JAC Class 10 Social Science Solutions Civics Chapter 6 राजनीतिक दल

JAC Board Class 10th Social Science Solutions Civics Chapter 6 राजनीतिक दल

JAC Class 10th Civics राजनीतिक दल Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं की चर्चा करें।
अथवा
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का क्या महत्त्व है?
अथवा
आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
अथवा
एक राजनीतिक दल के किन्हीं पाँच कार्यों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों के किन्हीं पाँच प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
अथवा
लोकतान्त्रिक सरकार में राजनीतिक दलों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारतीय राजनीतिक दलों के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं/कार्यों को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है
1. चुनाव लड़ना:
विश्व के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा चयनित उम्मीदवारों के मध्य लड़ा जाता है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों का चुनाव कई तरीकों से करते हैं; जैसे-संयुक्त राज्य अमेरिका में उम्मीदवारों का चुनाव दल के सदस्य व समर्थक करते हैं, वहीं भारत में दलों के नेता ही उम्मीदवार चुनते हैं।

2. नीतियों एवं कार्यक्रमों को मतदाताओं के समक्ष रखना:
संजनीतिक दल अलग-अलग नीतियों एवं कार्यक्रमों को मतदाताओं के समक्ष रखते हैं तथा मतदाता अपनी पसंद की नीतियाँ एवं कार्यक्रम चुनते हैं। लोकतंत्र में समान या एक जैसे विचारों को एक साथ लाना होता है, ताकि सरकार की नीतियों को एक दिशा प्रदान की जा सके। राजनैतिक दल यही कार्य करते हैं। वे विभिन्न प्रकार के विचारों को कुछ बुनियादी राय तक समेट लाते हैं जिनका वे समर्थन करते हैं। सरकार प्रायः शासक दल की राय के अनुरूप अपनी नीतियाँ तय करती है।

3. कानून निर्माण में भूमिका:
राजनीतिक दल देश के कानून-निर्माण में निर्णायक भूमिका का निर्वाह करते हैं, कानूनों पर औपचारिक बहस होती है तथा उन्हें विधायिका में पास करवाना होता है। लेकिन विधायिका के अधिकांश सदस्य किसी-न-किसी राजनीतिक दल के सदस्य होते हैं, इस कारण वे अपने दल के नेता के निर्देश पर फैसला करते हैं।

4. सरकार का निर्माण एवं संचालन:
राजनैतिक दल ही सरकार का निर्माण करते हैं एवं उसका संचालन करते हैं जो भी राजनीतिक दल अथवा उनका गठबन्धन विधायिका में बहुमत प्राप्त करता है, वह सरकार बनाता है और अपनी विचार पारा के अनुसार सरकार को चलाता है व नीतियाँ बनाता है।

5. शासक दल के विरोधी पक्ष की भूमिका का निर्वाह करना:
चुनाव में पराजय का सामना करने वाले दल शासन में विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं। ऐसे दल सरकार की गलत नीतियों व असफलताओं की आलोचना करते हैं तथा अपनी राय भी रखते हैं। इसके अतिरिक्त विपक्षी दल सरकार के विरुद्ध आम जनता को भी गोलबन्द करते हैं।

6. जनमत का निर्माण करना:
जनमत निर्माण में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। वे उन मुद्दों को जनता के समक्ष लाते हैं जिनका सरकार ठीक ढंग से प्रबंध नहीं कर पाती है। इससे ये अपने पक्ष में एवं सत्ताधारी दल के विरुद्ध जनमत का निर्माण करते हैं।

7. सरकारी तंत्र व कल्याणकारी कार्यक्रमों तक जनता की पहुँच को आसान बनाना:
राजनीतिक दल ही सरकारी तंत्र एवं सरकार द्वारा संचालित कल्याण कार्यक्रमों तक लोगों की पहुँच बनाते हैं। जनता एक राजकीय अधिकारी के स्थान पर एक नेता तक आसानी से पहुँच सकती है।

