JAC Class 9 Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

Jharkhand Board JAC Class 9 Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Textbook Exercise Questions and Answers.

JAC Board Class 9 Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

Jharkhand Board Class 9 Science क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को पृथक् करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएँगे?

  1. सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक् करने में।
  2. अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक् करने में।
  3. धातु के छोटे टुकड़ों को कार के इंजन आयल से पृथक् करने में।
  4. दही से मक्खन निकालने के लिए।
  5. जल से तेल निकालने के लिए।
  6. चाय से चाय की पत्तियों को पृथक् करने में।
  7. बालू से लोहे की पिनों को पृथक् करने में।
  8. भूसे से गेहूँ के दानों को पृथक करने में।
  9. पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए।
  10. पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजकों को प्रथक करने में।

उत्तर:

  1. वाष्पीकरण या आसवन विधि
  2. ऊर्ध्वपातन
  3. छानने की क्रिया
  4. अपकेन्द्रीकरण
  5. कीप पृथक्करण
  6. छानने की क्रिया
  7. चुम्बकीय पृथक्करण
  8. ओसाई
  9. निधारने की क्रिया
  10. क्रोमेटोग्राफी।

प्रश्न 2.
चाय तैयार करने के लिए आप किन-किन चरणों का प्रयोग करेंगे। विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय (फिल्ट्रेट) तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें।
उत्तर:

  • चरण 1: एक बर्तन (चायदानी) में थोड़ा पानी (विलायक) लेकर गर्म करे।
  • चरण 2: गर्म पानी में चाय की पत्ती ( विलेय) डालें।
  • चरण 3: एक कप में चीनी ( विलेय) डालें।
  • चरण 4: विलयन को हिलाकर छान लें, इस प्रकार प्राप्त विलयन को कप में डालें।
  • चरण 5: दो चम्मच दूध कप में डालकर चम्मच से हिलाएँ इस प्रकार चाय तैयार हो जायेगी। छलनी में से बची चाय की पत्तियाँ अघुलनशील पदार्थ हैं। जो अवशेष है।

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प्रश्न 3.
प्रज्ञा ने तीन अलग-अलग पदार्थों की घुलनशीलताओं को विभिन्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए आँकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 g जल में विलेय पदार्थ की मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु पर्याप्त है, निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है-

विलेय पदार्थ तापमान K में
283 293 313 333 353
पोटैशियम नाइट्रेट 21 32 62 106 167
सोडियम क्लोराइड 36 36 36 37 37
पोटैशियम क्लोराइड 35 35 40 46 54
अमोनियम क्लोराइड 24 37 41 55 66

(a) 50g जल में 313 K पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी?
(b) प्रज्ञा 353 K पर पोटैशियम क्लोराइड का एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठण्डा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठण्डा हो जाता है तो वह क्या अवलोकित करेगी, स्पष्ट करें।
(c) 293 K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा?
(d) तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
100g विलायक में विलेय की अधिकतम जितनी मात्रा घुली होती है, उसे विलयन में विलेय की घुलनशीलता कहते हैं। (एक निश्चित ताप तथा दाब पर)
(a) 131 K पर अधिकतम 62 g पोटैशियम नाइट्रेट 100 g जल द्वारा घोला जा सकता है।
∴ 313K पर 50g जल अधिकतम 31 g पोटैशियम नाइट्रेट को घोल सकता है।

(b) कमरे का तापमान लगभग 20°C लिया जाता है।
20°C = (20+273) K = 293 K
कमरे का तापमान घटने के साथ-साथ ठोसों की द्रव में घुलनशीलता भी घट जाती है। अतः पोटैशियम क्लोराइड का पाउडर नीचे बैठना प्रारम्भ कर देता है।

(c) 293K पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता

लवण घुलनशीलता
पोटैशियम नाइट्रेट = 32 g
सोडियम क्लोराइड = 36 g
पोटैशियम क्लोराइड = 35 g
अमोनियम क्लोराइड = 37 g

