JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

JAC Class 9th Economics पालमपुर गाँव की कहानी InText Questions and Answers 

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या-  3

प्रश्न 1.
सारणी 1.1 में 10 लाख ( मिलीयन) हेक्टेयर की इकाइयों में भारत में कृषि क्षेत्र को दिखाया गया है। सारणी के नीचे दिए गए आरेख में इसे चित्रित करें।आरेख क्या दिखाता है ? कक्षा में चर्चा करें।

वर्षजुताई क्षेत्र ( मिलीयन हेक्टेयर)
1950 – 51129
1999 – 91157
2000 – 01156
2010 – 11 (p)156
2011 – 12 (p)156
2012 – 13 (p)157
2013 – 14 (p)156
2014 – 15 (p)155

(P)-अनंतिम गणना स्त्रोत-पॉकेट बुक ऑफ एग्रीकल्चरल स्टैटिस्टिक्स 2017, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि निगम और किसानों के कल्याण विभाग पाठ्य पुस्तक अर्थशास्त्र पेज नं. 4
JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी 1
उत्तर:
उपर्युक्त सारणी व आरेख का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि जब तक हमारे पास भूमि उपलब्ध है तब तक कृषि क्षेत्र में वृद्धि की जा सकती है जैसा कि सारणी से स्पष्ट है कि सन् 1950-51 जुताई क्षेत्र 129 मिलीयन हेक्टेयर था जो 1990-91 के आते-आते बढ़कर 157 मिलीयन हेक्टेयर हो गया लेकिन इसके बाद 2014-15 तक कोई वृद्धि नहीं हुई। यह कम हुआ या फिर स्थिर बना हुआ है।

प्रश्न 2.
क्या सिंचाई के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना आवश्यक है? क्यों?
उत्तर:
हाँ, सिंचाई के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना आवश्यक है क्योंकि भूमि सीमित है जिसे चाहकर भी नहीं बढ़ाया जा सकता, लेकिन सिंचित क्षेत्र में वृद्धि की जा सकती है ताकि जिस क्षेत्र में केवल वर्ष में एक फसल पैदा की जाती है वहाँ सिंचाई के द्वारा वर्ष में दो या तीन फसलें पैदा करके कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सके। जिससे कि तीव्रगति से बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाद्यानों की आपूर्ति की हो सके।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 4

प्रश्न 3.
आप पालमपुर में पैदा की जाने वाली फसलों के बारे में पढ़ चुके हैं। अपने क्षेत्र में पैदा की जाने वाली फसलों की सूचना के आधार पर निम्न सारणी को भरिए नोट-सभी विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र के किसानों से फसलों के बारे में सारणी में चाही गयी सूचनाओं के बारे में चर्चा करें और इस सारणी को भरकर अध्यापक जी से जाँच कराएँ।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 5

प्रश्न 4.
बहुविधि फसल प्रणाली और खेती की आधुनिक विधियों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
बहुविधि फसल प्रणाली और खेती की आधुनिक विधियों में निम्नलिखित अन्तर हैबहुविधि फसल प्रणाली खेती की आधुनिक विधियाँ

बहुविधि फसल प्रणालीखेती की आधुनिक विधियाँ
1. इसके अन्तर्गत एक ही भूमि पर वर्षभर में एक से अधिक फसलें पैदा की जाती हैं, जैसे-खरीफ में मक्का, ज्वार, बाजरा; रबी में गेहूँ, जौ; जायद में तरबूजा, खरबूजा, ककड़ी आदि।1. इसके अन्तर्गत एक ही फसल से अधिक मात्रा में अनाज पैदा होता है।
2. इस प्रणाली में खेती की परम्परागत या आधुनिक किसी भी विधि का प्रयोग हो सकता है।2. यह उन्नत बीजों वाली खेती की आधुनिक विधि है जिसमें आधुनिक कृषि यंत्र, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाइयाँ एवं अधिक पानी का प्रयोग होता है।

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प्रश्न 5.
सारणी 1.2 में भारत में हरित क्रान्ति के बाद गेहूँ और दालों के उत्पादन को करोड़ टन इकाइयों में दर्शाया गया है। इसे एक आरेख बनाकर दिखाइए। क्या हरित क्रान्ति दोनों ही फसलों के लिए समान रही?

सारणी 1.2 : दालों तथा गेहूँ का उत्पादन

वर्षदाल का उत्पादनगेहूँ का उत्पादन
1965 – 661010
1970  – 711224
1980 – 811136
1990 – 911455
2000 – 011170
2010 – 111887
2012 – 131894
2013 – 141996
2014 – 151787
2015 – 161794
2016 – 172399
2017 – 182497


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जहाँ हरित क्रान्ति से पूर्व देश में दालों व गेहूँ का उत्पादन समान था। लेकिन हरित क्रान्ति के पश्चात् दालों के उत्पादन में कभी वृद्धि तो कभी कमी का पता लगता है। परन्तु गेहूँ के उत्पादन में लगातार साल-दर-साल वृद्धि दृष्टिगोचर होती है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि हरित क्रान्ति गेहूँ उत्पादकता में वृद्धि करने में सफल रही है।

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प्रश्न 6.
आधुनिक कृषि विधियों को अपनाने वाले किसान के लिए आवश्यक कार्यशील पूँजी क्या है?
उत्तर:
आधुनिक कृषि विधियों को अपनाने वाले किसानों के लिए उत्पादन के दौरान भुगतान करने एवं जरूरी माल खरीदने के लिए कुछ पैसों की भी आवश्यकता पड़ती है, जैसे-बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक दवाइयाँ आदि। कच्चा माल तथा नकद पैसों को कार्यशील पूँजी कहते हैं।

प्रश्न 7.
पहले की तुलना में कृषि की आधुनिक विधियों के लिए किसानों को अधिक नकद (पैसे )की जरूरत पड़ती है। क्यों?
उत्तर:
पहले की तुलना में कृषि में आधुनिक विधियों को अपनाने के लिए किसान को अधिक नकद (पैसे) की आवश्यकता होती है, क्योंकि पारम्परिक कृषि पद्धति में न तो नए बीज, न ही खाद और न कीटनाशक खरीदने की आवश्यकता पड़ती थी। उक्त सभी वस्तुएँ उसे परिवार से ही प्राप्त हो जाती थीं, जैसे-बीज वह बचाकर रखता था; गोबर या दूसरी प्राकृतिक खादों का प्रयोग करता था लेकिन कृषि की आधुनिक विधियों में उसे सभी वस्तुएँ, जैसे-एच.वाई.वी.

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 7

प्रश्न 8.
किसानों के इतने अधिक परिवार भूमि के इतने छोटे प्लॉटों पर क्यों खेती करते हैं?
उत्तर:
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भूमि का आकार तो नहीं बढ़ता लेकिन किसानों के परिवार बढ़ जाते हैं, जिसके कारण भारतीय उत्तराधिकार कानून के अनुसार व्यक्ति विशेष की भूमि उसके बेटों, फिर बेटों के बेटों में बँटती जाती है। फलस्वरूप, भूमि के छोटे-छोटे खेत बनते जाते हैं। जैसे पालमपुर गाँव की कहानी में 1960 में कृषक गोविन्द के पास 2.25 हेक्टेयर भूमि थी जो उसकी मृत्यु के पश्चात् उसके तीन पुत्रों में बँट गई। अब प्रत्येक के पास केवल 0.75 हेक्टेयर भूमि ही रह गई।

प्रश्न 9.
आरेख 1.1 में भारत में किसानों और उनके द्वारा खेती में प्रयुक्त भूमि का वितरण दिया गया है। इसकी कक्षा में चर्चा करें।
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चित्र-कृषि क्षेत्र और कृषकों का वितरण उत्तर-संलग्न वृत आरेख से निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं

  1. भारत में 85% छोटे किसान हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है और वह कुल कृषि योग्य भूमि के 44.6% भाग पर खेती करते हैं।
  2. दूसरी ओर भारत में कुल कृषकों की संख्या का मात्र 15% मझोले और बड़े कृषक हैं जिनके पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है। वे सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र के 55.4% भाग पर खेती करते हैं।

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प्रश्न 10.
क्या आप इस बात से सहमत हैं कि पालमपुर में कृषि भूमि का वितरण असमान है? क्या भारत में भी ऐसी ही स्थिति है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हाँ, हम इस बात से सहमत हैं कि पालमपुर में कृषि भूमि का वितरण असमान है क्योंकि पालमपुर में कुल 450 परिवार हैं जिनमें से 150 परिवार ऐसे हैं जिनके पास कृषि भूमि नहीं है तथा 240 परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से भी कम कृषि योग्य भूमि है। इसके अतिरिक्त इस गाँव के 60 परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि है।

इनमें से कुछ परिवारों के पास तो 10 हेक्टेयर या उससे भी अधिक भूमि है। भारत में भी ऐसी ही स्थिति है। भारत में छोटे किसानों की संख्या कुल किसानों की संख्या का 85% है जिनके पास कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 44.6% भूमि है जबकि 15% किसानों के पास कुल कृषि योग्यभूमि का 55.4% है।

पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या- 9

प्रश्न 11.
डाला तथा रामकली जैसे खेतिहर श्रमिक गरीब क्यों हैं?
उत्तर:
डाला और रामकली जैसे खेतिहर श्रमिक गरीब हैं क्योंकि एक तो ये भूमिहीन श्रमिक हैं तथा दूसरे इन्हें सम्पूर्ण वर्ष कार्य भी नहीं मिलता है। ऐसे लोग हमेशा मजदूरी की तलाश में रहते हैं। गाँवों में काम करने वाले लोगों की ज्यादा संख्या तथा काम की कमी के कारण न्यूनतम मजदूरी 300 रु. से भी कम 160 रु. में काम करने को सहमत हो जाते

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 11

प्रश्न 12.
(वैकल्पिक अभ्यास) हम तीन किसानों के उदाहरण लेते हैं। प्रत्येक ने अपने खेतों में गेहूँ बोया है, यद्यपि उनका उत्पादन भिन्न-भिन्न हैं ( देखिए स्तम्भ 2, ‘दूसरा किसान’)। प्रत्येक किसान के परिवार द्वारा गेहूँ का उपभोग समान है ( देखिए स्तम्भ 3, ‘तीसरा किसान’)। इस वर्ष के समस्त अधिशेष गेहूँ का उपयोग अगले वर्ष के उत्पादन के लिए पूँजी के रूप में किया जाता है। यह भी मान लीजिए कि उत्पादन, इसमें प्रयुक्त होने वाली पूँजी का दो गुना होता है। सारणियों को पूरा करें
उत्तर:
नोट-सारणियों को गहरी काली स्याही से पूर्णतः भरा गया है।
पहला किसान

उत्पादनउपभोगअधिशेष-उत्पादन
उपभोग
अगले वर्ष के लिए
पूँजी
 वर्ष 1100406060
 वर्ष 2120408080
 वर्ष 316040120120

दूसरा किसान

उत्पादनउपभोगअधिशेष-उत्पादन
उपभोग
अगले वर्ष के लिए
पूँजी
वर्ष 180404040
वर्ष 280404040
वर्ष 380404040

तीसरा किसान

उत्पादनउपभोगअधिशेष-उत्पादन
उपभोग
अगले वर्ष के लिए
पूँजी
वर्ष 160402020
वर्ष 2404000
वर्ष 3040

प्रश्न 13.
तीनों किसानों के गेहूँ के तीनों वर्षों के उत्पादन की तुलना कीजिए।
उत्तर:
तीनों किसानों के गेहूँ के तीन वर्षों के उत्पादन की तुलना करने पर हम पाते हैं कि प्रथम किसान के गेहूँ के उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। दूसरे किसान के उत्पादन में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हो रहा है, जबकि तीसरे किसान का गेहूँ का उत्पादन निरन्तर घट रहा है।

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प्रश्न 14.
तीसरे वर्ष, तीसरे किसान के साथ क्या हुआ? क्या वह उत्पादन जारी रख सकता है? उत्पादन जारी रखने के लिए उसे क्या करना होगा?
उत्तर:
तीसरे वर्ष तीसरा किसान उत्पादन नहीं कर पाया। हाँ, तीसरा किसान, उत्पादन जारी रख सकता है, लेकिन उत्पादन जारी रखने के लिए उसे ऋण के रूप में पूँजी की व्यवस्था स्थानीय साहूकार, जमींदार या अन्य किसी सरकारी या अर्द्ध सरकारी संस्था से करनी होगी।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 12

प्रश्न 15.
मिश्रीलाल को गुड़ बनाने की उत्पादन इकाई लगाने में कितनी पूँजी की जरूरत पड़ी?
उत्तर:
मिश्रीलाल को गुड़ बनाने की उत्पादन इकाई लगाने में गन्ना पेरने की बिजली से चलने वाली मशीन खरीदने तथा दूसरे किसानों से गन्ना खरीदने के लिए लगभग 25,000 रु. की पूँजी की जरूरत पड़ी होगी।

प्रश्न 16.
इस कार्य में श्रम कौन उपलब्ध कराता है?
उत्तर:
इस कार्य में श्रम प्रायः परिवार के सदस्य ही उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न 17.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि मिश्रीलाल क्यों अपना लाभ नहीं बढ़ा पा रहा है?
उत्तर:
मिश्रीलाल अपना लाभ नहीं बढ़ा पा रहा है क्योंकि हो सकता है कि वह उत्पादन के लिए नवीन तकनीक नहीं अपनाने के कारण अच्छी गुणवत्ता का गुड़ उत्पादित नहीं कर पा रहा हो तथा कम पूँजी के कारण उत्पादित गुड़ की मात्रा कम होने की वजह से अपना उत्पादन बड़े व्यापारियों के बेचने के स्थान पर आस-पास के छोटे व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हो। हमारी समझ में तो यही दो कारण हो सकते हैं जो मिश्रीलाल के लाभ-वृद्धि में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

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प्रश्न 18.
क्या आप ऐसे कारणों के बारे में सोच सकते हैं जिनसे उसे हानि भी हो सकती है?
उत्तर:
बिजली से चलने वाली मशीन के खराब हो जाने पर, गन्ना न मिलने पर अथवा गुड़ की कीमतें घट जाने पर उसे हानि भी हो सकती है।

प्रश्न 19.
मिश्रीलाल अपना गुड़ गाँव में न बेचकर शाहपुर के व्यापारियों को क्यों बेचता है?
उत्तर:
मिश्रीलाल अपना गुड़ शाहपुर के व्यापारियों को इसलिए बेचता है क्योंकि उसके गाँव में गुड़ की माँग कम

प्रश्न 20.
करीम की पूँजी और श्रम किस रूप से मिश्रीलाल की पूँजी और श्रम से भिन्न है?
उत्तर:
करीम मानसिक श्रम करा रहा है जबकि मिश्रीलाल शारीरिक श्रम कर रहा है। करीम ने कम्प्यूटर केन्द्र चलाने के लिए एक बार अधिक पूँजी लगाई है लेकिन मिश्रीलाल पूँजी से मशीन लगाता है तथा गन्ना खरीदता है एवं गुड़ बनाकर बेचकर जो पैसे आते हैं उनसे फिर गन्ना खरीदता है। इस प्रकार लाभ कमाता है।

प्रश्न 21.
इससे पहले किसी और ने कम्प्यूटर केन्द्र क्यों नहीं शुरू किया? सम्भावित कारणों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
करीम से पहले पालमपुर ग्राम में किसी और ने कम्प्यूटर केन्द्र इसलिए शुरू नहीं किया होगा कि इससे पहले गाँव के छात्र कॉलेज नहीं जाते होंगे और शहर की कम्प्यूटर कक्षाओं में भी नहीं जाते होंगे। दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि इससे पहले पालमपुर में कोई प्रशिक्षित कम्प्यूटर सिखाने वाला नहीं होगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या- 13

प्रश्न 22.
किशोर की स्थायी पँजी क्या है?
उत्तर:
किशोर की स्थायी पूँजी के रूप में उसके द्वारा खरीदी गयी भैंस और भैंसागाड़ी हैं।

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प्रश्न 23.
क्या आप सोच सकते हैं कि उसकी कार्यशील पूँजी कितनी होगी?
उत्तर:
किशोर की कार्यशील पूँजी के अन्तर्गत केवल भैंस के लिए चारा, चुनी, अनाज हेतु लगभग एक-डेढ़ हजार और भैंसागाड़ी हेतु भी लगभग दो-ढाई हजार रुपये। इस प्रकार कुल मिलाकर किशोर के पास तीन-चार हजार रुपये की कार्यशील पूँजी होगी।

प्रश्न 24.
किशोर कितनी उत्पादन क्रियाओं में लगा हुआ है?
उत्तर:
किशोर कृषि उत्पादन के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन और परिवहन सेवाओं में भी लगा हुआ है।

प्रश्न 25.
क्या आप कह सकते हैं कि किशोर को पालमपुर की अच्छी सड़कों से लाभ हआ है?
उत्तर:
हाँ, हम कह सकते हैं कि किशोर को पालमपुर की अच्छी सड़कों से लाभ हुआ है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या 15

प्रश्न 1.
आधुनिक या परम्परागत या मिश्रित-खेती की इन विधियों में से किसान किसका प्रयोग करते हैं? एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हमारे क्षेत्र के अधिकांश किसान खेती की मिश्रित विधियों का प्रयोग करते हैं। वे अपने खेतों को हल-बैल से जोतते हैं। सिंचाई मुख्यतः नलकूप और फव्वारा पद्धति से करते हैं। वे अपने खेतों में गाय-भैंस के गोबर की खाद एवं रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। यहाँ कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। फसल की कटाई परम्परागत विधियों से की जाती है।

प्रश्न 2.
सिंचाई के क्या स्त्रोत हैं?
उत्तर:
सिंचाई के प्रमुख साधन वर्षा के अलावा नहर, नलकूप आदि हैं।

प्रश्न 3.
कृषि भूमि के कितने भाग में सिंचाई होती है? (बहुत कम/लगभग आधी/अधिकांश/समस्त)
उत्तर:
वर्तमान में कृषि भूमि के लगभग आधे क्षेत्र में ही सिंचाई के साधन उपलब्ध होने के कारण सिंचाई की व्यवस्था हो पाती है। शेष भूमि पर साधनों की अनुपलब्धता के कारण वर्षा पर ही कृषि निर्भर है।

प्रश्न 4.
किसान अपने लिए आवश्यक आगत कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
किसान अपने लिए आवश्यक आगत अर्थात् कार्यशील पूँजी की व्यवस्था स्थानीय साहूकार, लाला या जमींदार से करते हैं। कुछ शिक्षा का प्रचार-प्रसार होने से भारतीय कृषकों में चेतना उत्पन्न हुई है और अब वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत सरकारी संस्थानों से भी अपनी आवश्यक आगत की व्यवस्था करने लगे हैं। सरकार द्वारा ग्रीन कार्ड की व्यवस्था से किसानों को बैंकों के द्वारा आसानी से फसली ऋण उपलब्ध होने लगा है।

JAC Class 9th Economics पालमपुर गाँव की कहानी Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
भारत में जनगणना के दौरान दस वर्ष में एक बार प्रत्येक गाँव का सर्वेक्षण किया जाता है। पालमपुर से सम्बन्धित सूचनाओं के आधार पर निम्न तालिका को भरिए
उत्तर:
(क) अवस्थिति क्षेत्र: पालमपुर, रायगंज से तीन किमी. की दूरी पर सड़क से जुड़ा हुआ गाँव है।
(ख) गाँव का कुल क्षेत्र-226 हेक्टेयर।
(ग) भूमि का उपयोग (हेक्टेयर में) कृषि भूमि

कृषि भूमिभूमि जो कृषि के लिए उपलब्ध नहीं है
(निवास स्थानों, सड़कों तालाबों, चारागाहों आदि का क्षेत्र)
सिंचितअसिंचित
200 हेक्टेयर26 हेक्टेयर

(घ) सुविधाएँ

शैक्षिकदो प्राथमिक विद्यालय व एक हाईस्कूल है।
चिकित्साएक राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र व एक निजी औषधालय है।
बाजाररायगंज और शाहपुर के बाजार।
बिजली पूर्तिअधिकांश घरों में उपलब्ध।
संचारउपलबध नहीं।
निकटतमशाहपुर।
कस्बादो प्राथमिक विद्यालय व एक हाईस्कूल है।

प्रश्न 2.
खेती की आधुनिक विधियों के लिए ऐसे अधिक आगतों की आवश्यकता होती है जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है। क्या आप सहमत हैं ?
उत्तर:
हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं क्योंकि खेती की आधुनिक विधियों में उन्नतशील बीज, रासायनिक खाद (उर्वरक), कीटनाशक, खरपतवारनाशक आदि उद्योगों (फैक्ट्रियों) में विनिर्मित किए जाते हैं तथा सिंचाई में काम आने वाले पम्पसैट, जुताई के काम आने वाला ट्रैक्टर तथा उपजों से खाद्यान्न व दूसरे उत्पाद प्राप्त करने के लिए जो भी यन्त्र काम आते हैं, सभी किसी न किसी उद्योग में विनिर्मित होते हैं।

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प्रश्न 3.
पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की किस प्रकार मदद की?
उत्तर:
पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की बहुत अधिक मदद की। वर्तमान में पालमपुर में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो कि असिंचित क्षेत्र के अन्तर्गत आता हो। बिजली के प्रसार से न केवल सम्पूर्ण क्षेत्र सिंचित है, बल्कि बहुत कम समय में एक बड़े क्षेत्र की सिंचाई आसानी से पूर्ण हो जाती है।

प्रश्न 4.
क्या सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्वपूर्ण है? क्यों?
उत्तर:
सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्वपूर्ण ही नहीं बल्कि देश की बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती खाद्यान्न की माँग को पूरा करने के लिए आवश्यक भी है। क्योंकि जितना ज्यादा सिंचित क्षेत्र उपलब्ध होगा, हम उतना ही अधिक कृषि उत्पादन कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि के वितरण की एक सारणी बनाइए।
उत्तर:
पालमपुर के कुल 450 परिवारों में भूमि का वितरण इस प्रकार हैक्र. सं. परिवारों की संख्या

प्रश्न 6.
पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी, न्यूनतम मजदूरी से कम क्यों है?
उत्तर:
पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी, न्यूनतम मजदूरी से भी कम है क्योंकि पालमपुर में लगभग आधे परिवार ऐसे हैं जो या तो भूमिहीन हैं या बहुत छोटे क्षेत्र पर कृषि कार्य करते हैं। ये लोग हमेशा ही कोई न कोई कार्य ढूँढ़ते रहते हैं। पालमपुर में काम करने वाले ज्यादा तथा काम कम है। इस कारण वे सरकार द्वारा निर्धारित 300 रु. दैनिक मजदूरी से भी कम 160 रु. दैनिक मजदूरी पर काम करने को तैयार हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
अपने क्षेत्र में दो श्रमिकों से बात कीजिए।खेतों में काम करने वाले या विनिर्माण कार्य में लगे मजदूरों में से किसी को चनें। उन्हें कितनी मजदूरी मिलती है? क्या उन्हें नकद पैसा मिलता है या वस्तु-रूप में? क्या उन्हें नियमित रूप से काम मिलता है? क्या वे कर्ज में हैं?
उत्तर:
मैंने अपने क्षेत्र के दो श्रमिकों ‘रामसिंह’ और ‘भगवत’ से बात की- ये दोनों खेतिहर श्रमिक हैं। इन्हें 100 रु. दैनिक मजदूरी के रूप में मिलते हैं। इन्हें मजदूरी के रूप में नकद पैसा ही मिलता है न कि वस्तु रूप में। इनको नियमित रूप से कार्य नहीं मिल पाता है और ये आस-पास के गाँवों या छोटे कस्बों में भी काम तलाशते रहते हैं। काम पर्याप्त न मिल पाने की वजह से ये दोनों कर्ज में हैं।

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प्रश्न 8.
एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग कौन से तरीके हैं ? समझाने के लिए उदाहरणों का प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग तरीकों में बहुविधि फसल प्रणाली और आधुनिक फसल प्रणालियाँ हैं। बहुविधि फसल प्रणाली के अन्तर्गत किसान सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर एक वर्ष में एक फसल के स्थान पर दो या तीन फसलें प्राप्त करके उत्पादन में वृद्धि का प्रयास करता है, जैसे खरीफ के मौसम में ज्वार, बाजरा, मक्का; रबी के मौसम में गेहूँ, चना, मटर एवं जायद के मौसम में तरबूजा, खरबूजा, ककड़ी आदि उगाए जाते हैं।

जबकि आधुनिक फसल प्रणाली के अन्तर्गत किसान सिंचाई के लिए नलकूपों, एच.वाई.वी. बीजों, कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन में बढ़ोत्तरी करने लगे हैं। कृषि में हुए इन आधुनिक प्रयोगों का ही परिणाम है कि अब हमें अपनी भूख मिटाने के लिए किसी दूसरे देश का मुँह ताकने की आवश्यकता नहीं है। यहाँ तक कि हरित क्रान्ति को लोग गेहूँ की क्रान्ति भी कहने लग गए हैं।

प्रश्न 9.
एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के कार्य का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर:
एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान को अपनी भूमि के समस्त कार्यों के साथ-साथ दूसरे बड़े किसानों की भूमि में खेतिहर मजदूर के रूप में मजदूरी करने की विवशता है और जब खेतों में काम नहीं होता तब वे आस-पास के गाँवों, कस्बों में काम तलाश कर उस पर लग जाते हैं ताकि उनके परिवार का भरण-पोषण होता रहे। कई बार इतना करने के बाद भी ये किसान कर्ज में डूब जाते हैं।

प्रश्न 10.
मझोले और बड़े किसान कृषि से कैसे पूँजी प्राप्त करते हैं ? वे छोटे किसानों से कैसे भिन्न हैं?
उत्तर:
मझोले और बड़े किसान परिवार के उपभोग हेतु कुछ उपज रख लेने के बाद अधिशेष गेहूँ को बाजार में बेचकर पूँजी प्राप्त कर लेते हैं। ये छोटे किसानों से इसलिए भिन्न हैं क्योंकि छोटे किसान के पास बहुत कम उत्पादन होता है। इस उत्पादन से उनकी घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति भी बहुत मुश्किल से होती है। अधिशेष के बारे में ये छोटे किसान सोच भी नहीं पाते हैं। अतः इनके पास कृषि उत्पादन से किसी प्रकार की पूँजी एकत्रित नहीं होती है।

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प्रश्न 11.
सविता को किन शर्तों पर तेजपाल सिंह से ऋण मिला है? क्या ब्याज की कम दर पर बैंक से कर्ज मिलने पर सविता की स्थिति अलग होती?
उत्तर:
सविता को तेजपाल सिंह से चार महीने के लिए 24% वार्षिक की ब्याज दर पर कर्ज मिला है। साथ में सविता को फसल कटाई के समय में 35 रु. प्रतिदिन की मजदूरी पर उसके खेत में काम करने का वचन भी देना पड़ा है। यदि सविता को कम ब्याज दर पर बैंक से कर्ज मिल जाता तो सविता को अधिक ब्याज व कम मजदूरी में व्यस्त दिनों में काम करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

प्रश्न 12.
अपने क्षेत्र के कुछ पुराने निवासियों से बात कीजिए और पिछले 40-50 वर्षों में सिंचाई और उत्पादन के तरीकों में हुए परिवर्तनों पर एक संक्षिप्त (वैकल्पिक )रिपोर्ट लिखिए।
उत्तर:
हम यहाँ पर पालमपुर ग्राम में हुए परिवर्तनों की वैकल्पिक रिपोर्ट लिख रहे हैं। (विद्यार्थियों से आग्रह है कि वे अपने-अपने क्षेत्र की इसी प्रकार रिपोर्ट बनाकर विषयाध्यापक जी से जाँच कराएँ।) हमें पालमपुर में कुछ बुजुर्ग कृषकों से बात करने पर ज्ञात हुआ कि आज से लगभग 40-50 वर्ष पहले सिंचाई वर्तमान की भाँति नलकूपों से नहीं होती थी बल्कि कुछ कच्चे और कुछ पक्के कुओं पर परम्परागत सिंचाई के साधनों जैसे-चरस, रहट, ढेकुली आदि से बहुत परिश्रम करके फसलों की सिंचाई की जाती थी।

इसी प्रकार कृषि उत्पादन हेतु खेतों को हल और बैलों के माध्यम से पाटा फेर कर, जोत कर तैयार किया जाता था। उसके बाद घर के सदस्य बीज बोते थे वह भी पिछली फसल का अधिशेष होता था। खाद भी वर्तमान की जैसी नहीं थी, गोबर की प्राकृतिक खाद दी जाती थी। फसल तैयार होने पर हाथों से कटाई करके बैलों के माध्यम से उपज को प्राप्त किया जाता था। सब कुछ जानने के बाद निष्कर्ष यह निकला कि पुराने समय में कृषि कार्य में मानवीय श्रम की अधिकता थी जबकि वर्तमान समय में यांत्रिक श्रम अधिक काम आता है।

प्रश्न 13.
आपके क्षेत्र में कौन से गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं? इनकी एक संक्षिप्त सूची बनाइए।
उत्तर:
हमारे क्षेत्र में निम्नलिखित गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं

  1. डेयरी कार्य।
  2. गुड़ बनाने का कार्य।
  3. वस्तु विनिमय से सम्बन्धित कार्य।
  4. कम्प्यूटर केन्द्र खोलकर प्रशिक्षण का कार्य।
  5. परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराने के कार्य।
  6. मिट्टी के बर्तन बनाने सम्बन्धी कार्य।
  7. बान, रस्सी, ढकोले आदि विनिर्माण सम्बन्धी कार्य।

नोट: उक्त सारणी में ज्यादातर पालमपुर ग्राम में होने वाले गैर-कृषि कार्यों को लिया गया है विद्यार्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने क्षेत्रीय कार्यों की सूची बनायें।

JAC Class 9 Social Science Solutions Economics Chapter 1 पालमपुर गाँव की कहानी

प्रश्न 14.
गाँवों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारम्भ करने के लिए क्या किया जा सकता है?
उत्तर:
गाँव में आज भी लगभग 25% लोग ऐसे हैं जो गैर-कृषि कार्यों में लगे रहते हैं चाहे इन कार्यों से इनके परिवार का भरण-पोषण हो या न हो। अगर गाँव के लोगों को गैर-कृषि कार्यों की आधुनिक माँग के अनुरूप करने के लिए प्रशिक्षित किया जाये तो इन लोगों के जीवन स्तर में बदलाव लाया जा सकता है। अतः लोगों में जागरूकता पैदा करके शिक्षण व प्रशिक्षण के लिए उन्हें तैयार किया जाये और वर्तमान माँग के अनुरूप कुटीर उद्योग-धन्धों की शुरुआत करने के लिये लोगों को तैयार किया जाये।

अगर किसी कार्य में पूँजी की आवश्यकता पड़े तो हमें ग्रामीण या व्यापारिक बैंकों से ऋण दिलाने की व्यवस्था भी करनी होगी, तभी गाँवों की स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। इन कुटीर उद्योगों के लिए कच्चे माल की प्राप्ति के स्रोतों व निर्मित माल के उपयुक्त बाजारों की जानकारी भी उस प्रशिक्षण का हिस्सा होना आवश्यक है ताकि ग्रामीण परिवेश के लोगों को यह विश्वास हो सके कि हम इस प्रशिक्षण के बाद अपने उद्योग को आसानी से चला पायेंगे।

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JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

JAC Class 9th Civics  लोकतांत्रिक अधिकार InText Questions and Answers

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में विभिन्न पृष्ठों पर लड़के/लड़की के कार्टून चित्रों के नीचे अथवा ‘खुद करें, खुद सीखें’ शीर्षक से बॉक्स में अथवा ‘कार्टून बूझें’ शीर्षक के नीचे अथवा कहाँ पहुँचे? क्या समझे? शीर्षक से बॉक्स में प्रश्न दिए हुए हैं। इन प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं|

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 82

प्रश्न 1.
अगर आप सर्ब होते तो कोसोवो में मिलोशेविक ने जो कुछ किया, क्या उसका समर्थन करते? सर्ब लोगों का प्रभुत्व कायम करने की उनकी योजना क्या सर्ब लोगों के वास्तविक हित में थी?
उत्तर:
यदि मैं एक सर्ब होता तो मिलोशेविक के कार्यों का बिल्कुल समर्थन नहीं करता। सर्ब लोगों का प्रभुत्व कायम करने की उसकी योजना किसी भी रूप में सर्ब लोगों के वास्तविक हित में नहीं थी।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 83

प्रश्न 2.
कोसोवो की बतीसा की तरफ से 1984 के सिख विरोधी दंगों या 2002 के गुजरात दंगों में वैसी ही स्थिति झेलने वाली किसी महिला के नाम एक पत्र लिखिए।
उत्तर:

13 नवम्बर,
कोसोवो,
यूगोस्लाविया

प्रिय अनीता,
अखबारों के माध्यम से सिख विरोधी दंगों का पता चला, दंगे से तुम्हें भी बहुत हानि हुई, यह जानकर दुःख हुआ। इस तरह की घटनाओं को सुनकर हृदय को बहुत दुःख होता है। मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि कैसे मनुष्य एक-दूसरे पर अत्याचार करते हैं। हर जुल्म की एक सीमा होती है। हम सबको मिलकर इन अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।

सदैव तुम्हारी
बतीसा

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प्रश्न 3.
सऊदी अरब की महिलाओं की तरफ से संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नाम एक ज्ञापन लिखिए।
उत्तर:
महाशय, मैं आपको सऊदी अरब में महिलाओं के लिए निम्न व्यवस्था हेतु आग्रह करना चाहती हूँ

  1. महिलाओं को विधायिका तथा कार्यपालिका के चुनाव में भाग लेने की अनुमति होनी चाहिए।
  2. महिलाओं पर लगाये गये सभी सार्वजनिक प्रतिबन्ध नहीं होने चाहिए। इन प्रतिबन्धों को हटाया जाना चाहिए।
  3. महिलाओं को भी पुरुषों के समान सामाजिक स्तर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  4. महिलाओं को अपने शासकों को चुनने अथवा बदलने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 4.
अधिकारविहीन जीवन के इन तीनों मामलों से मिलते-जुलते उदाहरण भारत से भी दें। ये उदाहरण निम्नलिखित में से हो सकते हैं
पुलिस हिरासत में हिंसा की अखबारी खबरें।
1. भूख हड़ताल पर जाने वाले कैदियों को जबरदस्ती खाना खिलाने की अखबारी रपट।
2. हमारे देश के किसी हिस्से में जातीय हिंसा।
3. महिलाओं के साथ गैर-बराबरी वाले व्यवहार की खबरें।
4. फिर इन मामलों और भारतीय मामलों के बीच समानता और अन्तरों की सूची बनाएँ। यह जरूरी नहीं है कि प्रत्येक मामले के लिए आप ठीक उसी तरह का भारतीय उदाहरण दें।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 84

प्रश्न 5.
चुनी हुई सरकारों द्वारा अपने नागरिक के अधिकार की रक्षा न करने या इन अधिकारों पर हमला करने के उदाहरण कौन से हैं? सरकार ऐसा क्यों करती है?
उत्तर:
चुनी हुई सरकारों द्वारा अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा न कर पाना तथा उन पर आक्रमण होने के उदाहरण हैं-तानाशाही सरकार, औपनिवेशिक सरकार और सैनिक सरकार। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे सरकार का सत्ता पर कब्जा बना रहे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 86

प्रश्न 6.
हर आदमी जानता है कि अमीर आदमी मुकदमे के समय अच्छे वकीलों की मदद ले सकता है। फिर कानून के समक्ष समानता की बात का क्या महत्व रह जाता है?
उत्तर:
यह सत्य है कि अमीर लोग धन की ताकत पर न्यायालय में अच्छे से अच्छा वकील कर सकते हैं। लेकिन संविधान के अनुसार सरकार प्रत्येक व्यक्ति को, उसके माँगने पर, मुफ्त न्यायिक सेवा उपलब्ध करायेगी, ऐसा कानून के समक्ष समानता या कानून की एक समान सुरक्षा के नाम पर किया जाता है।

इसका अर्थ यह है कि कानून अमीर-गरीब में कोई भेद नहीं करता, उसकी दृष्टि में सभी एक समान हैं। धनी लोग चाहे अच्छे वकीलों को एकत्रित कर लें, लेकिन लोकतान्त्रिक व्यवस्था में दोषी पाये जाने पर उन्हें भी वही सजा मिलेगी जो किसी सामान्य नागरिक को मिलती। अतः कानून के सामने समानता का बहुत ही व्यापक अर्थ होता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 87

प्रश्न 7.
किसी भी स्कूल के खेल के दौरान या किसी स्टेडियम में जाकर 400 मीटर दौड़ वाली पट्टी को गौर से देखिए। वहाँ बाहरी लेन में दौड़ने वाले खिलाड़ी को अन्दर वाली लेन के खिलाड़ी रेआगे के स्थान से दौड़ शुरू करने क्यों दिया जाता है? अगर सभी दौड़ने वाले एक ही लाइन पर से दौड़ प्रारम्भ करें तो क्या होगा? इन दोनों स्थितियों में से कौन-कौन सी स्थिति दौड़ के मुकाबले को समान बनाती है? नौकरियों में प्रतिद्वन्द्विता के मामले में भी इसी चीज को लागू कीजिए।
उत्तर:
खेल की शुरुआत के समय लाइन में अपनी दौड़ की शुरुआत करने वाले प्रतियोगियों को अन्दर की लाइन में दौड़ने वाले प्रतियोगियों के आगे रखा गया क्योंकि अन्दर के लाइन की परिधि बाहर के लाइन की परिधि से कम है। अतः प्रतियोगिता के समय न्याय नहीं हो सकेगा। इस हेतु बाहरी लाइन वालों को आगे रखने से दोनों को समान दूरी तय करनी होगी तभी प्रतियोगियों के साथ न्याय हो सकेगा।

यदि सभी प्रतियोगियों को एक ही लेन से दौड़ की शुरुआत करने को कहा जाए तो बाहरी लेन में दौड़ने वालों को अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी तथा वे लक्ष्य तक स्वाभाविक रूप से देर में पहुंचेंगे जो कि न्याय के विरुद्ध होगा। प्रथम स्थिति उचित है जिसमें बाहरी लाइन वालों को अन्दर की लाइन वालों से आगे रखा गया था। इस उदाहरण को नौकरी के क्षेत्र में भी लागू किया जा सकता है। प्रतियोगिता में समान योग्यता वाले विद्यार्थियों को एक साथ रखा जाना चाहिए।

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प्रश्न 8.
किसी भी बड़ी सार्वजनिक इमारत को गौर से देखिए। क्या वहाँ विकलांगों के आने-जाने के लिए अलग से विशेष व्यवस्था है ? विकलांग लोग उस जगह का उपयोग किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह ही कर सकें क्या इसका कोई और विशेष इंतजाम वहाँ है? ज्यादा खर्च होने पर भी क्या वे विशेष इंतजाम किए जाने चाहिए? क्या ये विशेष इंतजाम समानता के सिद्धान्त का उल्लंघन करते हैं?
उत्तर:
हमारे शहर में जय नारायण मेमोरियल ट्रस्ट का एक बड़ा सार्वजनिक भवन है, जहाँ शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए रैम्प बनाए गए हैं। वहाँ पर कई अन्य सुविधाएँ हैं जिनका उपयोग विकलांग लोग आसानी से कर सकते हैं। इस कारण से उस भवन की उपयोगिता विकलांग लोगों के लिए भी उतनी ही है जितनी कि आम लोगों के लिए।

