JAC Class 9 Hindi व्याकरण अनुस्वार एवं अनुनासिक

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Vyakaran अनुस्वार एवं अनुनासिक Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 9 Hindi Vyakaran अनुस्वार एवं अनुनासिक

अनुस्वार, अनुनासिक –

हिंदी में अनुस्वार और अनुनासिक का प्रायः प्रयोग किया जाता है।
अनुस्वार का उच्चारण इ इ, ण्, च, म् के समान होता है। जैसे – कंघी (कड्घी), गंजा (गज्जा), घंटी (घण्टी), संत (सल), पंप (पम्प) अनुस्वार के साथ मिलती-जुलती एक ध्वनि अनुनासिक भी है, जिसका रूप ‘ज’ है। इन दोनों में भेद केवल यह है कि जनस्वार की ध्वनि कठोर होती है और अनुनासिक की कोमल। अनुस्वार का उच्चारण नाक से होता है और अनुनासिक का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से होता है। जैसे-हँस और हंस। हँस का अर्थ है-हँसना और हंस का अर्थ है-एक प्रकार का पक्षी।

हिंदी मानक लिपि में बिंदु –

(क) पंचमाक्षों (ङ, उ, ण, न, म) का जब अपने वर्ग के वर्णों के साथ संयोग होता है तब उनके स्थान पर अनुस्वार (-लिखा जाता है । जैसे –

  • दन्त = दंत
  • चज्वल = चंचल
  • ठण्डा = ठंडा
  • कड्यी = कंघी
  • पम्प = पंप
  • कन्द्रा = कंधा

JAC Class 9 Hindi व्याकरण अनुस्वार एवं अनुनासिक

(ख) य, र, ल, व, श, ष, स, ह के साथ अनुस्वार ही लगता है। जैसे -संयोग, संरक्षण, संसार, संशय, शंका, लंपट, बंदना, संबाद. हुंकार, हंता, रंक, रंज, लंका आदि।
(ग) यदि वर्ण के ऊपर मात्रा लगी हो, तो अनुनासिक (-) का उच्चारण होने पर भी अनुस्वार की बिंदी ही लगेरी। जैंसे-मैं, हैं, बेंमल्ला, सौंफ आदि।
अनुस्वार के प्रयोग संबंधी अन्य उदाहरण –

पुराना रूप – मानक रूप

  • चन्दन – चंदन
  • प्रशान्त – प्रशांत
  • किन्तु – किंतु
  • हिन्दी – हिंदी
  • अन्त – अंत
  • पण्डा – पंडा
  • इन्द्र – इंद्र
  • प्रबन्ध – प्रबंध
  • अन्तर – अंतर
  • सम्बन्धी – संबंधी
  • निरन्तर – निरंतर
  • हिन्दू – हिंदू
  • चिह्न – चिह्न
  • गन्दा – गंदा
  • क्रन्दन – क्रंदन
  • सन्ध्या – संध्या
  • सुन्दर – सुंदर
  • दन्त – दंत
  • अन्तर – अंतर
  • केन्द्र – कैंद्र
  • निन्दनीय – निंदनीय
  • आरम्भ – आरंभ
  • आनन्द – आनंद
  • ठण्डक – एंडक
  • अभिनन्दन – अभिनंद्न
  • सम्भावना – संभावन
  • इप्टरनेशनल – इंटरनेशनल
  • सम्पादक मण्डल – संपादक मंडल
  • प्रेमचन्द – प्रेमचंद
  • सन्दिग्ध – संदिन्ध
  • सन्देह – संदेह
  • अन्दर – अंदर
  • तुरन्त – तुरंत
  • इन्तज़ार – इंतजार
  • सम्भव – संभव
  • सन्देहास्पद – संदेहास्पद्
  • शान्ति – शांति
  • स्वतन्त्र – स्वतंत्र
  • गणतन्त्र – गणतंत्र
  • अम्बाला – अंबाला
  • चण्डीगढ़ – चंडीगढ़
  • मुम्बई – मुंबई
  • हिन्दुस्तान – हिंदुस्तान
  • गान्धी – गांधी
  • सन्दीपन – संदीपन
  • क्रान्ति – क्रांति
  • श्रद्धार्जलि – श्रद्धाजाल
  • दुर्गन्ध – दुर्गंध
  • सन्धि – संधि
  • सन्तोष – संतोष
  • अम्बर – अंबर
  • अझ्ग – अंग
  • कुन्तल – कुंतल
  • अम्भोज – अंभोज
  • निशान्त – निशांत
  • उत्कण्ठा – उत्कंठा
  • पउ्चबाण – पंचबाण
  • लम्बोदर – लंबोदर
  • चन्द्रमा – चंद्रमा
  • कालिन्दी – कालिंदी
  • दन्तच्छद – दंतच्छद
  • नरेन्द्र – नरेंद्र
  • इन्दिरा – इंदिरा
  • सन्तान – संतान
  • वसुन्धरा – वसुंधरा
  • बन्दर – बंदर
  • देहान्त – देहांत
  • कुन्दन – कुंदन
  • किंवदन्ती – किंवर्दंती
  • दम्पति – दंपति
  • पन्द्रह – पंद्रह
  • सम्पत्ति – संपत्ति
  • अनन्त – अनंत
  • इन्द्रियां – इंद्रियाँ
  • पाण्डव – पांडव
  • छन्द – छंद
  • तम्बू – तंबू
  • मन्दिर – मंदिर
  • क्रान्ति – क्रांति
  • अनुकम्पा – अनुकंपा
  • दयानन्द – द्यानंद
  • कवीन्द्र – कवींद्र
  • सम्पदाय – संप्रदाय
  • सम्भावित – संभावित
  • पीताम्बर – पीतांबर
  • परमानन्द – परमानंद्
  • मन्दाकिनी – मंदाकिनी

JAC Class 9 Hindi व्याकरण अनुस्वार एवं अनुनासिक

अनुनासिकता के अशुद्ध प्रयोग संबंधी कुछ शुद्ध उदाहरण –

अशुद्ध – शुद्ध

  • आंगन – आँगन
  • उंगली – उँगली
  • कांटा – काँटा
  • पांव – पाँव
  • चांद – चाँद
  • गांव – गाँव
  • बहुएं – बहुएँ
  • अशुद्ध – शुद्ध
  • खांसी – खाँसी
  • टांक – टाँक
  • फंसा – फँसा
  • संभल – सँभल
  • सांप – साँप
  • नदियां – नदियाँ

JAC Class 9 Hindi व्याकरण अनुस्वार एवं अनुनासिक

आगत ध्वनियाँ :

अर्धचंद्राकार –

आजकल अंग्रेज़ी भाषा के प्रभाव से हिंदी में ‘आ’ आगत ध्वनि का प्रयोग किया जाने लगा है। जो ‘आ’ और ‘ओ’ के बीच की ध्वनि है। जैसे –

JAC Class 9 Hindi व्याकरण अनुस्वार एवं अनुनासिक 1

यदि हिंदी में ‘ऑ’ आगत ध्वनि का प्रयोग न किया जाए तब शब्दों की अभिव्यक्ति में दोष उत्पन्न होने की पूरी संभावना हो सकती है। जैसे –

  • हाल – हालचाल
  • बाल – शरीर के बाल
  • काल – समय
  • काफ़ी – पर्याप्त
  • डाल – डालना
  • हॉल – एक बड़ा कमरा
  • बॉल – गेंद
  • कॉल – बुलाना
  • कॉफ़ी – एक पेय
  • डॉल – गुड़िया

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

JAC Class 9 Hindi सवैये Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है ?
उत्तर :
ब्रजभूमि के प्रति कवि का अगाध प्रेम है। वह हर जन्म में ब्रजक्षेत्र में ही रहना चाहता है। वह इस जन्म में तो ब्रजभूमि से जुड़ा ही हुआ है और चाहता है कि उसे अगले जन्मों में चाहे कोई भी जीवन मिले वह बार-बार ब्रज में ही आए। यदि वह मनुष्य का जीवन प्राप्त करे तो वह ब्रजक्षेत्र के गोकुल गाँव के ग्वालों में रहे। यदि वह पशु की योनि प्राप्त करते तो नंद बाबा की गऊओं के साथ मिलकर चरनेवाली गाय बने। यदि वह निर्जीव पत्थर भी बने तो उस गोवर्धन पर्वत पर ही स्थान पाए जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को भंग करने के लिए उठा लिया था। यदि वह पक्षी के रूप में जन्म ले तो वह यमुना किनारे कदंब की शाखाओं पर ही बसेरा करे।

प्रश्न 2.
कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं ?
उत्तर :
कवि ब्रज के वन, बाग और तालाबों को निहारना चाहता है ताकि वह श्रीकृष्ण की प्रिय भूमि और लीला – स्थली के प्रति अपने हृदय की अनन्यता को प्रकट कर सके। उसे ब्रज के कण-कण में श्रीकृष्ण समाए हुए प्रतीत होते हैं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

प्रश्न 3.
एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है ?
उत्तर :
लकड़ी के एक डंडे को हाथ में धारण कर और शरीर पर काला कंबल ओढ़कर ग्वाले श्रीकृष्ण के साथ गौएँ चराने जाया करते थे। कवि के हृदय में उस ‘लकुटी’ और ‘कामरिया’ के प्रति अनन्य समर्पण भाव है जिस कारण वह उन पर सब कुछ न्योछावर करने को तैयार है।

प्रश्न 4.
सखी ने गोपी से कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया था ? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सखी ने गोपी से श्रीकृष्ण जैसी वेशभूषा और रूप धारण करने का आग्रह किया है। सिर पर मोर पंख, गले में गुंज माला, तन पर पीतांबर और हाथ में लाठी लेकर ग्वालों के साथ घूमने के लिए कहा है। ऐसा करके वे श्रीकृष्ण की स्मृतियों को ताजा बनाए रखना चाहती हैं।

प्रश्न 5.
आपके विचार से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है ?
उत्तर :
रसखान के हृदय में श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अगाध प्रेम है। उसे ब्रजक्षेत्र के कण-कण में श्रीकृष्ण की छवि झलकती हुई दिखाई देती है। वह सदा उस छवि को अपनी आँखों के सामने ही पाना चाहता है। मानसिक छवियाँ ऐसा अहसास कराती हैं मानो वास्तविकता ही सामने विद्यमान हो। इसलिए कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी सान्निध्य प्राप्त करना चाहता है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

प्रश्न 6.
चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने-आप को क्यों विवश पाती हैं ?
उत्तर :
गोपियाँ श्रीकृष्ण की मुरली की धुन और उनकी आकर्षक मुसकान के अचूक प्रभाव से स्वयं को नियंत्रित रखने में विवश पाती हैं।

प्रश्न 7.
भाव स्पष्ट कीजिए –
(क) कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।
(ख) माइ री वा सुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै।
उत्तर :
(क) रसखान ब्रजक्षेत्र की काँटोंभरी करील की झाड़ियों को सुंदर महलों से श्रेष्ठ मानते हैं और उन्हें ही पाना चाहते हैं ताकि श्रीकृष्ण के क्षेत्र के प्रति अपने प्रेम और निष्ठा को प्रकट कर सकें।
(ख) गोपियाँ श्रीकृष्ण के मुख की मंद-मंद मुसकान पर इतनी मुग्ध हो चुकी हैं कि वे अपने मन की अवस्था को नियंत्रण में रख ही नहीं सकतीं। उन्हें प्रतीत होता है कि उनकी मुसकान उनसे सँभाली नहीं जाएगी।

प्रश्न 8.
‘कालिंदी कूल कदंब की डारन’ में कौन-सा अलंकार है ?
उत्तर :
अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 9.
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी।
उत्तर :
गोपियों के हृदय में श्रीकृष्ण की बाँसुरी के प्रति सौत भावना है। उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि श्रीकृष्ण उनकी अपेक्षा बाँसुरी को अधिक प्रेम करते हैं इसलिए वह सदा उनके होंठों पर टिकी रहती है। गोपियाँ श्रीकृष्ण की प्रत्येक वस्तु को अपनाना चाहती हैं पर अपनी सौत रूपी बाँसुरी को होंठों पर नहीं रखना चाहतीं। अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग सराहनीय है। ब्रजभाषा की कोमल कांत शब्दावली की सुंदर योजना की गई है। गोपियों का हठ-भाव अति आकर्षक है। प्रसाद गुण तथा अभिधा शब्द-शक्ति ने कथन को सरलता – सरसता प्रदान की है।

रचना और अभिव्यक्ति –

प्रश्न 10.
प्रस्तुत सवैयों में जिस प्रकार ब्रजभूमि के प्रति प्रेम अभिव्यक्त हुआ है, उसी तरह आप अपनी मातृभूमि के प्रति अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कीजिए।

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प्रश्न 11.
रसखान के इन सवैयों का शिक्षक की सहायता से कक्षा में आदर्श वाचन कीजिए। साथ ही किन्हीं दो सवैयों को कंठस्थ कीजिए।
उत्तर :
अध्यापक/अध्यापिका के सहायता से विद्यार्थी इन्हें स्वयं करें।

पाठेतर सक्रियता –

सूरदास द्वारा रचिंत कृष्ण के रूप-सौदर्य संबंधी पदों को पढ़िए।
उत्तर :
छात्र इसे स्वयं करें।

यह भी जानें –

सवैया छंद – यह एक वर्णिक छंद है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं। यह ब्रजभाषा का बहुप्रचलित छंद रहा है।
आठ सिद्धियाँ – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व – ये आठ अलौकिक शक्तियाँ आठ सिद्धियाँ कहलाती हैं।
नव (नौ) निधियाँ – पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व- ये कुबेर की नौ निधियाँ कहलाती हैं।

JAC Class 9 Hindi सवैये Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
रसखान के काव्य की विशेषता लिखिए।
उत्तर :
रसखान की कविता का लक्ष्य श्रीकृष्ण एवं गोपियों की प्रेम-लीलाओं का वर्णन करना रहा है। यत्र-तत्र उन्होंने श्रीकृष्ण के बाल रूप का भी मनोहारी चित्रण किया है –
धूर भरे अति सोभित स्यामजू तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।
खेल खात फिरै अँगना पग पैंजनी बाजति पीरी कछोटी।
रसखान ने श्रीकृष्ण तथा ब्रज के प्रति अपनी अगाध निष्ठा का भी परिचय दिया है –
मानुस हौं तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।

प्रश्न 2.
रसखान की काव्य- भाषा पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर :
रसखान की भाषा ब्रजभाषा है। ब्रजभाषा अपनी पूरी मधुरता के साथ इनके काव्य में प्रयुक्त हुई है। अलंकारों और लोकोक्तियों के प्रयोग ने भाषा को सजीव बना दिया है। रसखान जाति से मुसलमान होते हुए भी हिंदी के परम अनुरागी थे। उनके हिंदी प्रेम एवं सफल काव्य पर मुग्ध होकर ठीक ही कहा गया है, “रसखान की भक्ति में प्रेम, श्रृंगार और सौंदर्य की त्रिवेणी का प्रवाह सतत बना रहा और उनकी भाषा का मधुर, सरल, सरस और स्वाभाविक प्रकार पाठकों को अपने साथ बहाने में सफल रहा।’

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

प्रश्न 3.
कवि मनुष्य के रूप में कहाँ जन्म लेना चाहता है और क्यों ?
उत्तर :
कवि श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। उन्होंने श्रीकृष्ण और उनकी भूमि के प्रति समर्पण भाव व्यक्त करते हुए कहा है कि वे अगले जन्म मनुष्य के रूप में जीवन पाकर ब्रज क्षेत्र के गोकुल गाँव में ग्वालों के बीच रहना चाहते हैं क्योंकि श्रीकृष्ण उनके साथ रहे थे और ग्वालों को उनकी निकटता प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।

प्रश्न 4.
कवि तीनों लोकों का राज्य क्यों त्याग देने को तैयार है ?
उत्तर :
कवि तीनों लोकों का राज्य उस लाठी और कंबल के बदले में त्याग देने को तैयार है जो ब्रज क्षेत्र के ग्वाले गऊओं को चराते समय श्रीकृष्ण धारण किया करते थे। वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वह उन्हें परम सुख की प्राप्ति के लिए श्रीकृष्ण व ब्रजक्षेत्र से जोड़े रखता है।

प्रश्न 5.
गोपी कैसा शृंगार करना चाहती है ?
उत्तर :
गोपी श्रीकृष्ण की भक्ति के वशीभूत होकर श्रीकृष्ण का स्वांग भरने को तैयार हो जाती है। गोपी श्रीकृष्ण की प्रत्येक वस्तु से अपना श्रृंगार करना चाहती है। वह श्रीकृष्ण का मोर पंख का मुकुट अपने सिर पर धारण करना चाहती है और गले में गुंजों की माला पहनना चाहती है। वह श्रीकृष्ण की तरह पीले वस्त्र पहनकर तथा हाथों में लाठी लेकर ग्वालों के साथ गाय चराने वन-वन भी फिरने के लिए तैयार है।

प्रश्न 6.
गोपी अपने होंठों पर मुरली क्यों नहीं रखना चाहती ?
उत्तर :
गोपी अपने होंठों की श्रृंगार करते समय श्रीकृष्ण की मुरली अपने होंठों पर इसलिए नहीं रखना चाहती क्योंकि वह मुरली को अपनी सौत मानती है। मुरली सदा श्रीकृष्ण के होंठों पर लगी रहती थी। इसी सौतिया डाह के कारण वह मुरली को अपना शत्रु मानती है और उसे अपने होंठों पर नहीं लगाना चाहती है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

प्रश्न 7.
गोपी श्रीकृष्ण द्वारा बजाई बाँसुरी की तान को क्यों सुनना नहीं चाहती ?
उत्तर :
गोपी श्रीकृष्ण द्वारा बजाई बाँसुरी की तान इसलिए नहीं सुनना चाहती क्योंकि उसकी बाँसुरी की तान में जादू-सा प्रभाव है। वह इसे सुनकर अपनी सुध-बुध खोकर श्रीकृष्ण के पीछे-पीछे चल देती है परंतु आज वह अपने पर नियंत्रण रखना चाहती है। इसलिए कानों में अँगुली डालकर बैठी है, जिससे उसे बाँसुरी की तान न सुनाई दे।

प्रश्न 8.
गोपी स्वयं को किस कारण विवश अनुभव करती है ?
उत्तर :
श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन और उनकी मुसकान का प्रभाव अचूक है। जिसके कारण गोपियाँ अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख पाती हैं और विवश होकर श्रीकृष्ण के पास चली जाती हैं। वे स्वयं को सँभाल नहीं पाती हैं। कवि ने श्रीकृष्ण के भक्ति – प्रेम में डूबी गोपी की विवशता का वर्णन किया है कि वह श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबकर अपनी सुध-बुध खो बैठती है।

प्रश्न 9.
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।
उत्तर :
कवि रसखान ने श्रीकृष्ण और ब्रजक्षेत्र के प्रति अपने प्रेम-भाव को वाणी प्रदान करते हुए सभी प्रकार का सुख त्याग देने की बात की है। वह ब्रज क्षेत्र में उगी करील की कँटीली झाड़ियों पर करोड़ों सोने के महल न्योछावर करने को तैयार हैं। उन्हें केवल ब्रज क्षेत्र में किसी भी रूप में स्थान चाहिए। इसमें ब्रजभाषा का सरस प्रयोग सराहनीय है। तद्भव शब्दों का अधिकता से प्रयोग है। अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग है। प्रसाद गुण, अभिधा शब्द – शक्ति और शांत रस का प्रयोग किया गया है। सवैया छंद विद्यमान है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

प्रश्न 10.
कवि रसखान की भक्ति-पद्धति का परिचय दीजिए।
उत्तर :
रसखान की भक्ति अनेक पद्धतियों और सिद्धांतों का संयोग है। इन्होंने किसी भी बात की परवाह न करते हुए कृष्ण-भक्ति में स्वयं को डुबो दिया। इन्हें अपने भक्ति – क्षेत्र में जो अच्छा लगा, इन्होंने उसे अपना लिया। रसखान पर सगुण और निर्गुण दोनों का प्रभाव है। उन्होंने संतों के समान अपने आराध्य के गुणों का बखान किया है। इन्होंने दैन्यभाव को प्रकट किया है। इनकी भक्ति में समर्पण – भाव है। इनके काव्य में अनुभूति की गहनता है।

प्रश्न 11.
कवि रसखान किस चीज को पाने के लिए जीवन के सभी सुखों को त्याग देना चाहते थे ?
उत्तर :
कवि रसखान हर अवस्था में ब्रज क्षेत्र और अपने इष्ट को प्राप्त करना चाहते थे। उनके लिए परम सुख की प्राप्ति ब्रज क्षेत्र से जुड़ा रहना है। वे ब्रज- क्षेत्र में उसी करील की झाड़ियों पर करोड़ों महलों को न्योछावर करने से भी पीछे नहीं हटते। ब्रज क्षेत्र में रहनेवाले सूरज को पाने के लिए वे तीनों लोकों का राज्य भी त्यागने को तत्पर रहते हैं।

सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर – 

1. मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।
जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन ॥
पाहन हौं तो वही गिरि को जो कियो हरिछत्र पुरंदर धारन।
जौ खग हौं तो बसेरो करौं कालिंदी कूल कदंब की डारन ॥

शब्दार्थ : मानुष – मनुष्य। हौं – मैं। बसौं – रहना, बसना। ग्वारन – ग्वाले। कहा बस $-$ बस में न होना। नित $-$ सदा, नित्य। धेनु – गाय। मँझारन – बीच में। पाहन – पत्थर, चट्टान। गिरि – पर्वत। पुरंदर – इंद्र। खग – पक्षी। कालिंदी – यमुना नदी। कूल – किनारा। डारन – डालियाँ।

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया हमारी पाठ्य पुस्तक ‘क्षितिज’ में संकलित पाठ सवैये से लिया गया है जिसके रचयिता श्रीकृष्ण भक्त रसखान हैं। कवि कामना करता है कि अगले जन्म में वह चाहे किसी रूप में धरती पर वापिस आए पर वह ब्रज क्षेत्र में ही स्थान प्राप्त करे।

