JAC Class 12 Political Science Solutions Chapter 4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र

Jharkhand Board JAC Class 12 Political Science Solutions Chapter 4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र Textbook Exercise Questions and Answers

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Jharkhand Board Class 12 Political Science सत्ता के वैकल्पिक केंद्र InText Questions and Answers

पृष्ठ 56

प्रश्न 1.
क्या भारत दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा नहीं है? भारत के पूर्वोत्तरी राज्य आसियान देशों के इतने निकट क्यों हैं?
उत्तर:
भारत दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया का हिस्सा है। भारत आसियान देशों क पड़ोसी देश है, इसलिए भारत के पूर्वोत्तरी राज्य आसियान देशों के काफी निकट हैं।

पृष्ठ 57

प्रश्न 2.
आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) के सदस्य कौन हैं?
उत्तर:
कम्बोडिया, इण्डोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, थाईलैण्ड, वियतनाम इत्यादि।

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पृष्ठ 58

प्रश्न 5.
आसियान क्यों सफल रहा और दक्षेस (सार्क) क्यों नहीं? क्या इसलिए कि उस क्षेत्र में कोई बहुत बड़ा देश नहीं है?
उत्तर:
आसियान इसलिए सफल रहा क्योंकि इसके सदस्य देशों ने टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा देने की नीति अख्तियार करते हुए निवेश, श्रम और सेवाओं के मामले में मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने में सफलता पायी है। इसने आसियान देशों का साझा बाजार और उत्पादन आधार तैयार किया है तथा इस क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में सहयोग किया है। दक्षेस (सार्क) इसलिए सफल नहीं रहा क्योंकि इसके सदस्य देश बातचीत के माध्यम से टकराव को टालकर एक साझा बाजार स्थापित करने में असफल रहे हैं और निवेश, श्रम तथा सेवाओं के मामलों में इसे मुक्त व्यापार क्षेत्र नहीं बना सके हैं।

पृष्ठ 60

प्रश्न 6.
कार्टून में (पृष्ठ संख्या 60 ) साइकिल का प्रयोग आज के चीन के दोहरेपन को इंगित करने के लिए किया गया है। यह दोहरापन क्या है? क्या हम इसे अन्तर्विरोध कह सकते हैं?
उत्तर:
चीन विश्व में सर्वाधिक साइकिल प्रयोग करने वाला देश है। इस कार्टून में साइकिल का प्रयोग दोहरापन दर्शाता है क्योंकि एक तरफ तो चीन साम्यवादी विचारधारा वाले देशों का नेता होने की बात करता है, जबकि दूसरी ओर अपनी अर्थव्यवस्था में डालर अर्थात् पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को आमंत्रित कर रहा है। कार्टून में दोनों पहियों में अगला पहिया जहाँ साम्यवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहा है, वहीं पीछे का पहिया पूँजीवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह एक प्रकार का विचारधारागत अन्तर्विरोध है।

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प्रश्न 7.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में भारत का दौरा किया। 2018 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन गए थे । इन दौरों में जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनके बारे में पता करें।
उत्तर:
अप्रैल, 2018 में प्रधानमंत्री मोदी चीन यात्रा पर गए यात्रा के दौरान द्विपक्षीय व राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर वार्ता हुई इसके अतिरिक्त सीमा विवाद को शीघ्रता से निपटाने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर भी दोनों पक्षों में सहमति हुई। अक्टूबर, 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर आये। शी जिनपिंग ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में भारतीय प्रधानमंत्री के साथ औपचारिक वार्ता में भाग लिया। इसके अतिरिक्त बीजा नियमों में शिथिलता देने, सीमाविवाद को शीघ्र सुलझाने, कैलाश मानसरोवर के लिए नाथूला से नया रास्ता खोलने, आतंकवाद को रोकने, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए चीन को आमंत्रित करने, दो इंडस्ट्रियल पार्क बनाने, रेलवे का आधुनिकीकरण करने, अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग करने जैसे समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

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प्रश्न 1.
तिथि के हिसाब से इन सबको क्रम दें-
(क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश
(ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना
(ग) यूरोपीय संघ की स्थापना
(घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना।
उत्तर:
(ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना (1957)
(घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना (1967)
(ग) यूरोपीय संघ की स्थापना (1992)
(क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश (2001 )।

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प्रश्न 2.
‘ASEAN way’ या आसियान शैली क्या है?
(क) आसियान के सदस्य देशों की जीवन शैली है।
(ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को कहा जाता है।
(ग) आसियान सदस्यों की रक्षा नीति है।
(घ) सभी आसियान सदस्य देशों को जोड़ने वाली सड़क है।
उत्तर:
(ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को कहा जाता है।

प्रश्न 3.
इनमें से किसने ‘खुले द्वार’ की नीति अपनाई?
(क) चीन
(ख) दक्षिण कोरिया
(ग) जापान
(घ) अमरीका।
उत्तर:
(क) चीन।

प्रश्न 4.
खाली स्थान भरें-
(क) 1962 में भारत और चीन के बीच ……… और ……….. को लेकर सीमावर्ती लड़ाई हुई थी।
(ख) आसियान क्षेत्रीय मंच के कामों में ………… और ……… करना शामिल है।
(ग) चीन ने 1972 में ……………. के साथ दोतरफा संबंध शुरू करके अपना एकांतवास समाप्त किया।
(घ) ………….. योजना के प्रभाव से 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना हुई।
(ङ) आसियान का एक स्तम्भ है जो इसके सदस्य देशों की सुरक्षा के मामले देखता है।
उत्तर;
(क) अरुणाचल, लद्दाख
(ख) आसियान के देशों की सुरक्षा, विदेश नीतियों में तालमेल
(ग) अमेरिका
(घ) मार्शल
(ङ) सुरक्षा समुदाय।

प्रश्न 5.
क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर;
क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य हैं-

  1. अपने-अपने इलाके (क्षेत्र) में चलने वाली ऐतिहासिक दुश्मनियों और कमजोरियों का क्षेत्रीय स्तर पर समाधान ढूंढ़ना।
  2. अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक शांतिपूर्ण और सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था विकसित करना।
  3. अपने क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्थाओं का समूह बनाने की दिशा में काम करना।
  4. बाहरी हस्तक्षेप का डटकर मुकाबला करना।

प्रश्न 6.
भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?
उत्तर:
भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर सकारात्मक असर पड़ता है। यथा-

  1. इसके कारण उस क्षेत्र के देशों की कई समस्यायें, धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज तथा भाषाएँ समान होती हैं, जिससे क्षेत्रीय संगठन के निर्माण में मदद मिलती है।
  2. इसके कारण क्षेत्र विशेष के देशों में क्षेत्रीय संगठन बनाने की भावना विकसित होती है और इस भावना के विकास के साथ पारस्परिक संघर्ष और युद्ध का स्थान, पारस्परिक सहयोग और शांति ले लेती है।
  3. क्षेत्रीय निकटता और भौगोलिक एकता मेल-मिलाप के साथ आर्थिक सहयोग तथा अन्तर्देशीय व्यापार को बढ़ावा देती है।
  4. भौगोलिक निकटता के कारण उस क्षेत्र विशेष के राष्ट्र बड़ी आसानी से सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था कर सकते
  5. एक क्षेत्र के विभिन्न राष्ट्र यदि क्षेत्रीय संगठन बना लें तो वे परस्पर सड़क मार्गों और रेल सेवाओं से आसानी से जुड़ सकते हैं।

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प्रश्न 7.
‘आसियान- विजन 2020′ की मुख्य-मुख्य बातें क्या हैं? उत्तर–‘आसियान-विजन 2020’ की मुख्य-मुख्य बातें ये हैं-

  1. आसियान-विजन 2020 में अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय में आसियान की एक बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता दी गई है।
  2. आसियान द्वारा टकराव की जगह बातचीत द्वारा हल निकालने की नीति पर बल दिया गया है। इस नीति से आसियान ने कम्बोडिया के टकराव एवं पूर्वी तिमोर के संकट को संभाला है।
  3. आसियान – विजन 2020 के तहत एक आसियान सुरक्षा समुदाय, एक आसियान आर्थिक समुदाय तथा एक आसियान सामाजिक तथा सांस्कृतिक समुदाय बनाने की संकल्पना की गई है।
  4. आसियान अपने सदस्य देशों, सहभागी सदस्यों और गैर- क्षेत्रीय संगठनों के बीच निरन्तर संवाद और परामर्श को महत्त्व देगा।

प्रश्न 8.
आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों और उनके उद्देश्यों के बारे में बताएँ।
उत्तर:
आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभ- 2003 में आसियान ने तीन मुख्य स्तंभ बताये हैं। ये हैं

  1. आसियान सुरक्षा समुदाय,
  2. आसियान आर्थिक समुदाय और
  3. आसियान सामाजिक- सांस्कृतिक समुदाय।

आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों के उद्देश्य-आसियान समुदाय के तीनों मुख्य स्तंभों के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. आसियान सुरक्षा समुदाय – यह क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाकर उन्हें बातचीत के द्वारा सुलझाने का प्रयास करता है।
  2. आसियान आर्थिक समुदाय – आसियान आर्थिक समुदाय का उद्देश्य आसियान देशों का साझा बाजार और उत्पादन आधार तैयार करना तथा इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना है। यह संगठन इस क्षेत्र के देशों के आर्थिक विवादों को निपटाने के लिए बनी मौजूदा व्यवस्था को भी सुधारता है।
  3. आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय – इसका मुख्य उद्देश्य आसियान क्षेत्र का सामाजिक और सांस्कृतिक विकास करना है। इस हेतु यह सदस्य देशों में संवाद और परामर्श के लिए रास्ता तैयार करता है।

प्रश्न 9.
आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?
उत्तर:
चीन की नियंत्रित अर्थव्यवस्था और आज की अर्थव्यवस्था में अन्तर आज की चीनी अर्थव्यवस्था, उसकी नियंत्रित अर्थव्यवस्था से भिन्नता लिए हुए है। दोनों के अन्तर को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है-
(1) नियंत्रित अर्थव्यवस्था बनाम खुले द्वार की अर्थव्यवस्था:
चीन की नियंत्रित अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योगों पर राज्य का नियंत्रण था। विदेशी बाजारों से तकनीक और सामान खरीदने पर प्रतिबंध था। इसमें विदेशी व्यापार न के बराबर था, प्रति व्यक्ति आय बहुत कम थी तथा औद्योगिक उत्पादन पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ पा रहा था। चीन ने 1970 के बाद अमेरिका से सम्बन्ध बनाकर अपने राजनीतिक और आर्थिक एकांतवास को खत्म किया। कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आधुनिकीकरण पर बल दिया तथा विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के ‘निवेश से उच्चतर उत्पादकता को प्राप्त करने पर बल दिया गया।

(2) राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था बनाम निजीकरण की बाजारमूलक अर्थव्यवस्था:
चीन की नियंत्रित अर्थव्यवस्था में कृषि तथा उद्यमों पर राज्य का नियंत्रण था। लेकिन चीन की वर्तमान अर्थव्यवस्था निजीकरण लिये हुए बाजारमूलक अर्थव्यवस्था है।

(3) रोजगार तथा सामाजिक कल्याण सम्बन्धी अन्तर:
चीन की राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था में सभी नागरिकों को ‘रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ देने के दायरे में लाया गया। लेकिन वर्तमान चीन की बाजारमूलक अर्थव्यवस्था का लाभ सभी नागरिकों को नहीं मिल रहा है।

(4) विदेशी निवेश सम्बन्धी अन्तर;
चीन की नियन्त्रित अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश नगण्य रहा जबकि वर्तमान अर्थव्यवस्था में वह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए आकर्षक देश बनकर उभरा है।

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प्रश्न 10.
किस तरह यूरोपीय देशों ने युद्ध के बाद की अपनी परेशानियाँ सुलझाई? संक्षेप में उन कदमों की चर्चा करें जिनसे होते हुए यूरोपीय संघ की स्थापना हुई।
उत्तर:
यूरोपीय देशों ने दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात् आपसी बातचीत, सहयोग एवं परस्पर विश्वासों के आधार पर अपनी परेशानियों को दूर किया। यथा यूरोपीय देशों की प्रमुख समस्यायें – 1945 के बाद यूरोपीय देशों की प्रमुख समस्यायें निम्नलिखित थीं:

  1. 1945 तक यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाएँ बर्बाद हो गयी थीं।
  2. 1945 तक यूरोपीय देशों की वे मान्यताएँ और व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो गईं जिन पर यूरोप खड़ा हुआ था।
  3. यूरोप के देशों में प्राचीन समय से ही दुश्मनियाँ चली आ रही थीं।

समस्याओं का निवारण- यूरोप के देशों ने अपनी समस्याओं का निवारण निम्न प्रकार से किया:

  1. शीत युद्ध से सहायता – 1945 के बाद यूरोप के देशों में मेल-मिलाप को शीत युद्ध से भी मदद मिली।
  2. मार्शल योजना से अर्थव्यवस्था का पुनर्गठन – अमरीका से यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए जबरदस्त मदद मिली। इसे मार्शल योजना के नाम से जाना जाता है।
  3. सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था – अमेरिका ने नाटो के तहत एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को जन्म दिया।

यूरोपीय संघ की स्थापना के प्रमुख कदम-

  1. यूरोपीय परिषद् का गठन – 1949 में गठित यूरोपीय परिषद् राजनैतिक सहयोग के मामले में एक अगला कदम साबित हुआ।
  2. अर्थव्यवस्था के पारस्परिक एकीकरण की प्रक्रिया – यूरोप के पूँजीवादी देशों की अर्थव्यवस्था के आपसी एकीकरण की प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ी और इसके परिणामस्वरूप 1957 में यूरोपियन इकॉनोमिक कम्युनिटी का गठन व यूरोपीय संसद का गठन हुआ तथा 1992 में मॉस्ट्रिस्ट संधि के द्वारा यूरोपीय संघ की स्थापना हुई।
  3. यूरोपीय संघ एक विशाल राष्ट्र-राज्य के रूप में- अब यूरोपीय संघ स्वयं काफी हद तक एक विशाल राष्ट्र-राज्य की तरह ही काम करने लगा है। यद्यपि यूरोपीय संघ का कोई संविधान नहीं बन सका है, तथापि इसका अपना झंडा, गान, स्थापना दिवस और अपनी मुद्रा है।

प्रश्न 11.
यूरोपीय संघ को क्या चीजें एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाती हैं?
उत्तर:
यूरोपीय संघ एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन के रूप में यूरोपीय संघ को निम्न तत्त्व एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन सिद्ध करते हैं:

  1. समान राजनैतिक रूप-यूरोपीय संघ यूरोपीय देशों का एक ऐसा राजनैतिक संगठन है जिसका अपना झंडा, गान, स्थापना दिवस तथा मुद्रा है। इससे साझी विदेश नीति और सुरक्षा नीति में मदद मिली है।
  2. सहयोग की नीति – यूरोपीय संघ ने सहयोग की नीति अपनाते हुए यूरोप के देशों में परस्पर सहयोग को बढ़ावा दिया है। इससे इसका प्रभाव बढ़ा है।
  3. यूरोपीय संघ का आर्थिक प्रभाव – यूरोपीय संघ का आर्थिक प्रभाव बहुत जबरदस्त है। 2005 में यह विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। विश्व व्यापार संगठन के अन्दर भी यह एक महत्त्वपूर्ण समूह के रूप में कार्य करता है। इसकी आर्थिक शक्ति का प्रभाव इसके नजदीकी देशों पर ही नहीं, बल्कि एशिया और अफ्रीका के दूर-दराज के देशों पर भी है।
  4. राजनैतिक और कूटनीतिक प्रभाव – यूरोपीय संघ का राजनैतिक और कूटनीतिक प्रभाव भी कम नहीं है। इसके दो सदस्य देश
    •  ब्रिटेन और
    •  फ्रांस सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य हैं। यूरोपीय संघ के कई और देश सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों में शामिल हैं।
  5. सैनिक तथा तकनीकी प्रभाव – यूरोपीय संघ के पास विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। इसका कुल रक्षा बजट अमेरिका के बाद सबसे अधिक है। इसके दो देशों – ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु हथियार हैं। अंतरिक्ष विज्ञान तथा संचार प्रौद्योगिकी के मामले में यूरोपीय संघ का विश्व में द्वितीय स्थान है।

प्रश्न 12.
चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूदा एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें।
उत्तर:
हम इस कथन से सहमत हैं कि चीन और भारत में मौजूदा विश्व – व्यवस्था को चुनौती देने की क्षमता है। इसके समर्थन में अग्र तर्क दिये जा सकते हैं: संजीव पास बुक्स

  1. चीन और भारत दोनों एशिया के दो प्राचीन, महान शक्तिशाली, साधन- सम्पन्न देश हैं। दोनों में परस्पर सुदृढ़ मित्रता और सहयोग अमेरिका के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
  2. चीन और भारत दोनों ही विशाल जनसंख्या वाले देश हैं। इतना विशाल जनमानस अमेरिका के निर्मित माल के लिए एक विशाल बाजार प्रदान कर सकता है। दोनों देश पश्चिमी व अन्य देशों को कुशल और अकुशल सस्ते श्रमिक दे सकते हैं।
  3. भारत और चीन दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएँ उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं। तेजी से आर्थिक विकास करके ये आर्थिक क्षेत्र में एकध्रुवीय विश्व को चुनौती दे सकते हैं।
  4. दोनों ही राष्ट्र अपने यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों में परस्पर सहयोग करके प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आश्चर्यजनक प्रगति कर एकध्रुवीय विश्व को चुनौती प्रस्तुत कर सकते हैं।
  5. दोनों देश विश्व बैंक, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण लेते समय अमेरिकी एकाधिकार की प्रवृत्ति को नियंत्रित कर सकते हैं।
  6. दोनों देश बहुउद्देश्यीय योजनाओं में, यातायात के साधनों के विकास में, जल-विद्युत निर्माण क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग और आदान-प्रदान की नीतियाँ अपनाकर अपने को शीघ्र महाशक्ति की श्रेणी में ला सकते हैं।

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प्रश्न 13.
मुल्कों की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों को बनाने और मजबूत करने पर टिकी है। इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर:
विश्व शांति और समृद्धि के लिए क्षेत्रीय आर्थिक संगठन आवश्यक है। प्रत्येक देश की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों के निर्माण और उन्हें सुदृढ़ बनाने पर टिकी है क्योंकि-

  1. क्षेत्रीय आर्थिक संगठन बनने पर कृषि, उद्योग-धन्धों, व्यापार, यातायात, आर्थिक संस्थाओं आदि को बढ़ावा मिलता है।
  2. क्षेत्रीय आर्थिक संगठन बनने पर लोगों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में रोजगार मिलेगा। इससे बेरोजगारी और गरीबी दूर होगी।
  3. क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों के निर्माण से जब रोजगार बढ़ेगा और गरीबी दूर होगी तो लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। वे अपने बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, यातायात आदि की अच्छी सुविधाएँ प्रदान करेंगे।
  4. सभी देश चाहते हैं कि उनके उद्योगों को कच्चा माल मिले तथा अतिरिक्त संसाधनों का निर्यात हो। यह तभी संभव हो सकता है कि सभी पड़ोसी देशों में शांति तथा सहयोग की भावना हो और यह भावना क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों के माध्यम से पैदा होती है। इस प्रकार क्षेत्रीय संगठन समृद्धि और शांति लाते हैं।

प्रश्न 14.
भारत और चीन के बीच विवाद के मामलों की पहचान करें और बताएँ कि वृहत्तर सहयोग के लिए इन्हें कैसे निपटाया जा सकता है। अपने सुझाव भी दीजिए।
उत्तर:
भारत और चीन के बीच विवाद के मुद्दे – भारत और चीन के बीच विवाद के प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं।

  1. सीमा विवाद – दोनों देशों के बीच सीमा विवाद 1962 से चला आ रहा है
  2. मैकमोहन रेखा – मैकमोहन रेखा, जो भारत तथा चीन के क्षेत्र की सीमा निश्चित करती है कि सम्बन्ध में दोनों देशों में मतभेद है।
  3. अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश सम्बन्धी मुद्दा – अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्र के सम्बन्ध में दोनों देशों के बीच विवाद चला आ रहा है।
  4. तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा का मुद्दा – तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा की भारत में उपस्थिति चीन के लिए निरंतर एक परेशानी का कारण रही है।
  5. चीन का पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति करना – चीन ने सदैव पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति की है, जिनका प्रयोग पाकिस्तान भारत के विरुद्ध करता है।

वृहत्तर सहयोग हेतु मतभेदों को निपटाने के लिए सुझाव: वृहत्तर सहयोग के लिए भारत-चीन मतभेदों को निपटाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिये जा सकते हैं।

  1. दोनों देशों की सरकारें, नेतागण, जनसंचार माध्यम पारस्परिक बातचीत के द्वारा हर विवाद का समाधान निकाल सकते हैं
  2. दोनों देश अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर यथासंभव समान दृष्टिकोण अपना कर और परस्पर सहयोग कर इन्हें निपटाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
  3. दोनों देश पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण फैलाने वाली समस्याओं के समाधान में सहयोग दे सकते हैं।
  4. दोनों देशों के प्रमुख नेता समय-समय पर एक-दूसरे के देशों की यात्राएँ करें तथा अपने विचारों का अदानप्रदान करें जिससे दोनों देशों में सद्भाव और मित्रता स्थापित हो।
  5. भारत और चीन के पारस्परिक व्यापार को बढ़ावा दिया जाये।

सत्ता के वैकल्पिक केंद्र JAC Class 12 Political Science Notes

→ परिचय:
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद द्वि-ध्रुवीयता का अन्त हो गया । आज विश्व में स्वतंत्र देशों ने मिलकर अनेक असैनिक संगठन, जैसे—यूरोपीय संघ और आसियान आदि, खड़े किए हैं जिनका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों का आर्थिक विकास करना है। इन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। इसके अतिरिक्त विश्व में चीन के आर्थिक क्षेत्र में बढ़ते कदमों ने भी विश्व राजनीति में नाटकीय प्रभाव डाला है। चीन की आर्थिक व्यवस्था में बढ़ोतरी व यूरोपियन संघ तथा आसियान जैसे संगठनों के द्वारा आर्थिक क्षेत्र में जो प्रयास किये गये हैं, उनसे ऐसा लगने लगा है कि आज विश्व में अमरीका के अलावा सत्ता के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

→ यूरोपीय संघ
लम्बे समय से यूरोपीय नेताओं का यह स्वप्न रहा था कि यूरोपीय राज्यों का एक संघ या साझी राजनीतिक- आर्थिक व्यवस्था बनाई जाए। विश्व युद्धों ने इस स्वप्न को आवश्यकता में बदल दिया।

→ यूरोपीय संघ का उद्भव:

  • मार्शल योजना के तहत 1948 ई. में ‘यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन ‘ की स्थापना की गई। इसके माध्यम से पश्चिमी यूरोप के देशों ने व्यापार व आर्थिक मामलों में परस्पर मदद शुरू की।
  • 1949 में गठित यूरोपीय परिषद् राजनैतिक सहयोग के मामले में एक अगला कदम साबित हुई।
  • यूरोप के पूँजीवादी देशों की अर्थव्यवस्था के आपसी एकीकरण की प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ी, परिणामस्वरूप 1957 में यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी का गठन हुआ यूरोपियन पार्लियामेंट के गठन के बाद इस प्रक्रिया ने राजनीतिक स्वरूप प्राप्त कर लिया।

सोवियत गुट के पतन के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आयी और 1992 में इस प्रक्रिया की परिणति यूरोपीय संघ की स्थापना के रूप में हुई। एक लम्बे समय बना यूरोपीय संघ आर्थिक सहयोग वाली व्यवस्था से बदलकर ज्यादा से ज्यादा राजनैतिक रूप लेता गया है यूरोपीय संघ स्वयं काफी हद तक एक विशाल राष्ट्र-राज्य की तरह ही काम करने लगा है। अन्य देशों से संबंधों के मामले में इसने काफी हद तक साझी विदेश और सुरक्षा नीति भी बना ली है। यूरोपीय संघ का आर्थिक, राजनैतिक, कूटनीतिक तथा सैनिक प्रभाव बहुत जबरदस्त है। 2016 में यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और इसका सकल घरेलू उत्पादन 17000 अरब डालर से ज्यादा था जो अमरीका के लगभग है।

विश्व व्यापार में इसकी हिस्सेदारी अमरीका सें तीन गुनी ज्यादा है। यह विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठनों के अंदर एक महत्त्वपूर्ण समूह के रूप में काम करता है। यूरोपीय संघ के दो सदस्य देश ब्रिटेन और फ्रांस सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य हैं। यूरोपीय देश के कई और देश सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों में शामिल हैं। सैनिक ताकत के हिसाब से यूरोपीय संघ के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। यूरोपीय संघ के दो देशों- ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु हथियार हैं। अंतरिक्ष विज्ञान और संचार प्रौद्योगिकी के मामले में भी यूरोपीय संघ का दुनिया में दूसरा स्थान है। अधिराष्ट्रीय संगठन के तौर पर यूरोपीय संघ आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में दखल देने में सक्षम है।

यूरोपीय एकता के महत्त्वपूर्ण पड़ाव
→ अप्रैल, 1951: पश्चिमी यूरोप के छह देशों – फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग ने पेरिस संधि पर दस्तखत करके यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय का गठन (Euratom) किया ।

→ मार्च 1957: संजीव पास बुक्स इन्हीं छह देशों ने रोम की सन्धि के माध्यम से यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) और यूरोपीय एटमी ऊर्जा समुदाय ( Euratom) का गठन किया।

→ जनवरी, 1973: डेनमार्क, आयरलैंड और ब्रिटेन ने भी यूरोपीय समुदाय की सदस्यता ली।

→ जून, 1979: यूरोपीय संसद के लिए पहला प्रत्यक्ष चुनाव।

→ जनवरी, 1981: यूनान ( ग्रीस) ने यूरोपीय समुदाय की सदस्यता ली।

→ जून, 1985: शांगेन संधि ने यूरोपीय समुदाय के देशों के बीच सीमा नियंत्रण समाप्त किया

→ जनवरी, 1986: स्पेन ओर पुर्तगाल भी यूरोपीय समुदाय में शामिल हुए।

→ अक्टूबर, 1990: जर्मनी का एकीकरण।

→ फरवरी, 1992: यूरोपीय संघ के गठन के लिए मास्ट्रिस्ट संधि पर दस्तखत।

→ जनवरी, 1993: एकीकृत बाजार का गठन।

→ जनवरी, 2002: नई मुद्रा यूरो को 12 सदस्य देशों ने अपनाया।

→ मई, 2004: साइप्रस, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, हगरी, लताविया, लिथुआनिया, माल्टा, पोलैंड, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया भी यूरोपीय संघ में शामिल।

→ जनवरी, 2007: बुल्गारिया और रोमानिया यूरोपीय संघ में शामिल स्लोवेनिया ने यूरो को अपनाया।

→ दिसम्बर, 2009: लिस्बन संधि लागू हुई।

→ 2012: यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार।

→ 2013: क्रोएशिया यूरोपीय संध का 28वाँ सदस्य बना।

→ 2016: ब्रिटेन में जनमत संग्रह, 51.9 प्रतिशत मतदाताओं ने फैसला किया कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर हो जाए।

JAC Class 12 Political Science Chapter 4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र

→ दक्षिण – पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) (Association of South-East Asian Nations)
गठन: आसियान का गठन 1967 को हुआ इसके 5 संस्थापक सदस्य देश – इंडोनेशिया, मलेशिया, थाइलैंड, फिलीपींस और सिंगापुर हैं। बाद के वर्षों में ब्रुनेई दारुस्सलाम, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया भी इसके सदस्य बने। इस प्रकार वर्तमान में इसके दस सदस्य देश हैं। उद्देश्य – इसके उद्देश्य हैं

  • क्षेत्र में आर्थिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक विकास को बढ़ावा देना;
  • क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा स्थापित करना;
  • साझे हितों, प्रशिक्षण, शोध-सुविधाओं, कृषि, व्यापार तथा उद्योग के क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कायम करना;
  • समान उद्देश्यों व लक्ष्यों वाले दूसरे क्षेत्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ लाभप्रद व निकटतम संबंध कायम करना।

→ भूमिका व उपलब्धियाँ-

  • आसियान आर्थिक संवृद्धि, सामाजिक उन्नयन, सांस्कृतिक विकास और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा है।
  • आसियान ने आर्थिक सहयोग के उद्देश्य को भी सही रूप में पूरा किया है। मुक्त व्यापार क्षेत्र का गठन, आसियान आर्थिक समुदाय के गठन पर बल, चीन व कोरिया के साथ मुक्त व्यापार समझौता इसकी उपलब्धियाँ हैं।
  • आसियान ने सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
  • पूर्वी एशिया के देशों के बीच आसियान एक सेतु का कार्य कर रहा है।
  • यह टकराव के स्थान पर बातचीत को बढ़ावा देने की नीति अपनाए हुए है।
  • यह भारत तथा चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को सुदृढ़ करने की ओर प्रयासरत है।

→ चीनी अर्थव्यवस्था का उत्थान
1978 के बाद चीन की आर्थिक सफलता को देखकर इसको एक महाशक्ति के रूप में देखा जाने लगा है। जनसंख्या की दृष्टि से चीन सबसे आगे है। क्षेत्रफल की दृष्टि से चीन का विश्व में चौथा स्थान है। विश्व में चीन की थल सेना सबसे: जुलाई, 2013 को क्रोएशिया द्वारा यूरोपीय संघ की सदस्यता ग्रहण करने से यूरोपीय संघ के सदस्यों की कुल संख्या 28 हो गई है। बड़ी है। आज इसकी प्रति व्यक्ति जी एन पी विश्व में दूसरे स्थान पर है। आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने के बाद से चीन सबसे जयादा तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है। 1949 में माओ के नेतृतव में हुई साम्यवादी क्रांति के बाद चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना के समय यहाँ की आर्थिकी सोवियत मॉडल पर आधारित थी।

इसने विकास का जो मॉडल अपनाया उसमें खेती से पूँजी निकालकर सरकारी नियंत्रण में बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था। इस मॉडल में चीन ने अभूतपूर्व स्तर पर औद्योगिक अर्थव्यवस्था खड़ा करने का आधार बनाने के लिए सारे संसाधनों का इस्तेमाल किया। सभी नागरिकों को रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ देने के दायरे में लाया गया, स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के मामले में चीन सबसे विकसित देशों से भी आगे निकल गया।

चीनी नेतृत्व ने 1972 में अमरीका से संबंध बनाकर अपने राजनैतिक और आर्थिक एकांतवास को खत्म किया। चीन ने ‘शॉक थेरेपी’ पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला 1982 में खेती का ओर 1998 में उद्योगों का निजीकरण किया व्यापार संबंधी अवरोधों को सिर्फ ‘विशेष आर्थिक क्षेत्रों’ के लिए ही हटाया गया जहाँ विदेशी निवेशक अपने उद्यम लगा सकते हैं। उद्योग और कृषि दोनों ही क्षेत्रों में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर तेज रही व्यापार के नये कानून तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SE2) के निर्माण से विदेश व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई । अब चीन की योजना विश्व आर्थिकी से अपने जुडाव को और गहरा करके भविष्य की विश्व व्यवस्था को एक मनचाहा रूप देने की है।

चीन की आर्थिकी में तो नाटकीय सुधार हुआ है लेकिन वहाँ बेरोजगारी बढ़ी है। वहाँ महिलाओं के रोजगार और काम करने के हालात उतने ही खराब हैं जितने यूरोप में 18वीं और 19वीं सदी में थे। हालाँकि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चीन आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है। 1977 के वित्तीय संकट के बाद आसियान देशों की अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में चीन के आर्थिक उभार ने काफी मदद की है। लातिनी अमरीका और अफ्रीका में निवेश और मदद की नीतियाँ बताती हैं कि विकासशील देशों के मामले में चीन एक नई विश्व शक्ति के रूप में उभरता जा रहा है।

चीन के साथ भारत के सम्बन्ध
→ सकारात्मक पक्ष-

  • दोनों देशों के बीच महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं।
  • भारत और चीन के राजनीतिक सम्बन्ध उतार-चढ़ावों के बाद वर्तमान में सौहार्दपूर्ण हो रहे हैं।
  • भारत व चीन ने व्यापारिक तथा आर्थिक क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1999 से दोनों के बीच व्यापार 30 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है।
  • दोनों ने चिकित्सा विज्ञान, बैंकिंग क्षेत्र, ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की सहमति जतायी है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों के मध्य सहयोगी सम्बन्ध बढ़ रहे हैं

→ नकारात्मक पक्ष-

  • दोनों देशों के बीच सीमा विवाद लम्बे समय से चला आ रहा है।
  • तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा की भारत में उपस्थिति चीन के लिए निरंतर परेशानी का कारण रही है।
  • चीन का सैन्य आधुनिकीकरण भी भारतीय चिंता का विषय है।
  • चीन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता व नाभिकीय सहायता भारत के लिए एक सिरदर्द है।
  • भारत के कुछ महत्त्वपूर्ण व संवेदनशील आर्थिक क्षेत्रों में चीनी कंपनियों की भागीदारी का बढ़ना भारतीय चिंता का विषय है।

JAC Class 12 Political Science Solutions Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत

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JAC Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 2 दो ध्रुवीयता का अंत

Jharkhand Board Class 12 Political Science दो ध्रुवीयता का अंत InText Questions and Answers.