यह सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक है, विकलांग भी हमारे समाज के सदस्य होते हैं तथा इस देश के सम्मानित नागरिक हैं, जिन्हें सार्वजनिक भवनों के बराबर उपयोग का अधिकार है। हाँ, ज्यादा खर्च होने पर भी विशेष इंतजाम किये जाने चाहिए, इस तरह के विशेष इंतजाम समानता के सिद्धान्त का उल्लंघन नहीं करते हैं।

प्रश्न 9.
1999 में प्रसिद्ध पत्रकार पी.साईंनाथ ने दलितों या अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ अभी तक छुआछूत के व्यवहार पर अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दू’ में एक लेखमाला लिखी। वे देश के अनेक स्थानों पर गये और पाया कि अनेक स्थानों पर
1. चाय की दुकानों पर दो तरह के कप रखे जाते हैं-एक दलितों के लिए, दूसरा बाकी लोगों के लिए।
2. हजाम दलितों के बाल नहीं काटते, दाढ़ी नहीं बनाते।
3. दलित छात्रों को कक्षा में अलग बैठना होता है और अलग रखे घड़े से पानी पीना होता है।
4. दलित दूल्हों को बारात में घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया जाता। दलितों को सार्वजनिक हैण्डपम्प से पानी नहीं लेने दिया जाता या उनके पानी भर लेने के बाद हैण्डपम्प को धो दिया जाता है। ये सभी काम छुआछूत की परिभाषा के दायरे में आते हैं। क्या आप अपने इलाके से कुछ ऐसे ही उदाहरण सोच सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, हमने अपने क्षेत्र में लोगों को इस तरह का व्यवहार करते हुए कभी नहीं देखा है। किसी भी रूप में छुआछूत को व्यवहार में लाना एक दंडनीय अपराध है। हमारा संविधान भी इस बात की इजाजत नहीं देता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 88

प्रश्न 10.
क्या गलत और संकीर्ण विचारों का प्रचार करने वालों को भी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता मिलनी चाहिए? क्या उन्हें लोगों को भ्रमित करने की अनुमति दी जानी चाहिए?
उत्तर:
नहीं, ऐसे लोग जो संकीर्ण तथा गलत विचारों को जनता में फैलाते हैं वे एक दंडनीय अपराध कर रहे हैं। उनकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर समाज के हित में रोक लगानी चाहिए। ऐसे लोगों को कोई हक नहीं है कि वे अपने गलत और संकीर्ण विचारों से दूसरों को भ्रमित करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 90

प्रश्न 11.
क्या निम्नांकित उदाहरण स्वतन्त्रता के अधिकार के उल्लंघन के हैं? अगर हाँ, तो प्रत्येक में संविधान के कौन-से प्रावधान का उल्लंघन हुआ है?
1. भारत सरकार ने सलमान रुश्दी की किताब ‘सैटेनिक वर्सेज’को इस आधार पर प्रतिबन्धित कर दिया कि इसमें पैगम्बर मोहम्मद के प्रति अनादर का भाव दिखाया गया और इससे मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि यदि किसी के विचारों से जनमानस की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो उसे प्रतिबन्धित किया जा सकता है।

2. हर फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन पूर्व भारत सरकार के सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र लेना होता है। पर वही कहानी किताब या पात्रिका में छपे तो उस पर ऐसी पाबंदी नहीं है।
उत्तर:
हाँ, यह मामला स्वतन्त्रता के अधिकार के उल्लंघन का उदाहरण है। क्योंकि एक फिल्म का प्रभाव तो शिक्षित अथवा अशिक्षित दोनों ही लोगों पर पड़ सकता है, किन्तु किसी किताब को एक शिक्षित व्यक्ति ही पढ़ता है जिसके पास एक मजबूत विचार होता है। अतः इस तरह की पाबन्दी नहीं लगानी चाहिए।

3. सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कुछ खास औद्योगिक क्षेत्रों या अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों में काम करने वालों को यूनियन बनाने और हड़ताल पर जाने का अधिकार नहीं होगा।
उत्तर:
यह व्यक्ति की स्वतन्त्रता के अधिकार के उल्लंघन का मामला है। संविधान द्वारा संगठन बनाने का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त है।

4. नगर प्रशासन ने माध्यमिक परीक्षाओं के मद्देनजर शहर में रात 10 बजे के बाद सार्वजनिक लाउडस्पीकर के प्रयोग पर पाबन्दी लगा दी है।
उत्तर:
यह मामला स्वतन्त्रता के अधिकार के हनन का मामला नहीं है, हमें अपने अधिकारों का उसी सीमा तक प्रयोग करने का अधिकार है जिस सीमा तक वे किसी दूसरे के अधिकार का उल्लंघन नहीं करते हों। बच्चों की परीक्षा को देखते हुए प्रशासन द्वारा लिया गया यह सही फैसला है। हमें इसका पालन करना चाहिए।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 91

प्रश्न 12.
इन खबरों के आधार पर सम्पादक के नाम एक लम्बा पत्र या शोषण के खिलाफ अधिकार के उल्लंघन की बात उजागर करते हुए अदालत के लिए अर्जी लिखिए :
मद्रास हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर की गई। अर्जी दायर करने वाले ने कहा कि सालेम जिले के गाँवों के 7 से 12 वर्ष के उम्र के अनेक बच्चों को ले जाकर केरल के त्रिचूर जिले के ओलुर में बेचा गया है। आवेदनकर्ता ने अदालत से माँग की कि वह सरकार को इस मामले से जुड़े हुए तथ्यों की जाँच कराने का आदेश दे। (मार्च 2005)

कर्नाटक के होमपेट, मांडुर और इकाल इलाके में लौह अयस्क खदानों में पाँच वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों से काम कराया जा रहा है। बच्चों से खुदाई, अयस्क तोड़ने,लादने, गिराने, ढुलाई और कटाई का काम लिया जा रहा है। उनको न तो सुरक्षा के उपकरण दिये जाते हैं न तय मजदूरी और न ही उनके काम का समय तय है। वे बहुत ही जहरीले कचरे को ढोते हैं और खदान की धूल, जो मानक स्तर से काफी अधिक है, भी उनके आँख, नाक, कान में जाती रहती है। इस इलाके में स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर काफी ऊँची है। (मई 2005)

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के नवीनतम वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में लड़कियों से काम कराने का क्रम बढ़ता जा रहा है और अब, ज्यादा बच्चियों से काम कराया जा रहा है। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि पहले जहाँ प्रति हजार कामगारों में बच्चियों की संख्या 34 थी वहीं अब 41 हो गयी है। लड़कों की संख्या का अनुपात 31 बना हुआ है। (अप्रैल, 2005)
उत्तर:
नोट-विद्यार्थी ऊपर लिखे हुए तथ्यों का प्रयोग करते हुए स्वयं पत्र लिखें। इन न्यूज रिपोर्ट्स के विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि बच्चों से सम्बन्धित तीनों ही मामलों में बिना किसी सुरक्षा या उपयुक्त माहौल के उनसे खतरनाक काम लिये जा रहे हैं और उन्हें व्यापार की वस्तु बना दिया गया है। सर्वेक्षण रिपोर्ट भी बाल मजदूरों, खासकर महिला बाल मजदूरों की तेजी से बढ़ती संख्या की ओर इशारा कर रही है।

हमारे संविधान में बाल मजदूरी पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। किसी भी व्यक्ति को 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी खतरनाक उद्योग में नियोजित करने का अधिकार नहीं है। यह बच्चों के ऊपर किया जा रहा अत्याचार है। इस सम्बन्ध में माननीय न्यायालय द्वारा आवश्यक कदम उठाते हुए सरकार से तथ्यों की जाँच करने हेतु कहा जाए तथा इसको सही पाये जाने पर आवश्यक कार्यवाही की जाए।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

प्रश्न 13.
क्या आपको अपने प्रदेश में लागू न्यूनतम मजदूरी का पता है? अगर नहीं, तो क्या आप यह पता कर सकते हैं? अपने मुहल्ले में अलग-अलग काम करने वालों से बात करके यह जानने की कोशिश कीजिए कि क्या उनको न्यूनतम मजदूरी मिल रही है। उनसे पूछिए कि क्या उनको न्यूनतम मजदूरी का पता है? उनसे यह भी पूछिए कि उसी काम के लिए क्या मर्द और औरत को समान मजदूरी मिलती है?
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अपने शिक्षकों की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 92

प्रश्न 14.
संविधान लोगों का धर्म नहीं तय करता। पर लोगों को अपने धार्मिक कामकाज करने का अधिकार इसे क्यों देना पड़ा?
उत्तर:
एक धर्मनिरपेक्ष प्रजातन्त्र में लोग अपनी पसंद के धर्म का चुनाव करने तथा उसको मानने के लिए स्वतन्त्र हैं। संविधान यह अधिकार देकर धर्म को वैयक्तिक विषय बनाता है। स्वतन्त्रता स्वयं में सबसे बड़ा धर्म है। यदि किसी को धर्म के अनुपालन से कानून द्वारा रोका जाए और किसी खास धर्म को सरकार द्वारा आश्रय दिया जाए, तो वह देश एक धार्मिक देश होगा जबकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (पंथ निरपेक्ष) देश है।

हमारे संविधान की प्रस्तावना में इस देश का स्वरूप धर्मनिरपेक्ष बताया गया है। अर्थात् धर्म के आधार पर यहाँ किसी भी तरह के भेदभाव की सम्भावना नहीं है। अतः व्यक्ति की धार्मिक स्वतन्त्रता की घोषणा आवश्यक है, जो हमारा संविधान करता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 93

प्रश्न 15.
इन खबरों को पढ़िए और प्रत्येक में जिस अधिकार की चर्चा है, उसकी पहचान कीजिए। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी की आपात बैठक में हरियाणा के सिख धार्मिक स्थलों के प्रबन्धन के लिए अलग संगठन बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। सरकार को यह चेतावनी दी गई कि सिख समुदाय अपने धार्मिक मामलों में किसी भी किस्म की दखलंदाजी बरदाश्त नहीं करेगा। (जून 2005)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने वाले केन्द्रीय कानून को रद्द कर दिया और मेडिकल स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स में सीटों के आरक्षण को गैर-कानूनी करार दिया। (जनवरी 2005)

राजस्थान सरकार ने धर्म परिवर्तन विरोधी कानून बनाने का फैसला किया है। ईसाई नेताओं का कहना है कि इस विधेयक से अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ेगी।
(मार्च 2005)
उत्तर:
पहले कथन में धर्म की स्वतन्त्रता सम्बन्धी अधिकार की चर्चा की गई है। दूसरे कथन में समानता के अधिकार की चर्चा की गई है। तीसरे कथन में धार्मिक स्वतन्त्रता सम्बन्धी अधिकार की चर्चा की गई है।

प्रश्न 16.
क्या आपको अपने मौलिक अधिकारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने से राष्ट्रपति भी रोक सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, भारत के राष्ट्रपति मुझे अपने मौलिक अधिकार प्राप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने से नहीं रोक सकते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 95

प्रश्न 17.
क्या आपके राज्य में मानवाधिकार आयोग है? इसकी गतिविधियों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठी कीजिए।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

प्रश्न 18.
इस अध्याय में आए मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों या आपको ज्ञात किसी भी ऐसे मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक आवेदन लिखें।
उत्तर:
छात्र इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

प्रश्न 19.
जरा सोचिए : क्या ये अधिकार सिर्फ वयस्क के लिए हैं? बच्चों के लिए कौन-कौन से अधिकार
उत्तर:
नहीं, ये अधिकार केवल वयस्कों के लिए ही नहीं हैं, ये बच्चों को भी प्राप्त हैं, जैसे-जीवन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार, समानता का अधिकार आदि।

JAC Class 9th Civics लोकतांत्रिक अधिकार Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
इनमें से कौन-सा मौलिक अधिकारों के उपयोग का उदाहरण नहीं है
(क) बिहार के मजदूरों का पंजाब के खेतों में काम करने जाना।
(ख) ईसाई मिशनों द्वारा मिशनरी स्कूलों की श्रृंखला चलाना।
(ग) सरकारी नौकरी में औरत और मर्द को समान वेतन मिलना।
(घ) बच्चों द्वारा माँ-बाप की सम्पत्ति विरासत में पाना।
उत्तर:
(घ) बच्चों द्वारा माँ-बाप की सम्पत्ति विरासत में पाना।

प्रश्न 2.
इनमें से कौन-सी स्वतन्त्रता भारतीय नागरिकों को नहीं है
(क) सरकार की आलोचना की स्वतन्त्रता।
(ख) सशस्त्र विद्रोह में भाग लेने की स्वतन्त्रता।
(ग) सरकार बदलने के लिए आन्दोलन शुरू करने की स्वतन्त्रता।
(घ) संविधान के केन्द्रीय मूल्यों का विरोध करने की स्वतन्त्रता।
उत्तर:
(ख) सशस्त्र विद्रोह में भाग लेने की स्वतन्त्रता।

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान इनमें से कौन-सा अधिकार देता है
(क) काम का अधिकार।
(ख) पर्याप्त जीविका का अधिकार।
(ग) अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार।
(घ) निजता का अधिकार।
उत्तर:
(ग) अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार।

प्रश्न 4.
उस मौलिक अधिकार का नाम बताएँ जिसके तहत निम्नलिखित स्वतन्त्रताएँ आती हैं
(क) अपने धर्म का प्रचार करने की स्वतन्त्रता।
(ख) जीवन का अधिकार।
(ग) छुआछूत की समाप्ति।
(घ) बेगार पर प्रतिबन्ध।
उत्तर:
(क) धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार।
(ख) स्वतन्त्रता का अधिकार।
(ग) समानता का अधिकार।
(घ) शोषण के विरुद्ध अधिकार।

प्रश्न 5.
लोकतन्त्र और अधिकारों के बीच सम्बन्धों के बारे में इनमें से कौन-सा बयान ज्यादा उचित है? अपनी पसंद के पक्ष में कारण बताएँ।
(क) हर लोकतान्त्रिक देश अपने नागरिकों को अधिकार देता है।
(ख) अपने नागरिकों को अधिकार देने वाला हर देश लोकतान्त्रिक है।
(ग) अधिकार देना अच्छा है, पर यह लोकतन्त्र के लिए जरूरी नहीं है।
उत्तर:
(क) यह कथन सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि लोकतान्त्रिक देश में वहाँ के नागरिकों को उनके कुछ अधिकारों की गारण्टी दी जाती है। कई बार लोगों के पास गैर-लोकतान्त्रिक देश में भी कुछ अधिकार हो सकते हैं। अतः इस आधार पर उन्हें लोकतान्त्रिक नहीं कहा जा सकता है।

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता के अधिकार प्रर ये पाबन्दियाँ उचित हैं? अपने जवाब के पक्ष में कारण बताएँ।
(क) भारतीय नागरिकों को सुरक्षा कारणों से कुछ सीमावर्ती इलाकों में जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
(ख) स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए कुछ इलाकों में बाहरी लोगों को सम्पत्ति खरीदने की अनुमति नहीं है।
(ग ) शासक दल को अगले चुनाव में नुकसान पहुँचा सकने वाली किताब पर सरकार प्रतिबन्ध लगाती है।
उत्तर:
(क) यदि सरकार कुछ संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के घूमने पर प्रतिबन्ध लगाती है तो यह सर्वथा उचित है क्योंकि, इससे न केवल सम्बन्धित व्यक्ति/व्यक्तियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, बल्कि इसका फायदा उठाकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोग दुश्मनों से सूचनाओं का आदान-प्रदान भी कर सकते हैं। साथ ही, इस तरह की स्वतन्त्रता से सीमा के आर-पार अवैध व्यापार तथा घुसपैठ को बढ़ावा मिल सकता है।

(ख) नागरिकों को संविधान द्वारा दी गई स्वतन्त्रता के अन्तर्गत देश में कहीं भी बस जाने की स्वतन्त्रता भी है किन्तु, यदि सरकार स्थानीय लोगों के हित में यह फैसला लेती है कि कोई बाहरी व्यक्ति किसी विशेष क्षेत्र में सम्पत्ति नहीं खरीद सकता, तो यह उचित ही है। ऐसा वह वहाँ के लोगों की विशेष सांस्कृतिक पहचान बनाये रखने के लिए करती है।

(ग) लोगों को संविधान के अन्तर्गत अपने विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता प्राप्त है और किताब विचार व्यक्त करने का एक माध्यम है। शर्त यह है कि ऐसे विचार समाज विरोधी अथवा राष्ट्रविरोधी न हों। किन्तु, यदि सरकार सिर्फ इस कारण से किताब के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध लगाती है कि यह उसकी पार्टी के विरोध में है अथवा आगामी चुनाव में उसकी पार्टी पर इसका प्रभाव पड़ सकता है, तो यह गलत है। इससे व्यक्ति के स्वतन्त्रता के अधिकार का हनन होता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

प्रश्न 7.
मनोज एक सरकारी दफ्तर में मैनेजर के पद के लिए आवेदन देने गया। वहाँ के किरानी (लिपिक)ने उसका आवेदन लेने से मना कर दिया और कहा, ‘झाडू लगाने वाले का बेटा होकर तुम मैनेजर बनना चाहते हो। तुम्हारी जाति का कोई कभी इस पद पर आया है? नगरपालिका के दफ्तर जाओ और सफाई कर्मचारी के लिए अर्जी दो।’ इस मामले में मनोज के किस मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है ? मनोज की तरफ से जिला अधिकारी के नाम लिखे एक पत्र में इसका उल्लेख करो।
उत्तर:

दिनांक-05-5-2020

सेवा में,
श्रीमान जिला अधिकारी महोदय,
भरतपुर (राज.)

विषय : मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के सम्बन्ध में।
महाशय,
नम्र निवेदन है कि मैं मनोज पुत्र श्री भगवानदास, निवासी नगर (भरतपुर) ने दिनांक 03-5-2020 को परिवहन डिपो के सरकारी दफ्तर में मैनेजर पद के लिए आवेदन किया था। वहाँ सम्बन्धित क्लर्क ने आवेदन लेने से मना कर दिया। जबकि मैं उक्त पद हेतु समस्त योग्यताओं को पूरा करता हूँ। उक्त कार्यालय में मुझे जातिसूचक शब्दों से भी सम्बोधित किया गया।

श्रीमान् हमारे संविधान में नागरिक को विभिन्न मौलिक अधिकार दिये गए हैं। इस घटना में हमारे ‘अवसर की समानता’ के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। अतः श्रीमान् से मेरा नम्र निवेदन है कि आप उपरोक्त विषय में उचित कार्यवाही करके सम्बन्धित अधिकारी को इस पद के लिए मेरा आवेदन स्वीकार करने का आदेश दें। इसके लिए मैं हमेशा श्रीमान् जी का आभारी रहूँगा।

प्रार्थी
मनोज

प्रश्न 8.
जब मधुरिमा सम्पत्ति के पंजीकरण वाले दफ्तर में गई तो रजिस्ट्रार ने कहा, ”आप अपना नाम मधुरिमा बनर्जी,बेटी ए.के. बनर्जी”नहीं लिख सकतीं। आप शादीशुदा हैं और आपको अपने पति का ही नाम देना होगा। फिर आपके पति का उपनाम तो राव है। इसलिए आपका नाम भी बदलकर मधुरिमा राव हो जाना चाहिए। मधुरिमा इस बात से सहमत नहीं हुई। उसने कहा, ‘अगर शादी के बाद मेरे पति का नाम नहीं बदला तो मेरा नाम क्यों बदलना चाहिए? अगर वह अपने नाम के साथ पिता का नाम लिखते रह सकते हैं तो मैं क्यों नहीं लिख सकती?” आपकी राय में इस विवाद में किसका पक्ष सही है? और क्यों?
उत्तर:
मेरे विचार में रजिस्ट्रार की सलाह पूर्वाग्रह से प्रभावित तथा अनुचित है। मधुरिमा का कहना बिल्कुल ठीक है कि यदि विवाह के बाद उसके पति का नाम नहीं बदला तो उसका नाम क्यों बदला जाएगा? वास्तव में, इस तरह का रिवाज पुरुष प्रधानता का सूचक है। यह महिला-पुरुष समानता के विचार का विरोध करता है। यह महिला-स्वतन्त्रता की भावना के विरुद्ध है। अतः मधुरिमा को अपना नाम नहीं बदलना चाहिए।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार

प्रश्न 9.
मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के पिपरिया में हजारों आदिवासी और जंगल में रहने वाले लोग सतपुड़ा राष्ट्रीय पार्क, बोरी वन्यजीव अभयारण्य और पंचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य से अपनी प्रस्तावित विस्थापन का विरोध करने के लिए जमा हुए। उनका कहना था कि यह विस्थापन उनकी जीविका और उनके विश्वासों पर हमला है। सरकार का दावा है कि इलाके के विकास और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उनका विस्थापन जरूरी है। जंगल पर आधारित जीवन जीने वाले की तरफ से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक पत्र, इस मसले पर सरकार द्वारा दिया जा सकने वाला सम्भावित जवाब और इस मामले पर मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट तैयार करो।
उत्तर:
सेवा में,

दिनांक-05-5-2020

श्रीमान् अध्यक्ष, महोदय
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली
महोदय,
निवेदन यह है कि हम वनवासी लोग सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी वन्यजीव अभ्यारण्य तथा पंचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्रों में सैकड़ों वर्षों से रहते आ रहे हैं। हम वनवासियों की प्रत्येक गतिविधि वन से जुड़ी हुई है। हमारी जीविका का मुख्य स्रोत वन हैं। आज मध्य प्रदेश सरकार विकास तथा वन्यजीवों की सुरक्षा के नाम पर हमें यहाँ से हटाना चाहती है इससे हमारा जीवन प्रभावित होगा। अतः, श्रीमान् जी से निवेदन है कि हमारी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमें न्याय दिलाएँ। इसके लिए हम वनवासी सदैव आपके आभारी रहेंगे।

प्रार्थी
समस्त वनवासी
होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)

सरकार द्वारा दिया जा सकने वाला सम्भावित जवाब:
क्षेत्र के विकास तथा वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है कि सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, बोरी वन्यजीव अभ्यारण्य तथा पंचमढ़ी अभ्यारण्य क्षेत्रों से वनवासियों का कहीं दूसरे स्थान पर पुनर्वास किया जाए। इससे वन्यजीवों को सुरक्षा मिलेगी। वहाँ वनवासियों के लिए स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, आवास आदि जैसी मौलिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा सकेंगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट:
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान तथा बोरी एवं पंचमढ़ी वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्रों से लोगों के विस्थापन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को देखते हुए आयोग ने सरकार के इस कदम पर असहमति व्यक्त की है। आयोग का कहना है कि सरकार पहले उनकी जीविका तथा पुनर्वास की व्यवस्था करे फिर उन्हें विस्थापित करने जैसा कदम उठाये। इन लोगों की जीविका वनों से चलती है। विस्थापन की स्थिति में हजारों परिवार अपनी रोजी-रोटी खो देंगे अतः, सरकार एक समिति बनाकर पहले इससे जुड़ी सभी समस्याओं की जानकारी ले, फिर अन्य कदम उठाए, ताकि उनके मानवीय अधिकारों की रक्षा हो सके।

प्रश्न 10.
इस अध्याय में पढ़े विभिन्न अधिकारों को आपस में जोड़ने वाला एक मकड़जाल बनाएँ। जैसे आने-जाने की स्वतन्त्रता का अधिकार तथा पेशा चुनने की स्वतन्त्रता का अधिकार आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसका कारण है कि आने-जाने की स्वतन्त्रता के चलते व्यक्ति अपने गाँव या शहर के अन्दर ही नहीं, दूसरे गाँव, दूसरे शहर और दूसरे राज्य तक में जाकर काम कर सकता है। इसी प्रकार इस अधिकार को तीर्थाटन से जोड़ा जा सकता है जो किसी व्यक्ति द्वारा अपने धर्म का अनुसरण करने की आजादी से जुड़ा है। आप इस मकड़जाल को बनाएँ और तीर के निशानों से बताएं कि कौन-से अधिकार आपस में जुड़े हैं। हर तीर के साथ सम्बन्ध बताने वाला एक उदाहरण भी दें।
उत्तर:
JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 5 लोकतांत्रिक अधिकार 1

आइए, अखबार पढ़ें

प्रश्न 1.
अभी तक के सभी अध्यायों में हमने अखबार पढ़ने वाला अभ्यास रखा है। आइए, अब अखबारों के लिए लिखने का प्रयास करें। इस अध्याय में आई रिपोर्टों या अपने आसपास के उदाहरणों के आधार पर इन चीजों को लिखने का प्रयास करें
1. मानवाधिकारों का उल्लंघन के मामले पर सम्पादक के नाम पत्र।
2. मानवाधिकार संगठन की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति।
3. मौलिक अधिकार सम्बन्धित सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से सम्बन्धित समाचार और उसका शीर्षक।
4. पुलिस हिरासत में मौत की बढ़ती घटनाओं पर संपादकीय टिप्पणी। इन सबको मिलाकर अपने स्कूल के नोटिस बोर्ड के लिए अखबार तैयार करो।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

JAC Class 9th Civics संस्थाओं का कामकाज InText Questions and Answers

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में विभिन्न पृष्ठों पर लड़का/लड़की के कार्टून चित्रों के नीचे अथवा ‘खुद करें, खुद सीखें’ शीर्षक से बॉक्स में अथवा कार्टून बूझें, शीर्षक के नीचे अथवा कहाँ पहुँचे? क्या समझे ? शीर्षक से बॉक्स में प्रश्न दिए हुए हैं। इन प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 62

प्रश्न 1.
ऊपर बतायी गयी बातों के अलावा इन संस्थाओं के बारे में पिछली कक्षाओं की और कौन-सी बातें आपको याद हैं? कक्षा में उस पर चर्चा करें। क्या आप अपनी राज्य सरकार द्वारा लिए गए किसी बड़े फैसले को याद कर सकते हैं? राज्यपाल, मन्त्रिमण्डल, राज्य विधानसभा और न्यायालय किस तरह इस निर्णय में शामिल थे?
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

प्रश्न 2.
क्या हर सरकारी आदेश एक बड़ा राजनीतिक फैसला होता है? इस सरकारी आदेश में खास बात है।
उत्तर:
नहीं, हर आदेश एक बड़ा राजनीतिक फैसला नहीं होता है। इस सरकारी आदेश में खास बात यह है कि इस आदेश के द्वारा सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण भारत सरकार की सरकारी प्रशासनिक रिक्तियों में प्रदान किया गया। जिससे समाज के कुछ वर्गों को लाभ होगा तथा कुछ को मौके कम मिलेंगे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 63

प्रश्न 3.
सन् 1990-91 में आरक्षण पर बहस का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था कि विज्ञापनकर्ताओं ने अपने उत्पाद को बेचने के लिए इस विषय का उपयोग किया। क्या आप अमूल के इन होर्डिंग में राजनीतिक घटनाओं और बहसों की ओर कोई इशारा ढूँढ़ सकते हैं ?
उत्तर:
अमूल के इन होर्डिंग में आरक्षण विरोधी उपद्रवों का हवाला है, जिनमें सैकड़ों विद्यार्थियों की जाने गईं और कई लोगों ने आत्मदाह की कोशिश की। आरक्षण को समाप्त किया जाए जैसी बहस प्रारम्भ हो गई।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 64

प्रश्न 4.
आरक्षण के मामले में किसने क्या किया?
उत्तर:

किसनेक्या किया
सर्वोच्च न्यायालय ने– आरक्षण को वैध करार दिया।
कैबिनेट ने– 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया।
राष्ट्रपति ने– मण्डल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की औपचारिक घोषणा की।
सरकारी अधिकारी ने– आदेश जारी करके घोषणा को लागू किया।


पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 65

प्रश्न 5.
आपके स्कूल को चलाने के लिए कौन-सी संस्थाएँ काम करती हैं? क्या यह अच्छा होता कि स्कूल के कामकाज के बारे में सिर्फ एक व्यक्ति सभी फैसले लेता?
उत्तर:
विद्यालय की प्रबन्धन समिति, शिक्षक और अभिभावक संघ जैसी संस्थाएँ हमारे विद्यालय को ठीक से चलाने के लिए कार्य करती हैं। कोई एक व्यक्ति सभी विषयों में सही निर्णय नहीं ले सकता है। बड़े निर्णयों के सम्बन्ध में विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों, अध्यापक एवं अभिभावक संगठन के सदस्यों के बीच आपसी चर्चा होनी चाहिए।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 66

प्रश्न 6.
जब हमें मालूम है कि जिस पार्टी की सरकार है उसके विचार ही प्रभावी होंगे तो संसद में इतनी बहस और चर्चा करने का क्या मतलब है?
उत्तर:
संसद में इतनी बहस और चर्चा की आवश्यकता है क्योंकि बहस और चर्चा के समय विषयों से जुड़े हुए कई सकारात्मक तथा नकारात्मक बिन्दुओं को उठाया जाता है। इसके बाद ही निर्णय लिया जाता है। इसके अतिरिक्त इससे लोगों को उस विषय से सम्बन्धित जानकारी मिलती है जिस पर फैसला लिया जाना होता है और आम जनता को भी अपने विचार अथवा आपत्तियाँ सत्ताधारी पार्टी को पहुँचाने का मौका मिलता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 67

प्रश्न 7.
संसद सत्र के दौरान दूरदर्शन पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाहियों पर रोजाना एक विशेष कार्यक्रम आता है। कार्यवाहियों को देखकर या अखबारों में उसके बारे में पढ़कर निम्नलिखित चीजों की सूची बनाएँ।
(क) संसद के दोनों सदनों के अधिकार
(ख) अध्यक्ष की भूमिका
(ग) विपक्ष की भूमिका।
उत्तर:
(क) संसद के दोनों सदनों के अधिकार-द्वितीय सदन अर्थात् लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है और यह सदन जनता की ओर से वास्तविक अधिकारों का उपयोग करता है। प्रथम सदन अर्थात् राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है तथा यह विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखता है।

(ख) अध्यक्ष की भूमिका अध्यक्ष सदन में विभिन्न भूमिकाएँ अदा करता है

  1. लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करता है।
  2. सदन को अनुशासित रखता है।
  3. सदन को सम्बोधित याचिकाएँ तथा अन्य कागजात प्राप्त करने के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक कार्य भी करता
  4. संसदीय समितियों की देखभाल करता है।
  5. दल-बदल विरोधी कानून के अन्तर्गत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करता है।
  6. सदन में किसी प्रस्ताव पर मतदान के समय पक्ष तथा विपक्ष के बराबर मत होने की स्थिति में निर्णायक मत देता है।

(ग) विपक्ष की भूमिका-एक लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली में विपक्ष विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाता है

  1. लोगों को शासन हेतु विकल्प उपलब्ध कराता है।
  2. सत्ताधारी दल अथवा लोगों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करता है। यह सरकार द्वारा किये जा रहे गलत कार्यों को जनता के सामने रखता है।
  3. यह लोगों को सरकार के कार्यकलापों के बारे में जानकारी देता है और उन्हें जागरूक बनाता है।
  4. यह एक वैकल्पिक मन्त्रिमण्डल के रूप में सरकार का स्थान लेने के लिए हर समय तैयार रहता है, यदि जनता ऐसा चाहती हो तो।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

प्रश्न 8.
मन्त्री बनने की होड़ नई नहीं है। यह कार्टून 1962 के बाद नेहरू मन्त्रिमण्डल में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों की बेचैनी दर्शाता है। राजनेता मन्त्री बनने के लिए इतने बेचैन क्यों रहते हैं? आप क्या सोचते हैं?
उत्तर:
राजनेता मन्त्री बनने के लिए इतने उत्साहित इसलिए रहते हैं, क्योंकि

  1. जब राजनेता चुनाव के दौरान मतदाताओं से मिलते हैं तो कुछ वायदे करते हैं और इन्हीं वायदों को पूरा करने की इच्छा रखने के कारण वे मन्त्री बनना चाहते हैं।
  2. जब ये राजनेता राजनीति में प्रवेश करते हैं तो उनकी इच्छा होती है कि वे मन्त्री बनें। मंत्री पद के साथ जुड़ी हुई प्रतिष्ठा तथा शक्तियाँ वे प्राप्त करना चाहते हैं।
  3. वे देश की सेवा करना चाहते हैं और लोगों की आवश्यकताओं तथा समस्याओं को अपने तरीके से हल करना चाहते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 71

प्रश्न 9.
केन्द्र और अपनी राज्य सरकार के पाँच कैबिनेट मन्त्रियों और उनके मन्त्रालयों के नाम लिखें।
उत्तर:
विद्यार्थी इस प्रश्न को अपने शिक्षकों की सहायता से स्वयं हल करें।

प्रश्न 10.
अपने शहर के नगर निगम/पालिका प्रमुख या अपने जिले के जिला परिषद् के अध्यक्ष से मिलें और उनसे पूछे कि वे अपने शहर या जिले का प्रशासन किस तरह चलाते हैं?
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

प्रश्न 11.
इस कार्टून में अपनी लोकप्रियता के उफान वाले 1970 के दशक के शुरुआती दिनों में इन्दिरा गाँधी को कैबिनेट की बैठक करते दिखाया गया है। क्या आपको लगता है कि उनके बाद बने किसी प्रधानमन्त्री को इसी आकार या रूप में दिखाते हुए कार्टून बनाया जा सकता है?
उत्तर:
हाँ, क्यों नहीं? जो भी प्रधानमन्त्री अच्छे व्यक्तित्व अथवा कृतित्व वाला होगा उसी का कार्टून बनाया जा सकता है। नोट-विद्यार्थी इस कार्टून को पाठ्य-पुस्तक के इसी अध्याय के ‘कार्टून बूझें’ शीर्षक के अन्तर्गत पृष्ठ सं. 71 पर देखें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 72

प्रश्न 12.
प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति के लिए हमेशा पुल्लिग का इस्तेमाल क्यों होता है?
उत्तर:
प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति के लिए हमेशा पुल्लिग का इस्तेमाल इसलिए होता है क्योंकि हमारा समाज पुरुष प्रधान है, लेकिन यहाँ प्रधानमन्त्री या राष्ट्रपति स्त्री या पुरुष कोई भी हो सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 73

प्रश्न 13.
लोकतन्त्र के लिए कैसा प्रधानमन्त्री होता है? ऐसा जो केवल अपनी मर्जी से काम करता है या ऐसा जो दूसरी पार्टियों और व्यक्तियों से भी सलाह लेता है?
उत्तर:
किसी लोकतन्त्र के लिए यह आवश्यक है कि उसका प्रधानमन्त्री कोई भी फैसला अन्य पार्टियों एवं अन्य नेताओं से सलाह करके ही ले।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 74

प्रश्न 14.
इलियम्मा, अन्नाकुट्टी और मेरीमॉल राष्ट्रपति के विषय वाले हिस्से को पढ़ती हैं। वे तीनों एक-एक सवाल का जवाब जानना चाहती हैं। क्या आप उन्हें उनके सवालों के जवाब दे सकते हैं? इलियम्मा-अगर राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री किसी नीति पर असहमत हों तो क्या होगा? क्या प्रधानमन्त्री का विचार हमेशा प्रभावी होगा?
उत्तर:

  1. किसी नीति को लेकर राष्ट्रपति तथा प्रधानमन्त्री के बीच सहमति न होने की स्थिति में प्रधानमन्त्री का विचार ही हमेशा प्रभावशाली होगा, लेकिन उसे इस पर बहुमत का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।
  2.  यदि प्रधानमन्त्री संसद में बहुमत का समर्थन खो देता है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति अपने विवेक से फैसला लेने के लिए स्वतन्त्र है। राष्ट्रपति चाहे तो सरकार को बर्खास्त भी कर सकता है।

1. अन्नाकुट्टी: मुझे यह बेतुका लगता है कि सशस्त्र बलों का सुप्रीम कमाण्डर राष्ट्रपति हो।वह तो एक भारी बंदूक भी नहीं उठा सकता। उसे कमाण्डर बनाने में क्या तुक है ?
उत्तर:
राष्ट्रपति के पास हथियार की नहीं कलम की ताकत होती है जिससे वह आदेश देता है, जबकि सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों के पास हथियार हैं, जिनकी सहायता से वे आदेश का पालन करते हैं। हथियार में कलम से कम ताकत होती है। राष्ट्रपति को सुरक्षा से सम्बन्धित अधिकांश जानकारी मन्त्री परिषद् के द्वारा प्राप्त हो जाती है। अतः राष्ट्रपति को सेना का कमाण्डर बनाना उचित ही है। इससे सेना पर जनता का अप्रत्यक्ष रूप से नियन्त्रण होता है।

2. मेरीमॉल: मेरा सवाल यह है कि अगर असली अधिकार प्रधानमन्त्री के पास ही हैं तो राष्ट्रपति की जरूरत ही क्या है?
उत्तर:
राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। कई बार गम्भीर परिस्थितियों में राष्ट्रपति द्वारा स्वयं ही वास्तविक शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रहित में फैसला लिया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर वह अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकता है, जैसे-जब कोई प्रधानमन्त्री संसद में अपना बहुमत खो देता है तो कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति द्वारा ही किया जाता है। ऐसी स्थिति में इस पद के नहीं होने से देश में अराजकता फैलने की सम्भावना पैदा हो सकती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

प्रश्न 15.
उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी बड़े फैसले से जुड़ी खबरों पर गौर करें। मूल फैसला क्या था? क्या अदालत ने उसमें बदलाव कर दिया? इसका कारण क्या दिया गया?
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 75

प्रश्न 16.
संयुक्त राज्य अमेरिका में न्यायाधीशों को उनके राजनीतिक विचार और दलीय जुड़ाव के आधार पर नियुक्त करना एक आम बात है। यह काल्पनिक विज्ञापन वहाँ सन् 2005 में एक कार्टून के रूप में छपा। उस समय राष्ट्रपति बुश अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में मनोनयन के लिए विभिन्न उम्मीदवारों के नाम पर विचार कर रहे
1. यह कार्टून न्यायालय की स्वतन्त्रता के बारे में क्या कहता है?
उत्तर:
दिया गया कार्टून यह प्रदर्शित करता है कि अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति में उनके राजनीतिक विचार तथा पार्टी के प्रति उनकी सोच को आधार बनाया जाता है। यदि कोई न्यायाधीश राष्ट्रपति से जुड़ा हुआ है, चाहे उसके पास अपेक्षित योग्यता एवं अनुभव हो या न हो, उसे न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। अतः यह कहा जा सकता है कि अमेरिका में न्यायपालिका निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं करती।

2. हमारे देश में इस तरह के कार्टून क्यों नहीं छपते?
उत्तर:
हमारे देश में इस तरह के कार्टून नहीं छपते, क्योंकि भारतीय न्यायपालिका, दुनिया की सर्वाधिक स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिकाओं में से एक है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय आदि के न्यायाधीश कभी भी सत्तासीन या अन्य राजनीतिक पार्टियों की प्रशंसा में अथवा प्रधानमन्त्री या राष्ट्रपति की प्रशंसा में एक शब्द भी नहीं बोलते हैं। उन्हें राजनीतिक विचारधाराओं से कोई मतलब नहीं होता है।

3. क्या यह हमारी न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को दर्शाता है?
उत्तर:
हाँ, यह हमारी स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका को दर्शाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं. 76