व्याख्या : रसखान कहते हैं कि यदि मैं अगले जन्म में मनुष्य का जीवन प्राप्त करूँ तो मेरी इच्छा है कि मैं ब्रज क्षेत्र के गोकुल गाँव में ग्वालों के बीच रहूँ। यदि मैं पशु बनूँ और मेरी इच्छा पूर्ण हो तो मैं नंद बाबा की गऊओं में गाय बनकर सदा चरूँ। यदि मैं पत्थर बनूँ तो उसी गोवर्धन पर्वत पर स्थान प्राप्त करूँ जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए छत्र के समान धारण कर लिया था। यदि मैं पक्षी बनूँ तो यमुना के किनारे कदंब की डालियों पर ही बसेरा करूँ। भाव है कि कवि किसी भी अवस्था में ब्रजक्षेत्र को त्यागना नहीं चाहता, वह वहीं रहना चाहता है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य – सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि मनुष्य रूप में कहाँ और क्यों जीवन पाना चाहता है ?
(ख) निर्जीव रूप में भी कवि जगह क्यों पाना चाहता है ?
(ग) कवि यमुना किनारे कदंब की शाखाओं पर पक्षी बनकर क्यों रहना चाहता है ?
(घ) सवैया में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।
(ङ) कवि अगले जन्म में कौन-सा पशु बनना चाहता है ?
(च) कवि गोकुल में किनके साथ रहना चाहता है ?
(छ) कवि किसके पशु चराने की कामना करता है ?
उत्तर :
(क) कवि अगले जन्म में मनुष्य के रूप में जीवन पाकर ब्रज क्षेत्र के गोकुल गाँव में ग्वालों के बीच रहना चाहता है क्योंकि श्रीकृष्ण उनके साथ रहे थे और ग्वालों को उनकी निकटता प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।
(ख) कवि पत्थर बनकर निर्जीव रूप में गोवर्धन पर्वत पर जगह पाना चाहता है जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को चूर करने के लिए अपनी अंगुली पर उठा लिया था।
(ग) कवि यमुना किनारे कदंब की शाखाओं पर पक्षी बनकर रहना चाहता है ताकि वह उन स्थलों को देख सके जहाँ श्रीकृष्ण विहार करते थे।
(घ) रसखान प्रत्येक स्थिति में श्रीकृष्ण की लीला – स्थली पर ही रहना चाहता है जिससे उसके प्रति अपनी अनन्यता प्रकट कर सके। कवि ने ब्रजभाषा की कोमल कांत शब्दावली का सहज प्रयोग किया है। सवैया छंद ने लयात्मकता की सृष्टि की है। तद्भव शब्दावली का अधिक प्रयोग है। प्रसाद गुण, अभिधा शब्द – शक्ति और शांत रस विद्यमान है। अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग सराहनीय है।
(ङ) कवि अगले जन्म में नंद बाबा की गायों में एक गाय बनना चाहता है जिससे वह श्रीकृष्ण की निकटता प्राप्त कर सके।
(च) कवि गोकुल में ग्वालों के साथ रहना चाहता है। वह श्रीकृष्ण के बाल सखा के रूप में ब्रजभूमि पर निवास करना चाहता है।
(छ) कवि नंद बाबा के पशु चराने की कामना करता है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

2. या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।
आठहुँ सिद्धि नवौ निधि के सुख नंद की गाइ-चराइ बिसारौं,
रसखान कबौं इन आँखिन सौं, ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।
कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।

शब्दार्थ : या – इस। लकुटी – लकड़ी, लाठी। कामरिया – कंबल। तिहूँ – तीनों । तजि – छोड़; त्याग। आठहुँ सिद्धि – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इंशित्व और वाशित्व नामक आठ अलौकिक शक्तियाँ। नवौ निधि – पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व नामक कुबेर की नौ निधियाँ। गाइ – गाय। बिसारौं – भुला दूँ। तड़ाग – तालाब। निहारौं – देख़ँ। कोटिक – करोड़ों। कलधौत – सोने-चाँदी के महल। करील – कँटीली झाड़ियाँ। वारौौ – न्योछावर करूँ।

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘क्षितिज’ में संकलित पाठ ‘सवैये’ से लिया गया है जिसके रचयिता रसखान हैं। कवि ने श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को प्रकट किया है। वे हर अवस्था में ब्रज क्षेत्र और अपने इष्ट को प्राप्त करना चाहते हैं।

व्याख्या : रसखान कहते हैं कि मैं ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण के ग्वालों की गऊओं को चराने के लिए प्रयुक्त इस लाठी और उनके द्वारा ओढ़े जाने वाले काले कंबल के बदले तीनों लोकों का राज्य त्याग दूँ। मैं नंद बाबा की गऊओं को चराने के बदले आठों सिद्धियाँ और नौ निधियों के सुख भी भुला दूँ। मैं ब्रज क्षेत्र के वनों, बागों और तालाबों को अपनी आँखों से कब निहार पाऊँगा ? मैं ब्रज क्षेत्र में उगी करील की कँटीली झाड़ियों पर करोड़ों महल को न्योछावर कर दूँ। भाव है कि रसखान ब्रज क्षेत्र के लिए जीवन के सभी सुखों को त्याग देना चाहते हैं। उनके लिए परम सुख की प्राप्ति ब्रज क्षेत्र से जुड़ा रहना है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य – सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि तीनों लोकों का राज्य किसके बदले त्याग देने को तैयार है ?
(ख) कवि अपनी आँखों से क्या निहारना चाहता है ?
(ग) ब्रज की कँटीली करील झाड़ियों पर कवि क्या न्योछावर कर देना चाहता है ?
(घ) प्रस्तुत सवैया में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
(ङ) कवि ने किन आठ सिद्धियों की बात की है ?
(च) नौ निधियों के नाम लिखिए।
(छ) कवि ने किसके प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया है ?
उत्तर :
(क) कवि तीनों लोकों का राज्य उस लाठी और काले कंबल के बदले त्याग देने को तैयार है जो श्रीकृष्ण ब्रज के ग्वाले की गऊओं को चराते समय धारण किया करते थे।
(ख) कवि अपनी आँखों से ब्रज के वन, बाग और तालाबों को निहारना चाहता है।
(ग) ब्रज-क्षेत्र की कँटीली झाड़ियाँ भी कवि के लिए इतनी मूल्यवान हैं कि वह उनके बदले करोड़ों महलों को उन पर न्योछावर कर देना चाहता है।
(घ) रसखान ने सवैया में श्रीकृष्ण और ब्रज क्षेत्र के प्रति अपने मन के प्रेम-भाव को वाणी प्रदान करते हुए अपने सब प्रकार के सुख त्याग देने और उस आनंद को पाने की इच्छा प्रकट की है। ब्रजभाषा का सरस प्रयोग सराहनीय है। तद्भव शब्दों का अधिकता से प्रयोग किया गया है। स्वरमैत्री ने लयात्मकता की सृष्टि की है। अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग सराहनीय है। प्रसाद गुण, अभिधा शब्द-शक्ति और शांत रस का प्रयोग किया गया है। सवैया छंद विद्यमान है।
(ङ) कवि ने जिन आठ सिद्धियों की बात की है, वे हैं – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इंशित्व, वशित्वा।
(च) नौ निधियों के नाम हैं- महापद्म, पद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील, खर्व।
(छ) कवि ने श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को प्रकट किया है। वे हर अवस्था में ब्रजक्षेत्र और अपने इष्ट को प्राप्त करना चाहते हैं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

3. मोरपखा सिर ऊपर राखिहाँ गुंज की माल गरें पहिरौंगी।
ओढ़ि पितंबर लै लकुटी बन गोधन ग्वारनि संग फिरौंगी॥
भावतो वोहि मेरो रसखानि सो तेरे कहें सब स्वाँग करौंगी।
या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी॥

शब्दार्थ : मोरपखा – मोरपंख। गुंज – घुंघची। गरें – गले। पहिरौंगी – पहनूँगी। पितंबर – पीत (पीला) वस्त्र। लकुटी – लाठी। ग्वारनि – ग्वालिन। स्वाँग – रूप धरना, नकल करना। अधरा – होंठ।

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया भक्तिकाल के कवि रसखान द्वारा रचित है। इस सवैये में रसखान जी ने श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों के निश्छल तथा निस्स्वार्थ प्रेम का चित्रण किया है। गोपियाँ श्रीकृष्ण के लिए कोई भी रूप धारण करने को तैयार हैं।

गोपियाँ श्रीकृष्ण की भक्ति के वशीभूत होकर श्रीकृष्ण का स्वाँग भरने को तैयार हो जाती हैं। रसखान जी वर्णन करते हैं कि गोपिका कहती हैं- मैं श्रीकृष्ण के सिर पर रखा हुआ मोरपंख अपने सिर पर धारण कर लूँगी। श्रीकृष्ण के गले में शोभा पानेवाली गुंजों की माला को अपने गले में पहन लूँगी। पीत वस्त्र ओढ़कर तथा श्रीकृष्ण की तरह लाठी हाथ में लेकर, गायों के पीछे ग्वालों के साथ-साथ घूमा करूँगी। रसखान जी कहते हैं कि गोपिका अपनी सखी से कहती है कि वे श्रीकृष्ण मेरे मन को प्रिय हैं तुम्हारी कसम ! मैं उनके लिए सब प्रकार के रूप धर लूँगी। परंतु श्रीकृष्ण के होंठों पर लगी रहनेवाली इस मुरली को मैं अपने होंठों पर कभी भी नहीं रखूँगी। यहाँ गोपी की सौतिया डाह चित्रित हुई है जो श्रीकृष्ण के लिए सब कुछ कर सकती है पर मुरली को अपना दुश्मन मानते हुए उसे अपने होंठों पर नहीं लगा सकती।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य – सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) गोपी कैसा शृंगार करना चाहती है ?
(ख) गोपी कैसा स्वांग धारण करना चाहती है ?
(ग) गोपी मुरली को अपने होंठों पर क्यों नहीं रखना चाहती है ?
(घ) इस पद का भाव तथा काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ङ) किसके प्रेम को किसके प्रति प्रकट किया गया है ?
(च) अपने होंठों पर बाँसुरी कौन, क्यों नहीं रखना चाहता है ?
(छ) मुरलीधर कौन है ?
(ज) ‘मोरपखा’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
(क) गोपी श्रीकृष्ण की प्रत्येक वस्तु से शृंगार करना चाहती है। वह अपने सिर पर उनका मोरपंख का मुकुट धारण करना चाहती है तथा गले में गुंजों की माला पहनना चाहती है। वह पीले वस्त्र पहनकर तथा हाथों में लाठी लेकर ग्वालों के साथ गाय चराने वन-वन भी फिरने के लिए तैयार है।
(ख) वह श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए उनके कहे अनुसार सब प्रकार का स्वांग धारण करने के लिए तैयार है।
(ग) श्रीकृष्ण के होंठों से लगे रहनेवाली मुरली को गोपी अपने होंठों से इसलिए नहीं लगाना चाहती क्योंकि वह मुरली को अपनी सौत मानती है जो सदा श्रीकृष्ण के होंठों से लगी रहती है। इसी सौतिया डाह के कारण वह मुरली को अपनी शत्रु मानती है और उसे अपने होंठों पर नहीं लगाना चाहती।
(घ) गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति निश्छल प्रेम की अभिव्यक्ति हुई है। गोपियों का श्रीकृष्ण का स्वांग भरना पर मुरली को होंठों से न लगाना उनकी सौतिया डाह को चित्रित करता है। अनुप्रास और यमक अलंकार की छटा दर्शनीय है। ब्रजभाषा है। सवैया छंद है। माधुर्य गुण है। संगीतात्मकता विद्यमान है। श्रृंगार रस है। भक्ति रस का सुंदर परिपाक है। भाषा सरस तथा प्रवाहमयी है।
(ङ) इस सवैये में रसखान जी ने श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों के निश्छल तथा निःस्वार्थ प्रेम का चित्रण किया है। गोपियाँ श्रीकृष्ण के लिए कोई भी रूप धारण करने को तैयार हैं।

(च) गोपी अपने होंठों पर बाँसुरी नहीं रखना चाहती। वह बाँसुरी को अपनी सौत मानती है। उसे लगता है कि श्रीकृष्ण बाँसुरी को अधिक प्रेम करते हैं और गोपी के प्रति उनके हृदय में प्रेम का भाव नहीं है। गोपी को उन्होंने बाँसुरी के कारण भुला-सा दिया है।
(छ) मुरलीधर श्रीकृष्ण हैं जो यमुना किनारे कदंब की छाया में मग्न होकर मुरली बजाते थे।
(ज) मोरपखा मोर के पंखों से बना मुकुट है जिसे श्रीकृष्ण अपने सिर पर धारण करते हैं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

4. काननि दै अँगुरी रहिबो जबहीं मुरली धुनि मंद बजैहै।
मोहनी तानन सों रसखानि अटा चढ़ि गोधन गैहै तो गैहै ॥
टेरि कहौं सिगरे ब्रजलोगनि काल्हि कोऊ कितनो समुझहै।
माइ री वा मुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै ॥

शब्दार्थ : काननि – कानों में। मुरली – बाँसुरी। मंद – धीमी। अटा – अटारी, अट्टालिका, कोठा। टेरि – आवाज़ लगाना, पुकारना। सिगरे – सारे। वा – उस।

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया हमारी पाठ्य पुस्तक ‘क्षितिज’ में संकलित पाठ ‘सवैये’ से अवतरित किया गया है जिसके रचयिता कृष्ण-भक्त कवि रसखान हैं। श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन और उनकी मुसकान का प्रभाव अचूक है। गोपियाँ स्वयं को इनके सामने विवश पाती हैं। वे स्वयं को सँभाल नहीं पातीं।

व्याख्या : रसखान कहते हैं कि कोई गोपी श्रीकृष्ण की बाँसुरी की मोहक तान के जादुई प्रभाव को प्रकट करते हुए कहती है कि हे सखी! जब श्रीकृष्ण बाँसुरी की मधुर धुन को धीमे-धीमे स्वर में बजाएँगे तब मैं अपने कानों को अँगुली से बंद कर लूँगी ताकि बाँसुरी की मधुर तान मुझ पर अपना जादुई प्रभाव न डाल सके। फिर चाहे वह रस की खान रूपी कृष्ण अट्टालिका पर चढ़कर मोहनी तान बजाते रहे तो भी कोई बात नहीं, वह चाहे गोधन नामक लोकगीत गाते रहें पर मुझ पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हे ब्रज के सभी लोगो ! मैं पुकार – पुकारकर कह रही हूँ कि तब कोई हमें कितना भी समझाए पर मैं समझ नहीं पाऊँगी, मैं अपने आपको सँभाल नहीं पाऊँगी। हे री माँ, उनके मुख की मुसकान हमसे नहीं सँभाली जाती; नहीं सँभाली जाती; नहीं सँभाली जाती। भाव है कि गोपियाँ तो मानो श्रीकृष्ण की मधुर मुसकान पर अपने-आप को खो चुकी हैं। उनका हृदय अब उनके बस में नहीं है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) किसका प्रभाव गोपी पर अचूक है ?
(ख) गोपी श्रीकृष्ण के द्वारा बजाई बाँसुरी की तान को क्यों नहीं सुनना चाहती ?
(ग) गोपी को किनकी कोई परवाह नहीं ?
(घ) गोपी अपने-आपको किस कारण विवश अनुभव करती है ?
(ङ) कृष्ण अपनी किन विशेषताओं के कारण गोपियों को प्रिय लगते हैं ?
(च) ‘गोधन’ से क्या तात्पर्य है ?
(छ) ‘माई री ‘ का प्रयोग क्यों किया गया है ?
(ज) ‘न जैहै, न जैहै’ की आवृत्ति क्या प्रदर्शित करती है ?
(झ) सवैया में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन और उनकी मुसकान का प्रभाव अचूक है। गोपियाँ स्वयं को इनके सामने विवश पाती हैं। वे स्वयं को सँभाल नहीं पातीं।
(ख) गोपी श्रीकृष्ण की बाँसुरी के जादुई प्रभाव से बचने के लिए बाँसुरी की धुन नहीं सुनना चाहती।
(ग) गोपी को कोई परवाह नहीं है कि कोई इसके बारे में क्या कहेगा।
(घ) श्रीकृष्ण की मधुर मुसकान और उनकी बाँसुरी की तान के कारण गोपी अपने मन पर नियंत्रण नहीं रख पाती और वह स्वयं को विवश अनुभव करती है।
(ङ) कृष्ण अपनी निम्नलिखित विशेषताओं के कारण गोपियों को प्रिय लगते हैं –
(क) मोहक रूप छटा (ख) बाँसुरी वादन (ग) लोक-गीतों का मधुर स्वर में गायन (घ) मधुर मुसकान।
(च) ‘गोधन’ एक लोकगीत है जिसे ग्वाले अपनी गायों को चराते समय गाते हैं।
(छ) ‘माई री ‘ का प्रयोग सामान्य रूप से आश्चर्य, दुःख, पीड़ा आदि भावों को अभिव्यक्त करने के लिए किया गया है। लड़कियाँ और औरतें प्रायः इस उद्गारात्मक शब्द का प्रयोग करती हैं।
(ज) ‘न जैहै, न जैहै’ की आवृत्ति गोपी के द्वारा की जानेवाली ज़िद और उन्माद की स्थिति को प्रदर्शित करती है।
(झ) श्रीकृष्ण के द्वारा बजाई जानेवाली बाँसुरी की मोहक तान और उनके मुख पर आई मुसकान ने गोपियों को विवश कर दिया है। उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि उनका हृदय अब उनके बस में नहीं है। ब्रजभाषा की कोमल-कांत शब्दावली ने कवि के कथन को सरसता प्रदान की है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द – शक्ति ने सरलता से भावों को प्रकट किया है। चाक्षुक बिंब योजना की गई है। अनुप्रास और स्वाभावोक्ति अलंकार का स्वाभाविक प्रयोग है। स्वरमैत्री ने लयात्मकता की सृष्टि की है। सवैया छंद है।

सवैये Summary in Hindi

कवि-परिचय :

रसखान कृष्ण-भक्ति काव्य के सुप्रसिद्ध कवि हैं जिनका जन्म सन् 1548 ई० में राजवंश से संबंधित दिल्ली के एक समृद्ध पठान परिवार में हुआ था। इनका मूल नाम सैयद इब्राहिम था। श्रीकृष्ण की भक्ति के कारण भक्तजन इन्हें ‘रसखान’ कहने लगे थे। इनकी भक्ति भावना के कारण गोस्वामी विट्ठलनाथ ने इन्हें अपना शिष्य बना लिया था और तब ये ब्रजभूमि में जा बसे थे। ये जीवनभर वहीं रहे थे और सन् 1628 ई० के लगभग इनका देहावसान हो गया था। रसखान रीतिकालीन कवि थे। ये प्रेमी स्वभाव के थे। वैष्णवों के सत्संग और उपदेशों के कारण इनका प्रेम लौकिक से अलौकिक हो गया था। ये श्रीकृष्ण और उनकी लीलाभूमि ब्रज की प्राकृतिक सुंदरता पर मुग्ध थे। ॐ रसखान के द्वारा दो रचनाएँ प्राप्त हुई हैं – ‘सुजान रसखान’ और ‘प्रेम वाटिका’। ‘रसखान रचनावली’ के नाम से उनकी रचनाओं का संग्रह मिलता है।

रसखान की कविता में भक्ति की प्रधानता है। इन्हें श्रीकृष्ण से संबंधित प्रत्येक वस्तु प्रिय थी। उनका रूप-सौंदर्य, वेशभूषा, बाँसुरी और बाल क्रीड़ाएँ इनकी कविता का आधार हैं। ये ब्रजक्षेत्र, यमुना तट, वन-बाग, पशु-पक्षी, नदी-पर्वत आदि के प्रति गहरे प्रेम का भाव रखते थे। इन्हें श्रीकृष्ण के बिना संसार में कुछ भी प्रिय नहीं था। इनके प्रेम में गहनता और तन्मयता की अधिकता है जिस कारण वे प्रत्येक पाठक को गहरा प्रभावित करते हैं। इनकी भक्ति में प्रेम, श्रृंगार और सुंदरता का सहज समन्वित रूप दिखाई देता है। इनके प्रेम में निश्छल प्रेम और करुण हृदय के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। इन्होंने श्रीकृष्ण के बाल रूप के सुंदर – सहज सवैये लिखे हैं।

रसखान की भाषा उनके भावों के समान ही अति कोमल है जिसमें ज़रा सा भी बनावटीपन नहीं है। ये अपनी मधुर, सरस और प्रवाहमयी भाषा के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके काव्य में शब्द इतने सरल और मोहक रूप में प्रयुक्त किए गए हैं कि वे झरने के प्रवाह के समान निरंतर पाठक को रस में सराबोर आगे बढ़ जाते हैं। उन्होंने अलंकारों का अनावश्यक बोझ अपनी कविता पर नहीं डाला। मुहावरों का स्वाभाविक ॐ प्रयोग विशेष सुंदरता प्रदान करने में समर्थ सिद्ध हुआ है। इन्होंने कविता की रचना के लिए परंपरागत पद शैलियों का अनुसरण नहीं किया। मुक्तक छंद शैली का प्रयोग इन्हें प्रिय है। कोमल-कांत ब्रजभाषा में रचित रसखान की कविता स्वाभाविकता के गुण से परिपूर्ण है। इन्हें दोहा, कवित्त और सवैया छंदों पर पूरा अधिकार है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 11 सवैये

सवैयों का सार :

कृष्ण भक्त रसखान श्रीकृष्ण और कृष्ण-भूमि के प्रति समर्पण का भाव व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यदि मैं मनुष्य रूप में जन्म लूँ तो मैं ब्रजक्षेत्र के गोकुल गाँव में ग्वालों के बीच जन्म लूँ। यदि मैं पशु रूप में पैदा होऊँ तो मैं नंद बाबा की गऊओं के झुंड में चरनेवाली गाय बनूँ। यदि मैं पत्थर बनूँ तो गोवर्धन पर्वत पर जगह पाऊँ जिसे श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए उठाया था। यदि मैं पक्षी का जीवन प्राप्त करूँ तो यमुना किनारे कदंब की डालियों पर ही बसेरा करूँ।

श्रीकृष्ण के काले कंबल और गऊओं को चराने के लिए प्रयुक्त लाठी के बदले मैं तीनों लोकों का राज्य त्याग दूँ। आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ, नंद बाबा की गऊओं को चराने में भुला दूँ। मैं अपनी आँखों से ब्रज के वन और बाग निहारता रहूँ और करोड़ों महलों को ब्रज की काँटेदार झाड़ियों पर न्योछावर कर दूँ।

श्रीकृष्ण की अनुपस्थिति में गोपियाँ स्वयं उनकी वेशभूषा में रहने की इच्छा करती हैं। सिर पर मोरपंख, गले में गुंज माल और पीले वस्त्र पहन वे ग्वालों के साथ घूमने की इच्छा करती हैं। वे वही सब कुछ करना चाहती हैं जो श्रीकृष्ण को प्रिय है पर वे बाँसुरी को अपने होंठों पर रखना पसंद नहीं करतीं। गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन और उनकी मुसकान के अचूक प्रभाव से स्वयं को विवश मानती हैं और स्वयं को सँभाल नहीं पातीं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

JAC Class 9 Hindi दुःख का अधिकार Textbook Questions and Answers

मौखिक –

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न 1.
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है ?
उत्तर :
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें पता चलता है कि उस व्यक्ति का समाज में क्या स्तर है और वह किस वर्ग से संबंधित है।

