JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

JAC Class 10 Hindi स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कुछ पुरातन पंथी लोग स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी थे। द्विवेदी जी ने क्या-क्या तर्क देकर स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया?
अथवा
महावीर प्रसाद द्विवेदी स्त्री शिक्षा का पुरजोर समर्थन करते हैं। उनके तर्कों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
पढ़े-लिखे, सभ्य और स्वयं को सुसंस्कृत विचारों के समझने वाले लोग स्त्रियों की शिक्षा को समाज का अहित मानते हैं। उन लोगों ने अपने पास से कुछ कुतर्क दिए, जिन्हें द्विवेदी जी ने अपने सशक्त विचारों से काट दिया। द्विवेदी जी के अनुसार प्राचीन भारत में स्त्रियों के अनपढ़ होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है, परंतु उनके पढ़े-लिखे होने के कई प्रमाण मिलते हैं।

उस समय बोलचाल की भाषा प्राकृत थी, तो नाटकों में भी स्त्रियों और अन्य पात्रों से प्राकृत तथा संस्कृत बुलवाई जाती थी। इसका यह अर्थ नहीं है कि उस समय स्त्रियाँ पढ़ी-लिखी नहीं थीं। हमारा प्राचीन साहित्य प्राकृत भाषा में ही है। उसे लिखने वाले अवश्य अनपढ़ होने चाहिए। बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अधिकतर ग्रंथ प्राकृत भाषा में है, जो हमें उस समय के समाज से परिचित करवाते हैं। बुद्ध भगवान के सभी उपदेश प्राकृत भाषा में हैं। बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक प्राकृत भाषा में है।

जिस तरह आज हम बाँग्ला, हिंदी, उड़िया आदि भाषाओं का प्रयोग बोलने तथा पढ़ने-लिखने में करते हैं, उसी तरह उस समय के लोग प्राकृत भाषा का प्रयोग करते थे। यदि प्राकृत भाषा का प्रयोग करने से कोई अनपढ़ कहलाता है, तो आज के समय में सब पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ होते। वाल्मीकि जी की : रामायण में तो बंदर तक संस्कृत बोलते थे, तो स्त्रियों के लिए कौन-सी भाषा उचित हो सकती है? यह बात स्त्री-शिक्षा का विरोध करने वाले स्वयं सोच सकते हैं।

ऋषि अत्रि की पत्नी, गार्गी तथा मंडन मिश्र की पत्नी ने अपने समय के बड़े प्रकांड आचार्यों को शास्त्रार्थ में मात दी थी, तो क्या वे पढ़ी-लिखी नहीं थीं? लेखक के अनुसार पुराने समय में उड़ने वाले विमानों का वर्णन शास्त्रों में मिलता है, परंतु किसी भी शास्त्र में उनके निर्माण की विधि नहीं मिलती; इससे क्या स्त्री-शिक्षा विरोधी उस समय विमान न होने से इन्कार कर सकते हैं? यदि शास्त्रों में स्त्री-शिक्षा का अलग से प्रबंध का कोई वर्णन नहीं मिलता, तो हम यह नहीं मान सकते हैं कि उस समय स्त्री-शिक्षा नहीं थी। उस समय स्त्रियों को पुरुषों के समान सभी अधिकार प्राप्त थे। इस प्रकार द्विवेदी जी अपने विचारों से स्त्री-शिक्षा के विरोधियों को उत्तर देते हैं।

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प्रश्न 2.
‘स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होते हैं’-कुतर्कवादियों की इस दलील का खंडन द्विवेदी जी ने कैसे किया है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
स्त्री-शिक्षा विरोधी कुतर्कवादियों का यह कहना उचित नहीं है कि स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होता है। शकुंतला द्वारा अपने सम्मान की रक्षा के लिए कुछ कहना यदि अनर्थ है, तो यह उचित नहीं है। यदि पढ़ी-लिखी स्त्रियों का अपने सम्मान की रक्षा के लिए किया गया कार्य या विचार अनर्थ है, तो पुरुषों द्वारा किया गया अनर्थ भी उनकी पढ़ाई-लिखाई के कारण है। समाज को गलत मार्ग पर ले जाने का कार्य पुरुष ही करते हैं। डाके डालना, चोरी करना, घूस लेना, बुरे काम करना आदि पुरुष-बुद्धि की ही उपज है।

इसलिए सभी स्कूल-कॉलेज बंद कर देने चाहिए, जिससे पुरुष भी अनर्थ करने की शिक्षा न ले सकें। लेखक ने शकुंतला के दुष्यंत को कहे कटु वाक्यों को एक स्त्री के सम्मान की रक्षा के लिए प्रयुक्त किए गए वाक्य बताया है। सीता जी ने भी अपने परित्याग के समय राम जी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह अपनी शुद्धता अग्नि में कूदकर सिद्ध कर चुकी थी। अब वह तो लोगों के कहने पर राम जी ने उनका परित्याग करके अपने कुल के नाम पर कलंक लगाया है। सीता जी का राम जी पर यह आरोप क्या उन्हें अशिक्षित सिद्ध करता है? वह महाविदुषी थी।

एक स्त्री का अपने सम्मान की रक्षा के लिए बोलना उचित है। यह पढ़-लिख कर अनर्थ करना नहीं है। अनर्थ पढ़ाईलिखाई की नहीं अपितु हमारी सोच की उपज है। स्त्रियों की पढ़ाई-लिखाई से समाज और घर में अनर्थ नहीं होता। पढ़ाई-लिखाई से स्त्रियों को अच्छे-बुरे का ज्ञान होता है और वे समाज की उन्नति में सहायक सिद्ध होती है।

प्रश्न 3.
दविवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोधी कुतर्कों का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है-जैसे ‘यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़तीं, न वे पूजनीय पुरुषों का मुकाबला करतीं।’ आप ऐसे अन्य अंशों को निबंध में से छाँटकर समझिए और लिखिए।
उत्तर :
द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोधी कुतर्कों का खंडन करने के लिए निबंध में कई स्थानों पर व्यंग्य का सहारा लिया है। वे कहते हैं कि नाटकों में स्त्रियों का प्राकृत भाषा बोलना उनके अनपढ़ होने का प्रमाण नहीं है। इसके संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘वाल्मीकि रामायण के तो बंदर तक संस्कृत बोलते हैं। बंदर संस्कृत बोल सकते थे, स्त्रियाँ न बोल सकती थीं।’ यदि उस समय के जानवर तक संस्कृत भाषा का प्रयोग करते थे, तो स्त्रियाँ कैसे अनपढ़ हो सकती हैं? वे भी आम भाषा में संस्कृत ही बोलती होंगी।

जब हम उस समय उड़ने वाले जहाजों के वर्णन पर विश्वास करते हैं, तो इस बात पर विश्वास क्यों नहीं करते हैं कि उस समय स्त्री-शिक्षा दी जाती थी यदि उस समय की स्त्री-शिक्षा पर विश्वास नहीं है, तो ‘दिखाए, जहाज़ बनाने की नियमबद्ध प्रणाली के दर्शक ग्रंथ !’ स्त्री-शिक्षा विरोधियों के अनुसार स्त्रियों को पढ़ाना अनर्थ करना है। पढ़ी-लिखी स्त्रियाँ समाज और घर दोनों का नाश कर देंगी, इसलिए उनकी पढ़ाई उचित नहीं है। ऐसे पुरुषों के लिए द्विवेदी जी लिखते हैं स्त्री-शिक्षा पर अपना विरोध प्रकट कर लोग देश के गौरव को बढ़ा नहीं कम कर रहे हैं।

उनके अनुसार पढ़ना-लिखना पुरुषों के लिए उचित है, लेकिन स्त्री के लिए इस विषय में सोचना भी विष के समान है। ‘स्त्रियों के लिए पढ़ना कालकूट और पुरुषों के लिए पीयूष का घूट !’ अपने सम्मान की रक्षा के लिए स्त्री द्वारा पुरुष को यदि कटु वाक्य बोल भी दिए गए हों, तो यह अनर्थ नहीं है; सभी को अपने सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। स्त्री-शिक्षा विरोधियों के अनुसार शकुंतला द्वारा दुष्यंत के कार्य का विरोध करना कटु वाक्य थे।

यह उसकी पढ़ाई-लिखाई का परिणाम है, तो क्या वह यह कहती”आर्य पुत्र, शाबाश ! बड़ा अच्छा काम किया जो मेरे साथ गांधर्व-विवाह करके मुकर गए। नीति, न्याय, सदाचार और धर्म की आप प्रत्यक्ष मूर्ति हैं।” इस प्रकार निबंध में द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा के विरोधी की बात काटने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है, जिससे उनकी बात सशक्त ढंग से दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ती है।

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प्रश्न 4.
पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अनपढ़ होने का सबूत है-पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना उनके अनपढ़ होने का सबूत नहीं है। उस समय आम बोलचाल और पढ़ने-लिखने की भाषा प्राकृत थी। जिस प्रकार आज हम हिंदी, बाँग्ला, मराठी आदि भाषाओं का प्रयोग बोलने, पढ़ने व लिखने के लिए करके स्वयं को पढ़ा-लिखा, सुसभ्य और सुसंस्कृत बताते हैं; उसी प्रकार प्राचीन समय में प्राकृत भाषा का विशेष महत्व था। हमारा प्राचीन साहित्य स्पष्ट प्राकृत भाषा में है और उसी साहित्य से हमें तत्कालीन समाज का वर्णन मिलता है। इसलिए हम प्राकृत भाषा में बोलने वाली स्त्रियों को अनपढ़ नहीं कह सकते।

प्रश्न 5.
परंपरा के उन्हीं पक्षों को स्वीकार किया जाना चाहिए जो स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ाते हों-तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर :
लेखक का यह कथन स्वीकार करने योग्य है कि हमें परंपरा के उन्हीं पक्षों को अपनाना चाहिए, जो स्त्री-पुरुष की समानता को बढ़ाते हों। मनुष्य का जीवन अकेले नहीं चल सकता। उसकी जीवन-यात्रा स्त्री-पुरुष के सहयोग से ही चलती है। यदि जीवनरूपी गाड़ी का एक पहिया मज़बूत और दूसरा कमज़ोर होगा, तो गाड़ी ठीक से नहीं चल पाएगी। इसलिए दोनों को ही जीवनरूपी गाड़ी को सुचारु रूप से चलाने के लिए समान रूप से योग्य बनना चाहिए।

यह तभी संभव हो सकता है, जब दोनों को शिक्षा, खान-पान, मान-सम्मान के समान अवसर प्रदान किए जाए। घरों में लड़के के जन्म पर खुशियाँ और लड़की के जन्म पर मातम नहीं मनाना चाहिए। लड़की की भ्रूण-हत्या बंद होनी चाहिए। संसार में जैसे लड़के के आने का स्वागत होता है, वैसे ही लड़की के जन्म पर भी होना चाहिए। जब तक हम लड़की-लड़के के भेद को समाप्त करके दोनों को समान रूप से नहीं अपनाते, भविष्य में उनकी जीवन गाड़ी भी ठीक से नहीं चल सकती। इसलिए हमें अपनी उन्हीं परंपराओं को अपनाना चाहिए, जिनमें स्त्री-पुरुष की समानता की प्रतिष्ठा हो।

प्रश्न 6.
तब की शिक्षा-प्रणाली और अब की शिक्षा-प्रणाली में क्या अंतर है? स्पष्ट करें।
उत्तर :
पुराने ज़माने में लोग स्त्रियों को शिक्षा देने के विरोधी थे। वे स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होना मानते थे। धीरे-धीरे लोगों ने शिक्षा का महत्व समझा और स्त्रियों को भी पढ़ाने लगे। स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा के नाम पर परंपरागत रूप से पढ़ाए जाने वाले विषय ही पढ़ाए जाते थे। अब शिक्षा-प्रणाली में व्यापक परिवर्तन आ गया है। विद्यार्थियों को परंपरागत शिक्षा के साथ-साथ रोज़गारोन्मुख विषय भी पढ़ाए जाते हैं, जिससे वे अपनी शिक्षा समाप्त करने के बाद स्वयं को किसी व्यवसाय अथवा कार्य में लगाकर आजीविका अर्जित कर सकें। स्त्रियाँ भी पढ़-लिखकर कुशल गृहस्थ जीवन व्यतीत करने के साथ ही समाज एवं देश के लिए अनेक उपयोगी कार्य भी कर रही हैं।

रचना और अभिव्यक्ति –

प्रश्न 7.
महावीरप्रसाद द्विवेदी का निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है, कैसे ?
उत्तर :
महावीरप्रसाद दविवेदी का निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है। दविवेदी जी के अनुसार प्राचीन समय की अपेक्षा आधुनिक समय में स्त्री-शिक्षा का अधिक महत्व है। द्विवेदी जी का समय समाज में नई चेतना जागृत करने का था। उस समय के समाज में स्त्रियों को पढ़ाना अपराध समझा जाता था। पढ़ी-लिखी स्त्रियों को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता था। दकियानूसी विचारों वाले लोगों ने स्त्री-शिक्षा के विरोध में व्यर्थ की दलीलें बना रखी थीं।

द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा के महत्व को समझा और उसका प्रचार-प्रसार करने के लिए लेखों का सहारा लिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही देश का उचित विकास कर सकती है। स्त्रियों के उत्थान से देश का उत्थान निश्चित है। शिक्षित नारी स्वयं का भला तो करती है साथ में अपने परिवार, समाज और देश का भी भला करती है। नारी की क्षमता और प्रतिभा के उचित उपयोग के लिए उसे शिक्षित करना आवश्यक है।

द्विवेदी जी की स्त्री-शिक्षा के प्रति यह सोच आज के समय में वरदान सिद्ध हो रही है। आधुनिक समय में शिक्षा का बहुत महत्व है। इसके बिना मानव-जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज के समय में लड़कों और लड़कियों के लिए शिक्षा अनिवार्य है। घर, समाज और देश के विकास के लिए नारी का आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। इसलिए आज हर क्षेत्र में लड़कियाँ लड़कों से आगे निकल रही हैं। हर क्षेत्र में लड़कियों की सफलता का श्रेय उन लोगों को है, जिन्होंने स्त्री-शिक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया। उन लोगों ने आने वाले समय में स्त्री-शिक्षा के महत्व को समझा तथा स्त्री-शिक्षा विरोधियों की विचारधारा का डटकर मुकाबला किया।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

प्रश्न 8.
द्विवेदी जी की भाषा-शैली पर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर :
द्विवेदी जी की भाषा शुद्ध खड़ी बोली हिंदी हैं, जिसमें उन्होंने ‘प्रगल्भ, पीयूष, कटु, उद्धत, सहधर्मचारिणी, पांडित्य, दुर्वाक्य’ जैसे तत्सम प्रधान शब्दों के साथ-साथ ‘मुमानियत, हरगिज़, गंवार, अपढ़, बम, सबूत, तिस, लवलैटर’ जैसे विदेशी, देशज तथा तद्भव शब्दों का भरपूर प्रयोग किया है। ‘छक्के छुड़ाना’ जैसे मुहावरों के प्रयोग ने भापा में सजीवता ला दी है। लेखक की शैली वर्णन प्रधान, भावपूर्ण एवं व्याख्यात्मक होते हुए भी व्यंग्य प्रधान है; जैसे -‘अत्रि की पत्नी पत्नी-धर्म पर व्याख्यान देते समय घंटों पांडित्य प्रकट करे, गार्गी बड़े-बड़े ब्रहमवादियों को हरा दे, मंडन मिश्र की सहधर्मचारिणी शंकराचार्य के छक्के छुड़ा दे ! गज़ब ! इससे भयंकर बात क्या हो सकेगी। यहृ सब दुराचार स्त्रियों को पढ़ाने ही का कुफल है। समझे। इस प्रकार लेखक ने अत्यंत सहज तथा रोचक भाषा-शैली का प्रयोग करते हुए अपने विषय का प्रतिपादन किया है।

भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 9.
निम्नलिखित अनेकार्थी शब्दों को ऐसे वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए जिनमें उनके एकाधिक अर्थ स्पष्ट हों –
चाल, दल, पत्र, हरा, पर, फल, कुल
उत्तर :
(क) चाल – रमा का चाल-चलन ठीक नहीं है।
चाल – हिरण तेज़ चाल से दौड़ता हैं।
(ख) दल – टिइ्डी-दल ने गेहूँ की तैयार फसल खराब कर दी।
दल – सभी राजनीतिक दल चुनाव में सक्रिय हैं।
(ग) पत्र – आज श्याम का पत्र आया है।
पत्र – प्राचीन समय में लोग पत्र पर लिखा करते थे।
(घ) हरा – शुभम ने पराग को कुश्ती में हरा दिया।
हरा – झंडे में हरा रंग देश में हरियाली का प्रतीक है।
(ङ) पर – तितली के पर पीले रंग के हैं।
पर – कल पर कभी काम नहीं छोड़ना चाहिए।
(च) फल – आज दसर्वं कक्षा का परीक्षा-फल आएगा।
फल – स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन फल का सेवन करना चाहिए।
(छ) कुल – आजकल लड़कियाँ लड़कों से अधिक अपने कुल का नाम रोशन कर रही हैं।
कुल – राम ने नर्बी परीक्षा में कुल कितने अंक प्राप्त किए ?

पाठेतर सक्रियता –

प्रश्न 1.
अपनी दादी, नानी और माँ से बातचीत कीजिए और (स्त्री-शिक्षा संबंधी) उस समय की स्थितियों का पता लगाइए और अपनी स्थितियों से तुलना करते हुए निबंध लिखिए। चाहें तो उसके साथ तसर्वरं भी चिपकाइए।
उत्तर :
‘शिक्षा’ से अभिप्राय सीखना है। मनुष्य जीवनभर कुछ-न-कुछ सीखता रहता है। इसी सीखने के अंतर्गत पढ़ाई-लिखाई भी आती है। पढ़ाई-लिखाई के बिना मानव का जीवन पशु के समान होता है। इसलिए पढ़ाई-लिखाई का मानव के जीवन में बहुत महत्व है। प्राचीन समय में पढ़ाई-लिखाई का संबंध लड़कों तक सीमित माना जाता था, उसमें लड़कियों को नहीं के बराबर स्थान दिया जाता था। लड़कियों को इतनी शिक्षा दी जाती थी, जिससे वे केवल धर्म का पालन करना सीख सकें। अधिक शिक्षा लड़कियों के लिए अभिशाप समझी जाती थी।

लड़कियों को बचपन से ही घर सँभालने की शिक्षा दी जाती थी। उन्हें समझा दिया जाता था कि उनका कार्यक्षेत्र घर की चारदीवारी तक सीमित है, इसलिए उनके लिए अधिक शिक्षा महत्व नर्हीं रखती। उस समय लड़कियों के लिए अलग से पाठशालाएँ भी नहीं होती थीं। उस समय यदि किसी परिवार में शिक्षा के महत्व को समझकर लड़कियों को पढ़ा-लिखा दिया जाता था, तो उस परिवार की लड़कियों को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता था। पढ़ाई-लिखाई लड़कियों को बिगाड़ने का साधन समझा जाता था।

लेकिन आज परिस्थितियाँ कुछ और हैं। आज के समय में लड़कों के समान लड़कियों के लिए भी पढ़ाई-लिखाई अनिवार्य है। आज के समय में लड़कियों को पढ़ाना उन्हें बिगाड़ने का साधन नहीं माना जाता अपितु उन्हें पढ़ाकर उनका भविष्य सुरक्षित किया जाता है। आधुनिक युग में लड़कियाँ हर क्षेत्र में लड़कों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल रही हैं। सरकार, समाज और घर-परिवार में सभी लोग शिक्षा के महत्व को समझ गए हैं। शिक्षा ही देश की उन्नति में सहायक हैं। जब देश की नारी शिक्षित होगी, तभी हर घर शिक्षित होगा और वह देश के विकास में अपना सहयोग देगा।

लड़कियों को पढ़ाने के लिए सरकार ने भी कई तरह की योजनाएँ आरंभ की हैं। कई क्षेत्रों में लड़कियों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। शहरों और गाँवों में लड़कियों के लिए अलग से पाठशालाएँ व कॉलेज खुले हुए हैं। आज की लड़कियाँ हर क्षेत्र में अपने पाँव जमा चुकी हैं। उन्होंने अपनी क्षमता को साबित किया है। आज की नारी अबला नहीं सबला है।

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प्रश्न 2.
लड़कियों की शिक्षा के प्रति परिवार और समाज में जागरूकता आए-इसके लिए आप क्या-क्या करेंगे?
उत्तर :
अभी भी कई स्थानों पर लड़कियों की शिक्षा को अनिवार्य नहीं माना जाता। आज भी कई परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को लड़कों की अपेक्षा कम महत्व दिया जाता है। उन्हें घर पर एक बोझ के रूप में देखा जाता है, जिसे माँ-बाप उसकी शादी करके उतारना चाहते हैं। ऐसे लोगों को लड़कियों की शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए जगह-जगह नुक्कड़ नाटक होने चाहिए। नुक्कड़ नाटकों में लड़कियों के लिए शिक्षा क्यों अनिवार्य है, दिखाना चाहिए।

लड़कियों और लड़कों में कोई अंतर नहीं होता, लोगों में इस सोच को बढ़ावा देना चाहिए। लड़कियाँ माँ-बाप पर बोझ नहीं होती अपितु पढ़-लिखकर वे अपने माता-पिता की ज़िम्मेदारियों का बोझ हल्का करती हैं। यदि लड़कियाँ पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर हो जाए, तो दहेज जैसी कुप्रथा स्वयं ही दूर हो जाएँगी। पढ़-लिखकर लड़कियों में अच्छे-बुरे की समझ आ जाती है। वे समाज में फैली हर कुरीति का डटकर सामना कर सकती हैं तथा माता-पिता का नाम रोशन कर सकती हैं। परिवार, समाज तथा देश की उन्नति में लड़कियाँ लड़कों से अधिक सहायक होती हैं। शिक्षित लड़कियाँ ही परिवार और समाज को शिक्षित बनाती हैं और उन्हें देश की प्रगति में सहायक होने के लिए प्रेरित करती हैं।

प्रश्न 3.
स्त्री-शिक्षा पर एक पोस्टर तैयार कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन कार्यों को अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से करें।

प्रश्न 4.
स्त्री-शिक्षा पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार कर उसे प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन कार्यों को अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से करें।

यह भी जानें –

भवभूति – संस्कृत के प्रधान नाटककार हैं। इनके तीन प्रसिद्ध ग्रंथ वीररचित, उत्तररामचरित और मालतीमाधव हैं। भवभूति करुण रस के प्रमुख लेखक थे।
विश्ववरा – अत्रिगोत्र की स्त्री। ये ऋगवेद के पाँचवें मंडल 28वें सूक्त की एक में से छठी ऋक् की ऋषि थीं।
शीला – कौरिडन्य मुनि की पत्नी का नाम।
थेरीगाथा – बौद्ध भिक्षुणियों की पद्य रचना इसमें संकलित है।
अनुसूया – अत्रि मुनि की पत्नी और दक्ष प्रजापति की कन्या।
गार्गी – वैदिक समय की एक पंडिता ऋषिपुत्री। इनके पिता का नाम गर्ग मुनि था। मिथिला के जनकराज की सभा में इन्होंने पंडितों के सामने याज्ञवल्क्य के साथ वेदांत शास्त्र विषय पर शास्त्रार्थ किया था।
गाथा सप्तशती – प्राकृत भाषा का ग्रंथ जिसे हाल द्वारा रचित माना जाता है।
कुमारपाल चरित्र – एक ऐतिहासिक ग्रंथ है जिसे वीं शताब्दी के अंत में अज्ञातनामा कवि ने अनहल के राजा कुमारपाल के लिए लिखा था। इसमें ब्रह्मा से लेकर राजा कुमारपाल तक बौद्ध राजाओं की वंशावली का वर्णन है।
त्रिपिटक ग्रंथ – गौतम बुद्ध ने भिक्षु-भिक्षुणियों को अपने सारे उपदेश मौखिक दिए थे। उन आदेशों को उनके शिष्यों ने कंठस्थ कर लिया था और बाद में उन्हें त्रिपिटक के रूप में लेखबद्ध किया गया। वे तीन त्रिपिटक हैं-सुत या सूत्र पिटक, विनय पिटक और अभिधम पिटक।
शाक्य मुनि – शक्यवंशीय होने के कारण गौतम बुद्ध को शाक्य मुनि भी कहा जाता है।
नाट्यशास्त्र – भरतमुनि रचित काव्यशास्त्र संबंधी संस्कृत के इस ग्रंथ में मुख्यतः रूपक (नाटक) का शास्त्रीय विवेचन किया गया है। इसकी रचना 300 ईसा पूर्व मानी जाती है।
कालिदास – संस्कृत के महान कवियों में कालिदास की गणना की जाती है। उन्होंने कुमारसंभव, रघुवंश (महाकाव्य), ऋतु संहार, मेघदूत (खंडकाव्य), विक्रमोर्वशीय, मालविकाग्निमित्र और अभिज्ञान शाकुंतलम् (नाटक) की रचना की।

आज़ादी के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ी पंडिता रमाबाई ने स्त्रियों की शिक्षा एवं उनके शोषण के विरुद्ध जो आवाज़ उठाई उसकी एक झलक यहाँ प्रस्तुत है। आप ऐसे अन्य लोगों के योगदान के बारे में पढ़िए और मित्रों से चर्चा कीजिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पाँचवाँ अधिवेशन 1889 में मुंबई में आयोजित हुआ था। खचाखच भरे हॉल में देशभर के नेता एकत्र हुए थे। एक सुंदर युवती अधिवेशन को संबोधित करने के लिए उठी। उसकी आँखों में तेज़ और उसके कांतिमय चेहरे पर प्रतिभा झलक रही थी। इससे पहले कांग्रेस अधिवेशनों में ऐसा दृश्य देखने में नहीं आया था।

हॉल में लाउडस्पीकर न थे। पीछे बैठे हुए लोग उस युवती की आवाज़ नहीं सुन पा रहे थे। वे आगे की ओर बढ़ने लगे। यह देखकर युवती ने कहा, “भाइयो, मुझे क्षमा कीजिए। मेरी आवाज़ आप तक नहीं पहुंच पा रही है। लेकिन इस पर मुझे आश्चर्य नहीं है। क्या आपने शताब्दियों तक कभी किसी महिला की आवाज़ सुनने की कोशिश की? क्या आपने उसे इतनी शक्ति प्रदान की कि वह अपनी आवाज़ को आप तक पहुँचने योग्य बना सके?”

प्रतिनिधियों के पास इन प्रश्नों के उत्तर न थे। इस साहसी युवती को अभी और बहुत कुछ कहना था। उसका नाम पंडिता रमाबाई था। उस दिन तक स्त्रियों ने कांग्रेस के अधिवेशनों में शायद ही कभी भाग लिया हो। पंडिता रमाबाई के प्रयास से 1889 के उस अधिवेशन में 9 महिला प्रतिनिधि सम्मिलित हुई थीं। वे एक मूक प्रतिनिधि नहीं बन सकती थीं। विधवाओं को सिर मुंडवाए जाने की प्रथा के विरोध में रखे गए प्रस्ताव पर उन्होंने एक ज़ोरदार भाषण दिया।

“आप पुरुष लोग ब्रिटिश संसद में प्रतिनिधित्व की माँग कर रहे हैं जिससे कि आप भारतीय जनता की राय वहाँ पर अभिव्यक्त कर सकें। इस पांडाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चीख-चिल्ला रहे हैं, तब आप अपने परिवारों में वैसी ही स्वतंत्रता महिलाओं को क्यों नहीं देते? आप किसी महिला को उसके विधवा होते ही कुरूप और दूसरे पर निर्भर होने के लिए क्यों विवश करते हैं? क्या कोई विधुर भी वैसा करता है? उसे अपनी इच्छा के अनुसार जीने की स्वतंत्रता है। तब स्त्रियों को वैसी स्वतंत्रता क्यों नहीं मिलती?”

निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि पंडिता रमाबाई ने भारत में नारी-मुक्ति आंदोलन की नींव डाली।
वे बचपन से ही अन्याय सहन नहीं कर पाती थीं। एक दिन उन्होंने नौ वर्ष की एक छोटी-सी लड़की को उसके पति के शव के साथ भस्म किए जाने से बचाने की चेष्टा की। “यदि स्त्री के लिए भस्म होकर सती बनना अनिवार्य है तो क्या पुरुष भी पत्नी की मृत्यु के बाद सता होते हैं?” रौबपूर्वक पूछे गए इस प्रश्न का उस लड़की की माँ के पास कोई उत्तर न था। उसने केवल इतना कहा कि “यह पुरुषों की दुनिया है।

कानून वे ही बनाते हैं, स्त्रियों को तो उनका पालन भर करना होता है।” रमाबाई ने पलटकर पूछा, “स्त्रियाँ ऐसे कानूनों को सहन क्यों करती हैं? मैं जब बड़ी हो जाऊँगी तो ऐसे कानूनों के विरुद्ध संघर्ष करूँगी।” सचमुच उन्होंने पुरुषों द्वारा महिलाओं के प्रत्येक प्रकार के शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया।

JAC Class 10 Hindi स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
स्त्री-शिक्षा के विरोधी अपने दल में क्या-क्या तर्क देते हैं ? दो का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
स्त्री-शिक्षा विरोधियों ने स्त्री-शिक्षा के विरोध में निम्नलिखित तर्क दिए हैं –
(क) प्राचीन काल में संस्कृत-कवियों ने नाटकों में स्त्रियों से अनपढ़ों की भाषा में बातें करवाई हैं। इससे पता चलता है कि उस समय स्त्रियों को पढ़ाने का चलन नहीं था।
(ख) स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होता है।
(ग) स्त्रियों को पढ़ाना समय बर्बाद करना है।
(घ) शकुंतला का दुष्यंत को भला-बुरा कहना उसकी पढ़ाई-लिखाई का दोष था।

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प्रश्न 2.
लेखक नाटकों में स्त्रियों की भाषा प्राकृत होने को उनकी अशिक्षा का प्रमाण नहीं मानता। इसके लिए वह क्या तर्क देता है ?
उत्तर :
स्त्री-शिक्षा विरोधियों के अनुसार प्राचीन काल में स्त्रियों से नाटक में अनपढ़ों की भाषा का प्रयोग करवाया जाता था। द्विवेदी जी के अनुसार नाटकों में प्राकृत भाषा बोलना अनपढ़ता का प्रमाण नहीं है। उस समय आम बोलचाल में प्राकृत भाषा का प्रयोग किया : जाता था। संस्कृत भाषा का चलन तो कुछ लोगों तक ही सीमित था। इसलिए आचार्यों ने नाट्यशास्त्रों से संबंधित नियम बनाते समय इस बात का ध्यान रखा होगा कि कुछ चुने लोगों को छोड़कर अन्यों से उस समय की प्रचलित प्राकृत भाषा में संवाद बोलने के लिए कहा जाए। इससे स्त्रियों की अनपढ़ता सिद्ध नहीं होती।

प्रश्न 3.
प्राचीन समय में प्राकृत भाषा का चलन था। इसके लिए द्विवेदी जी ने क्या प्रमाण दिया है?
उत्तर :
स्त्री-शिक्षा विरोधियों ने प्राकृत भाषा को अनपढ़ों की भाषा कहा है। द्विवेदी जी के अनुसार उस समय की बोलचाल और पढ़ाई-लिखाई की भाषा प्राकृत थी। उस समय में प्राकृत भाषा के चलन का प्रमाण बौद्ध-ग्रंथों और जैन-ग्रंथों से मिलता है। दोनों धर्मों के हज़ारों ग्रंथ प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं। बुद्ध भगवान ने अपने उपदेश उस समय की प्रचलित प्राकृत भाषा में दिए हैं। बौद्धों के सबसे बड़े ग्रंथ त्रिपिटक की रचना भी प्राकृत भाषा में की गई है। इसका एकमात्र कारण यह था कि उस समय बोलचाल की भाषा प्राकृत थी। इससे सिद्ध होता है कि प्राकृत अनपढ़ों की भाषा नहीं है।

प्रश्न 4.
द्विवेदी जी ने प्राकृत भाषा की तुलना आज की कौन-सी भाषा से की है और क्यों?
उत्तर :
द्विवेदी जी ने प्राकृत भाषा की तुलना आज अत्यधिक बोले जाने वाली भाषा हिंदी से की है। स्त्री-शिक्षा विरोधियों ने प्राचीन समय में बोली जाने वाली प्राकृत भाषा को अनपढ़ों और गँवारों की भाषा बताया है। लेकिन द्विवेदी जी के अनुसार प्राकृत भाषा उस समय की आम बोलचाल की भाषा थी, इसलिए प्राकृत बोलना और पढ़ना-लिखना अनपढ़ता का कारण नहीं है।

उस समय के प्रसिद्ध ग्रंथ प्राकृत भाषा में लिखे गए थे; जैसे-गाथा-सप्तशती, सेतुबंध, महाकाव्य, कुमारपाल चरित आदि। यदि इन ग्रंथों को लिखने वाले अनपढ़ और गँवार हैं, तो आज के समय में हिंदी के प्रसिद्ध से प्रसिद्ध संपादकों को अनपढ़ और गँवार कहा जा सकता है। हिंदी इस समय की आम बोलचाल की भाषा है। जिस तरह हम लोग हिंदी, बाँग्ला आदि भाषाओं को पढ़कर विद्वान बन सकते हैं, उसी तरह प्राचीन समय में शौरसेनी, मागधी, महाराष्ट्री आदि प्राकृत भाषाओं को पढ़-लिखकर कोई भी सभ्य, शिक्षित और पंडित बन सकते थे।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

प्रश्न 5.
लेखक ने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन सी प्रसिद्ध विदुषी स्त्री का वर्णन किया है?
उत्तर :
लेखक ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों की व्यर्थ दलीलों को निराधार सिद्ध करते हुए लिखा है कि प्राचीन समय में भी स्त्रियों को पढ़ाया लिखाया जाता था। यह बात सही है कि उनके लिए अलग से विश्वविद्यालय नहीं थे, परंतु यह कहना सही नहीं है कि प्राचीन समय में स्त्रियों को शिक्षित नहीं किया जाता था। वेदों को हिंदू ईश्वर-कृत रचना मानते हैं; ईश्वर ने भी वेदों की रचना और दर्शन का निर्माण स्त्रियों से करवाया है। शीला और विज्जा जैसी विदुषी स्त्रियों को बड़े-बड़े पुरुष-कवियों ने सम्मानित किया था।

उनकी कविता के नमूने शाग्र्धर-पद्धति में देखे जा सकते हैं। अत्रि की पत्नी पत्नी-धर्म पर कई घंटे लगातार उपदेश दे सकती थी। गार्गी ने बड़े-बड़े वेद पढ़नेपढ़ाने वालों को अपने पांडित्य से हरा दिया था। मंडन मिश्र की पत्नी ने शंकराचार्य को अपने ज्ञान से पराजित कर दिया था। बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक के अंतर्गत थेरीगाथा में स्त्रियों द्वारा रचित सैकड़ों पद्य-रचनाएँ हैं। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि प्राचीन समय में स्त्रियों को शिक्षित करने का नियम नहीं था, अपितु उस समय स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे।

प्रश्न 6.
वर्तमान में स्त्रियों का पढ़ना क्यों ज़रूरी माना गया है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक के अनुसार यह मान भी लिया जाए कि प्राचीन समय में स्त्रियों को पढ़ाने का चलन नहीं था, तो उस समय स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता इतनी अधिक नहीं होगी। परंतु आधुनिक समय में स्त्री-शिक्षा का महत्व बहुत अधिक है। आधुनिक युग भौतिकवादी युग है। इस युग में अनपढ़ता देश के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। यदि नारी शिक्षित होगी, तो वह अपने परिवार के सदस्यों को शिक्षित करने का प्रयत्न करेगी और उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाकर एक अच्छा नागरिक बनने के लिए प्रेरित करेगी। परिवार शिक्षित होगा तो समाज में भी नई विचारधारा का विकास होगा, जिससे देश का विकास होगा। इसलिए लेखक ने प्राचीन समय की अपेक्षा आधुनिक समय में स्त्रियों के लिए शिक्षा को अनिवार्य कहा है।

प्रश्न 7.
द्विवेदी जी का निबंध क्या संदेश देता है ?
उत्तर :
द्विवेदी जी ने अपने निबंध के माध्यम से स्त्री-शिक्षा का विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार किया है। स्त्री-शिक्षा विरोधियों के अनुसार लड़कियों को पढ़ाना अनर्थ करना है। परंतु द्विवेदी जी ने आज के समय की आवश्यकता को समझते हुए स्त्री-शिक्षा पर बल दिया है। उनके अनुसार स्त्रियों को शिक्षित करने से ही समाज और देश का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

शिक्षा से व्यक्ति बिगड़ता नहीं है अपितु उसे अच्छे-बुरे की समझ आ जाती है। इस देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में दोष हैं; इसलिए उस शिक्षा प्रणाली को सुधारने की आवश्यकता है, जिसमें लड़कियों के लिए विशेष रूप से शिक्षा का प्रबंध हो। लड़कियों को पढ़ाने से कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। लड़कियों को पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देनी चाहिए।

लड़कियों के आत्मनिर्भर होने पर दहेज जैसी कुप्रथा का अंत हो जाएगा। द्विवेदी जी का निबंध यह भी संदेश देता है कि परंपराओं का पालन पुराने नियमों के अनुसार नहीं करना चाहिए; जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए। जो बात वर्तमान समय के लिए उपयोगी है, उसे मान लेना चाहिए और समाज के स्वरूप को बिगाड़ने वाली परंपराओं का त्यागकर देना चाहिए।

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प्रश्न 8.
आचार्यों ने नाट्यशास्त्र संबंधी क्या नियम बनाए थे?
उत्तर :
जिस समय आचार्यों ने नाट्यशास्त्र संबंधी नियम बनाए थे, उस समय सर्वसाधरण की भाषा संस्कृत नहीं थी। चुने हुए लोग ही संस्कृत बोलते थे। इसलिए उन्होंने उनकी भाषा संस्कृत और स्त्रियों व अन्य लोगों की भाषा प्राकृत रखने का नियम बनाया।

प्रश्न 9.
आजकल के संपादकों को किस तर्क से अनपढ़ कहा जा सकता है?
उत्तर :
हिंदी, बाँग्ला आदि भाषाओं को प्राकृत के अंतर्गत रखा जाता है। आजकल संपादक इन्हीं भाषाओं में अपना कार्य करते हैं। इसलिए यदि प्राकृत अनपढ़ों की भाषा मानी जाती है, तो आजकल के सभी संपादक; जो इन भाषाओं में लिखते-पढ़ते हैं; अनपढ़ हैं।

प्रश्न 10.
व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का क्या महत्व है ?
उत्तर :
व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। शिक्षा व्यक्ति को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वह मानव को कुमार्ग से हटाकर सुमार्ग पर ले जाती है। शिक्षा मानव को अच्छा नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होती है। शिक्षा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है।

प्रश्न 11.
पुराने समय में लोग स्त्रियों को अनपढ़ क्यों रखना चाहते थे?
उत्तर :
पुराना समाज पुरुष प्रधान समाज था। उसे इस बात का सदैव खतरा बना रहता था कि कहीं स्त्रियों के पढ़े-लिखे होने पर उन्हें अपना अस्तित्व ही न खोना पड़े। अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए वे स्त्रियों को न तो पढ़ाने के पक्ष में थे और न ही स्वयं इस बात का समर्थन करते थे कि स्त्रियों को पढ़ाया जाए।

प्रश्न 12.
अनर्थ का क्या कारण है ? पाठ के अनुसार इसे कौन करता है?
उत्तर :
अनर्थ का कारण दुराचार और पापाचार है। अनर्थ करने वाले अनपढ़ तथा पढ़े-लिखे-दोनों तरह के हो सकते हैं। यह उनकी मानसिकता तथा संस्कार पर निर्भर करता है कि वह जनमानस के समक्ष कैसा तथा किस प्रकार का व्यवहार करते हैं।

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प्रश्न 13.
आज बदलते समय के साथ स्त्री-शिक्षा अनिवार्य क्यों है?
उत्तर :
आज बदलते समय के साथ स्त्री-शिक्षा इसलिए अनिवार्य है, क्योंकि आज नारी पुरुष के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम कर रही है। आज नारी अशिक्षित या दासी न होकर हमारी सहभागिनी है। अत: एक नारी को शिक्षित कर हम पूरे एक कुल को शिक्षित कर सकते हैं, क्योंकि जब माँ शिक्षित होगी तो उसकी संतान भी शिक्षित होगी।

प्रश्न 14.
द्विवेदी जी की भाषा-शैली का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
द्विवेदी जी की भाषा शुद्ध खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें तत्सम शब्दों की प्रधानता है। इनकी शैली वर्णन प्रधान तथा भावपूर्ण है। ‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ पाठ में लेखक ने स्त्री-शिक्षा के विरोधियों को तर्कयुक्त जवाब दिया है। लेखक ने अपने इस निबंध में तत्सम प्रधान भाषा का अधिक प्रयोग किया है।

प्रश्न 15.
पाठ में वर्णित किन नारी पात्रों के प्रति लेखक ने अपनी सहानुभूति प्रकट की है?
उत्तर :
लेखक ने पाठ में वर्णित शकुंतला तथा सीता की पीड़ा को अत्यंत सहज भाव से समझा है। लेखक शुरू से ही अन्याय एवं अत्याचार का विरोधी रहा है, इसलिए उसने संघर्षशील स्त्रियों का पुरजोर समर्थन किया है। पुरातन पंथियों की बातों को दरकिनार करते हुए स्त्री-शिक्षा अनिवार्य हो-लेखक ने इस बात पर बल दिया है। उसके अनुसार शकुंतला तथा सीता दोनों पर उनके पतियों द्वारा अत्याचार किया गया, इसलिए वे सहानुभूति की हकदार हैं। अतः उनके प्रति सहानुभूति प्रकट होना स्वाभाविक है।

प्रश्न 16.
लेखक के मतानुसार परम्पराएँ क्या होती हैं?
अथवा
परम्पराएँ विकास के मार्ग में अवरोधक हों तो उन्हें तोड़ना ही चाहिए। ‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ के आधार पर लिखिए।
उत्तर :
लेखक के मतानुसार परम्पराएँ मानव द्वारा बनाई गई वे बेड़ियाँ हैं, जिनमें वह अपनी सुविधानुसार लोगों को जकड़ने का प्रयास करता है। प्राचीन समय में परम्परा का हवाला देकर नारी को चारदीवारी में कैद करके रखा जाता था। उसकी आजादी को परम्परा की जंजीरों से जकड़ा जाता था। परम्परा के नाम पर उस पर सैकड़ों आदेश तथा नियम लाद दिए जाते थे। आज भी समाज में पुरुष प्रधानता है, जिसके कारण आज भी परम्परा के नाम पर नारी पर निर्दयता तथा अत्याचार जारी हैं। जब भी परंपराएँ विकास के मार्ग में अवरोधक बन जाए तो उन्हें अवश्य तोड़ देना चाहिए।

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प्रश्न 17.
लेखक का स्त्री-शिक्षा के संबंध में क्या विचार है ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार स्त्री-शिक्षा को अनिवार्य कर देना चाहिए क्योंकि एक शिक्षित नारी एक अच्छे समाज का निर्माण करती है; समाज की नींव को सुदृढ़ करती है। वह अपनी शिक्षा के बल पर देश, समाज एवं राज्य को एक अच्छा नागरिक एवं समाज सुधारक दे सकती है। माँ ही अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर उसके जीवन को बेहतर बना सकती है। इसलिए नारी का शिक्षित होना आवश्यक है।

प्रश्न 18.
‘प्राकृत केवल अपढ़ों की नहीं अपितु सुशिक्षितों की भी भाषा थी’-महावीर प्रसाद द्विवेदी ने यह क्यों कहा?
उत्तर :
पढ़े-लिखे-सभ्य और स्वयं को सुसंस्कृत विचारों के समझने वाले लोग स्त्रियों की शिक्षा को समाज का अहित मानते हैं। उन लोगों ने अपने पास से कुछ कुतर्क दिए जिन्हें द्विवेदी जी ने अपने सशक्त विचारों से काट दिया। द्विवेदी जी के अनुसार प्राचीन भारत में स्त्रियों के अनपढ़ होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है, परंतु उनके पढ़े-लिखे होने के कई प्रमाण मिलते हैं। उस समय बोलचाल की भाषा प्राकृत थी, तो नाटकों में भी स्त्रियों व अन्य पात्रों से प्राकृत तथा संस्कृत बुलवाई जाती थी। इसका यह अर्थ नहीं है कि उस समय स्त्रियाँ पढ़ी-लिखी नहीं थीं।

हमारा प्राचीन साहित्य प्राकृत भाषा में है। उसे लिखने वाले अवश्य अनपढ़ होने चाहिए। बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अधिकतर ग्रंथ प्राकृत भाषा में है, जो हमें उस समय के समाज से परिचित करवाते हैं। बुद्ध भगवान के सभी उपदेश प्राकृत भाषा में है। बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक प्राकृत भाषा में है। जिस तरह आज हम बांग्ला, हिंदी, उड़िया आदि भाषाओं का प्रयोग बोलने तथा पढ़ने-लिखने में करते हैं, उसी तरह उस समय के लोग प्राकृत भाषा का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 19.
‘स्त्रियाँ शैक्षिक दृष्टि से पुरुषों से कम नहीं रही है’ – इसके लिए महावीर प्रसाद द्विवेदी ने क्या उदाहरण दिए हैं ? किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
यदि प्राकृत भाषा का प्रयोग करने से कोई अनपढ़ कहलाए तो आज के समय में सब पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ होते। तो स्त्रियों के लिए कौन सी भाषा उचित हो सकती है। यह बात स्त्री-शिक्षा का विरोध करने वाले स्वयं सोच सकते हैं। ऋषि आत्रि की पत्नी, गार्गी मंडन मिश्र की पत्नी ने अपने समय के बड़े प्रकांड आचार्य को शास्त्रार्थ में मात दी थी तो क्या वे पढ़ी-लिखी नहीं थी?

लेखक के अनुसार पुराने समय में उड़ने वाले जहाजों का वर्णन शास्त्रों में मिलता है परंतु किसी भी शास्त्र में उनके निर्माण की विधि नहीं मिलती इससे क्या स्त्रीशिक्षा विरोधी उस समय जहाज़ न होने से इन्कार कर सकते हैं। यदि शास्त्रों में स्त्री-शिक्षा का अलग से प्रबंध का कोई वर्णन नहीं मिलता तो हम यह नहीं मान सकते हैं कि उस समय स्त्री-शिक्षा नहीं थी। उस समय स्त्रियों को पुरुषों के समान सभी अधिकार प्राप्त थे। इस प्रकार द्विवेदी जी अपने विचारों से स्त्री-शिक्षा विरोधियों का उत्तर देते हैं।

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प्रश्न 20.
‘महावीर प्रसाद द्विवेदी का निबंध उनकी खुली सोच और दूरदर्शिता का परिचायक है’, कैसे?
उत्तर :
महावीर प्रसाद द्विवेदी का निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है। द्विवेदी जी के अनुसार प्राचीन समय की अपेक्षा आधुनिक समय में स्त्री-शिक्षा का अधिक महत्व है। द्विवेदी जी का समय समाज में नई चेतना जागृत करने का था। उस समय के समाज में स्त्रियों को पढ़ाना अपराध समझा जाता था। पढ़ी-लिखी स्त्रियों को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता था। दकियानूसी विचारों वाले लोगों ने स्त्री-शिक्षा के विरोध में व्यर्थ की दलीलें बना रखी थीं।

द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा के महत्व को समझा और उसका प्रचार-प्रसार करने के लिए लेखों का सहारा लिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही देश का उचित विकास कर सकती है। स्त्रियों के उत्थान से देश का उत्थान निश्चित है। शिक्षित नारी स्वयं का भला तो करती है साथ में अपने परिवार, समाज और देश का भी भला करती है। नारी की क्षमता और प्रतिभा के उचित उपयोग के लिए उसे शिक्षित करना आवश्यक है। द्विवेदी जी की स्त्री-शिक्षा के प्रति यह सोच आज के समय में वरदान सिद्ध हो रही है।

महत्वपूर्ण गद्यांशों के अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. बड़े शोक की बात है, आजकल भी ऐसे लोग-विद्यमान हैं जो स्त्रियों को पढ़ाना उनके और गृह-सुख के नाश का कारण समझते
हैं। और, लोग भी ऐसे-वैसे नहीं, सुशिक्षित लोग-ऐसे लोग जिन्होंने बड़े-बड़े स्कूलों और शायद कॉलिजों में भी शिक्षा पाई है, जो धर्म-शास्त्र और संस्कृत के ग्रंथ साहित्य से परिचय रखते हैं, और जिनका पेशा कुशिक्षितों को सुशिक्षित करना, कुमार्गगामियों को सुमार्गगामी बनाना और अधार्मिकों को धर्मतत्व समझाना है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
2. लेखक के अनुसार शोक की बात क्या है?
3. ‘गृह-सुख के नाश’ से लेखक का क्या तात्पर्य है?
4. लेखक ने ‘ऐसे-वैसे’ किन लोगों को कहा है?
5. लेखक ने किन-किन के पेशों की ओर संकेत किया है और क्यों?
उत्तर :
1. पाठ-‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’, लेखक-आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी।

2. लेखक के अनुसार शोक की बात यह है कि आधुनिक युग में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो स्वयं तो पढ़े-लिखे हैं परंतु स्त्रियों कोपढ़ाना-लिखाना नहीं चाहते। ऐसे लोगों का विचार है कि स्त्रियाँ पढ़-लिखकर बिगड़ जाती हैं और परिवार के सुख का नाश कर देती हैं।

3. ‘गृह-सुख के नाश’ से लेखक का आशय है-‘घर के काम-काज में रुचि न लेना, परिवार की देखभाल न करना, किसी का आदर-सम्मान न करना, सबको अपने से हीन समझना, हर बात में अपनी टाँग अड़ाना तथा किसी की बात न सुनना’। इससे सारे घर की शांति भंग हो जाती है तथा गृह-सुख का नाश हो जाता है।

4. लेखक ने ‘ऐसे-वैसे’ उन लोगों को कहा है, जो स्वयं सुशिक्षित हैं; बड़े-बड़े स्कूलों-कॉलेजों में पढ़े हैं, परंतु स्त्रियों को पढ़ाने-लिखाने के विरुद्ध हैं। स्वयं पढ़ने-लिखने का लाभ उठाकर भी स्त्रियों को अनपढ़ ही रहने देना चाहते हैं।

5. इन पंक्तियों में लेखक ने अध्यापकों, उपदेशकों, समाज सुधारकों, धर्माचार्यों आदि के पेशों की ओर संकेत किया है। अध्यापक अशिक्षितों को शिक्षित करता है; समाज-सेवक समाज को सुमार्ग पर चलने का उपदेश देता है तथा धर्माचार्य धर्म का मर्म समझाता है। ये सब इतने सुयोग्य होते हुए भी स्त्री-शिक्षा के विरुद्ध हैं। इसलिए लेखक इन पर व्यंग्य करते हुए पूछता है कि इतने योग्य होते हुए भी वे स्त्री-शिक्षा का विरोध क्यों कर रहे हैं?

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2. इसका क्या सबूत है कि उस ज़माने में बोलचाल की भाषा प्राकृत न थी? सबूत तो प्राकृत के चलन के ही मिलते हैं। प्राकृत यदि उस समय की प्रचलित भाषा न होती तो बौद्धों तथा जैनों के हजारों ग्रंथ उसमें क्या लिखे जाते, और भगवान शाक्य मुनि तथा उनके चेले प्राकृत ही में क्यों धर्मोपदेश देते? बौद्धों के त्रिपिटक ग्रंथ रचना प्राकृत में किए जाने का एक मात्र कारण यही है कि उस ज़माने में प्राकृत ही सर्वसाधारण की भाषा थी। अतएव प्राकृत बोलना और लिखना अपढ़ और अशिक्षित होने का चिह्न नहीं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखक किस ज़माने की बात कर रहा है और क्यों?
2. बौद्धों के ग्रंथ का क्या नाम है ? इस ग्रंथ की रचना किस भाषा में हुई है?
3. बौद्धों के ग्रंथ की रचना जिस समय में की गई थी, उस समय सर्वसाधारण की भाषा कौन-सी थी?
4. लोकभाषा में रचना करने का क्या कारण होता है?
उत्तर :
1. लेखक भवभूति और कालिदास के ज़माने की बात कर रहा है, क्योंकि उस ज़माने में नाटक संस्कृत में लिखे जाते थे। परंतु इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि उस जमाने में शिक्षित-वर्ग केवल संस्कृत ही बोलता था। इसलिए इन नाटकों में यदि स्त्री-वर्ग प्राकृत बोलता है, तो उन पर अनपढ़ होने का आक्षेप नहीं लगाया जा सकता।

2. बौद्धों के ग्रंथ का नाम त्रिपिटक है। इस ग्रंथ की रचना प्राकृत भाषा में हुई थी।

3. बौद्धों के ग्रंथ त्रिपिटक की रचना प्राकृत भाषा में की गई थी, क्योंकि उस समय सर्वसाधारण की बोलचाल की भाषा प्राकृत थी। अधिक से-अधिक लोगों तक अपने ग्रंथ का प्रचार-प्रसार करने के लिए इसे प्राकृत भाषा में लिखा गया था।

4. लोकभाषा अथवा जनसाधारण द्वारा दैनिक व्यवहार में लाई जाने वाली भाषा में रचना करने का सर्वाधिक लाभ यह होता है कि वह रचना जनसाधारण की समझ में आसानी से आ जाती है और लोकप्रिय बन जाती है। इससे रचना और रचनाकार को लोकप्रियता एवं सम्मान मिलता है।

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3. इससे अधिक भयंकर बात और क्या हो सकेगी! यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़तीं, न वे पूजनीय पुरुषों का मुकाबला करतीं। यह सारा दुराचार स्त्रियों को पढ़ाने का ही कुफल है। समझे। स्त्रियों के लिए पढ़ना कालकूट और पुरुषों के लिए पीयूष का छूट! ऐसी ही दलीलों और दृष्टांतों के आधार पर कुछ लोग स्त्रियों को अपढ़ रखकर भारतवर्ष का गौरव बढ़ाना चाहते हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखक ने किसे बहुत भयंकर बताया है और क्यों?
2. ‘कालकूट’ और ‘पीयूष का बूट’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
3. क्या स्त्रियों को अनपढ़ रखकर देश का गौरव बढ़ाया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
4. पुराने लोग स्त्रियों को अनपढ़ क्यों रखना चाहते थे?
उत्तर :
1. लेखक ने इस बात को व्यंग्यात्मक रूप से भयंकर बताया है कि प्राचीनकाल में पढ़ी-लिखी स्त्रियाँ शास्त्रार्थ में बड़े-बड़े विद्वानों को भी पराजित कर देती थीं। उनका ऐसा करना आज भी लोगों को स्त्रियों द्वारा किया गया अपराध लगता है।

2. ‘कालकूट’ का शाब्दिक अर्थ ‘भयंकर विष’ होता है। यहाँ इस शब्द का प्रयोग स्त्री शिक्षा के संदर्भ में किया गया है। ‘पीयुष का घुट’ का अर्थ अमृत पीने से है। इस शब्द का प्रयोग पुरुष शिक्षा के संदर्भ में किया गया है। अभिप्राय यह है कि कई विद्वान शिक्षा को नारी के लिए विष समान तथा पुरुषों के लिए अमृत समान मानते हैं।

3. स्त्रियों को अनपढ़ रखकर देश का गौरव नहीं बढ़ाया जा सकता। स्त्री परिवार का आधार होती है। यदि वह अनपढ़ होगी, तो परिवार का उचित ढंग से पालन-पोषण नहीं कर सकती। पढ़ी-लिखी स्त्री अपने घर-परिवार को सुचारु रूप से चला सकती है तथा अपनी संतान को अच्छा नागरिक बना सकती है। इसलिए स्त्रियों का पढ़ा-लिखा होना अत्यंत आवश्यक है।

4. पुराने ज़माने में लोग स्त्रियों को इसलिए पढ़ाते-लिखाते नहीं थे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं पुरुष प्रधान समाज स्त्रियों के पढ़े-लिखे होने पर अपना अस्तित्व ही न खो दे। पुरुष अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए ही स्त्रियों को पढ़ने-लिखने नहीं देते थे। वे उसे अपनी दासी बनाकर रखना चाहते थे, सहधर्मचारिणी नहीं।