पृष्ठ 24

प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या 24 पर दिये गये मानचित्र में स्वतंत्र मध्य एशियाई देशों को चिह्नित करें।
उत्तर;
स्वतंत्र मध्य एशियाई देश ये हैं-

  1. उज्बेकिस्तान
  2. ताजिकिस्तान
  3. कजाकिस्तान
  4. किरगिझस्तान
  5. तुर्कमेनिस्तान।

प्रश्न 2.
मैंने किसी को कहते हुए सुना है कि, “सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है। ” क्या यह संभव है?
उत्तर:
यह सही है कि सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है। यद्यपि सोवियत संघ समाजवादी विचारधारा का प्रबल समर्थक तथा उसका प्रतीक था, लेकिन वह समाजवाद के एक रूप का प्रतीक था। समाजवाद के अनेक रूप हैं और समाजवादी विचारधारा के उन रूपों को अभी भी विश्व के अनेक देशों ने अपना रखा है। दूसरे, समाजवाद एक विचारधारा है जिसमें देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार विकास होता रहा है और अब भी हो रहा है। इसलिए सोवियत संघ का अन्त समाजवाद का अन्त नहीं है।

पृष्ठ 28

प्रश्न 1.
सोवियत और अमरीकी दोनों खेमों के शीत युद्ध के दौर के पाँच-पाँच देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
शीत युद्ध के दौर के सोवियत और अमरीकी खेमों के 5-5 देशों के नाम निम्नलिखित हैं-

  • अमरीकी खेमे के देश:
    1. संयुक्त राज्य अमेरिका
    2. इंग्लैंड
    3. फ्रांस
    4. पश्चिमी जर्मनी
    5. इटली।
  • सोवियत खेमे के देश:
    1. सोवियत संघ
    2. पूर्वी जर्मनी
    3. पोलैंड
    4. रोमानिया
    5. हंगरी।

Jharkhand Board Class 12 Political Science दो ध्रुवीयता का अंत Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित में से कौनसा कथन गलत है?
(क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी।
(ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व / नियन्त्रण होना।
(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।
(घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियन्त्रण राज्य करता था।
उत्तर:
(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ।
(क) अफगान – संकट
(ग) सोवियत संघ का विघटन
(ख) बर्लिन – दीवार का गिरना
(घ) रूसी क्रान्ति।
उत्तर:
(क) रूसी क्रान्ति, (1917)
(ख) अफगान संकट, (1979)
(ग) बर्लिन – दीवार का गिरना (1989)
(घ) सोवियत संघ का विघटन, (1991)।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौनसा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?
(क) संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई का अन्त
(ख) स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल ( सी आई एस ) का जन्म
(ग) विश्व – व्यवस्था के शक्ति सन्तुलन में बदलाव
(घ) मध्य-पूर्व में संकट
उत्तर:
(घ) मध्य-पूर्व में संकट

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में मेल बैठाएँ-

(1) मिखाइल गोर्बाचेव(क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(2) शॉक थेरेपी(ख) सैन्य समझौता
(3) रूस(ग) सुधारों की शुरुआत
(4) बोरिस येल्तसिन(घ) आर्थिक मॉडल
(5) वारसॉ(ङ) रूस के राष्ट्रपति

उत्तर:

(1) मिखाइल गोर्बाचेव(ग) सुधारों की शुरुआत
(2) शॉक थेरेपी(घ) आर्थिक मॉडल
(3) रूस(क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
(4) बोरिस येल्तसिन(ङ) रूस के राष्ट्रपति
(5) वारसॉ(ख) सैन्य समझौता

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
(क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली”…………”की विचारधारा पर आधारित थी।
(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन” …………था।
(ग) ………… पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
(घ) …………. ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
(ङ) …………. का गिरना शीतयुद्ध के अन्त का प्रतीक था।
उत्तर:
(क) समाजवाद
(ख) वारसॉ पैक्ट
(ग) कम्युनिस्ट
(घ) मिखाइल गोर्बाचेव
(ङ) बर्लिन की दीवार।

प्रश्न 6.
सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र करें।
उत्तर:

  1. सोवियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियन्त्रण में थी जबकि पूँजीवादी देशों में मुक्त व्यापार की नीति को अपनाया गया था।
  2. सोवियत अर्थव्यवस्था समाजवादी अर्थव्यवस्था पर आधारित थी जबकि अमेरिका ने पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को अपनाया था।
  3. सोवियत अर्थव्यवस्था में भूमि और अन्य उत्पादक सम्पदाओं तथा वितरण व्यवस्था पर राज्य का ही स्वामित्व और नियन्त्रण था जबकि पूँजीवादी देशों में निजीकरण को अपनाया गया था।

प्रश्न 7.
किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?
उत्तर:
गोर्बाचेव द्वारा सोवियत संघ में सुधार के कारण
गोर्बाचेव निम्नलिखित कारणों से सोवियत संघ में सुधार करने के लिए बाध्य हुए-
(1) अर्थव्यवस्था का गतिरुद्ध हो जाना:
सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था कई सालों तक गतिरुद्ध हुई। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की बड़ी कमी हो गयी थी। लोगों का जीवन कठिन हो गया था। गोर्बाचेव ने जनता से अर्थव्यवस्था के गतिरोध को दूर करने का वायदा किया था। अतः वह सुधार लाने के लिए बाध्य हुआ।

(2) पश्चिम के देशों की तुलना में पिछड़ जाना:
सोवियत संघ हथियारों के निर्माण की होड़ में प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे (मसलन परिवहन, ऊर्जा) के मामले में पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत पिछड़ गया था। पश्चिमी देशों की तरक्की के बारे में सोवियत संघ के आम नागरिकों की जानकारी बढ़ी। अपने पिछड़ेपन की पहचान से लोगों को राजनीतिक मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का लगा। गोर्बाचेव ने सोवियत संघ को पश्चिम की बराबरी पर लाने का वायदा किया था । इसलिए वह सुधार लाने को बाध्य हुआ।

(3) प्रशासनिक ढाँचे की त्रुटियाँ;
सोवियत संघ के गतिरुद्ध प्रशासन, नौकरशाही में भारी भ्रष्टाचार और सत्ता के केन्द्रीकृत होने आदि के कारण आम जनता शासन से अलग-थलग पड़ गयी थी। गोर्बाचेव ने जनता को विश्वास में लेने के लिए प्रशासनिक ढाँचे में ढील देने का वायदा किया था। अतः गोर्बाचेव प्रशासनिक ढाँचे में सुधार लाने के लिए बाध्य हो गए थे।

प्रश्न 8.
भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
सोविय संघ के विघटन के भारत पर प्रभाव
सोवियत संघ के विघटन से भारत जैसे देशों के लिए निम्नलिखित परिणाम हुए-

  1. सोवियत संघ भारत का एक सच्चा व महान् मित्र रहा था। भारत को अपने आर्थिक विकास के लिए सोवियत संघ से भारी मात्रा में आर्थिक, सैनिक व तकनीकी सहायता प्राप्त होती थी। सोवियत संघ के विघटन के बाद अब भारत की अपने आर्थिक विकास के लिए अमरीका व अन्य पश्चिमी देशों पर निर्भरता बढ़ गयी; जिन्होंने भारत पर आर्थिक सहायता के द्वारा दबाव की कूटनीति थोपी।
  2. सोवियत संघ के पतन के परिणामस्वरूप शीतयुद्ध समाप्त हो गया तथा अन्तर्राष्ट्रीय तनावपूर्ण वातावरण एवं संघर्ष में कमी आई। इससे हथियारों की तेज दौड़ में कमी आई। भारत जैसे देशों के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति की सम्भावना दिखाई दी तथा वे अपने विकास की तरफ अधिक ध्यान देने को उन्मुख हुए।
  3. सोवियत संघ के पतन के बाद भारत जैसे राष्ट्रों के लिए अमेरिका या अन्य किसी राष्ट्र से नजदीकी सम्बन्ध बनाने के लिए किसी गुट में शामिल होने की बाध्यता नहीं रही।
  4. भारत जैसे देशों में लोग पूँजीवादी अर्थव्यवस्था को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शक्तिशाली व महत्त्वपूर्ण मानने लगे। परिणामस्वरूप मिश्रित अर्थव्यवस्था को छोड़कर भारत में उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीतियां अपना ली गईं।
  5. सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने विश्व की एकमात्र महाशक्ति अमेरिका के साथ मजबूती के रिश्ते बनाने की ओर रुख किया।

प्रश्न 9.
शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था?
उत्तर:
साम्यवादी के पतन के बाद पूर्व सोवियत संघ के गणराज्य एक सत्तावादी, समाजवादी व्यवस्था से लोकतांत्रिक पूँजीवादी व्यवस्था तक के कष्टप्रद संक्रमण से होकर गुजरे। रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में पूँजीवाद की ओर संक्रमण का एक खास मॉडल अपनाया गया। विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष द्वारा निर्देशित इस मॉडल को ‘शॉक थेरेपी’ कहा गया । भूतपूर्व ‘दूसरी दुनिया’ के देशों में शॉक थेरेपी की गति और गहनता अलग-अलग रही परंतु इसकी दिशा और चरित्र बड़ी सीमा तक एक जैसे थे।

हर देश को पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना था। ‘शॉक थेरेपी’ की सर्वोपरि मान्यता थी कि मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा। इसके अंतर्गत राज्य की संपदा के निजीकरण और व्यावसायिक स्वामित्व के ढाँचे को तुरंत अपनाने की बात शामिल थी। सामूहिक ‘फार्म’ को निजी ‘फार्म’ में बदला गया और पूँजीवादी पद्धति से खेती शुरू हुई।

‘शॉक थेरेपी’ से इन अर्थव्यवस्थाओं के बाहरी व्यवस्थाओं के प्रति रूझान बुनियादीतौर पर बदल गए। पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाने के लिए वित्तीय खुलापन, मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता और मुक्त व्यापार की नीति महत्त्वपूर्ण मानी गई। अंततः इस संक्रमण में सोवियत खेमे के देशों के बीच मौजूद व्यापारिक गठबंधनों को समाप्त कर दिया गया। खेमे के प्रत्येक देश को एक-दूसरे से जोड़ने की जगह पर प्रत्यक्ष रूप से पश्चिमी मुल्कों से जोड़ा गया। इस तरह धीरे-धीरे इन देशों को पश्चिमी अर्थतंत्र में समाहित किया गया।

साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर संक्रमण के ‘शॉक थेरेपी’ के तरीके को सबसे बेहतर तरीका नहीं कहा जा सकता। अधिक बेहतर उपाय यह होता कि इन देशों में पूँजीवादी सुधार तुरन्त किये जाने की अपेक्षा धीरे-धीरे किये जाते। एकदम से ही सभी प्रकार के परिवर्तनों को लाद देने से सोवियत खेमे में अनेक नकारात्मक प्रभाव पड़े, जैसे- इससे इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तहस-नहस हो गई; इससे जनता को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा; समाज में गरीबी – अमीरी का भेद बढ़ा तथा जल्दबाजी में लोकतंत्रीकरण का काम भी सही ढंग से नहीं हो पाया।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित कथन के पक्ष या विपक्ष में एक लेख लिखें -” दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परम्परागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमरीका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।”
उत्तर:
उक्त कथन के विपक्ष में तर्क-दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भी भारत को अपनी विदेश नीति बदलने की आवश्यकता नहीं है। रूस को छोड़कर अमेरिका से ज्यादा दोस्ती भारत के लिए निम्न तथ्यों के आलोक में उचित नहीं कही जा सकती करता है।

  1. अमेरिका भारत के महत्त्व को कम करने के लिए पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध खड़ा करता आ रहा है
  2. अमेरिका भारत की स्वतन्त्र विदेश नीति को प्रभावित करके अपना पिछलग्गू बनाना चाहता है।
  3. अमेरिका भारत को शक्तिशाली रूप में देखना पसन्द नहीं करता है। इस हेतु वह भारत के प्रयासों का विरोध
  4. चीन-अमेरिकी – पाक धुरी भी भारत और अमेरिका के सम्बन्धों में कटुता का कारण बनती रही है।
  5. आतंकवाद की समस्या से निपटने में भी अमेरिका दोहरी नीति अपनाये हुए है।

उक्त कथन के पक्ष में तर्क- उक्त कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिये जा सकते हैं:

  1. सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् अब विश्व में अमेरिका ही सुपर शक्ति है, इसलिए अब भारत को अमरीका के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध बनाए रखना चाहिए।
  2. भारत और अमरीका दोनों ही देशों में लोकतंत्र है, दोनों ने ही आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई हुई है। अतः भारत को अमरीका के साथ सम्बन्ध बढ़ाने की नीति अपनानी चाहिए।
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को समय-समय पर विभिन्न प्रकार की सहायता की है। शीत युद्ध की समाप्ति के बाद भारत द्वारा उदारीकरण की नीति अपनाने से भारत को अमरीका से सम्बन्ध बढ़ाने चाहिए।
  4. भारत और अमरीका दोनों ही आतंकवाद विरोधी देश हैं।

दो ध्रुवीयता का अंत JAC Class 12 Political Science Notes

→ सोवियत प्रणाली:

  • समाजवादी सोवियत गणराज्य रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रान्ति के बाद अस्तित्व में आया।
  • सोवियत प्रणाली की धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी।
  • वियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियन्त्रण में थी।
  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के देश सोवियत संघ के अंकुश में आ गए। इन सभी देशों की राजनीतिक-सामाजिक व्यवस्था को सोवियत संघ की समाजवादी प्रणाली में ढाला गया । इन्हें ही
  • समाजवादी खेमे के देश या दूसरी दुनिया कहा गया । इनका नेता सोवियत संघ था। इस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ महाशक्ति के रूप में उभरा।
  • अमरीका को छोड़कर शेष विश्व की तुलना में सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था कहीं ज्यादा विकसित थी।
  • लेकिन, सोवियत प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा कसता चला गया।

यह प्रणाली सत्तावादी होती गयी और नागरिकों का जीवन कठिन होता चला गया। सोवियत संघ में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन था जिसका सभी संस्थाओं पर गहरा अंकुश था तथा यह दल जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं था। सोवियत संघ के 15 गणराज्यों में रूसी गणराज्य का हर मामले में वर्चस्व था। अन्य क्षेत्रों की जनता उपेक्षित और दमित महसूस करती थी। हथियारों की होड़ में सोवियत संघ ने समय-समय पर अमरीका को बराबर टक्कर दी लेकिन उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

वह प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे के मामले में पश्चिमी देशों की तुलना में पीछे रह गया। यह अपने नागरिकों की राजनीतिक और आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सका। 1979 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप से उसकी अर्थव्यवस्था और कमजोर हुई। उपभोक्ता वस्तु की कमी हो गयी। 1970 के दशक के अन्तिम वर्षों में यह व्यवस्था लड़खड़ाने लगी थी।

→ गोर्बाचेव और सोवियत संघ का विघटन:
1980 के दशक के मध्य में गोर्बाचेव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने। उसने पश्चिम के देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने, सोवियत संघ को लोकतान्त्रिक रूप देने और वहाँ सुधार करने का फैसला किया। इस फैसले की अकल्पनीय परिणतियाँ हुईं

  • पूर्वी यूरोप की साम्यवादी सरकारें जनता के दबाव में एक के बाद एक गिर गईं। वहाँ लोकतान्त्रिक व्यवस्था की स्थापना हुई।
  •  देश के अन्दर आर्थिक-राजनीतिक सुधारों और लोकतन्त्रीकरण का जहाँ साम्यवादी दल के नेताओं द्वारा विरोध किया गया, वहीं जनता और तेजी से सुधार चाहती थी। परिणामतः 1991 में सोवियत संघ के तीन बड़े गणराज्यों रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की। इन्होंने पूँजीवाद और लोकतन्त्र को अपना आधार बनाया। इन्होंने स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल का गठन किया। बाकी गणराज्यों को राष्ट्रकुल का संस्थापक सदस्य बनाया गया।
  • रूस को सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की सीट मिली। सोवियत संघ के अन्तर्राष्ट्रीय करार और सन्धियों को निभाने की जिम्मेदारी रूस को सौंपी गयी। इस प्रकार सोवियत संघ का पतन हुआ।

सोवियत संघ के विघटन का घटना चक्र:
→ मार्च, 1985: मिसाइल गोर्बाचेव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव चुने गए। बोरिस येल्तसिन को रूस की कम्युनिस्ट पार्टी का प्रमुख बनाया। सोवियत संघ में सुधारों की श्रृंखला शुरू की।

→ 1988: लिथुआनिया में आजादी के लिए आंदोलन शुरू एस्टोनिया और लताविया में भी फैला ।

→ अक्टूबर, 1989: सोवियत संघ ने घोषणा की कि ‘वारसा समझौते’ के सदस्य अपना भविष्य तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। नवम्बर में बर्लिन की दीवार गिर।

→ फरवरी, 1990: शुरुआत गोर्बाचेव ने सोवियत संसद ड्यूमा के चुनाव के लिए बहुदलीय राजनीति की सोवियत सत्ता पर कम्युनिष्ट पार्टी का 72 वर्ष पुराना एकाधिकार समाप्त।

→ जून, 1990: रूसी संसद ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता घोषित की।

→ मार्च, 1990: लिथुआनिया स्वतंत्रता की घोषणा करने वाला पहला सोवियत गणराज्य बना।

→ जून, 1991: येल्तसिन का कम्युनिस्ट पार्टी से इस्तीफा रूस के राष्ट्रपति बने।

→ अगस्त, 1991: कम्युनिस्ट पार्टी के गरमपंथियों ने गोर्बाचेव के खिलाफ एक असफल तख्तापलट किया।

→  सितम्बर, 1991: एस्टोनिया, लताविया और लिथुआनिया बाल्टिक गणराज्य संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य बने।

→ दिस0म्बर, 1991: रूस, बेलारूस और उक्रेन ने 1922 की सोवियत संघ के निर्माण से संबद्ध संधि को समाप्त करके स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रकुल बनाया। आर्मेनिया, अजरबैजान, माल्दोवा, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान भी राष्ट्रकुल का हिस्सा बने। 1993 में जार्जिया राष्ट्रकुल का सदस्य बना संयुक्त राष्ट्रसंघ में सोवियत संघ की सीट रूस को मिली।

→ 25 दिसंबर, 1991: गोर्बाचेव ने सोवियत संघ के राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दिया सोवियत संघ का अंत

→  सोवियत संघ का विघटन क्यों हुआ?

  • सोवियत संघ की राजनीतिक-आर्थिक संस्थाएं अन्दरूनी कमजोरी के कारण लोगों की आकांक्षाएँ पूरा नहीं कर सकीं। यही सोवियत संघ के पतन का प्रमुख कारण रहा।
  • परमाणु हथियार, सैन्य साजो-सामान तथा पूर्वी यूरोप के पिछलग्गू देशों के विकास पर हुए खर्चों से सोवियत संघ पर गहरा आर्थिक दबाव बना, सोवियत व्यवस्था इसका सामना नहीं कर सकी।
  • पश्चिमी देशों की तरक्की के बारे में सोवियत संघ की जनता को यह जानकारी मिली कि सोवियत संघ पश्चिमी देशों से काफी पीछे है। इससे जनता को राजनीतिक मनोवैज्ञानिक धक्का लगा।
  • गतिरुद्ध प्रशासन, भारी भ्रष्टाचार, पार्टी का जनता के प्रति जवाबदेह न होना, खुलापन का अभाव तथा केन्द्रीकृत सत्ता के कारण जनता शासन से अलग-थलग पड़ चुकी थी। सरकार का जनाधार
  • खिसक गया था।
  • गोर्बाचेव ने जब सुधारों को लागू किया तो आकांक्षाओं- अपेक्षाओं का जनता का जो ज्वार उमड़ा, शासक उसका सामना नहीं कर सका। जहाँ आम जनता और तीव्र सुधार चाहती थी, वहाँ सत्ताधारी वर्ग इस बात से असन्तुष्ट था कि गोर्बाचेव सुधारों में बहुत जल्दबाजी दिखा रहे हैं। फलतः गोर्बाचेव का समर्थन हर तरफ से जाता रहा।
  • रूस, बाल्टिक गणराज्यों, उक्रेन तथा जार्जिया में राष्ट्रवादी भावनाओं और सम्प्रभुता की इच्छा का उभार सोवियत संघ के विघटन का तात्कालिक कारण सिद्ध हुआ।

विघटन की परिणतियाँ:
→  सोवियत संघ के विघटन से प्रमुख परिणाम ये निकले:

  • शीत युद्ध के दौर की समाप्ति हुई।
  • अमेरिका विश्व में अकेला महाशक्ति बन बैठा। इस प्रकार एकध्रुवीय विश्व का उदय हुआ।
  •  उदारवादी लोकतन्त्र राजनीतिक जीवन को सूत्रबद्ध करने की सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा।
  •  सोवियत संघ से अलग होकर अनेक नये देशों का उदय हुआ।

साम्यवादी शासन के बाद ‘शॉक थेरेपी’:
→  साम्यवाद के पतन के बाद सोवियत संघ के गणराज्य एक सत्तावादी, समाजवादी व्यवस्था से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था तक के कष्टप्रद संक्रमण से होकर गुजरे। यथा-

  • निजी स्वामित्व को मान्यता: राज्य की सम्पदा का निजीकरण और पूँजीवादी ढाँचे को तुरन्त अपनाने पर बल दिया गया।
  • मुक्त व्यापार: मुक्त व्यापार को पूर्ण रूप से अपनाना जरूरी माना गया।
  • पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाना: पूँजीवादी व्यवस्था को अपनाने के लिए वित्तीय खुलापन, मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता और मुक्त व्यापार की नीति पर बल दिया गया।
  • पश्चिमी देशों से प्रत्यक्ष सम्बन्ध की स्थापना: सोवियत खेमे के देशों के बीच मौजूद व्यापारिक गठबन्धनों को समाप्त कर प्रत्येक देश को सीधे पश्चिमी देशों से जोड़ा गया।

→  शॉक थेरेपी के परिणाम:

  • ‘शॉक थेरेपी’ से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई। पूरा राज्य नियन्त्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा गया। 90 प्रतिशत उद्योगों को निजी कम्पनियों को बेचा गया।
  • रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में नाटकीय ढंग से गिरावट आयी। मुद्रास्फीति इतनी बढ़ गई कि लोगों की जमा पूँजी जाती रही।
  • पुराने व्यापारिक ढाँचे के स्थान पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था स्थापित नहीं हो पायी।
  • खाद्यान्न सुरक्षा व्यवस्था, समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था को नष्ट कर दिया गया। इससे अमीर-गरीब की खाई और बढ़ गयी
  • लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्माण के कार्य को प्राथमिकता के साथ नहीं किया गया। फलतः संसद एक कमजोर संस्था रह गयी। न्यायिक संस्कृति और न्यायपालिका की स्वतन्त्रता स्थापित नहीं हो पायी।
  • अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन का आधार बना – खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और धातु।

→  संघर्ष और तनाव:

  • अनेक गणराज्यों में गृहयुद्ध और बगावत हुई।
  • इन देशों में बाहरी ताकतों की दखल बढ़ी।
  • अनेक में हिंसक अलगाववादी आन्दोलन चले।
  • मध्य एशियाई गणराज्य पेट्रोलियम के विशाल तेल भण्डारों के कारण बाहरी ताकतों और तेल कम्पनियों की आपसी प्रतिस्पर्द्धा का अखाड़ा बन गये अमेरिका इस क्षेत्र में सैनिक ठिकाना बनाना चाहता है और रूस इन राज्यों को अपना निकटवर्ती विदेश मानता है और उसका मानना है कि इन्हें रूस के प्रभाव में रहना चाहिए। चीनियों ने भी सीमावर्ती क्षेत्र में आकर व्यापार शुरू कर दिया है।

→  पूर्व – साम्यवादी देश और भारत:
भारत के सम्बन्ध रूस के साथ गहरे हैं। भारत-रूस सम्बन्धों का इतिहास आपसी विश्वास और साझे हितों का इतिहास है। ये सम्बन्ध जनता की अपेक्षाओं से मेल खाते हैं। रूस और भारत दोनों का सपना बहुध्रुवीय विश्व का है। भारत को रूस के साथ अपने सम्बन्धों के कारण अनेक मसलों में फायदे हुए हैं, जैसे कश्मीर समस्या, ऊर्जा आपूर्ति, चीन के साथ सम्बन्धों में सन्तुलन लाना आदि रूस का भारत से लाभ यह है कि भारत उसके हथियारों का एक बड़ा खरीददार देश है। रूस ने तेल के संकट की घड़ी में भारत की हमेशा मदद की। रूस भारत की परमाणविक योजना के लिए महत्त्वपूर्ण है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

JAC Class 9 Hindi धूल Textbook Questions and Answers

मौखिक –

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न 1.
हीरे के प्रेमी उसे किस रूप में पसंद करते हैं ?
उत्तर :
हीरे के प्रेमी हीरे को साफ़-सुथरे, तराशे हुए और आँखों में चकाचौंध पैदा करने वाले रूप में पसंद करते हैं।

प्रश्न 2.
लेखक ने संसार में किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?
उत्तर :
लेखक ने संसार में उस सुख को दुर्लभ माना है, जो जवानी में अखाड़े की मिट्टी में सनने से मिलता है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

प्रश्न 3.
मिट्टी की आभा क्या है? उसकी पहचान किससे होती है ?
उत्तर :
मिट्टी की आभा धूल है। मिट्टी के रंग-रूप की पहचान उसकी धूल से ही होती है।

लिखित –

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती ?
उत्तर :
धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना इसलिए नहीं की जा सकती, क्योंकि शिशुओं को धूल में खेलना अच्छा लगता है। धूल से सना शिशु का मुख उसकी सहजता को और भी अधिक निखार देता है। इसी कारण शिशुओं को ‘धूलि भरे हीरे’ कहा गया है।

प्रश्न 2.
हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है ?
उत्तर :
आधुनिक युग का अभिजात वर्ग धूल से इसलिए बचना चाहता है, ताकि उसकी दिखावे की चमक-दमक फीकी न पड़ जाए। ये लोग अपने बच्चों को धूल-मिट्टी में खेलने से मना करते हैं। वे धूल से सने हुए शिशु को इसलिए नहीं उठाते कि कहीं उनके वस्त्र मैले न हो जाएँ।

प्रश्न 3.
अखाड़े की मिट्टी की क्या विशेषता होती है ?
उत्तर :
अखाड़े की मिट्टी साधारण धूल नहीं होती। यह मिट्टी अखाड़े में दाव आज़माने वाले जवानों के शरीर पर लगे तेल, मट्ठे और उनकी मेहनत से बहे हुए पसीने से सिझाई हुई होती है। अखाड़े में मेहनत करने से पसीने से तर-बतर जवानों के शरीर पर यह मिट्टी ऐसे फिसलती है, जैसे वह कुआँ खोदकर बाहर निकला हो।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

प्रश्न 4.
श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन किस प्रकार है ?
उत्तर :
लोग कहते हैं कि धूल के समान तुच्छ कोई नहीं है, जबकि सती धूल को माथे से लगाकर उसके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करती है। वीर योद्धा धूल को आँखों से लगाकर उसके प्रति अपनी श्रद्धा जताते हैं तथा युलिसिस ने विदेश से लौटने के बाद अपने देश के प्रति अपना स्नेह व्यक्त करने के लिए इथाका की धूलि को चूमा था। इस प्रकार धूल श्रद्धा, भक्ति और स्नेह व्यक्त करने का सर्वोत्तम साधन है।

प्रश्न 5.
इस पाठ में लेखक ने नगरीय सभ्यता पर क्या व्यंग्य किया है ?
उत्तर :
इस पाठ में लेखक ने बताया है कि जो लोग गाँव से जुड़े हुए हैं, वे यह कल्पना नहीं कर सकते कि धूल के बिना भी कोई शिशु हो सकता है। वे धूल से सने हुए बच्चे को ‘धूलि भरे हीरे’ कहते थे। आधुनिक नगरीय सभ्यता बच्चों को धूल में खेलने से मना करती है, क्योंकि यदि वे धूल से सने बच्चे को उठाएँगे तो मैले हो जाएँगे। नगर वाले गोधूलि अथवा धूलि का महत्व जानते ही नहीं हैं क्योंकि नगरों में तो धूल-धक्कड़ होते हैं, गोधूलि नहीं होती। लेखक नगरीय सभ्यता को हीनभावना से युक्त मानता है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
लेखक ‘बालकृष्ण’ के मुँह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ क्यों मानता है ?
उत्तर :
लेखक का मानना है कि जिस प्रकार फूल के ऊपर धूल के महीन कण शोभा पाते हैं, उसी प्रकार से बालकृष्ण के मुँह पर छाई हुई गोधूलि उनके मुख की शोभा को और अधिक निखार देती है। उनके मुख की ऐसी कांति आधुनिक युग में प्रचलित प्रसाधन-सामग्री के उपयोग से नहीं आ सकती। गोधूलि की सहजता ने बालकृष्ण के मधुर स्वरूप को और भी अधिक आकर्षक बना दिया है। इसलिए लेखक ने बालकृष्ण के मुँह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ माना है।

प्रश्न 2.
लेखक ने धूल और मिट्टी में क्या अंतर बताया है ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार धूल और मिट्टी में विशेष अंतर नहीं है। उसके अनुसार धूल और मिट्टी में केवल उतना ही अंतर है, जितना कि शब्द और रस, देह और प्राण अथवा चाँद और चाँदनी में होता है। जिस प्रकार ये अलग-अलग होते हुए भी एक हैं, उसी प्रकार धूल और मिट्टी अलग नाम होकर भी एक हैं। मिट्टी की आभा का नाम धूल है और मिट्टी के रंग-रूप की पहचान उसकी धूल से ही होती है। मिट्टी और धूल एक दूसरे के पूरक हैं। धूल ही मिट्टी के आरंभ को प्रस्तुत करती है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

प्रश्न 3.
ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है ?
उत्तर :
संध्या के समय जब गोपालक गायें चराकर गाँव में लौटते हैं, तो उनके और उनकी गायों के चलने से उत्पन्न हुई धूल वातावरण में ऐसे भर जाती है कि संध्या के समय को गोधूलि का नाम दे दिया गया है। गाँव की अमराइयों के पीछे अस्त होते हुए सूर्य की किरणें धूलि पर पड़ती हैं, तो वह धूल भी स्वर्णमय हो जाती है। सूर्यास्त के बाद जब गाँव की कच्ची डगर से कोई बैलगाड़ी निकल जाती है, तो उसके पीछे उड़ने वाली धूल रूई के बादल के समान दिखाई देती है और चाँदनी रात में मेले जाने वाली बैलगाड़ियों के पीछे उड़ने वाली धूल चाँदी जैसी लगती है।

प्रश्न 4.
‘हीरा वही घन चोट न टूटे’ – का संदर्भ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक का विचार है कि धूल में लिपटा किसान आज भी तथाकथित अभिजात वर्ग की उपेक्षा का पात्र है। किसान सब की उपेक्षा सहकर भी अपनी मिट्टी से प्यार करता है और अपने परिश्रम से अन्न पैदा करता है। उसके हाथ, पैर, मुँह आदि पर छाई हुई धूल उसके परिश्रमी होने का प्रमाण है। वह ऐसा हीरा है, जो धूल भरा है। हीरा अपनी कठोरता के लिए जाना जाता है, जो हथौड़े की चोट से भी नहीं टूटता। इसी प्रकार से भारतीय किसान भी कठोर परिश्रम से नहीं घबराता, इसलिए वह अटूट है।

प्रश्न 5.
धूल, धूलि, धूली, धूरि और गोधूलि की व्यंजनाओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक ने धूल को जीवन का यथार्थवादी गद्य कहा है। धूलि को वह उसकी कविता मानता है। धूली को वह छायावादी दर्शन मानता है, जिसकी वास्तविकता उसे संदिग्ध लगती है। धूरि को लेखक ने लोक-संस्कृति का नवीन जागरण माना है। गोधूलि से अभिप्राय संध्या के समय उड़ने वाली उस धूल से है, जो गायें चराकर गाँव की ओर लौटते समय ग्वालों और गायों के पैरों से उठती है। इस प्रकार लेखक ने चारों को अलग-अलग रूप में चित्रित किया है।

प्रश्न 6.
‘धूल’ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘धूल’ पाठ में लेखक ने धूल के माध्यम से निम्न वर्ग के महत्व को स्पष्ट किया है। उनका मानना है कि धूल से सना व्यक्ति घृणा अथवा उपेक्षा का पात्र नहीं होता, बल्कि धूल तो परिश्रमी व्यक्ति का परिधान है। धूल से सना शिशु ‘धूलि भरा हीरा’ कहलाता है। धूल में सना किसान-मजदूर सच्चा हीरा है, जो देश की उन्नति में सहायक है। आधुनिक सभ्यता में पले लोग धूल से घृणा करते हैं। वे नहीं जानते कि धूल अथवा मिट्टी ही जीवन का सार है। मिट्टी से ही सब पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इसलिए सती मिट्टी को सिर से, सिपाही आँखों से तथा आम नागरिक स्नेह से स्पर्श करता है।

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प्रश्न 7.
कविता को विडंबना मानते हुए लेखक ने क्या कहा है ?
उत्तर
लेखक ने कहा है कि गोधूलि पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं, परंतु वे उस धूलि को सजीवता से चित्रित नहीं कर पाए, जो कि संध्या के समय गायें चराकर लौटते समय ग्वालों और गायों के पैर से उठकर सारे वातावरण में फैल जाती है। अधिकांश कवि शहरों के रहने वाले हैं। शहरों में धूल-धक्कड़ तो होता है, परंतु गाँव की गोधूलि नहीं होती। इसलिए वे अपनी कविताओं में गाँव की गोधूलि का सजीव वर्णन नहीं कर पाए हैं। अभिप्राय यह है कि कवियों ने जिसे देखा नहीं, महसूस नहीं किया, भोगा नहीं – उसी को अपनी कविताओं में उतार दिया। इसमें कविता यथार्थ से परे हो गई है। इसी को लेखक ने कविता की विडंबना माना है।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1.
फूल के ऊपर जो रेणु उसका श्रृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुँह पर उसकी सहज पार्थिवता को निखार देती है।
उत्तर :
इस पंक्ति के माध्यम से लेखक कहना चाहता है कि शिशु धूल-मिट्टी से सना हुआ ही अच्छा लगता है। धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना नहीं की जा सकती। इस प्रकार धूल से सने शिशु को ‘धूलि भरे हीरे’ कहा गया है। लेखक के अनुसार जैसे फूल के ऊपर पड़े हुए धूल के कण उसकी शोभा को बढ़ा देते हैं, वैसे ही शिशु के मुँह पर पड़ी हुई धूल उसके सहज स्वरूप को और भी निखार देती है।

प्रश्न 2.
‘धन्य-धन्य’ वे हैं नर मैले जो करत गात कनिया लगाय धूरि ऐसे लरिकान की ‘ – लेखक इन पंक्तियों द्वारा क्या कहना चाहता है ?
उत्तर :
लेखक कहना चाहता है कि धूल भरे बच्चे को गोद में उठाए हुए व्यक्ति को सौभाग्यशाली अवश्य माना जाता है, परंतु साथ ही ‘धूल भरे बच्चों को उठाने से मैले हुए’ कहने से यह स्पष्ट होता है कि कवि ने धूल को गंदगी जैसा माना है। इसी पंक्ति में ‘ऐसे लरिकान’ से यह भावार्थ निकलता है कि ये बच्चे निम्न वर्ग के हैं इसलिए धूल से लिपटे हैं। इस प्रकार वह व्यक्ति चमक-दमक देखता है, गुण नहीं। उसे हीरे पसंद हैं, धूलि भरे हीरे नहीं।

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प्रश्न 3.
मिट्टी और धूल में अंतर है, लेकिन उतना ही, जितना शब्द और रस में, देह और प्राण में, चाँद और चाँदनी में।
उत्तर :
इस पंक्ति के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि मिट्टी और धूल में कोई अंतर नहीं है। दोनों एक ही हैं। मिट्टी और धूल की अभिन्नता स्पष्ट करने के लिए लेखक उदाहरण देता है कि जैसे शब्द और रस दो होते हुए भी एक हैं। शब्द के बिना रस उत्पन्न नहीं होता। देह और प्राण अलग-अलग होते हुए भी अभिन्न हैं, क्योंकि प्राण के बिना देह मृत है और देह के बिना प्राण का कोई अस्तित्व नहीं है। चाँद और चाँदनी अलग-अलग हैं, परंतु चाँद के बिना चाँदनी नहीं हो सकती। इसी प्रकार से मिट्टी है, तो धूल है। मिट्टी की पहचान धूल से ही होती है।

प्रश्न 4.
हमारी देशभक्ति धूल को माथे से न लगाए तो कम-से-कम उस पर पैर तो रखे।
उत्तर :
लेखक के अनुसार हमारी देशभक्ति का स्तर इतना गिर गया है कि हम अपने देश की मिट्टी को आदर देने के स्थान पर उसका तिरस्कार करते हैं। हम अपने देश को छोड़कर विदेशों की ओर भाग रहे हैं। इसलिए लेखक चाहता है कि हम चाहे अपने देश की मिट्टी के प्रति समर्पित न हों, परंतु हमें अपने देश को छोड़कर विदेश नहीं जाना चाहिए। हमारे पैर हमारी धरती पर टिके रहे।

प्रश्न 5.
वे उलटकर चोट भी करेंगे और तब काँच और हीरे का भेद जानना बाकी न रहेगा।
उत्तर :
लेखक ने यह संबोधन भारत के किसानों और मज़दूरों के लिए किया है। लेखक ने इन्हें ‘धूल भरे हीरे’ कहा है। आधुनिक अभिजात वर्ग इनकी अपेक्षा करता है और काँच जैसी क्षणभंगुर वस्तुओं के पीछे भाग रहा है। इन किसान-मज़दूरों की उपेक्षा करना तथा इन्हें तुच्छ मानना उचित नहीं है, क्योंकि इनमें दृढ़ता तथा परिश्रम करने की शक्ति है। जब ये अपनी शक्ति पहचान कर अभिजात वर्ग पर अपनी उपयोगिता सिद्ध कर देंगे, तो आधुनिकतावादियों के पास काँच और हीरे में भेद करने का अवसर नहीं होगा।

भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग छाँटिए –
उदाहरण : विज्ञापित – वि (उपसर्ग) ज्ञापित
संसर्ग, उपमान, संस्कृति, दुर्लभ, निद्वंद्व, प्रवास, दुर्भाग्य, अभिजात, संचालन।
उत्तर :
संसर्ग – सम् (सर्ग), उपमान – उप (मान), संस्कृति सम्-कृ – सम्-कृ + क्तिन्
दुर्लभ – दुर् (लभ), निद्वंद्व – निर् (द्वंद्व), प्रवास – प्र (वास)
दुर्भाग्य – दुर् (भाग्य), अभिजात – अभि (जात), संचालन – सम् (चालन)

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

प्रश्न 2.
लेखक ने इस पाठ में धूल चूमना, धूल माथे पर लगाना, धूल होना जैसे प्रयोग किए हैं। धूल से संबंधित अन्य पाँच प्रयोग और बताइए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :

  1. धूल में मिलना – रोहित ने बहुत परिश्रम से चित्र बनाया था, लेकिन सीमा ने उस पर पानी डालकर उसे धूल में मिला दिया।
  2. धूल फाँकना – सतीश पढ़-लिखकर भी कोई काम न मिलने के कारण इधर-उधर धूल फाँकता फिर रहा है
  3. धूल चाटना – पुलिस के डंडे खाकर चोर धूल चाटने लगा।
  4. धूल उड़ना – सुमिता जब चुनाव हार गई, तब उसके घर पर धूल उड़ने लगी।
  5. धूल समझना – रावण अपने सामने सबको धूल समझता था।

योग्यता विस्तार –

प्रश्न 1.
शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविता ‘मिट्टी की महिमा’, नरेश मेहता की कविता ‘मृत्तिका’ तथा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की ‘धूल’ शीर्षक से लिखी कविताओं को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

परियोजना कार्य –

प्रश्न 1.
इस पाठ में लेखक ने शरीर और मिट्टी को लेकर संसार की असारता का जिक्र किया है। इस असारता का वर्णन अनेक भक्त कवियों ने अपने काव्य में किया है। ऐसी कुछ रचनाओं का संकलन कर कक्षा में भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

JAC Class 9 Hindi धूल Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘नीच को धूरि समान’ कथन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :
कवि का कथन है कि धूलि के समान नीच कौन है ? कोई नहीं। इस संबंध में लेखक का कहना है कि कवि के इस कथन को वेद- वाक्य के समान सत्य नहीं मान लेना चाहिए, क्योंकि धूल तो इस देश की पवित्र मिट्टी है। इस मिट्टी को सती श्रद्धावश अपने सिर पर धारण करती है; देशभक्त इसे अपनी आँखों से लगाते हैं और प्रत्येक नागरिक देशप्रेम के कारण अपने देश की मिट्टी का प्रेम से स्पर्श करता है। इसलिए धूल नीच न होकर श्रद्धा, भक्ति और स्नेह के योग्य है।

