JAC Class 9 Science Solutions Chapter 7 जीवों में विविधता

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 7 जीवों में विविधता Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 7 जीवों में विविधता

Jharkhand Board Class 9 Science जीवों में विविधता Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
जीवों के वर्गीकरण से क्या लाभ है?
उत्तर:
जीवों के वर्गीकरण से लाभ-

  • जीवों के वर्गीकरण की सहायता से विभिन्न प्रकार के जीवों में पाई जाने वाली समानता एवं विभिन्नता का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
  • जीवों का वर्गीकरण करने से हमें जीवों के अध्ययन में सुविधा होती है।
  • जीवों के विकासक्रम का ज्ञान होता है।
  • जीवों के पारस्परिक सम्बन्धों का ज्ञान होता है।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारण के लिए दो लक्षणों में से आप किस लक्षण का चयन करेंगे?
उत्तर:
कोशिकीय संरचना, शारीरिक संगठन, पोषण के स्रोत एवं विधियों के आधार पर वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारित किया जाता है। वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रम
निम्नवत् हैं-
जगत् संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति।

प्रश्न 3.
जीवों के पाँच जगत में वर्गीकरण के आधार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आर. एच. ह्रिटेकर (1959) ने समस्त जीवों को कोशिकीय संरचना, पोषण के स्रोत तथा भोजन ग्रहण करने की विधि और शारीरिक संगठन के आधार पर निम्नलिखित 5 जगत में बाँटा था-

  • मोनेरा
  • प्रोटिस्टा
  • फंजाई
  • प्लान्टी तथा
  • एनीमेलिया।

1. मोनेरा – इसके अन्तर्गत उन एककोशिकीय प्रोकेरियोटी जीवों को रखा गया है जिनमें कुछ में कोशिका भित्ति पाई जाती है तथा कुछ में नहीं पोषण के आधार पर ये स्वपोषी या विषमपोषी दोनों हो सकते हैं। जैसे- नील हरित शैवाल, बैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा आदि ।

2. प्रोटिस्टा – इस जगत के अन्तर्गत एककोशिक, यूकेरियोटी जीवों को रखा गया है जिनमें गमन के लिए सीलिया, फ्लैजेला नामक संरचनाएँ पाई जाती हैं। ये स्वपोषी और विषमपोषी दोनों तरह के होते हैं जैसे- एककोशिक शैवाल, डाइएटम, प्रोटोजोआ आदि।

3. फंजाई – इसके अन्तर्गत विषमपोषी यूकेरियोटी जीवों को रखा गया है। इन्हें मृतजीवी कहते हैं, क्योंकि ये अपने पोषण के लिए सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहते हैं। जैसे यीस्ट, मशरूम, पेनीसीलियम आदि ।

4. प्लांटी – इसके अन्तर्गत कोशिका भित्ति वाले बहुकोशिक यूकेरियोटी जीवों को रखा गया है। ये स्वपोषी होते हैं और प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस वर्ग में सभी पौधों को रखा गया है। इसके अन्तर्गत थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म एवं एन्जियोस्पर्म आदि पादपं आते हैं।

5. एनीमेलिया – इसके अन्तर्गत ऐसे सभी बहुकोशिक यूकेरियोटी जीवों को रखा गया है, जिनमें कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती है। इस वर्ग के जीव विषमपोषी होते हैं। इसके अन्तर्गत सभी अकशेरुकी तथा कशेरुकी जन्तु आते हैं।

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प्रश्न 4.
पादप जगत के प्रमुख वर्ग कौन हैं? इस वर्गीकरण का क्या आधार है?
उत्तर:
पादप जगत के प्रमुख वर्ग हैं-

  • थैलोफाइटा
  • ब्रायोफाइटा
  • टेरिडोफाइटा
  • जिम्नोस्पर्म तथा
  • एन्जियोस्पर्म।

पादप जगत के वर्गीकरण के आधार-

  • पादप शरीर के प्रमुख घटक पूर्ण रूप से विकसित एवं विभेदित हैं।
  • पादप शरीर में जल, खनिज तथा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का संवहन करने के लिए विशिष्ट ऊतकों (जाइलम एवं फ्लोएम) की उपस्थिति है या नहीं।
  • पौधों में बीजधारण की क्षमता है या नहीं।
  • पौधा नग्नबीजी है या आवृतबीजी है।

प्रश्न 5.
जन्तुओं और पौधों के वर्गीकरण के आधारों में मूल अन्तर क्या है?
उत्तर:
जन्तुओं और पौधों के वर्गीकरण के आधारों में मूल अन्तर शारीरिक संगठा का है। पौधों में कोशिका भित्ति पाई जाती है। इनमें प्रकाशसंश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाने की क्षमता होती है, अन्तः ये स्वपोषी होते हैं। जन्तुओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है इनकी शारीरिक संरचना एवं संगठन जटिल होता है। ये अपना भोजन स्वयं बनाने में सक्षम नहीं होते हैं, अतः ये अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए ये परपोषी अथवा विषमपोषी होते हैं।

प्रश्न 6.
वर्टीब्रेटा (कशेरुक प्राणी) को विभिन्न वर्गों में बाँटने के आधार की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सभी वर्टीब्रेटा जन्तुओं में वास्तविक मेरुदण्ड एवं अन्तः कंकाल पाया जाता है। इसलिए जन्तुओं में पेशियों का वितरण होता है। इनमें ऊतकों एवं अंगों का जटिल विभेदन पाया जाता है। सभी जन्तुओं में नोटोकॉर्ड, मेरुरज्जु, त्रिकोरिक शरीर, युग्मित क्लोम थैली एवं देहगुहा पाई जाती है। पेशियाँ तथा अस्थियाँ प्रचलन में सहायक होती हैं। इन जन्तुओं में नेत्र, कर्ण एवं प्राणेन्द्रियाँ आदि संवेदांग पाये जाते हैं।

वर्टीब्रेटा को उपर्युक्त लक्षणों के आधार पर अग्रलिखित छह: वर्गों में विभाजित किया जाता है-

  • सायक्लोस्टोमेटा
  • मत्स्य
  • जल स्थलचर
  • सरीसृप
  • पक्षी तथा
  • स्तनपायी।

1. सायक्लोस्टोमेटा- ये बिना जबड़े के कशेरुकी हैं। इनका लंबे ईल के आकार का शरीर होता है। इनकी त्वचा शल्क रहित और चिकनी होती है। ये बाह्य परजीवी होते हैं और दूसरे कशेरुकी से संबद्ध होते हैं उदाहरण हैग फिश, पेट्रोमाइजॉन।

2. मत्स्य- ये जलीय जन्तु हैं। इनमें त्वचा पर स्केल पाये जाते हैं। श्वसन क्लोम द्वारा होता है। ये असमतापी प्राणी हैं। कंकाल अस्थियों या उपास्थियों का होता है। ये अण्डे देते हैं। उदाहरण- रोहू, शार्क, लेबियो, हिप्पोकैम्पस आदि।

3. जल स्थलचर-ये जल और स्थल दोनों जगह रहते। ये शल्कहीन, असमतापी व अण्ड प्रजक होते हैं। श्वसन क्लोम, त्वचा तथा फेफड़ों द्वारा होता है। उदाहरण – मेंढक, टोड, सेलामेंडर आदि।

4. सरीसृप – इनका शरीर शल्कों से ढका हुआ, श्वसन फेफड़ों द्वारा, हृदय त्रिकक्षीय, असमतापी व अण्डज प्राणी हैं। ये भूमि पर पेट के बल रेंग कर चलते हैं। उदाहरण- कछुआ, साँप, छिपकली, मगरमच्छ आदि।

5. पक्षी – ये वायु में उड़ते हैं। इनके अग्रपाद पंखों में रूपान्तरित होते हैं। मुख के आगे चोंच होती है। शरीर कोमल परों से ढका होता है। हृदय चार वेश्मी होता है। ये अण्डे देते हैं। उदाहरण- कबूतर, तोता, सारस, कौवा, गौरैया, बतख, मोटर आदि।

6. स्तनपायी – ये समतापी होते हैं। त्वचा पर बाल, स्वेद व तैल ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। हृदय चार कक्षीय, श्वसन फेफड़ों द्वारा, बाह्य कर्ण व स्तन ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। ये बच्चों को जन्म देते हैं। उदाहरण- मनुष्य, बन्दर, गाय, भैंस, शेर, बिल्ली, कुत्ता, कंगारू आदि।

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क्रियाकलाप 7.1. (पा. पु. पृ. सं. 90)
देसी ओर जर्सी गाय की तुलना करें।

प्रश्न 1.
क्या एक देसी गाय, जर्सी गाय के जैसी ही दिखती है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 2.
क्या सभी देसी गायें एक जैसी दिखती हैं?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 3.
क्या हम देसी गायों के झुंड में जर्सी गाय को पहचान सकेंगे?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 4.
पहचानने का हमारा आधार क्या होगा?
उत्तर:
देसी गाय के बड़े सींग तथा कूबड़ होता है। जर्सी गाय में ये नहीं होते।
पृथ्वी पर रहने वाले कुछ जीव तो बहुत छोटे हैं तथा कुछ बहुत बड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, बैक्टीरिया को देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी का उपयोग करना पड़ता है जबकि 100 m लंबे रेडवुड पेड़ भी होते हैं। चीड़ के वृक्ष हजारों वर्ष तक जीवित रहते हैं जबकि कुछ कीट जैसे मच्छरों का जीवन कुछ दिनों का ही होता है। सभी जीवों के रंग रूप भी अलग-अलग होते हैं।

खंड 7 से संबंधित पाठ्यपुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पु. सं. 91)

प्रश्न 1.
हम जीवधारियों का वर्गीकरण क्यों करते हैं?
उत्तर:
संसार में विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जन्तु पाये जाते हैं। इनमें से कुछ जीवों की संरचना सरल एवं कुछ की जटिल होती है। उनका सरलतापूर्वक अध्ययन करने के लिए वर्गीकरण किया जाता है, जो उनकी समानताओं एवं असमानताओं पर आधारित होता है।

प्रश्न 2.
अपने चारों ओर फैले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  • आकार के आधार पर भिन्नता, जैसे जीवाणु (बैक्टीरिया) का आकार कुछ माइक्रोमीटर होता है, जबकि 30 मीटर लम्बे नीले ह्रेल या केलीफोर्निया में मिलने वाले 100 मीटर लम्बे रेडबुड (सिकोया) के पेड़ भी पाये जाते हैं।
  • आयु के आधार पर भिन्नता, जैसे मच्छर का जीवन काल कुछ दिन का होता है जबकि कछुआ 300 वर्ष तक जीवित रहता है।

खण्ड 7.2 से सम्बन्धित पाठय-पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
आदिम जीव किन्हें कहते हैं? ये तथाकधित उन्नत जीवों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
जिन जीवों की शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से लेकर आज तक कोई खास (महत्वपूर्ण) परिवर्तन नहीं हुआ है उनको आदिम जीव कहते हैं। किन्तु ऐरो जीव जिनकी शारीरिक संरचना में विकास के दौरान पर्याप्त प।रंवर्तन हुआ है, उनको उन्नत जीव कहते हैं।

प्रश्न 2.
क्या उन्नत जीव और जटिल जीव एक होते हैं?
उत्तर:
नहीं, उन्नत जीव और जटिल भिन्न होते हैं।

खण्ड 7.3 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पृ. सं. 96)

प्रश्न 1.
मोनेरा अथवा प्रोटिस्टा जैसे जीवों के वर्गीकरण के मापदण्ड क्या हैं?
उत्तर:
मोनेरा के मापदण्ड-

  • इस वर्ग के कुछ जीवों में कोशिका भित्ति पाई जाती है और कुछ में नहीं।
  • इन जीवों में न तो संगठित केन्द्रक और कोशिकांग होते हैं और न ही उनका शरीर बहुकोशिक होता है।
  • ये स्वपोषी तथा विषमपोषी दोनों होते हैं।

प्रोटिस्टा के मापदण्ड-

  • इस वर्ग के जीवों के शरीर में गमन के लिए सीलिया, फ्लैजेला नामक संरचनाएँ होती हैं।
  • इस वर्ग के जीव एककोशिक होते हैं।
  • ये स्वपोषी और विषमपोषी दोनों तरह के होते हैं।

प्रश्न 2.
प्रकाश संश्लेषण करने त्राले एककोशिक यूकेरियोटी जीव को आप किस जगत् में रखेंगे?
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण करने वाले एककोशिक यूकेरियोटी जीव को प्रोटिस्टा वर्ग में रखेंगे।

प्रश्न 3.
वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में किस समूह में सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों को और किस समूह में सबसे ज्यादा संख्या में जीवों को रखा जायेगा?
उत्तर:
सबसे कम संख्या में समान लक्षण वाले जीवों को जाति (स्पीशीज) में तथा सबसे ज्यादा संख्या में समान लक्षण वाले जीवों को जगत (किंगडम) में रखा जायेगा।

क्रियाकलाप 7.2.
भिगोये हुए चने, गेहूँ, मक्का, मटर और इमली के बीज लिए। ये बीज जल अवशोषित करके नरम हो जाते हैं। इन बीजों को दो बराबर भागों में बाँटते हैं। जिन बीजों में दो दालें दिखाई देती हैं वे द्विबीजपत्री कहलाते हैं। जो बीज नहीं फूटते और दालें नहीं दिखाई देती हैं वे एक बीजपत्री कहलाते हैं। अब इन पौधों की जड़ों पत्तियों और फलों के लक्षणों का निरीक्षण करते हैं।

प्रश्न 1.
एक बीजपत्री पौधों के लक्षण लिखो।
उत्तर:
एक बीजपत्री पौधों के बीजों को भिगोने और उनको फाड़ने पर दो दालें दिखाई नहीं देती हैं।

प्रश्न 2.
चना तथा मटर के बीजों में कितने बीजपत्र होते हैं?
उत्तर:
चना तथा मटर के बीजों में दो-दो बीजपत्र होते हैं।

प्रश्न 3.
एक बीजपत्री पौधों में कैसी जड़ें होती हैं?
उत्तर:
एक बीजपत्री पौधों में रेशेदार जड़ें होती हैं।

प्रश्न 4.
द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में किस तरह का शिरा विन्यास होता है?
उत्तर:
द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में जालिकावत् शिरा विन्यास होता है।

खड 7.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पू. सं. 99)

प्रश्न 1.
सरलतम पौधों को किस वर्ग में रखा गया है?
उत्तर:
सरलतम पौधों को थैलोफाइटा वर्ग में रखा गया है।

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प्रश्न 2.
टैरिडोफाइट और फैनरोगैम में क्या अन्तर है?
उत्तर:

टेरिडोफाइटफैनरोगैम
1. इनमें नग्न भ्रूण पाए जाते हैं, जिन्हें बीजाणु कहते हैं।1. इनमें जनन ऊतक पूर्ण विकसित एवं विभेदित होते हैं।
2. जननांग अप्रत्यक्ष होते हैं।2. इनमें पुष्प तथा बीजों का निर्माण होता है।
3. ये पौधे बीज रहित होते हैं।3. ये बीज युक्त पौधे होते हैं।

प्रश्न 3.
जिम्नोस्पर्म और एन्जियोस्पर्म एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:

जिम्नोस्पर्मएन्जियोस्पर्म
1. इनमें बीज फलों के अन्दर बन्द नहीं होते हैं अर्थात् बीज नग्न होते हैं।1. इनमें बीज फलों के अन्दर बन्द रहते हैं; अर्थात् ये आवृतबीजी होते हैं।
2. इनमें जनन रचनाएँ शंकु कहलाती हैं।
उदाहरण – साइकस, पाइनस।
2. इनमें जनन रचनाएँ पुष्प कहलाती हैं।
उदाहरण-गेहूँ, चावल, चना, मटर, सेम।

खण्ड 7.5 से सम्बन्धित पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पृ. सं. 105)

प्रश्न 1.
पोरीफेरा और सिलेंटरेटा वर्ग के जन्तुओं में क्या अन्तर है?
उत्तर:
अन्तर

पोरीफेरासिलेंटरेटा
1. ये छिद्रयुक्त व अचल जीव हैं जो किसी आधार से चिपके रहते हैं।1. ये जलीय जन्तु हैं। इनके शरीर में एक छिद्र होता है।
2. इनमें नालतन्त्र पाया जाता है।2. इनमें देहगुहा (सीलेन्ट्रोन) पाई जाती है।
3. इनमें ऊतकों का विभेदन नहीं होता है।3. इनमें शारीरिक संगठन ऊतकीय स्तर का होता है।

प्रश्न 2.
एनीलिडा के जन्तु, आर्थ्रोपोडा के जन्तुओं से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
भिन्नता

एनीलिडाआर्थ्र्रोपोडा
1. इनका शरीर द्विपार्श्वसममित एवं त्रिकोरक होता है।1. इनमें भी द्विपाशर्वसममित होती है।
2. परिसंचरण तन्त्र खुला होता है।2. परिसंचरण तन्त्र बन्द प्रकार का होता है।
3. देहगुहा रक्त से भरी होती है।3. देहगुहा रक्त से भरी नहीं होती है।
4. इनमें जोड़दार टाँगें नहीं होती हैं।4. इनमें जोड़दार टाँगें होती हैं।

प्रश्न 3.
जल स्थलचर और सरीसृप में क्या अन्तर है?
उत्तर:
अन्तर

जल स्थलचरसरीसृप
1. इनके शरीर पर शल्क नहीं होते हैं।1. इनके शरीर पर शल्क होते हैं।
2. त्वचा पर श्लेष्म ग्रन्थियाँ होती हैं।2. श्लेष्म ग्रन्थियाँ नहीं होती हैं।
3. श्वसन क्लोम, त्वचा अथवा फेफड़ों द्वारा होता है।3. श्वसन केवल फेफड़ों द्वारा होता है।
4. ये अण्डे जल में देते हैं और इनके अण्डे कवच रहित होते हैं।4. ये अण्डे स्थल पर देते हैं और इनके अण्डे कवचयुक्त होते हैं।

प्रशुन 4.
पक्षी वर्ग और स्तनपायी वर्ग के जन्तुओं में क्या अन्तर है?
उत्तर:
अन्तर

पक्षीस्तनपायी
1. त्वचा परों से ढकी रहती है।1. त्वचा पर बाल, स्वेद व तेल ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं।
2. अगली टाँगें उड़ने के लिए पंखों (Wings) में रूपान्तरित होती हैं।2. अगली टाँगें प्रचलन तथा हाथ वस्तुओं को पकड़ने के लिए उपयोजित होते हैं।
3. कर्णपल्लव तथा स्तनग्रन्थियाँ नहीं पाई जाती हैं।3. कर्ण पल्लव तथा स्तनग्रन्थियाँ पाई जाती हैं।
4. ये अण्डे देते हैं।4. ये प्रायः शिशुओं को जन्म देते हैं।
5. इनके मुख के आगे चोंच होती है।5. इनमें चोंच नहीं होती है।

क्रियाकलाप 7.3 (पा. पु. पृ. सं. 105)
निम्नलिखित जन्तुओं और पौधों के नाम जितनी भाषाओं में सम्भव हो सके आप बताएँ-
1. चीता 2. मोर 3. चींटी 4. नीम 5. कमल 6. आलू [नोट-अध्यापक की सहायता से छात्र स्वयं करें।] (पा. पु. पृ. सं. 106)

क्रियाकलाप 7.4 (पा. पु. पृ. सं. 106)
किन्हीं पाँच जन्तुओं और पौधों के वैज्ञानिक नाम का पता लगाइए। क्या इनके वैज्ञानिक नामों और सामान्य नामों में कोई समानता है?

क्रियाकलाप 7.3 तथा 7.4 से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
किन्हीं पाँच जन्तुओं के वैज्ञानिक नाम बताओ।
उत्तर:

सामान्य नामवैज्ञानिक नाम
1. शेरफेलिस लिओ (Falis leo)
2. चीताफेलिस टाइग्रिस (Falis trigris)
3. कुत्ताकेनिस फेमिलीएरिस (Canis familiaris)
4. मनुष्यहोमो सेपियन्स (Homo sepiance)
5. हाथीएलीफस इण्डिकस (Elephus indicus)

प्रश्न 2.
किन्हीं पाँच पौधों के वैज्ञानिक नाम बताओ।
उत्तर:

सामान्य नामवैज्ञानिक नाम
1. सरसोंब्रेसिका कमपेस्ट्रिस (Brassica campestris)
2. आलूसोलेनम ट्यूबरोसम (Solanum tuberosum)
3. मटरपाइसम सेटाइवम (Pisum sativum)
4. गेहूँट्रिटिकम सेटाइवम (Triticum sativum)
5. तुलसीओसिमम सेंक्टम (Ocimum sanctum)

प्रश्न 3.
जन्तुओं के वर्गीकरण का चार्ट बनाइए।
उत्तर:
प्राणी
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 7 जीवों में विविधता 1

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन 

Jharkhand Board JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. स्थानीय स्वशासन का सम्बन्ध है।
(क) स्थानीय हित से
(ख) राष्ट्रीय हित से
(ग) प्रादेशिक हित से
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं से
उत्तर:
(क) स्थानीय हित से

2. जीवन्त और मजबूत स्थानीय शासन सुनिश्चित करता है।
(क) जनता की सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही को
(ख) जनता की निरंकुशता को
(ग) जनता की स्वेच्छाचारिता को
(घ) सामन्तशाही को।
उत्तर:
(क) जनता की सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही को

3. ब्रिटिश काल में भारत में स्थानीय शासन के निर्वाचित निकाय को कहा जाता था।
(क) ग्राम पंचायत
(ख) तालुका पंचायत
(ग) नगर परिषद
(घ) मुकामी बोर्ड
उत्तर:
(घ) मुकामी बोर्ड

4. जब संविधान बना तो स्थानीय शासन का विषय सौंप दिया गया।
(क) संघ की सरकार को
(ख) प्रदेशों की सरकार को
(ग) मुकामी बोर्डों को
(घ) उपर्युक्त में से किसी को नहीं
उत्तर:
(ख) प्रदेशों की सरकार को

5. पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित संविधान संशोधन है।
(क) 72वां संविधान संशोधन
(ख) 78वां संविधान संशोधन
(ग) 73वां संविधान संशोधन
(घ) 74वां संविधान संशोधन
उत्तर:
(ग) 73वां संविधान संशोधन

6. अब प्रत्येक पंचायती निकाय का चुनाव किया जाता है।
(क) 3 साल के लिए
(ख) चार साल के लिए
(ग) 6 साल के लिए
(घ) पांच साल के लिए
उत्तर:
(घ) पांच साल के लिए

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

7. सभी पंचायती संस्थाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं।
(क) 7 1/2 प्रतिशत
(ख) 50 प्रतिशत
(ग) 20 प्रतिशत
(घ) 33 प्रतिशत
उत्तर:
(घ) 33 प्रतिशत

8. संविधान की 11वीं अनुसूची में दर्ज विषय प्रदान किये गये हैं।
(क) संघ सरकार को
(ख) राज्य सरकारों को
(ग) स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर:
(ग) स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को

9. शहरी स्थानीय निकायों का कुल राजस्व उगाही में योगदान है।
(क) 0.24 प्रतिशत का
(ख) 4 प्रतिशत का
(ग) 24 प्रतिशत का
(घ) 76 प्रतिशत का
उत्तर:
(क) 0.24 प्रतिशत का

10. संविधान का कौनसा संशोधन शहरी स्थानीय शासन से संबंधित है?
(क) 60वाँ
(ख) 62वाँ
(ग) 63वाँ
(घ) 74वाँ
उत्तर:
(घ) 74वाँ

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. गाँव और जिला स्तर के शासन को …………………… कहते हैं।
उत्तर:
स्थानीय शासन

2. स्थानीय शासन का विषय है-आम नागरिक की समस्यायें और उसकी रोजमर्रा की ………………….
उत्तर:
जिंदगी

3. संविधान का ……………… संविधान संशोधन गाँव के स्थानीय शासन से जुड़ा है।
उत्तर:
63वाँ

4. संविधान का 74वाँ संशोधन ………………… स्थानीय शासन से जुड़ा है।
उत्तर:
शहरी

5. सभी पंचायत संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें …………………… के लिए आरक्षित हैं।
उत्तर:
महिलाओं।

निम्नलिखित में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये

1. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की लगभग 31 प्रतिशत जनसंख्या शहरी इलाकों में रहती है।
उत्तर:
सत्य

2. अब सभी प्रदेशों में पंचायती राज व्यवस्था का ढाँचा त्रि-स्तरीय है।
उत्तर:
सत्य

3. हर पंचायती निकाय की अवधि 3 साल की होती है।
उत्तर:
असत्य

4. ऐसे 29 विषय जो पहले समवर्ती सूची में थे, अब पहचान कर संविधान की 11वीं अनुसूची में दर्ज कर लिए गए हैं।
उत्तर:
असत्य

5. प्रदेशों की सरकार के लिए हर 5 वर्ष पर एक प्रादेशिक वित्त आयोग बनाना जरूरी है।
उत्तर:
सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये

1. पंचायत समिति(अ) नगरीय स्थानीय स्वशासन की संस्था
2. नगर निगम(ब) पी.के. थुंगन समिति (1989)
3. सामुदायिक विकास(स) सन् 1993 कार्यक्रम
4. स्थानीय शासन के निकायों को संवैधानिक दर्जा(द) सन् 1952 प्रदान करने की सिफारिश की
5. 73वां और 74वां संविधान संशोधन लागू हुए(य) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की संस्था

उत्तर:

1. पंचायत समिति(य) ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की संस्था
2. नगर निगम(अ) नगरीय स्थानीय स्वशासन की संस्था
3. सामुदायिक विकास(द) सन् 1952
4. स्थानीय शासन के निकायों को संवैधानिक दर्जा(ब) पी.के. थुंगन समिति (1989)
5. 73वां और 74वां संविधान संशोधन लागू हुए(स) सन् 1993

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पंचायती राज क्या है?
उत्तर:
पंचायती राज उस व्यवस्था को कहते हैं जिसके अन्तर्गत ग्रामों में रहने वाले लोगों को अपने गांवों का प्रशासन तथा विकास का अधिकार दिया गया है।

प्रश्न 2.
स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से क्या आशय है?
उत्तर:
स्थानीय मामलों का प्रबन्ध करने वाली संस्थाओं को स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ कहते हैं।

प्रश्न 3.
पंचायती राज के किन्हीं दो उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पंचायती राज के दो प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं।

  1. ग्रामों का विकास करना व उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
  2. ग्रामीणों को उनके अधिकार और कर्तव्य का ज्ञान कराना।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

प्रश्न 4.
पंचायती राज संस्थाओं में स्त्रियों के लिए कितनी सीटें आरक्षित की गई हैं?
उत्तर:
73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों में स्त्रियों के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गई हैं।

प्रश्न 5.
ग्राम सभा क्या है?
उत्तर:
ग्राम सभा एक तरह से गांव की संसद है। एक ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। इसकी एक वर्ष में दो सामान्य बैठकें होना आवश्यक है।

प्रश्न 6.
स्थानीय शासन का विषय क्या है?
उत्तर:
स्थानीय शासन का विषय है। आम नागरिक की समस्यायें और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी।

प्रश्न 7.
स्थानीय शासन की मान्यता क्या है?
उत्तर:
स्थानीय शासन की मान्यता है कि स्थानीय ज्ञान और स्थानीय हित लोकतांत्रिक फैसले लेने के लिए तथा कारगर और जन 1 हितकारी प्रशासन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 8.
संविधान में स्थानीय शासन का विषय किसे सौंपा गया है?
उत्तर:
संविधान में स्थानीय शासन को राज्य सूची में रखा गया है। प्रदेशों को इस बात की छूट है कि वे स्थानीय शासन के बारे में अपनी तरह का कानून बनाएं।

प्रश्न 9.
ग्यारहवीं अनुसूची में दर्ज किन्हीं दो विषयों के नाम लिखिये।
उत्तर:
कृषि, लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, जल संचय का विकास।

प्रश्न 10.
73वें संविधान संशोधन द्वारा राज्य सूची के कितने विषय 11वीं अनुसूची में दर्ज कर लिए गये हैं?
उत्तर:
73वें संविधान संशोधन के द्वारा राज्य सूची के 29 विषय संविधान की 11वीं अनुसूची में दर्ज कर लिये गये हैं।

प्रश्न 11.
11वीं अनुसूची के विषयों का स्थानीय शासन को वास्तविक हस्तांतरण किस पर निर्भर है?
उत्तर:
11वीं अनुसूची में दर्ज विषयों का वास्तविक हस्तांतरण प्रदेश के कानून पर निर्भर है। हर प्रदेश यह फैसला करेगा कि इन 29 विषयों में से कितने को स्थानीय निकायों के हवाले करना है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

प्रश्न 12.
संविधान के 74वें संविधान संशोधन का संबंध किससे है?
उत्तर:
संविधान के 74वें संशोधन का सम्बन्ध शहरी स्थानीय शासन के निकाय अर्थात् नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषदों से है।

प्रश्न 13.
भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है?
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की लगभग 31 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है।

प्रश्न 14.
आज ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं की संख्या क्या है?
उत्तर:
आज ग्रामीण भारत में स्थानीय स्वशासन से संबंधित

  1. जिला पंचायतों की संख्या 500,
  2. मध्यवर्ती अथवा प्रखंड स्तरीय पंचायत की संख्या 6000 तथा
  3. ग्राम पंचायतों की संख्या 2,40,000 है

प्रश्न 15.
वर्तमान में शहरी भारत में कितने नगर निगम, नगरपालिकाएँ और नगर पंचायतें हैं?
उत्तर:
वर्तमान में शहरी भारत में 100 से ज्यादा नगर निगम, 1400 नगरपालिका तथा 2000 नगर पंचायतें विद्यमान हैं।

प्रश्न 16.
पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर:
राज्य निर्वाचन आयुक्त की।

प्रश्न 17.
जिला परिषद् क्या है?
उत्तर:
जिला परिषद् पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था का शीर्ष निकाय है।

प्रश्न 18.
नगर निगम के सर्वोच्च अधिकारी को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
नगर निगम के सर्वोच्च अधिकारी को महापौर कहा जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान में स्थानीय शासन के मामले को अधिक महत्त्व न मिलने के कारणों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
संविधान में निम्नलिखित कारणों से स्थानीय शासन के मामले को अधिक महत्त्व नहीं मिल सका

  1. देश-विभाजन की खलबली के कारण संविधान निर्माताओं का झुकाव केन्द्र को मजबूत बनाने का रहा। नेहरू स्वयं अति स्थानीयता को राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरा मानते थे।
  2. डॉ. अम्बेडकर का कहना था कि ग्रामीण भारत में जाति-पांति और आपसी फूट का बोलबाला है। ऐसे माहौल में स्थानीय शासन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पायेगा।

प्रश्न 2.
स्थानीय शासन के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थानीय शासन का महत्त्व।

  1. स्थानीय शासन लोगों के सबसे नजदीक होता है। इस कारण उनकी समस्याओं का समाधान बहुत तेजी से तथा कम खर्चे में हो जाता है।
  2. जीवन्त और मजबूत स्थानीय शासन सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही को सुनिश्चित करता है।
  3. मजबूत स्थानीय शासन से लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है।

प्रश्न 3.
ब्राजील के संविधान का कौनसा प्रावधान स्थानीय शासन की शक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है? ब्राजील के संविधान में प्रांत, संघीय जिले तथा नगर परिषदों में हर एक को स्वतंत्र शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। जिस तरह गणराज्य (Republic) राज्यों के काम-काज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, ठीक उसी तरह राज्य भी नगरपालिका-नगरपरिषद के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। अहस्तक्षेप का यह प्रावधान स्थानीय शासन की शक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है।

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प्रश्न 4.
73वें संविधान संशोधन की कोई चार विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
73वें संविधान संशोधन की विशेषताएँ-

  • त्रिस्तरीय बनावट: 73वें संशोधन के द्वारा अब प्रदेशों में पंचायती राज व्यवस्था का ढाँचा त्रि-स्तरीय है।
    1. ग्राम पंचायत
    2. मध्यवर्ती या खंड स्तरीय पंचायत और
    3. जिला पंचायत।
  • ग्राम सभा: संविधान संशोधन में अब ग्राम सभा की दो बैठकें अनिवार्य कर दी गई हैं। ग्राम पंचायत का हर मतदाता इसका सदस्य होता है।
  • चुनाव: पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तर के चुनाव अब सीधे जनता करती है। हर पंचायती निकाय की अवधि 5 साल की होती है।
  • आरक्षण: सभी पंचायत संस्थाओं में एक-तिहाई आरक्षण महिलाओं के लिए दिया गया है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी आरक्षण के प्रावधान किये गये हैं।

प्रश्न 5.
ग्यारहवीं अनुसूची में किस प्रकार के विषय रखे गये हैं? किन्हीं पांच विषयों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
ग्यारहवीं अनुसूची में राज्य सूची के 29 विषय रखे गये हैं। अधिकांश मामलों में इन विषयों का सम्बन्ध स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास और कल्याण के कामकाज से है।11वीं अनुसूची के पांच प्रमुख विषय ये हैं।

  1. कृषि
  2. लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, जल संचय का विकास
  3. लघु उद्योग, इसमें खाद्य प्रसंस्करण के उद्योग शामिल हैं।
  4. ग्रामीण आवास
  5. ग्रामीण विद्युतीकरण।

प्रश्न 6.
ग्राम पंचायत की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ग्राम पंचायत की भूमिका-ग्रामीण जीवन में ग्राम पंचायत एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो कि निम्नलिखित है।

  1. ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में जल आपूर्ति, शांति एवं व्यवस्था, स्वच्छता तथा जन-स्वास्थ्य के प्रति उत्तरदायी
  2. ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में स्थानीय सरकार के समस्त कार्य करती है।
  3. यह अपने क्षेत्र में ग्रामीण विकास, ग्रामीण सुधार, सामाजिक न्याय तथा आर्थिक विकास के लिए उत्तरदायी है तथा उसके लिए योजनाएँ बनाती है तथा उन्हें क्रियान्वित करती है।
  4. ग्राम पंचायत समूची पंचायती राज व्यवस्था का आधार है जिसकी सफलता पर ही इसकी सफलता निर्भर करती है।
  5. ग्राम पंचायत ग्रामीणों को प्रशासन का प्रशिक्षण देती है जो कि भारतीय लोकतंत्र की सफलता का आधार है।

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प्रश्न 7.
राज्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
राज्य चुनाव आयुक्त: 73वें तथा 74वें संविधान संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन के लिए एक राज्य चुनाव आयुक्त की स्थापना की है। इस आयुक्त की जिम्मेदारी राज संस्थाओं के चुनाव कराने की होगी। प्रदेश का यह चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र अधिकारी है। इसका संबंध भारत के चुनाव आयोग से नहीं होता।

प्रश्न 8.
राज्य वित्त आयोग की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
राज्य वित्त आयोग: 73वें व 74वें संविधान संशोधन में प्रदेशों की सरकार के लिए पांच वर्ष पर एक प्रादेशिक वित्त आयोग बनाना आवश्यक है। यह आयोग एक तरफ प्रदेश और स्थानीय शासन की व्यवस्थाओं के बीच तो दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण स्थानीय शासन की संस्थाओं के बीच राजस्व के बंटवारे का पुनरावलोकन करेगा।

प्रश्न 9.
पंचायती राज व्यवस्था की त्रिस्तरीय बनावट क्या है? था
उत्तर:
त्रिस्तरीय बनावट: भारत में वर्तमान में सभी राज्यों में पंचायती राज व्यवस्था का ढांचा त्रिस्तरीय है।

  1. ग्राम पंचायत: पहले स्तर पर या सबसे नीचे ग्राम पंचायत आती है जिसमें एक या एक से ज्यादा गांव होते
  2. खंड या तालुका पंचायत-मवर्ती स्तर मंडल का है जिसे खंड या तालुका भी कहा जाता है। यह अनेक ग्राम पंचायतों से मिलकर बना होता है।
  3. जिला पंचायत: सबसे ऊपर के पायदान पर जिला पंचायत का स्थान है। इसके दायरे में जिले का सम्पूर्ण ग्रामीण इलाका आता है।

प्रश्न 10.
73वें संविधान संशोधन में चुनाव सम्बन्धी क्या प्रावधान किये गये हैं?
उत्तर:
निर्वाचन सम्बन्धी प्रावधान: 73वें संविधान संशोधन के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तर के चुनाव सीधे जनता करती है। हर पंचायती निकाय की अवधि पांच साल की होती है। यदि प्रदेश की सरकार पांच साल पूरे होने से पहले पंचायत को भंग करती है तो इसके छ: माह के अन्दर नये चुनाव हो जाने चाहिए।

प्रश्न 11.
73वें तथा 74वें संशोधन के बाद भारत में स्थानीय स्वशासन को किस प्रकार मजबूती मिली है?
उत्तर:
73वें तथा 74वें संशोधन के बाद भारत में स्थानीय स्वशासन को अग्र रूपों में मजबूती मिली है।

  1. स्थानीय निकायों की चुनावों की निश्चितता के बाद से चुनाव के कारण निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
  2. इन संशोधनों ने देश भर की पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिका की संस्थाओं की बनावट को एकसा किया है।
  3. अब महिलाओं के आरक्षण के प्रावधान के कारण स्थानीय निकायों में महिलाओं की भारी संख्या में मौजूदगी सुनिश्चित हुई है।
  4. दलित तथा आदिवासियों को आरक्षण मिलने से स्थानीय निकायों की सामाजिक बनावट में भारी बदलाव आए हैं।

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प्रश्न 12.
वर्तमान में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के कारगर ढंग से कार्य नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के अप्रभावी होने के कारण यद्यपि सैद्धान्तिक रूप अर्थात् 73वें तथा 74वें संविधान संशोधनों के बाद भारत में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को समर्थ तथा सक्षम बनाने का प्रयास किया गया है, लेकिन व्यवहार में कुछ कारणों ने अभी भी इन्हें दुर्बल बना रखा है और ये संस्थाएँ अपनी भूमिका सार्थक ढंग से नहीं निभा पा रही हैं।

1. स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने की छूट का न होना:
संविधान के संशोधनों ने 29 विषयों को स्थानीय शासन के हवाले किया है। ये सारे विषय स्थानीय विकास तथा कल्याण की जरूरतों से संबंधित हैं। स्थानीय शासन के कामकाज के पिछले दशकों के अनुभव बताते हैं कि भारत में इसे अपना कामकाज स्वतंत्रतापूर्वक करने की छूट बहुत कम है। अनेक प्रदेशों ने अधिकांश विषय स्थानीय निकायों को नहीं सौंपे हैं। फलतः वे कारगर ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं।

2. धन की कमी:
स्थानीय निकायों के पास धन बहुत कम होता है। वे प्रदेश और केन्द्र की सरकार पर वित्तीय मदद के लिए निर्भर होते हैं। इससे कारगर ढंग से काम कर सकने की उनकी क्षमता का बहुत क्षरण हुआ है।

प्रश्न 13.
1992 के 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
उत्तर:
1992 के 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं।

  1. नगरपालिकाओं में समाज के कमजोर वर्गों तथा महिलाओं को आरक्षण के माध्यम से सार्थक प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया है।
  2. विधान की 12वीं अनुसूची नगरीय संस्थाओं को व्यापक शक्तियाँ प्रदान करती है।
  3. नगरीय संस्थाओं के लिए वित्तीय साधन जुटाने के लिए एक वित्तीय आयोग की स्थापना का प्रावधान है।
  4. नगर निगम या नगरपालिकाओं का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है, लेकिन इससे पूर्व इनके भंग हो जाने की दशा में नयी संस्थाओं के गठन के लिए 6 महीनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होगा। चुनावों की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है।

प्रश्न 14.
नगरीय स्वशासी संस्थाएँ किन-किन समस्याओं से जूझ रही हैं?
उत्तर:
नगरीय स्वशासी संस्थाओं की समस्यायें: नगरीय स्वशासी संस्थाएँ नगर निगम तथा नगरपालिकाएँ। आज निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रही हैं।

  1. सरकार का हस्तक्षेप: स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के कामकाज में राज्य सरकार और जिला अधिकारियों का अनावश्यक हस्तक्षेप उनके कार्यों में रुकावट डाल रहा है। यदि एक नगर निगम में उस दल का बहुमत है जो दल राज्य सरकार में विरोधी दल है तो राज्य मंत्रिमंडल उसे ठीक से कार्य नहीं करने देता।
  2. राजनेताओं द्वारा दबाव: नगरीय स्वशासी संस्थाओं पर शहरी राजनेताओं द्वारा तरह-तरह के दबाव डाले जाते हैं।
  3. जनसंख्या वृद्धि: शहरी जनसंख्या में जनसंख्या बेहताशा ढंग से बढ़ी है। जनसंख्या वृद्धि के कारण आवास सुविधाओं का बड़ा अभाव है तथा तेजी से गंदी बस्तियों का विकास हो रहा है। इससे पर्यावरण सम्बन्धी समस्यायें बढ़ी हैं तथा अपराध भी बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 15.
स्थानीय शासन के महत्त्व का विवेचन कीजिये।
उत्तर:
स्थानीय शासन का महत्त्व ( उपयोगिता ) स्थानीय शासन आम आदमी के सबसे नजदीक का शासन है। इसका विषय है। आम नागरिक की समस्यायें और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी। लोकतंत्र और कारगर तथा जनहितकारी प्रशासन की दृष्टि से यह अत्यन्त उपयोगी है। इसके महत्त्व को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है।

1. स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान तीव्र गति से तथा कम खर्च में:
चूंकि स्थानीय शासन लोगों के सबसे नजदीक होता है इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान बहुत तेजी से तथा कम खर्चे में हो जाता है। उदाहरण के लिए, गीता राठौड़ ने ग्राम पंचायत के सरपंच के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जमनिया तालाब पंचायत में बड़ा बदलाव कर दिखाया। बेंगैसवल गांव की जमीन पर उस गांव का ही हक रहा।

2. सक्रिय भागीदारी तथा उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही: लोकतंत्र की सफलता के लिए सार्थक भागीदारी और जवाबदेही की सुनिश्चितता आवश्यक होती है। जीवन्त और मजबूत स्थानीय शासन सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। जो काम स्थानीय स्तर पर किये जा सकते हैं वे काम स्थानीय लोगों और इनके प्रतिनिधियों के हाथ में रहने चाहिए। लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है। आम जनता प्रादेशिक या केन्द्रीय सरकार से कहीं ज्यादा परिचित स्थानीय शासन से होती है। इस तरह, स्थानीय शासन को मजबूत करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।

प्रश्न 16.
संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में दर्ज कोई 10 विषयों के नाम लिखिये।
उत्तर:
ग्यारहवीं अनुसूची में दर्ज विषय ग्यारहवीं अनसूची में दर्ज प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं।

  1. कृषि
  2. लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, जल संचय का विकास
  3. लघु उद्योग, इसमें खाद्य प्रसंस्करण के उद्योग शामिल हैं।
  4. ग्रामीण आवास
  5. पेयजल
  6. सड़क, पुलिया
  7. ग्रामीण विद्युतीकरण
  8. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
  9. शिक्षा इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा शामिल है।
  10. तकनीकी प्रशिक्षण तथा व्यावसायिक शिक्षा।

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प्रश्न 17.
बोलिविया के स्थानीय स्वशासन पर एक टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
बोलिविया में स्थानीय स्वशासन लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के सफल उदाहरण के रूप में अक्सर लातिनी अमेरिका के देश बोलिविया का नाम लिय जाता है। यथा बोलिविया में स्थानीय स्वशासन का संगठन: सन् 1994 में जनभागीदारी कानून के तहत यहाँ सत्ता का विकेन्द्रीकरण कर स्थानीय स्तर नगरपालिका प्रशासन को सत्ता सौंपी गई है। बोलिविया में 314 नगरपालिकाएँ हैं। नगरपालिकाओं का नेतृत्व जनता द्वारा निर्वाचित महापौर करते हैं। इन्हें Presidente Municipal भी कहा जाता है महापौर के साथ एक नगरपालिका परिषद होती है। स्थानीय स्तर पर देशव्यापी चुनाव हर पांच वर्ष पर होते हैं। बोलिविया स्थानीय स्वशासन की शक्तियाँ।

  1. यहाँ स्थानीय सरकार को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधा बहाल करने तथा आधारभूत ढांचे के रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  2. यहाँ देशव्यापी राजस्व उगाही का 20 प्रतिशत नगरपालिकाओं को प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिया जाता है।
  3. नगरपालिका को मोटर वाहन, शहरी संपदा तथा बड़ी कृषि सम्पदा पर कर लगाने का अधिकार है इन नगरपालिकाओं के बजट का अधिकांश हिस्सा वित्तीय हस्तांतरण प्रणाली के जरिये प्राप्त होता है। इस प्रकार बोलिविया में एक ऐसी प्रणाली अपनायी गई है कि इन नगरपालिकाओं को धन स्वतः हस्तांतरित हो जाये।

प्रश्न 18.
स्पष्ट कीजिये कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान के कारण महिलाओं की भारी संख्या में मौजूदगी सुनिश्चित हुई है।
उत्तर:
73वें तथा 74वें संविधान संशोधनों के तहत पंचायतों और नगरपालिकाओं में सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित किये जाने का प्रावधान किया गया है। सभी राज्यों की सरकारों ने अपने स्थानीय स्वशासन सम्बन्धी कानूनों में इस प्रावधान का पालन किया। महिलाओं के लिए आरक्षण के इस प्रावधान के कारण स्थानीय निकायों में महिलाओं की भारी संख्या में मौजूदगी सुनिश्चित हुई है। यथा

  1. निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की एक बड़ी संख्या अध्यक्ष और सरपंच जैसे पदों पर आसीन हुई है। आज कम से कम 200 महिलाएँ जिला पंचायतों की अध्यक्ष हैं। 2000 महिलाएँ प्रखंड अथवा तालुका पंचायत की अध्यक्ष हैं और ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच की संख्या 80000 से ज्यादा है।
  2. नगर निगमों में 30 महिलाएँ मेयर (महापौर) हैं। नगरपालिकाओं में 500 से ज्यादा महिलाएँ अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। लगभग 650 नगर पंचायतों की प्रधानी महिलाओं के हाथ में है। संसाधनों पर अपने नियंत्रण की दावेदारी करके महिलाओं ने ज्यादा शक्ति और आत्मविश्वास अर्जित किया है। साथ ही इससे स्त्रियों में राजनीति के प्रति समझ बढ़ी है। स्थानीय निकायों में महिलाओं की मौजूदगी से चर्चा ज्यादा संवेदनशील हुई है।

प्रश्न 19.
स्पष्ट कीजिये कि स्थानीय शासन की संस्थाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व से निकायों की सामाजिक बुनावट में भारी बदलाव आए हैं।
उत्तर:
स्थानीय निकायों की सामाजिक बुनावट में परिवर्तन:
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को संविधान संशोधन ने अनिवार्य बना दिया था । इसके साथ ही, अधिकांश प्रदेशों ने पिछड़ी जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान बनाया है। भारत की जनसंख्या में 16.2 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा 8.2 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति है। स्थानीय शासन के शहरी तथा ग्रामीण संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों में इन समुदायों के सदस्यों की संख्या लगभग 6.6 लाख है। इससे स्थानीय निकायों की सामाजिक बुनावट में भारी बदलाव आए हैं।

ये निकाय जिस सामाजिक सच्चाई के बीच काम कर रहे हैं, अब उस सच्चाई की नुमाइंदगी इन निकायों के जरिये ज्यादा हो रही है। कभी-कभी इससे तनाव पैदा होता है। लेकिन तनाव और संघर्ष हमेशा बुरे नहीं होते। जब भी लोकतंत्र को ज्यादा सार्थक बनाने और ताकत से वंचित लोगों को ताकत देने की कोशिश होगी तो समाज में संघर्ष और तनाव होना ही है।

प्रश्न 20.
” सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के आरक्षण ने ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व के स्वरूप को परिवर्तन कर दिया है। ” कैसे ? स्पष्ट करें।
उत्तर:
ग्रामीण स्तर पर आरक्षण ने नेतृत्व के स्वरूप में परिवर्तन ला दिया है। 73वें संविधान संशोधन के अन्तर्गत पंचायती राज संस्थाओं में प्रत्येक स्तर पर आरक्षण न केवल सीटों के लिए किया गया है, बल्कि उनके अध्यक्षों व सरपंचों के पदों पर भी आरक्षण किया गया है तथा इन श्रेणी की स्त्रियों के लिए भी 1/3 सीटों का आरक्षण किया गया है। इस प्रावधान ने ग्राम स्तर के नेतृत्व के स्वरूप में परिवर्तन ला दिया है। यथा।

  1. पहले जहाँ उच्च वर्ग या प्रभुत्व वर्गों के पुरुष सदस्यों का नेतृत्व पर एकाधिकार था, जब दलित और पिछड़े वर्गों के पुरुष तथा स्त्री सदस्य भी इस नेतृत्व में भागीदार बने हैं।
  2. अब दलित तथा पिछड़े वर्गों के पुरुष तथा स्त्री भी इन संस्थाओं में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और गांव के विकास तथा प्रशासन के प्रस्तावों पर समान रूप से विचार-विमर्श में भागीदारी कर रहे हैं।
  3. अब दलित तथा पिछड़े वर्गों के स्त्री-पुरुष प्रतिनिधि भी निर्णय – निर्माण प्रक्रिया में समान रूप से भागीदारी कर रहे हैं। पहले जो तबका सामाजिक रूप से प्रभावशाली होने के कारण गांव पर अपना नियंत्रण रखता था, लेकिन अब दलित आदिवासी तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों का नेतृत्व भी उभरा है। इससे ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व के स्वरूप में परिवर्तन आया है।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थानीय स्वशासन क्या है? इसके महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थानीय स्वशासन का अर्थ- स्थानीय मामलों का प्रबन्ध करने वाली संस्थाओं को स्वशासन संस्थाएँ कहते हैं। गाँव और जिला स्तर के शासन को स्थानीय शासन कहते हैं और जब इन संस्थाओं का शासन वहाँ की जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, तो ऐसे स्थानीय शासन को ही स्थानीय स्वशासन कहा जाता है। स्थानीय स्वशासन का महत्त्व स्थानीय स्वशासन की उपयोगिता या उसके महत्व का विवेचन अग्रलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है।

1. स्थानीय आवश्यकताओं का सर्वोत्तम प्रशासन:
स्थानीय शासन आम आदमी के सबसे नजदीक का शासन है। इसका विषय है-आम नागरिक की समस्यायें और उसकी रोजमर्रा की जिन्दगी। इसकी मान्यता है कि स्थानीय ज्ञान और स्थानीय हित लोकतांत्रिक फैसले लेने के अनिवार्य घटक हैं। लोगों की स्थानीय आवश्यकताएँ क्षेत्र और स्थान की भिन्नता के आधार पर भिन्न-भिन्न होती हैं। वे पूरे देश में एकसमान नहीं हो सकतीं। इन आवश्यकताओं और समस्याओं को उस क्षेत्र के निवासी अच्छी तरह जानते हैं। चूंकि जब उस क्षेत्र के निवासियों के निर्वाचित प्रतिनिधि स्थानीय शासन का कार्य संभालेंगे तथा नीतियों का निर्माण करेंगे तो स्वाभाविक रूप से वे उस क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं का अधिक अच्छी तरह से समाधान कर सकेंगे।