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प्रश्न 2.
राजनीतिक दलों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं ?
अथवा
लोकतांत्रिक भारत में राजनैतिक दलों के समक्ष कौन-कौन-सी चुनौतियाँ हैं?
अथवा
भारत में राजनीतिक दलों के समक्ष आने वाली किन्हीं चार चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक युग में राजनीतिक दलों के सामने निम्नलिखित चुनौतियाँ हैं
1. आंतरिक लोकतंत्र का अभाव होना:
अधिकांश राजनीतिक दलों, के समक्ष आन्तरिक लोकतंत्र की कमी एक प्रमुख चुनौती है। समस्त विश्व में यह प्रवृत्ति बन गयी है कि समस्त शक्ति एक या कुछेक नेताओं के हाथ में सिमट जाती है। दलों के पास न तो सदस्यों की खुली सूची होती है, न ही नियमित रूप से संगठनात्मक बैठकें होती हैं, इसके अतिरिक्त आन्तरिक चुनाव भी नहीं होते हैं। कार्यकर्ताओं से वे सूचनाओं का साझा भी नहीं करते। सामान्य कार्यकर्ता दल में चल रही हलचलों से अनजान बना रहता है।

2. वंशवाद की प्रवृत्ति:
भारत के अधिकांश राजनीतिक दलों के समक्ष यह एक प्रमुख चुनौती है। जो लोग बड़े नेता होते हैं, वे अनुचित लाभ लेते हुए अपने नजदीकी लोगों विशेषकर अपने परिवार के लोगों को आगे बढ़ाते हैं। अनेक दलों में उच्च पदों पर हमेशा एक ही परिवार के लोग आते हैं।

3. धन एवं अपराधी तत्वों की बढ़ती घुसपैठ:
चूँकि समस्त राजनीतिक दलों की चिन्ता चुनाव जीतने की होती है अतः इसके लिए वे कोई भी जायज-नाजायज तरीका अपनाने से भी परहेज नहीं करते हैं। वे ऐसे ही लोगों को चुनाव में उतारते हैं जिनके पास अधिक पैसा है या अधिक पैसा जुटा सकते हैं। कई बार राजनीतिक दल चुनाव जीत सकने वाले अपराधियों का भी समर्थन करते हैं तथा उनकी मदद लेते हैं।

4. राजनैतिक दलों के मध्य विकल्पहीनता की स्थिति:
आधुनिक युग में राजनीतिक दलों के पास मतदाताओं को देने के लिए सार्थकः विकल्प की कमी है। सार्थक विकल्प देने के लिए विभिन्न दलों की नीतियों में अन्तर होना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न देशों में दलों के बीच वैचारिक अन्तर कम होता जा रहा है।

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प्रश्न 3.
राजनीतिक दल अपना कामकाज बेहतर ढंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने के कुछ सुझाव दें।
अथवा
भारत में राजनीतिक दलों के सुधार हेतु किए गए चार प्रमुख प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजनैतिक दल अपना काम-काज बेहतर ढंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने हेतु निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं
1. कानून का निर्माण:
राजनीतिक दलों के आंतरिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए कानून का निर्माण किया जाना चाहिए। सभी दल अपने-अपने सदस्यों की सूची रखें, अपने संविधान का पालन करें, दल में विवाद की स्थिति में एक स्वतन्त्र प्राधिकारी को पंच बनाएँ, दल के सबसे बड़े पदों के लिए खुला चुनाव कराएँ। इन समस्त व्यवस्थाओं को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

2. महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था:
राजनीतिक दलों को महिलाओं को एक न्यूनतम अनुपात (लगभग एक-तिहाई) में चुनाव में टिकट दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त दल के प्रमुख पदों पर महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।

3. चुनाव खर्च का सरकार द्वारा वहन:
विभिन्न प्रकार के चुनावों का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए। सरकार को चुनावों हेतु विभिन्न राजनीतिक दलों को धन प्रदान करना चाहिए। यह धन नकद रूप में अथवा मदद जैसे-पेट्रेल, कागज, फोन आदि के रूप में हो सकता है।

4. राजनीतिक दलों पर जनता द्वारा दबाव बनाना:
राजनीतिक दलों पर जनता द्वारा दबाव बनाया जाय इस हेतु पत्र लिखने, प्रचार करने एवं आन्दोलन के माध्यम.से जनता यह कार्य कर सकती है। आम नागरिक दबाव समूह, आन्दोलन एवं मीडिया के माध्यम से यह कार्य कर सकता है। अपनी छवि खराब होने के भय से राजनीतिक दल अपने में सुधार करेंगे।

