JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions History Chapter 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय वन सेवा की स्थापना की
(अ) भेंडिस ने
(ब) हिटलर ने
(स) सामिन ने
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(अ) भेंडिस ने।

2. प्रथम वन अधिनियम कब लागू हुआ
(अ) सन् 1856 ई. में
(ब) सन् 1865 ई. में
(स) सन् 1947 ई. में
(द) सन् 1857 ई. में।
उत्तर:
(ब) सन् 1865 ई. में।

3. श्रीलंका में घुमंतू कृषि को किस नाम से पुकारा जाता है
(अ) लादिंग
(ब) तावी
(स) चितमेन
(द) चेना।
उत्तर:
(द) चेना।

4. धया, पेंदा, बेवर, झूम, पोडू, आदि किस देश की घुमंतू कृषि के नाम हैं
(अ) भारत
(ब) श्रीलंका
(स) चीन
उत्तर:
(अ) भारत।

5. जावा में वन सम्बन्धी ‘भस्म कर भागो नीति” किन लोगों ने अपनायी थी
(अ) जापानियों ने
(ब) डचों ने
(स) पुर्तगालियों ने
(द) अंग्रेजों ने।
उत्तर:
(ब) डचों ने।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके द्वारा प्रयोग की जाने वाली कोई चार ऐसी वस्तुएँ बताइए। जो जंगल से प्राप्त होती हैं।
उत्तर:
1. कागज,
2. मेज-कुर्सीं
3. गोंद,
4. मसाले।

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प्रश्न 2.
सन् 1600 ईं. तक भारत के कुल भू-भाग के कितने हिस्से पर खेती होती थी?
उत्तर:
सन् 1600 ई. तक भारत के कुल भू-भाग के लगभग छठे हिस्से पर खेती होती थी।

प्रश्न 3.
अंग्रेजों ने किन-किन व्यावसाखिक फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया।
उत्तर:
पटसन, गन्ना, गेहूँ एवं कपास के उत्पादन को।

प्रश्न 4.
19वीं सदी की शुरुआत में इंग्लैण्ड में किस वृक्ष के जंगल लुप्त होने लगे थे।
उत्तर:
बलूत वृक्ष के।

प्रश्न 5.
औपनिवेशिक शासकों को किन-किन उदेश्यें की पूर्ति हेतु बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती थी?
उत्तर:

  1. रेलवे के विस्तार हेतु,
  2. शाही नौसेना हेतु जलयान बनाने के लिए।

प्रश्न 6.
ब्रैंडिस द्वारा वनों की रक्षा हेतु दिया गया प्रमुख सुझाव लिखिए।
उत्तर:
जंगलों के प्रबन्धन हेतु व्यवस्थित तंत्र विकसित करने के लिए कानून के निर्माण का सुझाव।

प्रश्न 7.
भारतीय वन सेवा की स्थापना कब्र की गयी?
उत्तर:
सन् 1864 ई. में।

प्रश्न 8.
इम्पीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीद्यूट की स्थापना कब एवं कहाँ की गयी?
उत्तर:
सन् 1906 ई. में देहरादून में।

प्रश्न 9.
अंग्रेजों ने डायद्रिघ ब्रैडिस नामक जर्मन विशेषज्ञ को भारत क्यों बुलाया?
उत्तर:
अंग्रेजों को इस बात की चिन्ता थी कि स्थानीय लोगों द्वारा जंगलों का उपयोग एवं व्यापारियों द्वारा पेड़ों की अंधधिंध कटाई से जंगल नही हो जाएँंगे इसलिए उन्होंने डायट्रिच ब्रैंडिस को भारत बुलाया।

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प्रश्न 10.
वन विनाश के लिए उत्तरदायी कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  1. बढ़ती जनसंख्या,
  2. औद्योगीकरण।

प्रश्न 11.
कलांग कौन थे?
उत्तर:
कलांग जावा के कुशल लकड़हारे एवं घुमन्तू किसान थे।

प्रश्न 12.
सन् 1878 ई. के वन अधिनियम द्वारा वनों को कितने भागों में वर्गीकृत किया गया?
उत्तर:
तीन भागों में:

  1. आरक्षित वन,
  2. सुरक्षित वन,
  3. ग्रामीण वन।

प्रश्न 13.
वैज्ञानिक वानिकी क्या है?
उत्तर:
वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई की वह पद्धति जिसमें पुराने पेड़ काट कर उनकी जगह नये पेड़ लगाये जाते हैं?

प्रश्न 14.
आरक्षित वन क्या थे?
उत्तर:
सबसे अच्छे जंगलों को आरक्षित वन कहा गया। ग्रामवासी इन जंगलों से उपयोग के लिए कुछ भी नहीं ले सकते थे।

प्रश्न 15.
ग्रामवासी ईंधन या घर बनाने के लिए लकड़ी कहाँ से ले सकते थे?
उत्तर:
ग्रामवासी इंधन या घर बनाने के लिए केवल सुरक्षित या फ्रामीण वनों से ही लकड़ी ले सकते थे।

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प्रश्न 16.
महुआ का क्या-क्या उपयोग होता है?
उत्तर:
महुआ के फूल से शराब बनाई जाती है। बीजों से वेल भी निकाला जाता है।

प्रश्न 17.
भारत में अंग्रेजों के लिए रेल अनिवार्य क्यों थी?
उत्तर:
शाही सेना के आवागमन और औपनिवेशिक व्यापार के लिए रेल अंग्रेजों के लिए अनिवार्य थी।

प्रश्न 18.
बीड़ी बनाने में किस वनोत्पाद का प्रयोग होता है?
उत्तर:
बीड़ी बनाने में सूखे हुए तेंदू के पत्तों का प्रयोग होता है। बच्चे, महिलाएँ और वृद्ध इन पत्तों को एकत्र करते हैं।

प्रश्न 19.
वनों के विनाश में ठेकेदारों की क्या भूमिका रही?
उत्तर:
ठेकेदारों ने बिना सोचे-समझे पेड़ काटना शुरू कर दिया जिससे रेल लाइनों के आस-पास तेजी से जंगल गायब होने लगे।

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प्रश्न 20.
बड़े जंगाली जानवरों के प्रति अंग्रेजों के क्या विचार थे?
उत्तर:
अंग्रेजों का विचार था कि बड़े जंगली जानवरों को मारकर वे हिन्दुस्तान को सभ्य बनाएँगे।

प्रश्न 21.
बस्तर कहाँ स्थित है?
उत्तर:
बस्तर जिला छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे दक्षिणी भाग में स्थित है।

प्रश्न 22.
बस्तर में कौन-कौन से आदिवासी समुदाय रहते हैं?
उत्तर:
बस्तर में मरिया, मुरिया गोंड, धुरवा, भतरा, हलबा आदि अनेक आदिवासी समुदाय रहते है।

प्रश्न 23.
देवसारी किसे कहते हैं?
उत्तर:
यदि एक गाँव के लोग दुसरे गाँव के जंगल से अल्प मात्रा में लकड़ी लेना चाहते हैं तो इसके बदले में उन्हें शुल्क अदा करना पड़ता है। इसे देवसारी कहते हैं।

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प्रश्न 24.
औपनिवेशिक काल में वनों और गोदामों से भारी लकड़ी के दुकड़ों को उठाने के लिए किस पशु का प्रयोग किया जाता था?
उत्तर:
हाथी का।

प्रश्न 25.
बागान किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी विशेष प्रजाति के पौधों को सीधी कतारों में लगाने की प्रक्रिया को बागान कहते है।

प्रश्न 26.
इण्डोनेशिया के किस द्वीप को चावल उत्पादक द्वीप के रूप में जाना जाता है?
उत्तर:
इण्डोनेशिया देश के जावा द्वीप को चावल उत्पादक द्वीप के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 27.
जावा पर जापानियों के नियन्त्रण से पहले डचों ने वन सम्बन्धी कौन-सी नीति अपनायी?
उत्तर:
भस्म-कर-भागो नीति।

प्रश्न 28.
किन्हीं दो बागानी फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चाय, रबड़।

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प्रश्न 29.
भारत में रेल लाइनों का जाल किस दशक में तेजी से फैला?
उत्तर:
भारत में रेल लाइनों का जाल सन् 1860 ई. के दशक में तेजी से फैला।

प्रश्न 30.
जार्ज यूल नामक अंग्रेज अफसर ने कितने बाघों को मारा था?
उत्तर:
400 बाघों को।

प्रश्न 31.
वे कौन-से कारण हैं जिन्होंने बस्तर के लोग्री को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए उकसाया?
उत्तर:

  1. जंगल के दो-तिहाई भाग को आरक्षित करना।
  2. घुमतू खेती को रोकना।
  3. शिकार एवं वन्य उत्पादों के संग्रह पर पाबन्दी लगाना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उन सभी वस्तुओं की सूची बनाइए जो वनों से प्राप्त होती हैं और जिन्हें आप अपने घरों एवं विद्यालय में प्रयोग करते हैं?
उत्तर:
हमें वनों से निम्नलिखित वस्तुएँ प्राप्त होती हैं जिनका प्रयोग हम अपने घरों एवं विद्यालय में करते हैं

  1. फर्नीचर जैसे कुर्सियाँ, मेज तथा दरवाजे एवं खिड़कियाँ।
  2. पुस्तकों का कागज।
  3. मसाले जिनका हम भोजन में प्रयोग करते हैं।
  4. रंग जिनसे कपड़ों की रंगाई की जाती है।
  5. पैंसिल में प्रयुक्त लकड़ी वनों से प्राप्त होती है।
  6. बीड़ी बनाने हेतु तेंदू पत्ते वनों से मिलते हैं।
  7. गोंद, रबड़, शहद, चाय, कॉफी आदि भी वनों से मिलते हैं।
  8. चाकलेट बनाने में प्रयुक्त होने वाला तेल, जो साल के बीजों से मिलता है।
  9. खाल से चमड़ा बनाने में प्रयोग होने वाला टैनिन।
  10. दवाइयाँ बनाने हेतु काम में ली जाने वाली जड़ी-बूटियाँ।
  11.  इसके अतिरिक्त वनों से हमें बाँस, ईंधन के लिए लकड़ी, घास, कच्चा कोयला, फल-फूल आदि मिलते हैं।

प्रश्न 2.
जनसंख्या वृद्धि का जंगलों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि का जंगलों पर प्रभाव-बढ़ती हुई जनसंख्या की रहने, खाने एवं कपड़े पहनने आदि की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जंगलों को काटा जाने लगा जिसके परिणामस्वरूप जंगल सिकुड़ते चले गये। सन् 1600 में हिन्दुस्तान के कुल भू-भाग के – भाग पर खेती होती थी जो अब बढ़कर लगभग – भाग तक पहुँच गयी है। अत: हम कह .. सकते हैं कि जनसंख्या वृद्धि का जंगलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

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प्रश्न 3.
उपनिवेशकालीन भारत में रेलवे के विस्तार ने जंगलों को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर:
उपनिवेशकाल में अंग्रेजों ने अपने माल की ढुलाई के लिए रेलवे का काफी विकास किया लेकिन इसका दुष्परिणाम भारतीय जंगलों को भुगतना पड़ा। क्योंकि नयी रेल पटरियों को बिछाने के लिए लगाये जाने वाले स्लीपर जंगली लकड़ी से बनाये जाते थे। जैसे-जैसे रेल लाइनों का विस्तार होता गया वैसे-वैसे ही पटरी बिछाने के लिए स्थान हेतु तथा स्लीपरों के लिए जंगल काटे जाने लगे। अत: रेलवे के विस्तार ने जंगलों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।

प्रश्न 4.
बागान पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जब व्यावसायिक उद्देश्य से एक विशाल क्षेत्र पर एक ही प्रकार के पेड़ उगाये जाते हैं तो वे बागान कहलाते हैं। यूरोप में चाय, कॉफी और रबड़ की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए अंग्रेजों ने भारत में जंगलों को साफ करके बागान लगाये थे। इन बागानों के कारण जगलों का एक भारी हिस्सा काटकर समाप्त कर दिया गया था।

