JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. रोग कहते हैं-
(a) स्वास्थ्य की कमी
(b) स्वास्थ्य का अभाव
(c) दु ₹खी रहना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

2. रोगों का लक्षण है-
(a) दस्त लगना
(b) उल्टी होना
(c) बुखार आना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

3. निम्न में दीर्घकालिक रोग है-
(a) फ्लू
(b) सिर दर्द
(c) क्षयरोग
(d) बुखार।
उत्तर:
(b) सिर दर्द।

4. रोग के कारक हैं-
(a) वाइरस
(b) बैक्टीरिया
(c) प्रोटोजोआ
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

5. संक्रामक रोग फैलते हैं-
(a) प्रदूषित जल
(b) प्रदूषित वायु
(c) रोगवाहक द्वारा
(d) उपर्युक्त सभी से।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

6. टीकाकरण द्वारा निवारण
(a) संक्रामक रोगों का
(b) असंक्रामक रोगों का
(c) यौन रोगों का
(d) इन्फ्लुएंजा का।
उत्तर:
(a) संक्रामक रोगों का।

7. अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है-
(a) पौष्टिक भोजन
(b) स्वच्छ वातावरण
(c) नियमित व्यायाम करना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

8. एड्स का संचरण होता है-
(a) रोगी व्यक्ति का रक्त दूसरे व्यक्ति को देने से
(b) संक्रमित सुई द्वारा इंजेक्शन लगाने से
(c) यौन सम्पर्क द्वारा
(d) उपर्युक्त सभी से।
उत्तर:
(c) यौन सम्पर्क द्वारा।

9. एड्स का कारक है-
(a) प्रोटोजोआ जन्तु
(b) बैक्टीरिया
(c) वाइरस
(d) H.I.V. वाइरस।
उत्तर:
(d) H.I.V. वाइरस।

10. बैक्टीरिया का संक्रमण होने पर किसका उपयोग लाभदायक होगा?
(a) एण्टीबायोटिक
(c) एण्टीवाइरल
(b) एण्टीसैप्टिक
(d) उपर्युक्त सभी का।
उत्तर:
(a) एण्टीबायोटिक।

11. मच्छर के काटने से होने वाला रोग है-
(a) मलेरिया
(b) डेंगूज्वर
(c) ‘अ’ तथा ‘ब’ दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ‘अ’ तथा ‘ब’

12. पीलिया रोग किस अंग को प्रभावित करता है-
(a) आमाशय को
(b) बी.सी.जी. का
(c) फेंफड़ों को
(d) एण्टी वाइरल का
उत्तर:
(b) यकृत को।

13. कुत्ते के काटने पर कौन-सा
(a) टेटनस का
(b) बी. सी. जी. का
(c) एंटीरेबीज का
(d) एण्टी वाइरल का
उत्तर:
(b) बी. सी. जी. का

14. रक्ताल्पता का कारण है-
(a) शरीर में आयरन की कमी
(b) आयोडीन की कमी
(c) विटामिनों की कमी
(d) प्रोटीन की कमी।
उत्तर:
(a) शरीर में आयरन की कमी।

रिक्त स्थान भरो-

  1. WHO का विस्तार रूप ……………….. है।
  2. AIDS एक ……………….. (संक्रामक / असंक्रामक) रोग है।
  3. सर्दी-जुकाम एक ………………… (तीव्र / दीर्घकालिक) रोग है।
  4. वेक्सीन की खोज सबसे पहले ……………….. ने की थी।

उत्तर:

  1. World Health Organization
  2. संक्रामक
  3. तीव्र
  4. एडवर्ड जेनर।

सुमेलन कीजिए-

कौलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. वायु(क) मलेरिया
2. जल(ख) AIDS
3. रोग वाहक(ग) क्षय रोग
4. लैंगिक संपर्क(घ) हैजा

उत्तर:
1. (ग) क्षय रोग
2. (घ) हैजा
3. (क) मलेरिया
4. (ख) AIDS

सत्य / असत्य

  1. तीव्र रोग लम्बे समय तक चलते हैं।
  2. रोगाणु को मारने के लिए एंटीबायोटिक दिया जाता है।
  3. 17 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाते हैं।
  4. व्यक्तिगत तथा सामुदायिक समस्याएँ दोनों, स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य क्या है?
उत्तर:
स्वास्थ्य शरीर की वह अवस्था है जिसके अन्तर्गत शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक कार्य करने की समुचित क्षमता हो व कोई भी कार्य उचित प्रकार से किया जा सके।

प्रश्न 2.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए किन-किन बातों की जरूरत है?
उत्तर:
अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक व सन्तुलित भोजन, नियमित व्यायाम, सामुदायिक स्वच्छता आदि की जरूरत है।

प्रश्न 3.
‘बाधित आराम’ और ‘असुविधा’ क्या है?
उत्तर:
बाधित आराम तथा असुविधा, रोग का दूसरा नाम है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 4.
शरीर की क्रियाओं में बदलाव क्या प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर:
शरीर की क्रियाओं में बदलाव रोग के लक्षण प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 5.
कोई चार लक्षण बताइए जिनसे रोग का पता लगता है।
उत्तर:
सिर दर्द, खाँसी, दस्त होना, किसी घाव में मवाद पड़ना।

प्रश्न 6.
तीव्र रोग या प्रचंड रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन रोगों की अवधि कम होती है उन्हें तीव्र रोग या प्रचंड रोग कहते हैं।

प्रश्न 7.
दीर्घकालिक रोग किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
लम्बी अवधि तक या जीवन पर्यन्त रहने वाले रोगों को दीर्घकालिक रोग कहते हैं।

प्रश्न 8.
तीव्र रोग व दीर्घकालिक रोग का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
खाँसी-जुकाम तीव्र रोग तथा क्षयरोग दीर्घकालिक रोग हैं।

प्रश्न 9.
पतले दस्त या अतिसार लगने का क्या कारण है?
उत्तर:
दूषित भोजन और गन्दे पानी का प्रयोग अतिसार लगने का कारण है।

प्रश्न 10.
संक्रामक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे रोग जिनके तात्कालिक कारक सूक्ष्म जीव (रोगाणु) होते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं। ये सूक्ष्म जीव जन समुदाय में रोग फैला देते हैं।

प्रश्न 11.
कैंसर रोग का क्या कारण है?
उत्तर:
कैंसर रोग का कारण आनुवंशिक असामान्यता है।

प्रश्न 12.
उच्च रक्त चाप का क्या कारण है?
उत्तर:
वजन अधिक होना तथा व्यायाम न करना उच्च रक्त चाप का कारण है।

प्रश्न 13.
पेप्टिक व्रण का क्या कारण है?
उत्तर:
पेप्टिक व्रण का कारण हेलीकोबैक्टर पायलोरी नामक बैक्टीरिया है।

प्रश्न 14.
उन दो वैज्ञानिकों के नाम लिखो जिन्होंने पेष्टिक व्रण के कारक बैक्टीरिया का पता लगाया था।
उत्तर:
आस्ट्रेलिया के रोग विज्ञानी रॉबिन वारेन तथा बैरी मार्शल।

प्रश्न 15.
पेप्टिक व्रण का उपचार किस दवा से होता है?
उत्तर:
पेप्टिक व्रण का उपचार एंटीबायोटिक से हो जाता है।

प्रश्न 16.
मार्शल तथा वारेन को शरीर क्रिया विज्ञान तथा औषधि के लिए कब नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था?
उत्तर:
मार्शल तथा वारेन को शरीर क्रिया विज्ञान तथा औषधि के लिए सन् 2005 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।

प्रश्न 17.
रोग उत्पन्न करने वाले जीवों के चार वर्गों का नाम लिखो।
उत्तर:
रोग उत्पन्न करने वाले जीवों के चार वर्ग हैं- वाइरस, कुछ बैक्टीरिया, कुछ फंजाई तथा कुछ प्रोटोजोआ।

प्रश्न 18.
वाइरस से होने वाले चार रोगों के नाम लिखो।
उत्तर:
वाइरस से होने वाले चार रोग सर्दी-जुकाम, फ्लू, डेंगू ज्वर और एड्स।

प्रश्न 19.
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले चार रोगों के नाम लिखो।
उत्तर:
बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाले चार रोग- हैजा, टाइफॉइड, क्षय रोग (टी.बी) तथा ऐन्थ्रेक्स।

प्रश्न 20.
प्रोटोजोआ से होने वाले दो रोगों का नाम लिखो।
उत्तर:
प्रोटोजोआ से होने वाले दो रोग-मलेरिया, कालाजारं।

प्रश्न 21.
स्टेफाइलोकोकाई बैक्टीरिया किसका कारक है?
उत्तर:
स्टेफाइलोकोकाई बैक्टीरिया मुँहासे रोग का कारक है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 22.
दिनोसोमा किस रोग का कारक है?
उत्तर:
ट्रिप्नोसोमा निद्रा रोग का कारक है।

प्रश्न 23.
लेश्मानिया किस व्याधि का कारक है?
उत्तर:
लेश्मानिया कालाजार व्याधि का कारक है।

प्रश्न 24.
गोलकृमि (एस्केरिस लुंग्रीकाइडिस) कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
गोल कृमि मनुष्य (छोटे बच्चों) की छोटी आँत में पाया जाता है।

प्रश्न 25.
एंटीबायोटिक रोग की अवस्था में क्या करते हैं?
उत्तर:
एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के महत्त्वपूर्ण जैव रासायनिक मार्ग को बन्द कर देते हैं।

प्रश्न 26.
पेनिसिलीन एंटीबायोटिक का कार्य बताइए।
उत्तर:
पेनिसिलीन एंटीबायोटिक बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनाने वाली प्रक्रिया को बाधित कर देती है। अतः बैक्टीरिया कोशिका भित्ति नहीं बना सकते और वे सरलता से मर जाते हैं। पेनिसिलीन का मनुष्य पर कोई प्रभाव नहीं होता है।

प्रश्न 27.
सामान्य खाँसी-जुकाम पर एंटीबायोटिक क्यों प्रभाव नहीं दिखा पाते हैं?
उत्तर:
सामान्य खाँसी-जुकाम वाइरस के प्रभाव से होता है और एंटीबायोटिक वाइरस को प्रभावित नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 28.
संचारी रोग किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
जो रोग सूक्ष्मजीवीय कारक रोगी से अन्य स्वस्थ मनुष्यों में फैलते हैं, उन्हें संचारी रोग कहते हैं।

प्रश्न 29.
वायु द्वारा फैलने वाले रोगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
खाँसी-जुकाम, निमोनिया तथा क्षय रोग वायु द्वारा फैलते हैं।

प्रश्न 30.
जल से संक्रमण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
जब संक्रमणीय रोग से ग्रस्त रोगी के अपशिष्ट पेय जल में मिल जाते हैं और यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति जाने-अनजाने में इस जल को पी लेता है तो रोगाणुओं का संक्रमण उस व्यक्ति में हो होता है।

प्रश्न 31.
लैंगिक सम्पर्क से फैलने वाले दो रोगों के नाम लिखो।
उत्तर:
सिफलिस तथा एड्स लैंगिक सम्पर्क से होने वाले रोग हैं।

प्रश्न 32.
एड्स रोग किन-किन स्थितियों में फैलता है?
उत्तर:
एड्स रोग लैंगिक सम्पर्क द्वारा, रक्त स्थानान्तरण द्वारा संक्रमित सुई से इंजेक्शन लगवाने तथा गर्भावस्था में रोगी माता से अथवा शिशु को स्तनपान कराने से फैलता है।

प्रश्न 33.
मच्छर समतापी प्राणियों का रक्त क्यों पीता है?
उत्तर:
मच्छर अत्यधिक पोषण के लिए समतापी प्राणियों का रक्त पीता है ताकि परिपक्व अण्डे दे सके।

प्रश्न 34.
पीलिया रोग के कारक का नाम बताइए।
उत्तर:
पीलिया रोग का कारक हिपेटाइटिस बैक्टीरिया है।

प्रश्न 35.
टाइफॉयड उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया कहाँ रहते हैं?
उत्तर:
टाइफॉयड उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया मनुष्य की आहार नाल में रहते हैं।

प्रश्न 36.
HIV कहाँ फैलते हैं?
उत्तर:
HIV लसीका ग्रन्थियों में फैलते हैं।

प्रश्न 37.
मलेरिया उत्पन्न करने वाले रोगाणु शरीर में कहाँ से कहाँ जाते हैं?
उत्तर:
मलेरिया के रोगाणु यकृत से लाल रुधिर कोशिकाओं में जाते हैं।

प्रश्न 38.
जापानी बुखार (ऐंसेफेलाइटिस) किस अंग को प्रभावित करता है?
उत्तर:
जापानी बुखार मस्तिष्क को प्रभावित करता है।

प्रश्न 39.
शोध किसे कहते हैं?
उत्तर:
शरीर का प्रतिरक्षा तन्त्र क्रियाशील होकर प्रभावित ऊतक के चारों ओर रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्म जीवों को मारने के लिए अनेक कोशिकाएँ बना देता है। नई कोशिकाओं के बनने के प्रक्रम को शोथ कहते हैं।

प्रश्न 40.
HIV AIDS से व्यक्ति की मृत्यु प्रायः क्यों हो जाती है?
उत्तर:
HIV AIDS संक्रमण से प्रतिरक्षा तन्त्र के कार्य नष्ट हो जाते हैं। इससे प्रतिदिन होने वाले छोटे-छोटे संक्रमणों का मुकाबला भी व्यक्ति नहीं कर पाता है। अतः ये संक्रमण ही HIV AIDS के रोगी की मृत्यु के कारण बन जाते हैं।

प्रश्न 41.
संक्रामक रोगों के उपचार के दो उपाय बताइए।
उत्तर:
संक्रामक रोगों के उपचार के दो उपाय-

  • रोग के प्रभाव को कम करना तथा
  • रोग के कारण को मार देना।

प्रश्न 42.
बीमार होने पर हम आराम क्यों करते हैं?
उत्तर:
बीमार होने पर हम आराम इसलिए करते हैं, क्योंकि इससे ऊर्जा का संरक्षण होता है और बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है।

प्रश्न 43.
HIV संक्रमण किन औषधियों से नियन्त्रित हो जाता है?
उत्तर:
HIV संक्रमण एंटीवाइरल औषधियों से नियन्त्रित हो जाता है।

प्रश्न 44.
रोगाणुओं से हमारे शरीर में कौन लड़ता है?
उत्तर:
रोगाणुओं से हमार शरीर में स्थित प्रतिरक्षा तन्त्र लड़ता है।

प्रश्न 45.
गम्भीर संक्रामक रोग किसकी असफलता की ओर संकेत करता है?
उत्तर:
गम्भीर संक्रामक रोग हमारे प्रतिरक्षा तन्त्र की असफलता की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 46.
प्रतिरक्षाकरण किस नियम पर आधारित है?
उत्तर:
जब रोगाणु प्रतिरक्षा तन्त्र पर दूसरी बार आक्रमण करता है तो स्मृति के आधार पर प्रतिरक्षा तन्त्र अपनी पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 47.
टीकाकरण से हमारे शरीर में क्या प्रविष्ट कराया जाता है?
उत्तर:
टीकाकरण से हमारे शरीर में विशिष्ट संक्रमण रोधी तत्व प्रविष्ट कराया जाता है।

प्रश्न 48.
टीकाकरण का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
टीकाकरण से प्रविष्ट विशिष्ट संक्रमण रोधी तत्व रोग उत्पन्न नहीं होने देते, लेकिन ये वास्तव में रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं को रोग उत्पन्न करने से रोक देते हैं।

प्रश्न 49.
चेचक के टीके की खोज किसने की थी?
उत्तर:
चेचक के टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने की थी।

प्रश्न 50.
आजकल रोग निवारण के लिए कौन-कौन से टीके उपलब्ध हैं?
उत्तर:
आजकल रोग निवारण के लिए टेटनस, डिप्थीरिया, कुकर खाँसी, चेचक, पोलियो आदि के टीके उपलब्ध है।

प्रश्न 51.
हिपेटाइटिस के किस प्रकार के लिए टीका उपलब्ध है?
उत्तर:
हिपेटाइटिस ‘A’ के लिए टीका उपलब्ध है।

प्रश्न 52.
पेनिसिलीन प्रतिजैविक की खोज किसने की थी?
उत्तर:
पेनिसिलीन प्रतिजैविक की खोज अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग ने की थी।

प्रश्न 53.
संक्रमित कुत्ते के काटने से कौन सा रोग हो जाता है?
उत्तर:
रेबीज वाइरस से संक्रमित कुत्ते के काटने से रेबीज रोग हो जाता है।

लघुत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) के अनुसार, “स्वास्थ्य केवल शारीरिक रोग या विकलांगता की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि किसी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक जीवन क्षमता की सामान्य स्थिति है।” स्वस्थ जीवन हेतु अच्छा स्वास्थ्य आवश्यक है। यह केवल रोग से मुक्ति ही नहीं अपितु मानसिक तनाव व चिन्ता से मुक्ति की दशा है।

प्रश्न 2.
अच्छे स्वास्थ्य की चार दशाएँ बताइए।
उत्तर:
अच्छे स्वास्थ्य के लिए निम्न चार दशाएँ आवश्यक हैं-

  • सन्तुलित एवं पौष्टिक भोजन लेना।
  • स्वच्छ भोजन, जल एवं वायु का होना
  • व्यक्तिगत एवं घरेलू स्वच्छता का होना
  • अच्छी आदतें, नियमित व्यायाम तथा उचित विश्राम करना।

प्रश्न 3.
सामुदायिक स्वास्थ्य किसे कहते हैं? सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं के अन्तर्गत क्या कार्य आते हैं?
उत्तर:
सामुदायिक स्वास्थ्य – सम्पूर्ण व्यक्तिगत स्वास्थ्य और उसके साथ-साथ समुदाय के स्वास्थ्य हेतु महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवाएँ उपलब्ध करना सामुदायिक स्वास्थ्य कहलाता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के अन्तर्गत निम्न कार्य सम्मिलित हैं-
1. पर्यावरण की सफाई सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण की सफाई बहुत आवश्यक है। इसके लिए अपशिष्ट पदार्थों का निपटान जैसे मूत्राशय, शौचालय, सेप्टिक टैंक, सोकपिट, कम्पोस्ट पिट की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रदूषण रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए। स्वच्छ जल उपलब्ध कराना, सार्वजनिक स्थानों की सफाई के लिए व्यवस्था बनाना, शुद्ध और कीटाणु रहित भोजन उपलब्ध कराना आदि।

2. उचित चिकित्सा सुविधाएँ- बीमारों की चिकित्सा व उचित देख-रेख के लिए अच्छी चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जा सकता है।

3. स्वास्थ्य शिक्षा अच्छे स्वास्थ्य और रोगों को फैलने से रोकने के लिए लोगों को शिक्षित करना, सन्तुलित भोजन, नशाखोरी की बुरी आदत एवं उसके दुष्प्रभावों आदि की जानकारी रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, व्यक्तिगत सम्पर्क या छपी हुई सामग्री द्वारा देना अति आवश्यक है।

4. संक्रमण रोगों से बचाव एवं उनकी रोकथाम- सामान्य रोगों से बचाव के टीके लगवाना, जैसे- हैजा, चेचक, काली खाँसी, टिटेनस, पोलियो, टाइफॉइड आदि । मलेरिया उन्मूलन, फाइलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग की रोकथाम, क्षयरोग की रोकथाम आदि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करने चाहिए।

5. मातृ एवं शिशु कल्याण-शिशु के जन्म होने के पश्चात् उसकी उचित देखभाल, बच्चों को मुख्य रोगों से बचाव के टीके लगवाना, अल्परक्तता या कुपोषण सम्बन्धी रोगों की जानकारी, परीक्षण व बचाव आदि की व्यवस्था होनी चाहिए।

6. परिवार नियोजन परिवार को स्वस्थ और सीमित रखने के लिए परिवार नियोजन की शिक्षा व परिवार नियोजन की चिकित्सकीय व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे जहाँ एक ओर जनसंख्या सीमित या नियन्त्रित होगी, वहीं दूसरी और सामुदायिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।

7. पार्कों एवं व्यायामशालाओं का प्रबन्ध-सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए पार्कों की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे लोगों को श्वास के लिए स्वच्छ वायु मिल सके। इसके अलावा मनुष्य को निरोगी, स्वस्थ और बलिष्ठ बनाये रखने के लिए व्यायामशालाओं की व्यवस्था होनी चाहिए।

8. विद्यालय स्वास्थ्य सेवाएँ – इसमें विद्यालय के बच्चों की जाँच, उनको टीके लगवाना, औषधियाँ देना, परामर्श देना, सफाई व स्वच्छता का ध्यान रखना, व्यक्तिगत सफाई की ओर ध्यान देना, स्वास्थ्य शिक्षा देना और मध्याह्नकालीन अल्पाहार की व्यवस्था शामिल है।

9. आँकड़े एकत्रित करना – सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी विभिन्न संक्रामक रोगों, जैसे- हैजा, चेचक, टाइफॉइड, कुष्ठ, मलेरिया, पोलियो आदि के निश्चित आँकड़े एकत्रित करने के लिए प्रशिक्षित किये जाते हैं और उन्हें स्वास्थ्य योजना बनाने वालों को भेजते हैं। इन आँकड़ों के आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य योजनाएँ बनाई जाती हैं।

प्रश्न 4.
अच्छे स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण को प्रदूषण रहित बनाये रखना कठिन क्यों हो गया है?
उत्तर:
देश में बढ़ती हुई जनसंख्या के स्वस्थ जीवन के लिए प्रदूषण मुक्त शुद्ध पर्यावरण बनाये रखना बहुत कठिन हो गया है, क्योंकि तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निवास अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि, यातायात के साधनों में वृद्धि, जंगलों की अबाध कटाई आदि हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर स्वास्थ्य के लिए अनुपयुक्त बना देते हैं। इससे पृथ्वी, जल एवं वायु को प्रदूषण मुक्त करने की क्षमता पर दबाव पड़ता है और ये शुद्ध नहीं हो पाते हैं।

प्रश्न 5.
अशुद्ध वातावरण से व्यक्ति का स्वास्थ्य किस प्रकार प्रभावित हो सकता है?
उत्तर:
व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके वातावरण द्वारा अत्यधिक प्रभावित होता है। यह बात निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हो जाती है-
(1) जल, वायु तथा भोजन व्यक्ति के वातावरण के भाग हैं। यदि किसी स्थान पर पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है तथा लोग प्रदूषित जल पीने के लिए विवश हैं तो वे हैजा, पीलिया, जोड़ों का दर्द, पोलिया टायफॉइड आदि रोगों से पीड़ित हो जाते हैं अर्थात् अस्वस्थ हो जाते हैं।

(2) प्रदूषित वायु में कार्य करने वाले व्यक्ति श्वसन सम्बन्धी रोगों, जैसे- ब्रॉकाइटिस, सांस फूलना, खाँसी आदि से पीड़ित हो जाते हैं। शोर युक्त वातावरण में काम करने वाले व्यक्ति मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, सिरदर्द आदि से पीड़ित हो जाते है उनकी सुनने की क्षमता भी कम हो जाती है अर्थात् बहरापन के शिकार हो जाते हैं।

(3) यदि वे अशुद्ध, प्रदूषित, विषाक्त, बासी भोजन खाते हैं तो वे अपच, मन्दाग्नि, एसिडिटी, पीलिया, टाइफॉइड, उल्टी-दस्त (अतिसार) आदि से पीड़ित हो जाते हैं।

प्रश्न 6.
यदि आपका घर स्वच्छ है, परन्तु पास-पड़ौस स्वच्छ नहीं है तो क्या आप स्वस्थ रह सकेंगे? यदि नहीं, तो क्यों?
उत्तर:
यदि हमारा घर स्वच्छ है, परन्तु पास पड़ौस स्वच्छ नहीं है तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते हैं। हम अपनी व्यक्तिगत तथा अपने घरों की सफाई इसलिए करते हैं, ताकि हम रोग के कारक सूक्ष्म जीवों तथा अन्य संक्रमण के कारणों से बचे रह सकें। परन्तु पास-पड़ोस स्वच्छ न होने से अशुद्ध वायु मक्खी, मच्छर आदि फोटों द्वारा जाने-आने के कारण ये संक्रमणकारी सूक्ष्मजीव हमें भी संक्रमित करके अस्वस्थ कर देंगे और हम बीमार हो जायेंगे।

प्रश्न 7.
संतुलित भोजन अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
अच्छा स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए सन्तुलित भोजन बहुत आवश्यक है। ऐसा भोजन जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवणों की उपयुक्त मात्रा उपस्थित हो, सन्तुलित भोजन (आहार) कहलाता है। सन्तुलित भोजन प्राप्त न होने की स्थिति में मनुष्य अभावजनित रोग से पीड़ित हो जाते हैं। अज्ञानता के कारण लोग उपयुक्त भोजन नहीं ले पाते हैं और वे कुपोषण के कारण अस्वस्थ (बीमार) हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य में परस्पर क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य में सम्बन्ध – व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य दोनों ही अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं। दोनों ही एक-दूसरे  के पूरक हैं। हम व्यक्तिगत रूप से स्वच्छ रहकर अपने घर को स्वच्छ रखकर और सन्तुलित भोजन करके व्यक्तिगत रूप से स्वस्थ रहते हैं। सदैव स्वस्थ बने रहने के लिए यह आवश्यक है कि हमें स्वस्थ पर्यावरण मिले। यदि हम व्यक्तिगत स्वच्छता के कारण स्वस्थ हैं, किन्तु हमारे चारों ओर का वातावरण गन्दा और प्रदूषित है अर्थात् रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों से भरा तो ये सूक्ष्मजीव हमारे स्वास्थ्य को अवश्य ही प्रभावित करेंगे और हम व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने पर भी अस्वस्थ हो जायेंगे। अतः व्यक्तिगत शारीरिक, मानसिक, जैविक और सामाजिक स्थिरता बनाये रखने के लिए सामुदायिक स्वस्थ वातावरण आवश्यक है। इस प्रकार व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 9.
व्यक्तिगत स्तर पर स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
व्यक्तिगत स्तर पर हमें अपना स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए प्रतिदिन साफ पानी से स्नान करना चाहिए ताकि शरीर पर लगी धूल व शरीर की दुर्गन्ध दूर हो जाए। त्वचा साफ हो तो शरीर से दुर्गन्ध नहीं आती और चर्म रोग आदि होने की सम्भावना नहीं रहती है। हमारे वस्त्र स्वच्छ होने चाहिए। सूक्ष्मजीवों से भोजन भी संक्रमित हो जाता है।

अतः खाने के बर्तनों तथा खाद्य पदार्थों को मक्खियों तथा कीटों से बचाकर जालीदार अलमारी में अथवा स्वच्छ कपड़े से ढककर रखना चाहिए। मल-मूत्र त्यागने के बाद तथा भोजन करने से पहले अपने हाथों को साबुन और स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धो लेने से वे रोगाणु मुक्त हो जाते हैं। ऐसा न करने से सूक्ष्म जीवों की वृद्धि हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी।

प्रश्न 10.
रोग शब्द से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
रोग (Disease)- रोग को अंग्रेजी में डिजीज (Disease) कहते हैं जिसका शाब्दिक अर्थ है – Disease अर्थात् आसानी या सुविधा का न होना। रोग की परिभाषा किसी कारणवश शरीर के अंगों की ठोक से कार्य न करने की स्थिति के रूप में दी जा सकती है। दूसरे शब्दों में, शरीर में किसी प्रकार के विकार (दोष) को रोग कहते हैं।

प्रश्न 11.
संचारी या संक्रामक रोग तथा असंचारी या असंक्रामक रोग क्या हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
संचारी (संचरणीय) या संक्रामक रोग-ये ऐसे रोग होते हैं जो रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में जल, वायु, भोजन, कीट या शारीरिक सम्पर्क द्वारा फैलते हैं। संक्रामक रोग बैक्टीरिया, वाइरस, प्रोटोजोआ या फंजाई वर्ग के सूक्ष्म जीवों के संक्रमण के कारण हो जाते हैं। इन सूक्ष्म जीवों को रोगाणु भी कहते हैं ये रोगाणु प्रदूषित जल, वायु, भोजन, कीट या शारीरिक सम्पर्क द्वारा रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति मैं पहुँचते हैं।

हैजा, क्लेरिया, डेंगू ज्वर, फ्लू, क्षय रोग, टाइफॉयड, रेबीज, एड्स, अतिसार, कर्णफेर, चेचक आदि संचरणीय या संक्रामक रोगों के उदाहरण हैं।

असंचारी (असंचरणीय) या असंक्रामक रोग-ये ऐसे रोग हैं जो स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते हैं। कुछ रोग शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण हो जाते हैं, इन्हें असंक्रामक या हीनताजन्य रोग कहते हैं घेघा एनीमिया, रतौंधी, क्वाशियोरकोर, मेरेस्मस आदि असंक्रामक रोगों के उदाहरण “हैं। कुछ असंचरणीय रोग शरीर के अंगों की असामान्य क्रिया के कारण हो जाते हैं, जैसे मधुमेह (डायबिटीज), गठिया, कैंसर, हृदय रोग आदि।

प्रश्न 12.
संचरणीय तथा असंचरणीय रोगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संचरणीय तथा असंचरणीय रोग में अन्तर

संचरणीय रोगअसंचरणीय रोग
1. ये रोग शरीर में रोगाणुओं के प्रवेश कर जाने के कारण होते हैं।1. ये रोग शरीर में पोषक तत्वों की कमी या उपापचयी क्रियाओं में त्रुटि या परजीवी जीवों के कारण होते हैं।
2. इन रोगों का संचरण वायु, जल, भोजन, कीट या शारीरिक सम्पर्क द्वारा रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में हो सकता है। उदाहरणार्थ – है जा, मलेरिया, फ्लू, क्षय रोग, रेबीज, चेचक, एड्स आदि।2. ये रोग, रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैलते। उदाहरणार्थ – छों घा, एनीमिया (अरक्तता), रतौंधी, डायबिटीज आदि।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित रोगों के कारक जीवों के नाम लिखिए – हैजा, मलेरिया, क्षयरोग, टाइफॉयड, रेबीज, फ्लू (इन्फ्लूएंजा)।
उत्तर:

रोग का नामकारक जीव का नाम
1. हैजाविब्रियो कॉलेरी
2. मलेरियाप्लाज्मोडियम वाइवैक्स
3. क्षयरोगमाइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस
4. टाइफॉयडसाल्मोनेला टाइफी
5. रेबीजरेबीज वाइरस
6. फ्लू (इन्फ्लुएंजा)मिक्सोवाइरस इन्फ्लूएन्जाई।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित सूक्ष्म जीवों द्वारा उत्पन्न रोगों के नाम लिखो-
(क) बैक्टीरिया
(ख) वाइरस
(ग) प्रोटोजोआ वर्ग।
उत्तर:

सूक्ष्मजीवउत्पन्न रोग का नाम
1. बैक्टीरिया (जीवाणु)हैजा, अतिसार, टाइफॉइड, क्षयरोग (टी.बी), टेटनस आदि।
2. वाइरसइन्फ्लूएन्जा, रेबीज, एड्स, पोलियो, चिकन पॉक्स, खसरा आदि।
3. प्रोटोजोआ वर्ग के जीवमलेरिया अमीबीय पेचिश, पायरिया आदि।

प्रश्न 15.
वाहक (Vector) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वाहक (Vector) – बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्म जीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले जीवों को वाहक कहते हैं। घरेलू मक्खी हैजा, पेचिश, टाइफॉयड आदि के रोगाणुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है। मादा एनोफिलीज मच्छर मलेरिया रोग की वाहक है। एडीज मच्छर डेंगू ज्वर का वाहक है।

प्रश्न 16.
प्रतिजैविक (एन्टीबायोटिक) किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रतिजैविक (एन्टीबायोटिक)- ये वे पदार्थ हैं। जो सूक्ष्म जीवों से उत्पन्न किए जाते हैं। ये सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकते हैं। पेनिसिलीन ऐसा पहला प्रतिजैविक पदार्थ है जो मनुष्य द्वारा उपयोग के लिए तैयार किया गया है। पेनिसिलीन की खोज सर्वप्रथम अलैक्जेन्डर फ्लेमिंग ने की थी।

प्रश्न 17.
एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को प्रभावित करते हैं, परन्तु मनुष्य को नहीं, क्यों?
उत्तर:
इसका उत्तर खण्ड 13.3.1 के अन्तर्गत पैराग्राफ 5 देखिए।

प्रश्न 18.
वाइरस पर एंटीबायोटिक का प्रभाव क्यों नहीं दिखाई देता है?
उत्तर:
वाइरस की जैव प्रक्रियाएँ बैक्टीरिया से भिन्न होती हैं। ये मेजबानों की कोशिकाओं में रहते हैं। इनमें ऐसा मार्ग नहीं होता है जैसा कि बैक्टीरिया में होता है। यही कारण है कि कोई भी एंटीबायोटिक वाइरस संक्रमण पर प्रभावकारी नहीं होता है यदि हम खाँसी-जुकाम से ग्रस्त हैं तो एंटीबायोटिक लेने से रोग की तीव्रता अथवा उसकी समयावधि कम नहीं होती है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 19.
एंटीवाइरल औषधि बनाना एंटीबैक्टीरियल औषधि बनाने से कठिन क्यों है?
उत्तर:
इसका उत्तर खण्ड 13.3.4 के अन्तर्गत पैराग्राफ 4 में देखिये।

प्रश्न 20.
शोध के कारण शरीर पर कुछ स्थानीय सामान्य प्रभाव क्यों पड़ते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संक्रामक रोगों के ऊतक विशिष्ट प्रभाव के अतिरिक्त उनके अन्य सामान्य प्रभाव भी होते हैं। (शेष भाग के लिए खण्ड 13.3.3 के अन्तर्गत पैराग्राफ 5 देखिये।)

प्रश्न 21.
HIV AIDS रोगी की मृत्यु का कारण क्यों बन जाता है?
उत्तर:
इसका उत्तर खण्ड 13.3.3 के अन्तर्गत पैराग्राफ 6 देखिये।

प्रश्न 22.
किसी रोग की तीव्रता किस बात पर निर्भर करती है?
उत्तर:
इसका उत्तर खण्ड 13.3.3 के अन्तर्गत अन्तिम पैराग्राफ देखिये।

प्रश्न 23.
यदि एक बार किसी को चेचक हो जाये तो दुबारा उसे कभी चेचक नहीं हो सकती, क्यों? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यदि कोई व्यक्ति एक बार चेचक से ग्रसित हो जाता है तो उसे दुबारा यह रोग कभी नहीं हो सकता क्योंकि जब चेचक के रोगाणु प्रतिक्षा तन्त्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तन्त्र रोगाणुओं के प्रति क्रिया करता है और फिर इसका विशेष रूप से स्मरण कर लेता है। इस प्रकार जब वहीं जीवाणु या उससे मिलता-जुलता रोगाणु सम्पर्क में आता है तो पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र समाप्त हो जाता है। यह प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार है।

प्रश्न 24.
टीकाकरण से आप क्या समझते हैं?
अथवा
टीकाकरण क्या है?
उत्तर:
टीकाकरण – आजकल रोगों से बचने अथवा उनके उपचार के लिए टीकाकरण की बहुत अधिक सहायता ली जाती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पदार्थ का संरोपण एक स्वस्थ व्यक्ति में किया जाता है जिससे उस व्यक्ति में विशेष बीमारी के प्रति प्रतिरक्षी (एण्टीबॉडी) पैदा हो जायें।

प्रतिरक्षा पॉस्क बीमारी को पहचानने, समाप्त करने तथा उसे पूरी तरह उखाड़ फेंकने में सहायता करते हैं। टीकाकरण की प्रक्रिया में किसी सूक्ष्म जीव की जीवित या मृत कुछ मात्रा व्यक्ति के शरीर में पहुँचायी जाती है, जो बीमारी के विपरीत प्रतिरक्षा करते हुए हानिकारक बाह्य सूक्ष्म-जीवों को नष्ट कर देते हैं। टीके में रोग वाहक सूक्ष्म जीव कम सांद्रित अवस्था में रहते हैं।

प्रश्न 25.
विभिन्न प्रकार के टीकों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
विभिन्न प्रकार के टीकों से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के प्रति प्रतिरक्षण में सहायता मिलती है। चेचक, रेबीज, पोलियो, डिव्थीरिया, हिपेटाइटिस, कुकर खाँसी, क्षयरोग, टाइफॉयड आदि बीमारियों से बचने के लिए टीके लगाये जाते हैं। हमारी सरकार ने टीकाकरण का बृहद् कार्यक्रम चला रखा है ताकि बीमारियाँ सदैव के लिए देश से दूर की जा सकें। प्रमुख टीके निम्न हैं-

  • चेचक का टीका, चेचक से बचने के लिए लगाया जाता है।
  • खसरे का टीका, खसरे से बचने के लिए लगाया जाता है।
  • टाइफॉयड का टीका, टाइफायड (मियादी ज्वर) से बचने के लिए लगाया जाता है।
  • पोलियो का टीका, बूँदों के रूप में बच्चों को अपंगता से बचने के लिए पिलाया जाता है।
  • बी.सी.जी. का टीका, क्षयरोग से बचने के लिए लगाया जाता है।
  • डी.पी.टी. का टीका डिप्थीरिया, काली खाँसी तथा टिटेनस को नियन्त्रित करने के लिए लगाया जाता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. प्रोटियम में नहीं पाया जाता है-
(a) प्रोटॉन
(b) न्यूट्रॉन।
(c) इलेक्ट्रॉन
(d) इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन।
उत्तर:
(b) न्यूट्रॉन

2. किसी परमाणु में प्रोटॉन की संख्या होती है-
(a) न्यूट्रॉन के बराबर
(b) इलेक्ट्रॉन के बराबर
(c) परमाणु द्रव्यमान के बराबर
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) इलेक्ट्रॉन के बराबर।

3. परमाणु के नाभिक में पाया जाने वाला अनावेशित कण है-
(a) इलेक्ट्रॉन
(b) प्रोटॉन
(c) न्यूट्रॉन
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) न्यूट्रॉन।

4. रदरफोर्ड ने अपना प्रयोग किया-
(a) सोने की पन्नी पर
(b) ताँबे की पत्नी पर
(c) चाँदी की पत्नी पर
(d) लोहे की पन्नी पर।
उत्तर:
(a) सोने की पन्नी पर।

5. परमाणु के नाभिक में होते हैं-
(a) इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन
(b) इलेक्ट्रॉन व न्यूट्रॉन
(c) केवल इलेक्ट्रॉन
(d) प्रोटॉन व न्यूट्रॉन।
उत्तर:
(d) प्रोटॉन व न्यूट्रॉन।

6. प्रथम कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या होती है-
(a) 2
(b) 8
(c ) 18
(d) 32।
उत्तर:
(a) 2

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

7. बोरोन (B) के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या होगी-
(a) 5
(b) 4
(c) 3
(d) 61
उत्तर:
(d) 6

8. सोडियम की द्रव्यमान संख्या है-
(a) 11
(b) 10
(c) 24
(d) 231
उत्तर:
(d) 23

9. क्लोरीन की संयोजकता है-
(a) 2
(b) 1
(c) 0
(d) 41
उत्तर:
(b) 1

10. 1H² या D को कहते हैं-
(a) ट्राइटियम
(b) प्रोटियम
(c) ड्यूटीरियम
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ड्यूटीरियम।

11. बोर-बरी के नियमानुसार इलेक्ट्रॉनों की किसी कोश में अधिकतम संख्या होती है-
(a) 2n²
(b) 2n
(c) 4n²
(d) 2n³।
उत्तर:
(a) 2n²

12. यदि किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हों तो उसकी संयोजकता होगी-
(a) 7
(b) 2
(c) 3
(d) 1।
उत्तर:
(d) 1

13. प्रकृति में क्लोरीन – 35 व क्लोरीन 37 का अनुपात होता है-
(a) 3 : 1
(b) 1 : 3
(c) 1 : 2
(d) 2 : 11
उत्तर:
(a) 3 : 1

14. क्लोरीन परमाणु का औसत द्रव्यमान है-
(a) 35
(b) 36
(c) 35.5
(d) 171
उत्तर:
(c) 35.5

15. इलेक्ट्रॉन की खोज की-
(a) गोल्डस्टीन ने
(b) टॉमसन ने
(c) रदरफोर्ड ने
(d) बोर ने।
उत्तर:
(b) टॉमसन ने।

16. इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग होता है-
(a) 2000 Tell
(b) 1000 गुना
(c) \(\frac { 1 }{ 1837 }\) गुना
(d) \(\frac { 1 }{ 1000 }\) गुना
उत्तर:
(c) \(\frac { 1 }{ 1837 }\) गुना

रिक्त स्थान भरो-

  1. रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग द्वारा ……………… खोज हुई।
  2. र्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास …………………. है।
  3. निऑन और क्लोरीन की परमाणु संख्या क्रमश: 10 और 17 है। इनकी संयोजकताएँ …………………. और …………………. होंगी।
  4. समभारिकों में समान …………………. लेकिन भिन्न …………………. होते हैं।

उत्तर:

  1. नाभिक
  2. 2, 4
  3. 4, 0, 1
  4. द्रव्यमान संख्या, परमाणु संख्या।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’ (तत्त्व)कॉलम ‘ख’ (संयोजकता)
1. सोडियम Na(क) 2
2. कैल्सियम Ca(ख) 3
3. निऑन Ne(ग) 1
4. नाइट्रोजन N(घ) 0

उत्तर:
1. (ग) 1
2. (क) 2
3. (घ) 0
4. (ख) 3

सत्य / असत्य

  1. किसी परमाणु के आंतरिक कक्ष में इलेक्ट्रॉनों की संख्या से संयोजकता ज्ञात होती है।
  2. जे. चैडविक ने न्यूट्रॉन की खोज की थी।
  3. रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग में सोने की पन्नी का प्रयोग किया था।
  4. \(\begin{array}{r}
    35 \\
    { }_{17} \mathrm{Cl}
    \end{array}\) और \(\begin{array}{r}
    37 \\
    { }_{17} \mathrm{Cl}
    \end{array}\) समभारिक हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बन – 13 के 100 परमाणुओं की परमाणु द्रव्यमान इकाई का भार क्या होगा?
उत्तर:
13amu x 100 = 1300amu.

प्रश्न 2.
क्लोरीन परमाणु (Z = 17) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
क्लोरीन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – 2, 8, 7.

प्रश्न 3.
सोडियम आयन पर ……………… आवेश होता है जबकि सोडियम परमाणु पर ……………… आवेश होता है।
उत्तर:
धन, शून्य।

प्रश्न 4.
क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है। इसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या है?
उत्तर:
17.

प्रश्न 5.
कार्बन (Z = 6), फॉस्फोरस (Z = 15) तथा (Z = 16) परमाणुओं में कितने संयोजी इलेक्ट्रॉन गन्धक (Z = 16) उपस्थित हैं?
उत्तर:
कार्बन में 4, फॉस्फोरस में 5 तथा गन्धक में 6 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 6.
एक उपयुक्त उदाहरण देकर समस्थानिक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
एक ही तत्व के परमाणु जिनकी ‘परमाणु समान तथा द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं; जैसे- हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक प्रोटियम, ड्यूटीरियम तथा ट्राइटियम होते हैं।

प्रश्न 7.
…………………… की संख्या भिन्न होने के कारण समस्थानिक पाए जाते हैं।
उत्तर:
न्यूट्रॉनों।

प्रश्न 8,.
\({ }_{17} \mathbf{A}^{35},{ }_{20} \mathbf{B}^{40},{ }_{17} \mathrm{Cl}^{37},{ }_{18} D^{40}\) में से समस्थानिकों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
\({ }_{17} \mathrm{~A}^{35}\) तथा \({ }_{17} \mathrm{~A}^{37}\).

प्रश्न 9.
समस्थानिकों में की संख्या समान होती है।
उत्तर:
प्रोटॉनों।

प्रश्न 10.
एक तत्व के समस्थानिकों की परमाणु संख्या होती है।
उत्तर:
समान।

प्रश्न 11.
दो रेडियोधर्मी समस्थानिकों के नाम बताइए।
उत्तर:
यूरेनियम – 235 तथा यूरेनियम-238.

प्रश्न 12.
किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के व्यवस्थापन को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास।

प्रश्न 13.
तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी तत्व के परमाणु में उसके विभिन्न ऊर्जा स्तरों या कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों का वितरण ‘इलेक्ट्रॉनिक विन्यास’ कहलाता है।

प्रश्न 14.
कार्बन – 14 क्या है?
उत्तर:
कार्बन का समस्थानिक।

प्रश्न 15.
इलेक्ट्रॉन पर ………………. कूलॉम ………………….. आवेश होता है।
उत्तर:
उत्तर:
1.6 x 10-19, ऋणात्मक।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 16.
प्रोटॉन पर आवेश ……………….. होता है।
उत्तर:
धनात्मक।

प्रश्न 17.
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान ………….. होता है।
उत्तर:
9.1 × 10-28 ग्राम।

प्रश्न 18.
………………… तथा ………………… परमाणु के मूल कण हैं।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन।

प्रश्न 19.
कैनाल किरणें ………………… आवेशित कणों से मिलकर बनती हैं।
उत्तर:
धन।

प्रश्न 20.
हाइड्रोजन के कितने समस्थानिक हैं?
उत्तर:
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं-
\({ }_1^1 \mathrm{H},{ }_1^2 \mathrm{H}\) तथा \({ }_1^3 \mathrm{H}\).

प्रश्न 21.
समभारिक नाभिकों का एक उदाहरण दो।
उत्तर:
\({ }_{20}^{40} \mathrm{Ca}\) तथा \({ }_{18}^{40} \mathrm{Ar}\) दोनों समभारिक हैं।

प्रश्न 22.
परमाणु के मौलिक कण बताइए।
उत्तर:
परमाणु के मौलिक कण प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 23.
विसर्जन नलिका में कैथोड से उत्सर्जित कण धन प्लेट की ओर झुकते हैं। कण की प्रकृति बताइए।
उत्तर:
कण की प्रकृति विद्युत ऋणात्मक है।

प्रश्न 24.
यूरेनियम के दो समस्थानिक लिखिए।
उत्तर:
\({ }_{92}^{235} \mathrm{U}\) तथा \({ }_{92}^{238} \mathrm{U}\)

प्रश्न 25.
किसी तत्व के समस्थानिकों में किसमें समानता है?
उत्तर:
किसी तत्व के समस्थानिकों में प्रोटॉनों तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित परमाणु नाभिकों में से कौन समभारी तथा कौन समस्थानिक हैं?
(i) (17p + 18n ) तथा ( 17p+20n)
(ii) (18p + 22n) तथा (20p+20n)
उत्तर:
(i) नाभिक समस्थानिक है तथा
(ii) नाभिक समभारिक हैं।

प्रश्न 27.
परमाणु के यदि K और L कोश पूर्णतः भरे हुए हैं, उनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या क्या है?
उत्तर:
10

प्रश्न 28.
उस तत्व के परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का वितरण लिखिए जिसकी परमाणु संख्या 13 है।
उत्तर:

KLM
283

प्रश्न 29.
प्रतीक \({ }_{15}^{31} P\) से बताइये –
(i) फॉस्फोरस की द्रव्यमान संख्या
(ii) फॉस्फोरस की परमाणु संख्या।
उत्तर:
(i) 31
(ii) 15.

प्रश्न 30.
उस तत्व की संयोजकता क्या होगी जिसकी परमाणु संख्या 15 है?
उत्तर:
3 या 5

प्रश्न 31.
क्लोरीन की परमाणु संख्या 17 है। Cl आयन में इलेक्ट्रॉन की संख्या क्या होगी?
उत्तर:
Cl में इलेक्ट्रॉन की संख्या 17 + 1 = 18.

प्रश्न 32.
ऐलुमिनियम की परमाणु संख्या 13 है। Al+3 में कितने इलेक्ट्रॉन होंगे?
उत्तर:
Al+3 में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 13 – 3 = 10

प्रश्न 33.
मैग्नीशियम की परमाणु संख्या 12 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 28 2

प्रश्न 34.
परमाणु क्रमांक 13 वाले तत्व की संयोजकता बताइए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 3
इसलिए संयोजकता = 3

प्रश्न 35.
एक तत्व का परमाणु द्रव्यमान A तथा परमाणु संख्या B है। इस तत्व के नाभिक में न्यूट्रानों की संख्या बताइए।
उत्तर:
न्यूट्रॉनों की संख्या = परमाणु द्रव्यमान परमाणु संख्या
= A – B

प्रश्न 36.
एक तत्व के M-कक्ष में दो इलेक्ट्रॉन हैं। इस तत्व का परमाणु क्रमांक बताइये।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक = 2 + 8 + 2 = 12
K     L    M

प्रश्न 37.
किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास उसकी संयोजकता से किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
किसी तत्व की संयोजकता उस तत्व के संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, या (8 – संयोजकता इलेक्ट्रॉन) की संख्या के बराबर होती है।

प्रश्न 38.
एक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान किसी तत्व का परमाणु क्रमांक क्यों नहीं बदलता?
उत्तर:
किसी तत्व के परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या, उसका परमाणु क्रमांक कहलाती है। चूँकि केवल इलेक्ट्रॉन ही रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेता है तथा प्रोटॉन इसमें सम्मिलित नहीं होते; अतः इनकी संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात् तत्व का परमाणु क्रमांक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अपरिवर्तित रहता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 39.
हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं- प्रोटियम (1H1), ड्यूटीरियम (1H2) तथा ट्राइटियम (1H3)

प्रश्न 40.
समस्थानिकों के दो अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर:

  1. कैंसर की चिकित्सा में कोबाल्ट-60 का प्रयोग किया जाता है।
  2. घेंघा रोग के इलाज में आयोडीन 131 का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 41.
संयोजकता कोश क्या है?
उत्तर:
किसी परमाणु का बाह्यतम इलेक्ट्रॉन कोश ‘संयोजकता – कोश’ कहलाता है।

प्रश्न 42.
संयोजी इलेक्ट्रॉन क्या हैं?
उत्तर:
किसी परमाणु के बाह्यतम इलेक्ट्रॉन कोश में उपस्थित इलेक्ट्रान ‘संयोजी इलेक्ट्रॉन’ कहलाते हैं।

प्रश्न 43.
एक परमाणु में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
संयोजी इलेक्ट्रॉन ही परमाणु की रासायनिक प्रकृति का निर्धारण करते हैं। ये इलेक्ट्रॉन परमाण्वीय स्पेक्ट्रा प्राप्त होने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

प्रश्न 44.
उन तत्वों का सामान्य नाम बताइए जिनके परमाणुओं के संयोजकता कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
उत्तर:
अक्रिय गैसें (हीलियम को छोड़कर जिसके संयोजी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं)।

प्रश्न 45.
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से किसी परमाणु के नाभिक के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है?
उत्तर:
एक परमाणु में अल्फा धनावेशित, अल्प-आकार का एक नाभिक होता है जिसमें परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान निहित रहता है तथा इसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन कुछ स्थिर कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं।

प्रश्न 46.
परमाणु उदासीन क्यों होता है यद्यपि इसके भीतर आवेशित कण विद्यमान हैं?
उत्तर:
परमाणु में प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन, विपरीत आवेशित कण उपस्थित होते हैं परन्तु संख्या में समान होने के कारण ये परस्पर आवेश प्रभाव को समाप्त कर देते हैं, इसी कारण परमाणु उदासीन रहता है।

प्रश्न 47.
एक तत्व के परमाणु को 4X9 के रूप में लिखा जाता है-
(i) अंक 9 क्या प्रदर्शित करता है?
(ii) अंक 4 क्या प्रदर्शित करता है?
(iii) परमाणु में इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या क्या है?
उत्तर:
(i) अंक 9 द्रव्यमान संख्या को प्रदर्शित करता है।
(ii) अंक 4 परमाणु संख्या को प्रदर्शित करता है।
(iii) इलेक्ट्रॉन 4, प्रोटॉन 4, न्यूट्रॉन 5

प्रश्न 48.
किसी परमाणु के प्रथम ऊर्जा स्तर में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
उत्तर:
प्रथम ऊर्जा स्तर में केवल 2 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं।

प्रश्न 49.
परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या, उसका परमाणु क्रमांक या परमाणु संख्या कहलाती है। परमाणु में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या का योग, उसकी द्रव्यमान संख्या कहलाती है।

लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
न्यूट्रॉन की खोज ने परमाणु संरचना की कौन-सी समस्या का समाधान किया?
उत्तर:
न्यूट्रॉन की खोज से निष्कर्ष निकला कि परमाणु का नाभिक न्यूट्रॉनों तथा प्रोटॉनों से मिलकर बनता है। इससे नाभिक के आवेश तथा द्रव्यमान को स्पष्ट समझने में सहायता मिली।
न्यूट्रॉन की खोज से आवर्त सारणी में समस्थानिकों की समस्या का भी समाधान हो गया।

प्रश्न 2.
न्यूट्रॉन के अस्तित्व को किसने प्रस्तावित किया? इस पूर्वधारणा का क्या आधार छ?
उत्तर:
रदरफोर्ड ने सबसे पहले न्यूट्रॉन के अस्तित्व का विचार प्रकट किया था। सन् 1920 ई. में रदरफोर्ड ने प्रस्तावित किया कि नाभिक के अन्दर इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन उच्च स्थिर विद्युत आकर्षण बल के कारण इतने निकट होते हैं कि दोनों को मिलाकर एक कण के रूप में ही माना जा सकता है। इस कण पर कुल आवेश शून्य होगा। उसने इस कण को यूट्रॉन नाम दिया। इसका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के समान अपेक्षित था। इसी संकल्पना ने आधुनिक विज्ञान की अनेक महत्त्वपूर्ण समस्याओं को हल कर दिया।

प्रश्न 3.
न्यूट्रॉन के महत्त्वपूर्ण गुणधर्म क्या हैं?
उत्तर:
न्यूट्रॉन के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-

  1. न्यूट्रॉन उदासीन अथवा विद्युत आवेश रहित कण है। इसे on संकेत से प्रदर्शित करते हैं।
  2. न्यूट्रॉन की त्रिज्या 10-13 सेमी होती है।
  3. न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.6748 10-27 किग्रा या परमाणु द्रव्यमान इकाई में 1.00893 amu होता है जो प्रोटॉन से कुछ अधिक होता है।
  4. नाभिकीय अभिक्रियाओं से ज्ञात हुआ है कि सभी तत्वों के परमाणुओं में (हाइड्रोजन को छोड़कर) न्यूट्रॉन होते हैं।
  5. न्यूट्रॉन की बेधन क्षमता भी अत्यधिक है, परन्तु कॉस्मिक किरणों से कम है।
  6. स्वतन्त्र न्यूट्रॉन का क्षय प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में होता है तथा ऊर्जा उत्सर्जित होती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित परमाणुओं की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में क्या-क्या समानताएँ हैं?
लीथियम, सोडियम, पोटैशियम;
हीलियम निऑन आर्गन;
बेरिलियम मैग्नीशियम और कैल्सियम।
उत्तर:
उपर्युक्त परमाणुओं की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में समानताएँ इनमें इलेक्ट्रॉनों के वितरण के आधार पर ज्ञात की जा सकती हैं।
लीथियम, सोडियम, पोटैशियम की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में समानताएँ

तत्वपरमाणु संख्याइलेक्ट्रॉनों का वितरण
K L M N
लीथियम (Li)32, 1
सोडियम (Na)112, 8, 1
पोटैशियम (K)192, 8, 8, 1

इन सभी तत्वों के परमाणु के बाह्यतम कक्ष में 1 इलेक्ट्रॉन है, इसीलिए इनकी संयोजकता भी 1 है।

हीलियम, निऑन, आर्गन की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में समानताएँ

तत्वपरमाणु संख्याइलेक्ट्रॉनों का वितरण
K L M N
हीलियम (He)22
निऑन (Ne)102, 8
आर्गन (Ar)182, 8, 8

इन सभी तत्वों के परमाणु के बाह्यतम कक्ष पूर्ण हैं, इसीलिए इनकी संयोजकता शून्य है अर्थात् ये तत्व निष्क्रिय हैं।
बेरीलियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं में समानताएँ

तत्वपरमाणु संख्याइलेक्ट्रॉनों का वितरण
K L M N
बेरीलियम (Be)42, 2
मैग्नीशियम (Mg)122, 8, 2
कैल्सियम (Ca)202, 8, 8, 2

इन सभी तत्वों के बाह्यतम कक्ष में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, इसीलिए
इनकी संयोजकता 2 है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित परमाणुओं के विभिन्न कोशों में इलेक्ट्रॉनों के वितरण का वर्णन कीजिए-
लीथियम, नाइट्रोजन, निऑन, मैग्नीशियम और सिलिकॉन।

तत्वपरमाणु संख्याइलेक्ट्रॉनों का वितरण
K L M N
लीथियम (Li)32, 1 – –
नाइट्रोजन (N)72, 5, – –
निऑन (Ne)102, 8, – –
मैग्नीशियम (Mg)122, 8, 2 –
सिलिकॉन (Si)142, 8, 4 –

प्रश्न 6.
समस्थानिकों की परिभाषा दीजिए। समस्थानिकों के मुख्य अभिलक्षण क्या-क्या हैं?
उत्तर:
तत्व के ऐसे परमाणुओं को, जिनके नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या तो समान हो, परन्तु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न हो, समस्थानिक (Isotopes) कहते हैं। अतः किसी तत्व के वे परमाणु, जिनके परमाणु द्रव्यमान भिन्न-भिन्न होते हैं, समस्थानिक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए- हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं- प्रोटियम (1H1), ड्यूटी – रियम (1H2 या 1D2) तथा या ट्राइटियम (1H3) या 1T3)। क्लोरीन के दो समस्थानिक हैं- 17Cl35, 17Cl37.

समस्थानिकों के मुख्य अभिलक्षण – समस्थानिकों के मुख्य अभिलक्षण निम्नलिखित हैं-

  • समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक समान तथा द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न होती हैं।
  • समस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों तथा प्रोटॉनों की संख्याएँ समान तथा न्यूट्रॉनों की संख्याएँ भिन्न होती हैं।
  • समस्थानिकों के भौतिक गुण जैसे- घनत्व, क्वथनांक आदि भिन्न होते हैं।
  • चूँकि एक तत्व के सभी समस्थानिकों की द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती हैं, इसलिए इनके भौतिक गुण भी भिन्न-भिन्न होते हैं।
  • चूँकि तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान होता है, इसलिए एक तत्व के सभी समस्थानिकों को आवर्त सारणी में एक ही स्थान पर रखा जाता है।
  • किसी एक तत्व के समस्थानिकों में से कुछ रेडियोऐक्टिव हो सकते हैं और कुछ नहीं। इसका मुख्य कारण नाभिकीय संरचना का भिन्न-भिन्न होना है। जैसे- हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों 1H1, 1H2 तथा 1H3 में से केवल ट्राइटियम (1H3) ही रेडियोऐक्टिव है। प्रोटियम (1H1) तथा ड्यूटीरियम (1H2) रेडियोऐक्टिव नहीं हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 7.
समस्थानिकों के मुख्य अनुप्रयोग क्या हैं?
उत्तर:
समस्थानिकों के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं-

  • किसी तत्व में समस्थानिकों की आपेक्षिक सान्द्रता (Relative concentration) स्थिर होती है। पुरातत्ववेत्ता किसी पदार्थ के समस्थानिकों के आपेक्षिक बाहुल्य (Relative abundance) के निर्धारण द्वारा प्राचीन समय के पौधों अथवा उत्खनन (Excavation) से प्राप्त जानवरों और मानवों के कंकालों के काल निर्धारण करते हैं।
  • यूरेनियम के समस्थानिकों का प्रयोग परमाणु विखण्डन में किया जाता है जिससे अपार मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
  • समस्थानिकों का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
  • समस्थानिकों से विभिन्न प्रकार के विस्फोटक तैयार किए जाते हैं।
  • समस्थानिकों से चट्टानों की आयु का पता लगाया जा सकता है।
  • कैंसर जैसी घातक बीमारी के चिकित्सीय इलाज में मुख्य रूप से रेडियोऐक्टिव समस्थानिकों का प्रयोग किया जाता है। इसमें मुख्यत: कोबाल्ट समस्थानिक (Co-60) का उपयोग किया जाता है। यह समस्थानिक गामा किरणें उत्सर्जित करता है, जो कैंसर से पीड़ित रोगी की दुर्दम कोशिकाओं को नष्ट कर रोगी को स्वस्थ बनाने में सहायता करती हैं।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक तत्व का परमाणु द्रव्यमान 24 है तथा इसके नाभिक में 12 न्यूट्रॉन हैं। तत्व के परमाणु क्रमांक की गणना कीजिए।
हल:
तत्व का परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या
= परमाणु द्रव्यमान न्यूट्रॉनों की संख्या
= 24 – 12
= 12

प्रश्न 2.
सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। सोडियम-23 के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1
∴ सोडियम का परमाणु क्रमांक = 2 + 8 + 1 = 11
∴ सोडियम का परमाणु द्रव्यमान = 23
∴ नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या = परमाणु क्रमांक = 11
∴ नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या = परमाणु भार – प्रोटॉनों की संख्या
= 23 – 11 = 12

प्रश्न 3.
किसी तत्व का परमाणु क्रमांक 18 है। इस तत्व की बाह्य कक्षा में कितने प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन होंगे?
हल:
तत्व का परमाणु क्रमांक 18
∴ प्रोटॉनों की संख्या 18
∴ इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या = 18
बाह्यतम कक्ष में प्रोटॉन शून्य होंगे; क्योंकि समस्त प्रोटॉन नाभिक में रहते हैं।
∴ तत्व का इलेक्ट्रानिक विन्यास 2, 8, 8
अतः तत्व के परमाणु के बाह्य कक्ष में इलेक्ट्रॉनों की संख्या-18

प्रश्न 4.
क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 तथा द्रव्यमान संख्या 35 है। क्लोरीन के एक परमाणु में प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
प्रोटॉनों की संख्या = परमाणु क्रमांक 17
न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या
= 35 – 17 = 18

प्रश्न 5.
सोडियम के परमाणु के अन्दर पाए जाने वाले न्यूट्रॉनों तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए।
हल:
सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 तथा द्रव्यमान संख्या 23 है।
अत: सोडियम में इलेक्ट्रॉनों की संख्या परमाणु क्रमांक = 11
सोयम में न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या
= 23 – 11 = 12

प्रश्न 6.
समान परमाणु द्रव्यमान के दो तत्वों A तथा B के परमाणु क्रमांक क्रमशः 19 तथा 20 हैं। यदि तत्व A के नाभिक में 21 न्यूट्रॉन हैं तो तत्व B के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या क्या होगी?
हल:
तत्व A का परमाणु भार = A के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या + A के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या
= 19 + 21 = 40
चूँकि तत्व A और B का परमाणु द्रव्यमान बराबर है; अतः B का परमाणु द्रव्यमान भी 40 होगा।
तत्व B का परमाणु द्रव्यमान = तत्व B के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या + तत्व B के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या 40 = 20 + न्यूट्रॉनों की संख्या
न्यूट्रॉनों की संख्या = 40 – 20 = 20
अतः तत्व B के नाभिक में 20 न्यूट्रॉन होंगे।

प्रश्न 7.
एक परमाणु द्रव्यमान के नाभिक में 10 प्रोटॉन तथा 10 न्यूटॉन हैं। इस परमाणु में कुल कितने इलेक्ट्रॉन हैं?
हल:
परमाणु में कुल इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉनों की संख्या = 10

प्रश्न 8.
एक तत्व का परमाणु क्रमांक 19 तथा द्रव्यमान संख्या 39 है। इसके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
तत्व का परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या
= 19, तत्व की द्रव्यमान संख्या
= 39
न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या – प्रोटॉनों की संख्या
= 39 – 19
= 20

प्रश्न 9.
एक तत्व का परमाणु द्रव्यमान 27 है। इस तत्व के नाभिक में 14 न्यूट्रॉन हैं। तत्व की संयोजकता क्या है?
हल:
तत्व का परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या
= परमाणु भार – न्यूट्रॉनों की संख्या
= 27 – 14 = 13
तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 4 परमाणु की संरचना 1
चूँकि किसी परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या द्वारा उस तत्व की संयोजकता निर्धारित होती है; अतः इस तत्व की संयोजकता 3 होगी।

प्रश्न 10.
एक तत्व X के परमाणु में जिसकी परमाणु -संख्या 17 है, कितने संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं? इस परमाणु के संयोजी कोश का नाम लिखिए
हल:
तत्व X की परमाणु संख्या – 17
X का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7
17X में संयोजी इलेक्ट्रॉन = 7
इस परमाणु के संयोजी कोश का नाम M है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

Jharkhand Board Class 9 Science हम बीमार क्यों होते हैं Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पिछले एक वर्ष में आप कितनी बार बीमार हुए? बीमारी क्या थीं?
(a) इन बीमारियों को हटाने के लिए आप अपनी दिनचर्या में क्या परिवर्तन करेंगे?
(b) इन बीमारियों से बचने के लिए आप अपने पास- पड़ोस में क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
उत्तर:
पिछले वर्ष में मैं दो बार बीमार हुआ / हुई। पहली बार मुझे वाइरल बुखार हुआ और दूसरी बार मलेरिया हुआ था।
(a) बीमारी से बचने के लिए प्रतिरक्षा तन्त्र का सुदृढ़ होना जरूरी है। इसलिए इन रोगों से बचने के लिए मैंने अपनी दिनचर्चा में इस प्रकार परिवर्तन किये-
पौष्टिक और सन्तुलित आहार लेना प्रारम्भ कर दिया। मलेरिया से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करने लगा। मच्छर घर में प्रवेश न कर सकें इसका प्रबन्ध किया।

(b) उपर्युक्त बीमारियों से बचने के लिए-

  • हम अपने पास-पड़ोस में समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना करना चाहेंगे। जहाँ पर सभी रोगों के लिए टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों।
  • संक्रामक रोगों से बचने के लिए (रोकथाम के लिए) टीकाकरण का कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
  • लोगों में स्वास्थ्य शिक्षा में प्रति जागरूकता पैदा करेंगे।
  • अपने चारों ओर के वातावरण की सफाई पर उचित ध्यान देंगे।
  • विद्यालय में भी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी तथा टीकाकरण की व्यवस्था करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं व सरकार को प्रेरित करेंगे।

प्रश्न 2.
डॉक्टर / नर्स / स्वास्थ्य कर्मचारी अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा रोगियों के सम्पर्क में अधिक रहते हैं। पता करो कि वे अपने आपको बीमार होने से कैसे बचाते हैं?
उत्तर:
डॉक्टर / नर्स / स्वास्थ्य कर्मचारी निरन्तर रोगियों के सम्पर्क में रहते हैं। रोगों से बचने के लिए वे सभी व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं। रोगी का परीक्षण व चिकित्सा करते समय वे अपने चेहरे पर मास्क का प्रयोग करते हैं जिससे कि रोगाणुओं के प्रत्यक्ष सम्पर्क से बचे रहें। रोगी का परीक्षण करने के बाद वे अपने हाथों को एन्टीसेप्टिक रसायन या साबुन से धोते हैं। वे पौष्टिक व सन्तुलित आहार लेते हैं। जिससे इनका प्रतिरक्षा तन्त्र सक्रिय बना रहता है। इस प्रकार वे बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 3.
अपने पास-पड़ोस में एक सर्वेक्षण कीजिए तथा पता लगाइए कि सामान्यतः कौन-सी तीन बीमारियाँ होती हैं? इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए अपने स्थानीय प्रशासन को तीन सुझाव दीजिए।
उत्तर:
हमारे पास-पड़ोस में सामान्यतः मलेरिया, हैजा, अतिसार, टाइफॉयड डायरिया (दस्त) आदि रोग होते हैं। ये रोग सामाजिक अस्वच्छता एवं प्रदूषित पर्यावरण के कारण फैलते हैं। इन रोगों को फैलने से रोकने के लिए अपने स्थानीय प्रशासन को निम्नलिखित सुझाव देंगे-

  • सड़क के किनारों पर बनी नालियों की नियमित सफाई करायें। उनमें गंदा पानी रुकने न पाये।
  • रुके हुए तालाब व पोखरों के जल पर मिट्टी का तेल डी.डी.टी. आदि कीटनाशक छिड़कवायें।
  • कटे हुए फलों, खुले हुए खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगवाएँ
  • रोगों से बचाव हेतु सामाजिक स्वच्छता एवं टीकाकरण कार्यक्रम की व्यवस्था कराएँ।

प्रश्न 4.
एक बच्चा अपनी बीमारी के विषय में नहीं बता पा रहा है? हम कैसे पता करेंगे कि-
(a) बच्चा बीमार है?
(b) उसे कौन सी बीमारी है?
उत्तर:
(a) बीमार होने की स्थिति में बच्चे का सामान्य व्यवहार ठीक नहीं रहेगा। वह पीड़ा के कारण रोयेगा, कुछ भी खाना पसन्द नहीं करेगा, उल्टी-दस्त करेगा, बेचैन रहेगा, सुस्त हो जायेगा, शरीर का ताप बढ़ जायेगा। खांसना, छींकना आदि लक्षण प्रदर्शित करेगा।

(b) उल्टी-दस्त, भोजन ग्रहण न करना, बुखार आना, सुस्त व बेचैन रहना और परेशानी के कारण रोना आदि लक्षण हैं तो बच्चा अतिसार (डायरिया) रोग से पीड़ित हो गया है। यह रोग प्रदूषित खाद्य पदार्थ खाने या प्रदूषित जल पीने के कारण हो गया है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति पुनः बीमार हो सकता है?
(a) जब वह मलेरिया से ठीक हो रहा है।
(b) वह मलेरिया से ठीक हो चुका है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है।
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है।
उत्तर:
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद भी शारीरिक कमजोरी बनी रहेगी और वह व्यक्ति चार दिन उपवास करता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम हो जायेगी। अतः चेचक के रोगाणुओं का संक्रमण ऐसे व्यक्ति पर आसानी से हो जायेगा। जो शारीरिक रूप से कमजोर हैं। और जिसका प्रतिरक्षा तन्त्र सक्रिय न हो। अतः रोग से बचने के लिए प्रतिरक्षा तन्त्र का स्वस्थ और सक्रिय बने रहना अति आवश्यक है। इसके लिए उस व्यक्ति को पौष्टिक आहार की आवश्यकता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से किन परिस्थितियों में आप बीमार हो सकते हैं? क्यों – (a) जब आपकी परीक्षा का समय है। (b) जब आप बस तथा रेलगाड़ी में दो दिन तक · यात्रा कर चुके हैं। (c) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है।
उत्तर:
(c) जब हमारा मित्र खसरा से पीड़ित है। क्योंकि खसरा एक संक्रामक रोग है अतः खसरा पीड़ित मित्र के सम्पर्क में रहने से खसरे का संक्रमण हो जाता है और सम्पर्क में रहने वाला व्यक्ति बीमार हो जाता है।