प्रश्न 2.
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था ?
उत्तर :
खरबूज़े बेचने वाली स्त्री से कोई खरबूजे इसलिए नहीं खरीद रहा था, क्योंकि उसके जवान बेटे को मरे हुए एक ही दिन हुआ था और वह सूतक में ही खरबूजे बेचने आ गई थी।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 3.
उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा ?
उत्तर :
उस स्त्री को रोते देखकर लेखक के मन में व्यथा-सी उठी, परंतु अभिजात वर्ग के होने के कारण वह उसके पास बैठकर उसके रोने का कारण न जान सका।

प्रश्न 4.
उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था ?
उत्तर :
उस स्त्री का लड़का सुबह मुँह – अँधेरे बेलों में से पके खरबूज़े चुन रहा था। तभी गीली मेड़ की ठंडक में विश्राम करते हुए साँप पर उसका पैर पड़ गया। साँप ने उसे डँस लिया, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता ?
उत्तर :
बुढ़िया का बेटा मर गया था, जिसके कारण लोगों को लगा कि अब बुढ़िया उधार नहीं चुका सकेगी। इसलिए कोई भी बुढ़िया को उधार नहीं देता।

लिखित –

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है ?
उत्तर :
मनुष्य के जीवन में पोशाक का बहुत महत्व है। पोशाक को देखकर पता चलता है कि अमुक व्यक्ति उच्च वर्ग का है अथवा निम्न वर्ग का। पोशाक मनुष्य का समाज में स्तर निर्धारित करती है। पोशाक से ही मनुष्य की आर्थिक व सामाजिक स्थिति का ज्ञान होता है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 2.
पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है ?
उत्तर :
पोशाक हमारे लिए तब बंधन और अड़चन बन जाती है, जब हम अपने स्तर से नीचे के लोगों की भावनाओं को समझना चाहते हैं। उस समय हमें लगता है कि हम समाज के भय से उनके साथ बैठकर उनका दुख-दर्द नहीं जान सकते। इस प्रकार पोशाक दो विभिन्न वर्गों में व्यवधान बनकर खड़ी हो जाती है।

प्रश्न 3.
लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया ?
उत्तर :
लेखक उस स्त्री के रोने का कारण इसलिए नहीं जान पाया, क्योंकि उसकी पोशाक उसे फुटपाथ पर रोती हुई निम्न वर्ग की स्त्री के पास बैठने से रोक रही थी। लेखक के मन में उस स्त्री को रोते देखकर दुख तो हो रहा था, परंतु अपनी उच्च वर्ग की पोशाक के कारण वह फुटपाथ पर बैठकर उस स्त्री के रोने का कारण नहीं पूछ पा रहा था।

प्रश्न 4.
भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था ?
उत्तर :
भगवाना शहर के पास डेढ़ बीघा ज़मीन में तरकारी आदि की खेती करके परिवार का पालन-पोषण करता था। इन दिनों उसने खरबूज़े बोये हुए थे, जिन्हें टोकरी में डालकर वह स्वयं अथवा उसकी माँ बाज़ार में बेचा करते थे

प्रश्न 5.
लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी ?
उत्तर :
लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूज़े बेचने इसलिए चल पड़ी क्योंकि उसके पास जो जमा-पूँजी तथा गहने आदि थे, वह सब उसके मृत लड़के के क्रिया-कर्म में खर्च हो गए थे। उसके पोता-पोती भूख से तड़प रहे थे तथा बहू बुखार से तप रही थी। उसे कहीं से उधार मिलने की आशा नहीं थी। खाने-पीने और बहू के लिए दवा का प्रबंध करने के लिए पैसों की ज़रूरत थी, जिन्हें वह खरबूज़े बेचकर प्राप्त कर सकती थी।

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प्रश्न 6.
बुढ़िया के दुख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई ?
उत्तर :
रोती हुई बुढ़िया को देखकर लेखक को अपने पड़ोस में पुत्र की मृत्यु से दुखी संभ्रांत महिला की याद आ गई, जो अढ़ाई मास तक पलंग से उठ न सकी थी तथा उसे पंद्रह-पंद्रह मिनट बाद पुत्र-वियोग से मूर्छा आ जाती थी। दो-दो डॉक्टर हरदम उसकी सेवा के लिए उसके सिरहाने बैठे रहते थे, जबकि इस बुढ़िया को अगले दिन ही बाज़ार में खरबूज़े बेचने आना पड़ा। लेखक इस तुलना के फलस्वरूप अत्यंत व्यथित हो गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1.
बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे ? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचने वाली स्त्री को घृणा की दृष्टि से देखकर कह रहे थे कि जवान लड़के को मरे पूरा दिन भी नहीं हुआ और यह बेशर्म दुकान लगाकर बैठी है। दूसरा व्यक्ति उस स्त्री की नीयत खोटी बता रहा था, तो तीसरा उसे संबंधों से बढ़कर रोटी को महत्व देने वाली बता रहा था। पंसारी लाला उसे दूसरों का धर्म – ईमान खराब करने वाली कह रहा था, जो सूतक का ध्यान रखे बिना ही खरबूज़े बेचने बैठ गई है। इस तरह सभी अपने-अपने ढंग से उसे प्रताड़ित कर रहे थे।

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प्रश्न 2.
पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला ?
उत्तर :
आस-पास की दुकानों से पता करने पर लेखक को ज्ञात हुआ कि इस बुढ़िया का तेईस वर्ष का जवान बेटा था। घर में उसकी बहू और पोता-पोती भी हैं। उसका पुत्र शहर के पास डेढ़ बीघा ज़मीन में फल तरकारियाँ आदि बोकर परिवार का पालन-पोषण करता था। बाज़ार में फुटपाथ पर बैठकर वह अथवा उसकी माँ खरबूजे बेचा करते थे। परसों वह सुबह मुँह-अँधेरे बेलों से पके खरबूजे चुन रहा था कि उसका पैर मेड़ पर ठंडक में विश्राम कर रहे साँप पर पड़ गया। साँप ने उसे डॅस लिया था। बाद में ओझा से इलाज करवाने व नाग देवता की पूजा करने पर भी वह मर गया।

प्रश्न 3.
लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए?
उत्तर :
वृद्धा के बेटे को साँप ने काट लिया था, जिसके कारण वह अचेत हो गया। लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने ओझा को बुलाया। उसने झाड़-फूँक करने के बाद नाग देवता की पूजा भी की। पूजा का प्रबंध करने के लिए घर में जो कुछ आटा और अनाज था, वह उसने दक्षिणा में दे दिया। ओझा प्रयत्न करता रहा, किंतु वह अपने प्रयास में सफल न हुआ। अंत में सर्प के विष से उसके लड़के का सारा शरीर काला पड़ गया और वह चल बसा। वृद्धा के सभी प्रयास विफल हो गए थे।

प्रश्न 4.
लेखक ने बुढ़िया के दुख का अंदाजा कैसे लगाया ?
उत्तर :
बुढ़िया के दुख का अंदाजा लगाने के लिए लेखक अपने पड़ोस में पुत्र की मृत्यु से दुखी संभ्रांत महिला के बारे में सोचने लगा। वह माता अपने पुत्र की मृत्यु के बाद अढ़ाई मास तक पलंग से उठ नहीं सकी थी। उसे बार-बार मूर्छा आ जाती थी। दो-दो डॉक्टर उसकी सेवा में हरदम उसके सिरहाने बैठे रहते थे। मूर्छा न आने की अवस्था में उसकी आँखों से आँसू बहते रहते थे। लेखक को लगा कि यह बुढ़िया भी इसी प्रकार से पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर रो रही है, परंतु आर्थिक मजबूरी के कारण पुत्र की मृत्यु के अगले ही दिन खरबूजे बेचने आ बैठी है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 5.
इस पाठ का शीर्षक ‘दुख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
इस पाठ का शीर्षक ‘दुख का अधिकार’ पूरी तरह से उचित है। लेखक ने बताया है कि दुख सभी को दुखी करता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब। लेखक के पंड़ोस की संभ्रांत महिला पुत्र-शोक से दुखी होकर अढ़ाई महीने तक पलंग से ही उठ नहीं पाई थी। वह रोती रहती थी या उसे मूर्छा पड़ जाती थी। उसका इलाज करने के लिए दो-दो डॉक्टर थे। सारा शहर उसके पुत्र की मृत्यु से दुखी था। इसके विपरीत गरीब बुढ़िया अपने पुत्र की मृत्यु के अगले दिन ही बाजार में खरबूज़े बेचने के लिए मजबूर थी और चाह कर भी उसके मरने का मातम नहीं मना सकती थी, क्योंकि उसे अपने भूखे पोते-पोती का पेट भरना था और बीमार बहू के लिए दवा लानी थी। इस प्रकार वह इतनी अभागी थी कि उसे मृत पुत्र का दुख मनाने का भी अधिकार नहीं थी।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1.
जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिरजाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
उत्तर :
इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि मनुष्य की पहचान उसकी पोशाक से होती है। पहनी हुई पोशाक से ही पता चलता है कि व्यक्ति उच्च श्रेणी का है अथवा नहीं। पोशाक ही उस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का ज्ञान करवाती है। इसलिए जिस प्रकार कटी हुई पतंग एकदम से ज़मीन पर नहीं गिरती, उसी प्रकार से उच्च वर्ग की पोशाक पहने वाला व्यक्ति भी सरलता से निम्न वर्ग के व्यक्ति के पास बैठने का प्रयास नहीं करता। उसकी अभिजात्य वर्ग की पोशाक उसे फटेहाल व्यक्ति के पास बैठने से रोकती है। उसे यही चिंता रहती है कि फटेहाल व्यक्ति के पास उसे बैठा देखकर दुनिया क्या कहेगी ?

प्रश्न 2.
इनके लिए बेटा-बेटी, खसम – लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है ?
उत्तर :
इस पंक्ति में लेखक उस व्यक्ति की विचारधारा को व्यक्त करता है, जो पुत्र की मृत्यु के अगले ही दिन खरबूज़े बेचने आई बुढ़िया के संबंध में यह वाक्य कहता है। उस व्यक्ति के विचार में इन नीच लोगों को किसी के मरने का दुख नहीं होता। ये किसी भी संबंध को नहीं मानते। इनके लिए पुत्र-पुत्री, पति-पत्नी तथा धर्म – ईमान का कोई महत्व नहीं होता। ये लोग केवल रोटी के लिए ही जीते हैं। इनका सबकुछ रोटी का टुकड़ा ही है। इसलिए यह बुढ़िया बेटे के मरने के एक दिन बाद ही खरबूज़े बेचने आ गई है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 3.
शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और दुखी होने का भी एक अधिकार होता है।
उत्तर :
इस पंक्ति के माध्यम से लेखक उन अभावग्रस्त अभागे लोगों की दशा का वर्णन कर रहा है, जिनके पास अपने किसी सगे व्यक्ति की मृत्यु पर शोक मनाने का समय भी नहीं है। वे निरंतर अपना पेट भरने की चिंता में लगे रहते हैं। उनकी अभावग्रस्त जिंदगी उन्हें अपने किसी संबंधी के मर जाने पर उसका दुख मनाने का अधिकार भी नहीं देती, जबकि हर किसी को दुखी होने का तो अधिकार है ही।

भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो –
(i) कड्या, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
(i) कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
(iii) अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
(iv) संशय, संसद, संरचना, संवाद, संहार।
(v) अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिला, में, मैं।
ध्यान दो कि झ ञ, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ आपने ऊपर देखीं इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्णों में से किसी भी एक वर्ण की भाँति हो सकता है; जैसे- संशय, संरचना में ‘न्, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ्’।
(.) यह चिह्न है अनुस्वार का और (.) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमश: बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार का प्रयोग व्यंजन के साथ होता है। अनुनासिक का स्वर के साथ।
उत्तर :
विद्यार्थी इसे ध्यान से पढ़ कर याद रखें।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए –
ईमान, बदन, अंदाज़ा, बेचैनी, गम, दर्जा, ज़मीन, जमाना, बरकत।
उत्तर :

  • ईमान – धर्म।
  • बदन – शरीर अंदाज़ा अनुमान।
  • बेचैनी – व्याकुलता।
  • गम – दुख।
  • दर्ज़ा – वर्ग।
  • ज़मीन – धरती।
  • ज़माना – युग।
  • बरकत – लाभ।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित उदाहरण के अनुसार पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए-
उदाहरण: बेटा-बेटी
उत्तर :
खसम – लुगाई, पोता-पोती, झाड़ना-फूँकना, दान-दक्षिणा, छन्नी- ककना, चूनी भूसी, दुअन्नी – चवन्नी।

प्रश्न 4.
पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए –
बंद दरवाज़े खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना।
उत्तर :

  1. बंद दरवाज़े खोल देना – कुछ भी करने की आज़ादी। अच्छी पोशाक पहनने वाले को कहीं भी आने-जाने से रोका नहीं जाता, उसके लिए सभी रास्ते खुले होते हैं।
  2. निर्वाह करना – गुज़ारा करना। बुढ़िया और उसके परिवार का निर्वाह खरबूज़े आदि बेचकर होता था।
  3. भूख से बिलबिलाना – भूख के कारण तड़पना घर में खाने-पीने की सामग्री न होने के कारण बुढ़िया के पोते-पोतियाँ भूख से बिलबिला रहे थे।
  4. कोई चारा न होना- कोई उपाय न होना। बुढ़िया के पास इसके अतिरिक्त कोई और चारा नहीं था कि वह बाज़ार में खरबूजे बेचने जाती।
  5. शोक से द्रवित हो जाना – दुख देखकर करुणा से पिघल जाना। लेखक खरबूज़े बेचने वाली बुढ़िया के शोक से द्रवित था। किसी के दुख को देखकर स्वयं भी दुखी होने का भाव इस वाक्यांश से व्यक्त होता है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
(i) छन्नी- ककना, अढ़ाई – मास, पास-पड़ोस, दुअन्नी चवन्नी, मुँह-अंधेरे, झाड़ना – फूँकना
(ii) फफक-फफककर, बिलख-बिलखकर, तड़प-तड़पकर, लिपट लिपटकर।
उत्तर :
(i) छन्नी- ककना – राम ने अपनी बेटी की शादी के लिए घर का छन्नी- ककना तक बेच दिया।
अढ़ाई – मास – हमारी वार्षिक परीक्षाएँ अढ़ाई – मास बाद शुरू होनी हैं।
पास-पड़ोस – रीना के पास-पड़ोस में कोई परचून की दुकान नहीं है।
दुअन्नी – चवन्नी – आजकल दुअन्नी – चवन्नी में चाय नहीं मिलती, इसके लिए पाँच रुपए देने पड़ते हैं।
मुँह – अंधेरे- विनोद और शारदा प्रतिदिन सुबह मुँह – अंधेरे ही घूमने जाते हैं।
झाड़ना-फूँकना – गीता डॉक्टर से इलाज करने की बजाय ओझा से झाड़ना – फूँकना करवाने में अधिक विश्वास रखती है।

(ii) फफक-फफककर – अपने पिताजी की मृत्यु का समाचार सुनते ही विशाल फफक-फफककर रोने लगा।
बिलख-बिलखकर – अध्यापक की डाँट पड़ते ही सुमन बिलख-बिलखकर रो पड़ी।
तड़प-तड़पकर – कार से टक्कर लगते ही सुखबीर ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
लिपट लिपटकर – साबिरा अपने पति की लाश से लिपट लिपटकर रोने लगी।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इस प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए-
(क) 1. लड़के सुबह उठते ही भूख से बिलबिलाने लगे।
2. उसके लिए तो बजाज की दुकान से कपड़ा लाना ही होगा।
3. चाहे उसके लिए माँ के हाथों के छन्नी-ककना ही क्यों न बिक जाएँ।
(ख) 1. अरे जैसी नीयत होती है, अल्ला भी वैसी ही बरकत देता है।
2. भगवाना जो एक दफे चुप हुआ तो फिर न बोला।
उत्तर :
(क) 1. राजेश विद्यालय से आते ही पेट दर्द से तड़फड़ाने लगा।
2. सलमा के लिए तो बाज़ार से मिठाई लानी ही होगी।
3. चाहे उसका घर-बार ही क्यों न बिक जाए, लेकिन उसे बेटी की शादी तो करनी ही है।
4. माँ-बाप की प्रसन्नता के लिए उसे विवाह करना ही होगा।

(ख) 1. जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा।
2. जो जैसा होता है, वैसा ही करता है।
3. सुरेश जो एक बार यहाँ आया तो फिर नहीं गया।
4. रश्मि जो एक दफे नाराज़ हुई तो फिर खुश न हुई।

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योग्यता विस्तार –

प्रश्न 1.
‘व्यक्ति की पहचान उसकी पोशाक से होती है।’ इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए। यदि आपने भगवाना की माँ जैसी किसी दुखिया को देखा है तो उसकी कहानी लिखिए। पता कीजिए कि कौन-से साँप विषैले होते हैं ? उनके चित्र एकत्र कीजिए और भित्ति पत्रिका में लगाइए।
उत्तर :
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

JAC Class 9 Hindi दुःख का अधिकार Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘दुःख का अधिकार’ कहानी का मूल भाव क्या है ?
उत्तर :
‘दुःख का अधिकार’ कहानी में लेखक ने समाज में फैले अंधविश्वासों, जातिभेद, वर्गभेद आदि पर कटाक्ष किया है। लेखक के अनुसार किसी अपने के मरने का दुख सबको समान रूप से होता है; परंतु उच्च वर्ग जहाँ इस शोक को अपनी सुविधा के अनुसार कई दिनों तक मना सकता है, वहीं निम्न वर्ग के अभागे लोगों के पास अपने पुत्र की मृत्यु तक का शोक मनाने के लिए समय नहीं होता क्योंकि उन्हें पेट की आग रोटी कमाने के लिए विवश कर देती है। इस कहानी में लेखक के पड़ोस की संभ्रांत महिला पुत्र शोक में अढ़ाई महीने तक बिस्तर से नहीं उठ सकी थी, जबकि भगवाना की मृत्यु के एक दिन बाद ही उसकी माँ को परिवार के लिए रोटी जुटाने हेतु खरबूजे बेचने बाज़ार में आना पड़ा।

प्रश्न 2.
पड़ोस की दुकानों पर बैठे अथवा बाज़ार में खड़े लोगों को भगवाना की माँ से घृणा क्यों थी ?
उत्तर :
पड़ोस की दुकानों पर बैठे अथवा बाज़ार में खड़े लोगों को भगवाना की माँ से इसलिए घृणा हो रही थी क्योंकि कल ही उसका पुत्र भगवाना साँप के काटने से मरा था और आज वह बाज़ार में खरबूज़े बेचने आ गई थी। उन्हें लगता था कि उसे सूतक के दिनों में घर में रहना चाहिए था। जिन लोगों को उसके पुत्र के मरने का पता नहीं है, वे यदि उससे खरबूज़े खरीदेंगे तो उनका ईमान-धर्म नष्ट हो जाएगा। वे उसे बेहया मानते हैं।

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प्रश्न 3.
परचून की दुकान पर बैठे लाला ने भगवाना की माँ के संबंध में क्या कहा ?
उत्तर :
परचून की दुकान पर बैठे लाला ने पुत्र की मृत्यु के अगले दिन भगवाना की माँ को खरबूज़े बेचते हुए देखकर कहा कि इन लोगों को किसी के मरने – जीने की कोई चिंता नहीं होती है, फिर भी इन्हें दूसरों के धर्म-ईमान का तो ध्यान रखना चाहिए। जवान बेटे के मरने पर तेरह दिन का सूतक होता है। इस बीच छूत – छात का पूरा ध्यान रखा जाता है, परंतु यह तो यहाँ बाज़ार में खरबूज़े बेचने आ गई है। यहाँ हज़ारों लोग आते-जाते हैं। इनमें से किसी को क्या पता कि इसके घर सूतक है। यदि किसी ने इससे खरबूज़े लेकर खा लिए, तो उसका धर्म-ईमान ही नष्ट हो जाएगा। इन लोगों ने तो अँधेर मचा रखा है।

प्रश्न 4.
पोशाकें मनुष्य को कैसे बाँटती हैं और उसके लिए बंद दरवाजे कैसे खोलती हैं ?
उत्तर :
पोशाक मनुष्य के स्तर को प्रकट करती है। यदि कोई मनुष्य अच्छी, महँगी और चमकदार पोशाक पहनता है तो उसे सभ्य, उच्च वर्गीय और अमीर समझा जाता है। जब कोई व्यक्ति साधारण या फटे-पुराने वस्त्र पहनता है, तो उसे गरीब अथवा निम्न वर्ग का माना जाता है। इस तरह पोशाक के आधार पर मनुष्य के स्तर और आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाकर उसे वर्गों में बाँटा जाता है।

पोशाक मनुष्य के लिए बंद दरवाजे खोलने का काम करती है। जब कोई मनुष्य साधारण कपड़े पहनकर किसी बड़े व्यक्ति से मिलने जाता है, तो चौकीदार उसे बाहर से ही भगा देता है। यदि कोई महँगे, अच्छे और शानदार कपड़े पहनकर बड़े आदमी से मिलने जाता है, तो चौकीदार भागकर उसकी गाड़ी का दरवाजा खोलता है और आने वाले व्यक्ति को सलाम करता है। इस प्रकार पोशाक व्यक्ति के लिए बंद दरवाज़े खोलने का काम करती है।

प्रश्न 5.
लेखक की पोशाक बुढ़िया से उसका दुख का कारण जानने में कैसे रुकावट बन गई ?
उत्तर :
लेखक उच्च वर्ग से संबंध रखता था और उसने अच्छी पोशाक पहन रखी थी। लेकिन उसकी अच्छी पोशाक फुटपाथ पर फटेहाल रोती हुई बुढ़िया के पास बैठकर रोने का कारण जानने में रुकावट पैदा कर रही थी। वह अपनी पोशाक के कारण यह साहस नहीं कर पा रहा था कि वह बुढ़िया के पास बैठकर उसके दुख को बाँट सके। वह यही सोच रहा था कि उसे फटेहाल बुढ़िया के पास बैठा देखकर लोग क्या कहेंगे।

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प्रश्न 6.
जिंदा आदमी और मुर्दा आदमी की परिस्थितियों में क्या अंतर है ?
उत्तर :
जिंदा आदमी और मुर्दा आदमी की परिस्थितियों में बहुत अंतर है। एक निर्धन जिंदा आदमी बिना कुछ खाए-पिए रह सकता है; फटे- पुराने कपड़े पहनकर अपना तन ढक सकता है। वह अपना जीवन किसी भी तरह गुज़ार सकता है, परन्तु मुर्दा आदमी को बिना कफ़न के विदा नहीं किया जा सकता। समाज और बिरादरी के डर से उसके लिए हमें नए कपड़े लाने पड़ते हैं। मुर्दे को नंगा विदा करना हमारे धर्म के भी विरुद्ध माना जाता है। इसलिए जिंदा और मुर्दा आदमी की परिस्थिति में अंतर है।