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4. स्त्रियों का किया हुआ अनर्थ यदि पढ़ाने ही का परिणाम है तो पुरुषों का किया हुआ अनर्थ भी उनकी विद्या और शिक्षा का ही परिणाम समझना चाहिए। बम के गोले फेंकना, नरहत्या करना, डाके डालना, चोरियाँ करना, घूस लेना-ये सब यदि पढ़ने-लिखने ही का परिणाम हो तो सारे कॉलिज, स्कूल और पाठशालाएँ बंद हो जानी चाहिए। परंतु विक्षिप्तों, बातव्यथितों और ग्रहग्रस्तों के सिवा ऐसी दलीलें पेश करने वाले बहुत ही कम मिलेंगे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखक ने स्त्रियों के द्वारा किए गए किस अनर्थ की चर्चा की है? अपने विचार में क्या यह अनर्थ है?
2. पुरुष पढ़-लिखकर भी क्या कुकर्म करता है? क्या यह उसकी पढ़ाई का दोष है?
3. लेखक ने शिक्षित स्त्रियों को अनर्थ का कारण मानने वालों को क्या और क्यों कहा है?
4. व्यक्ति को शिक्षा किस मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है?
उत्तर :
1. लेखक ने पढ़ी-लिखी स्त्रियों द्वारा अपनी विद्वता से बड़े-बड़े विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित करने तथा अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करने की चर्चा की है। इसे पुरुष प्रधान समाज स्त्रियों द्वारा किया गया अनर्थ मानता है और उन्हें अनपढ़ बनाए रखना चाहता है। वास्तव में यह अनर्थ नहीं है। यह पुरुष समाज द्वारा स्त्रियों पर बलात थोपा जाने वाला अनर्थ है।

2. पुरुष पढ़-लिखकर भी चोरी, डकैती, व्यभिचार आदि कुकर्म करता है, जो उसकी पढ़ाई-लिखाई का दोष नहीं होता। वह ये सब बुरे कार्य अपनी संगति अथवा संस्कारों के कारण करता है। इसलिए पढ़ाई-लिखाई को कुकर्मों को प्रेरित करने वाली नहीं मानना चाहिए।

3. लेखक ने शिक्षित स्त्रियों को अनर्थ का कारण मानने वाले पुरुषों को पागल, पूर्वाग्रहों से ग्रस्त, अंधविश्वासी आदि कहा है। ये लोग अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए स्त्रियों को अनपढ़ ही बनाए रखना चाहते हैं। ये लोग नहीं चाहते कि स्त्रियाँ अपना भला-बुरा सोचें तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

4. व्यक्ति को शिक्षा सदा सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वह मनुष्य को कुमार्ग से हटाकर सुमार्ग पर चलाती है। शिक्षा से ही व्यक्ति की सोचने-समझने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। शिक्षा उसे अच्छा नागरिक बनाती है। इसलिए शिक्षा को अनर्थ का कारण नहीं मानना चाहिए।

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5. पढने-लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नहीं जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीज उसमें हरगिज़ नहीं। अनर्थ पुरुषों से भी होते हैं। अनपढ़ों और पढ़े-लिखों, दोनों से। अनर्थ, दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। अतएव स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. पढ़ना-लिखना स्वयं में कैसा है?
2. अनर्थ का बीज किस में होता है?
3. व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन देखकर क्या जाना जा सकता है?
4. लेखक का स्त्री-शिक्षा के संबंध में क्या विचार है?
उत्तर :
1. लेखक के अनुसार पढ़ने-लिखने में स्वयं ऐसी कोई बात नहीं है कि जिस से किसी प्रकार का अनर्थ हो सके। पढ़ना-लिखना स्वयं में मनुष्य को शिक्षित बना कर सद्मार्ग पर चलना सिखाता है। पढ़-लिख कर मनुष्य अपना जीवन सफल बना सकता है। वह दूसरों का भी मार्ग दर्शक बन सकता है।

2. अनर्थ का बीज व्यक्ति के अपने चरित्र में होता है। उस का स्वभाव, संगति और संस्कार उसे अनर्थ करने के लिए प्रेरित करते हैं। बुरी संगत, बुरे संस्कार और उदंड स्वभाव उसे सदा अनर्थकारी कार्यों की ओर ही प्रेरित करेगा। इसके लिए पढ़ा-लिखा अथवा अनपढ़ होना आवश्यक नहीं है। किसी भी व्यक्ति में अनर्थ के बीज पनप सकते हैं।

3. व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन, स्वभाव, रहन-सहन आदि देख कर ही उसके संबंध में अनुमान लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति कैसा होगा? यदि व्यक्ति सरल, सहज, निर्भीक, उत्साही, परिश्रमी, सफ़ाई पसंद, सत्यनिष्ठ है तो हम कहते हैं कि वह व्यक्ति बहुत अच्छा है। इसके विपरीत चोरी-डकैती करने वाला, झूठा, आलसी, गंदगी पसंद व्यक्ति हमें बुरा अथवा अनर्थकारी ही लगेगा।

4. लेखक का स्त्री-शिक्षा के संबंध में यह विचार है कि स्त्रियों को अवश्य ही पढ़ाना चाहिए। पढ़ी-लिखी स्त्री स्वयं को, अपने परिवार, समाज और देश को अच्छे नागरिक दे सकती है। वह अपनी संतान में अच्छे संस्कार पैदा कर सकती है। उस की शिक्षा-पद्धति उसकी आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। वह पढ़-लिखकर गृह-सुख का नाश करने वाली न होकर गृह को स्वर्ग बनाने वाली बन सकती है क्योंकि स्त्री को गृहलक्ष्मी भी कहते हैं।

स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य में निबंधकार एवं आलोचक के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनका जन्म सन् 1864 ई० में उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के दौलतपुर नामक ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। संस्कृत के अतिरिक्त इन्होंने अपने गाँव की पाठशाला में उर्दू का अध्ययन भी किया। अंग्रेजी के अध्ययन के लिए इन्हें रायबरेली, उन्नाव और फतेहपुर भेजा गया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण इन्होंने रेलवे में नौकरी कर ली।

शीघ्र ही द्विवेदी जी ने अनुभव किया कि विदेशी सरकार की नौकरी से स्वाभिमान को ठेस पहुँचती है। अतः इन्होंने नौकरी से त्याग-पत्र दे दिया। द्विवेदी जी की अध्ययन के प्रति अत्यधिक रुचि थी। इन्होंने विषम परिस्थितियों में भी अध्ययन और लेखन का कार्य जारी रखा। अपने अध्यवसाय से वे उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, बाँग्ला, गुजराती आदि भाषाओं के विद्वान बन गए। द्विवेदी जी ने अपने युग के लेखकों एवं कवियों का मार्गदर्शन किया।

इसलिए इनका युग द्विवेदी युग के नाम से प्रसिद्ध है। ‘सरस्वती’ पत्रिका का संपादन कार्य सँभालना द्विवेदी जी के जीवन की प्रमुख घटना है। इस पत्रिका के माध्यम से इन्होंने हिंदी साहित्य के विकास एवं प्रचार में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान दिया। द्विवेदी जी ने अनेक विषयों पर निबंधों की रचना की। सन् 1938 ई० में इनका निधन हो गया।

रचनाएँ – द्विवेदी जी ने मौलिक रचनाओं के अतिरिक्त संस्कृत, बाँग्ला एवं अंग्रेजी की पुस्तकों का अनुवाद भी किया है। द्विवेदी जी ने साहित्यिक तथा साहित्येत्तर दोनों प्रकार के विषयों पर निबंध लिखे हैं। रसज्ञ रंजन, साहित्य सीकर, अद्भुत अलाप, साहित्य-संदर्भ इनके निबंध-संग्रह हैं। ‘संपत्तिशास्त्र’ इनकी अर्थशास्त्र से संबंधित, ‘महिला मोद’ महिलाओं के लिए उपयोगी तथा ‘आध्यात्मिकी’ दर्शन शास्त्र से संबंधित रचना है। इनकी काव्य रचना ‘द्विवेदी काव्यमाला’ है। इनका संपूर्ण साहित्य ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी रचनावली’ के पंद्रह खंडों में उपलब्ध है।

भाषा-शैली-द्विवेदी जी की भाषा हिंदी का शुद्ध खड़ी बोली है, जिसमें तत्सम शब्दों की प्रधानता रहती है। इनकी शैली वर्णन प्रधान, भावपूर्ण तथा व्याख्यात्मक होती है। ‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ पाठ में लेखक ने स्त्री-शिक्षा के विरोधियों को मुँह तोड़ जवाब दिया है। लेखक ने इस पाठ में तत्सम प्रधान भाषा का अधिक प्रयोग किया है। जैसे-‘कुशिक्षितों को सुशिक्षित करना, कुमार्गगामियों को सुमार्गगामी बनाना और अधार्मिकों को धर्मतत्व समझाना।’

लेखक ने अन्यत्र भी ऐसे ही शब्दों का प्रयोग किया है; जैसे-कटु, सेतुबंध, द्वीपांतरों, प्रगल्भ, पीयूष, सहधर्मचारिणी, उद्धत, अनर्थकर आदि कहीं-कहीं देशज, विदेशी व तद्भव शब्दों का प्रयोग भी किया गया है; जैसेहरगिज़, गंवार, अपढ़, खुद, बम, लंबा, चौड़ा, सबूत, तिस आदि। लेखक ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा स्त्री-शिक्षा और स्त्री की विद्वता का समर्थन किया है। जैसे – ‘अत्रि की पत्नी, पत्नी-धर्म पर व्याख्यान देते समय घंटों पांडित्य प्रकट करे, गार्गी बड़े-बड़े ब्रह्मवादियों को हरा दे, मंडन मिश्र की सहधर्मचारिणी शंकराचार्य के छक्के छुड़ा दे।’ लेखक ने यत्र-तत्र सटीक मुहावरों और सूक्तियों का भी प्रयोग किया है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

पाठ का सार :

‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’ निबंध के लेखक ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी’ हैं। लेखक का यह निबंध उन लोगों की चेतना जागृत। करने के लिए था, जो स्त्री-शिक्षा को व्यर्थ मानते थे। उन लोगों के अनुसार शिक्षित स्त्री समाज के विघटन का कारण बनती है। इस निबंध में परंपरा का जो हिस्सा सड़-गल चुका है, उसे बेकार मानकर छोड़ देने की बात कही गई है और यही इस निबंध की विशेषता है। लेखक के समय कुछ ऐसे पढ़े-लिखे लोग भी थे, जो स्त्री-शिक्षा को घर और समाज-दोनों के लिए हानिकारक मानते थे। इन लोगों का काम समाज में बुराइयों और अनीतियों को समाप्त करना था।

स्त्री-शिक्षा के विरोध में ये लोग अपने कुछ तर्क प्रस्तुत करते हैं। उनके अनुसार प्राचीन भारत में संस्कृत कवियों के नाटकों में कुलीन स्त्रियाँ गँवार भाषा का प्रयोग करती थीं, क्योंकि उस समय भी स्त्रियों को पढ़ाने का चलन नहीं था। कम पढ़ी-लिखी शकुंतला ने दुष्यंत से ऐसे कटु वचन बोले कि अपना सत्यानाश कर लिया। यह उसके पढ़े-लिखे होने का फल था। उस समय स्त्रियों को पढ़ाना समय बर्बाद करना समझा जाता था।

लेखक ने वह कहता है कि व्यर्थ की बातों का उत्तर दिया है। इन नाटकों में, स्त्रियों का संस्कृत न बोलना उनका अनपढ़ होना सिद्ध नहीं करता। वाल्मीकि की रामायण में जब बंदर संस्कृत बोल सकते हैं, तो उस समय स्त्रियाँ संस्कृत क्यों नहीं बोल सकती थीं? ऋषि-पत्नियों की भाषा तो गँवारों जैसी नहीं हो सकती। कालिदास और भवभूति के समय तो आम लोग भी संस्कृत भाषा बोलते थे। इस बात का कोई स्पष्ट सबूत नहीं हैं कि उस समय बोलचाल की भाषा प्राकृत नहीं थी।

प्राकृत भाषा में बात करना अनपढ़ होना नहीं था। प्राकृत उस समय की प्रचलित भाषा थी, इसका प्रमाण बौद्धों और जैनों के हज़ारों ग्रंथों से मिलता है। भगवान बुद्ध के सभी उपदेश प्राकृत भाषा में मिलते हैं। बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा ग्रंथ त्रिपिटक प्राकृत भाषा में है। इसलिए प्राकृत बोलना और लिखना अनपढ़ होने का प्रमाण नहीं है। गाथा-सप्तशती, सेतुबंध-महाकाव्य और कुमारपालचरित आदि ग्रंथ प्राकृत भाषा में हैं।

यदि इन्हें लिखने वाले अनपढ़ थे, तो आज के सभी अख़बार संपादक अनपढ़ हैं। वे अपनी-अपनी प्रचलित भाषा में अखबार छापते हैं। जिस तरह हम बाँग्ला, मराठी, हिंदी आदि बोल, पढ़ और लिखकर स्वयं को विद्वान समझते हैं उसी तरह उस समय पाली, मगधी, महाराष्ट्री, शोरसैनी आदि भाषाएँ पढ़कर वे लोग सभ्य और शिक्षित हो सकते थे। जिस भाषा का चलन होता है, वही बोली जाती है और उसी भाषा में साहित्य मिलता है। उस समय के आचार्यों के नाट्य संबंधी नियमों के आधार पर पढ़े-लिखे होने का ज्ञान नहीं हो सकता।

जब ये नियम बने थे, उस समय संस्कृत सर्वसाधारण की बोलचाल की भाषा नहीं थी। इसलिए नाटकों में कुछ लोगों से संस्कृत तथा स्त्रियों और अन्यों से प्राकृत भाषा का प्रयोग करवाया गया। उस समय स्त्रियों के लिए विद्यालय थे या नहीं, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है; परंतु इसके आधार पर हम स्त्रियों को अनपढ़ और असभ्य नहीं मान सकते। कहा जाता है कि उस समय विमान होते थे, जिससे एक-दूसरे द्वीपांतारों से द्वीपांतरों तक जाया जा सकता था।

परंतु हमारे शास्त्रों में इसके बनाने की विधि कहीं नहीं दी गई है। इससे उस समय जहाज़ होने की बात से इंकार तो नहीं करते अपितु गर्व ही करते हैं। फिर यह कहाँ का न्याय है कि उस समय की स्त्रियों को शास्त्रों के आधार पर मूर्ख, असभ्य और अनपढ़ बता दिया जाए। हिंदू लोग वेदों की रचना को ईश्वरकृत रचना मानते हैं। ईश्वर ने भी मंत्रों की रचना स्त्रियों से करवाई है। प्राचीन भारत में ऐसी कई स्त्रियाँ हुई हैं, जिन्होंने बड़ेबड़े पुरुषों से शास्त्रार्थ किया और उनके हाथों सम्मानित हुई हैं, बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक में सैकड़ों स्त्रियों की पद्य रचना लिखी हुई है।

उन स्त्रियों को सभी प्रकार के काम करने की इजाजत थी, तो उन्हें पढ़ने-लिखने से क्यों रोका जाता? स्त्री-शिक्षा के विरोधियों की ऐसी बातें समझ में नहीं आतीं। अत्रि की पत्नी, मंडन मिश्र की पत्नी, गार्गी आदि जैसी विदुषी नारियों ने अपने पांडित्य से उस समय के बड़े-बड़े आचार्य को भी मात दे दी थी। तो क्या उन स्त्रियों को कुछ बुरा परिणाम भुगतना पड़ा? ये सब उन लोगों की गढ़ी हुई कहानियाँ हैं, जो स्त्रियों को अपने से आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते।

जिनका अहंकार स्त्री को दबाकर रखने से संतुष्ट होता है, वे स्त्री को अपनी बराबरी का अधिकार कैसे दे सकते हैं? यदि उनकी बात मान भी ली जाए, तो पुराने समय में स्त्रियों को पढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती थी; परंतु आज बदलते समय के साथ स्त्री-शिक्षा अनिवार्य है। जब हम लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए कई पुराने रीति-रिवाजों को तोड़ दिया है, तो इस पद्धति को हम क्यों नहीं तोड़ सकते? यदि उन लोगों को पुराने समय में स्त्रियों के पढ़े-लिखे होने का प्रमाण चाहिए तो श्रीमद्भागवत, दशमस्कंध में रुक्मिणी द्वारा कृष्ण को लिखा पत्र बड़ी विद्वता भरा है।

क्या यह उसके पढ़े-लिखे होने का प्रमाण नहीं है? वे लोग भागवत की बात से इंकार नहीं कर सकते। स्त्री-शिक्षा विरोधियों के अनुसार यदि स्त्रियों को पढ़ाने से कुछ बुरा घटित होता है, तो पुरुषों के पढ़ने से तो उससे भी बुरा घटित होता है। समाज में होने वाले सभी बुरे कार्य पढ़े-लिखे पुरुषों की देन है, तो क्या , पाठशालाएँ, कॉलेज आदि बंद कर देने चाहिए? शकुंतला का दुष्यंत का अपमान करना स्वाभाविक बात थी। एक पुरुष स्त्री से शादी करके उसे भूल जाए और उसका त्याग कर दे, तो वह स्त्री चुप नहीं बैठेगी।

वह अपने विरुद्ध किए अन्याय का विरोध करेगी; यह कोई गलत बात नहीं थी। सीता जी तो शकुंतला से अधिक पवित्र मानी जाती हैं। उन्होंने भी अपने परित्याग के समय राम जी पर आरोप लगाए थे कि उन्होंने सबके सामने अग्नि में कूद कर अपनी पवित्रता का प्रमाण दिया था, फिर लोगों की बातें सुनकर उसे क्यों छोड़ दिया गया। यह राम जी के कुल पर कलंक लगाने वाली बात है। सीता जी तो शास्त्रों का ज्ञान रखने वाली थी, फिर उन्होंने अपने विरुद्ध हुए अन्याय का विरोध अनपढ़ों की भाँति क्यों किया? यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है, जब मनुष्य अपने विरुद्ध हुए अन्याय के विरोध में आवाज़ उठाता है।

पढ़ने-लिखने से समाज में कोई भी अनर्थ नहीं होता। अनर्थ करने वाले अनपढ़ और पढ़े-लिखे-दोनों तरह के हो सकते हैं। अनर्थ का कारण दुराचार और पापाचार है। स्त्रियाँ अच्छे-बुरे का ज्ञान कर सकें, उसके लिए स्त्रियों को पढ़ाना आवश्यक है। जो लोग स्त्रियों को पढ़ने-लिखने से रोकते हैं, उन्हें दंड दिया जाना चाहिए। स्त्रियों को अनपढ़ रखना समाज की उन्नति में रुकावट डालता है। ‘शिक्षा’ शब्द का अर्थ बहुत विस्तृत है। उसमें सीखने योग्य सभी कार्य समाहित हैं, तो पढ़ना-लिखना भी उसी के अंतर्गत आता है।

यदि वर्तमान शिक्षा-प्रणाली के कारण लड़कियों को पढ़ने-लिखने से रोका जाए, तो यह ठीक नहीं है। इससे तो अच्छा है कि शिक्षा-प्रणाली में सुधार लाया जाए। लड़कों की भी शिक्षा-प्रणाली अच्छी नहीं है, फिर स्कूल-कॉलेज क्यों बंद नहीं किए। दोहरे मापदंडों से समाज का हित नहीं हो सकता। यदि विचार करना है, तो स्त्री-शिक्षा के नियमों पर विचार करना चाहिए। उन्हें कहाँ पढ़ाना चाहिए, कितनी शिक्षा देनी चाहिए, किससे शिक्षा दिलानी चाहिए आदि। परंतु यह कहना कि स्त्री-शिक्षा में दोष है, यह पुरुषों के अहंकार को सिद्ध करता है। अहंकार को बनाए रखने के लिए झूठ का सहारा लेना उचित नहीं है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 15 स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन

कठिन शब्दों के अर्थ :

उपेक्षा – ध्यान न देना। प्राकृत – एक प्राचीन भाषा। वेदांतवादिनी – वेदांत दर्शन पर बोलने वाली। दर्शक ग्रंथ – जानकारी देने वाली या दिखाने वाली पुस्तकें। तत्कालीन – उस समय का। तर्कशास्त्रज्ञता – तर्कशास्त्र को जानने वाला। न्यायशीलता – न्याय के अनुसार आचरण करना। कुतर्क – अनुचित तर्क। खंडन – दूसरे के मत का युक्तिपूर्वक निराकरण। प्रगल्भ – प्रतिभावान। नामोल्लेख – नाम का उल्लेख करना। आदृत – आदर या सम्मान पाया, सम्मानित। विज्ञ – समझदार, विद्वान। ब्रह्मवादी – वेद पढ़ने-पढ़ाने वाला। दुराचार – निंदनीय आचरण। सहधर्मचारिणी – पत्नी। कालकूट – ज़हर। कुकल – बुरा परिणाम। पीयूष – अमृत।

दृष्टांत – उदाहरण, मिसाल। अल्पज्ञ – थोड़ा जानने वाला। प्राक्कालीन – पुरानी। व्यभिचार – पाप। विक्षिप्त – पागल। व्यापक – विस्तृत। बात व्यथित – बातों से दुखी होने वाले। ग्रह ग्रस्त – पाप ग्रह से प्रभावित। किंचित् – थोड़ा। दुराचार – बुरा आचरण। दुर्वाक्य – निंदा करने वाला वाक्य या बात। परित्यक्त – पूरे तौर पर छोड़ा हुआ। अभिमान – अहंकार, घमंड। मिथ्यावाद – झूठी बात। कलंकारोपण – दोष मढ़ना, दोषी ठहराना।

मिथ्या – झूठ। निर्भर्त्सना – तिरस्कार, निंदा। नीतिज्ञ – नीति जानने वाला। हरगिज़ – किसी हालत में। विद्यमान – उपस्थित। शोक – दुख। कुमार्गगामी – बुरी राह पर चलने वाले। सुमार्गगामी – अच्छी राह पर चलने वाला। कटु – कड़वा। अधार्मिक – धर्म से संबंध न रखने वाला। धर्म तत्व – धर्म का सार। दलीलें – तर्क । सुशिक्षित – पढ़े-लिखे। अनर्थ – बुरा, अर्थहीन । अपढ़ों – अनपढ़ों। कुलीन – सभ्य। मुमानियत – रोक, मनाही । बट्टा लगाना – कलंक लगाना। अभिज्ञता – जानकारी, ज्ञान। अपकार – अहित।

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.2

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.2

Page-88

Question 1.
How would you rewrite Euclid’s fifth postulate so that it would be easier to understand?
Answer:
The fifth postulate is about parallel lines. When two or more lines never intersect each other in a plane and perpendicular distance between them is always constant then they are said to be parallel lines.
Two facts of the postulates:
(i) If P doesn’t lie on 1 then we can draw a line through P which will be parallel to the line 1.
(ii) There will be only one line can be drawn through P which is parallel to the line 1.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.2

Question 2.
Does Euclid’s fifth postulate imply the existence of parallel lines? Explain.
Answer:
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.2 - 1
Yes, Euclid’s fifth postulate implies the existence of parallel lines.
If the sum of the interior angles will be equal to sum of the two right angles then two lines will not meet each other on either side and therefore they will be parallel to each other.

Lines m and n will be parallel if
∠1 + ∠3 = 180°
Or ∠2 + ∠4 = 180°

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1

Question 1.
Which of the following statements are true and which are false? Give reasons for your answers.
(i) Only one line can pass through a single point.
(ii) There are an infinite number of lines which pass through two distinct points.
(iii) A terminated line can be produced indefinitely on both the sides.
(iv) If two circles are equal, then their radii are equal.
(v) In Fig., if AB = PQ and PQ = XY, then AB = XY.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1 - 1
Answer:
(i) False. There can be infinite lines drawn passing through a single point.
(ii) False. Only one line can be drawn which passes through two distinct points.
(iii) True. A terminated line can be produced indefinitely on both the sides.
In geometry, a line can be extended in both the directions. A line means infinite long length.
(iv) True. If two circles are equal, then their radii are equal.
By superposition, we will find that the centre and circumference of the both circles coincide. Hence, their radii must be equal.
(v) True. By Euclid’s first axiom things which are equal to the same thing, are equal to one another.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1

Question 2.
Give a definition for each of the following terms. Are there other terms that need to be defined first? What are they, and how might you define them?
(i) parallel lines
(ii) perpendicular lines
(iii) line segment
(iv) radius of a circle
(v) square
Answer:
Yes, other terms need to be defined first which are:
Plane: A plane is flat surface on which geometric figures are drawn.
Point: A point is a dot drawn on a plane surface and is dimensionless.
Line: A line is collection of points which can extend in both the directions and has only length not breadth.
(i) Parallel lines: When two or more lines never intersect each other in a plane and perpendicular distance between them is always constant then they are said to be parallel lines.
(ii) Perpendicular lines: When two lines intersect each other at right angle in a plane then they are said to be perpendicular to each other.
(iii) Line segment: A line segment is a part of a line with two end points and cannot be extended further.
(iv) Radius of a circle: The fixed distance between the centre and any point on the circumference of a circle is called the radius of the circle.
(v) Square: A square is a quadrilateral in which all the four sides are equal and each internal angle is a right angle.

Question 3.
Consider two ‘postulates’ given below:
(i) Given any two distinct points A and B, there exists a third point C which is in between A and B.
(ii) There exist at least three points that are not on the same line.
Do these postulates contain any undefined terms? Are these postulates consistent? Do they follow from Euclid’s postulates? Explain.
Answer:
Undefined terms in the postulates:
⇒ Many points lie in a plane. But here it is not given about the position of the point C whether it lies on the line segment joining AB or not.
⇒ Also, there is no information about the plane whether the points are in same plane or not.
Yes, these postulates are consistent when we deal with these two situations:
(i) Point C is lying in between and on the line segment joining A and B.
(ii) Point C not lies on the line segment joining A and B.
No, they don’t follow from Euclid’s postulates. They follow the axioms.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1

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Question 4.
If a point C lies between two points A and B such that AC = BC, then prove that AC = 1/2 AB. Explain by drawing the figure.
Answer:
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1 - 2
Here, AC = BC
Now, adding AC both sides.
AC + AC = BC + AC
Also, BC + AC = AB (as it coincides with line segment AB)
∴ 2 AC = AB
⇒ AC = \(\frac{1}{2}\) AB.

Question 5.
In Question 4, point C is called a mid-point of line segment AB. Prove that every line segment has one and only one mid-point.
Answer:
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1 - 3
Let AB be the line segment and points P and Q be two different mid points of AB.
Now,
∴ P and Q are mid points of AB.
Therefore, AP = PB and also AQ = QB.
Also, PB + AP = AB (as it coincides with line segment AB)
Similarly, QB + AQ = AB.
Now, AP = PB
AP + AP = PB + AP
(If equals are added to equals, the wholes are equal.)
⇒ 2 AP = AB ……… (i)
Similarly,
2 AQ = AB ……. (ii)
From (i) and (ii)
2 AP = 2 AQ (Things which are equal to the same thing are equal to one another.)
⇒ AP = AQ
Thus, P and Q are the same points. This contradicts the fact that P and Q are two different mid points of AB. Thus, it is proved that every line segment has one and only one mid-point.

Question 6.
In Fig, if AC = BD, then prove that AB = CD.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1 - 4
Answer:
Given, AC = BD
From the figure,
AC = AB + BC
BD = BC + CD
⇒ AB + BC = BC + CD
According to Euclid’s axiom, when equals are subtracted from equals, remainders are also equal.
Subtracting BC from both sides,
AB + BC – BC = BC + CD – BC
AB = CD

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 5 Introduction to Euclid’s Geometry Ex 5.1

Question 7.
Why is Axiom 5, in the list of Euclid’s axioms, considered a ‘universal truth’? (Note that the question is not about the fifth postulate.)
Answer:
Axiom 5: The whole is greater than the part.
Take an example of a cake. When it is whole it will measures 2 pound but when we took out a part from it and measured its weigh it will come out lower than the previous one. So, the fifth axiom of Euclid is true for all the universal things. That is why it is considered a ‘universal truth’.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

JAC Class 9th Economics Poverty as a Challenge InText Questions and Answers

Page No. 32

Question 1.
Why do different countries use different poverty lines?
Answer:
Different countries use different poverty lines because what is necessary to satisfy basic needs is different at different times and in different countries. Each country uses an imaginary line that is considered appropriate for its existing level of development and its accepted minimum social norms.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 2.
What do you think would be the “minimum necessary level” in your locality?
Answer:
The “minimum necessary level” in our locality would be ₹5000 per month per head.

Page No. 33

Table 3.1 Estimates of Poverty in India

Poverty Ratio (%)Number of Poor (in million)
YearRuralUrbanTotalRuralUrbanCombined
1993-9450.7324532975404
2004-0542263732681407
2009-1034213027876355
2011-1226142221753270

(Source Economic Survey 2017-18.)

Question 1.
Even if poverty ratio declined between 1993-94 and 2004-05, why did the number of poor remain at about 407 million?
Answer:
Though poverty ratio declined between 1993-94 and 2004-05, the number of poor remained at about 407 million due to population explosion during this period.