प्रश्न 7.
यदि आप किसी एक संक्रामक रोग के टीके की खोज कर सकते हो तो आप किसको चुनते हैं? (a) स्वयं की? (b) अपने क्षेत्र में फैले एक सामान्य रोग की क्यों?
उत्तर:
यदि हम किसी एक संक्रामक रोग के टीके की खोज कर सकते हैं, तो हम अपने क्षेत्र में फैले सामान्य रोग के टीके की खोज करेंगे जिससे ज़्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा हो सके।

Jharkhand Board Class 9 Science हम बीमार क्यों होते हैं InText Questions and Answers

क्रियाकलाप 13.1 (पा. पु. पृ. सं. 198)
लातूर, भुज, कश्मीर आदि में आए भूकंप या तटवर्ती भाग को प्रभावित करने वाले चक्रवात जैसी आपदाओं से वहाँ के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
इन आपदाओं के वास्तव में घटने के समय हमारे ऊपर क्या प्रभाव पड़ेंगे?
उत्तर:
इन आपदाओं की वजह से अनेक बुरे प्रभाव हम पर पड़ेंगे। इसके कारण स्वास्थ्य भी प्रभावित होगा। स्वच्छ तथा साफ जल तथा भोजन के अभाव से बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

प्रश्न 2.
आपदा घटित होने के पश्चात् कितने समय तक विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ पैदा होती रहेंगी?
उत्तर:
जब तक स्वच्छ वातावरण नहीं मिलेगा, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ पैदा होती रहेंगी।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

प्रश्न 3.
पहली स्थिति में (आपदा के समय) स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ते हैं? तथा दूसरी स्थिति में (आपदा के पश्चात् ) स्वास्थ्य संबंधी कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
पहली स्थिति में (आपदा के समय) जान माल की हानि होगी तथा भोजन न मिलने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। दूसरी स्थिति में (आपदा के पश्चात् ) पौष्टिक भोजन और स्वच्छ वातावरण न मिलने के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

मानव समुदाय में स्वास्थ्य एवं रोग एक जटिल समस्या है, जिसके लिए एक दूसरे से सम्बन्धित अनेक कारक उत्तरदायी हैं। हम यह भी अनुभव करते हैं कि स्वास्थ्य और रोग का अर्थ स्वयं में बहुत जटिल है।

हम जानते हैं कि कोशिकाएँ सजीवों की मौलिक इकाई हैं। कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थों जैसे- प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा या लिपिड आदि से बनी होती हैं। इनमें काफी सक्रियता पाई जाती है। इनके अन्दर कुछ न कुछ क्रियाएँ सदैव होती रहती हैं।

कोशिकाएँ एक स्थान से दूसरे स्थान को गतिशील रहती हैं। जिन कोशिकाओं में गति नहीं होती उनमें भी कुछ न कुछ मरम्मत का कार्य चलता रहता है। नई-नई कोशिकाएँ बनती रहती हैं। हमारे अंगों अथवा ऊतकों में बहुत सी विशिष्ट क्रियाएँ चलती रहती हैं, जैसे- हृदय धड़कता है, फेफड़े सांस लेते हैं, वृक्क में निस्यन्दन द्वारा मूत्र बनता है, मस्तिष्क सोचता है।

सभी क्रियाएँ परस्पर सम्बन्धित हैं। उदाहरणार्थं यदि वृक्क (गुर्दे) में निस्यन्दन न हो तो विषैले पदार्थ हमारे शरीर में एकत्र हो जायेंगे। इस स्थिति में मस्तिष्क उचित प्रकार से सोच नहीं सकेगा। इन सभी पारस्परिक क्रियाओं को करने के लिए ऊर्जा तथा कच्चे पदार्थों की आवश्यकता होती है।

ये कच्चे पदार्थ हमारे शरीर को बाहर से प्राप्त होते हैं अर्थात् कोशिकाओं तथा ऊतकों को कार्य करने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। ऐसा कोई भी कारक जो कोशिकाओं एवं ऊतकों को उचित प्रकार से कार्य करने से रोकता है, वह हमारे शरीर की समुचित क्रिया में कमी का कारण होगा।

क्रियाकलाप 13.2 (पा.पु. पू. सं. 199)
आपके स्थानीय प्राधिकरण (पंचायत / नगर निगम) ने स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए क्या उपाय किये हैं?
उत्तर:
हमारे कस्बे शहर को स्वच्छ जल की आपूति के लिए नगर के प्राधिकरण ने एक बहुत बड़ा जल आपूर्ति घर (Water Supply home) बनाया हुआ है। वहाँ पर कई विधियों द्वारा जल को साफ करके शुद्ध पेय जल बनाया जाता है। फिर उस शुद्ध जल को पानी की टंकी में एकत्र किया जाता है। इसके बाद शुद्ध जल पाइप लाइनों के द्वारा घर-घर में वितरित कर दिया जाता है।

क्या आपके मोहल्ले में सभी निवासियों को स्वच्छ जल प्राप्त हो रहा है?
उत्तर:
नहीं, हमारे मोहल्ले के सभी निवासियों को स्वच्छ जल प्राप्त नहीं हो पाता है, क्योंकि जनसंख्या के हिसाब से स्वच्छ पेय जल की मात्रा बहुत कम होती है। इसलिए कम मात्रा में शुद्ध जल मिल पाने के कारण हमारे मोहल्ले के सभी निवासियों को पीने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पाता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। जिसके अभाव में अनेक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न होती रहती हैं।

क्रियाकलाप 13.3 (पा.पु. पू. सं. 199)
आपका स्थानीय प्राधिकरण आपके मोहल्ले में उत्पन्न कचरे का निपटारा कैसे करता है?
उत्तर:
हमारे शहर का स्थानीय प्राधिकरण मोहल्ले में उत्पन्न कचरे का निपटारा घर-घर जाकर कूड़ा-कचरा इकट्ठा करने वाली ढकेलों द्वारा कराता है, जिसका संचालन एक सफाई कर्मचारी करता है सड़कों और गलियों की सफाई, सफाई कर्मचारियों के द्वारा की जाती है। इस कचरे को प्राधिकरण द्वारा बनाए गये डलाब घर में डाल दिया जाता है। जहाँ से प्राधिकरण की गाड़ियाँ उस कचरे को शहर से बाहर ले जाती हैं।

क्या प्राधिकरण द्वारा किये गये उपाय पर्याप्त हैं?
उत्तर:
प्राधिकरण द्वारा कचरे का निपटारा करने के लिए किये गये उपाय पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि सफाई कर्मचारियों का संख्या अपेक्षाकृत कम है। सफाई कर्मचारी ठीक से कार्य नहीं करते हैं। कचरे का निपटारा करने वाली गाड़ियों की संख्या भी कम है जो कि कम चक्कर करती हैं परिणामस्वरूप कचरा सड़ने लगता है, जिससे वायु प्रदूषित हो जाती है और बीमारियाँ फैलने लगती हैं।

यदि नहीं, तो इसके सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
प्राधिकरण को चाहिए कि आवश्यकतानुसार पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करे, कचरा ढोने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ाये कर्मचारियों को समय से वेतन का भुगतान करे और उनमें कर्त्तव्यनिष्ठा की भावना पैदा करे। कचरे का निपटारा प्रतिदिन पूरा कराया जाये। कचरे को एकत्र न होने दिया जाये।

आप अपने घर में दैनिक / साप्ताहिक उत्पन्न होने वाले कचरे को कम करने के लिए क्या रेंगे?
उत्तर:
हम अपने घर में उत्पन्न होने वाले कचरे की मात्रा को कम करने के लिए, जलने वाले कचरे को जला देंगे। पुनः प्रयोग में न आने वाली वस्तुओं को अलग करके कबाड़े वाले को दे देंगे खाद के रूप में काम आने वाले कचरे को खेतों और बाग-बगीचों में प्रयोग कर लेंगे।

स्वास्थ्य के लिए हमें भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन प्राप्त करके लिए हमें काम करना पड़ता है। इसके लिए हमें काम करने के अवसर खोजने पड़ते हैं। अच्छी आर्थिक परिस्थितियाँ तथा कार्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।

स्वस्थ्य रहने के लिए हमें प्रसन्न रहना आवश्यक है। यदि किसी से हमारा व्यवहार ठीक नहीं है और हमें एक-दूसरे से डर हो तो हम प्रसन्न तथा स्वस्थ नहीं रह सकते। अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सामाजिक समानता बहुत आवश्यक है। अनेक सामुदायिक समस्याएँ भी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

खण्ड 13.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. सं. 200)

प्रश्न 1.
अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियाँ हैं-

  • पौष्टिक भोजन की आवश्यकता।
  • प्रसन्न रहना और सामुदायिक स्वच्छता।

प्रश्न 2.
रोग मुक्ति की कोई दो आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
रोगमुक्ति की दो आवश्यक परिस्थितियाँ हैं-

  • सामुदायिक और व्यक्तिगत स्वच्छता।
  • चिकित्सा (पौष्टिक व सन्तुलित भोजन तथा औषधियाँ)।

प्रश्न 3.
क्या उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे हैं अथवा भिन्न, क्यों?
उत्तर:
उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे नहीं हैं, कुछ भिन्न हैं। फिर भी उनका एक-दूसरे से गहरा सम्बन्ध है। क्योंकि अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक एवं सन्तुलित भोजन के साथ-साथ स्वच्छ रहना भी आवश्यक है, जबकि रोग से मुक्ति पाने के लिए स्वच्छता के साथ-साथ अच्छी चिकित्सा ( औषधियों एवं चिकित्सक) की भी आवश्यकता है। केवल एक ही परिस्थिति में रोग से मुक्ति पाना सम्भव नहीं है।

क्रियाकलाप (13.4) (पा. पु. पू. सं. 201)
पिछले तीन महीनों में कितने लोग तीव्र रोगों से ग्रसित हुए?
उत्तर:
पिछले तीन महीनों में हमारे गाँव / कस्बे / शहर में 1000 लोग तीव्र रोगों से ग्रसित हुए।

पिछले तीन महीनों में कितने लोग दीर्घकालिक रोग से ग्रसित हुए?
उत्तर:
पिछले तीन महीनों में 2000 लोग दीर्घकालिक रोग से ग्रसित हुए।

आपके पड़ोस में कुल कितने लोग दीर्घकालिक रोग से पीड़ित हैं?
उत्तर:
हमारे पड़ोस में कुल 100 लोग दीर्घकालिक रोग से पीड़ित हैं।

क्या उपरोक्त प्रश्न 1 तथा 2 के उत्तर भिन्न हैं?
उत्तर:
हाँ, उपरोक्त प्रश्न 1 तथा 2 के उत्तर भिन्न हैं।

क्या उपरोक्त प्रश्न 2 तथा 3 के उत्तर भिन्न हैं?
उत्तर:
हाँ, उपरोक्त प्रश्न 2 तथा 3 के उत्तर भिन्न हैं।

इस भिन्नता के क्या कारण हो सकते हैं? इस भिन्नता का लोगों के सामान्य स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
भिन्नता के कारण-

  • हमारे आस-पास स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं की कमी है।
  • अच्छी स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाएँ प्रत्येक नागरिक को प्राप्त नहीं हैं।
  • जनसंख्या में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है।
  • अशिक्षा के कारण रोगियों की उचित देख-रेख नहीं हो पाती है। जिसके कारण तीव्र रोग ठीक नहीं हो पाते हैं और वे
  • दीर्घकालिक रोग में बदल जाते हैं इसलिए लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। (v) बीमार होने के कारण लोग काम करने के
  • लिए नहीं जा पाते हैं तथा घर के दूसरे लोग भी बीमार व्यक्ति की देखभाल में लगे रहते हैं, जिससे लोगों की निरन्तर आर्थिक हानि होती है।
  • पैसे की कमी से बीमार व्यक्ति की चिकित्सा नहीं हो पाती है।

उपरोक्त कारणों से लोगों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा सामुदायिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

खण्ड 13.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 203)

प्रश्न 1.
ऐसे तीन कारण लिखिए जिससे आप सोचते हैं कि आप बीमार हैं तथा चिकित्सक के पास जाना चाहते हैं। यदि इनमें से एक भी लक्षण हो तो क्या आप फिर भी चिकित्सक के पास जाना चाहेंगे? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
जब हमारे शरीर का कोई अंग या अंग तन्त्र ठीक से कार्य नहीं कर पाता है तो हमें शारीरिक कष्ट होता है तब हम सोचते हैं कि हम बीमार हैं तथा हमें चिकित्सक के पास जाना चाहिए। बीमार होने के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं- सिरदर्द, खाँसी, दस्त, किसी घाव में पस आना आदि। यदि हमारे शरीर में इनमें से कोई भी एक या अधिक लक्षण दिखाई दें तो हमें शीघ्र ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए और पूरी जाँच करानी चाहिए, जिससे हमें पता चल सके कि किस रोग के कारण हमारे शरीर के अंग ठीक तरह से कार्य नहीं कर रहे हैं। रोग और उसके होने के कारणों के पता चलने के बाद ही रोग की चिकित्सा सम्भव हो सकेगी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से किसके लम्बे समय तक रहने के कारण आप समझते हैं कि आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा तथा क्यों – यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं। यदि आपके शरीर पर जूँ (Lice) हैं। यदि आप मुँहासों से ग्रस्त हैं।
उत्तर:
पीलिया रोग के लम्बे समय तक बने रहने के कारण यकृत (Liver) में सूजन आ जाती है। जिससे पाचन क्रिया बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। इस स्थिति में हमें तेज बुखार, सिर दर्द तथा जोड़ों में दर्द का अनुभव होता है। हमें भूख नहीं लगती है, शरीर में खुजली, जलन व उत्तेजनशील चकते उत्पन्न हो जाते हैं। अधिक लम्बे समय तक इस रोग से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। इस रोग के कारण स्वास्थ्य पर बड़ा बुरा प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति कमजोर हो जाता है।

जूँ तथा मुँहासे तीव्र प्रभाव दिखाते हैं और वे आसानी से दूर हो सकते हैं तथा उनका शरीर पर प्रभाव देर तक नहीं रहता है।

क्रियाकलाप (13.5) (पा. पु. पृ. सं. 205)
आपकी कक्षा में कुछ दिनों पहले कितने विद्यार्थियों को जुकाम, खाँसी तथा बुखार हुआ था?
उत्तर:
हमारी कक्षा में कुछ दिन पहले 20 विद्यार्थियों को जुकाम/खाँसी तथा बुखार हुआ था।

उनको बीमारी कितने दिनों तक रही?
उत्तर:
उनको बीमारी एक सप्ताह से लेकर 15 दिनों तक रही।

इनमें से कितनों ने एंटीबायोटिक का उपयोग किया?
उत्तर:
इनमें से 15 विद्यार्थियों ने एंटीबोयोटिक का उपयोग किया था।

जिन्होंने एंटीबायोटिक लिया था वे कितने दिनों तक बीमार रहे ?
उत्तर:
जिन विद्यार्थियों ने एंटीबायोटिक लिया था वे 5-6 दिनों तक बीमार रहे और शीघ्र ही ठीक हो गये।

जिन्होंने एंटीबायोटिक नहीं लिया था वे कितने दिनों तक बीमार रहे?
उत्तर:
जिंन विद्यार्थियों ने एंटीबायोटिक नहीं लिया था वे कई दिनों तक बीमार रहे।

क्या इन दोनों वर्गों में अन्तर है?
उत्तर:
हाँ, दोनों वर्गों में अन्तर है।

यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो क्यों?
उत्तर:
दोनों वर्गों में यह अन्तर है कि जिन विद्यार्थियों ने एंटीबायोटिक लिया था उनकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ गई, जिससे वे शीघ्र ठीक हो गये। जिन विद्यार्थियों ने एंटीबायोटिक नहीं लिया था उनके शरीर में बैक्टीरिया फैलते रहे और शरीर प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर हो गया, जिसके कारण उनको देर से रोग से मुक्ति मिल सकी।

क्रियाकलाप 13.6. (पा. पु. पृ. सं. 209)
अपने मोहल्ले में एक सर्वेक्षण करो। दस परिवारों से बात करो जिनका रहन-सहन उच्च स्तर का है, जो अच्छी प्रकार रहते हैं और दस ऐसे परिवार जो आपके अनुमान के अनुसार गरीब हैं। इन दोनों परिवारों में बच्चे होने चाहिए जिनकी आयु पाँच वर्ष से कम हो। प्रत्येक बच्चे की ऊँचाई मापो और आयु लिखो तथा एक ग्राफ बनाओ।

क्या दोनों (अमीर और गरीब) वर्गों में कोई अन्तर है? यदि हाँ, तो क्यों?
उत्तर:
हाँ, दोनों वर्गों में अन्तर है। क्योंकि अमीर के पास खर्च करने के लिए धन उपलब्ध है जबकि गरीब के पास धन का अभाव है।

यदि उनमें अन्तर नहीं है तो क्या आप यह निष्कर्ष निकालते हैं कि स्वास्थ्य के लिए अमीरी तथा गरीबी का कोई महत्व नहीं है।
उत्तर:
स्वास्थ्य पर अमीरी और गरीबी का स्पष्ट अन्तर दिखाई देता है। अमीर लोगों के बच्चों को पौष्टिक व सन्तुलित ‘भोजन, शुद्ध पेय जल, अच्छा वातावरण, अच्छा घर तथा अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं जबकि गरीब लोगों बच्चों को न तो पौष्टिक व सन्तुलित भोजन मिल पाता है, न ही पीने के लिए शुद्ध जल, न ही रहने के लिए अच्छा वातावरण, न अच्छा घर और न ही अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पाती हैं। इसलिए गरीब वर्ग के रोगी बच्चों की संख्या अमीर वर्ग के बच्चों की अपेक्षा अधिक होती है।

संक्रमण से बचने की विशिष्ट विधियाँ प्रतिरक्षा तन्त्र के विशिष्ट गुणों से सम्बन्धित हैं, जो प्रायः रोगाणु से लड़ते रहते हैं। जैसे इन दिनों सारे विश्व में चेचक (स्मॉल पॉक्स) नहीं है, किन्तु 100 वर्ष पहले चेचक महामारी बहुत होती थी। लोग रोगी के पास आने से डरते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि उन्हें भी चेचक न हो जाये।

लेकिन एक वर्ग ऐसा भी था जो चेचक से नहीं डरता था और वे चेचक के रोगी की सेवा करते थे। इस वर्ग के व्यक्तियों को बहुत भयानक चेचक हुआ था, लेकिन फिर भी वे जीवित रहे, किन्तु उनके शरीर पर (मुख्यत: चेहरे पर बहुत से दाग थे। अर्थात् यदि किसी को एक बार चेचक हो जाए तो उसे चेचक रोग पुनः होने की सम्भावना नहीं होती। इसलिए यह एक बार रोग होने पर उसी रोग से बचने की एक विधि है।

ऐसा इसलिए होता है कि जब रोगाणु प्रतिरक्षा तन्त्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तन्त्र रोगाणुओं से प्रतिक्रिया करते हैं और फिर उसका विशिष्ट रूप से स्मरण कर लेता है। अतः जब वही रोगाणु या उससे मिलता-जुलता रोगाणु सम्पर्क में आता है तो पूरी शक्ति से उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र ही समाप्त हो जाता है। यह प्रतिरक्षाकरण के नियम का आधार है।

इस प्रकार, टीकाकरण का सामान्य नियम यह है कि शरीर में विशिष्ट संक्रमण तत्व प्रविष्ट कराकर प्रतिरक्षा तन्त्र को ‘मूर्ख’ बना सकते हैं वह उन रोगाणुओं की नकल करता है जो टीके के द्वारा शरीर में पहुँचे हैं। वह वास्तव में रोग उत्पन्न नहीं करते, किन्तु यह वास्तव में रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं को उसके बाद रोग उत्पन्न करने से रोकता है।

आजकल ऐसे बहुत से टीके उपलब्ध हैं जो संक्रामक रोगों का निवारण करते हैं और रोग निवारण के विशिष्ट साधन प्रदान करते हैं। टेटनस, डिप्थीरिया, कुकर खाँसी, चेचक, पोलियो आदि के टीके उपलब्ध हैं। यह बच्चों की संक्रामक रोगों से रक्षा करने के लिए सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम है।

ऐसे कार्यक्रम तभी सफल होते हैं जब ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएँ सभी बच्चों को प्राप्त हों हिपेटाइटिस के कुछ वाइरस जिससे पोलियो होता है, पानी द्वारा संचारित होता है। हिपेटाइटिस ‘A’ के लिए टीका उपलब्ध है। देश के अधिकांश भागों में जब बच्चे की आयु पाँच वर्ष हो जाती है तब तक वह हिपेटाइटिस ‘A’ के प्रति प्रतिरक्षी हो चुका होता है। इसका कारण यह है कि यह पानी के द्वारा वाइरस के प्रभाव में आ चुका हो।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

क्रियाकलाप 13.7. (पा.पु. पृ. सं. 210)
संक्रमित कुत्ते तथा अन्य जन्तुओं के काटने से रेबीज वाइरस फैलता है। मनुष्य तथा जन्तु दोनों के लिए प्रति रेबीज टीके उपलब्ध हैं पता करो कि आपके पास पड़ौस में स्थानीय प्रशासन रेबीज को फैलने से रोकने के लिए क्या कर रहा है?
क्या (प्रशासन द्वारा रेबीज फैलने से रोकने के लिए) ये उपाय पर्याप्त हैं? यदि नहीं, तो आप इसके सुधार के लिए क्या सुझाव देंगे ?
उत्तर:
स्थानीय प्रशासन द्वारा रेबीज को फैलने से रोकने के लिए स्थानीय चिकित्सा केन्द्र में टीकाकरण की सेवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। अतः जब इन सेवाओं की जरूरत पड़ती है तो स्थानीय चिकित्सा केन्द्र टीकों के अभाव में असमर्थ दिखाई देते हैं। चिकित्सक व परिचारिका (नर्स) या सहायक भी उपलब्ध नहीं होते हैं इसलिए चिकित्सा में देरी हो जाती है। चिकित्सा सही ढंग से नहीं हो पाती और रोगी की हालत बिगड़ जाती है और उसका जीवन खतरे में पड़ जाता है। यहाँ तक कि उसकी मृत्यु हो जाती है। इसका बुरा असर पूरे समाज पर पड़ता है।

अतः प्रशासन को चाहिए कि स्थानीय चिकित्सा केन्द्र पर पर्याप्त मात्रा में रेबीज के टीके उपलब्ध कराये, चिकित्सक, नर्स व सहायक भी उपलब्ध रहें ताकि उनकी सेवाओं का लाभ उठाया जा सके।

खण्ड 13.7 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 210)

प्रश्न 1.
जब आप बीमार होते हैं तो आपको सुपाच्य तथा पोषण युक्त भोजन करने का परामर्श क्यों दिया जाता है?
उत्तर:
बीमार होने पर सुपाच्य तथा पोषणयुक्त भोजन का परामर्श इसलिए दिया जाता है, क्योंकि ऐसे भोजन से हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण उचित मात्रा में प्राप्त हो जाते हैं। ये तत्व हमारे शरीर के लिए जरूरी हैं। स्वस्थ होने के लिए ऐसा आहार आवश्यक है, क्योंकि भोजन से हमें ऊर्जा मिलती है तथा शरीर के टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत होती है।

प्रश्न 2.
संक्रामक रोग फैलने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
संक्रामक रोग फैलने की विभिन्न विधियाँ इस प्रकार हैं-

  • रोगी व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में
  • दूषित जल
  • प्रदूषित वायु
  • दूषित भोजन, तथा
  • कीट या शारीरिक सम्पर्क द्वारा फैलते हैं ये रोग बैक्टीरिया, वाइरस, प्रोटोजोआ, एवं कवक वर्ग के सूक्ष्म जीवों के संक्रमण के कारण होते हैं।

प्रश्न 3.
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए आपके विद्यालय में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं?
उत्तर:
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए हमें निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी आवश्यक हैं-

  • अपने को रोगी साथियों से अलग रखना।
  • उनके साथ उठना-बैठना, खाना-पीना, स्पर्श एवं अन्य सम्पर्क न रखना।
  • सूक्ष्म जीवों से बचने के लिए स्वच्छ जल का उपयोग करना।
  • स्वच्छता अपनाना तथा पर्यावरण को स्वच्छ रखना।
  • खुले स्थान पर रहना।
  • संक्रामक रोगों से बचने के लिए आवश्यक टीके लगवाना।

प्रश्न 4.
प्रतिरक्षीकरण क्या है?
उत्तर:
प्रतिरक्षीकरण-एक बार रोग होने पर उसी रोग से बचने की एक विधि प्रतिरक्षीकरण है। जब रोगाणु प्रतिरक्षा तन्त्र पर पहली बार आक्रमण करते हैं तो प्रतिरक्षा तन्त्र रोगाणुओं के प्रति क्रिया करता है और फिर इसका विशिष्ट रूप से स्मरण कर लेता है। इस प्रकार जब वही रोगाणु या उससे मिलता-जुलता रोगाणु सम्पर्क में आता है तो पूरी शक्ति के साथ उसे नष्ट कर देता है। इससे पहले संक्रमण की अपेक्षा दूसरा संक्रमण शीघ्र ही समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 5.
आपके पास में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में टीकाकरण के कौन-कौन से कार्यक्रम उपलब्ध हैं? आपके क्षेत्र में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सम्बन्धी मुख्य समस्या है?
उत्तर:
हमारे पास स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में टेटनस डिप्थीरिया, चेचक, कुकर खाँसी, पोलियो, बी.सी.जी. आदि के टीकाकरण कार्यक्रम उपलब्ध हैं। हमारे क्षेत्र में हैजा, टाइफॉयड, अतिसार, मलेरिया, फ्लू, रेबीज, क्षयरोग, एनीमिया, गलगण्ड (घेंघा) डाइबिटीज, गठिया, मेरेस्मस और हृदय रोग आदि स्वास्थ्य सम्बन्धी मुख्य समस्याएँ हैं।

प्रश्न 6.
क्या रोगी व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर सभी रोग फैल जाते हैं? (पा. पु. पृ. सं. 202)
उत्तर:
नहीं; रोगी व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर केवल संक्रामक रोग ही फैलते हैं।

प्रश्न 7.
ऐसे कौन से रोग हैं जो नहीं फैलते हैं?
उत्तर:
कैंसर, उच्च रक्त चाप, मोटापा, शरीर के किसी भाग में दर्द होना, गठिया, किसी दुर्घटना से होने वाली शारीरिक क्षति से उत्पन्न रोग आदि।

प्रश्न 8.
मनुष्टों में वे रोग कैसे हो जाते हैं जो रोगी के सम्पर्क में आने से नहीं फैलते?
उत्तर:
मनुष्य के शरीर में बहुत से असंक्रामक रोग हो जाते हैं; जैसे-आनुवंशिक असामान्यता, दुर्घटना, पौष्टिक भोजन की कमी, प्रदूषित पर्यावरण, व्यक्तिगत तथा सामुदायिक अस्वस्थता, विषाक्त भोजन, व्यायाम न करना तथा अप्रसन्न (दु:खी) रहना आदि। ये रोग एक रोगी से दूसरे रोगी में नहीं फैलते।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

Jharkhand Board JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9th Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(i) दो आसन्न कोण एक रेखीय युग्म बनाते हैं, यदि वे ……………… हों ।
(ii) यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी है तो इस प्रकार बने दो आसन्न कोणों का योग ………………….. होता है।
(iii) यदि दो आसन्न कोणों का योग 180° हो तो वे एक ………………. बनाते हैं।
(iv) दो आसन्न कोणों का शीर्ष बिन्दु …………. ही होता है।
(v) यदि दो शीर्षाभिमुख कोणों में से एक x° हो तो दूसरा कोण …………….. होगा।
(vi) यदि दो रेखाऐं एक दूसरे पर लम्ब हों तो वे परस्पर ……………. होती हैं।
(vii) यदि दो रेखाओं को एक तियक रेखा काटे और इस प्रकार बने संगत कोण बराबर हों, तो वे रेखाएँ परस्पर ……………… होती हैं।
(viii) यदि दो समान्तर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा काटे तो इस प्रकार बने एकान्तर कोण ……………….. होते हैं।
(ix) दो आसन्न सम्पूरक कोणों के समद्विभाजक एक दूसरे पर ……………….. होते हैं।
(x) त्रिभुज की किसी भुजा को बढ़ाने पर ………………. बनता है, जो के मानों के योग के बराबर होता है।
हल :
(i) सम्पूरक कोण
(ii) 180°
(iii) रेखीय युग्म,
(iv) एक
(v) x°
(vi) समान्तर
(vii) समान्तर,
(viii) समान,
(ix) लम्ब
(x) शीर्षाभिमुख कोण, अंत: अभिमुख कोणों ।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 2.
चित्र में प्रतिवर्ती कोण ∠POQ बराबर है :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 1
(A) 60°
(B) 120°
(C) 300°
(D) 360°.
हल :
∵ किसी बिन्दु पर समस्त कोणों का योग = 360°
∴ दीर्घ ∠POQ = 360° – लघु ∠POQ = 360° – 60° = 300°
अत: विकल्प (C) सही है।

प्रश्न 3.
चित्र में दो समान्तर रेखाओं l तथा m को एक तिर्यक् रेखा n, बिन्दुओं G तथा H पर काट रही है। इस प्रकार बनने वाले कोण चित्र में अंकित हैं। यदि ∠1 न्यूनकोण हो, तो बताइए निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 2
(A) ∠1 + ∠2 = 180°
(B) ∠2 + ∠5 = 180°
(C) ∠3 + ∠8 = 180°
(D) ∠2 + ∠6 = 180°
हल :
∠1 + ∠2 = 180° (रैखिक कोण युग्म)
∠2 + ∠5 = 180° (संगत अन्तः कोणों का योग)
∠3 + ∠8 = 180° (संगत अन्तः कोणों का योग)
∠1 + ∠2 = 180°
न्यूनकोण + ∠2 = 180°
⇒ ∠2 = 180° – न्यूनकोण
⇒ ∠2 = अधिक कोण
⇒ ∠2 = ∠6 (संगतकोण)
अतः अधिक कोण अधिक कोण > 180°

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 4.
चित्र में दो समान्तर रेखाओं a तथा b को एक तिर्यक रेखा c बिन्दुओं A तथा B पर काटती है। A तथा B पर बनने वाले कोण चित्र में अंकित हैं। चित्र में बताइए कि निम्न में से कौन-से कोण युग्म का समान होना आवश्यक नहीं है:
(A) ∠1, ∠2
(B) ∠1, ∠3
(C) ∠1, ∠5
(D) ∠2, ∠8
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 3
हल :
∠1 और ∠2 तब तक बराबर नहीं हो सकते जब तक कि तिर्यक रेखा c, भुजाओं a तथा b पर लम्ब न हो।
∠1 = ∠3 (शीर्षाभिमुख कोण)
∠1 = ∠5 (संगत कोण)
∠2 = ∠8 (एकान्तर कोण)
∵ ∠1 व ∠2 का समान होना आवश्यक नहीं है।
अतः विकल्प (A) सही है।

प्रश्न 5.
निम्न में पूरक कोण युग्म नहीं है:
(A) 60°, 30°
(B) 56°, 34°
(C) 0°, 90°
(D) 150°, 30°.
हल :
पूरक कोण युग्म का योग 90° होता है।
अतः विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 6.
निम्न में सम्पूरक कोण युग्म नहीं है:
(A) 90°, 90°
(B) 32°, 58°
(C) 0°, 180°
(D) 76°, 104°
हल :
सम्पूरक कोण युग्म का योग 180° होता है।
अतः विकल्प (B) सही हैं।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 7.
चित्र में दर्शाए कोण ∠AOB तथा ∠BOC हैं:
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 4
(A) पूरक कोण
(B) सम्पूरक कोण
(C) आसन्न कोण
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
हल :
किरण AOB के बिन्दु पर दो आसन्न कोण ∠AOB तथा ∠BOC हैं।
अत: विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 8.
चित्र में दो सरल रेखाएँ AB तथा CD एक-दूसरे को O बिन्दु पर प्रतिच्छेद कर रही हैं और इस प्रकार बिन्दु O पर बने कोण अंकित हैं। यहाँ ∠x – ∠y का मान है :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 5
(A) 56°
(B) 118°
(C) 620
(D) 180°.
हल :
∠BOC + ∠BOD = 180° (रैखिक युग्म कोण)
x + 62° = 180°
x = 180° – 62° = 118°
अत: विकल्प (A) सही है।
[∵ ∠x – ∠y = 118° – 62° = 56°]

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 9.
चित्र से बताइए कि निम्न में कौन-सा युग्म, संगत कोण नहीं हैं:
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 6
(A) ∠1, ∠5
(B) ∠2, ∠6
(C) ∠3, ∠7
(D) ∠3, ∠5
हल :
∠3 और ∠5 एकान्तर कोण हैं। अन्त तीन संगत कोण हैं। अतः विकल्प (D) सही है।

प्रश्न 10.
चित्र में रेखाएँ l तथा m समान्तर हैं, तो ∠x का मानज्ञात कीजिए । कारण भी स्पष्ट कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 7
हल :
∠y = 68° (एकान्तर कोण)
∠y + ∠x + ∠x = 180° (रेखिक कोण युग्म)
⇒ 68° + 2∠x = 180°
⇒ 2∠x = 180° – 68°
⇒ 2∠x = 112°
⇒ ∠x = \(\frac {112°}{2}\)
∴ ∠x = 56°

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 11.
चित्र में, ∠AOB, ∠COD एवं ∠EOF ज्ञात कीजिए ।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 8
हल :
दिया है, CF और BE, दो रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद कर रही हैं,
∴ ∠COB = ∠EOF (शीर्षाभिमुख कोण)
5x° = ∠EOF
∴ ∠EOF = 5x°
अत: ∠AOF + ∠EOF + ∠DOE = 180°
[∵ DOA एक सरल रेखा है]
4x° + 5x° + 3x° = 180°
⇒ 12x° = 180°
⇒ x° = \(\frac {180°}{12}\)
∴ x° = 15°
अतः
∠AOB = ∠DOE (शीर्षाभिमुख कोण)
= 3x° = 3 × 15° = 45°
∠COD = ∠AOF (शीर्षाभिमुख कोण)
= 4x° = 4 × 15° = 60°
∠EOF = ∠COB (शीर्षाभिमुख कोण)
= 5x° = 5 × 15° = 75°
अत: ∠AOB, ∠COD और ∠EOF क्रमश: 45°, 60° और 75° हैं।

प्रश्न 12.
चित्र में, ∠POR और ∠QOR एक रैखिक कोण युग्म बनाते हैं। यदि a – b = 80°, तो a और b का मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 9
हल :
दिया है, ∠a तथा ∠b रैखिक युग्म हैं
अतः a + b = 180° …………..(i)
एवं a – b = 80° …………..(ii) (दिया है)
समीकरण (i) और (ii) को जोड़ने पर,
2a = 260°
∴ a = \(\frac {260°}{2}\) = 130°
a का मान समीकरण (i) में रखने पर,
⇒ 130° + b = 180°
⇒ b = 180° – 130°
∴ b = 50°
अतः a = 130°, b = 50°

प्रश्न 13.
आकृति में रेखाएँ PQ और RS परस्पर बिन्दु O पर प्रतिच्छेद करती हैं यदि ∠POR : ∠ROQ = 5 : 7 हो, तो सभी कोण ज्ञात करो ।
हल :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 10
∠POR + ∠ROQ = 180° (रैखिक कोण युग्म)
∵ ∠POR : ∠ROQ = 5 : 7 (दिया है)
माना ∠POR = 5x, तथा ∠ROQ = 7x
∴ 5x + 7x = 180°
12x = 180°
x = \(\frac {180°}{2}\) = 15°
∴ ∠POR = 5 × 15 = 75°
तथा ∠ROQ = 7 × 15 = 105°
अत: ∠POS = ∠ROQ = 105° (शीर्षाभिमुख कोण)
और ∠SOQ = ∠POR = 75° (शीर्षाभिमुख कोण)

प्रश्न 14.
आकृति में, OP, OQ, OR और OS चार किरणें हैं। सिद्ध कीजिए कि
∠POQ + ∠QOR + ∠SOR + ∠POS = 360° है।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 11
हल :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 12
किरण QO को T बिन्दु तक आगे बढ़ाया। TOQ सरल रेखा हैं।
∴ ∠TOP + ∠POQ = 180° ……….(1)
(रैखिक कोण युग्म)
इसी प्रकार, किरण OS, रेखा TOQ पर खड़ी है।
⇒ ∠TOS +∠SOQ= 180° (रैखिक कोण युग्म)
परन्तु ∠SOQ = ∠SOR + ∠QOR है।
⇒ ∠TOS + ∠SOR + ∠QOR = 180° … (2)
अब (1) और (2) को जोड़ने पर,
∠TOP + ∠POQ + ∠TOS + ∠SOR + ∠QOR
= 180° + 180°
[∵ ∠TOP + ∠TOS = ∠POS]
= ∠POQ + ∠QOR + ∠SOR + ∠POS
= 360°. इति सिद्धम् ।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 15.
आकृति में AB || CD और CD || EF है। साथ ही EA ⊥ AB है। यदि ∠BEF = 55° है, तो x, y और z के मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 13
हल :
y + 55° = 180°
(CD || EF, तिर्यक रेखा ED के एक ही ओर के अन्त:कोण)
⇒ y = 180° – 55° = 125°
x = y (संगत कोण)
∴ x = 125°
∵ AB || CD और CD || EF
∴ AB || EF होगी।
⇒ ∠EAB + ∠FEA = 180° (अन्तःकोण)
⇒ 90° + z + 55° = 180°
∴ z = 180° – 90° – 55°
= 35°
अतः x y और z के मान क्रमशः 125°, 125° और 350° हैं।

प्रश्न 16.
यदि दो समान्तर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा प्रतिच्छेदित करती है, तो सिद्ध कीजिए कि अन्तः कोणों के समद्विभाजकों से एक आयत बनता है।
हल :
दिया है AB || CD तथा तिर्यक रेखा EF || AB व CD को क्रमश: P तथा Q पर काटती है अन्तः कोणों के समद्विभाजक क्रमश: PR व QR बिन्दु R पर तथा ∠BPQ एवं ∠PQD के समद्विभाजक PS व QS बिन्दु S पर काटते हैं।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 14
उपपत्ति: AB || CD, व तिर्यक रेखा EF उन्हें P तथा Q पर काटती है।
∴ ∠APQ = ∠PQD (एकान्तर कोण )
⇒ \(\frac {1}{2}\)∠APQ = \(\frac {1}{2}\)∠PQD
⇒ ∠2 = ∠4
परन्तु ∠2 व ∠4 एकान्तर कोण युग्म है।
∴ RP || QS ………..(i)
इसी प्रकार ∠1 = ∠3
∴ PS || QR …….(ii)
(i) व (ii) से
PSQR एक समान्तर चतुर्भुज है ….(iii)
परन्तु ∠APQ + ∠BPQ = 180°
⇒ \(\frac {1}{2}\)∠APQ + \(\frac {1}{2}\)∠BPQ = \(\frac {1}{2}\) × 180°
⇒ ∠2 = ∠1 = 90°
⇒ ∠RPS = 90°
∴ PS QR एक आयत हैं। इति सिद्धम्

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 17.
चित्र में AB || DC हो, तो दिए गए कोणों से ∠x, ∠y तथा ∠z ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 15
हल :
AB || DC
∴ x = 102° (एकान्तर कोण)
और 88° = 22° + z (CBE का बहिष्कोण)
z° = 88° – 22° = 66°
और ∵ AB || DC
∴ y + 88° = 180°
(एक ही ओर के अन्तः कोणों का योग)
∴ ∠y = 180° – 88°
∴ ∠y = 92°
अतः ∠x = 102°, y = 92°, z = 66°

प्रश्न 18.
दिए गए चित्र से ∠x तथा ∠y के माप ज्ञात कीजिए। यदि ∠x – ∠y = 10° हो ।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 16
हल :
∠x – ∠y = 10° (दिया है) … (i)
और ∠x + ∠y = 120°
(बहिष्कोण = दोनों अन्तराभिमुख अन्तः कोणों का योगफल) … (ii)
(i) व (ii) को जोड़ने पर
⇒ 2∠x = 130° ⇒ ∠x = 65°
समी. (ii) से,
65° + ∠y = 120°
∴ ∠y = 120° – 65° = 55°.
अतः ∠x = 65° तथा ∠y = 55°

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 19.
आकृति में, ΔABC की भुजाओं AB और AC को क्रमशः E और D तक बढ़ाया गया है। यदि ∠CBE और ∠BCD के समद्विभाजक क्रमश: BO और CO बिन्दु O पर मिलते हैं, तो सिद्ध कीजिए कि
∠BOC = 90° – \(\frac {1}{2}\)∠BAC
हल :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 17
किरण BO, ∠CBE की समद्विभाजक है।
∴ ∠CBO = \(\frac {1}{2}\)∠CBE
= \(\frac {1}{2}\)(180° – y)
= 90° – \(\frac {z}{2}\) ………….(1)
इसी प्रकार, किरण CO, ∠BCD की समद्विभाजक
∠BCO = \(\frac {1}{2}\)∠BCD = \(\frac {1}{2}\)(180° – z)
= 90° – \(\frac {z}{2}\) ……….(2)
ΔBOC में,
∠BOC + ∠BCO + ∠CBO = 180° ……….(3)
समीकरण (1) व (2) के मान (3) में रखने पर,
∠BOC + 90° – \(\frac {z}{2}\) + 90° – \(\frac {y}{2}\) = 180°
∠BOC = \(\frac{z}{2}+\frac{y}{2}\)
∠BOC = \(\frac {1}{2}\)(y + z)
[∵ त्रिभुज के तीनों कोणों का योग (x + y + z) = 180°]
y + z = 180° – x
\(\frac {1}{2}\)(y + z) = \(\frac {1}{2}\)(180 – x)
∠BOC = \(\frac {1}{2}\)(180° – x)
= \(\frac {1}{2}\) × 180° – \(\frac {x}{2}\)
अतः ∠BOC = 90° – \(\frac {1}{2}\)∠BAC. इति सिद्धम् ।

प्रश्न 20.
निम्न चित्र में m और n दो समतल दर्पण हैं जो परस्पर लम्बवत है। दिखाइए कि आपतित किरण CA, परावर्तित किरण BD के समान्तर है।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 18
हल :
दिया है: m ⊥ n तथा
आ CA, n पर आपतित व BD, m पर परावर्तित किरणें हैं।
सिद्ध करना है : CA || BD
रचना : AE ⊥ n तथा BF ⊥ Lin खींचे
उपपत्ति : AE ⊥ n तथा BF ⊥ m एवं m ⊥ n
∴ BF ⊥ AE या BG ⊥ GA
ΔBGA = 90°
एवं ∠GAB + ∠GBA + ∠BGA = 180°
(त्रिभुज के अन्त कोणों का योग)
⇒ ∠GAB + ∠GBA + 90° = 180°
⇒ ∠GAB + ∠GBA = 90° ……………..(i)
∵ आपतन कोण परावर्तन कोण
∴ ∠CAG = ∠GAB ……(i)
⇒ ∠GBA = \(\frac {1}{2}\)∠CAB … (ii)
इसी प्रकार ∠CAG = \(\frac {1}{2}\)∠ABD … (iii)
(i), (ii) तथा (iii) से
⇒ \(\frac {1}{2}\)∠CAB + \(\frac {1}{2}\)∠ABD = 90°
⇒ ∠CAB + ∠ABD = 180°
किन्तु में तिर्यक रेखा के एक ही ओर के कोण हैं
अत: CA || BD इति सिद्धम्

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 21.
यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि संगत कोणों के एक युग्म के समद्विभाजक परस्पर समान्तर हों, तो सिद्ध करो कि दोनों रेखाएँ भी परस्पर समान्तर होती हैं।
हल :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 19
दिया है : एक तिर्यक रेखा AD दो रेखाओं PQ और RS को B व C बिन्दु पर प्रतिच्छेद करती है। किरण BE, ∠ABQ की समद्विभाजक और किरण CG, ∠BCS की समद्विभाजक है तथा BE || CG है।
सिद्ध करना है : PQ || RS
उपपत्ति: किरण BE, ∠ABQ की समद्विभाजक है।
∴ ∠ABE = \(\frac {1}{2}\)∠ABQ ……. (1)
इसी प्रकार, किरण CG, ∠BCS की समद्विभाजक है।
∴ ∠BCG = \(\frac {1}{2}\)∠BCS …….. (2)
∵ BE || CG है और AD तिर्यक काटती है।
∴ ∠ABE = ∠BCG (संगत कोण)
समी (1) और (2) से मान रखने पर,
\(\frac {1}{2}\)∠ABQ = \(\frac {1}{2}\)∠BCS (संगत कोण)
⇒ ∠ABQ = ∠BCS
∴ PQ || RS. इति सिद्धम् ।

प्रश्न 22.
निम्न आकृति में, ∠ABC और ∠BCA के कोण समद्विभाजक बिन्दु O पर परस्पर प्रतिच्छेद करते हैं। सिद्ध कीजिए कि ∠BOC = 90° + \(\frac {1}{2}\)∠A.
हल :
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 20
दिया है ΔABC में ZABC तथा ∠BCA के समद्विभाजक BO तथा CO बिन्दु पर एक-दूसरे को काटते हैं।
सिद्ध करना है: ∠BOC = 90° + \(\frac {1}{2}\)∠A
उपपत्ति : ∵BO, ∠ABC की समद्विभाजक है।
∴ ∠OBC = \(\frac {1}{2}\)∠ABC
इसी प्रकार CO, ∠BCA की समद्विभाजक है।
∴ ∠OCB = \(\frac {1}{2}\)∠BCA
⇒ ∠OBC + ∠OCB = \(\frac {1}{2}\)∠ABC + \(\frac {1}{2}\)∠BCA … (1)
ΔABC से, ∵ ∠ABC + ∠BCA + ∠A = 180°
⇒ \(\frac {1}{2}\)∠ABC + \(\frac {1}{2}\)∠BCA + \(\frac {1}{2}\)∠A = \(\frac {1}{2}\) × 180°
⇒ \(\frac {1}{2}\)∠ABC + \(\frac {1}{2}\)∠BCA = 90° – \(\frac {1}{2}\)∠A …..(2)
समी (2) में समी. (1) का मान रखने पर,
∠BOC + ∠OCB = 90° – \(\frac {1}{2}\)∠A …………..(3)
ΔOBC से, ∠OBC + ∠OCB + ∠BOC = 180°
समीकरण (3) से मान रखने पर
90° – \(\frac {1}{2}\)∠A + ∠BOC = 180°
∴ ∠BOC = 90° + \(\frac {1}{2}\)∠A इति सिद्धम् ।

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 23.
सिद्ध करो कि किसी चतुर्भुज के चारों कोणों का योगफल चार समकोण के बराबर होता है।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 21
हल :
दिया है
चतुर्भुज PQRS
रचना : PR को मिलाया, अत: रेखा PR, चतुर्भुज PQRS को दो त्रिभुओं PQR तथा SPR में बाँटती है।
ΔPQR में, ∠1 + ∠2 + ∠3 = 180° … (i)
एवं ΔPSR में ∠4 + ∠5 + ∠6 = 180° …(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) से,
∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 = 360°
या (∠1 + ∠4) + ∠2 + (∠3 + ∠5) + ∠6 = 360°
या ∠P + ∠Q + ∠R + ∠S = 360°
या ∠P + ∠Q + ∠R + ∠S = 4 × 90°
या ∠P + ∠Q + ∠R + ∠S = 4 समकोण । इति सिद्धम् ।

प्रश्न 24.
दिये गये चित्र में AB और CD दो समान्तर रेखाओं के बीच विन्दु P इस प्रकार है किं ∠PAB 45° तथा ∠PCD = 30° तो बृहत कोण APC का मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 22
हल :
बिन्दु P से AB रेखा के समान्तर RS रेखा खींची।
अतः
∠BAP = ∠APR = 45° (एकान्तर कोण)
इसी प्रकार, ∠SPC = ∠PCD = 30° (एकान्तर कोण)
अव ∠RPC = 180° – 30° = 150°
∴ ∠APC = ∠APR + ∠RPC
= 45° + 150°
∴ ∠APC = 195°.

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 25.
दिये गये चित्र में AB || CD तथा PQ || EF तो ∠x का मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 23
हल :
∠DEF = 60° + 52° = 112°
∠EMQ = ∠DEF (संगत कोण)
परन्तु
∠PMC = ∠EMQ
= 112° (शीर्षाभिमुख कोण)
∴ ∠x = ∠PMC (संगत कोण)
∴ ∠x = 112°

प्रश्न 26.
दी गई आकृति में AB || CD हैं तो ∠x तथा के मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 24
हल :
(i) ∠ABC = ∠BCD (एकान्तर कोण)
∵ ∠x + 80° = 116
∴ ∠x = 116° – 80°
= 36°

(ii) परन्तु
∠y + ∠x + 80° = 180°,
(सरल रेखा पर बने कोण)
⇒ ∠y + 80° + 36° = 180°
⇒ ∠y = 180 – 80 – 36 = 180° – 116°
∴ ∠y = 64°

JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण

प्रश्न 27.
दिये गये चित्र में यदि, QT ⊥ PR, ∠TQR = 40°, ∠SPR = 30° है तो x तथा y के मान ज्ञात कीजिए।
JAC Class 9 Maths Important Questions Chapter 6 रेखाएँ और कोण - 25
हल :
(i) ΔTQR में, ∠T = 90° (∵ OT⊥PR)
∴ 90° + 40° + x = 180°
(त्रिभुज के अन्तःकोणों का योग )
⇒ ∠x = 180° – 40° – 90° = 180° – 130°
∴ ∠x = 50°.

(ii) ΔPSR में,
∠y, ΔPSR का बहिष्कोण है।
∴ ∠y = 30° + x = 30° + 50°
∴ ∠y = 80°.

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. मंगोल यायावर थे –
(अ) चीन के
(ब) रूस के
(स) मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र के
(द) सीरिया के।
उत्तर:
(स) मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र के

2. मंगोलों को व्यापार के लिए किस देश के स्थायी निवासियों के पास जाना पड़ता था –
(अ) ईरान
(ब) तूरान
(स) भारत
(द) चीन।
उत्तर:
(द) चीन।

3. चंगेजखान का प्रारम्भिक नाम था –
(अ) जमूका
(ब) नेमन
(स) तेमुजिन
(द) अब्दुल्ला खान।
उत्तर:
(स) तेमुजिन

4. चंगेज खाँ की मृत्यु हुई-
(अ) 1226 ई.
(ब) 1227 ई.
(स) 1326 ई.
(द) 1327 ई.।
उत्तर:
(ब) 1227 ई.

5. कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में कौन प्रसिद्ध था?
(अ) चंगेजखान
(ब) चघताई
(स) ओगोदेई
(द) कुबलई खान।
उत्तर:
(द) कुबलई खान।

6. किस मंगोल शासक ने अपने सेनापतियों को आदेश दिया था कि वे किसानों को न लूटें और उनकी रक्षा करें?
(अ) चंगेज खान
(ब) कुबलई खान
(स) गजन खान
(द) जोची।
उत्तर:
(स) गजन खान

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

7. चंगेजखान की विधि-संहिता कहलाता है –
(अ) उलुस
(ब) तामा
(स) किरिलताई
(द) यास।
उत्तर:
(द) यास।

8. चंगेज खान के तीसरे पुत्र ओगोदेई ने अपनी राजधानी प्रतिष्ठित की –
(अ) चीन में
(ब) कराकोरम में
(स) ईरान में
(द) अफगानिस्तान में।
उत्तर:
(ब) कराकोरम में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1. कुछ मंगोल पशुपालक थे और कुछ ………………
2. मंगोलों के स्टेपी क्षेत्रों में कोई …………… नहीं उभर पाया।
3. समय – समय पर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मंगोल समुदायों में ……………. होता था।
4. चंगेज खां उन विभिन्न जनजातीय समूहों को जो उसके महासंघ के सदस्य थे, की पहचान को योजनाबद्ध रूप से …………… को कृत-संकल्प था।
5. चंगेज खां ने प्राचीन जनजातीय समूहों को …………….. कर उनके सदस्यों को नवीन सैनिक इकाइयों में विभक्त कर दिया।
उत्तर:
1. शिकारी संग्राहक
2. नगर
3. संघर्ष
4. मिटाने
5. विभाजित।

निम्न में से सत्य / असत्य कथन छाँटिये –

1. चंगेज खां के चार पुत्रों के अधीन नयी सैनिक टुकड़ियों को आंडा कहा जाता था।
2. चंगेज खां के कर्त्तव्यनिष्ठ अनुयायियों के समूह को नोयान कहा जाता था।
3. आंडा ने निम्न श्रेणी के कर्त्तव्यनिष्ठ अनुयायी को ‘स्वतंत्र व्यक्ति’ कहा जाता था।
4. चंगेज खां ने अपने नव – विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व चार पुत्रों को सौंपा। इससे उलूस का गठन हुआ।
5. परिवार के सदस्यों में राज्य की भागीदारी का बोध किरिलताई में होता था।
उत्तर:
1. असत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. सत्य
5. सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

1. कुरिलताई(क) चंगेज खां के चार पुत्रों के अधीन नई सैनिक टुकड़ियां
2. नोयान(ख) चंगेज खां के कर्त्तव्यनिष्ठ अनुयायी
3. आंडा(ग) ऐसा क्षेत्र जिसकी दूरस्थ सीमा निर्धारित नहीं थी।
4. उलूस(घ) सुरक्षित यात्रा हेतु यात्रियों को जारी किए गए पास।
5. जेरेज(च) मंगोल कबीले के सरदारों की एक सभा

उत्तर:

1. कुरिलताई(च) मंगोल कबीले के सरदारों की एक सभां
2. नोयान(क) चंगेज खां के चार पुत्रों के अधीन नई सैनिक टुकड़ियाँ
3. आंडा(ख) चंगेज खां के कर्त्तव्यनिष्ठ अनुयायी
4. उलूस(ग) ऐसा क्षेत्र जिसकी दूरस्थ सीमा निर्धारित नहीं थीं।
5. जेरेज(घ) सुरक्षित यात्रा हेतु यात्रियों को जारी किए गए पास।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
किस मंगोल शासक ने फ्रांस के शासक लुई नौवें को चेतावनी दी थी ?
उत्तर:
चंगेजखान के पौत्र मोन्के ने।

प्रश्न 2.
बाटू कौन था ?
उत्तर:
बाटू चंगेज खान का पौत्र था ?

प्रश्न 3.
मंगोल साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
उत्तर:
चंगेज खाँ।

प्रश्न 4.
चंगेज खाँ का जन्म कब हुआ था और कहाँ हुआ था ?
उत्तर:
1162 ई. के आस-पास, आधुनिक मंगोलिया में।

प्रश्न 5.
चंगेज खां का प्रारम्भिक नाम क्या था ?
उत्तर:
मुजिन।

प्रश्न 6.
मंगोलों का महानायक किसे घोषित किया गया और किसके द्वारा घोषित किया गया ?
उत्तर:
(1) चंगेज खान को
(2) मंगोल सरदारों की सभा कुरिलताई द्वारा।

प्रश्न 7.
निशापुर में कत्ले-आम का आदेश किसने दिया?
उत्तर:
चंगेज खान ने।

प्रश्न 8.
‘उलुस’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘उलुस’ शब्द का मूल अर्थ निश्चित भू-भाग नहीं था।

प्रश्न 9.
चंगेजखाँ के तीसरे और चौथे पुत्रों को शासन करने के लिए कौन से प्रदेश प्राप्त हुए?
उत्तर:
चंगेजखाँ के तीसरे पुत्र ओगोदेई को कराकोरम तथा चौथे पुत्र तोलोए को मंगोलिया प्राप्त हुआ।

प्रश्न 10.
गजन खान कौन था ?
उत्तर:
गजन खान चंगेज खाँ के सबसे छोटे पुत्र तोलुई का वंशज था।

प्रश्न 11.
यायावर कौन थे ?
उत्तर:
यायावर घुमक्कड़ लोग थे जो अनेक परिवारों के समूह में संगठित होते थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 12.
चीन की महान दीवार क्यों बनवाई गई थी ?
उत्तर:
मंगोलों के आक्रमणों से सुरक्षा प्राप्त करने के लिए।.

प्रश्न 13.
मंगोलों के प्रमुख नेता का नाम लिखिए।
उत्तर:
चंगेज खान।

प्रश्न 14.
चंगेज खान का सैन्य संगठन किस पद्धति पर आधारित था ?
उत्तर:
स्टेपी क्षेत्र की पुरानी दशमलव पद्धति पर।

प्रश्न 15.
चीनी शासकों द्वारा मंगोलों के आक्रमणों से अपनी प्रजा की रक्षा के लिए किए गए दो उपायों का उल्लेख कीजिये ।
उत्तर:
(1) किलेबन्दी करना
(2) चीन की महान दीवार का निर्माण करवाना।

प्रश्न 16.
चीन की विशाल दीवार के निर्माण का कार्य कब से प्रारम्भ हुआ?
उत्तर:
तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से।

प्रश्न 17.
मंगोलिया में चंगेज खाँ की छवि का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
मंगोलों के लिए चंगेज खाँ एक आराध्य व्यक्ति था।

प्रश्न 18.
यास या यसाक से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
यास्क का अर्थ था-विधि, आज्ञप्ति व आदेश। यह चंगेज खाँ की विधि-संहिता थी। यसाक का सम्बन्ध प्रशासनिक विनियमों से है जैसे आखेट, सैन्य और डाक प्रणाली का संगठन।

प्रश्न 19.
चंगेज खाँ ने बुखारा पर कब विजय प्राप्त की ?
उत्तर:
1220 ई. में।

प्रश्न 20.
चंगेज खाँ का कौनसा पोता किसानों और नगरों का रक्षक था ?
उत्तर:
कुबलई खान।

प्रश्न 21.
‘बर्बर’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘बर्बर’ शब्द यूनानी भाषा के ‘बारबरोस’ शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका तात्पर्य गैर-यूनानी लोगों से है। ये लोग क्रूर एवं निर्दयी होते थे।

प्रश्न 22.
मंगोल शासक मोन्के ने फ्रांस के शासक लुई नौवें को क्या चेतावनी दी थी ?
उत्तर:
“स्वर्ग में केवल एक शाश्वत आकाश है और पृथ्वी का केवल एक अधिपति चंगेज खान है। अतः वह मंगोलों पर आक्रमण न करे।”

प्रश्न 23.
बाटू की दो सैनिक उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) उसने अपने 1236-1241 के अभियानों में रूस की भूमि को मास्को तक रौंद डाला।
(2) उसने पोलैण्ड, हंगरी तथा आस्ट्रिया पर विजय प्राप्त की।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 24.
चंगेजखान ने 1220 में बुखारा को जीत कर वहाँ के व्यापारियों को क्या चेतावनी दी थी ?
उत्तर:
चंगेजखान ने बुखारा के व्यापारियों से कहा था कि “तुमने अनेक पाप किए हैं। ईश्वर ने मुझे तुम्हें दण्ड देने के लिए तुम्हारे पास भेजा है। ”

प्रश्न 25.
मंगोल कौन थे ?
उत्तर:
मंगोल विविध जन-समुदाय का एक निकाय था । ये लोग पूर्व के तातार, खितान तथा मंचू लोगों से सम्बन्धित थे।

प्रश्न 26.
मंगोलों का निवास स्थान क्या था ?
उत्तर:
मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र में रहते थे, जो कि आज के आधुनिक मंगोलिया राज्य का भू-भाग है।

प्रश्न 27.
मंगोलों ने कृषि कार्य को क्यों नहीं अपनाया?
उत्तर:
चारण क्षेत्र में वर्ष की सीमित अवधियों में ही कृषि करना सम्भव था इसलिए मंगोलों ने कृषि कार्य को नहीं अपनाया।

प्रश्न 28.
मंगोल प्रदेशों में नगर विकसित क्यों नहीं हो पाए ?
उत्तर:
मंगोलों ने कृषि कार्य नहीं अपनाया। पशुपालकों और शिकारी संग्राहकों की अर्थव्यवस्था भी घनी आबादी वाले क्षेत्रों का भरण-पोषण करने में समर्थ नहीं थी।

प्रश्न 29.
मंगोल परिवारों के समूह परिसंघ का निर्माण क्यों करते थे?
उत्तर:
मंगोल परिवारों के समूह आक्रमण करने तथा अपनी रक्षा करने के लिए शक्तिशाली कुलों से मिलकर परिसंघ बनाते थे।

प्रश्न 30.
चंगेज खान द्वारा बनाये गए परिसंघ की तुलना किसके परिसंघ से की गई है ?
उत्तर:
चंगेज खान द्वारा बनाया गया परिसंघ पाँचवीं शताब्दी के अट्टीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के बराबर था।

प्रश्न 31.
चंगेज खान द्वारा स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के स्थायी होने का क्या कारण था ?
उत्तर:
यह व्यवस्था चीन, ईरान और पूर्वी यूरोपीय देशों की उन्नत शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेनाओं का मुकाबला करने में सक्षम थी।

प्रश्न 32.
मंगोलों को व्यापार और वस्तु-विनिमय के लिए किस देश के लोगों के पास जाना पड़ता था और क्यों?
उत्तर:
स्टेपी क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण मंगोलों को व्यापार और वस्तु विनिमय के लिए चीन के लोगों के पास जाना पड़ता था।

प्रश्न 33.
चीन के साथ किन वस्तुओं का व्यापार किया जाता था?
उत्तर:
मंगोल कबीले खेती से प्राप्त उत्पादों तथा लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे तथा घोड़े, फर और स्टेपी में पकड़े गए शिकार का विनिमय करते थे

प्रश्न 34.
वाणिज्यिक क्रिया-कलापों में मंगोलों को चीनियों के साथ तनाव का सामना क्यों करना पड़ता था ?
उत्तर:
क्योंकि मंगोल और चीनी दोनों ही अधिक लाभ प्राप्त करने की होड़ में निडरतापूर्वक सैनिक कार्यवाही कर बैठते थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 35.
चंगेज खान कौन था ?
उत्तर:
चंगेज खान मंगोलों का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था।

प्रश्न 36.
चंगेज खान स्टेपी क्षेत्र की राजनीति में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में क्यों उभरा और कंब ?
उत्तर:
1206 में चंगेज खान अपने शक्तिशाली प्रतिद्वन्द्वी जमूका तथा नेमन लोगों को निर्णायक रूप से पराजित करने के बाद सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरा।

प्रश्न 37.
1206 में अपने प्रतिद्वन्द्वियों को पराजित करने के कारण तेमुजिन को किन उपाधियों से विभूषित किया गया?
उत्तर:
तेमुजिन को ‘चंगेज खान’, ‘समुद्री खान’ या ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधियों से विभूषित किया गया और उसे मंगोलों का महानायक घोषित किया गया।

प्रश्न 38.
चंगेज खान की चीन – विजय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1209 में चंगेज खान ने चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों के सी – सिआ लोगों को पराजित किया और 1215 में पेकिंग नगर को खूब लूटा

प्रश्न 39.
1219 और 1221 तक चंगेज खान के सैनिक अभियानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1219 और 1221 तक चंगेज खान ने अपने सैनिक अभियान किये और ओट्रार, बुखारा, समरकन्द, बल्ख, गंज, मर्व, निशापुर तथा हेरात पर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 40.
चंगेज खान ने निशापुर में कत्ले-आम का आदेश क्यों दिया?
उत्तर:
निशापुर में घेरा डालने के दौरान एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दिये जाने के कारण ।

प्रश्न 41.
निशापुर नगर को ध्वस्त किये जाने के चंगेज खान के आदेश का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर:
चंगेज खान ने आदेश दिया कि “नगर को इस तरह विध्वंस किया जाए कि सम्पूर्ण नगर में हल चलाया जा सके। ”

प्रश्न 42.
चंगेज खान किसका पीछा करता हुआ सिन्ध प्रदेश तक पहुँच गया था और क्यों ?
उत्तर:
ख्वारिज्म के शासक मोहम्मद के पुत्र जलालखाँ का पीछा करते हुए चंगेजखाँ सिन्ध नदी के तट तक पहुँचा।

प्रश्न 43.
किन कारणों से चंगेज खान ने सिन्धु नदी के तट पर उत्तरी भारत तथा असम मार्ग से मंगोलिया वापस लौटने का विचार बदल दिया ?
उत्तर:
(1) भारत में गर्मी असहनीय थी।
(2) प्राकृतिक आवास की कठिनाइयाँ थीं।
(3) चंगेज खान के शमन निमितज्ञ ने अशुभ संकेत दिए थे।

प्रश्न 44.
अपने शत्रुओं के विरुद्ध चंगेज खान को प्राप्त हुई सैनिक सफलताओं के दो कारण लिखिए।
उत्तर:
(1) मंगोलों और तुर्कों के घुड़सवारी कौशल ने चंगेज खान की सेना को गतिशीलता प्रदान की थी।
(2) मंगोल सैनिक कुशल तीरंदाज थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 45.
चंगेज खान की मृत्यु के बाद मंगोल साम्राज्य को किन दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर:
(1) पहला चरण 1236-1242 तक।
(2) दूसरा चरण 1255-1300 तक।

प्रश्न 46.
1260 के दशक के बाद मंगोलों की राजनीति में नई राजनीतिक प्रवृत्तियों के उदय होने के क्या संकेत थे?
उत्तर:
(1) मंगोलों को हंगरी के स्टेपी- क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा।
(2) मंगोलों को मिस्र की सेनाओं ने पराजित कर दिया था।

प्रश्न 47.
पश्चिम में मंगोलों का विस्तार क्यों रुक गया था ? दो कारण बताइए।
उत्तर:
(1) मंगोलों को मिस्र की सेना के हाथों पराजित होना पड़ा।
(2) मंगोलों के तोलूई परिवार की चीन के प्रति रुचि निरन्तर बढ़ रही थी।.