प्रश्न 5.
”इंग्लैण्ड की शाही नौ-सेना भी भारत में वन-विनाश के लिए उत्तरदायी थी।” कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इंग्लैण्ड की शाही नौ-सेना के लिए लकड़ी की आपूर्ति की समस्या वहाँ बलूत के वन विलुप्त होने के कारण उत्पन्न हो गई थी। अत: शाही नौ सेना हेतु जलयान बनाने के लिए लकड़ी की आपूर्ति के कारणवश अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर भारतीय वनों को काटा।

प्रश्न 6.
ब्रिटिश शासकों ने झूम खेती को प्रतिबन्धित क्यों किया?
उत्तर:
ब्रिटिश शासकों ने निम्न कारणों से झूम खेती को हानिप्रद मानते हुए प्रतिबन्धित किया

  1. ब्रिटिश शासकों का यह मानना था कि उस भूमि पर जहाँ कुछ वर्षों के बाद झूम खेती की जाती थी, रेलवे के लिए आवश्यक लकड़ी हेतु पेड़ नहीं उगाए जा सकते थे।
  2. झूम खेती के कारण बार-बार स्थान परिवर्तन करने के कारण अधिकारियों के लिए कर-निर्धारण करना अत्यन्त कठिन था।
  3. ब्रिटिश शासकों का यह मानना था कि जब झूम कृषि के लिए जंगल को जलाकर साफ किया जाता है तो उस समय मूल्यवान पेड़ों के भी आग में जलकर नष्ट होने की सम्भावना बहुत अधिक रहती है।

प्रश्न 7.
वैज्ञानिक वानिकी के अन्तर्गत वन-प्रबन्धन के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए?
उत्तर:
वैज्ञानिक वानिकी के अन्तर्गत वन-प्रबन्धन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए

  1. वैज्ञानिक वानिकी के अन्तर्गत उन प्राकृतिक वनों को काट दिया गया जिनमें विविध प्रजातियों के वृक्ष पाये जाते थे।
  2. काटे गए वनों के स्थान पर सीधी पंक्ति में एक ही प्रकार के वृक्ष लगाए गए।
  3. वन-विभाग के अधिकारियों ने वनों का सर्वेक्षण किया और विभिन्न प्रकार के वृक्षों के अधीन क्षेत्र का अनुमान लगाया।
  4. वन विभाग के अधिकारियों ने वनों के उचित प्रबन्ध के लिए विभिन्न प्रकार की व्यापक योजनाएँ तैयार की।
  5. वन अधिकारियों ने योजना बनाते समय यह भी निर्णय किया कि प्रति वर्ष जितने वृक्ष काटे जाएँ उस क्षेत्र में उतने ही वृक्ष लगाए जाएँ।

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प्रश्न 8.
सन् 1878 ई. के वन अधिनियम द्वारा क्या परिवर्तन लाए गए थे?
उत्तर:
सन् 1878 ई. के वन अधिनियम द्वारा निम्नलिखित परिवर्तन लाए गए थे:

  1. वनों का तीन श्रेणियों में वर्गीकरण कर दिया गया-आरक्षित, सुरक्षित और ग्रामीण वन।
  2. गाँव के निवासियों को आरक्षित वनों में किसी भी प्रकार के वनोत्पाद को संगृहीत करने की अनुमति नहीं थी।
  3. ग्रामीण घर बनाने या ईंधन के लिए सुरक्षित या ग्रामीण वनों से ही लकड़ी ले सकते थे।

प्रश्न 9.
घुमंतू कृषि क्या है?
उत्तर:
घुमंतू कृषि के अन्तर्गत पेड़ों, झाड़ियों एवं घास को काटकर वन-भूमि का छोटा-सा टुकड़ा साफ किया जाता है, फिर उन्हें जला दिया जाता है। जलाने के बाद प्राप्त राख को मिट्टी में मिला दिया जाता है ताकि उपजाऊपन को बढ़ाया जा सके। तब उस स्थान पर कुछ वर्षों के लिए कृषि की जाती है। जब उस स्थान का उपजाऊपन कम हो जाता है, तो अन्य स्थान पर कृषि आरम्भ की जाती है। अत: इस प्रकार की ‘कृषि’ के अन्तर्गत किसान एक स्थान से दूसरे स्थान पर कृषि के लिए घूमते रहते हैं।

प्रश्न 10.
वन अधिनियम के लागू होने से गाँव वालों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
वन अधिनियम के लागू होने से गाँव वालों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े

  1. दैनिक गतिविधियाँ, जैसे-घरों के लिए लकड़ी काटना, पशुओं को चराना, कन्द-मूल फल एकत्रित करना, शिकार करना, मछली पकड़ना आदि गैर-कानूनी बन गए।
  2. इन सभी गतिविधियों पर पाबन्दी लगा दी गई। गाँव वाले जंगलों से लकड़ी चुराने लगे।
  3. यदि वे जंगलों से लकड़ी चुराते समय पकड़े जाते तो उन्हें वन-रक्षकों को घूस देनी पड़ती थी या वे उनसे मुफ्त खाने-पीने की माँग करते थे।
  4. जलाने हेतु लकड़ी एकत्र करने वाली महिलाएँ दुःखी हुईं क्योंकि उन्हें पुलिस एवं जंगल के चौकीदारों द्वारा परेशान किया जाता था।

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प्रश्न 11.
ब्लैण्डाँगडिएन्स्टेन व्यवस्था क्या थी?
उत्तर:
ब्लैण्डाँगडिएन्स्टेन जावा की डच सरकार और वहाँ के वनवासियों के बीच किया गया एक समझौता था। इस प्रणाली के अन्तर्गत डचों ने इस शर्त पर भूमि पर कर न देने की कुछ गाँवों को छूट दे दी थी कि यदि वे सामूहिक रूप से पेड़ काटने तथा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए श्रम तथा भैंसें मुफ्त में प्रदान करने के लिए कार्य करेंगे। इस व्यवस्था को ब्लैण्डाँगडिएन्स्टेन के नाम से जाना गया। बाद में, कर छूट की अपेक्षा, ग्रामीणों को थोड़ी-सी मजदूरी दी जाने लगी, परन्तु वन भूमि पर कृषि करने के उनके अधिकार पर रोक लगा दी थी।

प्रश्न 12.
सुरोन्तिको सामिन कौन था? उसका क्या कहना था?
उत्तर:
सुरोन्तिको सामिन जावा के रान्दुब्लातुंग गाँव का निवासी था। सन् 1890 ई. के आस-पास उसने सागौन के जंगलों पर राजकीय मालिकाना अधिकार के प्रश्न पर डच सरकार का विरोध किया। उसका कहना था कि हवा, पानी, भूमि एवं लकड़ी डच सरकार की बनाई हुई नहीं है, अत: उन पर उसका कोई अधिकार नहीं हो सकता।

प्रश्न 13.
किन कारणों से औपनिवेशिक काल में कृषि का विस्तार तेजी से हुआ? किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
औपनिवेशिक काल में कृषि का विस्तार तेजी से हुआ जिसके प्रमुख दो कारण अग्रलिखित थे
1. कच्चे पदार्थों की आवश्यकता तथा खाद्य समस्या:
अंग्रेजों ने जूट, चीनी, कपास तथा नील आदि व्यापारिक फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया क्योंकि ब्रिटिश उद्योगों में इनका प्रयोग कच्चे पदार्थों के रूप में होता था। उन्होंने खाद्यान्नों के उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया क्योंकि बढ़ती हुई शहरी जनसंख्या के भोजन के लिए इनकी आवश्यकता थी।

2. अनुत्पादित वन:
19वीं शताब्दी के आरम्भ में औपनिवेशिक शासन ने सोचा था कि वन अनुत्पादित हैं। जिन्हें कृषि के अधीन लाकर कृषि उत्पादों को किया जा सकता है तथा राज्य की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न 14.
जंगलों पर वन विभाग का नियन्त्रण स्थापित हो जाने से क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर:
जंगलों पर वन विभाग का नियन्त्रण स्थापित हो जाने से निम्नलिखित प्रभाव पड़े

  1. जंगलों पर वन विभाग का नियन्त्रण स्थापित हो जाने से वन-उत्पादों का व्यापार प्रारभ हो गया। बहुत-सी व्यापारिक कम्पनियाँ व्यापार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत आईं।
  2. ब्रिटिश सरकार ने कई बड़ी यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों को विशेष क्षेत्रों में वन उत्पादों के व्यापार की इजारेदारी सौंप दी।
  3. लोगों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियाँ प्रभावित हुईं। स्थानीय लोगों द्वारा शिकार करने और पशुओं को चराने पर पाबन्दी लगा दी गई।
  4. अनेक चरवाहे और घुमंतू समुदाय को “अपराधी कबीला” कहा जाने लगा। इन्हें ब्रिटिश सरकार की निगरानी में फैक्ट्रियों, खदानों तथा बागानों में काम करने के लिए मजबूर किया गया।

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प्रश्न 15.
वनों के संरक्षण के विभिन्न उपायों को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
वनों का संरक्षण निम्नलिखित उपायों द्वारा किया जा सकता है

  1. हमें वृक्षारोपण का कार्य करते रहना चाहिए। यह कार्य उपलब्ध खाली स्थान, नदियों एवं बाँधों के आस-पास के क्षेत्र में अच्छे ढंग से हो सकता है।
  2. वन हमारी राष्ट्रीय निधि हैं। हमारा दायित्व वनों के अन्धाधुन्ध कटाव को रोकना है।
  3. आज के वैज्ञानिक युग में हमें ऐसी फसलों की खोज कर लेनी चाहिए जो पहाड़ी, शुष्क, रेतीली एवं बंजर भूमि में सरलता से उगाई जा सके।
  4. हमें वनों पर दबाव कम करने के लिए प्लास्टिक, कागज, बोर्ड आदि से निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 16.
इस कथन को सिद्ध कीजिए कि-‘वन राष्ट्र की निधि हैं।
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र की प्रगति में वन संसाधनों का विशेष,महत्व होता है। वनों से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं

  1. वर्षा कराने में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वृक्ष वातावरण को शीतल बना देते हैं, जिससे वाष्प-कणों से तृप्त वायु उनके ऊपर से गुजरती है, तो वह ठण्डी होकर वर्षा का रूप धारण कर लेती है। यह वर्षा कृषि के लिए अत्यन्त लाभदायक सिद्ध होती है।
  2. वनों का मृदा अपरदन रोकने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। वृक्ष बहने वाले जल के रास्ते में अवरोधक बनकर खड़े हो जाते हैं और जल के वेग को कम कर देते हैं, जिससे मृदा-कणों को बहाकर ले जाने की उतनी शक्ति नहीं रहती।
  3. वनों से मूल्यवान पदार्थ, जैसे-लकड़ी, गोंद, रबड़ आदि प्राप्त होते हैं। वनों से प्राप्त कच्ची लकड़ी से कागज की लुगदी एवं कच्चे रबड़ से मोटरगाड़ियों के लिए टायर आदि निर्मित किए जाते हैं।
  4. वन में उगने वाले घास-फूस पर अनेक पशुओं का जीवन निर्भर करता है।
  5. वनों से प्राप्त जड़ी-बूटियों से अनेक प्रकार की दवाइयाँ बनायी जाती हैं।
  6. वन नदियों की बाढ़ को रोकने एवं उनकी गति धीमी करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
  7. वनों से अनेक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
  8. वन सूखे को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि वन ‘राष्ट की निधि हैं’।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बस्तर के लोगों की बगावत की विस्तार से व्याख्या करें।
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बस्तर के लोगों की बगावत की व्याख्या निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत की जा सकती है
1. बगावत के कारण:

  • सन् 1905 ई. में, ब्रिटिश सरकार ने वनों का दो-तिहाई आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा।
  • स्थानान्तरित कृषि पर प्रतिबन्ध लगाया।
  • शिकार करने तथा वन उत्पादों को एकत्र करने पर प्रतिबन्ध लगाया। इन समस्त कदमों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए स्थानीय लोगों को मजबूर किया।