293 K पर अमोनियम क्लोराइड की घुलनशीलता अधिकतम होती है।

(d) लवण की घुलनशीलता ताप बढ़ने पर बढ़ती है। तथा ताप घटने पर घटती है।

प्रश्न 4.
निम्न की उदाहरण सहित व्याख्या करें-(a) संतृप्त विलयन (b) शुद्ध पदार्थ (c) कोलाइड (d) निलंबन
उत्तर:
(a) संतृप्त विलयन किसी निश्चित तापमान पर उतना ही पदार्थ घुल सकता है, जितनी कि विलयन की क्षमता होती है। दूसरे शब्दों में दिए गए निश्चित तापमान पर यदि विलायक में विलेय पदार्थ नहीं घुलता हो तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।

उदाहरण- एक बीकर में 100 मिली जल लेकर उसको लगभग 25°C पर गर्म करते हैं और उसमें धीरे-धीरे नमक मिलाते हैं। नमक तब तक मिलाते हैं जब तक कि नमक का घुलना बन्द न हो जाये। इस प्रकार तैयार विलयन 25°C पर नमक का संतृप्त विलयन है।

(b) शुद्ध पदार्थ- शुद्ध पदार्थ वह पदार्थ है, जिसमें मौजूद सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हैं। एक शुद्ध पदार्थ एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है। जैसे- दूध, जल, प्रोटीन आदि।

(c) कोलाइड – कोलाइड वह विषमांगी मिश्रण है, जिसके कणों का व्यास लगभग 1000 nm या 1000 × 10-9 m होता है। जैसे- दूध, गोंद आदि।

(d) निलंबन वह विषमांगी मिश्रण जिसमें विलेय के कण घुलते नहीं हैं बल्कि पूरे माध्यम में बहुमात्रा में निलंबित रहते हैं, उसे निलंबन कहते हैं। जैसे-चॉक पाउडर का जल में मिश्रण।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें- सोडा जल, लकड़ी, बर्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुई चाय।
उत्तर:

  • समांगी: सोडा जल बर्फ, वायु, छनी हुई चाय, सिरका
  • विषमांगी: लकड़ी, मिट्टी

प्रश्न 6.
आप किस प्रकार पुष्टि करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुद्ध जल है?
उत्तर:
शुद्ध जल 373°K पर और सामान्य वायुमण्डलीय दाब (1 atm) पर उबलता है, जबकि लवण मिला जल 373°K से उच्च ताप पर उबलता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तुएँ शुद्ध पदार्थ हैं?
(a) बर्फ
(c) लोहा
(b) दूध
(d) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(e) कैल्शियम ऑक्साइड
(f) पारा
(g) ईंट
(i) वायु
(h) लकड़ी
उत्तर:
लोहा, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, कैल्शियम ऑक्सा- इड और पारा शुद्ध पदार्थ हैं।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित मिश्रणों में से विलयन की पहचान करें-
(a) मिट्टी
(b) समुद्री जल
(c) वायु
(d) कोयला
(e) सोडा जल
उत्तर:
समुद्री जल, सोडा जल तथा वायु विलयन हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन टिण्डल प्रभाव को प्रदर्शित करेगा?
(a) नमक का घोल
(b) दूध
(c) कॉपर सल्फेट का विलयन
(d) स्टार्च विलयन
उत्तर:
दूध और स्टार्च विलयन ‘टिण्डल प्रभाव’ प्रदर्शित करेंगे क्योंकि दोनों कोलाइडी विलयन हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित को तत्व, यौगिक तथा मिश्रण में वगीकृत करें-

  1. सोडियम
  2. मिट्टी
  3. चीनी का घोल
  4. चाँदी
  5. कैल्शियम कार्बोनेट
  6. टिन
  7. सिलिकान
  8. कोयला
  9. वायु
  10. साबुन
  11. मीथेन
  12. कार्बन डाइऑक्साइड
  13. रक्त।

उत्तर:

  1. तत्व
  2. मिश्रण
  3. मिश्रण
  4. तत्व
  5. यौगिक
  6. तत्व
  7. तत्व
  8. मिश्रण
  9. मिश्रण
  10. मिश्रण
  11. यौगिक
  12. यौगिक
  13. मिश्रण