प्रश्न 17.
निम्नलिखित सन्दर्भो में एक कारण देकर समझाएँ कि भारतीय न्यायपालिका किस तरह स्वतन्त्र है
1. न्यायाधीशों की नियुक्ति
2. न्यायाधीशों को पद से हटाना
3. न्यायपालिका के अधिकार।
उत्तर:
1. न्यायाधीशों की नियुक्ति:
सर्वोच्च तथा उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा प्रधानमन्त्री की सलाह पर, राष्ट्रपति करता है। मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश होता है। वरिष्ठता तथा योग्यता ही न्यायाधीशों की नियुक्ति के मुख्य आधार होते हैं और इसी आधार पर न्यायाधीश को चुना जाता है।

2. न्यायाधीशों को पद से हटाना:
एक बार किसी व्यक्ति को सर्वोच्च या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति हो जाने पर उसे अपने पद से हटाना आसान नहीं है।
किसी न्यायाधीश को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पारित करके ही हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं।

3. न्यायपालिका:
के अधिकार सर्वोच्च न्यायालय विधायिका द्वारा पारित किसी भी विधेयक को असंवैधानिक घोषित कर सकती है यदि वह संविधान के किसी उपबन्ध या मूल भावना के विपरीत हो। न्यायपालिका अपने सामने लाये जाने पर कार्यपालिका की किसी कार्यवाही की उसकी संवैधानिकता के सम्बन्ध में जाँच कर सकती है।

JAC Class 9th Civics संस्थाओं का कामकाज Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
अगर आपको भारत का राष्ट्रपति चुना जाए तो आप निम्नलिखित में से कौन-सा फैसला खुद कर सकते हैं
(क) अपनी पसन्द के व्यक्ति को प्रधानमन्त्री चुन सकते हैं।
(ख) लोकसभा में बहुमत वाले प्रधानमन्त्री को उसके पद से हटा सकते हैं।
(ग) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं।
(घ) मन्त्रिपरिषद् में अपनी पसन्द के नेताओं का चयन कर सकते हैं।
उत्तर:
(ग) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में कौन राजनीतिक कार्यपालिका का हिस्सा होता है
(क) जिलाधीश
(ख) गृह मन्त्रालय का सचिव
(ग) गृह मन्त्री
(घ) पुलिस महानिदेशक।
उत्तर:
(ग) गृह मन्त्री।

प्रश्न 3.
न्यायपालिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा बयान गलत है
(क) संसद द्वारा पारित कानून को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है।
(ख) अगर कोई कानून संविधान की भावना के खिलाफ है तो न्यायपालिका उसे अमान्य घोषित कर सकती है।
(ग) न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतन्त्र होती है।
(घ) अगर किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है तो वह अदालत में जा सकता है।
उत्तर:
(क) संसद द्वारा पारित कानून को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित राजनीतिक संस्थाओं में से कौन-सी संस्था देश के मौजूदा कानून में संशोधन कर सकती
(क) सर्वोच्च न्यायालय
(ख) राष्ट्रपति
(ग) प्रधानमन्त्री
(घ) संसद।
उत्तर:
(घ) संसद।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज

प्रश्न 5.
उस मन्त्रालय की पहचान करें जिसने निम्नलिखित समाचार जारी किया होगा

(क) देश से जूट का निर्यात बढ़ाने के लिए एक नई1. रक्षा मन्त्रालय। नीति बनाई जा रही है।
(ख) ग्रामीण इलाकों में टेलीफोन सेवाएँ सुलभ2. कृषि, खाद्यान्न और सार्वजनिक वितरण करायी जाएंगी। मन्त्रालय।
(ग) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बिकने वाले चावल और गेहूँ की कीमतें कम की3. स्वास्थ्य मन्त्रालय।
(घ) जाएँगी।4. वाणिज्य और उद्योग मन्त्रालय।
(ङ) पल्स पोलियो अभियान शुरू किया जाएगा। ऊँची पहाड़ियों पर तैनात सैनिकों के भत्ते बढ़ाए जाएंगे।5. संचार और सूचना-प्रौद्योगिकी मन्त्रालय।

उत्तर:

(क) देश से जूट का निर्यात बढ़ाने के लिए एक नई4. वाणिज्य और उद्योग मन्त्रालय।
(ख) ग्रामीण इलाकों में टेलीफोन सेवाएँ सुलभ5. संचार और सूचना-प्रौद्योगिकी मन्त्रालय।
(ग) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बिकने वाले चावल और गेहूँ की कीमतें कम की2. कृषि, खाद्यान्न और सार्वजनिक वितरण करायी जाएंगी। मन्त्रालय।
(घ) जाएँगी।3. स्वास्थ्य मन्त्रालय।
(ङ) पल्स पोलियो अभियान शुरू किया जाएगा। ऊँची पहाड़ियों पर तैनात सैनिकों के भत्ते बढ़ाए जाएंगे।1. रक्षा मन्त्रालय। नीति बनाई जा रही है।

प्रश्न 6.
देश की विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में से उस राजनीतिक संस्था का नाम बताइए जो निम्नलिखित मामलों में अधिकारों का इस्तेमाल करती है
(क)सड़क, सिंचाई जैसे बुनियादी ढाँचों के विकास और नागरिकों की विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा।

(ख) स्टॉक एक्सचेंज को नियमित करने सम्बन्धी कानून बनाने की कमेटी के सुझाव पर विचार-विमर्श करती है।

(ग) दो राज्य सरकारों के बीच कानूनी विवाद पर निर्णय लेती है।

(घ) भूकम्प पीड़ितों की राहत के प्रयासों के बारे में सूचना माँगती है।
उत्तर:
(क) विधायिका (संसद)
(ख) विधायिका (संसद)
(ग) न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय)
(घ) स्थायी कार्यपालिका।

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प्रश्न 7.
भारत का प्रधानमन्त्री सीधे जनता द्वारा क्यों नहीं चुना जाता? निम्नलिखित चार जवाबों में सबसे सही को चुनकर अपनी पसन्द के पक्ष में कारण दीजिए
(क) संसदीय लोकतन्त्र में लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी का नेता ही प्रधानमन्त्री बन सकता है।
(ख) लोकसभा, प्रधानमन्त्री और मन्त्रि परिषद का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें हटा सकती है।
(ग) चूँकि प्रधानमन्त्री को राष्ट्रपति नियुक्त करता है लिहाजा उसे जनता द्वारा चुने जाने की जरूरत नहीं है।
(घ) प्रधानमन्त्री के सीधे चुनाव में बहुत ज्यादा खर्च आएगा।
उत्तर:
(क) संसदीय लोकतन्त्र में लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी का नेता ही प्रधानमन्त्री बन सकता है। कारण-भारतीय संविधान में संसदीय लोकतन्त्र की व्यवस्था की गई है जिसमें यह व्यवस्था है कि प्रधानमन्त्री का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से न होकर लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमन्त्री के रूप में मनोनीत किया जायेगा।

प्रश्न 8.
तीन दोस्त एक ऐसी फिल्म देखने गये जिसमें हीरो एक दिन के लिए मुख्यमन्त्री बनता है और राज्य में बहुत से बदलाव लाता है। इमरान ने कहा कि देश को इसी चीज की जरूरत है। रिजवान ने कहा कि इस तरह का, बिना संस्थाओं वाला एक व्यक्ति का राज खतरनाक है।शंकर ने कहा कि यह तो एक कल्पना है। कोई भी मन्त्री एक दिन में कुछ भी नहीं कर सकता। ऐसी फिल्मों के बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर:
यह फिल्म आदर्शवाद तथा वास्तविक स्थिति दोनों ही पर आधारित फिल्म है। फिल्म में दिखाई गई समस्याएँ तो वास्तविक हैं, लेकिन जो हल बताए गये हैं वे आदर्श पर आधारित हैं, किन्तु मुख्यमन्त्री की भूमिका निभा रहे नायक द्वारा किये गये सभी कार्य संस्था की सीमा के अन्तर्गत हैं। मुख्यमन्त्री के रूप में नायक को अव्यावहारिक रूप से कार्य करते हुए दिखाया गया है। लेकिन, यदि ऐसा वास्तव में हो सकता है तो सही है कि इस समय हमारे देश को ऐसे ही नेताओं की आवश्यकता है।

प्रश्न 9.
एक शिक्षिका छात्रों की संसद के आयोजन की तैयारी कर रही थी। उसने दो छात्राओं से अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की भूमिका करने को कहा। उसने उन्हें विकल्प भी दिया। यदि वे चाहें तो राज्य सभा में बहुमत प्राप्त दल की नेता हो सकती थीं और अगर चाहें तो लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल की। अगर आपको यह विकल्प दिया गया तो आप क्या चुनेंगे और क्यों?
उत्तर:
यदि ऐसा विकल्प मेरे सामने प्रस्तुत किया जाएगा तो मैं लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल के नेता के विकल्प को स्वीकार करूँगा क्योंकि लोकसभा, राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है। सभी निर्णय लोकसभा के द्वारा लिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त लोकसभा के सदस्यों द्वारा ही अपने सदन के नेता का चुनाव किया जाता है तथा जिस व्यक्ति को बहुमत प्राप्त होता है, उसे प्रधानमन्त्री नियुक्त किया जाता है और उसी की सरकार बनती है।

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प्रश्न 10.
आरक्षण पर आदेश का उदाहरण पढ़कर तीन विद्यार्थियों की न्यायपालिका की भूमिका पर अलग-अलग प्रतिक्रिया थी। इनमें से कौन-सी प्रतिक्रिया, न्यायपालिका की भूमिका को सही तरह से समझती है?
(क) श्रीनिवास का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय सरकार के साथ सहमत हो गई है लिहाजा वह स्वतन्त्र नहीं

(ख) अंजैया का कहना है कि न्यायपालिका स्वतन्त्र है क्योंकि वह सरकार के आदेश के खिलाफ फैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को उसमें संशोधन का निर्देश दिया।

(ग) विजया का मानना है कि न्यायपालिका न तो स्वतन्त्र है न ही किसी के अनुसार चलने वाली है, बल्कि वह विरोधी समूहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। न्यायालय ने इस आदेश के समर्थकों और विरोधियों के बीच बढ़िया सन्तुलन बनाया। आपकी राय में कौन-सा विचार सबसे सही है ?
उत्तर:
इन तीनों प्रतिक्रियाओं में से अंजैया (ख) का विचार न्यायपालिका की भूमिका को सही रूप में प्रकट करता है। क्योंकि देश का सर्वोच्च न्यायालय सरकार के निर्णय को भी रद्द कर सकता है अथवा उसे बदलने का आदेश भी दे सकता है। आइए, अखबार पढ़ें इस अध्याय में हमने देश की चार विभिन्न संस्थाओं के बारे में चर्चा की।

आप कम-से-कम एक हफ्ते के समाचारों को इकट्ठा करके उन्हें चार समूहों में वर्गीकृत कीजिएविधायिका की कार्यशैली। राजनीतिक कार्यपालिका की कार्यशैली। नौकरशाही की कार्यशैली। न्यायपालिका की कार्यशैली। उत्तर-छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

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JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

JAC Class 9th Civics चुनावी राजनीति InText Questions and Answers 

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में विभिन्न पृष्ठों पर लड़के/लड़की के कार्टून चित्रों के नीचे अथवा खुद करें, खुद सीखें शीर्षक से बॉक्स में अथवा ‘कार्टून बूझें’ शीर्षक के नीचे अथवा कहाँ पहुँचे? क्या समझे? शीर्षक से बॉक्स में प्रश्न दिए हुए हैं। इन प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 37

प्रश्न 1.
क्या अधिकांश नेता अपने चुनावी वायदे पूरा करते हैं?
उत्तर:
अधिकांश नेता चुनाव में जीत जाने के बाद सत्ता की राजनीति में लगे रहते हैं। कुछ हद तक सत्ता में आने वाली पार्टियाँ अपने घोषणा-पत्र में किए गये वायदों पर अमल करती हैं। विजयी नेता, जनता द्वारा पूछे जाने पर सरकार द्वारा (यदि नेता सत्ताधारी पार्टी का है) किये गये कार्यों को अपने द्वारा करवाया जाना बताकर मुक्ति पा लेते हैं और अपनी जेबें भरने में लगे रहते हैं।

प्रश्न 2.
क्या आपको मालूम है आपके राज्य में विधानसभा के पिछले चुनाव कब हुए ? आपके इलाके में पिछले पाँच वर्षों में और कौन-से चुनाव हुए हैं? इन चुनावों के स्तर ( राष्ट्रीय, विधानसभा, पंचायत वगैरह), उनके होने का समय और उसमें आपके क्षेत्र से चुने गए व्यक्ति के पद (सांसद, विधायक, पार्षद वगैरह) को भी दर्ज करें।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 38

प्रश्न 3.
जगदीप और नवप्रीत ने इस कथा को पढ़ा और निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले।क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से कौन-से निष्कर्ष सही हैं और कौन-से गलत। ( या फिर इस कथा में दी गई सूचनाओं के आधार पर सही-गलत का फैसला नहीं हो सकता)
1. चुनाव से सरकारी नीतियों में बदलाव हो सकता है।
2. राज्यपाल ने देवीलाल के भाषणों से प्रभावित होकर उन्हें मुख्यमन्त्री बनने का न्यौता दिया।
3. लोग हर शासक दल से नाराज रहते हैं और हर अगले चुनाव में उसके खिलाफ वोट देते हैं।
4. चुनाव जीतने वाली पार्टी सरकार बनाती है।
5. इस चुनाव से हरियाणा के आर्थिक विकास में काफी मदद मिली।
6. अपनी पार्टी के चुनाव हारने के बाद कांग्रेसी मुख्यमन्त्री को इस्तीफा देने की जरूरत नहीं थी।
उत्तर:

  1. सही,
  2. गलत,
  3. अपर्याप्त सूचना,
  4. सही,
  5. अपर्याप्त सूचना,
  6. गलत।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 36

प्रश्न 4.
हमने देखा कि लोकतन्त्र के लिए चुनाव क्यों जरूरी हैं, पर गैर-लोकतान्त्रिक देशों के शासकों को भी चुनाव कराने की जरूरत क्यों पड़ती है?
उत्तर:
गैर-लोकतान्त्रिक देशों में अपने शासन तथा विधायिका की वैधानिकता का जनता द्वारा अनुमोदन करवाने के लिए शासकों को चुनाव कराने की आवश्यकता होती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 38

प्रश्न 5.
यहाँ दिए दोनों कार्टूनों को ध्यान से देखें। प्रत्येक कार्टून क्या संदेश देता है, इसे अपने शब्दों में लिखें। अपनी कक्षा में चर्चा करें कि इनमें कौन-सा कार्टून आपके अपने इलाके की असलियत के करीब है। मतदाता और उम्मीदवार के सम्बन्धों पर चुनाव का असर बताने वाला एक कार्टून खुद बनाएँ।
उत्तर:
बायीं तरफ वाले कार्टून से यह संदेश प्राप्त होता है कि नेताओं के ज्ञान, विचार, वायदा, योजना आदि सभी निरर्थक हैं, यदि उन्हें जीत के लिए पर्याप्त वोट प्राप्त नहीं होते हैं। दाहिनी तरफ दिखाए गये कार्टून से यह संदेश मिलता है कि चुनाव अभियानों के दौरान राजनेताओं द्वारा कई वायदे किये जाते हैं। किन्तु, चुनाव जीतने के बाद जब उन्हें पद प्राप्त हो जाता है, तो उनके पास अपने किये वायदों को पूरा करने के लिए समय नहीं होता। नोट-चर्चा तथा कार्टून बनाने का कार्य छात्र अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 39

प्रश्न 6.
गुलबर्गा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की सीमा और गुलबर्गा जिले की सीमा में अन्तर क्यों है?
उत्तर:
गुलबर्गा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र तथा जिले की सीमा में अन्तर है क्योंकि सम्पूर्ण कर्नाटक राज्य जनसंख्या के अनुसार समान लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित है। सम्पूर्ण गुलबर्गा जिले की जनसंख्या राज्य के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के लिए निर्धारित जनसंख्या से अधिक है।

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प्रश्न 7.
अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का ऐसा ही नक्शा बनाइए।
उत्तर:
छात्र, अध्यापक की सहायता से स्वयं बनाएँ।

प्रश्न 8.
गुलबर्गा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा के कितने क्षेत्र हैं?
उत्तर:
गुलबर्गा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 8 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं।

प्रश्न 9.
क्या आपके लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की इतनी ही सीटें हैं?
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 40

प्रश्न 10.
पंचायतों की तरह क्या हम संसद और विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं कर सकते?
उत्तर:
समाज की लगभग आधी जनसंख्या महिलाओं की है। उन्हें राज्य विधान सभा की सीटों अथवा संसदीय सीटों में एक-तिहाई सीटों पर आरक्षण देना चाहिए। जिससे वे संसदीय मंच से अपनी समस्याओं के लिए आवाज उठाने तथा उनका समाधान ढूँढ़ने का पूरा-पूरा प्रयत्न करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 41

प्रश्न 11.
ऊपर दिए नक्शे को देखिए और निम्नलिखित सवालों का जवाब दीजिएनोट-विद्यार्थी नक्शे को पाठ्य-पुस्तक के इस अध्याय में पृष्ठ संख्या 67 पर देखें।
1. आपके राज्य और इसके दो पड़ोसी राज्यों में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या कितनी है?
उत्तर:
राजस्थान = 25, उत्तर प्रदेश = 80, मध्य प्रदेश = 29, उत्तराखण्ड = 5.

2. किन-किन राज्यों में लोकसभा के 30 से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र हैं?
उत्तर:
वे राज्य जिनमें लोकसभा सीटों की संख्या 30 से अधिक है-उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं पश्चिमी बंगाल हैं।

3. कुछ राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या ज्यादा क्यों है?
उत्तर:
इन राज्यों में जनसंख्या अधिक है। इस कारण मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है। अतः इनके लिए आवंटित सीटों की संख्या ज्यादा है।

4. कुछ निर्वाचन क्षेत्र इलाके के हिसाब से छोटे और कुछ बहुत बड़े क्यों हैं?
उत्तर:
मतदाताओं की संख्या के आधार पर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के क्षेत्रफल को निर्धारित किया जाता है। ऐसा इसलिए है कि समान आबादी के लिए प्रतिनिधि की संख्या समान हो। यहाँ क्षेत्रफल का कोई महत्व नहीं होता। सम्भव है कि एक छोटे से क्षेत्र की जनसंख्या एक बड़े क्षेत्र की जनसंख्या के बराबर हो। यही कारण है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहुत छोटे होते हैं, कुछ बहुत बड़े होते हैं।

5. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र पूरे देश में बिखरे हैं या कुछ इलाकों में इनकी संख्या ज्यादा है?
उत्तर:
अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए निर्वाचन क्षेत्र उनकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षित किये जाते हैं। अतः इनके लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र पूरे देश में समान रूप से वितरित नहीं हैं, बल्कि कुछ क्षेत्रों में इनके निर्वाचन क्षेत्र अधिक हैं तो कुछ में निर्वाचन क्षेत्र कम हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 42

प्रश्न 12.
उम्मीदवारों को अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा देने की जरूरत क्यों होती है?
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार प्रत्येक मतदाता को अपने प्रतिनिधि के बारे में निम्नलिखित सूचनाएँ प्राप्त करने का अधिकार है

  1. चल तथा अचल सम्पत्ति का विवरण
  2. सरकारी ऋण
  3. शैक्षिक योग्यता
  4. कर की स्थिति
  5. आपराधिक पृष्ठभूमि
  6. आमदनी।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 44

प्रश्न 13.
भारत की चुनाव प्रणाली की कुछ विशेषताएँ और कुछ सिद्धान्त दिये गये हैं। इनके सही जोड़े बनाएँ।

सिद्धान्तचुनाव प्रणाली की विशेषता
1. सार्वभौम वयस्क मताधिकारहर चुनाव क्षेत्र में लगभग बराबर मतदाता
2. कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व18 वर्ष और उससे ऊपर के सभी को मताधिकार
3. खुली राजनीतिक प्रतिद्वंद्वितासभी को पार्टी बनाने या चुनाव लड़ने की आजादी
4. एक मत, एक मोलअनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण।

प्रश्न 14.
पिछले लोकसभा चुनाव में आपके चुनाव क्षेत्र में चुनाव अभियान कैसा चला था? उम्मीदवारों और पार्टियों ने क्या-क्या कहा और क्या-क्या किया, इसकी सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:
छात्र, इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 46

प्रश्न 15.
मतदान केन्द्रों और मतगणना केन्द्रों पर पार्टी या उम्मीदवार के एजेंट क्यों मौजूद होते हैं?
उत्तर:
क्योंकि किसी पार्टी अथवा मतदाता द्वारा मतदान के दौरान किए जाने वाली किसी प्रकार की धाँधली को रोका जा सके। मतगणना के दौरान मतगणना केन्द्र पर होने वाली किसी भी प्रकार की अनियमितता पर नजर रखना एवं अनियमितता या गड़बड़ी होने पर उसे सम्बन्धित अधिकारियों के सामने लाया जा सके। (पाठ्य-पुस्तक के पृ. सं. 49 पर दी गयी सारणी को देखकर प्र. नं. 17, 18 के उत्तर दीजिए।)

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प्रश्न 16.
अपना मत डालने वाले मतदाताओं का प्रतिशत कितना था?
उत्तर:
कुल 57.54 प्रतिशत मतदाताओं ने अपना मतदान किया।

प्रश्न 17.
क्या चुनाव जीतने के लिए यह जरूरी है कि किसी व्यक्ति को डाले गये मतों में से आधे से अधिक मत मिलें?
उत्तर:
नहीं, जो उम्मीदवार सम्बन्धित क्षेत्र में सर्वाधिक मत प्राप्त करता है, उसे ही विजयी घोषित किया जाता है। चाहे उसने एक ही मत अधिक प्राप्त किया हो।

प्रश्न 18.
इनमें कौन-सा काम आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है, कौन-सा नहीं?
1. मतदान की तारीख से पहले मन्त्री द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए नई रेलगाड़ी को हरी झण्डी दिखाकर रवाना करना।
2. एक उम्मीदवार ने वायदा किया कि चुने जाने पर वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में नई रेलगाड़ी चलवायेगा।
3. एक उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा मतदाताओं को एक मन्दिर में ले जाकर उनसे उसी उम्मीदवार को वोट देने की शपथ दिलाना।
4. किसी उम्मीदवार के समर्थकों द्वारा झुग्गी बस्ती में वोट के वायदे लेकर कंबल बाँटना।
उत्तर:

  1. आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
  2. आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन नहीं है।
  3. आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।
  4. आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 47

प्रश्न 19.
चुनाव आयोग के पास इतनी शक्ति क्यों है ? क्या यह लोकतन्त्र के लिए अच्छा है?
उत्तर:
चुनाव को स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष कराने के लिए ही चुनाव आयोग को इतनी शक्ति दी गई है। यह लोकतन्त्र के लिए अच्छा है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 48

प्रश्न 20.
इन सुर्खियों को ध्यान से पढ़िए और पहचानिए कि स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग किन शक्तियों का प्रयोग कर रहा है।
1. चुनाव आयोग ने 14वीं लोकसभा के गठन की अधिसूचना जारी की।
उत्तर:
14वीं लोकसभा के चुनाव सम्बन्धी सभी तारीखों तथा सीमाओं की घोषणा कर दी गई है। अतः विभिन्न राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारी प्रारम्भ कर दें।

2. बिहार के चुनाव में मतदान के लिए फोटो पहचान-पत्र अनिवार्य।
उत्तर:
कोई मतदाता जब मतदान के लिए जाता है तो मतदाताओं का मतदान के लिए मतदाता पहचान-पत्र दिखाना जरूरी है अतः बिहार चुनाव में मतदाता को अपना पहचान-पत्र दिखाना अनिवार्य है। इस घोषणा द्वारा आयोग ने चुनाव हित में फैसला लेने सम्बन्धी शक्ति का प्रयोग किया है।

3. चुनाव आयोग ने चुनाव खर्च पर नकेल कसी।
उत्तर:
चुनाव आयोग ने प्रत्येक संसदीय तथा विधान सभा सीट के लिए उम्मीदवारों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि की सीमा तय कर दी है, क्योकि कुछ राजनीतिक दल या उम्मीदवार जिसके पास अधिक संसाधन हैं, इसका फायदा उठा सकते हैं। आयोग ने निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग किया है।

4. चुनाव आयोग का एक और गुजरात दौरा, चुनावी तैयारियों का जायजा लिया।
उत्तर:
गुजरात में मतदान केन्द्रों पर कब्जा तथा धाँधली होने की सम्भावना सम्बन्धी खबरों के कारण वहाँ की चुनावी व्यवस्था की समीक्षा के लिए आयोग ने एक और दौरा किया। आयोग, निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र चुनाव कराने की अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहा है।

5. चुनाव आयोग ने गृह मन्त्रालय के चुनाव सुधार सम्बन्धी सुझाव नकारे।
उत्तर:
चुनाव आयोग स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। इस सम्बन्ध में सारे अन्तिम फैसले वही लेता है। वह किसी भी सुझाव को न मानने के लिए स्वतन्त्र है। इसलिए उसने गृह मन्त्रालय का चुनाव सुधार सम्बन्धी सुझाव नहीं माना।

6. चुनाव के गुप्त खर्च पर चुनाव आयोग की नजर।
उत्तर:
चुनाव आयोग चाहता है कि देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति चाहे अमीर हो या गरीब, चुनाव लड़ सके, इसलिए चुनाव में खर्च करने की एक सीमा निर्धारित कर दी गई है। उससे अधिक खर्च करने पर उम्मीदवार को चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा।

7. उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग से अपराधी नेताओं पर रोक लगाने को कहा।
उत्तर:
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने की आज्ञा नहीं दी जानी चाहिए। प्रत्येक ऐसे उम्मीदवार को उसके खिलाफ चल रहे गम्भीर आपराधिक मुकदमों का ब्यौरा वैधानिक रूप से घोषित करना पड़ेगा।

8. चुनाव आयोग को हरियाणा के नए पुलिस प्रमुख की नियुक्ति स्वीकार।
उत्तर:
सरकार ने आयोग के निर्देशानुसार वर्तमान पुलिस प्रमुख को स्थानान्तरित किया है। आयोग ने यहाँ निष्पक्ष चुनाव के लिए निष्पक्ष अधिकारी के स्थानान्तरण या नियुक्ति सम्बन्धी अपनी शक्ति का उपयोग किया है।

9. चुनाव आयोग ने 398 मतदान केन्द्रों पर फिर से वोट डालने के आदेश दिए।
उत्तर:
अगर किसी मतदान केन्द्र पर बूथ कब्जा या लूट अथवा धन या शक्ति के प्रयोग की पुष्टि होती है तो चुनाव आयोग का अधिकार है कि वह वहाँ से रिपोर्ट मँगवाए तथा आरोप की पुष्टि होने पर पूर्व मतदान को खारिज कर पुनर्मतदान का आदेश जारी करे। इसलिए आयोग ने 398 मतदान केन्द्रों पर फिर से वोट डालने के आदेश दिए।

10. राजनीतिक विज्ञापनों पर सेंसर का अधिकार हो-चुनाव आयोग।
उत्तर:
चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियाँ एक-दूसरे को बदनाम करने के लिए राजनीतिक विज्ञापनों का सहारा लेती हैं, इसलिए आयोग ने स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए केवल उन्हीं विज्ञापनों को लगाने की अनुमति दी, जो दूसरों पर आरोप नहीं लगाते।

11. ‘एक्जिट पोल’ पर प्रतिबन्ध लगाने की फिलहाल कोई योजना नहीं-चुनाव आयोग।
उत्तर:
चुनाव के दौरान टी. वी. तथा रेडियो के संवाददाताओं द्वारा सर्वे करके यह अनुमान लगाया जाता है कि मतदाता किस पार्टी को अधिक मत दे रहे हैं इसे ही एक्जिट पोल कहा जाता है। चूँकि चुनाव कई चरणों में होता है अतः अन्य चरणों के मतदान पर इस प्रकार के प्रसारण से असर पड़ सकता है, चुनाव आयोग के पास एक्जिट पोल पर प्रतिबन्ध लगाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 49

प्रश्न 21.
अपने परिवार के जो सदस्य मतदाता हैं उनसे पूछे कि उन्होंने पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में वोट दिया था या नहीं? अगर उन्होंने वोट नहीं दिया हो तो उनसे इसका कारण पूछिए।अगर उन्होंने मतदान किया हो तो उनसे पूछिए कि उन्होंने किस पार्टी और किस उम्मीदवार को वोट दिया और क्यों दिया। उनसे यह भी पूछिए कि क्या चुनाव सभा या रैली में शामिल होने जैसी किसी चुनावी गतिविधि में भी उन्होंने हिस्सा लिया था।
उत्तर:
छात्र इस प्रश्न को अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं हल करें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 50

प्रश्न 22.
इस कार्टून में एक नेताजी को संवाददाता सम्मेलन से बाहर आते हुए दिखाया गया है और वे भाई-भतीजावाद के पक्ष में बोल रहे हैं। क्या भाई-भतीजावाद कुछ राज्यों और पार्टियों तक ही सीमित है?
उत्तर:
नहीं, भाई-भतीजावाद केवल कुछ राज्यों अथवा पार्टियों तक सीमित नहीं है। यह प्रवृत्ति प्रत्येक राजनीतिक दल, चाहे वह राष्ट्रीय स्तर के हों या राज्य स्तर के, सभी में देखी जा सकती है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

प्रश्न 23.
चुनावी अभियान शीर्षक वाला यह कार्टून लातिनी अमेरिका के सन्दर्भ में बना था। क्या यह भारत और अन्य लोकतान्त्रिक देशों पर भी लागू होता है?
उत्तर:
हाँ, प्रदर्शित कार्टून भारत सहित दुनिया के दूसरे अन्य लोकतान्त्रिक देशों पर भी लागू होता है, क्योंकि प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव अभियान के दौरान एक निश्चित राशि ही खर्च करने की अनुमति है। लेकिन वे उससे ज्यादा खर्च करते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ सं.- 51

प्रश्न 24.
क्या यह कार्टून वोट के पहले और बाद में मतदाता की सही स्थिति को दिखाता है? क्या किसी लोकतन्त्र में ऐसा हमेशा ही होगा? क्या आप कुछ ऐसे उदाहरण सोच सकते हैं जब ऐसा नहीं हुआ हो?
उत्तर:
हाँ, यह चुनाव के पहले तथा बाद में मतदाताओं के साथ बीतने वाली स्थितियों का बिल्कुल सही चित्रण है ! हाँ, अधिकतर इस तरह की बातें एक लोकतन्त्र में होती हैं। नहीं, ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब ऐसा न हुआ हो !

प्रश्न 25.
ये भारतीय चुनावों के बारे में कुछ तथ्य हैं। इनमें से प्रत्येक पर टिप्पणी करके यह बताइए कि ये चीजें हमारी चुनाव प्रणाली की शक्ति को बढ़ाती हैं या कमजोरी को।
1. सोलहवीं लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या 12 फीसदी ही है।
2. चुनाव कब हों इस बारे में अक्सर चुनाव आयोग सरकार की नहीं सुनता।
3. सोलहवीं लोकसभा के 440 से अधिक सदस्यों की सम्पत्ति एक करोड़ से भी अधिक है।
4. चुनाव हारने के बाद एक मुख्यमन्त्री ने कहा, ‘मुझे जनादेश मंजूर है।’
उत्तर:

  1. लगभग आधी जनसंख्या होने पर भी लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या 12 फीसदी ही है। यह हमारी चुनाव प्रणाली की कमजोरी है।
  2. चुनाव आयोग को चुनाव के हित में सरकार की सलाह न मानने की स्वतन्त्रता है। अर्थात् चुनाव आयोग निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए स्वतन्त्र है। चुनाव आयोग की यह स्वतन्त्रता हमारी चुनाव प्रणाली की शक्ति को बढ़ाती है।
  3. यह हमारी चुनाव प्रणाली की कमजोरी है कि यह हमारे देश में अमीरों तथा गरीबों को चुनाव जीतने का बराबर अवसर प्राप्त नहीं होता। अमीर लोग धन बल से चुनाव को प्रभावित कर लेते हैं और जीत जाते हैं।
  4. यह हमारी चुनाव प्रणाली की मजबूती है कि चुनाव हारने तथा जीतने वाले दोनों ही चुनाव परिणाम से अपनी सहमति व्यक्त करते हैं। यह स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष चुनाव का प्रतीक है। जिसमें हारने वाले को अपनी हार सहर्ष स्वीकार करनी चाहिए।

JAC Class 9th Civics  चुनावी राजनीति Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
चुनाव क्यों होते हैं, इस बारे में इनमें से कौन-सा वाक्य ठीक नहीं है?
(क) चुनाव लोगों को सरकार के कामकाज का फैसला करने का अवसर देते हैं।
(ख) लोग चुनाव में अपनी पसन्द के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं।
(ग) चुनाव लोगों को न्यायपालिका के कामकाज का मूल्यांकन करने का अवसर देते हैं।
(घ) लोग चुनाव से अपनी पसन्द की नीतियाँ बना सकते हैं।
उत्तर:
(ग) चुनाव लोगों को न्यायपालिका के कामकाज का मूल्यांकन करने का अवसर देते हैं।

प्रश्न 2.
भारत के चुनाव लोकतान्त्रिक हैं, यह बताने के लिए उनमें कौन-सा वाक्य सही कारण नहीं देता?
(क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।
(ख) भारत में चुनाव आयोग काफी शक्तिशाली है।
(ग) भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर व्यक्ति मतदाता है।
(घ) भारत में चुनाव हारने वाली पार्टियाँ जनादेश स्वीकार कर लेती हैं।
उत्तर:
(क) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में मेल ढूँढ़ें

(क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि1. समाज के हर तबके का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके।
(ख) कुछ निर्वाचन-क्षेत्र अनु. जाति और अनु. जनजाति के लिए आरक्षित हैं ताकि2. हर एक को अपना प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले।
(ग) प्रत्येक को सिर्फ एक वोट डालने का हक है ताकि3. हर उम्मीदवार को चुनावों में लड़ने का समान अवसर मिले।
(घ) सत्ताधारी दल को सरकारी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं क्योंकि4. सम्भव है कि कुछ लोग उस जगह से अलग चले गये हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था।

उत्तर:

(क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि4. सम्भव है कि कुछ लोग उस जगह से अलग चले गये हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था।
(ख) कुछ निर्वाचन-क्षेत्र अनु. जाति और अनु. जनजाति के लिए आरक्षित हैं ताकि1. समाज के हर तबके का समुचित प्रतिनिधित्व हो सके।
(ग) प्रत्येक को सिर्फ एक वोट डालने का हक है ताकि2. हर एक को अपना प्रतिनिधि चुनने का समान अवसर मिले।
(घ) सत्ताधारी दल को सरकारी वाहन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं क्योंकि3. हर उम्मीदवार को चुनावों में लड़ने का समान अवसर मिले।
(क) समय-समय पर मतदाता सूची का नवीनीकरण आवश्यक है ताकि4. सम्भव है कि कुछ लोग उस जगह से अलग चले गये हों जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में मतदान किया था।

प्रश्न 4.
इस अध्याय में वर्णित चुनाव सम्बन्धी सभी गतिविधियों की सूची बनाएँ और इन्हें चुनाव में सबसे पहले किये जाने वाले काम से लेकर आखिर तक के क्रम में सजाएँ। इनमें से कुछ मामले हैं चुनाव घोषणा-पत्र जारी करना, वोटों की गिनती, मतदाता सूची बनाना, चुनाव अभियान, चुनाव नतीजों की घोषणा, मतदान, पुनर्मतदान के आदेश, चुनाव प्रक्रिया की घोषणा, नामांकन दाखिल करना।
उत्तर:

  1. मतदाता सूची बनाना
  2. चुनाव प्रक्रिया की घोषणा
  3. नामांकन दाखिल करना
  4. चुनाव घोषणा-पत्र जारी करना
  5. चुनाव अभियान
  6. मतदान
  7. पुनर्मतदान के आदेश
  8. वोटों की गिनती
  9. चुनाव नतीजों की घोषणा।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

प्रश्न 5.
सुरेखा एक राज्य विधानसभा क्षेत्र में स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली अधिकारी है। चुनाव के इन चरणों में उसे किन-किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
(क)चुनाव प्रचार
(ख) मतदान के दिन
(ग) मतगणना के दिन
उत्तर:
(क) चुनाव प्रचार:
एक प्रभारी अधिकारी के रूप में सुरेखा को चाहिए कि स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष चुनाव को ध्यान में रखते हुए वह सुनिश्चित करे कि कोई भी उम्मीदवार अथवा अन्य व्यक्ति मतदाताओं को बहका अथवा धमका तो नहीं रहा है अथवा उन्हें किसी तरह का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित तो नहीं कर रहा है। उम्मीदवारों द्वारा धर्म अथवा जाति के नाम पर मतदाताओं से समर्थन तो नहीं माँगा जा रहा है। सरकारी मशीनरियों का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है। ये सभी उम्मीदवार चुनाव अभियान के दौरान तय सीमा में खर्च कर रहे हैं या इनका खर्च निर्धारित सीमा से अधिक है।

(ख) मतदान के दिन:
सुरेखा को चाहिए कि वह इस बात का ध्यान रखे कि मतदाताओं को किसी भी तरह से मतदान करने से रोका तो नहीं जा रहा है। किसी तरह की धाँधली तो नहीं की जा रही है ? उसे मतपेटियाँ छीनने, जबरन बूथ पर कब्जा करने जैसी घटना की रिपोर्ट तुरन्त आयोग को करनी चाहिए। कहीं कोई अवैध मतदान तो नहीं कर/करा रहा

(ग) मतगणना के दिन:
मतों की स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष गिनती के लिए उसे पर्याप्त सुरक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। मतगणना में किसी भी प्रकार की धांधली न हो एवं जो उम्मीदवार जीता हो उसी को विजयी घोषित किया जाए। पार्टियों के समर्थकों द्वारा कोई भी घटना हो सकती है। उसके लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखनी चाहिए।

प्रश्न 6.
नीचे दी गई तालिका बताती है कि अमेरिकी कांग्रेस के चुनावों के विजयी उम्मीदवारों में अमेरिकी समाज के विभिन्न समुदाय के सदस्यों का क्या अनुपात था। ये किस अनुपात में जीते? इसकी तुलना अमेरिकी समाज में इन समुदायों की आबादी के अनुपात से कीजिए। इसके आधार पर क्या आप अमेरिकी संसद के चुनाव में भी आरक्षण का सुझाव देंगे? अगर हाँ, तो क्यों और किस समुदाय के लिए? अगर नहीं, तो क्यों?

