाया और गैर-कांग्रेसी सरकार को समर्थन दिया। इसी कारण इन सरकारों को संयुक्त विधायक दल की सरकार कहा गया-।

  1. बिहार में बनी संयुक्त विधायक दल की सरकार में वामपंथी: सीपीआई और दक्षिणपंथी जनसंघ शामिल था।
  2. पंजाब में बनी संयुक्त विधायक दल की सरकार को ‘पॉपुलर यूनाइटेड फ्रंट’ की सरकार कहा गया। इसमें परस्पर प्रतिस्पर्धी अकाली दल – संत ग्रुप और मास्टर ग्रुप शामिल थे।

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प्रश्न 34.
1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता बढ़ाने वाले तीन कारकों का विश्लेषण कीजिए।
अथवा
इंदिरा गाँधी सरकार ने अपनी छवि को समाजवादी बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए?
उत्तर:

  1. 1970 के दशक में इंदिरा गाँधी ने भूमि सुधार के मौजूदा कानूनों के क्रियान्वय के लिए जबरदस्त अभियान चलाए। उन्होंने भू- परिसीमन के कुछ और कानून भी बनवाए।
  2. दूसरे राजनीतिक दलों पर अपनी निर्भरता समाप्त करने, संसद में अपनी पार्टी की स्थिति मजबूत करने और अपने कार्यक्रमों के पक्ष में जनादेश हासिल करने के लिए 1970 के दिसंबर में लोकसभा भंग करने की सिफारिश की।
  3. भारत-पाक युद्ध में बाँग्लादेश को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के संकट ने भी इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 35.
1967 के चुनाव को भारत के राजनीतिक और चुनावी इतिहास में एक ऐतिहासिक वर्ष क्यों माना गया? टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1967 के चुनाव को भारत के राजनीतिक और चुनावी इतिहास में ऐतिहासिक वर्ष माना गया क्योंकि।

  1. यह चुनाव नेहरू के बिना पहली बार आयोजित किया गया था । इस चुनाव का फैसला काँग्रेस के पक्ष में नहीं था और इसके नतीजों ने राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर काँग्रेस को झटका दिया।
  2. इंदिरा गाँधी मंत्रिमंडल के आधे मंत्री चुनाव हार गए थे। इसमें तमिलनाडु से कामराज, महाराष्ट्र से एस. के. पाटिल, पश्चिम बंगाल से अतुल्य घोष और बिहार से के. बी. सहाय इत्यादि शामिल हैं।
  3. चुनावी इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी गैर- काँग्रेसी दल को किसी राज्य में पूर्ण बहुमत मिला।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पण्डित जवाहर लाल नेहरू के बाद राजनीतिक उत्तराधिकार पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
सन् 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि भारत में कांग्रेस पार्टी में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष छिड़ जायेगा और कांग्रेस पार्टी बिखर जायेगी। लेकिन यह सब गलत साबित हुआ और पं. नेहरू की मृत्यु के बाद उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप में पहले लालबहादुर शास्त्री तथा बाद में श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने सफलतापूर्वक कार्य किया।
1. श्री लालबहादुर शास्त्री:
लालबहादुर शास्त्री ने 6 जून, 1964 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। जब शास्त्रीजी ने नेहरू की मृत्यु के बाद कार्यभार सँभाला उस समय देश अनेक संकटों का सामना कर रहा था। देश में अनाज की कमी थी। देश का मनोबल नीचा था, सीमान्त क्षेत्रों में तनाव विद्यमान था आदि। शास्त्रीजी ने इन चुनौतियों का दृढ़तापूर्वक सामना किया तथा कृषि पर बल देते हुए ‘अधिक अन्न उगाओ के साथ ही ‘जय जवान जय किसान’ का मशहूर नारा भी दिया।

1965 में पाकिस्तान के आक्रमण का शास्त्रीजी की सूझ-बूझ एवं कुशल नेतृत्व से युद्ध में विजय प्राप्त की । सोवियत संघ के प्रयासों से 1966 में भारत-पाकिस्तान के बीच ताशकंद में समझौता हुआ और ताशकन्द में ही जनवरी, 1966 में शास्त्रीजी की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।

2. श्रीमती इंदिरा गांधी: शास्त्रीजी की मृत्यु के पश्चात् श्रीमती इन्दिरा गाँधी को प्रधानमंत्री बनाया गया। अपने प्रधानमंत्री काल में श्रीमती गांधी ने ऐसे कई कार्य किए जिससे देश प्रगति कर सके। उन्होंने कृषि कार्यों को बढ़ावा दिया। गरीबी को हटाने के लिए कार्यक्रम घोषित किया तथा देश की सेनाओं का आधुनिकीकरण किया। 1974 में पोकरण में ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण किया। 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में भारत की निर्णायक विजय हुई तथा बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इस युद्ध में विजय के बाद विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी।

प्रश्न 2.
1971 में पांचवीं लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की विजय पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए।
अथवा
पांचवीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी की जीत के प्रमुख कारणों का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
1971 का लोकसभा चुनाव इंदिरा गांधी के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। श्रीमती गाँधी पार्टी अनुभवी नेताओं को छोड़कर, निर्वाचकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने के लिए निकल पड़ीं और चुनावों में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की। श्रीमती गाँधी की पार्टी को लोकसभा की 518 सीटों में से 352 सीटें प्राप्त हुईं। कांग्रेस की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे अनेक कारण जिम्मेदार रहे, जो इस प्रकार हैं।

  1. श्रीमती गांधी का प्रभावशाली नेतृत्व: 1971 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की सफलता का मूल कारण श्रीमती गाँधी का चमत्कारिक एवं प्रभावशाली नेतृत्व रहा।
  2. पार्टी पर श्रीमती गांधी की पकड़ व नियन्त्रण: इस चुनाव में श्रीमती गांधी की अपने दल पर पूरी पकड़ एवं प्रभाव था।
  3. गरीबी हटाओ का नारा: 1971 में कांग्रेस पार्टी की सफलता का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण उनके द्वारा दिया गया गरीबी हटाओ का नारा था । इस नारे के बल पर श्रीमती गांधी ने अधिकांश गरीबों के वोट अपनी झोली में डाले।
  4. समाजवादी नीतियों एवं कार्यक्रमों का निर्धारण: 1971 के चुनावों में कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत का एक और कारण बैंकों का राष्ट्रीयकरण, राजाओं के प्रीविपर्स बन्द करना तथा श्रीमती गाँधी की अन्य समाजवादी नीतियों को भी माना जाता है। इस प्रकार श्रीमती गांधी का चमत्कारिक नेतृत्व गरीबी हटाओ का नारा, बैंकों का राष्ट्रीयकरण व समाजवादी नीतियों का अपनाना ऐसे मुद्दे थे जिन्होंने 1971 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भारी सफलता दिलाई।

प्रश्न 3.
1970 के दशक में इंदिरा गाँधी की सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने वाले कारकों का विस्तारपूर्वक विश्लेषण कीजिए
उत्तर:
1. लोकसभा का पांचवा आमचुनाव 1971 में हुआ था। चुनावी मुकाबला काँग्रेस (आर) के विपरीत जान पड़ रहा था। हर किसी को विश्वास था कि काँग्रेस पार्टी की असली सांगठनिक ताकत काँग्रेस (ओ) के नियंत्रण में है। इसके अतिरिक्त, सभी बड़ी गैर – साम्यवादी और गैर-कांग्रेसी विपक्षी पार्टियों ने एक चुनावी गठबंधन बना लिया था। से ‘ग्रैंड अलायंस’ कहा गया। एसएसपी, पीएसपी, भारतीय जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी और भारतीय क्रांतिदल, चुनाव में एक छतरी के नीचे आ गए। शासक दल ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठजोड़ किया। इसके बावजूद नयी काँग्रेस के साथ एक ऐसी बात थी, जिसका उसके बड़े विपक्षियों के पास अभाव था।

2. नयी कॉंग्रेस के पास एक मुद्दा था; एक एजेंडा और कार्यक्रम था। ‘ग्रैंड अलायंस’ के पास कोई सुसंगत राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था। विपक्षी गठबंधन के ‘इंदिरा हटाओ’ के विपरीत इंदिरा गाँधी के ‘गरीबी हटाओ’ नामक सकारात्मक कार्यक्रम रखा।

3. इंदिरा गाँधी ने सार्वजनिक क्षेत्र की संवृद्धि, ग्रामीण भू-स्वामित्व और शहरी संपदा के परिसीमन, आय और अवसरों की असमानता की समाप्ति तथा ‘प्रिवी पर्स’ की समाप्ति पर अपने चुनाव अभियान में जोर दिया। ‘गरीबी हटाओ’ के नारे से इंदिरा गाँधी ने वंचित तबकों खासकर भूमिहीन किसान, दलित और आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिला और बेरोजगार नौजवानों के बीच अपने समर्थन का आधार तैयार करने की कोशिश की।

‘गरीबी हटाओ’ का नारा और इससे जुड़ा हुआ कार्यक्रम इंदिरा गाँधी की राजनीतिक रणनीति थी। परिणामस्वरूप इंदिरा गाँधी की काँग्रेस (आर) ने 352 सीटें और 44 प्रतिशत वोट हासिल किये। इस जीत के साथ इंदिरा गाँधी की अगुवाई वाली काँग्रेस ने अपने दावे को साबित कर दिया और भारतीय राजनीति में फिर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 5 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

प्रश्न 4.
काँग्रेस ‘सिंडिकेट’ पर विस्तार में लिखिए।
उत्तर:
कांग्रेसी नेताओं के एक समूह को अनौपचारिक तौर पर ‘सिंडिकेट’ के नाम से इंगित किया जाता था। इस समूह के नेताओं का पार्टी के संगठन पर नियंत्रण था। ‘सिंडिकेट’ के अगुवा मद्रास प्रांत के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और फिर काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रह चुके के. कामराज थे। इसमें प्रांतों के ताकतवर नेता जैसे बंबई सिटी के एस. के. पाटिल, मैसूर के एस. निजलिंगप्पा, आंध्र प्रदेश के एन. संजीव रेड्डी और पश्चिम बंगाल के अतुल्य घोष शामिल थे। लालबहादुर शास्त्री और उसके बाद इंदिरा गाँधी दोनों ही सिंडिकेट की सहायता से प्रधानमंत्री के पद पर आरूढ़ हुए थे।

इंदिरा गाँधी के पहले मंत्रिपरिषद् में इस समूह की निर्णायक भूमिका रही। इसने तब नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभायी थी। कांग्रेस के विभाजित होने के बाद सिंडिकेट के नेताओं और उनके प्रति निष्ठावान काँग्रेसी काँग्रेस (ओ) में ही रहे । चूँकि इंदिरा गाँधी की काँग्रेस (आर) ही लोकप्रियता की कसौटी पर सफल रहीं, इसलिए भारतीय राजनीति के ये बड़े और ताकतवर नेता 1971 के बाद प्रभावहीन हो गए।

प्रश्न 5.
1969 के दौरान काँग्रेस में विभाजन के लिए जिम्मेदार कारकों का विस्तार में उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
काँग्रेस में औपचारिक विभाजन 1969 में राष्ट्रपति चुनावों के दौरान उम्मीदवार के नामांकन के मुद्दे पर हुआ।

  • राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया और इंदिरा गाँधी की असहमति के बावजूद सिंडिकेट ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष एन. संजीव रेड्डी को काँग्रेस पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया।
  • इस स्थिति का प्रतिकार करने के लिए इंदिरा गाँधी ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी.वी. गिरि को बढ़ावा दिया कि वे एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरें।
  • चुनाव के दौरान तत्कालीन काँग्रेस अध्यक्ष एस. निजलिंगप्पा ने ‘ह्विप’ जारी किया कि काँग्रेसी सांसद और विधायक संजीव रेड्डी को वोट डालें।
  • दूसरी तरफ इंदिरा गाँधी ने छुपे तौर पर वी.वी. गिरि को समर्थन करते हुए विधायकों और सांसदों को अंतरात्मा की आवाज पर तथा अपनी मनमर्जी से वोट डालने का आह्वान किया।
  • आखिरकार राष्ट्रपति पद के चुनाव में वी.वी. गिरि विजयी हुए।
  • कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की हार से पार्टी का टूटना तय हो गया; और इस प्रकार काँग्रेस पार्टी का विभाजन दो गुटों में हो गया।
    1. सिंडिकेट की अगुवाई वाले काँग्रेसी खेमा को काँग्रेस (ओ) के नाम से तथा
    2. इंदिरा गाँधी की अगुवाई वाले काँग्रेसी खेमे को काँग्रेस (आर) के नाम से जाना गया।
  • इन दोनों दलों को क्रमशः ‘पुरानी काँग्रेस’ और ‘नयी काँग्रेस’ भी कहा जाता था।

प्रश्न 6.
1967 के चौथे आम चुनाव से पहले गंभीर आर्थिक संकट की जाँच करें। चुनावी फैसले का भी आकलन करें।
उत्तर:
इंदिरा गाँधी सरकार ने 1967 के आर्थिक संकट की जाँच के लिए भारतीय रुपये का अवमूल्यन किया फलस्वरूप पहले के वक्त में 1 अमरीकी डॉलर की कीमत 5 रुपये थी जो बढ़कर 7 रुपये हो गई।

  • आर्थिक संकट के कारण कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ।
  • आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, बेरोजगारी आदि को लेकर जनता विरोध करने लगी।
  • साम्यवादी और समाजवादी पार्टी ने व्यापक समानता के लिए संघर्ष छेड़ दिया। चौथा आम चुनाव पहली बार नेहरू की गैर मौजूदगी में हुआ था।
    1. चुनाव के परिणामों से काँग्रेस को राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर धक्का लगा।
    2. इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडल के आधे मंत्री चुनाव हार गए थे। तमिलनाडु से कामराज, महाराष्ट्र से एस. पाटिल, पश्चिम बंगाल से अतुल्य घोष इत्यादि दिग्गजों को मुँह की खानी पड़ी थी।
    3. काँग्रेस को सात राज्यों में बहुमत नहीं मिला और दो अन्य राज्यों में दलबदल के कारण यह पार्टी सरकार नहीं बना पायी।
    4. चुनावी इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी गैर – काँग्रेसी दल को किसी राज्य में पूर्ण बहुमत मिला।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

Jharkhand Board JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

बहुचयनात्मक प्रश्न

1. भारतीय विदेश नीति के जनक हैं।
(क) पंडित जवाहरलाल नेहरू
(ग) वल्लभ भाई पटेल
(ख) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(घ) मौलाना अबुल कलाम आजाद।
उत्तर:
(क) पंडित जवाहरलाल नेहरू

2. भारतीय विदेश नीति किन कारकों से प्रभावित है।
(क) सांस्कृतिक कारक
(ग) अन्तर्राष्ट्रीय कारक
(ख) घरेलू कारक
(घ) घरेलू तथा अन्तर्राष्ट्रीय कारक।
उत्तर:
(घ) घरेलू तथा अन्तर्राष्ट्रीय कारक।

3. बाण्डुंग सम्मेलन सम्पन्न हुआ।
(क) 1954 में
(ख) 1955 में
(ग) 1956 में
(घ) 1957 में।
उत्तर:
(ख) 1955 में

4. भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषता है।
(क) पंचशील
(ख) सैनिक गुट
(ग) गुटबन्दी
(घ) उदासीनता।
उत्तर:
(क) पंचशील

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

5. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के प्रणेता हैं।
(क) पं. नेहरू
(ख) नासिर
(ग) मार्शल टीटो
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।

6. पंचशील के सिद्धान्त किसके द्वारा घोषित किये गये थे?
(क) नेहरू
(ग) राजीव गाँधी
(ख) लाल बहादुर शास्त्री
(घ) अटल बिहारी वाजपेयी।
उत्तर:
(क) नेहरू

7. पहला परमाणु परीक्षण भारत में कब किया गया था?
(क) 1971
(ख) 1974
(ग) 1980
(घ) 1985।
उत्तर:
(ख) 1974

8. निम्न का सही मिलान कीजिए।

(क) घाना (i) जवाहरलाल नेहरू
(ख) मिस्र (ii) एन कुमा
(ग) भारत (iii) नासिर
(घ) इंडोनेशिया (iv) सुकर्णो
(ङ) यूगोस्लाविया (v) टीटो

उत्तर:

(क) घाना (ii) एन कुमा
(ख) मिस्र (iii) नासिर
(ग) भारत (i) जवाहरलाल नेहरू
(घ) इंडोनेशिया (iv) सुकर्णो
(ङ) यूगोस्लाविया (v) टीटो

9. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्देशक सिद्धांत का उल्लेख किया गया हैं।
(क) अनुच्छेद 47
(ख) अनुच्छेद 50
(ग) अनुच्छेद 51
(घ) अनुच्छेद 49
उत्तर:
(ग) अनुच्छेद 51

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

10. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान आई. एन. ए. का गठन किसने किया था?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ग) सरदार पटेल
(ख) सुभाषचंद्र बोस
(घ) भगत सिंह
उत्तर:
(ख) सुभाषचंद्र बोस

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. पंडित नेहरू के अनुसार हर देश की आजादी बुनियादी तौर पर ………………………. संबंधों से ही बनी होती है।
उत्तर:
विदेश

2. शीतयुद्ध के दौरान चीन में ……………………. शासन की स्थापना हुई।
उत्तर:
कम्युनिस्ट

3. शीतयुद्ध के समय अमरीका द्वारा उत्तर अटलांटिक संधि संगठन का जवाब सोवियत संघ ने …………………….. नामक संधि संगठन बनाकर दिया।
उत्तर:
वारसा पैक्ट

4. ब्रिटेन ने स्वेज नहर के मामले को लेकर मिस्र पर ………………………….. में आक्रमण किया।
उत्तर:
1956

5. नेहरू की अगुवाई में भारत ने ……………………… के मार्च में ………………………. संबंध सम्मेलन का आयोजन किया।
उत्तर:
एशियाई

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत ने ताशकंद में किस संधि पर हस्ताक्षर किए?
उत्तर:
भारत ने ताशकंद में पाकिस्तान के साथ मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए।

प्रश्न 2.
भारत के पहले विदेश मंत्री कौन थे?
उत्तर:
पण्डित जवाहरलाल नेहरू।

प्रश्न 3.
भारत में एशियाई सम्मेलन का आयोजन कब किया गया?
उत्तर:
सन् 1947 में।

प्रश्न 4.
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में किस नये देश का जन्म हुआ?
उत्तर:
बांग्लादेश का।

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प्रश्न 5.
शिमला समझौते पर कब व किसने हस्ताक्षर किये?
उत्तर:
शिमला समझौते पर जुलाई, 1972 में भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किये।

प्रश्न 6.
भारत द्वारा दूसरा परमाणु परीक्षण कब किया गया?
उत्तर:
11 व 13 मई, 1998 के बीच

प्रश्न 7.
1966 में ताशकंद समझौता किन दो राष्ट्रों के मध्य हुआ?
अथवा
ताशकन्द समझौता कब और किसके मध्य हुआ?
उत्तर:
10 जनवरी, 1966 को भारत और पाकिस्तान के मध्य।

प्रश्न 8.
चीन ने तिब्बत पर कब कब्जा किया?
उत्तर:
चीन ने तिब्बत पर 1950 में कब्जा किया।

प्रश्न 9.
चीन और भारत में पंचशील समझौता कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1954 में।

प्रश्न 10.
एक राष्ट्र के रूप में भारत का जन्म कब हुआ था?
उत्तर:
एक राष्ट्र के रूप में भारत का जन्म विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में हुआ था।

प्रश्न 11.
राष्ट्र शक्ति के तीन साधन कौन-कौनसे हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक सम्पदा, धन, धन एवं जन-शक्ति।

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प्रश्न 12.
आजाद हिन्द फौज की स्थापना किसने की?
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस ने।

प्रश्न 13.
विदेश नीति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रत्येक देश दूसरे देशों के साथ सम्बन्धों की स्थापना में एक विशेष प्रकार की नीति का प्रयोग करता है। जिसे विदेश नीति कहा जाता है।

प्रश्न 14.
भारतीय विदेश नीति के दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. क्षेत्रीय अखण्डता की रक्षा करना।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा कायम रखना और उसे प्रोत्साहन देना।

प्रश्न 15.
एशियन सम्बन्ध सम्मेलन कब और किसके नेतृत्व में हुआ?
उत्तर:
एशियन सम्बन्ध सम्मेलन मार्च, 1947 में पं. जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत में हुआ।

प्रश्न 16.
भारतीय विदेश नीति के संवैधानिक आधार बताइए।
उत्तर:
अनुच्छेद 51 के अनुसार राज्य को अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को निपटाने के लिए मध्यस्थ का रास्ता अपनाने सम्बन्धी निर्देश दिये गये हैं।

प्रश्न 17.
तिब्बत के किस धार्मिक नेता ने भारत में कब शरण ली?
उत्तर:
तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया और 1959 में भारत में शरण माँगी।

प्रश्न 18.
शीतयुद्ध के दौरान अमरीका द्वारा कौन-सा संगठन बनाया गया?
उत्तर:
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO)।.