प्रश्न 48.
मंगोलों को मिस्र की सेना के हाथों क्यों पराजित होना पड़ा ?
उत्तर:
मंगोलों ने मिस्र की सेना का मुकाबला करने के लिए एक छोटी और अपर्याप्त सेना भेजी थी।

प्रश्न 49.
चंगेजखान के सैनिक संगठन का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चंगेजखान ने स्टेपी क्षेत्र की पुरानी दशमलव पद्धति के अनुसार अपनी सेना का गठन किया जो दस, सौ, हजार और दस हजार सैनिकों की इकाई में विभाजित थी।

प्रश्न 50.
नवीन सैनिक टुकड़ियाँ किसके अधीन थीं? उन्हें क्या कहा जाता था ?
उत्तर:
नवीन सैनिक टुकड़ियाँ चंगेज खान के चार पुत्रों के अधीन थीं और विशेष रूप से चयनित कप्तानों के अधीन कार्य करती थीं। इन्हें ‘नोयान’ कहा जाता था।

प्रश्न 51.
उलुस का गठन किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
चंगेज खान ने अपने नव-विजित प्रदेशों पर शासन करने का भार अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इससे उलुस का गठन हुआ।

प्रश्न 52.
चंगेज खान के पुत्रों को शासन करने के लिए कौन-कौनसे प्रदेश प्राप्त हुए? दो का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) चंगेज खान के सबसे ज्येष्ठ पुत्र जोची को रूसी स्टेपी प्रदेश तथा
(2) उसके दूसरे पुत्र चघताई को तूरान का स्टेपी- प्रदेश तथा पामीर के पहाड़ का उत्तरी क्षेत्र प्राप्त हुआ।

प्रश्न 53.
चंगेज खान की हरकारा पद्धति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
चंगेज खान ने एक चुस्त हरकारा पद्धति अपना रखी थी जिससे राज्य के दूरदराज के स्थानों में परस्पर सम्पर्क रखा जाता था।

प्रश्न 54.
‘कुकुर कर’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
चंगेज खान की हरकारा पद्धति की संचार पद्धति की व्यवस्था करने के लिए मंगोल अपने पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे। इसे ‘कुबकुर कर’ कहते थे।

प्रश्न 55.
हरकारा पद्धति मंगोल शासकों के लिए किस प्रकार उपयोगी सिद्ध हुई ?
उत्तर:
हरकारा पद्धति से मंगोल शासकों को अपने विस्तृत महाद्वीपीय साम्राज्य के सुदूर स्थानों में होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलती रहती थी।

प्रश्न 56.
विजित लोगों को अपने नवीन यायावर शासकों से कोई लगाव नहीं था। इसके दो कारण बताइये।
उत्तर:
(1) मंगोलों द्वारा किये गए आक्रमणों के फलस्वरूप नव- – विजित क्षेत्रों में अनेक नगर नष्ट कर दिए गए थे।
(2) कृषि भूमि को भारी हानि हुई थी।

प्रश्न 57.
यायावर शासकों के विरुद्ध ईरान में असन्तोष क्यों था ?
उत्तर:
यायावर शासकों के निरन्तर आक्रमणों के फलस्वरूप ईरान में अस्थिरता उत्पन्न हुई जिससे वहाँ नहरों की नियमित रूप से मरम्मत नहीं करवाई जा सकी।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 58.
मंगोलों के सैनिक अभियानों में विराम आने से व्यापार की उन्नति क्यों हुई ?
उत्तर:
मंगोलों के सैनिक अभियानों में विराम आने और शान्ति स्थापित होने से यूरोप और चीन के व्यापारिक सम्बन्ध घनिष्ठ हो गए।

प्रश्न 59.
मंगोलों ने अपने साम्राज्य में यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए क्या व्यवस्था की थी ?
उत्तर:
मंगोल अपने साम्राज्य में सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को पास देते थे। इस सुविधा के लिए यात्री ‘बाज’ नाम कर देते थे।

प्रश्न 60.
उन दो मंगोल शासकों के नाम लिखिए जिन्होंने कृषकों की भलाई एवं रक्षा करने पर बल दिया था।
उत्तर:
(1) चंगेजखान का पौत्र कुबलई ख़ान
(2) चंगेजखान के सबसे छोटे पुत्र तोलूई का वंशज गजेन खान।

प्रश्न 61.
गजन खान ने कृषकों के बारे में अपने मंगोल – तुर्की यायावर सेनापतियों को क्या आदेश दिया था ?
उत्तर:
गजन खान ने अपने सेनापतियों को आदेश दिया था कि वे कृषकों का अपमान न करें और उनसे अनाज तथा बीज न छीनें।

प्रश्न 62.
मंगोलों द्वारा विजित राज्यों से नागरिक प्रशासकों को अपने यहाँ भर्ती करने से क्या लाभ हुए?
उत्तर:
इन नागरिक प्रशासकों ने दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में सहायता दी और इनके प्रभाव से मंगोलों की लूटमार की घटनाओं में कमी आई।

प्रश्न 63.
मंगोलों की सामाजिक स्थिति कैसी थी ?
उत्तर:
मंगोलों का समाज अनेक पितृपक्षीय वंशों में बंटा हुआ था। धनी परिवार विशाल होते थे तथा उनके पास अधिक पशु और चारण भूमि होती थी।

प्रश्न 64.
चंगेज खान की दो उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) चंगेज खान ने स्थापना की। मंगोलों को संगठित किया।
(2) उसने एक शानदार पारमहाद्वीपीय साम्राज्य की

प्रश्न 65.
मंगोलों पर सबसे बहुमूल्य शोध कार्य किस देश के विद्वानों ने किया ?
उत्तर:
मंगोलों पर सबसे बहुमूल्य शोध कार्य अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी में रूस के विद्वानों ने किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यायावर साम्राज्य से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यायावर साम्राज्य – यायावर साम्राज्य की अवधारणा विरोधात्मक प्रतीत होती है। यह तर्क दिया जा सकता है कि यायावर लोग मूलतः घुमक्कड़ होते हैं तथा ये सापेक्षिक तौर पर एक अविभेदित आर्थिक जीवन और प्रारंभिक राजनीतिक संगठन के साथ परिवारों के समूहों में संगठित होते हैं। दूसरी ओर, साम्राज्य शब्द भौतिक अवस्थितियों को दर्शाता है। साम्राज्य ने जटिल सामाजिक-आर्थिक ढाँचे में स्थिरता प्रदान करने की और एक सुपरिष्कृत प्रशासनिक व्यवस्था के द्वारा एक व्यापक भू-भागीय प्रदेश में सुचारु रूप से शासन प्रदान किया गया। यहाँ यायावर साम्राज्य से आशय मध्य एशिया के मगोल यायावर लोगों द्वारा 13वीं तथा 14वीं शताब्दी में चंगेज खां के नेतृत्व में स्थापित पारद्वीपीय साम्राज्य से है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 2.
‘बर्बर’ शब्द की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
‘बर्बर’ शब्द यूनानी भाषा के ‘बारबरोस’ शब्द से उत्पन्न हुआ है। जिसका तात्पर्य गैर-यूनानी लोगों से है जिनकी भाषा यूनानियों को बेतरतीब शोर ‘बर-बर’ के समान लगती थी। यूनानी पुस्तकों में बर्बरों को बच्चों की भाँति प्रदर्शित किया गया है जो अच्छी तरह से बोलने या सोचने में असमर्थ, कायर, विलासी, क्रूर, आलसी, लालची, स्त्री- लोलुप तथा स्व-शासन का संचालन करने में असमर्थ थे। यह रूढ़िगत धारणाएँ रोमवासियों को प्राप्त हुईं। रोमवासियों ने बर्बर शब्द का प्रयोग, जर्मन जनजातियों गाल और हूण जैसे लोगों के लिए किया। चीनियों ने स्टेपी क्षेत्र के बर्बरों के लिए दूसरे शब्दों का प्रयोग किया, परन्तु उनमें से किसी भी शब्द के सकारात्मक अर्थ नहीं थे।

प्रश्न 3.
“चंगेजख़ान की राजनैतिक दूरदर्शिता मध्य- एशिया के स्टेपी- प्रदेश मंगोल जातियों का एक महासंघ मात्र बनाने से कहीं अधिक दूरगामी थी। ” स्पष्ट कीजिए। उसके वंशजों ने चंगेजखान के स्वप्न को कैसे साकार किया?
उत्तर:
चंगेजखान का विश्वास था कि उसे ईश्वर से विश्व पर शासन करने का आदेश मिला था। यद्यपि उसका अपना जीवन मंगोल जातियों पर अधिकार करने तथा साम्राज्य से लगे हुए क्षेत्र जैसे उत्तरी चीन, तूरान, अफगानिस्तान, पूर्वी ईरान, रूसी स्टेपी प्रदेशों के विरुद्ध सैनिक अभियानों का संचालन करने में व्यतीत हुआ, फिर भी उसके वंशजों ने इस क्षेत्र से आगे बढ़कर चंगेज खान के स्वप्न को पूरा किया एवं विश्व के सबसे विशाल साम्राज्य की स्थापना की। चंगेजखान की महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने के उद्देश्य से उसके एक दूसरे पौत्र बाटू ने 1236-1241 की अवधि में सैनिक अभियान करते हुए रूस की भूमि को मास्को तक रौंद डाला और पोलैण्ड, हंगरी पर विजय प्राप्त करता हुआ वियना तक पहुँच गया। चीन के अधिकांश भाग, मध्य-पूर्व एशिया तथा यूरोप यह मानने लगे कि चंगेजखान की विश्व पर विजय ‘ईश्वर का क्रोध’ है और यह कयामत के दिन की शुरुआत है।

प्रश्न 4.
1220 में चंगेजखान की बुखारा – विजय का फारसी इतिहासकार जुवैनी ने क्या विवरण प्रस्तुत किया है?
उत्तर:
परवर्ती तेरहवीं शताब्दी के ईरान के मंगोल शासकों के एक फारसी इतिहासकार जुनैनी ने 1220 ई. में चंगेज खाँ की बुखारा – विजय का वृत्तान्त दिया है। उसने लिखा है कि बुखारा नगर की विजय के बाद चंगेजखान उत्सव मैदान में गया और वहाँ पर एकत्रित धनी व्यापारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि, ” अरे लोगो ! तुम्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि तुम लोगों ने अनेक पाप किए हैं और तुम में से जो अधिक सम्पन्न लोग हैं, उन्होंने सबसे अधिक पाप किए हैं।

यदि तुम मुझसे पूछो कि इसका मेरे पास क्या प्रमाण है, तो इसके लिए मैं कहूँगा कि मैं ईश्वर का दण्ड हूँ । यदि तुमने पाप न किए होते, तो ईश्वर ने मुझे दण्ड हेतु तुम्हारे पास न भेजा होता।” जुवैनी के अनुसार बुखारा पर अधिकार होने के बाद कोई व्यक्ति खुरासान भाग गया था। जब वहाँ के लोगों ने उस व्यक्ति से बुखारा नगर के भाग्य के विषय में पूछा तो उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, “वे (मंगोल) नगर में आए, दीवारों को ध्वस्त कर दिया, जला दिया, लोगों की हत्या की, उन्हें लूटा और चल दिए।”

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 5.
मंगोल कौन थे?
उत्तर:
मंगोल – मंगोल विविध जनसमुदाय का एक निकाय था। ये लोग पूर्व में तातार, खितान और मंचू लोगों से और पश्चिम में तुर्की कबीलों से भाषागत समानता के कारण परस्पर सम्बद्ध थे। कुछ मंगोल पशुपालक थे और कुछ शिकारी संग्राहक थे। ये लोग यायावर लोग थे। उनका यायावरीकरण मध्य एशिया की चारण भूमि (स्टेपीज) में हुआ और शिकारी- संग्राहक लोग पशुपालकों के आवास क्षेत्र के उत्तर में साइबेरियायी वनों में रहते थे।

प्रश्न 6.
मंगोल कबीलों की मुख्य विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
मंगोल कबीलों की मुख्य विशेषताएँ –
(i) मंगोल कबीले नृजातीय और भाषायी संबंधों के कारण परस्पर. जुड़े हुए थे। परन्तु उपलब्ध आर्थिक संसाधनों के अभाव के कारण उनका समाज अनेक पितृवंशीय वंशों में विभाजित था।
(ii) मंगोल कबीलों में धनी परिवार विशाल होते थे। उनके पास अधिक संख्या में पशु और चारण भूमि होती थी। स्थानीय राजनीति में उनका दबदबा था। इसलिए उनके अनेक अनुयायी होते थे।
(iii) समय-समय पर आने वाली आपदाओं- भीषण शीत ऋतु या वर्षा का न होना आदि-के कारण इन्हें. चरागाहों की खोज में भटकाना पड़ता था। इस दौरान उनमें संघर्ष होता था और वे पशुधन प्राप्त करने हेतु लूटपाट भी करते थे।
(iv) प्रायः परिवारों के समूह आक्रमण करने और अपनी रक्षा करने हेतु अधिक शक्तिशाली और सम्पन्न कुलों से मित्रता कर लेते थे और परिसंघ बना लेते थे।
(v) मंगोल कबीलों में कुछ पशुपालक थे और कुछ शिकारी-संग्राहक। इन्होंने कृषि कार्य नहीं अपनाया था।

प्रश्न 7.
मंगोल परिसंघ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मंगोल परिसंघ – मंगोलों ने अपने परिसंघ बना लिए थे। प्रायः ये परिसंघ बहुत छोटे तथा अल्पकालिक होते थे। चंगेज खान ने मंगोल तथा तुर्की कबीलों को मिलाकर एक परिसंघ बनाया था जो पाँचवीं शताब्दी के अट्टीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के बराबर था। अट्टीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के विपरीत चंगेजखान की राजनीतिक व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी रही और चंगेजखान की मृत्यु के बाद भी यह व्यवस्था बनी रही। यह परिसंघ व्यवस्था इतनी सुदृढ़ और स्थायी थी कि यह चीन, ईरान और पूर्वी यूरोपीय देशों की उन्नत शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेनाओं का मुकाबला करने में सक्षम थी। मंगोलों ने इन क्षेत्रों में नियन्त्रण स्थापित किया तथा जटिल कृषि अर्थव्यवस्थाओं एवं नगरीय आवासों वाले स्थानबद्ध समाजों का कुशलतापूर्वक प्रशासन किया। मंगोलों के अपने सामाजिक अनुभव तथा रहन-सहन के तरीके इनसे बिल्कुल ही अलग थे।

प्रश्न 8.
मंगोलों के काल में स्टेपी क्षेत्रों में कोई नगर क्यों नहीं स्थापित हो पाया?
उत्तर:
मंगोल विविध प्रकार के लोगों का जनसमुदाय था। ये लोग मूलतः घुमक्कड़ थे। मंगोलों में कुछ लोग पशुपालक थे, तो कुछ लोग शिकारी-संग्राहक थे। इन्होंने कृषि व्यवस्था को नहीं अपनाया था। इनकी पशुपालन और शिकार – संग्राहक अर्थव्यवस्थाएँ भी घनी आबादी के भरण-पोषण में असमर्थ थीं। यही कारण था कि उनके काल में कोई भी नगर स्थापित नहीं हो सका।

प्रश्न 9.
मंगोलों के चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मंगोलों के चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध-स्टेपी क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण मंगोलों को व्यापार एवं वस्तु-विनिमय के लिए चीन के लोगों के पास जाना पड़ता था । यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभदायक थी। मंगोल खेती से प्राप्त उत्पादों तथा लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे और घोड़े, फर और शिकार का विनिमय करते थे।

व्यापारिक गतिविधियों के कारण दोनों पक्षों में तनावपूर्ण वातावरण बना रहता था, क्योंकि दोनों पक्ष अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से एक-दूसरे के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही कर बैठते थे। व्यापार करते समय मंगोल, चीनी लोगों को व्यापार में उत्तम शर्तें रखने के लिए विवश कर देते थे। कभी-कभी ये लोग व्यापारिक सम्बन्धों की परवाह न करते हुए केवल लूटपाट करने लगते थे। मंगोल लूटपाट कर संघर्ष – क्षेत्र से दूर भाग जाते थे जिससे उन्हें बहुत कम हानि होती थी।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 10.
चंगेजखान की सैनिक सफलताओं के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
(1) मंगोलों और तुर्कों के घुड़सवारी कौशल ने चंगेजखान की सेना को गति प्रदान की थी।
(2) घोड़े पर सवार होकर मंगोल सैनिकों की तीरन्दाजी का कौशल अद्भुत था। उनकी इस तीरन्दाजी ने उनकी सैनिक गति को बहुत तेज़ कर दिया था।
(3) स्टेपी- क्षेत्र के घुड़सवार सदैव फुर्तीले रहते थे तथा बड़ी तीव्र गति से यात्रा करते थे।
(4) मंगोलों को अपने आसपास के क्षेत्रों तथा मौसम की जानकारी हो गई थी । इसने उन्हें सफल सैनिक अभियान करने की क्षमता प्रदान की क्योंकि मंगोल अपने अभियान शीत ऋतु में प्रारंभ करते थे। वे शत्रु के शिविरों और नगरों में प्रवेश करने के लिए बर्फ से जमी हुई नदियों का प्रयोग राजमार्गों की तरह करते थे।
(5) चंगेज खान को पता था कि घेराबंदी – यंत्र और नेफ्था बमबारी के अभाव में प्राचीरों से आरक्षित किलों पर विजय प्राप्त करना दुष्कर था। अतः उसने अपनी सैन्य टुकड़ियों को इनके प्रयोग में कुशल बनाया।
(6) चंगेजखान के इन्जीनियरों ने उसके शत्रुओं के विरुद्ध अभियानों में प्रयोग के लिए हल्के चल-उपस्करों का निर्माण किया। ये चल – उपस्कर शत्रुओं के लिए घातक सिद्ध हुए।

प्रश्न 11.
‘उलुस’ से क्या तात्पर्य है? उलुस का गठन किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
उलुस से तात्पर्य – उलुस शब्द का मूल अर्थ निश्चित भू-भाग नहीं था। इस भू-भाग में परिवर्तन होता रहता था। चंगेजखान अभी भी निरन्तर विजय प्राप्त करने तथा साम्राज्य का अधिक से अधिक विस्तार करने के लिए प्रयत्नशील था। इस साम्राज्य की सीमाएँ अत्यन्त परिवर्तनशील थीं।
चार उलुस – चंगेजखान ने अपने नव – विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इससे ‘उलुस’ का गठन हुआ। ये चार उलुस थे-
(1) चंगेजखान के सबसे बड़े पुत्र जोची को रूसी स्टेपी- प्रदेश प्राप्त हुआ। परन्तु उसकी दूरस्थ सीमा अर्थात् उलुस निर्धारित नहीं थी।
(2) चंगेजखान के दूसरे पुत्र चघताई को तूरान का स्टेपी- क्षेत्र तथा पामीर के पहाड़ का उत्तरी क्षेत्र प्राप्त हुआ था।
(3) चंगेजखान ने संकेत दिया था कि उसका तीसरा पुत्र ओगोदेई उसका उत्तराधिकारी होगा और उसे ‘महान खान’ की उपाधि प्रदान की जाएगी। ओगोदेई ने अपने राज्याभिषेक के बाद अपनी राजधानी कराकोरम में स्थापित की था।
(4) चंगेजखान के सबसे छोटे पुत्र तोलोए ने अपनी पैतृक भूमि मंगोलिया को प्राप्त किया।
चंगेजखान चाहता था कि उसके पुत्र परस्पर मिलजुल कर साम्राज्य का शासन करें। अतः उसने राजकुमारों के लिए अलग-अलग सैनिक टुकड़ियाँ नियुक्त कर दीं जो प्रत्येक उलुस में तैनात रहती थीं।

प्रश्न 12.
चंगेजखान की हरकारा पद्धति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चंगेजखान की हरकारा पद्धति – चंगेजखान ने एक फुर्तीली हरकारा पद्धति (संचार पद्धति) अपना रखी थी जिससे राज्य के दूर-दूर के स्थानों में परस्पर सम्पर्क बना रहता था। हरकारा पद्धति के सफल संचालन के लिए अपेक्षित दूरी पर सैनिक चौकियाँ स्थापित की गई थीं। इन चौकियों में स्वस्थ और शक्तिशाली घोड़े तथा घुड़सवार सन्देशवाहक नियुक्त रहते थे। इस संचार पद्धति के संचालन के लिए मंगोल यायावर अपने पशु-समूहों से घोड़े अथवा अन्य पशुओं का दसवाँ भाग देते थे। इसे ‘कुबकुर कर’ कहते थे। यायांवर लोग इस कर को अपनी इच्छा से देते थे जिससे उन्हें अनेक लाभ मिलते थे। चंगेजखान की मृत्यु के बाद इस हरकारा पद्धति में और भी सुधार किये गए। इस संचार पद्धति से महान खानों को अपने विस्तृत महाद्वीपीय साम्राज्य के सुदूर स्थानों में होने वाली घटनाओं की जानकारी प्राप्त हो जाती थी।

प्रश्न 13.
विजित लोगों को अपने नवीन यायावर शासकों से लगाव क्यों नहीं था? इसके क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
विजित लोगों का अपने नवीन यायावर शासकों से लगाव न होना – विजित लोगों को अपने नवीन मंगोल यायावर शासकों से कोई लगाव नहीं था। इसके निम्नलिखित कारण थे –
(1) मंगोलों ने विजित क्षेत्रों में लूटमार तथा विध्वंस की नीति अपनाई थी।
(2) तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हुए युद्धों में अनेक नगर नष्ट कर दिए थे।
(3) कृषि भूमि को काफी हानि हुई, फसलें नष्ट हो गईं।
(4) व्यापार चौपट हो गया तथा शिल्प उद्योगों को प्रबल आघात पहुँचा।
(5) इन युद्धों में हजारों लोग मारे गये और इससे भी अधिक लोग दास बना लिए गए।
इस प्रकार मंगोलों की लूटमार तथा विध्वंस की नीति से संभ्रान्त लोगों से लेकर कृषक वर्ग तक समस्त लोगों को भारी कष्टों का सामना करना पड़ा।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

परिणाम –
(1) मंगोलों के निरन्तर धावों तथा लूटमार की नीति से राज्य में अस्थिरता फैल गई। इस अस्थिरता से ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों का मरम्मत का कार्य नियमित रूप से न हो सका।
(2) नहरों की मरम्मत न होने से मरुस्थल फैलने लगा जिससे बहुत बड़ा पारिस्थितिक विनाश हुआ।

प्रश्न 14.
तेरहवीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य में यायावरों और स्थानबद्ध समुदायों में संघर्ष कम होने से क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य में यायावरों और स्थानबद्ध समुदायों में संघर्ष कम होते गए। इससे कृषि को प्रोत्साहन मिला। उदाहरण के लिए, 1230 ई. के दशक में जब मंगोलों ने उत्तरी चीन के चिन वंश के विरुद्ध युद्ध में विजय प्राप्त की, तो मंगोल नेताओं के एक क्रुद्ध वर्ग ने यह विचार प्रकट किया कि समस्त कृषकों का वध कर दिया जा तथा उनकी कृषि भूमि को चरागाह में बदल दिया जाए । परन्तु 1270 के दशक के आते-आते शुंग वंश को पराजित करने के बाद दक्षिण चीन को मंगोल – साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया गया। इस अवसर पर चंगेजखान का पौत्र कुबलई खान कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में प्रकट हुआ। चंगेज़खान के सबसे छोटे पुत्र तोलूई के वंशज गज़नखान ने अपने परिवार के सदस्यों और अन्य सेनापतियों को आदेश दिया था कि वे कृषकों को न लूटें। एक बार अपने भाषण के दौरान उसने कहा था कि कृषकों को सताने और लूटने से राज्य में स्थायित्व और समृद्धि नहीं आती। मंगोलों के इस नवीन दृष्टिकोण से कृषि की उन्नति को प्रोत्साहन मिला।

प्रश्न 15.
मंगोल वंश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मंगोल वंश-चंगेजखान के अनेक बच्चे थे। उनकी पटरानी बोरेत ने चार पुत्रों को जन्म दिया जिन्होंने उनके वंश को आगे बढ़ाया।
(1) उनके ज्येष्ठ पुत्र जोची के परिवार में कोई भी शूरवीर (प्रसिद्ध खान) उत्पन्न नहीं हुआ, परन्तु उस परिवार के पास अपार शक्ति थी।
(2) गोमुक की मृत्यु के बाद जोची के पुत्र बातू ने ओगोदेई के वंश को समर्थन देने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप शक्ति तोलुई परिवार के हाथों में आ गई जिससे मोन्के और कुबलई के लिए सत्ता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

प्रश्न 16.
अपने यायावर सेनापतियों को गजन खान द्वारा दिए गए भाषण का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गजनखान का भाषण – गजनखान (1295-1304) चंगेजखान के सबसे छोटे पुत्र तोलुई का वंश था। उसने अपने मंगोल-तुर्की यायावर सेनापतियों के सामने निम्न भाषण दिया “मैं फारस के कृषक वर्ग के पक्ष में नहीं हूँ। यदि उन सबको लूटने का कोई उद्देश्य है, तो ऐसा करने के लिए मेरे से अधिक शक्तिशाली और कोई नहीं है। चलो हम सब मिलकर उन्हें लूटते हैं। परन्तु यदि आप निश्चित रूप से भविष्य में अपने भोजन के लिए अनाज और भोज्य सामग्री इकट्ठा करना चाहते हैं, तो मुझे आपके साथ कठोर होना पड़ेगा। आपको तर्क और बुद्धि से काम लेना सिखाना पड़ेगा। यदि आप कृषकों का अपमान करेंगे, उनसे उनके बैल और अनाज के बीज छीन लेंगे और उनकी फसलों को कुचल डालेंगे, तो आप भविष्य में क्या करेंगे? एक आज्ञाकारी कृषक वर्ग तथा एक विद्रोही कृषक वर्ग में अन्तर समझना आवश्यक है। ”

प्रश्न 17.
मंगोलों के विजित राज्यों से भर्ती किए गए नागरिक प्रशासकों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
चंगेजखान के शासन काल से ही मंगोलों ने विजित राज्यों से नागरिक प्रशासकों को अपने यहाँ भर्ती करना शुरू कर दिया था। इन प्रशासकों की भूमिका इस प्रकार रही –
(i) इन्होंने दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में सहायता की।
(ii) इन नागरिक प्रशासकों के प्रभाव से खानाबदोश लोगों की स्थानबद्ध क्षेत्र में की जाने वाली लूटमार में भी कमी आई।
(iii) इनमें से कुछ प्रशासक काफी प्रभावशाली थे और अपने प्रभाव का उपयोग मंगोल खानों पर भी करते रहते थे । उदाहरण के लिए, 1230 के दौरान चीनी मन्त्री ये-लू – चुत्साई ने ओगोदेई की लूटमार की प्रवृत्ति को बदल दिया था। जुवैनी परिवार ने भी ईरान में तेरहवीं शताब्दी में और उसके अन्त में इसी प्रकार की भूमिका निभाई थी। ईरान के वजीर रशीदुद्दीन ने मंगोल – शासक गजनखान के लिए वह भाषण लिखा था जो उसने अपने मंगोल सेनापतियों के सामने दिया था । इस भाषण में गजनखान ने कृषक वर्ग को सताने की बजाय, उनकी रक्षा करने की सलाह दी थी।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

प्रश्न 18.
13वीं सदी में चंगेजखान के वंशज पृथक्-पृथक् वंश समूहों में किस प्रकार बँट गए?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक भाइयों द्वारा पिता के धन को मिल-बाँट कर उपयोग करने की बजाय व्यक्तिगत राजवंश बनाने की भावना प्रबल हो गई। प्रत्येक राजवंश अपने ‘उलुस’ (अधिकृत क्षेत्र) का स्वामी हो गया । यह कुछ अंशों तक उत्तराधिकार के लिए संघर्ष का परिणाम था जिसमें चंगेजखान के वंशजों के बीच ‘महान’ पद के लिए तथा श्रेष्ठ चरागाही भूमि प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्द्धा होती थी। चीन और ईरान दोनों पर शासन करने के लिए आए तोलुई के वंशजों ने युआन तथा इल- खानी वंशों की स्थापना की। जोची ने ‘सुनहरा गिरोह’ का गठन किया और रूस के स्टेपी क्षेत्रों पर शासन किया। चघताई के उत्तराधिकारियों ने तूरान के स्टेपी- क्षेत्रों पर राज किया। इसे आजकल तुर्किस्तान कहा जाता है।

प्रश्न 19.
चंगेज खाँ के वंशजों का धीरे-धीरे अलग होकर पृथक्-पृथक् वंश-समूहों में बँट जाना किस बात का प्रतीक था ?
उत्तर:
चंगेज खान के वंशजों का धीरे-धीरे अलग होकर पृथक्-पृथक् वंश – समूहों में बँट जाने का मतलब था कि उनका अपने पिछले परिवार से जुड़ी स्मृतियों और परम्पराओं के सामंजस्य में परिवर्तन आना। यह सब एक कुल के सदस्यों में परस्पर होड़ के परिणामस्वरूप हुआ था। यह सब चीन और ईरान पर उनके प्रभुत्व का तथा उनके परिवार के सदस्यों द्वारा विद्वानों को अपने दरबार में संरक्षण देने का परिणाम था। अतीत से अलग होने का कारण यह था कि चंगेज खान के वंशज महान खानों की अपेक्षा अपने गुणों का प्रदर्शन करना चाहते थे।

इल-खानी ईरान में तेरहवीं शताब्दी के अन्त में फारसी इतिहासवृत्त में महान खानों द्वारा की गईं रक्तरंजित हत्याओं का विस्तृत विवरण मिलता है। इसमें मृतकों की संख्या बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई है। चंगेज खान के वंशजों को उत्तराधिकार में जो कुछ मिला, वह महत्त्वपूर्ण था परन्तु उनके सामने एक समस्या यह थी कि एक स्थानबद्ध समाज में अपनी धाक किस प्रकार स्थापित की जाए। इस बदली हुई परिस्थिति में वे वीरता का वह चित्र प्रस्तुत नहीं कर सकते थे, जैसा चंगेजखान ने किया था।

प्रश्न 20.
‘नोयान’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
चंगेज खान एक महान योद्धा एवं कुशल सेनापति था। उसकी सेना पुरानी दशमलव पद्धति के अनुसार गठित की गई थी जो दस सौ हजार और लगभग दस हजार सैनिकों की इक़ाई में विभाजित थी। चंगेजखान ने इस पद्धति को समाप्त करके मंगोलों को नई सैनिक इकाइयों में बाँट दिया। इन नई सैनिक टुकड़ियों को, जो उसके चार पुत्रों के अधीन थीं और विशेष रूप से चयनित कप्तानों के अधीन कार्य करती थी, ‘नोयान’ कहा जाता था। इस नई व्यवस्था में चंगेज खाँ के अनुयायियों का वह समूह भी सम्मिलित था, जिन्होंने संकटपूर्ण परिस्थितियों में भी निष्ठापूर्वक चंगेज खाँ का साथ दिया था।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मंगोलों के इतिहास की जानकारी के विभिन्न स्रोतों की विवेचना कीजिए।
अथवा
मंगोलों पर हुए शोध कार्यों का विवरण दीजिए।
उत्तर-
मंगोलों के इतिहास की जानकारी के स्रोत –
मंगोलों ने प्रायः अपना कोई साहित्य नहीं रचा। इसीलिए मंगोलों के बारे में इतिवृत्तों, यात्रा-वृत्तान्तों तथा नगरीय साहित्यकारों के दस्तावेजों से जानकारी मिलती है। इन लेखकों की मंगोल – यायावरों के जीवन सम्बन्धी सूचनाएँ अपर्याप्त, दोषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण हैं। मंगोलों की साम्राज्यिक उपलब्धियों से प्रभावित होकर कुछ विद्वानों ने अपने अनुभवों के यात्रावृत्तान्त लिखे।

कुछ मंगोल शासकों के राज्याश्रय में यद्यपि इन लोगों को मंगोल रीति-रिवाजों का ज्ञान नहीं था, फिर भी इनमें से अनेक विद्वानों ने मंगोलों के विषय में सहानुभूतिपरक विवरण लिखा। कुछ ने उनकी प्रशस्तियाँ भी लिखीं। इन्होंने ऐसे विवरणों का खण्डन किया जिनमें मंगोलों को स्टेपी- क्षेत्र का लुटेरा कहा गया था। अतः मंगोलों का इतिहास हमें ऐसे तथ्य उपलब्ध कराता है जिससे यह प्रकट होता है कि मंगोल यायावरों को आदिम बर्बर के रूप में प्रस्तुत करना न्यायसंगत नहीं है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

मंगोलों पर शोध कार्य – मंगोलों पर सबसे बहुमूल्य शोध कार्य अठारहवीं तथा उन्नीसवीं शताब्दी में रूसी विद्वानों ने उस काल में किया जब रूस के शासक मध्य एशियाई क्षेत्रों में अपनी शक्ति को सुदृढ़ कर रहे थे। ये शोधकार्य प्रायः सर्वेक्षण-टिप्पणियों के रूप में मिलते हैं जिन्हें यात्रियों, सैनिकों, व्यापारियों तथा पुराविदों ने तैयार किया था । मार्क्सवादी इतिहास-लेखन ने चंगेजखान तथा उभरते हुए मंगोल – साम्राज्य को मानव विकास की उस संक्रमण व्यवस्था के अन्तर्गत रखा जिसमें जनजातीय उत्पादन प्रणाली से सामन्ती उत्पादन प्रणाली की ओर परिवर्तन हो रहा था।

मंगोल भाषाओं और उनके समाज और संस्कृति पर वोरिस याकोवालेवित्र व्लाडिमीरस्टाव नामक विद्वान ने उच्च कोटि का शोध कार्य किया है। रूस के एक अन्य विद्वान वैसिली व्लाडिमिरोविच बारटोल्ड ने चंगेजखान और उसके वंशजों के अधीन मंगोलों का जीवन और उनकी उपलब्धियों का सकारात्मक और सहानुभूतिपरक विवरण प्रस्तुत किया । यद्यपि रूसी सरकार ने उसकी रचनाओं के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध लगा दिया, परन्तु 1960 के दशक में उदारवादी ख्रुश्चेव युग के दौरान और उसके बाद ही उसकी रचनाओं को 9 खण्डों में प्रकाशित किया गया।

शोध के स्रोतों की अनेक भाषाओं में रचना – जो शोध के स्रोत विद्वानों को उपलब्ध हैं, वे अनेक भाषाओं में रचे गए हैं। इनमें सबसे निर्णायक स्रोत चीनी, मंगोली, फारसी और अरबी भाषा में उपलब्ध हैं, परन्तु महत्त्वपूर्ण सामग्रियाँ हमें इतालवी, लातिनी, फ्रांसीसी तथा रूसी भाषा में मिलती हैं। चंगेजखान के विषय में सबसे प्राचीन विवरण मंगकोल-उन-न्यूतोबिअन (मंगोलों के गोपनीय इतिहास), मंगोल और चीनी भाषा में मिलते हैं, परन्तु ये एक-दूसरे से अलग हैं। इसी प्रकार मार्कोपोलो द्वारा मंगोल राजदरबार का यात्रा – वृत्तान्त इतालवी तथा लातिनी भाषा में उपलब्ध है, परन्तु एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।

प्रश्न 2.
मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों के चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। इसके चीन पर क्या प्रभाव हुए?
उत्तर:
मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों के चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्टेपी-क्षेत्र में वर्ष में थोड़े समय के लिए ही कृषि करना सम्भव था। इसलिए मंगोल यायावरों ने कृषि कार्य को नहीं अपनाया। स्टेपी-क्षेत्र में संसाधनों की कमी थी। अतः मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों को अपने पड़ोसी देश चीन के साथ व्यापार करना पड़ता था। यायावर कबीले चीन से कृषि उत्पाद तथा लोहे के उपकरण लाते थे तथा घोड़े, फर और स्टेपी- क्षेत्र में पकड़े गए शिकार (पशु) चीनियों को देते थे। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभदायक थी। परन्तु वाणिज्यिक गतिविधियों में उन्हें प्रायः तनाव का सामना भी करना पड़ता था। इसका कारण यह था कि दोनों पक्ष अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से एक-दूसरे के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही कर बैठते थे।

चीन पर प्रभाव – जब मंगोल कबीलों के लोग साथ मिलकर व्यापार करते थे, तो वे अपने चीनी पड़ोसियों को व्यापार में उत्तम शर्तें रखने के लिए विवश कर देते थे। कभी-कभी ये लोग व्यापारिक सम्बन्धों की परवाह न करते हुए केवल लूटपाट करने लगते थे। मंगोलों का जीवन अस्त-व्यस्त होने पर ही इन सम्बन्धों में परिवर्तन होता था । ऐसी स्थिति में चीनी लोग स्टेपी क्षेत्र में अपने प्रभाव का प्रयोग बड़े आत्मविश्वास के साथ करते थे। इन सीमावर्ती झड़पों से चीन के स्थायी समाज कमजोर पड़ने लगे। मंगोलों ने कृषि को अस्त-व्यस्त कर दिया और नगरों को खूब लूटा।

दूसरी ओर मंगोल यायावर लूटपाट कर दूर भाग जाते थे, जिससे उन्हें बहुत कम हानि होती थी। दीर्घकाल तक चीनियों को इन मंगोल यायावरों से विभिन्न शासन कालों में बहुत अधिक हानि उठानी पड़ी। अतः आठवीं शताब्दी ई. पूर्व से ही अपनी प्रजा की रक्षा के लिए चीन के शासकों ने किलेबन्दी करना शुरू कर दिया था। तीसरी शताब्दी ई. पूर्व से इन किलाबन्दियों का एकीकरण करके ‘चीन की महान दीवार’ का निर्माण किया गया। उत्तरी चीन के किसानों पर यायावरों द्वारा निरन्तर किये गए आक्रमणों और उनसे उत्पन्न आतंक एवं अस्थिरता का यह एक ठोस प्रमाण है।

प्रश्न 3.
चंगेजखान के जीवन-वृत्त तथा उसकी विजयों का वर्णन कीजिए।
अथवा
चंगेजखान की सैनिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:
(1) चंगेजखान का जीवन-वृत्त – चंगेजखान का जन्म लगभग 1162 ई. में आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन नदी के निकट हुआ था। उसका प्रारम्भिक नाम तेमुजिन था। उसके पिता का नाम येसूजेई था जो कियात कबीले का मुखिया था। उसके पिता की अल्पायु में ही हत्या कर दी गई थी। अतः उसकी माता ओलुन-इके ने तेमुजिन तथा उसके सगे और सौतेले भाइयों का पालन-पोषण बड़ी कठिनाई से किया था। 1170 के दशक में तेमुजिन का अपहरण कर उसे दास बना लिया गया और उसकी पत्नी बोरटे का भी विवाह के बाद अपहरण कर लिया गया। अतः उसे अपनी धर्म पत्नी को मुक्त कराने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी।

(2) मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना – विपत्ति के इन वर्षों में भी वह अनेक मित्र बनाने में सफल रहा। नवयुवक बोघूरचू उसका पहला मित्र था जो हमेशा एक विश्वस्त साथी के रूप में उसके साथ रहा। उसका सगा भाई जमूका भी उसका एक अन्य विश्वसनीय मित्र था।

(3) प्रतिद्वन्द्वियों का दमन करना – तेमुजिन का सगा भाई जमूका कालान्तर में उसका शत्रु बन गया। 1180 तथा 1190 के दशकों में तेमुजिन ने ओंग खान की सहायता से अपने प्रबल प्रतिद्वन्द्वी जमूका को पराजित कर दिया। इसके बाद मुजिन ने अपने पिता के हत्यारे शक्तिशाली तातार कैराईट तथा ओंगखान के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया । 1206 ई. में उसने शक्तिशाली जेमूका तथा नेमन लोगों को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

(4) कुरिलताई द्वारा चंगेजखान को मान्यता प्रदान करना – 1206 ई. में अपने शक्तिशाली शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के बाद स्टेपी- क्षेत्र की राजनीति में तेमुजिन सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रकट हुआ । उसकी इस प्रतिष्ठा को मंगोल कबीले के सरदारों की एक सभा ‘कुरिलताई’ में मान्यता दी गई। इस सभा में तेमुजिन को ‘चंगेजखान’, ‘समुद्री खान’ या ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि से विभूषित किया गया और ‘मंगोलों का महानायक’ घोषित किया गया।

(5) चंगेजखान की सैनिक उपलब्धियाँ – 1206 में कुरिलताई से मान्यता प्राप्त करने से पूर्व चंगेजखान ने मंगोलों की एक शक्तिशाली एवं अनुशासित सेना का गठन किया। उसने सर्वप्रथम चीन पर विजय प्राप्त करने का निश्चय किया। उसकी प्रमुख विजयें निम्नलिखित थीं –
(1) चीन – विजय –
(1) 1209 ई. में चंगेजखान ने सी – सिआ लोगों को पराजित किया।
(2) 1213 ई. में मंगोलों ने चीन की महान दीवार का अतिक्रमण किया।
(3) 1215 ई. में मंगोलों ने पेकिंग नगर को खूब लूटा। चंगेजखान अपने सैनिक अभियानों की सफलता से पूर्णतया सन्तुष्ट था । इसलिए उस क्षेत्र के सैनिक मामले अपने अधीनस्थ अधिकारियों की देखरेख में छोड़कर 1216 में मंगोलिया स्थित अपनी मातृभूमि में लौट आया।
(4) 1218 ई. में मंगोलों ने कराखिता जाति को पराजित कर दिया जो चीन के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित तियेन- शान की पहाड़ियों को नियन्त्रित करती थी । अब मंगोलों का साम्राज्य अमूदरिया, तूरान और ख्वारिज्म राज्यों तक विस्तृत हो गया।
(2) अन्य विजयें – चंगेजखान ने अपने सैनिक अभियान जारी रखे। उसने 1219 -1221 ई. तक के अभियानों में बड़े-बड़े नगरों- ओट्रार, बुखारा, समरकन्द, बल्ख, गुरगंज, मर्व, निशापुर तथा हेरात ने मंगोल सेनाओं के सामने आत्म-समर्पण कर दिया। जिन नगरों ने मंगोल सेनाओं का प्रतिरोध किया, उनका विध्वंस कर दिया गया । निशापुर के घेरे के दौरान जब एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दी गई, तो चंगेजखान ने निशापुर के लोगों का कत्ले-आम करवा दिया। चंगेजखान ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि – ” नगर का इस तरह विध्वंस किया जाए कि सम्पूर्ण नगर में हल चलाया जा सके। ऐसा संहार किया जाए कि नगर के समस्त बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।” मध्यकालीन इतिहासकारों के अनुसार निशापुर पर अधिकार करने में 17,47,000 लोगों का वध कर दिया गया था।

(3) ख्वारिज्म पर आक्रमण – चंगेजखान ने ख्वारिज्म पर भी आक्रमण किया। मंगोल सेनाएँ ख्वारिज्म के सुल्तान मोहम्मद का पीछा करती हुई अजरबैजान तक आ पहुँचीं। उन्होंने क्रीमिया में रूसी सेनाओं को पराजित कर दिया और कैस्पियन सागर को घेर लिया। सेना की एक अन्य टुकड़ी ने सुल्तान मोहम्मद के पुत्र जलालुद्दीन का अफगानिस्तान तथा सिन्ध तक पीछा किया। सिन्धु नदी के तट पर चंगेजखान ने उत्तरी भारत तथा असम मार्ग होते हुए वापस मंगोलिया लौटने का विचार किया। परन्तु भीषण गर्मी, प्राकृतिक आवास की कठिनाइयों तथा कुछ अशुभ संकेतों ने उसे अपने विचार बदलने पर विवश कर दिया। चंगेजखान की मृत्यु – चंगेजखान को अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में व्यतीत करना पड़ा। अन्त में 1227 ई. में उसका देहान्त हो गया। उसकी सैनिक उपलब्धियाँ आश्चर्यजनक थीं।

प्रश्न 4.
चंगेजखान के बाद मंगोल साम्राज्य की राजनीतिक स्थिति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
चंगेजखान के बाद मंगोल साम्राज्य की राजनीतिक स्थिति
चंगेजखान के बाद मंगोल साम्राज्य की राजनीतिक स्थिति की विवेचना निम्नानुसार है –
(1) मंगोल साम्राज्य का दो चरणों में विभाजन – चंगेजखान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है –
(i) पहला चरण – पहला चरण 1236-1242 ई. तक था जिसके दौरान रूस के स्टेपी- क्षेत्र, बुलधार, कीव, पोलैण्ड तथा हंगरी में भारी सफलता प्राप्त की गई।
(ii) दूसरा चरण – दूसरा चरण 1255-1300 ई. तक था। इसमें मंगोलों ने समस्त चीन, ईरान, इराक तथा सीरिया पर विजय प्राप्त की।

(2) नवीन राजनीतिक प्रवृत्तियों का उदय – 1230 के बाद के दशकों में मंगोलों को महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त हुईं परन्तु उनके लिए 1260 के दशक के बाद पश्चिम के सैन्य अभियानों के प्रारम्भिक आवेग को जारी रखना सम्भव नहीं रहा। यद्यपि वियना तथा उससे परे पश्चिमी यूरोप एवं मिस्र पर मंगोलों का आधिपत्य बना रहा, परन्तु उनके हंगरी के स्टेपी- क्षेत्र से पीछे हट जाने तथा मिस्र की सेनाओं के हाथों पराजित होने से नई राजनीतिक प्रवृत्तियों के उदय होने के संकेत मिलते हैं।

(3) राजनीतिक प्रवृत्ति के दो पहलू – इस प्रवृत्ति के दो पहलू थे – पहला था – मंगोल परिवार में उत्तराधिकार को लेकर आन्तरिक राजनीति थी। इसमें जोची और ओगोदेई के उत्तराधिकारी महान् खान के राज्य पर नियन्त्रण स्थापित करने के लिए संगठित हो गए। अब वे यूरोप में अभियान करने की अपेक्षा अपने हितों की रक्षा करना अधिक महत्त्वपूर्ण मानते थे।

दूसरी स्थिति तब उत्पन्न हुई जब चंगेजखान के वंश की तोलूयिद शाखा के उत्तराधिकारियों ने जोची और ओगोदेई वंशों को कमजोर कर दिया। चंगेजखान के सबसे छोटे पुत्र तोलूई के वंशज मोंके के राज्याभिषेक के बाद 1250 ई. के दशक में ईरान में सैनिक अभियान किए गए। परन्तु 1260 के दशक में तोलूई के वंशज चीन में अपना प्रभाव बढ़ाने लगे। इसलिए उस समय सैनिकों और रसद – सामग्रियों को मंगोल साम्राज्य के मुख्य भागों की ओर भेज दिया गया।

परिणामस्वरूप मिस्र की सेना का सामना करने के लिए मंगोलों ने एक छोटी-सी सैनिक टुकड़ी भेज दी। इस स्थिति में मंगोलों को पराजय का सामना करना पड़ा मिस्र में मंगोलों की पराजय तथा तोलूई परिवार की चीन में निरन्तर बढ़ती हुई रुचि के कारण मंगोलों का पश्चिम की ओर विस्तार रुक गया। इसी दौरान रूस और चीन की सीमा पर जोची तथा तोलूई वंशों के आन्तरिक झगड़ों ने जोची वंशजों का ध्यान उनके सम्भावित यूरोपीय अभियानों से हटा दिया।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

(4) चीन में मंगोलों के अभियानों का जारी रहना – यद्यपि पश्चिम में मंगोलों का विस्तार रुक गया, परन्तु इसके बावजूद मंगोलों ने चीन में अपने अभियान जारी रखे । वस्तुतः उन्होंने चीन को एकीकृत किया।

प्रश्न 5.
चंगेजखान के सैनिक संगठन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चंगेजखान का सैनिक संगठन चंगेज खान के सैनिक संगठन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –
(1) विशाल विषमजातीय सेना का गठन – मंगोलों और अन्य अनेक यायावर समाजों में प्रत्येक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के लिए शस्त्र धारण करना अनिवार्य था। आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं लोगों से सशस्त्र सेना का गठन किया जाता था। विभिन्न मंगोल जनजातियों के एकीकरण तथा उसके विभिन्न लोगों के विरुद्ध अभियानों से चंगेजखान की सेना में नये सदस्य सम्मिलित हुए। इससे मंगोल सेना जो पहले काफी छोटी थी, अब एक विशाल विषमजातीय संगठन में बदल गई। इस सेना में मंगोलों की सत्ता को स्वेच्छा से स्वीकार करने वाले तुर्की मूल के उइगर समुदाय के लोग भी शामिल थे। इसके अतिरिक्त इस सेना में केराइट जैसे पराजित लोग भी शामिल थे जिन्हें अपनी पुरानी शत्रुता के बावजूद महासंघ में सम्मिलित कर लिया गया था।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

(2) दशमलव पद्धति पर सेना का गठन- चंगेजखान की सेना स्टेपी- क्षेत्रों की पुरानी दशमलव पद्धति के अनुसार गठित की गई थी जो दस, सौ, हजार और ( अनुमानित) दस हजार सैनिकों की इकाई में विभाजित थी । पुरानी पद्धति में कुल, कबीले और सैनिक दशमलव इकाइयाँ एकसाथ अस्तित्व में थीं। चंगेजखान ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया। उसने प्राचीन जनजातीय समूहों को विभाजित कर उनके सदस्यों को नवीन सैनिक इकाइयों में विभक्त कर दिया।

(3) कठोर अनुशासन – चंगेजखान अनुशासन पर विशेष जोर देता था। जो सैनिक अपने अधिकारी से अनुमति लिए बिना बाहर जाने की चेष्टा करता था, उसे कठोर दण्ड दिया जाता था।

(4) सैनिकों की सबसे बड़ी इकाई – सैनिकों की सबसे बड़ी इकाई लगभग दस हजार सैनिकों (तुमन) की थी, जिसमें अनेक कबीलों और कुलों के सैनिक सम्मिलित थे।

(5) नवीन सैनिक टुकड़ियाँ – नवीन सैनिक टुकड़ियाँ चंगेजखान के चार पुत्रों के अधीन थीं तथा विशेष रूप से चयनित कप्तानों के अधीन कार्य करती थीं। ये सैनिक टुकड़ियाँ ‘नोयान’ कहलाती थीं । इस नई व्यवस्था में चंगेजखान के अनुयायियों का वह समूह भी शामिल था, जिन्होंने संकटपूर्ण तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी निष्ठापूर्वक चंगेजखान का साथ दिया था। चंगेजखान ने सार्वजनिक रूप से अनेक ऐसे व्यक्तियों को आंडा (सगा भाई) कहकर सम्मानित किया था। आंडा से निम्न श्रेणी के अनेक स्वतन्त्र व्यक्ति थे, जिन्हें चंगेजखान ने अपने विशेष नौकर के पद पर रखा। नौकर का पद इन लोगों तथा इनके स्वामी के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध का प्रतीक था। इस नए वर्गीकरण से पुराने सरदारों के अधिकार सुरक्षित नहीं रहे। दूसरी ओर एक नवीन अभिजात वर्ग उभरकर सामने आया जिसने अपनी प्रतिष्ठा मंगोलों के महानायक के साथ स्थापित कर ली।

प्रश्न 6.
‘यास’ से क्या अभिप्राय है? यास ने मंगोलों की पहचान और विशिष्टता की रक्षा में क्या योगदान दिया?
उत्तर:
‘यास’ से अभिप्राय-अपने प्रारम्भिक स्वरूप में ‘यास’ को ‘यसाक’ लिखा जाता था जिसका अर्थ या विधि, आज्ञप्ति व आदेश। यसाक का सम्बन्ध प्रशासनिक विनियमों से है, जैसे आखेट, सैन्य और डाक प्रणाली का संगठन तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक, मंगोलों ने ‘यास’ शब्द का प्रयोग अधिक सामान्य रूप में करना शुरू कर दिया। – चंगेजखान की विधि – संहिता इससे तात्पर्य था अपनी पहचान और विशिष्टता की रक्षा का उपाय – तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक मंगोल एक संगठित जन- समूह के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने एक ऐसे विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसे विश्व में पहले नहीं देखा गया था।

मंगोलों ने अत्यन्त जटिल शहरी समाजों पर शासन किया जिनके अपने- अपने इतिहास, संस्कृतियाँ और नियम थे। यद्यपि मंगोलों का अपने साम्राज्य के क्षेत्रों पर राजनैतिक प्रभुत्व रहा, फिर भी संख्या की दृष्टि से वे अल्पसंख्यक ही थे। उनके लिए अपनी पहचान और विशिष्टता की रक्षा का एकमात्र उपाय उस पवित्र नियम के अधिकार के दावे के द्वारा हो सकता था, जो उन्हें अपने पूर्वजों से प्राप्त हुआ था। वास्तव में यास मंगोल जनजाति की ही प्रथागत परम्पराओं का एक संकलन था, परन्तु उसे चंगेजखान की विधि – संहिता घोषित कर मंगोलों ने भी मूसा और सुलेमान की भाँति अपने को एक स्मृतिकार के होने का दावा किया जिसकी प्रामाणिक संहिता प्रजा पर लागू की जा सकती थी।

यास का योगदान-यास मंगोलों को समान आस्था रखने वालों के आधार पर एकजुट करने में सफल हुआ। उसने चंगेजखान तथा उनके वंशजों से मंगोलों की निकटता को स्वीकार किया। यद्यपि मंगोलों ने भी स्थान – बद्ध जीवन-प्रणाली के कुछ तत्त्वों को अपना लिया था, फिर भी यास ने उनको अपनी कबीलाई पहचान बनाए रखने तथा अपने नियमों को उन पराजित लोगों पर लागू करने का साहस प्रदान किया। यास एक बहुत ही शक्तिशाली विचारधारा थी। सम्भव है कि चंगेजखान ने इस प्रकार की विधि-संहिता की कोई योजना पहले से न बनाई हो, परन्तु यह निश्चित रूप से उसकी कल्पना – शक्ति से प्रेरित था, जिसने विश्वव्यापी मंगोल साम्राज्य की संरचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 7.
चंगेजखान और मंगोलों का विश्व इतिहास में स्थान निर्धारित कीजिए।
अथवा
चंगेजखान और मंगोलों की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:
चंगेजखान और मंगोलों का विश्व इतिहास में स्थान (चंगेजखान तथा मंगोलों की उपलब्धियाँ) – आज हमारे सामने चंगेजखान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभर कर सामने आता है जो महान विजेता, नगरों को ध्वस्त करने वाला, लूटमार करने वाला और हजारों लोगों की हत्या करने वाला था । इसलिए तेरहवीं शताब्दी के चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के नगरवासी, स्टेपी- क्षेत्रों के मंगोलों को क्रोध, भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे। इसके बावजूद चंगेजखान की उपलब्धियों की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

उसकी तथा मंगोलों की उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –
(1) मंगोलों के लिए चंगेज़खान अब तक का सबसे महान शासक था। उसने मंगोलों को संगठित किया, दीर्घकाल से चली आ रही कबीलाई लड़ाइयों और चीनियों द्वारा शोषण से मुक्ति दिलाई।

(2) उसने मंगोलों को शक्तिशाली, गौरवशाली और समृद्ध बनाया।

(3) उसने एक विशाल एवं शानदार पारमहाद्वीपीय मंगोल साम्राज्य की स्थापना की।

(4) उसने व्यापार के मार्गों तथा बाजारों को पुनर्स्थापित किया जिनसे वेनिस के मार्कोपोलो की भाँति दूर के यात्री आकृष्ट हुए।

(5) चंगेजखान और मंगोलों ने अपने राज्य में विविध मतों और आस्था वाले लोगों को सम्मिलित किया।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

(6) यद्यपि मंगोल शासक स्वयं भी विभिन्न धर्मों तथा आस्थाओं से सम्बन्ध रखने वाले थे अर्थात् वे शमन, बौद्ध, ईसाई और इस्लाम से सम्बन्ध रखने वाले थे, परन्तु उन्होंने सार्वजनिक नीतियों पर अपने वैयक्तिक मत थोपने का प्रयास नहीं किया।

(7) मंगोल शासकों ने सब जातियों तथा धर्मों के लोगों को अपने यहाँ प्रशासकों तथा सैनिकों के पद पर नियुक्त किया।

(8) मंगोलों का शासन बहु-जातीय, बहु-भाषी, बहु- धार्मिक था। यह तत्कालीन युग में एक असामान्य बात थी। मंगोल अपने बाद में आने वाली शासन-प्रणालियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत कर सके। यह उनकी एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थी।

(9) यद्यपि मंगोल अनेक समुदायों में विभाजित थे, फिर भी वे एक परिसंघ बनाने में सफल रहे। प्रायः ये परिसंघ बहुत छोटे तथा अल्पकालिक होते थे। चंगेजखान ने मंगोल तथा तुर्की कबीलों को मिला कर एक परिसंघ बनाया था जो पाँचवीं शताब्दी के अट्टीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के बराबर था। अट्टीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के विपरीत चंगेज खान की राजनीतिक व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी रही और चंगेज खाँ की मृत्यु के बाद भी यह व्यवस्था बनी रही। यह परिसंघ व्यवस्था इतनी सुदृढ़ और स्थायी थी कि यह चीन, ईरान और पूर्वी यूरोपीय देशों की उन्नत शस्त्रों से सुसज्जित विशाल सेनाओं का मुकाबला करने में सक्षम थी।

(10) आज दशकों के रूसी नियन्त्रण के बाद, मंगोलिया एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उसने चंगेजखान को एक महान राष्ट्र नायक के रूप में लिया है जिसका सार्वजनिक रूप से सम्मान किया जाता है और जिसकी उपलब्धियों का वर्णन गर्व के साथ किया जाता है।

(11) मंगोलिया के इतिहास में इस निर्णायक समय पर चंगेजखान एक बार फिर मंगोलों के लिए एक आराध्य व्यक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है, जो महान अतीत की यादों को जागृत कर राष्ट्र की पहचान बनाने की दिशा में शक्ति प्रदान करेगा।

मंहत्त्वपूर्ण तिथियाँ एवं घटनाएँ

तिथिघटना
लगभग 1167तेमुजिन का जन्म
1160 और 1170दासता और संघर्ष के वर्ष
के दशक 1180 और 90सन्धि सम्बन्धों का काल
के दशक 1203-1227विस्तार और विजय
1206तेमुजिन को चंगेजखान यानी मंगोलों का ‘सार्वभौम शासक’ घोषित किया गया।
1227चंगेजखान की मृत्यु।
1227-1241चंगेजखान के पुत्र ओगोदेई का शासन-काल।
1227-1260तीन महान खानों का शासन और मंगोल-एकता की स्थापना।
1236-1242बाटू के अधीन रूस, हंगरी, पोलैण्ड और आस्ट्रिया पर आक्रमण। बाटू चंगेजखान के सबसे बड़े पुत्र जोची का पुत्र था।
1246-1249ओगोदेई के पुत्र गुयूक का काल।
1251-1260मोंके, चंगेजखान के पौत्र और तुलू के पुत्र का काल।
1253-1255मोंके के अधीन ईरान और चीन में पुनः आक्रमण।
1257-1267बाटू के पुत्र बर्के का राज्य-काल। सुनहरा गिरोह का नेस्टोरियन ईसाई-धर्म से इस्लाम धर्म की ओर पुनः प्रवृत्त होना। 1350 के दशक में उनका इस्लाम में निश्चयात्मक रूप से धर्मांतरण हुआ। इल-खान के विरुद्ध गोल्डन होर्ड और मिस्र देश की मैत्री का प्रारम्भ।
1258बगदाद पर अधिकार और अब्बासी खिलाफत का अन्त। मोंके के छोटे भाई हुलेगु के अधीन ईरान में इल-खानी राज्य की स्थापना। जोचिद और इल-खान के बीच संघर्ष की शुरुआत।
1260पेकिंग में ‘महान खान’ के रूप में कुबलई खान का राज्यारोहण। चंगेजखान के उत्तराधिकारियों में संघर्ष। मंगोल-राज्य का अनेक स्वतन्त्र भागों में अनेक वंशों में विभाजन-तोलुई, चघताई और जोची (ओगोदेई का वंश पराजित हो गया और तोलूयिद में मिल गए।)

तोलूयिद : चीन का यूआन वंश और ईरान का इल-खानी राज्य।

चघताई : उत्तरी तूरान के स्टेपी-क्षेत्र और तुर्किस्तान में रूसी स्टेपी-क्षेत्र में जोचिद वंश थे। उन्हें पर्यवेक्षक ‘गोल्डनहोर्ड’ के नाम से वर्णन करते थे।

1295-1304ईरान में इल-खानी शासक गजन खान का शासन काल। उसके बौद्ध-धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरण के बाद धीरे-धीरे अन्य इल-खानी सरदारों का भी धर्मान्तरण होने लगा।
1368चीन में यू-आन राजवंश का अन्त।
1370-1405तैमूर का शासन। बरलास तुर्क होते हुए उसने चघताई वंश के आधार पर अपने को चंगेजखान का वंशज बताया। उसने स्टेपी-साम्राज्य की स्थापना की। टोलू राज्य चघताई और जोची राज्यों के कुछ हिस्सों (चीन को छोड़कर). को सम्मिलित करते हुए उसने स्टेपी-क्षेत्र में एक साम्राज्य का गठन किया। उसने अपने को ‘गुरेगेन’, ‘शाही-दामाद’ की उपाधि से विभूषित किया और चंगेजखान के कुल की एक राजकुमारी से विवाह किया।
1495-1530जहीरूद्दीन बाबर जो तैमूर और चंगेजखान का वंशज था, फरगना और समरकन्द के तैमूरी क्षेत्र का उत्तराधिकारी बना। वहाँ से खदेड़ा गया। काबुल पर अधिकार किया और 1526 में दिल्ली और आगरा पर अधिकार स्थापित किया। उसने भारत में मुगल-साम्राज्य की नींव रखी।
1500जोची के कनिष्ठ पुत्र शिबान का दंशज शयबानी खान द्वारा तूरान पर आधिपत्य। तूरान में शयबानी सत्ता (शयबानियों को उज़्बेग भी कहा जाता था जिनके नाम से ही वर्तमान उज्बेकिस्तान का नाम पड़ा) को सुदृढ़ किया और इस क्षेत्र से बाबर तथा तैमूर के वंशजों को खदेड़ दिया।
1759चीन के मंचुओं ने मंगोलिया पर विजय प्राप्त कर ली।
1921मंगोलिया का गणराज्य।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई. Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. मुस्लिम कैलेंडर (हिजरी) की शुरुआत हुई-
(अ) 612 ई.
(ब) 642 ई.
(स) 632 ई.
(द) 622 ई.।
उत्तर:
(द) 622 ई.।

2. पैगम्बर मुहम्मद साहब की मृत्यु के बाद प्रथम खलीफा बने-
(अ) हुसैन
(ब) अली
(स) अबू बकर
(द) अब्बास।
उत्तर:
(स) अबू बकर

3. उमय्यद वंश की स्थापना की थी –
(अ) अबू बकर
(ब) उथमान
(स) अली
(द) मुआविया।
उत्तर:
(द) मुआविया।

4. उमय्यद वंश की समाप्ति के बाद किस वंश की स्थापना हुई?
(अ) सुन्नी
(ब) अब्बासी
(स) फातिमी
(द) गजनवी।
उत्तर:
(ब) अब्बासी

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

5. प्रथम धर्म-युद्ध लड़ा गया –
(अ) 1095 ई. में
(ब) 1195 ई. में
(स) 995 ई. में
(द) 1098-99 ई. में।
उत्तर:
(द) 1098-99 ई. में।

6. कुरान शरीफ कितने अध्यायों में विभाजित है –
(अ) 140
(ब) 120
(स) 114
(द) 214
उत्तर:
(स) 114

7. अब्द-अल-लतीफ कौन थे?
(अ) बगदाद के सम्राट
(ब) बगदाद के कानून और चिकित्सा के विद्वान
(स) प्रसिद्ध सूफी सन्त
(द) अन्तिम खलीफा।
उत्तर:
(ब) बगदाद के कानून और चिकित्सा के विद्वान

8. ‘चिकित्सा के सिद्धान्त’ (अल़-कानून फिल तिब) का रचयिता था-
(अ) मसूद
(ब) टालेमी
(स) अब्द-अल-लतीफ
(द) इबसिना।
उत्तर:
(द) इबसिना।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1. पैगम्बर मुहम्मद का अपना कबीला ………………. मक्का में रहता था और उसका वहाँ के मुख्य धर्मस्थल पर नियंत्रण था।
2. जो लोग पैगम्बर मुहम्मद के धर्म-सिद्धान्त को स्वीकार कर लेते थे, उन्हें ………………. कहा जाता था।
3. जिस वर्ष पैगम्बर मुहम्मद का आगमन ……………….. में हुआ उस वर्ष से हिजरी सन् की शुरुआत हुई।
4. पैगम्बर मुहम्मद के देहान्त के बाद उनकी सत्ता ………………. को अंतरित कर दी गई।
5. ………………. ने 661 ई. में अपने आपको अगला खलीफा घोषित कर उमय्यद वंश की स्थापना की।
उत्तर:
1. कुरैश
2. मुसलमान
3. मदीना
4. उम्मा
5. मुआविया

निम्न में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये –

1. पहले खलीफा अली ने अनेक अभियानों द्वारा विद्रोहों का दमन किया।
2. पहले उमय्यद खलीफा मुआविया ने दमिश्क को अपनी राजधानी बनाया।
3. अरब, तुर्किस्तान के मध्य एशियायी घास के मैदानों के खानाबदोश कबाइली लोग थे।
4. गजनी सल्तनत की स्थापना अल्पनितिन ( 961 ई.) द्वारा की गई थी।
5. प्रथम धर्मयुद्ध (1098-1099 ई.) में अरब सैनिकों ने सीरिया में एंटीओक और जेरूसलम पर कब्जा कर लिया।
उत्तर:
1. असत्य
2 . सत्य
3 . असत्य
4 . सत्य
5 . असत्य

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

1. बेदुइन(अ) खुदा का संदेशवाहक
2. कुरैश(ब) पैगम्बर मुहम्मद का संदेशवाहक
3. रसूल(स) पैगम्बर मुहम्मद का कबीला
4. जिबरील(द) पहला उमय्यद खलीफा
5. मुआविया(य) खानाबदोश अरबी कबीले

उत्तर:

1. बेदुइन(य) खानाबदोश अरबी कबीले
2. कुरैश(स) पैगम्बर मुहम्मद का कबीला
3. रसूल(अ) खुदा का संदेशवाहक
4. जिबरील(ब) पैगम्बर मुहम्मद का संदेशवाहक
5. मुआविया(द) पहला उमय्यद खलीफा

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कबीले का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
कबीले रक्त सम्बन्धों पर संगठित समाज होते हैं।

प्रश्न 2.
इस्लाम धर्म के संस्थापक कौन थे ?
उत्तर:
पैगम्बर मुहम्मद साहब।

प्रश्न 3.
पैगम्बर मुहम्मद ने अपने आपको खुदा का सन्देशवाहक ( रसूल ) कब घोषित किया ?
उत्तर:
612 ई. के आस-पास।

प्रश्न 4.
कुरान शब्द किससे बना है ?
उत्तर:
इकरा (पाठ करो) से।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 5.
इस्लामी ब्रह्माण्ड विज्ञान में सृष्टि जीवन के तीन बौद्धिक रूपों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:

  • दूत
  • इन्सान तथा
  • जिन्न।

प्रश्न 6.
पैगम्बर मुहम्मद के धर्म – सिद्धान्त को स्वीकार करने वाले लोग क्या कहलाये ?
उत्तर:
मुसलमान।

प्रश्न 7.
प्रथम चार खलीफाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • अबूबकर
  • उमर
  • उथमान
  • अली।

प्रश्न 8.
इस्लाम का किन दो सम्प्रदायों में विभाजन हुआ?
उत्तर:
(1) सुन्नी तथा
(2) शिया।

प्रश्न 9.
अली के बाद कौन खलीफा बना और कब बना?
उत्तर:
661 ई. में अली के बाद मुआविया खलीफा बना।

प्रश्न 10.
चट्टान के गुम्बद (डोम ऑफ रॉक) का निर्माण किसने करवाया ?
उत्तर:
उमय्यद वंश के शासक अब्द-अल-मलिक ने।

प्रश्न 11.
अब्बासी कौन थे ?
उत्तर:
अब्बासी पैगम्बर मुहम्मद के चाचा अब्बास के वंशज थे।

प्रश्न 12.
अब्बासी वंश की सत्ता को समाप्त कर किस वंश ने अपनी सत्ता स्थापित की और कब ?
उत्तर:
945 ई. में ईरान के बुवाही शिया वंश ने।

प्रश्न 13.
फातिमी राजवंश के लोग कौन थे ?
उत्तर:
ये लोग पैगम्बर साहब की पुत्री फातिमा के वंशज थे।

प्रश्न 14.
निशापुर को किसने अपनी राजधानी बनाया था ?
उत्तर:
सल्जुक तुर्कों ने।

प्रश्न 15.
तुगरिल बेग कौन था ?
उत्तर:
तुगरिल बेग सल्जुक तुर्कों का प्रसिद्ध नेता था।

प्रश्न 16.
धर्म – युद्ध कब हुए?
उत्तर:
धर्म – युद्ध 1095 और 1291 ई. के बीच हुए।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 17.
धर्म – युद्ध किन – किनके बीच हुए ?
उत्तर:
पश्चिमी यूरोप के ईसाइयों और मुसलमानों के बीच

प्रश्न 18.
ईसाइयों तथा मुसलमानों में प्रथम धर्म – युद्ध कब हुआ ?
उत्तर:
1098-99 ई. में।

प्रश्न 19.
जजिया कर क्या था ?
उत्तर:
गैर-मुसलमानों से लिया जाने वाला कर जजिया कर कहलाता था।

प्रश्न 20.
इस्लामी राज्य में जिन चार नई फसलों की खेती की गई, उनके नाम लिखो।
उत्तर:

  • कपास
  • संतरा
  • केला
  • तरबूजा।

प्रश्न 21.
इस्लामी राज्य के चार फौजी शहरों के नाम लिखिए –
उत्तर:

  • कुफा (इराक)
  • बसरा (इराक)
  • फुस्तात (मिस्र)
  • काहिरा (मिस्र)।

प्रश्न 22.
आठवीं तथा नौवीं शताब्दियों में कानून की चार शाखाएँ कौनसी थीं?
उत्तर:

  • मलिकी
  • हनफी
  • शफोई
  • हनबली।

प्रश्न 23.
कुरान शरीफ कितने अध्यायों (सूराओं) में विभाजित है ? यह किस भाषा में रचित है ?
उत्तर:
(1) 114 अध्यायों (सूराओं) में
(2) अरबी भाषा में।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 24.
सूफी मत के दो सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) संसार का त्याग करना
(2) केवल खुदा पर भरोसा करना।

प्रश्न 25.
रुबाई से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
रुबाई चार पंक्तियों वाला छन्द होता है।

प्रश्न 26.
‘शाहनामा’ का रचयिता कौन था ?
उत्तर:
फिरदौसी।

प्रश्न 27.
इस्लामी जगत के पाठकों की नैतिक शिक्षा और उनके मनोरंजन के लिए चार पुस्तकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • कलीला व दिमना
  • अलसिकन्दर
  • सिन्दबाद
  • एक हजार एक रातें।

प्रश्न 28.
मध्यकालीन मुस्लिम समाज की तस्वीर किस ग्रन्थ में मिलती है ?
उत्तर:
एक हजार एक रातें में।

प्रश्न 29.
‘तहकीक मा लिल-हिंद’ (भारत का इतिहास) नामक पुस्तक का रचयिता कौन था ?
उत्तर:
अल्बरुनी।

प्रश्न 30.
इस्लामी जगत की मस्जिदों का बुनियादी नमूना क्या था ?
उत्तर:
मेहराब, गुम्बद, मीनार और खुला आंगन।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 31.
उमय्यदों द्वारा नखलिस्तानों में बनाये गए ‘मरुस्थली महलों’ का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) फिलिस्तीन में खिरबत – उल – मफजर महल
(2) जार्डन में कुसाईर अमरा महल।

प्रश्न 32.
इस्लामी धार्मिक कला में कला के किन दो रूपों को बढ़ावा मिला ?
उत्तर:
(1) खुशनवीसी (सुन्दर लिखने की कला)
(2) अरबेस्क (ज्यामितीय तथा वनस्पतीय डिजाइन )।

प्रश्न 33.
622 ई. में हज़रत मुहम्मद साहब द्वारा मक्का से मदीना की ओर प्रस्थान से कौनसे संवत् की शुरुआत
उत्तर:
हिजरी सन् की।

प्रश्न 34.
हिजरी वर्ष सौर वर्ष से कितने दिन कम होता है ?
उत्तर:
11 दिन।

प्रश्न 35.
इस्लामी क्षेत्रों के सन् 600 से 1200 तक के इतिहास की जानकारी के प्रमुख स्रोतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
इतिवृत्त अथवा तवारीख और अर्द्ध – ऐतिहासिक कृतियाँ, जैसे जीवन चरित, पैगम्बर साहब के कथनों और कृत्यों के अभिलेख, कुरान की टीकाएँ।

प्रश्न 36.
अधिकतर ऐतिहासिक और अर्द्ध – ऐतिहासिक रचनाएँ किस भाषा में हैं? इनमें सर्वोत्तम रचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) अधिकतर ऐतिहासिक और अर्द्ध – ऐतिहासिक रचनाएँ अरबी भाषा में हैं।
(2) इनमें सर्वोत्तम रचना ‘तबरी की तारीख’ है।

प्रश्न 37.
इतिवृत्तों के अतिरिक्त किन स्रोतों से इस्लाम के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त होती है ?
उत्तर:
कानूनी पुस्तकों, भूगोल, यात्रा – वृत्तान्त और साहित्यिक रचनाओं से इस्लाम के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।

प्रश्न 38.
दस्तावेजी साक्ष्य इतिहास-लेखन के लिए सर्वाधिक बहुमूल्य क्यों हैं ?
उत्तर:
दस्तावेजी साक्ष्य इतिहास-लेखन के लिए सर्वाधिक बहुमूल्य हैं क्योंकि इनमें पूर्व चिन्तन कर घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख नहीं होता ।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 39.
इग्नाज गोल्डजिहर कौन था?-
उत्तर:
इग्नाज गोल्जजिहर हंगरी का एक यहूदी था, जिसने जर्मन भाषा में इस्लामी कानून और धर्म – विज्ञान के बारे में नई राह दिखाने वाली पुस्तकें लिखीं।

प्रश्न 40.
अरबी कबीलों के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अरबी कबीले वंशों से बने हुए होते थे अथवा बड़े परिवारों के समूह होते थे । प्रत्येक कबीले का नेतृत्व एक शेख द्वारा किया जाता था।

प्रश्न 41.
बेदूइन कौन थे ?
उत्तर:
बेदूइन खानाबदोश होते थे, जो खजूर आदि खाद्य तथा अपने ऊँटों के लिए चारे की तलाश में रेगिस्तान के सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों की ओर जाते रहते थे।

प्रश्न 42.
पैगम्बर मुहम्मद कौन थे? वे किस कबीले से सम्बन्धित थे?
उत्तर:
पैगम्बर मुहम्मद सौदागर थे और मक्का में रहने वाले कुरैश कबीले से सम्बन्धित थे। वे इस्लाम धर्म के संस्थापक थे।

प्रश्न 43.
इस्लाम का मूल क्या था ?
उत्तर:
पैगम्बर मुहम्मद ने एक ईश्वर अर्थात् अल्लाह की पूजा करने का और आस्तिकों के एक ही समाज की सदस्यता का प्रचार किया। यह इस्लाम का मूल था।

प्रश्न 44.
‘काबा’ से क्या अभिप्राय है? काबा के बारे में संक्षेप में बताइये।
अथवा
उत्तर:
मक्का के मुख्य धर्म-स्थल का ढाँचा घनाकार था और उसे ‘काबा’ कहा जाता था। इसमें बुत रखे

प्रश्न 45.
‘काबा’ की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
‘काबा’ को एक ऐसा पवित्र स्थान (हरम) माना जाता था, जहाँ हिंसा वर्जित थी तथा सभी दर्शनार्थियों को सुरक्षा प्रदान की जाती थी।

प्रश्न 46.
मक्का का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
मक्का यमन और सीरिया के बीच के व्यापारी मार्गों के एक चौराहे पर स्थित था। यह अरबों का एक प्रमुख धार्मिक केन्द्र था।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 47.
जिबरील कौन था?
उत्तर:
जिबरील एक महादूत था जो पैगम्बर मुहम्मद के लिए सन्देश लाया करता था।

प्रश्न 48.
पैगम्बर मुहम्मद की तीन शिक्षाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पैगम्बर मुहम्मदं की तीन शिक्षाएँ थीं –