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प्रश्न 4.
राजनीतिक दल का क्या अर्थ होता है ?
अथवा
राजनीतिक दल से क्या तात्पर्य है ?
अथवा
राजनीतिक दल का क्या अभिप्राय है? राजनीतिक दल के तीन अवयवों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजनीतिक दल का अर्थ:
राजनीतिक दल को लोगों के एक ऐसे संगठित समूह के रूप में समझा जा सकता है जो चुनाव लड़ने व सरकार में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्य करता है। समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखकर यह समूह कुछ नीतियाँ एवं कार्यक्रम तय करता है। इसके तीन प्रमुख अंग (अवयव) हैं-नेता, सक्रिय सदस्य एवं अनुयायी या समर्थक।

प्रश्न 5.
किसी भी राजनीतिक दल के क्या गुण होते हैं?
उत्तर:
किसी भी राजनीतिक दल के निम्नलिखित गुण होते हैं

  1. यह लोगों का एक ऐसा संगठित समूह होता है जो सरकार बनाने एवं चलाने के लिए समान मुद्दों पर सहमति दिखाते हुए साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं।
  2. समाज के सामूहिक हितों को सुनिश्चित करने के लिए इनके पास नीति व कार्यक्रम होते हैं।
  3. इनका एक चुनाव चिह्न होता है।
  4. समाज के विकास के लिए धरना, प्रदर्शन आदि करते हैं।
  5. वे अपनी नीतियों व कार्यक्रमों को चुनाव द्वारा जनता से प्राप्त लोकप्रिय समर्थन के माध्यम से लागू करते हैं।
  6. राजनीतिक दल समाज के मौलिक राजनीतिक विभाजन को परिलक्षित करते हैं।

प्रश्न 6.
चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता संभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को “….”कहते हैं।
उत्तर:
राजनीतिक दल।

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प्रश्न 7.
पहली सूची (संगठन/दल) और दूसरी सूची (गठबंधन/मोर्चा) के नामों का मिलान करें और नीचे दिए गए कूट नामों के आधार पर सही उत्तर ढूँढ़ें

सूची-I सूची-II
1. इंडियन नेशनल कांग्रेस (क) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन
2. भारतीय जनता पार्टी (ख) क्षेत्रीय दल
3. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (ग) संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन
4. तेलुगु देशम पार्टी (घ) वाम मोर्चा उत्तर- कूट।
1 2 3 4
(क)
(ख)
(ग)
(ग)

उत्तर:
(ग) 1. ग,.2. क, 3. घ, 4. ख।

प्रश्न 8.
इनमें से कौन बहुजन समाज पार्टी का संस्थापक है?
(क) कांशीराम
(ख) साहू महाराज
(ग) बी. आर. आंबेडकर
(घ) ज्योतिबा फुले
उत्तर:
(क) कांशीराम।

प्रश्न 9.
भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धान्त क्या है?
(क) बहुजन समाज
(ख) क्रांतिकारी लोकतन्त्र
(ग) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
(घ) आधुनिकता
उत्तर:
(ग) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

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प्रश्न 10.
पार्टियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर गौर करें
(अ) राजनीतिक दलों पर लोगों का ज्यादा भरोसा नहीं है।
(ब) दलों में अक्सर बड़े नेताओं के घोटालों की गूंज सुनाई देती है।
(स) सरकार चलाने के लिए पार्टियों का होना जरूरी नहीं। इन कथनों में से कौन सही है ?
(क) अ, ब और स
(ख) अ और ब
(ग) ब और स
(घ) अ और स
उत्तर:
(ख) अ और ब।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित उद्धरण को पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों का जवाब दें मोहम्मद युनूस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। गरीबों के आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों के लिए उन्हें अनेक अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को संयुक्त रूप से वर्ष 2006 का नोबेल शान्ति पुरस्कार दिया गया। फरवरी 2007 में उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाने तथा संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका उद्देश्य सही नेतृत्व को उभारना, अच्छा शासन देना और नए बांग्लादेश का निर्माण करना है। उन्हें लगता है कि पारम्परिक दलों से अलग एक नए राजनीतिक दल से ही नई राजनीतिक संस्कृति पैदा हो सकती है।