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प्रश्न 19.
ब्रिटेन ने मिस्र पर कब और क्यों आक्रमण किया?
उत्तर:
ब्रिटेन ने मिस्र पर 1956 में स्वेज नहर के मामले को लेकर आक्रमण किया।

प्रश्न 20.
वारसा पैक्ट नामक संगठन किसके द्वारा बनाया गया?
उत्तर:
सोवियत संघ।

प्रश्न 21. भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा मुद्दा क्या रहा है?
उत्तर:
भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा मुद्दा सीमा विवाद का रहा है।

प्रश्न 22.
भारतीय विदेश नीति के किन्हीं दो सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति के दो सिद्धान्त ये हैं।

  1. गुटनिरपेक्षता की नीति
  2. पंचशील सिद्धान्त।

प्रश्न 23.
गुटनिरपेक्षता का अर्थ बताइये।
उत्तर:
किसी गुट में शामिल न होते हुए, राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर अपनी स्वतन्त्र विदेश नीति का संचालन करना ही गुटनिरपेक्षता है।

प्रश्न 24.
नियोजित विकास की रणनीति में किस बात पर जोर दिया गया?
उत्तर:
आयात कम करने पर और संसाधन आधार तैयार करने पर।

प्रश्न 25.
बांडुंग सम्मेलन कब और कहाँ सम्पन्न हुआ?
उत्तर:
1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग शहर में1

प्रश्न 26.
पंचशील के दो सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर:

  1. एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  2. अनाक्रमण।

प्रश्न 27.
WTO का पूरा नाम बताइये।
उत्तर:
वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन ( अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन)।

प्रश्न 28.
गुटनिरपेक्षता की नीति के दो उद्देश्य बताइए।
उत्तर:

  1. स्वतन्त्र विदेश नीति का संचालन।
  2. विकासशील राष्ट्रों के आर्थिक विकास हेतु प्रयत्न करना।

प्रश्न 29.
सी. टी. बी. टी. का पूरा नाम बताइये।
उत्तर:
कॉम्प्रीहेन्सिव टेस्ट बैन ट्रीटी।

प्रश्न 30.
पंचशील सिद्धान्त का प्रतिपादन कब किया गया?
उत्तर:
पंचशील के सिद्धान्तों का प्रतिपादन 29 अप्रैल, 1954 को भारत और चीन के प्रधानमन्त्रियों ने तिब्बत के समझौते पर हस्ताक्षर करके किया।

प्रश्न 31.
मुजीबुर्रहमान की पार्टी का नाम क्या था?
उत्तर:
आवामी लीग।

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प्रश्न 32.
रक्षा – उत्पाद विभाग और रक्षा आपूर्ति विभाग की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
रक्षा आपूर्ति विभाग – 1962
रक्षा आपूर्ति विभाग – 1965

प्रश्न 33.
चौथी पंचवर्षीय योजना कब शुरू की गई?
उत्तर:
1969

प्रश्न 34.
भारत ने परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत किसके निर्देशन में की?
उत्तर:
होमी जहाँगीर भाभा।

प्रश्न 35.
अरब-इजरायल युद्ध कब हुआ?
उत्तर:
1973 में।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय विदेश नीति राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने में किस प्रकार सहायक सिद्ध हुई है?
उत्तर:
भारत की गुटनिरपेक्षता, दूसरे देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध, जातीय भेदभाव का विरोध और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन आदि विदेश नीति के सिद्धांत भारत के राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध हुए हैं। भारत शुरुआत से ही शांतिप्रिय देश रहा है इसलिए भारत ने अपनी विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों के सिद्धांत पर आधारित किया। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भी भारत ने सबसे मित्रतापूर्ण व्यवहार रखा। वर्तमान समय में भी भारत के संबंध विश्व की महाशक्तियों एवं अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे हैं।

प्रश्न 2.
विकासशील देशों की विदेश नीति का लक्ष्य सीधा-सादा होता है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर;
जिस प्रकार किसी व्यक्ति या परिवार के व्यवहारों को अंदरूनी और बाहरी कारक निर्देशित करते हैं उसी ” तरह एक देश की विदेश नीति पर भी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वातावरण का असर पड़ता है। विकासशील देशों के पास अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के भीतर अपने सरोकारों को पूरा करने के लिए जरूरी संसाधनों का अभाव होता है। इसके कारण विकासशील देश बढ़े – चढ़े देशों की अपेक्षा सीधे-सादे लक्ष्यों को लेकर अपनी विदेश नीति तय करते हैं। ऐसे देश इस बात पर जोर देते हैं कि उनके पड़ोसी देशों में शांति कायम रहे और विकास भी होता रहे।

प्रश्न 3.
शिमला समझौता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
शिमला समझौता क्या है?
उत्तर:
भारत-पाक युद्ध 1971 के बाद जुलाई, 1972 में शिमला में भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भुट्टो के बीच एक समझौता हुआ जिसे शिमला समझौता कहा जाता है।

प्रश्न 4.
पंचशील के सिद्धान्तों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पंचशील के सिद्धान्तों का प्रतिपादन 29 अप्रैल, 1954 को भारत और चीन के प्रधानमन्त्रियों ने तिब्बत के सम्बन्ध में एक समझौता किया। ये सिद्धान्त हैं।

  1. सभी देश एक-दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता का सम्मान करें।
  2. अनाक्रमण।
  3. एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  4. परस्पर समानता तथा लाभ के आधार पर कार्य करना।
  5. शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व।

प्रश्न 5.
अनुच्छेद 51 में वर्णित अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बढ़ाने वाले कोई दो नीति निदेशक तत्त्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अनुच्छेद-51 में वर्णित अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बढ़ाने वाले दो नीति निदेशक तत्त्व ये हैं।

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा में अभिवृद्धि करना।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने का प्रयास करना।

प्रश्न 6.
पण्डित नेहरू के अनुसार गुटनिरपेक्षता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
पण्डित नेहरू के अनुसार गुटनिरपेक्षता नकारात्मक तटस्थता, अप्रगतिशील अथवा उपदेशात्मक नीति नहीं है । इसका अर्थ सकारात्मक है अर्थात् जो उचित और न्यायसंगत है उसकी सहायता एवं समर्थन करना तथा जो अनुचित एवं अन्यायपूर्ण है उसकी आलोचना एवं निन्दा करना है।

प्रश्न 7.
भारतीय विदेश नीति में साधनों की पवित्रता से क्या अर्थ है?
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति में साधनों की पवित्रता से तात्पर्य है। अन्तर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान करने में शान्तिपूर्ण तरीकों का समर्थन तथा हिंसात्मक एवं अनैतिक साधनों का विरोध करना । भारतीय विदेश नीति का यह तत्त्व अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति को परस्पर घृणा तथा सन्देह की भावना से दूर रखना चाहता है।

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प्रश्न 8.
दूसरे युद्ध के पश्चात् विकासशील देशों ने क्या ध्यान में रखकर अपनी विदेश नीति बनाई?
उत्तर:
विकासशील देश आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ताकतवर देशों पर निर्भर होते हैं। इसलिए दूसरे विश्वयुद्ध के तुरंत बाद के दौर में अनेक विकासशील देशों ने ताकतवर देशों की मर्जी को ध्यान में रखकर अपनी विदेश नीति अपनाई क्योंकि इन देशों से इन्हें अनुदान अथवा कर्ज मिल रहा था।

प्रश्न 9.
विदेश मंत्री के रूप में नेहरू के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विदेश मंत्री के रहते हुए प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय एजेंडा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के रूप में 1946 से 1964 तक उन्होंने भारत की विदेश नीति की रचना और क्रियान्वयन पर गहरा प्रभाव डाला। इनकी विदेश नीति के तीन बड़े उद्देश्य थे। कठिन संघर्ष से प्राप्त संप्रभुता को बचाए रखना, क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना और तेज रफ्तार से आर्थिक विकास करना।

प्रश्न 10.
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की स्थापना के लिए कौन-कौन उत्तरदायी थे?
उत्तर:
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के जन्मदाता के रूप में भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। सर्वप्रथम नेहरूजी ने इस नीति को भारत के लिए उपयुक्त समझा। इसके पश्चात् 1955 के बांडुंग सम्मेलन के दौरान नासिर (मिस्र) एवं टीटो (यूगोस्लाविया) के साथ मिलकर इसे विश्व आन्दोलन बनाने पर सहमति प्रकट की।

प्रश्न 11.
गुट निरपेक्षता की नीति ने कम से कम दो तरह से भारत का प्रत्यक्ष रूप से हित साधन किया- स्पष्ट कीजिये। गुट निरपेक्ष नीति से भारत को मिलने वाले दो लाभ बताइये।
उत्तर:

  1. गुट निरपेक्ष नीति अपनाकर ही भारत शीत युद्ध काल में दोनों गुटों से सैनिक व आर्थिक सहायता प्राप्त करने में सफल रहा।
  2. इस नीति के कारण ही भारत को कश्मीर समस्या पर रूस का हमेशा समर्थन मिला।

प्रश्न 12.
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के क्या कारण थे?
उत्तर:
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के प्रमुख कारण निम्न थे।

  1. 1962 में चीन से हार जाने से पाकिस्तान ने भारत को कमजोर माना।
  2. 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद नए नेतृत्व को पाकिस्तान ने कमजोर माना।
  3. पाकिस्तान में सत्ता प्राप्ति की राजनीति।
  4. 1963-64 में कश्मीर में मुस्लिम विरोधी गतिविधियाँ पाकिस्तान की विजय में सहायक होंगी।

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प्रश्न 13.
विदेश नीति से संबंधित किन्हीं दो नीति निर्देशक सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिये।
अथवा
भारतीय विदेश नीति के संवैधानिक सिद्धान्तों को सूचीबद्ध कीजिये।
अथवा
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-51 में विदेश नीति के दिये गये संवैधानिक सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा में अभिवृद्धि।
  2. राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण एवं सम्मानपूर्ण सम्बन्धों को बनाए रखना।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने का प्रयास करना।
  4. संगठित लोगों के परस्पर व्यवहारों में अन्तर्राष्ट्रीय विधि और संधियों के प्रति आदर की भावना रखना।

प्रश्न 14.
भारत की परमाणु नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत की परमाणु नीति- 18 अगस्त, 1999 को जारी की गई भारत की परमाणु नीति में शस्त्र नियंत्रण के सिद्धान्त को अपनाया गया है। भारत अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखेगा, लेकिन उसने पहले परमाणु हमला नहीं करने की प्रतिबद्धता दर्शायी है।

प्रश्न 15.
भारतीय विदेश नीति में आया महत्त्वपूर्ण परिवर्तन बताओ।
उत्तर:
भारत की विदेश नीति में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन पश्चिमी ब्लॉक की तरफ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना, परमाणु ब्लॉक में शामिल होना। 1990 के बाद से रूस का अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व कम हुआ इसी कारण भारत की विदेश नीति में अमरीका समर्थक रणनीतियाँ अपनाई गई हैं। इसके अतिरिक्त मौजूदा अन्तर्राष्ट्रीय परिवेश में सैन्य हितों के बजाय आर्थिक हितों पर जोर ज्यादा है। इसका असर भी भारत की विदेश नीति में अपनाए गए विकल्पों पर पड़ा है।

प्रश्न 16.
भारत-रूस ( सोवियत संघ ) 1971 की सन्धि के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1971 में भारत: सोवियत संघ के बीच 20 वर्षीय मैत्री की सन्धि की गई थी। इस सन्धि के अधीन सोवियत संघ ने भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति को स्वीकार किया तथा दोनों देशों ने किसी के विरुद्ध हुए बाह्य आक्रमण के समय परस्पर विचार-विमर्श करने की व्यवस्था की।

प्रश्न 17.
1950 के दशक में भारत-अमरीकी सम्बन्धों में खटास पैदा करने वाले दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. पाकिस्तान अमरीकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबन्धन में शामिल हो गया। इससे अमरीका तथा भारत के सम्बन्धों में खटास पैदा हो गई।
  2. अमरीका, सोवियत संघ से भारत की बढ़ती हुई दोस्ती को लेकर भी नाराज था।

प्रश्न 18.
प्रथम एफ्रो-एशियाई एकता सम्मेलन कहाँ हुआ? इसकी दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
प्रथम एफ्रो एशियाई एकता सम्मेलन इंडोनेशिया के एक बड़े शहर बांडुंग में 1955 में हुआ इसकी विशेषताएँ हैं।

  1. इस सम्मेलन में गुट निरपेक्ष आन्दोलन की नींव पड़ी।
  2. इस सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने इण्डोनेशिया में नस्लवाद विशेषकर दक्षिण अफ्रीका में रंग-भेद का विरोध किया।

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प्रश्न 19.
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के कोई तीन राजनीतिक परिणाम बताइये।
उत्तर:

  1. भारतीय सेना के समक्ष पाकिस्तानी सेना ने 90,000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।
  2. बांग्लादेश के रूप में एक स्वतन्त्र राज्य का उदय हुआ।
  3. 3 जुलाई, 1972 को इन्दिरा गाँधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर हुए और अमन की बहाली हुई।

प्रश्न 20.
विदेश नीति के चार अनिवार्य कारक बताइए।
उत्तर:
विदेश नीति के चार प्रमुख अनिवार्य कारक ये हैं।

  1. राष्ट्रीय हित,
  2. राज्य की राजनीतिक स्थिति,
  3. पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध,
  4. अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक वातावरण।

प्रश्न 21.
भारतीय विदेश नीति के लक्ष्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. राष्ट्रीय हित: भारतीय विदेश नीति का लक्ष्य राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करना है जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर विकास करना है।
  2. विश्व समस्याओं के प्रति दृष्टिकोण-इनमें प्रमुख रूप से विश्व शान्ति, राज्यों का सहअस्तित्व, राज्यों का आर्थिक विकास मानवाधिकार आदि शामिल हैं।

प्रश्न 22.
नेहरूजी की विदेश नीति की कोई दो विशेषताएँ लिखिये
अथवा
भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  1. गुटनिरपेक्षता की नीति का अनुसरण करना।
  2. राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना।
  3. जाति, रंग, भेदभाव, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद का विरोध करना।

प्रश्न 23.
एशियाई देशों के मामले में नेहरू के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत के आकार, अवस्थिति और शक्ति: संभावना को भाँपकर नेहरू ने विश्व के मामलों, मुख्यतया एशियाई मामलों में भारत के लिए बड़ी भूमिका का स्वप्न देखा था। नेहरू के दौर में भारत ने एशियाई और अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों के साथ संपर्क बनाए 1940 और 1950 के दशकों में नेहरू बड़े मुखर स्वर में एशियाई एकता की पैरोकारी करते रहे। नेहरू की अगुवाई में भारत ने 1947 के मार्च में एशियाई संबंध सम्मेलन का आयोजन किया। भारत ने इंडोनेशिया को डच औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता संग्राम के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन किया।

प्रश्न 24.
ताशकंद समझौते के कोई दो प्रावधान लिखें।
उत्तर:

  1. दोनों पक्षों ( भारत – पाकिस्तान) का यह प्रयास रहेगा कि संयुक्त राष्ट्र के घोषणा-पत्र के अनुसार दोनों में मधुर सम्बन्ध बनें।
  2. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि दोनों देशों की सेनाएँ फरवरी, 1966 से पहले उस स्थान पर पहुँच जाएँ जहाँ 5 अगस्त, 1965 से पहले थीं।

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प्रश्न 25.
शिमला समझौते पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1972 में भारत और पाकिस्तान के मध्य शिमला समझौता हुआ। इसकी प्रमुख शर्तें हैं।

  1. दोनों देश आपसी मतभेदों का शान्तिपूर्ण ढंग से समाधान करेंगे।
  2. दोनों देश एक-दूसरे की सीमा पर आक्रमण नहीं करेंगे।

प्रश्न 26.
भारत और चीन के मध्य तनाव के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  1. भारत और चीन में महत्त्वपूर्ण विवाद सीमा का विवाद है। चीन ने भारत की भूमि पर कब्जा कर रखा है।
  2. चीन का तिब्बत पर कब्जा और भारत का दलाईलामा को राजनीतिक शरण देना।

प्रश्न 27.
भारत व चीन के मध्य अच्छे सम्बन्ध बनाने हेतु दो सुझाव दीजिये।
उत्तर:

  1. दोनों पक्ष सीमा विवादों के निपटारे के लिए वार्ताएँ जारी रखें तथा सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखें।
  2. दोनों देशों को द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि करने का प्रयत्न करना चाहिए।

प्रश्न 28.
भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बन्धों में तनाव के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  1. भारत-पाक सम्बन्धों में तनाव का महत्त्वपूर्ण कारण कश्मीर का मामला है।
  2. भारत-पाक के मध्य तनाव का अन्य कारण भारत में पाक समर्थित आतंकवाद है। पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से कश्मीर के आतंकवादियों की सभी तरह से सहायता कर रहा है।

प्रश्न 29.
भारत द्वारा परमाणु नीति अपनाने के मुख्य कारण बताइ ।
उत्तर:

  1. भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर दूसरे देशों के आक्रमण से बचने के लिए न्यूनतम – अवरोध की स्थिति प्राप्त करना चाहता है।
  2. भारत के दो पड़ोसी देशों चीन एवं पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और इन दोनों देशों से भारत युद्ध भी लड़ चुका है।

प्रश्न 30.
भारत की परमाणु नीति की किन्हीं दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. भारत परमाणु क्षेत्र में न्यूनतम प्रतिरोध की क्षमता प्राप्त करना चाहता है।
  2. भारत परमाणु हथियारों का प्रयोग पहले नहीं करेगा।

प्रश्न 31.
भारतीय विदेश नीति के चार निर्धारक तत्त्वों का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति के निर्धारक तत्त्व : भारतीय विदेश नीति के प्रमुख निर्धारक तत्त्व निम्नलिखित हैं।

  1. भारत की विदेश नीति की आधारशिला उसके राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा है।
  2. शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की भावना का विकास करना।
  3. पड़ोसी देशों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बनाये रखना।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने हेतु शान्तिपूर्ण साधनों के प्रयोग पर बल देना।

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प्रश्न 32.
आप नेहरूजी को विदेश नीति तय करने का एक अनिवार्य संकेतक क्यों मानते हैं? दो कारण बताइये।
उत्तर:

  1. नेहरूजी प्रधानमंत्री के साथ-साथ विदेश मंत्री भी थे। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की विदेश नीति की रचना और क्रियान्वयन पर गहरा प्रभाव डाला।
  2. नेहरूजी ने देश की संप्रभुता को बचाए रखने, क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने तथा तीव्र आर्थिक विकास की दृष्टि से गुटनिरपेक्षता की नीति अपनायी।

प्रश्न 33.
पण्डित नेहरू के काल में भारत की विदेश नीति की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पण्डित नेहरू के काल में भारत की विदेश नीति की उपलब्धियाँ: प्रधानमन्त्री नेहरू की विदेश नीति अत्यधिक आदर्शवादी और भावना प्रधान थी। इस नीति के चलते भारत ने दोनों गुटों से प्रशंसा तथा सहायता पाने में सफलता प्राप्त की। यह विश्व शान्ति बनाये रखने में अत्यधिक सफल रही। नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण ही भारत-चीन युद्ध के समय उन्होंने रूस तथा अमेरिका दोनों देशों से सहायता प्राप्त की इस नीति के कारण भारत शान्तिदूत, गुटों का पुल, तटस्थ विश्व का नेता आदि माना जाने लगा।

प्रश्न 34.
पंचशील के पाँच सिद्धान्त क्या हैं?
अथवा
पंचशील के सिद्धान्त पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पंचशील के सिद्धान्त: पंचशील के पाँच सिद्धान्त निम्नलिखित हैं।

  1. सभी राष्ट्र एक-दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता और सम्प्रभुता का सम्मान करें।
  2. कोई राज्य दूसरे राज्य पर आक्रमण न करे और राष्ट्रीय सीमाओं का अतिक्रमण न करे।
  3. कोई राज्य किसी दूसरे राज्य के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे।
  4. प्रत्येक राज्य एक-दूसरे के साथ समानता का व्यवहार करे तथा पारस्परिक हित में सहयोग प्रदान करे।
  5. सभी राष्ट्र शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धान्त में विश्वास करें

प्रश्न 35.
भारतीय विदेश नीति के ऐसे कोई दो उदाहरण दीजिये जिनमें भारत ने स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाया है।
उत्तर:
निम्नलिखित दो अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं में भारत ने स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाया है।

  1. शीतयुद्ध के दौरान भारत न तो संयुक्त राज्य अमेरिका और न ही सोवियत संघ के खेमे में सम्मिलित हुआ तथा उसने गुटनिरपेक्ष आंदोलन को शुरू करने, समय-समय पर होने वाले सम्मेलनों में स्वेच्छा एवं पूर्ण निष्पक्षता से भाग लिया।
  2. भारत ने शांति व विकास के लिए परमाणु ऊर्जा व शक्ति के प्रयोग का समर्थन किया तथा निर्भय होकर सन् में परमाणु परीक्षण किया तथा उसे उचित बताया।

प्रश्न 36.
अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं के ऐसे कोई दो उदाहरण दीजिये जिनमें भारत ने स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाया है।
उत्तर:

  1. 1956 में जब ब्रिटेन ने स्वेज नहर के मामले को लेकर मिस्र पर आक्रमण किया तो भारत ने इस औपनिवेशिक हमले के विरुद्ध विश्वव्यापी विरोध की अगुवाई की।
  2. 1956 में ही जब सोवियत संघ ने हंगरी पर आक्रमण किया तो भारत ने सोवियत संघ के इस कदम की सार्वजनिक निंदा की।

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प्रश्न 37
भारतीय विदेश नीति में परिवर्तन के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति का परिवर्तित स्वरूप: भारतीय विदेश नीति के परिवर्तित स्वरूप की व्याख्या निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है।

  1. सामरिक और तकनीकी ताकत हासिल करने, परमाणु परीक्षण करने और परमाणु अप्रसार सन्धि तथा सी. टी. बी. टी. पर हस्ताक्षर न करने की नीति को अपनाया।
  2. बांग्लादेश की स्वतन्त्रता के लिए श्रीलंका की सरकार के चाहने पर तथा मालदीव की सुरक्षा के लिए भारतीय सेनाओं को इन देशों में भेजा।
  3. व्यावहारिक कूटनीति को अपनाना, जैसे अफगानिस्तान पर रूसी कार्यवाही पर चुप रहना, नेपाल को चेतावनी देना, इजरायल से दौत्य सम्बन्ध स्थापित करना आदि।
  4. आकार, शक्ति, तकनीकी और सैनिक श्रेष्ठता आदि के आधार पर दक्षिण एशिया को भारतीय प्रभाव क्षेत्र बनाना।

प्रश्न 38.
बांडुंग सम्मेलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
इंडोनेशिया के एक शहर बांडुंग में एफ्रो-एशियाई सम्मेलन 1955 में हुआ । इसी सम्मेलन को बांडुंग सम्मेलन के नाम से जाना जाता है। अफ्रीका और एशिया के नव-स्वतंत्र देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्क का यह चरम बिंदु था। बांडुंग सम्मेलन में ही गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी।

प्रश्न 39.
पण्डित नेहरू की विदेश नीति की कोई चार विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
पण्डित नेहरू की विदेश नीति की विशेषताएँ पण्डित नेहरू की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  1. गुटनिरपेक्षता: नेहरू की विदेश नीति की सबसे प्रमुख विशेषता गुटनिरपेक्षता है। गुटनिरपेक्षता का अर्थ – किसी गुट में शामिल न होना और स्वतन्त्र नीति का अनुसरण करना।
  2. विश्व शान्ति और सुरक्षा की नीति: नेहरू की विदेश नीति का आधारभूत सिद्धान्त विश्व शान्ति और सुरक्षा बनाए रखना है।
  3. साम्राज्यवाद एवं उपनिवेशवाद का विरोध: नेहरू ने सदैव साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद का विरोध किया है।
  4. अन्य देशों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार: नेहरू की विदेश नीति की एक अन्य विशेषता विश्व के सभी देशों से मित्रतापूर्ण सम्बन्ध बनाने का प्रयास करना रही।