समुदाय का प्रतिनिधित्व (प्रतिशत में)

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा मेंअमेरिकी समाज में
अश्वेत813
हिस्पैनिक513
श्वेत8670

उत्तर:
हाँ, अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिनिधित्व पद्धति लागू की जानी चाहिए, क्योंकि इसके द्वारा प्रत्येक समुदाय को उसकी जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधि सभा में बराबर का प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। जनसंख्या में अश्वेत लोगों तथा हिस्पैनिक का कुल प्रतिशत 26 होने के बावजूद, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में केवल उन्हें 13 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्राप्त है और श्वेत लोगों को उनकी जनसंख्या से 16 प्रतिशत अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त है।

प्रश्न 7.
क्या हम इस अध्याय में दी गई सूचनाओं के आधार पर निम्नलिखित निष्कर्ष निकाल सकते हैं? इनमें से सभी पर अपनी राय के पक्ष में दो तथ्य प्रस्तुत कीजिए।
(क) भारत के चुनाव आयोग को देश में स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव करा सकने लायक पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
उत्तर:
भारत में स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त अधिकार दिये गये हैं-चुनाव सम्बन्धी सरकार की किसी भी सलाह को मानने के लिए आयोग बाध्य नहीं है। आयोग सत्ताधारी पार्टी को सरकारी मशीनरियों के दुरुपयोग से रोक सकता है। यदि वे इसका दुरुपयोग करते हुए पाये जाते हैं।

(ख) हमारे देश के चुनाव में लोगों की जबर्दस्त भागीदारी होती है।
उत्तर:
यह स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष चुनाव का प्रतीक है। यदि चुनावों में धाँधली होती तो मतदाताओं की संख्या निरन्तर घटती जाती।

(ग) सत्ताधारी पार्टी के लिए चुनाव जीतना बहुत आसान होता है।
उत्तर:
नहीं, सत्ताधारी पार्टी के लिए चुनाव जीतना अपेक्षाकृत कठिन है। पिछले 50 वर्ष में सत्ताधारी पार्टी प्रत्येक 3 में से 2 चुनाव हारी हैं। मतदाता चुनाव के दौरान किये गये वादों को पूरा नहीं किये जाने के कारण प्रायः इनसे नाराज रहते हैं। विरोधी पार्टियों द्वारा नये तथा आकर्षक वादे करने के कारण माहौल उनके पक्ष में चला जाता है।

(घ) अपने चुनावों को पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतन्त्र बनाने के लिए कई कदम उठाने जरूरी हैं।
उत्तर:

  1. भारत की 16वीं लोकसभा के 440 से अधिक सदस्य करोड़पति हैं। इससे पता चलता है कि चुनाव धन से प्रभावित किये जाते हैं। अतः सुधार की आवश्यकता है जिससे कि आम आदमी भी चुनकर आ सके।
  2. 16वीं लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मात्र 12 फीसदी ही है। इससे सिद्ध होता है कि यहाँ महिलायें चुनाव लड़ने के लिए स्वतन्त्र एवं सक्षम नहीं है। अत: उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता है।

प्रश्न 8.
चिनप्पा को दहेज के लिए अपनी पत्नी को परेशान करने के जुर्म में सजा मिली थी। सतबीर को छुआछूत मामले का दोषी माना गया था। दोनों को अदालत ने चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी। क्या यह फैसला लोकतान्त्रिक चुनावों के बुनियादी सिद्धान्तों के खिलाफ जाता है ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
न्यायालय का यह निर्णय लोकतान्त्रिक सिद्धान्तों के विरुद्ध नहीं है। आयोग के निर्देशानुसार गम्भीर आपराधिक मामले जिन व्यक्तियों पर साबित हुए हैं, उन्हें वह चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दे सकता। दूसरा, संवैधानिक प्रावधान के तहत छुआछूत का व्यवहार एक दण्डनीय अपराध है। इसलिए न्यायालय का चिनप्पा और सतबीर के मामले में फैसला बिल्कुल सही है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

प्रश्न 9.
यहाँ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चुनावी गड़बड़ियों की कुछ रिपोर्ट दी गई हैं। क्या ये देश अपने यहाँ के चुनावों में सुधार के लिए भारत से कुछ बातें सीख सकते हैं ? प्रत्येक मामले में आप क्या सुझाव देंगे?
(क) नाइजीरिया के एक चुनाव में मतगणना अधिकारी ने जान-बूझकर एक उम्मीदवार को मिले वोटों की संख्या बढ़ा दी और उसे जीता हुआ घोषित कर दिया। बाद में अदालत ने पाया कि दूसरे उम्मीदवार को मिले पाँच लाख वोटों को उस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज कर लिया गया था।
उत्तर:
हाँ, यह देश भारतीय मतगणना पद्धति से सीख ले सकता है। नाइजीरिया को मतगणना का भारतीय तरीका अपनाना चाहिए। हमारे यहाँ मतगणना के समय चुनाव में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों के एजेंट उपस्थित होते हैं तथा उनके सामने मतों की गणना की जाती है। जिससे किसी भी तरह का संदेह होने पर मतगणना दुबारा करायी जा सके। इसके अतिरिक्त नाइजीरिया सरकार को मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग भी करना चाहिए।

(ख) फिजी में चुनाव से ठीक पहले एक परचा बाँटा गया जिसमें धमकी दी गई थी कि अगर पूर्व प्रधानमन्त्री महेन्द्र चौधरी के पक्ष में वोट दिया गया तो खून-खराबा हो जायेगा। यह धमकी भारतीय मूल के मतदाताओं को दी गई थी।
उत्तर:
हाँ, फिजी के लोग भारतीय चुनाव पद्धति से सीख ले सकते हैं, इस तरह की धमकियों से निबटने के लिए ऐसी शक्तिशाली एजेंसी होनी चाहिए जो तत्काल दण्डात्मक कार्यवाई कर सके और मतदाता निष्पक्ष मतदान कर सकें। यह प्रावधान भी होना चाहिए कि जो कोई पार्टी इस तरह के कार्यों में लिप्त पाई जायेगी, उसको चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जायेगा।

(ग) अमेरिका के हर प्रान्त में मतदान, मतगणना और चुनाव संचालन की अपनी-अपनी प्रणालियाँ हैं। सन् 2000 के चुनाव में फ्लोरिडा प्रान्त के अधिकारियों ने जॉर्ज बुश के पक्ष में अनेक विवादास्पद फैसले लिए पर उनके फैसले को कोई भी नहीं बदल सका।
उत्तर:
अमेरिका, भारतीय चुनाव पद्धति से सीख ले सकता है। चुनाव में आयोजन के लिए भारत में एकीकृत व्यवस्था है जो राष्ट्रीय चुनाव आयोग के रूप में काम करती है। इसके नियम और आदेश का सम्पूर्ण देश में समान रूप से पालन होता है। यह संस्था स्वतन्त्र तथा सरकारी प्रभाव से मुक्त होती है। यह चुनाव के समय सरकार के फैसलों पर रोक लगा सकती है, यदि वे स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव के हित में न हों।

प्रश्न 10.
भारत में चुनावी गड़बड़ियों से सम्बन्धी कुछ रिपोर्ट यहाँ दी गई हैं। प्रत्येक मामले में समस्या की पहचान कीजिए। इन्हें दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है?
(क) चुनाव की घोषणा होते ही मन्त्री महोदय ने बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा खोलने के लिए वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।
उत्तर:
चुनाव की घोषणा के बाद मन्त्री द्वारा की गई यह घोषणा जनमत को प्रभावित करने वाला कदम है जो निष्पक्ष चुनाव में बाधा डाल सकता है। यह आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। इसके लिए चुनाव आयोग मन्त्री को कारण बताओ नोटिस जारी करे तथा अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर उसकी इस घोषणा को अवैध घोषित करके उसके विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही करे।

(ख) विपक्षी दलों का आरोप था कि दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके बयानों और चुनाव अभियान को उचित जगह नहीं मिली।
उत्तर:
विपक्षी दलों का यह आरोप कि दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके बयानों और चुनाव अभियान को उचित जगह नहीं मिली, यह निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न करने में बाधक है। इससे उन पार्टियों को जनता तक अपनी बात पहुँचाने का समान अवसर प्राप्त नहीं हुआ है। अतः मतदान प्रभावित हो सकता है।
चुनाव आयोग इसकी जाँच करवाए तथा सही पाये जाने पर उन पार्टियों की भी दूरदर्शन तथा रेडियो तक बात पहुँचाने की व्यवस्था करे।

(ग) चुनाव आयोग की जाँच से एक राज्य की मतदान सूची में 20 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम मिले।
उत्तर:
इस तरह से स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होगा, क्योंकि ये सभी मतदाता किसी एक पार्टी के पक्ष में मत डाल सकते हैं। इससे चुनाव परिणाम प्रभावित होंगे।
चुनाव आयोग इस मतदाता सूची को खारिज करके सही मतदाता सूची तैयार करने का आदेश जारी करे। इस कार्य में लगे हुए अधिकारियों को दण्डित करने के आदेश भी जारी किये जाएँ।

(घ) एक राजनीतिक दल के गुण्डे बंदूकों के साथ घूम रहे थे, दूसरी पार्टियों के लोगों को मतदान में भाग लेने से रोक रहे थे और दूसरी पार्टी की चुनावी सभाओं पर हमले कर रहे थे।
उत्तर:
राजनीति के इस अपराधीकरण से स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। लोग इनके डर से चुनाव में भाग लेने के लिए नहीं जाएँगे और ये अवैध मतदान करके विजयी हो जाएँगे। आयोग को चाहिए कि ऐसे लोगों तथा सम्बन्धित पार्टी का पता लगाकर उन पर उचित कार्यवाई करे। सभी उम्मीदवारों को समुचित सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए एवं जनता को निडर होकर मतदान में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

JAC Class 9 Social Science Solutions Civics Chapter 3 चुनावी राजनीति

प्रश्न 11.
जब यह अध्याय पढ़ाया जा रहा था तो रमेश कक्षा में नहीं आ पाया था। अगले दिन कक्षा में आने के बाद उसने अपने पिताजी से सुनी बातों को दोहराया। क्या आप रमेश को बता सकते हैं कि इसके इन बयानों में क्या गड़बड़ी है ?
(क) औरतें उसी तरह वोट देती हैं जैसा पुरुष उनसे कहते हैं इसलिए उनको मताधिकार देने का कोई मतलब नहीं है।
उत्तर:
मतदान के अधिकार का सम्बन्ध इस बात से बिल्कुल नहीं होता है कि व्यक्ति अपने उस अधिकार का किस प्रकार प्रयोग करता है। अतः इस बात का विचार किये बिना कि कोई पुरुष है या स्त्री प्रत्येक व्यक्ति को वोट का अधिकार होना चाहिए। वे जिसे चाहे उसे वोट दें।

(ख) पार्टी-पॉलिटिक्स से समाज में तनाव पैदा होता है। चुनाव में सबकी सहमति वाला फैसला होना चाहिए, प्रतिद्वन्द्विता नहीं होनी चाहिए।
उत्तर:
पार्टी-पॉलिटिक्स से समाज में तनाव पैदा होता है, लेकिन चुनावों में प्रायः सहमति सम्भव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक उम्मीदवार विजयी होना चाहता है तथा इस मुद्दे पर सहमति बनने की कोई सम्भावना ही नहीं है।

(ग) सिर्फ स्नातकों को ही चुनाव लड़ने की इजाजत होनी चाहिए।
उत्तर:
नहीं, यह लोकतान्त्रिक सिद्धान्तों के खिलाफ है। खासकर हमारे देश में, जहाँ अशिक्षा बहुत अधिक है, यह लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन होगा और अधिकांश लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएँगे। आइए, अखबार पढ़ें प्रश्न-राज्य धानसभाओं के चुनाव अब किसी-न-किसी राज्य में हर वर्ष होते ही रहते हैं। तुम्हारी पढ़ाई के इस वर्ष में जिस राज्य में चुनाव हो रहे हैं उससे सम्बन्धित सूचनाएँ इकट्ठा करो। सूचनाएँ जमा करते हुए उन्हें तीन हिस्सों में बाँटते चलो।
(क) चुनाव के पहले क्या: क्या मुख्य घटनाएँ हुई-राजनीतिक दलों का मुख्य एजेंडा, लोगों की माँगों के बारे में सूचनाएँ, चुनाव आयोग की भूमिका।

(ख) मतदान और मतगणना के दिन क्या मुख्य घटनाएँ थीं: चुनाव में भाग लेने वालों का प्रतिशत क्या था, क्या चुनावी गड़बड़ी भी हुई, क्या पुनर्मतदान हुए, किस तरह की भविष्यवाणियाँ की गई थीं।

(ग) चुनाव के बाद क्या हुआ चुनाव जीतने या हारने वाली पार्टियों ने क्या दावे किए, कौन पार्टी सफल हुई ? मुख्यमन्त्री का चुनाव किस प्रकार हुआ।
उत्तर:
छात्र स्वयं इस प्रश्न को अध्यापक की सहायता से हल करें।

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JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप

JAC Class 9th Geography भारत का भौतिक स्वरूप  InText Questions and Answers 

‘ज्ञात कीजिए’ आधारित प्रश्न

प्रश्न 1.
महान हिमालय में पायी जाने वाली हिमानियों तथा दरों के नाम।
उत्तर:

  1. महान हिमालय में पायी जाने वाली हिमानियाँ: सियाचिन, मिलाम, गंगोत्री, जेमू, बाल्टोरो, बिआफो।
  2. महान हिमालय में पाये जाने वाले दर्रे”: बुर्जिल, जोजीला, शिपकी ला, बारालाचा ला. जेलेप ला, बोमडी ला, थागा ला, लोपूलेख ला।

प्रश्न 2.
भारत के उन राज्यों के नाम जहाँ ऊपर दिए गए ऊँचे शिखर स्थित हैं।
उत्तर:

पर्वत शिखरराज्य
कंचनजंघासिक्किम
नंगा पर्वतजम्मू और कश्मीर
नन्दा देवीउत्तराखण्ड
कामेटउत्तराखण्ड
नामचा बरुआअरुणाचल प्रदेश।

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प्रश्न 3.
एटलस से मसूरी, नैनीताल एवं रानीखेत की स्थिति देखें तथा उन राज्यों के नाम लिखें जहाँ वे स्थित
उत्तर:

स्थानराज्य
मसूरीउत्तराखण्ड
नैनीतालउत्तराखण्ड
रानीखेतउत्तराखण्ड

‘क्या आप जानते हैं’ से सम्बन्धित प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व का सबसे बड़ा नदीयद्वीप, जिस पर लोग निवास करते हैं, कौन-सा है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित माजोली नदीय द्वीप।

प्रश्न 2.
‘दोआब’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
‘दोआब’ का अर्थ है दो नदियों के बीच का भाग। यह दो शब्दों से मिलकर बना है-दो तथा आब अर्थात् पानी।

प्रश्न 3.
‘पंजाब’ किन दो शब्दों से मिलकर बना है?
उत्तर:
‘पंज’ तथा ‘आब’ इन दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें पंज का अर्थ है पाँच तथा आब का अर्थ है पानी।

प्रश्न 4.
भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील कौन-सी है?
उत्तर:
चिल्का झील।

प्रश्न 5.
चिल्का झील कहाँ स्थित है?
उत्तर:
चिल्का झील उड़ीसा में महानदी डेल्टा के दक्षिण में स्थित है।

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प्रश्न 6.
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ स्थित है?
उत्तर:
अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह के बैरेन द्वीप पर।

JAC Class 9th Geography भारत का भौतिक स्वरूप Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
1. एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो
(क) तट
(ख) प्रायद्वीप
(ग) द्वीप
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) प्रायद्वीप।

2. भारत के पूर्वी भाग में म्यांमार की सीमा का निर्धारण करने वाले पर्वतों का संयुक्त नाम
(क) हिमाचल
(ख) पूर्वांचल
(ग) उत्तराखण्ड
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) पूर्वांचल।

3. गोवा के दक्षिण में स्थित पश्चिम तटीय पट्टी
(क) कोरोमण्डल
(ख) कन्नड़
(ग) कोंकण
(घ) उत्तरी सरकार।
उत्तर:
(ग) कोंकण।

4. पूर्वी घाट का सर्वोच्च शिखर
(क) अनाईमुडी
(ख) महेन्द्रगिरि
(ग) कंचनजंघा
(घ) खासी।
उत्तर:
(ख) महेन्द्रगिरि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए:
1. भाबर क्या है?
उत्तर:
नदियाँ पर्वतों से नीचे उतरते समय शिवालिक के ढाल पर 8 से 16 किमी. की चौड़ी पट्टी में गुटिका का निक्षेपण करती हैं। इसे भाबर के नाम से जाना जाता है।

2. हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए।
उत्तर:

  1. हिमाद्रि,
  2. हिमाचल,
  3. शिवालिक।

3. अरावली और विन्ध्याचल की पहाड़ियों में कौन-सा पठार स्थित है?
उत्तर:
मालवा का पठार।

4. भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भित्ति के हैं।
उत्तर:
लकादीव, मिनीकाय एवं एमीनदीव। इन्हें आजकल लक्षद्वीप द्वीप समूह के नाम से जाना जाता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए:
1. बांगर और खादर:

बांगरखादर
1. उत्तरी मैदान के पुराने जलोढ़ को बांगर कहते हैं।1. बाढ़ के मैदानों के नवीन जलोढ़ को खादर कहते हैं।
2. ये नदियों के बाढ़ वाले मैदान के ऊपर स्थित हैं। यहाँ बाढ़ का पानी नहीं पहुँच पाता है।2. इन क्षेत्रों में बाढ़ के समय नदी का पानी सम्पूर्ण क्षेत्र में फैल जाता है तथा नयी जलोढ़ की परत जम जाती है।
3. इनका प्रत्येक वर्ष पुर्नर्निर्माण नहीं होता है।3. इनका प्रत्येक वर्ष पुनर्निर्माण होता है।
4. यह कम उपजाऊ होते हैं।4. यह अधिक उपजाऊ होते हैं।

2. पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट पूर्वी घाट:

पूर्वी घाटपशिचमी घाट
1. दक्षिणी पठार के पूर्वी सिरे पर पूर्वी घाट स्थित है।1. दक्षिणी पठार के पश्चिमी सिरे पर पश्चिमी घाट स्थित है।
2. ये शृंग पर्वतमाला है जो पूर्वी तट के समानान्तर फैली हुई है।2. यह सतत् पर्वतमाला है जो पश्चिमी तट के समानान्तर स्थित है।
3. पूर्वी घाट कम ऊँचे हैं। इन घाटों की औसत ऊँचाई 600 मीटर है।3. पश्चमी घाट अधिक ऊँचे हैं। इन घाटों की औसत ऊँचाई 900 से 1600 मीटर है।
4. पूर्वी घाट को बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने काट दिया है।4. पश्चिमी घाट निरन्तरता लिए हुए हैं और इन्हें दर्रों से होकर ही पार किया जा सकता है।
5. महेन्द्रगिरि ( 1,500 मी.) पूर्वी घाट का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।5. अनाईमुडी (2,695 मी.) पश्चिमी घाट का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।

प्रश्न 4.
भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं ? हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग निम्नलिखित हैं

  1. हिमालय पर्वत श्रृंखला,
  2. उत्तरी मैदान,
  3. प्रायद्वीपीय पठार,
  4. भारतीय मरुस्थल,
  5. तटीय मैदान,
  6. द्वीप समूह।

हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में अन्तर निम्न प्रकार से हैंहिमालय क्षेत्र

हिमालय क्षेत्रप्रायद्वीपीय पठार
1. यह नवीन वलित पर्वतीय क्षेत्र है।1. यह पठारी क्षेत्र अति प्राचीन भूखण्ड है।
2. हिमालय पर्वतीय क्षेत्र की तीन वलित श्रेणियाँ हैं: हिमाद्रि, निम्न हिमालय, शिवालिक।2. प्रायद्वीपीय पठार के दो भाग हैं: मध्यवर्ती भूमि, दक्कन (दक्षिण) का पठार।
3. हिमालय क्षेत्र में ऊँचे पर्वत शिखर एवं गहरी घाटियाँ हैं।3. इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं।
4. हिमालय क्षेत्र में अधिक हिमनद एवं दरे पाये जाते हैं।4. पठारी भूमि होने के कारण हिमनद नहीं पाये जाते हैं। केवल सीमित मात्रा में दर्रे पाये जाते हैं।
5. इस पर्वतीय क्षेत्र का निर्माण मुख्य रूप से अत्यधिक संपीडित तथा परिवर्तित शैलों से हुआ है।5. इस पठारी क्षेत्र का निर्माण पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय एवं रूपान्तरित शैलों से हुआ है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप

प्रश्न 5.
भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन निम्न प्रकार से है

  1. उत्तरी मैदान हिमालय पर्वतीय प्रदेश एवं प्रायद्वीपीय पठार के मध्य में स्थित है।
  2. इस मैदानी क्षेत्र का विस्तार 7 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में है। यह मैदान लगभग 2400 किमी. लम्बा एवं 240 से 320 किमी. चौड़ा है।
  3. यह मैदान उत्तर में हिमालय से आने वाली नदियों द्वारा लाये गये महीन जलोढ़कों द्वारा निर्मित है।
  4. उच्चावच में बहुत कम विषमताओं वाला यह लगभग समतल भू-भाग है।
  5. यह मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों सिन्धु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों से निर्मित हुआ है।
  6. इस मैदानी क्षेत्र की उपजाऊ मृदा, पर्याप्त जलापूर्ति एवं अनुकूल जलवायु इसे कृषि के लिए आदर्श बनाती है।
  7. आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:
    • भाबर,
    • तराई,
    • भांगर (बांगर),
    • खादर।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
1. मध्य हिमालय,
2. मध्य उच्च भूमि,
3. भारत के द्वीप समूह।
उत्तर:
(i) मध्य हिमालय:

  1. मध्य हिमालय पर्वत श्रृंखला हिमालय पर्वत की सर्वोच्च श्रेणी हिमाद्रि के दक्षिण में समानान्तर रूप में फैली हुई है। इसे हिमाचल या निम्न हिमालय के नाम से भी जाना जाता है।
  2. इसकी औसत ऊँचाई 3700 से 4500 मीटर है तथा औसत चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर है।
  3. यह हिमालय की मध्यवर्ती श्रेणी है।
  4. इसका सर्वाधिक भाग असम राज्य में है।
  5. इसमें पीरपंजाल श्रृंखला सबसे लम्बी एवं सबसे महत्वपूर्ण श्रृंखला है। धौलाधर एवं महाभारत श्रृंखलाएँ भी महत्वपूर्ण हैं।
  6. इसी पर्वत श्रृंखला में कश्मीर की घाटी एवं हिमाचल के कांगड़ा एवं कुल्लू की घाटियाँ स्थित हैं।
  7. धर्मशाला, शिमला, मसूरी, नैनीताल एवं दार्जिलिंग यहाँ के प्रमुख स्वास्थ्यवर्द्धक पर्वतीय स्थल हैं।

(ii) मध्य उच्च भूमि:

  1. नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो मालवा के पठार के अधिकांश भागों पर फैला है, मध्य उच्च भूमि के नाम से जाना जाता है।
  2. इस क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ-चम्बल, सिंध, बेतवा एवं केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर पूर्व की तरफ बहती हैं।
  3. मध्यवर्ती उच्च भूमि पश्चिम में चौड़ी एवं पूर्व में सँकरी है।
  4. इस पठार के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप में बुन्देलखंड एवं बघेलखंड के नाम से जाना जाता है।
  5. सोन नदी के पूर्व में छोटा नागपुर का पठार स्थित है। यह पठारी भाग लावा के निक्षेपों की परतों से बना है।

(iii) भारत के द्वीप समूह भारत के द्वीप समूह को दो वर्गों में बाँटा जाता है लक्षद्वीप द्वीप समूह:

  1. केरल के मालाबार तट के समीप स्थित छोटे-छोटे द्वीपों के समूह को लक्षद्वीप कहते हैं।
  2. द्वीपों का यह समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से मिलकर बना है।
  3. इन द्वीपों को पहले लकादीव, मीनीकाय एवं एमीनदीव के नाम से जाना जाता था।
  4. यह द्वीप समूह 32 किमी. के छोटे से क्षेत्र में फैला हुआ है।
  5. कावारत्ती द्वीप लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय है।
  6. इस द्वीप समूह पर वनस्पति एवं जन्तुओं के अनेक प्रकार पाये जाते हैं।
  7. पिटली द्वीप पर मनुष्यों का निवास नहीं है। यहाँ एक पक्षी अभयारण्य स्थित है।

(iv) अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह:

  1. ये द्वीप बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर फैले हुए हैं।
  2. ये द्वीप समूह आकार में बड़े, संख्या में बहुल एवं बिखरे हुए हैं।
  3. इन द्वीप समूहों को मुख्यत: दो भागों में बाँटा गया है-उत्तर में अण्डमान तथा दक्षिण में निकोबार।
  4. यह माना जाता है कि यह द्वीप समूह निमज्जित पर्वत श्रेणियों के ऊपर उठे हुए भाग हैं।
  5. यह द्वीप समूह देश की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस द्वीप समूह का मुख्यालय पोर्ट ब्लेयर में है।
  6. इन द्वीप समूह में पाये जाने वाले पादप और जन्तुओं में बहुत अधिक विविधता पायी जाती है।
  7. ये द्वीप विषुवत् वृत्त के समीप स्थित हैं।
  8. इन द्वीपों की जलवायु विषुवतीय है।
  9. ये द्वीप घने वनों से आच्छादित हैं।

मानचित्र कार्य

प्रश्न 1.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाइए:
1. पर्वत शिखर-के-2, कंचनजंघा, नंगा पर्वत, अनाईमुडी।
2. पठार-शिलांग, छोटा नागपुर, मालवा तथा बुन्देलखंड।
3. थार मरुस्थल, पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप समूह, गंगा-यमुना दोआब तथा कोरोमण्डल तट।
उत्तर:
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप 2

क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
दी गई वर्ग पहेली में कुछ शिखरों, दरों, श्रेणियों, पठारों, पहाड़ियों एवं घाटियों के नाम छपे हैं। उन्हें ढूंढ़िए। ज्ञात कीजिए कि ये आकृतियाँ कहाँ स्थित हैं? आप अपनी खोज क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर या विकर्णीय दिशा में कर सकते नोट-पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 2 भारत का भौतिक स्वरूप 1
उत्तर:

  1. शिखर-कंचनजंघा (हिमालय पर्वत), एवरेस्ट (हिमालय पर्वत), अनाईमुडी (पश्चिमी घाट)
  2. दरे-नाथू-ला (हिमालय पर्वत), शिपकी-ला (हिमालय पर्वत), बोमडी-ला (हिमालय पर्वत)
  3. पर्वत श्रेणियाँ-मैकाल, सह्याद्रि, विन्ध्यन (प्रायद्वीपीय पठार)
  4. पठार–छोटा नागपुर, मालवा (प्रायद्वीपीय पठार)
  5. पहाड़ियाँ-जयंतिया (पूर्वांचल), कैमूर (प्रायद्वीपीय पठार), गारो (पूर्वांचल), नीलगिरी (प्रायद्वीपीय पठार)
  6. घाटियाँ-भोरघाट, पालघाट (पश्चिमी घाट)।

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JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 1 भारत-आकार वे स्थिति

JAC Board Class 9th Social Science Solutions Geography Chapter 1 भारत-आकार वे स्थिति

JAC Class 9th Geography भारत-आकार वे स्थिति  InText Questions and Answers 

प्रश्न 1.
82°30 पूर्व देशान्तर को भारत की मानक याम्योत्तर क्यों माना गया है?
उत्तर:
सम्पूर्ण देश में एक ही समय को स्वीकार करने के लिए भारत में 82°30′ पूर्व देशान्तर रेखा को मानक याम्योत्तर रेखा माना गया है। यह रेखा भारत के लगभग मध्य से होकर गुजरती है। इसके अतिरिक्त दूसरा कारण 75° पूर्व देशान्तर से 90° पूर्व देशान्तर का अन्तर्राष्ट्रीय समय क्षेत्र भारत के मध्य में पड़ता है। अत: 75° पूर्व एवं 90° पूर्व देशान्तरों के बीच की संख्या 82°30′ पूर्व देशान्तर होती है। अत: इसी देशान्तर रेखा को भारत की मानक याम्यात्तर रेखा निर्धारित किया गया है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 1 भारत-आकार वे स्थिति

प्रश्न 2.
कन्याकुमारी और कश्मीर में दिन-रात की अवधि में अन्तर क्यों है?
उत्तर:
कन्याकुमारी भूमध्य रेखा के समीप एवं कश्मीर भूमध्य रेखा से दूर स्थित है। भूमध्य रेखा के समीप दिन और रात की अवधि लगभग समान रहती है। कश्मीर भूमध्य रेखा से बहुत दूर स्थित है अत: दोनों स्थानों की दिन-रात की अवधि में लगभग 5 घण्टे का अन्तर रहता है।

प्रश्न 3.
पश्चिमी और पूर्वी तटों पर केन्द्र-शासित क्षेत्रों की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:

  • पश्चिमी तट पर स्थित केन्द्र-शासित प्रदेश:
    1. दादरा नगर हवेली और दमन-दीव,
    2. लक्षद्वीप समूह।
  • पूर्वी तट पर स्थित केन्द्र-शासित क्षेत्र:
    1. पाण्डिचेरी (पुडुचेरी),
    2. अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह।

प्रश्न 4.
क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा एवं सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा राज्य राजस्थान एवं सबसे छोटा राज्य गोवा है।

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प्रश्न 5.
कौन से राज्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा तथा समुद्र तट को स्पर्श नहीं करते हैं?
उत्तर:
हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्य अन्तर्राष्ट्रीय सीमा एवं समुद्र तट को स्पर्श नहीं करते

प्रश्न 6.
1. पाकिस्तान,
2. चीन,
3. म्यांमार, और
4. बांग्लादेश की सीमाओं को छूने वाले राज्यों को चार वर्गों में विभाजित कीजिए।
उदाहरणार्थ: उन राज्यों को एक वर्ग में रखिए, जिनकी सीमाएँ पाकिस्तान से मिलती हैं। इसी तरह अन्य शेष वर्ग बनाइए।
उत्तर:

  1. पाकिस्तान की सीमा को छूने वाले राज्य: राजस्थान, गुजरात, पंजाब एवं जम्मू और कश्मीर।
  2. चीन की सीमा को छूने वाले राज्य: जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।
  3. म्यांमार की सीमा को छूने वाले राज्य: नागालैण्ड, असम, मणिपुर, मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश।
  4. बांग्लादेश की सीमा को छूने वाले राज्य: पश्चिमी बंगाल, मेघालय, त्रिपुरा, असम और मिजोरम।

‘क्या आप जानते हैं” से सम्बन्धित प्रश्न

प्रश्न 1.
सन् 2004 से पूर्व भारतीय संघ राज्य का सबसे दक्षिणी बिन्दु कौन-सा था?
उत्तर:
सन् 2004 से पूर्व भारतीय संघ राज्य का सबसे दक्षिणी बिन्दु ‘इन्दिरा बिन्दु’ था जो अब सुनामी लहरों के कारण समुद्र में डूब चुका है।

प्रश्न 2.
सन् 1869 में स्वेज नहर के खुलने से भारत और यूरोप के बीच की दूरी कितने किमी कम हो गई।
उत्तर:
7,000 किमी।

प्रश्न 3.
सन् 1947 से पूर्व भारत में कितने प्रकार के राज्य थे?
उत्तर:
दो प्रकार के-प्रान्त और रियासत।

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प्रश्न 4.
सन् 1947 से पूर्व प्रान्त और रियासतों की शासन व्यवस्था कैसे चली थी?
उत्तर:
प्रान्तों में वायसराय द्वारा नियुक्त अंग्रेज अधिकारी शासन करते थे तथा रियासतों का शासन स्थानीय शासकों द्वारा पैतृकता के आधार पर अंग्रेजी शासकों की प्रभुत्ता मानकर स्वायत्तता से किया जाता था।

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित घार उत्तरों में से उपयुक्त उत्तर चुनिए:
1. कर्क रेखा किस राज्य से नहीं गुजरती है?
(क) राजस्थान
(ख) उड़ीसा
(ग) छत्तीसगढ़
(घ) त्रिपुरा।
उत्तर:
(ख) उड़ीसा।

2. भारत का सबसे पूर्वी देशान्तर कौन-सा है?
(क) 97°25′ पू.
(ख) 77°6′ पू.
(ग) 68°7′ पू.
(घ) 82°32′ पू.।
उत्तर:
(क) 97°25′ पू.।

3. उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल और सिक्किम की सीमाएँ किस देश को छूती हैं?
(क) चीन
(ख) भूटान
(ग) नेपाल
(घ) म्यांमार।
उत्तर:
(ग) नेपाल।

4. ग्रीष्मावकाश में आप यदि कावारत्ती जाना चाहते हैं तो किस केन्द्र-शासित क्षेत्र में जाएँगे?
(क) पुडुचेरी
(ख) लक्षद्वीप
(ग) अण्डमान और निकोबार
(घ) दीव और दमन।
उत्तर:
(ख) लक्षद्वीप।

5. मेरे मित्र एक ऐसे देश के निवासी हैं जिस देश की सीमा भारत के साथ नहीं लगती है। आप बताइए, वह कौन-सा देश है?
(क) भूटान
(ख) ताजिकिस्तान
(ग) बांग्लादेश
(घ) नेपाल।
उत्तर:
(ख) ताजिकिस्तान।

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प्रश्न 2.
निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए
1. अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह के नाम बताइए।दक्षिण में कौन-कौन से द्वीपीय देश हमारे पड़ोसी हैं?
उत्तर:
अरब सागर में लक्षद्वीप समूह एवं बंगाल की खाड़ी में अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित हैं। दक्षिण में हमारे पड़ोसी द्वीपीय देश श्रीलंका और मालदीव हैं।

2. उन देशों के नाम बताइए जो क्षेत्रफल में भारत से बड़े हैं ?
उत्तर:
क्षेत्रफल में भारत से बड़े देश:

  1. रूस,
  2. कनाडा,
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका,
  4. चीन,
  5. ब्राजील,
  6. ऑस्ट्रेलिया हैं।

3. हमारे उत्तर पश्चिमी,उत्तरी तथा उत्तर-पूर्वी पड़ोसी देशों के नाम बताइए।
उत्तर:
हमारे उत्तर पश्चिमी पड़ोसी देश-पाकिस्तान, अफगानिस्तान। उत्तरी पड़ौसी देश-चीन, नेपाल, भूटान। उत्तरी पूर्वी पड़ौसी देश-बांग्लादेश, म्यांमार।

4. भारत में किन-किन राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है, उनके नाम बताइए।
उत्तर:
भारत के निम्नलिखित 8 राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है

  1. गुजरात,
  2. राजस्थान,
  3. मध्य प्रदेश,
  4. छत्तीसगढ़,
  5. झारखण्ड,
  6. पश्चिमी बंगाल,
  7. त्रिपुरा,
  8. मिजोरम।

प्रश्न 3.
सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में गुजरात के पश्चिमी भाग की अपेक्षा 2 घण्टे पहले क्यों होता है, जबकि दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत का देशान्तरीय विस्तार 6807′ पूर्व से लेकर 97°25′ पूर्व तक है अर्थात् सर्वाधिक पूर्वी और पश्चिमी बिन्दुओं का अन्तर लगभग 30° का है। पृथ्वी अपने अक्ष पर एक बार घूर्णन करने में (360°) 24 घण्टे का समय लेती है। इसका अर्थ यह हुआ कि पृथ्वी से 1° देशान्तर पार करने में 4 मिनट का समय लगता है अत: 30° देशान्तरों को पार करने में कुल मिनट अर्थात् 2 घण्टे लगते हैं।

पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है इसलिए अरुणाचल प्रदेश में जो कि 97°25′ पूर्व पर स्थित है, सूर्य पहले दिखता है, जबकि गुजरात में, जो कि 68°07′ पूर्व पर स्थित है, सूर्य दो घण्टे बाद दिखता है। दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती हैं क्योंकि भारतीय मानक समय 82°30′ पूर्वी देशान्तर रेखा से मिर्धारित किया जाता है। इस देशान्तर का स्थानीय समय सम्पूर्ण भारत का मानक समय माना जाता है जिससे सम्पूर्ण भारत का समय एक समान रहता है।

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प्रश्न 4.
हिन्द महासागर में भारत की केन्द्रीय स्थिति से इसे किस प्रकार लाभ प्राप्त हआ है?
उत्तर:
हिन्द महासागर में भारत की केन्द्रीय स्थिति से इसे निम्नलिखित रूप में लाभ प्राप्त हुआ है
1. हिन्द महासागर में भारत की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारे देश के अतिरिक्त संसार के किसी भी देश की इतनी लम्बी तट रेखा इस समुद्र के साथ नहीं है। इससे पश्चिम एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप आदि के साथ समुद्री व्यापार सम्भव हुआ है।

2. स्वेज नहर के खुलने से भूमध्य सागर को हिन्द महासागर से जोड़ दिया गया है। इससे दक्षिण यूरोप और उत्तरी अफ्रीका भी हिन्द महासागर के प्रभाव क्षेत्र में आ गये हैं।

3. भारत ने अपनी केन्द्रीय स्थिति के कारण ही प्राचीन समय में अपने पड़ौसी देशों से मधुर व्यापारिक एवं सांस्कृतिक सम्बन्ध स्थापित किए हैं।

मानचित्र कौशल:  निम्नलिखित की मानचित्र की सहायता से पहचान कीजिए:
1. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह।
2. भारतीय उपमहाद्वीप किन देशों से मिलकर बनता है?
3. कर्क रेखा कौन-कौन से राज्यों से गुजरती है?
4. भारत के मुख्य भू-भाग का दक्षिणी शीर्ष बिन्दु।
5. भारत का सबसे उत्तरी अक्षांश।
6. अंशों में भारत के मुख्य भू-भाग का दक्षिणी अक्षांश।
7. भारत का सबसे पूर्वी और पश्चिमी देशान्तर।
8. सबसे लम्बी तट रेखा वाला राज्य।
9. भारत और श्रीलंका को अलग करने वाली जल सन्धि।
10. भारत के केन्द्र-शासित क्षेत्र।
JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 1 भारत-आकार वे स्थिति 1
उत्तर:

  1. संकेत: अरब सागर में लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी में अण्डमान निकोबार द्वीप समूह।
  2. भारतीय उपमहाद्वीप भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका से मिलकर बना है।
  3. कर्क रेखा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिमी बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है।
  4. कन्याकुमारी,
  5. 37°6′,
  6. 8°4,
  7. भारत का सबसे पूर्वी देशान्तर 97°25′, पश्चिमी देशान्तर 68°7’।
  8. गुजरात।
  9. पाक जलसन्धि।
  10. भारत के केन्द्र- शासित क्षेत्र:
    • 1. अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह,
    • 2. चण्डीगढ़,
    • 3. दिल्ली,
    • 4. दमन-दीव और दादरा-नागर हवेली,
    • 5. पुडुचेरी (पाण्डिचेरी),
    • 6. लक्षद्वीप,
    • 7. जम्मू और कश्मीर
    • 8. लद्दाख।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. अपने राज्य का विस्तार अक्षांश और देशान्तर में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
किसी भी राज्य या स्थान का अक्षांश और देशान्तर रेखाओं का विस्तार जानने के लिए मानचित्र पर उस स्थान की सही जानकारी मालूम होनी चाहिए। प्रत्येक मानचित्र पर अक्षांश और देशान्तर की डिग्रियाँ (अंश) लिखे रहते हैं। अपने राज्य के अक्षांश को जानने के लिए उत्तर दक्षिण दिशा में एवं देशान्तर को जानने के लिए पूर्व-पश्चिम दिशा में भारत के मानचित्र पर समान्तर रेखाएँ खींचिए।