प्रश्न 7.
भगवाना की माँ को अपने हाथों के छन्नी- ककना क्यों बेचने पड़े ?
उत्तर :
भगवाना के इलाज में घर की जमा-पूँजी समाप्त हो गई थी, लेकिन वह फिर भी नहीं बचा। अब उसके मरने पर उसे नंगा तो विदा नहीं किया जा सकता था। उसके लिए कपड़े की दुकान से नया कपड़ा लाना था। इसलिए भगवाना की माँ ने अपने हाथ के मामूली से गहने छन्नी- ककना बेच दिए ताकि उसके बेटे का क्रिया-क्रम धर्मानुसार हो सके।

प्रश्न 8.
पुत्र के मरने के बाद बुढ़िया जिस साहस से खरबूजे बेचने आई थी, वह बाज़ार में आकर क्यों टूट गया ?
उत्तर :
जवान बेटे के मरने के अगले दिन बुढ़िया बाज़ार में खरबूज़े बेचने के लिए आ गई थी। अब उसके घर में कमाने वाला कोई नहीं था। जवान बहू और पोते को पालने के लिए पैसों की आवश्यकता थी, इसलिए वह साहस करके बाज़ार में खरबूज़े बेचने के लिए आ गई। परंतु बाज़ार में लोगों की चुभती आँखों और जली-कटी बातों ने उसका साहस तोड़ दिया। वह एक ओर बैठकर मुँह छिपाकर रोने लगी।

प्रश्न 9.
लेखक ने दुख मनाने के लिए सहूलियत की बात क्यों की ?
उत्तर :
समाज में रहने वाले छोटे-बड़े सभी व्यक्तियों को दुख मनाने की सहूलियत होनी चाहिए। दुख को प्रकट करने का अवसर मिलने पर दुखी व्यक्ति का मन हल्का हो जाता है; उस पर दुख का भार कम हो जाता है। जिस प्रकार रोने से मन हल्का हो जाता है, उसी प्रकार मृत्यु पर शोक मनाने से दुख कम हो जाता है। इसलिए लेखक ने दुख मनाने के लिए सहूलियत की बात की है।

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प्रश्न 10.
क्या दुखी होने का अधिकार सबके लिए समान है ?
उत्तर :
गरीब व्यक्ति परिवार के पालन-पोषण के लिए अपने परिवार की किसी जवान मौत के दुख को धकेलकर काम के लिए चला जाता है; उसके पास दुख मनाने का समय नहीं होता। वहीं दूसरी ओर अमीर व्यक्ति के पास समाज, रिश्तेदार आदि सभी एकत्रित होकर उसका दुख कम करने में लगे रहते हैं। उसके पास दुख मनाने का समय भी होता है और धन भी। इसलिए सबके लिए दुखी होने का अधिकार समान नहीं है।

प्रश्न 11.
बुढ़िया के पुत्र भगवाना की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर :
भगवाना बुढ़िया का इकलौता पुत्र था। एक दिन सुबह मुँह – अँधेरे वह खेत से खरबूज़े तोड़ रहा था। मध्यम रोशनी होने के कारण कुछ चीजें स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थीं। वहीं पास में खेत की गीली मेड़ की तरावट में एक साँप विश्राम कर रहा था। खरबूज़े तोड़ते-तोड़ते अचानक भगवाना का पैर साँप के ऊपर जा पड़ा और साँप ने उसे काट लिया। इस प्रकार साँप के काटने से भगवाना की मृत्यु हुई।

प्रश्न 12.
बुढ़िया बाज़ार में खरबूज़े बेचने के लिए क्यों आई थी ?
उत्तर :
अपने परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए बुढ़िया खरबूज़े बेचने बाज़ार में आई थी। पहले यह कार्य उसका पुत्र करता था। अब उनके पास कोई अन्य उपाय नहीं था। पुत्र के निधन के बाद बुढ़िया को उधार देने वाला भी कोई नहीं था। घर में बच्चे भूख से और भगवाना की पत्नी बुखार से तड़प रही थी। इन सभी विकट स्थितियों का ध्यान करते हुए बुढ़िया बाज़ार में खरबूज़े बेचने आई थी।

प्रश्न 13.
पोशाकें मनुष्य को किस प्रकार बाँटती हैं ?
उत्तर
पोशाकें मनुष्य को विभिन्न श्रेणियों में बाँटती हैं। यह मानव को स्थिति के अनुसार न चलाकर पोशाक के आधार पर अन्य लोगों से अलग करती है। पोशाक ही अमीर-गरीब का भेद स्पष्ट करती है। फटेहाली गरीबी का परिचायक बन जाती है, जबकि सुंदर व रंग-बिरंगे कपड़े अमीर तथा उच्चवर्गीय लोगों के परिचायक बन जाते हैं। आज समाज में पोशाकें इसी प्रकार मनुष्य को बाँटने का काम कर रही हैं।

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प्रश्न 14.
पाठ में लेखक ने ‘जिंदा आदमी नंगा भी रह सकता है’ कहकर समाज पर क्या व्यंग्य किया है?
उत्तर :
पाठ में लेखक ने ‘जिंदा आदमी नंगा भी रह सकता है’ कहकर समाज की उस परंपरा एवं रूढ़िवादिता पर व्यंग्य किया है, जिसमें जीवित व्यक्ति को चाहे जीवन भर तन ढँकने के लिए कोई कपड़ा न मिला हो, लेकिन मरने के बाद उसे नया कपड़ा कफ़न के रूप में अवश्य दिया जाता है। लेखक जानना चाहता है कि समाज को जिंदा व्यक्ति से अधिक मरे व्यक्ति की चिंता क्यों है?

प्रश्न 15.
लेखक को फुटपाथ पर बैठने से कौन और क्यों रोक रहा था ?
उत्तर :
लेखक को फुटपाथ पर बैठने से उसकी पोशाक रोक रही थी, क्योंकि उसने उच्चवर्ग की कीमती पोशाक पहन रखी थी। यह पोशाक लेखक को फुटपाथ पर रुकने तक की इज़ाजत नहीं दे रही थी, बैठने की बात तो दूर की थी। लेखक की पोशाक फुटपाथ पर बैठे लोगों तथा उसके बीच के फासले को स्पष्ट कर रही थी। इसी कारण लेखक फुटपाथ पर नहीं बैठा।

दुःख का अधिकार Summary in Hindi

लेखक-परिचय :

जीवन-परिचय – आधुनिक युग के सुप्रसिद्ध कथाकार यशपाल का जन्म 3 दिसंबर, सन् 1903 को फिरोज़पुर छावनी में हुआ था। इनके पिता का नाम हीरालाल तथा माता का नाम प्रेम देवी था। इनके पूर्वज कांगड़ा जिले के निवासी थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी में हुई थी। बाद में यशपाल फिरोज़पुर आकर पढ़ने लगे और यहीं से इन्होंने सन् 1921 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन आर्य समाज के प्रचारक के रूप में प्रारंभ किया तथा इनका मासिक वेतन आठ रुपए था।

सन् 1922 में इन्होंने नेशनल कॉलेज में प्रवेश लिया। यहीं इनकी भेंट सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी भगत सिंह तथा सुखदेव से हुई। इसके बाद यशपाल क्रांतिकारियों के विभिन्न दलों से जुड़ गए। लाहौर और रोहतक में इन्होंने बम बनाने का कार्य भी किया था। 7 अगस्त, 1936 को बरेली जेल में इनका विवाह प्रकाशवती से संपन्न हुआ। इन्होंने सात बार विदेश यात्राएँ भी की थीं। इन्हें अनेक उपाधियों और पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया। 26 दिसंबर सन् 1976 को इनका देहावसान हुआ।

रचनाएँ – यशपाल ने साहित्य रचना कॉलेज जीवन से ही प्रारंभ कर दी थी। इन्होंने उपन्यास, कहानी, निबंध, नाटक, यात्रा – विवरण, संस्मरण आदि गद्य की समस्त विधाओं में साहित्यिक रचनाएँ की हैं। इनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं-
उपन्यास – दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, मनुष्य के रूप, अमिता, झूठा सच, बारह घंटे, अप्सरा का श्राप, क्यों फँसे, मेरी तेरी उसकी बात आदि।
नाटक – नशे – नशे की बात, रूप की परख, गुडबाई दर्देदिल।
यात्रा विवरण – लोहे की दीवार के दोनों ओर, राहबीती, स्वर्गोद्यान बिना साँप।
आत्मकथा – सिंहावलोकन।
निबंध – चक्कर क्लब, न्याय का संघर्ष, मार्क्सवाद, रामराज्य की कथा, जग का मुजरा।
संपादन – विप्लव।
कहानी-संग्रह – पिंजरे की उड़ान, वो दुनिया, तर्क का तूफान, ज्ञानदान, अभिशप्त, भस्मावृत चिनगारी, फूलों का कुरता, धर्मयुद्ध, उत्तराधिकारी, चित्र का शीर्षक, तुमने क्यों कहा था मैं सुंदर हूँ, उत्तमी की माँ, ओ भैरवी, सच बोलने की भूल आदि।

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पाठ का सार :

‘दुःख का अधिकार’ कहानी के लेखक यशपाल हैं। इस कहानी में लेखक ने बताया है कि हमारे देश में कुछ ऐसे अभागे लोग भी हैं, जिन्हें दुख मनाने का भी अधिकार नहीं है। समाज में हमारी पोशाक देखकर हमारा स्तर निर्धारित किया जाता है। ऊँची और अच्छी पोशाक वाले निम्न व मामूली पोशाक वालों के साथ संबंध नहीं बना सकते। जैसे कटी हुई पतंग एकदम ज़मीन पर नहीं गिरती है, वैसे ही अच्छी पोशाक वाले मामूली अथवा गंदी पोशाक पहनने वालों की तरफ नहीं झुकते हैं। बाज़ार में फुटपाथ पर कुछ खरबूज़े टोकरी में और कुछ ज़मीन पर रखकर एक अधेड़ उम्र की औरत कपड़े से मुँह छिपाए सिर घुटनों पर रखकर रो रही थी। वह खरबूज़े बेचने के लिए लाई थी, परंतु उन्हें कोई खरीद नहीं रहा था। आस-पास की दुकानों पर बैठे लोग घृणा से उस स्त्री के संबंध में बातें कर रहे थे। लेखक उस स्त्री से उसके रोने का कारण जानना चाहता था, परंतु अपनी पोशाक का लिहाज़ कर वह फुटपाथ पर उसके साथ न बैठ सका।

वहीं एक आदमी कह रहा था कि क्या ज़माना आ गया है! जवान लड़के को मरे एक दिन भी नहीं हुआ कि यह बेहया दुकान लगाकर बैठी है। दूसरा कह रहा था कि जैसी नीयत होती है, अल्ला भी वैसी बरकत देता है। तीसरे का कहना था कि इन लोगों के लिए संबंध कुछ नहीं रोटी ही सबकुछ हैं। परचून की दुकान पर बैठे लाला ने कहा कि इन लोगों को दूसरे के धर्म-ईमान की भी चिंता नहीं है। जवान बेटे के मरने पर तेरह दिन का सूतक होता है और यह आज ही खरबूजे बेचने आ गई है। आस-पास के दुकानदारों से पता करने पर लेखक को ज्ञात हुआ कि उस अधेड़ स्त्री का तेईस वर्ष का बेटा था। घर में बहू और पोता-पोती भी हैं।

लड़का शहर के पास डेढ़ बीघा जमीन में तरकारियाँ बोता था, जिससे परिवार का पालन-पोषण होता था। वह परसों सुबह मुँह- अँधेरे बेलों से खरबूजे चुन रहा था कि उसका पैर साँप पर पड़ गया और साँप ने उसे डँस लिया। ओझा से इलाज करवाने तथा नाग देवता की पूजा करने के बाद भी अधेड़ स्त्री के पुत्र भगवाना का शरीर काला पड़ गया और वह मर गया। उसका क्रिया-कर्म करने में इनकी सारी जमा-पूँजी समाप्त हो गई। बच्चे भूख से बिलख रहे थे; बहू को बुखार हो गया था; बुढ़िया को कोई उधार देने वाला भी नहीं था।

वह रोते- बिलखते बाज़ार में खरबूज़े बेचने आ गई थी। कल जिसका बेटा चल बसा, मज़बूरी में उसे आज बाजार में खरबूजे बेचने पड़ रहे हैं। लेखक को याद आया कि पिछले साल उसके पड़ोस में एक स्त्री अपने पुत्र की मृत्यु के शोक में अढ़ाई मास तक पलंग से उठ न सकी थी। पुत्र-वियोग में बार-बार उसे मूर्छा आ जाती थी। दो-दो डॉक्टर उसकी सेवा में उपस्थित रहते थे। सारा शहर उसके पुत्र-शोक से दुखी था। आज इस बुढ़िया के पास शोक मनाने की सुविधा भी नहीं है और उसे यह अधिकार भी नहीं है कि वह दुखी हो सके। यह सब सोचते हुए लेखक चला जा रहा था, राह चलते ठोकरें खाता हुआ।

JAC Class 9 Hindi Solutions Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार

कठिन शब्दों के अर्थ :

  • पोशाक – पहनावा।
  • दर्ज़ा – स्तर, हैसियत।
  • अनुभूति – अनुभव, तजुर्बा।
  • अड़चन – रुकावट, बाधा।
  • डलिया – टोकरी।
  • अधेड़ – ढलती अवस्था।
  • घृणा – नफ़रत।
  • व्यथा – दुख।
  • उपाय – तरीका।
  • बेहया – बेशर्म, निर्लज्ज।
  • नीयत – इरादा, मन में रहने वाला भाव, मंशा।
  • बरकत – लाभ।
  • खसम – पति।
  • लुगाई – पत्नी।
  • परचून की दुकान – पंसारी की दुकान।
  • सूतक – घर में पैदा होने वाले बच्चे अथवा घर में किसी के मरने पर परिवार वालों को लगने वाला अशौच। इस दशा में कुछ निश्चित दिनों तक छूत का ध्यान रखते हैं।
  • कछियारी – खेतों में तरकारी आदि की खेती करना।
  • निर्वाह – गुज़ारा।
  • तरावर – ठंडक।
  • दफे – बार।
  • छन्नी-ककना – मामूली गहने।
  • संभ्रांत – सम्मानित, प्रतिष्ठित, उच्च वर्ग की।
  • द्रवित – दया से पसीजना।
  • गम – दुख।
  • शोक – दुख।
  • सहूलियत – सुविधा।

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Vyakaran शब्द और पद Questions and Answers, Notes Pdf.

JAC Board Class 9 Hindi Vyakaran शब्द और पद

शब्द भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। शब्द को व्याकरण के नियमों के अनुसार किसी वाक्य में प्रयोग करने पर वह पद बन जाता है। एक से अधिक पद जुड़कर एक ही व्याकरणिक इकाई का काम करने पर पदबंध कहलाते हैं।

शब्द का वर्गीकरण इस प्रकार है –

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद 1

प्रश्न 1.
शब्द किसे कहते हैं ?
उत्तर :
शब्द वर्णों के मेल से बनाई गई भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है। जैसे – राम, रावण, मारना।

प्रश्न 2.
शब्द का प्रत्यक्ष रूप किसे कहते हैं ?
उत्तर :
भाषा में जब शब्द कर्ता में बिना परसर्ग के आता है तो वह अपने मूल रूप में आता है। इसे शब्द का प्रत्यक्ष रूप कहते हैं। जैसे – वह, लड़का, मैं।

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

प्रश्न 3.
कोशीय शब्द किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जिस शब्द का अर्थ शब्दकोश से प्राप्त हो जाए, उसे कोशीय शब्द कहते हैं। जैसे- मनुष्य, घोड़ा।

प्रश्न 4.
व्याकरणिक शब्द किसे कहते हैं ?
उत्तर :
व्याकरणिक शब्द उस शब्द को कहते हैं, जो व्याकरणिक कार्य करता है। जैसे-‘मुझसे आजकल विद्यालय नहीं जाया जाता।’ इस वाक्य में ‘जाता’ शब्द व्याकरणिक शब्द है।

प्रश्न 5.
पद किसे कहते हैं ?
अथवा
शब्द वाक्य में प्रयुक्त होने पर क्या कहलाता है ?
उत्तर :
जब किसी शब्द को व्याकरण के नियमों के अनुसार किसी वाक्य में प्रयोग किया जाता है तब वह पद बन जाता है। जैसे- राम, रावण, मारा शब्द है। इनमें विभक्तियों, परसर्ग, प्रत्यय आदि को जोड़कर पद बन जाता है। जैसे- श्रीराम ने रावण को मारा।

प्रश्न 6.
पद के कितने और कौन-कौन से भेद हैं ?
उत्तर :
पद के पाँच भेद संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय हैं।

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

प्रश्न 7.
शब्द और पद में क्या अंतर है ?
उत्तर :
शब्द भाषा की स्वतंत्र और सार्थक इकाई है और वाक्य के बाहर रहता है, परंतु जब शब्द वाक्य के अंग के रूप में प्रयोग किया जाता है तो इसे पद कहते हैं। जैसे- ‘लड़का, मैदान, खेलना’ शब्द हैं। इन शब्दों से यह वाक्य बनाने पर – ‘लड़के मैदान में खेलते हैं।’- ये पद बन जाते हैं।

प्रश्न 8.
पदबंध किसे कहते हैं ?
उत्तर :
पदबंध का शाब्दिक अर्थ है – पदों में बँधा हुआ। जब एक से अधिक पद मिलकर एक इकाई के रूप में व्याकरणिक कार्य करते हैं तो वे पदबंध कहलाते हैं। जैसे चिड़िया सोने के पिंजरे में बंद है। इस वाक्य में सोने का पिंजरा पदबंध है। पदबंध वाक्यांश मात्र होते हैं, काव्य नहीं। पदबंध में एक से अधिक पदों का योग होता है और ये पद आपस में जुड़े होते हैं। शब्द के सभी भेद स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 9.
शब्द और शब्दावली वर्गीकरण निम्नलिखित दृष्टियों से किया जा सकता है –
उत्तर :
(क) अर्थ की दृष्टि से वर्गीकरण –
अर्थ की दृष्टि से निम्नलिखित चार भेद किए जाते हैं –
(i) एकार्थी – जिन शब्दों का प्रयोग केवल एक अर्थ में ही होता है, उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं। जैसे –
पुस्तक, पेड़, घर, घोड़ा, पत्थर आदि।
(ii) अनेकार्थी – जो शब्द एक से अधिक अर्थ बताने में समर्थ हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं। इन शब्दों का प्रयोग जिस संदर्भ में किया जाएगा, ये उसी के अनुसार अर्थ देंगे। जैसे –
काल – समय, मृत्यु।
अर्क – सूर्य, आक का पौधा।
(iii) पर्यायवाची या समानार्थी – जिन शब्दों के अर्थों में समानता हो, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं
जैसे – कमल – जलज, नीरज, अंबुज, सरोज।
आदमी – नर, मनुष्य, मानव।
(iv) विपरीतार्थी – विपरीत अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों को विपरीतार्थी अथवा विलोम शब्द कहते हैं। जैसे –
आशा-निराशा हँसना – रोना

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

(ख) उत्पत्ति की दृष्टि से वर्गीकरण –
इतिहास की दृष्टि से शब्दों के पाँच भेद हैं –
(i) तत्सम – तत्सम शब्द का अर्थ है – तत् (उसके) + सम (समान) अर्थात उसके समान जो शब्द संस्कृत के मूल रूपों के समान ही हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तत्सम कहते हैं। इनका प्रयोग हिंदी में भी उसी रूप में किया जाता है, जिस रूप में संस्कृत में किया जाता है। जैसे- नेत्र, जल, पवन, सूर्य, आत्मा, माता, भवन, नयन, आशा, सर्प, पुत्र, हास, कार्य, यदि आदि।

(ii) तद्भव – तद्भव शब्द का अर्थ है तत् ( उससे) + भव ( पैदा हुआ) जो शब्द संस्कृत के मूल रूपों से बिगड़ कर हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तद्भव कहते हैं, जैसे- दुध से दुग्ध, घोटक से घोड़ा, आम्र से आम, अंधे से अंधा, कर्म से काम, माता से माँ, सर्प से साँप, सप्त से सात, रत्न से रतन, भक्त से भगत।

(iii) देशज – देशज का अर्थ होता है देश + ज अर्थात देश में जन्मा। लोकभाषाओं से आए हुए शब्द देशज कहलाते हैं। कदाचित ये शब्द बोलचाल से बने हैं। जैसे – पेड़, खिड़की, अटकल, तेंदुआ, लोटा, डिबिया, जूता, खोट, फुनगी आदि।

(iv) विदेशज – जो शब्द विदेशी भाषाओं से लिए गए हैं, उन्हें विदेशज कहते हैं।
अंग्रेज़ी – डॉक्टर, नर्स, स्टेशन, प्लेटफ़ॉर्म, पेंसिल, बटन, फ़ीस, मोटर, कॉलेज, ट्रेन, ट्रक, कार, बस, स्कूटर, फ्रीज़ आदि।
फ़ारसी – दुकान, ईमान, ज़हर, किशमिश, उम्मीद, फ़र्श, जहाज़, कागज़, ज़मींदार, बीमार, सब्ज़ी, दीवार आदि।
अरबी – कीमत, फ़ैसला, कायदा, तरफ़, नहर, कसरत, नशा, वकील, वज़न, कानून, तकदीर, खराब, कत्ल, फौज़ नज़र, खत आदि।
तुर्की – तगमा, तोप, लाश, चाकू, उर्दू, कैंची, बेग़म, गलीचा, बावर्ची, बहादुर, चम्मच, कैंची, कुली, कुरता आदि।
पुर्तगाली – तंबाकू, पेड़ा, गिरिजा, कमीज़, तौलिया, बालटी, मेज़, कमरा, अलमारी, संतरा, साबुन, चाबी, आलपीन, कप्तान आदि।
फ्रांसीसी – कारतूस, कूपन, अंग्रेज़।

(v) संकर – दो भाषाओं के शब्दों के मिश्रण से बने शब्द संकर शब्द कहलाते हैं।
यथा – जाँचकर्ता – जाँच (हिंदी) कर्ता (संस्कृत)
सज़ाप्राप्त – सज़ा (फ़ारसी) प्राप्त (संस्कृत)
रेलगाड़ी – रेल (अंग्रेज़ी) गाड़ी (हिंदी)
उद्गम के आधार पर शब्दों की एक और कोटि हिंदी शब्दावली में पाई जाती है जिसे अनुकरणात्मक या ध्वन्यात्मक कहते हैं।
यथा – हिनहिनाना, चहचहाना, खड़खड़ाना, भिनभिनाना आदि।

(ग) रचना की दृष्टि से वर्गीकरण –
प्रयोग के आधार पर शब्दों के भेद तीन प्रकार के होते हैं –

