JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

JAC Board Class 10th Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

बहविकल्पीय

प्रश्न 1.
केन्द्रीय सरकार की ओर से निम्नलिखित में कौन करेंसी नोट जारी करता है?
(क) भारतीय स्टेट बैंक
(ख) भारतीय रिजर्व बैंक
(ग) भारतीय वाणिज्यिक बैंक
(घ) यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
उत्तर:
(ख) भारतीय रिजर्व बैंक

2. बैंकों से सम्बंधित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) बैंक जमा राशि का उपयोग लोगों की ऋण सम्बंधी माँगों को पूरा करने के लिए नहीं कर सकते
(ख) बैंक जमा राशि का उपयोग सरकार की आवश्यकताओं के लिए करते हैं।
(ग) बैंक जमा राशि रख लेते हैं और ऋण नहीं देते।
(घ) बैंक जमा राशि को लोगों की कर्जे सम्बन्धी माँगों को पूरा करने के लिए प्रयोग करते हैं
उत्तर:
(घ) बैंक जमा राशि को लोगों की कर्जे सम्बन्धी माँगों को पूरा करने के लिए प्रयोग करते हैं

3. ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज की आवश्यकता मुख्यतः किसलिए होती है?
(क) आवास
(ख) फसल उगाने के लिए
(ग) विदेश यात्रा के लिए
(घ) पारिवारिक यात्रा के लिए
उत्तर:
(ख) फसल उगाने के लिए

4. कर्ज लेने के लिए कर्जदार निम्नलिखित में से किसका उपयोग गारण्टी देने के लिए करता है?
(क) साख
(ख) करेंसी नोट
(ग) चैक
(घ) समर्थक ऋणाधार
उत्तर:
(घ) समर्थक ऋणाधार

5. निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था ऋणों के औपचारिक स्रोतों की कार्यप्रणाली पर नज़र रखती है?
(क) भारतीय स्टेट बैंक
(ख) सैंट्रल बैंक ऑफ इण्डिया
(ग) भारतीय रिजर्व बैंक
(घ) ग्रामीण बैंक
उत्तर:
(ग) भारतीय रिजर्व बैंक

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

6. स्वयं सहायता समूह का सम्बन्ध है
(क) ग्रामीण लोगों का समूह जो ऋण के क्षेत्रक में मिलकर काम करते हैं
(ख) अमीर लोगों का समूह जो मिलकर काम करते हैं
(ग) एक औपचारिक ऋण क्षेत्रक
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) ग्रामीण लोगों का समूह जो ऋण के क्षेत्रक में मिलकर काम करते हैं

7. “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी-छोटी गतिविधियों के जरिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।” यह कथन किसका है?
(क) प्रो. मोहम्मद यूनुस
(ख) प्रो. अमर्त्य सेन
(ग) डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
(घ) डॉ. मनमोहन सिंह।
उत्तर:
(क) प्रो. मोहम्मद यूनुस

रिक्त स्थान

निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
1. …………प्रणाली में मुद्रा का उपयोग किए बिना वस्तुओं का विनिमय किया जाता है।
उत्तर:
वस्तु विनिमय,

2. भारतीय रिजर्व बैंक…………की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।
उत्तर:
केन्द्रीय सरकार,

3. बैंकों व सरकारी समितियों से लिया गया ऋण………. कहलाता है।
उत्तर:
औपचारिक क्षेत्रक ऋण,

4. साहूकार, मालिक या परिचित से लिया गया ऋण ………………कहलाता है।
उत्तर:
अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण

अति लयूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्तु विनिमय किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब वस्तुओं का लेन-देन बिना मुद्रा के प्रयोग से आपस में ही हो जाता है तो ऐसी व्यवस्था को वस्तु विनिमय कहते हैं।

प्रश्न 2.
मुद्रा को परिभाषित कीजिए।
अथवा
मुद्रा किसे कहते हैं?
उत्तर:
मुद्रा से अभिप्राय उस वैधानिक वस्तु से है जिसका उपयोग सामान्यतः विनिमय माध्यम के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 3.
वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहा जाता है?
उत्तर:
वस्तुओं के आदान-प्रदान की प्रणाली को वस्तु विनिमय प्रणाली कहा जाता है।

प्रश्न 4.
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दोनों पक्ष एक-दूसरे से वस्तुएँ खरीदने व बेचने पर सहमति रखते हैं तो इसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 5.
वस्तु विनिमय प्रक्रिया का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण क्या है?
उत्तर:
विनिमय प्रक्रिया का सबसे महत्त्वपूर्ण लक्षण आवश्यकताओं का दोहरा संयोग है।

प्रश्न 6.
विनिमय का माध्यम क्या है?
उत्तर:
मुद्रा विनिमय का माध्यम है क्योंकि यह विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है।

प्रश्न 7.
विनिमय की प्रक्रिया में मुद्रा किस प्रकार माध्यम का काम करती है?
उत्तर:
मुद्रा के माध्यम से वस्तुएँ खरीदी व बेची जा सकती हैं।

प्रश्न 8.
आधुनिक मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?
अथवा
मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?
उत्तर:
क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है।

प्रश्न 9.
मुद्रा के सम्बन्ध में भारतीय कानून क्या है?
उत्तर:
भारतीय कानून के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की अनुमति नहीं है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 10.
माँग जमा क्या है?
उत्तर:
जब बैंक खातों में जमा धन को ग्राहक द्वारा माँग के अनुसार निकाला जा सकता है तो उसे माँग जमा कहते हैं।

प्रश्न 11.
बैंक चेक क्या है?
उत्तर:
चेक एक ऐसा कागज है जो बैंक को कोई व्यक्ति अपने खाते से चेक पर लिख्रे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक विशेष रकम का धुगतान करने का आदेश देता है।

प्रश्न 12.
हम चेक क्यों जारी करते हैं?
उत्तर:
हम माँग जमाओं के विरुद्ध चेक जारी करते हैं जिससे बिना नकद का इस्तेमाल किए सीधा भुगतान करना सम्भव होता है।

प्रश्न 13.
माँग जमा को मुद्रा क्यों समझा जाता है?
उत्तर:
बैंक खातों में जमाधन को माँग करने पर निकाला जा सकता है। अतः इस माँग जमा को मुद्रा समझा जाता है।

प्रश्न 14.
बैंक जमा का एक छोटा हिस्सा अपने पास नकद रूप में क्यों रखते हैं?
उत्तर:
किसी एक दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही वैंक से नगदी निकालने के लिए आते हैं। इन्हें नगदी देने के लिए बैंक जमा का एक छोटा हिस्सा अपने पास रखते हैं।

प्रश्न 15.
भारत में बैंक जमा का कितना प्रतिशत हिस्सा’ नकद के रूप में अपने पास रखते हैं?
उत्तर:
भारत में बैंक जमा का 15 प्रतिशत हिस्सा नकद् रूप में अपने पास रखते हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 16.
बैंक शेष जमा राशि का कैसे उपयोग करते हैं?
उत्तर:
बैंक शेष जमा राशि का लोगों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग करते हैं।

प्रश्न 17.
बैंक के कोई दो कार्य लिखिए।
उत्तर:

  1. धन जमा करना
  2. ऋण देना।

प्रश्न 18.
बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?
अथवा
बैंकों में जमा राशियाँ किस प्रकार बैंकों की आय का स्रोत बनती है?
उत्तर:
कर्जदारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अन्तर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है।

प्रश्न 19.
ऋण से क्या तात्पर्य है?
अथवा
ॠण क्या है?
उत्तर:
ऋण से तात्पर्य एक सहमति से है जहाँ साहूका कर्जदार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ उपलब्ध कराता है और बदल में भविष्य में कर्जदार से भुगतान करने का वायदा लेता है।

प्रश्न 20.
ऋण किस प्रकार एक महत्त्वपूर्ण एव सकारात्मक भूमिका निभाता है ?
उत्तर:
ऋण उत्पादन के कार्यशील खर्चों को पूरा करने, उत्पादन को समय पर पूरा करने एवं आय बढ़ाने मे सहायता करता है।

प्रश्न 21.
बैंकों के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते ऋण का प्रमुख स्रोत कौन-सा है ?
उत्तर:
सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते ऋण का एक प्रमुख स्रोत हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 22.
कृषक सहकारी समिति का क्या कार्य है?
उत्तर:
कृषक सहकारी समिति उपकरण खरीदने, खेती एवं व्यापार करने, मछली पालन करने, घर बनाने एवं अन्य विभिन्न प्रकार के खर्चों के लिए ॠण उपलब्ध कराती है।

प्रश्न 23.
ॠणों को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है? नाम लिखो।
उत्तर:

  1. औपचारिक क्षेत्रक ॠण
  2. अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण।

प्रश्न 24.
औपचारिक क्षेत्रक ऋण के स्रोत क्या हैं?
अथवा
ऋण के औपचारिक स्रोत क्या हैं ?
उत्तर:

  1. बैंक
  2. सहकारी समितियौ।

प्रश्न 25.
ऋणों के औपचारिक स्रोतों की कार्य प्रणाली पर नजर रखना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
ऋणों के समान वितरण और ब्याज दरों को निम्न रखने के लिए।

प्रश्न 26.
अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण के स्रोत क्या हैं?
अथवा
साख (ऋण) के अनौपचारिक क्षेत्रक के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. साहूकार,
  2. व्यापारी,
  3. मालिक,
  4. रिश्तेदार,
  5. दोस्त आदि।

प्रश्न 27.
ऋण की ऊँची लागत का क्या अर्थ है?
उत्तर:
ऋण की ऊँची लागत का अर्थ है कि कर्जदार की आय का अधिकांश भाग ऋण कै ब्याज भुगतान में ही खर्च हो जाता है। इसलिए कर्जदारों के पास अपने लिए कम आय शेष रहती है।

प्रश्न 28.
कर्जदारों की अनौपचारिक स्रोतों पर से निर्भरता कम करने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर:
बैकों व सहकारी समितियों को अपनी गतिविधियाँ विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़्मनी चाहिए।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 29.
एक स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं?
उत्तर:
एक स्वयं सहायता समूह में 15-20 सदस्य होते हैं।

प्रश्न 30.
लोग स्वर्यं सहायता समूह से ऋण लेने के लिए प्राथमिकता देते हैं। क्यों?
उत्तर:
क्योंकि इनकी ब्याज की दरें अनौपचारिक स्रोतों से कम होती हैं।

प्रश्न 31.
यदि स्वयं सहायता समूह नियमित रूप से बचत करता है तो वह किससे ऋण लेने योग्य हो जाता है?
उत्तर:
स्वयं सहायता समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है।

प्रश्न 32.
स्वयं सहायता समूह द्वारा बैंक से समूह के नाम से लिये गये ऋणों का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर:
सदस्यों के लिए स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA1)

प्रश्न 1.
भारत में मुद्रा के आधुनिक रूप कौन कौन से हैं? इसे विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?
अथवा
आधुनिक मुद्रा को, जिसका अपना कोई उपयोग नहीं है, विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है? कारण ज्ञात कीजिए।
अथवा
“करेंसी’ का अर्थ स्पष्ट कीजिएस.
उत्तर:
भारत में मुद्रा का आधुनिक रूप करेंसी है जिसमें कागज के नोट व सिक्के सम्मिलित हैं। इसे विनिमय का माध्यम इसलिए स्वीकार किया जाता है क्योंकि सरकार द्वारा इसे प्राधिकृत किया गया है। भारत में भारतीय रिजर्व बैंक केन्द्रीय सरकार की ओर से करेंसी को छापती है और वैधानिक विनिमय के माध्यम के रूप में इसे इस्तेमाल करने के लिए स्वीकार करती है। भारत में किसी भी सौदे एवं लेन-देन के लिए इसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 2.
मुद्रा के आधुनिक रूप एवं पार व्यरिक रूप में अन्तर बताइए।
उत्तर:
मुद्रा के आधुनिक रूप एवं पारम्पक रूप में निम्नलिखित अन्तर हैं

  • मुद्रा का आधुनिक रूप:
    1. मुद्रा के आधुनिक रूप में करेंसी-कागज के नोट एवं सिक्के सम्मिलित किये जाते हैं।
    2. मुद्रा का यह रूप वर्तमान काल में प्रचलन में है।
    3. आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है।
  • मुद्रा का पारम्परिक रूप
    1. मुद्रा के प म्परिक रूप में सोना, चाँदी, ताँबा जैसी धातुओं को सम्मिलित किया जाता था।
    2. मुद्रा का यह रूप प्राचीनकाल में प्रचलन में था।
    3. इस मुद्रा का अपना इस्तेमाल होता था।

प्रश्न 3.
माँग जमा क्या है? माँग जमा की मुद्रा क्यों समझा जाता है?
उत्तर:
माँग जमा:
बैंक खातों में वह जमा राशि जिसे माँग के अनुसार निकाला जा सके जमा कहलाती है। माँग जमा को मुद्रा समझा जाता है क्योंकि:

  1. इसे विनिमय के माध्यम के रूप से प्रयोग किया जा सकता है।
  2. यह आसानी से सबको स्वीकार्य होती है।
  3. बिना नकद का प्रयोग किए इससे भगतान करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 4.
‘माँग जमा में मुद्रा के अनिवार्य लक्षण मिलते हैं।’ कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बैंक खाते में वह जमा राशि जिसे माँग के अनुसार निकाला जा सके माँग जमा कहलाती है। माँग जमा में मुद्रा के निम्नलिखित अनिवार्य लक्षण मिलते हैं

  1. लोगों की मुद्रा बैंकों में सुरक्षित रहती है।
  2. लोगों को बैंक में जमा राशि पर ब्याज भी मिलती है।
  3. भुगतान नकद के बदले चेक के द्वारा भी किया जा सकता है। इसलिए बैंकों के द्वारा अपने खाताधारकों को चेक बुक जारी की जाती है।
  4. लोग अपनी इच्छानुसार बैंकों से की भी मुद्रा निकाल सकते हैं।

प्रश्न 5.
चेक क्या है? हम चेक क्यों और कैसे जारी करते हैं?
उत्तर:
चेक चेक एक ऐसा कागज है, जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चेक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक विशेष धनराशि का भुगतान करने का आदेश देता है। हम माँग जमाओं के विरुद्ध चेक जारी करते हैं, जिससे बिना नकद लेन-देन का प्रयोग किए सीधे भुगतान करना संभव होता है। चेक से भुगतान करने के लिए भुगतानकर्ता, जिसका किसी बैंक में खाता है, एक निश्चित राशि के लिए चेक काटता है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 6.
बैंकों की आवश्यकता हमें क्यों है? बैंक लोगों को किस प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं?
उत्तर:
बैंकों की आवश्यकता व सेवाएँ निम्नलिखित हैं

  1. लोगों का धन बैंक के पास सुरक्षित रहता है।
  2. बैंक में जमा धन से लोगों को ब्याज प्राप्त होता है।
  3. बैंक बचत के लिए आवश्यक हैं।
  4. बैंक जमा राशि से लोगों की आवश्? कताओं को पूरा करने के लिए ऋण सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।
  5. माँग जमा के बदले चेक लिखने की सुविधा से बिना नकद का प्रयोग किए सीधा भुगतान किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की माँग क्यों होती है?
उत्तर:
ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की मुख्य मांग फसल उगाने के लिए होती है। फसल उगाने में बीज, खाद, कीटनाशक दवाओं, पानी, विद्युत, कृषि उपकरणों की मरम्मत आदि पर बहुत खर्च होता है। इन आगतों को खरीदने एवं फसल की बिक्री होने के बीच कम से कम 3-4 महीने का अन्तरल होता है। अधिकांशतया किसान ऋतु के प्रारम्भ में फसल उगाने के लिए उधार लेते हैं और फसल तैयार होने के पश्चात् का देते हैं। उधार का भुगतान मुख्य रूप से फसल से प्राप्त आय पर निर्भर करता है।

प्रश्न 8.
भारत में बैंकों एवं सहकारी सतियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक ऋण सुविधाएँ क्यों प्रदान करनी चाहिए?
अथवा
बैंकों और सहकारी समितियों को अपनी ऋण देने की गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ाने के किन्हीं तीन कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में बैंकों एवं सहकारी समितियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक ऋण सुविधाएँ निम्न कारणों से प्रदान करनी चाहिए

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकार, व्यापारी आदि ऊँची ब्याज दरों पर ऋण प्रदान करते हैं।
  2. साहूकार व व्यापारी आदि अपना पैसा वापस लेने के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं।
  3. सस्ता कर्ज उत्पादन की लागत में कमी करता है तथा आय बढ़ाता है।
  4. ग्रामीण विकास के लिए सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज होना चाहिए।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 9.
कर्ज जाल क्या है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
एक स्थिति में ऋण आय बढ़ाने में सहायता करता है, जिससे व्यक्ति की स्थिति पहले से बेहतर हो जाती है। दूसरी स्थिति में फसल बर्बाद होने के कारण ऋण व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लेता है। कर्ज उतारने के लिए उसे जमीन का टुकड़ा बेचना पड़ता है जिससे उसकी स्थिति पहले की तुलना में बुरी हो जाती है। इस तरह ऋण कर्जदार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है जहाँ से बाहर निकलना बहुत कष्टदायक होता है। इसे ही कर्ज जाल कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA2)

प्रश्न 1.
खरीददारी मुद्रा के माध्यम से क्यों होती है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
मुद्रा में लेन-देन क्यों किए जाते हैं? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मुद्रा मूल्य के मापन का कार्य करती है। मुद्रा के रूप में विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य का निर्धारण किया । जा सकता है। मुद्रा विनिमय का एक माध्यम है। यह आसानी से स्वीकार्य है। जिस व्यक्ति के पास मुद्रा होती है वह इसका विनिमय किसी भी वस्तु या सेवा खरीदने के लिए आसानी से कर सकता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति भुगतान मुद्रा के रूप में लेना पसन्द करता है फिर उस मुद्रा का इस्तेमाल अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को खरीदने के लिए करता है।

उदाहरण:
एक किसान बाजार में गेहूँ बेचना चाहता है और घरेलू आवश्यकता की वस्तुएँ खरीदना चाहता है। इसलिए किसान सबसे पहले गेहूँ के बदले मुद्रा प्राप्त करेगा। इसके पश्चात् मुद्रा का प्रयोग घरेलू आवश्यकता की वस्तुएँ खरीदने के लिए करेगा।

प्रश्न 2.
“मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता को समाप्त कर देती है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
वस्तु विनिमय प्रणाली को समझाइए।
उत्तर:
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग वस्तु विनिमय प्रणाली में देखने को मिलता है। वस्तु विनिमय प्रणाली में मुद्रा का उपयोग किए बिना वस्तुओं का विनिमय होता है। वस्तु विनिमय प्रणाली में मनुष्य ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ता है जो उसकी अतिरिक्त वस्तु लेकर उसे इच्छित वस्तु दे। उदाहरण के लिए, किसान गेहूँ बेचकर जूते खरीदना चाहता है तो उसे ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना पड़ेगा जो उससे गेहूँ लेकर जूते दे दे।

यह एक कठिन कार्य है। इसकी तुलना में ऐसी अर्थव्यवस्था में जहाँ मुद्रा का प्रयोग होता है मुद्रा महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की जरूरत को समाप्त कर देती है। अब किसान के लिए जरूरी नहीं रह जाता कि वह ऐसे जूता निर्माता को ढूँढ़े जो न केवल उसका गेहूँ खरीदे बल्कि साथ-साथ उसको जूते में बेचे।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 3.
“बैंक जिन लोगों के पास अतिरिक्त धनराशि है और जिन्हें धनराशि की जरूरत है, के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बैंक जिन लोगों के पास अतिरिक्त धनराशि है और जिन्हें धनराशि की जरूरत है, के बीच मध्यस्थता का कार्य निम्न प्रकार करते हैं

  1. बैंक उन लोगों से जमा राशि स्वीकार करते हैं जिनके पास अतिरिक्त धन होता है।
  2. बैंक जमाओं पर ब्याज का भी भुगतान करते हैं।
  3. बैंक अपने पास जमा धनराशि का एक छोटा भाग नकद के रूप में रखते हैं। इसे किसी एक दिन में जमाकर्ताओं द्वारा धन निकालने की सम्भावना को देखते हुए रखा जाता है।
  4. चूँकि किसी एक दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद रुपया निकालने के लिए आते हैं, इसलिए बैंक अपने पास जमाओं का अधिकांश भाग उन्हें ऋण देने के लिए प्रयोग में लेते हैं, जिन्हें धन की आवश्यकता होती है। इस तरह बैंक जिन लोगों के पास अतिरिक्त धनराशि है और जिन्हें धनराशि की जरूरत है के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं।

प्रश्न 4.
“बैंकों द्वारा मुद्रा निक्षेप स्वीकार करना उनका सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:

  1. लोग अपनी अतिरिक्त मुद्रा को बैंकों में निक्षेप के रूप में सुरक्षित रखते हैं।
  2. लोग अतिरिक्त नकद को बैंकों में अपने नाम से खाता खोलकर जमा कर देते हैं। बैंक जमा स्वीकार करते हैं और इस पर ब्याज़ भी देते हैं।
  3. लोगों को आवश्यकतानुसार इसमें से धन निकालने की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है। चूँकि बैंक खातों में जमा धन को माँग के जरिए निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा को ‘माँग जमा’ कहा जाता है।

प्रश्न 5.
जब कोई ऋण लेने वाला किसी महाजन अथवा साहूकार से कर्ज लेता है, तो उसके समक्ष आने वाली समस्याओं में से किन्हीं तीन का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. हर ऋण समझौते के अंतर्गत ब्याज दर निश्चित कर दी जाती है, जिसे कर्जदार महाजन को मूल रकम के साथ वापस करता है। इसके अलावा, उधारदाता कोई समर्थक ऋणाधार (गिरवी रखने के लिए) की माँग कर सकता है।
  2. समर्थक ऋणाधार ऐसी सम्पत्ति है, जिसका मालिक कर्जदार है (जैसे कि भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु बैंकों में पूँजी) और इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारण्टी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता।
  3. यदि कर्जदार ऋण का भुगतान नहीं कर पाता है तो ऋणदाता को ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।

प्रश्न 6.
सहकारी समितियाँ क्या होती हैं? संक्षेप में बताइए।
अथवा
सहकारी समितियों की कार्य-प्रणाली को बताइए।
अथवा
ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों की गतिविधियाँ बढ़ाने हेतु कोई तीन सुझाव दीजिए
उत्तर:
वे लोग जो कुछ सामान्य उद्देश्यों पर एक साथ मिल-जुलकर कार्य करना चाहते हैं, एक समिति का गठन कर लेते हैं जिसे सहकारी समिति कहते हैं। यह लोगों का एक ऐच्छिक संगठन होता है जिसके अन्तर्गत वे अपने आर्थिक हितों की पूर्ति के लिए एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। सहकारी समितियाँ पारस्परिक सहायता के सिद्धान्त पर कार्य करती हैं। लोग एक समूह के रूप में एकत्रित होकर अपने व्यक्तिगत संसाधनों को एकत्रित करते हैं तथा उनका सर्वोत्तम ढंग से उपयोग करते हैं और इससे प्राप्त सामूहिक लाभ को आपस में मिलजुलकर बाँट लेते हैं। सुझाव:

  1. बैंकों द्वारा सहकारी समितियों को सस्ती दर पर ऋण प्रदान करना।
  2. सहकारी समितियों द्वारा अपने सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना।
  3. कृषकों पर किसी भी प्रकार की कोई अनुचित शर्त न लगाना ताकि सहकारी समिति के अधिकाधिक सदस्य बन सकें।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके दृष्टिकोण से वस्तु विनिमय प्रणाली और मौद्रिक प्रणाली में कौन-सी प्रणाली श्रेष्ठ है और क्यों?
उत्तर:
मेरे दृष्टिकोण से दोनों प्रणालियों में से मौद्रिक प्रणाली श्रेष्ठ है क्योंकि जिस व्यक्ति के पास मुद्रा है, वह इसका विनिमय कोई भी वस्तु या सेवा खरीदने के लिए कर सकता है। हर कोई मुद्रा के रूप में भुगतान लेना पसंद करता है, फिर उस मुद्रा का उपयोग अपनी जरूरत की चीजें खरीदने के लिए कर सकता है। एक जूता निर्माता का उदाहरण लेते हैं। वह बाज़ार में जूता बेचकर गेहूँ खरीदना चाहता है।

जूता बनाने वाला पहले जूतों के बदले मुद्रा प्राप्त करेगां फिर इस मुद्रा का इस्तेमाल गेहूँ खरीदने के लिए करेगा। यदि जूता निर्माता बिना मुद्रा का इस्तेमाल किए जूते का सीधे गेहूँ से विनिमय करता है, तो उसे गेहूँ शास्त्र पैदा करने वाले ऐसे किसान को खोजना पड़ेगा, जो न केवल गेहूँ बेचना चाहता हो बल्कि साथ में जूते भी खरीदना चाहता हो अर्थात् दोनों पक्ष एक-दूसरे से चीजें खरीदने व बेचने पर सहमत हों। विनिमय की दूसरी प्रणाली में समय एवं श्रम अधिक लगेगा जबकि मौद्रिक प्रणाली में समय एवं श्रम की बचत है। चूँकि मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है, अतः वस्तु विनिमय की तुलना में मुद्रा विनिमय प्रणाली श्रेष्ठ है।

प्रश्न 2.
भारत में ‘करेंसी नोट’ कौन जारी करता है? बैंकों के तीन कार्य बताइए।
अथवा
भारत की अर्थव्यवस्था में बैंक किस प्रकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
“बैंक, देश के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” कथन की उदाहरणों सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
भारत में भारतीय रिजर्व बैंक केन्द्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है। भारतीय कानून के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की अनुमति नहीं है। मुद्रा के आधुनिक रूपों में करेंसी में कागज के नोट एवं सिक्कों को सम्मिलित किया गया है। बैंक के कार्य अथवा भारत की अर्थव्यवस्था में बैंकों की भूमिका
1. जमा राशि को स्वीकार करना:
बैंक जनता से जमा स्वीकार करते हैं। लोग अपनी नकदी को सुविधा के लिए बैंकों के बचत जमा खाता, सावधि जमा खाता, चालू खाता आदि में जमा कराते हैं। बैंक इन जमाओं पर ब्याज भी देता है। इस तरह लोगों का धन बैंक के पास सुरक्षित रहता है।

2. ऋण प्रदान करना:
बैंक अपने पास जमा रकम का एक छोटा हिस्सा नकदं के रूप में रखते हैं। उदाहरण के लिए आजकल भारत में बैंक जमा धन का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा नकद में अपने पास रखते हैं। इसे किसी एक दिन में जमाकर्ताओं द्वारा धन निकालने की सम्भावना को देखते हुए रखा जाता है। चूँकि किसी एक दिन में केवल कुछ जमाकर्ता ही नगद राशि निकालने के लिए आते हैं, इसलिए बैंक अपने पास जमाओं का अधिकांश हिस्सा ऋण देने के लिए प्रयोग करते हैं।

3. पूँजी निर्माण:
बैंक लोगों की बचतों को संग्रह करते हैं तथा उसे अन्य उत्पादक क्रियाओं में निवेश करते हैं। इस प्रकार बैंक देश में पूँजी निर्माण को प्रोत्साहित करते हैं तथा आर्थिक विकास की दर को तीव्र करते हैं।

4. लॉकर सुविधाएँ:
बैंक अपने ग्राहकों को लॉकर सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं, जिसमें लोग अपनी मूल्यवान वस्तुओं एवं महत्त्वपूर्ण कागजातों को सुरक्षित रख सकते हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 3.
उदाहरण सहित समझाइए कि किस प्रकार से बैंक ऋण उत्पादन में सकारात्मक भूमिका अदा करते हैं?
उत्तर:
हमारी दिन-प्रतिदिन की क्रियाओं में व्यापक लेन-देन किसी-न-किसी रूप में ऋण द्वारा ही होता है। ऋण किसानों को अपनी फसल उगाने में मदद करता है। यह उद्यमियों के लिए व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना, समय पर उत्पादन को पूरा करने एवं उत्पादन के कार्यशील खर्चों को पूरा करने में सहायक होता है। इससे उनकी आय में वृद्धि होती है। ऋण देश के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में बैंकों द्वारा ऋण के अन्य स्रोतों के मुकाबले सस्ती दर पर अपने ग्राहकों को ऋण प्रदान किया जाता है।

बैंक जमा रकम का एक छोटा हिस्सा अपने पास नकद रूप में रखकर शेष जमा राशि के एक बड़े भाग को ऋण देने के लिए प्रयोग करते हैं। विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण की बहुत अधिक माँग रहती है। बैंक जमा धनराशि का लोगों की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयोग करते हैं! लोग बैंकों से सस्ती दर पर ऋण प्राप्त कर उत्पादन कार्यों में लगाते हैं तथा अधिक लाभ प्राप्त करते हैं।

उदाहरण: सोहन का जूते बनाने का कारखाना है। उसके पास शहर के एक बड़े व्यापारी से 5000 जोड़ी जूतों की माँग आती है जिसे एक महीने के अन्दर पूरा करना है। उत्पादन के कार्य को समय पर पूर्ण करने के लिए सोहन को सिलाई व चिपकाने के काम के लिए अतिरिक्त मजदूर रखने की आवश्यकता है तथा उसे कच्चा माल भी खरीदना है। अतः सोहन को इस कार्य के लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है।