प्रश्न 40.
भारत की पड़ोसी देशों के प्रति क्या नीति है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
भारत की पड़ोसी देशों के प्रति नीति – भारत सदैव ही पड़ोसी देशों से मित्रवत् सम्बन्ध चाहता है। भारत का मानना है कि बिना मित्रतापूर्ण सम्बन्ध के कोई भी देश सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास नहीं कर सकता। इसलिए भारत ने पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, म्यांमार इत्यादि पड़ोसी देशों से मधुर सम्बन्ध बनाए रखने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाए हैं। उन्हीं महत्त्वपूर्ण कदमों में से एक सार्क की स्थापना है। इससे न केवल भारत के अन्य पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध मधुर होंगे, बल्कि दक्षिण एशिया और अधिक विकास कर सकेगा। भारत की नीति यह है कि पड़ोसी देशों के साथ जो भी मतभेद हैं, उन्हें युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत द्वारा हल किया जाना चाहिए।

प्रश्न 41.
1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण बताइए।
उत्तर:
भारत-चीन युद्ध के कारण: 1962 के भारत-चीन युद्ध के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. तिब्बत की समस्या: 1962 के भारत-चीन युद्ध की सबसे बड़ी समस्या तिब्बत की समस्या थी। चीन ने सदैव तिब्बत पर अपना दावा किया, जबकि भारत इस समस्या को तिब्बत वासियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर सुलझाना चाहता था।
  2. मानचित्र से सम्बन्धित समस्या- भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध का एक कारण दोनों देशों के बीच मानचित्र में रेखांकित भू-भाग था। चीन ने 1954 में प्रकाशित अपने मानचित्र में कुछ ऐसे भाग प्रदर्शित किये जो वास्तव में भारतीय भू-भाग में थे, अत: भारत ने इस पर चीन के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
  3. सीमा विवाद – भारत-चीन के बीच युद्ध का एक कारण सीमा विवाद भी था।

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प्रश्न 42.
ताशकन्द समझौता कब हुआ? इसके प्रमुख प्रावधान लिखिए।
उत्तर:
ताशकन्द समझौता: सितम्बर, 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के बाद 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री तथा पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खां के बीच ताशकंद समझौता सम्पन्न हुआ। इस समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे।
संजीव पास बुक्स

  1. भारत एवं पाकिस्तान अच्छे पड़ोसियों की भाँति सम्बन्ध स्थापित करेंगे और विवादों को शान्तिपूर्ण ढंग से सुलझायेंगे।
  2. दोनों देश के सैनिक युद्ध से पूर्व की स्थिति में चले जायेंगे। दोनों युद्ध-विराम की शर्तों का पालन करेंगे।
  3. दोनों एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
  4. दोनों राजनयिक सम्बन्धों को पुनः सामान्य रूप से स्थापित करेंगे।
  5. दोनों आर्थिक एवं व्यापारिक सम्बन्धों को पुनः सामान्य रूप से स्थापित करेंगे।
  6. दोनों देश सन्धि की शर्तों का पालन करने के लिए सर्वोच्च स्तर पर आपस में मिलते रहेंगे।

प्रश्न 43.
बांग्लादेश युद्ध, 1971 पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
बांग्लादेश युद्ध, 1971 1970 में पाकिस्तान के हुए आम चुनाव के बाद पाकिस्तान की सेना ने 1971 में शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में पूर्वी पाकिस्तान की जनता ने अपने इलाके को पाकिस्तान से मुक्त कराने का संघर्ष छेड़ दिया। पाकिस्तानी शासन ने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया । फलतः लगभग 80 लाख शरणार्थी पाकिस्तान से भाग कर भारत में शरण लिये हुए थे। महीनों राजनायिक तनाव और सैन्य तैनाती के बाद 1971 के दिसम्बर में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। दस दिनों के अन्दर भारतीय सेना ने ढाका को तीन तरफ से घेर लिया और अपने 90000 सैनिकों के साथ पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा। बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र का उदय हुआ। भारतीय सेना ने एकतरफा युद्ध विराम कर दिया।

प्रश्न 44.
शिमला समझौता कब हुआ? इसके प्रमुख प्रावधान लिखिए।
उत्तर:
शिमला समझौता:
28 जून, 1972 को श्रीमती इन्दिरा गाँधी एवं जुल्फिकार अली भुट्टो के द्वारा शिमला में दोनों देशों के मध्य जो समझौता हुआ उसे शिमला समझौते के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान थे।

  • दोनों देश सभी विवादों एवं समस्याओं के शान्तिपूर्ण समाधान के लिए सीधी वार्ता करेंगे।
  • दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध दुष्प्रचार नहीं करेंगे।
  • दोनों देशों के सम्बन्धों को सामान्य बनाने के लिए
    1. संचार सम्बन्ध फिर से स्थापित करेंगे,
    2. आवागमन की सुविधाओं का विस्तार करेंगे।
    3. व्यापार एवं आर्थिक सहयोग स्थापित करेंगे,
    4. विज्ञान एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में आदान-प्रदान करेंगे।
  • (4) स्थायी शान्ति स्थापित करने हेतु हर सम्भव प्रयास किये जाएँगे।
  • (5) भविष्य में दोनों सरकारों के अध्यक्ष मिलते रहेंगे।

प्रश्न 45.
वी. के. कृष्णमेनन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
वी.के. कृष्णमेनन (1897-1974) भारतीय राजनयिक एवं मंत्री थे। 1939 से 1947 के समयकाल में ये इंग्लैंड की लेबर पार्टी में सक्रिय थे। आप इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त एवं बाद में संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि मंडल के मुखिया थे। आप राज्यसभा के सांसद एवं बाद में लोकसभा सांसद बने। 1956 से संघ केबिनेट के सदस्य 1957 से रक्षा मंत्री का पद संभाला। आपने 1962 में भारत-चीन के युद्ध के बाद इस्तीफा दे दिया।

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प्रश्न 46.
चीन के साथ युद्ध का भारत पर क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
चीन के साथ युद्ध से भारत की छवि को देश और विदेश दोनों ही जगह धक्का लगा। इस संकट से उबरने के लिए भारत को अमरीका और ब्रिटेन से सैन्य मदद लेनी पड़ी। चीन युद्ध से भारतीय राष्ट्रीय स्वाभिमान को ठेस लगी परंतु राष्ट्र – भावना मजबूत हुई। नेहरू की छवि भी धूमिल हुई। चीन के इरादों को समय रहते न भाँप सकने और सैन्य तैयारी न कर पाने को लेकर नेहरू की पड़ी आलोचना हुई। पहली बार, उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इसके तुरंत बाद, कांग्रेस ने कुछ महत्त्वपूर्ण चुनावों में हार का सामना किया। देश का राजनीतिक मानस बदलने लगा था।

प्रश्न 47.
भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव के कोई चार कारण बताइये।
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव के कारण- भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. कश्मीर समस्या: भारत एवं पाकिस्तान के मध्य तनाव का प्रमुख मुद्दा कश्मीर है।
  2. सियाचिन ग्लेशियर का मामला: पिछले कुछ समय से पाकिस्तान सैनिक कार्यवाही द्वारा सियाचिन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है जिसे भारत के सैनिकों ने विफल कर दिया।
  3. आतंकवाद की समस्या: पाकिस्तान भारत में जेहाद के नाम पर आतंकवादी गतिविधियाँ फैला रहा है।
  4. आणविक हथियारों की होड़: भारत और पाकिस्तान के मध्य आणविक हथियारों की होड़ भी दोनों देशों के मध्य तनाव का मुख्य कारण माना जाता है।

प्रश्न 48.
करगिल संघर्ष के कारणों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
करगिल संघर्ष के कारण: करगिल संघर्ष के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे।

  1. पाकिस्तान को अमेरिका तथा चीन द्वारा अपनी अति गोपनीय कूटनीति विस्तार हेतु आर्थिक सहायता प्रदान
  2. पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा इस मामले को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अंधेरे में रखना।
  3. पाकिस्तानी सेना द्वारा छद्म रूप से भारतीय नियंत्रण रेखा के कई ठिकानों, जैसे द्रास, माश्कोह, काकस तथा तालिक पर कब्जा कर लेना।

प्रश्न 49.
करगिल की लड़ाई पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
करगिल संकट पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
करगिल की लड़ाई: सन् 1999 के शुरूआती महीनों में भारतीय नियन्त्रण रेखा के कई ठिकानों जैसे द्रास, माश्कोह, काकसर और बतालिक पर अपने को मुजाहिदीन बताने वालों ने कब्जा कर लिया था। पाकिस्तानी सेना की इसमें मिली भगत भांप कर भारतीय सेना हरकत में आयी। इससे दोनों देशों के बीच संघर्ष छिड़ गया।

इसे करगिल की लड़ाई के नाम से जाना जाता है। 1999 के मई-जून में यह लड़ाई जारी रही। 26 जुलाई, 1999 तक भारत अपने अधिकतर क्षेत्रों पर पुनः अधिकार कर चुका था। करगिल की इस लड़ाई ने पूरे विश्व का ध्यान खींचा था क्योंकि इससे ठीक एक वर्ष पहले दोनों देश परमाणु हथियार बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुके थे।

प्रश्न 50.
तिब्बत का पठार भारत और चीन के तनाव का बड़ा मामला कैसे बना?
उत्तर:

  1. सन् 1950 में चीन ने तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया। सन् 1958 में चीनी आधिपत्य के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ जिसे चीनी सेनाओं ने दबा दिया। स्थिति को बिगड़ता देखकर तिब्बत के पारम्परिक नेता दलाई लामा ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया तथा उसने 1959 में भारत से शरण मांगी। भारत ने दलाई लामा को शरण दे दी। चीन ने भारत के इस कदम का कड़ा विरोध किया।
  2. 1950 और 1960 के दशक में भारत के अनेक राजनीतिक दल तथा राजनेताओं ने तिब्बत की आजादी के प्रति अपना समर्थन जताया, जबकि चीन इसे अपना अभिन्न अंग मानता है। इन कारणों से तिब्बत भारत और चीन के बीच तनाव का बड़ा मामला बना।

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प्रश्न 51.
भारत-चीन युद्ध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत-चीन युद्ध-20 अक्टूबर, 1962 को चीन ने नेफा और लद्दाख की सीमाओं में घुस कर भारत पर सुनियोजित ढंग से बड़े पैमाने पर आक्रमण किया। नेफा क्षेत्र में भारत को पीछे हटना पड़ा और असम के मैदान में खतरा उत्पन्न हो गया। 24 नवम्बर, 1962 को चीन ने अपनी तरफ से युद्ध विराम की घोषणा कर दी और चीनी सेनाएँ 7 नवम्बर, 1959 की वास्तविक नियन्त्रण रेखा से 20 कि.मी. पीछे हट गईं। यद्यपि भारत की पर्याप्त भूमि पर उन्होंने अपना अधिकार कर लिया था।

चीन ने वार्ता का प्रस्ताव भी किया परन्तु भारत ने इस शर्त के साथ इसे अस्वीकार कर दिया कि जब तक चीनी सेनाएँ 8 सितम्बर, 1962 की स्थिति तक वापस नहीं लौट जायेंगी तब तक वार्ता नहीं हो सकती। इस युद्ध में भारत की पराजय से एशिया तथा विश्व में भारत की प्रतिष्ठा घटी और इस युद्ध के पीछे चीन का यह मूल उद्देश्य था, जिसमें सफल रहा।

प्रश्न 52.
भारत तथा बांग्लादेश के बीच सहयोग और असहमति के किसी एक-एक क्षेत्र का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:

  1. भारत तथा बांग्लादेश के बीच सहयोग: भारत तथा बांग्लादेश के बीच 1972 में 25 वर्षीय मैत्री, सहयोग और शांति संधि हुई थी। इसके साथ ही दोनों देशों के मध्य व्यापार समझौता भी हुआ। फलस्वरूप दोनों देशों में 1. सहयोग और मित्रता बढ़ती गयी।
  2. भारत तथा बांग्लादेश के बीच असहयोग: बांग्लादेश से शरणार्थी और घुसपैठिये लगातार भारत आते रहते हैं। भारत में लाखों बांग्लादेशी किसी न किसी तरह से अनाधिकृत रूप से रह रहे हैं। इस मुद्दे पर दोनों में सहमति नहीं हो पा रही है।

प्रश्न 53.
भारत द्वारा परमाणु नीति एवं कार्यक्रम अपनाने के कोई चार कारण बताइये।
उत्तर:
भारत द्वारा परमाणु नीति एवं कार्यक्रम निर्धारण के कारण: भारत द्वारा परमाणु नीति एवं कार्यक्रम निर्धारण के प्रमुख कारण निम्नलिखित है।

  1. आत्मनिर्भर राष्ट्र बनना: भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर एक आत्म-निर्भर राष्ट्र बनना चाहता है । विश्व के जिन देशों के पास भी हथियार हैं वे सभी आत्म-निर्भर राष्ट्र हैं।
  2. न्यूनतम अवरोध की स्थिति प्राप्त करना: भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर दूसरे देशों के आक्रमण से बचने के लिए न्यूनतम अवरोध की स्थिति प्राप्त करना चाहता है।
  3. दो पड़ोसी देशों के पास परमाणु हथियार होना: भारत के लिए परमाणु नीति एवं हथियार बनाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि भारत के दोनों पड़ोसी देशों चीन एवं पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं।
  4. परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों की विभेदपूर्ण नीति: परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों ने 1968 में परमाणु अप्रसार सन्धि (NPT) तथा 1996 में व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध सन्धि (C. T. B. T.) को विभेदपूर्ण ढंग से लागू किया जिसके कारण भारत ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये।

प्रश्न 54.
भारत की नवीन परमाणु नीति का मसौदा क्या है?
उत्तर:
भारत की नवीन परमाणु नीति- 18 अगस्त, 1999 को भारत सरकार ने अपनी नवीन परमाणु नीति का एक मसौदा प्रकाशित किया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  1. इसमें शस्त्र नियन्त्रण के सिद्धान्त को अपनाया गया है।
  2. किसी भी देश पर भारत पहला हमला नहीं करेगा, परन्तु उस पर हमला किया गया तो उसका मुँहतोड़ जवाब देगा।
  3. प्रधानमन्त्री या प्रधानमन्त्री द्वारा नामांकित व्यक्ति परमाणु विस्फोट के लिए उत्तरदायी होगा।
  4. सी. टी. बी. टी. के प्रश्न को इस मसौदे से अलग रखा गया है।
  5. भारत विश्व को परमाणु शक्तिहीन बनाने की प्रतिबद्धता पर कायम रहेगा।
  6. परमाणु अथवा मिसाइल प्रौद्योगिकी के निर्यात पर कड़ा नियन्त्रण रखा जायेगा।

प्रश्न 55.
चीन के साथ भारत के सम्बन्धों को बेहतर बनाने के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
चीन के साथ भारत के सम्बन्धों को बेहतर बनाने के लिए हम निम्न सुझाव देंगे।

  1. दोनों पक्ष सीमा विवाद को निपटारे के लिए वार्ताएँ जारी रखें तथा सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखें।
  2. हमें चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि करने का प्रयत्न करना चाहिए।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण के प्रश्नों में दोनों देशों को मिलकर संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्थाओं में अपना पक्ष रखना चाहिए क्योंकि दोनों देशों के हित समान हैं।
  4. हमें चीन के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देना चाहिए।

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प्रश्न 56.
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद के भारत-चीन संबंध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इन दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने में दस साल लग गए। 1976 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल हो सके। शीर्ष नेता के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी (तब के विदेश मंत्री ) 1979 में चीन के दौरे पर गए। इसके बाद से चीन के साथ भारत संबंधों में ज्यादा जोर व्यापारिक मसलों पर रहा है।

प्रश्न 57.
कश्मीर मुद्दे पर संघर्ष के बावजूद भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच सहयोग-संबंध कायम रहे। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कश्मीर मुद्दे पर संघर्ष के बावजूद भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच सहयोग-संबंध कायम रहे इस कथन का सत्यापन निम्न उदाहरणों द्वारा किया जा सकता है।

  1. दोनों सरकारों ने मिल-जुल कर प्रयास किया कि बँटवारे के समय अपहृत महिलाओं को उनके परिवार के पास लौटाया जा सके।
  2. विश्व बैंक की मध्यस्थता से नदी जल में हिस्सेदारी का लंबा विवाद सुलझा लिया गया।
  3. नेहरू और जनरल अयूब खान ने सिंधु नदी जल संधि पर 1960 में हस्ताक्षर किए और भारत-पाक संबंधों में तनाव के बावजूद इस संधि पर ठीक-ठाक अमल होता रहा।

प्रश्न 58.
भारत ने सोवियत संघ के साथ 1971 में शांति और मित्रता की 20 वर्षीय संधि पर दस्तखत क्यों किये?
उत्तर:
पूर्वी पाकिस्तान की जनता ने अपने इलाके को पाकिस्तान से मुक्त कराने के लिए संघर्ष छेड़ दिया। भारत ने बांग्लादेश के ‘मुक्ति संग्राम’ को नैतिक समर्थन और भौतिक सहायता दी। ऐसे समय पर पाकिस्तान को अमरीका और चीन ने सहायता की। 1960 के दशक में अमरीका और चीन के बीच संबंधों को सामान्य करने की कोशिश चल रही थी, इससे एशिया में सत्ता- समीकरण नया रूप ले रहा था। अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के सलाहकार हेनरी किसिंजर ने 1971 के जुलाई में पाकिस्तान होते हुए गुपचुप चीन का दौरा किया। अमरीका- पाकिस्तान-चीन की धुरी बनते देख भारत ने इसके जवाब में सोवियत संघ के साथ 1971 में शांति और मित्रता की एक 20 वर्षीय संधि पर दस्तखत किए। इस संधि से भारत को यह आश्वासन मिला कि हमला होने की सूरत में सोवियत संघ भारत की मदद करेगा ।

प्रश्न 59.
चीन के साथ हुए युद्ध ने भारत के नेताओं पर आंतरिक क्षेत्रीय नीतियों के हिसाब से क्या उल्लेखनीय प्रभाव डाला? संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चीन के साथ हुए युद्ध ने भारत के नेताओं को पूर्वोत्तर की डावांडोल स्थिति के प्रति सचेत किया। यह इलाका अत्यंत पिछड़ी दशा में था और अलग-थलग पड़ गया था। चीन युद्ध के तुरंत बाद इस इलाके को नयी तरतीब में ढालने की कोशिशें शुरू की गई। नागालैंड को प्रांत का दर्जा दिया गया। मणिपुर और त्रिपुरा हालांकि केन्द्र शासित प्रदेश थे लेकिन उन्हें अपनी विधानसभा के निर्वाचन का अधिकार मिला।

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प्रश्न 60.
1962 और 1965 के युद्धों का भारतीय रक्षा व्यय पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
आजादी के बाद भारत ने अपने सीमित संसाधनों के साथ नियोजित विकास की रणनीति के साथ शुरुआत की। पड़ोसी देशों के साथ संघर्ष के कारण पंचवर्षीय योजना पटरी से उतर गई। 1962 के बाद भारत को अपने सीमित संसाधनों को रक्षा क्षेत्र में लगाना पड़ा। भारत को अपने सैन्य ढाँचे का आधुनिकीकरण करना पड़ा। 1962 में रक्षा उत्पाद और 1965 में रक्षा आपूर्ति विभाग की स्थापना हुई। तीसरी पंचवर्षीय योजना पर असर पड़ा और इसके बाद लगातार तीन एक-वर्षीय योजना पर अमल हुआ। चौथी पंचवर्षीय योजना 1969 में ही शुरू हो सकी। युद्ध के बाद भारत का रक्षा-व्यय बहुत ज्यादा बढ़ गया।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति की विशेषताएँ: भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  • अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा में आस्था: भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सदैव अपना सहयोग प्रदान किया है, चाहे वह कोरिया समस्या हो या इराक की समस्या।
  • असंलग्नता अथवा गुट निरपेक्षता की नीति: असंलग्नता का अभिप्राय है। किसी गुट (पंक्ति) से संलग्न नहीं होना यह गुटों से पृथक् रहते हुए एक स्वतंत्र विदेश नीति है। यह तटस्थ न होकर एक सक्रिय विदेश नीति है।
  • पंचशील के सिद्धान्त तथा शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की नीति: पंचशील का अर्थ है। पाँच सिद्धान्त। ये पाँच सिद्धान्त अग्रलिखित हैं।
    1. परस्पर एक-दूसरे की भौगोलिक अखण्डता तथा संप्रभुता का सम्मान।
    2. एक-दूसरे पर आक्रमण नहीं करना।
    3. एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना।
    4. परस्पर समानता तथा लाभ के आधार पर कार्य करना।
    5. शांतिपूर्ण सहअस्तित्व।
  • साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद का विरोध: भारत ने उपनिवेशवाद तथा साम्राज्यवाद के विरोध की नीति अपनाई। इसी नीति को दृष्टिगत रखते हुए भारत ने एशिया तथा अफ्रीकी देशों के स्वतन्त्रता आन्दोलनों को सक्रिय समर्थन प्रदान किया।
  • सभी राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना: भारत अपना गुट बनाने के स्थान पर सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना में विश्वास करता है।
  • निःशस्त्रीकरण का समर्थन: भारत ने सदैव ही निःशस्त्रीकरण का समर्थन किया है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों एवं संयुक्त राष्ट्र के प्रति आस्था: भारत ने सदैव अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन किया है तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रति आस्था व्यक्त की है।

प्रश्न 2.
वर्तमान में भारतीय गुटनिरपेक्षता की नीति का महत्त्व बताइए।
उत्तर:
भारतीय विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता की नीति का महत्त्व: भारतीय विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता के महत्त्व का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता

  1. भारत गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाकर ही शीत युद्ध काल में दोनों गुटों से सैनिक और आर्थिक सहायता बिना शर्त प्राप्त करने में सफल रहा।
  2. गुट निरपेक्ष नीति के कारण भारत को कश्मीर समस्या पर रूस का हमेशा समर्थन मिला जबकि पश्चिमी शक्तियाँ पाकिस्तान का समर्थन कर रही थीं।
  3. भारत की गुटनिरपेक्ष नीति ने उसे आत्म-निर्भरता का पाठ पढ़ाया है।
  4. भारत की गुटनिरपेक्ष नीति शीतयुद्ध काल में अमरीका और रूस दोनों के शासनाध्यक्षों की प्रशंसा की पात्र रही है।
  5. भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति विश्व शांति में सहायक रही है। भारत ने शीत युद्ध की चरमावस्था में दोनों गुटों में सेतुबन्ध का कार्य किया और संकट की स्थिति को टालने का प्रयत्न किया।

इस प्रकार भारत की गुटनिरपेक्ष नीति अनेक कसौटियों पर कसी गई है। विश्व चाहे द्विध्रुवीय रहा हो या एकध्रुवीय, भारत चाहे अपने आर्थिक विकास के लिए पश्चिम या पूर्व से सहायता ले या सीमाओं की रक्षा के लिए पश्चिम से सैनिक अस्त्र-शस्त्र ले, द्विपक्षीय समझौतों के अन्तर्गत शान्ति सेनाएँ भेजे या मालदीव जैसी स्थितियों में तुरत-फुरत सक्रियता दिखाये, भारत के लिए असंलग्नता की नीति ही सर्वोत्तम है। इसी से उसके राष्ट्रीय हितों की सर्वोत्तम सुरक्षा हो सकती है तथा शान्ति स्थापित की जा सकती है।

प्रश्न 3.
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की समकालीन प्रासंगिकता बताइये।
उत्तर:
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की प्रासंगिकता: गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की समकालीन प्रासंगिकता के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिये जा सकते हैं।

  1. नये राष्ट्रों की स्वतन्त्रता तथा विकास की दृष्टि से प्रासंगिक: नए स्वतन्त्र देशों की स्वतन्त्रता की रक्षा तथा आर्थिक और सामाजिक विकास हेतु उन्हें युद्धों से दूर रहने की दृष्टि से गुटनिरपेक्ष आन्दोलन आज भी प्रासंगिक बना हुआ है।
  2. विकासशील राष्ट्रों के बीच परस्पर आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग: वर्तमान समय में विकासशील देशों को शोषण से बचाने, उनमें पारस्परिक आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ाने, अपनी समाचार एजेन्सियों का निर्माण करने के लिए गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का औचित्य बना हुआ है।
  3. विश्व जनमत में सहायक: गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की वर्तमान काल में विश्व जनमत के निर्माण के लिए अत्यधिक आवश्यकता है।
  4. बहुगुटीय विश्व: सोवियत संघ के विघटन के बाद आज विश्व बहुगुटीय बन रहा है। वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की महती प्रासंगिकता बनी हुई है।
  5. एशिया तथा अफ्रीका में विस्फोटक स्थिति: वर्तमान काल में एशिया तथा अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्र तनाव केन्द्र हैं। ऐसी स्थिति में निर्गुट आन्दोलन इनकी समस्याओं का समाधान ढूँढ़ने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
  6. महत्वपूर्ण उद्देश्यों की प्राप्ति शेष:
    • नई अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थापना
    • संयुक्त राष्ट्र संघ का लोकतन्त्रीकरण
    • न्यायसंगत विश्व की स्थापना तथा
    • नि:शस्त्रीकरण आदि उद्देश्यों की प्राप्ति में इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
  7. प्रदूषण एवं अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद – प्रदूषण एवं अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध एक संगठित दबाव पैदा करने की दृष्टि से गुटनिरपेक्ष आन्दोलन उपयोगी है।

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प्रश्न 4.
भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव – विवाद के प्रमुख कारण बताइए।
अथवा
भारत-पाक सम्बन्धों की समीक्षा कीजिये।
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव के कारण: अपने पड़ौसी देशों के प्रति मधुर सम्बन्ध रखने को उच्च प्राथमिकता देने की भारत की नीति के बावजूद अनेक कारणों से भारत-पाक सम्बन्ध में तनाव व कटुता बनी रही है। भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं।

  1. विभाजन से उत्पन्न अविश्वास: भारत विभाजन ने भारत और पाकिस्तान के मध्य शत्रुता उत्पन्न कर दी। यह ब्रिटिश शासकों की रणनीति थी।
  2. देशी रियासतों की समस्या तथा कश्मीर विवाद: कश्मीर के विलय का विवाद अभी भी दोनों देशों के मध्य व्याप्त है और यह निरन्तर दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य बिन्दु बना हुआ है।
  3. कच्छ के रन ( सरक्रीक) का प्रश्न 1947 में कच्छ की रियासत के भारत में विलय के साथ ही कच्छ का रन भी भारत का अंग बन गया था। लेकिन जुलाई, 1948 में पाकिस्तान ने यह प्रश्न उठाया कि कच्छ का रन चूँकि एक मृत समुद्री भाग है, अतः उसका मध्य भाग दोनों देशों की सीमा होना चाहिए। भारत ने उसके इस दावे को स्वीकार नहीं किया। दोनों देशों के मध्य इस विवाद को सुलझाने की दिशा में अनेक वार्ताएँ हुई हैं लेकिन अभी तक इनका निपटारा नहीं हो सका हैं।
  4. साम्प्रदायिक विभाजन की राजनीति: पाकिस्तानी राजनेता जान-बूझकर दोनों देशों के मध्य साम्प्रदायिक वैमनस्य बनाये रखना चाहते हैं। वे साम्प्रदायिक वैमनस्य को अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और संगठनों में अभिव्यक्त करते रहे हैं।
  5. भारत के विरुद्ध पाक प्रायोजित आतंकवाद – भारत के विरुद्ध पाक-प्रायोजित आतंकवाद के कारण भी दोनों देशों के मध्य कटुता बनी हुई है।

प्रश्न 5.
भारत-पाक सम्बन्धों को सुधारने हेतु सुझाव दीजिए।
उत्तर:
भारत-पाक सम्बन्धों को सुधारने हेतु सुझाव: भारत-पाक सम्बन्धों में आयी कटुता को दूर करने तथा उनके बीच सम्बन्धों को सुधारने हेतु निम्न सुझाव दिये जा सकते हैं।

  1. आपसी बातचीत एवं समझौते की नीति- भारत और पाकिस्तान के मध्य विवादों को आपसी बातचीत और समझौते द्वारा दूर किया जा सकता है।
  2. दोनों देशों के मध्य विश्वास बहाली के उपाय किये जाने चाहिए – भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों में आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए बसों, ट्रेनों की आवाजाही तथा व्यक्तिगत सम्पर्क आदि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  3. सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर बल: दोनों देशों में धार्मिक भिन्नताओं के बावजूद सांस्कृतिक समानताएँ हैं। अतः दोनों देशों में समय-समय पर एक-दूसरे के धार्मिक उत्सवों एवं समारोहों का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे दोनों देशों की जनता के बीच परस्पर भाईचारे एवं सद्भावना का विकास हो।
  4. आपसी मतभेदों के अन्तर्राष्ट्रीयकरण पर रोक- दोनों देशों को मतभेदों का समाधान करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मंचों के स्थान पर द्विपक्षीय वार्ता एवं परस्पर सहयोग एवं समझौते की नीति का अनुसरण करना चाहिए।
  5. आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगायी जानी चाहिए: पाकिस्तान को चाहिए कि वह आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाए ताकि वार्ता द्वारा समझौते का वातावरण बन सके।

प्रश्न 6.
भारत एवं चीन सम्बन्धों का वर्तमान संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
भारत-चीन सम्बन्ध: वर्तमान संदर्भ में भारत तथा चीन के सम्बन्धों का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है।

  • सीमा-विवाद यथावत्: आज भी दोनों देशों के मध्य सीमा के प्रश्न पर व्यापक मतभेद हैं, तथापि दोनों पक्ष इसे सुलझाने के लिए वार्ता जारी रखे हुए हैं। वर्तमान में दोनों देश इस नीति का दृढ़ता से पालन कर रहे हैं कि जब तक सीमा विवाद का अन्तिम रूप से समाधान नहीं हो जाता है, दोनों पक्ष सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखेंगे।
  • आर्थिक तथा व्यापारिक क्षेत्रों में सहयोग की ओर बढ़ते कदम: 1993 में दोनों देशों के मध्य हुए एक व्यापारिक समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सीमा – व्यापार पुनः प्रारम्भ हो गया है तथा यह निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इसके अतिरिक्त दोनों देशों के बीच 50 से अधिक संयुक्त उद्यमों की स्थापना हुई है।
  • विश्व व्यापार संगठन की बैठकों में परस्पर सहयोग; दोनों पक्षों में यह भी सहमति हुई कि वे विश्व व्यापार संगठन की बैठकों में दोनों के हितों से जुड़े मुद्दों पर परस्पर सहयोग करेंगे।
  • वर्तमान समय में भारत-चीन के मध्य विवाद के प्रमुख मुद्दे: वर्तमान समय में भारत और चीन के मध्य विवाद के प्रमुख मुद्दे निम्न हैं।
    1. अनसुलझा सीमा विवाद
    2. घुसपैठ से घिरा अण्डमान-निकोबार
    3. चीन-पाकिस्तान में बढ़ती निकटता
    4. चीन का नया सामरिक गठजोड़
    5. तिब्बत पर कसता चीनी शिकंजा
    6. माओवाद से घिरता नेपाल
    7. चीन का साइबर आक्रमण
    8. भारतीय सीमा में घुसपैठ
    9. कश्मीरियों के लिए अलग से चीनी वीजा।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

प्रश्न 7.
भारत द्वारा परमाणु नीति अपनाने के मुख्य कारण बताइए।
उत्तर:
भारत द्वारा परमाणु नीति अपनाने के कारण: भारत ने सर्वप्रथम 1974 में एक तथा 1998 में पांच परमाणु परीक्षण करके विश्व को दिखला दिया कि भारत भी एक परमाणु सम्पन्न राष्ट्र है। भारत द्वारा परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार को बनाने एवं रखने के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिये जा सकते हैं।

  1. आत्मनिर्भर राष्ट्र बनना: भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनना चाहता है। विश्व में जिन देशों के पास भी परमाणु हथियार हैं वे सभी आत्मनिर्भर राष्ट्र माने जाते हैं।
  2. प्रतिष्ठा प्राप्त करना: भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर शक्तिशाली राष्ट्र बन विश्व में प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहता है।
  3. न्यूनतम अवरोध की स्थिति प्राप्त करना: भारत परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाकर दूसरे देशों के आक्रमण से बचने के लिए न्यूनतम अवरोध की स्थिति प्राप्त करना चाहता है।
  4. परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों की भेदपूर्ण नीति- परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों ने NPT-1996 तथा CTBT 1996 की भेदभावपूर्ण संधियों द्वारा अन्य राष्ट्रों को परमाणु सम्पन्न न बनने देने की नीति अपना रखी है। भारत ने इन पर हस्ताक्षर नहीं किये तथा परमाणु कार्यक्रम जारी रखा।
  5. भारत द्वारा लड़े गए युद्ध – भारत ने समय- समय पर 1962, 1965, 1971 एवं 1999 में युद्धों का सामना किया । युद्धों में होने वाली अधिक हानि से बचने के लिए भारत परमाणु हथियार प्राप्त करना चाहता है।
  6. दो पड़ोसी राष्ट्रों के पास परमाणु हथियार होना – भारत के लिए परमाणु नीति एवं परमाणु हथियार बनाने इसलिए भी आवश्यक हैं, क्योंकि भारत के दोनों पड़ोसी देशों चीन एवं पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं।

प्रश्न 8.
भारत की विदेश नीति में नेहरू की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारत की विदेश नीति में नेहरू की भूमिका भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्रीय एजेंडा तय करने में निर्णायक भूमिका निभायी। वे प्रधानमंत्री के साथ-साथ विदेश मंत्री भी थे। प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री के रूप में 1946 से 1964 तक उन्होंने भारत की विदेश नीति की रचना और क्रियान्वयन पर गहरा प्रभाव डाला।
1. गुटनिरपेक्षता की नीति:
नेहरू की विदेश नीति के तीन बड़े उद्देश्य थे। कठिन संघर्ष से प्राप्त संप्रभुता को बचाए रखना, क्षेत्रीय अखण्डता को बनाए रखना तथा तेज रफ्तार से आर्थिक विकास करना। नेहरू इन उद्देश्यों को गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाकर हासिल करना चाहते थे। इन दिनों में भारत में कुछ राजनैतिक दल, नेता तथा समूह ऐसे भी थे जिनका मानना था कि भारत को अमरीकी खेमे के साथ ज्यादा नजदीकी बढ़ानी चाहिए क्योंकि इस खेमे की प्रतिष्ठा लोकतंत्र के हिमायती के रूप में थी। लेकिन विदेश नीति को तैयार करने में नेहरू को खासी बढ़त हासिल थी।

2. सैनिक गठबन्धनों से दूर रहने की नीति:
स्वतंत्र भारत की विदेश नीति में शांतिपूर्ण विश्व का सपना था और इसके लिए भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति का पालन किया। भारत ने इसके लिए शीत युद्ध से उपजे तनाव को कम करने की कोशिश की और संयुक्त राष्ट्र संघ के शांति-अभियानों में अपनी सेना भेजी। भारत ने अमरीका और सोवियत संघ की अगुवाई वाले सैन्य गठबंधनों से अपने को दूर रखना चाहता था। दोनों खेमों के बीच भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय मामलों पर स्वतंत्र रवैया अपनाया। उसे दोनों खेमों के देशों ने सहायता और अनुदान दिये।

3. एफ्रो-एशियायी एकता की नीति- भारत के आकार, अवस्थिति और शक्ति संभावना को भांपकर नेहरू ने विश्व के मामलों, विशेषकर एशियायी मामलों में भारत के लिए बड़ी भूमिका निभाने की नीति अपनायी। उन्होंने एशिया और अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों से सम्पर्क बनाए तथा एशियायी एकता की पैरोकारी की। 1955 का बांडुंग में एफ्रो- एशियायी देशों का सम्मेलन हुआ जो अफ्रीका व एशिया के नव-स्वतंत्र देशों के साथ भारत के बढ़ते सम्पर्क का चरम बिन्दु था।

4. चीन के साथ शांति और संघर्ष:
नेहरू के नेतृत्व में भारत ने चीन के साथ अपने रिश्तों की शुरुआत दोस्ताना ढंग से की भारत ने सबसे पहले चीन की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता दी। शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धान्तों यानी पंचशील की घोषणा नेहरू और चाऊ एन लाई ने संयुक्त रूप से 29 अप्रेल, 1954 में की। लेकिन चीन ने 1962 में भारत पर अचानक आक्रमण कर इस दोस्ताना रिश्ते को शत्रुता में बदल दिया तथा भारत के काफी बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच सीमा विवाद जारी है। यद्यपि चीन के सम्बन्ध में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आशंका व्यक्त की थी, लेकिन नेहरू ने इस आशंका को नजरअंदाज कर दिया था। एक विदेश नीति के मामले में नेहरू की एक भूल साबित हुई।

प्रश्न 9.
चीन के साथ भारत के युद्ध का भारत तथा भारत की राजनीति पर क्या प्रभाव हुआ? विस्तारपूर्वक समझाइए
उत्तर:

  1. चीन-युद्ध से भारत की छवि को देश और विदेश दोनों ही जगह धक्का लगा। इस संकट से निपटने के लिए भारत को अमरीका और ब्रिटेन से सैन्य सहायता माँगनी पड़ी।
  2. चीन- युद्ध से भारतीय राष्ट्रीय स्वाभिमान को चोट पहुँची लेकिन इसके साथ-साथ राष्ट्र भावना भी बलवती हुई। इस युद्ध के कारण नेहरू की छवि भी धूमिल हुई। चीन के इरादों को समय रहते न भाँप सकने और सैन्य तैयारी न कर पाने को लेकर नेहरू की आलोचना हुई ।
  3. नेहरू की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। कुछ महत्त्वपूर्ण उप-चुनावों में कांग्रेस ने हार का सामना किया। देश का राजनीतिक मानस बदलने लगा था।
  4. भारत-चीन संघर्ष का असर विपक्षी दलों पर भी हुआ। इस युद्ध और चीन – सोवियत संघ के बीच बढ़ते मतभेद से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर बड़ा बदलाव हुआ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 1964 में टूट गई। इस पार्टी के भीतर जो खेमा चीन का पक्षधर था उसने मार्क्सवादी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बनाई। चीन युद्ध के क्रम में माकपा के कई नेताओं को चीन का पक्ष लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
  5. चीन के साथ हुए युद्ध ने भारत के नेताओं को पूर्वोत्तर की डाँवाडोल स्थिति के प्रति सचेत किया क्योंकि राष्ट्रीय एकता के लिहाज से यह इलाका चुनौतीपूर्ण था।
  6. चीन – र – युद्ध के बाद पूर्वोत्तर भारत के इलाकों को नयी तरतीब में ढालने की कोशिशें शुरू की गईं। नागालैंड को प्रांत का दर्जा दिया गया। मणिपुर और त्रिपुरा हालाँकि केन्द्र – शासित प्रदेश थे लेकिन उन्हें अपनी विधानसभा के निर्वाचन का अधिकार मिला। संजीव पास बुक्स।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 4 भारत के विदेश संबंध

प्रश्न 10.
ऐतिहासिक रूप से तिब्बत भारत और चीन के बीच विवाद का एक बड़ा मसला रहा है। विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तिब्बत मध्य एशिया का मशहूर पठार है। अतीत में समय-समय पर चीन ने तिब्बत पर अपना प्रशासनिक अधिकार जताया और कई दफा तिब्बत आजाद भी हुआ। 1950 में चीन ने तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया। तिब्बत के ज्यादातर लोगों ने चीनी कब्जे का विरोध किया। 1954 में भारत और चीन के बीच पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर हुए तो इसके प्रावधानों में एक बात यह भी थी कि दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करेंगे। चीन ने इसका यह अर्थ लगाया कि भारत तिब्बत पर चीन की दावेदारी को स्वीकार कर रहा है।

1965 में चीनी शासनाध्यक्ष जब भारत आए. उसे समय तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा भी भारत पहुँचे और उन्होंने तिब्बत की बिगड़ती स्थिति की जानकारी नेहरू को दी। चीन ने यह आश्वासन दिया कि तिब्बत को चीन के अन्य इलाकों से ज्यादा स्वायत्तता दी जाएगी। 1958 में चीनी आधिपत्य के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ। इस विद्रोह को चीनी सेनाओं द्वारा दबा दिया गया। स्थिति को बिगड़ता देख तिब्बत के पारंपरिक नेता दलाई लामा ने सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया और 1959 में भारत से शरण माँगी। भारत ने दलाई लामा को शरण दे दी। चीन ने भारत के इस कदम का कड़ा विरोध किया।

पिछले 50 सालों में बड़ी संख्या में तिब्बती जनता ने भारत और दुनिया के अन्य देशों में शरण ली है। भारत में तिब्बती शरणार्थियों की बड़ी-बड़ी बस्तियाँ हैं। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में संभवतया तिब्बती शरणार्थियों की सबसे बड़ी बस्ती है। दलाई लामा ने भी भारत में धर्मशाला को अपना निवास स्थान बनाया है। 1950 और 1960 के दशक में भारत के अनेक राजनीतिक दल और राजनेताओं ने तिब्बत की आजादी के प्रति अपना समर्थन जताया। इन दलों में सोशलिस्ट पार्टी और जनसंघ शामिल हैं।

JAC Class 9 Maths Notes Chapter 1 संख्या पद्धति

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JAC Board Class 9 Maths Notes Chapter 1 संख्या पद्धति

प्राकृत संख्याएँ वस्तुओं की गिनती करने के लिए हम 1, 2, 3, 4,… आदि संख्याओं का प्रयोग करते हैं। इन संख्याओं को प्राकृत संख्याएँ कहते हैं। इनकी संख्या अनन्त होती है। प्राकृत संख्याओं के समूह को N द्वारा व्यक्त करते हैं।
जैसे N = {1, 2, 3, 4, 5,…..}

पूर्ण संख्याएं: यदि प्राकृत संख्याओं में 0 (शून्य) को सम्मिलित कर लिया जाए, तो प्राप्त संख्याओं के समूह को पूर्ण संख्याएँ कहा जाता है। इस समूह को W से व्यक्त किया जाता है।
जैसे W = {0, 1, 2, 3, 4….}

प्राकृत संख्याओं और पूर्ण संख्याओं के समुच्चय में अन्तर :
प्राकृत संख्याओं का समुच्चय N = {1, 2, 3…} है और पूर्ण संख्याओं का समुच्चय W = {0, 1, 2, 3….} है।
प्राकृत और पूर्ण संख्याओं के समुच्चय की तुलना करने पर, हम देखते हैं कि

  • समस्त प्राकृत संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ हैं।
  • 0 के अतिरिक्त समस्त पूर्ण संख्याएँ प्राकृत संख्याएँ हैं।
  • 1 सबसे छोटी प्राकृत संख्या है जबकि 0 सबसे छोटी पूर्ण संख्या है।
  • प्राकृत तथा पूर्ण संख्याएँ अनन्त होती हैं।

पूर्णांक संख्याएँ : यदि प्राकृत संख्याओं में ऋण संख्याओं को भी सम्मिलित कर लिया जाए तो प्राप्त संख्याओं के संग्रह को पूर्णांक संख्याएँ कहा जाता है, और इन्हें Z or I प्रतीक से व्यक्त किया जाता हैं। ये दो प्रकार की होती हैं:
(i) धन पूर्णांक,
(ii) ऋण पूर्णांक
JAC Class 9 Maths Notes Chapter 1 संख्या पद्धति 1
(i) संख्या रेखा पर शून्य के दार्यों और के पूर्णांक, धन पूर्णांक तथा शून्य के बायीं ओर के पूर्णांक, ऋण पूर्णांक कहलाते हैं।
(ii) शून्य, प्रत्येक धन पूर्णांक से छोटा तथा सभी ऋण पूर्णांकों से बड़ा होता है।

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परिमेय संख्याएँ : ऐसी संख्याएँ जो \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त की जा सकती हों तथा जहाँ p और पूर्णांक हों, परन्तु q ≠ 0, परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं।
जैसे : \(\frac{1}{2}, \frac{2}{3}, \frac{-4}{5}, \frac{7}{3}, \frac{-6}{7}, \ldots\) इत्यादि।