Question 2.
Are the dynamics of poverty reduction the same in rural and urban India?
Answer:
No, the dynamics of poverty reduction are not the same in rural and urban India.

Page. No. 35

Observe some of the poor families around you and try to find the following:
Question 1.
Which social and economic group do they belong to?
Answer:
They belong to scheduled castes and scheduled tribes and some are daily wages labourers.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 2.
Who are the earning members in the family?
Answer:
Both males and females are the earning members in the family.

Question 3.
What is the condition of the old people in the family?
Answer:
The condition of the old people in the family is very bad. They are treated as a burden on the family.

Question 4.
Are all the children (boys and girls) attending schools?
Answer:
No, all the children (boys and girls) are not attending schools. Only some boys are attending schools while girls are made to sit at home.

Page. No. 36

Graph 3.2 : Poverty Ratio in Selected Indian States (As per 2011 census)
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge 1
[Source Economic Survey 2017-18

Study the Graph 3.2 and do the following:
Question 1.
Identify the three states where the poverty ratio is the highest.
Answer:

  1. Bihar.
  2. Odisha.
  3. Assam.

Question 2.
Identify the three states where poverty ratio is the lowest.
Answer:

  1. Kerela.
  2. Himachal Pradesh.
  3. Punjab.

Page. No. 36

Graph 3.4 Number of the poor by region ($ 1.90 per day) in millions
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge 2
(Source Poverty and Equity Database: Word Bank (http://databank.worldbank.org/data/ reports. aspx?source=poverty-and-equity-database)

Study the Graph 3.4 and do the following:
Question 1.
Identify the areas of the world, where poverty ratios have declined.
Answer:
Poverty ratios have declined in:

  1. East Asia and Pacific,
  2. China,
  3. Sub-Saharan Africa,
  4. South Asia.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 2.
Identify the area of the globe which has the largest concentration of the poor.
Answer:
East Asia and the Pacific has the largest concentration of the poor.

JAC Class 9th Economics Poverty as a Challenge Textbook Questions and Answers  

Question 1.
Describe how the poverty line is estimated in India?
Answer:
A common method used to measure poverty is based on the income or consumption levels. A minimum level of food requirement, clothing, footwear, fuel and light, educational anu medical requirement, etc. are determined for subsistence while determining the poverty line in India. These physical quantities are multiplied by their prices in rupees.

The present formula for food requirement while estimating the poverty line is based on the desired calorie requirement. The accepted average calorie requirement in India is 2400 calories per person per day in rural areas and 2100 calories per person per day in urban areas.

Question 2.
Do you think that present methodology of poverty estimation is appropriate?
Answer:
No, we do not think that the present methodology of poverty estimation is appropriate. The present methodology of poverty estimation takes into consideration income and consumption level only. That is insufficient criterion. According to social scientists, poverty should be a looked at through some other indicators. These indicators may be lack of general resistance due to continuous malnutrition, lack of access to healthcare, lack of job opportunities, lack of access to safe drinking water and sanitation, etc. Poverty should also be viewed on the basis of social exclusion and vulnerability.

Question 3.
Describe poverty trends in India since 1973.
Answer:
There has been a substantial decline in poverty ratios in India. It was about 55 per cent in 1973-74, which reduced to 37 per cent in 2004-05. Although, the percentage of people living under poverty declined in the earlier two decades, i.e., 1973-1993, the number of poor declined from 407 million in 2004-05 to 270 million in 2011-12 with an average decline of 2.2 percentage points during 2004-05 to 2011-12.

The proportion of people below poverty line further came down to about 22 per cent in 2011-12. If the trend continues, people below poverty line may came down to less than 20 per cent in the next few years.

Question 4.
Discuss the major reasons for poverty in India.
Answer:
The major reasons for poverty in India are as follows:
1. Low level of Economic Development:
One historical reason is the low level of economic development under the British colonial administration. The policies of the colonial government ruined traditional handicrafts and discouraged development of industries like textiles.

2. Failure of Indian Administration:
The Indian administration failed at two fronts :
(i) Promotion of economic growth,
(ii) Population control which perpetuated the cycle of poverty.

3. Lack of Employment:
With the extension of irrigation and the advents of Green Revolution, many job opportunities were created in the agricultural sector but the effects were limited to some parts of India. The industries, both in the public and private sector did provide some jobs. But there were not enough to absorb all the job seekers.

4. Huge Income Inequalities:
This is one of the major reasons of poverty in India. Unequal distribution of land and other resources increases income inequalities.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 5.
Identify the social and economic groups which are most vulnerable to poverty in India.
Answer:
1. Social Groups:
The social groups more vulnerable to poverty are the scheduled caste and scheduled tribe households. These are not allowed to avail the facilities given to others due to the prevailing caste system. This leads to poverty.

2. Economic Groups:
The economic groups vulnerable to poverty are the rural agricultural labourer households and the urban casual labourer households. The rural agricultural labourers have no land of their own and are thus not able to earn enough to meet their daily needs, and hence remain poor.

Question 6.
Give an account of inter-state disparities of poverty in India.
Answer:
A major aspect of poverty in India is that the proportion of poor people is not the same in every state. The success rate of reducing poverty varies from state to state. Recent estimates show while the all India Head Count Ratio (HCR) was 21.9 per cent in 2011-12 states like Madhya Pradesh, Assam, Uttar Pardesh, Bihar and Odisha had higher poverty levels than the all, India poverty level. Bihar and Odisha continue to be the two poorest states with poverty ratios of 33.7 and 32.6 per cent respectively.

Along with rural poverty, urban poverty is also high in Odisha, Madhya Pradesh, Bihar and Uttar Pradesh. In comparison, there has been a significant decline in poverty in Kerala, Maharashtra, Andhra Pradesh, Tamil Nadu, Gujarat and West Bengal.

States like Punjab and Haryana have traditionally succeeded in reducing poverty with the help of high agricultural growth rates. Kerala with the help of human resource development, West Bengal with land reform measures, Andhra Pradesh and Tamil Nadu with Public distribution of food grains have been successful in reducing poverty levels.

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 7.
Describe global poverty trends.
Answer:
The proportion of people in developing countries living in extreme economic poverty has fallen from 36 per cent in 1990 to 10 per cent in 2015. Although, there has been a substantial reduction in global poverty, it is marked with great regional differences.

Poverty declined substantially in China and South-East Asian countries as a result of rapid economic growth and massive investments in human resource development. Number of poor in China has come down from 88.3 per cent in 1981 to 14.7% per cent in 2008, and to 0.7 percent in 2015.

In the countries of South Asia (India, Pakistan, Sri Lanka, Nepal, Bangladesh, Bhutan), the decline has also been rapid-34 percent in 2005 to 16.2 percent in 2013. In Sub-Saharan Africa, poverty in fact declined from 51 per cent in 2005 to 41 per cent in 2015. In Latin America, the ratio of poverty has also declined from 10 percent in 2005 to 4 percent in 2015. Poverty has also resurfaced in some of the former socialist countries like Russia where officially it was non-existent earlier.

Question 8.
Describe the current government strategy of poverty allevaition.
Answer:
Removal of poverty has been one of the major objectives of Indian developmental strategy. The current anti-poverty strategy of the government is based broadly on two planks:
1. Promotion of Economic Growth:
Over a period of thirty years lasting upto the early eighties, there was little per capita income growth and not much reduction in poverty. Official poverty estimates which were about 45 percent in the early 1950s remained the same even in the early eighties.

Since the eighties, India’s economic growth has been one of the fastest in the world. The growth rate jumped from the average of about 3.5 per cent a year in the 1970s to about 6 per cent during the 1980s and 1990s. The higher growth rates have helped significantly in the reduction of poverty.

Therefore, it is becoming clear that there is a strong link between economic growth and poverty reduction. Economic growth widens opportunities and provides the resources needed to invest in human development. However, the poor may not be able to take direct advantage of the opportunities created by economic growth. Moreover, growth in the agriculture sector is much below the expectations.

2. Targetted Anti-poverty Programmes:
There is a clear need for targetted anti-poverty programmes. The government has implemented several anti- poverty schemes to eradicate poverty; Some of these are as follows :
(a) National Rural Employment Guarantee Act (NREG), 2005
(b) Prime Minister Rozgar Yojana (PMRY), 1993
(c) Rural Employment Generation Programme (REGP), 1995
(d) Swamajayanti Gram Swarozgar Yojana (SGSY), 1999
(e) Pradhan Mantri Gramodaya Yojana (PMGY), 2000
(f) Antyodaya Anna Yojana (AAY), 2000

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 Poverty as a Challenge

Question 9.
Answer the following questions briefly:
1. What do you understand by human poverty?
Answer:
Human poverty is a concept that goes beyond the limited view of poverty as lack of income. It refers to the denial of political, economic and social opportunities to an individual, needed to maintain a reasonable standard of living. Illiteracy, lack of job opportunities, lack of access to proper healthcare and sanitation, caste and gender discrimination, etc are all components of human poverty.

2. Who are the poorest of the poor?
Answer:
Women, elderly people and female infants are the poorest of the poor in society Women, elderly people and the girl child are systematically denied equal access to the resources available in the family. That is why they are considered as the poorest of the poor.

3. What are the main features the National Rural Employment Guarantee Act, 2005?
Answer:
National Rural Employment Guarantee Act, 2005 was passed in September 2005.

Its main features are as under:

  1. The Act provides 100 days assured employment every year to every rural household.
  2. One-third of the proposed jobs would be reserved for women.
  3. Under the programme, if an applicant is not provided employment within fifteen days he/she will be entitled to get daily unemployment allowance.
  4. The central government and state governments will establish National Employment Guarantee Funds and State Employment Guarantee Funds respectively.

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JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Question 1.
The area of a triangle is 30 cm2. Find the base if the altitude exceeds the base by 7 cm.
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula - 1
Solution :
Let base BC = x cm
Then altitude = (x + 7) cm
Area of ΔABC = \(\frac {1}{2}\) × base × height
⇒ 30 = \(\frac {1}{2}\)(x)(x + 7)
⇒ 60 = x2 + 7x
⇒ x2 + 7x – 60 = 0
⇒ x2 + 12x – 5x – 60 = 0
⇒ x(x + 12) – 5(x + 12) = 0
⇒ (x – 5)(x + 12) = 0
⇒ x = 5 or x = -12+
⇒ x = 5 [∵ x ≠ -12]
∴ Base (x) = 5 cm and
Altitude = x + 7 = 5 + 7 = 12 cm.

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Question 2.
The cost of turfing a triangular field at the rate of ₹ 45 per 100 m2 is ₹ 900. Find the height, if double the base of the triangle is 5 times the height.
Solution :
Let the height of triangular field be h metres.
It is given that 2 × (base) = 5 × (Height)
∴ Base = \(\frac {5}{2}\) h
Area = \(\frac {1}{2}\) × Base × Height
Area = \(\frac {1}{2}\) × \(\frac {5}{2}\)h × h = \(\frac {5}{4}\)h2m2 …………(i)
∴ Cost of turfing the field is ₹ 45 per 100m2
∴ Area = Total cost / Rate per sq.m
= \(\frac{900}{45 / 100}=\frac{90000}{45}\)
= 2000 m2 …………(ii)
From (i) and (ii), we get
\(\frac {5}{4}\)h2 = 2000
⇒ 5h2 = 8000
⇒ h2 = 1600
⇒ h = 40 m
∴ Height of the triangular field is 40 m.

Question 3.
From a point in the interior of an equilateral triangle, perpendicular drawn to the three sides are 8 cm, 10 cm and 11 cm respectively. Find the area of the triangle.
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula - 2
Solution :
Let each side of the equilateral ΔABC = x cm,
From an interior point O, OD, OE and OF perpendiculars be drawn to BC, AC and AB respectively.
It is given that OD = 11 cm, OE = 8 cm and OF = 10 cm.
Join OA, OB and OC.
Area of ΔABC = Area of ΔOBC + Area of ΔOCA + Area of ΔOAB
= \(\frac {1}{2}\) × 11 + \(\frac {1}{2}\) × 8 + \(\frac {1}{2}\) × 10 = \(\frac {29}{2}\) × cm2
But, area of an equilateral triangle, whose each side is x = \(\frac{\sqrt{3}}{4}\) x2cm2
Therefore,
\(\frac{\sqrt{3}}{4}\) x2 = \(\frac {29}{2}\)x
∴ x = \(\frac{4 \times 29}{2 \times \sqrt{3}}=\frac{58}{\sqrt{3}}\) cm
∴ Area of ΔABC
= \(\frac{29}{2} \times \frac{58}{\sqrt{3}}\) cm2 = \(\frac{\sqrt{841}}{1.73}\)cm2
∴ Area of ΔABC = 486.1 cm2

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Question 4.
The difference between the sides at right angles in a right-angled triangle is 14 cm. The area of the triangle is 120 cm2. Calculate the perimeter of the triangle.
Solution :
Let the sides containing the right angle be x cm and (x – 14) cm.
Then, its area = [\(\frac {1}{2}\).x. (x – 14)] cm2
But, area = 120 cm2 [Given]
∴ \(\frac {1}{2}\)x (x – 14) = 120
⇒ x2 – 14x – 240 = 0
⇒ x2 – 24x + 10x – 240 = 0
⇒ x(x – 24) + 10 (x – 24) = 0
⇒ (x – 24) (x + 10) = 0
⇒ x = 24 [Neglecting x = -10]
∴ One side = 24 cm,
other side = (24 – 14) cm = 10 cm
Hypotenuse
= \(\sqrt{(24)^2+(10)^2}\) cm
= \(\sqrt{576+100}\) cm
= \(\sqrt{676}\) cm = 26 cm.
∴ Perimeter of the triangle
= (24 + 10 + 26) cm = 60 cm.

Question 5.
Find the percentage increase in the area of a triangle if its each side is doubled.
Solution :
Let a, b, c be the sides of the given triangle and s be its semi-perimeter
∴ s = \(\frac {1}{2}\)(a + b + c) …………(i)
The sides of the new triangle are 2a, 2b and 2c. Let s’ be its semi-perimeter.
∴ s’ = (2a + 2b + 2c)
= a + b + c = 2s [Using (i)]
Let Δ = Area of given triangle
Δ = \(\sqrt{s(s-a)(s-b)(s-c)}\) …….(ii)
And, Δ’ = Area of new triangle
Δ’ = \(\sqrt{s^{\prime}\left(s^{\prime}-2 a\right)\left(s^{\prime}-2 b\right)\left(s^{\prime}-2 c\right)}\)
= \(\sqrt{2 s(2 s-2 a)(2 s-2 b)(2 s-2 c)}\)
= \(\sqrt{16 s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
Δ’ = 4Δ
∴ Increase in the area of the triangle
= Δ’ – Δ = 4Δ – Δ = 3Δ
∴ % increase in area = (\(\frac {3Δ}{Δ}\) × 100)%
= 300%

Multiple Choice Questions

Question 1.
The area of the field ABGFEA is:
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula - 3
(a) 7225 m2
(b) 7230 m2
(c) 7235 m2
(d) 7240 m2
Solution :
(a) 7225 m2

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Question 2.
Area of shaded portion as shown in the figure is:
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula - 4
(a) 12 m2
(b) 13 m2
(c) 14 m2
(d) 15 m2
Solution :
(a) 12 m2

Question 3.
The lengths of four sides and a diagonal of the given quadrilateral are indicated in the diagram. If A denotes the area of quadrilateral in cm2, then A is
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula - 5
(a) 12\(\sqrt{6}\) sq. unit
(b) 6 sq. unit
(c) 6\(\sqrt{6}\) sq. unit
(d) \(\sqrt{6}\) sq. unit
Solution :
(a) 12\(\sqrt{6}\) sq. unit

Question 4.
If the sides of a triangle are doubled, then its area:
(a) Remains the same
(b) Becomes doubled
(c) Becomes three times
(d) Becomes four times
Solution :
(d) Becomes four times

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 12 Heron’s Formula

Question 5.
Inside a triangular garden there is a flower bed in the form of a similar triangle. Around the flower bed runs a uniform path of such a width that the side of the garden are double of the corresponding sides of the flower bed. The areas of the path and the flower bed are in the ratio:
(a) 1 : 1
(b) 1 : 2
(c) 1 : 3
(d) 3 : 1
Solution :
(d) 3 : 1

JAC Class 9 Social Science Important Questions Civics Chapter 1 What is Democracy? Why Democracy? 

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions Civics Chapter 1 What is Democracy? Why Democracy?

I. Objective Type Questions

1. Democracy is a form of government in which the rulers are elected by:
(a) the people
(b) rich people
(c) the king
(d) all of the above.
Answer:
(a) the people

2. In which year, General Pervez Musharraf held a referendum which granted him five years’ extension as a President?
(a) 2005
(b) 2008
(c) 2002
(d)2010.
Answer:
(c) 2002

3. Since its independence in, Mexico holds elections after every six years to elect its President.
(a) 1938
(b) 1930
(c) 1935
(d) 1947.
Answer:
(b) 1930

4. Which form of government requires all citizens to take part in politics ?
(a) Democracy
(b) Monarchy
(c) Dictatorship
(d) None of these.
Answer:
(a) Democracy

5. Democracy is better than other forms of government because:
(a) people are given opportunities to participate directly in government
(b) democratic governments prepare annual budget
(c) it is a more accountable form of government
(d) none of the above.
Answer:
(c) it is a more accountable form of government

II. Very Short Answer Type Questions

Question 1.
State the definition of democracy given by Abraham Lincoln.
Answer:
Abraham Lincoln, the President of the United States from 1861 to 1865, defined democracy as “Government of the people, for the people and by the people.”

JAC Class 9 Social Science Important Questions Civics Chapter 1 What is Democracy? Why Democracy?

Question 2.
From which Greek word democracy has been derived?
Answer:
Democracy has been derived from the Greek word ‘Democratia’.

Question 3.
What do you mean by the term ‘Democracy’?
Answer:
The term democracy is derived from two Greek words ‘Demos’ which means people and ‘Kratia’ ‘meaning the government. Thus, Democracy means “Rule by the people”.

Question 4.
Which Pakistani general led a military coup in October 1999?
Answer:
The Pakistani general who led a military coup in October 1999 was General Pervez Musharaf.

Question 5.
What was the designation taken by General Pervez Musharraf for himself when he overthrew the democratic government of Pakistan in 1999?
Answer:
General Pervez Musharraf declared himself the chief executive of Pakistan when he overthrew the democratic government of Pakistan in 1999.

Question 6.
What is a Referendum?
Answer:
A Referendum is a vote in which the electorate can express a view on a particular issue of public policy.

Question 7.
With what motive did General Pervez Musharraf issue a ‘legal framework order’ in August 2002?
Answer:
The motive was to ensure that he had the ultimate power to decide how he wanted Pakistan to be ruled.

Question 8.
Mention one of the important features of democracy.
Answer:
One important feature of democracy is that the final decision-making power rests with those elected by the people.

Question 9.
What is the name of the Chinese parliament?
Answer:
The name of the Chinese parliament is Quanguo Renmin Daibiuo Dahui (National People’s Congress).

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Question 10.
Which party always forms the government in China?
Answer:
The Communist Party of China always forms the government in China.

Question 11.
When did Mexico get independence?
Answer:
Mexico got independence in 1930.

Question 12.
From 1930, which country holds elections after every six years and which has never been under a military or dictator rule?
Answer:
Mexico.

Question 13.
What is the name of famous political party of Mexico?
Answer:
The famous political party of Mexico is Institutional Revolutionary Party (PRI).

Question 14.
Despite having an elected parliament and government under the monarchy and military rule, why can’t they be called democracy?
Answer:
Because the elected Parliament is nominal. Real power rests in the hands of those people, whom the people have not chosen.

Question 15.
Who should have the final decision-making power in a democracy?
Answer:
The power to make the final decisions in a democracy should be in the hands of the elected representatives by the people.

Question 16.
What do you understand by political equality?
Answer:
Political equality means that each adult citizen must have one vote and each vote must have one value.

Question 17.
When did Zimbabwe get independence?
Answer:
Zimbabwe gained independence inl980.

Question 18.
Which party of Zimbabwe led the struggle for independence?
Answer:
ZANU-PF.

Question 19.
What does the example of Zimbabew tell us?
Answer:
The example of Zimbabew shows that popular approval of the rulers is necessary in a democracy.

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Question 20.
Within what limits does a democratic government govern?
Answer:
A democratic government rules within limits set by constitutional law and citizens’ rights.

Question 21.
State any two characteristics of democracy.
Answer:

  1. Rulers elected by the people take all the major decisions.
  2. Elections offer a choice and fair opportunity to the people to change the current rulers.

Question 22.
Give any two arguments against democracy.
Answer:

  1. Leaders keep changing in a democracy. This leads to instability.
  2. Democracy leads to corruption.

Question 23.
Give any two arguments for democracy.
Answer:

  1. It is a more accountable form of government.
  2. It improves the quality of decision-making.

Question 24.
Which governance system is based on the principle of political equality?
Answer:
Democratic governance is based on the principle of political equality.

Question 25.
Mention any four challenges to Democracy.
Answer:

  1. Economic Inequalities,
  2. Social Inequalities,
  3. Leadership and Political Parties,
  4. Power-play in ‘Elections’.

III. Short Answer Type Questions

Question 1.
How did Musharraf establish his rule in Pakistan?
Answer:
General Pervez Musharraf led a military coup in Pakistan in October 1999. He over-threw a democratically-elected government and declared himself the chief executive of the country. Later, he changed his designation to President. In 2002, he held a refrendum in the country that granted him a five-year extension.

In August, 2002, he issued a legal framework order that amended the constitution of Pakistan. According to this order, the President can dismiss the national or provincial assemblies. After passing the ‘legal framework order’ elections were held to the national and state assemblies. But the final power was in the hands of military officers and General Musharraf. Elected representatives had only some powers.

Question 2.
“In Pakistan people elect their representatives to the national and provincial assemblies but still it cannot be called a democratic country.” Give reasons.
Answer:
In Pakistan, General Parvez Musharraf led a military coup against a democratically- elected government. The work of the civilian cabinet was supervised by a National Security Council which was dominated by military officers. Though, at present, Pakistan has a democratic government under the leadership of Imran Khan, but the government is still a tool in the hands of Pakistani Army and ISI.

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Question 3.
“In China, elections are regularly held after 5 years for electing the country’s Parliament, but still it cannot be called a democratic country.” Give reasons.
Answer:
In China, elections are regularly held after every five years for electing the country’s Parliament. Before contesting elections, a candidate needs the approval of theChinese Communist Party. Only those who are the members of the Chinese Communist Party or eight smaller parties allied to it are allowed to contest elections. The government is always formed by the Communist Party. Therefore, China cannot be called a democratic country.

Question 4.
‘Since its independence in 1930, Mexico holds elections after every six years to elect its President. The country has never been under a military or dictator’s rule but still it cannot be called a democratic country’. Give reasons.
Answer:
Since its independence in 1930, Mexico holds elections after every 6 years. The country has never been under a dictator or military ruler. But until 2000 every election was won by a party called PRI (Institutional Revolutionary Party). Opposition parties did contest elections, but never managed to win. The government used all its machinery to win elections.

All those who were employed in goverment offices had to attend its party meeting. Teachers of government schools used to force parents to vote for the PRI. Media used to work under the influence of the government. The PRI spent a large sum of money in the campaign for its condidates. Thus, due to lack of free and fair elections, Mexico cannot be called a democratic country.

Question 5.
Why are Saudi Arabia, Estonia and China non-democratic countries though they declare themselves as democracies ? State one reason for each of the countries.
Answer:
One major demand of democracy is ‘universal adult franchise’, i.e., the right to vote for every adult citizen. But in world politics, there are many instances of denial of equal right to vote.
These are:

  1. In Saudi Arabia, women did not have the right to vote until 2015.
  2. Estonia made its citizenship rules in such a manner that people be longing to Russian minority find of it difficult to get the right to vote.
  3. In China, before contesting the election, the candidate needs the approval of the Chinese Communist Party. Although these countries declare themselves as democracies, the fundamental principle of ‘political equality’ is denied in all the cases. Thus, these are not truly democratic countries.

Question 6.
Why Zimbabwe cannot be called a democratic nation? Give reasons.
Answer:
Since independence in 1980, the country has been ruled by ZANU-PF. Its leader, Robert Mugabe, had been ruling the country since independence. Elections have been held regularly and always won by ZANU-PF. President Mugabe uses unfair practices in elections.

Over the years, his government has changed the constitution several times to increase the powers of the President. Opposition party workers are harassed and their meeting disrupted. Public protests and demonstrations against the government are declared illegal. The courts are there, but most of the time their orders are ignored by the government. Because of all these reasons, Zimbabwe can¬not be called a democratic country.

Question 7.
Which three rights should every citizen of a democratic country get?
Answer:
Following are the three rights should every citizen of a democratic country get

  1. Citizens should be free to express their opinion in public, to form associations, to protest and take other political actions.
  2. They should be equal in the eyes of the law.
  3. These rights must be protected by an independent judiciary, whose orders should be obeyed by everyone.

Question 8.
Explain the major arguments against democracy.
Answer:
The major arguments against democracy are as follows:

  1. Leaders keep changing in a democracy. This leads to instability.
  2. Democracy is all about political competition and power-play. There is no scope for morality.
  3. Elected leaders do not know the best interest of the people. It leads to bad decisions.
  4. Democracy leads to corruption, for it is based on electoral competition.
  5. Ordinary people don’t know what is good for them; they should not decide anything.

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Question 9.
“Democracy improves the quality of decision-making.” Explain.
Answer:
Democracy is based on consultation and discussion.

  1. A democratic decision always involves many persons’ discussions and meetings. When a number of people put their heads together, they are able to point out the possible mistakes in any decision.
  2. As most of the decisions are taken by discussion, this reduces the chances of irrational or irresponsible decisions.
  3. If the decision is not according to the wishes of the people they have the right to protest and they can even force the government to withdraw it.
  4. Thus, we can say that democracy improves the quality of decision-making.

Question 10.
“Democracy provides a method to deal with differecences and conflicts.” Explain.
Answer:

  1. Democracy provides all the citizens some basic rights through which they can give their opinion.
  2. Democracy provides the citizens a right to choose their representatives and change them if they do not work according to their wishes.
  3. In the parliament, all the members have the right to give their opinion. Therefore, we can say that democracy provides a method to deal with differences and conflicts.

Question 11.
“Democracy is better than other forms of government because it allows us to correct its own mistakes.” Explain.
Answer:
There is no guarantee that mistakes cannot be made in democracy. No form of government can guarantee that. The advantage in a democracy is that such mistakes cannot be hidden for long. There is a space for public discussion on these mistakes and there is a room for correction. Either the rulers have to change their decisions or the rulers can be changed. While this cannot happen in a non-democratic government.

Question 12.
What is democracy? Which are its four features?
Answer:
Democracy is a form of government in which the rulers are elected by the people. Some features of democracy are:

  1. Democracy is a form of government in which the rules are elected by the people.
  2. A democracy must be based on a free and fair election, where those currently in power have a fair chance of losing.
  3. In a democracy, each adult citizen must have one vote and each vote must have one value.
  4. In a democracy, government rulers within limits set by constitutional law and citizens’ rights.

Question 13.
Keeping in mind the features and principles of democracy, can you say that India is a democratic country? Explain by giving examples.
Answer:

  1. Decision-making power with the people’s representative: In India, the final decision-making power is with the parliament, whose members are directly elected by the people.
  2. Free and fair elections: In India, we have the Election Commision an independent body for conducting elections. Due to this, the party which is in power has a fair chance of losing.
  3. One person, one vote, one value: In India, all the adult citizens have one vote and each vote has one value.
  4. Rule of law and respect for rights: Indian government rules within limits set up by the constitutional law. All the citizens have been given some basic rights.

Question 14.
Why is democracy better than any other form of government? Write any five argument to support your answer.
Or
Explain any five arguments in favour of democracy.
Answer:
Democracy is better than any other form of government Five arguments in favour of democracy are as follows:

  1. A democratic form of government is a better government because it is a more accountable form of government. A democracy requires that the rulers have to attend to the needs of the people.
  2. Democracy is based on consulation and discussion. Although it takes time, this process reduces the chances of irrational and irresponsible decisions. Thus, democracy improves the quality of decision-making.
  3. Democracy provides a method to deal with differences and conflicts in the society. In a diverse country like India, democracy keeps our country united.
  4. As democracy is based on the principle of political equality, it enhances the dignity of citizens.
  5. Democracy is better than other forms of government because it allows us to correct our own mistakes. In democracy, there is a space for public discussion on these mistakes and there is always a room for correction.

Question 15.
“Democracy enhances the dignity of citizens”. Explain.
Answer:
There is no guarantee that mistakes cannot be made in democracy. No form of government can guarantee that. The advantage in a democracy is that such mistakes cannot be hidden for long. There is a space for public discussion on these mistakes and there is always a room for correction. Either the rulers have to change their decisions or the rulers can be changed. While this cannot happen in a non-democratic government.