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-कौन से परिवर्तन रासायनिक हैं?
(a) पौधों की वृद्धि।
(b) लोहे में जंग लगना।
(c) लोहे के चूर्ण तथा बालू को मिलाना।
(d) खाना पकाना।
(e) भोजन का पाचन।
(f) जल से बर्फ बनना।
(g) मोमबत्ती का जलना।
उत्तर:
पौधों की वृद्धि, लोहे में जंग लगना, खाना पकना, भोजन का पाचन और मोमबत्ती का जलना-रासायनिक परिवर्तन हैं।

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क्रियाकलाप 1.
कंक्षा को अ, ब, स और द समूह में बाँटें। इसके पश्चात समूह अ को एक बीकर में 50mL जल और एक चम्मच कॉपर सल्फेट चूर्ण दें। समूह ब को एक बीकर में 50mL जल तथा दो चम्मच कॉपर सल्फेट का चूर्ण दें। समूह स एवं द को कॉपर सल्फेट और पोटैशियम परमैगनेट या साधारण नमक पृथक-पृथक मात्रा में दें। अब पृथक-पृथक समूह के उन अवयवों को मिलाकर मिश्रण तैयार करें।

समूह अ और ब को समान बनावट वाले मिश्रण प्राप्त होते हैं, जिसे समांगी मिश्रण कहते हैं। समूह स और द के मिश्रण के अंश भौतिक दृष्टि से अलग-अलग हैं। इस मिश्रण को विषमांगी मिश्रण कहते हैं। विषमांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण सोडियम क्लोराइड एवं लोहे की छीलन, नमक और सल्फर एवं जल और तेल हैं।

क्रियाकलाप 2. (पा. पु. पृ. सं. – 16)

  • कक्षा को पुनः चार समूहों अ, ब, स और द में बाँटें।
  • समूह अ को कॉपर सल्फेट के कुछ क्रिस्टल दें।
  • समूह ब को एक चम्मच कॉपर सल्फेट दें।
  • समूह स को चॉक का चूर्ण या गेहूँ का आटा दें।
  • समूह द को दूध या स्याही की कुछ बूँदें दें।

सभी छात्रों को काँच की छड़ की सहायता से नमूनों को जल में मिलाने को कहें। मिश्रण को छानकर देखें, छानक पत्र पर जो शेष

  • बचा है, उसका अवलोकन करें।
  • समूह ‘अ’ और ‘ब’ एक विलयन पाते हैं।
  • समूह ‘स’ एक निलंबन पाता है।
  • समूह ‘द’ एक कोलाइड विलयन पाता है।
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अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
समांगी मिश्रण के उदाहरण दें।
उत्तर:
जल में चीनी, जल में नमक आदि।

प्रश्न 2.
मिश्रण कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
मिश्रण दो प्रकार के होते हैं-

  • समांगी
  • विषमांगी।

प्रश्न 3.
विषमांगी मिश्रण के उदाहरण दें।
उत्तर:
नमक और सल्फर, जल और तेल आदि।

खंड 2.1 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. – 16 )

प्रश्न 1.
पदार्थ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विश्व में प्रत्येक वस्तु जिस सामग्री से बनी होती है, उसे पदार्थ कहते हैं। पदार्थ स्थान घेरता है तथा उसका द्रव्यमान होता है।

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प्रश्न 2.
समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अन्तर बताएँ।
उत्तर:

समांगी विषमांगी
समांगी मिश्रण को विलयन भी कहते हैं क्योंकि इसमें सभी जगह एक समान संघटन होता है। जैसे-चीनी का घोल आदि। विषमांगी मिश्रण वह मिश्रण, है जिसमें भौतिक रूप से अलग-अलग भाग होते हैं तथा प्रत्येक भाग भिन्न गुणधर्मों का होता है। जैसेखड़िया युक्त पानी आदि।

क्रियाकलाप 3. (पा. पु. पृ. सं. 17):