2. बगावत की कार्य-प्रणाली:

  • लोगों ने अपनी ग्राम पंचायतों, बाजारों तथा त्योहारों के मौके पर इन सब विषयों पर चर्चा करनी आरम्भ कर दी। कांगेर वन के धुरवा समुदाय द्वारा इस सम्बन्ध में पहल की गई, जहाँ सबसे पहले आरक्षण लागू हुआ। इस विद्रोह का मुख्य नेता नेथानार गाँव का गुंडा धूर था।
  • सन् 1910 ई. में गाँवों में आम की शाखाओं, मिट्टी के ढेले, मिर्ची तथा तीरों को घुमाना आरम्भ हुआ वास्तव में, ये ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बगावत करने के लिए, ग्रामीणों को आमन्त्रित करने के सन्देश थे। प्रत्येक गाँव ने बगावत के खर्चों के लिए कुछ न कुछ योगदान दिया।
  • बाजारों को लूटा गया, अधिकारियों तथा व्यापारियों के घरों, स्कूलों तथा पुलिस स्टेशनों को लूटा एवं जलाया गया और अनाज का पुनर्वितरण किया गया। जिन पर आक्रमण किया गया, उनमें से अधिकतर औपनिवेशिक शासन तथा दमन के कानूनों से सम्बन्ध रखते थे।

3. विद्रोह का दमन:
ब्रिटिश सरकार ने बगावत को दबाने के लिए सेना भेजी। आदिवासी नेताओं ने समझौता करने का प्रयास किया, परन्तु अंग्रेजों ने उनके शिविरों को घेरकर उन पर गोली चलाई। इसके बाद उन्होंने गाँव की ओर मार्च किया तथा बगावत में भाग लेने वालों को सजा दी। अधिकतर गाँव खाली हो गए क्योंकि लोग जंगलों में भाग गए थे। अंग्रेजों को फिर से नियन्त्रण पाने में तीन महीने लग गए, परन्तु वे गुंडा धूर को कभी पकड़ न पाए।

4. बगावत के परिणाम:
बागियों की बहुत बड़ी जीत यह रही कि आरक्षण पर कार्य कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया तथा आरक्षित क्षेत्र को भी सन् 1910 ई. से पहले की योजना से लगभग आधा कर दिया गया।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 भारत में खाद्य सुरक्षा

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 भारत में खाद्य सुरक्षा

→ मानव के भोजन के सम्बन्ध में कहा जाता है कि जिस प्रकार साँस लेने के लिए वायु आवश्यक है उसी प्रकार जीवन के लिए भोजन की आवश्यकता है।

→ खाद्य सुरक्षा से आशय है, सभी लोगों के लिए हमेशा भोजन की उपलब्धता, पहुँच और इसे प्राप्त करने की सामर्थ्य होना।

→ खाद्य सुरक्षा देश में प्रचलित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शासकीय सतर्कता और खाद्य सुरक्षा के खतरे की स्थिति में सरकार द्वारा की गई कार्यवाही पर निर्भर करती है।

→ देश में खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता प्राकृतिक आपदाओं के समय देश की समस्त जनसंख्या को खाद्य असुरक्षा ग्रस्त होने से बचाव के लिए है। प्राकृतिक आपदाओं के समय खाद्य सुरक्षा में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

→ देश में खाद्य सुरक्षा के अभाव में व्यापक भुखमरी और अकाल जैसी स्थितियों के पैदा होने का डर रहता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 भारत में खाद्य सुरक्षा

→ सन् 1943 में बंगाल प्रान्त में पड़े अकाल में लगभग 30 लाख लोगों की मृत्यु हुई। स्वतन्त्र भारत में बंगाल जैसी स्थिति कभी पैदा नहीं हुई लेकिन उड़ीसा के कालाहांडी तथा काशीपुर ऐसे स्थान हैं जहाँ अकाल जैसी दशाएँ कई वर्षों से बनी हुई हैं।

→ भारत में खाद्य एवं पोषण की दृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित भूमिहीन-कृषक, पारम्परिक दस्तकार, छोटे-मोटे कामगार श्रमिक, निराश्रित और भिखारी आदि हैं।

→ कुपोषण से सबसे अधिक महिलायें प्रभावित होती हैं यह गम्भीर चिंता का विषय है क्योंकि इससे अजन्मे बच्चों को कुपोषण का खतरा रहता है। खाद्य असुरक्षा से ग्रस्त आबादी का एक बड़ा भाग गर्भवती तथा दूध पिला रही महिलाओं तथा पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का है।

→ भारत में खाद्य असुरक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक लोगों की संख्या उत्तर प्रदेश के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी भाग, बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, पश्चिम-बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ भाग हैं।

→ खाद्य पदार्थों की सुरक्षा से न केवल वर्तमान की भुखमरी समाप्त होती है बल्कि भविष्य में भुखमरी का खतरा भी नहीं रहता।

→ जनसंख्या में भुखमरी के दो आयाम होते हैं-दीर्घकालिक और मौसमी भुखमरी।

→ स्वतन्त्रता के बाद भारतीय नीति-निर्माताओं ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नयी रणनीति अपनाई जिसकी परिणति हरित क्रान्ति के रूप में हुई।

→ भारत सरकार द्वारा तैयार की गई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था-बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अनाज की उपलब्धता और भी सुनिश्चित हो गई।
भारतीय खाद्य निगम अधिशेष उत्पादन वाले राज्यों में किसानों द्वारा उत्पादित खाद्यान्न को न्यूनतम समर्थित मूल्य पर खरीद कर बफर स्टॉक करता है।

→ भारतीय खाद्य निगम द्वारा अधिप्राप्त अनाज को सरकार विनियमित राशन की दुकानों के माध्यम से समाज के गरीब . वर्गों में वितरित कराती है जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहलाती है।

→ भारत में राशन व्यवस्था का श्रीगणेश सन् 1940 के दशक में बंगाल के अकाल की पृष्ठभूमि में हुआ।

→ गरीबी के उच्च स्तरों को ध्यान में रखते हुए सन् 1970 के दशक के मध्य खाद्य सम्बन्धी तीन महत्वपूर्ण अंतःक्षेप कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए। जिनमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल-विकास सेवाएँ और काम के बदले अनाज कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए।

→ प्रारम्भ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली सभी के लिये समान रूप से उपलब्ध थी लेकिन बाद में इसे अधिक दक्ष और लक्षित बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर संशोधित किया गया।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 4 भारत में खाद्य सुरक्षा

→ 1992 में देश में 1700 ब्लॉकों में संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (आर. पी. डी. एस.) शुरू की गयी।

→ जून 1997 लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टी. पी.डी.एस.) प्रारंभ की गई।

→ सन् 2000 में दो विशेष योजनाएँ-अंत्योदय अन्न योजना और अन्नपूर्णा योजना प्रारम्भ की गई। ये योजनाएँ क्रमश: ‘गरीबों में भी सर्वाधिक गरीब’ और ‘दीन वरिष्ठ नागरिक’ समूहों पर लक्षित हैं।

→ वर्ष 2014 में एफ. सी. आई. के पास गेहूँ और चावल का भंडार 65.2 करोड़ टन था जो न्यूनतम बफर प्रतिमान से बहुत अधिक था।

→ पी. डी. एस. गेहूँ की प्रति माह प्रति व्यक्ति खपत 2004-05 से ग्रामीण एवं नगरीय भारत में दोगुनी हो गई है।

→ देश की खाद्य-सुरक्षा व्यवस्था में सरकार की भूमिका के साथ-साथ अनेक सहकारी समितियाँ और गैर-सरकारी संगठन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जैसे महाराष्ट्र में एकेडमी ऑफ डेवलपमेंट साइंस का अनाज बैंक कार्यक्रम है।

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JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

→ स्वतन्त्र भारत के समक्ष सर्वाधिक कठिन चुनौती निर्धनता की समस्या है।

→ भारत एवं विश्व में निर्धनता की प्रवृतियों को निर्धनता रेखा की अवधारणा के माध्यम से समझाया गया है।

→ जिन्हें हम निर्धन समझते हैं वे गाँवों के भूमिहीन श्रमिक या शहरों की भीड़ भरी झुग्गियों में रहने वाले लोग हो सकते हैं। ये निर्धन लोग दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी या ढाबों पर काम करने वाले बाल श्रमिक अथवा भिखारी भी हो सकते हैं।

→ एक व्यक्ति तब निर्धन माना जाता है जब उसकी आय या उपभोग का स्तर इतना कम होता है कि वह अपनी मूलभूत न्यूनतम आवश्यकताओं को भी पूर्ण नहीं कर पाता है।

→ महात्मा गाँधी सदैव इस बात पर जोर देते थे कि भारत सही मायने में तभी स्वतन्त्र होगा जब यहाँ का सबसे निर्धन व्यक्ति भी मानवीय व्यथा से मुक्त होगा।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

→ सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा निर्धनता को अनेक सूचकों जैसे आय और उपभोग के स्तर, निरक्षरता के स्तर, कुपोषण के कारण रोग प्रतिरोधी क्षमता की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, रोजगार के अवसरों की कमी, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता की कमी आदि के माध्यम से देखा जाता है।

→ निर्धनता के प्रति असुरक्षा एक माप है जो कुछ विशेष समुदायों या व्यक्तियों के आने वाले वर्षों में निर्धन होने या बने रहने की सम्भावना को प्रदर्शित करता है।

→ असुरक्षा का निर्धारण परिसम्पत्तियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का जीविका के लिए विभिन्न समुदायों के पास उपलब्ध विकल्पों से होता है।

→ निर्धनता रेखा की अवधारणा के माध्यम से निर्धनता का आकलन सामान्य आय एवं उपभोग स्तर के आधार पर समझाया जाता है।

→ व्यक्तियों की मूल आवश्यकताएँ काल एवं स्थान के अनुसार भिन्न होती हैं इसीलिए काल एवं स्थान के अनुसार निर्धनता रेखा भी भिन्न होती है।

→ निर्धनता रेखा का आकलन सामान्यतः प्रत्येक 5 वर्ष बाद ‘राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन’ द्वारा किया जाता है।

→ भारत में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के परिवार निर्धनता के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं। आर्थिक समूहों ‘ में सर्वाधिक असुरक्षित समूह-ग्रामीण कृषि श्रमिक परिवार व अनियमित मजदूर परिवार हैं।

→ निर्धन परिवार के सभी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है किन्तु कुछ लोगों, जैसे महिलाओं, वृद्धों और लड़कियों को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

→ वर्ष 2011-12 में भारत का निर्धनता अनुपात 22 प्रतिशत था, लेकिन सभी राज्यों में इसकी दर एक समान नहीं है।

→ भारत के उड़ीसा, असम, बिहार, बंगाल, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश राज्यों में निर्धनता अन्य राज्यों की अपेक्षा एक गम्भीर समस्या है।

→ पंजाब और हरियाणा राज्यों में उच्च कृषि वृद्धि दर के द्वारा, केरल में मानव संसाधन विकास द्वारा तथा पश्चिमी बंगाल में भूमि सुधार उपायों के माध्यम से निर्धनता को कम करने में सफलता हासिल की गई है।

→ भारत में निर्धनता के प्रमुख कारण हैं

  • ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान आर्थिक विकास का निम्न स्तर।
  • जनसंख्या में उच्च वृद्धि दर का पाया जाना।
  • गाँवों से शहरों की ओर पलायन की प्रवृत्ति ने नगरीय क्षेत्रों में निर्धनता को बढ़ावा दिया।
  • भूमि और संसाधनों का असमान वितरण।
  • भारत में भूमि संसाधनों की कमी और भूमि का उप विभाजन।
  • भारतीयों में सामाजिक दायित्वों और धार्मिक अनुष्ठानों की प्रवृत्ति का अधिक पाया जाना।
  • अत्यधिक ऋणग्रस्तता भी निर्धनता का प्रमुख कारण है।