  • केवल अल्लाह की ही आराधना करना
  • नैतिक सिद्धान्त जैसे खैरात बाँटना तथा
  • चोरी न करना।

प्रश्न 49.
पैगम्बर मुहम्मद ने अपना क्या उद्देश्य बताया ?
उत्तर:
आस्तिकों (उम्मा) के एक ऐसे समाज की स्थापना करना, जो सामान्य धार्मिक विश्वासों के द्वारा आपस में जुड़े हुए हों।

प्रश्न 50.
पैगम्बर मुहम्मद को मक्का के लोगों के विरोध का सामना क्यों करना पड़ा?
उत्तर:
लोग मक्का के देवी-देवताओं के ठुकराए जाने से नाराज थे और वे नये धर्म को मक्का की प्रतिष्ठा तथा समृद्धि के लिए खतरा समझते थे।

प्रश्न 51.
‘हिजरा’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पैगम्बर मुहम्मद की मक्का से मदीना जाने की यात्रा क्या कहलाती है ?
उत्तर:
मक्का के लोगों के विरोध के कारण 622 ई. में पैगम्बर मुहम्मद को मक्का छोड़कर मदीना के लिए प्रस्थान करना पड़ा। इस यात्रा को ‘हिजरा’ कहते हैं।

प्रश्न 52.
मुस्लिम कैलेण्डर या हिजरी सन् की शुरुआत कब हुई ?
उत्तर:
जिस वर्ष पैगम्बर मुहम्मद मदीना पहुँचे, उसी वर्ष से मुस्लिम कैलेण्डर या हिजरी सन् की शुरुआत हुई।

प्रश्न 53.
पैगम्बर मुहम्मद ने किन तरीकों से मदीना में एक राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना की ? दो का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) पैगम्बर मुहम्मद ने मुसलमानों के समुदाय को आन्तरिक रूप से सुदृढ़ बनाया।
(2) उन्हें बाहरी खतरों से सुरक्षा प्रदान की।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 54.
खिलाफत की संस्था का निर्माण किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
उत्तराधिकार के किसी निश्चित नियम के अभाव में इस्लामी राजसत्ता उम्मा को सौंप दी गई जिसके फलस्वरूप खिलाफत संस्था का निर्माण हुआ।

प्रश्न 55.
खिलाफत के दो प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
(1) कबीलों पर नियन्त्रण स्थापित करना, जिनसे मिलकर उम्मा का गठन हुआ था।
(2) राज्य के लिए संसाधन जुटाना।

प्रश्न 56.
प्रथम दो खलीफाओं की उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) प्रथम खलीफा अबूबकर ने अनेक अभियानों द्वारा विद्रोहों का दमन किया।
(2) द्वितीय खलीफा ने ‘उम्मा की सत्ता का विस्तार किया।

प्रश्न 57.
बाइजेन्टाइन तथा ससानी साम्राज्यों के विरुद्ध अभियानों में अरबों की सफलता के क्या कारण थे?
उत्तर:
(1) अरबों की उत्तम सामरिक नीति
(2) अरबों में धार्मिक जोश,
(3) विरोधियों की कमजोरियाँ।

प्रश्न 58.
इस्लाम का दो सम्प्रदायों में विभाजन क्यों हुआ ?
उत्तर:
खलीफा अली द्वारा मक्का के अभिजात वर्ग के लोगों के विरुद्ध दो युद्ध लड़े जाने के पश्चात् इस्लाम दो सम्प्रदायों में विभाजित हो गया।

प्रश्न 59.
उमय्यद वंश की स्थापना किसने की और कब की ? इस वंश ने कब तक शासन किया?
उत्तर:

  • 661 ई. में मुआविया ने उमय्यद वंश की स्थापना की।
  • उमय्यद वंश ने 750 ई. तक शासन किया।

प्रश्न 60.
अब्द-अल-मलिक ने अरब और इस्लाम दोनों पहचानों को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या उपाय किये ?
उत्तर:
(1) अब्द अल मलिक ने अरबी को प्रशासन की भाषा बनाया।
(2) उसने इस्लामी सिक्के जारी किये जिन पर अरबी भाषा में लिखा होता था।

प्रश्न 61.
चट्टान का गुम्बद (डोम ऑफ रॉक) का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
यह इस्लामी वास्तुकला का पहला बड़ा नमूना है। यह जेरुस्लम नगर की मुस्लिम संस्कृति का प्रतीक था।

प्रश्न 62.
‘अब्बासी क्रान्ति’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
750 ई. में उमय्यद वंश का स्थान अब्बासियों ने ले लिया। इस घटना को ‘अब्बासी क्रान्ति’ कहते हैं।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 63.
अब्बासियों ने किस प्रकार सत्ता प्राप्त की ?
उत्तर:
उन्होंने लोगों को यह वचन दिया कि पैगम्बर के परिवार का कोई मसीहा उन्हें उमय्यदों के दमनकारी शासन से मुक्त करायेगा ।

प्रश्न 64.
अब्बासियों ने उमय्यद वंश के किस अन्तिम खलीफा को पराजित कर सत्ता प्राप्त की?
उत्तर:
अब्बासियों की सेना का नेतृत्व एक ईरानी गुलाम अबू मुस्लिम ने किया तथा अन्तिम उमय्यद खलीफा मारवान को ज़ब नदी पर हुई लड़ाई में पराजित किया ।

प्रश्न 65.
नौवीं शताब्दी में अब्बासी राज्य के कमजोर होने के दो कारण लिखिए।
उत्तर:
(1) दूर के प्रान्तों पर बग़दाद का नियन्त्रण कम हो गया था।
(2) सेना और नौकरशाही में अरब – समर्थक और ईरान समर्थक गुटों में आपस में झगड़ा हो गया था।

प्रश्न 66.
बुवाही वंश के शासकों की दो उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर:
(1) बुवाही वंश के शासकों ने बगदाद पर अधिकार कर लिया।
(2) उन्होंने विभिन्न उपाधियाँ धारण कीं, जिनमें ‘शहंशाह’ भी शामिल थी।

प्रश्न 67.
फातिमी राजवंश के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
फातिमी राजवंश का सम्बन्ध इस्माइली सम्प्रदाय इस्माइली से था तथा ये लोग अपने आप को पैगम्बर साहब की पुत्री फातिमा का वंशज मानते थे।

प्रश्न 68.
फातिमी खिलाफत की दो उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) 969 ई. में फातिमी लोगों ने मिस्र पर विजय प्राप्त की।
(2) उन्होंने शिया कवियों और विद्वानों को आश्रय प्रदान किया।

प्रश्न 69.
तुर्क लोग कौन थे ?
उत्तर:
तुर्क, तुर्किस्तान के मध्य एशियाई घास के मैदानों के खानाबदोश कबाइली लोग थे। वे कुशल घुड़सवार और वीर योद्धा थे।

प्रश्न 70.
गजनी सल्तनत की स्थापना किसने और कब की थी और उसे किसने सुदृढ़ किया?
उत्तर:
गजनी सल्तनत की स्थापना अल्पतिगिन ने 961 ई. में की थी और उसे महमूद गजनवी ने सुदृढ़ किया था।

प्रश्न 71.
गजनवी वंश के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
गजनवी वंश एक सैनिक वंश था जिसके पास तुर्कों और भारतीयों जैसी व्यावसायिक सेना थी । उसकी सत्ता और शक्ति का केन्द्र खुरासान और अफगानिस्तान थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 72.
सल्जुक तुर्क कौन थे ?
उत्तर:
सल्जुक तुर्क समानियों और काराखानियों की सेनाओं में सैनिकों के रूप में तूरान में पहुँच गए। तुगरिल तथा छागरी बेग इनके प्रसिद्ध नेता थे।

प्रश्न 73.
सल्जुक तुर्कों की दो उपलब्धियाँ बताइये।
उत्तर:
(1) 1037 में सल्जुकों ने खुरासान पर विजय प्राप्त की और
(2) निशापुर को अपनी प्रथम राजधानी बनाया। 1055 में उन्होंने बगदाद पर भी अधिकार कर लिया।

प्रश्न 74.
निशापुर किसलिए प्रसिद्ध था ?
उत्तर:
निशापुर सल्जुक तुर्कों की राजधानी थी। यह शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण फारसी – इस्लामी केन्द्र था। यह प्रसिद्ध विद्वान उमर खय्याम का जन्म स्थान भी था।

प्रश्न 75.
तुगरिल बेग की दो उपलब्धियों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) तुगरिल बेग के नेतृत्व में सल्जुक तुर्कों ने गजनी को जीत लिया और
( 2) 1055 में बगदाद पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 76.
धर्म – युद्ध से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
1095 और 1291 के बीच पश्चिमी यूरोप के ईसाइयों ने मुसलमानों से अपने पवित्र धर्म – स्थान को मुक्त कराने के लिए अनेक युद्ध लड़े। जिन्हें धर्म- युद्ध कहा जाता है

प्रश्न 77.
धर्म- युद्धों के दो कारण लिखिए।
उत्तर:
(1) मुसलमानों ने ईसाइयों के पवित्र स्थान जेरुस्लम पर अधिकार कर लिया था।
(2) ईसाइयों और मुसलमानों के बीच शत्रुता विद्यमान थी ।

प्रश्न 78.
‘ईश्वरीय शान्ति आन्दोलन’ क्या था ?
उत्तर:
इस आन्दोलन ने सामन्ती समाज की आक्रमणकारी प्रवृत्तियों को ईसाई जगत से हटा कर ईश्वर के शत्रुओं की ओर मोड़ दिया था।

प्रश्न 79.
प्रथम धर्म – युद्ध के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
इस युद्ध में फ्रांस और इटली के सैनिकों ने सीरिया में एंटीओक तथा जेरुस्लम पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 80.
‘आउटरैमर’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
प्रथम धर्म – युद्ध के दौरान ईसाइयों ने सीरिया – फिलिस्तीन के क्षेत्र में जीते गए चार राज्य स्थापित कर लिए। इन्हें ‘आउटरैमर’ कहा जाता था।

प्रश्न 81.
दूसरा धर्म – युद्ध कब हुआ ? इसका क्या कारण था ?
उत्तर:
जब तुर्कों ने 1144 में एडेस्सा पर अधिकार कर लिया, तो पोप ने एक दूसरे धर्म – युद्ध के लिए अपील की। परिणामस्वरूप 1145-49 में द्वितीय धर्म – युद्ध शुरू हो गये।

प्रश्न 82.
तीसरा धर्म – युद्ध कब हुआ ? इसका क्या कारण था ?
उत्तर:
जब मुसलमानों ने जेरुस्लम पर अधिकार कर लिया, तो 1189 ई. में तीसरे धर्म – युद्ध का सूत्रपात हुआ।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 83.
धर्म – युद्धों के ईसाई – मुस्लिम सम्बन्धों पर क्या स्थायी प्रभाव हुए?
उत्तर:
(1) मुस्लिम राज्यों ने अपनी ईसाई प्रजा के प्रति कठोर नीति अपनाना शुरू कर दिया।
(2) पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापार में इटली के व्यापारी समुदायों का प्रभाव बढ़ गया।

प्रश्न 84.
फ्रैंक कौन थे ?
उत्तर:
फ्रैंक धर्म- युद्धों में विजय पाने वाले पश्चिमी देशों के नागरिक थे। ये सीरिया तथा फिलिस्तीन में बस गए

प्रश्न 85.
‘खराज’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अरबों द्वारा जोती गई भूमि पर ‘खराज’ कर लगता था जो खेती की स्थिति के अनुसार उसके आधे से लेकर उसके पाँचवें हिस्से के बराबर होता था।

प्रश्न 86.
इस्लामी राज्य में नये शहरों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था ?:
उत्तर:
इस्लामी राज्य में नये शहरों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य मुख्य रूप से अरब सैनिकों को बसाना था, जो स्थानीय प्रशासन की रीढ़ थे।

प्रश्न 87.
मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत का सबसे बड़ा योगदान क्या था ?
उत्तर:
मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने अदायगी और व्यापार सम्बन्ध के श्रेष्ठ तरीकों का विकास किया।

प्रश्न 88.
इस्लामी राज्य में साख-पत्रों तथा हुण्डियों का किस प्रकार उपयोग किया जाता था ?
उत्तर:
साख-पत्रों तथा हुण्डियों का उपयोग व्यापारियों, साहूकारों द्वारा धन को एक स्थान से दूसरे स्थान और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अन्तरित करने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 89.
वाणिज्यिक पत्रों के उपयोग से व्यापारी वर्ग को क्या लाभ हुआ?
उत्तर:
वाणिज्यिक पत्रों के उपयोग से व्यापारी वर्ग को हर स्थान पर नकद मुद्रा अपने साथ ले जाने से मुक्ति मिल गई तथा इससे उनकी यात्राएँ भी अधिक सुरक्षित हो गईं।

प्रश्न 90.
‘मुज़र्बा’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
‘मुज़र्बा’ जैसे औपचारिक व्यापारिक प्रबन्धों में निष्क्रिय साझेदार अपनी पूँजी देश-विदेश में जाने वाले सक्रिय सौदागरों को सौंप देते थे।

प्रश्न 91.
कुरान शरीफ के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
मुस्लिम परम्पराओं के अनुसार कुरान शरीफ उन सन्देशों का संग्रह है, 610 और 632 के बीच की अवधि में दिए थे।

प्रश्न 92.
सूफ़ी कौन थे ? जो खुदा ने पैगम्बर मुहम्मद को
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लाम के धार्मिक विचारों वाले लोगों का समूह ‘सूफी’ कहलाता था। ये लोग तपश्चर्या और रहस्यवाद के द्वारा खुदा का ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे।

प्रश्न 93.
सूफी मत के सर्वेश्वरवाद से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सर्वेश्वरवाद ईश्वर और उसकी सृष्टि के एक होने का विचार है। इससे अभिप्राय यह है कि मनुष्य की आत्मा को परमात्मा के साथ मिलाना चाहिए।

प्रश्न 94.
अब्द-अल-लतीफ कौन थे ?
उत्तर:
अब्द-अल-लतीफ बारहवीं शताब्दी के बगदाद के कानून और चिकित्सा के विषयों के विद्वान थे।

प्रश्न 95.
अब्द-अल-लतीफ के अनुसार एक आदर्श विद्यार्थी को किन दो शिक्षाओं को ग्रहण करना चाहिए?
उत्तर:
(1) प्रत्येक विषय के ज्ञान के लिए अध्यापकों का ही सहारा लेना चाहिए।
(2) अपने अध्यापकों का आदर करना चाहिए।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 96.
इब्नसिना के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
इब्नसिना (980-1037) एक प्रसिद्ध चिकित्सक तथा दार्शनिक था । उसने ‘चिकित्सा के सिद्धान्त’ नामक पुस्तक की रचना की थी ।

प्रश्न 97.
‘अदब’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘अदब’ का अर्थ है – साहित्यिक और सांस्कृतिक परिष्कार । अदब रूपी अभिव्यक्तियों में पद्य और गद्य शामिल थे।

प्रश्न 98.
नई फारसी कविता क्या थी? इसका जनक कौन था ?
उत्तर:
(1) नई फारसी कविता में छोटे गीत-काव्य (गज़ल) और चतुष्पदी ( रुबाई) जैसे नये रूप शामिल थे । (2) नई फारसी कविता का जनक रुदकी था ।

प्रश्न 99.
उमर खय्याम कौन था ?
उत्तर:
उमर खय्याम एक प्रसिद्ध कवि, खगोल वैज्ञानिक तथा गणितज्ञ था। उसने रुबाई को अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया था।

प्रश्न 100.
‘शाहनामा’ की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) शाहनामा में 50,000 पद हैं। यह इस्लामी साहित्य की एक श्रेष्ठ रचना मानी जाती है।
(2) इसमें प्रारम्भ से लेकर अरबों की विजय तक ईरान का चित्रण है।

प्रश्न 101.
मस्जिद के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मस्जिद में एक खुला प्रांगण होता था, जहाँ पर एक फव्वारा अथवा जलाशय होता था और यह प्रांगण एक बड़े कमरे की ओर खुलता था।

प्रश्न 102.
मस्जिद के बड़े कमरे की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) दीवार में एक मेहराब होती है।
(2) एक मंच होता है जहाँ से शुक्रवार को दोपहर की नमाज के समय प्रवचन दिए जाते हैं।

प्रश्न 103.
हदीथ की विषय-वस्तु क्या है?
उत्तर:
हदीथ में पैगम्बर मुहम्मद साहब के कथनों और कृत्यों के अभिलेख हैं।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 104.
‘कलीला व दिमना’ किस भारतीय ग्रन्थ का अरबी अनुवाद है ?
उत्तर:
‘पंचतन्त्र’ का।

प्रश्न 105.
657 ई. में हुई ‘ऊँट की लड़ाई’ में अली ने किसे पराजित किया?
उत्तर:
657 ई. में हुई ‘ऊँट की लड़ाई’ में अली ने मुहम्मद की पत्नी आयशा की सेना को पराजित किया।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अरब में इस्लाम के उदय के पूर्व अरबों की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
अरब में इस्लाम के उदय के पूर्व अरबों की स्थिति –
(1) इस्लाम धर्म के उदय के पूर्व अरब लोग कबीलों में बँटे हुए थे। प्रत्येक कबीले का नेतृत्व एक शेख द्वारा किया जाता था। उसका चुनाव कुछ हद तक पारिवारिक सम्बन्धों के आधार किया जाता था, परन्तु वह अधिकतर व्यक्तिगत साहस, बुद्धिमत्ता और उदारता के आधार पर चुना जाता था। कबीले रक्त सम्बन्धों पर संगठित समाज होते थे।
(2) प्रत्येक कबीले के अपने स्वयं के देवी-देवता होते थे, जो बुतों के रूप में मस्जिदों में पूजे जाते थे
(3) बहुत से अरब कबीले खानाबदोश होते थे। ये लोग खजूर आदि खाद्य तथा अपने ऊँटों के लिए चारे कीतलाश में रेगिस्तान में सूखे – क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों की ओर जाते रहते थे।
(4) कुछ कबीले शहरों में बस गए थे और व्यापार अथवा खेती का काम करने लगे थे।

प्रश्न 2.
कबीले से क्या अभिप्राय है? कबीले की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कबीले रक्त-सम्बन्धों पर संगठित समाज होते थे। अरबी कबीले वंशों से बने हुए होते थे अथवा बड़े परिवारों के समूह होते थे। गैर- अरब व्यक्ति कबीलों के प्रमुखों के संरक्षण में सदस्य बन जाते थे। लेकिन इनके साथ अरब व्यक्तियों (मुसलमानों) द्वारा समानता का व्यवहार नहीं किया जाता था। गैर – रिश्तेदार वंशों का तैयार किए गए वंश – -क्रम के आधार पर इस आशा के साथ विलय होता था कि नया कबीला शक्तिशाली होगा।

प्रश्न 3.
ब्रददू या बेदूइन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
बहुत से अरब कबीले खानाबदोश होते थे, जो बद्दू या बेदूइन कहलाते थे। ये लोग ऊँट पशुचारी थे। ये लोग खाद्य और ऊँटों के लिए चारे की तलाश में रेगिस्तान में सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों (नखलिस्तान) की ओर भ्रमण रहते थे। खजूर इन लोगों का प्रमुख भोजन था और इसे प्राप्त करने के लिए हरे-भरे क्षेत्रों (नखलिस्तान) की तलाश में रहते थे। कुछ लोग शहरों में बस गए थे और व्यापार अथवा खेती का काम करने लग गए थे।

प्रश्न 4.
पैगम्बर मुहम्मद के प्रादुर्भाव के पूर्व मक्का के धार्मिक महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
अथवा
काबा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘मक्का का धार्मिक महत्त्व – पैगम्बर मुहम्मद साहब के प्रादुर्भाव के पूर्व मक्का अरबों का एक प्रमुख धार्मिक केन्द्र था। पैगम्बर मुहम्मद का कबीला कुरैश भी मक्का में रहता था जिसका वहाँ के मुख्य धर्म-स्थल पर नियन्त्रण था। इस धर्म-स्थल का ढाँचा घनाकार था और उसे ‘काबा’ के नाम से पुकारा जाता था। इसमें बुत रखे हुए थे। मक्का के बाहर के कबीले भी काबा को पवित्र मानते थे। वे इसमें बुत रखते थे और प्रतिवर्ष इस स्थान की धार्मिक यात्रा (हज) करते थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

मक्का, यमन और सीरिया के बीच के व्यापारी मार्गों के एक चौराहे पर स्थित था, जिससे शहर का महत्त्व और बढ़ गया था। काबा को एक ऐसा पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ हिंसा का निषेध था और सभी दर्शनार्थियों को सुरक्षा प्रदान की जाती थी। तीर्थयात्रा और व्यापार ने खानाबदोश तथा बसे हुए कबीलों को एक-दूसरे से सम्पर्क स्थापित करने तथा अपने विश्वासों और रीति-रिवाजों को आपस में बाँटने का अवसर दिया। बहुदेववादी अरब लोगों को अल्लाह की धारणा के बारे में अस्पष्ट-सी ही जानकारी थी, परन्तु उनका मूर्तियों तथा इबादतगाहों के साथ लगाव सीधा और सुदृढ़ था।

प्रश्न 5.
जिबरील के बारे आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
जिबरील – जिबरील एक महादूत थे जो पैगम्बर मुहम्मद साहब के लिए सन्देश लाया करते थे। यह माना जाता है कि जो शब्द उन्होंने सबसे पहले बोला, वह इकरा था। इकरा का अर्थ है – बयान करो। कुरान शब्द इकरा से बना है। इस्लामी ब्रह्माण्ड विज्ञान में दूतों को सृष्टि- जीवन के तीन बौद्धिक रूपों में से एक माना जाता है।

अन्य दो रूप हैं –
(1) इन्सान और
(2) जिन्न।

प्रश्न 6.
इस्लाम धर्म के सुदृढ़ीकरण और उसके प्रचार-प्रसार के लिए पैगम्बर मुहम्मद साहब के द्वारा किये गए कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इस्लाम धर्म के सुदृढ़ीकरण और उसके प्रचार-प्रसार के लिए पैगम्बर मुहम्मद साहब के कार्य –
(1) मदीना में राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना – पैगम्बर मुहम्मद साहब ने मदीना में एक राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना की, जिसने उनके अनुयायियों को सुरक्षा प्रदान की और इसके साथ-साथ शहर में चल रही कलह को सुलझाया।

(2) उम्मा को एक बड़े समुदाय के रूप में बदलना – उन्होंने उम्मा को एक बड़े समुदाय के में बदल दिया गया ताकि मदीना के बहुदेववादियों तथा यहूदियों को पैगम्बर मुहम्मद के राजनीतिक नेतृत्व के अन्तर्गत लाया जा सके।

(3) कर्मकाण्डों और नैतिक सिद्धान्तों में वृद्धि एवं सुधार करना – पैगम्बर मुहम्मद साहब ने कर्मकाण्डों जैसे उपवास आदि और नैतिक सिद्धान्तों में वृद्धि तथा सुधार करके इस्लाम धर्म को अपने अनुयायियों के लिए सुदृढ़ बनाया।

(4) मक्का पर अधिकार – पैगम्बर मुहम्मद ने मक्का पर भी अधिकार कर लिया । इसके परिणामस्वरूप एक धार्मिक प्रचारक तथा राजनीतिक नेता के रूप में पैगम्बर मुहम्मद साहब की प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैल गई।

(5) अनेक कबीलों द्वारा इस्लाम धर्म ग्रहण करना – पैगम्बर मुहम्मद की शिक्षाओं और उपलब्धियों से प्रभावित होकर बहुत से कबीलों ने अधिकांशतः बद्दुओं ने, इस्लाम धर्म को ग्रहण कर लिया और उस समाज में शामिल हो गए।

(6) प्रशासनिक राजधानी एवं धार्मिक केन्द्र की स्थापना – शीघ्र ही पैगम्बर मुहम्मद द्वारा संरचित गठजोड़ का प्रसार सम्पूर्ण अरब देश में हो गया । मदीना इस्लामी राज्य की प्रशासनिक राजधानी तथा मक्का उसका धार्मिक केन्द्र बन गया।

प्रश्न 7.
खिलाफत की संस्था का निर्माण किस प्रकार हुआ ? इसके क्या उद्देश्य थे?
उत्तर:
खिलाफत की संस्था का निर्माण- सन् 632 में पैगम्बर मुहम्मद साहब की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद कोई भी व्यक्ति वैध रूप से इस्लाम का अगला पैगम्बर होने का दावा नहीं कर सकता था। अतः उनकी राजसत्ता उम्मा को सौंप दी गई। इससे मुसलमानों में गहरे मतभेद उत्पन्न हो गए। सबसे बड़ा नव-परिवर्तन यह हुआ कि खिलाफत की संस्था का निर्माण हुआ। इसमें समुदाय का नेता अर्थात् अमीर अल-मोमिनिन पैगम्बर का प्रतिनिधि (खलीफा) बन गया। पहले चार खलीफाओं ( 632-661 ई.) ने पैगम्बर के साथ अपने गहरे और निकटतम सम्बन्धों के आधार पर अपनी शक्तियों तथा अधिकारों का औचित्य स्थापित किया।
खिलाफत के उद्देश्य –
(1) उम्मा के कबीलों पर नियन्त्रण स्थापित करना।
(2) राज्य के लिए संसाधन जुटाना।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 8.
खलीफाओं के शासन काल में इस्लामी राज्य के विस्तार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खलीफाओं के शासन काल में इस्लामी राज्य का विस्तार –
(1) प्रथम खलीफा – पैगम्बर मुहम्मद के देहावसान के बाद बहुल से कबीले इस्लामी राज्य से टूट कर अलग हो गए। कुछ कबीलों ने स्वयं अपने समाजों की स्थापना हेतु अपने स्वयं के पैगम्बर बना लिए थे। इस स्थिति में प्रथम खलीफा अबूबकर ने अनेक अभियानों द्वारा विद्रोहों का दमन किया।

(2) द्वितीय खलीफा – दूसरे खलीफा उमर और उसके सेनापतियों ने पश्चिम में बाइजेन्टाइन समुदाय और पूर्व में ‘ससानी साम्राज्य के विरुद्ध अभियान किये। तीन सफल अभियानों (637-642 ई.) में अरबों ने सीरिया, इराक ईरान और मिस्र पर अधिकार कर लिया।

(3) तृतीय खलीफा -तृतीय खलीफा, उथमान (644-656) ने अपना नियन्त्रण मध्य एशिया तक बढ़ाने के लिए और अभियान चलाए। इस प्रकार पैगम्बर मुहम्मद की मृत्यु के एक दशक के अन्दर अरब-इस्लामी राज्य ने नील और आक्सस के बीच के विशाल क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व एवं नियन्त्रण स्थापित कर लिये।

प्रश्न 9.
विजित प्रान्तों में खलीफाओं द्वारा स्थापित प्रशासनिक ढाँचे का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजित प्रान्तों में खलीफाओं द्वारा नया प्रशासनिक ढाँचा स्थापित किया गया। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार थीं-
(1) नये प्रशासनिक ढाँचे के अध्यक्ष गवर्नर (अमीर) तथा कबीलों के मुखिया (अशरफ) थे।
(2) केन्द्रीय राजकोष के दो प्रमुख स्रोत थे –

  • मुसलमानों द्वारा अदा किये जाने वाले कर तथा
  • सैनिक अभियानों. द्वारा मिलने वाली लूट में से प्राप्त हिस्सा।

(3) खलीफा के सैनिक रेगिस्तान के किनारों पर बसे शहरों जैसे कुफा तथा बसरा में शिविरों में रहते थे ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास स्थलों के निकट तथा खलीफा की कमान के अन्तर्गत बने रहें।

(4) शासक वर्ग और सैनिकों को लूट में हिस्सा मिलता था और मासिक अदायगियाँ प्राप्त होती थीं।

(5) गैर – मुस्लिम लोगों को खराज और जजिया नामक कर देने पड़ते थे । इन करों के अदा करने पर ही उनका सम्पत्ति का तथा धार्मिक कार्यों को सम्पन्न करने का अधिकार बना रहता था।

(6) यहूदी और ईसाई मुस्लिम- – राज्य के संरक्षित लोग (धिम्मीस) घोषित किये गए और अपने सामुदायिक कार्यों को करने के लिए उन्हें काफी अधिक स्वायत्तता दी गई थी।

प्रश्न 10.
तृतीय खलीफा उथमान की हत्या के लिए उत्तरदायी परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तृतीय खलीफा उथमान की हत्या के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ-
(1) अरब कबीले राजनैतिक विस्तार तथा एकीकरण का कार्य सरलता से नहीं कर पाये। इस्लामी राज्य के विस्तार से तथा संसाधनों और पदों के वितरण के सम्बन्ध में उत्पन्न हुए झगड़ों से उम्मा की एकता खतरे में पड़ गई।

(2) प्रारम्भिक इस्लामी राज्य के शासन में मक्का के कुरैश लोगों का ही बोलबाला था। तृतीय खलीफा उथमान (644- 656 ) भी एक कुरैश था। उसने सत्ता पर अधिक नियन्त्रण प्राप्त करने के लिए प्रशासन में अपने ही व्यक्ति नियुक्त कर दिए। ‘परिणामस्वरूप अन्य कबीलों में असन्तोष उत्पन्न हुआ और वे उथमान का विरोध करने लगे।

(3) तृतीय खलीफा उथमान की नीतियों से इराक तथा मिस्र में तो पहले से ही विरोध था। अब मदीना में भी विरोध उत्पन्न हो जाने से 656 ई. में उथमान की हत्या कर दी गई।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 11.
चतुर्थ खलीफा अली के शासन काल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
चतुर्थ खलीफा अली के शासन काल की प्रमुख घटनाएँ – चतुर्थ खलीफा अली के शासन काल की प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित थीं-
(1) 656 में अली को चतुर्थ खलीफा नियुक्त किया गया। उसने मक्का के अभिजात – तन्त्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों के विरुद्ध दो युद्ध लड़े। इसके फलस्वरूप मुसलमानों में कटुता और बढ़ गई। अली के समर्थकों और शत्रुओं ने बाद में इस्लाम के दो मुख्य सम्प्रदाय शिया और सुन्नी बना लिए।

(2) अली ने अपनी सत्ता कुफा में स्थापित कर ली। उसने पैगम्बर मुहम्मद की पत्नी आयशा के नेतृत्व में लड़ने वाली सेना को 657 ई. में ‘ऊँट की लड़ाई’ में पराजित कर दिया। लेकिन, वह उथमान (तृतीय खलीफा) के नातेदार और सीरिया के गवर्नर मुआविया के नेतृत्व वाले गुट का दमन नहीं कर सका।

(3) अली को सिफ्फिन (उत्तरी मेसोपोटामिया ) में दूसरा युद्ध लड़ना पड़ा जो सन्धि के रूप में समाप्त हुआ। इसके परिणामस्वरूप उसके अनुयायी दो गुटों में बँट गए, कुछ उसके वफादार बने रहे, जबकि अन्य लोगों ने उसका साथ छोड़ दिया और वे खरजी कहलाने लगे।

(4) इसके शीघ्र बाद, कुफा में एक खरजी ने एक मस्जिद में अली की हत्या कर दी।

प्रश्न 12.
अब्द-अल-मलिक द्वारा सिक्कों में क्या सुधार किए गए ?
उत्तर:
(1) अब्द-अल-मलिक के पहले जो सिक्के चल रहे थे, वे रोमन और ईरानी अनुकृतियाँ थे जिन पर सलीब और अग्नि – वेदी के चिह्न बने होते थे और यूनानी तथा पहलवी भाषा में लेख अंकित होते थे। अब्द अल-मलिक ने इन चिह्नों को हटवा दिया और सिक्कों पर अरबी भाषा में लेख अंकित कर दिया।
(2) अब्द-अल-मलिक द्वारा सिक्कों में किए गए सुधार उसके राज्य – वित्त के पुनर्गठन से जुड़े हुए थे।
(3) अब्द-अल-मलिक की सिक्के ढालने की प्रक्रिया इतनी सफल थी कि उसके सिक्कों के प्रारूप व वजन के अनुसार ही कई शताब्दियों तक सिक्के ढाले जाते रहे।

प्रश्न 13.
उमय्यद खलीफा शब्द अल-मलिक द्वारा अपनायी गयी नीतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
शब्द अल-मलिक द्वारा अपनायी गयी नीतियाँ –
(1) शब्द अल-मलिक और उसके उत्तराधिकारियों के शासन काल में अरब और इस्लाम दोनों पहचानों पर मजबूती से बल दिया जाता रहा।
(2) शब्द अल-मलिक ने अरबी को प्रशासन की भाषा के रूप में अपनाया।
(3) उसने सिक्कों से रोमन तथा ईरानी चिन्हों को हटाकर उन पर अरबी भाषा में लिखा गया। इस प्रकार उसने इस्लामी सिक्कों को जारी किया।
(4) उसने जेरूसलम में डोम ऑफ रॉक बनवाकर अरब-इस्लामी पहचान को विकसित किया।

प्रश्न 14.
उमय्यदों के किन राजनैतिक उपायों से उम्मा के भीतर उनका नेतृत्व सुदृढ़ हुआ?
उत्तर:
उमय्यदों ने ऐसे बहुत से राजनैतिक उपाय किए जिनसे उम्मा के भीतर उनका नेतृत्व सुदृढ़ हो गया –
(1) प्रथम उमय्यद खलीफा मुआविया ने दमिश्क को अपनी राजधानी बनाया।
(2) उसने बाइजेंटाइन साम्राज्य की राजदरबारी रस्मों और प्रशासनिक संस्थाओं को अपना लिया।
(3) उसने वंशगत उत्तराधिकार की परम्परा भी प्रारंभ की और प्रमुख मुसलमानों को मना लिया कि वे उसके पुत्रों को उसका वारिस स्वीकार करें।
(4) बाद वाले खलीफाओं ने भी ये नवीन परिवर्तन अपना लिए।
इन राजनैतिक परिवर्तनों के फलस्वरूप उमय्यद राज्य एक साम्राज्यीय शक्ति बन गया। वह सीधे इस्लाम पर आधारित न होकर शासन – कला और सैनिकों की वफादारी के बल पर चल रहा था तथा इस्लाम उसे वैधता प्रदान करता रहा।

प्रश्न 15.
सन् 950 से 1200 तक की अवधि में इस्लामी समाज की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सन् 950 से 1200 तक की अवधि में इस्लामी समाज किसी एकल राजनीतिक व्यवस्था अथवा किसी संस्कृति की एकल भाषा अरबी से नहीं, बल्कि सामान्य आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिरूपों से एकजुट बना रहा। इस एकता को बनाए रखने के लिए राज्य और समाज को अलग माना गया। इसके अतिरिक्त इस्लामी उच्च संस्कृति की भाषा के रूप में फारसी का विकास किया गया। इस एकता के निर्माण में विद्वानों, कलाकारों, व्यापारियों आदि ने भी योगदान दिया। विद्वान, कलाकार, व्यापारी आदि इस्लामी राज्य में घूमते रहते थे । इससे लोगों में विचारों तथा तौर-तरीकों का आदान-प्रदान होता रहता था । इसके फलस्वरूप अनेक लोग इस्लाम धर्म ग्रहण कर लेते थे। परिणामस्वरूप मुसलमानों की जनसंख्या आगे चलकर बहुत अधिक बढ़ गई। इस्लाम ने एक अलग धर्म तथा सांस्कृतिक प्रणाली के रूप में अपनी पहचान बना ली।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 16.
दसवीं तथा ग्यारहवीं शताब्दियों में तुर्की सल्तनत का उदय किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
दसवीं तथा ग्यारहवीं शताब्दियों में तुर्की सल्तनत का उदय हुआ। तुर्क, तुर्किस्तान के मध्य एशियाई घास के मैदानों के खानाबदोश कबाइली लोग थे जिन्होंने धीरे-धीरे इस्लाम धर्म अपना लिया था। तुर्क कुशल घुड़सवार तथा वीर योद्धा थे। वे गुलामों और सैनिकों के रूप में अब्बासी, समानी तथा बुवाही शासकों के अधीन कार्य करने लगे। 961 ई. में अल्पतिगिन ने गजनी सल्तनत की स्थापना की। गजनी सल्तनत को मजबूत बनाने में महमूद गजनवी (998-1030 ई.) ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

गजनवी वंश एक सैनिक वंश था जिसके पास तुर्कों और भारतीयों जैसी पेशेवर सेना थी । उनकी सत्ता और शक्ति का केन्द्र खुरासान ओर अफगानिस्तान था। इसलिए उनके लिए अब्बासी प्रतिद्वन्द्वी नहीं थे, बल्कि उनकी वैधता के स्रोत थे। महमूद गजनवी जानता था कि वह एक गुलाम का पुत्र था और इस कारण वह खलीफा से सुल्तान की उपाधि प्राप्त करने के लिए लालायित था। दूसरी और खलीफा भी गजनवी जो सुन्नी था, को समर्थन देने के लिए सहमत हो गया था।

प्रश्न 17.
सलजुक तुर्कों द्वारा तुर्क – साम्राज्य के विस्तार के लिए किये गए प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सलजुक तुर्क समानियों और काराखानियों की सेनाओं में सैनिकों के रूप में तूरान में प्रविष्ट हो गए। उन्होंने बाद में दो भाइयों तुगरिल और छागरी बेग के नेतृत्व में एक शक्तिशाली समूह का रूप धारण कर लिया। महमूद गजनवी की मृत्यु के बाद सलजुक तुर्कों ने 1037 ई. में खुरासान पर अधिकार कर लिया और निशापुर को अपनी राजधानी बनाया। कुछ समय बाद उन्होंने 1055 में बगदाद को पुनः सुन्नी शासन के अधीन कर दिया।

खलीफा अल- कायम ने तुगरिल बेग को सुल्तान की उपाधि प्रदान की जिसके फलस्वरूप धार्मिक सत्ता राजनीतिक सत्ता से अलग हो गई। दोनों सलजुक भाइयों ने इकट्ठे मिलकर शासन का संचालन किया। इसके बाद उनका भतीजा अल्प अरसलन गद्दी पर बैठा। उसके शासन काल में सलजुक साम्राज्य का विस्तार अनातोलिया ( आधुनिक तुर्की) तक हो गया।

प्रश्न 18.
इस्लामी राज्य में कृषि की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इस्लामी राज्य में कृषि की स्थिति – अरबों द्वारा नए जीते गए क्षेत्रों में बसे हुए लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था। इस्लामी राज्य ने इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया। जमीन के स्वामी बड़े और छोटे किसान थे। कहीं-कहीं राज्य का स्वामित्व भी था। इराक और ईरान में जमीन काफी बड़ी इकाइयों में बँटी हुई थी, जिसकी खेती कृषकों द्वारा की जाती थी। ससानी और इस्लामी कालों में भूमि के स्वामी राज्य की ओर से कर इकट्ठा करते थे।

उन प्रदेशों में, जो पशुचारण की अवस्था से आगे बढ़ कर स्थिर कृषि व्यवस्था तक पहुँच गए थे, जमीन गाँव की सांझी सम्पत्ति थी। जो भूमि- सम्पत्तियाँ इस्लामी विजय के पश्चात् स्वामियों द्वारा छोड़ दी गई थीं, उन्हें राज्य ने अपने हाथ में ले लिया था । इसे साम्राज्य के विशिष्ट वर्ग के मुसलमानों को दे दी गई थी, विशेष रूप से खलीफा के परिवार के सदस्यों को।

प्रश्न 19.
इस्लामी राज्य में कृषि भूमि के नियन्त्रण एवं भू-राजस्व व्यवस्था की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
इस्लामी राज्य में कृषि भूमि का सर्वोपरि नियन्त्रण राज्य के हाथों में था। राज्य अपनी अधिकांश आय भू- राजस्व से प्राप्त करता था । अरबों द्वारा जीती गई भूमि पर जो मालिकों के हाथों में रहती थी, कर (खराज ) लगता था। खराज खेती की स्थिति के अनुसार उपज के आधे हिस्से से लेकर उसके पाँचवें हिस्से के बराबर होता था । जिस भूमि पर मुसलमानों का स्वामित्व था अथवा जिसमें उनके द्वारा खेती की जाती थी, उस पर उपज के दसवें हिस्से के बराबर कर लगता था।

जब गैर-मुसलमान कम कर देने के उद्देश्य से मुसलमान बनने लगे, तो उससे राज्य की आय कम हो गई। इस पर खलीफाओं ने पहले तो धर्मान्तरण को निरुत्साहित किया और बाद में कराधान की एकसमान नीति अपनाई। दसवीं शताब्दी से राज्य ने अधिकारियों को उनका वेतन भूमियों के राजस्व से देना शुरू किया। इसे ‘इक्का’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है- ‘राजस्व का हिस्सा’।

प्रश्न 20.
इस्लामी राज्य में खेती में समृद्धि राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ कैसे आई? इस सम्बन्ध में राज्य द्वारा क्या उपाय किये गए ?
उत्तर:
इस्लामी राज्य में खेती में समृद्धि – इस्लामी राज्य में खेती में समृद्धि राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ आई। इस सम्बन्ध में राज्य ने निम्नलिखित उपाय किये–
(1) नीलघाटी सहित अनेक क्षेत्रों में राज्य ने सिंचाई प्रणालियों का विकास किया। राज्य ने अनेक बाँधों तथा नहरों का निर्माण करवाया और अनेक कुएँ खुदवाये।
(2) अपनी भूमि पर पहली बार खेती करने वाले कृषकों को कर में छूट दी गई।
(3) खेती – योग्य भूमि का विस्तार किया गया। इन उपायों के परिणामस्वरूप उत्पादकता में वृद्धि हुई।
(4) कुछ नई फसलों, जैसे कपास, संतरा, केला, तरबूज, पालक और बैंगन की खेती की गई और इन फसलों का यूरोप को निर्यात किया गया।

प्रश्न 21.
“मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने अदायगी और व्यापार व्यवस्था के उत्तम तरीकों को विकसित किया।” विवेचना कीजिए।
अथवा
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में साख-पत्रों तथा हुण्डियों का उपयोग किस प्रकार किया जाता था ?
उत्तर:
साख-पत्रों तथा हुण्डियों का उपयोग – मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने अदायगी और व्यापार व्यवस्था के उत्तम तरीकों को विकसित किया। व्यापारियों तथा साहूकारों द्वारा धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए साख-पत्रों ( सक्क) तथा हुण्डियों (बिल ऑफ एक्सचेंज – सुफतजा ) का उपयोग किया जाता था। वाणिज्यिक पत्रों के व्यापक उपयोग से व्यापारियों को प्रत्येक स्थान पर नकद मुद्रा अपने साथ ले जाने से मुक्ति मिल गई और इससे उनकी यात्राएँ पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो गईं। खलीफा भी वेतन देने अथवा कवियों और चारणों को इनाम देने के लिए साख-पत्रों (सक्क) का प्रयोग करते थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 22.
उलमा कौन थे? उनके क्या कार्य थे?
उत्तर:
उलमा इस्लाम के धार्मिक विद्वान थे। वे कुरान से प्राप्त ज्ञान (इल्म) और पैगम्बर के आदर्श व्यवहार (सुन्ना) का मार्गदर्शन करते थे। मध्यकाल में उलमा अपना समय कुरान पर टीका (तफसीर) लिखने और पैगम्बर मुहम्मद की प्रामाणिक उक्तियों और कार्यों को लेखबद्ध (हदीथ) करने में लगाते थे। कुछ उलेमाओं ने कर्मकाण्डों (इबादत) के द्वारा ईश्वर के साथ मुसलमानों के सम्बन्धों को नियन्त्रित करने और सामाजिक कार्यों (मुआमलात) के द्वारा अन्य व्यक्तियों के साथ मुसलमानों के सम्बन्धों को नियन्त्रित करने के लिए कानून अथवा शरीआ तैयार करने का काम किया। इस्लामी कानून तैयार करने के लिए विधिवेत्ताओं ने तर्क और अनुमान (कियास) का प्रयोग भी किया। आठवीं तथा नौवीं शताब्दी में कानून की चार शाखाएँ (मजहब) बन गईं। ये शाखाएँ थीं –

  • मलिकी
  • हनफी
  • शफीई
  • हनबली।

प्रश्न 23.
‘कुरान शरीफ’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
कुरान शरीफ- अरबी भाषा में रचित कुरान शरीफ 114 अध्यायों (सूराओं) में विभाजित है। मुस्लिम परम्परा के अनुसार, कुरान उन सन्देशों (रहस्योद्घाटन) का संग्रह है, जो खुदा ने पैगम्बर मुहम्मद साहब को 610 तथा 632 के बीच की अवधि में पहले मक्का में और फिर मदीना में दिए थे। इन रहस्योद्घाटनों को संकलित करने का कार्य 650 में पूरा किया गया था। वर्तमान में जो सबसे प्राचीन सम्पूर्ण कुरान उपलब्ध है, वह नौवीं शताब्दी की है। कुरान शरीफ मुसलमानों का पवित्र ग्रन्थ है। कुरान शरीफ के अध्याय 31, पद 27 में कहा गया है कि “यदि संसार के सभी पेड़ कलम होते और समुद्र स्याही होते और इस तरह सात समुद्र स्याही की पूर्ति करने के लिए होते, तो भी लिखते-लिखते अल्लाह के शब्द समाप्त न होते। ”

प्रश्न 24.
प्रारम्भिक इस्लाम के इतिहास के लिए स्रोत सामग्री के रूप में कुरान के उपयोग ने कौनसी समस्याएँ प्रस्तुत की हैं?
अथवा
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में उलमा वर्ग कुरान पर टीकाएँ लिखने के लिए क्यों प्रेरित हुआ?
उत्तर:
(1) कुरान एक धर्म-ग्रन्थ है- पहली समस्या यह है कि कुरान शरीफ एक धर्म-ग्रन्थ है। यह एक ऐसा मूल पाठ है, जिसमें धार्मिक सत्ता निहित है। प्रायः मुसलमान यह मानते हैं कि खुदा की वाणी (कलाम अल्लाह) होने के कारण कुरान को शब्दश: समझा जाना चाहिए। परन्तु बुद्धिवादी धर्म विज्ञानी अधिक उदार विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने कुरान की व्याख्या अधिक उदारता से की। 833 ई. में अब्बासी खलीफा अल – मामून मत लागू किया कि कुरान खुदा की वाणी की बजाय उसकी रचना है।

(2) कुरान प्रायः रूपकों में बात करता है – दूसरी समस्या यह है कि कुरान प्रायः रूपकों में बात करता है। ओल्ड टेस्टामेन्ट के विपरीत, यह घटनाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि केवल उनका उल्लेख करता है। इसलिए मध्यकाल के मुस्लिम विद्वानों को पैगम्बर मुहम्मद के वचनों के अभिलेखों (हदीथ) की सहायता से कई टीकाएँ लिखनी पड़ी थीं। कुरान को पढ़ने-समझने के लिए कई हदीथ लिखे गए।

प्रश्न 25.
सूफियों के धार्मिक सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
अथवा
‘सूफीवाद’ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
मध्यकालीन इस्लाम में सूफियों के धार्मिक विचार बताइये।
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लाम के धार्मिक विचारों वाले लोगों का एक समूह बन गया था, जिन्हें सूफी कहा जाता है। उनके धार्मिक सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –
(1) सूफी लोग तपश्चर्या (रहबनिया) तथा रहस्यवाद के द्वारा खुदा का अधिक गहन और अधिक वैयक्तिक ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे।

(2) सूफियों की भौतिक पदार्थों तथा सांसारिक सुखों में रुचि नहीं थी। ये लोग संसार का त्याग करना चाहते थे और केवल खुदा पर भरोसा करते थे

(3) सर्वेश्वरवाद ईश्वर और उसकी सृष्टि के एक होने का विचार है जिसका अभिप्राय यह है कि मनुष्य की आत्मा को परमात्मा के साथ मिलाना चाहिए।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

(4) सूफीवाद के अनुसार ईश्वर से मिलना, ईश्वर के साथ तीव्र प्रेम (इश्क) के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। इस इश्क का उपदेश एक महिला सन्त बसरा की राबिया द्वारा अपनी शायरी में दिया गया था। ईरानी सूफी बयाजिद बिस्तामी प्रथम व्यक्ति था जिसने अपने आप को खुदा में लीन या फना करने का उपदेश दिया था।

(5) सूफी लोग आनन्द उत्पन्न करने तथा प्रेम और भावावेश को तीव्र करने के लिए संगीत समारोहों (सभा) का उपयोग करते हैं।

(6) सूफीवाद का द्वार सबके लिए खुला है

प्रश्न 26.
इब्नसिना के साहित्यिक योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इब्नसिना (980-1037 ई.) एक प्रसिद्ध चिकित्सक और दार्शनिक था । वह इस बात को नहीं मानता था कि कयामत के दिन व्यक्ति पुनः जीवित हो जाता है। उन्होंने ‘चिकित्सा के सिद्धान्त’ (अल-कानून फिलतिब) नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी, जो दस लाख शब्दों वाली पाण्डुलिपि थी। इस पुस्तक में तत्कालीन औषधशास्त्रियों द्वारा बेची जाने वाली 760 औषधियों का उल्लेख है। इसमें इब्नसिना द्वारा अस्पतालों में किये गए प्रयोगों तथा अनुभवों की जानकारी भी दी गई है।

इस पुस्तक में आहार – विज्ञान के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। इसमें यह बताया गया है कि जलवायु और पर्यावरण का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त कुछ रोगों के संक्रामक स्वरूप की जानकारी भी दी गई है । इस पुस्तक का महत्त्व इस बात से प्रकट हो जाता है कि इस पुस्तक का उपयोग यूरोप में एक पाठ्यपुस्तक के रूप में किया जाता था।

प्रश्न 27.
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में भाषा और साहित्य के विकास की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में श्रेष्ठ भाषा और सृजनात्मक कल्पना को व्यक्ति के सर्वाधिक प्रशंसनीय गुणों में शामिल किया जाता था । ये गुण किसी भी व्यक्ति की विचार – अभिव्यक्ति को अदब के स्तर तक ऊँचा उठा देते थे। इस्लाम – पूर्व काल की सर्वाधिक लोकप्रिय रचना संबोधन गीत ( कसीदा ) था।

अब्बासी – काल के कवियों ने अपने आश्रयदाताओं की उपलब्धियों का गुणगान करने के लिए संबोधन गीत नामक विधा का विकास किया। फारसी मूल के कवियों ने अरबी कविता में नये प्राण फूँके । फारसी मूल के एक कवि अबुनुवास ने इस्लाम द्वारा वर्जित आनन्द मनाने के उद्देश्य से शराब और पुरुष – प्रेम जैसे नये विषयों पर श्रेष्ठ कविताओं की रचना की । सूफियों ने रहस्यवादी प्रेम की सुरा द्वारा उत्पन्न मस्ती का गुणगान किया।

प्रश्न 28.
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में नई फारसी के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में अरबों की ईरान- विजय के बाद नई फारसी का पर्याप्त विकास हुआ। इसमें अरबी शब्दों की संख्या बहुत अधिक थी । खुरासानी और तूरानी राज्यों की स्थापना से नई फारसी सांस्कृतिक ऊँचाइयों पर पहुँच गई। समानी राज दरबार के कवि रुदकी को नई फारसी कविता का जनक माना जाता था।

इस कविता में छोटे गीत-काव्य (गज़ल) तथा चतुष्पदी ( रुबाई) जैसे नये रूप शामिल थे। रुबाई चार पंक्तियों वाला छन्द होता है। इसका प्रयोग प्रियतम अथवा प्रेयसी के सौन्दर्य का वर्णन करने, संरक्षक की प्रशंसा करने अथवा दार्शनिक विचारों की अभिव्यक्ति करने के लिए किया जाता है। उमर खय्याम ने रुबाई को पराकाष्ठा पर पहुँचा दिया उमर खय्याम ( 1048-1131 ई.) एक प्रसिद्ध कवि, खगोल वैज्ञानिक तथा गणितज्ञ था।

प्रश्न 29. गजनी साम्राज्य में हुए फारसी साहित्य के विकास का वर्णन कीजिए।
अथवा
फारसी भाषा के विकास में फिरदौसी के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्यारहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में गजनी फारसी साहित्यिक गतिविधियों का केन्द्र बन गया था। गजनी के शासक विद्या – प्रेमी थे। उन्होंने अनेक विद्वानों, कवियों तथा कलाकारों को संरक्षण प्रदान किया। गजनी के शासक महमूद गजनवी के दरबार में अनेक कवि और विद्वान आश्रित थे। उसके शासन काल में अनेक काव्य-संग्रहों (दीवानों) तथा महाकाव्यों (मथनवी) की रचना की गई। महमूद गजनवी के दरबार के विद्वानों में सबसे अधिक प्रसिद्ध फिरदौसी थे।

फिरदौसी ने ‘शाहनामा’ नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना की थी । इसे पूरा करने में 30 वर्ष लगे थे । इस ग्रन्थ में 50,000 पद हैं और यह इस्लामी साहित्य की एक उत्कृष्ट रचना मानी जाती है। शाहनामा परम्पराओं और आख्यानों का संग्रह है। इनमें सबसे अधिक लोकप्रिय आख्यान रुस्तम का है। ‘शाहनामा’ में प्रारम्भ से लेकर अरबों की विजय तक ईरान का वर्णन काव्यात्मक शैली में किया गया है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 30.
बगदाद के पुस्तक-विक्रेता इब्ननदीम की पुस्तक-सूची का उल्लेख कीजिए। इन पुस्तकों की विषय-वस्तु क्या थी?
उत्तर:
बगदाद के पुस्तक विक्रेता इब्ननदीम की पुस्तक सूची (किताब अल – फिहरिस्त ) में ऐसी अनेक पुस्तकों का उल्लेख है, जो पाठकों की नैतिक शिक्षा और उनके मनोरंजन के लिए लिखी गई थीं। इनमें सबसे प्राचीन पुस्तक ‘कलीला व दिमना’ (दो गीदड़ों के नाम, जो पुस्तक के मुख्य पात्र थे ) है। यह जानवरों की कहानियों का संग्रह है।

यह पुस्तक ‘पंचतन्त्र’ के पहलवी संस्करण का अरबी अनुवाद है। सबसे अधिक प्रचलित और लोकप्रिय रचनाएँ वीरों – साहसियों की कहानियाँ हैं जैसे अल- सिकन्दर तथा सिन्दबाद और दुःखी प्रेमियों जैसे कायस की कहानियाँ। ‘एक हजार एक रातें’ कहानियों का एक अन्य संग्रह है। इन कहानियों में विभिन्न प्रकार के मनुष्यों- उदार, मूर्ख, भोले-भाले और धूर्त मनुष्यों का चित्रण किया गया है। इनको शिक्षा प्रदान करने तथा मनोरंजन के लिए सुनाया जाता है। बसरा के जहीज ने ‘किताब-अल-बुखाला’ (कंजूसों की पुस्तक) नामक पुस्तक लिखी जिसमें कंजूसों के बारे में अनेक कहानियाँ हैं।

प्रश्न 31.
इस्लामी धार्मिक कला में प्राणियों के चित्रण की मनाही से कला के किन दो रूपों को बढ़ावा मिला?
उत्तर:
इस्लामी धार्मिक कला में प्राणियों के चित्रण की मनाही से कला के निम्नलिखित दो रूपों को बढ़ावा मिला –
(1) खुशनवीसी
(2) अरबेस्क। इमारतों को सुसज्जित करने के लिए प्रायः धार्मिक उद्धरणों का छोटे और बड़े शिलालेखों में उपयोग किया जाता था। कुरान शरीफ की आठवीं तथा नौवीं शताब्दियों की पाण्डुलिपियों में खुशनवीसी की कला को सर्वोत्तम रूप में सुरक्षित रखा गया है। ‘किताब – अल-अघानी’ (गीत पुस्तक), ‘कलीला व दिमना’, ‘हरिरी की मकामात’ जैसी साहित्यिक रचनाओं को लघु चित्रों से सुसज्जित किया गया था। इसके अतिरिक्त पुस्तक का सौन्दर्य बढ़ाने के लिए चित्रावली की अनेक प्रकार की तकनीकें शुरू की गई थीं। इमारतों तथा पुस्तकों के चित्रण में उद्यान की कल्पना पर आधारित पौधों और फूलों के नमूनों का उपयोग किया जाता था।

प्रश्न 32.
कई शताब्दियों तक दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद के रूप में विख्यात अल-मुतव्वकिल मस्जिद का रेखांकन कीजिये।
उत्तर:
‘अल-मुतव्वकिल’ मस्जिद दूसरी अब्बासी राजधानी समारा में स्थित थी। इसका निर्माण 850 ई. में किया गया था। यह एक विशाल मस्जिद थी। इसकी ईंटों की बनी हुई मीनार 50 मीटर ऊँची है। मेसोपोटामिया की वास्तुकला की परम्पराओं से प्रेरित यह कई शताब्दियों तक विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद थी।

निबन्धात्मक प्रश्न 

प्रश्न 1.
इस्लामी राज्य के सन् 600 से 1200 तक के इतिहास की जानकारी के प्रमुख स्रोतों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
इस्लामी राज्य के इतिहास की जानकारी के स्रोत प्रमुख इस्लामी राज्य के सन् 600 से 1200 तक के इतिहास की जानकारी के प्रमुख स्रोतों का विवेचन निम्नानुसार है –

1. इतिवृत्त अथवा तवारीख-इस्लामी राज्य के सन् 600 से 1200 तक के इतिहास की जानकारी के प्रमुख स्रोतों में इतिवृत्त अथवा तवारीख तथा अर्द्ध- ऐतिहासिक रचनाएँ उल्लेखनीय हैं। इनमें जीवन-चरित, के पैगम्बर मुहम्मद कथनों और कार्यों के अभिलेख (हदीथ) तथा कुरान के बारे में टीकाएँ सम्मिलित हैं। इन कृतियों का निर्माण प्रत्यक्षदर्शी वृत्तान्तों से किया गया था।

प्रत्येक सूचना की प्रामाणिकता की जाँच एक आलोचनात्मक विधि से की जाती थी जिसमें सूचना भेजने की श्रृंखला की जानकारी प्राप्त की जाती थी और वर्णन करने वाले की विश्वसनीयता का पता लगाया जाता था। मध्यकालीन मुस्लिम लेखकों ने सूचना का चयन करने तथा अपने सूचना देने वालों के अभिप्राय को समझने में अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक सतर्कता दिखाई है। उनका वर्णन अधिक सुनियोजित तथा विश्लेषणात्मक है।

2. प्रमुख ऐतिहासिक और अर्द्ध- ऐतिहासिक रचनाएँ – अधिकतर ऐतिहासिक और अर्द्ध- ऐतिहासिक रचनाएँ अरबी भाषा में हैं। इनमें सर्वश्रेष्ठ रचना ‘तबरी की तारीख’ है। इसका 38 खण्डों में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। फारसी भाषा में लिखित इतिवृत्तों में ईरान और मध्य एशिया के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है। ईसाई इतिवृत्तों से प्रारम्भिक इस्लाम के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।

3. दस्तावेजी साक्ष्य – दस्तावेजी साक्ष्य इस्लामी राज्य के इतिहास के निर्माण के लिए सर्वाधिक उपयोगी हैं क्योंकि इनमें पूर्व चिन्तन कर घटनाओं और व्यक्तियों का वर्णन नहीं होता है। दस्तावेजी साहित्य में सरकारी आदेश अथवा निजी पत्राचार सम्मिलित हैं। दस्तावेजी साक्ष्य यूनानी और अरबी पैपाइरस तथा गेनिजा अभिलेखों से प्राप्त होता है।

4. पुरातत्वीय और अन्य साक्ष्य – पुरातत्वीय (उजड़े महलों में की गई खुदाई), मुद्राशास्त्रीय (सिक्कों के अध्ययन) और पुरालेखीय (शिलालेखों का अध्ययन), साक्ष्य आर्थिक इतिहास, कला इतिहास, नामों और तवारीखों के प्रमाणीकरण के लिए बड़े उपयोगी हैं।

5. पाश्चात्य विद्वानों द्वारा इतिहास लेखन – सही अर्थों में इस्लाम के इतिहास ग्रन्थ लिखे जाने का कार्य उन्नीसवीं शताब्दी में जर्मनी तथा नीदरलैण्ड के विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों द्वारा किया गया। कुछ ईसाई पादरियों ने भी इस्लाम के इतिहास से सम्बन्धित कुछ ग्रन्थ लिखे। प्राच्यविद् नामक विद्वान अरबी और फारसी के ज्ञान के लिए तथा मूल ग्रन्थों के आलोचनात्मक विश्लेषण के लिए प्रसिद्ध है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

इग्नाज गोल्डजिहर नामक यहूदी ने जर्मन भाषा में इस्लामी कानून और धर्म – विज्ञान के बारे में पुस्तकें लिखीं। इस्लाम के बीसवीं शताब्दी के इतिहासकारों ने अधिकतर प्राच्यविदों के तरीकों का ही अनुसरण किया है। उन्होंने नये विषयों को सम्मिलित कर इस्लाम के इतिहास के क्षेत्रों का विस्तार किया है और अर्थशास्त्र, मानव-विज्ञान और सांख्यिकी जैसे सम्बद्ध विषयों का प्रयोग करके प्राच्य अध्ययन के अनेक पहलुओं को स्पष्ट किया है।

प्रश्न 2.
पैगम्बर मुहम्मद साहब की जीवनी का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पैगम्बर मुहम्मद साहब की जीवनी पैगम्बर मुहम्मद साहब का जन्म 570 ई. में मक्का में हुआ था। वे कुरैश कबीले से सम्बन्धित थे तथा भाषा और संस्कृति की दृष्टि से अरबी थे। उन्होंने खदीजा नामक एक विधवा स्त्री से विवाह किया था। खुदा का सन्देशवाहक घोषित करना – सन् 612 के आसपास पैगम्बर मुहम्मद ने अपने आप को खुदा का सन्देशवाहक घोषित किया। उन्होंने यह प्रचार किया कि अल्लाह एक है तथा केवल अल्लाह की ही इबादत ( आराधना) की जानी चाहिए। मक्का के निवासियों द्वारा पैगम्बर मुहम्मद का विरोध – पैगम्बर मुहम्मद ने धार्मिक पाखण्डों तथा अन्धविश्वासों का विरोध किया।

मक्का के व्यापारियों तथा पुजारियों को पैगम्बर मुहम्मद के विचार पसन्द नहीं आए क्योंकि वे अपने आप को व्यापार तथा धर्म के लाभों से वंचित अनुभव करते थे । अतः मक्का के धनी लोगों ने पैगम्बर मुहम्मद का विरोध करना शुरू कर दिया, क्योंकि उन्हें देवी-देवताओं की उपेक्षा किया जाना बुरा लगा था तथा उन्होंने नये इस्लाम धर्म को मक्का की प्रतिष्ठा तथा समृद्धि के लिए खतरा समझा था।

मक्का छोड़कर मदीना जाना – पैगम्बर मुहम्मद के विरोधियों ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। अतः विवश होकर 622 ई. में पैगम्बर मुहम्मद साहब को मक्का छोड़कर मदीना जाना पड़ा। पैगम्बर मुहम्मद की इस यात्रा को ‘हिजरा’ कहते हैं। सन् 622 से मुस्लिम कलैण्डर अर्थात् हिजरी सन् की शुरुआत हुई। मदीना पहुँचने पर मुहम्मद साहब का भव्य स्वागत किया गया। मदीना में पैगम्बर मुहम्मद ने इस्लाम का प्रचार किया।

पैगम्बर मुहम्मद ने मदीना में एक राजनैतिक व्यवस्था स्थापित की, जिसने उनके अनुयायियों को सुरक्षा प्रदान की। इसके साथ-साथ उन्होंने शहर में चल रही कलह को सुलझाया। अब उम्मा को एक बड़े राजनैतिक समुदाय में बदला गया। इसमें मदीना के बहुदेववादियों तथा यहूदियों को पैगम्बर मुहम्मद के नेतृत्व में लाया गया। मक्का पर विजय – पैगम्बर मुहम्मद ने मक्का परं आक्रमण किया। मक्कावासियों की पराजय हुई और उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। मक्का इस्लाम का तीर्थ-स्थान तथा धार्मिक केन्द्र बन गया।

इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार – मक्का पर अधिकार कर लेने के बाद एक धार्मिक प्रचारक और राजनैतिक नेता के रूप में पैगम्बर मुहम्मद की प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैल गई। पैगम्बर मुहम्मद ने कर्मकाण्डों जैसे उपवास आदि और नैतिक सिद्धान्तों को बढ़ाकर और उनमें सुधार करके इस्लाम धर्म को अपने अनुयायियों के लिए मजबूत बनाया।

उन्होंने अब समुदाय की सदस्यता के लिए धर्मान्तरण को एकमात्र कसौटी माना। पैगम्बर मुहम्मद की उपलब्धियों से प्रभावित होकर हजारों अरब लोगों ने इस्लाम धर्म को ग्रहण कर लिया। शीघ्र ही इस्लाम धर्म का प्रसार सम्पूर्ण अरब देश में हो गया। मदीना इस्लामी राज्य की प्रशासनिक राजधानी और मक्का उसका धार्मिक केन्द्र बन गया। काबा से बुतों को हटा दिया गया। 632 ई. में पैगम्बर मुहम्मद साहब की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के समय तक लगभग सम्पूर्ण अरब देश ने इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लिया था।

प्रश्न 3.
पैगम्बर मुहम्मद साहब की शिक्षाओं का वर्णन कीजिये।
अथवा
इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों की विवेचना कीजिये।
उत्तर- पैगम्बर मुहम्मद साहब की शिक्षाएँ (इस्लाम धर्म के प्रमुख सिद्धान्त) पैगम्बर मुहम्मद साहब की प्रमुख शिक्षाएँ मुसलमानों के पवित्र ग्रन्थ ‘कुरान शरीफ’ में संकलित हैं । इनका वर्णन निम्नानुसार है –
(1) एक अल्लाह की उपासना – पैगम्बर मुहम्मद के अनुसार केवल एक अल्लाह की ही उपासना की जानी चाहिए।
(2) इस्लाम धर्म के पाँच प्रमुख सिद्धान्त – प्रत्येक मुसलमान को इस्लाम धर्म के पाँच प्रमुख सिद्धान्तों का पालना करना चाहिए –

  • अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है और मुहम्मद साहब उसके पैगम्बर हैं।
  • उसे प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़नी चाहिए।
  • उसे रमज़ान के महीने में रोज़े रखने चाहिए।
  • उसे अपनी आय का 40वाँ भाग गरीबों को दान में देना चाहिए।
  • उसे जीवन में एक बार हज के लिए मक्का की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।

(3) नैतिक गुणों पर बल – मुसलमानों को झूठ नहीं बोलना चाहिए। उन्हें चोरी नहीं करनी चाहिए। उन्हें खैरात बाँटना चाहिए।
(4) सामाजिक समानता – पैगम्बर मुहम्मद साहब के अनुसार सब मुसलमान समान हैं और भाई-भाई हैं।
(5) मूर्ति – पूजा का विरोध – पैगम्बर मुहम्मद ने मूर्ति-पूजा का घोर विरोध किया। उन्होंने मूर्ति-पूजा को इस्लाम धर्म के विरुद्ध बतलाया।
(6) कर्मवाद तथा परलोक में विश्वास – पैगम्बर मुहम्मद साहब के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है। कयामत के दिन सभी प्राणी अल्लाह के सामने लाए जाते हैं, जहाँ उनके कर्मों के अनुसार न्याय होता है।
(7) आत्मा की अमरता में विश्वास – इस्लाम धर्म के अनुसार आत्मा अजर तथा अमर है। शरीर नश्वर है, परन्तु आत्मा अमर है।
(8) आस्तिकों के समाज की स्थापना – पैगम्बर मुहम्मद ने आस्तिकों (उम्मा) के ऐसे समाज की स्थापना पर बल दिया, जो सामान्य धार्मिक विश्वासों के द्वारा आपस में जुड़े हों।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 4.
प्रथम चार खलीफाओं के शासन काल में इस्लामी राज्य के विस्तार की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
प्रथम चार खलीफाओं के शासन काल में इस्लामी राज्य का विस्ता प्रथम चार खलीफाओं के शासन काल में इस्लामी राज्य के विस्तार की विवेचना निम्नानुसार है –
(1) प्रथम खलीफा – प्रथम खलीफा अबूबकर ने अनेक अभियानों द्वारा विद्रोहों का दमन किया।
(2) द्वितीय खलीफा – द्वितीय खलीफा उमर ने उम्मा की सत्ता का विस्तार करने का निश्चय किया।

खलीफा जानता था कि उम्मा को व्यापार और करों से होने वाली साधारण आमदनी के बल पर नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए बहुत बड़ी धन – राशि की जरूरत पड़ेगी। यह धन-सम्पत्ति सैनिक अभियानों के द्वारा प्राप्त की जा सकती थी। अतः खलीफा तथा उसके सेनापतियों ने पश्चिम में बाइजेन्टाइन साम्राज्य तथा पूर्व में ससानी साम्राज्य के विरुद्ध सैनिक अभियानों की योजना बनाई। अरबों के समय इन साम्राज्यों की शक्ति धार्मिक संघर्षों तथा अभिजात वर्गों के विद्रोहों . के कारण क्षीण हो चुकी थी । इस कारण युद्धों और सन्धियों के माध्यम से इन साम्राज्यों को अपने अधीन लाना सरल हो गया था। अतः तीन सफल अभियानों (637-642 ई.) में अरबों ने सीरिया, इराक, ईरान तथा मिस्र पर अधिकार कर लिया। सामरिक नीति, धार्मिक जोश तथा विरोधियों की दुर्बलताओं के कारण अरबों की विजय हुई

(3) तृतीय खलीफा – तृतीय खलीफा उथमान ( 644-656 ई.) ने अपना नियन्त्रण मध्य एशिया तक बढ़ाने के लिए और अभियान चलाए। इस प्रकार पैगम्बर मुहम्मद साहब की मृत्यु के एक दशक के अन्दर अरब-इस्लामी राज्य ने नील तथा ऑक्सस के बीच के विशाल क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व तथा नियन्त्रण स्थापित कर लिया। ये प्रदेश आज तक मुस्लिम शासन के अन्तर्गत हैं। लेकिन उसने अपने शासन में मक्का के कुरैश समुदाय के लोगों को भर दिया। इससे इराक, मिस्र तथा मदीना में विरोध उत्पन्न हो जाने के परिणामस्वरूप 656 ई. में उथमान की हत्या कर दी गई।

(4) चतुर्थ खलीफा – चतुर्थ खलीफा अली ने मक्का के अभिजात तन्त्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों के विरुद्ध दो युद्ध लड़े, जिनसे मुसलमानों में दरार और गहरी हो गई । अली ने मुहम्मद की पत्नी आयशा की सेना को ‘ऊँट की लड़ाई’ में पराजित कर दिया परन्तु वह उथमान के नातेदार तथा सीरिया के गवर्नर मुआविया के नेतृत्व वाले गुट का दमन नहीं कर सका। अली ने सिफ्फिन में दूसरा युद्ध लड़ा, जो सन्धि के रूप में समाप्त हुआ। 661 में अली की हत्या कर दी गई।