वह बैंक की औपचारिकताओं को पूर्ण करके उससे ऋण ले लेता है। समय पर शहर के व्यापारी को जूते बनाकर दे देता है। इस प्रकार सोहन उत्पादन के लिए कार्यशील पूँजी की जरूरत को ऋण के द्वारा पूरा करता है। ऋण उसे उत्पादन के कार्यशील खर्चों तथा उत्पादन को समय पर पूरा करने में सहायता प्रदान करता है। इस प्रकार सोहन बैंक ऋण द्वारा अपनी कमाई बढ़ा लेता है। इस प्रकार बैंक ऋण उत्पादन में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 4.
साख की दो विभिन्न स्थितियाँ बताइए एवं बैंकों से ऋण लेने की आवश्यक शर्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
साख की स्थितियाँ प्रथम स्थिति:
एक स्थिति में ऋण (साख) आय बढ़ाने में सहयोग करता है, जिससे व्यक्ति की स्थिति पहले से बेहतर हो जाती है।

द्वितीय स्थिति:
दूसरी स्थिति में फसल बर्बाद होने के कारण ऋण व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लेता है। जहाँ से बाहर निकलना काफी कष्टदायक होता है। आमदनी में वृद्धि की बजाय कर्जदार की स्थिति पहले से बदतर हो जाती है। ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थितियों के खतरों एवं हानि होने पर प्राप्त सहयोग की सम्भावना पर निर्भर करता है।

बैंकों से ऋण लेने की आवश्यक शर्ते: बैंकों से ऋण लेने की आवश्यक शर्ते निम्नलिखित हैं

  1. सर्वप्रथम ऋण लेने वाले व्यक्ति को यह प्रमाण-पत्र देना होगा कि यह देख लिया जाए कि उसे कितना ऋण दिया जाए, जिसे वह आसानी से उतार सके।
  2. यदि वह व्यक्ति कहीं नौकरी कर रहा हो तो उसे अपनी आय के विषय में ब्यौरा उपलब्ध कराना होगा।
  3. बैंक कर्जदार से समर्थक ऋणाधार की माँग कर सकता है, जिसमें भूमि, पशु, सम्पत्ति एवं बैंकों में जमा-पूँजी आदि सम्मिलित होती है।
  4. बैंक कर्जदार से किसी ऐसे व्यक्ति की गारंटी माँग सकता है जो उसके कर्ज न चुकाने पर रकम वापस कर सके।

प्रश्न 5.
शहरी गरीबों व अमीरों के ऋणों में औपचारिक साख के योगदान की तुलना कीजिए। औपचारिक क्षेत्र की ऋणों के सृजन में भागीदारी बढ़ाने हेतु कोई दो सुझाव दीजिए।
उत्तर:
गरीबों की तुलना में अमीर परिवारों को औपचारिक ऋणों का अधिक हिस्सा मिलता है क्योंकि अमीर परिवारों के पास ऋण लेने हेतु समर्थक ऋणाधार होता है तथा उन परिवारों की ऋण चुकाने की क्षमता भी अधिक होती है। जिस प्रकार से साहूकार, महाजन आदि गरीबों का शोषण करते हैं, जबकि औपचारिक स्रोतों द्वारा कर्ज लिए जाने पर उनका शोषण नहीं किया जाता है।

गरीबों को उचित व कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान किया जाता है। इसी प्रकार से अमीरों को ऋण उचित ब्याज दरों पर प्रदान कर औपचारिक संस्थाएँ, बहुत से उद्योगपतियों की उनकी विनियोग संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करती हैं। जिससे लोगों को रोजगार की प्राप्ति होती है तथा राष्ट्रीय उत्पादन व आय में भी वृद्धि होती है। औपचारिक क्षेत्र की ऋणों के सृजन में भागीदारी बढ़ाने हेतु दो उपाय इस प्रकार से हैं

  1. औपचास्कि स्रोतों को गैर-उत्पादक उद्देश्यों के लिए भी ऋण प्रदान करना चाहिए ।
  2. औपचारिक स्रोतों को ऋण के दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया सरल कर देनी चाहिए, जिससे कि सभी जरूरतमंद लोग जरूरत के समय जल्द से जल्द ऋण प्राप्त कर सकें।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 6.
अनौपचारिक क्षेत्रक ऋणों की कोई दो कमियाँ बताइए। इस सन्दर्भ में औपचारिक क्षेत्रक ऋण किस प्रकार बेहतर हैं?
उत्तर:
ऋण के स्रोत भारत में ऋण प्रदान करने वाले स्रोतों को दो भागों में बाँटा जा सकता है
1. औपचारिक ऋण स्रोत:
भारत में औपचारिक ऋण स्रोतों में व्यापारिक बैंक, सहकारी समितियाँ, ग्रामीण बैंक आदि को सम्मिलित किया जाता है। इन स्रोतों द्वारा कम ब्याज दर पर लम्बे समय के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाता है।

2. अनौपचारिक ऋण स्रोत:
भारत में बड़ी संख्या में ऋण अनौपचारिक स्रोतों द्वारा उपलब्ध करवाये जाते हैं। अनौपचारिक स्रोतों में साहूकार, महाजन, व्यापारियों, रिश्तेदारों एवं मित्रों को सम्मिलित किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश छोटे कृषक एवं मजदूर आज भी भारत के अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं।

  • अनौपचारिक क्षेत्रक ऋणों की कमियाँ: अनौपचारिक क्षेत्रक ऋणों की प्रमुख कमियाँ निम्नलिखित हैं
    1. भारत में अनौपचारिक ऋण स्रोतों द्वारा ऊँची दर पर ऋण दिया जाता है।
    2. अनौपचारिक स्रोतों द्वारा अत्यन्त कठोर शर्तों पर ऋण दिया जाता है।
    3. ऋण न चुकाने की स्थिति में ऋणदाता, कृषकों का अनाज सस्ते में खरीद लेते हैं तथा कई बार उन्हें अपने खेतों अथवा घरों पर बिना परिश्रम के कार्य करवाते हैं।
  • औपचारिक क्षेत्रक ऋण निम्न प्रकार से बेहतर हैं:
    1. औपचारिक क्षेत्रक ऋण में ऋण के वे स्रोत सम्मिलित होते हैं जो सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं। इनमें बैंक व सहकारी समितियाँ प्रमुख हैं।
    2. भारतीय रिजर्व बैंक ऋण के औपचारिक स्रोतों के कामकाज पर निगरानी रखता है।
    3. ऋण के औपचारिक स्रोतों द्वारा ऋण प्रदान किये जाने का उद्देश्य लाभ कमाने के साथ-साथ सामाजिक भी होता है।
    4. इन स्रोतों से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाए जाते हैं।
    5. ऋण के औपचारिक स्रोत ऋण लेने वाले के समक्ष कोई अनुचित शर्त नहीं लगाते हैं।
    6. औपचारिक स्रोतों द्वारा कर्जदारों का शोषण नहीं किया जाता है।

प्रश्न 7.
स्वयं सहायता समूह क्या हैं? स्वयं सहायता समूहों की कार्यविधि को विस्तार से बताइए।
अथवा:
स्वयं सहायता समूहों के बारे में विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा
स्वयं सहायता समूह क्या है? ये किस प्रकार कार्य करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. हाल के वर्षों में लोगों ने गरीबों को उधार देने के कुछ नए तरीके अपनाने की कोशिश की है। इनमें से एक विचार ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों विशेषकर महिलाओं को छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूहों में संगठित करने एवं उनकी बचत पूँजी को एकत्रित करने पर आधारित है।’
  2. एक विशेष सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ौसी 15-20 सदस्य होते हैं जो नियमित रूप से मिलते हैं और बचत करते हैं।
  3. स्वयं सहायता समूहों का प्रमुख उद्देश्य गरीब लोगों की बचत पूँजी को एकत्रित करना होता है।
  4. प्रतिव्यक्ति बचत 25 रुपये से लेकर 100 रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है। यह परिवारों की बचत करने की क्षमता पर निर्भर करता है।
  5. स्वयं सहायता समूह अपने सदस्यों को कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान करते हैं। यह साहूकार द्वारा लिये गये ब्याज से कम होता है।
  6. एक या दो वर्षों के पश्चात् अगर समूह नियमित रूप से बचत करता है तो समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है।
  7. बैंकों द्वारा ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सदस्यों के लिए स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करना है।
  8. सदस्यों को छोटे-छोटे ऋण अपनी गिरवी भूमि को छुड़ाने हेतु, कार्यशील पूँजी की जरूरतों, जैसे-बीज, खाद, . बाँस व कपड़ा खरीदने के लिए, घर बनाने तथा सिलाई मशीन, हथकरघा व पंशु आदि खरीदने के लिए दिये जाते हैं।
  9. स्वयं सहायता समूह के अन्तर्गत बचत व ऋण गतिविधियों से सम्बन्धित निर्णय समूह के सदस्य स्वयं लेते हैं। समूह ही दिये जाने वाले ऋण, उसका लक्ष्य, उसकी रकम, ब्याज-दर, वापस लौटाने की अवधि आदि के बारे में निर्णय करता है।
  10. स्वयं सहायता समूहों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश समूह महिलाओं द्वारा संगठित किए गए हैं। ये समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने में मदद करते हैं। समूह की नियमित बैठकों के माध्यम से लोगों को एक मंच मिलता है, जहाँ वह विभिन्न प्रकार के सामाजिक विषयों; जैसे-स्वास्थ्य, पोषण व घरेलू हिंसा आदि पर आपस में चर्चा कर पाते हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद 

JAC Board Class 10th Social Science Notes History Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद

→ भारत में राष्ट्रवाद का उदय

  • भारत में भी आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की घटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन का परिणाम रही है।
  • 1914 ई. में प्रारम्भ हुए प्रथम विश्वयुद्ध ने भारत में एक नयी राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति उत्पन्न कर दी जिसके कारण रक्षा खर्च में बहुत अधिक वृद्धि हुई। सीमा शुल्क में वृद्धि के साथ आयकर की शुरुआत की गई।
  • 1918-19 ई तथा 1920-21ई. में देश के अनेक क्षेत्रों में फसल खराब होने के कारण खाद्य पदार्थों की भारी कमी हो गई। इसी दौरान फ्लू की महामारी फैल गई। जनगणना 1921 के अनुसार दुर्भिक्ष तथा महामारी की वजह से 120-130 लाख मारे गए।

→  सत्याग्रह का विचार

  • महात्मा गांधी जनवरी, 1915 में दक्षिणी अफ्रीका से भारत वापस आये थे। वहाँ उन्होंने सत्याग्रह का मार्ग अपनाकर वहाँ की नस्लभेदी सरकार से लोहा लिया।
  • गाँधीजी का विश्वास था कि अहिंसा समस्त भारतीयों को एकता के सूत्र में बाँध सकती है।
  • भारत आने के पश्चात् गाँधीजी ने अनेक स्थानों पर सत्याग्रह आन्दोलन चलाया, जिनमें चंपारन 1916 ई., खेड़ा 1917 ई. एवं अहमदाबाद 1918 ई. आदि प्रमुख हैं।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद

→  रॉलेट एक्ट

  • 1919 ई. में गाँधीजी ने रॉलेट एक्ट के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आन्दोलन चलाया।
  • रॉलेट एक्ट के तहत सरकार राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने तथा राजनीतिक कैदियों को बिना मुकदमा चलाए दो साल तक जेल में बन्द रख सकती थी।
  • 13 अप्रैल, 1919 ई. को अमृतसर में जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ जिसमें सैंकड़ों लोग मारे गए।
  • सितंबर 1920 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में महात्मा गाँधी ने खिलाफत आन्दोलन के समर्थन तथा स्वराज के लिए एक असहयोग आन्दोलन शुरू करने पर अन्य नेताओं को राजी किया।

→  असहयोग आंदोलन

  • महात्मा गाँधी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘हिन्द स्वराज’ (1909 ई.) में कहा था कि भारत में ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से स्थापित हुआ था तथा उनके सहयोग से ही चल पा रहा है। यदि भारत के लोग अपना सहयोग वापस ले लें तो शीघ्र ही ब्रिटिश शासन ढह जाएगा और स्वराज्य की स्थापना हो जाएगी।
  • दिसंबर 1920 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में एक समझौते के साथ असहयोग कार्यक्रम को मंजूरी दी गई।
  • असहयोग-खिलाफत आन्दोलन जनवरी, 1921 में प्रारम्भ हुआ। असहयोग-खिलाफत आन्दोलन की शुरुआत शहरी मध्यम वर्ग की भागीदारी के साथ हुई। विद्यार्थियों ने स्कूल-कॉलेज छोड़ दिये तथा लोगों ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया।
  • असहयोग आन्दोलन शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल गया। देश के विभिन्न भागों में संचालित किसानों व आदिवासियों के संघर्ष भी इस आन्दोलन में सम्मिलित हो गये।
  • अंग्रेजों के बागानों में कार्य करने वाले मजदूरों को बिना इजाजत के बागान से बाहर जाने की छूट नहीं होती थी। जब उन्होंने असहयोग आन्दोलन के बारे में सुना तो हजारों मजदूरों ने अपने अधिकारियों की अवहेलना कर बागान छोड़ दिये और अपने घर को चल दिए।
  • गोरखपुर के चौरी-चौरा नामक स्थान पर घटित घटना के विरोध में फरवरी, 1922 में महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन वापस लेने का फैसला किया।
  • वल्लभ भाई पटेल ने 1928 ई. में गुजरात के बारदोली में किसान आन्दोलन का सफल नेतृत्व किया। यह आन्दोलन भू-राजस्व में वृद्धि के खिलाफ था। इस आन्दोलन को ‘बारदोली सत्याग्रह’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • सन् 1928 में जब साइमन कमीशन भारत पहुँचा तो उसका स्वागत ‘साइमन कमीशन वापस जाओ’ के नारों से किया गया।
  • दिसम्बर, 1929 में पं. जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज’ की माँग को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया तथा 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाना तय किया गया।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद

→  नमक यात्रा और सविनय अवज्ञा आंदोलन:

  • देश को एकजुट करने के लिए महात्मा गाँधी ने नमक को एक हथियार के रूप में प्रयोग किया। 6 अप्रैल, 1930 को महात्मा गाँधी ने दांडी पहुँचकर वहाँ नमक बनाकर ब्रिटिश कानून को तोड़ा तथा सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया।
  • 5 मार्च, 1931 को महात्मा गाँधी ने लॉर्ड इरविन के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए तथा लन्दन में होने वाले दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति प्रदान की। •गाँवों में सम्पन्न कृषक समुदाय जैसे गुजरात के पटीदार व उत्तर प्रदेश के जाट सविनय अवज्ञा आन्दोलन में सक्रिय थे।
  • औद्योगिक श्रमिक वर्ग ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन में नागपुर के अतिरिक्त कहीं भी बहुत बड़ी संख्या में भाग नहीं लिया।
  • इस आन्दोलन में महिलाओं ने भी बड़े पैमाने पर भाग लिया।
  • महात्मा गाँधीजी ने घोषणा की कि छुआछूत को समाप्त किये बिना हम स्वराज की स्थापना नहीं कर सकते। उन्होंने अछूतों को हरिजन यानि ईश्वर की सन्तान बताया।
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने सन् 1930 में दलितों को दमित वर्ग एसोसिएशन में संगठित किया।
  • अंबेडकर ने गाँधीजी की बात मानकर सितंबर, 1932 में पूना पैक्ट पर दस्तखत किए।
  • भारत में सामूहिक अपनेपन की भावना आंशिक रूप से संयुक्त संघर्षों के चलते उत्पन्न हुई थी।
  • राष्ट्रवाद को साकार करने में इतिहास व साहित्य, लोक कथाएँ व गीत, चित्र व प्रतीक, सभी ने अपना योगदान दिया था।
  • 1870 के दशक में बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने मातृभूमि की स्तुति में ‘वन्देमातरम्’ गीत लिखा। यह गीत उनके उपन्यास ‘आनन्दमठ’ में शामिल है।
  • स्वदेशी आन्दोलन की प्रेरणा से अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत माता की छवि को चित्रित किया।
  • जैसे-जैसे राष्ट्रीय आन्दोलन आगे-बढ़ा। राष्ट्रवादी नेताओं ने लोगों को एकजुट करने तथा उनमें राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए विभिन्न प्रकार के चिह्नों व प्रतीकों का प्रयोग किया।
  • अंग्रेज सरकार के विरुद्ध तीव्र गति से बढ़ता गुस्सा भारतीय समूहों एवं वर्गों के लिए स्वतन्त्रता का साझा संघर्ष बनता जा रहा था। औपनिवेशिक शासन से मुक्ति की चाह में लोगों को सामुहिक होने का आधार प्रदान किया था।

→  महत्त्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाएँ

तिथिघटनाएँ
1. 1913 ई.6 नवम्बर को महात्मा गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत मजदूरों के अधिकारों को हनन करने वाले नस्लभेदी कानून के विरुद्ध सत्याग्रह किया।
2. 1915 ई.जनवरी माह में महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आये।
3. 1916 ई.महात्मा गाँधी ने बिहार के चम्पारन क्षेत्र का दौरा किया।
4. 1918-19 ई.बाबा रामचन्द्र द्वारा उत्तर-प्रदेश के कृषकों को संगठित किया।
5. 1918 ई.महात्मा गाँधी सूती वस्त्र कारखानों के श्रमिकों के मध्य सत्याग्रह आन्दोलन चलाने अहमदाबाद पहुँचे।
6. 1919 ई.रॉलेट एक्ट के विरुद्ध गाँधीजी ने राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह चलाने का निश्चय किया। 13 अप्रैल को अमृतसर का जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ।
7. 1920 ई.सितम्बर माह में महात्मा गाँधी द्वारा कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में खिलाफत आन्दोलन के समर्थन एवं स्वराज के लिए एक असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु अन्य नेताओं को सहमत किया।
8. 1921 ई.असहयोग आन्दोलन के लिए समर्थन जुटाने हेतु गाँधीजी व शौकत अली ने देशभर में यात्राएँ कीं। दिसम्बर माह में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में असहयोग कार्यक्रम पर स्वीकृति हेतु समझौता। भारतीय औद्योगिक एवं व्यावसायिक कांग्रेस का गठन।
9. 1922 ई.जनवरी माह में असहयोग एवं खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ।
10. 1924 ई.फरवरी माह चौरी-चौरा कांड, महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन वापस लिया।
11. 1927मई माह में अल्लूरी सीताराम राजू की गिरफ्तारी। दो वर्ष से चला आ रहा हथियारबन्द आदिवासी संघर्ष समाप्त।
12. 1928भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग परिसंघ का गठन।
13. 1929साइमन कमीशन भारत पहुँचा। सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन।
14. 1930 ई.अक्टूबर माह में वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा भारत के लिए डोमीनियन स्टेट्स की घोषणा। दिसम्बर माह में जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की माँग औपचारिक रूप से स्वीकार, 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाये जाने का निर्णय।
15. 1931जनवरी माह में महात्मा गाँधी द्वारा 11 सूत्री माँगों के साथ वायसराय इरविन को पत्र लिखा गया। मार्च में गाँधीजी द्वारा दांडी में नमक कानून का उल्लंघन करके सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू करना, डॉ. अम्बेडकर द्वारा दलितों को दमित वर्ग एसोसिएशन में संगठित करना।
16. 1932मार्च माहृ में गाँधीजी द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन का वापस लिया जाना। 5 मार्च को गाँधी-इरविन समझौता हुआ। दिसम्बर माह द्वितीय गोलमेज सम्मेलन। गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने महात्मा गाँधीजी लन्दन गये। सविनय अवज्ञा आन्दोलन पुन: प्रारम्भ, सितम्बर माह में पूना समझौता हुआ।
17. 194214 जुलाई को अपनी कार्यकारिणी में कांग्रेस कार्य समिति में ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित किया। 8 अगस्त को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। महात्मा गाँधी ने प्रसिद्ध ‘करो या मरो’ का नारा दिया।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 2 भारत में राष्ट्रवाद

→ प्रमुख पारिभाषिक शब्दावली

  1. जबरन भर्ती: इस प्रक्रिया के अन्तर्गत अंग्रेज भारतीय लोगों को अपनी सेना में जबरदस्ती भर्ती कर लेते थे।
  2. पिकेटिंग: विरोध अथवा प्रदर्शन का एक ऐसा स्वरूप जिसमें लोग किसी दुकान, कारखाना या दफ्तर के भीतर जाने का रास्ता रोक लेते है।
  3. बहिष्कार: किसी के साथ सम्पर्क रखने एवं जुड़ने से इंकार करना अथवा गतिविधियों में हिस्सेदारी, वस्तुओं की खरीद एवं प्रयोग से इन्कार करना। सामान्यतया यह विरोध प्रदर्शन का एक रूप होता है।
  4. सत्याग्रह: दमनकारी शक्तियों के विरुद्ध गाँधीजी द्वारा प्रयोग किया गया एक अहिंसात्मक ढंग।
  5. गिरमिटिया मजदूर: औपनिवेशिक शासन के दौरान अधिक संख्या में लोगों को काम करने के लिए गयाना, फिजी, वेस्टइंडीज. आदि स्थानों पर ले जाया जाता था जिन्हें बाद में गिरमिटिया कहा जाने लगा। इन श्रमिकों को एक अनुबन्ध के तहत ले जाया जाता था, बाद में इसी समझौते के अन्तर्गत ये श्रमिक गिरमिट कहने लगे, जिससे आगे चलकर इन श्रमिकों को गिरमिटिया मजदूर कहा जाने लगा।
  6. खिलाफत आन्दोलन: यह मोहम्मद अली एवं शौकत अली बन्धुओं द्वारा संचालित एक विरोध आन्दोलन था जो तुर्की के साथ युद्ध के पश्चात् किए गए अन्याय के विरुद्ध चलाया गया था।
  7. असहयोग आन्दोलन: जनवरी, 1921 ई. में महात्मा गाँधी जी द्वारा संचालित आन्दोलन। इस आन्दोलन का उद्देश्य पंजाब एवं तुर्की में हुए अन्याय का विरोध करना एवं स्वराज की प्राप्ति था।
  8. इंग्लैंड इमिग्रेशन एक्ट: अंग्रेज सरकार द्वारा लागू एक कानून जिसके तहत बागानों में कार्य करने वाले श्रमिकों को बिना अनुमति बागान से बाहर जाने की छूट नहीं होती थी और यह इजाजत उन्हें कभी-कभी ही मिलती थी।
  9. पूना समझौता: सितम्बर, 1932 ई. में गाँधीजी एवं डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के मध्य हुआ एक समझौता जिसके अन्तर्गत दलित वर्गों को प्रान्तीय एवं केन्द्रीय विधायी परिषदों में सीटों का आरक्षण दिया गया।
  10. दांडी यात्रा: महात्मा गाँधी जी अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से समुद्र तट दांडी तक पैदल यात्रा की थी तथा वहाँ नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा था।

JAC Class 10 Social Science Notes

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

JAC Board Class 10th Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→ फ्रांसीसी क्रांति

  • फ्रांसीसी कलाकार फ्रेड्रिक सॉरयू ने सन् 1848 में चार चित्रों की एक श्रृंखला (विश्वव्यापी प्रजातांत्रिक और सामाजिक
    गणराज्यों का स्वप्न-राष्ट्रों के बीच संधि) बनाई। इनके कल्पनादर्श (युटोपिया) में विश्व के लोग अलग राष्ट्रों के समूहों में विभक्त हैं जिन्हें उनके कपड़ों एवं राष्ट्रीय पोशाकों से पहचाना जा सकता है।
  • 19 वीं सदी के दौरान राष्ट्रवाद एक ऐसी शक्ति के रूप में सामने आया जिसने यूरोप के राजनीतिक तथा मानसिक जगत में बड़े बदलाव किए जिनके परिणामस्वरूप अंततः यूरोप के बहु-राष्ट्रीय वंशीय साम्राज्यों की जगह ‘राष्ट्र-राज्य’ का उदय हुआ।

→ यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

  • यूरोप में राष्ट्रवाद की प्रथम स्पष्ट अभिव्यक्ति सन् 1789 में फ्रांसीसी क्रान्ति के साथ हुई। इससे उत्पन्न हुए राजनीतिक
    तथा संवैधानिक परिवर्तनों से प्रभुसत्ता का हस्तांतरण राजतंत्र से निकलकर फ्रांसीसी नागरिकों के समूह में हुआ।
  • फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने प्रारम्भ से ही ऐसे अनेक कदम उठाए जिनसे फ्रांसीसी लोगों में एक सामूहिक पहचान की
    भावना उत्पन्न हो सकती थी।
  • इस्टेट जेनरल का नाम बदलकर नेशनल एसेबंली कर दिया गया तथा इसका चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा
    करवाया जाने लगा।
  • फ्रांसीसी क्रान्ति, रियों का प्रमुख लक्ष्य यूरोप के लोगों को निरंकुश शासकों से मुक्त कराना था। नेपोलियन ने प्र में राजतंत्र को वापस लाकर प्रजातंत्र को समाप्त किया लेकिन उसने प्रशासनिक क्षेत्र में अनेक क्रान्तिकारी सिद्धान्तों को सम्मिलित किया।
  • सन् 1804 में नेपोलियन ने एक नागरिक संहिता का निर्माण किया, जिसे नेपोलियन संहिता के नाम से भी जाना जाता है। इसमें जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया गया।
  • नेपोलियन द्वारा निर्मित नागरिक संहिता में कानून के समक्ष समानता एवं सम्पत्ति के अधिकार को सुरक्षित रखने की बात कही गयी थी। अठारहवीं शताब्दी के मध्य में पूर्वी व मध्य यूरोप निरंकुश राजतन्त्रों के अधीन था। यहाँ रहने वाले लोग विभिन्न जातीय समूहों के सदस्य थे। केवल सम्राट के प्रति सबकी निष्ठा ही इन समूहों को आपस में बाँधने वाला तत्व था। यूरोप महाद्वीप का सबसे शक्तिशाली वर्ग-कुलीन वर्ग था जो सामाजिक और राजनीतिक रूप से भूमि का मालिक था।
  • जनसंख्या की दृष्टि से कुलीन वर्ग एक छोटा समूह था जनसंख्या के अधिकांश लोग कृषक थे।
  • मध्य एवं पश्चिमी यूरोप में औद्योगिक उत्पादन एवं व्यापार में वृद्धि होने से विभिन्न शहरों व वाणिज्यिक वर्गों का जन्म हुआ। इन वर्गों का अस्तित्व बाजार के लिए उत्पादन पर टिका था।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→ उदारवादी राष्ट्रवाद

  • कुलीन वर्ग को प्राप्त विशेषाधिकारों की समाप्ति के पश्चात् शिक्षित एवं उदारवादी वर्गों के बीच ही राष्ट्रीय एकता के विचारों का अधिक प्रचार-प्रसार हुआ।
  • उदारवाद (Liberalism) शब्द लैटिन भाषा के मूल शब्द Liber से निकला है जिसका अर्थ है- आजाद।
  • यूरोप के नवीन मध्यम वर्ग के लिए उदारवाद का अर्थ था-लोगों के लिए स्वतन्त्रता एवं कानून के समक्ष सभी की
    समानता।
  • फ्रांसीसी क्रान्ति के पश्चात् से ही उदारवाद निरंकुश शासक व पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति तथा संविधान एवं संसदीय प्रतिनिधि सरकार का समर्थक था।
  • आर्थिक क्षेत्र में उदारवाद, बाजारों की मुक्ति एवं पूँजी व वस्तुओं के आवागमन पर राज्य द्वारा लगाये गये नियन्त्रणों को समाप्त करने के पक्ष में था।

→  रूढ़िवाद का उदय व वियना संधि

  • सन् 1815 में नेपोलियन की पराजय के पश्चात् यूरोप की सरकारें रूढ़िवाद की भावना से प्रेरित थीं। रूढ़िवादियों का मत था कि राज्य व समाज द्वारा स्थापित की गयी पारम्परिक संस्थाओं जैसे- चर्च, सामाजिक भेदभाव, राजतन्त्र, सम्पत्ति एवं परिवार को बनाए रखना चाहिए।
  • नेपोलियन को पराजित करने वाली यूरोपीय शक्तियों-ब्रिटेन, रूस, प्रशा एवं ऑस्ट्रिया के प्रतिनिधियों ने यूरोप के लिए एक समझौता तैयार करने के लिए वियना में मुलाकात की। ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख ने इस सम्मेलन की मेजबानी की। इस सम्मेलन में सभी प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से सन् 1815 की वियना सन्धि तैयार की।
  • वियना सन्धि का उद्देश्य उन बहुत से बदलावों को समाप्त करना था जिन्हें नेपोलियाई युद्धों के दौरान किया गया था।
  • वियना सन्धि के तहत, फ्रांसीसी क्रान्ति के दौरान हटाए गये बूढे राजवंश को वापस शासन का अधिकार दिया गया।
  • फ्रांस को भविष्य में विस्तार करने से रोकने के लिए उसकी सीमाओं पर उत्तर में नीदरलैंड्स राज्य स्थापित किया गया तथा दक्षिण में पीडमॉण्ट में जेनोआ को सम्मिलित किया गया।
  • सन् 1815 में स्थापित रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएँ निरंकुश थीं।
  • रूढ़िवादी व्यवस्था के आलोचक उदारवादी राष्ट्रवादी प्रेस की स्वतन्त्रता चाहते थे।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→  क्रांतिकारी

  • सन् 1815 के पश्चात् यूरोप में अनेक उदारवादी-राष्ट्रवादी सरकारी दमन के भय से भूमिगत हो गये।
  • विभिन्न यूरोपीय देशों में क्रान्तिकारियों को प्रशिक्षण एवं विचारों का प्रसार करने के लिए अनेक गुप्त संगठनों का निर्माण हुआ।
  • इटली का ज्युसेपी मेत्सिनी भी एक ऐसा क्रान्तिकारी था जो, कार्बोनारी के गुप्त संगठन का सदस्य था।
  • मेत्सिनी ने 24 वर्ष की अवस्था में लिगुरिया में क्रांति करने के लिए बहिष्कृत होने के बाद ‘यंग इनी’ (मार्सेई में) तथा ‘यंग यूरोप’ (बर्न में) नामक दो अन्य भूमिगत संगठनों की स्थापना की।
  • मेत्सिनी राजतंत्र का घोर विरोध कर तथा प्रजातांत्रिक गणतंत्रों के अपने स्वप्न से रूढ़िवादियों ६ हराने में सफल रहा। उसे मैटरनिख ने ‘हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन’ करार दिया।