उनका दल निचले स्तर से लेकर ऊपर तक लोकतांत्रिक होगा। नागरिक शक्ति नामक इस नये दल के गठन से बांग्लादेश में हलचल मच गई है। उनके फैसले को काफी लोगों ने पसंद किया तो अनेक को यह अच्छा नहीं लगा। एक सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम ने कहा, “मुझे लगता है कि अब बांग्लादेश में अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करना सम्भव हो गया है। अब एक अच्छी सरकार की उम्मीद की जा सकती है। यह सरकार न केवल भ्रष्टाचार से दूर होगी बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन की समाप्ति को भी अपनी प्राथमिकता बनायेगी।”

मर दशकों से मुल्क की राजनीति में रुतबा रखने वाले पुराने दलों के नेताओं में संशय है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है-“नोबेल पुरस्कार जीतने पर क्या बहस हो सकती है पर राजनीति एकदम अलग चीज है। एकदम चुनौती भरी और अक्सर विवादास्पद।” कुछ अन्य लोगों का स्वर और कड़ा था। वे उनके राजनीति में आने पर सवाल उठाने लगे। एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, “देश से बाहर की ताकतें उन्हें राजनीति पर थोप रही हैं।”

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प्रश्न 1.
क्या आपको लगता है कि यूनुस ने नई राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया? क्या आप विभिन्न लोगों द्वारा जारी बयानों और संदेशों से सहमत हैं? इस पार्टी को दूसरों से अलग काम करने के लिए खुद को किस तरह संगठित करना चाहिए? अगर आप इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होते तो इसके पक्ष में क्या दलील देते?
उत्तर:
1. हाँ, मेरे विचार से युनूस ने नई राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया है।

2. हाँ, मैं समस्त प्रगतिशील लोकतांत्रिक जनता की भलाई के लिए किए गए उन लोगों के बयानों व अंदेशों से सहमत हूँ जो किसी-न-किसी रूप में युनूस के कार्यक्रम से सहमत हैं। लेकिन मैं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता के कथन से सहमत नहीं हूँ।

3. इस पार्टी को सभी लोगों के हित में काम करना चाहिए। अमीर-गरीब, साक्षर-निरक्षर, सभी तरह के लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए, जो सभी लोगों के हित में हों।

4. यदि मैं इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में से एक होता तो मैं बांग्लादेश के लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयत्न करता कि इस नवगठित दल का एकमात्र उद्देश्य जनता की भलाई करना है। यह पार्टी जमीनी स्तर से ही ऊपरी स्तर तक लोकतांत्रिक होगी जिससे इस पर जन-साधारण का नियंत्रण रहेगा तथा वंशवाद का उभार नहीं होगा। यह पार्टी एक अधिक लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी नवीन राजनीतिक संस्कृति को जन्म देने जा रही है, जिसकी बांग्लादेश को अति आवश्यकता है।

गतिविधि एवं क्रियाकलाप सम्बन्धी प्रश्न

उन्नी-मुन्नी के सवाल (पृष्ठ सं. 74)

प्रश्न 1.
ठीक है, मान लिया कि हम दलों के बगैर नहीं रह सकते। पर ज़रा यह बताइए कि किस आधार पर जनता किसी राजनीतिक दल का समर्थन करती है?
उत्तर:
राजनीतिक दल हमारे ही लोगों का संगठन होता है। यदि हम सही विचार और उचित माँग के साथ हों और व्यवहार सही हो तो हम किसी भी राजनीतिक दल को सही कार्य करने पर मजबूर कर सकते हैं। ये दल हमारे प्रतिनिधियों द्वारा निर्मित होते हैं जिन्हें हम चुनकर भेजते हैं। यदि फिर भी वह राजनीतिक पार्टी अपनी मनमानी करती है तो अगले चुनाव में हम अपने मताधिकार का प्रयोग करके उसे सबक सिखा सकते हैं।

क्या समझा? क्या जाना? (पृष्ठ संख्या 75)

प्रश्न 1.
राजनीतिक दलों की गतिविधियाँ दर्शाने वाली इन तस्वीरों का वर्गीकरण करें। ऊपर बताई गई गतिविधियों से सम्बन्धित अपने इलाके की कोई तस्वीर या खबर की कतरन ढूँढ़िए।
उत्तर:

  1. प्रथम तस्वीर: विपक्ष की भूमिका निभाता हुआ दल।
  2. द्वितीय तस्वीर: नीतियाँ व कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
  3. तृतीय तस्वीर: जनमत का निर्माण। (करतनें छात्र स्वयं ढूँढ़ें)

प्लस बॉक्स से (पृष्ठ संख्या 76)

