JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

Jharkhand Board JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय Important Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों में जैविक क्रियाओं को नियन्त्रित करने वाले रसायन को क्या कहते हैं?
उत्तर:
पौधों में जैविक क्रियाओं को नियन्त्रित करने वाले रसायन को पादप हॉर्मोन्स कहते हैं।

प्रश्न 2.
मनुष्य में पाई जाने वाली अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य में पाई जाने वाली अंत:स्रावी ग्रन्थियाँ हैं-थॉयराइड, पेंक्रियास, एड्रिनल, पीयूष, अण्डाशय एवं वृषण।

प्रश्न 3.
न्यूरॉन एवं एक्सान (तंत्रिकाक्ष) के कार्य लिखिए।
उत्तर:
न्यूरॉन सन्देश संजिन का कार्य करता है तथा एक्सान डेन्ड्राइट द्वारा किये गये संवेदना को विद्युत आवेश के रूप में वहन करने का कार्य करता है।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 4.
अण्डाशय एवं वृषण से स्रावित होने वाले हॉर्मोन के नाम तथा कार्य लिखिए।
उत्तर:
अण्डाशय द्वारा स्रावित होने वाला हॉर्मोन एस्ट्रोजन है इसका कार्य मादा लैंगिक लक्षणों का विकास करना है।
वृषण द्वारा स्रावित होने वाला हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन है। इसका कार्य पुरुषों में लैंगिक लक्षणों का विकास करना है।

प्रश्न 5.
रसायनानुवर्तन का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
परागनलिका का बीजांड की ओर वृद्धि करना।

प्रश्न 6.
मानवों में पश्चमस्तिष्क का एक कार्य बताइए।
उत्तर:
अनैच्छिक क्रियाएँ; जैसे-रक्तदाब, लार आना तथा वमन पश्चमस्तिष्क स्थित मेडुला द्वारा नियंत्रित होती हैं।

प्रश्न 7.
बहुकोशिकीय जीवों में नियंत्रण तथा समन्वय प्रदान करने वाले दो ऊतकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • तंत्रिका ऊतक
  • पेशी ऊतक।

प्रश्न 8.
कौन-सी अंतःस्तावी ग्रंधि वृद्धि हॉर्मोंन का स्ताव करती है?
उत्तर:
पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland)।

प्रश्न 9.
कोशिका विभाजन को बड़ावा देने वाले पादप हॉमोंन का नाम लिखिए।
उत्तर:
साइटोकाइनिन कोशिका।

प्रश्न 10.
तने की वृद्धि के लिए उत्तरदायी पादप हॉर्मोन का नाम बताइए।
उत्तर:
जिब्येरेलिन।

प्रश्न 11.
क्या होगा यदि हमारे द्वारा भोजन में आयोडीन कम मात्रा में ली जाए?
उत्तर:
थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनने के लिए आयोडीन जरूरी होता है, जिसकी कमी से हम गॉयटर (घेंधा) रोग से ग्रसित हो सकते हैं।

प्रश्न 12.
सूत्र-युग्मन क्या है?
उत्तर:
वह स्थान जहाँ दो न्यूरॉन मिलते हैं, सूत्र-युग्मन कहलाता है।

प्रश्न 13.
अग्याशय से स्रावित होने वाले हॉर्मोन का नाम एवं कार्य लिखिए।
उत्तर:
अग्न्याशय से स्रावित होने वाला हॉमोन इन्सुलिन है। इसका कार्य शर्करा उपापचय का नियन्त्रण करना है।

प्रश्न 14.
प्रतिवर्ती क्रिया किस अंग द्वारा नियन्तित होती है?
उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया मेरुण्जु द्वारा नियन्त्रित होती है।

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प्रश्न 15.
ABA के कार्य लिखिए।
उत्तर:
ABA के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • यह पौधों की वृद्धि की गति कम करता है।
  • पतझड़ की क्रिया को बढ़ता है।
  • पत्तियों एवं फूलों के खुलने एवं बन्द करने की क्रिया को नियन्त्रित करता है।

प्रश्न 16.
मास्टर ग्रान्थि किसे कहते हैं?
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि कहते हैं।

प्रश्न 17.
एड्रीनलिन होर्मोन किस ग्रंधि द्वारा स्रावित होता है?
उत्तर:
मेडुला में।

प्रश्न 18.
एड़ीनलिन हॉमोंन का एक कार्ब लिखिए।
उत्तर:
एड्रीनलिन हॉर्मोन दिल की धड़कन को बड़ा देता है। यह खतरे का सामना करने के लिए शरीर को तैयार करता है।

प्रश्न 19.
प्रोजेस्टरॉन का क्या कार्य है?
उत्तर:
प्रोजेस्टरॉन का स्राव कार्पस ल्यूटियस से होता है। गर्भाशय में होने वाले वे सभी अंतिम परिवर्तन हैं जो गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए गर्भास्य के भीतर के की वृद्धि के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 20.
मास्टर ग्रंथि का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
पिट्यूटरी ग्रंथि को ही मास्टर ग्रंथि कहते हैं।

प्रश्न 21.
फेरोमोन से से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
फेरोमोन वे वे स्राव होते हैं जो एक जीव द्वारा स्त्रावित होते हैं, लेकिन वे प्रभाव किसी दूसरे व्यक्ति या जीव पर डालते हैं। यह हॉर्मोन कुछ कीट अपने साथियों को आकर्षित करने के लिए स्त्रावित करते हैं।

प्रश्न 22.
हॉर्मोन स्त्राव पर नियंत्रण कौन-सी ग्रंथि द्वारा होता है?
उत्तर:
पिट्यूटरी ग्रंथि अंतःस्रावी ग्रंथियों के क्रिया- कलाप का नियंत्रण और नियमन करती है और स्वयं हाइपोथैलेमस के नियंत्रण में होती है।

प्रश्न 23.
फेरोमोन किन बातों में हॉर्मोन से अलग होते हैं?
उत्तर:
हॉर्मोन उसी जीव को प्रभावित करता है जिससे उत्पन्न हुआ होता है जबकि फेरोमोन दूसरे जीवों को प्रभावित करता है।

प्रश्न 24.
‘एक सीधी रेखा में चलना’ मस्तिष्क के किस भाग द्वारा नियंत्रित होगा?
उत्तर:
अनुमस्तिष्क द्वारा।

प्रश्न 25.
प्ररोह के प्रकाश की ओर झुक जाने को हम क्या कहते हैं?
उत्तर:
प्रकाशानुवर्तन।

प्रश्न 26.
कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि के लिए उत्तरदायी पादप हॉर्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर:
ऑक्सिन।

प्रश्न 27.
मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की संस्थिति एवं संतुलन के लिए उत्तरदायी है?
उत्तर:
पश्चमस्तिष्क स्थित भाग अनुमस्तिष्क द्वारा।

प्रश्न 28.
जब कोई सुई हाथ में चुभती है या गर्म वस्तु का स्पर्श हो जाता है, तो हम तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लेते हैं हैं। इस प्रक्रिया से सम्बन्धित प्रतिक्रिया का क्या नाम है?
उत्तर:
प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया (Reflex action)।

प्रश्न 29.
उस अंतःस्त्रावी ग्रंथि का क्या नाम है, जो हमारे शरीर में इन्सुलिन का स्राव करती है?
उत्तर:
अग्न्याशय।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित छूने पर प्रक्रियाओं में से रसायनानुवर्तन का उदाहरण कौन-सा है? स्पर्श सुग्राही पादप (छुई-मुई) में गति, मानव टाँग में गति
उत्तर:
स्पर्श-सुग्राही पादप (छुई-मुई) में गति।

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प्रश्न 31.
मेडुला ऑब्लांगेटा कहाँ स्थित होता है?
उत्तर:
यह मस्तिष्क का अंतिम भाग होता है, जो मेरुरज्जु से जुड़ा रहता है। यह श्वास लेने, खाँसने व निगलने आदि का केन्द्र है। इसके अलावा यह हृदयस्पंदन, आहारनाल के क्रमाकुंचन तथा अनेक अनैच्छिक क्रियाओं पर नियंत्रण करता है।

प्रश्न 32.
हाइपोथैलेमस का प्रमुख कार्य क्या है?
उत्तर:
यह समस्थापन तथा पिट्यूटरी ग्रंथि का नियंत्रण करते हैं तथा संवेदी आवेगों के लिए रिले केंद्र होता है।

प्रश्न 33.
सुनने के लिए कौन-सा संवेदी अंग कार्य करता है?
उत्तर:
कान के द्वारा हम अलग-अलग ध्वनियों को सुन सकते हैं। कान वायु में मौजूद कंपनों को तंत्रिका आवेगों में बदल देते हैं जो आगे मस्तिष्क में संदेश भेजते हैं।

प्रश्न 34.
एक ऐसे रसायन का नाम बताइए, जो एक्सॉन के अंतिम सिरों से निकलकर अगले न्यूरॉन में एक नया आवेग शुरू कर देता है।
उत्तर:
ऐसीटिलकोलिन।

प्रश्न 35.
होमोस्टेटिस किसे कहते हैं?
उत्तर:
जीवों द्वारा बाह्य वातावरण और जीवों की आन्तरिक स्थितियों स्थायित्व की स्थिति और स्थिरता बनाये रखने की क्षमता को होमोस्टेटिस कहते हैं। वास्तव में होमोस्टेटिस का अर्थ है- समान दशा।

प्रश्न 36.
तन्त्रिका तन्त्र क्या है?
उत्तर:
तंत्रिका तंत्र वह तंत्र होता है जो कि सोचने, समझने याद रखने के साथ-साथ शरीर के विभिन्न अंगों के क्रियाकलापों में सामंजस्य एवं समन्वय स्थापित करके शरीर पर नियंत्रण रखता है।

प्रश्न 37.
इन्सुलिन क्या है? इसका क्या कार्य है?
उत्तर:
अन्त:स्त्रावी ग्रन्थि पेंक्रियास द्वारा स्त्रावित हॉर्मोन का नाम इंसुलिन है। यह शर्करा उपापचय का नियन्त्रण करता है।

प्रश्न 38.
पादप हॉर्मोन को कितने वर्गों में विभाजित किया गया है? नाम लिखिए।
उत्तर:
पादप हॉर्मोन्स को 4 वर्गों में विभाजित किया गया है-

  • ऑक्सिन
  • जिबरलिन
  • साइटोकाइनिन
  • वृद्धिरोधक ABA हॉर्मोन।

प्रश्न 39.
साइटोकाइनिन के अन्तर्गत आने वाले रसायन के नाम लिखिए।
उत्तर:
साइटोकाइनिन के अन्तर्गत –

  • काइनिन
  • केलाइन
  • जिएटिन
  • फ्लोकोजिन आदि रसायन आते हैं।

प्रश्न 40.
नलिकाविहीन ग्रन्थियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सभी अन्त: स्रावी ग्रन्थियाँ नलिकाविहीन होती हैं, ये हैं-

  • थायरॉइड
  • पेंक्रियास
  • एड्रिनल
  • पीयूष
  • अण्डाशय
  • वृषण।

प्रश्न 41.
तन्त्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) कितने ‘की होती हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
तन्त्रिका कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • प्रेरक तन्त्रिका कोशिका
  • संवेदी तंत्रिका कोशिका
  • बहुध्रुवीय तन्त्रिका कोशिका।

प्रश्न 42.
मनुष्य में लिंग निर्धारित करने वाली ग्रन्थियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
महिला में 1 में लिंग निर्धारण – अण्डाशय द्वारा। पुरुष में लिंग निर्धारण – वृषण द्वारा।

प्रश्न 43.
हॉर्मोन तथा ग्रंथियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
हॉर्मोन – वह रासायनिक पदार्थ जो शरीर के किसी भाग में ग्रंथियों से स्त्रावित होता है और रक्त द्वारा शरीर के अन्य भागों में पहुँचा दिया जाता है, उसे हॉर्मोन कहते हैं।
ग्रंथि – वह संरचना, जो एक विशेष प्रकार का रासायनिक पदार्थ स्त्रावित करती है। यह दो प्रकार की होती है- बहिःस्रावी व अंत: स्रावी

प्रश्न 44.
अंत: स्रावी ग्रंथियों की क्या विशेषता होती है?
उत्तर:
अंत: स्रावी ग्रंथियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ती और ये वाहिकाहीन ग्रंथियाँ होती हैं।

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प्रश्न 45.
थायरॉइड ग्रंथि कहाँ स्थित होती है?
उत्तर:
गर्दन के सामने Larynx के ठीक नीचे।

प्रश्न 46.
थायरॉइड ग्रंथि किस हॉर्मोन का स्त्राव करती है?
उत्तर:
थायरॉक्सिन और कैल्सीटोनिन।

प्रश्न 47.
उच्च वर्ग के जन्तुओं के समन्वय केन्द्र का नाम लिखिए।
उत्तर:
उच्च वर्ग के जन्तुओं के समन्वय केन्द्र हैं- मस्तिष्क और मेरुरज्जु।

प्रश्न 48.
मस्तिष्क के विभिन्न भाग क्या हैं?
उत्तर:
मस्तिष्क के विभिन्न भाग हैं-

  • अग्र मस्तिष्क
  • मध्य-मस्तिष्क
  • पश्च मस्तिष्क

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हॉर्मोन क्या हैं?
उत्तर:
जन्तुओं एवं पौधों के शरीर में विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियन्त्रित करने के लिए कुछ विशेष रसायन होते हैं जिन्हें हॉर्मोन कहते हैं। ये हॉर्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्त्रावित किये जाते हैं।

प्रश्न 2.
तंत्रिका कोशा (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
तंत्रिका कोशा (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 1

प्रश्न 3.
पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि क्यों कहते
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि से 13 से भी अधिक प्रकार के हॉर्मोन्स स्त्रावित होते हैं जिनका प्रभाव शरीर के विभिन्न भागों के कार्यों पर होता है। इतना ही नहीं ये अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों को भी प्रभावित करते इसलिए पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि कहते हैं।

प्रश्न 4.
प्रतिवर्ती क्रिया किसे कहते हैं? एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
हमारे शरीर में होने वाली कुछ ऐसी अभिक्रियाएँ हैं जो मस्तिष्क के आदेश के बिना ही तुरन्त हो जाती हैं। इस प्रकार की अनुक्रियाएँ प्रतिवर्ती या स्वत: प्रेरित क्रियाएँ कहलाती हैं जो मेरुरज्जु द्वारा ही सम्पन्न हो जाती हैं। पलकों का झपकना, छींकना या खाँसना सभी प्रतिवर्ती क्रियाएँ हैं।

उदाहरण के लिए, जब हाथ पर मुई चुभोई जाती है तो एकदम हाथ हट जाता है, यह प्रतिवर्ती क्रिया है। जब मुई चुभोते हैं तो शरीर का यह भाग उत्तेजित हो जाता है। फलस्वरूप यह उत्तेजना (उद्दीपन) आवेग के रूप में बदल जाता है, यह आवेग डेन्ड्राइट ग्रहण कर लेते हैं। यहाँ से आवेग मेरुरज्जु में पहुँचता है। यह आवेग मेरुरज्जु से होते हुए न्यूरॉन में जाता है जहाँ से यह अपवाही अंग में पहुँच
जाता है। अपवाही अंग में प्रेरणा के पहुँचते ही शरीर के इस भाग को उद्दीपन के स्थान से हटा लिया जाता है।

प्रश्न 5.
हाइड्रा में तंत्रिका समन्वय चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
हाइड़ा के तन्त्रिका तन्त्र को नीचे चित्र में दर्शाया गया है-
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 2
हाइड़ा एक निम्न वर्ग का जन्तु है। इसमें सन्देश एक ही न्यूरॉन (तन्त्रिका कोशिका) द्वारा ग्रहण किया जाता है जो कि पूरे शरीर में फैली रहती है। हाइड्रा में मस्तिष्क नहीं होता है परन्तु फिर भी मनुष्य तथा हाइड्रा में सन्देश संवहन की क्रिया – विधि मूलतः एक जैसी होती है।

प्रश्न 6.
मानव मस्तिष्क के कार्य लिखिए।
उत्तर:
मानव मस्तिष्क के विभिन्न कार्य निम्नलिखित हैं-

  • सभी संवेदी अंगों आवेश ग्रहण करना।
  • इन आवेशों पर प्रेरित तंत्रिकाओं द्वारा ग्रन्थियों और पेशियों को निर्देश भेजना जिससे वे उचित अनुक्रिया करें।
  • विभिन्न संवेदी अंगों से विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों में सम्बन्ध स्थापित कर इस प्रकार समन्वय करना जिससे शरीर अधिक क्षमता से क्रियाकलाप कर सके।
  • सूचनाओं को ज्ञान या चेतना के रूप में एकत्रित करना और व्यवहार में पूर्व अनुभव के आधार पर परिवर्तन करना।
  • अनुमस्तिष्क सही-सही गतियों को नियन्त्रित तथा समन्वित करता है। इसका लम्बा भाग मेरुरज्जु से जुड़ा रहता है जो हृदय धड़कन, रुधिर परिवहन, श्वसन तथा अधिकांश अनैच्छिक क्रियाओं एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं पर नियन्त्रण रखता है।

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प्रश्न 7.
मेरुरज्जु के कार्य लिखिए।
उत्तर:
मेरुरज्जु प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • यह अनैच्छिक क्रियाओं, प्रतिवर्ती क्रियाओं आदि का प्रमुख केन्द्र है, जिनका संचालन का कार्य करता है।
  • यह मस्तिष्क से आने वाले तथा मस्तिष्क को जाने वाले सन्देश को मार्ग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 8.
अभिग्राहक से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
अभिग्राहक जंतुओं में एक में एक विशेष प्रकार की संरचना वाले तंत्रिका अंग होते हैं हैं जो प्रकाश, ध्वनि एवं गंध के द्वारा बाहरी सूचनाओं का पता लगाते हैं। इन्हें प्रकाशग्राही, ध्वनिग्राही व गंधग्राही कहते हैं। अभिग्राहक एक विशेष प्रकार की तंत्रिका कोशिकाओं के द्वारा मस्तिष्क को सूचनाएँ प्रेषित करते हैं जिन्हें संवेदी पथिकाएँ भी कहते हैं।

प्रश्न 9.
अमीबा, हाइड्रा, केंचुए व कॉकरोच में तंत्रिका तंत्र किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर:
अमीबा में एक कोशिका होती है जो स्वयं ही उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करती है। हाइड्रा में तंत्रिका कोशिकाओं का एक जाल होता है जो सारे शरीर हुआ होता है। केंचुए में एक अधर तंत्रिकारज्जु होता तथा उसमें खंडशः व्यवस्थित गैंग्लिया एवं तंत्रिकाएँ होती हैं कॉकरोच में एक स्पष्ट मस्तिष्क और अधर तंत्रिकारज्जु में श्रृंखलाबद्ध गैंग्लिया होते हैं।

प्रश्न 10.
पादप हॉर्मोन क्या हैं? किन्हीं दो पादप हॉर्मोनों के नाम बताइए।
उत्तर:
वो हॉर्मोन जो पादपों के एक भाग में उत्पन्न होते हैं तथा पौधे के अन्य भागों में क्रिया को प्रेरित करते हैं। यह वृद्धि नियामक होते हैं।
जैसे-

  • ऑक्सिन
  • जिब्रेलिन
  • साइटोकाइनिन।

प्रश्न 11.
ऑक्सिन क्या है? इसके कोई 4 कार्य लिखिए।
उत्तर:
ऑक्सिन पौधों में पाया जाने वाला एक हॉर्मोन है, जो तने के शीर्ष पर उत्पन्न होता है। इसे IAA (इन्डोल एसीटिक एसिड) के नाम से जाना जाता है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं-

  • यह तने की लम्बाई में वृद्धि करता है तथा जड़ों की वृद्धि को रोकता है।
  • फलों एवं पत्तियों को झड़ने से रोकता है।
  • बीजरहित फल के उत्पादन में सहायता करता है।
  • यह कोशिका विभाजन करता है।

प्रश्न 12.
पीयूष ग्रन्थि के कोई चार प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • ऊतकों और हड्डियों की वृद्धि का नियमन करना।
  • वृक्कों द्वारा जल के पुनः अवशोषण का नियमन करना।
  • कार्टीसोन बनाने में एड्रिनल कॉर्टेक्स को प्रेरित करना।
  • थाइरॉक्सिन स्रावण के लिए थायराइड को प्रेरित करना।

प्रश्न 13.
साइटोकाइनिन के कोई चार प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
साइटोकाइनिन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • प्रोटीन के उत्पादन (संश्लेषण) में सहायता करना।
  • कोशिकाओं की लम्बाई में वृद्धि करना।
  • अंकुरण के समय उत्प्रेरक उत्पन्न करना।
  • पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि करना।
  • पत्तियों की वृद्धि को रोकना व तने की लम्बाई में

प्रश्न 14.
वृद्धिरोधक ABA हॉर्मोन के कोई चार वृद्धि करना। प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
वृद्धिरोधक ABA हॉर्मोन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • पौधों में वृद्धि की गति को कम करना।
  • पतझड़ क्रिया को बढ़ाना।
  • पत्तियों में खुलने एवं बन्द करने की क्रिया को नियन्त्रित करना।
  • फूलों को खुलने एवं बन्द करने की क्रिया को नियन्त्रित करना।

प्रश्न 15.
सूत्र – युग्मन किसे कहते हैं? समझाइए।
अथवा
सूत्र – युग्मन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
दो न्यूरॉन जहाँ मिलते हैं उस स्थान को सूत्र – युग्मन कहते हैं। बहुधा सन्देश एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक सूत्र – युग्मन के द्वारा पहुँचाया जाता है। उदाहरण के लिए, आपके पैर के अँगूठे में दर्द होता है तो सबसे पहले संवेदना डेन्ड्राइट या न्यूरॉन के बहुशाखित संरचना द्वारा ग्रहण कर तन्त्रिका द्वारा विद्युत आवेश के रूप में वहन की जाती है। सूत्र युग्मन के जरिए दूसरे न्यूरॉन में और अन्त में यह तन्त्रिका केन्द्र तक पहुँच जाती है। अनुक्रिया प्रेरक तन्त्रिका द्वारा पैर की मांसपेशियों में पहुँच जाती है और पैर उसके अनुसार प्रतिक्रिया करता है।

प्रश्न 16.
तंत्रिका तंत्र के कोई चार प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
तंत्रिका तंत्र के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • यह शरीर के सभी अंगों के कार्यों पर नियन्त्रण एवं समन्वय बनाये रखता है।
  • यह तंत्र जीवधारी को बाहरी वातावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया देने में मदद करता है।
  • यह अनुभवों को याद रखने में सहायता करता है।
  • यह प्रतिवर्ती क्रियाओं के द्वारा हमारी सुरक्षा करता है।

प्रश्न 17.
ऑक्सिन के पौधों पर कोई दो कार्य बताइए।
उत्तर:

  • कायिका की लंबाई बढ़ाने में।
  • पौधों की जड़ों को बहुत तेजी से बढ़ाना।

प्रश्न 18.
गुरुत्वानुवर्तन गति व स्पर्शानुवर्तन एक अंतर बताइए।
उत्तर:
पौधों में जो गति गुरुत्वाकर्षण के कारण होती है, उन्हें गुरुत्वावर्त गति कहते हैं, जबकि जिन पौधों में के कारण होती है, उन्हें स्पर्शानुवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 19.
ऑक्सिन और साइटोकाइनिन में क्या अंतर है?
उत्तर:
ऑक्सिन का निम्न सांद्रण वृद्धि को जाग्रत करता है। लेकिन सांद्रण की मात्रा अधिक होने पर वृद्धि कम हो जाती है। लेकिन तने में वृद्धि बढ़ जाती है जबकि साइटोकाइनिन हॉर्मोन सक्रिय रूप से बुद्धिमान ऊतकों, जैसे- भ्रूणों, परिवर्धमान फलों और जड़ों में उत्पन्न होते हैं। इनके कारण कोशिका विभाजन हो जाता है और जीर्णता देर से आती है।

प्रश्न 20.
प्रतिवर्ती क्रिया के कोई चार उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया के उदाहरण हैं-

  • छींकना एवं खाँसना।
  • मिठाई देखने पर मुँह में लार आना।
  • तेज रोशनी (बिजली चमकना) में पलकों का झपकना।
  • सुई चुभने पर तुरन्त अंग को हटाना।

प्रश्न 21.
मनुष्य में जनन ग्रन्थि को समझाइए।
उत्तर:
मनुष्य पायी जाने वाली मुख्यतः दो ग्रन्थि हैं-

  • वृषण
  • अण्डाशय।

(1) वृषण – यह पुरुष में होते हैं जो उदरगुहा के बाहर स्थित होते हैं। यह टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन स्रावित करते हैं जिसका कार्य दाढ़ी-मूंछ का विकास, आवाज भारी होने वाले लक्षण तथा शुक्राणु उत्पन्न करना।

(2) अण्डाशय यह स्त्री में होता है जो उदरगुहा में स्थित होता है। यह एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन स्रावित करता है जिसका कार्य स्तनों का विकास, आवाज पतली होना, रजोधर्म का होना तथा अण्डज उत्पन्न करना होता है।

प्रश्न 22.
जन्तुओं में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है? समझाइये।
उत्तर:
जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कुछ विशिष्ट प्रकार के रसायन द्वारा होता है जिन्हें हॉर्मोन कहते हैं। हॉर्मोन विशिष्ट ग्रन्थियों में निर्मित होते हैं जिन्हें अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ कहते हैं। ये ग्रन्थियाँ नलिकाविहीन होने के कारण हॉर्मोन के सीधे रक्त प्रवाह में स्रावित करती हैं। ये हॉर्मोन शरीर को विभिन्न भागों में पहुँचकर अपना विशिष्ट प्रकार दिखाते हैं, जैसे- वृद्धि दर, विकास, रुधिर दाब, लैंगिक परिपक्वता आदि। फलस्वरूप शरीर में विभिन्न क्रिया-कलापों में तालमेल बना रहता है।

प्रश्न 23.
मानव शरीर में पायी जाने वाली अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों के नाम एवं उनसे स्त्रावित होने वाले हॉर्मोन्स के नाम लिखिए।
अथवा
कोई भी तीन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के नाम एवं उनसे स्त्रावित हॉर्मोन को लिखिए।
उत्तर:
प्रमुख अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ एवं उनसे स्त्रावित हॉर्मोन्स निम्नलिखित हैं-

ग्रन्थि का नाम हॉर्मोन
(i) थॉयराइड थॉयरॉक्सिन
(ii) पेंक्रियास इन्सुलिन
(iii) एड्रिनल कार्टीसोन
(iv) पीयूष ग्रन्थि वृद्धि हॉर्मोन ADH, ACTH, FSH, TSH
(v) अण्डाशय एस्ट्रोजन
(vi) वृषण टेस्टोस्टेरॉन

प्रश्न 24.
अण्डाशय से निकलने वाले प्रमुख हॉर्मोन को उनके कार्य सहित लिखिए।
उत्तर:
अण्डाशय द्वारा स्रावित प्रमुख हॉर्मोन एस्ट्रोजन हैं जिनके कार्य निम्न हैं-

  • स्तन ग्रन्थियों का विकास करना।
  • गर्भाशय, फेलोपियन नलिका तथा योनि की वृद्धि एवं परिवर्धन।
  • मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करना।
  • ऋतुस्राव चक्र का नियमन करना।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रतिवर्ती क्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित क्रिया पथ को समझाइए।
उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया – अभ्यासार्थ लघु उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 3 का उत्तर देखिए।
प्रतिवर्ती क्रिया का पथ निम्नलिखित प्रकार होता है-
उद्दीपन → ग्राही अंग → संवेदन तन्त्रिका → मेरुरज्जु → प्रेरित तंत्रिका → मांसपेशियों द्वारा क्रियाएँ।
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 3

प्रश्न 2.
पादप हॉर्मोन को कितने वर्गों में विभाजित किया गया है? प्रत्येक के कार्य लिखिए।
उत्तर:
पादप हॉर्मोन को चार वर्गों में विभाजित किया गया है-

  • ऑक्सिन
  • जिब्रेलिन
  • साइटोकाइनिन
  • वृद्धिरोधक ABA हॉर्मोन।

कार्य-
(i) ऑक्सिन – इसका प्रमुख कार्य कोशिकाओं को दीर्घीकरण करना है। इनके द्वारा कोशिका विभाजन होता है। पौधों की गतियों पर नियन्त्रण रखता है। इससे पत्तियों का गिरना रुकता है तथा यह बीजरहित फलों के उत्पादन में सहायक है।

(ii) जिब्रेलिन – इसके कारण पौधों की लम्बाई बढ़ जाती है। यह कोशिका विभाजन में सहायक होता है।

(iii) साइटोकाइनिन – इसके अन्तर्गत

  • काइनिन
  • केलाइन
  • जिएटिन
  • फ्लोकोजिन आदि रसायन आते हैं जो प्रोटीन के उत्पादन में सहायता करते हैं। ये बीज अंकुरण में सहायता करते हैं पाश्र्व कलिका की वृद्धि करते हैं, मूल वृद्धि को रोकते हैं, पत्तियों की वृद्धि को रोकते हैं तथा तने की लम्बाई में वृद्धि करते हैं। की गति कम करता है, पतझड़ की क्रिया को बढ़ाता है,

(iv) वृद्धिरोधक ABA हॉर्मोन – यह पौधे की वृद्धि पत्तियों एवं फलों के खुलने एवं बन्द करने की क्रिया को यह पदार्थ नियन्त्रित करता है।

प्रश्न 3.
मानव मस्तिष्क के विभिन्न भागों के कार्य लिखिए।
उत्तर:
मानव मस्तिष्क तीन भागों में विभाजित हैं जिनके कार्य निम्नलिखित है-

  • अग्र-मस्तिष्क
  • मध्य-मस्तिष्क
  • पश्च मस्तिष्क।

(1) अग्र-मस्तिष्क- इसके निम्नलिखित कार्य हैं-

  • अग्र-मस्तिष्क घ्राण पिण्ड सुगन्ध का बोध कराता है।
  • प्रमस्तिष्क मनुष्य की बुद्धि, स्मृति व चेतना तर्क का केन्द्र माना जाता है। यह इच्छाओं, भावनाओं तथा सुनने का केन्द्र होता है।
  • डाइनसिफेलॉन भाग भूख प्यास, नींद, थकावट, क्रोध तथा प्रसन्नता का केन्द्र है।

(2) मध्य-मस्तिष्क – यह भाग वस्तुओं के प्रतिबिम्बों की पहचान के नियन्त्रण का कार्य करता है इसलिए इसे दृष्टि पिण्ड कहते हैं।

(3) पश्च-मस्तिष्क- ये तीन भागों –

  • अनुमस्तिष्क
  • मेडुला ऑब्लांगेटा
  • मेरुरज्जु से मिलकर बने होते हैं।

इनके निम्नलिखित कार्य हैं-
(a) अनुमस्तिष्क का कार्य-

  • यह शरीर में सन्तुलन स्थापित रखता है।
  • यह कंकाल पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन को भी नियन्त्रित करता है।

(b) मेडुला ऑब्लांगेटा शरीर के सभी अनैच्छिक क्रियाओं का केन्द्र है।

(c) मेरुरज्जु के कार्य-

  • यह प्रतिवर्ती क्रियाओं का मुख्य केन्द्र है।
  • यह अनैच्छिक क्रियाओं को सन्तुलित करती है।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 4.
मानव शरीर की विभिन्न ग्रन्थियों से उत्पन्न पाँच महत्त्वपूर्ण हॉर्मोन्स तथा उनके कार्य की सारणी बनाइये।
उत्तर:
अन्तःस्त्रावी ग्रन्थि और उनके कार्य

ग्रा्थि/स्थिति हॉर्मोन का नाम हॉर्मोन के कार्य
1. पीयूष ग्रन्थि (मस्तिष्क में) वृद्धि हॉर्मोन ऊतकों और हड्डियों की वृद्धि का नियन्त्रण।
2. थायरॉइड ग्रन्थि (गर्दन में) थायरॉक्सिन (i) वृद्धि और उपापचय को नियन्त्रित करना।
(ii) इसकी कमी से घेंघा रोग होता है।
(iii) अत्यधिक स्रावण से दुर्बलता, पतलापन और अधिक क्रियाशीलता आती है।
3. एड्रीनल (वृक्कों के ऊपर) एड्रीनेलीन यह शरीर में रक्त प्रवाह की दर को नियन्त्रित करता है।
4. पेंक्रियास (ग्रहणी के पास) इन्सुलिन (i) शर्करा उपापचय का नियंत्रण। (ii) इसकी कमी से मधुमेह रोग (डायबिटीज) होता है। पुरुष द्वितीय लैंगिक लक्षणों (दाढ़ी, मूँछ का निकलना, आवाज का भारीपन) के विकास के लिए उत्तरदायी है।
5. वृषण (नर जननांग) टेस्टोस्टेरॉन

प्रश्न 5.
जन्तुओं में नियन्त्रण एवं समन्वय प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
नियंत्रण और समन्वय सभी जन्तुओं में बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इनमें शारीरिक क्रियाओं के लिए अलग-अलग अंग या क्रियात्मक तंत्र पाए जाते हैं। जन्तुओं में दो प्रकार का समन्वय पाया जाता है-

  • रासायनिक एवं
  • तंत्रिकीय समन्वय।

(1) जन्तुओं में रासायनिक समन्वय एवं नियन्त्रण -जन्तुओं में कुछ विशिष्ट प्रकार के रसायन स्रावित होते हैं जिन्हें हॉर्मोन कहते हैं, ये विशिष्ट ग्रन्थियों में निर्मित होते हैं जिन्हें अंत: स्रावी ग्रन्थियाँ कहते हैं। ये हॉर्मोन को सीधे ही रक्त प्रवाह में स्रावित करती हैं। शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचकर ये हॉर्मोन अपना विशिष्ट प्रभाव दिखाते हैं; जैसे – वृद्धि करना, लैंगिक परिपक्वता आदि। नीचे कुछ
ग्रन्थि एवं उनसे स्रावित हॉर्मोन का नाम दर्शाया गया है-

ग्रन्थि का नाम हॉर्मोन
(i) थॉयराइड थॉयरॉक्सिन
(ii) पेंक्रियास इन्सुलिन
(iii) एड्रिनल कार्टीसोन
(iv) पीयूष ग्रन्थि वृद्धि हॉर्मोन ADH, ACTH, FSH, TSH
(v) अण्डाशय एस्ट्रोजन
(vi) वृषण टेस्टोस्टेरॉन

(2) तंत्रिकीय समन्वय एवं नियन्त्रण- नियन्त्रण एवं समन्वय का कार्य एक और तंत्र द्वारा किया जाता है, यह हैं- तंत्रिका तंत्र।

तंत्रिका कोशिका, इसकी संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है जो पूरे शरीर में फैलकर विद्युत संवाहित कोशिकाओं का एक जाल बनाते हैं। इन्हीं के द्वारा सन्देश शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचाये जाते हैं। तंत्रिका तन्त्र के तीन प्रमुख भाग होते हैं जो विभिन्न कार्यों का नियन्त्रण एवं समन्वय करते हैं। ये निम्नलिखित हैं –
(A) केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र- इसमें

  • मस्तिष्क
  • मेरुरज्जु शामिल हैं।

(B) परिधीय तंत्रिका तंत्र- इसमें

  • क्रेनियल तथा
  • स्पाइनल तंत्रिकाएँ शामिल हैं।

(C) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र- इसमें

  • अनुकम्पीय तंत्रिकाएँ तथा
  • परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र शामिल हैं।

प्रश्न 6.
मनुष्य के मस्तिष्क की काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
मनुष्य के मस्तिष्क की काट का नामांकित चित्र-
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 4

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण होता है-
(a) अग्र-मस्तिष्क के मेडुला से
(b) मध्य-मस्तिष्क के मेडुला से
(c) पश्च-मस्तिष्क के मेडुला से
(d) मेरुरज्जु के मेडुला से
उत्तर:
(c) पश्च-मस्तिष्क के मेडुला से

2. सूर्य के मार्ग के अनुसार सूरज की गति किसके कारण होती है?
(a) प्रकाशानुवर्तन के
(b) गुरुत्वानुवर्तन के
(c) रसायनानुवर्तन के
(d) जलानुवर्तन के
उत्तर:
(a) प्रकाशानुवर्तन के

3. मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है-
(a) अग्रमस्तिष्क
(b) मध्यमस्तिष्क
(c) अनुमस्तिष्क
(d) पश्चमस्तिष्क
उत्तर:
(a) अग्रमस्तिष्क

4. सुनने, सूँघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत क्षेत्र होते हैं-
(a) अग्रमस्तिष्क
(b) मेडुला
(c) अनुमस्तिष्क
(d) पश्चमस्तिष्क
उत्तर:
(a) अग्रमस्तिष्क

5. कौन-सा हॉर्मोन शरीर को आपातकाल के लिए तैयार करता है?
(a) एड्रीनलिन
(b) इन्सुलिन
(c) मेलाटोनिन
(d) थाइमोसिन
उत्तर:
(a) एड्रीनलिन

6. मेरुरज्जु कहाँ से निकलती है?
(a) मेडुला से
(b) प्रमस्तिष्क से
(c) अनुमस्तिष्क से
(d) अग्रमस्तिष्क से
उत्तर:
(a) मेडुला से

7. प्ररोह का प्रकाश की ओर गति क्या कहलाती है?
(a) गुरुत्वानुवर्तन
(b) रसायनानुवर्तन
(c) जलानुवर्तन
(d) प्रकाशानुवर्तन
उत्तर:
(d) प्रकाशानुवर्तन

8. पराग नलियों की अंडाणु की तरफ वृद्धि किसके कारण होती है?
(a) जलानुवर्तन के
(b) रसोनुवर्तन (रसायनानुवर्तन) के
(c) गुरुत्वानुवर्तन
(d) प्रकाशानुवर्तन
उत्तर:
(b) रसोनुवर्तन (रसायनानुवर्तन) के

9. बौनेपन का क्या कारण है?
(a) एडीनलिन के स्राव की कमी।
(b) वृद्धि – हॉर्मोन के स्राव की अधिकता
(c) वृद्धि हॉर्मोन के स्राव की कमी
(d) इन्सुलिन की अधिकता
उत्तर:
(c) वृद्धि हॉर्मोन के स्राव की कमी

10. एक तंत्रिका कोशिका का ऐक्सॉन अगली तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइटों के समीप होता है। दो तंत्रिका कोशिकाओं की इस संधि को क्या कहते हैं?
(a) सिनेप्स
(b) संवेदी तंत्रिकाएँ
(c) मिश्रित तंत्रिकाएँ
(d) प्रेरक तंत्रिकाएँ
उत्तर:
(a) सिनेप्स

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

11. निम्न में से फाइटोक्रोम (Phytochrome) कौन-सा है?
(a) ऑक्सिन
(b) जिब्रेलिन
(c) साइटोकाइनिन
(d) ये सभी।
उत्तर:
(d) ये सभी।

12. निम्न में से मस्तिष्क का कौन-सा भाग है?
(a) प्रमस्तिष्क
(b) अनुमस्तिष्क
(c) मेडुला
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

13. छुई-मुई के पौधे में किस प्रकार की गति होती है?
(a) रासायनिक गति
(b) तंत्रिका गति
(c) पेशीय गति
(d) ये सभी।
उत्तर:
(a) रासायनिक गति

14. कौन जल की मात्रा में परिवर्तन करके अपनी आकृति बदल लेती है?
(a) छुई-मुई का पौधा
(b) तंत्रिका कोशिका
(c) गुलाब का पौधा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) छुई-मुई का पौधा

