JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. गाड़ी द्वारा चली गयी दूरी बतायी जाती है-
(a) स्पीडोमीटर से
(b) ओडोमीटर से
(c) मेनोमीटर से
(d) सीस्मोग्राफ़ से।
उत्तर:
(b) ओडोमीटर से।

2. त्वरण का S.I. मात्रक है-
(a) मी/से.²
(b) मी/से.
(c) किग्रा.मी/से.
(d) न्यूटन/मीटर।
उत्तर:
(a) मी/से.²

3. किसी वस्तु की गति के लिए दूरी-समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा है। यह ग्राफ प्रदर्शित करता है-
(a) एक समान गति
(b) समान वेग
(c) त्वरित गति
(d) विरामावस्था।
उत्तर:
(d) विरामावस्था।

4. 36 किमी/घण्टा की चाल से चल रही कार 10 मिनट में कितनी दूरी तय करेगी-
(a) 6 किमी
(b) 36 किमी
(c) 3.6 किमी
(d) 0.36 किमी।
उत्तर:
(a) 6 किमी।

5. वेग परिवर्तन की दर को कहते हैं-
(a) विस्थापन
(b) चाल
(c) त्वरण
(d) संवेग।
उत्तर:
(c) त्वरण।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

6. दिए गए सूत्र में रिक्त स्थान भरिए-
S = ut + ……………………..
(a) at
(b) 2as
(c) at²
(d) \(\frac { 1 }{ 2 }\)at²
उत्तर:
(d) \(\frac { 1 }{ 2 }\)at²

7. किसी वस्तु की गति के लिए चाल समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा है। यह ग्राफ प्रदर्शित करता है।
(a) एक समान त्वरित गति
(b) एक समान चाल
(c) असमान त्वरित गति
(d) विरामावस्था।
उत्तर:
(b) एक समान चाल।

8. कोई कार 54 किमी/घण्टा की चाल से चल रही है। 5 सेकण्ड पश्चात् उसकी चाल 72 किमी/ घण्टा हो जाती है उसका त्वरण होगा-
(a) 2मी/से
(c) मी/से²
(b) 4मी/से²
(d) \(\frac { 1 }{ 2 }\) मी/से²।
उत्तर:
(c) 1 मी/से²।

9. विरामावस्था से गतिशील होकर किसी पिण्ड का त्वरण 8 ms-2 हो जाता है। पिण्ड द्वारा 1 सेकण्ड में चली गई दूरी होगी-
(a) 6m
(b) 4m
(c) 2m
(d) &m
उत्तर:
(b) 4m।

10. एक कार 54 किमी / घण्टा की चाल से गतिमान है, मी/से में इसकी चाल है-
(a) 20 मी/से.
(b) 194.4 मी/से.
(c) 15 मी/से.
(d) 18 मी/से.।
उत्तर:
(c) 15 मी / से।

11. A से B तक तय की गयी दूरी है-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 1
(a) 2r
(b) 2πr
(c) πr
(d) \(\frac { πr }{ 2 }\)
उत्तर:
(c) πr

12. प्रश्न 11 वाले चित्र में बिन्दु A से B तक का विस्थापन है-
(a) 2r
(b) 2 πr
(c) πr
(d) शून्य।
उत्तर:
(a) 2r।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

13. 20 किमी / घण्टा की चाल से गतिशील किसी कार की चाल 6 सेकण्ड में 60 किमी / घण्टा हो जाती है।
कार का त्वरण है-
(a) 240 किमी / घण्टा²
(b) 24 किमी / घण्टा²
(c) 2400 किमी / घण्टा²
(d) \(\frac { 1 }{ 240 }\) किमी/ घण्टा²।
उत्तर:
(c) 2400 किमी / घण्टा²।

14. विस्थापन का SI मात्रक है-
(a) m/s
(b) m/s²
(c) km/h
(d) m.
उत्तर:
(d) m.

15. निम्नांकित ग्राफ दर्शाता है-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 2
(a) वस्तु स्थिर है
(b) वस्तु स्थिर वेग से गतिमान है।
(c) वस्तु का वेग एक समान दर से परिवर्तित हो रहा है
(d) वस्तु का त्वरण असमान है।
उत्तर:
(b) वस्तु स्थिर वेग से गतिमान है।

रिक्त स्थान भरो-

  1. दूरी एक ……………………. राशि है।
  2. विस्थापन एक ……………………. राशि है।
  3. विस्थापन का अंकीय मान ……………………. होता है जब प्रारम्भिक और अंतिम स्थिति एक हो ।
  4. यदि वस्तु की गति समय के साथ लगातार घटती है तो वह ……………………. गति कहलाती है।

उत्तर:

  1. अदिश
  2. सदिश
  3. शून्य
  4. मंदन।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. प्रथम समीकरण(क) v² – u² = 2as
2. द्वितीय समीकरण(ख) v = u + at
3. तृतीय समीकरण(ग) s – u t = \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²

उत्तर:
1. (ख) v = u + at
2. (ग) s – u t = \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
3. (क) v² – u² = 2as

सत्य / असत्य-

  1. मंदन की स्थिति में त्वरण ऋणात्मक होता है।
  2. यदि वस्तु की गति समय के साथ लगातार घटती है तब वह त्वरण गति कहलाती है।
  3. विस्थापन शून्य नहीं हो सकता।
  4. दूरी का मान शून्य नहीं हो सकता।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
चाल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु द्वारा किसी भी दिशा में इकाई समय में चली गयी दूरी को चाल कहते हैं।

प्रश्न 2.
एक वस्तु एक समान वेग से चल रही है। इसका त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 3.
क्या किसी गतिमान वस्तु का औसत वेग शून्य हो सकता है ?
उत्तर:
हाँ, जब उसका किसी दिये गये समय में विस्थापन शून्य हो।

प्रश्न 4.
किसी वस्तु की चाल नियत है। क्या उसमें त्वरण हो सकता है ? उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
चाल नियत होने पर भी वस्तु में त्वरण हो सकता है, यदि वह वृत्तीय गति में है जैसे कृत्रिम उपग्रहों की पृथ्वी के चारों ओर गति, इलेक्ट्रॉन की नाभिक के चारों ओर गति ।

प्रश्न 5.
एक वस्तु द्वारा तय की गई दूरी समय के अनुक्रमानुपाती है, उसकी चाल कैसी होगी?
उत्तर:
पिण्ड की चाल एक समान होगी।

प्रश्न 6.
एक गेंद वायु में ऊपर फेंकी गई गेंद का त्वरण तथा वेग सबसे ऊपर वाले भाग में क्या होगा?
उत्तर:
त्वरण 9.8m/s² है जो नीचे की ओर कार्य करता है तथा उसका वेग शून्य होगा।

प्रश्न 7.
वेग की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
विस्थापन परिवर्तन की दर वेग कहलाती है।

प्रश्न 8.
एक समान त्वरित गति का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी पर स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु की गति।

प्रश्न 9.
मन्दन किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऋणात्मक त्वरण को मन्दन कहते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

प्रश्न 10.
विरामावस्था अवस्था किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऐसी अवस्था जब वस्तु की चाल शून्य हो, विरामावस्था कहलाती है।

प्रश्न 11.
चाल तथा वेग का SI मात्रक क्या है?
उत्तर:
मीटर / सेकण्ड।

प्रश्न 12.
एकसमान वृत्तीय गति से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एकसमान वृत्तीय गति यदि कोई वस्तु समान समयान्तराल में वृत्तीय पथ पर समान दूरी तय करती है तो वस्तु की गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है।

प्रश्न 13.
कोई वस्तु 10 मीटर/सेकण्ड के वेग से गति कर रही है, यदि उसकी गति एकर शन हो तो 10 सेकण्ड पश्चात् उसका वेग क्या होगा?
उत्तर:
चूँकि वस्तु की गति एकसमान है; अतः उसका वेग अपरिवर्तित रहेगा अर्थात् 10 सेकण्ड पश्चात् भी उसका वेग 10 मीटर / सेकण्ड ही रहेगा।

प्रश्न 14.
एक कार का दूरी-समय ग्राफ निम्नांकित चित्र में प्रदर्शित है। बताइए-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 3
(i) ग्राफ का कौन-सा भाग कार की विरामावस्था को प्रदर्शित करता है?
(ii) AB भाग में कार के वेग की प्रकृति क्या है?
(iii) कौन-सा भाग कार के वापस लौटने को प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
(i) A से B तक का भाग विरामावस्था को प्रदर्शित करता है।
(ii) OA भाग में कार का वेग एकसमान है।
(iii) BC भाग कार के वापस लौटने को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित में से उस ग्राफ को पहचानिए जो – (a) एकसमान मंदन, (b) शून्य त्वरण की गति को प्रदर्शित करता है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 4
उत्तर:
(a) ग्राफ C में चाल एकसमान रूप से घटती है; अतः यह एकसमान मन्दन को प्रदर्शित करता है।
(b) ग्राफ B में वस्तु स्थिर चाल से गतिमा है; अत: यह ग्राफ शून्य त्वरण की गति को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 16.
एक गेंद मेज पर गति करती हुई उसके किनारे पहुँचती है और नीचे गिर पड़ती है। नीचे गिरते समय इसके द्वारा तय किए गए मार्ग को प्रदर्शित कीजिए। इस पथ का नाम भी बताइए।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 5
उत्तर:
गेंद का पथ परवलयाकार होगा।

प्रश्न 17.
वेग समय ग्राफ का ढलान क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
वेग समय ग्राफ का ढलान (slope) त्वरण को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 18.
अगर किसी वस्तु का वेग समय ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर हो, तो इससे क्या निष्कर्ष निकलता है?
उत्तर:
पिण्ड का वेग एक समान है अर्थात् पिण्ड का त्वरण शून्य है।

प्रश्न 19.
कोई वस्तु समान समय में समान दूरी तय करती है। इसके दूरी-समय ग्राफ का ढलान क्या होगा?
उत्तर:
एक सीधी सरल रेखा होगी जो x अक्ष के साथ कोई कोण बनाती है।

प्रश्न 20.
कोई वस्तु समान समय अन्तरालों में समान दूरी तय करती है। इसके चाल-समय ग्राफ का ढलान क्या होगा?
उत्तर:
यह एक सीधी रेखा होगी जो समय अक्ष के समान्तर होती है।

प्रश्न 21.
यदि किसी वस्तु का विस्थापन समय ग्राफ एक सीधी रेखा हो जो समय के साथ एक कोण बनाती है। गति की प्रकृति कैसी होगी ?
उत्तर:
एकसमान गति।

प्रश्न 22.
यदि किसी वस्तु का विस्थापन समय ग्राफ समय अक्ष के समान्तर हो तो वस्तु की गति कैसी होगी?
उत्तर:
वस्तु विराम अवस्था में है।

प्रश्न 23.
वस्तु की गति के बारे में आप क्या बता सकते हैं, यदि
(a) उसका विस्थापन समय ग्राफ एक सीधी रेखा है।
(b) उसका वेग समय ग्राफ एक सीधी रेखा है।
उत्तर:
(a) एक समान वेग
(b) एक समान त्वरण।

प्रश्न 24.
S.I. पद्धति में त्वरण का मात्रक लिखिए।
उत्तर:
S. I. पद्धति में त्वरण का मात्रक मीटर/सेकण्डर² है।

प्रश्न 25.
निम्नलिखित गति के समीकरण में खाली स्थान भरिए – s = ……………… + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
उत्तर:
गति का समीकरण s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²

प्रश्न 26.
गति के समीकरण v² + ……………… + 2as को पूर्ण कीजिए।
उत्तर:
गति का समीकरण v² = u² + 2 a s

प्रश्न 27.
समय-दूरी ग्राफ का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
समय-दूरी ग्राफ का ढाल चाल को प्रदर्शित करता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

प्रश्न 28.
यदि समय विस्थापन ग्राफ, समय- अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा में हो तो वेग तथा त्वरण के मान होंगे?
उत्तर:
वेग तथा त्वरण दोनों के मान शून्य होंगे।

प्रश्न 29.
समय वेग ग्राफ का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
समय वेग ग्राफ का ढाल त्वरण को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 30.
समय वेग ग्राफ में त्वरण किसके बराबर होता है?
उत्तर:
ग्राफ रेखा के ढाल के बराबर होता है।

प्रश्न 31.
क्या संलग्न चित्र 8.30 में प्रदर्शित किसी वस्तु का समय दूरी ग्राफ सही है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 6
उत्तर:
ग्राफ सही नहीं है। इस ग्राफ में एक ही समय (जैसे-4 सेकण्ड) पर वस्तु को दो अलग-अलग स्थानों पर दिखाया गया है जो कि असम्भव है।

प्रश्न 32.
एक वस्तु त्रिज्या के वृत्त पर गति कर रही है। उसके द्वारा चली दूरी व विस्थापन कितना होगा?
(i) आधे चक्कर के बाद
(ii) पूरा चक्कर हो जाने पर।
उत्तर:
(i) आधा चक्कर पूरा हो जाने पर चली दूरी तथा विस्थापन 21 होगा।
(ii) चक्कर पूरा हो जाने पर चली दूरी 2xr तथा विस्थापन शून्य होगा।

प्रश्न 33.
गति का समीकरण लिखिए जबकि गतिशील वस्तु में त्वरण न होकर मन्दन हो रहा है।
उत्तर:
मन्दन होने पर त्वरण ऋणात्मक होगा। अतः गति के समीकरण निम्नवत् होंगे-

  • v = u – at,
  • s = ut – \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
  • v² – u² – 2 as.

प्रश्न 34.
एक वस्तु एकसमान वेग से चल रही है, गति के समीकरणों का स्वरूप बताइए।
उत्तर:
जब वस्तु एकसमान वेग से चल रही है तो त्वरण a = 0:

  • v = u.
  • s = ut
  • v² = u²

प्रश्न 35.
कोई वस्तु विरामावस्था से अचर त्वरण से चलना प्रारम्भ करती है, तो गति के समीकरणों का स्वरूप बताइए।
उत्तर:
जब वस्तु विरामावस्था से चल रही है, तो u = 0

  • v = at
  • s = \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
  • v² = 2 as

प्रश्न 36.
गति के समीकरण v = u + at का अर्थ समझाइए।
उत्तर:
गति के समीकरण v = u + at का अर्थ है-
t समय पश्चात् वस्तु का अन्तिम वेग प्रारम्भिक वेग + त्वरण समय।

प्रश्न 37.
वृत्तीय गति किसे कहते हैं?
उत्तर:
वृत्तीय गति – जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर गति करती है तो उस वस्तु की गति वृत्तीय गति कहलाती है।

लघुत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एकसमान गति व असमान गति को दूरी समय आरेख से समझाइए।
उत्तर:
समान गति यदि कोई वस्तु निश्चित समय अन्तराल में समान दूरी तय करती है, तो वस्तु की गति को एकसमान गति कहते हैं।

उदाहरण – यदि हम एक कार से सड़क पर एकसमान चाल से गतिमान हैं, तो माना हम निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त करते हैं-

किलोमीटर पत्थर की संख्या (दूरी)समय (सेकण्ड में)
मूल पत्थर0
1 किमी पत्थर100 सेकण्ड
2 किमी पत्थर200 सेकण्ड
3 किमी पत्थर300 सेकण्ड
4 किमी पत्थर400 सेकण्ड
5 किमी पत्थर500 सेकण्ड

इन प्रेक्षणों के द्वारा ग्राफ खींचने पर चित्र 8.31 के समान ग्राफ प्राप्त होता है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 7
इस ग्राफ से स्पष्ट है कि दूरी व समय के बीच एक सीधी रेखा प्राप्त हुई है अतः कार की गति एकसमान गति है दूरी समय आलेख का ढाल (झुकाव ) वस्तु की चाल को प्रदर्शित करता है।

असमान गति- यदि किसी वस्तु द्वारा समान समय अन्तरालों में तय की गयी दूरियाँ असमान हों तो वस्तु की गति असमान गति कहलाती है।

उदाहरण के लिए यदि कोई कार असमान चाल से चल रही है तो कार द्वारा समान समय अन्तरालों में तय की गयी दूरियाँ भिन्न-भिन्न होंगी।

समयदूरी
0 सेकण्ड में0 मीटर
1 सेकण्ड में6 मीटर
2 सेकण्ड में14 मीटर
3 सेकण्ड में21 मीटर
4 सेकण्ड में30 मीटर
5 सेकण्ड में40 मीटर

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 8
चित्र से स्पष्ट है कि कार द्वारा समान समय अन्तरालों में तय की गयी दूरी समान नहीं है अतः यह गति असमान गति है। इसे त्वरित गति भी कहते हैं।

प्रश्न 2.
हम किसी वस्तु की स्थिति कैसे निरूपित करते हैं?
उत्तर:
किसी वस्तु की स्थिति निरूपित करने के लिए आवश्यक है-
(i) एक नियत बिन्दु जिसे ‘मूल’ अथवा ‘निर्देश बिन्दु’ कहते हैं।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 9

(ii) एक ‘निश्चित रेखा’ जो कि मूल बिन्दु से होकर जाती है और जिसे ‘सन्दर्भ अक्ष’ भी कहते हैं। अतः किसी वस्तु की स्थिति को व्यक्त करने के लिए आवश्यक है-

  • वस्तु की मूल बिन्दु 0 से दूरी तथा
  • ‘सन्दर्भ अक्ष’ और वस्तु एवं मूल बिन्दु को मिलाने वाली रेखा के बीच स्थित कोण

चित्र 8.33 में एक वस्तु की स्थिति बिन्दु P पर है जो कि मूल बिन्दु पर 6 मीटर दूर उत्तर:पूर्व दिशा में है।

प्रश्न 3.
अदिश राशि क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अदिश राशि – वे भौतिक राशियाँ जिनको व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है, अदिश राशि कहलाती हैं। दूरी, चाल, समय, क्षेत्रफल आदि अदिश राशियाँ हैं।

प्रश्न 4.
सदिश राशियाँ क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे भौतिक राशियाँ जिनको दर्शाने के लिए दिशा तथा परिमाण दोनों की आवश्यकता होती है, ‘सदिश राशियाँ’ कहलाती हैं। विस्थापन, वेग, बल आदि सदिश राशियाँ हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से अदिश तथा सदिश राशियाँ छाँटो-
तापक्रम, संहति, आयतन चाल, विस्थापन, समय, दूरी, वेग, विद्युत आवेश, त्वरण, बल, संवेग, कार्य भार तथा ऊर्जा, घनत्व।
उत्तर:

  • अदिश- तापक्रम, संहति, आयतन, चाल, समय, दूरी, विद्युत आवेश, घनत्व, कार्य और ऊर्जा।
  • सदिश – विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग तथा भार।

प्रश्न 6.
चलन या गमन क्या है? जीव-जन्तुओं में कौन-कौन सी गति देखी जा सकती है? उदाहरण दो।
उत्तर:
जीव-जन्तुओं की गतिशीलता को चलन या गमन कहते हैं। जीव-जन्तुओं की निम्नलिखित गतियाँ होती हैं-

  • हाथी अथवा गाय जैसे जन्तु, अपने पैरों के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।
  • जन्तु एक स्थान पर स्थिर रहते हुए भी अपने अंगों, जैसे- कान, पूँछ, सिर को हिला सकते हैं।
  • साँप, छिपकली जैसे जन्तु रेंगते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।
  • तितली हवा में उड़ती है और मछली पानी में तैरती है।

प्रश्न 7.
जीव-जन्तुओं की तुलना में पेड़-पौधों की गति स्वाभाविक क्यों नहीं होती? पेड़-पौधों की गति के उदाहरण दो।
उत्तर:
जीव-जन्तुओं की तुलना में पेड़-पौधों की गति का प्रेक्षण सरलता से नहीं किया जा सकता क्योंकि कुछ ही पेड़-पौधे बहुत धीमी गति से गतिशील होते हैं। जैसे-

  • पौधे की जड़ें मिट्टी में नीचे की ओर तथा उसकी कोंपलें ऊपर की ओर गति करती हैं।
  • पेड़ की पत्तियाँ और नई शाखाएँ निरन्तर उत्पन्न होती और बढ़ती रहती हैं।
  • फूलों के खिलने तथा फलों के बढ़ने के कारण भी गति होती है।

प्रश्न 8.
सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं की गतियों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
पेड़-पौधों तथा जीव-जन्तुओं में गति स्वत: ही होती है अर्थात् उनकी गति स्वतः गति है। लेकिन निर्जीव वस्तुओं में गति के लिए किसी बाह्य कारक की आवश्यकता होती है। जैसे- पंखे को चलाने के लिए विद्युत की आवश्यकता होती है और स्कूटर को गति देने के लिए पेट्रोल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 9.
गणितीय विधि से एकसमान त्वरण के अन्तर्गत ऋजुरेखीय गति करती किसी वस्तु के लिए गति के समीकरणों का निगमन कीजिए।
उत्तर:
गणितीय विधि द्वारा गति के समीकरण स्थापित करना
(i) गति का प्रथम समीकरण माना, किसी गतिशील वस्तु का प्रारम्भिक वेग 1 व एकसमान त्वरण है। माना सेकण्ड में दूरी चलने के पश्चात् वस्तु का वेग हो जाता है, तब
1 सेकण्ड में वस्तु के वेग में वृद्धि = a
t सेकण्ड में वस्तु के वेग में वृद्धि = a x t
अतः t सेकण्ड पश्चात् वस्तु का वेग प्रारम्भिक वेग + t सेकण्ड में वस्तु के वेग वृद्धि
या v = u + at

(ii) गति का द्वितीय समीकरण-माना, किसी गतिशील वस्तु का प्रारम्भिक वेग u तथा एकसमान त्वरण a है माना, t समय पश्चात् वस्तु का अन्तिम वेग हो जाता है; अतः
1 सेकण्ड में वस्तु के वेग में वृद्धि = a
गति के प्रारम्भ होने के 1 सेकण्ड बाद वस्तु का वेग = (u + a)
गति समाप्त होने के 1 सेकण्ड पहले वस्तु का वेग =(v – a)
अतः वस्तु का औसत वेग = \(\frac{(u+a)(v-a)}{2}=\left(\frac{u+v}{2}\right)\)
इसी प्रकार, गति प्रारम्भ होने के 2 सेकण्ड बाद वस्तु का वेग = (u+2a)
गति समाप्त होने के 2 सेकण्ड पहले वस्तु का वेग = (v – 2a )
अतः वस्तु का औसत वेग = \(\frac{(u+2 a)(v-2 a)}{2}\)
= \(\frac { u+v }{ 2 }\)
इस प्रकार, त्वरण के नियत होने पर वस्तु का औसत वेग सदैव ही \(\frac { 1 }{ 2 }\) (M+ v) रहता है अतः हम यह मान सकते हैं कि सेकण्ड तक वस्तु इसी औसत वेग \(\frac { 1 }{ 2 }\) (M + v) से चलती रही है।
अत: t सेकण्ड में वस्तु द्वारा चली गई दूरी,
s = वस्तु का औसत वेग x समय = \(\frac { 1 }{ 2 }\) (u + v) × t
परन्तु गति के प्रथम समीकरण v = u + at से,
अतः वस्तु द्वारा चली गई दूरी 5 = \(\frac { u+u+at }{ 2 }\) x t
= \(\frac{2 u t+a t^2}{2}\)
s = at + \(\frac { 1 }{ 2 }\)at²

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

(iii) गति का तृतीय समीकरण गति के प्रथम समीकरण v = u + at का दोनों ओर का वर्ग करने पर,
v² = (u + at)² = u² + 2u at + a² t²
= u² + 2a (ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\)at²)
परन्तु गति के द्वितीय समीकरण ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\)at² = s से,
v² = u² + 2 as

प्रश्न 10.
चाल- समय ग्राफ से किसी वस्तु द्वारा चली गई दूरी किस प्रकार ज्ञात करोगे?
उत्तर:
चाल-समय ग्राफ से किसी वस्तु द्वारा चली गई दूरी ज्ञात करना – यदि समय को X- अक्ष पर तथा चाल को Y-अक्ष पर लेकर ग्राफ खींचा जाए तो इसे वस्तु का चाल – समय ग्राफ कहते हैं। इस ग्राफ से हम किसी भी समयान्तराल में वस्तु द्वारा चली गई दूरी ज्ञात कर सकते हैं।

यदि वस्तु की चाल नियत है तो समय-चाल ग्राफ चाल – समय के समान्तर एक सरल रेखा होगी चित्र – 8.34)।
यदि ∆t = (t2 – t1 ) समय में वस्तु द्वारा चली गई दूरी ∆s (s2 – s1) है तो
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 10
वस्तु की चाल (v) = \(\frac { ∆ s }{ ∆ t }\)
अतः वस्तु द्वारा चली गई दूरी
(∆s) = v = ∆t = DC × ED
= 6 x (6 – 2) सेकण्ड
= 6 x 4 मीटर
= 24 मीटर
इस प्रकार, किसी गतिमान वस्तु द्वारा तय की गई दूरी, उसके चाल – समय ग्राफ तथा समय-अक्ष के बीच घिरे क्षेत्रफल के बराबर होती है। यह तथ्य एकसमान गति तथा असमान गति दोनों के लिए समान रूप से लागू होता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित के समय वेग ग्राफ खींचकर उदाहरण द्वारा समझाइए – (i) एकसमान वेग, (ii) एकसमान त्वरित गति (iii) असमान त्वरित गति।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 11
उत्तर:
(i) एकसमान वेग-यदि कोई वस्तु एक नियत दिशा में इस प्रकार गति करती है कि उसके द्वारा समान समयान्तरालों में तय की गई दूरियाँ समान हैं, तब वस्तु का वेग, एकसमान वेग कहलाता है। चित्र 8.35 में एक वस्तु का वेग – समय ग्राफ प्रदर्शित है। जिसमें कोई वस्तु 5 मीटर / सेकण्ड के समान वेग से एक निश्चित दिशा में चल रही है। यह ग्राफ समय अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा है, जो यह दर्शाती है कि वस्तु का वेग सदैव 5 मीटर / सेकण्ड बना रहता है। इस प्रकार एकसमान वेग से गतिमान वस्तु का समय- वेग ग्राफ, समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा के रूप में होता है।

(ii) एकसमान त्वरित गति यदि किसी वस्तु के वेग में समान समयान्तरालों में समान परिवर्तन होता है तो वस्तु की गति एकसमान त्वरित गति कहलाती है। चित्र 8.36 में मुक्त रूप से गिरते हुए पत्थर का वेग समय ग्राफ प्रदर्शित है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 12
इसमें पत्थर का वेग प्रति सेकण्ड 9.8 मीटर / सेकण्ड बढ़ता रहता है, अर्थात् वस्तु की गति में त्वरण 9.8 मीटर / सेकण्ड² है। यह ग्राफ एक झुकी हुई सरल रेखा के रूप में प्राप्त होता है, जो दर्शाता है कि वस्तु की गति, एकसमान त्वरित गति है।

(iii) असमान त्वरित गति – यदि किसी वस्तु के वेग में समान समयान्तरालों में असमान परिवर्तन होते हैं, तब वस्तु की गति असमान त्वरित गति कहलाती है। चित्र 8.37 में किसी शहर में एक कार की गति का वेग समय ग्राफ दिया गया है। इसमें कार का वेग घटता बढ़ता है। यह ग्राफ टेढ़े-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 13
मेढ़े वक्र के रूप में प्राप्त होता है, जो यह दर्शाता है कि कार की गति असमान त्वरित गति है।

प्रश्न 12.
वेग- समय ग्राफ से त्वरण ज्ञात करने की विधि उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
वेग-समय ग्राफ से त्वरण ज्ञात करना – चित्र 8.38 में किसी वस्तु का वेग समय ग्राफ दिखाया गया है। ग्राफ से स्पष्ट है कि वेग समान दर बढ़ रहा है।

किसी वस्तु का त्वरण ज्ञात करने के दो बिन्दु A व B लेते हैं। माना A पर t1 समय पर वेग v1 तथा बिन्दु B पर t2 समय पर वेग v2 है।
अतः
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 14
वेग परिवर्तन = v2 – v1 = BC
तथा समयान्तराल = t2 – t1 = AC
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 15
इस प्रकार, किसी गतिमान वस्तु का त्वरण, उनके वेग-समय ग्राफ के ढाल के बराबर होता है।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई कार एकसमान रूप से त्वरित होकर 5 सेकण्ड में 18 किमी / घण्टा से 36 किमी / घण्टा की गति प्राप्त करती है। ज्ञात कीजिए-
(i) त्वरण
(ii) उतने समय में कार द्वारा तय दूरी।
हल:
दिया है u = 18 किमी / घण्टा
= 18 × \(\frac {5}{18}\)
= 5 मीटर/सेकण्ड
v = 36 किमी / घण्टा = 36 × \(\frac {5}{18}\) = 10 मीटर / सेकण्ड
t = 5 सेकण्ड, a = ?. s = ?
(i) त्वरण a = \(\frac{v-u}{t}=\frac{10-5}{5}=\frac{5}{5}\) = 1 मीटर/सेकण्डर

(ii) तय दूरी v2 – u2 = 2as से,
अतः तय दूरी s = \(\frac{100-25}{2}=\frac{75}{2}\) = 37.5 मीटर।

प्रश्न 2.
किसी कार पर ब्रेक लगाने से वह गति की विपरीत दिशा में 6 मीटर/सेकण्ड’ का त्वरण उत्पन्न करती है। यदि कार ब्रेक लगाये जाने के बाद रुकने में 2 सेकण्ड का समय लेती है तो उतने समय में तय की गई दूरी की गणना कीजिए ।
हल:
दिया है a = -6 मीटर / सेकण्ड2, रुकने पर v = 0 तथा t = 2 सेकण्ड
माना कि ब्रेक लगाने के समय कार का वेग u है तो
सूत्र v = u + at से, 0 = u + (-6) × 2
या u = 6 × 2 = 12 मीटर / सेकण्ड
अब इस बीच तय दूरी
s = ut+ \(\frac {1}{2}\) at2 = 12 × 2 + \(\frac {1}{2}\) (-6) × 22
= 24 – 3 × 4 – 12
अतः रुकने तक कार 12 मीटर की दूरी तय करती है।

प्रश्न 3.
कोई वस्तु 2 मीटर/सेकण्ड के वेग से 5 सेकण्ड तक चलती है। अगले 5 सेकण्ड में एकसमान त्वरण के कारण उसका वेग बढ़कर 10 मीटर / सेकण्ड हो जाता है। इसके बाद इस वस्तु का वेग एकसमान रूप से कम होता है। और वस्तु 10 सेकण्ड में विराम अवस्था में आ जाती है तो
(a) इस वस्तु की गति के लिए वेग समय तथा दूरी – समय ग्राफ खींचिए।
(b) ग्राफ में वह भाग दिखाइए जहाँ गति एकसमान है तथा जहाँ असमान है।
(c) ग्राफ से वस्तु द्वारा प्रारम्भ से 2 सेकण्ड बाद, 12 सेकण्ड बाद तथा अन्तिम 10 सेकण्ड में तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) वेग-समय ग्राफ –
पैमाना – समय-अक्ष, 1 सेमी = 2 सेकण्ड
वेग- अक्ष, 1 सेमी = 2 मीटर / सेकण्ड
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 16
प्रथम 5 सेकण्ड में वस्तु का वेग अचर 2 मीटर / सेकण्ड है; अत: t = 0 सेकण्ड से t = 5 सेकण्ड तक ग्राफ समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा होगी जो वेग अक्ष को 2 मीटर / सेकण्ड पर काटता है। t = 5 सेकण्ड से t = 10 सेकण्ड के बीच वेग 2 मीटर/सेकण्ड से एकसमान त्वरण से बढ़कर 10 मीटर / सेकण्ड हो जाता है। अतः यहाँ ग्राफ बिन्दुओं B (5, 2) तथा C ( 10, 10) को मिलाने वाली सरल रेखा होगी। तीसरे भाग में ग्राफ बिन्दुओं C ( 10, 10) तथा D (20,0 ) को मिलाने वाली सरल रेखा होगी।

दूरी – समय ग्राफ – दूरी – समय ग्राफ खींचने के लिए सर्वप्रथम हमें विभिन्न समयों पर वस्तु द्वारा तय की गई दूरियाँ ज्ञात करनी होंगी।
प्रथम भाग में, पहले 5 सेकण्ड के लिए वस्तु का वेग 2 मीटर / सेकण्ड है; अतः इस भाग में तय दूरी,
S1 = vt = 2 मीटर/सेकण्ड x 5 सेकण्ड = 10 मीटर
अतः t = 5 सेकण्ड पर s = 10 मीटर।
अगले 5 सेकण्ड की गति के लिए, प्रारम्भिक वेग u = 2 मीटर / सेकण्ड v = 10 मीटर / सेकण्ड = 5 सेकण्ड।
समीकरण v = u + at से,
त्वरण a = \(\frac{v-u}{t}=\frac{10-2}{5}=\frac{8}{5}\)
a = 1.6 मीटर / सेकण्ड2
समीकरण s = ut + \(\frac {1}{2}\) at2 से,
इस दौरान तय दूरी –
s = 2 × 5 + \(\frac {1}{2}\) x 1.6 (5)2 = 10 + 20 = 30 मीटर
∴ प्रथम 10 से. में तय दूरी s = प्रथम 5 से. में तय दूरी + 30 = 10 + 30 = 40 मीटर
अतः इस भाग के लिये = 5 + 5 = 10 से. पर s = 40 मी.
अन्तिम 10 से. की गति लिये, प्रारम्भिक वेग u = 10 मी / से. v = 0 t = 10, सेकण्ड; v = u + at से
इस भाग का त्वरणं a = \(\frac{v-u}{t}=\frac{0-10}{10}\) = -1 मी / से2
समी. s = ut + \(\frac {1}{2}\) at2 से
s = 10 × 10 + \(\frac {1}{2}\) (-1) × 102 = 100 – 50 = 50 मीटर
∴ 20 सेकण्ड में तय कुल दूरी = 40 + 50 = 90 मीटर
अतः अन्तिम भाग के लिए t=10 + 10 = 20 सेकण्ड पर 90 मीटर।
इस प्रकार हमें निम्न सारणी प्राप्त होती है –

समय (सेकण्ड में)051020
दूरी s (मीटर में)0104090

उपर्युक्त आँकड़ों के आधार पर वस्तु का दूरी-ग्राफ नीचे दिया गया है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 17
पैमाना –
समय – अक्ष 1 सेमी = 2 सेकण्ड
दूरी – अक्ष 1 सेमी = 20 मीटर
वेग- समय ग्राम में, भाग AB एकसमान गति को तथा भाग BC व CD असमान गति को प्रदर्शित करते हैं।

(b) दूरी-वेग समय ग्राफ में, भाग OA एकसमान गति को तथा भाग AB व BC असमान गति को प्रदर्शित करते हैं।

(c) दूरी – समय – ग्राफ से, 12 सेकण्ड बाद तय दूरी के लिए t = 2 सेकण्ड पर समय- अक्ष के लम्बवत् रेखा खींची जो ग्राफ को बिन्दु P पर काटती है। बिन्दु P से दूरी-अक्ष के लम्बवत् रेखा खींची जो दूरी-अक्ष को बिन्दु Q पर काटती है। बिन्दु Q के संगत दूरी अक्ष पर दूरी = 4 मीटर।
∴ t = 2 सेकण्ड बाद तय दूरी = 4 मीटर ।
इसी प्रकार, = 12 सेकण्ड बाद तय दूरी = 58 मीटर।
इसी प्रकार, प्रथम 10 सेकण्ड में तय दूरी = 40 मीटर (बिन्दु B)
तथा कुल 20 सेकण्ड में तय दूरी = 90 मीटर ( बिन्दु C )
∴ अन्तिम 10 सेकण्ड में तय दूरी = 90 मीटर 40 मीटर = 50 मीटर ।

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र – 8.41 में प्रदर्शित चाल – समय ग्राफ से ज्ञात कीजिए –
(i) वस्तु की प्रारम्भिक चाल
(ii) 6 सेकण्ड में वस्तु द्वारा चली गई दूरी
(iii) वस्तु का त्वरण।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 18
हल:
(i) वस्तु की प्रारम्भिक चाल = 2.5 मीटर/सेकण्ड ।

(ii) 6 सेकण्ड में वस्तु द्वारा चली गई दूरी = चाल × समय
= (7.5 – 2.5 ) मीटर / सेकण्ड × 6 सेकण्ड
= 5 × 6 मीटर = 30 मीटर
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 18a
\(\frac {5}{6}\) मीटर/सेकण्ड2
= 0.83 मीटर / सेकण्ड2

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र 8.42 में किसी गतिशील पिण्ड का वेग-समय ग्राफ प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए –
(i) प्रथम 10 सेकण्ड में चली गई दूरी
(ii) 15वें सेकण्ड पर पिण्ड का त्वरण
(iii) 20 से 25 सेकण्ड के बीच त्वरण।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 19
हल:
(i) प्रथम 10 सेकण्ड में चली गई दूरी
= समकोण ∆OAD का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × OD × AD
= \(\frac {1}{2}\) × (10 – 0) सेकण्ड × (30 × 0) मीटर/सेकण्ड = 150 मीटर।
(ii) 15वें सेकण्ड पर त्वरण शून्य होगा; क्योंकि वेग – परिवर्तन शून्य है।

(iii) 20 से 25 सेकण्ड के बीच त्वरण
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 20
= – \(\frac {30}{5}\)
= – 6 मीटर / सेकण्ड2

प्रश्न 6.
कोई जलयान 56 किलोमीटर/घण्टा की चाल से चल रहा है। 1 सेकण्ड के पश्चात् उसकी चाल 58 किलोमीटर / घण्टा हो जाती है। उसका त्वरण ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : जलयान का प्रारम्भिक वेग (4) = 56 किलोमीटर/घण्टा,
जलयान का अन्तिम वेग (v) = 58 किलोमीटर/घण्टा
समय (t) = 1 सेकण्ड = \(\frac {1}{3600}\) घण्टा
जलयान का त्वरण (a) =
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 21
=  \(\frac {5}{9}\)मीटर / सेकण्ड2
= 0.56 मीटर / सेकण्ड2

प्रश्न 7.
10 सेकण्ड में एक कार का वेग 36 किमी / घण्टा से 72 किमी/घण्टा हो जाता है। कार का त्वरण ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है कार प्रारिम्भक वेग (u) = 36 किमी / घण्टा
= \(\frac{36 \times 1000}{60 \times 60}\) मीटर/सेकण्ड
= 10 मीटर / सेकण्ड
तथा कार का अन्तिम वेग (v) = 72 किमी / घण्टा
= \(\frac{72 \times 1000}{60 \times 60}\)
= 20 ‘मीटर/सेकण्ड
अतः कार का त्वरण (a) =
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 8 गति 22
= 1 मीटर / सेकण्ड2

प्रश्न 8.
एक गोली 90 मीटर / सेकण्ड के वेग से लक्ष्य से टकराकर 0.3 सेकण्ड में रुक जाती है। गोली का मन्दन ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : u = 90 मीटर / सेकण्ड, v = 0, t = 0.3 सेकण्ड a = ?
समीकरण v = u + at से,
0 = 90 + a × 0.3
अतः गोली का मन्दन (a) = – \(\frac{90}{0.3}\)
= – 300 मीटर / सेकण्ड2

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन 

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. बताएँ कि निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार वैयक्तिक स्वतंत्रता का अंश है।
(क) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
(ख) धर्म की स्वतंत्रता
(ग) अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
(घ) सार्वजनिक स्थलों पर बराबरी की पहुँच
उत्तर:
(क) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

2. बताएँ कि निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार वैयक्तिक स्वतंत्रता का अंश नहीं है।
(क) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
(ख) अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
(ग) मनमानी गिरफ्तारी के विरुद्ध स्वतंत्रता
(घ) अंतरात्मा का अधिकार से किसके द्वारा हुआ है।
उत्तर:
(ख) अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार

3. भारत के संविधान का अंगीकार निम्नलिखित में
(क) ब्रिटिश ताज के द्वारा
(ख) ब्रिटिश संसद के द्वारा
(ग) भारत के वायसराय के द्वारा
(घ) भारत के लोगों के द्वारा
उत्तर:
(घ) भारत के लोगों के द्वारा

4. संविधान के दर्शन का सर्वोत्तम सार-संक्षेप है।
(क) संविधान के मूल अधिकारों में
(ख) संविधान के नीति-निर्देशक तत्त्वों में
(ग) संविधान की प्रस्तावना में
(घ) संविधान के मूल कर्त्तव्यों में
उत्तर:
(ग) संविधान की प्रस्तावना में

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

5. निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है।
(क) भारत में अदालतों और सरकारों के बीच संविधान की अनेक व्याख्याओं पर असहमति है।
(ख) केन्द्र और प्रादेशिक सरकारों के बीच मत – भिन्नता है।
(ग) राजनीतिक दल संविधान की विविध व्याख्याओं के आधार पर पूरे जोर-शोर से लड़ते हैं।
(घ) आम नागरिक संविधान के अंतर्निहित दर्शन में विश्वास नहीं करते हैं।
उत्तर:
(घ) आम नागरिक संविधान के अंतर्निहित दर्शन में विश्वास नहीं करते हैं।

6. निम्नलिखित में कौनसी भारतीय संविधान की सीमा नहीं है–
(क) भारतीय संविधान ने ‘असमतोल संघवाद’ जैसी अवधारणा को अपनाया है।
(ख) भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत है।
(ग) भारतीय संविधान में लिंगगत न्याय के कुछ महत्त्वपूर्ण मसलों विशेषकर परिवार से जुड़े मुद्दों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है।
(घ) कुछ बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व वाले खंड में डाल दिया गया है।
उत्तर:
(क) भारतीय संविधान ने ‘असमतोल संघवाद’ जैसी अवधारणा को अपनाया है।

7. निम्नलिखित में कौनसा कथन भारतीय संविधान की आलोचना से सम्बन्धित है।
(क) भारत के संविधान में अचल और लचीले संविधान दोनों की विशेषताओं का मिश्रण है
(ख) संविधान में भारतीय जनता की राष्ट्रीय पहचान पर निरंतर जोर दिया गया है।
(ग) भारतीय संविधान निर्मात्री सभा में सबकी नुमाइंदगी नहीं हो सकी है
(घ) भारत का संविधान एक धर्म – निरेपक्ष संविधान है।
उत्तर:
(ग) भारतीय संविधान निर्मात्री सभा में सबकी नुमाइंदगी नहीं हो सकी है

8. निम्नलिखित में से कौनसा कथन भारतीय संविधान की आलोचना से सम्बन्धित नहीं है।
(क) भारत का संविधान अस्त-व्यस्त है।
(ख) भारत का संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है।
(ग) भारत का संविधान प्रतिनिधित्वपूर्ण नहीं है।
(घ) भारत का संविधान एक विदेशी दस्तावेज है।
उत्तर:
(ख) भारत का संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है।

9. भारतीय संविधान की प्रक्रियात्मक उपलब्धि है।
(क) सर्वानुमति से फैसले लेने के प्रति संविधान सभा की दृढ़ता।
(ख) सार्वभौमिक मताधिकार के प्रति वचनबद्धता
(ग) धर्मनिरपेक्ष संविधान
(घ) व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्धता
उत्तर:
(क) सर्वानुमति से फैसले लेने के प्रति संविधान सभा की दृढ़ता।

10. शांति का संविधान कहा जाता है।
(क) भारत के संविधान को
(ग) फ्रांस के पंचम गणतंत्र को
(ख) अमेरिका के संविधान को
(घ) जापान के संविधान को
उत्तर:
(घ) जापान के संविधान को

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. सन् 1947 के जापानी संविधान को बोलचाल में…………………… संविधान कहा जाता है।
उत्तर:
शांति

2. संविधान को अंगीकार करने का एक बड़ा कारण है- सत्ता को ……………………… होने से रोकना।
उत्तर:
निरंकुश

3. संविधान हमें गहरे सामाजिक बदलाव के लिए शांतिपूर्ण …………………….. साधन भी प्रदान करता है।
उत्तर:
लोकतांत्रिक

4. संविधान, कमजोर लोगों को उनका वाजिब ……………………… सामुदायिक रूप में हासिल करने की ताकत देता है।
उत्तर:
हक

5. भारत का संविधान स्वतंत्रता, …………………. लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तर:
समानता

निम्नलिखित में से सत्य / असत्य कथन छाँटिये

1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे संविधान का अभिन्न अंग है।
उत्तर:
सत्य
2. भारतीय संविधान शास्त्रीय उदारवाद से इस अर्थ में अलग है कि यह सामाजिक न्याय से जुड़ा है
उत्तर:
सत्य

3. भारतीय संविधान ने समुदायों को मान्यता न देकर सामुदायिक प्रतिद्वन्द्विता को समाप्त किया है
उत्तर:
असत्य

4. धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ भारत में पारस्परिक निषेध है।
उत्तर:
असत्य

5. सार्वभौम मताधिकार का विचार भारतीय राष्ट्रवाद के बीज विचारों में एक है।
उत्तर:
सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. शांति संविधान(क) राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत
2. भारतीय संविधान की सीमा(ख) सार्वभौमिक मताधिकार
3. भारतीय राष्ट्रवाद का बीज विचार(ग) राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी
4. मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट(घ) जापान का संविधान
5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषता(ङ) सन् 1928

उत्तर:

1. शांति संविधान(घ) जापान का संविधान
2. भारतीय संविधान की सीमा(क) राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत
3. भारतीय राष्ट्रवाद का बीज विचार(ख) सार्वभौमिक मताधिकार
4. मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट(ङ) सन् 1928
5. भारतीय धर्मनिरपेक्षता की विशेषता(ग) राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान में अन्तर्निहित दर्शन को समझना क्यों जरूरी है?
उत्तर:
संविधान में अन्तर्निहित नैतिक तत्त्व को जानने और उसके दावे के मूल्यांकन तथा शासन-व्यवस्था के मूल- मूल्यों की अलग-अलग व्याख्याओं को एक कसौटी पर जांच कर सकने के लिए संविधान में अन्तर्निहित दर्शन को समझना जरूरी है।

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान की किन्हीं दो मूलभूत विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की दो मूलभूत विशेषताएँ ये हैं।

  1. व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध संविधान।
  2. सामाजिक न्याय से जुड़ा संविधान।

प्रश्न 3.
संविधान के प्रति राजनैतिक दर्शन के नजरिये से हमारा क्या आशय है?
उत्तर:
इसमें तीन बातें शामिल हैं।

  1. संविधान की अवधारणाओं की व्याख्या,
  2. अवधारणाओं की इन व्याख्याओं से मेल खाती समाज व शासन व्यवस्था की तस्वीर तथा
  3. शासन व्यवस्था के सम्बन्ध में अलग-अलग व्याख्याओं की जांच की एक कसौटी का होना।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 4.
संविधान के प्रति राजनैतिक दर्शन का नजरिया अपनाना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
संविधान के अन्तर्निहित नैतिक तत्त्व को जानने और उसके दावे के मूल्यांकन के लिए संविधान के प्रति राजनैतिक दर्शन का नजरिया अपनाने की जरूरत है।

प्रश्न 5.
एक अच्छे संविधान की क्या आवश्यकता है? कोई दो कारण लिखिये।
उत्तर:

  1. एक अच्छे संविधान की आवश्यकता का सबसे बड़ा कारण है। सत्ता को निरंकुश होने से रोकना।
  2. इसका दूसरा कारण यह है कि संविधान हमें गहरे सामाजिक बदलाव के लिए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक साधन भी प्रदान करता है।