  • प्रत्येक प्राकृत संख्या परिमेय संख्या है।
  • 0 एक परिमेय संख्या है।
  • प्रत्येक पूर्णांक परिमेय संख्या है।
  • प्रत्येक भिन्न परिमेय संख्या है।
  • प्रत्येक परिमेय संख्या का दशमलव भिन्न के रूप में प्रसार किया जा सकता है।

परिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार दो प्रकार का होता है:
(i) सांत,
(ii) असांत (अनवसानी आवर्ती)।

सांत दशमलव प्रसार : परिमेय संख्याएँ, जो कि सदा \(\frac{p}{q}\) के रूप में होती है, p में q का भाग देने पर अन्त में शेषफल शुन्य प्राप्त होता है, तो वे दशमलव संख्याएँ सांत दशमलव प्रसार वाली परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं।
जैसे : \(\frac{1}{2}\) = 0.5, \(\frac{3}{2}\) = 1.5, \(\frac{1}{8}\) = 0.125 आदि।

असांत दशमलव प्रसार : परिमेय संख्या को दशमलव संख्या में बदलते समय भाग की क्रिया निरन्तर चलती रहती है और शेषफल की निरंतरता बनी रहती है अर्थात् भागफल में अंकों की पुनरावृत्ति होती रहती है इस प्रकार की दशमलव संख्याओं को असांत आवर्ती दशमलव संख्या कहते हैं असांत दशमलव संख्या को संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए पुनरावृत्ति वाले अंकों के ऊपर (-) रेखा खींचते हैं।
जैसे : \(\frac{3}{11}\) = 0.272727…….. = \(0 . \overline{27}\)
\(\frac{1}{3}\) = 0.333……. = \(0 . \overline{3}\) इत्यादि।
इन्हें असांत आवर्ती (Non-terminating Repeating) परिमेय संख्याएँ भी कहते हैं।

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परिमेय संख्याओं के महत्त्वपूर्ण बिन्दु :

  1. प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक व भिन्नें सभी परिमेय संख्याएँ होती हैं।
  2. भिन्न के अंश और हर प्राकृत संख्याएँ होती हैं, जबकि परिमेय संख्या के अंश और हर पूर्णांक होते हैं। परन्तु परिमेय संख्या का हर शून्य नहीं होता।
  3. संख्या रेखा पर परिमेय संख्याएँ प्रदर्शित की जा सकती हैं।
  4. किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को समान अशून्य पूर्णांक से गुणा करने अथवा भाग देने पर समतुल्य परिमेय संख्याएँ प्राप्त होती हैं।
  5. दो परिमेय संख्याओं के बीच में अनन्त परिमेय संख्याएँ निहित होती हैं।
  6. प्रत्येक परिमेय संख्या को सांत अथवा असांत आवर्ती दशमलव संख्या के रूप में लिखा जा सकता है।
  7. सांत परिमेय संख्या का हर सदैव 2m × 5n के रूप में होता है।
  8. यदि परिमेय संख्या का हर 2m × 5n के रूप में नहीं है तो वह असांत आवृत्ति होती है।
  9. यदि परिमेय संख्या के अंश तथा हर में एक के अतिरिक्त अन्य कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड नहीं है तो वह परिमेय संख्या का मानक रूप (Standard form) कहलाता है।
  10. परिमेय संख्या ऋणात्मक हो सकती है किन्तु उसका हर सदैव धनात्मक ही लिया जाता है।

JAC Class 9 Hindi रचना नारा लेखन

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JAC Board Class 9 Hindi Rachana नारा लेखन

किसी सुंदर विचार अथवा उद्देश्य को बार-बार अभिव्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाने वाला आदर्श वाक्य नारा कहलाता है। नारों में प्रभावशाली वाक्य पिरोए जाते हैं। जिनसे ये सहज लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। इनमें विस्तृत विवरण तो प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होती। नारे सामाजिक दायरे में रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नारा लिखते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान रखना चाहिए –

  • नारों में आदर्शवादिता का भाव होना आवश्यक है।
  • नारे अनेक क्षेत्रों जैसे – राजनीतिक, धार्मिक, समाज से संबंधित हो सकते हैं।
  • नारों में विवादास्पद शब्दावली का प्रयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए।
  • नारों के प्रकटन का उद्देश्य सार्वभौमिक होना चाहिए।
  • नारों की शब्दावली सर्वस्वीकार्य होनी चाहिए।
  • नारों की गूँज से ऊर्जा का संचार होता है। रोमांचक होने का अहसास होता है। उदाहरण के तौर पर देश प्रेम के नारे जनमानस में देश –
  • भक्ति का संचार करते हैं।
  • नारों में तुकबंदी अथवा लयात्मक योजना का विशेष महत्व होता है।
  • नारों की विषय सामग्री में आपसी सम्बद्धता व मौलिकता का होना ज़रूरी है।

नारों के महत्वपूर्ण उदाहरण :

प्रश्न 1.
लॉकडाउन के दौरान आप अपने घर पर हैं। जागरूक नागरिक होने के नाते जनमानस के बीच सामाजिक सचेतता फैलाने वाले सुझावों पर 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
सामाजिक दूरी है वायरस से लड़ने का औजार।
पैदल हो या फिर कार पर हो सवार।।
बिना मास्क के घर से मत निकलो यार।
आफत को मत गले लगाओ, बन जाओ समझदार।।

JAC Class 9 Hindi रचना नारा लेखन

प्रश्न 2.
शिक्षा प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। शिक्षा के बिना हमारे जीवन का कोई महत्व नहीं है। अशिक्षितों को शिक्षित करने के लिए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
लड़का हो या लड़की, सब बने साक्षर।
शिक्षा से ही फलता-फूलता यह देश निरंतर।।
बच्चे-बच्चे का सपना हो साकार।
शिक्षा पर हम सबका अधिकार ।।

प्रश्न 3.
स्वच्छता अपनाना सभी की जवाबदारी है। हर हाल में सफाई का ध्यान रखते हुए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
स्वच्छता से है बढ़ते देशों की पहचान।
आओ मिलकर रखें इनका ध्यान ।।
स्वच्छता से बढ़ेगी धरती की शान।
तभी गांधीजी के सपनों का होगा मान।।

प्रश्न 4.
सड़क सुरक्षा अनुशासित जीवन का अंग है। सुरक्षा नियमों का पालन करना मजबूरी नहीं हो सकती। ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
चलो सड़क पर रखो आँखें चार।
पैदल हो, बाईक हो या फिर कार।।
ट्रैफिक सिगनल देख करो सड़क को पार।
रहो सुरक्षित पड़ेगी न दंड की मार ||

JAC Class 9 Hindi रचना नारा लेखन

प्रश्न 5.
वृक्षारोपण बहुत ज़रूरी है। इसे पुण्य का काम समझा जाता है। वृक्ष की उपयोगिता का ध्यान रखते हुए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
वृक्ष ही हैं सबके जीवन का अधिकार।
उदर पूर्ति का होते हैं ये अद्भुत भंडार।।
हरे-भरे वृक्ष जीवन में हरियाली लाते।
अपने कर्तव्यों से हम क्यों मुकर जाते।।

प्रश्न 6.
15 अगस्त को बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इतिहास के इस स्वर्णिम दिन का महत्व बताते हुए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
आज किरन किरन थिरक रही, ले प्रभा नवीन।
आज श्वास है नवीन आज की पवन नवीन।।
मिलती नहीं आजादी खुद, यह ली जाती है मीत।
तलवारों के साये के नीचे गाने पड़ते हैं गीत।।

प्रश्न 7.
विज्ञान को मानव की तीसरी आँख माना गया है। विज्ञान के कारण मानव जीवन में अनेक परिवर्तन आए हैं। विज्ञान के वरदान या अभिशाप को ध्यान में रखते हुए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
फैल रहा विज्ञान का घर – घर प्रकाश।
करता दोनों काम- नव निर्माण विकास।।
यह विष्णु जैसा पालक है, शंकर जैसा संहारक।
पूजा उसकी शुद्ध भाव से करो तुम यहाँ आराधक।।

JAC Class 9 Hindi रचना नारा लेखन

प्रश्न 8.
हम कभी न बुझने वाला आशा का दीपक अपने हाथ में लेकर मंजिल की ओर बढ़ते हैं। लक्ष्य प्राप्ति के लिए 20-30 शब्दों में नारा लेखन कीजिए।
उत्तर :
जिस युग में जन्मे उसे बड़ा बनाएँगे।
चाहे कितना हो विस्तीर्ण – कर्म क्षेत्र बनाएँगे।
जीवन में कुछ करना है तो – मन मारकर न बैठेंगे।
यदि आगे-आगे बढ़ना है – हिम्मत हारकर न बैठेंगे।।

JAC Class 9 Hindi रचना संदेश लेखन

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JAC Board Class 9 Hindi Rachana संदेश लेखन

अपने मनोभावों और विचारों को प्रकट करने का सशक्त माध्यम संदेश – लेखन कहलाता है। इस माध्यम के द्वारा हम अपने प्रियजन, सहपाठियों, मित्रों, पारिवारिक सदस्यों या संबंधियों को किसी शुभ अवसर, त्योहार या फिर परीक्षा अथवा नौकरी में सफलता प्राप्त करने आदि अवसरों में अपने मन के भावों को संदेश लिखकर आत्मीयता से प्रकट करते हैं। इस प्रकार संदेश लेखन के माध्यम से शुभकामनाएँ भेजने के साथ-साथ निःसंदेह उनका मनोबल बढ़ाना होता है।

संदेश लेखन लिखते समय ध्यान देने योग्य प्रमुख बिंदु –

  • संदेश को बॉक्स के अंदर लिखना चाहिए।
  • संदेश लिखते समय शब्द, शब्द – सीमा 30 से 40 शब्द ही होनी चाहिए।
  • संदेश हृदयस्पर्शी तथा संक्षिप्त होने चाहिए।
  • बॉक्स के बाएँ शीर्ष में दिनांक और उसके नीचे स्थान अवश्य लिखें।
  • संदेश के आखिर में नीचे प्रेषक का नाम लिखना न भूलें।
  • संदेश लिखते समय केवल महत्वपूर्ण बातों का ही उल्लेख करें।
  • मनोभावों की सुंदर अभिव्यक्ति पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने वाली होती है।
  • संदेश लेखन में तुकबंदी वाली प्रभावशाली पंक्तियाँ भी लिखी जाती हैं।
  • संदेश दो प्रकार के अनौपचारिक व औपचारिक हो सकते हैं।

JAC Class 9 Hindi रचना संदेश लेखन

संदेश लेखन के महत्वपूर्ण उदाहरण :

प्रश्न 1.
आप अमेरिका में रहते हैं और गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने भारतीय सहेली को 30 से 40 शब्दों में शुभकामना संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

26 जनवरी, 20XX
नवी मुंबई
प्रिय मान्यता।
भारत देश हमारा है यह हमको जान से प्यारा है दुनिया में सबसे न्यारा यह सबकी आँखों का तारा है मोती हैं इसके कण-कण में बूँद-बूँद में सागर है
प्रहरी बना हिमालय बैठ धरा सोने की गागर है।
इस गणतंत्र दिवस की आप और आपके परिवार को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ। भारत देश ऐसे ही कामयाबी की बुलंदियों को छूता रहे। अपने राष्ट्र की समृद्धि और उन्नति में अपना योगदान देना हर भारतवासी का कर्तव्य है।
कविता

प्रश्न 2.
अपने मित्र को वसंत पंचमी के अवसर पर 30 से 40 शब्दों में शुभकामना संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

10 फ़रवरी, 20Xx
नई दिल्ली
मित्रवर,
संदेश
गेंदा गमके महक बिखेरे। उपवन को आभास दिलाए।
बहे बयरिया मधुरम – मधुरम। प्यारी कोयल गीत जो गाए।
ऐसी बेला में उत्सव होता जब।
वाग्देवी भी तान लगाए।
आपको वसंत पंचमी के अवसर पर ढेर सारी बधाई और उम्मीद है कि आप हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी वार्षिक वसंतोत्सव में वाग्देवी की सेवा में सहभागिता देंगे।
आर्यन

JAC Class 9 Hindi रचना संदेश लेखन

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने सहेली को 30 से 40 शब्दों में एक शुभकामना संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

15 अगस्त, 20XX
चेन्नई
प्रिय सहेली।
संदेश
स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर है, विजयी – विश्व का गान अमर है।
देश-हित सबसे पहले है, बाकी सबका राग अलग है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएँ।
रोशनी

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शिष्य द्वारा विज्ञान शिक्षक को 30 से 40 शब्दों में शुभकामना संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

28 फ़रवरी, 20XX
नई दिल्ली
आदरणीय गुरुदेव,
28 फ़रवरी, 1928 को सर सी०आर० रमन ने 1930 में अपनी खोज की घोषणा कर नोबल पुरस्कार प्राप्त किया था। जो विज्ञान विशिष्ट ज्ञान को जीवन के अनुभव के साथ जोड़कर शिक्षा देता है और उस शिक्षा से शिक्षार्थी का जीवन सार्थक बनता है, वही विषय विज्ञान कहलाता है। हर दिन आपके द्वारा पढ़ाए गए विज्ञान विषय से मेरी रुचि में अद्भुत परिवर्तन आया। आपके अनुभव ने मेरा और मुझ जैसे अनेक शिष्यों का मार्गदर्शन कर आदर्श विज्ञान शिक्षक की भूमिका का निर्वाह किया। आपका उद्देश्य सर्वदा विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित व प्रेरित करना रहा है। ऐसे विशिष्ट गुरु को मेरा शत-शत प्रणाम। विज्ञान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। अभिनव

JAC Class 9 Hindi रचना संदेश लेखन

प्रश्न 5.
अपनी पूजनीया माता जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए 30-40 शब्दों में संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

14 अप्रैल, 20XX
नई दिल्ली
खुद से पहले तुम मुझे खिलाती थी, रोने पर तुम भी बच्चा बन जाती थी,
खुद जाग जागकर मुझे सुलाती थी, शिक्षक बनकर तुम मुझे पढ़ाती थी,
कभी बहन कभी सहेली बन जाती थी।
आपने – अपने प्रेम, परम त्याग और आदर्शों से पूरे परिवार को प्रेम के धागे में बाँधे रखा। हमेशा अपने मश्दु अनुभवों से हमारा मार्गदर्शन किया। मैंने माँ के रूप में सच्ची सहेली और शिक्षिका पाया। आपके चरणों में शत-शत नमन। जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ।
अनन्या

प्रश्न 6.
अपने मित्र की नौकरी में पदोन्नति होने पर बधाई देते हुए शुभकामना संदेश 30-40 शब्दों में लिखिए।
उत्तर :

संदेश

8 जून, 20XX
नई दिल्ली
मित्रवर,
फूल बनके मुसकराना जिंदगी है
मुसकरा कर गम भुलाना भी जिंदगी है जीत कर खुश हो तो अच्छा है पर,
हार कर खुशियाँ मनाना भी जिंदगी है
आपने अपनी योग्यता और कुशलता का अद्भुत परिचय तो परीक्षा का अंतिम पड़ाव पारकर सभी का दिल जीत लिया था। आज फिर वह अवसर आ गया है कि आपको योग्यता और परिश्रम के बल पर पदोन्नति मिली है, आप इस पदोन्नति के सच्चे हकदार हैं। भविष्य में भी आप अपने सहकर्मियों के लिए एक आदर्श बने रहेंगे। आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ।
जयंत शुक्ल

JAC Class 9 Hindi रचना संदेश लेखन

प्रश्न 7.
विद्यालय की वार्षिक पत्रिका के प्रकाशन पर अध्यक्ष द्वारा विद्यार्थियों को 30 से 40 शब्दों में शुभकामना संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

5 अप्रैल, 20XX
कोलकाता
प्रिय विद्यार्थियो
सत्र 20XX – 20XX की वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन हो रहा है। उत्कृष्ट लेख, नाटक, प्रहसन, चुटकुले, निबंध आदि के प्रकाशन हेतु प्रवेश नियम विद्यार्थियों को विद्यालय के सूचना बोर्ड पर शर्तों के साथ सूचित कर दिया गया है। इस साहित्यिक पत्रिका में विद्यार्थियों का चहुमुखी साहित्यिक विकास होगा और आप कवि या लेखक के रूप में लेखन द्वारा राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे, मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ आपके साथ हैं।
अध्यक्ष
शिखर त्रिवेदी

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प्रश्न 8.
मोबाइल फोन को कम उपयोग करने के लिए विद्यार्थियों को 30-40 शब्दों में संदेश लिखिए।
उत्तर :

संदेश

22 जुलाई, 20XX
नई दिल्ली
प्रिय विद्यार्थियो
खोजा बहुत ही उसको, नहीं मुलाकात हुई उससे।
घर-घर में खिलता था वह बचपन बिना मोबाइल जो।
जो करता दुरुपयोग इसका नर्वस सिस्टम होता खराब।
बीमारियों का आमंत्रण, डिप्रैशन, अनेक विकार।
स्मरण शक्ति का निश्चय होता है ह्रास।
रवि

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Rachana लघुकथा-लेखन Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 9 Hindi Rachana लघुकथा-लेखन

किसी घटना के संक्षिप्त रोचक वर्णन को लघुकथा कहते हैं। कहानी या कथा लिखना एक कला है। लघुकथा में कम-से-कम शब्दों में ही बात को इस प्रकार प्रस्तुत करना होता है कि वह पाठक के मन को चिंतन के लिए उद्वेलित कर दे। अपनी कल्पना और वर्णन – शक्ति के द्वारा लेखक कहानी के कथानक, पात्र या वातावरण को प्रभावशाली बना देता है। लेखक पाठक के लिए अपनी कल्पना और विचारों को नैतिक संदेश प्रदान करने के लिए एक कहानी के रूप में डालने की कोशिश करता है। विद्यार्थियों को पहले दी गई रूपरेखा के आधार, चित्र देखकर अथवा कहानी के संकेत पढ़कर कहानी लिखने का अभ्यास करना चाहिए।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

कहानी के कुछ प्रमुख तत्व :

  • कथावस्तु
  • संवाद
  • देशकाल और वातावरण
  • भाषा-शैली
  • चरित्र-चित्रण
  • उद्देश्य

कथावस्तु – कथावस्तु से तात्पर्य कहानी में वर्णित घटनाओं और कार्य – व्यापार से है।
संवाद – कहानी के पात्रों द्वारा आपस में किए गए वार्तालाप को संवाद कहते हैं। कहानी के संवाद लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि संवाद पात्र के अनुकूल हों।
देशकाल और वातावरण – कहानी में वर्णित घटना का संबंध जिस परिस्थिति अथवा वातावरण से है, उसे एक कहानी का देशकाल अथवा परिवेश कहा जाता है।
भाषा-शैली – कथाकार अपनी भाषा शैली के द्वारा कहानी के पात्रों को जीवंत और प्रभावशाली बनाता है। भाषा शैली कहानी का प्राण तत्व होती है।
चरित्र-चित्रण – कहानी के पात्रों के हाव-भाव तथा कार्य-व्यापार उनके चरित्र का निर्माण करते हैं।
उद्देश्य – कहानी का अभिप्राय ही कहानी का उद्देश्य है। पाठक कहानी के अभिप्राय को समझे बिना कहानी को सही ढंग से आत्मसात नहीं कर सकता।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

कहानी लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • परिचय कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कहानी लिखते समय मुख्य चरित्र और एक घटना का उल्लेख के साथ परिचय लिखना चाहिए।
  • परिचय के उपरांत कहानी की स्थिति के बारे में लिखना चाहिए।
  • दी गई रूपरेखा अथवा संकेतों के आधार पर ही कहानी का विस्तार करें।
  • कहानी में विभिन्न घटनाओं और प्रसंगों को संतुलित विस्तार दें।
  • कहानी की भाषा सरल होनी चाहिए, जिससे पाठकों को आसानी से समझ आ जाए।
  • कहानी रोचक और स्वाभाविक हो। घटनाओं का पारस्परिक संबंध हो और कहानी से कोई-न-कोई उपदेश मिलता हो।
  • कहानी का शीर्षक उपयुक्त एवं आकर्षक होना चाहिए।
  • कहानी का आरंभ आकर्षक होना चाहिए और अंत सहज ढंग से होना चाहिए।

संकेत बिंदुओं के आधार पर लघुकथा लेखन के कुछ उदाहरण –

1. एक बालक का अपने मित्रों के साथ बगीचे में जाना… चोरी से फल तोड़कर खाना… माली का बगीचे में आना… बच्चों का भाग जाना… एक बालक का पकड़े जाना… माली द्वारा उसे डाँटना… बालक का रोना.. माली की बात को आत्मसात करना… भविष्य में प्रतिष्ठित व्यक्ति बनना।

शीर्षक – सीख

एक दिन कुछ बालक विद्यालय से लौट रहे थे कि रास्ते में एक बगीचे में अमरूद से लदे पेड़ देखकर सभी बच्चे उसमें घुस गए। माली को वहाँ न पाकर बच्चे पेड़ पर चढ़ गए और अमरूद तोड़कर खाने लगे। एक बच्चा नीचे खड़ा बड़े बच्चों से गुहार लगा रहा था कि वे उसे भी थोड़े अमरूद तोड़ कर दे दें। पेड़ पर चढ़े एक बच्चे ने एक अमरूद उसकी ओर उछाल दिया।

अमरूद पाकर बालक बड़ा प्रसन्न हुआ और अमरूद खाने लगा। इतने में ही बालक ने ज़ोर से शोर मचाया, माली आ गया भागो…..। बच्चे पेड़ से उतरकर भागने लगे। वह छोटा बालक अमरूद खाने में लगा हुआ था उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी माली ने आकर उसे धर दबोचा। माली उस बालक को पहचान गया। उससे बोला, तुम्हें बगीचे में चोरी करते हुए लज्जा नहीं आती? एक तो तुम्हारे पिता नहीं हैं ऊपर से तुम इन बच्चों के साथ गंदी आदतें सीख रहे हो।

बालक यह सुनकर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। बालक को रोता देखकर माली ने समझाया, “तुम्हारी माता भविष्य के सुनहरे सपने देखती हैं। तुम्हें तो अच्छी तरह पढ़ना चाहिए ताकि तुम बड़े होकर अपनी माँ का हाथ बँटा सको।’

बालक समझ गया उसने माली की बात गाँठ बाँध ली। इसके बाद वह बालक कभी उस बगीचे में नज़र नहीं आया। आगे चलकर यही बालक हमारे देश के दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री के रूप में विख्यात हुए।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