JAC Class 9 Social Science Important Questions Civics Chapter 1 What is Democracy? Why Democracy?

Question 16.
Democracy is based on the principle of political equality. Explain.
Answer:
Democracy is based on the principle of political equality due to the recognition that the poor and the least educated have the same status as the rich and the educated. People are not subjects of a ruler, they are the rulers themselves. Even when they make mistakes, they are responsible for their conduct.

Question 17.
Democracy is the government of the people, for the people and by the people. Explain it.
Answer:
Democracy is a form of government in which the rulers are elected by the people. Rulers elected by the people take all the important decisions. The rulers of democracy have to attend to need of the people. Democracy is based on discussion and consultation.

A democratic decision always involves many persons, discussions and meetings. So, democracy improves the quality of decision-making. Democracy recognises the principal of political equality. It recognises that the poor and the least educated have the same status as the rich and the educated. Thus, people are not subjects of a ruler, they are the rulers themselves.

III. Long Answer Type Questions

Question 1.
Explain any five drity tricks used by the Institutional Revolutionary Party (PRI) to win elections in Mexico.
Answer:
The Institutional Revolutionary Party (PRI) of Mexico won all the elections from 1930 till 2000. The opposition parties did contest elections, but never managed to win. The PRI used may dirty triks to win the election. These were:

  1. All those who were employed in government offices had to attend its party meetings.
  2. Teachers of government schools used to force the parents to’vote for the Institutional Revolutionary Party.
  3. Sometimes, the polling booths were shifted from one place to another without prior notice, which made it difficult for people to cast their votes.
  4. Media largely ignored the activities of the opposition political parties.
  5. Being in power, the PRI spent a large sum of money to manipulate the elections and in campaigning for the candidates.

Question 2.
Explain the major features of democracy.
Answer:
The major features of democracy are as follows:
1. Responsible Government:
A democratic government is a responsible govern¬ment. The reprsentatives elected by the people on the basis of universal adult franchise remain responsible to the people, and in case they do not remain responsible before the people, the people can change them during the next elections.

2. Free and fair elections:
A democracy is based on free and fair elections, where those currently in power have a fair chance of losing.

3. Based on Liberty and Fraternity:
In democracy, the rights and the liberty of the people are well safe guarded. People are given freedom to express their views without any fear. They can criticise the wrong policies of the government.

4. Respect of the Principle of Equality:
In a democracy, all are equal in the eyes of law, and no discrimination is done on the basis of birth, race, caste, colour, sex, religion, etc. All citizens get equal opportunities to participate in the affairs of the state.

5. Government based on the will of the people:
A democracy is based on the will of the people, and it functions according to their consent. The government cannot ignore the interest of the people.

6. Political Education:
The gretaest merit of a democracy is its educative value. Participation in elections and other political activities, make the people intelligent and politically conscious. They become enlightened citizens.

Question 3.
Explain any five limitations of democracy.
Answer:

  1. Instability: Under democracy, leaders and political parties keep changing. This leads to political inslability.
  2. Law morality: Democracy is all about political competition and power-play. There is no scope for morality.
  3. Delays in decision-making: All the decisions are to be approved and discussed in the Parliament, and many people and institutions are to be consulted. So, it leads to delays in decision-making.
  4. Bad decisions: As most of the leaders do not know the best interest of the people, it leads to bad decisions.
  5. Corruption: As democracy is based on electoral competition, it leads to corrup¬tion. Many political parties used muscle and money power to come to power.
  6. Illiterate and politically unconscious voters: In most of the developing countries, voters are illiterate and politically unconscious, so they elect wrong governance.

Question 4.
Distinguish between democratic and non-democratic conditions.

DemocraticNon-Democratic
1. Government: A democratic government is elected by the people and it works for the people. It is also answerable to the people. People can change it, if it is not working according to the wishes of the people.1. Government: A non-democratic government is not elected by the people. The ruler may be hereditary or a military general, who has come to power by force. People cannot change it as there are no regular elections.
2. Basic rights: Under democracy, people ( are given basic rights like freedom of speech, freedom of movement, freedom of forming associations or unions, etc.2. No basic rights: Under non-democratic conditions, peoploe are not given basic rights. Citizens are put behind bars if they try to demand the basic rights.
3. Regular elections: Under this, there (i are regular elections through which people can change their government.3. No regular elections: Under this, there are no regular elections. Most of the non-democratic rulers have captured the power through military coup.
4. Constitution: Under democracy, the; (i government works within the limits, set up by the constitution. It has different institutions like judiciary which can check the powers of the government. Parliament is supreme 1 Under ( democracy, it is the parliament which is supreme. All the leaders or’ even the govenment is answerable to the parliament.4. Constitution: Some of the non democratic countries may have a constitution, but it can be changed only according to the wishes of the dictator.
5. Parliament is supreme: Under democracy, it is the parliament which is supreme. All the leaders or’ even the govenment is answerable to the parliament.5. The ruler is supreme: Under non-democratic conditions, it is the ruler who is supreme. All the political and economi powers are in his/her hand.

 

JAC Class 9 Social Science Important Questions

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

Jharkhand Board JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

JAC Class 10 Hindi पर्वत प्रदेश में पावस Textbook Questions and Answers

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
पावस ॠतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं ? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
अधवा
पर्वतीय प्रदेश में वर्षा का सौंदर्य।
उत्तर :
पावस ऋतु में प्रकृति में निरंतर परिवर्तन होता है। कभी धूप निकल आती है, तो कभी घने काले बादल छा जाते हैं। धूप के निकलनेपर आस-पास के पर्वत और उन पर खिले हुए फूल बहुत सुंदर दिखाई देते हैं। घने बादलों के आ जाने पर सबकुछ बादलों की ओट में छिप जाता है। चारों ओर घना अंधकार छा जाता है। ऊँचे-ऊँचे वृक्ष धुले हुए से प्रतीत होते हैं। पर्वतों से निकलने वाले झरने मधुर ध्वनि करते हुए बहने लगते हैं। आकाश में इधर-उधर घूमते हुए बादल अत्यंत आकर्षक लगते हैं।

प्रश्न 2.
‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
उत्तर :
मेखलाकार का शाब्दिक अर्थ है-‘श्रृंखलाकार, मंडलाकार, एक से एक जुड़े हुए’। कवि ने पर्वत की सुंदरता प्रकट करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है। पर्वतों की श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़कर दूर तक फैली हुई हैं और इस व्यापकता से उनकी सुंदरता प्रकट हो रही है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 3.
‘पर्वत प्रदेश में पावस. कविता के आधार पर पर्वत के रूप-स्वरूप का चित्रण कीजिए।
उत्तर :
पर्वत श्रृंखलाबद्ध विशालकाय अपने ढालदार आकार के कारण दूर-दूर तक फैला हुआ है। उस पर अनेक रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं, जो ऐसे लगते हैं मानो शृंखलाबद्ध अपार पर्वत सहस्रो प्रण्यरूपी नेत्रों से तलहटी में बने हुए सरोवर रूपी दर्पण में अपना रूप निहार रहा हो।

प्रश्न 4.
‘सहस्त्र दृग सुमन’ से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
उत्तर :
‘सहस्र दृग सुमन’ से तात्पर्य हज़ारों पुष्परूपी आँखों से है। कवि ने इस पद का प्रयोग पर्वत के लिए किया है। कवि कहता है कि पर्वत पर फूल खिले हुए थे और पर्वत के नीचे विशाल सरोवर था। उन्हें देखकर ऐसा लगता है, मानो पर्वत सहस्रों पुष्परूपी नेत्रों से अपनी शोभा को तालाबरूपी दर्पण में निहार रहा हो।

प्रश्न 5.
कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
उत्तर :
समानता इसलिए दिखाई है, क्योंकि जिस प्रकार दर्पण में प्रतिबिंब को साफ-साफ देखा जा सकता है, उसी प्रकार तालाब के जल में भी पर्वत और उस पर लगे फूलों का प्रतिबिंब साफ दिखाई दे रहा था। यहाँ कवि द्वारा तालाब की समानता दर्पण से करना अत्यंत उपयुक्त एवं सटीक है।

प्रश्न 6.
पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
उत्तर :
पर्वत की चोटियों पर ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे, जो टकटकी लगाए आकाश की ओर देखते हुए प्रतीत हो रहे थे। ऐसा लगता था, मानो वे और ऊँचा उठना चाहते थे। वे पेड़ ऐसे व्यक्ति को प्रतिबिंबित कर रहे थे, जो ऊँचा उठने की आकांक्षा से ओत-प्रोत हो और चिंतामुक्त होकर स्थिर भाव से अपने लक्ष्य को पाने की चाह में निरंतर बढ़ रहा हो।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 7.
शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धंस गए?
उत्तर :
कवि ने शाल के वृक्षों के भयभीत होकर धरती में धंसने की कल्पना की है। कवि के अनुसार वर्षा इतनी तेज़ और मूसलाधार थी कि ऐसा लगता था, मानो आकाश टूटकर धरती पर गिर गया हो। कोहरे के फैलने से ऐसा प्रतीत होता था, मानो सरोवर जल गया हो और उसमें से धुआँ उठ रहा हो। वर्षा के ऐसे भयंकर रूप को देखकर प्रतीत होता था कि शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में धंस गए हों।

प्रश्न 8.
झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
उत्तर :
झरने कल-कल की ध्वनि से पर्वत के गौरव का गान करते प्रतीत हो रहे थे। कवि ने बहते हुए झरने की तुलना मोतियों की लड़ियों से की है। कवि के अनुसार बहते हुए झरने में झाग के मोटे-मोटे बुलबुले बन रहे थे, जो मोतियों के समान लग रहे थे। इसी कारण कवि ने बहते हुए झरने की तुलना मोतियों की लड़ी से की है।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1.
है टूट पड़ा भू पर अंबर।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति से लेखक स्पष्ट करना चाहता है कि पर्वत-प्रदेश में होने वाली वर्षा अत्यंत भयंकर थी। पर्वतों पर मूसलाधार वर्षा हो रही थी। बादलों से बड़ी तेजी से और मोटे रूप में जल की वर्षा हो रही थी। ऐसी भयंकर वर्षा को देखकर लगता था, मानो आकाश टूटकर धरती पर आ गिरा हो।

प्रश्न 2.
-यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्ति से कवि का भाव यह है कि उस प्राकृतिक वातावरण को देखकर ऐसा प्रतीत होता था, मानो वर्षा का देवता इंद्र बादलों के यान में बैठा हुआ जादू का कोई खेल खेल रहा हो। आकाश में इधर-उधर उमड़ते-घुमड़ते बादलों में छिपे पहाड़ों को देखकर ऐसा लगता था, जैसे पहाड़ अपने पंखों को फड़फड़ाते हुए उड़ रहे हों। कहीं गहरे कोहरे के कारण चारों ओर धुआँ ही धुआँ था, तो कहीं मूसलाधार वर्षा से आकाश के धरती पर टूटकर गिरने जैसा प्रतीत हो रहा था। पहाड़ों का उड़ना, चारों ओर धुआँ होना और मूसलाधार-ये सब जादू के खेल के समान दिखाई दे रहे थे।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 3.
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।
उत्तर :
प्रस्तुत पंक्तियों से कवि स्पष्ट करना चाहता है कि पर्वत की चोटियों पर पेड़ उगे हुए थे, जो पर्वत के हृदय से उठे हुए लगते थे। पर्वत की चोटियों पर उगे ऊँचे-ऊँचे वे पेड़ आकाश में झाँकते हुए ऐसे प्रतीत होते थे, मानो ऊँचा उठने की आकांक्षा से कोई व्यक्ति सब प्रकार की चिंताओं से मुक्त होकर निरंतर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर बढ़ रहा हो।

कविता का सौंदर्य –

प्रश्न 1.
इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
काव्य में जड़ अथवा चेतन तत्वों पर मानवीय भावों, संबंधों और क्रियाओं के आरोप से उन्हें मनुष्य की तरह व्यवहार करते हुए दिखाना ही मानवीकरण अलंकार है। प्रस्तुत कविता में सर्वत्र मानवीकरण अलंकार दिखाई देता है। पर्वत को अपने फूलरूपी नेत्रों से अपना प्रतिबिंब देखते चित्रित किया गया है। पर्वतों पर लगे हुए पेड़ों को लक्ष्य-प्राप्ति की ओर अग्रसर चिंता मुक्त मनुष्य के समान दर्शाया गया है। इसी प्रकार एक अन्य स्थान पर पर्वत को बादलों के पंख लगाकर उड़ते हुए तथा शाल के पेड़ों को भयभीत होकर धंसते हुए चित्रित करके कवि ने इनका सुंदर मानवीकरण किया है।

प्रश्न 2.
आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है –
(क) अनेक शब्दों की आवृत्ति पर।
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर।
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर।
उत्तर :
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर। कवि ने शब्दों को इस प्रकार चित्रित किया है कि संपूर्ण दृश्य आँखों के समक्ष सजीव हो उठता है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 3.
कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर :
(क) मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्त्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल!

(ख) गिरिवर के डर से उठ-उठकर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

(ग) धंस गए धरा में सभय शाल!
उठ हरा धुआँ, जल गया ताल!

योग्यता विस्तार –

प्रश्न :
इस कविता में वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों की बात की गई है। आप अपने यहाँ वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
वर्षा ऋतु में प्रकृति अत्यंत मोहक रूप धारण कर लेती है। चारों ओर लहलहाते खेत और पेड़ हृदय को आनंद प्रदान करते हैं। नदियाँ, सरोवर, नाले सब जल से भर जाते हैं। मोर नाच उठते हैं। औषधियाँ और वनस्पतियाँ लहलहा उठती हैं। वर्षा की बूंदों से नहाकर पेड़ चमकदार हो जाते हैं। पशु-पक्षी आनंदमग्न हो उठते हैं। चारों ओर जल-ही-जल दिखाई देता है। बागों और बगीचों में फिर से बहार आ जाती है।

परियोजना कार्य –

प्रश्न 1.
वर्षा ऋतु पर लिखी गई अन्य कवियों की कविताओं का संग्रह कीजिए और कक्षा में सुनाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन कार्यों को स्वयं करें।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 2.
बारिश, झरने, इंद्रधनुष, बादल, कोयल, पानी, पक्षी, सूरज, हरियाली, फूल, फल आदि या कोई भी प्रकृति विषयक शब्दों का प्रयोग करते हुए एक कविता लिखने का प्रयास कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन कार्यों को स्वयं करें।

JAC Class 10 Hindi पर्वत प्रदेश में पावस Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
वर्षा के समय आपके घर के आसपास कैसा दृश्य होता है ? उसका वर्णन एक अनुच्छेद में कीजिए।
उत्तर :
वर्षा के समय हमारे घर के आसपास जल ही जल हो जाता है। हमारी गली में नदी-सी बहने लगती है। आस-पास के छोटे बच्चे उस पानी में छलाँगें लगाते हुए जल-क्रीड़ा करने लगते हैं। कुछ बच्चे कागज़ की नावें बनाकर उसे पानी में तैराते हैं। वर्षा की बूँदों से पेड़ नहा कर चमकने लगते हैं। मकानों की दीवारें धुली हुई लगती हैं। गली का कचरा बह जाता है और गली भी साफ-सुथरी लगने लगती है। चारों ओर हरियाली छा जाती है।

प्रश्न 2.
पंत जी मूलतः कलाकार हैं; स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
पंत जी मूलतः कलाकार हैं। उनके काव्य में शब्दों की कसावट, शब्द-चयन, वस्तु-विषय आदि सभी कुछ इस प्रकार है, जैसे कोई शिल्पकार मूर्ति तराशने से पहले उसके रंग, रूप, निखार तथा साज-सज्जा का सामान जुटाता है। इसी प्रकार पंत जी भी शब्द आदि को जुटाकर काव्य का निर्माण करते हैं। इनके काव्य में सर्वप्रथम कला का, फिर विचारों का और अंत में भावों का स्थान है। अपनी रचना को सुंदर बनाने के लिए कलाकार जिन प्रसाधनों का प्रयोग करता है, वे सब कला के ही प्रसाधन हैं।

प्रश्न 3.
पंत जी की भाषा-शैली का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
पंत जी प्रकृति के सुकुमार कवि हैं। उनकी भाषा में संस्कृत की व्यंजनापूर्ण तत्सम शब्दावली का प्राचुर्य है। उन्होंने अपने अद्भुत कला-कौशल से खड़ी बोली को कोमलता एवं सरसता प्रदान की है। भाषा तो ऐसी लगती है, मानों उनके कलात्मक संकेत पर नाचती हो। इनकी भाषा में तत्सम व तद्भव शब्दों की अधिकता होती है। इनके द्वारा किया गया शब्द चयन अपने आप में बेजोड़ है। इससे साथ-साथ अनुप्रास, उपमा आदि अलंकारों के प्रयोग ने इनके काव्य को सुंदरता प्रदान की है। पंत जी के शब्द वस्तुत: शब्द-चित्र है, जो कल्पना को भी प्रत्यक्ष प्रस्तुत करने में सक्षम है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 4.
वर्षाकाल में पर्वतीय प्रदेश में प्रकृति प्रतिपल अपना रूप क्यों बदल रही है ?
उत्तर :
वर्षाकाल में पर्वतीय प्रदेश में कभी धूप और कभी बादल छा जाते हैं। बादल और धूप की इस आँखमिचौली के कारण पर्वतीय प्रदेश के प्राकृतिक परिवेश में प्रतिपल परिवर्तन हो रहा है। धूप निकलने पर आस-पास के पर्वतों का साँदर्य स्पष्ट दिखाई देता है, परंतु बादलों के आने से पर्वत छिप जाते हैं तथा सर्वत्र अंधकार छा जाता है।

प्रश्न 5.
‘फड़का अपार वारिद के पर’ से क्या आशय है ?
उत्तर :
पर्वतीय क्षेत्र में बादलों के घिर आने पर पर्वत, वृक्ष, पुष्प, झरने आदि दिखाई नहीं देते। वे बादलों से ढक जाते हैं। कवि ने इन शब्दों के माध्यम से यह कल्पना की है कि पर्वत बादलरूपी पंखों को फड़फड़ा कर वहाँ से उड़ जाता है। जैसे पक्षी के उड़ने पर उसके पंखों की फड़फड़ाहट सुनाई देती है, वैसे ही बादलों की गर्जना सुनाई दे रही है।

प्रश्न 6.
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में कवि पंत ने क्या कहना चाहा है?
उत्तर :
सुमित्रानंदन पंत प्रकृति के सुकुमार कवि हैं। उन्होंने ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में वर्षा ऋतु के समय पर्वतीय प्रदेश के प्राकृतिक परिवेश में होने वाले परिवर्तनों का सुंदर उल्लेख किया है। कवि ने बताया है कि किस प्रकार प्रकृति बादलों और धूप की आँखमिचौली के कारण प्रतिफल अपने रूप को बदलती है। उसके रूप में हर पल एक नया निखार आता है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रश्न 7.
कविता में ऊँचे पर्वत सरोवर में क्या देखते हैं?
उत्तर :
कविता में कवि ने ऊँचे पर्वतों का मानवीकरण करते हुए कहा है कि श्रृंखलाबद्ध ऊँचे पर्वत अपने ऊपर खिले हुए पुष्परूपी नेत्रों से अपनी तलहटी के सरोवररूपी दर्पण में इस प्रकार झाँकते हैं जैसे कि सरोवर के जल में वे अपनी छवि एवं शोभा देख रहे हों।

पर्वत प्रदेश में पावस Summary in Hindi

कवि-परिचय :

जीवन – श्री सुमित्रानंदन पंत छायावादी काव्यधारा के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनका जन्म सन 1900 ई० में प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण जिला अल्मोड़ा के कौसानी ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री गंगादत्त पंत तथा माता का नाम सरस्वती था। पंत जी जन्म के कुछ घंटे के पश्चात ही अपनी माँ की स्नेह-छाया से वंचित हो गए थे। उन्होंने अपनी एक कविता में माँ के निधन के विषय में कहा है –

जन्म-मरण आए थे संग-संग बन हमजोली,
मृत्यु अंक में जीवन ने जब आँखें खोलीं।

पंत जी आरंभ से ही सुकुमारता के उपासक रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने अपने बचपन का नाम गुसाईं दत्त से बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया। स्वभाव की कोमलता एवं प्रकृति की सुकुमारता ने मिलकर कवि को कोमल भावों का गायक बना दिया। पंत जी के ऊपर युग चेतना का प्रभाव भी रहा है। गांधीजी के आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और अपनी ओजस्वी लेखनी से ब्रिटिश सरकार पर प्रहार करने लगे। संस्कृत, हिंदी, बाँग्ला एवं अंग्रेज़ी आदि भाषाओं के अध्ययन द्वारा पंत जी ने अपनी प्रतिभा को समृद्ध बनाया। उनके ऊपर अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि कीट्स व शैली तथा भारतीय कवि रवींद्रनाथ टैगोर का प्रभाव रहा है। सन 1977 ई० में पंत जी का निधन हो गया।

रचनाएँ – पंत जी ने अपने युग की माँग के अनुसार अनेक रचनाएँ लिखी हैं। उनकी रचनाओं में तत्कालीन युग की प्रगति का सफल अंकन हुआ है। उन्होंने कविता के साथ-साथ गद्य के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। पंत जी की रचनाएँ इस प्रकार हैं –

काव्य – वीणा, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन, युगांत, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्ण किरण, स्वर्ण धूलि, उत्तरा, कला और बूढ़ा चाँद, लोकायतन, ‘ सत्यकाम आदि।
लोकायतन – लोकायतन महाकाव्य पर पंत जी को एक लाख रुपये का पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।
नाटक – रजत-रश्मि, ज्योत्स्ना, शिल्पी।
उपन्यास – हार।
कहानियाँ एवं संस्मरण – पाँच कहानियाँ, साठ हर्ष, एक रेखांकन।
साहित्यिक विशेषताएँ – पंत जी का काव्य तत्कालीन युग का दर्पण कहा जा सकता है। इनका काव्य धीरे-धीरे विकसित हुआ। उच्छ्वास से गुंजन तक कवि प्रणय और प्रकृति का गायक रहा। इस आधार पर उसे शुद्ध सौंदर्यवादी कवि स्वीकार किया जा सकता है। ‘युगांत’ उनकी काव्य चेतना के एक युग का अंत है और ‘युगांत’ से ‘ग्राम्या’ तक उनकी भौतिकवादी दृष्टि अधिक सजग रही और वे मार्क्सवादी से प्रभावित रहे। ‘स्वर्ण धूलि’ से ‘उत्तरा’ तक वे अध्यात्मवाद की ओर झुके प्रतीत होते हैं तथा अरविंद दर्शन का उन पर गहरा।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

प्रभाव दिखाई पड़ता है। ‘लोकायतन’ में गांधीवादी विचारधारा का स्पष्ट प्रभाव लक्षित होता है। पंत जी के काव्य में कल्पना, अनुभूति, संवेदना और विचारशीलता एक साथ है। पल्लव’ काल की रचनाओं में कल्पना अधिक है। ‘बादल’ नामक कविता में कल्पना के विविध रूप दिखाई पड़ते हैं। पंत प्रकृति के कवि थे और शायद पहले हिंदी कवि भी, जिन्होंने स्पष्ट रूप से सांसारिक मांसलता के स्थान पर प्रकृति के सूक्ष्म सौंदर्य को स्वीकार किया और लिखा –

छोड़ द्रमों का मद छाया, तोड़ प्रकृति की भी माया।
छाले! हरे बाल जाल में, कैसे उलझा दूँ लोचन।

आजीवन अविवाहित रहने वाले पंत जी निश्चय ही प्रकृति में अपनी माँ, अपनी प्रेयसी तथा अपना सर्वस्व खोजते रहे। पंत जी की कविता – प्रकृति के मनोरम चित्रों की अद्भुत चित्रशाला है। ग्रीष्म ऋतु में सूखी हुई गंगा का चाँदनी रात में चित्रण कितना मार्मिक है –

सैकत शैय्या पर दुग्ध-धवल, तन्वंगी गंगा, ग्रीष्म विरल,
लेटी है श्रांत, क्लांत, निश्चल!

पंत जी की काव्य रचना का छायावादी दौर समाप्त होने पर प्रगतिवादी दौर आरंभ होता है। ‘ताज’, ‘दो लड़के’ तथा ‘वह बुड्ढा’ – शीर्षक कविताएँ कवि की प्रगतिशील चेतना की सूचक हैं। ‘ताज’ को शोषण का प्रतीक और रूढ़िवादी व पतनशील विचारधारा का स्तूप बताते हुए कवि ने लिखा –

हाय ! मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन !
जब विषण्ण निर्जीव पड़ा हो जग का जीवन।

पंत के काव्य का कलापक्ष अत्यंत सुंदर है। पंत जी प्रधान रूप से कलाकार ही हैं। उनके काव्य में सर्वप्रथम कला का, फिर विचारों का और अंत में भावों का स्थान है। अपनी कृति में सौंदर्य का प्रतिफलन करने के लिए कलाकार जिन साधनों का उपयोग करता है, वे सभी कला के प्रसाधन हैं। पंत जी शब्द-चित्रों के अद्भुत कलाकार हैं। सचित्र विशेषणों का चयन पंत जी की दूसरी विशेषता है। वे एक को ही शब्द अथवा पंक्ति में व्यापक कल्पना को समेट सिकोड़कर बंद कर देते हैं। इस प्रकार के शब्द-चित्र उनके काव्य में सर्वत्र दिखाई पड़ते हैं।

‘बापू के प्रति’ कविता में ‘अस्थिशेष’, ‘माँसहीन’, ‘नग्न’ आदि विशेषणों को पंत जी ने चित्रमय बना दिया है। पंत जी के काव्य में रंगों का चमत्कार भी है, परंतु ये रंग इतनी कोमलता लिए हैं कि तितली के पंखों की तरह छूने मात्र से ही इनका रंग उतर जाता है। पंत जी की भाषा में संस्कृत की व्यंजनापूर्ण तत्सम शब्दावली का प्राचुर्य है। कविवर पंत ने खड़ी बोली को कोमलता एवं सरसता प्रदान की है। उनके कलात्मक संकेत पर भाषा नाचती दिखाई पड़ती है। सचमुच सुमित्रानंदन पंत प्रणय, प्रकृति और मानव-प्रेम के – महान कवि हैं।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

कविता का सार :

‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु के समय प्राकृतिक परिवेश में होने वाले परिवर्तनों का आकर्षक चित्रण किया है। बादलों और धूप की आँखमिचौली के कारण प्रकृति प्रतिपल अपना रूप बदल रही है। श्रृंखलाबद्ध ऊँचे पर्वत अपने ऊपर खिले हुए पुष्परूपी नेत्रों से अपनी तलहटी के सरोवररूपी दर्पण में मानो अपना अपनी शोभा देख रहे हैं। बहते हुए झरने पर्वत के गौरव का गान कर रहे हैं।

पर्वत शिखरों पर खड़े हुए ऊँचे-ऊँचे वृक्ष शून्य आकाश की ओर देख रहे हैं। अचानक बादलों के घिर आने से कुछ भी दिखाई नहीं देता। ऐसा लगता है, मानो बादलरूपी पंखों को फड़फड़ा कर पर्वत कहीं उड़ गया हो। केवल झरनों का शोर सुनाई देता है। ऐसा लगता है, जैसे धरती पर आकाश टूट पड़ा हो। मूसलाधार वर्षा के कारण भयभीत होकर शाल के वृक्ष जैसे धरती में समा गए हों तथा कुहरा इतना अधिक बढ़ गया है, मानो तालाब में आग लग गई हो और वहीं से धुआँ उठ रहा हो। इस प्रकार से बादलों के यान पर बैठकर इंद्र विभिन्न प्रकार के जादू के खेल खेल रहा है।

सप्रसंग व्याख्या –

1. पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहत्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल!