→ भारत में निर्धनता उन्मूलन हेतु उपाय

  • भारत सरकार द्वारा आर्थिक संवृद्धि दर को प्रोत्साहन देना।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) पारित किया गया।
  • राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम प्रारम्भ करना।
  • प्रधानमन्त्री रोजगार योजना शुरू करना।
  • ग्रामीण रोजगार सृजन योजना लागू करना।
  • स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना प्रारम्भ करना।
  • प्रधानमन्त्री ग्रामोदय योजना प्रारम्भ करना।
  • अंत्योदय अन्न योजना प्रारम्भ करना आदि।

→ देश की प्रगति के बाद भी निर्धनता उन्मूलन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। आशा है कि अगले 10-15 वर्षों में निर्धनता उन्मूलन में अधिक प्रगति होगी जो प्रमुख रूप से उच्च आर्थिक संवृद्धि, सभी को प्राथमिक शिक्षा उपलब्धि पर जोर, जनसंख्या विकास में कमी, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बढ़ते सशक्तीकरण से सम्भव हो सकेगा।

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JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

→ जब शिक्षा, प्रशिक्षण तथा स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश किया जाता है तो जनसंख्या मानव पूँजी में परिवर्तित हो जाती है।

→ जनसंख्या, उत्पादन में अपनी भूमिका एक संसाधन के रूप में निभाती है जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद के सृजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। यह जनसंख्या का एक सकारात्मक पहलू है।

→ यही जनसंख्या उस समय एक समस्या के रूप में सामने आती है जब इसके लिए प्राथमिक आवश्यकताओं; जैसे- भोजन, वस्त्र, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ति करना होता है। यह जनसंख्या का एक नकारात्मक पहलू है।

→ जब मानवीय संसाधन रूपी जनसंख्या को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से विकसित किया जाता है तब हम इसे मानव-पूँजी निर्माण कहते हैं जो कि देश की उत्पादन क्षमता में भौतिक पूँजी निर्माण की भाँति वृद्धि करता है।

→ समाज में उच्च आय से केवल शिक्षित और स्वस्थ लोगों को ही लाभ नहीं होता बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से समाज के सभी लोगों को लाभ होता है। इसीलिए मानव पूँजी उत्पादन के अन्य संसाधनों से श्रेष्ठ बताई जाती है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

→ बच्चों में शिक्षा के द्वारा उनकी गुणवत्ता को बढ़ाया जाता है जिससे कुल उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ देश की संवृद्धि भी होती है।

→ भूमि और पूँजी में निवेश की भाँति जनसंख्या में निवेश द्वारा भविष्य में उच्च प्रतिफल प्राप्त होता है। जापान जैसे प्राकृतिक संसाधनों से हीन देश मानव संसाधन पर निवेश और कुशल उपयोग करके आज धनी देश बन गये हैं।

→ शिक्षित माता – पिता अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान इसलिए देते हैं कि वे स्वयं शिक्षा और स्वास्थ्य के महत्व से अशिक्षित की अपेक्षा ज्यादा परिचित होते हैं।

→ जनसंख्या की गुणवत्ता साक्षरता – दर, जीवन-प्रत्याशा से निरूपित व्यक्तियों के स्वास्थ्य और देश के लोगों द्वारा प्राप्त कौशल निर्माण पर निर्भर करती है। मानव के विभिन्न क्रियाकलापों को प्राथमिक , द्वितीयक व तृतीयक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, इन्हीं क्षेत्रों के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।

→ मानव द्वारा धनोपार्जन हेतु जो क्रियाएँ की जाती हैं उन्हें आर्थिक क्रियाएँ कहा जाता है।

→ अनार्थिक क्रियाएँ वे क्रियाएँ हैं जो स्व-उपभोग हेतु या दान-पुण्य के लिए की जाती हैं।

→ किसी व्यक्ति के पारिश्रमिक का निर्धारण उसकी योग्यता और शिक्षा के आधार पर किया जाता है।

→ देश की संवृद्धि दर निर्धारण में जनसंख्या की गुणवत्ता महत्वपूर्ण कारक है।

→ शिक्षा व्यक्ति के लिए नये क्षितिज, नई आकांक्षाएँ तथा जीवन मूल्य विकसित करने में अहम् भूमिका निभाती है इसीलिए प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए अनिवार्य किया गया है। लड़कियों की शिक्षा पर भी विशेष बल दिया जा रहा है।

→ सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में शिक्षा पर व्यय सन् 1951-52 के 0.64 प्रतिशत से बढ़कर सन् 2015-16 में 3 प्रतिशत के लगभग हो गया है। साक्षरता दर 1951 के 18 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 74 प्रतिशत हो गई है।

→ वर्ष 2011 में केरल के कुछ जिलों में साक्षरता दर 94 प्रतिशत है जबकि बिहार में 62 प्रतिशत ही है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

→ बारहवीं योजना में 18-23 वर्ष आयु वर्ग के नामांकन में 25.2 प्रतिशत तक की वृद्धि 2017-18 में तथा वर्ष 2020-21 तक 30 प्रतिशत तक वृद्धि करने का प्रयास जारी है।

→ भारत में सर्वशिक्षा अभियान हेतु पाठ्यक्रम, स्कूल लौटो शिविर तथा मिड-डे-मील जैसी योजनाओं के द्वारा सभी को शिक्षा प्रदान करने की सरकार द्वारा कोशिशें की जा रही हैं।

→ किसी फर्म में स्वस्थ व्यक्तियों को ही रोजगार दिया जाता है क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति ही उत्पादन वृद्धि में सहयोग कर सकता है।

→ सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं, परिवार कल्याण कार्यक्रमों और पौष्टिक भोजन की उपलब्धि से जनसंख्या की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि, शिशु मृत्यु दर तथा जन्म दर में कमी आई है।

→ आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार 2014 में जीवन प्रत्याशा 68.3 वर्ष से अधिक हो गयी है। 2016 में शिशु मृत्युदर घटकर 34 पर आ गयी है।

→ बेरोजगार उस व्यक्ति को कहा जाता है जो प्रचलित मजदूरी पर काम करने की इच्छा रखता है लेकिन उसे कोई काम नहीं मिलता है। बेरोजगारों में केवल 15 वर्ष से 59 वर्ष के लोगों को शामिल किया जाता है।

→ भारतीय ग्रामों में मौसमी व प्रच्छन्न बेरोजगारी तथा शहरों में शिक्षित बेरोजगारी दिखाई देती है।

→ बेरोजगारी के कारण तेजी से स्वास्थ्य स्तर में गिरावट तथा विद्यालय प्रणाली से अलगाव में वृद्धि होने लगती है।

→ शिक्षा के माध्यम व व्यक्ति की लगन और मेहनत से कई प्रकार के आधुनिक आर्थिक क्रियाकलापों को जन्म देकर देश की एक बड़ी समस्या बेरोजगारी को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

JAC Board Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

→ एक काल्पनिक गाँव पालमपुर की कहानी का मूल उद्देश्य उत्पादन सम्बन्धी क्रियाओं; जैसे-कृषि, लघुस्तरीय विनिर्माण, डेयरी, परिवहन आदि से परिचित कराना है।

→ उत्पादन की इन समस्त क्रियाओं को पूरा करने के लिए विभिन्न संसाधनों; जैसे-भूमि, पूँजी, श्रम व मानवकृत वस्तुओं आदि की आवश्यकता होती है।

→ पालमपुर गाँव सड़क से जुड़ा हुआ है। इस सड़क पर बैलगाड़ी, भैंसागाड़ी के साथ-साथ मोटर साइकिल, जीप, ट्रैक्टर, ट्रक आदि देखे जा सकते हैं। इस गाँव में एक-तिहाई परिवार दलित वर्ग के रहते हैं जिनके मकान घास-फंस और मिट्टी के बने हुए हैं।

→ पालमपुर गाँव में विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि का पर्याप्त विकसित तन्त्र मौजूद है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

→ भारतीय गाँवों में उत्पादन की प्रमुख क्रिया खेती (कृषि) है। इस गाँव में कृषि के साथ-साथ लघु व कुटीर उद्योग, परिवहन कार्य व दुकानदारी भी सहायक क्रियाओं के रूप में पाई जाती हैं। इन्हें गैर कृषि क्रियायें कहा जाता है।

→ उत्पादन का उद्देश्य उन वस्तुओं और सेवाओं को उपलब्ध कराना है जिनकी मानव को आवश्यकता होती है। उत्पादन के लिए आवश्यक तत्व हैं- भूमि तथा प्राकृतिक संसाधन (वन, खनिज, जल), श्रम-मानवीय व यांत्रिक, भौतिक पूँजी (भवन, मशीन, औजार), मानव पूँजी (ज्ञान व उद्यम) आदि।

→ पालमपुर गाँव की लगभग 75% जनसंख्या कृषि कार्यों से अपनी आजीविका चलाती है। भूमि माप की मानक इकाई हेक्टेयर है किन्तु गाँव में भूमि की माप-बीघा, गुंठा जैसी क्षेत्रीय इकाइयों में भी की जाती है।

→ पालमपुर में समस्त भूमि पर खेती की जाती है, कोई भाग खाली नहीं छोड़ा जाता। यहाँ खरीफ व रबी दोनों फसलों के साथ-साथ आलू व गन्ने की खेती भी की जाती है।

→ पालमपुर में किसान एक वर्ष में दो के स्थान पर तीन फसलें लेते हैं क्योंकि यहाँ सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को बहुविध फसल प्रणाली कहते हैं।

→ सम्पूर्ण भारत में केवल 40% से भी कम क्षेत्र में सिंचाई की उचित व्यवस्था है, शेष क्षेत्र में कृषि मुख्यतः वर्षा पर ही आधारित है। एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से अधिक फसलें पैदा करने को ‘बहुविध फसल प्रणाली’ के नाम से जाना जाता है।

→ सन् 1960 के दशक के अन्त में हुई हरित क्रान्ति के कारण किसानों को एच.वाई.वी. बीज तथा प्राकृतिक खाद के स्थान पर रासायनिक खाद तथा कीटनाशकों का प्रयोग समझ में आया, जिससे उनके कृषि उत्पादनों में गुणात्मक वृद्धि हुई।

→ अनेक क्षेत्रों में हरित क्रान्ति के कारण उर्वरकों के अधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे कम हो रही है। नलकपों से लगातार सिंचाई के कारण भौम जल-स्तर कम हो रहा है। अतः भविष्य में विकास को सुनिश्चित करने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने की अधिक आवश्यकता है।

→ पालमपुर गाँव के लगभग एक -तिहाई परिवार जो दलित हैं उनके पास भूमि नहीं है लेकिन फिर भी वे खेती का कार्य दूसरों की भूमि पर करते हैं जिन्हें ‘खेतिहर मजदूर’ के नाम से जाना जाता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

→ ग्रामीण परिवेश में खेतिहर मजदूरों की दयनीय दशा है क्योंकि सरकार द्वारा खेतों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए एक दिन का न्यूनतम वेतन 300/- (मार्च 2017) भी नहीं मिलता।

→ आधुनिक तरीकों से कृषि करने के लिए अब ज्यादा पूँजी की जरूरत होती है, छोटे किसान इस धन की व्यवस्था साहूकारों या महाजनों से करते हैं जिनकी ब्याज दर बहुत ऊँची होती है, जिसे चुकाने के लिए इन्हें बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं।

→ छोटे और मझोले किसानों के पास कृषि उत्पादन के अधिशेष इतने नहीं बचते कि वे बचत कर सकें या अगली फसल के लिए पूँजी की व्यवस्था कर सकें लेकिन बड़े किसानों के पास पर्याप्त अधिशेष के चलते वे कृषि कार्यों के लिए मशीनें ट्रैक्टर, हार्वेस्टर आदि की व्यवस्था भी कर लेते हैं।

→ गाँवों में कृषि के अलावा अब डेयरी उद्योग भी पनपने लगे हैं। इसमें दुग्ध संग्रहण एवं शीतलन के द्वारा दूध को दूर-दराज के शहरों और कस्बों में भेजा जाता है।

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JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार 

JAC Board Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

→ अधिकार लोगों के तार्किक दावे हैं, इन्हें समाज से स्वीकृति तथा अदालतों द्वारा मान्यता मिली होती है।