  • दो अलग-अलग बीकरों में 50 mL जल लें।
  • एक बीकर में नमक तथा दूसरे बीकर में चीनी या बेरियम क्लोराइड लेकर अच्छी तरह मिला लें।
  • जब विलेय पदार्थ और अधिक न घुले तब 5°C ताप बढ़ाने के लिए बीकर को गर्म करेंहैहै
  • विलेय पदार्थ को फिर से मिलाना शुरु करें।

“दिये गये निश्चित ताप पर यदि विलयन में विलेय पदार्थ नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। इस ताप पर संतृप्त विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा, उसकी घुलनशीलता कहलाती है।”

यदि विलयन में विलेय पदार्थ की मात्रा संतृप्तता से कम है तो इसे असंतृप्त विलयन कहा जाता है। “विलेय पदार्थ की वह मात्रा जो विलयन के किसी दी गई मात्रा अथवा आयतन में उपस्थित हो, उस विलयन की सान्द्रता कहलाती है।”
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उदाहरण 2.1.
एक विलयन के 320g विलायक जल में 40g साधारण नमक विलेय है। विलयन की सान्द्रता का परिकलन करें।
हल:
विलेय पदार्थ (नमक) का द्रव्यमान = 40 g
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 320 g
हम जानते हैं,
विलयन का द्रव्यमान – विलेय पदार्थ का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान
= 40g + 320 g
=360 g
विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत
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= \(\frac { 40 }{ 360 }\) x 100 = 11.1%

खंड-2.2 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पृ. सं.-20)

प्रश्न 1.
उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों में विभेद कीजिए।
उत्तर:

समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture) विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
1. मिश्रण के घटकों की बनावट समान होती है। उदाहरण-जल में नमक और जल में चीनी। 1. मिश्रण के घटकों की बनावट समान नहीं होती है। उदाहरण-सोडियम क्लोराइड और लोहे की छीलन।

प्रश्न 2.
विलयन, निलंबन और कोलाइड एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
भिन्नता

वास्तविक विलयन कोलाइडी विलयन निलम्बन
1. दो पदार्थों का समांगी मिश्रण है। 1. कोलाइडी विलयन समांगी प्रतीत होते हैं, परन्तु वास्तव में वे विषमांगी होते हैं। 1. यह एक विषमांगी मिश्रण होता है।
2. विलेय पदार्थों के कणों को देखा नहीं जा सकता। 2. विलेय पदार्थ के कणों को सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। 2. केवल आँखों से ही इसके कणों को देखा जा सकता है।
3. विलेय पदार्थ के कणों का आकार 10-10 मी. होता है। 3. विलेय पदार्थ के कणों का आकार 10-9 मी. से 10-7 मी. के बोच होता है। 3. कणों का आकार 10-7 मी. से अधिक होता है।
4. इसके घटकों की छानने से अलगअलग नहं किया जा सकता। 4. इसके घटकों को छानने से अलगअलग किया जा सकता है। 4. इसके घटकों को साधारण छलनी से अलग-अलग किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36g सोडियम क्लोराइड को 100 g जल में 293 K पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सान्द्रता प्राप्त करें।
उत्तर:
सोडियम क्लोराइड विलयन का द्रव्यमान = 36 g
(जल) का द्रव्यमान
विलयन का द्रव्यमान
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 100 g
विलेय का द्रव्यमान = विलायक का द्रव्यमान + विलयन का द्रव्यमान
= 36g + 100g
= 136 g
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क्रियाकलाप 4.
आधा बीकर जल लेकर बीकर के मुख पर वाच- ग्लास रखें तथा कुछ बूँद स्याही वाच ग्लास पर डाल दें तथा बीकर को गर्म करना प्रारम्भ करें। यह प्रेक्षित होता है कि बाच ग्लास से वाष्पीकरण हो रहा है। वाच ग्लास में किसी परिवर्तन तक गर्म करें।
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अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
आपके विचार में वाच ग्लास पर से किसका वाष्पीकरण हुआ?
उत्तर:
वाच-ग्लास पर से स्याही का वाष्पीकरण हुआ।

प्रश्न 2.
क्या वाच – ग्लास पर कोई अवशेष बचा है?
उत्तर:
वाच – ग्लास पर स्याही (विलेय पदार्थ) बची है।