शब्दार्थ : पावस – वर्षा, बरसात। ऋतु – मौसम। पल-पल – प्रतिक्षण, हर समय। परिवर्तित – बदलता हुआ। प्रकृति – वेश, प्रकृति का स्वरूप। मेखलाकार – श्रृंखलाकार, मंडलाकार, एक में एक जुड़े हुए। अपार – बहुत अधिक, जिसका पार न हो, असीम। सहस्त्र – हज़ार। दृग – आँखें। सुमन – पुष्प, फूल। अवलोक – देखना। निज – अपना। महाकार – विशाल आकार । ताल – सरोवर। दर्पण – शीशा।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने वर्षा ऋतु के समय पर्वतीय प्रदेश में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन किया है।

व्याख्या : कवि लिखता है कि वर्षा ऋतु थी और पर्वतीय प्रदेश में प्रकृति प्रतिक्षण अपना रूप बदल रही थी। श्रृंखलाबद्ध ऊँचे उठे हुए बड़े पर्वत पर अनेक रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे और उस पर्वत श्रृंखला की तलहटी में दर्पण के समान फैला हुआ विशाल सरोवर था। ऐसा लगता था मानो यह श्रृंखलाबद्ध अपार पर्वत अपने सहस्रों पुष्परूपी नेत्रों से इस सरोवररूपी दर्पण में अपनी शोभा देख रहा है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

2. गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों-से सुंदर
झरते हैं झाग भरे निर्झर!
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

शब्दार्थ : गिरि – पर्वत। गौरव – यश, सम्मान। मद – मस्ती, आनंद। निर्झर – झरना। उर – हृदय। उच्चाकांक्षा – ऊँचा उठने की कामना। तरुवर – बड़े वृक्ष। नीरव – चुपचाप। नभ – आकाश। अनिमेष – एकटक, टकटकी बाँधे। अटल – स्थिर, बिना हिले-डुले।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने वर्षा ऋतु में प्रतिपल बदलते हुए पर्वतीय प्रदेश का आकर्षक वर्णन किया है।

व्याख्या : कवि लिखता है कि पर्वतों से निकलने वाले झरने मानो पर्वत का यशोगान गाते हुए कल-कल स्वर करते हुए बहते हैं और प्रत्येक अंग में मादकता भर रहे हैं। झाग से भरे हुए झरने मोतियों की लड़ियों के समान सुंदर लगते हैं। पर्वत की चोटियों पर खड़े हुए ऊँचे-ऊँचे वृक्ष शून्य आकाश की ओर एकटक देखते हुए ऐसे लग रहे हैं, मानो ऊँचा उठने की आकांक्षा से चिंतामुक्त कोई व्यक्ति स्थिर भाव से अपने लक्ष्य की प्राप्ति में लगा हुआ है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Sparsh Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस

3. उड़ गया, अचानक लो, भूधर
फड़का अपार वारिद के पर!
रव-शेष रह गए हैं निईर!
है टूट पड़ा भू पर अंबर!
धँस गए धरा में सभय शाल!
उठ रहा धुआँ, जल गया ताल!
-यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

शब्दार्थ : भूधर – पर्वत। वारिद – बादल। पर – पंख। रव – आवाज़, शोर। शेष – बाकी। भू- धरती। अंबर – आकाश। सभय- डरकर, भयभीत होकर। शाल – शाल का वृक्ष। ताल – सरोवर। जलद-यान – बादल रूपी यान। विचर-विचर – घूम-घूमकर। इंद्रजाल – जादू के खेल।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने वर्षा ऋतु में प्रतिपल बदलते हुए पर्वतीय प्रदेश की प्राकृतिक सुषमा का वर्णन किया है।

व्याख्या : कवि लिखता है कि वर्षा ऋतु में बादलों के छा जाने से ऐसा लगता है, मानो अचानक बादलरूपी बड़े-बड़े पंखों को फड़फड़ा कर पर्वत कहीं उड़ गया हो। बादलों के कारण पर्वत दिखाई नहीं देता; केवल झरनों के बहने की आवाज़ सुनाई देती है। ऐसी मूसलाधार वर्षा हो रही है, मानो धरती पर आकाश टूटकर गिर गया हो। शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में धंस गए प्रतीत होते हैं। कोहरा इतना फैल गया है, मानो सरोवर जल गया हो और उसमें से धुआँ उठ रहा हो। इस प्रकार से बादलों के यान में बैठकर इंद्र वहाँ अपने जादू के खेल दिखा रहा था।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Question 1.
A card is drawn from a well-shuffled deck of 52 cards. Find the probability of getting
(i) A king.
(ii) A heart.
(iii) A seven of heart.
(iv) A jack, queen or a king.
(v) A two of heart or a two of diamond.
(vi) A face card.
(vii) A black card.
(viii) Neither a heart nor a king,
(ix) Neither an ace nor a king.
Solution :
Total number of outcomes = 52
(i) A king
No. of kings = 4
P(A) = \(\frac{4}{52}=\frac{1}{13}\)

(ii) A heart, P(A) = \(\frac{13}{52}=\frac{1}{4}\)

(iii) A seven of heart P(A) = \(\frac{1}{52}\)

(iv) A jack, queen or a king,
P(A) = \(\frac{12}{52}=\frac{3}{13}\)

(v) A two of heat or a two of diamond,
P(A) = \(\frac{2}{52}=\frac{1}{26}\)

(vi) A face card, P(A) = \(\frac{12}{52}=\frac{3}{13}\)

(vii) A black card, P(A) = \(\frac{26}{52}=\frac{1}{2}\)

(viii) Neither a heart nor a king (13 heart + 4 king, but 1 common)
P(A) = 1 – \(\frac{16}{52}=\frac{52-16}{52}=\frac{36}{52}=\frac{9}{13}\)

(ix) Neither an ace nor a king,
P(A) = \(\frac{44}{52}=\frac{11}{13}\)
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability - 1

Question 2.
Two coins are tossed simultaneously. Find the probability of getting
(i) two heads
(ii) at least one head
(iii) no head
Solution :
On tossing two coins simultaneously, all the possible outcomes are HH, HT, TH, TT.
(i) The probability of getting two heads
= P (HH)
= No. of outcomes of two heads / Total no. of possible outcomes
= \(\frac {1}{4}\)

(ii) The probability of getting at least one head
= No. of favourable outcomes / Total no. of outcomes
= \(\frac {3}{4}\)

(iii) The probability of getting no head
P(TT) = \(\frac {1}{4}\)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Question 3.
A bag contains 5 red balls, 8 white balls, 4 green balls and 7 black balls. If one ball is drawn at random, find the probability that it is
(i) Black
(ii) Not red
(iii) Green
Solution :
Number of red balls in the bag = 5.
Number of white balls in the bag = 8.
Number of green balls in the bag = 4.
Number of black balls in the bag = 7.
∴ Total number of balls in the bag = 5 + 8 + 4 + 7 = 24.
Drawing balls randomly are equally likely outcomes.
∴ Total number of possible outcomes = 24.
Now,
(i) There are 7 black balls, hence the number of such favourable outcomes = 7
∴ Probability of drawing a black ball
= No. of favourable outcomes / Total no. of possible outcomes
= \(\frac {7}{24}\)

(ii) There are 5 red balls, hence the number of such favourable outcomes = 5.
∴ Probability of drawing a red ball
= No. of favourable outcomes / Total no. of possible outcomes
= \(\frac {5}{24}\)
∴ Probability of drawing not a red ball = P(Not red ball) = 1 – \(\frac{5}{24}=\frac{19}{24}\)

(iii) There are 4 green balls.
∴ Number of such favourable outcomes = 4
Probability of drawing a green ball = No. of favourable outcomes / Total no. of possible outcomes
= \(\frac{4}{24}=\frac{1}{6}\)

Question 4.
A card is drawn from a well-shuffled deck of playing cards. Find the probability of drawing
(i) a face card
(ii) a red face card
Solution :
Random drawing of cards ensures equally likely outcomes
(i) Number of face cards (King, Queen and jack of each suits) = 4 x 3 = 12.
Total number of cards in deck = 52.
∴ Total number of possible outcomes = 52.
P (drawing a face card) = \(\frac{12}{52}=\frac{3}{13}\)

(ii) Number of red face cards = 2 × 3 = 6.
Number of favourable outcomes of drawing red face card = 6.
P(drawing of red face card) = \(\frac{6}{52}=\frac{3}{26}\)

Multiple Choice Questions

Question 1.
3 Coins are tossed simultaneously. The probability of getting at least 2 heads is
(a) \(\frac {3}{10}\)
(b) \(\frac {3}{4}\)
(c) \(\frac {3}{8}\)
(d) \(\frac {1}{2}\)
Solution :
(c) \(\frac {3}{8}\)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Question 2.
Two cards are drawn successively with replacement from a pack of 52 cards. The probability of getting two aces is
(a) \(\frac {1}{169}\)
(b) \(\frac {1}{221}\)
(c) \(\frac {1}{265}\)
(d) \(\frac {1}{663}\)
Solution :
(b) \(\frac {1}{221}\)

Question 3.
In a single throw of two dice, the probability of getting a sum of more than 7 is
(a) \(\frac {7}{36}\)
(b) \(\frac {7}{12}\)
(c) \(\frac {5}{12}\)
(d) \(\frac {5}{36}\)
Solution :
(c) \(\frac {5}{12}\)

Question 4.
Two cards are drawn at random from a pack of 52 cards. The probability that both are the cards of spade is
(a) \(\frac {1}{26}\)
(b) \(\frac {1}{4}\)
(c) \(\frac {1}{17}\)
(d) None of these
Solution :
(c) \(\frac {1}{17}\)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Question 5.
Two dice are thrown together. The probability that sum of the two numbers will be a multiple of 4 is
(a) \(\frac {1}{9}\)
(b) \(\frac {1}{3}\)
(c) \(\frac {1}{4}\)
(d) \(\frac {5}{9}\)
Solution :
(c) \(\frac {1}{4}\)

Question 6.
If the three coins are simultaneously tossed compute the probability of 2 heads coming up.
(a) \(\frac {3}{8}\)
(b) \(\frac {1}{4}\)
(c) \(\frac {5}{8}\)
(d) \(\frac {3}{4}\)
Solution :
(a) \(\frac {3}{8}\)

Question 7.
A coin is tossed successively three times. The probability of getting one head or two heads is:
(a) \(\frac {2}{3}\)
(b) \(\frac {3}{4}\)
(c) \(\frac {4}{9}\)
(d) \(\frac {1}{9}\)
Solution :
(b) \(\frac {3}{4}\)

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 15 Probability

Question 8.
One card is drawn from a pack of 52 cards. What is the probability that the drawn card is either red or king:
(a) \(\frac {15}{26}\)
(b) \(\frac {1}{2}\)
(c) \(\frac {7}{13}\)
(d) \(\frac {17}{32}\)
Solution :
(c) \(\frac {7}{13}\)

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Page-258

Question 1.
A survey conducted by an organisation for the cause of illness and death among the women between the ages 15 – 44 (in years) worldwide, found the following figures (in %):

S.NoCausesFemale fatality rate (%)
1.Reproductive health conditions31.8
2.Neuropsychiatric conditions25.4
3.Injuries12.4
4.Cardiovascular conditions4.3
5.Respiratory conditions4.1
6.Other causes22.0

(i) Represent the information given above graphically.
(ii) Which condition is the major cause of women’s ill health and death worldwide?
(iii) Try to find out, with the help of your teacher, any two factors which play a major role in the cause in (ii) above being the major cause.
Answer:
(i) The data is represented below graphically.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 1
(ii) From the above graphical data, we observe that reproductive health conditions is the major cause of womens ill health and death worldwide.
(iii) Two factors responsible for cause in (ii)

  • Lack of proper care and under-standing.
  • Lack of medical facilities.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Question 2.
The following data on the number of girls (to the nearest ten) per thousand boys in different sections of Indian society is given below.

SectionNumber of girls per thousand boys
Scheduled Caste (SC)940
Scheduled Tribe (ST)970
Non SC/ST920
Backward districts950
Non backward districts920
Rural930
Urban910

(i) Represent the information above by a bar graph.
(ii) In the classroom discuss what conclusions can be arrived at from the graph.
Answer:
(i)
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 2
(ii) It can be observed from the above graph that the maximum number of girls per thousand boys is in ST. Also, the backward districts and rural areas have more number of girls per thousand boys than non¬backward districts and urban areas.

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Question 3.
Given below are the seats won by different political parties in the polling outcome of a state assembly elections:

Political partyABCDEF
Seats won755537291037

(i) Draw a bar graph to represent the polling results.
(ii) Which political party won the maximum number of seats?
Answer:
(i)
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 3
(ii)The party named A has won the maximum number of seats.

Question 4.
The length of 40 leaves of a plant are measured correct to one millimetre, and the obtained data is represented in the following table :

Length (in mm)Number of leaves
118 – 1263
127 – 1355
136 – 1449
145 – 15312
154 – 1625
163 – 1714
172 – 1802

(i) Draw a histogram to represent the given data. [Hint: First make the class intervals continuous]
(ii) Is there any other suitable graphical representation for the same data?
(iii) Is it correct to conclude that the maximum number of leaves are 153 mm long? Why?
Answer:
(i) The data is represented in a discontinuous class interval. So, first we will make it continuous.
The difference is 1, so we subtract \(\frac{1}{2}\) = 0.5 from lower limit and add 0.5 to the upper limit.

Length (in mm)Number of leaves
117.5 – 126.53
126.5 – 135.55
135.5 – 144.59
144.5 – 153.512
153.5 – 162.55
162.5 – 171.54
171.5 – 180.52

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 4
(ii) Yes, the data can also be represented by frequency polygon.
(iii) No, it is incorrect to conclude that the maximum number of leaves are 153 mm long because maximum number of leaves are lying between the length of 144.5-153.5.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Question 5.
The following table gives the life times of 400 neon lamps:

Number of lampsLifetime (in hours)
300 – 40014
400 – 50056
500 – 60060
600 – 70086
700 – 80074
800 – 90062
900 – 100048

(i) Represent the given information with the help of a histogram.
(ii) How many lamps have a life time of more than 700 hours?
Answer:
(i)
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 5
(ii) 74 + 62 + 48 = 184 lamp’s have a life time of more than 700 hours.

Page-260

Question 6.
The following table gives the distribution of students of two sections according to the marks obtained by them:

Section ASection B
MarksFrequencyMarksFrequency
0-1030-105
10-20910-2019
20-301720-3015
30-401230-4010
40-50940-501

Represent the marks of the students of both the sections on the same graph by
two frequency polygons. From the two polygons compare the performance of the two sections.
Answer:
The class mark can be found by (Lower limit + Upper limit)/2.
For section A

Section A
MarksFrequency
0-103
10-209
20-3017
30-4012
40-509

For section B

Section B
MarksFrequency
0-105
10-2019
20-3015
30-4010
40-501

Now, we draw frequency polygons for the given data.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 6
In the two polygons, we observed that most of the students of section A got higher marks. So the result of section A is better.

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Question 7.
The runs scored by two teams A and B on the first 60 balls in a cricket match are given below:

Number of ballsTeam ATeam B
1 – 625
7 – 1216
13 – 1882
19 – 24910
25 – 3045
31 – 3656
37 – 4263
43 – 48104
49 – 5468
55 – 60210

Represent the data of both the teams on the same graph by frequency polygons.
[Hint: First make the class intervals continuous.]
Answer:
The data given in the form of discontinu¬ous class intervals. So, first we will make them continuous. The difference is 1, so
we subtract \(\frac{1}{2}\) = 0.5 from lower limit and add 0.5 to the upper limit.

Number of ballsClass MarksTeam ATeam B
0.5 – 6.53.525
6.5 – 12.59.516
12.5 – 18.515.582
18.5 – 24.521.5910
24.5 – 30.527.545
30.5 – 36.533.556
36.5 – 42.539.563
42.5 – 48.545.5104
48.5 – 54.551.568
54.5 – 60.557.5210

Now, we draw frequency polygons for the given data.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 7

Page-261

Question 8.
A random survey of the number of children of various age groups playing in a park was found as follows:

Age (in years)Number of children
1 – 25
2 – 33
3 – 56
5 – 712
7 – 109
10 – 1510
15 – 174

 

Draw a histogram to represent the data above.
Answer:
The class intervals in the data is having varying width. We know that the area of rectangle is proportional to the frequencies in the histogram. The class interval with minimum class size 1 is selected and the length of the rectangle is proportionate to it.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 8
Taking the age of children on x-axis and no. of children on v-axis, the histogram can be drawn as follows.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 9

JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

Question 9.
100 surnames were randomly picked up from a local telephone directory and a frequency distribution of the number of letters in the English alphabet in the surnames was found as follows:

Number of lettersNumber of surnames
1 – 46
4 – 630
6 – 844
8 – 1216
12 – 204

 

(i) Draw a histogram to depict the gi ven information.
(ii) Write the class interval in which the maximum number of surnames lie.
Answer:
(i) The class intervals in the data is having varying width. We know that the area of rectangle is proportional to the frequencies in the histogram. The class interval with minimum class size 2 is selected and the length of the rectangle is proportionate to it.
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 10
JAC Class 9 Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 - 11
(ii) The class interval in which the maximum number of surnames lie is 6-8.

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

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प्रश्न 1.
लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
लेखिका के व्यक्तित्व पर उसके पिताजी और अध्यापक शीला अग्रवाल का विशेष प्रभाव पड़ा। उसके पिताजी ने उन्हें घर में होने वाली राजनीतिक सभाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। वह उनके साथ बैठकर सबके विचार सुनती है। उसके पिता साहित्य प्रेमी थे, इसलिए वह उनके पास रखी किताबें पढ़ती थी। लेखिका के पिता विचारशील व्यक्ति थे; लेखिका पर अनेक विचारों का विशेष प्रभाव पड़ा।

लेखिका जब कॉलेज गई, तो वहाँ पर हिंदी की अध्यापिका शीला अग्रवाल ने उसका साहित्य से वास्तविक परिचय करवाया। घर की राजनीतिक सभाओं से निकालकर देश की असली स्थिति से उसका परिचय करवाया। अध्यापिका शीला अग्रवाल के विचारों ने उसमें नया जोश और उत्साह भर दिया था, जिसने लेखिका को अपने विचारों को दूसरों के सामने व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न 2.
इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को ‘भटियारखाना’ कहकर क्यों संबोधित किया है ?
उत्तर :
लेखिका के पिता रसोई को ‘भटियारखाना’ कहते थे। उनके अनुसार रसोई वह भट्टी है, जिसमें औरतों की क्षमता और प्रतिभा झोंक दी जाती है।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

प्रश्न 3.
वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?
उत्तर :
लेखिका जिस कॉलेज में पढ़ती थी, पिताजी के नाम उस कॉलेज के प्रिंसिपल का पत्र आया था। उसमें पिता जी से पूछा था कि लेखिका पर अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं की जाए? इसके लिए पिताजी को कॉलेज बुलाया गया था। उस पत्र को पढ़कर पिताजी आग लेखिका ने उनके नाम पर दाग लगा दिया है। वे लेखिका पर उबलते हुए कॉलेज पहँचे। उनके जाने के बाद लेखिका पड़ोस में जाकर बैठ गई, जिससे वह लौटने पर पिता के क्रोध से बच सके। परंतु जब वे कॉलेज से लौटे, तो बहुत प्रसन्न थे; चेहरा गर्व से चमक रहा था।

वे घर आकर बोले कि कॉलेज की लड़कियों पर उसका बहुत रौब है। पूरा कॉलेज तीन लड़कियों के इशारे पर खाली हो जाता है। प्रिंसिपल के लिए कॉलेज चलाना असंभव हो रहा है। पिताजी को उस पर गर्व है क्योंकि वह देश की पुकार के समय देश के साथ चल रही है, इसलिए उसे रोकना असंभव है। यह सब सुनकर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हुआ था, न ही अपने कानों पर; परंतु यह वास्तविकता थी।

प्रश्न 4.
लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
लेखिका के पिता दोहरे व्यक्तित्व के व्यक्ति थे। वे आधुनिकता के समर्थक थे। वे औरतों को केवल रसोई तक सीमित नहीं देखना चाहते थे। उनके अनुसार औरतों को अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग घर के बाहर देश की स्थिति सुधारने के लिए करना चाहिए। इससे यश, प्रतिष्ठा और सम्मान सबकुछ मिलता है। लेकिन जहाँ वे आधुनिक विचारों के समर्थक थे, वहीं दकियानूसी विचारों के भी थे।

उन्हें अपनी इज्जत प्यारी थी। जहाँ वे औरतों को रसोई से बाहर देखना चाहते थे, वहीं उन्हें यह भी बर्दाश्त नहीं होता था कि वह लड़कों के साथ स्वतंत्रता की लड़ाई में कदम-से-कदम मिलाकर चलें। वे औरतों की स्वतंत्रता को घर की चारदीवारी से दूर नहीं देखना चाहते थे, परंतु लेखिका के लिए पिताजी की दी हुई आज़ादी के दायरे में चलना कठिन था। इसलिए उसकी अपने पिता से वैचारिक टकराहट थी।

प्रश्न 5.
इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उनमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
उत्तर :
सन 1946-47 वह समय भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का समय था। उस समय किसी के लिए भी घर में चप बैठना असंभव था: चारों ओर प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस, भाषणबाजी हो रही थी। हर युवा, बच्चा और बूढ़ा अपनी क्षमता के अनुसार देश की स्वाधीनता में अपना योगदान दे रहा था। लेखिका के पिता ने घर में होने वाली राजनीतिक सभाओं में उसे अपने साथ बैठाकर देश की स्थिति से अवगत करवाया था।

उसमें देश की स्थिति को समझने तथा जोश के साथ कार्य करने का उन्माद उसमें उनकी अध्यापिका शीला अग्रवाल ने अपने विचारों से भरा। अध्यापिका शीला अग्रवाल के उचित मार्गदर्शन से मन्नू जी ने अपनी योग्यता के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन में योगदान दिया। प्रभात-फेरियाँ निकालना, हड़तालें करवाना, कॉलेज में क्लासें बंद करवाना, छात्रों को इकट्ठा करके जुलूस के रूप में सड़कों पर निकलना, भाषणबाजी करना आदि कार्य उस समय मन्नू भंडारी ने किए। उस समय उनकी रगों में आज़ादी का लावा बह रहा था। उस लावे ने उसके अंदर के भय को समाप्त कर दिया था। इस तरह उस समय मन्नू भंडारी ने स्वाधीनता आंदोलन में बढ़ चढ़कर अपना योगदान दिया।

रचना और अभिव्यक्ति –

प्रश्न 6.
लेखिका ने बना लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले, किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लडकियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
उत्तर :
लेखिका ने अपने भाइयों के साथ बचपन में लड़कों वाले खेल खेले थे, परंतु लड़की होने के कारण उसका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। परंतु आज लड़कियों के लिए स्थिति बदल गई है। उन्हें लड़कों के समान अधिकार और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। आज उन्हें घर से बाहर अपनी क्षमता दिखाने का पूरा अवसर दिया जाता है। लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाया जाता है।

उन्हें अपनी और दूसरों की रक्षा के उपाय सिखाए जाते हैं। माता-पिता और समाज द्वारा लड़कियों को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए भरपूर सहयोग दिया जाता है। आधुनिक समय में लड़कियाँ हर क्षेत्र में लड़कों के बराबर हैं। अब आज का समाज भी जागरूक हो गया है। इसलिए अब लड़कियों और लड़कों के क्षेत्र में कोई भी अंतर नहीं किया जाता।

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प्रश्न 7.
मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः ‘पड़ोस कल्चर’ से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। आस-पड़ोस मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास करने में सहायक होता है, परंतु बड़े शहरों में रहने वाले लोग प्राय: ‘पड़ोस कल्चर’ से वंचित रहते हैं। उन्हें आस-पड़ोस की महत्ता का पता नहीं होता। जिस तरह एक बच्चे का लालन-पालन और विकास अपने माता-पिता व दादा-दादी बिना अच्छी तरह से नहीं हो सकता है, उसी तरह उसके पास के लोग बच्चे को एक सुरक्षित समाज की नींव प्रदान करते हैं। उसे अच्छे-बुरे की पहचान करवाते हैं। आस-पड़ोस जहाँ बच्चोंलोग उनके साथ अ पहायक हाता ह वहा हम जीना पसंद करते हैं, इसलिए वे एकाकीपन, मानसिक अशांति, असुरक्षा आदि का शिकार हो जाते हैं। इसलिए मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है।

प्रश्न 8.
लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।
उत्तर :
लेखिका ने ‘सुनीता’, ‘शेखर एक जीवनी’, ‘नदी के द्वीप’, ‘त्यागपत्र’, ‘चित्रलेखा’ उपन्यासों के अतिरिक्त शरत, प्रेमचंद, जैनेंद्र, अज्ञेय, यशपाल, भगवतीचरण वर्मा के अनेक उपन्यास पढ़े थे। विद्यार्थी इन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय से प्राप्त करके पढ़ें।

प्रश्न 9.
आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।
उत्तर :
यहाँ एक दिन का अनुभव और डायरी का नमूना दिया जा रहा है। अन्य दिनों की डायरी विद्यार्थी स्वयं लिखें।
दिनांक …………….
आज कॉलेज में मेरा पहला दिन था। कॉलेज में होने वाली रैगिंग से घबराते हुए तथा अनजाने भय से काँपते हुए मैं कॉलेज पहुँची। कॉलेज के प्रवेश द्वार पर लड़के-लड़कियों की भीड़ से होकर अपनी कक्षा में पहुँची, तो देखा कि कमरा खाली है। पीछे बरामदे में खड़ी हुई लड़कियों ने मुझे बुलाया और मेरा नाम आदि पूछा। धीरे-धीरे हिम्मत करके मैं उनके सभी प्रश्नों के उत्तर देती गई, तो वे ठहाका मार कर हँस पड़ीं। मैं उन्हें सीनियर समझ कर डर रही थी, पर वे तो मेरी ही कक्षा की छात्राएँ थीं। फिर तो मैं भी उनमें मिल गई और कॉलेज का पहला दिन कैंटीन में व्यतीत किया।
दिनांक ……………..
आज सुबह पापा ने जल्दी से मुझे उठाया और कहा, “बाहर देखो! बारिश हो रही है; ओले गिर रहे हैं। बहुत ठंड पड़ रही है।” मैं जल्दी से उठा और पापा से कहा, “दीदी को भी उठाओ।” फिर हमने देखा कि हमारे घर के सामने वाले मैदान में हरी-हरी घास पर सफ़ेद-सफ़ेद ओले गिर रहे थे। ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने चमेली के फूल गिरा रखे हैं। बहुत अच्छा लग रहा था। ओले पड़ रहे थे; बारिश हो रही थी; चिड़िया दुबक रही थी; कौए परेशान थे; पेड़ काँप रहे थे; बिजली चमक रही थी; बादल डरा रहे थे।

एक चिड़िया हमारी खिड़की पर डरी हुई बहुत देर तक बैठी रही। फिर उड़ गई। अभी तक कोई बच्चा खेलने नहीं निकला। इसलिए मैं आज जल्दी डायरी लिख रहा हूँ। सुबह के दस बजे हैं। मैं अपना सीरियल देखने जा रहा हूँ। आज मेरा न्यू इंक पेन और पेंसिल बॉक्स आया। आज दोपहर को धूप निकलेगी, तो हम खेलने निकलेगी। आजकल हम लोग मिट्टी के गोले बना कर सुखा देते हैं, फिर हम उनके ऊपर पेंटिंग करते हैं; उसके बाद फिर उनसे खेलते हैं।

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भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 10.
इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ –
(क) इस बीच पिता जी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिता जी की लू उतारी।
(ख) वे तो आग लगाकर चले गए और पिताजी सारे दिन भभकते रहे।
(ग) बस अब यही रह गया है कि लोग घर आकर थ-थ करके चले जाएँ।
(घ) पत्र पढ़ते ही पिता जी आग-बबूला।।
उत्तर :
(क) ईर्ष्यालु व्यक्ति सदा किसी-न-किसी की लू उतारने में लगे रहते हैं।
(ख) दीपक किसी का भला क्या करेगा, उसका तो आग लगाने का काम है।
(ग) रमेश की चोरी की आदत से सभी उसके खानदान पर थू-थू कर रहे हैं।
(घ) मोहन ने सुरेश को गाली दी, तो उसने आग-बबूला होकर मोहन को भी भला-बुरा कहा।

पाठेतर सक्रियता –

1. इस आत्मकथ्य से हमें यह जानकारी मिलती है कि कैसे लेखिका का परिचय साहित्य की अच्छी पुस्तकों से हुआ। आप इस जानकारी का लाभ उठाते हुए अच्छी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने का सिलसिला शुरू कर सकते हैं। कौन जानता है कि आप में से ही कोई अच्छा पाठक बनने के साथ-साथ अच्छा रचनाकार भी बन जाए।

2. लेखिका के बचपन के खेलों में लंगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई और काली-टीलो आदि शामिल थे। क्या आप भी यह खेल खेलते हैं। आपके परिवेश में इन खेलों के लिए कौन-से शब्द प्रचलन में हैं। इनके अतिरिक्त आप जो खेल खेलते हैं उन पर चर्चा कीजिए।