(i) मूल अथवा रूढ़ शब्द – जो शब्द किसी अन्य शब्द के संयोग से नहीं बनते हैं और अपने आप में पूर्ण होते हैं उन्हें रूढ़ अथवा मूल शब्द कहते हैं। ये शब्द किसी विशेष अर्थ के लिए रूढ़ या प्रसिद्ध हो जाते हैं। इनके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते।
जैसे – घड़ा, घोड़ा, काला, जल, कमल, कपड़ा, घास, दिन, घर, किताब, मुँह।

(ii) यौगिक – दो शब्दों के संयोग से जो सार्थक शब्द बनते हैं, उन्हें यौगिक कहते हैं। दूसरे शब्दों में यौगिक शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें रूढ़ शब्द के अतिरिक्त प्रत्यय, उपसर्ग या एक अन्य रूढ़ शब्द अवश्य होता है अर्थात ये दो अंशों को जोड़ने से बनते हैं, जिनमें एक शब्द आवश्यक रूप से रूढ़ होता है। जैसे – नमकीन – इसमें नमक रूढ़ तथा ईन प्रत्यय है।
जैसे – गतिमान, विचारवान, पाठशाला, विद्यालय, प्रधानमंत्री, गाड़ीवान, पानवाला, घुड़सवार, बैलगाड़ी, स्नानघर, अनपढ़, बदचलन।

(iii) योगरूढ़ – दो शब्दों के योग से बनने पर भी किसी एक निश्चित अर्थ में रूढ़ हो जाने वाले शब्द योगरूढ़ कहलाते हैं।
जैसे – चारपाई, तिपाई, जलज (जल + ज = कमल), दशानन (दस + आनन = रावण), जलद (जल + द = बादल), जलधि (जल + धि समुद्र)।

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

(घ) रूपांतरण की दृष्टि से शब्दों के भेद –

(i) विकारी शब्द – जिन शब्दों के रूप में विकार (परिवर्तन) उत्पन्न हो जाता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया – ये चार प्रकार के शब्द विकारी कहलाते हैं। इनमें लिंग, वचन एवं कारक आदि के कारण विकारी उत्पन्न हो जाता है।

(ii) अविकारी शब्द – जिन शब्दों के रूप में विकार (परिवर्तन) उत्पन्न नहीं होता और जो अपने मूल में बने रहते हैं, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं।

अविकारी शब्द को अव्यय भी कहा जाता है। क्रिया-विशेषण, समुच्चयबोधक, संबंधसूचक तथा विस्मयादिबोधक – ये चार प्रकार के शब्द अविकारी कहलाते हैं। क्रिया-विशेषण इधर समुच्चयबोधक और संबंधसूचक के ऊपर विस्मयादिबोधक ओह।

(ङ) प्रयोग की दृष्टि से –
प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण निम्नलिखित दो वर्गों में किया जाता है –
(i) सामान्य शब्द – आम जन-जीवन में प्रयोग होने वाले शब्द सामान्य शब्द कहलाते हैं; जैसे- दाल, भात, खाट, लोटा, सुबह, हाथ, पाँव, घर, मैदान।

(ii) पारिभाषिक शब्द – जो शब्द ज्ञान – विज्ञान अथवा विभिन्न व्यवसायों में विशेष अर्थों में प्रयोग किए जाते हैं, पारिभाषिक शब्द कहलाते हैं।
इन्हें तकनीकी शब्द भी कहते हैं, जैसे- संज्ञा, सर्वनाम, रसायन, समाजशास्त्र, अधीक्षक।

JAC Class 9 Hindi व्याकरण शब्द और पद

प्रश्न 10.
शब्द पद कब बन जाता है ? उदाहरण देकर तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
उत्तर :
शब्द को जब व्याकरण के नियमों के अनुसार वाक्य में प्रयोग करते हैं तब वह पद बन जाता है, जैसे- राम, रावण, मारा शब्द हैं। इनसे बना वाक्य – राम ने रावण को मारा- पद है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

Jharkhand Board JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

JAC Class 9 Hindi चंद्र गहना से लौटती बेर Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘इस विजन में…….अधिक है’ -पंक्तियों में नगरीय संस्कृति के प्रति कवि का क्या आक्रोश है और क्यों ?
उत्तर
कवि नगरीय संस्कृति के प्रति वैसे सहज भाव नहीं रखता, जैसे ग्रामीण आंचल की सुंदरता के प्रति उस के हृदय में है। नगरों में प्रत्येक वस्तु व्यापारिक दृष्टि से देखी परखी जाती है। वहाँ के जीवन में पाखंड और स्वार्थ की छाया सदा ही बनी रहती है। वहाँ का प्रेम भी बनावटी ही होता है। इसलिए कवि के हृदय में ऐसी संस्कृति के प्रति आक्रोश छिपा हुआ है।

प्रश्न 2.
सरसों को ‘सयानी’ कहकर कवि क्या कहना चाहता होगा ?
उत्तर :
कवि सरसों को सयानी कहकर यह बताना चाहता है कि उसके पीले-पीले फूलों से सारे खेत दूर-दूर तक पीले रंग में रंगे हुए दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है, जैसे प्रकृति ने उसके हाथ पीले कर देने का निश्चय कर लिया है और वह विवाह मंडप में सजी सँवरी धारी है।

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प्रश्न 3.
अलसी के मनोभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सजे-सँवरे चने के पास ही दुबले-पतले शरीर और लचीली कमर वाली अलसी अपने सिर पर नीले फूलों को सजाकर खड़ी है। वह चंचलता से परिपूर्ण है। शरारत-भरे स्वर में कहती है कि जो उसे छू देगा, वह उसे अपना हृदय दान में दे देगी।

प्रश्न 4.
अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग क्यों किया गया है ?
उत्तर :
कवि ने अलसी के लिए ‘हठीली’ विशेषण का प्रयोग किया है क्योंकि वह यह जिद्द कर रही है कि जो कोई उसे छू देगा वह उसी को अपना हृदय दे देगी, उसी की हो जाएगी।

प्रश्न 5.
‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ में कवि की किस सूक्ष्म कल्पना का आभास मिलता है ?
उत्तर :
कवि अति कल्पनाशील है। शाम का समय है और आकाश में संध्या का सूर्य जगमगाने लगा है जिसका प्रतिबिंब पोखर के जल में बन रहा है। पोखर का जल धीरे-धीरे लहरियाँ ले रहा है जिस कारण सूर्य का प्रतिबिंब हिल-हिल कर लंबे गोल खंभे के समान प्रतीत हो रहा है। कवि ने उसे ‘चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ कहकर अपनी सूक्ष्म कल्पना का परिचय दिया है।

प्रश्न 6.
कविता के आधार पर ‘हरे चने’ का सौंदर्य अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
उत्तर :
छोटा-सा एक बलिश्त के बराबर हरा ठिगना चना अपने सिर पर छोटे गुलाबी फूल का मुरैठा बाँध कर सज-धज कर खड़ा है। उसका सौंदर्य अनुपम है। कवि उसकी सुंदरता पर मुग्ध होकर एकटक उसे निहारता है।

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प्रश्न 7.
कवि ने प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ किया है ?
उत्तर :
श्री केदारनाथ अग्रवाल के द्वारा रचित कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ वास्तव में प्रकृति के मानवीकरण का अनूठा रूप है। कवि ने सारी प्रकृति पर ही मानवीय भावनाओं का आरोप कर दिया है। बीते भर का चना गुलाबी फूलों की पगड़ी लपेटे खेत में सज-सँवर कर खड़ा है तो दुबले-पतले शरीर वाली हठीली अलसी अपने सिर पर नीले फूलों को सजाकर खड़ी है जो किसी को भी अपना दिल दे देने को तैयार है। सरसों जवान हो चुकी है जो पीले फूलों से सज-सँवर कर ब्याह मंडप में पधार गई है। प्रकृति का अनुराग-आँचल हिल रहा है। पोखर के किनारे पानी में अधडूबे पत्थर भी पानी पी रहे हैं। चित्रकूट की भूमि बाँझ है जिस पर काँटेदार कुरूप पेड़ खड़े हैं।

प्रश्न 8.
कविता में से उन पंक्तियों को ढूँढ़िए जिनमें निम्नलिखित भाव व्यंजित हो रहा है और चारों तरफ सूखी और उजाड़ ज़मीन है लेकिन वहाँ भी तोते का मधुर स्वर मन को स्पंदित कर रहा है।
उत्तर :
बाँझ भूमि पर
इधर-उधर रींवा के पेड़
काँटेदार कुरूप खड़े हैं।
सुन पड़ता है
मीठा-मीठा रस टपकाता
सुग्गे का स्वर
टें टें टें टें

रचना और अभिव्यक्ति –

प्रश्न 9.
‘और सरसों की न पूछो’- इस उक्ति में बात को कहने का एक खास अंदाज है। हम इस प्रकार की शैली का प्रयोग कब और क्यों करते हैं?
उत्तर :
कवि के शब्द- चयन और वाक्य संरचना में नाटकीयता का समावेश हुआ है जिससे उसके हृदय में छिपे भाव एक खास अंदाज में प्रकट हुए हैं। जब वह युवा हो चुकी सरसों के लिए कहता है-‘और सरसों की न पूछो तो उससे यह स्पष्ट रूप से ध्वनित होता है कि अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया कि सरसों बड़ी हो गई है और विवाह के योग्य हो चुकी है। हम सामान्य बोलचाल में इस प्रकार की शैली का प्रयोग तभी और वहीं करते हैं जब हम किसी बात पर पूरी तरह विश्वस्त हो जाते हैं। उस बात की सच्चाई पर हमें तनिक भी अविश्वास या संशय नहीं होता।

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प्रश्न 10.
काले माथे और सफ़ेद पंखों वाली चिड़िया आपकी दृष्टि में किस प्रकार के व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है ?
उत्तर :
कविता में वर्णित काले माथे और सफ़ेद पंखों वाली चिड़िया चालाक, मौकापरस्त और चुस्त व्यक्तित्व का प्रतीक हो सकती है जो उचित अवसर मिलते ही अपना स्वार्थ पूरा कर दूर भाग जाता है।

भाषा-अध्ययन –

प्रश्न 11.
बीते के बराबर, ठिगना, मुरैठा आदि सामान्य बोलचाल के शब्द हैं लेकिन कविता में इन्हीं से सौंदर्य उभरा है और कविता सहज बन पड़ी है। कविता में आए ऐसे ही अन्य शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर :
हठीली, लचीली, सयानी, फाग, फागुन, पोखर, लहरियाँ, झपाटे, उजली, चटुल, रेल की पटरी, ट्रेन का टाइम, सुग्गे, टें टें टें दें, टिस्टों टिरटों, चुप्पे-चुप्पे।

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प्रश्न 12.
कविता को पढ़ते समय कुछ मुहावरे मानस पटल पर उभर आते हैं, उन्हें लिखिए और अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर :
1. बीते के बराबर – छोटा।
वाक्य – अरे, इस राकेश को तो देखो! यह है तो बीते के बराबर, पर बातें कितनी बड़ी-बड़ी करता है।
2. हाथ पीले करना – विवाह करना।
वाक्य – हर माता-पिता को अपनी जवान बेटी के हाथ पीले करने की चिंता अवश्य होती है।
3. प्यास बुझना – संतोष होना, इच्छा पूरी होना।
वाक्य – शिष्य ने जैसे ही अपने गुरु जी को देखा उसकी आँखों की प्यास बुझ गई।
4. टूट पड़ना – हमला करना।
वाक्य – हमारे खिलाड़ी तो विपक्षी टीम के गोल पर टूट पड़े और एक के बाद एक लगातार चार गोल ठोक दिए।
5. जुगुल जोड़ी = प्रेम करने वाली जोड़ी
वाक्य – भक्त के हृदय में राधा-कृष्ण की जुगुल जोड़ी सदा बसी ही रहती है।

पाठेतर सक्रियता –

प्रश्न :
प्रस्तुत अपठित कविता के आधार पर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
देहात का दृश्य
अरहर कल्लों से भरी हुई फलियों से झुकती जाती है,
उस शोभासागर में कमला ही कमला बस लहराती है।
सरसों दानों की लड़ियों से दोहरी – सी होती जाती है,
भूषण का भार सँभाल नहीं सकती है कटि बलखाती है है
चोटी उस की हिरनखुरी के फूलों से गुँथ कर सुंदर,
अन- आमंत्रित आ पोलंगा है इंगित करता हिल – हिल कर।
हैं मसें भींगती गेहूँ की तरुणाई फूटी आती है,
यौवन में माती मटरबेलि अलियों से आँख लड़ाती है।
लोने – लोने वे घने चने क्या बने बने इठलाते हैं,
हौले-हौले होली गा-गा घुँघरू पर ताल बजाते हैं।
हैं जलाशयों के ढालू भीटों पर शोभित तृण शालाएँ,
जिनमें तप करती कनक वरण हो जाग बेलि-अहिबालाएँ।
हैं कंद धरा में दाब कोष ऊपर तक्षक बन झूम रहे,
अलसी के नील गगन में मधुकर दृग-तारों से घूम
रहे। मेथी में थी जो विचर रही तितली सो सोए में सोई,
उस की सुगंध – मादकता में सुध-बुध खो देते सब कोई।

शब्दार्थ : हिरनखुरी – बरसाती लता। भीटा – बरसाती लता। भीटा – दूह, टीले के शक्ल की ज़मीन

प्रश्न :
1. इस कविता के मुख्य भाव को अपने शब्दों में लिखिए।
2. इन पंक्तियों में कवि ने किस-किसका मानवीकरण किया है ?
3. इस कविता को पढ़कर आपको किस मौसम का स्मरण हो आता है ?
4. मधुकर और तितली अपनी सुध-बुध कहाँ और क्यों खो बैठे?
उत्तर
1. कवि ने फरवरी – मार्च महीनों में कच्ची-पक्की फसलों से भरे खेतों का सुंदर चित्रण करते हुए माना है कि प्रकृति ने धरती पर अपार सोना बरसाया है। अरहर की फलियाँ अपने भार से झुकी जाती हैं। सरसों दानों के भार से दोहरी होती जा रही है। हिरनखुरी के फूलों से गुँथी वह सुंदर लगती है। गेहूँ की बालियाँ लगनी आरंभ हो गई हैं। मटर और चने की फसलें इठलाने लगी हैं। अलसी और मेथी अपने रंग-गंध से तितलियों को अपनी ओर खींच रही हैं। प्रकृति का रंग तो खेतों के कण-कण में समाया हुआ है।
2. कवि ने इस कविता में अरहर, सरसों, मटर, चने और गेहूँ का मानवीकरण किया है।
3. इस कविता को पढ़कर बसंत ऋतु का स्मरण हो आता है।
4. अलसी पर मधुकर और मेथी पर तितली ने घूमते हुए अपनी सूझ-बूझ खो दी। वे प्रकृति की सुंदरता पर अपने आप को खो बैठे हैं।

एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा कवि केदारनाथ अग्रवाल पर बनाई गई फ़िल्म देखें।

JAC Class 9 Hindi चंद्र गहना से लौटती बेर Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
कवि ने खेत में खड़े हरे चने और अलसी के सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया है ?
उत्तर :
चना एक बीते के बराबर है। उसका रंग हरा तथा कद ठिगना है। वह सिर पर गुलाबी फूल का साफा-सा बाँधे, सजा खड़ा है। अलसी हठीली, शरीर से पतली तथा लचीली है। वह नीले रंग के फूल सिर पर चढ़ाकर यह कह रही है कि जो भी मुझे छुएगा, मैं उसको अपना हृदय दान दे दूँगी।

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प्रश्न 2.
‘देखता हूँ मैं: स्वयंवर हो रहा है……..अंचल हिल रहा है’, पंक्तियों के द्वारा कवि क्या कहना चाहता है ?
उत्तर :
इन पंक्तियों के द्वारा कवि प्रकृति के सौंदर्य का मानवी क्रियाओं का आरोप करने का अनुरागमयी चित्रण करना चाहता है।

प्रश्न 3.
कवि ने किस भूमि को प्रेम की सर्वाधिक उपजाऊ भूमि कहा है और क्यों ?
उत्तर :
कवि ने व्यापारिक नगरों से दूर ग्राम्य – प्रकृति को (एकांत को) प्रेम की सर्वाधिक उपजाऊ भूमि कहा है। प्रकृति की निश्छल गोद में प्रेम सहज व स्वाभाविक रूप में पनपता है।

प्रश्न 4.
इस कविता में ‘एक चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा’ किसके लिए प्रयुक्त किया गया है ?
उत्तर :
डूबते सूरज की परछाईं के लिए।

प्रश्न 5.
पोखर के सौंदर्य का वर्णन इस कविता के आधार पर कीजिए।
उत्तर :
पोखर में लहरें उठ रही हैं। उसके नीले जल के तले भूरी घास उगी हुई है। वह घास भी लहरों के साथ हिल-डुल रही है। उसमें डूबते सूरज परछाई एक खंभे के सदृश आँखों को आकर्षक लगती है। उसके तट पर कई पत्थर पड़े हैं। वे चुपचाप पानी का सेवन कर रहे हैं।

प्रश्न 6.
भाव स्पष्ट कीजिए-
और सरसों की न पूछो-
हो गई सबसे सयानी।
हाथ पीले कर लिए हैं,
ब्याह – मंडल में पधारी।
उत्तर :
इस कथन के द्वारा कवि ने सरसों के गदराए हुए रूप का वर्णन किया है। चारों ओर उसका पीलापन अपना प्रभाव दिखा रहा है। उसे देखकर कवि कल्पना करता है मानो कोई युवती हाथ पीले करके ब्याह मंडप में पधार चुकी है।

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प्रश्न 7.
तालाब में खड़ा बगुला नींद में होने का नाटक क्यों करता है ?
उत्तर :
बगुला एक ढोंगी पक्षी है। वह मछलियों को देखते ही नींद में होने का ढोंग करता है। जब मछली निकट आती है तो अवसर मिलते ही वह मछली को चोंच में भरकर निगल जाता है। बगुले के ढोंग के कारण ही मछलियाँ उसके नजदीक जाती हैं और उसका आहार बन जाती हैं। इसलिए बगुला तालाब में नींद में होने का नाटक करता है।

प्रश्न 8.
कवि ने चित्रकूट के क्षेत्र की जीवंतता का वर्णन किस प्रकार किया है ?
उत्तर :
चित्रकूट की अनगढ़ पहाड़ियों में प्राकृतिक सुंदरता नहीं है। वहाँ की बंजर भूमि पर इधर-उधर रींवा के काँटेदार तथा कुरूप पेड़ दिखाई देते हैं। परंतु जगह-जगह पक्षियों ने सारे क्षेत्र को जीवंत बना रखा है। कवि ने तोते की रस टपकाती टें टें तथा सारस की टिरटों-टिस्टों की आवाज़ों से सारा वन क्षेत्र गूँज रहा है, जिससे वहाँ का वातावरण जीवंत बन गया है।

प्रश्न 9.
कवि किसकी प्रेम-कहानी सुनना चाहता है ?
उत्तर :
कवि अपने जीवन में पक्षियों से प्रेम-भाव की शिक्षा पाना चाहता है। इसलिए वह सारस पक्षी के साथ उड़कर हरे-भरे खेत में जाना चाहता है जहाँ उनकी जोड़ी रहती है और प्रेम व्यवहार करती है। वह उनकी प्रेम-कहानी को सुनना चाहता है ताकि वह भी अपने जीवन में उन जैसा पवित्र प्रेम-भाव प्राप्त कर सके।

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प्रश्न 10.
और सारसों की न पूछो-
हो गई सबसे सयानी,
हाथ पीले कर लिए हैं।
ब्याह – मंडप में पधारी,
फाग गाता मास फागुन
आ गया है आज जैसे।
अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
कवि ने वसंत ऋतु के आगमन पर खेतों में दूर-दूर तक फैली पीली-पीली सरसों का मानवीकरण करते हुए कहा है कि वह सयानी हो गई है, विवाह के योग्य हो गई है। इसलिए वह प्रकृति के द्वारा सजाए मंडप में पधारी है। फागुन का महीना फाग गाने लगा है। कवि की भाषा सरल और सरस है जिसमें सामान्य बोलचाल के शब्दों की अधिकता है। ‘हाथ पीले करना’ में लाक्षणिकता विद्यमान है। मुक्त छंद में भी लयात्मकता का गुण विद्यमान है। अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोग सराहनीय है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द-शक्ति के कथन को सरलता और सरसता प्रदान की है।

सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

1. देख आया चंद्र गहना
देखता हूँ दृश्य अब मैं
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला
एक बीते के बराबर
यह हरा ठिगना चना,
बाँधे मुरैठा शीश पर
छोटे गुलाबी फूल का,
सजकर खड़ा है।

शब्दार्थ : बीते – (बित्ता) अंगूठे के सिर से कनिष्ठा के सिरे तक लंबाई की नाप। ठिगना – छोटे कद का। मुरैठा – साफा, पगड़ी।
प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘क्षितिज’ में संकलित कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता श्री केदारनाथ अग्रवाल हैं। इसमें उन्होंने ग्राम्य प्रकृति का बड़ा अनुरागमय चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि चंद्र गहना को देख आया है। अब वह खेत की मेंड़ पर अकेला बैठकर उस सारे दृश्य को सजीव रूप में अनुभव कर रहा है। खेतों में उगा हरा तथा ठिगना चना जो एक बीते ( बित्ता) के बराबर है, उसने अपने सिर पर छोटे गुलाबी फूल का मुरैठा (साफा, पगड़ी) बाँध रखा है। इस तरह वह सजकर खड़ा है। कवि ने खेत में उत्पन्न चने के पौधे का बड़ा सजीव एवं मनोहारी चित्र प्रस्तुत किया है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि कहाँ बैठा हुआ था ? उसके साथ कौन था ?
(ख) कवि ने खेत में किसे देखा ?
(ग) चने की शोभा वर्णित कीजिए।
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि चंद्र गहना से लौटते समय एक खेत की मेड़ पर बैठा हुआ था। उसके साथ कोई नहीं था, वह बिल्कुल अकेला था। (ख) कवि ने खेत में हरे-भरे चने को देखा था।
(ग) हरा-भरा चना ठिगना है। उसकी शोभा प्रकृति ने सुंदर ढंग से बढ़ाई है। उस पर छोटे-छोटे गुलाबी फूल लगे हैं जो उसके सिर पर गुलाबी पगड़ी के समान प्रतीत होते हैं।
(घ) कवि ने खेत में उगे चने की अद्भुत सुंदरता को प्रकट करते हुए मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया है। तद्भव और तत्सम शब्दावली का मिला-जुला प्रयोग भाषा को सुंदरता प्रदान करने में सफल हुआ है। चाक्षुक बिंब विद्यमान है। अभिधा शब्द-शक्ति और प्रसाद गुण कथन को सरलता और सहजता प्रदान करने में सहायक हुए हैं। मुक्त छंद का प्रयोग है।