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प्रश्न 2.
किसान के हाथ-मुँह पर छाई धूल हमारी आधुनिक सभ्यता से क्या कहती है ?
उत्तर :
किसान के हाथ-मुँह पर छाई धूल हमारी आधुनिक सभ्यता से कहती है कि वह धूल परिश्रम की प्रतीक है। इसी के फलस्वरूप किसान देश के लिए अनाज पैदा करता है। हमारी आधुनिक सभ्यता को इन्हें हेय-दृष्टि से देखने के स्थान पर इनका सम्मान करना चाहिए. क्योंकि ये वे सच्चे हीरे हैं, जो घन की चोट से भी नहीं टूटते। किसान कभी भी परिश्रम से जी नहीं चुराता; वह कठोर-से-कठोर स्थिति में भी अपना काम करता रहता है।

प्रश्न 3.
हमारी आधुनिक सभ्यता में धूल की उपेक्षा क्यों की जाती है ?
उत्तर :
हमारी आधुनिक सभ्यता में पले-बढ़े लोग चमक-दमक तथा दिखावे के पीछे भागते हैं। उन्हें धूल से सने हुए लोगों से नफ़रत है। वे अपने बच्चों को धूल-मिट्टी में खेलने से मना करते हैं। वे काँच के समान चमकीली वस्तुओं के पीछे दीवाने हैं। वे यह नहीं सोचते कि काँच क्षणभंगुर होता है। इसके विपरीत परिश्रम की धूल में लिपटा हुआ हीरा ही असली है। वे शारीरिक श्रम को हीनदृष्टि से देखने के कारण भी धूल की उपेक्षा करते हैं।

प्रश्न 4.
गोधूलि गाँव में ही क्यों होती है ?
उत्तर :
गोधूलि गाँव की संपत्ति है गाँव के कच्चे रास्तों पर संध्या के समय जब ग्वाले अपनी गायों को चराकर लौटते हैं, तो उनके तथा गायों के पैरों से उड़ने वाली धूल अस्त होते हुए सूर्य की सुनहरी किरणों में रंगकर स्वर्णमयी हो जाती है। इसी धूल को गोधूलि कहते हैं इसके विपरीत शहर की पक्की सड़कों पर यह दृश्य दिखाई नहीं देता। इसलिए गोधूलि गाँव में ही होती है।

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प्रश्न 5.
लेखक ने किसे हीरे के समान कीमती कहा है और क्यों ?
उत्तर :
लेखक ने से भरे हुए बच्चों को हीरे के समान कीमती कहा है। ऐसा इसलिए कहा गया है, क्योंकि धूल से बच्चों का बचपन लिपटा होता है। बच्चा धूल में खेलकर बड़ा होता है। बच्चों को ज़मीन पर खेलना अच्छा लगता है। उसका सारा शरीर धूल से भर जाता है, इसी कारण वह हीरे से अधिक कीमती है।

प्रश्न 6.
प्रसाधन-सामग्री की तुलना किससे की गई है और क्यों ?
उत्तर :
प्रसाधन – सामग्री की तुलना गोधूलि से की गई है, क्योंकि गोधूलि से ही प्रकृति अपना श्रृंगार करती है। फूल, गलियाँ, पेड़-पौधे इत्यादि सभी इससे भरकर अपना अलग रंग प्रस्तुत करते हैं। बच्चे भी गोधूलि से भरे होते हैं। उस समय सब समान लगते हैं- कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सभी का रूप उसके परिवार वालों को आकर्षित करता है। इसलिए प्रसाधन-सामग्री को गोधूलि के समक्ष तुच्छ माना गया है।

प्रश्न 7.
बड़े लोग अपने बड़प्पन को दिखाने के लिए क्या ढोंग करते हैं ?
उत्तर :
बड़े लोग जब गाँवों में जाते हैं, उस समय अपनी महानता दिखाने के लिए धूल से भरे बच्चों को गोद में उठा लेते हैं। लोग उन्हें इस तरह बच्चों को उठाते देख उनकी प्रशंसा करते हैं कि किस प्रकार उन्होंने मैले-कुचैले धूल से भरे बच्चों को अपनी गोद में उठा रखा है। उन्हें अपनी मिट्टी से प्यार है। यह ढोंग उन्हें आम लोगों की नज़र में महान बना देता है।

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प्रश्न 8.
मिट्टी का हमारे जीवन में क्या महत्व है ?
उत्तर :
मिट्टी का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हमारा शरीर अंत में मिट्टी में विलीन हो जाता है। जीवन जीने के लिए जितने भी सार तत्व अनिवार्य होते हैं, वे सब हमें मिट्टी से मिलते हैं। हमारे जीवन के रूप, रस, गंध, स्पर्श सभी मिट्टी से संबंधित हैं। धूल भी मिट्टी का अंश है, जिसमें बच्चे अपने को पहचानते हैं।

प्रश्न 9.
गोधूलि गाँव की संपत्ति क्यों है ?
उत्तर :
गोधूलि गाँव की संपत्ति मानी जाती है। शहरों में धूल तो है, परंतु वह गोधूलि नहीं है; क्योंकि संध्या के समय जब ग्वाले गाएँ चराकर घरों को लौटते हैं, तो उनके तथा गायों के पदचापों से उठने वाली धूल से वहाँ के वातावरण में अद्भुत आकर्षण दिखाई देता है। जब इस धूल पर अस्त होते हुए सूर्य की सुनहरी किरणें पड़ती हैं; तो धूल स्वर्णिम हो जाती है। ये सब दृश्य गाँवों में ही दिखाई देते हैं। शहरों में ऊँची-ऊँची इमारतों में सूर्य भी छिप जाता है। वहाँ गोधूलि के समय गाँवों जैसा वातावरण दिखाई नहीं देता है। इसलिए गोधूलि को गाँव की संपत्ति माना गया है।

प्रश्न 10.
लेखक धूल पर पैर रखने का आग्रह क्यों कर रहा है ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार आज की पीढ़ी चमक-दमक में खो गई है। उसे अपनी मिट्टी से प्यार नहीं है। वह काँच के टुकड़े प्राप्त करने के लिए विदेशों में जाकर रहना पसंद करती है। इसलिए लेखक कहता है कि हम एक बार अपनी मिट्टी में पैर रखें, जिसमें हमें हमारी सभ्यता की सुगंध मिलेगी। लेखक चाहता है कि हम अपनी धरती पर टिके रहे तथा अपना देश छोड़कर

प्रश्न 11.
विदेश न जाएँ। मानव शरीर किससे बना हुआ है ?
उत्तर :
मानव शरीर मिट्टी से बना हुआ है। यही मिट्टी मानव के शरीर को मज़बूत बनाती है। इसी से उसके शरीर में शक्ति का संचार होता है।

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प्रश्न 12.
मिट्टी हमें किसका ज्ञान करवाती है ?
उत्तर :
मानव शरीर मिट्टी से बना है। इसी से मानव में शक्ति का संचार होता है। संसार में रूप, रस, गंध और स्पर्श का ज्ञान मिट्टी से ही होता है। यह हमें किसी को पहचानने तथा उसके गुणों व अवगुणों से अवगत करवाने का काम करती है।

प्रश्न 13.
लेखक को किस प्रकार का शिशु अच्छा लगता है और क्यों ?
उत्तर :
लेखक को धूल से लथपथ तथा उसमें सना हुआ बालक अति सुंदर लगता है। धूल उसके तन को शोभा युक्त बनाती है; उसके शरीर में चमक तथा कांति उत्पन्न करती है। धूल से युक्त बालक का शरीर सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। ऐसा बालक हीरे की चमक को भी फीका कर देता है।

प्रश्न 14.
मिट्टी की आभा क्या है ? उसकी पहचान कैसे होती है ?
उत्तर :
मिट्टी की आभा ‘धूल’ है। इसी धूल से मिट्टी के रंग-रूप को देखा और जाना जा सकता है। यही धूल मिट्टी के महत्व को प्रतिपादित करती है; उसकी विभिन्नता को एक रूप देकर मिट्टी के गुणों से लोगों को परिचित करवाती है।

प्रश्न 15.
‘धूल’ किस प्रकार की रचना है ? लेखक ने इस रचना के माध्यम से क्या कहना चाहा है ?
उत्तर :
धूल’ डॉ० रामविलास शर्मा द्वारा रचित एक ललित निबंध है। लेखक की यह कृति ग्रामीण अंचल से अवश्य जुड़ी है, लेकिन इसने संपूर्ण मानव जाति को एक बहुमूल्य संदेश देना चाहा है। लेखक ने ‘धूल’ रचना के माध्यम से मिट्टी के महत्व, उपयोगिता तथा महिमा का वर्णन किया है। इसमें लेखक ने मानव-जीवन में मिट्टी का स्थान निर्धारित करते हुए धूल को उसकी आभा कहा है।

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प्रश्न 16.
लेखक ने ‘धूल’ निबंध में बहुत-से मुहावरों का वर्णन किया है। आप भी ‘धूल’ से संबंधित कुछ मुहावरे लिखिए।
उत्तर :
धूल से संबंधित निम्नलिखित मुहावरे हो सकते हैं –

  1. धूल चाटना
  2. धूल झाड़ना
  3. धूल चूमना
  4. धूल में मिलना
  5. धूल उड़ाना
  6. धूल में उड़ना
  7. धूल फाँकना
  8. धूल समझना

प्रश्न 17.
लेखक ने धूल के महत्व को किस प्रकार रेखांकित किया है ?
उत्तर :
लेखक ने धूल के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया है कि सती धूल को माथे से लगाकर स्वयं को सौभाग्यशाली समझती है तथा योद्धा इसी धूल को अपनी आँखों से लगाकर स्वयं को परमवीर समझता है। युलिसिस नामक योद्धा ने स्वदेश लौटने पर सबसे पहले अपने देश इथाका की धूलि को ही चूमा था।

धूल Summary in Hindi

लेखक परिचय :

जीवन-परिचय – सुप्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक एवं कवि श्री रामविलास शर्मा जी का जन्म 10 अक्टूबर, सन् 1912 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुआ था। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में एम० ए० तथा पी०एच डी० की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1938 से ही वे अध्यापन क्षेत्र में आ गए। वर्ष 1943 से 1974 ई० तक इन्होंने बलवंत राजपूत कॉलेज, आगरा के अंग्रेजी विभाग में कार्य किया और विभाग के अध्यक्ष रहे। प्रगतिवादी समीक्षा-पद्धति को हिंदी में सम्मान दिलाने वाले लेखकों में डॉ० रामविलास शर्मा का स्थान प्रमुख है।

प्रगतिशील लेखक संघ के मंत्री के रूप में मार्क्सवादी साहित्य- दृष्टि को समझने का इन्हें पर्याप्त अवसर मिला और इन्होंने उसका भरपूर प्रयोग अपनी रचनाओं में किया। इनका मार्क्सवादी साहित्य-समीक्षा के अग्रणी समीक्षकों में इनका नाम लिया जा सकता है। रामविलास शर्मा जी ने कबीर, तुलसी, भारतेंदु, रामचंद्र शुक्ल, प्रेमचंद आदि पर नवीन ढंग से विचार किया और प्राचीन मान्यताओं को खंडित किया। डॉ० रामविलास शर्मा स्पष्ट वक्ता एवं स्वतंत्र चिंतक थे।

आपने ‘हंस’ मासिक पत्रिका के ‘काव्य-विशेषांक’ का संपादन किया तथा दो वर्ष तक आगरा से निकलने वाली ‘समालोचना’ पत्रिका का भी संपादन किया। सन् 2000 में दिल्ली में इनकी मृत्यु हुई।

रचनाएँ – शर्मा जी की ख्याति हिंदी समालोचक के रूप में अधिक रही है। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं –
निराला की साहित्य साधना (तीन खंड), भारतेंदु और उनका युग, प्रेमचंद और उनका युग, महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण, भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिंदी (तीन खंड), भाषा और समाज, भारत में अंग्रेज़ी राज और मार्क्सवाद (दो खंड), इतिहास दर्शन, भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रदेश आदि।

भाषा-शैली – ‘ धूल’ रामविलास शर्मा का ललित निबंध है, जिसमें लेखक ने प्रसंगानुकूल भावपूर्ण भाषा-शैली का प्रयोग किया है। लेखक ने सहज, सरल तथा व्यावहारिक हिंदी भाषा के शब्दों का अधिक प्रयोग किया है जिसमें कहीं-कहीं शिशु, पार्थिवता, संसर्ग, विज्ञापित, विडंबना आदि तत्सम प्रधान शब्दों के साथ-साथ सिझाई, बाटे, कनिया, मट्ठा आदि देशज शब्दों का प्रयोग भी मिलता है। लेखक ने धूल चाटने, धूल झाड़ने, धूल चूमने, धूल होना आदि मुहावरों का सटीक प्रयोग किया है। लेखक ने काव्यात्मक भावपूर्ण शैली का बहुत सफलता से प्रयोग किया है; जैसे- ‘फूल के ऊपर जो रेणु उसका श्रृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुख पर उसकी सहज पार्थिवता निखार देती है।’ अतः कह सकते हैं कि इस पाठ में लेखक ने सहज, स्वाभाविक तथा भावपूर्ण भाषा-शैली में ‘ धूल’ के महत्व को रेखांकित किया है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

पाठ का सार :

‘धूल’ पाठ में डॉ० रामविलास शर्मा ने धूल की महिमा, महत्व और उपयोगिता का वर्णन किया है। लेखक पाठ का प्रारंभ कविता की इस पंक्ति से करता है- ‘जिसके कारण धूलि भरे हीरे कहलाए’। लेखक का मानना है कि हीरे को तो साफ-सुथरा चमकाकर रखा जाता है, परंतु धूल से लिपटा हुआ शिशु इतना प्यारा लगता है कि वह धूल से भरा हीरा सबका मन मोह लेता है। धूल से सने हुए बालकृष्ण सबके मन के मोहन हैं। आधुनिक सभ्यता में पले हुए लोग बच्चों को धूल में खेलने से रोकते हैं। उन्हें लगता है कि धूल में खेलने से उनका स्तर गिर जाएगा। इसके विपरीत किसी कवि ने धूल-भरे शिशुओं को गोद में लेने वाले लोगों को सौभाग्यशाली मानते हुए लिखा है-‘धन्य धन्य वे हैं नर मैले जो करत गात कनिया लगाय धूरि ऐसे लरिकान की।’

लेखक के अनुसार जो लोग भोले-भाले धूल भरे शिशु को उठाने से शरीर का मैला होना मानते हैं, उन्हें तो अखाड़े की मिट्टी से सने हुए लोगों के शरीर से बदबू ही आने लगेगी। परंतु जो बचपन से ही धूल में खेलता रहा है, उसे जवानी में अखाड़े की मिट्टी से दूर नहीं रखा जा सकता। अखाड़े की मिट्टी साधारण धूल नहीं है वह तो तेल, मट्ठे और मेहनत के पसीने से सनी हुई वह मिट्टी है, जो पसीने से तर शरीर पर ऐसे फिसलती है जैसे कोई कुआँ खोदकर बाहर निकल आया हो। अखाड़े में मेहनत करने से व्यक्ति की मांसपेशियाँ फूल उठती हैं और अखाड़े में चित्त लेटकर वह स्वयं को सारे संसार को जीतने वाला मानता है।

मानव शरीर मिट्टी का बना हुआ है और मिट्टी ही उसके शरीर को मज़बूत बनाती है। फूल मिट्टी की उपज हैं। संसार में रूप, रस, गंध और स्पर्श का ज्ञान भी इसी से होता है। मिट्टी और धूल में उतना ही अंतर है, जितना कि शब्द व रस, देह व प्राण तथा चाँद व चाँदनी में होता है। मिट्टी की आभा का नाम धूल है, जिससे उसके रंग-रूप की पहचान होती है। धूल वह है, जो सूर्यास्त के पश्चात गाँव में गोधूलि, शिशु के मुख पर धूल तथा फूल की पंखुड़ियों पर साकार सौंदर्य बनकर छा जाती है। गोधूलि पर कवियों ने बहुत लिखा है। यह गाँव में होती है, शहरों में नहीं। यह गो और गोपालों के पदों से उत्पन्न होती है। एक प्रसिद्ध पुस्तक-विक्रेता के निमंत्रण-पत्र में गोधूलि की बेला में आने का आग्रह पढ़कर लेखक सोचता है कि शहर के धूल-धक्कड़ में गोधूलि कहाँ ?

धूलि के महत्व को रेखांकित करते हुए लेखक बताता है कि सती इसे माथे से और योद्धा आँखों से लगाता है। युलिसिस ने विदेश से स्वदेश लौटने पर सबसे पहले अपने देश इथाका की धूलि चूमी थी। यूक्रेन के मुक्त होने पर सैनिक ने वहाँ की धूल का अत्यंत श्रद्धा से स्पर्श किया था। जहाँ श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना धूल से होती है, वहीं घृणा के लिए धूल चाटने, धूल झाड़ने आदि मुहावरों का प्रयोग किया जाता है। धूल जीवन का यथार्थ व धूलि उसकी कविता है। मिट्टी काली, पीली, लाल आदि अनेक रंगों की होती है, परंतु धूलि शरत के धुले उजले बादलों जैसी होती है। किसान के हाथ, पैर, मुँह आदि पर छाई हुई धूल के नीचे ही असली हीरे हैं। जब हम यह जान जाएँगे, तब हम हीरे से लिपटी हुई धूल को माथे से लगाना सीख जाएँगे।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 1 धूल

कठिन शब्दों के अर्थ :

  • खरादा हुआ – सुडौल और चिकना।
  • रेणु – धूल।
  • नयन-तारा – आँखों का तारा, बहुत प्यारा।
  • पार्थिवता – मिट्टी से बना।
  • अभिजात – कुलीन, उच्च वर्ग।
  • प्रसाधन सामग्री – श्रृंगार की वस्तु।
  • संसर्ग – संपर्क।
  • गात – शरीर।
  • कनिया – गोद।
  • लरिकान – शिशुओं।
  • विज्ञापित – सूचित।
  • वंचित – विमुख, रहित, अलग।
  • रिझाई – पकाई हुई, सनी हुई।
  • निद्वर्वद्व – बिना किसी दुविधा के, जहाँ कोई द्वंद्व न हो।
  • व्यंजित – व्यक्त करना।
  • असारता – सारहीनता, जिसका कोई सार न हो।
  • सूक्ष्मबोध – गहराई से समझना।
  • अमराइयों – आम के बागों।
  • उपरांत – बाद।
  • गोधूलि की बेला – संध्या का समय।
  • विडंबना – छलना।
  • बाटे – हिस्से।
  • प्रवास – विदेश में रहना।
  • असूया – ईर्ष्या।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

JAC Class 9 Hindi किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
वह कौन-सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली जाने के लिए बाध्य कर दिया ?
उत्तर :
लेखक को कटाक्ष भरे वाक्य कहे गए थे। इन वाक्यों ने उसे आहत कर उसके मन-मस्तिष्क को झिंझोड़ दिया था। उसने तय कर लिया था कि अब उसे जो भी काम करना है, करना शुरू कर देना चाहिए। लेखक की रुचि पेंटिंग में थी। उकील आर्ट स्कूल का नाम लेखक ने सुन रखा था जो दिल्ली में था। अपने प्रति कहे गए वाक्यों से आहत होकर तथा अपने सपने को पूरा करने के लिए ही लेखक दिल्ली जाने को बाध्य हुआ होगा।

प्रश्न 2.
लेखक को अंग्रेज़ी में कविता लिखने का अफसोस क्यों रहा होगा ?
उत्तर :
लेखक घर में उर्दू के वातावरण में पला था। उसकी भावनाओं की अभिव्यक्ति या तो उर्दू भाषा में होती थी या अंग्रेज़ी में। हिंदी में प्रतिष्ठित कवियों हरिवंशराय बच्चन, निराला और पंत से परिचय होने पर लेखक का रुझान हिंदी की तरफ बढ़ा। बच्चन से तो लेखक विशेष रूप से प्रभावित था। बच्चन हिंदी के विख्यात कवि थे। उनके नोट का जवाब लेखक ने अंग्रेज़ी में दिया था। बच्चन ने हिंदी साहित्य के प्रांगण में लेखक को स्थापित किया था। हिंदी के क्षेत्र में अपने उच्च स्थान को पाकर ही लेखक को अपने अंग्रेज़ी में कविता लिखने का अफसोस रहा होगा।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

प्रश्न 3.
अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए ‘नोट’ में क्या लिखा होगा ?
उत्तर :
बच्चन लेखक से मिलना चाहते थे। परंतु लेखक उस समय स्टूडियो में नहीं थे इसलिए बच्चन ने लेखक के लिए एक ‘नोट’ छोड़ा था। उस समय के प्रतिष्ठित कवि द्वारा लेखक के लिए नोट छोड़ा जाना लेखक के लिए आनंददायक अनुभव रहा होगा। उसने लेखक के हृदय पर गहरी छाप छोड़ी थी। लेखक स्वयं को कृतज्ञ महसूस कर रहा था। इससे लगता है कि बच्चन ने लेखक के विषय में कुछ काव्य पंक्तियाँ लिखी होंगी तथा उनसे मिलने की इच्छा भी की होगी। यह भी हो सकता है कि बच्चन ने स्टूडियो में लेखक के चित्र और कविताएँ देखी हों और उनके प्रति ‘नोट’ में अपना दृष्टिकोण प्रकट किया हो।

प्रश्न 4.
लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किन-किन रूपों को उभारा है ?
उत्तर :
लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के अग्रांकित रूपों को उभारा है-
1. सहायक – बच्चन सच्चे सहायक थे। लेखक को इलाहाबाद लाकर उसके एम० ए० के दोनों सालों का ज़िम्मा उन्होंने अपने ऊपर ले लिया था। हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भी लेखक की रचनाओं, उसकी कविताओं के लिए बच्चन प्रेरक रहे। हिंदी साहित्य के प्रांगण में लेखक को स्थापित करने का श्रेय बच्चन को ही जाता है।
2. समय नियोजक – बच्चन समय का दृढ़ता से पालन करने वाले थे। अपने स्थान पर वे नियत समय पर ही पहुँचा करते थे
3. निश्छलता – निश्छलता बच्चन के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण गुण था। उनके हृदय में किसी के प्रति छल-कपट नहीं था। वे एक ऐसे निश्छल कवि थे जिसके हृदय के आर-पार देखा जा सकता था।
4. कोमल हृदय – बच्चन कोमल हृदय के व्यक्ति थे। वे दूसरों के दुख को अपना समझकर उसे दूर करने की चेष्टा करते थे।
5. दृढ़ संकल्प शक्ति – बच्चन की संकल्प शक्ति फौलाद के समान मज़बूत थी। पत्नी के देहांत के पश्चात् वे दुखी और उदास फिर भी उन्होंने साहित्य – साधना में लीन होकर अपने आदर्शों और संघर्षों को जीवित रखा।
6. मौन सजग प्रतिभा – बच्चन प्रतिभावान व्यक्ति थे। उनकी मौन सजग प्रतिभा तो दूसरों की प्रतिभा को नया आयाम देने की स्वाभाविक क्षमता रखती थी।

प्रश्न 5.
बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला ?
उत्तर
बच्चन के सहयोग ने तो लेखक को हिंदी साहित्य में श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया था, परंतु बच्चन के साथ-साथ सुमित्रानंदन पंत ने भी लेखक को सहयोग दिया। पंत जी की ही कृपा से लेखक को इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम मिला था, तभी उन्होंने हिंदी में गंभीरता से कविता रचना करने का निर्णय लिया था। पंत जी ने ‘निशा- निमंत्रण’ के कवि के प्रति लेखक की इस कविता में संशोधन करके लेखक को सहयोग दिया था। ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित एक कविता पर लेखक को निराला की प्रशंसा भी मिली। प्रशंसा उत्साहवर्धन करती है और क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सहयोग करती है दिल्ली में रह रहे। लेखक को उनके भाई तेज बहादुर ने भी उनका सहयोग किया।

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प्रश्न 6.
लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।
उत्तर :
लेखक घर में उर्दू के वातावरण में पला था। उसकी आंतरिक भावनाएँ कविता के रूप में उर्दू में ही उभरती थीं। अभिव्यक्ति के लिए वह अंग्रेज़ी भाषा का भी प्रयोग करता था। हिंदी से लेखक का संबंध नहीं था। बच्चन से परिचय होने के बाद लेखक हिंदी की ओर आकृष्ट हुआ। बच्चन लेखक को इलाहाबाद लाए जहाँ लेखक एम० ए० करने लगे। पंत जी की कृपा से उन्हें इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम मिला। तभी लेखक ने हिंदी कविता को गंभीरता से लिखने का निर्णय किया। उनकी रचनाएँ ‘सरस्वती’ और ‘चाँद’ पत्रिकाओं में छपने लगी थीं।

लेखक की चेतना में पंत और निराला के विचार, उनके संस्कार, इलाहाबाद के हिंदी साहित्यिक वातावरण तथा मित्रों के प्रोत्साहन ने लेखक को हिंदी लेखन में आगे बढ़ाया। बच्चन का प्रभाव लेखक पर सबसे अधिक पड़ा। बच्चन के नवीन प्रयोगों को लेखक भी अपनी रचनाओं में अपनाता था। इसी प्रकार निरंतर अभ्यास से उसका हिंदी लेखन प्रसिद्धि पाने लगा। लेखन में पंत जी ने भी संशोधन कर सहयोग किया। लेखक स्वयं मानते हैं कि हिंदी के साहित्यिक प्रांगण में बच्चन ही उन्हें घसीट लाए थे। कविता के क्षेत्र से निकलकर लेखक ने निबंध और कहानी के क्षेत्र में भी लेखन कार्य किया।

प्रश्न 7.
लेखक ने अपने जीवन में किन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।
उत्तर :
लेखक का जीवन संघर्षों और कठिनाइयों से परिपूर्ण रहा है। दिल्ली में रहकर अपने पेंटिंग की शिक्षा को पूरा करने के लिए लेखक को या तो अपने भाई से सहायता लेनी पड़ती थी या वह स्वयं साइनबोर्ड पेंट कर अपना गुजारा चलाता था। पत्नी का देहांत हो जाने के कारण उसका जीवन एकाकी था। एकाकीपन की पीड़ा हृदय को उद्विग्न और खिन्न बनाए रखती थी। इसी पीड़ा की अभिव्यक्ति वह कविताओं एवं चित्रों के माध्यम से करता था। कुछ समय बाद लेखक ने देहरादून जाकर अपने ससुराल की केमिस्ट्स की दुकान पर कंपाउडरी भी सीखी।

लेखक लोगों से कम ही मिलता-जुलता था इसलिए अपनी पीड़ा की अभिव्यक्ति वह किसी के समक्ष नहीं कर पाता था। केवल खिन्न और दुखी मन से परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की चेष्टा करता रहता। बच्चन के कहने पर लेखक ने यदि एम० ए० शुरू किया तो दिमाग में नौकरी न करने की बात बैठे होने के कारण उसने पढ़ाई पूरी नहीं की। इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम मिला तो हिंदी भाषा में निपुणता की समस्या सामने आई।

भाषा और शिल्प पर लेखक को गंभीरता से ध्यान देना पड़ा। बच्चन के नवीन प्रयोगों को वह अपनी रचनाओं में प्रयोग करता तो उसे कभी सफलता मिलती तो कभी असफलता। ‘निशा-निमंत्रण’ के रूप-प्रकार के अनुसार लिखने में उसे सफलता नहीं मिली। पंत जी ने उसकी कविता का संशोधन किया। अभ्यास के द्वारा, संघर्षो के बीच तथा बच्चन के सहयोग के साथ ही लेखक हिंदी साहित्य में अपना स्थान बनाने में सफल हो सका।

JAC Class 9 Hindi किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
लेखक को हिंदी साहित्य में प्रतिष्ठित करने में बच्चन कैसे सहायक सिद्ध हुए ?
उत्तर :
लेखक के उद्विग्न हृदय की पीड़ा कविता के माध्यम से उर्दू और अंग्रेज़ी में ही अभिव्यक्त होती थी। बच्चन जैसे प्रतिष्ठित कवि से परिचय होने के पश्चात् लेखक हिंदी लेखन की ओर प्रवृत्त हुआ। बच्चन ने लेखक को इलाहाबाद लाकर उसके एम० ए० के दोनों वर्षों का जिम्मा उठा लिया था। विभिन्न पत्रिकाओं में लेखक की छपी रचनाओं की प्रशंसा कर बच्चन ने लेखक को हिंदी लेखन को प्रेरित किया। उसके ‘अभ्युदय’ में प्रकाशित सॉनेट को बच्चन ने विशेष तौर पर पसंद कर उसे खालिस सॉनेट कहा। हिंदी लेखन के क्षेत्र में बच्चन ही उसकी प्रेरणा बने।

बच्चन की कविताओं के उच्च घोषों का लेखक पर प्रभाव पड़ा और यही भाव उसके जीवन का लक्ष्य बन गया। बच्चन अपने नवीन प्रयोगों के विषय में लेखक को बताते थे। लेखक भी उन प्रकारों का प्रयोग अपनी कविताओं में करने का प्रयास करता था। लेखक ने स्वयं स्वीकार किया है-“निश्चय ही हिंदी के साहित्यिक प्रांगण में बच्चन मुझे घसीट लाए थे।” बच्चन की सहायता और निरंतर अभ्यास से लेखक हिंदी लेखन में निपुण होता गया। उसने कविता के साथ-साथ कहानी एवं निबंध के क्षेत्र में भी कार्य किया।

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प्रश्न 2.
बच्चन के जीवन की किन घटनाओं का उल्लेख लेखक ने इस पाठ में किया है?
उत्तर :
बच्चन और लेखक देहरादून में साथ-साथ थे। बड़ा भयंकर तूफान आया था। बड़े-बड़े पेड़ सड़कों पर बिछ गए थे। टीन की छतें उड़ गई थीं। बच्चन उस तूफान में एक गिरते हुए पेड़ के नीचे आने के कारण बाल-बाल बचे थे। लेखक ने उस दिन स्पष्ट देखा था कि उस तूफान से बढ़कर एक और तूफान था जो उनके मन और मस्तिष्क से गुज़र रहा था। वे पत्नी के वियोग को झेल रहे थे। उनकी पत्नी उनकी अर्धांगिनी ही नहीं उनके संघर्षों और आदर्शों की संगिनी भी थी। इस पीड़ा को झेलते हुए भी वे साहित्य साधना में लीन थे।

लेखक ने उनकी समय का पाबंद होने की घटना का उल्लेख भी किया है। इलाहाबाद में भारी बरसात हो रही थी। बच्चन को स्टेशन पहुँचना था। मेजबान के लाख रोकने पर भी बच्चन नहीं रुके। भारी बरसात में उन्हें कोई सवारी नहीं मिली। बच्चन ने बिस्तर काँधे पर रखा और स्टेशन की ओर चल पड़े। उन्हें जहाँ पहुँचना था, वहाँ सही समय पर पहुँचे

प्रश्न 3.
करोल बाग से कनाट प्लेस तक के रास्ते को लेखक किस प्रकार व्यतीत करता था ?
उत्तर :
करोल बाग से कनाट प्लेस के रास्ते में लेखक कभी तो अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति चित्रों के रूप में करता तो कभी कविताओं के माध्यम से। उस समय लेखक को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि ये कविताएँ कहीं छपेंगी। केवल अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति और मन की मौज के लिए वह चित्र बनाता और कविताएँ लिखता था। लेखक हर चेहरे, हर चीज़ और हर दृश्य को गौर से देखता और उसमें अपनी ड्राइंग का तत्व खोज लेता। अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से लेखक किसी भी दृश्य या किसी भी चेहरे को अपनी ड्राइंग और कविता का आधार बना लेता।

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प्रश्न 4.
कल्पनाशील होते हुए भी लेखक उद्विग्न क्यों रहता था ?
उत्तर :
लेखक में अद्भुत कल्पनाशीलता थी। उसमें अपने आप को आस-पास के दृश्यों और चित्रों में खो देने की अद्भुत शक्ति थी। इन्हीं से वह अपनी कविताओं और चित्रों के लिए तत्व प्राप्त करता था। यह सब होते हुए भी लेखक उद्विग्न था क्योंकि उसकी पत्नी का देहांत टी० बी० के कारण हो चुका था। दिल्ली में वह एकदम अकेला। एकाकीपन की पीड़ा उसके हृदय में खिन्नता भरती जा रही थी। अपने इसी एकाकीपन को वह अपने चित्रों और कविताओं द्वारा भरने की चेष्टा करता। किसी से अधिक न मिलने-जुलने के कारण आंतरिक पीड़ा को किसी से बाँट भी न पाता था, इसी कारण वह उद्विग्न रहता था।

प्रश्न 5.
लेखक के दिल्ली आने का क्या कारण था ?
उत्तर :
लेखक को किसी ने कुछ व्यंग्य-भरे वाक्य कह दिए थे। उन वाक्यों से लेखक के मन को बहुत चोट पहुँची, इसलिए उसने जीवन में कुछ करने का निश्चय किया। वह जिस हालत में बैठा था, उसी हालत में दिल्ली के लिए चल दिया। उसकी जेब में पाँच-सात रुपए थे। उसका दिल्ली आने का कारण आहत मन और कुछ कर दिखाने की चाह थी।

प्रश्न 6.
उकील आर्ट स्कूल लेखक का दाखिला कैसे हुआ ?
उत्तर :
लेखक अपने जीवन में कुछ करना चाहता था। उसने पेंटिंग करने का निर्णय लिया। पेंटिंग की शिक्षा के लिए उसने उकील आर्ट में दाखिला लेने के लिए सोचा। वह उकील आर्ट स्कूल गया, वहाँ उसका इम्तिहान लिया गया। उसका शौक और हुनर देखकर, उसको बिना फीस के आर्ट स्कूल में दाखिला मिल गया।

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प्रश्न 7.
उस समय लेखक की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?
उत्तर :
लेखक जब घर से चला था तब उसकी जेब में पाँच-सात रुपए थे। उकील आर्ट स्कूल में बिना फीस के दाखिला हो गया था। लेखक अपना गुजारा चलाने के लिए साइन बोर्ड पेंट करता था या फिर कभी – कभी लेखक के भाई तेज़ बहादुर से मदद लेता था। इस तरह स्पष्ट होता है कि लेखक की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

प्रश्न 8.
उन दिनों लेखक का मन उद्विग्न क्यों रहता था ?
उत्तर :
उन दिनों लेखक का मन उदास रहता था। यद्यपि वह अपने चित्रों और कविताओं के माध्यम से अपने विचारों को प्रकट करता था परंतु मन का एकाकीपन समाप्त नहीं होता था। इसका कारण यह था कि लेखक ने अपनी पत्नी को खो दिया था अर्थात् उनकी पत्नी की टी० बी० से मृत्यु हो गई थी, इसलिए उसे अकेलापन अधिक कचोटता था। वह अपने कमरे में आकर अपने अकेलेपन से लड़ता और उद्विग्न होता था।

प्रश्न 9.
लेखक में क्या बुरी आदत थी ?
उत्तर :
लेखक में एक बहुत बुरी आदत थी कि वह पत्रों का जवाब नहीं देता था। यह नहीं था कि उसे पत्रों का जवाब सूझता नहीं था, परंतु उसे पत्र लिखने की आदत नहीं थी। वह सैकड़ों पत्रों के जवाब मन-ही-मन लिखकर हवा में साँस के साथ बिखेर देता था।

प्रश्न 10.
लेखक अपने जीवन के साथ कैसे ताल-मेल बैठाने का प्रयास कर रहा था ?
उत्तर :
लेखक अपने एकाकी जीवन के साथ तालमेल बैठाने का प्रयास कर रहा था। वह कुछ महीने दिल्ली में रहने के बाद देहरादून आ गया था। देहरादून में अपनी ससुराल की केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स की दुकान पर कंपाउंडरी सीखने लगा। धीरे-धीरे उसे टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखे नुस्खा को पढ़ने में महारत हासिल हो गई थी।

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प्रश्न 11.
लेखक स्वयं को एकाकी क्यों अनुभव करता था ?
उत्तर :
लेखक को कम बोलने की आदत थी। वह अपनी आंतरिक भावनाओं को दूसरों के सामने व्यक्त करने से कतराते था। दूसरे लोगों को उसके एकाकीपन और आंतरिक भावनाओं से कोई मतलब नहीं था। वे बड़ों के सामने जुबान नहीं खोलते थे, इसीलिए वे अपनी आंतरिक पीड़ा से जूझते हुए अकेले रहते थे। अपनी इसी आदत के कारण वे एकाकी अनुभव करते थे।

प्रश्न 12.
लेखक के अनुसार बच्चन जी के मन और मस्तिष्क में कैसा तूफान चल रहा था ?
उत्तर :
सन् 1930 की बात है। उन दिनों बच्चन जी के मन और मस्तिष्क में अलग ही तरह का तूफ़ान चल रहा था। इसका कारण यह था कि उनके जीवन में सहयोग देने वाली अर्द्धांगिनी उन्हें मँझधार में छोड़कर चली गई थी। उनकी पत्नी उनके भावुक आदर्शों, उत्साहों और संघर्ष की युवासंगिनी थी। वह उनके सपनों को साकार करने वाली साथिन थीं, जो उनको छोड़कर जा चुकी थीं। उस समय बच्चन जी अंदर से टूट गए थे परंतु वे ऊपर से कठोर तथा उच्च मनोबल के बने हुए थे।

प्रश्न 13.
बच्चन जी ने लेखक से ऐसा क्यों कहा कि तुम यहाँ रहोगे तो मर जाओगे ?
उत्तर :
एक बार बच्चन जी देहरादून आए थे। उस समय लेखक अपने ससुराल की केमिस्ट की दुकान पर नौकरी कर रहा था। वे उसकी कला को परख कर वहाँ से चलने के लिए बोल पड़े। उन्हें लगा, यदि ये यहाँ रहेगा तो टी०बी० की दवाई बाँटते- बाँटते वह एक दिन इसी तरह मर जाएगा।