प्रश्न 6.
एक राजनीति के विद्यार्थी के लिए संविधान निर्माताओं के सरोकार और मंशा को जानना क्यों जरूरी है?
उत्तर:
जब संवैधानिक व्यवहार को चुनौती मिले, खतरा मंडराये या उपेक्षा हो तब इन व्यवहारों के मूल्य और अर्थ को समझने के लिए संविधान निर्माताओं के सरोकार और मंशा को जानना जरूरी है।

प्रश्न 7.
भारत के संविधान का राजनीतिक दर्शन क्या है?
उत्तर:
भारत के संविधान का राजनीतिक दर्शन स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिबद्धता का है।

प्रश्न 8.
भारत का संविधान व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें निहित किन्हीं तीन स्वतंत्रताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  2. मनमानी गिरफ्तारी के विरुद्ध स्वतंत्रता
  3. अंतरात्मा का अधिकार।

प्रश्न 9.
भारतीय संविधान का उदारवाद शास्त्रीय उदारवाद से किन दो बातों में भिन्न है?
उत्तर:
शास्त्रीय उदारवाद सामाजिक न्याय और सामुदायिक जीवन मूल्यों के ऊपर हमेशा व्यक्ति को तरजीह देता है, जबकि भारतीय संविधान के उदारवाद सामाजिक न्याय और सामुदायिक जीवन मूल्यों को व्यक्ति के ऊपर तरजीह देता है।

प्रश्न 10.
हमारा संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है। इसका कोई एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हमारा संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है। इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान।

प्रश्न 11.
समाज के विभिन्न समुदायों के बीच बराबरी का रिश्ता कायम करने तथा उन्हें उदार बनाने के लिए पश्चिमी राष्ट्रों के संविधानों में क्या किया गया है?
उत्तर:
समाज के विभिन्न समुदायों के बीच बराबरी का रिश्ता कायम करने तथा उन्हें उदार बनाने के लिए पश्चिमी राष्ट्रों के संविधानों ने इन समुदायों को मान्यता न देकर किया है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 12.
भारतीय संविधान में समुदायों के बीच बराबरी के रिश्ते को बढ़ावा देने के लिए क्या रास्ता अपनाया है? उत्तर- भारतीय संविधान ने समुदाय आधारित अधिकारों को मान्यता देकर इनके बीच बराबरी के रिश्ते को बढ़ावा दिया है, जैसे- धार्मिक समुदाय का अपनी शिक्षा संस्था स्थापित करने और चलाने का अधिकार।

प्रश्न 13.
मुख्य धारा की पश्चिमी धारणा में धर्मनिरपेक्षता को किस रूप में देखा गया है?
उत्तर:
मुख्य धारा की पश्चिमी धारणा में व्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की नागरिकता से संबंधित अधिकारों की रक्षा के लिए धर्मनिरपेक्षता को धर्म और राज्य के पारस्परिक निषेध के रूप में देखा गया है।

प्रश्न 14.
धर्म और राज्य के पारस्परिक निषेध से क्या आशय है?
उत्तर:
धर्म और राज्य के ‘पारस्परिक निषेध’ शब्द का आशय है– धर्म और राज्य दोनों एक-दूसरे के क्षेत्र से अलग रहेंगे, एक-दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

प्रश्न 15.
भारतीय संविधान में दी गई धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी मॉडल से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता का मॉडल पश्चिमी मॉडल से निम्न दो रूपों में भिन्न है।

  1. भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता न होकर व्यक्ति और समुदाय दोनों की धार्मिक स्वतंत्रता से है।
  2. भारत में धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ पारस्परिक निषेध नहीं बल्कि राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी

प्रश्न 16.
भारतीय संविधान की कोई दो केन्द्रीय विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:

  1. भारतीय संविधान ने उदारवादी व्यक्तिवाद को एक नया रूप देकर उसे विकसित किया है।
  2. इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक न्याय के सिद्धान्त को भी स्वीकार किया है।

प्रश्न 17.
अनुच्छेद 371 को जगह देकर भारतीय संविधान ने किस प्रकार के संघवाद की अवधारणा को अपनाया
उत्तर:
अनुच्छेद 371 को जगह देकर भारतीय संविधान ने ‘असमतोल संघवाद’ जैसी अवधारणा को अपनाया प्रश्न 18. भारतीय संविधान की दो प्रक्रियागत उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की दो प्रक्रियागत उपलब्धियाँ ये हैं।

  1. संविधान निर्माण में स्वार्थों के स्थान पर तर्कबुद्धि पर बल दिया गया है।
  2. महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय सर्वानुमति से लिए गए हैं।

प्रश्न 19.
भारतीय संविधान की कोई दो आलोचनाएँ लिखिये।
उत्तर:

  1. भारतीय संविधान के निर्माण में जनता का प्रतिनिधित्व नहीं हो सका है।
  2. यह संविधान एक विदेशी दस्तावेज है।

प्रश्न 20.
भारतीय संविधान की कोई दो सीमाएँ बताइये।
उत्तर:

  1. भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत है।
  2. इसमें कुछ बुनियादी आर्थिक-सामाजिक अधिकारों को राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्व वाले खंड में डाल दिया गया है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में प्रस्तुत ‘ अवसर और प्रतिष्ठा की समानता’ से क्या आशय है?
उत्तर:
अवसर और प्रतिष्ठा की समानता: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिए गए ‘प्रतिष्ठा की समानता’ शब्द से आशय है कि भारत के सभी नागरिकों के साथ बिना किसी प्रतिष्ठा के भेदभाव के समाज में समान व्यवहार किया जायेगा। सभी नागरिक भारतीय समाज में समान हैं तथा सब पर कानून समान रूप से लागू होंगे। अवसर की समानता का आशय है कि सभी नागरिकों को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए समान अवसर प्राप्त होंगे। धर्म, जाति, वंश, लिंग, रंग तथा सम्पत्ति के आधार पर इसमें कोई भेद नहीं किया जायेगा।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 2.
” औपनिवेशिक दासता में रहे लोगों के लिए संविधान राजनीतिक आत्मनिर्णय का उद्घोष और इसका पहला वास्तविक अनुभव है।” स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
संविधान राजनीतिक आत्मनिर्णय का उद्घोष है। औपनिवेशिक दासता में रह रहे लोगों के लिए संविधान सभा की मांग पूर्ण आत्मनिर्णय की सामूहिक मांग का प्रतिरूप है क्योंकि सिर्फ औपनिवेशिक देश की जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से बनी संविधान सभा को ही बिना बाहरी हस्तक्षेप के उस देश का संविधान बनाने का अधिकार है। संविधान पहला वास्तविक अनुभव संविधान सभा सिर्फ जनप्रतिनिधियों अथवा योग्य वकीलों का जमावड़ा भर नहीं है बल्कि यह स्वयं में औपनिवेशिक राष्ट्र द्वारा अपने बनाए नए आवरण को पहनने की तैयारी भी है।

प्रश्न 3.
संविधान के महत्त्व को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
संविधान के महत्त्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है।

  1. संविधान शासन व्यवस्था के बुनियादी नियम प्रदान करता है।
  2. यह राज्य को निरंकुश बनने से रोकता है।
  3. संविधान हमें गहरे सामाजिक बदलाव के लिए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक साधन भी प्रदान करता है।
  4. औपनिवेशिक दासता में रह रहे लोगों के लिए संविधान राजनीतिक आत्मनिर्णय का उद्घोष है तथा इसका पहला वास्तविक अनुभव भी।
  5. संविधान कमजोर लोगों को उनका वाजिब हक सामुदायिक रूप में हासिल करने की ताकत देता है।

प्रश्न 4.
भारतीय संविधान का राजनीतिक दर्शन क्या है?
उत्तर:
भारतीय संविधान का राजनीतिक दर्शन: भारतीय संविधान उदारवादी, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, संघवादी, सामुदायिक जीवन-मूल्यों का हामी, धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों तथा अधिकार – वंचित वर्गों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील तथा एक सर्व सामान्य राष्ट्रीय पहचान बनाने को प्रतिबद्ध संविधान है। संक्षेप में, यह संविधान स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा एक न एक किस्म की राष्ट्रीय एकता के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरे, संविधान का जोर इस बात पर है कि उसके दर्शन पर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अमल किया जाये।

प्रश्न 5.
भारतीय संघवाद की ‘असमतोल संघवाद’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
असमतोल संघवाद: ‘असमतोल संघवाद’ से आशय है कि भारतीय संघ की विभिन्न इकाइयों की कानूनी हैसियत और विशेषाधिकार में महत्त्वपूर्ण अन्तर है। यहाँ कुछ इकाइयों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संविधान की रचना में इन्हें विशेष दर्जा दिया गया है। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 371 के अन्तर्गत पूर्वोत्तर भारत के अनेक राज्यों को विशेष प्रावधानों का लाभ दिया गया है। भारतीय संविधान के अनुसार विभिन्न प्रदेशों के साथ इस असमान बर्ताव में कोई बुराई नहीं है।

प्रश्न 6.
” भारत में धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी है। ” स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
भारत में धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ पारस्परिक: निषेध नहीं बल्कि राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी है। इसका आशय यह है कि राज्य सभी धर्मों से समान दूरी रखेगा लेकिन स्वतंत्रता, समता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए वह किसी धर्म के मामले में हस्तक्षेप कर सकता है या वह किसी धार्मिक सम्प्रदाय को इस हेतु सहयोग कर सकता है।

प्रश्न 7.
भारतीय संविधान की चार प्रमुख विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
भारतीय संविधान की विशेषताएँ – भारतीय संविधान की अनेक विशेषताएँ हैं जिनमें से चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
1. व्यक्ति की स्वतंत्रता:
भारत का संविधान व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अन्तर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मनमानी गिरफ्तारी के प्रति स्वतंत्रता तथा अन्य वैयक्तिक स्वतंत्रताएँ, जैसे- अन्तरात्मा का अधिकार आदि प्रदान किये गए भारतीय संविधान की यह विशेषता मजबूत उदारवादी नींव पर प्रतिष्ठित है।

2. सामाजिक न्याय तथा सामुदायिक जीवन:
मूल्यों का पक्षधर: भारत का संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। साथ ही भारतीय संविधान का उदारवाद सामुदायिक जीवन-मूल्यों का पक्षधर है । इसमें समुदाय आधारित अधिकारों को मान्यता दी गई है।

3. धर्मनिरपेक्षता:
भारतीय संविधान निर्माताओं ने पश्चिम की ‘पारस्परिक निषेध’ धर्मनिरपेक्ष अवधारणा की वैकल्पिक धारणा का विकास किया है। क्योंकि भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्ति और समुदाय दोनों की धार्मिक स्वतंत्रता से है, न कि केवल व्यक्ति की निजी धार्मिक स्वतंत्रता का । दूसरे, भारत में धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ पारस्परिक निषेध नहीं बल्कि राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी है।

4. सार्वभौम मताधिकार: भारतीय संविधान में सार्वभौम मताधिकार को अपनाया गया है। सार्वभौम मताधिकार का विचार भारतीय राष्ट्रवाद के बीज विचारों में एक है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 8.
भारतीय संविधान की सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की सीमाएँ: भारतीय संविधान की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं।

  1. केन्द्रीकृत राष्ट्रीय एकता की धारणा: भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत है।
  2. लिंगगत न्याय की उपेक्षा: भारतीय संविधान में लिंगगत न्याय के कुछ महत्त्वपूर्ण मसलों खासकर परिवार से जुड़े मुद्दों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया। इसमें परिवार की सम्पत्ति के बंटवारे में पुत्र और पुत्री के बीच असमान अधिकार दिये गये हैं।
  3. सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को नीति-निर्देशक तत्त्वों का हिस्सा बनाना भारत जैसे विकासशील देश में कुछ बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को मौलिक अधिकारों का अभिन्न हिस्सा बनाने के बजाय उसे राज्य के नीति-निर्देशक खंड में डालकर उपेक्षित कर दिया है क्योंकि इन अधिकारों को लागू करने के लिए नागरिक न्यायालय में वाद दायर नहीं कर सकते।

प्रश्न 9.
प्रस्तावना में दिये गये भारतीय संविधान के उद्देश्यों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
भारतीय संविधान की प्रस्तावना के उद्देश्य: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं।

  1. न्याय: सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय।
  2. स्वतंत्रता विचार: अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म एवं पूजा की स्वतंत्रता।
  3. समानता: प्रतिष्ठा और अवसर की समानता।
  4. बंधुता: व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता सुनिश्चित करने वाली बंधुता।

प्रश्न 10.
भारत के संविधान की प्रस्तावना में दिये गये ‘हम भारत के लोग’ शब्द से क्या आशय है?
उत्तर:
हम भारत के लोग;
प्रस्तावना के ‘हम भारत के लोग शब्द से यह अभिप्राय है कि भारत के संविधान को महान व्यक्तियों के एक एक समूह ने नहीं प्रदान किया है, बल्कि इसकी रचना और इसका अंगीकार ‘हम भारत के लोग’ के द्वारा हुआ है। इस तरह जनता स्वयं अपनी नियति की नियंता है और लोकतंत्र का एक साधन है जिसके सहारे लोग अपने वर्तमान और भविष्य को आंकार देते हैं । आज प्रस्तावना के इस उद्घोष को पचास साल से ज्यादा हो चुके हैं। अनेक व्याख्याओं, असहमतियों, मत – विभिन्नताओं के चलते हुए भी पिछले पचास वर्षों से हर कोई संविधान के इस अन्तर्निहित दर्शन में विश्वास रखते हुए चलता आया है, वह यह है कि यह संविधान हम सब भारतवासियों का और भारतवासियों के लिए है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान के दर्शन का क्या आशय है? इसको समझना क्यों जरूरी है?
उत्तर:
संविधान के दर्शन से आशय: कानून और नैतिक मूल्य के बीच गहरा संबंध है। संविधान कानूनों का एक ऐसा दस्तावेज है जिसके पीछे नैतिक दृष्टि काम कर रही है। संविधान के कानूनों में निहित यही नैतिक व राजनैतिक दृष्टि संविधान का राजनैतिक दर्शन है। इसमें निम्नलिखित तीन बातें शामिल हैं-

1. अवधारणाएँ: संविधान कुछ अवधारणाओं के आधार पर बना है। इन अवधारणाओं की व्याख्या हमारे लिए आवश्यक है। कुछ प्रमुख अवधारणाएँ ये हैं। अधिकार, नागरिकता, अल्पसंख्यक, लोकतंत्र आदि।

2. आदर्श: संविधान का निर्माण जिन आदर्शों की नींव पर हुआ है, उन आदर्शों पर हमारी गहरी पकड़ होनी चाहिए अर्थात् हमारे सामने एक ऐसे समाज और शासन व्यवस्था की तस्वीर साफ-साफ होनी चाहिए जो संविधान की मूल अवधारणाओं की हमारी व्याख्या से मेल खाती हो।

3. संविधान सभा की बहसों में निहित तर्क:
भारतीय संविधान को संविधान सभा की बहसों के साथ जोड़कर पढ़ा जाना चाहिए ताकि सैद्धान्तिक रूप से हम यह बता सकें कि ये आदर्श कहां तक और क्यों ठीक हैं तथा आगे उनमें कौनसे सुधार किये जा सकते हैं। किसी मूल्य को यदि हम संविधान की बुनियाद बताते हैं, तो हमारे लिए यह बताना जरूरी हो जाता है कि यह मूल्य सही और सुसंगत क्यों है? संविधान निर्माताओं ने जब भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में किसी खास मूल्य-समूह को अपनाया तो ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि उनके पास इस मूल्य समूह के जायज ठहराने के लिए कुछ तर्क मौजूद थे।

ये तर्क भी संविधान के अन्तर्निहित दर्शन से संबंधित हैं। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान के अन्तर्निहित दर्शन के अन्तर्गत मुख्यतः संविधान की अवधारणाओं की व्याख्या, संविधान के आदर्श तथा इन आदर्शों का औचित्य ठहराने के लिए संविधान सभा में दिये गए तर्क आते हैं।

संविधान के अन्तर्निहित दर्शन को समझना आवश्यक है संविधान के अन्तर्निहित दर्शन को जानने और उसके दावे के मूल्यांकन के लिए संविधान के प्रति राजनीतिक दर्शन का दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है ताकि हम अपनी शासन व्यवस्था के बुनियादी मूल्यों की अलग-अलग व्याख्याओं को एक कसौटी पर जांच सकें। दूसरे शब्दों में संविधान की शासन व्यवस्था के बुनियादी मूल्यों की अलग-अलग व्याख्याओं को एक कसौटी पर जांचने के लिए संविधान के अन्तर्निहित दर्शन को समझना आवश्यक है।

आदर्शों को मिलने वाली चुनौतियाँ व विविध व्याख्याएँ; आज संविधान के बहुत से आदर्शों को अनेक रूप में चुनौती मिल रही है। यथा

  • इन आदर्शों पर बार-बार न्यायालयों में तर्क-वितर्क होते हैं। विधायिका, राजनीतिक दल, मीडिया, स्कूल तथा विश्वविद्यालयों में इन पर विचार-विमर्श होता है, बहस चलती है और इन पर सवाल उठाये जाते हैं।
  • इन आदर्शों की व्याख्या अलग-अलग ढंग से की जाती है और कभी-कभी अल्पकालिक क्षुद्र स्वार्थी के लिए इनके साथ चालबाजी भी की जाती है।
  • परीक्षा की आवश्यकता: उपर्युक्त कारणों से इस बात की परीक्षा की आवश्यकता होती है कि।
    1. संविधान के आदर्शों और अन्य हलकों में इन आदर्शों की अभिव्यक्ति के बीच कहीं कोई गंभीर खाई तो नहीं
    2. विभिन्न संस्थाओं द्वारा इन आदर्शों की की जाने वाली अलग-अलग व्याख्याओं की तुलना की जाये। अलग- अलग व्याख्याओं के कारण इन व्याख्याओं के बीच विरोध पैदा होता है। यहां यह जांचने की जरूरत आ पड़ती है कि कौनसी व्याख्या सही है। इस जांच-परख में संविधान के दर्शन का प्रयोग एक कसौटी के रूप में किया जाना चाहिए। अतः स्पष्ट है कि शासन-व्यवस्था के बुनियादी मूल्यों की अलग-अलग व्याख्याओं को जांचने के लिए एक कसौटी के रूप में संविधान के दर्शन को जानना अति आवश्यक।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान की मूलभूत विशेषताएँ क्या हैं?
अथवा
भारतीय संविधान की केन्द्रीय विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
अथव
भारतीय संविधान की आधारभूत महत्त्व की उपलब्धियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की मूलभूत विशेषताएँ
अथवा
भारतीय संविधान की आधारभूत महत्त्व की उपलब्धियाँ: भारतीय संविधान की मूलभूत या केन्द्रीय विशेषताओं तथा उसकी आधारभूत महत्त्व की उपलब्धियों को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है।
1. लोकतंत्र:
भारतीय संविधान के दर्शन का प्रमुख आधारभूत तत्त्व लोकतंत्र है। भारतीय जनता लोकतंत्र को बहुत अधिक महत्त्व देती है। यही कारण है कि यहाँ राजनैतिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में लोकतंत्र को अपनाया गया है। संविधान न केवल राजनैतिक लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्ध है, बल्कि उसमें नीति-निर्देशक तत्त्वों के माध्यम से सामाजिक- आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना की रूपरेखा व नीतियाँ भी प्रस्तुत की गई हैं। संविधान में लोकतांत्रिक राजनैतिक संस्थाओं के गठन के प्रावधान किये गये हैं।

संघीय संसद, राज्यों की विधायिकाओं का गठन जनता के निर्वाचन द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए किया जाता है तथा सरकारों को इन जन-प्रतिनिधियों के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है। इस प्रकार संविधान में लोकतंत्र को अपनाने के पीछे यही दर्शन रहा है कि समस्त निर्णय जो जनता को प्रभावित कर सकते हैं, जनता द्वारा लिये जाने चाहिए और ये निर्णय केवल बहुमत के आधार पर ही नहीं बल्कि जनमत तथा लोगों की बड़ी संख्या की स्वतंत्र सहमति पर आधारित होने चाहिए। इस प्रकार लोकतंत्र भारतीय संविधान के दर्शन का आधारभूत तत्त्व है।

2. समानता:
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता भी संविधान के दर्शन का आधारभूत तत्त्व है। संविधान में कहा गया है कि सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं तथा सभी को कानून का समान संरक्षण मिलेगा। राज्य जाति, रंग, लिंग, प्रजाति और सम्पत्ति के आधार पर कोई भेदभावपूर्ण कानून नहीं बनायेगा। लेकिन सामाजिक रूप से शोषित और वंचित लोगों को समाज की मुख्य धारा में लाने तथा जीवन के प्रत्येक पक्ष में समानता लाने के लिए ऐसे वर्गों के लिए संविधान में कुछ विशेष प्रावधान किये गये हैं। ये विशेष प्रावधान भेदभाव को बढ़ावा नहीं देते हैं बल्कि ये व्यवहार में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक समानता को स्थापित करने के सकारात्मक कदम हैं ।

3. व्यक्ति की स्वतंत्रता:
संविधान व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। यह प्रतिबद्धता लगभग एक सदी तक निरंतर चली बौद्धिक और राजनैतिक गतिविधियों का परिणाम है। 19वीं सदी के प्रारंभ में भी राममोहन राय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की काट-छांट का विरोध किया था तथा इस बात पर बल दिया कि राज्य के लिए यह जरूरी है कि वह अभिव्यक्ति की असीमित आजादी प्रदान करे। पूरे ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय प्रेस की आजादी की मांग निरन्तर उठाते रहे। इसीलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान का अभिन्न अंग है।

इसी तरह, मनमानी गिरफ्तारी के विरुद्ध नागरिकों को स्वतंत्रता दी गई है। इसके अतिरिक्त अन्य वैयक्तिक स्वतंत्रताएँ जैसे- अंतरात्मा का अधिकार, आदि इसमें प्रदान की गई हैं। ये व्यक्तिगत स्वतंत्रताएँ उदारवादी लोकतांत्रिक विचारधारा का अभिन्न अंग हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान मजबूत उदारवादी नींव पर खड़ा है। यही कारण है कि संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों में व्यक्ति की स्वतंत्रताओं को अत्यधिक महत्त्व दिया गया है।

4. सामाजिक न्याय:
भारतीय संविधान योरोपीय शास्त्रीय परम्परा में उदारवादी नहीं है । शास्त्रीय उदारवाद जहाँ सामाजिक न्याय और सामाजिक मूल्यों के ऊपर हमेशा व्यक्ति को महत्त्व देता है, वहाँ भारत के संविधान का उदारवाद में व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक न्याय और सामाजिक मूल्यों को भी महत्त्व दिया गया है। भारतीय संविधान का उदारवाद शास्त्रीय उदारवाद से दो मायनों में अलग है।

  • भारत का संविधान सामाजिक न्याय से जुड़ा है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
  • संविधान के विशेष प्रावधानों के कारण ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए विधायिका में सीटों का आरक्षण तथा सरकारी नौकरियों में इन वर्गों को आरक्षण देना संभव हो सका है।

5. समुदाय आधारित अधिकारों तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान:
भारतीय संविधान का उदारवाद सामुदायिक जीवन-मूल्यों का पक्षधर है। भारतीय संविधान समुदायों के बीच बराबरी के रिश्ते को बढ़ावा देता है। भारतीय सामुदायिक जीवन-मूल्यों को खुले तौर पर स्वीकार करते हैं। इसके साथ ही भारत में अनेक सांस्कृतिक समुदाय हैं। यहाँ बहुत से भाषायी और धार्मिक समुदाय हैं। संविधान में समुदाय आधारित अधिकारों को मान्यता दी गई है। ऐसे ही अधिकारोंमें एक है। धार्मिक समुदाय का अपनी शिक्षा संस्था स्थापित करने और चलाने का अधिकार। सरकार ऐसी संस्थाओं को धन दे सकती है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान धर्म को सिर्फ व्यक्ति का निजी मामला नहीं मानता।

6. धर्मनिरपेक्षता:
भारतीय संविधान एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है। पश्चिमी विचारधारा में धर्मनिरपेक्षता को धर्म और राज्य के पारस्परिक निषेध के रूप में देखा गया है। इसका आशय यह है कि राज्य को न तो किसी धर्म की कोई मदद करनी चाहिए और न उसके कार्यों में हस्तक्षेप करना चाहिए। उसे धर्म से एक सम्मानजनक दूरी बनाए रखनी चाहिए। व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए यह आवश्यक है। राज्य को व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए चाहे उस व्यक्ति का धर्म कोई भी हो। भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा पाश्चात्य धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा से दो रूपों में भिन्न है।

  • भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्ति और समुदाय दोनों की धार्मिक स्वतंत्रता से है। इसीलिए भारतीय संविधान सभी धार्मिक समुदायों को अपने शिक्षा संस्थान स्थापित करने और उन्हें चलाने का अधिकार प्रदान करता है।
  • भारत में धर्म और राज्य के अलगाव का अर्थ राज्य की धर्म से सिद्धान्तगत दूरी है, न कि पारस्परिक निषेध राज्य समाज में व्यक्ति की स्वतंत्रता, समता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए अवसर के अनुकूल धर्म के मामले में हस्तक्षेप कर सकता है; वह धार्मिक संगठन द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा संस्थान को धन भी दे सकता है।

7. सार्वभौम मताधिकार:
भारतीय संविधान सार्वभौम मताधिकार के प्रति वचनबद्ध है। भारतीय राष्ट्रवाद की धारणा में हमेशा एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की बात विद्यमान रही है जो समाज के प्रत्येक सदस्य की इच्छा पर आधारित है। सार्वभौम मताधिकार का विचार भारतीय राष्ट्रवाद के बीज विचारों में एक है।

8. संघवाद:
भारतीय संविधान की एक अन्य विशेषता संघात्मक शासन व्यवस्था की स्थापना करना है। संविधान में संघात्मक व्यवस्था के प्रावधानों जैसे—संविधान की सर्वोच्चता, शक्तियों का केन्द्र तथा राज्यों की सरकारों के मध्य बँटवारा, स्वतंत्र न्यायपालिका आदि के साथ-साथ एक मजबूत केन्द्रीय सरकार के निर्माण की बात मानी गई है। एक तरफ तो संघवाद का झुकाव केन्द्र सरकार की मजबूती की ओर है दूसरी तरफ भारतीय संघ की विभिन्न इकाइयों की कानूनी हैसियत और विशेषाधिकार में महत्त्वपूर्ण अन्तर है।

इस प्रकार भारतीय संघवाद संवैधानिक रूप से असमतोल है। पूर्वोत्तर से संबंधित अनुच्छेद 371 को जगह देकर भारतीय संविधान ने असमतोल संघवाद जैसी अवधारणा को अपनाया। लेकिन भारतीय संविधान के अनुसार विभिन्न प्रदेशों के साथ इस असमान व्यवहार में कोई बुराई नहीं है।

9. राष्ट्रीय पहचान:
संविधान में समस्त भारतीय जनता की एक राष्ट्रीय पहचान पर निरंतर जोर दिया गया है। हमारी एक राष्ट्रीय पहचान का भाषा या धर्म के आधार पर बनी अलग- अलग पहचानों से कोई विरोध नहीं है । भारतीय संविधान में इन दो पहचानों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। फिर भी, किन्हीं विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रीय पहचान को वरीयता प्रदान की गई है।

10. स्वतंत्र न्यायपालिका:
भारत के संविधान में स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है। निष्पक्ष न्याय, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, संघ सरकार – राज्य सरकार व राज्य सरकारों के मध्य उत्पन्न विवादों को इसके माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जाता है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान की क्या आलोचनाएँ की गई हैं? इसकी प्रमुख सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की आलोचना: भारतीय संविधान की कई आलोचनाएँ की गई हैं, इनमें से तीन प्रमुख आलोचनाएँ अग्रलिखित हैं।
1. भारतीय संविधान अस्त-व्यस्त: भारतीय संविधान की पहली आलोचना यह की जाती है कि यह संविधान अस्त- व्यस्त या ढीला-ढाला है। इसके पीछे यह धारणा काम करती है कि किसी देश का संविधान एक कसे हुए दस्तावेज के रूप में मौजूद होना चाहिए। लेकिन यह बात संयुक्त राज्य अमरीका जैसे देश के लिए भी सच नहीं है, जहां संविधान एक कसे हुए दस्तावेज के रूप में है। वास्तविकता यह है कि किसी देश का संविधान एक दस्तावेज तो होता ही है, लेकिन इसमें संवैधानिक हैसियत के अन्य दस्तावेजों को भी शामिल किया जाता है।

इससे यह संभव है कि कुछ महत्त्वपूर्ण संवैधानिक वक्तव्य व से नियम उस कसे हुए दस्तावेज से बाहर मिलें जिसे संविधान कहा जाता है। भारत में संवैधानिक हैसियत के ऐसे बहुत वक्तव्यों, ब्यौरों और कायदों को एक ही दस्तावेज के अन्दर समेट लिया गया है। जैस चुनाव आयोग और लोक सेवा आयोग सम्बन्धी प्रावधान भी भारत के संविधान के अंग हैं। इसलिए यह अमेरिका के संविधान की तरह एक कसा हुआ संविधान नहीं बन पाया है।

2. भारतीय संविधान निर्मात्री सभा समस्त जनता की प्रतिनिधि नहीं थी: भारतीय संविधान की दूसरी आलोचना संविधान सभा के प्रतिनिधित्व को लेकर की जाती है कि संविधान सभा के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित नहीं थे, वे प्रान्तों की विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित थे। साथ ही संविधान सभा के सदस्य सीमित मताधिकार से चुने गये थे, न कि सार्वभौमिक मताधिकार से। इस दृष्टि से देखें तो स्पष्ट है कि हमारे संविधान में समस्त जनता का प्रतिनिधित्व नहीं हो सका है। लेकिन यदि प्रतिनिधित्व के दूसरे पक्ष ‘राय’ के आधार पर इस आलोचना का विश्लेषण करें तो हमारे संविधान में गैर- नुमाइंदगी नहीं दिखाई देती है।

क्योंकि संविधान सभा में लगभग हर किस्म की राय रखी गई। संविधान सभा की बहसों में बहुत से मुद्दे उठाये गए और बड़े पैमाने पर राय रखी गई । सदस्यों ने अपने व्यक्तिगत और सामाजिक सरोकार पर आधारित मसले ही नहीं बल्कि समाज के विभिन्न तबकों के सरोकारों और हितों पर आधारित मसले भी उठाये। अतः राय की दृष्टि से उक्त आलोचना भी पूर्णत: सही नहीं है। क्योंकि संविधान निर्माण के बाद हुए पहले आम चुनाव में संविधान सभा के सभी सदस्य निर्वाचित हुए।

3. यह संविधान भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है। भारतीय संविधान की एक अन्य आलोचना यह की जाती है कि यह एक विदेशी दस्तावेज है। इसका हर अनुच्छेद पश्चिमी संविधानों की नकल है और भारतीय जनता के सांस्कृतिक भावबोध से इसका मेल नहीं बैठता। संविधान सभा के भी बहुत से सदस्यों ने यह बात उठायी थी। लेकिन यह आलोचना भ्रामक है क्योंकि:

(i) अनेक भारतीयों ने चिंतन के आधुनिक तरीके को आत्मसात कर लिया है। इन लोगों के लिए पश्चिमीकरण अपनी परंपरा के विरोध का एक तरीका था। राममोहन राय ने इस प्रवृत्ति की शुरुआत की थी और आज भी यह प्रवृत्ति दलितों द्वारा जारी है।

(ii) जब पश्चिमी आधुनिकता का स्थानीय सांस्कृतिक व्यवस्था से टकराव हुआ तो एक किस्म की संकर संस्कृति उत्पन्न हुई। यह संकर-संस्कृति पश्चिमी आधुनिकता से कुछ लेने और कुछ छोड़ने की रचनात्मक प्रक्रिया का परिणाम थी। ऐसी प्रक्रिया को न तो पश्चिमी आधुनिकता में ढूंढा जा सकता है और न ही देशी परम्परा में। पश्चिमी आधुनिकता और देशी सांस्कृतिक व्यवस्था के संयोग से उत्पन्न इस बहुमुखी परिघटना में वैकल्पिक आधुनिकता का चरित्र है। इस तरह, जब हम अपना संविधान बना रहे थे तो हमारे मन में परंपरागत भारतीय और पश्चिमी मूल्यों के स्वस्थ मेल का भाव था । अतः यह संविधान सचेत चयन और अनुकूलन का परिणाम है, न कि नकल का।

भारतीय संविधान की सीमाएँ: भारतीय संविधान की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं।

  1. भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता की धारणा बहुत केन्द्रीकृत है।
  2. इसमें लिंगगत न्याय के कुछ महत्त्वपूर्ण मसलों विशेषकर परिवार से जुड़े मुद्दों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया है।
  3. यह बात स्पष्ट नहीं है कि एक गरीब और विकासशील देश में कुछ बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को मौलिक अधिकारों का अभिन्न हिस्सा बनाने के बजाय उसे राज्य के नीति-निर्देशक तत्व वाले खंड में क्यों डाल दिया गया है। लेकिन संविधान की ये सीमाएँ इतनी गंभीर नहीं हैं कि ये संविधान के दर्शन के लिए ही खतरा पैदा कर दें।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. वह तरंग, जिसमें संपीडन और विरलन हैं, कहलाती है-
(a) अनुप्रस्थ तरंग
(b) अनुदैर्ध्य तरंग
(c) प्रकाश तरंग
(d) जल तरंग।
उत्तर:
(b) अनुदैर्ध्य तरंग।

2. तरंग के वेग v, तरंगदैर्ध्य (λ) तथा आवृत्ति n के बीच सम्बन्ध है-
(a) v = nλ
(b) λ = vn
(c) n = vλ
(d) n = λ/v।
उत्तर:
(a) v = nλ

3. अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न की जा सकती हैं-
(a) ठोस व गैस में
(b) ठोस व द्रव में
(c) गैस व द्रव में
(c) ठोस, द्रव व गैस तीनों में।
उत्तर:
(b) ठोस व द्रव में।

4. अनुदैर्ध्य तरंग में माध्यम के कणों का कम्पन्न-
(a) तरंग की दिशा में होता है
(b) तरंग की दिशा के लम्बवत् होता है।
(c) कण कम्पन नहीं करते हैं
(d) तरंग की दिशा में 60° के कोण पर।
उत्तर:
(a) तरंग की दिशा में होता है।

5. ध्वनि की चाल अधिकतम होती है-
(a) वायु में
(b) ठोसों में।
(c) जल में
(d) जल व ठोस दोनों में।
उत्तर:
(b) ठोसों में

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

6. घड़ी की सुइयों में घण्टे वाली सुई का आवर्तकाल होता है-
(a) 1 घण्टे
(b) 24 घण्टे
(c) 12 घण्टे
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) 12 घण्टे।

7. एक तरंग की चाल 350 मी/से. तथा तरंगदैर्ध्य 50 सेमी है, तो तरंग की आवृत्ति होगी-
(a) 13500 प्रति सेकण्ड
(b) 700 प्रति सेकण्ड
(c) 400 प्रति सेकण्ड
(d) 300 प्रति सेकण्ड।
उत्तर:
(b) 700 प्रति सेकण्ड।

8. प्रति सेकण्ड समय में पूर्ण किए गए दोलनों की संख्या को कहते हैं-
(a) आयाम
(b) चाल
(c) आवर्तकाल
(d) आवृत्ति।
उत्तर:
(d) आवृत्ति।

9. कम्पन करती एक वस्तु का आवर्तकाल 0.02 सेकण्ड है, वस्तु के कम्पन की आवृत्ति होगी-
(a) 100 सेकण्ड
(b) 20 सेकण्ड1
(c) 50 सेकण्ड
(d) 1 सेकण्ड।
उत्तर:
(c) 50 सेकण्ड

10. घड़ी में सेकण्ड वाली सुई का आवर्तकाल होता है-
(a) 1 मिनट
(b) 1 घण्टा
(c) 12 घण्टे
(d) 24 घण्टे।
उत्तर:
(a) 1 मिनट।

11. श्रव्यता सीमा होती है-
(a) 200 Hz से 20000 Hz तक
(b) 20 Hz से 20000 Hz तक
(c) 2 Hz से 20 Hz तक
(d) 20000 Hz से अधिक।
उत्तर:
(b) 20Hz से 20000 Hz तक।

12. प्रतिध्वनि सुनने के लिए हमारे कान तक ध्वनि कम से कम कितने समय बाद पहुंचनी चाहिए?
(a) 0.1 सेकण्ड
(b) 0.5 सेकण्ड
(c) 1 सेकण्ड
(d) 2 सेकण्ड।
उत्तर:
(c) 1 सेकण्ड

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

13. अल्ट्रासोनोग्राफी में प्रयुक्त तरंगों की आवृत्ति है-
(a) 20 हर्ट्ज
(b) 20 हर्ट्ज तक से कम
(c) 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक
(d) 20000 हर्ट्ज से अधिक।
उत्तर:
(d) 20000 हर्ट्ज से अधिक।

14. आयाम का मात्रक है-
(a) मीटर
(b) मीटर / सेकण्ड
(c) हर्ट्ज
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) मीटर।

15. ध्वनि की निर्वात में चाल होती है-
(a) 3 x 108 मी/सेकण्ड
(b) 330 मीटर / सेकण्ड
(c) ध्वनि निर्वातु में नहीं चल सकती
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) ध्वनि निर्वात् में नहीं चल सकती।

रिक्त स्थान भरो-

  1. ध्वनि तब उत्पन्न होती है जब वस्तु ……………….. करती है।
  2. ध्वनि तरंगें ……………….. तरंगें होती हैं।
  3. ध्वनि संचरण के लिए ……………….. की आवश्यकता होती है।
  4. एकल आवृत्ति की ध्वनि को ……………….. कहते हैं।

उत्तर:

  1. कम्पन
  2. अनुदैर्ध्य
  3. माध्यम
  4. टोन।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. चाल(क) 20 Hz से कम
2. ध्वनि का वेग(ख) दूरी/समय
3. अपश्रव्य ध्वनि(ग) 20 kHz से अधिक
4. पराश्रव्य ध्वनि(घ) तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति

उत्तर:
1. (ख) दूरी/समय
2. (घ) तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति
3. (क) 20 Hz से कम
4. (ग) 20 kHz से अधिक

सत्य / असत्य –

  1. शोर सुनने में कर्णप्रिय होता है।
  2. ध्वनि की चाल आर्द्रता बढ़ने पर बढ़ती है।
  3. ध्वनि का आयतन कोण हमेशा ध्वनि के परावर्तन कोण बड़ा होता है।
  4. तरंगदैर्ध्य का SI मात्रक हर्ट्ज होता है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य।

अति लघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनुप्रस्थ तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं?
उत्तर:
ठोसों में तथा द्रवों की सतह पर, जिनमें दृढ़ता होती है।

प्रश्न 2.
अनुदैर्ध्य तरंगें किस प्रकार के माध्यम में उत्पन्न की जा सकती हैं?
उत्तर:
ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में।

प्रश्न 3.
जल में पत्थर फेंकने से जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंगें।

प्रश्न 4.
लोहे में उत्पन्न ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
अनुदैर्ध्य तरंगें।

प्रश्न 5.
वायु में उत्पन्न ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
अनुदैर्ध्य तरंगें।

प्रश्न 6.
किसी तार को दो खूँटियों के बीच तानकर लम्बाई के लम्बवत् खींचकर छोड़ दिया जाता है तो तार में उत्पन्न तरंग का नाम बताइए।
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंग।

प्रश्न 7.
अनुप्रस्थ तरंग के कारण जिस क्षण तालाब का जल ऊपर को उठता है, उस उठे भाग का क्या कहते हैं?
उत्तर:
श्रृंग (Crest)।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 8.
अनुप्रस्थ तरंग के कारण जिस क्षण तालाब का जल नीचे की ओर दबा होता है, उस दबे भाग को क्या कहते हैं?
उत्तर:
गर्त (trough)।

प्रश्न 9.
अनुप्रस्थ तरंगों में दो क्रमागत शृंगों (दो क्रमागत गर्तों) के बीच की दूरी कितनी होती है?
उत्तर:
तरंग दैर्ध्य के बराबर।

प्रश्न 10.
तरंगदैर्ध्य का SI मात्रक क्या है?
उत्तर:
तरंगदैर्ध्य का SI मात्रक मीटर है।

प्रश्न 11.
आवृत्ति का SI मात्रक क्या है?
उत्तर:
आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।

प्रश्न 12.
एक स्वतंत्र रूप से लटकी स्लिंकी को खींचकर छोड़ दिया जाए तो किस प्रकार की तरंगें उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
अनुदैर्ध्य तरंगें।

प्रश्न 13.
घड़ी की सुइयों की गति किस प्रकार की होती है?
उत्तर:
आवर्ती गति।

प्रश्न 14.
हमारे कान में ध्वनि की संवेदना कितने समय तक बनी रहती है?
उत्तर:
0.1 सेकण्ड तक।

प्रश्न 15.
प्रतिध्वनि सुनाई देने का क्या कारण है?
उत्तर:
प्रतिध्वनि सुनाई देने का कारण ध्वनि का परावर्तन है।

प्रश्न 16.
स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए अवरोध प्रतिध्वनि से कम-से-कम कितनी दूर होना चाहिए?
उत्तर:
प्रतिध्वनि सुनने के लिए अवरोध कम-से-कम 17.2 मीटर दूर होना चाहिए।

प्रश्न 17.
हम छोटे कमरों में प्रतिध्वनि क्यों नहीं सुन पाते?
उत्तर:
क्योंकि प्रतिध्वनि सुनने के लिए दीवारों के बीच न्यूनतम 17.2 मीटर की दूरी होनी चाहिए।

प्रश्न 18.
पराध्वनिक वस्तु किसे कहते हैं?
उत्तर:
वायु में ध्वनि की चाल की अपेक्षा, अधिक चाल से चलने वाली वस्तु को पराध्वनिक वस्तु कहते हैं।

प्रश्न 19.
पराध्वनिक बूम क्यों सुनाई देता है?
उत्तर:
किसी वस्तु के वायु में ध्वनि की चाल से अधिक चाल से चलने के कारण।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 20.
SONAR किस वाक्य का संक्षिप्त रूप है? उसे लिखिए।
उत्तर:
SONAR, Sound Navigation And Ranging वाक्य का संक्षिप्त रूप है।

प्रश्न 21.
SONAR में प्रयुक्त होने वाली दो युक्तियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रेषक तथा ग्राही

प्रश्न 22.
SONAR के दो उपयोग बताइए।
उत्तर:

  1. समुद्र की गहराई ज्ञात करना
  2. शत्रु पनडुब्बी की स्थिति का ज्ञान प्राप्त करना।

प्रश्न 23.
संपीडन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कोई अनुदैर्ध्य तरंग आगे बढ़ती है तो जिन स्थानों पर माध्यम के कण एक-दूसरे के बहुत समीप आ जाते हैं तो इन्हें संपीडन कहते हैं।

प्रश्न 24.
विरलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनुदैर्ध्य तरंगों में जिन स्थानों पर माध्यम के कणों की संख्या कम हो जाती है अर्थात् कण दूर-दूर चले जाते हैं, विरलन कहते हैं।

प्रश्न 25.
यदि किसी बिन्दु पर किसी समय संपीडन हो रहा हो तो कितने समय पश्चात्-
(i) उसी स्थान पर विरलन होगा?
(ii) उसी स्थान पर संपीडन होगा?
उत्तर:
(i) T / 2 समय पश्चात् विरलन होगा।
(ii) T समय पश्चात् पुनः संपीडन होगा।

प्रश्न 26.
स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को रबड़ पैड पर मारने से उत्पन्न तरंग स्पंद का उदाहरण है या आवर्ती तरंग का।
उत्तर:
आवर्ती तरंग।

लघुत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनुप्रस्थ तरंगों तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में क्या अन्तर
उत्तर:
अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर

अनुप्रस्थ तरंगअनुदैर्ध्य तरंग
1. इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के लम्बवत् कंपन या दोलन करते हैं।1. इन तरंगों में माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा के अनुरूप ही कंपन या दोलन करते हैं।
2. इनमें श्रंग (crest) गर्त (trough) बनते हैं जिनकी सहायता से ये तरं गें संचरित होती है। एक भूंग व एक गर्त मिलकर एक तरंग बनाते हैं।2. इनमें संपीडन तथा विरलन बनते हैं जिनकी सहायता से ये तरंगें संचरित होती हैं। एक संपीडन व एक विरलन मिलकर एक तरंग बनाते है।
3. ये तरंगें ठोस में तथा द्रवों की ऊपरी सतहों पर से संचरित हो सकती हैं। ये वायु या अन्य गैसों में संचरित नहीं हो सकरीं।3. ये तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों में से संचरित हो सकती हैं।

प्रश्न 2.
अनुदैर्ध्य तरंगों के चलने पर माध्यम में घनत्व व दाब वितरण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
अनुदैर्ध्य तरंग के चलने से माध्यम में संपीडन तथा विरलन पैदा हो जाते हैं। संपीडन वाले स्थानों पर माध्यम के कण पास-पास होते हैं। अतः वहाँ माध्यम का घनत्व एवं दाब सामान्य अवस्था की अपेक्षा अधिक रहता है। इसी प्रकार विरलन वाले स्थानों पर माध्यम का घनत्व एवं दाब सामान्य अवस्था की अपेक्षा कम रहता है।

प्रश्न 3.
‘पराध्वनिक’ से क्या तात्पर्य है? क्या यह पराश्रव्य से भिन्न है?
उत्तर:
कई बार पराश्रव्य (Ultrasonic ) तरंग तथा पराध्वनिक तरंगों में भ्रम हो जाता है।
पराश्रव्य तरंगें 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति वाली तरंगें हैं जबकि पराध्वनिक (Supersonic) पिंड की चाल से संबंधित है। जब कोई पिण्ड ध्वनि की चाल से अधिक चाल से गति करता है तब उसकी चाल को पराध्वनिक चाल कहते हैं।

प्रश्न 4.
ध्वनि बूम से आप क्या समझते हैं? इसके हानिकारक प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
जब पराध्वनिक वायुयान वायु में ध्वनि के वेग से अधिक वेग से उड़ते हैं तो वायु में एक प्रघाती तरंग उत्पन्न हो जाती है। ध्वनि से अधिक तीव्र गति से चलने वाली ये प्रघाती तरंगें ऊर्जा की विशाल मात्रा की वाहक हैं। इन तरंगों के कारण वायु दाब से अत्यधिक परिवर्तन होता है तथा वायु में तीव्र ध्वनि (बादल फटने जैसी) उत्पन्न होती है जिसे ध्वनि बूम (Sonic Boom) कहते हैं।

ध्वनि बूम के हानिकारक प्रभाव –

  • काँच के बर्तन, खिड़कियों के काँच टूट जाते हैं तथा ऊँचे-ऊँचे भवनों को गंभीर हानि हो सकती है।
  • असहनीय शोर होता है जिससे कानों में पीड़ा होती है तथा कर्णपटल को क्षति पहुँच सकती है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 5.
ध्वनि के परावर्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब कोई ध्वनि तरंग दो माध्यमों के सीमा पृष्ठ पर पहुँचती है तो उसका कुछ भाग पहले माध्यम में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।