2. स्थानीय शासन और जनता के बीच घनिष्ठ सम्पर्क:
स्थानीय स्वशासन में जनता और शासन के मध्य घनिष्ठ सम्पर्क रहता है। आम जनता प्रादेशिक या केन्द्रीय सरकार से कहीं ज्यादा परिचित स्थानीय शासन से होती है। स्थानीय शासन क्या कर रहां है और क्या करने में नाकाम रहा है। आम जनता का इस सवाल से अधिक सरोकार रहता है क्योंकि इस बात का सीधा असर उसकी रोजमर्रा की जिन्दगी पर पड़ता है। स्थानीय स्वशासन में लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं, जिन तक वे आसानी से पहुंचकर अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दबाव बना सकते हैं। इस प्रकार स्थानीय स्वशासन में जनता और शासन के बीच घनिष्ठ सम्पर्क रहता है।

3. प्रशासन में दक्षता:
स्थानीय स्वशासन प्रशासन में दक्षता लाता है। स्थानीय सरकारें प्रान्तीय और संघीय सरकारों के प्रशासनिक बोझ को कम करती हैं। स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय निकायों द्वारा की जाती है। प्रशासनिक बोझ के कम होने से प्रत्येक स्तर की सरकार की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। उदाहरण के रूप में गीता राठौड़ ने ग्राम पंचायत के सरपंच के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जमनिया तलाब पंचायत में बड़ा बदलाव कर दिखाया।

4. कम खर्च:
स्थानीय स्वशासन, प्रदेश की सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों के माध्यम से किये जाने वाले स्थानीय शासन की तुलना में कम खर्चीला होता है। स्थानीय निकायों के सदस्य जनता द्वारा निर्वाचित होते हैं, वे स्थानीय मामलों के प्रबन्ध पर अपना समय और शक्ति या तो ऑनरेरी आधार या छोटे भत्तों पर प्रदान करते हैं। दूसरे, सरकार जो धन व्यय करती है, उस पर कम ध्यान देती है; जबकि स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्य खर्च किये जाने वाले धन को सावधानी से खर्च करते हैं। अतः निर्वाचित स्थानीय निकायों के द्वारा स्थानीय समस्याओं का समाधान बहुत तेजी से तथा कम खर्चे में हो जाता है।

5. सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही:
लोकतंत्र की सफलता के लिए जनता की सार्थक भागीदारी तथा जवाबदेही पूर्ण प्रशासन की आवश्यकता होती है। जीवन्त और मजबूत स्थानीय स्वशासन सक्रिय भागीदारी और उद्देश्यपूर्ण जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। गीता राठौड़ की कहानी प्रतिबद्धता के साथ लोकतंत्र में भागीदारी करने की घटनाओं में से एक है। स्थानीय स्वशासन के स्तर पर आम नागरिक को उसके जीवन से जुड़े मसलों, जरूरतों और उसके विकास के बारे में फैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

6. लोकतंत्र की सफलता में सहायक:
लोकतंत्र केवल वहाँ सफल हो सकता है जहाँ लोगों में स्वतंत्रता की भावना हो। इसके लिए शक्ति के विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता होती है, जब तक निर्णय लेने तथा उन्हें लागू करने में विकेन्द्रीकरण नहीं होगा, तब तक लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता। इसलिए जो काम स्थानीय स्तर पर किये जा सकते हैं, वे काम स्थानीय लोगों और उनके प्रतिनिधियों के हाथ में रहने चाहिए। लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है। आम जनता प्रादेशिक या केन्द्रीय सरकार से कहीं ज्यादा परिचित स्थानीय शासन से होती है। इस तरह स्थानीय शासन को मजबूत करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के समान है।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

प्रश्न 2.
भारत में स्थानीय शासन के विकास की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
भारत में स्थानीय शासन का विकास: भारत में स्थानीय शासन के विकास का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है।
1. प्राचीन काल में स्थानीय शासन:
प्राचीन भारत में गाँवों और शहरों में स्थानीय सरकारें थीं। इतिहासकारों तथा विदेशी यात्रियों ने शहरों में स्थानीय निकायों का उल्लेख किया है। गाँवों में प्राचीन भारत में ‘सभा’ के रूप में स्थानीय निकाय थे । समय बीतने के साथ गांव की इन सभाओं ने ‘पंचायत’ का रूप ले लिया। समय बदलने के साथ- साथ पंचायतों की भूमिका और काम भी बदलते रहे।

2. ब्रिटिश काल में स्थानीय शासन:
भारत में ब्रिटिश काल में ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के इन स्थानीय निकायों ने अपना महत्व खो दिया। इसलिए आधुनिक काल के स्थानीय निकायों और प्राचीन तथा मध्यकालीन भारत के स्थानीय निकायों के मध्य कोई तारतम्य नहीं है।
जब अंग्रेजों ने भारत में अपना शासन स्थापित किया, उन्होंने भारत में गाँवों और शहरों में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। इसकी अपेक्षा उन्होंने स्थानीय आत्मनिर्भरता तथा स्वायत्तता को खत्म करने का प्रयास किया और उनके ऊपर सरकारी नियंत्रण स्थापित किया।

लार्ड रिपन का शासनकाल आधुनिक भारत के स्थानीय स्वशासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण है। उसने इन निकायों को बनाने की दिशा में पहलकदमी की। सबसे पहले सन् 1888 में बम्बई में एक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की स्थापना की गई। इसके बाद कलकत्ता और मद्रास में भी इनकी स्थापना हुई। प्रारम्भ में स्थानीय स्वशासन की इन संस्थाओं में सरकारी बहुमत था तथा सरकार का उनके ऊपर पूर्ण नियंत्रण था। उस समय इन्हें मुकामी बोर्ड (Local Board) कहा जाता था।

1909 में रॉयल कमीशन ने स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के विकास और उनकी स्थापना की सिफारिश की। इसने यह भी सिफारिश की कि इन निकायों में निर्वाचित गैर-सरकारी सदस्यों का बहुमत हो तथा इन निकायों को कर लगाने के अधिकार होने चाहिए। गवर्नमेंट आफ इण्डिया एक्ट 1919 के बनने पर अनेक प्रान्तों में ग्राम पंचायत बने। सन् 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट बनने के बाद भी यह प्रवृत्ति जारी रही।

3. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय नेताओं की मांग:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार से यह मांग की कि सभी स्थानीय बोर्डों को ज्यादा कारगर बनाने के लिए वह जरूरी कदम उठाये। महात्मा गाँधी ने जोर देकर कहा कि आर्थिक और राजनीतिक सत्ता का विकेन्द्रीकरण होना चाहिए। उनका मानना था कि ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाना सत्ता के विकेन्द्रीकरण का कारगर साधन है। विकास की हर पहलकदमी में स्थानीय लोगों की भागीदारी होनी चाहिए ताकि यह सफल हो। इस तरह, पंचायत को सहभागी लोकतंत्र को स्थापित करने के साधन के रूप में देखा गया।

4. संविधान में स्थानीय स्वशासन के प्रावधान:
जब स्वतंत्र भारत का संविधान बना तो स्थानीय शासन का विषय प्रदेशों को सौंप दिया गया। संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धान्तों में भी इसकी चर्चा है। इसमें कहा गया है कि देश की हर सरकार अपनी नीति में इसे एक निर्देशक तत्व मानकर चले। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानीय शासन के मसले को संविधान में यथोचित महत्व नहीं मिला।

5. स्वतंत्र भारत में स्थानीय शासन का विकास: स्वतंत्र भारत में स्थानीय शासन का विकासक्रम इस प्रकार
(i) सामुदायिक विकास कार्यक्रम:
स्थानीय शासन के निकाय बनाने के सम्बन्ध में स्वतंत्रता के बाद 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम बना। इस कार्यक्रम के पीछे सोच यह थी कि स्थानीय विकास की विभिन्न गतिविधियों में जनता की भागीदारी हो।

(ii) स्वतन्त्र भारत में संविधान संशोधन 73 व 74 के पूर्व तक स्थानीय निकायों के गठन की स्थिति:
सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत ग्रामीण इलाकों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की गई तथा कुछ प्रदेशों गुजरात, महाराष्ट्र ने 1960 में निर्वाचन द्वारा स्थानीय निकायों की प्रणाली अपनायी । लेकिन ये निकाय वित्तीय मदद के लिए प्रदेश तथा केन्द्रीय सरकार पर बहुत ज्यादा निर्भर थे। कई प्रदेशों ने निर्वाचन द्वारा स्थानीय निकाय स्थापित करने की जरूरत भी नहीं समझी। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जहाँ स्थानीय शासन का जिम्मा सरकारी अधिकारी को सौंप दिया गया। कई प्रदेशों में अधिकांश स्थानीय निकायों के चुनाव अप्रत्यक्ष रीति से हुए। अनेक प्रदेशों में स्थानीय निकायों के चुनाव समय-समय पर स्थगित होते रहे।

(iii) थुंगन समिति की सिफारिश (1989):
सन 1989 में पी. के. थुंगन समिति ने स्थानीय शासन के निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने की सिफारिश की और कहा कि स्थानीय शासन की संस्थाओं के चुनाव समय-समय पर कराने, उनके समुचित कार्यों की सूची तय करने तथा ऐसी संस्थाओं को धन प्रदान करने के लिए संविधान में संशोधन किया जाये।

(iv) संविधान का 73वां और 74वां संशोधन:
स्थानीय शासन को मजबूत करने तथा पूरे देश में इसके कामकाज तथा बनावट की एकता लाने के उद्देश्य से सन् 1992 में संविधान के 73वें तथा 74वें संशोधन संसद ने पारित किये। संविधान का 73वां संशोधन गांव के स्थानीय शासन से जुड़ा है। इसका सम्बन्ध पंचायती राज व्यवस्था की संस्थाओं से है। संविधान का 74वां संशोधन शहरी स्थानीय शासन ( नगरपालिका) से जुड़ा है। ये दोनों संविधान संशोधन 1993 में लागू हुए। संविधान के 73वें तथा 74वें संशोधन के बाद देश में स्थानीय शासन को मजबूत आधार मिला है।

(v) 73वें और 74वें संशोधनों का क्रियान्वयन:
अब सभी प्रदेशों ने 73वें संशोधन के प्रावधानों को लागू करने के लिए कानून बना दिये हैं। अब सभी प्रदेशों में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के चुनाव प्रति 5 वर्ष के लिए प्रत्यक्ष रूप से किये जाते हैं। सभी प्रदेशों में पंचायती राज व्यवस्था का ढांचा त्रि-स्तरीय है। ग्रामसभा को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है। सभी पंचायती संस्थाओं में महिलाओं, अनुसूचित जातियों, जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए सीटों पर तथा अध्यक्ष पदों पर आरक्षण दिया गया है।

राज्य सूची के 29 विषयों को 11वीं अनुसूची में दर्ज कर लिया गया है, लेकिन इन सभी विषयों को अभी प्रदेशों ने स्थानीय संस्थाओं को हस्तांतरित नहीं किया है। एक स्वतंत्र राज्य चुनाव आयुक्त की स्थापना की गई है जो इन संस्थाओं के चुनाव करायेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को राजस्व के बंटवारे की समीक्षा हेतु एक राज्य वित्त आयोग की स्थापना भी की गई है। लेकिन अभी भी स्थानीय निकाय प्रदेश और केन्द्र सरकार की वित्तीय मदद के लिए निर्भर रहते हैं क्योंकि उनके पास आय के साधन कम हैं और खर्च की मदें अधिक हैं।

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

प्रश्न 3.
पंचायती राज व्यवस्था के संबंध में संविधान के 73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ: 73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताओं को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है।

  • त्रिस्तरीय बनावट; 73वें संविधान संशोधन अधिनियम में कहा गया है कि राज्य सरकार अपने क्षेत्र में पंचायती राज संस्थाएँ निम्न प्रकार से स्थापित करेगी
    1. ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण स्तर पर एक गांव या एक से अधिक गांवों में एक ग्राम पंचायत।
    2. मध्यवर्ती स्तर पर जिसे खंड या तालुका भी कहा जाता है। एक मंडल पंचायत या तालुका पंचायत या पंचायत समिति।
    3. जिला स्तर पर एक जिला पंचायत (जिला परिषद्)।
  • ग्रामसभा की अनिवार्यता: संविधान के 73वें संशोधन में इस बात का भी प्रावधान है कि ग्राम सभा अनिवार्य रूप से बनायी जानी चाहिए। पंचायती हलके में मतदाता के रूप में दर्ज हर व्यक्ति ग्राम सभा का सदस्य होता है। ग्राम सभा की भूमिका और कार्य का फैसला प्रदेश के कानूनों से होता है।
  • चुनाव: इस संशोधन अधिनियम में निर्वाचन सम्बन्धी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं।
    1. पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तर के सदस्य सीधे जनता द्वारा निर्वाचित होंगे।
    2. हर पंचायती निकाय की अवधि पांच साल की होगी। यदि प्रदेश की सरकार पांच साल पूरे होने से पहले पंचायत को भंग करती है तो इसके छः माह के अन्दर नये चुनाव कराये जायेंगे। इन प्रावधानों से निर्वाचित स्थानीय निकायों के अस्तित्व को सुनिश्चित किया गया है।
  • आरक्षण के प्रावधान: इस संशोधन अधिनियम में किए गए सदस्यों तथा अध्यक्ष पदों के आरक्षण के निम्न प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं।
    1. सभी पंचायती संस्थाओं में एक-तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
    2. तीनों स्तरों पर अनुसूचित जाति और अनुसचित जनजाति के लिए सीटों में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था अनुसूचित जाति / जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में की गई है।
    3. यदि प्रदेश की सरकार जरूरी समझे, तो वह अन्य पिछड़ा वर्ग को भी सीट में आरक्षण दे सकती है।
    4. तीनों ही स्तर पर अध्यक्ष पद तक आरक्षण दिया गया है।
    5. अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था है।

(5) विषयों का स्थानान्तरण:
ऐसे 29 विषय जो पहले राज्य सूची में थे, अब पहचान कर संविधान की 11वीं अनुसूची में दर्ज कर लिए गए हैं। इन विषयों को पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किया जाना है। इन कार्यों का वास्तविक हस्तान्तरण प्रदेश के कानून पर निर्भर है। हर प्रदेश यह फैसला करेगा कि इन विषयों में से कितने को स्थानीय निकायों के हवाले करना है।

(6) आदिवासी जनसंख्या वाले क्षेत्रों को सम्मिलित नहीं किया गया है- भारत के अनेक प्रदेशों के आदिवासी जनसंख्या वाले क्षेत्रों को 73वें संशोधन के प्रावधानों से दूर रखा गया है। ये क्षेत्र हैं।

  1. नागालैण्ड, मेघालय और मिजोरम के राज्य।
  2. मणिपुर राज्य में ऐसे पर्वतीय क्षेत्र जिनके लिए उस समय लागू किसी विधि के अधीन जिला परिषदें विद्यमान
  3. पश्चिम बंगाल राज्य के दार्जिलिंग जिले के ऐसे पर्वतीय क्षेत्र, जहाँ विधिवत गोरखा पर्वतीय परिषद विद्यमान ये प्रावधान इन क्षेत्रों पर लागू नहीं होते थे। सन् 1996 में अलग से एक अधिनियम बना और पंचायती व्यवस्था के प्रावधानों के दायरे में इन क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया गया।

(7) राज्य चुनाव आयुक्त:
इस संशोधन अधिनियम में अब प्रदेशों के लिए एक राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गयी है, जो एक स्वतंत्र अधिकारी होगा। इसकी जिम्मेदारी राज्य में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के चुनाव कराने की होगी।

(8) राज्य वित्त आयोग:
इस संशोधन अधिनियम में अब प्रदेशों की सरकार के लिए हर पांच वर्ष पर एक प्रादेशिक वित्त आयोग बनाना अनिवार्य कर दिया गया है जो मौजूदा स्थानीय शासन की संस्थाओं की आर्थिक स्थिति का जायजा लेगा तथा प्रदेश के राजस्व के बंटवारे का पुनरावलोकन करेगा।

प्रश्न 4.
शहरी स्थानीय स्वशासन से संबंधित संविधान के 74वें संशोधन की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
74वें संविधान संशोधन अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं: संविधान के 74वें संशोधन का सम्बन्ध शहरी स्थानीय शासन के निकाय अर्थात् नगरपालिका से है। शहरी इलाका क्या है? भारत की जनगणना में शहरी इलाके की परिभाषा करते हुए जरूरी माना गया है कि ऐसे इलाके में

(क) कम से कम 5000 जनसंख्या हो,

(ख) इस इलाके के कामकाजी पुरुषों में कम से कम 75 प्रतिशत खेती-बाड़ी के काम से अलग माने जाने वाले पेशे में हों, और

(ग) जनसंख्या का घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो।
सन 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 31 प्रतिशत जनसंख्या शहरी इलाके में रहती है। 74वें संविधान संशोधन अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  1. प्रत्यक्ष चुनाव, आरक्षण, विषयों का हस्तांतरण, प्रादेशिक चुनाव आयुक्त और प्रादेशिक वित्त आयोग के प्रावधान वही हैं, जो 73वें संविधान संशोधन में दिये गये हैं। इन मामलों में यह 73वें संविधान संशोधन का दोहराव मात्र है।
  2. 74वां संविधान संशोधन नगरपालिकाओं पर लागू होता है। ( इसके विस्तृत विवेचन के लिए कृपया पूर्व प्रश्न का उत्तर देखें ।)

JAC Class 11 Political Science Important Questions Chapter 8 स्थानीय शासन

प्रश्न 5.
73वें और 74वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन पर एक लेख लिखिये।
उत्तर:
73वें और 74वें संविधान संशोधन का क्रियान्दयन: वर्तमान में सभी प्रदेशों ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के प्रावधानों को लागू करने के लिए कानून बना दिये हैं। इन प्रावधानों को अस्तित्व में आए अब 15 वर्ष से ज्यादा हो रहे हैं । इस अवधि ( 1994 – 2010) में अधिकांश प्रदेशों में स्थानीय निकायों के चुनाव कम से कम तीन बार हो चुके हैं। इनके क्रियान्वयन से स्थानीय शासन के क्षेत्र में निम्नलिखित विशेषताएँ उभरकर सामने आई हैं।

1. निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संख्या में वृद्धि:
73वें व 74वें संविधान संशोधनों के क्रियान्वयन के पश्चात् ग्रामीण भारत में जिला पंचायतों की संख्या लगभग 600, मध्यवर्ती अथवा प्रखंड स्तरीय पंचायत की संख्या 6000 तथा ग्राम पंचायतों की संख्या 2,40,000 है। शहरी भारत में 100 से ज्यादा नगर निगम, 1400 नगरपालिकाएँ तथा 2,000 नगर पंचायतें मौजूद हैं। हर पांच वर्ष पर इन निकायों के लिए 32 लाख सदस्यों का निर्वाचन होता है। इनमें से 13 लाख महिलाएँ हैं। यदि प्रदेशों की विधानसभा तथा संसद को एक साथ रखकर देखें तो भी इनमें निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की संख्या 5000 कम बैठती है। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानीय निकायों के निश्चित चुनाव होने के कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

2. देश भर की स्थानीय संस्थाओं की बनावट में समानता:
73वें और 74वें संशोधन ने देश भर की पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिका की संस्थाओं की बनावट को एक-सा किया है। इससे शासन में जनता की भागीदारी के लिए मंच और माहौल तैयार होगा।

3. स्थानीय निकायों में महिलाओं की भारी संख्या में मौजूदगी का सुनिश्चित होना:
पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान के कारण स्थानीय निकायों में महिलाओं की भारी संख्या में मौजूदगी सुनिश्चित हुई है। आरक्षण का प्रावधान अध्यक्ष और सरपंच जैसे पद के लिए भी है। इस कारण निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की एक बड़ी संख्या अध्यक्ष और सरपंच जैसे पदों पर आसीन हुई है। आज कम से कम 200 महिलाएँ जिला पंचायतों की अध्यक्ष हैं।

2000 महिलाएँ प्रखंड अथवा तालुका पंचायत की अध्यक्ष हैं और ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच की संख्या 80 हजार से ज्यादा है। नगर निगमों में 30 महिलाएँ महापौर हैं। नगरपालिकाओं में 500 से ज्यादा महिलाएँ अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। लगभग 650 नगर पंचायतों की प्रधानी महिलाओं के हाथ में है। इसके निम्न प्रभाव परिलक्षित हुए

  • संसाधनों पर अपने नियंत्रण की दावेदारी करके महिलाओं में ज्यादा शक्ति और आत्मविश्वास अर्जित किया है।
  • इन संस्थाओं में महिलाओं की मौजूदगी के कारण बहुत सी स्त्रियों की राजनीतिक समझ पैनी हुई है।
  • स्थानीय निकायों के विचार-विमर्श में महिलाओं की मौजूदगी एक नया परिप्रेक्ष्य जोड़ती है और चर्चा ज्यादा संवेदनशील होती है।

4. स्थानीय निकायों की सामाजिक बुनावट में परिवर्तन:
73वें तथा 74वें संविधान संशोधन ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण को अनिवार्य बना दिया है। इसके साथ ही अधिकांश प्रदेशों ने पिछड़ी जाति के लिए आरक्षण का प्रावधान बनाया है। स्थानीय शासन के शहरी और ग्रामीण संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों में इन समुदायों की संख्या लगभग 6.6 लाख है। इससे स्थानीय निकायों की सामाजिक बुनावट में भारी परिवर्तन आए हैं।

ये निकाय जिस सामाजिक सच्चाई के बीच काम कर रहे हैं अब उस सच्चाई की नुमाइंदगी इन निकायों के माध्यम से ज्यादा हो रही है। कभी-कभी इससे पुराने नेतृत्व और नये नेतृत्व के बीच तनाव भी पैदा होता है तथा सत्ता के लिए संघर्ष तेज हो जाता है। जब भी लोकतंत्र को ज्यादा सार्थक बनाने और ताकत से वंचित लोगों को ताकत देने की कोशिश होती है, तब समाज में संघर्ष और तनाव बढ़ता ही है।

5. व्यवहार में विषयों का हस्तांतरण नहीं:
संविधान के संशोधन ने 29 विषयों को स्थानीय शासन के हवाले किया है। ये सारे विषय स्थानीय विकास तथा कल्याण की जरूरतों से संबंधित हैं। लेकिन स्थानीय कामकाज के पिछले दशक के अनुभव से व्यवहार में निम्नलिखित तथ्य उजागर हुए है।

  1. भारत में अभी भी स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को अपना कामकाज स्वतंत्रतापूर्वक करने की छूट बहुत कम
  2. अनेक प्रदेशों ने अधिकांश विषय स्थानीय निकायों को नहीं सौंपे थे। इस तरह, इतने सारे जन-प्रतिनिधियों को निर्वाचित करने का पूरा का पूरा काम बस प्रतीकात्मक बनकर रह गया है। स्थानीय स्तर की जनता के पास लोक-कल्याण के कार्यक्रमों अथवा संसाधनों के आबंटन के बारे में विकल्प चुनने की ज्यादा शक्ति नहीं होती।

6. वित्तीय निर्भरता:
स्थानीय निकायों के पास अपना कह सकने लायक धन बहुत कम होता है। स्थानीय निकाय प्रदेश और केन्द्र की सरकार पर वित्तीय मदद के लिए निर्भर होते हैं। इससे कारगर ढंग से काम कर सकने की उनकी क्षमता का क्षरण हुआ है; क्योंकि ये निकाय अनुदान देने वाले पर निर्भर होते हैं।

JAC Class 9 Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

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JAC Board Class 9 Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

→ द्रथ्य तीन अवस्थाओं-ठोस, द्रव तथा गैस के रूप में विद्यमान होता है।

→ द्रव्य अत्यन्त सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है।

→ ठोस के कणों में आकर्षण बल सर्वाधिक, गैस के कणों में न्यूनतम और द्रव के कणों में, ठोसों से कम तथा गैसों से अधिक होता है।

→ व्रेस के कणों के बीच का रिक्त स्थान और गतिज ऊर्जा न्यूनतम, गैसों के लिए इसका मान अधिकतम तथा द्रवों के लिए मध्यवर्ती होता है।

→ वोसों के अणु एक विशेष क्रम में व्यवस्थित होते है। द्रवों में कणों की परतें एक-दूसरे पर फिसल सकती है। गैसों में अणुओं का कोई भी निश्चित क्रम नहीं होता है तथा गैसों के कण अनियमित रूप से गति करते हैं।

→ ताप व दाय में परिवर्तन करने पर पदार्थ की अवस्थाएँ आपस में परिवत्तिंत की जा सकती हैं।

→ ऊर्ध्वपातन प्रक्रम में ठोस पदार्थ द्रव में परिवर्तित हुए बिना ही सीधे गैसीय अवस्था में आ जाता है और निक्षेपण प्रक्रम में गैसीय अवस्था से सीधे टोस अवस्था में आ जाता है।

JAC Class 9 Science Notes Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

→ क्वथनांक वायुमंडलीय दाब पर वह ताप है जिस पर द्रव गैस में बदलना शुरू हो जाता है।

→ वाष्पीकरण में द्रव की सतह के कण पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त कर उनके बीच के लगने वाले परस्पर आकर्षण बलों को पार कर लेते है और द्रवव अवस्था से वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं।

→ वाष्पीकरण की गति, सतही क्षेत्रफल जिसका वायुमण्डल के प्रति परित्याग होता है, तापमान, आर्द्रता और वायु की गति पर निर्भर करती है।

→ वाष्पीकरण द्वारा ठंडक उत्पन्न होती है जैसे एल्कोहल को हथेली पर डालने से हथेली ठंडी हो जाती है।

→ वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा ऊष्मीय ऊर्जा की वह मात्रा है जो 1 kg द्रव को वायुमण्डलीय दाब और द्रव के क्वथनांक पर गैसीय अवस्था में परिवर्तन करने हेतु प्रयोग होती है।

→ संगलन की गुप्त ऊष्मा ऊर्जा की वह मात्रा है जो 1 kg ठोस को वायुमण्डलीय दाय पर ठोस को उसके संगलन बिन्दु पर लाने के लिए प्रयुक्त होती है।

→ कुछ मापन योग्य राशियाँ व उनके मात्रक-

राशिमात्रकप्रतीक
तापमानकेल्व्वनK
लम्बाईमीटरm
संहतिकिलोग्रामkg
भारन्यूटनN
आयतनघन मीटर
घनत्वकिग्रा प्रति घन मीटरkg/m³ या kg-3
दाबपास्कलPa

→ विश्व में प्रत्येक वस्तु जिस सामग्री से बनी होती है उसे पदार्थ (matter) कहते हैं। सभी वस्तुओं का द्रव्यमान तथा आयतन होता है। आधुनिक वैज्ञानिकों ने पदार्थ को भौतिक गुणों व रासायनिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. किस वैज्ञानिक ने पाँच जगत प्रणाली प्रस्तुत की?
(a) लिनियस
(c) कार्ल बोस
(b) व्हिटेकर
(d) अर्न्सट हेकेल।
उत्तर:
(b) व्हिटेकर।

2. ‘दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज’ पुस्तक के लेखक थे-
(a) अर्न्सट हेकेल
(b) चार्ल्स डार्विन
(c) व्हिटेकर
(d) लिनियस।
उत्तर:
(b) चार्ल्स डार्विन।

3. नील हरित शैवाल किस वर्ग में आते हैं?
(a) प्लांटी
(b) मोनेरा
(c) प्रोटिस्टा
(d) कवक।
उत्तर:
(b) मोनेरा।

4. शैवाल उदाहरण है-
(a) माँस
(b) प्रोटोजोआ
(c) यीस्ट
(d) प्रोटिस्टा

5. प्रकाश संश्लेषण की
(a) जन्तुओं में
(b) हरे पौधों में।
(c) कवकों में
(d) उपर्युक्त सभी में।
उत्तर:
(b) हरे पौधों में।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

6. जिम्नोस्पर्म का उदाहरण है-
(a) आइपोमिया
(b) पाइनस
(c) फ्यूनेरिया
(d) मासलिया।
उत्तर:
(b) पाइनस।

7. किस संघ का शरीर छिद्रमय होता है?
(a) पोरीफेरा
(b) प्रोटोजोआ
(c) मोलस्का
(d) एनीलिडा
उत्तर:
(a) पोरीफेरा।

8. निम्नलिखित में कौन-सा जन्तु मछली है?
(a) जेलीफिश
(b) झींगा मछली
(c) तारा मछली
(d) लेखियो।
उत्तर:
(d) लेखियो।

9. किस संघ के जन्तुओं में
(a) एनीलिडा
(b) मॉलस्का
(c) आर्थ्रोपोडा
(d) इकानोडर्मेटा।
उत्तर:
(c) आर्थ्रोपोडा।

10. एक ही वंश फेलिस में रखें गये जन्तु हैं-
(a) शेर
(b) चीता
(c) तेन्दुआ
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

11. द्विनाम पद्धित के जन्मदाता हैं-
(a) केरोलस लिनियस
(b) ओसवाल्ड टिप्पो
(c) व्हिटेकर
(d) चार्ल्स डार्विन।
उत्तर:
(a) केरोलस लिनियस।

12. उपास्थि का कंकाल बना होता है-
(a) शार्क
(b) बेल
(c) लेबियो
(d) हिप्पोकैम्पस।
उत्तर:
(a) शार्क।

रिक्त स्थान भरो-

  1. …………………. जगत में एककोशिक प्रोकैरियोटी जीव आते हैं।
  2. …………………. को मृतजीवी कहते हैं।
  3. पुष्पी पादपों को ………………… भी कहा जाता है।
  4. केंचुआ भी कहा जाता है। जंतु का उदाहरण हैं।

उत्तर:

  1. मोनेरा
  2. फंजाई
  3. एंजियोस्पर्म
  4. एनीलिड।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. तारा मछली(क) मोलस्क
2. मकड़ी(ख) इकाइनोडर्म
3. ऑक्टॉपस(ग) सरीसृप
4. छिपकली(घ) आर्थ्रोपोड

उत्तर:
1. (ख) इकाइनोडर्म
2. (घ) आर्थ्रोपोड
3. (क) मोलस्क
4. (ग) सरीसृप

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

सत्य / असत्य-

  1. पक्षी समतापी प्राणी होते हैं।
  2. स्तनपायी जीवों का हृदय द्विकक्षीय होता है।
  3. पादप जगत का सरलतम वर्ग ब्रायोफाइटा है।
  4. मनुष्य का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियन्स है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्गीकरण क्या है?
उत्तर:
जीवों को उनकी समानता एवं भिन्नता के आधार पर अनेक वर्गों में बाँटना वर्गीकरण कहलाता है।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण का आधारभूत लक्षण क्या है?
उत्तर:
वर्गीकरण का आधारभूत लक्षण कोशिकीय संरचना एवं कार्य है।

प्रश्न 3.
प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवों को पौधे कहते हैं।

प्रश्न 4.
पौधों का शरीर किस आधार पर विकसित होता है?
उत्तर:
पौधों का शरीर भोजन ग्रहण करने के आधार पर विकसित होता है।

प्रश्न 5.
व्हिटेकर ने जीवों को किन समूहों में वर्गीकृत किया?
उत्तर:
व्हिटेकर ने जीवों को पाँच समूहों में वर्गीकृत किया था। ये समूह हैं-मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनीमेलिया।

प्रश्न 6.
वर्गीकरण की विभिन्न इकाइयाँ क्या हैं?
उत्तर:
जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश तथा जाति वर्गीकरण की विभिन्न इकाइयाँ हैं।

प्रश्न 7.
बोस ने मोनेरा जगत को किन दो भागों में बाँटा?
उत्तर:
बोस ने मोनेरा जगत को दो भागों में बाँटा-

  • आकीबैक्टीरिया
  •  यूबैक्टीरिया।

प्रश्न 8.
व्हिटेकर ने वर्गीकरण का आधार किसे बनाया था?
उत्तर:
व्हिटेकर ने कोशिकीय संरचना, पोषण के स्रोत और तरीके तथा शारीरिक संगठन को वर्गीकरण का आधार बनाया था।

प्रश्न 9.
मोनेरा वर्ग में कौन-कौन से जीव आते हैं?
उत्तर:
मोनेरा वर्ग में एककोशिकीय जीव आते हैं, जिनमें कोशिका भित्ति पाई जाती है।

प्रश्न 10.
मोनेरा वर्ग के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
मोनेरा वर्ग के तीन उदाहरण- जीवाणु, नील- हरित शैवाल, माइकोप्लाज्मा हैं।

प्रश्न 11.
प्रोटिस्टा वर्ग के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रोटिस्टा वर्ग के तीन उदाहरण एककोशिकीय शैवाल, प्रोटोजोआ, डाइएटम।

प्रश्न 12.
फंजाई को मृतजीवी क्यों कहते हैं?
उत्तर:
फंजाई पोषण के लिए सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर करती है, इसलिए इसे मृतजीवी कहते हैं।

प्रश्न 13.
फंजाई की कोशिका भित्ति किस पदार्थ की बनी होती है?
उत्तर:
फंजाई की कोशिका भित्ति काइटिन नामक जटिल शर्करा की बनी होती है।

प्रश्न 14.
सहजीविता किसे कहते हैं?
उत्तर:
कवकों की कुछ प्रजातियाँ नील हरित शैवाल के साथ स्थायी अन्तर्सम्बन्ध बनाती हैं, इसे सहजीविता कहते हैं।

प्रश्न 15.
लाइकेन क्या हैं?
उत्तर:
वृक्षों की छालों पर रंगीन धब्बों के रूप में दिखाई देने वाले जो कवकों एवं नील हरित शैवाल की सहजीविता से बनते हैं, उनको लाइकेन कहते हैं।

प्रश्न 16.
शैवाल और कवक किस समूह में आते हैं?
उत्तर:
शैवाल और कवक थैलोफाइटा समूह में आते हैं।

प्रश्न 17.
ब्रायोफाइटा वर्ग के पौधों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
ब्रायोफाइटा वर्ग के पौधों को उभयचर नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 18.
ब्रायोफाइटा के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
फ्यूनेरिया (मॉस) तथा मार्केशिया।

प्रश्न 19.
टेरिडोफाइटा वर्ग के पौधों का शरीर कितने भागों में विभाजित होता है?
उत्तर:
टेरिडोफाइडा वर्ग के पौधों का शरीर जड़, तना तथा पत्ती में विभाजित होता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

प्रश्न 20.
टेरिडोफाइडा के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
मार्सीलिया, फर्न, हॉर्स टेल।

प्रश्न 21.
बीजाणु (स्पोर) किसे कहते हैं?
उत्तर:
थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा और टेरिडोफाइटा में नग्न भ्रूण पाये जाते हैं, जिन्हें बीजाणु (स्पोर) कहते हैं।

प्रश्न 22.
क्रिप्टोगैम किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
जिन पौधों में बीज उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती है, उन्हें क्रिप्टोगैम कहते हैं।

प्रश्न 23.
फैनरोगैम किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
वे पौधे जिनमें जनन ऊतक पूर्ण विकसित एवं विभेदित होते हैं तथा जनन की प्रक्रिया के बाद बीज उत्पन्न करते हैं, उन्हें फैनरोगैम कहते हैं।

प्रश्न 24.
एन्जियोस्पर्म किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
जिन पौधों के बीज फलों के अन्दर ढके होते हैं। इनके बीजों का विकास अण्डाशय के अन्दर होता है, जो बाद में फल बन जाते हैं। इन्हें एन्जियोस्पर्म कहते हैं।

प्रश्न 25.
एन्जियोस्पर्म को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
एन्जियोस्पर्म को दो भागों में बाँटा गया है- एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री।

प्रश्न 26.
जिम्नोस्पर्म पौधे किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
नग्न बीज उत्पन्न करने वाले पौधों को जिम्नोस्पर्म कहते हैं।

प्रश्न 27.
पोरीफेरा में नाल प्रणाली का क्या कार्य है?
उत्तर:
पोरीफेरा के शरीर में नाल प्रणाली जल, ऑक्सीजन एवं भोज्य पदार्थों का संचरण करती है।

प्रश्न 28.
पोरीफेरा के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
साइकॉन, यूप्लेक्टीला, स्पांजिला आदि।

प्रश्न 29.
सीलेन्ट्रेटा जन्तुओं के समूह में और एकाकी रहने वाले जीवों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
समूह में रहने वाले जीव- कोरल (मूँगा) एकल रहने वाले जीव- हाइड़ा, जेलीफिश।

प्रश्न 30.
दो परजीवी प्लेटीहेल्मिन्थीज जन्तुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
लिवरफ्लूक, टेपवर्म।

प्रश्न 31.
तीन परजीवी निमेटोड के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
गोलकृमि (ऐस्कैरिस), फाइलेरिया कृमि, पिनवर्म।

प्रश्न 32.
एनीलिडा वर्ग के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
केंचुआ, नेरीस, जोंक।

प्रश्न 33.
जन्तु जगत का सबसे बड़ा संघ कौन-सा है?
उत्तर:
जन्तु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा है।

प्रश्न 34.
आर्थ्रोपोडा के पाँच उदाहरण लिखो।
उत्तर:
झींगा, तितली, मक्खी, मकड़ी, बिच्छू, केंकड़ा।

प्रश्न 35.
मोलस्का जन्तुओं के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सीप, घोंघा, ऑक्टोपस

प्रश्न 36.
जल संवहन नाल तन्त्र किन जीवों में पाया जाता है?
उत्तर:
जल संवहन नाल तन्त्र इकाइनोडर्मेटा संघ के जन्तुओं में पाया जाता है, जो इनके चलन में सहायक होता है, जैसे- स्टारफिश।

प्रश्न 37.
प्रोटोकॉर्डेटा वर्ग के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
बैलेनोग्लॉसस, हर्डमानिया, एम्फिऑक्सस।

प्रश्न 38.
कशेरुकी जीवों के प्रमुख लक्षण लिखो।
उत्तर:
नोटोकॉर्ड की उपस्थिति, पृष्ठनलीय कशेरुकदण्ड एवं मेरुरज्जु, त्रिकोरकी शरीर, युग्मित क्लोम थैली, देहगुहा की उपस्थिति।

प्रश्न 39.
मत्स्य वर्ग के कोई तीन लक्षण लिखो।
उत्तर:
मत्स्य वर्ग के जन्तुओं का शरीर शल्क या प्लेटों से ढका हुआ, हृदय द्विकक्षीय श्वसन क्लोमों द्वारा, अण्डज प्राणी।

प्रश्न 40.
किस मछली का कंकाल केवल उपास्थि का बना होता है?
उत्तर:
शार्क मछली का शरीर केवल उपास्थि का बना होता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता

प्रश्न 41.
हिप्पोकेम्पस किस वर्ग का जन्तु है?
उत्तर:
हिप्पोकेम्पस मत्स्य वर्ग का जन्तु है।

प्रश्न 42.
जल-स्थलचर वर्ग की चार विशेषताएँ (लक्षण) बताओ।
उत्तर:
जलस्थलचर वर्ग के जन्तु जल और स्थल दोनों स्थानों पर रह सकते हैं। इनकी त्वचा पर श्लेष्म ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं। हृदय त्रिकक्षीय होता है ये असमतापी होते हैं और जल में अण्डे देते हैं।

प्रश्न 43.
असमतापी जन्तुओं के दो वर्गों के नाम लिखो।
उत्तर:
जल-स्थलचर व सरीसृप वर्ग के जन्तु असमतापी होते हैं।

प्रश्न 44.
चार सरीसृप वर्ग के जन्तुओं के नाम लिखो।
उत्तर:
साँप, छिपकली, कछुआ, मगरमच्छ।

प्रश्न 45.
पक्षी किस प्रकार के जन्तु हैं?
उत्तर:
पक्षी समतापी तथा वायु में उड़ने वाले जन्तु हैं।

प्रश्न 46.
पक्षियों के पंख किस अंग के रूपान्तर हैं?
उत्तर:
पक्षियों के पंख आगे के दो पैरों के रूपान्तर हैं।

प्रश्न 47.
किन्हीं दो अण्डे देने वाले स्तनपायी जन्तुओं के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. इकिडना
  2. प्लेटीपस।

प्रश्न 48.
जल में रहने वाले दो स्तनपायी जन्तुओं के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. ह्वेल
  2. वालरस।

प्रश्न 49.
अविकसित बच्चों को जन्म देने वाले स्तनपायी का नाम लिखो।
उत्तर:
कंगारू अविकसित बच्चों को जन्म देती है।

प्रश्न 50.
मासूपियम थैली क्या होती है?
उत्तर:
कंगारू के पेट पर मासूपियम नामक थैली होती. है, इसमें अविकसित बच्चों के पोषण हेतु स्तनग्रन्थियाँ होती हैं। बच्चे इस थैली में तब तक रहते हैं जब तक कि उनका पूर्ण विकास नहीं हो जाता है।

प्रश्न 51.
‘सिस्टेमा नेचुरी’ पुस्तक के लेखक का नाम बताओ।
उत्तर:
सिस्टेमा नेचुरी’ पुस्तक कालवानलिने (केरोलस लिनियस) ने लिखी थी।

प्रश्न 52.
द्विनाम पद्धति किसने प्रस्तुत की थी?
उत्तर:
द्विनाम पद्धति केरोलस लिनियस ने प्रस्तुत की थी।

प्रश्न 53.
मेगाडाइवर्सिटी क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी पर कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के क्षेत्र को मेगाडाइवर्सिटी क्षेत्र कहते हैं। इस क्षेत्र में जो नमी और गर्मी वाला भाग है वहाँ पौधों और जन्तुओं में पर्याप्त विविधता पाई जाती है।

प्रश्न 54.
पृथ्वी पर जैव विविधता का आधे से अधिक भाग किन देशों में केन्द्रित है?
उत्तर:
पृथ्वी पर जैव विविधता का आधे से अधिक भाग मैक्सिको, ब्राजील, कोलम्बिया, इक्वेडोर, पेरू, जायरे, मैडागास्कर, आस्ट्रेलिया, चीन, भारत, इण्डोनेशिया और मलेशिया में केन्द्रित है।

लघुत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जैवविविधता से क्या तात्पर्य है? जैव विविधता असीमित है, इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैव विविधता जैव विविधता से तात्पर्य विभिन्न जीवरूपों में पाई जाने वाली विविधता से है। यह शब्द किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले विभिन्न जीवरूपों की ओर संकेत करता है। ये विभिन्न जीव न केवल एक समानं पर्यावरण में रहते हैं बल्कि एक दूसरे को प्रभावित भी करते हैं।

इसके परिणामस्वरूप विभिन्न प्रजातियों का स्थायी समुदाय अस्तित्व में आता है। किसी समुदाय की विविधता भूमि, जल, जलवायु आदि कई चीजों से प्रभावित होती है। अनुमानित रूप से पृथ्वी पर जीवों की लगभग 1 करोड़ प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जबकि हमें केवल 10 लाख या 20 लाख प्रजातियों की ही जानकारी है।

प्रश्न 2.
क्या जीवों की विविधता आदिकाल से इसी प्रकार की है?
उत्तर:
जीवों की विविधता आदिकाल से इसी प्रकार आज या अब जो विविधता दिखाई देती है, वह विगत् 350 करोड़ वर्षों के जैव विकास का परिणाम है। इस अत्यधिक दीर्घ अवधि में बहुत सी जातियाँ अस्तित्व में आई और बहुत सी विलुप्त हो गई ऐसा अनुमान लगाया गया है कि जीवों की विलुप्त हुई जातियों की संख्या आ गुनिक काल में पाई जाने वाली जातियों से 50 गुना अधिक थी।

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प्रश्न 3.
जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता- विश्व के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं। पहाड़ों पर रहने वाले जीव मैदानी भागों के जीवों से भिन्न होते हैं तो वनों के जीव मरुस्थली जीवों से भिन्न होते हैं। इनमें से प्रत्येक जीव जाति अपने आप में अद्भुत है। इस प्रकार जीवों में असीमित विविधता पाई जाती है। जैव विकास की दीर्घकालीन अवधि में अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं। इतनी अधिक संख्या में तथा विविधता में पाए जाने वाले जीवों में से प्रत्येक जीव का अलग-अलग अध्ययन करना सम्भव नहीं है।

इस असम्भव कार्य को सम्भव करने के लिए विभिन्न प्रकार के जीवों को क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित करना अर्थात उनका वर्गीकरण करना आवश्यक है। वर्गीकरण करने पर हम प्रत्येक वर्ग से कुछ प्रतिनिधि जीवों का अध्ययन करके, उस वर्ग के अन्य सभी सदस्य जीवों के विषय में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 4.
वर्गीकरण का महत्व बताइए।
उत्तर:
वर्गीकरण का महत्व-जीवों का वर्गीकरण निम्नलिखित बातों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है-

  • किसी भी समूह के एक जीव का अध्ययन करने से उस समूह के सभी जीवों के सामान्य लक्षणों का ज्ञानार्जन किया जा सकता है।
  • विभिन्न समूहों के सामान्य लक्षणों का अध्ययन करके उन्हें जटिलता के आधार पर विकास के क्रम में सरलता से रखा गया है।
  • विभिन्न समूहों के जीवों का अध्ययन करने से कुछ जीव ऐसे भी मिले हैं, जिनमें दो पृथक समूहों के लक्षण विद्यमान थे अथवा हैं
  • ऐसे जीव दो समूहों के मध्य संयोजक कड़ी के रूप में माने जाते हैं। इन के अध्ययन से विभिन्न समूहों में परस्पर सम्बन्ध का बोध होता है।
  • विभिन्न समूहों के जीवों का अध्ययन करने से उन समूहों की उत्पत्ति का ज्ञान हो जाता है। जैसे- पक्षी वर्ग तथा स्तनपायी वर्ग का विकास सरीसृप वर्ग से हुआ है।
  • वर्गीकरण से जीवों में पाई जाने वाली आकारिकीय समानताओं एवं विभिन्नताओं के कारण का भी ज्ञान हो जाता है।
  • किसी वातावरण में पाए जाने वाले विभिन्न वर्गों के लक्षणों के आधार पर उनकी अनुकूलता के बारे में अनुमान लगाया जा सकता विभिन्न वर्गों के जीवों का अध्ययन करने से जैव विकास का अनुमान लगाया जा सकता है।
  • जीवों (पौधों एवं जन्तुओं) का भौगोलिक वितरण पूर्णत: वर्गीकरण से उपलब्ध सूचनाओं पर आश्रित है।

प्रश्न 5.
द्विनाम पद्धति क्या है? एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्विनाम पद्धति लीनियस द्वारा किसी भी जीव का नाम रखने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक पद्धति प्रस्तुत की गई, जिसे द्विनाम पद्धति कहते हैं। इसके अनुसार प्रत्येक जीव को दोहरा नाम दिया जाता है- पहला नाम वंश (जीनस) का तथा दूसरा नाम जाति (स्पीशीज) का होता है।

जैसे – मनुष्य का वैज्ञानिक नाम होमो सेपियन्स है। इसमें होमो मनुष्य के वंश (जीनस) तथा सेपियन्स उसकी जाति (स्पीशीज ) को प्रकट करता है। इस पद्धति में वंश का नाम सदैव अंग्रेजी के बड़े अक्षर से तथा जाति का नाम अंग्रेजी के छोटे अक्षर से तिरछे ( इटैलिक) अक्षरों में लिखा जाता है। जैसे- मनुष्य- होमो सेपियन्स (Homo sapiens)

शेर-फेलिस लिओ (Falis leo)

प्रश्न 6.
पौधों एवं जन्तुओं में समानता बताइए।
उत्तर:
पौधों एवं जन्तुओं में समानता –

  • दोनों के शरीर कोशिकाओं से बने होते हैं।
  • दोनों की कोशिकाओं में जीवद्रव्य होता है।
  • दोनों में ही पाचन, श्वसन एवं प्रजनन आदि समान क्रियाएँ होती हैं।
  • दोनों में ही वृद्धि होती है।
  • दोनों ही संवेदनशील होते हैं।
  • दोनों में ही अपनी वंश वृद्धि के लिए प्रजनन क्रिया होती है।

प्रश्न 7.
पौधों और जन्तुओं में अन्तर बताइए।
उत्तर;
पौधों और जन्तुओं में अन्तर –

पौधों (पादप)जन्तु (प्राणी)
1. पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है।1. इनकी कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
2. इनकी कोशिकाओं में क्लोरोफिल उपस्थित होता है।2. इनकी कोशिकाओं में क्लोरोफिल नहीं होता है।
3. हरे पौधे अपना भोजन स्वयं बना सकते हैं, अर्थात् ये स्वपोषी होते हैं।3. जन्तु अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, अर्थात् ये परपोषी होते हैं।
4. पौधों में वृद्धि जीवन भर होती है।4. जन्तुओं में वृद्धि निश्चित आयु तक होती है।
5. अधिकांश पौधे गति नहीं करते हैं।5. अधिकांश जन्तु गति करते हैं।

प्रश्न 8.
नविटेकर द्वारा प्रस्तुत पाँच जगत के वर्गीकरण को चार्ट बनाकर लिखो।
उत्तर:
चित्र 7.4 देखिए।

प्रश्न 9.
वनस्पति जगत का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है? चार्ट बनाकर बताओ।
उत्तर:
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 7 जीवों में विविधता 1

प्रश्न 10.
अकशेरुकी और कशेरुकी जन्तुओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अकशेरुकी और कशेरुकी जन्तुओं में अन्तर-

अकशेरुकी जन्तुकशेरुकी जन्तु
1. इनमें नोटोकॉर्ड नहीं होती है।1. जन्तु की किसी न किसी अवस्था में नोटोकॉर्ड अवश्य पाई जाती है।
2. केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र ठोस होता है तथा यह आहार नाल के नीचे अधर तल पर स्थित होता है।2. केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र खोखला एवं नलिकाकार होता है तथा आहारनाल के पृष्ठ तल पर स्थित होता है।
3. इनमें पृष्ठनलीय कशेरुक दण्ड एवं मेरुरज्जु अनुपस्थित होता है।3. इनमें पृष्ठनलीय कशेरुक द्ण तथा मेरुरज्जु पाया जाता है।
4. इनमें क्लोम विदर नही होते हैं।4. इनमें युग्मित क्लोम विदर जीवन की किसी न किसी अवस्था में अवश्य पाये जाते हैं।

 

JAC Class 9 Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

Students must go through these JAC Class 9 Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं to get a clear insight into all the important concepts.