15. पादपों में कोशिकाओं के लंबी होने के लिए उत्तरदायी हॉर्मोन हैं—
(a) जिब्रेलिन
(b) ऑक्सिन
(c) साइटोकायनिन
(d) ऐब्सिजिक अम्ल
उत्तर:
(b) ऑक्सिन

16. पौधे में वृद्धि का संदमन करने वाले हॉर्मोन का एक उदाहरण है1
(a) एब्सिसिक अम्ल
(b) टार्टरिक अम्ल
(c) ऐसीटिक अम्ल
(d) सल्फ्यूरिक अम्ल
उत्तर:
(a) एब्सिसिक अम्ल

17. इंसुलिन के बारे में गलत कथन चुनिए-
(a) यह अग्न्याशय से उत्पन्न होता है।
(b) यह शरीर की वृद्धि और उसके परिवर्धन (विकास) का नियमन करता है।
(c) यह रुधिर में शर्करा के स्तर का नियमन करता है।
(d) इंसुलिन के अपर्याप्त स्त्रावण से डायबिटीज नामक रोग हो जाता है।
उत्तर:
(b) यह शरीर की वृद्धि और उसके परिवर्धन (विकास) का नियमन करता है।

18. मटर के पौधों में प्रतान की वृद्धि किसके कारण होती है?
(a) प्रकाश के प्रभाव के
(b) गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के
(c) प्रतान की उन कोशिकाओं में तीव्र विभाजन के कारण जो अवलंब से दूर होती हैं।
(d) प्रतान की उन कोशिकाओं में तीव्र विभाजन के कारण जो अवलंब के संपर्क में होती हैं।
उत्तर:
(c) प्रतान की उन कोशिकाओं में तीव्र विभाजन के कारण जो अवलंब से दूर होती हैं।

19. मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग कौन-सा होता है?
(a) प्रमस्तिष्क
(b) अनुमस्तिष्क
(c) मेडुला ऑब्लांगेटा
(d) मस्तिष्क
उत्तर:
(a) प्रमस्तिष्क

20. अनुमस्तिष्क निम्न में से कौन-सा कार्य करता है?
(a) यह शरीर का संतुलन बनाए रखता है।
(b) यह अत्यावश्यक प्रतिवर्त केन्द्रों का नियंत्रण करता है।
(c) यह सभी अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
(d) यह हमारी भावनाओं, इच्छाशक्ति एवं वाक्शक्ति को नियंत्रित करता है।
उत्तर:
(a) यह शरीर का संतुलन बनाए रखता है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

  1. पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षण …………………… हॉर्मोन द्वारा विकसित होते हैं।
  2. किसी उद्दीपन के प्रति तुरन्त होने वाली अनुक्रिया …………………… क्रिया कहलाती है।
  3. प्रतिवर्ती क्रिया …………………… द्वारा संपन्न होती है।
  4. अग्न्याशय पाचक एंजाइम के साथ …………………… भी स्त्रावित करता है।
  5. वृषण शुक्राणुओं के साथ-साथ …………………… हॉर्मोन भी उत्पन्न करता है।
  6. अनैच्छिक प्रक्रियाएँ …………………… के द्वारा नियंत्रित होती हैं।
  7. विभिन्न अंगों का एक-दूसरे के साथ कार्य करना …………………… कहलाता है।
  8. लड़कियों में वक्ष स्थल का विकास गर्भाशय द्वारा स्रावित हॉर्मोन …………………… द्वारा किया जाता है।
  9. ऑक्सिन मूल की वृद्धि को …………………… करते हैं।
  10. तने की वृद्धि एवं कोशिका विभाजन के लिए उत्तरदायी है ……………………।

उत्तर:

  1. टेस्टोस्टेरोन
  2. प्रतिवर्ती
  3. मेरुरज्जु
  4. हॉर्मोन
  5. टेस्टोस्टेरोन
  6. मेरुरज्जु
  7. समन्वयन
  8. एस्ट्रोजन
  9. कम
  10. जिब्रेलिन।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

Jharkhand Board JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

Jharkhand Board Class 10 Science नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है-
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन
उत्तर:
(d) साइटोकाइनिन।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-
(a) दुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग
उत्तर:
(b) सिनेप्स।

प्रश्न 3.
मस्तिष्क उत्तरदायी है-
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 4.
हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहा हो। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर:
ग्राही, हमारी ज्ञानेन्द्रियों में स्थित एक खास कोशिकाएँ होती हैं, जो वातावरण से सभी सूचनाएँ ढूँढ़ सकती हैं और उन्हें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मेरुरण्जु तथा मस्तिष्क) में पहुँचाती हैं। मस्तिष्क के भाग अग्रमस्तिष्क में विभिन्न ग्राही से संवेदी आवेग (सूचनाएँ) प्राप्त करने के लिए क्षेत्र होते हैं। इसके अलग-अलग क्षेत्र सुनने, सूँघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत होते हैं। यदि कोई ग्राही उचित प्रकार कार्य नहीं करेगी तो उस ग्राही द्वारा एकत्र की गई सूचना मस्तिष्क तक नहीं पहुँचेगी। जैसे-

  • यदि रेटिना की कोशिका अच्छी तरह कार्य नहीं करेंगी, तो हम देख नहीं पाएँगे जिससे हम अंधे भी हो सकते हैं।
  • जिढ्वा द्वार मीठा, नमकीन आदि स्वाद का पता लगाना संभव नहीं हो पाएगा।

प्रश्न 5.
एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइये तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 1
तंत्रिका कोशिका के कार्य-न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई है। इसके निम्न तीन भाग होते हैं-

  • दुमिका
  • कोशिकाकाय
  • एक्सॉन।

सूचनाओं का आवेग द्रुमिका से कोशिकाकाय की ओर चलता है तथा फिर एक्सॉन में से होता हुआ सिनेप्स तक पहुँचता है। फिर इसे पार करता हुआ एक न्यूरॉन से दूसरे में गुजरता हुआ मेरुरज्जु तक पहुँचता है। इसी प्रकार सूचनाएँ मस्तिष्क से कार्यकारी अंग (पेशी, ग्रंथि) तक पहुँचती हैं।

प्रश्न 6.
पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
दिशिक या अनुवर्तन गति जो प्रकाश उद्दीपन के प्रभाव में, प्रकाश की ओर अथवा उसके विपरीत होती है उसे प्रकाशानुवर्तन कहते हैं। तने प्रकाश की ओर मुड़ते हैं जबकि जड़ें प्रकाश के विपरीत मुड़कर अनुक्रिया करती हैं।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 2

प्रश्न 7.
मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आवागमन में व्यवधान होगा ?
उत्तर:

  • सभी संकेत जो मस्तिष्क से दूर या मस्तिष्क की ओर मेरुरज्जु से होकर चलते हैं, उनके आवागमन में व्यवधान उत्पन्न होगा।
  • प्रतिवर्ती क्रिया नहीं संपादित होगी।

प्रश्न 8.
पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?
उत्तर:
पौधों की विशेष कोशिकाओं द्वारा कुछ रासायनिक पदार्थ स्रावित होते हैं जिन्हें पादप हॉर्मोन कहते हैं। विभिन्न प्रकार के पादप हॉर्मोन वृद्धि व विकास तथा वातावरण के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। ये पादप हॉर्मोन क्रिया स्थान से दूर कहीं स्रावित होकर विसरण द्वारा उस स्थान तक पहुँचकर कार्य करते हैं।

प्रश्न 9.
एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?
उत्तर:
एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की आवश्यकता दो प्रकायों को करने के लिए होती है-
(1) इससे शरीर के विभिन्न अंगों का निर्माण होता है एवं अंगतंत्र एक व्यवस्थित तरीके से कार्य करते हैं और उनमें समन्वय बना रहता है। उदाहरण के लिए जब हम भोजन करने की सोचते हैं तो हम भोजन लेकर मुँह की तरफ ले जाते हैं, दाँत और जबड़े की पेशियाँ भोजन को तोड़ती हैं, लार ग्रंथियाँ लार का स्रावण करती हैं।

(2) बस से कूदना, आग की लौ से अपना हाथ पीछे खींच लेना, भूख के कारण मुँह में पानी आना। इन सभी उदाहरणों में एक सामान्य विचार आता है कि जो कुछ हम करते हैं उसके बारे में विचार नहीं करते, या अपनी क्रियाओं को नियंत्रण में महसूस नहीं करते हैं। फिर भी ये वे स्थितियाँ हैं जहाँ हम अपने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया कर रहे हैं। इन परिस्थितियों के लिए हमें नियंत्रण व समन्वय तंत्र की आवश्यकता होती है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 10.
अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ निम्न प्रकार से एक-दूसरे से भिन्न हैं-

अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ
1. वे क्रियाएँ जिनका नियंत्रण हमारे सोचने से नहीं होत है या ऐसी क्रियाएँ जो शरीर में निरन्तर चलती रहती हैं। 1. वह क्रियाएँ जिनमें किसी बाह्य उद्दीपन के प्रति अनुक्रियाएँ होती हैं प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती हैं।
2. इसका नियंत्रण पश्चमस्तिष्क स्थित मेडुला द्वारा होता है। 2. इनका नियंत्रण मुख्यतः मेरुज्जु द्वारा होता है तथा प्रत्यावर्ती चाप के रूप में क्रियान्वित होता है।
3. उदाहरण के लिए- हृदय का स्पन्दन, साँस लेना, श्वसन क्रिया द्वारा ऊर्जा का उत्पादन, भोजन देखकर लार का निकलना, वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन आदि। 3. उदाहरण के लिए-किसी गर्म वस्तु को स्पर्श करने पर हाथ शीघ्रता से हटाना।

प्रश्न 11.
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए।
उत्तर:
जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक

जंतुओं में तंत्रिका द्वारा नियंत्रण एवं समन्वय जंतुओं में हॉर्मोन द्वारा नियंत्रण एवं समन्वय
1. यह नियंत्रण एवं समन्वय से सम्बन्धित क्रियाविधि होती है। 1. यह क्रियाविधि भी नियंत्रण एवं समन्वय से सम्बन्धित है।
2. तंत्रिका क्रियाविधि में रासायनिक परिवर्तन मांसपेशियों की कोशिकाओं में होता है। 2. शरीर के एक अंग में उत्पन्न हॉर्मोन शरीर के अन्य भागों को भेजे जाते हैं।
3. यह मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। 3. यह अन्तः स्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित होते हैं।

प्रश्न 12.
छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अंतर है?
उत्तर:
छुई-मुई पौधे में गति-छुई-मुई में स्पर्श उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया के फलस्वरूप गति होती है। यदि पत्ती को छूते हैं तब उद्दीपन पत्ती के आधार तक संचरित हो जाता है और पत्तियाँ नीचे झुक जाती हैं। यह आधार कोशिकाओं में परासरणीय दाब कम होने के कारण होता है। जब उद्दीपन समय समाप्त हो जाता है तब परासरणीय दाब पुनः स्थापित हो जाता है तथा पत्तियाँ सामान्य अवस्था में आ जाती हैं। यह वृद्धि अनाश्रित गति है।

छुई-मुई में स्पर्श बिंदु (उद्दीपन) से अलग भाग में गति होती है। इसमें सूचना विशिष्ट ऊतकों से होकर नहीं बल्कि विद्युत रासायनिक संकेतों के रूप में एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक संचरित होती है। पादप कोशिकाओं की रचना उनमें पानी की मात्रा के परिवर्तन से परिवर्तित होती है जिसके परिणामस्वरूप गति होती है।

हमारे पैर की गति-हमारे पैर की पेशियाँ तंत्रिकाओं से सम्बद्ध होती हैं जिनमें गति करने हेतु आवश्यक सूचनाएँ मस्तिष्क द्वारा भेजी जाती हैं।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 3
सूचनाएँ विद्युत रासायनिक संकेतों के रूप में संचरित होती हैं। यह पेशियों तक पहुँचकर रासायनिक संकेतों में बदल जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप पैर में गति होती है। अतः पैर में गति पेशियों के सिकुड़ने एवं फैलने से होती है जो मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती रहती है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-132)

प्रश्न 1.
प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अन्तर है?
उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच अन्तर निम्न प्रकार हैं-

प्रतिवर्ती क्रिया टहलना
1. प्रतिवर्ती क्रिया मेरुण्जु द्वारा नियंत्रित होती है। 1. टहलना मस्तिष्क के भाग अनुमस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है।
2. यह अनैच्छिक (Involuntary) क्रियाएँ हैं। 2. यह ऐच्छिक (voluntary) क्रियाएँ हैं।
3. यह क्रिया अत्यंत तेज अर्थात् एक सेकण्ड के सूक्ष्म अंश में ही पूर्ण हो जाती है। 3. इस क्रिया में अधिक समय लगता है क्योंकि पहले मस्तिष्क विचार करता है तथा सूचना को तंत्रिका के माध्यम से पेशियों तक पहुँचाता है।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?
उत्तर:
अंतर्ग्रथन पर विद्युत तरंगों के रूप में आने वाला तंत्रिका आवेग कुछ रसायन के स्रावण को प्रेरित करता है। ये रसायन अंतर्ग्रथन को पार करके अगली तंत्रिका कोशिका में समान प्रकार का तंत्रिका आवेग उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 3.
मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
उत्तर:
अनुमस्तिष्क।

प्रश्न 4.
हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?
उत्तर:
अगरबत्ती की गंध का पता अग्रमस्पिक द्वारा लगाया जाता है। यहाँ गंध की संवेदना के लिए अलग संवेदी केंद्र होता है जहाँ सूचना प्राप्त होती है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 5.
प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु द्वारा सम्पन्न होती है। प्रतिवर्ती चाप इसी मेरुरज्जु में बनते हैं यद्यपि आगत सूचनाएँ मस्तिष्क तक दी जाती हैं। सामान्य प्रतिवर्ती क्रिया जैसे पुतली के आकार में परिवर्तन तथा कोई सोची क्रिया जैसे कुर्सी खिसकाना। उसको मध्य एक और पेशी गति का सेट है जिस पर हमारे सोचने का कोई नियंत्रण नहीं है। इन अनैच्छिक क्रियाओं में से कई मध्यमस्तिष्क तथा पश्चमस्तिष्क से नियंत्रित होती हैं। ये सभी अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे रक्तदाब, लार आना तथा वमन (उल्टी आना) पश्चमस्तिष्क स्थित मेडुला द्वारा नियंत्रित होती हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-136)

प्रश्न 1.
पादप हॉर्मोन क्या हैं?
उत्तर:
विविध पादप हॉर्मोन वृद्धि, विकास तथा पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वय में सहायता करते हैं। इनके संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया क्षेत्र से दूर होता है और साधारण विसरण द्वारा वे क्रिया क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं।

प्रश्न 2.
छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:

छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति प्रकाश की ओर प्ररोह की गति
1. इसमें पत्तियों की गति किसी खास दिशा में नहीं होती है अर्थात् उद्दीपक (स्पर्श) की दिशा पर निर्भर नहीं करती है। 1. इसमें प्ररोह की गति उद्दीपक (प्रकाश) की दिशा में होती है।
2. इसमें वृद्धि नहीं होती है। 2. इसमें वृद्धि होती है।
3. अनुक्रिया की गति बहुत तीव्र होती है। 3. अनुक्रिया की गति धीमी होती है।
4. यह गति हॉर्मोन के द्वारा नहीं होती है। 4. यह गति ऑक्सिन हॉर्मोन के द्वारा होती है।
5. यह जल की मात्रा में परिवर्तन के कारण होता है। 5. यह प्ररोह के दोनों ओर असमान वृद्धि के कारण होता है।

प्रश्न 3.
एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर:

  • ऑक्सिन पौधे के तने की लम्बाई को बढ़ाता है।
  • जिब्बेरेलिन पौधे के तने की वृद्धि करता है।

प्रश्न 4.
किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
प्रतान स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है। प्रतान जैसे ही किसी स्पर्श के सम्पर्क में आते हैं ऑक्सिन दूसरी ओर विसरित हो जाता है जिससे उस ओर की कोशिकाएँ अधिक लम्बी होने लगती हैं और प्रतान विपरीत दिशा में मुड़ता है। इस प्रकार वह सहारे के चारों ओर लिपटकर पौधे को सहारा देता है।

प्रश्न 5.
जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
उत्तर:
जलानुवर्तन प्रदर्शित करने के लिए बीजों का अंकुरण एक ऐसी जमीन के ऊपर करवाते हैं जो एक तरफ नम है तथा दूसरी तरफ सूखी।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 4
मूलांकुर पहले तो धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन दर्शांते हुए नीचे की ओर गति करते हैं। परन्तु जल्दी ही गीली जमीन की ओर मुड़ने लगते हैं। यह धनात्मक जलानुवर्तन गति को प्रदर्शित करता है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-138)

प्रश्न 1.
जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
उत्तर:
जंतुओं में रासायनिक समन्वय कुछ रासायनिक पदार्थ जिसे हॉर्मोन कहते हैं के द्वारा होता है। ये अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा स्नावित होते हैं। स्रावित होने वाले हॉर्मोन का समय और मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रिया विधि से किया जाता है।

प्रश्न 2.
आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर:
आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि आयोडीन, थाइराइड ग्रंथि जो कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के उपापचय हेतु थायरॉक्सिन हॉर्मोन स्वावित करती है, के लिए आवश्यक है। यह हॉर्मोन संतुलित वृद्धि व विकास के लिए उत्तरदायी है। आयोडीन की कमी से घेंधा रोग हो जाता है।

प्रश्न 3.
जब एड़ीनलीन रुधिर में स्वावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
उत्तर:
एड्रीनलीन सीधे रक्त में स्रावित होता है तथा शरीर के विभिन्न भागों में रुधिर प्रवाह के साथ फैलता है। यह मुख्य रूप से हुदय पर प्रभाव डालता है, जिससे हदय तेजी से धड़कने लगता है और पेशियों में ऑक्सीजन अधिक मात्रा में पहुँचाना शुरू करता है जिससे पेशियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं। ये पेशियाँ शरीर की विभिन्न क्रियाविधियों को नियंत्रित करती हैं।

प्रश्न 4.
मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
उत्तर:
इंसुलिन हॉर्मोन रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है। मधुमेह के रोगी में अग्याशय ग्रंथि के अल्प सक्रियता के कारण यह हॉर्मोन कम मात्रा में स्रावित होता है जिससे रक्त शर्करा बढ़ जाती है। इसके शरीर पर घातक परिणाम होते हैं। इसलिए इंसुलिन का इंजेक्शन देकर रोगी की रक्त शर्करा को नियमित किया जाता है।

क्रिया-कलाप-7.1

प्रश्न 1.
कुछ चीनी अपने मुँह में रखिए। इसका स्वाद कैसा है?
उत्तर:
चीनी मीठी लगती है।

प्रश्न 2.
अपनी नाक को अँगूठा तथा तर्जनी अँगुली से दबाकर बंद कर लीजिए। अब फिर से चीनी खाइए। इसके स्वाद में क्या कोई अंतर है?
उत्तर:
हाँ, चीनी के स्वाद में अंतर महसूस होता है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 3.
खाना खाते समय उसी तरह से अपनी नाक बंद कर लीजिए तथा ध्यान दीजिए कि जिस भोजन को आप खा रहे हैं, क्या आप उस खाने का पूरा स्वाद ले रहे हैं।
उत्तर:
छात्र अपने आप महसूस करें।

प्रश्न 4.
जब नाक बन्द होती है, तो क्या आप चीनी तथा भोजन के स्वाद में कोई अंतर महसूस करते हैं? यदि हाँ, तो आप सोचते होंगे कि यह क्यों होता है? इस तरह के अंतर जानने के लिए और उनके संभावित हल खोजने के लिए पढ़िए तथा चर्चा करिए। जब आपको जुकाम हो जाता है तब भी क्या आप इसी तरह की स्थिति का सामना करते हैं?
उत्तर:
हाँ।

क्रिया-कलाप-7.2

  • एक शंकु फ्लास्क को जल से भर लीजिए।
  • फ्लास्क की ग्रीवा को तार के जाल से ढक दीजिए।
  • एक ताजा छोटा सेम का पौधा तार की जाली पर इस प्रकार रख दीजिए कि उसकी जड़ें जल में भीगी रहें।
    JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 5
  • एक ओर से खुला हुआ गत्ते का एक बॉक्स लीजिए।
    JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 6
  • फ्लास्क को बॉक्स में इस प्रकार रखिए कि बॉक्स की खुली साइड खिड़की की ओर हो जहाँ से प्रकाश आ रहा है।
  • दो या तीन दिन बाद आप देखेंगे कि प्ररोह प्रकाश की ओर झुक जाता है तथा जड़ें प्रकाश से दूर चली जाती हैं।
  • अब फ्लास्क को इस प्रकार घुमाइए कि प्ररहह प्रकाश से दूर तथा जड़ प्रकाश की ओर हो जाएँ। इसे इस अवस्था में कुछ दिन के लिए विक्षोभरहित छोड़ दीजिए।

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या प्ररोह और जड़ के पुराने भागों ने दिशा बदल दी है?
उत्तर:
पौधों के पुराने भाग जड़ और तने बहुत कम दिशा बदलते हैं जबकि नए भाग अधिक दिशा बदले हैं।

प्रश्न 2.
क्या ये अंतर नयी वृद्धि की दिशा मं हैं?
उत्तर:
हाँ, नयी वृद्धि की दिशा में अधिक परिवर्तन होता है।

प्रश्न 3.
इस क्रिया-कलाप से हम क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
उपर्युक्त क्रिया-कलाप में तने द्वारा ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन और जड़ों द्वारा धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित होता है।

क्रिया-कलाप-7.3

  • चित्र देखिए।
  • चित्र में दर्शाई गई अंतःस्रावी ग्रंथियों की पहचान कीजिए।
  • इनमें से कुछ ग्रंथियों को पुस्तक में वर्णित किया गया है। पुस्तकालय में पुस्तकों की सहायता से एवं अध्यापकों के साथ चर्चा करके कुछ अन्य ग्रंथियों के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

उत्तर:
अन्य ग्रंधियों के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर निम्न तालिका में प्रदर्शित किया गया है-
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 7

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

Jharkhand Board JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम Important Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जैव प्रक्रम किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
एककोशिकीय जीवों में उत्सर्जन की क्रिया किस प्रकार से होती है?
उत्तर:
एककोशिकीय जीवों में उत्सर्जन की क्रिया विसरण द्वारा होती है।

प्रश्न 3.
वृक्क के अतिरिक्त दो सहायक उत्सर्जी अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर:
वृक्क के अतिरिक्त दो सहायक उत्सर्जी अंग हैं- त्वचा, यकृत।

प्रश्न 4.
मूत्र निर्माण की प्रक्रियाओं के केवल नाम लिखिए।
उत्तर:
मूत्र निर्माण की प्रक्रियाएँ हैं-

  • छनन (Piltration)
  • वरणात्मक पुनः अवशोषण (Selective reab-sorption)
  • नलिकीय स्त्रावण (Tubular secretion)।

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प्रश्न 5.
पादपों की उस प्रक्रिया का नाम लिखिए, जिसमें जलवाष्प के रूप में जल लुप्त होता है।
उत्तर:
वाष्पोत्सर्जन।

प्रश्न 6.
पादप में प्रकाश संश्लेषण के विलेय उत्पादों का स्थानान्तरण करने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
फ्लोएम।

प्रश्न 7.
पोषण के आधार पर जीवों को कितने समूहों में बाँटा गया है?
उत्तर:
पोषण के आधार पर जीवों को दो समूहों में बाँटा गया

  • स्वपोषी पोषण
  • विषमपोषी पोषण।

प्रश्न 8.
पादपों में जल और खनिज का स्थानांतरण करने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
जाइलम ऊतक।

प्रश्न 9.
हमारी पेशी कोशिका में अवायवीय श्वसन के उत्पादों के नाम बताइए।
उत्तर:
लैक्टिक अम्ल तथा ऊर्जा।

प्रश्न 10.
एक परजीवी पुष्पी पादप का नाम बताइए।
उत्तर:
अमरबेल।

प्रश्न 11.
कौन-सी शिरा में शुद्ध रक्त पाया जाता है?
उत्तर:
पल्मोनरी शिरा में।

प्रश्न 12.
हृदय के किस भाग में (i) शुद्ध रक्त, (ii) अशुद्ध रक्त प्रवेश करता है?
उत्तर:

  • बायें अलिन्द में
  • दाहिने अलिन्द में।

प्रश्न 13.
हृदय के किस भाग से (i) शुद्ध रक्त, (ii) अशुद्ध रक्त बाहर जाता है?
उत्तर:

  • बायें निलय से
  • दाहिने निलय से।

प्रश्न 14.
ताप नियमन, ग्लूकोज मात्रा का नियमन, सोडियम, पोटैशियम का नियमन एवं जल की मात्रा का नियमन किस क्रिया द्वारा सम्पन्न होता है?
उत्तर:
यह परासरण नियन्त्रण क्रिया द्वारा सम्पन्न होता है।

प्रश्न 15.
एंजाइम पेप्सिन तथा लाइपेज किस माध्यम में सक्रिय रूप से क्रिया करते हैं?
उत्तर:
अम्लीय माध्यम में।

प्रश्न 16.
यीस्ट में अवायवीय श्वसन के बाद बनने वाले उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर:
इथेनॉल, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा ऊर्जा।

प्रश्न 17.
मानव हृदय का कौन-सा भाग ऑक्सीजनित रुधिर प्राप्त करता है?
उत्तर:
बायाँ भाग।

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प्रश्न 18.
कौन-सी रुधिरवाहिका रक्त हृदय से दूर शुद्धीकरण के लिए ले जाती है?
उत्तर:
फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery)।

प्रश्न 19.
वृक्क की सूक्ष्मतम उत्सर्जन इकाई क्या है?
उत्तर:
नेफ्रॉन (वृक्काणु)।

प्रश्न 20.
हमारी आँत में वसा का पाचन कहाँ होता है?
उत्तर:
छोटी आँत में।

प्रश्न 21.
ऊतकों में गैसों का विनिमय किस प्रकार होता है?
उत्तर:
गैसों का विनिमय ऊतक और रुधिर कोशिकाओं के बीच O2 और CO2 के विसरण द्वारा होता है।

प्रश्न 22.
ऊर्जा कहाँ मुक्त और एकत्र होती है?
उत्तर:
ऊर्जा माइटोकॉण्ड्रिया में मुक्त और एकत्र होती है।

प्रश्न 23.
श्वसन वर्णक किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
श्वसन वर्णक बड़े जंतुओं में पाए जाते हैं। वे हवा से ऑक्सीजन ग्रहण कर फेफड़ों से ले जाते हैं और जिन ऊतकों में ऑक्सीजन की कमी होती है वहाँ पर ले जाकर मुक्त करते हैं।

प्रश्न 24.
मनुष्य में पाए जाने वाले श्वसन वर्णक का नाम लिखिए। यह कहाँ पर पाया जाता है?
उत्तर:
मनुष्य में पाया जाने वाला श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन हैं है। यह लाल रक्त कणिकाओं में पाया जाता है।

प्रश्न 25.
हमारे शरीर में CO2 का परिवहन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
CO2 जल में अधिक घुलनशील है और हमारे रक्त में घुली हुई अवस्था में स्थानान्तरित होती है।

प्रश्न 26.
हमारे शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर:
ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 27.
वहन क्या है?
उत्तर:
वह जैव प्रक्रिया जिसमें पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में ले जाया जाता है, वहन कहलाता है।

प्रश्न 28.
जंतुओं में पदार्थों के परिवहन के लिए उत्तरदायी तंत्र का नाम लिखो।
उत्तर:
परिसंचरण तंत्र।

प्रश्न 29.
मनुष्य में पदार्थों का वहन किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
रुधिर और लसीका।

प्रश्न 30.
प्रत्येक वृक्क में कितने नेफ्रॉन होते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक वृक्क में नेफ्रॉन की संख्या लगभग 10 लाख तक होती है।

प्रश्न 31.
हमारे शरीर में शर्कराओं तथा वसाओं के ऑक्सीकरण से उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हमारे शरीर में शर्कराओं एवं वसाओं के ऑक्सीकरण से बनने वाले पदार्थ हैं – H2O, CO2

प्रश्न 32.
रुधिर में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइ-ऑक्साइड के वाहक का नाम लिखिए।
उत्तर:
लाल रुधिर कोशिकाओं में उपस्थित प्रोटीन हीमोग्लोबिन है।

प्रश्न 33.
शरीर में लसीका कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
शरीर के सभी ऊतकों में कोशिकाओं के बीच के रिक्त स्थान में लसीका पाया जाता है।

प्रश्न 34.
प्लाज्मा जल की कितनी मात्रा पायी जाती है?
उत्तर:
प्लाज्मा में लगभग 90-92 प्रतिशत जल होता है।

प्रश्न 35.
उत्सर्जन क्या है?
उत्तर:
जीवधारियों के शरीर में उपापचय क्रियाओं के फलस्वरूप कई विषाक्त और हानिकारक पदार्थ बनते हैं, इन पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।

प्रश्न 36.
मूत्र क्या है?
उत्तर:
वृक्क में छनन, वरणात्मक पुनः अवशोषण तथा नलिकीय स्रावण प्रक्रियाओं के पश्चात् मूत्राशय में एकत्रित अपशिष्ट द्रव मूत्र कहलाता है।

प्रश्न 37.
मूत्र का संघटन बताइए।
उत्तर:
मूत्र में निम्नलिखित पदार्थ होते हैं-

  • जल
  • यूरिया
  • यूरिक अम्ल
  • विभिन्न

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प्रश्न 38.
मनुष्य के शरीर में कौन-कौन से पदार्थ होते हैं? लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य के शरीर में निम्नलिखित अपशिष्ट पदार्थ होते हैं-

  • गैसीय अपशिष्ट कार्बन डाइ ऑक्साइड, अमोनिया।
  • द्रव अपशिष्ट – अमोनिया लवण, यूरिया तथा यूरिक अम्ल, अतिरिक्त जल आदि।
  • ठोस अपशिष्ट – भोजन के पाचन के बाद बचे पदार्थ, जैसे- रफेज।

प्रश्न 39.
पौधों में कौन-कौन-से अपशिष्ट पदार्थ पाये जाते हैं?
उत्तर:
पौधों में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, क्रिस्टल, गोंद, टेनिन आदि अपशिष्ट पदार्थ के रूप में पाये जाते हैं।

प्रश्न 40.
नेफ्रॉन क्या है?
उत्तर:
मनुष्य का प्रत्येक वृक्क बहुत-सी कुण्डलित नलिकाओं का बना होता है जिन्हें नेफ्रॉन कहते हैं। नेफ्रॉन वृक्क की एक क्रियात्मक इकाई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कुपोषण से क्या तात्पर्य है? इसके कारण भी लिखिए।
उत्तर:
कुपोषण – कुपोषण का तात्पर्य है शरीर का पोषण ठीक से न होना अर्थात् भोजन करने और कोई रोग न होने पर भी शरीर की वृद्धि का न होना इसके कई कारण हैं- अधिक मात्रा में भोजन करना, कम मात्रा में भोजन करना, भोजन का असन्तुलित होना, भोजन का अनियमित होना या शरीर में कोई रोग अथवा दोष होना, जिसके कारण पोषण ठीक से न होता हो।

प्रश्न 2.
पोषण के निम्नलिखित चरणों की क्रिया को लिखिए – (i) अन्तर्ग्रहण, (ii) पाचन, (iii) अवशोषण, (iv) स्वांगीकरण, (v) बहिः क्षेपण या मल परित्याग।
उत्तर:
(i) भोजन का अन्तर्ग्रहण (Ingestion)- शाकाहारी एवं मांसाहारी जन्त में अन्तर्ग्रहण क्रिया द्वारा ठोस या अविसरणशील भोजन को सीधे ही वातावरण से प्राप्त करके शरीर के अन्दर स्थित पाचक अंगों (Digestive organs) तक पहुँचाया जाता है। उच्चस्तरीय बहुकोशिक रीढ़धारी जन्तु सीधे ही मुख द्वारा भोजन को बगैर किसी बाह्य अंग की सहायता से ग्रहण करते हैं।

(ii) पाचन (Digestion) – खाये हुए ठोस या तरल भोजन में जटिल कार्बनिक पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) अविसरणशील होता है जिसे सीधे अवशोषित नहीं एवं तथा किया जा सकता। अतः उसे पाचक रसों (एन्जाइमों) जल की जलीय अपघटन (Hydrolysis) क्रिया द्वारा, क्रमश: मोनोसेकेराइड्स (शर्कराओं) ऐमीनो अम्लों वसा अम्लों के छोटे-छोटे सरल, विसरणशील अणुओं (Mol- ecules) और आयनों (Ions) में बदल दिया जाता है, ताकि उनका सरलता से अवशोषण हो सके।

(iii) अवशोषण (Absorption ) – सरल घुलनशील पचा हुआ भोजन जिसमें ग्लूकोज, शर्करा, ऐमीनो अम्ल, वसा अम्ल आदि होते हैं, आँत से विसरित होकर रुधिर में पहुँचता है, इस क्रिया को अवशोषण (Absorption) कहते हैं। यह कार्य प्रमुख रूप से क्षुद्रान्त्र में होता है।

(iv) स्वांगीकरण (Assimilation ) – अवशोषण के बाद रुधिर में होकर ऐमीनो अम्ल, ग्लूकोज तथा वसा के अणु शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक पहुँचते हैं. जहाँ पर वे प्रोटीन संश्लेषण टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत तथा जीवद्रव्य का निर्माण करते ही

(v) बहिःक्षेपण या मल परित्याग (Egestion) नाल के अन्दर यद्यपि अनेक एन्जाइम्स खाद्य – आहार रह आँत में पदार्थों के ऊपर क्रिया करते हैं फिर भी इनका कुछ अंश अपचित रह है। यह अवशिष्ट पदार्थ चला जाता है जहाँ इसका अधिकांश भाग पानी पुनः अवशोषित हो जाता है तथा शेष टोस अथवा अर्ध ठोस पदार्थ मल के रूप में समय-समय पर गुदा द्वार (anus) द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 3.
आमाशय किसे कहते हैं? उसके तीन प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
आमाशय (Stomach)- आमाशय एक पेशीय थैली होती है जिसकी पेशियाँ संकुचन एवं शिथिलन की सहायता से खाद्य पदार्थ को मथती हैं तथा आमाशयी पाचन की क्रिया पूर्ण होने पर उसे आगे ग्रहणी की ओर धकेलती हैं।

आमाशय के कार्य (Functions of Stomach) –

  • आमाशय भोजन के भण्डारण का कार्य करता है।
  • भोजन को मथने का कार्य करता है।
  • आमाशय की दीवारों से जठर रस स्रावित होता है जो भोजन को पचाने में सहायक होता है।

प्रश्न 4.
आहारनाल से सम्बन्धित पाचक ग्रन्थियों का संक्षेप में वर्णन करते हुए उनके मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर:
1. आमाशय – आमाशय की दीवारों में जठर ग्रन्थियाँ होती हैं जिनसे निम्न जठर रस स्त्रावित होते हैं-

  • ट्रिप्सिन (Trypsin)-यह काइम की शेष प्रोटीन को पेप्टोन तथा पॉलीपेप्टाइड में बदल देता है।
    ट्रिप्सिन + प्रोटीन → पेप्टोन्स + पॉलीपेप्टाइड्स
    काइमोट्रिप्सिन + प्रोटीन → पेप्टोन्स + पॉलीपेप्टाइड्स
  • एमाइलेज (Amylase ) – यह मण्ड को माल्टोज शर्करा में बदल देता है। (स्टार्च + ग्लाइकोजन) + एमाइलेज
  • स्टीएप्सिन (Steapsin) – यह पायसीकृत वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देता है। इमल्सीकृत वसा + स्टीएप्सिन वसीय अम्ल ग्लिसरॉल
  • न्यूक्लिएजेज- ये न्यूक्लिक अम्लों को न्यूक्लियोटाइड्स में विखण्डित करते हैं।
    न्यूक्लिक अम्ल + न्यूक्लिएजेज न्यूक्लियोटाइड्स

2. क्षुद्रात्र में पाचन – भोजन के अधिकांश भाग का पाचन ग्रहणी में हो जाता है फिर भी अवशेष भोजन का पाचन क्षुद्रान्त्र में होता है। करते क्षुद्रान्त्र हैं। की दीवारों में पाचन ग्रन्थियाँ होती हैं, जिनसे आन्त्रीय रस (Intestinal juice) निकलता है। एक दिन में मनुष्य की आँत से 6-7 लीटर आन्त्रीय रस का स्त्रावण होता है। इसमें निम्नलिखित पाचक एन्जाइम होते हैं-

  • इरेप्सिन (Erapsin) – यह पॉलीपेप्टाइडों को ऐमीनो अम्ल में बदलता है।
  • माल्टेज (Maltase ) – यह माल्टोज को ग्लूकोज में बदलता है
  • सुक्रेज (Sucrase) – यह सुक्रोज को फ्रक्टोज तथा ग्लूकोज में बदलता है।
  • लैक्टेज (Lactase) – यह दुग्ध शर्करा (Lac-tose) को ग्लूकोज तथा गैलेक्टोज में बदलता है।
  • लाइपेज (Lipase) – यह शेष वसाओं को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है।

प्रश्न 5.
मुख से लेकर आमाशय तक होने वाली पाचन क्रिया को प्रभावित करने वाले विकारों के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  • टायलिन – यह एक विकार है जो भोजन के मण्ड को शर्करा में बदल देता है।
  • पेप्सिन – यह भोजन के प्रोटीन को पेप्टोन तथा पॉलीपेप्टाइड में बदल देता है।
  • रेनिन- यह दूध की विलेय प्रोटीन (केसीन- Casein) को ठोस एवं अविलेय दही बदल देता है।
  • जठर लाइपेज – वसा को ड्राइ ग्लिसरॉयड्स में बदल देता है।

प्रश्न 6.
जाइलम द्वारा जल एवं खनिज लवणों का वहन पादपों किस बल के अंतर्गत होता है?
उत्तर:
जाइलम में जल के वहन के लिए दो बल उत्तरदायी हैं-
(i) पौधे की जड़ों में उपस्थित जाइलम ऊतक मिट्टी के सम्पर्क में आने पर बड़ी शीघ्रता से आयनों को ऊपर की ओर ग्रहण करते हैं जिससे जड़ों और मिट्टी में आयन सान्द्रता में अन्तर उत्पन्न हो जाता है। अतः मिट्टी से पानी इस आयन सान्द्रता को दूर करने के लिए प्रवेश जड़ों करता है।

(ii) वाष्पोत्सर्जन – यह पौधों में जल के परिवहन का दूसरा तरीका है। पौधों की पत्तियों की कोशिकाओं जल के अणुओं का वाष्पन एक चूषण दाब उत्पन्न करता है जिसके कारण जड़ों की जाइलम कोशिकाओं से पानी ऊपर की ओर खिंचता है।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 7.
पौधों के लिए वाष्पोत्सर्जन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:

  • वाष्पोत्सर्जन जड़ों से अवशोषित जल व खनिज लवणों के उपरिमुखी गति के लिए सहायक है।
  • वाष्पोत्सर्जन पौधों में तापमान नियन्त्रण के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 8.
फ्लोएम में भोजन का संवहन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
फ्लोएम में भोजन का स्थानान्तरण सक्रिय रूप से ऊर्जा के उपयोग द्वारा होता है। यह ऊतक का परासरण दाब बढ़ा देता है जिससे जल इसमें प्रवेश कर जाता है। यह दाब पदार्थों को फ्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता जहाँ दाब कम होता है। यह फ्लोएम को पादप की आवश्यकतानुसार पदार्थों का स्थानांतरण कराता है।
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 1