→ लोकतन्त्र की स्थापना के लिए अधिकारों का होना अति आवश्यक है। संविधान में अंकित मौलिक अधिकार भारतीय प्रजातन्त्र को दृढ़ तथा जीवित रखने का अधिकार है।

→ लोकतन्त्र में प्रत्येक नागरिक को वोट देने एवं चुनाव लड़कर प्रतिनिधि चुने जाने का अधिकार प्राप्त है। लोकतन्त्र में अधिकार बहुसंख्यकों के दमन से अल्पसंख्यकों की रक्षा करते हैं।

→ अधिकांश लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थाओं में नागरिकों के अधिकार संविधान में लिखित रूप में दर्ज होते हैं। भारत में इसी तरह की व्यवस्था है। यहाँ इन्हें मौलिक अधिकार कहा जाता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार 

→ हमारा संविधान नागरिकों को छ: मौलिक अधिकार प्रदान करता है जिनमें

  • समानता का अधिकार
  • स्वतन्त्रता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार
  • सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार एवं
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार है।

→ भारतीय संविधान के अनुसार सरकार किसी व्यक्ति को कानून के सामने समानता या कानून से संरक्षण के मामले में समानता के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती।

→ भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की, शान्तिपूर्ण प्रदर्शन, संगठन बनाने, देश में कहीं भी जाने-आने एवं बसने, कोई भी काम धन्धा करने की स्वतंत्रता दी है।

→ शोषण के खिलाफ संविधान में तीन बातों का निषेध किया है जिनमें मनुष्य जाति का अवैध व्यापार, बेगार (जबरन काम लेना) तथा बाल मजदूरी को शामिल किया गया है।

→ किसी भी व्यक्ति को उसके जीवित रहने के अधिकार और निजी स्वतन्त्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।

→ देश के प्रत्येक नागरिक को अपना धर्म मानने, उस पर आचरण करने एवं उसका प्रचार करने का अधिकार है।

→ भाषा या संस्कृति के आधार पर अल्पसंख्यकों को संविधान में अधिकार दिये गये हैं कि वे अपनी भाषा एवं संस्कृति को बचा सकें एवं अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थान स्थापित कर सकें।

→ मौलिक अधिकार विधायिका, कार्यपालिका एवं सरकार द्वारा गठित किसी भी अन्य प्राधिकारी की गतिविधियों तथा फैसलों से ऊपर है।

→ मौलिक अधिकारों के हनन के मामले में भी पीड़ित व्यक्ति न्याय पाने के लिए तुरन्त न्यायालय की शरण में जा सकता है।

→ मानवाधिकार आयोग का कार्य मानवाधिकार के उल्लंघन के किसी भी मामले में स्वतन्त्र और विश्वसनीय जाँच करना

→ 14 वर्ष तक के समस्त बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार 

→ प्रतिज्ञा पत्र – नियमों और सिद्धान्तों को बनाये रखने का व्यक्ति, समूह या देशों का वायदा। ऐसे बयान अथवा सन्धि पर हस्ताक्षर करने वाले पर इसके पालन की कानूनी बाध्यता होती है।

→ दलित – वह व्यक्ति जो उन जातियों से सम्बन्ध रखता है, जिन्हें निम्न समझा जाता है एवं दूसरों द्वारा स्पर्श नहीं किया जाता। दलितों को अनुसूचित जाति, कमजोर वर्ग आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।

→ दावा – एक व्यक्ति की अपने साथी नागरिकों, समाज अथवा सरकार से कानूनी या नैतिक अधिकारों की माँग दावा कहलाती है।

→ सम्मन – न्यायालय द्वारा जारी एक आदेश, जिसमें व्यक्ति को अदालत के सामने पेश होने के लिए कहा गया हो।

→ अवैध व्यापार – अनैतिक कार्यों के लिए पुरुष, महिलाओं अथवा बच्चों का खरीदना एवं बेचना।

→ जातीय समूह – मानव जाति का एक ऐसा समूह जिसमें लोग आपस में एक मूल या निश्चित वंश के हों। एक जातीय समूह के लोग सांस्कृतिक पद्धतियों, धार्मिक विश्वासों एवं ऐतिहासिक स्मृतियों से बँधे होते हैं।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार 

→ रिट – सरकार को न्यायालय द्वारा भेजा गया एक औपचारिक आदेश, जिसे केवल सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय ही जारी कर सकता है।

→ अधिकार – अधिकार जीवन की वे आवश्यक शर्ते हैं, जिसके बिना कोई भी व्यक्ति पूर्ण, प्रसन्न एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन नहीं जी सकता।

→ एमनेस्टी इण्टरनेशनल – मानवाधिकारों के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन। यह संगठन सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर स्वतन्त्र रिपोर्ट जारी करता है।

→ बेगार प्रथा – वह प्रथा जिसमें मजदूरों को अपने मालिक के लिए मुफ्त या बहुत थोड़े अनाज आदि के लिए जबरन काम करना पड़ता है।

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JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

JAC Board Class 9th Social Science Notes  Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

→ राष्ट्रपति देश का राष्ट्राध्यक्ष होता है एवं औपचारिक रूप से देश का सबसे बड़ा अधिकारी होता है।

→ प्रधानमन्त्री सरकार का प्रमुख होता है और सरकार की ओर से अधिकांश अधिकारों का प्रयोग वही करता है।

→ प्रधानमन्त्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति मन्त्रियों को नियुक्त करता है। मन्त्रिमण्डल की बैठकों में ही राजकार्य से जुड़े अधिकतर निर्णय लिये जाते हैं।

→ प्रधानमन्त्री को लोकसभा के सदस्यों के बहुमत का समर्थन प्राप्त होना आवश्यक होता है।

→भारत सरकार ने सन् 1979 ई. में दूसरा पिछड़ी जाति आयोग गठित किया था। इसके अध्यक्ष बी. पी. मण्डल थे और इसी के कारण इसे मण्डल आयोग कहते हैं।

→ मण्डल आयोग ने सन् 1981 में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की। आयोग द्वारा सुझाये गये उपायों में एक सिफारिश थी सरकारी नौकरियों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण देना।

→ 13 अगस्त सन् 1990 को भारत सरकार ने एक आदेश जारी करके सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

→ आरक्षण के इस फैसले पर पूरे देश में विवाद उत्पन्न हुआ तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद एक और आदेश 8 सितम्बर 1993 को जारी किया गया जिसके द्वारा पिछड़े वर्ग के अच्छी स्थिति वाले लोगों को इसके लाभ से वंचित कर दिया गया।

→ सरकारी निर्णय से उठने वाले विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय करते हैं।

→ प्रधानमन्त्री और कैबिनेट ऐसी संस्थाएँ हैं जो समस्त महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले करती हैं। भारत में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय सभा को संसद कहा जाता है। राज्य स्तर पर इसे विधान सभा कहते हैं।

→ हमारे देश में संसद के दो सदन हैं-एक को राज्यसभा तथा दूसरे को लोकसभा कहा जाता है। भारत का राष्ट्रपति संसद का हिस्सा होता है लेकिन वह किसी की सदन का सदस्य नहीं होता। इसीलिए संसद के फैसले राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही लागू होते हैं।

→ किसी भी देश में कानून बनाने का सबसे बड़ा अधिकार संसद को होता है। कानून बनाने या विधि निर्माण का यह कार्य इतना महत्वपूर्ण होता है कि इन सभाओं को विधायिका कहते हैं।

→ राज्यसभा को ‘अपर हाउस’ एवं लोकसभा को ‘लोअर हाउस’ भी कहा जाता है। लोकसभा में सरकार का बजट या धन से सम्बन्धित कोई कानून पारित हो जाए तो राज्यसभा उसे खारिज नहीं कर सकती।

→ किसी भी सामान्य कानून को पारित कराने के लिए दोनों सदनों की सहमति की जरूरत होती है लेकिन दोनों सदनों के बीच कोई मतभेद हो तो अन्तिम फैसला दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में किया जाता है।

→ भारत में प्रधानमन्त्री सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था है। राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या पार्टियों के नेता को ही प्रधानमन्त्री नियुक्त करता है। प्रधानमन्त्री को नियुक्त करने के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री की सलाह पर दूसरे मन्त्रियों को नियुक्त करते हैं। मन्त्रियों में सामान्यतया कैबिनेट मन्त्री, स्वतन्त्र प्रभार वाले राज्यमन्त्री एवं राज्यमन्त्री होते हैं।

→ राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष एवं देश का प्रथम नागरिक होता है। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मण्डल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य एवं राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं। इस प्रकार राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रीति से होता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

→ भारतीय न्यायपालिका में सम्पूर्ण देश के लिए सर्वोच्च न्यायालय, राज्यों में उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय एवं स्थानीय स्तर के न्यायालय होते हैं।

→ राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को प्रधानमन्त्री एवं सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से नियुक्त करता है।

→ किसी भी न्यायाधीश को संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दो तिहाई बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित करके ही हटाया जा सकता है।

→ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को देश के संविधान की व्याख्या का अधिकार है।

→ भारतीय न्यायपालिका के अधिकार और स्वतन्त्रता उसे मौलिक अधिकारों के रक्षक के रूप में काम करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

→ न्यायपालिका सरकार को निर्णय करने की शक्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए हस्तक्षेप करती है तथा सरकारी अधिकारियों को भ्रष्ट आचरण से रोकती है। लोकतन्त्र के लिये स्वतन्त्र और प्रभावशाली न्यायपालिका आवश्यक है।

→ कार्यालय ज्ञापन – सक्षम अधिकारी द्वारा जारी पत्र जिसके माध्यम से सरकार के फैसले अथवा नीति के बारे में बताया जाता है, कार्यालय ज्ञापन कहलाता है।

→ सरकार – संस्थाओं का एक समूह जिसके पास कानून वनाने, न्याय करने और उसकी व्याख्या करने का अधिकार होता है, जिससे राज्य का जीवन सुनिश्चित एवं व्यवस्थित हो सके।

→ विधायिका – विधायिका जनता के प्रतिनिधियों की वह सभा होती है, जिसके पास देश का कानून बनाने का अधिकार होता है। कानून बनाने के अतिरिक्त विधायिका को कर लगाने, बजट बनाने एवं दूसरे वित्त विधेयकों को बनाने का विशेष अधिकार होता है।

→ कार्यपालिका – अधिकार प्राप्त लोगों की एक संस्था जो देश के संविधान और कानून के आधार पर प्रमुख नीति बनाती है, निर्णय लेकर उन्हें लागू करने का कार्य करती है।

→ राजनीतिक संस्था – देश की सरकार एवं राजनीतिक जीवन के आचार को नियमित करने वाली प्रक्रियाओं का समूह राजनीतिक संस्था कहलाती है।

→ न्यायपालिका – एक ऐसी संस्था जिसके पास न्याय करने एवं कानूनी विवादों को निपटाने का अधिकार होता है। देश की सभी अदालतों को न्यायपालिका के नाम से जाना जाता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

→ गठबन्धन सरकार – साधारणतया जब विधायिका में किसी एक दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है तो दो या दो से अधिक राजनैतिक दलों के गठबन्धन से बनी सरकार गठबन्धन सरकार कहलाती है।

→ आरक्षण – भेदभाव के शिकार, वंचित एवं पिछड़े लोगों और समुदायों के लिए सरकारी नौकरियों तथा शैक्षिक संस्थाओं में पद एवं सीटें आरक्षित करने की नीति आरक्षण कहलाती है।

→ राज्य – निश्चित क्षेत्र में फैली राजनीतिक इकाई जिसके पास संगठित सरकार हो एवं घरेलू व विदेश नीतियों को बनाने का अधिकार हो। सरकारें बदल सकती हैं पर राज्य स्थाई रूप से बना रहता है।

→ सामान्य बोलचाल – की भाषा में देश, राष्ट्र एवं राज्य को समानार्थी के रूप में प्रयोग किया जाता है। राज्य शब्द का एक अन्य प्रयोग किसी देश के अन्दर की प्रशासनिक इकाइयों अथवा प्रान्तों के लिए भी होता है। इसी अर्थ में राजस्थान, झारखण्ड, उत्तराखण्ड. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि भी राज्य कहे जाते हैं।

→ संसद – देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था। इस संस्था को विभिन्न देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। भारत में इसे ‘संसद’ कहा जाता है।

→ जनहित याचिका – यदि सरकार की कार्यवाहियों से आम जनता के हितों को कोई नुकसान पहुंचता है तो इस सम्बन्ध में न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है। इसे जनहित याचिका कहते हैं!