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2. पास ही मिलकर उगी है
बीच में अलसी हठीली।
देह की पतली कमर की है लचीली,
नील फूले फूल को सिर पर चढ़ाकर
कह रही है, जो छुए यह,
दूँ हृदय का दान उसको।

शब्दार्थ : अलसी तीसी, एक तिलहन का पौधा जिस पर नीला फूल आता है।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यावतरण श्री केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से अवतरित किया गया है। इसमें ग्राम्य- शोभा का बड़ा सुंदर चित्रण हुआ है।

व्याख्या : कवि कहता है कि चने के खेतों के बीच में हठीली अलसी उगी हुई है। यह अलसी शरीर से दुबली-पतली तथा लचीली कमर वाली है। उसने अपने सिर पर फूले हुए नीले फूल धारण किए हैं। वह मानो यह कह रही है जो भी मेरे इन फूलों को छुएगा, मैं उसको अपने हृदय का दान दे दूँगी। कवि ने अलसी का बड़ा सहज-सजीव चित्रण किया है। यहाँ खिली हुई अलसी में एक प्रेमिका के व्यवहार की आकर्षक कल्पना है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि ने अलसी को कौन-सा विशेषण दिया है ?
(ख) अलसी की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
(ग) अलसी क्या कहना चाहती है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर
(क) कवि ने अलसी को ‘हठीली’ विशेषण दिया है।
(ख) अलसी अति सुंदर है। उसकी देह दुबली-पतली है, कमर लचीली है तथा उसके सिर पर नीले रंग के छोटे-छोटे फूल शोभा दे रहे हैं।
(ग) अलसी कहना चाहती है कि जो भी उसके फूलों को छुएगा वह उसे अपना हृदय दान में दे देगी।
(घ) कवि ने खड़ी बोली में खेत में उगी अलसी के कोमल – सुंदर पौधों का सजीव चित्रण किया है। भाषा में चित्रात्मकता का गुण है। अभिधा शब्दशक्ति और प्रसाद गुण ने कथन को सरलता – सरसता प्रदान की है। तद्भव शब्दावली की अधिकता है। मानवीकरण अलंकार का प्रयोग सराहनीय है।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

3. और सरसों की न पूछो –
हो गई सबसे सयानी,
हाथ पीले कर लिए हैं
ब्याह मंडप में पधारी,
फाग गाता मास फागुन
आ गया है आज जैसे।

शब्दार्थ : सयानी जवान कन्या। हाथ पीले करना विवाह करना। फाग – होली के दिनों में गाया जाने वाला गीत।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने ग्राम्य – प्रकृति एवं वहाँ की उपज का बड़ा अनुरागमय चित्रण किया है। यहाँ खिली हुई पीली सरसों का बड़ा मोहक चित्र अंकित किया गया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि सरसों की मोहकता के विषय में तो पूछो ही नहीं। वह अत्यंत आकर्षक रूप धारण किए हुए है। सरसों अब जवान हो गई है। ऐसा लगता है कि जैसे वह अपना हाथ पीला करके ब्याह मंडप में पधार चुकी है। अभिप्राय यह है कि सरसों में फूल लग गए हैं। ऐसा लगता है जैसे फागुन होली का गीत गा रहा हो। सरसों के खेत का बड़ा मोहक वर्णन है और साथ ही उसमें एक युवती की कल्पना है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि की दृष्टि में कौन सयानी हो गई है ?
(ख) शादी के मंडप में कौन पधारी है ?
(ग) फागुन का महीना क्या गा रहा है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि की दृष्टि में सरसों अब सयानी हो गई है।
(ख) शादी के मंडप में सरसों पधारी है।
(ग) फागुन का महीना फाग गा रहा है जो होली के अवसर पर गाया जाता है।
(घ) कवि ने वसंत ऋतु के आगमन पर खेतों में दूर-दूर तक फैली पीली-पीली सरसों का मानवीकरण करते हुए माना है कि वह सयानी हो गई है, विवाह के योग्य हो गई है इसलिए वह प्रकृति के द्वारा सजाए – सँवारे मंडप में पधारी है। फागुन का महीना फाग गाने लगा है। कवि की भाषा सरल और सरस है जिसमें सामान्य बोलचाल के शब्दों की अधिकता है। ‘हाथ पीले करना’ में लाक्षणिकता विद्यमान है। मुक्त छंद में भी लयात्मकता का गुण विद्यमान है। अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोगं सराहनीय है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द-शक्ति ने कथन को सरलता और सरसता प्रदान की है।

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4. देखता हूं मैं: स्वयंवर हो रहा है,
प्रकृति का अनुराग – अंचल हिल रहा है
इस विजन में,
दूर व्यापारिक नगर से,
प्रेम की प्रिय भूमि उपजाऊ अधिक है।

शब्दार्थ : स्वयंवर – विवाह का एक आयोजन जिसमें कन्या स्वयं अपने लिए वर चुनती है। विजन जंगल, सूना प्रदेश।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यावतरण ‘क्षितिज’ में संकलित कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से लिया गया है। इस कविता में केदारनाथ अग्रवाल ने ग्राम्य प्रकृति तथा वहाँ के खेतों के सौंदर्य का चित्रण अनुरागमयी शैली में किया है।

व्याख्या : कवि का कथन है कि प्रकृति एवं खेतों के भरपूर सौंदर्य को देखकर मुझे ऐसा लगता है, जैसे स्वयंवर हो रहा हो अर्थात् इस ग्राम्य शोभा ने ऐसा रूप धारण कर लिया है जिसे देखकर एक ऐसे आयोजन का दृश्य आँखों के सामने तैर जाता है जिसमें कोई कन्या स्वयं अपने लिए वर का चुनाव करती है। प्रकृति रूपी नायिका का प्रेमपूर्ण अंचल हिल-डुलकर उसके भीतर प्रिय मिलन की तीव्र इच्छा को प्रकट कर रहा है। नगरों के पाखंडपूर्ण, स्वार्थमय, व्यापारिक जीवन की तुलना में यहाँ प्रेम की प्रिय भूमि कहीं अधिक उपजाऊ है। अभिप्राय यह है कि प्रकृति के अंचल में चलनेवाले प्रेम व्यवहार में स्थायित्व अधिक है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) किसका स्वयंवर हो रहा है ?
(ख) कवि ने किसके आँचल हिलने का वर्णन किया है ?
(ग) कवि की दृष्टि में नगरीय जीवन कैसा है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि ने माना है कि ग्रामीण शोभा रूपी आँचल में सरसों का स्वयंवर हो रहा है।
(ख) कवि ने प्रकृति रूपी नायिका के प्रेमपूर्ण आँचल हिलने का वर्णन किया है।
(ग) कवि की दृष्टि में नगरीय जीवन पाखंडपूर्ण, स्वार्थमय और व्यापारिक है।
(घ) कवि ने अवतरण में खेतों का चित्रात्मक और अनुरागमयी रूप अंकित किया है। अतुकांत छंद में रचित पंक्तियों में लयात्मकता विद्यमान है। तत्सम शब्दावली का अधिकता से प्रयोग किया गया है। मानवीकरण और अनुप्रास अलंकारों का स्वाभाविक रूप सराहनीय है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द-शक्ति के कथन को सरलता – सरसता प्रदान की है।

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5. और पैरों के तले है एक पोखर,
उठ रहीं इसमें लहरियाँ,
नील तल में जो उगी है घास भूरी
ले रही वह भी लहरियाँ।

शब्दार्थ पोखर – तालाब।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से अवतरित की गई हैं, जिसमें कवि ने गाँव की प्रकृति की सुंदरता का सहज चित्रण किया है।

व्याख्या : कवि ग्राम्य प्रकृति का अनुरागपूर्ण चित्रण करता हुआ कहता है- मेरे पाँव के तले (निकट) एक सरोवर है, जिसमें लहरें उठ रही हैं। उस सरोवर के नीले तल में जो भूरी घास उग आई है, वह भी लहरियाँ ले रही है अर्थात् जल के साथ हिल-डुल रही है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि के पैरों के पास क्या है ?
(ख) पोखर की गहराई में क्या उगा हुआ है ?
(ग) तल में घास किस प्रकार का व्यवहार कर रही है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि के पैरों के पास एक पोखर है जो पानी से भरा हुआ है।
(ख) पोखर की गहराई में घास उगी हुई है जो भूरे रंग की है।
(ग) पोखर के जल के हिलने से घास भी लहरियाँ लेती हुई प्रतीत होती हैं।
(घ) अवतरण में पोखर का सजीव चित्रण किया गया है। तल में उगी हुई घास भी जल के हिलने से लहरियाँ लेने लगती है। चित्रात्मकता विद्यमान है। अनुप्रास का सहज प्रयोग किया गया है। अतुकांत छंद का प्रयोग है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द- शक्ति विद्यमान है।

6. एक चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा
आँख को है चकमकाता।
हैं कई पत्थर किनारे
पी रहे चुपचाप पानी,
प्यास जाने कब बुझेगी!

शब्दार्थ : चकमकाना चकाचौंध पैदा करना।

प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण श्री केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से अवतरित किया गया है। कवि ने गाँव की प्राकृतिक सुंदरता का सुंदर वर्णन किया है। खेतों के पास जल से भरा एक पोखर है जिसमें जल लहरा रहा है।

व्याख्या : कवि ग्राम्य प्रकृति का अनुरागमय चित्रण करता हुआ कहता है कि पोखर के पानी में डूबते हुए सूर्य का प्रतिबिंब इस प्रकार बन रहा है जैसे वह चाँदी का एक बड़ा-सा गोल खंभा हो। हलके-हलके हिलते पानी के कारण उसका आकार लंबा प्रतीत होता है और चमकीला होने के कारण वह चाँदी की तरह चमक रहा है। उसे देखने से आँखें चौंधिया रही हैं। उसकी ओर दृष्टि टिकती नहीं है। पोखर के किनारे पर कई पत्थर पड़े हैं। हवा के कारण पानी की छोटी-छोटी लहरें इन पत्थरों से स्पर्श कर रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो ये पत्थर प्यासे हों और मौन भाव से पानी पी रहे हों। पता नहीं, ये पत्थर कब से पानी पी रहे हैं पर फिर भी इनकी प्यास नहीं बुझ रही। पता नहीं इनकी प्यास कब बुझेगी ? क्या ये सदा इसी तरह प्यासे ही रहेंगे।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
(क) कवि ने चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा किसे कहा है ?
(ख) पत्थर कहाँ पड़े हैं ?
(ग) पत्थर क्या करते प्रतीत हो रहे हैं ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि ने चाँदी का बड़ा-सा गोल खंभा सूर्य के प्रतिबिंब को कहा है जो पोखर के जल में बिंबित हो रहा है। पानी के हिलने के कारण वह निरंतर हिलकर लंबे खंभे-सा प्रतीत हो रहा है।
(ख) पत्थर पोखर के किनारे पड़े हैं जो जल को स्पर्श कर रहे हैं।
(ग) कवि को प्रतीत होता है कि वे पत्थर पोखर के पानी को पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
(घ) कवि ने कल्पना की है कि पोखर के जल में आँख को चकमकाता सूर्य का प्रतिबिंब बड़े से गोल खंभे के रूप में दिखाई दे रहा है और किनारे पर पड़े पत्थर ऐसे लगते हैं जैसे पोखर के जल को पीकर अपनी प्यास को बुझाना चाह रहे हों। पता नहीं उनकी प्यास कभी बुझेगी भी या नहीं। शब्द अति सरल हैं। अभिधा शब्द – शक्ति, प्रसाद गुण और चित्रात्मकता ने कवि के भावों को सजीवता प्रदान की है। उपमा, स्वाभावोक्ति और अनुप्रास अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग किया गया है।

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7. चुप खड़ा बगुला डुबाए टाँग जल में,
देखते ही मीन चंचल
ध्यान – निद्रा त्यागता है,
चट दबाकर चोंच में
नीचे गले के डालता है !

शब्दार्थ : ध्यान – निद्रा – ध्यान रूपी नींद

प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण श्री केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से उद्धृत किया गया है। इस कविता में ग्राम्य प्रकृति का बड़ा मधुर एवं अनुरागमय चित्रण हुआ है।

व्याख्या : यहाँ कवि सरोवर का वर्णन करता हुआ कहता है कि कोई बगुला चुपचाप अपनी एक टाँग जल में डुबोए खड़ा है। वह चंचल मछली को देखते ही अपनी निद्रा का ध्यान त्यागकर झट से मछली को चोंच से पकड़कर गले में डाल देता है अर्थात् मछली को निगल जाता है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
(क) पोखर के जल में एक टाँग पर कौन खड़ा है ?
(ख) बगुला अपनी नींद को कब त्यागता प्रतीत होता है ?
(ग) तालाब में खड़ा बगुला क्या वास्तव में ही नींद में होता है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) पोखर के जल में एक टाँग पर बगुला खड़ा है।
(ख) बगुला अपनी नींद को तब त्यागता प्रतीत होता है, जब कोई चंचल मछली जल में उसके निकट से गुज़रती है।
(ग) बगुला वास्तव में नींद में नहीं होता। वह बिना हिले-डुले मछलियों को यह अहसास कराता है कि जल में ऐसा कोई खतरा नहीं जो उन्हें क्षति पहुँचा सके। किसी प्रकार के संकट की संभावना न होने के कारण ही मछलियाँ तैरती हुई बगुले के निकट आ जाती हैं।
(घ) कवि ने बगुले की ढोंगी वृत्ति का चित्रण है। वस्तुतः बगुला भोला – सा बनकर सरोवर के तट पर खड़ा हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे यह किसी को हानि नहीं पहुँचाना चाहता, पर अवसर मिलते ही वह मछली को चोंच में भरकर निगल जाता है। बगुले के माध्यम से यहाँ ढोंगी व्यक्ति के स्वभाव का चित्रण हुआ है।

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8. एक काले माथे वाली चतुर चिड़िया
श्वेत पंखों के झपाटे मार फौरन।
टूट पड़ती है भरे जल के हृदय पर,
एक उजली चटुल मछली
चोंच पीली में दबाकर
दूर उड़ती है गगन में !

शब्दार्थ : श्वेत- सफेद। चटुल – चंचल। गगन – आकाश।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से अवतरित की गई हैं। इस कविता में कवि ने ग्राम्य प्रकृति का बड़ा अनुरागमय चित्रण किया है।

व्याख्या : यहाँ मछली का भक्षण करने वाली एक चिड़िया का शब्द – चित्र कवि के द्वारा प्रस्तुत किया गया है। एक चिड़िया जिसका मस्तक काला है, वह अपने सफेद पंखों को फड़फड़ाते हुए अचानक सरोवर में भरे हुए जल के ऊपर टूट पड़ती है तथा एक चंचल सफेद मछली को अपनी पीली चोंच में दबाकर कहीं दूर आकाश में उड़ जाती है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य-सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न :
(क) चिड़िया का रूप कैसा है ?
(ख) कवि ने चिड़िया को चतुर क्यों कहा है ?
(ग) चिड़िया उड़ कर कहाँ जाती है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) चिड़िया सफेद पंखों वाली है जिसके माथे का काला रंग है। वह तेजी से झपटने की क्षमता रखती है। उसकी चोंच पीली है।
(ख) कवि ने चिड़िया को चतुर कहा है क्योंकि वह जल की गहराई से ही अपनी पीली चोंच में मछली को झपटकर ले जाती है और पल-भर में ही आकाश की ऊँचाई में दूर उड़ जाती है।
(ग) चिड़िया उड़कर आकाश में चली जाती है।
(घ) कवि ने काले माथे, पीली चोंच और सफेद रंग की चिड़िया की निपुणता और चपलता का वर्णन किया है। गतिशील बिंब – योजना और सुंदर रंग- योजना ने सहज रूप से चित्रात्मकता को प्रकट किया है। अनुप्रास का सहज स्वाभाविक प्रयोग सराहनीय है। प्रसाद गुण और अभिधा शब्द – शक्ति ने कवि के कथन को सरलता और सहजता प्रदान की है।

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9. औ यहीं से
भूमि ऊँची है जहाँ से-
रेल की पटरी गई है।
ट्रेन का टाइम नहीं है।
मैं यहाँ स्वच्छंद हूँ जाना नहीं है।
चित्रकूट की अनगढ़ चौड़ी,
कम ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ।
दूर दिशाओं तक फैली हैं।
बाँझ भूमि पर
इधर-उधर रींवा के पेड़,
काँटेदार कुरूप खड़े हैं।

शब्दार्थ : टाइम समय। स्वच्छंद – समय। स्वच्छंद – स्वतंत्र। बाँझ भूमि – बंजर भूमि। रींवा काँटेदार पेड़ विशेष।

प्रसंग : ये पंक्तियाँ केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से अवतरित की गई हैं। कवि ग्राम्य प्रकृति का चित्र खींचता हुआ कहता है कि पोखर के निकट ही पहाड़ियाँ हैं जिनकी शोभा भिन्न प्रकार की है।

व्याख्या : कवि कहता है कि यहीं से, जहाँ भूमि कुछ ऊँची है जहाँ से रेल की पटरी जा रही है। यह समय किसी गाड़ी के आने-जाने का नहीं है। अतः कवि यहाँ स्वच्छंदतापूर्वक भ्रमण कर सकता है। उसे कहीं जाना नहीं है। चित्रकूट की अनगढ़ी पहाड़ियाँ जो अधिक ऊँची नहीं हैं, दूर दिशा तक फैली हुई हैं। वहाँ की बंजर भूमि पर इधर-उधर रींवा के काँटेदार तथा कुरूप पेड़ खड़े दिखाई देते हैं।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि उस स्थान पर स्वयं को स्वच्छंद क्यों मानता है ?
(ख) चित्रकूट की पहाड़ियाँ कैसी हैं ?
(ग) काँटेदार कुरूप पौधे कहाँ पर हैं ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि स्वयं को उस ऊँची भूमि पर स्वच्छंद मानता है क्योंकि उस समय उसके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है। वहाँ से गुजरती रेल की पटरी पर भी तब कोई गाड़ी गुजरने वाली नहीं है
(ख) चित्रकूट की पहाड़ियाँ चौड़ी और अनगढ़ हैं। उनकी ऊँचाई अधिक नहीं है और वे दूर-दूर तक फैली हुई हैं।
(ग) चित्रकूट की अनगढ़ पथरीली बाँझ भूमि पर रींवा के काँटेदार कुरूप पेड़ इधर-उधर उगे हुए हैं।
(घ) कवि ने चित्रकूट की अनगढ़ चौड़ी और कम ऊँची पहाड़ियों पर उगे रींवा के काँटेदार कुरूप पेड़ों का वर्णन करने के साथ-साथ अपने अकेलेपन का उल्लेख किया है। कवि ने बोलचाल की सामान्य शब्दावली का प्रयोग अति स्वाभाविक रूप से किया है। ‘रेल’, ‘ट्रेन’, ‘टाइम’ आदि विदेशी शब्दावली के साथ-साथ तद्भव शब्दावली का भी प्रयोग किया गया है। मानवीकरण और अनुप्रास का सहज-स्वाभाविक प्रयोग सराहनीय है। अभिधा शब्द-शक्ति और प्रसाद गुण का सुंदर प्रयोग कथन की सरलता का आधार है। मुक्त छंद के प्रयोग में भी लयात्मकता की सृष्टि हुई है।

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10. सुन पड़ता है
मीठा-मीठा रस टपकाता
सुग्गे का स्वर
टें टें टें दें,
सुन पड़ता है
वनस्थली का हृदय चीरता,
उठता-गिरता,
सारस का स्वर
टिरटों टिरटों,
मन होता है
उड़ जाऊँ मैं,
पर फैलाए सारस के संग
जहाँ जुगुल जोड़ी रहती है
हरे खेत में,
सच्ची प्रेम-कहानी सुन लूँ
चुप्पे-चुप्पे।

शब्दार्थ : वनस्थली – जंगल। सुग्गा – तोता।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘चंद्र गहना से लौटती बेर’ से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने ग्राम्य प्रकृति का बड़ा मनोहारी चित्र अंकित किया है। चित्रकूट की अनगढ़ पहाड़ियों में चाहे प्राकृतिक सुंदरता कम हो पर जगह-जगह पक्षियों ने सारे क्षेत्र को जीवंत बना रखा है।

व्याख्या : कवि का कथन है- मीठा-मीठा रस टपकता हुआ तोते का टें टें टें टें का स्वर जंगल के हृदय को चीरता हुआ-सा सुनाई पड़ता है। कभी उठता तथा कभी गिरता हुआ सारस की टिरटों-टिरटों की-सी आवाज़ सुनाई देने लगती है। कवि का मन चाहता है कि वह भी अपने पैरों को फैलाकर सारस के संग उड़कर वहाँ जा पहुँचे, जहाँ प्रेमियों की जोड़ी रहती है। वहाँ पहुँचकर मौन रूप से प्रेम की कहानी सुन ले उनके प्रेम में निश्छलता का भाव होगा इसलिए उसने प्रकृति के प्रांगण में चलने वाली निश्छल प्रेम कहानी सुनने की तीव्र इच्छा प्रकट की है।

अर्थग्रहण एवं सौंदर्य सराहना संबंधी प्रश्नोत्तर –

प्रश्न :
(क) कवि ने किस-किस पक्षी की आवाज़ कविता में सुनाई है ?
(ख) कवि की इच्छा क्या है ?
(ग) कवि किसकी प्रेम कहानी सुनना चाहता है ?
(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर :
(क) कवि ने तोते की रस टपकाती टें टें टें टें तथा सारस के स्वर टिरटों टिरटों की आवाजें सुनाई हैं जो सारे वनक्षेत्र में गूँज रही हैं।
(ख) कवि की इच्छा है कि वह भी सारस पक्षी के साथ उड़ जाए और स्वच्छंद उड़ान भरे।
(ग) कवि सारस पक्षी के साथ उड़कर उन हरे-भरे खेतों में जाना चाहता है जहाँ उनकी जोड़ी रहती है और प्रेम व्यवहार करती है। वह उनकी प्रेम कहानी को सुनना चाहता है ताकि वह भी अपने जीवन में उन जैसा पवित्र प्रेम-भाव प्राप्त कर सके।
(घ) कवि ने अपने जीवन में पक्षियों से प्रेम-भाव की शिक्षा पाने की कामना की है। उनकी मधुर आवाज़ उनके हृदय के भावों को प्रकट करने में सक्षम है। ‘टें टें टें टें’ तथा ‘टिरटों टिरटों’ से श्रव्य बिंब की सृष्टि हुई है। दृश्य बिंब ने गाँव के सुंदर क्षेत्र को प्रकट करने में सफलता पाई है। अतुकांत छंद के प्रयोग में भी लयात्मकता विद्यमान है। पुनरुक्ति प्रकाश, अनुप्रास और मानवीकरण अलंकारों का सहज-स्वाभाविक प्रयोग सराहनीय है। तद्भव शब्दावली का अधिकता से प्रयोग किया गया है।