प्रश्न 3.
आप क्या प्रतिपादित करेंगे? क्या स्याही एक शुद्ध पदार्थ है या मिश्रण है?
उत्तर:
स्वाही जल तथा रंग ( विलेय पदार्थ) का समांगी मिश्रण है।

क्रियाकलाप 5.
एक परखनली में थोड़ी मात्रा में संपूर्ण क्रीम युक्त दूध लेकर इसे दो मिनट तक अपकेन्द्रीय यंत्र (Centrifuging Machine) द्वारा अपकेन्द्रित करें। कभी-कभी द्रव में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि ये छानक पत्र से बाहर निकल जाते हैं ऐसे मिश्रणों को अपकेन्द्रण विधि द्वारा अलग किया जाता है। इसमें तेजी से घुमाये जाने पर भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर रह जाते हैं।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
दूध को मथने पर आपने क्या देखा?
उत्तर:
क्रीम के हल्के कण ऊपर रह जाते हैं तथा भारी कण नीचे बैठ जाते हैं।

प्रश्न 2.
दूध में से क्रीम का पृथक्करण कैसे करते हैं?
उत्तर:
अपकेन्द्रीय यंत्र के द्वारा दूध में से क्रीम को अलग किया जा सकता है।
अनुप्रयोग:

  • जाँच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्र की जाँच में।
  • डेयरी तथा घर में क्रीम से मक्खन निकालने में।
  • कपड़े धोने की मशीन में भीगे हुए कपड़ों से जल निचोड़ने में।

क्रियाकलाप 6.
मिट्टी के तेल एवं जल के मिश्रण को एक पृथक्करण कीप में डालकर कुछ देर इसे शांत छोड़ दें ताकि जल एवं तेल की पृथक् पृथक् परत तैयार हो जाए। पृथक्करण कीप के स्टॉप कॉर्क को खोलकर सावधानी पूर्वक नीचे वाले जल की परत को निकाल लें तथा तेल नीचे पहुँचने पर स्टॉप कार्क को बंद कर दें।
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अनुप्रयोग:

  • तेल तथा जल के अघुलनशील मिश्रण को पृथक करने में।
  • धातुशोधन के दौरान लोहे को पृथक् करने में।

सिद्धान्त – अमिश्रणीय द्रव अपने घनत्व के अनुसार अलग-अलग परतों के रूप में पृथक् हो जाते हैं।

क्रियाकलाप 7.
एक छानक पत्र की एक पतली परत लेकर इसके निचले सिरे से 3 cm ऊपर पेंसिल से एक रेखा खींचकर उसके बीच में जल में घुलनशील काली स्याही की एक बूँद रखकर इसे सूखने दें। बीकर या परखनली में जल लेकर इस छानक पत्रक को इस प्रकार रखें कि वह जल की सतह से ठीक ऊपर चित्र की भाँति रहे। अब इसे शांत छोड़ दें। जल के ऊपर उठने पर यह डाई के कणों को भी अपने साथ ले लेता है।
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अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
जैसे-जैसे जल ऊपर की ओर उठता है, आपने छानक पत्र पर क्या देखा?
उत्तर:
जल ऊपर उठते समय डाई के कणों को भी अपने साथ ले लेता है।

प्रश्न 2.
क्या आपने छानक पत्र के टुकड़े पर विभिन्न रंगों का अवलोकन किया?
उत्तर:
हाँ, छानक पत्र के टुकड़े पर दो से अधिक रंगों का मिश्रण देखा गया।

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प्रश्न 3.
आपके मतानुसार, रंग के स्थान पर छानक पत्र ऊपर की ओर उठने का क्या कारण है?
उत्तर:
रंग वाला घटक जो कि जल में अधिक घुलनशील है, तेजी से ऊपर उठता है।
मिश्रण से घटकों को पृथक करने की इस विधि को क्रोमैटोग्राफी (Chromatography) कहते हैं। इस विधि का उपयोग सबसे पहले रंगों को पृथक करने में किया गया था, इसका उपयोग उन विलेय पदार्थों को पृथक करने में होता है जो एक ही प्रकार के विलायक में घुले होते हैं।
अनुप्रयोग-