प्रश्न 5.
उमय्यद वंश के खलीफाओं की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
अथना
अब्द-अल-मलिक तथा उसके उत्तराधिकारियों के शासन काल में अरब और इस्लाम दोनों पहचानों पर मजबूती से बल दिया जाता रहा ।” विवेचना कीजिए।
उत्तर:
उमय्यद वंश के खलीफाओं की उपलब्धियाँ –
661 ई. में मुआविया ने अपने आप को खलीफा घोषित कर दिया तथा उसने उमय्यद वंश की स्थापना की, जो 750 ई. तक चलता रहा। उमय्यद वंश के खलीफाओं की उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –
(1) उमय्यदों ने ऐसे अनेक राजनीतिक उपाय किये, जिनसे उम्मा के भीतर उनका नेतृत्व मजबूत हो गया।

(2) प्रथम उमय्यद खलीफा मुआविया ने दमिश्क को अपनी राजधानी बनाया और फिर बाइजेन्टाइन साम्राज्य की राजदरबारी प्रथाओं और प्रशासनिक संस्थाओं को अपना लिया।

(3) मुआविया ने वंशगत उत्तराधिकार की परम्परा भी शुरू की और प्रमुख मुसलमानों को इस बात पर राजी कर ‘लिया कि वे उसके पुत्र को उसका उत्तराधिकारी स्वीकार करें। उसके पश्चात् आने वाले खलीफाओं ने भी इस नीति का अनुसरण किया, जिसके परिणामस्वरूप उमय्यद वंश के खलीफा 90 वर्ष तक और अब्बासी खलीफा दो शताब्दियों तक सत्ता में बने रहे।

(4) उमय्यद – राज्य अब एक साम्राज्यिक शक्ति बन चुका था। अब यह राज्य सीधे इस्लाम पर आधारित नहीं था। अब यह शासन – कला तथा सीरियाई सैनिकों की वफादारी के बल पर चल रहा था।

(5) प्रशासन में ईसाई सलाहकार तथा जरतुश्त लिपिक और अधिकारी भी सम्मिलित थें। इसके बावजूद इस्लाम उमय्यद शासन को वैधता प्रदान करता रहा। उमय्यद सदैव एकता के लिए प्रयत्नशील रहे तथा विद्रोहों का इस्लाम के नाम पर दमन करते रहे।

(6) उमय्यदों ने अपनी अरबी सामाजिक पहचान बनाए रखी। अब्द-अल-मलिक और उसके उत्तराधिकारियों के शासन काल में अरब और इस्लाम दोनों पहचानों पर दृढ़तापूर्वक बल दिया जाता रहा।

यथा –
(i) अब्द-अल-मलिक ने अरबी को प्रशासन की भाषा बनाया।

(ii) अब्द-अल-मलिक ने इस्लामी सिक्के जारी किये। इस्लामी राज्य में जो सोने के दीनार तथा चाँदी के दिरहम चल रहे थे, वे रोमन तथा ईरान सिक्कों की नकल थे। इन सिक्कों पर सलीब और अग्नि-वेदी के चिन्ह बने होते थे। अब्द-अल-मलिक ने इन चिन्हों को हटवा दिया और सिक्कों पर अरबी भाषा में लिखा गया।

(iii) अब्द-अल-मलिक ने जेरुस्लम में डोम ऑफ रॉक का निर्माण करवाकर अरब-इस्लामी पहचान के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। ‘डोम ऑफ रॉक’ इस्लामी वास्तुकला का पहला उत्कृष्ट नमूना है। जेरुस्लम नगर की मुस्लिम संस्कृति के प्रतीक के रूप में इस इमारत का निर्माण किया गया। पैगम्बर मुहम्मद साहब की स्वर्ग की ओर की रात्रि- (मिराज) से यह इमारत जुड़ गई। यह इसका रहस्यमय महत्त्व है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 6.
अब्बासी क्रान्ति के लिए कौनसी परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं?
अथवा
अब्बासी क्रान्ति के महत्त्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
अब्बासी क्रान्ति – उमय्यद वंश को मुस्लिम राजनैतिक व्यवस्था के केन्द्रीकरण के लिए भारी मूल्य चुकाना पड़ा। ‘दवा’ नामक एक सुसंगठित आन्दोलन ने उमय्यद वंश की सत्ता को नष्ट कर दिया। 750 में उमय्यद वंश के स्थान पर अब्बासियों की सत्ता स्थापित हुई। अब्बासियों ने उमय्यद – शासन को दुष्ट बताया और यह दावा किया कि वे पैगम्बर मुहम्मद साहब के मूल इस्लाम की पुनर्स्थापना करेंगे।

अब्बासी क्रान्ति के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ अब्बासी क्रान्ति के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं –
(1) खुरासान के अरब नागरिकों में असन्तोष – अब्बासियों का विद्रोह पूर्वी ईरान में स्थित खुरासान में हुआ। खुरासान में अरब – ईरानियों की मिली-जुली आबादी थी। खुरासान में अरब सैनिक अधिकांशतः इराक से आए थे। ये लोग सीरियाई लोगों के प्रभुत्व से नाराज थे। खुरासान के अरब नागरिक उमय्यद शासन से इसलिए घृणा करते थे कि उमय्यद शासकों ने करों में छूट देने तथा विशेषाधिकार देने के जो वचन दिए थे, वे पूरे नहीं किये थे।

(2) ईरानी मुसलमानों में असन्तोष-खुरासान के ईरानी मुसलमानों को अपनी जातीय चेतना से ग्रस्त अरबों के तिरस्कार का शिकार होना पड़ा था। अतः वे भी उमय्यदों से नाराज थे तथा उनकी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए किसी भी अभियान में सम्मिलित होने के इच्छुक थे।

अब्बासी क्रान्ति की सफलता – अब्बासी पैगम्बर मुहम्मद के चाचा अब्बास के वंशज थे। अब्बासियों ने विभिन्न समूहों का समर्थन प्राप्त कर लिया। उन्होंने लोगों को यह आश्वासन दिया कि पैगम्बर मुहम्मद के परिवार का कोई मसीहा (महदी) उन्हें उमय्यदों के दमनकारी शासन से मुक्ति दिलाएगा। इस प्रकार उन्होंने शासन-सत्ता प्राप्त करने के अपने प्रयत्न को वैध ठहराया। अब्बासियों की सेना का नेतृत्व एक ईरानी गुलाम अबू मुस्लिम ने किया। उसने अन्तिम उमय्यदं खलीफा मारवान को जब नदी पर हुई लड़ाई में पराजित कर दिया। इस प्रकार उमय्यद वंश के स्थान पर अब्बासी वंश की सत्ता स्थापित हुई। इस घटना को ‘अब्बासी क्रान्ति’ कहते हैं।

‘अब्बासी क्रान्ति’ का महत्त्व –
(1) अब्बासी क्रान्ति से केवल वंश का ही परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि इस्लाम के राजनीतिक ढाँचे और उसकी संस्कृति में भी परिवर्तन आए।
(2) अब्बासी क्रान्ति के अन्तर्गत अरबों के प्रभाव में कमी आई, जबकि ईरानी संस्कृति के महत्त्व में वृद्धि हुई।
(3) अब्बासियों ने अपनी राजधानी बगदाद में स्थापित की।
(4) अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब्बासी शासन में सेना और नौकरशाही का पुनर्गठन गैर- कबीलाई आधार पर किया गया।
(5) अब्बासी शासकों ने खिलाफत की धार्मिक स्थिति और कार्यों को सुदृढ़ बनाया और इस्लामी संस्थाओं तथा विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया।
(6) अब्बासियों ने उमय्यदों की उत्कृष्ट शाही वास्तुकला और राजदरबार के व्यापक समारोहों की परम्पराओं को बनाए रखा।

प्रश्न 7.
खिलाफत के विघटन पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
खिलाफत का विघटन – अब्बासी राज्य नौवीं शताब्दी से कमजोर होता गया और अब्बासियों की सत्ता सीमित होती गई।
अब्बासी राज्य की कमजोरी के कारण – अब्बासी राज्य की कमजोरी के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –
(1) अब्बासी राज्य की कमजोरी का एक कारण यह था कि दूर के प्रान्तों पर उनका नियन्त्रण कम हो गया था।
(2) सेना और नौकरशाही में अरब – समर्थक और ईरान समर्थक गुटों में आपस में झगड़ा हो गया था।
(3) सन् 810 में खलीफा हारुन- अल रशीद के पुत्रों, अमीन और मामुन के समर्थकों के बीच गृह-युद्ध छिड़ गया जिससे गुटबन्दी और अधिक गहरी हो गई और तुर्की गुलाम अधिकारियों का एक नया शक्ति – गुट बन गया। शियाओं और सुन्नियों में सत्ता प्राप्ति के लिए प्रतिस्पर्द्धा शुरू हो गई थी।
(4) अनेक नए छोटे राजवंश स्थापित हो गए। खुरासान और ट्रांसोक्सियाना अर्थात् तूरान अथवा ऑक्सस के पार वाले क्षेत्रों में ताहिरी तथा समानी वंश और मिस्र तथा सीरिया में तुलुनी वंश स्थापित हुए। अब्बासियों की सत्ता शीघ्र ही मध्य इराक तथा पश्चिमी ईरान तक सीमित रह गई।
(5) सन् 945 में ईरान के कैस्पियन क्षेत्र में बुवाही नामक शिया वंश ने बगदाद पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार अब्बासियों की सत्ता समाप्त हो गई। बुवाही शासकों ने अनेक उपाधियाँ धारण कीं जिनमें ‘शहंशाह’ (राजाओं का राजा) नामक उपाधि भी शामिल थी। परन्तु उन्होंने ‘खलीफा’ की पदवी धारण नहीं की।

उन्होंने अब्बासी खलीफा को अपनी सुन्नी प्रजा के प्रतीकात्मक मुखिया के रूप में बनाए रखा। इस प्रकार खिलाफत का विघटन हो गया। फातिमी खिलाफत की स्थापना -बुवाही शासकों द्वारा खिलाफत को समाप्त न करने का निर्णय चतुराईपूर्ण था, क्योंकि फातिमी नामक एक अन्य शिया राजवंश इस्लामी जगत पर शासन करना चाहता था।

फातिमी का सम्बन्ध शिया सम्प्रदाय के एक उप-सम्प्रदाय इस्माइली से था और वे अपने आप को पैगम्बर की पुत्री फातिमा का वंशज मानते थे। इस आधार पर वे दावा करते थे कि वे इस्लाम के एकमात्र न्याय संगत शासक हैं। उन्होंने 969 ई. में मिस्र पर विजय प्राप्त की और फातिमी खिलाफत की स्थापना की। उन्होंने मिस्र की पुरानी राजधानी फुस्तात के स्थान पर काहिरा को राजधानी बनाया। दोनों प्रतिस्पर्द्धा राजवंशों ने शिया प्रशासकों, कवियों और विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 8.
धर्म-युद्ध से क्या अभिप्राय है? धर्म – युद्धों के प्रमुख कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर- धर्म – युद्ध – 1095 से 1291 ई. के बीच यूरोपीय ईसाइयों तथा मुसलमानों के बीच अनेक युद्ध लड़े गए। इन युद्धों को ‘ धर्म – युद्ध’ के नाम से पुकारा जाता है।
धर्म- युद्धों के कारण
धर्म- युद्धों के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –
(1) मुसलमानों द्वारा जेरुस्लम पर अधिकार करना – 638 में अरबों ने जेरुस्लम पर अधिकार कर लिया था। जेरुस्लम ईसाइयों का पवित्र स्थान था। ईसाई लोग जेरुस्लम को ईसा के क्रूसारोपण तथा पुनरुज्जीवन के स्थान के रूप में हमेशा याद करते थे। अतः ईसाई लोग जेरुस्लम पर पुनः अधिकार करने के लिए लालायित थे।

(2) मुसलमानों के प्रति शत्रुता – ग्यारहवीं शताब्दी में ईसाइयों की मुसलमानों के प्रति शत्रुता और अधिक स्पष्ट हो गई। इस समय तक नार्मनों, हंगरीवासियों तथा अनेक स्लाव लोगों को ईसाई बना लिया गया था। अब केवल मुसलमान मुख्य शत्रु रह गए थे।

(3) पश्चिमी यूरोप के सामाजिक और आर्थिक संगठनों में परिवर्तन – ग्यारहवीं शताब्दी में पश्चिमी यूरोप के सामाजिक और आर्थिक संगठनों में भी परिवर्तन हो गया था जिससे ईसाइयों तथा मुसलमानों के बीच शत्रुता और अधिक बढ़ गई।

(4) ईश्वरीय शान्ति आन्दोलन – पादरी और योद्धा वर्ग के लोग राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास के लिए प्रयत्नशील थे। ‘ईश्वरीय शान्ति आन्दोलन’ ने सामन्ती राज्यों के बीच सैनिक मुठभेड़ की सम्भावनाओं और लूटमार की प्रवृत्तियों को समाप्त कर दिया था। अब ईश्वरीय शान्ति आन्दोलन ने सामन्ती समाज की आक्रमणकारी प्रवृत्तियों को ईसाई – जगत से हटाकर ईश्वर के शत्रुओं अर्थात् मुसलमानों की ओर मोड़ दिया था। इसके फलस्वरूप ईसाइयों और मुसलमानों में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई। ईसाइयों के लिए यह संघर्ष न केवल उचित, बल्कि प्रशंसनीय समझा जाने लगा।

(5) सलजुक-साम्राज्य का विघटन – 1092 ई. में बगदाद के सलजुक सुल्तान मलिक शाह का देहान्त हो गया। उसकी मृत्यु के बाद उसके साम्राज्य का विघटन हो गया। इसके परिणामस्वरूप बाइजेन्टाइन सम्राट एलेक्सियस प्रथम को एशिया माइनर तथा उत्तरी सीरिया पर पुनः आधिपत्य स्थापित करने का अवसर मिल गया।

पोप अबर्न द्वितीय भी ईसाई धर्म के पुनरुत्थान के लिए लालायित था। अतः 1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने बाइजेन्टाइन-सम्राट के साथ मिलकर ‘पवित्र भूमि’ (होली लैण्ड) को मुक्त कराने के लिए ईश्वर के नाम पर युद्ध के लिए आह्वान किया। उपर्युक्त कारणों में 1095 तथा 1291 के बीच पश्चिमी यूरोपीय ईसाइयों तथा मुसलमानों में अनेक युद्ध लड़े गए जिन्हें ‘धर्म-युद्ध’ के नाम से पुकारा जाता है।

प्रश्न 9.
धर्म – युद्धों की घटनाओं का वर्णन कीजिए। इन धर्म- युद्धों के क्या प्रभाव हुए?
उत्तर:
धर्म – युद्धों की घटनाएँ 1095 से 1291 ई. के बीच ईसाइयों तथा मुसलमानों के बीच अनेक धर्म – युद्ध लड़े गए। इनका वर्णन निम्नानुसार –
(1) प्रथम धर्म – युद्ध (1098-99 ई.)-ईसाइयों और मुसलमानों के बीच प्रथम धर्म – युद्ध 1098-99 ई. में शुरू हुआ। इस युद्ध में फ्रांस और इटली के सैनिकों ने सीरिया में एंटीओक और जेरुस्लम पर अधिकार कर लिया जेरुस्लम में मुसलमानों और यहूदियों की बड़ी संख्या में निर्ममतापूर्ण हत्याएँ की गईं। शीघ्र ही ईसाइयों ने सीरिया- फिलिस्तीन के क्षेत्र में धर्म- युद्ध द्वारा जीते गए चार राज्य स्थापित कर लिए। इन क्षेत्रों को सामूहिक रूप से ‘आउटरैमर’ कहा जाता था। बाद के धर्म – युद्ध आउटरैमर की रक्षा तथा विस्तार के लिए किए गए।

(2) द्वितीय धर्म – युद्ध (1145-1149 ई.)-ईसाइयों द्वारा स्थापित ‘आउटरैमर क्षेत्र’ कुछ समय तक भली- भांति स्थापित रहा। परन्तु जब 1144 ई. में तुर्कों ने एड्रेस्सा पर अधिकार कर लिया तो पोप ने ईसाई राजाओं तथा सामन्तों से एक अन्य धर्म – युद्ध (1145-1149 ई.) के लिए अपील की। पोप की अपील पर एक जर्मन तथा फ्रांसीसी सेना ने दमिश्क पर अधिकार करने का प्रयास किया, परन्तु उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा और घर लौटना पड़ा। इसके पश्चात् ‘आउटरैमर’ की शक्ति धीरे-धीरे क्षीण होती गई। अब ईसाइयों में धर्म- युद्धों के प्रति जोश समाप्त हो गया तथा ईसाई शासकों ने विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करना और नये-नये प्रदेशों के लिए लड़ाई करना शुरू कर दिया।

इस युद्ध के दौरान सलाह अल-दीन ने एक मिस्री – सीरियाई साम्राज्य स्थापित किया और ईसाइयों के विरुद्ध धर्म – युद्ध शुरू कर दिया। 1187 ई. में उसने ईसाइयों को पराजित कर दिया। उसने प्रथम धर्म – -युद्ध . के लगभग एक शताब्दी बाद, जेरुस्लम पर पुनः अधिकार कर लिया। सलाह अल-दीन ने ईसाइयों के प्रति दयामय व्यवहार किया । यद्यपि उसने ‘दि चर्च ऑफ दि होली सेपलकर’ नामक गिरजाघर की देखभाल का काम ईसाइयों को सौंप दिया था, परन्तु अनेक गिरजाघरों को मस्जिदों में बदल दिया गया और जेरुस्लम एक बार फिर मुस्लिम शहर बन गया।

(3) तृतीय धर्म – युद्ध (1189 ई.) – जेरुस्लम शहर के छिन जाने से ईसाइयों में तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ और इसके फलस्वरूप 1189 ई. में तृतीय धर्म- युद्ध छिड़ गया । परन्तु धर्म- युद्ध करने वाले फिलिस्तीन में कुछ तटवर्ती शहरों और ईसाई तीर्थयात्रियों के लिए जेरुस्लम में मुक्त रूप से प्रवेश के सिवाय और कुछ प्राप्त नहीं कर सके । अन्ततः मिस्र के शासकों तथा मामलूकों ने 1291 में धर्म-युद्ध करने वाले सभी ईसाइयों को सम्पूर्ण फिलिस्तीन से बाहर निकाल दिया। धीरे-धीरे यूरोप की इस्लाम में सैनिक दिलचस्पी समाप्त हो गई और उसका ध्यान अपने आन्तरिक राजनैतिक और सांस्कृतिक विकास की ओर केन्द्रित हो गया।
धर्म- युद्धों के प्रभाव – धर्म – युद्धों ने ईसाई – मुस्लिम सम्बन्धों के निम्नलिखित दो पहलुओं पर स्थायी प्रभाव छोड़ा –

(1) मुस्लिम राज्यों ने अपनी ईसाई प्रजा के प्रति कठोर नीति अपनाना शुरू किया जो लड़ाइयों की कड़वी यादों और मिली-जुली आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा की जरूरतों का परिणाम था।

(2) मुस्लिम सत्ता की पुनर्स्थापना के पश्चात् भी पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापार में इटली के व्यापारिक समुदायों का प्रभाव बढ़ गया।

प्रश्न 10.
इस्लामी राज्य में शहरों के विकास तथा शहरी विशेषताओं पर एक निबन्ध लिखिए।
अथवा
इस्लामी राज्य में शहरीकरण की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
इस्लामी राज्य में शहरों का विकास – इस्लामी राज्य में शहरों की संख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई जिसके फलस्वरूप इस्लामी सभ्यता का विकास हुआ। अनेक नये शहरों की स्थापना की गई जिनका उद्देश्य मुख्य रूप से अरब सैनिकों को बसाना था। ये स्थानीय प्रशासन की रीढ़ थे। इस श्रेणी के फौजी शहरों में इराक में कुफा तथा बसरा और मिस्र में फुस्तात तथा काहिरा थे। इन शहरों के अतिरिक्त बगदाद, इस्फहान, दमिश्क तथा समरकन्द आदि कुछ पुराने शहर थे जिन्हें नया जीवन मिल गया था।

बगदाद अब्बासी खलीफाओं की राजधानी थी तथा अपनी स्थापना के बाद आधी शताब्दी के अन्दर बगदाद की आबादी बढ़ कर लगभग दस लाख तक पहुँच गई थी। खाद्यान्नों तथा शहरी विनिर्माताओं के लिए कपास और चीनी के उत्पादन में वृद्धि की गई जिससे इन शहरों के आकार और इनकी आबादी में वृद्धि हुई। इस प्रकार इस्लामी राज्य में शहरों का एक विशाल जाल विकसित हो गया। एक शहर दूसरे शहर से जुड़ गया जिससे परस्पर सम्पर्क तथा व्यापार वाणिज्य में वृद्धि हुई।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

शहरों की विशेषताएँ – शहर की विशेषताओं को दो भागों में विभाजित किया गया है-
(अ) शहर के आंतरिक क्षेत्र की विशेषताएँ और
(ब) शहर के बाह्य क्षेत्र की विशेषताएँ।

यथा –
(अ) शहर के आंतरिक क्षेत्र की विशेषताएँ – शहर के आंतरिक क्षेत्र की विशेषताओं को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है –
(1) दो भवन समूह-शहर के केन्द्र में दो भवन – समूह होते थे, जहाँ से सांस्कृतिक तथा आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता था।

  • मस्जिद – दो भवन – समूहों में एक मस्जिद (मस्जिद अल- जामी) होती थी। इसमें सामूहिक नमाज पढ़ी जाती थी। यह मस्जिद इतनी बड़ी होती थी कि दूर से दिखाई देती थी
  • केन्द्रीय मण्डी (सुक ) – दूसरा भवन – समूह केन्द्रीय मण्डी (सुक) होता था। इसमें दुकानों की पंक्तियाँ, व्यापारियों के आवास (फंदुक) और सर्राफ का कार्यालय होता था। इसमें प्रशासकों, विद्वानों और व्यापारियों के लिए घर होते थे, जो केन्द्र के निकट बने होते थे।

(2) आंतरिक क्षेत्र का बाहरी घेरा – सामान्य नागरिकों तथा सैनिकों के रहने के क्वार्टर बाहरी घेरे में होते थे। प्रत्येक इकाई की अपनी मस्जिद, गिरजाघर अथवा सिनेगोग, (यहूदी प्रार्थना – घर), छोटी मण्डी, सार्वजनिक स्नान-घर (हमाम) और एक महत्त्वपूर्ण सभा स्थल होता था।
(ब) शहर के बाह्य क्षेत्र की विशेषताएँ –

  • शहर के बाहरी क्षेत्रों में शहरी गरीबों के मकान, हरी सब्जियों और फलों के बाजार, काफिलों के ठिकाने, चमड़ा साफ करने या रंगने की दुकानें और कसाई की दुकानें होती थीं।
  • शहर की चारदीवारी के बाहर कब्रिस्तान और सरायें होते थे। सराय में लोग उस समय आराम कर सकते थे, जब शहर के दरवाजे बन्द कर दिये जाते थे। सभी शहरों के मानचित्र एक जैसे नहीं होते थे। इस मानचित्र में परिदृश्य, राजनीतिक परम्पराओं और ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर परिवर्तन किये जा सकते थे।

प्रश्न 11.
इस्लामी राज्य में व्यापार-वाणिज्य के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इस्लामी राज्य में व्यापार वाणिज्य का विकास राजनीतिक एकीकरण और खाद्य पदार्थों और विलास – वस्तुओं की शहरी मांग ने विनिमय के दायरे का विस्तार कर दिया था । भूगोल ने मुस्लिम साम्राज्य की सहायता की, जो हिन्द महासागर और भूमध्य सागर के व्यापारिक क्षेत्रों के बीच फैल गया। पाँच शताब्दियों तक अरब और ईरानी व्यापारियों का चीन, भारत तथा यूरोप के बीच के समुद्री व्यापार पर. एकाधिकार रहा।

(1) व्यापार – मार्ग – यह व्यापार दो मुख्य मार्गों – लाल सागर तथा फारस की खाड़ी से होता था। लम्बी दूरी के व्यापार के लिए मसालों, कपड़ों, चीनी मिट्टी की वस्तुओं तथा बारूद को भारत और चीन से लाल सागर के पत्तनों (अदन और एधाब तक) और फारस की खाड़ी के पत्तनों (सिराफ तथा बसरा) तक जहाजों द्वारा लाया जाता था । यहाँ से माल को जमीन पर ऊँटों के काफिलों द्वारा बगदाद, दमिश्क और एलेप्पो के भण्डार-‍ -गृहों तक स्थानीय खपत हेतु अथवा आगे भेजने हेतु ले जाया जाता था । हज की यात्रा के समय मक्का के रास्ते से गुजरने वाले काफिले बड़े हो जाते थे।

इन व्यापारिक मार्गों के भूमध्य सागर के सिरे पर सिकन्दरिया के पत्तन से यूरोप को किए जाने वाले निर्यात को यहूदी व्यापारियों द्वारा नियन्त्रित किया जाता था। उनमें से कुछ भारत से सीधे व्यापार करते थे। चौथी शताब्दी से व्यापार एवं शक्ति केन्द्र के रूप में काहिरा के उभरने के कारण तथा इटली के व्यापारिक शहरों से पूर्वी माल की बढ़ती हुई माँग के कारण लाल सागर के मार्ग ने अधिक महत्त्व प्राप्त कर लिया।

पूर्वी सिरे का जहाँ तक सम्बन्ध है, ईरानी व्यापारी मध्य एशियाई और चीनी वस्तुएँ लाने के लिए बगदाद से बुखारा और समरकन्द (तूरान) होते हुए रेशम मार्ग से चीन जाते थे। तूरान भी वाणिज्यिक तन्त्र में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी था। यह तन्त्र फर और स्लाव गुलामों के व्यापार के लिए उत्तर में रूस तथा स्केंडीनेविया तक फैला हुआ था । इन बाजारों में तुर्क गुलाम (दास और दासियाँ) भी खलीफाओं तथा सुल्तानों के दरबारों के लिए खरीदे जाते थे।

(2) सिक्के – राजकोषीय प्रणाली (राज्य की आय और व्यय) और बाजार के लेन-देन ने इस्लामी राज्यों में धन का महत्त्व बढ़ा दिया था। इस्लामी राज्यों में सोने, चाँदी तथा ताँबे (फुलस) के सिक्के बनाए जाते थे। वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य चुकाने के लिए प्राय: ये सिक्के सर्राफों द्वारा सीलबन्द किए गए थैलों में भेजे जाते थे। सोना अफ्रीका (सूडान) से तथा चाँदी मध्य एशिया से आती थी।

बहुमूल्य धातुएँ तथा सिक्के यूरोप से भी आते थे। पूर्वी व्यापार की वस्तुओं को खरीदने के लिए यूरोप इन सिक्कों की अदायगी करता था । धन की बढ़ती हुई माँग ने लोगों को अपने संचित भण्डारों तथा निरर्थक पड़ी सम्पत्ति का उपयोग करने के लिए बाध्य कर दिया। उधार का कारोबार भी मुद्राओं के साथ जुड़ गया जिससे वाणिज्य गतिशील हो गया।

(3) साख-पत्रों तथा हुण्डियों का उपयोग – मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने अदायगी और व्यापार व्यवस्था के उत्तम तरीकों को विकसित किया। व्यापारियों तथा साहूकारों द्वारा धन को एक स्थान से दूसरे स्थान और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए साख-पत्रों (सक्क) तथा हुण्डियों (बिल ऑफ एक्सचेंज – सुफतजा ) का उपयोग किया जाता था। वाणिज्यिक पत्रों के व्यापक उपयोग से व्यापारियों को प्रत्येक स्थान पर नकद मुद्रा अपने साथ ले जाने से मुक्ति मिल गई और इससे उनकी यात्राएँ पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो गईं। खलीफा भी वेतन देने अथवा कवियों और चारणों को इनाम देने के लिए साख-पत्रों (सक्क) का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 12.
कागज और गेनिजा अभिलेख इतिहास-लेखन में किस प्रकार उपयोगी सिद्ध हुए?
उत्तर:
(1) कागज की इतिहास-लेखन में उपयोगिता – कागज के आविष्कार के पश्चात् इस्लामी जगत में लिखित रचनाओं का व्यापक रूप से प्रसार होने लगा। कागज का आविष्कार चीनियों ने किया था, जहाँ कागज बनाने की प्रक्रिया को गुप्त रखा गया था। 751 ई. में समरकन्द के मुसलमान प्रशासक ने 20 हजार चीनी आक्रमणकारियों को बन्दी बना लिया, जिनमें से कुछ कागज बनाने में अत्यन्त निपुण थे।

अतः अगले सौ वर्षों के लिए, समरकन्द का कागज निर्यात की एक महत्त्वपूर्ण वस्तु बन गया। समरकन्द के अतिरिक्त अन्य मुस्लिम राज्यों में भी कागज का निर्माण किया जाने लगा। धीरे-धीरे कागज की माँग बढ़ती गई । प्रसिद्ध विद्वान और चिकित्सक अब्द-अल-लतीफ ने लिखा है कि मिस्र के किसानों ने ममियों के ऊपर लपेटे गए लिनन से बने हुए आवरण प्राप्त करने के लिए कब्रों को बुरी तरह लूटा था, ताकि वे लिनन से बने हुए इन आवरणों को कागज के कारखानों को बेच सकें।

(2) गेनिजा अभिलेखों की इतिहास-लेखन में उपयोगिता – जब कागज बड़ी मात्रा में उपलब्ध हो गया, तो सभी प्रकार के वाणिज्यिक और निजी दस्तावेजों को लिखना भी सुविधाजनक हो गया। 1896 में फुस्तात ( पुराना काहिरा) में बेन एजरा के यहूदी प्रार्थना – भवन के एक सीलबन्द कमरे (गेनिजा ) में मध्यकालीन यहूदी दस्तावेजों का एक विशाल संग्रह प्राप्त हुआ। गेनिजा में लगभग ढाई लाख पाण्डुलिपियाँ तथा उनके टुकड़े थे, जिनमें कई आठवीं शताब्दी मध्यकाल की भी थीं।

अधिकांश सामग्री दसवीं से तेरहवीं शताब्दी तक की थी अर्थात् फातिमी, अयूबी तथा प्रारम्भिक मामलुक काल की थी। निजा अभिलेखों में व्यापारियों, परिवार के सदस्यों और मित्रों के बीच लिखे गए पत्र, संविदा, बिक्री – दस्तावेज आदि शामिल थे। अधिकतर दस्तावेज यहूदी – अरबी भाषा में लिखे गए थे, जो हिब्रू अक्षरों में लिखी जाने वाली अरबी भाषा का ही रूप था, जिसका उपयोग सम्पूर्ण मध्यकालीन भूमध्यसागरीय क्षेत्र में यहूदी समुदायों द्वारा सामान्यतया किया जाता था।

गेनिजा दस्तावेज निजी और आर्थिक अनुभवों से भरे हुए हैं और वे भूमध्यसागरीय और इस्लामी संस्कृति की आन्तरिक जानकारी प्रस्तुत करते हैं । इन दस्तावेजों से यह भी ज्ञात होता है कि मध्यकालीन इस्लामी जगत के व्यापारियों के व्यापारिक कौशल तथा वाणिज्यिक तकनीकें उनके यूरोपीय प्रतिद्वन्द्वियों की तुलना में बहुत अधिक उन्नत थीं । गेटिन निजा अभिलेखों का प्रयोग करते हुए ‘भूमध्य सागर का इतिहास’ कई संग्रहों में लिखा। गेनिजा के एक पत्र से प्रेरित होकर अमिताभ घोष ने अपनी पुस्तक ‘इन एन एंटीक लैण्ड’ में एक भारतीय गुलाम की कहानी का वर्णन किया है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

प्रश्न 13.
बगदाद के कानून और चिकित्सा के विद्वान अब्द-अल-लतीफ द्वारा बताए गए आदर्श विद्यार्थी के गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदर्श विद्यार्थी के गुण बगदाद के कानून और चिकित्सा के विद्वान अब्द-अल-लतीफ द्वारा बताए गए आदर्श विद्यार्थी के गुणों का वर्णन निम्नानुसार है –

(1) ज्ञान प्राप्त करने के लिए अध्यापकों का सहारा लेना- अब्द-अल-लतीफ के अनुसार एक आदर्श विद्यार्थी को बिना किसी की सहायता के, केवल पुस्तकों से ही विज्ञान न सीखना चाहिए, चाहे उसको समझने की अपनी योग्यता पर विश्वास हो। उसे प्रत्येक विषय के लिए, जिसका ज्ञान वह प्राप्त करना चाहता हो, अध्यापकों का सहारा लेना चाहिए। यदि उसके अध्यापकों का ज्ञान सीमित हो, तो जो कुछ वह दे सकता है, उसे प्राप्त कर लेना चाहिए। जब तक उसको उससे अधिक योग्य अध्यापक न मिल जाए उसे अपने अध्यापक का आदर और सम्मान करना चाहिए।

(2) पुस्तक को कण्ठस्थ करना – अब्द-अल-लतीफ के अनुसार आदर्श विद्यार्थी जब कोई पुस्तक पढ़े, तो उसे कण्ठस्थ करने और उसके अर्थ पर पूर्ण अधिकार कर लेना चाहिए। पुस्तक खोने की अवस्था में पुस्तक कण्ठस्थ होने पर उसे कुछ भी हानि नहीं होगी।

(3) इतिहास की पुस्तकों का अध्ययन करना – अब्द-अल-लतीफ के अनुसार आदर्श विद्यार्थी को इतिहास की पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए। उसे जीवनियों तथा राष्ट्रों के अनुभवों का अध्ययन करना चाहिए।

(4) पैगम्बर की जीवनी का अध्ययन करना – अब्द-अल-लतीफ का कहना है कि आदर्श विद्यार्थी को अपना आचरण प्रारम्भिक मुसलमानों के आचरण के अनुरूप बनाना चाहिए। इसलिए, उसे पैगम्बर मुहम्मद साहब की जीवनी का अध्ययन करना चाहिए तथा उनके पद चिन्हों पर चलना चाहिए।

(5) अपने स्वभाव पर अविश्वास करना – आदर्श विद्यार्थी को अपने स्वभाव के बारे में अच्छी राय रखने की बजाय, उस पर बार-बार अविश्वास करना चाहिए। उसे अपना ध्यान विद्वान लोगों और उनकी रचनाओं पर लगाना चाहिए। उसे बहुत सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए और कभी भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

(6) अल्लाह का गुणगान करना – अब्द-अल-लतीफ के अनुसार जब आदर्श व्यक्ति ने अपना अध्ययन तथा चिन्तन-मनन पूरा कर लिया हो, तो अपनी जीभ को अल्लाह का नाम लेने के कार्य में व्यस्त रखना चाहिए और अल्लाह का गुणगान करना चाहिए।

(7) ज्ञान कभी समाप्त नहीं होता – अब्द-अल-लतीफ के अनुसार ज्ञान कभी समाप्त नहीं होता, वह अपने पीछे अपनी सुगन्ध छोड़ जाता है, जो उसके मालिक का पता बता देती है। ज्ञान प्रकाश और कान्ति की किरण ज्ञानी पर चमकती रहती है और उसकी ओर संकेत करती रहती है।

प्रश्न 14.
मध्यकालीन इस्लामी राज्य में साहित्य के क्षेत्र में हुई उन्नति का वर्णन कीजिए।
अथवा
“नौवीं शताब्दी से अदब के दायरे का विस्तार किया गया और उसमें जीवनियों, आचार-संहिताओं, राजकुमारों की शासन कला की शिक्षा देने वाली पुस्तकों और सबसे ऊपर इतिहास और भूगोल को शामिल किया गया। ” विवेचना कीजिए –
उत्तर:
अदब से आशय – अदब का अर्थ है – साहित्यिक और सांस्कृतिक परिष्कार। अदब रूपी अभिव्यक्तियों में पद्य और गद्य दोनों शामिल थे। इस्लाम पूर्व काल की सबसे अधिक लोकप्रिय विधा, ‘कसीदा’ थी जिसे अब्बासी काल के कवियों ने विकसित किया था। फारस के मूल कवियों ने अरबी कविता का पुनः आविष्कार किया। समानी राजदरबार के कवि रुदकी ने गजल, रुबाई जैसे नए रूप शामिल किए। उमर खय्याम ने रुबाई को उच्चता प्रदान की। गजनी के महमूद के काल में काव्यसंग्रहों और महाकाव्यों की रचना हुई। इस काल में फिरदौसी ने ‘शाहनामा’ की रचना की। इसके अतिरिक्त अनेक किस्से-कहानियों की रचनाएँ भी हुईं।

अदब के दायरे का विस्तार –
(1) इतिहास का अध्ययन – इस्लामी राज्य में नौवीं शताब्दी में अदब के दायरे का विस्तार हुआ और अनेक जीवनियों, आचार-संहिताओं, शासन कला से सम्बन्धित पुस्तकों, ऐतिहासिक ग्रन्थों आदि की रचना की गई। शिक्षित मुस्लिम समाजों में इतिहास लिखने की परम्परा स्थापित थी। विद्यार्थी, विद्वान तथा सुशिक्षित लोग इतिहास की पुस्तकों का अध्ययन करते थे। इतिहास शासकों तथा अधिकारियों के लिए किसी वंश की प्रतिष्ठा में वृद्धि करने वाले कार्यों तथा उपलब्धियों का विवरण तथा प्रशासन की तकनीकों के उदाहरण प्रस्तुत करता था।

बालाधुरी कृत ‘अनसब अल – अशरफ’ (सामन्तों की वंशावलियाँ) तथा ताबरी कृत तारीख ‘अल- मुलुक’ (पैगम्बरों और राजाओं का इतिहास ) इतिहास के दो प्रमुख ग्रन्थ थे, जिनमें सम्पूर्ण मानव – इतिहास का वर्णन किया गया है। इनमें इस्लामी काल केन्द्र – बिन्दु है। स्थानीय इतिहास लेखन की परम्परा का विकास खिलाफत के विघटन के पश्चात् हुआ। इस्लामी राज्यों की एकता तथा विविधता की खोज के लिए फारसी में वंशों, नगरों और प्रदेशों के सम्बन्ध में अनेक पुस्तकें लिखी गईं।

(2) भूगोल और यात्रा – वृत्तान्त – भूगोल और यात्रावृत्तान्त (रिहला) अदब की एक विशेष विधा थे। इनमें यूनानी, ईरानी तथा भारतीय पुस्तकों के ज्ञान और व्यापारियों तथा यात्रियों के विचार और कथन शामिल थे। गणितीय भूगोल में संसार को भूमध्य रेखा के समानान्तर हमारे तीन महाद्वीपों के अनुरूप, सात प्रकार की जलवायु में विभाजित किया गया। प्रत्येक शहर की यथार्थ स्थिति का वर्णन खगोल वैज्ञानिक तरीके से किया गया।

मुकदसी ने अपने ग्रन्थ ‘अहसान – अल- तकसीम’ अथवा ‘सर्वोत्तम विभाजन’ में विश्व के सभी देशों के लोगों का तुलनात्मक अध्ययन किया है और विदेशों के बारे में वांछित जिज्ञासाओं को शान्त करने का प्रयास किया है। मसूदी ने अपनी पुस्तक ‘मुरुज अल – धाहाब’ में विश्व की संस्कृतियों की व्यापक विविधता दिखाने के लिए भूगोल और सामान्य इतिहास को मिला दिया था। अल्बरुनी ने ‘तहकीक मा लिल – हिंद’ ( भारत का इतिहास ) नामक पुस्तक लिखी जिसमें 11वीं शताब्दी के एक मुस्लिम लेखक का इस्लाम की दुनिया से बाहर देखने और यह जानकारी प्राप्त करने का सबसे बड़ा प्रयास था कि एक अन्य सांस्कृतिक परम्परा में क्या चीज बहुमूल्य है।

प्रश्न 15.
मध्यकालीन इस्लामी वास्तुकला की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
‘मध्यकालीन इस्लामी राज्य में वास्तुकला के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण उन्नति हुई। इस काल में अनेक मस्जिदों, राजमहलों, मकबरों आदि का निर्माण किया गया। मध्यकालीन इस्लामी वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन निम्नानुसार है –
(1) मस्जिद – धार्मिक इमारतें इस्लामी जगत् की सबसे बड़ी बाहरी प्रतीक थीं। स्पेन से लेकर मध्य एशिया तक फैली मस्जिदों, इबादतगाहों और मकबरों का आधारभूत नमूना एक जैसा था। इसकी विशेषताएँ थीं-मेहराबें, गुम्बद, मीनार और खुले सहन। ये इमारतें मुसलमानों की आध्यात्मिक और व्यावहारिक आवश्यकताओं को प्रकट करती थीं

(i) इस्लाम की पहली शताब्दी में मस्जिद ने एक विशिष्ट वास्तुशिल्प का रूप (खम्भों के सहारे वाली छत ) धारण कर लिया था। मस्जिद में एक खुला प्रांगण होता था। इस प्रांगण में एक फव्वारा अथवा जलाशय बनाया जाता था। यह प्रांगण एक बड़े कमरे की ओर खुलता था, जिसमें प्रार्थना करने वाले लोगों और प्रार्थना ( नमाज) का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति (इमाम) के लिए काफी स्थान होता था।

(ii) बड़े कमरे की दो विशेषताएँ थीं- दीवार में एक मेहराब जो मक्का (काबा) की दिशा का संकेत देती थी तथा एक मंच (मिम्बर) जहाँ से शुक्रवार की दोपहर की नमाज के समय प्रवचन दिए जाते थे। इमारत में एक मीनार जुड़ी होती थी जिसका उपयोग नियत समय पर नमाज के लिए लोगों को बुलाने के लिए किया जाता था। मीनार नए धर्म के अस्तित्व का प्रतीक थी। शहरों और गाँवों में लोग समय का अनुमान पाँच दैनिक नमाजों की सहायता से लगाते थे । वर्तमान समय में भी मस्जिद की ये विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

(iii) केन्द्रीय प्रांगण (इवान) के चारों ओर बनी इमारतों के निर्माण का स्वरूप न केवल मस्जिदों और मकबरों में बल्कि सरायों, अस्पतालों और महलों में भी पाया जाता था।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार-लगभग 570-1200 ई.

(2) महल –
(i) उमय्यदों ने नखलिस्तानों में ‘मरुस्थलीय महल’ बनाए। इनमें फिलिस्तीन में ‘खिरबत अल-मफजर’ और जोर्डन में ‘कुसाईर अमरा’ उल्लेखनीय थे। ये महल ऐश्वर्यपूर्ण निवास-स्थानों और शिकार तथा मनोरंजन के लिए विश्रामस्थलों के रूप में काम आते थे। महलों को चित्रों, प्रतिमाओं तथा पच्चीकारी से सजाया जाता था।

(ii) अब्बासियों ने समरा में बागों और बहते हुए पानी के बीच एक नया शाही शहर बनाया जिसका उल्लेख खलीफा हारुन-अल- रशीद से जुड़ी कहानियों और आख्यानों में मिलता है।

(iii) अब्बासियों ने बगदाद में तथा फातिमियों ने काहिरा में विशाल महल बनवाये, परन्तु अब इनका अस्तित्व नहीं –

(3) कला के दो रूपों को बढ़ावा मिलना- इस्लामी धार्मिक कला में प्राणियों के चित्रण की मनाही से कला के दो रूपों को बढ़ावा मिला-खुशनवीसी (सुन्दर लिखने की कला) तथा अरेबस्क (ज्यामितीय तथा वनस्पतीय डिजाइन)। इमारतों को सुसज्जित करने हेतु प्रायः धार्मिक उद्धरणों का शिलालेखों में उपयोग किया जाता था। कुरान की आठवीं तथा नौवीं शताब्दियों की पाण्डुलिपियों में खुशनवीसी की कला को सुरक्षित रखा गया है। ‘किताब-अल- अधानी’ (गीत-पुस्तक), ‘कलीला व दिमना’, ‘हरिरी की मकामात’ जैसी साहित्यिक रचनाओं को लघु चित्रों से सजाया गया था। इसके अतिरिक्त पुस्तकों के सौन्दर्य में वृद्धि हेतु चित्रावली की अनेक तकनीकें शुरू की गई थीं। इमारतों और पुस्तकों के चित्रण में पौधों और फूलों के नमूनों का उपयोग किया जाता था।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. निम्नलिखित में से कौन भारत में बाहरी व्यक्ति है ?
(अ) रीता जो भारत में जन्मे अपने पिता और ब्रिटिश माँ के साथ रहती है।
(ब) जानकी जो भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए मारीशस से आई है।
(स) जयपुर का रहने वाला एक लड़का रहीम जो आस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहा है।
(द) शांति भूषण जो अमेरिका में भारतीय उच्चायोग में भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं।
उत्तर:
(ब) जानकी जो भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए मारीशस से आई है।

2. निम्न में किस आधार पर भारत की नागरिकता ग्रहण नहीं की जा सकती
(अ) वह व्यक्ति जिसका जन्म भारत में हुआ है।
(ब) भारत में निवास कर रहा वह व्यक्ति जिसके माता-पिता का जन्म भारत
(स) वह व्यक्ति जिसके माता-पिता संविधान लागू होने से कम से कम पांच
(द) वह विदेशी व्यक्ति जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत में रह रहा है।
उत्तर:
(द) वह विदेशी व्यक्ति जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए भारत में रह रहा है।

3. निम्नलिखित में से किसे अपनी भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ेगी
(अ) जगन सिंह, जिसे डकैती डालते हुए पकड़ा गया।
(ब) मनोरमा, जिसे ब्रिटेन में अध्ययन के लिए शोधवृत्ति मिली है।
(स) सुरेश, जो छुट्टियाँ मनाने स्विट्जरलैंड गया है।
(द) अशोक मेहता, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति का सलाहकार नियुक्त किया गया है।
उत्तर:
(द) अशोक मेहता, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति का सलाहकार नियुक्त किया गया है।

4. टी. एच. मार्शल नागरिकता में कितने प्रकार के अधिकारों को शामिल मानते हैं-
(अ) चार
(ब) तीन
(स) दो
(द) पाँच
उत्तर:
(ब) तीन

5. टी. एच. मार्शल की नागरिकता सम्बन्धी धारणा मिलती-जुलती है-
(अ) उदारवाद से
(ब) मार्क्सवाद से
(स) राष्ट्रवाद से
(द) आदर्शवाद से
उत्तर:
(अ) उदारवाद से

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

6. भारतीय नागरिकता अधिनियम कब बनाया गया
(अ) 1955 में
(ब) 1951 में
(स) 1954 में
(द) 1952 में
उत्तर:
(अ) 1955 में

7. आदर्श नागरिकता के मार्ग में प्रमुख बाधा है-
(अ) संकीर्णता
(ब) उग्र राष्ट्रीयता
(स) अज्ञानता
(द) उक्त सभी
उत्तर:
(द) उक्त सभी

8. ‘नागरिकता और सामाजिक वर्ग’ के लेखक हैं-
(अ) टी. एच. मार्शल
(ब) डेविड हेल्ड
(स) रिची
(द) जॉन लॉक
उत्तर:
(अ) टी. एच. मार्शल

9. मार्शल टी. एच. ने नागरिकता में निम्न में से किस प्रकार के अधिकारों को शामिल नहीं किया
(अ) नागरिक अधिकार
(ब) संवैधानिक उपचारों का अधिकार
(स) राजनीतिक अधिकार
(द) सामाजिक अधिकार
उत्तर:
(ब) संवैधानिक उपचारों का अधिकार

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

10. संयुक्त राज्य अमेरिका के अनेक दक्षिणी राज्यों में काले और गोरे लोगों के भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ आंदोलन के प्रमुख ‘नेता थे-
(अ) मार्टिन लूथर किंग जूनियर
(ब) टी. एच. मार्शल
(स) ओल्गाटेलिस
(द) रॉबर्ट मुगावे।
उत्तर:
(अ) मार्टिन लूथर किंग जूनियर

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. नागरिकता की परिभाषा किसी राजनीतिक समुदाय की ……………… और ……………… सदस्यता के रूप में की गई है।
उत्तर:
पूर्ण, समान

2. शरणार्थी और …………………… प्रवासियों को कोई राष्ट्र पूर्ण सदस्यता देने के लिए तैयार नहीं है।
उत्तर:
अवैध

3. नागरिकता सिर्फ राज्यसत्ता और उसके सदस्यों के बीच के संबंधों का निरूपण नहीं बल्कि यह ………………….. आपसी संबंधों के बारे में भी ह।
उत्तर:
नागरिकों

4. किसी राष्ट्र की संपूर्ण और समान सदस्यता का अर्थ है कि सभी अमीर-गरीब नागरिकों को कुछ ……………….. अधिकार और सुविधाएँ मिलें।
उत्तर:
बुनियादी

5. देश के सभी नागरिकों को ‘पूर्ण और समान सदस्यता’ से संबंधित विवादों का समाधान बल प्रयोग के बजाय …………………. और ……………….. से हो।
उत्तर:
संधि-वार्ता, विचार-विमर्श

निम्नलिखित में से सत्य / असत्य कथन छाँटिये-

1. अवांछित आगन्तुकों को नागरिकता से बाहर रखने के लिए राज्य सत्ताएँ ताकत का प्रयोग करती हैं।
उत्तर:
सत्य

2. नागरिकता के नए आवेदकों को अनुमति देने की कसौटी हर देश में समान होती है।
उत्तर:
असत्य

3. नागरिकता प्रदान करने में फ्रांस में धर्म या जातीय मूल जैसे तत्त्व को वरीयता दी जाती है।
उत्तर:
असत्य

4. इजरायल ऐसा देश है जो धर्मनिरपेक्ष और समावेशी होने का दावा करता है।
उत्तर:
असत्य

5. समान नागरिकता की अवधारणा का अर्थ यही है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना सरकारी नीतियों का मार्गदर्शक सिद्धान्त हो।
उत्तर:
सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. ‘नागरिकता और सामाजिक वर्ग’ पुस्तक(अ) सर्वोच्च न्यायालय का 1985 का एक निर्णय
2. संविधान के अनु. 21 में जीने के अधिकार में आजीविका का अधिकार भी शामिल है।(ब) भारत
3. एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश(स) राज्यविहीन शरणार्थी लोग
4. शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहने को मजबूर लोग(द) इजरायल
5. नागरिकता देने में धर्म या जातीय मूल तत्त्व को वरीयता देने वाला देश(य) टी. एच. मार्शल

उत्तर:

1. ‘नागरिकता और सामाजिक वर्ग’ पुस्तक(य) टी. एच. मार्शल
2. संविधान के अनु. 21 में जीने के अधिकार में आजीविका का अधिकार भी शामिल है।(अ) सर्वोच्च न्यायालय का 1985 का एक निर्णय
3. एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश(ब) भारत
4. शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहने को मजबूर लोग(स) राज्यविहीन शरणार्थी लोग
5. नागरिकता देने में धर्म या जातीय मूल तत्त्व को वरीयता देने वाला देश(द) इजरायल

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नागरिकता की परिभाषा किस रूप में की गई है?
उत्तर:
नागरिकता की परिभाषा किसी राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में की गई है।

प्रश्न 2.
भारत में नागरिकता कैसे हासिल की जा सकती है?
उत्तर:
भारत में जन्म, वंश-परम्परा, पंजीकरण, देशीकरण या किसी भू-क्षेत्र के राजक्षेत्र में शामिल होने से नागरिकता हासिल की जा सकती है।

प्रश्न 3.
लोगों के विस्थापित होने या शरणार्थी होने के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए गए हैं।
उत्तर:
युद्ध, उत्पीड़न तथा अकाल।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 4.
ऐसे लोगों का उदाहरण दीजिए जो अपने ही देश या पड़ौसी देश में शरणार्थी बनने के लिए विवश किए
उत्तर:
सूडान के डरफर क्षेत्र के शरणार्थी, फिलिस्तीनी, बर्मी तथा बांग्लादेशी शरणार्थी।

प्रश्न 5.
शरणार्थियों की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने क्या कदम उठाया है?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ ने शरणार्थियों की जांच करने एवं उनकी मदद करने हेतु उच्चायुक्त नियुक्त किया है।

प्रश्न 6.
एक देश में भ्रमण हेतु आया हुआ अन्य देश का नागरिक क्या कहलाता है?
उत्तर:
विदेशी।

प्रश्न 7.
भारत में किस प्रकार की नागरिकता है?
उत्तर:
इकहरी नागरिकता।

प्रश्न 8.
नागरिकता में समाज के प्रति क्या दायित्व है?
उत्तर:
नागरिकता में समाज के सहजीवन में भागीदार होने और योगदान करने का नैतिक दायित्व शामिल है।

प्रश्न 9.
शहरों की गंदी बस्तियों की कोई दो समस्यायें लिखिये।
उत्तर:

  1. शौचालय, जलापूर्ति और सफाई की समस्या
  2. जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा की समस्या।

प्रश्न 10.
झोंपड़पट्टियों के निवासी किस प्रकार अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं?
उत्तर:
झोंपड़पट्टियों के निवासी अपने श्रम से अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं।

प्रश्न 11.
भारतीय संविधान में नागरिकता की कौनसी धारणा को अपनाया है?
उत्तर:
भारतीय संविधान में नागरिकता की लोकतांत्रिक और समावेशी धारणा को अपनाया गया है।

प्रश्न 12.
नागरिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए हुए किसी एक संघर्ष का नाम लिखिये।
उत्तर:
1789 की फ्रांसीसी क्रांति।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 13.
शरणार्थियों के किन्हीं दो रूपों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:

  1. युद्ध या अकाल से विस्थापित लोग।
  2. यूरोप या अमेरिका में चोरी-छिपे घुसने के प्रयास में तत्पर लोग।

प्रश्न 14.
मार्शल ने नागरिकता में कौन-कौनसे तीन अधिकार शामिल किये थे?
उत्तर:
मार्शल नागरिकता में तीन प्रकार के अधिकारों को शामिल करते हैं, वे हैं

  1. नागरिक अधिकार
  2. राजनैतिक अधिकार
  3. सामाजिक अधिकार।

प्रश्न 15.
उन दो परिस्थितियों का उल्लेख कीजिये जिनमें नागरिकता समाप्त हो जाती है।
उत्तर:

  1. दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करने पर।
  2. वह उस देश से बाहर लगातार निश्चित वर्षों तक, जैसे सात वर्ष तक निवास करता रहा हो।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में नागरिकता किन-किन आधारों पर प्राप्त की जा सकती है?
अथवा
भारत में नागरिकता किस प्रकार हासिल की जा सकती है?
उत्तर:
भारत में जन्म, वंश-परम्परा, पंजीकरण, देशीयकरण या किसी भू-क्षेत्र के राज क्षेत्र में शामिल होने से नागरिकता हासिल की जा सकती है।

प्रश्न 2.
किसी राज्य की नागरिकता हेतु दो शर्तें बताइये।
उत्तर:
किसी राज्य की नागरिकता हेतु निम्न दो शर्तों का होना आवश्यक होता है।

  1. यदि कोई विदेशी एक निश्चित अवधि तक विदेश में रहता है तो उसका देशीयकरण कर उसे उस देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  2. यदि कोई स्त्री अन्य देश के नागरिक से विवाह कर लेती है तो उसे अपने पति के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।

प्रश्न 3.
कोई नागरिक अपनी नागरिकता का स्वेच्छा से त्याग किस प्रकार कर सकता है?
उत्तर:
अनेक देश अपने नागरिकों को यह अधिकार प्रदान करते हैं कि यदि वे अपनी इच्छा के अनुसार वहाँ नागरिकता छोड़कर किसी दूसरे अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करना चाहें तो वे सरकार की अनुमति लेकर ऐसा कर सकते हैं। इसके लिये नागरिकों को सरकार के पास आवेदन करना होता है। जर्मनी में नागरिकता की समाप्ति के लिये इस प्रकार का नियम प्रचलित है।

प्रश्न 4.
नागरिकों के प्रमुख राजनीतिक अधिकार कौन-कौनसे हैं? उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
नागरिकों के प्रमुख राजनीतिक अधिकार ये हैं।

  1. मत देने का अधिकार।
  2. विधायिका की सदस्यता हेतु प्रत्याशी बनने का अधिकार।
  3. राजकीय पद धारण करने का अधिकार।
  4. कानून के समक्ष समानता का अधिकार।

प्रश्न 5.
नागरिकों की स्वतंत्रता को बनाये रखने में राज्य की क्या भूमिका है?
उत्तर:
नागरिकों की स्वतन्त्रता को बनाये रखने के लिए राज्य को केवल धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिये।

प्रश्न 6.
एक आदर्श नागरिक लोकतंत्र को किस प्रकार मजबूती प्रदान कर सकता है?
उत्तर:
एक आदर्श नागरिक निम्न उपायों से लोकतंत्र को मजबूती प्रदान कर सकता है।

  1. प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिये।
  2. प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है कि वह देश एवं सरकार के प्रति आस्था रखे एवं वफादार रहे और किसी भी तरह का देशद्रोहिता का कार्य न करे।

प्रश्न 7.
नागरिक और बाहरी व्यक्ति में क्या अन्तर है?
उत्तर:
नागरिक और बाहरी व्यक्ति में अन्तर: नागरिक वह व्यक्ति है जो किसी देश या राज्य का सदस्य होता है, वह उसके प्रति निष्ठावान होता है तथा नागरिक और राजनैतिक अधिकारों का उपभोग करता है। वह देश के शासन में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेता है। बाहरी व्यक्ति वह व्यक्ति होता है जो किसी देश में अस्थाई रूप से निवास करता है। उसे उस देश के राजनैतिक व नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। वह देश के शासन में भाग नहीं लेता।

प्रश्न 8.
जन्मजात और देशीयकृत नागरिक में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जन्मजात और देशीयकृत नागरिक में अन्तर: जन्मजात नागरिक वह व्यक्ति कहलाता है जो उस देश में पैदा होता है या उसके माता-पिता उस देश के नागरिक होते हैं, जिसमें वह निवास कर रहा है। देशीयकृत नागरिक वह व्यक्ति होता है जो किसी अन्य देश की नागरिकता कुछ आवश्यक शर्तों को प्राप्त करता है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 9.
राज्य प्रदत्त नागरिकता कैसे प्राप्त की जाती है?
उत्तर:
नागरिकता सामान्यतः जन्म के आधार पर प्रदान की जाती है और जब यह राज्य द्वारा प्रदान की जाती है तो उसे देशीयकरण नागरिकता कहा जाता है। राज्य द्वारा नागरिकता अनेक तरीकों से प्राप्त की जा सकती है। यथा

  1. एक स्त्री विवाह के बाद अपने पति की नागरिकता प्राप्त कर लेती है।
  2. एक गोद लिया बच्चा, गोद लेने के बाद अपने नये माता-पिता की नागरिकता प्राप्त कर लेता है।
  3. यदि कोई विदेशी एक राज्य में लम्बी अवधि से रह रहा है तथा अपने मूल राज्य में लौटने का उसका कोई इरादा नहीं है, तो वह नागरिकता के लिए प्रार्थना पत्र दे सकता है। उस विदेशी को कुछ निश्चित औपचारिकताओं के बाद तथा कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
  4. सरकारी नौकरी करने या सम्पत्ति खरीदने के आधार पर भी किसी बाहरी व्यक्ति को राज्य नागरिकता प्रदान कर सकता है।
  5. कुछ क्षेत्र के हस्तांतरण के बाद भी प्रकृतिस्थ नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 10.
दोहरी नागरिकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दोहरी नागरिकता: सामान्यतः एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही राज्य का नागरिक हो सकता है। लेकिन एक नागरिक को दोहरी नागरिकता की आवश्यकता होती है। जब एक व्यक्ति रक्त सम्बन्ध के सिद्धान्त के आधार पर एक राज्य की प्रकृतिस्थ नागरिकता प्राप्त करता है और क्षेत्र के सिद्धान्त के आधार पर दूसरे राज्य की नागरिकता प्राप्त करता है। इस प्रकार वह जन्म से दोहरी नागरिकता प्राप्त करता है। ऐसी स्थिति में जब वह व्यक्ति वयस्क होता है तो उसे उन दो नागरिकताओं में किसी एक को चुनना पड़ता है। इसके बाद उसकी दोहरी नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 11.
सार्वभौमिक नागरिकता से क्या आशय है?
उत्तर:
सार्वभौमिक नागरिकता: सार्वभौमिक नागरिकता की धारणा का आशय यह है कि सभी व्यक्ति, जो किसी राज्य में रहते हैं, राज्य द्वारा स्वीकार किये जाने चाहिए और उन्हें उस राज्य का नागरिक घोषित किया जाना चाहिए तथा सभी व्यक्ति समाज के पूर्ण तथा समान सदस्य के रूप में होने चाहिए तथा उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्ति जो राज्य में रह रहा है, चाहे वह वहाँ जन्म से रह रहा हो या दूसरे राज्य का आप्रवासी हो, चाहे वह यहाँ विधिक और आधिकारिक तौर पर आया आप्रवासी हो, चाहे गैर-कानूनी रूप से आया घुसपैठिया हो, वह नागरिकता के अधिकार और स्तर का अधिकारी होना चाहिए। तब विश्व में कहीं भी कोई भी व्यक्ति शरणार्थी या राज्यविहीन नहीं होगा। लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है।

प्रश्न 12.
वैश्विक नागरिकता से क्या आशय है?
उत्तर:
वैश्विक नागरिकता: वैश्वीकरण की अवधारणा के विकास के साथ-साथ वैश्विक नागरिकता की अवधारणा का विकास हो रहा है। वैश्विक नागरिकता की अवधारणा में राज्य की सीमाओं तथा पासपोर्ट की आवश्यकता की बाधायें नहीं रहेंगी। विश्व के सभी भागों के लोग संचार के इंटरनेट, टेलीविजन और सेलफोन के साधनों के कारण परस्पर अन्तर्सम्बन्धित महसूस करते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति अपने आपको न केवल एक विशेष समाज का सदस्य महसूस करता है, बल्कि वह सम्पूर्ण विश्व का सदस्य भी महसूस करता है। इस प्रकार किसी विशेष राज्य की नागरिकता विश्व की नागरिकता में बदल दी जानी चाहिए। वैश्विक नागकिरता पूरे विश्व की सदस्यता के रूप में मिलनी चाहिए।

लेकिन यह अवधारणा अव्यावहारिक है क्योंकि कोई भी राज्य अपनी संप्रभुता को त्यागना नहीं चाहता। वैश्विक नागरिकता की अवधारण को व्यावहारिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि राष्ट्रीय नागरिकता को वैश्विक नागरिकता के साथ इस समझ के साथ जोड़ा जाये कि हम आज अन्तर्सम्बद्ध विश्व में रहते हैं। साथ ही हमें विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहिए तथा राष्ट्रीय सीमाओं के पार के लोगों और सरकारों के साथ काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

प्रश्न 13.
एक आदर्श नागरिक के लिये कौनसे गुण आपकी दृष्टि में आवश्यक हैं?
अथवा
एक आदर्श नागरिक के गुणों का संक्षिप्त विवेचन कीजिये।
उत्तर:
आदर्श नागरिक के गुण-एक आदर्श नागरिक में निम्नलिखित गुण होने आवश्यक हैं।

  1. एक अच्छे नागरिक को शिक्षित होना चाहिए ताकि उसे अपने अधिकारों व कर्तव्यों का ज्ञान हो सके।
  2. एक अच्छे नागरिक में समाज सेवा, दूसरों की सहायता, परस्पर प्रेम तथा सहनशीलता आदि गुण होने चाहिए।
  3. अच्छे नागरिक को दूसरे नागरिकों, समाज तथा राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
  4. एक अच्छा नागरिक अपने देश के प्रति वफादार, देशभक्त व निष्ठावान होता है।

प्रश्न 14.
एक नागरिक और एक विदेशी में चार अन्तर लिखिये।
उत्तर:
एक नागरिक और एक विदेशी में अन्तर: एक नागरिक और एक विदेशी में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित

  1. एक नागरिक उस राज्य का स्थायी निवासी होता है जिसमें वह रह रहा है, जबकि विदेशी दूसरे राज्य का स्थायी निवासी होता है।
  2. नागरिकों को राजनैतिक, नागरिक व सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं, विदेशियों को नहीं।
  3. नागरिक अपने राज्य के प्रति भक्तिभाव रखता है, जबकि विदेशी उस राज्य के प्रति वफादार होता है जिसका कि वह नागरिक है।
  4. युद्ध के समय विदेशियों को राज्य की सीमा से बाहर जाने के लिए कहा जा सकता है, परन्तु नागरिकों को नहीं।

प्रश्न 15.
” लोकतंत्र के सफल संचालन के लिये नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। ” संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। उदाहरण के लिए प्रतिवाद करने का अधिकार हमारे संविधान में नागरिकों के लिए सुनिश्चित की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक पक्ष है, बशर्ते कि वह प्रतिवाद दूसरे लोगों या राज्य के जीवन या सम्पत्ति को हानि न पहुँचाये। यदि नागरिक इस सम्बन्ध में जागरूक होंगे तो वे समूह बनाकर, प्रदर्शन कर, मीडिया का उपयोग कर, राजनीतिक दलों से अपील कर या अदालत में जाकर जनमत और सरकारी नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालतें उस पर निर्णय दे सकती हैं या समाधान के लिए सरकार से आग्रह कर सकती हैं। इससे समाज में समय-समय पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का सर्वमान्य समाधान निकल सकता है।

प्रश्न 16.
“नागरिकता राज्य सत्ता और उसके सदस्यों के बीच विधिक संबंधों का निरूपण है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
नागरिकों के विधिक कर्तव्यों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
नागरिकों के विधिक कर्तव्य: नागरिकों के विधिक कर्तव्य हैं जो राज्य द्वारा पारिभाषित, मान्य तथा लागू किये जाते हैं तथा जिनका उल्लंघन करने पर नागरिक दंड का भागी बनता है। नागरिकों के प्रमुख विधिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं।
1. कानूनों का पालन करना: राज्य शांति व्यवस्था तथा जीवन की सुरक्षा हेतु कानून बनाता है जो कि व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक हैं। नागरिक का यह पहला कर्तव्य है कि वह राज्य द्वारा निर्मित कानूनों का पालन करे। वे व्यक्ति जो कानूनों का उल्लंघन करेंगे, उन्हें राज्य द्वारा दंडित किया जा सकता है। कानूनों का पालन करके नागरिक राज्य को उसके उद्देश्यों को पूरा करने में सहयोग करते हैं।

2. करों का भुगतान करना:
सरकार को अपने कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है। सरकार धन की प्राप्ति हेतु कर लगाती है। अत: नागरिकों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे अपने हिस्से के करों का भुगतान ईमानदारी से करें। करों को ईमानदारी से न चुकाने पर राज्य द्वारा दण्ड भी दिया जा सकता है।

3. राज्य के प्रति वफादारी:\
राज्य प्रत्येक नागरिक को अनेक प्रकार के अधिकार प्रदान करता है; कई प्रकार की सुख-सुविधाएँ प्रदान करता है तथा बाहरी आक्रमणों व प्राकृतिक विपदाओं से उनकी रक्षा करता है। अतः प्रत्येकं नागरिक से राज्य के प्रति निष्ठा व भक्ति की आशा की जाती है। प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह देशद्रोह न करे तथा देश की रक्षा हेतु हर संभव प्रयत्न करे।

4. सैनिक सेवा में भाग लेना:
नागरिकों का यह भी कर्तव्य है कि आवश्यकता पड़ने पर देश की सुरक्षा हेतु सेना में भर्ती हो । राज्य की रक्षा हेतु नागरिकों से यह आशा की जाती है कि वे प्रत्येक चीज का त्याग करने, यहाँ तक कि अपने जीवन को न्यौछावर करने के लिए तैयार रहें।

5. राजनीतिक अधिकारों का उचित प्रयोग:
प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह अपने मत देने के अधिकार का सदुपयोग करे। यदि इस अधिकार का प्रयोग करके बुरे व्यक्तियों का चुनाव किया जायेगा तो वे शक्ति का दुरुपयोग करेंगे तथा पूरा समाज इसे भुगतेगा |

6. संविधान का आदर करना:
प्रशासन संविधान के अनुसार कार्य करता है। निर्वाचित व्यक्ति व मंत्रीगण संविधान की शपथ लेते हैं। इसलिए सभी नागरिकों को भी संविधान के प्रति आदर प्रदर्शित करना चाहिए।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 17.
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों को कौन-कौन से राजनैतिक अधिकार प्रदान करते
उत्तर:
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों को निम्नलिखित राजनैतिक अधिकार प्रदान करते हैं।

  1. मतदान का अधिकार: लोकतांत्रिक राज्यों में प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार प्रदान किया जाता है। इसके द्वारा वे समय-समय पर होने वाले चुनावों के द्वारा अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। ये प्रतिनिधि ही सरकार का निर्माण करते हैं तथा शासन को चलाते हैं।
  2. चुनाव लड़ने का अधिकार: लोकतांत्रिक राज्यों में प्रत्येक नागरिक को निर्वाचन में खड़ा होने का भी अधिकार है। निर्वाचित होने के बाद व्यक्ति नागरिकों के प्रतिनिधि के रूप में सरकार का निर्माण करते हैं।
  3. सरकारी नौकरी प्राप्त करने का अधिकार: आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियाँ पाने का अधिकार है।
  4. कानून के समक्ष समानता का अधिकार: आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान किया जाता है।
  5. अभिव्यक्ति या धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता: आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को अभिव्यक्ति तथा धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता का अधिकार भी प्रदान किया जाता है।

प्रश्न 18.
“नागरिकता राज्यसत्ता और उसके सदस्यों के बीच विधिक सम्बन्धों के निरूपण के साथ-साथ नागरिकों के आपसी सम्बन्धों का भी निरूपण है ।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नागरिकता एक तरफ जहाँ राज्य सत्ता और उसके सदस्यों के बीच विधिक सम्बन्धों, जैसे कानूनों का पालन करने, करों का भुगतान करने, राज्य के प्रति वफादारी, सैनिक सेवा में भाग लेना, राजनीतिक अधिकारों के प्रयोग तथा संविधान के आदर, आदि का निरूपण है। लेकिन इसके साथ ही साथ यह नागरिकों के आपसी सम्बन्धों के बारे में भी है। यथा

  1. इसमें नागरिकों के एक-दूसरे के प्रति और समाज के प्रति निश्चित दायित्व शामिल हैं।
  2. इसमें समुदाय के सहजीवन में भागीदार होने और योगदान करने का नैतिक दायित्व भी शामिल होता है।
  3. नागरिकों को देश के सांस्कृतिक और प्राकृतिक संसाधनों का उत्तराधिकारी और न्यासी भी माना जाता है।

प्रश्न 19.
भारत में नागिरकता किस प्रकार मिलती है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारत में जन्म, वंश-परम्परा, पंजीकरण, देशीयकरण या किसी भू-क्षेत्र के राजक्षेत्र में शामिल होने से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। यथा