→ क्रांतियों का युग व रूमावी कल्पनी और राष्ट्रीय भावना

  • जुलाई 1830 में फ्रांस में प्रथम विद्रोह हुआ जिसमें उदारवादी क्रांतिकारियों ने बूढे राजा को सत्ता से बेदखल कर दिया तथा लुई फिलिप की अध्यक्षता में एक संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया।
  • सन् 1832 में हुई कुस्तुनतुनिया की सन्धि ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान की।
  • राष्ट्रवाद के विचार के निर्माण में संस्कृति का बहुत अधिक योगदान रहा।
  • रूमानी कलाकारों एवं कवियों ने तर्क-वितर्क व विज्ञान के स्थान पर भावनाओं, अंतर्दृष्टि एवं रहस्यवादी भावनाओं पर – अधिक बल दिया।
  • जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रीड के अनुसार राष्ट्र की वास्तविक आत्मा लोकगीतों, जनकाव्य एवं लोकनृत्यों से प्रकट होती थी।
  • यूरोप में राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में भाषा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→ भूख, कठिनाइयाँ और जन विद्रोह तथा उदारवादियों की क्रांति:

  • सन् 1830 के दशक में यूरोप में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं जिनमें तीव्र जनसंख्या वृद्धि, बेरोजगारी में वृद्धि, वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि एवं निर्धनता प्रमुख थीं। सन् 1848 में खाने-पीने की सामग्री की कमी एवं अत्यधिक बेरोजगारी के कारण लोगों ने पेरिस की सड़कों पर आकर आन्दोलन कर दिया।
  • सन् 1848 में अनेक यूरोपीय देशों में किसान व मजदूर वर्ग ने गरीबी, बेरोजगारी व भुखमरी के कारण विद्रोह कर दिया।
    उसी समय शिक्षित मध्यम वर्ग ने भी राजा के विरुद्ध क्रान्ति कर दी।
  • उदारवादी मध्यम वर्ग ने राष्ट्र-राज्य के निर्माण की माँग की जो संविधान, प्रेस की स्वतन्त्रता एवं संगठन निर्माण की
    स्वतन्त्रता जैसे संसदीय व्यवस्था के सिद्धान्तों पर आधारित थी।
  • 18 मई, 1848 को जर्मन क्षेत्रों में मतदान द्वारा सर्व-जर्मन नेशनल एसेम्बली का गठन किया गया, जिसमें 831 निर्वाचित प्रतिनिधि थे। इसे ‘फ्रैंकफर्ट संसद’ के नाम से जाना गया।
  • फ्रैंकफर्ट संसद में मध्यम वर्ग का प्रभाव अधिक था, जिसने मजदूर-कारीगर वर्ग की माँगों का विरोध किया। फलस्वरूप मध्यम वर्ग ने समर्थन खो दिया और संसद भंग हो गयी।
  • उदारवादी आंदोलन में महिलाओं को राजनैतिक अधिकार प्रदान करने का मुद्दा विवादास्पद था।
  • सन् 1848 में रूढ़िवादी ताकतों ने उदारवादी आन्दोलन को समाप्त कर दिया। लेकिन वे पुरानी व्यवस्था बहाल करने में नाकाम रहीं।

→ जर्मनी व इटली का एकीकरण

  • मध्य वर्ग के जर्मन राष्ट्रवादी लोगों के प्रयासों से जर्मनी व इटली एकीकृत होकर राष्ट्र-राज्य बने।
  • बिस्मार्क के नेतृत्व में प्रशा ने राष्ट्रीय एकीकरण के आन्दोलन का नेतृत्व किया। ऑस्ट्रिया, डेनमार्क व फ्रांस से सात वर्ष के दौरान तीन युद्धों में जीत के साथ प्रशा ने एकीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया।
  • जनवरी 1871 में वर्साय में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।
  • जर्मनी की तरह इटली का भी राजनीतिक विखण्डन का एक लम्बा इतिहास रहा है।
  • उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में इटली सात राज्यों में विभाजित था। इनमें से मात्र एक सार्डिनिया पीडमॉण्ट में एक इतालवी राजघराने का शासन था।
  • सन् 1830 के दशक में ज्युसेपे मेत्सिनी ने एकीकृत इटली गणराज्य के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत की तथा ‘यंग इटली’ नामक गुप्त संगठन का गठन किया।
  • सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के शासक विक्टर इमेनुएल द्वितीय के मंत्री प्रमुख कापूर ने इटली के प्रदेशों को एकीकृत करने वाले आन्दोलन का नेतृत्व किया।
  • सन् 1861 में इमेनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली राष्ट्र का राजा घोषित किया गया।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→  ब्रिटेन का उदय

  1. ब्रिटेन में राष्ट्र राज्य का निर्माण अचानक न होकर एक लम्बी प्रक्रिया द्वारा हुआ।
  2. अठारहवीं शताब्दी से पहले विश्व में कोई ब्रिटेन नाम का राष्ट्र नहीं था। सन् 1688 में आंग्ल संसद ने राजतंत्र से सत्ता छीनकर एक राष्ट्र राज्य का निर्माण किया जिसके केन्द्र में इंग्लैण्ड था।
  3. सन् 1707 में इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड के बीच एक्ट ऑफ यूनियन नामक समझौते के तहत ‘यूनाइटेड किगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन’ का गठन हुआ।
  4. सन् 1801 में आयरलैण्ड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में सम्मिलित कर लिया गया। इस तरह नये ब्रितानी राष्ट्र का निर्माण हुआ।

→  राष्ट्र दृश्य की कल्पना

  • 18 वीं एवं 19 वीं शताब्दी के कलाकारों ने राष्ट्र का मानवीकरण करके उसे मानव के रूप में चित्रित किया। उस समय राष्ट्र को महिला भेष में प्रस्तुत किया जाता था। इस काल में महिला की छवि राष्ट्र का प्रतीक (रूपक) बन गयी।
  • फ्रांसीसी गणराज्य में मारीआन की तस्वीर, जर्मनी में जर्मेनिया की तस्वीर इसी प्रकार की अभिव्यक्ति के प्रमुख उदाहरण

→  राष्ट्रवाद व साम्राज्य

  • सन् 1871 के पश्चात् यूरोप महाद्वीप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का प्रमुख स्रोत बाल्कन क्षेत्र था।
  • बाल्कन क्षेत्र में भौगोलिक एवं जातीय भिन्नता बहुत अधिक थी। इस क्षेत्र में आधुनिक रोमानिया, बुल्गारिया, अल्बानिया, यूनान, मेसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया, सर्बिया एवं मॉन्टिनिग्रो आदि सम्मिलित थे। आमतौर पर इस क्षेत्र के निवासियों को स्लाव कहा जाता था।
  • बाल्कन क्षेत्र का अधिकांश भाग ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था।
  • 19वीं शताब्दी में बाल्कन क्षेत्र के विभिन्न राष्ट्र ऑटोमन साम्राज्य के नियन्त्रण से निकलकर स्वतन्त्रता की घोषणा करने लगे।
  • साम्राज्यवाद से जुड़कर राष्ट्रवाद सन् 1914 में यूरोप को महाविपदा की ओर ले गया। अंततः प्रथम विश्व युद्ध हआ।
  • यूरोपीय शक्तियों के अधीन विश्व के विभिन्न राष्ट्रों ने उनके साम्राज्यवादी प्रभुत्व का विरोध किया।
तिथिघटनाएँ
1. 1688 ई.आंग्ल (इंग्लैण्ड) की संसद ने राजतंत्र से शक्ति छीन ली एवं एक राष्ट्र राज्य का निर्माण हुआ।
2. 1707 ई.इंग्लैण्ड एवं स्कॉटलैण्ड के मध्य एक्ट ऑफ यूनियन द्वारा ‘यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन’ का गठन किया गया।
3. 1785 ई.जर्मनी के उदारवादी नेता जैकब ग्रिम का जन्म।
4. 1786 ई.जर्मनी के उदारवादी नेता विल्हेल्म ग्रिम का जन्म।
5. 1789 ई.फ्रांस की क्रान्ति।
6. 1797 ई.नेपोलियन का इटली पर आक्रमण, नेपोलियन के युद्धों की शुरुआत।
7. 1801 ई.आयरलैण्ड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में सम्मिलित किया गया।
8. 1804 ई.फ्रांस में नागरिक संहिता का निर्माण किया गया, जिसे नेपोलियन की संहिता के नाम से जाना गया।
9. 1807 ई.इटली के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी ज्युसेपे मेत्सिनी का जन्म।
10. 1812 ई.ग्रीम्स बन्धु जैकब ग्रिम व विल्हेल्म ग्रिम की लोककथाओं की कहानियों का पहला संग्रह प्रकाशित हुआ।
11. 1814-15 ई.नेपोलियन का पतन एवं वियना शांति संधि।
12. 1819 ई.लुइजे ऑटो पीटर्स का जन्म।
13. 1821 है.यूनानियों का स्वतन्त्रता संग्राम प्रारम्भ।
14. 1830 ई.फ्रांस की उुलाई क्रान्ति।
15. 1831 ई.रूस के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह।
16. 1832 है.कुस्तुनु निया की संधि ने यूनान को एक स्वतन्त्र राष्ट्र की मान्यता दी।
17. 1834 ह.प्रशा की पहल पर एक शुल्क संघ, ‘जॉवेराइन’ की स्थापना जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य सम्मिलित थे।
18. 1848 ईई.फ्रांस में क्रान्ति, आर्थिक समस्याओं से परेशान कारीगरों, औद्योगिक मजदूरों एवं किसानों की बगावत, मध्यम वर्ग द्वारा संविधान तथा प्रतिनिध्यात्मक सरकार के गठन की माँग, जर्मन, इतालवी, पोलिश, चेक आदि के लोगों ने राष्ट्र राज्यों की माँग की।
19. 1859-1870 ई.इटली का एकीकरण।
20. 1861 ई.इमेनुएल द्वितीय एकीकृत इटली का राजा घोषित।
21. 1866-1871 ई.जर्मनी का एकीकरण।
22. जनवरी 1871 ई.वर्साय में हुए एक समारोह में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।
23. 1905 ई.हैब्सबर्ग एवं ऑटोमन साम्राज्यों में स्लाव राष्ट्रवाद की मजबूती।
24. 1914 ईप्रथम विश्वयुद्ध प्रारम्भ।

JAC Class 10 Social Science Notes History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

→ प्रमुख पारिभाषिक शब्दावली
1. निरंकुशवाद:
एक ऐसी सरकार अथवा शासन व्यवस्था जिसकी सत्ता पर किसी प्रकार का कोई नियन्त्रण नहीं होता। इतिहास में ऐसी राजशाही सरकारों को निरंकुश सरकार कहा जाता है जो अत्यधिक केन्द्रीकृत सैन्य बल पर निर्भर एवं दमनकारी सरकारें होती थीं।

2. कल्पनादर्श (युटोपिया): एक ऐसे समाज की कल्पना जो इतना अधिक आदर्श है कि उसका साकार होना लगभग असम्भव होता है।

3. जनमत संग्रह: एक प्रत्यक्ष मतदान जिसके माध्यम से एक क्षेत्र के समस्त लोगों को किसी प्रस्ताव को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत करने के लिए पूछा जाता है।

4. राष्ट्र: समान नस्ल, भाषा, धर्म एवं क्षेत्र है, जिसे एक लम्बे प्रयासों, त्याग एवं निष्ठा के द्वारा प्राप्त किया है।
5. मताधिकार: मत (वोट) देने का अधिकार।

6. रूढ़िवाद: एक ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परम्परा, स्थापित संस्थाओं व रीति-रिवाज़ों पर बल देता है एवं तीव्र परिवर्तन की अपेक्षा धीमे व श्रमिक विकास को प्राथमिकता देता है।

7. नारीवाद: महिला व पुरुष की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक समानता की सोच के आधार पर महिलाओं के अधिकारों व हितों के प्रति जागृति की विचारधारा।

8. विचारधारा: एक विशेष प्रकार की राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टि को इंगित करने वाले विचारों का समूह।

9. नृजातीय: एक साझा नस्ली, जनजातीय या सांस्कृतिक उद्गम अथवा पृष्ठभूमि जिसे कोई समुदाय अपनी पहचान स्वीकार करता है।

10. राष्ट्रवाद: व्यक्तियों के द्वारा एकता की भावना को महसूस करना जो एक समान भाषा, इतिहास एवं साझी संस्कृति के भागीदार होते हैं।

11. उदारवाद: यूरोप में 19वीं शताब्दी में मध्यम वर्ग के लोगों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा प्रोत्साहित वह विचारधारा जिसमें उनको ही अधिक-से-अधिक राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में अवसर प्रदान हों तथा उनकी हिस्सेदारी को महत्व प्रदान किया जाये।

12. रूपक: जब किसी भी अमूर्त विचार; जैसे-लालच, ईर्ष्या, स्वतन्त्रता, मुक्ति आदि को किसी व्यक्ति अथवा वस्तु के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। एक रूपकात्मक कहानी के दो अर्थ होते हैं- एक शाब्दिक अर्थ व एक प्रतीकात्मक अर्थ।

13. मारीआन: फ्रांस में राष्ट्रीय भावना के रूपक के रूप में दर्शायी गई एक नारी की छवि। यह ईसाइयों का लोकप्रिय नाम था। इसे सिक्कों और डाक-टिकटों पर दर्शाया गया था।

14. जर्मेनिया: जर्मन राष्ट्र की रूपक। इसे वीरता के प्रतीक ‘बलूत के वृक्ष के पत्तों का मुकुट’ पहने हुए दर्शाया गया है।

15. राष्ट्र का मानवीकरण: एक देश को इस प्रकार चित्रित करना कि वह कोई व्यक्ति हो।

16. हलेनिज्म: प्राचीन यूनानी संस्कृति।

17. क्रान्ति: अचानक होने वाली ऐसी कार्यवाही जो गैर-कानूनी तरीके अथवा शक्ति के द्वारा सरकार या शासन में परिवर्तन के लिए विद्रोह के रूप में प्रकट होती है।

18. जॉलवेराइन: प्रशा की पहल पर स्थापित एक शुल्क संघ।

19. रूमानीवाद: एक ऐसा सांस्कृतिक आन्दोलन जो एक विशेष प्रकार की राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था।

JAC Class 10 Social Science Notes

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता: एक चुनौती

JAC Class 9th Economics निर्धनता: एक चुनौती InText Questions and Answers 

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 32

प्रश्न 1.
विभिन्न देश विभिन्न निर्धनता रेखाओं का प्रयोग क्यों करते हैं?
उत्तर:
व्यक्ति की प्राथमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक वस्तुएँ विभिन्न कालों एवं विभिन्न देशों में भिन्न होने के कारण विभिन्न देश विभिन्न निर्धनता रेखाओं का प्रयोग करते हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

प्रश्न 2.
आपके अनुसार आपके क्षेत्र में न्यूनतम आवश्यक स्तर’ क्या होगा?
उत्तर:
हमारे अनुसार हमारे क्षेत्र में न्यूनतम आवश्यक स्तर 2500 रुपये प्रतिमाह प्रतिव्यक्ति होना चाहिए। पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या-33 प्रश्न 3. तालिका 3.1 का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए तालिका 3.1 : भारत में निर्धनता के अनुमान ( तेंदुलकर कार्य प्रणाली) निर्धनता अनुपात (प्रतिशत)

1. 1993-94 और 2004-05 के मध्य निर्धनता अनुपात में गिरावट आने के बावजूद निर्धनों की संख्या 407 मिलियन के आस-पास क्यों बनी रही?
उत्तर:
इसका प्रमुख कारण इन वर्षों में देश की तीव्र जनसंख्या वृद्धि हुई है।

2. क्या भारत में निर्धनता में कमी की गति ग्रामीण और शहरी भारत में समान है?
उत्तर:
भारत में निर्धनता में कमी की गति ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में समान नहीं है क्योंकि तालिका 3.1 यह दर्शाती है के निर्धनता में कमी की गति शहरों की अपेक्षा गाँवों में अधिक तीव्र है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 36

प्रश्न 4.
आरेख 3.2 के आधार पर निम्न प्रश्नों का उत्तर दीजिए
1. तीन राज्यों की पहचान करें जहाँ निर्धनता अनुपात सर्वाधिक है।
उत्तर:
बिहार, ओडिशा तथा असम सर्वाधिक निर्धनता अनुपात वाले राज्य हैं।

2. तीन राज्यों की पहचान करें जहाँ निर्धनता अनुपात सबसे कम है।
उत्तर:
केरल, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहाँ निर्धनता अनुपात सबसे कम है।

JAC Class 9th Economics निर्धनता: एक चुनौती Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
भारत में निर्धनता रेखा का आकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
भारत में निर्धनता रेखा का निर्धारण मानव के लिए आवश्यक प्राथमिक आवश्यकताओं, जैसे-खाद्य आवश्यकता, कपड़े, ईंधन, शिक्षा, चिकित्सा आदि की भौतिक मात्रा को रुपये में उनकी कीमतों से गुणा करके किया जाता है। निर्धनता रेखा का आकलन करते समय खाद्य आवश्यकता के लिए वर्तमान सूत्र वांछित कैलोरी आवश्यकता पर आधारित है जो कि ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तथा शहरी क्षेत्र में 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन ऊर्जा देने वाले भोजन से है।

प्रश्न 2.
क्या आप समझते हैं कि निर्धनता आकलन का वर्तमान तरीका सही है?
उत्तर:
हम यह मानते हैं कि वर्तमान में निर्धनता आकलन के तरीके में व्यक्ति की आय और उपभोग को आधार बनाया गया है। वर्तमान में केवल व्यक्ति की मूल आवश्यकता उदर-पूर्ति नहीं है इसलिए मानव की दूसरी प्राथमिक आवश्यकताओं जैसे वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ मनोरंजन को भी शामिल किया जाये तो निर्धनता का आकलन अधिक प्रभावी रहेगा तथा जीवन स्तर सुधार हेतु किये गये प्रयासों में अधिक सफलता प्राप्त होगी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

प्रश्न 3.
भारत में 1973 से निर्धनता की प्रवृत्तियों की चर्चा करें।
उत्तर:
भारत में 1973 में लगभग 55% निर्धन लोग थे जिनमें शहरी क्षेत्र में 49% तथा ग्रामीण क्षेत्र में 56.4% निर्धन लोग थे। इनकी देश में कुल संख्या 32 करोड़ के आस-पास थी। दो दशक बाद निर्धनता के प्रतिशत में तो कमी आई क्योंकि यह प्रतिशत केवल 36 रह गया। लेकिन कुल संख्या में कोई खास कमी नहीं आई, इसका प्रमुख कारण देश में तीव्र जनसंख्या वृद्धि रहा।

लेकिन अगले 5 वर्षों में न केवल निर्धनता का प्रतिशत घटकर 26 रह गया बल्कि कुल निर्धनों की संख्या भी घटकर 26 करोड़ रह गयी। निर्धनों की संख्या में कमी का यह क्रम शीघ्र ही टूट गया तथा 2009-10 में यह संख्या पुन: बढ़कर 35 करोड़ के लगभग हो गयी जो कुल जनसंख्या का 30 प्रतिशत थी परन्तु सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2011-12 में निर्धनों की संख्या में तेजी गिरावट आई, तब यह संख्या 27 करोड़ हो गई थी।

प्रश्न 4.
भारत में निर्धनता में अन्तर-राज्य असमानताओं का एक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारतीय निर्धनता का एक पहलू यह भी है कि यहाँ सभी राज्यों में निर्धनता का अनुपात समान नहीं है। राज्यों में निर्धनता को कम करने की सफलता दर विभिन्न राज्यों में भिन्न-भिन्न है। देश के 20 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में निर्धनता का अनुपात राष्ट्रीय निर्धनता औसत से कम है तथा शेष राज्यों, जैसे-उड़ीसा, बिहार, असम, त्रिपुरा व उत्तर-प्रदेश में यह एक गम्भीर समस्या है। देश के बिहार और उड़ीसा में क्रमश: 33.7 और 326% निर्धनता का औसत है तथा यही दोनों राज्य सर्वाधिक निर्धनता वाले राज्य हैं।

उड़ीसा, मध्य-प्रदेश, बिहार व उत्तर-प्रदेश में ग्रामीण निर्धनता के साथ-साथ नगरीय निर्धनता का प्रतिशत भी अधिक है। उक्त राज्यों की तुलना में केरल, आन्ध्र-प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिमी बंगाल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंजाब, हरियाणा में उच्च कृषि वृद्धि दर से, केरल में मानव संसाधन विकास से, पश्चिमी बंगाल में भूमि सुधार कार्यक्रमों से, आन्ध्र-प्रदेश व तमिलनाडु में सार्वजनिक वितरण प्रणाली सुधार से निर्धनता को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की गई है।

प्रश्न 5.
उन सामाजिक और आर्थिक समूहों की पहचान करें जो भारत में निर्धनता के समक्ष निरुपाय हैं?
उत्तर:
भारत में अग्रलिखित सामाजिक और आर्थिक समूह निर्धनता के समक्ष निरूपाय हैं
1. सामाजिक समूह:
यद्यपि निर्धनता रेखा के नीचे के लोगों का औसत भारत में सभी समूहों के लिए 22 है, अनुसूचित जनजातियों के 100 में से 43 लोग अपनी मूल आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं। इसी तरह नगरीय क्षेत्रों में 34 प्रतिशत अनियत मजदूर निर्धनता रेखा के नीचे हैं। लगभग 34 प्रतिशत अनियत कृषि श्रमिक ग्रामीण क्षेत्र में और 29 प्रतिशत अनुसूचित जातियाँ भी निर्धन हैं।

अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सामाजिक रूप से सुविधा वंचित समूहों का भूमिहीन अनियत दिहाड़ी श्रमिक होना उनकी दोहरी असुविधा की समस्या की गम्भीरता को दिखाता है। 1990 के दशक के दौरान अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर अनुसूचित जाति, ग्रामीण कृषि श्रमिक और शहरी अनियत मजदूर परिवार की निर्धनता में कमी आई है।

2. आर्थिक समूह: इस समूह के अन्तर्गत ग्रामीण कृषि श्रमिक परिवार तथा शहरी अनियत श्रमिक परिवार आते

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

प्रश्न 6.
भारत में अन्तर्राज्यीय निर्धनता में विभिन्नता के कारणों को बताइए।
उत्तर:
भारत में अन्तर्राज्यीय निर्धनता में विभिन्नता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. राज्यों में जनसंख्या घनत्व की असमानता का पाया जाना।
  2. राज्यों में लोगों की शिक्षा के प्रतिशत की असमानता का विद्यमान होना।
  3. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता में भी असमानता की विद्यमानता।
  4. धरातल की असमानता भी राज्यों में निर्धनता की विभिन्नता को दर्शाता है।
  5. औपनिवेशिक राज्य की अवधि भी राज्यों में निर्धनता की विभिन्नता का एक कारण है।
  6. राज्य सरकारों द्वारा किए गए प्रयासों ने भी राज्यों की निर्धनता में विभिन्नताएँ पैदा की हैं।

प्रश्न 7.
वैश्विक निर्धनता की प्रवृत्तियों की चर्चा करें।
उत्तर:
वैश्विक निर्धनता पर दृष्टि डालते हैं तो पता चलता है कि विकासशील देशों में अधिक आर्थिक निर्धनता व्याप्त है। हालांकि निर्धनता (विश्व बैंक की परिभाषा के अनुपात प्रतिदिन 1.9 से कम पर जीवन निर्वाह करना) में रहने वाले लोगों का अनुपात 1990 के 35% से गिरकर 2013 में 10.68 प्रतिशत हो गया है जो महत्त्वपूर्ण गिरावट को दर्शाता है। फिर भी वैश्विक निर्धनता में बहुत क्षेत्रीय विभिन्नताएँ विद्यमान हैं।

चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में तीव्र आर्थिक विकास और मानव संसाधन विकास में वृहत् निवेश से विशेष कमी हुई है। चीन में निर्धनों की संख्या 1981 के 88.3 प्रतिशत से घटकर 2008 में 14.7 प्रतिशत और वर्ष 2013 में 1.9 प्रतिशत रह गई है। दक्षिण एशिया के देशों जैसे भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान में निर्धनों की संख्या में गिरावट इतनी ही तीव्र रही है।

यह 54 प्रतिशत से गिरकर 15 प्रतिशत हो गई है। निर्धनों के प्रतिशत में गिरावट के बावजूद निर्धनों की संख्या में भी कमी आई जो 1990 में 44 प्रतिशत से घटकर 2013 में 17 प्रतिशत रह गई। भिन्न निर्धनता रेखा परिभाषा के कारण भारत में भी निर्धनता राष्ट्रीय अनुमान से अधिक है।

सब-सहारा अफ्रीकी देशों में निर्धनता वास्तव में 1991 के 54 प्रतिशत से घटकर 2013 में 41 प्रतिशत हो गई है। लैटिन अमेरिका निर्धनता का अनुपात वही रहा है। यहाँ पर निर्धनता रेखा 1990 में 16 प्रतिशत से गिरकर 2013 में 5.4 प्रतिशत रह गई है। रूस जैसे पूर्व समाजवादी देशों में भी निर्धनता पुनः समाप्त हो गई, जहाँ पहले आधिकारिक रूप से कोई निर्धनता थी ही नहीं। संयुक्त राष्ट्र के नये सतत विकास के लक्ष्य को 2030 तक सभी प्रकार की गरीबी खत्म करने का प्रस्ताव है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

प्रश्न 8.
निर्धनता उन्मूलन की वर्तमान सरकारी रणनीति की चर्चा करें।
उत्तर:
निर्धनता उन्मूलन भारतीय सरकारी रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य रहा है। भारत सरकार की वर्तमान निर्धनता उन्मूलन रणनीति प्रमुख रूप से निम्नलिखित दो कारकों पर निर्भर है

  1. आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन, और
  2. लक्षित निर्धनता निरोधी कार्यक्रमों को पूरा करना।

भारत में 1980 के अन्त तक 30 वर्ष की योजना अवधि के दौरान प्रतिव्यक्ति आय में कोई वृद्धि नहीं हुई जिससे निर्धनता में भी अधिक कमी नहीं आई। 1980-90 के दशक में भारतीय आर्थिक संवृद्धि दर विश्व में सबसे ज्यादा 6% के आस-पास रही। इस आर्थिक संवृद्धि दर ने देश में व्याप्त निर्धनता को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इससे एक बात यह स्पष्ट हुई कि आर्थिक संवृद्धि और निर्धनता-उन्मूलन के बीच एक घनिष्ठ सम्बन्ध है।

क्योंकि आर्थिक संवृद्धि अवसरों की व्यापकता को बढ़ाकर मानवीय विकास में निवेश हेतु आवश्यक संसाधनों को उपलब्ध कराती है। इसके बाद भी यह सम्भव है कि आर्थिक विकास से उपलब्ध अवसरों के द्वारा निर्धन लोग प्रत्यक्ष रूप में लाभ नहीं उठा पाते। इसके अलावा कृषि क्षेत्रों में संवृद्धि की दर बहुत कम होने का सीधा प्रभाव निर्धनता पर पड़ा क्योंकि निर्धन लोगों की बड़ी संख्या गाँवों में निवास करती है जो कृषि पर निर्भर है।

उक्त परिस्थितियों में लक्षित निर्धनता निरोधी कार्यक्रमों की आवश्यकता प्रत्यक्ष में दिखाई देने लगी। देश में ऐसी अनेक योजनाएँ हैं जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्धनता कम करने हेतु तैयार किया गया है इनमें से कुछ निम्नांकित महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) सितम्बर 2005 में पारित किया गया। इस विधेयक द्वारा देश के 200 जिलों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करने का प्रावधान है।

इसका उद्देश्य सतत् विकास में मदद करना ताकि सूखा, वन कटाई एवं मिट्टी के कटाव जैसी समस्याओं से बचा जा सके। इस प्रावधान के अन्तर्गत एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिये सुरक्षित किया गया है। इस स्कीम के अन्तर्गत 4.78 करोड़ परिवार को 220 करोड़ प्रतिव्यक्ति रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं का हिस्सा क्रमश: 23 प्रतिशत, 17 प्रतिशत एवं 53 प्रतिशत हैं। औसतन रोजगार वर्ष 2006-07 में 65 रुपये से बढ़कर वर्ष 2013-14 में 132 रुपये कर दिया गया है। केन्द्र सरकार राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कोष भी स्थापित करेगी। इसी तरह राज्य सरकारें भी योजना के कार्यान्वयन के लिए राज्य रोजगार गारंटी कोष की स्थापना करेंगी।

कार्यक्रम के अन्तर्गत अगर आवेदक को 15 दिन के अन्दर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह दैनिक बेरोजगार भत्ते का हकदार होगा। एक और महत्वपूर्ण योजना राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम है जिसे 2004 में देश के सबसे पिछड़े 150 जिलों में लागू किया गया था। यह कार्यक्रम उन सभी ग्रामीण निर्धनों के लिए है, जिन्हें मजदूरी पर रोजगार की आवश्यकता है और जो अकुशल शारीरिक काम करने के इच्छुक हैं। इसका कार्यान्वयन शत-प्रतिशत केन्द्रीय वित्तपोषित कार्यक्रम के रूप में किया गया है और राज्यों को खाद्यान्न नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक बार एन. आर. ई. जी. ए. लागू हो जाए तो काम के बदले अनाज (एन. एफ. डब्ल्यू. पी.) का राष्ट्रीय कार्यक्रम भी इस कार्यक्रम के अन्तर्गत आ जाएगा।