इनमें से कोई रेखा निश्चित रूप से आपके राज्य को स्पर्श करते हुए निकलेगी। जो रेखा उत्तर-दक्षिण दिशा में आपके राज्य को स्पर्श करे उसका मूल्य (अंश) ज्ञात कर लें। इसी प्रकार जो रेखा पूर्व-पश्चिम दिशा में आपके राज्य को स्पर्श करे उसका मूल्य (अंश) ज्ञात कर लें। यही मूल्य (अंश) आपके राज्य के अक्षांश एवं देशान्तर होंगे।

1. राजस्थान राज्य का अक्षांशीय विस्तार 23°3′ उत्तरी अक्षांश से 30°12′ उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 69°30′ पूर्वी देशान्तर से 78°17′ पूर्वी देशान्तर तक है।

2. मध्य प्रदेश का अक्षांशीय विस्तार 21°6 उत्तरी अक्षांश से 26°30′ उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 74° पूर्वी देशान्तर से 81°48′ पूर्वी देशान्तर तक है।

3. बिहार राज्य का अक्षांशीय विस्तार 21°28′ उत्तरी अक्षांश से 26°30 उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 80°15′ पूर्वी देशान्तर से 7817′ पूर्वी देशान्तर तक है।

4. छत्तीसगढ़ राज्य का अक्षांशीय विस्तार 17°46′ से 24°6′ उत्तरी अक्षांश से एवं देशान्तरीय विस्तार 80°15′ पूर्वी देशान्तर से 7817′ पूर्वी देशान्तर तक है।

5. उत्तराखण्ड राज्य का अक्षांशीय विस्तार 28°43′ से 31°27′ उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 69°30′ पूर्वी देशान्तर से 78°17′ पूर्वी देशान्तर तक है।

6. झारखण्ड राज्य का अक्षांशीय विस्तार 23°3′ उत्तरी अक्षांश से 30°12′ उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 69°30′ पूर्वी देशान्तर से 78°17′ पूर्वी देशान्तर तक है।

7. हरियाणा राज्य का अक्षांशीय विस्तार 23°3′ उत्तरी अक्षांश से 30°12′ उत्तरी अक्षांश एवं देशान्तरीय विस्तार 69°30′ पूर्वी देशान्तर से 78°17′ पूर्वी देशान्तर तक है।

JAC Class 9 Social Science Solutions Geography Chapter 1 भारत-आकार वे स्थिति

प्रश्न 2.
‘रेशम मार्ग’ के बारे में सूचना एकत्र कीजिए। यह भी ज्ञात कीजिए कि किन नई विकास योजनाओं द्वारा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन के मार्ग विकसित किये गये हैं?
उत्तर:
रेशम मार्ग भारत, चीन, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों के मध्य पर्वतीय दरों से होकर जाने वाला प्राचीन मार्ग था। इस मार्ग के द्वारा व्यापारी चीन निर्मित रेशमी कपड़ा, रेशम एवं अन्य सामग्री याकों एवं खच्चरों की सहायता से भारत तथा अन्य देशों को पहुँचाया करते थे।

भारत से गर्म मसाले, रबड़, तम्बाकू, ऊनी वस्त्र, सूती वस्त्र एवं अन्य वस्तुएँ इसी मार्ग से उत्तरी पश्चिमी चीन, पश्चिमी एवं मध्य पूर्वी एशिया के देशों को भेजी जाती थीं। नई विकास योजनाओं द्वारा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन का विकास-प्राचीन काल में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में मानव के लिए एक-दूसरे से सम्पर्क स्थापित करने में बहुत अधिक बाधाएँ थीं।

वर्तमान समय में नई विकास योजनाओं के माध्यम से पर्वतों को काटकर आवागमन के नये मार्गों को विकसित किया गया है। वायु परिवहन के साधनों का भी तीव्र गति से पर्वतीय क्षेत्रों में विकास होने से दुर्गम क्षेत्रों में भी लोगों को आसानी से पहुँचाया एवं संकटपूर्ण परिस्थितियों में पाल उनको वहाँ से निकाला भी जा सकता है।

आज अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सड़क मार्गों का जाल बन गया है। कहीं-कहीं रेलमार्गों का भी विकास किया गया है। उच्च पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के अधिक विकास हेतु केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस प्रकार नई-नई विकास योजनाओं द्वारा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है।

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JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

JAC Board Class 9th Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

JAC Class 9th History आधुनिक विश्व में चरवाहे  InText Questions and Answers

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश:
पाठ्य-पुस्तक में इस अध्याय के विभिन्न पृष्ठों पर बॉक्स के अन्दर क्रियाकलाप दिए हुए हैं। इन क्रियाकलापों के अन्तर्गत पूछे गए प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर अग्र प्रकार से हैं

क्रियाकलाप (पृष्ठ सख्या-101)

प्रश्न 1.
इन स्रोतों के आधार पर संक्षेप में बताइए कि चरवाहा परिवारों के औरत-मर्द क्या-क्या काम करते थे?
उत्तर:
चरवाहा परिवारों के महिला-पुरुष द्वारा किये जाने वाले कार्य निम्नलिखित थे

  1. पुरुष मुख्य रूप से मवेशियों को चराने का कार्य करते थे एवं इसके लिए वे कई सप्ताहों तक अपने घरों से दूर रहते थे।
  2. महिलाएँ प्रतिदिन सुबह अपने सिर पर टोकरी और कंधे पर हँडिया लटकाकर बाजार जाती थीं। इन टोकरियों एवं हाँड़ियों में दैनिक खान-पान की चीजें, जैसे दूध, मक्खन, घी आदि होते थे। इन्हें बेचकर वे अपने घर के लिए आवश्यक सामग्री खरीदती थीं।

JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

प्रश्न 2.
आपकी राय में चरवाहे जंगलों के आस-पास ही क्यों रहते हैं?
उत्तर:
चरवाहों के जंगलों के आस-पास निवास करने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

  1. जंगल के आस-पास छोटे-छोटे गाँवों में रहते हुए चरवाहे जंगल की जमीन पर कृषि-कार्य करते हैं।
  2. चरवाहे जंगलों में अपने मवेशियों को चरा लेते हैं।
  3. चरवाहे जंगलों से अनेक ऐसी वस्तुएँ प्राप्त करते हैं जिनको शहरों में बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

क्रियाकलाप (पृष्ठ संख्या-104)

प्रश्न 1.
मान लीजिए कि जंगलों में जानवरों को चराने पर रोक लगा दी गई है। इस बात पर निम्नलिखित की दृष्टि से टिप्पणी कीजिए
1. एक वन अधिकारी
2. एक चरवाहा।
उत्तर:
एक वन अधिकारी की दृष्टि से टिप्पणी-चरवाहे जंगलों एवं जंगली जानवरों को नुकसान पहुंचाते हैं। वे पर्यावरण का ध्यान रखे बिना ही अपनी अधिक से अधिक आमदनी करने के लिए जंगलों का अव्यवस्थित विदोहन करते हैं। अतः इन्हें जंगलों में प्रवेश नहीं देना चाहिए। एक चरवाहा की दृष्टि से टिप्पणी-जंगली लकड़ी, फूल-फल, पत्ते, मसाले आदि सभी मानव के उपयोग के लिए ही हैं।

हम सभी लोग जंगल के आस-पास के गाँवों में ही रहते हैं तथा जंगल की रखवाली भी करते हैं। यही हमारी आजीविका का साधन हैं तथा हमारे पशुओं को भी यहीं से चारा मिलता है। जंगल के बिना हमारे पशु एवं हम जीवित नहीं रह पायेंगे अत: हमें जंगलों में अपने पशु चराने की अनुमति मिलनी ही चाहिए।

क्रियाकलाप ( पृष्ठ संख्या-105)

प्रश्न 1.
कल्पना कीजिए कि आप 19वीं सदी के आखिरी सालों यानी सन् 1890 ई. के आस-पास रह रहे हैं। आप घुमंतू चरवाहों या कारीगरों के एक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। आपको पता चला है कि सरकार ने आपके समुदाय को अपराधी समुदाय घोषित कर दिया है।
1. संक्षेप में बताइए कि यह जानकर आपको कैसा महसूस होता और आप क्या करते?
उत्तर:
यह बहुत स्वाभाविक है कि मुझे बुरा लगता क्योंकि किसी समुदाय को अपराधी घोषित कर देना वह भी सिर्फ इस कारण से कि एक घुमंतू समुदाय है, बहुत ही गलत है। ऐसी स्थिति में, मैं सरकार से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करता।

2. स्थानीय कलेक्टर को चिट्ठी लिखकर बताइए कि आपकी नज़र में यह कानून किस तरह अन्यायपूर्ण है और इससे आपकी जिन्दगी पर क्या असर पड़ेंगे?
उत्तर:
सेवा में, श्रीमान् कलेक्टर महोदय जैसलमेर विषय-राइका समुदाय को अपराधी समुदाय घोषित करने के सन्दर्भ में। महोदय, विषयानुसार निवेदन है कि आपकी सरकार ने अपराधी जनजाति अधिनियम, 1871 के तहत् हमारे राइका समुदाय को अपराधी घोषित कर दिया है। यह एक अनुचित कार्यवाही है क्योंकि बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ घुमंतू होने के आधार पर हमारे समुदाय को अपराधी जनजाति घोषित किया गया है। समाज में आगे भी आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ इसी आधार पर अपराधी बुलाया जायेगा जो कि घोर अन्याय होगा।

इतना ही नहीं इस अधिनियम के लागू हो जाने पर हमें एक अधिसूचित क्षेत्र की सीमा के अन्दर अपनी जीवन-यापन सम्बन्धी गतिविधियाँ करनी पड़ेगी। इससे बाहर जाने के लिए हमें सरकार से पूर्वानुमति लेनी होगी। पुलिस हमेशा हम पर कड़ी नजर रखेगी। यह बार-बार हमें अपने अपराधी होने का अहसास दिलायेगा। अतः इस तरह का अधिनियम हमारे जीवन पर व्यापक प्रभाव डालेगा एवं हमारी स्वतन्त्रता पूर्णरूपेण बाधित हो जायेगी। अतः इस अधिनियम को निरस्त करने की सरकार से सिफारिश करने की कृपा करें। दिनांक: प्रार्थी जगपत राइका जैसलमेर

क्रियाकलाप (पृष्ठ संख्या-116)

प्रश्न 1.
कल्पना कीजिए कि यह सन् 1950 ई. का समय है और आप 60 वर्षीय राइका पशुपालक हैं। आप अपनी पोती को बता रहे हैं कि आजादी के बाद से आपके जीवन में क्या बदलाव आए हैं? आप उसे क्या बताएँगे?
उत्तर:
हमारी जीवन-शैली में स्वतन्त्रता के पश्चात् अनेक तरह के बदलाव आए हैं। पहले हमारे पास बहुत बड़ी संख्या में भेड़-बकरियाँ होते थे किन्तु अब चरागाहों की कमी के कारण हमें इनकी संख्या में कमी लानी पड़ी है। हममें से कुछ लोग पुराने चरागाहों पर प्रतिबन्ध के कारण नये चरागाहों की खोज कर रहे हैं, जो कि एक कठिन कार्य है। भारत एवं पाकिस्तान के विभाजन से आज हम पहले की तरह सिन्ध क्षेत्र में जाकर सिन्धु नदी के किनारे के मैदानों में अपने पशुओं को नहीं चरा सकते।

भारत एवं पाकिस्तान के बीच नई राजनीतिक सीमाओं ने हमारी गतिविधियों पर एक तरह से रोक लगा दी है। आजकल हमारे समुदाय के कुछ लोग हरियाणा की ओर जाने लगे हैं। वहाँ फसल कटने के बाद खेतों में उग आया घास पशुओं को चराने के काम आता है। हमारे समुदाय के कुछ लोग अपनी परम्परागत घुमंतू जीवन-शैली को छोड़ कर एक ही जगह स्थाई रूप से बसने लगे हैं और मैंने भी ऐसा ही किया। अब हम अपनी जमीन पर मेहनत करेंगे एवं फसल उगाएँगे और अपने परिवार का खूब अच्छे ढंग से पालन- पोषण करेंगे।

JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

प्रश्न 2.
मान लीजिए कि आपको एक प्रसिद्ध पत्रिका ने उपनिवेशवाद से पहले अफ्रीका में मासाइयों की स्थिति के बारे में एक लेख लिखने के लिए कहा है। वह लेख लिखिए और उसे एक सुन्दर शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
मासाइयों का जीवन मासाई नाम ‘मा’ शब्द से निकला है। मा-साई का अर्थ होता है-‘मेरे लोग’। परम्परागत रूप से मासाई घुमंतू और चरवाहा समुदाय के लोग होते हैं जो अपनी आजीविका के लिए दूध एवं मॉस पर आश्रित रहते हैं। ये गाय-बैल, ऊँट, बकरी, भेड़ एवं गधे पालते हैं।

ये दूध, माँस, पशुओं की खाल एवं ऊन बेचते हैं। मासाई पशुपालक मूल रूप से पूर्वी अफ्रीका के निवासी हैं। मासाई क्षेत्र उत्तरी कीनिया से लेकर तंज़ानिया के घास के मैदानों तक फैला हुआ है। ऊँचे तापमान और कम वर्षा के कारण यहाँ शुष्क, धूल भरे और बेहद गर्म हालात रहते हैं।

JAC Class 9th History आधुनिक विश्व में चरवाहे Textbook Questions and Answers  

प्रश्न 1.
स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं?
उत्तर:
सूखे से चरवाही समूहों का जीवन प्रायः प्रभावित होता है। जब वर्षा नहीं होती है, चरागाह सूख जाते हैं तो पशुओं के लिए भूखे मरने की स्थिति आ जाती है। यही कारण है कि घुमंतू जनजातियों को, जो चरावाही से अपनी जीविका प्राप्त करते हैं पशुओं के लिए चरागाहों एवं पानी की खोज में एक जगह से दूसरी जगह तक घूमते रहने की आवश्यकता पड़ती है।

घुमंतू समुदायों को कई बार अपने पशुओं को कठोर जलवायु से बचाने के लिए भी स्थान परिवर्तन करना पड़ता है। इस घुमंतू जीवन के कारण उन्हें जीवित रहने तथा संकट से बचने का अवसर प्राप्त होता है। घुमंतू समुदायों के निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को लाभ

  1. घुमंतू समुदायों की निरन्तर गतिशीलता के कारण प्राकृतिक वनस्पति को फिर से वृद्धि करने का अवसर प्राप्त होता है। फलस्वरूप, वनस्पति संरक्षण के कारण पर्यावरण सन्तुलन बना रहता है।
  2. उनके मवेशियों को हरा-भरा नया चारा प्राप्त होता है।
  3. घुमंतू समुदायों के लगातार स्थान-परिवर्तन से भूमि की उर्वरा-शक्ति बनी रहती है क्योंकि उनके पशु जिन खेतों में चरते हैं, उन खेतों को उनसे गोबर के रूप में खाद भी मिलती है।
  4. घुमंतू समुदायों के लगातार स्थान-परिवर्तन से क्षेत्र विशेष का अधिक दोहन नहीं होता है।

JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

प्रश्न 2.
इस बारे में चर्चा कीजिए कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइए कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा
(क) परती भूमि नियमावली,
(ख) वन अधिनियम,
(ग) अपराधी जनजाति अधिनियम,
(घ) चराई कर।
उत्तर:
(क) परती भूमि नियमावली:
औपनिवेशिक सरकार चरागाह भूमि क्षेत्र को ‘बेकार’ भूमि मानती थी। उनके अनुसार चरागाह भूमि से न तो लगान मिलता था और न ही उत्पादन। इसी बात को ध्यान में रखते हुए औपनिवेशिक सरकार ने उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य से देश के विभिन्न भागों में ‘परती भूमि के विकास के लिए नियम बनाए।

इस नियम के द्वारा बहुत-सी चरागाह भूमि को कृषि के अन्तर्गत लाया गया। औपनिवेशिक सरकार ने ऐसी भूमियों को गाँव के मुखियाओं को सौंप दिया जिससे वे उनमें खेती का कार्य करायें जिसके परिणामस्वरूप चरागाह क्षेत्र कम हो गए और चरवाहों के लिए अपने पशुओं को चराने की समस्या उत्पन्न हो गई।

(ख) वन अधिनियम:
औपनिवेशिक सरकार द्वारा 1878 ई. में वन अधिनियम लागू किया गया। इसके द्वारा सरकार ने ऐसे कई जंगलों को आरक्षित वन घोषित कर दिया जहाँ देवदार या साल जैसी कीमती लकड़ी पैदा होती थी। चरवाहे इन वनों का प्रयोग अपने पशुओं को चराने के लिए नहीं कर सकते थे। उनकी किसी भी गतिविधि के लिए इन वनों में पाबन्दी लगा दी गयी। जिन वनों में उन्हें प्रवेश करने की अनुमति थी, उन वनों में भी उनकी गतिविधियों पर नियन्त्रण रखा जाता था।

उन्हें उन वनों में प्रवेश के लिए अनुमति पत्र लेना पड़ता था। जंगल में उनके प्रवेश और वापसी की तारीख पहले से तय होती थी तथा वह जंगल में बहुत ही कम दिन बिता सकते थे। यदि वे निश्चित दिनों से अधिक समय तक वन में रहते थे, तो उन पर जुर्माना लगा दिया जाता था। इस प्रकार इन वन अधिनियमों ने चरवाहों के लिए आजीविका की गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने में कठिनाई उत्पन्न कर दी। अब उन्हें अपने पशुओं की संख्या कम करनी पड़ी।

(ग) अपराधी जनजाति अधिनियम:
औपनिवेशिक सरकार घुमंतू किस्म के लोगों को शक की नजर से देखती थी। औपनिवेशिक शासकों का मानना था कि जो लोग गाँव-गाँव जाकर वस्तुएँ बेचते हैं तथा वे चरवाहे जो ऋतु परिवर्तन के साथ अपना स्थान बदल लेते हैं, वे अपराधी हैं। इसलिए 1871 में औपनिवेशिक सरकार ने ‘अपराधी जनजाति अधिनियम’ पारित किया। इस कानून के तहत् दस्तकारों, व्यापारियों एवं चरवाहों के अनेक समुदायों को अपराधी समुदायों की सूची में रखा गया।

उन्हें कुदरती एवं जन्मजात अपराधी घोषित किया गया। इस कानून के द्वारा ऐसे सभी समुदायों (दस्तकारों, व्यापारियों एवं चरवाहों) को एक निश्चित गाँव में ही रहना पड़ता था। वे बिना अनुमति पत्र (परमिट) के अपना स्थान नहीं बदल सकते थे। ग्रामीण पुलिस उन पर लगातार निगरानी रखती थी।

(घ) चराई कर:
औपनिवेशिक सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में देश के अधिकांश चरवाही क्षेत्रों में ‘चराई कर’ लागू कर दिया, यह कर प्रति पशु पर लिया जाता था। प्रति पशु कर की दर तेजी से बढ़ती चली गई एवं कर वसूली की व्यवस्था दिन- प्रतिदिन मजबूत होती गई। 1850 से 1880 के दशकों के मध्य कर वसूली का काम ठेकेदारों के माध्यम से किया जाता था परन्तु बाद में सरकार ने अपने कारिंदों के माध्यम से सीधे चरवाहों से ही कर वसूलना शुरू कर दिया।

प्रत्येक चरवाहे को एक ‘पास’ जारी किया जाता था। किसी भी चरागाह में प्रवेश करने के लिए चरवाहों को पास दिखाकर पहले कर जमा कराना पड़ता था। इस प्रकार चरवाहों का शोषण होने लगा जिससे बाध्य होकर उन्हें अपने पशुओं की संख्या कम करनी पड़ी। परिणामस्वरूप, चरवाहों को अपनी आजीविका की पूर्ति करना मुश्किल हो गया।

प्रश्न 3.
मासाई समुदाय के चरागाह उससे क्यों छिन गए? कारण बताएँ। उत्तर-मासाई समुदाय को निम्नलिखित कारणों से अपने चरागाह छोड़ने पड़े
1. साम्राज्यवादी प्रसार:
औपनिवेशिक काल से पहले मासाई समुदाय के पास उत्तरी कीनिया से लेकर तंज़ानिया के स्टेपीज तक का क्षेत्र था, परन्तु साम्राज्यवादी प्रसार के कारण सन् 1885 में मासाईलैण्ड को ब्रिटिश कीनिया एवं जर्मन तंज़ानिया के बीच विभाजित कर दिया गया।

इसके बाद श्वेत बस्तियों ने उत्तम चरागाह भूमि पर अधिकार कर लिया और मासाइयों को दक्षिण कीनिया एवं उत्तरी तंज़ानिया के छोटे क्षेत्रों की ओर खदेड़ दिया गया। इस प्रकार मासाइयों की लगभग 60 प्रतिशत भूमि ले ली गई। वे एक शुष्क प्रदेश तक ही सीमित रह गए, जहाँ निम्न श्रेणी के घटिया चरागाह थे।

2. कृषि का विस्तार:
19वीं शताब्दी के अन्त में ब्रिटिश उपनिवेशी सरकार ने पूर्वी अफ्रीका के स्थानीय किसानों को खेती का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। जैसे ही कृषि आरम्भ हुई, चरागाह कृषि भूमि में बदलते गए। मासाई लोगों के चरागाहों पर स्थानीय किसानों ने अपना अधिकार कर लिया और वे असहाय हो गए।

3. शिकार हेतु आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना:
चरागाहों का एक बहुत बड़ा क्षेत्र शिकार के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इनमें कीनिया के मासाई मारा, साम्बुरू नेशनल पार्क एवं तंज़ानिया का सेरेंगेटी पार्क प्रमुख थे। मासाई लोग इन पार्कों में न तो पशु चरा सकते थे और न ही शिकार कर सकते थे। परिणामस्वरूप, चराई क्षेत्रों के छिन जाने से पशुओं के लिए चारा जुटाने की समस्या गम्भीर हो गई।

4. चरागाहों की गुणवत्ता में कमी:
मासाई लोगों को आरक्षित वनों में घुसने की मनाही कर दी गई। अब ऐसे आरक्षित चरागाहों से मासाई न लकड़ी काट सकते थे और न ही अपने पशुओं को चरा सकते थे। अत: मासाई लोगों के पास छोटा क्षेत्र होने से उसमें निरन्तर चराई से चरागाह की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

प्रश्न 4.
आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीका चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गड़रियों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे।
उत्तर:
भारतीय चरवाहों और मासाई गड़रियों, दोनों में निम्नलिखित दो परिवर्तन समान रूप से मौजूद थे

  1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों की विभिन्न नीतियों ने भारतीय चरवाहों तथा मासाई गड़रियों दोनों को अपने-अपने चरागाहों से बेदखल कर दिया। फलस्वरूप मासाई तथा भारतीय चरवाहों की चरागाह भूमि निरन्तर कम होती गई।
  2. दोनों ही देशों में सरकारों ने विभिन्न वन अधिनियम पारित किए। इन अधिनियमों के द्वारा कुछ वन क्षेत्रों में चरवाहों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई और कुछ में उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया गया।

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JAC Class 9 Social Science Solutions History Chapter 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

JAC Board Class 9th Social Science Solutions History Chapter 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद

JAC Class 9th History वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद InText Questions and Answers 

विद्यार्थियों हेतु आवश्यक निर्देश-पाठ्य:
पुस्तक में इस अध्याय के विभिन्न पृष्ठों पर बॉक्स के अन्दर क्रियाकलाप दिए हुए हैं। इन क्रियाकलापों के अन्तर्गत पूछे गए प्रश्नों के क्रमानुसार उत्तर निम्न प्रकार से हैं

क्रियाकलाप ( पृष्ठ संख्या-81)

प्रश्न 1.
एक मील लम्बी रेल की पटरी के लिए 1,760 से 2,000 तक स्लीपरों की जरूरत थी। यदि 3 मीटर लम्बी बड़ी लाइन की पटरी बिछाने के लिए एक औसत कद के पेड़ से 3-5 स्लीपर बन सकते हैं तो हिसाब लगाकर देखें कि एक मील लम्बी पटरी बिछाने के लिए कितने पेड़ काटने होंगे?
उत्तर:
1 मील लम्बी पटरी बिछाने के लिए आवश्यक स्लीपरों की औसत संख्या = \(\frac{1760+2000}{2}\) =1880
1 पेड़ से बनाये जा सकने वाले स्लीपरों की औसत संख्या =\(\frac{3+5}{2}\)
1 मील लम्बी पटरी बिछाने के लिए काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या = \(\frac{1880}{4}\) = 470

क्रियाकलाप ( पृष्ठ संख्या-83)

प्रश्न 1.
यदि 1862 ई. में भारत सरकार की बागडोर आपके हाथ में होती और आप पर इतने व्यापक पैमाने पर रेलों के लिए स्लीपर और ईंधन आपूर्ति की जिम्मेदारी होती तो आप इसके लिए कौन-कौन से कदम उठाते?
उत्तर:
यदि 1862 ई. में भारत सरकार की बागडोर मेरे हाथ में होती और मुझ पर इतने व्यापक पैमाने पर रेलों के स्लीपर और ईंधन आपूर्ति की जिम्मेदारी होती तो मैं निम्नलिखित कदम उठाता

  1. ईंधन तथा स्लीपरों के लिए रेलवे को लकड़ी की आपूर्ति तो की जाती, किन्तु अवन्यीकरण की कीमत पर कदापि नहीं।
  2. विभिन्न वैकल्पिक संसाधनों, जैसे-लोहे अथवा पत्थरों के स्लीपर का उपयोग किया जाता। ईंधन की आपूर्ति के लिए कोयले का उपयोग किया जाता।
  3. जितनी मात्रा में पेड़ों की कटाई आवश्यक होती उतने ही नवीन पेड़ भी लगाये जाते।

क्रियाकलाप (पृष्ठ संख्या-86)

प्रश्न 1.
वन-प्रदेशों में रहने वाले बच्चे पेड़-पौधों की सैकड़ों प्रजातियों के नाम बता सकते हैं। आप पेड़-पौधों की कितनी प्रजातियों के नाम जानते हैं ?
उत्तर:
फलदार पेड़-आम, अमरूद, नींबू, जामुन, केले आदि। औषधि वाले-तुलसी, नीम आदि। काँटेदार-बबूल, बेर आदि।

क्रियाकलाप ( पृष्ठ संख्या-96)

प्रश्न 1.
जहाँ आप रहते हैं क्या वहाँ के जंगली इलाकों में कोई बदलाव आए हैं? ये बदलाव क्या हैं और क्यों हुए हैं?
उत्तर:
हाँ, हमारे यहाँ के जंगली इलाकों में कई बदलाव दिखाई देते हैं। ये बदलाव निम्नलिखित हैं

  1. इन वन क्षेत्रों में बड़े जंगली जानवरों के शिकार पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।
  2. इन क्षेत्रों में वृक्षों की संख्या बढ़ गयी है।
  3. वन क्षेत्रों में जगह-जगह पर वन सुरक्षा अधिकारियों द्वारा चैक पोस्ट स्थापित कर दिए गए हैं।
  4. वन क्षेत्रों में प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया गया है।
  5. हाथी दाँत एवं जंगली बिल्लियों की खालों के अवैध व्यापार को रोका गया है तथा इन जानवरों पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
  6. वन क्षेत्रों से होकर बहने वाली नदियों को साफ कर दिया गया है।

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प्रश्न 2.
एक औपनिवेशिक वनपाल और एक आदिवासी के बीच जंगल में शिकार करने के मसले पर होने वाली बातचीत के संवाद लिखें।
उत्तर:

  1. औपनिवेशिक वनपाल: तुम कौन हो? यहाँ वन में क्या कर रहे हो?
  2. आदिवासी: श्रीमान् जी, मैं एक आदिवासी हूँ। मैं यहाँ नजदीक के गाँव में रहता हूँ। यहाँ वन में कन्द-मूल, फल एकत्रित करने एवं खरगोश का शिकार करने आया हूँ।
  3. औपनिवेशिक वनपाल: क्या तुम नहीं जानते कि वन में शिकार करना प्रतिबन्धित है?
  4. आदिवासी: लेकिन श्रीमान् जी, मेरे बच्चे पिछले पाँच दिनों से भूखे हैं, मैं उनकी भोजन की जरूरत पूरी करने के लिए यहाँ आया हूँ।
  5. औपनिवेशिक वनपाल: मैं ये सब नहीं जानता। मैं बस इतना जानता हूँ कि वन में शिकार करना गैर-कानूनी है। यह एक कानूनन अपराध है, इसकी तुम्हें सजा अवश्य मिलेगी।
  6. आदिवासी: लेकिन श्रीमान् यह वन तो हम आदिवासियों का ही है। इसी से तो हमारी रोजी-रोटी चलती है। अगर हमें शिकार करने से रोका गया तो हमारा क्या होगा? हमारा परिवार तो भूखा ही मर जाएगा।
  7. औपनिवेशिक वनपाल: देखो, तुम मुझसे बहस कर रहे हो। इसकी तुम्हें भारी कीमत चुकानी पर है।
  8. आदिवासी: श्रीमान् जी, प्राचीन समय से ही हम यहाँ रहते आये हैं। हम जंगलों पर ही निर्भर हैं। कृपया हमें शिकार करने दीजिए। हम आपको भी शिकार में से हिस्सा दे देंगे।
  9. औपनिवेशिक वनपाल: नहीं। कदापि नहीं, चुप रहो! हमें अपने वन संरक्षण अधिकारी को तुम्हारी रिपोर्ट करनी ही पड़ेगी। चलो मेरे साथ चलो।

[औपनिवेशिक वनपाल आदिवासी को पकड़कर अपने साथ लेकर चला जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सामान्य परिस्थिति में हथकड़ी नहीं लगेगी]

JAC Class 9th History वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद Textbook Questions and Answers 

प्रश्न 1.
औपनिवेशिक काल के वन प्रबन्धन में आए परिवर्तनों ने इन समूहों को कैसे प्रभावित किया
1. झूम खेती करने वालों को।
2. घुमंतू और चरवाहा समुदायों को।
3. लकड़ी और वन-उत्पादों का व्यापार करने वाली कम्पनियों को।
4. बागान मालिकों को।
5. शिकार खेलने वाले राजाओं और अंग्रेज अफसरों को।
उत्तर:
औपनिवेशिक काल के वन प्रबन्धन में आये परिवर्तनों ने विभिन्न समूहों को निम्नलिखित प्रकार प्रभावित किया
1. झूम खेती करने वालों पर प्रभाव:
औपनिवेशिक काल के वन प्रबन्धन की नीति में परिवर्तन का झूम खेती करने वालों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। खेती की इस पद्धति पर प्रतिबन्ध लगा दिये जाने के कारण उन्हें कोई दूसरा व्यवसाय अपनाना पड़ा तथा उनके स्वतन्त्र जीवनयापन की प्राचीन व्यवस्था चरमरा गई। विभिन्न क्षेत्रों में उनका शोषण होने लगा। साथ ही नई नीति ने एक तरह से उन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया।

2. घुमंतू और चरवाहा समुदायों पर प्रभाव:
वन प्रबन्धन की नई नीति के तहत् घुमंतू और चरवाहा समुदायों को सुरक्षित वनों में अपनी गतिविधियाँ चलाने से रोक दिया गया। फलत: उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हुई। वनोत्पादों के व्यापार को रोके जाने से इन समुदायों के लिए आय के स्रोत बन्द हो गये तथा इनका जीवनयापन कठिन हो गया।

3. लकड़ी और वन:
उत्पादों का व्यापार करने वाली कम्पनियों पर प्रभाव-वन प्रबन्धन की नीति के तहत् इन कम्पनियों को लकड़ी एवं वनोत्पाद का व्यापार करने का एकाधिकार दे दिया गया। इस समूह के लोगों को इस नीति का सर्वाधिक लाभ पहुँचा। इसके फलस्वरूप उन्होंने अपने तथा सरकार के लिए विशाल -मात्रा में वनों के दोहन एवं आदिवासियों के शोषण द्वारा धन एकत्र किया।

4. बागान मालिकों पर प्रभाव:
वन प्रबन्धन की नई नीति से बागान मालिकों को अपने व्यवसाय से बहुत अधिक लाभ हुआ। अवन्यीकरण के पश्चात् चाय, कॉफी, रबर आदि के नये-नये बागानों का विकास किया गया। इन बागानों में भूमिहीन आदिवासियों से मुफ्त काम करवाया जाता था। चूँकि इन उत्पादों का निर्यात होता था अतः सरकार एवं कम्पनियों दोनों को बहुत अधिक लाभ हुआ।

5. शिकार खेलने वाले राजाओं और अंग्रेज अफसरों पर प्रभाव:
हालांकि वन प्रबन्धन की नई नीति में जंगलों में शिकार करना प्रतिबन्धित कर दिया गया था किन्तु इसमें भेदभाव बरता गया। राजा-महाराजा एवं ब्रिटिश अधिकारी इन नियमों के निर्माण के बावजूद शिकार करते रहे। उनके साथ सरकार की मौन सहमति थी। चूँकि बड़े जंगली जानवरों को वे आदिम, असभ्य तथा बर्बर समुदाय का सूचक मानते थे अत: भारत को सभ्य बनाने के नाम पर इन जानवरों का शिकार चलता रहा।

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प्रश्न 2.
बस्तर और जावा के औपनिवेशिक वन प्रबन्धन में क्या समानताएँ हैं?
उत्तर:
भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के सुदूर दक्षिण में स्थित बस्तर एक जिला है, जबकि जावा, इण्डोनेशिया देश में स्थित एक द्वीप है। भारत अंग्रेजों का एवं इण्डोनेशिया डचों का उपनिवेश रहा है। औपनिवेशिक काल में बस्तर तथा जावा दोनों में वन प्रबन्धन में निम्नलिखित समानताएँ थीं

  1. रेलवे तथा जहाज निर्माण के लिए अत्यधिक संख्या में पेड़ों की कटाई की गई।
  2. दोनों ही स्थानों पर शिकार को प्रतिबन्धित कर दिया गया।
  3. घुमंतू तथा चरवाहे समुदायों को वनों में प्रवेश करने से रोका गया।
  4. वनवासी समुदायों द्वारा पेड़ों की कटाई का विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया।
  5. वनोत्पाद से सम्बन्धित स्थानीय लोगों द्वारा किये जाने वाले व्यापार को रोका गया।
  6. वन भूमि को ग्रामीण, सुरक्षित तथा संरक्षित वनों में वर्गीकरण कर दिया गया।
  7. वनवासी समुदायों को जंगल में स्थित अपने घरों में रहने के लिए या तो किराया देने के लिए अथवा बेगारी के लिए मजबूर किया गया।
  8. वनों की कटाई तथा बगीचों के विकास के लिए यूरोपीय फर्मों को लाइसेंस प्रदान किये गये।
  9. दोनों ही स्थानों पर औपनिवेशिक वन प्रबन्धन का उद्देश्य सरकारी सत्ता को लाभ पहुँचाना तथा स्थानीय वनों में या आस-पास रहने वालों का शोषण करना था।
  10. इन नीतियों के निर्माण में दोनों ही स्थानों पर स्थानीय लोगों को शामिल नहीं किया गया, बल्कि यूरोपीय विशेषज्ञों ने इन नीतियों का अपने हितों के लिए निर्माण किया।

प्रश्न 3.
सन् 1880 ई.से सन् 1920 ई.के बीच भारतीय उपमहाद्वीप के वनाच्छादित क्षेत्र में 97 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई। पहले के 10.86 करोड़ हेक्टेयर से घटकर यह क्षेत्र 9.89 करोड़ हेक्टेयर रह गया था। इस गिरावट में निम्नलिखित कारकों की भूमिका बताएँ
रेलवे, जहाज निर्माण, कृषि-विस्तार, व्यावसायिक खेती, चाय-कॉफी के बागान, आदिवासी और किसान।
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप के वनाच्छादित क्षेत्र की गिरावट में विभिन्न कारकों की भूमिका निम्नलिखित थी
1. रेलवे:
औपनिवेशिक शासकों को रेलवे के विस्तार के लिए स्लीपरों की आवश्यकता थी जो कठोर लकड़ी के बनाए जाते थे। एक मील रेलवे लाइन बिछाने के लिए 1,760 से लेकर 2,000 स्लीपरों की आवश्यकता पड़ती थी। सन् 1946 ई. तक लगभग 7,65,000 किलोमीटर रेलवे लाइनें भारत के विभिन्न भागों में बिछाई गई हैं जिससे लाखों की संख्या में वृक्ष, रेलवे की भेंट चढ़ गए। रेल-इंजनों में भी लकड़ी का कोयला जलने से वनों को भारी क्षति हुई।

2. जहाज निर्माण:
ब्रिटेन में 19वीं सदी की शुरुआत तक बलूत (ओक) के वन समाप्त होने लगे थे। इसकी वजह से शाही नौसेना हेतु बनाये जाने वाले जहाजों के लिए मजबूत लकड़ी की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। अत: भारत में मजबूत लकड़ी प्राप्त करने के लिए टीक (सागौन) और साल के वृक्ष लगाये जाने लगे। अन्य सभी प्रकार के वृक्षों को साफ कर दिया गया। भारत से बड़े पैमाने पर लकड़ी इंग्लैण्ड भेजी जाने लगी अत: भारतीय उपमहाद्वीप के वनों से आच्छादित भू-भाग में तेजी से कमी आ गई।

3. कृषि-विस्तार:
सन् 1600 ई. में भारत का लगभग 1/6 भू-भाग कृषि के अधीन था, परन्तु जनसंख्या वृद्धि के साध-साथ खाद्यान्नों की माँग बढ़ने लगी अत: किसान कृषि-क्षेत्र का विस्तार करने लगे। इसके लिए वनों को साफ करके नए खेत बनाए जाने लगे इसके अतिरिक्त खानाबदोशों और चरवाहों के क्रियाकलापों पर प्रतिबन्धों ने भी इन लोगों को कृषि अपनाने के लिए विवश किया। अत: सन् 1880-1920 ई. के मध्य कृषि योग्य भूमि के क्षेत्रफल में 67 लाख हेक्टेयर का विस्तार हुआ अत: वन तीव्रता से समाप्त होने लगे।

4. व्यावसायिक खेती:
व्यावसायिक खेती भी वन-क्षेत्रों की कमी के लिए उत्तरदायी थी। किसानों ने कृषि के व्यवसायीकरण के पश्चात् बाजार में बेचने के लिए फसलों का उत्पादन करना आरम्भ कर दिया जिससे उन्हें अधिक-सेअधिक लाभ प्राप्त हो सके। देश के विस्तृत वन क्षेत्रों से वनों को साफ किया गया और वहाँ चाय एवं कॉफी की खेती की गई।

5. चाय:
कॉफी के बागान-यूरोप में चाय-कॉफी की बहुत अधिक माँग थी। औपनिवेशिक सरकार ने वनों पर नियन्त्रण स्थापित करके बड़ी सस्ती दरों पर यूरोपीय लोगों को बड़े क्षेत्र दे दिए। इन क्षेत्रों से वनों को साफ किया गया तथा चाय एवं कॉफी के बागान स्थापित कर दिए गए।

6. आदिवासी और किसान:
आदिवासी एवं स्थानीय किसान भी वन क्षेत्रों में कमी के लिए उत्तरदायी हैं। व्यावसायिक कृषि के लिए वनों को साफ किया गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ईंधन के लिए पेड़ों को काटा जिससे वनों का अत्यधिक विनाश हुआ।

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प्रश्न 4.
युद्धों से जंगल क्यों प्रभावित होते हैं?
उत्तर:
युद्धों से जंगल (वन) प्रभावित होते हैं क्योंकि