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प्रश्न 14.
लेखक लेखन कला में किससे प्रभावित थे ? क्यों ?
उत्तर :
लेखक लेखन कला में बच्चन जी से बहुत प्रभावित थे। वे लेखन कला में नए-नए प्रयोग करते थे। लेखक उनके नवीन प्रयोगों से प्रभावित होकर स्वयं की कविता में उनका प्रयोग करने लगे थे। परंतु उन्हें उस प्रकार की लेखन कला में कठिनाई आती थी। उन्होंने निरंतर प्रयास से उसी प्रकार के प्रयोग कर कई रचनाएँ लिखीं। उन्हें साहित्य क्षेत्र में स्थापित करने और लाने का श्रेय बच्चन जी को जाता है, इसीलिए लेखक बच्चन जी से बहुत प्रभावित था।

किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया Summary in Hindi

पाठ का सार :

प्रस्तुत पाठ में लेखक शमशेर बहादुर सिंह ने अपने हिंदी के क्षेत्र में आने और हिंदी में लेखन यात्रा का विवरण दिया है। लेखक घर में उर्दू के ही वातावरण में पला-बढ़ा था। बी०ए० में भी उसने उर्दू ही एक विषय लिया था। हिंदी से उसका संबंध नहीं था। उसकी भावनाएँ कविता और गज़ल बनकर उर्दू में निरुपित होतीं। अपने आंतरिक भावों को लेखक कभी-कभी अंग्रेजी भाषा में अभिव्यक्त करता था। हिंदी के क्षेत्र में आने के बाद लेखक का हिंदी से इतनी आत्मीयता का संबंध बन गया कि उसे अपने अंग्रेजी में लेखक का अफसोस होने लगा। इस पाठ में लेखक ने अपनी हिंदी तक पहुँचने की यात्रा का वर्णन करने के साथ-साथ हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कवि हरिवंश राय बच्चन के सहयोग और उनके व्यक्तित्व का चित्रांकन भी किया है।

लेखक की रुचि अपनी भावनाओं को शब्दों और चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने की थी। उसे पेंटिंग का बहुत शौक था। लोगों द्वारा कहे गए वाक्य से आहत होकर लेखक ने दिल्ली आकर उकील आर्ट स्कूल में प्रवेश लेकर पेंटिंग में महारत हासिल करने का निर्णय किया। लेखक सुबह जब अपनी कक्षा तक पहुँचने का मार्ग तय करता तो अपने शौक के अनुसार मार्ग में उसकी दृष्टि आस- पास के लोगों के चेहरों और दृश्यों में अपनी ड्राइंग के लिए तत्व खोजने लगती। यह तत्व उसकी कविताओं और उसके चित्रों का आधार बनते। दिल्ली में रह रहे लेखक को उनके भाई तेज बहादुर द्वारा कभी-कभी सहायता मिल जाती और कभी वे साइनबोर्ड पेंट कर अपना गुजारा चला लेते।

लेखक का हृदय पत्नी के देहांत के बाद से ही उदास और खिन्न रहने लगा था। लेखक अपनी भावनाओं को लिखकर या कागज़ पर उकेर कर अपने एकाकीपन को भरने का प्रयास करता। एक बार बच्चन जी लेखक से मिल नहीं पाए लेकिन उन्होंने लेखक के लिए एक नोट छोड़ दिया जिसे पाकर लेखक ने अपने आप को कृतज्ञ अनुभव किया। अपनी कृतज्ञता की अभिव्यक्ति स्वरूप लेखक ने एक कविता लिखी। वह कविता अंग्रेजी में थी जिसका हिंदी क्षेत्र में आने पर लेखक को अफसोस हुआ। लेखक ने बच्चन को वह कविता भेजी।

लेखक का जीवन एकाकी था। खिन्न और उदास होते हुए भी लेखक अपनी परिस्थितियों से तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा था। एक बार बच्चन लेखक के भाई के मित्र ब्रजमोहन गुप्त के साथ लेखक से मिलने आए। लेखक उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हुए। बच्चन उस समय पत्नी वियोग की पीड़ा झेल रहे थे। वे निश्छल कवि थे जिसके मन में कोई छल-कपट नहीं था। बात और वाणी के धनी थे। हृदय मक्खन-सा कोमल था तो संकल्प फौलाद से मजबूत। समय का कठोरता से पालन करना बच्चन की आदत थी। वे वक्त पर अपने स्थान पर पहुँचते थे।

बच्चन जी ने ही लेखक को इलाहाबाद चलकर एम० ए० करने के लिए प्रेरित किया। लेखक ने एम० ए० के दोनों सालों का जिम्मा भी बच्चन ने अपने ऊपर ले लिया था। उनकी यही इच्छा थी कि लेखक पढ़-लिखकर अपने पैर जमाकर एक अच्छा आदमी बन जाए। परंतु लेखक ने अपने मन में नौकरी न करने की बात ठान रखी थी। पंत जी की कृपा से लेखक को इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम मिला। तब लेखक ने हिंदी कविता को गंभीरता से लिखने का निर्णय लिया। लेखक की ‘सरस्वती’ और ‘चाँद’ में रचनाएँ छपीं। बच्चन ने ‘अभ्युदय’ में प्रकाशित उनके सॉनेट को पसंद किया।

निराला और पंत के विचार, उनसे प्राप्त संस्कार, इलाहाबाद का हिंदी साहित्यिक वातावरण, मित्रों का प्रोत्साहन आदि लेखक के हिंदी के प्रति खिंचाव के लिए कारक सिद्ध हुए। बच्चन के प्रभाव और उनकी प्रेरणा से लेखक ने बहुत कुछ सीखा। बच्चन ने कविता के क्षेत्र में नवीन प्रयोग किए। लेखक ने भी उसी प्रकार का प्रयोग कर अपनी रचनाएँ लिखीं। लेखक अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सका जिसका बच्चन जी को क्षोभ रहा। लेखक का हिंदी कविता में अभ्यास सफल हुआ। ‘सरस्वती’ में छपी उनकी कविता की निराला ने प्रशंसा की।

लेखक ने निबंध और कहानी के क्षेत्र में भी कार्य किया। लेखक अपने आप को हिंदी के साहित्यिक प्रांगण में लाने का श्रेय बच्चन जी को ही देता है। बच्चन जी वह मौन सजग प्रतिभा थी जिसने लेखक की प्रतिभा को स्वाभाविक रूप से जीवन दिया था। लेखक बच्चन के व्यक्तित्व को उनकी श्रेष्ठ कविता से बड़ा आँकता है। उन्हीं के कारण ही लेखक शमशेर सिंह बहादुर हिंदी साहित्य में श्रेष्ठ लेखन कर सके। लेखक की दृष्टि में उसका हिंदी तक पहुँचने का यह अनुभव नया या अनोखा नहीं है परंतु बच्चन जैसा व्यक्तित्व अवश्य दुष्प्राप्य है –

JAC Class 9 Hindi Solutions Kritika Chapter 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया

कठिन शब्दों के अर्थ :

  • जुमला – वाक्य
  • फौरन – तत्काल
  • इम्तिहान – परीक्षा
  • लबे-सड़क – सड़क के किनारे
  • चुनाँचे – इसलिए
  • शेर – गाल के दो चरण
  • आकर्षण – खिंचाव
  • उद्विग्न – बेचैन
  • संलग्न – लीन
  • उपलब्धि – सफलता
  • महारत – निपुणता
  • अजूबा-इबारत – वाक्य की बनावट
  • अदब – सम्मान
  • सामंजस्य – तालमेल
  • प्रबल – शक्तिशाली
  • मेजबान – आतिथ्य करने वाला
  • बराय नाम – नाम के लिए
  • न्नेह – प्यार
  • प्लान – योजना
  • संकीर्ण – संकुचित
  • द्योतक – परिचायक
  • विन्यास – व्यवस्थित करना
  • क्षोभ – दुख
  • आकस्मिक – अचानक
  • व्यवधान – रुकावट, बाधा
  • दुष्प्राप्य – जिसका मिलना कठिन हो
  • तय – निश्चित
  • मुख्तसर – संक्षिप्त
  • बिला फीस – बिना फीस के
  • वहमो गुमान – ख्वाबो ख्याल, अंदेशा
  • गाल – फारसी और उर्दू में मुक्तक काव्य का एक प्रकार
  • विशिष्ट – अनूठा
  • जिक्र – चर्चा
  • देहांत – निधन
  • वसीला – सहारा
  • सॉनेट – यूरोपीय कविता का एक लोकप्रिय छंद जिसका प्रयोग
  • हिंदी कवियों ने भी किया है
  • गोया – मानो
  • एकांत – सुनसान
  • एकांतिकता – एकाकीपन
  • इत्तिफ़ाक – संयोग
  • झंझावात – तूफान
  • इसरार – आग्रह
  • बेफिक्र – चिंतामुक्त
  • अरसे तक – लंबे समय तक
  • खालिस – शुद्ध
  • उच्च-घोष – ऊँचे स्वर
  • स्टैंजा – गीत का चरण
  • आकृष्ट – आकर्षित
  • निरर्थक – व्यर्थ, अर्थहीन
  • सजग – जागरूक
  • मर्यांदा – सीमा

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Vyakaran रस Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 10 Hindi Vyakaran रस

प्रश्न 1.
साहित्य में रस से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
दैनिक जीवन में हम रस शब्द का उपयोग अनेक अथों में करते हैं। सर्वप्रथ हम विभिन्न पदार्थो के रस की बात करते हैं। खट्य-माठा, नमकीन अथवा कड़वा रस होता है। जिह्वा के द्वारा हम इस प्रकार के छह रसों का आनंद लेते हैं। दूसरी प्रकार के रस जिनसे हमारा। दैनिक जीवन में परिचय रहता है, वे हैं विभिन्न पदार्थों का सार या निचोड़। किसी पदार्थ का निचोड़, तरलता अथवा पारे गंधक से बनी औषधि आदि को भी रस कह दिया जता है। प्रायः यह भी सुनने को गाने में रस है। इसका अभिप्राय कर्णप्रियता या मधुरता है।

साधु महात्मा एक और रस का वर्णन करते हैं, जिसे ब्रह्मानंद कहा जाता है। पहुँचे हुए योगी ब्रह्म के साथ ऐसा संबंध स्थापित कर लेते हैं कि हर क्षण उन्हें ब्रह्म के निकट होने का आभास होता है और वे उससे आनंदित रहते हैं। यह स्थायी आनंद भी रस माना जाता है। साहित्य में रस, ऐसे आनंद को कहते हैं जो कि पाठक, श्रोता या दर्शक को किसी रचना को गढ़ने, सुनने अथवा मंच पर अभिनीत होते देखकर होता है। जब सहदय (पाठक, श्रोता आदि) को अपने व्यक्तित्व का एहसास पहीं रहता, वह आत्म-विभोर हो उदतार अपे पारेवेश को भूलकर आनद विभीर हो उठता है तो कार्य रस या आजंद ब्रहमानंद के समान हो जाता है । रस का संध यु० के भाव जगत से है।

प्रश्न 2.
रस के अंग अथवा कारण सामग्री का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
आचार्य विश्वनाथ ने अपने ग्रंथ ‘साहित्य दर्पण’ में रस के स्वरूप एवं अवयवों पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार ‘विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों से व्यक्त हुआ स्थायी भाव ही रस का रूप धारण करता है। इस प्रकार रस के चार अंग स्पष्ट हो जाते हैं, जो निम्नलिखित हैं –
(i) स्थायी भाव – मनुष्य के मन में जन्म से ही कुछ भाव रहते हैं, जिनका धीरे-धीरे विकास होता है। वे भा या अधिक मात्रा में स्थायी रूप से रहते हैं। प्रेम, क्रोध, शोक, घृणा, भय, विस्मय, हास्य आदि ऐसे ही स्थायी भाव हैं। ये भाव मन में सुप्तावस्था में रहते हैं और अवसर आने पर जाग जाते हैं। कोई व्यक्ति हर समय क्रोधित दिखाई नहीं पड़ता। जब उसे अपना कोई शत्रु दिखाई दे, अपने को हानि पहुँचाने वाला दिखाई दे तो मन में क्रोध का भाव जागता है। स्थायी भावों को जागृत करने वाली सामग्री को विभाव कहते हैं। स्थायी भाव ही अभिव्यक्त होकर रस में बदलता है।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

(ii) विभाव – विभिन्न प्रकार के स्थायी भावों को जगा देने के जो कारण हैं, उन्हें ‘विभाव’ कहते हैं। विभाव शब्द का अर्थ है विशेष रूप से भाव को जगा देने वाला। स्थायी भाव मन में सोए रहते हैं, विभाव उन्हें जागृत या तीव्र करते हैं। विभाव दो होते हैं –
(क) आलंबन विभाव – आलंबन शब्द का अर्थ हैं, सहारा या आधार। जिन पदार्थों का सहारा लेकर स्थायी भाव जागते हैं, उन्हें आलंबन विभाव कहते हैं। उदाहरण के लिए बालकृष्ण को देखकर माता यशोदा के हृदय में वात्सल्य जागता है तो ‘बालकृष्ण’ यहाँ पर आलंबन विभाव है। इनकी संख्या असीम है। माता यशोदा के मन में भाव जागा, वह आश्रय है। बालकृष्ण के लिए जागा, कृष्ण यहाँ पर विषय है।

(ख) उद्दीपन विभाव – उद्दीपन का अर्थ है, उद्दीप्त करना, तेज़ करना। आलंबन विभाव द्वारा जगाए गए भावों को उद्दीप्त करने वाले पदार्थ, चेष्टाएँ अथवा भाव उद्दीपन विभाव कहलाते हैं। उदाहरण के लिए बाल-कृष्ण माता यशोदा के निकट आकर खीझते हुए, तोतली बोली में बड़े भाई की शिकायत करते हैं तो उनकी खीझ और तुतलाहट यहाँ पर माँ के हृदय में और अधिक प्यार का संचार करती है। यह खीझ और तुतलाहट यहाँ पर माँ के वात्सल्य भाव को तीव्र कर रही है। इसलिए इसे उद्दीपन विभाव कहा जा सकता है। जितने प्रकार के आलंबन हैं, उनसे कहीं ज्यादा उद्दीपन विभाव हैं। इसलिए इनकी संख्या भी असीम है। आलंबन की चेष्टाएँ और उसके आसपास का वातावरण भी उद्दीपन में गिना जाता है।

(iii) अनुभाव – अनु का अर्थ है पीछे। अनुभाव का अर्थ हुआ, जो भाव के पश्चात जन्म लेते हैं। जब किसी आश्रय या पात्र में विभावों को देखकर स्थायी भाव जाग उठता है तब वह कुछ चेष्टाएँ करेगा, उन्हीं को अनुभाव कहेंगे। अनुभाव, भावों के जागृत होने का परिचय देते हैं। अनुभाव, भावों के कार्य हैं, ये भावों का अनुभव करवाते हैं। उपर्युक्त उदाहरण को यदि आगे बढ़ाएँ तो कहेंगे कि माता यशोदा, बालकृष्ण की चेष्टाओं को देखकर आनंद विभोर हो उठीं और उन्होंने कृष्ण की बलाएँ लीं, उन्हें चूमा तथा गोद में उठा लिया। यशोदा द्वारा बालकृष्ण को चूमना, गोद में उठाना और बलाएँ लेना इस बात का प्रतीक है कि उसमें प्रेमभाव वात्सल्य जाग गया है। इस प्रकार माता यशोदा की ये चेष्टाएँ अनुभाव कही जाएँगी। आश्रय की चेष्टाओं के अनुभाव तथा विषय की चेष्टाओं को उद्दीपन में गिनते हैं। अनुभाव संख्या में आठ माने गए हैं –
(क) स्तंभ (अंगों की जकड़न) – हर्ष, भय, शोक आदि के कारण अंगों की गति अवरुद्ध हो जाती है।
(ख) स्वेद (पसीना आना) – क्रोध, भय, दुख अथवा श्रम से पसीना आ जाता है।
(ग) रोमांच (रोंगटे खड़े होना) – विस्मय, हर्ष अथवा शीत से रोमांच हो जाता है।
(घ) स्वरभंग (स्वर का गद्गद होना) – यह भय, हर्ष, मद, क्रोध आदि से उत्पन्न होता है।
(ङ) कंप (काँपना) – भय, क्रोध, आनंद आदि से भरकर आश्रय का शरीर काँपने लगता है।
(च) विवर्णता (रंग फीका पड़ना, हवाइयाँ उड़ना) – क्रोध, भय, काम, शीत आदि से यह उत्पन्न होता है।
(छ) अश्रु (आँसू बहाना) – आनंद, शोक, भय आदि में आश्रय आँसू बहाने लगता है।
(ज) मूर्छा प्रलाप (होश खो जाना) – काम, मोह, मद आदि से इसकी उत्पत्ति होती है।

(iv) संचारी भाव – स्थायी भावों के बीच-बीच में प्रकट होने वाले भावों को संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं। संचारी इन्हें इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये थोड़े समय के लिए जागृत होकर लुप्त हो जाते हैं। यदि माता यशोदा कृष्ण की माखनचोरी से क्रोधित होती हैं, उसे मारने के लिए छड़ी उठाती हैं तो माता यशोदा का यह क्रोध अस्थायी है। बालकृष्ण के प्रति वात्सल्य भाव के कारण ही उन्हें क्रोध आ रहा है। यहाँ पर क्रोध संचारी भाव बनकर आया है। कृष्ण ज्यों ही क्षमा माँग लेगा या दुखी दिखाई पड़ेगा, माँ का वात्सल्य उमड़ आएगा।

क्रोध के रहते हुए भी माँ का कृष्ण के प्रति प्रेम रहता है। इस प्रकार स्थायी भाव को पुष्ट करने के लिए समय-समय पर आश्रय के मन में जो भाव जागते हैं, उन्हें संचारी भाव कहते हैं। संचारी भावों को व्यभिचारी भी कह दिया जाता है क्योंकि ये भाव किसी भी स्थायी भाव के साथ आ सकते हैं। किस स्थायी भाव के साथ कौन-सा संचारी भाव आएगा, यह निश्चित नहीं किया जा सकता। इसलिए संचारी भावों को व्यभिचारी भाव भी कह दिया जाता है। संचारी भावों का उदय केवल स्थायी भावों की पुष्टि के लिए होता है। भावों को अनुभावों द्वारा व्यक्त होना चाहिए। भावों का नाम लेकर उनकी गिनती करवाना काव्य में दोष माना जाता है। संचारी भावों की संख्या 33 मानी जाती है।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

प्रश्न 3.
‘रस’ के बारे में बताते हुए इसके भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर :
साहित्य या काव्य से प्राप्त आनंद को रस कहा जाता है। विभाव, अनुभाव एवं संचारी भावों के द्वारा रस की निष्पत्ति होती है। निष्पत्ति का अर्थ है अभिव्यक्ति या प्रकट होना। काव्य, आत्मा के ऊपर पड़े आवरणों को हटाकर हमारे गुप्त भावों को जगा देता है, जिससे आनंद प्राप्त होता है। स्थायी भाव अभिव्यक्त होकर ही आनंद देने योग्य बनते हैं। इस प्रकार परिपक्व एवं अभिव्यक्त स्थायी भाव ही रस बनते हैं। रस की संख्या सामान्यता नौ स्वीकार की जाती है। ये शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, शांत और अद्भुत रस हैं।

कुछ विद्वानों ने वात्सल्य तथा भक्ति को भी रस की कोटि में रखना चाहा है परंतु सामान्यतः इन्हें भावों की कोटि में ही रखा जाता है। इनका स्थायी भाव भी रति ही है। स्थायी भाव एवं संचारी भाव का अंतर स्पष्ट कीजिए। स्थायी भाव, जैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है, वे भाव हैं जोकि स्थायी रूप से हृदय में स्थित रहते हैं। एक बार जागृत होने पर ये नष्ट नहीं होते बल्कि अंत तक बने रहते हैं।

संचारी भाव संचरण करते रहते हैं, चलते रहते हैं। ये स्थायी रूप में मन में नहीं रहते बल्कि किसी भी स्थायी भाव के साथ उत्पन्न हो जाते हैं। प्रत्येक रस का स्थायी भाव निश्चित रहता है परंतु संचारी भाव निश्चित रूप से न तो किसी रस से जुड़ते हैं और न ही किसी स्थायी भाव से। एक ही संचारी भाव अनेक स्थायी भावों तथा रसों से जुड़ सकता है। इसीलिए संचारी भाव को व्यभिचारी भाव भी कहा जाता है। इनका उपयोग स्थायी भाव को पुष्ट करने में है।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

प्रश्न 4.
स्थायी भाव रसों के अनुसार नौ हैं जबकि संचारी भावों की संख्या 33 है।
उत्तर :
स्थायी भाव, जैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है, वे भाव हैं जोकि स्थायी रूप से हृदय में स्थित रहते हैं। एक बार जागृत होने पर ये नष्ट नहीं होते बल्कि अंत तक बने रहते हैं। संचारी भाव संचरण करते रहते हैं, चलते रहते हैं। ये स्थायी रूप में मन में नहीं रहते बल्कि किसी भी स्थायी भाव के साथ उत्पन्न हो जाते हैं।

प्रत्येक रस का स्थायी भाव निश्चित रहता है परंतु संचारी भाव निश्चित रूप से न तो किसी रस से जुड़ते हैं और न ही किसी स्थायी भाव से। एक ही संचारी भाव अनेक स्थायी भावों तथा रसों से जुड़ सकता है। इसीलिए संचारी भाव को व्यभिचारी भाव भी कहा जाता है। इसका उपयोग स्थायी भाव को पुष्ट करने में है।

स्थायी भाव – रस
(क) रति – शृंगार
(ख) हास – हास्य
(ग) शोक – करुण
(घ) क्रोध – रौद्र
(ङ) उत्साह – वीर
(च) भय – भयानक
(छ) जुगुप्सा – वीभत्स
(ज) विस्मय – अद्भुत
(झ) निर्वेद – शांत

कुछ विद्वान प्रभुरति (भक्ति) और वात्सल्य को स्थायी भावों में गिनते हैं और इनसे क्रमशः भक्ति रस और वात्सल्य रस की अभिव्यक्ति स्वीकार करते हैं।

संचारी भाव – निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, मद, श्रम, आलस्य, दैन्य, चिंता, मोह, स्मृति, धृति, लज्जा, चपलता, हर्ष, आवेग, जड़ता, गर्व, विषाद, औत्सूक्य, नीरसता, अपस्मार, स्वप्न, विबोध, अमर्ष, अवहित्य, उग्रता, मति, व्यधि, उन्माद, त्रास, वितर्क और मरण हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

प्रश्न 5.
रस के भेदों का सोदाहरण परिचय दीजिए।
उत्तर :
1. श्रृंगार रस

विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों के संयोग से अभिव्यक्त रति स्थायी भाव शृंगार रस कहलाता है।
रति, प्रेम एक कोमल भाव है। सामाजिक दृष्टि से स्वीकार्य प्रेम ही श्रृंगार का स्थायी भाव बन सकता है। इस रस की रचना में रति का भाव झलकना चाहिए। अश्लील चित्रण इस रस में बाधक ही हैं। ग्राम्य अथवा अशिष्ट व्यवहार का वर्णन श्रृंगार के लिए उपयोगी नहीं। श्रृंगार के दो भेद हैं-संयोग और वियोग शृंगार।

संयोग एवं वियोग शृंगार के उदाहरण निम्नलिखित ढंग से समझे जा सकते हैं –

(क) संयोग श्रृंगार

जब नायक-नायिका एक-दूसरे के निकट होते हैं तब संयोग अवस्था होती है। ऐसे चित्रण में संयोग श्रृंगार रस होता है। संयोग श्रृंगार में नायक-नायिका एक दूसरे की ओर प्रेम से देखते हैं, आपस में बातें करते हैं, साथ-साथ घूमते हैं, तथा वे आपस में प्रेम क्रीड़ा कर सकते हैं।
उदाहरण :

1. “राम को रूप निहारत जानकी, कंकन की नग की परछांही।
यातें सबै सुधि भूलि गई कर टैकि रही पल टारत नाही॥”

(राम के सुंदर रूप पर मुग्ध जानकी लज्जावश सीधे उनकी ओर नहीं देखतीं बल्कि अपने कंगन की परछाईं में राम के सुंदर रूप को देख रही हैं। कंगन जिस बाजू में पहना है उसे बिलकुल भी हिला नहीं रही कि कहीं राम का रूप ओझल न हो जाए। वह निरंतर उस कंगन को देख रही है, जिसमें श्री रामचंद्र जी की परछाईं है।) इस पद्यांश में स्थायी भाव-रति (सीता का राम के प्रति प्रेम)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 1

उदाहरण 2.

कंकन किंकिन नूपुर धुनि-सुनि।
कहत लखन सन राम हृदय गुनि।
मानहु मदन दुंदुभी दीन्हीं।
मनसा विस्व विजय कह कीन्हीं।
अस कहि फिरि चितये तेहि ओरा।
सीय-मुख ससि भये नयन चकोरा।
भये विलोचन चारु अचंचल।
मनहु सकुचि निमि तजेड दुगंचल।

(श्रीराम अपने हृदय में विचारकर लक्ष्मण से कहते हैं कि कंकण, करधनी और पाजेब के शब्द सुनकर लगता है मानो कामदेव ने विश्व को जीतने का संकल्प कर डंके पर चोट मारी है। ऐसा कहकर राम ने सीता के मुखरूपी चंद्रमा की ओर ऐसे देखा जैसे उनकी आँखें चकोर बन गई हों। सुंदर आँखें स्थिर हो गईं। मानो निमि ने सकुचाकर पलकें छोड़ दी हों।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 2

उदाहरण 3.

सुनि सुंदर बैन सुधारस साने सयानी हैं जानकी जानी भली।
तिरछे करि नैन, दे सैन तिन्हैं समुझाई कछू मुसकाइ चली।
तुलसी तेहि ओसर सोहे सबै, अवलोकति लोचन लाहु अली।
अनुराग तड़ाग में मानु उदै विगसी मनो मंजुल कंजकली।

(सीता ने ग्रामवासिनियों के अमृत रस भरे सुंदर वचनों को सुनकर समझ लिया कि वे सब समझदार और चंचल हैं। इसलिए उन्होंने आँखों से कटाक्ष करते हुए संकेत ही में उन्हें समझा दिया और मुसकराकर आगे बढ़ गईं। तुलसीदास कहते हैं कि उस समय मानो उनकी कमल कलियों के समान आँखें प्रेमरूपी तालाब में सूर्य के प्रकाश के कारण खिल गईं।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 3

(ख) वियोग श्रृंगार –

उदाहरण 1.

जहाँ नायक-नायिका, एक-दूसरे से अलग, दूर हो जाते हैं। ऐसे चित्रांकन को वियोग श्रृंगार कहते हैं।

निसिदिन बरसत नैन हमारे।
सदा रहत पावस ऋतु हम पै जब तै स्याम सिधारे॥
दृग अंजन लागत नहिं कबहू उर कपोल भये कारे॥

(गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि हे उद्धव यह वर्षा ऋतु हमारे लिए घातक बन गई है। हमारी आँखों से निरंतर आँसुओं की वर्षा होती है। हम पर तो सदा ही पावस, बरसात छाई रहती है, जब से कृष्ण गोकुल को छोड़कर गए हैं। हमारी आँखों में काजल नहीं ठहरता है तथा आँसुओं के साथ बहे काजल से हमारे गाल और छाती काली हो गई है।) इस पद्यांश में रस की दृष्टि से विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से हैं –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 4

वियोग श्रृंगार के तीन भेद हैं –
(क) पूर्वराग – जब नायक अथवा नायिका वास्तविक रूप में एक-दूसरे से मिलने से पूर्व ही चित्र-दर्शन, गुण कथन अथवा सौंदर्य श्रवण आदि से एक-दूसरे को प्यार करने लगें, तब उस समय के विरह को पूर्वराग का विरह कहेंगे।
(ख) मान – नायक अथवा नायिका रूठकर एक-दूसरे से अलग हो जाएँ तथा अपने अहम के कारण नायक ऊपर से रूठने का नाटक करे तो यह ‘मान’ विरह की स्थिति है।
(ग) प्रवास – मिलने के पश्चात नायक अथवा नायिका का विदेश यात्रा के लिए तैयार होना प्रवास की स्थिति है। वियोग श्रृंगार में वियोगी की दस दशाएँ अभिलाषा, चिंता, स्मृति, गुण कथन, उद्वेग, प्रलाप, उन्माद, व्याधि, जड़ता और मरण स्वीकार की जाती हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 2.
मधुवन तुम कत रहत हरे।
विरह-वियोग स्थान सुंदर के ठाढ़े क्यों न जरे?
(अरे, मधुवन ! तुम हरे-भरे क्यों हो? तुम श्रीकृष्ण के वियोग में खड़े-खड़े जल क्यों नहीं गए।)
स्थायी भाव-रति।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 5

उदाहरण 3.
कहा लडैते दृग करे, पटे लाल बेहाल।
कहुं मुरली, कहुं पीत पट, कहुं मुकुट वनमाल॥
(राधा के वियोग में श्रीकृष्ण की बाँसुरी कहीं, पीले वस्त्र कहीं और मुकुट कहीं पड़ा है। वे स्वयं निश्चेष्ट दिखाई दे रहे हैं।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 6

उदाहरण 4.

खड़ी खड़ी अनमनी तोड़ती हुई कुसुम-पंखुड़ियाँ,
किसी ध्यान में पड़ी गवाँ देती घड़ियाँ की घड़ियाँ।
दृग से झरते हुए अश्रु का ज्ञान नहीं होता है,
आया-गया कौन, इसका कुछ ध्यान नहीं होता है।

(देवलोक की अप्सरा उर्वशी पुरुरवा के प्रेम में डूबी अनमनी-सी खड़ी फूलों की पत्तियाँ तोड़ती रहती है, उसी के ध्यान में घंटों व्यतीत कर देती है, आँखों से बहते आँसुओं का उसे पता ही नहीं लगता, उसके पास कौन आया और कौन गया इससे अनजान रहती है।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 7

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

2. हास्य रस

किसी व्यक्ति या पदार्थ को साधारण से भिन्न अथवा विकृत आकृति में देखकर, विचित्र-रूप में देखकर, विभिन्न प्रकार की चेष्टाएँ देखकर जब पाठक, श्रोता या दर्शक के मन में हास्य विनोद का भाव जागता है, तो उसे हास या हास्य कहते हैं।

उदाहरण –
एक कबूतर देख हाथ में पूछा कहाँ अपर है?
उसने कहा अपर कैसा? वह उड़ गया सपर है।
उत्तेजित हो पूछा उसने, उड़ा? अरे वह कैसे?
‘फड़’ से उड़ा दूसरा बोली, उड़ा देखिए ऐसे।

उपर्युक्त पद्यांश में नूरजहाँ और जहाँगीर में वार्तालाप हो रहा है। रस के आधार पर विश्लेषण आगे दिया गया है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 8

उदाहरण 2.

बाबू बनने का यार फार्मूला सुनो।
कीजिए इकन्नी खर्च मूंछ की मुँडाई में।
लीजिए सैकेंड हैंड सूट डेढ़ रुपये में,
देसी रिस्ट वाच चार पैसे की कलाई में॥
गूदड़ी बाज़ार का हो बूट भी अधेली वाला,
करो पूरे खर्च आने तीन नेकटाई में।
अठन्नी में हो कोट और चश्मा दुअन्नी में,
‘मुरली’ बनो न बाबू मुद्रिका अढ़ाई में॥

(बाबू बनने के लिए इकन्नी में अपनी मूंछे मुंडवाओ, डेढ़ रुपये में पुराना सूट लो, चार पैसे वाली नकली घड़ी कलाई पर बाँधो, गूदड़ी बाजार से अधेले का पुराना बूट खरीदो, तीन आने में नेकटाई खरीदो, अठन्नी में कोट और दुअन्नी में चश्मा लो। अढ़ाई रुपये खर्च करके बाबू बन जाओ।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 9

उदाहरण 3.
चना बनावे घासी राम। जिनकी झोली में दुकान।
चना चुरमुर चुरमुर बोलै। बाबू खाने को मुख खोले।
xxxxxxx
चना खाते सब बंगाली। जिनकी धोती ढीली ढाली।
चना जोर गर्म।
(चौपट राजा की अँधेर नगरी में घासी राम चने वाला अपने समय का वर्णन व्यंग्यात्मक ढंग से करता है।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 10

3. करुण रस

किसी प्रिय पात्र के लंबे वियोग की पीड़ा या उसके न रहने पर होने वाले क्लेश को शोक कहते हैं और इसमें करुण रस का परिपाक होता है। करुण रस में शोक स्थायी भाव रहता है, आश्रय शोक संतप्त व्यक्ति होता है, आलंबन विभाव नष्ट प्रिय वस्तु या व्यक्ति रहता है तथा उद्दीपन विभाव से प्रिय का दाह, विलाप, रात्रि, एकांत, श्मशान तथा उस प्रिय की वस्तुएँ आदि रहती हैं। अनुभाव में रोना, पीटना, पछाड़ खाना, आहे भरना आदि आता है। संचारी भावों में विकलता, मोह, ग्लानि, व्याधि, स्मृति, जड़ता आदि प्रयोग होते हैं। करुण में प्रिय के मिलने की आशा नहीं रहती।

उदाहरण 1.

हाय पुत्र हा ! रोहिताश्व ! कहि रोवन लागे,
विविध गुणवान महामर्म वेधी जिय जागे।
हाय ! भयो हो कहा हमें यह जात न जान्यो,
जो पत्नी और पुत्रादिक लौं नाहिं पिछान्यौ॥

रस की दृष्टि से उपर्युक्त पद्य का विश्लेषण आगे दिया गया है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 11

संचारी भाव – हरिश्चंद्र की चिंता, जड़ता तथा शंका व्यक्त करना है।

यहाँ पर करुण रस का आश्रय हरिश्चंद्र है क्योंकि उसके मन का करुण भाव, विभावादि से जागृत होकर अनुभावादि से व्यक्त होता हुआ रस में बदल रहा है। करुण रस किसी प्रिय की मृत्यु पर होता है, विरह या विप्रलंभ श्रृंगार केवल बिछुड़ने पर होता है। करुण में प्रिय से मिलने की आशा शेष नहीं रहती, विप्रलंभ या वियोग श्रृंगार में यह आशा बनी रहती है।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 2.
मेरे हृदय के हर्ष हा ! अभिमन्यु अब तू है कहाँ।
दृग खोलकर बेटा तनिक तो देख हम सबको यहाँ।
माना खड़े हैं पास तेरे, तू यहीं पर है पड़ा।
निज गुरुजनों के मान का तो, ध्यान था तुझको बड़ा॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 12

उदाहरण 3.

फिर पीटकर सिर और छाती अश्रु बरसाती हुई।
कुररी सदृश सकरुण गिरा से दैन्य दरसाती हुई।
बहु विधि विलाप-प्रलाप वह करने लगी उस शोक में।
निजप्रिय वियोग समान दुःख होता न कोई लोक में।
स्थायी भाव – शोक।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 13

4. रौद्र रस

किसी शत्रु, विपक्षी, अहितकारी, बुरा चाहने वाले, अथवा उदंड लोगों की चेष्टाओं और कार्यों को देखकर अपने अपमान, अहित, निंदा, अवहेलना अथवा अपकार का जो भाव मन में जागता है, वही पुष्ट होकर रौद्र रस का रूप धारण कर लेता है। पाठक को रौद्र रस का अनभव किसी अन्यायी, अत्याचारी तथा दष्ट व्यक्ति को कहे जाने वाले वचनों अथवा उसके विरुदध की गई चेष्टाओं से होता है।

रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध है। आश्रय क्रोधी व्यक्ति होता है; आलंबन विभाव के रूप में शत्रु, देशद्रोही, कपटी, दुराचारी व्यक्ति होते हैं; उद्दीपन विभाव के रूप में उनके किए गए अपराध, अपशब्द, कुचेष्टाएँ तथा अपकार लिए जाते हैं। अनुभावों में हथियार दिखाना, आँखों का लाल होना, क्रूरता से देखना, गर्जना, ललकारना आदि क्रियाएँ आती हैं। संचारी भावों में मोह, मद, उग्रता, स्मृति, गर्व आदि आते हैं।

रौद्र रस में आश्रय के शरीर में विकार आते हैं; जैसे-आँखों तथा मुँह का लाल होना, क्रोध से काँपना आदि। वीर रस में आश्रय उत्साह से भरकर कार्य करता है। उसमें किसी प्रकार का विकार नहीं आता। उदाहरण 1. ‘माखे लखन कुटिल भई भौहें, रद पट फरकत नयन रिसौहे।’ (क्रुद्ध लक्ष्मण की भौंहों में बल बढ़ गए हैं। उनके ओंठ फड़क रहे हैं, आँखें लाल हो गई हैं।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 14

उदाहरण 2.

रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न संभार।
धनही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 15

उदाहरण 3.
श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे,
सब शील अपना भूलकर कर तल युगल मलने लगे।
संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े,
करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठकर खड़े।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 16

5. वीर रस

शत्रु के घमंड को तोड़ने, दीनों की बुरी दशा तथा धर्म की दुर्गति को मिटाने अथवा किसी कठिन कार्य को करने का निश्चय करते हुए जो तीव्र भाव हृदय में पैदा होता है, वह उत्साह है। यह उत्साह ही विभावों द्वारा जागृत, अनुभावों द्वारा व्यक्त तथा संचारियों द्वारा पुष्ट होकर रस बनता है। वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है। शत्रु, दीन, याचक अथवा खलनायक आलंबन बनते हैं। सेना, दुश्मन की ललकार, युद्ध के बाजे अथवा वीर गीत उद्दीपन बनते हैं। आँखों में खून उतरना, शस्त्र सँभालना, गर्जन करना, ताल ठोंकना आदि अनुभाव हैं। स्मृति, ईर्ष्या, हर्ष, गर्व तथा रोमांच आदि संचारी भाव हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

वीर रस के भेद –
जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्साह दिखाया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर वीरों की विभिन्न कोटियाँ हैं। वीर रस की भी उनके अनुसार चार कोटियाँ बन गई हैं – (1) युद्धवीर (2) दानवीर (3) धर्मवीर (4) दयावीर। कुछ विद्वानों ने कर्मवीर नामक एक अन्य श्रेणी का भी उल्लेख किया है।

उदाहरण 1.
सौमित्र के घननाद का रव अल्प भी न सहा गया।
निज शत्रु को देखे बिना उनसे तनिक न रहा गया।
रघुवीर का आदेश ले युद्धार्थ वे सजने लगे।
रणवाद्य भी निघोष करके धूम से बजने लगे।
सानंद लड़ने के लिए तैयार जल्दी हो गए।
उठने लगे उन के हृदय में भाव नए-नए॥

रस की दृष्टि से विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से होगा –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 17

उदाहरण 2.
उस काल, जिस ओर वह संग्राम करने को गया।
भागते हुए अरि वृंद से मैदान खाली हो गया।
रथ-पथ कहीं भी रुद्ध उसका दृष्टि में आया नहीं।
सन्मुख हुआ जो वीर वह मारा गया तत्क्षण वहीं॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 18

उदाहरण 3.

मुझ कर्ण का कर्तव्य दृढ़ है माँगने आए जिसे,
निज हाथ से झट काट अपना शीश भी देना उसे।
बस क्या हुआ फिर अधिक, घर पर आ गया अतिथि विसे,
हूँ दे रहा, कुंडल तथा तन-प्राण ही अपने इसे।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 19

6. भयानक रस

किसी डरावनी वस्तु या व्यक्ति को देखने से, किसी अपराध का दंड मिलने के भय से मन में जो व्याकुलता उत्पन्न होती है, वही भय है। भय का भाव जब विभावादि द्वारा जागृत होकर, अनुभावों द्वारा व्यक्त होकर तथा संचारियों द्वारा पुष्ट होकर सामने आता है तो वह भयानक रस में बदल जाता है। भयानक रस का स्थायी भाव भय है। इसका आश्रय भयभीत व्यक्ति है। इस रस के आलंबन भयानक दृश्य, भयानक घटनाएँ भयानक जीव, दुर्घटनाएँ अथवा बलवान शत्रु आदि होते हैं। अनुभावों में कंप, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग एवं मूर्छा आदि को लिया जा सकता है। संचारी भावों में चिंता, स्मृति, ग्लानि, आवेग, त्रास तथा दैन्य आते हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 1.

एक ओर अजगरहि लखि एक ओर मृग राय।
विकल बटोही बीच ही पर्यो मूरछा खाय॥

रस की दृष्टि से उपर्युक्त पंक्तियों का विश्लेषण निम्नलिखित ढंग से किया जा सकता है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 20

उदाहरण 2

कर्तव्य अपना इस समय होता न मुझको ज्ञात है,
कुरुराज, चिंताग्रस्त मेरा जल रहा सब गात है।
अतएव मुझ को अभय देकर आप रक्षित कीजिए।
या पार्थ-प्रण करने विफल अन्यत्र जाने दीजिए।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 2.

सिर पर बैठो काग, आंखि दोऊ खात निकारत।
खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनंद उर धारत॥
गिद्ध जांघ कहँ खोदि खोदि के मांस उचारत।
स्वान आँगुरिन काटि-काटि के खात विदारत॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 21

उदाहरण 3.

कहूँ घूम उठत बरति कतहुं है चिता,
कहूँ होत शोर कहूं अरथी धरी है।
कहूं हाड़ परौ कहूं जरो अध जरो बाँस,
कहूं गीध-भीर मांस नोचत अरी अहै॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 22

8. अद्भुत रस

किसी आश्चर्यजनक, असाधारण अथवा अलौकिक वस्तु को देखकर हृदय में आश्चर्य का भाव घर कर लेता है। ऐसी अवस्था का जब वर्णन किया जाता है तो अद्भुत रस प्रकट होता है। यह रस चमत्कार से पैदा होता है। किसी विलक्षण वस्तु को देखने से जागृत विस्मय का भाव जब अनुभावों से व्यक्त एवं संचारियों से पुष्ट होकर सामने आता है, तो उसे अद्भुत रस कहते हैं।

इस रस का स्थायी भाव विस्मय है, विस्मित व्यक्ति इसका आश्रय है। अद्भुत वस्तु, विचित्र दृश्य, विलक्षण अनुभव अथवा अलौकिक घटना आदि आलंबन बनते हैं। मुँह खुला रह जाना, दाँतों तले अंगुली दबाना, आँखें फाड़कर देखते रह जाना, स्वरभंग, स्वेद एवं स्तंभ आदि अनुभाव होते हैं। वितर्क, हर्ष, आवेग एवं भ्रांति आदि संचारी भाव हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 1.

अखिल भुवन चर-अचर सब, हरिमुख में लखि मातु।
चकित भई गद्-गद् वचन, विकसत दृग, पुलकातु॥

(प्रसंग उस समय का है जबकि माता यशोदा कृष्ण को मुँह खोलने के लिए कहती हैं। उन्हें संदेह है कि कृष्ण के मुँह में मिट्टी है और वह मिट्टी खा रहा था। कृष्ण ने ज्यों ही मुँह खोला तो माता यशोदा को उसमें सारा ब्रह्मांड दिखाई दिया। माता के आश्चर्य का ठिकाना न रहा।) रस की दृष्टि से उपर्युक्त पद का विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 23

इस पद्य में आश्चर्य का भाव पुष्ट होकर अद्भुत रस में बदल गया है।

उदाहरण 2.

लीन्हों उखारि पहार विसाल
चल्यो तेहि काल विलंब न लायौ।
मारुत नंदन मारुत को मन को
खगराज को वेग लजायो॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 24

उदाहरण 3.

गोपों से अपमान जान अपना क्रोधांध होके तभी,
की वर्षा व्रज इंद्र ने सलिल से चाहा, डुबाना सभी।
यों ऐसा गिरिराज आज कर से ऊँचा उठा के अहो।
जाना था किसने कि गोपाशिशु ये रक्षा करेगा कहो।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 25

9. शांत रस

सांसारिक वस्तुओं से विरक्ति, हृदय में तत्व ज्ञान आदि से जो वैराग्य भाव उत्पन्न होता है, उससे चित्त को शांति मिलती है। उस शांति का वर्णन पढ़-सुनकर पाठक के हृदय में ‘शांत रस’ की उद्भावना होती है। शांत रस का स्थायी भाव ‘निर्वेद’ या ‘शम’ है। निर्वेद का अर्थ है-वेदना रहित होना। शम का अर्थ शांत हो जाना है। इस रस का आलंबन प्रिय वस्तु का विनाश, आशा के विरुद्ध वस्तु की प्राप्ति, संसार की नश्वरता, प्रभु चिंतन आदि हैं। यहाँ सत्संग, कथा-श्रवण, तीर्थ-स्नान आदि उद्दीपन होते हैं। अश्रु, रोमांच एवं पुलक आदि अनुभाव बनते हैं तथा धृति, हर्ष, स्मरण और निर्वेद आदि संचारी भाव बनते हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 1.

तुम तजि और कौन पै जाऊँ
काके द्वार जाय सिर नाऊँ, पर हाथ कहाँ बिकाऊँ॥
ऐसो को दाता है समरथ, जाके दिये अघाऊँ।
अंतकाल तुमरो सुमिरन गति अनत कहूँ नहिं जाऊँ॥

रस की दृष्टि से विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 26

उदाहरण 2.
गुरु गोविंद तो एक है, दूजा यह आकार।
आपा मेटि जीवित मरै, तो पावै करतार॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 27

उदाहरण 3.
भारतमाता का मंदिर यह, समता का संवाद यहाँ।
सबका शिव कल्याण यहाँ, पावे सभी प्रसाद यहाँ॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 28

दो नये रस

प्राचीन ग्रंथों में नौ रसों को ही मान्यता दी जाती थी पर हिंदी-साहित्य के भक्तिकाल में भक्ति रस और वात्सल्य रस को इनमें सम्मिलित कर रसों की संख्या ग्यारह तक बढ़ा दी गई थी।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

10. भक्ति रस

ईश्वर के गुणों के प्रति श्रद्धाभाव से भरकर जब कोई भक्त प्रेम में लीन हो जाता है, तो उसे आनंद देने वाले भक्ति रस का अनुभव होता है। भक्ति राग प्रधान है जबकि ज्ञान विराग प्रधान है। शांत रस में वैराग्य भाव रहता है, भक्ति रस में रागात्मक प्रेम, पूर्ण संबंध रहता है। इसलिए – विद्वानों ने शांत रस से पृथक भक्ति रस को माना। भक्ति का स्थायी भाव देवताओं आदि के प्रति रति है। भक्त के हृदय में रस की उत्पत्ति होने योग्य कोमल तन्मयता का भाव रहता है। भक्ति रस में आश्रय भक्त हृदय होता है। आलंबन प्रभु होता है, उद्दीपन प्रभु का गुण, रूप एवं कार्य होते हैं, भक्त की विह्वलता, आसक्ति आदि से उत्पन्न आँसू अनुभाव होते हैं। हर्ष, औत्सुक्य, चपलता, दैन्य तथा स्मरण आदि संचारी भाव होते हैं। तुलसी, सूर, मीरा आदि की रचनाओं में भक्ति रस को देखा जा सकता है।

उदाहरण 1.
माधव अब न द्रवहु केहि लेखे।
प्रनतपाल पन तोर मोर पन, जिअहुँ कमलपद देखे॥
जब लगि मैं न दीन, दयालु तैं, मैं न दास, तें स्वामी।
तब लगि जो दुख सहेउँ कहेउँ नहिं, जद्यपि अंतरजामी।
तू उदार, मैं कृपन, पतित मैं, तैं पुनीत श्रुति गावै।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 29

उदाहरण 2.
अँखड़ियाँ, झाई पड़ी, पंथ निहारि-निहारि।
जीभड़िया छाला पड़ा, राम पुकारि-पुकारि॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 30

उदाहरण 3.
म्हारो परनाम बाँके बिहारी जी।
मोर मुकुट माथाँ तिलक बिराज्याँ, कुँडल, अलकाँ कारी जी,
अधर मधुर घर वंशी बजावाँ, रीझ रिझावाँ ब्रजनारी जी।
या छब देख्याँ मोहयाँ मीराँ मोहण गिरधारी जी॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 31

11. वात्सल्य रस

जब बड़ों के हृदय में बच्चों के प्रति स्नेह भाव, विभावादि से पुष्ट होकर अभिव्यक्त होता है तब वहाँ पर वात्सल्य रस होता है। वात्सल्य रस का स्थायी भाव अपत्य स्नेह अथवा संतान स्नेह है, आलंबन बच्चा होता है। उद्दीपन बच्चों की चेष्टाएँ होती हैं। अनुभाव हँसना, पुलकित होना, चूमना आदि आश्रय की चेष्टाएँ होती हैं। हर्ष, आवेग, मोह, चिंता, विषाद, गर्व, उन्माद आदि संचारी भाव हैं।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

उदाहरण 1.

किलक अरे, मैं नेक निहारूँ,
इन दाँतों पर मोती वारूँ।
पानी भर आया फूलों के मुँह में आज सवेरे,
हाँ गोपा का दूध जमा है, राहुल! मुख में तेरे।
लटपट चरण, चाल अटपट सी मन भाई है मेरे,
तू मेरी अंगुली धर अथवा मैं तेरा कर धारूँ
इन दाँतों पर मोती वारूँ।

(माता यशोधरा अपने नन्हे राहुल के नए निकले दाँतों की शोभा को देखकर आनंदित होकर कहती है, अरे राहुल! एक बार फिर से तू किलकारी मार, मैं तुम्हारे दूधिया दाँत देखना चाहती हूँ। वह कल्पना करती है कि राहुल के दाँत फूलों पर अटकी चमकीली ओस की बूंदें हैं अथवा माँ का दूध ही जमकर राहुल के श्वेत दाँतों में बदल गया है। बालक राहुल ने अभी-अभी डगमगाते कदमों से चलना सीखा है। इसलिए माँ उसकी बाँह पकड़कर उसे चलाना चाहती है।)

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

रस की दृष्टि से व्याख्या –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 32

उदाहरण 2.

मैया मैं नहिं माखन खायो।
भोर भये गैयन के पाछे मधुबन मोहि पठायो।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 33

उदाहरण 3.
सुभग सेज सोभित कौसिल्या रुचिर राम-सिसु गोद लियो।
बार-बार विधु-वदन विलोकति लोचन चारु चकोर किये।
कबहुँ पौढ़ि पय-पान करावति, कबहुंक राखाति लाइ हिये।
बाल केलि गावति हलरावति, फुलकति प्रेम-पियूष जिये।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 34

रस : एक दृष्टि में

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 35

पाठ्यपुस्तक पर अधारित कबिताओं में वर्णित रसों का विश्लेषण –

शांत रस –

रस की दृष्टि से पद्य की पंक्तियों का विश्लेषण निम्न प्रकार से किया जा सकता है –

1. कितना प्रामाणिक था उसका दुख
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो
लड़की अभी सयानी नहीं थी
अभी इतनी भोली सरल थी
कि उसे सुख का आभास तो होता था
लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की
कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 36

2. माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 37

3. तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 38

4. एक के नहीं,
दो के नहीं,
ढेर सारी नदियों के पानी का जादू :
एक के नहीं,
दो के नहीं,
लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा :
एक की नहीं,
दो की नहीं,
हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म :
फ़सल क्या है ?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण-धर्म है
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा का थिरकन का!

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 39

वीर रस

रस की दृष्टि से विश्लेषण –

1. लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना॥
का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें।
छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू॥
बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा॥
बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥
सहसबाहु भुज छे दनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा॥
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 40

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

2. बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहौं रिस रोकी॥
सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।
बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहू पा परिअ तुम्हारें॥
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा॥
जो बिलोकि अनुचित कहेडँ छमहु महामुनि धीर।
सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गंभीर॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 41

3. कौसिक सुनहु मंद येहु बालकु। कुटिलु कालबस निज कुल घालकु॥
भानुबंस राके स कलंकू। निपट निरंकु सु अबुधु असंकू ॥
कालकवलु होइहि छन माहीं। कहौं पुकारि खोरि मोहि नाहीं॥
तुम्ह हटकहु जौ चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा॥
लखन कहेउ मुनि सुजसु तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा॥
अपने मुह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी॥
नहि संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू॥
बीरबती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
विद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 42

4. कहेउ लखन मुनि सील तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा॥
माता पितहि उरिन भये नीकें। गुररिनु रहा सोचु बड़ जी कें॥
सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गये ब्याज बड़ बाढ़ा॥
अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली॥
सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय-हाय सब सभा पुकारा॥
भृगुबर परसु देखाबहु मोही। बिप्र बिचारि बचौं नृपद्रोही॥
मिले न कबहूँ सुभट रन गाढ़े। द्विजदेवता घरहि के बाढ़े॥
अनुचित कहि सबु लोगु पुकारे। रघुपति सयनहि लखनु नेवारे॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 43

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

वात्सल्य रस

रस की दृष्टि से व्याख्या –

1. डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झूलावै, केकी-कीर बरतावै, ‘देव’,
कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै॥
पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,
कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।
मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 44

2. तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात….
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण
छू गया तुमसे कि झरने लगे पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल ?
तुम मुझे पाए नहीं पहचान ?
देखते ही रहोगे अनिमेष!
थक गए हो ?
आँख लूँ मैं फेर ?
क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार?

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 45

3. यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!
चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य!
इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क
उँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर कनखी मार
और होतीं जबकि आँखें चार
तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान!

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 46

शंगार टस 

मन की मन ही माँझ रही।
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाहीं परत कही।
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही।
अब इन जोरा सँदेसनि सुनि-सुनि, बिरहिनि बिरह दही।
चाहति हुती गुहारि जितहिं, उत तैं धार बही।
‘सूरदास’ अब धीर धरहिं क्यौं, मरजादा न लही॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 47

2. हमारै हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी।
सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी॥

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 47

3. फटिक सिलानि सौं सुधार्यो सुधा मंदिर,
उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।
बाहर ते भीतर लौं भीति न दिखैए ‘देव’
दूध को सो फेन फैल्यो आँगन फरसबंद।
तारा सी तरुनि तामें ठाढ़ी झिलमिली होति,
मोतिन की जोति मिल्यो मल्लिका को मकरंद।
आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,
प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद॥

रस की दृष्टि से उपर्युक्त पद्य का विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 49

करुण रस 

मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास,
तब भी कहते हो-कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती।
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

रस की दृष्टि से उपर्युक्त पद्य का विश्लेषण निम्न प्रकार से है –

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस 50

अभ्यास के लिए प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में प्रयुक्त रसों के नाम बताइए –
(i) ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।
(ii) सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी॥
(iii) हमारै हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
(iv) मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर ।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ॥
(v) जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।
सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गंभीर ॥
(vi) आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,
प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद।
(vii) फटिक सिलानि सौं सुधार्यो सुधा मंदिर,
उदधि दधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद।
(viii) जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।
सुनत जोग लागत हे ऐसौ, ज्यौं करुई ककरी॥
(ix) तब भी कहते हो-कह डालूँ दुर्बलता अपनी बीती।
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।
(x) धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात ……….
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात ॥
(xi) भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण-धर्म है
रूपांतर है सूरज की किरणों का।
(xii) यश है न वैभव, मान है न सरमाया;
जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।
(xiii) इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास
(xiv) तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान
(xv) कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी
भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण
(xvi) वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
(xvii) सुर महिसुर हरिजन अरूरू गाई।
हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।
(xviii) हमारे हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम वचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
(xix) सुनि कटु बचन कुठार सुधारा,
हाय-हाय सब सभा पुकारा।
(xx) तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
उत्तर :
(i) वियोग शृंगार रस
(ii) वियोग शृंगार रस
(iii) वियोग शृंगार रस
(iv) भयानक रस
(v) वीर रस
(vi) शृंगार रस
(vii) श्रृंगार रस
(viii) वियोग श्रृंगार रस
(ix) करुण रस
(x) वात्सल्य रस
(xi) शांत रस
(xii) करुण रस
(xiii) करुण रस
(xiv) वात्सल्य रस
(xv) वियोग श्रृंगार रस
(xvi) शांत रस
(xvii) वीर रस
(xviii) भक्ति रस
(xix) भयानक रस
(xx) शांत रस

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

प्रश्न 2.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में प्रयुक्त रसों के नाम बताइए –
(i) “डोलि-डोलि कुंडल उठत देई बार-बार,
एरी! वह मुकुट हिये मैं हालि-हालि उठै॥”
(ii) “बारी टारि डारौ कुम्भकर्णहिं बिदारि डारौं,
मारि मेघनादै आजु यौं बल अनन्त हौं।”
(iii) “केशव, कहि न जाइ का कहिये।
देखत तब रचना विचित्र अति समुझि मनहिं मन रहिये॥”
(iv) “हँसि-हँसि भाजे देखि दूलह दिगम्बर को,
पाहुनी जै आवै हिमाचल कै, उछाह में।” “दीठ पर्यो जोतें तोते, नाहिंन टरति छवि,
आँखिन छयो री, छिन-छिन छालि-छालि उठे।”
(vi) सून्य भीति पर चित्र, रंग नहि, तनु बिन लिखा चितेरे।
धोये मिटै न मरै भीति, द:ख : पाइय इहि तन हेरे।।
(vii) मगन भयेई हँसे मगन महेस ठाढ़े,
और हँसे एक हँसि हँसी के उमाह में।
(viii) यज्ञ समाप्त हो चुका, तो भी धधक रही थी ज्वाला
दारुण-दृश्य! रुधिर के छोटे-अस्थि खंड की माला।
(ix) बाजि-बाजि उठत मिठौंहैं सुर बसी भोर,
ठौर-ठौर ढीली गरबीली चालि-चालि उठे।
(x) कहै ‘पद्माकर’ त्रिकूट ही को ढाय डारौं,
डरत करेई जातुधानन को अंत हौं॥
(xi) रविकर नीर बसै अति दारुन मकर रूप तेहि माहीं।
बदन हीन सो ग्रसै चराचर पान करन जे जाहीं॥
(xii) कहै ‘पद्माकर’ सु काहू सौं कहै को कहा,
जोई जहाँ देखै सो हँसेई तहाँ राह में॥
(xiii) वेदों की निर्मम प्रसन्नता पशु की कातर वाणी;
मिलकर वातावरण बना था कोई कुत्सित प्राणी।
(xiv) सीस पर गंगा हँसे भुजनि भुजंग हँसै,
हास ही को दंगा भयौ नंगा के विवाह में।
(xv) कोउ कह सत्य, झूठ कह कोऊ, जुगल प्रबल कोउ माने।
‘तुलसीदास’ परिहरै तीन भ्रम सो आतम पहचान।
(xvi) अच्छहिं निरच्छ कपि ऋच्छहिं उचारौ इनि,
तोत्र तुच्छ तुच्छन को कछुवै न गंत हौं।
(xvii) कहरि-कहरि उठै पीरै पटुका को छोर,
साँवरे की तिरछी चितौनि सालि-सालि उठे।
(xviii) जा दिन मन-पंछी उड़ि-जैहै।
ता दिन तेरे तन तरुवर के सबै पात झरि जैहैं।
(xix) सेवक सेव्य भाव बिनु भव न तरिय उरगारि।
(xx) अनुचर अनाथ से रोते थे। जो थे अधीर सब होते थे।
(xxi) जसोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै दुलराइ, मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥
(xxii) अति भीषण हाहाकार हुआ, सूना सब संसार हुआ।
(xxiii) ज्यों-त्यों ‘तुलसी’ कृपालु चरण शरण पावै।
(xxiv) कबहुँ पलक हरि नूदि लेत हैं, कबहुँ उधर फरकावै
(xxv) तू दयालु दीन हौँ तू दानि हौं भिखारी।
उत्तर :
(i) वियोग श्रृंगार रस
(ii) रौद्र रस
(iii) अद्भुत रस
(iv) हास्य रस
(v) वियोग श्रृंगार रस
(vi) अद्भुत रस
(vii) हास्य रस
(viii) वीभत्स रस
(ix) वियोग श्रृंगार रस
(x) रौद्र रस
(xi) अद्भुत रस
(xii) हास्य रस
(xiii) वीभत्स रस
(xiv) हास्य रस
(xv) अद्भुत रस
(xvi) रौद्र रस
(xvii) वियोग श्रृंगार रस
(xviii) शांत रस
(xix) भक्ति रस
(xx) करुण रस
(xxi) वात्सल्य रस
(xxii) करुण रस
(xxiii) भक्ति रस
(xxiv) वात्सल्य रस
(xxv) भक्ति रस

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

पाठ पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर – 

1. निर्देशानुसार उचित विकल्प चुनकर लिखिए –
(क) पंक्ति में प्रयुक्त रस है –
कहत, नटत, रीझत, खिझत,
मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौंन में करत हैं,
नैननु ही सौं बात।
(i) वीर रस
(ii) श्रृंगार रस
(iii) शांत रस
(iv) करुण रस
उत्तर :
(ii) श्रृंगार रस

(ख) पंक्ति में प्रयुक्त रस है –
एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय। विकल बटोही बीच ही, पर्यो मूरछा खाय।।
(i) भयानक रस
(ii) करुण रस
(iii) हास्य रस
(iv) वात्सल्य रस
उत्तर :
(i) भयानक रस

(ग) पंक्ति में प्रयुक्त रस है –
एक मित्र बोले, “लाला तुम किस चक्की का खाते हो? इतने महँगे राशन में भी, तुम तोंद बढ़ाए जाते हो।”
(i) शृंगार रस
(ii) हास्य रस
(iii) करुण रस
(iv) रौद्र रस
उत्तर :
(ii) हास्य रस

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

(घ) करुण रस का स्थायी भाव क्या है?
(i) भय
(ii) शोक
(iii) क्रोध
(iv) उत्साह
उत्तर :
(ii) शोक

(ङ) पंक्तियों में कौन-सा स्थायी भाव है?
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में, पूरा किया
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं।
(i) रति
(ii) भय
(iii) क्रोध
(iv) उत्साह
उत्तर :
(iv) उत्साह

(च) पंक्तियों में प्रयुक्त रस है –
एक पल, मेरी प्रिया के दृग-पलक,
थे उठे-ऊपर, सहज नीचे गिरे।
चपलता ने इस विकंपित पुलक से,
दृढ़ किया मानो प्रणय-संबंध था।
(i) हास्य रस
(ii) वीर रस
(iii) शांत रस
(iv) शृंगार रस
उत्तर :
(iv) शृंगार रस

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

(छ) काव्यांश में कौन-सा स्थायी भाव है?
जसोदा हरि पालने झुलावै। हलरावै, दुलरावै, मल्हावै, जोई-सोई कछु गावै।
(i) उत्साह
(ii) क्रोध
(iii) हास
(iv) वात्सल्य
उत्तर :
(iv) वात्सल्य

(ज) काव्यांश में प्रयुक्त रस है –
साक्षी रहे संसार करता हूँ प्रतिज्ञा पार्थ मैं, पूरा करूँगा कार्य सब कथनानुसार यथार्थ मैं। जो एक बालक को कपट से मार हँसते हैं अभी, वे शत्रु सत्वर शोक-सागर-मग्न दीखेंगे सभी।
(i) रौद्र रस
(ii) करुण रस
(iii) शृंगार रस
(iv) वात्सल्य रस
उत्तर :
(i) रौद्र रस

(झ) काव्यांश में प्रयुक्त रस है –
साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए,
बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते,
और दाहिना दया दृष्टि पाने की ओर बढ़ाए।
(i) हास्य रस
(ii) करुण रस
(iii) वीभत्स रस
(iv) रौद्र रस
उत्तर :
(ii) करुण रस

(ञ) काव्यांश में स्थायी भाव है –
मेरे लाल को आउ निंदरिया, काहै न आनि सुवावै।
तू काहै नहिं बेगहिं आवै, तोको कान्ह बुलावै।
(i) विस्मय
(ii) शोक
(iii) रति
(iv) वत्सल
उत्तर :
(iv) वत्सल

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(i) रति’ किस रस का स्थायी भाव है?
(ii) ‘करुण’ रस का स्थायी भाव क्या है?
(iii) ‘हास्य’ रस का एक उदाहरण लिखिए।
(iv) निम्नलिखित पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिए:
मैं सत्य कहता हूँ सखे! सुकुमार मत जानो मुझे,
यमराज से भी युद्ध को प्रस्तुत सदा मानो मुझे।
उत्तर :
(i) शृंगार
(ii) शोक
(iii) चना बनावे घासी राम। जिनकी झोली में दुकान।
(iv) वीर रस चना चुरमुर-चुरमुर बोलै। बाबू खाने को मुँह खोले।

2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) ‘हास्य रस’ का एक उदाहरण लिखिए।
(ख) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में रस पहचानकर लिखिए
रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँभार।
धनुही सम त्रिपुरारिधनु बिदित सकल संसार।।
(ग) ‘वीर’ रस का स्थायी भाव क्या है?
(घ) ‘रति’ किस रस का स्थायी भाव है?
उत्तर :
(क) चना बनावे घासी राम। जिनकी झोली में दुकान।
चना चुरमुर चुरमुर बोलै। बाबू खाने को मुख खोले।
(ख) रौद्र रस।
(ग) उत्साह।
(घ) श्रृंगार रस।

3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) ‘करुण रस’ का एक उदाहरण लिखिए।
(ख) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में निहित रस पहचान कर लिखिए –
तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,
साज मिले पंद्रह मिनट, घंटा भर आलाप।
घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता,
धीर-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता।
(ग) “उत्साह’ किस रस का स्थायी भाव है?
(घ) ‘वात्सल्य’ रस का स्थायी भाव क्या है?
(ङ) ‘शृंगार’ रस के कौन-से दो भेद हैं?
उत्तर :
(क) चना बनावे घासी राम। जिनकी झोली में दुकान।
चना चुरमुर चुरमुर बोलै। बाबू खाने को मुख खोले।
(ख) हास्य रस।
(ग) वीर रस।
(घ) वात्सल्य / वत्सल रस
(ङ) संयोग शृंगार, वियोग शृंगार।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

4. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) स्थायी भाव से आप क्या समझते हैं?
(ख) हास्य रस का एक उदाहरण लिखिए।
(ग) वत्सल रस का स्थायी भाव क्या है?
(घ) निम्नलिखित पंक्तियों में से रस पहचानकर लिखिए –
जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।
(ङ) क्रोध किस रस का स्थायी भाव है?
उत्तर :
(क) मन में स्थायी रूप से विद्यमान भावों को स्थायी भाव कहते हैं।
(ख) एक कबूतर देख हाथ में पूछा कहाँ अपर है?
उसने कहा अपर कैसा? वह उड़ गया सपर है।
उत्तेजित हो पूछा उसने, उड़ा? अरे वह कैसे?
‘फड’ से उडा दसरा बोली, उडा देखिए ऐसे।
(ग) वात्सल्य
(घ) श्रृंगार रस
(ङ) रौद्र रस

5. निम्नलिखित पाँच में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
1. भय की अधिकता में किस रस की निष्पत्ति होती है?
(क) वीर रस
(ख) करुण रस
(ग) भयानक रस
(घ) रौद्र रस
उत्तर :
(घ) रौद्र रस

2. ‘निर्वेद’ किस रस का स्थायी भाव है?
(क) शांत रस
(ख) करुण रस
(ग) हास्य रस
(घ) शृंगार रस
उत्तर :
(क) शांत रस

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

3. “तनकर भाला यूँ बोल उठा
राणा मुझको विश्राम न दें।
मुझको वैरी से हृदय-क्षोभ
तू तनिक मुझे आराम न दे’।
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में निहित रस है?
(क) वीर रस
(ख) शांत रस
(ग) करुण रस
(घ) रौद्र रस
उत्तर :
(क) वीर रस

4. किस रस को ‘रसराज’ भी कहा जाता है?
(क) शांत रस
(ख) करुण रस
(ग) हास्य रस
(घ) शृंगार रस
उत्तर :
(घ) शृंगार रस

5. ‘वीभत्स रस’ का स्थायी भाव है?
(क) उत्साह
(ख) शोक
(ग) जुगुप्सा
(घ) हास
उत्तर :
(ग) जुगुप्सा

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

6. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर लिखिए –

(क) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिए –
उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उनका लगा।
मानो हवा के ज़ोर-से, सोता हुआ सागर जगा।
(ख) ‘वीर रस’ का एक उदाहरण लिखिए।
(ग) ‘शांत रस’ का स्थायी भाव क्या है?
(घ) उद्दीपन से आप क्या समझते हैं?
(ङ) स्थायी भाव से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
(क) वीर रस।
(ख) धरती की लाज रखने को धरती के वीर,
समर विजय हेतु कसर उठाएँ क्यों?
हमें ललकार, दुत्कार, फुफकार कर,
जीवित यहाँ से ये अरि दल जाएँ, जाएँ क्यों?
(ग) निर्वेद/उदासीनता।
(घ) स्थायी भावों को उद्दीप्त कर रस की अवस्था तक ले जाने वाले भाव उद्दीपन कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-एक पात्रों की चेष्टाओं के रूप में, दूसरे बाह्य वातावरण या प्रकृति रूप में।
(ङ) सहृदय मनुष्य के हृदय में जो भाव स्थायी (स्थिर) रूप से विद्यमान रहते हैं, उन्हें स्थायी भाव कहते हैं। प्रत्येक रस का एक स्थायी भाव होता है।
(ग) निर्वेद/उदासीनता

7. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर लिखिए –
(क) निम्नलिखित काव्य पक्तियों में रस पहचान कर लिखिए –
एक ओर अजगरसिंह लखि, एक ओर मश्गराय।
विकल बटोही बीच ही, पर्यो मूर्छा खाय।।
(ख) रौद्र रस का एक उदाहारण लिखिए।
(ग) करुण रस का स्थायी भाव क्या है?
उत्तर :
(क) भयानक रस
(ख) श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर करतल-युगल मलने लगे।
(ग) शोक।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

8. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर लिखिए –
(क) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों से रस पहचानकर लिखिए –
विरह का जलजात जीवन, वरिह का जलजात
वेदना जन्म वरुणा में मिला आवास
अश्रु चुनता दिवस इसका, अश्रु गिनती रात
(ख) वीभत्स रस का एक उदाहरण लिखिए।
(ग) हास्य रस का स्थायी भाव लिखिए।
उत्तर :
(क) श्रृंगार रस (वियोग)
(ख) सिर पै बैठ्यो काग, आँख दोऊ खात निकारत।
खींचत जीभहिं स्यार, अतिहि आनंद उर धारत।
(ग) हास स्थायी भाव

9. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(क) ‘वीर रस’ का एक उदाहरण लिखिए।
(ख) घृणा के भाव उत्पन्न करने वाले काव्य में कौन-सा रस होगा?
(ग) ‘शृंगार रस’ के दो भेद कौन-से हैं?
(घ) निम्नलिखित काव्य-पक्तियों में रस पहचानकर रस का नाम लिखिए –
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से लिी, पली
अंत भी उसी गोद में ष्टारण
ली, मूंदै दृग वर महामरण!
(ङ) उद्दीपन किसे कहते हैं?
उत्तर :
(क) वीर रस का उदाहरण –
वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
हाथ में ध्वज रहे बाल दल सजा रहे,
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो धीर तुम बढ़े चलो।
(ख) वीभत्स रस।
(ग) 1. संयोग शृंगार रस,
2. वियोग शृंगार रस
(घ) करुण रस।
(ङ) उद्दीपन – आश्रय के मन में उत्पन्न हुए स्थायी भाव को और तीव्र करने वाले विषय की बाहरी चेष्टाओं और बाहरी वातावरण को उद्दीपन कहते हैं।

10. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(ख) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में रस पहचानकर रस का नाम लिखिए –
“यह मुरझाया हुआ फूल है, इसका हृदय दुखाना मत।
स्वयं बिखरने वाली इसकी, पंखुड़ियाँ बिखराना मत।।”
(घ) भयानक रस का स्थायी भाव क्या है?
उत्तर :
(ख) करुण रस।
(घ) स्थायी भाव-भय।

JAC Class 10 Hindi व्याकरण रस

11. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(ख) यशोदा हरि पालने झुलावै
हलरावै, दुलरावै, जेहि सेहि कछु गावै।
उपर्युक्त पंक्तियों में किस रस की निज़्पत्ति होती है? रस का नाम लिखिए।
(घ) आलंबन विभाव किसे कहते हैं?
उत्तर :
(ख) वात्सल्य रस।
(घ) आलंबन विभाव – जिन पात्रों या व्यक्तियों के आलंबन अर्थात सहारे से स्थायी भाव उत्पन्न होते हैं, वे आलंबन विभाव कहलाते हैं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

JAC Class 9 Hindi रहीम के दोहे Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता ?
(ख) हमें अपना दुख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपनी मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है ?
(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
(घ) एक को साधने से सब कैसे सध जाता है?
(ङ) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता ?
(च) ‘नट’ किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है ?
(छ) मोती, मानुष, चून’ के संदर्भ में पानी के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
(क) जिस प्रकार टूटे हुए सामान्य धागे को जोड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है, उसी प्रकार प्रेम के टूटे हुए धागे को जोड़ने पर वह पहले के समान नहीं रह पाता। उसमें अविश्वास की गाँठ पड़ जाती है।
(ख) हमें अपना दुख दूसरों पर इसलिए प्रकट नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे हमारा दुख बाँट नहीं सकते। अपनी व्यथा कहने से वे हमारा मजाक उड़ाने लगते हैं।
(ग) सागर का जल खारा होता है, जिससे किसी की प्यास नहीं बुझती; जबकि पंक जल मीठा होने के कारण लघु जीवों की प्यास बुझाकर उन्हें तृप्त करता है। उसकी इसी उपयोगिता के कारण कवि ने पंक जल को धन्य कहा है।
(घ) एक पर अटूट विश्वास करके उसकी सेवा करने से सब कार्य सफल हो जाते हैं तथा मनुष्य को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता।
(ङ) कमल जल में ही खिलता है; उसके अभाव में कमल का कोई अस्तित्व नहीं होता। इसलिए जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर सकता।
(च) नट कुंडली विद्या में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है।
(छ) जिस मोती का पानी अर्थात उसकी चमक समाप्त हो जाती है, उसका कोई मूल्य नहीं रह जाता। मनुष्य का पानी उतरने से आशय मनुष्य के मान-सम्मान के समाप्त होने से है। जाता है। चूना पानी के अभाव में घुलता नहीं है और सूखा आटा पानी के बिना पेट भरने के काम नहीं आता।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