2. अध्यापक का शिष्यों के साथ घूमने जाना …… अच्छी संगति के महत्व को समझाना ……. एक गुलाब का पौधा देखना …… ढेला उठाकर सूँघना …… शिष्य का ढेला सूँघना ……. अध्यापक का शिष्यों को समझाना ……. गुलाब की पंखुड़ियाँ गिरना ……. पंखुड़ियों की संगति से मिट्टी से गुलाब की महक आना ……… जैसी संगति वैसे ही गुण-दोष।

शीर्षक – संगति का असर

एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे। रास्ते में वे अपने शिष्यों के अच्छी संगति का महत्व समझा रहे थे। लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे। तभी अध्यापक ने फूलों से लदा एक गुलाब का पौधा देखा। उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकर ले आने को कहा। जब शिष्य ढेला उठा लाया तो अध्यापक ने उससे उस ढेले को सूँघने को कहा।

शिष्य ने ढेला सूँघा और बोला, “गुरु जी इसमें से तो गुलाब की बड़ी खुशबू आ रही है।”

अध्यापक बोले, “बच्चो ! जानते हो इस मिट्टी में यह मनमोहक महक कैसे आई? दर सअसल इस मिट्टी पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ, टूट-टूटकर गिरती हैं, तो मिट्टी में भी गुलाब की महक आने लगी है। जिस प्रकार गुलाब की पंखुड़ियों की संगति के कारण इस मिट्टी में से गुलाब की महक आने लगी उसी प्रकार जो व्यक्ति जैसी संगति में रहता है उसमें वैसे ही गुण-दोष आ जाते हैं।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

3. व्यापारी का ऊँटों का व्यापार करना ……… उनके बच्चे खरीदकर बेचना ……… जंगल के पास चरने को भेजना ……… ऊँट का बच्चा शैतान होना ……… उसके गले में घंटी बाँधना ……… शेर ऊँटों को शिकार करने के लिए देखना ……… मौके की तलाश करना ……… ऊँटों का खतरा होना …….. चल पड़ना ………. बच्चे का झुंड से अलग जाना ……… शेर के द्वारा मारे जाना।

शीर्षक – मूर्खता का परिणाम

रेगिस्तान के किनारे स्थित एक गाँव में एक व्यापारी रहता था। वह ऊँटों का व्यापार करता था। वह ऊँटों के बच्चों को खरीदकर उन्हें शक्तिशाली बनाकर बेच देता था। इससे वह ढेर सारा धन कमाता था।
व्यापारी ऊँटों को पास के जंगल में घास चरने के लिए भेज देता था जिससे उनके चारे का खर्च बचता था। उनमें से एक ऊँट का बच्चा बहुत शैतान था। वह प्राय: समूह से दूर चलता था और इस कारण पीछे रह जाता था। बड़े ऊँट हरदम उसे समझाते थे, परंतु वह नहीं सुनता था। इसलिए उन सबने उसकी परवाह करना छोड़ दिया।
व्यापारी को उस छोटे ऊँट से बहुत प्रेम था। इसलिए उसने उसके गले में घंटी बाँध रखी थी। जब भी वह सिर हिलाता तो उसकी घंटी बजती थी जिससे उसकी चाल एवं स्थिति का पता चल जाता था।
एक बार उस स्थान से एक शोर गुजरा जहाँ ऊँट चर रहे थे। उसे ऊँट की घंटी के द्वारा उनके होने का पता चल गया था। उसने फ़सल में से झाँककर देखा तो उसे ज्ञात हुआ कि ऊँट का एक बड़ा समूह है लेकिन वह ऊँटों पर हमला नहीं कर सकता था क्योंकि समूह में ऊँट उससे बलशाली थे। इस कारण वह मौके की तलाश में वहाँ छुपकर खड़ा हो गया। समूह के एक बड़े ऊँट को खतरे का आभास हो गया। ऊँटों ने एक मंडली बनाकर जंगल से बाहर निकलना आरंभ कर दिया। शेर ने मौके की तलाश में उनका पीछा करना शुरू कर दिया। बड़े

ऊँट ने विशेषकर छोटे ऊँट को सावधान किया था। कहीं वह कोई परेशानी न खड़ी कर दे। पर छोटे ऊँट ने ध्यान नहीं दिया और वह लापरवाही से चलता रहा। छोटा ऊँट अपनी मस्ती में अन्य ऊँटों से पीछे रह गया। जब शेर ने उसको देखा तो वह उस पर झपट पड़ा। छोटा ऊँट अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागा, पर वह अपने आप को उस शेर से नहीं बचा पाया। उसका अंत बुरा हुआ क्योंकि उसने अपने बड़ों की आज्ञा का पालन नहीं किया था।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

4. एक धनी सेठ के बेटे का आज्ञाकारी तथा होनहार होना… उसका बुरी संगत में पड़ना …….. उनके साथ उसका कक्षा छोड़कर भागना …….. उसे सिगरेट की लत लगना ……. उसके पिता का उसे सिगरेट पीते देखना पर कुछ न कहना …….. आदित्य को पश्चाताप होना …….. पिता से क्षमा माँगना ……. बुरी संगति को छोड़ना …….

संगति का प्रभाव

बनारस के पास एक छोटे-से नगर में सेठ श्याम दास रहते थे। उनका इकलौता था पुत्र था, जो बहुत ही होनहार था उसका नाम आदित्य था। विद्यालय के सभी शिक्षक आदित्य को बहुत पसंद किया करते थे क्योंकि वह आज्ञाकारी होने के साथ-साथ पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था। उसकी कक्षा में कुछ ऐसे बच्चे भी पढ़ते थे जिनकी आदत खराब थी। न मालूम कैसे धीरे-धीरे आदित्य की मित्रता उन बच्चों के साथ हो गई। अब वह भी उन बच्चों की भाँति विद्यालय से भागने लगा। उसे कक्षा छोड़कर जाना अच्छा लगने लगा। वह पहले की भाँति विद्यालय तो आता, लेकिन बीच में ही विद्यालय से बाहर निकलकर उन मित्रों के साथ सिनेमा देखता, बाज़ार घूमता और जुआ खेलता। उसे सिगरेट पीने की लत भी लग गई थी। सेठ श्याम दास इन सब बातों से बेखबर थे। वे नहीं जानते थे कि उनका प्रिय पुत्र किस प्रकार बुरी संगति में पड़ गया है।

एक दिन किसी कार्यवश वे बाज़ार निकले, तो उन्होंने देखा कि आदित्य कुछ बच्चों के साथ पेड़ के नीचे बैठकर सिगरेट पी रहा है। पहले तो उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ किंतु पास जाकर देखा, तो समझ गए कि आदित्य अब बुरी संगति में पड़ चुका है। अपने पिता को सामने खड़ा देखकर आदित्य झेंप गया। उसे कुछ जवाब देते नहीं बन पड़ा। बिना कुछ कहे वह अपने पिता के साथ हो लिया। रास्ते भर पिता-पुत्र में कोई बातचीत नहीं हुई। वह समझ चुका था कि उसने अपने पिता को बहुत कष्ट पहुँचाया है। घर आकर उसने अपने पिता से क्षमा माँगी और उन गलत दोस्तों का साथ छोड़ देने का प्रण लिया। उसे समझ आ गया था कि बुरे लोगों के साथ रहकर कुछ भला नहीं हो सकता।

JAC Class 9 Hindi रचना लघुकथा-लेखन

5. सेठ काशीराम के पास अपार दौलत होना ……… पर मन की शांति नहीं ……… एक दिन आश्रम में जाना ……… संत द्वारा प्रश्न पूछना …….. सेठ द्वारा अपनी परेशानी को बताना ……….. दोनों का आश्रम के चक्कर लगाना ………… सेठ द्वारा सुंदर वृक्ष को छूना ….. काँटा चुभना …….. सेठ का चिल्लाना ……… संत द्वारा समझाया जाना ……. ईर्ष्या, क्रोध, लोभ का त्याग करना ……… शांति का प्राप्त होना ……….

शीर्षक-शांति की प्राप्ति

सेठ काशीराम के पास अपार धन-दौलत थी। उन्हें हर तरह का आराम था लेकिन उनके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उन्हें कोई-न-कोई चिंता परेशान किए रहती थी। एक दिन वे कहीं जा रहे थे तो रास्ते में उनकी नज़र एक आश्रम पर पड़ी। वहाँ उन्हें किसी साधु के प्रवचनों की आवाज़ सुनाई दी। उस आवाज़ से प्रभावित होकर काशीराम आश्रम के अंदर गए और बैठ गए।

प्रवचन समाप्त होने पर सभी अपने-अपने घर को चले गए। लेकिन सेठ वहीं बैठे रहे। उन्हें देखकर संत बोले, ” कहो, तुम्हारे मन में क्या निराशा है, जो तुम्हें परेशान कर रही है।”
इस पर काशीराम बोले, “बाबा, मेरे जीवन में शांति नहीं है।”

यह सुनकर संत बोले, ” घबराओ नहीं, तुम्हारे मन की सारी अशांति अभी दूर हो जाएगी। तुम आँखें बंद करके ध्यान की मुद्रा में बैठो।’ संत की बात सुनकर ज्यों ही काशीराम ध्यान की मुद्रा में बैठे त्यों ही उनके मन में इधर-उधर की बातें घूमने लगीं और उनका ध्यान उचट गया। संत ने यह देखकर सेठ से कहा, ‘चलो, आश्रम का एक चक्कर लगाते हैं।’

इसके बाद वे आश्रम में घूमने लगे। काशीराम ने एक सुंदर वृक्ष देखा तथा उसे हाथ से छुआ। हाथ लगाते ही उनके हाथ में एक काँटा चुभ गया और सेठ बुरी तरह चिल्लाने लगे। यह देखकर संत वापस अपनी कुटिया में आए। कटे हुए हिस्से पर लेप लगाया। कुछ देर बाद वे सेठ से बोले, “तुम्हारे हाथ में ज़रा-सा काँटा चुभा तो तुम बेहाल हो गए। सोचो कि जब तुम्हारे अंदर ईर्ष्या, क्रोध व लोभ जैसे बड़े-बड़े काँटे छिपे हैं, तो तुम्हारा मन भला शांत कैसे हो सकता है?”

संत की बात से सेठ काशीराम को अपनी गलती का अहसास हो गया। वे संतुष्ट होकर वहाँ से चले गए। उसके बाद सेठ काशीराम ने कभी भी ईर्ष्या नहीं की, क्रोध भी त्याग दिया।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

Jharkhand Board JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

बहुचयनात्मक प्रश्न

1. एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि (ABM) किस वर्ष हुई ?
(अ) 1975
(ब) 1978
(स) 1956
(द) 1972
उत्तर:
(द) 1972

2. निम्नलिखित में से कौन-सी संधि अस्त्र नियंत्रण संधि थी
(अ) अस्त्र परिसीमन संधि – 2 ( SALT – II)
(ब) सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि (स्ट्रेटजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी – SIART)
(स) परमाणु अप्रसार संधि (NPT)
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

3. जैविक हथियार संधि कब की गई ?
(अ) 1975
(ब) 1992
(स) 1972
(द) 1968
उत्तर:
(स) 1972

4. सुरक्षा की अवधारणा कितने प्रकार की है ?
(अ) तीन
(ब) चार
(स) दो
(द) एक
उत्तर:
(स) दो

5. परमाणु अप्रसार संधि जिस सन् में हुई वह है-
(अ) 1968
(ब) दो
(स) 1972
(द) एक
उत्तर:
(अ) 1968

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

6. निम्न में से किस संधि ने अमरीका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोक:
(अ) जैविक हथियार संधि
(ब) एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि
(स) रासायनिक हथियार संधि
(द) परमाणु अप्रसार संधि
उत्तर:
(ब) एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि

7. अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादियों ने हमला किया
(अ) 11 सितंबर, 2001
(ब) 10 अक्टूबर, 2001
(स) 11 नवम्बर, 2002
(द) 9 दिसम्बर, 2002
उत्तर:
(अ) 11 सितंबर, 2001

8. भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया
(अ) 1974 में
(ब) 1975 में
(स) 1978 में
(द) 1980 में
उत्तर:
(अ) 1974 में

9. पाकिस्तान ने भारत पर अब तक कुल कितनी बार हमला किया है?
(अ) तीन
(ब) दो
(स) चार
(द) पाँच
उत्तर:
(अ) तीन

10. क्योटो के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर कब किया गया?.
(अ) 1998
(ब) 1997
(स) 1991
(द) 1992
उत्तर:
(ब) 1997

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. सुरक्षा की ………………………. धारणा में माना जाता है कि किसी देश की सुरक्षा को ज्यादातर खतरा उसकी सीमा के बाहर से होता है।
उत्तर:
परंपरागत

2. सुरक्षा – नीति का संबंध युद्ध की आशंका को रोकने में होता है जिसे ………………………….. कहा जाता है।
उत्तर:
अपरोध

3. …………………….. सुरक्षा नीति का एक तत्त्व शक्ति संतुलन है।
उत्तर:
परम्परागत

4. जैविक हथियार संधि पर ………………………. से ज्यादा देशों ने संधि पर हस्ताक्षर किए।
उत्तर:
155

5. …………………………संधि ने परमाणविक आयुधों को हासिल कर सकने वाले देशों की संख्या कम की।
उत्तर:
परमाणु अप्रसार

6. सुरक्षा की …………………… धारणा को ‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ……………………………. कहा जाता है।
उत्तर:
अपारंपरिक, विश्व- रक्षा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुरक्षा का बुनियादी अर्थ लिखिए।
उत्तर:
सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है। खतरे से आजादी।

प्रश्न 2.
सुरक्षा की कितनी धारणाएँ हैं?
उत्तर:
सुरक्षा की दो धारणाएँ हैं। पारंपरिक और अपारंपरिक।

प्रश्न 3.
लोग पलायन क्यों करते हैं? कोई एक कारण बताएँ।
उत्तर:
लोग आजीविका हेतु पलायन करते हैं।

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प्रश्न 4.
भारत के किन दो पड़ौसी देशों के पास परमाणु हथियार हैं?
उत्तर:
भारत के दो पड़ौसी देशों – पाकिस्तान और चीन के पास परमाणु हथियार हैं।

प्रश्न 5.
आतंकवाद सुरक्षा के लिए खतरे की किस श्रेणी में आता है?
उत्तर:
अपरम्परागत श्रेणी में।

प्रश्न 6.
एन. पी. टी. का पूरा नाम क्या है? यह किस वर्ष में हुई?
उत्तर:
एन. पी. टी. का पूरा नाम है। न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफेरेशन ट्रीटी । यह सन् 1968 में हुई।

प्रश्न 7.
सैन्य शक्ति का आधार क्या है?
उत्तर:
सैन्य – शक्ति का आधार आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत है।

प्रश्न 8.
ओसामा बिन लादेन किस आतंकवादी समूह का था?
उत्तर:
अल-कायदा।

प्रश्न 9.
पारम्परिक सुरक्षा की धारणा के अन्तर्गत ‘अपरोध’ का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
पारम्परिक सुरक्षा की धारणा के अन्तर्गत ‘अपरोध’ का अर्थ है – युद्ध की आशंका को रोकना।

प्रश्न 10.
पारम्परिक बाह्य सुरक्षा नीति के कोई दो तत्त्व लिखिये।
उत्तर:
शक्ति सन्तुलन और गठबंधन बनाना।

प्रश्न 11.
एशिया- अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों में आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली किसी एक समस्या का नाम लिखिये।
उत्तर:
अलगाववादी आंदोलन|

प्रश्न 12.
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा को ‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ‘विश्व- रक्षा’ कहा जाता है।

प्रश्न 13.
मानवता की सुरक्षा का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
मानवता की सुरक्षा का प्राथमिक लक्ष्य व्यक्तियों की संरक्षा है।

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प्रश्न 14.
व्यापकतम अर्थ में मानवता की रक्षा से क्या आशय है?
उत्तर:
व्यापकतम अर्थ में मानवता की रक्षा से आशय ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ है।

प्रश्न 15.
युद्ध के सिवाय मानव सुरक्षा के किन्हीं अन्य चार खतरों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मानव सुरक्षा के खतरे निम्नलिखित हैं।

  1. पर्यावरण ह्रास
  2. ग्रीन हाउस गैसों का अत्यधिक उत्सर्जन
  3. नाभिकीय युद्ध का भय
  4. बढ़ती हुई जनसंख्या।

प्रश्न 16.
सुरक्षा के खतरे के किन्हीं दो नये स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:

  1. वैश्विक ताप वृद्धि
  2. अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद।

प्रश्न 17.
किन्हीं दो शक्तियों के नाम लिखें जो सैनिक शक्ति का आधार हैं।
उत्तर:
आर्थिक शक्ति एवं, तकनीकी शक्ति।

प्रश्न 18.
सुरक्षा के मुख्य दो रूपों के नाम लिखिये।
उत्तर:
सुरक्षा के दो रूप हैं।

  1. पारम्परिक सुरक्षा और
  2. अपारंपरिक सुरक्षा।

प्रश्न 19.
पारम्परिक सुरक्षा से क्या आशय है?
उत्तर:
पारम्परिक सुरक्षा में यह स्वीकार किया गया है कि हिंसा का प्रयोग जहाँ तक हो सके कम से कम होना

प्रश्न 20.
अपारम्परिक सुरक्षा से क्या आशय है?
उत्तर:
अपारम्परिक सुरक्षा की धारणा सैन्य खतरों से सम्बन्धित न होकर मानवीय अस्तित्व को चोट पहुँचाने वाले व्यापक खतरों से है।

प्रश्न 21.
परम्परागत सुरक्षा और अपरम्परागत सुरक्षा में एक अंतर लिखें।
उत्तर:
परम्परागत सुरक्षा का दृष्टिकोण संकुचित है जबकि अपरम्परागत सुरक्षा का दृष्टिकोण व्यापक है।

प्रश्न 22.
निःशस्त्रीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
निशस्त्रीकरण से अभिप्राय हथियारों के निर्माण या उनको हासिल करने पर अंकुश लगाना है।

प्रश्न 23.
विश्व तापन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विश्व तापन से अभिप्राय विश्व स्तर पर पारे में लगातार होने वाली वृद्धि है, जिसके कारण विश्व का वातावरण गर्म होता जा रहा है।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

प्रश्न 24.
निरस्त्रीकरण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. जैविक हथियार संधि
  2. रासायनिक हथियार संधि।

प्रश्न 25.
आतंकवाद के कोई दो रूप लिखिये।
उत्तर:
आतंकवाद के दो रूप हैं।

  1. विमान अपहरण करके आतंकवाद फैलाना।
  2. भीड़ भरी जगहों पर विस्फोट करना।

प्रश्न 26.
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा के दो पक्ष बताइये।
उत्तर:
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा के दो पक्ष हैं।

  1. मानवता की सुरक्षा और
  2. विश्व सुरक्षा।

प्रश्न 27.
सुरक्षा नीति के दो घटक बताइये।
उत्तर:

  1. सैन्य क्षमता को मजबूत करना।
  2. अपने सुरक्षा हितों को बचाने के लिये अन्तर्राष्ट्रीय कायदों और संस्थाओं को मजबूत करना।

प्रश्न 28.
ऐसी दो संधियों के नाम बताइये जो अस्त्र नियंत्रण से सम्बन्धित हैं।
उत्तर:

  1. सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि
  2. परमाणु अप्रसार संधि।

प्रश्न 29.
विश्व सुरक्षा का क्या अर्थ है?
उत्तर:
विश्व सुरक्षा से आशय है- पृथ्वी के बढ़ते तापमान, अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, एड्स ‘जैसे असाध्य रोगों पर रोक लगाना।

प्रश्न 30.
क्षेत्रीय सुरक्षा से क्या आशय है?
उत्तर:
क्षेत्रीय सुरक्षा से आशय है। सशस्त्र विद्रोहियों तथा विदेशी आक्रमणकारियों से किसी भू भाग तथा उसके निवासियों के जान-माल की रक्षा करना।

प्रश्न 31.
राष्ट्रीय सुरक्षा, सुरक्षा की किस अवधारणा से जुड़ी हुई है?
उत्तर:
सुरक्षा की पारम्परिक अवधारणा से।

प्रश्न 32.
आतंकवाद का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आतंकवाद का अभिप्राय है। राजनीतिक हिंसा, जिसका निशाना नागरिक होते हैं ताकि समाज में दहशत पैदा की जा सके।

प्रश्न 33.
मानवाधिकार की पहली कोटि कौन-सी है?
उत्तर:
राजनैतिक अधिकारों की।

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प्रश्न 34.
केमिकल वीपन्स कन्वेंशन (CWC) संधि पर कितने देशों ने हस्ताक्षर किये थे?
उत्तर:
181 देशों ने।

प्रश्न 35.
अस्त्र नियंत्रण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
अस्त्र नियंत्रण का आशय है हथियारों को विकसित करने अथवा उनको हासिल करने के संबंध में कुछ कानून का पालन करना।

प्रश्न 36.
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा को ‘मानवता की सुरक्षा’ अथवा ‘विश्व – रक्षा’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि सुरक्षा की जरूरत सिर्फ राज्य ही नहीं व्यक्तियों और समुदायों अपितु समूची मानवता को है।

प्रश्न 37.
परम्परागत धारणा के अनुसार सुरक्षा के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर:
दो – बाह्य सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा।

प्रश्न 38.
मानवाधिकार को कितने कोटियों में रखा गया है?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 39.
राजनैतिक अधिकारों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अभिव्यक्ति और सभा करने की आजादी।

प्रश्न 40.
सहयोगमूलक सुरक्षा से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अपरम्परागत खतरों के लिए सैन्य संघर्ष की बजाय आपसी सहयोग अपनाना।

प्रश्न 41.
‘क्योटो प्रोटोकॉल’ क्या है?
उत्तर:
‘क्योटो प्रोटोकॉल’ में वैश्विक तापवृद्धि पर काबू पाने तथा ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

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प्रश्न 42.
क्योटो प्रोटोकॉल पर कितने देशों ने हस्ताक्षर किए हैं?
उत्तर:
160

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुरक्षा का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है। खतरे से आजादी संकीर्ण दृष्टिकोण के अनुसार इसका अभिप्राय व्यक्तिगत मूल्यों की सुरक्षा से है और व्यापक दृष्टिकोण के अनुसार इसका अभिप्राय बड़े और गंभीर खतरों से सुरक्षा है।