प्रश्न 9.
एक नेफ्रॉन (nephron) अथवा मूत्रजन (वृक्क) नलिका का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए। (वर्णन की आवश्यकता नहीं) अथवा मानव की वृक्क नलिका की संरचना का स्वच्छ
उत्तर:
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 2

प्रश्न 10.
मनुष्य के उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 3

प्रश्न 11.
उत्सर्जन किसे कहते हैं? मनुष्य के शरीर में बनने वाले वर्ज्य पदार्थ कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
उत्सर्जन – वह प्रक्रम जिसमें जीवधारियों के शरीर में हानिकारक उपापचयी वर्ज्य पदार्थों का निष्कासन होता है, उत्सर्जन कहलाता है।

मनुष्य के शरीर में बनने वाले वर्ज्य पदार्थों को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
(1) नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ मानव शरीर में मेटाबोलिक क्रियाओं के समय इन पदार्थों का उत्पादन प्रोटीन के ऑक्सीकरण के परिणामस्वरूप होता है। मानव में इन पदार्थों का उत्सर्जन वृक्कों द्वारा होता है ये पदार्थ हैं – यूरिया, यूरिक अम्ल, अमोनिया आदि।

(2) कार्बनेशियस वर्ज्य पदार्थ शरीर की विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के अन्तर्गत कुछ कार्बनयुक्त उत्सर्जी पदार्थों का उत्पादन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा तीनों भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से होता है। मनुष्य में इन पदार्थों का उत्सर्जन फेफड़ों द्वारा किया जाता है।
उदाहरण- कार्बन डाइ ऑक्साइड।

प्रश्न 12.
वृक्क के कार्य लिखिए।
उत्तर:
वृक्क के निम्नलिखित कार्य हैं-

  • नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों का शरीर से बाहर निकालना।
  • शरीर में जल की मात्रा का नियमन करना।
  • शरीर में लवर्णों की पर्याप्त मात्रा का नियमन करना।
  • विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना।

प्रश्न 13.
उत्सर्जन का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
उत्सर्जन का महत्त्व-

  • हानिकारक पदार्थों का नियन्त्रण करना।
  • परासरण नियमन बनाए रखना।
  • शरीर में समस्थापन स्थापित करना।
  • जल सन्तुलन, लवण सन्तुलन तथा अम्ल-क्षार सन्तुलन को बनाए रखना।

प्रश्न 14.
निम्न प्राणियों को उनके अन्तिम उत्सर्जी पदार्थ के आधार पर वर्गीकृत कीजिए- पक्षी, मेढक, मछली, अमीबा, छिपकली, मनुष्य।
उत्तर:

  • मछली, अमीबा, अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं अतः ये अमोनोटेलिक होंगे।
  • मेढक, मनुष्य, यूरिया का उत्सर्जन करते हैं अतः ये यूरियोटेलिक होंगे।
  • पक्षी, छिपकली यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं अतः ये यूरिकोटेलिक होंगे।

प्रश्न 15.
अधोत्वचा किसे कहते हैं?
उत्तर:
अधोत्वचा (Hypodermis ) – त्वचा के नीचे शिथिल संयोजी ऊतकों की एक परत होती है, जिसे अधोत्वचा कहते हैं। यह त्वचा का भाग तो नहीं होती, परन्तु इसका कार्य त्वचा को शरीर के भीतरी के ऊतकों से जोड़ने का होता है। इस परत में वसा (Fat) भी होती है, जो शरीर की बाह्य आघातों से रक्षा करने तथा शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकने में, ऊष्मा अवरोधक (Heat insulator) का कार्य करती है।

प्रश्न 16.
पोषण क्या है? पोषण की आवश्यकता क्यों पड़ती है? पोषण के मुख्य प्रकारों का उल्लेख कीजिए। पाचन एवं पोषण में अन्तर बताइए।
उत्तर:
भोजन ग्रहण से लेकर स्वांगीकृत तथा भविष्य के लिए उसे शरीर में संगृहीत करने तक की सभी क्रियाओं का सम्मिलित नाम पोषण है। शरीर के उचित विकास हेतु पोषण की आवश्यकता पड़ती है।

पोषण दो प्रकार से होता है-

  • स्वपोषण
  • परपोषण।

स्वपोषण – जब जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं तो इसे स्वपोषण कहते हैं।

परपोषण – जब जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बनाता वह दूसरे पर निर्भर रहता है तो इस क्रिया को परपोषण कहते हैं।
पोषण में भोजन को शरीर में ग्रहण करने से उत्सर्जन तक की सभी क्रिया सम्मिलित होती है, जबकि पाचन पोषण की प्राथमिक क्रिया है।

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प्रश्न 17.
प्रकाश संश्लेषण हेतु आवश्यक पदार्थ तथा इसके उत्पाद क्या हैं? सम्बन्धित समीकरण देकर बताइए।
अथवा
प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों का नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक पदार्थ पौधे अपना भोजन चार पदार्थों कार्बन डाइऑक्साइड, जल, क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की सहायता बनाते हैं।
(1) कार्बन डाइऑक्साइड (Carbondixoide) – समस्त जीवधारियों की श्वसन क्रिया वायुमण्डल की ऑक्सीजन का अवशोषण होता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड वायुमण्डल में मुक्त की जाती है। पौधे इस कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करने की क्षमता रखते हैं। वे अपना भोजन बनाने के लिए इसका उपयोग करते हैं।

(2) जल ( Water ) – आप देखते हैं कि किसान अपनी फसलों को पानी देते हैं। वे ऐसा क्यों करते हैं। पौधों की जड़ें इस पानी को अवशोषित करती हैं और जाइलम द्वारा पत्तियों तक पहुँचा देती हैं। पौधे पानी के साथ-साथ अधिकांश खनिज लवण भी अवशोषित करते हैं। खनिज लवण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में अपना योगदान देते हैं।

(3) क्लोरोफिल (Chlorophyll ) – क्लोरोफिल पत्तों में हरे रंग का वर्णक है। इसके चार घटक हैं। क्लोरोफिल ए, क्लोरोफिल बी, कैरोटिन तथा जैथोफिल। इनमें से क्लोरोफिल ए और बी हरे रंग के होते हैं और सूर्य की प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करके प्रकाश संश्लेषण क्रिया हेतु उपलब्ध कराते हैं। क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं। इसलिए जिन कोशिकाओं में क्लोरोफिल होता है उन्हीं कोशिकाओं को प्रकाश संश्लेषी कहते हैं।

(4) प्रकाश (Light) – प्रकाश संश्लेषण में सूर्य प्रकाश का प्राकृतिक स्रोत है, परन्तु कुछ कृत्रिम स्रोत भी इस क्रिया को करने में समर्थ होते हैं। क्लोरोफिल प्रकाश में से बैंगनी, नीला तथा लाल रंग को ग्रहण करता है, परन्तु संश्लेषण की दर लाल प्रकाश में सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 18.
प्रकाश संश्लेषण के प्रकाश-रासायनिक चरण की प्रक्रियाएँ आवश्यक समीकरण देकर समझाइए।
अथवा
प्रकाश-संश्लेषण में प्रकाशित अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रकाश- रासायनिक अभिक्रिया (Photo- chemical Reactions) – प्रकाश संश्लेषण के प्रथम चरण में पौधे के हरे भागों की कोशिकाओं में उपस्थित हरित लवक का प्रकाश संश्लेषी रंग का पदार्थ, क्लोरोफिल / (Chlorophyll), प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करता है – जिससे क्लोरोफिल के अणु ऊर्जित (energised) अथवा उत्तेजित (excited) होकर इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करते हैं।

इस प्रकार निकले ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन हरित लवक (chloroplast) 1 में उपस्थित इलेक्ट्रॉनग्राहियों (electron acceptors) की सहायता से एक यौगिक एडीनोसीन डाइफॉस्फेट अथवा ए.डी.पी. ADP को ऑक्सीकृत करके एडीनोसीन ट्राइफॉस्फेट : ATP में बदल देते हैं। इस परिवर्तन में प्रकाश ऊर्जा का स्थानान्तरण क्लोरोफिल के अणु से इलेक्ट्रॉनों को तथा इलेक्ट्रॉनों से ADP के अणुओं को होता है – अर्थात् यह ऊर्जा ATP अणु में संचित हो जाती है। इस क्रिया को निम्नवत् लिखा जा सकता है-
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 4
इसके अतिरिक्त प्रकाश अभिक्रिया में जल के अणु का प्रकाश ऊर्जा द्वारा विघटन होकर हाइड्रोजन आयन (H+) प्राप्त होते हैं-
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 5
प्रकाश अभिक्रिया में उत्पन्न ATP के अणुओं की संचित ऊर्जा का उपयोग क्रिया अगले चरण, अप्रकाशिक अभिक्रिया (dark reaction) में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल से ग्लूकोस के संश्लेषण में होता है।

प्रश्न 19.
प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक क्रिया से क्या तात्पर्य है? इसके विभिन्न चरणों को आवश्यक आरेख बनाकर प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
अप्रकाशिक अभिक्रिया अथवा जैव रासायनिक संश्लेषण (Dark Reaction or Bio-chemical Reaction ) – अप्रकाशिक अभिक्रिया चक्रीय प्रक्रिया है, जिसमें उत्पाद प्राप्त होने के साथ-साथ प्रारम्भिक अभिकर्मक का पुनरुत्पादन होता रहता है। इसे चित्र में प्रदर्शित चक्र द्वारा समझा जा सकता है। इसे केल्विन बेन्सन चक्र (Kelvin- Benson cycle) कहते हैं।

(1) प्रकाशहीन क्रियाओं के प्रथम चरण में वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) रन्ध्रों के माध्यम से पत्ती में प्रवेश करती है। CO2 एक 5- कार्बनधारी अणु राइबोलोस – 1, 5- बाइफॉस्फेट ( RuBP) के द्वारा ग्रहण की जाती पत्ती में पहले से उपस्थित रहता है। CO2 एवं जल (H2O) के संयोग से 3 कार्बनधारी यौगिक, 3- फॉस्फोग्लिसरिक एसिड (PGA) के दो अणुओं का निर्माण होता है। इस क्रिया को कार्बोक्सिलीकरण (Carboxy- lation) कहते हैं। यह क्रिया राइबोलोस बाईफॉस्फेट कार्बोक्सिलेज Rubisco नामक एन्जाइम के द्वारा उत्प्रेरित की जाती है।
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 6

(2) कार्बोक्सिलीकरण की अभिक्रिया के पश्चात् PGA का अपचयन होता है। इस क्रिया में उन ATP एवं NADPH अणुओं का उपयोग होता है जो प्रकाश- रासायनिक अभिक्रिया में निर्मित हुए थे। अपचयन हेतु आवश्यक ऊर्जा ATP के ADP में परिवर्तन से तथा हाइड्रोजन, NADPH के NADP में परिवर्तन से प्राप्त होती है। PGA के अपचयन से 3- कार्बनधारी अणु ग्लिसरेल्डिहाइड-3 फॉस्फेट नामक यौगिक का निर्माण होता है। इस 3- कार्बनधारी अणु को ट्रायोस फॉस्फेट कहते हैं। इससे कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है।

(3) अपचयन की क्रिया में ट्रायोस फॉस्फेट के निर्माण से बचे पदार्थों राइबोलोस-1, 5- बाइफॉस्फेट का पुनरुद्भवन (regeneration) होता है। इसके लिए ATP की आवश्यकता होती है, जिससे एक फॉस्फेट मूलक तथा ATP की ऊर्जा का उपयोग पुनरुद्भवन में होता है तथा ADP शेष है। यह ADP प्रकाशिक क्रिया में पुन: ATP के लिए प्रयुक्त होता है, तथा पुनरुद्भवन से बने RuBP का प्रयोग, पुनः चक्र को आगे बढ़ाने में होता है।

(4) दिए गए चक्र में बने ट्रायोस-फॉस्फेट (3-कार्बनधारी) के दो अणुओं के संयोग से 6- कार्बनधारी कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोस, C6H12O6) बनता है। ग्लूकोस अणुओं के परस्पर संयोग से शर्करा (Sucrase, C12H22O11), स्टार्च [Starch, (C6H10O5)n], सेलुलोस आदि का निर्माण होता है जो पादप कोशिकाओं के भी भोज्य पदार्थ, पादपों में संचित खाद्य पदार्थ एवं कोशिकाभित्ति बनाने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित का अन्तर स्पष्ट कीजिए-
(i) श्वसन तथा साँस लेना,
(ii) श्वसन तथा दहन,
(iii) ऑक्सी- श्वसन तथा अनॉक्सी – श्वसन।
उत्तर:
(i) श्वसन तथा साँस लेना (Respira- tion and Breathing) – साँस लेना एक भौतिक क्रिया है। साँस लेने में निःश्वसन के समय जन्तु वातावरण से ऑक्सीजन अपने शरीर (फेफड़ों) में लेता है जहाँ उसका विसरण द्वारा रक्त में अवशोषण हो जाता है।

इसके विपरीत श्वसन एक रासायनिक क्रिया है जो प्रत्येक जीवधारी की प्रत्येक कोशिका में होती है। इस क्रिया के लिए आवश्यक ऑक्सीजन का कोशिका से फेफड़ों तक परिवहन का कार्य रुधिर के प्रवाह द्वारा किया जाता है।

(ii) श्वसन तथा दहन में अन्तर (Differences between Respiration and Combustion)

श्वसन (Respiration) दहन (Combustion)
1. यह एक जैविक क्रिया है जो केवल सजीव कोशिकाओं में ही होती है। 1. यह एक अजैविक क्रिया है। सजीव कोशिकाओं से इसका कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
2. यह क्रमबद्ध अनेक चरणों में होती है। 2. इसका कोई क्रमबद्ध चरण नहीं होता है। यह एक ही चरण में होती है।
3. यह एन्जाइमों (Enzymes) द्वारा नियन्त्रित होती है। 3. एन्जाइमों का इस क्रिया से कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
4. इसमें ऊर्जा का अधिकांश भाग ATP (adenosine tri-phosphate) के रूप में संचित होता है। 4. इसमें ऊर्जा का अधिकांश भाग ऊष्मा (heat) तथा प्रकाश (light) के रूप में मुक्त होता है।
5. श्वसन क्रिया शरीर के सामान्य ताप पर होती है। 5. दहन अति उच्च ताप पर होता है।

(iii) ऑक्सी-श्वसन तथा अनॉक्सी-श्वसन में अन्तर
(Differences between Respiration and Combustion)

ऑक्सी-श्वसन (Aerobic Respiration) अनॉक्सी-श्वसन (Anaerobic Respiration)
1. ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। 1. ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है।
2. इसमें भोज्य पदार्थ (Glucose) का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। 2. इसमें भोज्य पदार्थ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
3. इसमें क्रिया के अन्त में कार्बन डाइऑक्साइड व एथिल ऐल्कोहॉल बनता है। 3. इसमें क्रिया के अन्त में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनता है।
4. इसमें ग्लूकोस के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 k.cal. ऊर्जा उत्पन्न होती है। 4. इसमें बहुत कम ऊर्जा लगभग 27 k cal.  उत्पन्न होती है।
5. इस प्रकार का श्वसन अधिकांश जीवों में होता है। 5. इस प्रकार का श्वसन कवक, जीवाणु आदि में होता है।

प्रश्न 21.
हीमोग्लोबिन तथा ऑक्सी- हीमोग्लोबिन में क्या अन्तर है? रक्त का रंग किस तत्त्व के कारण लाल होता है?
उत्तर:
हीमोग्लोबिन तथा ऑक्सी- हीमोग्लोबिन में मुख्य अन्तर यह होता है कि ऑक्सी- हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन युक्त होता है जबकि हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन विहीन होता हैं। ऑक्सी- हीमोग्लोबिन कोशिकाओं तक पहुँचकर O2 को मुक्त कर देता है और वहाँ से CO2 को ले आकर फेफड़े में मुक्त करता है। रक्त का लाल रंग हीमोग्लोबिन के हीम (haem) नामक रंगा (pigment) पदार्थ के कारण होता है।

प्रश्न 22.
‘हीमोग्लोबिन’ क्या होता है? इसका कार्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) – लाल रुधिर कणिकाओं में लौह युक्त प्रोटीन पाया जाता है जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। इसका रंग लाल होता है इसी कारण रुधिर कणिकाएँ लाल होती हैं। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन में भाग लेता है।

हीमोग्लोबिन के कार्य (Functions of Haemoglobin) –
(i) श्वसनांगों में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को अवशोषित करके एक अस्थायी यौगिक बनाता है जिसे ऑक्सीहीमोग्लोबिन (Oxyhaemo-globin) कहते हैं।
हीमोग्लोबिन + ऑक्सीजन → ऑक्सीहीमोग्लोबिन (श्वसनांगों में)
ऑक्सीहीमोग्लोबिन रुधिर परिसंचरण द्वारा उन कोशिकाओं तक पहुँचता है, जहाँ ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। वहाँ पर ऑक्सीहीमोग्लोबिन विखण्डित होकर ऑक्सीजन को मुक्त कर देती है। मुक्त ऑक्सीजन कोशिकाओं में विसरित होकर श्वसन में भाग लेता है।
ऑक्सीहीमोग्लोबिन → हीमोग्लोबिन + ऑक्सीजन (कोशिकाओं में)

(ii) हीमोग्लोबिन श्वसन क्रिया के उपरान्त कोशिकाओं में मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलकर अस्थायी यौगिक बनाता है जिसे कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (Carbo- xyhaemoglobin) कहते हैं।
हीमोग्लोबिन + CO2 → कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (कोशिकाओं में)
यह यौगिक परिसंचरण द्वारा श्वसनांगों में पहुँचकर हीमोग्लोबिन तथा कार्बन डाइऑक्साइड में विभक्त हो जाता है जहाँ से कार्बन डाइ ऑक्साइड वातावरण हो जाती है।
कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन → हीमोग्लोबिन + CO2 (फेफड़ों में)
हीमोग्लोबिन फेफड़ों में पुनः ऑक्सीजन से संयोग करती है तथा यह क्रिया बारम्बार होती रहती है।

प्रश्न 23.
धमनी एवं शिरा में चार अन्तर लिखिए।
उत्तर:
धमनी तथा शिरा में अन्तर (Differences between Arteries and Veins)

घमनी (Arteries) शिरा (Veins)
1. रुधिर को हददय से दूर विभिन्न अंगों तथा ऊतकों को ले जाती है। 1. विभिन्न ऊतकों व अंगों से रक्त हृदय में लाती है।
2. इनकी दीवार, मोटी, पेशीय, अधिक लचीली और न पिचकने वाली होती है। 2. इनकी दीवार, पतली, कम पेशीच, न के बराबर लचीली और पिचकने वाली होती है :
3. इसमें कपाट नहीं होते हैं। 3. इसमें कपाट होते हैं :
4. इनमें रक्त अधिक दबाव व झटके के साथ तेज गति से बहता है। 4. इनमें रक्त कम दबाव के साथ धीमी गति से बहता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘पोषण’ से क्या तात्पर्य है? मानव में पोषण के विभिन्न चरणों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
पोषण (Nutrition) सभी जीवों की दो प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं- एक ऊर्जा की उपलब्धि और दूसरा नये जीवद्रव्य का निर्माण। इन दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति पोषण द्वारा ही होती है। सजीवों द्वारा ग्रहण किया जाने वाला भोजन विभिन्न प्रकार का होता है, जो सीधे शरीर के द्वारा ग्रहण नहीं किया जा सकता। अतः पहले उसे शरीर के साथ विलीन करने हेतु यह आवश्यक होता है कि उसे इस योग्य बनाया जाय जिससे कि उसका शोषण शरीर द्वारा सरलता से हो सके।

इस हेतु पहले भोजन का पाचन होता है, जिसमें भोजन शोषण होने योग्य बन जाता है और शोषण कर लिया जाता है, जिसे अवशोषण कहते हैं। अवशोषण के बाद भोजन का रुधिर वाहिनियों के साथ शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचकर वहाँ के ऊतकों में विलीन हो जाता है अथवा उनमें संश्लेषित होकर संगृहीत रहता है।

कोशिकाओं में इस संगृहीत भोजन कोशिकीय श्वसन द्वारा ऑक्सीकरण होता है तो उसमें से रासायनिक बंध टूटने पर ऊर्जा मुक्त होती है जो कोशिकीय कार्यों के उपयोग में आती है। स्थूल रूप से वे सभी क्रियाएँ जिनके अन्तर्गत भोजन शरीर के अन्दर ग्रहण किया जाता है (पौधों द्वारा निर्माण किया जाता है) पाचन, प्रचूषण तथा संश्लेषण के उपरान्त जीवद्रव्य में विलीन होकर शरीर की वृद्धि करता है तथा अपचयित भोजन शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है, उसे पोषण कहते हैं।

मानव में पोषण के चरण (Steps of Nutrition in Man)
अन्य जन्तुओं की भाँति मानव में भी पोषण के 5 चरण होते हैं-

  • भोजन का अन्तर्ग्रहण (Ingestion)
  • पाचन (Digestion)
  • अवशोषण (Absorption)
  • स्वांगीकरण (Assimilation)
  • बहि: क्षेपण (Eges- tion) या मलत्याग।

1. भोजन का अन्तर्ग्रहण ( Ingestion) – मनुष्य विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों को अपने हाथों की सहायता से मुख में पहुँचाता है तथा दाँतों से चबाकर उसे छोटे-छोटे खण्डों / कणों में विभाजित करके निगल जाता है। जल तथा अन्य द्रव खाद्यों को वह मुख के द्वारा चूसकर अन्दर लेता है तथा निगल जाता है।

2. पाचन (Digestion) – खाये हुए ठोस या तरल भोजन में जटिल कार्बनिक पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा ) अविसरणशील होता है जिसे सीधे ही शोषित नहीं किया जा सकता। अतः उसे पाचक रसों ( एन्जाइमों) एवं जल की जलीय अपघटन (Hydrolysis) क्रिया द्वारा क्रमश: मोनोसैकेराइड्स (शर्कराओं) ऐमीनो अम्लों तथा वसा अम्लों के छोटे-छोटे सरल, विसरणशील अणुओं (Mol- ecules) और आयनों (Ions) में बदल दिया जाता है ताकि उनका शोषण सरलता से हो सके।

अतः पाचन क्रिया ठोस, अविसरणशील खाद्य पदार्थों के जटिल अणुओं को सरल विसरणशील और शोषण योग्य आयनों तथा अणुओं में विभाजित करने की प्रक्रिया होती है। इस तरह ये पदार्थ विसरण और परासरण द्वारा आमाशय तथा दाँतों की श्लेष्मा कला में फैली रुधिर कोशिकाओं के रुधिर में मिलकर विभिन्न ऊतकों में पहुँच सकते हैं।

3. अवशोषण (Absorption) – सरल घुलनशील पाचित भोजन जिसमें ग्लूकोज, शर्करा, ऐमीनो अम्ल, वसा अम्ल आदि होते हैं, आँत से विसरित होकर रुधिर में पहुँचने की क्रिया को अवशोषण (Absorption) कहते हैं। यह कार्य प्रमुख रूप से आन्त्र द्वारा होता है।

4. स्वांगीकरण (Assimilation) – अवशोषण के बाद रुधिर में होकर ऐमीनो अम्ल, ग्लूकोज तथा के अणु शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तक पहुँचते हैं, जहाँ पर वे प्रोटीन संश्लेषण, टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत तथा जीवद्रव्य का निर्माण करते हैं। अतः पचे हुए भोज्य पदार्थों को जटिल या घुलनशील पदार्थों के रूप में विभिन्न ऊतकों के कोशिका द्रव्य में विलीन होने की क्रिया को स्वांगीकरण (Assimilation) कहते हैं।

ऐमीनो अम्ल से एन्जाइम्स के प्रोटीनों का भी निर्माण होता है जो शरीर की रासायनिक क्रिया में भाग लेते हैं। ऐमीनो अम्ल यदि आवश्यकता से अधिक होते हैं तो यकृत द्वारा उसे अमोनिया और अमोनिया से यूरिया में परिवर्तित कर दिया जाता है। यूरिया को वर्ज्य पदार्थों के रूप में मूत्र के साथ बाहर निकाल दिया जाता ऐमीनो अम्ल की भाँति ग्लूकोज के ही रूप में अथवा है। ग्लाइकोजेनेसिस द्वारा ग्लाइकोजन के रूप में संगृहीत रहता है।

5. बहिःक्षेपण या मल परित्याग (Egestion)- आहार नाल के अन्दर यद्यपि अनेक एन्जाइम्स खाद्य पदार्थों के ऊपर क्रिया करते हैं फिर भी इनका कुछ अंश अपचा रह जाता है। यह अपचा अवशिष्ट पदार्थ एककोशिकीय जीवों में खाद्य धानी के अन्दर ही रहता है और इस कार्य के लिए कोई छिद्र अथवा निश्चित स्थान नहीं होता है। यह धीरे-धीरे शरीर की सतह तक पहुँचता है और अन्त में अपचा पदार्थ खाद्यधानी के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion) – भोजन के पाचन के फलस्वरूप आवश्यक अवयव जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, स्वांगीकरण के फलस्वरूप रक्त में पहुँचते हैं। रक्त के साथ ये शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं जहाँ जैव रासायनिक प्रक्रिया के उपरान्त ऊर्जा उत्पन्न होती है। जिसका उपयोग मनुष्य विभिन्न कार्यों के सम्पादन में करता है अतः भोजन ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 2.
पाचन से आप क्या समझते हैं? यकृत उदरगुहा में कहाँ स्थित होता है? पित्त रस कहाँ बनता है? इसके कार्य का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पाचन (Digestion) – जटिल अघुलनशील भोज्य पदार्थों को सरल घुलनशील इकाइयों में बदलने की क्रिया पाचन कहलाती है। पाचन के फलस्वरूप शरीर की कोशिकाएँ भोज्य पदार्थों का प्रयोग कर सकती हैं।

भोज्य पदार्थों का पाचन दो प्रकार से होता है- यान्त्रिक या भौतिक पाचन (mechanical or physical diges-tion) तथा (2) रासायनिक पाचन (chemical digestion)।
1. यान्त्रिक या भौतिक पाचन (Mechanical or Physical Digestion)- मुखगुहा में भोजन को चबाना, आमाशय में भोजन की लुगदी बनना, आहारनाल की पेशियों में क्रमाकुंचन गतियाँ आदि यान्त्रिक पाचन या भौतिक पाचन कहलाता है।

2. रासायनिक पाचन (Chemical Digestion) – पाचक एन्जाइम जटिल, अघुलनशील भोज्य पदार्थों पर रासायनिक क्रिया करके उन्हें सरल घुलनशील इकाइयों में बदल देते हैं।
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि है। यह उदरगुहा में डायाफ्राम के नीचे तथा आमाशय के ऊपर स्थित होता है। पित्त रस का निर्माण यकृत में होता है।

पित्त रस के कार्य (Functions of Bile Juice) –

  • यह भोजन के अम्लीय माध्यम को क्षारीय बनाता है।
  • इसमें कोई पाचक एन्जाइम नहीं होता फिर भी पाचन में इसका बहुत महत्त्व है।
  • यह आँत में क्रमाकुंचन गति को बढ़ाता है ताकि पाचक रस काइम में मिल सके।
  • यह वसा का पायसीकरण करता है ताकि स्टीएप्सिन नामक एन्जाइम्स वसा का अधिकतम पाचन कर सके।

प्रश्न 3.
मुँह से लेकर कोशिका में अवशोषित होने तक भोजन में होने वाले परिवर्तनों को सम्बन्धित अंगों का सन्दर्भ देते हुए बताइए।
उत्तर:
कोशिकाओं में अवशोषित होने के पहले भोजन का पाचन होना आवश्यक है। मनुष्य द्वारा खाये गये ठोस तथा तरल खाद्य पदार्थ मुख्यतः जटिल कार्बोहाइड्रेट (स्टॉर्च, शर्करा), प्रोटीन तथा वसा के रूप में होते हैं, जिनका कोशिकाओं द्वारा सीधा उपयोग नहीं किया जा सकता। पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों में इन पदार्थों को विभिन्न रासायनिक एवं एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं द्वारा सरल शर्कराओं (ग्लूकोज, फ्रक्टोज आदि) सरल ऐमीनो अम्लों तथा सरल वसा अम्लों में बदल दिया जाता है जिससे ये अवशोषित होकर रुधिर द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाये जाते हैं।

पाचन तन्त्र के निम्नलिखित अंग इस कार्य को करते हैं-

  • मुखगुहा
  • आमाशय
  • ग्रहणी
  • क्षुद्रान्त्र।

(i) मुखगुहा (Buccal Cavity) – इसमें मनुष्य दाँतों से ठोस भोजन को पीसकर लुग्दी में बदल देता है। इसके साथ मुँह में लार ग्रन्थियों द्वारा स्रावित एन्जाइम टायलिन (Ptylin) भोजन में उपस्थित स्टॉर्च को शर्करा में बदल देता है।

(ii) आमाशय (Stomach) – मुखगुहा से भोजन लुग्दी के रूप में, ग्रास नली द्वारा आमाशय में पहुँचता है। आमाशय की दीवार में स्थित जठर ग्रन्थियों से जठर रस Juice) स्रावित होता है जिसमें हाइड्रोक्लोरिक (Gastric एसिड तथा पेप्सिन (Pepsin) एवं रेनिन (Renin) नामक एन्जाइम होते हैं।

हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन के माध्यम को अम्लीय बनाता है जिससे भोजन के सड़ने (Fermen- tation) की क्रिया रुकती है तथा हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं। पेप्सिन की क्रिया से जटिल प्रोटीनों के आंशिक पाचन से पेप्टोन तथा पॉलीपेप्टाइड बनते हैं। रेनिन एन्जाइम दूध की प्रोटीन, केसीन को दही में बदल देता है।

(iii) ग्रहणी (Duodenum) – आमाशय में अंशत: पचा हुआ भोजन, जिसे काइम (Chyme) कहते हैं, ग्रहणी मिलता है। में पहुँचता है। यहाँ पर यकृत (liver) से स्रावित पित्त रस (bile) तथा अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा सावित अग्न्याशयी रस (Pancreatic Juice) भोजन में पित्त रस भोजन के माध्यम को क्षारीय बना देता है तथा भोजन में उपस्थित वसा (Fat) का पायसीकरण (Emulsification) – अर्थात् अत्यन्त सूक्ष्म कणों में परिवर्तन करता है। इससे वसा का पाचन सुगम हो जाता है।

(iv) क्षुद्रान्त्र ( Small Intestines ) – क्षुद्रान्त्र में ग्रहणी से आने वाले भोजन का पाचन पूर्ण होता है। क्षुद्रान्त्र में भोजन के सभी तत्त्वों के पूर्ण पाचन से प्राप्त पदार्थ (ऐमीनो अम्ल, ग्लूकोज, फ्रक्टोज, वसा अम्ल आदि) का अवशोषण होता है। इसके लिए क्षुद्रान्त्र की दीवार में असंख्य रसांकुर होते हैं, जिनसे होकर भोजन के पचे हुए पोषक तत्त्व विसरण द्वारा रुधिर प्लाज्मा में पहुँच जाते हैं तथा यकृत (Liver) में चले जाते हैं।

यकृत में इनका संचय होता है तथा शरीर की आवश्यकतानुसार ये पोषक तत्त्व रुधिर द्वारा शरीर के सभी भागों में पहुँचते हैं। रुधिर कोशिकाओं से रुधिर प्लाज्मा छन-छनकर लसीका के रूप में निकलता तथा शरीर के विभिन्न अंगों की कोशिकाओं के सम्पर्क में आता है। ये कोशिकाएँ रुधिर प्लाज्मा से ही आवश्यक पोषक तत्त्वों का अवशोषण करके उनका उपयोग करती हैं।

प्रश्न 4.
मनुष्य की आहारनाल का नामांकित चित्र बनाइए।
अथवा
आहार नली के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
अथवा
मनुष्य के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
मुख, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, ग्रहणी, क्षुद्रांत्र, वृहदांत्र, मलाशय, गुदा।
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 7

प्रश्न 5.
रुधिर वाहिनियाँ कितने प्रकार की होती हैं? इनके कार्य समझाइए।
अथवा
धमनी और शिराओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
विभिन्न रुधिर वाहिनियों के नाम तथा उनके कार्य बताइए।
अथवा
रुधिर वाहिनियाँ किसे कहते हैं? इनके प्रकार लिखिए।
उत्तर:
रुधिर वाहिनियाँ (Blood Vessels): शरीर में रुधिर का प्रवाह करने वाली वाहिनियों को रुधिर वाहिनियों रुधिर वाहिनियाँ हैं। हृदय से शुद्ध रुधिर का प्रवाह शरीर के समस्त भागों में होता है तथा शरीर में से अशुद्ध रक्त को एकत्र करके रुधिर वाहिनियाँ पुनः हृदय में पहुँचाती हैं। किसी भी रुधिर वाहिनी में रक्त का प्रवाह केवल एक ही दिशा में होता है। रुधिर वाहिनियाँ विभिन्न आकार की होती हैं सबसे मोटी वाहिनी का व्यास लगभग 1 सेमी तथा सबसे पतली वाहिनी का व्यास लगभग 0.001 मिमी होता है। रुधिर वाहिनियाँ तीन प्रकार की होती हैं-
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 8
1. धमनियाँ (Arteries) – जो वाहिनियाँ हृदय से रुधिर को शरीर के विभिन्न भागों में वितरित करती हैं, उन्हें धमनियाँ कहते हैं। इनमें सामान्यतः शुद्ध रुधिर (oxy- genated blood) बहता है परन्तु पल्मोनरी धमनी में अशुद्ध रुधिर (Deoxygenated धमनियों की दीवारें अपेक्षाकृत मोटी, पेशीय तथा लचीली blood) प्रवाहित होता है। होती हैं। अतः इसकी गुहा पतली होती है। यही कारण है
कि धमनियाँ हृदय के पम्प करते समय अन्दर से रुधिर के दाब को सहन कर लेती हैं।

2. शिराएँ (Veins) – जो वाहिनियाँ शरीर के विभिन्न अंगों से रुधिर को एकत्रित करके हृदय में पहुँचाती हैं उन्हें शिराएँ कहते हैं। इनमें सामान्यतः अशुद्ध रुधिर बहता है, परन्तु पल्मोनरी शिरा में शुद्ध रुधिर बहता है। शिराओं की दीवारें पतली होती हैं। इनकी गुहा अधिक चौड़ी होती है। अधिकांश शिराओं में कपाट (valve) लगे होते हैं, जो रुधिर को हृदय की और जाने देते हैं परन्तु वापस नहीं आने देते।

3. रुथिर केशिकाएँ (Blood Capillaries) – धमनियाँ सिरों पर पतली-पतली शाखाओं में बँट जाती हैं जिन्हें धमनिकाएँ (arterioles) कहते हैं। धर्मानिकाएँ विभिन्न ऊतकों में प्रवेश कर पुनः विभाजित होकर पतली-पतली केशिकाएँ (capillaries) बनाती हैं। ये केशिकाएँ पुनः मिलकर शिरकाओं (venules) का निर्माण करती हैं और शिरकाएँ पुनः आपस में मिलकर शिराओं (veins) का निर्माण करती हैं। रुधिर केशिकाएँ बहुत महीन होती हैं। इनके भित्ति की मोटाई केवल एक कोशिका जितनी होती है। केशिकाओं की भित्ति पानी, छोटे-छोटे अणुओं, घुलित खाद्य पदार्थों, अवशिष्ट पदार्थों, कार्बन डाइ ऑक्साइड तथा ऑक्सीजन के लिए पारगम्य (permeable) होती हैं।

अतः रुधिर केशिका तथा ऊतक कोशिकाओं के बीच उपयुक्त सभी पदार्थों का आदान-प्रदान होता है तथा रुधिर के माध्यम से आवश्यक पदार्थों का परिसंचरण भी होता है। केशिकाएँ फेफड़ों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइ ऑक्साइड का आदान-प्रदान करती हैं। केशिकाओं का व्यास बहुत पतला होता है। यही कारण है कि लाल रुधिर कोशिकाएँ पंक्तिबद्ध होकर एक-एक करके आगे बढ़ती हैं।

प्रश्न 6.
लसीका’ क्या होता है? इसकी संरचना तथा कार्यों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
लसीका (Lymph):
लसीका एक रंगहीन तरल पदार्थ है जो ऊतकों एवं रुधिर वाहिनियों के बीच के रिक्त स्थान में पाया जाता है। यह रुधिर प्लाज्मा का ही अंश है जो रक्त केशिकाओं (blood capillaries) की पतली दीवारों से विसरण (dif-fusion) द्वारा बाहर निकलने से बनता है। इसके साथ श्वेत रक्त कणिकाएं (WBC) बाहर आ जाती हैं परन्तु इसमें लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) नहीं होतीं लेकिन इसमें रुधिर सूक्ष्म मात्रा में कैल्शियम एवं फॉस्फोरस के आयन पाये जाते हैं। विभिन्न अंगों के ऊतकों के सम्पर्क में होने के ही समान लसीका कणिकाएँ (lymphocytes) तथा कारण लसीका में ग्लूकोज, ऐमीनो एसिड, वसीय एसिड, विटामिन्स, लवण तथा उत्सर्जी पदार्थ (CO2 यूरिया) भी इसमें पहुँच जाते हैं।

लसीका के कार्य (Functions of Lymph) –

  • लसीका ऊतकीय द्रव तथा उन पदार्थों को रुधिर तंत्र में वापस लाती हैं जो धमनी कोशिकाओं से विसरित हो जाते हैं।
  • लसीका कोशिकाओं में भोज्य पदार्थ, गैस, हॉर्मोन, एन्जाइम आदि के प्रसारण का कार्य करती हैं।
  • लसीका गाठ (lymph nodes) में लिम्फोसाइट्स का निर्माण होता है।
  • केशिका के चारों ओर जलीय वातावरण बनाकर केशिका के बाहर एवं भीतर रसाकर्षण सन्तुलन बनाये रखता है।
  • केशिका ऊतक से CO2 व अन्य उत्सर्जी पदार्थ को रक्त केशिकाओं तक पहुँचाता है।
  • लसीका कणिकाएँ (lymphocytes) जीवाणुओं व अन्य बाहरी पदार्थ का भक्षण करके शरीर की रक्षा करती हैं।
  • लसीका में श्वेत कणिकाओं की मात्रा अधिक होने के कारण घाव भरने में सहायक होती हैं।
  • छोटी आँत के रसांकुरों (villi) में उपस्थित लसीका वाहिनियाँ (lacteals) वसा का अवशोषण करके इसे काइलोमाइकॉन बूँदों के रूप में रक्त में पहुँचाती हैं।
  • मनुष्य में लसीका गाँठें जैविक छलनी की तरह कार्य करती हैं। हानिकारक जीवाणु, धूल-मिट्टी के कण, कैन्सर कोशिकाएँ आदि इन गाँठों में रुक जाते हैं और अन्य आवश्यक पदार्थ रक्त परिसंचरण में पहुँच जाते हैं।
  • लसीका तन्त्र रुधिर परिसंचरण तन्त्र का ही एक भाग है।
  • लसीका सदैव एक दिशा में बहता है (ऊतकों से हृदय की ओर) अतः रक्त की मात्रा तथा गुणवत्ता को बनाये रखने का कार्य करता है।

प्रश्न 7.
‘लसीका’ तथा ‘रुधिर’ की भिन्नताओं तथा समानताओं का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रुधिर एवं लसीका में अन्तर (Differences between Blood and Lymph)