चंद्र गहना से लौटती बेर Summary in Hindi

कवि-परिचय :

श्री केदारनाथ अग्रवाल आधुनिक युग के चर्चित कवियों में से एक हैं। उनका जन्म 1 अप्रैल, सन् 1911 को बाँदा जिले के कमासिन गाँव में हुआ था। उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से बी० ए० करने के बाद आगरा विश्वविद्यालय से एल०एल०बी० की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने बाँदा में वकालत करनी आरंभ की। अग्रवाल जी ने जहाँ वकालत के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की, वहीं वे काव्य – साधना में भी संलग्न रहे। हिंदी के प्रगतिशील आंदोलन के साथ वे बराबर जुड़े रहे। उनका काव्य यथार्थ की भूमि को आधार बनाकर खड़ा हुआ। वे वर्गहीन समाज के समर्थक रहे। यही कारण है कि दीन-दुखियों के प्रति उनकी सहज सहानुभूति रही। इनका देहावसान सन् 2000 में हुआ।

नींद के बादल, युग की गंगा, लोक तथा आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं, आग का आईना, हे मेरी तुम, मार प्यार की थापें, कहे केदार खरी-खरी, पंख और पतवार आदि उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। काव्यगत विशेषताएँ – अग्रवाल जी अपने समकालीन प्रगतिवादी कवियों से प्रेरणा लेकर काव्य-क्षेत्र में आगे बढ़े। उनकी खड़ी बोली में रचे गये कवित्त, सवैये लखनऊ की माधुरी पत्रिका में प्रकाशित हुए।

‘नींद के बादल’ उनका पहला कविता संग्रह है। इस संग्रह में उनकी प्रणय संबंधी कविताओं की प्रधानता है। दूसरे काव्य संग्रह ‘युग की गंगा’ में सामान्य जन-जीवन तथा प्रकृति के मार्मिक चित्र अंकित हुए हैं। तीसरे संग्रह ‘लोक तथा आलोक’ में प्रगतिवाद की झलक मिलती है। प्रगतिवादी रचनाओं में उन्होंने पूँजीपतियों की शोषण वृत्ति का यथार्थ चित्र अंकित किया है। प्रकृति-संबंधी कविताओं में बड़े गतिशील चित्र अंकित हुए हैं।

अग्रवाल जी की भाषा प्रायः सरल एवं सुबोध है। शब्दचयन प्रायः कलात्मक एवं भावानुरूप है। शैलीकार के रूप में उन्होंने मुक्त छंद और गीति छंद का सफल प्रयोग किया है। उनकी भाषा में शब्दों का सौंदर्य है, ध्वनियों की धारा है और स्थापत्य की कला है। संगीतात्मकता तो इनके काव्य की अनूठी विशेषता है। लोकभाषा और ग्रामीण जीवन से जुड़े बिंबों को प्रस्तुत करने में इन्हें अद्भुत क्षमता प्राप्त थी। इनकी कविता में शिल्प की जटिलता नहीं है। वे अपने भावों को सहज रूप से व्यक्त कर देते हैं।

JAC Class 9 Hindi Solutions Kshitij Chapter 14 चंद्र गहना से लौटती बेर

कविता का सार :

कवि का प्रकृति के प्रति गहरा अनुराग-भाव पाठक को सहसा अपनी ओर आकृष्ट करने की क्षमता रखता है। वह चंद्र गहना नामक स्थान से लौट रहा था। उसका किसान मन बार-बार प्रकृति के रंगों में रंगा जा रहा था। खेत-खलिहान उसके मन से बाहर निकलते ही नहीं। उसे प्रकृति के साधारण रंगों में भी असाधारण शोभा दिखाई देती है। वह शहरी विकास की तेज गति के बीच भी उस सौंदर्य को अपनी कोमल भावनाओं और संवेदनाओं को सुरक्षित रखना चाहता है। खेत की मेड़ पर बैठे हुए उसे खेत में उगा चना ऐसे लगता है जैसे पौधों ने फूलों की पगड़ियाँ बाँधी हुई हों, वे सज-संवर कर खड़े हों।

पास ही नीले फूलों से सजी अलसी के पौधे शोभा दे रहे हैं। पीली-पीली सरसों तो मानो अपना विवाह रचाने के लिए मंडप में पधार रही हो। पोखर में छोटी-छोटी लहरियाँ उठ रही हैं। एक बगुला मछलियों की ताक में शांत भाव से एक टाँग पर खड़ा है। मछली दिखते ही उसकी ध्यान-निद्रा टूटती है। पक्षियों की तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं। चित्रकूट की अनगढ़ कम चौड़ी पर ऊँची पहाड़ियों में इधर-उधर कंटीले पेड़-पौधे दिखाई देते हैं। कवि चाहता है कि सारस पक्षियों के जोड़े के साथ हरे-भरे खेतों में उनकी प्रेम-कथा को सुने। कवि कविता के माध्यम से प्राकृतिक चित्रों को अंकित करने में सफल रहा है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.

1. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) 102.8 करोड़
(ग) 328.7 करोड़
(ख) 318.2 करोड़
(घ) 2 करोड़।
उत्तर:
(क) 102.8 करोड़।

2. निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है?
(क) पश्चिमी बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(ख) केरल
(घ) पंजाब।
उत्तर:
(क) पश्चिमी बंगाल।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

3. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में नगरीय जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक है?
(क) तमिलनाडु
(ग) केरल
(ख) महाराष्ट्र
(घ) गुजरात।
उत्तर:
(क) तमिलनाडु।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक समूह भारत में विशालतम भाषाई समूह है?
(क) चीनी-तिब्बती
(ग) ऑस्ट्रिक
(ख) भारतीय-आर्य
(घ) द्राविड़। उत्तर-(ख) भारतीय-आर्य।

अति लघु आरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 1.
भारत के अत्यन्त उष्ण एवं शुष्क तथा अत्यन्त शीत व आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व निम्न हैं। इस कथन के दृष्टिकोण से जनसंख्या के वितरण में जलवायु की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तापमान तथा वर्षा जनसंख्या के घनत्व पर स्पष्ट प्रभाव डालते हैं। अत्यन्त उष्ण तथा शुष्क प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व निम्न है जैसे राजस्थान में मरुस्थल के कारण जनसंख्या घनत्व 165 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्यों में भारत के औसत जनसंख्या घनत्व से कम घनत्व है। इसी प्रकार अत्यन्त शीत एवं आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या घनत्व कम है जैसे कश्मीर, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या घनत्व लगभग 100 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।

प्रश्न 2.
भारत के किन राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या है ? इतनी विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदायी एक कारण को लिखिए।
उत्तर:
भारत एक गांवों का देश है जहां 580781 गांव हैं। औसत ग्रामीण जनसंख्या 68.8% है। उत्तरी भारत में हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत 80% से अधिक है। जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का अत्यधिक प्रतिशत का कारण यह है कि इन राज्यों में लोगों का मुख्य क्रिया-कलाप कृषि है।

प्रश्न 3.
भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता ऊंची क्यों है?
उत्तर:
भारत में हिमाचल प्रदेश, नागालैंड जैसे राज्यों में कृषकों की संख्या अधिक है। परिणामस्वरूप द्वितीय और तृतीयक सैक्टर में सहभागिता बढ़ी है। श्रमिक खेत आधारित रोज़गारों पर निर्भर है परन्तु अब गैर-खेत आधारित रोज़गारों पर निर्भरता बढ़ रही है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 4.
कृषि सैक्टर में भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंश संलग्न है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या का व्यावसायिक संघटन दर्शाता है कि प्राथमिक (कृषि) संकट में श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक है। कुल श्रम जीवी जनसंख्या का 58.2% कृषक और कृषि मज़दूर हैं। कृषि भारत में लोगों का जीवन यापन का आधार है। गैर-कृषि कार्यों में कम जनसंख्या है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का स्थानिक वितरण बहुत असमान है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक जनसंख्या है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में देश की लगभग आधी जनसंख्या निवास करती है। दिल्ली की जनसंख्या सभी केन्द्र शासित राज्यों की कुल जनसंख्या से अधिक है। मध्य प्रदेश में देश का 14% क्षेत्रफल है परन्तु, केवल 7.6% ही जनसंख्या है। पंजाब से लेकर पश्चिमी बंगाल तक की मेखला में उच्च घनत्व पाया जाता है।

गंगा-सतलुज मैदान के 23% क्षेत्र में 52% जनसंख्या का सकेंद्रण है। हिमालय पर्वत के 13% क्षेत्र में केवल 2% जनसंख्या निवास करती है। अरुणाचल प्रदेश में भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व 13 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। मध्य भारत के विशाल क्षेत्र में गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में जनसंख्या घनत्व औसत से कम है। इस प्रकार जनसंख्या का स्थानिक वितरण भौतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा ऐतिहासिक कारकों पर निर्भर है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 2.
भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
व्यावसायिक संघटन से अर्थ है, किसी व्यक्ति के खेती, निर्माण, व्यापार, सेवाओं आदि क्रियाओं में लगे होना। भारत में कुल श्रमजीवी जनसंख्या का 58.2% भाग कृषि में संलग्न है। केवल 4.2% श्रमिक घरेलू उद्योगों में तथा 31.6% गैर-घरेलू, उद्योगों, व्यापार, वाणिज्य, विनिर्माण आदि सेवाओं में कार्यरत है। इस प्रकार भारत में प्राथमिक सैक्टर में श्रमजीवी लोगों की संख्या आम सैक्टरों की अपेक्षा अधिक है।

सन् 2001 के अनुसार व्यावसायिक संरचनाजनसंख्याप्रतिशत
1. प्राथमिक सैक्टर2,34,088,18158.2
2. द्वितीयक सैक्टर1,69,569,424.2
3. तृतीयक सैक्टर1,5  189,60137.6


जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन JAC Class 12 Geography Notes

→ कुल जनसंख्या (Total Population): सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ है।

→ विश्व में स्थान (Ranking in the world): भारत का विश्व में कुल जनसंख्या में चीन के पश्चात् दूसरा स्थान है। विश्व में प्रत्येक 6 व्यक्तियों में एक भारतीय है।

→ जनसंख्या घनत्व (Density of Population): भारत में औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है। सबसे अधिक घनत्व बिहार राज्य में 1102 व्यक्ति तथा सब से कम घनत्व अरुणाचल राज्य में 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।

→ जनसंख्या वितरण (Distribution of Population): भारत में सबसे अधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश में लगभग 20 करोड़ है।

→ दिल्ली क्षेत्र (Delhi-NCR): भारत में केन्द्र शासित राज्यों में सबसे अधिक घनत्व दिल्ली में 11297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि० मी० है।

→ जनसंख्या वृद्धि (Growth of Population): भारत में जनसंख्या वृद्धि दर 1.76 प्रतिशत प्रति वर्ष है।

→ जनसंख्या का दुगुना होना: भारत की जनसंख्या लगभग 35 वर्षों में दुगुनी हो जाती है।

→ नगरीय जनसंख्या: लगभग 37.7 करोड़ (31.2%) है। देश में 53 मिलियन नगर हैं।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

1.निम्न में से किस प्रकार की बस्तियां सड़क, नदी या नहर के किनारे होती हैं?
(क) वृत्ताकार
(ख) चौक पट्टी
(ग) रेखीय
(घ) वर्गाकार।
उत्तर:
(ग) रेखीय।

2. निम्न में से कौन-सी एक आर्थिक क्रिया ग्रामीण बस्तियों की मुख्य आर्थिक क्रिया है?
(क) प्राथमिक
(ख) तृतीयक
(ग) द्वितीयक
(घ) चतुर्थ।
उत्तर:
(क) प्राथमिक।

3. निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है?
(क) ह्वांगहो की घाटी
(ख) सिंधु घाटी
(ग) नील घाटी
(घ) मेसोपोटामिया।
उत्तर:
(ख) सिंधु घाटी।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

4. 2006 के प्रारम्भ में भारत में कितने मिलियन सिटी थे?
(क) 40
(ख) 41
(ग) 42
(घ) 43.
उत्तर:
(ख) 41

5. विकासशील देशों की जनसंख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं आवश्यकताओं की पूर्ति में कौन से प्रकार के संसाधन सहायक हैं?
(क) वित्तीय
(ख) मानवीय
(ग) प्राकृतिक
(घ) सामाजिक।
उत्तर:
(क) वित्तीय।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 1.
आप बस्ती को कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर:
आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। यह एक झोंपड़ी, एक मकान, एक फ्लैट अथवा एक बड़ी हवेली हो सकता है। ‘बस्ती’ मनुष्यों के आवासों के संगठित निवास स्थान को कहते हैं। इनमें अस्थाई डेरे, स्थायी बस्ती जिसे गाँव कहते हैं तथा बृहत् नगरीय समूह को सम्मिलित किया जाता है। मानव बस्तियां कुछ घरों वाले एक छोटे पुरवे से लेकर बहुत से भवनों वाले नगर या मेगालोपोलिस हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
स्थान (Site) एवं स्थिति (Situation) के मध्य अन्तर बताइए।
उत्तर:
बस्तियों का अध्ययन उनके स्थल, उनकी स्थिति, आकार, मकानों, प्रारूपों, कार्यों, आन्तरिक संरचना, बाहरी-संलग्नता तथा राष्ट्रीय एवं भूमंडलीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका के संदर्भ में किया जा सकता है। स्थल से तात्पर्य उस वास्तविक भूमि से है जिस पर बस्ती बनी हुई है। बस्ती की स्थिति से तात्पर्य उसके आस-पास के गाँवों के सम्बन्ध में उसकी अवस्थिति बताना है। बस्तियों के स्थल एवं स्थिति तथा उनके भवनों के प्रकारों का अध्ययन भौतिक पर्यावरण तथा सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
बस्तियों के वर्गीकरण का आधार क्या है?
उत्तर:
बस्तियों को सामान्यतः उनके आकार तथा प्रकार्यों के आधार पर ग्रामीण तथा नगरीय अथवा गाँवों तथा नगरों, दो प्रकारों में बांटते हैं। ग्रामीण और नगरीय शब्द सापेक्ष हैं। ग्रामीण बस्ती को नगरीय बस्ती से अलग करने का कोई सार्वभौम मापदण्ड नहीं है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

प्रश्न 4.
मानव भूगोल में मानव बस्तियों के अध्ययन का औचित्य बताएं।
उत्तर:
मानव बस्तियों का अध्ययन मानव भूगोल के अध्ययन का आधार है। किसी प्रदेश में मानव बस्तियों का प्रतिरूप उस प्रदेश के वातावरण को प्रकट करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक न हो

प्रश्न 1.
ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियां किसे कहते हैं? इनकी विशेषताएं बताओ।
उत्तर:
नगरीय बस्तियां

  1. ये वे निवास स्थान है जहाँ लोगों का व्यवसाय निर्माण उद्योग, व्यापार तथा प्रशासन होता है।
  2. इस क्षेत्र में मानवीय क्रियाएं निर्मित क्षेत्र में सीमित होती हैं।
  3. इसका आकार बड़ा होता है।
  4. नगरों में परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा आदि सेवाओं की अधिक सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
  5. इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।
  6. नगरीय बस्तियों में संक्षिप्त निवास स्थल होता है।
  7. ये प्रदेश उद्योग प्रधान होते हैं।
  8. नगरीय क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक गम्भीर समस्या है।

ग्रामीण बस्तियां

  1. इन बस्तियों में लोग मुख्यतः कृषि तथा पशु-पालन पर निर्भर करते हैं।
  2. इन बस्तियों के लोगों की क्रियाएं ग्राम से बाहर तक फैली होती हैं।
  3. इसका आकार छोटा होता है।
  4. ग्रामीण बस्तियों में आधुनिक सुविधाएं कम होती हैं।
  5. इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व इतना अधिक नहीं होता।
  6. ग्रानीण बस्तियों में मकान बिखरे हुए होते हैं।
  7. ये प्रदेश कृषि प्रधान होते हैं।
  8. ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या नहीं है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

प्रश्न 2.
विकासशील देशों में नगरीय बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संसार के विकासशील प्रदेशों में नगरीय वृद्धि की प्रक्रिया विकसित प्रदेशों से भिन्न रही है। विकसित देशों में नगरीकरण में वृद्धि औद्योगिक विकास के साथ-साथ हुई पर विकासशील देशों में जनांकिकीय वृद्धि आर्थिक विकास से पहले हुई है।
1. बेरोज़गारी:
इन प्रदेशों में अप्रत्याशित नगरीय वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी थी। इसकी तुलना में कस्बों तथा नगरों में संभावित रोज़गार के आकर्षण कम प्रभावी थे। 5 लाख की जनसंख्या वाले नगर से 1 करोड़ (100 लाख) वाले महानगर बनने में लन्दन को 190 वर्ष तथा न्यूयार्क को 140 वर्ष लगे थे, इसके विपरीत, मेक्सिको सिटी, साओपोलो, कोलकाता, सियोल तथा मुम्बई सभी की जनसंख्या को 5 लाख से 100 लाख (1 करोड़) की वृद्धि हेतु मात्र 75 वर्षों से कम का समय लगा था।

2. स्लम क्षेत्र:
इन नगरों ने अतिनगरीकरण तथा अनियंत्रित नगरीकरण के परिणामस्वरूप झुग्गी-झोंपड़ी जैसी गन्दी बस्तियों को जन्म दिया है। संसार में जहाँ कहीं भी ऐसी झुग्गी-झोंपड़ी बस्तियाँ बसी हैं, वहाँ नगरीय जीवन दुखद हो गया है। लगभग 60 करोड़ से अधिक लोग आज नगरों में असुरक्षित जीवन दशाओं में जी रहे हैं, जबकि 30 करोड़ लोग नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

3. प्रदूषण:
विकासशील देशों में वर्तमान नगरीकरण की प्रक्रिया ने ग्रामीण क्षेत्रों की योग्य श्रम शक्ति को छीन लिया है। पारिस्थितिकी के विकृत होने तथा सामाजिक प्रदूषण ने उनकी ऊर्जा को निचोड़ लिया है।

4. आवास की कमी:
इसके साथ ही, नगरीय बस्तियाँ भी आवास, परिवहन, स्वास्थ्य एवं अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की कमी से अत्यधिक प्रभावित हुई हैं। इन दोनों ही स्थानों (ग्राम व नगर) पर गुणवत्ता युक्त जीवन का ह्मस हुआ है। अफ्रीका में, केवल एक तिहाई घरों में पेयजल की व्यवस्था है।

5. मल जल प्रणाली का अभाव:
एशिया प्रशान्त क्षेत्र में मात्र 38 प्रतिशत नगरीय घरों को ही मल जल प्रणाली से जोड़ा गया है। विकासशील देशों के बहुत-से नगरों में जनसंख्या का एक बढ़ता हुआ हिस्सा निम्न स्तरीय घरों अथवा सड़कों पर रहता है। भारत के अधिकांश दस लाख या इससे अधिक जनसंख्या वाले नगरों में, चार में से एक नागरिक अवैध बस्तियों में रहता है। इनमें नगर के शेष भागों की तुलना में दुगुनी वृद्धि हो रही है।

मानव बस्ती JAC Class 12 Geography Notes

→ आवास (Shelter): आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है।

→ बस्ती (Settlement): बस्ती मनुष्यों के आवास का समूह है।

→ बस्तियों के प्रकार (Types of Settlements): ग्रामीण तथा नगरीय।

→ ग्रामीण बस्ती की जनसंख्या (Population of a Rural Settlement): 5000 व्यक्ति तक।

→ नियोजित नगर (Planned City): इस प्रकार के नगर को बसाने से पूर्व सुव्यवस्थित योजना तैयार की जाती है। चण्डीगढ़।

→ विश्व में नगरीकरण (World Urbanisation): 47 % नगरीय जनसंख्या।

→ मेगा नगर (Mega City): 1 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाला नगर।

→ विश्व का सबसे बड़ा महानगर (The largest Mega City): मेक्सिको सिटी।

→ सबसे बड़ी मलिन बस्ती (The biggest Slum): धारावी (मुम्बई)।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न। (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

1. संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं
(क) नौसेना पत्तन
(ख) विस्तृत पत्तन
(ग) तैल पत्तन
(घ) औद्योगिक पत्तन।
उत्तर:
(क) विस्तृत पत्तन।

2. निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(क) एशिया
(ख) यूरोप
(ग) उत्तरी अमेरिका
(घ) अफ्रीका।
उत्तर:
(ग) उत्तरी अमेरिका।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

3. दक्षिण अमरीकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(क) ब्राज़ील
(ख) वेनेजुएला
(ग) चिली
(घ) पेरू।
उत्तर:
(ख) वेनेजुएला।

4. निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह-सदस्य है?
(क) साफ्टा (SAFTA)
(ख) आसियान (ASEAN)
(ग) ओइसीडी (OECD)
(घ) ओपेक (OPEC)
उत्तर:
(ख) आसियान (ASEAN).