प्रश्न 2.
निःशस्त्रीकरण के मार्ग में आने वाली दो कठिनाइयाँ लिखें।
उत्तर:
निःशस्त्रीकरण के मार्ग में आने वाली दो कठिनाइयाँ ये हैं।

  1. महाशक्तियों में अस्त्र-शस्त्रों के आधुनिकीकरण के प्रति मोह विद्यमान है।
  2. महाशक्तियों में एक-दूसरे के प्रति अविश्वास की भावना भी अभी बनी हुई है।

प्रश्न 3.
‘सुरक्षा’ की धारणा अपने आप में भुलैयादार धारणा है। कैसे?
उत्तर:
‘सुरक्षा’ की धारणा अपने आप में भुलैयादार है क्योंकि इसकी धारणा हर सदी में एकसमान नहीं होती है। विश्व के सारे नागरिकों के लिए सुरक्षा के मायने अलग-अलग होते हैं। विकासशील देशों को बेरोजगार, भुखमरी तथा आर्थिक व सामाजिक पिछड़ेपन से खुद की सुरक्षा करनी होती है तो विकसित देशों को पर्यावरण प्रदूषण, वैश्विक तापवृद्धि जैसे समस्याओं से स्वयं की सुरक्षा करनी होती है।

प्रश्न 4.
आतंकवाद क्या है?
उत्तर:
आतंकवाद का अर्थ है। राजनीतिक हिंसा, जिसका निशाना नागरिक होते हैं। ताकि समाज में दहशत पैदा की जा सके। इसकी चिर-परिचित तकनीकें हैं। विमान अपहरण, भीड़भरी जगहों, जैसे रेलवे स्टेशनों, होटल, बाजार, धर्मस्थल आदि जगहों में बम लगाकर विस्फोट करना।

प्रश्न 5.
आतंकवादी दहशत क्यों पैदा करते हैं?
उत्तर:
आतंकवादी सरकार से अपनी मांगों को मनवाने के लिए दहशत पैदा करते हैं। दूसरे, उन्हें दहशत पैदा करने के लिए ही अपने संगठन से धन व अन्य सुविधायें मिलती हैं।

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प्रश्न 6.
पारम्परिक सुरक्षा से क्या आशय है?
उत्तर;
पारम्परिक सुरक्षा:
पारम्परिक सुरक्षा में यह स्वीकार किया गया है कि हिंसा का प्रयोग जहाँ तक हो सके कम से कम होना चाहिए। युद्ध के लक्ष्य और साधन दोनों का इससे सम्बन्ध है। यह न्याय युद्ध की परम्परा का विस्तार, निःशस्त्रीकरण, अस्त्र- नियंत्रण और विश्वास बहाली के उपायों पर आधारित है।

प्रश्न 7.
सुरक्षा की परम्परागत तथा गैर-परम्परागत धारणाओं में क्या अन्तर है?
उत्तर:
सुरक्षा की परम्परागत धारणा में सिर्फ भूखण्ड तथा उसमें रहने वाले लोगों की जान-माल की रक्षा करना तथा सशस्त्र सैन्य हमलों को रोकना है जबकि अपरम्परागत धारणा में भू-भाग, प्राणियों और सम्पत्ति की सुरक्षा के साथ- साथ पर्यावरण तथा मानवाधिकारों की सुरक्षा भी शामिल है।

प्रश्न 8.
अमरीका तथा सोवियत संघ जैसी महाशक्तियों ने अस्त्र- नियंत्रण का सहारा क्यों लिया?
उत्तर:
मरीका तथा सोवियत संघ सामूहिक संहार के अस्त्र यानी परमाण्विक हथियार का विकल्प नहीं छोड़ना चाहती थीं इसलिए दोनों ने अस्त्र-नियंत्रण का सहारा लिया।

प्रश्न 9.
अस्त्र नियंत्रण का अभिप्राय क्या है?
उत्तर:
अस्त्र नियंत्रण के अंतर्गत हथियारों को विकसित करने अथवा उनको हासिल करने के संबंध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन करना पड़ता है। उदाहरण के लिए सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि – 2, सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि इत्यादि संधियाँ अस्त्र नियंत्रण के उदाहरण हैं.

प्रश्न 10.
एंटी बैलेस्टिक संधि कब और क्यों की गई?
उत्तर:
सन् 1972 में एंटी बैलेस्टिक संधि की गई। इस संधि ने अमरीका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोका। इस संधि में दोनों देशों को सीमित संख्या में ऐसी रक्षा प्रणाली तैनात करने की अनुमति थी लेकिन इस संधि ने दोनों देशों को ऐसी रक्षा प्रणाली के व्यापक उत्पादन से रोक दिया।

प्रश्न 11.
अपरोध नीति क्या है?
उत्तर:
युद्ध की आशंका को रोकने की सुरक्षा नीति को अपरोध नीति कहा जाता है। इसके अन्तर्गत एक पक्ष द्वारा . युद्ध से होने वाले विनाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत दिये जाते हैं ताकि दूसरा पक्ष सहम कर हमला करने से रुक जाये।

प्रश्न 12.
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में किस खतरे को सर्वाधिक खतरनाक माना जाता है?
उत्तर:
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य खतरे को किसी देश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसका स्रोत कोई दूसरा देश होता है जो सैन्य हमले की धमकी देकर संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता जैसे किसी देश के केन्द्रीय मूल्यों के लिए खतरा पैदा करता है।

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प्रश्न 13.
बायोलॉजिकल वैपन्स कन्वेंशन, 1972 द्वारा क्या निर्णय लिया गया?
उत्तर:
सन् 1972 की जैविक हथियार संधि (बायोलॉजिकल वैपन्स कन्वेंशन) ने जैविक हथियारों को बनाना और रखना प्रतिबंधित कर दिया गया। 155 से अधिक देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं जिनमें विश्व की सभी महाशक्तियाँ शामिल हैं।.

प्रश्न 14.
आपकी दृष्टि में बुनियादी तौर पर किसी सरकार के पास युद्ध की स्थिति में कौनसे विकल्प हो सकते हैं? कोई दो स्पष्ट कीजिए।
अथवा
किसी सरकार के पास युद्ध की स्थिति में सुरक्षा के कितने विकल्प होते हैं?
उत्तर:
किसी सरकार के पास युद्ध की स्थिति में तीन विकल्प होते हैं।

  1. आत्म-समर्पण करना तथा दूसरे पक्ष की बात को बिना युद्ध किये मान लेना।
  2. युद्ध से होने वाले नाश को इस हद तक बढ़ाने के संकेत देना कि दूसरा पक्ष सहम कर हमला करने से रुक जाये।
  3. यदि युद्ध ठन जाये तो अपनी रक्षा करना।

प्रश्न 15.
बाहरी सुरक्षा हेतु गठबंधन बनाने से क्या आशय है?
उत्तर:
गठबंधन बनाना:
गठबंधन में कई देश शामिल होते हैं और सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम उठाते हैं। अधिकांश गठबंधनों को लिखित संधि से एक औपचारिक रूप मिलता है जिसमें यह स्पष्ट होता है कि खतरा किससे है? गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं।

प्रश्न 16.
एक उदाहरण देकर यह स्पष्ट कीजिये कि राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं।
उत्तर:
राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबंधन भी बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए, अमरीका ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ इस्लामी उग्रवादियों को समर्थन दिया, लेकिन 9/11 के आतंकवादी हमले के बाद उसने उन्हीं इस्लामी उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

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प्रश्न 17.
निरस्त्रीकरण से क्या आशय है?
उत्तर:
निरस्त्रीकरण-निरस्त्रीकरण सुरक्षा की इस धारणा पर आधारित है कि देशों के बीच एक न एक रूप में सहयोग हो। निरस्त्रीकरण की मांग होती है कि सभी राज्य चाहे उनका आकार, ताकत और प्रभाव कुछ भी हो कुछ ख़ास किस्म के हथियारों से बाज आयें।

प्रश्न 18.
आप वर्तमान विश्व में सुरक्षा को किससे खतरा मानते हैं? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
हम वर्तमान विश्व में सुरक्षा को खतरा निम्न दो कारणों को मानते हैं।

  1. वैश्विक ताप वृद्धि: वर्तमान में विश्व में वैश्विक ताप वृद्धि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए खतरा है।
  2. प्रदूषण: पर्यावरण में तीव्रता से बढ़ रहे प्रदूषण से विश्व की सुरक्षा के समक्ष एक गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

प्रश्न 19.
सुरक्षा के पारंपरिक तरीके के रूप में अस्त्र नियंत्रण को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
अस्त्र नियंत्रण के अन्तर्गत हथियारों के संबंध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन करना पड़ता है। जैसे, सन् 1972 की एंटी बैलिस्टिक मिसाइल संधि (ABM) ने अमरीका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा- कवच के रूप में इस्तेमाल करने से रोका।

प्रश्न 20.
मानवाधिकारों को कितनी कोटियों में रखा गया है?
उत्तर:
मानवाधिकारों को तीन कोटियों (श्रेणियों) में रखा गया है। ये हैं।

  1. राजनैतिक अधिकार, जैसे अभिव्यक्ति और सभा करने की स्वतंत्रता।
  2. आर्थिक और सामाजिक अधिकार।
  3. उपनिवेशीकृत जनता अथवा जातीय और मूलवासी अल्पसंख्यकों के अधिकार।

प्रश्न 21.
आपकी दृष्टि में मानवता की सुरक्षा के व्यापकतम अर्थ में कौन-कौनसी सुरक्षा को शामिल करेंगे?
उत्तर:
मानवतावादी सुरक्षा के व्यापकतम अर्थ में हम युद्ध, जनसंहार, आतंकवाद, अकाल, महामारी, प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के साथ-साथ ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ को भी शामिल करेंगे।

प्रश्न 22.
आप भारत की सुरक्षा नीति के दो घटक बताइये।
उत्तर:
भारत की सुरक्षा नीति के दो घटक ये हैं-

  1. सैन्य क्षमता को मजबूत करना – अपने चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देशों को देखते हुए भारत ने 1974 तथा 1998 में परमाणु परीक्षण कर अपनी सैन्य क्षमता का विकास किया है।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत करना – भारत ने अपने सुरक्षा हितों को बचाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय कायदों एवं संस्थाओं को मजबूत करने की नीति अपनायी है।

प्रश्न 23.
‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ से क्या आशय है?
उत्तर:
जो लोग राजनीतिक उत्पीड़न, जातीय हिंसा आदि किसी कारण से अपना घर-बार छोड़कर अपने ही देश या राष्ट्र की सीमा के भीतर ही रह रहे हैं, उन्हें ‘आंतरिक रूप से विस्थापित जन’ कहा जाता है। जैसे कश्मीर घाटी छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित।

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प्रश्न 24.
युद्ध और शरणार्थी समस्या के आपसी सम्बन्ध पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
युद्ध और शरणार्थी समस्या के बीच आपस में सकारात्मक सम्बन्ध है क्योंकि युद्ध या सशस्त्र संघर्षों के कारण ही शरणार्थी की समस्या बढ़ती है। उदाहरण के लिए सन् 1990 के दशक में कुल 60 जगहों से शरणार्थी प्रवास करने को मजबूर हुए और इनमें से तीन को छोड़कर शेष सभी के मूल में सशस्त्र संघर्ष था।

प्रश्न 25.
परमाणु अप्रसार संधि, 1968 की एक अस्त्र नियंत्रण संधि के रूप में व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
परमाणु अप्रसार संधि, 1968 इस अर्थ में एक अस्त्र नियंत्रक संधि थी क्योंकि इसने परमाणविक हथियारों के उपार्जन को कायदे-कानूनों के दायरे में ला दिया। जिन देशों ने सन् 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे उन्हें इस संधि के अन्तर्गत इस हथियारों को रखने की अनुमति दी गई। लेकिन अन्य देशों को ऐसे हथियारों को हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया।

प्रश्न 26.
शक्ति संतुलन को कैसे बनाए रखा जा सकता है?
उत्तर:
शक्ति सन्तुलन को बनाए रखने के अनेक साधन हैं।

  1. शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए सैन्य शक्ति को बढ़ाना एवं आर्थिक और प्रौद्योगिकी विकास महत्त्वपूर्ण हैं।
  2. राष्ट्रों द्वारा सैनिक या सुरक्षा संधियाँ कर गठबंधन कर शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।
  3. ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपना कर भी राष्ट्रों द्वारा शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।
  4. कई बार एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र में हस्तक्षेप कर वहां अपनी मित्र सरकार बनाकर भी शक्ति सन्तुलन स्थापित करते हैं।
  5. शस्त्रीकरण और निःशस्त्रीकरण द्वारा भी शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।

प्रश्न 27.
सुरक्षा का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा का अर्थ- सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है खतरे से आजादी मानव का अस्तित्व और किसी देश का जीवन खतरों से भरा होता है लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं कि हर तरह के खतरे को सुरक्षा पर खतरा माना जाये अतः सुरक्षा के अर्थ को दो दृष्टिकोणों से स्पष्ट किया जा सकता है।

  1. संकीर्ण दृष्टिकोण: इस दृष्टिकोण के अनुसार व्यक्तिगत मूल्यों की सुरक्षा अर्थात् समाज में प्रत्येक मनुष्य की अपनी सोच व मूल्य होते हैं। जब इन मूल्यों को बचाने का प्रयास किया जाता है तो यह सुरक्षा का संकीर्ण दृष्टिकोण कहलाता है।
  2. व्यापक दृष्टिकोण: इस दृष्टिकोण के अनुसार सुरक्षा का सम्बन्ध बड़े तथा गंभीर खतरों से है। इसमें वे खतरे सम्मिलित होते हैं जिन्हें रोकने के उपाय नहीं किये गये तो हमारे केन्द्रीय मूल्यों को अपूरणीय हानि पहुँचेगी।

प्रश्न 28.
अमेरिका और सोवियत संघ ने नियंत्रण से जुड़ी जिन संधियों पर हस्ताक्षर किये उन्हें संक्षेप में लिखिये।
उत्तर:
अमेरिका और सोवियत संघ ने अस्त्र – नियंत्रण की कई संधियों पर हस्ताक्षर किये जिसमें सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि – 2 ( स्ट्रेटजिक आर्म्स लिमिटेशन ट्रीटी – SALT-II) और सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि ( स्ट्रेटजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी-(START) शामिल हैं। परमाणु अप्रसार संधि (न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफेरेशन ट्रीटी – NPT (1968) भी एक अर्थ में अस्त्र नियंत्रण संधि ही थी क्योंकि इसने परमाण्विक हथियारों के उपार्जन को कायदे-कानून के दायरे में ला खड़ा किया। सन् 1972 की एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि (ABM) ने अमेरिका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा कवच के रूप में प्रयोग करने से रोका।

प्रश्न 29.
सुरक्षा की दृष्टि से निरस्त्रीकरण के महत्त्व को बताइए।
उत्तर:
वर्तमान में विश्व शांति तथा सुरक्षा की दृष्टि से निरस्त्रीकरण का बहुत महत्त्व है। आज यह अनुभव किया गया है कि राष्ट्रों की मारक क्षमता को कम करने वाला निःशस्त्रीकरण तथा शस्त्र नियंत्रण न कि मारक क्षमता बढ़ाने वाले तथा आतंक संतुलन बनाने वाली शस्त्र दौड़, आज के युग में अधिक प्रभावशाली व लाभकारी शक्ति संतुलन का साधन है। एक व्यापक निःशस्त्रीकरण संधि, परमाणु निःशस्त्रीकरण तथा शस्त्र नियंत्रण, 1972 की जैविक हथियार संधि, 1992 की रासायनिक हथियार संधि तथा 181 देशों के CWC संधि पर हस्ताक्षर, इस संतुलन को सुदृढ़ करने के लिये अधिक सहायक हो सकते हैं।

प्रश्न 30.
सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में विश्वास बहाली के उपायों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में यह बात भी मानी गई है कि विश्वास बहाली के उपायों से देशों के बीच हिंसाचार कम किया जा सकता है। विश्वास बहाली के उपाय अग्र हैं।
उत्तर:
युद्ध और शरणार्थी समस्या के बीच आपस में सकारात्मक सम्बन्ध है क्योंकि युद्ध या सशस्त्र संघर्षों के कारण ही शरणार्थी की समस्या बढ़ती है। उदाहरण के लिए सन् 1990 के दशक में कुल 60 जगहों से शरणार्थी प्रवास करने को मजबूर हुए और इनमें से तीन को छोड़कर शेष सभी के मूल में सशस्त्र संघर्ष था।

प्रश्न 25.
परमाणु अप्रसार संधि, 1968 की एक अस्त्र नियंत्रण संधि के रूप में व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
परमाणु अप्रसार संधि, 1968 इस अर्थ में एक अस्त्र नियंत्रक संधि थी क्योंकि इसने परमाणविक हथियारों के उपार्जन को कायदे-कानूनों के दायरे में ला दिया। जिन देशों ने सन् 1967 से पहले परमाणु हथियार बना लिये थे उन्हें इस संधि के अन्तर्गत इस हथियारों को रखने की अनुमति दी गई। लेकिन अन्य देशों को ऐसे हथियारों को हासिल करने के अधिकार से वंचित किया गया।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

प्रश्न 26.
शक्ति संतुलन को कैसे बनाए रखा जा सकता है?
उत्तर:
शक्ति सन्तुलन को बनाए रखने के अनेक साधन हैं।

  1. शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए सैन्य शक्ति को बढ़ाना एवं आर्थिक और प्रौद्योगिकी विकास महत्त्वपूर्ण हैं।
  2. राष्ट्रों द्वारा सैनिक या सुरक्षा संधियाँ कर गठबंधन कर शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।
  3. ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपना कर भी राष्ट्रों द्वारा शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।
  4. कई बार एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र में हस्तक्षेप कर वहां अपनी मित्र सरकार बनाकर भी शक्ति सन्तुलन स्थापित करते हैं।
  5. शस्त्रीकरण और निःशस्त्रीकरण द्वारा भी शक्ति सन्तुलन बनाए रखा जा सकता है।

प्रश्न 27.
सुरक्षा का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा का अर्थ- सुरक्षा का बुनियादी अर्थ है खतरे से आजादी मानव का अस्तित्व और किसी देश का जीवन खतरों से भरा होता है लेकिन इसका अभिप्राय यह नहीं कि हर तरह के खतरे को सुरक्षा पर खतरा माना जाये अतः सुरक्षा के अर्थ को दो दृष्टिकोणों से स्पष्ट किया जा सकता है।

  1. संकीर्ण दृष्टिकोण: इस दृष्टिकोण के अनुसार व्यक्तिगत मूल्यों की सुरक्षा अर्थात् समाज में प्रत्येक मनुष्य की अपनी सोच व मूल्य होते हैं। जब इन मूल्यों को बचाने का प्रयास किया जाता है तो यह सुरक्षा का संकीर्ण दृष्टिकोण कहलाता है।
  2. व्यापक दृष्टिकोण: इस दृष्टिकोण के अनुसार सुरक्षा का सम्बन्ध बड़े तथा गंभीर खतरों से है। इसमें वे खतरे सम्मिलित होते हैं जिन्हें रोकने के उपाय नहीं किये गये तो हमारे केन्द्रीय मूल्यों को अपूरणीय हानि पहुँचेगी।

प्रश्न 28.
अमेरिका और सोवियत संघ ने नियंत्रण से जुड़ी जिन संधियों पर हस्ताक्षर किये उन्हें संक्षेप में लिखिये।
उत्तर;
अमेरिका और सोवियत संघ ने अस्त्र – नियंत्रण की कई संधियों पर हस्ताक्षर किये जिसमें सामरिक अस्त्र परिसीमन संधि – 2 ( स्ट्रेटजिक आर्म्स लिमिटेशन ट्रीटी – SALT-II) और सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि ( स्ट्रेटजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी-(START) शामिल हैं। परमाणु अप्रसार संधि (न्यूक्लियर नॉन प्रोलिफेरेशन ट्रीटी – NPT (1968) भी एक अर्थ में अस्त्र नियंत्रण संधि ही थी क्योंकि इसने परमाण्विक हथियारों के उपार्जन को कायदे-कानून के दायरे में ला खड़ा किया। सन् 1972 की एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि (ABM) ने अमेरिका और सोवियत संघ को बैलेस्टिक मिसाइलों को रक्षा कवच के रूप में प्रयोग करने से रोका।

प्रश्न 29.
सुरक्षा की दृष्टि से निरस्त्रीकरण के महत्त्व को बताइए।
उत्तर:
वर्तमान में विश्व शांति तथा सुरक्षा की दृष्टि से निरस्त्रीकरण का बहुत महत्त्व है। आज यह अनुभव किया गया है कि राष्ट्रों की मारक क्षमता को कम करने वाला निःशस्त्रीकरण तथा शस्त्र नियंत्रण न कि मारक क्षमता बढ़ाने वाले तथा आतंक संतुलन बनाने वाली शस्त्र दौड़, आज के युग में अधिक प्रभावशाली व लाभकारी शक्ति संतुलन का साधन है। एक व्यापक निःशस्त्रीकरण संधि, परमाणु निःशस्त्रीकरण तथा शस्त्र नियंत्रण, 1972 की जैविक हथियार संधि, 1992 की रासायनिक हथियार संधि तथा 181 देशों के CWC संधि पर हस्ताक्षर, इस संतुलन को सुदृढ़ करने के लिये अधिक सहायक हो सकते हैं।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

प्रश्न 30.
सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में विश्वास बहाली के उपायों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा की पारंपरिक धारणा में यह बात भी मानी गई है कि विश्वास बहाली के उपायों से देशों के बीच हिंसाचार कम किया जा सकता है। विश्वास बहाली के उपाय अग्र हैं।

  1. विश्वास बहाली से दोनों देशों के बीच हिंसा को कम किया जा सकता है।
  2. विश्वास बहाली से दोनों देशों के बीच सूचनाओं तथा विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
  3. ऐसे में दोनों देश एक-दूसरे को सैनिक साजो-सामान की जानकारी व अपने सैनिक मकसद के बारे में जानकारी देते हैं
  4. इस प्रक्रिया से दोनों देशों के बीच गलतफहमी से बचा जा सकता है।

प्रश्न 31.
आपकी दृष्टि में सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा क्या है?
अथवा
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा क्या है? संक्षेप में लिखिये।
उत्तर:
अपारंपरिक धारणा का अर्थ- सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में न केवल सैन्य खतरों को बल्कि इसमें मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले अन्य व्यापक खतरों और आशंकाओं को भी शामिल किया गया है। इसमें राज्य ही नहीं बल्कि व्यक्तियों और संप्रदायों या कहें कि संपूर्ण मानवता की सुरक्षा होती है।