रुधिर (Blood) लसीका (Lymph)
1. रुधिर सामान्य तरल संयोजी ऊतक है। 1. लसीका छना हुआ रुधिर है।
2. यह गहरे लाल रंग का तरल ऊतक है। 2. यह रंगहीन तरल ऊतक है।
3. RBC उपस्थित होती हैं। 3. RBC अनुपस्थित होती हैं।
4. WBC उपस्थित होती हैं परन्तु कम मात्रा में। 4. WBC अधिक मात्रा में पायी जाती हैं।
5. प्रोटीन्स की मात्रा अधिक होती हैं। 5. प्रोटीन्स कम मात्रा में पायी जाती हैं।
6. न्यूट्रोफिल की संख्या बहुत अधिक होती है। 6. लिम्फोसाइट्स की संख्या बहुत अधिक होती है।
7. रुधिर में O2  व अन्य पोषक पदार्थ अधिक होते हैं। 7. लसीका में O2 व अन्य पोषक पदार्थ कम मात्रा में पाये जाते हैं।
8. रुधिर में CO2 तथा उत्सर्जी पदार्थों की मात्रा सामान्य होती है। 8. लसीका में CO2 व उत्सर्जी पदार्थ अधिक मात्रा में होते हैं।

लसीका एवं रुधिर में समानताएँ (Similarities in Lymph and Blood):

  • लसीका में रुधिर की भाँति ग्लूकोज, यूरिया, ऐमीनो अम्ल लवण एवं प्रतिरक्षी (Antibodies) पाये जाते हैं।
  • रुधिर की भाँति श्वेत रक्त कणिकाएँ पायी जाती हैं।
  • फाइब्रिनोजन प्रोटीन उपस्थित होने के कारण लसीका का भी थक्का बन सकता है।
  • लसीका रुधिर की भाँति पोषक पदार्थों एवं O2, को ऊतकों तक पहुँचाकर उनसे CO2 एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ एकत्रित करता है।
  • रुधिर की भाँति लसीका में भी प्रतिरक्षी प्रोटीनें (Antibodies) तथा प्रतिविषाणु (Antitoxin) होते हैं।

प्रश्न 8.
मानव के उत्सर्जी तन्त्र तथा उसकी क्रिया का वर्णन कीजिए।
अथवा
मानव के वृक्क की आन्तरिक संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
मानव का उत्सर्जी तन्त्र (Excretory System of Man)
भोजन के अन्तर्ग्रहण तथा पाचन के बाद शरीर उपयोगी पदार्थों को विभिन्न ऊतकों तथा कोशिकाओं में पहुँचाता है। अपाचित तथा अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की आवश्यकता होती है। शरीर में उपापचय की क्रियाओं द्वारा इन अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

गैस, तरल तथा ठोस पदार्थों का उत्सर्जित होना आवश्यक है और इनमें से प्रत्येक के उत्सर्जन की प्रक्रिया भिन्न-भिन्न होती है। कार्बन डाइ ऑक्साइड सबसे प्रमुख अपशिष्ट पदार्थ हैं जिसे साँस द्वारा बाहर निकाला जाता है। श्वसन के समय कोशिकाओं में कार्बन डाइ-ऑक्साइड रुधिर में स्थित हीमोग्लोबिन से मिलकर या पानी में घुलकर स्थानान्तरित होती है। कार्बन डाइ ऑक्साइड का निष्कासन फेफड़ों की सतह से होता है।

ठोस अपशिष्ट मुख्यत: भोजन का अपाचित भाग जैसे सब्जियों के रेशे होते हैं। मुँह में भोजन का पाचन आरम्भ होता है तथा आमाशय में समाप्त होता है। पाचित भोजन पेट की भित्तियों द्वारा अवशोषित हो जाता है। अपाचित पदार्थ बड़ी आँत में आ जाता है और गुदा के रास्ते शरीर से निष्कासित हो जाता है।
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 9
शरीर से नाइट्रोजन युक्त वर्ज्य पदार्थ को बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। अपशिष्ट तरल पदार्थों के उत्सर्जन के लिए एक जटिल क्रियाविधि की आवश्यकता होती है, क्योंकि रुधिर में पोषक तत्त्व तथा अपशिष्ट पदार्थ दोनों ही होते हैं, इसीलिए इनको छानने तथा अलग करने की विशेष विधि होती है। इस क्रिया से उपयोगी पदार्थ शरीर में ही रह जाते हैं और अपशिष्ट पदार्थ उत्सर्जित हो जाते हैं। यह क्रिया शरीर में स्थित वृक्कों (kidneys ) द्वारा सम्पन्न होती है। शरीर में इनकी संख्या दो होती है। यदि इनमें से एक वृक्क काम करना बन्द कर दे तो दूसरा वृक्क अकेले ही पूरा कार्य करता है।

चित्र में शरीर में वृक्क की स्थिति तथा वृक्क के कटे हुए भाग को दिखाया गया है। वृक्क धमनी, महाधमनी से रुधिर लेकर वृक्क में पहुँचाती है। अपशिष्ट पदार्थ अलग करने बाद साफ वृक्क शिरा द्वारा वापस भेज दिया जाता है। वृक्क द्वारा अलग किये गये अपशिष्ट पदार्थ को मूत्र कहते हैं। मूत्र मूत्रवाहिनी से मूत्राशय में जाता है और मूत्र मार्ग से उत्सर्जित हो जाता है।

मनुष्य के अन्य उत्सर्जी अंग (Other Excretory Organs of Man)
1. त्वचा (Skin) – त्वचा में स्वेद ग्रन्थियाँ होती हैं जो छिद्रों द्वारा त्वचा की बाहरी सतह पर खुलती हैं। स्वेद ग्रन्थियाँ रुधिर कोशिकाओं से जल, यूरिया तथा कुछ लवण अवशोषित करके पसीने के रूप में त्वचा की ऊपरी सतह पर मुक्त कर देती हैं।

2. आँत (Intestines) – आँत की भीतरी स्तर एपिथीलियम कोशिकाओं से बनी होती है। ये कोशिकायें रुधिर कोशिकाओं से जल तथा अनावश्यक खनिज लवण जैसे – लोहा, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि को लेकर आँत की गुहा में छोड़ देती हैं जहाँ से इन्हें मल के साथ बाहर निकाल दिया जाता है।

3. यकृत (Liver) – यकृत कोशिकायें आवश्यकता से अधिक ऐमीनो अम्ल को पायरुविक अम्ल में बदल देती हैं। इस क्रिया में विषाक्त अमोनिया निकलती है। यकृत अमोनिया को कम हानिकारक पदार्थ यूरिया में बदल देता है।

4. फेफड़े (Lungs) – फेफड़े वसा और कार्बोहाइड्रेट के विघटन के फलस्वरूप कार्बन डाइ ऑक्साइड और जल बनाता है। कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन फेफड़े से श्वासोच्छ्वास (Breathing) द्वारा बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 9.
सजीव जगत में ग्लूकोज के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने के मुख्य तरीके कौन-से हैं? सम्बन्धित समीकरण भी दीजिए। इनमें से किसमें अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है?
उत्तर:
सजीवों में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण दो तरह से होता है-

  • वायवीय या ऑक्सी-श्वसन
  • अवायवीय या अनॉक्सी-श्वसन

(i) वायवीय या ऑक्सी-श्वसन
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 10

(ii) अवायवीय या अनॉक्सी-श्वसन
यीस्ट में
JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम 11

प्रश्न 10.
वृक्क द्वारा नाइट्रोजन युक्त उत्सर्जी पदार्थों के उत्सर्जन की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर:
वृक्क नलिकाएँ एक प्रकार से छानने का कार्य करती हैं। क्योंकि रक्त चौड़ी अधिवाही धमनिका द्वारा वोमेन्स कैप्सूल में जाता है और फिर सँकरी अपवाही धमनिका द्वारा उसके बाहर निकलता है अतः रक्त का दबाव ग्लोमेरूलस में बढ़ जाता है इसके फलस्वरूप रक्त में घले सभी पदार्थ छन जाते हैं।

छने हुए पदार्थ में लाभकारी एवं हानिकारक दोनों ही प्रकार के पदार्थ होते हैं जब यह द्रव वृक्क नलिका से होकर गुजरता है तो वृक्कनलिका पर लिपटी रक्त कोशिकाएँ इनसे लाभदायक पदार्थ जैसे ग्लूकोज आदि को चूस लेती हैं। इस प्रकार केवल नाइट्रोजन युक्त हानिकारक पदार्थ, जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल, अमोनिया आदि संग्रह नलिका तथा मूत्रवाहिनी में होते हुए मूत्राशय में पहुँचते हैं और यहाँ से आवश्यकतानुसार समय-समय पर यह बाहर निकलते रहते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न में दिए गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही विकल्प चुनिए-

1. मनुष्य में मुख्य उत्सर्जी अंग है-
(a) त्वचा
(b) फेफडे
(c) आहारनाल
(d) वृक्क
उत्तर:
(a) त्वचा

2. मानव शरीर का सबसे बड़ा अंग है-
(a) त्वचा
(b) यकृत
(c) सिर
(d) पैर
उत्तर:
(a) त्वचा

3. प्लूरा एक द्विस्तरीय झिल्ली है जो आवरण होती है-
(a) वृक्कों का
(b) मस्तिष्क का
(c) हृदय का
(d) फुफ्फुसों का
उत्तर:
(d) फुफ्फुसों का

4. फुफ्फुसों में कूपिकाओं की संख्या होती है लगभग-
(a) 30 हजार
(b) 30 लाख
(c) 3 करोड़
(d) 30 करोड़
उत्तर:
(d) 30 करोड़

5. मनुष्य में श्वास लेने की दर होती है लगभग-
(a) 18 बार प्रति मिनट
(b) 18 बार प्रति सेकण्ड
(c) 25 बार प्रति मिनट
(d) 72 बार प्रति मिनट
उत्तर:
(a) 18 बार प्रति मिनट

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

6. फुफ्फुसों में कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रुधिर आता है-
(a) शरीर के विभिन्न अंगों से
(b) हृदय के बायें निलय से
(c) हृदय के दाहिने निलय से
(d) यकृत से
उत्तर:
(c) हृदय के दाहिने निलय से

7. फुफ्फुस से ऑक्सीजन युक्त रुधिर ले जाती है-
(a) फुफ्फुसी धमनी बायें अलिन्द को
(b) फुफ्फुसी शिरा दाहिने अलिन्द को
(c) फुफ्फुसी शिरा बायें अलिन्द को
(d) फुफ्फुसी धमनी दाहिने अलिन्द को
उत्तर:
(c) फुफ्फुसी शिरा बायें अलिन्द को

8. प्रकाश संश्लेषण की दर अधिकतम होती है-
(a) हरे रंग के प्रकाश में
(b) लाल रंग के प्रकाश में
(c) पीले रंग के प्रकाश में
(d) नीले रंग के प्रकाश में
उत्तर:
(b) लाल रंग के प्रकाश में

9. स्टार्च नीला रंग उत्पन्न करता है-
(a) ब्रोमीन जल में
(b) परमैंगनेट जल में
(c) आयोडीन विलयन में
(d) अम्लीय विलयन में
उत्तर:
(c) आयोडीन विलयन में

10. श्वसन में उत्पन्न ऊर्जा संचित होती है-
(a) ADP के रूप में
(b) ATP के रूप में
(c) NADP के रूप में
(d) PI के रूप में
उत्तर:
(b) ATP के रूप में

11. ऑक्सी- श्वसन में ग्लूकोज का एक अणु उत्पन्न करता है, ATP के-
(a) 32 अणु
(b) 19 अण
(c) 38 अणु
(d) 83 अणु
उत्तर:
(c) 38 अणु

12. श्वसन में बाहर निकली वायु में ऑक्सीजन की मात्रा होती है-
(a) 17%
(b) 21%
(c) 11%
(d) 25%
उत्तर:
(a) 17%

13. श्वसन में बाहर निकली वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा होती है-
(a) 0.03%
(b) 0.04%
(c) 4%
(d) 2.4%
उत्तर:
(c) 4%

14. श्वसन क्रिया से मानव शरीर में होता है-
(a) कोशिकाओं का निर्माण
(b) ग्लूकोस का ऑक्सीकरण
(c) प्रोटीन का निर्माण
(d) ग्लूकोस का निर्माण
उत्तर:
(b) ग्लूकोस का ऑक्सीकरण

15. प्रकाश संश्लेषण से उत्पन्न होने वाली ऑक्सीजन निकलती है-
(a) जल स
(b) कार्बन डाइऑक्साइड से
(c) शर्करा से
(d) पर्णहरित से
उत्तर:
(a) जल स

16. ग्लाइकोलिसिस कहाँ होता है?
(a) कोशिका द्रव्य में
(b) हरित लवक में
(c) राइबोसोम में
(d) माइटोकॉण्ड्रिया में
उत्तर:
(a) कोशिका द्रव्य में

17. अनॉक्सी श्वसन में बनता है-
(a) एथिल ऐल्कोहॉल
(b) एथिलीन
(c) ग्लूकोज
(d) ग्लिसरॉल
उत्तर:
(a) एथिल ऐल्कोहॉल

18. पौधों श्वसन क्रिया में निम्नलिखित में से कौन-सी गैस निकलती है?
(a) ऑक्सीजन
(b) नाइट्रोजन
(c) कार्बन डाइऑक्साइड
(d) किण्वन
उत्तर:
(c) कार्बन डाइऑक्साइड

19. निम्नलिखित क्रियाओं में से किसमें ऑक्सीजन निकलती है?
(a) प्रकाश संश्लेषण
(b) ऑक्सी-श्वसन
(c) अनॉक्सी-श्वसन
(d) किण्वन
उत्तर:
(a) प्रकाश संश्लेषण

20. शरीर में आये हुए हानिकारक बैक्टीरिया को कौन-कौन सी रुधिर कणिकाएँ नष्ट करती हैं?
(a) श्वेत रुधिर कणिकाएँ
(b) लाल रक्त कणिकाएँ
(c) प्लेटलेट्स
(d) हीमोग्लोबिन
उत्तर:
(a) श्वेत रुधिर कणिकाएँ

21. रक्त में प्लाज्मा की मात्रा होती है-
(a) 20%
(b) 40%
(c) 60%
(d) 80%
उत्तर:
(c) 60%

22. प्रत्येक मनुष्य का रक्त प्रत्येक मनुष्य को नहीं दिया जा सकता, यह कथन है-
(a) लैन्डस्टीनर का
(b) स्टेफेनहेल का
(c) वाटसन का
(d) मेण्डल
उत्तर:
(a) लैन्डस्टीनर का

23. हीमोग्लोबिन का प्रमुख कार्य है-
(a) प्रजनन में सहायता
(b) रुधिर को रंगहीन करना
(c) जीवाणुओं को नष्ट करना
(d) ऑक्सीजन का परिवहन
उत्तर:
(d) ऑक्सीजन का परिवहन

24. यकृत संश्लेषण करता है-
(a) शर्करा
(b) रक्त
(c) यूरिया
(d) पाचन
उत्तर:
(c) यूरिया

25. वृक्कों का कार्य है-
(a) श्वसन
(b) परिवहन
(c) उत्सर्जन
(d) प्रोटीन
उत्तर:
(c) उत्सर्जन

26. शुद्ध रक्त बहता है-
(a) फुफ्फुस धमनी में
(b) पश्च महाशिरा में
(c) अग्र महाशिरा में
(d) फुफ्फुस शिरा में
उत्तर:
(d) फुफ्फुस शिरा में

27. रक्त थक्का जमने के लिए आवश्यक है-
(a) सोडियम क्लोराइड
(b) थ्रोम्बिन
(c) पोटैशियम
(d) कैल्सियम
उत्तर:
(b) थ्रोम्बिन

28. रुधिर- दाब मापक है-
(a) थर्मामीटर
(b) बैरोमीटर
(c) गैलवेनोमीटर
(d) स्फिग्मोमैनोमीटर
उत्तर:
(d) स्फिग्मोमैनोमीटर

29. हीमोग्लोबिन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है-
(a) उत्सर्जन में
(b) श्वसन में
(c) पाचन में
(d) वृद्धि में
उत्तर:
(b) श्वसन में

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 6 जैव प्रक्रम

30. फेफड़ों से शुद्ध रक्त आता है-
(a) बायें अलिन्द में
(b) दायें अलिन्द में
(c) बायें निलय में
(d) दायें निलय में
उत्तर:
(a) बायें अलिन्द में

31. शुद्ध रुधिर को शरीर के विभिन्न भागों में ले जाती
(a) शिराएँ
(b) महाशिरा
(c) दायाँ निलय
(d) महाधमनी
उत्तर:
(d) महाधमनी

32. फुफ्फुस (पल्मोनरी) शिरा खुलती है-
(a) दाएँ अलिन्द में
(b) बाएँ अलिन्द में
(c) दाएँ निलय में
(d) बाएँ निलय में
उत्तर:
(b) बाएँ अलिन्द में

33. रक्त में ऑक्सीजन की कला से लाल रक्त कणिकाओं में में उत्पन्न रोग है-
(a) रक्त कोशिका अल्परक्तता
(b) हीमोफीलिया
(c) वर्णान्धता
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) हीमोफीलिया

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

  1. ……………………… पोषण में दूसरे जीवों द्वारा तैयार किए जटिल पदार्थों का अंतर्ग्रहण होता है।
  2. मनुष्य में, खाए गए भोजन का विखंडन भोजन नली के अन्दर कई चरणों में होता है तथा पाचित भोजन को ……………………… में अवशोषित करके शरीर की सभी कोशिकाओं में भेज दिया जाता है।
  3. ……………………… प्रक्रम में ग्लूकोज जैसे जटिल कार्बनिक यौगिकों का विखंडन होता है जिससे ए.टी.पी. का उपयोग कोशिका में होने वाली अन्य क्रियाओं को ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है।
  4. श्वसन …………………….. या …………………….. हो सकता है। …………………….. श्वसन से जीव को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  5. मनुष्य में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, भोजन तथा उत्सर्जी उत्पाद सरीखे पदार्थों का वहन …………………….. का कार्य होता है। परिसंचरण तंत्र में हृदय, रुधिर तथा रुधिर वाहिकाएँ होती हैं।
  6. उच्च विभेदित पादपों में जल, खनिज लवण, भोजन तथा अन्य पदार्थों का परिवहन संवहन ऊतक का कार्य है जिसमें …………………….. तथा …………………….. होता हैं।
  7. मनुष्य में, उत्सर्जी उत्पाद विलेय …………………….. के रूप में में वृक्काणु (नेफ्रॉन) द्वारा निकाले जाते हैं।

उत्तर:

  1. विषमपोषी
  2. क्षुद्रांत्र
  3. श्वसन
  4. वायवीय, अवायवीय, वायवीय
  5. परिसंचरण तंत्र
  6. जाइलम, फ्लोएम
  7. नाइट्रोजनी यौगिक, वृक्क।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Exercise 5.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित स्थितियों में से किन स्थितियों में सम्बद्ध संख्याओं की सूची A. P. है और क्यों ?
(i) प्रत्येक किलोमीटर के बाद का टैक्सी का किराया, जबकि प्रथम किलोमीटर के लिए किराया ₹ 15 है और प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए किराया ₹ 8 है।
(ii) किसी बेलन (cylinder) में उपस्थित हवा की मात्रा, जबकि वायु निकालने वाला पम्प प्रत्येक बार बेलन की शेष हवा का \(\frac{1}{4}\) भाग बाहर निकाल देता है।
(iii) प्रत्येक मीटर की खुदाई के बाद, एक कुआँ खोदने में आई लागत, जबकि प्रथम मीटर खुदाई की लागत ₹ 150 है और बाद में प्रत्येक मीटर खुदाई की लागत ₹ 50 बणती जाती है।
(iv) खाते में प्रत्येक वर्ष का मिश्रधन, जबकि ₹ 10000 की राशि 8% वार्षिक की दर से चक्रवृद्धि ब्याज पर जमा की जाती है।
हल:
(i) यदि टैक्सी का पहले किमी का किराया a1, दूसरे किमी का किराया a2 तथा वें किमी का किराया an से व्यक्त किया जाए तो
प्रश्नानुसार,
a1 = 15
a2 = 15 + 8 = 23
a3 = 23 + 8 = 31
अब सार्वअन्तर (d) = a2 – a1 = 23 – 15 = 8
और a3 – a2 = 31 – 23 = 8
∵ a3 – a2 = a2 – a1
अर्थात् सार्वअन्तर समान हैं।
∴ दी गई स्थिति A.P. (समान्तर श्रेढी) के रूप की है।

(ii) माना कि एक बेलन में उपस्थित हवा की मात्रा को x मात्रक से तथा प्रत्येक पम्प के बाद हवा की शेष मात्रा को a2, a3, a4 से व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न के अनुसार,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 1
और आगे भी इसी प्रकार से….
अब सार्वअन्तर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 2
यहाँ a3 – a2 ≠ a2 – a1
∵ सार्वअन्तर समान नहीं है।
∴ दी गई स्थिति A.P का रूप नहीं है।

(iii) माना कि एक कुआँ खोदने के nवें मीटर की लागत को an से व्यक्त किया जाए तो.
प्रश्न के अनुसार, a1 = ₹ 150
a2 = ₹ (150 + 50) = ₹ 200
a3 = ₹ (200 + 50) = ₹ 250
और आगे भी इसी प्रकार से…..
अब सार्वअन्तर
a3 – a2 = ₹ (250 – 200) = ₹ 50
a2 – a1 = ₹ (200 – 150) = ₹ 50
यहाँ a3 – a2 = a2 – a1 = ₹ 50
सार्वअन्तर समान हैं।
अतः दी गई स्थिति A. P. (समान्तर श्रेढी) के रूप की है।

(iv) खाते में जमा किए गए धन के लिए भिन्न वर्षों के मिश्रधन:
मूलधन P = ₹ 10000
ब्याज की दर R% = 8%
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 3
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 4
निरीक्षण से ही स्पष्ट है कि
A2 – A1 ≠ A3 – A2
अतः मिश्रधन A.P. (समान्तर श्रेढी) में नहीं हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

प्रश्न 2.
दी हुई A. P. के प्रथम चार पद लिखिए, जबकि प्रथम पद a और सार्वअन्तर d निम्नलिखित हैं:
(i) a = 10, d = 10,
(ii) a = -2, d = 0
(iii) a = 4, d = – 3,
(iv) a = -1, d = \(\frac{1}{2}\)
(v) a = -1.25, d = -0.25
हल:
(i) दिया है, प्रथम पद (a) = 10
और सार्व अन्तर (d) = 10
∴ a1 = प्रथम पद (a) = 10
a2 = a + d = 10 + 10 = 20
a3 = a + 2d = 10 + 2 × 10 = 30
a4 = a + 3d = 10 + 3 × 10 = 40
अत: A.P के प्रथम चार पद 10, 20, 30, 40 हैं।

(ii) दिया हुआ है कि प्रथम पद (a) = 22
और सार्वअन्तर (d) = 0
∴ a1 = a = -2
a2 = a + d = 2 + 0 = 2
a3 = a + 2d = -2 + 2 × 0 = -2
a4 = a + 3d = 2 + 3 × 0 = -2
अत: A.P. के प्रथम चार पद -2, -2, -2, -2, हैं ।

(iii) दिया हुआ है, प्रथम पद (a) = 4
और सार्वअन्तर (d) = -3
∴ a1 = a = 4
a2 = a + d = 4 + (-3) = 1
a3 = a + 2d = 4 + 2 × (-3) = -2
a4 = a + 3d = 4 + 3 × (-3) = – 5
अत: A.P. के प्रथम चार पद 4, 1, 2, 5 हैं।

(iv) दिया है कि प्रथम पद a = -1
और सार्वअन्तर d = \(\frac{1}{2}\)
∴ a1 = a = -1
a2 = a + d
= \(-1+\frac{1}{2}=\frac{-1}{2}\)
a3 = a + 2d
= \(-1+2\left(\frac{1}{2}\right)\)
– 1 + 1 = 0
a4 = a + 3d
= \(-1+3\left(\frac{1}{2}\right)\)
= \(\frac{-2+3}{2}=\frac{1}{2}\)
अत: A.P. के प्रथम चार पद -1, –\(\frac{1}{2}\), 0, \(\frac{1}{2}\) हैं।

(v) दिया हैं कि प्रथम पद = a = -1.25
और सार्वअन्तर (d) = -0.25
∴ a1 = a = – 1.25
a2 = a + d = – 1.25 – 0.25 = -1.50
a3 = a + 2d = – 1.25 + 2(-0.25)
= -1.25 – 0.50 = -1.75
a4 = a + 3d = – 1.25 + 3(-0.25)
= – 1.25 – 0.75 = -2
अत: A.P. के प्रथम चार पद -1.25, -1.50, 1.75, – 2. हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से प्रत्येक A. P. के लिए प्रथम पद तथा सार्वअन्तर लिखिए:
(i) 3, 1, -1, -3,…
(ii) -5, 1, 3, 7,…
(iii) \(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}, \ldots\)
(iv) 0.6, 1.7, 2.8, 3.9,…
हल:
(i) दी गई A.P. = 3, 1, -1, -3, …
यहाँ a1 = 3, a2 = 1
a3 = -1, a4 = -3
प्रथम पद a = a1 = 3
सार्वअन्तर d = a2 – a1 = 1 – 3 = -2
अत: प्रथम पद 3 तथा सार्वअन्तर = -2

(ii) दी गई A. P. = -5, -1, 3, 7, …
यहाँ a1 = -5
a2 = -1
a3 = 3
a4 = 7
प्रथम पद a1 = -5
सार्वन्तर d = a2 – a1 = – 1 – (-5) = – 1 + 5 = 4
अतः प्रथम पद = -5 तथा सार्वन्तर = 4

(iii) दी गई A.P. = \(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}, \ldots \ldots\)
यहाँ a1 = \(\frac{1}{3}\),
a2 = \(\frac{5}{3}\),
a3 = \(\frac{9}{3}\),
a4 = \(\frac{13}{3}\)
प्रथम पद a = a1 = \(\frac{1}{3}\)
सार्वन्तर d = a2 – a1 = \(\left(\frac{5}{3}-\frac{1}{3}\right)\)
= \(\frac{5-1}{3}=\frac{4}{3}\)
अतः प्रथम पद = \(\frac{1}{3}\) तथा सार्वअन्तर = \(\frac{4}{3}\)

(iv) दी गई A.P. = 0.6, 1.7, 2.8, 3.9, …
a1 = 0.6, a2 = 1.7
a3 = 2.8, a4 = 3.9
प्रथम पद a = a1 = 0.6
सार्वअन्तर d = a2 – a1 = 1.7 – 0.6 = 1.1
अत: प्रथम पद = 0.6 तथा सार्वअन्तर = 1.1

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-कौन A.P. हैं ? यदि कोई A.P. है, तो इसका सार्वअन्तर ज्ञात कीजिए और इनके तीन और पद लिखिए:
(i) 2, 4, 8, 16, …
(ii) 2, \(\frac{5}{2}\), 3, \(\frac{7}{2}\), …
(iii) -1.2, -3.2, -5.2, -7.2,
(iv) -10, -6, -2, 2,…
(v) 3, 3 + \(\sqrt{2}\), 3 + 2\(\sqrt{2}\), 3 + 3\(\sqrt{2}\),…
(vi) 0.2, 0.22, 0.222, 0.2222,
(vii) 0, -4, -8, -12,…
(viii) \(-\frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{1}{2}, \ldots\)
(ix) 1, 3, 9, 27, …
(x) a, 2a, 3a, 4a, …
(xi) a, a2, a3, a4, …
(xii) \(\sqrt{2}\), \(\sqrt{8}\), \(\sqrt{18}\), \(\sqrt{32}\),…
(xiii) \(\sqrt{3}\), \(\sqrt{6}\), \(\sqrt{9}\), \(\sqrt{12}\),…
(xiv) 12, 32, 52, 72, …
(xv) 12, 52, 72, 73, …
हल:
(i) दिया हुआ अनुक्रम 2, 4, 8, 16, …
यहाँ a1 = 2, a2 = 4, a3 = 8, a4 = 16
दो क्रमागत पदों का अन्तर (सार्वअन्तर)
d = a2 – a1 = 4 – 2 = 2
a3 – a2 = 8 – 4 = 4
a4 – a3 = 16 – 8 = 8
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर समान नहीं है,
अर्थात् a2 – a1 ≠ a3 – a2 ≠ a4 – a3
अतः दिया गया अनुक्रम A.P. नहीं है।

(ii) दिया गया अनुक्रम 2, \(\frac{5}{2}\), 3, \(\frac{7}{2}\), …
यहाँ a1 = 2, a2 = \(\frac{5}{2}\), a3 = 3, a4 = \(\frac{7}{2}\)
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर (सार्वअन्तर)
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 5
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान है। सार्वअन्तर = \(\frac{1}{2}\) हैं।
∴ दिया गया अनुक्रम A.P. है।
अगले तीन पद
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ Ex 5.1 6
अत: दिये गये अनुक्रम के अगले तीन पद 4, \(\frac{9}{2}\) और 5 हैं।

(iii) दिया गया अनुक्रम -1.2, -3.2, -5.2, -7.2, …
यहाँ a1 = -1.2, a2 = -3.2, a3 = -5.2, a4 = -7.2
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = – 3.2 – (-1.2) = – 2.0
a3 – a2 = -5.2 – (-3.2) = -2.0
a4 – a3 = -7.2 – (-5.2) = -2.0
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर समान (-2.0) है।
∴ सार्वन्तर d = -2.0 और दिया गया अनुक्रम एक A.P. है।
तब पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
= -7.2 + (-2) = -9.2
छठा पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= -9.2 + (-2) = -11.2
सातवाँ पद a7 = छठा पद a6 + सार्वअन्तर d
-11.2 + (-2) = -13.2
अतः दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद -9.2, -11.2, -13.2 हैं।

(iv) दिया हुआ अनुक्रम -10, 6, – 2, 2,…
यहाँ a1 = -10, a2 = -6, a3 = -2, a4 = 2
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = -6 – (-10) = – 6 + 10 = 4
a3 – a2 = – 2 – (-6) = – 2 + 6 = 4
a4 – a3 = 2 – (-2) = 2 + 2 = 4
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर समान (4) है।
∴ सार्वअन्तर d = 4 और दिया गया अनुक्रम एक A.P. हैं।
तब पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
= 2 + 4 = 6
छठा पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= 6 + 4 = 10
सातवाँ पद a7 = छठा पद a6 + सार्वअन्तर d
= 10 + 4 = 14
अतः दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद 6, 10, 14 हैं।

(v) दिया हुआ अनुक्रम 3, 3 + \(\sqrt{2}\), 3 + 2\(\sqrt{2}\), 3 + 3\(\sqrt{2}\),…
यहाँ a1 = 3, a2 = 3 + \(\sqrt{2}\), a3 = 3 + 2\(\sqrt{2}\), a4 = 3 + 3\(\sqrt{2}\)
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = (3+ \(\sqrt{2}\)) – 3 = \(\sqrt{2}\)
a3 – a2 = (3 + 2\(\sqrt{2}\)) – (3 + \(\sqrt{2}\)) = \(\sqrt{2}\)
a4 – a3 = (3 + 3\(\sqrt{2}\)) – (3 + 2\(\sqrt{2}\))= \(\sqrt{2}\)
∵ दो क्रमागत पद का अन्तर समान (\(\sqrt{2}\)) है।
∴ सार्वअन्तर d = \(\sqrt{2}\) और दिया गया अनुक्रम एक A. P. है।
तब पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
3 + 3\(\sqrt{2}\) + \(\sqrt{2}\)
= 3 + \(\sqrt{2}\)(3 + 1) = 3 + 4\(\sqrt{2}\)
छठा पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= 3 + 4\(\sqrt{2}\) + \(\sqrt{2}\)
= 3 + \(\sqrt{2}\)(4 + 1) = 3 + 5\(\sqrt{2}\)
सातवाँ पद a7 = छठा पद a6 + सार्वअन्तर d
= 3 + 5\(\sqrt{2}\) + \(\sqrt{2}\)
= 3 + \(\sqrt{2}\)(5 + 1) = 3 + 6\(\sqrt{2}\)
अतः दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद
3 + 4\(\sqrt{2}\), 3 + 5\(\sqrt{2}\), 3 + 6\(\sqrt{2}\) है।

(vi) दिया हुआ अनुक्रम
0.2, 0.22, 0.222, 0.2222, …
यहाँ a1 = 0.2, a2 = 0.22, a3 = 0.222, a4 = 0.2222,
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = 0.22 – 0.2 = 0.02
a3 – a2 = 0.222 – 0.22 = 0.002
a4 – a3 = 0.2222 – 0.222 = 0.0002
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान नहीं है।
अर्थात् a2 – a1 ≠ a3 – a2 ≠ a4 – a3
अतः दिया गया अनुक्रम A. P. नहीं है।

(vii) दिया हुआ अनुक्रम 0, -4, -8, -12, ….
यहाँ a1 = 0, a2 = -4, a3 = -8, a4 = -12
दो क्रमागत पदों का अन्तर :
a2 – a1 = – 4 – 0 = -4
a3 – a2 = – 8 – (-4)
= – 8 + 4 = -4
a4 – a3 = – 12 – (-8)
= – 12 + 8 = -4
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान है सार्वअन्तर = -4 है। अतः दिया गया अनुक्रम A.P. है।
तब पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
= – 12 + (-4) = -16
पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= – 16 + (-4) = -20
सातवाँ पद a7 = छठा पद a6 + सार्वअन्तर d
= -20 + (-4) = -24
अतः दिए गये अनुक्रम के अगले तीन पद -16, -20 और -24 हैं।

(viii) दिया हुआ अनुक्रम \(-\frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{1}{2}, \ldots\)

a4 – a3 = \(-\frac{1}{2}-\left(-\frac{1}{2}\right)\)
= \(-\frac{1}{2}+\frac{1}{2}\) = 0
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान है। सार्वअन्तर = 0 है अतः दिया गया अनुक्रम एक A.P. है।
पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
= \(-\frac{1}{2}+0=-\frac{1}{2}\)
छठा पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= \(-\frac{1}{2}+0=-\frac{1}{2} \)
सातवाँ पद a7 = छठा पद a6 + सार्वअन्तर d
= \(-\frac{1}{2}+0=-\frac{1}{2}\)
दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद \(-\frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{1}{2}\) है।

(ix) दिया हुआ अनुक्रम 1, 3, 9, 27,…
यहाँ a1 = 1, a2 = 3, a3 = 9, a4 = 27
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = 3 – 1 = 2
a3 – a2 = 9 – 3 = 6
a4 – a3 = 27 – 9 = 18
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान नहीं है।
अर्थात् a2 – a1 ≠ a3 – a2 ≠ a4 – a3
अतः दिया गया अनुक्रम A.P. में नहीं है।

(x) दिया हुआ अनुक्रम a, 2a, 3a, 4a…..
यहाँ a1 = a, a2 = 2a, a3 = 3a, a4 = 4a
दो क्रमागत पद का अन्तर d:
a2 – a1 = 2a – a = a
a3 – a2 = 3a – 2a = a
a4 – a3 = 4a – 3a = a
∵ दो क्रमागत पर्दों का अन्तर समान (a) है।
अतः सार्वन्तर d = a तथा दिया गया अनुक्रम एक A. P. है।
तब पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर d
= 4a + a = 5a
छठा पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर d
= 5a + a = 6a
सातवाँ पद a7 = छटा पद a7 + सार्वअन्तर d
= 6a + a = 7a
अतः दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद 5a, 6a, 7a है।

(xi) दिया हुआ अनुक्रम यहाँ a, a2, a3, a4, ….
यहाँ a1 = a, a2 = a2, a3 = a3‚ a4 = a4
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = a2 – a = a(a – 1)
a3 – a2 = a3 – a2 = a2(a – 1)
∵ दो क्रमागत पद का अन्तर समान नहीं है।
अर्थात a2 – a1 ≠ a3 – a2
अतः दिया गया अनुक्रम एक A. P. नहीं है।

(xii) दिया हुआ अनुक्रम \(\sqrt{2}\), \(\sqrt{8}\), \(\sqrt{18}\), \(\sqrt{32}\)……
यहाँ a1 = \(\sqrt{2}\), a2 = \(\sqrt{8}\), a3 = \(\sqrt{18}\), a4 = \(\sqrt{32}\)
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = \(\sqrt{8}\) – \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{4}\) – 1)
= \(\sqrt{2}\) (2 – 1) = \(\sqrt{2}\)
a3 – a2 = \(\sqrt{18}\) – \(\sqrt{8}\) = \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{9}\) – \(\sqrt{4}\))
= \(\sqrt{2}\)(3 – 2) = \(\sqrt{2}\)
a4 – a3 = \(\sqrt{32}\) – \(\sqrt{18}\) = \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{19}\) – \(\sqrt{9}\))
= \(\sqrt{2}\)(4 – 3) = \(\sqrt{2}\)
दो क्रमागत पदों का अन्तर समान (\(\sqrt{2}\)) है।
अतः सार्वअन्तर d = \(\sqrt{2}\) तथा दिया गया अनुक्रम एक A.P. है।
तब 5वाँ पद a5 = 4वाँ पद + सार्वअन्तर d.
= \(\sqrt{32}\) + \(\sqrt{2}\)
= \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{16}\) + 1) = \(\sqrt{2}\)(4 + 1)
= 5\(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{25}\) × \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{50}\)
6वाँ पद a6 = 5वाँ पद + सार्वअन्तर d
= \(\sqrt{50}\) + \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{25}\) + 1)
= \(\sqrt{2}\)(5 + 1) = 6\(\sqrt{2}\)
= \(\sqrt{36}\) × \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{72}\)
7वाँ पद a7 = 6वीं पद + सार्वअन्तर d
= \(\sqrt{72}\) + \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{36}\) + 1)
= \(\sqrt{2}\)(6 + 1) = 7\(\sqrt{2}\)
= \(\sqrt{49}\) × \(\sqrt{2}\) = \(\sqrt{98}\)
अतः दिए गए अनुक्रम के अगले तीन पद \(\sqrt{50}\), \(\sqrt{72}\), \(\sqrt{98}\) हैं।

(xiii) दिया हुआ अनुक्रम \(\sqrt{3}\), \(\sqrt{6}\), \(\sqrt{9}\), \(\sqrt{12}\), …
a1 = \(\sqrt{3}\), a2 = \(\sqrt{6}\), a3 = \(\sqrt{9}\), a4 = \(\sqrt{12}\)
दो क्रमागत पदों का अन्तर d
a2 – a1 = \(\sqrt{6}\) – \(\sqrt{3}\) = \(\sqrt{3}\) (\(\sqrt{2}\) – 1) = 0.717
a3 – a2 = \(\sqrt{9}\) – \(\sqrt{6}\) = \(\sqrt{3}\)(\(\sqrt{3}\) – \(\sqrt{2}\)) = 0.530
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर समान नहीं है।
अर्थात a2 – a1 ≠ a3 – a2
अतः दिया गया अनुक्रम एक A.P. नहीं है।

(xiv) दिया हुआ अनुक्रम 12, 32, 52, 72, ….
a1 = 12, a2 = 32, a3 = 52, a4 = 72
दो क्रमागत पदों का अन्तर d:
a2 – a1 = 32 – 12 = 9 – 1 = 8
a3 – a2 = 52 – 32 = 25 – 9 = 16
a4 – a3 = 72 – 52 = 49 – 25 = 24
∵ दो क्रमागत पदों का अन्तर समान नहीं है।
अर्थात् a2 – a1 ≠ a3 – a2 ≠ a4 – a3
अतः दिया गया अनुक्रम A.P. नहीं है।