जब हम कुएँ पर बोलते हैं या ताली बजाते हैं तो हमें वही किन्तु कुछ धीमी ध्वनि कुएँ के अंदर से आती हुई दोबारा सुनाई देती है। दोबारा सुनाई देने वाली ध्वनि पहली ध्वनि की प्रतिध्वनि (Echo) है जो पहली ध्वनि के कुएँ के जल से परावर्तन के कारण दोबारा सुनाई देती है। इसी प्रकार की प्रतिध्वनि हम एक बड़े हॉल या गुंबद से भी ध्वनि के परावर्तन के कारण सुनते हैं।

प्रश्न 6.
यान्त्रिक तरंगें कितने प्रकार की होती हैं? प्रत्येक को उदाहरण देकर समझाइए तथा इनके प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यान्त्रिक तरंगें-वे तरंगें जो किसी (ठोस, द्रव अथवा गैस) पदार्थ के कणों के दोलनों द्वारा उत्पन्न होती हैं तथा आगे बढ़ती हैं यान्त्रिक तरंगें कहलाती हैं; जैसे – वायु में ध्वनि तरंगें, जल में गिरे पत्थर के कारण उत्पन्न तरंगें रस्सी में दोलनों के द्वारा उत्पन्न तरंगें आदि।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 1
माध्यम के कणों के कम्पन करने की दिशा के आधार पर यान्त्रिक तरंगें दो प्रकार की होती हैं-
(1) अनुप्रस्थ तरंगें जब किसी तरंग में माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के लम्बवत् कम्पन करते हैं तो उत्पन्न तरंग अनुप्रस्थं तरंग कहलाती है। यह तरंग श्रृंग तथा गर्त के मिलने से बनती है जब तालाब के जल में पत्थर फेंकते हैं तो अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं तालाब में पत्थर फेंकने से उत्पन्न अनुप्रस्थ तरंग के उठे हुए भाग को शृंग (crest) तथा दबे हुए भाग की गर्त (trough) कहते हैं (चित्र 12.18)।

उदाहरण- वायलिन, सितार आदि की तनी हुई डोरियों में उत्पन्न तरंगें तथा जल की सतह पर उत्पन्न तरंगें ।

गुण- इस प्रकार की तरंगें केवल ठोस तथा द्रव की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं, जिनमें दृढ़ता होती है। ये तरंगें गैसों में उत्पन्न नहीं की जा सकती हैं; क्योंकि गैसों दृढ़ता नहीं होती है।
में

(2) अनुदैर्ध्य तरंगें जब किसी तरंग में माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा में ही कम्पन करते हैं तो उत्पन्न तरंग अनुदैर्ध्य तरंग कहलाती है। यह तरंग संपीडन एवं विरलनों के मिलने से बनती है। जब स्वरित्र को कम्पित कराते हैं और स्वरित्र की भुजाएँ बाहर की ओर जाती हैं तो संपीडन तथा जब भुजाएँ अन्दर की ओर जाती हैं तो विरलन उत्पन्न होता है। (चित्र 12.19 ) ।
उदाहरण – वायु में चलने वाली ध्वनि तरंगें, हुक से लटके एक स्प्रिंग के सिरे से बाँट बाँधकर खींचकर छोड़ने से उत्पन्न तरंगें, जल के अन्दर चलने वाली तरंगें।

गुण – इस प्रकार की तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों ही माध्यमों में उत्पन्न होती हैं। वायु में ध्वनि इन्हीं तरंगों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक तरंग की चाल 250 मीटर / सेकण्ड तथा आवृत्ति 500 हर्ट्ज है। तरंग की तरंगदैर्ध्य तथा आवर्तकाल की गणना कीजिए।
हल:
दिया है v = 250 मीटर / सेकण्ड,
v = 500 हर्ट्ज
तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac { V }{ v }\)
= \(\frac { 250 }{ 300 }\)
= 0.5 मीटर
तथा आवर्तकाल T = \(\frac { 1 }{ v }\)
= \(\frac { 1 }{ 500 }\)
= 0.002 सेकण्ड

प्रश्न 2.
एक सरल लोलक 20 सेकण्ड में 40 दोलन पूरे करता है। दोलनों की आवृत्ति तथा आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
हल:
20 सेकण्ड में पूरे किए गए दोलन = 40
∴ 1 सेकण्ड में पूरे किए गए दोलन = \(\frac { 40 }{ 20 }\) = 2
अत: दोलनों की आवृत्ति v = 2 हज
तथा दोलनों का आवर्तकाल
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 2

प्रश्न 3.
किसी माध्यम में चलने वाली दो यान्त्रिक तरंगों की आवृत्तियों का अनुपात 3 4 है इन तरंगों के
(i) तरंगदैयों का अनुपात क्या दोष होगा?
(ii) आवर्तकाल का अनुपात क्या होगा?
हल:
(i) दिया है v1 : v2 = 3 : 4
∵ v = vλ अत: v1λ1 = v2λ2
अतः \(\frac{v_1}{v_2}=\frac{\lambda_2}{\lambda_1}\) या \(\frac{\lambda_2}{\lambda_1}=\frac{3}{4}\) [∵ \(\frac{v_1}{v_2}=\frac{3}{4}\) ]
अतः \(\frac{λ_1}{λ_2}=\frac{4}{3}\)
अत: λ1 : λ1 = 4 : 3

(ii) आवर्तकाल का अनुपात
तथा v = \(\frac { 1 }{ T }\) अर्थात् \(\frac{v_1}{v_2}=\frac{T_2}{T_1}\)
परन्तु \(\frac{v_1}{v_2}=\frac{3}{4}\)
\(\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}=\frac{3}{4}\) या \(\frac{T_1}{T_2}=\frac{4}{3}\)
आवर्तकाल का अनुपात T1 : T2 = 4 : 3

प्रश्न 4.
यदि प्रकाश का वेग 3 x 108 मीटर/सेकण्ड हो तथा आवृत्ति 5 x 1014 प्रति सेकण्ड हो, तो प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
हल:
प्रकाश का वेग v = 3 x 108 मीटर/सेकण्ड
आवृत्ति v = 5 x 1014 प्रति सेकण्ड?
∵ v = vλ अतः λ = \(\frac { υ }{ v }\)
या λ = \(\frac{3 \times 10^8}{5 \times 10^{14}}\) = 6 × 10-7 मीटर

प्रश्न 5.
X किरणों की तरंगदैर्ध्य 1 Å है। यदि X किरणों की चाल 3 x 108 मीटर/सेकण्ड हो, तो इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है λ = 1 Å = 10-10 मीटर
V = 3 x 108 मीटर/सेकण्ड
v = ?
V = vλ अत: v = \(\frac{v}{\lambda}=\frac{3 \times 10^8}{10^{-10}}\)
v = 3 × 1018 हर्ट्ज

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 6.
एक इलेक्ट्रॉन के दोलन का आवर्तकाल 0.05 माइक्रोसेकण्ड है, इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है T = 0.05 माइक्रोसेकण्ड 0.05 × 10-6
सेकण्ड v = ?
∴ v = \(\frac { 1 }{ T }\) = \(\frac{1}{0.05 \times 10^{-6}}\)
या v = \(\frac{100 \times 10^6}{5}\) = 20 x 106
या v = 2 x 10-6 हर्ट्ज

प्रश्न 7.
एक स्वरित्र की आवृत्ति 512 हर्ट्ज है। यह स्वरित्र 10 सेकण्ड में कितने दोलन करेगा तथा इसका आवर्तकाल क्या होगा?
हल:
दिया है v = 512 हर्ट्ज
अतः 1 सेकण्ड में स्वरित्र द्वारा किए गए दोलन = 512
10 सेकण्ड में स्वरित्र द्वारा किए गए दोलन = 512 × 10 = 5120 दोलन
तथा आवर्तकाल T = \(\frac { 1 }{ v }\) = \(\frac { 1 }{ 512 }\) सेकण्ड

प्रश्न 8.
एक तरंग की आवृत्ति 120 हर्ट्ज है। यदि तरंग की चाल 480 मीटर / सेकण्ड हो, तो तरंगदैर्ध्य का मान क्या होगा?
हल:
दिया है v = 120 हर्ट्ज, V = 480 मीटर / सेकण्ड,
λ = ?
∵ V = vλ अत: λ = \(\frac { υ }{ v }\) = \(\frac { 480 }{ 120 }\)
या λ = 4 मीटर

प्रश्न 9.
एक रेडियो प्रसारण केन्द्र से 40 मेगाहर्टज आवृत्ति की विद्युत चुम्बकीय तरंगें प्रसारित होती हैं। यदि विद्युत चुम्बकीय तरंग की चाल 3 x 108 मीटर / सेकण्ड हो तो इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य क्या होगी?
हल:
दिया है आवृत्ति v = 40 मेगा हर्ट्ज 40 x 106 हर्ट्ज
V = 3 x 108 मीटर / सेकण्ड
λ = ?
υ = vλ अत: λ = \(\frac { υ }{ v }\)
अतः λ = \(\frac{3 \times 10^8}{40 \times 10^6}=\frac{300}{40}\)
या λ = 7.5 मीटर

प्रश्न 10.
जहाज में लगा हुआ एक सोनार उपकरण समुद्र के अन्दर पराश्रव्य तरंगें भेजता है ये तरंगें समुद्र तल से परावर्तित होती हैं। यदि पराश्रव्य तरंगें जहाज से समुद्र तल तक वापस चलने में 2 सेकण्ड लेती हैं; तो समुद्र ‘की गहराई क्या है? (जल में ध्वनि की चाल = 1500 m/s )
हल:
जहाज से समुद्र के तल तक जाने में ध्वनि \(\frac { 2 }{ 2 }\) = 1 सेकण्ड लेती है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 3

प्रश्न 11.
सोनार की सहायता से पानी की सतह पर ध्वनि स्पंदन छोड़ा जाता है। पेंदी से टकराकर परावर्तित होने पर इन स्पंदनों को ग्रहण कर लिया जाता है। यदि स्पंदन के छोड़े एवं ग्रहण किये जाने तक लगा कुल समय 4 सेकण्ड हो तो पानी की गहराई ज्ञात करो।
हल:
स्पंदन द्वारा लिया गया कुल समय = 4s
माना कि भूमि की सतह से पानी की गहराई हो, तो स्पंदन द्वारा तय की गई कुल दूरी = 2d
अत: ध्वनि का वेग = \(\frac { 2d }{ 4s }\)
अथवा,
344 m/s = \(\frac { d }{ 2s }\)
अथवा d = 344 m/s x 2s = 688m

प्रश्न 12.
जहाज में लगा हुआ एक सोनार उपकरण समुद्र के अंदर पराश्रव्य तरंगें भेजता है ये तरंगें समुद्र तल से परावर्तित होती हैं। यदि पराश्रव्य तरंगें जहाज से समुद्र तल तक और वापस जहाज तक (प्रतिध्वनि के रूप में) चलने में 4 सेकण्ड लेती हैं, तो समुद्र की गहराई क्या है? (जल में ध्वनि की चाल = 1500m/s)
हल:
पराश्रव्य ध्वनि तरंगों द्वारा जहाज से समुद्र तल और वापस जहाज तक चलने में लिया गया समय 4 सेकण्ड है। इसलिए, पराश्रव्य ध्वनि द्वारा जहाज से समुद्र तल जाने में लिया गया समय इस समय का आधा होगा जो \(\frac { 4 }{ 2 }\) = 2 सेकण्ड है।
अतः जहाज से समुद्र तल तक जाने में ध्वनि 2 सेकण्ड लेती है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 4
अत: जहाज के नीचे इस समुद्र की गहराई 3000m है।

प्रश्न 13.
समुद्र के अंदर एक व्हेल 75 किमी. दूर अपने मित्र से कुछ कहती है। उसके मित्र को सुनने में कितना समय लगेगा? (ध्वनि की पानी में चाल 1500m/s)।
हल:
दिया है ध्वनि की चाल = 1500m/s
दूरी = 75 km
= 75 x 1000
= 75,000m
लिया गया समय = ?
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 12 ध्वनि 5
इस प्रकार, व्हेल का मित्र, बात की ध्वनि को 50 सेकण्ड बाद सुनेगा।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

Jharkhand Board Class 9 Science प्राकृतिक सम्पदा Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
जीवन के लिए वायुमण्डल क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
जीवन के लिए वायुमण्डल की आवश्यकताजीवों के लिए वायुमण्डल बहुत आवश्यक है। पृथ्वी पर जीवन वायु के घटकों का परिणाम है। स्थलीय जन्तु श्वसन के लिए ऑक्सीजन वायुमण्डल से ही प्राप्त करते हैं। जलीय जीव इसे पानी में घुली हुई अवस्था में प्राप्त करते हैं। यूकैरियोटिक तथा प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं को ग्लूकोज के अणुओं को तोड़ने के लिए तथा उससे ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसी कारण CO2 उत्पन्न होती है। पौधे इस CO2 को ग्लूकोज में बदलते हैं तथा अपने लिए भोजन के रूप में प्राप्त करते हैं। वायुमण्डल ने पूरी पृथ्वी को कम्बल की तरह ढक रखा है।

वायु ताप की कुचालक है इसलिए वायुमण्डल पृथ्वी के औसत तापमान को पूरे वर्ष भर लगभग नियत रखता है। वायुमण्डल दिन के तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है और रात के समय ऊष्मा को बाहरी अन्तरिक्ष में जाने की दर को कम करता है। मौसम सम्बन्धी सभी क्रियाएँ वायुमण्डल द्वारा निर्मित होती हैं। इसलिए जीवन के लिए वायुमण्डल आवश्यक है।

प्रश्न 2.
जीवन के लिए जल क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
जीवन के लिए जल की अनिवार्यता – जल जीवमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण निर्जीव घटक है। जल बहुत से पदार्थों को अपने में घोल लेने में सक्षम है। जीवन की विभिन्न प्रक्रियाओं में स्थलीय जीव-जन्तु और पौधे जल का उपयोग करते हैं। सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में ही होती हैं। हमारे शरीर में या कोशिकाओं के अन्दर होने वाली सभी प्रक्रियाएँ जल में घुले हुए पदार्थों से ही होती हैं। शरीर के अन्दर पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में होता है। इसलिए सजीव प्राणी व पौधे जीवित रहने के लिए अपने शरीर में जल की मात्रा का सन्तुलन बनाये रखते हैं। स्थलीय जीवों को जीवित रहने के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर हैं? क्या जल में रहने वाले जीव सम्पदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतन्त्र हैं?
उत्तर:
जीवित प्राणियों की मृदा पर निर्भरता जीवित प्राणी मृदा पर ही निर्भर करते हैं। मृदा में उत्पन्न पेड़-पौधों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं जो हमें ऊर्जा प्रदान करता है। जीवनयापन के लिए अन्य बहुत से आवश्यक तत्व मृदा से ही प्राप्त होते हैं। पौधे अनेक प्रकार के खनिज लवण मृदा से ही प्राप्त करते हैं और भोजन के तत्वों के रूप में प्राणियों के जीवन का आधार बनते हैं। जल में रहने वाले जीव सम्पदा के रूप में मुदा से पूरी तरह स्वतन्त्र नहीं हैं।

क्योंकि जलीय जीव भी भोजन और ऊर्जा के लिए जल में उगने वाले पौधों पर आश्रित हैं। जलीय पौधे खनिजों को जल से प्राप्त करते हैं। इस प्रकार जल में रहने वाले जीव सम्पदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतन्त्र हैं। परन्तु फिर भी कहीं न कहीं मृदा का उनके साथ सम्बन्ध अवश्य है।

प्रश्न 4.
आपने टेलीविजन पर और समाचार-पत्र में मौसम सम्बन्धी रिपोर्ट को देखा होगा। क्या आप सोचते हैं कि हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं?
उत्तर:
मौसम का पूर्वानुमान जी हाँ, हम मौसम के पूर्वानुमान के सम्बन्ध में भविष्यवाणी पवनों की दिशाओं का अध्ययन करने के बाद कर सकते हैं। पवनों की दिशाओं द्वारा हमें वर्षा होने या न होने, पवनों की गति, तापमान आदि की जानकारी मिल जाती है। पवनों का पैटर्न हमें बता सकता है कि किस दिशा में गर्म और ठंडी हवाएँ बहेंगी और कम वायु दाब तथा उच्च वायु दाब वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं। भारत के अधिकतर भाग में वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी या पूर्वी उत्तरी मानसूनों (मौसमी हवाओं) द्वारा होती है। कम वायु दाब तथा उच्च वायु दाब वाले क्षेत्रों को पहचान कर और मानसून पवनों की दिशा ज्ञात कर हम मौसम सम्बन्धी पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

प्रश्न 5.
हम जानते हैं कि बहुत सी मानवीय गतिविधियाँ वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण स्तर को बढ़ा रही हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी?
उत्तर:
बहुत से मानवीय क्रियाकलाप वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण स्तर को निरन्तर बढ़ा रहे हैं। यदि इन क्रिया कलापों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर दिया जाए तो प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिल सकेगी। यातायात के भारी वाहनों का अस्पतालों के आसपास व घनी बस्तियों में आवागमन प्रतिबन्धित कर वातावरण में हानिकारक गैसों पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। पेट्रोल और डीजल के स्थान पर वाहनों में CNG का प्रयोग कुछ नगरों में प्रारम्भ किया गया है जिसके अनुकूल प्रभाव दिखाई दिये हैं।

खानों की खनन क्रिया को रोककर वायुमण्डल तथा पेड़-पौधों की रक्षा की गई है। नदियों के जल के शुद्धीकरण के लिए प्रयत्न किये गये हैं। यह ठीक है कि हमारे देश में जनसंख्या बहुत अधिक है, अशिक्षा है, निर्धनता है, परन्तु फिर भी प्रयत्न करने पर सकारात्मक परिणाम अवश्य प्राप्त होंगे। इनसे प्रदूषण तो पूर्णरूपेण समाप्त नहीं होगा परन्तु प्रदूषण के स्तर को घटाने में अवश्य सहायता मिलेगी।

प्रश्न 6.
जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
जंगल (वन) तीनों प्राकृतिक स्रोतों वायु, जल तथा मृदा की गुणवत्ता को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करते हैं-
1. जंगल वायुमण्डल में CO2 तथा O2 के अनुपात को बनाए रखते हैं-वृक्ष हमारे पर्यावरण से CO2 गैस की अवशोषित करके तथा O2 गैस मुक्त करके पर्यावरण को स्वच्छ करने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं, जिसके कारण वायुमण्डल में CO2 और O2 की मात्रा का अनुपात ठीक बना रहता है।

2. जंगल मृदा अपरदन को रोकने में सहायक होते हैं- वृक्षों तथा अन्य पौधों एवं वनस्पतियों की जड़ें मिट्टी को जकड़े रहती हैं। यह जल तथा वायु के तेज प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करते हैं जिसके कारण मृदा का अपरदन नहीं होने पाता है तथा मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत का संरक्षण होता रहता है।

3. जंगल जलस्रोतों के पुनः पूरण में सहायक होते हैंवृक्ष वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया द्वारा अत्यधिक मात्रा में जलवाष्प उत्सर्जित करते हैं। यह जलवाष्प संघनित होकर वर्षा वाले बादलों में परिवर्तित हो जाती है। यदि किसी क्षेत्र में वृक्षों की संख्या कम होगी तो उस क्षेत्र में वर्षा कम होगी, परिणामस्वरूप, उस क्षेत्र में जल की कमी हो जायेगी और एक समय ऐसा आयेगा कि वह क्षेत्र मरुस्थल (रेगिस्तान) बन सकता है। अतः ऐसे स्थानों पर वृक्षारोपण और उनकी सुरक्षा करना बहुत आवश्यक है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वन वृक्ष वर्षा को आकर्षित करते हैं जिससे हमारे जलस्रोतों का पुनः पूरण होता रहता है। अतः वन (जंगल) हमारे राष्ट्र की अमूल्य निधि हैं।

Jharkhand Board Class 9 Science प्राकृतिक सम्पदा InText Questions and Answers

क्रियाकलाप 14.1. (पा. पु. पृ. सं. 214)
निम्नलिखित का ताप मापिए- (i) जल से भरा एक बीकर, (ii) मृदा या बालू से भरा एक बीकर और (iii) एक बन्द बोतल लें, जिसमें थर्मामीटर लगा हो। इन सभी को सूर्य के प्रकाश में तीन घन्टे तक रखो। अब तीनों बोतलों के तापमान को मापो। इसी समय छाया में भी तापमान को देखिए।
(i) या (ii) में से किसमें तापमान की माप अधिक है?
उत्तर:
(ii) मृदा या बालू से भरे बीकर का तापमान अधिक है।

प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर कौन सब से पहले गर्म होगा – स्थल या समुद्र?
उत्तर:
सबसे पहले स्थल गर्म होगा।

क्या छाया में वायु का तापमान बालू तथा जल के तापमान के समान होगा? आप इसके कारण के बारे में क्या सोचते हैं और तापमान को छाया में क्यों मापा जाता है?
उत्तर:
छाया में वायु का तापमान बालू तथा जल के तापमान से कम होगा, क्योंकि बालू जल्दी गर्म हो जाती है। इसी प्रकार जल भी वायु की अपेक्षा जल्दी गर्म हो जाता है।

तापमान को छाया में इसलिए मापा जाता है कि सूर्य की गर्मी या किरणों के परावर्तन के कारण तापमान में वृद्धि हो जाती है। अतः इसके कारण तापमान सही मापने में अनुमान लगाना कठिन होता है।

क्या बन्द बोतल या शीशे के बर्तन में लिया गया हवा का तापमान और खुले में लिया गया हवा का तापमान समान है? इसके कारण के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या हम प्रायः इस प्रकार की घटनाओं से अवगत होते हैं?
उत्तर:
बन्द बोतल या शीशे के बर्तन में ली गई हवा का तापमान खुले में लिए गए तापमान से कम होगा क्योंकि बाहर की हवा अन्दर की हवा की तुलना में अधिक गर्म होती है और उस पर मौसम का प्रभाव भी बना रहता है। हम इस प्रकार की घटनाओं से प्रतिदिन अवगत होते रहते हैं।

क्रियाकलाप 14.2. (पा.पु. पृ. सं. 214)
चित्र 14.1 के अनुसार एक मोमबत्ती को चौड़े मुँह वाली बोतल या बीकर में रखकर उसे जलाते हैं। अब एक अगरबत्ती को जलाकर उसे बोतल के मुँह के पास ले जाते हैं।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा 1
जब अगरबत्ती को बोतल के मुँह के किनारे पर ले जाया जाता है तब अवलोकन करते हैं कि धुँआ किस ओर जाता है? जब अगरबत्ती को मोमबत्ती के थोड़ा ऊपर रखा जाता है। तब धुँआ किस ओर जाता है?

दूसरे भागों में जब अगरबत्ती को रखा जाता है तब धुँआ किस ओर जाता है?

धुँआ की दिशाओं को देखने से हमें पता चलता है कि किस दिशा में गर्म और ठंडी हवाएँ बहती हैं। इसी प्रकार जब वायु स्थल और जल के विकिरण के कारण गर्म होती है। तब यह ऊपर की ओर प्रवाहित होती है। चूँकि जल की अपेक्षा स्थल शीघ्र गर्म हो जाता है इसलिए स्थल के ऊपर की वायु जल के ऊपर की वायु की अपेक्षा तेजी से गर्म होती है।

दिन में जब हम तटीय क्षेत्रों की ओर देखते हैं तो पाते हैं कि स्थल के ऊपर की वायु तेजी से गर्म होकर ऊपर की और उठना प्रारम्भ कर देती है। जैसे ही यह वायु ऊपर की ओर उठती है, वहाँ कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है और समुद्र के ऊपर की वायु कम दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित हो जाती है। एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वायु की गति पवनों (winds) का निर्माण करती है। दिन के समय हवा की दिशा समुद्र से स्थल की ओर हो जाती है।

रात के समय स्थल और समुद्र दोनों ठंडे होने लगते हैं। चूँकि स्थल की अपेक्षा जल धीरे-धीरे ठंडा होता है। इसलिए जल के ऊपर की वायु स्थल के ऊपर की वायु से गर्म होगी।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

तटीय क्षेत्रों पर कम तथा उच्च दाब के क्षेत्र रात में प्रतीत होते हैं, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि दिन के समय हवा की दिशा समुद्र से स्थल की ओर होती है। दिन के समय स्थल के ऊपर की वायु तेज गति से गर्म होकर ऊपर उठने लगती है। जैसे ही यह वायु ऊपर की ओर उठती है, वहाँ कम दाब का क्षेत्र बन जाता है और समुद्र के ऊपर की वायु कम दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित हो जाती है।

तटीय क्षेत्रों में रात के समय वायु की दिशा क्या होगी?
उत्तर:
रात के समय स्थल और समुद्र दोनों ठण्डे होने लगते हैं। चूँकि स्थल की अपेक्षा जल धीरे-धीरे ठंडा होता है। इसलिए जल के ऊपर की वायु स्थल के ऊपर की वायु से अधिक गर्म होगी तथा वायु का प्रवाह ऊपर की ओर होगा। हवा की गति और दिशाओं को बहुत से अन्य कारक भी प्रभावित करते हैं, जैसे- पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पवन के मार्ग में आने वाली पर्वत श्रृंखलाएँ।

क्रियाकलाप 14.3. (पा. पु. पृ. सं. 215)
एक पतली प्लास्टिक की बोतल लेकर इसमें 5 से 10 ml जल भर लेते हैं तथा बोतल को कसकर बन्द कर देते हैं। अब इसे अच्छी तरह से हिलाकर 10 मिनट तक धूप में रख देते हैं। इससे बोतल में मौजूद वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है।

अब एक जली हुई अगरबत्ती लेते हैं और बोतल के मुँह को खोलकर अगरबत्ती के धुँए की कुछ मात्रा को बोतल के अन्दर जाने देते हैं। पुनः बोतल को कसकर बन्द कर देते हैं। बोतल को अपनी हथेलियों के बीच में रखकर खूब जोर से दबाते हैं। अब कुछ समय तक प्रतीक्षा करने के बाद बोतल को छोड़ देते हैं। एक बार पुनः बोतल को जितना जोर से सम्भव हो, दबाते हैं।

आपने कब देखा कि बोतल के अन्दर स्थित हवा कुहरे की भाँति हो जाती है?
उत्तर:
बोतल के अन्दर की हवा कुहरे की भाँति तब हो जाती है जब हमने अगरबत्ती के धुँए की कुछ मात्रा को बोतल के अन्दर जाने दिया।

यह कुहासा कब समाप्त होता है?
उत्तर:
यह कुहांसा तब समाप्त होता है जब हम बोतल को हथेलियों के बीच रखकर जोर से दबाते हैं।

बोतल के अन्दर दाब कब अधिक है?
उत्तर:
बोतल के अन्दर अगरबत्ती का धुँआ पहुँचने के बाद बोतल के अन्दर का दाब अधिक हो गया।

कुहासा दिखाई देने की स्थिति में, बोतल के अन्दर का दाब कम है या अधिक।
उत्तर:
कुहासा दिखाई देने की स्थिति में बोतल के अन्दर का दाब अधिक होगा।

इस प्रयोग के लिए बोतल के भीतर धुँए की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
इस बोतल के भीतर दाब बढ़ाने के लिए और बादल की संरचना प्रदर्शित करने के लिए धुँए की आवश्यकता हैं।

क्या होगा जब हम इस प्रयोग को बिना अगरबत्ती के धुँए के करेंगे? अब ऐसा प्रयत्न करते हैं और देखते हैं कि परिकल्पना सही थी या गलत।
उत्तर:
जब हम इस प्रयोग को बिना अगरबत्ती के धुए के करेंगे तो बोतल में कुहासा की स्थिति नहीं बनेगी। इस स्थिति में प्रयोग करने पर हमें यह मालूम हो जाता है कि परिकल्पना सही थी।

क्या होता है जब जलवाष्प से भरी हुई वायु उच्च दाब वाले क्षेत्र से कम दाब वाले क्षेत्र में या इसके विपरीत प्रवाहित होती है?
उत्तर:
दिन के समय जब जलीय भाग गर्म हो जाते हैं तब बहुत अधिक मात्रा में जलवाष्प बन जाती है और यह वाष्प वायु में प्रवाहित हो जाती है जलवाष्प की कुछ मात्रा विभिन्न जैविक क्रियाओं के कारण वायुमण्डल में चली जाती है। यह वायु भी गर्म हो जाती है। गर्म वायु अपने साथ जलवाष्प को लेकर ऊपर की ओर उठ जाती है।

यह वायु ऊपर पहुँचकर फैलती है तथा ठंडी हो जाती है। ठंडा होने के – कारण हवा में उपस्थित जलवाष्प छोटी-छोटी जल की बूँदों में संघनित हो जाती है जिन्हें बादल कहते हैं। जल का यह संघनन सरलतापूर्वक हो जाता है। कुछ कण नाभिक के समान कार्य करके अपने चारों ओर बूँदों को एकत्र होने देते हैं। सामान्यतः वायु में उपस्थित धूल के कण तथा दूसरे निलम्बित कण नाभिक के रूप में कार्य करते हैं।

एक बार जब जल की बूँदें बन जाती हैं तो वे संघनित होने के कारण बड़ी हो जाती हैं। बड़ी और भारी हो जाने पर ये बूँदें वर्षा के रूप में नीचे की ओर गिरती हैं। कभी-कभी जब वायु का तापमान बहुत कम हो जाता है तब ये हिम वृष्टि अथवा ओलों के रूप में गिरती हैं।

वर्षा का पैटर्न पवनों के पैटर्न पर निर्भर करता है। भारत के बहुत बड़े भू-भाग में अधिकतर वर्षा दक्षिण-पश्चिम या उत्तर पूर्वी मानसून के कारण होती है। ऐसा बंगाल की खाड़ी पर वायु का दाब कम होने के कारण कई क्षेत्रों में वर्षा होती है।

क्रियाकलाप 14.4. (पा.पु. पृ. सं. 216)
पूरे देश में होने वालो वर्षा के पैटर्न के बारे में समाचार पत्र या टेलीविजन के माध्यम से मौसम सम्बन्धी सूचनाओं की जानकारी एकत्र करते हैं। यह भी पता लगाते हैं कि एक वर्षामापक यन्त्र कैसे बनाया जाता है और उसे बनाते हैं। वर्षामापक यन्त्र से सही डाटा (आँकड़े) प्राप्त करने के लिए कौन-कौन से सुरक्षात्मक उपाय करने आवश्यक हैं?

किस महीने में आपके शहर/नगर/ गाँव में सबसे अधिक वर्षा हुई?
उत्तर:
जुलाई और अगस्त के महीने में हमारे शहर / नगर / गाँव में सबसे अधिक (मानसूनी) वर्षा हुई।

किस महीने में आपके राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा हुई?
उत्तर:
जुलाई-अगस्त के महीने में हमारे राज्य में सबसे अधिक वर्षा हुई।

क्या वर्षा हमेशा बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ होती है? अगर नहीं, तो किस मौसम में सबसे अधिक वर्षा, बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ होती है।
उत्तर:
वर्षा हमेशा बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ नहीं होती है। जून-जुलाई तथा अगस्त में ग्रीष्मकालीन मौसम में सर्वाधिक वर्षा बादल गरजने एवं बिजली चमकने के साथ होती है।

क्रियाकलाप 14.5. (पा. पु. पू. सं. 216)
पुस्तकालय से मानसून और चक्रवात के बारे में और अधिक जानकारी एकत्र करें। किसी दूसरे देश की वर्षा के पैटर्न का पता लगाएँ क्या पूरे विश्व में वर्षा के लिए मानसून उत्तरदायी होता है?
उत्तर:
मानसून पवनें- वे पवनें हैं जिनकी दिशा मौसम के अनुसार पूर्णरूपेण उल्टी हो जाती है ये पवनें ग्रीष्म ऋतु के 6 महीने समुद्र से स्थल की ओर तथा शीत ऋतु के 6 महीने स्थल से समुद्र की ओर चलती है। ये पवनें मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, बंग्लादेश, बर्मा, श्रीलंका, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, चीन, जापान, उत्तरी आस्ट्रेलिया एवं अमेरिका में चलती हैं।

क्रियाकलाप 14.6.
लाइकेन नामक जीव वायु में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर के प्रति अधिक संवेदी होते हैं। ये प्रायः वृक्षों की छालों पर पतले हरे और सफेद रंग की परत के रूप में पाए जाते हैं। यदि आप के आस-पास वृक्षों पर लाइकेन है तो आप उसे देख सकते हैं।
व्यस्त सड़क के समीप पेड़ पर स्थित लाइकेन और कुछ दूरी पर स्थित पेड़ पर स्थित लाइकेन की तुलना करें।
सड़क के समीप स्थित पेड़ों पर सड़क की ओर की सतहों पर लगे लाइकेन की तुलना सड़क की विपरीत दिशा की ओर वाली सतहों पर लगे लाइकेन से करें।

खंड 14.1.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 217)

प्रश्न 1.
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमण्डल से हमारा वायुमण्डल कैसे भिन्न है?
उत्तर:
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमण्डल का मुख्य घटक कार्बन डाइऑक्साइड है। इनके वायुमण्डल में 95 से 97 प्रतिशत तक कार्बन डाइऑक्साइड है। जबकि हमारी पृथ्वी के वायुमण्डल में नाइट्रोजन ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प का मिश्रण है।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कैसे कार्य करता है?
उत्तर:
वायु ऊष्मा का कुचालक है वायुमण्डल पृथ्वी के औसत तापमान को दिन के समय और यहाँ तक कि पूरे वर्ष भर लगभग नियत रखता है। वायुमण्डल दिन में तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है और रात के समय ऊष्मा की बाहरी अन्तरिक्ष में जाने की दर को कम करता है। इस तरह वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 3.
वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं?
उत्तर:
वायु प्रवाह, हमारे वायुमण्डल में हवा के गर्म होने और जलवाष्प बनने का परिणाम है जलवाष्प जीवित प्राणियों के क्रियाकलापों और जल के गर्म होने के कारण बनती है। स्थलीय भाग या जलीय भाग से होने वाले विकिरण के परावर्तन तथा पुनर्विकिरण के कारण वायुमण्डल गर्म होता है जिससे वायु में संवहन धाराएँ उत्पन्न होती हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

प्रश्न 4.
बादलों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
बादलों का निर्माण क्रियात्मक प्रश्नोत्तर 14.3 के अन्तर्गत प्रश्न (7) का उत्तर देखिए।.

प्रश्न 5.
मनुष्य के तीन क्रियाकलापों का उल्लेख करें, जो वायु प्रदूषण में सहायक हैं।
उत्तर:
वायु प्रदूषण में सहायक मनुष्य के तीन क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं-

  • मोटर वाहनों में पेट्रोल और डीजल का उपयोग ईंधन के रूप में करना।
  • कल-कारखानों, इंजनों और थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले का ईंधन के रूप में उपयोग किया जाना तथा औद्योगिक विस्तार।
  • अन्य मानवीय क्रियाकलापों से उत्पन्न होने वाला धुँआ, वनों की अबाध कटाई तथा नगरीकरण का विकास आदि।

क्रियाकलाप 14.7. (पा.पु. पू. सं. 218)
बहुत से नगर निगम जल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जल संग्रहण की तकनीकों पर कार्य कर रहे हैं। पता लगाइये कि ये कौन कौन-सी तकनीक हैं तथा ये उपयोग के लिए उपलब्ध जल की मात्रा बढ़ाने में किस प्रकार सहायक हैं?
उत्तर:
जल की उपलब्धता विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न है। गर्मी में अधिकतर स्थानों पर भूमिजल की मात्रा भी कम हो जाती है। शुद्ध जल के भंडार विभिन्न स्थानों पर बिखरे हुए हैं। देश के प्रत्येक व्यक्ति तक शुद्ध पेय जल पहुँचाना सरकार का कार्य है। यह कार्य नगर निगमों के द्वारा जल आपूर्ति करके किया जाता है।

शुद्ध जल हमें प्राकृतिक रूप में वर्षा के द्वारा प्राप्त होता है जो नदियों, तालाबों और झीलों के रूप में मिलता है। इस जल को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु नदियों पर बड़े-बड़े बाँध बनाये जाते हैं। फिर इन बाँधों से नहरों के द्वारा इस जल को गाँव-गाँव तक पहुँचाया जाता है। शहर और कस्बों में तालाब या बड़े-बड़े टैंकों में नहर से जल की आपूर्ति होती रहती है। पहले नहर के जल को क्लोरीनीकरण क्रिया या छनन क्रिया द्वारा शुद्ध करके पाइप लाइनों के माध्यम से घर-घर तक पहुँचाया जाता है।

बाँधों में संग्रहित जल से बिजली बनाई जाती है, सिंचाई की जाती है तथा करोड़ों लोगों को समय पर शुद्ध पेय जल मिलता है। जल संग्रहण तकनीक से जल की उपलब्धता की मात्रा कई गुना बढ़ गई है।

जल हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि सभी प्रतिक्रियाएँ जो हमारे शरीर में या कोशिकाओं के अन्दर होती हैं वह जल में घुले हुए पदार्थों में, जलीय माध्यम में होती हैं। शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में होता है। स्थलीय जीवों को जीवित रहने के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है क्योंकि खारे जल में नमक की अधिक मात्रा होने के कारण जीवों का शरीर उसे सहन नहीं कर पाता है। इसलिए प्राणियों और पौधों को पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए सुगमतापूर्वक जल उपलब्धि के स्रोत आवश्यक हैं।

क्रियाकलाप 14.8. (पा.पु. पू. सं. 218)
किसी नदी, तालाब या झील के समीप एक छोटे से स्थान को चुनते हैं। माना कि एक वर्ग मीटर। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न पौधों एवं जन्तुओं की संख्या को गिन लें। प्रत्येक स्पीशीज की अलग-अलग गणना करें।
इसकी तुलना सूखे और पथरीले भाग के उतने ही बड़े क्षेत्र में पाए जाने वाले जन्तुओं और पौधों से करें। क्या दोनों क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधे और जन्तु एक प्रकार के हैं?
उत्तर:
क्रियाकलाप के अनुसार हमने चुने हुए दोनों क्षेत्रों के पौधों और जन्तुओं की गणना कर ली।

नदी के पास वाले क्षेत्र की सूखे और पथरीले क्षेत्र से तुलना करने पर हमने पाया कि सूखे व पथरीले क्षेत्र में बहुत ही कम स्पीशीज के थोड़े से पौधे और जन्तु थे जबकि सूखे क्षेत्र की तुलना में नदी के समीप वाले क्षेत्र में कई गुना अधिक विभिन्न प्रकार के सैकड़ों पौधों और जन्तुओं की स्पीशीज पाई गई।

क्रियाकलाप 14.9. (पा.पु. पु. सं. 218)
अपने विद्यालय के समीप या किसी प्रयोग में न आने वाली भूमि को चुनें।
उसी प्रकार उस क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न जन्तुओं और पौधों तथा प्रत्येक स्पीशीज के जीवों की संख्याओं की गणना करें।
उसी स्थान की गणना वर्ष में दो बार करें। एक बार गर्मी में या सूखे मौसम में और दूसरी बार बरसात के मौसम के बाद।

अब उत्तर दें

प्रश्न 1.
क्या दोनों बार संख्याएँ समान थीं?
उत्तर:
नहीं, दोनों बार समान संख्या नहीं थीं।

प्रश्न 2.
किस मौसम में आपने विभिन्न प्रकार के पौधों और जन्तुओं की अधिकता पाई?
उत्तर:
बरसात के मौसम के बाद गणना करने पर गर्मी की गणना की अपेक्षा कई गुना अधिक पौधों और जन्तुओं की संख्या हमें प्राप्त हुई।

प्रश्न 3.
प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या किस मौसम में अधिक थी?
उत्तर:
बरसात के बाद वाले मौसम में प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या गर्मी वाले मौसम की संख्या से अधिक थी।

इसी प्रकार वर्षा के पैटर्न के अनुसार 200 cm वर्षा वाले क्षेत्र में हम सबसे अधिक प्रकार के जीवों की उपलब्धता पाते हैं।

मानचित्र में वर्षा के पैटर्न को देखकर हम असम तथा उत्तरांचल राज्यों में सबसे अधिक जैव विविधता पाते हैं, जबकि राजस्थान और गुजरात राज्यों में सबसे कम जैव विविधता पाते हैं।

निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि जल की उपलब्धता प्रत्येक स्पीशीज के वर्ग जो कि एक विशेष क्षेत्र में जीवित रहने में सक्षम हैं, की संख्या को ही निर्धारित नहीं करती, अपितु यह वहाँ के जीवन में विविधता को भी निर्धारित करती है। जीवन की विविधता को निर्धारित करने के लिए जल के अतिरिक्त तापमान और मिट्टी की प्रकृति भी महत्त्वपूर्ण कारक है। किन्तु जल एक महत्त्वपूर्ण संपदा है जो जीवन को स्थल पर निर्धारित करता है।

खंड 14.2.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 219)

प्रश्न 1.
जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
जीवों को जल की आवश्यकता – जीवों की सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं। हमारे शरीर में या कोशिकाओं में होने वाली प्रक्रियाएँ जल में घुलित पदार्थों में होती हैं। शरीर के एक भाग से दूसरे भागों में पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में होता है। इसलिए जीवों को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
जिस गाँव / शहर / नगर में आप रहते हैं, वहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत क्या है?
उत्तर:
हमारे गाँव में उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत वर्षा तथा हैण्डपम्प का जल है। शहर / नगर में शुद्ध जल, टंकियों में एकत्रित किये हुए जल को क्लोरीनीकरण क्रिया द्वारा (या छनन क्रिया द्वारा) शुद्ध करके पाइप लाइनों के माध्यम से घर-घर पहुँचाया जाता है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

प्रश्न 3.
क्या आप किसी ऐसे क्रियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा है?
उत्तर:
हाँ, वें क्रियाकलाप हैं- जलाशयों में अनैच्छिक पदार्थों का डालना जैसे पीड़कनाशी, रासायनिक उर्वरक, कारखानों से निकलने वाले विषैले अपशिष्ट पदार्थ। शहरों की सीवर लाइनों तथा गन्दी नालियों का दूषित पानी, जिसमें अनेक प्रकार के विषाक्त पदार्थ मिले होते हैं।

क्रियाकलाप 14.10. (पा. पु. पृ. सं. 220)
कुछ मृदा लेकर उसे जल से भरे बीकर में डालते हैं। ली गई मृदा की मात्रा का लगभग 5 गुना जल लेते हैं। मृदा और जल को मिलाते हैं और फिर मृदा को नीचे जमने देते हैं। कुछ समय बाद उसका अवलोकन करें।
क्या बीकर के तल में मृदा समांगी है या परतों में विभाजित है?
अगर परतों का निर्माण हुआ है तो किस प्रकार एक परत दूसरे से भिन्न है?
क्या वहाँ जल की सतह पर कुछ तैर रहा है?