इन्हीं कार्यक्रमों के अन्तर्गत एक और योजना ‘प्रधानमन्त्री रोजगार योजना’ सन् 1993 में प्रारम्भ की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण और छोटे शहरों के शिक्षित बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है। ‘स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना’ का श्रीगणेश सन् 1999 में सहायता प्राप्त निर्धन परिवारों का स्वसहायता समूहों में संगठित करके बैंक व सरकारी सहायिकी संयोजन के द्वारा निर्धनता रेखा के ऊपर उठाना है। उक्त योजनाओं के अलावा प्रधानमन्त्री ग्रामोदय योजना-2000, अन्त्योदय अन्न योजना आदि निर्धनता निवारण हेतु लक्षित कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 3 निर्धनता : एक चुनौती

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों का संक्षेप में उत्तर दें:
(क) मानव निर्धनता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मानव निर्धनता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति या समूह उन सुविधाओं, लाभों और अवसरों से वंचित रहते हैं जिनका उपभोग दूसरे लोग उनसे अधिक करते हैं।

(ख) निर्धनों में भी सबसे निर्धन कौन है?
उत्तर:
महिलाएँ, बच्चे विशेषकर लड़कियाँ तथा वृद्ध व्यक्ति निर्धनों में सबसे अधिक निर्धन हैं।

(ग) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम, 2005 की मुख्य विशेषताओं में प्रत्येक वर्ष देश 200 जिलों में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार का प्रावधान करना है। योजना में प्रस्तावित रोजगारों में से एक तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।

केन्द्र में राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी कोष की स्थापना के साथ राज्यों में राज्य रोजगार गारण्टी कोषों’ की स्थापना की जायेगी। कार्यक्रम के अन्तर्गत यदि आवेदक को 15 दिन में रोजगार उपलब्ध नहीं होता है तो वह बेरोजगार भत्ता का हकदार होगा। इस योजना के नाम में आंशिक परिवर्तन किया गया है। अब इसका नाम महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारण्टी (मनरेगा) योजना हो गया है। यह योजना अब 600 जिलों में लागू है।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

JAC Class 9th Geography अपवाह InText Questions and Answers 

प्रश्न 1.
भारत में किस नदी की अपवाह द्रोणी सबसे बड़ी है।
उत्तर:
भारत में गंगा नदी की अपवाह द्रोणी सबसे बड़ी है।

प्रश्न 2.
भारत का सबसे बड़ा जल प्रपात कौन-सा है?
उत्तर:
भारत का सबसे बड़ा जल प्रपात जोग जल प्रपात है जो शरावती नदी द्वारा निर्मित है।

‘क्या आप जानते हैं’ पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी किस नदी की है?
उत्तर:
अमेजन नदी की।

प्रश्न 2.
सिंधु जल समझौता, 1960 के अनुसार भारत सिंधु नदी के कितने प्रतिशत जल का उपभोग कर सकता है?
उत्तर:
20 प्रतिशत जल का।

प्रश्न 3.
विश्व का सबसे बड़ा एवं तेजी से वृद्धि करने वाला डेल्टा कौन-सा है?
उत्तर:
सुन्दर डेल्टा।

प्रश्न 4.
ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत एवं बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में सांगपो एवं बांग्लादेश में जमुना कहा जाता है।

प्रश्न 5.
भारत में दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात कौन-सी नदी बनाती है?
उत्तर:
कावेरी नदी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

प्रश्न 6.
भारत में दूसरा सबसे बड़ा जल प्रपात कौन-सा है?
उत्तर:
कावेरी नदी द्वारा बनाया गया शिवसमुद्रम् जलप्रपात।

प्रश्न 7.
पृथ्वी के धरातल का लगभग कितने प्रतिशत भाग जल से ढंका है?
उत्तर:
71 प्रतिशत।

प्रश्न 8.
पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल का लगभग कितने प्रतिशत जल स्वच्छ है?
उत्तर:
3 प्रतिशत।

प्रश्न 9.
बड़े आकार वाली झीलों को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
समुद्र कहा जाता है।

प्रश्न 10.
पृथ्वी पर उपलब्ध जल का कितने प्रतिशत लवणीय है?
उत्तर:
97 प्रतिशत।

क्रियाकलाप आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
एटलस की सहायता से प्राकृतिक तथा मानव निर्मित झीलों की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:

  • प्राकृतिक झील:
    1. डल झील (जम्मू और कश्मीर),
    2. वूलर झील (जम्मू और कश्मीर),
    3. भीमताल झील (उत्तराखण्ड),
    4. नैनीताल झील (उत्तराखण्ड),
    5. लोनार झील (महाराष्ट्र),
    6. पुष्कर झील (राजस्थान),
    7. कोलेरु झील (आन्ध्र प्रदेश),
    8. चिल्का झील (उड़ीसा),
    9. वेम्बनाद झील (केरल),
    10. सांभर झील (राजस्थान),
    11. लोकतक झील (मणिपुर),
    12. पुलीकट झील (आन्ध्र प्रदेश)।
  • मानव निर्मित झील:
    1. गोविन्द सागर झील (हिमाचल प्रदेश),
    2. नागार्जुन सागर (आन्ध्र प्रदेश)
    3. राणा प्रताप सागर (राजस्थान),
    4. हीराकुण्ड (उड़ीसा),
    5. गांधी सागर (मध्य प्रदेश),
    6. गोविन्द बल्लभ सागर (उत्तर प्रदेश)।

JAC Class 9th Geography अपवाह Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
दिए गये चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए।
1. वूलर झील निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है
(क) राजस्थान
(ख) पंजाब
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) जम्मू-कश्मीर।
उत्तर:
(घ) जम्मू-कश्मीर।

2. नर्मदा नदी का उद्गम कहाँ से है
(क) सतपुड़ा
(ख) अमरकंटक
(ग) ब्रह्मगिरी
(घ) पश्चिमी घाट के ढाल।
उत्तर:
(ख) अमरकंटक।

3. निम्नलिखित में से कौन-सी लवणीय जल वाली झील है
(क) सांभर
(ख) वूलर
(ग) डल
(घ) गोविन्द सागर।
उत्तर:
(क) सांभर।

4. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है
(क) नर्मदा
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) महानदी।
उत्तर:
(ख) गोदावरी।

5. निम्नलिखित नदियों में से कौन-सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है
(क) महानदी
(ख) कृष्णा
(ग) तुंगभद्रा
(घ) तापी।
उत्तर:
(घ) तापी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए
1. जल विभाजक का क्या कार्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जल विभाजक वह उच्च स्थलीय भाग है जो दो अपवाह द्रोणियों को एक-दूसरे से पृथक् करता है। उदाहरण के लिए; अंबाला नगर सिंधु और गंगा नदी तन्त्रों के बीच जल विभाजक पर स्थित है।

2. भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन-सी है?
उत्तर:
गंगा द्रोणी।

3. सिंध एवं गंगा नदियाँ कहाँ से निकलती हैं?
उत्तर:
सिंधु नदी मानसरोवर झील (तिब्बत) के निकट से एवं गंगा नदी गंगोत्री नामक हिमानी (उत्तराखण्ड) से निकलती है।

4. गंगा की दो मुख्य धाराओं के नाम लिखिए।ये कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती
उत्तर:
गंगा की दो मुख्य धाराएँ भागीरथी एवं अलकनंदा हैं। ये दोनों धाराएँ एक-दूसरे से उत्तराखण्ड राज्य के देवप्रयाग (जनपद टिहरी) नामक स्थान पर मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।

5. लम्बी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद(सिल्ट क्यों है?
उत्तर:
लम्बी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद (सिल्ट) है क्योंकि यह एक शीत एवं शुष्क क्षेत्र है अतः यहाँ इस नदी में जल की मात्रा कम है जिसके फलस्वरूप अपरदन कम होता है।

6. कौन-सी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ गर्त से होकर बहती हैं? समुद्र में प्रवेश करने से पहले वे किस प्रकार की आकृतियों का निर्माण करती हैं?
उत्तर:
नर्मदा एवं तापी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं जो गर्त से होकर बहती हैं। समुद्र में प्रवेश करने से पहले वे ज्वारनदमुख का निर्माण करती हैं।

7. नदियों तथा झीलों के कुछ आर्थिक महत्व को बताइएं।
उत्तर:

  • नदियों का आर्थिक महत्व:
    1. नदियाँ घरेलू कार्यों, उद्योगों एवं फसलों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करवाती हैं।
    2. नदियाँ गाद और तलछट को बहाकर लाती हैं जो बाढ़ के मैदानों को उपजाऊ बनाती हैं तथा देश को उपजाऊ कृषि भूमि प्रदान करती हैं।
    3. नदियाँ जल विद्युत के उत्पादन में सहायक हैं।
    4. नदियाँ नौ-संचालन में प्रयोग होती हैं।
  • झीलों का आर्थिक महत्व:
    1. झीलें प्राकृतिक सुन्दरता एवं पर्यटन को बढ़ावा देती हैं तथा हमें मनोरंजन प्रदान करती हैं।
    2. झीलें नदी के बहाव को सुचारु बनाये रखती हैं।
    3. झीलों का प्रयोग जल विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
    4. अत्यधिक वर्षा के समय झीलें बाढ़ के पानी को रोकती हैं।
    5. झीलों का प्रयोग नौका संचालन में भी किया जाता है।
    6. सूखे के मौसम में झीलें पानी के बहाव को सन्तुलित करने में सहायता करती हैं।
    7. झीलें आस-पास के क्षेत्रों की जलवायु को सामान्य बनाती हैं।
    8. झीलें जलीय पारितन्त्र को सन्तुलित रखती हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

प्रश्न 3.
नीचे भारत की कुछ झीलों के नाम दिये गए हैं। इन्हें प्राकृतिक तथा मानव निर्मित वर्गों में बाँटिए
(क) वूलर
(ग) नैनीताल
(ङ) गोविन्द सागर
(छ) बारापानी
(झ) सांभर
(ट) निजामसागर
(ड) नागार्जुन सागर
(ख) डल
(घ) भीमताल
(च) लोकताल
(ज) चिल्का
(अ) राणा प्रताप सागर
(ठ) पुलिकट
(ढ) हीराकुण्ड
उत्तर:
1. प्राकृतिक झीलें: (क) वूलर, (ख) डल, (ग) नैनीताल, (घ) भीमताल, (च) लोकताल, (छ) बारापानी, (ज) चिल्का, (झ) सांभर, (ठ) पुलिकट।

2. मानव निर्मित झीलें: (ङ) गोविन्द सागर, (ब) राणाप्रताप सागर, (ट) निजाम सागर, (ठ) नागार्जुन सागर, (ढ) हीराकुण्ड।

प्रश्न 4.
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य अन्तरों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियों में मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैंहिमालयी नदियाँ

हिमालयी नदियाँप्रायद्वीपीय नदियाँ
1. हिमालय से निकलने वाली नदियों का अपवाह क्षेत्र लम्बा है।1. प्रायद्वीपीय नदियों का अपवाह क्षेत्र छोटा है।
2. हिमालय से निकलने वाली अधिकांश नदियाँ बारहमासी हैं। इनमें पूरे वर्ष भर पानी बना रहता है।2. प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी हैं। इनका प्रवाह वर्षा पर निर्भर करता है।
3. हिमालय से निकलने वाली अधिकांश नदियों का जन्म हिमानियों से हुआ है।3. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ वर्षा जल पर निर्भर हैं। यहाँ कोई हिमानी नहीं है।
4. अपने ऊपरी मार्ग में ये नदियाँ तीव्र गति से अपरदन कार्य करती हैं फलस्वरूप ये अपने साथ भारी मात्रा में गाद एवं तलछट लाती हैं।4. धीमे ढलानों के कारण ये नदियाँ अपेक्षाकृत धीमी गति से अपरदन कार्य करती हैं।
5. समतल भूभाग में होकर बहने के कारण ये नदियाँ नौकायन करने योग्य हैं।5. ये नदियाँ मार्ग में जल प्रपात बनाती हैं अतः तटीय मैदानों को छोड़कर ये नदियाँ नहीं हैं।
6. ये नदियाँ विशाल डेल्टा बनाती हैं।6. ये नदियाँ अपेक्षाकुत छोटे डेल्टा बनाती हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

प्रश्न 5.
प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों की तुलना निम्न प्रकार से हैपूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँपशिचम की ओर बहने वाली नदियाँ
1. ये नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।1. ये नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं।
2. ये नदियाँ डेल्टा का निर्माण करती हैं।2. ये नदियाँ ज्वारनदमुख का निर्माण करती हैं।
3. ये नदियाँ अधिक लम्बी दूरी को पार करती हैं तथा अपनी घाटी का स्वयं निर्माण करती हैं।3. नर्मदा एवं तापी को छोड़कर सभी नदियाँ अत्यन्त छोटी हैं तथा तेजी से तीव्र ढाल पर बहती हुई अरब सागर में गिरती हैं।
4. पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि प्रमुख हैं।4. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में नर्मदा एवं तापी आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 6.
किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ महत्वपूर्ण क्यों हैं?
उत्तर:
किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए नदियाँ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि

  1. नदियाँ घरेलू कार्यों, उद्योगों एवं फसलों की सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराती हैं विशेषकर भारत जैसे देश में जहाँ फसल मानसून पर निर्भर होती है।
  2. नदियाँ परिवहन के साधन एवं अन्तर्देशीय जल मार्ग उपलब्ध करवाती हैं।
  3. नदियों के किनारे नगर, मनोरंजन केन्द्र, पर्यटन एवं मत्स्य संग्रहण केन्द्र भी विकसित होते हैं।
  4. नदियाँ गाद और तलछट बहाकर लाती हैं जो बाढ़ के मैदानों को उपजाऊ बनाती हैं।
  5. नदियाँ अवशिष्ट को जमने नहीं देतीं, उसे गलाकर नष्ट कर देती हैं।
  6. नदियों का उपयोग जल विद्युत उत्पादन में किया जाता है। उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि मानव सभ्यता की जीवन रेखायें यह नदियाँ ही हैं।

मानचित्र कौशल

भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित नदियों को चिह्नित कीजिए तथा उनके नाम लिखिए गंगा, सतलुज, दामोदर, कृष्णा, नर्मदा, तापी, महानदी, दिहांग।
उत्तर:
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह 1

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह

प्रश्न 2.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित झीलों को चिह्नित कीजिए तथा उनके नाम लिखिए: चिल्का, सांभर, वूलर, पुलिकट तथा कोलेरू।
उत्तर:
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह 2

क्रियाकलाप

नीचे दी गई वर्ग पहेली को हल करें नोट: पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।

  • बाएँ से दाएँ:
    1. नागार्जुन सागर नदी परियोजना किस नदी पर है?
    2. भारत की सबसे लम्बी नदी।
    3. व्यास कुण्ड से उत्पन्न होने वाली नदी।
    4. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से उत्पन्न होकर पश्चिम की ओर बहने वाली नदी।
    5. प. बंगाल का ‘शोक’ के नाम से जानी जाने वाली नदी। मूल रूप से पाठ्य-पुस्तक में बिहार का शोक है। लेकिन पहेली में स्थान दामोदर के लिए छोड़ा गया है उस हिसाब से प. बंगाल का शोक ठीक है।
    6. किस नदी से इंदिरा गांधी नहर निकाली गयी है?
    7. रोहतांग दर्रा के पास किस नदी का स्रोत है?
    8. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी।
  • ऊपर से नीचे
    1. सिन्धु नदी की सहायक नदी, जिसका उद्गम हिमाचल प्रदेश में है।
    2. भ्रंश अपवाह होकर अरब सागर में मिलने वाली नदी।
    3. दक्षिण भारतीय नदी, जो ग्रीष्म तथा शीत ऋतु दोनों में वर्षा का जल प्राप्त करती है।
    4. लद्दाख, गिलगित तथा पाकिस्तान में बहने वाली नदी।
    5. भारतीय मरुस्थल की एक महत्वपूर्ण नदी।
    6. पाकिस्तान में चिनाव से मिलने वाली नदी।
    7. यमुनोत्री हिमानी से निकलने वाली नदी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 3 अपवाह 3

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

JAC Class 9th Civics संविधान निर्माण InText Questions and Answers 

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में विभिन्न पृष्ठों पर लड़के/लड़की के कार्टून चित्रों के नीचे अथवा ‘खुद करें, खुद सीखें’ शीर्षक से बॉक्स में अथवा ‘कार्टून बूझें शीर्षक के नीचे अथवा कहाँ
पहुँचे? क्या समझे? शीर्षक से बॉक्स में प्रश्न दिए हुए हैं। इन प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 22

प्रश्न 1.
नेल्सन मण्डेला के जीवन और संघर्षों पर एक पोस्टर बनाएँ।
उत्तर:
छात्र इस प्रश्न को अध्यापकों की सहायता से स्वयं हल करें।

प्रश्न 2.
अगर उनकी आत्मकथा, ‘द लाँग वाक टू फ्रीडम’ उपलब्ध हो तो कक्षा में उसके कुछ हिस्से पढ़कर आपस में चर्चा करें।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापकों की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 3.
अगर दक्षिण अफ्रीका के बहुसंख्यक काले लोगों ने गोरों से अपने दमन और शोषण का बदला लेने का निश्चय किया होता तो क्या होता?
उत्तर:
ऐसा करने पर दक्षिण अफ्रीका में हर तरफ युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाती। हर तरफ खून ही खून दिखाई पड़ता। हर तरफ विनाश तथा अराजकता का माहौल होता, किन्तु दक्षिण अफ्रीकी लोगों ने हिंसा की जगह अहिंसा का सहारा लिया तथा अपनी समस्याओं का हल ढूँढ़ निकाला।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 23

प्रश्न 4.
आज का दक्षिण अफ्रीका : यह तस्वीर आज के दक्षिण अफ्रीका की सोच को उजागर करती है। आज का दक्षिण अफ्रीका खुद को ‘इन्द्रधनुषी देश’ कहता है। क्या आप बता सकते हैं, क्यों?
उत्तर:
दक्षिण अफ्रीकी लोग स्वयं को ‘इन्द्रधनुषी देश’ कहकर बुलाते हैं, क्योंकि रंगभेदी सरकार के समय अपने कडुवे अनुभवों को भुलाकर गोरे, काले, दूसरे वर्ण के लोग तथा भारतीय मूल के लोग सभी मिलकर काम करते हुए लोकतान्त्रिक मूल्यों पर आधारित एक नये राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रयासरत हैं।

प्रश्न 5.
क्या दक्षिण अफ्रीका के स्वतन्त्रता संग्राम से आपको भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की याद आई? इन बिन्दुओं के आधार पर दोनों संघर्षों में समानताएँ और असमानताएँ बताएँ
1. विभिन्न समुदायों के बीच सम्बन्ध
2. नेतृत्व-गाँधी/मंडेला
3. संघर्ष का नेतृत्व करने वाली पार्टी-अफ्रीकी नेशनल काँग्रेस/भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
4. संघर्ष का तरीका उपनिवेशवाद का चरित्र।
उत्तर:
हाँ, दक्षिण अफ्रीका के स्वतन्त्रता संग्राम की कहानी हमें भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की याद दिलाती है।

1. विभिन्न समुदायों के बीच सम्बन्धसमानताअसमानता भारत के कुछ लोगों ने भी दक्षिण अफ्रीकी स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लिया, लेकिन किसी भी दक्षिण अफ्रीकी ने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग नहीं लिया।
2. नेतृत्वदोनों ही देशों में गोरे शासकों द्वारा वहाँ की जनता को हीन दृष्टि से देखा जाता था।मंडेला को आजीवन कारावास की सजा दी गई। उन्होंने जेल से ही आन्दोलन का नेतृत्व किया। गाँधीजी कई बार जेल गये, लेकिन उन्होंने जेल से आन्दोलन का नेतृत्व नहीं किया बल्कि वे जनता के बीच जाकर आन्दोलन का नेतृत्व करते थे।
3. संघर्ष नेत्रत्व करने वाली पार्टीगाँधी/मंडेला-गाँधी तथा मंडेला दोनों ने अपने देश के राष्ट्रीय आन्दोलनों में अहिंसा के माध्यम से संघर्ष किया तथा दोनों ही जनता के बीच बहुत ही लोकप्रिय थे। भारत में गाँधी तथा दक्षिण अक्रीका में मंडेला।अफ्रीका में केवल अफ्रीकी नेशनल काँग्रेस ही एकमात्र पार्टी थी, जबकि भारत में दूसरी अन्य राजनीतिक पार्टियाँ तथा चरमपंथी दल थे जिन्होंने आन्दोलन में अपनी-अपनी तरह से भाग लिया।
4. संघर्ष तरीकाअफ्रीकी नेशनल काँरेस। भारतीय राष्ट्रीय कँग्रेस-दोनों पार्टियों ने अपने-अपने देश में जन आन्दोलनों का नेतृत्व किया तथा उचित समय पर उचित कार्यक्रम द्वारा उन्हें निर्देशित किया। दोनों ही संगठन आम जनता के सामान्य हितों की रक्षा करते हुए संघर्ष कर रहे थे।भारत में कुछ आदिवासी संगठन भी थे जिन्होंने हिंसक तरीकों से अंग्रेजी शासन का विरोध किया तथा स्वतन्त्रता की लड़ाई में अपना योगदान दिया।
5. उपनिवेशवाद का चरित्रदोनों ही देशों में स्वतन्त्रता की लड़ाई अधिकतर लोकतान्त्रिक तथा अहिंसक तरीकों से लड़ी गई। इन तरीकों में धरना, प्रदर्शन व हड़ताल आदि थे।भारत में यूरोपीय लोग बसे नहीं हैं। लेकिन यूरोपीय लोग दक्षिण अफ्रीका में बस गये तथा वहाँ के स्थानीय शासक बन गये।


पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 24

प्रश्न 6.
अपने इलाके के किसी क्लब, सहकारी संगठन अथवा मजदूर संघ या राजनीतिक दल के दफ्तर में जाएँ और उनसे संविधान या संगठन के नियमों की पुस्तिका माँगें तथा उसका अध्ययन करें।
क्या उसके नियम लोकतान्त्रिक नियमों के अनुकूल हैं? क्या वे बिना भेदभाव के सभी को सदस्यता देते हैं?
उत्तर:
छात्र इस प्रश्न को अध्यापकों की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 7.
यह तो गड़बड़ हो गई। अगर सभी बुनियादी बातों पर पहले ही फैसला हो गया था तो संविधान सभा बनाने का क्या औचित्य था?
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्त करने के बाद भारत एक लोकतान्त्रिक देश बनने जा रहा था। अतः सर्वप्रथम यह आवश्यक था कि नीचे से ऊपर तक भारतीय जनता के सभी वर्गों के विचारों एवं समस्याओं को समझा जाए। इसके उपरान्त बहस व चर्चा द्वारा उनके लिए निर्धारित नियमों में सुधार किया जाए। अतः बुनियादी बातों पर पहले ही फैसला हो जाने के बावजूद संविधान सभा का गठन किया गया।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 25

प्रश्न 8.
अपने दादा-दादी, नाना-नानी या इलाके के किसी बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए कि क्या उनको आजादी या बँटवारे या संविधान निर्माण के बारे में कुछ बातें याद हैं। उस समय लोगों को किन बातों की उम्मीद थी और क्या-क्या अंदेशे थे ? अपनी कक्षा में इन बातों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापकों व अपने बुजुर्गों की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 27

प्रश्न 9.
अपने राज्य या इलाके से संविधान सभा में गये ऐसे सदस्य का नाम पता करें जिनका जिक्र यहाँ नहीं किया गया है। उस नेता की तस्वीर जुटाएँ या उनका स्केच बनाएँ। हमने जिस तरह संक्षेप में कुछ नेताओं के बारे में सूचना दी है उसी तरह उनके बारे में भी ब्यौरा दें। यानि नाम (जन्म वर्ष-मृत्यु वर्ष), जन्म स्थान ( वर्तमान राजनैतिक सीमाओं के आधार पर), राजनीतिक गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण, संविधान सभा के बाद की भूमिका।
उत्तर:
छात्र इस प्रश्न को अध्यापकों की सहायता से स्वयं हल करें।

 पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 28 

प्रश्न 10.
भारतीय संविधान निर्माताओं के बारे में यहाँ दी गई जानकारियों को पढ़ें। आपको यह जानकारी कंठस्थ करने की जरूरत नहीं है। इस आधार पर निम्नलिखित कथनों के पक्ष में उदाहरण प्रस्तुत करें
1. संविधान सभा में ऐसे अनेक सदस्य थे जो कांग्रेसी नहीं थे।
2. सभा में समाज के अलग-अलग समूहों का प्रतिनिधित्व था।
3. सभा के सदस्यों की विचारधारा भी अलग-अलग थी।
उत्तर:
1. संविधान सभा में ऐसे अनेक सदस्य थे जो कांग्रेसी नहीं थे। इन सदस्यों में वल्लभभाई झावरभाई पटेल (1875-1950), जयपाल सिंह (1903-1970), भीमराव रामजी अम्बेडकर (1891-1956), श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1901-1953) आदि प्रमुख थे।

2. सभा में समाज के अलग:
अलग समूहों का प्रतिनिधित्व था। इन समूहों व उनके नेताओं में

  1. वल्लभभाई झावरभाई पटेल-किसान सत्याग्रह के नेता।
  2. अबुल कलाम आजाद-धर्मशास्त्री, अरबी के विद्वान्।
  3. जयपाल सिंह-आदिवासी महासभा के संस्थापक अध्यक्ष।
  4. भीमराव रामजी अम्बेडकर-सामाजिक क्रान्तिकारी चिंतक तथा जाति-विभाजन एवं जाति-आधारित असमानता के प्रखर विरोधी।
  5. श्यामा प्रसाद मुखर्जी-हिन्दू महासभा के सदस्य। आदि प्रमुख थे।

3. सभा के सदस्यों की विचारधारा भी अलग:
अलग थी। कुछ अलग विचारधारा वाले नेताओं में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (1889-1963), एच. सी. मुखर्जी (1887-1956), जी. दुर्गाबाई देशमुख (1909-1981), जवाहरलाल नेहरू (1889-1964), सरोजिनी नायडू (1879-1949) आदि प्रमुख थे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 29

प्रश्न 1.
पहले दिए तीनों उद्धरणों को गौर से पढ़ें। पहचानिए कि कौन-सा एक विचार इन तीनों उद्धरणों में उपस्थित है। इन तीनों उद्धरणों में इस साझे विचार को व्यक्त करने का तरीका किस तरह एक-दूसरे से भिन्न है?
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को अपने शिक्षकों की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 2.
संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत और दक्षिण अफ्रीका के संविधानों की प्रस्तावना की तुलना कीजिए।
1. इन सभी में जो विचार साझा है, उनकी सूची बनाएँ।
2. इन सभी में कम-से-कम एक बड़े अन्तर को रेखांकित करें।
3. तीनों में से कौन-सी प्रस्तावना अतीत की ओर संकेत करती है?
4. इन प्रस्तावनाओं में कौन-सी ईश्वर का आह्वान नहीं करती?
उत्तर:

  1. इन तीनों में मिले-जुले विचार हैं:
    • इन तीनों संविधानों की शुरुआत प्रस्तावना से हुई है।
    • इन तीनों संविधानों की प्रस्तावना की शुरुआत ‘हम (देश का नाम) के लोग’ से हुई है।
  2. इनके बीच एक प्रमुख अन्तर है-‘समाजवादी विचारधारा का प्रयोग सिर्फ भारतीय संविधान की प्रस्तावना में हुआ
  3. दक्षिण अफ्रीकी संविधान की प्रस्तावना अतीत की ओर संकेत करती है।
  4. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ईश्वर का आह्वान नहीं किया गया है।

JAC Class 9th Civics संविधान निर्माण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
नीचे कुछ गलत वाक्य दिए गए हैं। हर एक में की गई गलती पहचानें और इस अध्याय के आधार पर उसको ठीक करके लिखें।
(क) स्वतन्त्रता के बाद देश लोकतान्त्रिक हो या नहीं, इस विषय पर स्वतन्त्रता आन्दोलन के नेताओं ने अपना दिमाग खुला रखा था।
(ख) भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान में कही गई हरेक बात पर सहमत थे।
(ग) जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था ही होगी।
(घ) संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है इसलिए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
उत्तर:
(क) स्वतन्त्रता आन्दोलन के नेताओं की इस बारे में स्पष्ट धारणा थी कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश में लोकतन्त्र होना चाहिए।

(ख) भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्यों की संविधान के सभी उपबन्धों को लेकर अलग-अलग धारणाएँ थीं।

(ग) जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था का होना जरूरी नहीं है।

(घ) यह सत्य है कि संविधान देश का सर्वोत्तम कानून होता है परन्तु संविधान में संशोधन की व्यवस्था होती है, क्योंकि इसे लोगों की इच्छाओं तथा समाज में आए परिवर्तन के अनुसार होना चाहिए।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 2.
दक्षिण अफ्रीका का लोकतान्त्रिक संविधान बनाने में इनमें से कौन-सा टकराव सबसे महत्वपूर्ण था
(क) दक्षिण अफ्रीका और उसके पड़ोसी देशों का।
(ख) स्त्रियों और पुरुषों का।
(ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का।
(घ) रंगीन चमड़ी वाले बहुसंख्यकों और अश्वेत अल्पसंख्यकों का।
उत्तर:
(ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का।

प्रश्न 3.
लोकतान्त्रिक संविधान में इनमें से कौन-सा प्रावधान नहीं रहता
(क) शासन प्रमुख के अधिकार
(ख) शासन प्रमुख का नाम
(ग) विधायिका के अधिकार
(घ) देश का नाम।
उत्तर:
(ख) शासन प्रमुख का नाम।