  1. विरोधी सेना सबसे पहले भोजन संसाधन और छिपने की जगहों को नष्ट करना चाहती है। इन दोनों की आपूर्ति में वन काफी सहायक होते हैं।
  2. थल सेना एवं वायु सेना की दृश्यता स्पष्ट करने के लिए भी जंगलों को जला दिया जाता है, क्योंकि वे एक अवरोध के रूप में काम करते हैं।
  3. युद्धरत सेना को तुरन्त रास्ता उपलब्ध करवाने के लिए वनों को काटकर रास्ता सुगम किया जाता है।
  4. युद्ध के समय विभिन्न सरकारें लकड़ी के विशाल भण्डारों एवं आरा मिलों को स्वयं भी जला डालती हैं जिससे ये संसाधन शत्रु के हाथ न लग पाएँ।
  5. आधुनिक समय में आक्रमण से बचने के लिए सेनाएँ तथा युद्ध सामग्री को घने वनों में छिपा देती हैं ताकि उन पर कोई हमला न कर सके। शत्रु विरोधी सैनिकों एवं उनकी युद्ध सामग्री पर कब्जा करने के लिए वनों को निशाना बनाते हैं।
  6. युद्ध में व्यस्त हो जाने पर बहुत से देशों का ध्यान वनों का सुव्यवस्थित ढंग से विकास करने के कार्यों से हट जाता है और परिणामस्वरूप बहुत से वन लापरवाही का शिकार हो जाते हैं।

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JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
नात्सीवाद का उदय हुआ
(अ) इंग्लैण्ड में
(ब) जर्मनी में
(स) फ्रांस में
(द) भारत में।
उत्तर:
(ब) जर्मनी में।

2. मित्र राष्ट्रों में सम्मिलित देश नहीं है
(अ) इंग्लैण्ड
(ब) फ्रांस
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका
(द) जर्मनी।
उत्तर:
(द) जर्मनी।

3. आर्थिक महामन्दी की शुरुआत हुई
(अ) सन् 1929 ई. में
(ब) सन् 1939 ई. में
(स) सन् 1949 ई. में
(द) सन् 1990 ई. में।
उत्तर:
(अ) सन् 1929 ई. में।

4. यहूदी लोगों के पूजा गृहों को कहा जाता है
(अ) गैस चैम्बर
(ब) नाजी यूथ लीग
(स) सेननॉग
(द) कोई नहीं।
उत्तर:
(स) सेननॉग।

5. 14 वर्ष से कम आयु के नात्सी लोगों का संगठन कहलाता था
(अ) सेननॉग
(ब) युंगफोक
(स) घेटो
(द) मैन कैम्फ।
उत्तर:
(ब) युंगफोक।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मित्र राष्ट्र कौन-कौन से थे?
उत्तर:
ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत रूस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका।

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प्रश्न 2.
नात्सी किस भाषा का शब्द है?
उत्तर:
नात्सी जर्मन भाषा के शब्द नात्सियोणाल के प्रारम्भिक अक्षरों को मिलाकर बनाया गया है।

प्रश्न 3.
हिटलर की पार्टी के लोगों को नात्सी क्यों कहा जाता था?
उत्तर:
हिटलर की पार्टी के नाम का पहला शब्द नात्सियोणाल था इसलिए इस पार्टी के लोगों को नात्सी कहा जाता था।

प्रश्न 4.
नात्सी पार्टी का पूरा नाम क्या था?
उत्तर:
नेशनल सोशलिस्ट पार्टी।

प्रश्न 5.
हिटलर ने पहली नात्सी सरकार का गठन कब किया?
उत्तर:
30 जनवरी, सन् 1933 ई. को हिटलर ने पहली नात्सी सरकार का गठन किया।

प्रश्न 6.
संयुक्त राज्य अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध में कब और क्यों प्रवेश किया?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका ने मई सन् 1945 ई. में द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश किया क्योंक जापान ने संयुक्त राज्य अमेरिका के नौ-सैनिक अद्छे पर्ल हार्बर पर आक्रमण कर दिया।

प्रश्न 7.
विश्व में आर्थिक महामन्दी कब आयी?
उत्तर:
विश्व में आर्थिक महामन्दी सन् 1929-33 ई. के मध्य आयी।

प्रश्न 8.
धुरी शक्तियों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध जर्मनी, जापान और इटली के गुट को धुरी शक्तियाँ कहा गया।

प्रश्न 9.
हिटलर के अनुसार उसके राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नागरिक कौन थी?
उत्तर:
माँ।

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

प्रश्न 10.
हिटलर की विदेश नीति के दो प्रमुख उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:

  1. जर्मनी को विश्व की महाशक्ति बनाना।
  2. विस्तारवादी नीति में विश्वास।

प्रश्न 11.
गाँधीजी ने हिटलर को पत्र लिखकर क्या कहा?
उत्तर:
महात्मा गाँधी ने 24 दिसम्बर, 1940 को हिटलर को जो पत्र लिखा उसमें उन्होंने अहिंसा के रास्ते पर चलने के लिए कहा।

प्रश्न 12.
स्पार्टकिस्ट लीग क्या था?
उत्तर:
स्पार्टकिस्ट लीग जर्मनी में होने वाला एक क्रान्तिकारी विद्रोह था। यह रूस की बोल्शेविक क्रान्ति की तर्ज पर आधारित था।

प्रश्न 13.
महाध्वंस क्या है?
उत्तर:
महाध्वंस नात्सियों की कत्लेआम प्रक्रिया थी, जिसे यहूदियों को मारने के लिए प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 14.
ह्यालमार शाख़्त कौन था? आर्थिक वसूली के सम्बन्ध में उसका क्या सिद्धान्त था?
उत्तर:
ह्यालमार शाख्त एक अर्थशास्त्री था जिसे हिटलर ने कर वसूली का उत्तरदायित्व सौपा था। राज्य द्वारा अनुदित कार्य निर्माण योजनाओं के माध्यम से उसने पूर्ण उत्पादन एवं पूर्ण रोजगार के सिद्धान्त का प्रयोग किया।

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 3 नात्सीवाद और हिटलर का उदय

प्रश्न 15.
किस कानून के तहत् जर्मनी में तानाशाही स्थापित की गयी?
उत्तर:
विशेषाधिकार अधिनियम (इनेबलिग एक्ट) के तहत् जर्मनी में तानाशाही स्थापित की गयी।

प्रश्न 16.
अति जीविता का सिद्धान्त किसने दिया?
उत्तर:
अति जीविता का सिद्धान्त हर्बर्ट स्पेंसर ने दिया।

प्रश्न 17.
हिटलर की विचारधारा का दूसरा पहलू क्या था?
उत्तर:
हिटलर की विचारधारा का दूसरा पहलू लेबेन्स्राउम या जीवन-परिधि की भू-राजनीतिक अवधारणा से सम्बन्धित था।

प्रश्न 18.
नवम्बर का अपराधी किसे कहा गया?
उत्तर:
वाइमर गणराज्य का साथ देने वाले समाजवादी, कैथौलिक एवं डेमोक्रेट आदि लोगों को नवम्बर का अपराधी कहा गया।

प्रश्न 19.
हिटलर ने राष्ट्रसंघ की सदस्यता से जर्मनी को कब बाहर कर लिया?
उत्तर:
हिटलर ने सन् 1933 ई. में जर्मनी को राष्ट्र संघ की सदस्यता से बाहर कर लिया।

प्रश्न 20.
डॉव्स योगना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मनी को आर्थिक संकट से उबारने हेतु डॉव्स योजना प्रारम्भ की गई थी।

प्रश्न 21.
गैस चैम्बरों को क्या कहा जाता था?
उत्तर:
नात्सियों द्वारा निर्मित गैस चैम्बरों को संक्रमण मुक्ति क्षेत्र कहा जाता था।

प्रश्न 22.
दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार कौन-सा है?
उत्तर:
वाल स्ट्रीट एक्सचेंज (अमेरिका)।

प्रश्न 23.
हिटलर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
हिटलर का जन्म सन् 1889 में आस्ट्रिया में हुआ था।

प्रश्न 24.
छोटी बस्तियाँ क्या थीं?
उत्तर:
यहूदी लोग समाज से अलग बस्तियों में रहते थे जिन्हें छोटी (दड़बा) बस्तियाँ कहा जाता था।

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प्रश्न 25.
कंसन्ट्रेशन कैम्प क्या थे?
उत्तर:
बगैर किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों को कैद रखने के स्थान कंसन्ट्रेशन कैम्प कहलाते थे। यह चारों ओर बिजली के करंट से प्रवाहित तारों से घिरे रहते थे।

प्रश्न 26.
घेटो बस्तियाँ क्या थीं?
उत्तर:
यहूदी लोग समाज से अलग बस्तियों में – रहते थे जिन्हें घेटो (दड़बा) कहा जाता था।

प्रश्न 27.
हिटलर की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर:
अप्रैल, 1945 में बर्लिन के एक बंकर में हिटलर ने पूरे परिवार सहित आत्महत्या कर ली थी।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वाइमर गणराज्य का उदय कैसे हुआ?
उत्तर:
प्रथम विश्वयुद्ध में केन्द्रीय शक्तियों की मित्र राष्ट्रों से हार के बाद जर्मनी में सम्राट के द्वारा पद त्याग दिया गया इससे वहाँ की संसदीय पार्टियों को जर्मन राजनीतिक व्यवस्था को नये साँचे में ढालने का मौका मिल गया। इसी सिलसिले में वाइमर में राष्ट्रीय सभा की बैठक बुलाई जिसमें एक लोकतांत्रिक संविधान को पारित कर दिया तथा जर्मन संसद राइखस्टाग के लिए प्रतिनिधियों के चयन हेतु सभी वयस्क नागरिकों को समान मताधिकार दिया गया। इस तरह वाइमर गणराज्य का उदय हुआ।

प्रश्न 2.
प्रथम विश्वयुद्ध के प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रथम विश्वयुद्ध ने जर्मनी के साथ-साथ पूरे यूरोपीय महाद्वीप को मनोवैज्ञानिक एवं आर्थिक तौर पर तोड़कर रख दिया था। इस युद्ध का हर्जाना नवगठित वाइमर गणराज्य से ही वसूल किया जा रहा था। वाइमर गणराज्य के पक्षधर समाजवादी, कैथलिक और डेमोक्रैट थे। उनका ‘नवम्बर के अपराधी कहकर सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाया जाने लगा। समाज में सिपाहियों को आम नागरिकों की अपेक्षा अधिक सम्मान दिया जाने लगा। राजनेता भी पुरुषों के आक्रामक ताकतवर और मर्दाना गुणों वाला होने के लिए प्रेरित करने लगे।

प्रश्न 3.
प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मन राजनीति एवं समाज में क्या बदलाव आया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मन राजनीति एवं समाज में निम्नलिखित बदलाव आये

  1. प्रथम विश्वयुद्ध के पश्चात् जर्मन समाज दो भागों में विभाजित हो गया-रूढ़िवादी समाज (जो वाइमर गणराज्य का समर्थन नहीं करते थे) एवं अरूढ़िवादी समाज (जो वाइमर गणराज्य का समर्थन करते थे)।
  2. सिपाहियों को आम नागरिकों के मुकाबले अधिक सम्मान दिया जाने लगा। सार्वजनिक जीवन में आक्रामक फौजी प्रचार और राष्ट्रीय सम्मान एवं प्रतिष्ठा की चाह बढ़ने लगी।
  3. राजनेता और प्रचारक इस बात पर जोर देने लगे कि पुरुषों को आक्रामक, ताकतवर और मर्दाना गुणों वाला होना चाहिए।

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प्रश्न 4.
जर्मनी में आर्थिक संकट के क्या कारण थे?
उत्तर:
जर्मनी में आर्थिक संकट के निम्नलिखित कारण थे

  1. मित्र राष्ट्रों द्वारा जर्मनी पर बहुत कठोर शर्ते थोपा जाना।
  2. जर्मनी ने प्रथम विश्वयुद्ध में बहुत अधिक पूँजी खर्च की थी।
  3. जर्मनी ने पहला विश्वयुद्ध मोटेतौर पर कर्ज लेकर लड़ा था और युद्ध के बाद तो उसे स्वर्ण मुद्रा में हर्जाना भी भरना पड़ा। इस दोहरे बोझ से जर्मनी का स्वर्ण भण्डार लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुँच गया था। इस सबके परिणामस्वरूप जर्मनी में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया।
  4. जब जर्मनी ने युद्ध का खर्च और हर्जाना चुकाने से इंकार कर दिया तब इसके जवाब में फ्रांसीसियों ने जर्मनी के मुख्य औद्योगिक इलाके रूर पर कब्जा कर लिया। यह भी आर्थिक संकट का एक कारण बना।

प्रश्न 5.
जर्मनी के विभिन्न सामाजिक समुदायों पर आर्थिक संकट का क्या प्रभाव पड़ा? बताइए। उत्तर-जर्मनी के विभिन्न सामाजिक समुदायों पर आर्थिक संकट का निम्नलिखित प्रभाव पड़ा

  1. मध्यम-वर्ग-मुद्रा के अवमूल्यन के कारण जर्मन के मध्यम वर्ग की, विशेष रूप से वेतनभोगी एवं पेंशनधारियों की बचत सिकुड़ती जा रही थी।
  2. व्यवसायी वर्ग-व्यापार ठप्प हो जाने से छोटे-मोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग और खुदरा व्यापारियों की हालत भी खराब होती जा रही थी। समाज के इन वर्गों को सर्वहाराकरण का भय सता रहा था।
  3. महिला वर्ग-अपने बच्चों का पेट भर पाने में असफल महिलाओं के मन दुःखी थे।
  4. कृषक वर्ग-किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट की वजह से परेशान था।

प्रश्न 6.
उन कारणों का उल्लेख कीजिए जिनके कारण जर्मनी में हिटलर का उत्कर्ष हुआ।
उत्तर:
जर्मनी में हिटलर के उत्कर्ष में अनेक तत्वों ने सहायता पहुँचाई, जिनका विवरण निम्नलिखित प्रकार से

  1. हिटलर एक कुशल वक्ता, प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी तथा योग्य नेता था। वह जर्मनवासियों की आहत भावनाओं को उभारना जानता था। जर्मनी की जनता ने उसके सिद्धान्तों का स्वागत किया।
  2. जर्मनी के अन्य राजनीतिक दलों में एकता का अभाव था। अत: इससे हिटलर के उत्कर्ष को बल मिला।
  3. जर्मनी में राजतन्त्र के पतन के बाद भी अनेक शक्तिशाली राजतन्त्र समर्थक थे। इनमें बड़े उद्योगपति, भूस्वामी तथा सैनिक अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने हिटलर का समर्थन किया।
  4. वर्साय की अपमानजनक सन्धि से जर्मनी के नागरिक दुःखी थे। हिटलर ने लोगों को विश्वास दिलाया कि यदि सत्ता में आया तो वह इस अपमान का बदला लेगा।
  5. सन् 1929 ई. में आर्थिक संकट के कारण जर्मनी के 60 लाख लोग बेरोजगार हो गए। हिटलर ने उन्हें अपने पक्ष में कर लिया।
  6. हिटलर के पास विरोधियों की आलोचना के लिए पर्याप्त कारण एवं भविष्य के लिए आकर्षक कार्यक्रम थे।

प्रश्न 7.
नाइट ऑफ ब्रोकन ग्लास क्या है?
उत्तर:
नवम्बर सन् 1938 ई. के एक जनसंहार में नात्सियों द्वारा यहूदियों के घरों पर हमले किए गए। उनकी सम्पत्ति को लूटा गया एवं यहूदी प्रार्थना घरों को जला दिया गया। इसके अतिरिक्त यहूदियों को गिरफ्तार किया गया यह घटना ‘नाइट ऑफ ब्रोकिन ग्लास’ के नाम से जानी जाती है।

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प्रश्न 8.
क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि नात्सियों ने मीडिया का उपयोग अपनी लोकप्रियता एवं विश्व दृष्टिकोण फैलाने के लिए, बड़ा ही सावधानीपूर्वक किया? संक्षेप में बताइए। उत्तर:
मैं इस विचार से सहमत हूँ कि नात्सियों ने मीडिया, का उपयोग अपनी लोकप्रियता एवं विश्व दृष्टिकोण फैलाने के लिए बड़ा ही सावधानीपूर्वक किया। यह निम्नलिखित बातों से स्पष्ट है

  1. नात्सियों ने अपनी लोकप्रियता एवं विश्व दृष्टिकोण फैलाने के लिए तस्वीरों, फिल्मों, रेडियो, पोस्टरों, आकर्षक नारों एवं इश्तहारी पर्यों का खूब सहारा लिया।
  2. पोस्टरों के माध्यम से जर्मनी के दुश्मनों का मजाक उड़ाया गया। उनको शैतान के रूप में बताकर अपमानित किया गया।
  3. समाजवादियों एवं उदारवादियों को कमजोर एवं पथभ्रष्ट तत्वों के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्हें विदेशी एजेंट कहकर बदनाम किया गया।
  4. यहूदियों के विरुद्ध नफरत फैलाने के उद्देश्य से प्रचार फिल्में विशेषकर ‘द एटर्नल ज्यू’ जैसी फिल्में दिखाई गईं। परम्परागत यहूदियों को खास छवि में प्रस्तुत किया गया।

प्रश्न 9.
महिला अधिकार एवं मातृत्व के विषय में नासियों के दृष्टिकोण की संक्षेप में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
महिला अधिकार एवं मातृत्व के विषय में नात्सियों का दृष्टिकोण निम्नलिखित था

  1. नात्सी पुरुष ‘स्त्री’ को उनके समान अधिकार देने के विरोधी थे। वे इसे समाज को तोड़ने एवं नष्ट करने वाला समझते थे।
  2. जर्मन महिलाओं से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अच्छी माँ बनें, शुद्ध आर्य रक्त वाले बच्चे पैदा करें एवं यहूदियों से विवाह तथा विवाहेत्तर सम्बन्ध स्थापित न करें।
  3. वे अपने बच्चों को नात्सी-जर्मनी की शिक्षा का मूल्य समझाएँ एवं आर्य संस्कृति को बढ़ावा दें।

प्रश्न 10.
‘नात्सीवाद’ से आप क्या समझते हैं? नात्सी पार्टी का कार्यक्रम लिखिए।
उत्तर:
नात्सीवाद एक उग्र तानाशाही आन्दोलन था, जो एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी में चलाया गया था। इसका स्वरूप फासीवाद से अधिक भयंकर था। इस आन्दोलन के बल पर ही हिटलर सन् 1933 ई. में जर्मनी का तानाशाह बना था। नात्सी पार्टी का कार्यक्रम निम्नलिखित था

  1. महान् जर्मन साम्राज्य का निर्माण करना।
  2. देश की जनता का पूरी तरह जर्मनीकरण करना तथा विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करना।
  3. जर्मनी की सैनिक शक्ति में वृद्धि करना।
  4. साम्यवादियों, समाजवादियों और यहूदियों को कुचलना।
  5. जर्मनी से अलग हुए उपनिवेशों को पुनः प्राप्त करना।
  6. वर्साय की कठोर एवं अपमानजनक सन्धि का अन्त करना।

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प्रश्न 11.
अपने तौर-तरीकों का प्रचार करने के लिए नात्सी शासन ने किस प्रकार भ्रामक शब्दों का प्रयोग किया?
उत्तर:
नात्सी शासन ने अपने विरोधियों पर अमानवीय अत्याचार किये और उन्होंने अपने तौर-तरीकों का प्रचार करने के लिए जो शब्द प्रयोग किये वे बहुत भ्रामक थे। उन्होंने अपने अधिकृत दस्तावेजों में ‘हत्या’ या ‘मौत’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने सामूहिक हत्याओं को विशेष व्यवहार तथा यहूदियों के सन्दर्भ में अन्तिम समाधान का प्रयोग किया।

उन्होंने विकलांगों को यूथनेजिया कहा। ‘इवैक्युएशन’ अर्थात् खाली कराना का आशय था लोगों को गैस चेंबरों में ले जाना। गैस चेंबरों को उन्होंने ‘संक्रमण मुक्ति-क्षेत्र’ कहा। नात्सी जर्मन यहूदियों को केंचुआ, चूहा और कीड़ा जैसे शब्दों से सम्बोधित करते थे।

प्रश्न 12.
वर्साय की सन्धि द्वितीय विश्वयुद्ध का एक प्रमुख कारण कैसे बनी?
उत्तर:
वर्साय का सन्धि-पत्र, जिसके द्वारा युद्ध की समाप्ति हुई थी, मूलत: अन्याय पर आधारित, थी। इस सन्धि-पत्र द्वारा पराजित राष्ट्रों में विशेषकर जर्मनी के साथ बड़ा अपमानजनक व्यवहार किया गया था। जर्मनी को अपने साम्राज्य के अनेक भागों और सभी उपनिवेशों से हाथ धोना पड़ा था। इसके अतिरिक्त जर्मनी को अपने 75 प्रतिशत लौह भण्डार एवं 26 प्रतिशत कोयला भण्डार, फ्रांस, पोलैण्ड, डेनमार्क एवं लिथुआनिया के हवाले करने पड़े।

जर्मनी पर इतना बड़ा आर्थिक भार डाला गया, जिसे चुका पाना असम्भव था। उसकी सेना को भी भंग कर दिया गया। जर्मनी पर यह सन्धि बलपूर्वक थोपी गई थी एवं उससे जो व्यवहार किया गया, वह पूर्णतया बदले की भावना पर आधारित था। इस सन्धि में न्याय का कोई भी दृष्टिकोण जर्मनी के प्रति नहीं अपनाया गया। अत: वर्साय की सन्धि जर्मनी के लोगों के लिए एक कलंक था, जिसे वे हर स्थिति में धो डालना चाहते थे। ऐसी स्थिति में युद्ध अनिवार्य हो गया था।

प्रश्न 13.
द्वितीय विश्वयुद्ध विश्वव्यापी’ कैसे बना? संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
सितम्बर, सन् 1939 ई. में द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ हुआ, परन्तु सन् 1940 ई. तक यह धीमी गति से चलता रहा, इसका क्षेत्र भी सीमित रहा, परन्तु सन् 1941 ई. में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इसे एक विश्वव्यापी युद्ध बना दिया। जून सन् 1941 ई. में जर्मनी ने सोवियत संघ के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। उस पर लेनिनग्राद, मास्को एवं स्टालिनग्राद अर्थात् तीन ओर से आक्रमण कर दिया गया।

जापान ने दिसम्बर सन् 1941 ई. को प्रशान्त महासागर में हवाई द्वीप में स्थित अमेरिकी नौ-सैनिक बेड़े पर्ल हार्बर पर आक्रमण कर दिया और उसे भारी नुकसान पहुँचाया अत: बाध्य होकर संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। इसी वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध जर्मनी और इटली ने युद्ध की घोषणा कर दी। अतः सन् 1941 ई. के अन्त तक यह युद्ध ‘विश्वव्यापी युद्ध’ में बदल गया।

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प्रश्न 14.
नात्सी शासन के जर्मनी पर पड़े प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नात्सी शासन के जर्मनी पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े

  1. नात्सी पार्टी के अतिरिक्त अन्य सभी पार्टियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। परिणामस्वरूप, जर्मनी में नात्सी तानाशाह हिटलर का साम्राज्य स्थापित हो गया।
  2. हिटलर ने जर्मनी को आर्थिक संकट से उबारने के लिए नए उद्योगों की स्थापना की जिससे मजदूरों को रोजगार मिल सके। व्यापार की उन्नति के लिए भी अनेक प्रयत्न किए गए।
  3. समाजवादियों, साम्यवादियों और नात्सी विरोधी नेताओं को यन्त्रणा शिविरों में भेज दिया गया।
  4. नात्सी शासन द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार का प्रमुख कारण यहूदियों को माना गया। अत: उन पर अनेक अत्याचार किये गये।
  5. हिटलर ने जर्मनी को शक्तिशाली बनाने के लिए सैनिक शक्ति में वृद्धि की।

प्रश्न 15.
‘नात्सी शासन एक खूखार, आपराधिक राज्य था।’ संक्षिप्त विश्लेषण कीजिए। उत्तर-नात्सी शासन एक खूखार, आपराधिक राज्य था यह निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है

  1. नात्सी शासन में पुलिस बल ने काफी अधिक शक्ति प्राप्त कर ली थी।
  2. कुछ अन्य विशेष सुरक्षा दस्तों का भी गठन किया गया जिनमें-
    (अ) गेस्तापो (गुप्तचर राज्य पुलिस),
    (ब) एस एस (अपराध नियन्त्रण पुलिस),
    (स) सुरक्षा सेवा (एसडी) प्रमुख हैं।
  3. इन नवगठित दस्तों को बेहिसाब असंवैधानिक अधिकार दिए गए। गेस्तापो के यन्त्रणा गृहों में किसी को भी बन्द किया जा सकता था। ये नए दस्ते किसी को भी यातना गृह में भेज सकते थे। किसी को भी बिना कार्यवाही के देश निकाला दिया जा सकता था एवं गिरफ्तार किया जा सकता था। इन्हीं सब कार्यों की वजह से नात्सी शासन को एक खूखार आपराधिक राज्य की छवि प्राप्त हुई।

प्रश्न 16.
हिटलर की विचारधारा लेबेन्त्राउम’ या जीवन-परिधि की भू-राजनीतिक अवधारणा को बताइए।
उत्तर:
हिटलर की विचारधारा लेबेन्स्त्राउम या जीवन-परिधि की भू-राजनीतिक अवधारणा के प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित प्रकार हैं

  1. हिटलर मानता था कि अपने लोगों को बसाने के लिए अधिक से अधिक क्षेत्रों पर नियन्त्रण करना आवश्यक है। इससे मातृ देश का क्षेत्रफल बढ़ेगा एवं नए इलाके में जाकर बसने वालों को अपने जन्म स्थान के साथ गहरे सम्बन्ध बनाए रखने में मुश्किल भी नहीं आएगी।
  2. हिटलर इन विधियों से जर्मनी के लिए असीमित संसाधन एकत्रित करना चाहता था।
  3. हिटलर जर्मनी की सीमाओं का विस्तार पूर्व दिशा की ओर करना चाहता था जिससे कि समस्त जर्मनों को एक ही जगह एकत्र किया जा सके।

प्रश्न 17.
नात्सीवाद पर आम लोगों की प्रतिक्रिया क्या रही?
उत्तर:
बहुत सारे लोग नात्सियों द्वारा फैलाये गये शब्दाडंबर एवं धुआँधार प्रचार का शिकार हो गये थे। वे दुनिया को नात्सी नजरों से ही देखने लगे थे। उन्हें विश्वास हो गया था कि नात्सीवाद ही देश को तरक्की पर ले जा सकता है। जर्मनी की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा मूकदर्शक एवं उदासीन बना हुआ था। कुछ लोग पुलिस दमन और मौत की आशंका के बावजूद नात्सीवाद का प्रबल विरोध कर रहे थे। इनमें प्रमुख रूप से कम्युनिस्ट, सोशल डेमोकैट्स एवं यहूदी लोग थे।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतन्त्र के विनाश हेतु एडोल्फ हिटलर द्वारा क्या कदम उठाए गए थे?
उत्तर:
30 जनवरी, सन् 1933 ई. को जर्मनी के राष्ट्रपति हिंडनबर्ग ने एडोल्फ हिटलर को चांसलर का पद सँभालने का न्यौता दिया जो मन्त्रिमण्डल का सबसे शक्तिशाली पद था। अब तक नात्सी रूढ़िवादियों को अपने उद्देश्य के लिए अपने पक्ष में लाने तथा एक बहुत बड़ी रैली करने में हिटलर सफल हो चुका था। सत्ता पाने के बाद हिटलर ने जर्मनी में लोकतन्त्र के ढाँचे को पूर्णतया समाप्त करने के लिए कार्यवाही प्रारम्भ कर दी। लोकतन्त्र के विनाश हेतु हिटलर द्वारा उठाए गए कदम निम्नलिखित थे

1. आम उद्घोषणा एवं नागरिक अधिकारों का स्थगन:
फरवरी सन् 1933 ई. में जर्मनी की संसद की इमारत में रहस्यात्मक रूप से आग लग गई। इसका दोषारोपण साम्यवादियों पर कर दिया गया, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि यह कार्य हिटलर के समर्थकों का ही था। 28 फरवरी, सन् 1933 ई. की इस अग्नि सम्बन्धी दुर्घटना ने नागरिक अधिकारों एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, भाषण, प्रेस एवं सभा आयोजन जिनकी गारण्टी वाइमर संविधान ने दी थी, को स्थगित कर दिया गया।

2. इसके बाद एडोल्फ हिटलर अपने शत्रु नम्बर एक अर्थात् जर्मनी के साम्यवादियों की ओर मुड़ा। अधिकतर साम्यवादियों को बन्दी बनाकर यातना शिविरों में भेज दिया गया।

3. साम्यवादियों को भारी यातनाएँ दी गईं। उनकी संख्या हजारों में थी लेकिन नात्सियों द्वारा न सिर्फ साम्यवादियों का सफाया किया वरन् 52 किस्म के अन्य लोगों को भी अपने दमन का शिकार बनाया।

4. 3 मार्च, सन् 1933 ई. को प्रसिद्ध इनेबलिंग एक्ट पारित किया गया था। इस अधिनियम ने जर्मनी में तानाशाही की स्थापना की थी। इस अधिनियम ने सभी तरह की राजनीतिक एवं प्रशासनिक शक्तियाँ ‘एडोल्फ हिटलर’ को सौंप दीं। उसे संसद की अवहेलना करने तथा सभी तरह के अध्यादेश जारी करने के अधिकार दे दिए गए।

5. सभी तरह की पार्टियों पर सिवाय नात्सी पार्टी को छोड़कर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगा दिया गया। जर्मनी में सभी श्रम संघों को भी अवैध घोषित कर दिया गया। केवल वे ही श्रम संगठन काम कर सकते थे जो नात्सी पार्टी से जुड़े हुए थे।

6. राज्य या देश की अर्थव्यवस्था, मीडिया (जनसंचार माध्यमों), सेना एवं न्यायपालिका पर नात्सियों का पूर्ण नियन्त्रण स्थापित हो गया। जिस तरह से नात्सी लोग चाहते थे, उसी ढंग से समाज पर नियन्त्रण एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए गुप्त सेनाओं का गठन किया गया।

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प्रश्न 2.
नात्सी विचारधारा का बच्चों एवं युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
नात्सी विचारधारा का बच्चों एवं युवाओं पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ा
1. स्कूलों पर पूर्ण नियन्त्रण:
हिटलर की देश के युवाओं के प्रति रुचि जुनून के हद तक थी। उसका विचार था कि युवाओं को नात्सी के सिद्धान्तों की शिक्षा देकर ही एक शक्तिशाली नात्सी समाज की स्थापना हो सकती है। इसके लिए बच्चों पर स्कूल के अन्दर तथा बाहर दोनों स्थानों पर नियन्त्रण की व्यवस्था की गयी।

2. स्कूलों का शुद्धीकरण:
सभी स्कूलों को शुद्ध तथा साफ किया गया। इसका अर्थ था कि जो अध्यापक यहूदी थे अथवा जो राजनीतिक तौर पर अविश्वसनीय लगते थे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। बच्चों को पहले अलग किया जाता था-जर्मन तथा यहूदी एक साथ बैठ नहीं सकते थे अथवा एक साथ खेल नहीं सकते थे। यहूदियों, शारीरिक रूप से अपंगों, जिप्सियों आदि अवांछनीय बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया और सन् 1940 ई. के दशक में तो उन्हें भी गैस चैम्बरों में झोंक दिया गया।

3. जीवन का विभाजन:
युवाओं के जीवन को विभिन्न चरणों में विभाजित किया गया। प्रत्येक चरण में उसे विभिन्न प्रशिक्षणों तथा शिक्षण कार्यक्रमों से गुजरना होता था।

4. हिटलर यूथ का गठन:
नात्सियों के युवा संघ की स्थापना सन् 1922 ई. में हुई। चार वर्ष बाद इसे हिटलर यूथ नया नाम दिया गया। नात्सी नियन्त्रण के अधीन युवा आन्दोलन को संयुक्त करने के लिए अन्य सभी युवा संस्थाओं को भंग कर दिया गया तथा उन पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।

5. नई शिक्षा नीति:
अपनी विचारधारा को लोकप्रिय बनाने के लिए हिटलर ने एक नई शिक्षा नीति की घोषणा की। इसके अन्तर्गत पाठ्य-पुस्तकों को फिर से लिखा गया। नात्सी के नस्ली विचारों को तर्कसंगत सिद्ध करने के लिए नस्ल विज्ञान नामक विषय का प्रारम्भ कर दिया गया। बच्चों को वफादारी तथा विनम्रता, यहूदियों से घृणा तथा हिटलर की पूजा करने की शिक्षा दी।

प्रश्न 3.
नात्सी अथवा हिटलर की प्रचार की कला को विस्तार से बताइए।
उत्तर:
नात्सी अथवा हिटलर की प्रचार की कला निम्नलिखित थी
1. सांकेतिक शब्द:
निम्न जातियों को निष्कासित करने के लिए वे सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते थे। अधिकृत दस्तावेज से उन्होंने कभी ‘मौत’ अथवा ‘हत्या’ शब्दों का प्रयोग नहीं किया। सामूहिक हत्याओं के लिए ‘विशेष व्यवहार’ ‘अन्तिम समाधान’ (यहूदियों के लिए), ‘यूथनेजिया’ (अपंगों के लिए), ‘चयन’ तथा ‘संक्रमण मुक्ति’ आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता। ‘इवैक्युएशन (खाली करना)’ का अर्थ था लोगों को गैस-चैम्बरों में भेजना। उन्हें ‘संक्रमण मुक्ति क्षेत्र’ कहा जाता था।

2. जनसंचार साधनों का प्रयोग:
शासन के लिए समर्थन पाने को तथा इसकी विचारधाराओं को लोकप्रिय बनाने के लिए जनसंचार का बुद्धिपूर्वक प्रयोग किया जाता। नात्सी विचारों को दृश्य-चित्रों, फिल्मों, रेडियो, पोस्टरों, नारों तथा इश्तहारी पर्चों द्वारा प्रचार किया जाता। पोस्टरों में जर्मन के ‘दुश्मन’ के रूप में प्रसिद्ध लोगों का मजाक उड़ाया जाता, अपमानित किया जाता तथा उन्हें एक शैतान के रूप में पेश किया जाता। समाजवादियों तथा उदारवादियों को कमजोर तथा पथभ्रष्ट बताया जाता। विदेशी एजेण्ट कहकर उन पर आक्रमण किया जाता। यहूदियों के लिए घृणा उत्पन्न करने के लिए प्रचार फिल्में बनाई जातीं। ‘द एटर्नल ज्यू’ (अक्षय यहूदी) सबसे अधिक शर्मनाक फिल्म थी।

3. स्कूलों में नई शिक्षा नीति:
नात्सी विचारधारा के प्रचार के लिए स्कूलों तथा शिक्षण संस्थाओं का प्रयोग किया जाता था। स्कूल की पाठ्य-पुस्तकों को फिर से लिखा गया। नात्सियों की नस्ली विचारधारा को तर्कसंगत सिद्ध करने के लिए नस्ल विज्ञान नामक एक नवीन विषय आरम्भ किया गया। यहूदी, जिप्सी तथा अश्वेत जैसे अवांछनीय बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया। नात्सियों के यूथ लीग की स्थापना सन् 1922 ई. में की गयी।

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प्रश्न 4.
महिलाओं के प्रति हिटलर की नीति का वर्णन करिए।
उत्तर:
महिलाओं के प्रति हिटलर की नीति निम्नलिखित थी
1. पुरुषों की श्रेष्ठता:
नात्सी जर्मनी में बच्चों को अक्सर यह बताया जाता था कि महिलाएँ , पुरुषों से काफी भिन्न हैं। नात्सी, महिलाओं के लोकतान्त्रिक अधिकारों के विरुद्ध थे। लड़कों को सिखाया जाता था कि वे कठोर, आक्रामक तथा ताकतवर बनें। लड़कियों को बताया जाता था कि उन्हें अच्छी आर्य माताएँ बनना है।

तथा ऐसी सन्तानें पैदा करनी हैं, जिनकी रगों में शुद्ध आर्यों का रक्त प्रवाहित हो। लड़कियों को नस्ल की शुद्धता बनाए रखनी है, यहूदियों से दूरी बनाए रखनी है, घर की देखभाल करनी है तथा अपने बच्चों को नात्सी सिद्धान्तों की शिक्षा देनी है। उन्हें आर्य संस्कृति तथा नस्ल का ध्वज वाहक बनना है।

2. महिलाओं के लिए आचार संहिता:
सभी आर्य महिलाओं के लिए हिटलर के शासन में एक आचार संहिता थी। जो महिलाएँ निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन करती थीं उनकी सार्वजनिक रूप से निन्दा की जाती थी और उन्हें कड़ा दण्ड दिया जाता था। बहुत बड़ी संख्या में औरतों को गंजा करके, मुँह पर कालिख पोत कर और उनके गले में तख्ती लटकाकर पूरे शहर में घुमाया जाता था।

उनके गले में तख्ती लटका दी जाती थी जिस पर लिखा होता था-“मैंने राष्ट्र के सम्मान को मलिन किया है।” इस आपराधिक कृत्य के लिए अनेक महिलाओं को जेल की सजा के साथ-साथ उनके नागरिक अधिकार, उनके पति एवं उनके परिवार भी छीन लिए गए।

3. पुरस्कार एवं दण्ड:
जो महिलाएँ नस्ली तौर पर अवांछित बच्चे पैदा करती थीं, उन्हें दण्डित किया जाता था जो महिलाएँ नस्ली रूप से वांछित बच्चे पैदा करती थीं, उन्हें पुरस्कार दिया जाता था। अस्पतालों में उन्हें विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं। दुकानों में उन्हें अधिक छूट मिलती, थियेटर एवं रेलगाड़ी के टिकट सस्ते मिलते थे।

अधिक बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को पदक दिये जाते थे। चार बच्चे पैदा करने वाली माँ को कांसे का, छ: बच्चे पैदा करने वाली माँ को चाँदी का एवं आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने वाली माँ को सोने का पदक दिया जाता था।

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पाठ्य-पुस्तक में दिए गए मानचित्र को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1. धुरी शक्तियों को सहयोग प्रदान करने वाले देशों के नाम लिखिए।
2. तटस्थ देश कौन-कौन से थे?
3. मानचित्र में बेल्जियम किस दिशा में है?
उत्तर:

  1. रोमानिया, स्लोवाकिया, हंगरी, बुल्गारिया, फिनलैण्ड।
  2. स्वीडन, स्पेन।
  3. पश्चिम दिशा में।

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JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. निरंकुश राजशाही के खिलाफ रूस में प्रथम क्रान्ति हुई
(अ) सन् 1905 ई. में
(ब) सन् 1978 ई. में
(स) सन् 1917 ई. में
(द) सन् 1919 ई. में।
उत्तर:
(अ) सन् 1905 ई. में।

2. रूस के स्थानीय स्वशासी संगठन कहलाते थे
(अ) सोवियत
(ब) पेत्रोग्राद
(स) ड्यूमा
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(अ) सोवियत।

3. रूसी क्रान्ति के समय रूस का शासक था
(अ) निकोलस प्रथम
(ब) निकोलस द्वितीय
(स) लेनिन
(द) कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) निकोलस द्वितीय।

4. रूस में सामूहिक खेतों को कहा गया
(अ) घुमन्तू
(ब) कोलखोज
(स) विण्टर पैलेस
(द) कुलक।
उत्तर:
(ब) कोलखोज।

5. बोल्शेविक क्रान्ति के नाम से जाना जाता है
(अ) सं. राज्य अमेरिका की क्रान्ति को
(ब) जर्मनी की क्रान्ति को
(स) भारत की क्रान्ति को।
(द) रूस की क्रान्ति को।
उत्तर:
(द) रूस की क्रान्ति को।

6. रूस की संसद का नाम था
(अ) ड्यूमा
(ब) मजलिस
(स) पार्लियामेन्ट
(द) कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) ड्यूमा।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
रूसी कान्ति किस जार के शासनकाल में हुऱे?
उत्तर:
निकोलस द्वितीय के शासनकाल में।

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प्रश्न 2.
प्रथम विश्वयुद्ध के समय रुस का शासक कौन था?
उत्तर:
जार निकोलस द्वितीय।

प्रश्न 3.
सन् 1905 ई. की रून की क्रान्ति का प्रमुख कारण क्या था?
उत्तर:
जार का निरंकुश शासन।

प्रश्न 4.
रूसी क्रान्ति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
चर्च की शक्ति एवं निरंकुश श्ञासन की समाप्ति।

प्रश्न 5.
रुसी क्रान्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
फरवरी, सन् 1917 ई, में राजशाही का पतन एवं अक्टूबर की घटनाओं को रूसी क्रान्ति कहते हैं।

प्रश्न 6.
रुस में बोल्शेखिक क्रान्ति कब्ब हुई?
उत्तर:
सन् 1917 ई. में।

प्रश्न 7.
रूसी क्रान्ति को विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटना क्यों माना जाता है?
उत्तर:
समाजवाद की स्थापना के कारण रूसी क्रान्ति को विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।

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प्रश्न 8.
ऐसे दो भारतीय सुधारकों के नाम बताओ जिन्होंने रुस की क्रान्ति के महत्व के बारे में बताया।
उत्तर:

  1. पं. जवाहर लाल नेहरू,
  2. एस. डी. विद्यालंकार।

प्रश्न 9.
सन् 1898 ई. में रूस में समाजवादियों ने किस पार्टी की स्थापना की?
उत्तर:
रशियन सोशल डेमोक्रैटिक वर्कर्स पार्टीं की।

प्रश्न 10.
रूस की क्रान्ति में बोल्शेविक खेमे का नेतृत्व कौन कर रहा था?
उत्तर:
ब्लादिमीर लेनिन।

प्रश्न 11.
रुसी क्रान्ति से पूर्व रूस में कौन-कौन से दल थे?
उत्तर:

  1. बोल्शेविक,
  2. मेन्शेविक।

प्रश्न 12.
सर्वप्रथम रुसी क्रान्ति का झंडा कहाँ फहराया गया?
उत्तर:
पेत्रोग्राद में।

प्रश्न 13.
किस संन्यासी ने रूस में राजशाही को और अधिक अलोकप्रिय बना दिया।
उत्तर:
रासपुतिन ने।

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प्रश्न 14.
कार्ल मार्क्स कौन था?
उत्तर:
कार्ल मार्क्स आधुनिक समाजवाद का जनक था। वह मूलतः जर्मनी का एक महान् विचारक था।

प्रश्न 15.
रूसी सेनाओं को कब एवं कहाँ पराजय झेलनी पड़ी?
उत्तर:
रुसी सेनाओं को सन् 1914 ई. से सन् 1916 ई. के मध्य जर्मनी और ऑस्ट्रिया में पराजय शेलनी पड़ी।

प्रश्न 16.
रूसी स्टीम रोलर किसे कहा जाता है?
उत्तर:
शाही रूसी सेना को रूसी स्टीम रोलर कहा जाता है।

प्रश्न 17.
सन् 1917 ई. की रूसी क्रान्ति किस विचारधारा से सबसे अधिक प्रभावित थी?
उत्तर:
सन् 1917 ई. की रुसी क्रान्ति समाजवादी विचारधारा से सबसे अधिक प्रभावित थी।

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प्रश्न 18.
बोल्शेविक पार्टी का संस्थापक कौन था? इस पार्टी के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:
बोल्शेविक पार्टीं का संस्थापक ब्लादिमीर लेनिन था। उसका मुख्य उद्देश्य जार निकोलस द्वितीय के शासन को उखाड़ फेंकना तथा रूस में कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना करना था।

प्रश्न 19.
मित्र राष्ट्र किन शक्तियों को कहा जाता था?
उत्तर:
ब्रिटेन, फ्रांस एवं रुस आदि शक्तियों को मित्र राष्ट्र कहा जाता था?