प्रश्न 2.
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –
(क) टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।
(ख) सुनि अठि हैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।
(ग) रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।
(घ) दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
(ङ) नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
(च) जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।
(छ) पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष चून।
उत्तर :
(क) यदि प्रेम संबंधों में एक बार भी टूटन या दरार आ जाती है, तो वे संबंध पुनः पहले की तरह सहज नहीं हो पाते। उनमें कहीं-न-कहीं अविश्वास – रूपी गाँठ पड़ जाती है।
(ख) मानव को अपने जीवन के दुख सबके सामने प्रकट नहीं करने चाहिए, बल्कि उन्हें अपने हृदय में छिपाकर रखने चाहिए। लोग उन्हें जान कर केवल मज़ाक उड़ाते हैं; कोई भी उन दुखों को बाँटता नहीं है।
(ग) अनेक देवी-देवताओं की भक्ति करने के स्थान पर एक ही इष्टदेव के प्रति आस्था रखना अधिक अच्छा होता है। जिस प्रकार जड़ के सींचने से पेड़ से फल की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार अपने एक इष्ट के प्रति ध्यान केंद्रित करने से ही फल की प्राप्ति होती है।
(घ) दोहा – छंद आकार में छोटा और स्वरूप में सरल होता है, पर थोड़े से अक्षरों से ही दीर्घ भावों को प्रकट करने की क्षमता रखता है।
(ङ) हिरण संगीत पर मुग्ध होकर अपना जीवन तक त्याग देते हैं। वे भागने की क्षमता रखते हुए भी भागते नहीं और संगीत के पुरस्कार स्वरूप शिकार बन जाते हैं। इसी प्रकार मनुष्य किसी के गुणों पर रीझकर पुरस्कारस्वरूप धन देते हैं।
(च) जहाँ छोटी चीज़ का उपयोग होता है। वहाँ बड़ी वस्तु किसी काम की नहीं होती और जहाँ बड़ी चीज़ प्रयुक्त होती है, वहाँ छोटी वस्तु बेकार है। सुई जो काम करती है, वह काम तलवार नहीं कर सकती और जिस काम के लिए तलवार है, वह काम सूई नहीं कर सकती। हर चीज़ की अपनी ही उपयोगिता है।
(छ) मोती में यदि चमक न रहे तो वह व्यर्थ है; मनुष्य यदि आत्म-सम्मान के भावों से रहित हो जाए तो बेकार है। सूखा आटा जल के बिना किसी का पेट भरने में सहायक नहीं। मोती, मनुष्य और चून के लिए पानी का अपना विशेष महत्त्व है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है –
(क) जिस पर विपदा पड़ती है वही इस देश में आता है।
(ख) कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती।
(ग) पानी के बिना सब सूना है अतः पानी अवश्य रखना चाहिए।
उत्तर :
(क) चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध- नरेस।
जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस ॥
(ख) बिगरी बात बन नहीं, लाख करौ किन कोय।
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय ॥
(ग) रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ॥

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

प्रश्न 4.
उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए –
उदाहरण: कोय – कोई, जे जो
उत्तर :

  • ज्यों – जैसे
  • नहिं – नहीं
  • धनि – धन्य
  • जिय – जीव
  • होय – होना
  • तरवारि – तलवार
  • मूलहिं – मूल को
  • पिआसो – प्यासा
  • आवे – आना
  • ऊबरै – उबरना
  • बिथा – व्यथा
  • परिजाय – पड़ जाती है
  • कछु – कुछ
  • कोय – कोई
  • आखर – अक्षर
  • थोरे – थोड़े
  • माखन – मक्खन
  • सींचिबो – सींचना
  • पिअत – पीना
  • बिगरी – बिगड़ी
  • सहाय – सहायक
  • बिनु – बिना
  • अठिलैहैं – इठलाना

योग्यता विस्तार –

प्रश्न 1.
‘सुई की जगह तलवार काम नहीं आती’ तथा ‘बिन पानी सब सून’ इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
‘चित्रकूट’ किस राज्य में स्थित है ? जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
‘चित्रकूट’ उत्तर प्रदेश में स्थित है।

परियोजना कार्य –

प्रश्न 1.
नीति संबंधी अन्य कवियों के दोहे / कविता एकत्र कीजिए और उन दोहों / कविताओं को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

JAC Class 9 Hindi रहीम के दोहे Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
रहीम की भाषा पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
रहीम ने अपने काव्य में प्रचलित ब्रज और अवधी भाषा का अधिक प्रयोग किया था। वे तुर्की, अरबी और फ़ारसी के परम विद्वान थे। इसलिए उनकी भाषा पर इन भाषाओं का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था। इन्होंने दोहे, सवैये, कवित्त और छप्पयों की रचना ब्रजभाषा में की थी। इनके सभी बरवै अवधी भाषा में हैं। इन्होंने खड़ी बोली की कविता भी इन्होंने की थी। ‘मद नाष्टक’ खड़ी बोली में है। कहीं- कहीं इन्होंने एक ही रचना में आठ-आठ भाषाओं का प्रयोग भी किया है। इनकी कविता में माधुर्य और प्रसाद गुण की अधिकता है। इनकी भाषा भावों का अनुसरण करने वाली है, जिसमें सभी गुणों का वहन करने की क्षमता है।

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प्रश्न 2.
‘गाँठ पड़ना’ से तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
रहीम के दोहे में ‘ गाँठ पड़ना’ लाक्षणिक प्रयोग है। इसका तात्पर्य है कि जिस प्रकार प्रयत्न करके जोड़ने के बाद भी धागा पहले जैसा एक सार नहीं होता, उसी प्रकार एक बार झगड़ा हो जाने के बाद मन में झगड़े की खटास कभी नहीं मिट पाती; फिर चाहे विवाद को मिटाने का लाख प्रयत्न भी कर लिया जाए। दोनों पक्षों के हृदय में अविश्वास रूपी गाँठ का भाव अवश्य विद्यमान रहता है।

प्रश्न 3.
‘चटकाय’ में निहित प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘चटकाय’ शब्द प्रयोजनमूलक शब्द है, जो किसी विशेष प्रयोजन को प्रकट करता है। यह ‘झटके से तोड़ना और बिना अधिक सोच-समझ कर तोड़ना’ के भाव को प्रकट करता है। जब कोई व्यक्ति बिना किसी कारण के दूसरे व्यक्ति के साथ लड़ता – झगड़ता है और आपसी संबंधों को एकदम से समाप्त कर देता है, तब वह अधिक सोचता – विचारता नहीं है।

प्रश्न 4.
लोग दूसरों के दुखों को क्यों नहीं बाँटना चाहते ?
उत्तर :
इस संसार में सभी व्यक्ति दुखी हैं। सबके पास अपने-अपने दुख हैं। उन्हें अपने दुख ही बहुत बड़े लगते हैं। कोई भी व्यक्ति किसी दुख का मूल कारण नहीं समझना चाहता और न ही उसके दुख को दूर करने की सोचता है। जब तक किसी भी व्यक्ति को दूसरे का सुख-दुख अपना नहीं लगता, तब तक कोई उन्हें बाँटने को तैयार नहीं होता।

प्रश्न 5.
रहीम ने पेड़ के दृष्टांत से क्या स्पष्ट किया है ?
उत्तर :
रहीम ने पेड़ के दृष्टांत से यह स्पष्ट किया है कि जैसे पेड़ की जड़ में पानी डालने से फल-फूल प्राप्त होते हैं; उसी प्रकार किसी एक इष्टदेव के प्रति भक्ति भाव से सेवा करने से भक्त को सब प्रकार के फलों की प्राप्ति हो जाती है।

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प्रश्न 6.
कवि ने ‘नाद रीझि तन देत मृग’ के माध्यम से किस काव्य इस रूढ़ि के बारे में बताया है ?
उत्तर :
कवि ने ‘नाद रीझि तन देत मृग’ के माध्यम से साहित्य में प्रचलित काव्य रूढ़ि को प्रकट किया है कि हिरण संगीत की मधुर ध्वनि पर मुग्ध हो जाते हैं और उस समय इतने तल्लीन हो जाते हैं कि शिकारी के सामने होने पर भी भागते नहीं हैं। शिकारी उनकी इस कमज़ोरी को जानते हैं और शिकार करते समय इस विधि को अपनाते हैं। हिरण अपनी इस कमज़ोरी के कारण अपने प्राण खो देते हैं

प्रश्न 7.
कवि दोहे में प्रयुक्त ‘लघु’ शब्द से क्या भाव प्रकट करना चाहता है ?
उत्तर :
‘लघु’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘छोटा’। कोई भी व्यक्ति आयु, जाति, पद, शक्ति, साहस, धन, बुद्धि आदि किसी भी प्रकार से दूसरों की तुलना में छोटा हो सकता है। इसके माध्यम से कवि यह प्रकट करना चाहता है कि कभी भी किसी को छोटा मानकर उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इस संसार में सभी अपना-अपना महत्व रखते हैं और सभी की अपनी-अपनी उपयोगिता है। कई बार ऐसा होता है कि जो काम बड़े-बड़े लोग नहीं कर पाते, उस काम को छोटे समझे जाने वाले लोग सरलता से कर देते हैं।

प्रश्न 8.
‘जलज’ शब्द के माध्यम से कवि मनुष्य को क्या समझाना चाहता है ?
उत्तर :
‘जलज’ शब्द से अभिप्राय है- ‘जल से उत्पन्न होने वाला अर्थात कमल’। कमल का फूल सूर्य की उपस्थिति में जल में उगता है; लेकिन जब तालाब का जल सूख जाता है, उस समय सूर्य की किरणों से कमल को सूखने से कोई नहीं बचा सकता। कवि मनुष्य से कहना चाहता है कि मुसीबत के समय अपनी संपत्ति ही काम आती है, कोई किसी का सहायक नहीं बनता। कवि के अनुसार परिस्थितियों के अनुकूल होने या न होने से अधिक साधन के न होने का अधिक प्रभाव पड़ता है। संचित धन की कमी अनुकूल परिस्थितियों को भी प्रतिकूल बना देती है।

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प्रश्न 9.
मोती का मूल्य कब तक होता है और कवि इसके माध्यम से क्या समझाना चाहता है ?
उत्तर :
मोती का मूल्य तब तक होता है, जब तक उस पर चमक होती है। वास्तव में मोती की गुणवत्ता उसके बाहरी भाग पर विद्यमान चमक है। जब चमक समाप्त हो जाती है, तो वह मूल्यहीन हो जाता है। कवि मोती के माध्यम से मनुष्य को यह शिक्षा देना चाहता है कि उसे सदा अपने सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। सम्मान के बिना मनुष्य का जीवन महत्वहीन हो जाता है।

प्रश्न 10.
रहीम के दोहों की प्रसिद्धि का क्या कारण है ?
उत्तर :
रहीम के दोहे नीतिगत ज्ञान तथा मानव कल्याण की भावना से ओत-प्रोत होने के कारण अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। रहीम ने अपने दोहों के माध्यम से लोगों की सुप्त चेतना को जगाना चाहा है। उन्होंने लोगों में नई चेतना तथा जागृति लाने का भरसक प्रयास किया है। रहीम के दोहों में निहित संदेश लोगों के मन को झकझोर कर रख देता है।

प्रश्न 11.
रहीम ने मानव को अपना दुख मन में ही छिपाकर रखने के लिए क्यों कहा है ?
उत्तर :
रहीम ने मानव को समझाते हुए कहा है कि मनुष्य को अपने मन की पीड़ा तथा दर्द को सदैव अपने मन में ही छिपाकर रखना चाहिए। उसे यह पीड़ा जग-जाहिर नहीं करनी चाहिए। संसार में लोग एक-दूसरे की पीड़ा देखकर उसकी सहायता करने के स्थान पर उसका मज़ाक ही उड़ाते हैं।

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प्रश्न 12.
कवि ने किसी एक देव को इष्टदेव मानने के लिए क्यों कहा है ?
उत्तर :
कवि ने मानव को अनेक देवी-देवताओं की पूजा-आराधना करने की बजाय एक देव की पूजा करने तथा उसे इष्टदेव मानकर सेवा करने की सलाह दी है। ऐसा करने से मानव मन अलग-अलग दिशाओं की ओर नहीं दौड़ता। वह शांत मन होकर एक ईश्वर की पूजा करता है, तो उसके सभी कार्य सफल होते हैं।

प्रश्न 13.
कवि रहीम ने अपने दोहों में सुख-दुख के विषय में क्या कहा है ?
उत्तर :
कवि रहीम ने अपने दोहों में सुख-दुख के विषय में कहा है कि सुख-दुख सभी के जीवन के अंग हैं। ये सभी के जीवन में आते-जाते हैं। समय परिवर्तनशील है। जीवन में अनेक बार ऐसा समय आता है, जब मानव को ऐसे स्थानों पर आना-जाना पड़ता है जो उसके लिए अनुकूल नहीं होते। सुख-दुख समयानुसार व्यक्ति की परिस्थितियों को बदल देते हैं।

प्रश्न 14.
रहीम के अनुसार एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की शरण में कब जाता है ?
उत्तर :
रहीम के अनुसार एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की शरण में अपने कष्टों को दूर करने के लिए जाता है। विपरीत परिस्थितियों में उसे ऐसी वस्तुओं एवं स्थानों को भी अपनाना पड़ता है, जिसके लिए वह स्वयं को अनुकूल नहीं मानता। अतीत में भगवान राम को भी अयोध्या छोड़कर जंगलों के कष्टों एवं दुखों को भोगना पड़ा था।

प्रश्न 15.
रहीम के दोहे गागर में सागर भरने का साहस रखते हैं, कैसे ?
उत्तर :
रहीम एक नीति परख कवि हैं। इनके दोहे सीधे दिल और दिमाग पर प्रहार करते हैं। इनके दोहों में शब्द तो कम होते हैं, किंतु उन शब्दों की चोट और घाव अत्यंत गहरे होते हैं। इनके दोहों में निहित संदेश अत्यंत गंभीर और मानव कल्याण से ओत-प्रोत होते हैं। कवि ने छोटे-छोटे छंदों के माध्यम से मानव-जीवन की गंभीर समस्याओं को उठाने तथा उनके निवारण का तरीका बताया है। उनके दोहे कम शब्दों में भी मनुष्य को ज्ञान का अथाह सागर प्रदान करते हैं। इसलिए रहीम के दोहों को गागर में सागर की उपमा दी गई है।

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प्रश्न 16.
कवि ने अपने दोहों के माध्यम से लोगों को सोच-समझकर बोलने के लिए क्यों कहा है?
उत्तर :
कवि ने अपने दोहों में लोगों को सोच-समझकर बोलने की शिक्षा देते हुए कहा है कि हमें बहुत विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई बात मुँह से बाहर निकालनी चाहिए। यदि एक बार मुख से निकली हुई बात से कोई हानि हो जाती है, तो अथाह प्रयास करने पर भी वह बात ठीक नहीं हो पाती। बिना सोचे-समझे कहे गए शब्द ऐसे तीर की भाँति होते हैं, जिन्हें लौटाया नहीं जा सकता। इसलिए हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए।

रहीम के दोहे Summary in Hindi

कवि-परिचय :

जीवन-परिचय – अब्दुर्रहीम खानखाना अर्थात रहीम का जन्म सन् 1556 ई० में लाहौर में हुआ था। बचपन से ही इनका मुगल दरबार से संबंध रहा। इसी कारण रहीम विद्या – व्यसनी हो गए। इन्होंने संस्कृत, अरबी, फ़ारसी आदि भाषाओं में अच्छी योग्यता प्राप्त की थी। युवावस्था में अकबर के दरबार में सेनापति के पद को सुशोभित करते हुए भी रहीम कविता करते थे। रहीम दानी स्वभाव के व्यक्ति थे, अतः याचक को यथेच्छ दान देकर संतुष्ट करना अपना कर्तव्य समझते थे। ये तुलसीदास के परम मित्र थे। जहाँगीर के समय में इनकी दशा बिगड़ गई थी। इनकी संपत्ति को राज्याधिकार में लेकर इन्हें पदच्युत कर दिया गया था। सन् 1626 ई० में इनकी मृत्यु हुई थी।

रचनाएँ – रहीम दोहावली, बरवै, नायिका भेद, श्रृंगार सोरठा, रहीम सतसई, श्रृंगार सतसई, रहीम रत्नावली, भाषिक वर्ण भेद, सदनाष्टक तथा रास पंचाध्यायी इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। इन्हें रहीम ग्रंथावली में संकलित किया गया है।

काव्य की विशेषताएँ – रहीम की कविता का विषय श्रृंगार, नीति और प्रेम है। इनका जीवन – अनुभव बहुत अधिक था। इस कारण इन्होंने जो कुछ लिखा, वह निजी अनुभव के आधार पर लिखा। इसलिए उसमें पाठक को प्रभावित करने की अपूर्व शक्ति है। इन्होंने केवल कल्पना पर उड़ने का प्रयत्न कहीं नहीं किया। जहाँ कहीं कल्पना को स्वीकार किया, वहाँ यथार्थ को भी साथ रखा गया है। इनकी अनेक सूक्तियाँ और नीति-संबंधी दोहे आज भी मानव का पथ-प्रदर्शन करते हैं। आपके कृष्ण-संबंधी दोहे भी सुंदर हैं और रहीम के हृदय की विशालता के परिचायक हैं।

रहीम का अवधी और ब्रजभाषा दोनों पर ही समान अधिकार था। कविता के लिए इन्होंने सामान्य ब्रजभाषा का ही प्रयोग किया। दोहों के अतिरिक्त इन्होंने कवित्त, सवैये और सोरठे भी लिखे हैं। इनकी प्रसिद्धि अपनी दोहावली के आधार पर ही है। इन्होंने अपनी कविता में लोकोक्तियों और लोक – प्रचलित उदाहरणों के आधार पर विषय को सरल तथा सुगम बनाने का यत्न किया है। अपनी भावुकतापूर्ण और अनुभव पर आधारित उक्तियों के कारण हिंदी – साहित्य दोहे में रहीम का विशेष स्थान है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

दोहों का सार :

रहीम के नीति के दोहे अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अनुभव के आधार पर जिन तथ्यों का संग्रह किया है, वे इन दोहों में प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने मानव जीवन के लिए उपयोगी सभी बातों का बड़ा मार्मिक वर्णन किया है। वे नीति-सिद्ध कवि थे। उनके काव्य में भक्ति, नीति तथा वैराग्य की त्रिवेणी बह रही है। उनके सूक्तिपरक दोहे भी अत्यधिक प्रभावशाली बन गए हैं। रहीम ने अपने दोहों के माध्यम से उन सब बातों की निंदा की है, जो मानव की प्रतिष्ठा में बाधक होती हैं। उनके दोहे अपनी सरलता, मधुरता, उपदेशात्मकता, सहजता एवं कलात्मकता के कारण हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि बन गए हैं।

व्याख्या –

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ॥

शब्दार्थ : चटकाय – झटके से। परि – पड़ना।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने प्रेम-संबंधों को सदा बनाकर रखने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या : कवि रहीम कहते हैं कि हमें प्रेम-रूपी धागे को चटकाकर नहीं तोड़ना चाहिए, क्योंकि टूटे हुए धागे को फिर से जोड़ा नहीं जा सकता। यदि जोड़ते भी हैं, तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। इसी प्रकार आपसी प्रेम-संबंध भी यदि टूट जाएँ, तो वे फिर जुड़ नहीं पाते। यदि जुड़ भी जाएँ, तो उनमें पहले जैसी मधुरता नहीं रहती।

2. रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।
सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥

शब्दार्थ : बिथा – व्यथा, दुख। गोय – छिपाकर। अठि हैं – मज़ाक उड़ाना।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने यह समझाया है कि कभी भी किसी को अपने मन का दुख नहीं बताना चाहिए।

व्याख्या : रहीम कहते हैं कि अपने मन का दुख-दर्द मन में ही छिपाकर रखना चाहिए, क्योंकि सब तुम्हारी बातें सुनकर तुम्हारा मज़ाक ही उड़ाएँगे; कोई तुम्हारा दुख नहीं बाँटेगा। भाव है कि अपने हृदय के भावों को जगजाहिर मत करो। कोई किसी के दुखों को बाँटता नहीं है।

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3. एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय ॥

शब्दार्थ : मूलहिं – जड़ को। अघाय – संतुष्ट होना, तृप्त होना।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि किसी एक को अपना इष्टदेव मानने की प्रेरणा देता है।

व्याख्या : कवि कहता है कि किसी एक इष्टदेव की सेवा करने से सभी कार्य सफल हो जाते हैं परंतु कई लोगों की सेवा करने से सबकुछ नष्ट हो जाता है। रहीम कहते हैं कि वृक्ष की जड़ को सींचने से वृक्ष पर खूब फल उगते हैं, जिन्हें खाकर मनुष्य तृप्त हो जाता है। इसी प्रकार से एक इष्ट को साधने से सब कार्य सफल होते हैं।

4. चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध- नरेस।
जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस ॥

शब्दार्थ : अवध – अयोध्या। रमि – रहना, बसना। नरसे – राजा। बिपदा – मुसीबत।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन किया है।

व्याख्या : रहीम कहते हैं कि अयोध्या नरेश श्री रामचंद्र जी चित्रकूट में निवास कर रहे हैं। चित्रकूट ऐसा पवित्र स्थान है कि कष्ट आने पर सभी यहाँ चले आते हैं। जिस पर मुसीबत पड़ती है, वह अपने कष्टों को दूर करने के लिए इस क्षेत्र में चला आता है।

5. दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
ज्यों रहीम नट कुंडली, सिमिटि कूदि चढ़ि जाहिं ॥

शब्दार्थ : दीरघ – दीर्घ, विशाल, गहरे। अरथ – अर्थ, भाव। आखर अक्षर। थोरे थोड़े, कम। नट – अभिनेता, बाजीगर। कुंडली – साँप के बैठने की गोलाकार मुद्रा।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। कवि ने इस छोटे-से छंद में छिपे अर्थ- गांभीर्य की ओर संकेत किया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि दोहे जैसे छोटे-से छंद में अक्षर तो बहुत कम होते हैं, परंतु उसमें अर्थ बहुत अधिक होता है। जैसे बाजीगर कुंडली मारकर और अपने को समेटकर ऊँचे-से-ऊँचे स्थान पर कूदकर चढ़ जाता है।

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6. धनि रहीम जल पंक को लघु जिय पिअत अघाय।
उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसो जाय ॥

शब्दार्थ : पंक – कीचड़। लघु – छोटे। जिय – जीत। अघाय – तृप्त हो जाना। उदधि – सागर। पिआसो – प्यासा।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे के माध्यम से कवि ने संदेश दिया है कि कई बार छोटे-से भी बड़े-बड़े काम बन जाते हैं, जबकि बड़ों से छोटा काम भी नहीं बनता।

व्याख्या : कवि कहता है कि कीचड़ से भरा वह जल भी प्रशंसा करने योग्य है, जिसे पीकर छोटे-छोटे जीव अपनी प्यास बुझाकर तृप्त हो जाते हैं। इसके विपरीत उस सागर की प्रशंसा कौन करेगा, जिसके पास जाकर भी लोग प्यासे रह जाते हैं; क्योंकि सागर का जल खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।

7. नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछू न देत ॥

शब्दार्थ : नाद – ध्वनि, संगीत। रीझि – प्रसन्न होकर, मोहित होकर। मृग – हिरन। नर – मनुष्य। हेत – उद्देश्य, कारण।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने किसी के कार्य से प्रसन्न होने पर उसे समुचित पुरस्कार देने का संदेश दिया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि कर्णप्रिय ध्वनि अथवा संगीत सुनकर मृग अपने प्राण तक न्योछावर कर देता है, लोग भी किसी के कार्य से प्रसन्न होकर उसे कुछ न कुछ देते हैं। रहीम उस व्यक्ति को पशु से भी अधिक निम्न श्रेणी का मानते हैं, जो प्रसन्न होने पर भी किसी को कुछ नहीं देता।

8. बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।।

शब्दार्थ : बिगरी – बिगड़ी हुई। मथे – मथने से।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने सदा सोच-समझकर बोलने पर बल दिया है।

व्याख्या : कवि कहता है कि मनुष्य को सोच-विचार कर ही कोई बात मुँह से निकालनी चाहिए। जैसे फटे हुए दूध को मथने से उसमें से मक्खन नहीं निकाला जा सकता, उसी तरह यदि एक बार कही हुई किसी बात से बिगाड़ हो जाता है, तो फिर चाहे कोई लाख प्रयत्न भी करे बिगड़ी हुई बात बन नहीं सकती।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

9. रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि ॥

शब्दार्थ : बड़ेन – बड़े, धनवान तथा प्रतिष्ठित। लघु – छोटे, निर्धन। तरवारि – तलवार।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में रहीम ने यह स्पष्ट किया है कि बड़ी वस्तुओं और बड़े प्राणियों के साथ-साथ छोटी वस्तुओं और छोटे प्राणियों का भी महत्व होता है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि बड़े लोगों का संपर्क पाकर छोटों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए; क्योंकि जहाँ छोटी-सी सुई काम करती है, वहाँ तलवार काम नहीं आ सकती। भाव है कि छोटे-बड़े सभी महत्वपूर्ण हैं और सभी की अपनी-अपनी उपयोगिता है, इसलिए किसी की भी अवहेलना नहीं करनी चाहिए।

10. रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय।
बिनु पानी ज्यों जलज को, नहिं रवि सके बचाय ॥

शब्दार्थ : बिपति – मुसीबत। जलज – कमल। रवि – सूर्य।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीम द्वारा रचित है। इस दोहे में कवि ने यह संदेश दिया है कि कठिनाई में सदा अपनी संपत्ति ही काम आती है।

व्याख्या : कवि रहीम कहते हैं कि जैसे पानी के बिना कमल को सूर्य भी नहीं बचा सकता, उसी तरह अपनी संपत्ति के बिना मुसीबत में कोई भी सहायता नहीं करता, विपत्ति के समय व्यक्ति को अपने पास संचित धन ही सहायता देता है। कष्ट के समय कोई किसी की सहायता नहीं करता।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 10 रहीम के दोहे

11. रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून ॥

शब्दार्थ : पानी – (i) स्वाभिमान, इज्ज़त (ii) चमक (iii) जल। ऊबरे – महत्व पाना। मानुष – मनुष्य।

प्रसंग : प्रस्तुत दोहे के रचयिता रहीम हैं। इसमें उन्होंने पानी के विभिन्न अर्थों के माध्यम से अपने काव्य में चमत्कार उत्पन्न किया है।

व्याख्या : रहीम का कथन है कि मनुष्य को अपने मान-सम्मान का सदैव ध्यान रखना चाहिए। मान-सम्मान के अभाव में मनुष्य उसी प्रकार महत्वहीन हो जाता है, जिस प्रकार चमक रहित मोती तथा बिना जल के आटे का महत्व नहीं होता।

JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

Jharkhand Board JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

बहु-विकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न – दिए गए प्रश्नों के चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनकर लिखो-
1. संसार के किस प्रदेश में पाताल तोड़ कुएं सबसे अधिक पाए जाते हैं?
(A) गुजरात ( भारत )
(B) क्वींसलैंड (आस्ट्रेलिया)
(C) यूक्रेन (रूस)
(D) ह्वांग – हो मैदान (चीन)।
उत्तर:
(B) क्वीसलैंड (आस्ट्रेलिया)।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भौम जल स्तर को प्रभावित नहीं करता?
(A) वाष्पीकरण
(B) वर्षा
(C) चट्टानों की कठोरता
(D) चट्टानों की पारगम्यता।
उत्तर:
(D) चट्टानों की पारगम्यता।

3. कार्स्ट प्रदेशों में भूमिगत जल का कार्य अधिकतर किस क्रिया द्वारा होता है?
(A) अपरदन
(B) अपवाहन
(C) अपघर्षण
(D) घुलन।
उत्तर:
(D) घुलन।

JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

4. ओल्ड फेथफुल गाईज़र किस देश में स्थित है?
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका
(B) आइसलैंड
(C) न्यूज़ीलैंड
(D) ऑस्ट्रेलिया।
उत्तर:
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका।

5. विलयन रंध्र किस प्रकार के धरातल पर बनते हैं ?
(A) कार्स्ट प्रदेश में
(B) नदी घाटी में
(C) महासागरों में
उत्तर:
(A) कार्स्ट प्रदेश में।

6. ‘ग्रेट आर्टेजियन बेसिन’ स्थित है-
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका के येलोस्टोम पार्क में
(B) न्यूज़ीलैंड के उत्तरी द्वीप में
(C) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के मध्य पूर्व भाग में
(D) आइसलैंड में।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के मध्य पूर्व भाग में।

7. ओल्ड फेथफुल गीज़र पाया जाता है-
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका के येलोस्टोन पार्क में
(B) न्यूज़ीलैंड के उत्तरी द्वीप में
(C) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के मध्य पूर्व भाग में
(D) आइसलैंड में।
उत्तर:
(C) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के मध्य पूर्व भाग में।

8. हिमानी प्रदेशों में शृंग की रचना का मुख्य कारण क्या है?
(A) उत्थान क्रिया
(B) चारों ओर हिमसागर का बनना
(C) अपरदन
(D) अपक्षरण।
उत्तर:
(C) अपरदन।

9. गुम्बद आकार भाग से बहने वाली नदियों द्वारा किस प्रवाह की रचना होती है?
(A) युग्म आकृतिक प्रवाह
(B) समान्तर प्रवाह
(C) जलायित प्रवाह
(D) आरीय प्रवाह
उत्तर:
(D) आरीय प्रवाह।

10. नदी के मुहाने पर बनने वाली संकीर्ण तथा गहरी घाटी को क्या कहते हैं?
(A) डेल्टा
(B) ज्वार नदमुख
(C) मुहाना
(D) घाटी।
उत्तर:
(B) ज्वार नदमुख।

JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास

11. गुफ़ाओं की रचना किस क्रिया द्वारा होती है?
(A) ऑक्सीकरण
(B) कार्बोनेटीकरण
(C) जल योजना
(D) घोलीकरण।
उत्तर:
(B) कार्बोनेटीकरण।

12. नदी के किस भाग में जल प्रपात की रचना होती है?
(A) ऊपरी भाग
(B) मध्य भाग
(C) निचला भाग
(D) मुहाना।
उत्तर:
(A) ऊपरी भाग।

13. स्थैतिक साधनों द्वारा चट्टानों का विघटन तथा अपघटन
(A) अपक्षय
(B) अपरदन
(C) निक्षेपण
(D) परिवहन।
उत्तर:
(A) अपक्षय।

14. कौन-सी अपवाह प्रणाली में महाखड्ड का निर्माण होता है?
(A) द्रुमाकृतिक
(B) पूर्ववर्ती
(C) अरीय
(D) जालीनुमा।
उत्तर:
(C) पूर्ववर्ती।

15. नदी के मध्य मार्ग में इसकी कौन-सी मुख्य विशेषता होती है?
(A) घाटी को गहरा करना
(B) डेल्टा का निर्माण
(C) घाटी को चौड़ा करना
(D) वितरकाओं का निर्माण।
उत्तर:
(C) घाटी को चौड़ा करना

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मुख्य भू-आकृतिक कारक कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. नदी
  2. हिमनदी
  3. वायु
  4. सागरीय तरंगें।

प्रश्न 2.
अपक्षय के दो मुख्य प्रकार बताओ।
उत्तर:
भौतिक तथा रासायनिक।

प्रश्न 3.
रासायनिक अपक्षय की मुख्य क्रियाएं बताओ
उत्तर:

  1. ऑक्सीकरण
  2. जल योजन
  3. विलयन
  4. कार्बोनेटीकरण।

प्रश्न 4.
अपरदन चक्र में मुख्य अवस्थाएं कौन-सी हैं?
उत्तर:
युवा, प्रौढ़, वृद्धावस्था।

प्रश्न 5.
भू-आकृतिक कारकों के कार्य के प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. अपरदन
  2. परिवहन
  3. निक्षेपण।

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प्रश्न 6.
मुख अपवाह ढांचों के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. आरीय
  2. द्रुमाकृतिक
  3. समान्तर
  4. जलायित।

प्रश्न 7.
नदी की युवा अवस्था में बनने वाले भू-आकार बताओ।
उत्तर:
गार्ज, केनियन, झरने।

प्रश्न 8.
नदी निक्षेप से बनने वाले भू-आकार बताओ।
उत्तर:
विसर्प, तटबन्ध, बाढ़ का मैदान।

प्रश्न 9.
वायु अपरदन से बनने वाले चार भू-आकार बताओ।
उत्तर:

  1. छत्रक,
  2. यारडांग
  3. ज्यूज़न,
  4. इन्सेलबर्ग।

प्रश्न 10.
हिम नदी अपरदन से बनने वाले भू-आकार बताओ।
उत्तर:
सर्क, श्रृंग, लटकती घाटी, ‘U’ आकार घाटी।

प्रश्न 11.
निम्नीकरण (Degradation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
बाह्य कारकों द्वारा धरातल के अपरदन को निम्नीकरण कहते हैं।

प्रश्न 12.
निम्नीकरण में कौन-सी क्रियाएं शामिल हैं?
उत्तर:

  1. अपक्षय
  2. अपरदन
  3. परिवहन।

प्रश्न 13.
अपरदन चक्र की धारणा का सबसे पहले प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
विलियम मारिस डेविस ने।

प्रश्न 14.
यदि नदी का वेग दुगुना हो जाए तो उसकी भार वाहन शक्ति कितने गुना बढ़ जाएगी?
उत्तर:
64 गुना।

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प्रश्न 15.
ग्रैंड केनियन कहाँ स्थित हैं?
उत्तर:
संयुक्त राज्य में, कोलोरेडो नदी पर।

प्रश्न 16.
जल प्रपात किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब नदी चट्टानी कगार पर ऊपर से सीधे नीचे गिरती है तो उसे जल प्रपात कहते हैं।

प्रश्न 17.
उत्तरी अमेरिका के एक प्रसिद्ध जल प्रपात का नाम लिखो।
उत्तर:
नियाग्रा जल प्रपात 120 मीटर ऊंचा।

प्रश्न 18.
भारत में दो प्रसिद्ध जल प्रपातों के उदाहरण दो।
उत्तर:

  1. जोग जल प्रपात 260 मीटर ऊंचा।
  2. हुण्ड्र जल प्रपात 97 मीटर ऊँचा।

प्रश्न 19.
चीन का शोक किस नदी को कहते हैं?
उत्तर:
ह्वांग-हो नदी।

प्रश्न 20.
कोई तीन प्रसिद्ध डैल्टाओं के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. नील डैल्टा
  2. गंगा डैल्टा
  3. मिसीसिपी डेल्टा।

प्रश्न 21.
लोएज प्रदेश कहां पाये जाते हैं?
उत्तर:
पश्चिमी चीन में ।

प्रश्न 22.
भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े डेल्टा का नाम बताएं
उत्तर:
सुन्दरवन डेल्टा।

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प्रश्न 23.
स्टैलेक्टाइट का निर्माण किस भू-प्राकृतिक कारक द्वारा होता है?
उत्तर:
चूना युक्त जल की गुफा की छत पर लटकी बूंदों के वाष्पीकृत से स्टैलेक्टाइट का निर्माण होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत के पश्चिमी तट पर नर्मदा व ताप्ती नदियां डैल्टे क्यों नहीं बनातीं?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर नदियों के निचले भाग में तीव्र ढाल है। नदियां तेज़ गति से समुद्र में गिरती हैं तथा मिट्टी का निक्षेप नहीं होता। इसलिए डैल्टा का निर्माण नहीं होता। पश्चिमी तटीय मैदान की चौड़ाई भी कम है। इसलिए डैल्टा निर्माण के लिए समतल भूमि की कमी है।

प्रश्न 2.
गार्ज तथा प्रपात खड्ड में क्या अन्तर होता है?
उत्तर:
पर्वतीय भागों में गहरे और तंग नदी मार्ग को गार्ज कहते हैं। नदी कठोर चट्टानों के बने अपने किनारों को तोड़-फोड़ नहीं सकती। इसलिए जब पर्वत ऊंचे उठते रहते हैं तो नदी घाटी लगातार गहरी होती रहती है। प्रपाती खड्ड (कैनियन) प्रायः शुष्क प्रदेशों में बनती हैं। इस घाटी में ऋतु प्रहार (weathering) के कारण घाटी का ऊपरी भाग कुछ अधिक चौड़ा हो जाता है। गार्ज में नदी मार्ग के किनारे दीवार की भांति खड़े (Vertical) होते हैं, परन्तु कैनियन की दीवारें पूर्ण रूप से लम्बवत् नहीं होतीं।

प्रश्न 3.
किसी जल प्रपात की रचना कैसे होती है?
उत्तर:
जब अधिक ऊंचाई से जल अधिक वेग से खड़े ढाल पर बहता है तो उसे जल-प्रपात कहते हैं। जब नदी के मार्ग में ऊपरी पर्त कठोर चट्टानों की हो और नीचे की पर्त नर्म चट्टानों की हो, तो नीचे की नर्म चट्टान जल्दी कट जाती है। दोनों परतों में एक अन्तर आ जाता है। कठोर चट्टान आगे बढ़ी रहती है। इस प्रकार इस ढाल पर पानी झरने के रूप में बहता है। भारत में जोग जल प्रपात 260 मीटर ऊंचा है।