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JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

JAC Board Class 9th Social Science Notes  Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

→ अधिकांश लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्थाओं में लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करते हैं। लोकतान्त्रिक देशों में तो चुनाव होते ही हैं परन्तु अधिकांश गैर लोकतान्त्रिक देशों में भी किसी न किसी तरह के चुनाव होते हैं। चुनाव का अभिप्राय राजनैतिक प्रतियोगिता या प्रतिद्विन्द्विता है। चुनाव के उद्देश्य से देश को अनेक क्षेत्रों में बाँट लिया गया है। इन्हें निर्वाचन क्षेत्र कहते हैं।

→ भारत में लोक सभा एवं विधान सभाओं के चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष बाद होते हैं। पाँच वर्ष के पश्चात् सभी चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है। लोक सभा और विधान सभाएँ भंग हो जाती हैं। सभी चुनाव क्षेत्रों में एक ही दिन या एक छोटे अन्तराल में अलग-अलग दिन चुनाव होते हैं। इसे आम चुनाव कहते हैं।

→ कई बार केवल एक क्षेत्र में चुनाव होता है जो किसी सदस्य की मृत्यु अथवा इस्तीफे से खाली हुआ स्थान भरने के लिए होता है। इसे उपचुनाव कहते हैं।

→ लोक सभा चुनाव के लिए देश को 543 निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र से चुने गये प्रतिनिधियों को ‘संसद सदस्य’ कहते हैं।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

→ हमारे देश के लोकतान्त्रिक चुनावों की एक प्रमुख विशेषता प्रत्येक वोट का बराबर मूल्य है।

→ प्रत्येक राज्य को उसकी विधान सभा की सीटों के हिसाब से विभाजित किया गया है। इन सीटों से चुने गये प्रतिनिधियों को ‘विधायक’ कहते हैं।

→ ग्राम पंचायतों एवं नगर पालिका के चुनावों में भी यही तरीका अपनाया जाता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत व नगर पालिका को कई वार्डों में बाँटा जाता है जो छोटे-छोटे निर्वाचन क्षेत्र हैं। प्रत्येक वार्ड से पंचायत या नगर पालिका के लिए एक सदस्य का चुनाव होता है।

→ हमारे देश में कुछ चुनाव क्षेत्रों को अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लोगों के लिए आरक्षित किया गया है। इन सीटों से केवल आरक्षित वर्ग के व्यक्ति ही चुनाव लड़ सकते हैं। वर्तमान में लोकसभा की 84 सीटें अनुसूचित जातियों एवं 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।

→ कमजोर समूहों के लिए आरक्षण की यह व्यवस्था जिला एवं स्थानीय स्तर पर भी लागू की गई है।

→ ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।

→ लोकतान्त्रिक चुनाव में मतदान की योग्यता रखने वाले व्यक्तियों की सूची चुनाव के बहुत पहले तैयार कर ली जाती है। इस सूची को आधिकारिक रूप से मतदाता सूची कहते हैं। आम बोलचाल की भाषाओं में इसे वोटरलिस्ट कहते हैं। हमार देश में 18 वर्ष और उससे ऊपर की उम्र के सभी नागरिक चुनाव में वोट डाल सकते हैं। जबकि चुनाव में उम्मीदवार बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।

→ प्रत्येक पाँच वर्ष पश्चात् मतदाता सूची का पूर्ण नवीनीकरण किया जाता है।

→ पिछले कुछ वर्षों से चुनावों में फोटो पहचान पत्र की नयी व्यवस्था लागू की गयी है। सरकार ने मतदाता सूची में दर्ज सभी व्यक्तियों को यह पहचान कार्ड देने की कोशिश की है।

→ चुनाव में भाग लेने वाले सभी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार मनोनीत करते हैं जिन्हें सम्बन्धित पार्टी का चुनाव चिह्न और समर्थन मिलता है। पार्टी के मनोनयन को आम बोलचाल की भाषा में ‘टिकट’ कहते हैं।

→ चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्येक उम्मीदवार को एक नामांकन पत्र भरना पड़ता है एवं कुछ धनराशि जमानत के रूप में जमा करानी पड़ती है। हमारे देश में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अन्तिम सूची की घोषणा एवं मतदान की तारीख के मध्य आमतौर पर दो सप्ताह का समय चुनाव प्रचार के लिए दिया जाता है।

→ चुनाव अभियान के दौरान विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ जनता का ध्यान कुछ बड़े मुद्दों पर केन्द्रित कराकर अपनी पार्टी के पक्ष में वोट देने को कहती हैं।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

→ कोई पार्टी या उम्मीदवार मतदाताओं को धमकी या घूस देकर, जाति/धर्म के नाम पर, सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल करके, वोट नहीं माँग सकता है तथा लोक सभा में 25 लाख तथा विधान सभा में 10 लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं कर सकता है।

→ हमारे देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार की आदर्श आचार संहिता को भी स्वीकार किया है।

→ वर्तमान समय में भारत में मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग होने लगा है। मशीन के ऊपर उम्मीदवारों के नाम एवं उनके चुनाव चिह्न बने होते हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों को भी चुनाव अधिकारी चुनाव चिह्न आवंटित करते हैं।

→ मतदान समाप्ति पर सभी वोटिंग मशीनों को सील बन्द करके एक सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया जाता है। फिर निश्चित तारीख पर एक चुनाव क्षेत्र की सभी मशीनों को एक साथ खोला जाता है तथा मतों की गणना की जाती है।

→ हमारे देश में चुनाव एक स्वतन्त्र एवं बहुत ताकतवर चुनाव आयोग द्वारा करवाये जाते हैं। चुनाव आयोग को न्याय पालिका के समान ही स्वतन्त्रता प्राप्त है। चुनाव आयोग का अध्यक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त होता है जिसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं।

→ संसार में शायद ही किसी देश के चुनाव आयोग को भारत के चुनाव आयोग जितने अधिकार प्राप्त होंगे।

→ यदि निर्वाचन आयोग को लगता है कि कुछ मतदान केन्द्रों पर पूरे चुनाव क्षेत्र में मतदान ठीक ढंग से नहीं हुआ है तो वह उसे रद्द करके पुनः मतदान करा सकता है।

→ भारत में अमीर एवं बड़े लोगों की तुलना में निर्धन, अशिक्षित एवं कमजोर लोग अधिक संख्या में मतदान करते हैं।

→ यदि चुनाव स्वतन्त्र और निष्पक्ष न हों तो शासक पार्टी कभी चुनाव नहीं हारेगी, जबकि भारत में लगभग प्रत्येक तीन में से 2 चुनावों में शासक पार्टी चुनाव हारती रही है।

→ निर्वाचन क्षेत्र – एक भौगोलिक क्षेत्र जिसके मतदाता अपने एक प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं।

→ मतदान – अपना प्रतिनिधि चुनने हेतु जनता द्वारा वोट डालने की प्रक्रिया मतदान कहलाती है।

→ आचार संहिता – चुनाव में सभी राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों द्वारा अपनाये गये कुछ कायदे कानून एवं दिशा निर्देश।

→ चुनाव धांधली – चुनाव में अपने वोट बढ़ाने के लिए उम्मीदवारों एवं पार्टियों द्वारा की जाने वाली गड़बड़ या फरेब।

→ मतदान केन्द्र पर कब्जा करना – जबकि किसी दल अथवा उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा अथवा भाड़े के अपराधियों द्वारा किसी मतदान केन्द्र पर जबरदस्ती नियन्त्रण करके सबको धमकाकर झूठे वोट डलवाना अथवा असली मतदाताओं को मतदान केन्द्र पर आने से रोकना और स्वयं समस्त वोट या अधिकांश वोट डाल देना।

→ आम चुनाव – संसद तथा विधान सभाओं के लिए रीति के अनुसार नियत अवधि पर आयोजित चुनाव को आम चुनाव कहते हैं। भारत में ये चुनाव प्रत्येक 5 वर्ष बाद होते हैं।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

→ उप-चुनाव – जब एक निर्वाचन क्षेत्र के जनप्रतिनिधि की कार्यकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है अथवा त्यागपत्र आदि कारणों से वह पद रिक्त हो जाता है तो उस विशेष निर्वाचन क्षेत्र में नये चुनाव होते हैं।

→ इस प्रकार के चुनाव को उप – चुनाव कहते हैं। निर्वाचन-यह एक कार्यप्रणाली है जिनके द्वारा जनता एक नियमित अन्तराल में अपने प्रतिनिधियों का चुनाव
करती है तथा जनता यदि चाहे तो उन्हें बदल भी सकती है।

→ निर्वाचन आयोग – हमारे देश में निर्वाचन की सम्पूर्ण प्रक्रिया एक स्वतन्त्र संगठन द्वारा संचालित, नियन्त्रित एवं पर्यवेक्षित की जाती है, जिसे निर्वाचन आयोग के नाम से जाना जाता है।

→ चुनाव चिह्न – मत पत्र में उम्मीदवार के नाम के आगे अंकित चिह्न को चुनाव चिह्न कहते हैं।

→ ई.वी.एम. – इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, इसके द्वारा उम्मीदवार के नाम के सामने बटन दबाकर वोट दे सकते हैं।

→ मतदाता सूची – मतदान की योग्यता रखने वालों की सूची, इसे वोटर लिस्ट भी कहते हैं।

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JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 2 संविधान निर्माण 

JAC Board Class 9th Social Science Notes  Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

→ दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रवादी नेता नेल्सन मण्डेला को सन् 1964 ई. में देश में रंगभेद से चलने वाली शासन व्यवस्था का विरोध करने के कारण आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। उन्हें 28 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका की सबसे भयानक जेल रोब्बेन द्वीप में कैद रखा गया था।

→ सन् 1950 ई. से ही दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत, रंगीन चमड़ी वाले एवं भारतीय मूल के लोगों ने रंगभेद नीति के विरुद्ध संघर्ष किया। शासन की रंगभेद की नीति के कारण वहाँ स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस, सिनेमाघर आदि सभी सार्वजनिक स्थानों पर काले एवं गोरे के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं।

→ 26 अप्रैल, सन् 1994 ई. की मध्यरात्रि को दक्षिण अफ्रीका गणराज्य स्वतन्त्र हुआ। यह दुनिया का एक नया लोकतान्त्रिक देश बन गया।

→ बहुसंख्यक अश्वेत सामाजिक व आर्थिक अधिकार चाहते थे तथा अल्पसंख्यक गोरों को अपनी संपत्ति तथा विशेषाधिकारों की चिंता थी। अत: दोनों ने मिल बैठकर शासन चलाने के नियमों को लिखकर एक संविधान बनाया।

→ दक्षिण अफ्रीका के नये संविधान में नागरिकों को जितने अधिक अधिकार दिए गए हैं, उतने संसार के किसी भी संविधान ने नहीं दिए हैं। जिस देश की दुनिया भर में अलोकतान्त्रिक तौर-तरीकों के लिये निन्दा की जाती थी, आज उसी दक्षिण अफ्रीका को लोकतन्त्र के मॉडल के रूप में देखा जाता है।

→ यह जरूरी नहीं है कि जिन देशों में संविधान है, वे सभी लोकतान्त्रिक शासन वाले हों लेकिन जिन देशों में लोकतान्त्रिक शासन है वहाँ संविधान का होना अति आवश्यक है। दक्षिण अफ्रीका की ही तरह भारत का संविधान भी बहुत कठिन परिस्थितियों के बीच बना। लेकिन यहाँ कुछ चीजों पर पहले से ही सहमति थी।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 2 संविधान निर्माण 