प्रश्न 20.
संघों का महासंघ किसे कहा गया?
उत्तर:
वकीलों, इंजीनियरों, डॉक्टरों एवं मध्यमवर्गीय कामगारों ने मिलकर एक संगठन की स्थापना की जिसे संघों का महासंघ कहा गया।

प्रश्न 21.
निजी सम्पत्ति की व्यवस्था के खिलाफ कौन थे?
उत्तर:
बोल्शेविक।

प्रश्न 22.
बोल्शोविक पार्टी का बदला हुआ नाम क्या था?
उत्तर:
रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक)।

प्रश्न 23.
बोल्शेविकों ने जर्मनी से कब एवं कहाँ संधि कर ली?
उत्तर:
बोल्शेविकों ने जर्मनी से ब्रेस्ट लिटोव्सक में मार्च सन् 1918 ई. में संधि कर ली।

प्रश्न 24.
क्रॉमिन्टर्न क्या हैं?
उत्तर:
बोल्शेविक समर्थक समाजवादी पार्टियों के अन्तर्राट्रीय महासंध को कांमिन्टर्न के नाम से जाना गया।

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प्रश्न 25.
समाजवादी निजी सम्पत्ति के विरोधी क्यों थे?
उत्तर:
समाजवादी निजी सम्पत्ति को सभी बुराइयों की जड़ मानते थे।

प्रश्न 26.
भारत में स्वतन्त्रता के बाद लागू की गई पंचवर्षीय योजनाएँ किस देश से प्रभावित थीं?
उत्तर:
रूस से।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
19वीं शताब्दी के यूरोप में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के प्रति अतिवादियों का क्या दृष्टिकोण था?
उत्तर:
19वीं शताब्दी के यूरोप में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के प्रति क्रान्तिकारी या अतिवादियों के दृष्टिकोण को निम्नलिखित रूप में व्यक्त किया जा सकता है

  1. उन्नीसवीं शताब्दी में अतिवादी या क्रान्तिकारी पार्टियाँ मत देने के अधिकार को अधिक विस्तृत कराना चाहती थीं। वे राजनीति में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी की पक्षधर थीं।
  2. अतिवादी बड़े जमींदारों, कारखाना मालिकों या व्यापारियों के हाथ में सम्पत्ति के केन्द्रीकरण के विरुद्ध थे।

प्रश्न 2.
रूस के इतिहास में कौन-सी घटना ‘खूनी रविवार’ के नाम से जानी जाती है?
उत्तर:
रूस में निरंकुश राजशाही थी। रूस के जार (सम्राट) के अधिकारी जन साधारण वर्ग पर भीषण अत्याचार करते थे। 9 जनवरी, सन् 1905 ई. को रविवार के दिन पादरी गैपॉन के नेतृत्व में मजदूरों का एक वर्ग अपनी मांगों के समर्थन में एक जुलूस निकालता हुआ जार के महल विंटर पैलेस के सामने पहुंचा तो पुलिस और कोसैक्स ने उन पर हमला बोल दिया। इस घटना में 100 से अधिक मजदूर मारे गये और लगभग 300 घायल हो गये। सन् 1905 ई. की क्रान्ति की शुरुआत इसी घटना से हुई। इतिहास में इस घटना को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
सन् 1917 ई. में पेत्रोग्राद में फरवरी क्रान्ति के क्या कारण थे?
उत्तर:
पेत्रोग्राद में फरवरी क्रान्ति के निम्नलिखित कारण थे

  1. फरवरी में मजदूरों के निवास क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की भारी कमी उत्पन्न हो गई।
  2. संसदीय प्रतिनिधि चाहते थे कि निर्वाचित सरकार बची रहे, इसलिए वह जार द्वारा ड्यूमा को भंग करने के लिए की जा रही कोशिशों का विरोध कर रहे थे।
  3. फरवरी सन् 1917 ई. में नेवा नदी के दाएँ तट पर स्थित एक फैक्ट्री में तालाबन्दी कर दी गई।
  4. रविवार 25 फरवरी को अपने निरंकुश शासन को बनाये रखने के लिए जार ने ड्यूमा को बर्खास्त कर दिया।

प्रश्न 4.
“रूसी जनता की समस्त समस्याओं का हल रूसी क्रान्ति में निहित था।”इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सन् 1917 ई. की रूसी समाजवादी क्रान्ति विश्व के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी। जार निकोलस द्वितीय का निरंकुश शासन रूस के लिए एक अभिशाप बन चुका था। रूस के किसानों, मजदूरों एवं जनसाधारण की दशा अत्यन्त दयनीय थी। रूस कृषि एवं औद्योगिक दृष्टि से एक पिछड़ा हुआ देश था। केरेस्की के नेतृत्व में जो लोकतान्त्रिक व्यवस्था स्थापित की गई थी, वह भी पतन की ओर अग्रसर थी।

प्रथम विश्व युद्ध ने रूस की आन्तरिक दशा को अधिक दयनीय बना दिया। लाखों रूसी सैनिक मौत के मुँह में चले गये और अनेक घायल हो गए। रूसी क्रान्तिकारी इन स्थितियों से निपटने के लिए विश्वयुद्ध से अलग होना, गैर-रूसी जातियों को समान अधिकार देना, जमीन का मालिकाना हक किसानों को देना तथा उद्योगों पर मजदूरों का नियन्त्रण करना चाहते थे।

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प्रश्न 5.
‘बोल्शेविक कौन थे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
‘बोल्शेविक रूस के औद्योगिक मजदूरों की एक राजनीतिक पार्टी थी, जिसका नेता ब्लादिमीर लेनिन था। इस पार्टी के साथ औद्योगिक मजदूरों की बहुत अधिक संख्या थी। यह गुट क्रान्तिकारी विचारधारा में विश्वास रखता था। उनका विचार था कि जिस देश में न तो संसद हो और न ही नागरिकों को कोई जनतान्त्रिक अधिकार दिए गए हों, वहाँ शान्तिपूर्ण तरीके से कोई परिवर्तन नहीं लाए जा सकते। अन्त में यह पार्टी सन् 1917 ई. में रूस में एक क्रान्ति लाने में सफल हुई।

प्रश्न 6.
स्वस में श्रमिकों की पंचायत (सोवियतों का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर:
रविवार 25 फरवरी सन् 1917 को सरकार ने ड्यूमा को बर्खास्त कर दिया। इसके विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन होने लगे तथा रोटी, वेतन, काम के घण्टों में कमी तथा लोकतान्त्रिक अधिकारों के पक्ष में बड़ी मात्रा में लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे। जब सरकार ने उन्हें काबू में करने के लिए सैनिकों को आदेश दिया तो उन्होंने अपने अफसर पर गोली चला दी और बगावत कर दी।

कई रेजीमेन्टों के सैनिक हड़ताली मजदूरों के साथ आ गये तथा जिस इमारत में यक की बैठक होती थी, उसी में एकत्र होकर एक सोवियत (परिषद) का गठन किया, जिसे पेत्रोपाद सोवियत कहा गया। इसके बाद अन्य स्थानों पर भी सोवियतों का गठन होने लगा।

प्रश्ना 7.
लेनिन की प्रमुख माँगें कौन-सी थी? उन्हें किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
लेनिन की प्रमुख तीन मांगे निम्नलिखित थीं

  1. पुत्र को समाप्त किया जाए।
  2. समस्त जमीन किसानों को दे दी जाए।
  3. बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाए। इन तीनों माँगों को लेनिन की ‘अप्रैल थीसिस’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 8.
स्तालिन द्वारा सामूहिकीकरण का निर्णय क्यों लिया गया ? कुलक तथा अन्य किसानों ने इसका विरोध क्यों किया?
उत्तर:
स्तालिन का यह मानना था कि कुलक और व्यापारी कीमत बढ़ने की उम्मीद में अनाज नहीं बेच रहे हैं और मिलकर जमाखोरी कर रहे हैं और इस कारण बाजार में कृत्रिम खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अतिरिक्त छोटे कृषि फार्मों का मशीनीकरण भी सम्भव नहीं था।

बड़े फामों पर मशीनों के उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता था इसीलिए स्तालिन ने यह निर्णय लिया कि बड़े सामूहिक फार्म बनाए जाएंगे जिन पर किसान उसी प्रकार काम करेंगे जैसे कारखानों में मजदूर काम करते हैं। कुलकों एवं किसानों ने अपनी भूमि पर सरकारी नियन्त्रण का विरोध किया, क्योंकि वे पहले अपनी जमीन के मालिक थे। सामूहिकीकरण की प्रक्रिया द्वारा वे मात्र मजदूर बनकर रह जाते। स्तालिन ने किसानों और कुलकों के इस विरोध को सख्ती से कुचल दिया।

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प्रश्न 9.
अक्टूबर सन् 1917 ई. की रूसी क्रान्ति की सफलता के लिए लेनिन द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
अक्टूबर 1917 ई. की रूसी क्रान्ति की सफलता के लिए लेनिन ने निम्न कदम उठाये

  1. जार निकोलस द्वितीय के शासन के पतन के बाद लेनिन ने ही क्रान्तिकारियों का नेतृत्व किया।
  2. केरेस्की के नेतृत्व में अन्तरिम सरकार लोगों की मांगों को पूरा करने में असफल रही, जिससे लेनिन ने घोषणा की कि अन्तरिम सरकार के स्थान पर अब सोवियतों को शासन दिया जाना चाहिए।
  3. लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने युद्ध समाप्त करने, किसानों को जमीन देने तथा समस्त अधिकार सोवियतों को देने सम्बन्धी स्पष्ट नीतियाँ सामने रखीं।
  4. लेनिन ने सभी रूसी साम्राज्यों को राष्ट्रों का कारागार कहा था और घोषणा की थी कि सभी गैर-रूसी लोगों को समान अधिकार दिए बिना वास्तविक लोकतन्त्र की स्थापना नहीं हो सकती।

प्रश्न 10.
सन् 1917 ई. की रूसी क्रान्ति के बाद लेनिन द्वारा किए गए प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अक्टूबर सन् 1917 ई. की क्रान्ति के बाद लेनिन द्वारा किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित थे

  1. सरकार द्वारा निजी सम्पत्ति के अधिकार को समाप्त कर दिया गया।
  2. उद्योगों का नियन्त्रण मजदूर सोवियतों एवं श्रमिक संघों को दे दिया गया।
  3. उत्पादन के सभी साधनों पर सरकार का नियन्त्रण स्थापित हो गया।
  4. बैंकों, बड़े उद्योगों, खानों तथा बड़ी कम्पनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

प्रश्न 11.
लेनिन ने रूस की कृषि एवं अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कौन-कौन से कदम उठाए? उनका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लेनिन ने रूस की कृषि एवं अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए निम्नलिखित कदम उठाये:

  1. निजी सम्पत्ति के अधिकार को पूर्णत: समाप्त कर दिया गया एवं उत्पादन के सभी साधनों को सरकार के नियन्त्रण में ले लिया गया।
  2. भू-स्वामियों, कुलकों तथा चर्च आदि से भूमि छीन ली गई तथा उसे किसानों में बाँट दिया मया। किसानों को भूमि का वास्तविक मालिक बना दिया गया। शीघ्र ही भूमि की चकबन्दी एवं यन्त्रीकरण शुरू कर दिया गया। प्रत्येक के लिए काम करना अनिवार्य कर दिया गया तथा प्रत्येक के योगदान के अनुसार उत्पादन का विभाजन कर दिया गया।
  3. रूस में कृषि योग्य भूमि, बड़े-बड़े उद्योगों, बैंकों, बीमा कम्पनियों, यातायात के साधनों, संचार के साधनों, शक्ति तथा ऊर्जा के स्रोतों, उत्पादन के साधनों, थोक व्यापार, जहाजरानी, खदानों तथा खनिज सम्पत्ति एवं कम्पनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
  4. शीघ्र ही पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से रूस का सुनियोजित ढंग से आर्थिक विकास प्रारम्भ कर दिया गया।
  5. सभी बड़े-बड़े उद्योग-धन्धे एवं कारखाने निजी स्वामियों एवं उद्योगपतियों से ले लिये गये। कामगारों एवं श्रमिकों को उद्योगों का वास्तविक स्वामी बना दिया गया।

प्रश्न 12.
किस सीमा तक प्रथम विश्व युद्ध को रूस की सन् 1917 ई. की क्रान्ति के लिए उत्तरदायी माना जाता है ?
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध के प्रति रूसी जनता में असन्तोष की भावना व्याप्त थी। सन् 1917 ई. तक लगभग 70 लाख लोग मारे जा चुके थे। इस विश्व युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी हो गए थे। युद्ध के परिणामस्वरूप उद्योगों, फसलों एवं घरों की भारी तबाही हुई थी। देश के अच्छी सेहत वाले मर्दो को सेना में भेज दिया गया था जिसके कारण कृषि एवं उद्योग के लिए श्रमिक कम हो गये तथा वे समाप्त होते गए।

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प्रश्न 13.
सन् 1917 ई. की क्रान्ति के बाद रूस प्रथम विश्व युद्ध से क्यों अलग हो गया?
उत्तर:
सन् 1917 ई. में रूस के प्रथम विश्व युद्ध से अलग होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  1. रूस की जनता सर्वप्रथम अपनी आन्तरिक समस्याओं का समाधान करना चाहती थी।
  2. रूस की जनता किसी दूसरे देश के भू-भाग पर अधिकार करना नहीं चाहती थी।
  3. रूस के क्रान्तिकारी आरम्भ से ही युद्ध का भारी विरोध कर रहे थे अत: क्रान्ति के बाद रूस युद्ध से हट गया।
  4. प्रथम विश्व युद्ध में सन् 1917 ई. तक 70 लाख से भी अधिक रूसी लोग मारे जा चुके थे।
  5. रूसी साम्राज्य को अनेक बार युद्धों में पराजय का सामना करना पड़ा था, जिससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची थी।
  6. लेनिन के कुशल नेतृत्व में रूस की जनता ने युद्ध को क्रान्तिकारी युद्ध में बदलने का निश्चय कर लिया था।

प्रश्न 14.
रूसी क्रान्तिकारियों के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:
रूसी क्रान्तिकारियों के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे
1. शान्तिपूर्ण दृष्टिकोण:
जार निकोलस द्वितीय ने रूस को प्रथम विश्व युद्ध में धकेल दिया था। इस युद्ध में रूस को भारी अपमान झेलना पड़ रहा था। सन् 1917 ई. तक रूस के लगभग 70 लाख लोग युद्ध में मारे जा चुके थे। रूसी क्रान्तिकारी अपने देश को युद्ध से अलग रखना चाहते थे। उनका मुख्य लक्ष्य शान्ति की नीति को अपनाना था।

2. उद्योगों पर मजदूरों का नियन्त्रण:
समाजवाद से प्रभावित होकर रूस के क्रान्तिकारी एक ही नारा लगा रहे थे “देश के कारखानों पर मजदूरों का स्वामित्व दिया जाए।” उनकी धारणा थी कि कपड़ा बनाने वाले फटे कपड़े क्यों पहनें? पूँजी अर्जित करने वाले पूँजीपतियों के दास बनकर क्यों रहे?

3. गैर-रूसी राष्ट्रों की जनता को बराबरी का दर्जा:
रूस में ऐसे अनेक राष्ट्र थे जिनको रूसी जारों ने जीत लिया था। इन राष्ट्रों के लोगों को रूसी लोगों के समान अधिकार प्राप्त नहीं थे। अत: क्रान्तिकारियों का उद्देश्य था कि गैर-रूसी राष्ट्रों की जनता रूसी जनता के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त करे।

4. जोतने वालों को जमीन:
रूस की भूमि जार, चर्च एवं जमींदारों के पास थी। यद्यपि किसान भूमि पर खेती सम्बन्धी कार्य करते थे, परन्तु वे भूमि के अधिकार से वंचित थे। अत: क्रान्तिकारियों का नारा था ‘भूमि पर काम करने वाले भूमि के स्वामी होने चाहिए।”

प्रश्न 15.
प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् समाजवादी आन्दोलन के स्वरूप का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् समाजवादी आन्दोलन दो गुटों में विभाजित हो गया था। ये गुट समाजवादी एवं साम्यवादी गुट थे। इन दोनों गुटों में समाजवाद की मूल योजना तथा अवधारणा में अन्तर था। समाजवादी गुट के अधिकांश लोग मानते थे कि सरकार के द्वारा ही धीरे-धीरे संवैधानिक एवं शान्तिपूर्ण तरीकों से कानून में आवश्यक परिवर्तन करके समाजवाद लाया जा सकता है। इसके विपरीत साम्यवादी मानते थे कि ताकत बन्दूक की नली से निकलती है। यदि क्रान्ति के लिए हिंसा का मार्ग भी अपनाना पड़े तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।

प्रश्न 16.
अक्टूबर क्रान्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
रूस में अक्टूबर क्रान्ति 7 नवम्बर, सन् 1917 ई. को हुई थी। उस दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 24, अक्टूबर का दिन था। इसी कारण से इस क्रान्ति को ‘अक्टूबर क्रान्ति’ नाम दिया गया। इस क्रान्ति के परिणामस्वरूप रूस में केरेस्की सरकार का पतन हो गया। सरकार के मुख्यालय विंटर पैलेस पर बोल्शेविक क्रान्तिकारी समिति के सदस्यों ने अधिकार कर लिया। उसी दिन पेत्रोग्राद में अखिल रूसी सोवियत कांग्रेस की बैठक हुई जिसमें बहुमत से बोल्शेविकों की कार्यवाही का समर्थन किया गया तथा लेनिन के हाथ में शासन की बागडोर आ गयी।

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प्रश्न 17.
रूसी क्रान्ति की विरासत पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
रूसी क्रान्ति की विरासत को निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

  1. समाजवाद ने पूँजीवाद के शोषणकारी स्वरूप को जनता के सामने उजागर किया जिसके परिणामस्वरूप यह स्पष्ट हो गया कि हमें धन का कुछ ही हाथों में केन्द्रीकरण नहीं होने देना चाहिए। देश के संसाधनों का उपयोग सभी लोगों के लाभ के लिए होना चाहिए।
  2. रूसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप विश्व के अधिकांश देशों में मजदूरों एवं अन्य कर्मचारियों हेतु न्यायसंगत वेतन एवं अन्य सुविधाएँ देने के लिए कानून बनाए गये हैं।
  3. विश्व के अनेक देशों में अपने नागरिकों की सुविधाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
  4. विश्व के अनेक देशों में कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ी है। कामकाजी महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए मातृत्व लाभ कानून एवं समान वेतन अधिनियम जैसे कदम उठाये गये हैं।
  5. सम्पूर्ण विश्व यह समझ चुका है कि तानाशाही शासन में नागरिकों को पीड़ा भुगतनी पड़ी है। अतः हम सबके लिए चेतावनी है कि हमें समस्त विश्व में लोकतान्त्रिक समाज के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।

प्रश्न 18.
समस्त विश्व पर रूसी क्रान्ति के प्रभावों को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
सन् 1917 ई. की रूसी क्रान्ति ने न केवल रूस को वरन् समस्त विश्व को प्रभावित किया इस क्रान्ति के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित थे

  1. रूसी क्रान्ति ने साम्राज्यवाद के विनाश की प्रक्रिया को तीव्र किया जिससे सम्पूर्ण विश्व में साम्राज्यवाद की समाप्ति के लिए सशक्त वातावरण बन गया।
  2. रूसी क्रान्ति के पश्चात् समस्त विश्व में पूँजीपतियों और मजदूर वर्ग में निरन्तर चलने वाला संघर्ष प्रारम्भ हो गया।
  3. रूस में किसान और मजदूर वर्ग की सरकार स्थापित हो जाने से इस वर्ग का सम्मान एवं प्रतिष्ठा विश्व के अन्य देशों में बढ़ गयी।
  4. विश्व स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठनों की स्थापना हुई।
  5. रूस को साम्यवादी सरकार की तरह अन्य देशों जैसे चीन एवं वियतनाम आदि में साम्यवादी सरकारें बन गयीं।
  6. जनता की दशा सुधारने हेतु राज्य द्वारा आर्थिक नियोजन पर बल दिया गया। भारत में भी पंचवर्षीय योजनाएँ प्रारम्भ की गई।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सन् 1917 ई.की रूसी क्रान्ति को जन्म देने वाली परिस्थितियों की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सन् 1917 ई. में जार के विरुद्ध रूस में जो क्रान्ति हुई, उसके लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं
1. सन् 1905 ई.की क्रान्ति:
सन् 1905 ई. की रूसी क्रान्ति को सन् 1917 ई. की क्रान्ति की जननी कहा जाता है। सन् 1905 ई. को मास्को में एक माँग पत्र को लेकर मजदूरों एवं कृषकों द्वारा शान्तिपूर्ण ढंग से एक जुलूस निकाला जा रहा था कि जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दीं।

फलस्वरूप, लगभग 100 लोग मारे गये एवं 300 लोग घायल हुए। इसके विरोध स्वरूप जगह-जगह हड़तालें तथा दंगे हुए। जार ने दमन के द्वारा क्रान्ति दबा दी किन्तु क्रान्ति की ज्वाला अन्दर ही अन्दर सुलगती रही और सन् 1917 ई. में एक महान् क्रान्ति के रूप में प्रकट हुई।

2. कषकों की बुरी दशा:
सन् 1861 ई. में सामन्तवादी प्रथा समाप्त होने पर भी किसानों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। उनकी दशा दयनीय ही बनी रही, क्योंकि उनके छोटे-छोटे और अलग-अलग खेत थे, उनके सिंचाई के साधन अच्छे नहीं थे, उनके पास खेतों में खाद डालने के लिए पैसे नहीं थे, उनका खेती करने का ढंग पुराना था, वैज्ञानिक रीति से खेती नहीं करते थे, उनके पास अच्छे कृषि यन्त्र नहीं थे, करों का उन पर भारी बोझ था, उन्हें दो समय का भोजन भी नहीं मिलता था। अतः किसानों की दयनीय दशा क्रान्ति का एक मुख्य कारण बनी।

3. श्रमिकों की दयनीय स्थिति:
रूस में मध्यम वर्ग न होने के कारण औघोगिक क्रान्ति काफी देर से हुई। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में औद्योगिक क्रान्ति का प्रारम्भ हुआ। इसके पश्चात् उसका बड़ी तेजी से विकास हुआ किन्तु निवेश के लिए पूँजी विदेशों से आई। विदेशी पूँजीपति अधिक लाभ कमाना चाहते थे।

उन्होंने मजदूरों की दशा पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। पूँजीपति लोग मजदूरों को कम से कम वेतन देकर अधिक से अधिक काम लेते थे तथा उनसे बुरा व्यवहार करते थे। उन्हें राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे, अत: उनमें असन्तोष बढ़ता जा रहा था। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि मजदूरों की दयनीय दशा भी रूसी क्रान्ति के उद्भव में सहायक सिद्ध हुई।

4. रूसी विचारकों का योगदान:
अनेक रूसी विचारक यूरोप में हो रहे परिवर्तनों से बहुत प्रभावित हुए। कार्ल मार्क्स, टॉलस्टाय आदि विद्वानों ने अपने विचारों से लोगों को प्रभावित किया। उन्होंने किसानों और मजदूरों में जागृति लाने और संगठित होकर कार्य करने की विचारधारा का प्रसार किया।

5. प्रथम विश्व युद्ध:
अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जार ने रूस को प्रथम विश्व .युद्ध में उलझा दिया, जबकि रूस की आर्थिक स्थिति बड़ी खराब थी। इस युद्ध में रूस को पराजय का मुँह देखना पड़ा। फरवरी, सन् 1917 ई. तक 70 लाख लोग मारे जा चुके थे। परिणामस्वरूप, पूरे साम्राज्य एवं सैनिकों में व्यापक रूप से असन्तोष था। इस प्रकार रूस का प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेना भी रूसी क्रान्ति का एक कारण बना।

6. जार का अत्याचारी शासन:
जार एक निरंकुश शासक था। वह साम्राज्यवादी नीति में विश्वास रखता था। निरन्तर युद्धों के कारण रूस आर्थिक संकट में फंस गया था। लोगों को जार का शासन असहनीय होता जा रहा था, वह लोगों पर तरह-तरह के अत्याचार करता था। अत: उसके अत्याचारी शासन ने भी सन् 1917 ई. की क्रान्ति को लाने में सहायता की।

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

प्रश्न 2.
प्रथम विश्व युद्ध रूसी क्रान्ति का कारण कैसे बना? विस्तार से बताइए। उत्तर-प्रथम विश्व युद्ध रूसी क्रान्ति का कारण निम्न कारणों से बना
1. युद्ध की लम्बी अवधि:
प्रथम विश्व युद्ध सन् 1914-1918 ई. तक लड़ा गया। युद्ध के आरम्भिक चरण में जर्मन विरोधी भावनाओं के कारण युद्ध लोकप्रिय था। धीरे-धीरे युद्ध के प्रति जन-समर्थन कम होने लगा।

2. रूस की असफलता:
रूस सभी क्षेत्रों में युद्ध में नुकसान उठा रहा था। सन् 1914 ई. से सन् 1916 ई. के बीच जर्मनी एवं ऑस्ट्रिया में रूसी सेनाओं को भारी पराजय झेलनी पड़ी।

3. भारी जान:
माल का नुकसान-रूस में सन् 1917 ई. तक 70 लाख से अधिक लोग मारे जा चुके थे। सेना की ताकत को बढ़ाने के लिए किसानों और मजदूरों को बलपूर्वक सेना में भर्ती किया गया।

4. फसलों तथा घरों की तबाही:
जैसे-जैसे रूस की सेना पीछे हट रही थी, तो उसने फसलों तथा भवनों को नष्ट कर दिया ताकि शत्रु उसकी धरती पर न रह सकें। फसलों तथा भवनों की तबाही के कारण रूस में 30 लाख से अधिक लोग शरणार्थी हो गए। इस परिस्थिति ने सरकार तथा जार की प्रतिष्ठा को केस पहुँचाई। सैनिक भी युद्ध से तंग आ चुके थे अब वे युद्ध लड़ना नहीं चाहते थे।

5. उद्योगों पर प्रभाव:
युद्ध का उद्योगों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। रूस के अपने उद्योगों की संख्या बहुत कम थी तथा अब बाहर से मिलने वाली आपूर्ति भी बन्द हो गई थी। रूस के औद्योगिक उपकरण, यूरोप के अन्य देशों की अपेक्षा, बहुत तेजी से बेकार होने लगे। सन् 1916 ई. तक रेलवे लाइनें टूटनी आरम्भ हो गईं। स्वस्थ लोगों को युद्ध में बुला लिया गया।

परिणामस्वरूप, मजदूरों की कमी हो गई तथा आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करने वाले छोटे-छोटे कारखाने बन्द हो गये। खाद्यान्नों की बड़ी मात्रा सेना के लिए भेजी जाती थी। शहरों में रहने वाले लोगों के लिए पावरोटी तथा आटे की कमी हो गई। सन् 1916 ई. की शीत ऋतु तक पावरोटी की दुकानों पर दंगे होना सामान्य बात हो गई।

प्रश्न 3.
स्तालिन की सामूहिकीकरण की नीति की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
1. स्तालिन की सामूहिकीकरण की नीति की व्याख्या निम्न प्रकार से है

2. सामूहिकीकरण की नीति स्तालिन द्वारा आरम्भ की गई, जो लेनिन की मृत्यु के बाद सत्ता में आया।

3. सामूहिकीकरण का प्रमुख कारण अनाज की आपूर्ति की कमी थी।

4. सामूहिकीकरण के पक्ष में यह तर्क दिया गया कि अनाज की कमी खेतों के छोटे आकार के कारण थी।

5. सन् 1917 ई. के बाद, भूमि किसानों को दे दी गई। इन छोटे आकार के खेतों का आधुनिकीकरण नहीं हो सकता था। आधुनिक फार्मों को विकसित करने के लिए तथा उन्हें मशीनों के साथ औद्योगिक रूपरेखा के अनुसार चलाने के लिए ‘कुलकों’ को समाप्त करना आवश्यक था। किसानों से जमीन लेकर, राज्य द्वारा नियन्त्रित बड़े-बड़े फार्मों की स्थापना की गई।

6. सन् 1929 ई. से रूस में सामूहिकीकरण की शुरुआत हुई, सरकार ने सामूहिक फार्मों (कोलखोज) पर खेती करने के लिए किसानों को मजबूर किया। अधिकतर भूमि तथा उपकरण, सामूहिक खेतों के स्वामियों को स्थानान्तरित कर दिए गए। किसान भूमि पर काम करते थे और सामूहिक खेतों का लाभ बाँट लिया जाता था।

7. इस फैसले से क्रोधित किसानों ने अधिकारियों का विरोध किया तथा अपने पशुओं को नष्ट कर दिया। सन् 1929 ई.से सन् 1931 ई. के बीच, पशुओं की संख्या कम होकर एक तिहाई रह गई। सामूहिकीकरण का विरोध करने वालों को कड़ी सजा दी गई। बहुत बड़ी संख्या में लोगों को देश से निर्वासित कर दिया गया।

8. सामूहिकीकरण का विरोध करने वाले किसानों ने तर्क दिया कि वे न तो अमीर हैं तथा न समाजवाद के विरोधी। वे केवल विभिन्न कारणों से सामूहिक खेतों पर काम नहीं करना चाहते।

9. स्तालिन की सरकार ने सीमित स्तर पर स्वतन्त्र खेती करने की आज्ञा दे दी, परन्तु उन किसानों को सरकार द्वारा कोई सहयोग नहीं दिया जाता था।

10. सामूहिकीकरण के बावजूद, उत्पादन में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई। वास्तव में सन् 1930 ई. से सन् 1933 ई. की खराब फसल के बाद रूसी इतिहास का सबसे अधिक तबाही वाला अकाल पड़ा, जिसमें 40 लाख से अधिक लोग भुखमरी के शिकार हो गये।

प्रश्न 4.
सन् 1917 ई. की क्रान्ति का रूस पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
सन् 1917 ई. में रूस में हिंसात्मक क्रान्ति हुई जो बीसवीं शताब्दी के इतिहास की सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना थी। इस क्रान्ति के रूस पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े
1. निरंकुश जारशाही का अन्त:
रूस में सदियों से अत्याचारी तथा निरंकुश जारों का शासन चल रहा था। सन् 1917 ई.की क्रान्ति के बाद रूस में इस निरंकुश शासन का अन्त हो गया। जार निकोलस द्वितीय को अन्तत: पद त्यागना पड़ा।

2. सामन्तशाही की समाप्ति:
इस क्रान्ति के फलस्वरूप रूस में सामन्तवादी व्यवस्था तथा अभिजात्य वर्ग के विशेषाधिकार समाप्त हो गए।

3. साम्राज्यवाद का अन्त:
पोलैण्ड, फिनलैण्ड तथा जार्जिया प्रदेश रूस के उपनिवेश थे। क्रान्ति के बाद उन्हें स्वतन्त्रता दे दी गई। इस प्रकार रूसी साम्राज्यवाद को समाप्त कर दिया गया।

4. साम्यवादी सरकार की स्थापना:
इस क्रान्ति से रूस में व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में नई साम्यवादी सरकार ने देश की बागडोर सँभाली। देश को ‘सोवियत समाजवादी गणराज्यों के संघ’ में परिणत कर दिया गया।

5. शासन में श्रमिकों एवं कृषकों का प्रतिनिधित्व नई शासन व्यवस्था में श्रमिकों एवं कृषकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया।

6. शोषण का अन्त:
इस क्रान्ति के बाद देश की सम्पूर्ण सम्पत्ति तथा उद्योगों पर सरकार का स्वामित्व स्थापित हो गया। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी क्षमता और योग्यता के अनुरूप काम देना राज्य का उत्तरदायित्व हो गया। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के लिए कार्य करना अनिवार्य हो गया।

7. समाजवाद की स्थापना:
इस क्रान्ति के बाद सत्ता में आई नई सरकार ने कार्ल मार्क्स के सिद्धान्तों को कार्यरूप में परिणत कर दिया। उद्योगों तथा बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके वास्तविक रूप में समाजवाद की स्थापना की गई। आर्थिक एवं सामाजिक समानताओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया।

8. रूस का सर्वांगीण विकास:
क्रान्ति से पूर्व रूस अत्यन्त पिछड़ा हुआ देश था, किन्तु क्रान्ति के बाद नई सरकार ने रूस की काया ही पलट दी। रूस का तीव्रता से आर्थिक विकास होता गया एवं कुछ ही वर्षों में यह विश्व का एक शक्तिशाली राष्ट्र बन गया।

9. सामाजिक कल्याण पर बल:
नई सरकार के गठन के बाद देश के सभी संसाधनों का प्रयोग निजी हित के स्थान पर सार्वजनिक हित के लिए किया जाने लगा। काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को रोटी, कपड़ा और मकान देने की जिम्मेदारी सरकार की हो गई।

10. शिक्षा का प्रसार:
साम्यवादी सरकार ने देश में शिक्षा का तीव्रता से प्रसार किया और अनेक नवीन विद्यालय खोले।

11. केन्द्रीकृत नियोजन की व्यवस्था:
रूस में शासन के लिए केन्द्रीकृत नियोजन की व्यवस्था लागू की गई। इस हेतु पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं।

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

प्रश्न 5.
रूस की क्रान्ति के अन्तर्राष्ट्रीय परिणामों की विस्तार से विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सन् 1917 ई. में रूस में जो क्रान्ति हुई, उसका प्रभाव न केवल रूस पर ही पड़ा बल्कि विश्व के अनेक देशों पर भी उसके प्रभाव पड़े। इन प्रभावों का विवरण निम्नलिखित है

1. पूरे विश्व में समाजवादी आन्दोलन का प्रचार-प्रसार:
रूसी क्रान्ति की सफलता से प्रेरित होकर विश्व के अधिकांश देशों में समाजवादी आन्दोलन जोर पकड़ने लगे। रूस इन आन्दोलनों के लिए उस प्रकाश-स्तम्भ का कार्य कर रहा था, जो समुद्र में भटकते हुए जहाजों को मार्ग दिखाता है।

2. किसानों एवं मजदूरों का स्वाभिमान:
रूस में जब किसानों और मजदूरों की सरकार बन गई तब सम्पूर्ण विश्व में यह वर्ग गर्व से सिर उठाकर चलने लगा। विभिन्न देशों में मजदूरों के मजबूत संगठनों का उदय हुआ।

3. आर्थिक नियोजन:
आर्थिक नियोजन के कारण ही रूस की लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था पुनःजीवित हो गई थी। विश्व के अन्य देशों ने भी आर्थिक नियोजन पद्धति अपने देश में लागू करके अपनी आर्थिक दशा को सुदृढ़ किया।