प्रश्न 4.
संविधान निर्माण में इन नेताओं और उनकी भूमिका में मेल बैठाएँ

(क) मोतीलाल नेहरू1. संविधान सभा के अध्यक्ष
(ख) बी. आर. अम्बेडकर2. संविधान सभा की सदस्य
(ग) राजेन्द्र प्रसाद3. प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष
(घ) सरोजिनी नायडू4. 1928 ई. में भारत का संविधान बनाया।

उत्तर:

(क) मोतीलाल नेहरू4. 1928 ई. में भारत का संविधान बनाया।
(ख) बी. आर. अम्बेडकर3. प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष
(ग) राजेन्द्र प्रसाद1. संविधान सभा के अध्यक्ष
(घ) सरोजिनी नायडू2. संविधान सभा की सदस्य

प्रश्न 5.
जवाहरलाल नेहरू के नियति के साथ साक्षात्कार वाले भाषण के आधार पर निम्नलिखित का जवाब
(क) नेहरू ने क्यों कहा कि भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं है?
(ख) नये भारत के सपने किस तरह विश्व से जुड़े हैं?
(ग) वे संविधान निर्माताओं से क्या शपथ चाहते थे?
(घ) “हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की कामना हर आँख के आँसू पोंछने की है।” वे इस कथन में किसका जिक्र कर रहे थे?
उत्तर:
(क) नेहरू ने यह बात ‘भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं है। इसलिए कहा था कि भारत के लोग अपने वायदों को पूरा करने के लिए निरन्तर प्रयास करते रहें।

(ख) नये भारत के सपने दरिद्रता का, अज्ञान का, बीमारियों का और अवसर की असमानता का अन्त करना है। विश्व शान्ति और समृद्धि के लिए भी यह आवश्यक है।

(ग) वह संविधान के निर्माताओं से यह शपथ लेना चाहते थे कि वे भारत के संसाधनों तथा जनता के हित में अपने आपको समर्पित कर दें।

(घ) वह इस कथन में महात्मा गाँधी की ओर संकेत कर रहे थे।

प्रश्न 6.
हमारे संविधान को दिशा देने वाले ये कुछ मूल्य और उनके अर्थ हैं। इन्हें आपस में मिलाकर दोबारा लिखिए।

(क) संप्रभु1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी।
(ख) गणतन्त्र2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है।
(ग) बंधुत्व3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है।
(घ) धर्मनिरपेक्ष4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए।

उत्तर:

(क) संप्रभु2. फैसले लेने का सर्वोच्च अधिकार लोगों के पास है।
(ख) गणतन्त्र3. शासन प्रमुख एक चुना हुआ व्यक्ति है।
(ग) बंधुत्व4. लोगों को आपस में परिवार की तरह रहना चाहिए।
(घ) धर्मनिरपेक्ष1. सरकार किसी धर्म के निर्देशों के अनुसार काम नहीं करेगी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 7.
कुछ दिन पहले नेपाल से आपके एक मित्र ने वहाँ की राजनीतिक स्थिति के बारे में आपको पत्र लिखा था। वहाँ अनेक राजनीतिक पार्टियाँ राजा के शासन का विरोध कर रही थीं। उनमें से कुछ का कहना था कि राजा द्वारा दिये गये मौजूदा संविधान में ही संशोधन करके चुने हुए प्रतिनिधियों को ज्यादा अधिकार दिये जा सकते हैं। अन्य पार्टियाँ नया गणतान्त्रिक संविधान बनाने के लिए नई संविधान सभा गठित करने की माँग कर रही थीं। इस विषय में अपनी राय बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें।
उत्तर:
प्रिय मित्र, आपने अपने पत्र में जिन मुद्दों की चर्चा की है। उनके विषय में मैं अपनी राय को निम्न रूप में प्रेषित कर रहा हूँ नेपाल में लोगों के विचार अलग-अलग हैं। कुछ लोगों का कहना है कि राजा ने जो संविधान बनाया है, उसी में थोड़ा सुधार करके चुने हुए लोगों को अधिक शक्ति दे दी जाये, लेकिन दूसरी पार्टियाँ चाहती हैं कि नई संविधान सभा का गठन किया जाये।

मेरी राय में मौजूदा संविधान में संशोधन कर जन प्रतिनिधियों को अधिक अधिकार दे देना उचित है। कुछ सालों के बाद स्वतन्त्र चुनाव कराने चाहिए। तब राजा के पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं होना चाहिए, राजा सिर्फ सलाहकार की भूमिका निभायेगा। अतः वर्तमान संविधान में उपयुक्त संशोधन ही नेपाल के हित में उपयुक्त फैसला होगा।

प्रश्न 8.
भारत के लोकतन्त्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे में कुछ अलग-अलग विचार इस प्रकार हैं। आप इनमें से हर कथन को भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण कारण मानते हैं?

(क) अंग्रेजी शासकों ने भारत को उपहार के रूप में लोकतान्त्रिक व्यवस्था दी। हमने ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी प्रान्तीय असेंबलियों के जरिए लोकतान्त्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया।

(ख) हमारे स्वतन्त्रता संग्राम ने औपनिवेशिक शोषण और भारतीय लोगों को तरह-तरह की आजादी न दिये जाने का विरोध किया। ऐसे में स्वतन्त्र भारत को लोकतान्त्रिक होना ही था।

(ग) हमारे राष्ट्रवादी नेताओं की आस्था लोकतन्त्र में थी। अनेक नव स्वतन्त्र राष्ट्रों में लोकतन्त्र का न आना हमारे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
उत्तर:
(क) अंग्रेजी शासकों के योगदान को कुछ सीमा तक स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि इसे अंग्रेजों की देन नहीं माना जा सकता है। यदि हमें पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त नहीं होता तो भारत जैसे विशाल देश में आरम्भिक दौर में प्रजातान्त्रिक व्यवस्था की स्थापना बहुत ही मुश्किल कार्य होता।

(ख) इस तथ्य का भारत में प्रजातन्त्र की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान है। चूँकि हमारे संघर्ष का तरीका लोकतान्त्रिक था, हमारे राजनीतिक दलों की संरचना भी लोकतान्त्रिक थी, अतः प्रजातन्त्र की अच्छाइयों को हम अनुभव कर रहे थे। दूसरी ओर, चूँकि लोगों को विभिन्न स्वतन्त्रताएँ नहीं मिली थीं, अतः प्रजातन्त्र ही एकमात्र ऐसी व्यवस्था थी जो लोगों की इच्छाओं को पूरा कर सकती थी।

(ग) स्वतन्त्रता प्राप्ति के दौरान यह बहुत आवश्यक था कि सच्चे लोकतन्त्र की स्थापना के लिए लोकतान्त्रिक विचारों वाले नेता हों, जिससे इन मूल्यों की स्थापना के लिए दूसरों को भी प्रेरित कर सकें। अतः इस कारण का योगदान भी महत्वपूर्ण था।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 2 संविधान निर्माण

प्रश्न 9.
1912 में प्रकाशित विवाहित महिलाओं के लिए आचरण’ पुस्तक के निम्नलिखित अंश को पढ़ें “ईश्वर ने औरत जाति को शारीरिक और भावनात्मक, दोनों ही तरह से ज्यादा नाजुक बनाया है, उन्हें आत्मरक्षा के भी योग्य नहीं बनाया है। इसलिए ईश्वर ने ही उन्हें जीवनभर पुरुषों के संरक्षण में रहने का भाग्य दिया है-कभी पिता के, कभी पति के और कभी पुत्र के। इसलिए महिलाओं को निराश होने की जगह इस बात से अनुगृहीत होना चाहिए कि वे अपने आपको पुरुषों की सेवा में समर्पित कर सकती हैं।” क्या इस अनुच्छेद में व्यक्त मूल्य संविधान के दर्शन से मेल खाते हैं या वे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं ?
उत्तर:
इस पाठ्यांश में व्यक्त मूल्य हमारे संविधान के मूल्यों को प्रदर्शित नहीं करते क्योकि हमारा संविधान पुरुष तथा महिला को प्रत्येक दृष्टि से समान मानता है। भारतीय संविधान में पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान किए गए हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। क्या आप उनसे सहमत हैं? अपने कारण भी बताइए।
(क) संविधान के नियमों की हैसियत किसी भी अन्य कानून के बराबर है।
(ख) संविधान बताता है कि शासन व्यवस्था के विविध अंगों का गठन किस तरह होगा।
(ग) नागरिकों के अधिकार और सरकार की सत्ता की सीमाओं का उल्लेख भी संविधान में स्पष्ट रूप में है।
(घ) संविधान संस्थाओं की चर्चा करता है, उसका मूल्यों से कुछ लेना-देना नहीं है।
उत्तर:
(क) यह कथन ठीक नहीं है, क्योंकि संवैधानिक नियम मौलिक नियम हैं, जबकि दूसरे अन्य नियमों की वैधानिकता इस आधार पर तय होती है कि वे संवैधानिक नियमों के अनुरूप हैं अथवा नहीं है।

(ख) यह कथन ठीक है, क्योंकि हमारे संविधान में सरकार के तीनों अंगों-विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के गठन तथा शक्ति की चर्चा की गई है।

(ग) यह कथन सही है, क्योंकि हमारे संविधान में नागरिकों को दिये गये विभिन्न अधिकारों और सरकार की सत्ता की सीमाओं का उल्लेख भी स्पष्ट रूप से है।

(घ) यह कथन गलत है, क्योंकि संविधान जिन मूल्यों पर आधारित है उनकी चर्चा संविधान की प्रस्तावना में की गई है तथा प्रस्तावना हमारे संविधान का हिस्सा है।

आइए, अखबार पढ़ें

प्रश्न 1.
संविधान संशोधन के किसी प्रस्ताव या किसी संशोधन की माँग से सम्बन्धित अखबारी खबरों को ध्यान से पढ़िए। आप किसी एक विषय पर, जैसे-संसद/विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण विषय पर छपी खबरों पर गौर कर सकते हैं। क्या इस सवाल पर कोई सार्वजनिक चर्चा हुई थी? संशोधन के पक्ष में क्या-क्या तर्क दिए गए हैं ? संविधान पर विभिन्न दलों की क्या प्रतिक्रिया थी? क्या यह संशोधन हो गया है?
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को शिक्षकों की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

JAC Class 9th Economics संसाधन के रूप में लोग InText Questions and Answers

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 17

प्रश्न 1.
चित्र 2.1 को देखकर क्या आप बता सकते हैं कि डॉक्टर, अध्यापक, इंजीनियर तथा दर्जी अर्थव्यवस्था के लिए किस प्रकार परिसम्पत्ति हैं?
उत्तर:
इस चित्र में डॉक्टर एक महिला को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहा है, इन सेवाओं से व्यक्ति के स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। अध्यापक पढ़ाकर लोगों को शिक्षित करने का कार्य करके उनके मानसिक कौशल में वृद्धि करता है। स्वस्थ व शिक्षित व्यक्ति कुल उत्पादकता की वृद्धि में सहयोग करता है। इंजीनियर विभिन्न प्रकार की मशीनों, इंजनों, सड़क एवं पुलों का निर्माण करता है जो अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देते हैं। दर्जी कपड़ों की सिलाई करते हैं एवं मरम्मत करते हैं। अतः ये चारों देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अपना पूर्ण सहयोग देते हैं इसीलिए इन्हें परिसम्पत्ति कहा जाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 18

प्रश्न 2.
क्या दोनों मित्रों के बीच आप कोई अन्तर पाते हैं? वे कौन-से अन्तर हैं ?
उत्तर:
हाँ, हम दोनों मित्रों सकल और विलास के मध्य अन्तर पाते हैं। ये अन्तर प्रमुख रूप से उनकी शिक्षा पर आधारित हैं। सकल के माता-पिता ने सकल को अच्छी शिक्षा दिलाई जिससे वह कम्प्यूटर इंजीनियर बना और कुल उत्पादकता में वृद्धि करके देश की संवृद्धि में योगदान दिया।

इसके विपरीत विलास को शिक्षा प्राप्त न होने के कारण तथा पारिवारिक स्थिति अच्छी न होने से वह गठिया से पीड़ित हुआ और वह कुछ न बन पाया और अपना पारम्परिक कार्य करने के लिए बाध्य हुआ। सकल हृष्ट-पुष्ट और स्वस्थ था जबकि विकल रोगी था। सकल नौकरी करता था जबकि विकल अपनी माँ की तरह मछलियाँ बेचकर अपना परिवार का भरण-पोषण बहुत कठिनाई से करता था।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 21

प्रश्न 3.
आरेख 2.1 का अध्ययन करें तथा निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दें
1. क्या 1951 से जनसंख्या की साक्षरता-दर बढ़ी है?
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग 1
उत्तर:
हाँ, 1951 से भारत में जनसंख्या की साक्षरता दर में वृद्धि हुई है।

2. किस वर्ष भारत में साक्षरता-दर सर्वाधिक रही?
उत्तर:
सन् 2011 में भारत की साक्षरता-दर सर्वाधिक रही।

3. भारत में पुरुषों की साक्षरता-दर अधिक क्यों है?
उत्तर:
भारत में पुरुष प्रधान समाज होने के कारण पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक सुविधाएँ दी जाती हैं एवं लिंग भेद के कारण पुरुषों की साक्षरता दर अधिक है।

4. पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ कम शिक्षित क्यों हैं?
उत्तर:
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की साक्षरता कम होने का प्रमुख कारण लिंग भेद और भारतीय समाज का पुरुष प्रधान होना है।

5. आप भारत में लोगों की साक्षरता दर का परिकलन कैसे करेंगे?
उत्तर:
भारत में लोगों की साक्षरता दर का परिकलन जनगणना के आँकड़ों से किया जाता है जो प्रति 10 वर्ष के अन्तराल पर होती है। इस हेतु निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है। साक्षरता दर =
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग 3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 22

प्रश्न 4.
सारणी 2.1 की कक्षा में चर्चा करें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें
सारणी 2.1-उच्च शिक्षा के संस्थानों की संख्या, नामांकन तथा संकाय

वर्षमहाविद्यालयों की संख्याविश्वविद्यालयों की संख्याविद्यार्थीशिक्षाक
1950 – 50750302,63,00024,000
1990-917,34617749,25,0002,72,000
1998-9911,08923874,70,0003,42,000
2010-1133,0235231,86,70,0508,16,966
2012-1337,2046282,23,02,9389,25,396
2014-1540,7607112,65,85,43712,61,350
2015-1641,3387532,84,84,74614,38,000
2016-1742,3387952,94,47,15814,70,190
2017-1841,0128513,66,42,37812,84,957
2018-19_911__

1. क्या विद्यार्थियों की बढ़ती हुई संख्या को प्रवेश देने के लिए कॉलेजों की संख्या में वृद्धि पर्याप्त है?
उत्तर:
नहीं, विद्यार्थियों की बढ़ती हुई संख्या को प्रवेश देने के लिए कॉलेजों की संख्या में वृद्धि पर्याप्त नहीं है।

2. क्या आप सोचते हैं कि हमें विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ानी चाहिए?
उत्तर:
हाँ, हम सोचते हैं कि भारत में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ानी चाहिए।

3. वर्ष 1950-51 से वर्ष 1998-99 तक शिक्षकों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर:
वर्ष 1950-51 से वर्ष 1998-99 तक शिक्षकों की संख्या में 3,18,000 की वृद्धि हुई है।

4. भावी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के बारे में आपका क्या विचार है?
उत्तर:
भावी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जहाँ छात्रों को बहुत-सी सुविधाएँ प्राप्त नहीं हैं वहाँ उन सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाए तथा व्यावसायिक महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने की अति आवश्यकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 24

प्रश्न 5.
दी गयी सारणी 2.2 को पढ़ें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें सारणी 2.2 सम्बन्धित वर्षों की स्वास्थ्य आधारिक संरचना विवरण
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग 2
ए. एन. एम. ऑक्लरी नर्स हाईड्राइड्स आर. एन. एण्ड आर. एम. रजिस्टर्ड नर्सेस एंड रजिस्टर्ड मिडवाइव्स एल. एच. वी. लेडी हेल्थ विजीटर्स। स्रोत : राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2013, 2014, 2015, 2016, 2017, 2018 केन्द्रीय स्वास्थ्य गुप्तचर ब्यूरो, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय।

प्रश्न 1.
2013 से 2017 तक औषधालयों की संख्या में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है?
उत्तर:
2013 से 2017 तक औषधालयों की संख्या में 8.09% की वृद्धि हुई है।

प्रश्न 2.
2013 से 2017 तक डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है ?
उत्तर:
2013 से 2017 तक भारतीय चिकित्सा परिषद में पंजीकृत डॉक्टरों में सारणी के अनुसार 60.13% की कमी आयी है तथा नर्सिंगकर्मियों की संख्या में 22.78% की वृद्धि हुई है। |

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 25

प्रश्न 3.
क्या आपको लगता है कि डॉक्टरों और नौं की संख्या में वृद्धि पर्याप्त है? यदि नहीं, तो क्यों?
उत्तर:
हमें यह नहीं लगता कि डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों की संख्या में हुई वृद्धि पर्याप्त है क्योंकि आज भी अस्पतालों औषधालयों में मरीजों की भीड़ लगी रहती है जिन्हें डॉक्टरों व नर्सिंगकर्मियों की अनुपलब्धता के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

प्रश्न 4.
किसी अस्पताल में आप और कौन-सी सुविधाएँ उपलब्ध कराना चाहेंगे?
उत्तर:
देश के प्रत्येक अस्पताल में समस्त बीमारियों से सम्बन्धित डॉक्टरों की उपस्थिति हो जो नागरिकों को स्वस्थ करने में मदद करें तथा प्रत्येक अस्पताल में सभी बुनियादी चिकित्सा उपकरण होने चाहिए ताकि किसी मरीज को डॉक्टर यह कहकर अन्यत्र भेजने की कोशिश न करें कि उक्त सुविधा यहाँ उपलब्ध नहीं है।

JAC Class 9th Economics संसाधन के रूप में लोग Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘संसाधन के रूप में लोग’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
‘संसाधन के रूप में लोग’ से तात्पर्य देश की कार्यशील जनसंख्या के कौशल एवं योग्यताओं से है। संसाधन के रूप में लोग सकल राष्ट्रीय उत्पाद के विकास में अपना सर्वोत्तम योगदान देते हैं। किसी भी देश का आर्थिक विकास जनसंख्या के आकार पर उतना निर्भर नहीं करता जितना कि वहाँ रहने वाले निवासियों के कौशल, तकनीकी दक्षता एवं स्वास्थ्य आदि पर निर्भर करता है। इस संसाधन को मानव संसाधन कहा जाता है।

प्रश्न 2.
मानव संसाधन भूमि और भौतिक पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
मानव संसाधन भूमि और भौतिक पूँजी जैसे अन्य संसाधनों से भिन्न है क्योंकि मानवीय संसाधन ही उत्पादन के अन्य संसाधनों का उपयोग करके उत्पादन की क्रिया को सरल बनाते हैं। मानवीय संसाधन के अभाव में उत्पादन के दूसरे संसाधन अनुपयोगी हैं।

प्रश्न 3.
मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका है?
उत्तर:
शिक्षा के द्वारा मनुष्य की कुल उत्पादक क्षमता में वृद्धि होती है जिससे उसकी आय बढ़ती है। जब लोगों की आय में वृद्धि होती है तो मानव पूँजी निर्माण में वृद्धि होती है जिससे न केवल जनसंख्या के जीवन स्तर में सुधार आता है बल्कि देश की कुल आय में भी वृद्धि होती है। इससे स्पष्ट होता है कि मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा की अहम् भूमिका है।

प्रश्न 4.
मानव पूँजी निर्माण में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?
उत्तर:
जिस प्रकार शिक्षा के द्वारा जनसंख्या की उत्पादकता में वृद्धि होती है, ठीक उसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं के द्वारा जनसंख्या की उत्पादकता में वृद्धि होती है क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति ही अपने पूर्ण मनोयोग से उत्पादन कार्यों को रुचि के साथ पूरा कर सकता है। यदि व्यक्ति अस्वस्थ है तो उसका मन कार्य में नहीं लग पाता है और इसके कारण उत्पादन प्रभावित होता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य की क्या भूमिका है?
उत्तर:
किसी व्यक्ति के कामयाब जीवन में स्वास्थ्य की बहुत बड़ी भूमिका होती है क्योंकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य व ज्ञान के आधार पर ही सफलता प्राप्त करता है। वह किसी क्षेत्र का विशेषज्ञ है लेकिन स्वस्थ नहीं है तो उसे सफलता नहीं मिल सकती। क्योंकि हर नियोक्ता अपने यहाँ स्वस्थ लोगों की ही नियुक्ति करता है, अस्वस्थ व्यक्ति की नहीं और कहा भी जाता है कि “एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।”

प्रश्न 6.
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में किस तरह की विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती हैं?
उत्तर:
मानवीय क्रियाकलापों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में विभाजित किया गया है, इन क्षेत्रकों में निम्नलिखित आर्थिक क्रियाएँ संचालित की जाती हैं

  1. प्राथमिक क्षेत्रक के अन्तर्गत वानिकी, कृषि, मत्स्य-पालन, पशुपालन, मुर्गीपालन और खनन जैसी आर्थिक क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है।
  2. द्वितीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत उत्खनन और विनिर्माण से सम्बन्धित क्रियाएँ होती हैं।
  3. तृतीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की सेवाओं, जैसे-व्यापार, संचार, परिवहन, बीमा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन को शामिल किया गया है।

प्रश्न 7.
आर्थिक और गैर-आर्थिक क्रियाओं में क्या अन्तर है?
उत्तर:
आर्थिक क्रियाओं में मानव द्वारा लाभ या वेतन के उद्देश्य से की गई समस्त क्रियाओं को शामिल किया जाता है, जैसे मानव द्वारा पारिश्रमिक भुगतान के लिए सरकारी या प्राइवेट सेवाएँ प्रदान करना अथवा उत्पादन से सम्बन्धित क्रियाएँ करना। जबकि गैर आर्थिक क्रियाओं में मानव की वे समस्त क्रियाएँ शामिल होती हैं जिन्हें वह स्व-उपभोग के लिए करता है अथवा जिनका उद्देश्य लाभ अर्जित करना नहीं होता है, जैसे-एक गृहिणी द्वारा घर में सभी कार्यों को पूरा करना।

प्रश्न 8.
महिलाएँ क्यों निम्न वेतन वाले कार्यों में नियोजित होती हैं?
उत्तर:
महिलाएँ समाज में आज भी उपेक्षित हैं उन्हें न तो पुरुष वर्ग की भाँति शिक्षा और प्रशिक्षण और न ही स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हैं तथा नियोक्ताओं का भी यह मानना है कि महिलाएँ शारीरिक रूप से पुरुषों की अपेक्षा कमजोर होती हैं। अतः वे उत्पादन में पुरुषों की बराबरी नहीं कर पातीं इसीलिए उन्हें निम्न वेतन वाले कार्यों में नियोजन प्राप्त होता है, लेकिन जैसे-जैसे महिलाएँ शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं उन्हें उच्च वेतन वाले कार्यों पर भी नियोजन प्राप्त होने लगा है।

प्रश्न 9.
‘बेरोजगारी’ शब्द की आप कैसे व्याख्या करेंगे?
उत्तर;
‘बेरोजगारी’ का आशय उस स्थिति से है जब व्यक्ति प्रचलित पारिश्रमिक पर काम करने को तैयार होता है लेकिन उसे कार्य नहीं मिलता है। अर्थात् वह निठल्ला (बेरोजगार) रहता है या उसके द्वारा किए गए कार्य से उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

प्रश्न 10.
प्रच्छन्न और मौसमी बेरोजगारी में क्या अन्तर है?
उत्तर:
प्रच्छन्न बेरोजगारी वह स्थिति है जबकि व्यक्ति काम में लगा हुआ तो प्रतीत होता है लेकिन उसके कार्य से उत्पादन में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होती अर्थात् आय में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होती। ऐसी बेरोजगारी कृषि क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है। इसके विपरीत मौसमी बेरोजगारी वह होती है जब लोगों को वर्ष के कुछ महीनों में तो काम मिलता है और शेष महीनों में वे कोई कार्य नहीं करते। इस प्रकार की बेरोजगारी कृषि क्षेत्रों व मौसम के आधार पर व्यापार करने वाले लोगों में अधिक दिखाई देती है।

प्रश्न 11.
शिक्षित बेरोजगारी भारत के लिए एक विशेष समस्या क्यों है?
उत्तर:
शिक्षित बेरोजगारी आज भारत के लिए एक विशेष समस्या बन गई है क्योंकि शिक्षा पूरी करने के बाद या तो लोग प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर पाने के कारण बेरोजगार हैं या फिर किसी क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक लोग शिक्षित और प्रशिक्षित हैं तथा दूसरे क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की कमी है। शिक्षित बेरोजगारी बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण भी एक समस्या है क्योंकि जिस तेजी से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है उस तेजी से रोजगार के अवसर सृजित नहीं हो पा रहे हैं।

प्रश्न 12.
आपके विचार से भारत किस क्षेत्रक में रोजगार के सर्वाधिक अवसर सृजित कर सकता है?
उत्तर:
हमारे विचार से भारत में तृतीयक क्षेत्र जिसमें विभिन्न प्रकार की सेवाएँ लोगों को प्रदान की जाती हैं, उसमें रोजगार के सर्वाधिक अवसर सृजित कर सकता है।

प्रश्न 13.
क्या आप शिक्षा प्रणाली में शिक्षित बेरोजगारों की समस्या दूर करने के लिए कुछ उपाय सुझा सकते हैं?
उत्तर:
शिक्षित बेरोजगारों की समस्या दूर करने के लिए विभिन्न व्यवसायों के संचालन और कुछ उत्पादन प्रणालियों की जानकारी को पाठ्यक्रमों में शामिल करके इस समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। दूसरे, एक निश्चित शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद इस प्रकार की व्यवस्था हो जहाँ से जिन क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की कमी या अधिकता है इसकी जानकारी लोगों को प्राप्त हो तब शिक्षित लोग कमी वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त करें तब ही इस समस्या से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 2 संसाधन के रूप में लोग

प्रश्न 14.
क्या आप कुछ ऐसे गाँवों की कल्पना कर सकते हैं जहाँ पहले रोजगार का कोई अवसर नहीं था लेकिन बाद में बहुतायत में हो गया?
उत्तर:
हाँ, ऐसे एक नहीं बहुत से गाँव भारत में देखने को मिल जायेंगे जहाँ पहले रोजगार के कोई अवसर नहीं थे लेकिन सरकार द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के प्रयासों से कुछ ने अपने बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएँ दिलायीं और इन शिक्षित-प्रशिक्षित व हृष्ट-पुष्ट नौजवानों ने अपने गाँव की काया पलट करने के लिए गाँव में ही अपने प्रशिक्षण का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर सृजित किए। जैसे कम्प्यूटर केन्द्र में विभिन्न लोगों को रोजगार मिला, सिलाई कार्य, शिक्षा के क्षेत्र में व एग्रो-इंजीनियरिंग क्षेत्रों के तहत नये-नये रोजगार के अवसर सृजित हुए।

प्रश्न 15.
किस पूँजी को आप सबसे अच्छा मानते हैं-भूमि, श्रम, भौतिक पूँजी और मानव पूँजी? क्यों?
उत्तर:
मानव पूँजी को हम सबसे अच्छा मानते हैं क्योंकि मानव पूँजी के माध्यम से ही भूमि, श्रम एवं भौतिक पूँजी का कुशलतम उपयोग किया जाता है। परन्तु भूमि और भौतिक पूँजी स्वयं कुछ नहीं कर सकती।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

JAC Board Class 10th Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

बहुविकल्पीय

प्रश्न 1.
निम्न में से सही विकल्प को चुनिएस्तम्भ A स्तम्भ B

AB
(क) पंजाब के समृद्ध किसान(i) काम करने के अधिक दिन तथा बेहतर मजदूरी
(ख) भूमिहीन ग्रामीण मजदूर(ii) सिंचाई के लिए अतिरिक्त साधनों की उपलब्धता
(ग) किसान जो खेती के लिए केवल वर्षा पर निर्भर हैं।(iii) किसानों को उनकी उपज के लिए ज्यादा समर्थन मूल्य
(घ) शहर के अमीर परिवार की एक लड़की(iv) उसे अपने भाई के समान आजादी मिलती है।

उत्तर:
(घ) शहर के अमीर परिवार की एक लड़की – (iv) उसे अपने भाई के समान आजादी मिलती है।

2. अगर आपको कहीं दूर-दराज के इलाके में नौकरी मिलती है, तो उसे स्वीकार करने से पहले आप आय के अतिरिक्त कौन से कारक पर विचार करेंगे
(क) परिवार के लिए सुविधाएँ
(ख) काम करने का वातावरण
(ग) सीखने के अवसर
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

3. देशों की तुलना करने के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण विशिष्टता समझी जाती है
(क) आय
(ख) व्यय
(ग) व्यवहार
(घ) अनैतिकता
उत्तर:
(क) आय

4. औसत आय को कहा जाता है
(क) प्रतिव्यक्ति आय
(ख) राष्ट्रीय आय
(ग) सकल राष्ट्रीय उत्पाद
(घ) सकल राष्ट्रीय आय
उत्तर:
(क) प्रतिव्यक्ति आय

5. निम्न में से कौन-सा कथन तीन स्तरों के लिए सकल नामांकन अनुपात दर्शाता है
(क) प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल और उससे आगे उच्च शिक्षा के नामांकन अनुपात का कुल योग
(ख) 10-14 वर्ष के बच्चों की साक्षरता दर।
(ग) 10-14 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले ग्रामीण बच्चों का प्रतिशत
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(क) प्राथमिक स्कूल, माध्यमिक स्कूल और उससे आगे उच्च शिक्षा के नामांकन अनुपात का कुल योग