(xv) दिया गया अनुक्रम 12, 52, 72, 73, ….
यहाँ a1 = 12, a2 = 52, a3 = 72, a4 = 73
दो क्रमागत पर्दों का अन्तर d:
a2 – a1 = 52 – 12 = 25 – 1 = 24
a3 – a2 = 72 – 52 = 49 – 25 = 24
a4 – a3 = 73 – 72 = 73 – 49 = 24
चूँकि दो क्रमागत पदों का अन्तर समान है।
अतः सार्वअन्तर d = 24
तथा दिया गया अनुक्रम A.P. है।
पाँचवाँ पद a5 = चौथा पद a4 + सार्वअन्तर
= 73 + 24 = 97
छठवाँ पद a6 = पाँचवाँ पद a5 + सार्वअन्तर
= 97 + 24 = 121
छठवाँ पद a7 = छठवाँ पद a6 + सार्वअन्तर
= 121 + 24 = 145
अत: दिये गये अनुक्रम के अगले तीन पद 97, 121 और 145 हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Exercise 4.4

प्रश्न 1.
निम्न द्विघात समीकरणों के मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए। यदि मूलों का अस्तित्व हो, तो उन्हें ज्ञात कीजिए:
(i) 2x2 – 3x + 5 = 0
(ii) 3x2 – 4\(\sqrt{3}\)x + 4 = 0
(iii) 2x2 – 6x + 3 = 0
हल:
(i) दिया गया समीकरण है:
2x2 – 3x + 5 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = – 3 तथा c = 5
विविक्तकर (D) = b2 – 4ac
= (- 3)2 – 4 × 2 × 5
= 9 – 40
= -31 < 0
अतः दी गई द्विघात समीकरण का कोई वास्तविक मूल नहीं है।

(ii) दिया गया द्विघात समीकरण है:
3x2 – 4\(\sqrt{3}\)x + 4 = 0
इसकी तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 3, b = – 4\(\sqrt{3}\), c = 4
∴ विविक्तकर (D) = b2 – 4ac
= (-4\(\sqrt{3}\))2 – 4 × 3 × 4
= 48 – 48 = 0
अतः दी गई द्विघात समीकरण के मूल वास्तविक और बराबर होंगे।
अब श्रीधराचार्य सूत्र से,
x = \(\frac{-b \pm 4 \sqrt{D}}{2 a}\)
= \(\frac{-(-4 \sqrt{3}) \pm \sqrt{0}}{2 \times 3}=\frac{4 \sqrt{3}}{6}\)
= \(\frac{2 \sqrt{3}}{3} \times \frac{\sqrt{3}}{\sqrt{3}}\)
= \(\frac{2 \times 3}{3 \times \sqrt{3}}=\frac{2}{\sqrt{3}}\)
अतः द्विघात समीकरण के मूल \(\frac{2}{\sqrt{3}}\) और \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)

(iii) दिया गया द्विघात समीकरण है : 2x2 – 6x + 3 = 0 है।
इसकी तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
∴ विविक्तकर (D) = b2 – 4ac
a = 2, b = – 6, c =3
= (- 6)2 – 4 × 2 × 3
= 36 – 24 = 12 > 0
∴ दी गई द्विघात समीकरण के मूल वास्तविक और भिन्न-भिन्न होंगे।
अब श्रीधराचार्य सूत्र से समीकरण के मूल
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4 1

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 2.
निम्न प्रत्येक द्विघात समीकरण में k का ऐसा मान ज्ञात कीजिए कि उसके दो बराबर मूल हों :
(i) 2x2 + kx + 3 = 0
(ii) kx(x – 2) + 6 = 0
हल:
(i) दिया गया समीकरण है:
2x2 +kx +3 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = k तथा c = 3
विविक्तकर D = b2 – 4ac
= k2 – 4 × 2 × 3
= k2 – 24
समीकरण के मूल बराबर तब होंगे, जब विविक्तकर
D = 0 हो
अर्थात् k2 – 24 = 0
⇒ k2 = 24
⇒ k = ±\(\sqrt{24}\) = ±2\(\sqrt{6}\)
अतः मूल बराबर होने के लिए ±2\(\sqrt{6}\) होना चाहिए।

(ii) दिया गया समीकरण
kx(x – 2) + 6 = 0
या kx2 – 2kx + 6 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = k, b = -2k तथा c = 6
विविक्तकर D =b2 – 4ac
= (-2k)2 – 4 × k × 6
= 4k2 – 24k
= 4k(k – 6)
समीकरण के मूल बराबर तब होंगे, जब विविक्तकर
D = 0 हो
अर्थात् 4k(k – 6) = 0
⇒ k = 0 या k – 6 = 0
⇒ k = 0 या k = 6
अतः समीकरण के बराबर होने के लिए k = 6 होना चाहिए क्योंकि k = 0 प्रतिबन्धित होता है।

प्रश्न 3.
क्या एक ऐसी आम की बगिया बनाना सम्भव है जिसकी लम्बाई, चौड़ाई से दुगनी हो और उसका क्षेत्रफल 800 मी’ हो ? यदि है, तो उसकी लम्बाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि एक आयताकार बगिया की चौड़ाई = x मी
आयताकार बगिया की लम्बाई = 2x मी
आयताकार बगिया का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= [2x × x] मी2
= 2x2 मी2
प्रश्नानुसार, 2x2 = 800
⇒ x2 = \(\frac{800}{2}\) = 400
⇒ x = ±\(\sqrt{400}\)
⇒ x = ±20
∵ आयताकार बगिया की लम्बाई ऋणात्मक नहीं हो सकती इसलिए हम x = – 20 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 20
∴ आयताकार बगिया की चौड़ाई = 20 मी
और आयताकार बगिया की लम्बाई = (2 × 20) मी
= 40 मी

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 4.
क्या निम्न स्थिति सम्भव है ? यदि है, तो उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए। दो मित्रों की आयु का योग 20 वर्ष है। चार वर्ष पूर्व उनकी आयु (वर्षो में) का गुणनफल 48 था।
हल:
माना कि पहले मित्र की आयु = x वर्ष
∵ दोनों की आयु का योग 20 वर्ष है।
दूसरे मित्र की आयु = (20 – x) वर्ष
चार वर्ष पूर्व,
पहले मित्र की आयु = (x – 4) वर्ष
दूसरे मित्र की आयु = (20 – x – 4) वर्ष
= (16 – x) वर्ष
और उनका गुणनफल = (x – 4) (16 – x)
= 16x – x2 – 64 + 4x
= – x + 20x – 64
प्रश्नानुसार,
-x2 + 20x – 64 = 48
⇒ -x2 + 20x – 64 – 48 = 0
⇒ -x2 + 20x – 112 = 0 …..(1)
इसकी मानक समीकरण ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
a = -1, b = 20, c = -112
∴ विविक्तकर (D) = b2 – 4ac
= (20)2 – 4 × (1) × (-112)
=400 – 448 = -48 < 0
∵ मूल वास्तविक नहीं होंगे।
इसलिए x का कोई भी मान द्विघात समीकरण (1) को सन्तुष्ट नहीं कर सकता है।
अतः दी गई स्थिति सम्भव नहीं है।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.4

प्रश्न 5.
क्या परिमाप 80 मी तथा क्षेत्रफल 400 मी2 के एक पार्क को बनाना सम्भव है? यदि है, तो उसकी लम्बाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल:
माना आयताकार पार्क की लम्बाई = x मी
एवं चौड़ाई = y मी
∴ आयताकार पार्क का परिमाप = 2(x + y) मी
और आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = xy मी2
प्रश्न की प्रथम शर्त के अनुसार,
2 (x + y) = 80
⇒ x + y = \(\frac{80}{2}\)
⇒ x + y = 40
⇒ y = 40 – x …..(1)
प्रश्न की दूसरी शर्त के अनुसार,
xy = 400
समीकरण (1) से y का मान रखने पर,
x(40 – x) = 400
⇒ 40x – x2 = 400
⇒ x2 – 40x + 400 = 0
इसकी तुलना मानक समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 40, c = 400
विविक्तकर (D) = b2 – 4ac
= (-40)2 – 4 × 1 × 400
= 1600 – 1600 = 0
अतः इस द्विघात समीकरण के मूल वास्तविक और बराबर होंगे।
अब श्रीधराचार्य सूत्र से, x = \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{1}{2}\)
∴ x = 20 मी
तथा y = 40 मी – 20 मी = 20 मी
∴ आयताकार पार्क की लम्बाई और चौड़ाई की माप बराबर अर्थात् 20 मीटर है।
अतः दिया गया आयताकार पार्क का अस्तित्व सम्भव है और यह एक वर्ग है।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Exercise 4.3

प्रश्न 1.
यदि निम्नलिखित द्विघात समीकरणों के मूलों का अस्तित्व हो, तो इन्हें पूर्ण वर्ग बनाने की विधि द्वारा ज्ञात कीजिए :
(i) 2x2 – 7x + 3 = 0
(ii) 2x2 + x – 4 = 0
(iii) 4x2 + 4\(\sqrt{3}\)x + 3 = 0
(iv) 2x2 + x + 4 = 0
हल:
(i) दिया गया द्विघात समीकरण है :
2x2 – 7x + 3 = 0
x2 – \(\frac{7}{2}\)x + \(\frac{3}{2}\) = 0
[प्रत्येक पद में x2 के गुणांक से भाग देने पर]
\(\left[x^2-\frac{7}{2} x\right]+\frac{3}{2}=0\)
[वह भाग जिसे पूर्ण वर्ग बनाना है, अलग करने पर]
\(x^2-\frac{7}{2} x=-\frac{3}{2}\)
x के गुणांक के आधे का वर्ग दोनों पक्षों में जोड़ने पर :
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 1
दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 2
अत: अभीष्ट मूल 3 और \(\frac{1}{2}\) होंगे।

(ii) दी गई द्विघात समीकरण है :
2x2 + x – 4 = 0
2x2 + x = 4
x2 + \(\frac{1}{2}\)x = \(\frac{4}{2}\)
x के गुणांक \(\frac{1}{2}\) के आधे का वर्ग दोनों पक्षों में जोड़ने पर
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 3
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 4

(iii) दी गई द्विघात समीकरण है:
4x2 + 4\(\sqrt{3}\)x + 3 = 0
⇒ 4x2 + 4\(\sqrt{3}\)x = -3
⇒ x2 + \(\frac{4 \sqrt{3}}{4} x\) = \(-\frac{3}{4}\)
x2 + \(\sqrt{3}\)x = \(-\frac{3}{4}\)
x के गुणांक के आधे का वर्ग दोनों पक्षों में जोड़ने पर
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 5
x = \(-\frac{\sqrt{3}}{2}\)
अतः दी गई समीकरण के मूल \(-\frac{\sqrt{3}}{2}\) और \(-\frac{\sqrt{3}}{2}\) हैं।

(iv) दिया गया द्विघात समीकरण है:
2x2 + x + 4 = 0
x2 + \(\frac{1}{2}\)x + 2 = 0
[प्रत्येक पद को 2 से भाग देने पर]
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 6
जो कि एक काल्पनिक संख्या है,
अतः दिए गए समीकरण के मूल वास्तविक नहीं हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 2.
उपर्युक्त प्रश्न (1) में दिए गए द्विघात समीकरणों के मूल, द्विघाती सूत्र का उपयोग करके ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) दिया गया द्विघात समीकरण है :
2x2 – 7x + 3 = 0
उपर्युक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = 7 तथा c = 3
श्रीधराचार्य सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 7
अतः समीकरण के मूल 3, \(\frac{1}{2}\)

(ii) दिया गया द्विघात समीकरण है।
2x2 + x – 4 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = 1 तथा c = – 4
श्रीधराचार्य सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 8
अतः द्विघात समीकरण के मूल \(\frac{-1-\sqrt{33}}{4}\) और \(\frac{-1+\sqrt{33}}{4}\) होंगे।

(iii) दिया गया द्विघात समीकरण है:
4x2 + 4\(\sqrt{3}\)x + 3 = 0
उपर्युक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 4, b = 4\(\sqrt{3}\), c = 3
श्रीधराचार्य सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 9
\(\frac{-4 \sqrt{3} \pm \sqrt{0}}{8}\)
x = \(\frac{-4 \sqrt{3}}{8}=\frac{-\sqrt{3}}{2}\)
अत: दिये गये द्विघात समीकरण के मूल \(-\frac{\sqrt{3}}{2}\) और \(-\frac{\sqrt{3}}{2}\) है।

(iv) दिया गया द्विघात समीकरण है:
2x2 + x + 4 = 0
उपर्युक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 2, b = 1, c = 4
श्रीधराचार्य सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 10
∵ \(\sqrt{-31}\) एक काल्पनिक संख्या है।
अतः दिए गये समीकरण के मूलों का अस्तित्व नहीं है।

प्रश्न 3.
निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए :
(i) \(x-\frac{1}{x}\) = 3, x ≠ 0
(ii) \(\frac{1}{x+4}-\frac{1}{x-7}=\frac{11}{30}\), x ≠ -4, 7
हल:
(i) दिया गया समीकरण है:
\(x-\frac{1}{x}\) = 3, x ≠ 0
⇒ \(\frac{x^2-1}{x}\) = 3
⇒ x2 – 1 = 3x [वज्रगुणन से]
⇒ x2 – 3x – 1 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = -3 तथा c = -1
द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 11
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 12

(ii) दिया गया समीकरण है:
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 13
[दोनों पक्षों को 11 से भाग देने पर]
⇒ x2 – 3x – 28 = -30
⇒ x2 – 3x – 28 + 30 = 0
⇒ x2 – 3x + 2 = 0
⇒ x2 – (2 + 1)x + 2 = 0
⇒ x2 – 2x – x + 2 = 0
⇒ x (x – 2) – 1 (x – 2)
⇒ (x – 2) (x – 1) = 0
या तो x – 2 = 0 या फिर x – 1 = 0
जब x – 2 = 0 तो x = 2
जब x – 1 = 0 तो x = 1
अतः दी गई द्विघात समीकरण के मूल 1 और 2 है ।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 4.
3 वर्ष पूर्व रहमान की आयु (वर्षों में) का व्युत्क्रम और अब से 5 वर्ष पश्चात् आयु के व्युत्क्रम का योग \(\frac{1}{3}\) है। उसकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल:
माना रहमान की वर्तमान आयु = x वर्ष
3 वर्ष पूर्व रहमान की आयु = (x – 3) वर्ष
अब से 5 वर्ष पश्चात् रहमान की आयु = (x + 5) वर्ष
प्रश्नानुसार,
\(\frac{1}{x-3}+\frac{1}{x+5}=\frac{1}{3}\)
\(\frac{x+5+x-3}{(x-3)(x+5)}=\frac{1}{3}\)
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 14
⇒ 6x + 6 = x2 + 2x – 15
⇒ x2 + 2x – 15 – 6x – 6 = 0
⇒ x2 – 4x – 21 = 0, जो कि x में द्विघात है।
इसकी तुलना ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 4, c = – 21
द्विघात सूत्र से
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 15
∵ आयु ऋणात्मक नहीं हो सकती।
इसलिए हम x = -3 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 7
अतः रहमान की वर्तमान आयु = 7 वर्ष।

प्रश्न 5.
एक क्लास टेस्ट में शेफाली के गणित और अंग्रेजी में प्राप्त किए गए अंकों का योग 30 है। यदि उसको गणित में 2 अंक अधिक और अंग्रेजी में 3 अंक कम मिले होते, तो उनके अंकों का गुणनफल 210 होता। उसके द्वारा दोनों विषयों में प्राप्त किए गए अंक ज्ञात कीजिए।
हल:
माना शेफाली ने गणित में x अंक प्राप्त किए।
अंग्रेजी और गणित दोनों के प्राप्तांकों का योग 30 है।
तब अंग्रेजी में प्राप्तांक = (30 – x) अंक
यदि उसको गणित में 2 अंक अधिक मिलते अर्थात् गणित में (x + 2) अंक मिलते और अंग्रेजी में 3 अंक कम मिलते अर्थात् अंग्रेजी में (30 – x – 3) या (27 – x) अंक मिलते तो अंकों का गुणनफल = (x + 2) (27 – x)
= 27x – x2 + 54 – 2x
= 25x – x2 + 54
परन्तु प्रश्नानुसार, अंकों का गुणनफल = 210
∴ 210 = 25x – x2 + 54
⇒ x2 – 25x – 54 + 210 = 0
⇒ x2 – 25x + 156 = 0
उक्त समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = -25 तथा c = 156
द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 16
तब शेफाली ने गणित में या तो 13 अंक प्राप्त किए या फिर 12 अंक प्राप्त किए।
यदि उसने गणित में 12 अंक प्राप्त किए तो अंग्रेजी में (30 – 12) = 18 अंक प्राप्त किए और यदि उसने गणित में 13 अंक प्राप्त किए तो अंग्रेजी में (30 – 13) = 17 प्राप्त किए।
अतः शेफाली ने गणित व अंग्रेजी में क्रमशः 12 व 18 अंक अथवा 13 व 17 अंक प्राप्त किए।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 6.
एक आयताकार खेत का विकणं उसकी छोटी भुजा से 60 मी अधिक लंबा है। यदि बड़ी भुजा छोटी भुजा से 30 मी अधिक हो, तो खेत की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि एक आयताकार खेत की छोटी भुजा = AD = x मीटर
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 17
आयताकार खेत की लम्बी भुजा = AB = (x + 30) मीटर
और आयताकार खेत का विकर्ण = DB = (x + 60) मीटर
एक आयत में लम्बाई और चौड़ाई के बीच का कोण समकोण होता है।
∴ ∠DAB = 90°
समकोण त्रिभुज DAB में, पाइथागोरथ प्रमेय से,
(DB)2 = (AD)2 + (AB)2
(x + 60)2 = (x)2 + (x + 30)2
⇒ x2 + 3600 + 120x = x2 + x2 + 900 + 60x
⇒ x2 + 3600 + 120x – x2 – x2 – 900 – 60x = 0
⇒ -x2 + 60x + 2700 = 0
या, x2 – 60x – 2700 = 0
इसकी तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर
a = 1, b = -60, c = -2700
द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 18
स्थिति (I)-धनात्मक चिह्न लेने पर
x = \(\frac{60+120}{2}=\frac{180}{2}\)
⇒ x = 90
स्थिति (II) ऋणात्मक चिह्न लेने पर
x = \(\frac{60-120}{2}=\frac{-60}{2}\)
⇒ x = -30
∴ x = 90 और -30
∵ किसी भुजा की लम्बाई ऋणात्मक नहीं हो सकती।
इसलिए x = -30 को छोड़ देते हैं।
अत: x = 90 मीटर
आयताकार खेत की छोटी भुजा = 90 मीटर
आयताकार खेत की लम्बी भुजा = (90 + 30) मीटर = 120 मीटर।

प्रश्न 7.
दो संख्याओं के वर्गों का अन्तर 180 है। छोटी संख्या का वर्ग बड़ी संख्या का आठ गुना है। दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना बड़ी संख्या = x
छोटी संख्या = y
प्रश्न की प्रथम शर्त के अनुसार,
x2 – y2 = 180 …..(i)
प्रश्न की द्वितीय शर्त के अनुसार,
y2 = 8x …..(ii)
समीकरण (ii) से y2 का मान समीकरण (i) में रखने पर
x2 – 8x = 180
= x2 – 8x – 180 = 0
इसकी तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = – 8, c = -180
द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 19
स्थिति (I)-धनात्मक चिह्न लेने पर,
x = \(\frac{8+28}{2}=\frac{36}{2}\) = 18
स्थिति (II)-ऋणात्मक चिह्न लेने पर,
\(\frac{8-28}{2}=\frac{-20}{2}\) = -10
अतः x = 18 और -10
जब x = 18 हो, तो समीकरण (ii) से,
y2 = 8 × 18 = 144
⇒ y = ±\(\sqrt{144}\)
⇒ y = ± 12
जब x = -10 हो, तो समीकरण (ii) से,
y2 = 8 × (-10)
⇒ y2 = -80
⇒ y = ±\(\sqrt{-80}\) (एक काल्पनिक संख्या)
इसे छोड़ देते हैं।
∴ y = +12
अर्थात् y = +12 और -12
अतः अभीष्ट संख्याएँ 18 और 12 या 18, -12 होंगी।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 8.
एक रेलगाड़ी एकसमान चाल से 360 किमी की दूरी तय करती है। यदि यह चाल 5 किमी / घण्टा अधिक होती, तो वह उसी यात्रा में 1 घण्टा कम समय लेती। रेलगाड़ी की चाल ज्ञात कीजिए।
हल:
माना रेलगाड़ी की चाल x किमी/ घण्टा है।
360 किमी दूरी तय करने में लगा समय
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 20
यदि रेलगाड़ी की चाल 5 किमी / घण्टा अधिक होती अर्थात् चाल = (x + 5) किमी/घण्टा
∴ समय = \(\frac{360}{x+5}\) घण्टा
यह समय पहले समय से 1 घण्टा कम है (दिया है)
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 21
इस समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 1, b = 5 तथा c = – 1800
तब द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 22
∵ रेलगाड़ी की चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती।
अतः रेलगाड़ी की चाल = 40 किमी / घण्टा।

प्रश्न 9.
दो पानी के नल एक साथ एक हौज को 9\(\frac{3}{8}\) घंटों में भर सकते हैं। बड़े व्यास वाला नल हौज को भरने में, कम व्यास वाले नल से 10 घण्टे कम समय लेता है। प्रत्येक नल द्वारा अलग-अलग हौज को भरने के समय ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि बड़े व्यास वाले नल द्वारा हौज को भरने में लिया गया समय = x घण्टे
कम व्यास वाले नल द्वारा हौज को भरने में लिया गया समय = (x + 10) घण्टे
बड़े व्यास वाले नल द्वारा हौज का 1 घण्टे में भरा गया भाग = \(\frac{1}{x}\) भाग
छोटे व्यास वाले नल द्वारा हौज का 1 घण्टे में भरा गया भाग = \(\frac{1}{x+10}\) भाग
प्रश्नानुसार यदि दोनों नल एक साथ खुले हों तो 1 घण्टे में हौज भरेगा = \(\left(\frac{1}{x}+\frac{1}{x+10}\right)\) भाग
दिया है, दोनों नल एक साथ हौज को भरने में 9\(\frac{3}{8}\) अर्थात् \(\frac{75}{8}\) घण्टे लेते हैं।
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 23
⇒ 150x + 750 = 8x2 + 80x
⇒ 8x2 + 80x – 150x – 750 = 0
⇒ 8x2 – 70x – 750 = 0
⇒ 2(4x2 – 35x – 375) = 0
⇒ 4x2 – 35x – 375 = 0
इसकी तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर,
a = 4, b = – 35, c = -375
द्विघात सूत्र से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 24
स्थिति (II)-ऋण चिह्न लेने पर,
x = \(\frac{35-85}{8}\)
= \(\frac{-50}{8}=\frac{-25}{4}\) घण्टे
∵ समय ऋणात्मक नहीं हो सकता है।
∴ x = \(\frac{-25}{4}\) को छोड़ देते हैं।
∴ x = 15 घण्टे
अतः बड़े व्यास वाले नल द्वारा हौज को भरने में लगा समय = 15 घण्टे
और छोटे व्यास वाले नल द्वारा हौज को भरने में लगा समय = (15 + 10) घण्टे
= 25 घण्टे

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 10.
मैसूर और बंगलौर के बीच की 132 किमी यात्रा करने में एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी, सवारीगाड़ी से 1 घण्टा समय कम लेती है (मध्य के स्टेशनों पर ठहरने का समय ध्यान में न लिया जाए)। यदि एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल, सवारीगाड़ी की औसत चाल से 11 किमी/ घण्टा अधिक हो, तो दोनों रेलगाड़ियों की औसत चाल ज्ञात कीजिए।
हल:
माना सवारी गाड़ी की औसत चाल x किमी / घण्टा है।
∵ एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल सवारीगाड़ी की औसत चाल की अपेक्षा 11 किमी/ घण्टा अधिक है।
∴ एक्सप्रेस गाड़ी की औसत चाल = (x + 11) किमी / घण्टा
तब 132 किमी यात्रा में सवारीगाड़ी द्वारा लिया गया
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 25
⇒ x2 + 11x = 1452
⇒ x2 + 11x – 1452 = 0
इस समीकरण की तुलना व्यापक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 से करने पर
a = 1, b = 11, c = -1452
श्रीधराचार्य से,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3 26
∵ रेलगाड़ी की चाल ऋणात्मक नहीं हो सकती है।
इस कारण x = -44 अस्वीकार्य है।
अतः सवारीगाड़ी की औसत चाल = 33 किमी / घण्टा है।
तथा एक्सप्रेस गाड़ी की औसत चाल (33 + 11) = 44 किमी / घण्टा है।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.3

प्रश्न 11.
दो वर्गों के क्षेत्रफलों का योग 468 वर्ग मीटर है। यदि उनके परिमापों का अन्तर 24 मीटर हो, तो दोनों वर्गों की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना एक वर्ग की भुजा x मीटर है।
उस वर्ग का परिमाप = 4x मीटर
∵ दोनों परिमापों का अन्तर 24 मीटर है।
∴ दूसरे वर्ग का परिमाप = 4x + 24 मीटर
तब दूसरे वर्ग की भुजा = \(\frac{4 x+24}{4}\)
= \(\frac{4(x+6)}{4}\)
= (x + 6) मीटर
पहले वर्ग का क्षेत्रफल = x2 वर्ग मीटर
दूसरे वर्ग का क्षेत्रफल = (x + 6)2 वर्ग मीटर
= x2 + 12x + 36 वर्ग मीटर
∵ दोनों वर्गों के क्षेत्रफलों का योग = 468 वर्ग मीटर
∴ x2 + (x2 + 12x + 36) = 468
⇒ 2x2 + 12x + 36 – 468 = 0
⇒ 2x2 + 12x – 432 = 0
⇒ 2(x2 + 6x – 216) = 0
⇒ x2 + 6x – 216 = 0
⇒ x2 + 18x – 12x – 216 = 0
⇒ x(x + 18) – 12(x + 18) = 0
⇒ (x + 18 ) (x – 12) = 0
जब x + 18 = 0 हो, तो x = -18
या फिर x – 12 = 0 हो, तो x = 12
वर्ग की भुजा ऋणात्मक नहीं हो सकती है।
इस कारण x = -18 को छोड़ने पर
∴ x = 12
छोटे वर्ग की भुजा = 12 मीटर
तथा बड़े वर्ग की भुजा = x + 6 = 12 + 6 = 18 मीटर
अतः वर्गों की भुजाएँ क्रमश: 12 मीटर व 18 मीटर हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Exercise 4.2

प्रश्न 1.
गुणनखण्ड विधि से निम्न द्विघात समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए :
(i) x2 – 3x – 10 = 0
(ii) 2x2 + x – 6 = 0
(iii) \(\sqrt{2}\)x2 + 7x + 5\(\sqrt{2}\) = 0
(iv) 2x2 – x + \(\frac{1}{8}\) = 0
(v) 100x2 – 20x + 1 = 0
हल:
(i) दिया गया द्विघात समीकरण है :
x2 – 3x – 10 = 0
⇒ x2 – (5 – 2)x – 10 = 0
⇒ x2 – 5x + 2x – 10 = 0
⇒ x(x – 5) + 2(x – 5) = 0
⇒ (x – 5) (x + 2) = 0
यहाँ या तो (x – 5) = 0 या फिर (x + 2) = 0
यदि x – 5 = 0 हो तो x = 5 और
यदि x + 2 = 0 हो तो x = – 2
अतः द्विघात समीकरण के मूल 5 या -2 है।

(ii) दिया गया द्विघात समीकरण है :
2x2 + x – 6 = 0
⇒ 2x2 + (4 – 3)x – 6 = 0
⇒ 2x2 + 4x – 3x – 6 = 0
⇒ 2x(x + 2) – 3(x + 2) = 0
⇒ (x + 2) (2x – 3) = 0
यहाँ या तो (x + 2) = 0 या फिर (2x – 3) = 0
यदि x + 2 = 0 हो, तो x = -2
यदि 2x – 3 = 0 हो, तो
⇒ 2x = 3 या x = \(\frac{3}{2}\)
अतः द्विघात समीकरण के मूल – 2 या \(\frac{3}{2}\) है।

(iii) दिया गया द्विघात समीकरण है:
\(\sqrt{2}\)x2 + 7x + 5\(\sqrt{2}\) =0
\(\sqrt{2}\)x2 + (5 + 2)x + 5\(\sqrt{2}\) = 0
\(\sqrt{2}\)x2 + 5x + 2x + 5\(\sqrt{2}\) = 0
x(\(\sqrt{2}\)x + 5) + \(\sqrt{2}\)(\(\sqrt{2}\)x + 5) = 0
(\(\sqrt{2}\)x + 5) (x + \(\sqrt{2}\)) = 0
यहाँ या तो (\(\sqrt{2}\)x + 5) = 0 या फिर (x + \(\sqrt{2}\)) = 0
यदि \(\sqrt{2}\)x + 5 = 0 हो, तो
\(\sqrt{2}\)x – 5 ⇒ x = \(-\frac{5}{\sqrt{2}}\)
यदि x + \(\sqrt{2}\) = 0 हो, तो x = –\(\sqrt{2}\)
अतः द्विघात समीकरण के मूल \(-\frac{5}{\sqrt{2}}\) या –\(\sqrt{2}\) होंगे।

(iv) दिया गया द्विघात समीकरण है:
2x2 – x – \(\frac{1}{8}\) = 0
⇒ \(\frac{16 x^2-8 x+1}{8}\) = 0
⇒ 16x2 – 8x + 1 = 0
⇒ 16x2 – 4x – 4x + 1 = 0
⇒ 4x(4x – 1) -1 (4x – 1) = 0
⇒ (4x – 1) (4x – 1) = 0
अर्थात् 4x – 1 = 0 या 4x – 1 = 0
x = \(\frac{1}{4}\) या x = \(\frac{1}{4}\)
अतः द्विघात समीकरण के मूल \(\frac{1}{4}\) या \(\frac{1}{4}\) अर्थात् दोनों मूल समान होंगे।

(v) दिया गया द्विघात समीकरण है:
100x2 – 20x + 1 = 0
100x2 – 10x – 10x + 1 = 0
⇒ 10x(10x – 1) – 1(10x – 1) = 0
⇒ (10x – 1) (10x – 1) = 0
अर्थात् 10x – 1 = 0 या फिर 10x – 1 = 0
या 10x = 1 या 10x = 1
या x = \(\frac{1}{10}\) या x = \(\frac{1}{10}\)
अतः द्विघात समीकरण के दोनों मूल समान होंगे।
∴ x = \(\frac{1}{10}\) और \(\frac{1}{10}\)

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

प्रश्न 2.
उदाहरण 1 में दी गई समस्याओं को हल कीजिए:
(i) जॉन और जीवंती दोनों के पास कुल मिलाकर 45 कंचे हैं। दोनों पाँच-पाँच कंचे खो देते हैं। अब उनके पास कंचों की संख्या का गुणनफल 124 है। हम जानना चाहेंगे कि प्रारम्भ में उनके पास कितने-कितने कंचे थे ?
(ii) एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ खिलौने निर्मित करता है। प्रत्येक खिलौने का मूल्य (₹ में), 55 में से एक दिन में निर्मित खिलौनों की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या के बराबर है। किसी दिन कुल निर्माण लागत ₹ 750 थी। हम उस दिन निर्माण किए गए खिलौनों की संख्या ज्ञात करना चाहेंगे।
हल:
(i) माना प्रारम्भ में जॉन के पास x कंचे थे।
दोनों के पास कुल मिलाकर 45 कंचे थे।
∴ जीवंती के पास प्रारम्भ में कंचों की संख्या = (45 – x)
जब जॉन 5 कंचे खो देता है, तो उसके पास कंचों की संख्या = (x – 5)
इसी प्रकार,
जब जीवंती 5 कंचे खो देती है, तो उसके पास शेष कंचों की संख्या
= (45 – x – 5) = (40 – x)
अब कंचों की संख्या का गुणनफल = (x – 5) (40 – x)
= 40x – x2 – 200 + 5x
= – x2 + 45x – 200
परन्तु प्रश्नानुसार,
-x2 + 45x – 200 = 124
⇒ -x2 + 45x – 200 – 124 = 0
⇒ -x2 + 45x – 324 = 0
⇒ -(x2 – 45x + 324) = 0
⇒ x2 – 45x + 324 = 0
⇒ x2 – (36 + 9)x + 324 = 0
⇒ x2 – 36x – 9x + 324=0
⇒ x(x – 36 ) – 9(x – 36) = 0
(x – 36) (x – 9) = 0
या तो x – 36 = 0 या फिर x – 9 = 0
यदि x – 36 = 0 तो x = 36
और यदि x – 9 = 0 तो x = 9
अत: जॉन के पास कंचों की संख्या = 36 अथवा 9 तब स्पष्ट है कि
यदि जॉन के पास 36 कंचे हैं, तो जीवन्ती के पास 9 कंचे होंगे।
और यदि जॉन के पास 9 कंचे हैं, तो जीवंती के पास 36 कंचे होंगे।
अतः उनके पास कंचों की संख्या (9, 36) अथवा (36, 9)।

(ii) माना उस विशेष दिन x खिलौने निर्मित किए गए।
∴ प्रत्येक खिलौने का मूल्य = ₹ (55 – x)
∴ उस दिन निर्मित सभी खिलौनों की लागत
= ₹ x(55 – x)
= ₹ (55x – x2)
परन्तु प्रश्नानुसार उस दिन की निर्माण लागत ₹ 750 थी।
⇒ 55x – x2 = 750
⇒ 55x – x2 – 750 = 0
⇒ x2 – 55x + 750 = 0
⇒ x2 – (30 + 25)x + 750 = 0
⇒ x2 – 30x – 25x + 750 = 0
⇒ x(x – 30 ) – 25 (x – 30 ) = 0
⇒ (x – 30) (x – 25) = 0
अर्थात् x – 30 = 0 या फिर x – 25 = 0
∴ x = 30 या x = 25
x = 30 और 25
अतः उस दिन निर्मित खिलौनों की संख्या 30 या 25 है।

प्रश्न 3.
ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए, जिनका योग 27 हो और गुणनफल 182 हो।
हल:
माना कि पहली संख्या x है।
दिया है, दोनों संख्याओं का योग 27 है।
∴ दूसरी संख्या = 27 – x
दिया है, संख्याओं का गुणनफल = x(27 – x)
= 27x – x2
प्रश्नानुसार, 27x – x2 = 182
⇒ -x2 – 27x – 182 = 0
⇒ x2 – 27x + 182 = 0
⇒ x2 – 13x – 14x + 182 = 0
⇒ (x – 13) – 14(x – 13) = 0
⇒ (x – 13 ) (x – 14) = 0
अर्थात् या तो
x – 13 = 0 या फिर x – 14 = 0
∴ x = 13 या x = 14
∴ x = 13, 14
अतः दो संख्याएँ 13 और 14 हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.2

प्रश्न 4.
दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक ज्ञात कीजिए जिनके वर्गों का योग 365 हो।
हल:
माना कि पहला धनात्मक पूर्णांक x है
तथा दूसरा क्रमागत धनात्मक पूर्णांक (x + 1) होगा।
प्रश्नानुसार, (x2) + (x + 1 )2 = 365
⇒ x2 + x2 + 1 + 2x = 365
⇒ 2x2 + 2x + 1 – 365 = 0
⇒ 2x2 + 2x – 364 = 0
⇒ x2 + x – 182 = 0
⇒ x2 + 14x – 13x – 182 = 0
⇒ x(x + 14) – 13 (x + 14) = 0
⇒ (x + 14) (x – 13) = 0
या तो x + 14 = 0 या x – 13 = 0
⇒ x = -14 या x = 13
∵ हमें धनात्मक पूर्णांक चाहिए।
इसलिए x = -14 सम्भव नहीं है।
∴ x = 13
∴ दूसरा धनात्मक पूर्णांक = 13 + 1 = 14
अतः दो अभीष्ट क्रमागत धनात्मक पूर्णांक 13 और 14 है।

प्रश्न 5.
एक समकोण त्रिभुज की ऊँचाई इसके आधार से 7 सेमी कम है। यदि कर्णे 13 सेमी हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि समकोण त्रिभुज का आधार = x सेमी
इसलिए, समकोण त्रिभुज की ऊँचाई (लम्ब) = (x – 7 ) सेमी
दिया है, समकोण त्रिभुज का कर्ण = 13 सेमी
पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार,
(आधार)2 + (लम्ब)2 = (कर्ण)2
(x)2 + (x – 7)2 = (13)2
⇒ x2 + x2 + 49 – 14x = 169
⇒ 2x2 – 14x + 49 – 169 = 0
⇒ 2x2 – 14x – 120 = 0
⇒ 2[x2 – 7x – 60] = 0
⇒ x2 – 7x – 60= 0
⇒ x2 – 12x + 5x – 60 = 0
⇒ x(x – 12) + 5 (x – 12) = 0
⇒ (x – 12) (x + 5) = 0
या तो x – 12 = 0 या x + 5 = 0
⇒ x = 12 या x = -5
∵ त्रिभुज की लम्बाई कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती।
इसलिए हम x = -5 को छोड़ देते हैं।
∴ x = 12
अतः समकोण त्रिभुज का आधार = 12 सेमी
समकोण त्रिभुज की ऊँचाई (लम्ब) = (12 – 7) सेमी 5 सेमी।
अतः त्रिभुज की अन्य दो भुजाएँ 5 सेमी और 12 सेमी हैं।

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प्रश्न 6.
एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ बर्तनों का निर्माण करता है। एक विशेष दिन यह देखा गया कि प्रत्येक नग की निर्माण लागत (₹ में) उस दिन के निर्माण किए बर्तनों की संख्या के दुगने से 3 अधिक थी। यदि उस दिन की कुल निर्माण लागत ₹ 90 थी, तो निर्मित बर्तनों की संख्या और प्रत्येक नग की लागत ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि एक विशेष दिन में निर्मित बर्तनों की संख्या x थी।
∵ प्रत्येक नग की लागत निर्मित बर्तनों की संख्या के दुगने से 3 अधिक थी।
∴ प्रत्येक नग की लागत = ₹ (2x + 3)
तब उस दिन निर्मित सभी बर्तनों की लागत = ₹ x × (2x + 3)
= ₹ (2x2 + 3x)
प्रश्नानुसार,
उस दिन की कुल निर्माण लागत = ₹ 90
∴ 2x2 + 3x = 90
⇒ 2x2 + 3x – 90 = 0
⇒ 2x2 + (15 – 12)x – 90 = 0
⇒ 2x2 + 15x – 12x – 90 = 0
⇒ x(2x + 15) – 6(2x + 15) = 0
⇒ (2x + 15) (x – 6) = 0
यदि 2x + 15 = 0 हो, तो 2x = -15 ⇒ x = –\(\frac{15}{2}\)
और यदि x – 6 = 0 हो, तो x = 6
∵ बर्तनों की संख्या ऋणात्मक नहीं हो सकती है।
अतः x = –\(\frac{15}{2}\) को छोड़ देते हैं।
∴ x = 6 अर्थात् निर्मित बर्तनों की संख्या = 6
तब प्रत्येक नग की लागत = ₹ (2x + 3)
= ₹ (2 × 6 + 3)
= ₹ (12 + 3) = 15
अतः निर्मित बर्तनों की संख्या 6 तथा प्रत्येक नग की लागत ₹ 15 है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

Jharkhand Board JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

Jharkhand Board Class 10 Science जैव प्रक्रम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो सम्बन्धित है-
(a) पोषण
(c) उत्सर्जन
(b) श्वसन
(d) परिवहन
उत्तर:
(a) उत्सर्जन।

प्रश्न 2.
पादप में जाइलम उत्तरदायी है-
(a) जल का वहन
(b) भोजन का वहन
(c) अमीनो अम्ल का वहन
(d) ऑक्सीजन का वहन
उत्तर:
(a) जल का वहन।