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 1.
विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जनवरी, 1995 से GATT को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रूपान्तरित कर दिया गया। इसके आधारभूत कार्य निम्नलिखत हैं

  1. विश्व व्यापार संगठन एकमात्र ऐसा अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों का व्यवहार करता है।
  2. यह विश्वव्यापी व्यापार तन्त्र के लिए नियमों को नियत करता है।
  3. इसके सदस्य देशों के मध्य विवादों का निपटारा करते हैं।
  4. यह विश्व को उच्च सीमा शुल्क और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से मुक्त करवाता है।

प्रश्न 2.
ऋणात्मक भुगतान सन्तुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर:
एक देश की आर्थिक स्थिति के लिए व्यापार सन्तुलन एवं भुगतान सन्तुलन के गम्भीर निहितार्थ होते हैं। एक ऋणात्मक सन्तुलन का अर्थ होगा कि देश वस्तुओं के क्रय पर उससे अधिक व्यय करता है जितना कि अपने सामानों के विक्रय से अर्जित करता है। यह अन्तिम रूप में वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है।

प्रश्न 3.
व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूह व्यापार की मदों में भौगोलिक सामीप्य, समरूपता और पूरकता के साथ देशों के मध्य व्यापार को बढ़ाने में सहायता करते हैं। ये व्यापार पर लगे प्रतिबन्ध हटाने में सहायता करते हैं। ये प्रादेशिक व्यापार को बढ़ावा देते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक में दें।

प्रश्न 1.
पत्तन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते हैं? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी उस स्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
पत्तनों के लाभ:
1. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की दुनिया के मुख्य प्रवेश द्वार (gateway) पोताश्रय तथा पत्तन होते हैं। इन्हीं पत्तनों के द्वारा जहाजी माल तथा यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं।

2. पत्तन जहाज़ के लिए गोदी, लादने, उतारने तथा भण्डारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन सुविधाओं को प्रदान करने के उद्देश्य से पत्तन के प्राधिकारी नौगम्य द्वारों का रख-रखाव, रस्सों व बजरों (छोटी अतिरिक्त नौकाएँ) की व्यवस्था करने और श्रम एवं प्रबन्धकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करते हैं।

3. एक पत्तन के महत्त्व को नौभार के आकार और निपटान किए गए जहाजों की संख्या द्वारा निश्चित किया जाता है।

4. एक पत्तन द्वारा निपटाया नौभार उसके पृष्ठ प्रदेश के विकास के स्तर का सूचक है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

अवस्थिति के आधार पर पत्तनों के प्रकार:
1. अन्तर्देशीय पत्तन:
ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पत्तन चौरस तल वाले जहाज़ या बजरे द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणस्वरूप मानचेस्टर एक नहर से जुड़ा है; मेंफिस मिसीसिपी नदी पर स्थित है; राइन के अनेक पत्तन हैं जैसे-मैनहीम तथा ड्यूसबर्ग; और कोलकाता हुगली नदी, जो गंगा नदी की एक शाखा है, पर स्थित है।

2. बाह्य पत्तन:
ये गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाज़ों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम हैं, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएं प्रदान करते हैं। उदाहरणस्वरूप एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस एक उच्चकोटि का संयोजन है।

3. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार उत्पादन में विशिष्टीकरण का परिणाम है।

  1. यह विश्व की अर्थव्यवस्था को लाभान्वित करता है, यदि विभिन्न राष्ट्र वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं की उपलब्धता में श्रम विभाजन तथा विशेषीकरण को प्रयोग में लाए।
  2. हर प्रकार का विशिष्टीकरण व्यापार को जन्म दे सकता है।
  3. इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता व हस्तांतरणीयता के सिद्धान्तों पर आधारित होता है और सिद्धान्ततः यह व्यापारिक भागीदारों को समान रूप से लाभदायक होना चाहिए।
  4. आधुनिक समय में व्यापार, विश्व के आर्थिक संगठन का आधार है और यह राष्ट्रों की विदेश नीति से सम्बन्धित है।
  5. सुविकसित परिवहन तथा संचार प्रणाली से युक्त कोई भी देश अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी से मिलने वाले लाभों को छोड़ने का इच्छुक नहीं है। FEED अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षाशैली प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार  JAC Class 12 Geography Notes

→ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार: विश्व में दूसरे देशों के साथ वस्तुओं का आयात-निर्यात करना।

→ आर्थिक बैरोमीटर: अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को आर्थिक बैरोमीटर कहते हैं।

→ पत्तन: पत्तन जलीय जहाज़ों के लिए सामान लादने, उतारने तथा भण्डारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। पत्तन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार हैं।

→ विश्व व्यापार: गत 25 वर्षों में विश्व व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है।

→ व्यापार संघ: कई व्यापार संघ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं

  • GATT
  • WTO
  • E.U.
  • EFTA
  • NAFTA
  • OPEC
  • ASEAN
  • SAARC

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचा

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचा Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

1. पारमहाद्वीपीय स्टुवर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुज़रता है?
(क) डार्विन और मेलबोर्न
(ख) एडमंटन और एंकारेज
(ग) बैंकूवर और सेंट जॉन नगर
(घ) चेगडू और ल्हासा।
उत्तर:
(क) डार्विन और मेलबोर्न।

2. किस देश में रेलमार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है?
(क) ब्राजील
(ख) कनाडा
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) रूस।
उत्तर:
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका।

3. बृहद ट्रंक मार्ग होकर जाता है
(क) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर
(ख) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर
(ग) दक्षिण अटलांटिक महासागर से होकर
(घ) उत्तर प्रशान्त महासागर से होकर।
उत्तर:
(स) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचा

4. ‘बिग इंच’ पाइप लाइन के द्वारा परिवहित किया जाता है?
(क) दूध
(ख) जल
(ग) तरल पेट्रोलियम गैस
(घ) पेट्रोलियम।
उत्तर;
(घ) पेट्रोलियम।

5. चैनल टनल जोड़ता है
(क) लंदन-बर्लिन
(ग) पेरिस-लंदन
(ख) बर्लिन-पेरिस
(घ) बार्सीलोना-बर्लिन।
उत्तर:
(ग) पेरिस-लंदन।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की क्या-क्या समस्याएं हैं ?
उत्तर:
पर्वतीय भागों में सड़क निर्माण एक कठिन प्रक्रिया है, क्योंकि इस प्रदेश में कई पुलों का निर्माण करना पड़ता है। मरुस्थलों में रेतीली भूमि के कारण सड़कें बनाना कठिन है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पुल बह जाते हैं। इस ऋतु में सड़कें मोटर वाहन के योग्य नहीं होती।

प्रश्न 2.
पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है?
उत्तर:
पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग पूरे महाद्वीप से गुजरते हुए इसके दोनों छोरों को जोड़ते हैं। ये रेलमार्ग महाद्वीपों के विपरीत तटों को आपस में जोड़ते हैं।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचा

प्रश्न 3.
जल परिवहन के क्या लाभ हैं?
अथवा
तटीय नौ परिवहन से क्या लाभ है?
उत्तर:

  1. इसमें मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता।
  2. महासागर एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं।
  3. इनमें विभिन्न प्रकार के जहाज़ चलाए जा सकते हैं।
  4. यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है।
  5. जल परिवहन की ऊर्जा लागत अपेक्षाकृत कम होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अधिक न हों

प्रश्न 1.
एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न साधन एक-दूसरे के संपूरक होते हैं। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अंतादेशिक (Inter Regional) तथा अंतरा-प्रादेशिक (Intra-Regional) परिवहन के लिए विभिन्न साधनों का प्रयोग किया जाता है, ये यात्रियों तथा माल दोनों का वहन करते हैं। विभिन्न साधन इस प्रकार कार्य करते हैं

  1. वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय संचालन का निपटान भारवाही जलयानों द्वारा किया जाता है।
  2. कम दूरी एवं एक घर से, दूसरे घर की सेवाएं प्रदान करने में सड़क परिवहन सस्ता एवं तीव्रगामी साधन है।
  3. लंबी दूरियों तक परिवहन करने के लिए रेल सर्वाधिक अनुकूल साधन है।
  4. उच्च मूल्य वाली हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है। इस प्रकार विभिन्न साधन एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में पूरक होते हैं।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचा

प्रश्न 2.
विश्व के कौन-कौन से प्रमुख प्रदेश हैं जहां वायुमार्ग का सघन तंत्र पाया जाता है?
उत्तर:
विश्व के कुल वायुमार्गों के 60 प्रतिशत भाग का प्रयोग अकेला संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। वायुमार्गों के सघन जाल अग्रलिखित क्षेत्रों में पाए जाते हैं

  1. पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. पश्चिमी यूरोप
  3. दक्षिण-पूर्वी एशिया।

प्रश्न 3.
वे कौन-सी विधियां हैं जिनके द्वारा साइबर स्पेस मनुष्यों के समकालीन और सामाजिक स्पेस की वृद्धि करेगा?
उत्तर:
साइबर-स्पेस इंटरनेट (Cyber Space Internet):
साईबर स्पेस विद्युत् द्वारा कंप्यूटरीकृत स्पेस का संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेबसाइट (WorldWide Website) (www) जैसे इंटरनेट द्वारा आवृत हैं। सरल शब्दों में यह भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के शारीरिक संचलन के बिना कंप्यूटर पर सूचनाओं के प्रेषण और प्राप्ति की विद्युतीय अंकीय (Digital) दुनिया ह । यो इंटरनेट के नाम से भी जाना जाता है।

साइबर स्पेस हर जगह विद्यमान है। यह किसी कार्यालय में, जल में चलती नौका में, उड़ते जहाज़ों में और वास्तव में कहीं भी हो सकता है। साइबर स्पेस में प्रगति: जिस गति से इलैक्ट्रॉनिक नेटवर्क का विस्तार हुआ है वह मानव इतिहास में अभूतपूर्व है।

  1. इंटरनेट प्रयोक्ता 1995 में 5 करोड़, 2000 में 40 करोड़ और 2005 में 100 करोड़ हैं।
  2. अगले 100 करोड़ प्रयोक्ता 2010 तक जुड़ जाएंगे।
  3. विगत 5 वर्षों में वैश्विक प्रयोक्ताओं का संयुक्त राज्य अमेरिका से विकासशील देशों में स्थानांतरण हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रयोक्ताओं का प्रतिशत अंश 1995 में 66 प्रतिशत रह गया।
  4. अब विश्व के अधिकांश प्रयोक्ता संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, चीन और भारत में है।

भविष्य (Future):
जैसे कि करोड़ों लोग प्रतिवर्ष इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। साइबर स्पेस लोगों के समकालीन आर्थिक और सामाजिक स्पेस का

  1. ई० मेल,
  2. ई० वाणिज्य,
  3. ई० शिक्षा और
  4. ई० प्रशासन के माध्यम से विस्तृत करेगा।
  5. फैक्स,
  6. टेलीविजन और
  7. रेडियो के साथ इंटरनेट समय और स्थान की सीमाओं को लाँघते हुए अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँचेगा। ये आधुनिक संचार प्रणालियाँ हैं जिन्होंने परिवहन से कहीं ज्यादा वैश्विक ग्राम की संकल्पना को साकार किया है।

 परिवहन एवं संचा JAC Class 12 Geography Notes

→ परिवहन के साधन: परिवहन साधनों को किसी देश की जीवन रेखाएं कहते हैं।

→ परिवहन के प्रकार: स्थल, जल तथा वायु परिवहन।

→ ट्रांस: साईबेरियन रेलमार्ग-ट्रांस-साईबेरियन रेलमार्ग (8880 km लम्बा) विश्व में सबसे लम्बा रेलमार्ग है।

→ उत्तरी अन्ध महासागरीय मार्ग: यह मार्ग विश्व में सबसे व्यस्त जलमार्ग है।

→ स्वेज नहर: स्वेज नहर सबसे लम्बी जहाज़ी नहर है।

→ संचार साधन; आधुनिक प्रौद्योगिकी ने दूरसंचार को आसान बना दिया है।

→ उपग्रह संचार: भारत में आर्यभट्ट उपग्रह 19 अप्रैल, 1975 को अन्तरिक्ष में छोड़ा गया।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

प्रश्न 1.
1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक तृतीयक क्रियाकलाप है?
(क) खेती
(ख) बुनाई
(ग) व्यापार
(घ) आखेट।
उत्तर:
(ग) व्यापार।

2. निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कौन-सा एक द्वितीयक सेक्टर का क्रियाकलाप नहीं है?
(क) इस्पात प्रगलन
(ख) वस्त्र निर्माण
(ग) मछली पकड़ना
(घ) टोकरी बुनना।
उत्तर:
(ग) मछली पकड़ना।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा एक क्षेत्र दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है?
(क) प्राथमिक
(ख) द्वितीयक
(ग) पर्यटन
(घ) सेवा।
उत्तर:
(क) सेवा।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

4. वे काम जिनमें उच्च परिणाम और स्तर वाले अन्वेषण सम्मिलित होते हैं, कहलाते हैं
(क) द्वितीयक क्रियाकलाप
(ख) पंचम क्रियाकलाप
(ग) चतुर्थ क्रियाकलाप
(घ) प्राथमिक क्रियाकलाप।
उत्तर:
(ख) पंचम क्रियाकलाप।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप चतुर्थ क्षेत्र से सम्बन्धित है?
(क) संगणक विनिर्माण
(ख) विश्वविद्यालयी अध्यापन
(ग) कागज़ और कच्ची लुगदी निर्माण
(घ) पुस्तकों का मुद्रण।
उत्तर:
(ख) विश्वविद्यालयी अध्यापन।

6. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सत्य नहीं है?
(क) बाह्यस्रोतन दक्षता को बढ़ाता है और लागतों को घटाता है।
(ख) कभी-कभार अभियांत्रिकी और विनिर्माण कार्यों की भी बाह्यस्रोतन की जा सकती है।
(ग) बी० पी० ओज़ के पास के० पी० ओज़ की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते हैं।
(घ) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असन्तोष पाया जाता है।
उत्तर:
(ग) बी० पी० ओज़ के पास के० पी० ओज़ की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते हैं।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
फुटकर व्यापार सेवा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
फुटकर व्यापार सेवा (Retail Trading Service):
ये वह व्यापारिक क्रियाकलाप हैं जो उपभोक्ताओं को वस्तुओं के प्रत्यक्ष विक्रय से सम्बन्धित हैं। अधिकांश फुटकर व्यापार केवल विक्रय से नियत प्रतिष्ठानों और भण्डारों (Stores) में सम्पन्न होता है। उदाहरण-फेरी, रेहड़ी, द्वार से द्वार (Door to Door) डाक आदेश, दूरभाष, स्वचालित बिक्री मशीनें तथा इंटरनेट फुटकर बिक्री के भण्डार रहित उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
चतुर्थ सेवाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चतुर्थ सेवाएं ज्ञान आधारित सेवाएं हैं, ये सेवाएं शोध, विकास तथा उच्च सेवाओं पर केन्द्रित हैं जिनमें विशिष्ट ज्ञान, तकनीकी कुशलता तथा प्रबन्धकीय कुशलता की विशेषताएं हो।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 3.
विश्व के चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन से सम्बन्धित चिकित्सा उपचार है। भारत, थाइलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, स्विट्ज़रलैण्ड तथा ऑस्ट्रेलिया में यह क्रियाकलाप तेज़ी से बढ़ रहा है।

प्रश्न 4.
अंकीय विभाजक क्या है?
उत्तर:
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास से मिलने वाले अवसरों का वितरण पूरे ग्लोब पर असमान रूप से वितरित है। विकसित देश इस दिशा में आगे बढ़ गए हैं जबकि विकासशील देश पिछड़ गए हैं। इस प्रकार देशों में इस विभाजन को अंकीय विभाजन (Digital divide) कहते हैं।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा क्षेत्र की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
सेवाएं (Services) आधुनिक विकास में सेवाएं एक महत्त्वपूर्ण घटक हैं। इसमें सभी प्रकार की सेवाएंशिक्षा, स्वास्थ्य, भलाई, आराम, मनोरंजन, व्यापार आदि शामिल हैं। इनसे उत्पादन की क्षमता बढ़ती है। इनमें रोज़गार के साधन बढ़ते हैं। सेवाओं के प्रकार

  1. उद्योगों में लोगों तथा परिवहन का प्रयोग होता है।
  2. निम्न स्तरीय सेवाओं में दुकानदार, लांडरी शामिल हैं।
  3. उच्च स्तरीय सेवाओं में लेखाकार, परामर्शदाता तथा चिकित्सक है।
  4. शारीरिक बल प्रयोग करने वालों में माली, नाई आदि शामिल हैं।
  5. मानसिक परिचय के अध्यापक, वकील, संगीतकार शामिल हैं।

नई प्रवृत्तियां:

  1. महामार्गों, पुलों का निर्माण करना
  2. परिवहन, दूर संचार, बिजली तथा जल की बिक्री
  3. स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग, वकील, प्रबन्ध आदि
  4. मनोरंजन सेवाएं।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 2.
परिवहन एवं संचार सेवाओं की सार्थकता को विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवहन सेवाएं: ये लोगों, वस्तुओं, सम्पत्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजते हैं। ये मूलभूत वस्तुओं को गतिशीलता प्रदान करते हैं। इससे वस्तुओं का उत्पाद, वितरण तथा खपत बढ़ती है तथा मूल्य बढ़ता है। संचार साधन: संचार साधन शब्दों संदेशों, विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। प्रायः परिवहन साधन इनके लिए प्रयोग किए जाते हैं जैसे-रेलें, सड़कें, वायुमार्ग, मोबाइल दूरभाष सबसे तेज़ साधन हैं जो इसे गति प्रदान करते हैं। अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाशैली प्रश्न

तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप JAC Class 12 Geography Notes

→ सेवा क्षेत्र (Service Area): आर्थिक विकास के लिए सेवाएं बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

→ सेवाओं के प्रकार (Types of Services): शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण, मनोरंजन तथा वाणिज्यिक सेवाएं।

→ चतुर्थक क्रिया-कलाप (Quarternary activities): इस वर्ग में वे क्रियाएं शामिल हैं जो ज्ञान, शिक्षा, सूचना, शोध तथा विकास से सम्बन्धित हैं।

→ उच्च स्तरीय सेवाएं (Advanced Services): इनमें वित्त, बीमा, परामर्श, बचत तथा सूचना सेवाएं शामिल हैं।

→ सेवाओं के घटक (Components of Services): विज्ञापन, परामर्श, वित्त, बीमा, बचत, परिवहन, मनोरंजन, शिक्षा, वातावरण तथा ग्रामीण विकास।

→ वैश्विक नगर (Global cities): ये विश्व तंत्र में आर्थिक सम्बन्धों को जोड़ते हैं तथा नियन्त्रक केन्द्रों के रूप में काम करते हैं।

→ सूचना प्रौद्योगिकी (Information technology): यह कम्प्यूटर, दूर संचार, प्रसारण आदि का संयुक्त रूप है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए.

1. दो देशों के मध्य व्यापार कहलाता है।
(क) अन्तर्देशीय व्यापार
(ख) बाह्य व्यापार
(ग) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
(ग) स्थानीय व्यापार।
उत्तर:
(ग) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थलबद्ध पोताश्रय है?
(क) विशाखापट्टनम
(ख) मुम्बई
(ग) एन्नोर
(घ) हल्दिया।
उत्तर;
(क) विशाखापट्टनम।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

3. भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार वहन होता है
(क) स्थल और समुद्र द्वारा
(ख) स्थल और वायु द्वारा
(ग) समुद्र और वायु द्वारा
(घ) समुद्र द्वारा।
उत्तर;
(ग) समुद्र और वायु द्वारा।

4. वर्ष 2003-04 में निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था?
(क) यूनाइटेड किंग्डम
(ख) चीन (ग) जर्मनी
(घ) सं.रा. अमेरिका।
उत्तर;
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका।

अति लघु आरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दोप्रश्न

1. भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. भारत का कुल व्यापार निरन्तर बढ़ रहा है।
  2. भारत का अधिकतर व्यापार समुद्र मार्गों द्वारा है।
  3. भारत में व्यापार सन्तुलन प्रतिकूल है।
  4. विश्व व्यापार में भारत के व्यापार का केवल 1% भाग है।
  5. भारत के आयात व्यापार में पेट्रोलियम का आयात बढ़ रहा है तथा निर्यात व्यापार में निर्मित वस्तुओं का प्रतिशत बढ़ रहा है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 2.
पत्तन और पोताश्रय में अन्तर बताओ।
उत्तर:
पत्तन समुद्री तट पर जहाज़ों के ठहरने के स्थान होते हैं। यहां जहाज़ों पर सामान लादने-उतारने की सुविधाएं होती हैं। यहां गोदामों की सुविधाएं होती हैं। पत्तन व्यापार के द्वार होते हैं जो पृष्ठभूमि से जुड़े होते हैं।

पोताश्रय समुद्र में जहाज़ों के प्रवेश करने का प्राकृतिक स्थान होता है। यहां जहाज़ लहरों तथा तूफान से सुरक्षा प्राप्त करते हैं। कटे फटे तट तथा खाड़ियां पोताश्रय स्थल होते हैं। यहां जहाज़ों के आगमन की सुविधाएं होती हैं।

प्रश्न 3.
पृष्ठ प्रदेश का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठ प्रदेश वह क्षेत्र होता है जो रेल-सड़क मार्ग द्वारा पत्तन से जुड़ा होता है। यहां से उत्पाद निर्यात के लिए भेजे जाते हैं तथा आयात सामान वितरीत किया जाता है।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 4.
उन महत्त्वपूर्ण मुद्दों के नाम बताइए जो भारत विदेशों से आयात करता है।
उत्तर:
पेट्रोलियम उत्पाद तथा पेट्रोलियम भारत की प्रमुख आयात है। इसके अतिरिक्त मशीनरी, गैर धात्विक खनिज, मोती बहुमूल्य रत्न, अलौह धातुएं, लुगदी, कागज़, खाद्य तेल, उर्वरक अन्य महत्त्वपूर्ण आयात हैं।

प्रश्न 5.
भारत के पूर्वी तट पर स्थित बन्दरगाहों के नाम लिखो।। उत्तर-कोलकाता, हल्दिया, पाराद्वीप, विशाखापट्टनम, एन्नौर, चेन्नई, तूतीकरन प्रमुख पत्तन हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में देंप्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयात: भारत के प्रमुख आयात निम्नलिखित हैं: पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, मोती-रत्न, स्वर्ण व चांदी, व्यावसायिक उपस्कट, खाद्य तेल, उर्वरक, लुगदी, कागज़, अलौहधातुएं, दालें। ,

निर्यात: इंजीनियरिंग सामान, रसायन सम्बन्धी उत्पाद, मणिरत्न आभूषण, वस्त्रादि, पेट्रोलियम उत्पादन, कृषि-समवर्गी उत्पाद, इलेक्ट्रिक साधन चमड़ा।

JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 2.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:

  1. भारत के व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है।
  2. कृषि तथा समवर्गी उत्पाद के निर्यात में हिस्सा घटा है।
  3. पेट्रोलियम उत्पादों को निर्यात बढ़ा है।
  4. कहवा, चाय, मसालों का निर्यात घटा है।
  5. ताजे फलों, चीनी आदि के निर्यात में वृद्धि हुई है।
  6. निर्यात क्षेत्र में विनिर्मित वस्तुओं की भागीदारी बढ़ी है।
  7. इंजीनियरिंग सामान में वृद्धि हुई है।
  8. मणिरत्नों तथा आभूषण का निर्यात में वृद्धि हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार JAC Class 12 Geography Notes

→ अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार (International Trade): अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के दो प्रमुख घटक हैं-आयात तथा निर्यात।

→ भारत का कुल विदेशी व्यापार (Total foreign trade of India): सन् 2004-05 में भारत का कुल विदेशी व्यापार का मूल्य ₹ 8371 अरब था।

→ आयात व्यापार तथा निर्यात व्यापार में अन्तर
JAC Class 12 Geography Solutions Chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 1

→ पत्तन (Ports): पत्तन व्यापार के द्वार हैं।

→ पत्तनों के प्रकार (Types of Ports): समुद्री पत्तन, नदीय पत्तन, शुष्क पत्तन।

→ भारत के पूर्वी तट के पत्तन; कोलकाता, हल्दिया, पाराद्वीप, विशाखापट्टनम, चेन्नई, तूतीकोरन।

→ भारत के पश्चिमी तट के पत्तन: मुम्बई न्हावा शेवा, कांडला, मार्मगाओ, कोच्चि।