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

6. निम्न में से कौन-सा संगठन मानव विकास रिपोर्ट तैयार करता है
(क) सार्क
(ख) विश्व बैंक
(ग) यू. एन. डी. पी.
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) सार्क

रिक्त स्थान

निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति ही ……….. आकांक्षाओं की पूर्ति ही…………………के लक्ष्य है।
उत्तर:
विकास,

2. विभिन्न देशों की तुलना करने का प्रमुख आधार उन देशों की…………….से होती है।
उत्तर:
आय,

3. देशों का विकास के आधार पर वर्गीकरण करते समय……………मापदण्ड का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर:
प्रतिव्यक्ति आय,

4. सात वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात…………..कहलाता है।
उत्तर:
साक्षारता दर।

अतिलयूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आज के विश्व में हम अपनी आशाओं एवं सम्भावनाओं को वास्तविक जीवन में किस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
लोकतान्त्रिक राजनीतिक प्रक्रिया द्वारा हम अपनी आशाओं को वास्तविक जीवन में प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
भूमिहीन ग्रामीण मजदूरों के किन्हीं दो विकास के लक्ष्य एवं आकांक्षाओं को बताइए।
उत्तर:

  1. काम करने के अंधिक दिन
  2. बेहतर मजदूरी।

प्रश्न 3.
लोगों द्वारा इच्छित आर्थिक लक्ष्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. नियमित काम
  2. बेहतर मजदूरी
  3. अपनी उपज एवं अन्य उत्पादों के लिए अच्छी कीमतें।

प्रश्न 4.
लोगों द्वारा इच्छित सामाजिक लक्ष्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. समान व्यवहार
  2. स्वतन्त्रता,
  3. सुरक्षा
  4. अन्य लोगों द्वारा सम्मान।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 5.
विकास किसे कहते हैं?
उत्तर:
विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होने के साथ-साथ असमानता, निर्धनता एवं निरक्षरता में कमी भी हो अर्थात् लोगों के आर्थिक जीवन में सुधार हो एवं उनका जीवन स्तर ऊँचा हो।

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय आय को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी समयावधि में एक अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं में कुल प्रवाह का मौद्रिक मूल्य राष्ट्रीय आय कहलाता है।

प्रश्न 7.
प्रतिव्यक्ति आय को परिभाषित कीजिए।
अथवा
औसत आय क्या है?
अथवा
प्रतिव्यक्ति आय का तात्पर्य लिखिए।
उत्तर:
जब देश की कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाला जाता है तो उसे प्रतिव्यक्ति आय या औसत आय कहते हैं।
JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास 1 2

प्रश्न 8.
जिन देशों की आय अधिक है उन्हें कम आय वाले देशों से अधिक विकसित क्यों समझा जाता है ?
उत्तर:
क्योंकि अधिक आय का अर्थ है- मानवीय आवश्यकता की सभी वस्तुओं का अधिक होना।

प्रश्न 9.
कौन-सा विकास का अधिक उपयुक्त मापदण्ड है?
अथवा
दो या अधिक देशों के विकास की तुलना का उपयुक्त माप क्या है?
उत्तर:
प्रतिव्यक्ति आय विकास का अधिक उपयुक्त मापदण्ड है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 10.
औसत आय के अतिरिक्त विकास के अन्य दो प्रमुख मापदण्ड क्या हैं?
उत्तर:

  1. शिशु मृत्यु दर
  2. साक्षरता।

प्रश्न 11.
अधिक आय को अपने आप में जीवन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य क्यों समझा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि आय (मुद्रा) से ही लोग अपनी अधि कांश आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं।

प्रश्न 12.
आय के अतिरिक्त विकास को जानने के और कौन-कौन से मापदण्ड हैं?
उत्तर:

  1. अच्छा व्यवहार
  2. समानता
  3. स्वतन्त्रता
  4. सुरक्षा।

प्रश्न 13.
‘भारत में शिशु मृत्यु-दर’ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी वर्ष में पैदा हुए 1000 जीवित बंच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्च्वों का अनुपात शिशु मृत्यु दर कहलाता है।

प्रश्न 14.
साक्षरता दर शब्द को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
7 वर्ष और उससे ज्यादा आयु के व्यक्तियों में साक्षर जनसंख्या के अनुपात को साक्षरता दर कहते हैं।

प्रश्न 15.
केरल में शिशु मृत्यु दर कम क्यों है?
अथवा
केरल में शिशु मृत्यु दर कम होने के कारण बताइए।
उत्तर:
क्योंकि केरल में स्वास्थ्य और शिक्षा की भौतिक सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 16.
“यह आवश्यक नहीं कि जेब में रखा रुपया वे सब वस्तुएँ एवं सेवाएँ खरीद सके, जिनकी आपको एक बेहतर जीवन के लिए आवश्यकता हो सकती है।” ऐसी दो आवश्यकताएँ बताइए जो रुपयों से खरीदी नहीं जा सकती हैं।
उत्तर:

  1. प्रदूषण रहित वातावरण एवं
  2. बिना मिलावट वाले खाद्य पदार्थ

प्रश्न 17.
निम्नलिखित के पूरे नाम लिखिए-
1. एच. डी. आर. (H.D.R.),
2. बी. प्म. आई. (B.M.I.),
3. यू. एन. डी. पी. (U.N.D.P.)
4. एच. डी. आई. (H.D.I.)
उत्तर:

  1. मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report),
  2. शरीर द्रव्यमान सूचकांक (Body Mass Index),
  3. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United National Development Programme)
  4. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index)

प्रश्न 18.
शरीर द्रव्यमान सूचकांक को कैसे माप सकते हैं?
उत्तर:
व्यक्ति के भार को उसकी लम्बाई के वर्ग से भाग देकर शरीर द्रव्यमान सूचकांक निकाला जाता है।

प्रश्न 19.
मानव विकास सूचकांक के किन्हीं दो सूचकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. स्वास्थ्य स्थिति
  2. शिक्षा का स्तर।

प्रश्न 20.
भारत में 2017 में जन्म के समय सम्भावित आयु क्या है? आयु क्या है?
उत्तर:
68.8वर्ष

प्रश्न 21.
जन्म के समय सम्भावित आयु क्या दर्शाती है?
उत्तर:
जन्म के समय सम्भावित आयु व्यक्ति की जन्म के समय औसत आयु की सम्भावना को दर्शाती है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 22.
मानव विकास सूचकांक में भारत की कौन-सी स्थिति है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक में भारत 130 वें स्थान पर है।

प्रश्न 23.
धारणीय आर्थिक विकास क्या है?
उत्तर:
बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये आर्थिक विकास को आगे बढ़ना धारणीय आर्थिक विकास कहलाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA1)

प्रश्न 1.
विकास की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
विकास की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. अलग-अलग लोगों के विकास के लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं।
  2. एक व्यक्ति के लिए जो विकास है, हो सकता है वह दूसरे व्यक्ति के लिए विकास न हो। दूसरे के लिए वह विनाशकारी भी हो सकता है।
  3. विकास के लिए सब लोग मिले-जुले लक्ष्यों को देखते हैं।
  4. विकास का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है-आय, परन्तु ज़्यादा आय चाहने के अतिरिक्त लोग बराबरी का व्यवहार, स्वतन्त्रता, सुरक्षा एवं दूसरों से आदर मिलने की इच्छा भी रखते हैं।

प्रश्न 2.
विकास के अन्तर्गत सामान्यतः सभी व्यक्ति किन-किन लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहते हैं?
अथवा
आय के अतिरिक्त विकास के किन्हीं दो लक्ष्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
विकास के अन्तर्गत सामान्यतः सभी व्यक्ति अपनी आय को अधिक से अधिक करना चाहते हैं। साथ ही लोग समानता का व्यवहार, स्वतंत्रता, सुरक्षा एवं दूसरों से आदर मिलने की इच्छा भी रखते हैं। हमारा बेहतर जीवन कई भौतिक एवं अभौतिक वस्तुओं पर निर्भर करता है।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 3.
देशों के बीच तुलना करने के लिए कुल आय अधिक उपयुक्त माप नहीं है। क्यों?
उत्तर:
देशों के बीच तुलना करने के लिए कुल आय अधिक उपयुक्त माप नहीं है क्योंकि देशों की जनसंख्या अलग-अलग होती है। कुल आय की तुलना करने से हमें यह ज्ञात नहीं होता है कि औसत व्यक्ति क्या कमा सकता है? क्या एक देश के लोग दूसरे देश के लोगों से बेहतर हैं? इसलिए हम औसत आय की तुलना करते हैं जो कि देश की कुल आय में कुल जनसंख्या का भाग देकर निकाली जाती है।

प्रश्न 4.
“धन उन सभी वस्तुओं और सेवाओं को नहीं खरीद सकता जिससे व्यक्ति बेहतर जीवन बिता सके।” उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह सत्य है कि धन उन सभी वस्तुओं और सेवाओं को नहीं खरीद सकता जिससे व्यक्ति बेहतर जीवन बिता सके। उदाहरण के रूप में; धन प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकता, धन बिना मिलावट की वस्तुएँ नहीं दिला सकता, धन संक्रामक बीमारियों से नहीं बचा सकता। इसके अतिरिक्त धन शांति नहीं खरीद सकता।

लयूत्तरात्मक प्रश्न (SA2)

प्रश्न 1.
“एक के लिए जो विकास है वह दूसरे के लिए विकास न भी हो।” उक्त कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कथन सत्य है कि एक के लिए जो विकास है वह दूसरे के लिए विकास नहीं भी हो सकता है। यह निम्न उदाहरणों से स्पष्ट है

  1. अधिक मजदूरी अर्थात् एक श्रमिक के लिए विकास परन्तु यह एक उद्योगपति के लिए ठीक नहीं हो सकता।
  2. एक धनिक किसान अथवा व्यापारी अपने खाद्यान्न ऊँची कीमतों पर बेचना चाहता है परन्तु एक गरीब किसान उसे कम कीमत पर खरीदना चाहता है।
  3. बिजली अधिक प्राप्त करने के लिए उद्योगपति अधिक बाँधों का निर्माण चाह सकते हैं परन्तु इससे कृषि भूमि में कमी आ सकती है जिससे लोगों के जीवन में संकट आ सकता है।
  4. बाँध के निर्माण से सस्ती एवं अधिक ऊर्जा मिलती है। परन्तु जिन लोगों को इसके निर्माण से बेघर होना पड़ता है वे विद्रोह पर उतारू हो जाते हैं, जैसे आदिवासी।

प्रश्न 2.
“विकास के लिए लोग मिले-जुले लक्ष्यों को देखते हैं।” कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विकास एक प्रक्रिया है जिसमें प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होने के साथ-साथ समानता, निर्धनता एवं निरक्षरता में कमी भी हो अर्थात् लोगों के आर्थिक जीवन में सुधार हो एवं उनका जीवन-स्तर ऊँचा हो। विकास के लिए लोग मिले-जुले लक्ष्यों को देखते हैं। यह सत्य है कि यदि महिलाएँ वेतनभोगी कार्य करती हैं तो घर एवं समाज में उनके आदर व सम्मान में वृद्धि होती है।

यद्यपि यह भी सत्य है कि यदि महिलाओं के लिए आदर है तो घर में उनके कामकाज में अधिक से अधिक हाथ बँटाया जाएगा तथा घर से बाहर कार्य करने वाली महिलाओं को अधिक स्वीकार किया जाएगा। सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण के कारण अधिकाधिक महिलाएँ विभिन्न प्रकार की नौकरियाँ अथवा व्यापार कर सकती हैं इसलिए लोगों के विकास के लक्ष्य केवल अच्छी आमदनी से ही नहीं होते बल्कि जीवन में अन्य महत्त्वपूर्ण वस्तुओं के बारे में भी होते हैं।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय विकास क्या है? राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत किन-किन पक्षों को सम्मिलित किया गया है ?
उत्तर:
राष्ट्रीय विकास-किसी राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक विकास को राष्ट्रीय विकास के नाम से जाना जाता है।
राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत सम्मिलित विभिन्न पक्ष राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत निम्नलिखित पक्ष सम्मिलित हैं

  1. राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत सरकार यह निर्णय लेती है कि विकास का कौन-सा मार्ग न्यायसंगत व सही है।
  2. राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत केवल उन्हीं कार्यक्रमों एवं नीतियों को लागू किया जाता है, जिनसे अधिकतम लोगों को लाभ हो।
  3. राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत विचारों की भिन्नता एवं उनके समाधान के बारे में निर्णय लेना बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  4. राष्ट्रीय विकास के अन्तर्गत हमें यह भी सोचना होगा कि विकास का अन्य कोई बेहतर तरीका है।

प्रश्न 4.
“औसत आय अधिक होने पर भी हरियाणा का मानव विकास क्रमांक केरल से नीचे है। इसलिए मानव विकास के लिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिल्कुल नहीं है।” इस कथन के पक्ष में कोई तीन तर्क दीजिए।
उत्तर:
मानव विकास के लिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिल्कुल नहीं हैं। इस कथन के पक्ष में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत हैं
1. प्रायः
राज्यों की तुलना प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर की जाती है लेकिन प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर मानव विकास का सही माप नहीं किया जा सकता क्योंकि केवल प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर ही मानव विकास को ज्ञात नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्धनता व सामाजिक सुविधाएँ आदि भी मानव विकास के अन्य महत्त्वपूर्ण निर्धारक हैं।

2. मानव विकास क्रमांक और औसत आय के बीच सम्बन्ध किसी समरूपता को नहीं दर्शाता है।

3. आय अपने आप में उन भौतिक वस्तुओं व सेवाओं का एक पूर्ण व पर्याप्त सूचक नहीं है जो, नागरिक प्रयोग करने के लिए सक्षम होते हैं।

4. मुद्रा से वे समस्त वस्तुएँ व सेवाएँ नहीं खरीदी जा सकतीं जो अच्छे रहन सहन के लिए आवश्यक हो सकती हैं।

उदाहरणस्वरूप: आपके पास उपलब्ध मुद्रा से आप प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकते। अतः औसत आय अधिक होने पर भी हरियाणा का मानव विकास क्रमांक केरल से नीचे है क्योंकि केरल के पास हरियाणा की तुलना में अन्य सुविधाएँ, जैसे-अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ, अधिक साक्षरता आदि उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त हरियाणा की तुलना में केरल में प्राथमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों की निवल उपस्थिति अनुपात अधिक है।

प्रश्न 5.
औसत आय किस प्रकार ज्ञात की जाती है? तथा उन सूचकों को सूचीबद्ध कीजिए जिनके आधार पर मानव विकास सूचकांक बनाया जाता है।
अथवा
‘मानव विकास सूचकांक’ के तीन घटकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
औसत आय: किसी देश की कुल आय में उसकी कुल जनसंख्या का भाग देकर औसत आय प्राप्त की जाती है। मानव विकास के सूचकों की सूची जनसंख्या का सम्बन्ध उपलब्ध संसाधनों के साथ-साथ प्राथमिक सुविधाओं, जैसे-स्वास्थ्य व शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक एवं राजनैतिक दशाओं से भी होता है। ये सभी स्थितियाँ जनसंख्या तथा जीवनयापन के साधनों के बीच संतुलन बनाये रखने के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। इस संतुलन को बनाये रखने एवं जीवन-स्तर में प्रगति ही मानव विकास है। मानव विकास के सूचक निम्नलिखित हैं

  1. जीवन काल: जिसकी माप जन्म के समय जीवन की प्रत्याशा से की जाती है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक बच्चा अपने जन्म से कितने वर्ष तक जीवित रहेगा।
  2. शैक्षिक स्तर: जिसे प्रौढ़ साक्षर और प्राथमिक, माध्यमिक एवं उससे आगे की उच्च शिक्षा के सकल नामांक-अनुपात दोनों को जोड़कर मापा जाता है।
  3. प्रतिव्यक्ति आय: इसका उपयोग जीवन-स्तर को मापने में किया जाता है। प्रतिव्यक्ति आय की गणना सभी देशों के लिए डॉलर में की जाती है ताकि उसकी तुलना की जा सके।

JAC Class 10 Social Science Important Questions Economics Chapter 1 विकास

प्रश्न 6.
मानव विकास क्या है? मानव विकास सूचकांक का महत्व बताइए।
उत्तर:
मानव विकास स्वस्थ भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक स्वतंत्रता तक समस्त प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया मानव विकास कहलाती है।

दूसरे शब्दों में कहा जाये, तो मानव विकास लोगों की इच्छाओं एवं उनके जीवन स्तर में वृद्धि लाने की प्रक्रिया है ताकि वे एक उद्देश्यपूर्ण एवं सक्रिय जीवन जी सकें। मानव विकास सूचकांक मानव विकास के विविध आयामों के मापन के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा निर्धारित विभिन्न संकेतकों को मानव विकास सूचकांक कहा जाता है। इसका महत्त्व निम्नलिखित है

  1. यह देश के विकास के स्तर का संकेत देता है।
  2. इसके माध्यम से आर्थिक विकास के महत्त्वपूर्ण घटकों यथा-जीवन प्रत्याशा, शिक्षा-प्राप्ति का स्तर एवं वास्तविक प्रतिव्यक्ति आय की जानकारी मिलती है।
  3. यह विभिन्न देशों को संकेत देता है कि वे मानव विकास की दिशा में कितने अग्रसर हो चुके हैं एवं उन्हें कितना और आगे बढ़ना है।

प्रश्न 7.
आर्थिक विकास एवं मानव विकास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विकास एवं मानव विकास में निम्नलिखित अन्तर हैं आर्थिक विकास एक साधन है।

आर्थिक विकासमानव विकास
1. आर्थिक विकास, विकास का एक संकीर्ण पक्ष है क्योंकि इसमें केवल वित्तीय पक्ष को ही लिया जाता है।1. मानव विकास, विकास का व्यापक पक्ष है क्योंकि इसमें वित्तीय पक्ष के साथ-साथ गैर वित्तीय पक्षों को भी सम्मिलित किया जाता है।
2. इसके अन्तर्गत केवल मात्रात्मक विकास सम्मिलित होता है।2. इसके अन्तर्गत मात्रात्मक विकास के साथ-साथ गुणात्मक पक्ष भी सम्मिलित होता है।
3. आर्थिक विकास, मानव विकास को प्राप्त करने का एक साधन है।3. मानव विकास समस्त विकासों का अंतिम लक्ष्य है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकास क्या है? विकास के विभिन्न लक्ष्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा
आपकी दृष्टि में, विकास की धारणीयता के सन्दर्भ में हमारे लक्ष्य क्या होने चाहिए? समझाइए।
अथवा
आर्थिक विकास के कोई तीन लक्ष्य समझाइए।
उत्तर:
विकास-विकास एक प्रक्रिया है जिसमें प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि होने के साथ-साथ निर्धनता, असमानता, अशिक्षा एवं बीमारी में कमी भी हो अर्थात् लोगों के आर्थिक स्तर में सुधार हो एवं उनका जीवन-स्तर उच्च हो। विकास के विभिन्न लक्ष्य विकास के विभिन्न लक्ष्य निम्नलिखित हैं

1. आय में वृद्धि करना:
यह विकास का सबसे प्रमुख लक्ष्य है। आय में वृद्धि के फलस्वरूप लोग पहले की तुलना में अधिक अच्छे तरीके से अपना जीवनयापन कर सकते हैं। इसके अन्तर्गत राष्ट्रीय आय एवं प्रतिव्यक्ति आय दोनों में वृद्धि के लक्ष्य को सम्मिलित किया जाता है। आय में वृद्धि से लोगों के जीवन-स्तर में सुधार होता है।

2. काम करने के अधिक दिन एवं बेहतर मजदूरी विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण:
लक्ष्य यह है कि लोगों को काम करने के अधिक दिन उपलब्ध हों अर्थात् नियमित रूप से रोजगार की प्राप्ति हो। उन्हें नियमित रोजगार के साथ-साथ बेहतर मजदूरी भी प्राप्त हो ताकि वे अपना जीवनयापन अच्छे ढंग से कर सकें। लोगों को उनकी उपज का अधिक समर्थन मूल्य मिले।

3. शैक्षिक विकास विकास:
में शिक्षा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षित व्यक्ति अधिक कार्यकुशल एवं उत्पादक होता है। शिक्षा से व्यक्ति न केवल अपना विकास करता है वरन् राष्ट्र का भी विकास करता है। अतः विकास के अन्तर्गत देश में शैक्षिक सुविधाओं का विकास किया जाना भी एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है।

4. समानता का व्यवहार:
विकास के अन्तर्गत सभी लोगों के साथ समानता का व्यवहार किया जाना चाहिए। समानता के अन्तर्गत आर्थिक समानता के साथ-साथ सामाजिक व राजनैतिक समानता को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।

5. सुरक्षा:
किसी भी राष्ट्र का विकास इस प्रकार होना चाहिए कि उसमें निवास करने वाले समस्त समुदायों के लोग अपने आपको सुरक्षित समझें।

6. स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार:
विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण लक्ष्य यह है कि देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का पर्याप्त विकास एवं विस्तार किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से देश में उत्पादन एवं आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

7. सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार:
किसी भी देश के विकास का एक अन्य महत्त्वपूर्ण लक्ष्य यह होता हैं कि देश में सार्वजनिक सुविधाओं का पर्याप्त विस्तार होना चाहिए, जिससे कि लोगों की सामूहिक आवश्यकताओं को पूरा किया जाना सुनिश्चित हो सके।

JAC Class 10 Social Science Important Questions

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

JAC Class 9th Civics लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? InText Questions and Answers 

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में विभिन्न पृष्ठों पर लड़के/लड़की के कार्टून चित्रों के नीचे अथवा ‘खुद करें-खुद सीखें’ शीर्षक से बॉक्स में अथवा ‘कार्टून बूझे’ शीर्षक के नीचे अथवा ‘कहाँ पहुँचे? क्या समझे?’ शीर्षक से बॉक्स में प्रश्न दिए हुए हैं। इन प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 3

प्रश्न 1.
आइए लिंगदोह मैडम की बात को गंभीरता से लें और कलम, बारिश और प्रेम जैसे सदा प्रयोग होने वाले साधारण शब्दों की ठीक-ठीक परिभाषा लिखने की कोशिश करें। जैसे, क्या कलम की कोई स्पष्ट परिभाषा है जो उसे पेंसिल, बुश, हाइलाइटर या मार्कर से अलग बताती हो ?
उत्तर:
पेन स्याही से चलने वाला एक ऐसा उपकरण है जिसके निब या प्वांइट के निर्माण में किसी-न-किसी धातु का प्रयोग किया जाता है, किन्तु अन्य दिए गए उपकरणों पर यह बात लागू नहीं होती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 2.
इस प्रयोग से आपने क्या सीखा?
उत्तर:
इस प्रयोग से हमने सीखा कि प्रत्येक वस्तु की अपनी खास विशेषता और पहचान होती है, जिसके आधार पर उसे अन्य दूसरी वस्तुओं से अलग किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
लोकतन्त्र का अर्थ समझने में इस अनुभव ने हमें क्या-क्या सिखाया?
उत्तर:
लोकतन्त्र को समझने में इस अनुभव से हमें शिक्षा मिलती है कि उसे उसके खास लक्षण या विशेषताओं के आधार पर सरकार के अन्य रूपों से अलग किया जा सकता है। यही लक्षण लोकतन्त्र की पहचान है।

प्रश्न 4.
मैंने तो यह भी सुना है कि लोकतन्त्र एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ लोक पर तंत्र हावी रहता है। इसके बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर:
वास्तव में लोकतन्त्र जनता का, जनता द्वारा तथा जनता के लिए एक शासन पद्धति है। क्योंकि यह जनता की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह कहना गलत है कि लोकतन्त्र एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ लोक पर तंत्र हावी रहता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 5.
रिबियांग स्कूल से घर गई और उसने लोकतन्त्र के बारे में कुछ अन्य प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों को जमा किया। इस बार उसने इन उक्तियों को कहने या लिखने वाले के नाम का उपयोग नहीं किया। वह चाहती है कि आप भी इन्हें पढ़ें और बताएँ कि ये उक्तियाँ कितनी अच्छी या उपयोगी हैं?
1. लोकतन्त्र हर व्यक्ति को अपना शोषक आप बन जाने का अधिकार देता है।
2. लोकतन्त्र का मतलब है अपने तानाशाहों का चुनाव करना पर उनके मुँह से अपनी इच्छा की बातें सुनने के बाद।
3. व्यक्ति की न्यायप्रियता लोकतंत्र को सम्भव बनाती है, लेकिन अन्याय के प्रति व्यक्ति का रुझान लोकतन्त्र को जरूरी बनाता है।
4. लोकतन्त्र शासन का ऐसा तरीका है जो सुनिश्चित करता है कि हम जैसी सरकार के लायक हैं वैसी सरकार ही हम पर शासन करे।
5. लोकतन्त्र की सारी बुराइयों को और अधिक लोकतन्त्र से ही दूर किया जा सकता है।
उत्तर:
1. यह विचार एक सीमा तक सही भी है कि हम जिस प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं वही हमारा शोषण करता है, किन्तु इसमें लोकतन्त्र का दोष नहीं है, व्यक्ति का दोष होता है जो लोगों की उन भावनाओं की कद्र नहीं करते हैं जिसके कारण लोगों ने उनका चुनाव किया है। यह वास्तव में लोकतांत्रिक पद्धति का दुरुपयोग है।

2. यदि हम वर्तमान संदर्भ में देखें तो यह विचार हमारी व्यवस्था पर व्यावहारिक रूप से लागू हो रहा है। जिन लोगों को हम चुनकर प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजते हैं, वे हमारी समस्या को भूलकर अपने लाभ की सोचते हैं लेकिन यह लोकतान्त्रिक सिद्धान्तों के विपरीत है। ऐसे विचारों की लोकतन्त्र अथवा समाज में कोई उपयोगिता नहीं है। हमें अपने प्रतिनिधि सोच-समझ कर चुनने चाहिए।

3. लोकतन्त्र की माँग है कि शासक वर्ग में न्याय करने की क्षमता हो। यदि जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं के साथ न्याय नहीं कर पाएँ तो लोकतन्त्र का कोई अर्थ नहीं रह जाता। अन्याय को रोकना लोकतन्त्र की जरूरत है। सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक अन्याय को लोकतान्त्रिक ढाँचे के तहत प्रभावी रूप से दूर किया जा सकता है। अतः इस विचार की उपयोगिता बहुत अधिक है।

4. यह विचार कुछ हद तक ठीक है कि जनता जैसी होती है सरकार भी वैसी ही होती है। हम जैसे होते हैं हमारे विचार भी वैसे होते हैं। किन्तु लोकतन्त्र एक ऐसी पद्धति है जिसमें यदि विकल्प उपलब्ध हों तो हम अपने से बेहतर लोगों को अपने प्रतिनिधित्व का मौका दे सकते हैं। वर्तमान संदर्भ में इस विचार की उपयोगिता बहुत अधिक है।

5. हम जितने अधिक लोकतान्त्रिक होते हैं, लोगों की सहभागिता तथा शासन की पारदर्शिता उतनी ही अधिक होती जाती है। लोगों की बढ़ती सहमति से संघर्ष की संभावना उतनी ही कम होती जाती है तथा देश में शांति आ जाती है। यह शांति और समृद्धि की ओर ले जाती है। अत: इस विचार की बहुत अधिक उपयोगिता है। |

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 4

प्रश्न 6.
इराक में अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों की उपस्थिति में हुए चुनाव के समय यह कार्टून बना था। यह कार्टून क्या कहता है? इसमें डेमोक्रेसी’ को इस तरह क्यों लिखा गया है?
उत्तर:
इस कार्टून के द्वारा यह बताने की कोशिश की गई है कि अमेरिकी सैनिक, इराकी शासन व्यवस्था को सुधारकर वहाँ लोकतन्त्र स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें ‘डेमोक्रेसी’ को इस तरह से इसलिए लिखा गया है क्योंकि कार्टून के द्वारा यह बताया जा रहा है कि इराक में अभी पूरी तरह से लोकतन्त्र मजबूत नहीं हुआ है। अब इसे उठाया जा रहा है एवं उसे खड़ा होने में अभी समय लगेगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 5

प्रश्न 7.
सीरिया पश्चिम एशिया का एक छोटा-सा देश है। शासक बाथ पार्टी और उसकी कुछ सहयोगी पार्टियों को ही देश में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति है। क्या इस कार्टून को चीन और मैक्सिको पर भी लाग किया जा सकता है? लोकतन्त्र के माथे पर पत्तों से बने ताज का क्या महत्व है?
उत्तर:
हाँ, इस कार्टून को चीन तथा मैक्सिको जैसे देशों पर भी लागू किया जा सकता है क्योंकि इन देशों में भी एक दल की सरकार है। केवल एक विशेष राजनीतिक पार्टी ही यहाँ शासन करती है।
अन्य दलों को राजनीतिक स्वीकृति प्राप्त नहीं है। पत्तों से बने ताज से यह पता चलता है कि जिस तरह एक ही शाखा में कई पत्तियाँ हैं, उसी तरह एक ही राजनीतिक दल अपने कई सहयोगी दलों की सहायता से सत्ता पर कब्जा बनाए हुए है। किसी दूसरी शाखा का न होना अन्य राजनीतिक दलों के न होने का संकेत देता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 6 