  • डाई में रंगों को पृथक् करने में।
  • प्राकृतिक रंगों से पिगमेंट को पृथक् करने में।
  • रक्त से नशीले पदार्थों (Drugs) को पृथक् करने में।

क्रियाकलाप 8.
जल और ऐसीटोन के मिश्रण को पृथक करने के लिए मिश्रण को आसवन फ्लास्क में लेकर इसमें एक थर्मामीटर लगाया जाता है तथा उपकरण को चित्र के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है। मिश्रण को धीरे-धीरे सावधानीपूर्वक गर्म करने पर एसीटोन वाष्पीकृत होता है तथा संघनित होकर संघनन द्वारा बाहर निकाल कर इसे बर्तन में एकत्रित किया जा सकता है तथा जल आसवन फ्लास्क में शेष रह जाता है।

इस विधि को आसवन विधि कहा जाता है। इसके द्वारा उन मिश्रणों को पृथक किया जाता है जो विघटित हुए बिना उबलते हैं तथा जिनके घटकों के क्वथनाकों के बीच बहुत अधिक अन्तर होता है।
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प्रभाजी आवसन- दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों को पृथक करने के लिए प्रभाजी आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है। यदि इन दोनों द्रवों के क्वथनांकों का अंतर 25K से कम होता है। इसमें आसवन फ्लास्क और संघनक के बीच एक प्रभाजी स्तम्भ का प्रयोग किया जाता है।

साधारण प्रभाजी स्तम्भ एक नली होती है जो कि शीशे के गुटकों से भरी होती है ये गुटके वाष्प को ठण्डा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करते हैं।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
जब आप मिश्रण को गर्म करना शुरू करते हैं तब आप क्या अवलोकित करते हैं?
उत्तर:
मिश्रण को गर्म करना शुरू करने पर एसीटोन वाष्पीकृत होता है तथा संघनित होकर संघनक द्वारा बाहर निकालने पर इसे बर्तन में एकत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
कुछ समय के लिए किस तापमान पर थर्मामीटर का पाठ्यांक स्थिर हो जाता है?
उत्तर:
क्वथनांक पर।

प्रश्न 3.
एसीटोन का क्वथनांक क्या है?
उत्तर:
56° C

प्रश्न 4.
दोनों घटकों को हम पृथक कर पाते हैं, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि दोनों घटकों में ताप का अन्तर 25K से अधिक है।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
वायु में उपस्थित गैसों को उनके बढ़ते हुए क्वथनांक के अनुसार व्यवस्थित करें।
उत्तर:
ऑक्सीजन, ऑर्गन, नाइट्रोजन।

प्रश्न 2.
जब वायु को ठण्डा किया जाता है तो कौन-सं। घटक पहले द्रव में परिवर्तित होता है?
उत्तर:
सर्वप्रथम ऑक्सीजन द्रवित होती है।

क्रियाकलाप 9.
चीनी मिट्टी की प्याली में लगभग 5 ग्राम अशुद्ध कॉपर सल्फेट लेकर जल की न्यूनतम मात्रा में इसे घोल देते हैं तथा अशुद्धियों को इसमें से छान लेते हैं। जल को कॉपर सल्फेट के घोल से वाष्पीकृत करके संतृप्त विलयन प्राप्त करते हैं। अब विलयन को छानक पत्र से ढक कर कमरे के तापमान पर इसे दिन भर ठण्डा होने के लिए शांत छोड़ देते हैं। कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल चीनी मिट्टी की प्याली में प्राप्त हो जाते हैं; यह क्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
चीनी मिट्टी की प्याली में आप क्या अवलोकन करते हैं?
उत्तर:
चीनी मिट्टी की प्याली में भरे कॉपर सल्फेट के घोल में अशुद्धियाँ अवलोकित होती हैं।

प्रश्न 2.
क्या क्रिस्टल एक समान दिखाई देते हैं?
उत्तर:
हाँ, क्रिस्टल एक समान दिखाई देते हैं।