JAC Board Class 9 Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ किसी मिश्रण में एक से अधिक तत्त्व अथवा यौगिक किसी भी अनुपात में मिले रहते हैं।

→ उचित विधियों द्वारा मिश्रण को शुद्ध पदार्थों में पृथक्करण किया जा सकता है।

→ दो या दो से अधिक पदार्थों का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।

→ विलयन के बड़े अवयव (अधिक मात्रा) को विलायक तथा छोटे अवयव को विलेय कहते हैं।

→ विलयन की सान्द्रता उसके इकाई आयतन या विलायक के इकाई द्रव्यमान में उपस्थित विलेय की मात्रा है।

JAC Class 9 Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ वह पदार्थ जो आँखों से देखा जा सकता है और विलायक में अघुलनशील होता है, निलंबन कहलाता है। यह एक विषमांगी मिश्रण होता है।

→ कोलाइड एक विभमांगी मिश्रण होता है जिसके कणों का आकार इतना छोटा होता है कि इन्हें सरलता से देखा नहीं जा सकता है परन्तु ये प्रकाश का फैलाव कर देते हैं।

→ कोलाइडों का उद्योगों व दैनिक जीवन में अत्यन्त उपयोग है।

→ कोलाइड में विलेय कणों को परिक्षिप्त प्रावस्था कहते हैं और विलायक जिसमें ये पूरी तरह से वितरित रहते हैं, उसे परिक्षेपण माध्यम कहते हैं।

→ शुद्ध पदार्थ तत्त्व या यौगिक हो सकते हैं।

JAC Class 9 Science Notes Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

→ तत्त्व पदार्थ का मूल रूप होता है, जिसे भौतिक तथा रासायनिक क्रिया द्वारा विभाजित नहीं किया जा सकता है।

→ यौगिक वह पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों के स्थिर अनुपात में रासायनिक रूप में संयोजन से निर्मित होता है।

→ मिश्रण में उपस्थित तत्त्व और यौगिक अपने-अपने गुणों को दर्शाति हैं एवं यौगिक के गुण उसमें निहित तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. विभज्योतक ऊतक होता है-
(a) मूलरोम में
(b) पत्ती में
(c) तना के शीर्ष पर
(d) पुष्प में।
उत्तर:
(c) तना के शीर्ष पर।

2. विभज्योतक कोशिकाएँ होती हैं-
(a) पतली भित्ति वाली
(b) लिग्निन युक्त
(c) बहुकेन्द्रकी
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर:
(a) पतली भित्ति वाली।

3. विभज्योतक किसके लिए उत्तरदायी है?
(a) खाद्य संश्लेषण
(b) खाद्य भण्डारण
(c) कोशिका विभाजन
(d) कोशिका परिपक्वन।
उत्तर:
(c) कोशिका विभाजन।

4. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है-
(a) क्लोरेन्काइमा में
(b) स्क्लेरेन्काइमा में
(c) कॉलेन्काइमा में
(d) इन सभी में।
उत्तर:
(a) क्लोरेन्काइमा में।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

5. लिग्निन कोशिकाओं को कैसा बनाता है-
(a) दृढ़
(b) लचीली
(c) कमजोर
(d) पतली।
उत्तर:
(a) दृढ़।

6. दृढ़ ऊतक की भित्ति होती है-
(a) पेक्टिन युक्त
(b) लिग्निन युक्त।
(c) सुबेरियन युक्त
(d) क्यूटिन युक्त।
उत्तर:
(b) लिग्निन युक्त

7. कोशिकाओं का वह समूह जो उत्पत्ति, संरचना व कार्य में समान होता है, कहलाता है-
(a) ऊतक
(b) अंग
(c) अंग तन्त्र
(d) जाइलम
उत्तर:
(a) ऊतक।

8. लम्बी, लिग्निनयुक्त, उपस्थित होती हैं-
(a) जाइलम में
(b) फ्लोएम में
(c) स्क्लेरेन्काइमा में
(d) पैरेन्काइमा में।
उत्तर:
(a) जाइलम में।

9. चालनी नलिकाएँ पायी जाती हैं-
(a) जाइलम में
(b) फ्लोएम में।
(c) कैम्बियम में
(d) विभज्योतक में।
उत्तर:
(b) फ्लोएम में।

10. आँत के भीतरी अस्तर में एपीथीलियम होती है-
(a) शल्की एपीथीलियम
(b) स्तम्भाकार एपीथीलियम
(c) पक्ष्माभी एपीथीलियम
(d) घनाकार एपीथीलियम
उत्तर:
(b) स्तम्भाकार एपीथीलियम।

11. रुधिर के तरल आधात्री भाग को कहते हैं-
(a) R.B.C
(c) प्लेटलेट्स
(b) W.B.C
(d) प्लाज्मा।
उत्तर:
(d) प्लाज्मा।

12. संकुचनशीलता का गुण पाया जाता है-
(a) तन्त्रिका कोशिका में
(b) पेशी ऊतक में
(c) संयोजी ऊतक में
(d) उपर्युक्त सभी में।
उत्तर:
(b) पेशी ऊतक में।

13. किस पेशी ऊतक की कोशिकाएँ शाखित होती हैं?
(a) रेखित पेशियाँ
(c) हृदयक पेशियाँ
(b) अरेखित पेशियाँ
(d) माँसपेशियाँ।
उत्तर:
(c) हृदयक पेशियाँ।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

14. अरेखित पेशियाँ पायी जाती हैं-
(a) हृदय में
(b) आमाशय में।
(c) जाँघ में
(d) बाँह में।
उत्तर:
(b) आमाशय में

15. कौन से पेशी ऊतक जन्तु की इच्छानुसार कार्य करते हैं?
(a) रेखित
(b) अरेखित
(c) हृदयक
(d) कोई भी नहीं।
उत्तर:
(a) रेखित।

16. तन्त्रिका कोशिका को कहते हैं-
(a) न्यूरॉन
(b) एक्सोन
(c) डेन्ड्राइट
(d) कोशिकाकाय।
उत्तर:
(a) न्यूरॉन।

रिक्त स्थान भरो-

  1. ………………… में क्लोरोफिल पाया जाता है।
  2. जाइलम की कोशिका भित्ति ………………… होती है।
  3. अस्थि के अंत: कोशीय स्थान में ………………… और …………………. को लवण भरे होते हैं।
  4. अस्थि एक ………………… ऊतक का उदाहरण है।

उत्तर:

  1. पैरेन्काइमा
  2. मोटी
  3. कैल्सियम, फॉस्फोरस,
  4. संयोजी।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कॉलम ‘ख’
1. पैरेन्काइमा(क) लिग्निन का जमना
2. कोलेन्काइमा(ख) पौधे को दृढ़ता प्रदान करना
3. स्कलेरेन्काइमा(ग) भोजन संचित
4. जाइलम फाइबर(घ) पेक्टिन का कोनों में जमना

उत्तर:
1. (ग) भोजन संचित
2. (घ) पेक्टिन का कोनों में जमना
3. (क) लिग्निन का जमना
4. (ख) पौधे को दृढ़ता प्रदान करना

सत्य / असत्य 

  1. अंतर्विष्ट विभज्योत्तक तने व जड़ के शीर्ष पर स्थित होता है।
  2. एपीडर्मिस पौधे को सुरक्षा प्रदान करता है।
  3. कोलेन्काइमा की कोशिका भित्ति पतली होती है।
  4. हृदय पेशी बेलनाकार व शाखित होती हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पादप ऊतकों के दो मुख्य वर्गों के नाम लिखो।
उत्तर:
पादप ऊतकों के दो मुख्य वर्ग हैं-

  • विभज्यो-तक
  • स्थायी ऊतक।

प्रश्न 2.
पौधों में विभज्योतक कहाँ-कहाँ होता है?
उत्तर:
पौधों में विभज्योतक (मैरिस्टमेटिक टिशू) निम्नलिखित वृद्धि क्षेत्रों में होता है-

  • जड़ तथा तने के अग्रस्थ भाग में शीर्षस्थ विभज्योतक
  • जड़ की पर्व सन्धियों पर अन्तर्विष्ट विभज्योतक
  • जड़ तथा तने के पार्श्व में पाश्र्वय विभज्योतक

प्रश्न 3.
विभज्योतक की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर:
विभज्योतक की कोशिकाएँ निरन्तर विभाजित होती रहती हैं जिससे यह ऊतक पौधों की लम्बाई में वृद्धि में सहायता करता है।

प्रश्न 4.
श्रम विभाजन किसे कहते हैं?
उत्तर:
बहुकोशिकीय जीवों में भिन्न-भिन्न कोशिकाओं के समूह भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं। इसे श्रम विभाजन कहते हैं।

प्रश्न 5.
किस पादप ऊतक के पास रसधानी नहीं होती है?
उत्तर:
विभज्योतक के पास रसधानी नहीं होती है।

प्रश्न 6.
विभेदीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक विशिष्ट कार्य करने के लिए विभज्योतक के स्थायी रूप और आकार लेने की क्रिया को विभेदीकरण कहते हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

प्रश्न 7.
स्थायी ऊतक कैसे बनते हैं?
उत्तर:
विभज्योतक की कोशिकाएँ विभाजित होकर स्थायी ऊतक बनाती है।

प्रश्न 8.
क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर:
क्लोरोफिल युक्त कोशिकाओं को क्लोरेन्काइमा कहते हैं।

प्रश्न 9.
जलीय पौधों में तैरने का गुण किस कारण से होता है?
उत्तर:
जलीय पौधों के पैरेन्काइमा की कोशिकाओं के मध्य बड़ी-बड़ी गुहिकाएँ होती हैं जो पौधों को तैरने के लिए उत्प्लावन बल प्रदान करती हैं।

प्रश्न 10.
पौधों में लचीलापन का गुण किस कारण होता है?
उत्तर:
पौधों में लचीलेपन का गुण कॉलेन्काइमा के कारण होता है।

प्रश्न 11.
पौधों में कठोरता और मजबूती किस ऊतक के कारण होती है?
उत्तर:
पौधों में कठोरता और मजबूती स्क्लेरेन्काइमा के कारण होती है।

प्रश्न 12.
स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की कोशिकाएँ किस प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की कोशिकाएँ मृत, लम्बी और पतली होती हैं।

प्रश्न 13.
स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की भित्ति किस पदार्थ के कारण मोटी होती है?
उत्तर:
स्क्लेरेन्काइमा ऊतक की भित्ति लिग्निन नामक रासायनिक पदार्थ के कारण मोटी होती है।

प्रश्न 14.
शुष्क स्थानों में पाये जाने पादपों की एपीडर्मिस मोटी क्यों होती है ?
उत्तर:
शुष्क स्थानों में पाये जाने वाले पादपों की एपीडर्मिस जल की हानि कम करके उनकी रक्षा करने के लिए मोटी होती है।

प्रश्न 15.
पत्तियों की एपीडर्मिस में छोटे-छोटे छिद्रों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
पत्तियों की एपीडर्मिस में छोटे-छोटे छिद्रों की स्टोमेटा कहते हैं।

प्रश्न 16.
रक्षी कोशिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं?
उत्तर:
रक्षी कोशिकाएँ स्टोमेटा में पायी जाती हैं।

प्रश्न 17.
मरुस्थली पौधों की बाहरी सतह पर किस पदार्थ का लेप होता है?
उत्तर:
मरुस्थली पौधों की बाहरी सतह की एपीडर्मिस ..मैं क्यूटिन नामक रासायनिक पदार्थ का लेप होता है।

प्रश्न 18.
छाल की भित्ति पर हवा और पानी के प्रवेश को रोकने के लिए कौन सा रासायनिक पदार्थ होता है?
उत्तर:
सुबेरिन नामक रासायनिक पदार्थ होता है।

प्रश्न 19.
जटिल ऊतक किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने ऊतक जो एक साथ मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं, उन्हें जटिल ऊतक कहते हैं।

प्रश्न 20.
जटिल ऊतकों के दो उदाहरण दो।
उत्तर:
जाइलम तथा फ्लोएम जटिल ऊतक हैं।

प्रश्न 21.
संवहन ऊतक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जाइलम तथा फ्लोएम संवहन ऊतक हैं।

प्रश्न 22.
स्थायी ऊतक किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
ऐसे ऊतक जिनमें विभाजन की क्षमता नष्ट हो जाती है, उन्हें स्थायी ऊतक कहते हैं।

प्रश्न 23.
स्थायी ऊतक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं-

  • साधारण ऊतक
  • जटिल ऊतक।

प्रश्न 24.
साधारण (सरल) ऊतकों के नाम लिखिये।
उत्तर:
पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा तथा स्क्लेरेन्काइमा।

प्रश्न 25.
विभिन्न प्रकार के जन्तु ऊतकों के नाम लिखो।
उत्तर:
जन्तुओं में चार प्रकार के ऊतक होते हैं-

  • एपीथीलियम ऊतक
  • संयोजी ऊतक
  • पेशीय ऊतक और
  • तन्त्रिका ऊतक।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

प्रश्न 26.
एपीथीलियमी ऊतक क्या है?
उत्तर:
जन्तु शरीर को ढकने या बाह्य रक्षा प्रदान करने तथा शरीर के अन्दर स्थित अंगों को ढकने वाले ऊतक एपीथीलियमी ऊतक हैं।

प्रश्न 27.
आहारनली और मुँह का अस्तर किससे ढका होता है?
उत्तर:
आहारनली और मुँह का अस्तर शल्की एपीथीलियम से ढका होता है।

प्रश्न 28.
त्वचा को कटने-फटने से बचाने के लिए कौन सा एपीथीलियम ऊतक होता है?
उत्तर:
त्वचा को कटने-फटने से बचाने के लिए स्तरित शल्की एपीथीलियम ऊतक कार्य करता है।

प्रश्न 29.
स्तम्भाकार एपीथीलियम ऊतक किस जगह पाया जाता है?
उत्तर:
स्तम्भाकार एपीथीलियम ऊतक आँत के भीतरी अस्तर में पाया जाता है, जहाँ अवशोषण क्रिया होती है।

प्रश्न 30.
घनाकार एपीथीलियम ऊतक का क्या कार्य है?
उत्तर:
घनाकार एपीथीलियम ऊतक वृक्कीय नली तथा लार ग्रन्थि की नली के अस्तर का निर्माण करता है और उन्हें यान्त्रिक सहारा प्रदान करता है।

प्रश्न 31.
ग्रन्थिल एपीथीलियम किसे कहते हैं?
उत्तर:
एपीथीलियम ऊतक का कुछ भाग अन्दर की ओर मुड़कर एक बहुकोशिक ग्रन्थि का निर्माण करता है। यह ग्रन्थिल एपीथीलियम कहलाता है।

प्रश्न 32.
पक्ष्माभी स्तम्भाकार एपीथीलियम कहाँ स्थित होती है?
उत्तर:
पक्ष्माभी स्तम्भाकार एपीथीलियम श्वास नली में स्थित होती है।

प्रश्न 33.
रक्त किस प्रकार का ऊतक है?
उत्तर:
रक्त तरल संयोजी ऊतक है।

प्रश्न 34.
रक्त के तरल भाग को क्या कहते हैं?
उत्तर:
रक्त के तरल भाग को प्लाज्मा कहते हैं।

प्रश्न 35.
प्लाज्मा में कितने प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं?
उत्तर:
प्लाज्मा में तीन प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं-

  • लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC)
  • श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) तथा
  • प्लेटलेट्स।

प्रश्न 36.
रक्त का कार्य बताओ।
उत्तर:
रक्त का कार्य गैसों शरीर के पचे हुए भोजन, हॉर्मोन्स और उत्सर्जी पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में संवहन करना है।

प्रश्न 37.
अस्थि संयोजी ऊतक का कार्य क्या है?
उत्तर:
अस्थि संयोजी ऊतक शरीर के कंकाल (पंजर) का निर्माण कर शरीर को आकार प्रदान करता है, माँसपेशियों को सहारा देता है तथा शरीर के मुख्य अंगों को सहारा प्रदान करता है।

प्रश्न 38.
अस्थि कोशिकाएँ किस पदार्थ के कारण कठोर होती हैं?
उत्तर:
अस्थि कोशिकाएँ कैल्सियम तथा फॉस्फोरस के कारण कठोर होती हैं।

प्रश्न 39.
अस्थियों को माँसपेशियों से कौन जोड़ता है?
उत्तर:
अस्थियों को माँसपेशियों से संयोजी ऊतक कंडरा (Tendon) जोड़ता है।

प्रश्न 40.
कंडरा ऊतक कैसे होते हैं?
उत्तर:
कंडरा मजबूत तथा सीमित लचीलेपन वाले रेशेदार ऊतक होते हैं।

प्रश्न 41.
उपास्थि क्या है?
उत्तर:
उपास्थि (Cartilage) संयोजी ऊतक है, जो अस्थियों के जोड़ों को चिकना बनाती है। उपास्थि नाक, कान, कंठ और श्वास नली में उपस्थित होती है।

प्रश्न 42.
एरियोलर संयोजी ऊतक कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
एरियोलर संयोजी ऊतक त्वचा और माँसपेशियों के बीच रक्त नलिका के चारों ओर तथा नसों और अस्थि मज्जा में पाया जाता है।

प्रश्न 43.
वसा का संचय कहाँ होता है?
उत्तर:
वसा का संचय (संग्रह) त्वचा के नीचे भीतरी अंगों के बीच वसामय ऊतक (एडीपोज ऊतक) में होता है। वसा का संग्रह होने के कारण यह ऊष्मा का कुचालक होता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

प्रश्न 44.
पेशीय ऊतक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
पेशीय ऊतक तीन प्रकार के होते हैं- रेखित, अरेखित तथा हृदयक।

प्रश्न 45.
पेशियों में गति किस कारण होती है?
उत्तर:
पेशियों में संकुचनशील प्रोटीन होती है। इसके संकुचन एवं प्रसार के कारण अंगों में गति होती है।

प्रश्न 46.
अरेखित पेशियों की गति का नियन्त्रण कौन सी पेशियाँ करती हैं?
उत्तर:
अरेखित पेशियों की गति को चिकनी पेशियाँ या अनैच्छिक पेशियाँ नियन्त्रित करती हैं।

प्रश्न 47.
अति शीघ्र उत्तेजित होने वाली कोशिकाओं का नाम लिखो।
उत्तर:
तन्त्रिका ऊतक की कोशिकाएँ अति शीघ्र उत्तेजित हो जाती हैं।

प्रश्न 48.
तन्त्रिका ऊतक कौन से अंगों में पाया जाता है?
उत्तर:
तन्त्रिका ऊतक मस्तिष्क, सुषुम्ना (मेरुरज्जु) तथा तन्त्रिकाओं में उपस्थित होता है।

प्रश्न 49.
न्यूरॉन किसे कहते हैं?
उत्तर:
तन्त्रिका ऊतक की कोशिकाओं को न्यूरॉन कहते है।

प्रश्न 50.
डेन्ड्राइट क्या है?
उत्तर:
न्यूरॉन के कोशिकाकाय से निकले हुए पतले तन्तुओं को डेन्ड्राइट कहते हैं।

प्रश्न 51.
एक तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन) कितनी लम्बी हो सकती है?
उत्तर:
एक तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन) 1 मीटर तक लम्बी हो सकती है।

प्रश्न 52.
एक्सॉन किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक न्यूरॉन में एक लम्बा प्रवर्ध होता है, जिसे एक्सॉन कहते हैं।

प्रश्न 53.
न्यूरॉन में केन्द्रक कहाँ उपस्थित होता है?
उत्तर:
न्यूरॉन में केन्द्रक कोशिकाकाय (Cyton) में उपस्थित होता है।

लघुत्तरात्मक एवं दीर्घ उत्तरीय

प्रश्न 1.
ऊतक किसे कहते हैं? पादप ऊतकों के नाम बताओ।
उत्तर:
ऊतक (Tissues) – समान उत्पत्ति, संरचना तथा कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं।
पादप ऊतकों के विभिन्न प्रकार-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक 1

प्रश्न 2.
विभज्योतक के विशिष्ट लक्षण बताओ।
उत्तर:
विभज्योतक के विशिष्ट लक्षण-

  • इसकी कोशिकाएँ समान होती हैं।
  • इसकी कोशिकाएँ पतली कोशिका भित्ति वाली तथा सेल्यूलोज की बनी होती हैं।
  • कोशिकाओं का आकार गोल, अण्डाकार या बहुभुजी होता है।
  • कोशिकाओं के बीच अंतर्कोशिकीय स्थान नहीं होता है।
  • कोशिकाओं में पर्याप्त कोशिकाद्रव्य और स्पष्ट केन्द्रक होता है।
  • इनमें रिक्तिकाओं का अभाव होता है।
  • ये सदैव विभाजन करती रहती हैं।

प्रश्न 3.
स्थिति के आधार पर पौधों में कितने प्रकार के विभज्योतक होते हैं?
उत्तर:
विभज्योतक के प्रकार स्थिति के आधार पर ये ऊतक निम्नोक्त तीन प्रकार के होते हैं-

  • शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical meristem) – यह तने, जड़ व शाखाओं के अग्रभाग में स्थित होते हैं।
  • अंतर्वेशी विभज्योतक (Inter calary meristem) – यह पत्तियों के आधार, एकबीजपत्री पत्तियों में जैसे- घास, गाँठों (पर्वों) के आधार के नीचे, गाँठों के ऊपरी भाग के ऊपर पाये जाते हैं।
  • पाश्वय विभज्योतक (Lateral meristem) – यह संवहन बंडलों में केम्बियम के रूप में पाया जाता है। यह ऊतक द्विबीजपत्री तनों एवं जड़ के पार्श्व भागों में मिलता है। यह जड़ तथा तने की मोटाई (चौड़ाई) में वृद्धि में सहायक होता है।

प्रश्न 4.
सुरक्षात्मक ऊतक का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर:
सुरक्षात्मक ऊतक यह पादप शरीर का बाहरी आवरण होता है। यह आवरण एक कोशिकीय तथा मोटा होता है, मरुस्थलीय पौधों की बाहरी सतह वाले एपीडर्मिस में क्यूटिन (एक जल अवरोधक रासायनिक पदार्थ) का लेप होता है। यह पादप शरीर के आन्तरिक ऊतक को सुरक्षा प्रदान करता है।

जैसे-जैसे वृक्ष की आयु बढ़ती है, उसके बाह्य सुरक्षात्मक ऊतकों में कुछ परिवर्तन होता है बाहरी सतह की कोशिकाएँ मोटी छाल का निर्माण करती हैं। इन छालों की कोशिकाएँ मृत होती हैं। ये बिना अन्तः कोशिकीय स्थानों में व्यवस्थित होती हैं। इनकी भित्ति पर सुबेरियन नामक रसायन होता है जो इन खलों को हवा एवं पानी के लिए अभेद्य बनाता है।
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक 2

प्रश्न 5.
स्थायी ऊतक की विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
स्थायी ऊतक की विशेषताएँ-

  • इस ऊतक की कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता नहीं होती है।
  • ये विभज्योतकी ऊतकों के विभाजन के पश्चात् बनती हैं।
  • कोशिकाओं की आकृति, माप तथा संरचना निश्चित होती है।
  • इनमें रिक्तिकायुक्त कोशिकाद्रव्य होता है।
  • स्थायी ऊतक जीवित हो सकते हैं; जैसे- पैरेन्काइमा या मृत हो सकते हैं जैसे- स्क्लेरेन्काइमा।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 6 ऊतक

प्रश्न 6.
सरल स्थायी ऊतक किन्हें कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
सरल स्थायी ऊतक ऐसे ऊतक जो एक ही प्रकार की कोशिकाओं के समूह होते हैं, उन्हें सरल स्थायी ऊतक कहते हैं ये ऊतक निर्माण, संरचना एवं कार्यों में समान होते हैं। ये ऊतक तीन प्रकार के होते हैं-

  • पैरेन्काइमा
  • कॉलेन्काइमा
  • स्क्लेरेन्काइमा।

प्रश्न 7.
जाइलम तथा फ्लोएम के कार्य बताओ।
उत्तर:
जाइलम का कार्य ये जल तथा उसमें घुलित खनिज लवणों को जड़ से लेकर पौधों के ऊपरी भागों तक स्थानान्तरित करते हैं। ये पौधे को यान्त्रिक शक्ति भी प्रदान करते हैं। फ्लोएम का कार्य ये पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन को पौधे के विभिन्न भागों में स्थानान्तरित करते हैं।

प्रश्न 8.
संवहन बंडल किन्हें कहते हैं? इनका क्या कार्य है?
उत्तर:
संवहन बंडल – ये जटिल पादप ऊतक – जाइलम व फ्लोएम से मिलकर बने होते हैं। इनका मुख्य कार्य पानी, खनिज लवण और खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण करना है।

प्रश्न 9.
संयोजी ऊतक के कार्य लिखिए तथा विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
संयोजी ऊतक के कार्य-संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ते हैं, सहारा देते हैं और एक-दूसरे से बाँधे रहते हैं। कंकाल संयोजी ऊतक शरीर को निश्चित आकार प्रदान करता है व शरीर के कोमल अंगों की सुरक्षा करता है। वसा ऊतक वसा का भण्डारण करने में सहायक है। तरल संयोजी ऊतक रक्त तथा लसीका पदार्थों का परिवहन कार्य करते हैं। हमारे शरीर में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतक हैं-अस्थि, उपास्थि कंडरा, स्नायु रक्त अस्थि तथा उपास्थि के आधात्री (मेट्रिक्स) ठोस होता है, जबकि रक्त का मेट्रिक्स द्रव होता है।

प्रश्न 10.
कंडरा तथा स्नायु में अन्तर बताओ।
उत्तर:
कंडरा तथा स्नायु में अन्तर:

कंडरा (Tendon)स्नायु (Ligament)
1. यह माँसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है।1. यह अस्थियों को आपस में बाँधे रखता है।
2. यह कठोर तथा सीमित लोचदार ऊतक होता है।2. यह सघन, लचीला तथा रेशेदार ऊतक होता है।

प्रश्न 11.
रेखित तथा अरेखित पेशी में अन्तर बताइये।
उत्तर:
रेखित तथा अरेखित पेशी में अन्तर

रेखित पेशीअरेखित पेशी
1. इसकी कोशिकाएँ बेलनाकार एवं अशाखित होती हैं।1. इसकी कोशिकाएँ तर्कु रूप लम्बी व दोनों सिरों पर नुकीली होती हैं।
2. इनमें गहरी व हल्की धारियाँ होती हैं।2 इनमें पेशी तन्तुक होते हैं।
3. रेखित पेशी कोशिका बहुकेन्द्रकी होती हैं।3. इसकी कोशिका में केवल एक केन्द्रक मध्य में होता है।
4. ये जन्तु की इच्छा से सिकुड़ती व फैलती हैं ; अतः ये ऐच्छिक होती हैं।4. ये स्वतः ही सिकुड़ती व फैलती हैं; अतः ये अनैच्छिक होती हैं।
5. ये अस्थियों से जुड़ी रहती हैं; अतः इन्हें कंकाल पेशी भी कहते हैं।5. ये पेशियाँ अन्तरांगों में पायी जाती हैं।

प्रश्न 12.
एपीथीलियम ऊतक कितने प्रकार के होते हैं? उनका वर्णन करो।
उत्तर:
पाठ्य 6.3.1 एपीथीलियमी ऊतक के अन्तर्गत बिन्दु (1), (2), (3) तथा (4) देखिये।

प्रश्न 13.
संयोजी ऊतकों का संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर:
पाठ्य 6.3.2 संयोजी ऊतक देखिये।

प्रश्न 14.
पेशीय ऊतकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पाठ्य 6. 33 पेशीय ऊतक देखिये।

प्रश्न 15.
तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र बनाकर उसका संक्षेप में वर्णन करो।
उत्तर:
तन्त्रिका कोशिका का नामांकित चित्र – चित्र 6.12 देखिये।
तन्त्रिका कोशिका – इसे न्यूरॉन भी कहते हैं। एक न्यूरॉन में निम्नलिखित भाग होते हैं-
1. कोशिकाकाय (Cyton ) – यह तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का मुख्य भाग होता है। इसके अन्दर साइटोप्लाज्म भरा होता है जिसमें सिल्स के कण उतराते रहते हैं। इसके बीच में एक बड़ा केन्द्रक होता है।

2. डेन्ड्राइट (Dendrite ) – कोशिकाकाय से अनेक पतले धागे जैसे प्रवर्ध निकले होते हैं। इन्हें डेन्ड्राइट कहते हैं।

3. एक्सॉन (Axon ) – डेन्ड्रॉन से निकलने वाला एक प्रवर्ध लम्बा, मोटी व बेलनाकार होता है। इसे एक्सोन कहते हैं एक्सोन न्यूरोलीमा नामक झिल्ली से स्तरित होता है। इसके बीच में वसा का स्तर होता है। एक्सोन का अन्तिम सिरा शाखाओं में विभाजित होता है। इनके अन्तिम सिरे पर सिनेप्टिक घुण्डियाँ होती हैं। एक्सोन से तन्त्रिका तन्तुओं का निर्माण होता हैं।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ Important Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
शुद्ध गलती हुई बर्फ का तापमान है-
(a) 200K
(b) 373 K
(c) 273 K
(d) OK
उत्तर:
(c) 273 K

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन गैस है?
(a) दूध
(c) मोम
(b) लोहा
(d) कार्बन डाई ऑक्साइड।
उत्तर:
(d) कार्बन डाई ऑक्साइड।

प्रश्न 3.
दर्शाए गए चित्र में (i), (ii) व (iii) प्रक्रियाओं के नाम क्रमश: हैं-
JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ 1
(a) वाष्पीकरण, ऊर्ध्वपातन, जमना
(b) संगलन, वाष्पीकरण, निक्षेपण
(c) ऊर्ध्वपातन, संगलन, वाष्पीकरण
(d) संगलन, ऊर्ध्वपातन, वाष्पीकरण।
उत्तर:
(b) संगलन, वाष्पीकरण, निक्षेपण।

प्रश्न 4.
तापमान का अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक है-
(a) केल्विन (K)
(b) डिग्री सेल्सियस
(c) फारेनहाइट
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) केल्विन (K)।

प्रश्न 5.
गुब्बारे वाले गुब्बारों में कौन-सी गैस भरते हैं?
(a) नाइट्रोजन
(b) ऑक्सीजन
(c) कार्बन डाई ऑक्साइड
(d) हाइड्रोजन।
उत्तर:
(d) हाइड्रोजन।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 6.
पंचतत्व के अन्तर्गत आते हैं-
(a) जल
(b) पृथ्वी
(d) उपरोक्त सभी।
(c) अग्नि
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी।

प्रश्न 7.
विसरित होने का गुण नहीं होता है-
(a) ठोसों में में
(b) द्रवों में
(c) गैसों
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(a) ठोसों में।

प्रश्न 8.
दाब मापने की S. I. इकाई है-
(a) पास्कल (Pa)
(b) न्यूटन
(d) वॉट
(c) जूल
उत्तर:
(a) पास्कल (Pa)।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
(a) ठोसों का आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
(b) ठोसों को आसानी से दबाया जा सकता है।
(c) ठोस अपने बर्तन को पूर्णतया भर देते हैं।
(d) ठोस आसानी से बहते हैं।
उत्तर:
(a) ठोसों का आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) गैसें अपने बर्तन को पूर्णतया नहीं भरती हैं।
(b) गैसों को अधिक दबाया नहीं जा सकता है।
(c) गैसों का न तो निश्चित आकार होता है और न निश्चित आयतन।
(d) गैसों का आकार निश्चित होता है परन्तु उनका आयतन निश्चित नहीं होता है।
उत्तर:
(c) गैसों का न तो निश्चित आकार होता है और न निश्चित आयतन।

प्रश्न 11.
संपीड्यता अधिक होती है-
(a) ठोसों की
(b) द्रवों की
(c) गैसों की
(d) निम्न में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) गैसों की।

प्रश्न 12.
रबर बैंड को माना जाता है-
(a) ठोस
(b) द्रव
(c) गैस
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) ठोस।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 13.
127°C के संगत केल्विन में ताप होगा-
(a) 300°C
(b) 400 K
(c) 246 K
(d) 310°C
उत्तर:
(b) 400K

प्रश्न 14.
ताप बढ़ने पर वाष्पन की दर-
(a) घट जाती है
(b) बढ़ जाती है।
(c) कोई प्रभाव नहीं पड़ता है
(d) पहले घटती है फिर बढ़ती है।
उत्तर:
(b) बढ़ जाती है।

प्रश्न 15.
दो विभिन्न पदार्थों का स्वयं मिलना कहलाता है-
(a) ऊर्ध्वपातन
(b) वाष्पीकरण
(c) संघनन
(d) विसरण।
उत्तर:
(d) विसरण।

प्रश्न 16.
जल में घुली निम्न में से कौन-सी गैस विसरित होकर पौधों को जीवन प्रदान करती है?
(a) ऑक्सीजन
(c) हाइड्रोजन
(b) कार्बन डाई ऑक्साइड
(d) नाइट्रोजन
उत्तर:
(b) कार्बन डाई ऑक्साइड।

प्रश्न 17.
ठोस, द्रव व गैस के अणुओं के बीच की दूरी के सम्बन्ध में कौन-सा विकल्प सही है?
(a) ठोस > द्रव > गैस
(b) ठोस < द्रव < गैस
(c) ठोस < द्रव > गैस
(d) गैस < ठोस > द्रव।
उत्तर:
(b) ठोस < द्रव < गैस।

प्रश्न 18.
गुप्त ऊष्मा का SI मात्रक है-
(a) जूल
(b) जूल प्रति
(c) जूल प्रति केल्विन
(d) जूल केल्विन।
उत्तर:
(b) जूल प्रति

प्रश्न 19.
स्पंज है-
(a) ठोस
(b) द्रव
(c) गैस
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) ठोस।

प्रश्न 20.
एक वायुमण्डल दाब का मान होता है-
(a) 1.01 x 10³ पास्कल
(b) 1.01 × 109 पास्कल
(c) 1.01 × 105 पास्कल
(d) 1.01 × 105 पास्कल
उत्तर:
(c) 1.01 × 105 पास्कल

रिक्त स्थान भरो-

  1. पदार्थ ……………. से मिलकर बनता है।
  2. पदार्थ के कणों के बीच ……………. स्थान होता है।
  3. पदार्थ के कण निरंतर ……………. होते हैं।
  4. पदार्थ की मुख्यत: तीन अवस्थाएँ हैं ……………. और ……….!

उत्तर:

  1. कणों
  2. रिक्त
  3. गतिशील
  4. ठोस, द्रव, गैस।

सुमेलन कीजिए-

कॉलम ‘क’कौलम ‘ख’
1. 0°C(क) तत्त्व
2. 100°C(ख) जल का क्वथनांक
3. कपूर(ग) बर्फ का गलनांक
4. सोना(घ) ऊर्ध्वपातन

उत्तर:
1. (ग)
2. (ख)
3. (घ)
4. (क)।

सत्य / असत्य –

  1. तापमान में वृद्धि से वाष्पीकरण कम होता है।
  2. दाब में परिवर्तन करने पर पदार्थ की अवस्था में कोई बदलाव नहीं होता है।
  3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
  4. हमारे विचार तथा भावनाएँ भी पदार्थ का उदाहरण हैं।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य।

अतिलघूत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
ठोस, द्रव व गैस।

प्रश्न 2.
ठोसों को ज्यादा क्यों नहीं दबाया जा सकता है?
उत्तर:
ठोसों के अणु अत्यन्त पास-पास एक व्यवस्थित क्रम में सजे रहते हैं तथा उनके बीच अन्तराणुक स्थान कम होता। इस कारण से ठोसों को अधिक दबाया नहीं जा सकता है।

प्रश्न 3.
विसरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
दो या दो से अधिक पदार्थों का स्वतः एक दूसरे से मिलकर समांग मिश्रण बना लेना विसरण कहलाता है।

प्रश्न 4.
गर्मियों में मिट्टी से बने घड़े में पानी ठण्डा कैसे रहता है?
उत्तर:
मिट्टी के घड़े में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिनसे होकर जल का वाष्पीकरण होता रहता है तथा घड़े में भरा जल ठण्डा हो जाता है।

प्रश्न 5.
दूध को ठण्डा करने के लिए गिलास में से कटोरी या तश्तरी में क्यों उड़ेलते हैं?
उत्तर:
दूध को कटोरी या तश्तरी में उड़ेलने से दूध का सतह क्षेत्रफल बढ़ जाता है जिससे अधिक ऊष्मा विकिरित होती है तथा दूध शीघ्रता से ठण्डा हो जाता है।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 6.
गलनांक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह निश्चित ताप जिस पर सम्पूर्ण पदार्थ ऊष्मा ग्रहण करके द्रव अवस्था में बदल जाता है, गलनांक कहलाता है।

प्रश्न 7.
तारों में प्लाज्मा क्यों बनता है?
उत्तर:
उच्च तापमान के कारण।

प्रश्न 8.
BEC का पूर्ण नाम बताइए।
उत्तर:
बोस-आइस्टाइन कंडनसेट।

प्रश्न 9.
BEC किस प्रकार तैयार किया जाता है?
उत्तर:
सामान्य वायु के घनत्व के एक लाखवें भाग जितने कम घनत्व वाली गैस को बहुत ही कम तापमान पर ठण्डा करने पर BEC तैयार होता है।

प्रश्न 10.
सूर्य और तारों में चमक किस कारण होती है?
उत्तर:
प्लाज्मा के कारण।

प्रश्न 11.
द्रवों के गुण बताइए।
उत्तर:
द्रवों में बहने का गुण तथा आकार परिवर्तन का गुण होता है।

प्रश्न 12.
पदार्थ के कणों के मध्य उपस्थित आकर्षण बल का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
इस आकर्षण बल के कारण ही पदार्थ के कण आपस में बँधे रहते हैं तथा पदार्थ का आकार एवं सीमाएँ निश्चित रहती हैं।

प्रश्न 13.
सामान्य दाब क्या होता है?
उत्तर:
समुद्र की सतह पर वायुमण्डलीय दाब एक वायुमण्डल होता है, इसे ही सामान्य दाब (1 atm) कहते हैं।

प्रश्न 14.
प्लाज्मा अवस्था में कण किस रूप में रहते हैं?
उत्तर:
प्लाज्मा अवस्था में कण अत्यधिक ऊर्जा वाले तथा अत्यधिक उत्तेजित होते हैं। ये कण आयनीकृत गैस के रूप में रहते हैं।

प्रश्न 15.
फ्लोरसेंट ट्यूब में क्या होता है?
उत्तर:
प्लाज्मा।

प्रश्न 16.
BEC की अवस्था प्राप्त करने के लिए भौतिकी में किसे नोबेल पुरस्कार दिया गया था?
उत्तर:
सन् 2001 में अमेरिका के एरिक ए कॉर्नेल, उल्फगैंग केटरले और कार्ल ई. वेमैन को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 17.
एसीटोन को हथेली पर गिराने पर हथेली ठण्डी होने की घटना का स्पष्टीकरण किसके द्वारा किया जा सकता है?
उत्तर:
वाष्पीकरण द्वारा।

प्रश्न 18.
पदार्थ की किस अवस्था में अन्तरा अणुक दूरी सबसे कम होती है?
उत्तर:
ठोस में।

प्रश्न 19.
पदार्थ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
विश्व की प्रत्येक वस्तु, जो स्थान घेरती है तथा जिनमें द्रव्यमान होता है, उसे पदार्थ कहा जाता है।

प्रश्न 20.
स्वतन्त्र अवस्था में रह सकने वाले पदार्थ का सबसे छोटा कण क्या है?
उत्तर:
अणु।

JAC Class 9 Science Important Questions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

प्रश्न 21.
ठोस कार्बनडाई ऑक्साइड को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
शुष्क बर्फ।

प्रश्न 22.
LPG व CNG के पूरे नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. LPG : Liquified Petroleum Gas (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस)
  2. CNG: Compressed Natural Gas ( संपीडित प्राकृतिक गैस)

प्रश्न 23.
कौन-सा पदार्थ तीनों अवस्थाओं में रह सकता है?
उत्तर:
जल।

प्रश्न 24.
जल का क्वथनांक कितना होता है?
उत्तर:
373 K या 100°C

प्रश्न 25.
द्रव आसानी से क्यों बहते हैं?
उत्तर:
द्रवों में अन्तरा अणुक आकर्षण बल कुछ कमजोर होने के कारण उसके अणु एक-दूसरे के ऊपर फिसलने की क्षमता रखते हैं, इसीलिए द्रव आसानी से बहते हैं।

प्रश्न 26.
द्रव्य का वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है?
उत्तर:
द्रव्य का वर्गीकरण उनके भौतिक गुण एवं रासायनिक गुणों के आधार पर किया जाता है।

लघूत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वाष्पन की परिभाषा दीजिए। वाष्पन किन घटकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
वह प्रक्रिया जिसमें कोई द्रव अपने क्वथनांक से कम ताप पर वाष्प में परिवर्तित हो जाए, वाष्पन कहलाती है। वाष्पन निम्नलिखित घटकों पर निर्भर करता है-

  • ताप वृद्धि से वाष्पन की दर अधिक हो जाती है।
  • सतह के क्षेत्रफल में वृद्धि से वाष्पन की दर अधिक हो जाती है।
  • आर्द्रता में कमी से वाष्पन की दर बढ़ती है तथा आर्द्रता अधिक होने पर वाष्पन की दर कम हो जाती है।

प्रश्न 2.
कोई ठोस किस प्रकार पिघलता है? समझाइए।
उत्तर:
ठोस के तापमान को बढ़ाने पर उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, इस वृद्धि के कारण कण अधिक तेजी से कम्पन करने लगते हैं। ऊष्मा के द्वारा प्रदान की जाने वाली ऊर्जा कर्णों के बीच के आकर्षण बल को पार कर लेती है। इस कारण कण अपने नियत स्थान को छोड़कर अधिक स्वतन्त्र होकर गति करने लगते हैं तब एक ऐसी अवस्था आती है जब ठोस पिघलकर द्रव में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए- (1) संघनन (2) हिमीकरण (3) संगलन
उत्तर:

  1. संघनन (Condensation) – वह प्रक्रम जिसमें वाष्प को ठण्डा करने पर द्रव में परिवर्तित किया जाता है, संघनन कहलाता है।
  2. हिमीकरण (Freezing ) – वह प्रक्रम जिसमें ठण्डा करने पर द्रव ठोस में परिवर्तित होता है, हिमीकरण कहलाता है।
  3. संगलन – वह प्रक्रम जिसमें गर्म करने पर ठोस, द्रव में परिवर्तित होता है, संगलन कहलाता है।

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प्रश्न 4.
उबलने तथा वाष्पन में भेद कीजिए।
उत्तर:

उबलनावाष्पन
1. यह एक निशिचत ताप पर होता है।1. यह प्रत्येक ताप पर होता है।
2. यह जल्दी-जल्दी होता है2. यह धीरे-धीरे होता है।
3. यह सम्पूर्ण द्रव में होता है।3. यह केवल ऊपरी सतह पर ही होता है।
4. इस क्रिया में ध्वनि उत्पन्न होती है।4. इस क्रिया में कोई ध्वनि उत्पन्न नहीं होती है, यह एक शान्त क्रिया है।

प्रश्न 5.
पदार्थ की अवस्था पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
दिए गए पदार्थ की भौतिक अवस्था को गर्म या ठण्डा करके परिवर्तित किया जा सकता है जैसे-बर्फ गर्म करने पर पिघल कर द्रव बनाती है तथा द्रव अवस्था में जल को गर्म करने पर यह भाप में परिवर्तित हो जाता है अतः पदार्थ की विभिन्न अवस्थाएँ अन्तः परिवर्तनीय हैं।
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प्रश्न 6.
गैस बर्तन की दीवार पर दाब कैसे डालती है?
उत्तर:
गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल बहुत कम होता है, इस कारण से गैस के अणु किसी भी दिशा में गति करने के लिए स्वतन्त्र रहते हैं। गैस के अणुओं की गति अनियमित तथा अत्यधिक तीव्र होती है। इस अनियमित गति के कारण ये कण आपस में एवं वर्तन की दीवारों से टकराते हैं। वर्तन की दीवार पर गैस कणों द्वारा प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगे बल के कारण गैस का दबाव बनता है।

प्रश्न 7.
पदार्थ को परिभाषित कीजिए पदार्थ की अवस्थाओं से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पदार्थ पदार्थ वह वस्तु है जिसमें द्रव्यमान तथा भार होता है और जो परिवर्तन का विरोध करता है। पदार्थ का अनुभव ज्ञानेन्द्रियों द्वारा किया जा सकता है। जैसे- मेज, किताब, जल आदि पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के रूप में विद्यमान हैं।

पदार्थ की अवस्थाएँ – पदार्थ की तीन अवस्थाएँ ठोस, द्रव व गैस होती हैं।

ठोस – इस भौतिक अवस्था में आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं; जैसे- लोहा, पत्थर आदि। द्रव पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें आयतन निश्चित परन्तु आकार अनिश्चित होता है जैसे- दूध, जल आदि।

गैस – पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसमें आकार एवं आयतन दोनों ही अनिश्चित होते हैं, गैस कहलाती है। जैसे – वायु, धुँआ आदि।

प्रश्न 8.
पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पदार्थ की ठोस, द्रव तथा गैस अवस्थाओं के गुणधर्म निम्नलिखित हैं-
पदार्थ की ठोस अवस्था के गुणधर्म-

  • आकार ठोस अवस्था में उसके कणों की स्थितियाँ निश्चित क्रम के अनुसार होती हैं जिसके कारण ठोसों का आकार निश्चित होता है।
  • आकर्षण बल ठोसों में कणों के बीच अन्तराणुक स्थान बहुत कम होता है तथा आकर्षण बल बहुत शक्तिशाली होता है।
  • घनत्व – ठोस में कणों के बहुत अधिक पास-पास होने के कारण टोस का घनत्व अधिक होता है जिसके कारण ठोस कठोर होते हैं।
  • आयतन ठोस पर दाब डालने पर उसके आयतन में परिवर्तन नहीं होता क्योंकि उसके कण पास-पास स्थित होते हैं अतः ठोस का आयतन भी निश्चित होता है।

पदार्थ की द्रव अवस्था के गुणधर्म-
(i) आकार द्रवों के कण गति करते रहते हैं, जिसके फलस्वरूप इसके स्थान स्थिर नहीं रहते हैं। इस कारण से द्रवों का आकार निश्चित नहीं होता है।

(ii) आयतन – द्रव के कण सीमा के अन्दर ही स्वतन्त्रता- पूर्वक गति करते हैं। जब द्रव की ऊपरी सतह तक अणु पहुँचता है तब द्रव के अन्दर के कण उसे आकर्षित करते हैं। इस कारण द्रवों का आयतन निश्चित रहता है।

(iii) तरलता – द्रव, कणों की गतिशीलता के कारण ही तरल होते हैं। गाढ़े द्रवों में कण कम गतिशील तथा तरल द्रवों में कण अधिक गतिशील होते हैं।

(iv) वाष्पन – कणों के अधिक गतिमान होने के कारण द्रव से वाष्प अवस्था में बदलने की इस क्रिया को वाष्पन कहते हैं।

(v) क्वथन – द्रव को गर्म करने पर इसके कणों की गतिज ऊर्जा में तेजी से वृद्धि होती है। अतः तेज गति वाले कण द्रव की सतह को तेजी से छोड़कर वायुमण्डल में आ जाते हैं। द्रव को लगातार गर्म करते रहने पर वाष्पन की क्रिया पूरे द्रव में होने लगती है तथा द्रव उबलने लगता है। इस स्थिति में द्रव के सभी कणों की ऊर्जा इतनी हो जाती है। कि वे सभी समूहों के रूप में द्रव की सतह को छोड़कर जाने लगते हैं। इस क्रिया को क्वथन कहते हैं तथा जिस ताप पर यह क्रिया होती है, उसे क्वथनांक कहते हैं।

(vi) जमना तथा हिमांक- द्रव को ठण्डा करने पर उसके कणों का वेग कम होता जाता है तथा अन्तराणुक आकर्षण बल गति को नियन्त्रित कर लेता है और कणों की स्थितियाँ निश्चित होने लगती हैं। जिससे ये अत्यन्त समीप आ जाते हैं। तथा अन्तराणुक स्थान कम हो जाता है। यही जमने की प्रक्रिया है।

पदार्थ की गैस अवस्था के गुणधर्म-
(i) आकार – गैसों के कण अत्यन्त तीव्र वेग में गति करते रहते हैं। इसके कणों के स्थान निश्चित नहीं रहते हैं। अतः गैसों का आकार अनिश्चित होता है।

(ii) आयतन – अत्यन्त तीव्र वेग से गैसों के कण अनियमित पथ पर सभी सम्भव दिशाओं में निरन्तर गति करते रहते हैं। इसलिए गैसों का आयतन निश्चित नहीं होता है।

(iii) दाब – गैस के कण बर्तन की दीवारों पर निरन्तर टकराते रहते हैं जिससे वेग और दिशा में परिवर्तन होता रहता है। बर्तन की दीवार पर कणों के निरन्तर टकराने के दौरान कण बर्तन की दीवारों को संवेग स्थानान्तरित करते हैं जिसके फलस्वरूप दाब उत्पन्न होता है।

(iv) गतिज ऊर्जा – गैसीय अवस्था में पूर्णतया गतिज ऊर्जा होती है। इस अवस्था में स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

(v) द्रवण – गैस पर दाब लगाने पर उसका ताप कम करने पर अणु पास-पास आने पर उनकी गति मन्द होती जाती है। अतः दाब डालकर गैस को ठण्डा करने पर वह द्रव में बदल जाती है। गैस के द्रव बनने की इस क्रिया को द्रवण कहते हैं।

प्रश्न 9.
गैसों की संपीड्यता के अधिक होने के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
गैसों की संपीड्यता अधिक होने के निम्नलिखित उपयोग हैं-

  • वाहनों के ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाली सी. एन. जी. (CNG) सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।
  • अस्पतालों में मरीज को दी जाने वाली ऑक्सीजन गैस सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।
  • घरेलू उपयोग में एल. पी. जी. सिलिण्डरों में संपीडित की जाती है।

JAC Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

Jharkhand Board JAC Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

Jharkhand Board Class 11 History आधुनिकीकरण के रास्ते In-text Questions and Answers

पृष्ठ 236

क्रियाकलाप 1 : जापानियों और एजटेकों का यूरोपीय लोगों से जो सम्पर्क / टकराव हुआ, उसके अन्तरों की पहचान करिए।
उत्तर:
जापानियों का यूरोपीय लोगों से सम्पर्क / टकराव – 1854 में अमरीकी कामोडोर मैथ्यू पेरी की माँग पर जापान को अमरीका के साथ राजनयिक और व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने पड़े। जापान ने अमरीका की सैन्य शक्ति से भयभीत होकर अपने तीन बन्दरगाह अमेरिका के लिए खोल दिये। इसी प्रकार जापान को इंग्लैण्ड, रूस, हालैण्ड आदि देशों से भी सन्धियाँ करनी पड़ीं। जापान के बहुत से विद्वान् और नेता यूरोप के नए विचारों से सीखना चाहते थे, बजाय उसकी उपेक्षा करने के। कुछ ने देश को बाहरी दुनिया के लिए धीरे-धीरे और सीमित तरह से खोलने के लिए तर्क दिया।