प्रश्न 3.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है-
(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
(b) क्लोरोफिल
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 4.
पायरुवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है-
(a) कोशिकाद्रव्य
(b) माइटोकॉण्ड्रिया
(c) हरित लवक
(d) केन्द्रक
उत्तर:
(a) माइटोकॉण्ड्रिया।

प्रश्न 5.
हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?
उत्तर:

  1. वसा का पाचन छोटी आँत में होता है।
  2. क्षुद्रांत्र में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है, जिससे उस पर एंजाइम का कार्य करना मुश्किल हो जाता है।
  3. लीवर द्वारा स्रावित पित्त लवण उन्हें छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है, जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। यह इमल्सीकृत क्रिया कहलाती है।
  4. पित्त रस अम्लीय माध्यम को क्षारीय बनाता है, ताकि अग्न्याशय से स्रावित लाइपेज एंजाइम क्रियाशील हो सके।
  5. लाइपेज एंजाइम वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में परिवर्तित कर देता है।
  6. पाचित वसा अंत में आंत्र की भित्ति अवशोषित कर लेती है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 6.
भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
उत्तर:

  1. लार में लार (सेलाइवरी) एमायलेज़ एंज़ाइम होता है जो स्टार्च को शर्करा जैसे माल्टोज में परिवर्तित कर देता है।
    JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 1
  2. लार भोजन को नम करती है जो भोजन के बड़े टुकड़ों को छोटे टुकड़ों में चबाने तथा तोड़ने में मदद करती है, जिससे कि सेलाइवरी एमायलेज़ स्टार्च को प्रभावशाली तरीके से पाचित कर सके।

प्रश्न 7.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उसके उपोत्पाद क्या हैं?
उत्तर:
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक शर्तें हैं-

  • जैव कोशिकाओं में क्लोरोफिल की उपस्थिति।
  • पादप की कोशिकाओं या हरे हिस्सों में पानी की आपूर्ति का प्रबन्ध या तो जड़ों के द्वारा या आसपास के वातावरण के द्वारा।
  • पर्याप्त सूर्य प्रकाश उपलब्ध हो, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश ऊर्जा आवश्यक है।
  • पर्याप्त CO2, जो प्रकाश संश्लेषण के दौरान शर्करा के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण अवयव है।
  • स्वपोषी पोषण के सह उत्पाद हैं- स्टार्च (शर्करा), जल तथा O2

प्रश्न 8.
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अन्तर हैं? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।
उत्तर:
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में प्रमुख निम्नलिखित अन्तर हैं-

वायवीय श्वसन अवायवीय श्वसन
1. वायवीय श्वसन, ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। 1. यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
2. ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। 2. ग्लूकोज़ का अपूर्ण विखण्डन होता है।
3. अन्तिम उत्पाद है – CO2, जल तथा ऊर्जा।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 2
3. अन्तिम उत्पाद हैं- इथाइल ऐल्कोहॉल (या लैक्टिक अम्ल), CO2 तथा थोड़ी-सी ऊर्जा।
4. बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है, एक ग्लूकोज़ अणु 38 ATP अणु। 4. कम मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है, एक ग्लूकोज़ अणु से 2ATP अणु।
5. वायवीय श्वसन का प्रथम चरण (ग्लाइकोलिसिस) कोशिकाद्रव्य में होता है जबकि अगला चरण माइटोकॉण्ड्रिया में होता है। 5. पूरा अवायवीय श्वसन कोशिकाद्रव्य में होता है।

जन्तु जिनमें अवायवीय श्वसन होता है- यीस्ट तथा परजीवी, जैसे टेपवर्म (फीताकृमि), एसकेरिस (गोलकृमि) आदि।

प्रश्न 9.
गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?
उत्तर:

  • कूपिका की भित्ति पतली होती है तथा रुधिर वाहिकाओं के जाल से ढकी हुई है, जिससे गैसों का आदान-प्रदान, रुधिर तथा कूपिका के अन्दर भरी हवा के बीच अधिकाधिक हो सके।
  • कूपिका की गुब्बारे के समान संरचना है, जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए सतही क्षेत्र बढ़ा देती है।

प्रश्न 10.
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर:
रुधिर की औसत हीमोग्लोबिन मात्रा किसी भी लिंग में 14.5 g प्रति 100 mL रुधिर है। यदि हीमोग्लोबिन की मात्रा रुधिर में कम होती है, तो इसकी O2 की वहन क्षमता भी घट जाती है। अतः वह मानव O2 की कमी के लक्षण दर्शाता है, जैसे साँस फूलना जो कि अक्सर लोहे की कमी से हुए एनीमिया का पहला लक्षण है।

प्रश्न 11.
मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
मनुष्य के परिसंचरण तंत्र को दोहरा परिसंचरण इसलिए कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक चक्र में रुधिर दो बार हृदय में जाता है। हृदय का दायाँ और बायाँ बँटवारा ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने से रोकता है। चूँकि हमारे शरीर में उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं, जिसके लिए उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन जरूरी होता है। अतः शरीर का तापक्रम बनाए रखने तथा निरन्तर ऊर्जा की पूर्ति के लिए यह परिसंचरण लाभदायक होता है।

प्रश्न 12.
जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में निम्नलिखित अन्तर हैं।

जाइलम फ्लोएम
1. जाइलम जड़ से पत्तियों तथा अन्य भागों में जल तथा घुले लवण परिवहित करते हैं। 1. फ्लोएम, भोजन पदार्थों को घुली अवस्था में पत्तियों से पादप के दूसरे हिस्सों तक परिवहित करता है।
2. जाइलम में पदार्थों का परिवहन वाहिकाओं तथा वाहिनियों द्वारा होता है, जो मृत ऊतक हैं। 2. फ्लोएम में पदार्थों का परिवहन चालनी ट्यूबों द्वारा सहचर कोशिकाओं की मदद से होता है, जो जैव कोशिकाएँ हैं।
3. वाष्पोत्सर्जन पुल के कारण ऊपर की ओर जल तथा घुले लवणों का चढ़ना सम्भव हो पाता है। यह पत्ती की कोशिकाओं से जल अणुओं के वाष्पीकरण से उत्पन्न खिंचाव के कारण होता है। 3. स्थानान्तरण में, पदार्थ फ्लोएम ऊतक में ATP ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए होता है। यह् परासरण दाब बढ़ा देता है जो फ्लोएम से पदार्थों को ऊतकों की ओर भेजता है, जिनमें दाब कम होता है।
4. जल का परिवहन सरल भौतिक गति के अन्तर्गत होता है। ऊर्जा खर्च नहीं होती है। अतः ATP की आवश्यकता नहीं है। 4. फ्लोएम में स्थानान्तरण एक सक्रिय क्रिया है तथा इसमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा ATP से प्राप्त हाती है।

प्रश्न 13.
फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।
उत्तर:
फुफ्फूस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु की रचना तथा क्रियार्विधि की तुलना निम्न प्रश्न से की जा सकती है-

कूपिका वृक्काणु
1. पतली भित्ति, गुब्बारे के समान संरचना। सतह महीन तथा नाजुक। 1. पतली भित्ति, कप की आकृति की संरचना, जो पतली भित्ति वाले ट्युब्यूल से जुड़ी है।
2. गैसों के आदान-प्रदान के लिए रुधिर केशिकाओं का लम्बा-चौड़ा जाल। 2. बोमेन संपुट में रुधिर केशिकाओं का गुच्छा होता है, जिसे केशिका गुच्छ कहते हैं। इसका काम छानना है। वृक्काणु के ट्युब्यूलर हिस्सों के ऊपर रुधिर वाहिकाओं का एक जाल होता है, जो लाभप्रद पदार्थों तथा जल का पुनः अवशोषण करता है।
3. कूपिकाएँ सतही क्षेत्र बढ़ा देती हैं, जिससे CO2 का रुधिर से वायु में तथा O2 का वायु से रुधिर में विसरण हो सके। 3. वृक्काणु भी सतही क्षेत्र बढ़ाता है, रूधिर को छानने के लिए तथा निस्यंद से लाभप्रद पदार्थ तथा जल के पुनः अवशोषण के लिए। अन्त में मूत्र बचेगा।
4. कूपिकाएँ केवल फेफड़ों में गैसों के आदान-प्रदान के लिए सतही क्षेत्र बढ़ाती हैं। 4. वृक्काणु के नलिकाकार हिस्से मृत्र को संग्राहक वाहिनी तक ले जाती है।
5. कूपिकाएँ बहुत छोटी होती हैं और प्रत्येक फेफड़े में एक बहुत बड़ी संख्या में पाई जाती हैं। 5. वृक्काणु, जो छानने की आधार इकाई है, एक बड़ी संख्या में प्रत्येक गुर्द् में होते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-105)

प्रश्न 1.
हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?
उत्तर:
हम जानते हैं कि बहुकोशिकीय जीवों में समस्त कोशिकाएँ वातावरण से सीधे सम्पर्क में नहीं होती हैं अतः सरल विसरण समस्त कोशिकाओं की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता है।

प्रश्न 2.
कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?
उत्तर:
सजीवों को अपनी संरचनाओं की मरम्मत एवं रखरखाव करना आवश्यक है। ये समस्त संरचनाएँ अणुओं से मिलकर बनी हैं। इसलिए हमें हर समय, अणुओं को गतिशील रखने की क्षमता होनी चाहिए। अतः अदृश्य अणुगति, जीव के जीवित होने का प्रमाण है।

प्रश्न 3.
किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:

  • भोजन- ऊर्जा एवं पदार्थों के स्रोत के रूप में।
  • ऑक्सीजन- भोजन पदार्थों का विखण्डन करके ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।
  • जल भोजन के सही पाचन के लिए तथा शरीर के अन्दर अन्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए।
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)।

प्रश्न 4.
जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे?
उत्तर:
अनेकों जैव प्रक्रम हैं जो जीवन के अनुरक्षण के लिए आवश्यक हैं, जैसे-

  • पोषण
  • श्वसन
  • उत्सर्जन
  • वहन आदि।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-111)

प्रश्न 1.
स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में निम्नलिखित अन्तर हैं –

स्वयंपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition) विषमपोषी पोषण (Hetrotrophic Nutrition)
1. यह पोषण हरे पौधों में पाया जाता है, जो भोजन के निर्माण के लिए अकार्बनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं। इसलिए हरे पौधों को स्वयंपोषी जीव कहते हैं। 1. इसमें जन्तुओं को अपने कार्बन तथा ऊर्जा की आवश्यकता के लिए पौधों तथा अन्य जीवों पर निर्भर रहना पड़ता है। उदाहरण-शाकाहारी, मांसाहारी, मृतजीवी आदि ।
2. इस पोषण में CO2 जल, क्लोरोफिल तथा सूर्य के प्रकाश द्वारा कार्बनिक पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषपा कहते हैं। 2. विषमपोषी पोषण में यह प्रक्रिया नहीं होती है।
3. यह पोषण हरे पौधों तथा साइनोबैक्टीरिया (नीले-हरे शैवाल) में होता है। 3. यह पोषण प्रायः सभी जन्तुओं, मानव, परजीवी, कवक आदि में होते हैं।

प्रश्न 2.
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?
उत्तर:

  • कार्बन डाइऑक्साइड – पादप वातावरण से CO2 रंध्रों द्वारा प्राप्त करते हैं।
  • जल- पादप, जड़ों द्वारा जल का अवशोषण मृदा में से करते हैं तथा पत्तियों तक इसका परिवहन करते हैं।
  • क्लोरोफिल – हरे पत्तों में क्लोरोप्लास्ट होता है, जिसमें क्लोरोफिल मौजूद होते हैं।
  • सूर्य का प्रकाश सूर्य से प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 3.
हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
उत्तर:
आमाशय में अम्ल माध्यम को अम्लीय बनाता है जो पेप्सिन ( Pepsin) एंजाइम की क्रिया में सहायक होता है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 4.
पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?
उत्तर:
पाचक एंजाइम प्रोटीन को अमीनो अम्ल में, कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में तथा वसा को वसीय अम्लों व ग्लिसरॉल में बदल देते हैं।

प्रश्न 5.
पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर:
पचे हुए भोजन का अवशोषण क्षुद्रांत्र में होता है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 3
क्षुद्रांत्र की संरचना इस प्रकार से है कि कुल सतही क्षेत्रफल अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे अवशोषण का क्षेत्र भी बढ़ जाता है। अतः पाचित भोजन अधिक मात्रा में अवशोषित होकर रक्त में पहुँचता है और फिर इसका वहन सारे शरीर में होता है। क्षुद्रांत्र की अंदरूनी भित्ति में बहुत बड़ी संख्या में अंगुलियाँ समान दीर्घरोम होती हैं। ये दीर्घरोम भोजन के अवशोषण के लिए एक बड़ा क्षेत्र प्रदान करती हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या – 116)

प्रश्न 1.
श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?
उत्तर:
जो जीव पानी में रहता है, वह अपने चारों ओर पानी में घुली ऑक्सीजन का प्रयोग करता है। चूँकि पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है, अतः जलीय जीव में श्वसन दर अधिक होती है। थलीय जीव, पर्याप्त ऑक्सीजन वाले वातावरण से श्वसन अंगों द्वारा ऑक्सीजन लेते हैं। अतः जलीय जीवों की तुलना में थलीय जीवों की श्वसन दर काफी कम होती है।

प्रश्न 2.
ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?
उत्तर:
ग्लूकोज के ऑक्सीजन से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ निम्नलिखित प्रकार हैं-
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 4

प्रश्न 3.
मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर:
ऑक्सीजन का परिवहन – मानव शरीर के फुफ्फुस कूपिकाओं की रुधिर वाहिकाओं में RBC होते हैं, जिसमें मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से संयुक्त होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है तथा सभी ऊतकों एवं अंगों तक पहुँच जाता है।

कार्बन-डाइऑक्साइड (CO2) का परिवहन – ऑक्सीजन की अपेक्षा CO2 जल में अधिक विलेय है, इसलिए ऊतकों से फुफ्फुस तक परिवहन हमारे रुधिर (प्लाज्मा) में विलेय अवस्था में होता है।

प्रश्न 4.
गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया है?
उत्तर:
श्वास नली फुफ्फुस में कई छोटी-छोटी श्वसनिकाओं में विभाजित होती ये छोटी श्वसनिकाएँ बहुत छोटे-छोटे थैली जैसी रचना कूपिकाओं में खुलती हैं। कूपिकाओं की भित्ति बहुत पतली होती है जो कि रुधिर केशिकाओं से घिरी होती है। दोनों फुफ्फुस में लगभग 30 करोड़ कूपिकाएँ होती हैं जो कि लगभग 100 वर्ग मीटर सतह बनाते हैं।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-122)

प्रश्न 1.
मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
मानव में वहन तंत्र के घटक हैं-हदय, रुधिर वाहिकाएँ और रुधिर। उनके कार्य निम्न प्रकार हैं-
(i) हददय-यह एक पंप की तरह कार्य करता है।

(ii) रुधिर वाहिकाएँ :

  • धमनियों से शरीर के सभी अभी तक
  • शिराएं विभिन्न तक वापस डीऑक्सीजनेटेड विभाजित हो जाती है, जिसे कोशिकाएँ कहते है सर एवं टीचर के लिए लाते हैं।
  • केशिकाएँ-धमनी छोटी-छोटी वाहिकाओं में विभाजित हो जाती हैं, जिसे केशिकाएँ कहते हैं। रुधिर एवं आसपास की केशिकाओं के मध्य पदार्थों का विनिमय होता है।

(iii) रुधिर या रक्त-यह परिवहन का माध्यम है जो निम्नलिखित से बने हैं-

  • प्लाज्मा-भोजन के अणुओं, CO2 नाइट्रोजनी वर्ज्य, लवण, हार्मोन, प्रोटीन आदि का विलीन रूप में वहन करता है।
  • RBC-इसमें हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन को ले जाती है।
  • WBC-संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है। यह शरीर में आए रोगाणुओं को मारकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।
  • प्लेटलेट्स-रक्तस्त्राव के स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर मार्ग अवरुद्ध कर देती है।

प्रश्न 2.
स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीज तथा विनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
हृदय का दावा विक्सीजन चिर को मिलने से रोकता है शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है, क्योंकि पक्षी और स्तनधारी जंतुओं को अपने शरीर का उपक्रम बनाए रखने के लिए निरन्तर उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए यह बहुभदायक होता है।

प्रश्न 3.
उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?
उत्तर:
उच्च संगठित पादप में निम्नलिखित वहन तंत्र होते हैं-
(i) जाइलम ऊतक-जाइलम ऊतक पादप के जड़ से खर्रिज लवण तथा जल इसके सभी अंगों तक पहुँचाता है। जाइलम ऊतक में जड़ों, तनों और पत्तियों की त्राहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहन वाहिकाओं का एक जाल बनाती हैं, जो पादप के सभी भागों से सम्बद्ध होता है।

(ii) फ्लोएम ऊतक भोजन तथा अन्य पदार्थों का संवहन पत्तियों से अन्य सभी अंगों तक फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है।

प्रश्न 4.
पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?
उत्तर:
जल तथा लवण, मृदा से पत्तियों तक जाइलम कोशिकाओं द्वारा परिवहित होते हैं। जड़, तने तथा पनियों कोशिकाएँ परस्पर जुड़कर संयोजी मार्ग बनाते हैं। जड़ों की कोशिकाएँ मृदा से लवण लेती हैं। ये मृदा तथा जड़ के लवणों की सान्द्रता में फर्क उत्पन्न कर देता की जाइलम है। इसलिए जल की निरन्तर गति जाइलम में होती रहती है। एक परासरण दबाव उत्पन्न होता और जल व लवण एक कोशिका से दूसरी कोशिका में परासरण के कारण परिवहित होते रहते हैं। वाष्पोत्सर्जन के कारण जल की निरन्तर हानि होती रहती है तथा चूषण बल उत्पन्न होता है जिससे जल तथा लवणों की निरन्तर गति होती रहती है। और जल तथा लवणों का परिवहन होता रहता है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 5

प्रश्न 5.
पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?
उत्तर:
पादपों में निर्मित भोजन, फ्लोएम द्वारा भण्डारण अंगों जैसे जड़, फल, बीज तथा विकासशील हिस्सों में परिवहित होता है। इस क्रिया को स्थानान्तरण कहते हैं। यह कार्य चलनी कोशिकाओं तथा सहचर कोशिकाओं द्वारा सम्पन्न होता है। भोजन कणों का परिवहन ऊपर तथा नीचे स्थानांतरण की क्रिया एक सक्रिय क्रिया है जिसमें ऊर्जा का प्रयोग होता है।

पदार्थों का स्थानांतरण पत्ती की कोशिकाओं या भण्डारण के स्थान से फ्लोएम ऊतक में होता है। इसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो ए. टी. पी. (ATP ) अणु से प्राप्त होती है। यह ऊर्जा परासरण दाब बढ़ाता है, परिणामस्वरूप जल बाहर से फ्लोएम के अन्दर गति करता है। यह क्रिया भोजन का परिवहन पादपों के समस्त हिस्सों में कायम रखती है।

पाठगत प्रश्न (पृष्ठ संख्या-124)

प्रश्न 1.
वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वृक्काणु के ऊपरी सिरे पर कप के आकार की रचना होती है जिसे बोमन संपुट कहते हैं। बोमन संपुट का निचला सिरा नली के आकार का होता है जो मूत्र संग्राहक नलिका में खुलता है। बोमन संपुट में बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छा होता है। प्रारम्भिक निस्यंद में कुछ पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और प्रचुर मात्रा में जल रह जाते हैं। जैसे-जैसे मूत्र इस नलिका में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित पुनरावशोषण हो जाता है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 6

प्रश्न 2.
उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं।
उत्तर:
उत्सर्जक पदार्थों से मुक्ति पाने के लिए पादप निम्नलिखित तरीकों का प्रयोग करते हैं-

  • अनेकों उत्सर्जक उत्पाद कोशिकाओं के धानियों में भण्डारित रहते हैं। पादप कोशिकाओं में तुलनात्मक रूप से बड़ी धानियाँ होती हैं।
  • कुछ उत्सर्जक उत्पाद पत्तियों में भण्डारित रहते हैं। पत्तियों के गिरने के साथ ये हट जाते हैं।
  • कुछ उत्सर्जक उत्पाद, जैसे रेज़िन या गम, विशेष रूप से निष्क्रिय पुराने जाइलम में भण्डारित रहते हैं।
  • कुछ उत्सर्जक उत्पाद जैसे टेनिन, रेज़िन, गम छल में भण्डारित रहते हैं। छाल के उतरने के साथ हट जाते हैं।
  • पादप कुछ उत्सर्जक पदार्थों का उत्सर्जन जड़ों के द्वारा मृदा में भी करते हैं।

प्रश्न 3.
मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
मूत्र की मात्रा पानी के पुनः अवशोषण पर प्रमुख रूप से निर्भर करती है। वृक्काणु नलिका द्वारा पानी की मात्रा का पुनः अवशोषण निम्नलिखित पर निर्भर करता है-

  • शरीर में अतिरिक्त पानी की कितनी मात्रा है जिसको निकालना है। जब शरीर के ऊतकों में पर्याप्त जल है, तब एक बड़ी मात्रा में तनु मूत्र का उत्सर्जन होता है। जब शरीर के ऊतकों में जल की मात्रा कम है, तब सांद्र मूत्र की थोड़ी-सी मात्रा उत्सर्जित होती है।
  • कितने घुलनशील उत्सर्जक, विशेषकर नाइट्रोजनयुक्त उत्सर्जक जैसे यूरिया तथा यूरिक अम्ल तथा लवण आदि का शरीर से उत्सर्जन होता है।

जब शरीर में घुलनशील उत्सर्जक की अधिक मात्रा हो, तब उनके उत्सर्जन के लिए जल की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है। अतः मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

क्रिया-कलाप – 6.1

  • गमले में लगा एक शबलित पत्ती वाला पौधा लीजिए (उदाहरण के लिए मनीप्लांट या क्रोटन का पौधा)।
  • पौधे को तीन दिन अँधेरे कमरे में रखिए ताकि उसका सम्पूर्ण मंड प्रयुक्त हो जाए।
  • अब पौधे को लगभग छह घण्टे के लिए सूर्य के प्रकाश में रखिए।
  • पौधे से एक पत्ती तोड़ लीजिए। इसमें हरे भाग को अंकित करिए तथा उन्हें एक कागज पर ट्रेस कर लीजिए।
  • कुछ मिनट के लिए इस पत्ती को उबलते पानी में डाल दीजिए।
  • इसके बाद इसे ऐल्कोहॉल से भरे बीकर में डुबा दीजिए।
  • इस बीकर को सावधानी से जल ऊष्मक में रखकर तब तक गर्म करिए जब तक ऐल्कोहॉल उबलने न लगे।

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पत्ती के रंग का क्या होता है? विलयन का रंग कैसा जाता है?
उत्तर:
पत्ती का रंग उड़ जाता है तथा यह रंगरहित हो जाती है, क्योंकि क्लोरोफिल ऐल्कोहॉल में घुल जाता है। घोल का रंग हरा हो जाता है।

  • लगभग समान आकार के गमल मे लग दा पाध लीजिए।
  • तीन दिन तक उन्हें अँधेरे कमरे में रखिए।
  • अब प्रत्येक पौधे को अलग-अलग काँच-पट्टिका पर रखिए। एक पौधे के पास वाच ग्लास में पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड रखिए। पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने के लिए किया जाता है।
  • चित्र के अनुसार दोनों पौधों को अलग-अलग बेलजार से ढक दीजिए।
  • जार के तले को सील करने के लिए काँच-पट्टिका पर वैसलीन लगा देते हैं इससे प्रयोग वायुरोधी हो जाता है।
  • लगभग दो घंटों के लिए पौधों को सूर्य के प्रकाश में रस्विए।
  • प्रत्येक पौधे से एक पत्ती तोड़िए तथा उपर्युक्त क्रिया-कलाप की तरह उसमें मंड की उपस्थिति की जाँच कीजिए।
    JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 7
  • अब कुछ मिनट लिए इस पत्ती को आयोडीन के तन विलयन डाल दीजिए।
  • पत्ती को बाहर निकालकर उसके आयोडीन को धो डालिए।
  • पत्ती के रंग का अवलोकन कीजिए और प्रारम्भ में पत्ती का जो रंग ट्रेस किया था उससे इसकी तुलना कीजिए।

क्रिया-कलाप – 6.2

प्रश्न 2.
पत्ती के विभिन्न भागों में मंड की उपस्थिति के बारे में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
पत्ती के वे क्षेत्र जो गहरे नीले-काले आयोडीन घोल के कारण हो गए हैं, स्टार्च की उपस्थिति दर्शा रहे हैं, जबकि वे क्षेत्र जो रंगरहित रह गए हैं, यह दर्शा रहे हैं कि वहाँ स्टार्च निर्माण नहीं हुआ है। यह क्रिया-कलाप यह संकेत दे रहा है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 8

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या दोनों पत्तियाँ समान मात्रा में मंड की उपस्थिति दर्शाती हैं?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि एक पौधे के पास (KOH) रखा गया है, जो CO2 अवशोषित करता है। अत: KOH वाले बेलजार से तोड़ी गई पत्ती में मंड की उपस्थिति अपेक्षाकृत बहुत कम है।

प्रश्न 2.
इस क्रिया-कलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
यह क्रिया-कलाप दर्शाता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 की मात्रा एक आवश्यक घटक है।

क्रिया-कलाप – 6.3

  • 1 mL मंड का घोल (1%) दो परखनलियों ‘A’ तथा ‘B’ में लीजिए।
  • परखनली ‘A’ में 1 mL लार डालिए तथा दोनों परखनलियों को 20-30 मिनट तक शांत छोड़ दीजिए।
  • अब प्रत्येक परखनली में कुछ बूँद तनु आयोडीन घोल की डालिए।

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किस परखनली में आपको रंग में परिवर्तन दिखाई दे रहा है?
उत्तर:
परखनली B में रंग बदल गया, क्योंकि इसमें केवल स्टार्च है। परखनली A में स्टार्च शर्करा में परिवर्तित हो गया, अतः रंग में कोई परिवर्तन नहीं देखा गया।

प्रश्न 2.
दोनों परखनलियों में मंड की उपस्थिति के बारे जबकि में क्या इंगित करता है?
उत्तर:
यह दर्शाता है कि परखनली परखनली A स्टार्च नहीं है। में स्टार्च है,

प्रश्न 3.
यह लार की मंड पर क्रिया के बारे में क्या दर्शाता है?
उत्तर:
यह हमें बताता है कि लार स्टार्च पर क्रिया करते हुए स्टार्च को दूसरे पदार्थ (माल्टोज शर्करा) में परिवर्तित कर देती है।

क्रिया-कलाप – 6.4

प्रश्न 1.
एक परखनली में ताजा तैयार किया हुआ चूने का पानी लीजिए। इस चूने के पानी में नि:श्वास द्वारा निकली वायु प्रवाहित कीजिए [चित्र (a)]। नोट कीजिए कि चूने के पानी को दूधिया होने में कितना समय लगता है?
उत्तर:
छात्र स्वयं समय नोट करें।

प्रश्न 2.
एक सिरिंज या पिचकारी द्वारा दूसरी परखनली में में ताजा चूने का पानी लेकर वायु प्रवाहित पानी को दूधिया होने में कितना समय लगता है। करते हैं [चित्र (b)]। नोट कीजिए कि इस बार चूने के
उत्तर:
छात्र स्वयं समय नोट करें।

JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 3.
निःश्वास द्वारा निकली वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा के बारे में यह हमें क्या दर्शाता है?
उत्तर:
पहली स्थिति में चूने का पानी [चित्र (a)] दूधिया होने में ज्यादा समय लेता है जबकि दूसरी स्थिति [चित्र (b)] में यह दर्शाता है कि बाह्यश्वसन वाली वायु में सामान्य वायु की तुलना में CO2 अधिक है। इसलिए बाह्यश्वसन वायु सामान्य वायु की तुलना में चूने के पानी को जल्दी दूधिया कर देती है। अतः बाह्यश्वसनीय वायु में CO2 अधिक है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 9
(a) चूने के पानी में निःश्वास द्वारा वायु प्रवाहित हो रही है।
(b) चूने के पानी में वायु पिचकारी / सिरिंज द्वारा प्रवाहित की जा रही है।

क्रिया-कलाप – 6.5

  • किसी फल का रस या चीनी का घोल लेकर उसमें कुछ यीस्ट डालिए। एक छिद्र वाली कॉर्क लगी परखनली में इस मिश्रण को ले जाइए।
  • कॉर्क में मुड़ी हुई काँच की नली लगाइए। काँच की नली के स्वतंत्र सिरे को ताजा तैयार चूने के पानी वाली परखनली में ले जाइए।
  • चूने के पानी में होने वाले परिवर्तन को तथा इस परिवर्तन में लगने वाले समय के अवलोकन को नोट कीजिए।

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किण्वन के उत्पाद के बारे में यह हमें क्या दर्शाता है?
उत्तर:
यह हमें बताता है कि अन्य उत्पादों (ऐल्कोहॉल) के साथ CO2 भी एक उत्पाद है।

क्रिया-कलाप – 6.6

प्रश्न 1.
एक जलशाला में मछली का अवलोकन कीजिए। वे अपना मुँह खोलती और बंद करती रहती हैं साथ ही आँखों के पीछे क्लोमछिद्र (या क्लोमछिद्र को ढकने वाला प्रच्छद) भी खुलता और बंद होता रहता है। क्या मुँह समय और क्लोमछिद्र के खुलने और बंद होने के में किसी प्रकार का समन्वय है?
उत्तर:
हाँ, वे बारी-बारी से खुलते तथा बन्द होते हैं।

प्रश्न 2.
गिनती करो कि मछली एक मिनट में कितनी बार मुँह खोलती और बन्द करती है?
उत्तर:
मुँह का खोलना तथा बन्द होना अलग-अलग मछलियों में तथा विभिन्न प्रकार की मछलियों में भिन्न-भिन्न होता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि यह वह स्वयं करें।

प्रश्न 3.
इसकी तुलना आप अपनी श्वास को एक मिनट में अंदर और बाहर करने से कीजिए।
उत्तर:
मछली हमारी तुलना में अधिक तेज श्वसन करती है क्योंकि वायु की तुलना में पानी में कम ऑक्सीजन होती है।

क्रिया-कलाप 6.7

प्रश्न 1.
अपने आसपास के एक स्वास्थ्य केन्द्र का भ्रमण कीजिए और ज्ञात कीजिए कि मनुष्यों में हीमोग्लोबिन की मात्रा का सामान्य परिसर क्या है?
उत्तर:
पुरुष : 13.8 – 17.5gm/dl
महिला : 12.1 – 15.1 gm/dl
बच्चों में 5 से 11 वर्ष : 11.5gm/dl
12 से 14 वर्ष : 12 gm/dl (माध्य मान)
2 से 6 वर्ष : 12.5gm/dl

प्रश्न 2.
क्या यह बच्चे और वयस्क के लिए समान है?
उत्तर:
नहीं बच्चों में 11 से 16 g/dl होता है।

प्रश्न 3.
क्या पुरुष और महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में कोई अन्तर है?
उत्तर:
हाँ, प्रश्न 1 का उत्तर देखें।

प्रश्न 4.
अपने आसपास के एक पशुचिकित्सा क्लीनिक का भ्रमण कीजिए। ज्ञात कीजिए कि पशुओं, जैसे भैंसा परिसर ‘या गाय में हीमोग्लोबिन की मात्रा का सामान्य क्या है?
उत्तर:
10.4 से 16.4 g/dl

प्रश्न 5.
क्या यह मात्रा बछड़ों में, नर तथा मादा जन्तुओं में समान है?
उत्तर:
नहीं, बछड़ों में अधिक होता है।

प्रश्न 6.
नर तथा मादा मानव में व जन्तुओं में दिखाई देने वाले अन्तर की तुलना कीजिए।
उत्तर:
हीमोग्लोबिन की मात्रा निम्नानुसार है-
पुरुष = 13.8 से 17.2 g/dl
महिला = 12.1 से 15.1 g/dl
बच्चे = 11 से 16 g/dl
मवेशी = 10.4 से 16.4g/dl

प्रश्न 7.
यदि कोई अन्तर है तो उसे कैसे समझाओगे?
उत्तर:
क्योंकि शरीर में O2 तथा CO2 के परिवहन के लिए हीमोग्लोबिन आवश्यक है। पुरुष महिलाओं बच्चों से अधिक परिश्रम करता है। कार्यों की प्रकृति व विविधता के कारण ही इनमें महिलाओं, बच्चों व मवेशियों की अपेक्षा हीमोग्लोबिन की मात्रा अधिक होती है।

क्रिया-कलाप 6.8

  • लगभग एक ही आकार के तथा बराबर मुदा वाले दो गमले लीजिए। एक में पौधा लगा दीजिए तथा दूसरे गमले में पौधे की ऊँचाई की एक छड़ी लगा दीजिए।
  • दोनों गमलों की मिट्टी प्लास्टिक की शीट से ढक दीजिए जिसमें नमी का वाष्पन न हो सके।
  • दोनों गमलों को को पौधे के साथ तथा दूसरे को छड़ी के साथ, प्लास्टिक शीट से ढक दीजिए।

क्रिया-कलाप के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या आप दोनों में कोई अन्तर देखते हैं?
उत्तर:
हाँ, जिस गमले में पौधा है, उसकी प्लास्टिक की चादर में पानी की बूँदें नजर आ रही हैं। वाष्पोत्सर्जन की क्रिया में पहले गमले में, जिसमें पौधा है, जल वाष्प बनकर उड़ रही बूँदों के रूप में नज़र आ रहा है जबकि दूसरे गमले में जिसमें लकड़ी है, पानी की बूँदें नजर नहीं आ रही हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Exercise 4.1

प्रश्न 1.
जाँच कीजिए कि क्या निम्न द्विघात समीकरण है:
(i) (x + 1)2 = 2(x – 3 )
(ii) x2 – 2x = (-2) (3 – x)
(iii) (x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)
(iv) (x – 3) (2x + 1) = x (x + 5)
(v) (2x – 1) (x – 3) = (x + 5)
(vi) x2 + 3x + 1 = (x – 2)2
(vii) (x + 2)3 = 2x(x2 – 1)
(viii) x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3
हल:
(i) दिया गया समीकरण है:
(x + 1)2 = 2(x – 3)
[सूत्र (a + b)2 = a2 + 2ab + b2 से]
⇒ x2 + 2x + 1 = 2x – 6
⇒ x2 + 2x + 1 – 2x + 6 = 0
⇒ x2 + 7 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 2 है।
अतः दिया गया समीकरण द्विघात समीकरण है।

(ii) दिया गया समीकरण है:
x2 – 2x = (- 2) (3 – x)
⇒ x2 – 2x = – 6 + 2x
⇒ x2 – 2x – 2x + 6 = 0
⇒ x2 – 4x + 6 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 2 है।
अतः दिया गया समीकरण द्विघात समीकरण है।

(iii) दिया गया समीकरण
(x – 2) (x + 1) = (x – 1) (x + 3)
⇒ x(x + 1) – 2 (x + 1) = x (x + 3) – 1 (x + 3)
⇒ x2 + x – 2x – 2 = x2 + 3x – x – 3
⇒ x2 + x – 2x – 2 – x2 – 3x + x + 3 = 0
⇒ 3x + 1 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 1 है।
अतः समीकरण, द्विघात समीकरण नहीं है।

(iv) दिया गया समीकरण
(x – 3) (2x + 1) = x(x + 5)
⇒ 2x2 + x – 6x – 3 = x2 + 5x
⇒ 2x2 – 5x – 3 – x2 – 5x = 0
⇒ x2 – 10x – 3 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 2 है।
अतः समीकरण द्विघात समीकरण है।

(v) दिया गया समीकरण
(2x – 1) (x – 3) = (x + 5) (x – 1)
2x2 – 6x – x + 3 = x2 – x + 5x – 5
2x2 – 7x + 3 = x2 + 4x – 5
2x2 – 7x + 3 – x2 – 4x + 5 = 0
x2 – 11x + 8 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 2 है।
अतः दिया गया समीकरण द्विघात समीकरण है।

(vi) दिया गया समीकरण
x2 + 3x + = (x – 2)2
⇒ x2 + 3x + 1 = x2 + 4 – 4x
⇒ x2 + 3x + 1 – x2 – 4 + 4x = 0
⇒ 7x – 3 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 1 है।
अतः दिया गया समीकरण द्विघात समीकरण नहीं है।

(vii) दिया गया समीकरण
(x + 2)3 = 2x(x2 – 1)
⇒ x3 + (2)3 + 3 × x × 2 (x + 2) = 2x3 – 2x
⇒ x3 + 8 + 6x2 + 12x = 2x3 – 2x = 0
⇒ x3 + 8 + 6x2 + 12x – 2x3 + 2x = 0
⇒ -x3 + 6x2 + 14x + 8 = 0
∵ यहाँ x की उच्चतम घात 3 है।
अतः यह एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(viii) दिया गया समीकरण
x3 – 4x2 – x + 1 = (x – 2)3
⇒ x3 – 4x2 – x + 1 = x3 – (2)3 – 3 × x × 2 (x – 2)
⇒ x3 – 4x2 – x + 1 = x3 – 8 – 6x2 + 12x = 0
⇒ x3 – 4x2 – x + 1 – x3 + 8 + 6x2 – 12x = 0
⇒ 2x2 – 13x + 9 = 0
∵ उक्त समीकरण में चर x की अधिकतम घात 2 है।
अतः दिया गया समीकरण द्विघात समीकरण है।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित स्थितियों को द्विघात समीकरणों के रूप में निरूपित कीजिए :
(i) एक आयताकार भूखण्ड का क्षेत्रफल 528 मीटर 2 है। क्षेत्र की लम्बाई (मीटरों में) चौड़ाई के दुगने से एक अधिक है। हमें भूखण्ड की लम्बाई और चौड़ाई ज्ञात करनी हैं।
(ii) दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। हमें पूर्णांकों को ज्ञात करना है।
(iii) रोहन की माँ उससे 26 वर्ष बड़ी है। उनकी आयु (वर्षो में) का गुणनफल अब से तीन वर्ष पश्चात् 360 हो जाएगा। हमें रोहन की वर्तमान आयु ज्ञात करनी है।
(iv) एक रेलगाड़ी 480 किमी की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल 8 किमी/घण्टा कम होती, तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घण्टे अधिक लेती। हमें रेलगाड़ी की चाल ज्ञात करनी है।
हल:
(i) माना भूखण्ड की चौड़ाई x मीटर है।
∵ भूखण्ड की लम्बाई, उसकी चौड़ाई के दुगुने से 1 मीटर अधिक है।
∴ भूखण्ड की लम्बाई = (2 × चौड़ाई) + 1
= (2 × x + 1)
= (2x + 1) मीटर
∵ आयताकार भूखण्ड का क्षेत्रफल = ल. × चौ.
= (2x + 1) × x
= (2x2 + x) वर्ग मीटर
दिया है भूखण्ड का क्षेत्रफल = 528 वर्ग मीटर
∴ 2x2 + x = 528
या 2x2 + x – 528 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण :
2x2 + x – 528 = 0

(ii) माना पहला धन पूर्णांक है तथा दूसरा क्रमागत धन पूर्णांक x + 1 है,
∴ पूर्णांकों का गुणनफल = x × (x + 1) = x2 + x
प्रश्नानुसार, x2 + x = 306
x2 + x – 306 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण:
x2 + x – 306 = 0