→ सन् 1928 ई. में ही मोतीलाल नेहरू एवं कांग्रेस के आठ अन्य नेताओं ने भारत का एक संविधान लिखा, जिसे सन 1931 ई. में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के करांची अधिवेशन में एक प्रस्ताव के तहत यह रूपरेखा रखी गयी थी कि स्वतन्त्र भारत का संविधान कैसा होगा।

→ चुने गए जनप्रतिनिधियों की जो एक संविधान लिखने का काम करती है उसे संविधान सभा कहते हैं।

→ भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में चुनाव हुए थे।

→ संविधान सभा की पहली बैठक दिसम्बर 1946 को हुई थी।

→ भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिन्होंने 26 नवम्बर, सन् 1949 को अपना कार्य पूर्ण किया।

→ भारतीय संविधान 26 जनवरी, सन् 1950 को लागू हुआ था। इसी दिन की याद में हम प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाते हैं। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।

→ डॉ. भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण समिति प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

→ महात्मा गाँधी संविधान सभा के सदस्य नहीं थे लेकिन उनके अनुयायी इस सभा में शामिल थे। संविधान की शुरुआत बुनियादी मूल्यों की एक छोटी-सी उद्देशिका से होती है इसे संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका कहते हैं। इसे भारतीय संविधान की आत्मा कहा जाता है।

→ संविधान सिर्फ मूल्यों और दर्शन का बयान भर नही है संविधान में इन्हें संस्थागत रूप देने की कोशिश भी की गयी

→ भारतीय संविधान में समय के साथ होने वाले बदलावों को शामिल करने का प्रावधान भी रखा गया है। इन बदलावों के संविधान संशोधन कहते हैं।

→ देशद्रोह – देश की सरकार को षड्यन्त्रपूर्वक उखाड़ फेंकने के प्रयास का अपराध।

→ रंगभेद – 1948 से 1989 के मध्य दक्षिण अफ्रीका की सरकार द्वारा अपनायी गयी सरकारी नीति है, इस नीति में अश्वेतों के साथ नस्ली-अलगाव एवं बुरा व्यवहार किया जाता था।

→ प्रारूप – किसी कानूनी दस्तावेज का प्रारम्भिक स्वरूप।

→ संविधान – देश का सर्वोच्च कानून, जिसमें देश में राजनीति एवं समाज को व्यवस्थित करने वाले मौलिक नियम होते हैं।

→ संविधान सभा – जनता के प्रतिनिधियों की वह सभा जो संविधान के लेखन का कार्य करती है।

→ संविधान संशोधन – देश की सर्वोच्च विधायी संस्था द्वारा उस देश के संविधान में किया गया कोई भी परिवर्तन।

→ प्रस्तावना – संविधान का वह प्रथम कथन, जिसमें कोई देश अपने संविधान के मूलभूत मूल्यों एवं अवधारणाओं को स्पष्ट ढंग से व्यक्त करता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 2 संविधान निर्माण 

→ धारा – संविधान के अनुच्छेद का एक विशेष भाग।

→ दर्शन – किसी सोच अथवा कार्यों को रेखांकित करने वाले मूलभूत सिद्धान्त।

→ सन् 1928 ई. – मोतीलाल नेहरू सहित कांग्रेस के आठ अन्य नेताओं ने भारत का एक संविधान लिखा था।

→ सन् 1931 ई. – महात्मा गाँधी ने अपनी पत्रिका ‘यंग इण्डिया’ में संविधान से अपनी अपेक्षा के बारे में लेख लिखा था।

→ सन् 1946 ई. – भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में चुनाव हुए थे।

→ दिसम्बर, 1946 ई.- संविधान सभा की प्रथम बैठक।

→ 26 नवम्बर, सन् 1949 ई. – संविधान निर्माण कार्य पूर्ण।

→ 26 जनवरी, सन् 1950 ई. – भारतीय संविधान लागू किया गया।

→ सन् 1964 ई. – दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मण्डेला एवं सात अन्य नेताओं को देश में रंगभेद से चलने वाली शासन व्यवस्था का विरोध करने के कारण आजीवन कारावास की सजा।

→ 26 अप्रैल, सन् 1994 ई. – दक्षिण अफ्रीका स्वतन्त्र होकर दुनिया का एक नया लोकतान्त्रिक देश बन गया।

→ डॉ.राजेन्द्र प्रसाद – भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति बने।

→ डॉ. भीमराव अम्बेडकर – भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम कानून मन्त्री बने।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 2 संविधान निर्माण 

→ पं.जवाहरलाल नेहरू – अन्तरिम सरकार के प्रधानमन्त्री, बाद में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

→ सरोजिनी नायडू – कांग्रेस की प्रमुख महिला नेता। बाद में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनीं।

→ अबुल कलाम आजाद – राष्ट्रीय आन्दोलन में अग्रणी भूमिका, मुस्लिम अलगाववादी राजनीति के विरोधी, देश के प्रथम केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में शिक्षा मन्त्री बने।

→ टी. टी. कृष्णामचारी – कांग्रेस के प्रमुख नेता, प्रारूप कमेटी के सदस्य एवं बाद में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में वित्त मन्त्री बने।

→ जी.दुर्गाबाई देशमुख – काँग्रेस की सक्रिय नेता, बाद में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड की संस्थापक अध्यक्ष बनीं।

→ जयपाल सिंह – भारतीय हॉकी टीम के प्रथम कप्तान, बाद में झारखण्ड पार्टी के संस्थापक।

→ एच.सी. मुखर्जी – संविधान सभा के उपाध्यक्ष, बाद में बंगाल के राज्यपाल बने।

→ कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी – इतिहासकार और भाषाविद्, स्वतन्त्र पार्टी के संस्थापक, केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में मन्त्री भी रहे।

→ बलदेव सिंह – संविधान सभा में काँग्रेस द्वारा मनोनीत सदस्य। बाद में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में मन्त्री रहे।

→ श्यामा प्रसाद मुखर्जी – अंतरिम सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री, हिन्दू महासभा में सक्रिय, बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की।

→ सोमनाथ लाहिड़ी – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता। बाद में पश्चिम बंगाल विधान सभा में सदस्य बने।

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JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

JAC Board Class 9th Social Science Notes  Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

→ ‘डेमोक्रेसी’ शब्द जिसका अर्थ हिन्दी में लोकतन्त्र होता है, ‘डेमोक्रेशिया’ नामक यूनानी शब्द से बना है। यूनानी भाषा में ‘डेमोस’ का अर्थ होता है, ‘लोग’ एवं ‘क्रेशिया’ का अर्थ होता है, ‘शासन।’ इस प्रकार डेमोक्रेसी शब्द का अर्थ हुआ लोगों अर्थात् जनता का शासन।

→ अब्राहम लिंकन के अनुसार लोकतन्त्र का अभिप्राय है, “जनता का, जनता के लिए एवं जनता द्वारा शासन।”

→ लोकतन्त्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव जनता करती है।

→ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में अन्तिम निर्णय लेने की शक्ति चुने हुए प्रतिनिधियों के पास ही होती है।

→ लोकतन्त्र निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र चुनावों पर आधारित होना चाहिए जिससे कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए हार-जीत के समान अवसर उपलब्ध हों।

→ लोकतन्त्र राजनीतिक समानता के बुनियादी सिद्धान्त पर आधारित है। लोकतन्त्र में देश के प्रत्येक वयस्क नागरिक का एक मत होना चाहिए एवं प्रत्येक मत का एक समान मूल्य होना चाहिए।

→ एक लोकतान्त्रिक सरकार संवैधानिक कानूनों एवं नागरिक अधिकारों द्वारा खींची लक्ष्मण रेखाओं के भीतर ही कार्य करती है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

→ सार रूप में यह कहा जा सकता है कि लोकतंत्र सरकार का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव लोग करते है।

→ लोकतंत्र में नेता बदलते रहते हैं इसलिए अस्थिरता बनी रही है तथा निर्णय लेने में भी देरी होती है।

→ लोकतंत्र में राजनैतिक लड़ाई और सत्ता के खेल के कारण नैतिकता की कोई जगह नहीं होती अत: भ्रष्टाचार में वृद्धि होती है।

→ सामान्य लोगों को पता नहीं होता है कि उनके लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है जबकि लोकतंत्र के ऐसे ही लोग वोट के माध्यम से सरकार को चुनते हैं। अत: यह सही वयस्क नहीं हैं।

→ लोकतान्त्रिक शासन की पद्धति दूसरों से बेहतर है क्योंकि यह शासन का अधिक जवाबदेही वाला स्वरूप है तथा बेहतर निर्णय लेने की संभावना बढ़ाता है।

→ लोकतन्त्र मतभेदों एवं टकरावों को संभालने का तरीका उपलब्ध कराता है।

→ लोकतन्त्र नागरिकों के सम्मान में वृद्धि करता है। यह राजनीतिक समानता के सिद्धान्त पर आधारित है।

→ नागरिक के तौर पर हम जो भी काम करते हैं वह भी हमारे देश के लोकतंत्र को अच्छा या खराब बनाने में मदद करता है यह लोकतंत्र की ताकत है और कमजोरी भी यही है।

→ तानाशाही – इस प्रकार की व्यवस्था में सभी शक्तियाँ निजी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के एक छोटे से समूह के हाथों में होती हैं एवं तानाशाह किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता है।

JAC Class 9th Social Science Notes Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

→ राजशाही – इस प्रकार की व्यवस्था में किसी देश में राजा का शासन होता है। इसे राजतन्त्र के नाम से भी जाना जाता है। राजा वंशानुगत होता है।

→ लोकतन्त्र – जनता का शासन, जिसमें शासक जनता द्वारा निर्वाचित होते हैं।

→ लोकतान्त्रिक सरकार – यह एक प्रकार की सरकार है, जिसमें लोगों के हाथों में सभी शक्तियाँ होती हैं एवं सरकार लोगों के प्रति उत्तरदायी होती है। लोग अर्थात् जनता संवैधानिक साधनों द्वारा इसे बदल भी सकती है।

→ राजनीतिक समानता – देश की राजनीति में भाग लेने, चुनाव लड़ने, मत देने के अधिकार का बिना किसी भेदभाव के उपयोग करना राजनीतिक समानता कहलाता है।

→ प्रतिनिधित्व लोकतन्त्र – शासन की वह व्यवस्था जिसमें सभी लोगों द्वारा शासन नहीं किया जाता। जनता की ओर से उनके द्वारा चुने प्रतिनिधियों को निर्णय लेने की अनुमति प्रदान की जाती है।

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JAC Class 9 Social Science Important Questions Geography Chapter 6 जनसंख्या

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions Geography Chapter 6 जनसंख्या

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए
(i) निम्न में से कौन-सा राज्य सबसे घना है?
(क) केरल
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) महाराष्ट्र
(घ) बिहार।
उत्तर:
(घ) बिहार।

(ii) भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य कौन-सा है?
(क) महाराष्ट्र
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) राजस्थान
(घ) मध्य प्रदेश।
उत्तर:
(ख) उत्तर प्रदेश।

(iii) सन् 2011 में साक्षरता का प्रतिशत है
(क) 73.0%
(ख) 75%
(ग) 76.08%
(घ) 78.02%
उत्तर:
(क) 73.0%.