  • संविधान लागू होने के पश्चात् भारत में पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक होगा।
  • संविधान लागू होने के पश्चात् भारत के बाहर पैदा हुआ वह व्यक्ति भारत का नागरिक होगा, यदि जन्म के समय उसका पिता वंशक्रम से भारत का नागरिक रहा हो।
  • पंजीकरण के द्वारा निम्नलिखित व्यक्ति भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
    1. भारत में उत्पन्न व्यक्ति जो पंजीकरण के लिए आवेदन पत्र देने के छ: महीने पहले से भारत में आमतौर पर निवास करते रहे हों।
    2. भारत में पैदा हुए व्यक्ति जो भारत के बाहर किसी अन्य देश में आमतौर पर निवास करते रहे हों।
    3. भारतीय नागरिकों की पत्नियाँ।
    4. भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।
  •  कोई भी विदेशी व्यक्ति भारतीय सरकार को कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करके आवेदन करके भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इसे देशीयकरण द्वारा नागरिकता की प्राप्ति कहा जाता है।

प्रश्न 20.
नागरिकता किन-किन कारणों से खो जाती है? कोई चार कारण लिखिये।
अथवा
किसी नागरिक की नागरिकता कैसे समाप्त हो सकती है?
उत्तर:
नागरिकता की समाप्ति के कारण: किसी नागरिक की नागरिकता की समाप्ति के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  1. देशद्रोह या निरंतर विद्रोही गतिविधियाँ: यदि कोई नागरिक देश के साथ गद्दारी करते हुए संविधान का अनादर करे तथा देश की शांति व्यवस्था को लगातार भंग करे तो उसे देश की नागरिकता से वंचित किया जा सकता है।
  2. किसी भू-भाग के पृथक् होने पर: यदि किसी देश का कोई भाग किसी समझौते या संधि द्वारा अलग हो जाए, तो वहाँ के सभी नागरिक दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करेंगे व उन्हें पहले देश की नागरिकता छोड़नी होगी।
  3. विदेश में सरकारी अधिकारी के रूप में नियुक्ति: जब कोई व्यक्ति किसी विदेशी सरकार की सेवा में पद ग्रहण करता है, तो उसकी मूल नागरिकता समाप्त हो सकती है।
  4. विदेशी से विवाह: यदि कोई भारतीय स्त्री किसी विदेशी से विवाह करती है, तो वह भारतीय नागरिकता छोड़कर अपने पति के देश की नागरिकता ग्रहण कर सकती है।
  5. विदेश में स्थायी निवास: यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में स्थायी रूप में जाकर रहने लगे, तब वह अपने देश की नागरिकता खो देता है।

प्रश्न 21.
“नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते हैं, उन सभी को संघर्ष के बाद हासिल किया गया है।” ऐसे कुछ संघर्षों का उदाहरण दीजिए। यथा
उत्तर:
नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते हैं, उन सभी को संघर्ष के बाद हासिल किया गया है।

  1. यूरोप में राजतंत्रों के विरुद्ध संघर्ष:
    अनेक यूरोपीय देशों में जनता ने अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए कुछ प्रारंभिक संघर्ष शक्तिशाली राजतंत्रों के खिलाफ छेड़े थे। उनमें कुछ हिंसक संघर्ष भी थे, जैसे – 1789 की फ्रांसीसी क्रांति।
  2. एशिया व अफ्रीका में संघर्ष:
    एशिया और अफ्रीका के अनेक उपनिवेशों में समान नागरिकता की माँग औपनिवेशिक शासकों से स्वतंत्रता हासिल करने के संघर्ष का भाग रही। दक्षिण अफ्रीका में समान नागरिकता पाने के लिए अफ्रीका की अश्वेत आबादी को सत्तारूढ़ गोरे अल्पसंख्यकों के खिलाफ लम्बा संघर्ष करना पड़ा जो 1990 के दशक के आरंभ तक जारी रहा।
  3. महिला व दलित आंदोलन:
    वर्तमान में विश्व के अनेक हिस्सों में महिला और दलित आंदोलन भी इस संघर्ष का एक भाग हैं।

प्रश्न 22.
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय लिखिये।
उत्तर:
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय: आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अग्रलिखित उपाय किये जा सकते हैं।

  1. उचित शिक्षा: आदर्श नागरिकता के मार्ग की प्रमुख बाधा अज्ञानता है। इस बाधा को दूर करने के लिए नागरिकों को मानवीय मूल्य पर आधारित उचित शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उचित शिक्षा से उनके विचारों में परिपक्वता आयेगी तथा अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का ज्ञान होगा।
  2. आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति: आदर्श नागरिकता के मार्ग की एक अन्य बाधा व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाना है। इसलिए देश में ऐसी आर्थिक व्यवस्था होनी चाहिए जिससे नागरिकों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सुचारु रूप से हो सके।
  3. राष्ट्रीय चरित्र का विकास: किसी भी राष्ट्र के व्यक्ति आदर्श नागरिक तभी बन सकते हैं जबकि उस राष्ट्र का राष्ट्रीय चरित्र उच्च कोटि का हो। अर्थात् लोग राष्ट्र को अपने स्वार्थों से ऊँचा स्थान दें तथा सभी प्रकार की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर सोचें।
  4. विश्व बंधुत्व की भावना: आदर्श नागरिकता के मार्ग की एक अन्य बाधा उग्र राष्ट्रीयता की भावना है। यह नागरिकों की मनोवृत्ति संकीर्ण बनाती है। इस बाधा को दूर करने के लिए आवश्यक है कि वसुधैव कुटुम्बकम् एवं विश्व बंधुत्व की भावना को स्वीकार कर लिया जाये।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘नागरिक’ कौन होता है? भारतीय संविधान नागरिक के बारे में क्या कहता है? भारत में नागरिकता ग्रहण करने की पद्धतियों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
‘नागरिक’ से आशय: नागरिक वह व्यक्ति है जो किसी राज्य का सदस्य होता है, उसके प्रति निष्ठावान होता है, उसे नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं और वह देश के शासन में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी न किसी रूप में, भागीदार होता है।

भारत का संविधान एवं नागरिक: भारत के संविधान का भाग 2 केवल उन वर्गों के लोगों के बारे में उल्लेख करता है जो संविधान के लागू होने के समय अर्थात् 26 जनवरी, 1950 को भारतीय नागरिक माने गये। नागरिकता से संबंधित शेष बातों की व्यवस्था भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 में की गई है।

1. संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता: संविधान के प्रारंभ पर निम्नलिखित व्यक्तियों को अधिवास द्वारा नागरिकता प्रदान की गई।
संविधान के अनुच्छेद 5 के अनुसार इस संविधान के आरंभ पर प्रत्येक व्यक्ति, जिसका भारत में अधिवास (Domicile) है, भारत का नागरिक होगा, यदि

  • वह भारत में जन्मा हो। अथवा
  • उसके माता-पिता में से कोई भी भारत में जन्मा हो ।
  • जो संविधान के प्रारंभ होने से ठीक पहले कम से कम पांच वर्षों तक भारत का साधारण तौर से निवासी रहा हो।

इस प्रकार भारत में अधिवास (निवास) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए – प्रथम, यह कि व्यक्ति का भारत में अधिवास हो; और दूसरा, यह कि वह व्यक्ति उक्त वर्णित तीन शर्तों में से एक शर्त पूरी कर रहा. हो।

2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ:
भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार भारत में निम्नलिखित पांच प्रकार से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।

  • जन्म से नागरिकता:
    संविधान लागू होने के पश्चात् भारत में पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक होगा। लेकिन यदि उसके जन्म के समय उसके पिता को ऐसे मुकदमों या कानूनी प्रक्रियाओं से विमुक्ति प्राप्त थी, जो भारत में कूटनीतिक राजदूतों को प्रदान की जाती है या उसका पिता एक विदेशी शत्रु है और उसका जन्म ऐसे स्थान में होता है, जो उस समय शत्रु के कब्जे में है, तो ऐसा व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं होगा।
  • वंश क्रम द्वारा नागरिकता की प्राप्ति;
    कोई ऐसा व्यक्ति जो 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद भारत के बाहर पैदा हुआ हो, भारत का नागरिक होगा, यदि उसके जन्म के समय में उसका पिता वंशक्रम से भारत का नागरिक रहा हो।

3. पंजीकरण द्वारा नागरिकता की प्राप्ति-व्यक्तियों के कुछ वर्ग जिन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं है, निर्धारित अधिकारियों के समक्ष पंजीकरण करवा कर उसे ग्रहण कर सकते हैं। पंजीकरण द्वारा निम्नलिखित व्यक्ति नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।

  • भारत में उत्पन्न व्यक्ति जो रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन पत्र देने के छः महीने पहले से भारत में आमतौर से निवास करते रहे हों।
  • भारत में पैदा हुए व्यक्ति जो भारत के बाहर किसी अन्य देश में आमतौर से निवास करते रहे हों।
  • भारतीय नागरिकों की पत्नियाँ।
  • भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।

4. देशीयकरण द्वारा नागरिकता की प्राप्ति:
कोई भी विदेशी व्यक्ति भारतीय सरकार को देशीयकरण के लिए आवेदन करके भारत की नागरिकता ग्रहण कर सकता है। देशीयकरण का अर्थ है। कुछ शर्तों का पालन करके किसी देश की नागरिकता लेना। हो। देशीयकरण द्वारा भारतीय नागरिकता प्राप्ति के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।

  • वह किसी ऐसे देश का नागरिक न हो जहाँ भारतीय देशीयकरण द्वारा नागरिक बनने से रोक दिये जाते हों।
  • उसने अपने देश की नागरिकता का परित्याग कर दिया हो और केन्द्रीय सरकार को इस बात की सूचना दे दी
  • वह देशीयकरण के लिए आवेदन करने की तिथि से पहले 12 वर्ष तक या तो भारत में रहा हो या भारत सरकार की सेवा में रहा हो।
  • उपर्युक्त 12 वर्षों के पहले के कुल 7 वर्षों में से कम-से-कम 4 वर्ष तक उसने भारत में निवास किया हो या भारत सरकार की नौकरी में रहा हो।
  • वह अच्छे चरित्र का व्यक्ति हो।
  • वह राज्यनिष्ठा की शपथ ग्रहण करे।
  • उसे भारतीय संविधान द्वारा मान्य भाषा का सम्यक् ज्ञान हो।
  • देशीयकरण के प्रमाणपत्र की प्राप्ति के उपरान्त उसका भारत में निवास करने या भारत सरकार की नौकरी में रहने का इरादा हो।

5. क्षेत्र के समावेशन के आधार पर नागरिकता: यदि कोई नया क्षेत्र भारत का भाग बन जाता है, तो भारत सरकार उस क्षेत्र के लोगों को नागरिकता दे देगी।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 2.
भारतीय नागरिकता की समाप्ति कितने प्रकार से हो सकती है?
उत्तर:
भारतीय नागरिकता की समाप्ति: भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार भारतीय नागरिकता की समाप्ति निम्नलिखित तीन प्रकार से हो सकती है।
1. नागरिकता का परित्याग: कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक, जो किसी दूसरे देश का भी नागरिक है, भारतीय नागरिकता को त्याग सकता है। इसके लिए उसे एक घोषणा करनी होगी और इस घोषणा के पंजीकृत हो जाने पर वह भारत का नागरिक नहीं रह जायेगा।

2. दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करने पर यदि भारत का कोई भी नागरिक अपनी इच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता को स्वीकार कर लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।

3. नागरिकता से वंचित किया जाना: भारत की केन्द्र सरकार किसी भी भारतीय नागरिक को उसकी नागरिकता से वंचित कर सकती है। देशीयकरण, पंजीकरण, अधिवास और निवास के आधार पर बने हुए किसी भी नागरिक को भारत सरकार एक आदेश जारी करके उसको नागरिकता से वंचित कर सकती है, बशर्ते कि उसे यह समाधान हो जाये कि लोकहित के लिए यह उचित नहीं है कि उसे भारत का नागरिक बने रहने दिया जाये। था। केन्द्र सरकार इस प्रकार का आदेश तभी जारी करेगी जब उसे इस बात का समाधान हो जाये कि

  • पंजीकरण या देशीयकरण कपट से, मिथ्या निरूपण से या किसी सारवान तथ्य को छिपाकर प्राप्त किया गया
  • उस व्यक्ति ने व्यवहार या भाषण द्वारा अपने को भारतीय संविधान के प्रति निष्ठाहीन दिखाया है।
  • किसी ऐसे युद्ध में, जिसमें भारत युद्धरत रहा हो, अवैध रूप से दुश्मन से व्यापार या संचार किया हो।
  • वह अपने पंजीकरण या देशीयकरण से पांच वर्ष की अवधि के अन्दर कम से कम दो वर्ष के लिए दण्डित किया गया हो।
  • यदि वह भारत से बाहर लगातार 7 वर्षों तक सामान्यतयां निवास करता रहा हो।

प्रश्न 3.
नागरिकता का अर्थ स्पष्ट करते हुये बताइये कि जन्मजात नागरिकता किन स्थितियों में प्राप्त होती
अथवा
नागरिकता से क्या आशय है? नागरिकता प्राप्त करने की विधियों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
नागरिकता का अर्थ: नागरिकता वह वैज्ञानिक व्यवस्था है जिसके द्वारा नागरिक को राज्य की ओर से सामाजिक और राजनीतिक और नागरिक अधिकार प्राप्त होते हैं तथा उसे राज्य तथा दूसरे नागरिकों के प्रति अपने कर्त्तव्यों का पालन करना पड़ता है। इस प्रकार नागरिकता एक कानून सम्मत पद है। गैटिल के अनुसार, “नागरिकता किसी व्यक्ति की उस स्थिति को कहते हैं जिसके अनुसार वह अपने राज्य में साधारण और राजनीतिक अधिकारों का भोग करता है तथा अपने कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए तैयार रहता है।” नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ किसी भी राज्य में नागरिकता प्राप्त करने की दो विधियाँ होती हैं।
(अ) जन्मजात नागरिकता
(ब) देशीयकरण द्वारा प्राप्त नागरिकता

(अ) जन्मजात नागरिकता: जन्मजात नागरिकता निम्नलिखित स्थितियों में प्राप्त होती है।

  1. रक्त या वंश के आधार पर:
    रक्त या वंश के आधार पर बच्चा जन्म लेते ही उस देश का नागरिक समझा जाता है, जिस देश के उसके माता-पिता नागरिक होते हैं, चाहे बच्चे का जन्म उसके माता-पिता के देश में हुआ हो या विदेश में । जर्मनी, फ्रांस आदि अनेक देशों में यही नियम मान्य है।
  2. जन्म स्थान के आधार पर:
    जन्म स्थान के आधार पर बच्चा उस देश का नागरिक समझा जाता है जहाँ उसका जन्म होता है, चाहे उसके माता-पिता किसी अन्य देश के नागरिक हों। अर्जेंटाइना में इसी नियम का पालन किया जाता है।
  3. मिश्रित नियम: इस नियम के अनुसार यदि किसी देश के नागरिकों की सन्तान का जन्म विदेश में होता है। अथवा विदेश के नागरिकों का जन्म उस देश में होता है, जहाँ उस देश के माता-पिता उस समय निवास कर रहे हैं तो दोनों ही स्थितियों में वह बच्चा उस देश का नागरिक होता है जहाँ उसका जन्म होता है। इंग्लैण्ड, अमेरिका तथा भारत में इसी नियम को अपनाया गया है।

(ब) देशीयकरण द्वारा प्राप्त नागरिकता: देशीयकरण द्वारा निम्नलिखित उपायों से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।

  1. निवास: यदि कोई विदेशी एक निश्चित अवधि तक विदेश में रहता है तो उसका देशीयकरण कर उस देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। निवास की अवधि भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न रखी गई है। भारत में यह 10 वर्ष रखी गयी है।
  2. विवाह: यदि कोई स्त्री अन्य देश के नागरिक से विवाह कर लेती है तो उसे अपने पति के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। अधिकांश देशों में यह विधि प्रचलित है।
  3. गोद लेने पर: यदि किसी देश का नागरिक किसी अन्य देश में उत्पन्न बालक को गोद ले लेता है तो वह बालक अपने देश की नागरिकता खोकर नये देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है।
  4. सरकारी पद: यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश में कोई सरकारी पद प्राप्त कर लेता है तो वह उस राज्य की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। रूस में यह नियम प्रचलित है।
  5. सम्पत्ति क्रय द्वारा: यदि कोई व्यक्ति किसी देश में भूमि आदि अचल सम्पत्ति खरीद लेता है तो उसे उस देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  6. विजय द्वारा: जब कोई देश युद्ध में अन्य देश पर विजय प्राप्त करके उसे अपने में मिला लेता है तो उस देश के नागरिकों को विजेता देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  7. वैधता: यदि किसी नागरिक के किसी विदेशी महिला से अवैध सन्तान उत्पन्न हो जाये तो माता-पिता के आपस में नियमानुसार विवाह कर लेने पर सन्तान को पिता के देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
  8. योग्यता या विद्वता: कुछ देशों में कुछ प्रमुख विद्वानों को अपने देश की नागरिकता प्रदान कर दी जाती है अथवा उनके निवास की अवधि में रियायत कर दी जाती है, जैसे – 10 वर्ष के स्थान पर 1 वर्ष।

प्रश्न 4.
सार्वभौमिक नागरिकता की अवधारणा की व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
सार्वभौमिक नागरिकता: सार्वभौमिक नागरिकता से आशय यह है कि किसी देश की पूर्ण एवं समान सदस्यता उन सबको उपलब्ध होनी चाहिए, जो सामान्यतः उस देश में रहते या काम करते हैं या जो नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं। किसी देश में रहने वाले सभी व्यक्तयों से यहाँ आशय यह है कि वे व्यक्ति उस देश में चाहे शरणार्थियों के रूप में रहे हों या अवैध आप्रवासियों के रूप में, यदि वे उस देश की नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें उस देश की नागरिकता प्रदान करने से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्ति जो किसी राज्य में रह रहा है, उसे उस राज्य की नागरिकता के लिए मान्यता देनी चाहिए।

लेकिन किसी भी राज्य द्वारा सार्वभौमिक नागरिकता प्रदान नहीं की जा रही है। सूडान के डरफन क्षेत्र के शरणार्थी, फिलिस्तीनी, बर्मी या बंगलादेशी शरणार्थी जैसे अनेक उदाहरण हैं जो अपने ही देश या पड़ौसी देश में शरणार्थी बनने के लिए मजबूर किये गये हैं और ये राज्यविहीन हैं, जिन्हें किसी देश की नागरिकता प्राप्त नहीं है। वे शिविरों या अवैध प्रवासियों के रूप में रहने को मजबूर हैं। प्रायः वे कानूनी रूप से कार्य नहीं कर सकते, संपत्ति अर्जित नहीं कर सकते। ऐसे लोगों की समस्याओं को सुलझाने के लिए कुछ विद्वानों ने सार्वभौमिक नागरिकता की अवधारणा प्रतिपादित की। सार्वभौमिक नागरिकता की अवधारणा की अव्यावहारिकता – यद्यपि सार्वभौमिक नागरिकता की अवधारणा एक प्रभावित करने वाला विचार है, लेकिन निम्नलिखित कारणों से यह व्यावहारिक नहीं है।

  1. प्रत्येक राज्य यह निर्धारित करता है कि उसकी जनसंख्या, क्षेत्र, रोजगार के अवसरों, व्यापार तथा व्यवसाय को ध्यान में रखते हुए कितने लोगों को राज्य में प्रवेश दिया जाना चाहिए। कोई भी राज्य लोगों की अनियंत्रित भीड़ को देश की अर्थव्यवस्था व आर्थिक विकास की दृष्टि से स्वीकार नहीं कर सकता।
  2. प्रत्येक राज्य को यह निर्धारित करना पड़ता है कि किस प्रकार को आप्रवासी उसकी अर्थव्यवस्था, सामाजिक वातावरण तथा संस्कृति के विकास के लिए उचित होंगे। कोई भी राज्य प्रत्येक प्रकार के आप्रवासियों – शिक्षित, अशिक्षित, कुशल और अकुशल- को आने की अनुमति देकर राज्य स्वयं की सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ना नहीं चाहता।
  3. राज्य को कानून और व्यवस्था को भी ध्यान में रखना पड़ता है। यदि वह अनियंत्रित शरणार्थियों को प्रवेश देने की स्वीकृति दे देगा तो उसके यहाँ कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।
  4. आप्रवासियों का अनियंत्रित प्रवेश और उनको नागरिकता प्रदान करना सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान तथा आर्थिक विकास पर दुष्प्रभाव डाल सकता है।

अनेक देश यद्यपि वैश्विक और समावेशी नागरिकता का समर्थन करते हैं लेकिन वे नागरिकता देने की शर्तें भी निर्धारित करते हैं। ये शर्तें आमतौर पर देश के संविधान और कानूनों में लिखी होती हैं और अवांछित आगंतुकों को नागरिकता से बाहर रखने के लिए राज्य सत्ताएँ ताकत का प्रयोग करती हैं। राज्यकृत नागरिकता सभी अवैध लोगों को नागरिकता प्रदान करने में असमर्थ रहती है। इसलिए सार्वभौमिक नागरिकता की अवधारणा प्रभावित करती है और इस समस्या का हल भी सुझाती है, लेकिन संप्रभु राज्य की अवधारणा से मिलने वाली नागरिकता के चलते यह अवधारणा अव्यावहारिक है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 6 नागरिकता

प्रश्न 5.
शरणार्थियों द्वारा कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार इनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है?
अथवा
वैश्विक नागरिकता की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वैश्विक नागरिकता की अवधारणा: आज हम एक ऐसे विश्व में रहते हैं जो आपस में जुड़ा हुआ है। संचार के इंटरनेट, टेलीविजन और सेलफोन जैसे नये साधनों ने विश्व के विभिन्न हिस्सों की हलचलों को हमारे तत्काल सम्पर्क के दायरे में ला दिया है। टेलीविजन के पर्दे पर विनाश और युद्धों को देखने से विश्व के विभिन्न देशों के लोगों में साझे सरोकार और सहानुभूति विकसित होने में मदद मिली है। विश्व नागरिकता के समर्थकों का मत है कि चाहे विश्व- कुटुम्ब और वैश्विक समाज अभी विद्यमान नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार लोग आज एक-दूसरे से जुड़ा महसूस करते हैं।

इसलिए विश्व नागरिकता की अवधारणा की दिशा में सक्रिय हुआ जा सकता है। विश्व नागरिकता में विश्व के सभी व्यक्ति एक परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। राज्यों की सीमाओं की बाधाएँ वैश्विक नागरिकता के अन्तर्गत समाप्त हो जायेंगी और विभिन्न राज्यों में व्यक्तियों तथा वस्तुओं का स्वतंत्र आवागमन होगा। अतः एक राज्य की नागरिकता पूरे विश्व में आने-जाने तथा सभी जगह समान अधिकारों की प्राप्ति के लिए पर्याप्त होगी। लोग यह महसूस करेंगे कि वे किसी व्यक्तिगत समाजों के सदस्य नहीं हैं, बल्कि एक वैश्विक समाज के सदस्य हैं।

शरणार्थियों से आशय: शरणार्थी वे व्यक्ति हैं जिन्हें किसी भी देश की नागरिकता प्राप्त नहीं है या वे राज्यविहीन व्यक्ति हैं। युद्ध, उत्पीड़न, अकाल या अन्य कारणों से लोग विस्थापित होते हैं। अगर कोई देश उन्हें स्वीकार करने के लिए राजी नहीं होता और वे अपने घर नहीं लौट सकते तो वे राज्यविहीन और शरणार्थी हो जाते हैं। अनेक देशों में युद्ध या उत्पीड़न से पलायन करने वाले लोगों को अंगीकार करने की नीति है। लेकिन वे भी लोगों की अनियंत्रित भीड़ को स्वीकार करना सुरक्षा के संदर्भ में देश को जोखिम में डालना नहीं चाहेंगे। भारत में यद्यपि उत्पीड़ित लोगों को आश्रय उपलब्ध कराने की नीति अपनायी गयी है, लेकिन भारत राष्ट्र की सभी सीमाओं से पड़ौसी देशों के लोगों का प्रवेश हुआ है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। इनमें से अनेक लोग वर्षों या पीढ़ियों तक राज्यहीन व्यक्तियों के रूप में पड़े रहते हैं। शिविरों या अवैध प्रवासी के रूप में। ये हैं।

शरणार्थियों या राज्यविहीन व्यक्तियों की समस्यायें: राज्यविहीन व्यक्तियों या शरणार्थियों की प्रमुख समस्यायें

  1. वे शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहने को मजबूर किये जाते हैं।
  2. उन्हें कोई भी सामाजिक-राजनैतिक अधिकार नहीं मिले होते।
  3. प्राय: वे कानूनी तौर पर काम नहीं कर सकते या अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं सकते या सम्पत्ति अर्जित नहीं कर सकते।

वैश्विक नागरिकता की अवधारणा और शरणार्थियों की समस्याओं का समाधान यद्यपि अभी तक वैश्विक नागरिकता की अवधारणा का विचार अन्तर्राष्ट्रीय जगत में स्वीकार नहीं किया जा सका है, लेकिन यदि यह स्वीकार कर लिया जाता है तो यह शरणार्थियों की अनेक समस्याओं का समाधान कर देगा तथा उनके लिए लाभकारी रहेगा। यथा

  1. वैश्विक नागरिकता की अवधारणा के कारण संसार का कोई भी व्यक्ति राज्यविहीन या शरणार्थी नहीं रहेगा।
  2. शरणार्थी अधिकारों के वंचन से पीड़ित नहीं होंगे।
  3. पूरे विश्व के लोगों में राज्य की सीमाओं के आर-पार मानव जाति की सहायता करने का भाव विकसित होगा।
  4. वैश्विक नागरिकता अनेक वैश्विक समस्याओं, जैसे- आतंकवाद, पर्यावरण को खतरा, कुछ राज्यों में जनाधिक्य की समस्या तथा कुछ राज्यों में भोजन तथा स्वास्थ्य की समस्यायें आदि को हल करने में लाभप्रद होगी।

 

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. व्यक्ति के उच्चतम विकास हेतु परमावश्यक है।
(अ) अधिकार
(ब) सम्पत्ति
(स) न्याय व्यवस्था
(द) कानून
उत्तर:
(अ) अधिकार

2. राज्य द्वारा मान्य और कानून द्वारा रक्षित अधिकार कहे जाते हैं।
(अ) प्राकृतिक अधिकार
(ब) वैधानिक अधिकार
(स) नैतिक अधिकार
(द) परम्परागत अधिकार
उत्तर:
(ब) वैधानिक अधिकार

3. निर्वाचित होने का अधिकार निम्नांकित में से किस श्रेणी के अन्तर्गत आता है।
(अ) सामाजिक अधिकार
(ब) आर्थिक अधिकार
(स) राजनैतिक अधिकार
(द) धार्मिक अधिकार
उत्तर:
(स) राजनैतिक अधिकार

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

4. ‘अधिकार वह माँग है जिसे समाज स्वीकार करता है तथा राज्य लागू करता है।” यह कथन किसका है।
(अ) लास्की
(ब) ग्रीन
(स) बोसांके
(द) वाइल्ड
उत्तर:
(स) बोसांके

5. प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा के अन्तर्गत निम्न में से कौनसा अधिकार प्राकृतिक नहीं माना गया है।
(अ) काम का अधिकार
(ब) जीवन का अधिकार
(स) स्वतंत्रता का अधिकार
(द) संपत्ति का अधिकार
उत्तर:
(अ) काम का अधिकार

6. मानव अधिकारों के पीछे मूल मान्यता यह है कि-
(अ) अधिकार प्रकृति प्रदत्त हैं।
(ब) अधिकार ईश्वर प्रदत्त हैं।
(स) अधिकार जन्मजात हैं।
(द) मनुष्य होने के नाते सभी मनुष्य अधिकारों को पाने के अधिकारी हैं।
उत्तर:
(द) मनुष्य होने के नाते सभी मनुष्य अधिकारों को पाने के अधिकारी हैं।

7. आज प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की जरूरत के प्रति चेतना ने कौनसे अधिकारों की मांग पैदा की है?
(अ) स्वच्छ हवा तथा शुद्ध जल जैसे अधिकारों की मांग
(ब) आजीविका के अधिकार तथा बच्चों के अधिकारों की मांग
(स) स्वतंत्रता व समानता के अधिकारों की मांग
(द) सम्पत्ति व सांस्कृतिक अधिकारों की मांग
उत्तर:
(अ) स्वच्छ हवा तथा शुद्ध जल जैसे अधिकारों की मांग

8. निम्नलिखित में कौनसा अधिकार राजनैतिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता है?
(अ) वोट देने का अधिकार
(ब) काम पाने का अधिकार
(स) चुनाव लड़ने का अधिकार
(द) राजनैतिक दल बनाने का अधिकार
उत्तर:
(ब) काम पाने का अधिकार

9. निम्नलिखित में कौनसा अधिकार आर्थिक अधिकार है?
(अ) स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच का अधिकार
(ब) विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार
(स) असहमति प्रकट करने का अधिकार
(द) बुनियादी जरूरतों की पूर्ति हेतु पर्याप्त मजदूरी का अधिकार
उत्तर:
(द) बुनियादी जरूरतों की पूर्ति हेतु पर्याप्त मजदूरी का अधिकार

10. नागरिकों का सांस्कृतिक अधिकार है।
(अ) काम पाने का अधिकार
(ब) स्वतंत्रता का अधिकार
(स) अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार
(द) चुनाव लड़ने का अधिकार
उत्तर:
(स) अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

11. निम्न में कौनसा अधिकार हमें सृजनात्मक और मौलिक होने का मौका देता है।
(अ) आजीविका का अधिकार
(ब) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
(स) समानता का अधिकार
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. अधिकार उन बातों का द्योतक है जिन्हें मैं और अन्य लोग सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए ……………….. समझते हैं।
उत्तर:
आवश्यक

2. ……………… हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं।
उत्तर:
अधिकार

3. विविध समाजों में ज्यों-ज्यों नए खतरे और चुनौतियाँ उभरती आयी हैं, त्यों-त्यों उन ………………… लगातार बढ़ती गई है, जिनका लोगों ने दावा किया है।
उत्तर:
मानवाधिकारों

4. हाल के वर्षों में प्राकृतिक अधिकार शब्द से ज्यादा …………………. शब्द का प्रयोग हो रहा है।
उत्तर:
मानवाधिकार

5. ………………… में उन अधिकारों का उल्लेख रहता है, जो बुनियादी महत्त्व के माने जाते हैं।
उत्तर:
संविधान।

निम्नलिखित में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये

1. अधिकार सिर्फ यह ही नहीं बताते कि राज्य को क्या करना है, वे यह भी बताते हैं कि राज्य को क्या कुछ नहीं करना है।
उत्तर:
सत्य

2. हमारे अधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि राज्य की सत्ता वैयक्तिक जीवन और स्वतंत्रता की मर्यादा का उल्लंघन किये बगैर काम करे।
उत्तर:
सत्य

3. धार्मिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी और राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं।
उत्तर:
असत्य

4. लोकतांत्रिक समाज वोट देने तथा प्रतिनिधि चुनने के दायित्वों को पूरा करने के लिए आर्थिक अधिकार मुहैया करा रहे हैं।
उत्तर:
असत्य

5. अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार राजनैतिक अधिकार के अन्तर्गत आता है।
उत्तर:
असत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. मत देने का अधिकार(अ) सांस्कृतिक अधिकार
2. रोजगार पाने का अधिकार(ब) संयुक्त राष्ट्र संघ
3. अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण के लिए(स) आर्थिक अधिकार संस्थाएँ बनाने का अधिकार
4. मानवाधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा(द) प्राकृतिक अधिकार
5. अधिकार ईश्वर प्रदत्त हैं।(य) राजनैतिक अधिकार

उत्तर:

1. मत देने का अधिकार(य) राजनैतिक अधिकार
2. रोजगार पाने का अधिकार(स) आर्थिक अधिकार
3. अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण के लिए(अ) सांस्कृतिक अधिकार
4. मानवाधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा(ब) संयुक्त राष्ट्र संघ
5. अधिकार ईश्वर प्रदत्त हैं।(द) प्राकृतिक अधिकार

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव अधिकारों के घोषणा पत्र से क्या आशय है ?
उत्तर:
मानव अधिकारों का संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र अधिकारों के उन दावों को मान्यता देने का प्रयास है। विश्व समुदाय गरिमा और आत्मसम्मानपूर्ण जीवन के लिए आवश्यक मानता है।

प्रश्न 2.
अधिकार किस सत्ता को सीमित करते हैं?
उत्तर:
अधिकार राज्य की सत्ता को सीमित करते हैं।

प्रश्न 3.
राजनीतिक अधिकार किन्हें प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
राजनीतिक अधिकार नागरिकों को प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 4.
किन्हीं दो राजनीतिक अधिकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
दो प्रमुख राजनीतिक अधिकार हैं।

  1. मतदान करने एवं उम्मीदवार बनने का अधिकार
  2. सरकारी पद ग्रहण करने व सरकार की आलोचना का अधिकार।

प्रश्न 5.
मत देने और प्रतिनिधि चुनने का अधिकार किन अधिकारों के अन्तर्गत आता है?
उत्तर:
राजनीतिक अधिकारों के अन्तर्गत।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 6.
एक आर्थिक और एक सामाजिक अधिकार का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
काम प्राप्त करने का अधिकार एक आर्थिक अधिकार है जबकि शिक्षा का अधिकार एक सामाजिक अधिकार

प्रश्न 7.
वयस्क मताधिकार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
एक निश्चित उम्र के पश्चात् मत देने के लिए प्रदत्त अधिकार को वयस्क मताधिकार कहा जाता है।

प्रश्न 8.
संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को कब स्वीकार और लागू
उत्तर:
10 दिसम्बर, 1948 को।

प्रश्न 9.
संविधान में कौनसे अधिकारों का उल्लेख रहता है?
उत्तर:
संविधान में बुनियादी महत्व के अधिकारों का उल्लेख रहता है।

प्रश्न 10.
मानवाधिकारों की अवधारणा का प्रयोग किसलिए किया जाता रहा है?
उत्तर:
नस्ल, जाति, धर्म और लिंग पर आधारित असमानताओं को चुनौती देने के लिए।

प्रश्न 11.
भारत में संविधान में वर्णित अधिकारों को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
मूल अधिकार।

प्रश्न 12.
मानव अधिकार का आशय स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
मानव अधिकार वे अधिकार हैं जो लोगों के चहुँमुखी विकास एवं कल्याण के लिए अति आवश्यक होते

प्रश्न 13.
उस सिद्धान्त का नाम लिखिये जो अधिकारों को रीति-रिवाज एवं परम्पराओं की उपज मानता है।
उत्तर:
ऐतिहासिक सिद्धान्त।

प्रश्न 14.
किस सिद्धान्त के अनुसार अधिकार कानून का परिणाम है?
उत्तर:
वैधानिक सिद्धान्त के अनुसार।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 15.
अधिकारों के आदर्शवादी सिद्धान्त की क्या मान्यता है?
उत्तर:
एक आदर्श व्यक्तित्व के विकास हेतु अधिकारों की आवश्यकता है।

प्रश्न 16.
काम के अधिकार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
काम के अधिकार से तात्पर्य है। प्रत्येक व्यक्ति को उचित पारिश्रमिक पर आजीविका के साधन उपलब्ध

प्रश्न 17.
मानवाधिकारों के दावों की सफलता किस कारक पर सर्वाधिक निर्भर करती है?
उत्तर:
मानवाधिकारों के दावों की सफलता सरकारों और कानून के समर्थन पर सर्वाधिक निर्भर करती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार क्या हैं?
उत्तर:
अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए व्यक्ति द्वारा समाज से किये जाने वाले वे दावे ( माँगें) हैं, जिन्हें समाज सामाजिक हित की दृष्टि से मान्यता प्रदान कर देता है और राज्य उनके संरक्षण की मान्यता दे देता है।

प्रश्न 2.
अधिकार क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:

  1. अधिकार व्यक्तियों को सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।
  2. अधिकार हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं क्योंकि ये लोगों की प्रतिभा और दक्षता को विकसित करने में सहयोग देते हैं।

प्रश्न 3.
प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा क्या है?
उत्तर:
प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा के अनुसार व्यक्ति के अधिकार प्रकृति या ईश्वर प्रदत्त हैं। वे व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त हैं। परिणामतः कोई व्यक्ति या शासक उन्हें हमसे छीन नहीं सकता।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 4.
प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्तकारों ने कौनसे अधिकार प्राकृतिक बताए हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्त के अनुसार मनुष्य के तीन प्राकृतिक अधिकार थे।

  1. जीवन का अधिकार,
  2. स्वतंत्रता का अधिकार
  3. सम्पत्ति का अधिकार।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्त का प्रयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता था?
उत्तर:
प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्त का प्रयोग राज्यों या सरकारों के द्वारा स्वेच्छाचारी शक्तियों के प्रयोग का विरोध करने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 6.
मानवाधिकारों की अवधारणा के पीछे मूल मान्यता क्या है?
उत्तर:
मानवाधिकारों की अवधारणा के पीछे मूल मान्यता यह है कि सभी लोग मनुष्य होने मात्र से कुछ चीजों को पाने के अधिकारी हैं। एक मानव के रूप में हर मनुष्य विशिष्ट और समान महत्त्व का है तथा सभी मनुष्य समान हैं, इसलिए सबको स्वतंत्र रहने तथा अपने व्यक्तित्व के विकास हेतु समान अवसर मिलने चाहिए।

प्रश्न 7.
” विविध समाजों में ज्यों-ज्यों नए खतरे और चुनौतियाँ उभरती आई हैं, त्यों-त्यों मानवाधिकारों की सूची लगातार बढ़ती गई है जिनका लोगों ने दावा किया है?” इस कथन को कोई एक उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
आज हम प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की चुनौती का सामना कर रहे हैं, इस चुनौती के प्रति सजगता के चलते हमने जिन नये मानवाधिकारों की मांगें पैदा की हैं, वे हैं – स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और टिकाऊ विकास के अधिकारों की मांग। इससे स्पष्ट होता है कि समाज में बढ़ते खतरों के प्रति सजगता ने मानवाधिकारों की सूची में वृद्धि की है।

प्रश्न 8.
मानवाधिकारों का क्या महत्व है?
उत्तर:
मानव अधिकारों के पीछे मूल मान्यता यह है कि सब लोग, मनुष्य होने मात्र से कुछ चीजों को पाने के अधिकारी हैं। संयुक्त राष्ट्र का मानव अधिकारों का सार्वभौम घोषणा-पत्र उन दावों को मानव-अधिकारों के रूप में मान्यता प्रदान करता है, जिन्हें विश्व समुदाय सामूहिक रूप से गरिमा और आत्म- – सम्मानपूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक मानता है। पूरे विश्व के उत्पीड़ित लोग मानवाधिकारों की अवधारणा का प्रयोग उन कानूनों को चुनौती देने का कार्य कर रहे हैं, जो उन्हें समान अवसरों और अधिकारों से वंचित करते हैं। इस प्रकार मानव अधिकार मनुष्य के अच्छे जीवन जीने के लिए एक गारन्टी प्रदान करते हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 9.
“मेरा अधिकार राजसत्ता को खास तरीके से काम करने के कुछ वैधानिक दायित्व सौंपता है ।” इस कथन को एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यदि कोई समाज यह महसूस करता है कि जीने के अधिकार का अर्थ अच्छे स्तर के जीवन का अधिकार है, तो वह राजसत्ता से ऐसी नीतियों के अनुपालन की अपेक्षा करता है कि वह स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण और अन्य आवश्यक निर्धारकों का प्रावधान करे। इससे स्पष्ट होता है कि मेरा अधिकार यहाँ राजसत्ता को खास तरीके से काम करने के लिए कुछ वैधानिक दायित्व सौंपता है।

प्रश्न 10.
नागरिकों के प्रमुख राजनैतिक अधिकार कौन-कौनसे हैं ? उल्लेख करो।
उत्तर:
नागरिकों के प्रमुख राजनीतिक अधिकार ये हैं।

  1. मत देने तथा प्रतिनिधि चुनने का अधिकार,
  2. चुनाव लड़ने का अधिकार,
  3. राजनैतिक दल बनाने का अधिकार तथा
  4. किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बनने का अधिकार।

प्रश्नं 11.
चार ऐसे अधिकारों का उल्लेख कीजिए जो बुनियादी अधिकार के रूप में मान्य हैं।
उत्तर:

  1. जीवन का अधिकार,
  2. स्वतंत्रता का अधिकार,
  3. समान व्यवहार का अधिकार और
  4. राजनीतिक भागीदारी का अधिकार बुनियादी अधिकारों के रूप में मान्य हैं।

प्रश्न 12.
“अधिकार हमारे सम्मान और गरिमामय जीवन बसर करने के लिए आवश्यक हैं। ” स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
अधिकार उन बातों का द्योतक है जिन्हें लोग सम्मान और गरिमा का जीवन बसर करने के लिए आवश्यक समझते हैं। उदाहरण के लिए, आजीविका का अधिकार सम्मानजनक जीवन जीने के लिए जरूरी है क्योंकि यह व्यक्ति को आर्थिक स्वतंत्रता देता है। इसी प्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हमें सृजनात्मक और मौलिक होने का मौका देता है। चाहे यह लेखन के क्षेत्र में हो अथवा नृत्य, संगीत या किसी अन्य रचनात्मक क्रियाकलाप में

प्रश्न 13.
स्पष्ट कीजिये कि अधिकार हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं?
उत्तर:
अधिकार हमारी बेहतरी के लिए आवश्यक हैं क्योंकि ये लोगों को उनकी दक्षता और प्रतिभा को विकसित करने में सहयोग देते हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा का अधिकार हमारी तर्क शक्ति विकसित करने में मदद करता है, हमें उपयोगी कौशल प्रदान करता है और जीवन में सूझ-बूझ के साथ चयन करने में सक्षम बनाता है। यदि कोई कार्यकलाप हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए हानिकारक है तो उसे अधिकार नहीं माना जा सकता। उदाहरण के लिए, नशीली दवाएँ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं तथा धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए इनके सेवन के अधिकार को मान्य नहीं किया जा सकता। अतः स्पष्ट है कि अधिकार वे दावे ही हो सकते हैं जो हमारी दक्षता और प्रतिभा को विकसित करने में सहयोग देते हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 14.
अधिकारों के प्राकृतिक सिद्धान्त का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा क्या है?
उत्तर:
अधिकारों का प्राकृतिक सिद्धान्त: प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धान्तकारों के अनुसार अधिकार प्रकृति या ईश्वर प्रदत्त हैं। हमें ये अधिकार जन्म से प्राप्त हैं। परिणामतः कोई व्यक्ति या शासक उन्हें हमसे छीन नहीं सकता। उन्होंने मनुष्य के तीन प्राकृतिक अधिकार चिन्हित किये थे

  1. जीवन का अधिकार,
  2. स्वतंत्रता का अधिकार और
  3. संपत्ति का अधिकार। हम इन अधिकारों का दावा करें या न करें, व्यक्ति होने के नाते हमें ये प्राप्त हैं।

प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा का प्रयोग राज्यों अथवा सरकारों के द्वारा स्वेच्छाचारी शक्ति के प्रयोग का विरोध करने तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 15.
मानवीय गरिमा के बारे में कांट के विचारों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
मानवीय गरिमा- कांट का कहना है कि अन्य प्राणियों से अलग प्रत्येक मनुष्य की एक गरिमा होती है और मनुष्य होने के नाते उसके साथ इसी के अनुकूल बर्ताव किया जाना चाहिए। कांट के लिए, लोगों के साथ गरिमामय बर्ताव करने का अर्थ था- उनके साथ नैतिकता से पेश आना। यह विचार उन लोगों के लिए संबल था जो लोग सामाजिक ऊँच- नीच के खिलाफ और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।

प्रश्न 16.
कांट के मानवीय गरिमा के विचार ने अधिकार की कौनसी अवधारणा प्रस्तुत की?
उत्तर:
कांट के मानवीय गरिमा के विचार ने अधिकार की एक नैतिक अवधारणा प्रस्तुत की। इस अवधारणा में निम्न बातों पर बल दिया गया है।

  1. हमें दूसरों के साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिए, जैसा हम अपने लिए दूसरों से अपेक्षा करते हैं।
  2. हमें यह निश्चित करना चाहिए कि हम दूसरों को अपनी स्वार्थसिद्धि का साधन नहीं बनायेंगे।
  3. हमें लोगों के साथ उस तरह का बर्ताव नहीं करना चाहिए जैसा कि हम निर्जीव वस्तुओं के साथ करते हैं।
  4. हमें लोगों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि वे मनुष्य हैं।

प्रश्न 17.
प्राकृतिक अधिकारों तथा मौलिक अधिकारों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक अधिकारों तथा मौलिक अधिकारों में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं।

  1. मौलिक अधिकारों का वर्णन प्रत्येक देश के संविधान में होता है, लेकिन प्राकृतिक अधिकारों का नहीं।
  2. मौलिक अधिकार वाद योग्य हैं जबकि प्राकृतिक अधिकार नहीं।
  3. मौलिक अधिकार राज्य में उपलब्ध होते हैं, लेकिन प्राकृतिक अधिकार प्राकृतिक अवस्था में ही संभव हो सकते हैं।

प्रश्न 18.
विविध समाजों में बढ़ते खतरों और चुनौतियों के कारण मानवाधिकारों के नए दावे किये जा रहे हैं। ये दावे किस बात की अभिव्यक्ति करते हैं?
उत्तर:
विविध समाजों में ज्यों-ज्यों नये खतरे व चुनौतियाँ उभरती हैं, त्यों-त्यों लोगों ने नवीन मानवाधिकारों की मांग की है। उदाहरण के लिए आज प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा की आवश्यकता व उसके प्रति बढ़ती जागरूकता ने स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और टिकाऊ विकास जैसे अधिकारों की मांगें पैदा की हैं। ये दावे मानव गरिमा के अतिक्रमण के प्रति नैतिक आक्रोश के भाव को अभिव्यक्त करते हैं और वे समस्त मानव समुदाय हेतु अधिकारों के प्रयोग और विस्तार के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हैं।

प्रश्न 19.
क्या कानूनी मान्यता के आधार पर किसी अधिकार का दावा किया जा सकता है?
उत्तर:
मानवाधिकारों की सफलता बहुत कुछ सरकारों और कानून के समर्थन पर निर्भर करती है। इसी कारण अधिकारों की कानूनी मान्यता को इतना महत्त्व दिया गया है। और इस महत्त्व को देखते हुए कुछ विद्वानों ने ‘अधिकार को ऐसे दावों के रूप में परिभाषित किया है, जिन्हें राज्य मान्यता दे। ‘ कानूनी मान्यता से यद्यपि हमारे अधिकारों को समाज में एक दर्जा मिलता है; तथापि कानूनी मान्यता के आधार पर किसी अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता ।

प्रश्न 20.
अधिकारों के चार प्रमुख लक्षण लिखिये।
उत्तर:
अधिकारों के चार प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं।

  1. अधिकार एक विवेकसंगत और न्यायसंगत दावा है अधिकार समाज में कुछ कार्य करने के लिए मनुष्य या मनुष्य समूह द्वारा किया गया वह विवेकसंगत और न्यायसंगत दावा है जिसे समाज द्वारा अधिकार के रूप में मान्य किया जाता है।
  2. अधिकार केवल समाज में ही संभव है-अधिकार केवल समाज में ही संभव है। समाज से बाहर कोई अधिकार संभव नहीं है।
  3. अधिकार समाज द्वारा प्रदत्त- मनुष्य का कोई दावा या माँग तभी अधिकार बनता है जब उसे समाज मान्यता प्रदान कर देता है। समाज की स्वीकृति के बिना कोई माँग (दावा) अधिकार का रूप नहीं ले सकती।
  4. अधिकार में सबका हित निहित है-समाज व्यक्ति के किसी दावे को सामाजिक हित की दृष्टि से ही स्वीकार कर उसे अधिकार का रूप प्रदान करता है। अतः प्रत्येक अधिकार में समाज का हित निहित होता है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 21.
आधुनिक राज्य अपने नागिरकों को कौन-कौनसे राजनैतिक अधिकार प्रदान करते हैं?
उत्तर:
आधुनिक राज्य अपने नागरिकों को निम्न राजनैतिक अधिकार प्रदान करते हैं।

  1. मत देने का अधिकार: आधुनिक प्रजातांत्रिक राज्यों में अपने नागिरकों को वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है जिसके माध्यम से वे अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन करते हैं और उन प्रतिनिधियों द्वारा शासन-कार्य किया जाता है।
  2. निर्वाचित होने का अधिकार: आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य सभी नागरिकों को कुछ निश्चित अर्हताएँ पूरी करने के बाद निर्वाचित होने का अधिकार प्रदान करते हैं। इसी अधिकार के माध्यम से व्यक्ति देश की उन्नति में सक्रिय रूप से भाग ले सकता है।
  3. सरकारी पद प्राप्त करने का अधिकार: आधुनिक राज्य अपने नागरिकों को योग्यता के आधार पर सरकारी पद प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करते हैं।
  4. राजनैतिक दल बनाने व उसका सदस्य बनने का अधिकार: आधुनिक उदारवादी लोकतांत्रिक राज्य अपने नागिरकों को राजनैतिक दल बनाने या किसी राजनैतिक दल का सदस्य बनने का अधिकार भी प्रदान करते हैं।

प्रश्न 22.
राजनीतिक अधिकारों की दो विशेषताएँ बताइये तथा प्रमुख राजनीतिक अधिकारों का उल्लेख कीजिये हैं।
उत्तर:
राजनीतिक अधिकारों की विशेषताएँ।

  1. राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते
  2. राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े होते हैं।
  3. राजनीतिक अधिकार व नागरिक स्वतंत्रताएँ मिलकर लोकतांत्रिक प्रणाली की नींव का निर्माण करते हैं।

प्रमुख राजनैतिक अधिकार: प्रमुख राजनैतिक अधिकार तथा नागरिक स्वतंत्रताएँ ये हैं-मत देने तथा प्रतिनिधि चुनने का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, राजनीतिक पार्टियाँ बनाने या उनमें शामिल होने का अधिकार । प्रमुख नागरिक स्वतंत्रताएँ हैं। विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार, स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच का अधिकार, प्रतिवाद करने तथा असहमति प्रकट करने का अधिकार।

प्रश्न 23.
आर्थिक अधिकार किसे कहते हैं? लोकतांत्रिक देश आर्थिक अधिकारों को किस तरह से मुहैया करा रहे हैं?
उत्तर:
आर्थिक अधिकार: आर्थिक अधिकार वे अधिकार हैं जिनके द्वारा व्यक्ति भोजन, वस्त्र, आवास तथा स्वास्थ्य जैसी अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं। इन बुनियादी जरूरतों को पूरा किये बिना राजनीतिक अधिकारों का कोई मूल्य नहीं है। करते हैं। लोकतांत्रिक समाज विभिन्न तरीकों से लोगों की इन आवश्यकताओं व अधिकारों को पूरा कर रहे हैं। यथा

  1. कुछ देशों में नागरिक, खासकर निम्न आय वाले नागरिक, आवास और चिकित्सा जैसी सुविधाएँ राज्य से प्राप्त।
  2. कुछ अन्य देशों में बेरोजगार व्यक्ति कुछ न्यूनतम भत्ता पाते हैं; ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।
  3. भारत में सरकार ने अन्य कार्यवाहियों के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरूआत की है।

प्रश्न 24.
अधिकार हमारे ऊपर क्या जिम्मेदारियाँ डालते हैं?
उत्तर:
अधिकार हम सब पर निम्नलिखित जिम्मेदारियाँ डालतें हैं।

  1. अधिकार हमें बाध्य करते हैं कि हम अपनी निजी जरूरतों और हितों की ही न सोचें, बल्कि कुछ ऐसी चीजों की भी रक्षा करें, जो हम सबके लिए हितकर हैं।
  2. अधिकार मुझसे यह अपेक्षा करते हैं कि मैं अन्य लोगों के अधिकारों का सम्मान करूँ।
  3. टकराव की स्थिति में हमें अपने अधिकारों को संतुलित करना होता है।
  4. नागरिकों को अपने अधिकारों पर लगाए जाने वाले नियंत्रणों के बारे में सतर्क तथा जागरूक रहना चाहिए।

प्रश्न 25.
नागरिक अधिकार तथा राजनीतिक अधिकार में अन्तर बताइये प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
नागरिक अधिकार: नागरिक अधिकार वे अधिकार हैं जो कि व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता से संबंधित हैं वे व्यक्ति के सामाजिक विकास या समाज से व्यक्ति के सम्बन्धों से भी संबंधित होते हैं। ये मूलभूत तथा आवश्यक अधिकार हैं तथा गैर-लोकतांत्रिक राज्यों में भी ये नागरिकों को प्राप्त होते हैं। नागरिक अधिकारों के उदाहरण हैं। जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जांच का अधिकार तथा प्रतिवाद करने तथा असहमति व्यक्त करने का अधिकार आदि।

राजनीतिक अधिकार: राजनीतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं। ये अधिकार सामान्यतः लोकतांत्रिक राज्यों में ही नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं। राजनीतिक अधिकारों के उदाहरण हैं- मत देने का अधिकार, प्रतिनिधि चुनने का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, राजनैतिक दल बनाने का अधिकार आदि।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकार हमारे ऊपर क्या जिम्मेदारियाँ डालते हैं? उदाहरण सहित विवेचन कीजिये।
उत्तर:
अधिकार और जिम्मेदारियाँ
अधिकार न केवल राज्य पर यह जिम्मेदारी डालते हैं कि वह खास तरीके से काम करे, बल्कि हम सब पर भी यह जिम्मेदारी डालते हैं। इनका विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है।

1. सबके हित सम्बन्धी चीजों की रक्षा करना:
अधिकार हमें बाध्य करते हैं कि हम अपनी निजी जरूरतों और हितों की ही न सोचें, बल्कि कुछ ऐसी चीजों की भी रक्षा करें, जो हम सबके लिए हितकर हैं। उदाहरण के लिए, ओजोन परत की हिफाजत करना, वायु और जल प्रदूषण कम से कम करना, नए वृक्ष लगाकर और जंगलों की कटाई रोक कर हरियाली बरकरार रखना, पारिस्थितिकीय संतुलन कायम रखना आदि ऐसी चीजें हैं, जो हम सबके लिए अनिवार्य हैं। ये सबके हित की बातें हैं, जिनका पालन हमें अपनी और भावी पीढ़ियों की हिफाजत की दृष्टि से अवश्य करना चाहिए।

2. अन्य लोगों के अधिकारों का सम्मान करना:
अधिकार यह अपेक्षा करते हैं कि मैं अन्य लोगों के अधिकारों का सम्मान करूँ अगर मैं यह कहता हूँ कि मुझे अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अधिकार मिलना ही चाहिए तो मुझे दूसरों को भी यही अधिकार देना होगा। अगर मैं अपनी पसंद के कपड़े पहनने में, संगीत सुनने में दूसरों का हस्तक्षेप नहीं चाहता, तो मुझे भी दूसरों की पसंदगी में दखलंदाजी से बचना होगा। मेरे अधिकार में मेरा यह कर्त्तव्य निहित है कि मैं दूसरों को इसी तरह के अधिकार का उपभोग करने दूँ।

अपने अधिकारों का प्रयोग करने के लिए मैं दूसरों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता। मैं स्वतंत्र भाषण देने के अधिकार का प्रयोग अपने पड़ोसी की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने के लिए नहीं कर सकता। इससे उसके जीवन के अधिकार में बाधा पहुँचेगी और मेरा यह दायित्व है कि मैं अपने अधिकार का प्रयोग अन्य लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए ही कर सकता हूँ। दूसरे शब्दों में, मेरे अधिकार सबके लिए बराबर और एक ही अधिकार के सिद्धान्त से सीमाबद्ध हैं।

3. टकराव की स्थिति में अपने अधिकारों को संतुलित करना:
मेरे अधिकार में ही मेरा यह दायित्व निहित है कि टकराव की स्थिति में मैं अपने अधिकारों को संतुलित करूँ। उदाहरण के लिए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मेरा अधिकार मुझे तस्वीर लेने की अनुमति देता है, लेकिन अगर मैं अपने घर में नहाते हुए किसी व्यक्ति की उसकी इजाजत के बिना तस्वीर ले लूँ और उसे इंटरनेट पर डाल दूँ, तो यह उसकी गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होगा। इसलिए मुझे मेरे अधिकार को उस स्थिति में सीमित कर लेना चाहिए जब वह किसी दूसरे के अधिकार में दखलंदाजी करता हो।

4. अधिकारों पर लगाए जाने वाले नियंत्रणों के प्रति जागरूक रहना:
नागरिकों का यह दायित्व है कि वे अपने अधिकारों पर लगाए जाने वाले नियंत्रणों के प्रति जागरूक रहें। आजकल कई सरकारें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लोगों की स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगा रही हैं। नागरिकों के अधिकारों और भलाई की रक्षा के लिए जरूरी मान कर राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन किया जा सकता है। लेकिन किसी बिंदु पर सुरक्षा के लिए आवश्यक मान कर थोपे गए प्रतिबंध अपने आप में लोगों के अधिकारों के लिए खतरा बन जायें तो ? क्या उसे लोगों की चिट्ठियाँ देखने या फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है? क्या सच कबूल करवाने के लिए उसे यातना का सहारा लेने दिया जाना चाहिए?

ऐसी स्थितियों में यह प्रश्न उठता है कि संबद्ध व्यक्ति समाज के लिए खतरा तो नहीं पैदा कर रहा है? गिरफ्तार लोगों को भी कानूनी सलाह की इजाजत या न्यायालय के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए। इसलिए लोगों की नागरिक स्वतंत्रता में कटौती करते समय हमें अत्यन्त सावधान होने की आवश्यकता है क्योंकि इनका आसानी से दुरुपयोग किया जा सकता है। सरकारें निरंकुश हो सकती हैं, वे लोगों के कल्याण की जड़ खोद सकती हैं। इसलिए हमें अपने और दूसरों के अधिकारों की रक्षा करने में सतर्क तथा जागरूक रहना चाहिए क्योंकि यह जागरूकता ही लोकतांत्रिक समाज की नींव का निर्माण करती है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 2.
अधिकार किसे कहते हैं? इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अधिकार का अर्थ तथा परिभाषा: व्यक्ति की उन मांगों को अधिकार कहते हैं जो उसने अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए समाज के समक्ष रखीं और समाज ने उन्हें समाज के हित की दृष्टि से उचित मानते हुए मान्यता दे दी। कुछ विद्वान अधिकारों के लिए सामाजिक मान्यता के साथ-साथ राज्य की मान्यता को भी आवश्यक मानते हैं। क्योंकि अधिकारों की सफलता के लिए राज्य का संरक्षण अर्थात् कानूनी संरक्षण अति आवश्यक है।

इसलिए वे अधिकार को ऐसे दावों के रूप में परिभाषित करते हैं, जिन्हें राज्य ने मान्य किया हो। लेकिन कानूनी मान्यता के आधार पर किसी अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। कभी-कभी राज्य द्वारा असंरक्षित लेकिन समाज द्वारा मान्य मांगें भी अधिकार कहलाती हैं। जैसे काम पाने का अधिकार राज्य ने भले ही स्वीकार न किया हो, परन्तु समाज द्वारा मान्य होने पर वह अधिकार कहलायेगा। है।” अधिकार की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं।

  1. बोसांके के अनुसार, “एक अधिकार समाज द्वारा मान्यता प्राप्त तथा राज्य द्वारा प्रवर्तित व्यक्ति का एक दावा
  2. लास्की के अनुसार, ” अधिकार सामाजिक जीवन की वे दशाएँ हैं जिनके बिना कोई व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का सर्वोत्तम विकास नहीं कर सकता।”

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि अधिकारों का अर्थ उन सुविधाओं, स्वतंत्रताओं तथा अवसरों का होना है जो कि एक व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक हैं तथा जो समाज द्वारा मान्य तथा राज्य द्वारा संरक्षित हैं।

अधिकारों की विशेषताएँ अधिकारों की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई जा सकती हैं।
1. अधिकार एक दावा है:
अधिकार समाज में कुछ कार्य करने के लिए मनुष्य या मनुष्य समूह द्वारा किया गया एक दावा है। यह दावा समाज के प्रति किया जाता है। मनुष्य समाज के समक्ष अपनी आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए अपनी मांगें प्रस्तुत करता है।

2. अधिकार केवल समाज में ही संभव हैं: समाज से बाहर कोई अधिकार संभव नहीं है। अधिकार केवल समाज में ही संभव हैं।

3. अधिकार समाज द्वारा प्रदत्त होते हैं: मनुष्य की कोई मांग या दावा तभी अधिकार बनता है जब उसे समाज मान्यता प्रदान कर देता है। कोई दावा या मांग जो समाज द्वारा स्वीकृत नहीं की जाती है, अधिकार नहीं बन सकती।

4. अधिकार विवेकसंगत और न्यायसंगत दावा है:
व्यक्ति का केवल वही दावा समाज द्वारा अधिकार के रूप में मान्य होता है जो न्यायसंगत तथा विवेकसंगत होता है। यदि समाज इस बात से सहमत हो जाता है कि व्यक्ति द्वारा किया गया दावा व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास तथा समाज के हित के लिए आवश्यक हैं या समाज के लिए हानिकारक नहीं है, तभी समाज उस दावे को अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान करता है। कोई भी अन्यायपरक तथा अविवेकीय दावा समाज द्वारा अधिकार के रूप में मान्य नहीं किया जा सकता।

5. अधिकार में सबका हित निहित है:
अधिकार में सबका कल्याण निहित है। समाज किसी दावे को सबके हित की दृष्टि से ही स्वीकार करता है और अधिकार का उपभोग समाज के हित में ही करना होता है। ऐसा कोई भी अधिकार व्यक्ति को प्रदान नहीं किया जा सकता जो कि समाज के लिए हानिकारक हो या लोगों के कल्याण के विरुद्ध हो । एक अधिकार का उपभोग सामाजिक हित पर प्रतिबन्ध लगाकर नहीं किया जा सकता।

6. अधिकार सीमित हैं:
समाज में किसी व्यक्ति को निरपेक्ष अधिकार (Absolute right) नहीं दिया जा सकता। उस पर युक्तियुक्त सीमाएँ समाज के हित में हमेशा लगी होती हैं। किसी व्यक्ति को अधिकारों के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। किसी व्यक्ति को यह अनुमति भी नहीं दी जा सकती कि वह अपने अधिकार का उपभोग करने में दूसरों को हानि पहुँचाये।

7. अधिकार सबको समान रूप से प्रदान किये जाते हैं:
अधिकार सार्वभौमिक हैं तथा वे समाज के सभी लोगों को समानता के आधार पर प्रदान किये जाते हैं। जो स्वतंत्रताएँ एक को प्रदान की जाती हैं, वे ही स्वतंत्रताएँ अन्य लोगों को भी प्रदान की जाती हैं। अधिकारों के प्रदान करने में जाति, रंग, वंश, जन्म तथा लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

8. अधिकार विकासशील हैं:
अधिकार हमेशा के लिए समान रूप में नहीं रहते। वे देश, काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते रहते हैं। समाज व्यक्ति के दावों को लोगों के विचार, समय और परिस्थितियों की आवश्यकताओं के अनुरूप मान्यता प्रदान करता है। इसलिए अधिकारों की कोई निश्चित और स्थायी सूची नहीं बनाई जा सकती है। विविध समाजों में ज्यों-ज्यों नयी चुनौतियाँ तथा आवश्यकताएँ उभरती हैं, त्यों-त्यों उनका सामना करने के लिए लोगों द्वारा समाज के समक्ष नये दावे प्रस्तुत किये जाते हैं। इस प्रकार अधिकारों की सूची वर्तमान काल में निरन्तर बढ़ती जा रही है।

9. अधिकारों में कर्त्तव्य निहित हैं:
अधिकार और कर्त्तव्य एक सिक्के के दो पहलू हैं। प्रत्येक मेरे अधिकार में मेरा कर्त्तव्य भी निहित है, उसके प्रति अन्य लोगों के कर्त्तव्य तथा राज्य के कर्त्तव्य भी निहित हैं।

10. अधिकार राज्य द्वारा संरक्षित हैं:
एक अधिकार तभी सफल हो सकता है जब राज्य के कानूनों द्वारा उसकी सुरक्षा की जाये। अधिकारों की सफलता में राज्य व उसके कानून के महत्त्व को देखते हुए यह भी कहा जाता है कि एक अधिकार वह दावा है जिसे राज्य संरक्षित करे तथा लागू करे। राज्य ही अधिकारों को मान्यता देता है, परिभाषित करता है, लागू करता है तथा उनकी सुरक्षा करता है। राज्य उन व्यक्तियों को दंडित करता है जो दूसरों के अधिकारों के विरुद्ध कार्य करते हैं। राज्य के बाहर अधिकारों का प्रवर्तन संभव नहीं है। अतः स्पष्ट है कि अधिकार वे सुविधाएँ, स्वतंत्रताएँ और अवसर हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास तथा समाज हित के लिए समाज द्वारा व्यक्ति को प्रदान किये गए हैं तथा वे राज्य द्वारा संरक्षित हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 3.
अधिकार का अर्थ एवं परिभाषा बताते हुए उसके विभिन्न स्वरूपों/प्रकारों की व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
अधिकार का अर्थ एवं परिभाषा: अधिकार का अर्थ एवं परिभाषा के लिए पूर्व प्रश्न का उत्तर देखें । अधिकार के विभिन्न स्वरूप ( प्रकार ) अधिकार के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं।
1. राजनैतिक तथा नागरिक अधिकार:
अधिकांशतः लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ राजनैतिक अधिकारों का घोषणा- पत्र बनाने से अपनी शुरुआत करती हैं। राजनैतिक अधिकार नागरिकों को कानून के समक्ष बराबरी तथा राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का हक देते हैं। इनमें वोट देने और प्रतिनिधि चुनने, चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टियाँ बनाने या उनमें शामिल होने जैसे अधिकार शामिल हैं। राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं या नागरिक अधिकारों से जुड़े होते हैं। नागरिक स्वतंत्रता का अर्थ है। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जाँच का अधिकार, विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार, प्रतिवाद करने तथा असहमति प्रकट करने का अधिकार। इस प्रकार नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली की बुनियाद का निर्माण करते हैं।

2. आर्थिक अधिकार:
राजनीतिक भागीदारी का अपना अधिकार पूरी तरह से हम तभी अमल में ला सकते हैं जब भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य जैसी हमारी बुनियादी जरूरतें पूरी हों। इसीलिये लोकतांत्रिक समाज इन दायित्वों को स्वीकार कर रहे हैं और आर्थिक अधिकार मुहैया कर रहे हैं। कुछ देशों में नागरिक, खासकर निम्न आय वाले नागरिक, आवास और चिकित्सा जैसी सुविधायें राज्य से प्राप्त करते हैं। कुछ अन्य देशों में बेरोजगार व्यक्ति कुछ न्यूनतम भत्ता पाते हैं, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। भारत में, सरकार ने ग्रामीण और शहरी गरीबों की मदद के लिये अन्य कार्यवाहियों के साथ हाल में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरूआत की है।

3. सांस्कृतिक अधिकार:
अधिकाधिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ नागरिकों के सांस्कृतिक दावों को भी मान्यता दे रही हैं। अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण के लिये संस्थाएँ बनाने के अधिकार को बेहतर जिन्दगी जीने के लिये आवश्यक माना जा। इस प्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अधिकारों की सूची लगातार बढ़ती गई है रहा है।

4. बुनियादी अधिकार:
कुछ मूल अधिकार जैसे- जीने का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, समान व्यवहार का अधिकार और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार, ऐसे बुनियादी अधिकार के रूप में मान्य हैं, जिन्हें प्राथमिकता देनी ही है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. निम्नलिखित में कौनसा कथन असत्य है।
(अ) न्याय मिलने में देरी न्याय मिलने के समान होता है।
(ब) भारत में स्त्रियों और पुरुषों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की व्यवस्था की गई है।
(स) प्राचीन भारत समाज में न्याय धर्म के साथ जुड़ा था।
(द) कनफ्यूशियस का तर्क था कि गलत करने वालों को दंडित कर और भले लोगों को पुरस्कृत कर राजा को न्याय कायम रखना चाहिए।
उत्तर:
(अ) न्याय मिलने में देरी न्याय मिलने के समान होता है।

2. न्याय का अर्थ है।
(अ) अपने मित्रों के साथ भलाई करना
(ब) अपने दुश्मनों का नुकसान करना
(स) अपने हितों को साधना
(द) सभी लोगों की भलाई सुनिश्चित करना।
उत्तर:
(द) सभी लोगों की भलाई सुनिश्चित करना।

3. ‘न्याय का सिद्धान्त’ पुस्तक के लेखक हैं।
(अ) डायसी
(ब) आस्टिन
(स) जॉन रॉल्स
(द) प्लेटो।
उत्तर:
(स) जॉन रॉल्स

4. निम्न में से किसमें न्याय का समकक्षों के साथ समान बरताव का सिद्धान्त लागू हुआ है।
(अ) एक स्कूल में पुरुष शिक्षक को महिला शिक्षक से अधिक वेतन मिलता है।
(ब) पत्थर तोड़ने के किसी काम में सभी जातियों के लोगों को समान पारिश्रमिक दिया गया है।
(स) छात्रों को उनकी पुस्तिकाओं की गुणवत्ता के आधार पर अंक दिये गये।
(द) विकलांग लोगों को नौकरियों में प्रवेश के लिए आरक्षण दिया गया।
उत्तर:
(ब) पत्थर तोड़ने के किसी काम में सभी जातियों के लोगों को समान पारिश्रमिक दिया गया है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

5. विभिन्न राज्य सरकारों ने भूमि सुधार लागू करने जैसे कदम उठाये हैं।
(अ) लोगों के साथ समाज के कानूनों और नीतियों के संदर्भ में समान बरताव करने के लिए।
(ब) जमीन जैसे महत्त्वपूर्ण संसाधन के अधिक न्यायपूर्ण वितरण के लिए।
(स) सबको समान भूमि वितरण के लिए।
(द) बंजर पड़ी भूमि के वितरण के लिए।
उत्तर:
(ब) जमीन जैसे महत्त्वपूर्ण संसाधन के अधिक न्यायपूर्ण वितरण के लिए।

6. न्याय के ‘अज्ञानता के आवरण’ के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है।
(अ) सुकरात
(ब) प्लेटो ने
(स) कांट ने
(द) रॉल्स ने।
उत्तर:
(द) रॉल्स ने।

7. ” न्यायपूर्ण समाज वह है, जिसमें परस्पर सम्मान की बढ़ती हुई भावना और अपमान की घटती हुई भावना मिलकर एक करुणा से भरे समाज का निर्माण करे।” यह कथन है।
(अ) डॉ. भीमराव अंबेडकर का
(स) प्लेटो का
(ब) जे. एस. मिल का
(द) रॉल्स का।
उत्तर:
(अ) डॉ. भीमराव अंबेडकर का

8. न्याय के सम्बन्ध में न्यायोचित वितरण का सिद्धान्त प्रस्तुत किया गया है।
(अ) जे. एस. मिल द्वारा
(ब) बेंथम द्वारा
(स) जॉन रॉल्स द्वारा
(द) प्लेटो द्वारा।
उत्तर:
(स) जॉन रॉल्स द्वारा