3. स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है। उनके बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए और उनमें से किसी एक पर प्रोजेक्ट तैयार कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 1.
अजमेर से पहले लेखिका का परिवार कहाँ रहता था? उनकी आर्थिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर :
अजमेर से पहले लेखिका का परिवार इंदौर में रहता था और उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी। नगर में लेखिका के पिता जी की बड़ी प्रतिष्ठा और सम्मान था। वे कांग्रेस के साथ-साथ समाज-सुधार के कामों से भी जुड़े हुए थे। आर्थिक स्थिति अच्छी होने के कारण वे बहुत दरियादिल थे। अपनी दरियादिली के कारण वे लोगों में प्रसिद्ध थे।

प्रश्न 2.
क्या लेखिका की माँ लेखिका का आदर्श बन पाई थी?
अथवा
‘मन्नू भंडारी की माँ त्याग और धैर्य की पराकाष्ठा थी-फिर भी लेखिका के लिए आदर्श न बन सकी।’ क्यों?
उत्तर :
लेखिका की माँ एक अनपढ़ घरेलू महिला थी। उनमें धैर्य और सहनशक्ति अधिक थी। उनके सभी काम पति और बच्चों के इर्द-गिर्द घूमते थे। वे हर समय सबकी सेवा में तत्पर रहती थी, जैसे उन सबका काम करते रहना ही उनका फर्ज था। इस तरह उनका कार्यक्षेत्र घर और रसोईघर तक सीमित था। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी किसी से अपने लिए कुछ नहीं माँगा था। उन्होंने दूसरों को अपने पास से सदैव दिया ही था। माँ का त्याग और सहनशीलता लेखिका का आदर्श कभी नहीं बन पाया था।

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प्रश्न 3.
‘एक कहानी यह भी’ पाठ के आधार पर लेखिका के पिता का संक्षिप्त में परिचय दीजिए।
उत्तर :
लेखिका के पिता जी को इंदौर में बहुत बड़ा आर्थिक झटका लगा था, जिसके कारण वे लोग अजमेर आ गए। यहाँ उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब होती चली गई थी। उन्होंने आरंभ से अच्छे दिन देखे थे। उनकी नगर में प्रतिष्ठा और सम्मान था। वे स्वभाव से कोमल और संवेदनशील थे, परंतु बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने उनके स्वभाव को भी बदल दिया। वे ज्यादा महत्वाकांक्षी और अहंवादी हो गए थे।

वे अपने बच्चों को अपनी परेशानियों में भागीदार नहीं बनाना चाहते थे। वे दोहरे व्यक्तित्व के स्वामी थे। यश, सम्मान की चाह उन्हें आधुनिक विचारों का समर्थक बनाती थी। वे औरतों के स्वतंत्र व्यक्तित्व के पक्ष में थे। वे देश-निर्माण में औरतों की भूमिका को उचित मानते थे। लेकिन दूसरी ओर वे शक्की और दकियानूसी विचारों के व्यक्ति थे। छोटी-छोटी बातों से उन्हें अपनी इज्जत पर दाग लगने का डर रहता था।

लेखिका का देश की स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना उन्हें यश दिलाने का मार्ग लगता था, परंतु यह सब उन्हें एक सीमित दायरे में अच्छा लगता था। इन्हीं विचारों के कारण लेखिका और उनके मध्य सदैव वैचारिक टकराहट रहती थी। लेखिका के पिता के चरित्र से ऐसा लगता है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व को आर्थिक स्थिति बहुत प्रभावित करती है।

प्रश्न 4.
‘यह भी एक कहानी’ पाठ के आधार पर ‘मन्नू भंडारी’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
‘यह कहानी यह भी’ पाठ के आधार पर लेखिका के पिता जी के सकारात्मक और नकारात्मक गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
‘यह भी एक कहानी’ मन्नू भंडारी की आत्मकथ्य है। इसमें उन्होंने अपने उन पहलुओं का वर्णन किया है, जिनकी छाप उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। लेखिका का चरित्र-चित्रण निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया गया है –
1. परिचय – लेखिका का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था, जबकि अजमेर में उसका बचपन बीता था। वह पाँच भाई बहन थे। लेखिका सबसे छोटी थी। लेखिका का रंग काला था। वह शरीर से बेहद दुबली-पतली थी। लेखिका की माताजी घरेलू महिला थी, जबकि पिताजी समाज सुधारक थे।

2. शिक्षा – उस समय लेखिका दसवीं की पढ़ाई समाप्त करके कॉलेज में पढ़ रही थी। उसकी शिक्षा पर उसके पिता और अध्यापिका शीला अग्रवाल का बहुत प्रभाव था।

3. साहित्य में रुचि – लेखिका की साहित्य में रुचि थी। वह अपने पिता के कमरे में से किताबें लेकर पढ़ती थी। किताबों का चुनाव कैसे किया जाता है, यह उन्हें पता नहीं था। कॉलेज में हिंदी की अध्यापिका शीला अग्रवाल ने उसका साहित्य से वास्तविक परिचय करवाया। किताबों का चुनाव करना, उन्हें समझना और अपने विचार व्यक्त करना-यह सब कार्य उसकी अध्यापिका ने उसे सिखाएँ, जिससे उसकी साहित्य में रुचि बढ़ती गई।

4. वैचारिक मतभेद – लेखिका का अपने पिता से वैचारिक मतभेद था। उसे अपने पिताजी के विचार समझ में नहीं आते थे। एक ओर वे लेखिका को घर में चल रही राजनीतिक सभाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे, दूसरी ओर जब वह आंदोलनों में भाग लेती थी तो पिता जी को अपनी इज्ज़त समाप्त होती दिखाई देती थी। वह अपने पिता के दोहरे व्यक्तित्व से परेशान थी।

5. नेतृत्व के गुण – लेखिका जब कॉलेज में पढ़ने गई, तो वहाँ उसकी अध्यापिका शीला अग्रवाल ने उसके व्यक्तित्व को सही दिशा दिखाई। उसके अंदर की क्षमता और प्रतिभा को उभारने में सहायता की, जिससे उसमें नेतृत्व की भावना आई। उस समय देश की स्थिति बादलों में बैठकर पढ़ाई करने की नहीं थी, अपितु देश की स्वतंत्रता में अपना योगदान देने की थी। उसके एक इशारे पर लड़कियाँ कक्षा छोड़कर बाहर आ जाती थीं। वह लड़कों के साथ मिलकर हड़ताले करवाना, दुकानें बंद करवाना, लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत करने का कार्य करती थी।

6. प्रभावशाली वक्ता – लेखिका एक प्रभावशाली वक्ता थी। अजमेर में चौपड़ बाजार में पूरा शहर देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ: था। वहाँ भाषणबाजी हो रही थी। लेखिका ने भी आगे बढ़कर जोरदार भाषण दिया। वहाँ उपस्थित डॉ० अंबालाल ने घर आकर पिताजी को व्यक्तिगत रूप से उसके भाषण के लिए बधाई दी। – इस तरह लेखिका के जीवन को सही दिशा में ले जाने में अध्यापिका शीला अग्रवाल और पिताजी का योगदान रहा। पिता जी ने – उसकी प्रतिभा और क्षमता को रसोई के कार्यों में नष्ट नहीं होने दिया। वैचारिक मतभेदों के उपरांत भी वे उसके जीवन-निर्माण में सहायक रहे हैं।

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प्रश्न 5.
‘एक कहानी यह भी’ किस प्रकार की रचना है?
उत्तर :
‘एक कहानी यह भी’ एक आत्मकथ्य है। इस रचना में लेखिका मन्नू भंडारी ने अपने जीवन की उन घटनाओं का वर्णन किया है, जो उन्हें लेखिका बनाने में सहायक सिद्ध हुई हैं। इस रचना में छोटे शहर की युवा होती लड़की की कहानी है, जिसका आजादी की लड़ाई में उत्साह, संगठन-क्षमता और विरोध करने का तरीका देखते ही बनता था।

प्रश्न 6.
अजमेर आने से पहले लेखिका और उसका परिवार कहाँ रहता था?
उत्तर :
अजमेर आने से पूर्व लेखिका और उसका सारा परिवार इंदौर में रहता था। इंदौर में लेखिका के पिता का बहुत मान-सम्मान और प्रतिष्ठा थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ स्वयं को जोड़ा हुआ था तथा उसी के साथ मिलकर समाज-सुधार का कार्य करते थे।

प्रश्न 7.
लेखिका के पिता इंदौर से अजमेर क्यों आए?
उत्तर :
लेखिका के पिता एक साफ़ दिल के व्यक्ति थे। परिवार, समाज तथा देश में उनकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। वे समाज-सुधार के कार्यों में सदैव संलग्न रहते थे, लेकिन एक बहुत बड़े आर्थिक झटके के कारण उन्हें इंदौर से अजमेर आना पड़ा। यह आर्थिक झटका इतना बड़ा था कि वे पूरी कोशिश के बाद भी इससे उभर नहीं पाए।

प्रश्न 8.
इंदौर से अजमेर आकर लेखिका के पिता ने अपनी आर्थिक स्थिति को कैसे सुधारा?
उत्तर :
आर्थिक झटके से न उभर पाने के कारण जब लेखिका के पिता परिवार सहित अजमेर आ गए, तो उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए अपने हौंसले से अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश के अधूरे काम को अकेले ही आगे बढ़ाना शुरू किया। यह अपनी तरह का पहला और अकेला शब्दकोश था। इसने उन्हें यश और प्रतिष्ठा तो बहुत दी, लेकिन उन्हें आवश्यकतानुसार अर्थ नहीं मिल पाया।

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प्रश्न 9.
लेखिका की बहन सुशीला के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर :
लेखिका की बहन सुशीला लेखिका से दो वर्ष बड़ी थी। वह गोरे रंग की थी। उसके पिता को गोरा रंग पसंद था, इसलिए लेखिका की तुलना में सुशीला को पिता का प्यार अधिक मिलता था। सुशीला बचपन से ही स्वस्थ, हृष्ट-पुष्ट तथा हँसमुख स्वभाव की थी। पिताजी हर बात में लेखिका की तुलना सुशीला से करते थे।

प्रश्न 10.
‘पड़ोस-कल्चर’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
‘पड़ोस कल्चर’ वह विधान है, जो हमें सुरक्षा तथा अपनत्व का भाव प्रदान करता है। सारा पड़ोस हमें अपने घर के समान लगता है। हम अधिकार से एक-दूसरे के घरों में जाते हैं। हम अपने साथ रहने वाले सभी पड़ोसियों को अपने जीवन का अंग मानते हैं। यह सब ‘पड़ोस कल्चर’ है।

प्रश्न 11.
लेखिका के अनुसार ‘पड़ोस कल्चर’ न होने के क्या दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं?
उत्तर :
लेखिका के मतानुसार ‘पड़ोस कल्चर’ न होने पर अनेक दुष्परिणाम हमारे सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा दुष्परिणाम एकांकी जीवन का है, जो मानव को जीवनपर्यंत सताता है। दूसरा दुष्परिणाम असुरक्षा, संकुचित सोच तथा स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ समझने के भाव का उदय होना है। यह पड़ोस कल्चर समाप्त कर हमारे जीवन को दुष्परिणामों के चक्रव्यूह में फँसाता है।

प्रश्न 12.
लेखिका के अनुसार परम्पराएँ क्या हैं?
उत्तर :
लेखिका के अनुसार परम्पराएँ हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा है, जो हमें भूतकाल से जोड़कर रखता निर्भर करता है कि परम्परा अच्छी है या बुरी। लोगों की अभिव्यक्ति तथा उनके मन के भाव ही परम्परा के अच्छे-बुरे होने का संकेत देते हैं। व्यक्ति के मन में कुंठा तथा क्रोध का आना परम्परा में जकड़े रहने के कारण ही होता है। इसलिए यह मान लेना चाहिए कि – परंपरा के लिए व्यक्ति न होकर व्यक्ति की सुविधानुसार परंपरा होनी चाहिए।

प्रश्न 13.
मन में उपजी हीन ग्रंथि अर्थात हीन भावना परिणाम होता है ?
उत्तर :
मन में जब कोई हीन भावना जन्म ले लेती है, तो उसके दुष्परिणाम सामने आने लगते हैं। ऐसी ही हीन भावना लेखिका के मन में उपज आई, जिसके कारण मिलने वाली समस्त उपलब्धियाँ उसे तुच्छ लगने लगी। वह सदैव स्वयं को छोटा उसे लगने लगा कि वास्तव में वह किसी योग्य नहीं है। उसका जीवन व्यर्थ है, जिसका होना न होना एक ही बात है।

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प्रश्न 14.
लेखिका को साहित्य से जोड़ने का श्रेय किसे जाता है?
उत्तर :
लेखिका को साहित्य से जोड़ने का श्रेय उसकी हिंदी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल को जाता है, जिन्होंने लेखिका का रुझान हिंदी की तरफ बढ़ाया। लेखिका के साहित्य के दायरे को बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने उसे घर की चारदीवारी से खींचकर बाह्य जगत में लाकर खड़ा कर दिया।

प्रश्न 15.
लेखिका ने ऐसा क्यों कहा कि कॉलेज के दिन ‘मूल्यों के मंचन के दिन थे ?
उत्तर :
कॉलेज जाने से पूर्व लेखिका दुनिया परिवार, पड़ोस तथा मोहल्ले तक ही सीमित थी। लेकिन जब यह दायरा पार करके उसने कॉलेज में प्रेमचंद, अज्ञेय, जैनेन्द्र, यशपाल, भगवती चरण वर्मा आदि के लेखों एवं रचनाओं को पढ़ा, तो उसे लगा जैसे उसके नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन होना चाहिए। इसलिए लेखिका ने कहा कि वे दिन मूल्यों के मंचन के दिन थे।

प्रश्न 16.
मन्नू भंडारी के पिता की कौन-कौन सी विशेषताएँ अनुकरणीय हैं ?
उत्तर :
मन्नू भण्डारी के पिता स्त्री शिक्षा के समर्थक थे। राजनीति में वे महिलाओं की भागीदारी के पक्षधर थे। वे अपनी पुत्री को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे। वे रसोई को भटियारा खाना कहते थे। मन्न भण्डारी के पिता के उक्त सभी विचार एवं भाव अनुकरणीय है।

प्रश्न 17.
‘मन्नू भंडारी की माँ त्याग और धैर्य की पराकाष्ठा थी- फिर भी लेखिका के लिए आदर्श न बन सकी।’ क्यों?
उत्तर :
लेखिका की माँ एक अनपढ़ घेरलू महिला थी। उनमें धैर्य और सहनशक्ति अधिक थी। उनके सभी काम पति और बच्चों के इर्द-गिर्द घूमते थे। वे हर समय सबकी सेवा में तत्पर रहती थी, जैसे उन सबका काम करते रहना ही उनका फर्ज़ था। इस तरह उनका कार्य क्षेत्र घर और रसोईघर तक सीमित था। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कभी किसी से अपने लिए कुछ नहीं माँगा था। उन्होंने दूसरों को अपने पास से सदैव दिया ही था। माँ का त्याग और सहनशीलता लेखिका का आदर्श कभी नहीं बन पाया था।

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प्रश्न 18.
मन्नू भंडारी की ऐसी कौन-सी खुशी थी जो 15 अगस्त, 1947 की खुशी में समाकर रह गई ?
उत्तर :
मई 1947 में अध्यापक शीला अग्रवाल को कॉलेज से निकाल दिया गया था। उन पर यह आरोप था कि वे कॉलेज की लड़कियों में अनुशासनहीनता फैला रही थी। लेखिका के साथ दो और लडकियों को ‘थर्ड इयर’ में दाखिला नहीं दिया गया। कॉलेज में इस बात को लेकर खूब शोर-शराबा हुआ। जीत लड़कियों की हुई. परंतु इस जीत की खुशी से भी ज्यादा एक और खुशी प्रतीक्षा में थी। वह उस शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। उस समय भारत 15 अगस्त, सन 1947 को आजाद हुआ था।

पिठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्न –

दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पी प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर लिखिए –

1. इसने उन्हें यश और प्रतिष्ठा तो बहुत दी, पर अर्थ नहीं और शायद गिरती आर्थिक स्थिति ने ही उनके व्यक्तित्व के सारे सकारात्मक पहलुओं को निचोड़ना शुरू कर दिया। सिकुड़ती आर्थिक स्थिति के कारण और अधिक विस्फारित उनका अहं उन्हें इस बात तक की अनुमति नहीं देता था कि वे कम-से-कम अपने बच्चों को तो अपनी आर्थिक विवशताओं का भागीदार बनाएँ। नवाबी आदतें, अधूरी महत्त्वाकांक्षाएँ, हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद हाशिए पर सरकते चल जाने की यातना क्रोध बनकर हमेशा माँ को कँपाती-थरथराती रहती थीं। अपनों के हाथों विश्वासघात की जाने कैसी गहरी चोटें होंगी वे जिन्होंने आँख मूंदकर सबका विश्वास करने वाले पिता को बाद के दिनों में इतना शक्की बना दिया था कि जब-तब हम लोग भी उसकी चपेट में आते ही रहते।

(क) मनु भंडारी के पिता किस कारण शक्की बन गए?
(i) प्रतिष्ठा न रहने के कारण
(ii) आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण
(iii) कमजोरी के कारण
(iv) अपनों से विश्वासघात मिलने के कारण
उत्तर :
(iv) अपनों से विश्वासघात मिलने के कारण

(ख) मनु भंडारी के पिता की आदतें कैसी थी?
(i) कृपण वाली
(ii) नवाबी
(iii) गरीबों वाली
(iv) संकुचित
उत्तर :
(ii) नवाबी

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(ग) किस स्थिति ने मनु भंडारी के पिता के सारे सकारात्मक पहलुओं को निचोड़ना शुरू कर दिया?
(i) आर्थिक स्थिति ने
(ii) सामाजिक स्थिति ने
(iii) शारीरिक स्थिति ने
(iv) मानसिक स्थिति ने
उत्तर :
(i) आर्थिक स्थिति ने

(घ) मनु भंडारी के पिता ने किस कारण अपने बच्चों को अपनी आर्थिक विवशता का भागीदार नहीं बनाया?
(i) अपनी मज़बूरी के कारण
(ii) अपनी चिंता के कारण
(iii) अपने अहं के कारण
(iv) अपनी प्रतिष्ठा के कारण
उत्तर :
(iii) अपने अहं के कारण

(ङ) मनु भंडारी की माता क्या हमेशा काँपती-थरथराती रहती थी?
(i) अपने पति के क्रोध के कारण
(ii) अपने पति की आर्थिक स्थिति के कारण
(iii) अपने पति के अहं के कारण
(iv) अपने पति के हठ के कारण
उत्तर :
(i) अपने पति के क्रोध के कारण

उच्च चिंतन क्षमताओं एवं अभिव्यक्ति पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्न –

पाठ पर आधारित प्रश्नों को पढ़कर सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए –

(क) लेखिका के अनुसार फ्लैट-कल्चर ने हमें कैसा बना दिया है?
(i) आत्मीय
(ii) उदार
(iii) संकुचित
(iv) सुरक्षित
उत्तर :
(iii) संकुचित

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(ख) लेखिका के पिता अपनी झंझलाहट किस पर उतारते थे?
(i) अपने बेटे पर
(i) अपनी बेटी पर
(iii) अपने आप पर
(iv) अपनी पत्नी पर
उत्तर :
(iv) अपनी पत्नी पर

(ग) लेखिका ने पिता के व्यवहार का उस पर क्या प्रभाव पड़ा?
(i) वह उदार हो गई
(ii) वह लेखिका बन गई
(iii) वह हीनभावना से ग्रसित हो गई
(iv) वह स्वावलंबी हो गई
उत्तर :
(iii) वह हीनभावना से ग्रसित हो गई

(घ) मनु भंडारी ने अपने लेख में किन दिनों का वर्णन किया है?
(i) प्रथम स्वतंत्रता-संग्राम का
(ii) स्वतंत्रता आंदोलनों का
(iii) स्वतंत्रता के बाद का
(iv) भारत-चीन युद्ध के दिनों का
उत्तर :
(ii) स्वतंत्रता आंदोलनों का

महत्वपूर्ण गद्यांशों के अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

इसने उन्हें यश और प्रतिष्ठा तो बहुत दी, पर अर्थ नहीं और शायद गिरती आर्थिक स्थिति ने ही उनके व्यक्तित्व के सारे सकारात्मक पहलुओं को निचोड़ना शुरू कर दिया। सिकुड़ती आर्थिक स्थिति के कारण और अधिक विस्फारित उनका अहं उन्हें इस बात तक की अनुमति नहीं देता था कि वे कम-से-कम अपने बच्चों को तो अपनी आर्थिक विवशताओं का भागीदार बनाएँ। नवाबी आदतें, अधूरी महत्वाकांक्षाएँ, हमेशा शीर्ष पर रहने के बाद हाशिए पर सरकते चले जाने की यातना क्रोध बनकर हमेशा माँ को कैंपाती-थरथराती रहती थीं। अपनों के हाथों विश्वासघात की जाने कैसी गहरी चोटें होंगी वे जिन्होंने आँख मूंदकर सबका विश्वास करने वाले पिता को बाद के दिनों में इतना शक्की बना दिया था कि जब-तब हम लोग भी उसकी चपेट में आते ही रहते।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. मन्नू भंडारी के पिता की गिरती आर्थिक स्थिति का उन पर क्या प्रभाव पड़ा?
2. पहले इंदौर में उनकी आर्थिक स्थिति कैसी रही होगी?
3. मन्नू के पिता का स्वभाव शक्की क्यों हो गया था?
उत्तर :
1. गिरती आर्थिक स्थिति ने लेखिका के पिता के सभी सकारात्मक पहलुओं को निचोड़ना शुरू कर दिया। इसके कारण वे शक्की और क्रोधी हो गए।
2. अनुच्छेद में लेखिका ने अपने पिता के लिए नवाबी आदतें तथा शीर्ष में रहने की बात का उल्लेख किया है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि उनके पिता इंदौर में एक धनी परिवार से संबंधित रहे होंगे, जहाँ समाज में उनका भरपूर मान-सम्मान होगा।
3. मन्नू के पिता आँख मूंदकर किसी पर भी विश्वास कर लेते थे। लेकिन जब उन्हें अपनों से ही विश्वासघात मिला, तो उसके बाद वे शक्की हो गए।

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2. पर यह पितृ-गाथा मैं इसलिए नहीं गा रही कि मुझे उनका गौरव-गान करना है, बल्कि मैं तो यह देखना चाहती हूँ कि उनके व्यक्तित्व की कौन-सी खूबी और खामियाँ मेरे व्यक्तित्व के ताने-बाने में गुंथी हुई हैं या कि अनजाने-अनचाहे किए उनके व्यवहार ने मेरे भीतर किन ग्रंथियों को जन्म दे दिया। मैं काली हूँ। बचपन में दुबली और मरियल भी थी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखिका अपने पिता के संबंध में क्यों बता रही है?
2. लेखिका के पिता में क्या खूबियाँ थीं?
3. लेखिका के पिता की खामियों का वर्णन कीजिए।
4. लेखिका पर पिता के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
1. लेखिका अपने पिता के संबंध में इसलिए बता रही है, ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि उनके व्यक्तित्व के किन-किन गुण-अवगुणों की झलक उसके व्यक्तित्व में आ गई है अथवा वह उनसे किन-किन रूपों में प्रभावित हुई है।

2. लेखिका के पिता बहुत विद्वान व्यक्ति थे। वे सदा पढ़ने-लिखने में व्यस्त रहते थे। समाज में उन्हें अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। वे समाज-सुधार तथा देश को स्वतंत्र करवाने वाले कांग्रेस के आंदोलनों से भी जुड़े हुए थे। शिक्षा के प्रसार में वे बहुत रुचि रखते थे। अपने घर में आठ-दस विद्यार्थियों को रखकर पढ़ाते थे, जिनमें से कई बाद में ऊँचे पदों पर लग गए।

3. लेखिका के पिता बहुत क्रोधी तथा अहंवादी व्यक्ति थे। उनकी आदतें नवाबों जैसी थी। आर्थिक तंगी होते हुए भी उनके अहं में किसी प्रकार की कमी नहीं आई थी। वे अपने परिवार से भी अपनी आर्थिक विवशताओं की चर्चा नहीं करते थे। इसी आर्थिक स्थिति से छुटकारा न पा सकने पर वे अपनी सारी झुंझलाहट लेखिका की माँ पर उतारते थे।

4. लेखिका को ऐसा प्रतीत होता है कि पिता के व्यक्तित्व ने उसे हीनभावना से ग्रसित कर दिया है, क्योंकि उसके पिता उसकी उपेक्षा करते थे। पिता के शक्की स्वभाव का भी लेखिका पर प्रभाव है। इसी कारण वह अपनी उचित प्रशंसा को भी सहज रूप से ग्रहण नहीं कर पाती।

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3. उस ज़माने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं, इसलिए मोहल्ले के किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे। आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी जिंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस-कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. ‘घर की दीवारों का पूरे मोहल्ले तक फैलना’ से क्या आशय है?
2. वर्तमान फ्लैट-कल्चर में हम असुरक्षित कैसे हैं?
3. परंपरागत ‘पड़ोस-कल्चर’ क्या था?
4. लेखिका नेफ्लैटों में रहने वालों के जीवन को संकुचित और असहाय क्यों कहा है?
उत्तर :
1. लेखिका के इस कथन का आशय यह है कि उसके बचपन के दिनों में घर केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता था बल्कि सारा मोहल्ला ही घर जैसा होता था। सभी में आत्मीयता का भाव होता था। अपने घर के समान कोई भी किसी के भी घर में आ-जा सकता था।
सबको सबसे स्नेह, ममता और दुलार मिलता था।

2. वर्तमान ‘फ्लैट-कल्चर’ में हम बहुत अधिक असुरक्षित हो गए हैं। हमारे आस-पास, ऊपर-नीचे के फ्लैटों में रहने वालों की अपनी एक अलग दुनिया होती है तथा किसी को भी यह पता नहीं होता कि उनके आस-पास अथवा ऊपर-नीचे कौन रहता है? इस कारण चोरी, डकैती, हत्या आदि के अनेक कार्य हो जाते हैं और दूसरे फ्लैट में रहने वाले को इस सबका पता भी चलता। परंपरागत ‘पड़ोस-कल्चर’ में पड़ोसी को अपने आस-पास रहने वालों के सुख-दुख का पता रहता था। सभी एक-दूसरे की सहायता करने के लिए तैयार रहते थे। सबमें परस्पर अपनत्व का भाव रहता था। कोई भी अपने आप को असहाय, बेसहारा, असुरक्षित अथवा संकुचित महसूस नहीं करता था।

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4. फ्लैटों में रहने वाले व्यक्ति केवल अपने फ्लैट तक ही सीमित रहते हैं। उनका अपने आस-पास अथवा ऊपर-नीचे रहने वालों से कोई लेना-देना नहीं होता। अपने तक सीमित रहने के कारण उनका जीवन संकुचित हो जाता है। ऐसे में सुख-दुख में उनकी कोई सहायता करने भी नहीं आता, जिससे वे स्वयं को असहाय अनुभव करते हैं।

आए दिन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के जमावड़े होते थे और जमकर बहसें होती थीं। बहस करना पिता जी का प्रिय शगल था। चाय-पानी या नाश्ता देने जाती तो पिता जी मुझे भी बैठने को कहते। वे चाहते थे कि मैं भी वहीं बैठू, सुनूँ और जानूँ कि देश में चारों ओर क्या कुछ हो रहा है। देश में हो भी तो कितना कुछ रहा था। सन् 1942 के आंदोलन के बाद से तो सारा देश जैसे खौल रहा था, लेकिन विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की नीतियाँ उनके आपसी विरोध या मतभेदों की तो मुझे दूर-दूर तक कोई समझ नहीं थी। हाँ, क्रांतिकारियों और देशभक्त शहीदों के रोमानी आकर्षण, उनकी कुर्बानियों से ज़रूर मन आक्रांत रहता था।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखिका के पिता लेखिका को घर में होने वाली बहसों में बैठने को क्यों कहते थे?
2. घर के ऐसे वातावरण का लेखिका पर क्या प्रभाव पड़ा?
3. देश में उस समय क्या-कुछ हो रहा था?
उत्तर :
1. लेखिका के पिता चाहते थे कि उनकी बेटी देश की तत्कालीन परिस्थिति व राजनैतिक हलचल के बारे में जाने। इसलिए वे लेखिका को घर में होने वाली बहसों में बैठने के लिए कहते थे।
2. पिता के कहने पर लेखिका घर में होने वाली बहसों में सम्मिलित होती थी। यद्यपि उसे राजनैतिक पार्टियों की नीतियों, उनके आपसी विरोध या मतभेदों की समझ नहीं थी, तथापि क्रांतिकारियों और देशभक्तों के आकर्षण व कुर्बानियों से उसका मन आक्रांत रहता था।
3. उस समय देश स्वतंत्रता के लिए प्रयासरत था। चारों ओर आंदोलन, जुलूस व विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। सन 1942 के आंदोलन के बाद पूरा देश ही स्वतंत्रता की मांग करने लगा था।