एजटेकों का यूरोपीय लोगों से सम्पर्क – स्पेन के सेनापति कोर्टेस ने मैक्सिको पर आक्रमण किया। स्पेन के सैनिकों ने ट्लैक्सक्लानों पर आक्रमण कर दिया। अन्त में उन्होंने समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने क्रूरतापूर्वक उन सबका सफाया कर दिया। एजटेक शासक ने कोर्टेस पर उपहारों की वर्षा कर दी; परन्तु कोर्टेस ने धोखे से शासक को गिरफ्तार कर लिया। जब एजटेकों ने विद्रोह किया, तो स्पेन की सेना ने एजटेकों के विद्रोह को कुचल दिया।

पृष्ठ 242

क्रियाकलाप 2 : निशितानी ने ‘आधुनिक’ को जिस तरह परिभाषित किया, क्या आप उससे सहमत हैं?
उत्तर:
जापान के दर्शनशास्त्री निशितानी केजी ने ‘आधुनिक’ को तीन पश्चिमी धाराओं के मिलन और एकता से परिभाषित किया : पुनर्जागरण, प्रोटेस्टेन्ट सुधार और प्राकृतिक विज्ञानों का विकास। उन्होंने कहा कि जापान की ‘नैतिक ऊर्जा’ ने उसे एक उपनिवेश बनने से बचा लिया। जापान का यह कर्त्तव्य बनता है कि एक नई विश्व पद्धति, एक विशाल पूर्वी एशिया का निर्माण किया जाए। इसके लिए एक नई सोच की आवश्यकता है, जो विज्ञान और धर्म को जोड़ सके। हम इस परिभाषा से सहमत हैं।

पृष्ठ 247

क्रियाकलाप 3 : भेदभाव का एहसास लोगों को कैसे एकताबद्ध करता है?
उत्तर:
शंघाई में एक काला अमरीकी तुरेहीवादक, बक क्लेटन अपने जैज ऑरकेस्ट्रा के साथ विशेषाधिकार प्राप्त प्रवासी का जीवन व्यतीत कर रहा था। वह काला था तथा एक बार कुछ गोरे अमरीकी लोगों ने उसे तथा उसके साथियों को मार-पीट करके उन्हें उनके होटल से बाहर निकाल दिया। वह अमरीकी होने के बावजूद स्वयं नस्ली भेदभाव का शिकार होने के कारण चीनियों के कष्टदायक जीवन के साथ उसकी बहुत सहानुभूति थी।

गोरे अमरीकियों के साथ हुई अपनी लड़ाई, जिसमें वे जीत गए, के बारे में वह लिखते हैं, “चीनी तमाशबीनों ने हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे हमने उनका अभीष्ट काम सम्पन्न किया हो और घर पहुँचने तक रास्ते भर वे किसी विजेता फुटबाल टीम की तरह हमारा अभिनन्दन करते रहे।”

चीनी लोग निर्धनता का जीवन व्यतीत करते थे। उन्हें कठोर शारीरिक श्रम करना पड़ता था। चीनियों की दयनीय दशा का चित्रण करते हुए वह लिखते हैं कि – ” मैं कभी-कभी देखता हूँ कि बीस या तीस कुली मिलकर किसी बड़े भारी ढेले को खींच रहे हैं, जो कि अमेरिका में किसी ट्रक द्वारा या घोड़े द्वारा खींचा जाता है। ये लोग इन्सानी घोड़ों से अलग कुछ नहीं लगते थे और पूरा काम करने के बाद उन्हें इतना ही मिलता था, कि किसी तरह पेट भर चावल और सोने का एक स्थान प्राप्त कर लें।

मेरी समझ में नहीं आता, वे कैसे अपना काम चलाते थे।” चीनी संजीव पास बुक्स लोगों ने उस अमरीकी व्यक्ति के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार किया। इससे सिद्ध होता है कि भेदभाव का एहसास लोगों को एकताबद्ध करता है। अमरीकी और चीनी लोग भेदभाव के शिकार थे। इसी भावना ने उन्हें एकताबद्ध कर दिया था।

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लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मेजी पुनर्स्थापना से पहले की वे अहम घटनाएँ क्या थीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को सम्भव किया?
उत्तर:
मेजी पुर्स्थापना से पहले की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – 1867-68 में जापान में मेजी पुनर्स्थापना हुई। इससे पूर्व निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण घटनाएँ घटीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को सम्भव बनाया।
(1) किसानों से हथियार ले लिए गए। अब केवल सामुराई लोग ही तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति एवं व्यवस्था बनी रही।

(2) दैम्पो को अपने क्षेत्रों की राजधानियों में रहने के आदेश दिए गए और उन्हें काफी स्वायत्तता प्रदान की गई।

(3) मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए जमीन का सर्वेक्षण किया गया तथा उत्पादकता के आधार पर भूमि का वर्गीकरण किया गया।

(4) 17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान में एदो विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन गया। ऐसे 6 शहरों का उदय हुआ जिनकी जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। इससे वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ। व्यापारी वर्ग ने नाटक और कलाओं को प्रोत्साहन दिया।

(5) क्योतो के निशिजन में रेशम उद्योग के विकास के लिए प्रयास किए गए, जिससे रेशम का आयात कम किया जा सके। कुछ ही वर्षों में निशिजन का रेशम सम्पूर्ण विश्व में उत्कृष्ट रेशम माना जाने लगा।

प्रश्न 2.
जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोजमर्रा की जिन्दगी में किस तरह बदलाव आए? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जापानियों की रोजमर्रा की जिन्दगी में परिवर्तन – जापान के विकास के साथ-साथ जापानियों की रोजमर्रा की जिन्दगी में अनेक परिवर्तन आए।
यथा –
(i) पृथक् परिवार प्रणाली – आधुनिकीकरण से पहले जापान में पैतृक परिवार व्यवस्था प्रचलित थी। इसमें कई पीढ़ियाँ परिवार के मुखिया के नियन्त्रण में रहती थीं; परन्तु समृद्ध होने के साथ- साथ, लोगों में परिवार के बारे में नये विचारों का उदय हुआ। अब ‘नया घर’ का प्रचलन हुआ। पृथक् परिवार प्रथा के अन्तर्गत पति – पत्नी साथ रहकर कमाते थे और घर बसाते थे।

(ii) नया घर व्यवस्था – पृथक् परिवार प्रथा के कारण नये प्रकार के घरेलू उत्पादों, नये प्रकार के पारिवारिक मनोरंजनों आदि की माँग बढ़ने लगी । अब लोग नए प्रकार के घरों की माँग करने लगे जिनमें सभी प्रकार की सुख- सुविधाएँ हों। 1920 के दशक में निर्माण कम्पनियों ने प्रारम्भ में 200 येन देने के पश्चात् निरन्तर 10 वर्ष के लिए 12 यान प्रतिमाह की किस्तों पर लोगों को सस्ते मकान उपलब्ध कराए।

प्रश्न 3.
पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना छींग राजवंश ने कैसे किया?
उत्तर:
चीन के छींग राजवंश के शासकों को पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना निम्न प्रकार से किया

  1. क्विंग शासकों ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में अनेक सुधार किए ताकि वह आधुनिक प्रशासकीय व्यवस्था के मापदण्डों पर ठीक उतर सके।
  2. छींग शासकों ने नवीन सेना तथा नवीन शिक्षा व्यवस्था के लिए नीतियाँ बनाईं।
  3. शिक्षा को सुधारने की ओर विशेष ध्यान दिया गया। लोगों को नए विषयों की जानकारी हो सके इसलिए विद्यार्थियों को जापान, इंग्लैंड, फ्रांस आदि में भेजा गया ताकि वे नए विचार सीखकर वापस आयें। इसके अतिरिक्त पुरानी चीनी परीक्षा प्रणाली समाप्त कर दी गई।
  4. संवैधानिक सरकार की स्थापना के लिए स्थानीय विधायिकाओं का भी गठन किया गया। उन्होंने चीन को उपनिवेशीकरण से बचाने का भरसक प्रयास किया।
  5. कन्फ्यूशियसवाद को प्रोत्साहन दिया गया।

प्रश्न 4.
सन – यात – सेन के तीन सिद्धान्त क्या थे?
उत्तर:
सन – यात – सेन के तीन सिद्धान्त- डॉ. सनयात सेन के कार्यक्रम तीनं सिद्धान्तों पर आधारित थे, जिन्हें ‘सनमिन चुई’ कहा जाता था। उसके सिद्धान्त निम्नलिखित थे –
1. राष्ट्रवाद–इसका अर्थ था मांचू वंश को सत्ता से हटाना, क्योंकि मांचू वंश विदेशी राजवंश के रूप में देखा जाता था। इसके अतिरिक्त अन्य साम्राज्यवादी शक्तियों को चीन से हटाना भी राष्ट्रवाद का उद्देश्य था। डॉ. सनयात सेन ने चीनियों को विदेशी साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

2. गणतन्त्रवाद – डॉ. सेन चीन में गणतान्त्रिक सरकार की स्थापना करना चाहते थे। डॉ. सनयात सेन जनता को सर्वोपरि स्थान देते थे तथा चाहते थे कि जनता शासन के कार्यों में अधिकाधिक भाग ले।

3. समाजवाद-डॉ. सनयात सेन समाजवाद की स्थापना पर बल देते थे। समाजवाद का उद्देश्य पूँजी का नियमन करना तथा भूस्वामित्व में समानता लाना था।

प्रश्न 5.
कोरिया ने 1997 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना किस प्रकार किया?
उत्तर:
व्यापार घाटे में वृद्धि, वित्तीय संस्थानों के खराब प्रबंधन, संगठनों द्वारा बेईमान व्यापारिक संचालन के कारण कोरिया को 1997 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा। कोरिया ने इस संकट का सामना निम्न प्रकार से किया –

  • कोरिया ने इस संकट को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा आपात वित्तीय सहायता के जरिए संभालने की कोशिश की गई।
  • इस आर्थिक संकट में पूरे देश ने एक साथ प्रयास किए, नागरिकों ने गोल्ड कलेक्शन मूवमेंट के माध्यम से विदेशी ऋण भुगतान के लिए सक्रिय रूप से योगदान दिया।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 6.
क्या पड़ोसियों के साथ जापान के युद्ध और उसके पर्यावरण का विनाश तीव्र औद्योगीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ?
उत्तर:
जापान की तीव्र औद्योगिक नीति के परिणाम जापान के आधुनिकीकरण के अन्तर्गत जापान का तीव्र गति से औद्योगीकरण हुआ। जापान में लोहे-कपड़े, गोला- बारूद, बन्दूक, तोपें आदि बनाने के अनेक कारखाने स्थापित किये गए। इस औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप जापान एक अत्यन्त शक्तिशाली एवं समृद्ध देश बन गया। इससे जापान को साम्राज्यवादी नीति अपनाने की प्रेरणा मिली जिसके फलस्वरूप उसे पड़ोसियों के साथ युद्ध लड़ने पड़े।

1. पड़ोसी देशों के साथ युद्ध –
(1) चीन के साथ युद्ध – 1894-95 में कोरिया के मामले पर जापान और चीन के बीच युद्ध छिड़ गया, जिसमें जापान की विजय हुई। अन्त में 1895 में चीन को जापान से एक सन्धि करनी पड़ी, जिसे ‘शिमोनिस्की की सन्धि’ कहते हैं।

(2) रूस-जापान युद्ध-जापान और रूस दोनों ही कोरिया तथा मन्चूरिया में अपना-अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते थे। अतः जापान ने 8 फरवरी, 1904 को पोर्ट आथर पर आक्रमण कर दिया। इस प्रकार रूस तथा जापान के बीच युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में रूस की बुरी तरह से पराजय हुई। अन्त में 5 सितम्बर, 1905 को रूस तथा जापान के बीच एक सन्धि हो गई, जिसे ‘पोर्ट्समाउथ की सन्धि’ कहते हैं।

(3) चीन से युद्ध – 1931 में जापान ने मन्चूरिया पर आक्रमण कर दिया और 4 जनवरी, 1932 तक जापान ने सम्पूर्ण मन्चूरिया पर अधिकार कर लिया। जापान ने मन्चूरिया में ‘मन्चुकाओ’ नामक एक पृथक् राज्य की स्थापना कर दी। जापान ने चीन के जेहौल प्रदेश पर भी अधिकार कर लिया। 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण कर पीकिंग, नानकिंग, शंघाई, कैंटन आदि नगरों पर अधिकार कर लिया।

2. पर्यावरण का विनाश –
(i) जापान की औद्योगीकरण की नीति तथा लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की माँग से पर्यावरण का विनाश हुआ।

(ii) ओशियो खान से वातारासे नदी में प्रदूषण फैल रहा था जिसके कारण 100 वर्ग मील की कृषि भूमि नष्ट हो रही थी और एक हजार परिवार प्रभावित हो रहे थे। इस पर 1897 में जापानी संसद के पहले निम्न सदन के सदस्य तनाको शोजो ने प्रदूषण के विरुद्ध पहला आन्दोलन छेड़ा। इस आन्दोलन ने सरकार को प्रभावी कार्यवाही करने के लिए विवश किया। 1960 के दशक में नागरिक समाज आन्दोलन ने बढ़ते हुए औद्योगीकरण के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की पूर्ण रूप से उपेक्षा करने का विरोध किया।

(iii) अरगजी का विष, जिसके चलते बड़ी ही कष्टदायक बीमारी होती थी, एक प्रारम्भिक सूचक था। इसके बाद 1960 के दशक में मिनामाता के पारे के जहर के फैलने और 1970 के दशक के उत्तरार्द्ध में हवा में प्रदूषण से भी समस्याएँ उत्पन्न हुईं।

प्रश्न 7.
क्या आप मानते हैं कि माओत्सेतुंग और चीन के साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफलता प्राप्त की?
उत्तर:
माओत्से तुंग तथा साम्यवादी दल की उपलब्धियाँ-आधुनिक चीन के निर्माण में माओत्से तुंग का महत्त्वपूर्ण स्थान है। माओत्से तुंग तथा साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने तथा उसकी वर्तमान सफलता की आधारशिला रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। च्यांग काई शेक द्वारा साम्यवादियों का दमन – 1925 में डॉ. सनयात सेन की मृत्यु हो गई और उसके बाद च्यांग काई शेक कुओमिंगतांग दल का नेता बना।

उसने राष्ट्रीय एकता का प्रयास किया, स्थानीय नेताओं को अपने नियन्त्रण में किया। यद्यपि उसने देश को एकीकृत करने का प्रयास किया, परन्तु अपने संकीर्ण सामाजिक आधार और सीमित राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण वह असफल हो गया। उसने डॉ. सनयात सेन के दो सिद्धान्तों-पूँजी के नियमन तथा भूमि अधिकारों में समानता लानाको कार्यान्वित नहीं किया।

उसने साम्यवादियों का कठोरतापूर्वक दमन किया। इन सभी कारणों से वह देश में अलोकप्रिय हो गया। चीनी साम्यवादी दल का उदय और माओत्से तुंग का कुशल नेतृत्व – 1921 में चीन में साम्यवादी दल की स्थापना हुई। माओत्से तुंग के नेतृत्व में साम्यवादी दल की शक्ति तथा प्रभाव में निरन्तर वृद्धि होती गई। माओत्से तुंग ने क्रान्ति के कार्यक्रम को किसानों पर आधारित किया। उनके कुशल नेतृत्व में चीन की साम्यवादी पार्टी एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बनी, जिसने अन्त में कुओमिनतांग पर विजय प्राप्त की।

माओत्से तुंग के सुधार कार्य – 1928-34 के बीच माओत्से तुंग ने जियांग्सी के पहाड़ों में कुओमिनतांग के आक्रमणों से सुरक्षित शिविर लगाए। उसने एक शक्तिशाली किसान परिषद् का गठन किया। उसने भूमि सम्बन्धी सुधार किये तथा जमींदारों की जमीनों पर अधिकार करके उनकी भूमि को किसानों में बाँट दिया। उसने स्वतन्त्रं सरकार तथा सेना पर बल दिया। उसने ग्रामीण महिला संघों को प्रोत्साहन दिया और महिलाओं की समस्याओं का हल करने का प्रयास किया। उसने विवाह के नये कानून बनाए तथा तलाक को सरल बनाया।

साम्यवादियों का महा प्रस्थान – 1934 में च्यांग काई शेक ने साम्यवादियों के दमन के लिए एक विशाल सेना भे। च्यांग काई शेक की सेना के आक्रमण के दबाव के कारण 90 हजार साम्यवादियों को जियांग्सी प्रान्त को छोड़कर शेन्सी की ओर प्रस्थान करना पड़ा। साम्यवादियों की यह जियांग्सी से शेन्सी तक 6 हजार मील लम्बी यात्रा इतिहास में ‘महाप्रस्थान’ (Long March) के नाम से प्रसिद्ध है। इस यात्रा के दौरान लगभग 60 हजार साम्यवादी मौत के मुँह में चले गए तथा केवल 30 हजार साम्यवादी ही शेन्सी पहुँच सके।
येनान को नया अड्डा बनाना – साम्यवादियों ने येनान को अपना नया अड्डा बनाया।

यहाँ उन्होंने युद्ध सामन्तवाद को समाप्त करने, भूमि सुधार लागू करने तथा विदेशी साम्राज्यवाद से लड़ने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। इससे उन्हें सुदृढ़ सामाजिक आधार प्राप्त हुआ। जापान के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा-चीन में जापान की आक्रामक गतिविधियाँ बढ़ती जा रही थीं। 1937 में साम्यवादियों तथा च्यांग काई शेक के बीच एक समझौता हुआ, जिसके अनुसार दोनों ने संयुक्त रूप से जापानी आक्रमण का मुकाबला करने का निश्चय किया।

चीन – जापान युद्ध तथा संयुक्त मोर्चों की भूमिका – 1937 में जापान तथा चीन के बीच युद्ध छिड़ गया। यद्यपि संयुक्त मोर्चे की सेनाओं ने जापानी सेनाओं का वीरतापूर्वक मुकाबला किया, परन्तु उन्हें पराजय का मुँह देखना पड़ा। साम्यवादियों ने जिस साहस और वीरता से जापानियों का मुकाबला किया, उससे चीनी लोग बड़े प्रभावित हुए। 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया।

चीन में गृह-युद्ध और साम्यवादी दल की सफलता – अगस्त, 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने आत्म-समर्पण कर दिया और विश्व युद्ध का अन्त हो गया। शीघ्र ही चीन में साम्यवादियों तथा च्यांग काई शेक के सैनिकों के बीच गृह-युद्ध छिड़ गया, जिसमें च्यांग काई शेक को पराजय का मुँह देखना पड़ा। साम्यवादियों ने पीकिंग, शंघाई, नानकिंग, कैंटन आदि पर अधिकार कर लिया। च्यांग काई शेक फारमोसा भाग गया। 21 नवम्बर, 1949 को साम्यवादी दल के अध्यक्ष माओत्से तुंग ने चीन में चीनी जनवादी गणतन्त्र की स्थापना की घोषणा की।

प्रश्न 8.
क्या साउथ कोरिया की आर्थिक वृद्धि ने इसके लोकतंत्रीकरण में योगदान दिया?
उत्तर:
साउथ कोरिया की आर्थिक वृद्धि और लोकतंत्रीकरण – सन् 1980 के अन्त में चुन यूसूइन संविधान के तहत एक अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से राष्ट्रपति बने । चुन प्रशासन ने अपनी सरकार को स्थिर बनाने के लिए, लोकतांत्रिक प्रभाव का मजबूती से दमन किया। लेकिन चुन प्रशासन ने अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक दृष्टिकोण से, कोरिया के आर्थिक विका को 1980 के 1.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 1983 तक 13.2 प्रतिशत कर दिया और मुद्रा स्फीति को भी कम कर दिया।

(i) आर्थिक विकास ने शहरीकरण, शिक्षा के स्तर में सुधार और मीडिया की प्रगति को जन्म दिया। इसके फलस्वरूप नागरिकों में अपने राजनीतिक अधिकारों की आत्म जागरूकता बढ़ी, जिससे राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनावों के लिए संवैधानिक संशोधन की माँग की गई।

(ii) मई 1987 में एक विश्वविद्यालय के छात्र की अत्याचारों से मृत्यु हुई। इसके बाद नागरिकों ने लोकतंत्रीकरण के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। चुन सरकार के खिलाफ लोकतंत्रीय आंदोलन में छात्रों के साथ-साथ मध्यवर्ग के नागरिकों ने भी भाग लिया। इन प्रयासों के चलते चुन प्रशासन को संविधान में संशोधन के लिए मजबूर होना पड़ा और नागरिकों को सीधे चुनाव का अधिकार मिला। इस प्रकार आर्थिक विकास ने कोरियायी लोकतंत्रीकरण में योगदान दिया।

आधुनिकीकरण के रास्ते JAC Class 11 History Notes

पाठ-सार

1. परिचय –
(i) चीन विशालकाय महाद्वीपीय देश है जिसमें कई तरह के जलवायु वाले क्षेत्र हैं; मुख्य क्षेत्र में हुआंग हे, छांग जियांग और पर्ल – तीन प्रमुख नदियाँ हैं। हान प्रमुख जातीय समूह है और प्रमुख भाषा चीनी है, लेकिन कई राष्ट्रीयताएँ हैं। चीनी खानों में क्षेत्रीय विविधता की झलक मिलती है। यहाँ गेहूँ और चावल मुख्य आधार हैं।

(ii) जापान एक द्वीप शृंखला है जिसमें चार बड़े द्वीप हैं। यह बहुत सक्रिय भूकम्प क्षेत्र में है। अधिकतर जनसंख्या जापानी है। चावल यहाँ की मूल फसल है, मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।

(अ) जापान
1. जापान की राजनीतिक व्यवस्था – जापान पर क्योतो में रहने वाले सम्राट का शासन हुआ करता था, परन्तु 12वीं शताब्दी आते-आते वास्तविक सत्ता, शोगुनों के हाथ में आ गई जो राजा के नाम पर शासन करते थे। देश 250 भागों में विभाजित था जिनका शासन दैम्पो चलाते थे। शोगुन दैम्यो पर नियंत्रण रखते थे तथा राजधानी ‘एदो’ में रहते थे। समुराई शासन करने वाले कुलीन थे जो शोगुन और दैम्पो की सेवा में थे। 16वीं सदी में किसानों से हथियार ले लिए गए, दैम्पो को राजधानी क्षेत्रों में रहने के निर्देश दे दिए तथा राजस्व हेतु भूमि का वर्गीकरण किया गया। 17वीं सदी में यहाँ कई शहरी उभरे, वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और जापान एक अमीर देश के रूप में उभरा।

2. मेजी पुनर्स्थापना – 1867-68 में मेजी वंश के नेतृत्व में तोकुगावा वंश का शासन समाप्त किया गया। अब वास्तविक सत्ता सम्राट के हाथ में आ गई। 1870 के दशक में नई विद्यालय व्यवस्था का निर्माण हुआ । लड़के-लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य हो गया। आधुनिक सेना का गठन किया गया। कानून व्यवस्था बनायी गई। राष्ट्र के एकीकरण के लिए मेजी सरकार ने पुराने गाँवों और क्षेत्रीय सीमाओं को बदलकर नयाप्रशासनिक ढाँचा तैयार किया। सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के निर्देशन में रखा गया। ये दो गुट सरकारी नियंत्रण से बाहर रहे। इस वजह से चीन और रूस से जंग में जापान विजयी रहा और उसने अपना एक औपनिवेशिक साम्राज्य कायम किया।

3. अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण – रेल लाइनों का निर्माण किया गया तथा अनेक कारखानों की स्थापना की गई। आधुनिक बैंकिंग संस्थाओं की शुरुआत हुई।

4. औद्योगिक मजदूर-औद्योगिक मजदूरों की संख्या 1870 में 7 लाख से बढ़कर 1913 में 40 लाख पहुँच गईं। कारखानों में भी मजदूरों की संख्या बढ़ गई।

5. आक्रामक राष्ट्रवाद – सम्राटं सैन्य बल का कमाण्डर था और 1890 से यह माना जाने लगा कि थलसेना और नौसेना का नियन्त्रण स्वतन्त्र है। अब उपनिवेश स्थापना पर बल दिया जाने लगा।

6. पश्चिमीकरण और परम्परा – कुछ बुद्धिजीवी जापान का ‘पश्चिमीकरण’ चाहते थे। कुछ विद्वान् पश्चिमी उदारवाद की ओर आकर्षित थे। कुछ लोग उदारवादी शिक्षा के समर्थक थे।

7. रोजमर्रा की जिंदगी – नया घर का मतलब मूल परिवार से था जहाँ पति-पत्नी साथ रहकर कमाते थे और घर बसाते थे।

8. आधुनिकता पर विजय – 1930-40 की अवधि में जापान ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए लड़ाइयाँ लड़ीं। 1943 में एक संगोष्ठी हुई ‘आधुनिकता पर विजय’। इसमें चर्चा हुई कि आधुनिक रहते हुए पश्चिम पर कैसे विजय प्राप्त की जाए।

9. पराजय के बाद – एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में वापसी – द्वितीय विश्व युद्ध में जापान को पराजय का मुँह देखना पड़ा। अपनी भयंकर पराजय के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का जिस तेजी से पुनर्निर्माण हुआ, उसे एक युद्धोत्तर ‘चमत्कार’ कहा गया है।

(ब) चीन
1. आधुनिक चीन की शुरुआत – अफीम युद्धों में पराजय के बाद चीन में एक आधुनिक प्रशासकीय व्यवस्था नई सेना और शिक्षा व्यवस्था की स्थापना की गई।

2. गणतन्त्र की स्थापना – 1911 में मांचू साम्राज्य समाप्त कर दिया गया और सनयात सेन के नेतृत्व में गणतन्त्र की स्थापना की गई। डॉ. सेन के तीन सिद्धान्त थे –
(1) राष्ट्रवाद
(2) गणतन्त्रवाद
(3) समाजवाद।
सन यात सेन के विचार ‘कुओमीनतांग’ के राजनीतिक दर्शन के आधार बने। सनयात सेन के बाद च्यांग काई शेक कुओमीन तांग के नेता बनकर उभरे।

3. च्यांग काई – शेक-व्यांग काई शेक ने सैन्य अभियानों के द्वारा स्थानीय नेताओं को अपने नियन्त्रण में किया और साम्यवादियों का सफाया कर दिया। लेकिन कुओमीनतांग अपने संकीर्ण सामाजिक आधार और सीमित राजनीतिक दृष्टि के चलते असफल हो गया।

4. चीनी साम्यवादी दल का उदय – 1921 में चीन की साम्यवादी पार्टी की स्थापना हुई। माओत्से तुंग के नेतृत्व में चीनी साम्यवादी पार्टी एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बनी।

5. नए जनवाद की स्थापना ( 1949-65 ) – पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार 1949 में स्थापित हुई। यह ‘नए लोकतान्त्रिक’ के सिद्धान्त पर आधारित थी। 1958 में लम्बी छलांग वाले आन्दोलन की नीति के द्वारा चीन का तेजी से औद्योगीकरण करने का प्रयास किया गया।

6. दर्शनों का टकराव – 1965 में माओ द्वारा महान् सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति शुरू की गई। इससे खलबली का दौर शुरू हो गया।

7. 1978 से शुरू होने वाले सुधार – 1978 में साम्यवादी पार्टी ने अपने चार सूत्री लक्ष्य की घोषणा की। यह था— विज्ञान, उद्योग, कृषि और रक्षा का विकास। 1989 में बीजिंग के तियानमेन चौक पर छात्रों के प्रदर्शन को क्रूरतापूर्वक दबाया गया।

8. ताइवान – गृह-युद्ध में चीनी साम्यवादी दल द्वारा पराजित होने के बाद चियांग काई – शेक 1949 में ताइवान भाग गया। वहाँ उन्होंने चीनी गणतन्त्र की घोषणा की। 1975 में च्यांग काई शेक की मृत्यु हो गई।

(स) कोरिया की कहानी –

(1) आधुनिकीकरण की शुरुआत – 1392 से 1910 तक कोरिया पर जोसोन वंश का शासन था लेकिन 1910 में जापान ने अपनी कोलोनी के रूप में कोरिया पर कब्जा कर लिया । जापानी औपनिवेशिक शासन 35 साल के बाद अगस्त, 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के साथ समाप्त हुआ। लेकिन मुक्ति के बाद कोरियाई महाद्वीप उत्तरी और दक्षिणी दो भागों में विभाजित हो गया जिसने 1948 में स्थायी रूप ले लिया।

(2) युद्धोत्तर राष्ट्र – जून 1950 में कोरियाई युद्ध शुरू हुआ जो जुलाई 1953 में युद्ध विराम समझौते से समाप्त हआ। युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया को अमरीका की आर्थिक सहायता लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। 1948 में सिन्गमैन री लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से राष्ट्रपति चुने गए लेकिन ‘री’ को 1960 में इस्तीफा देना पड़ा और इसके बाद मई, 1961 में सैन्य तख्तापलट हुआ।

(3) तीव्र औद्योगीकरण और मजबूत नेतृत्व – अक्टूबर, 1963 के चुनाव में सैन्य नेता ‘पार्क चुंग- ही ‘ राष्ट्रपति बने। पार्क – प्रशासन के दौरान 1960 के दशक में कोरिया का अभूतपूर्व आर्थिक विकास हुआ। मजबूत नेताओं, प्रशिक्षित अफसरों, आक्रामक उद्योगपतियों और सक्षम श्रम बल के संयोजन से कोरिया आज सारे विश्व को आर्थिक वृद्धि से चौंका रहा है। 1979 में दूसरे तेल संकट और राजनीतिक अस्थिरता के चलते पार्क का प्रशासन अक्टूबर, 1979 में ‘पार्क चुंग ही’ की हत्या के साथ खत्म हो गया।

(4) लोकतंत्रीकरण की माँग और निरंतर आर्थिक विकास – 1980 में सांविधान के तहत एक अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुन युसुइन राष्ट्रपति बने। उसने लोकतंत्री प्रभाव का मजबूती से दमन किया। लेकिन 1987 में उसे संविधान से संशोधन हेतु मजबूर होना पड़ा और नागरिकों को सीधे चुनाव का अधिकार मिला और कोरियाई लोकतंत्र का नया अध्ययन शुरू हुआ।

(5) कोरियाई लोकतंत्र और आई एम एफ संकट – 1971 के बाद पहला प्रत्यक्ष चुनाव दिसम्बर, 1987 में हुआ जिसमें एक सैनिक नेता ‘रोह ताए – वू’ का चुनाव हुआ। लेकिन कोरिया में लोकतंत्र जारी रहा। दिसम्बर, 1992 में एक नागरिक नेता ‘किम’ को राष्ट्रपति चुना गया। 1996 में किम प्रशासन ने ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ‘ में शामिल होने का निर्णय लिया। लेकिन खराब प्रबंधन के कारण 1997 में उसे विदेशी मुद्रा संगठन का सामना करना पड़ा। कोरिया में तब से निरन्तर लोकतंत्र जारी है। मई, 2017 में वहाँ मून जे इन ने राष्ट्रपति पद संभाला है।

आधुनिकता के दो मार्ग – जापान का आधुनिकीकरण ऐसे वातावरण में हुआ जहाँ पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियों का प्रभुत्व था। चीन का आधुनिकीकरण की यात्रा बहुत अलग थी। चीन के साम्यवादी दल ने परम्परा को समाप्त करने की लड़ाई लड़ी।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. जापान में मेजी पुनस्स्थापना हुई-
(अ) 1876-77
(ब) 1867-68
(स) 1767-68
(द) 1858-59
उत्तर:
(ब) 1867-68

2. मेजी पुनर्स्थापना से पहले जापान में वास्तविक सत्ता किसके हाथ में थी?
(अ) सम्राट्
(ब) प्रधानमन्त्री
(स) सेना
(द) शोगुन।
उत्तर:
(द) शोगुन।

3. अमरीका के किस कमोडोर ने जापान की सरकार को समझौता करने पंर बाध्य किया?
(अ) नेल्सन
(ब) वाशिंगटन
(स) मैथ्यू पेरी
(द) जेफर्सन।
उत्तर:
(स) मैथ्यू पेरी

4. तनाको शोजो ने औद्योगिक प्रदूषण के विरुद्ध आन्दोलन कब शुरू किया?
(अ) 1870
(ब) 1770
(स) 1970
(द) 1897
उत्तर:
(द) 1897

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

5. चीन में गणतन्त्र की स्थापना हुई-
(अ) 1911
(ब) 1890
(स) 1901
(द) 1949
उत्तर:
(अ) 1911

6. चीन में 1911 में गणतन्त्र की स्थापना किसके नेतृत्व में हुई?
(अ) चाउ एन लाई
(ब) कांग युवेई
(स) च्यांग काई शेक
(द) डॉ. सनयात सेन।
उत्तर:
(द) डॉ. सनयात सेन।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. साम्राज्यवादी जापान ने ……………. में अपनी कॉलोनी के रूप में कोरिया पर जबरन कब्जा कर लिया।
2. 1949 में …………….. ने ताइवान में चीन गणतंत्र की स्थापन की।
3. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार ……………. में कायम हुई।
4. ……………… की साम्यवादी पार्टी की स्थापना 1921 में हुई थी।
5. अमरीकी नेतृत्व वाले कब्जे $(1945-47)$ के दौरान जापान का ………………. कर दिया गया।।
उत्तर:
1. सन् 1910
2. चियांग काई – शेक
3. 1949 ई.
4. चीन
5. विसैन्यीकरण

निम्न में से सत्य / असत्य कथन छाँटिये –

1. जापान ने चीन को 1894 में हराया और 1905 में रूस को पराजित किया।
2. 1945 में आंग्ल-अमरीकी सैन्य शक्ति के सामने चीन को हार माननी पड़ी।
3. हान चीन का सबसे बड़ा जातीय समूह है।
4. जापान में 1867-68 में तोकुगवा वंश के नेतृत्व में मेजी वंश का शासन समाप्त किया गया।
5. सन यात सेन के विचार कुओमीनतांग के राजनीतिक दर्शन के आधार बने।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. असत्य
5. सत्य

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

1. सन यात सेन(अ) ताईवान में चीनी गणतंत्र के संस्थापक
2. चियांग काई शेक(ब) दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति
3. माओत्से तुंग(स) मेजी काल के प्रमुख जापानी बुद्धिजीवी
4. मून जे-इन(द) चीनी समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता
5. फुकुजावा यूकिची(य) कुओमीनतांग के नेता

उत्तर:

1. सन यात सेन(य) कुओमीनतांग के नेता
2. चियांग काई शेक(अ) ताईवान में चीनी गणतंत्र के संस्थापक
3. माओत्से तुंग(द) चीनी समाजवादी पार्टी के प्रमुख़ नेता
4. मून जे-इन(ब) दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति
5. फुकुजावा यूकिची(स) मेजी काल के प्रमुख जापानी बुद्धिजीवी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1603 से 1867 तक जापान में कौन से परिवार के लोग शोगुन के पद पर आसीन थे ?
उत्तर:
तोकुगावा।

प्रश्न 2.
जापान का योद्धा वर्ग क्या कहलाता था ?
उत्तर:
समुराई।

प्रश्न 3.
17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान का कौनसा शहर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन गया था?..
उत्तर:
एदो।

प्रश्न 4.
जापान की किस बस्ती का रेशम दुनिया भर में उत्कृष्ट कोटि का रेशम माना जाता था ?
उत्तर:
निशिजिन का।

प्रश्न 5.
जापान में ‘मेजी पुनर्स्थापना’ कब हुई ?
उत्तर:
1867-68 में।

प्रश्न 6.
अमेरिका के किस जलसेनापति ने जापानी सरकार को अमेरिका के साथ व्यापारिक और राजनयिक सम्बन्ध स्थापित करने के लिए बाध्य किया?
उत्तर:
कॉमोडोर मैथ्यू पेरी ने।

प्रश्न 7.
जापान की सरकार ने किस नारे के साथ आधुनिकीकरण की नीति की घोषणा की?
उत्तर:
‘फुकोको क्योहे’ (समृद्ध देश, सुदृढ़ सेना) के नारे के साथ।

प्रश्न 8.
जापान की पहली रेलवे लाइन कब बिछाई गई ?
उत्तर:
1870-72 में।

प्रश्न 9.
जापान में आधुनिक बैंकिंग संस्थाओं का प्रारम्भ कब हुआ ?
उत्तर:
र – 1872 में।

प्रश्न 10.
जापान के किस प्रमुख बुद्धिजीवी ने जापान को एशियाई लक्षण छोड़कर अपना पश्चिमीकरण करने की सलाह दी थी?
उत्तर:
फुकुजावा यूकिची ने।

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प्रश्न 11.
तोक्यो में ओलम्पिक खेल कब हुए?
उत्तर:
1964 में।

प्रश्न 12.
आधुनिकीकरण के अन्तर्गत किस नगर को जापान की राजधानी बनाया गया?
उत्तर:
तोक्यो को

प्रश्न 13.
चीन और ब्रिटेन के बीच प्रथम अफीम युद्ध कब हुआ ?
उत्तर:
1839-1842 में।

प्रश्न 14.
आधुनिक चीन के संस्थापक कौन माने जातें हैं ?
उत्तर;
डॉ. सनयात सेन।

प्रश्न 15.
चीन में गणतन्त्र की स्थापना कब हुई और किसके नेतृत्व में हुई ?
उत्तर:
(1) 1911 में
(2) डॉ. सन – यात – सेन के नेतृत्व में।

प्रश्न 16.
डॉ. सनयात सेन का कार्यक्रम किसके नाम से प्रसिद्ध है ?
उत्तर:
तीन सिद्धान्त (सन मिन चुई) के नाम से।

प्रश्न 17.
डॉ. सनयात सेन के तीन सिद्धान्त कौन से थे?
उत्तर:
(1) राष्ट्रवाद
(2) गणतन्त्र की स्थापना
(3) समाजवाद।

प्रश्न 18.
डॉ. सनयात सेन ने किस दल की स्थापना की ?
उत्तर”
‘कुओमिनतांग’ की।

प्रश्न 19.
डॉ. सनयात सेन ने किन चार बड़ी जरूरतों पर बल दिया ?
उत्तर:
(1) कपड़ा
(2) रोटी
(3) मकान
(4) परिवहन।

प्रश्न 20.
जापान ने मन्चूरिया पर कब आक्रमण किया?
उत्तर:
1931 में।

प्रश्न 21.
जापान ने मन्चूरिया पर अधिकार करके वहाँ किसके नेतृत्व में सरकार का गठन किया ?
उत्तर:
मन्चुकाओ के नेतृत्व में।

प्रश्न 22.
चीन में साम्यवादी दल की स्थापना कब हुई ?
उत्तर:
1921 में।

प्रश्न 23.
चीन की तीन प्रमुख नदियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) पीली नदी (हुआंग हे )
(2) यांग्त्सी नदी (छांग जिआंग) तथा
(3) पर्ल नदी।

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प्रश्न 24.
जापान की भौगोलिक स्थिति समझाइए।
उत्तर:
जापान एक द्वीप – शृंखला है, जिसमें चार सबसे बड़े द्वीप हैं –
(1) होंशु
(2) क्युशू
(3) शिकोकू
(4) होकाइदो। ओकिनावा द्वीपों की श्रृंखला सबसे दक्षिण में है।

प्रश्न 25.
शोगुन कौन थे ?
उत्तर:
जापान की वास्तविक सत्ता शोगुनों के हाथ में थी जो सैद्धान्तिक रूप से सम्राट् के नाम पर शासन करते थे।

प्रश्न 26.
जापान अमीर देश क्यों समझा जाता था ?
उत्तर:
जापान चीन से रेशम तथा भारत से कपड़ा जैसी विलासी वस्तुएँ आयात करता था। इस कारण जापान अमीर देश समझा जाता था।

प्रश्न 27.
निशिजिन क्यों प्रसिद्ध था ?
अथवा
‘निशिजिन’ के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
निशिजिन क्योतो की एक बस्ती है। यहाँ बड़े पैमाने पर रेशम का उत्पादन किया जाता था। यहाँ केवल विशिष्ट प्रकार के महँगे उत्पाद बनाए जाते थे।

प्रश्न 28.
मुरासाकी शिकिबु कौन थी ? उसने किस ग्रन्थ की रचना की थी ?
उत्तर:
मुरासाकी शिकिबु जापान की एक प्रसिद्ध लेखिका थी। उसने ‘दि टेल ऑफ गेंजी’ (गेंजी की कथा ) नामक ग्रन्थ की रचना की थी।

प्रश्न 29.
‘मेजी पुनर्स्थापना’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
1867-68 में मेजी वंश के नेतृत्व में तोकुगावा वंश का शासन समाप्त कर दिया गया। अब वास्तविक सत्ता सम्राट के हाथ में आ गई।

प्रश्न 30.
अमरीका जापान में अपना प्रभाव क्यों बढ़ाना चाहता था ?
उत्तर:
अमरीका को प्रशान्त महासागर में अपने बेड़ों के लिए ईंधन प्राप्त करने के लिए स्थान की आवश्यकता थी।

प्रश्न 31.
अमरीका के किस जल-सेनापति के साथ जापान के शोगुन को सन्धि करनी पड़ी और कब ?
उत्तर:
(1) कमोडोर मैथ्यू पेरी के साथ
(2) 1854 ई. में। इस सन्धि के अनुसार जापान ने अमरीका के साथ राजनयिक तथा व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किये।

प्रश्न 32.
पेरी के आगमन का जापानी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर:
सम्राट का अचानक महत्त्व बढ़ गया। 1868 में एक आन्दोलन द्वारा शोगुन को सत्ता से हटा दिया गया।

प्रश्न 33.
जापान की सरकार ने ‘फुकोकु क्योहे’ के नारे के साथ नई नीति की घोषणा की? यह नीति क्या थी?
उत्तर:
जापान की सरकार ने ‘फुकोकु क्योहे’ (समृद्ध देश, मजबूत सेना) के नारे के साथ नई नीति की घोषणा की।

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प्रश्न 34.
जापान की सरकार ने ‘सम्राट्-व्यवस्था’ के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया ‘सम्राट् व्यवस्था’ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘सम्राट् व्यवस्था’ में सम्राट्, नौकरशाही तथा सेना इकट्ठे सत्ता चलाते थे और नौकरशाही व सेना सम्राट् के प्रति उत्तरदायी होते थे।

प्रश्न 35.
जापानी सरकार द्वारा सैन्य क्षेत्र में किये गये दो सुधारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) 20 वर्ष से अधिक आयु के नवयुवकों के लिए सेना में काम करना अनिवार्य कर दिया गया।
(2) एक आधुनिक सैन्य-बल तैयार किया गया।

प्रश्न 36.
लोकतान्त्रिक संविधान तथा आधुनिक सेना को महत्त्व देने के दो परिणाम लिखिए।
उत्तर:
(1) सेना ने साम्राज्य – विस्तार के उद्देश्य से मजबूत विदेश नीति के लिए दबाव डाला।
(2) जापान आर्थिक रूप से विकास करता गया।

प्रश्न 37.
जापान में पहली रेल लाइन कब बनाई गई ?
उत्तर:
जापान की पहली रेल लाइन 1870-72 में तोक्यो और योकोहामा के बन्दरगाह के बीच बिछाई गई।

प्रश्न 38.
तनाका शोजो कौन था ?
उत्तर:
तनाका शोजो जापान की संसद के पहले निम्न सदन का सदस्य था। 1897 में उसने औद्योगिक प्रदूषण के विरुद्ध पहला आन्दोलन शुरू किया।

प्रश्न 39.
फुकुजावा यूकिची कौन था? उसने जापान के आधुनिकीकरण के सम्बन्ध में क्या सुझाव दिए?
उत्तर:
फुकुजावा यूकिची जापान का मेजी काल का एक प्रमुख बुद्धिजीवी था। उसका कहना था कि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ कर पश्चिम का हिस्सा बन जाना चाहिए।

प्रश्न 40.
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जापान के किन नगरों पर नाभिकीय बम गिराए गए और क्यों गिराए गए ?
उत्तर:
द्वितीय विश्व युद्ध को जल्दी समाप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमरीका ने जापान के दो नगरों- हिरोशिमा और नागासाकी पर नाभिकीय बम गिराए।

प्रश्न 41.
द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद भी जापानी अर्थव्यवस्था का तेजी से पुनर्निर्माण हुआ। इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(1) 1964 में जापान में ओलम्पिक खेल जापानी अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रमाण हैं।
(2) 1964 में जापान में बुलेट ट्रेन का जाल शुरू हुआ।

प्रश्न 42.
प्रथम अफीम युद्ध किन देशों के बीच हुआ और कब हुआ ?
उत्तर:
चीन और ब्रिटेन के बीच 1839-42 में प्रथम अफीम युद्ध हुआ।

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प्रश्न 43.
चीन के विचारक लियांग किचाऊ ने भारत के विषय में क्या विचार प्रकट किये थे ?
उत्तर:
1903 में लियांग किचाऊ ने लिखा था कि भारत एक कम्पनी के हाथों बर्बाद हो गया, ईस्ट इण्डिया कम्पनी के।

प्रश्न 44.
चीन में गणतन्त्र की स्थापना किसके नेतृत्व में हुई और कब ?
उत्तर:
1911 में चीन में मांचू साम्राज्य समाप्त कर दिया गया और डॉ. सन यात सेन के नेतृत्व में गणतन्त्र की स्थापना की गई।

प्रश्न 45.
डॉ. सनयात सेन कौन थे ?
उत्तर:
डॉ. सनयात सेन आधुनिक चीन के संस्थापक थे।

प्रश्न 46.
कुओमिनतांग दल की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर:
डॉ. सनयात सेन ने कुओमिनतांग दल की स्थापना की थी।

प्रश्न 47.
च्यांग काई शेक कौन थे?
उत्तर:
डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के बाद च्यांग काई शेक कुओमिनतांग के प्रमुख नेता बने।

प्रश्न 48.
चीन की साम्यवादी पार्टी की स्थापना कब हुई? इसके प्रमुख नेता कौन थे ?
उत्तर:
(1) चीन की साम्यवादी पार्टी की स्थापना 1921 में हुई थी।
(2) इसके प्रमुख नेता माओत्से तुंग थे।

प्रश्न 49.
माओत्से तुंग के आमूल परिवर्तनवादी दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) माओत्से तुंग ने मजबूत किसान परिषद् का गठन किया, जमीन पर कब्जा और पुनर्वितरण के साथ एकीकरण हुआ।
(2) उन्होंने आजाद सरकार और सेना पर बल दिया

प्रश्न 50.
लाँग मार्च से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
च्यांग काई शेक के सैनिकों द्वारा आक्रमण करने पर माओत्से तुंग के नेतृत्व में साम्यवादियों को लाँग मार्च (1934-35) पर जाना पड़ा।

प्रश्न 51.
चीन में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (चीनी जनवादी गणतन्त्र) की स्थापना कब हुई ?
उत्तर:
1949 में चीन में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई, जो ‘नए लोकतन्त्र’ के सिद्धान्तों पर आधारित थी।

प्रश्न 52.
लम्बी छलांग वाले आन्दोलन से आप क्या समझते हैं? यह कब शुरू हुआ ?
उत्तर:
1958 में चीन में लम्बी छलांग वाले आन्दोलन की शुरुआत हुई। इसके द्वारा देश का तेजी से औद्योगीकरण करने का प्रयास किया गया।.