(iv) निम्न में से प्राथमिक व्यवसायों में सम्मिलित नहीं है
(क) मछली पालन
(ख) कृषि
(ग) पशुपालन
(घ) संचार।
उत्तर:
(क) लगभग दो तिहाई।

(v) निम्न में से किस राज्य में सर्वाधिक महिला साक्षरता पाई जाती है
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) पंजाब
(ग) केरल
(घ) छत्तीसगढ़।
उत्तर:
(ग) केरल।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनगणना क्या है? भारत में प्रथम बार जनगणना कब की गई थी?
उत्तर:
प्रत्येक 10 वर्ष पर आधिकारिक स्तर पर जनसंख्या की गणना को जनगणना कहते हैं। भारत में प्रथम बार जनगणना सन् 1872 में की गयी थी।

JAC Class 9 Social Science Important Questions Geography Chapter 6 जनसंख्या Important

प्रश्न 2.
भारत में सम्पूर्ण जनगणना सबसे पहले किस वर्ष की गयी?
उत्तर:
सन् 1881 में।

प्रश्न 3.
उन 5 राज्यों के नाम लिखिए जिनमें भारत की आधी जनसंख्या निवास करती है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिमी बंगाल एवं आन्ध्र प्रदेश।

प्रश्न 4.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 5.
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
राजस्थान।

प्रश्न 6.
जनसंख्या घनत्व किसे कहते हैं? इसकी गणना कैसे की जाती है?
उत्तर:
प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। कुल जनसंख्या को जितने क्षेत्रफल में लोग निवास करते हैं उससे भाग देकर जनसंख्या घनत्व की गणना की जाती है।

JAC Class 9 Social Science Important Questions Geography Chapter 6 जनसंख्या Important

प्रश्न 7.
भारत का जनसंख्या घनत्व क्या है? सर्वाधिक एवं न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है। सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य बिहार है जहाँ जनसंख्या का घनत्व 1,102 व्यक्ति प्रति किमी है) एवं न्यूनतम जनसंख्या वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.) है।

प्रश्न 8.
जनसंख्या में प्राकृतिक वृद्धि का क्या अर्थ है?
उत्तर:
जन्म-दर एवं मृत्यु-दर के बीच के अन्तर को प्राकृतिक वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 9.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षर किसे माना गया है?
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 7 वर्ष या इससे अधिक उम्र का व्यक्ति जो किसी भी भाषा को ठीक से समझते हुए पढ़ और लिख सके, साक्षर माना गया

प्रश्न 10.
उन कारकों के नाम बताइए जिनके कारण जनसंख्या बदलती रहती है?
उत्तर:

  1. जन्म-दर,
  2. मृत्यु-दर,
  3. प्रवास।

प्रश्न 11.
प्रवास किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। प्रवास दो प्रकार का होता है:

  1. आन्तरिक प्रवास,
  2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास।

प्रश्न 12.
जनसंख्या पर प्रवास का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
प्रवास के कारण जिस क्षेत्र से लोग जाते हैं वहाँ की जनसंख्या घट जाती है तथा जिस क्षेत्र में लोग आते हैं वहाँ की जनसंख्या बढ़ जाती है।

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प्रश्न 13.
भारत की साक्षरता दर कितनी है? देश की पुरुष एवं महिला साक्षरता को भी बताइए।
उत्तर:
भारत की साक्षरता दर 73 प्रतिशत है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत एवं महिलाओं की साक्षरता दर 64.6 प्रतिशत है।

प्रश्न 14.
व्यवसाय में तीन वर्ग कौन-कौन से हैं? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. प्राथमिक व्यवसाय-कृषि एवं पशुपालना
  2. द्वितीयक व्यवसाय-उद्योग एवं निर्माण कार्य।
  3. तृतीयक व्यवसाय-परिवहन एवं संचार।

प्रश्न 15.
किशोर जनसंख्या का आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
10 से 19 वर्ष।

प्रश्न 16.
नवीनतम राष्ट्रीय जनसंख्या नीति कब घोषित की गयी?
उत्तर:
सन् 2000 में।

प्रश्न 17.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का एक प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
परिवार नियोजन को एक जनकेन्द्रित कार्यक्रम बनाने के लिए नीतिगत ढाँचा तैयार करना।

प्रश्न 18.
उत्तरी मैदान के अधिक जनसंख्या वाले तीन राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. उत्तर प्रदेश,
  2. बिहार,
  3. पश्चिमी बंगाल।

प्रश्न 19.
किन राज्यों का जनसंख्या घनत्व 100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से कम है और क्यों?
उत्तर:

  1. जम्मू और कश्मीर,
  2. अरुणाचल प्रदेश,
  3. मिजोरम। इन राज्यों में जनसंख्या घनत्व कम होने का प्रमुख कारण विषम जलवायु एवं पर्वतीय क्षेत्र होना

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प्रश्न 20.
हमारे देश में समस्त विश्व का कुल कितना क्षेत्रफल पाया जाता है?
उत्तर:
2.4 प्रतिशत।

प्रश्न 21.
भारत के किन 2 राज्यों में लिंगानुपात महिलाओं के पक्ष में है?
उत्तर:
केरल तथा पुडुच्चेरी में।

प्रश्न 22.
आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद कौन-सा नया राज्य बना?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद 2 जून 2014 को तेलंगाना भारत का नया राज्य बना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या अध्ययन से सम्बन्धित तीन प्रमुख बिन्दु क्या हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या अध्ययन से सम्बन्धित तीन प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं

  1. जनसंख्या का आकार एवं वितरण-व्यक्तियों की संख्या कितनी है एवं वह कहाँ रहते हैं?
  2. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन की प्रक्रिया-समय के साथ जनसंख्या में वृद्धि तथा इसमें परिवर्तन किस प्रकार हुआ?
  3. जनसंख्या की विशेषताएँ-जनसंख्या की उम्र, लिंगानुपात, साक्षरता स्तर, व्यावसायिक संरचना एवं स्वास्थ्य की अवस्था क्या है?

प्रश्न 2.
250 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
250 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. से कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य निम्नलिखित हैं
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैण्ड, जम्मू और कश्मीर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम।

प्रश्न 3.
भारत में जनसंख्या वृद्धि को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:

  1. भारत में जनसंख्या 1951 में 3,610 लाख से बढ़कर 2011 में 12,100 लाख हो गई।
  2. 1951 से 1981 तक भारत में तीव्र जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गयी। यह जनसंख्या में तीव्र वृद्धि की व्याख्या करता है जो 1951 में 3,610 लाख से 1981 में 6,830 लाख हो गयी।
  3. 1981 से वृद्धि दर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गई, इस दौरान जन्म दर में तेजी से कमी आयी है फिर भी केवल 1990 में कुल जनसंख्या में 1,820 लाख की वृद्धि हुई।
  4. सरकारी प्रभावों एवं जनचेतना से सन् 2011 में भारत में 1.64 प्रतिशत जनसंख्या वृद्धि दर्ज की गई।

प्रश्न 4.
प्रवास के कारण जनसंख्या में किस तरह बदलाव आता है ? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:

  1. प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का महत्वपूर्ण घटक है, इससे न केवल जनसंख्या के आकार में परिवर्तन होता है बल्कि नगरीय एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में आयु एवं लिंग संरचना की दृष्टि से जनसंख्या में परिवर्तन आता है।
  2. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से प्रवास के कारण शहरों और नगरों की जनसंख्या में नियमित वृद्धि हुई है।
  3. भारत में नगरीय जनसंख्या जहाँ 1951 में कुल जनसंख्या का 17.29 प्रतिशत थी, वहीं यह 2011 में बढ़कर 31.80 प्रतिशत हो गई है।
  4. 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या में पिछले दशक (2001 से 2011) के मध्य वृद्धि हुई है। यह संख्या 35 से बढ़कर 53 हो गई है।

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प्रश्न 5.
किसी भी देश की जनसंख्या को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है ? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
किसी भी देश की जनसंख्या को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है

  1. बच्चे-इस वर्ग में सामान्यतया 15 वर्ष से कम उम्र की जनसंख्या आती है। ये आर्थिक रूप से उत्पादक नहीं होते हैं यह एक आश्रित जनसंख्या है।
  2. वयस्क-इस वर्ग में 15 से 59 वर्ष की उम्र की जनसंख्या आती है। यह आर्थिक रूप से उत्पादक होते हैं, यह जनसंख्या का कार्यशील वर्ग है।
  3. वद्ध-इस वर्ग में 59 वर्ष से अधिक उम्र की जनसंख्या आती है। यह आर्थिक रूप से उत्पादनशील अथवा अवकाश प्राप्त हो सकते हैं, यह स्वैच्छिक रूप से कार्य करते हैं।

प्रश्न 6.
लिंग संरचना से क्या तात्पर्य है? भारत के लिंग संरचना की प्रमुख विशेषता बताइए।
उत्तर:
लिंग संरचना से तात्पर्य महिला-पुरुष अनुपात से है। भारत की जनसंख्या में महिलाओं का अनुपात पुरुषों की अपेक्षा निरन्तर घटता जा रहा है। देश में सन् 1951 में 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 946 थी जो 1961 में 941, 1971 में 930, 1981 में 934, 1991 में 929, 2001 में 933 एवं 2011 में 943 रही है।

प्रश्न 7.
भारत की साक्षरता दर पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 73 प्रतिशत थी जिसमें 80.9 प्रतिशत पुरुष तथा 64.6 प्रतिशत महिलाएँ साक्षर थीं। 2011 की जनगणना के अनुसार 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति जो किसी भाषा को लिख या पढ़ सकते हैं उन्हें साक्षर की श्रेणी में रखा गया था। साक्षरता के स्तर में यह कमी देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में बाधक है। अतः पूर्ण साक्षरता हेतु अभी और भी गम्भीरतापूर्वक प्रयास करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 8.
भारत में व्यावसायिक गतिविधियों के तीन प्रमुख वर्ग कौन-से हैं? क्या वर्तमान समय में कोई व्यावसायिक बदलाव दर्ज किया गया?
उत्तर:
भारत में व्यावसायिक गतिविधियों के निम्न वर्ग हैं

  1. प्राथमिक व्यवसाय-इसमें कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण, मत्स्यपालन एवं खनन आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं।
  2. द्वितीयक व्यवसाय-इसमें विनिर्माण उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं।
  3. तृतीयक व्यवसाय-इसमें परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन एवं सेवाएँ आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं। वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में वृद्धि के कारण भारत में व्यावसायिक गतिविधियों का झुकाव द्वितीयक एवं तृतीयक गतिविधियों की ओर हुआ है।

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प्रश्न 9.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 में किशोरों की भलाई के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-2000 में किशोरों की भलाई के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये गये हैं

  1. पोषणीय आवश्यकताओं के अतिरिक्त राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-2000 में अवांछित गर्भधारण एवं यौन सम्बन्धों से फैलने वाली बीमारियों से सुरक्षा की ओर सरकार द्वारा बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
  2. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-2000 के अन्तर्गत ऐसे कार्यक्रम चलाए गए जो देर से विवाह करने एवं देर से सन्तानोत्पत्ति को प्रोत्साहित करते हैं।
  3. बाल विवाह को रोकने के कानूनों को मजबूत करना।
  4. खाद्य सम्पूरक एवं पोषणिक सेवाएँ उपलब्ध कराना।
  5. किशोर एवं किशोरियों को असुरक्षित यौन सम्बन्ध के कुप्रभावों के बारे में शिक्षित करना।
  6. गर्भनिरोधक सेवाओं की जनसाधारण तक पहुँच सुनिश्चित करना एवं उन्हें खरीद के भीतर लाना।

मानचित्र कार्य

प्रश्न 1.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत के मानचित्र में सभी राज्यों की जनसंख्या की स्थिति को दर्शाइए।
उत्तर:
नोट-आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद 2 जून 2014 को तेलंगाना भारत का 29 वां राज्य बना। लेकिन 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया जिससे राज्यों की संख्या पुन: 28 हो गयी।

इस प्रकार दमन व दीव तथा दादरा नगर हवेली का 26 जनवरी, 2020 को विलय करके एक केन्द्रशासित प्रदेश दमन-दीव और दादरा नगर हवेली बनाया गया है जिसमें केन्द्र शासित प्रदेश 9 से घटकर 8 हो गये हैं। वर्तमान में 28 राज्य तथा 8 केन्द्रशासित प्रदेश हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत के राज्यों एवं केन्द्र शासित क्षेत्रों की जनसंख्या घनत्व की स्थिति को दर्शाता हुआ मानचित्र
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प्रश्न 2.
2011 की जनगणना के आधार पर भारत की जनसंख्या वृद्धि दर को ग्राफ पर दर्शाइए।
उत्तर:
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