(iii) माना रोहन की वर्तमान आयु = x वर्ष तथा उसकी माँ उससे 26 वर्ष बड़ी है।
∴ रोहन की माँ की वर्तमान आयु = (x + 26) वर्ष
तीन वर्ष बाद रोहन की आयु = (x + 3) वर्ष
तथा तीन वर्ष बाद रोहन की माँ की आयु = (x + 26) + 3 = (x + 29) वर्ष
∴ रोहन और उसकी माँ की आयु का गुणनफल = (x + 3) (x + 29 ) वर्ष
प्रश्नानुसार,
⇒ (x + 3) (x + 29) = 360
⇒ x2 + 29x + 3x + 87 = 360
⇒ x2 + 32x + 87 – 360 = 0
⇒ x2 + 32x – 273 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण :
x2 + 32x – 273 = 0

(iv) माना रेलगाड़ी की चाल x किमी/घण्टा है।
निर्धारित दूरी = 480 किमी
रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1 1
यदि रेलगाड़ी की चाल 8 किमी / घण्टा कम हो अर्थात् चाल (x – 8) किमी / घण्टा होती तो रेलगाड़ी द्वारा 480 किमी दूरी चलने में लगा समय
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 4 द्विघात समीकरण Ex 4.1 2
⇒ 3x2 – 24x = 3840
⇒ 3x2 – 24x – 3840 = 0
⇒ 3(x2 – 8x – 1280) = 0
⇒ x2 – 8x – 1280 = 0
अतः अभीष्ट द्विघात समीकरण : x2 – 8x – 1280 = 0

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Jharkhand Board JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Important Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक तत्त्व (M) आवर्त सारणी के वर्ग IIIA में है। इसके क्लोराइड तथा ऑक्साइड के सूत्र लिखिए|
उत्तर:
वर्ग IIIA में तत्त्व M की संयोजकता 3 है। क्लोरीन की संयोजकता 1 तथा ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है। अत: क्लोराइड का सूत्र MCl3 तथा ऑक्साइड का सूत्र M2O3 है।

प्रश्न 2.
एक तत्त्व (M) के सल्फाइड का सूत्र M2S5 है। यह तत्त्व आवर्त सारणी के किस उप वर्ग में होगा?
उत्तर:
सूत्र M2S5 के अनुसार M की संयोजकता 5 है – अतः यह उपवर्ग VA में होगा।

प्रश्न 3.
तत्त्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।” इस कथन का अर्थ सरल भाषा में समझाइए।
उत्तर:
इसका अर्थ है कि यदि तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांकों के क्रम में व्यवस्थित किया जाय तो एक निश्चित अन्तराल पर स्थित तत्त्वों के गुणों में समानता होती है।

प्रश्न 4.
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक 1H1, 1H2 तथा 1H3 हैं। इन्हें आवर्त सारणी के किन आवर्ती/ उपवर्गों में रखा जाता है?
उत्तर:
तीनों समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक 1 है – अतः तीनों को प्रथम आवर्त के प्रथम उपवर्ग IA में रखा जाता है। जाता है।

प्रश्न 5.
अधिकतम कितने तत्त्व हो सकते हैं- (i) आवर्त संख्या n में, (ii) किसी आवर्त के p-ब्लॉक तथा d-ब्लॉक में, (iii) किसी आवर्त के f-ब्लॉक में।
उत्तर:
(i) n = 1 में 2 तत्त्व
n = 2 तथा 3 में से प्रत्येक में 8 तत्त्व
n = 4 तथा 5 में से प्रत्येक में 18 तत्त्व
n = 6 तथा 7 में से प्रत्येक में 32 तत्त्व

(ii) p-ब्लॉक में 6 तत्त्व; d-ब्लॉक में 10 तत्त्व,

(iii) f-ब्लॉक में 14 तत्त्व।

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प्रश्न 6.
सबसे हल्के तथा सबसे भारी प्राकृतिक तत्त्वों के नाम, प्रतीक तथा परमाणु क्रमांक लिखिए।
उत्तर:

  • सबसे हल्का तत्त्व- हाइड्रोजन (H) 1
  • सबसे भारी तत्त्व – यूरेनियम (U) 92

प्रश्न 7.
कुछ तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नवत् हैं। इनके नाम लिखिए तथा आवर्त सारणी में उपवर्ग बताइए-
A – 2. 4
B – 2, 8, 5
C – 2, 8,
D – 2,5
उत्तर:
A – 2, 4 → कार्बन, IV – A
B – 2, 8, 5 → फॉस्फोरस, V – A
C – 2, 8, 6 → सल्फर, VI – A
D – 2, 5 → नाइट्रोजन, V – A

प्रश्न 9.
निम्नलिखित परमाणुओं से बनने वाले आयनों के प्रतीक आवेश सहित लिखिए-
(i) Cl
(ii) S
(iii) Na
उत्तर:
(i) Cl → Cl1, (ii) S → S2- (iii) Na →

प्रश्न 10.
आवर्त क्या है?
उत्तर:
आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं।

प्रश्न 11.
मेण्डलीफ ने कितने तत्त्वों का वर्गीकरण किया था?
उत्तर:
63 तत्त्व।

प्रश्न 12.
उन तत्त्वों नाम लिखिए (किन्हीं दो) जिनकी खोज की भविष्यवाणी मेण्डलीफ ने की थी?
उत्तर:
टाइटेनियम (Ti) व गैलियम (Ga)।

प्रश्न 13.
आवर्त सारणी में समूह क्या होते हैं?
उत्तर:
आवर्त सारणी में ऊर्ध्वाधर कॉलम को समूह कहते हैं।

प्रश्न 14.
आधुनिक आवर्त सारणी में कितने समूह व आवर्त हैं?
उत्तर:
7 आवर्त व 18 समूह

प्रश्न 15.
आधुनिक आवर्त नियम लिखो।
उत्तर:
तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 16.
आवर्त सारणी में शून्य समूह की स्थिति बताओ।
उत्तर:
आवर्त सारणी में शून्य समूह दाहिनी तरफ अंत में है।

प्रश्न 17.
शून्य समूह के तत्त्वों के नाम लिखो।
उत्तर:
हीलियम (He), निऑन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), जीनॉन (Xe), रेडॉन (Rn)।

प्रश्न 18.
आवर्त सारणी में उस तत्त्व की स्थिति बताओ जिसकी परमाणु संख्या 13 है।
उत्तर:
यह तत्त्व आवर्त सारणी के समूह 13 और तीसरे आवर्त में स्थित है।

प्रश्न 19.
न्यूलैंड्स का अष्टक सिद्धांत क्या है?
उत्तर:
न्यूलैंड्स ने तत्त्वों को परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया कि प्रत्येक आठवें तत्त्व का गुणधर्म पहले तत्त्व के गुणधर्म के समान है।

प्रश्न 20.
मेण्डलीफ के द्वारा अनुमानित एका- ऐलुमिनियम तथा एका- सिलिकॉन तत्त्वों की किस नाम से खोज हुई?
उत्तर:

  • एका ऐलुमिनियम → गैलियम (Ga)
  • एका सिलिकॉन → जर्मेनियम (Ge)

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प्रश्न 21.
मेण्डलीफ के आवर्त सारणी का क्या सिद्धांत है?
उत्तर:
तत्त्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमान का आवर्त फलन होते हैं।

प्रश्न 22.
किसी वर्ग (समूह) में उपस्थित तत्त्वों में क्या समानता होती है?
उत्तर:
किसी समूह में तत्त्वों की संयोजकता समान रहती है। उदाहरण के लिए पहले समूह में प्रत्येक तत्त्व की संयोजकता 1 है।

प्रश्न 23.
मेण्डलीफ ने अपने आवर्त सारणी में तत्त्वों को किस आधार पर व्यवस्थित किया?
उत्तर:
मेण्डलीफ ने बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान, मूल गुणधर्म तथा रासायनिक गुणधमों में समानता को आधार मानकर तत्त्वों को आवर्त सारणी में व्यवस्थित किया।

प्रश्न 24.
किसी तत्त्व के ऑक्साइड का सूत्र E2O3 है तथा E एक क्रियाशील धातु है। E आवर्त सारणी के किस समूह में स्थित है?
उत्तर:
यह सारणी के 13वें समूह में स्थित है क्योंकि E की संयोजकता 3 है।

प्रश्न 25.
निम्नलिखित तत्त्वों को उनके धात्विक गुणों के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए- Mg, Ca, K, Ge, Ga
उत्तर:
Ge < Ga < Mg < Ca < K

प्रश्न 26.
क्लोरीन के दो समस्थानिक Cl-35 तथा Cl-37 हैं। क्या आधुनिक आवर्त सारणी में इन्हें दो स्थानों पर रखना चाहिए? उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
नहीं क्योंकि Cl की परमाणु संख्या 17 है और आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु संख्या ही है।

प्रश्न 27.
आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त (पीरियड) हैं?
उत्तर:
सात (7)।

प्रश्न 28.
मेण्डलीफ ने जिस समय आवर्त सारणी बनायी, उस समय तक कितने तत्वों की खोज हो चुकी थी?
उत्तर:
63 ।

प्रश्न 29.
मेण्डलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में कितने तत्त्वों को रखा है?
उत्तर:
56 तत्त्व।

प्रश्न 30.
आवर्त सारणी के आवर्त तीन के उन तत्त्वों के नाम लिखो जिनका आकार

  • सबसे बड़ा और
  • सबसे छोटा हो।

उत्तर:

  • सोडियम (Na)
  • आर्गन (Ar).

प्रश्न 31.
निम्नलिखित जोड़ों में से कौन-सा तत्त्व आकार में दूसरों से छोटा है?

  • Li व Na
  • C व N
  • B व Al.

उत्तर:

  • Na
  • C
  • Al

प्रश्न 32.
आवर्त के दो गुणधर्म लिखो।
उत्तर:

  • आवर्त के सभी तत्त्वों में भरे हुए कोशों की संख्या समान होती है।
  • आवर्त में आगे बढ़ने पर तत्त्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 33.
समूह की दो विशेषताएँ लिखो।
उत्तर:

  • वर्ग के सभी तत्त्वों में संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
  • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्त्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 34.
संयोजी इलेक्ट्रॉन क्या हैं?
उत्तर:
किसी तत्त्व के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं।

प्रश्न 35.
किसी आवर्त और समूह में तत्त्वों के धात्विक 5 गुण किस प्रकार बदलते हैं?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटता है तथा वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है।

प्रश्न 36.
उन दो तत्त्वों के नाम लिखिए जिनका सम्बन्ध निम्नलिखित से है-

  • कार्बन समूह
  • बोरॉन समूह
  • ऑक्सीजन समूह

उत्तर:

  • सिलिकॉन (Si) व जर्मेनियम (Ge)
  • ऐलुमिनियम (Al) व गैलियम (Ga)
  • सल्फर (S) व सिलीनियम (Se).

प्रश्न 37.
निम्नलिखित यौगिकों में बताइए कि हाइड्रोजन विद्युत धनी है अथवा विद्युत ऋणी-

  • NH3
  • HCl
  • H2S
  • PH3

उत्तर:

  • NH3 में विद्युत – धनी
  • HCl में विद्युत धनी में विद्युत-
  • H2S धनी
  • PH3 में विद्युत ऋणी

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प्रश्न 38.
ऐसे यौगिक का उदाहरण दीजिए जिससे नाइट्रोजन ऋणायन के रूप में हो। इस आयन का आवेश भी लिखिए।
उत्तर:
ऐलुमिनियम नाइट्राइड (AIN) में आयन N आवेश 3e.

प्रश्न 39.
आधुनिक आवर्त नियम क्या है? स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 40.
परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व की आवर्त सारणी में स्थिति बताइए तथा कारण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 17 अर्थात् (Cl17)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7
या 1s² 28² 2p6, 3s² 3p5
अत: आवर्त → = 3 है।
तथा वर्ग → = 2 + 5 = 7 है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का संक्षिप्त विवरण दीजिए – (i) डॉबेराइनर का त्रिक नियम; (ii) न्यूलैण्ड का अष्टक – नियम; (iii) संक्रमण तत्त्व; (iv) विकर्ण सम्बन्ध।
उत्तर:
(i) डॉबेराइनर का त्रिक नियम (1817) – इस नियम के अनुसार, “यदि समान गुण वाले तीन तत्त्वों को परमाणु भारों की वृद्धि के क्रम में रखा जाय तो बीच वाले भार, अन्य दो तत्त्वों के परमाणु भारों के माध्य (औसत) के लगभग बराबर होता है।” उदाहरणार्थ-
(i) \(\frac { Li }{ 7 }\), \(\frac { Na }{ 23 }\), \(\frac { K }{ 39 }\)
∴ Na = \(\frac { 7+39 }{ 2 }\) = 23

(ii) \(\frac { Cl }{ 35.5 }\), \(\frac { Br }{ 80 }\), \(\frac { I }{ 127 }\)
∴ Br = \(\frac { 35.5+127 }{ 2 }\) = 81
परन्तु सभी तत्त्वों के त्रिक न बनाये जा सकने के कारण यह नियम असफल रहा।

(ii) न्यूलैण्ड का अष्टक नियम (1864-66) – इस नियम के अनुसार, “जब तत्त्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है तो किसी भी तत्त्व के भौतिक व रासायनिक गुण इसके बाद आने वाले आठवें तत्त्व के गुणों से मिलते-जुलते हैं।

क्र. सं. तत्त्व
1. हाइड्रोजन (H)
2. लीथियम (Li)
3. बेरीलियम (Be)
4. बोरॉन (B)
5. कार्बन (C)
6. नाइट्रोजन (N)
7. ऑक्सीजन (O)
8. फ्लोरीन (F)
9. सोडियम (Na)
10. मैग्नीशियम (Mg)
11. ऐलुमीनियम (Al)
12. सिलिकॉन (Si)
13. फॉस्फोरस (P)
14. सल्फर (S)
15. क्लोरीन (Cl)
16. पोटैसियम (K)
17. कैल्शियम (Ca)
18. क्रोमियम (Cr)
19. टाइटेनियम (Ti)
20. मैंगनीज (Mn)
21. आयरन (Fe)

जैसा कि उपर्युक्त सारणी से व्यक्त होता है, यह नियम क्रम संख्या 18 के बाद समुचित रूप से लागू नहीं होता अर्थात् इसकी वैधता केवल कम परमाणु भारों के तत्त्वों तक ही सीमित थी।

(iii) संक्रमण तत्त्व-जिन तत्त्वों के d-कक्षक आंशिक रूप से भारी होते हैं, संक्रमण तत्त्व कहलाते हैं। Fe (26) = 1s², 2s² 2p6, 3s² 3p6 3d6, 4s²। दीघांकार आवर्त सारणी में इनका स्थान s-तथा p-ब्लॉक तत्त्वों के माध्यम है।

(iv) विकर्ण सम्बन्ध- आवर्त सारणी के दूसरे लघु आवर्त में आठ तत्त्व हैं तथा तीसरे लघु आवर्त में भी आठ तत्त्व हैं। इन तत्त्वों को प्रारूपिक तत्त्व कहते हैं तथा इन आवर्ती के तत्वों को विकर्ण सम्बन्ध कहते हैं अर्थात् विकर्ण से सिरों पर स्थित दोनों तत्त्वों के गुणों में समानता है।
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प्रश्न 2.
(i) मेण्डलीफ का आवर्त नियम लिखिए। इसमें क्या संशोधन करके आधुनिक आवर्त नियम प्राप्त किया गया? मेण्डलीफ के आवर्त सारणी तथा आधुनिक आवर्त सारणी बनाने के आधार में क्या मौलिक अंतर है?
अथवा
(ii) आधुनिक आवर्त नियम क्या है? आधुनिक आवर्त नियम पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
(i) मेण्डलीफ का आवर्त नियम-यदि तत्त्वों को परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाय तो तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन (periodic function of their atomic weights) होते हैं। उपर्युक्त नियम में ‘परमाणु भार’ के स्थान पर ‘परमाणु क्रमांक’ का उपयोग करके आधुनिक आवर्त नियम प्राप्त किया गया, जिसके अनुसार तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के आवर्ती फलन होते हैं।

मेण्डलीफ का आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु भारों पर आधारित है जबकि आधुनिक आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों पर आधारित है।

(ii) आधुनिक आवर्त नियम – यदि तत्त्वों को परमाणु क्रमांक के बढ़ते हुए क्रम में रखा जाय तो तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 3.
किसी तत्त्व के विभिन्न समस्थानिकों को मेण्डलीफ की मूल आवर्त सारणी में रखने में क्या कठिनाई थी? आधुनिक आवर्त सारणी में यह कठिनाई कैसे दूर हो गयी?
उत्तर:
समस्थानिकों का स्थान – अनेक तत्त्वों के ऐसे एक से अधिक समस्थानिक पाये जाते हैं जिनके परमाणु भार तो भिन्न होते हैं परन्तु रासायनिक गुण समान, जैसे हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक H-1, H-2, H-3, क्लोरीन के दो समस्थानिक Cl-35, Cl-37, कार्बन के दो समस्थानिक C-12, C-14 आदि हैं।

परमाणु भार के आधार पर क्रमायोजित करने से इन समस्थानिकों को भी सारणी में पृथक स्थान मिलना चाहिए परन्तु मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में ऐसा संभव नहीं था। आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्व का स्थान उसके परमाणु क्रमांक से निर्धारित होता है। अतः किसी तत्त्व के विभिन्न समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होने के कारण उन्हें सारणी में एक ही स्थान पर रखा जाता है।

प्रश्न 4.
दीर्घाकार आवर्त सारणी के मुख्य लक्षण क्या हैं? अंतिम चार आवर्ती के तत्त्वों की संख्या लिखिए।
अथवा
दीर्घाकार आवर्त सारणी की चार मुख्य विशेषताओं पर टिप्पणी लिखिए। दीर्घाकार आवर्त सारणी की विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
उत्तर:
दीघांकार आवर्त सारणी के लक्षण – इसके मुख्य लक्षण निम्नवत् हैं-
(1) इस सारणी में 7 क्षैतिज पंक्तियाँ (Horizontal rows) हैं, जिन्हें आवर्त (Period) कहते हैं तथा 18 ऊर्ध्वाधर स्तम्भ (Vertical columns) हैं, जिन्हें वर्ग (Group) या समूह कहते हैं।

(2) प्रत्येक आवर्त को चाहे वह लघु हो अथवा दीर्घ, एक ही रेखा में रखा गया है अर्थात् मेण्डलीफ की सारणी की भाँति उसे प्रथम तथा द्वितीय उपश्रेणियों में नहीं बाँटा गया।

(3) प्रत्येक आवर्त में, उपकोशों में अंतिम इलेक्ट्रॉन के प्रवेश के अनुसार तत्त्वों को उपवर्गों में निम्नलिखित क्रम में रखा गया है-
s – उपकोश – IA, IIA [ अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन]
p – उपकोश – III-A, IV-A, V-A, VI-A, VII-A तथा 0 [अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉन]
d – उपकोश – III-B, IV-B, V-B, VI-B, VII-B, VIII, VIII, VIII, I-B, II-B [ अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन]
इस प्रकार इस सारणी में किसी तत्त्व की स्थिति से ज्ञात हो जाता है कि उसमें अंतिम इलेक्ट्रॉन की आपूर्ति किस कोश तथा किस उपकोश में हुई है। यह स्थिति इसका भी ज्ञान कराती है कि परमाणु में कौन-से कोश तथा उपकोश पूर्णतः भरे जा चुके हैं।

(4) दीर्घाकार आवर्त सारणी में तत्त्वों को चार खण्डों अथवा ब्लॉकों (blocks) में स्पष्टत: विभाजित किया गया है। इन्हें क्रमश: 3, p, d तथा f ब्लॉक के तत्त्व कहते हैं। किसी एक ब्लॉक के तत्त्वों के लक्षणों में अनेक समानताएँ तथा अन्य ब्लॉक के तत्त्वों से भिन्नताएँ होती हैं।

(5) लैन्थेनाइड तथा एक्टिनाइड श्रेणियों को अलग लिखा गया है तथा इनके स्थानों का मुख्य सारणी में स्थान तारांकित (* तथा **) किया गया है अर्थात् इन श्रेणियों को मुख्य सारणी में इन तारांकित स्थानों पर लिखा जाना चाहिए। परन्तु ऐसा करने से, सारणी में कुल 32 स्तम्भ हो जाते हैं, तथा सारणी की लम्बाई (मुद्रण में) असुविधाजनक हो जाती है। अतः इन श्रेणियों को अलग लिखा जाता है। ये f – ब्लॉक के तत्त्व होते हैं।

(6) इस सारणी में धात्वीय एवं अधात्वीय तत्त्वों को, संक्रमण तत्त्वों को तथा अक्रिय तत्त्वों को स्पष्टतः अलग देखा जा सकता है।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 5.
आवर्त सारणी के ‘लघु’ तथा ‘दीर्घ आवर्त’ से क्या तात्पर्य है? आवर्त 1 से 6 तक प्रत्येक में तत्त्वों की संख्याएँ लिखिए।
अथवा
आवर्त सारणी में आवत के चार मुख्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
आवर्त सारणी के प्रथम तीन आवर्त ‘लघु-आवर्त’ कहलाते हैं। इनमें तत्त्वों की संख्या कम होती है। इसके आगे के आवर्त 4, 5, 6 तथा 7 दीर्घ आवर्त’ कहलाते हैं। इनमें तत्त्वों की संख्या अधिक होती है। तत्त्वों की संख्याएँ निम्नवत हैं-

आवर्त तत्त्वों की संख्या
1 2
2 8
3 8
4 18
5 18
6 32

प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए कि-
(i) लघु आवर्त में परमाणुओं के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों का वितरण किस प्रकार बदलता है?
(ii) किसी A उपवर्ग में परमाणुओं के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन वितरण में क्या भिन्नता या समानता होती है।
(iii) तत्त्वों का विकर्ण सम्बन्ध एवं सम्बन्धित दो तत्त्व।
अथवा
विकर्णी सम्बन्ध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
(i) लघु आवर्त में पहले 8-उपकोश 1 तथा 2 इलेक्ट्रॉन तथा उपकोश के पूर्ण (2 इलेक्ट्रॉन) हो जाने के बाद p-उपकोश में क्रमश: 1, 2, 3, 4, 5 तथा 6 इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति होती है।

(ii) किसी उपवर्ग में परमाणु के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती हैं, परन्तु उपवर्ग में परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ बाह्यतम कोश की मुख्य क्वाण्टम संख्या, आवर्त संख्या के साथ 1 से 7 तक बढ़ती जाती हैं।

उदाहरणतः उपवर्ग II-A के परमाणुओं में बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन 8- उपकोश में होते हैं, परन्तु बाह्यतम कोश क्रमश: 1, 2, 3, 4, 5, 6 तथा 7 क्वाण्टम संख्या का होगा।

(iii) तत्त्वों का विकर्ण सम्बन्ध – द्वितीय आवर्त के पहले तीन तत्त्व (Li, Be B) तीसरे आवर्त के तत्त्वों तथा अगले वर्ग के दूसरे तत्त्व के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करते हैं। इसे विकर्ण सम्बन्ध कहते हैं।
उदाहरणत:
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 2

प्रश्न 7.
निम्न ऑक्साइडों को उनके क्षारकीय गुण के घटते हुए क्रम में लिखिए-
Al2O3, Na2O, MgO, P2O5
उत्तर:
P2O5, Al2O3, MgO, Na2O.

प्रश्न 8.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के वर्ग तथा आवर्त की दो-दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के वर्गों की विशेषताएँ –

  • 0 से VIII तक कुल 9 वर्ग होते हैं।
  • धात्विक लक्षण या धनविद्युती लक्षण – परमाणु क्रमांक में वृद्धि क्रम के साथ बढ़ता है।
  • विद्युत ऋणीयता- किसी परमाणु की अपनी और इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की प्रवृत्ति परमाणु क्रमांक के वृद्धि के साथ घटती है।

आवर्ती की विशेषताएँ-

  • आवर्त सारणी में आवर्ती की क्रम संख्या एक से सात तक होती है।
  • आवर्त में धात्वीय गुण परमाणु क्रमांक की वृद्धि के साथ-साथ घटता है। क्रमांक के बढ़ने के साथ घटता है।
  • आवर्त में ऑक्साइडों का क्षारीय गुण परमाणु

प्रश्न 9.
आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर निम्नलिखित गुणों में क्या परिवर्तन होता है-

  • विद्युत धनात्मक गुण
  • धात्विक गुण
  • ऑक्साइडों का क्षारीय गुण?

उत्तर:

  • विद्युत धनात्मक गुण – परमाणु क्रमांक वृद्धि अर्थात् बायें से दायें जाने पर घटता है।
  • धात्विक गुण धात्विक गुण भी परमाणु क्रमांक वृद्धि के साथ घटता है।
  • ऑक्साइडों का क्षारीय गुण आवर्त में क्षारीय गुण परमाणु क्रमांक वृद्धि के साथ-साथ घटता है।

प्रश्न 10.
आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में निम्नलिखित गुणों में किस प्रकार का परिवर्तन होता है? समझाइए (i) धात्विक गुण (ii) हाइड्रोजन से सम्बन्धित संयोजकता।
उत्तर:
आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में परिवर्तन-

  • धात्विक गुण – परमाणु क्रमांक वृद्धि के साथ तत्त्वों के धात्विक गुण घटते हैं।
  • हाइड्रोजन से सम्बन्धित संयोजकता – हाइडोजन के अनुसार तत्त्वों की संयोजकता बढ़ती है।

प्रश्न 11.
आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में निम्नलिखित गुणों में किस प्रकार परिवर्तन होता है?

  • धन विद्युती गुण
  • ऑक्साइडों की प्रकृति
  • आयनन विभव।

उत्तर:

  • धनविद्युती गुण- परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम के साथ बढ़ता है।
  • ऑक्साइडों की प्रकृति- आवर्त में ऑक्साइडों का क्षारीय गुण परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ-साथ घटता है।
  • आयनन विभव- किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन विस्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा परमाणु क्रमांक में वृद्धि क्रम के साथ बढ़ती है।

प्रश्न 12.
परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व की आवर्त सारणी में वर्ग तथा आवर्त लिखिए।
अथवा
परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व की आवर्त सारणी में स्थिति बताइए।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक = 17
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7
आवर्त – 3
वर्ग-VIIA ।

प्रश्न 13.
परमाणु क्रमांक 11 वाले तत्त्व के समूह एवं आवर्त लिखिए।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक = 11
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1
आवर्त – 3
वर्ग – I A ।

प्रश्न 14.
तत्त्व Mg आवर्त सारणी के द्वितीय समूह में है। यदि Mg का तुल्यांकी भार 12 है तो तत्त्व का परमाणु भार ज्ञात करें।
उत्तर:
Mg द्वितीय समूह में है।
इसलिए Mg की संयोजकता 2 होगी।
अत: परमाणु भार = तुल्यांकी भार x संयोजकता
= 12 x 2 = 24

प्रश्न 15.
निम्न में से किस तत्त्व का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय है और क्यों?
Na, Mg, Al एवं Si
उत्तर:
Na का ऑक्साइड Na2 प्रबल क्षारीय है क्योंकि किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्त्वों के ऑक्साइडों की क्षारीयता घटती जाती है।

प्रश्न 16.
आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर निम्नलिखित गुणों में क्या परिवर्तन होता है?
(i) परमाणु त्रिज्या
(ii) विद्युत ऋणात्मकता
(iii) आयनन विभव।
उत्तर:
आवर्त सारणी में आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं-

  • परमाणु त्रिज्या – परमाणु त्रिज्या घटेगी।
  • विद्युत ऋणात्मकता प्रत्येक आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर तत्त्व की ऋणविद्युत प्रकृति में क्रमिक वृद्धि होती है; जैसे P से S अधिक ऋणविद्युत है।
  • आयनन विभव – प्रत्येक आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर तत्त्व की आयनन विभव में कमी आयेगी।

प्रश्न 17.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आप कैसे छाँटोगे –
(i) समान रासायनिक गुणों वाले तत्त्व
(ii) आवर्त का पहला तत्त्व
(iii) आवर्त का अंतिम तत्त्व
उत्तर:
(i) समान रासायनिक गुणों वाले तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है।
(ii) आवर्त के पहले तत्त्व के बाह्यतम कोश केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है।
(iii) आवर्त के अंतिम तत्त्व के बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 18.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के स्थान पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादास्पद है। एक संयोजी इलेक्ट्रॉन होने के कारण इसे IA समूह में क्षार धातुओं के ऊपर रखा गया है, लेकिन इसके कुछ गुण हैलोजन के समान होने के कारण इसे
इनके साथ स्थान मिलना चाहिए। इस कारण इसकी स्थिति अनिश्चित रही।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेण्डलीफ के आवर्त नियम का उल्लेख करते हुए, मेण्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
मेण्डलीफ का आवर्त नियम (Mendeleeff’s Periodic Law) – इसके अनुसार तत्त्वों के भौतिक रासायनिक गुण उनके परमाणु- भारों के आवर्ती फलन (periodic function of their atomic weights) हैं अर्थात् यदि तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु- भारों के क्रम में व्यवस्थित किया जाय तो निश्चित एवं समान क्रम- अन्तरालों के बाद लगभग समान गुण वाले तत्त्व पाये जाते हैं।

मेण्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी के लक्षण (Characteristics of Mendeleeff’s Modified Periodic Table ) – मेण्डलीफ की (Columns) संशोधित आवर्त सारणी को सात श्रेणियों (Series) जिनको आवर्त (Period) कहते हैं तथा नौ स्तम्भों में, जिन्हें वर्ग अथवा समूह (Groups ) कहते हैं, में विभाजित किया गया है।

सारणी में श्रेणियों को बाएँ से दाहिने तथा वर्गों को ऊपर से नीचे लिखा जाता है। श्रेणियों का नामांकन 1 से 7 तक तथा वर्गों का नामांकन I, II, III, IV, V, VI, VII VIII तथा 0 किया गया है। आवर्त 4, 5, 6 तथा में वर्ग I से VII तक प्रत्येक वर्ग को उपवर्गों A तथा B में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक वर्ग या समूह में आवर्त 1, 2 तथा 3 के तत्त्व उपवर्ग A के अन्तर्गत रखे गये हैं।

आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में केवल दो तत्त्व, H वर्ग 1 में तथा He वर्ग 0 में रखे गये हैं। द्वितीय तथा तृतीय आवर्त में से प्रत्येक में आठ तत्त्व हैं जो I से VII तक तथा वर्ग में आते हैं। इन्हें लघु आवर्त (Short periods) कहते हैं।

आवर्त 4 एवं 5 में से प्रत्येक में 18 तत्त्व हैं, जिनमें से 8 तत्त्व उपवर्ग A (I से VII तथा 0) में 7 तत्त्व उपवर्ग B (I से VII) में तथा 3 तत्त्व वर्ग 8 में रखे गये हैं।

आवर्त 6 में 32 तत्त्व तथा आवर्त 7 में अब तक ज्ञात 28 तत्त्व रखे गये हैं।
सारणी के वर्गों तथा आवतों के सामान्य लक्षण निम्नवत् हैं-
(i) प्रत्येक आवर्त में तत्त्वों का क्रम बढ़ते हुए परमाणु क्रमांकों के अनुसार है।

(ii) प्रत्येक आवर्त में बाएँ से दाहिने जाने पर तत्त्वों के (बढ़ता हुआ या घटता हुआ) परिवर्तन गुणों में क्रमिक होता जाता है।
उदाहरणत:
प्रत्येक आवर्त में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के अनुसार तत्त्वों की धन- वैद्युत संयोजकता बढ़ती तथा ऋण वैद्युत संयोजकता घटती जाती है।

(iii) एक ही वर्ग या समूह स्थित तत्त्वों के गुण (जैसे- संयोजकता, विद्युत धनात्मकता अथवा ऋणात्मकता तथा अन्य) में समानता पायी जाती हैं।

(iv) तत्त्व का परमाणु क्रमांक उसका मौलिक लक्षण हैं जो तत्त्व की विशेषताओं को व्यक्त करता है।

(v) सारणी में किसी तत्त्व के स्थान (आवर्त तथा वर्ग या समूह) के अनुसार उसके गुणों को बताया सकता है।

प्रश्न 2.
मेण्डलीफ की प्रारंभिक आवर्त सारणी के दोष बताइए। इनका निवारण मेण्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी में किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:
मेण्डलीफ की प्रारंभिक आवर्त सारणी के प्रमुख दोष निम्नवत् हैं-
1. तत्त्वों का क्रम बढ़ते परमाणु भार के अनुसार न होना- मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में तत्त्वों के ऐसे चार युग्म (pairs) हैं जिनमें अधिक परमाणु भार का तत्त्व, कम परमाणु भार के तत्त्व से पहले रखा गया है। ये युग्म हैं-

  • आर्गन (Ar ) – 39.4 तथा पोटैशियम (K) 39.1
  • कोबाल्ट (Co) – 58.94 तथा निकिल (Ni)-58.96
  • टेलुरियम (Te) – 127.61 तथा आयोडीन (I)-126.91
  • थोरियम (Th) – 232.12 तथा प्रोटोएक्टीनियम (Pa) – 231

2. समस्थानिकों का स्थान- अनेक तत्त्वों के ऐसे एक से अधिक समस्थानिक पाये जाते हैं जिनके परमाणु भार तो भिन्न होते हैं परन्तु रासायनिक गुण समान, जैसे हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक H-1, H-2, H-3, क्लोरीन के दो समस्थानिक C1-35, C1-37, कार्बन के दो समस्थानिक C-12, C-14 आदि परमाणु भार के आधार पर क्रमायोजित करने से इन समस्थानिक को भी सारणी में पृथक स्थान मिलना चाहिए, परन्तु मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में ऐसा संभव नहीं था।

3. हाइड्रोजन का द्वैध व्यवहार हाइड्रोजन; जो कि प्रथम वर्ग A की धातुओं (Li, Na, K…….) और सप्तम वर्ग A के तत्त्वों (F, Cl, Br, I) के गुणों से समानता रखता है, को निश्चित स्थान नहीं दिया जा सकता है।

4. असमान तत्त्वों को एक ही वर्ग में रखना- प्रथम समूह A के क्षारीय धातु और B के मुद्रा-धातु व सप्तम् वर्ग A के हैलोजन और B के Mn धातु में काफी असमानता होते हुए भी वे एक साथ रखे गये हैं।

IA VII
(H) (H)
Li F
Rb Cl
Cs Br
Fr I

5. अक्रिय गैसों (जैसे हीलियम, निऑन, आर्गन आदि को सारणी में कोई स्थान नहीं दिया गया।
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में संशोधन वैज्ञानिक मोज्ले (Mosley) ने X- विकिरणों के स्पेक्ट्रमों के अध्ययन के द्वारा एक तत्त्वों के एक नवीन लक्षण, परमाणु क्रमांक (Atomic Number) का प्रतिपादन किया।

किसी तत्त्व के परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या अथवा नाभिक के धनावेश (मूल आवेश पदों में) को तत्त्व का परमाणु क्रमांक कहते हैं। वैज्ञानिकों ने यह पाया कि यदि तत्त्वों को उनके परमाणु क्रमांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाय तो मेण्डलीफ की प्रारंभिक आवर्त सारणी के अनेक दोष दूर हो जाते हैं। इस आधार पर मेण्डलीफ द्वारा प्रतिपादित आवर्त नियम में संशोधन करके आधुनिक आवर्त नियम निम्नवत् प्रस्तुत किया गया-

“तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।”

इस नियम आधार पर मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में संशोधन किया गया। इसके अतिरिक्त सारणी में अक्रिय गैसों का एक नया वर्ग (शून्य वर्ग) जोड़ा गया तथा दुर्लभ मृदा तत्त्वों (Rare Earth Elements) एवं एक्टिनाइड तत्त्वों के स्थान निर्धारित किये गये।

किसी तत्त्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होने के कारण उनके स्थान निर्धारण की त्रुटि स्वतः ही दूर हो गयी।

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 3.
मेण्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी के आवर्ती तथा वर्गों / उपवर्गों की विशेषताएँ या लक्षणों को लिखिए।
उत्तर:
(i) आवर्त सारणी की विशेषताएँ (Char- acteristics of Periodic Table)
1. आवर्त सारणी में आवर्ती की क्रम संख्या एक से सात तक होती है।

2. पहले आवर्त में केवल दो तत्त्व हैं इसलिए इसे अतिलघु आवर्त कहते हैं तथा इसमें सिर्फ हाइड्रोजन तथा हीलियम हैं।

3. आवर्त दो व तीन में आठ-आठ तत्त्व होते हैं तथा इनको लघु आवर्त कहते हैं। तीसरे आवर्त के तत्त्वों (Na, Mg, Al, Si, P, S, CI) को प्रारूपी तत्त्व (Typical Elements) कहते हैं।

4. चौथे और पाँचवें आवर्त में 18-18 तत्त्व होते हैं इसलिए इनको दीर्घ आवर्त (Long period) कहते हैं।

5. छठे तथा सातवें आवर्त में 32-32 तत्त्व आते हैं इसलिए इनको अतिदीर्घ आवर्त कहते हैं सातवें आवर्त में उस समय सिर्फ 13 तत्त्व ही ज्ञात थे।

6. प्रत्येक दीर्घ आवर्त में आठ तत्त्वों को सामान्य तत्त्व (Normal element) तथा शेष दस तत्त्वों को संक्रमण तत्त्व (Transition elements) कहते हैं।

7. अतिदीर्घ छठे और सातवें आवर्त में आठ सामान्य तत्त्व 10 संक्रमण तत्त्व तथा 14 अन्त: संक्रमण तत्त्व हैं। छठी श्रेणी के अन्त संक्रमण तत्त्व लैन्थेनाइड तथा सातवीं श्रेणी के अन्तः संक्रमण तत्त्व एक्टिनाइड कहलाते हैं। इन्हें मुख्य सारणी के नीचे अलग दिखाया जाता है।

8. प्रत्येक आवर्त किसी क्षार धातु (Li, Na, K) से आरम्भ होकर किसी अक्रिय गैस, जैसे- हीलियम, निऑन, आर्गन आदि पर समाप्त हो जाता है।

9. प्रत्येक आवर्त में तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों, जैसे- धात्वीय प्रकृति, घनत्व, क्वथनांक, गलनांक और ऑक्साइड की प्रकृति में नियमित परिवर्तन ( Grada- tion) होता है।

10. द्वितीय आवर्त के पहले तीन तत्त्व ( लीथियम, बेरीलियम तथा बोरॉन) तीसरे आवर्त के तत्त्वों तथा अगले वर्ग के दूसरे तत्त्व के साथ विकर्ण समानता प्रदर्शित करते हैं। इस कारण इनके गुण समान होते हैं। जैसे- लीथियम, मैग्नीशियम के साथ, बेरीलियम, ऐलुमिनियम के साथ तथा बोरॉन, सिलिकॉन के साथ विकर्ण समानता प्रदर्शित कराता है।
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11. तत्त्वों का आवर्त में विद्युत धनात्मक गुण परमाणु क्रमांक की वृद्धि के साथ-साथ घटता है।
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12. धात्वीय गुण – आवर्त में धात्वीय गुण परमाणु क्रमांक की वृद्धि के साथ-साथ घटता है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 5

13. संयोजकता (हाइड्रोजन के अनुसार) हाइड्रोजन के अनुसार तत्त्वों की संयोजकता पहले वर्ग 1 से 4 तक बढ़ती है और उसके उपरान्त 4 से 1 तक घटती है।
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संयोजकता – (ऑक्सीजन के अनुसार) ऑक्सीजन के अनुसार संयोजकता वर्ग एक से आठ तक लगातार बढ़ती है।
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14. ऑक्साइडों का क्षारीय गुण आवर्त में ऑक्साइडों का क्षारीय गुण परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ-साथ घटता है।
JAC Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 8
क्वथनांक, गलनांक, विशिष्ट ताप में इसी प्रकार से क्रम पाया जाता है।