प्रश्न 8.
यह कार्टून लातिनी अमेरिका के सन्दर्भ में बना था। क्या आपको लगता है कि यह पाकिस्तान पर भी फिट बैठता है।कुछ अन्य देशों के बारे में सोधिए जिन पर यह कार्टून लागू हो सकता है। क्या ऐसा कई बार हमारे देश में भी होता है?
उत्तर:
यह कार्टून हथियारों के बल पर बूथ लूटने के दृश्य को प्रदर्शित करता है। यह लोकतन्त्र के अपहरण की ओर इशारा करता है। हाँ, यह पाकिस्तानी परिस्थितियों पर भी ठीक बैठता है, क्योंकि वहाँ सैनिक शासन ने लोकतन्त्र का अपहरण कर रखा था। यह चीन, म्यांमार आदि देशों पर भी लागू हो सकता है। हाँ, कभी-कभी इस तरह की छोटी-मोटी घटनाएँ हमारे देश में भी घटित होती रहती हैं। जब कुछ लोगों द्वारा इस तरह का गलत कार्य किया जाता है।

प्रश्न 9.
जाने कहाँ-कहाँ की बातें हो रही हैं! क्या लोकतन्त्र का मतलब सिर्फ सरकारों और शासनों से ही है? क्या हम अपनी कक्षा में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात कर सकते हैं? क्या हम अपने परिवार में लोकतन्त्र की बात कर सकते हैं? क्या हम एक लोकतान्त्रिक परिवार की बात कर सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, लोकतन्त्र का मतलब केवल शासन और सरकार से ही नहीं होता है। जनता के बिना शासन और सरकार का कोई अर्थ नहीं होता है। लोकतन्त्र, सरकार और शासन में जनता की सहभागिता से सम्बन्धित होता है। लोकतन्त्र आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय से सम्बन्धित है। हाँ, निश्चय ही हम अपने परिवार में लोकतन्त्र की बात कर सकते हैं। हाँ, जब हम अपनी कक्षा में मॉनीटर का चुनाव करते हैं तो यह लोकतांत्रिक पद्धति का उदाहरण होता है। परिवार के सदस्यों में विचार-विमर्श करके कोई निर्णय लेते हैं, तो यह लोकतान्त्रिक परिवार का उदाहरण होता है।
हाँ, हम एक लोकतान्त्रिक परिवार की बात कर सकते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 7

प्रश्न 10.
यह कार्टून लातिनी अमेरिका के लोकतन्त्र के कामकाज से सम्बन्धित है। इसमें सिक्कों की थैलियों का क्या मतलब है? राजनीति में थैलीशाहों की भूमिका के बारे में कार्टून बनाने वाला क्या कहना चाहता है ? क्या इस कार्टून को भारत पर भी लागू किया जा सकता है?
उत्तर:
इसमें सिक्कों की थैलियों का मतलब है कि लोकतन्त्र का निर्माण एवं विकास काफी खर्चीला होता है। चुनाव के समय उसके स्वतंत्र तथा निष्पक्ष आयोजन पर सरकार द्वारा बहुत अधिक मात्रा में पैसा खर्च किया जाता है। साथ ही, उम्मीदवारों तथा सम्बन्धित दलों द्वारा भी बहुत पैसा खर्च किया जाता है। राजनीति में थैलीशाही की भूमिका के बारे में कार्टून बनाने वाला यह कहना चाहता है कि राजनीति में धनकुबेरों की भूमिका निरन्तर बढ़ती ही जा रही है। हाँ, इस कार्टून को भारत पर भी लागू किया जा सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 8

प्रश्न 11.
यह कार्टून सद्दाम हुसैन के शासन को उखाड़ फेंकने के बाद हुए चुनावों से सम्बन्धित है। उन्हें जेल में बंद दिखाया गया है। यहाँ कार्टूनिस्ट क्या कहना चाहता है ? इस कार्टून के संदेश और अध्याय में आए पहले कार्टून के संदेश की तुलना कीजिए।
उत्तर:
यह कार्टून दिखाता है कि वोट डालने का अधिकार सबको एक समान होना चाहिए। इराकी लोगों को वोट देने का अधिकार प्राप्त हुआ। यह समानता के अधिकारों के आधार पर तानाशाही के ऊपर लोकतन्त्र की विजय को दर्शाता है। इस अध्याय के पहले कार्टून में यह संदेश दिया गया है कि पहले लोकतन्त्र को खड़ा करने और बाद में मजबूत बनाने की आवश्यकता है, किन्तु यहाँ कार्टूनिस्ट वोट देने के समान अधिकार की बात कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक है। अत: पहला कार्टून इस कार्टून का आगे आने वाला परिणाम है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 12.
जिम्बाब्वे की बात क्यों करें ? मैं तो अपने देश में भी इस तरह की घटनाओं की खबर अखबारों में पढ़ती रहती हूँ। हम इसकी चर्चा क्यों नहीं करते?
उत्तर:

  1. हमारे देश में कई ऐसे राज्य हैं जहाँ एक ही राजनीतिक पार्टी कई वर्ष तक शासन कर रही है; जैसे–पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी।
  2. हमारे देश में एक राष्ट्रीय पार्टी, जिसने देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में हिस्सा लिया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस केन्द्र में सन् 1947 से 1977 तक लगातार शासन करती रही। उसने आपातकाल लागू कर वैसा ही किया था, जैसा कि जिम्बाब्वे में जानु-पीएफ पार्टी ने किया था। अतः किसी पार्टी को लम्बे समय तक शासन में नहीं रहना चाहिए।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 9

प्रश्न 13.
चीनी सरकार ने ‘गूगल’ और ‘याहू’ जैसी लोकप्रिय वेबसाइटों पर बंदिशें लगाकर इंटरनेट पर सूचना के मुक्त प्रवाह को रोक दिया। इस कार्टून में इसी पर टिप्पणी की गई है। टैंक और निहत्थे छात्र की तस्वीर पाठक को चीन के हाल के इतिहास की एक अन्य बड़ी घटना की याद दिलाती है। वह घटना क्या थी? उसके बारे में अन्य ब्यौरेजुटाओ।
उत्तर:
यह घटना टियानन मेन चौक में सन् 1989 ई. में किये गये जनसंहार की थी। यह घटना एक खूनी सैनिक अभियान के समय चीनी सैनिकों द्वारा अपने ही सैकड़ों निहत्थे नागरिकों की गोलियों तथा तोपों द्वारा हत्या किए जाने की घटना है। यह अभियान बीजिंग के टियानन मेन चौक पर लोकतंत्र समर्थक लोगों की आवाज को दबाने के लिए किया गया था।

अचानक विभिन्न दिशाओं से टैंकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों व छात्रों पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दिया। छात्र पिछले सात सप्ताहों से अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन कर रहे थे। उनका कहना था कि जब तक उनके लोकतान्त्रिक सुधारों की माँग मानी नहीं जाएगी, तब तक वे चौक में डटे रहेंगे। सम्पूर्ण विश्व ने इस घटना की कठोर शब्दों में निन्दा की।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 10

प्रश्न 14.
लोकतन्त्र के कामकाज या उसकी अनुपस्थिति के इन पाँच उदाहरणों को पढ़िए। इनका मेल लोकतन्त्र की उन प्रासंगिक विशेषताओं से कराएँ, जिनकी चर्चा ऊपर की गई है। उत्तरउदाहरण

उदाहरणविशेषताएँ
1. भूटान नरेश ने यह घोषणा की है कि आगे से वे चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा दी गई सलाह पर काम करेंगे।चुने हुए नेताओं द्वारा प्रमुख फैसले करना।
2. भारत से गए अनेक तमिल मजदूरों को श्रीलंका में वोट डालने का अधिकार नहीं दिया गया।एक व्यक्ति, एक वोट, एक मोल।
3. नेपाल नरेश ने राजनीतिक जमावड़ों, प्रदर्शनों और रैलियों पर रोक लगा दी।अधिकारों का सम्मान।
4. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार विधानसभा भंग करने को असंवैधानिक ठहराया।कानून का शासन।
5. बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियाँ इस बात पर सहमत हुई कि चुनाव के समय किसी पार्टी की सरकार न रहे।स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनावी मुकाबला।

प्रश्न 15.
मैं लिंगदोह मैडम की कक्षा में बैठना चाहती हूँ! यही सही अर्थों में लोकतान्त्रिक कक्षा लगती है। ठीक है न?
उत्तर:
लिंगदोह मैडम की कक्षा सही अर्थों में लोकतान्त्रिक कक्षा लगती है। यह ठीक है, क्योंकि यहाँ लोकतन्त्र पर हुई चर्चा में सभी ने भाग लिया और अपने-अपने विचार प्रकट किए।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 12

प्रश्न 16.
यह कार्टून ब्राजील का है जिसे तानाशाही के लम्बे दौर का अनुभव है। इसका शीर्षक है ‘तानाशाही का छुपा पक्ष’। इस कार्टून में किस छुपे पहलू को उजागर किया गया है? क्या हर तानाशाही का एक पक्ष छुपा रहे यह जरूरी है? पहले अध्याय में जिन तानाशाहों का जिक्र हुआ है, उनके बारे में ऐसी जानकारियाँ जुटाएँ। अगर संभव हो तो उनके साथ नाइजीरिया के अबाचा और फिलीपींस के मार्कोस के बारे में भी ऐसी जानकारियाँ इकट्ठी करें।
उत्तर:
इस कार्टून में एक तानाशाह दिखता तो सामान्य आदमी की तरह ही है, किन्तु उसके कार्य बहुत भयानक हैं। वह कहता कुछ है और करता कुछ है। उसके मनमाने फैसलों को कोई रोकने वाला नहीं होता है। प्रायः लोगों के सामने वह अपना लोकप्रिय चेहरा पेश करता है, किन्तु उसके पीछे उसके नजदीकी तथा पारिवारिक आदमियों की एक सेना होती है जो लोगों पर अत्याचार करती है तथा उनका शोषण करती है।

प्रत्येक तानाशाह के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसका एक पक्ष छुपा रहे। यदि वह अपनी क्षमता का जनता की भलाई के लिए उपयोग करना चाहता है, तो उसे किसी छुपे चेहरे की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, कई ऐसे तानाशाह हुए हैं जिन्होंने सरेआम अत्याचार किया है, जैसे-हिटलर।

ऐसे लोगों को किसी छुपे चेहरे की आवश्यकता नहीं पड़ती। ये अपनी नीतियों को सैन्य बल की सहायता से लागू करते हैं। 1973 ई. में जनरल ऑगस्तो पिनोशे ने चिले में तख्ता पलट द्वारा सत्ता प्राप्त की। तत्कालीन रक्षा मंत्री को गिरफ्तार कर लिया तथा राष्ट्रपति सल्वाडोर आयेंदे को इस्तीफा देने के लिए कहा गया किन्तु उसने मना कर दिया।

सेना द्वारा उसके निवास पर बमबारी शुरू कर दी गई, इस फौजी हमले में आयेंदे मारे गये। पिनोशे की सरकार ने लोकतंत्र की माँग करने वाले जनरल अल्बटों बैशेले की हत्या कराई और उसकी पत्नी और बेटी को कैद कर लिया तथा विरोध करने और प्रजातंत्र पुनर्स्थापित करने के लिए कहने पर उन्हें प्रताड़ना दी।

इस घटना से हम अनुमान लगा सकते हैं कि लोकतन्त्र समर्थक सामान्य जनता के साथ क्या हुआ होगा। 3,000 से अधिक लोगों की हत्या की गई तथा हजारों लोग लापता हो गए। हम देख सकते हैं कि किस तरह अच्छे शासन के नाम पर सत्ता पर अधिकार करने के बाद पिनोशे द्वारा अत्याचार किए गए। वह बिना किसी छुपे चेहरे के लोगों पर अत्याचार करता रहा।

अबाचा कई मानवाधिकारों के उल्लंघन का दोषी था। उसने प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता तथा कवि केन सार को फाँसी पर लटका दिया था। उसने अपने विरोधियों की सामूहिक रूप से हत्या करवाईं तथा उन्हें सामूहिक रूप से कब्रों में दफना दिया। देश में चुनाव नहीं कराए गए तथा लोगों के विभिन्न मौलिक अधिकारों पर पाबन्दी लगा दी गयी।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 13

प्रश्न 17.
अगर भारत लोकतन्त्र नहीं अपनाता तो क्या हुआ होता ? क्या ऐसी स्थिति में हम एक राष्ट्र बने रह सकते थे?
उत्तर:
यदि भारत लोकतन्त्र नहीं अपनाता तो यहाँ तानाशाही होती या सैनिक शासन होता या फिर कई छोटे-छोटे राजतंत्रों में विभाजित हो जाता। ऐसी स्थिति में यह देश विभिन्न हिस्सों में बँट जाता, क्योंकि हमारे देश में सांस्कृतिक, भाषायी, धार्मिक आदि भिन्नताएँ अधिक पायी जाती हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 14

प्रश्न 18.
यह कार्टून कनाडा के 2004 संसदीय चुनावों के ठीक पहले प्रकाशित हुआ था। इस कार्टूनिस्ट समेत सभी लोगों का मानना था कि लिबरल पार्टी ही एक बार फिर चुनाव जीत जाएगी। पर जब नतीजे आए तो लिबरल पार्टी चुनाव हार गई। यह कार्टून लोकतंत्र के खिलाफ तर्क देता है या लोकतंत्र के पक्ष में ?
उत्तर:

  1. यह कार्टून लोकतंत्र के पक्ष में तर्क देता है। क्योंकि लोकतंत्र में मतदाता ही यह फैसला करता है कि शासक पार्टी फिर से सत्ता प्राप्त करेगी या सत्ता छोड़ देगी।
  2. दिखाए गए कार्टून से यह पता चलता है कि मतदाता शासक लिबरल पार्टी के प्रति गुस्से में हैं। अतः उन्होंने लिबरल पार्टी के खिलाफ वोट दिया तथा वह चुनाव हार गई।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 19.
राजेश और मुजफ्फर ने एक लेख पढ़ा। इसमें बताया गया था कि किसी भी लोकतान्त्रिक देश ने दूसरे लोकतान्त्रिक देश के साथ कभी लड़ाई नहीं छेड़ी है। लड़ाई तभी होती है जब कम से कम एक देश में गैर-लोकतान्त्रिक सरकार होती है। पर लेख पढ़ने के बाद राजेश ने कहा कि यह लोकतन्त्र के पक्ष में कोई अच्छा तर्क नहीं है। ऐसा सिर्फ संयोग से हुआ होगा। यह संभव है कि भविष्य में लोकतान्त्रिक देशों के बीच भी युद्ध हो। मुजफ्फर का कहना था कि ऐसा सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। लोकतन्त्र में जिस तरह से फैसले लिए जाते हैं उसमें युद्ध होने का अंदेशा काफी कम हो जाता है। प्रश्न-इन दोनों विचारों में आपकी सहमति किसकी तरफ है और क्यों?
उत्तर:

  1. यद्यपि मुजफ्फर का विचार ज्यादा तर्कसंगत है, किन्तु पूरी तरह से ठीक नहीं है। क्योंकि, जब कारगिल युद्ध हुआ उस समय पाकिस्तान में भी लोकतन्त्र था और भारत तो एक लोकतांत्रिक देश है ही।
  2. यह तर्क ज्यादा ठीक है कि जनता के दबाव, चर्चा एवं बहस द्वारा लोकतंत्र में फैसले लिए जाते हैं जिससे लोकतान्त्रिक देशों के बीच युद्ध होने का अंदेशा काफी हद तक कम हो जाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 15

प्रश्न 20.
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण का यह चर्चित कार्टून देश की आजादी की स्वर्ण जयंती पर टिप्पणी करता है। दीवार पर बने चित्रों में से आप किन-किन को पहचानते हैं? क्या देश के बहुत-से आम आदमी इस कार्टून के आम आदमी की तरह सोचते हैं?
उत्तर:
दीवार पर बने चित्रों में से सभी को पहचाना जा सकता है। ये चित्र हैं-पं. जवाहरलाल नेहरू, गुलजारी लाल नंदा, लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चन्द्रशेखर, नरसिम्हा राव, देवेगौड़ा तथा अटल बिहारी वाजपेयी। भारत की अधिकांश आबादी शहरों में नहीं रहती, भारत एक कृषि प्रधान देश है।

यहाँ अधिकांश लोग गाँवों में रहते हैं। जैसा कार्टून में दावा किया गया है, पिछले त्रेसठ वर्षों में, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में वैसा कुछ भी विकास नहीं हुआ है। अत: अधिकांश लोग वैसा महसूस नहीं करते हैं जैसा कि कार्टून में आम लोगों को महसूस करता हुआ दिखाया गया है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 16

प्रश्न 21.
मेरे गाँव में ग्राम सभा की बैठक कभी नहीं होती। यह कैसा लोकतंत्र है?
उत्तर:
नहीं, यह लोकतन्त्र नहीं है। क्योंकि लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के अनुसार ग्राम सभा की बैठक, उसके कार्यों पर चर्चा के लिए एक निश्चित समयान्तर पर होना अति आवश्यक है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 17

प्रश्न 22.
अपने विधानसभा और संसदीय क्षेत्र के सभी मतदाताओं की संख्या का पता लगाएँ। फिर यह पता करें कि आपके आसपास के सबसे बड़े स्टेडियम या हॉल में कितने लोग बैठ सकते हैं। फिर सोचें कि क्या एक विधानसभा या संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं का एक साथ बैठना, सार्थक चर्चा करना और लोकतान्त्रिक फैसले करना सम्भव है?
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को अपने शिक्षकों की मदद से हल करें।

JAC Class 9th Civics लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
यहाँ चार देशों के बारे में कुछ सूचनाएँ हैं। इन सूचनाओं के आधार पर आप इन देशों का वर्गीकरण किस तरह करेंगे? इनके सामने ‘लोकतान्त्रिक’, ‘अलोकतान्त्रिक’ और ‘पक्का नहीं लिखें।
(क) देश क-जो लोग देश के आधिकारिक धर्म को नहीं मानते, उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है।
(ख) देश ख-एक ही पार्टी बीते बीस वर्षों से चुनाव जीतती आ रही है।
(ग) देश ग-पिछले तीन चुनावों में शासक दल को पराजय का मुंह देखना पड़ा।
(घ) देश घ-यहाँ स्वतंत्र चुनाव आयोग नहीं है।
उत्तर:

सूचनावर्गीकरण
(क) जो लोग देश के आधिकारिक धर्म को नहीं मानते, उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं है।अलोकतान्त्रिक
(ख) एक ही पार्टी बीते बीस वर्षो से चुनाव जीतती आ रही है।पक्का नहीं
(ग) पिछले तीन चुनावों में शासक दल को पराजय का मुँह देखना पड़ा।लोकतान्त्रिक
(घ) यहाँ स्वतन्त्र चुनाव आयोग नहीं है।अलोकतान्त्रिक

प्रश्न 2.
यहाँ चार अन्य देशों के बारे में कुछ सूचनाएँ दी गई हैं, इन सूचनाओं के आधार पर इन देशों का वर्गीकरण आप किस तरह करेंगे? इनके आगे लोकतान्त्रिक’, ‘अलोकतान्त्रिक’ और ‘पक्का नहीं लिखें।
(क) देश च-संसद सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना सेना के बारे में कोई कानून नहीं बना सकती।
(ख) देश छ-संसद न्यायपालिका के अधिकारों में कटौती का कानून नहीं बना सकती।
(ग) देश ज-देश के नेता बिना पड़ोसी देश की अनुमति के किसी और देश से सन्धि नहीं कर सकते।
(घ) देश झ-देश के सारे आर्थिक फैसले केन्द्रीय बैंक के अधिकारी करते हैं, जिसे मंत्री भी नहीं बदल सकते।

सूचनावर्गीकरण
(क) संसद सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना सेना के बारे में कोई कानून नहीं बना सकती।अलोकतान्त्रिक
(ख) संसद न्यायपालिका के अधिकारों में कटौती का कानून नहीं बना सकती।अलोकतान्त्रिक
(ग) देश के नेता बिना पड़ोसी देश की अनुमति के किसी और देश से संधि नहीं कर सकते।पक्का नहीं
(घ) देश के सारे आर्थिक फैसले केन्द्रीय बैंक के अधिकारी करते हैं जिसे मंत्री भी नहीं बदल सकते।अलोकतान्त्रिक

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा तर्क लोकतन्त्र के पक्ष में अच्छा नहीं है और क्यों?
(क) लोकतन्त्र में लोग खुद को स्वतंत्र और समान मानते हैं।
(ख) लोकतान्त्रिक व्यवस्थाएँ दूसरों की तुलना में टकरावों को ज्यादा अच्छी तरह सुलझाती हैं।
(ग)लोकतान्त्रिक सरकारें लोगों के प्रति ज्यादा उत्तरदायी होती हैं।
(घ)लोकतान्त्रिक देश दूसरों की तुलना में ज्यादा समृद्ध होते हैं।
उत्तर:
इनमें से (क), (ख) तथा (ग) लोकतन्त्र के पक्ष में अच्छे तर्क माने जा सकते हैं, क्योंकि ये लोकतन्त्र की विशेषताओं से सम्बन्धित हैं, लेकिन तर्क (घ) लोकतन्त्र के पक्ष में उचित तर्क नहीं है। क्योंकि जरूरी नहीं है कि लोकतान्त्रिक देश दूसरों से समृद्ध हो। किसी देश का समृद्ध होना उसके संसाधनों पर निर्भर होता है। जो देश आर्थिक रूप से जितना सम्पन्न होता है उतना ही समृद्ध माना जाता है।

एक अलोकतान्त्रिक देश भी समृद्ध हो सकता है। चीन एक अलोकतान्त्रिक देश है, किन्तु अपने संसाधनों तथा नीतियों के बल पर वह विश्व के समृद्ध देशों में गिना जाता है। लोकतान्त्रिक देश गरीब भी हो सकते हैं, यदि उनके पास संसाधनों की कमी है; जैसे-बांग्लादेश। यह देश संसाधनों की कमी तथा गलत आर्थिक नीतियों के कारण आज भी गरीब है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 4.
इन सभी कथनों में कुछ चीजें लोकतान्त्रिक हैं तो कुछ अलोकतान्त्रिक। हर कथन में इन चीजों को अलग-अलग करके लिखें।
(क) एक मंत्री ने कहा कि संसद को कुछ कानून पास करने होंगे, जिससे विश्व व्यापार संगठन द्वारा तय नियमों की पुष्टि हो सके।
उत्तर:
लोकतान्त्रिक-संसद द्वारा कानून पास किया जाना। अलोकतान्त्रिक-विश्व-व्यापार संगठन द्वारा तय नियमों के अनुसार कानून पास किया जाना।

(ख)चुनाव आयोग ने एक चुनाव क्षेत्र के सभी मतदान केन्द्रों पर दुबारा मतदान का आदेश दिया जहाँ बड़े पैमाने पर मतदान में गड़बड़ी की गई थी।
उत्तर:
लोकतान्त्रिक तत्व-गड़बड़ी की स्थिति में निष्पक्ष चुनाव के लिए दुबारा मतदान का आदेश देना। अलोकतान्त्रिक तत्व-चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किया जाना।

(ग) संसद में औरतों का प्रतिनिधित्व कभी भी 10 प्रतिशत तक नहीं पहुंचा है। इसी के कारण महिला संगठनों ने संसद में एक-तिहाई आरक्षण की माँग की है।
उत्तर:
अलोकतान्त्रिक-संसद में औरतों का प्रतिनिधित्व कभी भी 10 प्रतिशत नहीं पहुंचा है। लोकतान्त्रिक-इसी कारण महिला संगठनों ने एक-तिहाई आरक्षण की माँग की है।

प्रश्न 5.
लोकतन्त्र में अकाल और भुखमरी की संभावना कम होती है। यह तर्क देने का इनमें से कौन-सा कारण सही नहीं है?
(क) विपक्षी दल भूख और भुखमरी की ओर सरकार का ध्यान दिला सकते हैं।
(ख) स्वतन्त्र अखबार देश के विभिन्न हिस्सों में अकाल की स्थिति के बारे में खबरें दे सकते हैं।
(ग) सरकार को अगले चुनाव में अपनी पराजय का डर होता है।
(घ) लोगों को कोई भी तर्क मानने और उस पर आचरण करने की स्वतन्त्रता है।
उत्तर:
(घ) लोगों को कोई भी तर्क मानने और उस पर आचरण करने की स्वतन्त्रता है।

प्रश्न 6.
किसी जिले में 40 ऐसे गाँव हैं जहाँ सरकार ने पेयजल उपलब्ध कराने का कोई इंतजाम नहीं किया है। इन गाँवों के लोगों ने एक बैठक की और अपनी जरूरतों की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए कई तरीकों पर विचार किया। इनमें से कौन-सा तरीका लोकतान्त्रिक नहीं है?
(क) अदालत में पानी को अपनी जीवन के अधिकार का हिस्सा बताते हुए मुकदमा दायर करना।
(ख) अगले चुनाव का बहिष्कार करके सभी पार्टियों को संदेश देना।
(ग) सरकारी नीतियों के खिलाफ जनसभाएँ करना।
(घ) सरकारी अधिकारियों को पानी के लिए रिश्वत देना।
उत्तर:
(घ) सरकारी अधिकारियों को पानी के लिए रिश्वत देना।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 7.
लोकतन्त्र के खिलाफ दिए जाने वाले इन तर्कों का जवाब दीजिए
(क) सेना देश का सबसे अनुशासित और भ्रष्टाचार मुक्त संगठन है। इसलिए सेना को देश का शासन करना चाहिए।
उत्तर:
अनुशासित तथा भ्रष्टाचार मुक्त होने पर भी सेना को देश का शासन नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह देश की जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

(ख) बहुमत के शासन का मतलब है मूर्तों और अशिक्षितों का राजा हमें तो होशियारों के शासन की जरूरत है, भले ही उनकी संख्या कम क्यों न हो?
उत्तर:
लोकतन्त्रात्मक शासन व्यवस्था का सम्बन्ध केवल होशियारों से नहीं होता। लोकतन्त्र का महत्वपूर्ण सिद्धान्त है-समानता का सिद्धान्त। इस शासन व्यवस्था में सभी निर्णय बहुमत से लिये जाते हैं। बहुमत के विरुद्ध थोड़े से होशियार लोगों को सत्ता सौंपना लोकतन्त्र के विरुद्ध है।

(ग) अगर आध्यात्मिक मामलों में मार्गदर्शन के लिए हमें धर्म-गुरुओं की जरूरत होती है तो उन्हीं को राजनीतिक मामलों में मार्गदर्शन का काम क्यों नहीं सौंपा जाए ? देश पर धर्म-गुरुओं का शासन होना चाहिए।
उत्तर:
धर्म लोगों का व्यक्तिगत विषय है इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लोकतन्त्र का हमारी भौतिक समस्याओं से सम्बन्ध है जो सभी लोगों की लगभग समान होती हैं। धर्म-गुरु अपने धर्म विशेष से प्रभावित हो सकते हैं अत: वे किसी वर्ग के साथ न्याय नहीं कर सकेंगे। उनके बीच हमेशा एक वैचारिक संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी, जो धर्म तथा आस्था से प्रेरित होती है। धर्म और राजनीति दो अलग-अलग बातें हैं। अतः धर्म-गुरुओं को राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 8.
इनमें से किन कथनों को आप लोकतान्त्रिक समझते हैं? क्यों?
(क) बेटी से बाप-मैं शादी के बारे में तुम्हारी राय सुनना नहीं चाहता। हमारे परिवार में बच्चे वहीं शादी करते हैं जहाँ माँ-बाप तय कर देते हैं।
उत्तर:
इस कथन में लोकतान्त्रिक मूल्यों का विरोध प्रकट किया गया है क्योंकि, इसमें दूसरों के विचारों की अभिव्यक्ति नहीं है जो लोकतन्त्र की एक प्रमुख विशेषता है।

(ख) छात्र से शिक्षक-कक्षा में सवाल पूछकर मेरा ध्यान मत बँटाओ।
उत्तर:
शिक्षक का इस प्रकार कहना लोकतान्त्रिक मूल्यों के अनुसार नहीं है क्योंकि, छात्रों का यह अधिकार है कि वे अपनी समस्याओं को शिक्षकों के सामने रखें तथा शिक्षकों का यह कर्तव्य है कि वे छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी समस्याओं का समाधान करें।

(ग) अधिकारी से कर्मचारी-हमारे काम करने के घंटे कानून के अनुसार कम किए जाने चाहिए।
उत्तर:
निश्चित अधिक घंटों तक काम लेना कानून का उल्लंघन तथा शोषण है। शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना लोकतान्त्रिक मौलिक अधिकार होता है। अतः यह माँग लोकतन्त्र के अनुसार उचित है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 1 लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?