प्रश्न 3.
चीनी मिट्टी की प्याली में रखे द्रव से क्रिस्टल को कैसे पृथक् करेंगे?
उत्तर:
चीनी मिट्टी की प्याली में रखे द्रव को सर्वप्रथम वाष्पीकृत करते हैं तथा विलयन को छानक पत्र से ढककर कमरे के तापमान पर इसे ठण्डा करने के लिए शांत छोड़ देते हैं। चीनी मिट्टी की प्याली में द्रव से क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं। यह क्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।

क्रिस्टलीकरण विधि का प्रयोग ठोस पदार्थों को शुद्ध करने में किया जाता है। इसमें ठोस पदार्थ विलयन में से क्रिस्टल के रूप में पृथक् कर लेते हैं। क्रिस्टलीकरण विधि, साधारण वाष्पीकरण विधि से निम्न कारणों से उत्तम होती है-

  • कुछ ठोस विघटित हो जाते हैं या कुछ चीनी की तरह गर्म करने पर झुलस जाते हैं।
  • छानने के बाद भी अशुद्ध विलेय पदार्थ को विलायक में घोलने पर विलयन में कुछ अशुद्धियाँ रह सकती हैं। वाष्पीकरण होने पर ये अशुद्धियाँ ठोस को दूषित कर सकती हैं।

अनुप्रयोग-

  • अशुद्ध नमूने से फिटकरी को अलग करने में।
  • समुद्री जल द्वारा प्राप्त नमक को शुद्ध करने में।

तकनीकियों में विकास के साथ कई और पृथक् करने वाली विधियों का आविष्कार हो चुका है। शहरों में जलघर से पीने योग्य जल की आपूर्ति की जाती है। जलघर से अपने घर में प्राप्त पेय जल के विभिन्न चरण निम्न रेखाचित्र में दिखाये गये हैं-
JAC Class 9 Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं 10

खण्ड 2.3 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा. पु. पृ. सं. – 26)

प्रश्न 1.
पेट्रोल और मिट्टी का तेल (Kerosene oil) जो कि आपस में घुलनशील हैं, के मिश्रण को आप कैसे पृथक् करेंगे? पेट्रोल तथा मिट्टी के तेल के क्वथनांकों में 25°C से अधिक का अंतराल है।
उत्तर:
पेट्रोल और मिट्टी के तेल के मिश्रण को प्रभाजी आसवन विधि द्वारा पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
पृथक् करने की सामान्य विधियों के नाम दें –

  1. दही से मक्खन
  2. समुद्री जल से नमक
  3. नमक से कपूर

उत्तर:

  1. दही से मक्खन- अपकेन्द्रीकरण विधि से।
  2. समुद्री जल से नमक- क्रिस्टलीकरण विधि से।
  3. नमक से कपूर ऊर्ध्वपातन विधि से।

प्रश्न 3.
क्रिस्टलीकरण विधि से किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक् किया जा सकता है?
उत्तर:
क्रिस्टलीकरण द्वारा ऐसे ठोस पदार्थों को अलग किया जाता है जो जल में घुलनशील हों।

खण्ड 2.4 से सम्बन्धित पाठ्य पुस्तक के प्रश्न (पा.पु. पू. सं. 27)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को रासायनिक और भौतिक परिवर्तनों में वर्गीकृत कीजिए-

  • पेड़ों को काटना,
  • मक्खन का एक बर्तन में पिघलना
  • अलमारी में जंग लगना,
  • जल का उबलकर वाष्प बनना,
  • विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना
  • जल में साधारण नमक का घुलना,
  • फलों से सलाद बनाना,
  • लकड़ी और कागज का जलना।

उत्तर:
वर्गीकरण:

  • पेड़ों को काटना – रासायनिक परिवर्तन।
  • मक्खन का एक बर्तन में पिघलना भौतिक परिवर्तन।
  • अलमारी में जंग लगना-रासायनिक परिवर्तन।
  • जल का उबलकर वाष्प बनना भौतिक परिवर्तन।
  • विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित होना रासायनिक परिवर्तन।
  • जल में साधारण नमक का घुलना- भौतिक परिवर्तन।
  • फलों से सलाद बनाना भौतिक परिवर्तन।
  • लकड़ी और कागज का जलना- रासायनिक परिवर्तन।