प्रश्न 4.
छत्रक शैल किसे कहते हैं? इसके विभिन्न कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
मरुस्थलीय भागों में छतरी के आकार की कठोर चट्टानों को छत्रक कहते हैं। कठोर चट्टानों के निचले भागों में चारों तरफ से नीचे का कटाव (under cutting) होता है। एक पतले आधार के ऊपर छतरी के आकार की चट्टानें खड़ी रहती नीचे की चट्टान एक गुफा के समान कट जाती है। जोधपुर के निकट ग्रेनाइट चट्टानें नीचे से कट कर छत्रक बन गई हैं।

प्रश्न 5.
नदी की शक्ति किन कारकों पर निर्भर करती है? उसकी भार वहन की क्षमता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
नदी की अपरदन तथा परिवहन शक्ति दो कारकों पर निर्भर करती है

  1. नदी का वेग
  2. जल की मात्रा।

नदी के वेग तथा अपरदन शक्ति में वर्ग का अनुपात होता है, यदि वेग दुगुना हो जाए तो अपरदन शक्ति चौगुनी होती है तथा परिवहन शक्ति 64 गुना बढ़ जाती है। जल की मात्रा बढ़ जाने से नदी अधिक भार का परिवहन कर सकती है। नदी की परिवहन शक्ति मुख्यतः नदी के ढाल तथा नदी के भार पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 6.
समुद्र द्वारा किए जाने वाले विभेदी अपरदन से आप क्या समझते हैं? इस क्रिया से किन स्थलाकृतियों का निर्माण होता है?
उत्तर:
समुद्र तट पर स्थित नर्म तथा कठोर चट्टानों की क्षैतिज अथवा लम्ब स्थिति के कारण विभेदी अपरदन होता है। नर्म चट्टानें शीघ्र टूट जाती हैं परन्तु कठोर चट्टानें खड़ी रहती हैं। इस प्रकार नर्म चट्टानों के अपरदन से खाड़ियां बनती हैं। कठोर चट्टानें भृगु के रूप में खड़ी रहती हैं। घुलनशील चट्टानों के घुल जाने से गुफाओं का निर्माण होता है। उन क्षेत्रों में मेहराब तथा प्राकृतिक पुल बनते हैं। कठोर चट्टानें स्टैक के रूप में बची-खुची रहती हैं।

प्रश्न 7.
पुनर्योवन के प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
भू-संचरण या जलवायु परिवर्तन के कारण पुरानी नदियां यदि युवा अवस्था में आ जाती हैं तो इसे पुनर्योवन कहते हैं। इस क्रिया के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:

  1. नदी की अपरदन क्षमता बढ़ जाती है।
  2. पुरानी घाटी में एक नई घाटी का निर्माण शुरू हो जाता है।
  3. नदी वेदिकाएं बनती हैं।
  4. गहरे विसर्प बनते हैं ।

प्रश्न 8.
महाद्वीपीय हिमनदी तथा घाटी हिमनदी में अन्तर बताओ।
उत्तर:
महाद्वीपीय हिमनदी या हिम चादरों का विस्तार ध्रुवीय प्रदेशों में अंटार्कटिका तथा ग्रीनलैण्ड में है। ये विशाल क्षेत्रों में फैले हुए हैं। घाटी हिमनदियां हिमालय, आल्पस आदि ऊंचे पर्वतों के हिम क्षेत्रों से जन्म लेती हैं। यह पर्वतीय क्षेत्रों में तथा ढलानों पर अपरदन का कार्य करती हैं। हिम चादरें किसी क्षेत्र को समतल करने का कार्य करती है। परन्तु घाटी हिमनदी कई भू-आकार जैसे यू-घाटी, सर्प आदि की रचना करती है।

प्रश्न 9.
‘V’ आकार घाटी तथा ‘U’ आकार घाटी में अन्तर बताओ।
उत्तर:
नदी के अपरदन से ‘V’ आकार घाटी बनती है, परन्तु हिमनदी के अपरदन से ‘U’ आकार घाटी बनती है। ‘V’ आकार घाटी अधिक गहरी होती है। ‘U’ आकार घाटी की दीवारें लगभग लम्बवत् होती हैं परन्तु ‘V’ आकार घाटी की दीवारें पूर्ण रूप से लम्ब नहीं होतीं । हिमनदी अपनी कोई घाटी नहीं बनाती, अपितु वह नदी घाटी का रूप बदल कर उसे ‘U’ आकार बना देती है।

प्रश्न 10.
हिम तोंदों तथा हिमनदियों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
हिम तोंदे हिम चादरों से जन्म लेते हैं। जैसे ग्रीनलैण्ड तथा अण्टार्कटिका में परन्तु हिमनदियां ऊंचे पर्वतों के हिम क्षेत्रों से निकलती हैं जैसे हिमालय तथा आल्पस पर्वत हिम तोंदे समुद्र में तैरते हुए दिखाई देते हैं तथा गर्म प्रदेशों में आकर पिघल जाते हैं। हिमनदियां पर्वतीय ढलानों पर खिसकती हैं तथा मैदानों में आकर पिघलती हैं। हिम तोंदों का 1/10 भाग जल से बाहर दिखाई देता है, परन्तु हिमनदी का सारा भाग धरातल पर दिखाई देता है।

प्रश्न 11.
लटकती घाटी (Hanging Valley) की रचना कैसे होती है?
उत्तर:
हिमनदी की मुख्य घाटी अधिक हिम के कारण अधिक गहरी होती है। पर्वतों की ढलानों से उतरने वाली सहायक हिमनदी की घाटी कम गहरी होती है। जब हिम पिघलती है तो सहायक हिम नदी की घाटी मुख्य घाटी से ऊंची रह जाती है तथा लटकती हुई प्रतीत होती है। इसे लटकती हुई घाटी कहते हैं।

प्रश्न 12.
वायु तथा नदी के कार्य की तुलना करो।
उत्तर:

वायु के कार्यनदी का कार्य
(1) वायु का कार्य मरूस्थल प्रदेशों में महत्त्वपूर्ण होता है।(1) नदी का कार्य आर्द्र प्रदेशों में महत्त्वपूर्ण होता है।
(2) नदी अपने मलबे को दूर-दूर प्रदेशों तक परिवहन करती है।(2) नदी का कार्य अपनी घाटी तक ही सीमित होता है।
(3) वायु का कार्य वायु की गति पर निर्भर करता है।(3) नदी का कार्य क्षेत्र की ढलान पर निर्भर करता है।
(4) वायु का कार्य धीमी गति से होता है तथा वायु भार कम होता है।(4) नदी का कार्य तीव्र गति से होता है तथा नदी भार बहुत अधिक होता है।

प्रश्न 13.
“वायु द्वारा अपरदन की तुलना रेगमार से की जाती है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वायु रेत के बारीक कणों को उड़ा कर दूर-दूर तक ले जाती है। वायु के धूलि कण इस अपरदन के यन्त्र (Tools) हैं। तीव्र गति से वायु रेत के कणों को चट्टानों से टकराती है। ये कण एक रेगमार (Sand paper) की तरह कटाव करते हैं। ये कण चट्टानों को रगड़ कर इस तरह मुलायम कर देते हैं जैसे पालिश किया हो या रेगमार से घिसा हो।

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प्रश्न 14.
ज्यूजन तथा यारडांग में क्या अन्तर है?
उत्तर:

यारडांगज्यूजन
(1) इसमें कठोर तथा नर्म चट्टानें लम्ब रूप में मिलती हैं।(1) इसमें कठोर तथा नर्म चट्टाने एक-दूसरे के समानान्तर होती हैं।
(2) इसका आकार पसलियों (Ribs) जैसा होता है।(2) इसका आकार एक ढक्कन दवात जैसा होता है।
(3) इसमें लम्बे कटाव मिलते हैं।(3) इसमें गहरे कटाव मिलते हैं।
(4) इसकी ऊंचाई 15 मीटर होती है।(4) इनकी ऊंचाई 10 मीटर होती है।

JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास 1

प्रश्न 15.
लम्बे बालू स्तूप तथा आड़े बालू स्तूप में क्या अन्तर है?
उत्तर:

लम्बे बालू स्तूपआड़े बालू स्तूप
(1) ये रेत की लम्बी दीवारें होती हैं।(1) ये अर्द्ध-चन्द्राकार टीले होते हैं।
(2) ये प्रचलित पवनों की दिशा के समानान्तर बनते हैं।(2) ये प्रचलित पवनों की दिशा के समकोण पर बनते हैं।
(3) ये 100 मीटर तक ऊँचे होते हैं।(3) ये 50 मीटर तक ऊंचे होते हैं।
(4) ये तलवार के आकार जैसे होते हैं तथा इन्हें सीफ़ भी कहा जाता है।(4) ये लहरों के आकार जैसे होते हैं।

प्रश्न 16.
सागरीय लहरों द्वारा अपरदन किन तत्त्वों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
सागरीय लहरों द्वारा अपरदन प्रायः तूफ़ानी लहरों द्वारा 200 मीटर की गहराई तक होता है। यह अपरदन कई तत्त्वों पर निर्भर करता है-

  1. लहरों का अधिक वेग तथा ऊँचाई
  2. चट्टानों की रचना
  3. तट का ढाल
  4. जल की गहराई
  5. छिद्रों तथा दरारों का होना
  6. वायु की गति।

प्रश्न 17.
भृगु (Cliff) की रचना कैसे होती है
उत्तर:
समुद्र तट पर खड़ी ढाल वाली चट्टान को भृगु कहते हैं। लहरों के सीधे अपरदन से चट्टान आधार पर कट जाती है तथा दांत (Notch ) की रचना होती है। यह खोखला स्थान धीरे-धीरे बड़ा हो जाता है। ऊपरी भाग धीरे- धीरे आगे बढ़कर लटकने लगता है। जब ऊपर का भाग टूट कर गिर जाता है, तो नीचे का कठोर भाग एक भृगु का रूप धारण कर लेता है।

प्रश्न 18.
गुम्फित नदी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
गुम्फित नदी ( Braided Channels):
नदी द्वारा प्रवाहित नद्य भार का निक्षेपण अगर नदी के मध्य में लम्बी रोधिका या रोध के रूप में हो जाए तो नदी धारा दो शाखाओं में विभाजित हो जाती हैं और यह प्रवाह किनारों पर क्षैतिज अपरदन करता है। नदी घाटी की चौड़ाई बढ़ने पर और जल आयतन कम होने पर, प्रजाहित जलोढ़ अधिक मात्रा में एक क्षैतिज अवरोध के रूप में द्वीप की भान्ति निक्षेपित हो जाते हैं तथा मुख्य जल धारा कई जल धाराओं में बंट जाती है।

गुम्फित नदी प्रारूप के लिए तटों पर अपरदन व निक्षेप आवश्यक है। या जब नदी में जल की मात्रा कम तथा जलोढ़ अधिक हो जाए, तब नदी प्रवाह में ही रेत, मिट्टी, बजरी आदि की लम्बी अवरोधिकाओं का जमाव हो जाता है और नदी प्रवाह कई जल वितरिकाओं में बंट जाता है। जल प्रवाह की ये विरिक्ताएं मिलती हैं और फिर उपधाराओं में बंट जाती हैं। इस प्रकार एक गुम्फित नदी प्रारूप का विकास होता है।

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प्रश्न 19.
गम्भीरभूत विसर्प तथा नदी वेदिकाएं किस प्रकार बनती हैं?
उत्तर:
अधः कर्तित विसर्प या गम्भीरभूत विसर्प (Incised or Entrenched Meanders ):
तीव्र ढालों में तीव्रता से बहती हुई नदियां सामान्यतः नदी तल पर अपरदन करती हैं। तीव्र नदी ढालों में भी पार्श्व/ क्षैतिज अपरदन अधिक नहीं होता लेकिन मंद ढालों पर बहती हुई नदियां अधिक पार्श्व अपरदन करती हैं। क्षैतिज अपरदन अधिक होने के कारण, मंद ढालों पर बहती हुई नदियां वक्री होकर बहती हैं या नदी विसर्प बनाती हैं।
JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास 2
नदी वेदिकाएं (River Terraces):
नदी वेदिकाएं प्रारम्भिक बाढ़ मैदान या पुरानी नदी घाटियों के चिह्न हैं। ये चट्टानी धरातल या नदियों के तल हैं जो जलोढ़ रहित वा निक्षेपित जलोढ़ वेदिकाओं के रूप में पाए जाते हैं। नदी वेदिकाएं मुख्यतः अपरदित स्थलरूप हैं क्योंकि ये नदी निक्षेपित बाढ़ मैदानों के लम्बवत् अपरदन से निर्मित होते हैं। ये वेदिकाएं संख्या में कई तथा भिन्न ऊंचाई की भी हो सकती हैं जो आरम्भिक नदी जल स्तर को दर्शाते हैं। नदी वेदिकाएं नदी के दोनों तरफ समान ऊंचाई वाली हो सकती हैं और इनके इस स्वरूप को युग्म (Paired ) वेदिकाएं कहते हैं।

प्रश्न 20.
नदी के मार्ग को विभिन्न अवस्थाओं में बांट कर प्रत्येक की विशेषताएं बताओ।
उत्तर:
नदी मार्ग को उद्गम से लेकर सागर में गिरने तक तीन प्रमुख भागों में बांटा जाता है:
1. तरुणावस्था (Youth ):
इस अवस्था में नदियों की संख्या बहुत कम होती है तथा इनका मूल ढाल पर दुर्बल एकीकरण होता है। ये नदियां उथली V-आकार घाटी बनाती हैं और जिनमें बाढ़ के मैदान लगभग अनुपस्थित या संकरे बाढ़ मैदान मुख्य नदी के साथ-साथ पाए जाते हैं। जल विभाजक अत्यधिक विस्तृत (चौड़े) व समतल होते हैं, जिनमें दलदल व झीलें होती हैं। इन ऊंचे समतल धरातल पर नदी विसर्प विकसित हो जाते हैं। ये विसर्प अंततः ऊंचे धरातलों में गम्भीरभूत हो जाते हैं (अर्थात् विसर्प की तली में निम्न कटाव होता है और ये गहराई में बढ़ते हैं ।) जहां कठोर चट्टानों का अनावरण होता है वहां जलप्रपात व क्षिप्रितकाएं पाई जाती हैं।
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2. प्रौढ़ावस्था (Mature ):
इस अवस्था में नदियों में जल की मात्रा अधिक होती है और सहायक नदियां भी इसमें आकर मिलती हैं। नदी घाटियां V-आकार की होती हैं लेकिन गहरी होती हैं। मुख्य नदी व्यापक विस्तृत होने से विस्तृत बाढ़ के मैदान पाए जाते हैं जिसमें घाटी के भीतर ही नदी विसर्प बनाती हुई प्रवाहित होती है। युवावस्था में निर्मित समतल, विस्तृत व दलदली अन्तर नदी क्षेत्र विलीन हो जाते हैं और नदी विभाजक स्पष्ट होते हैं। जलप्रपात व क्षिपिकाएं लुप्त हो जाती हैं।

3. जीर्णावस्था (Old ):
जीर्णावस्था में छोटी सहायक नदियां कम होती हैं और ढाल मंद होता है। नदियां स्वतन्त्र रूप से विस्तृत बाढ़ के मैदानों में बहती हुई नदी विसर्प, प्राकृतिक तटबन्ध, गोखुर झील आदि बनाती है विभाजक विस्तृत तथा समतल होते हैं जिनमें दलदल, कच्छ व अनूप उपस्थित होते हैं। अधिकतर भूदृश्य समुद्रतल के बराबर या थोड़ा ऊंचा होता है।

प्रश्न 21.
पेडीमेंट तथा पदस्थली की रचना बताओ।
उत्तर:
अपरदनात्मक स्थलरूप पेडीमेंट (Pediment ) और पदस्थली (Pediplain): मरुस्थलों में भूदृश्य का विकास मुख्यतः पेडीमेंट का निर्माण व उसका ही विकसित रूप है। पर्वतों के पाद पर मलबे रहित अथवा मलबे सहित मंद ढाल वाले चट्टानी तल पेडीमेंट कहलाते हैं। पेडीमेंट का निर्माण पर्वतीय अग्रभाग के अपरदन मुख्यतः सरिता के क्षैतिज अपरदन व परत बाढ़- दोनों के संयुक्त अपरदन से होता है। पर्वतों के तीव्र अग्रभाग या किनारों का अपरदन होता है और ये अपरदित भाग धरातल पर गिरते हैं। बाढ़ के कारण व तत्पश्चात् क्लिफ निर्माण से जो कटाव होते हैं उससे पेडीमेंट निर्मित होते हैं।

ये बाढ़ कटाव व क्लिफ निवर्तन करते हैं। यह अपरदन क्रिया पृष्ठक्षरण (backwasting) द्वारा की गई समानान्तर ढाल निवर्तन प्रक्रिया (paralled retreat of slope) कहलाती है। अत: समानान्तर ढाल विवर्तन द्वारा पेडीमेंट पर्वतों के अग्रभाग को अपरदित करते हुए पीछे हटते हैं और धीरे-धीरे पर्वतों का अपरदन होता है तथा इन्सेलबर्ग (Inselberg ) निर्मित होते हैं जो कि पर्वतों के अवशिष्ट रूप,हैं। इस प्रकार मरुस्थलीय प्रदेशों में एक उच्च धरातल आकृति विहीन मैदान में परिवर्तित हो जाता जिसे पेड़ीप्लेन या पदस्थली कहते हैं।

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प्रश्न 22.
प्लाया तथा ब्नजादा की रचना बताओ।
उत्तर:
प्लाया और बजादा (Playa and Bajada):
मरुभूमियों में मैदान (Plains) प्रमुख स्थलरूप हैं। पर्वत व पहाड़ियों से घिरे बेसिनों में अपवाह मुख्यतः बेसिन के मध्य में होता है, तथा बेसिन के किनारों से लगातार तलछट जमाव के कारण बेसिन के मध्य में लगभग समतल मैदान की रचना हो जाती है। पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर यह मैदान उथले जल क्षेत्र में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार की उथली जल झीलें ही प्लाया ( Playa) कहलाती हैं। प्लाया में वाष्पीकरण के कारण जल अल्प समय के लिए ही रहता है और अक्सर प्लाया में लवणों के घने निक्षेप पाए जाते हैं।

ऐसे प्लाया मैदान जो लवणों से भरे हों, कल्लर भूमि या क्षारीय क्षेत्र (Alkali flats) कहलाती हैं। अगर प्लाया मरुस्थल बेसिन के समतल मध्य मैदान हैं तो इनके ऊपर के ढाल वाले मैदान (जिनका ढाल 1° से 5° के मध्य है ) और जो गिरिपद पर जमाव से बने हैं, उन्हें बजादा (Bajada) कहते हैं। प्लाया व बजादा मुख्यतः पर्वतों के निवर्तन से बने पेडिमेंट के ही हिस्से हैं, जो बाढ़ अपरदित मलबे से ढके हैं। चूंकि प्लाया व बजादा पर तलछटों के जमाव की मोटी परत नहीं होती और इनके तल अपरदन के फलस्वरूप बनते हैं; इसलिए इन्हें कई बार अपरदनात्मक स्थलरूपों में वर्णित किया जाता है।

प्रश्न 23.
जल चक्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रकृति का जल अपने कई रूपों में बदलते हुए पुन: उसी रूप में लौट आता है। इसे ही जल चक्र की संज्ञा दी जाती है। जैसे पृथ्वी के जलाशयों का जल सूर्य के ताप के कारण जलवाष्प में बदलकर वायुमण्डल में चला जाता है। वायुमण्डल में यह संघनित होकर बर्फ या जल के रूप में पुनः पृथ्वी पर आ जाता है। इस प्रकार जल वायुमण्डल, स्थलमण्डल तथा जलमण्डल पर स्थानान्तरित होता है।

तुलनात्मक प्रश्न (Comparison Type Questions)

प्रश्न 1.
अपरदन तथा अपक्षय में अन्तर स्पष्ट करो
उत्तर:

अपरदन (Erosion)अपक्षय (Weathering)
(1) भू-तल पर खुरचने, काँट-छाँट तथा मलवे को परिवहन करने के कार्य को अपरदन कहते हैं।(1) चट्टानों को अपघटन तथा विघटन के द्वारा अपने मूल स्थान पर तोड़-फोड़ करने की क्रिया को अपक्षय कहते हैं।
(2) अपरदन एक बड़े क्षेत्र में होता है।(2) अपक्षय छोटे क्षेत्रों की क्रिया है।
(3) अपरदन गतिशील कारकों द्वारा जैसे जल, हिमनदी, वायु आदि से होता है।(3) अपक्षय सूर्यतप, पाला तथा रासायनिक क्रियाओं द्वारा होता है।
(4) अपक्षय अपरदन में सहायक होता है।(4) अपक्षय चट्टानों को कमज़ोर करके अपरदन में सहायता करता है ।

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प्रश्न 2.
‘V’ आकार घाटी तथा ‘U’ आकार घाटी में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:

V आकार घाटी‘U’ आकार घाटी
(1) नदी अपरदन से ‘V’ आकार घाटी बनती है।(1) हिमनदी के अपरदन से ‘U’ आकार घाटी बनती है।
(2) यह घाटी अधिक गहरी होती है। जब यह ‘T’ आकार में बन जाती है तो इसे कैनियन कहते हैं।(2) यह घाटी अधिक गहरी नहीं होती है। इससे ऊंचाई पर बनी घाटी को लटकती घाटी कहते हैं।
(3) इसके किनारे पूर्ण रूप से लम्ब नहीं होते।(3) इसकी दीवारें पूर्ण रूप से लम्ब होती हैं।
(4) नदी अपने गहरे कटाव से इस घाटी की रचना करती है।(4) हिमनदी की अपनी कोई घाटी नहीं होरी। यह नदी घाटी का रूप बदल कर उसे ‘U’ आकार की घाटी बना देती है।

प्रश्न 3.
निम्नीकरण तथा अधिवृद्धि में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:

निम्नीकरणअधिवृद्धि
(1) बाह्य कारकों द्वारा स्थानीय धरातल के अपरदन को निम्नीकरण कहते हैं।(1) धरातल के निचले स्थानों को मलवे के निक्षेप से भरने की क्रिया को अधिवृद्धि कहते हैं।
(2) यह अपरदन का ही दूसरा रूप है।(2) यह निक्षेप का ही दूसरा रूप है।
(3) इससे ऊंचे प्रदेश निचले प्रदेश हो जाते हैं।(3) इससे निचले प्रदेश का तल ऊँचा हो जाता है।

निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
तरंगों (लहरों) द्वारा अपरदन, परिवहन तथा निक्षेप के कार्य का वर्णन करो।
उत्तर:
समुद्री लहरों का कार्य (Work of Sea Waves) दूसरे कार्यकर्त्ताओं के समान लहरें भी अपरदन, परिवहन तथा निक्षेप का कार्य करती हैं।
(क) अपरदन (Erosion ): तट पर तोड़-फोड़ का कार्य प्राय: सर्फ ( Surf) लहरें तथा तूफानी लहरों द्वारा ही होता है। समुद्री लहरों द्वारा अपरदन अधिक-से-अधिक 600 फुट की गहराई तक होता है। यह अपरदन चार प्रकार से होता है:

  1. जल दबाव क्रिया (Water Pressure ): छिद्रों में जल के दबाव से चट्टानें टूटने-बिखरने लगती हैं।
  2. अपघर्षण (Abrasion): बड़े – बड़े पत्थर चट्टानों से टकरा कर उन्हें तोड़ते रहते हैं।
  3. संनिघर्षण (Attrition ): पत्थरों के टुकड़े आपस में टकरा कर टूटते रहते हैं।
  4. घुलन क्रिया (Solution ): समुद्री जल चूना युक्त चट्टानों को घुला कर अपरदन कर देता है।

अपरदन द्वारा बने स्थलाकार:
1. खाड़ियां (Bays ): जब किसी तट पर कोमल तथा कठोर चट्टानें लम्ब रूप में स्थित हों तो कोमल चट्टानें (Soft Rocks) भीतर की ओर अधिक कट जाती हैं। इस प्रकार कोमल चट्टानों में खाड़ियां (Bays) बन जाती हैं तथा कठोर चट्टानें आगे निकल जाती हैं तथा अन्तरीप (Cape ) की रचना करती हैं।
JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास 4

2. भृगु (Cliff): समुद्र तट पर खड्ढे ढाल वाले पर्वत को भृगु या क्लिफ (Cliff) कहते हैं। लहरों के लगातार सीधे आक्रमण के कारण चट्टानें अपने आधार पर कट जाती हैं तथा दांत (Notch ) की रचना होती है। ऊपर का भाग धीरे-धीरे आगे बढ़कर लटकने लगता है। कुछ समय के पश्चात् यह भाग टूट कर गिर जाता है। इससे तटों पर खड़े किनारों की रचना होती है जिसे भृगु ( Cliff) कहते हैं। भारत के पश्चिमी तट पर भृगुओं के उदाहरण मिलते हैं।
JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास 5

3. समुद्री गुफाएं (Sea Caves): आधार की कोमल चट्टानों के टूटने या घुल जाने पर तट के समीप खोखले स्थान बन जाते हैं । लहरों द्वारा वायु के बार-बार घुसने व निकलने की क्रिया से ये स्थान चौड़े हो जाते हैं तथा गुफाएं बन जाती हैं। दो पड़ोसी गुफाओं के बीच की दीवार टूट जाने से मेहराब (Arch) बन जाती है जिसे प्राकृतिक पुल भी कहते हैं, जैसे- इंग्लैण्ड में Needle’s Eye।
JAC Class 11 Geography Important Questions Chapter 7 भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास 6

4. वात छिद्र (Blow Holes): वायु के दबाव से कई बार गुफा की छत में छिद्र हो जाते हैं, इनमें से जल फव्वारे के रूप में बाहर निकलता है। इन छिद्रों से पवन सीटी बजाती हुई ऊपर निकलती है और साथ ही पानी फव्वारे के रूप में बाहर निकलता है। इन्हें उगलने वाले छिद्र (Spouting Horns) कहते हैं।

5. सागरीय स्तम्भ (Stack): मेहराब के छत के टूट जाने से कठोर चट्टानों के कुछ अंश स्तम्भ के रूप में खड़े रह जाते हैं जिन्हें स्तम्भ (Stack) कहते हैं। इंग्लैण्ड में St. Kilda के स्तम्भ 627 फुट ऊंचे हैं।

परिवहन का कार्य (Work of Transportation ): समुद्र में खुरचा हुआ पदार्थ लहरों, वायु तथा धाराओं द्वारा परिवहन होता है। लहरों द्वारा सागरीय पदार्थों का परिवहन दो रूपों में होता है:

  1. तट की ओर
  2. सागर की ओर

निक्षेप के कार्य (Work of Deposition): लहरों द्वारा अपरदन से प्राप्त पदार्थ तट के सहारे या तट के दूर जमा होते हैं। लहरों के नीचे के प्रवाह (Undertow) के कारण तट के दूर सागर में निक्षेप होता है। इससे तट का ढाल कम होता है तथा तट का विस्तार आगे बढ़ता रहता है। इस निक्षेप से कई भू-आकार बनते हैं:

1. पुलिन अथवा बीच (Beach ):
सागरीय तट के साथ-साथ मलवा के निक्षेप से बनी तटीय श्रेणियों को पुलिन कहते हैं। तट के निकट ये ऊंचे से प्रदेश क्रीड़ा के उत्तम स्थल बन जाते हैं। समतल तटों पर चौड़े पुलिन मिलते हैं, परन्तु पर्वतीय भागों में पुलिन कम मिलते हैं, जैसे – चिल्ली का तट।

2. रोधिका (Bars):
लहरों द्वारा तट के समानान्तर निक्षेप से ऊंची मुंडेर या श्रेणी बन जाती है। इन्हें तटीय रोध (Offshore Bars) कहते हैं। ये तट से दूर खुले समुद्र में बनती हैं। ये श्रेणियां तट रेखा तथा सागरीय जल के बीच रुकावट का कार्य करती हैं।

3. लैगून झीलें (Lagoons):
यदि रोधिका के दोनों छोर स्थल भाग से जुड़ जाते हैं तो बीच में खारे जल की झील बन जाती है। तट रेखा और मुंडेरों के बीच का जल एक छोटी झील का रूप धारण कर लेता है जिसे लैगून कहते हैं। भारत के पूर्वी तट पर चिल्का (Chilka) तथा पुलीकट (Pulicat) झीलें तथा केरल में वेम्बनाद झील इसी प्रकार बनी हैं।

4. भूजिहवा (Spit ):
भूजिहवा लहरों के निक्षेप से बनी एक रेतीली श्रेणी होती है। यह एक बांध के समान है जिसका एक सिरा तट से जुड़ा होता है तथा दूसरा सिरा खुले सागर में डूबा रहता है।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Jharkhand Board JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

बहु-विकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न- दिए गए चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए
1. भारत में कौन-सी मृदा सबसे विस्तृत उपजाऊ है?
(A) जलोढ़।
(B) काली मृदा
(C) लेटराइट
(D) वन मृदा।
उत्तर:
(A) जलोढ़।

2. किस मृदा को रेगड़ मृदा भी कहते हैं?
(A) नमकीन
(B) काली
(C) शुष्क
(D) लेटराइट।
उत्तर:
(B) काली।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

3. मृदा की ऊपरी तह के उड़ जाने का मुख्य कारण
(A) पवन अपरदन
(B) अपक्षातान
(C) जल अपरदन
(D) कोई नहीं।
उत्तर:
(A) पवन अपरदन।

4. कृषिकृत भूमि में जल सिंचित क्षेत्र में लवण का क्या कारण है?
(A) जिप्सम
(B) अति जल सिंचाई
(C) अति पशुचारण
(D) उर्वरक।
उत्तर:
(B) अति जल सिंचाई।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मृदा क्या है?
उत्तर:
मृदा भूतल की ऊपरी सतह का आवरण है। भू-पृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की ऊपरी परत को मृदा कहते हैं।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. उच्चावच
  3. जलवायु
  4. प्राकृतिक वनस्पति।

प्रश्न 3.
मृदा परिच्छेदिका के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख करो।
उत्तर:

  1. A-स्तर
  2. B-स्तर
  3. C-स्तर।

प्रश्न 4.
मृदा अवकर्षण क्या होता है?
उत्तर:
मृदा की उर्वरता के ह्रास को मृदा अवकर्षण कहते हैं। इससे मृदा का पोषण स्तर गिर जाता है तथा मृदा की गहराई कम हो जाती है।

प्रश्न 5.
खादर तथा बांगर में क्या अन्तर है?
उत्तर:
पुरातन जलोढ़ के निक्षेप से बने ऊंचे प्रदेश को बांगर कहते हैं। नवीन जलोढ़ के निक्षेप से बने निचले प्रदेश को खादर कहते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों तक दीजिए
प्रश्न 1.
काली मृदाएं किसे कहते हैं? इनके निर्माण तथा विशेषताओं का वर्णन कीजिए
उत्तर:
काली मिट्टी (Black Soil)

1. विस्तार ( Extent ):
इस मिट्टी का विस्तार प्रायद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में लगभग 5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। यह गुजरात, महाराष्ट्र के अधिकांश भाग, मध्य प्रदेश, दक्षिणी उड़ीसा, उत्तरी कर्नाटक, दक्षिणी आंध्र प्रदेश में मिलती है। यह मिट्टी नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी तथा कृष्णा नदी की घाटियों में पाई जाती है।

2. विशेषताएं (Characteristics):
इस मिट्टी का निर्माण लावा प्रवाह से बनी आग्नेय चट्टानों के टूटने-फूटने से हुआ है। यह अधिकतर दक्कन लावा (Deccan Trap) के क्षेत्र में मिलता है। इसलिए इसे लावा मिट्टी भी कहते हैं। इस मिट्टी का रंग काला होता है इसलिए इसे काली मिट्टी (Black Soil) भी कहते हैं। इसे रेगड़ मिट्टी (Regur Soil) भी कहा जाता है। इस मिट्टी में चूना, लोहा, मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, परन्तु फॉस्फोरस, पोटाश, नाइट्रोजन तथा जैविक पदार्थों की कमी होती है। इस मिट्टी में नमी धारण करने की शक्ति अधिक है। इसलिए सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। इस मिट्टी की तुलना में इसकी ‘शर्नीज़म’ तथा अमेरिका की ‘प्रेयरी’ मिट्टी से की जाती है।

3. फसलों की उपयुक्तता (Suitability to Crops):
यह मिट्टी कपास की कृषि के लिए उपयुक्त है। इसलिए इसे ‘कपास की मिट्टी’ (Cotton Soil) भी कहते हैं। पठारों की उच्च भूमि में कम उपजाऊ होने के कारण यहां ज्वारबाजरा, दालों आदि की कृषि होती है। मैदानी भैग में गेहूं, कपास, तम्बाकू, मूंगफली तथा तिलहन की कृषि की जाती है।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण क्या होता है? मृदा संरक्षण के कुछ उपाय सुझाइए
उत्तर:
मृदा संरक्षण यदि मृदा अपरदन और मृदाक्षय मानव द्वारा किया जाता है, तो स्पष्टतः मानवों द्वारा ही इसे रोका भी जा सकता है। मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मिट्टी के अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की अपक्षरित दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन वास्तव में मनुष्यकृत समस्या है।

1. किसी भी तर्कसंगत समाधान में पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत डाल वाली भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना ज़रूरी हो जाए, तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेने चाहिएं।

2. भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और झूम कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है। इसी प्रकार विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें ( अति चराई और झूम कृषि) नियमित और नियन्त्रित करना चाहिए।

3. समोच्च रेखा के अनुसार मेड़बंदी, समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेती बनाना, नियमित वानिकी, नियन्त्रित चराई, वरणात्मक खरपतवार नाशन, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन, उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

4. अवनालिका अपरदन को रोकने तथा उनके बनने पर नियन्त्रण के प्रयत्न किए जाने चाहिएं। अंगुल्याकार अवनालिकाओं को सीढ़ीदार खेत बनाकर खत्म किया जा सकता है। अवनालिकाओं के शीर्ष की ओर के विकास को नियन्त्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस कार्य को अवनालिकाओं को बन्द करके, सीढ़ीदार खेत बनाकर या आवरण वनस्पति का रोपण करके किया जा सकता है।

5. मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि पर बालू के टीलों के प्रसार को वनों की रक्षक मेखला बनाकर रोकना चाहिए। कृषि के अयोग्य भूमि को चराई के लिए चरागाहों में बदल देना चाहिए। बालू के टीलों को स्थिर करने के उपाय भी अपनाए जाने चाहिएं।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

भारत – स्थिति  JAC Class 11 Geography Notes

→ मिट्टी (Soil): भू-पृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की ऊपरी पर्त को मृदा कहते हैं।

→ मिट्टी के तत्त्व (Constituents of Soil): खनिज, ह्यूमस, जल, वायु तथा बैक्टीरिया ।

→ मिट्टी निर्माण के लिये आवश्यक तत्त्व (Formation of Soil): मूल पदार्थ, धरातल, जलवायु, ऋतु प्रहार।

→ मृदा के संस्तर (Horizons of Soil) अ – संस्तर, ब- संस्तर, स- संस्तर

→ मिट्टी की महत्ता (Importance of Soils ): मिट्टी एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। मानव तथा आर्थिक क्रियाएं मिट्टी का उपजाऊपन पर निर्भर करती हैं।

→ भारत में मिट्टी के प्रकार (Types of Soils): भारतीय मिट्टी के समूह निम्नलिखित हैं

  • काली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • लेटराइट मिट्टी
  • जलोढ़ मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • पर्वतीय मिट्टी

→ मृदा अपरदन (Soil erosion ): जल, वायु आदि द्वारा मिट्टी की ऊपरी परत का बहना मृदा अपरदन कहलाता है।

→ मृदा अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion): तीव्र ढलाने, भारी वर्षा, तेज़ हवाएं, चरागाहों का मृदा अत्यधिक प्रयोग, वनों की कटाई आदि।

→ मृदा संरक्षण (Conservation of Soil): मृदा संरक्षण के लिए मृदा का संरक्षण, पुन: नवीकरण तथा उपजाऊपन कायम रखना आवश्यक है। इसके लिए वनारोपण, नियन्त्रित पशु चारण, सीढ़ीनुमा कृषि तथा फ़सलों का हेर-फेर आवश्यक है।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

Jharkhand Board JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

बहु-विकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)

दिए गए चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए
1. प्राजैक्ट टाइगर का उद्देश्य क्या था?
(A) शेरों का शिकार करना
(B) अवैध शिकार को रोक कर शेरों की सुरक्षा
(C) शेरों को चिड़ियाघरों में रखना
(D) शेरों पर चित्र बनाना।
उत्तर:
(B) अवैध शिकार को रोककर शेरों की सुरक्षा।

2. नन्दा देवी जीव आरक्षण क्षेत्र किस राज्य में है?
(A) बिहार
(B) उत्तराखण्ड
(C) उत्तर प्रदेश
(D) उड़ीसा।
उत्तर:
(B) उत्तराखण्ड।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

3. संदल किस प्रकार के वन की लकड़ी है?
(A) सदाबहार
(B) डैल्टा वन
(C) पतझड़ीय
(D) कंटीले वन।
उत्तर:
(C) पतझड़ीय।

4. IUCN द्वारा कितने जीव आरक्षण स्थल मान्यता प्राप्त है?
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
उत्तर:
(D) 4

5. वन नीति के अधीन वन क्षेत्र का लक्ष्य कितना था?
(A) 33%
(B) 53%
(C) 44%
(D) 22%.
उत्तर:
(A) 33%.