क्या आप सोच सकते हैं कि कुछ पदार्थ जल में घुल गए होंगे? आप इसे कैसे रोकेंगे?
उत्तर:
क्रियाकलाप से हमने देखा कि मृदा एक मिश्रण है। इसमें विभिन्न प्रकार के छोटे-छोटे टुकड़े मिले होते हैं। इसमें सड़े-गले जीवों के टुकड़े भी मिले होते हैं जिसे ह्यूमस (Humus) कहा जाता है। इसके अतिरिक्त मिट्टी में विभिन्न प्रकार के जीव भी मिले होते हैं। मृदा के प्रकार का निर्णय उसमें पाये जाने वाले कणों के औसत आकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। मृदा के गुण का निर्धारण उसमें स्थित ह्यूमस की मात्रा और उसमें पाये जाने वाले सूक्ष्म जीवों के आधार पर किया जाता है।

मृदा की संरचना का मुख्य कारक ह्यूमस है, क्योंकि यह मृदा को सरन्ध्र बनाता है और वायु तथा जल को भूमि के अन्दर जाने में सहायक होता है। खनिज पोषक तत्व जो उस मृदा में पाये जाते हैं वह उन पत्थरों पर निर्भर करते हैं जिनसे मृदा बनी है। किस मृदा पर कौन सा पौधा होगा यह इस पर निर्भर करता है कि उस मृदा में पोषक तत्व कितने हैं, हयूमस की मात्रा कितनी है और उसकी गहराई कितनी है। इस प्रकार, मृदा की ऊपरी परत में जिसमें मृदा के कणों के अतिरिक्त हयूमस और सजीव स्थित होते हैं, उसे उपरिमृदा कहा जाता है। उपरिमृदा की गुणवत्ता, जो उस क्षेत्र की जैव विविधता को निर्धारित करती है, एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

आधुनिक समय में खेतों में पीड़कनाशकों और उर्वरकों का बहुत बड़ी मात्रा में प्रयोग हो रहा है। लम्बे समय तक इन पदार्थों का उपयोग करने से मृदा के सूक्ष्म जीव मृत हो जाते हैं और मृदा की संरचना को नष्ट कर सकते हैं जो कि मृदा के पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं। ह्यूमस बनाने में सहायक भूमि में स्थित केंचुओं को भी वे समाप्त कर सकते हैं उपयोगी घटकों का मृदा से हटना और दूसरे हानिकारक पदार्थों का मृदा में मिलना जो कि मृदा की उर्वरता को प्रभावित करते हैं और उसमें स्थित जैविक विविधता को नष्ट कर देते हैं। इसे भूमि प्रदूषण कहते हैं।

क्रियाकलाप 14.11. (पा.पु. पू. सं. 221)
एक ही प्रकार की दो ट्रे लेकर मृदा से भर देते हैं। एक ट्रे में सरसों या मूंग अथवा धान या हरे चने का पौधा रोपते हैं और दोनों ट्रे में तब तक जल देते हैं जब तक कि जिस ट्रे में पौधा रोपा गया है, वह पौधे की वृद्धि से ढक नहीं जाए। यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि दोनों ट्रे एक ही कोण पर झुके हों। दोनों ट्रे में समान मात्रा में जल इस प्रकार डालते हैं कि जल बाहर की ओर न निकलने पाए।

  • ट्रे से बाहर जाने वाली मृदा की मात्रा का अध्ययन करें। क्या बहने वाली मृदा की मात्रा दोनों ट्रे में समान है?
  • अब कुछ ऊँचाई से दोनों ट्रे में समान मात्रा में जल डालते हैं जितना कि हमने पहले डाला था उतनी ही मात्रा में जल तीन से चार बार डालते हैं।
  • अब मृदा की मात्रा का अध्ययन करते हैं जो ट्रे से बाहर चली गई है। क्या दोनों ट्रे में मृदा की मात्रा समान है?
    JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा 2

उत्तर:
उपरोक्त प्रकार से हमने अपनी प्रयोगात्मक व्यवस्था सैट कर ली। फिर इसके कुछ समय बाद जल के साथ बहने वाली मृदा का अध्ययन किया तो पाया कि एक ट्रे जिसमें पौधा नहीं रोपा गया था वह मृदा दूसरे ट्रे की मृदा से बहुत अधिक बढ़ गई थी। फिर कुछ ऊँचाई से 3-4 बार दोनों ट्रे में समान मात्रा में पानी डालने पर फिर मृदा का अध्ययन किया जो ट्रे से बाहर चली गई थी तो हमने पाया कि एक ट्रे में कम और रोपे गए पौधे वाली ट्रे में अधिक मृदा है।

इस क्रियाकलाप से यह स्पष्ट होता है कि पौधों की जड़ें मृदा के अपरदन (erosion) को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बड़े स्तर पर जंगलों को काटना न केवल जैव विविधता को नष्ट कर रहा है बल्कि मृदा के अपरदन के लिए भी उत्तरदायी है। वनस्पति के लिए सहायक उपरिमृदा अपरदन की प्रक्रिया में तीव्रता से हट सकती है। अतः मृदा अपरदन को रोकना बहुत कठिन है। सतह पर पायी जाने वाली वनस्पति जल को परतों के अन्दर जाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खंड 14.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 222)

प्रश्न 1.
मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
मृदा (मिट्टी) का निर्माण हजारों और लाखों वर्षों के लम्बे समयान्तराल में पृथ्वी की सतह या उसके समीप पाये जाने वाले पत्थर विभिन्न प्रकार के भौतिक- रासायनिक और कुछ जैव प्रक्रमों के द्वारा टूट जाते हैं। टूटने के बाद सबसे अंत में बचा महीन कण मृदा है। सूर्य, जल, वायु और जीव मृदा निर्माण प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं।

प्रश्न 2.
मृदा अपरदन क्या है?
उत्तर:
मृदा अपरदन – जल तथा वायु के प्रभाव से मृदा की ऊपरी परत बह जाती है जिसे मृदा अपरदन कहते हैं। मृदा अपरदन प्रमुख रूप से वनस्पति हीन, ढालू तथा कम ह्यूमस वाले क्षेत्रों में अधिक होता है। मृदा अपरदन का मुख्य कारण मनुष्य के अवांछित क्रियाकलाप जैसे वनों की अन्धाधुन्ध कटाई, पशुओं द्वारा अनियन्त्रित चराई कराना तथा अवैज्ञानिक ढंग से खेती करना आदि हैं।

प्रश्न 3.
अपरदन को रोकने और कम करने के कौन-कौन से तरीके हैं?
उत्तर:
अपरदन को रोकने के तरीके- हमारे देश में मृदा अपरदन एक बहुत ही गम्भीर समस्या बन गई है। ऐसी परिस्थिति में मृदा का संरक्षण बहुत ही आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं-
(1) वृक्षारोपण – मृदा अपरदन को रोकने का सबसे कारगार उपाय वृक्षारोपण है। जहाँ अपरदन की समस्या गम्भीर हो गई हो, वहाँ नए वृक्ष लगाए जाने चाहिए। वनों की अन्धाधुन्ध कटाई तथा उनके दुरुपयोग पर रोक लगाई जानी चाहिए।

(2) पशुचारण पर नियन्त्रण – खाली खेतों में पशुओं के बिना रोक-टोक घूमने से उनके खुरों से मिट्टी ढीली हो जाती है। इससे वर्षा के जल और वायु के लिए मृदा अपरदन आसान हो जाता है। अतः पशुचारण पर नियन्त्रण होना चाहिए। नियन्त्रित पशु चराई से मृदा अपरदन रुक सकता है।

(3) कृषि प्रणाली में सुधार – कृषि प्रणाली में सुधार करके मृदा अपरदन को बहुत कुछ रोका जा सकता है। इनमें फसल चक्र अपनाना, सीढ़ीदार खेती करना तथा ढालों पर समोच्च रखी जुताई करना आदि उपाय किये जाने चाहिए।

(4) बाँध बनाना – बरसात के दिनों में जब नदी में बाढ़ आती है तो बहुत सी उपजाऊ मिट्टी जल के साथ बह जाती हैं। इसे रोकने के लिए नदियों पर बाँध बनाये जाने चाहिए। इससे जल के वेग में कमी आती है और मृदा अपरदन रुक जाता है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

क्रियाकलाप 14.12. (पा. पु. पृ. सं. 225)
(i) वैश्विक ऊष्मीकरण के क्या परिणाम हो सकते हैं?
(ii) कुछ अन्य ग्रीन हाउस गैसों के नामों का भी पता लगाइए।
उत्तर:
(i) वैश्विक ऊष्मीकरण के कारण हमारी पृथ्वी के वायुमण्डल में ऊष्मा (गर्मी) की वृद्धि हो रही है जिसके फलस्वरूप –

  • हिमचोटियों और हिमनदियों के पिघलने से -समुद्र तल की ऊँचाई में वृद्धि हो रही है और तटवर्ती क्षेत्र तथा द्वीप डूबते जा रहे हैं या डूबने की स्थिति में हैं।
  • समय से पहले फसलें पक जाने के कारण अनाज के दानों का आकार छोटा होता जा रहा है।
  • मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे उसकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है।

(ii) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के अतिरिक्त वायुमण्डल में ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने वाली अन्य गैसें मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरो कार्बन, SO2 आर्गन, अमोनिया तथा क्रिप्टान आदि हैं।

क्रियाकलाप 14.13: (पा. पु. पृ. सं. 226)
पता लगाएँ कि और कौन से अणु हैं जो ओजोन परत को हानि पहुचाते हैं? समाचार-पत्रों में प्रायः ओजोन परत में होने वाले छिद्र की चर्चा की जाती है। पता लगाएँ कि क्या छिद्र में कोई परिवर्तन हो रहा है ? वैज्ञानिक क्या सोचते हैं कि यह किस प्रकार पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करेगा ?
उत्तर:
क्रियाकलाप के इन प्रश्नों के उत्तर के लिए खण्ड 14.5 के अन्तर्गत ‘ओजोन परत’ को ध्यानपूर्वक पढ़िये।

खंड 14.4 और 14.5 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 226)

प्रश्न 1.
जल चक्र के क्रम में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
जलचक्र के क्रम में जल पहले वाष्प बनता है। फिर संघनित होकर वर्षा के रूप में पृथ्वी की सतह पर गिरता है और फिर यह जल नदियों के द्वारा समुद्र में पहुँच जाता है।

प्रश्न 2.
जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाए जाते हों।
उत्तर:
जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण यौगिक प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, DNA तथा RNA तथा कुछ विटामिन हैं।

प्रश्न 3.
मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिनसे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
उत्तर:
मनुष्य की तीन गतिविधियाँ जिनसे वायु में CO2 की मात्रा बढ़ती है निम्नांकित हैं-

  • दहन की क्रिया जहाँ ईंधन का उपयोग भोजन पकाने व गर्म करने में होता है। होना।
  • यातायात के लिए मोटर वाहनों का उपयोग करना।
  • उद्योगों के द्वारा वायुमण्डल में (CO2) का प्रवेश

प्रश्न 4.
ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है?
उत्तर:
ग्रीन हाउस प्रभाव- कुछ गैसें, जैसे- CO2, मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, CFC आदि पृथ्वी से ऊष्मा को पृथ्वी के वायुमण्डल के बाहर जाने से रोकती हैं। वायुमण्डल में विद्यमान इस प्रकार की गैसों में वृद्धि संसार के औसत तापमान को बढ़ा सकती है। इस प्रकार के प्रभाव को फ़ोन हाउस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल में पाए जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल में पाये जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप-

  • द्विपरमाण्विक अणु O2, तथा
  • वायुमण्डल के ऊपरी भाग में तीन परमाणु वाले अणु O3 (ओजोन)

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

Jharkhand Board Class 9 Science परमाणु की संरचना Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूटॉन के गुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 1

प्रश्न 2.
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ थीं?
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन ने परमाणु का एक मॉडल दिया, जिसमें इलेक्ट्रॉन परमाणु के पूरे आयतन में एक समान रूप से वितरित रहते हैं। जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गय है। यह माना गया कि परमाणु का द्रव्यमान समान रूप से वितरित रहता है। यह स्थापित किया गया कि परमाणु का आकार 10-10 या 1Å होता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 2
जे. जे टामसन का परमाणु मॉडल दूसरे वैज्ञानिकों के द्वारा किये गये परिणामों को नहीं समझा सका।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धान्त के अनुसार रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल दोषपूर्ण पाया गया। इस सिद्धान्त के अनुसार गति करता हुआ विद्युत आवेशित कण निरन्तर विद्युत चुम्बकीय तरंगें विकरित करेगा, जिससे उसकी ऊर्जा में कमी होगी। अतः ऊर्जा में इस प्रकार की कमी होने
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 3
के कारण इलेक्ट्रॉन की गति कम होती जायेगी, जिससे उसकी कक्षाएँ छोटी होती जायेंगी और अन्त में इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जायेगा (चित्र)। इसका अभिप्राय यह होगा कि परमाणु एक अस्थायी यन्त्र है। इसका समाधान रदरफोर्ड के मॉडल द्वारा नहीं किया जा सका।

प्रश्न 4.
बोर के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए बोर ने सन् 1931 में क्वाण्टम सिद्धान्त पर आधारित नया परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया। इसके अनुसार-

  • परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित एवं स्थायी वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
  • प्रत्येक कक्षा में चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निश्चित होती है। इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर (Energy Levels) भी कहते हैं।
  • इन कक्षाओं में चक्रण करता हुआ इलेक्ट्रॉन न तो ऊर्जा का अवशोषण करता है और न उत्सर्जन।
  • ऊर्जा का अवशोषण करने पर इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में तथा ऊर्जा का उत्सर्जन करने पर इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमित हो जाता है। इन कक्षाओं को 1, 2, 3, 4 या K, L, M, N से प्रदर्शित करते हैं।
    JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 4

प्रश्न 5.
इस अध्याय में दिए गए सभी परमाणु मॉडलों की तुलना कीजिए।
उत्तर:

टॉमसन का परमाणु मॉडलरदरफोर्ड का परमाणु मॉडलबोर का परमाणु मॉडल
(a) धन आवेश (प्रोटॉन)परमाणु के अन्दर धनावेशित क्षेत्र होता है।धनावेश परमाणु के केन्द्र में इकट्ठा होता है। यह भारी, धनावेशित केन्द्र नाभिक कहलाता है।धनावेश परमाणु के केन्द्र में स्थित नाभिक में इकट्ठा होता है।
(b) ऋण आवेश (इलेक्ट्रॉन)परमाणु के धनावेशित क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन यहाँ-वहाँ बिखरे होते हैं।नाभिक को इलेक्ट्रॉन घेरे रहते हैं। नाभिक और इलेक्ट्रॉन, स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा अपनी-अपनी जगह टिके होते हैं।इलेक्ट्रॉन, नाभिक के आस-पास घूमते हैं। प्रत्येक की कक्षा एवं ऊर्जा स्तर भी होता है।

प्रश्न 6.
पहले अठारह तत्वों के विभिन्न कक्षों में इलेक्ट्रॉन वितरण के नियम को लिखिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन वितरण का बोर एवं बरी नियम निम्नलिखित हैं-
(1) किसी कक्ष में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² हो सकती है। जबकि n इलेक्ट्रॉन की कक्ष संख्या है।
प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन = 2n² = 2 x (1)² = 2
द्वितीय कक्ष में इलेक्ट्रॉन = 2 x (2)² = 2 x 4 = 8
तृतीय कक्ष में इलेक्ट्रॉन = 2 × (3)² = 2 × 9 = 18

(2) बाह्यतम कक्षा में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं। और उससे पहले वाले कक्ष में आधे।

(3) किसी परमाणु के दिए गए कोश में इलेक्ट्रॉन तब तक स्थान नहीं लेते हैं। जब तक कि उससे पहले वाले भीतरी कक्ष पूर्ण रूप से भर नहीं जाते। स्पष्ट होता है कि कक्षाएँ क्रमानुसार भरती हैं।

प्रश्न 7.
सिलिकॉन और ऑक्सीजन का उदाहरण लेते हुए संयोजकता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
कोई परमाणु बाह्यतम कोश को पूर्ण करने के लिए जितने इलेक्ट्रॉन लेता है या देता है, वही उसकी संयोजकता कहलाती है।
क्योंकि यह दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 5
क्योंकि यह दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है।

प्रश्न 8.
उदाहरण के साथ व्याख्या कीजिए-परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और समभारिक समस्थानिकों के कोई दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
परमाणु संख्या-किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन की संख्या को उसकी परमाणु संख्या कहते हैं। जैसे-हाइड्रोजन की परमाणु संख्या 1 क्योंकि इसके नाभिक में 1 प्रोटॉन होता है। कार्बन की परमाणु संख्या 6 है क्योंकि इसके नाभिक में 6 प्रोटॉन होते हैं।

द्रव्यमान संख्या-किसी तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या द्रव्यमान संख्या कहलाती है। जैसे-कार्बन की द्रव्यमान संख्या 12 है क्योंकि कार्बन के नाभिक में 6 प्रोटॉन और 6 न्यूट्रॉन होते हैं। ऐलुमिनियम की द्रव्यमान संख्या 27 है क्योंकि इसके नाभिक में 13 प्रोटॉन और 14 न्यूट्रॉन होते हैं।

समस्थानिक- किसी तत्व के ऐसे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है किन्तु द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती है वे उस तत्व के समस्थानिक कहलाते हैं। जैसे-
क्लोरीन के दो समस्थानिक हैं।
क्लोरीन \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\)
क्लोरीन \({ }_{17}^{37} \mathrm{Cl}\)
समभारिक – तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है किन्तु परमाणु संख्या भिन्न-भिन्न होती है, समभारिक कहलाते हैं जैसे कैल्शियम की परमाणु संख्या 20 तथा आर्गन की परमाणु
संख्या 18 है परन्तु दोनों के परमाणु द्रव्यमान समान (40) हैं।

समस्थानिकों के उपयोग:

  • कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक (Co-60) का प्रयोग किया जाता है।
  • घेंघा रोग के उपचार में 1-131 समस्थानिक का प्रयोग किया जाता है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 9.
Na के पूरी तरह से भरे हुए K व L कोश होते हैं- व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सोडियम (Na) का परमाणु क्रमांक 11 है; अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। M-कोश के इलेक्ट्रॉन निकल जाने के उपरान्त सोडियम आयन (Na+) प्राप्त होता है जिसके K कोश में 2 तथा L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा M- कोश विलुप्त हो जाता है। शेष दोनों कोशों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या, इन कोशों में होने वाले इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या के बराबर है अर्थात् K तथा L कोश पूर्णतः भरे हुए हैं।

प्रश्न 10.
अगर ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकों [ \({ }_{35} \mathbf{B r}^{79}\) (49.7%) तथा \({ }_{35} \mathrm{B} r^{81}\) (50.3%)] के रूप में है तो ब्रोमीन परमाणु के औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए ।
हल:
ब्रोमीन परमाणु का औसत परमाणु द्रव्यमान
= \(\left(79 \times \frac{49.7}{100}+81 \times \frac{50.3}{100}\right)\)
= 39.263 + 40.743
= 80.006 u

प्रश्न 11.
एक तत्त्व का परमाणु द्रव्यमान 16.2u है तो इसके किसी एक नमूने में समस्थानिक \({ }_8 X^{16}\) और \({ }_8 X^{18}\) का प्रतिशत क्या होगा?
है।
होगी।
उत्तर:
माना नमूने में \({ }_8 X^{16}\) समस्थानिक की प्रतिशतता a है।
अत: \({ }_8 X^{18}\) समस्थानिक की प्रतिशतता (100-a)
अब
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 6

अतः नमूने में, \({ }_8 \mathrm{X}^{16}\) की प्रतिशतता 90% तथा \({ }_8 \mathrm{X}^{16}\) की
प्रतिशतता 10% होगीं।

प्रश्न 12.
यदि तत्व का Z = 3 हो तो तत्व की संयोजकता क्या होगी? तत्व का नाम भी लिखिए।
उत्तर:
Z = 3 वाले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 1 होगा अर्थात् स्थायी विन्यास प्राप्त करने के लिए यह अपने बाह्यतम कोश में स्थित एक इलेक्ट्रॉन को त्याग सकता है। अतः इसकी संयोजकता 1 होगी तत्व का नाम लीथियम (Li) है।

प्रश्न 13.
दो परमाणु स्पीशीज के केन्द्रकों का संघटन नीचे दिया गया है-

XY
प्रोटॉन66
न्यूट्रॉन68

X और Y की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए। इन दोनों स्पीशीज में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
X की द्रव्यमान संख्या = 6 + 6 + 12
Y की द्रव्यमान संख्या = 6 + 8 = 14
X का परमाणु क्रमांक 6 = Y का परमाणु क्रमांक चूँकि दोनों परमाणु स्पीशीज की परमाणु संख्या समान तथा द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न है; अतः ये समस्थानिक होंगे। X तथा Y दोनों कार्बन के समस्थानिक \({ }_6 \mathrm{C}^{12}\) तथा \({ }_6 \mathrm{C}^{14}\) हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित वक्तव्यों में गलत के लिए- F और सही के लिए T लिखें।
(a) जे. जे. टामसन ने यह प्रस्तावित किया था कि परमाणु के केन्द्रक में केवल न्यूक्लीयॉन्स होते हैं।
(b) एक इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं, इसलिए यह अनावेशित होता है।
(c) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग \(\frac { 1 }{ 2000 }\) गुणा होता है।
(d) आयोडीन के समस्थानिक का इस्तेमाल टिंक्चर आयोडीन बनाने में होता है। इसका उपयोग दवा के रूप में होता है।
उत्तर:
(a) F
(b) F
(c) T
(d) F
प्रश्न संख्या 15, 16 और 17 में सही के सामने (✓) का चिह्न और गलत के सामने (x) का चिह्न लगाइए।

प्रश्न 15.
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था ?
(a) परमाणु केन्द्रक
(b) इलेक्ट्रॉन
(c) प्रोटॉन
(d) न्यूट्रॉन।
उत्तर:
(a) (✓)
(b) (✗)
(c) (✗)
(d) (✗)।

प्रश्न 16.
एक तत्व के समस्थानिक में होते हैं-
(a) समान भौतिक गुण
(b) भिन्न रासायनिक गुण
(c) न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या
(d) भिन्न परमाणु संख्या ।
उत्तर:
(a) (✗)
(b) (✗)
(c) (✓)
(d) (✗)।

प्रश्न 17.
Cl आयन में संयोजकता- इलेक्ट्रॉनों की संख्या है-
(a) 16
(b) 8
(c) 17
(d) 18
उत्तर:
(a) (✗)
(b) (✓)
(c) (✗)
(d) (✗)।

प्रश्न 18.
सोडियम का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न में कौन सा है?
(a) 2,8
(b) 8, 2, 1
(c) 2, 1, 8
(d) 2, 8, 1
उत्तर:
(d) 2, 8, 1.

प्रश्न 19.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए-
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 7
उत्तर:
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 8

Jharkhand Board Class 9 Science परमाणु की संरचना InText Questions and Answers

क्रियाकलाप 1.
(A) सूखे बालों पर कंघी करने के बाद क्या कंघी कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों को आकर्षित करती है?
(B) काँच की एक छड़ को रेशम के कपड़े पर रगड़कर इस छड़ को हवा से भरे गुब्बारे के पास लाइए और होने वाले परिणामों को देखिए।
निष्कर्ष-
(A) सूखे बालों पर कंत्री करने से कंघी आवेशित हो जाती है जिससे कागज के छोटे-छोटे टुकड़े उससे चिपक जाते हैं।
(B) काँच की एक छड़ को रेशम के कपड़े पर रगड़ने से छड़ आवेशित हो जाती है जब हम इस छड़ को हवा से भरे गुब्बारे के पास लाते हैं तो हवा से भरा गुब्बारा छड़ के साथ चिपक जाता है।

इससे यह पता चला कि परमाणु विभाज्य है और आवेशित कणों से मिलकर बना है। परमाणु में उपस्थित आवेशित कर्णों का पता लगाने में कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। जे. जे. टॉमसन ने बताया कि परमाणु में एक अवपरमाणुक कण इलेक्ट्रॉन विद्यमान होता है। गोल्डस्टीन ने 1886 में एक नए विकिरण की खोज की जिसका नाम कैनाल किरणें रखा। ये किरणें धनावेशित विकिरण थीं, जिसके द्वारा अन्य अवपरमाणुक कणों की खोज हुई। नए कण का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग 2000 गुना अधिक होता है, इसे प्रोटॉन नाम दिया गया। इलेक्ट्रॉन को द्वारा तथा प्रोटॉन को द्वारा दर्शाया जाता है। प्रोटॉन का द्रव्यमान 1 इकाई तथा आवेश +1 लिया जाता है। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान नगण्य और आवेश 1 माना जाता है।

ऐसा माना गया कि परमाणु प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन से बने होते हैं तो परस्पर आवेशों को संतुलित करते हैं। यह भी प्रतीत हुआ कि प्रोटॉन परमाणु के सबसे भीतरी भाग में होते हैं। इलेक्ट्रॉन को आसानी से निकाला जा सकता है लेकिन प्रोटॉनों को नहीं।

खंड 4.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा.पु. पू. सं. – 53 )

प्रश्न 1.
कैनाल किरणें क्या हैं?
उत्तर:
र- इलेक्ट्रॉन के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त होने के पहले, ई. गोल्डस्टीन ने 1886 में एक नए विकिरण की खोज की, जिसे उन्होंने ‘कैनाल किरणें नाम दिया। ये किरणें धनावेशित विकिरण थीं, जिसके द्वारा अन्तत: दूसरे अवपरमाणुक कण की खोज हुई।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 2.
यदि किसी परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन है, तो इसमें कोई आवेश होगा या नहीं?
उत्तर:
चूँकि एक इलेक्ट्रान और एक प्रोटॉन पर आवेश बराबर होता है, इसलिए एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन पर आवेश नहीं होगा। दूसरे शब्दों में यह एक उदासीन परमाणु वाली स्थिति है।

खंड 4.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पू. सं. – 56)

प्रश्न 1.
परमाणु उदासीन है, इस तथ्य को टॉमसन के मॉडल के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • टॉमसन के मॉडल के अनुसार परमाणु एक धनात्मक क्षेत्र से बना है, जिसमें ऋणात्मक कण अर्थात् इलेक्ट्रॉन इधर-उधर बिखरे हैं।
  • परमाणु के धनात्मक तथा ऋणात्मक आवेश एक-दूसरे को सन्तुलित कर देते हैं। इसलिए परमाणु उदासीन होता है।

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु के नाभिक में कौन-सा अवपरमाणुक कण विद्यमान है?
उत्तर:
परमाणु के नाभिक में धनावेशित कण (प्रोटॉन) होता है।

प्रश्न 3.
तीन कक्षाओं वाले बोर परमाणु मॉडल का चित्र बनाइए।
उत्तर:
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना 9

प्रश्न 4.
क्या अल्फा कणों का प्रकीर्णन प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धातु की पन्नी से सम्भव होगा ?
उत्तर:
सोने की अत्यन्त महीन पन्नी ( लगभग 1000 परमाणुओं के बराबर मोटी) प्राप्त करना सम्भव होता है, जो प्रकीर्णन प्रयोग के लिए आवश्यक है। किसी अन्य धातु की इतनी महीन पन्नी प्राप्त करना सम्भव नहीं है। अतः प्रकीर्णन प्रयोग में सोने के अतिरिक्त किसी अन्य धातु की पन्नी का प्रयोग सम्भव नहीं है।

खंड 4.2.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं.-56)

प्रश्न 1.
परमाणु के तीन अवपरमाणुक कणों के नाम लिखिए।
उत्तर:
परमाणु के तीन अवपरमाणुक कण इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन हैं।

प्रश्न 2.
हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4u है और उसके नाभिक में दो प्रोटॉन होते हैं। इसमें कितने न्यूट्रॉन होंगे?
उत्तर:
न्यूट्रॉनों की संख्या = परमाणु द्रव्यमान – प्रोटॉनों की संख्या
= 4 – 2 = 2

खण्ड 4. 3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. -57)

प्रश्न 1.
कार्बन तथा सोडियम के परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए।
उत्तर:
कार्बन का परमाणु क्रमांक = 6
इलेक्ट्रॉन वितरण = 2, 4
सोडियम का परमाणु क्रमांक = 11
इलेक्ट्रॉन वितरण = 2, 8, 1

प्रश्न 2.
अगर किसी परमाणु का K और L कोश भरा है तो उस परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी ?
उत्तर:
K कोश (n = 1) में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या = 2 (1)2 = 2
L कोश (n = 2) में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या = 2 (2)2 = 8
अत: परमाणु में 2 + 8 = 10 इलेक्ट्रॉन होंगे

खण्ड 4.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. प. प. सं. -58)

प्रश्न 1.
क्लोरीन, सल्फर और मैग्नीशियम की परमाणु संख्या से आप इनकी संयोजकता कैसे प्राप्त करेंगे ?
उत्तर:
क्लोरीन (Z = 17 ) – इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। स्पष्ट है कि क्लोरीन परमाणु को अपना अष्टक अर्थात् बाह्यतम कोश को पूर्ण भरने के लिए केवल एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है; अतः इसकी संयोजकता है।

सल्फर (Z = 16 ) – इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8.6 है। स्पष्ट है कि सल्फर परमाणु को अपना बाह्यतम कोश पूर्ण करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है; अतः इसकी संयोजकता 2 है।

मैग्नीशियम (Z = 12 ) – इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है। स्पष्ट है कि मैग्नीशियम परमाणु के बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं तथा स्थायी विन्यास प्राप्त करने के लिए यह इन इलेक्ट्रॉनों को त्याग सकता है। अतः इसकी संयोजकता 2 है।

खण्ड 4.5 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. प. प. सं. -59)

प्रश्न 1.
यदि किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 है और प्रोटॉनों की संख्या भी 8 है तब,
(a) परमाणु की परमाणुक संख्या क्या है?
(b) परमाणु का क्या आवेश है?
उत्तर:
(a) परमाणु की परमाणु संख्या परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या = 8
(b) चूँकि परमाणुक में इलेक्ट्रॉनों तथा प्रोटॉनों की संख्या समान है; अत: इस पर कोई आवेश नहीं होगा अर्थात् परमाणु विद्युत उदासीन होगा।

प्रश्न 2.
सारणी 4.3 की सहायता से ऑक्सीजन और सल्फर परमाणु की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
सारणी 4.3 के अनुसार
ऑक्सीजन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = 8
तथा ऑक्सीजन परमाणु में न्यूट्रॉनों की संख्या = 8
अब द्रव्यमान संख्या प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
द्रव्यमान संख्या = 8 + 8 =16
सल्फर परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = 16
तथा सल्फर परमाणु में न्यूट्रॉनों की संख्या = 16
अतः द्रव्यमान संख्या 16 + 16 = 32

खण्ड 4.6 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. प. प. सं. -60)

प्रश्न 1.
समस्थानिक और समभारिक के किसी एक युग्म का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक – 6C12 तथा 6C14
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 4
समभारिक – 20C40 तथा 18A40
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, 20Ca40 : 2, 8, 8, 2
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 18A40 : 2, 8, 8

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

प्रश्न 2.
चिह्न H, D और T के लिए प्रत्येक में पाए जाने वाले तीन अवपरमाणुक कणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:

समस्थानिकतीन अवपरमाणुक कण
इलेक्ट्रॉनप्रोटॉनन्यूट्रॉन
H110
D111
T112

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

Jharkhand Board Class 9 Science बल तथा गति के नियम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कोई वस्तु शून्य बाह्य असन्तुलित बल अनुभव करती है। क्या किसी भी वस्तु के लिए अशून्य वेग से गति करना सम्भव है? यदि हाँ, तो वस्तु के वेग के परिमाण एवं दिशा पर लगने वाली शर्तों का उल्लेख कीजिए। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हाँ, सम्भव है। वास्तव में गति की अवस्था में परिवर्तन के लिए बल की आवश्यकता होती है न कि एकसमान गति की अवस्था को बनाए रखने के लिए। अतः यदि कोई वस्तु पहले से गतिमान है तो वह बाह्य असन्तुलित बल की अनुपस्थिति में भी एकसमान गति की अवस्था को बनाए रखेगी। इस स्थिति में वस्तु के वेग का परिमाण तथा गति की दिशा दोनों नियत रहेंगे।

प्रश्न 2.
जब किसी छड़ी से एक दरी (कार्पेट) को पीटा जाता है तो धूल के कण बाहर आ जाते हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
दरी (कार्पेट) को छड़ी से पीटने पर धूल के कण निकल आते हैं- इसका कारण यह है कि छड़ी से पीटने पर दरी (कार्पेट) के कण तो गति की अवस्था में आ जाते हैं, परन्तु विराम जड़त्व के कारण धूल के कण विराम में ही बने रहते हैं और दरी (कार्पेट) के कणों से अलग होकर बाहर निकल जाते हैं।

प्रश्न 3.
बस की छत पर रखे सामान को रस्सी से क्यों बाँधा जाता है?
उत्तर:
जब चलती हुई गाड़ी में अचानक ब्रेक लगाए जाते हैं अथवा एकाएक उसे मोड़ा जाता है तो गति जड़त्व के कारण गाड़ी की छत पर रखा सामान उसी वेग से उसी दिशा में गतिमान रहने का प्रयास करता है। ऐसे में यदि सामान को बाँधा नहीं गया है तो वह छत से नीचे गिर सकता है, इससे सामान के टूटने की सम्भावना रहती है। अतः बस की छत पर रखे सामान को बाँधकर रखा जाता है।

प्रश्न 4.
किसी बल्लेबाज द्वारा क्रिकेट की गेंद को मारने पर गेंद जमीन पर लुढ़कती है। कुछ दूरी चलने के पश्चात् गेंद रुक जाती है। गेंद रुकने के लिए धीमी होती है, क्योंकि-
(a) बल्लेबाज ने गेंद को पर्याप्त प्रयास से हिट नहीं किया है।
(b) वेग गेंद पर लगाए गए बल के समानुपाती है।
(c) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।
(d) गेंद पर कोई असन्तुलित बल कार्यरत नहीं है; अतः गेंद विरामावस्था में आने के लिए प्रयासरत है। (सही विकल्प का चयन कीजिए।)
उत्तर:
(c) गेंद पर गति की दिशा में विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।

प्रश्न 5.
एक ट्रक विरामावस्था से किसी पहाड़ी से नीचे की ओर नियत त्वरण से लुढ़कना शुरू करता है। यह 20 सेकण्ड में 400 मीटर की दूरी तय करता है। इसका त्वरण ज्ञात कीजिए। अगर इसका द्रव्यमान 7 टन है तो इस पर लगने वाले बल की गणना कीजिए। (1 टन = 1000 किग्रा)
हल:
प्रश्नानुसार दूरी (s) = 400 मीटर,
प्रारम्भिक वेग (u) = 0 मीटर / सेकण्ड,
समय (t) = 20 सेकण्ड, त्वरण (a) = ?
s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at² से
400 = (0 × 20) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) a × (20)²
अथवा 400 = 200 a
अतः ट्रक का त्वरण (a) = \(\frac { 400 }{ 200 }\) = 2 मीटर/सेकण्ड²।
दिया है त्वरण (a) = 2 मीटर / सेकण्ड², द्रव्यमान (m) = 7 टन 7000 किग्रा, बल (F) = ?
सूत्र
F = m x a से,
बल (F) = 7000 किग्रा x 2 मीटर/सेकण्डर
= 14,000 किग्रा मीटर/सेकण्डर
= 14,000 न्यूटन
अतः ट्रक पर लगा बल = 14,000 न्यूटन।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 6.
1 किग्रा द्रव्यमान के एक पत्थर को 20 मीटर / सेकण्ड के वेग से झील की जमी हुई सतह पर फेंका जाता है। पत्थर 50 मीटर की दूरी तय करने के बाद रुक जाता है। पत्थर और बर्फ के बीच लगने वाले घर्षण बल की गणना कीजिए।
हल
दिया है द्रव्यमान m = 1 किग्रा, 4 = 20 मीटर / सेकण्ड s = 50 मीटर, v = 0 मीटर / सेकण्ड, बल F = ?
सूत्र,
v² – u² = 2as से,
0² – (20)² = 2a × 50
या a = – \(\frac{20 \times 20}{2 \times 50}\)
= – 4 मीटर / सेकण्डर
ऋणात्मक चिह्न मन्दन को प्रदर्शित करता है।
अत: पत्थर का मन्दन 4 मीटर / सेकण्ड है।
अब सूत्र F = m xa से,
बर्फ द्वारा पत्थर पर लगाया गया बल
F = 1 किग्रा x 4 मीटर / सेकण्ड² = 4 न्यूटन
अतः बर्फ तथा पत्थर के बीच 4 न्यूटन का बल लगता है।

प्रश्न 7.
एक 8,000 किग्रा द्रव्यमान का रेल इंजन प्रति 2,000 किग्रा द्रव्यमान वाले पाँच डिब्बों को सीधी पटरी पर खींचता है। यदि इंजन 40,000 न्यूटन का बल आरोपित करता है तथा पटरी 5,000 न्यूटन का घर्षण बल लगाती हो तो ज्ञात कीजिए-
(a) नेट त्वरण बल
(b) रेल का त्वरण
हल:
दिया है इंजन द्वारा लगाया गया बल = 40,000 न्यूटन,
इंजन का द्रव्यमान = 8,000 किग्रा,
पटरी द्वारा लगाया गया घर्षण बल = 5,000 न्यूटन,
प्रत्येक डिब्बे का द्रव्यमान = 2,000 किग्रा।
(a) ∵ घर्षण बल एक अवरोधी बल है,
∴ रेलगाड़ी पर नेट त्वरण बल = इंजन का बल – पटरी का घर्षण बल
= 40,000 – 5,000- 35,000 न्यूटन।

(b) पाँच डिब्बों का कुल द्रव्यमान
m = 5 × 2000 = 10,000 किग्रा
जबकि डिब्बों पर नेट त्वरण बल
F = 35,000 न्यूटन
∴ सूत्र F = ma से,
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 9

प्रश्न 8.
एक गाड़ी का द्रव्यमान 1,500 किग्रा है। यदि गाड़ी को 1.7 मीटर / सेकण्ड के ऋणात्मक त्वरण (अव- मन्दन) के साथ विरामावस्था में लाना है तो गाड़ी तथा सड़क के बीच लगने वाला बल कितना होगा?
हल:
दिया है गाड़ी का द्रव्यमान m= 1,500 किग्रा, मन्दन a = 1.7 मीटर/सेकण्डर²
माना कि गाड़ी व सड़क के बीच लगा बल = F
तब यही बल गाड़ी में मन्दन उत्पन्न करेगा; अतः
सूत्र F = m x a से,
बल F = 1,500 किग्रा 1.7 मीटर/सेकण्डर²
= 2,550 न्यूटन।

प्रश्न 9.
किसी द्रव्यमान की वस्तु, जिसका वेग है, का संवेग क्या होगा?
(a) (mv)²
(b) mv²
(c) \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv²
(d) mv
(उपर्युक्त में से सही विकल्प चुनिए)
उत्तर:
(d) mv.

प्रश्न 10.
हम एक लकड़ी के बक्से को 200 न्यूटन बल लगाकर उसे नियत वेग से फर्श पर धकेलते हैं। बक्से पर लगने वाला घर्षण बल क्या होगा?
हल:
बक्से पर लगाया गया बल F1 = 200 न्यूटन
माना बक्से पर लगा घर्षण बल तब बक्से पर लगा नेट बल = F2 न्यूटन
= F1 – F2 = (200 – F2) न्यूटन
∵ बक्सा नियत वेग से गतिमान है; अतः बक्से पर नेट असन्तुलित बल शून्य होगा।
अत: नेट बल = (200 – F2) = 0
F2 = 200 न्यूटन
अतः बक्से पर लगा घर्षण बल 200 न्यूटन है।

प्रश्न 11.
दो वस्तुएँ, प्रत्येक का द्रव्यमान 1-5 किग्रा है, एक ही सीधी रेखा में एक-दूसरे के विपरीत दिशा में गति कर रही हैं। टकराने के पहले प्रत्येक का वेग 2.5 मीटर / सेकण्ड है। टकराने के बाद यदि दोनों एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, तब उनका सम्मिलित वेग क्या होगा?
हल:
दिया है वस्तुओं के द्रव्यमान m1 = m2 = 1.5 किग्रा
टकराने से पहले इनके वेग u1 = 2.5 मीटर / सेकण्ड
u2 = 22.5 मीटर / सेकण्ड
(ऋण चिह्न विपरीत दिशा के कारण लिया है।)
माना कि टक्कर के बाद दोनों का सम्मिलित वेग v हो जाता है।
दोनों के जुड़ जाने से बनी नई वस्तु का द्रव्यमान (m1 + m2) होगा।
तब टक्कर के पहले दोनों का कुल संवेग
= m1u2 + m2u2
= 1.5 x 2.5 + 15 x (-2.5)
= 3.75 – 3.75 = 0
तथा टक्कर के बाद दोनों का कुल संवेग
= (m1 + m2)v = (1·5 + 1.5) v = 3v
संवेग संरक्षण के नियम से,
टक्कर के बाद कुल संवेग = टक्कर के पहले कुल संवेग
अर्थात्
3v = 0
∴ v = 0
अतः टक्कर के बाद दोनों वस्तुओं का सम्मिलित वेग शून्य होगा अर्थात् वे विरामावस्था में आ जाएँगी।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 12.
गति के तृतीय नियम के अनुसार जब हम किसी वस्तु को धक्का देते हैं तो वस्तु उतने ही बल के साथ हमें भी विपरीत दिशा में धक्का देती है। यदि वह वस्तु एक ट्रक है जो सड़क के किनारे खड़ा है; सम्भवतः हमारे द्वारा बल आरोपित करने पर गतिशील नहीं हो पाएगा एक विद्यार्थी इसे सही साबित करते हुए कहता है कि दोनों बल विपरीत एवं बराबर हैं जो एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। इस तर्क पर अपने विचार दीजिए और बताइए कि ट्रक गतिशील क्यों नहीं हो पाता?
उत्तर:
विद्यार्थी का तर्क गलत है, यह सही है कि क्रिया तथा प्रतिक्रिया के बल विपरीत एवं बराबर होते हैं, परन्तु ये बल कभी भी एक ही वस्तु पर कार्य नहीं करते। जैसे कि उपर्युक्त उदाहरण में, हमारे द्वारा आरोपित बल ट्रक पर लगेगा, जबकि ट्रक का प्रतिक्रिया बल हम पर लगेगा। ट्रक के गतिमान होने का सम्बन्ध केवल ट्रक पर लगने वाले बल से है न कि हमारे द्वारा लगे प्रतिक्रिया बल से अतः क्रिया-प्रतिक्रिया के बलों के निरस्त होने का यहाँ कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

हमारे द्वारा ट्रक पर बल आरोपित किए जाने पर भी ट्रक गतिशील नहीं हो पाता, इसका कारण यह है कि ट्रक पर इस बल के अतिरिक्त पृथ्वी द्वारा आरोपित घर्षण बल भी लगा है। जो कि हमारे द्वारा आरोपित बल को सन्तुलित कर देता है।

प्रश्न 13.
200 ग्राम द्रव्यमान की हॉकी की एक गेंद 10 ms-1 से गति कर रही है। यह एक हॉकी स्टिक से इस प्रकार टकराती है कि यह 5ms-1 के वेग से अपने प्रारंभिक मार्ग पर वापस लौटती है। हॉकी स्टिक द्वारा आरोपित बल द्वारा हॉकी की गेंद में आये संवेग परिवर्तन के परिमाप का परिकलन कीजिए।
हल:
दिया है गेंद का द्रव्यमान m = 200 g = 0.2kg
गेंद का प्रारम्भिक वेग, u1 = 10 m/s
गेंद का प्रारंभिक संवेग = mu1 = 0.2 x 10 = 2 kg m/s
गेंद का अंतिम वेग, u2 = – 5 ms-1
गेंद का अंतिम संवेग = mu2 x 0.2 x – 5 = – 1 kg m/s
संवेग परिवर्तन = 1 Ns – 2Ns = – 3 kg m/s

प्रश्न 14.
10 ग्राम द्रव्यमान की एक गोली सीधी रेखा में 150 मीटर / सेकण्ड के वेग से चलकर एक लकड़ी के गुटके से टकराती है और 0-03 सेकण्ड के बाद रुक जाती है। गोली लकड़ी को कितनी दूरी तक भेदेगी? लकड़ी के गुटके द्वारा गोली पर लगाए गए बल के परिमाण की गणना कीजिए।
हल:
दिया है गोली का द्रव्यमान
m = 10 ग्राम
= \(\frac { 10 }{ 1000 }\)
= 0.01
किग्रा, वेग u = 150 मीटर / सेकण्ड
समय t = 0.03 सेकण्ड, वेग v = 0 मीटर/सेकण्ड s = ?
गोली का त्वरण a = \(\frac { v-u }{ t }\)
= \(\frac { 0-150 }{ 0.03 }\)
= – \(\frac { 150 }{ 0.03 }\)
= – 5000 मीटर / सेकण्ड²
ऋणात्मक चिह्न मन्दन को प्रदर्शित करता है।
अब दूरी s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at²
s = 150 × 0.03 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) (- 5000) x (0.03)²
= 4.5 – 2500 – 0.0009
= 4.5 – 2.25
= 2.25
अतः गोली लकड़ी को 2.25 मीटर दूरी तक भेदेगी।
पुन: सूत्र F = ma से,
लकड़ी द्वारा गोली पर लगाया गया बल
F = 0.01× 5000 = 50 न्यूटन।

प्रश्न 15.
एक वस्तु जिसका द्रव्यमान 1 किग्रा है, 10 मीटर / सेकण्ड के वेग से एक सीधी रेखा में चलते हुए विरामावस्था में रखे 5 किग्रा द्रव्यमान के एक लकड़ी के गुटके से टकराती है। उसके बाद दोनों साथ-साथ उसी सीधी रेखा में गति करते हैं संघट्ट के पहले तथा बाद के कुल संवेगों की गणना कीजिए आपस में जुड़े हुए संयोजन के वेग की भी गणना कीजिए।
हल:
वस्तु का द्रव्यमान m1 = 1 किग्रा, वेग u1 = 10 मीटर/सेकण्ड
गुटके का द्रव्यमान m2 = 5 किग्रा, वेग u2 = 0 (विरामावस्था)
माना संघट्ट के बाद संयुक्त पिण्ड (m1 + m2), वेग v से
गति करता है,
तब संघट्ट के पहले का कुल संवेग
= m1 u1 + m2u2
= 1 × 10 + 5 × 0
= 10 किग्रा मीटर / सेकण्ड
संघट्ट के बाद, संयुक्त पिण्ड का संवेग
= (m1 + m2) v
= (1 + 5) v
= 6 v किग्रा मीटर/सेकण्ड
संवेग संरक्षण के नियम से,
संघट्ट के बाद कुल संवेग = संघट्ट के पहले कुल संवेग
अर्थात् 6 v = 10
या v = \(\frac { 10 }{ 6 }\)
= 1.67 मीटर/सेकण्ड
अतः संघट्ट के पहले तथा बाद में कुल संवेग
= 10 किग्रा मीटर / सेकण्ड।
संघट्ट के बाद संयोजन का वेग
= 1.67 मीटर / सेकण्ड।

प्रश्न 16.
100 किग्रा द्रव्यमान की एक वस्तु का वेग समान त्वरण से चलते हुए 6 सेकण्ड में 5 मीटर/सेकण्ड से 8 मीटर / सेकण्ड हो जाता है। वस्तु के पहले तथा बाद के संवेगों की गणना कीजिए। उस बल के परिमाण की गणना कीजिए जो उस वस्तु पर आरोपित है।
हल:
दिया है वस्तु का द्रव्यमान m = 100 किग्रा, प्रारम्भिक वेग u = 5 मीटर/सेकण्ड, अन्तिम वेग v = 8 मीटर / सेकण्ड समय t = 6 सेकण्ड
वस्तु का प्रारम्भिक संवेग
= mu = 100 किग्रा x 5 मीटर / सेकण्ड
= 500 किग्रा मीटर/सेकण्ड
तथा वस्तु का अन्तिम संवेग
mv = 100 किग्रा x 8 मीटर/सेकण्ड
= 800 किग्रा मीटर / सेकण्ड
∴ वस्तु के संवेग में परिवर्तन = अन्तिम संवेग – प्रारम्भिक संवेग
= 800 – 500 = 300 किग्रा मीटर/सेकण्ड
गति के द्वितीय नियम से,
वस्तु पर आरोपित बल
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 10
अतः वस्तु का प्रारम्भिक संवेग = 500 किग्रा मीटर / सेकण्ड।
वस्तु का अन्तिम संवेग = 800 किग्रा मीटर / सेकण्ड।
वस्तु पर आरोपित बल का परिमाण = 50 न्यूटन।

प्रश्न 17.
अख्तर, किरण और राहुल किसी राजमार्ग पर बहुत तीव्र गति से चलती हुई कार में सवार हैं, अचानक उड़ता हुआ कोई कीड़ा गाड़ी के सामने के शीशे से आ टकराया और वह शीशे से चिपक गया। अख्तर और किरण इस स्थिति पर विवाद करते हैं। किरण का मानना है कि कीड़े के संवेग परिवर्तन का परिमाण कार के संवेग परिवर्तन के परिमाण की अपेक्षा बहुत अधिक है (क्योंकि कीड़े के वेग में परिवर्तन का मान कार के वेग में परिवर्तन के मान से बहुत अधिक है)। अख्तर ने कहा कि चूंकि कार का वेग बहुत अधिक था अतः कार ने कीड़े पर बहुत अधिक बल लगाया जिसके कारण कीड़े की मौत हो गई। राहुल ने एक नया तर्क देते हुए कहा कि कार तथा कीड़ा दोनों पर समान बल लगा और दोनों के संवेग में बराबर परिवर्तन हुआ। इन विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए।
उत्तर:
राहुल का तर्क सही है क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम से दोनों पर समान बल लगेगा तथा दोनों के संवेग में भी समान परिवर्तन होगा। क्योंकि कीड़े का प्रारम्भिक संवेग, कार के संवेग की तुलना में नगण्य है अतः कीड़े का संवेग परिवर्तन स्पष्ट परिलक्षित होगा, जबकि समान संवेग परिवर्तन से कार के संवेग में कोई स्पष्ट अन्तर नहीं दिखाई देता।

प्रश्न 18.
एक 10 किग्रा द्रव्यमान की घण्टी 80 सेमी की ऊँचाई से फर्श पर गिरी। इस अवस्था में घण्टी द्वारा फर्श पर स्थानान्तरित संवेग के मान की गणना कीजिए। परिकलन में सरलता हेतु नीचे की ओर दिष्ट त्वरण का मान 10 मीटर / सेकण्ड² लीजिए।
हल:
दिया है घण्टी का द्रव्यमान m = 10 किग्रा, प्रारम्भिक ऊँचाई 880 सेमी 0.8 मीटर, घण्टी का त्वरण = 10 मीटर / सेकण्डर, गिरते समय प्रारम्भिक वेग u = 0
माना फर्श पर पहुँचकर घण्टी वेग से फर्श से टकराती है।
तब समीकरण v² = u² + 2as से,
v² = 0² + 2 x 10 × 0-8
= 16 मीटर/सेकण्ड²
∴ घण्टी का वेग v = \(\sqrt{16}\)
= 4 मीटर / सेकण्ड।
माना कि फर्श से टकराने के बाद घण्टी विरामावस्था में आ जाती है।
फर्श से टकराते समय घण्टी का वेग
v1 = 4 मीटर/सेकण्ड
तथा फर्श से टकराने के बाद घण्टी का वेग v2 = 0
घण्टी के संवेग में परिवर्तन = m (v2 – v1)
= 10 (0 – 4)
= 40 किग्रा – मीटर / सेकण्ड|
क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम से फर्श को स्थानान्तरित – घण्टी का संवेग परिवर्तन
= – (- 40) = 40 किग्रा मीटर / सेकण्ड।