प्रश्न 53.
महान् सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति क्या थी? यह किसने शुरू की और कब ?
उत्तर:
1965 में माओत्से तुंग ने महान् सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति शुरू की थी। पुरानी संस्कृति, पुराने रीति- रिवाजों और पुरानी आदतों के विरुद्ध अभियान छेड़ा गया।

प्रश्न 54.
1978 में साम्यवादी पार्टी ने आधुनिकीकरण के लिए किस चार सूत्री लक्ष्य की घोषणा की थी ?
उत्तर:
1978 में साम्यवादी पार्टी ने आधुनिकीकरण के लिए एक चार-सूत्री लक्ष्य की घोषणा की थी। ये थे- विज्ञान, उद्योग, कृषि और रक्षा का विकास।

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प्रश्न 55.
सन् 1392 से 1910 तक कोरिया में किस राज वंश का शासन था ?
उत्तर:
सन् 1392 से 1910 तक कोरिया में जोसोन राजवंश का शासन था।

प्रश्न 56.
किस साम्राज्यवादी देश ने 1910 में कोरिया पर कब्जा कर लिया था ?
उत्तर:
साम्राज्यवादी देश जापान ने 1910 में अपनी कॉलोनी के रूप में कोरिया पर जबरन कब्जा कर लिया था।

प्रश्न 57.
कोरिया से जापानी औपनिवेशिक शासन कब समाप्त हुआ?
उत्तर:
कोरिया से जापानी औपनिवेशिक शासन अगस्त, 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के साथ समाप्त हुआ।

प्रश्न 58.
कोरिया का विभाजन कब स्थायी रूप से स्थापित हो गया ?
उत्तर:
1948 में उत्तर और दक्षिण कोरिया में अलग-अलग सरकारें स्थापित होने के साथ कोरिया का विभाजन स्थायी रूप से स्थापित हो गया।

प्रश्न 59.
उत्तर व दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध कब लड़ा गया ?
उत्तर:
दोनों कोरिया के बीच जून, 1950 से जुलाई, 1953 तक युद्ध लड़ा गया।

प्रश्न 60.
दक्षिण कोरिया को युद्ध में किस राष्ट्र की सेना ने समर्थन किया ?
उत्तर:
र – अमेरिकी अगुवाई वाली संयुक्त राष्ट्र सेना ने।

प्रश्न 61.
दक्षिण कोरिया के पहले राष्ट्रपति कौन थे ?
उत्तर:
सिन्गमैन री

प्रश्न 62.
‘पार्क चुंग ही’ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कब से कब तक रहे ?
उत्तर:
‘पार्क चुंग ही ‘ मई, 1961 से अक्टूबर, 1979 तक दक्षिण कोरिया के राष्अपति रहे।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
शोगुन कौन थे? उनकी शासन व्यवस्था में क्या भूमिका थी?
उत्तर:
शोगुन – जापान में शासन का प्रमुख सम्राट् होता था जो क्योतो में रहता था। परन्तु बारहवीं शताब्दी में वास्तविक सत्ता शोगुनों के हाथ में आ गई। वे सैद्धान्तिक रूप से सम्राट् के नाम पर शासन करते थे। शासन व्यवस्था में शोगुनों की भूमिका-जापान में 1603 से 1867 तक तोकुगावा परिवार के लोग शोगुन पद पर आसीन थे। जापान 250 भागों में विभाजित था, जिनका शासन दैम्पो चलाते थे। शोगुन इन दैम्पो तथा समुराई (योद्धा वर्ग) पर नियन्त्रण रखते थे। शोगुन दैम्पो को लम्बी अवधि के लिए राजधानी एदो ( आधुनिक तोक्यो ) में रहने का आदेश देते थे, ताकि वे कोई खतरा उत्पन्न न कर सकें। शोगुन प्रमुख शहरों और खदानों पर भी नियन्त्रण रखते थे

प्रश्न 2.
शोगुनों के समय में जापान के नगरों के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शोगुनों के समय में जापान के नगरों का विकास-जापान में दैम्पो की राजधानियों का आकार बढ़ता गया जिसके परिणामस्वरूप 17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान में एदो विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन गया। एदो के अतिरिक्त ओसाका तथा तोक्यो भी बड़े शहरों के रूप में विकसित हुए। जापान में कम से कम 6 ऐसे गढ़ वाले शहरों का उदय हुआ, जिनकी जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। शहरों के विकास का महत्त्व –

  • शहरों के विकास से जापान की वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित्त तथा ऋण की प्रणालियाँ स्थापित हुईं।
  • व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक महत्त्वपूर्ण समझे जाने लगे।
  • शहरों में जीवन्त संस्कृति का विकास हुआ।
  • शहरों के व्यापारियों ने नाटकों तथा कलाओं को प्रोत्साहन दिया।
  • शहरों में रहने वाले प्रतिभाशाली लेखकों के लिए लेखन द्वारा अपनी आजीविका कमाने का अवसर मिला।

प्रश्न 3.
तोकुगावा शोगुनों के समय में जापान की अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तोकुगावा शोगुनों के समय में जापान की अर्थव्यवस्था में परिवर्तन – तोकुगावा शोगुनों के समय जापान एक धनी देश समझा जाता था। इसका कारण यह था कि जापान चीन से रेशम तथा भारत से कपड़ा जैसी विलासिता की वस्तुएँ मँगाता था। इन चीजों के आयात के लिए सोने तथा चाँदी के मूल्य चुकाने से अर्थव्यवस्था पर भार अवश्य पड़ा और इस कारण से तोकुगावा ने बहुमूल्य धातुओं के निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया। शोगुनों ने क्योतो के निशिजिन में रेशम उद्योग के विकास के लिए भी प्रयास किये जिससे रेशम का आयात कम किया जा सके। निशिजिन का रेशम सम्पूर्ण विश्व में उत्कृष्ट कोटि का रेशम माना जाने लगा। इससे जापान की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। मुद्रा के बढ़ते प्रयोग तथा चावल के शेयर बाजार के निर्माण से पता चलता है कि अर्थतन्त्र नई दिशाओं में विकसित हो रहा था।

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प्रश्न 4.
अमरीका के कामोडोर मैथ्यू पेरी ने जापान के तोकुगावा शोगुन को समझौता करने के लिए क्यों बाध्य किया? पेरी के आगमन के जापानी राजनीति पर क्या प्रभाव हुए?
उत्तर:
अमरीका अपने व्यापारिक हितों की पूर्ति के लिए जापान में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता था। जापान चीन के रास्ते में था और अमरीका चीन में एक बड़े बाजार की सम्भावना देखता था। इसके अतिरिक्त अमरीका को प्रशान्त महासागर में अपने बेड़े के लिए ईंधन लेने का स्थान भी चाहिए था। अतः 1853 में अमरीका ने कामोडोर मैथ्यू पेरी को जापान भेजा। उसने जापानी सरकार से एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने की माँग की, जिसके अनुसार जापान को अमरीका के साथ राजनयिक और व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने थे। अमरीका की सैनिक शक्ति से भयभीत होकर जापान के शोगुन ने 1854 में ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

पेरी के आगमन का महत्त्व इससे जापान के सम्राट् का अचानक महत्त्व बढ़ गया। 1868 में शोगुन को जबरदस्ती सत्ता से हटा दिया गया। एदो को जापान की राजधानी बना दिया गया तथा उसका नया नाम तोक्यो रखा गया। प्रश्न 5. मेजी सरकार द्वारा ‘सम्राट व्यवस्था’ के पुनर्निर्माण के लिए किये गये उपायों का वर्णन कीजिए। उत्तर-सम्राट व्यवस्था का पुनर्निर्माण – मेजी सरकार ने जापान में सम्राट् व्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए अनेक कदम उठाये। सम्राट् व्यवस्था से अभिप्राय है कि एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सम्राट् नौकरशाही और सेना इकट्ठे सत्ता चलाते थे और नौकरशाही तथा सेना सम्राट् के प्रति उत्तरदायी होते थे।

  • राजतान्त्रिक व्यवस्था के सिद्धान्तों को समझने के लिए जापान के कुछ अधिकारियों को यूरोप भेजा गया।
  • सम्राट् को सूर्य – देवी का वंशज माना गया। इसके साथ ही उसे पश्चिमीकरण का नेता भी बनाया गया।
  • जापान में सम्राट् का जन्म – दिन राष्ट्रीय अवकाश का दिन घोषित किया गया।
  • सम्राट् पश्चिमी ढंग की सैनिक वेशभूषा पहनने लगा। उसके नाम से आधुनिक संस्थाएँ स्थापित करने के अधिनियम बनाए गए।
  • 1890 की शिक्षा सम्बन्धी राजाज्ञा ने लोगों को पढ़ने, जनता के सार्वजनिक एवं साझे हितों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न 6.
मेजी सरकार ने शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए क्या कदम उठाये ?
उत्तर:

  • 1870 के दशक से नई विद्यालय व्यवस्था का निर्माण शुरू हुआ। लड़के और लड़कियों को स्कूल जाना अनिवार्य हो गया। 1910 तक जापान में स्कूल जाने से कोई वंचित नहीं रहा।
  • शिक्षा की फीस बहुत कम थी।
  • प्रारम्भ में पाठ्यक्रम पश्चिमी देशों के पाठ्यक्रमों पर आधारित था, परन्तु 1870 से आधुनिक विचारों पर बल दिया जाने लगा। इसके साथ-साथ राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर भी बल दिया जाने लगा।
  • पाठ्यक्रम, पुस्तक के चयन तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण पर शिक्षा मन्त्रालय नियन्त्रण रखता था। नैतिक संस्कृति के विषयों का अध्ययन करना अनिवार्य था। पुस्तकों में माता-पिता के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति स्वामि-भक्ति तथा अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी जाती थी।

प्रश्न 7.
गेंजी की कथा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गेंजी की कथा – मुरासाकी शिकिबु द्वारा रचित हेआन राजदरबार की इस काल्पनिक डायरी ‘दि टेल ऑफ दि गेंजी’ ने जापानी साहित्य में अपना प्रमुख स्थान बना लिया है। मुरासाकी शिकिबु एक प्रतिभाशाली लेखिका थी जिसने जापानी लिपि का प्रयोग किया। इस उपन्यास में कुमार गेंजी के रोमांचकारी जीवन पर प्रकाश डाला गया है तथा हेआन राज- दरबार के कुलीन वातावरण का सजीव चित्रण किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि स्त्रियों को अपने पति चुनने तथा अपना जीवन व्यतीत करने की कितनी स्वतन्त्रता थी।

प्रश्न 8.
‘निशिजिन’ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
निशिजिन – निशिजिन जापान के शहर क्योतो की एक बस्ती है। 16वीं शताब्दी में वहाँ 31 परिवारों का बुनकर संघ था। 17वीं शताब्दी के अन्त तक इस समुदाय में 70,000 लोग थे। निशिजिन में रेशम का उत्पादन किया जाता था। निशिजिन का रेशम समस्त विश्व में उत्कृष्ट कोटि का रेशम माना जाता था। यहाँ केवल विशिष्ट प्रकार के महँगे उत्पाद बनाए जाते थे। रेशम उत्पादन से ऐसे प्रादेशिक उद्यमी वर्ग का विकास हुआ, जिसने कालान्तर में तोकुगावा व्यवस्था को चुनौती दी। जब 1859 में विदेशी व्यापार प्रारम्भ हुआ, जापान से रेशम का निर्यात अर्थव्यवस्था के लिए मुनाफे का प्रमुख स्रोत बन गया। यह वह समय था, जबकि जापानी अर्थव्यवस्था पश्चिमी वस्तुओं से प्रतिस्पर्द्धा करने का प्रयास कर रही थी।

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प्रश्न 9.
राष्ट्र के एकीकरण के लिए मैजी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • राष्ट्र के एकीकरण के लिए मेजी सरकार ने पुराने गाँवों तथा क्षेत्रीय सीमाओं को परिवर्तित कर नवीन प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया।
  • जापान में 20 वर्ष से अधिक आयु के नव-युवकों के लिए कुछ समय के लिए सेना में काम करना अनिवार्य कर दिया गया। एक आधुनिक सैन्य-बल तैयार किया गया।
  • कानून व्यवस्था’ बनाई गई, जो राजनीतिक दलों के कार्यों पर नजर रख सके, सभाएँ बुलाने पर नियन्त्रण रख सके तथा कठोर सेंसर व्यवस्था स्थापित कर सके।
  • सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट् के अधीन रखा गया। लोकतान्त्रिक संविधान तथा आधुनिक सेना को महत्त्व देने के दूरगामी परिणाम निकले। सेना ने साम्राज्यवादी नीति अपनाने के लिए मजबूत विदेश नीति पर बल दिया। इस कारण से जापान को चीन और रूस के साथ युद्ध लड़ने पड़े। इन दोनों युद्धों में जापान की विजय हुई। आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में भी जापान की अत्यधिक उन्नति हुई।

प्रश्न 10.
फुकुजावा यूकिची पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
फुकुजावा यूकिची – फुकुजावा यूकिची का जन्म 1835 में एक निर्धन समुराई परिवार में हुआ था। उसने नागासाकी तथा ओसाका में शिक्षा प्राप्त की। उसने डच, पश्चिमी विज्ञान और बाद में अंग्रेजी का अध्ययन किया। 1860 में वह अमरीका में पहले जापानी दूतावास में अनुवादक के पद पर नियुक्त हुआ। उन्होंने पश्चिमी देशों पर एक पुस्तक लिखी। उसने एक शिक्षा संस्थान की स्थापना की, जो आज केओ विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध है।

फुकुजावा यूकिची ने ‘ज्ञान’ के लिए प्रोत्साहन’ नामक एक पुस्तक लिखी। इसमें उसने जापानी ज्ञान की कटु आलोचना की : ‘जापान के पास प्राकृतिक दृश्यों के अतिरिक्त गर्व करने के लिए कुछ भी नहीं है।” उसने आधुनिक कारखानों व संस्थाओं के अतिरिक्त पश्चिम के सांस्कृतिक सार तत्त्व को भी प्रोत्साहन दिया, जो कि उसके अनुसार सभ्यता की आत्मा है। उसके द्वारा एक नवीन नागरिक बनाया जा सकता था।

प्रश्न 11.
डॉ. सनयात सेन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
डॉ. सन यात सेन के सिद्धान्तों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
डॉ. सनयात सेन- डॉ. सनयात सेन का जन्म 12 नवम्बर, 1866 को कैंटन के निकट एक गांव में हुआ था। वे आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं। 1911 में चीन में क्रान्ति हो गई। वहाँ मांचू साम्राज्य समाप्त कर दिया – सेन के नेतृत्व में गणतन्त्र की स्थापना की गई। 1912 में सनयात सेन ने कुओमिनतांग दल की गया तथा सन – यात – स्थापना की।
डॉ. सनयात सेन के सिद्धान्त-

1. राष्ट्रवाद – इसका अर्थ था मांचू वंश को सत्ता से हटाना। मांचू वंश विदेशी राजवंश के रूप में देखा जाता था। डॉ. सेन ने चीनियों में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार किया। उन्होंने चीनियों को विदेशी साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।

2. गणतन्त्रवाद – डॉ. सेन चीन में गणतन्त्र या गणतान्त्रिक सरकार की स्थापना करना चाहते थे।

3. समाजवाद-इससे अभिप्राय था-जो पूँजी का नियमन करे तथा भू-स्वामित्व में बराबरी लाए।
डॉ. सेन के विचार कुओमिनतांग दल के राजनीतिक दर्शन का आधार बने। उन्होंने कपड़ा, भोजन, घर और परिवहन — इन चार बड़ी आवश्यकताओं पर बल दिया।

प्रश्न 12.
चीन में प्रचलित परीक्षा प्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीन में अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश अधिकतर परीक्षा के द्वारा ही होता था। इसमें 8 भाग वाला निबन्ध निर्धारित प्रपत्र में शास्त्रीय चीनी भाषा में लिखना होता था। यह परीक्षा विभिन्न स्तरों पर हर तीन वर्ष में दो बार आयोजित की जाती थी। पहले स्तर की परीक्षा में केवल 1-2 प्रतिशत लोग ही 24 वर्ष की आयु तक उत्तीर्ण हो पाते थे। इसलिए कई निम्न श्रेणी के डिग्री धारकों के पास नौकरी नहीं होती थी। यह परीक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में बाधक का काम करती थी; क्योंकि इसमें केवल साहित्यिक कौशल की माँग होती थी। चूँकि यह क्लासिक चीनी सीखने के कौशल पर ही आधारित थी, जिसकी आधुनिक विश्व में कोई प्रासंगिकता दिखाई नहीं देती थी। अन्त में, 1905 में इस प्रणाली को समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 13.
माओत्से तुंग के आमूल परिवर्तनवादी तौर-तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
माओत्से तुंग के आमूल परिवर्तनवादी तौर-तरीके –
(1) 1928-34 के बीच माओत्से तुंग ने कुओमिनतांग के आक्रमणों से बचाव के लिए सुरक्षित शिविर लगाए।
(2) उन्होंने मजबूत किसान परिषद् (सोवियत) का गठन किया, जमींदारों की भूमि पर अधिकार कर उसे भूमिहीन कृषकों में बाँट दिया।
(3) माओत्से तुंग ने स्वतन्त्र सरकार और सेना पर बल दिया।
(4) उन्होंने महिलाओं की दशा सुधारने पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीण महिला संघों की स्थापना को बढ़ावा दिया। उन्होंने विवाह के नये कानून बनाए, जिसमें आयोजित विवाहों तथा विवाह के समझौते खरीदने एवं बेचने पर रोक लगाई और तलाक को सरल बनाया।

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प्रश्न 14.
1930 में माओत्से तुंग द्वारा जुनवू में किए गए सर्वेक्षण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
“1930 में माओत्से तुंग द्वारा जुनवू में किया गया सर्वेक्षण – 1930 में जुनवू में किये गए एक सर्वेक्षण में माओत्से तुंग ने नमक और सोयाबीन जैसी दैनिक जीवन की वस्तुओं, स्थानीय संगठनों की तुलनात्मक दृढ़ताओं, छोटे व्यापारियों और शिल्पकारों, लौहारों, वेश्याओं, धार्मिक संगठनों की मजबूतियाँ, इन सबका परीक्षण किया, ताकि शोषण के पृथक्-पृथक् स्तरों को समझा जा सके। उन्होंने ऐसे आँकड़े एकत्रित किये कि कितने किसानों ने अपने बच्चों को बेचा है और इसके लिए उन्हें कितना धन मिला। लड़के 100-200 यूआन पर बिकते थे, परन्तु लड़कियों की बिक्री के कोई उदाहरण नहीं मिले; क्योंकि आवश्यकता मजदूरों की थी, स्त्रियों के शोषण की नहीं। इस अध्ययन के आधार पर उन्होंने सामाजिक समस्याओं के समाधान के तरीके प्रस्तुत किए।

प्रश्न 15.
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार की उपलब्धियाँ – पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार 1949 में स्थापित हुई। यह ‘नए लोकतन्त्र’ के सिद्धान्त पर आधारित थी। इसकी उपलब्धियाँ इस प्रकार रहीं –

  • नया लोकतन्त्र चीन के सभी सामाजिक वर्गों का गठबन्धन था। इसके अन्तर्गत, अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र सरकार के नियन्त्रण में रखे गए और निजी कारखानों तथा भूस्वामित्व को धीरे-धीरे समाप्त किया गया। यह कार्यक्रम 1953 तक चला।
  • उस समय सरकार ने समाजवादी परिवर्तन का कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी।
  • 1958 में सरकार ने लम्बी छलाँग वाले आन्दोलन की नीति अपनाई जिसके अन्तर्गत देश का तीव्र गति से औद्योगीकरण करने का प्रयास किया गया। लोगों को अपने घरों के पिछवाड़े में इस्पात की भट्टियाँ लगाने के लिए बढ़ावा दिया गया।
  •  ग्रामीण क्षेत्रों में पीपुल्स कम्यून शुरू किये गए। यहाँ लोग इकट्ठे जमीन के स्वामी थे तथा मिल-जुलकर फसल उगाते थे।

प्रश्न 16.
माओत्सेतुंग पार्टी द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पाने के लिए क्या कार्य किये? वे इन लक्ष्यों की प्राप्ति में कैसे सफल रहे?
उत्तर:
माओत्सेतुंग साम्यवादी दल द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए चीनी जनसमुदाय को प्रेरित करने में सफल रहे। वे ‘समाजवादी व्यक्ति’ बनाने के लिए लालायित थे। इसकी पाँच चीजें प्रिय होती थीं –
(1) पितृ भूमि
(2) जनता
(3) काम
(4) विज्ञान तथा
(5) जन सम्पत्ति। किसानों, स्त्रियों, छात्रों और अन्य गुटों के लिए जन- संस्थाएँ बनाई गईं। उदाहरणार्थ ‘ऑल चाइना स्टूडेन्ट्स फेडरेशन’ के 32 लाख 90 हजार सदस्य थे।

प्रश्न 17.
‘1965 की चीन की महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘समाजवादी व्यक्ति’ की रचना के इच्छुक माओवादियों तथा कुशलता की बजाय विचारधारा पर माओ के जोर देने की आलोचना करने वालों के मध्य संघर्ष छिड़ गया। इस संघर्ष के परिणामस्वरूप माओत्सेतुंग ने 1965 में महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति शुरू की। इस क्रान्ति की शुरुआत उन्होंने अपने आलोचकों का मुकाबला करने के लिए की। इस क्रान्ति के अन्तर्गत पुरानी संस्कृति, पुरानी रिवाजों और पुरानी आदतों के विरुद्ध अभियान शुरू करने के लिए रेड गार्ड्स मुख्यतः – छात्रों और सेना-का प्रयोग किया गया। छात्रों और व्यावसायिक लोगों को जनता से ज्ञान प्राप्त करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया। विचारधारा (साम्यवादी होना) व्यावसायिक ज्ञान से अधिक महत्त्वपूर्ण थी।

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परिणाम –
(1) सांस्कृतिक क्रान्ति के फलस्वरूप देश में अव्यवस्था फैल गई और साम्यवादी पार्टी कमजोर हो गई।
(2) अर्थव्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था में भारी गिरावट आई।
(3) धीरे-धीरे साम्यवादी दल ने अपना प्रभाव बढ़ना शुरू कर दिया।

प्रश्न 18.
यूसिन संविधान क्या था ?
उत्तर:
दक्षिण कोरिया के 1971 के चुनावों में पार्क चुंग ही को पुनः चुन लिया गया। इसके बाद अक्टूबर 1972 में पार्क ने यूसिन संविधान घोषित करके उसे कार्यान्वित किया। इस संविधान ने स्थायी अध्यक्षता को संभव बनाया। यूसिन संविधान के तहत राष्ट्रपति को कानून के क्षेत्राधिकार और प्रशासन पर पूर्ण अधिकार था तथा किसी भी कानून को ‘आपातकालीन नियम’ के रूप में निरस्त करने का भी एक संवैधानिक अधिकार था। इस प्रकार यूसिन संविधान के तहत राष्ट्रपति के पूर्ण अधिकार प्रणाली के साथ लोकतंत्र एक तरह से अस्थायी रूप से निलंबित हो गया।

निबन्धात्मक प्रश्न –
प्रश्न 1.
“चीन और जापान के भौतिक भूगोल में काफी अन्तर है।” स्पष्ट कीजिए।
अथवा
चीन और जापान की भौगोलिक स्थिति तथा उनकी प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
चीन का भौतिक भूगोल- चीन और जापान के भौतिक भूगोल में काफी अन्तर है। चीन विशालकाय . महाद्वीपीय देश है जिसमें कई प्रकार की जलवायु वाले क्षेत्र हैं। मुख्य क्षेत्र में तीन प्रमुख नदियाँ हैं –
(1) पीली नदी (हुआँग हो)
(2) यांग्त्सी नदी (छाँगजिआंग – विश्व की तीसरी सबसे लंम्बी नदी) तथा
(3) पर्ल नदी। चीन का बहुत-सा भाग पहाड़ी है।
चीन का जातीय समूह तथा भाषाएँ – हान चीन का सबसे प्रमुख जातीय समूह है। चीनी वहाँ की प्रमुख भाषा है। परन्तु वहाँ उइधुर, हुई, मांचू, तिब्बती आदि कई और राष्ट्रीयताएँ हैं। कैंटनीज (कैंटन की बोली- उए) तथा शंघाइनीज (शंघाई की बोली – वू) आदि बोलियाँ भी बोली जाती हैं।
चीनी भोजन- चीनी भोजनों में क्षेत्रीय विविधता पाई जाती है। इनमें चार प्रमुख प्रकार के भोजन उल्लेखनीय हैं-
(i) चीन में सबसे प्रसिद्ध भोजनं प्रणाली दक्षिणी या केंटोनी है, जो कैंटन व उसके आन्तरिक प्रदेशों की है। यह प्रणाली इसलिए प्रसिद्ध है कि विदेशों में रहने वाले अधिकतर चीनी कैंटन प्रान्त के हैं। डिमसम (शाब्दिक अर्थ दिल को छूना) यहाँ का प्रसिद्ध भोजन है। यह गुँथे हुए आटे को ‘सब्जी आदि भर कर उबाल कर बनाया गया व्यंजन है।
(ii) उत्तर में गेहूँ मुख्य आहार है।
(iii) शेचुआँ में प्राचीन काल में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा लाए गए मसाले और रेशम मार्ग द्वारा पन्द्रहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा लाई गई मिर्च के कारण विशेष झालदार और तीखा भोजन मिलता है।
(iv) पूर्वी चीन में चावल और गेहूँ दोनों खाए जाते हैं।
जापान के भौतिक भूगोल की विशेषताएँ – जापान के भौतिक भूगोल की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. चीन के विपरीत जापान एक द्वीप – शृंखला है। इनमें चार सबसे बड़े द्वीप हैं –
(1) होंशू
(2) क्यूशू
(3) शिकोकू तथा
(4) होकाइदो। सबसे दक्षिण में ओकिनावा द्वीपों की श्रृंखला है।

2. मुख्य द्वीपों की 50 प्रतिशत से अधिक भूमि पहाड़ी है।
3. जापान बहुत ही सक्रिय भूकम्प क्षेत्र है।
4. जापान की इन भौगोलिक परिस्थितियों ने वहाँ की वास्तुकला को प्रभावित किया है।
5. जापान की अधिकतर जनसंख्या जापानी है, परन्तु कुछ आयनू अल्पसंख्यक तथा कुछ कोरिया के लोग हैं कोरिया के लोगों को श्रमिक मजदूर के रूप में उस समय जापान लाया गया था, जब कोरिया जापान का उपनिवेश था।
6. जापान में पशु-पालन की परम्परा नहीं है।
7. चावल यहाँ की मुख्य फसल है और मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। यहाँ की कच्ची मछली साशिमी या सूशी अब सम्पूर्ण विश्व में लोकप्रिय हो गई है क्योंकि इसे बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

प्रश्न 2.
मेजी पुनर्स्थापना से क्या अभिप्राय है? जापान की सरकार ने राजनीतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में क्या सुधार किये?
उत्तर:
जापान में मेजी पुनर्स्थापना – 1867-68 में जापान में मेजी वंश के नेतृत्व में तोकुगावा वंश का शासन समाप्त किया गया। 1868 में एक प्रबल आन्दोलन द्वारा शोगुन को सत्ता से हटा दिया गया। सम्राट् को एदो में लाया गया। एदो को जापान की राजधानी बना दिया गया तथा उसका नया नाम तोक्यो रखा गया। तोक्यो का अर्थ है – ‘पूर्वी राजधानी’। अब शासन की वास्तविक सत्ता, सम्राट के हाथ में आ गई। इसे ‘मेजी पुनर्स्थापना’ अथवा ‘सम्राट की शक्ति का पुनरुद्धार’ कहते हैं।
1. राजनीतिक क्षेत्र में सुधार – जापान की मेजी सरकार ने राजनीतिक क्षेत्र में निम्नलिखित सुधार किये –
(i) नई नीति की घोषणा – सरकार ने ‘फुकोकु क्योहे’ (समृद्ध देश, मजबूत सेना) के नारे के साथ नई नीति की घोषणा की। सरकार की यह धारणा थी कि देश की अर्थव्यवस्था का विकास और मजबूत सेना का निर्माण करना अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा उसे भी भारत की भाँति पराधीन बनना पड़ सकता है। अतः उसने जापानी जनता में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार करने तथा प्रजा को नागरिक की श्रेणी में बदलने का निश्चय कर लिया।

(ii) सम्राट्-व्यवस्था का पुनर्निर्माण- मेजी सरकार ने सम्राट व्यवस्था के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया। विद्वानों के अनुसार सम्राट व्यवस्था से अभिप्राय है एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सम्राट, नौकरशाही तथा सेना इकट्ठे शासन चलाते थे और नौकरशाही तथा सेना सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे। राजतान्त्रिक व्यवस्था के सिद्धान्तों को समझने के लिए कुछ अधिकारियों को यूरोप भेजा गया। सम्राट को सूर्य देवी का वंशज माना गया। इसके साथ ही उसे पश्चिमीकरण का नेता भी स्वीकार किया गया। सम्राट का जन्म-दिन राष्ट्रीय अवकाश का दिन घोषित किया गया। अब सम्राट् पश्चिमी ढंग की सैनिक वेशभूषा पहनने लगा। उसके नाम से आधुनिक संस्थाएँ स्थापित करने के अधिनियम जारी किये जाने लगे।

(iii) नवीन प्रशासनिक ढाँचा तैयार करना – राष्ट्र के एकीकरण के लिए मेजी सरकार ने पुराने गाँवों तथा क्षेत्रीय सीमाओं को परिवर्तित कर नया प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया। 20 वर्ष से अधिक आयु के नवयुवकों के लिए कुछ समय के लिए सेना में काम करना अनिवार्य हो गया। एक आधुनिक सैन्य बल तैयार किया गया। कानून व्यवस्था बनाई गई जो राजनीतिक गुटों के गठन को देख सके, बैठकें आयोजित करने पर नियन्त्रण रख सके और कठोर सेंसर व्यवस्था बना सके।

सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के अधीन रखा गया। इस प्रकार संविधान बनने के बाद भी सेना और नौकरशाही सरकारी नियन्त्रण से बाहर रहे। इस नीति के परिणामस्वरूप सेना ने साम्राज्य-विस्तार के लिए मजबूत विदेश नीति अपनाने पर बल दिया। इस कारण से जापान को चीन और रूस से युद्ध लड़ने पड़े, जिनमें जापान की विजय हुई। जापान की आर्थिक क्षेत्र में आश्चर्यजनक उन्नति हुई तथा उसने अपना एक औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित कर लिया। परन्तु सरकार ने अपने देश में लोकतन्त्र के प्रसार को रोका और उपनिवेशीकृत लोगों के साथ संघर्ष की नीति अपनाई।

2. शैक्षणिक क्षेत्र में विकास – 1870 के दशक से जापान में नई विद्यालय – व्यवस्था का निर्माण शुरू हुआ। लड़के तथा लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य हो गया। 1910 तक स्कूल जाने से कोई वंचित नहीं रहा। शिक्षा की फीस बहुत कम थी। शुरू में पाठ्यक्रम पश्चिमी देशों के नमूने पर आधारित था, परन्तु 1870 से आधुनिक विचारों पर बल देने के साथ-साथ राज्य के प्रति निष्ठा तथा जापानी इतिहास के अध्ययन पर भी बल दिया जाने लगा। पाठ्यक्रम, पुस्तकों के चयन तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण पर शिक्षा मन्त्रालय का नियन्त्रण रहता था। नैतिक संस्कृति के विषयों का अध्ययन . आवश्यक था। पुस्तकों में माता-पिता के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति स्वामि-भक्ति और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी जाती थी।

प्रश्न 3.
मैजी सरकार द्वारा जापान की अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए किये गये सुधारों का वर्णन कीजिए उद्योगों के तीव्र विकास का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
जापान की अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण मैजी सरकार की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि था। इसके लिए मैजी सरकार ने निम्नलिखित कार्य किये –
(i) धन इकट्ठा करना – कृषि पर कर लगाकर धन इकट्ठा किया गया।
(ii) रेलवे लाइन का निर्माण – जापान की पहली रेलवे लाइन का निर्माण 1870-72 में हुआ जो तोक्यो से योकोहामा तक बनाई गई। 1894 तक जापान में 2118 मील लम्बी रेलवे लाइनों का निर्माण हो चुका था।
(iii) उद्योग- वस्त्र उद्योग के लिए मशीनें यूरोप से मँगाई गईं। लोहे, कपड़े आदि के अनेक कारखाने खोले गए। परिणामस्वरूप कारखानों में कपड़ा, लोहे का सामान, रेशम आदि बड़े पैमाने पर होने लगा। 1890 तक जापान में भाप से चलने वाले 250 से भी अधिक कारखाने स्थापित हो चुके थे। मजदूरों के प्रशिक्षण के लिए विदेशी कारीगरों को बुलाया गया।
(iv) बैंकों की स्थापना – 1872 में जापान में आधुनिक बैंकिंग संस्थाओं का प्रारम्भ हुआ। 1879 ई. तक जापान में लगभग 150 बैंक स्थापित हो चुके थे।
(v) जहाज – निर्माण – जापान में जहाज को सब्सिडी तथा करों में लाभ के द्वारा प्रमुख जहाजों में होने लगा।
उद्योग की बड़ी उन्नति हुई। मित्सुबिशी और सुमितोमी जैसी कम्पनियों जहाज़ – 1 ज़ – निर्माता बनने में सहायता मिली। इससे जापानी व्यापार जापान के
(vi) जायबात्सु (बड़ी व्यापारिक संस्थाएँ) का प्रभुत्व स्थापित होना – जायबात्सु बड़ी व्यापारिक संस्थाएँ जिन पर विशिष्ट परिवारों का नियन्त्रण था, का प्रभुत्व द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद तक जापान की अर्थव्यवस्था पर बना रहा।

(vii) जनसंख्या में वृद्धि – 1872 में जापान की जनसंख्या 3.5 करोड़ थी जो 1920 में बढ़कर 5.5 करोड़ हो गई। जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने प्रवास को प्रोत्साहन दिया। पहले उत्तरी टापू होकाइदो की ओर, फिर हवाई और ब्राजील और जापान के बढ़ते हुए औपनिवेशिक साम्राज्य की ओर। उद्योगों के विकास के कारण शहरों की आबादी बढ़ गई। 1925 तक जापान की 21 प्रतिशत जनता शहरों में रहती थी। 1935 तक यह बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई। इस प्रकार 1935 तक जापान के शहरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या 2.25 करोड़ थी।

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(viii) औद्योगिक मजदूर – 1870 में जापान में औद्योगिक मजदूरों की संख्या 7 लाख थी, जो बढ़कर 1913 में 40 लाख हो गई। अधिकतर मजदूर ऐसी इकाइयों में काम करते थे, जिनमें 5 से कम लोग थे और जिनमें मशीनों तथा विद्युत ऊर्जा का प्रयोग नहीं होता था। इन आधुनिक कारखानों में काम करने वालों में आधे से अधिक महिलाएँ थीं। 1886 में पहली आधुनिक हड़ताल महिलाओं द्वारा ही आयोजित की गई थी। 1900 के पश्चात् कारखानों में पुरुषों की संख्या बढ़ने लगी परन्तु 1930 के दशक में आकर ही पुरुषों की संख्या स्त्रियों से अधिक हुई।

(ix) कारखानों में मजदूरों की संख्या में वृद्धि – जापान में कारखानों में मजदूरों की संख्या भी बढ़ने लगी। 100 से अधिक मजदूर वाले कारखानों की संख्या 1909 में 1000 थी। 1920 तक इनकी संख्या 2000 से अधिक हो गई और 1930 के दशक में इनकी संख्या 4,000 हो गई। फिर भी 1940 में 5,50,000 कारखानों में 5 से कम मजदूर ही काम करते थे। इससे परिवार – केन्द्रित विचारधारा बनी रही।

पर्यावरण पर प्रभाव – उद्योगों के तीव्र विकास और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की माँग से पर्यावरण का विनाश हुआ। संसद के पहले निम्न सदन के सदस्य तनाकोशोजो ने 1897 में औद्योगिक प्रदूषण के विरुद्ध पहला आन्दोलन शुरू किया। तनाकोशोजो ने कहा कि औद्योगिक प्रगति के लिए सामान्य लोगों की बलि नहीं दी जानी चाहिए। आशियो खान से वातारासे नदी में प्रदूषण फैलता जा रहा था जिसके कारण 100 वर्ग मील की कृषि भूमि नष्ट हो रही थी तथा 1000 परिवार प्रभावित हो रहे थे। 800 गाँववासी पर्यावरण प्रदूषण के विरुद्ध संगठित हो गए और उन्होंने सरकार को उचित कार्यवाही करने पर बाध्य कर दिया।

प्रश्न 4.
जापान के आक्रामक राष्ट्रवाद, पश्चिमीकरण और परम्परा पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
1. जापान का आक्रामक राष्ट्रवाद – मेजी संविधान सीमित मताधिकार पर आधारित था और उसकी डायट (संसद) के अधिकार भी सीमित थे। सम्राट की शक्ति की पुनर्स्थापना करने वाले नेता सत्ता में बने रहे तथा उन्होंने राजनीतिक दलों का गठन किया। 1918 तथा 1931 के बीच जनमत से चुने गए प्रधानमन्त्रियों ने मन्त्रिपरिषदों का गठन किया। इसके पश्चात् उन्होंने पार्टियों का भेद भुलाकर बनाई गई राष्ट्रीय एकता मन्त्रिपरिषदों के हाथों अपनी सत्ता खो दी। सम्राट सैन्य बलों का कमाण्डर था।

1890 से यह माना जाने लगा कि थल सेना और नौसेना का नियन्त्रण स्वतन्त्र है। 1899 में जापान के प्रधानमन्त्री ने आदेश दिए कि केवल सेवारत जनरल और एडमिरल ही मन्त्री बन सकते हैं। सेना को शक्तिशाली बनाने का अभियान और जापान का औपनिवेशिक विस्तार इस भय से सम्बन्धित थे कि जापान पश्चिमी देशों की दया पर निर्भर है। इस डर का उपयोग उन लोगों के दमन करने में किया गया जो सैन्य विस्तार के विरुद्ध और सेना को अधिक धन देने के लिए वसूले जाने वाले भारी करों के विरुद्ध आवाज उठा रहे थे।

2. ‘पश्चिमीकरण’ और ‘परम्परा’ – कुछ विद्वानों के अनुसार अमरीका तथा पश्चिमी यूरोपीय देश सभ्यता के शिखर पर थे, जहाँ जापान को भी पहुँचना चाहिए। ये विद्वान जापान का ‘पश्चिमीकरण’ किये जाने के पक्ष में थे। फुकुजावा, यूकिची मेजी काल के प्रमुख बुद्धिजीवियों में से थे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ” जापान को अपने में से एशिया को निकाल फेंकना चाहिए।” इसका मतलब यह था कि जापान को अपने एशियाई लक्षणों का परित्याग कर देना चाहिए तथा पश्चिमी देशों का अनुकरण करना चाहिए। पश्चिमी विचारों को पूरी तरह से स्वीकार करने पर आपत्ति करना – जापान की अगली पीढ़ी ने पश्चिमी विचारों को पूरी तरह से स्वीकार करने पर आपत्ति की तथा कहा कि राष्ट्रीय गर्व का निर्माण देसी मूल्यों पर किया जाना चाहिए दर्शनशास्त्री मियाके सेत्सुरे का कहना था कि विश्व-सभ्यता के हित में हर राष्ट्र को अपने विशेष कौशल का विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि, ” अपने को अपने देश के लिए समर्पित करना अपने को विश्व को समर्पित करना है। ” पश्चिमी उदारवाद का समर्थन करना – दूसरी ओर कुछ विद्वान पश्चिमी उदारवाद के समर्थक थे। वे चाहते थे कि जापान अपना आधार सेना की बजाय लोकतन्त्र को बनाए।

फ्रांसीसी क्रान्ति में लोगों के प्राकृतिक अधिकारों और जन – प्रभुसत्ता के सिद्धान्तों का समर्थन – संवैधानिक सरकार की माँग करने वाले जनवादी अधिकारों के आन्दोलन के नेता उएकी एमोरी फ्रांसीसी क्रान्ति में लोगों के प्राकृतिक अधिकारों तथा जन-प्रभुसत्ता के सिद्धान्तों के समर्थकं थे। वे उदारवादी शिक्षा के समर्थक थे जो प्रत्येक व्यक्ति का विकास कर सके। उनका कहना था कि, ” व्यवस्था से अधिक मूल्यवान चीज है स्वतन्त्रता। ” कुछ अन्य लोगों ने महिलाओं के मताधिकार का भी समर्थन किया। इस प्रकार के दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर विवश किया।

प्रश्न 5.
जापान में सत्ता- -केन्द्रित राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के क्या परिणाम हुए?
अथवा
जापान आधुनिकता पर विजय क्यों प्राप्त करना चाहता था ?
उत्तर:
जापान में सत्ता केन्द्रित राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के परिणाम – आधुनिकीकरण के परिणामस्वरूप जापान की शक्ति में अत्यधिक वृद्धि हुई। 1930-40 की अवधि में सत्ता केन्द्रित राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिला। इसके फलस्वरूप जापान ने चीन और एशिया में अपने उपनिवेश स्थापित करने के लिए युद्ध लड़े। जापान ने 1937 में चीन पर आक्रमण कर उसके अनेक नगरों पर अधिकार कर लिया। जब 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, तो उस समय जापान पहले से ही चीन के विरुद्ध युद्ध छेड़े हुए था। उग्र राष्ट्रवाद से प्रेरित होकर 1941 में जापान ने अमरीका की बन्दरगाह पर्ल हार्बर पर आक्रमण कर दिया। राष्ट्रवाद की प्रबलता के कारण सामाजिक नियन्त्रण में वृद्धि हुई। विरोधियों पर अत्याचार किए गए तथा उन्हें जेलों में बन्द कर दिया गया। देश-भक्तों की ऐसी संस्थाओं का निर्माण हुआ जो युद्ध का समर्थन करती थीं। इनमें महिलाओं के अनेक संगठन थे।

आधुनिकता पर विजय – 1943 में जापान में एक संगोष्ठी हुई ‘आधुनिकता पर विजय’। इसमें जापान के सामने यह समस्या थी कि आधुनिक रहते हुए पश्चिम पर कैसे विजय प्राप्त की जाए ? संगीतकार मोरोई साबुरो ने इस बात पर बल दिया कि संगीत को आत्मा की कला के रूप में उसका पुनर्वास कैसे कराया जाए? वे पश्चिमी संगीत का विरोध नहीं कर रहे थे। वे चाहते थे कि जापानी संगीत को पश्चिमी वाद्यों पर बजाए जाने से आगे ले जाया जाए। प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री निशितानी केजी ने ‘आधुनिक’ को तीन पश्चिमी धाराओं के मिलन और एकता से परिभाषित किया ” पुनर्जागरण, प्रोटेस्टेन्ट सुधार और प्राकृतिक विज्ञानों का विकास।” उनका कहना था कि जापान की ‘नैतिक ऊर्जा’ ने उसे एक उपनिवेश बनने से बचा लिया और जापान का कर्त्तव्य बनता है कि एक नई विश्व पद्धति एक विशाल पूर्वी एशिया के निर्माण का प्रयत्न करे। इसके लिए एक नई सोच की आवश्यकता है जो विज्ञान और धर्म को जोड़ सके।

प्रश्न 6.
“द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद भी जापान का एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में प्रकट हुआ। ” विवेचना कीजिए।
उत्तर:
द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद भी जापान वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना- द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान युद्ध शीघ्र समाप्त करने के लिए अमरीका ने जापान के दो नगरों-हिरोशिमा तथा नागासाकी पर परमाणु बम गिराए। अतः जापान को आत्म-समर्पण करना पड़ा। अमरीकी नेतृत्व वाले कब्जे (1945-47) के दौरान, जापान का विसैन्यीकरण कर दिया गया और वहाँ एक नया संविधान लागू हुआ। इसके अनुच्छेद-9 के अनुसार युद्ध का राष्ट्रीय नीति के साधन के रूप में प्रयोग वर्जित है। कृषि – सुधार व्यापारिक संगठनों का पुनर्गठन और जापानी अर्थव्यवस्था में जायेबात्सु अर्थात् बड़ी एकाधिकार कम्पनियों के प्रभुत्व को समाप्त करने का प्रयास किया गया। राजनीतिक दलों को पुनर्जीवित किया गया। युद्ध के बाद जापान में पहले चुनाव 1946 में हुए। इसमें पहली बार महिलाओं ने भी मतदान किया।

जापानी अर्थव्यवस्था का विकास- द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी भीषण पराजय के बावजूद, जापानी अर्थव्यवस्था का ज़िस तीव्र गति से विकास हुआ, उसे एक ‘युद्धोत्तर चमत्कार’ कहा गया है। संविधान को औपचारिक रूप से गणतान्त्रिक रूप इसी समय दिया गया। परन्तु जापान में जनवादी आन्दोलन तथा राजनीतिक भागेदारी का आधार बढ़ाने में बुद्धिजीवियों का ऐतिहासिक योगदान रहा है। अतः युद्ध से पहले के काल की सामाजिक सम्बद्धता को सुदृढ़ किया गया। इसके परिणामस्वरूप सरकार, नौकरशाही और उद्योग के बीच एक निकटता का सम्बन्ध स्थापित हुआ। अमरीकी समर्थन और कोरिया तथा वियतनाम में युद्ध छिड़ने से भी जापान की अर्थव्यवस्था को सहायता मिली।

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1964 में तोक्यो में हुए ओलम्पिक खेल जापानी अर्थव्यवस्था की मजबूती के प्रमाण थे। इसी प्रकार तीव्र गति वाली शिंकांसेन अर्थात् ‘बुलेट ट्रेनों’ का जाल भी 1964 में शुरू हुआ। इस पर रेल‍ गाड़ियाँ 200 मील प्रति घण्टे की रफ्तार से चलती थीं। ( अब वे 300 मील प्रति घण्टे की रफ्तार से चलती हैं।) जापानी : नई प्रौद्योगिकी के द्वारा श्रेष्ठ और सस्ते उत्पाद बाजार में प्रस्तुत करने में सफल रहे। नागरिक समाज आन्दोलन का उदय – 1960 के दशक में नागरिक समाज आन्दोलन का विकास हुआ। बढ़ते औद्योगीकरण के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की अवहेलना करने का विरोध किया गया।

1970 के दशक के उत्तरार्द्ध में वायु में प्रदूषण से भी समस्याएँ उत्पन्न हुईं। अनेक गुटों ने इन समस्याओं को पहचानने और साथ ही हताहतों के लिए मुआवजा देने की माँग की। सरकार द्वारा की गई कार्यवाही तथा नये कानूनों से स्थिति में काफी सुधार हुआ। 1980 के दशक के मध्य से पर्यावरण सम्बन्धी विषयों में लोगों की रुचि में कमी आई है क्योंकि 1990 के जापान में विश्व के कुछ कठोरतम पर्यावरण सम्बन्धी नियन्त्रण लागू किए गए। आज जापान एक विकसित देश है। इस रूप में वह अग्रगामी विश्व शक्ति की अपनी हैसियत को बनाए रखने के लिए अपने राजनीतिक और प्रौद्योगिक क्षमताओं का प्रयोग करने की चुनौतियों का सामना कर रहा है।

प्रश्न 7.
1911 की क्रान्ति से पूर्व आधुनिक चीन की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1911 की क्रान्ति से पूर्व आधुनिक चीन की स्थिति 1911 की क्रान्ति से पूर्व आधुनिक चीन की स्थिति का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया जा सकता –
1. जेसुइट मिशनरियों द्वारा चीन से सम्पर्क स्थापित करना – आधुनिक चीन की शुरुआत सोलहवीं तथा सत्रहवीं सदी में पश्चिम के साथ उसका प्रथम सम्पर्क होने के समय से मानी जा सकती है। इस काल में जेसुइट मिशनरियों ने खगोल विद्या तथा गणित जैसे पश्चिमी विज्ञानों को चीन पहुँचाया।

2. प्रथम अफीम युद्ध (1839-42 ) – ब्रिटेन ने अफीम के लाभप्रद व्यापार को बढ़ाने के लिए अपनी सैन्य – शक्ति का प्रयोग किया जिसके फलस्वरूप ब्रिटेन और चीन में प्रथम अफीम – युद्ध (1839-42 ) हुआ। इसमें चीन की बुरी तरह से पराजय हुई और उसे विवश होकर ब्रिटेन से नानकिंग की सन्धि करनी पड़ी। इस युद्ध ने चीन के सत्ताधारी क्विंग राजवंश की प्रतिष्ठा को प्रबल आघात पहुँचाया और उसे कमजोर किया। इसके फलस्वरूप चीन में सुधार तथा परिवर्तन की माँग प्रबल होती गई।

3. व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर बल देना- चीन के प्रसिद्ध सुधारकों कांग यूवेई तथा लियांग किचाउ ने चन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। अतः चीनी सरकार ने एक आधुनिक प्रशासकीय व्यवस्था, नई सेना तथा शिक्षा- प्रणाली के निर्माण के लिए नीतियाँ बनाईं। इसके अतिरिक्त संवैधानिक सरकार की स्थापना के हेतु स्थानीय विधायिकाओं का भी गठन किया गया। सुधारकों ने चीन को उपनिवेशीकरण से बचाये जाने पर भी बल दिया।

4. उपनिवेश बनाये गए देशों के नकारात्मक उदाहरण – साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा उपनिवेश बनाए गए देशों के नकारात्मक उदाहरणों ने भी चीनी विचारकों को प्रभावित किया। 18वीं सदी में पोलैण्ड के बँटवारे के उदाहरण ने चीनियों को अत्यधिक प्रभावित किया। भारत के उदाहरण ने भी चीन को प्रभावित किया। चीनी विचारक लियांग किचाउ का कहना था कि चीनी लोगों में एक राष्ट्र की जागरूकता उत्पन्न करके ही चीन पश्चिम का विरोध कर सकेगा। 1903 में उन्होंने लिखा कि, ” भारत एक ऐसा देश है, जो किसी और देश नहीं, बल्कि एक कम्पनी के हाथों नष्ट हो गया – ईस्ट इण्डिया कम्पनी के। वे ब्रिटेन की सेवा करने तथा अपने लोगों के साथ क्रूर होने के लिए भारतीयों की आलोचना करते थे। उनकी बातों ने चीनियों को अत्यधिक प्रभावित किया, क्योंकि चीनी महसूस करते थे कि ब्रिटेन, चीन के साथ युद्ध में भारतीय सैनिकों का प्रयोग करता है। ”

5. परम्परागत सोच को बदलने की आवश्यकता – चीनियों ने यह अनुभव किया कि परम्परागत सोच को बदलने की आवश्यकता है। कन्फ्यूशियसवाद को विचारधारा चीन के प्रसिद्ध दार्शनिक और धर्म-सुधारक कन्फ्यूशियस और उनके अनुयायियों की शिक्षाओं से विकसित की गई। इसके अन्तर्गत अच्छे व्यवहार, व्यावहारिक समझदारी और उचित सामाजिक सम्बन्धों पर बल दिया गया था। इस विचारधारा ने चीनियों के जीवन के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित किया, सामाजिक मानक दिये तथा चीनी राजनीतिक सोच और संगठनों को आधार प्रदान किया।

6. चीनियों को नये विषयों में प्रशिक्षित करना – नए विषयों में प्रशिक्षित करने के लिए विद्यार्थियों को जापान, ब्रिटेन तथा फ्रांस में पढ़ने भेजा गया। 1890 के दशक में बड़ी संख्या में चीनी विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए जापान गए। वे नये विचार लेकर चीन पहुँचे। उन्होंने चीन में गणतन्त्र की स्थापना करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। चीन ने जापान से न्याय, अधिकार और क्रान्ति के यूरोपीय विचारों के जापानी अनुवाद लिए।

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7. रूस-जापान युद्ध – 1905 में रूस और जापान के बीच युद्ध हुआ। यह एक ऐसा युद्ध था जो चीन की धरती पर और चीनी प्रदेशों पर प्रभुत्व के लिए लड़ा गया था। इस युद्ध के बाद सदियों पुरानी चीनी परीक्षा-प्रणाली समाप्त कर दी गई, जो चीनियों को अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश दिलाने का काम करती थी।

प्रश्न 8.
डॉ. सनयात सेन तथा च्यांग काई शेक के नेतृत्व में चीन के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. डॉ. सनयातसेन के नेतृत्व में चीन का विकास – 1911 में मांचू साम्राज्य समाप्त कर दिया गया और डॉ. सनयातसेन के नेतृत्व में गणतन्त्र की स्थापना की गई। डॉ. सेन आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं। उन्होंने डॉक्टरी की परीक्षा उत्तीर्ण की, परन्तु वे चीन के भविष्य के प्रति चिन्तित थे। डॉ. सेन के प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित थे
(1) राष्ट्रवाद – इसका अर्थ था मांचू वंश को सत्ता से हटाना, साथ ही साम्राज्यवादियों को चीन से हटाना। मांचू वंश विदेशी राजवंश के रूप में देखा जाता था।

(2) गणतन्त्र – चीन में गणतन्त्र या गणतान्त्रिक सरकार की स्थापना करना।

(3) समाजवाद – पूँजी का नियमन करना तथा भू-स्वामित्व में बराबरी लाना। 1912 में डॉ. सनयात सेन ने कुओमिनतांग दल की स्थापना की जो शीघ्र ही चीन का एक प्रमुख दल बन गया। डॉ. सनयात सेन के विचार कुओमिनतांग के राजनीतिक दर्शन का आधार बने। उन्होंने कपड़ा, भोजन, मकान और परिवहन – इन चार बड़ी आवश्यकताओं पर बल दिया।

2. च्यांग काई शेक के नेतृत्व में चीन का विकास – 1925 में डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् च्यांग काई शेक कुओमिनतांग दल के नेता बने।
(1) च्यांग काई शेक ने सैन्य अभियानों के द्वारा वारलार्ड्सको (स्थानीय नेता जिन्होंने सत्ता छीन ली थी) अपने नियन्त्रण में किया और साम्यवादियों को नष्ट किया।
(2) उन्होंने सैक्यूलर और इहलौकिक कन्फ्यूशियसवाद का समर्थन किया, परन्तु साथ ही राष्ट्र का सैन्यकरण करने का कार्यक्रम जारी रखा।
(3) उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोगों को ‘एकताबद्ध व्यवहार की प्रवृत्ति और आदत’ का विकास करना चाहिए।
(4) उन्होंने महिलाओं के विकास पर भी बल दिया। उन्होंने महिलाओं को चार सद्गुण उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया।

ये चार सद्गुण थे –
(1) सतीत्व
(2) रूप-रंग
(3) वाणी,
(4) काम। उन्होंने उनकी भूमिका को घरेलू स्तर पर ही देखने पर बल दिया।