प्रश्न 32.
परम्परागत सुरक्षा के किन्हीं चार तत्त्वों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
परम्परागत सुरक्षा के चार तत्त्व निम्नलिखित हैं।

  1. परम्परागत खतरे: सुरक्षा की परम्परागत धारणा में सैन्य खतरों को किसी भी देश के लिए सर्वाधिक घातक माना जाता है। इसका स्रोत कोई अन्य देश होता है जो सैनिक हमले की धमकी देकर देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता तथा अखण्डता को प्रभावित करता है।
  2.  युद्ध: युद्ध से साधारण लोगों के जीवन पर भी खतरा मंडराता है क्योंकि युद्ध में जन सामान्य को भी काफी नुकसान पहुँचता है।
  3.  शक्ति सन्तुलन: प्रत्येक सरकार दूसरे देशों से अपने शक्ति सन्तुलन को लेकर अत्यधिक संवेदनशील रहती है।
  4. गठबंधन: इसमें विभिन्न देश सैनिक हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए मिलजुलकर कदम उठाते हैं।

प्रश्न 33.
आतंकवाद से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
आतंकवाद-आतंकवाद का आशय राजनीतिक खून-खराबे से है जो जानबूझकर बिना किसी मुरौव्वत के नागरिकों को अपना निशाना बनाता है। अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद एक से ज्यादा देशों में व्याप्त आतंकवाद है और उसके निशाने पर कई देशों के नागरिक हैं। कोई राजनीतिक स्थिति पसंद न होने पर आतंकवादी समूह उसे बल-प्रयोग या बल-प्रयोग की धमकी देकर बदलना चाहते हैं। जनमानस को आतंकित करने के लिए नागरिकों को निशाना बनाया जाता है। आतंकवाद की चिर-परिचित तकनीकें हैं। विमान अपहरण, भीड़ भरी जगहों, जैसे रेलगाड़ी, होटल, बाजार, धर्म स्थल आदि जगहों पर बम लगाना सितम्बर सन् 2001 में आतंकवादियों ने अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला बोला। इस घटना के बाद लगभग सभी देश आतंकवाद पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं।

प्रश्न 34.
मानव अधिकारों के हनन की स्थिति में क्या संयुक्त राष्ट्र संघ को हस्तक्षेप करना चाहिए?
उत्तर:
मानव अधिकारों की हनन की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र संघ को हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं, इस सम्बन्ध में विवाद है।

  1. कुछ देशों का तर्क है कि राष्ट्र संघ का घोषणा पत्र अन्तर्राष्ट्रीय जगत् को अधिकार देता है कि वह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हथियार उठाये अर्थात् राष्ट्र संघ को इस क्षेत्र में दखल देना चाहिए।
  2. कुछ देशों का तर्क है यह संभव है कि मानवाधिकार हनन का मामला ताकतवर देशों के हितों से निर्धारित होता है और इसी आधार पर यह निर्धारित होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार उल्लंघन के लिए मामले में कार्रवाई करेगा और किसमें नहीं? इससे ताकतवर देशों को मानवाधिकार के बहाने उसके अंदरूनी मामलों में दखल देने का आसान रास्ता मिल जायेगा।

प्रश्न 35.
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य खतरे को किसी भी देश के लिए खतरनाक क्यों माना जाता है?
उत्तर:
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य खतरे को किसी भी देश के लिए खतरनाक माना जाता है क्योंकि इस खतरे का स्रोत कोई दूसरा मुल्क होता है जो सैन्य हमले की धमकी देकर संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता जैसे किसी देश के केन्द्रीय मूल्यों के लिए खतरा पैदा करता है। सैन्य कार्रवाई से आम नागरिकों के जीवन को भी खतरा होता है। युद्ध में सिर्फ सैनिक ही घायल नहीं होते हैं अपितु आम नागरिकों को भी हानि उठानी पड़ती है। अक्सर निहत्थे और आम नागरिकों को जंग का निशाना बनाया जाता है; उनका और उनकी सरकार का हौंसला तोड़ने की कोशिश होती है।

प्रश्न 36.
हर सरकार दूसरे देश से अपने शक्ति संतुलन को लेकर बहुत संवेदनशील रहती है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शक्ति – संतुलन परंपरागत सुरक्षा नीति का एक तत्त्व है। हर देश के पड़ोस में छोटे या बड़े मुल्क होते हैं इससे भविष्य के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए कोई पड़ोसी देश संभवतः यह जाहिर ना करे कि वह हमले की तैयारी कर रहा है अथवा हमले का कोई प्रकट कारण भी ना हो। तथापि यह देखकर कि कोई देश बहुत ताकतवर है यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में वह हमलवार हो सकता है। इस वजह से हर सरकार दूसरे देश से अपने शक्ति संतुलन को लेकर बहुत संवेदनशील रहती है।

प्रश्न 37.
सरकारें दूसरे देशों से शक्ति-संतुलन का पलड़ा अपने पक्ष में बैठाने हेतु किस प्रकार की कोशिशें करती हैं? यथा-
उत्तर:
सरकारें दूसरे देशों से शक्ति-संतुलन का पलड़ा अपने पक्ष में बैठाने हेतु जी-तोड़ कोशिशें करती हैं।

  1. वो नजदीक देश जिनके साथ किसी मुद्दे पर मतभेद हो या अतीत में युद्ध हो चुका हो उनके साथ शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में करने के लिए अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने का प्रयत्न किया जाता है।
  2. सैन्य शक्ति के साथ आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत को बढ़ाने पर भी जोर दिया जाता है क्योंकि सैन्य- शक्ति का यही आधार है।

प्रश्न 38.
गठबंधन बनाना पारंपरिक सुरक्षा नीति का चौथा तत्त्व है। संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पारंपरिक सुरक्षा नीति का चौथा तत्त्व है गठबंधन बनाना गठबंधन में कई देश शामिल होते हैं जो सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम उठाते हैं। गठबंधन लिखित रूप में होते हैं उनको औपचारिक रूप मिलता है और ऐसे गठबंधनों को यह बात स्पष्ट रहती है कि उन्हें खतरा किस देश से है। किसी देश अथवा गठबंधन की तुलना में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए देश गठबंधन बनाते हैं। गठबंधन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं। राष्ट्रीय हितों के बदलने के साथ ही गठबंधन भी बदल जाते हैं।

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प्रश्न 39.
संयुक्त राष्ट्रसंघ विश्व: राजनीति में ऐसी केन्द्रीय सत्ता है जो सर्वोपरि है। यह सोचना बस एक लालचमात्र है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्रसंघ विश्व:
राजनीति में ऐसी केन्द्रीय सत्ता है जो सर्वोपरि है यह सोचना बस एक लालचमात्र है क्योंकि अपनी बनावट के अनुरूप संयुक्त राष्ट्रसंघ अपने सदस्य देशों का दास है ओर इसके सदस्य दशों का दास है ओर इसके सदस्य देश जितनी सत्ता इसको सौंपते और स्वीकारते हैं उतनी ही सत्ता इसे हासिल होती है। अतः विश्व- राजनीति में हर देश को अपनी सुरक्षा ही सत्ता इसे हासलि होती है। अतः विश्व – राजनीति में हर देश को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है।

प्रश्न 40.
एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र देशों के सामने खड़ी सुरक्षा की चुनौतियाँ यूरोपीय देशों के मुकाबले किन दो मायनों में विशिष्ट थीं?
उत्तर:
एशिया और अफ्रीका के नव स्वतंत्र देशों के सामने खड़ी सुरक्षा की चुनौतियाँ यूरोपीय देशों के मुकाबले निम्न दो मायनों में विशिष्ट थीं।

  1. इन देशों को अपने पड़ोसी देश से सैन्य हमले की आशंका थी।
  2. इन्हें अंदरूनी सैन्य संघर्ष की भी चिंता करनी थी।

प्रश्न 41.
नव-स्वतंत्र देशों के सामने पड़ोसी देशों से युद्ध और आंतरिक संघर्ष की सबसे बड़ी चुनौती थे। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नव-स्वतंत्र देशों के सामने सीमापार से खतरे के साथ ही पड़ोसी देशों से भी खतरा था। साथ ही भीतर से भी खतरे की आशंका थी अनेक नव-स्वतंत्र देश संयुक्त राज्य अमरीका या सोवियत संघ अथवा औपनिवेशिक ताकतों से कहीं ज्यादा अपने पड़ोसी देशों से आशंकित थे। इनके बीच सीमा रेखा और भूक्षेत्र अथवा आबादी पर नियंत्रण को लेकर या एक-एक करके सभी सवालों पर झगड़े हुए।

अलग राष्ट्र बनाने पर तुले अंदर के अलगावादी आंदोलनों से भी इन देशों को खतरा था। कोई पड़ोसी देश यदि ऐसे अलगाववादी आंदोलन को हवा दे अथवा उसकी सहायता करे तो दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव की स्थिति बन जाती थी । इस प्रकार पड़ोसी देशों से युद्ध और आंतरिक संघर्ष नवस्वतंत्र देशों के सामने सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती थे।

प्रश्न 42.
‘न्याय-युद्ध’ की यूरोपीय परंपरा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सुरक्षा की परंपरागत धारणा में यह माना गया है कि जितना हो सके हिंसा का इस्तेमाल सीमित होना चाहिए। युद्ध के लक्ष्य और दोनों से इसका संबंध है। न्याय-युद्ध की यूरोपीय परम्परा को आज पूरा विश्व मानता है। इस परंपरा के अनुसार किसी भी देश को युद्ध उचित कारणों अर्थात् आत्मरक्षा अथवा दूसरों को जनसंहार से बचाने के लिए ही करना चाहिए। इस दृष्टिकोण का मानना है कि।

  1. किसी भी देश को युद्ध में युद्ध साधनों का सीमित इस्तेमाल करना चाहिए।
  2. युद्धरत सेना को संघर्षविमुख शत्रु, निहत्थे व्यक्ति अथवा आत्मसमर्पण करने वाले शत्रु को मारना नहीं चाहिए।
  3. सेना को उतने ही बल का प्रयोग करना चाहिए जितना आत्मरक्षा के लिए आवश्यक हो और हिंसा का सहारा एक सीमा तक लेना चाहिए। बल प्रयोग तभी किया जाये जब बाकी के उपाय असफल हो गए हों।

प्रश्न 43.
भारत ने परमाणु परीक्षण करने के फैसले को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सत्यापित कैसे किया?
उत्तर:
भारतीय सुरक्षा नीति का पहला घटक सैन्य शक्ति को मजबूत करना है क्योंकि भारत पर पड़ोसी देशों से हमले होते रहे हैं। पाकिस्तान ने तीन तथा चीन ने भारत पर एक बार हमला किया है। दक्षिण एशियाई इलाके में भारत के चारों तरफ परमाणु हथियारों से लैस देश है। ऐसे में भारतीय सरकार ने परमाणु परीक्षण करने के भारत के फैसले को उचित ठहराते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया था। भारत ने सन् 1974 में पहला तथा 1998 में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था।

प्रश्न 44.
अप्रवासी और शरणार्थी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अप्रवासी उन्हें कहा जाता है जो अपनी इच्छा से स्वदेश छोड़ते हैं और शरणार्थी हम उन्हें कहते हैं जो युद्ध. प्राकृतिक आपदा अथवा राजनीतिक उत्पीड़न के कारण स्वदेश छोड़ने पर मजबूर होते हैं

प्रश्न 45.
1990 के दशक में विश्व सुरक्षा की धारणा उभरने की क्या वजहें हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विश्वव्यापी खतरे जैसे वैश्विक तापवृद्धि, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद तथा एड्स और बर्ड फ्लू जैसी महामारियों को ध्यान में रखते हुए 1990 के दशक में विश्व सुरक्षा की धारणा उभरी। क्योंकि कोई भी देश इन समस्याओं का समाधान अकेले नहीं कर सकता। ऐसा भी हो सकता है कि किन्हीं स्थितियों में किसी एक देश को इन समस्याओं की मार बाकियों की अपेक्षा ज्यादा झेलनी पड़े।

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प्रश्न 46.
भारत को अपनी परिस्थिति के अनुसार परम्परागत या अपरम्परागत सुरक्षा, किसे वरीयता देनी चाहिए?
उत्तर:
भारत को दोनों प्रकार की सुरक्षा को वरीयता देनी चाहिए।

  1. परम्परागत सुरक्षा के कारण : स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक युद्ध लड़े तथा भारत के अनेक आंतरिक भाग में अलगाववादी गतिविधियाँ व्याप्त हैं।
  2. अपरम्परागत सुरक्षा के कारण: भारत एक विकासशील देश है और इसके साथ इसमें गरीबी, बेकारी, साम्प्रदायिकता, सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन भी व्याप्त है।

प्रश्न 47.
वैश्विक गरीबी असुरक्षा का स्रोत है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वैश्विक गरीबी निर्धनता असुरक्षा का स्रोत है। वैश्विक गरीबी का आशय है आर्थिक विकास में कमी, राष्ट्रीय आय में कमी और यह विकासशील या विकसित देशों के जीवनस्तर को प्रभावित करती हैं। दुनिया की आधी आबादी का विकास सिर्फ 6 देशों में होता है भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश और इंडोनेशिया, जिन्हें विकासशील देश माना जाता है और अनुमान है कि अगले 50 सालों में दुनिया के गरीब देशों में जनसंख्या तीन गुना बढ़ेगी।

विश्व स्तर पर यह विषमता दुनिया के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के बीच की खाई में योगदान करती है। दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों में मौजूद गरीबी के कारण अधिकाधिक लोग बेहतर जीवन की तलाश में उत्तरी गोलार्द्ध के देशों में प्रवास कर रहे हैं। उपर्युक्त कारणों ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक घर्षण पैदा किया क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कानून अप्रवासी और शरणार्थी में भेद करते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सुरक्षा की पारम्परिक धारणा की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा की पारम्परिक धारणा: सुरक्षा की पारम्परिक धारणा को दो भागों में विभाजित किया गया है।
(अ) बाहरी सुरक्षा की धारणा और
(ब) आन्तरिक सुरक्षा की धारणा। यथा।
(अ) बाहरी सुरक्षा की धारणा: सैन्य खतरा-
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा में सैन्य खतरे को किसी देश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इस खतरे का स्रोत कोई दूसरा देश होता है जो सैन्य हमले की धमकी देकर संप्रभुता,  तंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता तथा जन-धन की हानि का खतरा पैदा करता है। सैन्य खतरे अर्थात् युद्ध से बचने के उपाय- सरकार के पास सैन्य खतरे से बचने के प्रमुख उपाय होते हैं।

  1. आत्मसमर्पण करना
  2. अपरोध की नीति अपनाना
  3. रक्षा नीति अपनाना
  4. शक्ति सन्तुलन की स्थापना करना तथा
  5. गठबन्धन बनाने की नीति अपनाना।

(ब) आंतरिक सुरक्षा की धारणा:
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ‘सुरक्षा के आंतरिक पक्ष पर दुनिया के अधिकांश ताकतवर देश अपनी अंदरूनी सुरक्षा के प्रति कमोबेश आश्वस्त थे। लेकिन एशिया और अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों को बाह्य सुरक्षा के साथ-साथ अन्दरूनी सैन्य संघर्ष की भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि ये देश सीमा पार से अपने पड़ौसी देशों से सैन्य हमले की आशंका से ग्रस्त थे तो दूसरी तरफ अलग राष्ट्र बनाने पर तुले अन्दर के अलगाववादी आंदोलनों से भी इन देशों को खतरा था।

प्रश्न 2.
सुरक्षा के पारंपरिक तरीके कौन-कौन से हैं? उनमें से प्रत्येक की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
अथवा
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा को स्पष्ट कीजिये तथा सुरक्षा के पारम्परिक तरीकों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा- सुरक्षा की पारम्परिक अवधारणा में निम्न तरीकों पर बल दिया गया है।

  • न्याय युद्ध की परम्परा का विस्तार- सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा ‘न्याय युद्ध’ की यूरोपीय परम्परा का विस्तार है। इसकी प्रमुख बातें ये हैं-
    1. किसी देश को युद्ध आत्म-रक्षा अथवा दूसरों से जन-संहार से बचाने के लिए ही करना चाहिए।
    2. साधनों का सीमित प्रयोग करना चाहिए।
    3. निहत्थे व्यक्ति या आत्मसमर्पण वाले शत्रु को नहीं मारना चाहिए तथा
    4. बल प्रयोग तभी किया जाये जब अन्य उपाय असफल हो गये हों।
  • निरस्त्रीकरण: देशों के बीच सहयोग में सुरक्षा का सबसे महत्त्वपूर्ण तरीका है। निरस्त्रीकरण। इसमें कुछ खास किस्म के हथियारों का त्याग करने पर बल दिया जाता है।
  • अस्त्र – नियंत्रण – अस्त्र- नियंत्रण के अन्तर्गत हथियारों को विकसित करने अथवा उनको प्राप्त करने के सम्बन्ध में कुछ कायदे-कानूनों का पालन करना पड़ता है। सन् 1972 की ‘एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि’, ‘साल्ट-2’ तथा ‘परमाणु अप्रसार संधि 1968 ‘ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
  •  विश्वास बहाली का उपाय: विश्वास बहाली की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि प्रतिद्वन्द्वी देश किसी गलतफहमी या गफलत में पड़कर जंग के लिए आमादा न हो जाएँ। विश्वास बहाली की प्रक्रिया के अन्तर्गत सैन्य टकराव और प्रतिद्वन्द्विता वाले देश एक-दूसरे को अपने फौजी मकसद, अपनी सैन्य योजनाओं, सैन्य बलों के स्वरूप तथा उनके तैनाती के स्थानों आदि प्रकार की सूचनाओं और विचारों का नियमित आदान-प्रदान करने का फैसला करते हैं।

JAC Class 12 Political Science Important Questions Chapter 7 समकालीन विश्व में सरक्षा

प्रश्न 3.
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा सिर्फ सैन्य खतरों से ही संबद्ध नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय अस्तित्व पर चोट करने वाले व्यापक खतरों और आशंकाओं को शामिल किया जाता है। इसके दो प्रमुख पक्ष हैं।
1. मानवता की सुरक्षा तथा
2. विश्व सुरक्षा। यथा।

1. मानवता की सुरक्षा:
मानवता की सुरक्षा की धारणा व्यक्तियों की रक्षा पर बल देती है। मानवता की रक्षा का विचार जन – सुरक्षा को राज्यों की सुरक्षा से बढ़कर मानता है। मानवता की सुरक्षा और राज्य की सुरक्षा परस्पर पूरक होने चाहिए लेकिन व्यक्तियों की रक्षा किनसे की जाय, इस सम्बन्ध में तीन प्रकार के दृष्टिकोण सामने आये हैं। यथा।

(अ) संकीर्ण अर्थ: इस दृष्टिकोण के पैरोकारों का जोर व्यक्तियों और समुदायों को अंदरूनी खून-खराबे से बचाना है।

(ब) व्यापक अर्थ: व्यापक अर्थ लेने वाले समर्थक विद्वानों का तर्क है कि खतरों की सूची में हिंसक खतरों के साथ-साथ अकाल, महामारी और आपदाओं को भी शामिल किया जाये ।

(स) व्यापकतम अर्थ: व्यापकतम अर्थ में युद्ध, जनसंहार, आतंकवाद, अकाल, महामारी, प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के साथ-साथ ‘अभाव से मुक्ति’ और ‘भय से मुक्ति’ पर बल दिया गया है।

2. विश्व – सुरक्षा:
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा का दूसरा पक्ष है। विश्व सुरक्षा विश्वव्यापी खतरे, वैश्विक ताप वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग), अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, एड्स तथा बर्ड फ्लू जैसी समस्याओं की प्रकृति वैश्विक है, इसलिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

प्रश्न 4.
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में सुरक्षा के प्रमुख खतरों पर एक निबंध लिखिये।
उत्तर:
सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा में खतरे के नये स्त्रोत: सुरक्षा की अपारंपरिक धारणा के संदर्भ में खतरों की बदलती प्रकृति पर जोर दिया जाता है। ऐसे खतरों के प्रमुख नये स्त्रोत निम्नलिखित हैं।

  1. अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद: जब आतंकवाद का कोई संगठन एक से अधिक देशों में व्याप्त हो जाता है, तो उसे अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद कहते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद के निशाने पर कई देशों के नागरिक हैं। आतंकवाद की चिर-परिचित तकनीकें हैं। विमान अपहरण करना, भीड़-भरी जगहों में बम लगाना।
  2. मानवाधिकारों का हनन: मानवता की सुरक्षा का एक नया स्रोत राष्ट्रीय सरकारों द्वारा मानवाधिकारों का हनन है।
  3. वैश्विक निर्धनता: मानवता की सुरक्षा के लिए वैश्विक गरीबी एक बड़ा खतरा है।
  4. र्थिक असमानता: विश्व स्तर पर आर्थिक असमानता पूरे विश्व को उत्तरी गोलार्द्ध व दक्षिणी गोलार्द्ध में विभाजित करती है । दक्षिणी गोलार्द्ध में यह आर्थिक असमानता और अधिक व्याप्त है।
  5. आप्रवासी, शरणार्थी और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की समस्या – आप्रवासी, शरणार्थी तथा आन्तरिक रूप से विस्थापित लोगों की समस्याएँ भी सुरक्षा की अपारम्परिक धारणा के अन्तर्गत आती हैं।
  6. महामारियाँ: एड्स, बर्ड- ड-फ्लू, सार्स जैसी महामारियों के फैलाव को रोकने में किसी एक देश की सफलता अथवा असफलता का प्रभाव दूसरे देशों में होने वाले संक्रमण पर पड़ता है।

प्रश्न 5.
सुरक्षा पर मंडराते अनेक अपारंपरिक खतरों से निपटने के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?
उत्तर:
सुरक्षा के अपारंपरिक खतरों से निपटने के उपाय : सहयोगात्मक सुरक्षा सुरक्षा पर मंडराते अनेक अपारंपरिक खतरों, जैसे- अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, वैश्विक ताप वृद्धि, वैश्विक गरीबी, वैश्विक असमानता, महामारियाँ, मानवाधिकारों के हनन तथा शरणार्थी समस्या आदि-से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की रणनीतियाँ बनाने की आवश्यकता है। इन्हें निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है।

  1. राज्यस्तरीय द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, महादेशीय और