9. न्याय पर लिखी गई प्लेटो की पुस्तक का नाम है।
(अ) पॉलिटिक्स
(ब) रिपब्लिक
(स) सामाजिक समझौता
(द) न्याय का सिद्धान्त।
उत्तर:
(ब) रिपब्लिक

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

10. सामाजिक न्याय का वर्णन भारतीय संविधान में कहाँ किया गया हैं?
(अ) राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों में
(स) मौलिक अधिकारों में
(ब) प्रस्तावना में
(द) सर्वोच्च न्यायालय में।
उत्तर:
(ब) प्रस्तावना में

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. प्राचीन भारतीय समाज में न्याय …………….. के साथ जुड़ा था।
उत्तर:
धर्म

2. प्लेटो के अनुसार न्याय में हर व्यक्ति को उसका ………………… देना शामिल है।
उत्तर:
वाजिब हिस्सा

3. कांट के अनुसार, अगर सभी व्यक्तियों की गरिमा स्वीकृत है, तो उनमें से हर एक का …………………. यह होगा कि उन्हें अपनी प्रतिभा के विकास और लक्ष्य की पूर्ति के लिए अवसर प्राप्त हो ।
उत्तर:
प्राप्य

4. समाज में न्याय के लिए समान बरताव के सिद्धान्त का …………………. के सिद्धान्त के साथ संतुलन बिठाने की जरूरत है।
उत्तर:
समानुपातिकता

5. जो लोग कुछ महत्त्वपूर्ण संदर्भों में समान नहीं हैं, उनके साथ …………………. से बरताव किया जाये।
उत्तर:
भिन्न ढंग।

निम्नलिखित में से सत्य/ असत्य कथन छाँटिये

1. योग्यता के पुरस्कृत करने को न्याय का प्रमुख सिद्धान्त मानने पर जोर देने का अर्थ यह होगा कि हाशिये पर खड़े तबके कई क्षेत्रों में वंचित रह जायेंगे।
उत्तर:
सत्य

2. सामाजिक न्याय का सरोकार वस्तुओं और सेवाओं के न्यायोचित वितरण से नहीं है।
उत्तर:
असत्य

3. रॉल्स का न्याय सिद्धान्त ‘अज्ञानता के आवरण में सोचना’ है।
उत्तर:
सत्य

4. न्याय के लिए लोगों के रहन-सहन के तौर-तरीकों में पूर्ण समानता और एकरूपता की आवश्यकता है।
उत्तर:
असत्य

5. मुक्त बाजार के सभी समर्थक आज पूर्णतया अप्रतिबंधित बाजार का समर्थन करते हैं।
उत्तर:
असत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. रिपब्लिक(अ) प्राचीन भारतीय समाज
2. न्याय धर्म के साथ जुड़ा था(ब) चीन के दार्शनिक
3. इमैनुएल कांट(स) न्यायोचित वितरण का सिद्धान्त
4. कन्फ्यूशस(द) एक जर्मन दार्शनिक
5. जॉन रॉल्स(य) प्लेटो

उत्तर:

1. रिपब्लिक(य) प्लेटो
2. न्याय धर्म के साथ जुड़ा था(अ) प्राचीन भारतीय समाज
3. इमैनुएल कांट(द) एक जर्मन दार्शनिक
4. कन्फ्यूशस(ब) चीन के दार्शनिक
5. जॉन रॉल्स(स) न्यायोचित वितरण का सिद्धान्त

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सही मिलान करें

(क) प्लेटो(i) भारतीय संविधान के निर्माताओं में महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
(ख) डॉ. भीमराव अम्बेडकर(ii) द रिपब्लिक का लेखक
(ग) मुक्त बाजार नीति(iii) सुप्रसिद्ध राजनीतिक दार्शनिक
(घ) जॉन रॉल्स(iv) राज्य के हस्तक्षेप की विरोधी

उत्तर:

(क) प्लेटो(ii) द रिपब्लिक का लेखक
(ख) डॉ. भीमराव अम्बेडकर(i) भारतीय संविधान के निर्माताओं में महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
(ग) मुक्त बाजार नीति(iv) राज्य के हस्तक्षेप की विरोधी
(घ) जॉन रॉल्स(iii) सुप्रसिद्ध राजनीतिक दार्शनिक

प्रश्न 2.
प्लेटो के अनुसार न्याय क्या है?
उत्तर:
प्लेटो के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को उसका प्राप्य मिल जाये, यही न्याय है।

प्रश्न 3.
सुकरात ने न्यायसंगत होना क्यों आवश्यक बताया है?
उत्तर:
सुकरात ने न्यायसंगत होना इसलिए आवश्यक बताया क्योंकि न्याय में सभी की भलाई निहित रहती है।

प्रश्न 4.
सामाजिक न्याय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सामाजिक न्याय से अभिप्राय है कि वस्तुओं और सेवाओं का न्यायोचित वितरण हो।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

प्रश्न 5.
प्लेटो ने न्याय सम्बन्धी विचार किस पुस्तक में व्यक्त किये हैं?
उत्तर:
‘द रिपब्लिक’ में।

प्रश्न 6.
भारत में संविधान में सामाजिक न्याय का उल्लेख कहाँ किया गया है?
उत्तर:
प्रस्तावना में।

प्रश्न 7.
न्याय की देवी की प्रतिमा में उसकी आँखों पर बँधी पट्टी किस बात का संकेत करती है?
उत्तर:
उसके निष्पक्ष रहने का संकेत करती है।

प्रश्न 8.
सामाजिक न्याय में किस पर बल दिया जाता है?
उत्तर:
अन्याय के उन्मूलन पर।

प्रश्न 9.
अन्यायपूर्ण समाज की कोई एक विशेषता बताइये।
उत्तर:
वह समाज जहाँ वंचितों को अपनी स्थिति सुधारने का कोई मौका न मिले, अन्यायपूर्ण समाज कहलाता है।

प्रश्न 10.
‘अज्ञानता के आवरण’ वाली स्थिति की एक विशेषता लिखिये।
उत्तर:
इसमें लोगों से सामान्य रूप से विवेकशील बने रहने की उम्मीद बँधती है।

प्रश्न 11.
एक न्यायपूर्ण समाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार की क्या जिम्मेदारी बन जाती है?
उत्तर:
एक न्यायपूर्ण समाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार को न्याय के विभिन्न सिद्धान्तों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की जिम्मेदारी बन जाती है।

प्रश्न 12.
न्याय के सम्बन्ध में चीन के दार्शनिक कन्फ्यूशियस का क्या तर्क था?
उत्तर:
कन्फ्यूशियस के अनुसार गलत करने वालों को दण्डित करना और भले लोगों को पुरस्कृत करना ही न्याय

प्रश्न 13.
एक न्यायपूर्ण समाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार की क्या जिम्मेदारी बन जाती है?
उत्तर:
एक न्यायपूर्ण समाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार को न्याय के विभिन्न सिद्धान्तों में सामंजस्य स्थापित करने की जिम्मेदारी बन जाती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्लाउकॉन और एडीमंटस के अनुसार अन्यायी लोग न्यायी लोगों से किस प्रकार बेहतर स्थिति में हैं?
उत्तर:
ग्लाउकॉन के अनुसार, अन्यायी लोग अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए कानून तोड़ते-मरोड़ते हैं, कर चुकाने से कतराते हैं, झूठ और धोखाधड़ी का सहारा लेते हैं। इसलिए वे न्याय के रास्ते पर चलने वाले लोगों से ज्यादा सफल होते हैं।

प्रश्न 2.
हर व्यक्ति को उसका प्राप्य कैसे दिया जाये? इस सम्बन्ध में कौन-कौन से सिद्धान्त पेश किये गये
उत्तर:
हर व्यक्ति को उसका प्राप्य कैसे दिया जाये, इस सम्बन्ध में तीन सिद्धान्त पेश किये गये हैं। ये हैं-

  1. समान लोगों के साथ समान बरताव का सिद्धान्त
  2. समानुपातिक न्याय का सिद्धान्त और
  3. विशेष जरूरतों के विशेष ख्याल का सिद्धान्त।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

प्रश्न 3.
यदि समाज में गंभीर सामाजिक या आर्थिक असमानताएँ हैं तो सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए क्या और क्यों जरूरी होगा?
उत्तर:
यदि समाज में गंभीर सामाजिक या आर्थिक असमानताएँ हैं तो यह जरूरी होगा कि समाज के कुछ प्रमुख संसाधनों का पुनर्वितरण हो, जिससे नागरिकों को जीने के लिए समान धरातल मिल सके।

प्रश्न 4.
राज्य को समाज के सबसे वंचित सदस्यों की मदद के तीन तरीके बताइये।
उत्तर:

  1. खुली प्रतियोगिता को बढ़ावा देना तथा समाज के सुविधा प्राप्त सदस्यों को हानि पहुँचाये बिना सुविधाहीनों की मदद करना।
  2. सरकार द्वारा गरीबों को न्यूनतम बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराना।
  3. वंचितों के लिए आरक्षण की नीति लागू करना।

प्रश्न 5.
मुक्त बाजार व्यवस्था के कोई दोष लिखिये।
उत्तर:

  1. मुक्त बाजार व्यवस्था में बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत गरीब लोगों की पहुँच से प्राय: दूर हो जाती है।
  2. मुक्त बाजार पहले से ही सुविधासम्पन्न लोगों के पक्ष में काम करने का रुझान दिखलाते हैं।

प्रश्न 6.
प्लेटो के अनुसार हमारा दीर्घकालीन हित कानून का पालन करने एवं न्यायी बनने में क्यों है? प्लेटो के अनुसार यदि हर कोई अन्यायी हो जाए, यदि हर आदमी अपने स्वार्थ के लिए कानून के साथ खिलवाड़ करे, तो किसी के लिए भी अन्याय से लाभ पाने की गारंटी नहीं रहेगी, कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा और इससे संभव है कि सबको नुकसान पहुँचे। इसलिए हमारा दीर्घकालीन हित इसी में है कि हम कानून का पालन करें और न्यायी बनें।

प्रश्न 7.
प्लेटो के अनुसार न्याय का गुण क्या है?
उत्तर:
प्लेटो के अनुसार न्याय में सभी लोगों की भलाई निहित रहती है। न्याय में कुछ लोगों के लिए हित और कुछ लोगों के लिए अहित की भावना नहीं होती, बल्कि उसमें सबका हित निहित होता है। इसलिए जो स्थिति या कानून या नियम सबके लिए हितकारी है, वही न्याय है।

प्रश्न 8.
सबका हित कैसे सुनिश्चित किया जाये?
अथवा
सबकी भलाई की सुनिश्चितता के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?
उत्तर:
जनता या सबकी भलाई की सुनिश्चितता में हर व्यक्ति को उसका वाजिब हिस्सा देना शामिल है। इस अर्थ में न्याय वह है जिसमें हर व्यक्ति को उसका वाजिब हिस्सा प्राप्त हो।

प्रश्न 9.
हर व्यक्ति का प्राप्य क्या है?
उत्तर:
कांट के अनुसार, हर मनुष्य की गरिमा होती है। अगर सभी व्यक्तियों की गरिमा स्वीकृत है तो उनमें से हर व्यक्ति का प्राप्य यह होगा कि उन्हें अपनी प्रतिभा के विकास और लक्ष्य की पूर्ति के लिए अवसर प्राप्त हों।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

प्रश्न 10.
मुक्त बाजार व्यवस्था के समर्थन में तीन तर्क दीजिये।
उत्तर:

  1. मुक्त बाजार व्यवस्था से योग्यता और प्रतिभा के अनुसार प्रतिफल मिलेगा।
  2. मुक्त बाजार व्यवस्था स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा आदि बुनियादी सेवाओं का सबसे कारगर तरीका है।
  3. मुक्त बाजार उचित और न्यायपूर्ण समाज का आधार होता है क्योंकि उसका सरोकार प्रतिभा और कौशल से होता है।

प्रश्न 11.
न्याय के सम्बन्ध में चीन के दार्शनिक कनफ्यूशियस का क्या तर्क था?
उत्तर:
न्याय के सम्बन्ध में चीन के दार्शनिक कनफ्यूशियस का तर्क था कि गलत करने वालों को दण्डित कर और भले लोगों को पुरस्कृत कर राजा को न्याय कायम करना चाहिए।

प्रश्न 12.
सरकारें न्याय के तीनों सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य बिठाने में क्या कठिनाई महसूस करती हैं? उत्तर-सरकारें कभी-कभी न्याय के तीनों सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य बिठाने में निम्न कठिनाई महसूस करती

  1. समकक्षों के बीच समान बरताव के सिद्धान्त पर अमल कभी-कभी योग्यता को उचित प्रतिफल देने के खिलाफ खड़ा हो जाता है।
  2. योग्यता को पुरस्कृत करने को न्याय का प्रमुख सिद्धान्त मानने पर जोर देने का अर्थ यह होगा कि हाशिये पर खड़े तबके कई क्षेत्रों में वंचित रह जायेंगे। ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह एक न्यायपरक समाज को बढ़ावा देने के लिए न्याय के विभिन्न सिद्धान्तों के बीच सामञ्जस्य स्थापित करे।

प्रश्न 13.
सामाजिक न्याय को परिभाषित कीजिये।
अथवा
सामाजिक न्याय का अर्थ बताइये।
उत्तर:
सामाजिक न्याय से यह अभिप्राय है कि कानून और नीतियाँ सभी व्यक्तियों पर निष्पक्ष रूप से लागू हों तथा वस्तुओं और सेवाओं का न्यायोचित वितरण भी हो।

प्रश्न 14.
क्या यह न्यायोचित है? हरियाणा की एक पंचायत ने निर्णय दिया कि अलग-अलग जातियों के जिस लड़के और लड़की ने शादी कर ली थी, वे अब गाँव में नहीं रहेंगे।
उत्तर:
नहीं, यह न्यायोचित नहीं है क्योंकि यह निर्णय शादी करने वाले सभी व्यक्तियों पर निष्पक्ष रूप से लागू नहीं किया गया है तथा यह कानून सम्मत नहीं है।

प्रश्न 15.
सामाजिक न्याय के प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक न्याय के प्रमुख लक्षण ये हैं।

  1. समान लोगों के प्रति समान बरताव: सामाजिक न्याय का पहला लक्षण यह है कि समकक्षों के साथ समान व्यवहार किया जाये, उनमें वर्ग, जाति, नस्ल या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाये।
  2. समानुपातिक न्याय: सामाजिक न्याय का दूसरा लक्षण समानुपातिक न्याय का है अर्थात् लोगों को उनके प्रयास के पैमाने पर अर्हता के अनुपात में पुरस्कृत किया जाये।
  3. विशेष जरूरतों का विशेष ख्याल का सिद्धान्त: सामाजिक न्याय का तीसरा लक्षण लोगों की विशेष जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रश्न 16.
“सामाजिक न्याय का सरोकार वस्तुओं और सेवाओं के न्यायोचित वितरण से भी है।” इस कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर:
न्यायपूर्ण वितरण समाज में सामाजिक न्याय पाने के लिए सरकारों को यह सुनिश्चित करना होता है कि कानून और नीतियाँ सभी व्यक्तियों पर निष्पक्ष रूप से लागू हों। लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। क्योंकि सामाजिक न्याय का सरोकार वस्तुओं और सेवाओं के न्यायोचित वितरण से भी है; चाहे वह राष्ट्रों के बीच वितरण का मामला हो या किसी समाज के अन्दर विभिन्न समूहों और व्यक्तियों के बीच का।

इसका अभिप्राय यह है कि यदि समाज में गंभीर सामाजिक या आर्थिक विषमताएँ हैं, तो यह जरूरी होगा कि समाज के कुछ प्रमुख संसाधनों का पुनर्वितरण हो, जिससे नागरिकों को जीने के लिए समतल धरातल मिल सके ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने उद्देश्यों के लिए प्रयास कर सके और स्वयं को अभिव्यक्त कर सके। भारत में विभिन्न राज्य सरकारों ने जमीन जैसे महत्त्वपूर्ण संसाधन के अधिक न्यायपूर्ण वितरण के लिए ही भूमि सुधार लागू करने जैसे कदम उठाये हैं।

प्रश्न 17.
हम किस तरह के समाज को अन्यायपूर्ण कहेंगे?
उत्तर:
हम उस समाज को अन्यायपूर्ण कहेंगे, जहाँ धनी और गरीब के बीच खाई इतनी गहरी हो कि वे बिल्कुल भिन्न-भिन्न दुनिया में रहने वाले लगें और जहाँ अपेक्षाकृत वंचितों को अपनी स्थिति सुधारने का कोई मौका न मिले, चाहे वे कितना ही कठिन श्रम क्यों न करें। दूसरे शब्दों में यदि किसी समाज में बेहिसाब धन-दौलत और इसके स्वामित्व के साथ जुड़ी सत्ता का उपभोग करने वालों तथा बहिष्कृतों और वंचितों के बीच गहरा और स्थायी विभाजन मौजूद हो, तो हम उस समाज को अन्यायपूर्ण समाज कहेंगे।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

प्रश्न 18.
न्यायपूर्ण समाज के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर:
न्यायपूर्ण समाज: न्यायपूर्ण समाज को लोगों के लिए न्यूनतम बुनियादी स्थितियाँ जरूर उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम हो सकें; समाज में अपनी प्रतिभा का विकास कर सकें तथा इसके साथ ही समान अवसरों के जरिये अपने चुने हुए लक्ष्य की ओर बढ़ सकें।

प्रश्न 19.
समान लोगों के प्रति समान व्यवहार का क्या अर्थ है?
उत्तर:
समान लोगों के साथ समान व्यवहार का अर्थ है कि मनुष्य होने के नाते सभी व्यक्तियों में कुछ समान चारित्रिक विशेषताएँ होती हैं। इसीलिए वे समान अधिकार और समान व्यवहार के अधिकारी हैं। इसी दृष्टि से आज अधिकांश उदारवादी लोकतंत्रों में जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति के अधिकारों के साथ समाज के अन्य सदस्यों के साथ समान अवसरों के उपभोग करने का सामाजिक अधिकार और मताधिकार जैसे राजनैतिक अधिकार दिये जाते हैं। समान लोगों के प्रति समान व्यवहार के सिद्धान्त के लिए यह भी आवश्यक है कि लोगों के साथ वर्ग, जाति, नस्ल या लिंग के आधार पर भेदभाव न किया जाये। उन्हें उनके काम और कार्यकलापों के आधार पर जाँचा जाना चाहिए, इस आधार पर नहीं कि वे किस समुदाय के सदस्य हैं।

प्रश्न 20.
रॉल्स के न्याय सिद्धान्त का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
रॉल्स का तर्क है कि निष्पक्ष और न्यायसंगत नियम तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम स्वयं को ऐसी परिस्थिति में होने की कल्पना करें जहाँ हमें निर्णय लेना है कि समाज को कैसे संगठित किया जाये। जबकि हमें यह ज्ञात नहीं है कि उस समाज में हमारी जगह क्या होगी? अर्थात् हम नहीं जानते कि किस किस्म के परिवार में हम जन्म लेंगे; हम उच्च जाति के परिवार में पैदा होंगे या निम्न जाति में; धनी होंगे या गरीब, सुविधा सम्पन्न होंगे या सुविधाहीन?

अगर हमें यह नहीं मालुम हो कि हम कौन होंगे और भविष्य के समाज में हमारे लिए कौनसे विकल्प खुले होंगे, तब हम भविष्य के उस समाज के नियमों और संगठन के बारे में जिस निर्णय का समर्थन करेंगे, वह तमाम सदस्यों के लिए अच्छा होगा। रॉल्स ने इसे ‘अज्ञानता के आवरण’ में सोचना कहा है। अज्ञानता के आवरण वाली स्थिति में लोगों से सामान्य रूप से विवेकशील मनुष्य बने रहने की उम्मीद बँधती है। विवेकशील मनुष्य न केवल सबसे बुरे संदर्भ के मद्देनजर चीजों को देखेंगे, बल्कि वे यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि उनके द्वारा निर्मित नीतियाँ समग्र समाज के लिए लाभप्रद हों।

प्रश्न 21.
भारत में सामाजिक न्याय की स्थिति क्या है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारतीय संविधान में देश के सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय प्रदान करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं।

  1. संविधान के द्वारा सभी नागरिकों को मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं अर्थात् मूल अधिकारों के माध्यम से समकक्षों के बीच समान बरताव के सिद्धान्त का पालन किया गया है। इनमें सभी को कानून के समक्ष समता प्रदान की गई है, जाति, धर्म, लिंग, वंश के आधार पर भेदभाव का निषेध किया गया है। छुआछूत को समाप्त किया गया है, भेदभाव पैदा करने वाली उपाधियों का अन्त किया गया। सभी को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई है।
  2. भारत में समानुपातिक न्याय के सिद्धान्त को भी समकक्षों के बीच समान व्यवहार के सिद्धान्त के साथ संतुलन बैठाया गया है।
  3. भारत में मूल अधिकारों के अन्तर्गत ही विशेष जरूरतों के लिए विशेष ख्याल का सिद्धान्त भी अपनाया है इस हेतु वंचितों के लिए आरक्षण की नीति लागू की गई है।

प्रश्न 22.
न्याय का क्या अर्थ है? कोई एक परिभाषा दीजिये।
उत्तर:
न्याय का सरोकार समाज में हमारे जीवन और सार्वजनिक जीवन को व्यवस्थित करने के नियमों और तरीकों से होता है, जिनके द्वारा समाज के विभिन्न सदस्यों के बीच सामाजिक लाभ और सामाजिक कर्त्तव्यों का बँटवारा किया जाता है। प्लेटो ने न्याय को परिभाषित करते हुए लिखा है कि, ‘प्रत्येक व्यक्ति को उसका प्राप्य मिल जाय, यही न्याय मनुष्य होने के नाते हर व्यक्ति का प्राप्य यह है कि उन्हें अपनी प्रतिभा के विकास और लक्ष्य की पूर्ति के लिए अवसर प्राप्त हों तथा सभी व्यक्तियों को समुचित और बराबर महत्व दिया जाये।

प्रश्न 23.
समानुपातिक न्याय क्या है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
समानुपातिक न्याय: समानुपातिक न्याय से यह आशय है कि लोगों को मिलने वाले लाभों को तय करते समय उनके विभिन्न प्रयासों और कौशलों को मान्यता दी जाये अर्थात् लोगों को उनके प्रयास के पैमाने और अर्हता के अनुपात में पुरस्कृत किया जाये। काम के लिए वांछित मेहनत, कौशल, संभावित खतरे आदि कारकों को ध्यान में रखते हुए अलग- अलग काम के लिए अलग-अलग पारिश्रमिक निर्धारण करना ही समानुपातिक न्याय है। लेकिन समाज में न्याय के लिए समान बरताव के सिद्धान्त के साथ ही समानुपातिकता के सिद्धान्त का संतुलन बिठाना आवश्यक है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 4 सामाजिक न्याय

प्रश्न 24.
न्याय के तीन सिद्धान्त कौन-से हैं? प्रत्येक को उदाहरण के साथ समझाइये।
उत्तर:
न्याय के तीन सिद्धान्त हैं।

  1. समकक्षों के बीच समान बरताव
  2. समानुपातिक न्याय और
  3. विशेष जरूरतों का विशेष ख्याल। यथा

1. समकक्षों के बीच समान बरताव:
न्याय का एक सिद्धान्त है कि समकक्षों के बीच समान व्यवहार किया जाये । मनुष्य होने के नाते सभी व्यक्तियों में कुछ समान चारित्रिक विशेषताएँ होती हैं। इसलिए वे समान अधिकार और बरताव के अधिकारी हैं। इसलिए आज अधिकांश उदारवादी जनतंत्रों में जीवन, स्वतंत्रता, सम्पत्ति तथा मताधिकार जैसे कुछ महत्वपूर्ण अधिकार सभी नागरिकों को समान रूप से प्रदान किये गये हैं। समान अधिकारों के अलावा समकक्षों में समान बरताव के सिद्धान्त के लिए जरूरी है कि लोगों के साथ वर्ग, जाति, नस्ल या लिंग के आधार पर भेद नहीं किया जाये, बल्कि उन्हें उनके काम के आधार पर जाँचा जाये। उदाहरण के लिए यदि स्कूल में पुरुष शिक्षक को महिला शिक्षक से ज्यादा वेतन मिलता है, तो यह समकक्षों के बीच समान बरताव के सिद्धान्त के विपरीत है। अतः अन्यायपूर्ण है।

2. समानुपातिक न्याय:
समानुपातिक न्याय के सिद्धान्त का आशय यह है कि लोगों को मिलने वाले लाभों को तय करते समय उनके विभिन्न प्रयास और कौशलों को मान्यता दी जाये । अर्थात् किसी काम के लिए वांछित मेहनत, कौशल, संभावित खतरे आदि को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग पारिश्रमिक निर्धारण किया जाये । इस प्रकार समाज में न्याय के लिए समान बरताव के सिद्धान्त का समानुपातिक सिद्धान्त के साथ संतुलन बैठाने की आवश्यकता है।

3. विशेष जरूरतों का विशेष ख्याल:
न्याय का तीसरा सिद्धान्त यह है कि समाज पारिश्रमिक या कर्त्तव्यों का वितरण करते समय लोगों की विशेष जरूरतों का ख्याल रखे। समकक्षों के साथ समान बरताव के सिद्धान्त में ही यह अन्तर्निहित है कि जो लोग कुछ महत्वपूर्ण संदर्भों में समान नहीं हैं, उनके साथ भिन्न ढंग से बरताव किया जाय । जैसे – वंचित और विकलांग लोग । इसी संदर्भ में भारत में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
न्यूनतम आवश्यक बुनियादी स्थितियाँ क्या हैं? इस लक्ष्य को पाने के तरीकों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
न्यूनतम आवश्यक बुनियादी स्थितियाँ लोगों की जिंदगी के लिए न्यूनतम बुनियादी स्थितियों के सम्बन्ध में सामान्यतः इस बात पर सहमति है कि स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्त्वों की बुनियादी मात्रा, आवास, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, शिक्षा और न्यूनतम मजदूरी इन बुनियादी स्थितियों की महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं। लोगों की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी समझी जाती है।

न्यूनतम आवश्यक बुनियादी स्थितियों की पूर्ति के तरीके: लोगों की जिंदगी के लिए न्यूनतम बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए यह आवश्यक है कि राज्य (सरकार) को समाज के सबसे वंचित सदस्यों की मदद करनी चाहिए, जिससे कि वे अन्य लोगों के साथ एक हद तक समानता का आनंद ले सकें। इस लक्ष्य को पाने के लिए निम्नलिखित दो तरीकों पर बल दिया जाता है; ये हैं।

(अ) मुक्त बाजार के जरिये खुली प्रतियोगिता को बढ़ावा देना तथा समाज के सुविधा प्राप्त सदस्यों को नुकसान पहुँचाये बगैर सुविधाहीनों की मदद करना।
(ब) राज्य के हस्तक्षेप की व्यवस्था। यथा

(अ) मुक्त बाजार की व्यवस्था: मुक्त बाजार व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि

  1. जहाँ तक संभव हो, व्यक्तियों को सम्पत्ति अर्जित करने के लिए तथा मूल्य, मजदूरी और लाभ के मामले में दूसरों के साथ अनुबंध और समझौतों में शामिल होने के लिए स्वतंत्र रहना चाहिए ।
  2. लाभ की अधिकतम मात्रा हासिल करने हेतु दूसरे के साथ प्रतिद्वन्द्विता करने की छूट होनी चाहिए।
  3. मुक्त बाजार के समर्थक बाजारों को राज्य के हस्तक्षेप से मुक्त कर देने के पक्षधर हैं।

मुक्त बाजार व्यवस्था के समर्थन में तर्क: मुक्त बाजार व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि बाजारों को राज्य के हस्तक्षेप से मुक्त कर देने से बाजारी कारोबार का योग कुल मिलाकर समाज में लाभ और कर्तव्यों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित कर देगा। वे इसके पक्ष में निम्न तर्क देते हैं।

  1. मुक्त बाजार व्यवस्था से योग्यता और प्रतिभा से युक्त लोगों को अधिक प्रतिफल मिलेगा जबकि अक्षम लोगों को कम हासिल होगा ।
  2. स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा तथा ऐसी अन्य बुनियादी सेवाओं के विकास के लिए बाजार को अनुमति देना ही लोगों के लिए इन बुनियादी सेवाओं की आपूर्ति का सबसे कारगर तरीका हो सकता है।
  3. मुक्त बाजार उचित और न्यायपूर्ण समाज का आधार होता है क्योंकि यह किसी व्यक्ति की जाति या धर्म की परवाह नहीं करता। वह यह भी नहीं देखता कि आप स्त्री हैं या पुरुष। वह इन सबसे निरपेक्ष रहता है और उसका सरोकार प्रतिभा और कौशल से है। अगर आपके पास योग्यता है तो बाकी सब बातें बेमानी हैं।
  4. मुक्त बाजार व्यवस्था हमें ज्यादा विकल्प प्रदान करता है।
  5. मुक्त बाजार में निजी उद्यम जो सेवाएँ मुहैया कराते हैं, उनकी गुणवत्ता सरकारी संस्थानों द्वारा प्रदत्त सेवाओं से प्राय: बेहतर होती है।

मुक्त बाजार व्यवस्था के विपक्ष में तर्क: मुक्त बाजार व्यवस्था के विपक्ष में निम्नलिखित प्रमुख तर्क दिये जाते हैं।

  1. सभी लोगों के लिए न्यूनतम बुनियादी जीवन: मानक सुनिश्चित करने हेतु राज्य को हस्तक्षेप करना आवश्यक है ताकि वे समान शर्तों पर प्रतिस्पर्द्धा करने में समर्थ हो सकें। वृद्धों और रोगियों की विशेष सहायता मुक्त बाजार व्यवस्था में संभव नहीं हो पाती है, राज्य ही ऐसी सहायता प्रदान कर सकता है।
  2. यद्यपि बाजारी वितरण हमें उपभोक्ता के तौर पर ज्यादा विकल्प देता है, बशर्ते उनकी कीमत चुकाने के लिए हमारे पास साधन हों। लेकिन बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं के मामले में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ और सेवाएँ लोगों के खरीदने लायक कीमत पर उपलब्ध होना आवश्यक है। लेकिन मुक्त बाजार व्यवस्था में इन सेवाओं की कीमतें गरीब लोगों की पहुँच के बाहर हो जाती हैं।
  3. मुक्त बाजार आमतौर पर पहले से ही सुविधासम्पन्न लोगों के हक में काम करने का रुझान दिखलाते हैं।

(ब) राज्य के हस्तक्षेप की व्यवस्था
कुछ विद्वानों का मत है कि गरीबों को न्यूनतम बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए अर्थात् पूर्णतया मुक्त बाजार के स्थान पर राज्य को सभी लोगों के लिए न्यूनतम बुनियादी जीवन मानक सुनिश्चित करने हेतु राज्य को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि वे समान शर्तों पर प्रतिस्पर्द्धा करने में समर्थ हो सकें। यदि हम बुनियादी वस्तुओं व सेवाओं को आम लोगों को मुहैया कराने के लिए निजी एजेन्सियों को देंगे, तो वे लाभ की दृष्टि रखते हुए इन वस्तुओं व सेवाओं को मुहैया करायेंगी। यदि निजी एजेन्सियाँ इसे अपने लिए लाभदायक नहीं पाती हैं तो वे उस खास बाजार में प्रवेश नहीं करेंगी अथवा सस्ती और घटिया सेवाएँ मुहैया करायेंगी।

जबकि बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं के मामले में महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ और सेवाएँ लोगों के खरीदने लायक कीमत पर उपलब्ध हों। निजी एजेन्सियाँ ऐसी व्यवस्थाएँ नहीं कर सकतीं, इसलिए सरकार को इस क्षेत्र में हस्तक्षेप कर गरीबों को न्यूनतम बुनियादी व अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ व सेवाएँ खरीदने लायक कीमत पर उपलब्ध करानी चाहिए। यही कारण है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में बहुत कम निजी विद्यालय खुले हैं और खुले भी हैं तो वे निम्नस्तरीय हैं। स्वास्थ्य सेवा और आवास के मामले में भी यही सच है। इन परिस्थितियों में सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे? Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. इनमें से कौनसी विशेषता एक सफल संविधान की विशेषता है।
(क) वह संविधान जो प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के प्रावधानों का आदर करने का कोई कारण अवश्य देता है।
(ख) वह संविधान् जिसमें समाज के अल्पसंख्यक समूहों का उत्पीड़न करने की अनुमति दी गई हो।
(ग) वह संविधान जो अन्य लोगों की तुलना में कुछ लोगों को ज्यादा सुविधायें देता है।
(घ) वह संविधान जो सुनियोजित ढंग से समाज के छोटे-छोटे समूहों की शक्ति को और मजबूत करता है।
उत्तर:
(क) वह संविधान जो प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के प्रावधानों का आदर करने का कोई कारण अवश्य देता है।

2. संविधान की संतुलित रूपरेखा बनाने की एक कारगर विधि यह है कि-
(क) किसी एक संस्था का सारी शक्तियों पर एकाधिकार हो।
(ख) शक्ति को कई संस्थाओं में विभाजित कर दिया जाये।
(ग) संविधान को अत्यधिक लचीला बनाया जाये।
(घ) संविधान को अत्यधिक कठोर बनाया जाये।
उत्तर:
(ख) शक्ति को कई संस्थाओं में विभाजित कर दिया जाये।

3. भारत के संविधान का केवल एक ही प्रावधान ऐसा है जो लगभग बिना किसी वाद-विवाद के पास हो गया। यह प्रावधान है।
(क) मौलिक अधिकारों सम्बन्धी
(ग) संघात्मक व्यवस्था सम्बन्धी
(ख) संसदात्मक व्यवस्था सम्बन्धी
(घ) सार्वभौमिक मताधिकार सम्बन्धी
उत्तर:
(घ) सार्वभौमिक मताधिकार सम्बन्धी

4. भारतीय संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्व सम्बन्धी प्रावधान निम्नलिखित में से किस देश के संविधान से लिये गये हैं।
(क) अमेरिका के संविधान से
(ख) फ्रांस के संविधान से
(ग) आयरलैंड के संविधान से
(घ) ब्रिटिश के संविधान से
उत्तर:
(ग) आयरलैंड के संविधान से

5. भारतीय संविधान में फ्रांस के संविधान से ग्रहण किया गया है।
(क) स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धान्त
(ख) कानून निर्माण की विधि
(ग) न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति
(घ) अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त।
उत्तर:
(क) स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धान्त

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

6. निम्नलिखित में से किसे ब्रिटिश संविधान से ग्रहण किया गया है।
(क) मौलिक अधिकारों की सूची
(ख) सरकार का संसदीय स्वरूप
(ग) अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त
(घ) अर्द्ध-संघात्मक सरकार का स्वरूप
उत्तर:
(ख) सरकार का संसदीय स्वरूप

7. कनाडा के संविधान से जो प्रावधान भारत के संविधान में ग्रहण किया गया है, वह है।
(क) कानून के शासन का विचार
(ग) अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त
(ख) कानून निर्माण की विधि
(घ) न्यायपालिका की स्वतंत्रता
उत्तर:
(ग) अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त

8. निम्नलिखित में से जो प्रावधान भारतीय संविधान में ब्रिटिश संविधान से ग्रहण नहीं किया गया है, वह ।
(क) सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फैसला
(ख) सरकार का संसदीय स्वरूप
(ग) कानून के शासन का विचार
(घ) मौलिक अधिकारों की सूची
उत्तर:
(घ) मौलिक अधिकारों की सूची

9. लोकतांत्रिक संविधानों में कानून के निर्माण का निर्णय लिया जाता है।
(क) राजा द्वारा
(ख) साम्यवादी पार्टी द्वारा
(ग) जन प्रतिनिधियों द्वारा
(घ) न्यायपालिका द्वारा
उत्तर:
(ग) जन प्रतिनिधियों द्वारा

10. सरकार को आय और सम्पत्ति की असमानता को कम करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। यह प्रावधान संविधान के है। जिस कार्य को इंगित करता है, वह है।
(क) सरकार की शक्ति पर सीमा
(ख) समाज की आकांक्षाएँ व लक्ष्यों को पूरा करने की क्षमता प्रदान करना
(ग) समाज में निर्णय लेने की शक्ति को निर्धारित करना
(घ) बुनियादी नियमों का समूह उपलब्ध कराना।
उत्तर:
(ख) समाज की आकांक्षाएँ व लक्ष्यों को पूरा करने की क्षमता प्रदान करना

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. संविधान का पहला काम यह है कि वह ……………………. नियमों का एक ऐसा समूह उपलब्ध कराए जिससे समाज के सदस्यों में न्यूनतम समन्वय व विश्वास बना रहे। होगी।
उत्तर:
बुनियादी

2. …………………. यह स्पष्ट करता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी और सरकार कैसे निर्मित होगी।
उत्तर:
संविधान

3. संविधान सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किये जाने वाले कानूनों पर कुछ ………………… भी लगाता है।
उत्तर:
सीमाएँ

4. संविधान सरकार को ऐसी ………………….प्रदान करता है, जिससे कि वह जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके। अधिकारों की रक्षा करते हैं।
उत्तर:
क्षमता ( शक्तियाँ)

5. अधिकतर संविधान कुछ ………………… अधिकारों की रक्षा करते हैं।
उत्तर:
मूलभूत।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

निम्नलिखित में से सत्य / असत्य कथन छाँटिये

1. भारतीय संविधान जातीयता या नस्ल को नागरिकता के आधार के रूप में मान्यता नहीं देता।
उत्तर:
सत्य

2. विश्व के सर्वाधिक सफल लिखित संविधान भारत, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के हैं।
उत्तर:
सत्य

3. भारत ने अपने संविधान पर पूर्ण जनमत संग्रह कराया जिसमें सभी लोगों ने अपनाये जा रहे संविधान के पक्ष या विपक्ष में राय दी।
उत्तर:
असत्य

4. भारतीय संविधान सभा की रचना 1935 के संविधान की प्रस्तावना के आधार पर हुई।
उत्तर:
असत्य

5. हमारी संविधान सभा के सदस्य सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने गए थे।
उत्तर:
असत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. 2015 में नया संविधान बनाया(अ) भारत में
2. 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ(ब) 9 दिसम्बर, 1946
3. भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक(स) जवाहरलाल नेहरू
4. संविधान सभा में प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव(द) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
5. संविधान सभा के अध्यक्ष(य) नेपाल ने
6. प्रारूप समिति के सभापति(र) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

उत्तर:

1. 2015 में नया संविधान बनाया(य) नेपाल ने
2. 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू हुआ(अ) भारत में
3. भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक(ब) 9 दिसम्बर, 1946
4. संविधान सभा में प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव(स) जवाहरलाल नेहरू
5. संविधान सभा के अध्यक्ष(र) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद


अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान का निर्माण कितने समय में हुआ?
उत्तर:
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा 2 वर्ष, 11 मास और 18 दिन के अथक प्रयास से 26 नवम्बर, 1949 को सम्पन्न हुआ।

प्रश्न 2.
संविधान का पहला काम क्या है?
उत्तर:
संविधान बुनियादी नियमों का एक ऐसा समूह उपलब्ध कराये जिससे समाज के सदस्यों में न्यूनतम समन्वय और विश्वास बना रहे।

प्रश्न 3.
संविधान का दूसरा काम क्या है?
उत्तर:
संविधान यह स्पष्ट करता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी और सरकार कैसे निर्मित होगी।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 4.
संविधान सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किये जाने वाले कानूनों की सीमाएँ तय करता है। ये सीमाएँ किस रूप में मौलिक होती हैं?
उत्तर:
संविधान द्वारा सरकार पर लगाई गई सीमाएँ इस रूप में मौलिक होती हैं कि सरकार कभी उनका उल्लंघन नहीं कर सकती।

प्रश्न 5.
सरकार की शक्तियों को सीमित करने का सबसे सरल तरीका क्या है?
उत्तर:
सरकार की शक्तियों को सीमित करने का सबसे सरल तरीका यह है कि नागरिक के रूप में व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को स्पष्ट कर दिया जाये।

प्रश्न 6.
सामान्यत: मूल अधिकारों को कब सीमित किया जा सकता है?
उत्तर:
सामान्यतः मूल अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल में सीमित किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर:
संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे।

प्रश्न 8.
भारतीय संविधान में कौनसा प्रावधान सरकार को ऐसी शक्तियाँ देता है कि वह समाज की भलाई के लिए कार्य कर सके?
उत्तर:
भारत के संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक तत्व सरकार से लोगों की आकांक्षाएँ पूरी करने की अपेक्षा करते हैं।

प्रश्न 9.
कौनसा सम्बन्ध किसी देश की राष्ट्रीय पहचान बनाता है?
उत्तर:
विभिन्न राष्ट्रों में देश की केन्द्रीय सरकार और विभिन्न क्षेत्रों के बीच के सम्बन्धों को लेकर भिन्न-भिन्न अवधारणाएँ होती हैं। यह सम्बन्ध उस देश की राष्ट्रीय पहचान बनाता है

प्रश्न 10.
संविधान किसी समाज की बुनियादी राजनैतिक पहचान कैसे होता है?
उत्तर:
संविधान के माध्यम से ही कोई समाज ‘शासन कैसे होगा’ और ‘शासित कौन होंगे’, जैसे बुनियादी नियमों और सिद्धान्तों पर सहमत होकर अपनी मूलभूत राजनीतिक पहचान बनाता है।

प्रश्न 11.
संविधान हमें एक नैतिक पहचान कैसे देता है?
उत्तर:
संविधान आधिकारिक बंधन लगाकर यह तय कर देता है कि कोई क्या कर सकता है और क्या नहीं। ऐसा करके वह हमें एक नैतिक पहचान देता है।

प्रश्न 12.
ऐसे दो राजनैतिक और नैतिक बुनियादी नियमों का उल्लेख कीजिये जो विश्व के सभी प्रकार के संविधानों में स्वीकार किये गये हैं।
उत्तर:

  1. अधिकतर संविधान कुछ मूलभूत अधिकारों की रक्षा करते हैं।
  2. अधिकतर संविधान ऐसी सरकारें संभव बनाते हैं जो किसी न किसी रूप में लोकतांत्रिक होती हैं।

प्रश्न 13.
संविधान का प्रभावी होना अनेक कारणों पर निर्भर है। किसी एक कारण का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
संविधान के प्रभावी होने का पहला कारण यह है कि उसे सफल राष्ट्रीय आन्दोलन के लोकप्रिय नेताओं द्वारा बनाया गया हो जिनके पास समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलने की विलक्षण क्षमता हो।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 14.
क्या भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को एक न एक ऐसा कारण देता है जिससे वह उसकी सामान्य रूपरेखा का समर्थन कर सके? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर:
हाँ, भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को उसकी सामान्य रूपरेखा का समर्थन करने का कोई न कोई कारण देता है, क्योंकि यह उन्हें विश्वास दिलाता है कि वह बुनियादी न्याय को प्राप्त करने के लिए ढाँचा उपलब्ध कराता है।

प्रश्न 15.
भारतीय संविधान सभा की रचना किस योजना के अनुसार हुई?
उत्तर:
भारतीय संविधान सभा की रचना लगभग उसी योजना के अनुसार हुई जिसे ‘कैबिनेट मिशन’ ने प्रस्तावित किया था।

प्रश्न 16.
उन दो कारकों का उल्लेख कीजिये जो भारतीय संविधान को प्रभावी और सम्मान के योग्य बनाते हैं।
उत्तर:

  1. संविधान सभा मोटे तौर पर सबका प्रतिनिधित्व कर रही थी।
  2. संविधान सभा के सदस्यों ने सार्वजनिक हित और सार्वजनिक विवेक को ध्यान में रखते हुए कार्य किया।

प्रश्न 17.
स्पष्ट कीजिये कि भारत की संविधान सभा ने व्यापक दृष्टिकोण से कार्य किया।
उत्तर:
भारत की संविधान सभा ने व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए ही सम्पूर्ण विश्व से सर्वोत्तम चीजों को ग्रहण किया और उन्हें अपना बना लिया।

प्रश्न 18.
भारत के विभाजन के बाद संविधान सभा में किस दल का वर्चस्व था तथा उसकी सीटें कितने प्रतिशत थीं?
उत्तर:
भारत के विभाजन के बाद संविधान सभा में कांग्रेस का वर्चस्व था और उसे 82% सीटें प्राप्त थीं।

प्रश्न 19.
भारतीय संविधान में न्यायिक पुनरावलोकन की धारणा कहाँ से ली गई है?
उत्तर:
भारत के संविधान में न्यायिक पुनरावलोकन की धारणा अमेरिका के संविधान से ली गई है।

प्रश्न 20.
नेपाल लोकतांत्रिक गणराज्य कब बना?
उत्तर:
नेपाल सन् 2008 में लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 21.
नेपाल ने लोकतांत्रिक गणराज्य के नये संविधान को कब अपनाया?
उत्तर:
नेपाल में सन् 2015 में नये संविधान को अपनाया।

प्रश्न 22.
भारत की संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया?
उत्तर:
भारत की संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव पं. जवाहर लाल नेहरू ने

प्रश्न 23.
भारत की संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर:
भारत की संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय नागरिकों के कोई पाँच मौलिक कर्त्तव्य लिखो। होगी।
उत्तर:
भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह प्रस्तुत किया 1

  1. संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे;
  2. भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे;
  3. देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे;
  4. सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे ; तथा
  5. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे।

प्रश्न 2.
संविधान के कार्यों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
संविधान के कार्य निम्नलिखित हैं।

  1. संविधान समाज में बुनियादी नियमों को उपलब्ध कराता।
  2. संविधान यह स्पष्ट करता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी तथा सरकार कैसे निर्मित
  3. वह सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किये जाने वाले कानूनों की सीमाएँ निश्चित करता है।
  4. वह सरकार को ऐसी शक्तियाँ भी देता है जिससे वह सामूहिक भलाई के लिए कार्य कर सके।

प्रश्न 3.
संविधान सरकार की शक्तियों को किस तरह से सीमित करता है?
उत्तर:
संविधान सरकार की शक्तियों को कई तरह से सीमित करता है। यथा

  1. संविधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को स्पष्ट करता है ताकि कोई भी सरकार कभी भी उनका उल्लंघन न कर सके। है।
  2. संविधान नागरिकों को मनमाने ढंग से बिना किसी कारण के गिरफ्तार करने के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता
  3. संविधान नागरिकों को कुछ मौलिक स्वतंत्रताओं का अधिकार प्रदान करता है।

प्रश्न 4.
सरकार को सकारात्मक कार्य कर सकने और समाज की आकांक्षाओं और उसके लक्ष्य को अभिव्यक्ति दे सकने की सामर्थ्य प्रदान करने वाले भारत के संविधान के उपबन्धों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
भारतीय संविधान सरकार को वह सामर्थ्य प्रदान करता है जिससे वह कुछ सकारात्मक लोक कल्याणकारी कदम उठा सके और जिन्हें कानून की मदद से लागू किया जा सके। ऐसा सामर्थ्य प्रदान करने वाले प्रावधानों को भारत के संविधान की प्रस्तावना का समर्थन प्राप्त है और ये प्रावधान संविधान के मौलिक अधिकारों तथा राज्य के नीति निर्देशक तत्व वाले भागों में पाये जाते हैं।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 5.
दक्षिण अफ्रीका के संविधान के ऐसे प्रावधानों का उल्लेख कीजिये जो सरकार को समाज की सामूहिक भलाई के लिये कार्य कर सकने की शक्तियाँ देते हैं।
उत्तर:
दक्षिण अफ्रीका का संविधान में सरकार को समाज की सामूहिक भलाई के कार्य करने से संबंधित प्रमुख प्रावधान ये हैं।

  1. वह सरकार को पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और अन्यायपूर्ण भेदभाव से व्यक्तियों और समूहों को बचाने का प्रयास करने के लिए कदम उठाने का अधिकार देता है।
  2. वह यह प्रावधान भी करता है कि सरकार धीरे-धीरे सभी के लिए पर्याप्त आवास और स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराये।

प्रश्न 6.
इण्डोनेशिया के संविधान में सरकार को समाज की सामूहिक भलाई के काम करने में समर्थ बनाने वाले उपबन्धों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. इण्डोनेशिया का संविधान सरकार को यह जिम्मेदारी देता है कि वह राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था बनाए और उसका संचालन करे।
  2. यह संविधान यह भी सुनिश्चित करता है कि सरकार गरीब और अनाथ बच्चों की देखभाल करेगी।

प्रश्न 7.
संविधान क्या है?
उत्तर:
संविधान वह दस्तावेज या दस्तावेजों का पुंज है जिसमें राज्य के बारे में कई प्रावधान होते हैं। ये प्रावधान बताते हैं कि राज्य का गठन कैसे होगा और वह किन सिद्धान्तों का पालन करेगा।

प्रश्न 8.
संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा से क्या आशय है?
उत्तर:
संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा से यह आशय है कि संविधान यह सुनिश्चित करे कि किसी एक संस्था का सारी शक्तियों पर एकाधिकार न हो। ऐसा करने के लिए सरकार की शक्ति को संविधान द्वारा कई संस्थाओं में बांट दिया जाता है ताकि कोई एक संस्था संविधान को नष्ट न कर सके। इसके साथ ही संविधान में बाध्यकारी मूल्य, नियम और प्रक्रियाओं के साथ-साथ कार्यप्रणाली में लचीलापन का संतुलन होना चाहिए ताकि वह आवश्यकताओं और परिस्थितियों के साथ अनुकूलन कर सके।

प्रश्न 9.
” भारत में संविधान सभा का विचार एक आस्था का प्रतीक बन चुका था ।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में संविधान सभा के अस्तित्व में आने से बहुत पहले संविधान सभा की माँग उठ चुकी थी। 9 दिसम्बर, 1946 के अध्यक्षीय भाषण में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने महात्मा गांधी के कथन को याद करते हुए कहा कि स्वराजं का अर्थ है जनता के द्वारा स्वतंत्र रूप से चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त उनकी इच्छा। अतः उन्होंने कहा कि ” देश में राजनीतिक रूप से जागरूक सभी वर्गों में संविधान सभा का विचार एक आस्था का प्रतीक बन चुका था। ”

प्रश्न 10.
उन तीन कारकों का उल्लेख कीजिए जो संविधान को प्रभावी और सम्मान के योग्य बनाते हैं?
उत्तर:
संविधान को प्रभावी और सम्मान योग्य बनाने वाले तीन कारक ये हैं।

  1. संविधान ऐसे लोकप्रिय नेताओं द्वारा बनाया गया हो जिनके पास लोगों को अपने साथ लेकर चलने की क्षमता हो।
  2. संविधान लोगों को यह विश्वास दिलाता हो कि वह बुनियादी न्याय को प्राप्त करने के लिए ढाँचा उपलब्ध कराता है।
  3. संविधान संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा प्रस्तुत करता हो।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 11.
स्पष्ट कीजिये कि भारत का संविधान एक जीवंत सच्चाई है।
उत्तर:
भारत का संविधान संविधान निर्माताओं की बुद्धिमता और दूरदृष्टि का प्रमाण है कि वे देश को एक ऐसा संविधान दे सके जिसमें जनता द्वारा मान्य आधारभूत मूल्यों और सर्वोच्च आकांक्षाओं को स्थान दिया गया है। यही वह कारण है कि जिसकी वजह से इतनी जटिलता से बताया गया संविधान न केवल अस्तित्व में है, बल्कि एक जीवन्त सच्चाई भी है जबकि दुनिया के अन्य अनेक संविधान कागजी पोथों में ही दबकर रह गये।

प्रश्न 12.
कोई ऐसे चार उदाहरण दीजिये जिन पर संविधान सभा के सदस्यों में वैध सैद्धान्तिक आधार पर मतभेद थे।
उत्तर:
संविधान सभा के सदस्यों में वैध सैद्धान्तिक आधार पर प्रमुख मतभेद इस प्रकार थे।

  1. भारत में शासन प्रणाली केन्द्रीकृत होनी चाहिए या विकेन्द्रीकृत?
  2. राज्यों के बीच कैसे सम्बन्ध होने चाहिए?
  3. न्यायपालिका की क्या शक्तियाँ होनी चाहिए?
  4. क्या संविधान को संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए?

प्रश्न 13.
भारत की संविधान सभा की रचना किस योजना के अनुसार हुई उसके प्रस्तावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1935 में स्थापित प्रान्तीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव हुआ। संविधान सभा की रचना लगभग उसी योजना के अनुसार हुई जिसे ब्रिटिश मंत्रिमंडल की एक समिति ‘कैबिनेट मिशन’ ने प्रस्तावित किया था। कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार:

  1. प्रत्येक प्रान्त, देशी रियासत या रियासतों के समूह को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी गईं। मोटे तौर पर दस लाख की जनसंख्या पर एक सीट का अनुपात रख गया। परिणामतः ब्रिटिश प्रान्तों को 292 सदस्य चुनने तथा देशी रियासतों को न्यूनतम 93 सीटें आवंटित की गईं।
  2. प्रत्येक प्रान्त की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों मुसलमान, सिक्ख और सामान्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात में बाँट दिया गया।
  3. प्रान्तीय विधान सभाओं में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों ने अपने प्रतिनिधियों को चुना और इसके लिए उन्होंने समानुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमण मत पद्धति का प्रयोग किया।
  4. देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चुनाव का तरीका उनके परामर्श से तय किया गया।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 14.
भारत की संविधान सभा के स्वरूप पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
संविधान सभा का स्वरूप:

  1. सदस्य संख्या: विभाजन के बाद पाकिस्तान के क्षेत्रों से चुनकर आए सदस्यों को घटाने के बाद संविधान सभा के वास्तविक सदस्यों की संख्या 299 रह गई। इनमें से 26 नवम्बर, 1949 को कुल 284 सदस्य उपस्थित थे जिन्होंने अंतिम रूप से पारित संविधान पर अपने हस्ताक्षर किये
  2.  प्रतिनिधित्वपूर्ण: यद्यपि भारत की संविधान सभा के सदस्य सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर नहीं चुने गये थे पर उसे ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधि – परक बनाने के प्रयास किये गये। यथा

(क) सभी धर्म के सदस्यों को जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी गईं।

(ख) संविधान सभा में उस समय के अनुसूचित वर्ग के 26 सदस्य थे।

(ग) यद्यपि विभाजन के बाद संविधान सभा में कांग्रेस का वर्चस्व था। उसे 82% सीटें प्राप्त थीं। लेकिन स्वयं कांग्रेस विविधताओं से भरी हुई एक ऐसी पार्टी थी जिसमें लगभग सभी विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व था।

प्रश्न 15.
भारत का संविधान एक ऐसी सरकार बनाने की नैतिक प्रतिबद्धता है जो राष्ट्रीय आन्दोलन में लोगों को दिये गये आश्वासनों को पूरा करेगी।
अथवा
भारत की संविधान सभा केवल उन सिद्धान्तों को मूर्त रूप और आकार दे रही थी जो उसने राष्ट्रीय आन्दोलन से विरासत में प्राप्त किये थे ।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत :
भारत की संविधान सभा केवल उन सिद्धान्तों को मूर्त रूप और आकार दे रही थी जो उसने राष्ट्रीय आन्दोलन में विरासत में प्राप्त किये थे। संविधान लागू होने के कई दशक पूर्व से ही राष्ट्रीय आन्दोलन में उन प्रश्नों पर चर्चा हुई थी जो संविधान बनाने के लिए प्रासंगिक थे। जैसे- भारत में सरकार का स्वरूप और संरचना कैसी होनी चाहिए, हमें किन मूल्यों का समर्थन करना चाहिए, किन असमानताओं को दूर करना चाहिए आदि ? इन बहसों से प्राप्त निष्कर्षो अर्थात् इन बहसों से बने सिद्धान्तों पर आम सहमति को ही संविधान में अंतिम रूप प्रदान किया गया।

प्रमुख सिद्धान्त:
राष्ट्रीय आन्दोलन से जिन सिद्धान्तों को संविधान सभा में लाया गया उनका सर्वोत्तम सारांश नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव में मिलता है। इस प्रस्ताव में संविधान सभा के उद्देश्यों तथा संविधान सभा की सभी आकांक्षाओं और मूल्यों को समाहित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर हमारे संविधान में समानता, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, संप्रभुता और सार्वजनीन पहचान जैसी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को संस्थागत स्वरूप दिया गया।

प्रश्न 16.
सरकार की सभी संस्थाओं को संतुलित ढंग से व्यवस्थित करने में संविधान सभा की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
संस्थाओं को संतुलित रूप से व्यवस्थित करने में संविधान सभा की भूमिका- सरकार की सभी संस्थाओं को संतुलित रूप से व्यवस्थित करने की दृष्टि से संविधान सभा ने निम्न प्रयास किये
1. संस्थाओं को संतुलित ढंग से व्यवस्थित करने की दृष्टि से मूल सिद्धान्त यह रखा गया कि सरकार लोकतांत्रिक रहे और जन कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हो। संविधान सभा ने शासन के विभिन्न अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच समुचित संतुलन स्थापित करने के लिए बहुत विचार मंथन किया तथा संसदीय शासन व्यवस्था और संघात्मक शासन व्यवस्था को स्वीकार किया।

2. शासकीय संस्थाओं की संतुलित व्यवस्था स्थापित करने में हमारे संविधान निर्माताओं ने दूसरे देशों के प्रयोगों और अनुभवों से सीखने का प्रयास किया; उन्होंने अन्य संवैधानिक परम्पराओं से कुछ ग्रहण करने से कोई परहेज नहीं किया। उन्होंने विभिन्न देशों से उनके प्रावधानों को भी लिया। लेकिन उन्होंने इन्हें तभी लिया जब वे भारत की समस्याओं और आशाओं के अनुरूप सिद्ध हुए। साथ ही उन्होंने इनमें आवश्यकतानुसार आवश्यक परिवर्तन कर इन्हें ग्रहण कया और उन्हें अपना बना लिया ।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 17.
भारत की संविधान सभा की कामकाज की शैली तथा कार्यविधि को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
संविधान सभा की कामकाज की शैली: यद्यपि भारत की संविधान सभा समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व कर रही थी, तथापि वे प्रतिनिधि केवल अपनी पहचान या समुदाय का ही प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे बल्कि वे पूरे देश के हित को ध्यान में रखकर विचार-विमर्श कर रहे थे। सदस्यों में प्रायः मतभेद हो जाते थे लेकिन सदस्यों द्वारा अपने हितों के आधार पर शायद ही कोई मतभेद हुआ हो। ये मतभेद वास्तव में वैध सैद्धान्तिक आधार पर थे। सार्वभौमिक मताधिकार के विषय को छोड़कर संविधान के प्रत्येक विषय पर संविधान सभा के सदस्यों में गंभीर विचार- विमर्श और वाद-विवाद हुए।

संविधान सभा की कार्यविधि: संविधान सभा की सामान्य कार्यविधि में भी सार्वजनिक विवेक का महत्व स्पष्ट दिखाई देता था। विभिन्न मुद्दों के लिए संविधान सभा की आठ मुख्य कमेटियाँ थीं। इनके अध्यक्षों के विचार एक-दूसरे के समान नहीं थे। फिर भी सबने एक साथ मिलकर काम किया। प्रत्येक कमेटी ने आम तौर पर संविधान के कुछ-कुछ प्रावधानों का प्रारूप तैयार किया जिन पर बाद में पूरी संविधान सभा में चर्चा की गई।

आमतौर पर यह प्रयास किया गया कि फैसले आम राय से हों और कोई भी प्रावधान किसी खास हित समूह के पक्ष में न हो। कई प्रावधानों पर निर्णय मत विभाजन से भी लिये गये। ऐसे अवसरों पर हर तर्क और शंका का समाधान बहुत ही सावधानी से किया गया। लिखित रूप में उनका जवाब दिया गया। अवधि तथा बैठकें -2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन की अवधि में संविधान सभा की बैठकें 166 दिनों तक चलीं। इसके सत्र अखबारों और आम लोगों के लिए खुले हुए थे।

प्रश्न 18.
भारतीय संविधान में कौनसी दो विशेषताएँ अमेरिकी संविधान से अपनाई गई हैं?
उत्तर:
भारतीय संविधान में निम्न दो विशेषताएँ अमेरिकी संविधान से अपनायी गई हैं-

  1. मौलिक अधिकार: भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार अमेरिकी संविधान के अधिकारों की सूची से मिलते-जुलते हैं।
  2. न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय संविधान अमेरिकी संविधान की भांति देश का सर्वोच्च संविधान है और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को अमेरिकी न्यायालय की भांति न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्राप्त है

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया? इसके मुख्य उपबन्धों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
उद्देश्य प्रस्तावं- संविधान सभा के समक्ष 13 दिसम्बर, 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा ने यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। उद्देश्य प्रस्ताव के प्रमुख बिन्दु – उद्देश्य प्रस्ताव के प्रमुख बिन्दु ( उपबन्ध) निम्नलिखित हैं।

  1. भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य है।
  2. भारत ब्रिटेन के अधिकार में आने वाले भारतीय क्षेत्रों, देशी रियासतों और देशी रियासतों के बाहर के ऐसे क्षेत्र जो हमारे संघ का अंग बनना चाहते हैं, का एक संघ होगा।
  3. संघ की इकाइयाँ स्वायत्त होंगी और उन सभी शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का संपादन करेंगी जो संघीय सरकार को नहीं दी गई हैं।
  4. संप्रभु और स्वतंत्र भारत तथा इसके संविधान की समस्त शक्तियों और सत्ता का स्रोत जनता है।
  5. भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, कानून के समक्ष समानता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा कानून और सार्वजनिक नैतिकता की सीमाओं में रहते हुए भाषण, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना, व्यवसाय, संगठन और कार्य करने की मौलिक स्वतंत्रता की गारण्टी और सुरक्षा दी जायेगी।
  6. अल्पसंख्यकों, पिछड़े व जनजातीय क्षेत्र, दलित व अन्य पिछड़े वर्गों को समुचित सुरक्षा दी जायेगी।
  7. गणराज्य की क्षेत्रीय अखंडता तथा थल, जल और आकाश में इसके संप्रभु अधिकारों की रक्षा सभ्य राष्ट्रों के कानून और न्याय के अनुसार की जायेगी।
  8. विश्वशांति और मानव कल्याण के विकास के लिए देश स्वेच्छापूर्वक और पूर्ण योगदान करेगा।

इस प्रकार उद्देश्य प्रस्ताव में संविधान की सभी आकांक्षाओं और मूल्यों को समाहित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर हमारे संविधान में समानता, स्वतंत्रता, लोकतंत्र, संप्रभुता और एक सर्वजनीन पहचान जैसी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को संस्थागत स्वरूप दिया गया।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान में विभिन्न देशों के संविधानों से लिये गये प्रावधानों का उल्लेख कीजिये।
अथवा
‘भारतीय संविधान उधार लिए गए सिद्धान्तों का समूह है।’ व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न देशों के संविधानों से लिये गए प्रावधान: शासकीय संस्थाओं की सर्वाधिक संतुलित व्यवस्था स्थापित करने में भारत के संविधान निर्माताओं ने दूसरे देशों के प्रयोगों और अनुभवों से कुछ सीखने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने अन्य संवैधानिक परम्पराओं से कुछ ग्रहण करने से भी कोई परहेज नहीं किया। साथ ही उन्होंने किसी भी ऐसे बौद्धिक तर्क या ऐतिहासिक उदाहरण की अनदेखी नहीं की जो उनके कार्य को सम्पन्न करने के लिए जरूरी था। अतः उन्होंने विभिन्न देशों से निम्नलिखित प्रावधानों को ग्रहण किया
(अ) 1935 के एक्ट का प्रभाव: हमारे संविधान निर्माता 1935 के एक्ट से अत्यधिक प्रभावित थे। हमारे संविधान का अनुच्छेद 362, 1935 के एक्ट की धारा 102 से मिलता-जुलता है।

(ब) ब्रिटिश संविधान से लिये गये प्रावधान: भारतीय संविधान निर्माताओं ने ब्रिटिश संविधान से निम्नलिखित प्रावधान लिये।

  1. सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फैसला।
  2. सरकार का संसदीय स्वरूप।
  3. कानून के शासन का विचार।
  4. विधायिका में अध्यक्ष का पद और उसकी भूमिका।
  5. कानून निर्माण की विधि|

(स) अमेरिका के संविधान से लिये गये प्रावधान – भारतीय संविधान निर्माताओं ने अमेरिका के संविधान से निम्नलिखित प्रावधान लिये-

  1. मौलिक अधिकारों की सूची।
  2. न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता।

(द) कनाडा के संविधान से लिये गये प्रावधान – कनाडा के संविधान से ये प्रावधान ग्रहण किये।

  1. एक अर्द्ध-संघात्मक सरकार का स्वरूप ( सशक्त केन्द्रीय सरकार वाली संघात्मक व्यवस्था)।
  2. अवशिष्ट शक्तियों का सिद्धान्त।

(य) अन्य संविधानों से ग्रहण किये गये प्रावधान – भारतीय संविधान निर्माताओं ने अन्य संविधानों से भी निम्न प्रावधानों को ग्रहण किया।

  1. आयरलैंड के संविधान से उन्होंने राज्य के नीति निर्देशक तत्व के प्रावधानों को ग्रहण किया।
  2. फ्रांस के संविधान से उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धान्त को ग्रहण किया।

लेकिन इन प्रावधानों को लेना कोई नकलची मानसिकता का परिणाम नहीं था बल्कि उन्होंने प्रत्येक प्रावधान को इस कसौटी पर कसा कि वह भारत की समस्याओं और आशाओं के अनुरूप है। इस प्रकार एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्होंने इन प्रावधानों को ग्रहण किया तथा भारत की समस्याओं, आशाओं व परिस्थितियों के अनुरूप उनमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर ग्रहण किया और उन्हें अपना बना लिया । इसलिए यह कहना गलत है कि यह संविधान उधार का था।

प्रश्न 3.
संविधान क्या है? संविधान के उन कारकों पर प्रकाश डालिये जो संविधान को प्रभावी और सम्मान के योग्य बनाते हैं।
उत्तर:
संविधान से आशय: संविधान वह दस्तावेज या दस्तावेजों का पुंज है जो यह बताता है कि राज्य का गठन कैसे होगा और वह किन सिद्धान्तों का पालन करेगा। भारत का संविधान जहाँ एक लिखित दस्तावेज है, वहीं इंग्लैण्ड का संविधान दस्तावेजों और निर्णयों की एक लंबी श्रृंखला के रूप में है जिसे सामूहिक रूप से संविधान कहा जा सकता है। संविधान को प्रभावी और सम्मान योग्य बनाने के कारक – किसी भी संविधान को प्रभावी और सम्मान योग्य बनाने के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं।

1. संविधान को प्रचलन में लाने का तरीका;
इसका अभिप्राय यह है कि कोई संविधान कैसे अस्तित्व में आया; किसने संविधान बनाया और उनके पास इसे बनाने की शक्ति कितनी थी। यदि कोई संविधान सैनिक शासकों या ऐसे अलोकप्रिय नेताओं के द्वारा बनाये जाते हैं जिनके पास लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता नहीं होती, तो ऐसे संविधान निष्प्रभावी होते हैं। 1948 के बाद नेपाल में पाँच संविधान, 1948, 1951, 1959, 1962 और 1990 में बनाये जा चुके हैं, लेकिन ये सभी संविधान नेपाल नरेश द्वारा प्रदान किये गये। इसलिए निष्प्रभावी रहे।

यदि संविधान सफल राष्ट्रीय आन्दोलन के बाद बनी संविधान निर्मात्री सभा के द्वारा बनाया जाता है जिसके सदस्य राष्ट्रीय आन्दोलन के लोकप्रिय नेता हों और जिनके पास समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलने की विलक्षण क्षमता हो, तो ऐसी संविधान सभा द्वारा बनाया गया संविधान प्रभावी होता है। यही कारण है कि विश्व के सर्वाधिक सफल संविधान भारत, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के हैं जिन्हें एक सफल राष्ट्रीय आन्दोलन के बाद बनाया गया था। संविधान निर्माताओं की लोकप्रियता समाज के विभिन्न वर्गों को अपने साथ ले चलने की उनकी क्षमता, उनका दृष्टिकोण तथा उनका प्रभाव संविधान को प्रभावी बनाता है।

2. संविधान के मौलिक प्रावधान संविधान के प्रभावी और सम्मान योग्य होने के लिए यह आवश्यक है कि वह प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के प्रावधानों का आदर करने का कोई कारण अवश्य देता है। जो संविधान लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि वह बुनियादी न्याय को प्राप्त करने के लिए ढांचा उपलब्ध कराता है, वह संविधान प्रभावी होता है। इस सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है कि जो संविधान अपने सभी नागरिकों की स्वतंत्रता और समानता की जितनी अधिक सुरक्षा करता है, उसकी सफलता की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

3. संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा: जो संविधान, संविधान में शक्तियों का बंटवारा इस प्रकार करता है कि कोई एक समूह या संस्था संविधान को नष्ट नहीं कर सके। ऐसे संविधान को प्रभावी संविधान कहा जा सकता है। ऐसा करने के लिए सरकार की शक्ति को कई संस्थाओं में बांट दिया जाता है। उदाहरण के लिए भारतीय संविधान सरकार की शक्ति को एक समान धरातल पर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं और स्वतंत्र संवैधानिक निकाय जैसे निर्वाचन आयोग आदि में बांट देता है। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि यदि कोई एक संस्था संविधान को नष्ट करना चाहे तो अन्य दूसरी संस्थाएँ उसके अतिक्रमण को नियंत्रित कर लेंगी। किसी संविधान को प्रभावी और सम्मान योग्य बनाने के लिए उपर्युक्त तीन कारकों का होना आवश्यक है।

JAC Class 11 Political Science  Important Questions Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे?