अतिरिक्त अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्न एवं उनके उत्तर (पा.पु. पृ.सं. 144)

प्रश्न 1.
एक वस्तु की गति की अवस्था में दूरी- समय सारणी निम्नवत् है-

समय (सेकण्ड)दूरी (मीटर)
00
11
28
327
464
5125
6216
7343

(a) त्वरण के बारे में आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं? क्या यह नियत है? बढ़ रहा है? घट रहा है? या शून्य है?
(b) आप वस्तु पर लगने वाले बल के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
हल:
त्वरण तथा बल के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए हम प्रत्येक समयान्तराल के लिए वेग तथा त्वरण की गणना करेंगे, जैसा कि निम्नांकित सारणी में दर्शाया गया है।
(a) निम्नलिखित सारणी से स्पष्ट है कि त्वरण नियत नहीं है, अपितु बढ़ रहा है।

(b) सूत्र बल F = m a के अनुसार, चूँकि वस्तु का त्तरण समय के साथ बढ़ रहा है; अतः वस्तु पर लगा बल भी समय के साथ बढ़ेगा।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 11

प्रश्न 2.
1,200 किग्रा द्रव्यमान की एक कार को एक समतल सड़क पर दो व्यक्ति समान वेग से धक्का देते हैं। उसी कार को तीन व्यक्तियों द्वारा धक्का दिलाकर 0-2 मीटर/सेकेण्ड² का त्वरण उत्पन्न किया जाता है। कितने बल के साथ प्रत्येक व्यक्ति कार को धक्का देता है? (मान लीजिए कि सभी व्यक्ति समान पेशीय बल के साथ कार को धक्का देते हैं।)
हल:
दिया है कार का द्रव्यमान m2 = 1,200 किग्रा
प्रथम दो व्यक्तियों के धक्का देने पर त्वरण = शून्य
(∵ कार एकसमान वेग से बढ़ती है।)
तीन व्यक्तियों द्वारा धक्का देने पर त्वरण a = 0.2 मीटर/सेक्ण²
∵ प्रथम दो व्यक्तियों के धक्का देने पर कार समान वेग से ही आगे बढ़ पाती है। इससे स्पष्ट है कि दूसरी दिशा में कार में त्वरण तीसरे व्यक्ति द्वारा लगाए गए बल के कारण उत्पन्न होता है।
∴ तीसरे व्यक्ति द्वारा लगाया बल F = m a
= 1,200 किग्रा x 0.2 मीटर / सेकण्ड² = 240 न्यूटन
अतः प्रत्येक व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल = 240 न्यूटन।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 3.
500 ग्राम द्रव्यमान के एक हृौड़े द्वारा 50 मीटर/सेकण्ड के वेग से एक कील पर प्रहार किया जाता है। कील द्वारा हथौड़े को बहुत कम समय 0.01 सेकण्ड में ही रोका जाता है। कील के द्वारा हथौड़े पर लगाए गए बल की गणना कीजिए।
हल:
दिया है हथौड़े का द्रव्यमान m = 500 ग्राम = 0.5
किग्रा, टकराते समय वेग u = 50 मीटर / सेकण्ड,
समय t = 0.01 सेकण्ड अन्तिम वेग v = 0
कील से टकराने पर हथौड़े का त्वरण
a = \(\frac { v-u }{ t }\)
= \(\frac { 0-50 }{ 0.01 }\)
= – 5,000 मीटर / सेकण्डर²
ऋणात्मक चिह्न मन्दन की प्रदर्शित करता है। कील द्वारा हथौड़े पर लगाया गया बल F = ma
= 0.5 किग्रा x 5,000 मीटर / सेकण्ड²
= 2,500 न्यूटन।

प्रश्न 4.
एक 1,200 किग्रा द्रव्यमान की मोटरकार 90 किमी / घण्टा के वेग से एक सीधी रेखा पर चल रही है। उसका वेग बाहरी असन्तुलित बल लगने के कारण 4 सेकण्ड में घटकर 18 किमी / घण्टा रह जाता है। त्वरण और संवेग में परिवर्तन की गणना कीजिए लगने वाले बल के परिमाण की भी गणना कीजिए।
हल:
दिया है कार का द्रव्यमान m = 1,200 किग्रा,
प्रारम्भिक वेग u = 90 किमी / घण्टा
= 90 × \(\frac { 5 }{ 18 }\)
= 25 मीटर/सेकण्ड
समय t = 4 सेकण्ड, अन्तिम वेग v = 18 किमी / घण्टा
= 18 × \(\frac { 5 }{ 18 }\) = 5 मीटर / सेकण्ड
त्वरण a = ?, संवेग में परिवर्तन = ?, बल F = ?
कार का त्वरण a = \(\frac { v-u }{ t }\)
= \(\frac { 5-25 }{ 4 }\)
= – \(\frac { 20 }{ 4 }\)
= 5 मीटर/सेकण्ड
ऋणात्मक चिह्न मन्दन को प्रदर्शित करता है।
कार के संवेग में परिवर्तन अन्तिम संवेग – प्रारम्भिक संवेग
= 1200 × 5-1200 × 25
= 6000-30000
= – 24,000 किग्रा मीटर सेकण्ड
कार पर लगा बल F = ma
= 1200 × 5
= 6,000 न्यूटन
अतः कार का त्वरण = – 5 मीटर / सेकण्ड²
संवेग में परिवर्तन = 24,000 किग्रा-मीटर/सेकण्ड की कमी तथा कार पर लगा बल = 6,000 न्यूटन।

Jharkhand Board Class 9 Science बल तथा गति के नियम InText Questions and Answers

क्रियाकलाप 9.1 (पा. पु. पृ. सं. 130)
चित्रानुसार कैरम की गोटियों को एक के ऊपर एक रखकर ढेरी ननाएँ। स्ट्राइकर को तेजी से झटका देकर ढेरी की सबसे नीचे वाली गोटी पर टकराएँ। आप पायेंगे कि केवल नीचे वाली गोटी ही शीघ्रता से ढेरी से बाहर जाती है, शेष गोटियाँ अपने जड़त्व के कारण लम्वबत् दिशा में नीचे की ओर गिर जाती हैं।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 1

क्रियाकलाप 9.2 (पा. पु. पृ. सं. 130)
काँच के एक खाली गिलास के ऊपर एक कड़े ताश का पत्ता रखकर चित्र के अनुसार उस पर एक पाँच रुपए का सिक्का रखें तथा पत्ते को अंगुलियों से तीव्रता से क्षैतिज झटका दें। आप पायेंगे कि पत्ता आगे खिसक जाता है तथा सिक्का अपने जड़त्व के कारण नीचे की ओर गिलास में गिर जाता है। ऐसा होने का कारण यह है कि सिक्का अपनी विरामावस्था को बनाये रखना चाहता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 2

क्रियाकलाप 9.3 (पा. पु. पृ. सं. 130)
ट्रे पर एक पानी से भरा गिलास रखाकर ट्रे को हाथ से पकड़कर तेजी से घूमने पर गिलास लुढ़क जाता है और पानी छलक जाता है।

खण्ड 9.3 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 131)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में किसका जड़त्व अधिक है?
(a) रबर की गेंद एवं उसी आकार का पत्थर,
(b) एक साइकिल एवं एक रेलगाड़ी,
(c) पाँच रुपये का सिक्का एवं एक रुपये का सिक्का।
उत्तर:
हम जानते हैं कि किसी वस्तु का द्रव्यमान ही उसके जड़त्व की माप है।

  • चूँकि पत्थर का द्रव्यमान, समान आकार की रबर की गेंद के द्रव्यमान से अधिक होगा; अतः पत्थर का जड़त्व ही अधिक होगा।
  • रेलगाड़ी का द्रव्यमान साइकिल के द्रव्यमान से अधिक है; अत: रेलगाड़ी का जड़त्व ही अधिक होगा।
  • पाँच रुपये के सिक्के का जड़त्व एक रुपये के सिक्के से अधिक होगा।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए उदाहरण में गेंद का वेग कितनी बार बदलता है, जानने का प्रयास की जिए-
“फुटबाल का एक खिलाड़ी गेंद पर किक लगाकर गेंद को अपनी टीम के दूसरे खिलाड़ी के पास पहुँचाता है। दूसरा खिलाड़ी उस गेंद को किक लगाकर गोल की ओर पहुँचाने का प्रयास करता है। विपक्षी टीम का गोलकीपर गेंद को पकड़ता है और अपनी टीम के खिलाड़ी की ओर किक लगाता है।”
इसके साथ ही उस कारक की भी पहचान कीजिए, जो प्रत्येक अवस्था में बल प्रदान करता है।
उत्तर:
उपर्युक्त उदाहरण में गेंद का वेग कुल तीन बार बदलता है।

  • पहली बार वेग-परिवर्तन के लिए आवश्यक बल प्रदान करने वाला कारक पहले खिलाड़ी द्वारा लगाई गई किक है।
  • दूसरी बार वेग-परिवर्तन के लिए आवश्यक बल, दूसरे खिलाड़ी द्वारा लगाई गई किक से प्राप्त होता है।
  • तीसरी बार वेग- परिवर्तन के लिए आवश्यक बल विपक्षी टीम के गोलकीपर द्वारा लगाई गई किक से प्राप्त होता है।

प्रश्न 3.
किसी पेड़ की शाखा को तीव्रता से हिलाने पर कुछ पत्तियाँ झड़ जाती हैं, क्यों?
उत्तर:
जब किसी पेड़ की शाखाओं को जोर-जोर से हिलाया जाता है तो शाखाएँ तुरन्त ही गति की अवस्था में आ जाती हैं, जबकि उनसे जुड़ी पत्तियाँ जड़त्व के कारण, विरामावस्था में ही बनी रहती हैं। अतः इनमें से कुछ पत्तियाँ शाखाओं से अलग होकर गिर जाती हैं।

प्रश्न 4.
जब कोई गतिशील बस अचानक रुकती है तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं, और जब विरामावस्था से गतिशील होती है तो पीछे की ओर हो जाते हैं, क्यों?
उत्तर:
ऐसा जड़त्व के कारण होता है। जब तक गाड़ी चलती रहती है तो हमारा शरीर भी गाड़ी के साथ उसी वेग से गति करता रहता है। गाड़ी के अचानक रुकने पर हमारे पैर गाड़ी के सम्पर्क में होने कारण तुरन्त विराम में आ जाते हैं, परन्तु गति जड़त्व के कारण हमारा ऊपरी शरीर आगे की ओर गति करता रहता है और हम आगे की ओर झुक जाते हैं।

जब रुकी हुई गाड़ी अचानक चलती है तो हमारे पैर तो तुरन्त गति में आ जाते हैं, परन्तु हमारा ऊपरी शरीर विराम जड़त्व के कारण विरामावस्था में बना रहता है; अतः हम पीछे की ओर झुक जाते हैं।

क्रियाकलाप 9.4. (पा. पु. पू. सं. 136)
चित्र 9.15 के अनुसार दो बच्चों को पहिये वाली गाड़ी पर खड़ा होने के लिए कहें। उन्हें बालू से भरा थैला या कोई भारी वस्तु दे दें। उन्हें थैले को लपकने के लिए कहें। गाड़ी के पहिये पर कोई सफेद रेखा खीच दें, ताकि जब वे बच्चे थैले को फेंकें तो गाड़ी की गति का अवलोकन किया जा सके।

थैले को फेंकने (क्रिया) के कारण उसमें से प्रत्येक तात्क्षणिक प्रतिक्रिया का अनुभव करें। अब दो बच्चों को किसी एक गाड़ी पर खड़ा कर दें तथा एक अन्य बच्चे को दूसरी गाड़ी पर। आप यहाँ गति के द्वितीय नियम को देख सकते हैं, क्योंकि इस अवस्था में यह बल अलग-अलग त्वरण उत्पन्न करेगा।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 3

क्रियाकलाप 9.5. (पा. पु. पृ. सं. 137)
एक बड़े आकार का गुब्बारा लेकर इसमें पूरी तरह से हवा भरकर इसके मुँह से धागा बाँधकर किसी चिपकाने वाले टेप की सहायता से चित्र $9.17$ के अनुसार एक स्ट्रॉं लगाएँ। स्ट्रॉ के बीच से एक धागे को पार कराएँ। इसके उपरान्त गुब्बारे के मुँह पर बाँधे धागे को खोल दें।

गुब्बारे में भरी हवा उसके मुख से बाहर की ओर निकलने लगेगी तथा स्ट्रो की गति की दिशा का अवलोकन करें।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 4
निष्कर्ष-स्ट्रॉं की दिशा हवा के निकलने की विपरीत दिशा में होगी।

क्रियाकलाप 9.6. (पा. पु. प.. सं. 138)
एक अच्छे काँच की परखनली लेकर उसमें थोड़ा पानी डालकर परखनली के मुख पर एक स्टॉप कॉर्क लगाएँ। चित्रानुसार परखनली को दो धागों के द्वारा स्टैण्ड पर क्षैतिज दिशा में लटकाएँ। अब बर्नर की सहायता
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 5
से परखनली को तब तक गर्म करें जब तक कि परखनली का पानी वाष्पित न हो जाए तथा कार्क बाहर न आ जाए।
निष्कर्ष – हम यह पाते हैं कि परखनली कार्क की गति की विपरीत दिशा में प्रक्षेपित होती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

उदाहरण 9.6.2
kg के एक पिस्टल से 20 g द्रव्यमान की एक गोली 150ms के क्षैतिज वेग से छोड़ी जाती है। पिस्टल के पीछे हटने के वेग का परिकलन करें।
हल:
गोली का द्रव्यमान m1 20 ग्राम = 0.02 किग्रा
पिस्टल का द्रव्यमान m2 = 2 किग्रा
गोली का प्रारम्भिक वेग u1 तथा पिस्टल का प्रारम्भिक वेग u2 क्रमशः शून्य हैं।
अर्थात्
u1 – u2 = 0
गोली का अन्तिम वेग v1 = + 150 ms-1
गोली की दिशा बाएँ से दाएँ परिपाटी के अनुसार धनात्मक (चित्र 9.19 ) ली गई है।
माना कि पिस्टल का प्रतिक्षेपित वेग v है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 6
गोली छूटने के पहले गोली तथा पिस्टल का कुल संवेग,
= (2 + 0.02) kg x 0 ms-1
= 0kg ms-1
गोली छूटने के बाद कुल संवेग
= 0.02 kg × (+ 150 ms-1) + 2 kg x vm s-1
= (3 + 2v) kg ms-1
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,
गोली छूटने के बाद का कुल संवेग = गोली छूटने के पहले का कुल संवेग
3 + 2v = 0
⇒ v = – 1.5 ms-1
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि पिस्टल गोली के विपरीत दिशा में अर्थात् दाई से बाई ओर प्रतिक्षेपित होगी।

उदाहरण 9.7.
40 kg द्रव्यमान वाली एक लड़की, 5 ms-1 के क्षैतिज वेग से एक 3 kg द्रव्यमान वाली स्थिर गाड़ी पर कूदती है। गाड़ी के पहिये घर्षणरहित हैं। गाड़ी की गति प्रारम्भ करने की अवस्था में लड़की का वेग क्या होगा? मान लें कि क्षैतिज दिशा में कोई असन्तुलित बल कार्य नहीं कर रहा है।
हल:
लड़की और गाड़ी का लड़की के कूदने से पहले
कुल संवेग
= 40kg x 5ms-1 + 3kg x 0 ms-1
= 200 kgms-1
मान लें कि लड़की के गाड़ी पर कूदने के बाद गाड़ी और लड़की का वेग लड़की का कुल संवेग है। इस अवस्था में गाड़ी तथा
= (40 + 3 ) kg x v ms-1
= 43 v kg ms-1
संवेग संरक्षण के नियमानुसार दोनों स्थितियों में कुल संवेग समान होंगे।
अर्थात्, 43 v = 200
⇒ v = 200/43 = + 4.65ms-1
गाड़ी पर संवार लड़की 4-65 ms के वेग से छलाँग लगाने की दिशा में चलेगी (चित्र 9.20 )।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 7

उदाहरण 9.8.
हॉकी की प्रतिद्वन्द्वी टीमों के दो खिलाड़ी गेंद को हिट करने के प्रयास में परस्पर टकरा जाते हैं तथा आपस में उलझ जाते हैं। पहले खिलाड़ी का द्रव्यमान 60 kg है तथा वह 5.0ms-1 के वेग से गति में था, जबकि दूसरा खिलाड़ी जिसका द्रव्यमान 55 kg है तथा वह 6.0ms-1 के वेग से पहले खिलाड़ी की ओर गति कर रहा था। टकराकर उलझने के बाद वे दोनों किस दिशा में किस वेग से गति करेंगे। मान लें कि दोनों खिलाड़ियों के पैर तथा पृथ्वी के बीच कार्यरत घर्षण बल नगण्य है।
हल:
मान लें कि पहला खिलाड़ी बाएँ से दाएँ दौड़ रहा है। परिपाटी के अनुसार, बाएँ से दाएँ गति की दिशा धनात्मक और दाएँ से बाएँ गति की दिशा को ऋणात्मक लेते हैं (चित्र 9. 21)। प्रतीक तथा दोनों खिलाड़ियों के क्रमश: द्रव्यमान और वेग को दर्शाते हैं। इन भौतिक राशियों पर अधोलिखित संख्याएँ तथा 2 क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय हॉकी खिलाड़ियों को बताती हैं। अतः
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम 8
m1 = 60kg; u1
= + 5ms-1 तथा
m2 = 55 kg: u2
= – 6ms-1
टक्कर से पहले दोनों खिलाड़ियों का कुल संवेग
= 60 kg × (+ 5ms-1) + 55 kg x (- 6ms-1)
= – 30kgms-1
मान लें कि दोनों खिलाड़ियों के टकराने के बाद उलझने पर वेग v है, टक्कर के बाद कुल संवेग
= (m1 + m2) x v
=(60 + 55) kg x v ms-1
= 115 x v kg ms-1
संवेग संरक्षण के नियमानुसार टक्कर से पहले तथा बाद के संवेगों की समानता से,
v = – 30/115 = – 0.26ms-1
अतः उलझने के बाद दोनों खिलाड़ी दाएँ से बाएँ 0.26 ms-1 के वेग से गतिशील होंगे।

खण्ड 9.6 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पृ. सं. 140)

प्रश्न 1.
यदि क्रिया सदैव प्रतिक्रिया के बराबर होती है तो स्पष्ट कीजिए कि घोड़ा गाड़ी को कैसे खींच पाता है?
उत्तर:
घोड़ा गाड़ी की गति- घोड़ा गाड़ी को खींचते समय अपने पैरों से सड़क पर पीछे की ओर बल लगाता है। क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम के अनुसार सड़क भी घोड़े पर समान परिमाण का बल आगे की ओर लगाती है। इसी प्रतिक्रिया बल के कारण घोड़ा तथा उसके पीछे जुड़ी गाड़ी आगे की ओर चल पड़ते हैं। इस प्रकार घोड़ा व गाड़ी घोड़े द्वारा लगाए बल के कारण नहीं बल्कि पृथ्वी के प्रतिक्रिया बल के कारण गतिमान होते हैं।

प्रश्न 2.
एक अग्निशमन कर्मचारी को तीव्र गति से बहुतायत मात्रा में पानी फेंकने वाली रबर की नली को पकड़ने में कठिनाई क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
फायर ब्रिगेड की अत्यधिक मात्रा उच्च वेग से मोटर के पाइप से पानी की निकलती है अर्थात् पाइप से निकलने वाले पानी की संवेग परिवर्तन की दर बहुत अधिक होती है। क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम से, पाइप का संवेग भी इसी दर से विपरीत दिशा में परिवर्तित होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि पाइप से निकलने वाला पानी पाइप पर बहुत अधिक बल आरोपित करता है जिसके कारण पाइप को सँभालना कठिन होता है।

प्रश्न 3.
एक 50 ग्राम द्रव्यमान की गोली 4 किग्रा द्रव्यमान की रायफल से 35 मीटर / सेकण्ड के प्रारम्भिक वेग से छोड़ी जाती है। रायफल के प्रारम्भिक प्रतिक्षेपित वेग की गणना कीजिए।
हल:
दिया है गोली का द्रव्यमान m1 = 50 ग्राम = \(\frac { 50 }{ 1000 }\) किग्रा = 0.05 किग्रा।
गोली के छूटने का वेग v1 = 35 मीटर / सेकण्ड
रायफल का द्रव्यमान m2 = 4 किग्रा,
रायफल का प्रतिक्षेपित वेग v2 = ?
∵ गोली में विस्फोट होने से पूर्व गोली तथा रायफल दोनों विरामावस्था में थीं,
∴ विस्फोट से पूर्व दोनों का कुल संवेग
= m1u1 + m2 u2
= m1 x 0 + m2 x 0 = 0 [∴ u1 = 0, u2 = 0]
तथा विस्फोट के बाद दोनों का संवेग
= m v1 + m2 v2
= 0.05 x 35 + 4v2
संवेग संरक्षण के नियम से, दोनों संवेगों को बराबर
रखने पर,
0.05 x 35 + 4v2 = 0
या 4v2 = 0.05 x 35 = – 1.75
या v2 = – \(\frac { 1.75 }{ 4 }\)
= – 0.4375 मीटर/सेकण्ड।
ऋणात्मक चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि रायफल गोली के विपरीत दिशा में गति करेगी।
अतः रायफल का प्रतिक्षेपित वेग = 0-4375 मीटर / सेकण्ड पीछे की ओर।

प्रश्न 4.
100 ग्राम तथा 200 ग्राम द्रव्यमान की दो वस्तुएँ एक ही रेखा के अनुदिश एक ही दिशा में क्रमश: 2 मीटर / सेकण्ड तथा 1 मीटर/सेकण्ड के वेग से गति कर रही हैं। दोनों वस्तुएँ टकरा जाती हैं। टक्कर के पश्चात् प्रथम वस्तु का वेग 1-67 मीटर/सेकण्ड हो जाता है तो दूसरी वस्तु का वेग ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है द्रव्यमान m1 = 100 ग्राम 0.1 किग्रा, m2 = 200 ग्राम 0-2 किग्रा
टक्कर से पूर्व वेग u1 = 2 मीटर/सेकण्ड,
u2 = 1 मीटर/सेकण्ड
टक्कर के बाद वेग v1 = 1.67 मीटर / सेकण्ड, v2 = ?
टक्कर से पूर्व दोनों का संवेग = m1 u1 + m2 u2
= 0.1 × 2 + 0.2 × 1
= 0.4 किग्रा मीटर/सेकण्ड
तथा टक्कर के बाद दोनों का संवेग = m1 v1 + m2 v2
= (0.1 × 1.67 + 0.2 × 12 ) किग्रा – मीटर / सेकण्ड संवेग संरक्षण के नियम से,
टक्कर के बाद संवेग = टक्कर से पूर्व संवेग
अर्थात् 0.1 × 1.67 + 0.2 x v2 = 0.4
या 0.2 x v2 = 0-4 – 0.167
0.2 × v2 = 0.233
या v2 = \(\frac { 0.233 }{ 0.2 }\)
= 1.165 मीटर / सेकण्ड
अतः टक्कर के बाद दूसरी वस्तु का वेग 1.165 मीटर / सेकण्ड होगा।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. हरित क्रांति सम्बन्धित है-
(a) दुग्ध उत्पादन से
(b) फसल उत्पादन में वृद्धि से
(c) मछली उत्पादन से
(d) मधुमक्खी पालन से।
उत्तर:
(b) फसल उत्पादन में वृद्धि से।

2. श्वेत क्रांति सम्बन्धित है-
(a) उर्वरक उत्पादन से
(b) खाद उत्पादन से
(c) दुग्ध उत्पादन से
(d) कृषि उत्पादन से।
उत्तर:
(c) दुग्ध उत्पादन से।

3. निम्न से कौन-से प्राथमिक पोषक तत्व हैं?
(a) नाइट्रोजन, पोटैशियम एवं फॉस्फोरस
(b) सल्फर, लोहा, मैंगनीज
(c) कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन
(d) कॉपर, क्लोरीन, बोरॉन
उत्तर:
(a) नाइट्रोजन, पोटैशियम एवं फॉस्फोरस।

4. उर्वरक का प्रयोग कब किया जाता है-
(a) बीज बोने से पहले
(b) बीज बोने के बाद
(c) फसल कटने के बाद
(d) कभी भी।
उत्तर:
(c) फसल कटने के बाद

5. कीटनाशी का प्रयोग किसे मारने के लिए किया जाता है?
(a) कीट
(b) जीवाणु
(c) पौधा
(d) चूहा।
उत्तर:
(a) कीट।

6. दो सामान्य फसलों के बीच दलहनी फसल उगाने की विधि को कहते हैं-
(a) एकल खेती
(b) फसल चक्र
(c) मिश्रित खेती
(d) बहुफसली खेती।
उत्तर:
(d) बहुफसली खेती।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

7. मुर्गियों की संकर नस्ल कौन सी है-
(a) व्हाइट लेगहॉर्न
(b) बसरा
(c) असील
(d) ILS-82
उत्तर:
(d) ILS-82।

8. खरपतवार वाले पौधे हैं-
(a) गोखरू
(b) गाजर घास
(c) मोथा
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

9. पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले कारक हैं-
(a) बैक्टीरिया
(b) कवक
(c) वाइरस
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

10. पशुओं की सामान्य बीमारी कौन-सी है?
(a) बुखार
(b) हैजा
(c) पशु महामारी
(d) मुँहपका एवं खुरपका।
उत्तर:
(d) मुँहपका एवं खुरपका।

11. माँस के लिए पाला जाता है-
(a) ब्रौलर
(b) लेयर
(c) बौलर एवं लेयर
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर:
(a) ब्रौलर।

12. ऑएस्टर का संवर्धन किया जाता है.
(a) गोश्त प्राप्ति के लिए
(b) अंडे प्राप्ति के लिए
(c) मोतियों को प्राप्त करने के लिए
(d) औषधि निर्माण के लिए।
उत्तर:
(c) मोतियों को प्राप्त करने के लिए।

13. मिश्रित मछली संवर्धन किया जाता है-
(a) समुद्र में
(b) नदियों में
(c) झीलों में
(d) तालाबों में
उत्तर:
(d) तालाबों में।

14. देशी किस्म की मधुमक्खी है-
(a) ऐपिस सेरना इंडिका
(b) ऐपिस डोरसेटा
(c) ऐपिस फ्लोरी
(d) उपर्युक्त तीनों ही।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त तीनों ही।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

15. फसल के लिए कुल कितने पोषक तत्व आवश्यक हैं-
(a) 16
(b) 13
(c) 7
(d) 6
उत्तर:
(a) 16।

16. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल मृदा को नाइट्रोजन से समृद्ध करेगी-
(a) सेम
(b) मटर
(c) धान
(d) आलू।
उत्तर:
(b) मटर।

रिक्त स्थान भरो-

  1. ………………….. क्रांति द्वारा फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है।
  2. ………………….. क्रांति द्वारा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
  3. पशुधन के प्रबंधन को ………………….. कहते हैं।
  4. नस्लों की गायों में रोगप्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है।

उत्तर:

  1. हरित
  2. श्वेत
  3. पशुपालन
  4. देशी।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कौलम ‘ख’
1. विदेशी गाय(क) मत्स्य पालन
2. देशी गाय(ख) रेडसिंधी
3. मछली(ग) जर्सी
4. देशी मुर्गी(घ) एसिल

उत्तर:
1. (ग) जर्सी
2. (ख) रेडसिंधी
3. (क) मत्स्य पालन
4. (घ) एसिल

सत्य / असत्य-

  1. माँस के लिए लेयर मुर्गी को पाला जाता है।
  2. मधुमक्खी पालन में बहुत अधिक पूँजी निवेश होता है।
  3. सामान्य भारतीय मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम ऐपिस सेरना इंडिका है।
  4. ग्रास कॉर्प मछली खरपतवार खाती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भोजन से हमें क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
भोजन से हमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 2.
हमारे भोजन के स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
जन्तु तथा पौधे हमारे भोजन के स्रोत हैं।

प्रश्न 3.
हमारे देश की जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
हमारे देश की जनसंख्या 1 बिलियन (1 अरब) से अधिक है।

प्रश्न 4.
किस क्रान्ति से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है?
उत्तर:
हरित क्रांति से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है।

प्रश्न 5.
दुग्ध उत्पादन किस प्रकार बढ़ाया गया है?
उत्तर:
दुग्ध उत्पादन श्वेत क्रांति से बढ़ाया गया है।

प्रश्न 6.
कृषि और पशुपालन के लिए किन प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है?
उत्तर:
कृषि और पशुपालन के लिए संपोषणीय प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है।

प्रश्न 7.
कृषि क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए हमें क्या अपनाना होगा?
उत्तर:
कृषि क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक प्रणालियाँ एवं प्रबन्धन अन्तराफसलीकरण तथा सम्बन्धित कृषि प्रणालियाँ अपनानी होंगी।

प्रश्न 8.
हमें कार्बोहाइड्रेट किन फसलों से प्राप्त होता है?
उत्तर:
हमें कार्बोहाइड्रेट गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा से प्राप्त होता है।

प्रश्न 9.
प्रोटीन किन-किन फसलों से प्राप्त होता है?
उत्तर:
प्रोटीन चना, मटर, अरहर, उड़द, मूंग और मसूर से प्राप्त होता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 10.
तेल प्रदान करने वाले बीजों के नाम बताइये।
उत्तर:
सरसों, अलसी, सूरजमुखी, अरंड, तिल, सोयाबीन, मूंगफली तेल देने वाले बीज हैं।

प्रश्न 11.
चारा देने वाली फसलों के नाम बताइये।
उत्तर:
बरसीम, जई, सूडान घास, चरी (हरी ज्वार) के पौधे आदि चारा देने वाली फसलें हैं।

प्रश्न 12.
फसलों की उचित वृद्धि के लिए किन-किन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
फसल की उचित वृद्धि के लिए जलवायुवीय परिस्थितियाँ, उचित तापमान और दीप्तिकाल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 13.
दीप्ति काल किससे सम्बन्धित है?
उत्तर:
दीप्तिकाल सूर्य के प्रकाश काल से सम्बन्धित है।

प्रश्न 14.
पौधों में पुष्पन और वृद्धि किस पर निर्भर है?
उत्तर:
पौधों में पुष्पन और वृद्धि सूर्य के प्रकाश पर निर्भर है।

प्रश्न 15.
पौधे किस प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन निर्माण करते हैं?
उत्तर:
पौधे प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा अपना भोजन निर्माण करते हैं।

प्रश्न 16.
वर्षा ऋतु में कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
उत्तर:
वर्षा ऋतु में धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, मूंग तथा उड़द की फसलें उगाई जाती हैं। इन्हें खरीफ फसल कहते हैं।

प्रश्न 17.
खरीफ फसलों का समय बताइये।
उत्तर:
खरीफ फसलों का समय जून से अक्टूबर माह तक है।

प्रश्न 18.
रबी में कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
उत्तर:
रबी में गेहूँ, चना, मटर, सरसों, अलसी की फसलें उगाई जाती हैं। ये शीत ऋतु की फसलें हैं।

प्रश्न 19.
रबी की फसलों का समय क्या है?
उत्तर:
रबी की फसलों का समय नवम्बर से अप्रैल तक का है।

प्रश्न 20.
कृषि प्रणालियों को किन तीन चरणों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
कृषि प्रणालियों को तीन चरणों में बाँटा जा सकता है-

  • बीज का चुनना
  • फसल की उचित देखभाल
  • खेत में उगी फसल की सुरक्षा तथा कटी हुई फसल को हानि से बचाना।

प्रश्न 21.
फसल की किस्मों में ऐच्छिक गुण किस विधि से डाले जाते हैं?
उत्तर:
फसल की किस्मों में ऐच्छिक गुण संकरण विधि से डाले जाते हैं।

प्रश्न 22.
सस्य विज्ञान वाली किस्में किसमें सहायक हैं?
उत्तर:
सस्य विज्ञान वाली किस्में अधिक उत्पादन में सहायक हैं।

प्रश्न 23.
पौधे अपने पोषण के लिए पोषक तत्व कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
पौधे अपने पोषण के लिए हवा से ऑक्सीजन, CO2, पानी से हाइड्रोजन और मिट्टी से 13 पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 24.
पौधों को कितने वृहत् और कितने सूक्ष्म पोषकों की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
पौधों को 6 बृहत् और 7 सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 25.
पौधों के लिए वृहत् पोषकों के नाम लिखिये।
उत्तर:
पौधों के लिए बृहत् पोषक हैं- नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर।

प्रश्न 26.
सूक्ष्म पोषक तत्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
आयरन, मैंगनीज, जिंक, कॉपर, बोरॉन, मॉलिब्डेनम और क्लोरीन सूक्ष्म पोषक हैं।

प्रश्न 27.
खाद में किन पदार्थों की अधिकता होती है?
उत्तर:
खाद में कार्बनिक पदार्थों की अधिकता होती है।

प्रश्न 28.
खाद की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
खाद मिट्टी को पोषक तथा कार्बनिक पदार्थों को प्रचुर मात्रा में प्रदान कर उसकी उर्वरता को बढ़ाता है।

प्रश्न 29.
रेतीली मिट्टी पर खाद का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
खाद से रेतीली मिट्टी में पानी को रोकने की क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 30.
कम्पोस्ट खाद किसे कहते हैं?
उत्तर:
कृषि और जन्तु अपशिष्ट (गोबर), घरेलू कचरे, खरपतवार आदि को गड्ढों में अपघटित करके बनाई जाने वाली खाद को कम्पोस्ट खाद कहते हैं।

प्रश्न 31.
वर्मीकम्पोस्ट क्या है?
उत्तर:
केंचुए के उपयोग से तैयार कम्पोस्ट को वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं।

प्रश्न 32.
हरी खाद क्या है?
उत्तर:
खेत में फसल उगाने से पहले पटसन, मूंग, ज्वार, ढेंचा आदि को उगाकर उन्हें खेत की जुताई करके मिट्टी में मिला देनें से हरे पौधे खाद में बदल जाते हैं।

प्रश्न 33.
हरी खाद में कौन-कौन से तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं?
उत्तर:
हरी खाद में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं।

प्रश्न 34.
उर्वरक क्या हैं?
उत्तर:
उर्वरक व्यावसायिक रूप से तैयार पादप पोषक हैं, जिनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम की अधिकता होती है। जैसे यूरिया, डी.ए.पी. आदि।

प्रश्न 35.
उर्वरक के अधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम क्यों हो जाती है?
उत्तर:
उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की पुनः पूर्ति नहीं होती है तथा सूक्ष्म जीवों का जीवन चक्र अवरुद्ध हो जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है।

प्रश्न 36.
मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने का प्राकृतिक उपाय क्या है?
उत्तर:
मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने का प्राकृतिक उपाय फसल चक्र अपनाया जाना है।

प्रश्न 37.
सिंचाई के चार जल स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सिंचाई के चार जल स्रोत हैं- कुएँ, नहरें, नदियाँ, तालाब।

प्रश्न 38.
सिंचाई की मात्रा निर्धारित करने वाले कारकों का नाम लिखो।
उत्तर:
सिंचाई की मात्रा निर्धारित करने वाले कारक हैं- मिट्टी की प्रकृति, फसल विशेष की प्रकृति और वर्षा।

प्रश्न 39.
नदी लिफ्ट पम्प क्या है?
उत्तर:
नदियों के किनारे स्थित खेतों में सिंचाई करने के लिए नदियों से सीधे ही पानी निकालना (पम्पिंग सैट द्वारा) ‘नदी लिफ्ट पम्प’ कहलाता है।

प्रश्न 40.
चैक डैम का क्या उपयोग है?
उत्तर:
चैक डैम वर्षा के पानी को बहने से रोकते हैं और मृदा अपरदन को कम करते हैं।

प्रश्न 41.
मिश्रित फसल के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
मिश्रित फसल के उदाहरण मेहूँ सरसों, गेहूँ + चना, मूंगफली + सूरजमुखी।

प्रश्न 42.
अन्तराफसलीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ एक ही खोत में निर्दिष्ट पैटर्न पर उगाया जाता है तो इसे अन्तराफसलीकरण कहते हैं। इसमें कुछ पंक्तियों में एक प्रकार की फसल तथा उसके एकान्तर दूसरी पंक्तियों में दूसरी फसल उगाई जाती है।

प्रश्न 43.
अन्तराफसलीकरण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • सोयाबीन + मक्का
  • बाजरा लोबिया।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 44.
खरपतवार क्या हैं? इनके उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
फसल के पौधों के साथ उगने वाले अवांछित पौधों को खररपतवार कहते हैं, जैसे- गोखरू, गाजर घास, मोथा, जई, चौलाई, बथुआ तथा हिरनखुरी, जंगली मेथी आदि।

प्रश्न 45.
पौधों में रोग किन कारकों से होते हैं?
उत्तर:
पौधों में रोग बैक्टीरिया, वाइरस और कवक द्वारा होते हैं।

प्रश्न 46.
हानिकारक कारक अनाज को क्या हानि पहुँचाते हैं?
उत्तर:
हानिकारक कारक अनाज की गुणवत्ता खराब करते हैं, वजन कम कर देते हैं, अंकुरण करने की क्षमता कम करते हैं और उन्हें बदरंग करते हैं।

प्रश्न 47.
पशुपालन किसे कहते हैं? इसके अन्तर्गत क्या-क्या कार्य किये जाते हैं?
उत्तर:
पशुओं को पालने के प्रबन्धन को पशुपालन कहते हैं। इसके अन्तर्गत पशुओं को भोजन देना, प्रजनन कराना तथा रोगों पर नियन्त्रण करना शामिल हैं।

प्रश्न 48.
दुधारू तथा ड्राफ्ट पशु किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
दूध देने वाली मादाओं को दुधारू पशु तथा बोझा ढोने वाले पशुओं को ड्राफ्ट पशु कहते हैं।

प्रश्न 49.
लम्बे समय तक दुग्ध स्रावणकाल के लिए विदेशी नसलें कौन-सी हैं?
उत्तर:
जर्सी, ब्राउन, स्विस गाय का दुग्ध स्रावण काल लम्बा होता है।

प्रश्न 50.
अधिक रोग प्रतिरोधकता वाली गाय की दो देशी नस्लों के नाम बताओ।
उत्तर:
रेडसिंधी तथा साहीवाल अधिक रोग प्रतिरोधकता वाली नस्ल की गाय हैं।

प्रश्न 51.
पर्णकृमि कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
पर्णकृमि (फ्लूकवर्म) पशुओं के यकृत में पाया जाता है।

प्रश्न 52.
कुक्कुट पालन में किन मुर्गियों का पालन किया जाता है?
उत्तर:
कुक्कुट पालन में अण्डों के लिए लेअर तथा माँस के लिए बौलर का पालन किया जाता है।

प्रश्न 53.
नई किस्मों के लिए किन कुक्कुटों का संकरण कराया जाता है ?
उत्तर:
नई किस्मों के लिए देशी एसिल तथा विदेशी लेगहार्न नस्लों का संकरण कराया जाता है।

प्रश्न 54.
बौलर के आहार में कौन से तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं?
उत्तर:
ब्रॉलर के आहार में प्रोटीन तथा वसा प्रचुर मात्रा में होते हैं।

प्रश्न 55.
मुर्गियों में रोग होने के कारण बताइए।
उत्तर:
मुर्गियों में रोग होने के कारण हैं- जीवाणु, विषाणु, कवक, परजीवी तथा पोषणहीनता।

प्रश्न 56.
प्रोटीन प्राप्ति का अच्छा और सस्ता स्रोत कौन-सा है?
उत्तर:
मछली प्रोटीन प्राप्ति का अच्छा और सस्ता स्रोत है।

प्रश्न 57.
भारत का समुद्री संसाधन क्षेत्र कितना है?
उत्तर:
भारत का समुद्री संसाधन क्षेत्र 7500 किलोमीटर समुद्री तट तथा इसके बाद समुद्र की गहराई तक है।

प्रश्न 58.
सर्वाधिक प्रचलित समुद्री मछलियों के नाम बताइए।
उत्तर:
पॉसफेट, मैकलं, दुना, सारडाइन व कंबेडक सर्वाधिक प्रचलित समुद्री मछलियाँ हैं।

प्रश्न 59.
मछलियों के बड़े समूह का पता कैसे लगाया जाता है?
उत्तर:
मछलियों के बड़े समूह का पता सैटेलाइट तथा प्रतिध्वनि ध्वनित्र से लगाया जाता है।

प्रश्न 60.
समुद्री जल में संवर्द्धित मछलियों के नाम बताओ।
उत्तर:
मुलेट, भेटकी तथा पर्लस्पॉट (पंख युक्त मछलियाँ)।

प्रश्न 61.
मोतियों की प्राप्ति के लिए किसका संवर्धन किया जाता है?
उत्तर:
मोतियों की प्राप्ति के लिए ऑएस्टर का संवर्धन किया जाता है।

प्रश्न 62.
समुद्री संवर्धन (मेरी कल्चर) किसे कहते हैं?
उत्तर:
समुद्री मछलियों का भण्डार (स्टॉक) कम होने की दशा में इन मछलियों की पूर्ति संवर्धन के द्वारा हो सकती है। इस प्रणाली को समुद्री संवर्धन (मेरीकल्चर) कहते हैं।

प्रश्न 63.
एस्चुरी किसे कहते हैं?
उत्तर:
ताजे पानी और समुद्री खारे पानी के मिश्रण को एस्चुरी कहते हैं।

प्रश्न 64.
उस फसल का नाम बताइए जिसके साथ मछली संवर्धन किया जाता है।
उत्तर:
धान की फसल के साथ मछली संवर्धन किया जाता है।

प्रश्न 65.
खारे तथा मीठे पानी की मछलियों की दो किस्मों के नाम लिखो।
उत्तर:

  • खारे पानी की मछलियाँ हिल्सा, कैट फिश, डॉग फिश, रेड, मुलैट आदि।
  • मीठे पानी की मछलियाँ – कतला, रोहू (लेबियो) मिरिटस, मिल्क फिश।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 66.
मधुमक्खी क्या बनाती है?
उत्तर:
मधुमक्खी शहद और मोम तैयार करती है।

प्रश्न 67.
व्यावसायिक स्तर पर शहद उत्पादन के लिए किस देशी मधुमक्खी का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
व्यावसायिक स्तर पर शहद उत्पादन के लिए ऐपिस सेरना इण्डिका (सामान्य भारतीय मधुमक्खी), ऐपिस डोरसेटा (एक शैल मधुमक्खी) तथा ऐपिस फ्लोरी (छोटी मधुमक्खी) का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 68.
किसी मधुमक्खी की सहायता से मधु उत्पादन बढ़ाया जा रहा है?
उत्तर:
इटेलियन मधुमक्खी ऐपिस मेलीफेरा की सहायता से मधु उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।

प्रश्न 69.
इटेलियन मधुमक्खी की दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
इटेलियन मधुमक्खी में-

  • मधु एकत्र करने की क्षमता अधिक होती है
  • यह डंक कम मारती है।

प्रश्न 70.
मधु की गुणवत्ता किस पर निर्भर करती है?
उत्तर:
मधु की गुणवत्ता मधुमक्खियों द्वारा मकरंद एकत्र करने के लिए उपलब्ध फूलों पर निर्भर करती है।

लघूत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों के लिए आवश्यक बृहत् और सूक्ष्म तत्व कौन-कौन से हैं? प्रत्येक को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हरे पौधों की सामान्य वृद्धि के लिए 16 तत्वों की आवश्यकता होती है, जिन्हें वानस्पतिक पोषक तत्व कहते हैं। ये पौधों की आवश्यकता की मात्रा के आधार पर दो प्रकार के होते हैं-

  • बृहत् पोषक तत्व ऐसे पोषक तत्व जिनकी आवश्यकता पौधों को अधिक मात्रा में होती है, वृहत् पोषक तत्व कहलाते हैं। ये पोषक तत्व हैं- नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम ऑक्सीजन और सल्फर।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व- वे पोषक तत्व जिनकी आवश्यकता पौधों को सूक्ष्म (अल्प) मात्रा में होती है, सूक्ष्म पोषक तत्व कहलाते हैं। ये पोषक तत्व हैं- आयरन, मैगनीज, बोरॉन, जिंक, कॉपर, मॉलिब्डेनम, क्लोरीन।

प्रश्न 2.
पौधों के लिए पोषक तत्वों के विभिन्न स्त्रोत बताइए।
उत्तर:
पौधों के लिए पोषक तत्व तीन स्रोतों से प्राप्त होते हैं- हवा, पानी तथा मृदा।

स्रोतपोषक
हवाकार्बन, ऑक्सीजन
पानीहाइड्रोजन, ऑक्सीजन
मृदा(i) वृहत् पोषक: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर
(ii) सूक्ष्म पोषक: आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, जिंक, कॉपर, क्लोरीन, मॉलिब्डेनम

प्रश्न 3.
खाद किसे कहते हैं? खाद के प्रयोग करने से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
खाद एक कार्बनिक पदार्थ है जो पौधों और जन्तुओं के अपशिष्ट पदार्थों से प्राप्त होता है। खाद पौधों के लिए पोषक तत्वों का स्रोत है। गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, हरी खाद वर्मीखाद मुख्य प्रकार की खाद हैं।
खाद के प्रयोग से लाभ-

  • मिट्टी में अपघटन के द्वारा कार्बनिक खाद हयूमस में परिवर्तित हो जाती है।
  • खाद से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ जाती है।
  • पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं।
  • कार्बनिक खादें मृदा की नमी को संरक्षित करने में सहायक होती हैं।
  • खादों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण कम होता है।
  • अपशिष्ट पदार्थों का पुनः चक्रीकरण हो जाता है।
  • खाद में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों का भोजन हैं। ये जीव पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं।
  • खादों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

प्रश्न 4.
उर्वरक क्या हैं? ये खाद से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
उर्वरक (फर्टीलाइजर्स) – ये व्यावसायिक रूप से तैयार रासायनिक खाद हैं, जो मृदा में पौधों को पोषक तत्व – नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम प्रदान करते हैं। इनके उपयोग से पौधों की अच्छी वृद्धि होती है, स्वस्थ पौधों की प्राप्ति होती है और फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

उर्वरक और खाद में अन्तर:

उर्वरक (फर्टीलाइजस)खाद (मैन्योस)
1. ये कृत्रिम रूप से बनाए गये मुख्यतः अकार्बनिक रासायनिक पदार्थ हैं।1. ये प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होने वाले कार्बनिक पदार्थ हैं।
2. ये कम स्थान घेरते हैं।2. ये अधिक स्थान घेरते हैं।
3. इनमें भंडारण, स्थानातरण तथा उपयोग की विधि आसान है।3. इनका भंडारण तथा स्थानान्तरण, असुविधाजनक है।
4. उर्वरक नमी का अवशोषण करके शीघ्र खराब हो जाते हैं।4. ये नमी का अवशोषण करके खराब नहीं होते हैं।
5. ये मृदा के संघटन को स्थिर नहीं रखते हैं।5. ये मृदा के संघटन को स्थिर रखते हैं।
6. इनके उपयोग से मृदा में पानी रोकने तथा वातन की क्षमता कम होती है।6. इनमें मृदा में पानी रोकने एवं वातन की क्षमता अधिक होती है।
7. इनमें विशिष्ट पोषक तत्व पाया जाता है।7. इनमें सभी पोषक तत्व उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 5.
भंडारण में अनाज की क्षति किन कारणों से होती है?
उत्तर:
भंडारण में अनाज की क्षति दो प्रमुख कारणों से होती है ये कारक निम्नलिखित हैं-