(5) कुओमिनतांग का सामाजिक आधार शहरी प्रदेशों में था। औद्योगिक विकास की गति धीमी थी तथा कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित थी। 1919 में शंघाई जैसे शहरों में औद्योगिक मजदूर वर्ग का उदय हो रहा था और उनकी संख्या लगभग पाँच लाख थी। परन्तु इनमें से अधिकतर लोग ‘नगण्य शहरी’ (शियाओ शिमिन), व्यापारी तथा दुकानदार होते थे। आधुनिक उद्योगों में मजदूरों की संख्या कम थी।

(6) व्यक्तिवाद बढ़ने के साथ-साथ, महिलाओं के अधिकार, परिवार बनाने के तरीके और प्रेम-मुहब्बत आदि विषयों पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा।

(7) सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में परिवर्तन लाने में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के विस्तार से सहायता मिली। 1902 में पीकिंग विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। पत्रकारिता का भी विकास हुआ।

3. च्यांग काई शेक व कुओमिनतांग की असफलता- देश को एकीकृत करने के अपने भरसक प्रयासों के बावजूद कुओमिन तांग अपने संकीर्ण सामाजिक आधार और सीमित राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण असफल हो गया।

यथा –
(i) डॉ. सनयात सेन के महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त – पूँजी नियमन और भूमि अधिकारों में बराबरी लाना, को कभी भी कार्यान्वित नहीं किया गया। इसका कारण यह था कि पार्टी ने किसानों और बढ़ती हुई सामाजिक असमानता की अवहेलना की।
(ii) पार्टी ने लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय, सैनिक व्यवस्था थोपने का प्रयास किया।
(iii) 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण किया और चीन के अनेक नगरों पर अधिकार कर लिया। कुओमिनताँग की सेना को पीछे हटना पड़ा। दीर्घकालीन युद्धों ने चीन को कमजोर कर दिया।
(iv) 1945-49 की अवधि में चीन में कीमतें 30 प्रतिशत प्रति महीने की गति से बढ़ती गईं। इसके परिणामस्वरूप सामान्य व्यक्ति का जीवन बर्बाद हो गया।
(v) ग्रामीण चीन को दो संकटों का सामना करना पड़ा।

ये दो संकट थे –
(1) पर्यावरण सम्बन्धी संकट, जिसमें बंजर जमीन, वनों का नाश और बाढ़ शामिल थे तथा
(2) सामाजिक – आर्थिक संकट जो विनाशकारी जमीन – प्रथा आदि प्रौद्योगिकी तथा निम्न स्तरीय संचार के कारण था।

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प्रश्न 9.
चीन में 1978 से शुरू होने वाले सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीन में 1978 से शुरू होने वाले सुधार चीन में सांस्कृतिक क्रान्ति के बाद राजनीतिक दांव-पेंच की प्रक्रिया आरम्भ हुई। तंग शीयाओफिंग ने पार्टी पर सुदृढ़ नियन्त्रण बनाये रखा और साथ ही देश में समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था आरम्भ की।

1. चार-सूत्री लक्ष्य – 1978 में चीन की साम्यवादी पार्टी ने आधुनिकीकरण के अपने चार सूत्री लक्ष्य की घोषणा की। यह था – 1 – विज्ञान, उद्योग, कृषि और रक्षा का विकास। पार्टी से प्रश्न-उत्तर न करने की शर्त पर वाद-विवाद करने की अनुमति दे दी गई।

2. नये विचारों का प्रसार – इस नए और स्वतन्त्र वातावरण में नये विचारों का खूब प्रसार हुआ | 5 दिसम्बर, 1978 को दीवार पर लगे एक पोस्टर ने पाँचवीं आधुनिकता का दावा किया कि लोकतन्त्र के बिना अन्य आधुनिकताएँ निरर्थक हैं अर्थात् लोकतन्त्र के बिना आधुनिकीकरण सम्भव नहीं है। इसे पाँचवीं आधुनिकता का नाम दिया गया। पोस्टर में गरीबी को न हटा पाने तथा लैंगिक शोषण समाप्त न कर पाने के लिए सी. सी.पी. की आलोचना की गईं। परन्तु इस विरोध का दमन कर दिया गया।

3. तियानमेन चौक पर छात्रों का प्रदर्शन- 1989 में 4 मई के आन्दोलन की 70वीं वर्षगांठ पर अनेक बुद्धिजीवियों ने अधिक खुलेपन की माँग की और कठोर सिद्धान्तों (शू – शाओझी) को समाप्त करने की माँग की। बीजिंग के तियानमेन चौक पर हजारों चीनी छात्रों ने विशाल प्रदर्शन किया और लोकतन्त्र की माँग की, सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन का क्रूरतापूर्वक दमन कर दिया। सम्पूर्ण विश्व में इसकी कटु आलोचना हुई।

4. चीन के विकास के सम्बन्ध में वाद-विवाद – कुछ समय पश्चात् चीन के विकास के विषय पर पुनः वाद- विवाद होने लगा। साम्यवादी पार्टी सुदृढ़ राजनीतिक नियन्त्रण, आर्थिक खुलेपन तथा विश्व बाजार से जुड़ाव का समर्थन करती है। परन्तु आलोचकों का कहना है कि सामाजिक गुटों, क्षेत्रों तथा पुरुषों और महिलाओं के बीच बढ़ती हुई असमानताओं से सामाजिक तनाव में वृद्धि हो रही है। अब चीन में पहले के पारम्परिक विचार फिर से जीवित हो रहे हैं। कन्फ्यूशियसवाद का प्रसार हो रहा है और इस बात पर बल दिया जा रहा है कि पश्चिम की नकल करने की बजाय चीन अपनी परम्परा पर चलते हुए भी एक आधुनिक समाज का निर्माण कर सकता है।

प्रश्न 10.
च्यांग काई शेक के नेतृत्व में ताइवान में सरकार की स्थापना का विवेचन कीजिए। वहाँ की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
च्यांग काई शेक के नेतृत्व में सरकार की स्थापना –
1. 1949 में च्यांग काई शेक का ताइवान भागना-चीन के साम्यवादी दल द्वारा पराजित होने के पश्चात् च्यांग काई शेक 30 करोड़ से अधिक अमरीकी डॉलर और बहुमूल्य कलाकृतियाँ लेकर 1949 में ताइवान भाग निकला। ताइवान में उसने चीनी गणतन्त्र की स्थापना की। 1894-95 में जापान के साथ हुए युद्ध में चीन को यह स्थान जापान को सौंपना पड़ा था। तब से ताइवान जापान का उपनिवेश बना हुआ था। कायरो घोषणा पत्र ( 1943) एवं पोट्सडैम उद्घोषणा (1949) के द्वारा चीन को सम्प्रभुता वापस मिल गई थी।

2. ताइवान में च्यांग काई शेक के नेतृत्व में दमनकारी सरकार की स्थापना – फरवरी, 1947 में हुए प्रबल प्रदर्शनों के पश्चात् कुओमिनतांग ने नेताओं की एक पूरी पीढ़ी का क्रूरतापूर्वक वध करवा दिया। च्यांग काई शेक के नेतृत्व कुओमिनतांग ने एक दमनकारी सरकार की स्थापना की। सरकार ने लोगों से बोलने की तथा राजनीतिक विरोध करने की स्वतन्त्रता छीन ली। सत्ता – केन्द्रों से स्थानीय लोगों को पूर्ण रूप से हटा दिया गया।

3. आर्थिक क्षेत्र में सुधार – च्यांग काई शेक की सरकार ने भूमि सुधार कार्यक्रम लागू किया जिसके परिणामस्वरूप खेती की उत्पादकता बढ़ी। सरकार ने अर्थव्यवस्था का भी आधुनिकीकरण किया जिसके फलस्वरूप 1973 में कुल राष्ट्रीय उत्पाद के मामले में ताइवान सम्पूर्ण एशिया में जापान के बाद दूसरे स्थान पर रहा। यह अर्थव्यवस्था मुख्यतः व्यापार पर आधारित थी तथा निरन्तर विकसित भी होती रही। परन्तु महत्त्वपूर्ण बात यह है अमीर और गरीब के बीच का अन्तराल निरन्तर कम होता गया।

4. ताइवान में लोकतन्त्र की स्थापना – ताइवान में लोकतन्त्र की स्थापना की घटना भी नाटकीय रही है। यह प्रक्रिया 1975 में च्यांग काई शेक की मृत्यु के बाद धीरे-धीरे शुरू हुई। 1987 में वहाँ फौजी कानून हटा लिया गया तथा विरोधी दलों को कानूनी मान्यता मिल गई। इसके बाद वहाँ लोकतन्त्र स्थापित करने की दिशा में काफी प्रगति हुई। पहले स्वतन्त्र मतदान के द्वारा स्थानीय ताइवानी लोग सत्ता में आने लगे। राजनयिक स्तर पर अधिकांश देशों के व्यापार मिशन केवल ताइवान में ही हैं। उनके द्वारा ताइवान में पूर्ण राजनयिक सम्बन्ध और दूतावास रखना सम्भव नहीं, क्योंकि ताइवान को चीन का ही एक भाग माना जाता है।

5. चीन के साथ पुनः एकीकरण की समस्या- चीन के साथ ताइवान का पुन: एकीकरण का प्रश्न अभी भी विवादास्पद बना हुआ है। अब ताइवान और चीन के बीच सम्बन्ध सुधर रहे हैं, ताइवानी व्यापार और निवेश चीन में बड़े पैमाने पर हो रहा है तथा आवागमन भी आसान हो गया है। आशा है कि चीन ताइवान को एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र के रूप में स्वीकार करने में सहमत हो जायेगा, बशर्ते ताइवान पूर्ण स्वतन्त्रता के लिए कोई उग्र कदम नहीं उठाये।

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प्रश्न 11.
जापान तथा चीन द्वारा आधुनिकीकरण के लिए अपनाये गए मार्गों का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
औद्योगिक समाजों ने आधुनिकता के अपने-अपने मार्ग बनाए। जापान और चीन की ऐतिहासिक परिस्थितियों ने उनके स्वतन्त्र तथा आधुनिक देश बनाने के बिल्कुल अलग-अलग मार्ग बनाए।
1. जापान के आधुनिकीकरण का मार्ग – जापान अपनी स्वतन्त्रता बनाए रखने में सफल रहा और पारम्परिक कौशल तथा प्रथाओं को नए तरीकों से प्रयुक्त कर पाया।
(i) उग्र-राष्ट्रवाद का उदय तथा शोषणकारी सत्ता को बनाए रखना – जापान में कुलीन तन्त्र के नेतृत्व में हुए आधुनिकीकरण ने एक उग्र राष्ट्रवाद को जन्म दिया और एक शोषणकारी सत्ता को बनाए रखा। इसने लोकतन्त्र की माँग का दमन कर दिया।
(ii) औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना – जापान ने एक औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना की जिससे उस क्षेत्र में कटुता की भावना बनी रही और आन्तरिक विकास भी अवरुद्ध हुआ।
(iii) जापान का आधुनिकीकरण और पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियों का प्रभुत्व – जापान का आधुनिकीकरण ऐसे वातावरण में हुआ जब पश्चिमी साम्राज्यवादी शक्तियों का बोलबाला था। यद्यपि जापान ने पश्चिमी देशों की नकल की, परन्तु साथ ही अपनी समस्याओं के हल ढूँढ़ने का भी प्रयास किया। जापानी राष्ट्रवाद पर इन विवशताओं का प्रभाव देखा जा सकता है। एक ओर जापान के लोग एशिया को पश्चिमी शक्तियों के आधिपत्य से मुक्त रखने की आशा करते थे, दूसरे लोगों के लिए यही विचार साम्राज्य की स्थापना करने के लिए महत्त्वपूर्ण कारक सिद्ध हुए।
(iv) परम्पराओं का नए तथा अलग रचनात्मक तरीके से प्रयोग करना – जापान के सामाजिक तथा राजनीतिक संस्थानों के सुधार आदि के लिए परम्पराओं का नए तथा अलग रचनात्मक तरीके से प्रयोग करना आवश्यक था। उदाहरण के लिए, मेजी स्कूली पद्धति ने यूरोपीय तथा अमरीकी प्रथाओं के अनुरूप नये विषयों की शुरुआत की। किन्तु पाठ्यचर्या . का मुख्य उद्देश्य निष्ठावान नागरिक बनाना था। नैतिक शास्त्र का विषय पढ़ना अनिवार्य था जिसमें सम्राट के प्रति वफादारी पर बल दिया जाता था। इसी प्रकार परिवार में और दैनिक जीवन में आए परिवर्तन विदेशी और देशी विचारों को मिलाकर कुछ नया बनाने के प्रयास को उजागर करते हैं।

2. चीन के आधुनिकीकरण का मार्ग-चीन के आधुनिकीकरण का मार्ग बिल्कुल अलग था। यथा –
(i) परम्पराओं का परित्याग करना – 19वीं और 20वीं शताब्दी में परम्पराओं का परित्याग किया गया तथा राष्ट्रीय एकता एवं मजबूती स्थापित करने के उपाय ढूँढ़े गए। चीन के साम्यवादी दल तथा उसके समर्थकों ने परम्पराओं को समाप्त करने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने महसूस किया कि परम्पराओं ने चीनी लोगों को गरीबी के जाल में जकड़ रखा है। इसके अतिरिक्त वे महिलाओं को अधीन बनाती हैं तथा देश को पिछड़ा हुआ रखती हैं।

(ii) लोगों को अधिकार एवं सत्ता देने का आश्वासन – चीन की साम्यवादी पार्टी ने लोगों को अधिकार एवं सत्ता देने का आश्वासन दिया परन्तु वास्तव में उसने बहुत ही केन्द्रीकृत राज्य की स्थापना की। साम्यवादी कार्यक्रम की सफलता ने नवीन आशा बँधाई परन्तु दमनकारी राजनीतिक व्यवस्था के कारण उनकी आशाएँ फलीभूत नहीं हुईं। परन्तु इससे शताब्दियाँ पुरानी असमानताएँ समाप्त हो गईं। शिक्षा का प्रसार हुआ और जनता में एक जागरूकता उत्पन्न हुई।

(iii) बाजार सम्बन्धी सुधार- चीनी साम्यवादी पार्टी ने बाजार सम्बन्धी सुधार किये और चीन को आर्थिक दृष्टि से शक्तिशाली बनाने में सफल हुई। परन्तु वहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर अब भी कड़ा नियन्त्रण है। अब समाज बढ़ती असमानताओं का सामना कर रहा है और सदियों से दबी हुई परम्पराएँ फिर से जीवित होने लगी हैं। इस नयी स्थिति से पुन: यह प्रश्न उठता है कि चीन किस प्रकार अपनी धरोहर को बनाए रखते हुए अपना विकास कर सकता है।

प्रश्न 12.
1987 के बाद दक्षिण कोरिया के लोकतंत्रीय विकासक्रम पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर:
1987 केबाद दक्षिण कोरिया में लोकतंत्रीय विकासक्रम 1987 के बाद दक्षिण कोरिया के लोकतंत्रीय विकासक्रम को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है –
(1) 1987 का प्रत्यक्ष चुनाव – नये संविधान के अनुसार, 1971 के बाद पहला प्रत्यक्ष चुनाव दिसम्बर, 1987 में आ, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता में विफलता के कारण, चुन के सैन्य दल के एक साथी सैन्य नेता, ‘रोह ताएं- वू’ का चुनाव हुआ। हालांकि कोरिया में लोकतंत्र जारी रहा। लेकिन इन चुनावों में सैन्य शक्ति ही सत्ता पर कायम रही।

(2) 1992 के चुनाव और एक नागरिक नेतृत्व – 1990 में, लम्बे समय से विपक्षी नेता, रह चुके, किम यंग सैम ने एक बड़ी सत्तारूढ़ पार्टी बनाने के लिए रोह की पार्टी से समझौता किया। दिसम्बर, 1992 के चुनावों में दशकों से चल रहे सैन्य शासन के बाद, एक नागरिक नेता किम को राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया।
नए चुनावों एवं सत्तावादी सेन्य शक्ति के विघटन के फलस्वरूप एक बार फिर लोकतंत्र की मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा।

(3) शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण – दिसम्बर, 1997 में, एक लम्बे समय के बाद द. कोरिया में पहली बार शांतिपूर्ण हस्तांतरण हुआ और विपक्षी पार्टी के नेता किम डे- जुंग सत्ता में आए। सत्ता में दूसरा शांतिपूर्ण हस्तांतरण 2008 में हुआ जब रूढ़िवादी पार्टी के नेता ली माइक – बाक, प्रगतिशील पार्टी रोह मु-हयून प्रशासन के बाद अध्यक्ष चुने गए। 2012 में रूढिवादी पार्टी की नेता पार्क खान हे पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में चुनी गईं। उनके पिता पार्क चुंग-ही की राजनीतिक विरासत के कारण उन्हें अपने कार्यकाल की शुरुआत में बहुत समर्थन प्राप्त हुआ, लेकिन मार्च, 2017 में, उनके मित्र द्वारा गुप्त रूप से सरकारी प्रबंधन किये जाने के कारण, उन पर महाभियोग चला और उन्हें कार्यालय से हटा दिया गया।

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2016 में पार्क खन – हे के विरोध में नागरिकों के नेतृत्व में किए गए, केंडल लाइट विरोध, देश के लोकतांत्रिक कानून और प्रणालियों की सीमाओं के भीतर राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग हेतु शांतिपूर्ण प्रदर्शन आदि कोरियाई लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। मई, 2017 में तीसरी बार शांतिपूर्ण हस्तांतरण के द्वारा मून जे-इन ने राष्ट्रपति का पद संभाला है।
कोरियाई लोकतंत्र देश के गणतंत्रवाद को प्रोत्साहित करने वाले नागरिकों की जागरूकता का परिणाम है, जिसने आज इस देश को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. संयुक्त राज्य अमेरिका की कौनसी सरहद (फ्रंटियर) खिसकती रहती थी-
(अ) पूर्वी
(ब) उत्तरी
(स) पश्चिमी
(द) दक्षिणी।
उत्तर:
(स) पश्चिमी

2. अमेरिका में गृह-युद्ध हुआ –
(अ) 1761-65
(ब) 1861-65
(स) 1961-65
(द) 1865-90
उत्तर:
(ब) 1861-65

3. अमेरिकां के संविधान में व्यक्ति के किस अधिकार को सम्मिलित किया गया-
(अ) जीवन का अधिकार
(ब) शिक्षा का अधिकार
(स) मताधिकार
(द) सम्पत्ति का अधिकार।
उत्तर:
(द) सम्पत्ति का अधिकार।

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4. ब्रिटेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक स्वतन्त्र देश के रूप में मान्यता दी –
(अ) 1783 में
(ब) 1883 में
(स) 1781 में
(द) 1791 में।
उत्तर:
(स) 1781 में

5. संयुक्त राज्य अमेरिका के तीसरे प्रेसिडेन्ट थे –
(अ) लायड जार्ज
(ब) थॉमस जैफर्सन
(स) जार्ज बुश
(द) केनेडी।
उत्तर:
(ब) थॉमस जैफर्सन

6. ब्रिटिश लोगों ने फ्रांस के साथ हुई लड़ाई में कनाडा को जीता था –
(अ) 1861
(ब) 1761
(स) 1769
(द) 1763
उत्तर:
(द) 1763

7. संयुक्त राज्य अमेरिका में रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए किन श्रमिकों की नियुक्ति हुई –
(अ) चीनी
(ब) भारतीय
(स) अफ्रीकी
(द) ब्रिटिश।
उत्तर:
(अ) चीनी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. उत्तरी अमेरिका के सबसे पहले वाशिंदे 30000 साल पहले ……………….. से आए थे।
2. उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी जमीन पर अपनी मिल्कियत की कोई ……………. महसूस किए बगैर उससे मिलने वाले भोजन और आश्रय से संतुष्ट थे।
3. 18 वीं सदी में पश्चिमी यूरोप के लोगों को अमरीका के मूल निवासी ……………. प्रतीत हुए। महसूस किए बगैर उससे
4. 17 वीं सदी में यूरोपीय लोगों के कुछ समूह ईसाइयत से भिन्न सम्र्रदाय से ताल्लुक रखने की वजह से ……………. के शिकार थे।
5. संयुक्त राज्य अमेरिका की ………………… सरहद सिसकती रहती थी।
उत्तर:
1. एशिया
2. मिल्कियत
3. असभ्य
4. उत्पीड़न
5. पश्चिमी।

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निम्नलिखित में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये –

1. ‘गोल्ड रश’ उस आपाधापी का नाम है, जिसमें हजारों की संख्या में आतुर यूरोपीय लोग चुटकियों में अपनी तकदीर सँवार लेने की उम्मीद में अमरीका पहुँचे।
2. उच्च अधिकारी अमरीका में मूल वाशिंदों की बेदखली को गलत मानते थे।
3. उत्तरी अमेरिका में मूल निवासी रिजर्वेशन्स में कैद कर दिए गए थे।
4. 1834 के इंडियन री ऑर्गेनाइजेशन एक्ट के द्वारा रिजर्वेशन्स में मूल निवासियों को जमीन खरीदने और ऋण लेने का अधिकार मिला।
5. 18 वीं सदी के आखिरी दौर में आस्ट्रेलिया में मूल निवासियों के 350 से 750 तक समुदाय थे।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. असत्य
5. सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

Table
उत्तर:
Table

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कनाडा की प्रमुख फसलें कौनसी हैं ?
उत्तर:
गेहूँ, मकई और फल।

प्रश्न 2.
कनाडा का मुख्य उद्योग कौनसा है ?
उत्तर:
मत्स्य उद्योग

प्रश्न 3.
होपी लोग कौन थे ?
उत्तर:
होपी लोग कैलिफोर्निया के पास रहने वाले आदिवासी हैं।

प्रश्न 4.
अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थामस जैफर्सन उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों को क्या मानते थे ?
उत्तर:
असभ्य लोग।

प्रश्न 5.
यूरोपवासी अमरीका से कौनसी वस्तुएँ प्राप्त करना चाहते थे ?
उत्तर:
मछली और रोएँदार खाल।

प्रश्न 6.
अमेरिका के उत्तरी राज्यों और दक्षिणी राज्यों में गृह-युद्ध कब हुआ ?
उत्तर:
1861-65 में।

प्रश्न 7.
अमेरिका के कौनसे राज्य दास प्रथा को समाप्त करने के समर्थक थे ?
उत्तर:
उत्तरी राज्य।

प्रश्न 8.
अमरीकी सरकार ने जार्जिया प्रान्त के किस कबीले को नागरिक अधिकार नहीं दिए थे?
उत्तर:
चिरोकी कबीले को।

प्रश्न 9.
अमेरिका के किस राष्ट्रपति ने चिरोकी कबीले के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करने के आदेश दिए?
उत्तर:
एंड्रिउ जैक्सन ने।

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प्रश्न 10.
उत्तरी अमेरिका के सबसे पहले निवासी कब आए और कहाँ से आए?
उत्तर:
(1) 30,000 वर्ष पूर्व
(2) एशिया से।

प्रश्न 11.
कनाडा को स्वायत्त राज्यों के एक महासंघ के रूप में कब संगठित किया गया ?
उत्तर:
1867 में।

प्रश्न 12.
कैलीफोर्निया में प्राप्त सोने को प्राप्त करने के लिए यूरोपीय लोगों में अमेरिका पहुँचने की होड़ मच गई। इसे क्या कहा गया ?
उत्तर:
‘गोल्ड रश’।

प्रश्न 13.
अमेरिका कब दुनिया की अग्रणी औद्योगिक शक्ति बन गया था ?
उत्तर:
1890 में।

प्रश्न 14.
संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘फ्रंटियर’ की समस्या कब समाप्त हुई ?
उत्तर:
1892 में।

प्रश्न 15.
आस्ट्रेलिया के शहर अधिकतर कहाँ बसे हुए हैं?
उत्तर:
समुद्रतट के साथ।

प्रश्न 16.
आस्ट्रेलिया की राजधानी किसे बनाया गया और कब ?
उत्तर:
1911 में, कैनबरा को।

प्रश्न 17.
‘व्हाई वरन्ट वी टोल्ड’ (‘हमें बताया क्यों नहीं गया’ ) नामक पुस्तक का रचयिता कौन था ?
उत्तर:
हेनरी रेनॉल्ड्स।

प्रश्न 18.
1974 से आस्ट्रेलिया की राजकीय नीति क्या रही है?
उत्तर:
बहुसंस्कृतिवाद।

प्रश्न 19.
आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के अधिकारों के लिए प्रबल आवाज उठाने वाली लेखिका कौन थी ?
उत्तर:
ज्यूडिथ राइट।

प्रश्न 20.
आस्ट्रेलिया के प्रारम्भिक मनुष्य या आदि मानव क्या कहलाते हैं ?
उत्तर:
‘एबारिजिनीज’।

प्रश्न 21.
यूरोपवासियों द्वारा कनाडा का नामकरण किस प्रकार किया गया ?
उत्तर:
‘कनाडा’ शब्द की उत्पत्ति ‘कनाटा’ से हुई है जिसका अर्थ है – गाँव।

प्रश्न 22.
अमेरिका में ‘सेटलर’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त किया जाता था ?
उत्तर:
‘सेटलर’ (आबादकार) शब्द अमेरिका में यूरोपीय लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 23.
दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया और अमरीका में यूरोपीय उपनिवेशों की राजभाषा कौनसी थी ?
उत्तर:
कनाडा को छोड़कर इन उपनिवेशों की राजभाषा अंग्रेजी थी। कनाडा में अंग्रेजी के साथ-साथ फ्रांसीसी भी एक राजभाषा थी।

प्रश्न 24.
उत्तरी अमरीका में किन चीजों का विकास किन लोगों के द्वारा हुआ है?
उत्तर:
उत्तरी अमरीका में खनन, उद्योग तथा बड़े पैमाने पर खेती का विकास पिछले 200 वर्षों में ही यूरोप, अफ्रीका तथा चीन के आप्रवासियों के द्वारा हुआ है

प्रश्न 25.
‘नेटिव’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
‘नेटिव’ शब्द का प्रयोग उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जो अपने वर्तमान निवास-स्थान में ही उत्पन्न हुआ हो।

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प्रश्न 26.
यूरोपीय लोग नेटिव शब्द का प्रयोग किन लोगों के लिए करते थे ?
उत्तर:
बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक वर्षों तक इस शब्द का प्रयोग यूरोपीय लोगों द्वारा अपने उपनिवेशों के निवासियों के लिए किया जाता था।

प्रश्न 27.
‘अमरीका की पूर्व सन्ध्या’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘अमरीका की पूर्व सन्ध्या’ से अभिप्राय उस समय से है जब यूरोपीय लोग अमरीका में आए और इस महाद्वीप को उन्होंने अमरीका की संज्ञा दी।

प्रश्न 28.
उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) उत्तरी अमरीका के मूल निवासी नदी घाटी के गाँवों में समूह बनाकर रहते थे।
(2) वे मछली और माँस खाते थे तथा सब्जियाँ और मकई उगाते थे।

प्रश्न 29.
उत्तरी अमरीका के लोगों ने दक्षिणी अमरीका की भाँति राजशाही और साम्राज्य का विकास क्यों नहीं किया?
उत्तर:
उत्तरी अमरीका के लोग अपनी आवश्यकताओं से अधिक उत्पादन नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने दक्षिणी अमरीका की भाँति राजशाही तथा साम्राज्य का विकास नहीं किया।

प्रश्न 30.
उत्तरी अमरीका के लोग धरती को किस प्रकार पढ़ सकते थे ?
उत्तर:
उत्तरी अमरीका के लोग जलवायु और विभिन्न भू-दृश्यों को उसी भाँति समझ सकते थे, जैसे शिक्षित लोग लिखी हुई चीजें पढ़ते हैं।

प्रश्न 31.
‘रेड इण्डियन’ कौन थे?
उत्तर:
‘रेड इण्डियन’ गेहुँए वर्ण के लोग थे, जिनके निवास स्थान को कोलम्बस ने गलती से इण्डिया समझ लिया था।

प्रश्न 32.
उत्तरी अमरीका के लोगों की परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता बताइए।
उत्तर:
औपचारिक सम्बन्ध और मित्रता स्थापित करना तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना।

प्रश्न 33.
स्थानीय उत्पादों के बदले में यूरोपीय लोग उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों को कौनसी वस्तुएँ देते थे ?
उत्तर:
स्थानीय उत्पादों के बदले में यूरोपीय लोग उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों को कम्बल, लोहे के बर्तन, बन्दूकें और शराब देते थे।

प्रश्न 34.
यूरोपवासियों द्वारा मूल निवासियों को शराब से परिचित कराना उनके लिए लाभप्रद सिद्ध क्यों हुआ ?
उत्तर:
क्योंकि इसने उन्हें व्यापार के लिए मूल निवासियों पर अपनी शर्तें थोपने में सक्षम बनाया।

प्रश्न 35.
अठारहवीं शताब्दी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान किन आधारों पर करते थे ?
उत्तर:
अठारहवीं शताब्दी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म तथा शहरीपन के आधार पर करते थे।

प्रश्न 36.
अंग्रेजी के कवि विलियम वर्ड्सवर्थ ने उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों के बारे में क्या विचार प्रकट किए हैं?
उत्तर:
“उत्तरी अमरीका के मूल निवासी ‘जंगलों’ में रहते हैं, जहाँ कल्पना शक्ति के पास उन्हें भाव सम्पन्न करने, उन्हें ऊँचा उठाने व परिष्कृत करने के अवसर बहुत कम हैं।”

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प्रश्न 37.
आप ‘वेमपुम बेल्ट’ से क्या समझते हैं ?
उत्तर:
‘वेमपुम बेल्ट’ रंगीन सीपियों को आपस में मिलाकर बनायी जाती थी। किसी समझौते के पश्चात् स्थानीय कबीलों के बीच इसका आदान-प्रदान होता था।

प्रश्न 38.
अमरीका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जैफर्सन ने मूल निवासियों के बारे में क्या विचार प्रकट किए हैं?
उत्तर:
“यह अभागी नस्ल, जिसे सभ्य बनाने के लिए हमने इतनी जहमत उठाई ….अपने उन्मूलन का औचित्य सिद्ध करती है। ”

प्रश्न 39.
जमीन के प्रति यूरोपीय लोगों का दृष्टिकोण मूल निवासियों से किस प्रकार अलग था ?
उत्तर:
मूल निवासी जमीन का मालिक बनने के लिए उत्सुक नहीं थे। परन्तु यूरोपीय लोग जमीन का मालिक बनने के लिए लालायित रहते थे।

प्रश्न 40.
यूरोपीय बागान – मालिकों ने अफ्रीका से दास क्यों खरीदे ?
उत्तर:
दक्षिणी अमरीकी उपनिवेशों से दास बनाकर लाए गए मूल निवासी बहुत बड़ी संख्या में मर गए थे। इसलिए यूरोपीय बागान मालिकों ने अफ्रीका से दास खरीदे।

प्रश्न 41.
अमरीका के उत्तरी राज्यों और दक्षिणी राज्यों के बीच गृह-युद्ध कब हुआ और क्यों हुआ?
उत्तर:
1861-65 में दास प्रथा को लेकर अमरीका के उत्तरी राज्यों और दक्षिणी राज्यों में गृह-युद्ध हुआ।

प्रश्न 42.
अमरीकी गृह-युद्ध के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
(1) इस गृह-युद्ध में दास प्रथा विरोधियों की जीत हुई।
(2) दास प्रथा समाप्त कर दी गई।

प्रश्न 43.
कनाडा की सरकार को किस समस्या का सामना करना पड़ा ?
उत्तर:
1763 में ब्रिटिश लोगों ने फ्रांस के साथ हुई लड़ाई में कनाडा को जीता था। वहाँ बसे फ्रांसीसी लोग निरन्तर स्वायत्त राजनीतिक दर्जे की माँग कर रहे थे।

प्रश्न 44.
यूरोप के लोगों ने अमरीका में कौनसी फसलें उगाईं, जिनसे उन्हें बहुत मुनाफा हुआ?
उत्तर:
यूरोप के लोगों ने अमरीका में धान, कपास आदि की फसलें उगाईं, जो यूरोप में नहीं उगाई जा सकती थीं तथा जिन्हें ऊँचे मुनाफे पर बेचा जा सकता था।

प्रश्न 45.
अमरीका के उच्च अधिकारी भी मूल निवासियों को उनकी जमीनों से बेदखली को गलत नहीं मानते थे। इसका एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जार्जिया के अधिकारियों ने कहा कि यद्यपि जार्जिया के चिरोकी कबीले के लोग राज्य के कानून से शासित तो होते हैं, परन्तु वे नागरिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते।

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प्रश्न 46.
चिरोकी लोग कौन थे ?
उत्तर:
चिरोकी कबीले के लोग संयुक्त राज्य अमेरिका के जार्जिया प्रान्त में रहते थे। उन्हें नागरिक अधिकार नहीं दिए गए थे।

प्रश्न 47.
1832 में जार्जिया के चिरोकी कबीले के बारे में अमरीका के मुख्य न्यायाधीश जॉन मार्शल ने क्या निर्णय सुनाया था?
उत्तर:
” चिरोकी कबीला एक विशिष्ट समुदाय है और उसके स्वत्वाधिकार वाले क्षेत्र में जार्जिया का कानून लागू नहीं होता। ”

प्रश्न 48.
अमरीकी राष्ट्रपति एन्ड्रिउ जैक्सन ने वहाँ के मुख्य न्यायाधीश की बात मानने से इन्कार करते हुए चिरोकी कबीले के विरुद्ध क्या कार्यवाही की ?
उत्तर:
अमरीकी राष्ट्रपति एन्ड्रिउ जैक्सन ने चिरोकी लोगों को अपनी जमीन से हाँककर विस्तृत अमरीकी भूमि की ओर खदेड़ने के लिए अमरीकी सेना भेज दी।

प्रश्न 49.
जिन लोगों ने अमरीका के मूल निवासियों से जमीनें ले ली थीं, वे किस आधार पर अपने को उचित मानते थे ?
उत्तर:
अमरीकी मूल निवासियों से जमीनें लेने वाले लोग इस आधार पर अपने को उचित ठहराते थे कि मूल निवासी जमीन का अधिकांश प्रयोग करना नहीं जानते।

प्रश्न 50.
यूरोपवासी मूल निवासियों की किस आधार पर आलोचना करते थे ?
उत्तर:
यूरोपवासी मूल निवासियों की इस आधार पर आलोचना करते थे कि वे आलसी हैं, इसलिए बाजार के लिए उत्पादन करने में अपने शिल्प कौशल का प्रयोग नहीं करते हैं।

प्रश्न 51.
एक फ्रांसीसी आगन्तुक ने लिखा था कि ” आदिम जानवरों के साथ-साथ आदिम मनुष्य लुप्त हो जायेंगे।” इसका अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यूरोपवासी अमरीका के मूल निवासियों को असभ्य मानते थे। उनकी मान्यता थी कि अमरीकी मूल निवासी मर-खपने योग्य ही हैं।

प्रश्न 52.
‘रिजर्वेशन्स’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
अमरीका के मूल निवासी छोटे इलाकों तक सीमित कर दिए गए थे। इन्हें ‘रिजर्वेशन्स’ (आरक्षण) कहा जाता था।

प्रश्न 53.
अमरीका के मूल निवासियों ने संघर्ष के बाद ही अपनी जमीनों का परित्याग किया था। उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
यह तथ्य इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि अमरीका की सेना ने 1865 से 1890 के बीच मूल निवासियों के निरन्तर होने वाले विद्रोहों का दमन किया था।

प्रश्न 54.
उत्तरी अमरीका में मानवशास्त्र विषय का सूत्रपात कब हुआ और क्यों हुआ ?
उत्तर:
उत्तरी अमरीका में 1840 के दशक से मानवशास्त्र विषय का सूत्रपात स्थानीय आदिम समुदायों और यूरोप के सभ्य समुदायों के बीच के अन्तर के अध्ययन के लिए हुआ था।

प्रश्न 55.
मानवशास्त्रियों ने अमरीका के मूल निवासियों के विषय में किस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया?
उत्तर:
कुछ मानवशास्त्रियों ने यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया कि जिस प्रकार यूरोप में ‘आदिम’ लोग नहीं पाए जाते, उसी प्रकार अमरीकी मूल निवासी भी समाप्त हो जायेंगे।

प्रश्न 56.
‘गोल्ड रश’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
‘गोल्ड रश’ उस आपाधापी का नाम है जिसमें हजारों की संख्या में यूरोपीय लोग सोना पाने की आशा में अमरीका पहुँचे।

प्रश्न 57.
गोल्ड रश का अमरीका पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर:
गोल्ड रश के कारण सम्पूर्ण महाद्वीप में रेलवे लाइनों का निर्माण हुआ। 1870 में संयुक्त राज्य अमरीका में तथा 1885 में कनाडा में रेलवे का काम पूरा हुआ।

प्रश्न 58.
उत्तरी अमरीका में उद्योगों के विकास के दो कारण लिखिए।
उत्तर:
(1) रेलवे के साज-सामान बनाने के लिए।
(2) ऐसे यन्त्रों का उत्पादन करने के लिए जिनसे खेती बड़े पैमाने पर की जा सके।

प्रश्न 59.
” संयुक्त राज्य अमरीका एक साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका था।” उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
औद्योगिक क्षेत्र में उन्नति करने के बाद कुछ ही वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका ने हवाई तथा फिलिपीन्स में अपने उपनिवेश स्थापित कर लिए।

प्रश्न 60.
संयुक्त राज्य अमरीका के संविधान की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) अमरीका में लोकतन्त्रात्मक शासन प्रणाली की स्थापना हुई।
(2) उनके संविधान में व्यक्ति के ‘सम्पत्ति के अधिकार’ को सम्मिलित किया गया।

प्रश्न 61.
1928 में समाज वैज्ञानिक लेवाइस मेरिअम के निर्देशन में किए गए सर्वेक्षण में क्या बताया गया था?
उत्तर:
इस सर्वेक्षण में रिजर्वेशन्स में रह रहे अमरीका के मूल निवासियों की स्वास्थ्य एवं शिक्षा सम्बन्धी सुविधाओं की दरिद्रता का भयंकर चित्र प्रस्तुत किया गया।

प्रश्न 62.
1934 के ‘इण्डियन रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट’ के द्वारा अमरीका के मूल निवासियों को क्या अधिकार प्राप्त हुआ ?
उत्तर:
1934 के ‘इण्डियन रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट’ के द्वारा अमरीका के मूल निवासियों को जमीन खरीदने और ऋण लेने का अधिकार प्राप्त हुआ।

प्रश्न 63.
1954 में अमरीका के अनेक मूल निवासियों ने किन शर्तों के साथ अमरीका की नागरिकता स्वीकार की थी?
उत्तर:
उनके ‘रिजर्वेशन्स’ वापस नहीं लिए जायेंगे तथा उनकी परम्पराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा।

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प्रश्न 64.
आदि मानव या एबारिजनीज आस्ट्रेलिया में कब आए ?
उत्तर:
आदिमानव या ‘एबारिजनीज’ आस्ट्रेलिया में 40,000 वर्ष पहले आने शुरू हुए।

प्रश्न 65.
आस्ट्रेलिया के उत्तर में रहने वाला समूह क्या कहलाता है? ये कौन लोग हैं?
उत्तर:
आस्ट्रेलिया के उत्तर में रहने वाला समूह टारसस्ट्रेट यपूवासी कहलाता है। ये लोग ‘एबारिजनीज’ नहीं कहलाते क्योंकि ये कहीं और से आए हैं और एक अलग नस्ल के हैं।

प्रश्न 66.
आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के प्रति ब्रिटिश लोगों की क्या धारणा थी ?
उत्तर
प्रारम्भ में ब्रिटिश लोगों ने आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के व्यवहार को मित्रतापूर्ण बताया था। कैप्टन कुक की हत्या के बाद ब्रिटिशों ने उनके व्यवहार को हिंसापूर्ण बताया।

प्रश्न 67.
‘व्हाई वरन्ट वी टोल्ड’ में किस बात की कटु आलोचना की गई है ?
उत्तर:
इस पुस्तक में आस्ट्रेलियाई इतिहास-लेखन के उस ढर्रे की कटु आलोचना की गई है जिसमें कैप्टन कुक की खोज से ही इतिहास की शुरुआत मानी जाती है।

प्रश्न 68.
आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृतियों के अध्ययन के लिए किये गये उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) विश्वविद्यालयी विभागों की स्थापना की गई है।
(2) कलादीर्घाओं में देशी कलाओं की दीर्घाएँ सम्मिलित की गई हैं।

प्रश्न 69.
मूल निवासियों की जमीन सम्बन्धी शिकायतों को दूर करने के लिए आस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा लिए गए निर्णय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
इस निर्णय में इस बात को मान्यता दी गई कि मूल निवासियों का जमीन के साथ, मजबूत ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा है और इसका आदर किया जाना चाहिए।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
साम्राज्यवादी देशों द्वारा अमरीका आदि देशों में उपनिवेश स्थापित करने के क्या कारण थे? उनकी . नियन्त्रण स्थापित करने की प्रकृति में क्या विविधताएँ थीं?
उत्तर:
साम्राज्यवादी देशों द्वारा अमरीका आदि देशों में उपनिवेश स्थापित करने का मूल कारण था –
उपनिवेशों से व्यापार करके मुनाफा कमाना। उनकी नियंत्रण स्थापित करने की प्रकृति में निम्नलिखित विविधताएँ थीं-
(1) दक्षिण एशिया में व्यापारिक कम्पनियों ने अपनी राजनीतिक सत्ता स्थापित की। उन्होंने स्थानीय शासकों को पराजित किया और अपने क्षेत्रों का विस्तार किया। उन्होंने पुरानी प्रशासकीय व्यवस्था जारी रखी तथा भू-स्वामियों से कर वसूल करते रहे। उन्होंने रेलवे का भी निर्माण किया, खदानें खुदवाईं और बड़े-बड़े बागान स्थापित किए।

(2) दक्षिणी अफ्रीका को छोड़कर शेष सम्पूर्ण अफ्रीका में यूरोपवासी हर जगह समुद्र तट पर ही व्यापार करते रहे। 19वीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों में ही वे आन्तरिक प्रदेशों में जाने का साहस कर सके। कालान्तर में यूरोपीय देशों के मध्य अपने उपनिवेशों के रूप में अफ्रीका का विभाजन करने का समझौता हो गया।

(3) अमरीकी महाद्वीपों के क्षेत्रों में यूरोप से आए आप्रवासी बसने लगे। इस प्रक्रिया ने वहाँ के बहुत से मूल निवासियों को दूसरे इलाकों जाने पर मजबूर किया गया।

प्रश्न 2.
उत्तरी अमरीका की भौगोलिक स्थिति और विस्तार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उत्तरी अमरीका का महाद्वीप उत्तर ध्रुवीय वृत्त से लेकर कर्करेखा तक और प्रशान्त महासागर से अटलांटिक महासागर तक फैला है। पहाड़ों की श्रृंखला के पश्चिम में अरिजोना और नेवाडा के मरुस्थल हैं। थोड़ा और पश्चिम में सिएरा नेवाडा पर्वत है। पूरब में विस्तृत मैदानी प्रदेश, विस्तृत झीलें, मिसीसिपी, ओहियों और अप्पालाचियाँ पर्वतों की घाटियाँ हैं। दक्षिणी दिशा में मैक्सिको है। उत्तर में कनाडा है जिसका 40 प्रतिशत क्षेत्र जंगलों से ढका है।

प्रश्न 3.
यूरोपीय व्यापारियों का उत्तरी अमरीका जाने का क्या उद्देश्य था ? यहाँ के मूल निवासियों और यूरोपीय लोगों के बीच किन चीजों का आदान-प्रदान होता था ?
उत्तर:
यूरोपीय व्यापारी उत्तरी अमरीका से व्यापार कर भारी मुनाफा कमाना चाहते थे। यूरोपीय व्यापारी यहाँ मछली और रोएंदार खाल के व्यापार के लिए आए थे जिसमें उन्हें कुशल शिकारी देसी लोगों से काफी सहायता मिली। यहाँ के मूल निवासी यूरोपीय व्यापारियों को स्थानीय उत्पाद देते थे। इनके बदले में यूरोपीय लोग वहाँ के मूल निवासियों को कम्बल, लोहे के बर्तन, बन्दूकें और शराब देते थे। मूल निवासी शराब से परिचित नहीं थे, परन्तु शीघ्र ही वे भी शराब पीने के आदी हो गए। यूरोपीय लोगों ने मूल निवासियों से तम्बाकू की आदत ग्रहण की।

प्रश्न 4.
उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों के प्रति यूरोपीय लोगों के स्वार्थपूर्ण व्यवहार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोपीय लोग उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों को ‘असभ्य’ समझते थे। वहाँ के मूल निवासी यूरोपीय लोगों के साथ जिन चीजों का आदान-प्रदान करते थे, वे उनके लिए मित्रता में दिए गए ‘उपहार’ थे। इसके विपरीत धनी बनने को उत्सुक यूरोपीय लोगों के लिए मछली और रोएँदार खाल मुनाफा कमाने की वस्तुएँ थीं। इन बेची जाने वाली वस्तुओं के मूल्य इनकी पूर्ति के आधार पर प्रति वर्ष बदलते रहते थे। मूल निवासी इसे समझने में असमर्थ थे क्योंकि उन्हें सुदूर यूरोप में स्थित ‘बाजार’ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

प्रश्न 5.
जंगलों के बारे में अमरीका के मूल निवासियों और यूरोपीय लोगों के दृष्टिकोण में क्या अन्तर था ?
उत्तर:
जंगलों के बारे में अमरीका के मूल निवासियों और यूरोपीय लोगों का अलग-अलग दृष्टिकोण था। मूल निवासियों ने वनों में ऐसे रास्तों की पहचान की जो यूरोपीय लोगों के लिए अदृश्य थे। यूरोपीय लोग कटे हुए जंगल की कल्पना नहीं करते थे, बल्कि वे कटे हुए जंगल के स्थान पर मक्के के खेत देखना चाहते थे। अमरीकी राष्ट्रपति जैफर्सन एक ऐसे देश की कल्पना करते थे जो छोटे-छोटे खेतों वाले यूरोपीय लोगों से आबाद था। मूल निवासी केवल अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फसलें उगाते थे, न कि बिक्री और मुनाफे के लिए। वे जमीन का ‘मालिक’ बनने को गलत मानते थे।

प्रश्न 6.
संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा कब अस्तित्व में आए ? संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी सीमाओं का किस प्रकार विस्तार किया?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अपनी सीमाओं का विस्तार करना संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा अठारहवीं शताब्दी के अन्त में अस्तित्व में आए। उस समय उनके पास वर्तमान क्षेत्रफल का एक छोटा भाग ही था। उन्होंने अगले सौ वर्षों में अपने नियन्त्रण वाले क्षेत्रों में काफी वृद्धि की। संयुक्त राज्य अमरीका ने कई विशाल क्षेत्रों को खरीद लिया। उसने दक्षिण में फ्रांस (लुइसियाना) तथा रूस (अलास्का) से जमीन खरीदी। इसके अतिरिक्त उसने युद्धों द्वारा भी जमीनें प्राप्त कीं। उदाहरण के लिए, दक्षिणी संयुक्त राज्य अमरीका का अधिकतर हिस्सा मैक्सिको से ही जीता गया है। संयुक्त राज्य अमरीका की पश्चिमी सीमा ( फ्रन्टियर) खिसकती रहती थी और जैसे-जैसे वह खिसकती जाती, मूल निवासियों को भी पीछे खिसकना पड़ता था।

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प्रश्न 7.
“19वीं सदी में अमरीका के भू-दृश्य में जबरदस्त परिवर्तन आया। ” स्पष्ट कीजिए।
अथवा
जमीन के प्रति यूरोपीय लोगों का क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर:
(1) ब्रिटेन और फ्रांस से आए कुछ प्रवासी ऐसे थे, जो छोटे पुत्र होने के कारण पिता की सम्पत्ति के उत्तराधिकारी नहीं बन सकते थे। वे इस कारण से अमरीका में जमीनों के मालिक बनना चाहते थे।

(2) कालान्तर में जर्मनी, स्वीडन और इटली से ऐसे आप्रवासी बड़ी संख्या में अमरीका आए, जिनकी जमीनें बड़े किसानों के कब्जे में चली गई थीं। वे ऐसी जमीन चाहते थे जिसे अपना कह सकें।

(3) पोलैण्ड से आए लोग प्रेयरी चरागाहों में काम करना पसन्द करते थे जो उन्हें अपने घरों के स्टेपीज (घास के मैदानों) की याद दिलाते थे। उन्हें यहाँ बहुत कम कीमत पर पड़ी सम्पत्तियाँ खरीदना बहुत रुचिकर लग रहा था।

(4) उन्होंने जमीनों की सफाई की और खेती का विकास किया। उन्होंने धान, कपास आदि फसलें उगाईं जो में नहीं उगाई जा सकती थीं।

(5) अपने खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए उन्होंने शिकार के द्वारा उनका सफाया कर दिया। 1873 में कंटीले तारों की खोज के बाद उन्हें जंगली जानवरों से सुरक्षा प्राप्त हो गई।

प्रश्न 8.
अमरीका में 1861-65 में गृह युद्ध क्यों हुए? इसके क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
यूरोपीयं बागान मालिकों ने अफ्रीका से दास खरीदे। दास प्रथा के विरोधियों ने इसके विरुद्ध आन्दोलन शुरू किया जिसके परिणामस्वरूप दासों के व्यापार पर तो प्रतिबन्ध लगा दिया गया, परन्तु जो अफ्रीकी संयुक्त राज्य अमरीका में थे, वे और उनके बच्चे दास ही बने रहे। संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी राज्यों ने दास प्रथा को समाप्त करने पर बल दिया। उन्होंने दास प्रथा को एक अमानवीय प्रथा बताया। 1861-65 में दास प्रथा के समर्थक तथा विरोधी राज्यों में गृह-युद्ध छिड़ गया।

परिणाम –
(1) इस गृह-युद्ध में दास प्रथा के विरोधियों की विजय हुई।
(2) संयुक्त राज्य अमरीका में दास- प्रथा समाप्त कर दी गई। परन्तु अफ्रीकी मूल के अमरीकियों को नागरिक स्वतन्त्रताओं हेतु अपने संघर्ष में विजय 20वीं सदी में आकर ही मिल पाई और तभी स्कूलों तथा ट्रेनों-बसों में उन्हें अलग रखने की व्यवस्था समाप्त हुई।

प्रश्न 9.
कनाडाई सरकार के समक्ष प्रमुख समस्या क्या थी और उसका हल किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
कनाडाई सरकार के समक्ष मुख्य समस्या यह थी कि उसे स्वायत्त राजनीतिक दर्जा प्राप्त हो। सन् 1763 ई. में ब्रिटिश लोगों ने फ्रांस के साथ हुई लड़ाई में कनाडा को जीता था। वहाँ फ्रांसीसी आबादकार लगातार स्वायत्त राजनीतिक दर्जे की मांग कर रहे थे। 1867 में कनाडा को स्वायत्त राज्यों के एक महासंघ के रूप में संगठित करके ही इस समस्या का हल निकल पाया।