प्रश्न 9.
एक देश के बारे में निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें और फैसला करें कि आप इसे लोकतन्त्र कहेंगे या नहीं? अपने फैसले के पीछे तर्क भी बताएँ।
(क) देश के सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार है और चुनाव नियमित रूप से होते हैं।

(ख) देश ने अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसियों से ऋण लिया। ऋण के साथ यह एक शर्त जुड़ी थी कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपने खचों में कमी करेगी।

(ग) लोग सात से ज्यादा भाषाएं बोलते हैं पर शिक्षा का माध्यम सिर्फ एक भाषा है जिसे देश के 52 फीसदी लोग बोलते हैं।

(घ) सरकारी नीतियों का विरोध करने के लिए अनेक संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन करने और देश भर में हड़ताल करने का आह्वान किया है। सरकार ने उनके नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है।

(ङ) देश के रेडियो और टेलीविजन चैनल सरकारी हैं। सरकारी नीतियों और विरोध के बारे में खबर छापने के लिए अखबारों को सरकार से अनुमति लेनी होती है।
उत्तर:
(घ) तथा
(ङ) सरकार के अलोकतान्त्रिक व्यवहार को दर्शाते हैं।
(ख) सरकार की आर्थिक कमजोरी के कारण मजबूरी में उठाए गए एक गलत फैसले की ओर संकेत करता है। किंतु,
(क) तथा
(ग) सरकार के मौलिक रूप से लोकतान्त्रिक होने को दिखाते हैं। ये विशेषताएँ लोकतान्त्रिक मूल्यों में विश्वास के प्रतीक हैं। अत: कहा जा सकता है कि यह देश एक लोकतान्त्रिक देश है।

प्रश्न 10.
अमेरिका के बारे में 2004 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार वहाँ के समाज में असमानता बढ़ती जा रही है। आमदनी की असमानता लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों की भागीदारी घटने-बढ़ने के रूप में भी सामने आई। इन समूहों की सरकार के फैसलों पर असर डालने की क्षमता भी इससे प्रभावित हुई है। इस रिपोर्ट की मुख्य बातें थीं

1. सन् 2004 में एक औसत अश्वेत परिवार की आमदनी 100 डॉलर थी, जबकि गोरे परिवार की आमदनी 162 डॉलर। औसत गोरे परिवार के पास अश्वेत परिवार से 12 गुना ज्यादा संपत्ति थी।

2. राष्ट्रपति चुनाव में 75,000 डॉलर से ज्यादा आमदनी वाले परिवारों के प्रत्येक 10 में से 9 लोगों ने वोट डाले थे। यही लोग आमदनी के हिसाब से समाज के ऊपरी 20 फीसदी में आते हैं। दूसरी ओर 15,000 डॉलर से कम आमदनी वाले परिवारों के प्रत्येक 10 में से सिर्फ 5 लोगों ने ही वोट डाले। आमदनी के हिसाब से ये लोग सबसे निचले 20 फीसदी हिस्से में आते हैं।

3. राजनीतिक दलों का करीब 95 फीसदी चंदा अमीर परिवारों से ही आता है। इससे उन्हें अपनी राय और चिंताओं से नेताओं को अवगत कराने का अवसर मिलता है। यह सुविधा देश के अधिकांश नागरिकों को उपलब्ध नहीं है।

4. जब गरीब लोग राजनीति में कम भागीदारी करते हैं तो सरकार भी उनकी चिन्ताओं पर कम ध्यान देती है-गरीबी दूर करना, रोजगार देना, उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की व्यवस्था करने पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए।राजनेता अक्सर अमीरों और व्यापारियों की चिन्ताओं पर ही नियमित रूप से गौर करते हैं।

इस रिपोर्ट की सूचनाओं को आधार बनाकर भारत का उदाहरण देते हुए लोकतन्त्र और गरीबी’ पर एक लेख लिखें।
उत्तर:

लोकतन्त्र और गरीबी

सामान्य लोगों की भलाई के लिए लोकतन्त्र लोगों के बहुमत का शासन है। किन्तु, आजकल इसका उपयोग कुछ मुट्ठी भर लोगों के फायदे के लिए किया जा रहा है, जिनके पास धन, संसाधन एवं शिक्षा है। भारत में अमीरों तथा गरीबों के बीच का अंतर बढ़ता ही जा रहा है। गरीब और गरीब होते जा रहे हैं जबकि अमीर और तेजी से अमीर होते जा रहे हैं। सक्षम लोगों द्वारा सभी प्रकार की सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाया जा रहा है तथा गरीब इनसे वंचित होते जा रहे हैं।

हमारे देश में लोकतान्त्रिक मूल्यों में तेजी से गिरावट आ रही है। आज लोगों ने राजनीति को व्यापार बना लिया है। लोग अब जनता की समस्याओं का हल निकालने के लिए राजनीति में नहीं जाते, बल्कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थों को पूरा करने के लिए राजनीति में आते हैं। राजनीति में धन तथा बल के उपयोग ने इसके लोकतान्त्रिक स्वरूप को बिगाड़ दिया है।

भारत की आबादी गाँवों में बसती है। उनके लिए कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएँ बनाई जाती हैं तथा आए दिन होने वाले घोटालों के द्वारा विकास की राशि को नेताओं, व्यापारियों, ठेकेदारों तथा अन्य सक्षम वर्गों द्वारा आपस में बाँट लिया जाता है। इस कारण गरीबी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

आज हमें जनप्रतिनिधियों से जवाब माँगने की आवश्यकता है। जनता के पास यह शक्ति होनी चाहिए कि वह जब चाहे अपने प्रतिनिधि को वापस बुला ले। यह उन्हें जवाबदेह बना देगा, साथ ही चुनावों में धन के अत्यधिक प्रयोग पर रोक लगानी चाहिए। तभी लोकतन्त्र का सही रूप सामने आएगा तथा आम जनता की समस्या की ओर ध्यान दिया जा सकेगा।
आइए, अखबार पढ़ें प्रश्न-अधिकांश अखबारों में एक संपादकीय पृष्ठ होता है।

इस पन्ने पर अखबार समकालीन घटनाओं पर अपनी राय प्रकाशित करता है। अखबार दूसरे बुद्धिजीवियों और लेखकों के लेख और विचारों को छापता है। इसी पन्ने पर पाठकों की राय और टिप्पणियाँ भी पत्रों के रूप में छपती हैं। किसी अखबार को एक महीने तक पढ़ें और उसके उन संपादकीय टिप्पणियों, लेखों और पाठकों के पत्रों को काटकर जमा करें जिनका रिश्ता लोकतन्त्र से है।

इनको निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटकर रखो। लोकतन्त्र का संवैधानिक और कानूनी पहलू -नागरिक अधिकार -चुनावी और पार्टियों की राजनीति -लोकतन्त्र की आलोचना उत्तर-विद्यार्थी इस प्रश्न को अपने शिक्षकों की सहायता से हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

JAC Class 9th Geography जनसंख्या InText Questions and Answers

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या के असमान वितरण का क्या कारण है ? उत्तर-भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के निम्नलिखित कारण हैं
1. उच्चावच: पर्वतीय व पठारी क्षेत्रों में धरातल काफी असमतल होता है। यहाँ कृषि के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होती है, यातायात की भी समस्या रहती है अत: विरल जनसंख्या मिलती है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में धरातल समतल होता है। खेती के लिए पर्याप्त भूमि होती है और यातायात के साधन भी सरलता से उपलब्ध होते हैं। फलस्वरूप सघन जनसंख्या मिलती है, जैसे हिमालय पर्वतीय क्षेत्र एवं उत्तरी मैदान।

2. मृदा: जलोढ़ एवं काली मृदा वाले क्षेत्र कृषि के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं अतः ऐसे क्षेत्रों में घनी जनसंख्या मिलती है। उत्तरी मैदान एवं डेल्टा क्षेत्रों की मिट्टी उपजाऊ है।

3. जलवायु: अति विषम जलवायु वाले क्षेत्र लोगों के निवास के योग्य नहीं होते। बहुत कम एवं बहुत अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सामान्यतया विरल जनसंख्या पाई जाती है।

4. वन: उत्तरी पूर्वी भारत एवं देश के अन्य भागों में घने वनों वाले क्षेत्रों में विरल जनसंख्या पायी जाती है।

5. औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक मिलती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 2.
वृद्धि दर में कमी के बावजूद प्रत्येक दशक लोगों की संख्या में नियमित से वृद्धि हो रही है। ऐसा क्यों?
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि दर में कमी के बावजूद लोगों की संख्या में नियमित वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित

  1. जन्मदर में कमी हुई है लेकिन अभी जन्मदर सापेक्षिक बनी हुई है।
  2. स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के कारण मृत्युदर में कमी आयी है अत: जनसंख्या वृद्धि जारी है।
  3. तीसरा प्रमुख कारण अन्य देशों; जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि से भारत में प्रवास का होना है इससे भी जनसंख्या वृद्धि में सहायता मिल रही है।

प्रश्न 3.
सबसे अधिक महिला साक्षरता दर कौन-से राज्य की है और क्यों?
उत्तर:
सबसे अधिक महिला साक्षरता दर केरल राज्य की है क्योंकि यहाँ लड़के और लड़की में कोई भेद नहीं समझा जाता है। दोनों को शिक्षा के समान अवसर दिये जाते हैं।

‘क्या आप जानते हैं?’ आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
दो देशों के नाम बताइए जिनका जनसंख्या घनत्व भारत से अधिक है?
उत्तर:
बांग्लादेश, जापान।

प्रश्न 2.
केरल, पुडुच्चेरी, दिल्ली तथा हरियाणा में प्रति एक हजार पुरुषों पर कितनी महिलाएँ हैं?
उत्तर:
केरल, पुडुच्चेरी, दिल्ली तथा हरियाणा में प्रति 1000 पुरुषों पर क्रमश: 1084, 1038, 866 तथा 877. महिलाएँ हैं।

JAC Class 9th Geography जनसंख्या Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए:
1. निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता
(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में
(ख) आगमन वाले क्षेत्र में
(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में।

2. जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है
(क) उच्च जन्म-दर
(ख) उच्च मृत्यु-दर
(ग) उच्च जीवन-दर
(घ) अधिक विवाहित जोड़े।
उत्तर:
(क) उच्च जन्म-दर।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिमाण दर्शाता है
(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या
(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर
(घ) प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या।
उत्तर:
(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि।

4. 2011 की जनगणना के अनुसार एक साक्षर’ व्यक्ति वह है
(क) जो अपने नाम को पढ़ एवं लिख सकता है
(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।
(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझने के साथ पढ़ एवं लिख सकता है
(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित, तीनों जानता है।
उत्तर:
(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझने के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के उत्तर संक्षेप में दें:
1. जनसंख्या वृद्धि के महत्वपूर्ण घटकों की व्याख्या करें। उत्तर-जनसंख्या वृद्धि के महत्वपूर्ण घटक तीन हैं
(क) जन्म-दर,
(ख) मृत्यु-दर और
(ग) प्रवास।

(क) जन्म-दर: एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर जन्मे जीवित बच्चों की संख्या जन्म-दर कहलाती है। यह जनसंख्या वृद्धि का महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि भारत में जन्म-दर हमेशा मृत्यु-दर से अधिक रही है।

(ख) मृत्यु-दर: एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को मृत्यु-दर कहा जाता है। मृत्यु-दर में तीव्र गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि का मुख्य कारण है।

(ग) प्रवास: लोगों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करता है।

2. 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर क्यों घट रही है?
उत्तर:
1981 से जनसंख्या वृद्धि की दर निम्नलिखित कारणों से घट रही है:

  1. जन्मदर नियंत्रण:
    सन् 1981 से जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है इसका प्रमुख कारण जन्मदर में कमी आना है। सामाजिक जागरूकता के कारण जन्म दर नियन्त्रित हुई है।
  2. परिवार नियोजन:
    परिवार नियोजन कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के कारण भी जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आयी
  3. साक्षरता:
    शिक्षा के प्रसार के कारण लोग अब समझने लगे हैं कि अधिक जनसंख्या देश एवं समाज के विकास में बाधक है।
  4. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार:
    स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के कारण लोगों में अच्छे भविष्य के प्रति विश्वास बना है जिससे जन्मदर में कमी आयी है। ।

3. आयु संरचना, जन्म-दर एवं मृत्यु-दर को परिभाषित करें।
उत्तर:
आयु संरचना-आयु संरचना से तात्पर्य किसी देश के लोगों के विभिन्न वर्गों के अनुसार जनसंख्या को कई आयु समूहों में बाँटना। भारत की जनसंख्या को तीन आयु वर्गों में बाँटा जाता है
(क) बच्चे (15 वर्ष से कम),
(ख) वयस्क (15-59 वर्ष),
(ग) वृद्ध (59 वर्ष से अधिक)।
जन्म दर: प्रति वर्ष प्रति एक हजार जनसंख्या पर जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या को जन्म दर कहते हैं। मृत्यु दर प्रति वर्ष प्रति एक हजार जनसंख्या पर मरने वाले लोगों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं।

4. प्रवास, जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक है।
उत्तर:
प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रवास का अर्थ है लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाना। प्रवास दो प्रकार का होता है (क) आन्तरिक प्रवास, (ख) अन्तर्देशीय प्रवास।

आन्तरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में कोई परिवर्तन नहीं लाता है किन्तु यह एक देश के भीतर जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है। वास्तव में प्रवास जनसंख्या परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। यह केवल जनसंख्या के आकार को ही प्रभावित नहीं करता, अपितु उम्र एवं लिंग के दृष्टिकोण से नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या की संरचना को भी परिवर्तित करता है। प्रवास की इस प्रक्रिया के कारण भारत के नगरों की जनसंख्या स्थायी रूप से बढ़ती रहती है।

भारत में लोग रोजगार के अवसरों एवं बेहतर सुविधाओं से आकर्षित होकर नगरों की ओर स्थानान्तरित होते रहते हैं। भारत में इसी प्रवृत्ति के कारण शहरों की जनसंख्या में नियमित रूप से वृद्धि हुई है। सन् 1951 में कुल जनसंख्या की 17.29 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या थी जो 2011 में बढ़कर 31.80 प्रतिशत हो गई। सन् 2001 से 2011 के मध्य दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या भी बढ़कर 35 से 53 हो गई। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि प्रवास के कारण नगरों पर जनसंख्या का दबाव बढ़ता जा रहा है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अन्तर स्पष्ट करें। उत्तर-जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन

जनसंख्या वृद्धिजनसंख्या परिवर्तन
1. दो समय बिन्दुओं के मध्य किसी देश अथवा राज्य की जनसंख्या में होने वाले शुद्ध परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।1. जनसंख्या परिवर्तन से अभिप्राय जनसंख्या के स्वरूप में परिवर्तन से है।
2. इस प्रकार के परिवर्तन को दो प्रकार से व्यक्त किया जाता है: सापेक्ष वृद्धि, प्रतिवर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा।2. जनसंख्या परिवर्तन को तीन कारक निर्धारित करते हैं: जन्म-दर, मृत्यु-दर, प्रवास।
3. इस प्रक्रिया में जनसंख्या के आकार में परिवर्तन आता है।3. इस प्रक्रिया में जनसंख्या वितरण एवं व्यावसायिक संरचना में परिवर्तन आता है।

प्रश्न 4.
व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच गहरा सम्बन्ध होता है। व्यवसायों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है-प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक। प्राथमिक व्यवसाय कृषि, पशुपालन, मछली पालन एवं खनन आदि से, द्वितीयक व्यवसाय निर्माण उद्योगों से एवं तृतीयक व्यवसाय परिवहन, संचार, वाणिज्य, प्रशासन एवं सेवाओं से सम्बन्धित होते हैं।

जिस देश के अधिक लोग प्राथमिक व्यवसायों में लगे होते हैं वह देश अपनी जनसंख्या के विकास के निम्न स्तर पर होता है और विकासशील देश कहलाता है, जैसे-भारत। इसके विपरीत जिस देश के लोग द्वितीयक एवं तृतीयक व्यवसायों में लगे होते हैं तो उनकी आय का स्तर भी अधिक होता है एवं विकास का स्तर भी ऊँचा होता है।

ऐसे देश विकसित देश कहलाते हैं, जैसे-संयुक्त राज्य अमेरिका एवं जापान आदि। भारत में कुल जनसंख्या का 64 प्रतिशत भाग कृषि कार्य में लगा हुआ है। द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र में क्रमशः 13 एवं 20 प्रतिशत लोग लगे हुए हैं। अतः स्पष्ट है कि हमारी जनसंख्या का लगभग 2/3 भाग कृषि में लगा होने के कारण हमारी जनसंख्या का विकास का स्तर नीचा है। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि व्यावसायिक संरचना का विकास से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 5.
स्वस्थ जनसंख्या कैसे लाभकारी है?
उत्तर:
किसी भी देश के विकास में स्वस्थ जनसंख्या, मानव शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वस्थ जनसंख्या के निम्नलिखित लाभ हैं

  1. स्वस्थ जनसंख्या की कार्यक्षमता अधिक होती है। फलस्वरूप देश का उत्पादन बढ़ता है जिससे राष्ट्रीय आय में स्वतः ही वृद्धि हो जायेगी।
  2. स्वस्थ जनसंख्या से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है।
  3. स्वस्थ जनसंख्या से देश का आर्थिक एवं सामाजिक विकास तीव्र गति से होने लगता है।
  4. स्वस्थ जनसंख्या से देश के प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग होता है।
  5. स्वस्थ जनसंख्या स्वयं में किसी भी देश का एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
  6. स्वस्थ जनसंख्या आश्रित अनुपात को कम करके राष्ट्रीय आय की वृद्धि में सहायक होती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 6 जनसंख्या

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर-राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
उत्तर:

  1. 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करना।
  2. शिशु मृत्यु-दर को प्रति 1000 में 30 से कम करना।
  3. व्यापक स्तर पर टीकारोधी बीमारियों से बच्चों को छुटकारा दिलाना।
  4. लड़कियों के विवाह की उम्र को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  5. परिवार नियोजन कार्यक्रम को एक जनकेन्द्रित कार्यक्रम बनाने के लिए नीतिगत ढाँचा प्रदान करना।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
एक प्रश्नावली बनाकर कक्षा की जनगणना कीजिए। प्रश्नावली में कम से कम पाँच प्रश्न होने चाहिए। ये प्रश्न विद्यार्थियों के परिवार जनों, कक्षा में उनकी उपलब्धि, उनके स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित हों। प्रत्येक विद्यार्थी को वह प्रश्नावली भरनी चाहिए। बाद में सूचनाओं को संख्याओं में (प्रतिशत में) संग्रहीत कीजिए। इस सूचना को वृत्त रेखा, दंड आरेख या अन्य किसी प्रकार से प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को शिक्षक की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

JAC Class 9th Geography प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन InText Questions and Answers 

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर उत्तरी ढलानों की अपेक्षा ज्यादा सघन वनस्पति क्यों है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर उत्तरी ढलानों की अपेक्षा ज्यादा सघन वनस्पति है, क्योंकि

  1. हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर मानसूनी वर्षा अत्यधिक मात्रा में होती है जो प्राकृतिक वनस्पति के बढ़ने में सहायक होती है जबकि उत्तरी ढलानों पर वर्षा बिल्कुल न के बराबर होती है।
  2. हिमालय पर्वत के दक्षिणी ढलानों पर सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मिलता है जो पेड़-पौधों के बढ़ने में सहायक होता है, जबकि उत्तरी ढलानों पर सूर्य का प्रकाश अपेक्षाकृत कम मात्रा में प्राप्त होता है।

प्रश्न 2.
पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों पर पूर्वी ढलानों की अपेक्षा अधिक सघन वनस्पति क्यों है?
उत्तर:
पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों पर अरब सागर से उठने वाली मानसूनी हवाएँ जो आर्द्रता से भरपूर होती हैं, भारी मात्रा में वर्षा करती हैं। भारी वर्षा घने वनस्पति के स्थायित्व एवं विकास में सहायक होती है। इसके विपरीत पूर्वी ढलानों पर पहुँचते-पहुँचते मानसूनी हवाएँ शुष्क हो जाती हैं अत: वर्षा के अभाव में यहाँ वनस्पति कम है। यही कारण है कि पश्चिमी ढलानों पर सघन वनस्पति है, जबकि पूर्वी ढलानों पर कम है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

प्रश्न 3.
चित्र 5.1(पुस्तक में )में दिए गए दण्ड आरेख का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1. किस राज्य में वनों का क्षेत्रफल सबसे अधिक है?
उत्तर:
मिजोरम में।

2. किस केन्द्र-शासित प्रदेश में वनों का क्षेत्रफल सबसे कम है और ऐसा क्यों है?
उत्तर:
दमन व दीव में वनों का क्षेत्रफल सबसे कम है क्योंकि यहाँ की मृदा अत्यन्त लवणीय है।

प्रश्न 4.
आओ विचार करें : क्या होगा यदि वनस्पति और जानवर धरती से अदृश्य हो जाएँ? क्या मनुष्य उन अवस्थाओं में जीवित रह पाएगा? जैव विविधता क्यों अनिवार्य है और इसका संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:

  1. यदि वनस्पति और जानवर धरती से अदृश्य हो जायें तो यह एक बंजर भूमि बन जायेगी। आहार श्रृंखला टूट जायेगी अथवा बिगड़ जायेगी और मानव जाति का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर आ जाएगा।
  2. मनुष्य उन अवस्थाओं में जीवित नहीं रह पाएगा।
  3. जैव विविधता निम्न कारणों से अनिवार्य है
    • यह पारिस्थितिक तन्त्र के सुचारु रूप से संचालन के लिए आवश्यक है।
    • यह पारिस्थितिक सन्तुलन बनाए रखने में सहायक है।
    • यह हमारी आहार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है।
    • यह स्वस्थ जैवमण्डल का एक आवश्यक लक्षण है।
  4. जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि
    • पारिस्थितिक तन्त्र के सुचारु संचालन के लिए प्रजातियों की विविधता आवश्यक है।
    • जीव एवं वनस्पति जगत हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं तथा ये स्वस्थ जैवमण्डल के अनिवार्य अभिलक्षण हैं।

‘क्या आप जानते हैं ?’ आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
देशज एवं विदेशज पौधों से क्या आशय है?
उत्तर:
वे पौधे जो मूल रूप से भारतीय हैं उन्हें देशज पौधे कहते हैं तथा जो पौधे भारत के बाहर से आये हैं उन्हें विदेशज पौधे कहते हैं?

प्रश्न 2.
सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत में वनों का क्षेत्रफल कितने प्रतिशत है?
उत्तर:
भारत में वनों का क्षेत्रफल भारत के क्षेत्रफल का 21.05 प्रतिशत है।

प्रश्न 3.
भारत में जीव सुरक्षा अधिनियम कब लागू किया गया।
उत्तर:
भारत में जीव सुरक्षा अधिनियम सन् 1972 में लागू किया गया।

JAC Class 9th Geography प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन Textbook Questions and Answers 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए
1. रबड़ का सम्बन्ध किस प्रकार की वनस्पति से है(क) टुंड्रा
(ख) हिमालय
(ग) मैंग्रोव
(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन।
उत्तर:
(घ) उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन।

2. सिनकोना के वृक्ष कितनी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं
(क) 100 सेमी.
(ख) 70 सेमी.
(ग) 50 सेमी.
(घ) 50 सेमी. से कम वर्षा।
उत्तर:
(क) 100 सेमी।

3. सिमलीपाल जीवमंडल निचय कौन-से राज्य में स्थित है
(क) पंजाब
(ख) दिल्ली
(ग) उड़ीसा
(घ) पश्चिमी बंगाल।
उत्तर:
(ग) उड़ीसा।

4. भारत के कौन-से जीवमंडल निचय विश्व के जीवमंडल निचयों में लिए गए हैं
(क) मानस
(ख) मन्नार की खाड़ी
(ग) नीलगिरी
(घ) नंदादेवी।
उत्तर:
(ख) मन्नार की खाड़ी।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

प्रश्न 2.
1. भारत में पादपों और जीवों का वितरण किन तत्वों द्वारा निर्धारित होता है?
उत्तर:
भारत में पादपों और जीवों का वितरण निम्नलिखित तत्वों के द्वारा निर्धारित होता है
(क) भू-आकृति,
(ख) मृदा,
(ग) तापमान,
(घ) सूर्य का प्रकाश,
(ङ) वर्षण।

2. जीवमंडल निचय से क्या अभिप्राय है? कोई दो उदाहरण दो।
उत्तर:
जीवमंडल निचय एक बहुउद्देशीय संरक्षित क्षेत्र होता है जहाँ प्रत्येक पादप एवं जीव प्रजातियों के प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण प्रदान किया जाता है। उदाहरण: (क) मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु), (ख) नंदादेवी (उत्तराखण्ड)।

3. कोई दो वन्य प्राणियों के नाम बताइए जो कि उष्ण कटिबन्धीय वर्षा और पर्वतीय वनस्पति में मिलते हैं।
उत्तर:
वनस्पति वन्य प्राणी:

  1. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वाले वन हाथी, लंगूर
  2. पर्वतीय वन याक, हिम तेंदुआ

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में अन्तर कीजिए:
1. वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत,
2. सदाबहार और पर्णपाती वन।
उत्तर:
1. वनस्पति जगत तथा प्राणी जगत वनस्पति जगत

नस्पति जगतप्राणी जगत
1. वनस्पति शब्द किसी विशेष क्षेत्र के पादपों का बोध1. प्राणी जगत शब्द किसी क्षेत्र विशेष के जीव-जन्तुओं कराता है।
2. प्राकृतिक वनस्पति के आवरण में वन, झाड़ियों एवं घास भूमियों को सम्मिलित किया जाता है।2. प्राणी जगत को तीन वर्गों- (अ) थलचर, (ब) जलचर, (स) नभचर में बाँटा गया है।
3. भारत में लगभग 47,000 प्रकार की विभिन्न जातियों के पौधे पाये जाते हैं।3. भारत में लगभग 90,000 प्रकार के विभिन्न जातियों के प्राणी पाये जाते हैं।
4. हमारे देश में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पायी जाती है।4. हमारे देश में कुछ वन्य प्राणी विलुप्त होने की स्थिति में हैं। इनके संरक्षण के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं।
5. वनस्पति स्थैतिक पदार्थ हैं।5. प्राणी गतिशील होते हैं।
6. वनस्पति का पृथ्वी पर सर्वप्रथम आगमन हुआ।6. परपोषी होने के कारण ये पृथ्वी पर वनस्पतियों के विकसित होने के बाद उत्पन्न हुए।

2. सदाबहार और पर्णपाती वनसदाबहार वन

सदाबहार वनपर्णपाती वन
1. सदाबहार वन उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी. या उससे अधिक होती है।1. पर्णपाती वन उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा 70 से 200 सेमी. के मध्य होती है।
2. ये वन सदैव हरे भरे रहते हैं। इन वनों के वृक्ष किसी ऋतु विशेष में अपनी पत्तियाँ नहीं गिराते हैं।2. इन वनों के वृक्ष शुष्क ग्रीष्म ऋतु में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
3. इन वनों के वृक्षों की ऊँचाई बहुत अधिक होती है। ये सामान्यतया 60 मीटर ऊँचे होते हैं।3. इन वनों के वृक्षों की ऊँचाई अधिकतम 30 मीटर तक होती है।
4. ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रो, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, असम के ऊपरी भागों एवं तमिलनाडु के तट पर मिलते हैं।4. ये वन देश के पृर्वी भागों, उत्तरी-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपद प्रदेशों, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, पश्चिमी उड़ीसा एवं पश्चिमी घाटों के पूर्वी ढालों पर मिलते हैं।
5. इन वनों के प्रमुख वृक्षों में आबनूस, महोगनी, रोजवुड, रबड़ और सिनकोना आदि हैं।5. इन वनों के प्रमुख वृक्षों में सागोन, बाँस, शीशम, चंदन, साल, खैर, कुसुम, अर्जुन एवं शहतूत आदि हैं।
6. इन वनों में हाथी, बन्दर, लंगूर, हिरण, चमगादड़ एवं एक सींग वाले गैंडे आदि मिलते हैं।6. इन वनों में सिह, शेर, सूअर, हिरण, छिपकली, साँप और कछुए आदि मिलते हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन

प्रश्न 4.
भारत में विभिन्न प्रकार की पाई जाने वाली वनस्पति के नाम बताइए और अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर:
भारत में निम्नलिखित प्रकार की प्राकृतिक वनस्पति पायी जाती हैं:

  1. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन,
  2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन,
  3. उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन एवं झाड़ियाँ,
  4. पर्वतीय वन,
  5. मैंग्रोव वन (ज्वारीय वन)।

अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति:
अधिक ऊँचाई पर पाई जाने वाली वनस्पति को पर्वतीय वन या पर्वतीय वनस्पति के नाम से जाना जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी एवं ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ प्राकृतिक वनस्पति में भी अन्तर दिखाई देता है। अतः ऊँचाई के आधार पर पर्वतीय भाग में निम्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है

  1. 1000 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण कटिबन्धीय वन मिलते हैं। इन वनों में ओक एवं चेस्टनट आदि वृक्ष मिलते हैं।
  2. 1500 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में शंकुधारी वृक्ष; जैसे चीड़, देवदार, सिल्वर-फर, स्प्रूस एवं सीडर आदि मिलते हैं।
  3. 3600 मीटर से अधिक ऊँचाई पर शीतोष्ण कटिबन्धीय वनों एवं घास के मैदानों का स्थान अल्पाइन वनस्पति ले लेती है। सिल्वर-फर, जुनिपर, पाइन एवं बर्च इन वनों के प्रमुख वृक्ष हैं। जैसे-जैसे हम हिम रेखा के नजदीक पहुँचते हैं

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन 1

(घ) पश्चिमी भाग में-पंचमढ़ी।
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीवन 2

परियोजना कार्य

1. अपने पड़ोस में पाये जाने वाले कुछ औषधि पादपों का पता लगाइए।
उत्तर:
जामुन, नीम, बबूल, आँवला, तुलसी, बहेड़ा, सर्पगंधा आदि।

2. किन्हीं दस व्यवसायों के नाम ज्ञात कीजिए जिन्हें जंगल और जंगली जानवरों से कच्चा माल प्राप्त होता है।
उत्तर:
फर्नीचर उद्योग, औषधि निर्माण उद्योग, भवन निर्माण उद्योग, चमड़ा उद्योग, माँस उद्योग, दुग्ध व्यवसाय, पशुपालन व्यवसाय, लाख उद्योग, आखेटक संग्राहक एवं रसायन उद्योग आदि।

3. वन्य प्राणियों का महत्व बताते हुए एक पद्यांश या गद्यांश लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को शिक्षक की सहायता से स्वयं हल करें।

4. वृक्षों का महत्व बताते हुए एक नुक्कड़ नाटक की रचना कीजिए और उसका अपने गली-मुहल्ले में मंचन करो।
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को स्वयं हल करें।

5. अपने या अपने परिवार के किसी भी सदस्य के जन्मदिन पर किसी भी पौधे को लगाइए और देखिए कि वह कैसे बड़ा होता है और किस मौसम में जल्दी बढ़ता है?
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं के अनुभव के आधार पर दें।

JAC Class 9 Social Science Solutions