  • जैविक कारक-इनमें चूहे आदि कृंतक, कीट, दीमक, जन्तु, कवक, पक्षी तथा जीवाणु आदि सम्मिलित हैं।
  • अजैविक कारक-इनमें नमी तथा तापमान सम्मिलित हैं ताप, आर्द्रता, नमी आदि अजैविक घटक फलों एवं सब्जियों को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 6.
कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट तथा हरी खाद पर टिप्पणी लिखो।
उत्तर:
खाद मिट्टी को पोषक तथा कार्बनिक पदार्थों से परिपूर्ण करती है और मिट्टी की उर्वरता, को बढ़ाती है। खाद में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा मिट्टी की संरचना में सुधार करती है। जबकि उर्वरक का सतत् प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को घटाता है क्योंकि कार्बनिक पदार्थ की पुनः पूर्ति नहीं हो पाती है तथा इससे सूक्ष्म जीवों एवं भूमिगत जीवों का जीवनचक्र अवरुद्ध होता है। उर्वरकों के उपयोग से फसलों का अधिक उत्पादन कम समय में प्राप्त हो सकता है, किन्तु यह मृदा की उर्वरता को कुछ समय बाद हानि पहुँचाते हैं। जबकि खाद के उपयोग के लाभ दीर्घावधि हैं।

कार्बनिक खेती, खेती करने की वह पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी, शाकनाशी आदि का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। इस पद्धति में अधिकाधिक कार्बनिक खाद, कृषि अंपशिष्ट (पुआल तथा पशुधन) का पुनर्चक्रण, जैविक कारक जैसे-नील-हरित शैवाल का संवर्धन, जैविक उर्वरक बनाने में उपयोग किया जाता है। नीम की पत्तियों तथा हल्दी का विशेष रूप से जैव कीटनाशकों के रूप में खाद्य संग्रहण में प्रयोग किया जाता है। कुशल फसलीकरण पद्धति के लिए मिश्रित खोती, अन्तर फसलीकरण तथा फसल चक्र आवश्यक हैं। ये फसल तन्त्र कीट, पीड़क तथा खरपतवार को नियन्त्रित करते हैं और पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

प्रश्न 7.
कार्बनिक खेती किसे कहते हैं?
उत्तर:
फसल उत्पादन प्रबन्धन – भारत में कृषि छोटेछोटे खेतों से लेकर बहुत बड़े फार्मों तक में होती है। इसलिए विभिन्न किसानों के पास भूमि, धन, सूचना तथा तकनीकी उपलब्धता कम या अधिक होती है। संक्षेप में धन अथवा आर्थिक परिस्थितियाँ किसान को विभिन्न कृषि प्रणालियों तथा कृषि तकनीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योगदान, उच्च निवेश तथा फसल उत्पादन में सह-सम्बन्ध है। इस प्रकार किसान की लागत क्षमता फसलतन्त्र तथा उत्पादन प्रणालियों का निर्धारण करती है। बिना लागत उत्पादन, अल्प लागत उत्पादन तथा अधिक लागत उत्पादन प्रणालियौँ इनमें सम्मिलित हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 8.
सिंचाई के साधनों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
सिंचाई (Itrigation) – भारत में अधिकांश कृषि वर्षा पर आधारित हैं अथथत् अधिकांश क्षेत्रों में फसल की उपज, समय पर मानसून आने तथा वृद्धि काल में वर्षा होने पर निर्भर करती है। इसलिए कम वर्षा होने पर फसल उत्पादन कम हो जाता है। फसल की वृद्धि काल में उचित समय पर सिंचाई करने से सम्भावित फसल उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इसलिए अधिकाधिक कृषि भूमि को सिचित करने के लिए अनेक उपाय किये जाते हैं।

भारत में पानी के अनेक सोता हैं और विभिन्न प्रकार की जलवायु है। इन परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार की सिंचाई की विधियाँ पानी के स्रोत की उपलब्यता के आधार पर अपनायी जाती है। इन स्रोतों के कुछ उदाहरण; कुएँ, नहरें, नदियाँ और तालाब हैं।
(1) कुएँ-कुएँ दो प्रकार के होते हैं- खुदे हुए कुएँ और नलकुप। स्रुदे हुए कुएँ द्वारा भूमिगत जल स्तरों में स्थित पानी को एकत्रित किया जाता है। नलकूप में पानी गहरे जलस्तरों से निकाला जाता है। इन कुओं से सिंचाई के लिए पानी को पम्प द्वारा निकाला जाता है।

(2) नहों-यह सिंचाई का बहुत विस्तृत तथा व्यापक तन्त्र है। इनमें पानी एक या अधिक जलाशयों अथवा नदियों से आता है। मुख्य नहर से शाखाएँ निकलती हैं जो विभाजित होकर खेतों में सिंचाई करती हैं।

(3) नदी जल उठाव प्रणाली-जिन क्षेत्रों में जलाशयों से कम पानी मिलने के कारण नहरों का बहाव अनियमित अथवा अपर्याप्त होता है वहाँ जल उठाव प्रणाली अधिक उपयोगी होती है। नदियों के किनारे स्थित ख्रेतों में सिंचाई करने के लिए नदियों से सीधे ही पानी निकाला जाता है।

(4) तालाब-छोटे जलाशय जो छोटे क्षेत्रों में बहते हुए पानी का संग्रह करते हैं, तालाब का रूप ले लेते हैं।

कृषि में पानी की उपलब्धि बढ़ाने के लिए आधुनिक विधियाँ, जैसे-वर्षां के पानी का संग्रहण तथा जल विभाजन का उचित प्रबन्धन द्वारा उपयोग किया जाता है। इसके लिए छोटे बाँध बनाने होते हैं जिससे कि भूमि के नीचे जलस्तर बढ़ जाए। ये छोटे बाँध वर्षा के पानी को बहने से रोकते हैं तथा मृदा अपरदन को भी कम करते हैं।

प्रश्न 9.
फसल चक्र किसे कहते हैं? इससे क्या लाभ हैं?
उत्तर:
फसल चक्र – एक ही खेत में प्रतिवर्ष अनाज तथा फलीदार पौधों की फसल को अदल-बदल कर एक के बाद एक को उगाने की क्रिया को फसल चक्र कहते हैं।
फसल चक्र के लाभ –

  • मृदा की उर्वरता बनी रहती है।
  • अधिक उपज प्राप्त होती है।
  • खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।
  • कीट-पतंगों और रोगों पर नियंत्रण में सहायता मिलती है।

प्रश्न 10.
फसल चक्र के लिए फसलों का चुनाव कैसे किया जाता है?
उत्तर:
फसल चक्र के लिए फसलों का चुनाव-फसल चक्र के लिए फसलों का चुनाव करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • मृदा में पोषक तत्व गहरी तथा उथली हुई जड़ वाली फसलों को एक के बाद एक करके बौना चाहिए जिससे फसलें मिट्टी की विभिन्न सतहों से पोषक तत्व ग्रहण कर सकें।
  • नमी या जल की उपलब्धता अधिक पानी वाली फसल के बाद कम पानी वाली फसल बोनी चाहिए जिससे मिट्टी में वायु का संचार हो सके।
  • पोषक तत्वों की उपलब्धता अनाज की फसल के बाद दलहनी फसल बोनी चाहिए ताकि दलहनी फसलों की जड़ों में उपस्थित जीवाणु नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके भूमि की उर्वरता को बनाए रखें।

प्रश्न 11.
फसल चक्र का महत्व बताइए।
उत्तर:
फसल चक्र का महत्व –

  • इससे मृदा की उर्वरता में कमी नहीं आती है और वह यथावत बनी रहती है।
  • इससे खेतों में खरपतवार कम पैदा होते हैं।
  • दलहनी फसल उगाने से भूमि में नाइट्रोजन की वृद्धि हो जाती है।
  • फसलें कीटों तथा अन्य व्याधियों से सुरक्षित रहती हैं।
  • इससे मृदा अपरदन कम होता है।

प्रश्न 12.
पादपों में संकरण के लाभ बताइये।
उत्तर:
पादपों में संकरण के लाभ निम्नलिखित हैं-

  • संकरण से प्राप्त पौधे पर्यावरण के प्रति अनुकूलित होते हैं।
  • ये पौधे छोटे होते हैं इसलिए इन पर तेज हवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • इन पौधों में वांछित लक्षण पाये जाते हैं।
  • इन पौधों से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है अर्थात् ये अच्छी उपज देते हैं।

प्रश्न 13.
कुक्कुट पालन क्यों किया जाता है? किन गुणों की प्राप्ति के लिए इनकी नई किस्में विकसित की जाती हैं?
उत्तर:
कुक्कुट (मुर्गी पालन) (Poultry farming) अंडे व कुक्कुट माँस के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है। इसलिए कुक्कुट पालन में उन्नत मुर्गी की नस्लें विकसित की जाती हैं। अंडों के लिए अंडे देने वाली ( लेयर) मुर्गी पालन किया जाता है तथा माँस के लिए ब्रौलर को पाला जाता है।

निम्नलिखित गुणों के लिए नई-नई किस्में विकसित की जाती हैं। नई किस्में बनाने के लिए देशी; जैसे-एसिल तथा विदेशी; जैसे-लेगहॉर्न नस्लों का संकरण कराया जाता है-

  • चूजों की संख्या तथा गुणवत्ता;
  • छोटे कद के ब्रोलर माता-पिता द्वारा चूजों के व्यावसायिक उत्पादन हेतु;
  • गर्मी अनुकूलन क्षमता। उच्च तापमान को सहने की क्षमता;
  • देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता;
  • अंडे देने वाले तथा ऐसी क्षमता वाले पक्षी जो कृषि के उपोत्पाद (एग्रीकल्चर बाइप्रोडक्ट्स) से प्राप्त सस्ते रेशेदार आहार का उपभोग कर सकें।

प्रश्न 14.
खौलर क्या है? इसकी आवश्यकताएँ क्या हैं?
उत्तर:
ब्रौलर-मांस प्रदान करने वाले कुक्कुटों को बौलर कहते हैं। इनकी आवास, पोषण तथा पर्यावरणीय आवश्यकताएँ अंडे देने वाली मुर्गियों से कुछ भिन्न होती हैं। इनको इनकी तीव्र वृद्धि एवं अल्पमृत्यु दर के अनुकूल परिस्थितियों में रखना आवश्यक है। इनके आहार में प्रोटीन वसा के साथ विटामिन A व K की मात्रा अधिक रखी जाती है।

प्रश्न 15.
हमारे देश में अलवण जलीय मछलियों के स्त्रोत एवं नस्लों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हमारे देश में तालाब, पोखर, झील, झरने, नदियाँ आदि अलवण मछलियों के स्रोत हैं कतला, रोहू, मृगल, सिल्वर कार्प तथा ग्रास कार्प आदि अलवण जल प्रदायों की खाद्य मछलियाँ हैं। कतला मछली सबसे तीव्र (शीघ्र) वृद्धि करने वाली मछली है।

प्रश्न 16.
मछली संवर्धन की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
मछली संवर्धन की उपयोगिता-मछली संवर्धन धान की फसल के साथ किया जा सकता है। अधिक मछली संवर्धन मिश्रित मछली संवर्धन तन्त्र से तालाब में किया जाता है। इसमें देशी तथा विदेशी प्रकार की मछलियों का उपयोग किया जाता है ऐसे तन्त्र में अकेले तालाब में 5 या 6 प्रकार की मछलियों की स्पीशीज का उपयोग किया जाता है। इनमें ऐसी मछलियों का चुनाव किया जाता है। जिनमें आहार के लिए प्रतिस्पर्धा न हो तथा उनके आहार की आदत अलग-अलग हो।

इससे तालाब के हर भाग में स्थित उपलब्ध आहार का उपयोग हो जाता है जैसे कटला मछली पानी की सतह से भोजन लेती है, रोहू मछली तालाब के मध्य क्षेत्र से अपना भोजन लेती है। मृगल तथा कॉमन कार्य तालाब की तली से भोजन लेती है। ग्रास कार्प खरपतवार खाती है। इस प्रकार ये मछलियाँ साथ साथ रहते हुए भी स्पर्धा के बिना अपना-अपना आहार लेती हैं। इससे तालाब में मछली उत्पादन में वृद्धि होती है।

प्रश्न 17.
शहद क्या है? इसकी शुद्धता की पहचान कैसे की जा सकती है? शहद के मुख्य गुण व उपयोग बताइये।
उत्तर:
शहद एक गाड़ा, मीठा तरल पदार्थ है जो मधुमक्खियों द्वारा अपने छत्तों में एकत्र किया जाता है। शहद मुख्य संघटक जल, शर्करा, खनिज तथा प्रकिण्व हैं।

शुद्ध शहद की पहचान –

  • काँच के एक गिलास में पानी भरकर उसमें शहद की बूँदें मिलाने पर शुद्ध शहद पानी में एक पतला तार बनाएगा जबकि मिलावटी शहद पानी में घुल जायेगा।
  • सूक्ष्मदर्शी से देखने पर शुद्ध शहद में अनेक परागकण दिखाई देते हैं, अशुद्ध शब्द में नहीं।

शहद के गुण-शहद स्वाद में मीठा और पानी में घुलनशील होता है। शहद को खुला रखने पर वायुमंडल से नमी सोख लेता है तथा इसका किण्वन हो जाता है।

उपयोग – शहद सहज ही पाचक तथा एंटीसेप्टिक होता है इसलिए इसका प्रयोग अनेक प्रकार की औषधियों में किया जाता है।

प्रश्न 18.
मधुमक्खी के छत्ते से शहद किस प्रकार निकाला जाता है?
उत्तर:
मधुमक्खी के छत्ते से शहद निकालना – छते से शहद दो विधियों द्वारा निकाला जाता है-

  • सीधे ही छत्ते से धूम्र विधि से रात के समय मक्खियों को उड़ा दिया जाता है और छत्ते को तोड़कर निचोड़ कर शहद प्राप्त कर लिया जाता है। किन्तु यह विधि अवैज्ञानिक है।
  • मशीन द्वारा – शहद निकालने की मशीन एक खोखले सिलिन्डर से बनी होती है। इसके केन्द्रीय अक्ष पर धातु की जाली का सिलिन्डर के आकार का कक्ष बना होता है और कक्ष की तली में जाली लगी होती है। एक हैन्डिल की सहायता से इस कक्ष को केन्द्रीय अक्ष के चारों ओर घुमाया जाता है।

शहद निकालने के लिए मधुकोषों सहित लकड़ी के फ्रेमों को मशीन में बने जालीदार कक्ष को घुमाया जाता है। जिससे शहद मधुकोषों से निकलकर मशीन के तल में एकत्रित हो जाता है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

Jharkhand Board Class 9 Science जीवन की मौलिक इकाई Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पादप कोशिकाओं तथा जन्तु कोशिकाओं में तुलना करो।
उत्तर:
पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में तुलना।

पादप कोशिकाजन्तु कोशिका
1. इसमें सेल्यूलोज की बनी कोशिका भित्ति तथा प्लाज्मा झिल्ली दोनों पाई जाती हैं।1. इसमें कोशिका भित्ति नहीं होती केवल प्लाज्मा झिल्ली होती है।
2. इनमें क्लोरोप्लास्ट होते हैं।2. इनमें क्लोरोप्लास्ट नहीं होता है।
3. रसधानियौँ बड़ी होती हैं।3. रसधानियाँ छोटी या अनुपस्थित होती हैं।
4. प्रायः कोशिका अंगक झिल्ली युक्त होते हैं।4. कोई भी कोशिका अंगक झिल्ली युक्त नहीं होता है।
5. केन्द्रक कोशिका की परिधि की ओर खिसका रहता है।5. केन्द्रक गोल एवं कोशिका के मध्य में होता है।
6. गॉल्जी उपकरण कम विकसित होते हैं।6. गॉल्जी उपकरण पूर्ण विकसित एवं स्पष्ट होता है।

प्रश्न 2.
प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ यूकैरियोटी कोशिकाओं से किस प्रकार भिन्न होती हैं?
उत्तर:
प्रोकैरियोटी व यूकैरियोटी कोशिका में भिन्नता

प्रोकैरियोटी कोशिकायूकैरियोटीक कोशिका
1. केन्द्रक झिल्ली नहीं होती है।1. केन्द्रक झिल्ली होती है।
2. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक नहीं होते हैं।2. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक होते हैं।
3. केवल एक क्रोमोसोम पाया जाता है।3. एक से अधिक क्रोमोसोम पाए जाते हैं।
4. क्लोरोफिल झिल्लीदार पुटिका के साथ होता है।4. क्लोरोफिल प्लास्टिड में होता है।

प्रश्न 3.
यदि प्लाज्मा झिल्ली फट जाए या टूट जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
प्लाज्मा झिल्ली वर्णात्मक पारगम्य होती है। यह आवश्यक पदार्थों को अन्दर आने देती है तथा अनावश्यक पदार्थों को बाहर जाने देती है और अन्दर आने से रोकती है। यदि प्लाज्मा झिल्ली फट जाए या टूट जाए तो कोशिका क्षतिग्रस्त या मृत हो जायेगी।

प्रश्न 4.
यदि गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका के जीवन में क्या होगा?
उत्तर:
यदि गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका में बने पदार्थों का संचयन, रूपान्तरण और पैकिंग का कार्य सम्भव नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 5.
कोशिका का कौन-सा अंगक बिजलीघर है? और क्यों?
उत्तर:
कोशिका का माइटोकॉन्ड्रिया महत्त्वपूर्ण अंगक तथा कोशिका का बिजलीघर है क्योंकि जीवन के लिए आवश्यक विभिन्न रासायनिक क्रियाओं के संचालन हेतु माइटोकॉन्ड्रिया भोजन के ऑक्सीकरण से ऊर्जा मुक्त करती है जो ATP के रूप में संचित रहती है। अतः ऊर्जा उत्पादन करने के कारण माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का बिजलीघर कहते हैं।

प्रश्न 6.
कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर:
कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड का संश्लेषण चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका (SER) द्वारा तथा प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम्स द्वारा होता है।

प्रश्न 7.
अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर:
अमीबा एन्डोसाइटोसिस प्रक्रिया द्वारा बाह्य वातावरण से अपना भोजन प्राप्त करता है। इसकी प्लाज्मा झिल्ली अन्दर की ओर मुड़कर कप के आकार का गड्ढा (Cavity) बना लेती है, जिसमें भोजन प्रवेश कर जाता है। इसके बाद यह खाद्यधानी का रूप ले लेती है।

प्रश्न 8.
परासरण क्या है?
उत्तर:
परासरण एक विशिष्ट विधि है जिसके द्वारा जल के अणु वरणात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च जल की सान्द्रता से निम्न जल की सान्द्रता की ओर जाते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित परासरण प्रयोग करें-
छिले हुए आधे-आधे आलू के चार टुकड़े लो, इन चारों को खोखला करो जिससे कि आलू के कप बन जायें। इनमें से एक कप को उबले आलू में बनाना है। आलू के प्रत्येक कप को जल वाले बर्तन में रखो। अब
(a) कप ‘A’ को खाली रखो,
(b) कप ‘B’ में एक चम्मच चीनी डालो,
(c) कप ‘C’ में एक चम्मच नमक डालो, तथा
(d) उबले आलू से बनाए गए कप D में एक चम्मच चीनी डालो।

आलू के इन चारों कपों को दो घन्टे तक रखने के पश्चात् उनका अवलोकन करो तथा निम्न प्रश्नों के उत्तर दो-
(i) ‘B’ तथा ‘C’ के खाली भाग में जल क्यों एकत्र हो गया? इसका वर्णन करो।
(ii) ‘A’ आलू इस प्रयोग के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
(iii) ‘A’ तथा ‘D’ आलू के खाली भाग में जल क्यों एकत्र नहीं हुआ ? इसका वर्णन करो।
उत्तर:
(i) ‘B’ तथा ‘C’ के खाली भाग में जल इसलिए एकत्र हो गया क्योंकि परासरण द्वारा जल कप B तथा C के अन्दर चला गया।

(ii) ‘A’ आलू इस प्रयोग के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि भीतर से खाली होने के कारण जल में कोई शुद्ध गति नहीं हुई।

(iii) ‘A’ तथा ‘D’ आलू के खाली भाग में जल एकत्र नहीं हुआ क्योंकि A कप कच्चे आलू का बना था और भीतर से खाली था परन्तु कप D उबले आलू का था जिसमें एक चम्मच चीनी थी। उबला होने के कारण वह वरणात्मक झिल्ली का कार्य नहीं करता। इसलिए आलू के कप A तथा D से जल में कोई शुद्ध गति नहीं हुई।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

प्रश्न 10.
कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु किस प्रकार के कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है तथा इसका औचित्य बताएँ?
उत्तर:
कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु सूत्री विभाजन की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में हर कोशिका (मातृ कोशिका) विभाजित होती है तथा दो समरूप संतति कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के समान होती है।

प्रश्न 11.
युग्मकों के बनने के लिए किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है? इस विभाजन का महत्त्व बताएँ ।
उत्तर:
युग्मकों के बनने के लिए अर्धसूत्री विभाजन होता है। इस विभाजन में प्रत्येक कोशिका अर्धसूत्रण द्वारा विभाजित होती हैं जिससे दो की जगह चार नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।

Jharkhand Board Class 9 Science जीवन की मौलिक इकाई InText Questions and Answers

क्रियाकलाप – 1.
प्याज का एक छोटा टुकड़ा लेकर चिमटी की सहायता से प्याज की अवतल सतह की ओर (भीतरी सतह) से झिल्ली उतार लेते हैं। इस झिल्ली को तुरंत पानी से भरे वॉच ग्लास में रख लेते हैं। इससे झिल्ली मुड़ने या सूखने से बच जाती है। अब काँच की एक स्लाइड लेकर इस पर पानी की एक बूँद डालते हैं। इसके बाद वॉच ग्लास में रखी झिल्ली के छोटे टुकड़े को सीधी इस स्लाइड पर रखते हैं। अब इस पर एक बूँद आयोडीन की डालकर इसे कवर स्लिप से ढक देते हैं। कवर स्लिप को इस प्रकार से ढकते हैं कि इसमें वायु के बुलबुले न आने पायें। अब इस स्लाइड को संयुक्त सूक्ष्मदर्शी यंत्र से पहले कम शक्ति वाले तथा इसके बाद उच्च शक्ति वाले अभिदृश्यक द्वारा देखते हैं।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई 1
सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर झिल्ली की सभी संरचनाएँ एक जैसी दिखाई देती हैं। प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ एक समान होती हैं। प्याज के आकार से इनका कोई सम्बन्ध नहीं होता है। ये छोटी-छोटी संरचनाएँ प्याज के शल्ककन्द की मूलभूत इकाई हैं। इन संरचनाओं को कोशिका (Cell ) कहते हैं। इसी प्रकार सभी जीव-जन्तुओं का शरीर कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। यद्यपि कुछ जीव एककोशिकीय भी होते हैं। सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार के बाद ही यह पता चला है कि एक कोशिका स्वयं में ही एक सम्पूर्ण जीव जैसे – अमीबा, क्लैमिडोमोनास, पैरामीशियम तथा बैक्टीरिया हो सकती है।

इन सजीवों को एक कोशिकीय जीव कहते हैं। बहुकोशिकीय जीवों में अनेक कोशिकाएँ समाहित होकर विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने के लिए विभिन्न अंगों का निर्माण करती हैं। उदाहरणार्थ- फंजाई (कवक), पादप तथा जन्तु। सभी कोशिकाएँ अपनी पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं। (पा. पु. पृ. सं. – 65)

क्रियाकलाप – 2.
प्याज की पत्ती की झिल्ली, प्याज की मूलाग्र अथवा विभिन्न आकार के प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बना सकते हैं।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई 2
कोशिकाओं की आकृति तथा आकार उनके विशिष्ट कार्यों के अनुरूप होते हैं। कुछ कोशिकाएँ अपना आकार
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई 3
बदलती रहती हैं, जैसे- एककोशिकीय अमीबा कुछ जीवों में कोशिका का आकार लगभग स्थिर रहता है और प्रत्येक प्रकार की कोशिका के लिए विशिष्ट होता है। उदाहरण के लिए तंत्रिका कोशिका।

प्रत्येक जीवित कोशिका में कुछ मूलभूत कार्य करने की क्षमता होती है, जो सभी सजीवों का गुण है। शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न कार्य करते हैं जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय रुधिर को पम्प करता है तथा आमाशय भोजन का पाचन करता है आदि। इसी प्रकार एककोशिकीय जीवों में भी श्रम विभाजन होता है।

वास्तव में ऐसी प्रत्येक कोशिका में कुछ विशिष्ट घटक होते हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं। प्रत्येक कोशिकांग एक विशिष्ट कार्य करता है, जैसे कोशिका में नए पदार्थ का निर्माण, अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन आदि। इन कोशिकांगों के कारण ही एक कोशिका जीवित रहती है और अपने सभी कार्य करती हैं। ये कोशिकांग मिलकर एक मूलभूत इकाई बनाते हैं जिसे कोशिका कहते हैं।

प्रश्न 1.
क्या सभी कोशिकाओं का आकार तथा आकृति एक जैसी दिखाई देती हैं?
उत्तर:
नहीं, कोशिकाओं की आकृति तथा आकार उनके विशिष्ट कार्यों के अनुरूप होते हैं।

प्रश्न 2.
क्या सभी कोशिकाओं की संरचना एक जैसी दिखाई देती है?
उत्तर:
हाँ, सभी कोशिकाओं की संरचना एक जैसी दिखाई देती है।

प्रश्न 3.
क्या पादप के विभिन्न भागों में पाई जाने वाली कोशिकाओं में कोई अन्तर है?
उत्तर:
पादप के विभिन्न भागों की कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार के विशिष्ट कार्य करती हैं। पादप बहुकोशिकीय होते हैं। इनका विकास ही एक ही कोशिका से हुआ है। कोशिकाएँ विभाजित होकर अपने जैसी ही कोशिकाएँ बनाती हैं। अतः सभी भागों की कोशिकाएँ एक जैसी होती हैं।

प्रश्न 4.
हमें कोशिकाओं में क्या समानता दिखाई देती है?
उत्तर:
सभी कोशिकाओं की संरचना एक समान दिखाई देती है। चूँकि सभी कोशिकाओं में एक ही प्रकार के कोशिकांग होते हैं।

खण्ड 5.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पू. सं. 66)

प्रश्न 1.
कोशिका की खोज किसने और कैसे की?
उत्तर:
कोशिका की खोज सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1605 में की। उन्होंने कोशिका को कॉर्क की पतली काट में अनगढ़ सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा। उन्हें कॉर्क की संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखाई दी। उन्होंने कॉर्क के प्रकोष्ठों को कोशिका (Cell) नाम दिया।

प्रश्न 2.
कोशिका को जीवन की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई क्यों कहते हैं?
उत्तर:
कोशिका जीवन की संरचनात्मक इकाई हैक्योंकि कोशिकाएँ विभाजित होकर अपने जैसी ही कोशिकाएँ बनाती हैं जिससे जीवों का शरीर बनता है। अतः कोशिका जीवन की संरचनात्मक इकाई है।

कोशिका जीवन की क्रियात्मक इकाई है क्योंकि कोशिकाओं की आकृति तथा आकार उनके विशिष्ट कार्यों के अनुरूप होते हैं। प्रत्येक सजीव कोशिका में कुछ मूलभूत कार्य करने की क्षमता होती है। ये कार्य कोशिका में स्थित कोशिकांगों द्वारा किये जाते हैं। प्रत्येक कोशिकांग एक विशिष्ट कार्य करता है। अतः कोशिका को जीवन की क्रियात्मक इकाई कहते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

क्रियाकलाप-3.
(a) एक अण्डे को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) में डालकर उसके कवच को हटा देते हैं। इसका कवच प्राय: कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) का बना होता है। अब अण्डे को एक पतली बाह्य त्वचा (झिल्ली) घेरे रहती है। इस अण्डे को शुद्ध जल में रखते हैं और 5 मिनट के बाद देखते हैं तो अण्डा फूल जाता है, क्योंकि परासरण द्वारा जल अण्डे के अन्दर चला जाता है।

(b) इसी प्रकार एक कवच रहित अण्डे को नमक के सान्द्र विलयन (NaCl) में रखते हैं। 5 मिनट बाद देखने से ज्ञात होता है कि अण्डा सिकुड़ जाता है। जल अण्डे से निकलकर नमक के विलयन में आ जाता है, क्योंकि नमक का विलयन अधिक सान्द्रित होता है। (पा. पु. पृ. सं. -68)

क्रियाकलाप – 4.
सूखी किशमिश को केवल जल में कुछ देर तक रखते हैं। उसके बाद उसे शक्कर या नमक के सान्द्रित विलयन में रखते हैं जल में रखने पर किशमिश जल ग्रहण करके फूल जाती है सान्द्रित घोल में रखने पर वह सिकुड़ जाती है क्योंकि उसका जल बाहर निकल जाता है।

एक कोशिकीय अलवणीय जलीय जीव तथा अधिकांश पादप कोशिकाएँ परासरण द्वारा जल ग्रहण करते हैं। पौधों के मूल द्वारा जल का अवशोषण परासरण का एक उदाहरण है। इसके अतिरिक्त विसरण, कोशिका को अपने बाहरी पर्यावरण से पोषण ग्रहण करने में सहायता करता है। कोशिका के विभिन्न अणुओं का अन्दर आना तथा बाहर निकलना भी विसरण द्वारा ही होता है। इस प्रकार के परिवहन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्लाज्मा झिल्ली लचीली होती है। यह कार्बनिक अणुओं जैसे- लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती है। कोशिका झिल्ली का लचीलापन एककोशिकीय जीवों में कोशिका के बाह्य पर्यावरण से अपना भोजन तथा अन्य पदार्थ ग्रहण करने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया को एण्डोसाइटोसिस कहते हैं। अमीबा अपना भोजन इसी प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करता है।
(पा. पु. पू. सं. – 68)

क्रियाकलाप – 5.
विद्यालय के पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के बारे में पता करें। इससे संबंधित विषय में अपने अध्यापक/अध्यापिका से चर्चा करें।

खण्ड 5.2.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा.पु. पू. सं. – 68)

प्रश्न 1.
CO2 तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका में कैसे अन्दर तथा बाहर जाते हैं? इस पर चर्चा करें।
उत्तर:
CO2 तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका झिल्ली के अन्दर तथा बाहर विसरण प्रक्रिया द्वारा आ-जा सकते हैं। जब कोशिका के भीतर CO2 की सान्द्रता बढ़ जाती है तो उच्च सान्द्रता से निम्न सान्द्रता की ओर विसरण द्वारा CO2 बाहर निकल जाती है। इसी प्रकार परासरण द्वारा जल के अणु वरणात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च जल की सान्द्रता से निम्न जल की सान्द्रता की ओर जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्लाज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं?
उत्तर:
प्लाज्मा झिल्ली कोशिका के घटकों को बाहरी पर्यावरण से अलग करती है। प्लाज्मा झिल्ली केवल कुछ वांछित पदार्थों को ही कोशिका के अन्दर आने देती है और अवांछित पदार्थों को अन्दर आने से रोक देती है। इसी प्रकार यह झिल्ली कोशिका के लिए अनावश्यक पदार्थों को तो बाहर जाने देती है तथा वांछित पदार्थों को अन्दर ही रोक लेती है। इसीलिए प्लाज्मा झिल्ली को वरणात्मक पारगम्य झिल्ली कहते हैं।

क्रियाकलाप – 6.
रिओ की पत्ती की झिल्ली को पानी में रखकर एक स्लाइड बनाते हैं इसे उच्च शक्ति वाले सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इसमें छोटे-छोटे कण दिखाई देते हैं। इन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। इनमें एक हरा पदार्थ क्लोरोफिल होता है। अब स्लाइड पर शक्कर या नमक का सान्द्र विलयन डालते हैं। अब रिओ की पत्तियों को कुछ मिनट तक जल में उबालते हैं। इससे पत्तियों की सभी कोशिकाएँ मर जायेंगी। अब स्लाइड पर रखी झिल्ली पर नमक का सान्द्र विलयन डालते हैं। इसे एक मिनट बाद पुनः सूक्ष्मदर्शी से देखते हैं तो पता लगता है कि केवल जीवित कोशिकाओं में ही परासरण द्वारा जल अवशोषण की क्षमता होती है न कि मृत कोशिकाओं में।

कोशिका भित्ति पौधों, कवक तथा बैक्टीरिया की कोशिकाओं को अपेक्षाकृत कम तनु विलयन में बिना फटे बनाये रखती है। ऐसे माध्यम से कोशिका परासरण विधि द्वारा पानी लेकर फूल जाती है और कोशिका भित्ति के ऊपर दबाव डालती है। कोशिका भित्ति भी फूली हुई कोशिका के प्रति समान रूप से दबाव डालती है। कोशिका भित्ति के कारण पादप कोशिकाएँ परिवर्तनीय माध्यम को जन्तु कोशिका की अपेक्षा आसानी से सहन कर सकती हैं।

क्रियाकलाप – 7.
काँच की एक स्लाइड लेकर उस पर एक बूँद पानी रखते हैं। अब अपने गाल के अन्दर की त्वचा को आइसक्रीम खाने वाले चम्मच से खुरचकर सुई की सहायता से स्लाइड पर समान रूप से फैलाते हैं। इसे रंगने के लिए एक बूँद मेथलीन ब्लू की डालते हैं। अब इसके ऊपर कवर स्लिप रखते हैं और सूक्ष्मदर्शी द्वारा अवलोकन करते हैं।

हम देखते हैं कि कोशिका के मध्य में एक गहरे रंग की गोलाकार अथवा अण्डाकार, डॉट के समान संरचना दिखाई देती है। इस संरचना को केन्द्रक कहते हैं।

केन्द्रक के चारों और दोहरे परत का एक स्तर होता है जिसे केन्द्रक झिल्ली कहते है। केन्द्रक झिल्ली में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। इन छिद्रों के द्वारा केन्द्रक के अन्दर का कोशिका द्रव्य केन्द्रक के बाहर जा सकता है केन्द्रक में क्रोमोसोम होते हैं जो कोशिका विभाजन के समय छड़ों की तरह दिखाई देते हैं। क्रोमोसोम में आनुवंशिक गुण होते हैं जो माता-पिता DNA (डिऑक्सीराइबो न्यूक्लीइक अम्ल) अणु के रूप में अगली संतति में जाते हैं।

क्रोमोसोम DNA तथा प्रोटीन के बने होते हैं। DNA अणु में कोशिका के निर्माण व संगठन की सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं DNA के क्रियात्मक खण्ड को जीन कहते हैं। अविभाजित कोशिका में DNA क्रोमेटिन पदार्थ के रूप में विद्यमान रहता है। क्रोमेटिन पदार्थ धागे के समान रचनाओं के एक जाल का पिण्ड होता है। कोशिका विभाजन के समय यह क्रोमोसोम में संगठित हो जाता है।

कुछ जीवों में केन्द्रक कोशिका जनन के समय महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कोशिका के विकास एवं परिपक्वन को निर्धारित करता है तथा साथ ही सजीव कोशिका की रासायनिक क्रियाओं को भी निर्देशित करता है। बैक्टीरिया जैसे कुछ जीवों में केन्द्रक झिल्ली नहीं होती है ऐसे अस्पष्ट केन्द्रक क्षेत्र में केवल क्रोमेटिन पदार्थ होता है। ऐसे क्षेत्र को केन्द्रकाय कहते हैं। ऐसे जीव जिसकी कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली नहीं होती है उन्हें प्रोकेरियोट तथा जिन जीवों की कोशिकाओं में केन्द्रक झिल्ली होती है। उन्हें यूकेरियोट कहते हैं।

खण्ड 5.2.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा.पु. पृ. सं. – 70)

प्रश्न 1.
क्या अब आप निम्नलिखित तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों को भर सकते हैं; जिससे कि प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी कोशिकाओं में अन्तर स्पष्ट हो सके।
उत्तर:

प्रोकैरियोटी कौशिकायूकैरियोटी कोशिका
1. आकार प्राय : छोटा (1-10 um) 1m = 10-6m1. आकार प्राय: बड़ा (5-100 um)
2. केन्द्रकीय क्षेत्रः बहुत कम स्पष्ट होता है। अस्पष्ट केन्द्रक क्षेत्र में केवल क्रोमेटिन पदार्थ होता है। उसे केन्द्रकाय कहते हैं।2. केन्द्रकीय क्षेत्र: सुस्पष्ट। जो चारों ओर से केन्द्रकीय झिल्ली से घिरा रहता है।
3. क्रोमोसोम : एक।3. क्रोमोसोम : एक से अधिक।
4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक अनुपस्थित होते हैं।4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक उपस्थित होते हैं।

खण्ड 5.2.5 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. -73)

प्रश्न 1.
क्या आप दो ऐसे अंगकों का नाम बता सकते हैं, जिनमें अपना आयुवंशिक पदार्थ होता है?
उत्तर:
ऐसे दो अंगक जिनमें अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है- वे हैं-

  • माइटोकॉन्ड्रिया तथा
  • प्लास्टिड।

प्रश्न 2.
यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है, तो क्या होगा?
उत्तर:
यदि किसी कोशिका का संगठन नष्ट हो जाता है तो लाइसोसोम फट जाते हैं और एन्जाइम अपनी ही कोशिकाओं को पाचित कर देते हैं फलस्वरूप कोशिका नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 3.
लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं?
उत्तर:
कोशिकीय उपापचय में व्यवधान के कारण जब कोशिका क्षतिग्रस्त या मृत हो जाती है तो लाइसोसोम फट जाते हैं और एन्जाइम अपनी ही कोशिकाओं को पाचित कर देते हैं इसलिए लाइसोसोम को कोशिका की ‘आत्मघाती थैली’ कहते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

प्रश्न 4.
कोशिका के अन्दर प्रोटीन संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर:
कोशिका के अन्दर प्रोटीन संश्लेषण राइबोसोम में होता है।

कोशिका विभाजन-जीवधारियों में वृद्धि के लिए नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इससे पुराने, मृत और क्षतिग्रस्त कोशिकाएँ प्रतिस्थापित हो जाती हैं तथा प्रजनन के लिए युग्मक बनते हैं। नई कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं। कोशिका विभाजन के दो प्रकार होते हैं-सूत्री विभाजन और अर्ध सूत्री विभाजन।

सूत्री विभाजन – इस प्रक्रिया में अधिकतर कोशिकाएँ वृद्धि के लिए विभाजित होती हैं। प्रत्येक कोशिका (मातृ कोशिका), दो समरूप कोशिकाओं में विभाजित होती हैं। संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के बराबर होती है। यह जीवों में वृद्धि और ऊतकों के मरम्मत में सहायक होती है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई 4
अर्धसूत्री विभाजन-जंतुओं तथा पादपों के प्रजनन अंगों या ऊतकों की विशेष कोशिकाएँ विभाजित हो, युग्मक बनाती है जो निषेचन के बाद संतति उत्पन्न करती है। इस विभाजन को अर्धसूत्रण भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में चार नई कोशिकाएँ बनती हैं। नई कोशिकाओं में मातृ कोशिकाओं की अपेक्षा गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

Jharkhand Board Class 9 Science खाद्य संसाधनों में सुधार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
फसल उत्पादन की एक विधि का वर्णन करो जिससे अधिक पैदावार प्राप्त हो सके।
उत्तर:
फसल उत्पादन में सुधार की प्रक्रिया में प्रयुक्त विधियों को निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है-

  • फसल की किस्मों में सुधार
  • फसल उत्पादन प्रबन्धन
  • फसल सुरक्षा प्रबन्धन।

(1) फसल की किस्मों में सुधार-(इसके लिए कृपया खंड 15.1 .1 का अध्ययन कीजिए)।
15.1.1 फसल की किस्मों में सुधार-फसलों का उत्पादन अच्छा हो, यह प्रयास फसलों की किस्मों के चयन पर निर्भर करता है। फसल की किस्मों के लिए विभिन्न उपयोगी गुणों (जैसे – रोग प्रतिरोधक क्षमता, उर्वरक के प्रति अनुरूपता, उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन) का चयन प्रजनन द्वारा कर सकते हैं।

फसल की किस्मों में ऐच्छिक गुणों को संकरण द्वारा डाला जा सकता है। संकरण विधि में विभिन्न आनुवंशिक गुणों वाले पौधों में संकरण करवाते हैं। यह संकरण अन्तराकिस्मीय (विभिन्न किस्मों में), अन्तरास्पीशीज (एक ही जीन्स की दो विभिन्न स्पीशीजों में) अथवा अन्तराकंशीय (विभिन्न जेनेरा में) हो सकता है। फसल सुधार की दूसरी विधि है, ऐच्छिक गुणों वाले जीन का ड्डालना। इसके परिणामस्वरूप आनुवंशिकीय रूपान्तरित फसल प्राप्त होती हैं।

नसल प्रभेदों के लिए यह आवश्यक है कि फसल की किस्म विभिन्न परिस्थितियों में जो विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न होती हैं, अच्छा उत्पादन दे सकें। किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले विशेष बीज उपलब्ध होने चाहिए जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित हो सकें।

कृषि प्रणालियाँ तथा फसल उत्पादन मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता तथा पानी की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। चूंक मौसम परिस्थितियों, जैसे-सूखा तथा बाढ़ का पूर्वानुमान कठिन होता है, इसलिए ऐसी किस्में अधिक उपयोगी हैं जो विविध जलवायु परिस्थितियों में भी उग सकें। इसी प्रकार ऐसी किस्में बनाई गई हैं जो उच्च लवणीय मिट्टी में उग सकें। किस्मों में सुधार के लिए कुछ कारक निम्नलिखित हैं-
1. उच्च उत्पादन-प्रति एकड़ फसल की उत्पादंकता बढ़ाना।

2. उन्तत किसमें-फसल उत्पाद की गुणवत्ता, प्रत्येक फसल में भिन्न-भिन्न होती है। दाल में प्रोटीन की गुणवत्ता तिलहन में तेल की गुणवत्ता और फल तथा सब्जियों का संरक्षण महत्वपूर्ण है।

3. जैविक तथा अजैविक प्रतिरोधकता-जैविक (रोग, कीट तथा निमेटोड) तथा अजैविक (ससखा, भारता, जलाक्रांति, गमीं, ठंड तथा पाला) परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन कम हो सकता है। इन परिस्थितियों को सहन कर सकने वाली किस्में फसल उत्पादन में सुधार कर सकती हैं।

4. परिपक्वन काल में परिवर्तन-फसल को उगाने से लेकर कटाई तक कम से कम समय लगना आर्थिक दृष्टि से अच्छ है। इससे किसान प्रतिवर्ष अपने खेतों में कई फसलें उगा सकते हैं। कम समय होने के कारण फसल उत्पादन में धन भी कम खर्च होता है। समान परिपक्वन कटाई की प्रक्रिया को सरल बनाता है और कटाई के समय होने वाली फसल की हानि कम हो जाती है।

5. व्यापक अनुकूलता-व्यापक अनुकूलता वाली किस्मों का विकास करना विभिन्न पर्यांवरणीय परिस्थितियों में फसल उत्पादन को स्थायी करने में सहायक होगा। एक ही किस्म को विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न जलवायु में आाया जा सकता है।

6. ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण-चारे वाली फसलों के लिए लम्बी तथा सघन शाखाएँ ऐच्छिक गुण हैं। अनाज के लिए बौने पौधें उपयुक्त हैं ताकि इन फसलों को उगाने के लिए कम पोषकों की आवश्यकता हो। इस प्रकार सस्य विज्ञान वाली किसेें अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायक होती है।

प्रश्न 2.
खेतों में खाद तथा उर्वरक का उपयोग क्यों करते हैं?
उत्तर:
खाद मिट्टी को पोषक तथा कार्बनिक पदार्थों से परिपूर्ण करती है और मिट्टी की उर्वरता, को बढ़ाती है। खाद में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा मिट्टी की संरचना में सुधार करती है। जबकि उर्वरक का सतत् प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को घटाता है क्योंकि कार्बनिक पदार्थ की पुनः पूर्ति नहीं हो पाती है तथा इससे सूक्ष्म जीवों एवं भूमिगत जीवों का जीवनचक्र अवरुद्ध होता है। उर्वरकों के उपयोग से फसलों का अधिक उत्पादन कम समय में प्राप्त हो सकता है, किन्तु यह मृदा की उर्वरता को कुछ समय बाद हानि पहुँचाते हैं। जबकि खाद के उपयोग के लाभ दीर्घावधि हैं।

कार्बनिक खेती, खेती करने की वह पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी, शाकनाशी आदि का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। इस पद्धति में अधिकाधिक कार्बनिक खाद, कृषि अंपशिष्ट (पुआल तथा पशुधन) का पुनर्चक्रण, जैविक कारक जैसे-नील-हरित शैवाल का संवर्धन, जैविक उर्वरक बनाने में उपयोग किया जाता है।

नीम की पत्तियों तथा हल्दी का विशेष रूप से जैव कीटनाशकों के रूप में खाद्य संग्रहण में प्रयोग किया जाता है। कुशल फसलीकरण पद्धति के लिए मिश्रत खोती, अन्तर फसलीकरण तथा फसल चक्र आवश्यक हैं। ये फसल तन्त्र कीट, पीड़क तथा खरपतवार को नियन्त्रित करते हैं और पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 3.
अन्तराफसलीकरण तथा फसल चक्र से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
अन्तराफसलीकरण विधि द्वारा पीड़क व रोगों को एक प्रकार की फसल के सभी पौधों में फैलने से रोका जा सकता है। इस प्रकार दोनों फसलों से अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सकता हैं।
फसल चक्र को उचित ढंग से अपनाने पर एक वर्ष में दो या तीन फसलों से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
आनुवंशिक फेरबदल क्या है? कृषि प्रणालियों में ये कैसे उपयोगी है?
उत्तर:
आनुवंशिक फेरबदल पौधों में ऐच्छिक गुणों को डालने की प्रक्रिया है। संकरण विधि द्वारा रोग की प्रतिरोधकता, उर्वरक के प्रति अनुकूलता, उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन क्षमता के गुणों की प्राप्ति की जा सकती है तथा फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह संकरण अन्तराकिस्मीय (विभिन्न किस्मों में), अन्तरास्पीशीज (एक ही जीन्स की दो विभिन्न स्पीशीजों में) अथवा अन्तरावंशीय (विभिन्न जेनरा में) हो सकता है। इसके फलस्वरूप रूपान्तरित फसलें प्राप्त हो सकती हैं। कृषि प्रणालियों में इस विधि ने बीजों की नई-नई किस्में तथा जातियाँ प्रदान की हैं जिससे अनाज उत्पादन बढ़ा है तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