15. परमाणु त्रिज्या – प्रत्येक आवर्त में पहले वर्ग से सातवें वर्ग की ओर जाने पर तत्त्वों की परमाणु त्रिज्या का मान क्रमानुसार घटता है तथा किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या का मान बढ़ता जाता है।

(ii) वर्गों तथा उपवर्गों की विशेषताएँ-
(i) ‘0’ से ‘VIII’ तक कुल 9 वर्ग होते हैं।

(ii) प्रत्येक वर्ग की वर्ग संख्या अपनी विशिष्ट संयोजकता (Valency) को प्रकट करती है जैसे ‘0’ वर्ग के तत्त्वों की संयोजकता शून्य है, ‘I’ वर्ग के तत्त्वों की संयोजकता 1 है तथा III वर्ग के तत्त्वों की संयोजकता 3 है।

(iii) कुछ अपवादों को छोड़कर एक वर्ग के तत्त्वों के गुण समान होते हैं।

(iv) एक वर्ग में नीचे के तत्त्वों का परमाणु भार ऊपर के तत्त्वों के परमाणु भार से अधिक होता है।

(v) शून्य तथा आठवें वर्ग को छोड़कर अन्य वर्गों को उपवर्गों (Sub-groups ) में विभाजित किया गया है। इनको उपवर्ग ‘A’ (अ) तथा उपवर्ग ‘B’ (ब) कहते हैं। सारणी में उपवर्ग ‘A’ को बायीं ओर तथा उपवर्ग ‘B’ को दायाँ लिखते हैं। एक उपवर्ग में उपस्थित तत्त्वों में अधिक समानता पायी जाती है तथा ये तत्त्व दूसरे उपवर्ग में उपस्थित तत्त्वों से भिन्न होते हैं, जैसे प्रथम वर्ग के उप-समूह ‘A’ में 6 तत्त्व Li, Na, K, Rb, Cs व Fr हैं तथा उपवर्ग ‘B’ में Cu, Ag तथा Au उपस्थित हैं। उपवर्ग A तथा B में उपस्थित तत्त्वों में अन्तर पाया जाता है।

(vi) एक ही वर्ग में परमाणु क्रमांक के वृद्धि- के साथ तत्त्वों के गुणों में क्रमबद्ध परिवर्तन होता है।
(क) धात्विक लक्षण या धन विद्युती लक्षण-परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम के साथ बढ़ता है।

(ख) आयनन विभव (Ionisation Poten-tial) – अर्थात् किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन विस्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा परमाणु क्रमांक में वृद्धि क्रम के साथ घटती है।

(ग) विद्युत ऋणीयता (Electronega-tivity) – अर्थात् किसी परमाणु की अपनी ओर इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की प्रवृत्ति परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम के साथ घटती है।

(vii) विभिन्न समूहों में उपस्थित तत्त्व सामान्य (Nor-mal), संक्रमण (Transitional), दुर्लभ मृदा (Rare earth) तथा एक्टिनाइड (Actinied ) हो सकते हैं। आधुनिक प्रणाली में ‘B’ उपवर्ग (भारी धातुएँ) के तत्त्व संक्रमण तत्त्व कहलाते हैं और उपवर्ग ‘A’ के तत्त्व (हल्की धातु तथा अधातु) सामान्य तत्त्व (Normal elements) कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की उपयोगिता का विवरण दीजिए।
उत्तर:
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की उपयोगिता (Utility of Mendeleeff’s Periodic Table)
1. तत्त्वों का वर्गीकरण – मेण्डलीफ की आवर्त सारणी का मुख्य उपयोग यह है कि 109 तत्त्वों के भौतिक केवल तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन अलग-अलग न रहकर 9 समूहों तक सीमित रह गया है।

2. परमाणु भार का आकलन – चूँकि किसी वर्ग विशेष में उपस्थित तत्त्व की संयोजकता उसकी वर्ग संख्या के बराबर होती है, यदि तत्त्व का तुल्यांकी भार ज्ञात है तो उसका परमाणु भार निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं-
परमाणु भार = तुल्यांकी भार x संयोजकता

3. संदेहास्पद परमाणु भारों का सही निर्धारण- मेण्डलीफ आवर्त सारणी की सहायता से बहुत से तत्त्वों के परमाणु भारों का सही निर्धारण करने में सहायता मिली। जैसे, Be का परमाणु भार इसकी संयोजकता तीन मानकर 4.5 x 3 = 13.5 माना जाता था। 4.5 इसका तुल्यांकी भार है, परन्तु मेण्डलीफ ने इसे द्विसंयोजी मानकर द्वितीय वर्ग में रखा। बाद में इसका परमाणु भार 4.5 x 2 9 निकाला गया जो इसके रासायनिक व्यवहार से पूर्णतः मेल खाता है।

4. नये तत्त्वों की खोज में- मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में दो क्रमागत तत्त्वों के परमाणु भार में लगभग दो से तीन इकाइयों का अन्तर है। जहाँ अन्तर छह या छह से अधिक इकाई का हुआ, वहीं मेण्डलीफ ने दोनों तत्त्वों के मध्य एक रिक्त स्थान छोड़ दिया। उसने इन तत्त्वों के गुणों का वर्णन भी इस वर्ग के गुणों के आधार पर कर दिया। उदाहरणार्थ, मेण्डलीफ की मूल आवर्त सारणी में बाद में खोजे गये तत्त्व स्कैण्डियम (Se), गैलियम (Ga) तथा जर्मेनियम (Ge) के स्थान रिक्त थे जिनको उसने क्रमशः एका बोरॉन, एका ऐलुमिनियम तथा एका सिलिकॉन नाम दिया था।

प्रश्न 5.
(i) मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में कुछ रिक्त स्थान क्यों थे?
(ii) मेण्डलीफ के वर्गीकरण की कोई तीन सीमाएँ लिखिए।
(iii) किसी आवर्त में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में किस प्रकार परिवर्तन होता है?
उत्तर:
(i) मेण्डलीफ का अनुमान था कि रिक्त स्थानों की पूर्ति नए तत्त्वों की खोज से होगी। मेण्डलीफ ने आवर्त सारणी की सहायता से रिक्त स्थानों के अज्ञात तत्त्वों के गुण का पूर्वानुमान किया। अब उन सभी तत्त्वों की खोज हो चुकी है, जिनके लिए मेण्डलीफ ने सारणी में रिक्त स्थान छोड़े थे। इन तत्त्वों के गुण लगभग वही पाए गए हैं जो मेण्डलीफ ने इनकी खोज से पहले बता दिए थे।
उदाहरण-स्कैंडियम, गैलियम, जर्मेनियम।

(ii) मेण्डलीफ के वर्गीकरण की तीन सीमाएँ-

  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का कोई एक निश्चित स्थान होना।
  • समस्थानिकों और समभारिकों को आवर्त सारणी में स्थान देने में कठिनाई।
  • अधिक परमाणु भार के तत्त्व को कम परमाणु भार के तत्त्व से पहले रखना।

उदाहरण – कोबाल्ट (परमाणु द्रव्यमान (भार) 58.9] को आवर्त सारणी में निकिल [परमाणु द्रव्यमान (भार) 58.7] से पहले रखा गया।

(iii) किसी आवर्त में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉन में बाएँ से दाएँ जाने पर इकाई की वृद्धि होती है क्योंकि शेलों की संख्या अपरिवर्तित रहती है।
जै-Na : 2, 8, 1; Mg: 2, 8, 2; Al: 2, 8, 3.

प्रश्न 6.
क्या कारण है कि समान गुणों वाले तत्त्व एक नियमित अंतराल के बाद उपस्थित होते हैं यदि तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु संख्या के क्रम में रखा गया हो?
अथवा
आप कैसे कह सकते हैं कि आधुनिक आवर्त सारणी का आधार तत्त्वों का इलेक्ट्रॉन विन्यास है?
उत्तर:
आवर्त सारणी के पहले आवर्त में 2, दूसरे और तीसरे आवर्त में 8-8 तथा चौथे और पाँचवें आवर्त में 18-18 तत्त्वों की उपस्थिति परमाणु की प्रथम, द्वितीय, तृतीय कोश (ऊर्जा स्तरों) की इलेक्ट्रॉन क्षमता से सम्बन्धित है। इस प्रकार हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं, कि आवर्त वर्गीकरण का आधार परमाणु संख्या अर्थात् इलेक्ट्रॉन की संख्या तथा अंततः इलेक्ट्रॉन विन्यास है।

यदि हम प्रथम तीन आवर्त के तत्त्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास पर दृष्टिपात करें तो हम पाते हैं विन्यास कि तत्त्वों के बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन की संख्या एक नियमित अंतराल के बाद समान होती है अर्थात् दोहराई जाती है जैसे- लीथियम, सोडियम तथा पोटैशियम के इलेक्ट्रॉन विन्यास से विदित है Li का इलेक्ट्रॉन = 2, 1, Na का 2, 8, 1 तथा K का 2, 8, 8, 1.

जैसा कि हम जानते हैं कि तत्त्वों के गुण उनके बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन (संयोजकता इलेक्ट्रॉन) की संख्या पर निर्भर करते हैं। संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होने पर उनके गुण भी समान होते हैं। यही कारण है कि नियमित अंतराल के बाद समान गुणों वाले तत्त्वों की पुनरावृत्ति होती है।

प्रश्न 7.
Na (परमाणु क्रमांक 11) और Al (परमाणु क्रमांक l3) आवर्त सारणी में एक तत्त्व की दूरी पर हैं। इनकी संयोजकता क्रमश: 1 तथा 3 है। C1 (परमाणु क्रमांक 17) और K (परमाणु क्रमांक 19) भी आवर्त सारणी में एक तत्त्व की दूरी पर हैं। किन्तु फिर भी दोनों की संयोजकता एक है। दोनों में अन्तर बताइए। प्रकार हैं-
उत्तर:
Na11 और Al13 के इलेक्ट्रॉन विन्यास निम्न
Na11 = 2, 8, 1 Al13 = 2, 8, 3.
Na11 के इलेक्ट्रॉन विन्यास में केवल 1 इलेक्ट्रॉन ही बाह्य कक्षा में है। अतः इसकी संयोजकता 1 है। Al के पास 3 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं अतः इसकी संयोजकता 3 है।
अब, CI और K के इलेक्ट्रॉन विन्यास क्रमश: हैं-
Cl17 = 2, 8, 7 और K19 = 2, 8, 8, 1
Cl के पास 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन होने के कारण इसे अपनी बाह्य कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की आवश्यकता होती है। अतः इसकी संयोजकता 1 है। जबकि K एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर पूर्ण इलेक्ट्रॉन विन्यास प्राप्त कर लेता है। अतः इसकी संयोजकता भी 1 है।

प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त नियम क्या है? आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों का वर्गीकरण समझाइए।
उत्तर:
मेण्डलीफ द्वारा प्रतिपादित आवर्त नियम में संशोधन करके आधुनिक आवर्त नियम निम्नवत् प्रस्तुत किया गया –
“तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।” आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों का वर्गीकरण (Classification of Elements in Modern Periodic Table) – आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है। इसके अनुसार ” तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आवर्ती फलन होते हैं।”

आवर्त सारणी में उपस्थित सभी तत्त्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर निम्नलिखित चार प्रकार के तत्त्वों में विभक्त किया जा सकता है-
1. अक्रिय तत्त्व (Inert Elements) – इस वर्ग ऐसे तत्त्व रखे गये हैं जिनके सभी कोश पूर्ण होते हैं, उदाहरणत: शून्य समूह के तत्त्व- हीलियम, निऑन, आर्गन इनके बाह्यतम कोश (Outermost shell) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns².np6 होता है। (हीलियम को इत्यादि। छोड़कर 292)

2. सामान्य तत्त्व (Normal Elements) – ये ऐसे तत्त्व हैं जिनके परमाणुओं के बाहरी कोश ही अपूर्ण होते हैं तथा बाकी सब पूर्ण होते हैं। ऐसे तत्त्वों के बाहरी कोश का सामान्य सूत्र ns1 से ns², np5 तक होता है। इस वर्ग में धातु, अधातु, उपधातु सभी आते हैं और यह सभी क्रियाशील तत्त्व होते हैं इनको दो भागों में बाँटा जा सकता है-

(क) 8 ब्लॉक के तत्त्व (Elements of s block) – s ब्लॉक के तत्त्वों के रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणुओं के बाहरी कक्ष के उपकोश पर निर्भर करते हैं। इनमें I-A तथा II-A वर्ग आते हैं। ये सभी क्रियाशील धातु होते हैं।

(ख) p-ब्लॉक के तत्त्व (Elements of p- block) – p-ब्लॉक के तत्त्वों के रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणुओं निर्भर के बाहरी कक्ष के p उपकोश के इलेक्ट्रॉनों पर करते हैं। इसमें IIIA, IVA, VA, VIA, VIIA के तत्त्व आते हैं और इनके बाहरी कक्ष के p उपकोश में 1 से 5 तक इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। मुख्य रूप से इनमें अधातु आते हैं। जैसे- फ्लोरीन, क्लोरीन, ऑक्सीजन इत्यादि।

3. संक्रमण तत्त्व (Transition Elements) – इस वर्ग में ऐसे तत्त्व उपस्थित होते हैं जिनके दो बाहरी कोश अपूर्ण होते हैं और उनका सामान्य सूत्र (n-1)dxns² होता है जबकि x = 1, 2 …………. 10 तक। इनके बाहरी कक्ष से लगी हुई d उपकोश अपूर्ण होती है इसलिए इन्हें d – ब्लॉक के तत्त्व कहते हैं। इन तत्त्वों की चार श्रेणियाँ होती हैं जिनमें क्रमश: 3d (Sc – Zn), 4d (Y – Cd), 5d (LaHg) तथा 6d श्रेणी (अपूर्ण) है।

संक्रमण तत्त्व निम्नलिखित गुणों को प्रदर्शित करते हैं-

  • ये रंगीन आयन बनाते हैं, Fe2+ (हरा), Fe3+ (नारंगी)।
  • ये अनुचुम्बकीय (paramagnetic) होते हैं।
  • ये उत्प्रेरक का कार्य करते हैं।
  • ये परिवर्ती संयोजकता दिखाते हैं
  • ये संकीर्ण आयन (Complex-ion) बनाते हैं।

4. आन्तरिक संक्रमण तत्त्व (Inner Transition Elements)-इस वर्ग में ऐसे तत्त्व रखे गये हैं जिनके परमाणुओं की अंतिम तीन कक्ष अपूर्ण होती हैं। यह तत्त्व f उपकोश को भरने के कारण बनते हैं। अत: इन्हें f-ब्लॉक के तत्त्व कहते हैं। इनका सामान्य सूत्र (n – 2 )fx, (n – 1)s²p6d1.ns² होता है जबकि x = 1, 2 ….. 14 तक 14f लैन्थेनाइड श्रेणी (Ce – 58 से Lu – 71 तक) तथा 5f एक्टिनाइड श्रेणी (Ac – 89 से Lw 103 तक), प्रत्येक में 14 तत्त्व होते हैं जो f-कक्षक में क्रमश: 1 से 14 इलेक्ट्रॉनों की आपूर्ति से बनते हैं। इन तत्त्वों के बाहरी दो कोशों का विन्यास समान होने के कारण इनके गुणों में बहुत समानता होती है।

5. प्रारूपिक तत्त्व (Typical Elements) – आवर्त सारणी के तृतीय आवर्त के (Na से C1 तक) तत्त्वों को प्रारूपिक तत्त्व कहते हैं क्योंकि ये तत्त्व अपने वर्गों तथा A – उपवर्गों के तत्त्वों की संयोजकता तथा अन्य रासायनिक लक्षणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न-

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न में दिये गये वैकल्पिक उत्तरों में से सही विकल्प चुनिए-

1. प्रारूपिक तत्त्व है-
(a) Na
(b) K
(c) Se
(d) He
उत्तर:
(a) Na

2. किसी आवर्त में बायें से दायें बढ़ने पर तत्त्वों की-
(a) धन विद्युती प्रकृति बढ़ती है
(b) धात्विकता बढ़ती जाती है।
(c) आयनिक त्रिज्या बढ़ती जाती है।
(d) तत्त्वों के ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है
उत्तर:
(d) तत्त्वों के ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है

3. किसी समूह में ऊपर से नीचे की ओर बढ़ने पर –
(a) आयनिक त्रिज्या घटती जाती है।
(b) सुचालकता घटती जाती है
(c) घनत्व घटता जाता है
(d) धात्विकता बढ़ती जाती है।
उत्तर:
(d) धात्विकता बढ़ती जाती है।

4. मेण्डलीफ आवर्त सारणी में एक दोष यह है कि-
(a) हैलोजन परिवार के सदस्यों को एक समूह में रखा गया है
(b) इसके आधार पर अज्ञात तत्त्वों के गुणों के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है
(c) सर्वथा भिन्न गण वाले तत्त्व एक ही समूह में स्थान पा गये हैं
(d) सारणी को बनाने में कोई आधारभूत सिद्धान्त नहीं रखा गया है
उत्तर:
(c) सर्वथा भिन्न गण वाले तत्त्व एक ही समूह में स्थान पा गये हैं

5. Li विकर्ण सम्बन्ध प्रकट करता है-
(a) Na के साथ
(b) K के साथ
(c) Al के साथ
(d) Mg के साथ
उत्तर:
(d) Mg के साथ

6. परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व का आवर्त सारणी में स्थान है-
(a) VII आवर्त, VII वर्ग
(b) III आवर्त, VII वर्ग
(c) IV आवर्त, VII वर्ग
(d) II आवर्त, VI वर्ग
उत्तर:
(b) III आवर्त, VII वर्ग

7. आधुनिक आवर्त नियम प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक हैं-
(a) प्राउट
(b) न्यूलैंड
(c) मेण्डलीफ
(d) मोज्ले
उत्तर:
(d) मोज्ले

8. आधुनिक आवर्ती वर्गीकरण का आधार है-
(a) परमाणु भार
(b) परमाणु क्रमांक
(c) संयोजकता
(d) रासायनिक क्रियाशीलता
उत्तर:
(b) परमाणु क्रमांक

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

9. आवर्त सारणी के किसी समूह में परमाणु क्रमांक की वृद्धि के साथ बढ़ता है-
(a) धन विद्युती लक्षण
(b) आयनन विभव
(c) विद्युत ऋणीयता
(d) अधात्विक लक्षण
उत्तर:
(a) धन विद्युती लक्षण

10. Be का विकर्ण सम्बन्ध है-
(a) Mg
(b) Al
(c) B
(d) Na
उत्तर:
(b) Al

11. द्वितीय आवर्त में तत्त्वों की संख्या होती है-
(a) 2
(b) 8
(c) 10
(d) 18
उत्तर:
(b) 8

12. ये तत्त्व परिवर्ती संयोजकता प्रकट करते हैं-
(a) नॉर्मल
(b) प्रारूपिक
(c) संक्रमण
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) संक्रमण

13. क्षार धातुएँ हैं-
(a) Be, Mg, Ca
(b) Li, Na, K
(c) B, Al, Ga
(d) Cu, Ag, Au
उत्तर:
(b) Li, Na, K

14. किस तत्त्व की विद्युत-धनात्मकता सबसे अधिक है-
(a) F
(b) Mg
(c) Na
(d) K
उत्तर:
(d) K

15. सर्वाधिक हाइड्रोजन संयोजकता होती है समूह ……… के तत्त्वों की।
(a) I
(b) VII
(c) IV
(d) 0
उत्तर:
(c) IV

16. तत्त्व A, B, C, D तथा E के परमाणु क्रमांक क्रमश: 9, 11, 17, 12 तथा 13 हैं। तत्त्वों का कौन सा युग्म समान समूह से सम्बन्धित है?
(a) A तथा B
(b) B तथा D
(c) A तथा C
(d) D तथा E
उत्तर:
(c) A तथा C

17. कोई तत्त्व जो क्षारकीय ऑक्साइड बनाते हैं, उसका परमाणु संख्या है—
(a) 18
(b) 14
(c) 17
(d) 19
उत्तर:
(d) 19

18. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व अम्लीय ऑक्साइड बनता है?
(a) परमाणु क्रमांक 7 युक्त तत्त्व
(b) परमाणु क्रमांक 3 वाला तत्त्व
(c) परमाणु क्रमांक 12 वाला तत्त्व
(d) परमाणु क्रमांक 19 वाला
उत्तर:
(a) परमाणु क्रमांक 7 युक्त तत्त्व

19. परमाणु क्रमांक 14 वाला तत्त्व कठोर है तथा अम्लीय ऑक्साइड एवं एक सहसंयोजक हैलाइड बनाता है। यह तत्त्व निम्नलिखित में से किस वर्ग से सम्बन्धित है?
(a) धातु
(b) उपधातु
(c) अधातु
(d) बायीं ओर वाले तत्त्व
उत्तर:
(b) उपधातु

20. आवर्त सारणी में एक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर निम्नलिखित में से क्या नहीं बढ़ता है?
(a) परमाणु की त्रिज्या
(b) धात्विक अभिलक्षण
(c) संयोजकता
(d) एक तत्त्व में कोशों की संख्या
उत्तर:
(c) संयोजकता

21. निम्नलिखित में से किस तत्त्व में अधिकतम संयोजी इलेक्ट्रॉन (Valence electron) हैं-
(a) Na
(b) Mg
(c) C
(d) P
उत्तर:
(d) P

22. सर्वाधिक ऑक्सीजन-संयोजकता होती है समूह के तत्त्वों की।
(a) I
(b) VII
(c) IV
(d) 0
उत्तर:
(b) VII

23. तत्त्वों के गुण निर्भर करते हैं, उनके परमाणुओं-
(a) में प्रोटॉनों की संख्या पर
(b) में न्यूट्रॉनों की संख्या पर
(c) के द्रव्यमान पर
(d) उपर्युक्त किसी पर नहीं
उत्तर:
(a) में प्रोटॉनों की संख्या पर

24. यूरेनियम है-
(a) क्षार धातु
(b) अधातु
(c) स्थायी तत्त्व
(d) अन्त: संक्रमण धातु
उत्तर:
(d) अन्त: संक्रमण धातु

25. परमाणु क्रमांक 18 का तत्त्व होगा-
(a) वर्ग ‘शून्य में
(b) वर्ग VIII में
(c) आवर्त सं. 4 में
(d) संक्रमण धातुओं में
उत्तर:
(a) वर्ग ‘शून्य में

26. एक तत्त्व M के ऑक्साइड का सूत्र MO है। इसके नाइट्रेट का सूत्र होगा-
(a) MNO3
(b) M(NO3)2
(c) M2NO3
(d) M2(NO2)2
उत्तर:
(b) M(NO3)2

27. उभयधर्मी ऑक्साइड है-
(a) Na2 O
(b) P2O5
(c) Al2O3
(d) MgO5
उत्तर:
(c) Al2O3

JAC Class 10 Science Important Questions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

28. निम्न में ऊष्मीय ऑक्साइड है-
(a) Al2O3
(b) K2O
(c) MgO
(d) P2O5
उत्तर:
(d) P2O5

29. निम्नलिखित में क्षारीय धातु है-
(a) Na
(b) Be
(c) Al
(d) Zn
उत्तर:
(b) Be

30. एक तत्त्व N के कार्बोनेट का सूत्र NCO3 है। इसके क्लोराइड का सूत्र होगा-
(a) MCl2
(b) MCl3
(c) MCl
(d) M2Cl
उत्तर:
(a) MCl2

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या ……………….. सकती है।
  2. एक ही ……………….. को सभी तत्त्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
  3. डॉबेराइनर ने तत्त्वों को ……………….. में वर्गीकृत किया जबकि ……………….. ने अष्टक का सिद्धान्त दिया।
  4. मेण्डलीफ ने तत्त्वों को उनके ……………….. को आरोही क्रम तथा रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर व्यवस्थित किया।
  5. ………………. ने आवर्त सारणी में खाली स्थानों के आधार पर नए तत्त्वों की भविष्यवाणी की।
  6. तत्त्वों को परमाणु ………………. के आरोही क्रम में व्यवस्थित करने से होने वाली विसंगतियाँ, परमाणु के आरोही क्रम में व्यवस्थित करने से दूर हो गई तत्त्व के इस आधारभूत गुणधर्म अर्थात् परमाणु संख्या की खोज मोज्ले ने की।

उत्तर:

  1. 2n²
  2. समूह
  3. त्रिक, न्यूलैंड्स
  4. परमाणु द्रव्यमान
  5. मेण्डलीफ
  6. द्रव्यमान संख्या

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

Jharkhand Board JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Exercise 3.7

प्रश्न 1.
दो मित्रों अनी और बीजू की आयु में 3 वर्ष का अन्तर है। अनी के पिता धरम की आयु अनी की आयु की दुगनी और बीजू की आयु अपनी बहन कैथी की आयु की दुगनी है। कैथी और धरम की आयु में अन्तर 30 वर्ष है। अनी और बीजू की आयु ज्ञात कीजिए।
हल:
माना अनी की आयु = x वर्ष
तथा बीजू की आयु = y वर्ष
प्रश्नानुसार,
x – y = 3 …..(i)
या y – x = 3
⇒ -x + y = 3 …..(ii)
और अनी के पिता की आयु = 2 × अनी की आयु
= 2x वर्ष
बीजू की आयु = कैथी की आयु का दुगना
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 1
प्रश्नानुसार, धरम, कैथी से 30 वर्ष बड़ा है।
∴ \(2 x-\frac{y}{2}=30\)
⇒ \(\frac{4 x-y}{2}=30\)
⇒ 4x – y = 60 …..(iii)
समीकरण (i) में से समीकरण (iii) को घटाने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 2
x का यह मान समीकरण (ii) में रखने पर,
19 – y = 3
⇒ -y = 3 – 19
⇒ -y = – 16 ∴ y = 16
पुन: समीकरण (2) तथा समीकरण (3) को जोड़ने पर
-x + y = 3
4x – y = 60
3x = 63
⇒ x = \(\frac{63}{3}\) = 21
x का मान समी. (2) में रखने पर,
– 21 + y = 3 ⇒ y= 3 + 21 = 24
अनी की आयु 19 वर्ष और बीजू की आयु 16 वर्ष है या अनी की आयु 21 वर्ष तथा बीजू की आयु 24 वर्ष है।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 2.
एक मित्र दूसरे से कहता है कि ‘यदि मुझे एक सौ रुपये दे दो, तो मैं आपसे दो गुना धनी बन जाऊँगा।’ दूसरा उत्तर देता है, ‘यदि आप मुझे दस रुपये दे दें, तो मैं आपसे छः गुना धनी बन जाऊँगा। बताइए कि उनकी क्रमशः क्या सम्पत्तियाँ हैं ?
हल:
माना A और B दो दोस्त हैं। A के पास ₹ x तथा B के पास रु. हैं।
का धन ₹ (x + 100)
प्रथम शर्तानुसार A का धन = ₹(x + 100)
B का धन = ₹(y – 100)
∵ A का धन = 2 × B का धन
x + 100 = 2 × (y – 100)
⇒ x + 100 = 2y – 200
⇒ x – 2y = – 300 …..(i)
तथा द्वितीय शर्तानुसार,
B का धन = ₹ (y + 10),
A का धन = ₹ (x – 10)
B का धन = 6 × A का धन
y + 10 = 6 × (x – 10)
y + 10 = 6x – 60
6x – y = 60 + 10
6x – y = 70 …..(ii)
समीकरण (ii) में 2 से गुणा करने पर,
12x – 2y = 140 …..(iii)
समीकरण (iii) में से समी. (i) को घटाने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 3
x का यह मान समीकरण (i) में रखने पर
40 – 2y = -300
– 2y = – 300 – 40
– 2y = – 340
2y = 340
y = \(\frac{340}{2}\) = ₹ 170
अतः पहले मित्र के पास धन = ₹ 40
और दूसरे मित्र के पास धन = ₹ 170

प्रश्न 3.
एक रेलगाड़ी एक समान चाल से एक निश्चित दूरी तय करती है। यदि गाड़ी 10 किमी/घण्टा अधिक तेज चलती होती, तो इसे नियत समय से 2 घण्टे कम लगते और यदि रेलगाड़ी 10 किमी/ घण्टा धीमी चलती होती, तो इसे नियत समय से 3 घण्टे अधिक लगते। रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि रेलगाड़ी की चाल = x किमी / घण्टा
और रेलगाड़ी द्वारा लिया गया = y घण्टा
रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = चाल × समय
= x × y
= xy किमी
रेलगाड़ी के तेज चलने पर चाल = (x + 10 ) किमी / घण्टा
रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = (y – 2) घण्टे
दूरी = (x + 10 ) (y – 2)
⇒ xy = xy – 2x + 10y – 20
⇒ 2x – 10y = – 20 …..(i)
रेलगाड़ी के धीमी गति से चलने पर चाल = (x – 10) किमी / घण्टा
समय = (y + 3) घण्टे
दूरी = चाल × समय
⇒ xy = (x – 10) × (y + 3)
⇒ xy = xy + 3x – 10y – 30
⇒ 3x – 10y = 30 …..(ii)
समीकरण (ii) में से (i) को घटाने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 4
∴ x = 50
समीकरण (i) में x का मान रखने पर,
2 × 50 – 10y = -20
100 – 10y = – 20
-10y = -20 – 100
– 10y = -120
y = \(\frac{-120}{-10}\) = 12
अतः रेलगाड़ी की चाल = 50 किमी / घण्टा
रेलगाड़ी द्वारा लिया गया समय = 12 घण्टे
∴ रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी = चाल × समय
= 50 × 12
= 600 किमी।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 4.
एक कक्षा के विद्यार्थियों को पंक्तियों में खड़ा होना है। यदि प्रत्येक पंक्ति में 3 विद्यार्थी अधिक होते तो 1 पंक्ति कम होती। यदि पंक्ति में 3 विद्यार्थी कम होते तो 2 पंक्तियाँ अधिक बनतीं कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
माना प्रत्येक पंक्ति में विद्यार्थियों की संख्या x है
तथा कुल पंक्तियों की संख्या y है
∴ कुल विद्यार्थियों की संख्या = xy
स्थिति I: यदि प्रत्येक पंक्ति में 3 विद्यार्थी अधिक हैं
तब इस स्थिति में पंक्तियों की संख्या (y – 1) हो जाती है।
xy = (x + 3) (y – 1)
⇒ xy = xy – x + 3y – 3
⇒ x – 3y = – 3 …..(i)
स्थिति II: यदि प्रत्येक पंक्ति में 3 विद्यार्थी कम हैं तब इस स्थिति में पंक्तियों की संख्या (y + 2) हो जाती है।
xy = (x – 3) (y + 2)
⇒ xy = xy + 2x – 3y – 6
⇒ 2x – 3y = 6 …..(ii)
समीकरण (i) में 2 से गुणा करने पर,
2x – 6y = – 6 …..(iii)
समीकरण (iii) में से (ii) को घटाने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 5
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
⇒ x – 3y = – 3
⇒ x – 3 × 4 = -3
⇒ x – 12 = – 3
x = – 3 + 12
∴ x = 9
अतः कक्षा में विद्यार्थियों की कुल संख्या = 9 × 4 = 36

प्रश्न 5.
एक ΔABC में, ∠C = 3 ∠B = 2 (∠A + ∠B) है। त्रिभुज के तीनों कोण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना त्रिभुज के कोण A, B तथा C हैं।
तब ∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ ∠A + ∠B = 180° – ∠C
∠C = 3∠B = 2 (∠A + ∠B)
∠C = 2 (∠A + ∠B)
⇒ ∠C = 2 (180° – ∠C)
[क्योंकि ∠A + ∠B = 180° – ∠C]
⇒ ∠C = 360° – 2∠C
⇒ ∠C + 2∠C = 360°
⇒ 3∠C = 360°
∴ C = \(\frac{360^{\circ}}{3}\) = 120°
अब ∠C = 3∠B
⇒ 3∠B = 120°
∴ ∠B = \(\frac{120^{\circ}}{3}\) = 40°
परन्तु ∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ ∠A + 40° + 120° = 180°
⇒ ∠A = 180° – 160°
∠A = 20°
अतः Δ के कोण ∠A = 20°
∠B = 40°
∠C = 120°

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 6.
समीकरणों 5x – y = 5 और 3x – y = 3 के ग्राफ खींचिए। इन रेखाओं और y-अक्ष पर बने त्रिभुज के शीषों के निर्देशांक ज्ञात कीजिए। इस प्रकार बने त्रिभुज के क्षेत्रफल का परिकलन कीजिए।
हल:
दिया गया समीकरण युग्म है
5x – y = 5 …..(i)
3x – y = 3 …..(ii)
समीकरण (i) से,
⇒ y = 5x – 5
x = 0 रखने पर, y = 5 × 0 – 5 = 0 – 5 = -5
x = 1 रखने पर, y = 5 × 1 – 5 = 0
x = 2 रखने पर, y = 5 × 2 – 5
= 10 – 5 = 5
x के विभिन्न मानों के लिए सारणी :

x 0 1 2
y -5 0 5

समीकरण (ii) से,
⇒ y = 3x – 3
x = 0 रखने पर, y = 3 × 0 – 3 = -3
x = 1 रखने पर, y = 3 × 1 – 3 = 0
x= 2 रखने पर, y = 3 × 2 – 3 = 3
x के विभिन्न मानों के लिए सारणी:

x 0 1 2
y -3 0 3

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 6
बिन्दुओं (0, -5), (1, 0) तथा (2, 5) को ग्राफ पेपर पर आलेखित करने पर समीकरण 5x – y = 5 की एक सरल रेखा प्राप्त होती है।
इसी प्रकार बिन्दुओं (0, -3), (1, 0) और (2, 3) को ग्राफ पेपर पर आलेखित करने पर समीकरण 3xy – 3 की सरल रेखा प्राप्त होती है।
इन रेखाओं से y-अक्ष पर बना छायांकित त्रिभुज ACD है जिसके निर्देशांक A(0, -5), C(0, -3) और D(1, 0) हैं।
माना x1 = 0, y1 = -5, x2 = 0, y2 = – 3
तथा x3 = 1, y3 = 0
त्रिभुज का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) [x1(y2 – y3) + x2(y3 – y1) + x3(y1 – y2)]
= \(\frac{1}{2}\) [0(- 3 – 0) + 0{0 – (-5)} + 1 {-5 – (-3)}]
= \(\frac{1}{2}\) [0 + 0 + 1(- 5 + 3)]
= \(\frac{1}{2}\) (-2) = -1 वर्ग मात्रक
त्रिभुज के शीषों के निर्देशांक (1, 0), (0, -3), (0, -5) है।
∵ क्षेत्रफल ऋणात्मक नहीं हो सकता। अतः त्रिभुज का क्षेत्रफल 1 वर्ग मात्रक होगा।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित रैखिक समीकरणों के युग्मों को हल कीजिए-
(i) px + qy = p – q
qx – py = p + q
(ii) ax + by = c
bx + ay = 1 + c
(iii) \(\frac{x}{a}-\frac{y}{b}=0\)
ax + by = a2 + b2
(iv) (a – b)x + (a + b)y = a2 – 2ab – b2
(a + b) (x + y) = a2 + b2
(v) 152x – 378y = -74
-378x + 152y = -604
हल:
(i) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म
px + qy = p – q …(1)
और qx – py = p + q …(2)

समीकरण (1) को से और समीकरण (2) को p से गुणा करने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 7
घटाने पर,
y के इस मान को समीकरण (1) में रखने पर,
px + q(-1) = p – q
⇒ px – q = p – q
⇒ px= p – q + q
⇒ px = p
∴ x = 1
अतः x = 1 और y = -1

(ii) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म
ax + by = c
⇒ ax + by – c = 0 …..(i)
तथा bx + ay = 1 + c
⇒ bx + ay – (1 + c) = 0 …..(ii)
वज्रगुणन विधि से समी. (i) एवं (ii) को हल करने पर
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 8
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 9

(iii) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म
\(\frac{x}{a}-\frac{y}{b}=0\)
⇒ \(\frac{b x-a y}{a b}\) = 0
⇒ bx – ay = 0 …..(i)
और ax + by = a2 + b2
⇒ ax + by – (a2 + b2) = 0 …..(ii)
वज्रगुणन विधि से हल करने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 10
अतः समीकरण के अभीष्ट हल x = a और y = b हैं।

(iv) दिया गया रैखिक समीकरण युग्म
(a – b)x + (a + b)y = a2 – 2ab – b2
ax – bx + ay + by = a2 – 2ab – b2 …..(i)
और (a + b) (x + y) = a2 + b2
⇒ ax + bx + ay + by = a2 + b2 …..(ii)
समीकरण (i) में से (ii) को घटाने पर,
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 11
x के इस मान को समीकरण (i) में रखने पर,
(a – b) (a + b) + (a + b)y = a2 – 2ab – b2
⇒ a2 – b2 + (a + b)y = a2 – 2ab – b2
⇒ (a + b)y = a2 – 2ab – b2 – a2 + b2
⇒ (a + b)y = -2ab
∴ y = \(\frac{-2 a b}{a+b}\)
अतः x = (a + b)
और y = \(-\frac{2 a b}{a+b}\)

(v) दिया गया समीकरण युग्म
152x – 378y = -74 …..(1)
-378x + 152y = -604 …..(2)
समीकरण (1) व समीकरण (2) को जोड़ने पर,
-226x – 226y = -678
⇒ -226(x + y) = -678
⇒ x + y = \(\frac{-678}{-226}\)
∴ x + y = 3 …..(3)
समीकरण (1) मैं से समीकरण (2) को घटाने पर,
(152x – 378y) – (-378x + 152y) = – 74 – (-604)
⇒ 152x – 378y + 378x – 152y = – 74 + 604
⇒ 530x – 530y = 530
⇒ 530(x – y) = 530
∴ x – y = 1 …..(4)
समीकरण (3) व समीकरण (4) को जोड़ने पर,
x + y + x – y = 3 + 1
⇒ 2x = 4
⇒ x = \(\frac{4}{2}\)
∴ x = 2
x = 2 समीकरण (3) में रखने पर,
⇒ 2 + y = 3
⇒ y = 3 – 2 ⇒ y = 1
अत: समीकरण के अभीष्ट हल x = 2 और y = 1 हैं।

JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7

प्रश्न 8.
ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है। इस चक्रीय चतुर्भुज के कोण ज्ञात कीजिए।
JAC Class 10 Maths Solutions Chapter 3 दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.7 12
हल:
∵ ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है।
∴ ∠A + ∠C = 180°
⇒ 4y + 20 + (- 4x ) = 180°
या – 4x + 4y = 180° – 20° = 160°
या x – y = – 40° …..(1)
और ∠B + ∠D = 180°
तो -7x + 5 + 3y – 5 = 180°
या -7x + 3y = 180°
या 7x – 3y = – 180° …..(2)
समीकरण (1) से y = x + 40 समीकरण (2) में प्रतिस्थापित करने पर,
7x – 3(x + 40) = – 180
⇒ 7x – 3x – 120 = -180
⇒ 4x = – 180 + 120
⇒ 4x = -60
∴ x = \(\frac{-60}{4}\) = -15
x का यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
– 15 – y = – 40
⇒ – y = -40 + 15
⇒ – y = – 25 ⇒ y = 25
तब ∠A = 4y + 20 = 4 × 25 + 20 = 120°
∠B = – 7x + 5 = (-7) × (-15) + 5
= 110°
∠C = – 4x = – 4 × – 15 = 60°
∠D = 3y – 5 = 3 × 25 – 5 = 70°