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5. प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस, भाषण हर शहर का चरित्र था और पूरे दमखम और जोश-खरोश के साथ इन सबसे जुड़ना हर युवा का उन्माद। मैं भी युवा थी और शीला अग्रवाल की जोशीली बातों ने रगों में बहते खून को लावे में बदल दिया था। स्थिति यह हुई कि एक बवंडर शहर में मचा हुआ था और एक घर में। पिता जी की आजादी की सीमा यहीं तक थी कि उनकी उपस्थिति में घर में आए लोगों के बीच उठू-बैलूं, जानूँ-समझें। हाथ उठा-उठाकर नारे लगाती, हड़तालें करवाती, लड़कों के साथ शहर की सड़कें नापती लड़की को अपनी सारी आधुनिकता के बावजूद बर्दाश्त करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था तो किसी की दी हुई आज़ादी के दायरे में चलना मेरे लिए। जब रगों में लहू की जगह लावा बहता हो तो सारे निषेध, सारी वर्जनाएँ और सारा भय कैसे ध्वस्त हो जाता है, यह तभी जाना।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. लेखिका किन दिनों का वर्णन कर रही है? उन दिनों देश का वातावरण कैसा था?
2. शीला अग्रवाल कौन थी? उसने लेखिका को कैसे प्रभावित किया?
3. घर और शहर में कैसे बवंडर मचे हुए थे?
4. लेखिका के पिता क्या चाहते थे?
5. इन दिनों लेखिका की मानसिक दशा कैसी थी?
उत्तर :
1. लेखिका सन 1946-47 के स्वतंत्रता आंदोलनों के दिनों का वर्णन कर रही है। उन दिनों देश को आजाद करवाने के लिए सर्वत्र प्रभात फेरियाँ, जुलूस आदि निकाले जा रहे थे। युवा वर्ग भी इन आंदोलनों में अधिक-से-अधिक संख्या में भाग ले रहा था। सब तरफ़ आज़ादी प्राप्त करने का जोश था।

2. शीला अग्रवाल लेखिका के विद्यालय में हिंदी की प्राध्यापिका थीं। वह लेखिका को हिंदी साहित्य के साथ-साथ देश की तत्कालीन स्थितियों से परिचित करवाती थीं। उनकी प्रेरणा से लेखिका शरत्, प्रेमचंद, अज्ञेय, जैनेंद्र, यशपाल, भगवती चरण वर्मा आदि का साहित्य पढ़कर उनसे विभिन्न विषयों पर चर्चा करके अपनी चिंतन-शक्ति में वृद्धि करती थी।

3. लेखिका के घर में उसके पिता ने बवंडर मचाया हुआ था। वे लेखिका को घर की सीमा में रहकर घर में आए लोगों के विचारों को सुनने के लिए कहते थे। वे यह नहीं चाहते थे कि उनकी लड़की शहर भर में लड़कों के साथ नारे लगवाती हुई हड़ताल करवाए। शहर में देश को आजाद करवाने वाले प्रभात-फेरियाँ, जुलूस आदि निकाल कर बवंडर मचाए हुए थे।

4. लेखिका के पिता चाहते थे कि वह घर में रहे तथा उनसे जो लोग मिलने आते हैं, उनकी बातों को सुने। वे यह नहीं चाहते थे कि उनकी लड़की स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग ले तथा लड़कों के साथ शहर में नारे लगाते हुए हड़ताल करवाए।

5. उन दिनों लेखिका की मानसिक स्थिति अत्यंत तनावग्रस्त थी। वह पिता के कहने के अनुसार घर में कैद नहीं रह सकती थी। अपनी प्राध्यापिका के विचारों को सुन-सुनकर तथा देश में आजादी के लिए बलिदान देने वाले युवाओं को देखकर उसका भी रक्त खौल उठता था और वह भी इन आंदोलनों में भाग लेने लग जाती थी। उसे इन्हीं दिनों यह अनुभव हुआ कि जब खून गर्म होता है, तो न कोई भय रह जाता है और न ही कोई बंधन रास्ता रोक सकता है।

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6. कहाँ तो जाते समय पिता जी मुँह दिखाने से घबरा रहे थे और कहाँ बड़े गर्व से कहकर आए कि यह तो पूरे देश की पुकार है…..इस पर ।
कोई कैसे रोक लगा सकता है भला? बेहद गद्गद स्वर में पिता जी यह सब सुनाते रहे और मैं अवाक। मुझे न अपनी आँखों पर विश्वास हो रहा था, न अपने कानों पर। पर यह हकीकत थी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. लेखिका के पिता जी मुँह दिखाने से क्यों घबरा रहे थे?
2. लेखिका के पिता को किस बात पर गर्व हुआ?
3. लेखिका अवाक क्यों थी?
4. लेखिका के अनुसार हकीकत क्या थी?
उत्तर :
1. लेखिका के कॉलेज की प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को पत्र लिखा था कि वे आकर उससे मिलें और आकर बताएँ कि उनकी बेटी कॉलेज में जो नियमों के विरुद्ध कार्य कर रही है, उन गतिविधियों के कारण उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों न की जाए? यह पत्र पढ़कर लेखिका के पिता आग-बबूला हो गए थे और उन्हें लग रहा था कि यह लड़की उन्हें कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगी। इसलिए वेमुँह दिखाने से घबरा रहे थे।

2. लेखिका के पिता लेखिका के विरुद्ध उसकी प्रिंसिपल की शिकायत से घबरा रहे थे, पर जब उन्हें प्रिंसिपल से मिलकर यह पता चला कि उनकी लड़की के एक इशारे पर लड़कियाँ कक्षाएँ छोड़कर स्वाधीनता संग्राम के आंदोलनों में कूद पड़ती हैं, तो उनका सिर गर्व से ऊँचा हो गया।

3. लेखिका अवाक इसलिए रह गई थी क्योंकि जब प्रिंसिपल का पत्र मिला था तो उसके पिता उसके आचरण को लेकर आग-बबूला हो रहे थे, परंतु प्रिंसिपल से मिलकर आने के बाद वे उसके कार्य से स्वयं को सम्मानित अनुभव कर रहे थे। वे उसे डाँटने के स्थान पर उसके प्रशंसक बन गए थे।

4. लेखिका को इस बात का विश्वास नहीं हो रहा था कि प्रिंसिपल से मिलकर आने के बाद उसके पिता उसे डाँट नहीं रहे, बल्कि उसके किए गए कार्य को उचित ही मान रहे हैं। यह एक हकीकत ही थी कि उसके पिता ने उसे सही माना और प्रिंसिपल की शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।

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लेखिका-परिचय :

जीवन-श्रीमती मन्नू भंडारी आधुनिक युग की प्रसिद्ध कथाकार हैं। इनका जन्म 3 अप्रैल, 1931 ई० को भानपुरा (मध्य प्रदेश) में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर में हुई। इन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में एम०ए० किया। कुछ समय तक कोलकाता में अध्यापन कार्य करने के बाद वे मिरांडा हाउस दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापिका के पद पर नियुक्त हुईं। यहीं कार्यरत रहकर इन्होंने अवकाश ग्रहण किया। इनकी कुछ कहानियों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है।

कुछ पर फ़िल्में भी बनी हैं। इन्हें हिंदी अकादमी के शिखर सम्मान, भारतीय भाषा परिषद् कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। रचनाएँ-मन्नू भंडारी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं कहानी संग्रह-मैं हार गई, एक प्लेट सैलाब, यही सच है, त्रिशंकु। उपन्यास-आपका बंटी, महाभोज। भाषा-शैली-मन्नू भंडारी की कहानियों में सामाजिक तत्व की प्रधानता है। इन्होंने अपनी कहानियों में नारी जीवन की विडंबना तथा व्यथा का मार्मिक चित्रण किया है।

नारी होने के कारण इनकी नारी हृदय तक पहुँच बड़ी सहज रही है। यही कारण है कि इन्हें मनोवैज्ञानिक कहानियाँ लिखने में विशेष सफलता प्राप्त हुई। वे घटना तत्व को अनावश्यक विस्तार न देकर पात्र विशेष पर अपनी दृष्टि केंद्रित रखती हैं। सामाजिक विसंगतियों को भी इन्होंने सफलतापूर्वक उभारा है। एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी का आत्मकथ्य है, जिसमें इन्होंने अपने सोलहवें-सत्रहवें वर्ष में भारत की आजादी की लड़ाई में अपनी भागीदारी को रेखांकित किया है। इसके साथ तत्कालीन समाज में स्त्रियों के प्रति इसके दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया गया है।

लेखिका ने आत्मकथात्मक शैली का प्रयोग करते हुए सहज, सरल तथा व्यावहारिक भाषा का प्रयोग किया है, जिसमें विस्फारित, भग्नावशेषों, प्रतिष्ठा, तत्पर, सदैव जैसे तत्सम प्रधान शब्दों के साथ-साथ हाशिए, ओहदों, तुक्का, फ़र्ज, माँजा, सूतना, मैट्रिक, शगल, आलम, समथिंग, मिस्ड जैसे विदेशी तथा देशज शब्दों का भी भरपूर प्रयोग किया है। कहीं-कहीं भावात्मक शैली के भी दर्शन होते हैं; जैसे–’समय का प्रवाह भले ही हमें दूसरी दिशाओं में बहाकर ले जाए….स्थितियों का दबाव भले ही हमारा रूप बदल दे, हमें पूरी तरह उससे मुक्त तो नहीं कर सकता!’ समग्र रूप से इनकी भाषा-शैली सहज तथा बोधगम्य है।

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पाठ का सार :

‘एक कहानी यह भी’ एक आत्मकथ्य है। इसकी लेखिका मन्नू भंडारी हैं। इसमें उन्होंने अपने जीवन की उन घटनाओं का वर्णन किया है जो उन्हें लेखिका बनाने में सहायक हुई हैं। इस पाठ में छोटे शहर की युवा होती लड़की की कहानी है जिसका आजादी की लड़ाई में उत्साह, संगठन-क्षमता और विरोध करने का तरीका देखते ही बनता था। लेखिका का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था, परंतु उसका बचपन अजमेर ब्रह्मपुरी मोहल्ले में गुजरा था। उनका घर दो मंजिला था।

नीचे पूरा परिवार रहता था; ऊपर की मंजिल पर पिताजी का साम्राज्य था। अजमेर से पहले वे लोग इंदौर में रहते थे। इंदौर में उनका परिवार प्रतिष्ठित परिवारों में से एक था। वे शिक्षा को केवल उपदेश की तरह नहीं लेते थे। कमजोर छात्रों को घर लाकर भी पढ़ाया करते थे। उनके पढ़ाए छात्र आज ऊँचे ओहदों पर लगे हुए थे। पिता दरियादिल, कोमल स्वभाव, संवेदनशील होने के साथ-साथ क्रोधी और अहंवादी थे। एक बहुत बड़े आर्थिक झटके ने उन्हें अंदर तक हिला दिया था। वे इंदौर छोड़कर अजमेर आ गए थे। यहाँ उन्होंने अंग्रेजी हिंदी शब्दकोष तैयार किया।

यह अपनी तरह का पहला शब्दकोश था, जिसने उन्हें प्रसिद्धि तो बहुत दी परंतु धन नहीं। कमजोर आर्थिक स्थिति ने उनके सकारात्मक पहलुओं को दबा दिया था। वे अपनी गिरती आर्थिक स्थिति में अपने बच्चों को भागीदार नहीं बनाना चाहते थे। आरंभ से अच्छा देखने वाले पिताजी के लिए वे दिन बड़े कष्टदायक थे। इससे उनका स्वभाव क्रोधी हो गया था। उनके क्रोध का भाजन सदैव माँ बनती थी। जब से उन्होंने अपने लोगों से धोखा खाया था, उनका स्वभाव शक्की हो गया था। वे हर किसी को शक की नज़रों से देखते थे।

लेखिका अपने पिताजी को याद करके यह देखना चाहती है कि उसमें पिताजी के कितने गुण और अवगुण आए हैं। उनके व्यवहार ने सदैव लेखिका को हीनता का शिकार बनाया है। लेखिका का रंग काला था; शरीर से भी वह दुबली-पतली थी, परंतु उसके पिताजी को गोरा रंग पसंद था। उससे बड़ी बहन सुशीला गोरे रंग की थी, इसलिए वह पिताजी की चहेती थी। पिताजी हर बात पर उसकी तुलना सुशीला से करते थे, जिससे उसमें हीन भावना घर कर गई।

वह हीन भावना उसमें से आज तक नहीं निकली थी। आज भी वह किसी के सामने खुलकर : अपनी तारीफ़ सुन नहीं पाती। लेखिका को यह सुनकर अपने कानों पर विश्वास नहीं होता कि उन्होंने लेखिका के रूप में इतनी उपलब्धियाँ । प्राप्त की हैं। लेखिका पर अपने पिता का पूरा प्रभाव था। उसे अपने व्यवहार में कहीं-न-कहीं अपने पिता का व्यवहार दिखाई देता था। दोनों के विचार सदैव आपस में टकराते रहे थे। समय मनुष्य को अवश्य बदलता है, परंतु कुछ जड़ें इतनी गहरी होती हैं कि वे अपने स्थान से ! नहीं हिलतीं।

लेखिका की माँ पिता से विपरीत स्वभाव की थी। वे हर समय सबकी सेवा में तैयार रहती थीं। पिताजी की हर कमजोरी माँ पर निकलती थी। वे हर बात को अपना कर्तव्य मानकर पूरा करती थीं। लेखिका और उसके दूसरे भाई-बहनों का माँ से विशेष लगाव था, परंतु लेखिका की माँ उसका आदर्श कभी नहीं बन पाई। लेखिका पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी। लेखिका को उसकी शादी की धुंधली-सी याद हैं। घर के आँगन में उसका खेल में साथ उसकी बहन सुशीला ने दिया।

दोनों बचपन के वे सभी खेल खेलती थीं, जो सभी बच्चे खेलते हैं। दोनों अपने भाइयों के साथ लड़कों वाले खेल भी खेलती थीं, परंतु उनके खेल का दायरा घर का आँगन था। लड़के कहीं भी आ-जा सकते है। थे। उस समय घरों का आँगन अपने घर तक सीमित नहीं था। वे पूरे मोहल्ले के घरों के आँगन तक आ-जा सकती थी। उस समय मोहल्ले के सभी घर एक-दूसरे के परिवारों का हिस्सा होते थे। लेखिका को आज की फ्लैट वाली जिंदगी असहाय लगती है। उसे लगता दर्जनों कहानियों के पात्र उसी मोहल्ले के हैं, जहाँ उसने अपना बचपन और यौवन व्यतीत किया था।

उस मोहल्ले के लोगों की छाप उसके मन पर इतनी गहरी थी कि वह किसी को भी अपनी कहानी या उपन्यास का पात्र बना लेती थी और उसे पता ही नहीं चलता था। उस समय : के समाज में शादी के लिए लड़की की योग्यता सोलह वर्ष आयु तथा मैट्रिक तक शिक्षा समझी जाती थी। उसकी बहन सुशीला की शादी सन 1944 में हो गई थी। उसके दोनों बड़े भाई पढ़ाई के लिए बाहर चले गए थे। सबके चले जाने के पश्चात लेखिका को अपने व्यक्तित्व का अहसास हुआ। उसके पिताजी ने उसे घर के कार्यों के लिए कभी प्रेरित नहीं किया।

उन्होंने सदा उसे राजनीतिक सभाओं में अपने साथ बैठाया। वे चाहते थे कि उसे देश की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। उस समय देश में बहुत कुछ घट रहा था। चारों तरफ आजादी की लहर दौड़ रही थी। लेखिका की आयु काफ़ी कम थी; फिर भी उसे क्रांतिकारियों, देशभक्तों और शहीदों की कुर्बानियाँ रोमांचित कर देती थीं। दसवीं कक्षा तक लेखिका को जो भी साहित्य मिलता, उसे पढ़ लेती थी। परंतु जैसे ही वह दसवीं पास करके कॉलेज में ‘फ़र्स्ट ईयर’ में गई, वहाँ हिंदी की अध्यापिका शीला अग्रवाल ने साहित्य से उसका वास्तविक परिचय करवाया।

वे स्वयं उसके लिए किताबें चुनतीं और उसे पढ़ने को देती थीं। उन विषयों पर शीला अग्रवाल लेखिका से लंबी बहस करती थी। इससे उनके साहित्य का दायरा बढ़ा। लेखिका ने उस समय के सभी बड़े-बड़े लेखकों के साहित्यों को पढ़कर समझना आरंभ कर दिया था। अध्यापिका शीला अग्रवाल की संगति ने उसका परिचय मात्र साहित्य से ही नहीं अपितु घर से बाहर की दुनिया से भी करवाया। पिताजी के साथ आरंभ से ही वह राजनीतिक सभाओं में हिस्सा लेती थी, परंतु उन्होंने उसे सक्रिय राजनीति में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

उस समय सन 1946-47 में देश का वातावरण इस प्रकार का था कि कोई भी व्यक्ति अपने घर में चुप रहकर नहीं बैठ सकता था। शीला अग्रवाल की बातों ने उसकी रगों में जोश भर दिया था। वह देश की स्वतंत्रता के लिए लड़कों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलने लगी, परंतु उसके पिताजी को ये बातें अच्छी नहीं लगती थीं। वे दोहरे व्यक्तित्व के स्वामी थे। वे आधुनिकता के समर्थक होते हुए भी दकियानूसी विचारों के थे। एक ओर तो वे मन्नू को घर में हो रही राजनीतिक सभाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करते, वहीं दूसरी ओर उन्हें उसका घर से बाहर की राजनीतिक उथल-पुथल में भाग लेना अच्छा नहीं लगता था। यहीं पर दोनों पिता-बेटी के विचारों में टकराहट होने लगी थी। दोनों के मध्य विचारों की टकराहट राजेंद्र से शादी होने तक चलती रही थी।

लेखिका के पिताजी की सबसे बड़ी कमज़ोरी यश की चाहत थी। उनके अनुसार कुछ ऐसे काम करने चाहिए, जिससे समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान हो। उनकी इसी चाहत ने लेखिका को उनके क्रोध का भाजन बनने से बचाया था। एक बार पिताजी के नाम कॉलेज से प्रिंसिपल का पत्र आया। उन्होंने उन्हें उसके बारे में बातचीत करने के लिए बुलाया था। पिताजी को बहुत क्रोध आया, परंतु जब वे कॉलेज से लौटे तो बहुत खुश थे।

उन्होंने बताया कि उसका कॉलेज में बहुत दबदबा है; सारा कॉलेज उसके एक इशारे पर खाली हो जाता है। वे तीन लड़कियाँ हैं, जिन्होंने कॉलेज चलाना मुश्किल कर रखा था। पिताजी को प्रिंसिपल की बातें सुनकर गर्व हुआ कि उनके घर में भी एक ऐसा नेता है, जो सभी को एक आवाज़ में अपने साथ चलने के लिए प्रेरित कर सकता है। पिताजी के मुँह से अपने लिए प्रशंसा सुनकर उसे अपने कानों और आँखों पर विश्वास नहीं हुआ था। ऐसी ही एक घटना और थी। उन दिनों आज़ाद हिंद फौज का मुकदमा चल रहा था। सभी स्कूल कॉलेजों में हड़ताल चल रही थी। सारा युवा वर्ग अजमेर के मुख्य बाजार के चौराहे पर एकत्रित हुआ।

वहाँ सभी ने अपने विचार रखे। लेखिका ने भी उपस्थित भीड़ के सामने अपने विचार रखे। उसके विचार सुनकर उसके पिताजी के मित्र ने आकर पिताजी को उसके बारे में उल्टी सीधी बातें कह दी, जिसे सुनकर वे आग-बबूला हो गए। वे सारा दिन माँ को कुछ-न-कुछ बोलते रहे। रात के समय जब वह घर लौटी, तो उसके पिता के पास उनके एक अभिन्न मित्र अंबालाल जी बैठे थे। डॉ० अंबालाल जी ने मन्नू को देखते ही उसकी प्रशंसा करनी आरंभ कर दी। वे पिताजी से बोले कि उन्होंने मन्नू का भाषण न सुनकर अच्छा नहीं किया। मन्नू ने बड़ा ही अच्छा और ज़ोरदार भाषण दिया। पिताजी यह सब सुनकर बहुत प्रसन्न हुए।

उनके चेहरे पर गर्व के भाव थे। बाद में उसे उसकी माँ ने दोपहर में पिताजी के क्रोध वाली बात बताई, तो उसकी साँस में साँस आई। लेखिका आज अपने अतीत में देखती है, तो उसे यह समझ नहीं आता कि क्या वास्तव में उसका भाषण ज़ोरदार था या फिर उस समय के समाज में किसी लड़की द्वारा उपस्थित भीड़ के सामने नि:संकोच से धुआँधार बोलना ही सब पर अपना प्रभाव छोड़ गया था। परंतु लेखिका के पिताजी कई प्रकार के अंतर्विरोधों में जी रहे थे। वे आधुनिकता और पुराने विचारों-दोनों के समर्थक थे।

उनके यही विचार कई प्रकार के विचारों के विरोध का कारण बनते थे। मई 1947 को अध्यापक शीला अग्रवाल को कॉलेज से निकाल दिया गया था। उन पर यह आरोप। था कि वे कॉलेज की लड़कियों में अनुशासनहीनता फैला रही थी। लेखिका के साथ दो और लड़कियों को ‘थर्ड इयर’ में दाखिला नहीं दिया गया। कॉलेज में इस बात को लेकर खूब शोर-शराबा हुआ। जीत लड़कियों की हुई, परंतु इस जीत की खुशी से भी ज्यादा एक और खुशी प्रतीक्षा में थी। वह उस शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। उस समय भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था।

JAC Class 10 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 एक कहानी यह भी

कठिन शब्दों के अर्थ :

प्रतिष्ठा – इज्जत, मान-मर्यादा। ओहदा – पदवी। भग्नावशेषों – खंडहर, टूटे-फूटे हिस्से। विस्फारित – फैला हुआ। हाशिए – एक किनारे पर। यातना – कष्ट। विश्वासघात – धोखा। खूबी – गुण। खामियाँ – कमियाँ। अचेतन – जड़, निर्जीव। पर्त – तह। तुक्का – बिना विचार के निशाना लगाना। व्यथा – पीड़ा, दुख। प्रतिच्छाया – परछाईं। निहायत – बिल्कुल। सहिष्णुता – सहनशीलता। माँजा – पतंग उड़ाने वाला धागा। शगल – शौक। आक्रांत – दुखी, कष्टग्रस्त। दुर्बलता – कमज़ोरी। वर्चस्व – दबदबा। निषिद्ध – वर्जित, जिस पर रोक लगाई गई हो।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 14 Statistics

Question 1.
The marks obtained by 40 students of class IX in a mathematics test are given below:
18, 55, 68, 79, 85, 43, 29, 68, 54, 73, 47, 35, 72, 64, 95, 44, 50, 77, 64, 35, 79, 52, 45, 54, 70, 83, 62, 64, 72, 92, 84, 76, 63, 43, 54, 38, 73, 68, 52, 54.
Prepare a frequency distribution table with class size of 10 marks.
Solution :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics - 1

Question 2.
Below are the marks obtained by 30 students of a class in Maths test out of 100. Make a frequency distribution table for this data with class interval of size 10 and draw a histogram to represent the data. 55, 61, 46, 100, 75, 90, 77, 60, 48, 58, 64, 59, 60, 78, 55, 88, 60, 37, 58, 84, 62, 44, 52, 50, 56, 95, 67, 70, 39, 68.
Solution :
Marks obtained by 30 students are 55, 61, 46, 100, 75, 90, 77, 60, 48, 58, 64, 59, 60, 78, 55, 88, 60, 37, 58, 84, 62, 44, 52, 50, 56, 95, 67, 70, 39, 68.
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics - 2

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics

Question 3.
Find the mean of the factors of 24.
Solution :
Various factors of 24 = 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12 and 24.
Mean,
\(\bar{x}\) = Sum of all observations / Total number of observations
= \(\frac{1+2+3+4+6+8+12+24}{8}\)
= \(\frac{60}{8}=\frac{15}{2}\) = 7.5

Question 4.
Find the range of the given data: 25.7, 16.3, 2.8, 21.7, 24.3, 22.7 and 24.9
Solution :
Range of the data = Highest value – Lowest value = 25.7 – 2.8 = 22.9

Multiple Choice Questions

Question 1.
The median of following series 520, 20, 340, 190, 35, 800, 1210, 50, 80 is
(a) 1210
(b) 520
(c) 190
(d) 35
Solution :
(c) 190

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Question 2.
If the arithmetic mean of 5, 7, 9, x is 9 then the value of x is
(a) 11
(b) 15
(c) 18
(d) 16
Solution :
(b) 15

Question 3.
The mode of the distribution 3, 5, 7, 4, 2, 1, 4, 3, 4 is
(a) 7
(b) 4
(c) 3
(d) 1
Solution :
(b) 4

Question 4.
If the mean and median of a set of numbers are 8.9 and 9 respectively, then the mode will be
(a) 7.2
(b) 8.2
(c) 9.2
(d) 10.2
Solution :
(c) 9.2

Question 5.
A student got marks in 5 subjects in a monthly test is given below: 2, 3, 4, 5, 6. In these obtained marks, 4 is the
(a) Mean and median
(b) Median but no mean
(c) Mean but no median
(d) Mode
Solution :
(a) Mean and median

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Question 6.
Find the mode from the following table:

Marks obtained31233343
Frequency (f)7111583

(a) 13
(b) 43
(c) 33
(d) 23
Solution :
(d) 23

Question 7.
If the class intervals in a frequency distribution are (72 – 73.9), (74 – 75.9), (76 – 77.9), (78 – 79.9) etc., the mid-point of the class (74 – 75.9) is
(a) 74.50
(b) 74.90
(c) 74.95
(d) 75.00
Solution :
(c) 74.95

Question 8.
Which one of the following is not correct –
(a) Statistics is liable to be misused.
(b) The data collected by the investigator to be used by himself are called primary data.
(c) Statistical laws are exact.
(d) Statistics do not take into account of individual cases.
Solution :
(c) Statistical laws are exact.

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Question 9.
If the first five elements of a sequence are replaced by (xi + 5), where i = 1, 2, 3, … 5 and the next five elements are replaced by (xi – 5), where, i = 6; ….. 10 then the mean will change by
(a) 25
(b) 10
(c) 5
(d) 0
Solution :
(d) 0

Question 10.
The following numbers are given: 61, 62, 63, 61, 63, 64, 64, 60, 65, 63, 64, 65, 66, 64. The difference between their median and mean is
(a) 0.4
(b) 0.3
(c) 0.2
(d) 0.1
Solution :
(b) 0.3

Question 11.
The value of \(\sum_{i=i}^n\) (xi – \(\bar{x}\)) where \(\bar{x}\) is the arithmetic mean of xi is
(a) 1
(b) n x
(c) 0
(d) None of these
Solution :
(c) 0

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Question 12.
The average of 15 numbers is 18. The average of first 8 is 19 and that of last 8 is 17, then the 8th number is
(a) 15
(b) 16
(c) 18
(d) 20
Solution :
(c) 18

Question 13.
In an examination, 10 students scored the following marks in Mathematics: 35, 19, 28, 32, 63, 02, 47, 31, 13, 98. Its range is
(a) 96
(b) 02
(c) 98
(d) 50
Direction: questions 14 is based on the histogram given in the adjacent figure.
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics - 3
Solution :
(a) 96

Question 14.
The percentage of students in science faculty in 1990-91 is:
(a) 26.9 %
(b) 27.8 %
(c) 14.81 %
(d) 30.2 %
Solution :
(c) 14.81 %

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Question 15.
For the scores 8, 6, 10, 12, 1, 5, 6 and 6, the arithmetic mean is
(a) 6.85
(b) 6.75
(c) 6.95
(d) 7
Direction: Each question from 16 to 18 is based on the histogram given in the adjacent figure.
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics - 4
Solution :
(b) 6.75

Question 16.
What is the number of workers earning ₹ 300 to 350?
(a) 50
(b) 40
(c) 45
(d) 130
Solution :
(a) 50

Question 17.
In which class interval of wages there is the least number of workers?
(a) 400 – 450
(b) 350 – 400
(c) 250 – 300
(d) 200 – 250
Solution :
(d) 200 – 250

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 14 Statistics

Question 18.
What is the upper limit of the class interval 200-250?
(a) 200
(b) 250
(c) 225
(d) None of these
Solution :
(b) 250