प्रश्न 2.
अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने का प्रयत्न करें।
उत्तर:
अपने आस-पास की चीजों को शुद्ध पदार्थों या मिश्रण से अलग करने के लिए विभिन्न विधियों जैसे-छानना, वाष्पीकरण या आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है। छात्र अपने आस-पास की चीजों को स्वयं अलग करने का प्रयत्न करें।

JAC Class 9 Science Solutions Chapter 2 क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं

क्रियाकलाप 10.
कक्षा को दो समूहों में विभाजित करके दोनों समूहों को 5 ग्राम लोहे का चूर्ण तथा 3 ग्राम सल्फर एक चीनी मिट्टी की प्याली में दें।
समूह I. लोहे के चूर्ण और सल्फर पाउडर को पीसकर मिलाएगा।

समूह II. लोहे के चूर्ण और सल्फर पाउडर को पीसकर मिलाएगा तथा मिश्रण को तीव्र ताप पर लाल होने तक गर्म करेगा, अब ज्वाला को हटाकर मिश्रण ठण्डा होने तक रखा जाएगा।

समूह I व II द्वारा प्राप्त सामग्री में चुम्बकीय गुणों की जाँच करें तथा प्राप्त सामग्री के रंग और बनावट की तुलना करें प्राप्त सामग्री के एक भाग में कार्बन डाइसल्फाइड मिलाकर मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर छानें प्राप्त पदार्थ के दूसरे भाग में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया।

इस क्रियाकलाप को लोहा तथा सल्फर तत्वों के साथ अलग-अलग दोहराएँ तथा अवलोकनों को नोट करें।

अब उत्तर दें-

प्रश्न 1.
क्या दोनों समूहों द्वारा प्राप्त सामग्री दिखने में समान है?
उत्तर:
हाँ, दोनों समूहों से प्राप्त सामग्री रंगहीन है।

प्रश्न 2.
किस समूह द्वारा प्राप्त सामग्री में चुम्बकीय गुण विद्यमान हैं?
उत्तर:
समूह I द्वारा प्राप्त सामग्री में चुम्बकीय गुण विद्यमान हैं।

प्रश्न 3.
क्या प्राप्त सामग्री के घटकों को हम पृथक् करने में सक्षम हैं?
उत्तर:
घटकों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
क्या तनु सल्फ्यूरिक अम्ल या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सामग्री पर डालने से दोनों समूहों से गैस प्राप्त होती है? क्या दोनों स्थितियों में प्राप्त गैस की गंध समान है या अलग-अलग है?
उत्तर:
दोनों ही स्थितियों में प्राप्त गैसें अलग-अलग हैं। समूह I द्वारा प्राप्त गैस हाइड्रोजन है जो रंगहीन, गंधहीन तथा ज्वलनशील है। समूह II द्वारा प्राप्त गैस हाइड्रोजन सल्फाइड है। यह रंगहीन गैस है तथा इसकी गंध सड़े हुए अंडे जैसी है।

निष्कर्ष – दोनों समूहों द्वारा प्राप्त पदार्थ भिन्न गुणों को दर्शाते हैं, प्रारम्भ में दोनों पदार्थ समान थे परन्तु समूह I में भौतिक परिवर्तन तथा समूह II में रासायनिक परिवर्तन हुआ। समूह I द्वारा प्राप्त सामग्री लोहा तथा सल्फर का मिश्रण है। मिश्रण का गुण उन दोनों मिले हुए तत्वों के गुण के समान है। समूह II द्वारा प्राप्त सामग्री यौगिक है।

दोनों तत्वों को तीव्रता से गर्म करने पर यौगिक की प्राप्ति होती है जिसका गुण मिले हुए तत्वों से पूरी तरह भिन्न होता है। यौगिक का संघटन पूरे पदार्थ में समान है। यौगिक की बनावट और रंग भी सभी स्थानों पर समान है।

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