प्रश्न 10.
आस्ट्रेलिया में मानव निवास के इतिहास का वर्णन कीजिए और वहाँ के मूल निवासियों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
आस्ट्रेलिया में मानव निवास का इतिहास – आस्ट्रेलिया में मानव निवास का इतिहास लम्बा है। वहाँ के आदिमानव जिन्हें ‘एबारिजनीज’ कहते हैं, आस्ट्रेलिया में 40,000 वर्ष पहले आने शुरू हुए थे। वे न्यूगिनी से आए थे। मूल निवासियों की परम्पराओं के अनुसार वे आस्ट्रेलिया नहीं आए थे, बल्कि सदा से यहीं थे। मूल निवासियों के समुदाय – 18वीं सदी के अन्तिम चरण में आस्ट्रेलिया में मूल निवासियों के 350 से 750 तक समुदाय थे।

हर समुदाय की अपनी भाषा थी। देसी लोगों का एक और विशाल समूह उत्तर में रहता है। इस समुदाय को टारस स्ट्रेट टापूवासी कहते हैं। 2005 में कुल मिलाकर वे आस्ट्रेलिया की आबादी का 2.4 प्रतिशत भाग थे। आस्ट्रेलिया की आबादी छितराई हुई है। आज भी वहाँ के अधिकतर शहर समुद्र तट के साथ-साथ बसे हैं।

प्रश्न 11.
यूरोपवासियों की आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के बारे में क्या धारणाएँ थीं? मूल निवासियों ने यूरोपियों के आगमन को खतरा क्यों नहीं माना?
उत्तर:
यूरोपवासियों की आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के बारे में धारणाएँ – 1770 ई. में ब्रिटिश नाविक कैप्टन कुक ने आस्ट्रेलिया की खोज की थी। कैप्टन कुक तथा उसके साथी आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के मित्रतापूर्ण व्यवहार से बड़े प्रभावित हुए। परन्तु बाद में जब एक मूल निवासी ने हवाई में कैप्टन कुक की हत्या कर दी, तो ब्रिटिश लोगों का दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया। अब उन्होंने मूल निवासियों के हिंसक व्यवहार की आलोचना करना शुरू कर दिया।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

सभी औपनिवेशिक शक्तियाँ ऐसा ही आचरण करती हैं यूरोपीय लोगों के आगमन को खतरा न मानना-आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों ने यूरोपीय लोगों के आगमन को खतरा नहीं माना। वे यह अनुमान नहीं लगा पाए कि 19वीं और 20वीं शताब्दियों के बीच कीटाणुओं के प्रभाव से, अपनी जमीनें खोने के चलते तथा यूरोपीय लोगों के साथ हुई लड़ाइयों में लगभग 90 प्रतिशत मूल निवासियों को अपने प्राण गँवाने पड़ेंगे।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तरी अमेरिका में मानव के आगमन के बारे में आप क्या जानते हैं? उनकी प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए
उत्तर:
उत्तरी अमरीका में मानव का आगमन – उत्तरी अमरीका में सबसे पहले निवासी 30,000 वर्ष पहले बेरिंग स्ट्रेट्स के आर-पार फैले भूमि सेतु के मार्ग से एशिया से आए थे। लगभग 10,000 वर्ष पहले वे आगे दक्षिण की ओर बढ़े। अमरीका में मिलने वाली सबसे प्राचीन मानव कृति एक तीर की नोक 11,000 वर्ष पुरानी है। लगभग 5,000 वर्ष पहले जलवायु में अधिक स्थिरता आने पर मूल निवासियों की जनसंख्या बढ़ने लगी।

उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों की प्रमुख विशेषताएँ उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –
1. भोजन और शिकार – उत्तरी अमरीका के मूल निवासी नदी घाटी के साथ-साथ बने गाँवों में समूह बनाकर रहते थे। वे मछली और मांस खाते थे। वे सब्जियाँ तथा मकई उगाते थे। वे प्रायः मांस की तलाश में लम्बी यात्राएँ करते थे। मुख्य रूप से उन्हें ‘बाइसन’ अर्थात् उन जंगली भैंसों की तलाश रहती थी, जो घास के मैदानों में घूमते थे। परन्तु वे उतने ही जानवर मारते थे, जितने की उन्हें भोजन के लिए आवश्यकता होती थी।

2. बड़े पैमाने पर खेती करने में रुचि न होना- उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों की बड़े पैमाने पर खेती करने में रुचि नहीं थी। वे अपनी आवश्यकताओं से अधिक उत्पादन नहीं करते थे। इसलिए उन्होंने केन्द्रीय तथा दक्षिणी अमरीका की भाँति राजशाही और साम्राज्य का विकास नहीं किया। वे जमीन पर नियन्त्रण स्थापित करने के इच्छुक नहीं थे। वे अपनी जमीन पर अपना स्वामित्व स्थापित करने की आवश्यकता अनुभव नहीं करते थे और उससे प्राप्त होने वाले भोजन और से सन्तुष्ट थे।

3. परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता – उनकी परम्परा की एक प्रमुख विशेषता औपचारिक सम्बन्ध और मित्रता स्थापित करना तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना था।

4. अनेक भाषाओं का प्रचलित होना- उत्तरी अमरीका में अनेक भाषाएँ बोली जाती थीं, यद्यपि वे लिखी नहीं जाती थीं। उनका विश्वास था कि समय की गति चक्रीय है। प्रत्येक कबीले के पास अपनी उत्पत्ति और इतिहास के ब्यौरे थे, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते आ रहे थे।

5. कुशल कारीगर – उत्तरी अमरीका के मूल निवासी कुशल कारीगर थे। वे सुन्दर कपड़े बनाते थे।

6. जलवायु और भू-दृश्यों की जानकारी – वे जलवायु और विभिन्न भू-दृश्यों को उसी प्रकार समझ सकते थे, जैसे शिक्षित लोग लिखी हुई चीजें पढ़ते हैं।

प्रश्न 2.
संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी जमीन से मूल निवासियों की बेदखली की नीति की विवेचना कीजिए। इस सम्बन्ध में उच्च अधिकारियों की क्या नीति थी?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी जमीन से मूल निवासियों की बेदखली जब संयुक्त राज्य अमरीका ने अपनी बस्तियों का विस्तार करना शुरू किया, तो जमीन की बिक्री के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद मूल निवासियों को वहाँ से हटने के लिए बाध्य या प्रेरित किया गया। उन्हें जो कीमतें दी गईं, वे बहुत कम थीं। ऐसे उदाहरण भी मिलते हैं कि अमरीका में रहने वाले यूरोपीय लोगों ने धोखे से मूल निवासियों से उनकी जमीनें ले लीं या उन्हें पैसा देने के सम्बन्ध में अपने वचनों का पालन नहीं किया।

1. उच्च अधिकारियों द्वारा बेदखली का समर्थन करना – संयुक्त राज्य अमरीका के उच्च अधिकारी भी मूल निवासियों की बेदखली को उचित मानते थे। संयुक्त राज्य अमरीका के जार्जिया नामक प्रान्त के उच्च अधिकारियों ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि चिरोकी कबीला राज्य के कानून से शासित तो होता है, परन्तु वे नागरिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकते। इन चिरोकी लोगों ने अंग्रेजी सीखने तथा अमरीकी जीवन-शैली को समझने का सर्वाधिक प्रयास किया था। इसके बावजूद उन्हें नागरिक अधिकार प्रदान नहीं किए गए।

2. चिरोकी लोगों को बेदखल करने के लिए सेना का प्रयोग करना – 1832 में संयुक्त राज्य अमरीका के मुख्य न्यायाधीश जॉन मार्शल ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि, ” चिरोकी कबीला एक विशिष्ट समुदाय है और उसके स्वत्वाधिकार वाले क्षेत्र में जार्जिया का कानून लागू नहीं होता।” वे कुछ मामलों में सर्वप्रभुता – सम्पन्न हैं। परन्तु संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति एंड्रिउ जैक्सन ने मुख्य न्यायाधीश की भावनाओं का सम्मान नहीं किया और चिरोकियों को अपनी जमीन से बेदखल करने के लिए अमरीकी सेना भेज दी। सेना ने लगभग 15 हजार चिरोकियों को जमीन से बेदखल कर दिया। इनमें से एक-चौथाई अपने ‘आँसुओं की राह ‘ (Trail of Tears) की यात्रा में ही मर – खप गए।”

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

3. जमीन से बेदखल करने के कार्य को उचित ठहराना -जिन लोगों ने मूल निवासियों की जमीनें प्राप्त कर लीं, वे इस आधार पर अपने को उचित ठहराते थे कि मूल निवासी जमीन का अधिकतम प्रयोग करना नहीं जानते। इसलिए वह जमीन उनके अधिकार में नहीं रहनी चाहिए।

वे इस कारण भी मूल निवासियों की आलोचना करते थे कि वे आलसी हैं और बाजार के लिए उत्पादन करने में अपने शिल्प कौशल का प्रयोग नहीं करते हैं। वे अंग्रेजी सीखने और ‘ढंग के कपड़े पहनने में भी उनकी रुचि नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मूल निवासी वास्तव में ‘मर-खपने’ योग्य ही हैं। खेती के लिए प्रेयरीज साफ की गई और जंगली भैंसों को मार डाला गया। एक फ्रांसीसी आगन्तुक ने लिखा, “आदिम जानवरों के साथ- साथ आदिम मनुष्य लुप्त हो जाएगा।”

4. मूल निवासियों को स्थायी तौर पर दी गई जमीन से भी खदेड़ना – इस बीच मूल निवासी पश्चिम की ओर खदेड़ दिए गए थे। उन्हें स्थायी तौर पर अपनी जमीन दे दी गई थी। परन्तु उनकी जमीन के अन्दर सीसा, सोना या तेल जैसे खनिज के पता चलने पर प्रायः उन्हें उस स्थान से भी बेदखल कर दिया जाता था। प्रायः कई समूहों को मूलतः किसी एक के अधिकार वाली जमीन में ही साझा करने के लिए बाध्य किया जाता था। इससे उनके बीच झगड़े हो जाते थे।

5. रिजर्वेशन्स – अमरीका के मूल निवासी छोटे-छोटे क्षेत्रों में सीमित कर दिए गए थे, जिन्हें ‘रिजर्वेशन्स’ कहा जाता था। ये प्रायः ऐसी जमीन होती थीं जिनके साथ उनका पहले से कोई सम्बन्ध नहीं होता था। ऐसा नहीं है कि मूल निवासियों ने अपनी जमीनें बिना संघर्ष किये समर्पित की हों। संयुक्त राज्य अमरीका की सेना ने 1865 से 1890 के मध्य अनेक विद्रोहों का दमन किया था। कनाडा में 1869 से 1885 के बीच मेटिसों (यूरोपीय मूल निवासियों के वंशज) के सशस्त्र विद्रोह हुए। परन्तु इन लड़ाइयों के पश्चात् उन्होंने हार मान ली थी।

प्रश्न 3.
‘गोल्ड रश’ से क्या अभिप्राय है? इससे उद्योगों को बढ़ावा क्यों मिला?
अथवा
गोल्ड रश के संयुक्त राज्य अमेरिका के आर्थिक विकास में योगदान की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
‘गोल्ड रश’ से अभिप्राय – लोगों की यह धारणा थी कि उत्तरी अमरीका में पृथ्वी के नीचे सोना हैं। 1840 में संयुक्त राज्य अमरीका के कैलीफोर्निया में सोने के कुछ चिन्ह मिले। सोना प्राप्ति की लालसा ने ‘गोल्ड रश’ को जन्म दिया। ‘गोल्ड रश’ उस आपा-धापी का नाम है, जिसमें हजारों यूरोपीय लोग क्षण-भर में धनी बनने की आशा में अमरीका पहुँचे।

1. रेलवे का निर्माण – ‘गोल्ड रश’ ने अमरीका के बहुमुखी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन दिया। गोल्ड रश के चलते सम्पूर्ण महाद्वीप में रेलवे लाइनों का निर्माण हुआ। रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए हजारों चीनी श्रमिकों की नियुक्ति की गई। संयुक्त राज्य अमरीका में रेलवे का काम 1870 में तथा कनाडा में रेलवे का काम 1885 पूरा हुआ।

2. उद्योगों का विकास – उत्तरी अमरीका में उद्योगों का खूब विकास हुआ। उत्तरी अमरीका में उद्योगों के विकसित होने के दो कारण थे –
(i) रेलवे के साज-सामान बनाने के लिए यहाँ उद्योगों का विकास हुआ ताकि दूर-दूर के स्थानों को तीव्र परिवहन द्वारा जोड़ा जा सके।
(ii) ऐसे यन्त्रों का उत्पादन करने के लिए उद्योगों का विकास हुआ जिनसे बड़े पैमाने की खेती की जा सके।
गोल्ड रश के परिणामस्वरूप संयुक्त राज्य अमरीका तथा कनाडा, दोनों देशों में औद्योगिक नगरों का विकास हुआ और कारखानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। 1860 में संयुक्त राज्य अमरीका का अर्थतन्त्र अविकसित अवस्था में था। 1890 में वह विश्व की अग्रणी औद्योगिक शक्ति बन चुका था।

3. बड़े पैमाने की खेती का विस्तार – गोल्ड रश से संयुक्त राज्य अमरीका में बड़े पैमाने की खेती का भी विस्तार हुआ। वहाँ बड़े-बड़े इलाके साफ किए गए और उन्हें खेतों के रूप में बदल दिया गया। 1890 तक जंगलो भैंसों का लगभग पूरी तरह से सफाया किया जा चुका था। इस प्रकार शिकार वाली जीवनचर्या भी समाप्त हो गई जिसे मूल निवासी सदियों से जीते आ रहे थे।

4. महाद्वीपीय विस्तार – 1892 में संयुक्त राज्य अमरीका का महाद्वीपीय विस्तार पूरा हो चुका था। प्रशान्त महासागर तथा अटलांटिक महासागर के बीच का क्षेत्र राज्यों में विभाजित किया जा चुका था। अब कोई ‘फ्रंटियर’ नहीं रहा, जो कई दशकों तक यूरोपीय निवासियों को पश्चिम की ओर खींचता रहा था। प्रशान्त महासागर और अटलान्टिक महासागर के बीच का क्षेत्र राज्यों में विभाजित किया जा चुका था। कुछ ही वर्षों में संयुक्त राज्य अमरीका ने हवाई तथा फिलीपीन्स में अपने उपनिवेश स्थापित कर लिए। अब संयुक्त राज्य अमरीका एक साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका था।

प्रश्न 4.
संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार द्वारा मूल निवासियों की भलाई के लिए किये गये कार्यों का वर्णन कीजिए।
अथवा
संयुक्त राज्य अमेरिका में बदलाव की लहर पर एक लेख लिखिए।
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार द्वारा मूल निवासियों की भलाई के कार्य 1920 के दशक तक संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार ने मूल निवासियों की भलाई के लिए प्रभावशाली कदम नहीं उठाये। 1928 में समाज वैज्ञानिक लेवाइस मेरिअम के निर्देशन में सम्पन्न हुआ एक सर्वेक्षण प्रकाशित हुआ – ‘दि प्राब्लम ऑफ इण्डियन एडमिनिस्ट्रेशन’। इस सर्वेक्षण में रिजर्वेशन्स में रह रहे मूल निवासियों की स्वास्थ्य और शिक्षा सम्बन्धी सुविधाओं के न होने का बड़ा ही करुणाजनक चित्रण प्रस्तुत किया गया था। इस प्रकार उन्हें स्वास्थ्य तथा शिक्षा सम्बन्धी सुविधाओं से वंचित रखा गया। परन्तु कालान्तर में परिवर्तन की लहर आई और संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार ने मूल निवासियों की भलाई के लिए निम्नलिखित कार्य किये –

1. रि- ऑर्गेनाइजेशन एक्ट – मूल निवासियों की करुणाजनक दशा देखकर गोरे अमरीकियों के मन में उनके प्रति सहानुभूति की भावना उत्पन्न हुई, जिन्हें अपनी संस्कृति का पालन करने से रोका जाता था तथा जिन्हें नागरिकता के लाभों से भी वंचित रखा जाता था। इसने संयुक्त राज्य अमरीका में एक युगान्तरकारी कानून को जन्म दिया। 1934 में इण्डियन रिआर्गेनाइजेशन एक्ट पारित हुआ जिसके द्वारा रिजर्वेशन्स में मूल निवासियों को जमीन खरीदने और ऋण लेने का अधिकार दिया गया।

2. मूल निवासियों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों को समाप्त करने पर विचार करना – 1950 और 1960 के दशकों में संयुक्त राज्य अमरीका तथा कनाडा की सरकारों ने मूल निवासियों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों को समाप्त करने का इस आशा से विचार किया कि वे मुख्य धारा में शामिल होंगे, अर्थात् वे यूरोपीय संस्कृति को अपनायेंगे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

परन्तु मूल निवासी ऐसा नहीं चाहते थे। 1954 में अनेक मूल निवासियों ने अपने द्वारा तैयार किए गए ‘डिक्लेरेशन ऑफ संजीव पास बुक्स इण्डियन राइट्स’ में इस शर्त के साथ संयुक्त राज्य अमरीका की नागरिकता स्वीकार की कि उनके रिजर्वेशन्स वापस नहीं लिए जायेंगे और उनकी परम्पराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा। कनाडा में भी कुछ ऐसी ही चीजें हुईं।

3. मूल निवासियों द्वारा सरकार की नीति का विरोध – 1969 में संयुक्त राज्य अमरीका की सरकार ने घोषणा की कि वह ” आदिवासी अधिकारों को मान्यता नहीं देगी।” परन्तु मूल निवासियों ने इसका प्रबल विरोध किया और धरनों-प्रदर्शनों का आयोजन किया। अन्त में, 1982 में एक संवैधानिक धारा के अन्तर्गत मूल निवासियों के वर्तमान आदिवासी अधिकारों तथा समझौता – आधारित अधिकारों को स्वीकृति प्रदान की गई। यद्यपि संयुक्त राज्य अमरीका तथा कनाडा दोनों के मूल निवासियों की संख्या 18वीं सदी के मुकाबले में बहुत कम हो गई है, फिर भी उन्होंने अपनी संस्कृति का पालन करने के अपने अधिकारों की प्रबल दावेदारी की है।

प्रश्न 5.
आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के यूरोपीय लोगों के प्रति दृष्टिकोण की विवेचना कीजिए और आस्ट्रेलिया के आर्थिक विकास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों का यूरोपीय लोगों के प्रति दृष्टिकोण – आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों का यूरोपीय लोगों के प्रति आरंभिक रूप में दोस्ताना व्यवहार था। यूरोपीय लोगों के आगमन को वहाँ के सभी मूल वाशिंदों ने खतरे की तरह नहीं देखा। लेकिन 19वीं और 20वीं सदी के दरम्यान कीटाणुओं के असर तथा आबादकारों के साथ जमीनों के लिए हुई लड़ाइयों के चलते 90 प्रतिशत मूल वाशिंदों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

आस्ट्रेलिया का आर्थिक विकास – आस्ट्रेलिया के आर्थिक विकास में बहुत लम्बा समय लगा। पहले भेड़ों के विशाल फार्म और खानें विकसित हुईं। इसके बाद शराब बनाने के लिए अंगूर के बाग और गेहूँ की खेती एक लम्बे समय में और काफी मेहनत से विकसित हो पाए। इसने आस्ट्रेलिया की सम्पन्नता की आधारशिला रखी। 1911 में आस्ट्रेलिया की नई राजधानी बनाने का निश्चय किया गया। प्रारम्भ में राजधानी के लिए ‘वूलव्हीट गोल्ड’ नाम का सुझाव दिया गया परन्तु अन्त में राजधानी का नाम ‘कैनबरा’ रखा गया। कैनबरा एक स्थानीय शब्द ‘कैमबरा’ से बना है, जिसका अर्थ है ‘ सभा-स्थल’।

मूल निवासियों का कठोर परिस्थितियों में खेतों में काम करना-आस्ट्रेलिया में कुछ मूल निवासियों को कठोर परिस्थितियों में खेतों में काम करना पड़ता था। उन्हें दासों जैसी कठोर परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। परन्तु बाद में चीनी आप्रवासियों ने सस्ता श्रम उपलब्ध कराया। कुछ समय बाद सरकार ने चीनी आप्रवासियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया ताकि गैर- गोरों पर निर्भरता न बढ़े। 1974 तक आस्ट्रेलिया के लोगों के मन में यह डर उत्पन्न हो गया था कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया के ‘गहरी रंगत वाले’ लोग बड़ी संख्या में आस्ट्रेलिया आ सकते हैं। अत: ग़ैर- गोरों को आस्ट्रेलिया आने से रोकने के लिए सरकार ने एक नीति अपनाई।

प्रश्न 6.
आस्ट्रेलिया में आई परिवर्तन की लहर का वर्णन कीजिए। इसके परिणामस्वरूप आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृति के अध्ययन के लिए किये गये उपायों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
आस्ट्रेलिया में आई बदलाव की लहर पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
आस्ट्रेलिया में परिवर्तन की लहर – 1968 में एक मानवशास्त्री डब्ल्यू. ई. एच. स्टैनर के एक व्याख्यान से आस्ट्रेलिया के लोगों में जागृति उत्पन्न हुई। व्याख्यान का शीर्षक था – दि ग्रेट आस्ट्रेलियन साइलेंस (महान आस्ट्रेलियाई चुप्पी ) – यह इतिहासकारों की मूल निवासियों के बारे में चुप्पी थी। 1970 के दशक से उत्तरी अमरीका की भाँति आस्ट्रेलिया में भी यहाँ के मूल निवासियों को एक नये रूप में समझने की लालसा पैदा हो चुकी थी। उन्हें विशिष्ट संस्कृतियों वाले समुदायों के रूप तथा प्रकृति और जलवायु को समझने की विशिष्ट पद्धतियों के रूप में समझने की आवश्यकता महसूस की गई।

उन्हें ऐसे समुदायों के रूप में समझा जाना था, जिनके पास अपनी कलाओं, कपड़ा-साजी, चित्रकारी, हस्तशिल्प आदि के कौशल का विशाल भण्डार था। उनका यह भण्डार प्रशंसा करने, सम्मान करने तथा अभिलेखन के योग्य था। इसलिए हेनरी रेनाल्ड्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘व्हाइ वरंट वी टोल्ड ?’ में आस्ट्रेलियाई इतिहास, लेखन की उस पद्धति की आलोचना की गई थी, जिसमें ‘कैप्टन कुक की खोज’ से ही इतिहास की शुरुआत मानी जाती थी।

1. मूल निवासियों की संस्कृतियों के अध्ययन पर बल देना- उसके बाद से आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृतियों का अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालयों में विभागों की स्थापना हुई है। कलादीर्घाओं (आर्ट गैलरीज) में तो इस देसी कलाओं की दीर्घाएँ सम्मिलित की गई हैं। इसके अतिरिक्त देसी संस्कृति पर प्रकाश डालने के लिए संग्रहालयों में सज्जित कमरों की व्यवस्था की गई है।

अब मूल निवासियों ने भी अपने जीवन – इतिहासों को लिखना आरम्भ किया है। यह एक प्रशंसनीय प्रयास है। यदि मूल निवासियों की संस्कृतियों के अध्ययन की ओर ध्यान नहीं दिया जाता, समय तक उसका बहुत कुछ हिस्सा भुला दिया गया होता। 1974 से ‘बहुसंस्कृतिवाद’ आस्ट्रेलिया की राजकीय नीति रही है, जिसने मूल निवासियों की संस्कृतियों तथा एशिया के आप्रवासियों की भिन्न-भिन्न संस्कृतियों को समान आदर दिया है।

2. भूमि अधिग्रहण सम्बन्धी समस्या – 1970 के दशक से, जब संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सियों की बैठकों में ‘मानवाधिकार’ शब्द सुनाई पड़ने लगा, आस्ट्रेलिया की जनता को इस बात का बोध हुआ कि आस्ट्रेलिया में यूरोपीय लोगों द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को औपचारिक बनाने के लिए मूल निवासियों के साथ कोई समझौता – पत्र तैयार नहीं किया गया था। सरकार सदा से आस्ट्रेलिया की जमीन को ‘टेरान्यूलिअस’ बताती आई थी। इसका अर्थ था- ‘जो किसी की नहीं है।’ इसके अतिरिक्त वहाँ अपने आदिवासी सम्बन्धियों से छीने गए मिश्रित रक्त वाले बच्चों का भीषण शोषण किया जाता था।

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आस्ट्रेलियाई जनता द्वारा इन प्रश्नों पर किये गए आन्दोलनों के परिणामस्वरूप दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए-

  • इस बात को मान्यता देना कि मूल निवासियों का जमीन के साथ, सुदृढ़ ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा है और इसका आदर किया जाना चाहिए। जमीन उनके लिए पवित्र है।
  • पिछली गलतियों को मिटाया तो नहीं जा सकता, परन्तु ‘गोरों’ और ‘रंग-बिरंगे लोगों’ को अलग-अलग रखने का प्रयास करके बच्चों के साथ जो अन्याय किया गया है, उसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँगी जानी चाहिए।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग रहते थे –
(अ) क्यूबा
(ब) अन्ध महासागर के क्षेत्र
(स) मैक्सिको
(द) कैरीबियन द्वीप-समूह।
उत्तर:
(द) कैरीबियन द्वीप-समूह।

2. एजटेक लोग रहते थे –
(अ) ब्राजील
(ब) काँगो
(स) मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी
(द) न्यूयार्क।
उत्तर:
(स) मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी

3. मक्का की खेती किन लोगों की सभ्यता का मुख्य आधार था-
(अ) तुपिनांबा
(ब) अरावाकी
(स) एजटेक
(द) माया।
उत्तर:
(द) माया।

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4. दक्षिणी अमरीकी देशों की संस्कृतियों में से सबसे बड़ी संस्कृति. थी –
(अ) स्पेनिश लोगों की
(ब) इंका लोगों की
(स) एजटेक लोगों की
(द) अरावाकी लोगों की।
उत्तर:
(ब) इंका लोगों की

5. पन्द्रहर्वीं शताब्दी में खोज-यात्रियों में कौनसे यूरोपीय देश सबसे आगे थे?
(अ) इंग्लैण्ड
(ब) हालैण्ड
(स) स्पेन और पुर्तगाल
(द) बेल्जियम और फ्रांस।
उत्तर:
(स) स्पेन और पुर्तगाल

6. कोलम्बस द्वारा खोजे गए उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण किसके नाम पर किया गया-
(अ) कोलम्बस
(ब) वास्कोडिगामा
(स) अमेरिगो वेस्पुस्सी
(द) हेनरी।
उत्तर:
(स) अमेरिगो वेस्पुस्सी

7. मैक्सिको पर अधिकार करने वाला स्पेन का निवासी था-
(अ) डियाज
(ब) हेनरी
(स) मोटेजुमा
(द) कोर्टेस।
उत्तर:
(द) कोर्टेस।

8. इंका साम्राज्य पर अधिकार करने वाला स्पेन का निवासी था-
(अ) कैब्राल
(ब) पिजारो
(स) क्वेटेमोक
(द) कोर्टेस।
उत्तर:
(ब) पिजारो

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. ……………. लोग लड़ने की बजाय बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे।
2. …………….. लोग दक्षिणी अमरीका के पूर्वी समद्र तट तथा ब्राजील-पेड़ों के जंगलों में बसे हुए गांवों में रहते थे।
3. 12 वीं सदी में …………… लोग उत्तर से आकर मेक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे।
4. ……………. की खेती मैक्सिको की माया संस्कृति का मुख्य आधार थी।
5. दक्षिणी अमरीकी देशज संस्कृतियों में सबसे बड़ी पेरू में ……….. लोगों की संस्कृति थी।
उत्तर:
1. अरावाक
2. तुपिनांबा
3. एजटेक
4. मक्का
5. इंका

निम्न में से सत्य/असत्य कथन छाँटिये –
1. 1380 में कुतुबनुमा का आविष्कार हो चुका था।
2. 15 वीं शताब्दी में इंग्लैंड और फ्रांस के लोग समुद्री खोज यात्राओं में सबसे आगे रहे।
3. 14 वीं शताब्दी के मध्य से 15 वीं शताब्दी के मध्य तक यूरोप की अर्थव्यवस्था उन्नति के दौर से गुजर रही थी।
4. 12 अक्टूबर, 1492 को कोलम्बस ने बहाना द्वीपसमूह के गुआनाहानि द्वीप की खोज की।
5. सन् 1521 में कोर्टेस ने एजटेक लोगों को हराया।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. असत्य
4. सत्य
5. सत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

1. टॉलेमी(अ) बहामा द्वीप समूह के गुहानाहानि द्वीप की खोज की
2. कोलम्बस(ब) मैक्सिको पर विजय प्रास की
3. कोर्टेस(स) इंका राज्य पर विजय प्राप्त की
4. पिजारो(द) ‘ज्योग्राफी’ नामक पुस्तक लिखी
5. क्रैब्राल(य) ब्राजील की खोज की

उत्तर:

1. टॉलेमी(द) ‘ज्योग्राफी’ नामक पुस्तक लिखी
2. कोलम्बस(अ) बहामा द्वीप समूह के गुहानाहानि द्वीप की खोज की
3. कोर्टेस(ब) मैक्सिको पर विजय प्रात की
4. पिजारो(स) इंका राज्य पर विजय प्राप्त की
5. क्रैब्नाल(य) ब्राजील की खोज की

 

प्रश्न 1.
समुद्री खोजों का कार्य सर्वप्रथम किन यूरोपीय देशों ने किया ?
उत्तर:स्पेन और पुर्तगाल ने।

प्रश्न 2.
मैक्सिको की माया संस्कृति का मुख्य आधार क्या थी?
उत्तर:
मक्के की खेती।

प्रश्न 3.
कुतुबनुमा का आविष्कार कब हुआ ?
उत्तर:
1380 ई. में

प्रश्न 4.
कुतुबनुमा की समुद्री यात्राओं में क्या उपयोगिता थी ?
उत्तर:
यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिलना।

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प्रश्न 5.
एजटेक लोग कहाँ के निवासी थे ?
उत्तर:
मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी के।

प्रश्न 6.
एजटेक लोगों ने भूमि उद्धार क्यों किया?
उत्तर:
भूमि की कमी के कारण।

प्रश्न 7.
माया संस्कृति कहाँ प्रचलित थी ?
उत्तर:
मैक्सिको में।

प्रश्न 8.
टालेमी ने किस पुस्तक की रचना की थी ?
उत्तर:
‘ज्योग्राफी’।

प्रश्न 9.
‘ज्योग्राफी’ पुस्तक कब प्रकाशित हुई ?
उत्तर:
1477 ई. में।

प्रश्न 10.
कोलम्बस अपने अभियान पर कब रवाना हुआ?
उत्तर:
अगस्त, 1942 को।

प्रश्न 11.
कोलम्बस ने किस द्वीप की खोज की?
उत्तर:
बहामा द्वीप समूह के गुआनाहानि द्वीप की।

प्रश्न 12.
कोलम्बस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका का क्या नाम रखा गया ?
उत्तर:
नई दुनिया

प्रश्न 13.
मैक्सिको पर किसने विजय प्राप्त की और कब ?
उत्तर:
1519 में स्पेन के निवासी कोर्टेस ने।

प्रश्न 14.
इंका राज्य पर किसने विजय प्राप्त की और कब की ?
उत्तर:
1532 में पिजारो ने इंका राज्य पर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 15.
ब्राजील की खोज किसने की ?
उत्तर:
स्पेन – निवासी कैब्राल ने।

प्रश्न 16.
यूरोपवासियों को अमेरिका में पैदा होने वाली किन नई फसलों के बारे में जानकारी हुई?
उत्तर:
आलू, तम्बाकू, गन्ने की चीनी, रबड़, लाल मिर्च।

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प्रश्न 17.
एजटेक की राजधानी कौन सी थी ?
उत्तर:
टेनोक्टिलान।

प्रश्न 18.
माया संस्कृति में खेतों में बेशुमार पैदावार क्यों होती थी?
उत्तर:
खेती करने के उन्नत और कुशलतापूर्ण तरीकों के कारण।

प्रश्न 19.
दक्षिणी अमरीकी देशज संस्कृतियों में सबसे बड़ी संस्कृति किनकी थी ?
उत्तर:
इंका लोगों की।

प्रश्न 20.
आज दक्षिण अमेरिका को क्या कहा जाता है ?
उत्तर:
‘लैटिन अमेरिका’।

प्रश्न 21.
अफ्रीका के किन देशों से दास पकड़ कर यूरोप और अमेरिका ले जाये जाते थे? दो का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) अंगोला
(2) सिमरालोन।

प्रश्न 22.
कोलम्बस ने गुआनाहानि का क्या नाम रखा ?
उत्तर:
सैन सैल्वाडोर।

प्रश्न 23.
पुर्तगाल का राजकुमार हेनरी किस नाम से प्रसिद्ध था ?
उत्तर:
‘नाविक’ के नाम से।

प्रश्न 24.
कोलम्बस ने किस देश की खोज की थी ?
उत्तर:
उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका।

प्रश्न 25.
कोलम्बस ने अमेरिका का नाम किसके नाम पर रखा था ?
उत्तर:
‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ नामक भूगोलवेत्ता के नाम पर।

प्रश्न 26.
पन्द्रहवीं शताब्दी से सत्रहवीं शताब्दी के बीच यूरोपीय लोगों ने कौनसी वस्तुएँ प्राप्त करने के लिए समुद्री यात्राएँ कीं ?
उत्तर:
पन्द्रहवीं शताब्दी तथा सत्रहवीं शताब्दी के बीच यूरोपीय लोगों ने चाँदी और मसाले प्राप्त करने के लिए समुद्री यात्राएँ कीं।

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प्रश्न 27.
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहां के मूल निवासियों के लिए उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी क्यों सिद्ध हुआ?
उत्तर:
यूरोपवासी अफ्रीका से गुलाम पकड़ कर या खरीद कर उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खानों तथा बागानों में काम करने के लिए बेचने लगे।

प्रश्न 28.
अमेरिका के लोगों पर यूरोपवासियों की विजय का क्या दुष्परिणाम हुआ ?
उत्तर:
अमरीकी लोगों की पांडुलिपियों तथा स्मारकों को निर्ममतापूर्वक नष्ट कर दिया गया।

प्रश्न 29.
दक्षिणी अमेरिका तथा मध्य अमेरिका की भौगोलिक स्थिति बताइए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका घने जंगलों तथा पहाड़ों से ढका हुआ था। विश्व की सबसे बड़ी नदी अमेजन वहाँ के घने वन्य प्रदेशों से होकर बहती थी।

प्रश्न 30.
मध्य अमेरिका की भौगोलिक स्थिति बताइये।
उत्तर:
मध्य अमेरिका में मेक्सिको में समुद्रतट के आस-पास के क्षेत्र तथा मैदानी प्रदेश घने बसे हुए थे, अन्यत्र सघन वनों वाले प्रदेशों में गाँव दूर-दूर स्थित थे जबकि

प्रश्न 31.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे?
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप-समूहों तथा बृहत्तर ऐंटिली में रहते थे।

प्रश्न 32.
अरावाकी लोगों की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) अरावाकी लोग शान्तिप्रिय थे। वे लड़ने की बजाय वार्तालाप से झगड़ा निपटाना अधिक पसन्द करते थे।
(2) वे कुशल नौका-निर्माता थे।

प्रश्न 33.
‘जीववादी’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जीववादियों का विश्वास है कि आज के वैज्ञानिक जिन वस्तुओं को निर्जीव मानते हैं, उनमें भी जीव या आत्मा हो सकती है।

प्रश्न 34.
अरावाकी संस्कृति की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) अरावाकी संस्कृति के लोग अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित थे। (2) उनमें बहु-विवाह प्रथा प्रचलित थी।

प्रश्न 35.
‘तुपिनांबा’ लोग कहाँ रहते थे?
उत्तर:
तुपिनांबा लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्र तट पर और ब्राजील नामक पेड़ों के जंगलों में बसे हुए गाँवों में रहते थे।

प्रश्न 36.
तुपिनांबा लोग खेती क्यों नहीं कर पाते थे ?
उत्तर:
तुपिनांबा लोग खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके क्योंकि पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए उनके पास लोहा नहीं था।

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प्रश्न 37.
तुपिनांबा लोगों को कृषि पर निर्भर क्यों नहीं होना पड़ा ?
उत्तर:
तुपिनांबा लोगों को बहुतायत से फल, सब्जियाँ, मछलियाँ आदि मिल जाती थीं जिससे उन्हें खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था।

प्रश्न 38.
मध्य अमेरिका की संस्कृति की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) मध्य अमेरिका के राज्यों में मक्के की उपज अत्यधिक होती थी
(2) इन शहरों की वास्तुकला उच्चकोटि की थी।

प्रश्न 39.
एजटेक लोग कौन थे ?
उत्तर:
बारहवीं शताब्दी में एजटेक लोग उत्तर से आकर मेक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को हराकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया।

प्रश्न 40.
एजटेक समाज किन वर्गों में विभाजित था ?
उत्तर:
(1) अभिजात वर्ग (उच्चकुलोत्पन्न, पुरोहित)
(2) व्यापारी वर्ग थे।
(3) शिल्पी, चिकित्सक तथा विशिष्ट अध्यापक।

प्रश्न 41.
भूमि उद्धार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
भूमि उद्धार का अभिप्राय बंजर भूमि को आवासीय अथवा कृषि योग्य भूमि में परिवर्तन से है।

प्रश्न 42.
एजटेक लोगों द्वारा बनाए गए चिनाम्पा क्या थे?
उत्तर:
एजटेक लोगों ने मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाए जिन्हें ‘चिनाम्पा’ कहते थे। ये द्वीप अत्यन्त उपजाऊ थे।

प्रश्न 43.
एजटेक लोगों की वास्तुकला के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
एजटेक लोगों ने 1325 में राजधानी टेनोक्टिलान का निर्माण किया जिसके राजमहल और पिरामिड झील के बीच में खड़े हुए दर्शनीय लगते थे।

प्रश्न 44.
एजटेक लोगों के धर्म की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) एजटेक लोग सूर्य देवता तथा अन्न देवी की पूजा करते थे।
(2) उनके मन्दिर भी युद्ध के देवताओं और सूर्य भगवान को समर्पित थे।

प्रश्न 45.
माया संस्कृति की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) मक्के की खेती माया संस्कृति का मुख्य आधार थी।
(2) खेती करने के तरीके उन्नत और कुशलतापूर्ण थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 46.
माया लोगों की लिपि के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
माया लोगों की लिपि चित्रात्मक लिपि कहलाती थी। परन्तु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 47.
माया संस्कृति की दो उपलब्धियाँ बताइए।
उत्तर:
(1) माया संस्कृति में वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित जैसे विषयों की पर्याप्त उन्नति हुई।
(2) माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी।

प्रश्न 48.
इंका लोगों की संस्कृति कहाँ विकसित हुई थी ? उनका साम्राज्य कहाँ तक फैला हुआ था ?
उत्तर:
(1) पेरू में इंका लोगों की संस्कृति विकसित हुई।
(2) उनका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक 3000 मील में फैला हुआ था।

प्रश्न 49.
इंका संस्कृति की दो राजनीतिक विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) साम्राज्य अत्यन्त केन्द्रीकृत था। राजा में ही सम्पूर्ण शक्ति निहित थी।
(2) प्रत्येक व्यक्ति को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी।

प्रश्न 50.
“इंका लोगों की वास्तुकला उच्चकोटि की थी।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उन्होंने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से चिली तक अनेक सड़कें बनाईं। उनके किले शिलापट्टियों को बारीकी से तराश कर बनाए जाते थे।

प्रश्न 51.
इंका सभ्यता की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(1) इंका सभ्यता का आधार कृषि था।
(2) उनकी बुनाई और मिट्टी के बर्तन बनाने की कला उच्च कोटि की थी।

प्रश्न 52.
इंका लोगों की हिसाब लगाने की प्रणाली को समझाइए।
उत्तर:
इंका लोगों के पास हिसाब लगाने की एक प्रणाली थी, जो ‘क्विपु’ कहलाती थी। इसके अनुसार डोरियों पर गाँठें लगाकर गणितीय इकाइयों का हिसाब रखा जाता था।

प्रश्न 53.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियाँ यूरोपीय संस्कृति से किस प्रकार भिन्न थीं?
उत्तर:
एजटेक तथा इंका लोगों का समाज श्रेणीबद्ध था, परन्तु वहाँ यूरोप की भाँति कुछ लोगों के हाथों में संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।

प्रश्न 54.
15वीं शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी तक की अवधि में खोज – यात्राएँ करना सरल हो गया था। इसके दो कारण बताइए |
उत्तर:
(1) 1380 में कुतुबनुमा (दिशासूचक यन्त्र) का आविष्कार हो चुका था।
(2) इस समय तक समुद्री यात्रा पर जाने वाले जहाजों में काफी सुधार हो चुका था।

प्रश्न 55.
सृष्टि – शास्त्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सृष्टि – शास्त्र विश्व का मानचित्र तैयार करने का विज्ञान है।

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प्रश्न 56.
टालेमी की पुस्तक ‘ज्योग्राफी’ से समुद्री खोज करने वाले यात्री किस प्रकार लाभान्वित हुए?
उत्तर:
टालेमी ने विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति को अक्षांश और देशान्तर रेखाओं के रूप में व्यवस्थित किया था। जिनसे यूरोपवासियों को संसार के बारे में जानकारी मिली।

प्रश्न 57.
स्पेन और पुर्तगाल के शासक समुद्री खोज के लिए लालायित क्यों थे? दो कारण लिखिए।
उत्तर:
(1) यूरोप की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ गई थी।
(2) स्पेन और पुर्तगाल के ईसाई बाहरी विश्व के लोगों को ईसाई बनाना चाहते थे।

प्रश्न 58.
अफ्रीकी देशों की खोज में पुर्तगाल के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी ने पश्चिमी अफ्रीका की तटीय यात्रा आयोजित की और सिउटा पर आक्रमण किया। अफ्रीका के बोजाडोर अन्तरीप में पुर्तगालियों ने अपना व्यापार- केन्द्र स्थापित कर लिया।

प्रश्न 59.
‘रीकांक्विस्टा’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
कांक्विस्टा ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप (स्पेन और पुर्तगाल) पर प्राप्त की गई सैनिक विजय

प्रश्न 60.
‘कैपिटुलैसियोन’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘कैपिटुलैसियोन’ एक प्रकार के इकरारनामे थे जिनके अन्तर्गत स्पेन का शासक नव – विजित प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित कर लेता था।

प्रश्न 61.
कोलम्बस कौन था ?
उत्तर:
कोलम्बस इटली का निवासी था। 12 अक्टूबर 1492 ई. को उसने बहामा के गुआनाहानि द्वीप की खोज

प्रश्न 62.
कोलम्बस किन तीन जहाजों को लेकर अटलांटिक यात्रा के लिए रवाना हुआ था ?
उत्तर:
‘सान्ता मारिया’ नामक एक छोटी नाओ ( भारी जहाज) तथा दो कैरेवल (छोटे हल्के जहाज) ‘पिंटा’ तथा ‘नीना’ को लेकर।

प्रश्न 63.
कोलम्बस ने गुआनाहानि द्वीप का नया नाम क्या रखा ? उसने वहाँ अपने आपको क्या घोषित किया ?
उत्तर:
(1) कोलम्बस ने गुआनाहानि का नया नाम सैन सैल्वाडोर रखा।
(2) उसने अपने आपको वायसराय (स्पेन के राजा का प्रतिनिधि) घोषित किया।

प्रश्न 64.
कोलम्बस की विशेष उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
कोलम्बस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनन्त समुद्र की सीमाएं खोज निकालीं।

प्रश्न 65.
कोलम्बस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण किसके नाम पर किया गया ?
उत्तर:
कोलम्बस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ के नाम पर किया गया।

प्रश्न 66.
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार किसकी बदौलत हुआ?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार बारूद और घोड़ों के प्रयोग पर आधारित स्पेन की सैन्य शक्ति की बदौलत हुआ।

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प्रश्न 67.
बार्टोलोम डिलास कैसास कौन था? उसने स्पेनी उपनिवेशक के बारे में क्या कहा है?
उत्तर:
बार्टोलोम डिलास कैसास एक कैथोलिक भिक्षु था। उसने कहा है कि स्पेनी उपनिवेशक प्रायः अपनी तलवार की धार अरावाकों के नंगे शरीर पर आजमाते थे।

प्रश्न 68.
स्पेन के आक्रमणकारी टेनोक्टिलैन नगर को देखकर क्यों आश्चर्यचकित हुए?
उत्तर:
क्योंकि यह नगर मैड्रिड से पाँच गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े शहर सेविली से दो गुनी ( अर्थात् एक लाख ) थी.