प्रश्न 4.
संविधान से आप क्या समझते हैं? हमें संविधान की क्या आवश्यकता है?
अथवा
संविधान क्या है? संविधान द्वारा किये जाने वाले कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिये।
उत्तर:
संविधान से आशय: ( इसको पूर्व प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया जा चुका है।) संविधान की आवश्यकता अथवा संविधान द्वारा किये जाने वाले कार्य किसी समाज के लिए बुनियादी नियमों का समूह उपलब्ध कराकर समाज में तालमेल बिठाने, समाज में शक्ति के मूल वितरण को स्पष्ट कर सरकार का निर्माण करने; सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ लगाने तथा नागरिकों को मूल अधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रताएँ प्रदान करने, सरकार को वह सामर्थ्य प्रदान करने जिससे वह कुछ सकारात्मक लोक- कल्याणकारी कदम उठा सके एवं राष्ट्र की बुनियादी पहचान के लिए संविधान की अत्यन्त आवश्यकता है। संविधान अपने कामों से समाज की इन आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। संविधान के कार्यों की रूपरेखा अग्रलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत दी गई है।

1. संविधान तालमेल बिठाता है। संविधान का पहला काम यह है कि वह बुनियादी नियमों का एक ऐसा समूह उपलब्ध कराये जिससे समाज के सदस्यों में एक न्यूनतम समन्वय और विश्वास बना रहे। सी भी समूह को सार्वजनिक रूप से मान्यता प्राप्त कुछ बुनियादी नियमों की आवश्यकता होती है जिसे. समूह के सभी सदस्य जानते हों, ताकि आपस में एक न्यूनतम समन्वय बना रहे। लेकिन ये नियम केवल पता ही नहीं होने चाहिए वरन् उन्हें लागू भी किया जाना चाहिए। इसलिए जब इन नियमों को न्यायालय द्वारा लागू किया जाता है तो इससे सभी को विश्वास हो जाता है कि और लोग भी इन नियमों का पालन करेंगे, क्योंकि ऐसा न करने पर उन्हें दंड दिया जायेगा। संविधान ऐसे नियमों को न केवल उपलब्ध कराता है, बल्कि उन्हें न्यायालय द्वारा लागू भी करवाता है।

2. निर्णय लेने की शक्ति का निर्धारण: संविधान का दूसरा काम यह स्पष्ट करना है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी। संविधान यह भी तय करता है कि सरकार कैसे निर्मित होगी । संविधान कुछ ऐसे बुनियादी सिद्धान्तों का समूह है जिसके आधार पर राज्य का निर्माण और शासन का निर्माण होता है। वह समाज में शक्ति के मूल वितरण को स्पष्ट करता है तथा यह तय करता है कि कानून कौन बनायेगा – राजा या केवल एक दल विशेष या जनता या जन-प्रतिनिधि। यदि यह काम जन प्रतिनिधियों द्वारा करना है तो संविधान यह भी तय करता है कि उन प्रतिनिधियों का चयन कैसे होगा और कुल प्रतिनिधि कितने होंगे । इस प्रकार संविधान सरकार का निर्माण करने वाली सत्ता है।

3. सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ: सविधान का तीसरा काम यह है कि वह सरकार द्वारा अपने नागरिकों पर लागू किये जाने वाले कानूनों की कोई सीमा तय करे। ये सीमाएँ इस रूप में मौलिक होती हैं कि सरकार कभी उनका उल्लंघन नहीं कर सकती। संविधान सरकार की शक्तियों को कई तरह से सीमित करता है। यथा

  • वह नागरिकों के मूल अधिकारों को स्पष्ट कर देता है ताकि कोई भी सरकार उनका उल्लंघन न कर सके।
  • वह नागरिकों को मनमाने ढंग से बिना किसी कारण के गिरफ्तार करने के विरुद्ध अधिकार प्रदान करता है।
  • वह नागरिकों को कुछ मौलिक स्वतंत्रताएँ प्रदान कर देता है, जैसे भाषण की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता आदि।
    व्यवहार में इन अधिकारों व स्वतन्त्रताओं को राष्ट्रीय आपातकाल में सीमित किया जा सकता है और संविधान उन परिस्थितियों का भी उल्लेख करता है जिनमें इन अधिकारों को वापिस लिया जा सकता है।

4. समाज की आकांक्षाएँ और लक्ष्य: संविधान का चौथा काम यह है कि वह सरकार को ऐसी क्षमता प्रदान करे जिससे वह जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए उचित परिस्थितियों का निर्माण कर सके। आधुनिक संविधान निर्णय लेने की शक्ति के वितरण और सरकार की शक्ति पर प्रतिबंध लगाने के काम के साथ- साथ एक ऐसा सक्षम ढांचा भी प्रदान करते हैं जिससे सरकार कुछ सकारात्मक कार्य कर सके और समाज की आकांक्षाएँ और उसके लक्ष्य को अभिव्यक्ति दे सके। उदाहरण के लिए भारत के संविधान में मौलिक अधिकार और राज्य की नीति के निर्देशक तत्व ऐसे ही प्रावधान हैं।

5. राष्ट्र की बुनियादी पहचान: संविधान किसी समाज की बुनियादी पहचान होती है अर्थात् इसके माध्यम से किसी समाज की एक सामूहिक इकाई के रूप में पहचान होती है। संविधान के द्वारा कोई समाज कुछ. बुनियादी नियमों और सिद्धान्तों पर सहमत होकर अपनी मूलभूत राजनीतिक पहचान बनाता है। संविधान आधिकारिक बंधन लगाकर यह तय कर देता है कि कोई क्या कर सकता है और क्या नहीं। इस तरह संविधान उस समाज को नैतिक पहचान भी देता है।

अधिकतर संविधान कुछ मूलभूत अधिकारों की रक्षा करते हैं और ऐसी सरकारें संभव बनाते हैं जो किसी न किसी रूप में लोकतांत्रिक होती हैं। लेकिन राष्ट्रीय पहचान की अवधारणा अलग-अलग संविधानों में अलग-अलग होती है। जहाँ जर्मनी के संविधान ने ‘जर्मन नस्ल’ को नागरिकता की अभिव्यक्ति दी है, वहाँ भारतीय संविधान ने जातीयता या नस्ल को नागरिकता के आधार के रूप में मान्यता नहीं दी है। विभिन्न राष्ट्रों में देश की केन्द्रीय सरकार और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सम्बन्धों को लेकर विभिन्न अवधारणाएँ होती हैं। यह सम्बन्ध उस देश की राष्ट्रीय पहचान बनाते हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. निम्नलिखित में से कौनसा समानता के सिद्धान्त का उल्लंघन करता है।
(अ) प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार है।
(ब) केवल श्वेत लोगों को ही एक डिब्बे में यात्रा करने की अनुमति है।
(स) स्त्रियों को नौकरियों में मातृत्व अवकाश प्रदान किया गया है।
(द) अनुसूचित जाति के लोगों को नौकरियों में आरक्षण दिया गया है।
उत्तर:
(ब) केवल श्वेत लोगों को ही एक डिब्बे में यात्रा करने की अनुमति है।

2. निम्नलिखित में से कौनसा तर्क समानता की सकारात्मक विभेदीकरण, विशेषकर आरक्षण की नीति का समर्थन करता है।
(अ) यह मनमाने तरीके से समाज के अन्य वर्गों को समान व्यवहार के अधिकार से वंचित करती है।
(ब) यह भी एक तरह का भेदभाव है।
(स) यह वंचित समूहों के अवसर की समानता के अधिकार को व्यावहारिक बनाती है।
(द) यह जातिगत पूर्वाग्रहों को और मजबूत कर समाज को विभाजित करती है ।
उत्तर:
(स) यह वंचित समूहों के अवसर की समानता के अधिकार को व्यावहारिक बनाती है।

3. निम्नलिखित में से कौनसी विभेदक बरताव की मांग समानता के सिद्धान्त को यथार्थपरक नहीं बनाती है।
(अ) विकलांगों को सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ढलान वाले रास्तों की मांग
(ब) रात में कॉल सेंटर में काम करने वाली महिला को कॉल सेंटर आते-जाते समय विशेष सुरक्षा की मांग
(स) श्वेत लोगों के लिए पृथक् से विश्राम गृह बनाने की मांग
(द) कामकाजी महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर बालबाड़ी की मांग
उत्तर:
(स) श्वेत लोगों के लिए पृथक् से विश्राम गृह बनाने की मांग

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

4. निम्नलिखित में कौनसा कथन समानता को दर्शाता है।
(अ) वर्तमान में विश्व में लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ‘ लागू किया जा चुका है।
(ब) दुनिया के 50 सबसे अमीर आदमियों की सामूहिक आमदनी दुनिया के 50 करोड़ सबसे गरीब लोगों की सामूहिक आमदनी के बराबर है।
(स) दुनिया की 40 प्रतिशत गरीब जनसंख्या का दुनिया की कुल आमदनी में हिस्सा केवल 5 प्रतिशत है, जबकि 5 प्रतिशत अमीर लोग दुनिया की 40 प्रतिशत आमदनी पर नियंत्रण करते हैं।
(द) अपने देश में हम आलीशान आवासों के साथ-साथ झोंपड़पट्टियां भी देखते हैं।
उत्तर:
(अ) वर्तमान में विश्व में लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ‘ लागू किया जा चुका है।

5. निम्नलिखित में किस प्रकार की समानता के अभाव में स्वतंत्रता प्रभावहीन हो जाती है?
(अ) नैतिक समानता
(ब) प्राकृतिक समानता
(स) धार्मिक समानता
(दं) आर्थिक समानता
उत्तर:
(दं) आर्थिक समानता

6. जाति एवं रंगभेद विरोधी आन्दोलन मांग करता है।
(अ) राजनीतिक समानता की
(ब) सामाजिक समानता की
(स) राष्ट्रीय समानता की
(द) धार्मिक समानता की
उत्तर:
(ब) सामाजिक समानता की

7. ” समानता स्वतंत्रता की शत्रु नहीं, उसकी एक आवश्यक शर्त है।” यह कथन है।
(अ) प्लेटो का
(ब) अरस्तू का
(स) आर. एस. टोनी का
(द) लार्ड एक्टन का
उत्तर:
(स) आर. एस. टोनी का

8. “र्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक भ्रम है।” यह कथन है।
(अ) प्रो. जोड का
(ब) गांधी का
(स) प्लेटो का
(द) अरस्तू का
उत्तर:
(अ) प्रो. जोड का

9. छुआछूत विरोधी निम्नलिखित में से किस समानता के पक्षधर हैं।
(अ) नैतिक समानता
(ब) सामाजिक समानता
(स) राजनीतिक समानता
(द) आर्थिक समानता
उत्तर:
(ब) सामाजिक समानता

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

10. निम्नलिखित में कौनसा कथन ठीक है?
(अ) पूर्ण समानता केवल प्रजातांत्रिक व्यवस्था में ही संभव है।
(ब) पूर्ण समानता केवल तानाशाही शासन में संभव है।
(स) पूर्ण समानता असंभव है।
(द) पूर्ण समानता केवल संसदीय शासन में ही संभव है।
उत्तर:
(स) पूर्ण समानता असंभव है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. समानता का दावा है कि सभी ………………. समान महत्त्व और सम्मान पाने योग्य हैं।
उत्तर:
मनुष्य

2. फ्रांसीसी क्रांतिकारियों का नारा था – स्वतंत्रता, ……………….. और भाईचारा।
उत्तर:
समानता

3. लोगों में उनकी विभिन्न क्षमताओं, प्रतिभा और उनके अलग-अलग चयन के कारण …………………. पैदा होती हैं।
उत्तर:
प्राकृतिक

4. समाज में अवसरों की असमानता होने से ………………… असमानताएँ पैदा होती हैं।
उत्तर:
समाजजनित

5. ……………… असमानताएँ विशेषाधिकार जैसी असमानताओं को बढ़ावा देती हैं।
उत्तर:
आर्थिक

निम्नलिखित में से सत्य/ असत्य कथन छाँटिये

1. उदारवाद स्त्री – पुरुष के समान अधिकारों का पक्ष लेने वाला राजनीतिक सिद्धान्त है।
उत्तर:
असत्य

2. नारीवाद के अनुसार स्त्री-पुरुष असमानता ‘पितृसत्ता’ का परिणाम है।
उत्तर:
सत्य

3. उदारवादी मानते हैं कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ एक-दूसरे से अनिवार्यत: जुड़ी होती हैं।
उत्तर:
असत्य

4. मार्क्स का मानना था कि खाईनुमा असमानताओं का बुनियादी कारण महत्त्वपूर्ण आर्थिक संसाधनों का निजी स्वामित्व है।
उत्तर:
सत्य

5. समानता की प्राप्ति के लिए जरूरी है कि सभी निषेध या विशेषाधिकारों का अन्त किया जाये।
उत्तर:
सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. फ्रांसीसी क्रांति
2. साझी मानवता
3. प्राकृतिक असमानताएँ
4. समाजजनित असमानताएँ
5. नारीवादी
उत्तर:
(अ) सभी मनुष्य समान सम्मान एवं परवाह के हकदार
(ब) अवसरों की असमानता का परिणा
(स) स्त्री-पुरुष के समान अधिकारों के पक्षधर
(द) जन्मजात विशिष्टताओं और योग्यताओं का परिणाम
(य) स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का नारा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समानता के कोई दो आयाम लिखो।
उत्तर:

  1. राजनीतिक समानता
  2. सामाजिक समानता।

प्रश्न 2.
समानता का नैतिक आदर्श क्या है?
उत्तर:
समानता का नैतिक आदर्श है कि समान मानवता के कारण सभी मनुष्य समान महत्त्व और सम्मान पाने के योग्य हैं।

प्रश्न 3.
सामाजिक समानता का अर्थ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सामाजिक समानता का तात्पर्य है। समाज से विशेषाधिकारों का अन्त होना तथा समाज में सभी व्यक्तियों का व्यक्ति होने के नाते समान महत्व होना।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 4.
प्राकृतिक समानता से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
प्राकृतिक समानता से आशय है कि प्राकृतिक रूप से सभी मनुष्य बराबर हैं।

प्रश्न 5.
अवसरों की समानता से क्या आशय है?
उत्तर:
प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसरों का मिलना ही अवसरों की समानता

प्रश्न 6.
भारत के प्रमुख समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने कौनसी पाँच तरह की असमानताओं का उल्लेख किया?
उत्तर:
समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने

  1. स्त्री-पुरुष असमानता,
  2. रंग आधारित असमानता,
  3. जातिगत असमानता,
  4. आर्थिक असमानता तथा
  5. कुछ देशों का अन्य पर औपनिवेशिक शासन की असमानता का उल्लेख किया।

प्रश्न 7.
सामाजिक समानता की स्थापना के लिए नागरिकों का दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
सामाजिक समानता की स्थापना हेतु नागरिकों का दृष्टिकोण उदार एवं व्यापक होना चाहिए।

प्रश्न 8.
समाजवादी राज्यों में समानता के किस रूप पर विशेष बल दिया जाता है?
उत्तर:
आर्थिक समानता पर।

प्रश्न 9.
समाज में आर्थिक एवं सामाजिक विषमताएँ बढ़ने पर क्या परिणाम होगा?
उत्तर:
अमीर वर्ग गरीब वर्ग का तथा उच्च वर्ग निम्न वर्ग का शोषण करने लगेगा।

प्रश्न 10.
स्त्री-पुरुष के समान अधिकारों का पक्ष लेने वाला राजनीतिक सिद्धान्त कौनसा है?
उत्तर:
नारीवाद स्त्री-पुरुष के समान अधिकारों का पक्ष लेने वाला राजनीतिक सिद्धान्त है।

प्रश्न 11.
नारीवाद के अनुसार स्त्री-पुरुष असमानता किसका परिणाम है?
उत्तर:
नारीवाद के अनुसार स्त्री पुरुष असमानता पितृसत्ता का परिणाम है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 12.
समानता का हमारा आत्मबोध क्या कहता है?
उत्तर:
समानता का हमारा आत्मबोध यह कहता है कि साझी मानवता के कारण सभी मनुष्य बराबर सम्मान के हकदार हैं।

प्रश्न 13.
राज्य के समाज के सबसे वंचित सदस्यों की मदद करने के कोई दो तरीके लिखिये।
उत्तर:

  1. आरक्षण
  2. कम उम्र से ही विशेष सुविधायें प्रदान करना।

प्रश्न 14.
कुछ सामाजिक संस्थाएँ और राजसत्ता लोगों में किस प्रकार की असमानता कायम रखती हैं?
उत्तर:
बहुत सी सामाजिक संस्थाएँ और राजसत्ता लोगों में पद, धन, हैसियत या विशेषाधिकार की असमानता कायम रखती हैं।

प्रश्न 15.
18वीं सदी के उत्तरार्द्ध में फ्रांसीसी क्रांति में क्रांतिकारियों का क्या नारा था?
उत्तर:
18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुई फ्रांसीसी क्रांति में ‘स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा’ फ्रांसीसी क्रांतिकारियों का नारा था।

प्रश्न 16.
स्पष्ट करें कि स्वतंत्रता तथा समानता परस्पर विरोधी नहीं हैं?
उत्तर:
स्वतंत्रता तथा समानता दोनों का उद्देश्य व्यक्ति के विकास, सुविधाएँ व उसके व्यक्तित्व के विकास से जुड़ा है, इसलिए यह विरोधी नहीं है।

प्रश्न 17.
20वीं सदी में समानता की मांग कहाँ और किसके द्वारा उठायी गयी थी?
उत्तर:
20वीं सदी में समानता की मांग एशिया और अफ्रीका के उपनिवेश विरोधी स्वतंत्रता संघर्षों के दौरान महिलाओं और दलित समूहों द्वारा उठायी गयी थी।

प्रश्न 18.
आज भी विश्व में किस प्रकार की असमानताएँ व्याप्त हैं?
उत्तर:
आज भी विश्व में धन-सम्पदा, अवसर, कार्य-स्थिति और शक्ति की भारी असमानताएँ व्याप्त हैं।

प्रश्न 19.
हम असमानता के किन आधारों को अस्वीकार करते हैं?
उत्तर:
हम असमानता के जन्म सम्बन्धी आधारों; जैसे धर्म, नस्ल, जाति या लिंग आदि, को अस्वीकार करते हैं।

प्रश्न 20.
प्राकृतिक असमानताएँ लोगों में किस कारण पैदा होती हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक असमानताएँ लोगों में उनकी विभिन्न क्षमताओं, प्रतिभा और उनके अलग-अलग चयन के कारण पैदा होती हैं।

प्रश्न 21.
समार्जजनित असमानताएँ किस कारण पैदा होती हैं?
उत्तर:
समाजजनित असमानताएँ समाज में अवसरों की असमानता होने या किसी समूह का दूसरे के द्वारा शोषण किये जाने से पैदा होती हैं।

प्रश्न 22.
असमानता को समाप्त करने के लिए किन्हीं दो सकारात्मक कार्यवाहियों का उल्लेख करें।
उत्तर:
वंचित समुदायों के लिए छात्रवृत्ति और होस्टल जैसी सुविधाओं पर वरीयता के आधार पर खर्च करना तथा नौकरियों व शैक्षिक संस्थाओं में उनके प्रवेश की विशेष व्यवस्था करना।

प्रश्न 23.
सकारात्मक कार्यवाही के रूप में विशेष सहायता को किस प्रकार का उपाय माना गया है? उत्तर- इसे एक निश्चित अवधि तक चलने वाला तदर्थ उपाय माना गया है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समान लोगों के साथ समान व्यवहार का अर्थ बताइये
अथवा
समानता के आदर्श से क्या आशय है?
उत्तर:
समानता के आदर्श का आशय है। साझी मानवता के कारण सभी मनुष्य समान व्यवहार के हकदार हैं; लेकिन इसका अभिप्राय व्यवहार के सभी तरह के अन्तरों का उन्मूलन नहीं है, बल्कि यह है कि हमें जो अवसर प्राप्त होते हैं, वे जन्म या सामाजिक परिस्थितियों से निर्धारित नहीं होने चाहिए।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 2.
समानता का राजनैतिक आदर्श क्या है?
उत्तर:
एक राजनैतिक आदर्श के रूप में समानता की अवधारणा उन विशिष्टताओं पर बल देती है जिसमें सभी मनुष्य रंग, लिंग, वंश या राष्ट्रीयता के अन्तर के बाद भी साझेदार होते हैं। जैसे’ मानवता के प्रति अपराध’ सभी के लिए समान हैं।

प्रश्न 3.
समानता का नैतिक आदर्श क्या है?
उत्तर:
समानता का नैतिक आदर्श यह है कि हर धर्म ईश्वर की श्रेष्ठतम रचना के रूप में प्रत्येक मनुष्य के समान महत्त्व की घोषणा करता है। समान मानवता के कारण सभी मनुष्य समान महत्त्व और सम्मान पाने के योग्य हैं।

प्रश्न 4.
प्राकृतिक असमानता और सामाजिक असमानता में क्या अन्तर है?
उत्तर:
प्राकृतिक असमानताएँ लोगों की जन्मगत विशिष्टताओं और योग्यताओं का परिणाम मानी जाती हैं, जबकि सामाजिक असमानताएँ वे हैं जिन्हें समाज ने पैदा किया है, जो समाजजनित हैं।

प्रश्न 5.
राजनैतिक समानता से क्या आशय है?
उत्तर:
राजनैतिक समानता से आशय है। समाज के सभी नागरिकों को कुछ मूल अधिकार, जैसे—मतदान का अधिकार, कहीं भी आने-जाने, संगठन बनाने और अभिव्यक्ति तथा धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता आदि प्राप्त हों।

प्रश्न 6.
सामाजिक समानता क्या है?
उत्तर:
सामाजिक समानता: सामाजिक समानता से आशय यह है कि समाज के विभिन्न समूह और समुदायों के लोगों के पास समाज में उपलब्ध साधनों और अवसरों को पाने का बराबर और उचित मौका हो। समाज में सभी सदस्यों के जीवनयापन के लिए अन्य चीज़ों के अतिरिक्त पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा, अच्छी शिक्षा पाने का अवसर, उचित पोषक आहार व न्यूनतम वेतन जैसी कुछ न्यूनतम चीजों की गारण्टी दी गई हो।

प्रश्न 7.
समानता को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
समानता को परिभाषित करना आसान नहीं है। कुछ विचारकों के अनुसार समानता से आशय प्रत्येक व्यक्ति के साथ समान व्यवहार करने से है। लेकिन हर स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के साथ एक समान व्यवहार करना संभव नहीं है। प्रकृति ने भी सभी व्यक्तियों को सभी तरह से एक समान नहीं बनाया है। इस प्रकार समानता का अर्थ है- जन्म, लिंग, रंग, जाति तथा वंश पर आधारित भेदभाव के बिना सभी लोगों के व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसरों की उपलब्धि।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 8.
” साझी मानवता के कारण सभी मनुष्य बराबर सम्मान और परवाह के हकदार हैं।” इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
इस कथन का आशय यह है कि समान मानवता के कारण सभी मनुष्य समान महत्त्व और सम्मान पाने के योग्य हैं। लेकिन लोगों से बराबर सम्मान का व्यवहार करने का अर्थ यह आवश्यक नहीं है कि हमेशा एक जैसा व्यवहार किया जाये। कोई भी समाज अपने सभी सदस्यों के साथ सभी स्थितियों में पूर्णतया एक समान बरताव नहीं करता और न ही यह संभव है। समाज के सहज कार्य-व्यापार के लिए कार्य का विभाजन आवश्यक है। अलग-अलग काम, अलग- अलग लोगों को अलग-अलग महत्त्व व लाभ दिलाता है। व्यवहार का यह अन्तर न केवल स्वीकार्य है, बल्कि आवश्यक भी है। समानता के समान व्यवहार में यह बात भी निहित है।

प्रश्न 9.
आर्थिक समानता से क्या आशय है?
उत्तर:
आर्थिक समानता: आर्थिक समानता से आशय है कि समाज के लोगों में धन-दौलत व आय की समानता हो। लेकिन समाज में धन-दौलत या आय की पूरी समानता संभवत: कभी विद्यमान नहीं रही। आज अधिकतर लोकतंत्र लोगों को समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं, ताकि आवश्यक प्रयासों द्वारा कोई भी समाज में अपनी स्थिति को सुधार सके। लेकिन किसी समाज में कुछ खास वर्ग के लोग पीढ़ियों से बेशुमार धन-दौलत तथा इससे हासिल होने वाली सत्ता का उपयोग करते हैं, तो समाज अत्यधिक धनी और अत्यधिक निर्धन दो वर्गों में बंट जायेगा। ऐसी स्थिति में आर्थिक समानता से आशय है समान अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ आवश्यक संसाधनों पर जनता का नियंत्रण कायम करके या अन्य उपाय करके आर्थिक असमानता की खाइयों को कम करके समान अवसर की उपलब्धता को व्यावहारिक भी बनाना।

प्रश्न 10.
समानता के महत्त्व का संक्षिप्त में वर्णन करो।
उत्तर:
समानता व्यक्ति एवं समाज दोनों के लिए अत्यधिक उपयोगी है। इसके बिना अशान्ति एवं अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। समानता के अभाव में स्वतंत्रता भी निरर्थक होती है। उदाहरण के लिए आर्थिक समानता होने पर ही राजनीतिक स्वतन्त्रता का सही अर्थों में उपयोग किया जा सकता है। समानता के बिना कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर सकता है। समानता का दावा है कि समान मानवता के कारण सभी मनुष्य समान महत्त्व और सम्मान पाने योग्य हैं । समानता की अवधारणा एक राजनीतिक आदर्श के रूप में उन विशिष्टताओं पर जोर देती है जिसमें सभी मनुष्य रंग, लिंग, वंश या राष्ट्रीयता के फर्क के बावजूद साझेदार होते हैं।

प्रश्न 11.
अवसरों की समानता से क्या आशय है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
अवसरों की समानता: अवसरों की समानता से यह आशय है कि सभी मनुष्य अपनी दक्षता और प्रतिभा को विकसित करने के लिए तथा अपने लक्ष्यों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समान अधिकार और समान अवसरों के हकदार हैं। इसका आशय यह है कि समाज में लोग अपनी पसंद और प्राथमिकताओं के मामलों में अलग हो सकते हैं, उनकी प्रतिभा और योग्यताओं में भी अन्तर हो सकता है और इस कारण कुछ लोग अपने चुने हुए क्षेत्रों में बाकी लोगों से ज्यादा सफल हो सकते हैं, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी चीजों की उपलब्धता में असमानता नहीं होनी चाहिए। इस असमानता के चलते अवसरों की समानता व्यावहारिक नहीं हो सकती।

प्रश्न 12.
समानता को लोकतंत्र की आधारशिला क्यों कहा गया है?
उत्तर:
समानता लोकतंत्र की आधारशिला है क्योंकि लोकतंत्र की स्थापना के लिए राजनीतिक समानता का होना अति आवश्यक है। राजनीतिक समानता के अन्तर्गत समाज के सभी सदस्यों को समान नागरिकता प्रदान करना है। समान नागरिकता अपने साथ कुछ मूल अधिकार, जैसे मतदान का अधिकार, कहीं भी आने-जाने, संगठन बनाने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता लाती है। ये ऐसे अधिकार हैं, जो नागिरकों को अपना विकास करने और राज्य के कामकाज में हिस्सा लेने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक माने जाते हैं।

अतः स्पष्ट है कि समानता लोकतंत्र की आधारशिला है। दूसरे, समानता के अभाव में स्वतंत्रता का भी कोई मूल्य नहीं। यदि सभी को राजनीतिक स्वतंत्रता मिल जाये, लेकिन आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक असमानता के कारण शोषणकारी स्थितियाँ बनी रहें तो राजनीतिक स्वतंत्रता अर्थात् लोकतंत्र निरर्थक हो जायेगा। अतः लोकतंत्र के स्थायित्व के लिए राजनैतिक समानता के साथ-साथ आर्थिक समानता भी आवश्यक है।

प्रश्न 13.
समानता के विभिन्न प्रकार कौन-कौनसे हैं ? स्पष्ट करो।
उत्तर:
विभिन्न विचारकों और विचारधाराओं ने समानता के तीन प्रकारों को रेखांकित किया है। ये निम्न हैं।

  1. राजनीतिक समानता: सभी सदस्यों को समान नागरिकता प्रदान करना, वयस्क मताधिकार, कहीं भी आने-जाने, संगठन बनाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार नागरिकों को समान रूप से प्राप्त होते हैं। इस प्रकार राजनीतिक समानता न्यायपूर्ण और समतावादी समाज के गठन के लिए एक महत्त्वपूर्ण घटक है।
  2. सामाजिक समानता: सामाजिक समानता का आशय अवसरों की समानता देने से है। इसका उद्देश्य विभिन्न समूह और समुदाय के लोगों के पास उपलब्ध साधनों और अवसरों को पाने का बराबर और उचित मौका हो।
  3. आर्थिक समानता: आर्थिक समानता से आशय है। समाज के सदस्यों और वर्गों के बीच धन, सम्पत्ति और आय की अत्यधिक भिन्नता न हो।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 14.
समानता क्या है? समानता का नैतिक और राजनैतिक आदर्श क्या है? समझाइये।
उत्तर:
समानता का अर्थ: समानता से यह आशय हैं कि सभी मनुष्य अपनी दक्षता और प्रतिभा को विकसित करने के लिए तथा अपने लक्ष्यों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समान अधिकार और अवसरों के हकदार हैं समानता का नैतिक और राजनैतिक आदर्श समानता एक शक्तिशाली नैतिक और राजनैतिक आदर्श के रूप में मानव समाज को प्रेरित और निर्देशित करती रही है। नैतिक आदर्श के रूप में समानता की बात सभी आस्थाओं और धर्मों में समाविष्ट है। हर धर्म ईश्वर की रचना के रूप में प्रत्येक मनुष्य के समान महत्त्व की घोषणा करता है। समानता की अवधारणा एक राजनैतिक आदर्श के रूप में उन विशिष्टताओं पर जोर देती है जिसमें तमाम मनुष्य रंग, लिंग, वंश या राष्ट्रीयता के फर्क के बाद भी साझेदार होते हैं। इस प्रकार नैतिक और राजनैतिक आदर्श के रूप में समानता का दावा है कि समान मानवता के कारण सभी मनुष्य समान महत्त्व और सम्मान पाने योग्य हैं।

प्रश्न 15.
क्या समानता का मतलब व्यक्ति से हर स्थिति में एक समान बरताव करना है?
उत्तर:
समानता का हमारा आत्मबोध कहता है कि साझी मानवता के कारण सभी मनुष्य बराबर सम्मान और समान व्यवहार के हकदार हैं। लेकिन लोगों से समान सम्मान और समान व्यवहार करने का मतलब आवश्यक नहीं कि हमेशा एक जैसा व्यवहार किया जाये। कोई भी समाज अपने सभी सदस्यों के साथ सभी स्थितियों में पूर्णतया एक समान बरताव नहीं करता। समाज के सहज कार्य-व्यापार के लिए कार्य का विभाजन जरूरी है। अलग-अलग काम और अलग-अलग लोगों को महत्त्व और लाभ भी अलग-अलग मिलता है।

कई बार इस व्यवहार में यह अन्तर न केवल स्वीकार्य होता है, बल्कि आवश्यक भी होता है। लेकिन कई बार लोगों से अलग तरह का व्यवहार इसलिए किया जाता है कि उनका जन्म किसी खास धर्म, नस्ल, जाति या लिंग में हुआ है। असमान व्यवहार के ये आधार समानता के सिद्धान्त में अस्वीकृत किये गयेहैं। लेकिन लोगों की आकांक्षाएँ और लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं और हो सकता है कि सभी को समान सफलता न मिले। समानता के आदर्श से जुड़े होने का यह अर्थ नहीं है कि सभी तरह के अन्तरों का उन्मूलन हो जाए। यहाँ हमारा अभिप्राय केवल इतना है कि हमसे जो व्यवहार किया जाता है और हमें जो भी अवसर प्राप्त होते हैं, वे जन्म या सामाजिक परिस्थितियों से निर्धारित नहीं होने चाहिए।

प्रश्न 16.
विभेदक बरताव द्वारा समानता से क्या आशय है?
उत्तर:
विभेदक बरताव द्वारा समानता:
समानता के सिद्धान्त को यथार्थ में बदलने के लिए औपचारिक समानता या कानून के समक्ष समानता आवश्यक तो है, लेकिन पर्याप्त नहीं। कभी-कभी यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोग समान अधिकारों का उपभोग कर सकें, उनसे अलग-अलग बरताव करना आवश्यक होता है। इस उद्देश्य से लोगों के बीच कुछ अन्तरों को ध्यान में रखना होता है । जैसे— विकलांगों की सार्वजनिक स्थानों पर विशेष दलान वाले रास्तों की मांग न्यायोचित होगी, क्योंकि इससे ही उन्हें सार्वजनिक भवनों में प्रवेश करने का समान अवसर मिल सकेगा। ऐसे अलग-अलग बरतावों को समानता को बढ़ावा देने वाले उपायों के रूप में देखा जाना चाहिए। इसी को विभेदक बरताव द्वारा समानता की स्थापना कहते हैं।

प्रश्न 17.
अवसरों की समानता बढ़ाने के लिए ‘सकारात्मक कार्यवाही’ के विचार को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
सकारात्मक कार्यवाही: कुछ देशों ने अवसरों की समानता बढ़ाने के लिए ‘सकारात्मक कार्यवाही’ की नीतियाँ अपनाई हैं। सकारात्मक कार्यवाही इस विचार पर आधारित है कि कानून द्वारा औपचारिक समानता स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। असमानताओं को मिटाने के लिए जरूरी होगा कि असमानता की गहरी खाइयों को भरने वाले अधिक सकारात्मक कदम उठाए जाएँ। इसीलिए सकारात्मक कार्यवाही की अधिकतर नीतियाँ अतीत की असमानताओं के संचयी दुष्प्रभावों को दुरुस्त करने के लिए बनाई जाती हैं। सकारात्मक कार्यवाही के रूप- सकारात्मक कार्यवाही के कई रूप हो सकते हैं। यथा

  1. इसमें वंचित समुदायों के लिए छात्रवृत्ति और हॉस्टल जैसी सुविधाओं पर वरीयता के आधार पर खर्च करने की नीति हो सकती है।
  2. इसमें नौकरियों और शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए विशेष व्यवस्था करने की नीतियाँ हो सकती हैं। सकारात्मक कार्यवाही के रूप में विशेष सहायता को एक निश्चित समय अवधि तक चलने वाला तदर्थ उपाय माना गया है। इसके पीछे मान्यता यह है कि विशेष बरताव इन समुदायों को वर्तमान वंचनाओं से उबरने में सक्षम बनाएगा और फिर ये अन्य समुदायों से समानता के आधार पर प्रतिस्पर्द्धा कर सकेंगे।

प्रश्न 18.
कुछ लोगों का तर्क है कि असमानता प्राकृतिक है। इस सम्बन्ध में आप अपने विचार लिखिये।
उत्तर:
कुछ लोगों का तर्क है कि असमानता प्राकृतिक है। लेकिन मैं इस मत से सहमत नहीं हूँ। असमानता प्राकृतिक और सामाजिक दोनों हैं। प्राकृतिक असमानताएँ लोगों में उनकी विभिन्न क्षमताओं, योग्यताओं, विशिष्टताओं तथा उनके अलग-अलग चयन के कारण पैदा होती हैं। प्राकृतिक असमानताएँ न्यायोचित होती हैं तथा इन्हें बदला नहीं जा सकता। दूसरी तरफ सामाजिक असमानताएँ सामाजिक विशेषाधिकारों, अवसरों की असमानता तथा शोषण के कारण पैदा होती हैं। सामाजिक असमानताएँ समाजजनित होती हैं, ये न्यायोचित नहीं होतीं तथा इन्हें बदला जा सकता है।

प्रश्न 19.
समाज में समानता की स्थापना हेतु सुझाव दीजिये।
उत्तर:
किसी समाज में समानता की स्थापना हेतु निम्न प्रयास किये जाने चाहिए

  1. राजनीतिक समानता की स्थापना: किसी भी लोकतांत्रिक समाज में समानता की स्थापना हेतु सभी व्यक्तियों को समान नागरिकता प्रदान करनी चाहिए। इससे राजनीतिक और कानूनी समानता की स्थापना होगी । राजनीतिक समानता न्यायपूर्ण और समतावादी समाज के गठन के लिए एक महत्त्वपूर्ण घटक है।
  2. अवसरों की समानता प्रदान करना: समाज में सभी सदस्यों के जीवन-यापन के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा, अच्छी शिक्षा पाने के अवसर, उचित पोषक आहार व न्यूनतम वेतन जैसी चीजों की गारण्टी होनी चाहिए। राज्य को इस दिशा में विशेष प्रयत्न करना चाहिए कि सभी लोगों को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए अवसरों की समानता हो।
  3. विभेदक बरताव द्वारा समानता: लोग समान अधिकारों का उपभोग कर सकें, इसके लिए विशिष्ट लोगों के लिए विभेदक बरताव की व्यवस्था भी सरकार को करनी चाहिए। जैसे विकलांगों के लिए ढलान वाले रास्तों का होना।
  4. सकारात्मक कार्यवाही या नीतियाँ: अवसरों की समानता को बढ़ाने के लिए सरकार को वंचितों के लिए विशिष्ट नीतियाँ भी बनानी चाहिए। जैसे—भारत में आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 20.
‘राजनीतिक समानता आर्थिक समानता के बिना अधूरी है।’ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
राजनीतिक समानता आर्थिक समानता के बिना अधूरी है क्योंकि।

  1. आर्थिक असमानता के कारण समाज धनी और निर्धन वर्गों में बँट जाता है। गरीब वर्ग के पास चुनाव लड़ने के साधनों की कमी होती है। अतः वे अपनी निर्धनता के कारण अपने इस राजनीतिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। फलतः धनी वर्ग ही राजनीतिक सत्ता का उपभोग करता रहता है।
  2. प्राय: यह भी देखने में आया है कि राजनीतिक दलों एवं मीडिया पर भी गरीब वर्ग की अपेक्षा धनी वर्ग का नियंत्रण रहता है। इस प्रकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी वे समान उपभोग नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 21.
‘समानता और स्वतंत्रता में क्या सम्बन्ध है?’ स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
समानता और स्वतंत्रता में संबंध – समानता और स्वतंत्रता एक-दूसरे की पूरक हैं। ‘समानता के बिना स्वतन्त्रता अधूरी है।’ अतः दोनों में घनिष्ठ सम्बन्ध हैं। यथा

  1. स्वतंत्रता और समानता का विकास साथ- साथ हुआ है।
  2. दोनों का उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास हेतु उचित वातावरण का निर्माण करना है।
  3. स्वतन्त्रता का उपभोग करने के लिए समानता परमावश्यक है।
  4. समानता और स्वतंत्रता दोनों लोकतंत्र के आधार – स्तंभ हैं।

प्रश्न 22.
उदारवादी समाज में संसाधनों और लाभांशों के वितरण का सबसे कारगर उपाय क्या मानते हैं?
उत्तर:
उदारवादी समाज में संसाधनों और लाभांशों के वितरण का सबसे कारगर तथा उचित तरीका प्रतिद्वन्द्विता के सिद्धान्त को मानते हैं। उनका मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष परिस्थितियों में लोगों के बीच प्रतिस्पर्द्धा ही समाज में लाभांशों के वितरण का सबसे न्यायपूर्ण और कारगर उपाय होती है। जब तक प्रतिस्पर्द्धा स्वतन्त्र और खुली होगी, असमानताओं की खाइयाँ नहीं बनेंगी और लोगों को अपनी प्रतिभा और प्रयासों का लाभ मिलता रहेगा।

प्रश्न 23.
राममनोहर लोहिया की सप्त क्रांतियाँ क्या थीं?
उत्तर:
भारत में प्रमुख समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया ने पाँच तरह की असमानताओं की पहचान की, जिनके खिलाफ एक साथ लड़ना होगा। ये पाँच असमानताएँ थीं

  1. स्त्री-पुरुष असमानता
  2. चमड़ी के रंग पर आधारित असमानता
  3. जातिगत असमानता
  4. कुछ देशों का अन्य पर औपनिवेशिक शासन
  5. आर्थिक असमानता। लोहिया का कहना था कि इस असमानताओं में से प्रत्येक की अलग-अलग जड़ें हैं और उन सबके खिलाफ अलग-अलग लेकिन एक साथ संघर्ष छेड़ने होंगे। उनके लिए उक्त पाँच असमानताओं के खिलाफ संघर्ष का अर्थ था पाँच क्रांतियाँ। उन्होंने इस सूची में दो और क्रांतियों को शामिल किया
  6. व्यक्तिगत जीवन पर अन्यायपूर्ण अतिक्रमण के खिलाफ नागरिक स्वतंत्रता के लिए क्रांति तथा
  7. अहिंसा के लिए, सत्याग्रह के पक्ष में शस्त्र त्याग के लिए क्रांति । ये ही सप्तक्रांतियां थीं, जो लोहिया के अनुसार समाजवाद का आदर्श हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 24.
भारत द्वारा अपनाई गयी सकारात्मक विभेदीकरण, विशेषकर आरक्षण की नीति के विरोध में आलोचक क्या तर्क देते हैं?
उत्तर:
आरक्षण की नीति के विरोध में तर्क- आरक्षण की नीति के आलोचक इसके विरोध में समानता के सिद्धान्त का सहारा लेते हुए निम्नलिखित तर्क देते हैं।

  1. वंचितों को उच्च शिक्षा या नौकरियों में आरक्षण या कोटा देने का कोई भी प्रावधान अनुचित है, क्योंकि यह मनमाने तरीके से समाज के अन्य वर्गों को समान व्यवहार के अधिकार से वंचित करता है।
  2. आरक्षण भी एक तरह का भेदभाव है जबकि समानता की माँग है कि सब लोगों से बिल्कुल एक तरह से व्यवहार हो।
  3. जब हम जाति के आधार पर अंतर करते हैं, तब हम जातिगत और नस्लगत पूर्वाग्रहों को और भी मजबूत कर रहे होते हैं।

प्रश्न 25.
नारीवाद क्या है?
उत्तर:
नारीवाद: नारीवाद स्त्री-पुरुष के समान अधिकारों का पक्ष लेने वाला राजनीतिक सिद्धान्त है। वे स्त्री या पुरुष नारीवादी कहलाते हैं, जो मानते हैं कि स्त्री-पुरुष के बीच की अनेक असमानताएँ न तो नैसर्गिक हैं और न ही आवश्यक। नारीवादियों का मानना है कि इन असमानताओं को बदला जा सकता है और स्त्री-पुरुष एक समतापूर्ण जीवन जी सकते हैं।

प्रश्न 26.
‘नारीवादियों के अनुसार स्त्री-पुरुष असमानता का मूल कारण पितृसत्ता है।’ इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पितृसत्ता से आशय एक ऐसी सामाजिक, आर्थिक-सांस्कृतिक व्यवस्था से है, जिसमें पुरुष को स्त्री से अधिक महत्त्व और शक्ति दी जाती है। इसके अनुसार पुरुष और स्त्री प्रकृति से भिन्न हैं और यही भिन्नता समाज में उनकी असमान स्थिति को न्यायोचित ठहराती है। लेकिन नारीवादियों का कहना है कि स्त्री-पुरुष के बीच जैविक विभेद तो प्राकृतिक है, लेकिन लैंगिकता ( स्त्री-पुरुष के बीच सामाजिक भूमिकाओं का विभेद) समाजजनित है।

पितृसत्ता ने श्रम का विभाजन कुछ ऐसा किया है जिसमें स्त्री घरेलू किस्म के कार्यों के लिए जिम्मेदार है तो पुरुष की जिम्मेदारी सार्वजनिक और बाहरी दुनिया के कार्यक्षेत्र से है। नारीवादियों का मत है कि निजी और सार्वजनिक के बीच यह विभेद और सामाजिक लैंगिकता की असमानता के सभी रूपों को दूर किया जा सकता है। स्पष्ट है कि स्त्री-पुरुष असमानता का मूल कारण पितृसत्ता है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समानता क्या है? समानता के आयामों को स्पष्ट कीजिये।
अथवा
समानता का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके प्रकारों की व्याख्या कीजिये।
उत्तर: समानता का अर्थ समानता की अवधारणा में यह निहित है कि सभी मनुष्य अपनी दक्षता और प्रतिभा को विकसित करने के लिए तथा अपने लक्ष्यों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समान अधिकार और अवसरों के हकदार हैं। समान अवसरों की समानता को व्यावहारिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी चीजों की उपलब्धता में अत्यधिक असमानताएँ न हों तथा जन्म, धर्म, नस्ल, जाति एवं लिंग के आधार पर लोगों के साथ कोई भेद-भावपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाता हो और न ही अवसरों की उपलब्धता में इनके आधार पर व्यक्तियों के बीच कोई भेदभाव किया जाता हो। समानता के आयाम विभिन्न विचारकों और विचारधाराओं ने समानता के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तीन आयामों को रेखांकित किया है। यथा

1. राजनीतिक समानता:
लोकतांत्रिक समाजों में सभी सदस्यों को समान नागरिकता प्रदान करना राजनैतिक समानता में शामिल है। समान नागरिकता अपने साथ कुछ मूलभूत अधिकार, जैसे मतदान का अधिकार, कहीं भी आने- जाने, संगठन बनाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता लाती है। ये ऐसे अधिकार हैं, जो नागरिकों को अपना विकास करने और राज्य के काम-काज में हिस्सा लेने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक माने जाते हैं। अतः ये अधिकार राजनीतिक समानता के अंग हैं। लेकिन ये समान औपचारिक अधिकार हैं, जिन्हें संविधान और कानूनों द्वारा सुनिश्चित किया गया है। राजनीतिक समानता न्यायपूर्ण और समतावादी समाज के गठन के लिए एक महत्त्वपूर्ण घटक है, लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है क्योंकि सभी नागरिकों को समान अधिकार देने वाले देशों में भी काफी असमानता विद्यमान हैं। ऐसी असमानताएँ प्रायः सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में नागरिकों को उपलब्ध संसाधनों और अवसरों की भिन्नता का परिणाम होती हैं। इसलिए प्राय: समान अवसर के लिए एक समान स्थितियों की माँग उठती है।

2. सामाजिक समानता:
राजनीतिक समानता या समान कानूनी अधिकार देना समानता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम था। राजनीतिक समानता की जरूरत उन बाधाओं को दूर करने में है जिन्हें दूर किए बिना लोगों का सरकार में अपनी बात रखने और उपलब्ध साधनों तक पहुँचना संभव नहीं होगा। लेकिन समानता के उद्देश्य की दूसरी आवश्यकता यह है कि विभिन्न समूह और समुदायों के लोगों के पास इन साधनों और अवसरों को पाने का बराबर और उचित मौका हो। इसके लिए यह आवश्यक है कि समाज में सभी सदस्यों के जीवनयापन के लिए अन्य चीजों के अतिरिक्त पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा, अच्छी शिक्षा पाने का अवसर, उचित पोषक आहार व न्यूनतम वेतन जैसी कुछ न्यूनतम चीजों की गारण्टी हो। इन सुविधाओं के अभाव में समाज के सभी सदस्यों के लिए समान शर्तों पर प्रतिस्पर्द्धा करना संभव नहीं होगा।

भारत में समान अवसरों के मद्देनजर एक विशेष समस्या कुछ सामाजिक रीति-रिवाजों से सामने आती है। देश के विभिन्न हिस्सों में औरतों को उत्तराधिकार का समान अधिकार नहीं मिलता, उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने से भी हतोत्साहित किया जाता है आदि। ऐसे मामलों में राज्य औरतों को समान कानूनी अधिकार प्रदान करके, शिक्षण या कुछ अन्य देशों में प्रवेश के लिए प्रोत्साहन जैसे उपाय करके अपनी भूमिका निभाता है। लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इन अधिकारों का प्रयोग करने वालों को समर्थन देकर भी राज्य अपनी भूमिका निभा सकता है।

3. आर्थिक समानता:
आर्थिक समानता से आशय समाज में धन-दौलत या आय की समानता का होना है। यह सही है कि समाज में धन- – दौलत या आय की पूरी समानता संभवत: कभी विद्यमान नहीं रही। आज अधिकतर लोकतंत्र लोगों को समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। यह माना जाता है कि समान अवसर कम से कम उन्हें अपनी हालत को सुधारने का मौका देते हैं जिनके पास प्रतिभा और संकल्प है। समान अवसरों के साथ भी असमानता बनी रह सकती है, लेकिन इसमें यह संभावना छुपी रहती है कि आवश्यक प्रयासों द्वारा कोई भी समाज में अपनी स्थिति बेहतर कर सकता है।

लेकिन समाज में अत्यधिक आर्थिक असमानताएँ भी नहीं होनी चाहिए। अगर किसी समाज में लोगों के कुछ खास वर्ग के लोग पीढ़ियों से बेशुमार धन-दौलत और इसके साथ हासिल होने वाली सत्ता का उपभोग करते हैं, तो समाज दो वर्गों – अत्यधिक धनी और विशेषाधिकार सम्पन्न वर्ग और अत्यधिक निर्धन और विशेषाधिकारविहीन वर्ग में बंट जाता है। ये आर्थिक असमानताएँ सामाजिक असमानताओं को बढ़ावा देती हैं। इसलिए ऐसी असमानताओं को दूर करने के लिए सरकार को सकारात्मक कार्यवाही की नीतियाँ बनानी चाहिए ताकि अत्यधिक आर्थिक असमानता को कम किया जा सके और अवसर की समानता को व्यावहारिक बनाया जा सके।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 2.
समाज में समानता की स्थापना के सम्बन्ध में मार्क्सवादी विचारधारा को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
मार्क्सवाद मार्क्सवाद हमारे समाज की एक प्रमुख राजनीतिक विचारधारा है। मार्क्स 19वीं सदी का एक प्रमुख विचारक था। उसके विचारों को मार्क्सवादी विचारधारा के रूप में जाना जाता है। उसके सामाजिक असमानता व समानता सम्बन्धी प्रमुख विचार निम्नलिखित हैं।

  1. आर्थिक संसाधनों का निजी स्वामित्व आर्थिक असमानता का प्रमुख कारक: समाज में अत्यधिक असमानताओं का मूल कारण महत्त्वपूर्ण आर्थिक संसाधनों, जैसे। जल, जंगल, जमीन या तेल समेत अन्य प्रकार की सम्पत्ति का निजी स्वामित्व है। निजी स्वामित्व मालिकों के वर्ग को सिर्फ अमीर नहीं बनाता, बल्कि उन्हें राजनैतिक शक्ति भी प्रदान करता है। यह शक्ति उन्हें राज्य की नीतियों और कानूनों को प्रभावित करने में सक्षम बनाती हैं और वे लोकतांत्रिक सरकार के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।
  2. आर्थिक असमानताएँ सामाजिक असमानताओं का कारक हैं। मार्क्सवादी यह महसूस करते हैं कि आर्थिक असमानताएँ सामाजिक रुतबे या विशेषाधिकार जैसी अन्य तरह की सामाजिक असमानताओं को बढ़ावा देती हैं।
  3. समानता की स्थापना के लिए संसाधनों पर सार्वजनिक स्वामित्व आवश्यक: समाज में असमानता से निबटने के लिए हमें समान अवसर उपलब्ध कराने से आगे जाने और आवश्यक संसाधनों तथा अन्य तरह की सम्पत्ति पर जनता का नियंत्रण कायम करने और सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 3.
उदारवादी विचारधारा के समानता सम्बन्धी विचारों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
उदारवादी: उदारवादी विचारधारा आधुनिक युग की प्रमुख राजनैतिक विचारधारा है। समाज में समानता की स्थापना के सम्बन्ध में उदारवादी दृष्टिकोण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
1. प्रतिद्वन्द्विता के सिद्धान्त का समर्थन:
उदारवादी विचारक समाज में संसाधनों और लाभांश के वितरण के सर्वाधिक कारगर और उचित तरीके के रूप में प्रतिद्वन्द्विता के सिद्धान्त का समर्थन करते हैं। वे मानते हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष परिस्थितियों में लोगों के बीच प्रतिस्पर्द्धा ही समाज में लाभांशों के वितरण का सबसे न्यायपूर्ण और कारगर उपाय है। जब तक प्रतिस्पर्द्धा स्वतंत्र और खुली होगी असमानताओं की खाइयाँ नहीं बनेंगी और लोगों को अपनी प्रतिभा और प्रयासों का लाभ मिलता रहेगा।

उनका कहना है कि नौकरियों में नियुक्ति और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए चयन के उपाय के रूप में प्रतिस्पर्द्धा का सिद्धान्त सर्वाधिक न्यायोचित व कारगर है। उदाहरण के लिए, अपने देश में अनेक छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकन की आशा करते हैं, जबकि प्रवेश के लिए अत्यधिक कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है। समय-समय पर सरकार और अदालतों शैक्षणिक संस्थानों और प्रवेश परीक्षाओं का नियमन करने के लिए हस्तक्षेप किया है, ताकि प्रत्याशी को उचित और समान अवसर मिले, फिर भी कुछ को प्रवेश नहीं मिलता, लेकिन इसे सीमित सीटों के बंटवारे का निष्पक्ष तरीका माना जाता है।

2. राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक असमानताएँ अनिवार्यतः
एक-दूसरे से जुड़ी नहीं होतीं – उदारवादी उक्त तीनों असमानताओं को अनिवार्यतः एक-दूसरे से जुड़ी होने के सिद्धान्त पर सहमत नहीं हैं। इसलिए उनका मानना है कि इनमें से हर क्षेत्र की असमानताओं का निराकरण ठोस तरीके से करना चाहिए। इसलिए लोकतंत्र राजनीतिक समानता प्रदान करने में सहायक हो सकता है। लेकिन सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं के समाधान के लिए विविध सकारात्मक रणनीतियों की खोज करना भी आवश्यक है।

3. असमानता अपने आप में समस्या नहीं:
उदारवादियों के लिए असमानता अपने आप में समस्या नहीं है, बल्कि वे केवल ऐसी अन्यायी और गहरी असमानताओं को ही समस्या मानते हैं, जो लोगों को उनकी वैयक्तिक क्षमताएँ विकसित करने से रोकती हैं।

प्रश्न 4.
नारीवाद से आप क्या समझते हैं? स्त्री-पुरुष असमानता के सम्बन्ध में नारीवाद विचारों को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
नारीवाद: नारीवाद स्त्री-पुरुष के समान अधिकारों का पक्ष लेने वाला राजनीतिक सिद्धान्त है। वे स्त्री या पुरुष नारीवादी कहलाते हैं जो मानते हैं कि स्त्री – पुरुष के बीच की अनेक असमानताएँ न तो नैसर्गिक हैं और न ही आवश्यक। नारीवादियों का मानना है कि इन असमानताओं को बदला जा सकता है और स्त्री-पुरुष एक समतापूर्ण जीवन जी सकते हैं। असमानता के सम्बन्ध में प्रमुख नारीवादी विचार स्त्री-पुरुष असमानता व समानता के सम्बन्ध में नारीवादी सिद्धान्त की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं।

1. स्त्री-पुरुष असमानता पितृसत्ता का परिणाम है:
नारीवाद के अनुसार स्त्री-पुरुष असमानता ‘पितृसत्ता’ का परिणाम है। पितृसत्ता से आशय एक ऐसी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से है, जिसमें पुरुष को स्त्री से अधिक महत्त्व और शक्ति दी जाती है। पितृसत्ता के अनुसार पुरुष और स्त्री प्रकृति से भिन्न हैं और यही भिन्नता समाज में उनकी असमान स्थिति को न्यायोचित ठहराती है। नारीवादी पितृसत्ता की इस धारणा से सहमत नहीं हैं।

2. स्त्री-पुरुष के बीच जैविक ( लिंग ) भेद और सामाजिक भूमिका सम्बन्धी भेद में अन्तर है।
नारीवादी विचारक स्त्री-पुरुष के बीच जैविक विभेद और उनके बीच सामाजिक भूमिकाओं के विभेद के बीच अन्तर करने पर बल देते हैं। उनका कहना है कि जैविक विभेद (लिंग-भेद ) प्राकृतिक और जन्मजात होता है जबकि दोनों के बीच सामाजिक भूमिकाओं का भेद समाजजनित है। यह एक जीव विज्ञान का तथ्य है कि केवल औरत ही गर्भ धारण करके बालक को जन्म दे सकती है, लेकिन जीव विज्ञान के तथ्य में यह निहित नहीं है कि जन्म देने के बाद केवल स्त्री ही बालक का लालन-पालन करे। इस प्रकार नारीवादियों ने यह स्पष्ट किया है कि स्त्री-पुरुष के बीच भूमिकाओं सम्बन्धी भेद प्राकृतिक नहीं बल्कि समाजजनित हैं।

3. घरेलू और बाह्य कार्यों के विभाजन की अस्वीकृति:
नारीवादियों का मत है कि पितृसत्ता ने ही ऐसा श्रम विभाजन किया है कि स्त्री निजी और घरेलू किस्म के कार्यों के प्रति जिम्मेदार है और पुरुष बाहरी कार्यों के प्रति । नारीवादी इस विभेद को अस्वीकार करते हुए कहते हैं कि अधिकतर स्त्रियाँ ‘ सार्वजनिक और बाहरी क्षेत्र’ में भी सक्रिय होती हैं । इसीलिए विश्व में स्त्रियाँ घर से बाहर अनेक क्षेत्रों में कार्यरत हैं और घरेलू कामकाज की पूरी जिम्मेदारी केवल स्त्रियों के कंधों पर है। नारीवादी इसे स्त्रियों के कंधों पर दोहरा बोझ बताते हैं। इस दोहरे बोझ के बावजूद स्त्रियों को ‘सार्वजनिक क्षेत्र के निर्णयों में ‘ना’ के बराबर महत्त्व दिया जाता है।

4. सामाजिक भूमिका सम्बन्धी लैंगिक असमानता के सभी रूपों को मिटाया जा सकता है:
नारीवादियों का मानना है कि निजी / सार्वजनिक के बीच यह विभेद और समाज या व्यक्ति द्वारा गढ़ी हुई भूमिका जनित लैंगिक असमानता के सभी रूपों को मिटाया जा सकता है तथा लिंग-सम्बन्धी समानता की स्थापना के लिए असमानता के इन रूपों को मिटाया जा सकता है और मिटाया जाना चाहिए।
कीजिए।

प्रश्न 5.
” आज समाज में हमारे चारों ओर समानता की बजाय असमानता अधिक नजर आती है। ” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समाज में व्याप्त असमानता: यद्यपि आज विश्व में समानता व्यापक रूप से स्वीकृत आदर्श है, जिसे अनेक देशों के संविधान और कानूनों में सम्मिलित किया गया है; तथापि विश्व समाज में हमारे चारों ओर समानता की बजाय असमानता अधिक नजर आती है। हम एक ऐसी जटिल दुनिया में रहते हैं जिसमें धन-संपदा, अवसर, कार्य स्थिति और शक्ति की भारी असमानता है। नीचे विश्व और हमारे देश के स्तर पर असमानता दर्शाने वाले कुछ आंकड़े दिये गये हैं-

  1. दुनिया के 50 सबसे अमीर आदमियों की सामूहिक आमदनी दुनिया के 40 करोड़ सबसे गरीब लोगों की सामूहिक आमदनी से अधिक है।
  2. दुनिया की 40 प्रतिशत गरीब जनसंख्या का दुनिया की कुल आमदनी में हिस्सा केवल 5 प्रतिशत है, जबकि 10 प्रतिशत अमीर लोग दुनिया की 54 प्रतिशत आमदनी पर नियंत्रण करते हैं।
  3. पहली दुनिया खासकर उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के अगड़े औद्योगिक देशों में दुनिया की जनसंख्या का 25 प्रतिशत हिस्सा रहता है, लेकिन दुनिया के 86 प्रतिशत उद्योग इन्हीं देशों में हैं और दुनिया की 80 प्रतिशत ऊर्जा इन्हीं देशों में इस्तेमाल की जाती है।
  4. इन अगड़े औद्योगिक देशों (उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के देशों) के निवासी भारत या चीन जैसी विकासशील देशों के निवासी की तुलना में कम से कम तीन गुना अधिक पानी, दस गुना ऊर्जा, तेरह गुना लोहा और इस्पात तथा 14 गुना कागज का उपभोग करता है।
  5. गर्भावस्था से जुड़े कारणों से मरने का खतरा नाइजीरिया के लिए 18 में से 1 मामले में है, जबकि कनाडा के लिए यह खतरा 8700 में से 1 मामले में है।
  6. जमीन से अंदर से निकालने वाले ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम और गैस) के जलने से दुनियाभर में जो कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, उसमें से पहली दुनिया के औद्योगिक देशों का हिस्सा दो-तिहाई है। अम्लीय वर्षा के लिए जिम्मेदार सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड का भी तीन-चौथाई हिस्सा इन्हीं देशों द्वारा उत्सर्जित होता है। ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले बहुत सारे उद्योगों को विकसित देशों से हटाकर विकासशील देशों में लगाया जा रहा है।
  7. अपने देश में हम आलीशान आवासों के साथ-साथ झोंपड़पट्टियाँ, विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस स्कूल और वातानुकूलित कक्षाओं के साथ-साथ पेयजल और शौचालय की सुविधा से विहीन स्कूल, भोजन की बर्बादी के साथ-साथ भुखमरी देख सकते हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 6.
प्राकृतिक और सामाजिक असमानताओं से आप क्या समझते हैं? इन दोनों के अन्तर को स्पष्ट कीजिये तथा दोनों के फर्क करने में आने वाली कठिनाइयों को भी स्पष्ट कीजिये।
अथवा
प्राकृतिक और सामाजिक असमानताओं से आप क्या समझते हैं? इन दोनों में अन्तर करना क्यों उपयोगी है तथा क्या इनके बीच के अन्तर को किसी समाज के कानून और नीतियों का निर्धारण करने में मापदण्ड के तौर पर उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर:
प्राकृतिक और सामाजिक असमानताएँ राजनीतिक सिद्धान्त में प्राकृतिक असमानताओं और समाजजनित असमानताओं में अन्तर किया जाता है। यथा प्राकृतिक असमानताएँ – प्राकृतिक असमानताएँ वे होती हैं जो लोगों में उनकी विभिन्न क्षमताओं, प्रतिभा और उनके अलग-अलग चयन के कारण पैदा होती हैं। समाजजनित (सामाजिक) असमानताएँ समाजजनित असमानताएँ वे होती हैं, जो समाज में अवसरों की असमानता होने या किसी समूह का दूसरे के द्वारा शोषण किये जाने से पैदा होती हैं। दोनों में प्रमुख अन्तर अग्रलिखित हैं।

  1. प्राकृतिक असमनताएँ लोगों की जन्मजात विशिष्टताओं और योग्यताओं का परिणाम होती हैं, जबकि सामाजिक असमानताओं को समाज ने पैदा किया है।
  2. प्राकृतिक असमानताओं को सामान्यतः बदला नहीं जा सकता जबकि सामाजिक असमानताओं को बदला जा सकता है।

दोनों असमानताओं में अन्तर करने की उपयोगिता प्राकृतिक और समाजमूलक असमानताओं में अन्तर करना इसलिए उपयोगी होता है क्योंकि इससे स्वीकार की जा सकने लायक और अन्यायपूर्ण असमानताओं को अलग-अलग करने में सहायता मिलती है। प्राकृतिक असमानताएँ जहाँ स्वीकार की जा सकने लायक होती हैं, वहीं समाजजनित असमानताएँ अन्यायपूर्ण होती हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। दोनों असमानताओं में अन्तर करने में आने वाली कठिनाइयाँ प्राकृतिक असमानताओं और सामाजिक असमानताओं में अन्तर करने में निम्नलिखित कठिनाइयाँ आती हैं।

1. दोनों में अन्तर हमेशा साफ और अपने आप स्पष्ट नहीं होता:
प्राकृतिक और सामाजिक असमानताओं में फर्क हमेशा साफ और अपने आप स्पष्ट नहीं होता। उदाहरण के लिए जब लोगों के व्यवहार में कुछ असमानताएँ लम्बे काल तक विद्यमान रहती हैं, तो वे हमें मनुष्य की प्राकृतिक विशेषताओं पर आधारित लगने लगती हैं। ऐसा लगने लगता है कि जैसे कि वे जन्मजात हों और आसानी से बदल नहीं सकतीं। जैसे औरतें अनादि काल से ‘अबला’ कही जाती थीं। उन्हें भीरु एवं पुरुषों से कम बुद्धि का माना जाता था, जिन्हें विशेष संरक्षण की जरूरत थी। इसलिए यह मान लिया गया था कि औरतों को समान अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत है। आज ऐसे सभी मानकों और मूल्यांकनों पर सवाल उठाये जा रहे हैं तथा इस असमानता को प्राकृतिक असमानता नहीं माना जा सकता। ऐसी ही अन्य अनेक धारणाओं पर अब सवाल उठाये जा रहे हैं।

2. प्राकृतिक मानी गयी कुछ असमानताएँ अब अपरिवर्तनीय नहीं रही हैं:
प्राकृतिक असमानता की एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये असमानताएँ अपरिवर्तनीय होती हैं। लेकिन प्राकृतिक मानी गयी कुछ असमानताएँ अब अपरिवर्तनीय नहीं रही हैं। उदाहरण के लिए, चिकित्सा विज्ञान और तकनीकी प्रगति ने विकलांग व्यक्तियों का समाज में प्रभावी ढंग से काम करना संभव बना दिया है। आज कम्प्यूटर नेत्रहीन व्यक्ति की मदद कर सकते हैं, पहियादार कुर्सी और कृत्रिम पाँव शारीरिक अक्षमता के निराकरण में सहायक हो सकते हैं।

कॉस्मेटिक सर्जरी से किसी व्यक्ति की शक्ल- सूरत बदली जा सकती है। आज अगर विकलांग लोगों को उनकी विकलांगता से उबरने के लिए जरूरी मदद और उनके कामों के लिए उचित पारिश्रमिक देने से इस आधार पर इनकार कर दिया जाए कि प्राकृतिक रूप से वे कम सक्षम हैं, तो यह अधिकतर लोगों को अन्यायपूर्ण लगेगा।

इन सब जटिलताओं के कारण प्राकृतिक और सामाजिक असमानताओं के बीच के अन्तर को किसी समाज के कानून और नीतियों का निर्धारण करने में मानदण्ड के रूप में उपयोग करना कठिन होता है। इसी कारण बहुत से सिद्धान्तकार अपने चयन से पैदा हुई असमानता और व्यक्ति के विशेष परिवार या परिस्थितियों में जन्म लेने से पैदा हुई असमानता में फर्क करते हैं तथा वे चाहते हैं कि परिवेश से जन्मी असमानता को न्यूनतम और समाप्त किया जाये।

प्रश्न 7.
हम समानता को किस प्रकार बढ़ावा दे सकते हैं?
अथवा
हम समानता की ओर कैसे बढ़ सकते हैं और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में असमानता को न्यूनतम कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:
हम समानता को बढ़ावा कैसे दे सकते हैं?
वर्तमान में इस विचार पर निरन्तर बहस जारी है कि समानता की ओर बढ़ने के लिए कौन-से सिद्धान्त और नीतियाँ आवश्यक हैं? समानता की ओर बढ़ने के लिए प्रमुख कदमों की विवेचना निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत की गई हैकीजिए।

1. औपचारिक समानता की स्थापना:
समानता लाने की दिशा में पहला कदम असमानता और विशेषाधिकार की औपचारिक व्यवस्था को समाप्त करना होगा। विश्व में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक असमानताओं को कुछ रीति-रिवाजों और कानूनी व्यवस्थाओं से संरक्षित रखा गया है। इनके द्वारा समाज के कुछ हिस्सों को सभी प्रकार के अवसरों और लाभों का आनंद उठाने से रोका जाता था। यथा

  1. बहुत सारे देशों में गरीब लोगों को मताधिकार से वंचित रखा जाता था।
  2. महिलाओं को बहुत सारे व्यवसाय और गतिविधियों में भाग लेने की इजाजत नहीं थी।
  3. भारत में जाति-व्यवस्था निचली जातियों को शारीरिक श्रम के अलावा कुछ भी करने से रोकती थी।
  4. कुछ देशों में केवल कुछ खास परिवारों के लोग ही सर्वोच्च पदों तक पहुँच सकते हैं।

समानता की प्राप्ति के लिए ऐसे सभी निषेधों व विशेषाधिकारों का अन्त किया जाना आवश्यक है। चूँकि ऐसी बहुत सी व्यवस्थाओं को कानून का समर्थन भी प्राप्त है, इसलिए यह आवश्यक है कि सरकार और कानून असमानतामूलक ऐसी व्यवस्थाओं को संरक्षण देना बंद करे। हमारे देश के संविधान में भी यही किया है। संविधान धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने का निषेध करता है तथा छुआछूत की प्रथा का भी उन्मूलन करता है। वर्तमान में लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में संविधान तथा सरकारें औपचारिक (कानूनी ) रूप से समानता के सिद्धान्त को स्वीकार कर चुकी हैं और इस सिद्धान्त को जाति, नस्ल, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना सभी नागरिकों को कानून के एक समान बर्ताव के रूप में समाहित किया है।

2. विभेदक बरताव द्वारा समानता:
समानता के सिद्धान्त को यथार्थ में बदलने के लिए औपचारिक समानता अर्थात् कानून के समक्ष समानता का सिद्धान्त पर्याप्त नहीं है। कभी-कभी लोग समान अधिकारों का उपभोग कर सकें, इसके लिए उनसे अलग बरताव करना भी आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, विकलांगों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर विशेष ढलान वाले रास्तों का होना, या रात में कॉल सेंटर में काम करने वाली महिला को कॉल सेंटर आते-जाते समय विशेष सुरक्षा की व्यवस्था करना आदि। इससे उनके काम के समान अधिकार की रक्षा हो सकेगी। ऐसे विभेदक बरतावों को समानता की कटौती के रूप में नहीं बल्कि समानता को बढ़ावा देने वाले उपायों के रूप में देखा जाना चाहिए।

3. सकारात्मक कार्यवाही की नीतियाँ:
कुछ देशों ने अवसरों की समानता बढ़ाने के लिए ‘सकारात्मक कार्यवाही’ की नीतियाँ अपनाई हैं। इसी संदर्भ में हमारे देश में आरक्षण की नीति अपनाई गई है। सकारात्मक कार्यवाही इस विचार पर आधारित है कि कानून द्वारा औपचारिक समानता स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। असमानताओं को मिटाने के लिए असमानता की गहरी खाइयों को भरने वाले अधिक सकारात्मक कदम उठाए जाएँ। इसीलिए सकारात्मक कार्यवाही की अधिकतर नीतियाँ अतीत की असमानताओं को संचयी दुष्प्रभावों को दुरुस्त करने के लिए बनाई जाती हैं।

सकारात्मक कार्यवाही के अनेक रूप हो सकते हैं। इसमें वंचित समुदायों के लिए छात्रवृत्ति और हॉस्टल सुविधाओं पर वरीयता के आधार पर खर्च करने से लेकर नौकरियों और शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए विशेष व्यवस्था करने तक की नीतियाँ हो सकती हैं। सकारात्मक कार्यवाही के रूप में विशेष सहायता को एक निश्चित समय अवधि तक चलने वाला तदर्थ उपाय माना गया है। इसके पीछे मान्यता यह है कि विशेष बरताव इन समुदायों को वर्तमान वंचनाओं से उबरने में सक्षम बनायेगा और फिर ये अन्य समुदायों से समानता के आधार पर प्रतिस्पर्द्धा कर सकेंगे। निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि समानता के विषय में सोचते हुए हमें प्रत्येक व्यक्ति को बिल्कुल एक जैसा मानने और प्रत्येक व्यक्ति को मूलतः समान मानने में अन्तर करना चाहिए।

मूलतः समान व्यक्तियों को विशेष स्थितियों में अलग-अलग बरताव की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन ऐसे सभी मामलों में सर्वोपरि उद्देश्य समानता को बढ़ावा देना ही होना चाहिए। एक खास स्थिति में विशेष बरताव जरूरी है या नहीं, इसके लिए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक समूह समान अधिकारों का उसी प्रकार आनंद उठा सके जैसा कि शेष समाज। यह विशेष बरताव वर्चस्व या शोषण की नई संरचनाओं को जन्म न दे अथवा यह समाज में विशेषाधिकार और शक्ति को फिर से स्थापित करने वाला एक प्रभावशाली उपकरण न बने। संक्षेप में, विशेष बरताव का उद्देश्य और औचित्य एक न्यायपरक और समतामूलक समाज को बढ़ावा देने के माध्यम के अतिरिक्त कुछ और नहीं है।