4. दो गुटों का विकास:
रूस की क्रान्ति से प्रभावित होकर विश्व में दो गुट उभरकर सामने आये। वे थे-एक पूँजीवादी और दूसरा समाजवादी। पूँजीवादी समर्थक देशों ने समाजवाद के बढ़ते प्रभाव को रोकने का यथासम्भव प्रयास किया।

5. लोकतन्त्र की नई परिभाषा:
पूँजीवादी समर्थक देशों ने समाजवाद की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर लोकतन्त्र की परिभाषा ही बदल दी। उनके अनुसार सच्चा लोकतन्त्र केवल राजनीतिक स्वतन्त्रता से स्थायी नहीं बनता, जब तक कि उसमें लोगों को आर्थिक एवं सामाजिक शोषण से न बचाया जाए।

6. वर्ग-संघर्ष का उदय:
रूसी क्रान्ति के बाद सम्पूर्ण विश्व में पूँजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग में संघर्ष छिड़ गया। मजदूर अपने अधिकारों के लिए और अधिक सजग हो गए तथा संगठित होकर संघर्ष करने लगे। दूसरी तरफ पूँजीपति और अधिक लाभ कमाने हेतु प्रयास करने लगे।

7. साम्यवादी सरकारों का उदय:
सन् 1917 ई. की रूसी क्रान्ति के बाद रूस में साम्यवादी सरकार की स्थापना हुई। इसके अतिरिक्त विश्व के कई अन्य देशों; जैसे-चीन, वियतनाम इत्यादि देशों में भी साम्यवादी सरकारें स्थापित हो गईं।

8. मानव अधिकारों का सिद्धान्त:
सर्वप्रथम रूस ने इस सिद्धान्त की रक्षा के लिए अपने अधीन उपनिवेशों को मुक्त कर दिया तथा विश्व में चल रहे स्वतन्त्रता आन्दोलनों को नैतिक समर्थन दिया।

9. लोक-कल्याणकारी भावनाओं का उदय:
रूसी सरकार की देखा-देखी विश्व की अन्य देशों की सरकारों ने भी लोक-कल्याणकारी योजनाएं लागू की। इस प्रकार विश्व के अन्य देशों में भी कल्याणकारी योजनाओं का विकास
हुआ।

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-पाठ्य-पुस्तक में दिए गए यूरोप के मानचित्र का अध्ययन कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
1. तटस्थ राज्यों के नाम,
2. केन्द्रीय शक्तियों के नाम,
3. मित्र शक्तियों के नाम।।
उत्तर:

  1. तटस्थ राज्य- स्पेन, हॉलैण्ड, नार्वे, स्वीडन एवं डेनमार्क, स्विट्जरलैण्ड एवं अल्बानिया।
  2. केन्द्रीय शक्तियाँ-जर्मनी, ऑस्ट्रिया एवं हंगरी।
  3. मित्र शक्तियाँ-इंग्लैण्ड, फ्रांस एवं रूस। नोट-विद्यार्थी मानचित्र को पाठ्य-पुस्तक के पृष्ठ संख्या 30 पर देखें।

JAC Class 9 Social Science Solutions

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांत

JAC Board Class 9th Social Science Important Questions History Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
बू| राजवंश का कौन-सा व्यक्ति सन् 1774 फ्रांस की राजगद्दी पर बैठा
(अ) लुई XVI
(ब) लुई x
(स) नेपोलियन
(द) मिराब्यो।
उत्तर:
(अ) लुई XVI

2. नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बना
(अ) सन् 1984 ई. में
(ब) सन् 1804 ई. में
(स) सन् 1815 ई. में
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) सन् 1804 ई. में।

3. फ्रांसीसी क्रान्ति हुई
(अ) सन् 1989 ई. में
(ब) सन् 1789 ई. में
(स) सन् 1946 ई. में
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(ब) सन् 1789 ई. में।

4. राजा के दैवी और निरंकुश अधिकारों का किसने विरोध किया
(अ) जॉन लॉक
(ब) माण्टेस्क्यू
(स) रूसो
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(अ) जॉन लॉक।

5. वॉटर लू की लड़ाई में किसकी पराजय हुई
(अ) नेपोलियन की
(ब) रूसो की
(स) रोबेस्प्येर की
(द) डेस्मॉलिन्स की।
उत्तर:
(अ) नेपोलियन की।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लुई सोलहवाँ फ्रांस की राजगही पर कब्य आसीन हुआ?
उत्तर:
लुई सोलहवाँ फ्रांस की राजगढी पर सन् 1774 ई. में आसीन हुआ।

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प्रश्न 2.
फ्रांसीसी क्रान्ति की शुरुआत किस दिन हुई?
उत्तर:
14 जुलाई, सन् 1789 ई. को।

प्रश्न 3.
लोगों के समूह ने किस किले की जेल को तोड़ डाला?
उत्तर:
बास्तील किले की जेल को लोगों के समूह ने तोड़ छाला।

प्रश्न 4.
फ्रांस का राष्ट्रीय गान कौन-सा है?
उत्तर:
‘मार्सिले’ क्रांस का राष्ट्रीय गान है।

प्रश्न 5.
‘मार्सिले ‘ को किसने लिखा था?
उत्तर:
रॉजेट दि लाइल ने।

प्रश्न 6.
प्रांस के राष्ट्रगान को प्रथम ब्वार कब और किसने गाया?
उत्तर:
फ्रांस के राष्ट्रगान को अप्रैल सन् 1792 .ई को मार्सिलेस के स्वर्यंसेवों ने पेरिस की ओर प्रस्थान करते हुए गाया था।

प्रश्न 7.
प्रांस के दार्शनिकों ने कैसे समाज की परिकल्पना की?
उत्तर:
स्वतन्त्रता, समान नियम एवं समान अवसरों के बिचार पर आधारित समाज की।

प्रश्न 8.
फ्रांस की क्रान्ति का प्रमुख राजनीतिक कारण क्या था?
उत्तर:
सम्राट की निरंकुशता एवं उसका विलासिता-पूर्ण जीवन व्यतीत करना।

प्रश्न 9.
प्रांस की क्रान्ति का प्रमुख आर्थिक कारण क्या था?
उत्तर:
जनता पर करों का अंत्यधिक बोझ एवं पावरोटी की कीमतों का महँगा होना।

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प्रश्न 10.
क्रान्ति से पूर्व फ्रांसीसी समाज कितने एस्टेद्स में विभाजित था? नाम लिखें।
उत्तर:
क्रान्ति से पूर्व फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेद्स

  1. प्रथम एस्टेट-पादरी वर्ग।
  2. दितीय एस्टेट-कुलीन वर्ग।
  3. तृतीय एस्टेट-जनसाधारण लोग।

प्रश्न 11.
प्रांस की क्रान्ति को किन प्रमुख दार्शनिकों ने प्रभावित किया?
उत्तर:
रुसो, जॉन लॉक एवं मॉन्टेस्त्यू आदि दार्शनिकों ने।

प्रश्न 12.
जॉन लॉक द्वारा लिखित पुस्तक का क्या नाम है?
उत्तर:
दू ट्रीटाइजेज अंक गवर्नमेण्ट।

प्रश्न 13.
मॉन्टेस्क्यू द्वारा लिखित ग्रत्थ का नाम लिखिए।
उत्तर:
द स्पिरिंट ऑफ द लोंज।

प्रश्न 14.
फ्रांस में सरकार के अन्दर सत्ता विभाजन की बात किसने की?
उत्तर:
मांन्टेस्क्यू ने।

प्रश्न 15.
नैशनल असेम्बली ने संखिधान का प्रारूप कब पूरा किया?
उत्तर:
सन् 1791 ई. में।

प्रश्न 16.
फ्रांसीसी क्रान्ति से पूर्व फ्रांसीसी समाज का एकमात्र कौन-सा वर्ग सरकार को कर चुकाता था?
उत्तर:
तृतीय एस्टेट के जनसाधारण लोग।

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प्रश्न 17.
फ्रांसीसी समाज की वर्ग ख्यवस्था में सर्वाधिक संख्या किन लोगों की थी?
उत्तर:
किसानों की लगभग 90 प्रतिशत।

प्रश्न 18.
रूसो द्वारा लिखित पुस्तक का नाम ब्वताइए।
उत्तर:
द सोशल कौन्ट्रैक्ट।

प्रश्न 19.
किस एस्टेट के प्रतिनिधि स्वर्यं को सम्पूर्ण फ्रांसीसी राष्ट्र का प्रवक्ता मानते थे?
उत्तर:
तृतीय एस्टेट्स के प्रतिनिधि।

प्रश्न 20.
20 जून, सन् 1789 ई. को बर्साय के इन्डोर टेनिस कोर्ट में तृतीय एस्टेट्स के प्रतिनिधियों का नेत्त्व किसने किया?
उत्तर:
मिराब्यो और ऑबेसिए ने।

प्रश्न 21.
लाल फ्राइजियन टोपी क्या है?
उत्तर:
दासों द्वारा स्वतन्य होने के बाद पहनी जाने वाली टोपी को लाल फ्राइजियन टोपी के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 22.
फ्रांस में राजदण्ड किसका प्रतीक था?
उत्तर:
फ्रांस में राजदप्ड शाही सत्ता का प्रतीक था।

प्रश्न 23.
अठारहर्वी शताब्दी में जनत्ता में महत्वपूर्ण विचारों का प्रचार-प्रसार करने के लिए किसका प्रयोग किया जाता था ?
उत्तर:
आकृतियों और प्रतीकों का।

प्रश्न 24.
फ्रांस में ड्लेनों वाली रती किसका प्रतीक थी?
उत्तर:
कानून के मानवीय रूप का।

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प्रश्न 25.
फ्रांस में नव्रनिवाधित असेम्बली को किस नाम से पुकारा गया?
उत्तर:
कन्वेशन के नाम से।

प्रश्न 26.
फ्रांस को कब गणतन्त्र घोषित किया गया?
उत्तर:
21 सितम्बर, सन् 1792 ई. को।

प्रश्न 27.
फ्रांस की क्रान्ति के दो प्रमुख परिणाम क्या हुए?
उत्तर:

  1. पादरी, सामन्त एवं कुलीन वर्ग के अधिकारों का अन्त।
  2. प्रांसीसी लोगों को सप्राट के निरंकुश शासन से मुक्ति।

प्रश्न 28.
विधियट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
विधिपट का तात्पर्य है कि कानून सबके लिए समान है एवं इसकी नज़र में सब बराबर हैं।

प्रश्न 29.
टूटी हुई जंजीर से क्या तात्पर्य था?
उत्तर:
टूटी हुई जंजोर से तात्पर्य दासों की आजादी से था।

प्रश्न 30.
फ्रांसीसी उपनिवेशों में दास व्यापार की समाप्ति कब हुर्श?
उत्तर;
सन् 1848 ईं. में।

प्रश्न 31.
सम्राट लुईं सोलहवें को कब फाँसी दी गई?
उत्तर:
21 जनवरी, सन् 1793 ई, को।

प्रश्न 32.
रोबेस्प्येर को कब गिलोटिन पर चढ़ाया गया?
उत्तर:
जुलाई, सन् 1794 ई. में।

प्रश्न 33.
जैफोबन क्या था? इसके नेता का नाम लिखिए।
उत्तर:
जैकोधिन सम्पन्न वर्ग से सम्बन्धित फ्रांस के नेताओं का क्लब था। इसका नेता मैक्समिलियन रोबेस्प्येर था।

प्रश्न 34.
त्रिकोणीय दास व्यापार में कौन-कौन से महाद्वीप सम्मिलित थे?
उत्तर:
यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका।

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प्रश्न 35.
जैकोचिन शासन का क्रान्तिकारी सामाजिक सुधार कौन-सा था?
उत्तर:
दास प्रथा का उन्मूलन करना।

प्रश्न 36.
प्रांस में महिलाओं को मत देने का अधिकार कब् मिला?
उत्तर:
सन्, 1946 ई. में।

प्रश्न 37.
फ्रांस का सबसे प्रसिद्ध महिला क्लब कौन-सा था?
उत्तर:
‘”द सोसाइटी अंफ रिवोल्यूशनरी एण्ड़्ड रिपष्लिकन विमेन'”।

प्रश्न 38.
नेपोलियन का पत्तन कब एर्व कहाँ हुआ?
उत्तर:
नेपोलियन का पतन सन् 1815 ई, में वॉटर लू के युद्ध में हुआ।

प्रश्न 39.
फ्रांस में सेंसरशिप की समाप्ति कब हुई?
उत्तर:
सन् 1789 ई. में।

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प्रश्न 40.
नेपोलियन द्वारा किये गये किन्हीं दो महत्वपूर्ण कार्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. निजी सम्पत्ति की सुरक्षा के कानून बनाना।
  2. दशमलव पद्धति पर आधारित नाप-तौल की एक समान प्रणाली चलाना।

प्रश्न 41.
फ्रांसीसी क्रान्ति में उपजे विचारों से प्रेरणा लेने वाले किनहीं दो भारतीयों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. टीपू सुल्तान,
  2. राजा राममोहन राय।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अठारहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में फ्रांस की आर्थिक दशा को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
लम्बे समय तक चले युद्धों के कारण फ्रांस के वित्तीय संसाधन नष्ट हो चुके थे। फ्रांस के सम्राटों के ऐश्वर्य एवं विलासितापूर्ण जीवन ने फ्रांस की आर्थिक दशा को और भी अधिक खराब कर दिया था। फ्रांसीसी सरकार अपने बजट का बड़ा भाग कर्ज चुकाने हेतु व्यय करने के लिए मजबूर थी। अपने नियमित खर्चों

जैसे-सेना के रख-रखाव, राजदरबार, सरकारी कार्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को चलाने के लिए फ्रांसीसी सरकार ने जनता पर और अधिक करों का बोझ डाल दिया, लेकिन उच्च वर्ग के लोगों को कोई ‘कर’ नहीं देना पड़ता था। जनता से लिए गए करों की सम्पूर्ण राशि भी सरकारी खजाने में जमा नहीं होती थी, क्योंकि सरकारी अधिकारियों पर किसी भी प्रकार का कोई नियन्त्रण नहीं था। इस प्रकार अठारहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में फ्रांस की आर्थिक दशा अत्यन्त खराब थी।

प्रश्न 2.
अठारहवीं शताब्दी में फ्रांस की सामाजिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सन् 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रान्ति से पूर्व फ्रांस का समाज निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित था

  1. पादरी वर्ग-इस वर्ग में चर्च के उच्च श्रेणी के पादरी थे। उन्हें कई विशेषाधिकार प्राप्त थे तथा कोई ‘कर’ नहीं देना पड़ता था। इस वर्ग में सम्मिलित लोग धनी थे और विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।
  2. कुलीन वर्ग-इस वर्ग में उच्च सरकारी अधिकारी एवं बड़े-बड़े जमींदार होते थे। उन्हें भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। वे कृषकों से सामन्ती ‘कर’ वसूल करते थे। इतना ही नहीं, इन लोगों के पास अपनी-अपनी जागीरें होती थीं।
  3. साधारण वर्ग-इस वर्ग में किसान, कारीगर, छोटे कर्मचारी, मजदूर, वकील तथा डॉक्टर आदि शामिल थे। इन लोगों पर करों का अत्यधिक बोझ था, इसके अतिरिक्त इनसे बेगार भी ली जाती थी। यह फ्रांस का सबसे असन्तुष्ट वर्ग था। इस वर्ग में सबसे बड़ा भाग किसानों का था, यह वर्ग अधिकारों से विहीन था। फ्रांस की राज्य-क्रान्ति के विस्फोट में इस वर्ग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 3.
फ्रांस के इतिहास में 14 जुलाई सन् 1789 का क्या महत्व है?
उत्तर:
फ्रांस के इतिहास में 14 जुलाई सन् 1789 का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन फ्रांस के क्रान्तिकारियों ने बास्तील के किले पर विजय प्राप्त की थी। बास्तील फ्रांस का एक अति प्राचीन किला था, जिसमें राजनीतिक कैदियों को रखा जाता था। इस किले को राजाओं की निरंकुशता तथा स्वेच्छाचारिता का प्रतीक समझा जाता था। पेरिस की भीड़ ने 14 जुलाई, सन् 1789 ई. के दिन तेजी के साथ बास्तील के किले पर आक्रमण कर दिया। विश्व के इतिहास में यह महत्वपूर्ण एवं अनुपम घटना थी। फ्रांस में यह लोकतन्त्रवाद की विजय एवं निरंकुशवाद की पराजय थी।

प्रश्न 4.
सन् 1789 ई.के बाद के वर्षों में, फ्रांस में पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों के जीवन में अनेक परिवर्तन आए। क्रान्तिकारी सरकारों ने कानून बनाकर स्वतन्त्रता एवं समानता के आदर्शों को दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास किया। ऐसे किन्हीं दो कानूनों का उल्लेख करें।
उत्तर:
1. सैंसरशिप की समाप्ति:
क्रान्ति से पूर्व, सभी लिखित सामग्री का प्रकाशन राजा की सहमति के बाद ही हो सकता था, परन्तु क्रान्ति के तत्काल बाद स्वतन्त्रता तथा समानता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, सैंसरशिप को समाप्त कर दिया गया।

2. साहित्य एवं प्रेस जगत् में क्रान्ति:
सैंसरशिप की समाप्ति के बाद अब प्रेस स्वतन्त्र था। प्रेस की स्वतन्त्रता का अर्थ था कि अब घटनाओं के विरोधी विचार भी अभिव्यक्त किए जा सकते थे। राजनीतिक, दार्शनिक तथा लेखक अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतन्त्र थे। फ्रांस में अखबारों, पर्यों एवं पुस्तकों का प्रचार-प्रसार होने लगा।

प्रश्न 5.
फ्रांसीसी क्रान्ति में मध्यम वर्ग ने क्या भूमिका निभाई?
उत्तर:
अठारहवीं शताब्दी में उदय हुए समाज के मध्यम वर्ग में सभी पढ़े-लिखे लोग थे। इनका मानना था कि समाज के किसी भी व्यक्ति के पास जन्म से विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। सभी विचारक और दार्शनिक इसी वर्ग से थे। इस वर्ग ने क्रान्ति के लिए वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार की इसके परिणामस्वरूप अन्ततः क्रान्ति हुई।

JAC Class 9 Social Science Important Questions History Chapter 1 फ्रांसीसी क्रांत

प्रश्न 6.
फ्रांसीसी क्रान्ति में जैकोबिन की क्या भूमिका थी?
उत्तर:
फ्रांसीसी क्रान्ति में जैकोबिन की निम्नलिखित भूमिका थी

  1. जैकोबिन लोगों के राजनीतिक क्लब थे। लोग इन राजनीतिक क्लबों में अड्डे जमा कर सरकारी नीतियों और अपनी कार्य योजना पर बहस करते थे।
  2. मैक्समिलियन रोबेस्प्येर उनका नेता था। जैकोबिन के एक बड़े वर्ग ने गोदी कामगारों की तरह धारीदार लम्बी पतलून पहनने का निर्णय किया।
  3. सन् 1792 ई. में, जैकोबिन ने राजतन्त्र को समाप्त करने के लिए हिंसक विद्रोह की योजना बनाई।
  4. जैकोबिन ने सन् 1793 ई. से सन् 1794 ई. तक फ्रांस पर शासन किया।

प्रश्न 7.
सन् 1791 ई. के फ्रांस के संविधान की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
सन् 1791 ई. के फ्रांस के संविधान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इसके द्वारा फ्रांस को एक संवैधानिक राजतन्त्र घोषित किया गया।
  2. सम्राट की शक्तियों को सीमित कर दिया गया, उसकी भूमिका अब केवल नाममात्र की रह गई। उसके पास वास्तविक राजनीतिक सत्ता अब नहीं थी।
  3. 25 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे नागरिकों को मत देने का अधिकार दिया गया जो कम से कम तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे। इनके द्वारा निर्वाचक समूह का चुनाव किया जाता था।
  4. नेशनल असेम्बली को कानून बनाने का अधिकार दिया गया। जिसके सदस्यों का चुनाव निर्वाचक द्वारा किया जाता था।
  5. सरकार की शक्ति को कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका के बीच विभाजित कर दिया गया।
  6. संविधान के अनुसार सभी नागरिकों के प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करने का उत्तरदायित्व सभी राज्यों का है।

प्रश्न 8.
फ्रांस के इतिहास में कौन-सा काल ‘आतंक का राज’ के नाम से जाना जाता है? इस काल की प्रमुख बातों को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
सन् 1793 ई. से सन् 1794 ई. तक का काल ‘आतंक का राज’ के नाम से जाना जाता है। इस काल की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं
1. इस काल के दौरान रोबेस्प्येर ने कठोर नियन्त्रण तथा दण्ड की सख्त नीति को अपनाया।

2. उन सभी को, जिन्हें वह गणतन्त्र के शत्रु के रूप में देखता था अर्थात् कुलीन तथा पादरी, अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य, अपने ही दल के सदस्य, जो उसकी नीतियों से सहमत न थे, गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया तथा क्रान्तिकारी अदालत द्वारा उन पर मुकदमा चलाया गया। यदि अदालत द्वारा दोषी पाया जाता तो उन्हें गिलोटिन पर चढ़ाकर मार दिया जाता था।

3. गोश्त तथा पावरोटी की राशनिंग कर दी गई। किसानों को अपने अनाज को शहरों में ले जाने तथा सरकार द्वारा निश्चित कीमत पर बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। अधिक महँगे सफेद आटे के उपयोग को वर्जित कर दिया गया, सभी नागरिकों को साबुत गेहूँ से बनी और बराबरी का प्रतीक मानी जाने वाली ‘समता रोटी’ खाना अनिवार्य कर दिया गया।

प्रश्न 9.
डिरेक्ट्री शासित फ्रांस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जैकोबिन सरकार के पतन के बाद फ्रांस की सत्ता मध्यम वर्ग के सम्पन्न लोगों के हाथ में आ गई। सन् 1795 ई. में फ्रांस में नया संविधान तैयार किया गया। नये संविधान के प्रावधानों के तहत् सम्पत्तिविहीन वर्ग के लोगों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया। नवीन संविधान में दो चुनी गई विधान परिषदों के गठन का प्रावधान था। इन परिषदों ने पाँच सदस्यों वाली एक कार्यपालिका को नियुक्त किया। इसे ही ‘डिरेक्ट्री’ कहा गया।

इस व्यवस्था के अन्तर्गत किसी एक व्यक्ति के हाथ में शक्तियों के केन्द्रीकरण पर रोक लगायी गयी। इन डिरेक्टरों से अपेक्षा थी कि वे देश में कानून व्यवस्था की दशा सुधारेंगे लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। डिरेक्टरों का झगड़ा अक्सर विधान परिषदों से होता था और तब परिषद् उन्हें बर्खास्त करने की कोशिश करती। डिरेक्टरों की राजनीतिक अस्थिरता ने सैनिक तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।

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प्रश्न 10.
ओलम्पदे गज के घोषणा-पत्र में दिए गए स्त्रियों के मूल अधिकारों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
ओलम्प दे गूज एक महान क्रांतिकारी फ्रांसीसी महिला थी, जिसने फ्रांस की महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। उसके घोषणा-पत्र में दिए गए स्त्रियों के कुछ मूल अधिकार निम्नलिखित थे

  1. महिला जन्मना स्वतन्त्र है और उसके अधिकार भी पुरुष के समान होते हैं।
  2. सभी राजनीतिक संस्थाओं का लक्ष्य महिला और पुरुष के नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा करना होता है। ये अधिकार–स्वतन्त्रता, सम्पत्ति, सुरक्षा और सबसे बढ़कर शोषण के प्रतिरोध का अधिकार हैं।
  3. ‘कानून’ सामान्य इच्छा की अभिव्यक्ति होना चाहिए। सभी महिला एवं पुरुष नागरिकों की या तो व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि-निर्माण में भागीदारी होनी चाहिए।
  4. सभी महिला और पुरुषों को उनकी योग्यता के अनुसार सम्मान तथा सार्वजनिक पद मिलने चाहिए।
  5. कानून की दृष्टि से महिला अपवाद नहीं है। वह विधि-सम्मत प्रक्रिया द्वारा अपराधी लहराई जा सकती है, गिरफ्तार और नजरबन्द की जा सकती है। अत: पुरुषों की भाँति महिलाएँ भी इस कङ्गोर कानून का पालन करें।

प्रश्न 11.
फ्रांस में ‘दास-प्रथा का उन्मूलन’ विषय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जैकोबिन शासन के दौरान फ्रांसीसी उपनिवेशों में सामाजिक सुधार के अनेक कार्यक्रम आरम्भ किए गए, जिसमें दास-प्रथा का उन्मूलन एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार कार्यक्रम था। फ्रांस में अठारहवीं सदी में दास-प्रथा की अधिक आलोचना नहीं हुई। नेशनल असेम्बली में इस बात पर बहस हुई कि फ्रांसीसी उपनिवेशों में रहने वाले लोगों सहित समस्त फ्रांसीसी जनता को मूलभूत अधिकार प्रदान किए जाएँ अथवा नहीं, परन्तु दास व्यापार पर निर्भर व्यक्तियों के विरोध के कारण नेशनल असेम्बली में दास-प्रथा से सम्बन्धित कोई कानून पास नहीं किया जा सका।

बाद में सन् 1794 ई. के अधिवेशन में फ्रांसीसी उपनिवेशों में निवास करने वाले सभी दासों की मुक्ति का कानून पास कर दिया परन्तु यह कानून अधिक समय तक लागू नहीं रह सका। दस वर्ष पश्चात् नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस में दास-प्रथा को पुनः आरम्भ कर दिया, जिसके कारण बागान मालिकों को अपने आर्थिक हित साधने के लिए अफ्रीकी नीग्रो लोगों को दास बनाने की स्वतन्त्रता मिल गई। सन् 1848 ई. में फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास-प्रथा को पूर्णरूप से समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 12.
नेपोलियन बोनापार्ट के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
सन् 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रान्ति का एक अप्रत्यक्ष परिणाम सैनिक तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट का उदय था। नेपोलियन ने फ्रांस की राजनीतिक एवं आर्थिक अस्थिरता का लाभ उठाकर सेना की मदद से सत्ता पर अधिकार कर लिया। उसने सन् 1804 ई. में स्वयं को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया।

उसने पड़ोसी यूरोपीय देशों पर विजय प्राप्त की तथा पुराने राजवंशों को हटाकर नया साम्राज्य स्थापित किया। सन् 1815 ई. में वॉटर लू के युद्ध में बुरी तरह पराजित हुआ और कालान्तर में नेपोलियन की मृत्यु हो गयी। नेपोलियन के क्रांतिकारी कार्यों का असर उसकी मृत्यु के काफी समय बाद सामने आया।

प्रश्न 13.
नेपोलियन स्वयं को यूरोप के आधुनिकीकरण के अग्रदूत के रूप में देखता था। इस कथन को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. यूरोप में बहुत बड़ी संख्या में लोग नेपोलियन को मुक्तिदाता के रूप में देखते थे, जो लोगों के लिए स्वतन्त्रता लाने वाला था।
  2. नेपोलियन ने कई कानून लागू किए, जिनमें निजी सम्पत्ति की सुरक्षा से सम्बन्धित कानून प्रमुख है।
  3. उसने माप एवं तौल की एक समान प्रणाली को लागू किया जो दशमलव पद्धति पर आधारित थी।
  4. नेपोलियन की मृत्यु के बाद भी उसके स्वतन्त्रता सम्बन्धी क्रान्तिकारी विचारों तथा आधुनिक कानूनों को फैलाने वाले क्रान्तिकारी उपायों का प्रभाव लम्बे समय तक लोगों के दिलों पर छाया रहा।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सन् 1789 ई. में फ्रांसीसी क्रान्ति के लिए उत्तरदायी राजनीतिक कारणों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
फ्रांस की क्रान्ति के लिए उत्तरदायी राजनीतिक कारण निम्नलिखित थे
1. युद्धों से फ्रांस की वित्तीय स्थिति का बिगड़ना:
अनेक युद्धों में सम्मिलित होने के कारण फ्रांस अराजकता की ओर बढ़ने लगा था। लुई सोलहवें के शासन के दौरान फ्रांस ने ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी उपनिवेशों का साथ दिया। इन युद्धों के बाद फ्रांस का खजाना खाली हो गया। फ्रांस को अपने मित्र राष्ट्रों से कर्ज लेना पड़ा, जो उसने कभी वापस नहीं किया। देश की वित्तीय दशा खराब थी।

2. निरंकुश राजतन्त्र:
तत्कालीन यूरोप के लगभग सभी देशों में निरंकुश राजतन्त्र की ही सत्ता थी। फ्रांस में भी निरंकुश राजतन्त्र ही शासन का स्वरूप था। सम्राट प्रजा के हितों की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था, जो क्रान्ति का मुख्य कारण बना।

3. राज्य के मामलों में रानी का हस्तक्षेप:
राजा पर उसकी ऑस्ट्रियन रानी मेरी एन्तोएनेत का काफी प्रभाव था। रानी रियासत की महत्वपूर्ण नियुक्तियों में अपने कृपापात्रों को बढ़ाने के लिए हस्तक्षेप करती थी। राजा पर उसका प्रभाव देश के लिए विनाशकारी साबित हुआ।

4. क्रूर एवं भ्रष्ट प्रशासन:
फ्रांस में प्रशासन भ्रष्ट एवं निरंकुश था। कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता था। लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाता था। जुर्माने का काफी भाग न्यायाधीशों की जेब में चला जाता था। बिना किसी कानूनी अध्यादेश के राजा किसी की भी सम्पत्ति जब्त कर सकता था।

5. कछ लोगों के लिए विशेषाधिकारों का होना:
प्रथम दो एस्टेट्स कुलीन वर्ग एवं पादरी वर्ग को जन्म से ही विशेषाधिकार प्राप्त थे उन्हें कर से छूट थी तथा तृतीय एस्टेट के जनसाधारण लोगों से ही कर लिया जाता था जिससे उनमें असन्तोष का भाव था।

प्रश्न 2.
फ्रांस की क्रान्ति के परिणामों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सन् 1789 ई. की फ्रांस की क्रान्ति विश्व की महानतम घटना थी। इसके मुख्य परिणाम निम्नलिखित थे

  1. इस क्रान्ति ने सदियों से चली आ रही यूरोप की पुरातन व्यवस्था का अन्त कर दिया।
  2. इस क्रान्ति ने फ्रांस में लम्बे समय से चली आ रही सामन्ती व्यवस्था का अन्त कर दिया।
  3. फ्रांस के क्रान्तिकारियों द्वारा की गई ‘मानव अधिकारों की घोषणा’ (27 अगस्त, सन् 1789 ई.), मानव जाति की स्वतन्त्रता के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण थी।
  4. इस क्रान्ति ने समस्त यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का विकास और प्रसार किया। परिणामस्वरूप यूरोप के अनेक देशों में क्रान्तियों का सूत्रपात हुआ।
  5. इस क्रान्ति ने लोकप्रिय सम्प्रभुता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।
  6. फ्रांस की क्रान्ति ने धर्मनिरपेक्ष राज्य की अवधारणा को जन्म दिया।
  7. इस क्रान्ति ने इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड तथा अन्य यूरोपीय देशों की विदेश नीति को प्रभावित किया।
  8. फ्रांसीसी क्रान्ति ने मानव जाति को स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व का नारा प्रदान किया।
  9. इस क्रान्ति के फलस्वरूप फ्रांस ने कृषि, उद्योग, कला, साहित्य, शिक्षा एवं सैन्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की।
  10. कुछ विद्वानों के अनुसार फ्रांस की क्रान्ति समाजवादी विचारधारा का स्रोत थी, क्योंकि इसने समानता का सिद्धान्त प्रतिपादित कर समाजवादी व्यवस्था का मार्ग भी खोल दिया था।
  11. इस क्रान्ति के परिणामस्वरूप महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  12. दास प्रथा का उन्मूलन भी इसी क्रान्ति का परिणाम था।

प्रश्न 3.
क्रान्ति से पहले तथा बाद में फ्रांस की राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की तुलना करें।
उत्तर:
क्रान्ति से पहले तथा बाद में फ्रांस की राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की तुलना निम्न प्रकार से हैक्रान्ति से पहले क्रान्ति के बाद राजनीतिक परिस्थितियाँ :

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प्रश्न 4.
फ्रांसीसी क्रान्ति से पूर्व, क्रान्ति के दौरान एवं क्रान्ति के बाद में फ्रांसीसी महिलाओं की स्थिति की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अधिकांश इतिहासकार इस तथ्य को मानते हैं कि सन् 1789 ई. की क्रान्ति के आरम्भ से ही वहाँ की महिलाएँ समाज में अहम् परिवर्तन लाने वाली गतिविधियों से जुड़ी हुई थीं। उनकी सक्रिय रुचि तथा भूमिका के कारण ही फ्रांसीसी समाज में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन आए। क्रान्ति से पूर्व, क्रान्ति के दौरान एवं क्रान्ति के बाद में फ्रांसीसी महिलाओं की स्थिति निम्न प्रकार थी

1. क्रान्ति से पूर्व तृतीय एस्टेट्स की महिलाएं अपनी जीविका के लिए काम करती थीं। वे धनवान लोगों के घरों में घरेलू नौकरों के रूप में काम करती थीं अथवा वे सिलाई-बुनाई, कपड़ों की धुलाई करती एवं बाजार में सब्जियाँ, फूल और फल बेचती थीं।

2. क्रान्ति के दिनों से पूर्व एवं उसके दौरान फ्रांस की अधिकांश महिलाएँ न तो अच्छी शिक्षा संस्थाओं और न ही व्यावसायिक प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं तक पहुँचती थीं इसीलिए अच्छी या उच्च नौकरियाँ उनकी पहुँच से बाहर थीं। केवल कुलीन तथा धनी मध्यम वर्गों की महिलाएँ ही कॉन्वेण्ट में शिक्षा प्राप्त करती थीं तथा शिक्षा समाप्ति के बाद उनके अभिभावक ही उनकी शादी के बारे में निर्णय लेते थे।

3. जो भी महिलाएँ काम करती थीं उनका जीवन बहुत ही कठोर होता था, क्योंकि उन्हें घर से बाहर न केवल नौकरी करनी होती थी, बल्कि घर के अन्दर भी उन्हें अपने-अपने परिवारों की देख-भाल करनी होती थी। उन्हें खाना पकाना होता था, पानी लाना होता था, पावरोटी के लिए लम्बी-लम्बी लाइनों में खड़ा होना पड़ता तथा छोटे-छोटे बच्चों का लालन-पालन एवं देख-भाल करनी पड़ती थी।

4. महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता था।

5. क्रान्ति के दिनों में ही फ्रांसीसी महिलाओं ने अपनी आवाज बुलन्द करने के लिए समाचार पत्र निकाले एवं राजनीतिक क्लब बनाये। फ्रांस के विभिन्न शहरों एवं कस्बों में लगभग 60 क्लब बनाये गये। इन सभी क्लबों में ‘द सोसायटी ऑफ रिवोल्यूशनरी एण्ड रिपब्लिक विमेन’ सर्वाधिक प्रसिद्ध क्लब था।

6. फ्रांसीसी महिलाओं ने अपने समाचार-पत्रों तथा राजनीतिक क्लबों के माध्यम से अपनी अनेक राजनीतिक एवं आर्थिक माँगें रखी थीं। उदाहरणार्थ, उनकी एक महत्वपूर्ण माँग यह थी कि उन्हें भी पुरुषों के बराबर अधिकार प्राप्त हों। फ्रांस की सभी महिलाओं को वे सभी अधिकार समान रूप से दिये जायें, जो सन् 1791 ई.के संविधान द्वारा पुरुषों को दिए गए हैं। उन्होंने मत देने का अधिकार, चुनाव लड़ने के अधिकार के साथ राजनीतिक पदों पर नियुक्त होने के अधिकार की भी माँग की।

7. प्रारम्भिक वर्षों में, क्रान्तिकारी सरकार ने महिलाओं की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से कानूनों को लागू किया तथा उनके जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से राजकीय विद्यालय खोले तथा सभी लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य कर दिया गया।

8. राजनैतिक अधिकारों के लिये महिलाओं का संघर्ष बाद में भी उन्नीसवीं सदी के अन्त एवं बीसवीं सदी के प्रारम्भ तक अन्तर्राष्ट्रीय मताधिकार आन्दोलन के जरिये जारी रहा। अन्ततः सन् 1946 में फ्रांस की महिलाओं ने मताधिकार हासिल कर लिया।

9. फ्रांस में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक कदम उठाये गये

  1. उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके पिता उन्हें विवाह के लिए विवश नहीं कर सकते थे।
  2. नागरिक कानून के अधीन शादी को एक समझौता बनाने के लिए उसका पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया।
  3. तलाक को कानूनी रूप दे दिया गया तथा इसके लिए प्रार्थना-पत्र देने का अधिकार पुरुषों एवं महिलाओं दोनों को समान रूप से दिया गया।
  4. अब नौकरियों के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा सकता था, वे कलाकार भी बन सकती थीं तथा छोटे-मोटे व्यापार भी कर सकती थीं।

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प्रश्न 5.
नेपोलियन की साम्राज्यवादी नीति का वर्णन कीजिए। यह नीति नेपोलियन के पतन में किस सीमा तक सहायक रही?
उत्तर:
नेपोलियन अत्यधिक महत्वाकांक्षी व्यक्ति था। उसमें साम्राज्यवादी भावना कूट-कूट कर भरी थी। उसके पतन का एक प्रमुख कारण उसका सैनिकवाद था। उसका साम्राज्यवाद सैनिक शक्ति पर आधारित था। फ्रांस के सैनिकवाद ने ही नेपोलियन के उत्थान को सम्भव बनाया था।

राष्ट्रीय सम्मेलन ने भी सैनिकवाद को प्रोत्साहन दिया और डिरेक्ट्री के शासन काल में नेपोलियन ने सैनिकवाद को चरम सीमा पर पहुँचाने का कार्य अपने हाथ में ले लिया। उसकी निरन्तर विजयों ने फ्रांस की सैनिक शक्ति का अत्यधिक विस्तार कर दिया और अब फ्रांस अपनी सैनिक शक्ति के बल पर यूरोप के अन्य राज्यों में अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगा।

सैनिकवाद के प्रसार ने यूरोप में भीषण युद्धों को जन्म दिया, जिनमें फ्रांस की सैनिक शक्ति निरन्तर कम होती गई। नेपोलियन ने सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस में सैनिक सेवा अनिवार्य कर दी। उसने युवा तथा वृद्ध सभी को सेना में भर्ती होने के लिए विवश किया, परन्तु उसकी यह नीति अधिक समय तक सफल न हो सकी जो अन्त में उसके लिए विनाशकारी सिद्ध हुई।

उसने अपनी असीमित साम्राज्यवादी लिप्सा को पूरा करने के लिए इंग्लैण्ड के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की, लोग उसकी सेनाओं को हमलावर मानने लगे और इसी के फलस्वरूप उसका पतन हो गया। अत: नेपोलियन की महत्वाकांक्षा, युद्धप्रियता एवं सैनिकवाद ने उसके पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मानचित्र सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ्य-पुस्तक में दिये गये मानचित्र को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
1. लूहांस किस दिशा में स्थित है?
उत्तर:
लूहांस पूर्व दिशा में स्थित है।

2. क्रान्ति के समय भगदड़ वाले 4 क्षेत्रों के नाम।
उत्तर:
लूहांस, एस्त्रीस, नातेस, रोमीली। नोट-विद्यार्थी मानचित्र को पाठ्य-पुस्तक की पृष्ठ संख्या 9 पर देखें।

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