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति क्या है? जलवायु की किन परिस्थितियों में ऊष्ण कटिबन्धीय वन उगते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति से अभिप्राय उस पौधा समुदाय से है जो लम्बे समय तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगता है। इसकी विभिन्न प्रजातियां मृदा व जलवायु के अनुसार पनपती हैं। उष्ण कटिबन्धीय वन-ये वन उष्ण एवं आई प्रदेशों में उगते हैं। यहां वार्षिक वर्षा 200 सें० मी० से अधिक तथा औसत वार्षिक तापमान 22°C से अधिक रहता है। इससे कम वर्षा तथा तापमान में उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन मिलते हैं।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 2.
जलवायु की कौन-सी परिस्थितियां सदाबहार वन उगने के लिए अनुकूल हैं?
उत्तर:

  1. वार्षिक वर्षा 200 सें० मी०
  2. औसत वार्षिक तापमान 22°C. ये दशाएं भूमध्य रेखीय जलवायु में मिलती हैं।

प्रश्न 3.
सामाजिक वानिकी से आपका क्या अभिप्रायः है?
उत्तर:
सामाजिक वानिकी का अर्थ है- पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद करने के उद्देश्य से वनों का प्रबन्ध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनारोपण। इसका उद्देश्य है ग्रामीण जनसंख्या के लिए ज्लावन छोटी इमारती लकड़ी और छोटे-छोटे वन उत्पादों की पूर्ति करना।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 4.
जीवमण्डल निचय को परिभाषित करें, वन क्षेत्र और वन आवरण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जीवमण्डल निचय आरक्षित क्षेत्र (Bioreserves) विशेष प्रकार के भौमिक और तटीय पारिस्थितिक तन्त्र हैं जिन्हें UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त है। वन क्षेत्र और वन आवरण एक-दूसरे से भिन्न-भिन्न हैं। वन क्षेत्र राजस्व विभाग के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र हैं चाहे वहां वृक्ष हो या न हो। वन आवरण वास्तविक रूप से वनों से ढका प्रदेश है। सन् 2001 में भारत में वन आवरण, 20.55% था, परन्तु इनमें 12.6% सघन तथा 7.8% विरल वन थे।

निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न-निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दोप्रश्न
प्रश्न 1.
वन संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
जनसंख्या के अत्यधिक दबाव तथा पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण वन सम्पदा का संरक्षण आवश्यक है। वन संरक्षण कृषि एवं चराई के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता के कारण आवश्यक है। इसके लिए वनवर्द्धन के उत्तम तरीकों को अपनाया जा रहा है। तेज़ी से उगने वाले पौधों की जातियों को लगाया जा रहा है। घास के मैदानों का पुनर्विकास किया जा रहा है। वन क्षेत्रों का विस्तार किया जा रहा है।
वनों का जीवन तथा पर्यावरण के साथ जटिल सम्बन्ध है, वन संरक्षण के लिए कई कदम उठाए गए हैं:

  1. वन नीति-1952 तथा 1988 में वन संरक्षण हेतु वन नीति लागू की गई।
  2. वन संसाधनों का सतत्-पोषणीय विकास किया जाएगा तथा स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी।
  3. देश में 33% वन लगाने के यत्न किए जा रहे हैं।
  4. वनों में जैव विविधता तथा पारिस्थितिक सन्तुलन कायम रखा जाएगा।
  5. मृदा अपरदन तथा बाढ़ पर नियन्त्रण।
  6. सामाजिक वानिकी तथा वनरोपण द्वारा वन आवरण का विस्तार हो रहा है।
  7. वनों की उत्पादकता को बढ़ाया जा रहा है।

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प्रश्न 2.
वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
वन संरक्षण में लोगों की भागीदारी द्वारा सामाजिक वानिकी की विचारधारा का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की संस्थाएं तथा महिलाएं योगदान दे रही हैं।
1. 1976 के राष्ट्रीय कृषि आयोग ने पहले-पहल ‘सामाजिक वानिकी’ शब्दावली का प्रयोग किया था। इसका अर्थ है-ग्रामीण जनसंख्या के लिए जलावन, छोटी इमारती लकड़ी और छोटे-छोटे वन उत्पादों की आपूर्ति करना।

2. अधिकतर राज्यों में वन विभागों के अन्तर्गत सामाजिक वानिकी के अलग से प्रकोष्ठ बनाए गए हैं।

3. सामाजिक वानिकी के मुख्य रूप से तीन अंग हैं: कृषि वानिकी किसानों को अपनी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना, वन-भूखण्ड (वुडलाट्स) वन विभागों द्वारा लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सड़कों, के किनारे, नहर के तटों तथा ऐसी अन्य सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण, सामुदायिक वन-भूखण्ड लोगों द्वारा स्वयं बराबर की हिस्सेदारी के आधार पर भूमि पर वृक्षारोपण।

4. यह लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कार्यक्रम के स्थान पर किसानों का धनोपार्जन कार्यक्रम बन गया।

प्राकृतिक वनस्पति JAC Class 11 Geography Notes

→ वन-एक प्राकृतिक साधन (Forests-A Natural Resource): वन एक नदी की भाँति बहुमुखी। संसाधन हैं। किसी देश का आर्थिक विकास वनों के उपयोग पर निर्भर करता है। जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति-जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति में घना सम्बन्ध है। विभिन्न प्रकार के वन-सदाबहार, पतझड़ीय, शुष्क; सभी वन तापमान तथा वर्षा पर निर्भर करते हैं।

→ वनों की महत्ता (Importance of Forests):

  • वन हमें भोजन सम्बन्धी वस्तुएं प्रदान करते हैं।
  • इनसे लकड़ी प्राप्त होती है।
  • वन विश्व का 40% ईंधन प्रदान करते हैं। लकड़ी का प्रयोग विभिन्न प्रकार से किया जाता है, जैसे घरों में ईंधन, प्रगलन उद्योगों में तथा रेल इंजनों में।
  • नर्म लकड़ी, लकड़ी की लुग्दी कागज़, रेयॉन उद्योग के लिये कच्चा माल, प्रदान करती है।
  • वन वायु में नमी ग्रहण करके वर्षा लाने में सहायता करते हैं।
  • वन मिट्टी अपरदन तथा बाढ़ को रोकते हैं।
  • ये मरुस्थलों को बढ़ने से रोकते हैं।

→ भारत में वनों के प्रकार (Types of Forests in India): भारत में वर्षा, तापमान तथा ऊंचाई की विभिन्नता होने के कारण विभिन्न प्रकार के वन पाये जाते हैं

  • उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
  • पतझड़ीय वन
  • शुष्क वन
  • ज्वारीय वन
  • पर्वती वन।

→ वनों का ह्रास (Depletion of Forests): निम्नलिखित कारणों द्वारा उत्तम वनों का विशाल क्षेत्रों पर ह्रास हुआ है

  • विशाल पैमाने पर वन क्षेत्र की कटाई
  • स्थानान्तरी कृषि
  • भारी मृदा अपरदन
  • चरागाहों की अत्यधिक चराई
  • लकड़ी तथा ईंधन के लिये वनों की कटाई
  • भूमि का मानव के लिये प्रयोग।

→ वनों का संरक्षण (Conservation of Forests): देश के वन संसाधनों पर जनसंख्या का भारी दबाव है। बढ़ती। हुई जनसंख्या को कृषि योग्य भूमि की अधिक आवश्यकता है। इसलिए वन संरक्षण उपाय आवश्यक हैं।

→ वृक्षारोपण का विभिन्न क्षेत्रों में विकास हुआ है। घास के मैदानों का विकास किया गया है। रेशम के कीड़े पालने के विकसित तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है। तेज़ी से बढ़ने वाले पौधों को लगाया जा रहा है। वनों । के अन्तर्गत क्षेत्रों में वृद्धि की गई है। राष्ट्रीय वन नीति-1988 की राष्ट्रीय वन नीति ने वनों का संरक्षण, पुनः विकास किया है। इसका उद्देश्य वातावरण, का संरक्षण तथा पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखना है। इसके अन्य उद्देश्य सामाजिक वाणिकी तथा वन उत्पादन में वृद्धि करना है।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

Jharkhand Board JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

बहु-विकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)

दिए गए चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए
1. शीतकाल में तमिलनाडु के तटीय मैदान में किन पवनों द्वारा वर्षा होती है?
(A) दक्षिण-पश्चिम मानसून
(B) उत्तर-पूर्वी मानसून
(C) शीतोष्ण चक्रवात
(D) स्थानिक पवनों।
उत्तर:
(B) उत्तर-पूर्वी मानसून

2. कितने प्रतिशत भाग में भारत में 75 सें० मी० से कम वार्षिक वर्षा होती है?
(A) आधे
(B) दो-तिहाई
(C) एक-तिहाई
(D) तीन चौथाई।
उत्तर:
(D) तीन चौथाई।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

3. दक्षिणी भारत के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सही नहीं?
(A) दैनिक तापान्तर कम है
(B) वार्षिक तापान्तर कम है
(C) वर्ष भर तापमान अधिक है
(D) यहां कठोर जलवायु है।
उत्तर:
(D) यहां कठोर जलवायु है।

4. जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लम्ब चमकता है तो क्या होता है?
(A) उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायु दाब
(B) उत्तर-पश्चिमी भारत में निम्न वायु दाब
(C) उत्तर-पश्चिमी भाग में तापमान-वायु दाब में
(D) उत्तर-पश्चिमी भाग में लू चलती है।
उत्तर:
(A) उत्तर-पश्चिमी भारत में उच्च वायु दाब।

5. भारत के किस देश-प्रदेश में कोपेन के ‘AS’ वर्ग की जलवायु है?
(A) केरल तथा कर्नाटक
(B) अण्डेमान निकोबार द्वीप
(C) कोरोमण्डल तट
(D) असम-अरुणाचल।
उत्तर:
(C) कोरोमण्डल तट।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारतीय मौसम के रचना तन्त्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्त्वपूर्ण कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
भारतीय मौसम के रचना तन्त्र को निम्नलिखित तीन कारक प्रभावित करते हैं
1. दाब तथा हवा का धरातलीय वितरण जिसमें मानसून पवनें, कम वायु दाब क्षेत्र तथा उच्च वायु दाब क्षेत्रों की स्थिति महत्त्वपूर्ण कारक हैं।
2. ऊपरी वायु परिसंचरण (Upper air Circulation) में विभिन्न वायु राशियां तथा जेट प्रवाह महत्त्वपूर्ण तत्त्व हैं।
3. विभिन्न वायु विक्षोभ (Atmospheric disturbances) में ऊष्ण कटिबन्धीय तथा पश्चिमी चक्रवात द्वारा वर्षा होना महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 2.
अन्तर ऊष्ण कटिबन्धीय अभिसरण कटिबन्ध (I.T.C.Z.) क्या है?
उत्तर:
अन्तर ऊष्ण कटिबन्धीय अभिसरण कटिबन्ध (I.T. C. Z. ):
भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब कटिबन्ध है जो धरातल के निकट पाया जाता है। इसकी स्थिति ऊष्ण कटिबन्ध के बीच सूर्य की स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। ग्रीष्मकाल में इसकी स्थिति उत्तर की ओर तथा शीतकाल में दक्षिण की ओर सरक जाती है । यह भूमध्य रेखीय निम्न दाब द्रोणी दोनों दिशाओं में हवाओं के प्रवाह को प्रोत्साहित करती है ।

प्रश्न 3.
‘मानसून प्रस्फोट’ किसे कहते हैं? भारत में सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान बताओ।
उत्तर:
भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर की मानसून पवनें दक्षिणी-पश्चिमी दिशा में चलती हैं। यहां ये पवनें जून के प्रथम सप्ताह में अचानक आरम्भ हो जाती हैं। मानसून के इस अकस्मात आरम्भ को ‘मानसून प्रस्फोट’ (Monsoon Burst) कहा जाता है क्योंकि मानसून आरम्भ होने पर बड़े ज़ोर की वर्षा होती है। जैसे किसी ने पानी से भरा गुब्बारा फोड़ दिया हो। भारत में मासिनराम (Mawsynram) में सबसे अधिक वार्षिक वर्षा ( 1080 सें० मी०) होती है। यह स्थान खासी पहाड़ियों में स्थित है।

प्रश्न 4.
जलवायु प्रदेश क्या होता है? कोपेन की पद्धति के प्रमुख आधार कौन से हैं?
उत्तर:
जलवायु प्रदेश – वह प्रदेश जहां वायुमण्डलीय दशाएं तापमान, वर्षा, मेघ, पवनें, वायुदाब आदि सब में लगभग समानता है। कोपेन की जलवायु पद्धति का आकार – कोपेन ने भारत के जलवायु प्रदेशों का वर्गीकरण किया है। इस वर्गीकरण का आधार दो तत्त्वों पर आधारित है। इसमें तापमान तथा वर्षा के औसत मासिक मान का विश्लेषण किया गया है। प्राकृतिक वनस्पति द्वारा किसी स्थान के तापमान और वर्षा के प्रभाव को आंका जाता है।

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प्रश्न 5.
उत्तर-पश्चिमी भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को किस प्रकार के चक्रवातों से वर्षा प्राप्त होती है? वे चक्रवात कहां उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
भारत में उत्तर-पश्चिमी भाग में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकाल में चक्रवातीय वर्षा होती है। ये चक्रवात पश्चिमी एशिया तथा भूमध्यसागर में उत्पन्न होते हैं तथा पश्चिमी जेट प्रवाह के साथ-साथ भारत में पहुंचते हैं। औसतन शीत ऋतु में 4 से 5 चक्रवात दिसम्बर से फरवरी के मध्य इस प्रदेश में वर्षा करते हैं। पर्वतीय भागों में हिमपात होता है। पूर्व की ओर इस वर्षा की मात्रा कम होती है। इन प्रदेशों में वर्षा 5 सेंटीमीटर से 25 सेंटीमीटर तक होती है। ये चक्रवात रबी की फसलों गेहूँ, बाजरा आदि के लिए लाभदायक हैं

(ग) निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions )

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में लिखिए

प्रश्न 1.
जलवायु में एक प्रकार का ऐक्य होते हुए भी भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नताएं पाई जाती हैं। उपयुक्त उदाहरण देते हुए इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहां पर अनेक प्रकार की जलवायु मिलती है। परन्तु मुख्य रूप से भारत मानसून पवनों के प्रभावाधीन है। मानसून पवनों के प्रभाव के कारण देश में जलवायविक एकता पाई जाती है। फिर भी देश के विभिन्न भागों में तापमान, वर्षा आदि जलवायु तत्त्वों में काफ़ी अन्तर पाए जाते हैं। ये प्रादेशिक अन्तर एक प्रकार से मानसूनी जलवायु के उपभेद हैं। आधारभूत रूप से सारे देश में जलवायु की व्यापक एकता पाई जाती है
प्रादेशिक अन्तर मुख्य रूप से तापमान, वायु तथा वर्षा के ढांचे में पाए जाते हैं।

1. राजस्थान के मरुस्थल में, बाड़मेर में ग्रीष्मकाल में 50°C तक तापमान मापे जाते हैं। इसके पर्वतीय प्रदेशों में तापमान 20°C सैंटीग्रेड के निकट रहता है।

2. दिसम्बर मास में द्रास एवं कारगिल में तापमान 40°C तक पहुंच जाता है जबकि तिरुवनन्तपुरम तथा चेन्नई में तापमान + 28°C रहता है ।

3. इसी प्रकार औसत वार्षिक वर्षा में भी प्रादेशिक अन्तर पाए जाते हैं। एक ओर मासिनराम में (1080 सेंटीमीटर) संसार में सबसे अधिक वर्षा होती है तो दूसरी ओर राजस्थान शुष्क रहता है। जैसलमेर में वार्षिक वर्षा शायद ही 12 सें०मी० से अधिक होती है । गारो पहाड़ियों में स्थित तुरा नामक स्थान में एक ही दिन में उतनी वर्षा हो सकती है जितनी जैसलमेर में दस वर्षों में होती है ।

4. कई भागों में मानसून वर्षा जून के पहले सप्ताह में आरम्भ हो जाती है तो कई भागों में जुलाई में वर्षा की प्रतीक्षा हो रही होती है।

5. तटीय भागों में मौसम की विषमता महसूस नहीं होती परन्तु अन्तःस्थ स्थानों में मौसम विषम रहता है। शीतकाल में उत्तर-पश्चिमी भारत में शीत लहर चल रही होती है तो दक्षिणी भारत में काफ़ी ऊंचे तापमान पाए जाते हैं। इस प्रकार विभिन्न प्रदेशों में ऋतु की लहर लोगों की जीवन पद्धति में एक परिवर्तन तथा विभिन्नता उत्पन्न कर देती है। इस प्रकार इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि भारतीय जलवायु में एक व्यापक एकता होते हुए भी प्रादेशिक अन्तर पाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में कितने स्पष्ट मौसम पाए जाते हैं ? किसी एक मौसम की दशाओं की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानसून व्यवस्था के अनुसार भारत में चार ऋतुएं होती हैं

  1. शीत ऋतु (जनवरी-फरवरी)।
  2. ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून )।
  3. वर्षा ऋतु (मध्य जून से मध्य सितम्बर)।
  4. लौटती मानसून की ऋतु (मध्य सितम्बर से दिसम्बर)।

1. शीत ऋतु:
कम तापमान, मेघ रहित आकाश, सुहावना मौसम तथा कम आर्द्रता इस ऋतु की विशेषताएं होती हैं। इस ऋतु में सूर्य की स्थिति दक्षिणी गोलार्द्ध में होने के कारण भारत में कम तापमान मिलते हैं। शीत लहर तथा हिमपात के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में औसत तापमान 21°C से कम रहते हैं। रात्रि का तापमान हिमांक से नीचे हो जाता है। दक्षिणी भारत में सागरीय प्रभाव के कारण 21°C से अधिक तापमान पाए जाते हैं।

यहां कोई शीत नहीं होती उत्तर – पश्चिमी भारत में उच्च वायु दाब क्षेत्र बन जाता है। उत्तर-पश्चिमी भारत में भूमध्य सागर से आने वाले चक्रवात हल्की-हल्की वर्षा करते हैं। यह वर्षा रबी की फसल के लिए लाभदायक होती है। मानसून पवनें स्थल से सागर (Land to Sea) की ओर चलने के कारण शुष्क होती हैं। ये लौटती हुई मानसून पवनें खाड़ी बंगाल से नमी ग्रहण करके पूर्वी तट पर वर्षा करती हैं।

2. ग्रीष्म ऋतु:
ग्रीष्म ऋतु में तापमान बढ़ना आरम्भ कर देता है। सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लम्बवत् पड़ती हैं।
उत्तर:
पश्चिमी भारत में उच्चतम तापमान 42°C से अधिक होते हैं। दिन के समय शुष्क, गर्म लू चलती है। दक्षिणी भारत में औसत तापमान 25°C तक रहता है। तटीय भागों में सागर के समकारी प्रभाव के कारण मौसम सुहावना रहता है। उत्तर – पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब केन्द्र बन जाता है। यह निम्न दाब दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनों को उत्तर की ओर आकर्षित करता है। ग्रीष्म ऋतु प्रायः शुष्क रहती है। उत्तर-पूर्वी भारत में उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों के कारण कुछ वर्षा होती है। गर्मी के कारण स्थानीय रूप से धूल भरी आंधियां (Dust Storms) चलती हैं। इनके कारण उत्तर-पश्चिमी भारत में कुछ वर्षा हो जाती है जो गर्मी को कम करती है।

3. वर्षा ऋतु:
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ भारत में वर्षा ऋतु आरम्भ हो जाती है। तटीय क्षेत्रों में जून के प्रथम सप्ताह में मानसून आरम्भ हो जाती है तथा अचानक भारी वर्षा होती है। इसे ‘मानसून प्रस्फोट’ कहा जाता है। मानसून वर्षा के कारण इस ऋतु में तापमान 5° से 8° कम हो जाते हैं। औसत तापमान 25°C से 30°C तक रहते हैं। इस ऋतु में सागर से स्थल की ओर (Sea to Land) दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनें चलती हैं जो भारत की जलवायु में सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। प्रायद्वीप के तिकोने आकार के कारण ये पवनें दो शाखाओं में बंट जाती हैं

  1. अरब सागर की मानसून शाखा।
  2. खाड़ी बंगाल की मानसून शाखा।

मानसून की खाड़ी बंगाल की शाखा अराकान पर्वत से टकरा कर उत्तर – पूर्वी भारत में भारी वर्षा करती है। ये पवनें उत्तरी मैदान में पंजाब तक वर्षा करती हैं। पश्चिम की ओर जाते हुए वर्षा की मात्रा कम होती है। मानसून की अरब सागरीय शाखा पश्चिमी तट, पश्चिमी घाट, मध्य प्रदेश में वर्षा करती है, परन्तु दक्षिणी पठार पश्चिमी घाट की वृष्टि छाया में रहने के कारण शुष्क रहता है।

4. लौटती मानसून की ऋतु:
इस ऋतु में दक्षिण-पश्चिमी मानसून उत्तरी भारत से लौटने लगती है । इस ऋतु में तापमान, वायु दाब तथा अन्य सभी दशाएं शनैः-शनैः बदलने लगती हैं। यह ऋतु वर्षा तथा शीत ऋतु में मध्य संक्रात काल होता है। दिन के समय तापमान कम होने लगता है। औसत तापमान 20°C से कम हो जाता है। पवनों की दिशा तथा गति अनिश्चित होती है। धीरे-धीरे प्रति चक्रवातीय दशाएं उत्पन्न होने लगती हैं। वर्षा कम होती है । पूर्वी तटीय प्रदेश पर कुछ वर्षा चक्रवातों द्वारा होती है।

मानचित्र कार्य (Map Skill)

प्रश्न-भारत के रेखा चित्र पर निम्नलिखित को दर्शाइए।

  1. शीतकालीन वर्षा के क्षेत्र
  2. ग्रीष्म ऋतु में पवनों की दिशा
  3. 50 प्रतिशत से अधिक वर्षा की परिवर्तिता के क्षेत्र
  4. जनवरी माह में 15°C से कम तापमान वाले क्षेत्र
  5. भारत में 100 सें० मी० की सम वर्षा रेखा।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 4 जलवायु 1

जलवायु JAC Class 11 Geography Notes

→ भारत का जलवायु (Climate of India): भारत में उष्णकटिबन्धीय मानसून प्रकार का जलवायु है। कर्क रेखा भारत को दो समान भागों-उष्ण कटिबन्धीय तथा शीतोष्ण कटिबन्धीय में बांटती है।

→ जलवायु विविधता (Climatic Diversity): अधिक विस्तार के कारण जलवायु में बहुत विविधता है। बाड़मेर। में सबसे अधिक तापमान 50° C जबकि कारगिल (लद्दाख ) में सबसे कम तापमान 45°C होता है। मासिनराम (मेघालय) में सबसे अधिक वर्षा 1080 cm जबकि जैसलमेर (रेगिस्तान) में 15 cm से कम वर्षा होती है। भारत की जलवायु को निर्धारित करने वाले कारक

  • मानसूनी पवनें: भारत में मानसूनी जलवायु है । यह मानसून पवनों द्वारा नियन्त्रित होता है।
  • देश का विस्तार: शीतोष्ण प्रदेश में उत्तरी भाग स्थित है। यहां उष्ण ग्रीष्मकाल तथा ठण्डी शीतकाल ऋतु होती है।
  • हिमालय की स्थिति: हिमालय एक जलवायु विभाजक का कार्य करता है। यह पर्वतीय दीवार सर्दियों में भारत को मध्यवर्ती एशिया की शीत पवनों से बचाती है। हिमालय पर्वत हिन्द महासागर की दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनों को रोक कर वर्षा करने में सहायक है।
  • हिन्द महासागर: दक्षिण-पश्चिमी मानसून का उद्गम इस महासागर से होता है। ये पवनें देश के अधिकतर भागों पर वर्षा प्रदान करती हैं।
  • पश्चिमी विक्षोभ: पश्चिमी विक्षोभ (चक्रवात) सर्दियों में भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में वर्षा प्रदान करते हैं।
  • समुद्र से दूरी: तटीय भागों में समकारी (सागरीय) जलवायु है। इन क्षेत्रों में समकारी जलवायु होता है। परन्तु देश के भीतरी भागों में कठोर या महाद्वीपीय जलवायु मिलता है।
  • धरातल: सम्मुख ढलानों पर भारी वर्षा होती है परन्तु विमुख ढलान पर ( दक्कन पठार) कम वर्षा के कारण वृष्टि छाया रहती है।

→ मानसून (Monsoons): ‘मानसून’ शब्द वास्तव में अरबी भाषा के शब्द ‘मौसिम’ से बना है। मानसून शब्द का अर्थ है – मौसम के अनुसार पवनों के ढांचे में परिवर्तन होना। मानसून व्यवस्था के अनुसार मौसमी पवनें चलती हैं जिनकी दिशा मौसम के अनुसार विपरीत हो जाती है। ये पवनें ग्रीष्मकाल के 6 मास समुद्र से स्थल | की ओर तथा शीतकाल के 6 मास स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।

→ (क) गर्मियों में मानसून: मई तथा जून के महीने के समय ये भारत के उत्तरी मैदानों में बहुत गर्म होती हैं। इसके परिणामस्वरूप उत्तर पश्चिमी भारत में निम्न वायुदाब उत्पन्न होता है। पवनें हिन्द महासागर से भारत के उत्तरी मैदान की ओर चलना आरम्भ कर देती हैं। ये पवनें भारत में दो विभिन्न दिशाओं द्वारा प्रवेश करती हैं

  1. खाड़ी बंगाल की मानसून की शाखा: खाड़ी बंगाल मानसून उत्तर – पूर्वी भारत में भारी वर्षा करती है। ये पवनें हिमालय पर्वत के साथ-साथ पश्चिम की ओर वर्षा करती हैं।
  2. अरब सागर की मानसून शाखा: इन पवनों की एक शाखा पश्चिमी घाट पर भारी वर्षा करती है। दूसरी शाखा मध्यवर्ती भारत में प्रवेश करके वर्षा करती है। तीसरी शाखा राजस्थान में अरावली पर्वत के समानान्तर चलती है तथा अरावली पर्वत इन्हें रोक नहीं पाता इसलिए यहां बहुत कम वर्षा होती है।

(ख) शीतकालीन मानसून पवनें: उत्तर-पूर्व मानसून शीतकाल में स्थल से सागर की ओर चलती है तथा शुष्क होती है परन्तु खाड़ी बंगाल को पार करने के पश्चात् तमिलनाडु तट पर वर्षा करती है।

भारत में वर्षा की विशेषताएं (Characteristics of Rainfall in India):

  • मानसूनी वर्षा: भारत में अधिकतर वर्षा मध्य जून से सितम्बर तक दक्षिण पश्चिमी मानसून पवनों द्वारा होती है। यह वर्षा मौसमी वर्षा है।
  • अनिश्चित वर्षा: गर्मियों में वर्षा अनिश्चित होती है। समय से पहले या बाद में आने वाली मानसून पवनें अकाल तथा बाढ़ का कारण बनती हैं।
  • असमान वितरण: देश में वर्षा का वितरण बहुत असमान है।
  • भारी वर्षा: भारतीय वर्षा बौछारों के रूप में भारी वर्षा करती हैं।
  • उच्चावच से सम्बन्धित वर्षा: पर्वतों के सहारे अधिक वर्षा होती है।
  • वर्षा का निरन्तर न होना: गर्मियों में वर्षा में शुष्क Spells आते हैं।
  • वर्षा की परिवर्तनशीलता: वर्षा की परिवर्तनशीलता लगभग 30% है जिसके कारण अकाल पड़ जाते हैं।

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→ भारत में वर्षा का वितरण (Distribution of Rainfall in India)

  1. भारी वर्षा वाले क्षेत्र: ये क्षेत्र 200 सेंटीमीटर से अधिक वार्षिक वर्षा प्राप्त करते हैं। इनमें पश्चिमी तट, पश्चिमी घाट, उप- हिमालय तथा उत्तर-पू -पूर्वी भाग शामिल हैं।
  2. दरमियानी वर्षा वाले क्षेत्र: ये क्षेत्र 100-200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा प्राप्त करते हैं। इन क्षेत्रों में पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग तथा मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु के तटीय मैदान शामिल हैं।
  3. कम वर्षा वाले क्षेत्र: ये क्षेत्र 50-100 सेंटीमीटर तक वर्षा प्राप्त करते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग, हरियाणा, पंजाब, प्रायद्वीपीय पठार तथा पूर्वी राजस्थान शामिल हैं।
  4. अति कम वर्षा वाले क्षेत्र: ये 50 सेंटीमीटर से कम वार्षिक वर्षा प्राप्त करते हैं। इनमें लद्दाख, दक्षिण-पश्चिमी पंजाब, दक्षिणी हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान, कच्छ तथा थार मरुस्थल शामिल हैं।

→ भारत में मौसम (Seasons in India): मानसून पवनों के आगमन तथा पीछे हटने के क्रम से मौसमों में भी एक क्रम पाया जाता है।

→ मौसम (Seasons)
उत्तर-पूर्व मानसून की ऋतुएं

  • शीत ऋतु: दिसम्बर से फरवरी
  • ग्रीष्म ऋतु: मार्च से मई ।

(ख) दक्षिण-पश्चिम मानसून की ऋतुएं

  • वर्षा ऋतु: जून से सितम्बर।
  • लौटती मानसून पवनों की ऋतु: अक्तूबर से नवम्बर।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Jharkhand Board JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

बहु-विकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions )

प्रश्न – दिए गए चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनिए
1. किस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था?
(A) गंडक
(B) कोसी
(C) सोन
(D) दामोदर।
उत्तर:
(D) दामोदर।

2. किस नदी का बेसिन भारत में सबसे बड़ा है?
(A) सिन्ध
(B) गंगा
(C) ब्रह्मपुत्र
(D) कृष्णा।
उत्तर:
(B) गंगा।

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3. कौन-सी नदी पंचनद में सम्मिलित नहीं है?
(A) रावी
(C) चनाब
उत्तर:
(B) सिन्ध |

4. कौन-सी नदी दरार घाटी में बहती है?
(A) सोन
(B) यमुना
(C) नर्मदा
(D) लूनी।
उत्तर:
(C) नर्मदा|

5. अलकनन्दा तथा भागीरथी नदी के संगम को क्या कहते हैं?
(A) विष्णु प्रयाग
(B) कर्णप्रयाग
(C) रुद्र प्रयाग
(D) देव प्रयाग।
उत्तर:

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
नदी द्रोणी और जल संभर में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
नदी द्रोणी (River Basin ): विशाल नदी एक विशिष्ट क्षेत्र से जल बहा कर अपने साथ लाती है तथा सागर में गिरती है। इसमें कई सहायक नदियां भी अपना जल शामिल करती हैं । इस क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं ।
जल संभर (Water- Shed): छोटी-छोटी नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को जल संभर कहते हैं । इसका आकार एक नदी द्रोणी से छोटा होता है ।

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

प्रश्न 2.
वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
वृक्षाकार अपवाद (Dendritic Pattern): जो अपवाह प्रतिरूप (Drainage pattern) पेड़ की शाखाओं के अनुरूप हो उसे वृक्षाकार प्रतिरूप कहते हैं। उत्तरी मैदान की नदियां वृक्षाकार अपवाह का उदाहरण हैं । यह वृक्ष की आकृति जैसा है।
जालीनुमा अपवाह (Trellis Drainage ): जब मुख्य नदियां एक-दूसरे के समानान्तर बहती हों तथा सहायक नदियां उनसे समकोण पर मिलती हों तो इस प्रतिरूप को जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप कहते हैं ।

प्रश्न 3.
अपकेन्द्रीय और अभिकेन्द्रीय अपवाह प्रारूप |
उत्तर:
अपकेन्द्रीय अपवाह (Radial Drainage ): जब नदियां किसी पर्वत से निकल कर सभी दिशाओं में बहती हैं तो इसे अपकेन्द्रीय अपवाद कहते हैं । अमरकंटक पर्वत श्रृंखला से निकलने वाली नदियां इस प्रतिरूप का उदाहरण हैं ।
अभिकेन्द्रीय अपवाह (Centripetal Drainage ): जब सभी दिशाओं से नदियां बहकर किसी झील या गर्त में मिल जाती हैं तो इसे अभिकेन्द्रीय अपवाद कहते हैं जैसे थार मरुस्थल में ।

प्रश्न 4.
डेल्टा तथा ज्वारनदमुख में अन्तर स्पष्ट करो ।
उत्तर:
डेल्टा (Delta): नदियां अपने उद्गम से लेकर अपने साथ तलछट सागर में गिरने से पहले निक्षेप करती हैं। यहां तक त्रिभुजाकार भू-भाग (∆) की रचना होती है जिसे डेल्टा कहते हैं। संसार में सबसे बड़ा डेल्टा गंगा ब्रह्मपुत्र डेल्टा है।
ज्वारनदमुख (Estuary): जब नदियां अपने अन्तिम भाग में तीव्र ढलान के कारण तलछट निक्षेप नहीं करतीं तो वह तलछट सागर में बह जाता है। इस तंग चैनल को ज्वारनदमुख कहते हैं। जैसे नर्मदा नदी डेल्टा की बजाय एक ज्वारनदमुख बनाती है।

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प्रश्न 5.
भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक आर्थिक लाभ क्या हैं?
उत्तर:
उत्तरी भारत की नदियां प्रायद्वीपीय नदियों से भिन्न हैं। मध्य भारत में सतपुड़ा – विन्ध्याचल श्रेणी तट जलविभाजक का कार्य करती है। उत्तरी भारत की नदियों में जलाधिकय है तथा सारा वर्ष जल प्राप्त होता है । परन्तु प्रायद्वीपीय नदियां मौसमी हैं । उत्तरी भारत की नदियों को प्रायद्वीपीय भारत की नदियों से जोड़ा जा सकता है। इस योजना को गंगा – कावेरी योजना कहते हैं। उत्तरी भारत की अतिरिक्त जल वाली नदियां प्रायद्वीपीय भारत की कम जल वाली नदियों को जल प्रदान कर सकती हैं। इससे जल सिंचाई में विस्तार किया जा सकता है। खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। देश में सूखे की समस्या समाप्त की जा सकती है। देश में जलविद्युत् उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है परन्तु विभिन्न राज्यों की सीमाओं तथा जल संसाधनों पर उनके अधिकार की समस्याएं हैं।

प्रश्न 6.
प्रायद्वीपीय नदियों के तीन लक्षण बताओ।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीपीय नदियां अधिक लम्बी नहीं हैं तथा कम हैं।
  2. ये नदियां मौसमी हैं। केवल वर्षा ऋतु में ही इनसे जल प्राप्त होता है।
  3. प्रायद्वीपीय नदियां जहाजरानी तथा जलसिंचाई के अनुकूल नहीं

JAC Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

प्रश्न 7.
हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में आने वाली मुख्य नदियों के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. गंगा
  2. शारदा नदी
  3. गोमती नदी
  4. घाघरा नदी
  5. गंडक नदी
  6. कोसी नदी।

अपवाह तंत्र  JAC Class 11 Geography Notes

→ भारत का जल-प्रवाह (Drainage of India): भारत में कई विशाल नदियां हैं इसलिए इसे ‘नदियों की | धरती’ कहते हैं। भारत के स्थल भाग का 90% जल प्रवाह बंगाल की खाड़ी में गिरता है।

→ जल विभाजक (Water Sheds): विभिन्न जल-प्रवाह तन्त्रों को अलग-अलग करने वाले क्षेत्र को जल विभाजक कहते हैं। भारत में मुख्य तीन जल विभाजक हैं- हिमालय श्रेणी, विंध्याचल, सतपुड़ा तथा पश्चिमी
घाट।

→ भारत का जल प्रवाह तन्त्र (Drainage System of India ): भारतीय नदियों को दो तन्त्रों में बाँटा जा सकता है
(i) हिमालय नदियां
(ii) प्रायद्वीपीय नदियां।

→ हिमालयाई नदियां (The Himalayan Rivers ): हिमालय नदियों में विशाल बेसिन हैं। नदियां गहरे गार्ज | बनाती हैं। ये सदा वाहिनी नदियां हैं क्योंकि ये हिम नदियों से जन्म लेती हैं। इनमें तीन मुख्य नदियां सिन्धु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियां हैं। कई नदियां पूर्ववर्ती हैं। ये हिमालय पर्वत के उत्थान से पहले बहती थीं।

→ प्रायद्वीपीय नदियां (The Peninsular Rivers ): ये नदियां कम गहरी घाटियों में बहती हैं जो आधार त को पहुंच चुकी हैं। कई नदियां मौसमी हैं जो वर्षा पर निर्भर करती हैं। इन्हें दो भागों में बांटा जा सकता है- I पूर्व में बहने वाली नदियां जो बंगाल की खाड़ी में गिरती (महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) हैं तथा पश्चिम में बहने वाली नदियां जो अरब सागर में गिरती हैं ( नर्मदा तथा ताप्ती) ।

→ मुख्य नदियां (Major Rivers ): सिन्धु नदी की कुल लम्बाई 2880 किलोमीटर है। इसका उद्गम तिब्बत में (मानसरोवर) होता है तथा यह ट्रांस हिमालयाई नदी है। इसकी पांच सहायक नदियां सतलुज, ब्यास, रावी, जेहलम तथा चिनाब हैं। गंगा भारत की मुख्य नदी है जो गंगोत्री से निकलती है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांपो कहते हैं जो बांग्लादेश से होकर बंगाल की खाड़ी की ओर बहती है। गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे | लम्बी नदी है। इसे वृद्ध गंगा कहते हैं। महानदी, कृष्णा, कावेरी प्रायद्वीपीय भारत की मुख्य नदियां हैं।