प्रश्न 5.
भंडार गृहों (गोदामों) में अनाज की हानि कैसे होती है?
उत्तर:
भंडार गृहों (गोदामों) में अनाज की हानि के जैविक कारक कीट, कृंतक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु हैं तथा इस हानि के अजैविक कारक भंडारण के स्थान पर उपयुक्त नमी एवं ताप का अभाव है ये कारक उत्पाद की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, वजन कम कर देते हैं तथा अंकुरण करने की क्षमता कम कर देते हैं, उत्पाद को बदरंग कर देते हैं जिससे बाजार में उत्पाद की कीमत कम हो जाती है।

प्रश्न 6.
किसानों के लिए पशुपालन प्रणालियाँ कैसे लाभदायक हैं?
उत्तर:
किसानों के लिए पशुपालन प्रणालियाँ बहुत लाभदायक हैं। इनसे उन्हें खेती के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी होता है। खाद्य पदार्थों की प्राप्ति- गाय, भैंस आदि पशुओं से दूध मिलता है। दूध मनुष्य का पूर्ण भोजन है तथा इसमें शरीर की समुचित वृद्धि के लिए सभी आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं। दूध से दही, घी, मक्खन, पनीर आदि भोज्य पदार्थ बनाये जाते हैं, कृषि कार्य में सहायक बैल, भैंसे आदि पशु किसान की खेती का काम करते हैं तथा सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोते हैं।

खाद की प्राप्ति – सभी पालतू पशु जैसे- गाय, भैंस, बकरी, ऊँट, घोड़ा आदि के अपशिष्ट, बचा हुआ चारा तथा मलमूत्र (गोबर) आदि से हमें कृषि कार्य के लिए उपयोगी जैविक खाद प्राप्त होती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

प्रश्न 7.
पशु पालन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
पशुओं से हमें दूध प्राप्त होता है जो हमारे भोजन का पौष्टिक आहार है। कृषि कार्य जैसे हल चलाना, सिंचाई करना तथा बोझ ढोने के लिए हम पशुओं का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 8.
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन में क्या समानताएँ हैं?
उत्तर:
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन में उचित देख-रेख तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति अनुकूलता की आवश्यकता है। इन तीनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए संकरण विधि का प्रयोग किया जाता है जिससे हमें उत्तम स्पीशीज प्राप्त होती हैं। इनसे हमें अधिक मात्रा में अंडे, मास (गोश्त ) तथा शहद प्राप्त होता

प्रश्न 9.
प्रग्रहण मत्स्यन, मेरीकल्चर तथा जल संवर्धन में क्या अन्तर है?
उत्तर:
ताजा जल के स्रोत नाले, तालाब, पोखर, नदियों में मछली पालन को प्रग्रहण मत्स्यन कहते हैं समुद्री मछलियों की पूर्ति हेतु समुद्री संवर्धन को मेरीकल्चर कहते हैं। कुछ आर्थिक महत्व वाली मछलियों का समुद्र में संवर्धन किया जाता है, जिसे जल संवर्धन कहते हैं।

Jharkhand Board Class 9 Science खाद्य संसाधनों में सुधार InText Questions and Answers

खंड 15.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 229)

प्रश्न 1.
अनाज, दाल, फल तथा सब्जियों से हमें क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
अनाजों से हमें कार्बोहाइड्रेट, दालों से प्रोटीन तथा फलों एवं सब्जियों से विटामिन व खनिज लवण, कुछ मात्रा में प्रोटीन, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट भी प्राप्त होते हैं।

विभिन्न फसलों के लिए विभिन्न जलवायु सम्बन्धी परिस्थितियों, तापमान तथा दीप्तिकाल (photoperiods) की आवश्यकता होती है जिससे कि उनकी समुचित वृद्धि हो सके और वे जीवनचक्र पूरा कर सकें। दीप्तिकाल सूर्य प्रकाश के समय से सम्बन्धित होता है। पौधों में पुष्पन तथा वृद्धि सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करती है। हम यह जानते हैं। कि पौधे सूर्य के प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं कुछ ऐसी फसलें जिन्हें हम वर्षा ऋतु मैं उगाते हैं, खरीफ फसल कहलाती हैं जो जून से आरम्भ होकर अक्टूबर मास तक होती हैं। कुछ फसलें शीत ऋतु में उगायी जाती हैं जो नवम्बर से अप्रैल मास तक होती हैं। इन फसलों को रबी फसल कहते हैं धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, मूंग तथा उड़द खरीफ फसलें हैं। गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी रबी फसलें हैं।

भारत में सन् 1952 से सन् 2010 तक कृषि भूमि में 25% की वृद्धि हुई है, जबकि अनाज की पैदावार में चार गुनी वृद्धि हुई है। पैदावार में इस वृद्धि होने को तीन चरणों में बाँट सकते हैं – सबसे पहले बीज का चुनना, दूसरा फसल की उचित देखभाल तथा तीसरा, खेतों में उगी फसल की सुरक्षा तथा कटी हुई फसल को हानि से बचाना। इस प्रकार फसल उत्पादन में सुधार की प्रक्रिया में प्रयुक्त गतिविधियों को निम्न तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है-

  • फसल की किस्मों में सुधार।
  • फसल उत्पादन प्रबन्धन।
  • फसल सुरक्षा प्रबन्धन।

खंड 15.1.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पु. सं. 230)

प्रश्न 1.
जैविक और अजैविक कारक किस प्रकार फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
जैविक तथा अजैविक प्रतिरोधकता-जैविक (रोग, कीट तथा निमेटोड) तथा अजैविक (सूखा, क्षारता, जलाक्रांति, गर्मी, ठंड तथा पाला) परिस्थितियों के कारण फसल उत्पादन कम हो सकता है। इन परिस्थितियों को सहन कर सकने वाली किस्में फसल उत्पादन में सुधार कर सकती हैं।

प्रश्न 2.
फसल सुधार के लिए ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण क्या हैं?
उत्तर:
ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण-चारे वाली फसलों के लिए लम्बी तथा सघन शाखाएँ ऐच्छिक गुण हैं। अनाज के लिए बौने पौधें उपयुक्त हैं ताकि इन फसलों को उगाने के लिए कम पोषकों की आवश्यकता हो। इस प्रकार सस्य विज्ञान वाली किस्में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायक होती हैं।

खंड 15.1.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 231)

प्रश्न 1.
वृहत् पोषक क्या हैं और इन्हें वृहत् पोषक क्यों कहते हैं?
उत्तर:
पौधों के लिए 16 पोषक पदार्थों की आवश्यकता होती है। हवा से कार्बन व ऑक्सीजन तथा पानी से हाइड्रोजन व ऑक्सीजन एवं शेष 13 पोषक पदार्थ मिट्टी से प्राप्त होते हैं। इन 13 में से 6 पोषकों की अधिक मात्रा चाहिए इसलिए इन्हें वृहत् पोषक कहते हैं।

प्रश्न 2.
पौधे अपना पोषक कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
पौधे अपना पोषक पदार्थ हवा, पानी तथा मिट्टी प्राप्त करते हैं।
खाद खाद में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा अधिक होती है तथा यह मिट्टी को अल्पमात्रा में पोषक प्रदान करते हैं। खाद को जन्तुओं के अपशिष्ट तथा पौधों के कचरे के अपघटन से तैयार किया जाता है। खाद मिट्टी को पोषकों तथा कार्बनिक पदार्थों से परिपूर्ण करती है और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है।

खाद में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा मिट्टी की संरचना में सुधार करती है। इसके कारण रेतीली मिट्टी में पानी को रखने की क्षमता बढ़ जाती है। चिकनी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा पानी को निकालने में सहायता करती है जिससे पानी एकत्रित नहीं होता है।

खाद के बनाने जैविक कचरे का उपयोग किया जाता है। इससे उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग की आवश्यकता नहीं होती तथा इस प्रकार पर्यावरण संरक्षण में सहयोग मिलता है। खाद बनाने की प्रक्रिया में विभिन्न जैव पदार्थों के उपयोग के आधार पर खाद को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है-
(i) कंपोस्ट तथा वर्मी कंपोस्ट-कंपोस्टीकरण प्रक्रिया में कृषि अपशिष्ट पदार्थ जैसे- पशुओं का गोबर (भलमूत्र आदि), सब्जी के छिलके एवं कचरा, सीवेज कचरे, घरेलू कचरे, जानवरों द्वारा छोड़े गये चारे फेंके हुए खर-पतवार आदि को गड्ढों में विगलित करते हैं। कंपोस्ट में कार्बनिक पदार्थ तथा पोषक बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। जब कंपोस्ट को केंचुओं द्वारा पौधों तथा जानवरों के अपशिष्ट पदार्थों के शीघ्र निरस्तीकरण की प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है। तब इसे वर्मी कंपोस्ट कहते हैं।

(ii) हरी खाद – फसल उगाने से पहले खेतों में कुछ पौधे जैसे- पटसन, मूंग, चा अथवा ग्वार आदि उगा देते है और उसके बाद उन पर हल चला कर खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है। ये पौधे हरी खाद में परिवर्तित हो जाते हैं जो मिट्टी को नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस से परिपूर्ण करने में सहायक होते हैं।

उर्वरक उर्वरक व्यावसायिक रूप से तैयार पादप पोषक हैं। ये नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम प्रदान करते हैं। इनके उपयोग से अच्छी कायिक वृद्धि होती है और स्वस्थ पौधों की प्राप्ति होती है। अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक का भी उपयोग होता है, किन्तु ये आर्थिक दृष्टि से मँहगे पड़ते हैं।

उर्वरक का उपयोग बड़े ध्यान से करना चाहिए और उसके सदुपयोग के लिए इसकी खुराक की उचित मात्रा, उचित समय तथा उर्वरक देने से पहले तथा उसके बाद की सावधानियों को अपनाना चाहिए। उदाहरण के लिए, कभी-कभी उर्वरक अधिक सिंचाई के कारण पानी में बह जाते हैं और पौधे उसका अवशोषण नहीं कर पाते हैं। उर्वरक की अधिक मात्रा जल प्रदूषण का कारण होती है।

उर्वरक का सतत् प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को घटाता है। क्योंकि कार्बनिक पदार्थ की पुनः पूर्ति नहीं हो पाती तथा इससे सूक्ष्मजीवों एवं भूमिगत जीवों का जीवन चक्र अवरुद्ध होता हैं। उर्वरकों के उपयोग द्वारा फसलों का अधिक उत्पादन कम समय में प्राप्त हो सकता है परन्तु यह मृदा की उर्वरता को कुछ समय बाद हानि पहुँचाते हैं। जबकि खाद के उपयोग के लाभ दीर्घावधि हैं।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

खंड 15.1.2 (i) से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 232)

प्रश्न 1.
मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए खाद तथा उर्वरक के उपयोग की तुलना कीजिए।
उत्तर:
खाद मिट्टी को पोषक तथा कार्बनिक पदार्थों से परिपूर्ण करती है और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। खाद में कार्बनिक पदार्थों की अधिक मात्रा मिट्टी की संरचना में सुधार करती है। जबकि उर्वरक का सतत् प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को घटाता है क्योंकि कार्बनिक पदार्थ की पुन: पूर्ति नहीं हो पाती है तथा इससे सूक्ष्म जीवों एवं भूमिगत जीवों का जीवनचक्र अवरुद्ध होता है। उर्वरकों के उपयोग से फसलों का अधिक उत्पादन कम समय में प्राप्त हो सकता है, किन्तु यह मृदा की उर्वरता को कुछ समय बाद हानि पहुँचाते हैं। जबकि खाद के उपयोग के लाभ दीर्घावधि हैं।

कार्बनिक खेती, खेती करने की वह पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी, शाकनाशी आदि का उपयोग बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। इस पद्धति में अधिकाधिक कार्बनिक खाद, कृषि अपशिष्ट (पुआल तथा पशुधन) का पुनर्चक्रण, जैविक कारक जैसे-नील हरित शैवाल का संवर्धन, जैविक उर्वरक बनाने में उपयोग किया जाता है। नीम की पत्तियों तथा हल्दी का विशेष रूप से जैव कीटनाशकों के रूप में खाद्य संग्रहण में प्रयोग किया जाता है। कुशल फसलीकरण पद्धति के लिए मिश्रित खेती, अन्तर फसलीकरण तथा फसल चक्र आवश्यक हैं। ये फसल तन्त्र कीट, पीड़क तथा खरपतवार को नियन्त्रित करते हैं और पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं।

खंड 15.1.2 तथा 15.1.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 235)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी परिस्थितियों में सबसे अधिक लाभ होगा? क्यों?
(a) किसान उच्च कोटि के बीज का उपयोग करें, सिंचाई न करें अथवा उर्वरक का उपयोग न करें।
(b) किसान सामान्य बीजों का उपयोग करें, सिंचाई करें तथा उर्वरक का उपयोग करें।
(c) किसान अच्छी किस्म के बीज का उपयोग करें, सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियाँ अपनाएँ।
उत्तर:
(c) किसान अच्छी किस्म के बीज का उपयोग करें सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियाँ अपनाएँ तो अधिक लाभ होगा। क्योंकि इस परिस्थिति में मुदा में पोषक तत्वों की अधिक मात्रा होगी। पौध को समय पर सिंचाई से पानी मिलेगा। अच्छी किस्म के बीजों का उपयोग करने पर उत्पादन में वद्धि होगी तथा फसल सुरक्षा की विधियाँ अपनाने से फसल की सुरक्षा होगी तथा उत्पादन में वृद्धि होगी।

क्रियाकलाप 15.1 (पा.पु. पू. सं. 235)
जुलाई अथवा अगस्त के महीने में खरपतवार से ग्रसित किसी खेत का अवलोकन करो। खेत में स्थित खरपतवार तथा कीट पीड़कों की एक सूची बनाओ।

नोट – इस क्रियाकलाप को जुलाई-अगस्त में अपने अध्यापक या माता-पिता या किसी अन्य के सहयोग से एवं मार्गदर्शन में खेतों में उपस्थित खरपतवारों तथा कीट पीड़कों की एक सूची बनाते हैं। कुछ खरपतवारों के नाम इस प्रकार हैं – गोखरू (जैथियम), गाजर घास (पारथेनियम), मोथा (साइरेनस रोटेंडस), बथुआ ( चीनोपोडियम) आदि। कुछ कीट पीड़कों के नाम इस प्रकार हैं- एफिड, पायरिला, शलभ, टिड्डी, दीमक, डिसडर्कस, बारगेटा, माहूँ, धान का गंधी कीट आदि।

अनाज का भंडारा कृषि उत्पाद के भंडारण में बहुत हानि हो सकती है। इस हानि के जैविक कारक कीट, कृतंक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु हैं तथा इस हानि के अजैविक कारक भंडारण के स्थान पर उपयुक्त नमी व ताप का अभाव है। ये कारक उत्पाद की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, वजन कम कर देते हैं तथा अंकुरण करने की क्षमता को कम कर देते हैं। उत्पाद को बदरंग कर देते हैं। ये सब
लक्षण बाजार में उत्पाद की कीमत को कम कर देते हैं। इन कारकों पर नियन्त्रण पाने के लिए उचित उपचार और भंडारण का प्रबन्ध होना चाहिए।

निरोधक तथा नियन्त्रण विधियों का उपयोग भंडारण करने से पहले किया जाता है। इन विधियों में भंडारण से पहले उत्पाद की नियन्त्रित सफाई और अच्छी तरह सुखाना ( पहले सूर्य के प्रकाश में फिर छाया में) तथा धूमक (fumi- gation) का उपयोग, जिससे कि पीड़क मर जाये, सम्मिलित हैं।

खंड 15.1.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पाठ्य पुस्तक पू. सं. 235)

प्रश्न 1.
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियाँ तथा जैव नियन्त्रण क्यों अच्छा समझा जाता है?
उत्तर:
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियाँ अपनाना इसलिए अच्छा समझा जाता है, क्योंकि ये विधियों अपनाना सरल है और इन विधियों से तथा जैव नियन्त्र पीड़क मर जाते हैं।

प्रश्न 2.
भंडारण की प्रक्रिया में कौन-कौन से कारक अनाज की हानि के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर:
भंडारण की प्रक्रिया में अनाज की हानि के लिए उत्तरदायी कारक हैं- जैविक कारक कीट, कवक, चिंचड़ा तथा जीवाणु एवं अजैविक कारक भंडारण के स्थान पर उपयुक्त नमी व ताप का अभाव होना।

क्रियाकलाप 15.2. (पा.पु. पू. सं. 235)
अनाज, दाल तथा तिलहन के बीजों को एकत्रित करो तथा उनके उगाने तथा कटाई की ऋतुएँ बताओ।
नोट- धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का, उड़द तथा मूँग आदि खरीफ की फसलें हैं। इनको वर्षा ऋतु में उगाया जाता है जो जून से प्रारम्भ होकर अक्टूबर तक होती हैं।
गेहूँ, चना, मटर, सरसों तथा अलसी आदि रबी की फसलें हैं। इनको शीत ऋतु में उगाया जाता है जो नवम्बर से अप्रैल तक होती हैं।

खंड 15.2.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 236)

प्रश्न 1.
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्राय: कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है और क्यों?
उत्तर:
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रायः संकरण विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि में देशी और विदेशी नस्लों के बीच संकरण कराया जाता है क्योंकि इन दोनों नस्लों के संकरण से एक ऐसी सन्तति प्राप्त होती है जिसमें दोनों के ऐच्छिक गुण (रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं लम्बा दुग्ध स्रावण काल) होते हैं।

क्रियाकलाप 15.3. (पा.पु. पू. सं. 236)
पशुधन फार्म पर जाएँ और निम्नलिखित की ओर ध्यान दें-

  • पशुओं की संख्या तथा विभिन्न प्रकार की नस्लों की संख्या
  • विभिन्न नस्लों से प्रतिदिन प्राप्त दूध।

नोट- इस क्रियाकलाप को अपने अध्यापक या अभिभावकों की सहायता से छात्र स्वयं करें अपने समीप वर्ती किसी पशुधन फार्म हाउस पर जाएँ और वहाँ पर विभिन्न प्रकार की नस्लों के पशुओं की सूची बनाएँ तथा उनसे प्रतिदिन प्राप्त दूध की मात्रा भी लिखें।

उत्पादन की मात्रा-मानवीय व्यवहार आधारित पशुपालन में पशुओं के स्वास्थ्य तथा स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए गाय तथा भैंस के शरीर की उचित सफाई तथा आवास की आवश्यकता होती है। पशु के शरीर पर झड़े हुए बाल तथा धूल को हटाने के लिए नियमित रूप से पशु की सफाई करनी चाहिए। उनका आवास छायादार तथा रोशनदान युक्त होना चाहिए। ऐसे आवास उन्हें वर्षा, गर्मी तथा सर्दी से बचाते हैं। आवास का फर्श बलवां होना चाहिए जिससे वह साफ और सूखा रहे।

दूध देने वाले पशु (डेयरी पशु) के आहार की आवश्यकता दो प्रकार की होती है-

  • एक प्रकार का आहार जो उसके स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखे।
  • दूसरा वह जो दुग्ध उत्पादन को बढ़ाये। इसकी आवश्यकता दुग्ध स्रावण काल में होती है।

पशु आहार के अन्तर्गत आते हैं-
(i) मोटा चारा ( रुक्षांश) – जो प्रायः मुख्यतः रेशे होते हैं।

(ii) सान्द्र चारा – जिसमें रेशे कम होते हैं और प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्व अधिक होते हैं। पशु को सन्तुलित आहार की आवश्यकता होती है जिसमें उचित मात्रा में सभी पोषक तत्व हों। ऐसे पोषक तत्वों के अतिरिक्त कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलाए जाते हैं जो दुधारू पशुओं को स्वस्थ रखते हैं तथा दूध उत्पादन को बढ़ाते

पशु अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो सकते हैं जिसके कारण उनकी दूध उत्पादन की क्षमता में कमी अथवा उनकी मृत्यु हो सकती है। एक स्वस्थ पशु नियमित रूप से खाता है ढंग से बैठता व उठता है। पशु के बाह्य परजीवी तथा अन्तः परजीवी दोनों ही होते हैं। बाह्य परजीवी जैसे किलनी, जूँ त्वचा पर रहते हैं जिनसे पशु को त्वचा रोग हो सकते हैं। अन्तः परजीवी जैसे कीड़े आमाशय तथा आँत को तथा पर्णकृमि ठीक रोग (फ्लूक) यकृत को प्रभावित करते हैं संक्रामक बैक्टीरिया तथा वाइरस के कारण होते हैं। अनेक विषाणु (वाइरस) तथा जीवाणु (बैक्टीरिया) जनित रोगों से पशुओं को बचाने के लिए टीका (वैक्सीन) लगाया जाता है।

खंड 15.2.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 237)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन की विवेचना कीजिए- “यह रुचिकर है कि भारत में कुक्कुट, अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पोषकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तन करने के लिए सबसे अधिक सक्षम है। अल्प रेशे के खाद्य पदार्थ मनुष्यों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।”
उत्तर:
पशु को सन्तुलित आहार की आवश्यकता होती है जिसमें उचित मात्रा में सभी पोषक तत्व उपस्थित हों। ऐसे पोषक तत्वों के अतिरिक्त कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलाए जाते हैं जो दुधारू पशुओं को स्वस्थ रखते हैं तथा दूध उत्पादन को बढ़ाते हैं। पशु आहार के अन्तर्गत मोटा चारा ( रूक्षांश) जो प्राय: रेशे होते हैं तथा सांद्र चारा जिसमें रेशे कम और प्रोटीन तथा अन्य पोषक तत्व अधिक होते हैं।

कुक्कुट तथा बौलर आहार से हमें प्रोटीन, वसा तथा विटामिन प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसलिए भारत के कुक्कुट, अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पोषकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तन करने में सबसे अधिक सक्षम है अल्प रेशे के खाद्य पदार्थ मनुष्यों के लिए इसलिए उपयुक्त नहीं होते क्योंकि उनमें पौष्टिकता बहुत ही कम मात्रा में होती है।

अंडों तथा बौलर का उत्पादन बौलर चूजों को अच्छी वृद्धि दर और अच्छी आहार दक्षता के लिए विटामिन से भरपूर आहार मिलते हैं उनकी मृत्युदर कम रखने और उनके पंख और मांस की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सावधानी बरती जाती है। उन्हें ब्रॉलर के रूप में उत्पादित किया जाता है तथा मांस के प्रयोजन के लिए विपणन किया जाता है।

मुर्गीपालन में अच्छा उत्पाद प्राप्त करने के लिए अच्छी प्रबन्धन प्रणालियाँ बहुत आवश्यक हैं। इसके अन्तर्गत इनके आवास में उचित ताप तथा स्वच्छता का निर्धारण करके कुक्कुट आहार की गुणवत्ता को बनाए रखा जाता है। इनके साथ-साथ रोगों तथा पीड़कों पर नियंत्रण तथा उनके बचाव करना भी सम्मिलित है।

बौलर की आवास, पोषण तथा पर्यावरणीय आवश्यकताएँ अंडे देने वाले कुक्कुटों (मुर्गियों) से कुछ भिन्न होती हैं ब्रौलर के आहार में प्रोटीन तथा वसा प्रचुर मात्रा में होता है। कुक्कुट आहार में विटामिन A तथा विटामिन K की मात्रा भी अधिक रखी जाती है।

विषाणु, जीवाणु, कवक, परजीवी तथा पोषणहीनता के कारण मुर्गियों में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। अतः सफाई तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए नियमित रूप से रोगाणुनाशी पदार्थों का छिड़काव आवश्यक है। मुर्गियों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए जिससे ये महामारी से ग्रसित न हों। इन सावधानियों के बरतने से रोगों के फैलने की दशा में कुक्कुट को न्यूनतम हानि होती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

खंड 15.2.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 238)

प्रश्न 1.
पशुपालन तथा कुक्कुट पालन के प्रबन्धन प्रणाली में क्या समानता है?
उत्तर:
पशुपालन तथा कुक्कुट पालन में अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए अच्छी प्रबन्धन प्रणालियाँ बहुत आवश्यक हैं। इनके अन्तर्गत इनके आवास में उचित ताप तथा स्वच्छता का निर्धारण करके पशु एवं कुक्कुट आहार की गुणवत्ता को बनाए रखा जाता है। इसके साथ ही रोगों तथा पीड़कों पर नियन्त्रण तथा उनसे बचाव करना भी सम्मिलित है। दोनों की प्रबन्धन प्रणाली में यही समानता है।

प्रश्न 2.
बौलर तथा अंडे देने वाली लेयर में क्या अन्तर है? इनके प्रबन्धन के अन्तर को भी स्पष्ट करें।
उत्तर:
बौलर की आवास, पोषण तथा पर्यावरणीय आवश्यकताएँ अंडे देने वाली मुर्गियों से भिन्न होती हैं बौलर के आहार में प्रोटीन और वसा प्रचुर मात्रा में होता है। कुक्कुट आहार में विटामिन A तथा K की मात्रा भी अधिक रखी जाती है। बौलर को माँस के लिए पाला जाता है, जबकि अंडे देने वाली मुर्गियों को लेयर्स कहा जाता है। बौलर की तीव्र वृद्धि तथा अल्पमृत्यु दर की अनुकूल परिस्थितियों में रखना आवश्यक है।

क्रियाकलाप 15.4. (पा.पु. पू. सं. 238)
विद्यार्थी स्वयं कुक्कुट पालन केन्द्र में जाएँ। वहाँ विभिन्न प्रकार की नस्लों का अवलोकन करें। उनको दिये जाने वाले आहार, उनके आवास तथा प्रकाश सुविधाओं को नोट करें। अंडे देने वाली लेयर तथा बौलर को पहचानें।
नोट- किसी कुक्कुट पालन केन्द्र में जाकर वहाँ किसी सहायक की सहायता से उनकी नस्लों का अवलोकन करें और उनको दिये जाने वाले आहार, आवास तथा प्रकाश की सुविधाओं को ध्यान से देखकर नोट कर लेते हैं। अंडे देने वाली लेयर तथा बौलर की पहचान कर उन्हें भी नोट कर लेते हैं।

खंड 15.2.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 239)

प्रश्न 1.
मछलियाँ कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
(i) समुद्री मत्स्यकी (Marine fisheries) भारत का समुद्री मछली संसाधन क्षेत्र 7500 किलोमीटर समुद्री तट तथा इसके अतिरिक्त समुद्र की गहराई तक है। सर्वाधिक प्रचलित समुद्री मछलियाँ पॉमफ्रेट, मैकर्ल, टुना, सारडाइन तथा बांबेडक हैं। समुद्री मछली पकड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के जालों का उपयोग मछली पकड़ने वाली नावों में किया जाता है। सैटेलाइट तथा प्रतिध्वनि ध्वनित्र से खुले समुद्र में मछलियों के बड़े समूह का पता लगाया जा सकता है। तथा इन सूचनाओं का उपयोग कर मछली का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

कुछ आर्थिक महत्व वाली समुद्री मछलियों का समुद्री जल में संवर्धन भी किया जाता है। इनमें प्रमुख हैं-मुलेट, भेटकी तथा पर्लस्पॉट (पंखयुक्त मछलियाँ), कवचीय मछलियाँ जैसे-झींगा (प्रॉन), मस्सल तथा ऑएस्टर एवं साथ ही खरपतवार। ऑएस्टर का संवर्धन मोतियों को प्राप्त करने के लिए भी किया जाता है।

भविष्य में समुद्री मछलियों का भंडार कम होने की अवस्था में इन मछलियों की पूर्ति संवर्धन के द्वारा हो सकती है। इस प्रणाली को समुद्री संवर्धन (मेरीकल्चर) कहते हैं।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 1

(ii) अन्त:स्थली मत्स्यकी (Inland fisheries) ताजा जल के स्रोत नाले, तालाब, पोखर तथा नदियाँ हैं। खारे जल के संसाधन, जहाँ समुद्री जल तथा ताजा जल मिश्रित होते हैं जैसे कि नदीमुख (एस्चुरी) तथा लैगून भी महत्वपूर्ण मछली भंडारण हैं। जब मछलियों का प्रग्रहण अन्तःस्थली स्रोतों पर किया जाता है तो उत्पादन अधिक नहीं होता। इन स्रोतों से अधिकांश मछली उत्पादन जल संवर्धन द्वारा ही होता है।

मछली संवर्धन कभी-कभी धान की फसल के साथ भी किया जाता है। अधिक मछली संवर्धन मिश्रित मछली संवर्धन तन्त्र से किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में देशी तथा आयातित प्रकार की मछलियों का प्रयोग किया जाता है।

ऐसे तन्त्र में एक ही तालाब में 5 या 6 मछलियों की स्पीशीज का प्रयोग किया जाता है। इनमें ऐसी मछलियो को चुना जाता है जिनमें आहार के लिए प्रतिस्पर्धा न हो अथवा उनके आहार भिन्न-भिन्न हों। इसके परिणामस्वरूप तालाब के प्रत्येक भाग में उपलब्ध आहार का उपयोग हो जाता है। जैसे- कटला मछली जल की सतह से अपना भोजन लेती है। रोहू मछली तालाब के मध्य से अपना भोजन लेती है। मृगल तथा कॉमन कार्प तालाब की तली से भोजन लेती हैं। ग्रास कॉर्प खरपतवार खाती है। इस प्रकार ये सभी मछलियाँ साथ-साथ रहते हुए भी बिना स्पर्धा के अपना-अपना आहार लेती हैं। इससे तालाब से मछली के उत्पादन में वृद्धि होती है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 2

मिश्रित मछली संवर्धन में एक समस्या यह है कि इनमें से कई मछलियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही प्रजनन करती हैं। यहाँ तक कि यदि मत्स्य डिंभ देशी नस्ल से लिए जायें तो अन्य स्पीशीज के डिंभों के साथ मिल सकते हैं। अतः मछली संवर्धन के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले डिंभों का उपलब्ध न होना एक गम्भीर समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए ऐसी विधियाँ खोजी जा रही हैं कि तालाब में इन मछलियों का संवर्धन हार्मोन के उपयोग द्वारा किया जा सके। इससे ऐच्छिक मात्रा में शुद्ध मछली के डिंभ प्राप्त होते रहेंगे।

प्रश्न 2.
मिश्रित मछली संवर्धन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
मिश्रित मछली संवर्धन में तालाब के प्रत्येक भाग में उपलब्ध आहार का उपयोग हो जाता है, जैसे- कटला मछली जल की सतह से अपना भोजन लेती है। रोहू मछली तालाब के मध्य क्षेत्र से अपना भोजन लेती है। मृगल तथा कॉमन कार्प तालाब की तली से भोजन लेती है। ग्रास कार्प खरपतवार खाती है। इस प्रकार ये सभी मछलियाँ साथ-साथ रहकर भी बिना स्पर्धा के अपना-अपना आहार लेती हैं। इससे तालाब में मछली के उत्पादन में वृद्धि होती है।

क्रियाकलाप-15.5. (पा. पु. पू. सं. 239)
मछलियों के जनन काल में मछली फार्म में जाओ और निम्नलिखित का अवलोकन करो-

  • तालाब में मछलियों की विभिन्न किस्में
  • तालाबों के प्रकार
  • फार्म में प्रयुक्त आहार में शामिल तत्व
  • ज्ञात करो कि फार्म की मछली उत्पादन क्षमता क्या है?

नोट- किसी मछली पालन केन्द्र में जाइए और अपने अध्यापक या मछली पालन केन्द्र के सहायक कर्मचारी की सहायता से ऊपर दिये गये प्रश्नों के विषय में जानकारी एकत्रित करके अपनी नोट बुक में सूची बनाइये।

खंड 15.2.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 240)

प्रश्न 1.
मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खी में कौन से ऐच्छिक गुण होने चाहिए?
उत्तर:
मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खी में निम्नलिखित ऐच्छिक गुण होने चाहिए-

  • मधुमक्खी में मधु एकत्र करने की क्षमता बहुत अधिक होनी चाहिए
  • वे डंक भी कम मारने वाली हों।
  • वे निर्धारित छत्ते में काफी समय तक रहें।
  • प्रजनन तीव्रता से करें।

प्रश्न 2.
चरागाह क्या है और ये मधु उत्पादन से कैसे सम्बन्धित है?
उत्तर:
मधुमक्खियों द्वारा मधु एकत्र करने के लिए उपलब्ध फूलों वाली जगह को चरागाह कहते हैं। मधुमक्खियाँ फूलों से मकरंद और पराग एकत्र करती हैं। चरागाह की पर्याप्त उपलब्धता मधु की गुणवत्ता और स्वाद को निर्धारित करती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

Jharkhand Board Class 9 Science ध्वनि Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर:
ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमारे कान में श्रवण संवेदना उत्पन्न करती है। जब हम किसी घण्टे पर चोट मारते हैं तो हमें ध्वनि सुनाई देती है तथा घण्टे को हल्का-सा छूने पर उसमें झनझनाहट-सी महसूस होती है। जैसे ही घण्टे में कंपन बंद हो जाता है ध्वनि भी बंद हो जाती है। इसी कारण जब सितार के तार को अँगुली से दबाकर छोड़ देते हैं, तो वह कम्पन करने लगता है और उससे ध्वनि निकलने लगती है। जीवधारी अपने गले की झिल्ली में कम्पन करके मुँह से ध्वनि निकालते हैं। इन कम्पनों की आवृत्ति 20 से 20,000 प्रति सेकण्ड के बीच होती है।

प्रश्न 2.
एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट बायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
ध्वनि हवा के माध्यम से गमन करती है। कोई कंपित वस्तु जब आगे बढ़ती है, तो वह अपने सामने वाली हवा पर बल लगाकर उसे संपीडित करती है, जिससे कि उच्च दबाव का क्षेत्र बनता है। यह क्षेत्र संपीडन कहलाता है। यह क्षेत्र कंपित वस्तु से दूर जाने लगता है। कंपित वस्तु
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 1
पीछे की ओर हटती है, जिससे निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है। यह क्षेत्र विरलन कहलाता है जैसे-जैसे वस्तु कंपित होती है, वैसे-वैसे हवा में संपीडनों और विरलनों की श्रृंखला बनती चली जाती है। इससे हवा में ध्वनि का संचरण होता है।

प्रश्न 3.
किस प्रयोग से यह दर्शाया जा सकता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
चित्र 12.16 के अनुसार उपकरणों को व्यवस्थित करके स्विच को दबाने पर हम घंटी की आवाज सुनते हैं। बेलजार से धीरे-धीरे हवा निकालने पर घंटी की आवाज धीमी होती जाती है, हालाँकि अभी भी उसमें उतनी ही विद्युत प्रवाहित हो रही है बेलजार में थोड़ी-सी हवा बचने पर घंटी की आवाज बहुत धीमी सुनाई पड़ती है। हवा पूरी तरह निकल जाने पर घंटी की आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती। इस प्रयोग से हम यह निष्कर्ष निकालते हैं कि ध्वनि को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 2

प्रश्न 4.
ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है?
उत्तर:
जब ध्वनि तरंगें संचरण करती हैं, तो हवा के अणु तरंग की गति की दिशा के अनुदिश गति करते हैं। इसीलिए ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।

प्रश्न 5.
ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अँधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है?
उत्तर:
ध्वनि की गुणता वह अभिलक्षण है जो हमें आवाज पहचानने में सहायता करता है और हम मित्र की आवाज पहचान लेते हैं।

प्रश्न 6.
तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं, लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं लेकिन पहले चमक दिखाई देती है और गर्जन की आवाज बाद में सुनाई देती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वायु में प्रकाश का वेग, ध्वनि के वेग से अधिक होता है। अतः चमक हमें पहले दिखाई देती है और ध्वनि कुछ देर बाद सुनाई देती है।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 7.
किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परास 20 Hz से 20 kHz है। दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग 344 ms-1
हल:
I. आवृत्ति = 20 हज
वायु में ध्वनि का वेग v = 344 मीटर / सेकण्ड
तरंगदैर्ध्य λ = ?
वेग = तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति
v = λ × v
344 मीटर / सेकण्ड = λ x 20 हर्ट्ज
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 3

II. आवृत्ति v = 20 किलो हर्ट्ज = 20,000 हर्ट्ज
वायु में ध्वनि का वेग v = 344 मी./से.
तरंगदैर्ध्य λ = ?
वेग तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति
344 मीटर / सेकण्ड = λ × 20,000 हर्ट्ज
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 4
इस प्रकार, 20 हर्ट्ज और 20 किलो हर्ट्ज के अनुरूप तरंगदैर्ध्य हैं क्रमश: 17.2 मीटर और 0.0172 मीटर।

प्रश्न 8.
दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
हवा में ध्वनि का वेग v1 = 346 मी./से.
ऐलुमिनियम में ध्वनि का वेग v2 = 6420 मी./से.
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 5

प्रश्न 9.
किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कंपन करेगा?
हल:
आवृत्ति = 100 Hz
समय = 1 मिनट = 60 सेकण्ड
कंपनों की संख्या = आवृत्ति x समय
= 100 Hz x 60 सेकण्ड
= 6000 कंपन।

प्रश्न 10.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए।
उत्तर:
हाँ, ध्वनि भी परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका प्रकाश तरंगें करती हैं। ये नियम इस प्रकार हैं-

  • अभिलम्ब तथा ध्वनि के आपतित होने की दिशा तथा परावर्तन होने की दिशा के बीच बने कोण आपस में बराबर होते हैं।
  • ये तीनों एक ही तल में होते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक सतह के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक सतह की दूरी स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी – (i) जिस दिन तापमान अधिक हो? (ii) जिस दिन तापमान कम हो?
उत्तर:
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 6
समय और वेग में प्रतिलोम अनुपात है। किसी भी माध्यम का ताप बढ़ने से उनमें ध्वनि का वेग बढ़ जाता है। इसलिए, गर्म दिन में अधिक तापमान के कारण ध्वनि का वेग बढ़ जाएगा और हमें प्रतिध्वनि ठंडे दिन की अपेक्षा जल्दी सुनाई देगी।

प्रश्न 12.
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के उपयोग-

  • श्रवण सहायक यंत्र ध्वनि के परावर्तन की प्रक्रिया पर ही आधारित होते हैं।
  • सोनार

प्रश्न 13.
500 मीटर ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में इसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी। (g = 10ms-2 तथा ध्वनि की चाल 340 ms है)
हल:
मीनार की ऊँचाई = 500 मी.
ध्वनि की चाल = 340 ms-1
g = 10ms-1
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 7
ध्वनि द्वारा तालाब से मीनार की चोटी पर पहुँचने में लगा समय = \(\frac { 500 }{ 340 }\) = 1.5 सेकण्ड
पत्थर द्वारा चोटी से तालाब तक पहुँचने में लगा समय
s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) gt²
500 = 0 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 10 x t²
(पत्थर विरामावस्था में था अतः u = 0 व ut = 0)
5t² = 500
t² = \(\frac { 500 }{ 5 }\) = 100
t = \(\sqrt{100}\)
= 10 सेकण्ड
अतः ध्वनि को मीनार की चोटी पर पहुँचने में लगा कुल समय
= 1.5 सेकण्ड + 10 सेकण्ड = 11.5 सेकण्ड

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 14.
एक ध्वनि तरंग 339 ms की चाल से चलती है। यदि ध्वनि की तरंगदैर्ध्य 1.5 सेमी हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी? क्या ये श्रव्य होंगी?
हल:
ध्वनि की चाल = 339 ms-1
तरंगदैर्ध्य = 1.5 सेमी. = 0.015 मी.
हम जानते हैं-
चाल = आवृत्ति x तरंगदैर्ध्य
339 = आवृत्ति x 0.015 मी.
आवृत्ति =\(\frac { 339 }{ 0.015 }\)
= \(\frac { 339×1000 }{ 15 }\)
= 22600 Hz
यह श्रव्य नहीं है।

प्रश्न 15.
अनुरणन क्या है? इसे कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर:
ध्वनि के बार बार दीवार से टकराकर बार-बार परावर्तन के कारण ध्वनि निर्बंध होता है। इसे अनुरणन कहते है।
अनुरणन को कम करने के लिए सभा भवन की छतों तथा दीवारों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थों, जैसे- संपीडित फाइबर बोर्ड, खुरदरा या पर्दे लगा देते हैं।

प्रश्न 16.
ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
किसी ध्वनि की प्रबलता उसकी तीव्रता है। यह उसके आयाम पर निर्भर करती है। ऐसी ध्वनि को जिसमें अधिक ऊर्जा होती है, उसकी प्रबलता कहते हैं।

कारक – यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  • आयाम पर
  • ऊर्जा पर
  • तीव्रता पर
  • तरंग के वेग पर

इकाई क्षेत्र से 1 सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि को प्रबलता कहते हैं।

प्रश्न 17.
चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराध्वनि का उपयोग किस प्रकार करता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चमगादड़ों की आँखें कमजोर होती हैं, इसीलिए वे अपना शिकार देख नहीं पाते। अपनी उड़ान के समय वे उच्च आवृत्ति वाली पराश्रव्य तरंगें छोड़ते हैं ये तरंगें अवरोध या शिकार द्वारा परावर्तित होकर चमगादड़ के कान तक वापस पहुँचती हैं। इन परावर्तित तरंगों की प्रकृति से चमगादड़ अवरोध या शिकार की स्थिति व आकार जान लेते हैं।

प्रश्न 18
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
उत्तर:
पराध्वनि का उपयोग ऐसे भागों को साफ करने के लिए किया जाता है, जो पहुँच से परे होती हैं, जैसे- सर्पिलाकार नली, विषम आकार के पुर्जे आदि। इन्हें साफ करने के लिए साफ करने वाले मार्जन विलयन में रखते हैं। इस विलयन में पराध्वनि की तरंगें भेजी जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण, धूल, चिकनाई तथा गंदगी अलग हो जाती है। इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है।

प्रश्न 19.
सोनार की कार्यविधि तथा उसके उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सोनार एक ऐसी युक्ति है जिसे जल में स्थित पिंडों की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए प्रयोग किया जाता है। सोनार में एक प्रेषित्र तथा एक संसूचक होता है। प्रेषित पराध्वनि उत्पन्न व प्रेषित करता है, ये तरंगें जल में चलती हैं तथा जल से टकराकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं संसूचक पराध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदल देता है। जिसका उचित विश्लेषण करके अनेक चीजों की जानकारी हासिल की जाती है।

सोनार के उपयोग:

  • सोनार का उपयोग समुद्र की गहराई ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
  • इसका उपयोग जल के अन्दर स्थित चट्टानों या घाटियों को ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
  • इसका उपयोग हिम शैल या डूबे हुए जहाज आदि की जानकारी प्राप्त करने में किया जाता है।

प्रश्न 20.
कडुब्बी पर लगी एक सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
हल:
वस्तु की दूरी = 3625m; समय = 5s
ध्वनि की चाल = ?
2 x दूरी = चाल x समय
2 x 3625 = v x 5
5v = 2 x 3625
v = \(\frac {2×3625 }{ 5 }\) = 1450m/s
अतः ध्वनि की चाल = 1450m/s

प्रश्न 21.
किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पराध्वनि का उपयोग धातुओं से बने ब्लॉकों के दोषों का पता लगाने के लिए किया जाता है। धातु के ब्लॉकों में विद्यमान दरार या छिद्र जो बाहर से दिखाई नहीं देते हैं। पराध्वनि तरंगें धातु के ब्लॉक से गुजारी जाती हैं और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। यदि जरा सा भी दोष आता है तो पराध्वनि तरंगें परावर्तित हो जाती हैं जो दोष की उपस्थिति को दर्शाती हैं। इस प्रकार धातु के ब्लॉकों से दोष दूर कर दिया जाता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 8

प्रश्न 22.
मनुष्य का कान किस प्रकार कार्य करता है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य का बाहरी कान, जिसे कर्णपल्लव कहते हैं, वातावरण से ध्वनि को एकत्र करके उसे श्रवण नलिका से होकर, मध्य कर्ण की ओर प्रेषित कर देता है। ध्वनि तरंगों के संपीडन तथा विरलन श्रवण नलिका से होकर कर्णपटल तक पहुँच जाते हैं। संपीडन कर्णपटल पर भीतर की ओर दवाब डालता है और विरलन के कारण कर्णपटल बाहर की ओर गति करता है। इस प्रकार ध्वनि तरंगों के कारण कर्णपटल कम्पन्न करने लगता है।

मुग्दरक, निहाई तथा वलयक नामक हडडियाँ इन कम्पनों को कई गुना बढ़ा देती हैं। मध्य कर्ण इन दाब परिवर्तनों को आन्तरिक कर्ण में स्थित कर्णावर्त इन दाब परिवर्तनों को विद्युत संकेतों में बदल देता है और श्रवण तन्त्रिका द्वारा मस्तिष्क को भेज देता है। मस्तिष्क इन विद्युत संकेतों की ध्वनि के रूप में व्यख्या कर लेता है।

Jharkhand Board Class 9 Science ध्वनि InText Questions and Answers

क्रियाकलाप 12.1. (पा. पु. पृ. सं. 179)
एक स्वरित्र द्विभुज लेकर इसकी किसी भुजा को एक रबड़ के पैड पर मार कर इसे कंपित कराकर अपने कान के पास लाइए। क्या आपको इसकी ध्वनि सुनाई देती है और क्या अँगुली से स्पर्श करने पर यह कंपित हो रही है।

अब एक टेबिल टेनिस या एक छोटी प्लास्टिक की गेंद को एक धागे से लटकाकर चिंत्रानुसार पहले कम्पन न करते हुए स्वरित्र की एक भुजा से गेंद को स्पर्श करिये। फिर कम्पन करते हुए स्वरित्र की एक भुजा से गेंद को स्पर्श करिये और दोनों अवस्थाओं में अन्तर की व्याख्या करने का प्रयास करिये।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 9

क्रियाकलाप 12.2. (पा. पु. पृ. सं. 179)
एक बीकर या गिलास को ऊपर तक पानी से भरकर कंपमान स्वरित्र की एक भुजा को चित्र में दर्शाए अनुसार पानी की सतह से स्पर्श कराये तथा कंपमान स्वरित्र की दोनों भुजाओं को पानी में डुबोइए और दोनों अवस्थाओं के बारे में अपने मित्रों के साथ विचार-विमर्श कीजिए।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 10

क्रियाकलाप 12.3. (पा. पु. पृ. सं. 180 )
विभिन्न वाद्य यंत्रों की सूची बनाकर अपने मित्रों के साथ विचार-विमर्श कीजिए कि ध्वनि उत्पन्न करने के लिए इस वाद्य यंत्रों का कौन सा भाग कंपन करता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 11

अब उत्तर दें –

प्रश्न 1.
क्रियाकलाप 12.1 में दोनों अवस्थाओं में क्या विचार-विमर्श किया?
उत्तर:
स्वरित्र की भुजा को पैड पर मारने पर इसमें कम्पन उत्पन्न होते हैं तथा लटकाई गेंद को कंपन करते हुए स्वरित्र की भुजा से छूने पर गेंद भी कंपित होने लगती है।

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 12.2 में चित्र 12.2 व 12.3 से क्या निष्कर्ष निकलता है?
उत्तर:
स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा पानी की सतह को छूती है तो स्वरित्र के स्पर्श बिन्दु से तरंगें उत्पन्न होकर फैल जाती हैं (चित्र 12.2) तथा चित्र 12.3 में स्वरित्र द्विभुज के दोनों सिरे पानी की सतह को छू रहे हैं तो तरंगें एक-दूसरे के ऊपर आकर अवरोध उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 3.
क्रियाकलाप 12.3 में वाद्य यंत्रों की सूची व कंपित भाग की सूची बनाइए।
उत्तर:

वाद्य यंत्रकंपित भाग
गिटार, सितारतार में उत्पन्न कम्पन
बाँसुरीबाँसुरी के अन्दर की वायु
ढोलकपर्दा
हारमोनियमहारमोनियम की रीड

खंड 12.2 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 182)

प्रश्न 1.
किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर:
जब ध्वनि के कारण किसी माध्यम में कोई विक्षोभ उत्पन्न होता है तो यह विक्षोभ माध्यम के कणों में गति उत्पन्न कर देता है। ये कण अपने समीपवर्ती माध्यम के अन्य कणों में उसी प्रकार की गति उत्पन्न कर देते हैं। यह क्रिया इसी प्रकार माध्यम के अन्य कणों में फैलती जाती है और विक्षोभ हमारे कानों तक पहुँच जाता है।

खंड 12.2.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 182)

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय की घण्टी ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है?
उत्तर:
जब घण्टी पर हथौड़े से आघात किया जाता है तो घण्टी कम्पित हो उठती है। घण्टी के कम्पित होने से ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें इसलिए कहा जाता है; क्योंकि ये माध्यम के कणों की कम्पनिक गति के द्वारा संचारित होती हैं, अर्थात् इनके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं। क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पाएँगे?
उत्तर:
किसी स्रोत से उत्पन्न ध्वनि तरंग वायु से होकर हमारे कानों तक पहुँचती है और तब हमें सुनाई पड़ती है। वायु की अनुपस्थिति में ध्वनि तरंगों का हमें सुनाई पड़ना सम्भव नहीं है। चूँक चन्द्रमा पर वायुमण्डल नहीं है; अत: हम अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को नहीं सुन पायेंगे।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

क्रियाकलाप 12.4. (पा. पु. पृ. सं. 182)
एक स्लिंकी लेकर चित्र के अनुसार खींचिए तथा अपने मित्र की ओर स्लिंकी को एक तेज झटका दीजिए। यदि आप अपने हाथ से स्लिंकी को लगातार आगे पीछे बारी-बारी से धक्का देते और खीचते रहें और स्लिंकी पर एक चिह्न लगा दें तो आप पायेंगे कि स्लिंकी पर लगा चिह्न विक्षोभ के संचरण की दिशा के समान्तर आगे-पीछे गति करता है।
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 12
उन क्षेत्रों को जहाँ कुंडलियाँ पास-पास आ जाती हैं संपीडन (C) कहते हैं तथा उन क्षेत्रों को जहाँ कुण्डलियाँ दूर दूर हो जाती हैं, विरलन (R) कहते हैं। स्लिंकी में विक्षोभ के संचरण की तरंगों को अनुदैर्ध्य तरंगें कहते हैं। इन तरंगों में माध्यम से कणों का विस्थापन विक्षोभ के संचरण की दिशा के समान्तर होता है।

खंड 12.2.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 186)

प्रश्न 1.
तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है?
(a) प्रबलता
(b) तारत्व।
उत्तर:
(a) प्रबलता-किसी ध्वनि तरंग की प्रबलता मूलत: उसके आयाम द्वारा निर्धारित होती है। बड़े आयाम की ध्वनि प्रबल तथा छोटे आयाम की ध्वनि मृदु होती है।

(b) तारत्व-ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति द्वारा निर्धारित होता है। उच्च आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व ऊँचा तथा निम्न आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व नीचा होता है।

प्रश्न 2.
अनुमान लगाइए कि निम्नलिखित में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है ?
(a) गिटार
(b) कार का हॉर्न।
उत्तर:
गिटार की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है।
तरंग के किसी बिन्दु जैसे एक संपीडन या एक विरलन द्वारा एकांक समय में तय की गई दूरी तरंग वेग कहलाती है।
हम जानते हैं
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 13
v = λv (∵ \(\frac { 1 }{ T }\) = v)
अथवा V = λv
वेग = तरंगदैर्ध्य x आवृत्ति

क्रियाकलाप 12.5. (पा. पु. पृ. स. 188)
चित्र 12.10 की भाँति दो एक जैसे पाइप लेकर इन्हें दीवार के समीप किसी मेज पर व्यवस्थित करें। एक पाइप के खुले सिरे के पास एक घड़ी रखिए तथा दूसरे पाइप की ओर से ध्वनि सुनने की कोशिश कीजिए। जब ठीक प्रकार से समायोजित होने पर ध्वनि सुनाई देने लगे तब इन पाइपों तथा दर्शाए अभिलंब के बीच के कोणों को मापिए तथा इनके बीच के संबंध को देखिए। दाईं ओर का पाइप थोड़ा सा उठाने पर क्या प्रेक्षित होता है?
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि 14
निष्कर्ष-

  • जब पाइप दीवार के साथ बराबर कोण पर होते है अर्थात् ∠i = ∠r तब घड़ी की ध्वनि सबसे अच्छी सुनाई देती है।
  • जब दायीं ओर के पाइप को थोड़ा ऊपर उठाया जाता है तो घड़ी की ध्वनि अच्छी तरह सुनाई नहीं देगी।

खंड 12.3 .1 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 189)

प्रश्न 1.
कोई प्रतिध्वनि 3 s पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 ms-1 हो तो स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच कितनी दूरी होगी?
उत्तर:
धवनि की चाल (V) = 342-1
प्रतिध्वनि सुनने में लिया गया समय (t) = 3 s
ध्वनि द्वारा चली गई दूरी = V x t = 342 ms-1 x 3 s
3 s में प्रतिध्वनि सुनाई दी। अतः 3 s में ध्वनि ने स्रोत तथा परावर्तक के बीच की दुगनी दूरी तय की।
स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी होगी
= \(\frac { 1026 }{ 2 }\)m = 513 m

खंड 12.3.3 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 190)

प्रश्न 1.
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती हैं?
उत्तर:
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार इसलिए बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल के सभी भागों में पहुँच जाए।

खंड 12.4 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 191)

प्रश्न 1.
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास क्या है?
उत्तर:
मनुष्यों में ध्वनि की श्रव्यता का परास लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक होता है।

प्रश्न 2.
निम्न से संबंधित आवृत्तियों का परास क्या है?
(a) अपश्रव्य ध्वनि
(b) पराध्वनि।
उत्तर:
(a) 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति की ध्वनियाँ।
(b) 20000 हर्ट्ज से अधिक आवृत्ति की ध्वनियाँ।

खंड 12.5 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर (पा. पु. पृ. सं. 193)

प्रश्न 1.
एक पनडुब्बी सोनार स्पंद उत्सर्जित करती है, जो पानी के अंदर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 s के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
सोनार स्पंद प्राप्त करने तथा प्रेषित्र के बीच समय, t = 1.02 s
लवणीय जल (खारे पानी) में ध्वनि की गति, V = 1531 ms-1
माना चट्टान की दूरी = d
ध्वनि द्वारा तय की गई दूरी = 2d
परंतु 2d = ध्वनि की गति x समय = v t
= 1531 x 1.02 m
d = \(\frac { 1531×1.02 }{ 2 }\)
= 780.81 m
नोट-चमगादड़ अंधेरे में भोजन को खोजने के लिए उड़ते समय पराध्वनिक तरंगें उत्सर्जित करके परावर्तन के पश्चात् इनका संसूचन करता है। चमगादड़ द्वारा उत्पन्न उच्च तारत्व के पराध्वनि स्पंद अवरोधों या कीटों से टकराकर उनसे परावर्तित होकर चमगादड़ के कान तक पहुँचते हैं, इससे चमगादड़ को अवरोध या कीट आदि की स्थिति का पता लग जाता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. लोहे का प्रतीक है-
(a) N
(b) Na
(c) Fe
(d) Ne
उत्तर:
(c) Fe

2. बेरियम कार्बोनेट का सूत्र है-
(a) Ba(NO3)2
(b) BaCO3
(c) BaSO4
(d) K2CO3
उत्तर:
(b) BaCO3

3. एलुमिनियम सल्फेट में ऐलुमिनियम की संयोजकता 3 है तथा सल्फेट आयन की संयोजकता 2 है। ऐलुमिनियम सल्फेट का अणुसूत्र होगा-
(a) AlSO4
(b) Al2SO4
(c) Al3(SO4)2
(d) Al2(SO4)3
उत्तर:
(d) Al2(SO4)3

4. आवोगाद्रो संख्या का मान है-
(a) 6.022 × 1023
(b) 6.023 x 1022
(c) 6.023 x 1022
(d) 6.023 x 10-22
उत्तर:
(a) 6.022 x 1023

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

5. एक धातु के फास्फेट का सूत्र MPO4 है। इसके क्लोराइड का अणुसूत्र होगा-
(a) MCl
(b) MCl3
(c) M2Cl3
(d) MC2
उत्तर:
(b) MCl3

6. परमाणु भार का अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक है-
(a) C-12
(b) O-16
(c) H-1
(d) N-14
उत्तर:
(a) C-12

7. सल्फर के 32 ग्राम में कितने परमाणु हैं?
(a) 6.023 x 1022
(b) 6.023 x 10-23
(c) 6.023 x 1023
(d) 6.023 x 10-23 x 32
उत्तर:
(c) 6.023 x 1023

8. ऑक्सीजन परमाणुओं का 1 मोल होता है-
(a) 8 ग्राम
(b) 16 ग्राम
(c) ग्राम
(d) \(\frac { 1 }{ 8 }\) ग्राम
उत्तर:
(b) 16 ग्राम।

9. विद्युत आवेशित परमाणु/परमाणुओं का समूह है-
(a) परमाणु
(b) अणु
(c) मोल
(d) आयन
उत्तर:
(c) आयन।

10. 18 u जल में जल के कितने अणु होते हैं-
(a) 1
(b) 6.022 × 1023
(c) 18
(d) 36
उत्तर:
(a) 1

11. फास्फोरस है-
(a) एक परमाणुक
(b) द्विपरमाणुक
(c) त्रिपरमाणुक
(d) चतुर्परमाणुक
उत्तर:
(d) चतुर्परमाणुक

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

12. 0.4 मोल ऑक्सीजन परमाणु का द्रव्यमान होगा-
(a) 0.8 ग्राम
(b) 6.4 ग्राम।
(c) 3.2 ग्राम
(d) 16 ग्राम
उत्तर:
(b) 6.4 ग्राम।

13. 12 ग्राम ऑक्सीजन गैस में मोलों की संख्या है-
(a) 0.667 मोल
(b) 6.4 ग्राम
(c) 0.375 मोल
(d) 1 मोल
उत्तर:
(c) 0.375 मोल।

14. ऑक्सीजन के 4 ग्राम में अणुओं की संख्या होगी-
(a) 7.528 × 1022
(b) 7.3 x 1023
(c) 6.023 x 1023
(d) 6.023 x 10-23
उत्तर:
(a) 7.528 × 1022

15. ग्राम में व्यक्त पदार्थ का परमाण्विक द्रव्यमान कहलाता हैं-
(a) ग्राम अणु द्रव्यमान
(b) ग्राम परमाण्विक द्रव्यमान
(c) अणुभार
(d) मोल
उत्तर:
(b) ग्राम परमाण्विक द्रव्यमान।

रिक्त स्थान भरो-

  1. रासायनिक संयोजन के दो नियम हैं- ……………… का नियम और ……………… का नियम।
  2. 1m = ……………… m.
  3. ……………… एक अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था है जो तत्त्वों के नामों, प्रतीकों और मात्रकों को स्वीकृति प्रदान करता है।
  4. किसी तत्त्व की संयोजन शक्ति उस तत्त्व की ……………… कहलाती है।

उत्तर:

  1. द्रव्यमान संरक्षण, स्थिर अनुपात
  2. 10
  3. IUPAC
  4. संयोजकता।

सुमेलन कीजिए-

कौलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. हाइड्रोजन(क) He
2. सोडियम(ख) H
3. हीलियम(ग) S
4. सल्फर(घ) Na

उत्तर:
1. (ख) H
2. (घ) Na
3. (क) He
4. (ग) S

सत्य / असत्य-

  1. ऋण आवेशित आयन को ऋणायन कहते हैं।
  2. आयरन को Ir से चिह्नित करते हैं।
  3. सभी तत्त्वों के परमाणुओं का सापेक्ष द्रव्यमान हाइड्रोजन- 2 परमाणु के द्रव्यमान के साथ तुलना करके प्राप्त करते हैं।
  4. ऑक्सीजन गैस द्वि-परमाणुक अणु है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

अति लघुत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोल क्या है?
उत्तर:
किसी पदार्थ का मोल उसकी वह मात्रा है, जिसमें उतने ही कण उपस्थित होते हैं जितने कार्बन – 12 समस्थानिक के ठीक 12 ग्राम ( या 0.012 किग्रा) में परमाणुओं की संख्या होती है।

प्रश्न 2.
मोलर द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी पदार्थ के एक मोल का ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान उसका ‘मोलर द्रव्यमान’ कहलाता है।

प्रश्न 3.
मोल संकल्पना के पदों में तत्व के ग्राम परमाणु द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ग्राम परमाणु द्रव्यमान अथवा एक ग्राम परमाणु किसी तत्व के एक मोल (6.022 x 1023 परमाणुओं) का द्रव्यमान होता है जिसे ग्राम में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
किसी तत्व के एक ग्राम परमाणु में कितने परमाणु उपस्थित होते हैं?
उत्तर:
6.022 x 1023 ( आवोगाद्रो संख्या) के तुल्य।

प्रश्न 5.
क्या सोडियम तथा कैल्सियम एक ग्राम मोल में परमाणुओं की संख्या भिन्न-भिन्न होगी?
उत्तर:
नहीं, इनमें परमाणुओं की संख्या समान होगी।

प्रश्न 6.
यौगिक के सूत्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी यौगिक के अणु का इसमें उपस्थित विभिन्न तत्वों के प्रतीकों के रूप में संक्षिप्त प्रदर्शन, यौगिक का सूत्र कहलाता है। इन्हें दो रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है- (i) मूलानुपाती सूत्र एवं (ii) आण्विक सूत्र।

प्रश्न 7.
एक बड़े पात्र में दो बीकर रखे हैं। एक में लैड नाइट्रेट का विलयन तथा दूसरे में सोडियम सल्फेट का विलयन है। पात्र को तौल लेते हैं, फिर बीकर के विलयन परस्पर भली-भाँति मिला देते हैं। पात्र को पुनः तौल लेते हैं। क्या द्रव्यमान परिवर्तित होगा?
उत्तर:
नहीं, द्रव्यमान संरक्षण नियम के अनुसार द्रव्यमान पहले के बराबर होगा।

प्रश्न 8.
12 ग्राम मैग्नीशियम 16 ग्राम ऑक्सीजन से संयोग करके 28 ग्राम मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। इन आँकड़ों से रासायनिक संयोग से किस नियम की पुष्टि होती है?
उत्तर:
द्रव्यमान संरक्षण नियम की।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

प्रश्न 9.
क्या कैल्सियम के एक मोल का भार उतना ही है जितना कार्बन के एक मोल का?
उत्तर:
नहीं, कैल्सियम के एक मोल का भार 40 ग्राम है जबकि कार्बन के एक मोल का भार 12 ग्राम होता है।

प्रश्न 10.
कार्बन तत्व के निश्चित 12 g में कितने परमाणु होते हैं? क्या इस संख्या का कोई नाम है?
उत्तर:
6.022 × 1023 परमाणु। इस संख्या को आवोगाद्रो संख्या (NA) कहा जाता है। यह एक मोल में परमाणुओं की संख्या दर्शाती है।

प्रश्न 11.
किसी पदार्थ के एक ग्राम परमाणु द्रव्यमान में कितने परमाणु उपस्थित होते हैं?
उत्तर:
6.022 × 1023 परमाणु।

प्रश्न 12.
किसी पदार्थ के एक ग्राम आण्विक द्रव्यमान में कितने परमाणु उपस्थित होते हैं?
उत्तर:
6.0221023 परमाणु।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखिए – (i) सल्फ्यूरिक अम्ल तथा (ii) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड
उत्तर:

  1. H2 SO4 तथा
  2. Ca(OH)2.

प्रश्न 14.
निम्नलिखित यौगिकों के नाम लिखिए- (i) (NH4)2SO4 तथा (ii) Na2S
उत्तर:

  1. अमोनियम सल्फेट तथा
  2. सोडियम सल्फाइड।

प्रश्न 15.
(i) Ag2 O तथा
(ii) Cus यौगिकों के नाम बताइए।
उत्तर:
(i) सिल्वर ऑक्साइड तथा
(ii) कॉपर सल्फाइड।

प्रश्न 16.
He के 12.044 x 1023 परमाणुओं को मोल में परिवर्तित कीजिए।
हल:
∵ 6.022 × 1023 परमाणु = 1 मोल
12.044 x 1023 परमाणु 2 मोल

प्रश्न 17.
किस भारतीय दार्शनिक ने परमाणु को परिभाषित किया था?
उत्तर:
महर्षि कणाद।

प्रश्न 18.
रासायनिक संयोजन के नियमों को सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया था?
उत्तर:
एन्टोनी एल० लेवॉशिये (Antonie L Lavoisier)।

प्रश्न 19.
द्रव्यमान संरक्षण क्या है?
उत्तर:
किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन किया जा सकता है न ही विनाश।

प्रश्न 20.
क्या मोल द्वारा केवल परमाणुओं को गिना जाता है?
उत्तर:
नहीं, मोल अतिसूक्ष्म स्तर पर कणों (जैसे- परमाणुओं, अणुओं, आयनों, इलेक्ट्रॉनों आदि) को गिनने की इकाई होती है।

प्रश्न 21.
परमाणुकता क्या है?
उत्तर:
किसी अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या उसकी परमाणुकता कहलाती है।

प्रश्न 22.
त्रिपरमाणुक अणु में कितने परमाणु होते हैं?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 23.
आण्विक सूत्र क्या है?
उत्तर:
वह सूत्र जिसमें किसी यौगिक में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की एक निश्चित (exact) संख्या होती है।

प्रश्न 24.
आयन क्या है?
उत्तर:
वह आवेशित कण जिस पर धन अथवा ऋण आवेश हो सकता है।

प्रश्न 25.
धनायनों के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
Na+, K+, Ca2+, Mg2+

प्रश्न 26.
ऋणायनों के पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
Cl, Br, F, F, O2- or O

प्रश्न 27.
आयनिक यौगिक क्या है?
उत्तर:
जिनमें आयन विद्यमान होते हैं उदाहरण : NaCl, KCI

प्रश्न 28.
तत्वों के प्रतीक क्या होते हैं?
उत्तर:
तत्वों के नामों के संक्षिप्त रूप ‘प्रतीक’ कहलाते है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

प्रश्न 29.
नाइट्रोजन, सल्फर तथा यूरेनियम के प्रतीक बताइए।
उत्तर:
N, S तथा U.

प्रश्न 30.
परमाणु का आकार सामान्यतः किसमें मापा जाता है?
उत्तर:
नैनोमीटर (nm) में।

प्रश्न 31.
amu हेतु IUPAC का नवीनतम अनुमोदन कौन-सा है?
उत्तर:
u (यूनीफाइड)।

प्रश्न 32.
NaCl का इकाई सूत्र द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
1 × 23 + 35.5 = 58.5 u.

प्रश्न 33.
किसी आयनिक यौगिक का सूत्र ज्ञात करने में कौन सहायता करता है?
उत्तर:
आयनों पर उपस्थित आवेश।

प्रश्न 34.
आवोगाद्रो संख्या क्या है?
उत्तर:
6.022 x 1023

प्रश्न 35.
एक मोल ऑक्सीजन परमाणुओं का द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
16 ग्राम।

प्रश्न 36.
Al3+ तथा SO22- आयनों से बने यौगिक का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Al2(SO4)3.

प्रश्न 37.
“भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु परस्पर छोटी पूर्ण संख्या के अनुपात में संयोग कर यौगिक निर्मित करते।” यह अभिगृहीत किस नियम से सम्बन्धित है?
उत्तर:
द्रव्यमान संरक्षण के नियम से।

लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डॉल्टन का परमाणु सिद्धान्त क्या है?
उत्तर:
डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं-

  • सभी द्रव्य अति सूक्ष्म कणों से मिलकर बने होते हैं, जिन्हें परमाणु कहते हैं।
  •  परमाणु अविभाज्य होता है अर्थात् इसे आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है।
  • परमाणु अविनाशी होता है। इसे रासायनिक क्रिया द्वारा न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही उत्पन्न किया जा सकता है।
  • एक तत्व के सभी परमाणु हर दृष्टि से समान होते हैं परन्तु दूसरे तत्व से भिन्न होते हैं। उनका भार निश्चित होता है।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के भार व गुण बराबर होते हैं।
  • विभिन्न तत्वों के परमाणु सरल व निश्चित संयोग करके यौगिक बनाते हैं।

प्रश्न 2.
डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त के अनुसार स्थिर ‘के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
डॉल्टन के परमाणु सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक तत्व छोटे कर्णो से बना होता है, जिन्हें परमाणु कहते हैं। प्रत्येक परमाणु का निश्चित भार होता है। विभिन्न तत्वों के परमाणु संयुक्त होकर यौगिक बनाते हैं और यौगिक में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या तथा प्रकार निश्चित होते हैं। अब क्योंकि किसी यौगिक के प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या, परमाणुओं के प्रकार तथा परमाणुओं के भार निश्चित होते हैं, इसलिए यौगिक में सदैव समान तत्व भारानुसार उसी अनुपात में परस्पर संयुक्त होंगे और यही स्थिर अनुपात का नियम है।

प्रश्न 3.
अणु व परमाणु में अन्तर बताइये।
उत्तर:
अन्तर

अणु (Molecule)परमाणु (Atom)
1. यह दो या दो से अधिक परमाणुओं से मिलकर बनता है : इसमें पदार्थ के गुण विद्यमान होते हैं।1. यह किसी पदार्थ का वह छोटा कण है, जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है।
2. यह मुक्त अवस्था में रह सकता है।2. यह मुक्त अवस्था में नहीं रह सकता है।

प्रश्न 4.
ग्राम परमाणु द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए तथा इसका महत्त्व बताइये।
उत्तर:
किसी पदार्थ की वह मात्रा जिसका ग्रामों में द्रव्यमान उसके परमाणु द्रव्यमान के बराबर हो, उस पदार्थ का ग्राम परमाणु द्रव्यमान कहलाता है। दूसरे शब्दों में, ग्रामों में व्यक्त परमाणु द्रव्यमान को ग्राम परमाणु द्रव्यमान कहते हैं। ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान 16 है, अतः ऑक्सीजन का ग्राम परमाणु द्रव्यमान 16 ग्राम होगा। किसी पदार्थ का ग्राम परमाणु द्रव्यमान उसके एक मोल परमाणुओं का द्रव्यमान होता है।

प्रश्न 5.
ग्राम अणु द्रव्यमान को परिभाषित करिए तथा इसका महत्त्व बताइए।
उत्तर:
किसी पदार्थ की वह मात्रा जिसका ग्राम में द्रव्यमान उसके अणु द्रव्यमान के बराबर हो, उस पदार्थ का ग्राम अणु द्रव्यमान कहलाता है। दूसरे शब्दों में, ग्रामों में व्यक्त अणु द्रव्यमान को ग्राम अणु द्रव्यमान कहते हैं।

ऑक्सीजन (O2) का अणु द्रव्यमान 32 अतः इसका ग्राम अणु द्रव्यमान 32 ग्राम होगा। किसी पदार्थ का ग्राम अणु द्रव्यमान उसके एक मोल (6.022 x 1023) अणु का द्रव्यमान होता है।

प्रश्न 6.
परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu) आजकल परमाणु द्रव्यमान को कार्बन-12 परमाणु (6C12) के द्रव्यमान के सापेक्ष व्यक्त किया जाता है। परमाणु द्रव्यमान मात्रक को संक्षेप में amu द्वारा प्रदर्शित करते हैं। कार्बन-12 के एक परमाणु का द्रव्यमान स्वेच्छा से ठीक 12 amu मान लिया गया है; अत: कार्बन-12 के एक परमाणु के द्रव्यमान के बारहवें (1/12) भाग को परमाणु द्रव्यमान इकाई कहते हैं।
परमाणु द्रव्यमान इकाई = \(\frac { 1 }{ 12 }\) x कार्बन-12 परमाणु का द्रव्यमान (1 amu- x mass of 6C12 atom )
कार्बन 12 समस्थानिक के एक परमाणु का वास्तविक द्रव्यमान 1.9926 × 10-23 ग्राम होता है जो 12 amu के बराबर होता है।
अत: 1 amu = \(\frac{1.9926 \times 10^{-23}}{12}\) = 1.66 × 10-24 ग्राम
1.66 × 10-24 ग्राम को amu का ग्राम तुल्यांक (gram equivalent) कहते हैं।
तत्वों के विभिन्न समस्थानिकों के परमाणुओं के द्रव्यमान तथा सब परमाण्विक कणों के द्रव्यमान प्राय: amu में व्यक्त किए जाते हैं। उदाहरणार्थ, 7N14 के एक परमाणु का द्रव्यमान 14.0032 amu है। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 0.0005486 amu है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए-
(i) परमाणु
(ii) अणु
(iii) अणुसूत्र।
उत्तर:
(i) परमाणु – परमाणु किसी तत्व का वह छोटे-से छोटा कण है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता है और स्वतन्त्र अवस्था में नहीं रह सकता है। दूसरे शब्दों में, परमाणु किसी तत्व का वह सूक्ष्मतम कण है जो सभी रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में अपनी रासायनिक पहचान बनाए रखता है।

(ii) अणु – अणु किसी तत्व या यौगिक वह सूक्ष्मतम कण है जिसका सामान्य अवस्था में अकेला या स्वतन्त्र अस्तित्व होता है और वह इस पदार्थ (तत्व या यौगिक) के सभी गुणों को दर्शाता है। एक अणु एक, दो या अधिक परमाणुओं से मिलकर बना हो सकता है। उदाहरण के लिए Ar या He (एकपरमाण्विक) H2, N2, HCl (द्विपरमाण्विक) H2O, CO2 (त्रिपरमाण्विक) तथा NH3, P4 (चतुर्परमाण्विक) इत्यादि।

(iii) अणुसूत्र – आण्विक सूत्र (अणुसूत्र ) वह सूत्र है जो किसी यौगिक के अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को बताता है। उदाहरण के लिए हाइड्रोजन परॉक्साइड में हाइड्रोजन के 2 परमाणु तथा ऑक्सीजन के 2 परमाणु उपस्थित हैं और इसका अणुसूत्र H2 O2 है

प्रश्न 8.
निम्नलिखित को आप कैसे परिभाषित करेंगे?
(अ) परमाणु द्रव्यमान
(ब) आण्विक द्रव्यमान।
उत्तर:
(अ) परमाणु द्रव्यमान कार्बन के एक परमाणु के भार के 1/12 भाग से किसी तत्व का एक परमाणु जितने गुना भारी होता है, वह द्रव्यमान उस तत्व का परमाणु द्रव्यमान कहलाता है, जबकि एक कार्बन परमाणु का भार 12 लिया गया हो।

(ब) आण्विक द्रव्यमान किसी पदार्थ के अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के कुल द्रव्यमान के योग को आण्विक द्रव्यमान कहते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

प्रश्न 9.
तत्व के प्रतीक का क्या महत्त्व होता है?
उत्तर:
तत्व के प्रतीक के महत्त्व निम्नवत् हैं-

  • प्रत्येक तत्व का नाम प्रदर्शित करता है।
  • प्रत्येक तत्व के एक परमाणु को प्रदर्शित करता है।
  • प्रत्येक तत्व के परमाणुओं के एक मोल को व्यक्त करता है।
  • प्रत्येक तत्व के निश्चित द्रव्यमान का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्न 10.
परमाणु तथा आयन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परमाणु तथा आयन में अन्तर

परमाणुआयन
1. यह विद्युत उदासीन होता है।यह विद्युत आवेशित होता है।
2. परमाणुओं का इलेक्ट्रॉ-निक विन्यास अस्थायी होता है (अक्रिय गैसों को छोड़कर)इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थायी होते हैं।
3. स्वतन्त्र अवस्था में नहीं रह सकता है।स्वतन्त्र अवस्था में रह सकता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए-

  1. फेरिक सल्फेट
  2. मैग्नीशियम फॉस्फाइट
  3. ऐलुमिनियम कार्बोनेट
  4. सोडियम थायोसल्फेट
  5. कैडमियम नाइट्रेट
  6. क्रोमियम ऑक्साइड
  7. सोडियम सिलिकेट
  8. स्ट्रॉन्शियम बाइकार्बोनेट
  9. पोटैशियम जिंकेट
  10. कैल्सियम बोरेट

उत्तर:

  1. (i) Fe2 (SO4)3
  2. ) MgHPO3
  3. Al2(CO3)3
  4. Na2S2O3
  5. Cd(NO3)2
  6. Cr2O3
  7. Na2 SiO3
  8. Sr (HCO3)2
  9. K2ZnO2
  10. Ca3 (BO3)2

प्रश्न 12.
निम्नलिखित के द्वारा बने यौगिकों के सूत्र तथा नाम बताइए-
(i) Cu2+ तथा O2-
(ii) K+ तथा CO32-
(iii) Cu2+ तथा SO42-
(iv) Na+ तथा HCO3
उत्तर:
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 1

प्रश्न 13.
निम्नलिखित के द्वारा बने यौगिकों के सूत्र तथा नाम लिखिए-
(i) Fe3+ तथा SO42-
(ii) Cr3+ तथा PO43-
(iii) Zn2+ तथा SO42-
(iv) Na+ तथा SO42-
(v) Hg22+ तथा Cr
(vi) NH4+ CO32-
उत्तर:
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित के द्वारा बने यौगिकों के सूत्र तथा नाम लिखिए-
(i) प्लम्बस आयन तथा नाइट्रेट आयन
(ii) निकिल आयन तथा कार्बोनेट आयन
(iii) कैल्सियम आयन तथा ऑक्सेलेट आयन
(iv) अमोनियम आयन तथा ऐसीटेट आयन
(v) मैग्नीशियम आयन तथा कार्बोनेट आयन
(vi) लीथियम आयन तथा बाइकार्बोनेट आयन
उत्तर:
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 3

प्रश्न 15.
निम्नलिखित के द्वारा बने यौगिकों के सूत्र तथा नाम लिखिए-
(i) पोटैशियम आयन तथा ब्रोमाइड आयन
(ii) कोबाल्ट आयन तथा नाइट्रेट आयन
(iii) मैंगनीज आयन तथा सल्फाइड आयन
उत्तर:
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 4

प्रश्न 16.
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(i) जिंक फॉस्फेट
(ii) अमोनियम ऑक्सेलेट
(iii) मरक्यूरिक क्लोराइड
(iv) मरक्यूरस नाइट्रेट
(v) ऐलुमिनियम फ्लुओराइड
(vi) क्रोमियम क्लोराइड
(vii) लेड ऐसीटेट
(viii) क्यूप्रस ऑक्साइड
(ix) कॉपर (II) फॉस्फेट
(x) निकिल नाइट्रेट
उत्तर:
(i) Zn3(PO4)2
(ii) (NH4)2C2O4
(iii) HgCl2
(iv) Hg2(NO3)2
(v) AlF3
(vi) Cr Cl3
(vii) Cu2O
(ix) Cu3 (PO4)2
(x) Ni(NO3)2

प्रश्न 17.
निम्नलिखित यौगिकों के नाम लिखिए-
(i) Na2 SO4
(ii) (NH4)2SO4
(iii) Mn(OH)2
(iv) NaOH
(v) ZnSO4
(vi) Cocl2
(vii) KClO3
(viii) KBr
(ix) FeCl3
(x) Al2O3
(xi) (NH4)2Cr2O7
उत्तर:
(i) सोडियम सल्फेट
(ii) अमोनियम सल्फेट
(iii) मँगनीज हाइड्रॉक्साइड
(iv) सोडियम हाइड्रॉक्साइड
(v) जिंक सल्फेट
(vi) कोबाल्ट क्लोराइड
(vii) पोटैशियम क्लोरेट
(viii) पोटैशियम ब्रोमाइड
(ix) फेरिक क्लोराइड
(x) ऐलुमिनियम ऑक्साइड
(xi) अमोनियम डाइक्रोमेट
(xii) सिल्वर नाइट्रेट।

प्रश्न 18.
आण्विक द्रव्यमान क्या है? इसकी विभिन्न परिभाषाएँ देते हुए ग्राम अणुभार को भी स्पष्ट करें।
उत्तर:
आण्विक द्रव्यमान “किसी तत्व अथवा यौगिक का वह छोटे-से-छोटा कण जिसमें उस तत्व अथवा यौगिक के सभी गुण विद्यमान हों तथा जो स्वतन्त्र अवस्था में रह सकता हो, अणु कहलाता है।” किसी पदार्थ के एक अणु का द्रव्यमान बहुत ही कम होता है और इसको ज्ञात करना कठिन एवं असुविधाजनक होता है।

अतः अणु का वास्तविक द्रव्यमान को ज्ञात न करके हम आण्विक द्रव्यमान को औसत सापेक्षिक द्रव्यमान के रूप में ज्ञात कर सकते हैं किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) के सापेक्ष आण्विक द्रव्यमान को व्यक्त करने के लिए C-12 समस्थानिक का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार पदार्थ का आण्विक द्रव्यमान इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता हैं-

किसी पदार्थ का आण्विक द्रव्यमान वह संख्या है जो यह प्रदर्शित करती है कि इस पदार्थ का एक अणु कार्बन- 12 (समस्थानिक) के एक परमाणु के बारहवें अंश से कितने गुना भारी है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 5
ग्राम आण्विक द्रव्यमान – ” जब आण्विक द्रव्यमान को ग्राम में प्रकट किया जाता है, तो वह ग्राम आण्विक द्रव्यमान कहलाता है।” जैसे- क्लोरीन का आण्विक द्रव्यमान 71 है और ग्राम आण्विक द्रव्यमान 71 ग्राम हैं।

प्रश्न 19.
मोल संकल्पना क्या है? इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए मोलर द्रव्यमान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
मोल संकल्पना रसायन शास्त्र में अतिसूक्ष्म स्तर पर कण (जैसे-परमाणुओं, अणुओं, कण, इलेक्ट्रॉनों आदि) की संख्या ज्ञात करने के लिए रसायनज्ञों को एक मानक मात्रक की आवश्यकता अनुभव हुई। इसलिए मोल संकल्पना का प्रादुर्भाव हुआ। इसके अनुसार,
“किसी पदार्थ का एक मोल उसकी वह मात्रा है जिसमें उतने ही कण उपस्थित होते हैं, जितने कार्बन – 12 समस्थानिक के ठीक 12 ग्राम (या 0.012 ग्राम) में परमाणुओं की संख्या होती है।”

यहाँ यह तथ्य महत्त्वपूर्ण है कि किसी पदार्थ के एक मोल में कर्णों की संख्या सदैव समान होगी, भले ही वह कोई भी पदार्थ हो। इस संख्या के सही निर्धारण के लिए कार्बन-12 परमाणु का द्रव्यमान द्रव्यमान स्पेक्ट्रममापी द्वारा ज्ञात किया गया जिसका मान 1.992648 x 10-23 ग्राम प्राप्त हुआ। कार्बन के 1 मोल का द्रव्यमान 12 ग्राम होता है; अतः कार्बन के 1 मोल में परमाणुओं की संख्या इस प्रकार होगी-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 6
1 मोल में कणों की यह संख्या अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसे ‘ आवोगाद्रो संख्या’ कहते हैं तथा ‘N’ या ‘N’ से व्यक्त करते हैं।

मोल संकल्पना की आवश्यकता परमाणु और अणु आकार में अत्यन्त छोटे होते हैं तथा किसी पदार्थ की बहुत कम मात्रा में भी इनकी संख्या बहुत अधिक होती है, इतनी बड़ी संख्याओं के साथ कार्य करने के लिए इतने ही परिमाण के एक मात्रक की आवश्यकता होती है। मोल संकल्पना के अनुसार 12 ग्राम कार्बन में 6.022 1023 ( आवोगाद्रो संख्या) कार्बन परमाणु होते हैं। चूँकि इस कणों को गिनना सम्भव नहीं है। अतः इनकी संख्या को मोल में व्यक्त करके कार्य करना सरल हो जाता है।

उदाहरणस्वरूप-
1 मोल में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
∴ 3 मोल में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या
= 3 × 6.022 × 1023
= 1.81 x 1024 परमाणु
उपर्युक्त उदाहरण से स्पष्ट है कि ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या 1.81 1034 में व्यक्त करना अपेक्षाकृत कठिन कार्य है, अपितु इन्हें 3 मोल ऑक्सीजन परमाणु के रूप में व्यक्त करना अत्यन्त सरल है।

मोल द्रव्यमान – मोल को परिभाषित करने के पश्चात् किसी पदार्थ या उसके घटकों के एक मोल के द्रव्यमान को सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।

“किसी पदार्थ के एक मोल के ग्राम में व्यक्त द्रव्यमान को उसका ‘मोलर द्रव्यमान’ कहते हैं।”
ग्राम में व्यक्त मोलर द्रव्यमान संख्यात्मक रूप से परमाणु द्रव्यमान या आण्विक द्रव्यमान या सूत्र द्रव्यमान के बराबर होता है।

उदाहरणार्थ-
जल का मोलर द्रव्यमान = 18.02 ग्राम
सोडियम क्लोराइड का मोलर द्रव्यमान = 58.5 ग्राम

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
CaCO3 के आण्विक द्रव्यमान की गणना कीजिए।
(Ca = 40u, C 12u, O = 16u)
हल:
CaCO3 का आण्विक द्रव्यमान
= (1 × 40) + (1 x 12) + ( 3 x 16 )
= 40 + 12 + 48 = 100u

प्रश्न 2.
ग्लूकोस (C6H12O6) के आण्विक द्रव्यमान की गणना कीजिए। (C = 12u, H = 1u, O = 16u)
हल:
C6H12O6 का आण्विक द्रव्यमान
=(6 × 12) + (12 × 1) + (6 × 16)
= 72 + 12 + 96 – 180 u

प्रश्न 3.
सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के आण्विक द्रव्यमान की गणना कीजिए।
हल:
H2SO4 का आण्विक द्रव्यमान
= (2 × 1) + (1 × 32) + (4 × 16)
= 2 + 32 + 64
= 98u

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु

प्रश्न 4.
H3PO4 के सूत्र द्रव्यमान की गणना करो। (H = 1 u, P = 31u, O = 16u)
हल:
H3 PO4 का सूत्र द्रव्यमान
= (3 × 1) + 31 + ( 4 x 16)u
= (3 + 31 + 64) u
= 98u

प्रश्न 5.
सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित आँकड़े स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि करते हैं। कॉपर मोनोऑक्साइड के दो विभिन्न नमूनों में कॉपर के द्रव्यमान निम्नलिखित थे –
(i) 1.26 ग्राम कॉपर, 1.42 ग्राम ऑक्साइड में
(ii) 1.008 ग्राम कॉपर, 1.136 ग्राम ऑक्साइड में। (कॉपर का परमाणु भार 63, ऑक्सीजन का परमाणु भार – 16)
हल:
पहले नमूने में,
कॉपर मोनोऑक्साइड का द्रव्यमान = 1.42 ग्राम
कॉपर का द्रव्यमान = 1.26 ग्राम
∴ ऑक्सीजन का द्रव्यमान = (1.42 – 1.26) ग्राम
= 0.16 ग्राम
अत: कॉपर तथा ऑक्सीजन का अनुपात = 1.26 : 0.16 = 7.875 : 1
दूसरे नमूने में,
कॉपर मोनोऑक्साइड का द्रव्यमान = 1.136 ग्राम
कॉपर का द्रव्यमान = 1.008 ग्राम
∴ ऑक्सीजन का द्रव्यमान = (1.136 – 1.008) ग्राम
= 0.128 ग्राम
अत: कॉपर तथा ऑक्सीजन का अनुपात
= 1.008 : 0.128 ग्राम
= 7.875 : 1
चूँकि इन दोनों नमूनों में कॉपर तथा ऑक्सीजन के द्रव्यमानों के अनुपात 7.8751 से प्रदर्शित होता है कि कॉपर मोनोऑक्साइड में उसके अवयवी तत्वों के द्रव्यमानों का अनुपात स्थिर होता है अतः इन आँकड़ों से स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि होती है।

प्रश्न 6.
एक प्रयोग में 2.4 ग्राम आयरन ऑक्साइड को हाइड्रोजन द्वारा पूर्णतया अपचयित करने पर 1.68 ग्राम आयरन प्राप्त होता है। दूसरे प्रयोग में 2.90 ग्राम आयरन ऑक्साइड अपचयित होने पर 2.03 ग्राम आयरन देता है। इन प्रयोगों के परिणामों से स्थिर अनुपात का नियम सिद्ध कीजिए।
हल:
पहले प्रयोग में,
आयरन ऑक्साइड का द्रव्यमान = 2.40 ग्राम
आयरन का द्रव्यमान = 1.68 ग्राम
अत: संयुक्त ऑक्सीजन का द्रव्यमान
= (2.40- 1.68) ग्राम
= 0.72 ग्राम
अब आयरन एवं ऑक्सीजन के द्रव्यमान का अनुपात
= 1.68 : 0.72 = 7 : 3
दूसरे प्रयोग में,
आयरन ऑक्साइड का द्रव्यमान = 2.90 ग्राम
आयरन का द्रव्यमान = 2.03 ग्राम
अत: संयुक्त ऑक्सीजन का द्रव्यमान
= (2.90-2.03) ग्राम = 0.87 ग्राम
आयरन एवं ऑक्सीजन के द्रव्यमानों का अनुपात
= 2.03 : 0.87 = 7 : 3
चूँकि दोनों प्रयोगों में आयरन ऑक्साइड में आयरन तथा ऑक्सीजन के द्रव्यमानों के अनुपात 7 3 से स्पष्ट है कि आयरन ऑक्साइड में उसके अवयवी तत्वों के द्रव्यमानों का अनुपात स्थिर होता है। अतः इससे स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि होती है।

प्रश्न 7.
एक प्रयोग में तत्व A के 12 ग्राम तत्व B के 16 ग्राम से संयोग करके एक यौगिक बनाते हैं। दूसरे प्रयोग में तत्व A के 3 ग्राम, तत्व B के 4 ग्राम से संयोग करके यौगिक बनाते हैं। कारण सहित बताइए कि इन आँकड़ों से रासायनिक संयोग के किस नियम का सत्यापन होता है?
हल:
प्रथम प्रयोग में, A: B = 12:16 = 3:4
दूसरे प्रयोग में, A:B = 3:4
A तथा B के द्रव्यमानों में समान अनुपात होने के कारण स्पष्ट है कि उपर्युक्त आँकड़े स्थिर अनुपात के नियम की पुष्टि करते हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित के मोलर द्रव्यमान की गणना कीजिए तथा उनकी उपयुक्त मात्रक इकाइयाँ दीजिए-
C2 H5 OH, PCl5
हल:
(i) C2 H5 OH का मोलर द्रव्यमान
= [ 2 × 12 + 5 × 1 + 16 + 1] amu
= 24 + 5 + 16 + 1 46 amu
= 46 ग्राम / मोल

(ii) PCI का मोलर द्रव्यमान = [31 + 5 x 35.5] ग्राम / मोल
= 31 + 177.5 ग्राम/मोल
= 208.5 ग्राम / मोल

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के आण्विक द्रव्यमान का परिकलन कीजिए- (i) CH2Cl2
(ii) H2O2
हल:
(i) CH2Cl2 का आण्विक द्रव्यमान
= [12 + 2 × 1 + 2 × 35.5]
= 12 + 2 + 71
= 85u

(ii) H2 O2 का आण्विक द्रव्यमान
= [2 × 1 + 2 × 16]
= 2 + 32
= 34.u

प्रश्न 10.
नीचे दिए गए यौगिकों के सूत्र द्रव्यमान का परिकलन कीजिए-
(i) MgO
(ii) AlCl3
हल:
(i) MgO का सूत्र द्रव्यमान = [24 + 16] = 40 ग्राम
(ii) AlCl3 का सूत्र द्रव्यमान = [27 + 3 × 35.5]
= 27 + 106.5 = 133.5 ग्राम

प्रश्न 11.
सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट (Na2 CO3.10H2O) एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक रसायन है। उसके सूत्र द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
हल:
Na2 CO3.10H2O का सूत्र द्रव्यमान
= [(2 × 23) + 12 + (316) +10 (21) + 163] ग्राम
= [46 + 12 + 48 + 10 (18)] ग्राम
= [46 + 12 + 48 + 180] ग्राम
= 286 ग्राम

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) 52 मोल He
(ii) 52 u He
(iii) 52 ग्राम He
हल:
(i) 1 मोल He में परमाणुओं की संख्या
= 6.022 x 1023
∴ 52 मोल He में परमाणुओं की संख्या
= 6.022 × 1023 x 52
= 3.13 x 1025 परमाणु

(ii) He का परमाणु द्रव्यमान – 4 u
∵ 4 u द्रव्यमान He के एक परमाणु का द्रव्यमान है,
∴ 52u द्रव्यमान होगा \(\frac { 52 }{ 4 }\) He परमाणु का = 13 परमाणु

(iii) He का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 4g
4 ग्राम He में परमाणुओं की संख्या = 6.022 x 1023
∴ 52 ग्राम He में परमाणुओं की संख्या
= 6.022 × 1023 x \(\frac { 52 }{ 4 }\)
= 7.83 x 1024 परमाणु

प्रश्न 13.
प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए जब-
(i) 1 मोल कार्बन को हवा में जलाया जाता है, और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16 ग्राम ऑक्सीजन में जलाया जाता है।
हल:
हवा में कार्बन को जलाने का रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 3 परमाणु एवं अणु 7

(i) जब 1 मोल कार्बन को वायु में जलाया जाता है-
1 मोल कार्बन जलकर CO2 उत्पन्न करेगा = 1 मोल = 44 ग्राम

(ii) जब 1 मोल कार्बन को 16 ग्राम ऑक्सीजन में जलाया जाता है-
1 मोल कार्बन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन = 32 ग्राम = 1 मोल
परन्तु ऑक्सीजन का उपलब्ध द्रव्यमान = 16 ग्राम = \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल
अतः ऑक्सीजन सीमित मात्रा में है अर्थात् यह Limit-ing reagent है।
∴ उत्पन्न CO2 का द्रव्यमान = \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल = 22 ग्राम

प्रश्न 14.
एथेन (C2H6) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए-
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या,
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या,
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या।
हल:
(i) एथेन (C2H6) के 1 मोल में कार्बन परमाणुओं के 2 मोल उपस्थित हैं,
अत: एथेन (C2H6) के 3 मोलों में कार्बन परमाणुओं के 2 × 3 = 6 मोल उपस्थित होंगे।

(ii) एथेन (C2H6) के 1 मोल में हाइड्रोजन परमाणुओं के 6 मोल उपस्थित हैं।
अतः एथेन (C2H6) के 3 मोलों में हाइड्रोजन परमाणुओं के 3 × 6 = 18 मोल उपस्थित होंगे।

(iii) 1 मोल C, H में अणुओं की संख्या
= 6.022 × 1023
∵ 3 मोलो C2H6 में अणुओं की संख्या
= 3 × 6.022 × 1023
= 1.81 × 1024 अणु