प्रश्न 69.
डोना मैरीना कौन थी?
उत्तर:
डोना मैरीना कोर्टेस की सहायिका थी। उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये के रूप में कार्य किया।

प्रश्न 70.
कौनसी घटना ‘आँसू भरी रात’ के नाम से जाना जाती है?
उत्तर:
एजटेकों तथा स्पेनियों के बीच हुई लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी स्पेनिश सैनिक और उतने ही ट्लैक्सक्लान के लोग मारे गए। इसे ‘आँसू भरी रात’ कहा जाता है।

प्रश्न 71.
मैक्सिको पर स्पेन की विजय के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
(1) कोर्टेस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टन – जनरल बन गया।
( 2 ) स्पेनियों ने अपना नियन्त्रण . ग्वातेमाला, निकारगुआ पर भी कर लिया।

प्रश्न 72.
पिजारो कौन था ?
उत्तर:
पिजारो एक निर्धन और अनपढ़ व्यक्ति था। उसने इंका राज्य पर विजय प्राप्त की थी।

प्रश्न 73.
पिजारो द्वारा इंका राज्य की विजय का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1532 में स्पेन निवासी पिजारो ने इंका राज्य पर आक्रमण किया और लूट-पाट के बाद इंका राज्य पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 74.
कैब्राल कौन था?
उत्तर:
कैब्राल पुर्तगाल-निवासी था। उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक चक्कर लगाया और ब्राजील पहुँच गया।

प्रश्न 75.
ब्राजील में कौनसा प्राकृतिक संसाधन था?
उत्तर:
ब्राजील में एक प्राकृतिक संसाधन था और वह था ‘इमारती लकड़ी’।

प्रश्न 76.
पुर्तगालियों और फ्रांसीसियों में किस कारण भयंकर लड़ाइयाँ हुईं और इनमें कौन विजयी हुए?
उत्तर:
इमारती लकड़ी के व्यापार के कारण पुर्तगालियों और फ्रांसीसियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुईं जिनमें पुर्तगालियों की जीत हुई।

प्रश्न 77.
यूरोपीय निवासी जेसुइट पादरियों को पसन्द क्यों नहीं करते थे ?
उत्तर:
जेसुइट पादरी मूल निवासियों के साथ दया का बर्ताव करने की सलाह देते थे और दास प्रथा की कटु आलोचना करते थे।

प्रश्न 78.
अमरीका की खोज के यूरोपवासियों के लिए निकले दो परिणाम बताइए।
उत्तर:
(1) सोने-चाँदी की बाढ़ ने अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण का और अधिक विस्तार किया।
(2) यूरोपवासियों को अमेरिका में पैदा होने वाली नई-नई फसलों के बारे में जानकारी मिली।

प्रश्न 79.
उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली वह होती है जिसमें उत्पादन तथा वितरण के साधनों का स्वामित्व व्यक्तियों अथवा निगमों के पास होता है।

प्रश्न 80.
दक्षिण अमरीका को आज ‘लैटिन अमरीका’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका को आज ‘लैटिन अमरीका’ भी कहा जाता है क्योंकि स्पेनी और पुर्तगाली दोनों भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार की हैं।

प्रश्न 80.
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए यूरोपवासियों के अभियानों के क्या परिणाम निकले ?
उत्तर:
(1) उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई।
(2) उनकी जीवन- शैली नष्ट हो गई।

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लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अमेरिका के लोगों पर यूरोपवासियों की विजय का क्या दुष्परिणाम हुआ ?
उत्तर:
अमेरिका के लोगों पर यूरोपवासियों की विजय का दुष्परिणाम – अमरीका के लोगों पर यूरोपवासियों की विजय का एक दुष्परिणाम यह हुआ कि अमरीकी लोगों की पांडुलिपियों और स्मारकों को नष्ट कर दिया गया। इसके बाद उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दौर में जाकर ही मानव विज्ञानियों द्वारा इन संस्कृतियों का अध्ययन प्रारम्भ किया गया और उसके पश्चात् पुरातत्त्ववेत्ताओं ने इन सभ्यताओं के भग्नावशेषों को ढूँढ़ निकाला। सन् 1911 में इंकाई नगर माचू-पिच्चू की पुनः खोज की गई। वर्तमान में, वायुयान से लिए गए चित्रों से ज्ञात होता है कि वहाँ और भी कई नगर थे जो अब जंगलों से ढके हुए हैं।

प्रश्न 2.
“हम अमरीका के मूल निवासियों तथा यूरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के बारे में मूल निवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते, परन्तु यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। ” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
र-हम अमरीका के मूल निवासियों तथा यूरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के सम्बन्ध में मूल निवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते, परन्तु यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। इसका कारण यह है कि जो यूरोपवासी अमरीका की यात्राओं पर गए, वे अपने साथ रोजनामचा और डायरियाँ रखते थे। इनमें वे अपनी यात्राओं का दैनिक विवरण लिखते थे। हमें यूरोप के सरकारी अधिकारियों एवं जेसुइट धर्म प्रचारकों के विवरणों से भी इन संघर्षों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। परन्तु यूरोपवासियों ने अपनी अमरीकी खोज के बारे में जो कुछ विवरण दिया है और वहाँ के देशों के जिन इतिहासों की रचना की है, उनमें यूरोपीय बस्तियों के बारे में ही अधिक लिखा गया है। उनमें स्थानीय लोगों के बारे में बहुत कम या न के बराबर ही लिखा गया है।

प्रश्न 3.
‘समुद्री खोजी यात्राओं’ के पीछे वास्तविक प्रेरक तत्त्व क्या थे?
उत्तर:
समुद्री खोजी यात्राओं के पीछे मुख्य प्रेरक तत्त्व निम्नलिखित थे –
(i) 14वीं तथा 15वीं सदी में यूरोप में आयी अर्थव्यवस्था की गिरावट से उबरने हेतु पूर्वी देशों से व्यापार कर व्यापार में वृद्धि करना तथा धन कमाने की इच्छा का प्रबल होना।
(ii) मसाले और सोना प्राप्त करके यश कमाना।
(iii) रोमांचकारी साहसिक यात्राएँ करके विदेशों में ईसाई धर्म का प्रचार करना।
(iv) नये स्थानों की खोज करके वहाँ अपना राजनैतिक नियंत्रण स्थापित कर, उन्हें अपने उपनिवेश बना कर अधिक लाभ कमाना।

प्रश्न 4.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कौन थे? उनकी संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप-समूहों और बृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे।
अरावाक संस्कृति की विशेषताएँ –
1. अरावाक लोग शान्तिप्रिय, उदार तथा सहयोगी प्रवृत्ति के थे। वे लड़ने की अपेक्षा वार्तालाप द्वारा झगड़े निपटाना चाहते थे।
2. वे कुशल नौका-निर्माता थे और डोंगियों में बैठकर खुले समुद्र में यात्रा करते थे।
3. वे खेती, शिकार और मछली पकड़ कर अपना जीवन-निर्वाह करते थे। वे मक्का, मीठे आलू, कन्द-मूल और कसावा की फसलें उगाते थे।
4. वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे। उनका यह प्रयत्न रहता था कि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो।
5. वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे।
6. उनमें बहु-विवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी थे।
7. अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे, परन्तु यूरोपवासियों की भाँति सोने को उतना महत्त्व नहीं देते थे उनमें बुनाई की कला बहुत विकसित थी। वे झूले का प्रयोग करते थे।
8. उनमें बनाई की कला बहत विकसित थी। वे झले का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 5.
अरावाक लोगों के प्रति यूरोपीय ( स्पेनी) लोगों के व्यवहार की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
अरावाक लोगों को यदि कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके दे देता था, तो वे प्रसन्न हो जाते थे, क्योंकि उन्हें काँच का मनका अधिक सुन्दर दिखाई देता था। हैमक अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोग बहुत पसन्द करते थे। अरावाकी लोगों का व्यवहार उदारतापूर्ण होता था और वे सोने की तलाश में स्पेनी लोगों की सहायता करने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परन्तु सोने के लालच में स्पेनी लोग अरावाकों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने लगे तो उनमें असन्तोष उत्पन्न हुआ। अतः अरावाकों ने स्पेनियों की अत्याचारपूर्ण नीति का विरोध किया, परन्तु उन्हें उसके विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। स्पेनी लोगों के सम्पर्क में आने के बाद लगभग 25 वर्ष के अन्दर ही अरावाकों और उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया।

प्रश्न 6.
‘तुपिनांबा’ लोग कहाँ रहते थे? उनकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तुपिनांबा – तुपिनांबा लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्रतट पर तथा ब्राजील नामक वृक्षों के जंगलों में बसे गाँवों में रहते थे। वे खेती के लिए जंगलों का सफाया नहीं कर सके, क्योंकि वृक्ष काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए उनके पास लोहा नहीं था। फिर भी उन्हें बड़ी मात्रा में फल, सब्जियाँ और मछलियाँ मिल जाती थीं जिससे उन्हें . खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। वे प्रसन्नचित्त रहते थे और स्वतन्त्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करते थे। उनसे मिलने वाले यूरोपीय लोग उनकी स्वतन्त्रता को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगते थे। इसका कारण यह था कि वहाँ न कोई राजा था, न सेना थी, न कोई चर्च था जो उनके जीवन को नियन्त्रित कर सके।

प्रश्न 7.
एजटेक लोग कौन थे? उनके सामाजिक संगठन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एजटेक लोग-बारहवीं शताब्दी में एजटेक लोग उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को हराकर अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया और उन पराजित लोगों से कर वसूल करने लगे। एजटेक लोगों का सामाजिक संगठन- एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्चकुलोत्पन्न, पुरोहित तथा वे लोग सम्मिलित थे जिन्हें बाद में यह प्रतिष्ठा दी गई थी। वे सरकार, सेना और पौरोहित्य कर्म में उच्च पदों पर नियुक्त थे। अभिजात वर्ग के लोग अपनों में से एक सर्वोच्च नेता का चुनाव करते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। समाज में योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सर्वाधिक सम्मान दिया जाता था। व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के पदों पर नियुक्त किया जाता था। कुशल शिल्पियों, चिकित्सकों तथा विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

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प्रश्न 8.
एजटेक लोगों ने भूमि की कमी को पूरा करने के लिए किस प्रकार भूमि उद्धार किया?
उत्तर:
(1) एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी, इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (जल में से जमीन लेकर इस कमी को पूरा करना) किया। सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढककर उन्होंने मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाये, जो ‘चिनाम्पा’ कहलाते थे। इन अत्यन्त उपजाऊ द्वीपों के मध्य नहरों का निर्माण किया गया। इन पर 1325 में एजटेक राजधानी टेनोक्टिलान का निर्माण किया गया। इसमें बने हुए राजमहल और पिरामिड झील के बीच में खड़े हुए बड़ा सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते थे।

प्रश्न 9.
एजटेक लोगों की आर्थिक स्थिति का विवेचन कीजिए।
(2) एजटेक लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू और अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष के पास नहीं होता था, बल्कि यह स्वामित्व कुल के पास होता था। खेतिहर लोग अभिजातों के खेत जोतते थे और इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को भी गुलामों के रूप में बेच देते थे।

प्रश्न 10.
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों का क्या दृष्टिकोण था ?
अथवा
एजटेक लोगों की शैक्षणिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों का दृष्टिकोण – एजटेक लोगों की शिक्षा में बड़ी रुचि थी। वे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे ‘कालमेकाक’ में भर्ती किये जाते थे। यहाँ उन्हें सेना अधिकारी और धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। शेष समस्त बच्चे पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल में पढ़ते थे। यहाँ उन्हें इतिहास, पुराण – मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण, खेती और व्यापार करना सिखाया जाता था और लड़कियों को घरेलू काम- -धन्धों में निपुण बनाया जाता था।

प्रश्न 11.
माया संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मैक्सिको की माया संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

  • मक्के की खेती माया लोगों की सभ्यता का मुख्य आधार थी। उनके अनेक धार्मिक क्रिया-कलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने और काटने से जुड़े होते थे।
  • उनके खेती करने के तरीके उन्नत तथा कुशलतापूर्ण थे, जिनके कारण खेतों में बहुत अधिक पैदावार होती थी। इससे शासक वर्ग, पुरोहितों तथा प्रधानों को एक उन्नत संस्कृति का विकास करने में सहायता मिली।
  • माया संस्कृति के अन्तर्गत वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित की पर्याप्त उन्नति हुई।
  • माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी। परन्तु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह से नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 12.
माया लोगों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
माया लोगों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ – माया लोगों की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –

  • वास्तुकला – माया लोग वास्तुकला में निपुण थे। उन्होंने अनेक मन्दिरों, वेधशालाओं, पिरामिडों आदि का है। निर्माण करवाया। टिकल, ग्वातेमाला में स्थित माया मन्दिर तत्कालीन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना
  • गणित एवं खगोल विज्ञान – माया लोग गणित एवं खगोल विज्ञान में भी निपुण थे। वे शून्य के लिए एक प्रतीक चिह्न का प्रयोग करते थे।
  • पंचांग- माया लोगों के पंचांग में वर्ष में 365 दिन होते थे। उन्होंने वर्ष को 18 महीने में विभाजित किया था और प्रत्येक महीना 20 दिन का होता था।
  • चित्रात्मक लिपि – माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि भी थी।

प्रश्न 13.
इंका लोगों के राजनीतिक जीवन का विवेचन कीजिए।
अथवा
इंका संस्कृति की राजनीतिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • दक्षिणी अमरीकी देशों की संस्कृतियों में से सबसे बड़ी पेरू में क्वेचुआ अथवा इंका लोगों की संस्कृति थी। इंका राज्य का विस्तार इक्वेडोर से चिली तक 3000 मील में फैला हुआ था।
  • इंका साम्राज्य अत्यन्त केन्द्रीकृत था। साम्राज्य की सम्पूर्ण शक्ति राजा में ही निहित थी। वही साम्राज्य का सर्वोच्च अधिकारी था।
  • प्रत्येक इंका व्यक्ति को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी।
  • प्रत्येक कबीला स्वतन्त्र रूप से वरिष्ठ लोगों की एक सभा द्वारा शासित होता था, परन्तु पूरा कबीला अपने आप में शासक के प्रति निष्ठावान था।

प्रश्न 14.
इंका लोगों की वास्तुकला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संजीव पास बुक्स – इंका लोगों की वास्तुकला – इंका लोग उच्च कोटि के भवन निर्माता थे। उन्होंने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से चिली तक अनेक सड़कों का निर्माण किया था। उनके दुर्ग शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए जाते थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे की आवश्यकता नहीं होती थी। वे टूटकर गिरी हुईं चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का उपयोग करते थे।

इसके लिए अपेक्षाकृत अधिक संख्या में मजदूरों की आवश्यकता पड़ती थी। राजमिस्त्री खण्डों को सुन्दर रूप देने के लिए शल्क पद्धति ( फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। यह पद्धति प्रभावकारी और सरल होती थी। कई शिलाखण्ड वजन में 100 मेट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे, उनके पास इतने बड़े शिलाखण्डों को ढोने के लिए पहियेदार गाड़ियाँ नहीं थीं। यह समस्त कार्य मजदूरों द्वारा ही बड़ी सावधानी से सम्पन्न कराया जाता था।

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प्रश्न 15.
इंका संस्कृति की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इंका संस्कृति की आर्थिक स्थिति – इंका संस्कृति का आधार कृषि था। इंका लोगों के यहाँ जमीन खेती के लिए बहुत उपजाऊ नहीं थी। इसलिए उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित कीं। पन्द्रहवीं शताब्दी में ऊँची भूमियों में खेती आज की तुलना में काफी अधिक परिमाण में की ती थी। इंका लोग मक्का तथा आलू की फसलें उगाते थे और भोजन तथा श्रम के लिए लामा पालते थे। इंका लोगों की बुनाई तथा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला उच्च कोटि की थी।

प्रश्न 16.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियाँ यूरोपीय संस्कृति से किस प्रकार भिन्न थीं?
उत्तर:
(1) एजटेक तथा इंका संस्कृतियों में समाज श्रेणीबद्ध था, परन्तु वहाँ यूरोप की भाँति कुछ लोगों के हाथों में संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।
(2) एजटेक तथा इंका संस्कृतियों में पुरोहितों तथा शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था, परन्तु यूरोप में ऐसा नहीं था।
(3) यद्यपि एजटेक तथा इंका लोग भव्य मन्दिर बनाते थे तथा उनमें परम्परागत रूप से सोने का प्रयोग करते थे; परन्तु वे सोने-चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। इसके विपरीत यूरोपीय लोग सोने-चाँदी को अत्यधिक महत्त्व देते थे। सोना-चाँदी प्राप्त करने के लिए वे क्रूरतापूर्ण व्यवहार करते थे और स्थानीय लोगों को गुलाम बनाकर उनका शोषण करते थे।

प्रश्न 17.
पुर्तगालियों द्वारा पश्चिमी अफ्रीका में व्यापारिक केन्द्र स्थापित करने के प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जब यूरोपवासी स्पेन और मसालों की खोज में नए-नए प्रदेशों में जाने की योजनाएँ बना रहे थे, तो यूरोप के एक छोटे से देश पुर्तगाल ने पश्चिमी अफ्रीका के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करने का निश्चय किया। पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी ने पश्चिमी अफ्रीका की तटीय यात्रा आयोजित की और 1415 में सिउटा पर आक्रमण कर दिया। उसके पश्चात् कई अभियान आयोजित किये गए और अफ्रीका के बोजडोर अन्तरीप में पुर्तगालियों ने अपना व्यापार केन्द्र स्थापित कर लिया। उन्होंने अफ्रीकियों को बड़ी संख्या में गुलाम बना लिया और स्वर्णधूलि को साफ करके सोना तैयार करने लगे।

प्रश्न 18.
“स्पेन में आर्थिक कारणों ने लोगों को महासागरी शूरवीर बनने के लिए प्रोत्साहित किया।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्पेन के आर्थिक कारणों ने लोगों को महासागरी शूरवीर बनने के लिए प्रोत्साहन दिया। धर्म-युद्धों की याद और रीकांक्विस्टा की सफलता ने उनकी व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं को बढ़ा दिया था। रीकांक्विस्टा (पुनर्विजय) ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप (स्पेन और पुर्तगाल के राज्य) पर प्राप्त की गई सैनिक विजय थी।

इस विजय के द्वारा इन राजाओं ने 1492 में इस प्रायद्वीप को अरबों के आधिपत्य से मुक्त करा लिया था। अब स्पेन के लोगों ने इकरारनामों की शुरुआत की जिसके अन्तर्गत स्पेन का शासक नव – विजित प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित कर लेता था और उन्हें विजयी अभियानों के नेताओं को पुरस्कार के रूप में पदवियाँ तथा विजित प्रदेशों पर शासनाधिकार देता था।

प्रश्न 19.
अमरीका में स्पेन के साम्राज्य की स्थापना किस प्रकार हुई ?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेन के साम्राज्य का विस्तार उसकी सैन्य शक्ति के आधार पर हुआ। उसकी सैन्य शक्ति बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग पर आधारित थी। स्पेन के लोग वहाँ शुरू में खोज के बाद छोटी बस्ती बसा लेते थे जिसमें रहने वाले स्पेनी लोग स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। स्थानीय प्रधानों को नये-नये प्रदेश और सोने के नए-नए स्रोतों की खोज के लिए भर्ती किया जाता था।

अधिक से अधिक सोना प्राप्त करने के लालच में स्पेन के लोगों ने दमनकारी नीति अपनाई जिसका स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया। इसके अतिरिक्त स्पेन की सेना के साथ आई चेचक की महामारी ने अरावांक लोगों का सफाया कर दिया क्योंकि उनमें प्रतिरोध क्षमता नहीं थी।” कोलम्बस के अभियानों के पश्चात् स्पेनवासियों द्वारा मध्यवर्ती तथा दक्षिणी अमरीका में खोज बराबर चलती रही और उसमें सफलता मिलती गई। 50 वर्षों के भीतर ही स्पेनवासियों ने लगभग 40 डिग्री उत्तरी से 40 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक के समस्त क्षेत्र को खोज खोज कर उस पर अधिकार कर लिया।

प्रश्न 20.
कोलम्बस की अटलान्टिक यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोलम्बस की अटलान्टिक यात्रा – 3 अगस्त, 1492 को कोलम्बस पालोस के पत्तन से अटलान्टिक यात्रा के लिए रवाना हुआ। कोलम्बस के बेड़े में सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ ( भारी जहाज) और दो कैरेवल – छोटे हल्के जहाज ‘पिंटा’ और ‘नीना’ थे। ‘सांता मारिया’ की कमान स्वयं कोलम्बस के हाथों में थी।

उसमें 40 कुशल नाविक थे। 33 दिनों तक कोलम्बस का बेड़ा आगे बढ़ता गया। अन्त में 12 अक्टूबर, 1492 को कोलम्बस को जमीन दिखाई दी जिसे उसने भारत समझा परन्तु वह स्थान बहामा द्वीप समूह का गुआनाहानि द्वीप था। कोलम्बस ने गुआनाहानि में स्पेन का झण्डा गाड़ दिया और उसने उस द्वीप का नया नाम ‘सैन सैल्वाडोर’ रखा। उसने अपने-आपको वाइसराय घोषित कर दिया। उसने बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन, क्यूबा तथा किस्केया तक आगे बढ़ने के लिए स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

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प्रश्न 21.
समुद्री खोज के सम्बन्ध में कोलम्बस की विशेष उपलब्धि का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
समुद्री खोज के सम्बन्ध में कोलम्बस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनन्त समुद्र की सीमाएँ खोज निकालीं और यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताहों तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। कोलम्बस के द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमरीका का नामकरण फ्लोरेन्स के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ के नाम पर किया गया। उसने उन्हें ‘नई दुनिया’ के नाम से पुकारा। उनके लिए ‘अमरीका’ नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशक द्वारा 1507 में किया गया।

प्रश्न 22.
स्पेनिश सेनापति कोर्टेस की मैक्सिको विजय का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1519 में स्पेनिश सेनापति कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था जहाँ उसने टाटानैक समुदाय से मैत्री कर ली। स्पेनी सैनिकों ने ट्लेक्सकलानों पर आक्रमण कर दिया और वहाँ के लोगों को पराजित कर दिया। इसके बाद 8 नवम्बर, 1519 को स्पेनी सैनिकों ने टेनोक्टिलान पर अधिकार कर लिया।

मैक्सिको के शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया, परन्तु कोर्टेस ने सम्राट मोंटेजुमा को नजरबन्द कर लिया और उसके नाम पर शासन चलाने का प्रयास करने लगा। जब कोर्टेस क्यूबा लौट गया तो मैक्सिको की जनता ने विद्रोह कर दिया, परन्तु स्पेनी सेना ने उनके विद्रोह का दमन कर दिया। कुछ समय बाद कोर्टेस ने 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टैनोक्टिलान पर आक्रमण किया और उस पर अधिकार कर लिया। मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया।

प्रश्न 23.
डोना मैरीना के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
डोना मैरीना – बर्नार्ड डियाज डेलकैस्टिलो ने अपने ग्रन्थ ‘टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको’ में लिखा है कि टैबेस्को के लोगों ने स्पेन के सेनापति कोर्टेस को डोना मैरीना नामक एक सहायिका दी थी।

डोना मैरीना तीन भाषाओं में प्रवीण थी और उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये के रूप में अत्यन्त निर्णायक भूमिका निभाई थी। बर्नार्ड डियाज ने लिखा है कि, “यह हमारी विजयों की जोरदार शुरुआत थी और डोना मैरीना की सहायता के बिना हम न्यू स्पेन और मैक्सिको की भाषा नहीं समझ सकते थे। ” बर्नार्ड डियाज का विचार था कि डोना मैरीना एक राजकुमारी थी। परन्तु मेक्सिकन लोग उसे ‘मांलिच’ अर्थात् विश्वासघाती कहते थे। ‘मांलिचिस्टा’ का अर्थ है – वह व्यक्ति जो दूसरों की भाषाओं तथा कपड़ों की हू-ब-हू नकल करता है।

प्रश्न 24.
पिजारो द्वारा इंका साम्राज्य की विजय का विवरण दीजिए।
उत्तर:
पिजारो सेना में भर्ती होकर 1502 में कैरीबियन द्वीप समूह में आया था। स्पेन के राजा ने पिजारो को यह वचन दिया था कि यदि वह इंका राज्य को जीत लेगा, तो उसे वहाँ का राज्यपाल बना दिया जायेगा। 1532 में पिजारो इंका राज्य पहुँचा और धोखे से वहाँ के राजा को बन्दी बना लिया। राजा ने अपनी मुक्ति के लिए पिजारो को एक कमरा भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव किया।

परन्तु पिजारो ने इस प्रस्ताव पर कोई ध्यान नहीं दिया और राजा का वध करवा दिया। पिजारो के सैनिकों ने इंका राज्य को लूटने के बाद इंका राज्य पर अधिकार कर लिया। 1534 में स्पेनी सैनिकों के अत्याचारों के विरुद्ध इंका राज्य के लोगों ने विद्रोह कर दिया, जो दो वर्ष तक चलता रहा। अगले पाँच वर्षों में स्पेनियों ने पोटोसी, ऊपरी पेरू की खानों में चाँदी के विशाल भण्डारों का पता लगा लिया और उन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को गुलाम बना लिया।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अरावाकी लुकायो समुदाय की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय – अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे- छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और बृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। कैरिब नामक एक खूंखार कबीले ने उन्हें लघु ऐंटिलीज प्रदेश से मार भगाया था। अरावाक लोग शान्तिप्रिय थे तथा लड़ने की अपेक्षा वार्तालाप से अपने झगड़े निपटाना चाहते थे। अरावाक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ अरावाक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

1. कुशल नौका-निर्माता-अरावाक लोग कुशल नौका-निर्माता थे। वे वृक्ष के खोखले तनों से अपनी डोंगियाँ बनाते थे और डोंगियों में बैठकर खुले समुद्र में यात्रा करते थे।

2. शान्तिप्रिय लोग – अरावाकी लोग शान्तिप्रिय थे तथा लड़ने की अपेक्षा वार्तालाप से अपने झगड़े निपटाना चाहते थे।

3. जीवन – निर्वाह के साधन – अरावाक लोग खेती, शिकार तथा मछली पकड़कर अपना जीवन-निर्वाह करते थे खेती में वे मक्का, मीठे आलू और अन्य प्रकार के कन्द-मूल और कसावा उगाते थे।

4. मिल-जुलकर खाद्य उत्पादन करना – अरावाक संस्कृति की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि वे सब एक-साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो सके। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे।

5. रीति-रिवाज – अरावाक लोगों में बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी थे। अरावाक समाज में भी शमन लोगों का बड़ा प्रभाव था। शमन लोग कष्ट दूर करने वालों तथा इहलोक और परलोक के बीच मध्यस्थों के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

6. सोने को अधिक महत्त्व नहीं देना – अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे परन्तु यूरोपवासियों की भाँति सोने को उतना महत्त्व नहीं देते थे। यदि कोई यूरोपीय व्यक्ति सोने के बदले काँच के मनके दे देता था, तो वे बहुत प्रसन्न होते थे क्योंकि उन्हें काँच का मनका अधिक सुन्दर दिखाई देता था।

7. बुनाई की उन्नत कला – अरावाक लोगों की बुनाई की कला बहुत उन्नत थी। हैमक अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी। इसे यूरोपीय लोगों ने भी बहुत पसन्द किया था।

8. उदारतापूर्ण व्यवहार – अरावाक लोगों का व्यवहार बड़ा उदारतापूर्ण होता था। वे सोने की खोज में स्पेनी लोगों को सहयोग देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परन्तु कालान्तर में जब स्पेनी लोगों ने दमनकारी नीति अपनाई, तो अरावाकों ने उसका विरोध किया। परन्तु इस विरोध के उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अरावाक संस्कृति का विनाश – स्पेनी लोगों ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए अरावाक लोगों का क्रूरतापूर्वक दमन किया। स्पेनी लोगों के सम्पर्क में आने के बाद लगभग 25 वर्ष के अन्दर ही अरावाकों और उनकी संस्कृति का अन्त हो गया।

प्रश्न 2.
एजटेक संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक जन – बारहवीं शताब्दी में एजटेक लोग उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को पराजित करके अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया। उन्होंने पराजित लोगों से नजराना वसूल किया। एज़टेक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ एंजटेक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं –

1. समाज- एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजातवर्ग में उच्च कुलोत्पन्न, पुरोहित तथा वे लोग सम्मिलित थे जिन्हें बाद में यह प्रतिष्ठा दी गई थी। पुश्तैनी अभिजातों की संख्या बहुत कम थी और वे सरकार, सेना तथा पौरोहित्य-कर्म में उच्च पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक सर्वोच्च नेता का चुनाव करते थे, जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा का पद अत्यन्त प्रतिष्ठित था। वह पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था।

योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को समाज में सर्वाधिक सम्मान दिया जाता था। व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। वे प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में कार्य करते थे। कुशल शिल्पियों, चिकित्सकों तथा विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

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2. भूमि उद्धार – एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार किया अर्थात् जल में से जमीन लेकर इस कमी को पूरा किया।

3. निर्माण कार्य – सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बन कर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढक कर उन्होंने मेक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाये, जिन्हें ‘चिनाम्पा’ कहते थे। इन अत्यन्त उपजाऊ द्वीपों के बीच नहरें बनाई गईं। 1325 में इन पर एजटेक राजधानी टेनोक्टिलान का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील के बीच में खड़े हुए बड़ा सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते थे। एजटेक शासक प्रायः युद्धों में व्यस्त रहते थें, इसलिए उनके सर्वाधिक भव्य मन्दिर भी युद्ध के देवताओं और सूर्य भगवान को समर्पित थे। .

4. आर्थिक जीवन – एजटेक साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। एजटेक लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू और अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामी कोई व्यक्ति विशेष नहीं होता था, बल्कि यह स्वामित्व कुल के पास होता था जो सार्वजनिक निर्माण कार्यों को सामूहिक रूप से पूरा करवाता था। खेतिहर लोग अभिजात वर्ग के लोगों के खेत जोतते थे तथा बदले में उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा दे दिया जाता था। निर्धन लोग, कभी – कभी अपने बच्चों को भी गुलामों के रूप में बेच देते थे, परन्तु यह बिक्री प्राय: कुछ वर्षों के लिए ही की जाती थी। गुलाम अपनी स्वतन्त्रता फिर से खरीद सकते थे।

5. शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण – एजटेक लोगों की शिक्षा में काफी रुचि थी। वे इस बात का अत्यधिक ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे ‘कालमेकाक’ में भर्ती किये जाते थे। वहाँ उन्हें सेना अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। शेष समस्त बच्चे पड़ोस के तपोकल्ली स्कूल में पढ़ते थे। वहाँ उन्हें इतिहास, पुराण – मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण, खेती और व्यापार करना सिखाया जाता था और लड़कियों को घरेलू काम-धन्धों में निपुण बनाया जाता था।

6. एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता – सोलहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में, एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता के चिह्न दिखाई देने लगे। यह अस्थिरता हाल ही जीते गए लोगों में उत्पन्न असन्तोष के कारण आई थी, जो एजटेक शासकों के नियन्त्रण मुक्त होने के लिए प्रयत्नशील थे।

प्रश्न 3.
“दक्षिणी अमरीकी देशों की संस्कृतियों में से सबसे बड़ी पेरू में क्वेचुआ या इंका लोगों की संस्कृति थी। ” व्याख्या कीजिए।
अथवा
पेरू की इंका संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
पेरू की इंका संस्कृति – दक्षिणी अमरीकी देशों की संस्कृतियों में से सबसे बड़ी पेरू में क्वेचुआ या इंका लोगों की संस्कृति थी। बारहवीं शताब्दी में प्रथम इंका शासक मैंकोकपाक ने कुजको में अपनी राजधानी स्थापित की थी। ‘नौवें इंका शासक के काल में इंका राज्य का विस्तार शुरू हुआ और अन्त में इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक 3000 मील में फैल गया। इंका संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ इंका संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

1. केन्द्रीकृत साम्राज्य – इंका साम्राज्य अत्यन्त केन्द्रीकृत था। राजा साम्राज्य का सर्वोच्च अधि कारी होता था। राजा में ही सम्पूर्ण शक्ति निहित थी। नवविजित कबीलों तथा जनजातियों को साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया गया था। प्रत्येक व्यक्ति को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी। प्रत्येक कबीला स्वतन्त्र रूप से व ष्ठों की एक सभा द्वारा शासित होता था। परन्तु पूरा कबीला शासक के प्रति वफादार होता था। स्थानीय शासकों को उन के सैनिक सहयोग के लिए पुरस्कृत किया जाता था। इस प्रकार इंका साम्राज्य एक संघ के समान था। विद्वानों का अनुमान है कि इंका साम्राज्य की आबादी 10 लाख से अधिक थी।

2. वास्तुकला – इंका साम्राज्य में वास्तुकला की पर्याप्त उन्नति हुई। एजटेक लोगों की भाँति इंका लोग भी उच्च कोटि के भवन-निर्माता थे। इंका लोगों ने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से चिली तक अनेक सड़कें बनाई थीं। उनके दुर्ग शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए जाते थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे की आवश्यकता नहीं होती थी। वे निकटवर्ती प्रदेशों में टूटकर गिरी हुई चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम – प्रधान प्रौद्योगिकी का उपयोग करते थे।

इसमें अपेक्षाकृत अधिक मजदूरों की आवश्यकता पड़ती थी। राजमिस्त्रीखण्डों को सुन्दर रूप देने के लिए शल्क पद्धति का प्रयोग करते थे। यह पद्धति प्रभावकारी तथा सरल थी। कई शिलाखण्ड 100 मैट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे; परन्तु उनके पास इतने बड़े शिलाखण्डों को ढोने के लिए पहिएदार गाड़ियाँ नहीं थीं। वे इस काम को मजदूरों के सहयोग से बड़ी सावधानी से करवाते थे।

3. कृषि – इंका सभ्यता का आधार कृषि था। इंका साम्राज्य में जमीन खेती के लिए बहुत उपजाऊ नहीं थी। इसलिए इंका लोगों ने पहाड़ी प्रदेशों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित कीं। इंका लोग मक्का और आलू उगाते थे तथा भोजन और श्रम के लिए लामा पालते थे।

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4. उद्योग – इंका लोगों की बुनाई और मिट्टी के बर्तन बनाने की कला उच्च कोटि की थी।

5. हिसाब लगाने की प्रणाली- इंका लोगों के पास हिसाब लगाने की एक प्रणाली थी— यह थी ‘क्विपु’ अर्थात् डोरियों पर गाँठें लगाकर गणितीय इकाइयों का हिसाब रखना। कुछ विद्वानों का विचार है कि इंका लोग इन धागों में एक प्रकार का संकेत (कोड) बुनते थे।

6. साम्राज्य का पिरामिडनुमा ढाँचा – इंका साम्राज्य का ढाँचा पिरामिडनुमा था। इसका अभिप्राय यह था कि इंका शासक के बन्दी बना लिए जाने पर उसके शासन की समस्त श्रृंखला टूट जाती थी। जब स्पेनी सैनिकों ने इंका – राज्य पर आक्रमण किया, तो उस समय भी यही स्थिति उत्पन्न हुई।

प्रश्न 4.
कोलम्बस की अमरीका की खोज-यात्रा का विवरण दीजिए।
उत्तर:
कोलम्बस का परिचय – क्रिस्टोफर कोलम्बस (1451-1506) इटली का निवासी था। वह एक स्वयं- शिक्षित व्यक्ति था। उसमें साहसिक कार्य करने तथा यश प्राप्त करने की इच्छा कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास करता था। उसका विश्वास था कि उसके भाग्य में पश्चिम की ओर से यात्रा करते हुए पूर्व की ओर जाने का मार्ग खोजना लिखा है। कोलम्बस कार्डिनल पिएर डिएली द्वारा 1410 में रचित पुस्तक ‘इमगो मुंडी’ से बहुत प्रेरित हुआ। सर्वप्रथम उसने पुर्तगाल के शासक के समक्ष अपने योजनाएँ प्रस्तुत कीं, परन्तु वे स्वीकृत नहीं हुईं। परन्तु स्पेन के शासक ने उसकी एक साधारण-सी योजना स्वीकार कर ली।

(1) कोलम्बस द्वारा अमरीका की खोज – यात्रा – 3 अगस्त, 1492 को कोलम्बस ने तीन जहाजों तथा 87 नाविकों के साथ पालोस के पत्तन से पश्चिम की ओर प्रस्थान किया। कोलम्बस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें ‘सांता मारिया’ नामक एक छोटी नाओ ( भारी जहाज) और दो कैरेवल (छोटे, हल्के जहाज) ‘पिंटा’ तथा ‘नीना’ थे। ‘सांता मारिया’ की कमान स्वयं कोलम्बस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक थे। कोलम्बस का बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। 33 दिनों तक बेड़ा तैरता हुआ आगे से आगे बढ़ता गया, परन्तु तट दिखाई नहीं दिया। उसके नाविक अधीर हो उठे और उनमें से कुछ तुरन्त वापस लौटने की माँग करने लगे।

(2) बहामा द्वीप समूह पहुँचना – अन्तत: 12 अक्टूबर, 1492 को नाविकों को जमीन दिखाई दी। कोलम्बस ने इसे भारत समझा परन्तु वह स्थान बहामा द्वीप – समूह का गुआनाहानि द्वीप था। गुआनाहानि पहुँचने पर अरावाक लोगों ने इस बेड़े के नाविकों का स्वागत किया। उन्होंने नाविकों के प्रति मैत्री प्रदर्शित की और उन्हें खाने-पीने का सामान भी दिया। कोलम्बस उनकी उदारता से बड़ा प्रभावित हुआ।

(3) कोलम्बस द्वारा अपने आपको वायसराय घोषित करना – कोलम्बस ने गुआनाहानि में स्पेन का झण्डा गाड़ दिया। वहाँ उसने सार्वजनिक उपासना करवाई और स्थानीय लोगों से बिना पूछे ही अपने आप को वायसराय घोषित कर दिया। उसने बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन और किस्केया तक आगे बढ़ने के लिए इन स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

(4) कोलम्बस की कठिनाइयाँ और वापसी यात्रा – शीघ्र ही कोलम्बस का यह अभियान दुर्घटनाओं में फँस गया और खूँखार कैरिब कबीलों की शत्रुता का भी उन्हें सामना करना पड़ा। नाविक शीघ्रातिशीघ्र घर लौटने के लिए बेचैन हो गए। वापसी यात्रा अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी और नाविकों को थकान व घर की याद सताने लग गई थी।

इस सम्पूर्ण यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे। कुछ समय बाद कोलम्बस द्वारा ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं, जिनके दौरान कोलम्बस ने बहामा और बृहत्तर ऐंटिलीज द्वीपों, दक्षिणी अमरीका की मुख्य भूमि तथा उसके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। बाद की यात्राओं से यह ज्ञात हुआ कि इन स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ नहीं, बल्कि एक नया महाद्वीप ही खोज निकाला था।

(5) कोलम्बस की उपलब्धि – कोलम्बस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनन्त समुद्र की सीमाएँ खोज निकालीं तथा यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताहों तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। उसके द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमरीका का नामकरण फ्लोरेन्स के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ के नाम पर किया गया जिसने उन्हें ‘नई दुनिया’ के नाम से पुकारा। ‘अमरीका’ नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशक द्वारा 1507 ई. में किया गया।

प्रश्न 5.
कोर्टेस की मैक्सिको की विजय का वर्णन कीजिए।
अथवा
मैक्सिको पर स्पेनियों की विजय का वर्णन कीजिये।
अथवा
कोर्टस के मैक्सिको अभियान का विवरण दीजिए।
उत्तर:
कोर्टेस की मैक्सिको की विजय कोर्टेस स्पेन का एक वीर योद्धा तथा कुशल सेनापति था। उसने बड़ी आसानी से मैक्सिको पर अधिकार कर लिया। 1519 ई. में कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था जहाँ उसने टाटानैक लोगों से मैत्री कर ली। टाटानैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस से भेंट करने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा। वह स्पेनवासियों की सैन्य शक्ति, आक्रमण-क्षमता, उनके बारूद और घोड़ों के प्रयोग को देखकर भयभीत हो गया। स्वयं मोंटेजुमा को यह विश्वास हो गया कि कोर्टेस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए पुनः प्रकट हुआ है।

(1) टेनोविट्टलैन पर कोर्टेस का अधिकार – स्पेनी सैनिकों ने ट्लैक्सकलानों पर आक्रमण कर दिया। ट्लैक्सकलान वीर-योद्धा थे। यद्यपि उन्होंने स्पेनी सैनिकों का प्रबल प्रतिरोध किया, परन्तु अन्त में उन्हें पराजय का मुँह देखना पड़ा और उन्होंने समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने क्रूरतापूर्वक उन सबको मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद 8 नवम्बर, 1519 को उन्होंने टेनोक्टिलैन पर अधिकार कर लिया। स्पेनी सैनिक टेनोक्ट्रिटलैन के दृश्य को देखकर आश्चर्यचकित हो गए। यह नगर मैड्रिड से पाँच, गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े नगर सेविली से दो गुनी अर्थात् 1,00,000 थी।

(2) एजटेक शासक मोंटेजुमा द्वारा कोर्टेस का स्वागत करना- एजटेक शासक मोटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया। स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ नगर के बीचोंबीच लाया गया, जहाँ मोटेजुमा ने उन्हें उपहार भेंट किये। परन्तु ट्लैक्सकलान के हत्या – काण्ड के बारे में जानकारी होने के कारण एजटेक लोगों के मन में आशंका थी।

(3) कोर्टेस द्वारा मोंटेजुमा को नजरबन्द करना – एजटेक लोगों की धारणा सही सिद्ध हुई। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट मोंटेजुमा को नजरबन्द कर लिया और फिर उसके नाम पर शासन संचालन करने का प्रयास करने लगा। कोर्टेस ने एजटेक मन्दिरों में ईसाई मूर्तियाँ स्थापित करवाईं। एक समझौते के अनुसार मन्दिरों में एजटेक और ईसाई दोनों प्रकार की मूर्तियाँ स्थापित की गईं।

(4) एजटेक लोगों के विद्रोह का दमन करना- इसी समय कोर्टेस को अपने सहायक एल्वारैडो को सत्ता सौंप कर शीघ्रता से क्यूबा लौटना पड़ा। स्पेनी शासन के अत्याचारों से परेशान होकर तथा सोने के लिए स्पेनियों की निरन्तर माँगों के दबाव के कारण, एजटेक लोगों ने विद्रोह कर दिया। एल्वारैडो ने हुईजिलपोक्टली के वसन्तोत्सव में विद्रोहियों के कत्ले-आम का आदेश दे दिया।

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(5) कोर्टेस की कठिनाइयाँ- जब 25 जून, 1520 को कोर्टेस वापस लौटा, तो उसे भीषण संकटों का सामना करना पड़ा। विद्रोहियों द्वारा पुल नष्ट कर दिए गए थे, जल-मार्ग काट दिए गए थे तथा सड़कें बन्द कर दी गई थीं। स्पेनी सैनिकों को पानी और भोजन की भीषण कमी का सामना करना पड़ा। अन्त में कोर्टेस को विवश होकर वापस लौटना पड़ा।

(6) एजटेकों तथा स्पेनियों के बीच संघर्ष – इसी समय मोंटेजुमा की मृत्यु हो गई। एजटेकों तथा स्पेनियों के बीच संघर्ष जारी रहा जिसके परिणामस्वरूप लगभग 600 स्पेनी सैनिक और उतने ही ट्लैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकाण्ड की इस भयंकर रात को ‘आँसूभरी रात’ के नाम से पुकारा जाता है।

(7) टेनोक्ट्ठिलैन पर कोर्टेस का पुनः अधिकार- मोटेजुमा के बाद क्वेटेमोक एजटेक का नया राजा निर्वाचित हुआ। कोर्टेस को उसके विरुद्ध अपनी रणनीति की योजना बनाने हेतु ट्लैक्सकलान में शरण लेनी पड़ी। उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आई चेचक की महामारी के प्रकोप से मर रहे थे। कोर्टेस केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टेनोक्ट्रिटलान में प्रविष्ट हो गया। एजटेक लोगों ने स्पेनियों का मुकाबला करने का निश्चय किया। परन्तु अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अन्त निकट है। परिणामस्वरूप एजटेक सम्राट ने अपनी जीवनलीला समाप्त करना ही उचित समझा।

(8) मैक्सिको – अभियान की समाप्ति – मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टेस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टन – जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया। मैक्सिको से, स्पेनियों ने अपना नियन्त्रण ग्वातेमाला, निकारगुआ तथा होंडुरास पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 6.
पुर्तगालियों द्वारा ब्राजील पर आधिपत्य किस प्रकार स्थापित किया गया?
अथवा
ब्राजील में पुर्तगालियों द्वारा अपना उपनिवेश स्थापित करने का वर्णन कीजिए। कैब्राल द्वारा ब्राजील पर अधिकार करना
उत्तर:
ब्राजील पर पुर्तगालियों का आधिपत्य संयोगवश ही हुआ। सन् 1500 में पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल जहाजों का एक बेड़ा लेकर भारत के लिए रवाना हुआ। तूफानी समुद्रों से बचने के लिए उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक बड़ा चक्कर लगाया और ब्राजील के समुद्रतट पर पहुँच गया। दक्षिणी अमरीका का यह पूर्वी भाग उस क्षेत्र के अन्तर्गत था जिसे पोप ने पुर्तगाल को सौंप रखा था। इसलिए पुर्तगाली इस क्षेत्र को अपना क्षेत्र ही मानते थे।

(1) ब्राजील में इमारती लकड़ी की प्रचुरता – पुर्तगाली ब्राजील की बजाय पश्चिमी भारत के साथ अपना व्यापार बढ़ाना चाहते थे, क्योंकि ब्राजील में सोना मिलने की कोई सम्भावना नहीं थी। परन्तु ब्राजील में इमारती लकड़ी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थी, जिसका पुर्तगालियों ने भरपूर लाभ उठाया। ब्राजीलवुड वृक्ष से एक सुन्दर लाल रंजक मिलता था।

ब्राजील के मूल निवासी लोहे के चाकू-छुरियों और आरियों के बदले में इमारती लकड़ी के वृक्षों को काटने और इनके लठ्ठे बनाकर जहाजों तक ले जाने के लिए तुरन्त तैयार हो गए। वे बहुत सरल प्रकृति के व्यक्ति थे तथा एक हंसिए, चाकू या कंघे के बदले ढेरों मुर्गियाँ, बन्दर, तोते, शहद, मोम, सूती धागा आदि चीजें देने को तैयार रहते थे।

(2) ब्राजील को पुर्तगाली आनुवंशिक कप्तानियों में बाँटना – इमारती लकड़ी का व्यापार बड़ा लाभप्रद था। अतः इमारती लकड़ी के व्यापार के कारण पुर्तगालियों और फ्रांसीसियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुईं। अन्त में इन लड़ाइयों में पुर्तगालियों की विजय हुई क्योंकि वे स्वयं तटीय क्षेत्र में बसना और अपना उपनिवेश स्थापित करना चाहते थे। 1534 में पुर्तगाल के शासक ने ब्राजील के तट को चौदह आनुवंशिक कप्तानियों में बाँट दिया।

उसने इनके स्वामित्व सम्बन्धी अधिकार उन पुर्तगालियों को दे दिए जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उसने उन्हें स्थानीय लोगों को गुलाम बनाने का अधिकार भी प्रदान कर दिया। ब्राजील में बसने वाले बहुत से पुर्तगाली लोग भूतपूर्व सैनिक थे, जिन्होंने भारत के गोवा – क्षेत्र में लड़ाइयों में भाग लिया था। ये पुर्तगाली लोग स्थानीय लोगों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करते थे।

(3) पुर्तगालियों द्वारा स्थानीय लोगों का शोषण – 1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील के बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना और चीनी बनाने के लिए मिलें चलाना शुरू कर दिया। इस चीनी को यूरोप के बाजारों में बेचा जाता था। बहुत ही गर्म तथा नम जलवायु में चीनी की मिलों में काम करने के लिए पुर्तगाली लोग स्थानीय लोगों पर निर्भर थे।

जब स्थानीय लोगों ने इस कष्टदायक और थकाने वाले नीरस काम को करने से इनकार कर दिया, तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण करवाकर उन्हें गुलाम बनाना शुरू कर दिया पुर्तगालियों की इस शोषणकारी नीति से स्थानीय लोगों में घोर असन्तोष उत्पन्न हुआ और वे मिल मालिकों के अत्याचारों से बचने के लिए गाँव छोड़ कर जंगलों में भाग गए। परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों के अधिकांश गाँव खाली हो गए, परन्तु उनके बदले यूरोपीय लोगों के कस्बे बस गए। विवश होकर पुर्तगालियों ने पश्चिमी अफ्रीका से गुलामों को लाना शुरू कर दिया।

(4) पुर्तगाली राजा के अधीन एक औपचारिक सरकार स्थापित करना – 1549 में ब्राजील में पुर्तगाल के शासक के अधीन एक औपचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया / सैल्वाडोर को उसकी राजधानी बनाया गया। इस समय तक ईसाई धर्म के प्रचार के लिए जेसुइट पादरियों ने ब्राजील जाना शुरू कर दिया था। परन्तु यूरोपीय नागरिक इन जेसुइट पादरियों को पसन्द नहीं करते थे। इसका कारण यह था कि जेसुइट पादरी मूल निवासियों के साथ दया का बर्ताव करने की सलाह देते थे। वे जंगलों में जाकर मूल निवासियों के गाँवों में रहते हुए यह शिक्षा देते थे कि ईसाई धर्म एक आनन्ददायक धर्म है और उसका आनन्द लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त ये धर्म प्रचारक दास प्रथा की कटु आलोचना करते थे।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 7.
समुद्री यात्राओं तथा अमरीका की खोज के यूरोप तथा उत्तरी- दक्षिणी अमरीका पर क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर:
I. समुद्री यात्राओं के यूरोप पर प्रभाव – समुद्री यात्राओं तथा अमरीका की खोज के यूरोप पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े –
1. ‘अटूट समुद्री मार्गों’ का खुलना – समुद्री यात्राओं ने एक महासागर से दूसरे महासागर तक के ‘अटूट समुद्री मार्ग’ खोल दिए। इन समुद्री यात्राओं से पूर्व तक, इनमें से अधिकांश मार्ग यूरोप के लोगों के लिए अज्ञात थे और कुछ मार्गों को तो कोई भी नहीं जानता था। तब तक कोई भी जहाज कैरीबियन या अमरीका महाद्वीपों के जल-क्षेत्रों में प्रविष्ट नहीं हुआ था। दक्षिणी अटलांटिक तो पूरी तरह से अछूता था। कोई भी जहाज दक्षिणी अटलांटिक से प्रशान्त महासागर या हिन्द महासागर तक नहीं पहुँचा था। 15वीं शताब्दी के अन्तिम तथा 16वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में ये सभी साहसिक कार्य सम्पन्न किए गए।

2. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार तथा औद्योगीकरण का विस्तार – अमरीका की खोज के यूरोपवासियों के लिए दीर्घकालीन परिणाम निकले। सोने-चाँदी की बाढ़ ने अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार तथा औद्योगीकरण का और अधिक विस्तार किया। 1560 से 1600 तक सैकड़ों जहाज प्रतिवर्ष दक्षिणी अमरीकी की खानों से चाँदी स्पेन को लाते रहे। परन्तु स्पेन और पुर्तगाल इसका अधिक लाभ नहीं उठा सके। उन्होंने अपने मुनाफों को आगे व्यापार में या अपने व्यापारी जहाजों के बेड़े का विस्तार करने में नहीं लगाया।

3. इंग्लैण्ड, फ्रांस, बैल्जियम, हालैण्ड को लाभ- इंग्लैण्ड, फ्रांस, बैल्जियम, हालैण्ड आदि देशों ने इन खोजों का भरपूर लाभ उठाया। उनके व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूँजी कम्पनियों की स्थापना की और अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने उपनिवेश स्थापित किये तथा यूरोपवासियों को नई दुनिया में पैदा होने वाली नई-नई चीजों जैसे तम्बाकू, आलू, गन्ने की चीनी, ककाओ तथा रबड़ आदि से परिचित कराया।

4. नई फसलों से परिचित होना – यूरोपीय देश अमरीका से आने वाली नई फसलों विशेष रूप मिर्च से परिचित हो गए। आगे चलकर यूरोपवासी इन फसलों को भारत जैसे अन्य देशों में ले गए।

II. समुद्री यात्राओं के उत्तरी तथा दक्षिणी अमरीका पर प्रभाव – समुद्री यात्राओं के उत्तरी तथा दक्षिणी अमरीका पर निम्नलिखित प्रभाव हुए –
1. मूल निवासियों की जनसंख्या का कम होना – यूरोपवासियों की नर-संहार की नीति के कारण उत्तरी तथा दक्षिणी अमरीका के मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई। इस जन हानि के लिए लड़ाइयाँ और बीमारियाँ प्रमुख रूप से जिम्मेदारी थीं।

2. मूल निवासियों की जीवन-शैली का नष्ट होना-यूरोपवासियों की नर-संहार की नीति के कारण मूल निवासियों की जीवन-शैली का विनाश हो गया।

3. मूल निवासियों का शोषण – यूरोपवासियों ने मूल निवासियों को गुलाम बनाकर खानों, बागानों तथा कारखानों में उनसे काम लेना शुरू किया। वहाँ उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली का प्रादुर्भाव हुआ। स्पेनी मालिकों ने आर्थिक लाभ के लिए स्थानीय लोगों का शोषण किया।

प्रश्न 8.
समुद्री यात्राओं के परिणामस्वरूप दास प्रथा के विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समुद्री यात्राओं के परिणामस्वरूप दास प्रथा का विकास – यूरोपवासियों ने अपनी उत्कृष्ट सैन्य शक्ति के बल पर स्थानीय निवासियों को पराजित कर दिया और हारे हुए लोगों को गुलाम बना लिया। दक्षिणी अमेरिका में दास-प्रथा के साथ-साथ वहाँ उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली का उदय हुआ।

स्पेन के शासक को दास प्रथा को चालू रखने पर विवश करना – 1601 ई. में स्पेन के शासक फिलिप द्वितीय सार्वजनिक रूप से बेगार की प्रथा पर प्रतिबन्ध लगा दिया, परन्तु उसने एक गुप्त आदेश के द्वारा इसे चालू रखने की भी व्यवस्था कर दी। 1609 ई. में स्पेन की सरकार ने एक कानून बनाया जिसके अन्तर्गत ईसाई तथा गैर-ईसाई सभी प्रकार के स्थानीय लोगों को पूरी स्वतन्त्रता प्रदान कर दी गई। परन्तु इस कानून से यूरोप से आकर अमेरिका में बसे हुए लोग नाराज हो गए। उन्होंने दो वर्ष के भीतर ही स्पेन के शासक को यह कानून हटाने तथा गुलाम बनाने की प्रथा को चालू रखने के लिए विवश कर दिया।

दास प्रथा को प्रोत्साहन – 1700 ई. में सोने की खोज के बाद खानों के काम में बड़ी प्रगति हुई और खानों के कामों के लिए सस्ते श्रम की माँग बनी रही। यह निश्चित था कि स्थानीय लोग गुलाम बनने का विरोध करेंगे। अतः अफ्रीका से गुलाम मँगाए जाने का निश्चय किया गया। 1550 ई. के दशक से 1880 ई. के दशक तक ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी गुलामों का आयात किया गया। 1750 ई. में कुछ ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति भी थे, जिनके पास हजार-हजार गुलाम होते थे। दास प्रथा को जारी रखने के प्रयास- कुछ लोगों ने दास प्रथा के उन्मूलन के बारे में यह तर्क दिया कि यूरोपवासियों के अफ्रीका में आने से पहले भी वहाँ दास प्रथा विद्यमान थी।

उनका कहना था कि पन्द्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका में स्थापित किए जाने वाले राज्यों में भी अधिकांश मजदूर वर्ग गुलामों से ही बना था। यूरोपीय व्यापारियों को युवा स्त्री-पुरुषों को गुलाम बनाने में अफ्रीकी लोगों से भी सहायता प्राप्त होती थी। ये व्यापारी बदले में उन अफ्रीकावासियों को दक्षिणी अमरीका से आयात की गई फसलें जैसे मक्का, कसावा, कुमाला आदि देते थे। इस सम्बन्ध में 1789 ई. की अपनी आत्मकथा में ओलाउदाह एक्वियानो नामक एक मुक्त किये गये गुलाम ने इन तर्कों का उत्तर देते हुए लिखा है कि अफ्रीका में गुलामों के साथ परिवार के सदस्यों जैसा व्यवहार किया जाता था।