प्रश्न 1.
किशन जी अब इस दुनिया में नहीं हैं। इन चारों कार्यकर्ताओं के बारे में आपकी क्या राय है? क्या उन्हें नया राजनीतिक दल बनाना चाहिए? क्या कोई राजनीतिक दल राजनीति में नैतिक बल बन सकता है? यह दल कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
किशन जी के न होने पर इन कार्यकर्ताओं को नया राजनीतिक दल बनाना चाहिए। प्रारम्भ में कुछ समय लग जायेगा, इन्हें अपनी पहचान बनाने में, लेकिन इस मुद्दे और नैतिक बल के होने पर लोग धीरे-धीरे उन पर विश्वास करने लगेंगे, लोगों का साथ उन्हें प्राप्त होने लगेगा, तब वे जनता की भलाई के लिए कुछ कर सकते हैं। कोई भी राजनीतिक दल अपने किए गए वादों को पूरा करके नैतिक बल प्राप्त कर सकता है।

वादों को पूरा करने पर लोगों का विश्वास उस राजनीतिक दल पर बढ़ेगा और उस दल को लोगों का समर्थन प्राप्त होगा। इस दल को लोगों की वर्तमान समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। कार्यकर्ताओं का चयन ऐसे व्यक्तियों के रूप में हो जो समाज की सेवा के उद्देश्य से पार्टी से जुड़े हैं। लोगों की छोटी से छोटी समस्या पर ध्यान देकर उन्हें दूर करने का प्रयत्न करें। चुनाव में पर्याप्त सीट न होने पर विपक्ष में शामिल होकर लोगों की सेवा करके अपनी पार्टी की छवि को और स्वच्छ तथा मजबूत करना चाहिए।

क्या समझा? क्या जाना? (पृष्ठ संख्या 77)

प्रश्न 1.
आइए, दलीय व्यवस्था के बारे में हमने जो जाना उसे भारत के विभिन्न राज्यों पर लागू करें। यहाँ राज्य स्तर पर मौजूद तीन तरह की दलीय व्यवस्थाएँ दी गई हैं। क्या आप इन श्रेणियों के लिए कम से कम दो-दो राज्यों के नाम बता सकते हैं?
1. दो दलीय व्यवस्था
2. दो गठबंधनों वाली बहुदलीय व्यवस्था
3. बहुदलीय व्यवस्था।
उत्तर:
1. राजस्थान, गुजरात।
2. बिहार, असम।
3. उत्तर प्रदेश, बंगाल।

उन्नी-मुन्नी के सवाल (पृष्ठ संख्या 83)

प्रश्न 1.
दल महिलाओं को पर्याप्त टिकट क्यों नहीं देते? क्या इसका कारण आंतरिक लोकतंत्र की कमी है? ।
उत्तर:
भारत में ज्यादातर आबादी गाँवों में निवास करती है। जहाँ महिलाएँ आज भी अशिक्षित हैं। जो महिलाएँ चुनाव जीत जाती हैं, उनके पति ही उनके कार्य-भार को सँभालते हैं, बिहार में लालू यादव के स्थान पर उनकी पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं, किन्तु समस्त काम-काज लालू यादव के हाथों में ही था। दूसरा, अभी आन्तरिक लोकतंत्र का अभाव है। महिलाएँ स्वयं भी राजनीति में कम भाग लेती हैं, धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ रही है, आगे आने वाले समय में महिलाओं की सत्ता में भागीदारी बढ़ेगी।

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क्या सीखा? क्या जाना? (पृष्ठ संख्या 85)

प्रश्न 1.
क्या आप इस हिस्से में (पृष्ठ 83 से 85 तक) तक दिए गए कार्टूनों में दर्शायी गई चुनौतियों की पहचान कर सकते हैं? राजनीति में धन तथा बल के दुरुपयोग को रोकने के क्या तरीके हैं?
उत्तर:
इन कार्टूनों में राजनीति में धन तथा बल के प्रयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दर्शाया गया है। राजनीति में धन तथा बल के दुरुपयोग को रोकने के लिए सर्वप्रथम भ्रष्टाचार की समाप्ति करनी होगी। सूचना के अधिकार’ के द्वारा लोगों को अधिक जागरूक होना होगा, तभी धन तथा बल के दुरुपयोग से बचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त चुनाव आयोग को और अधिक कड़े कदम उठाने चाहिए तथा भ्रष्टाचारियों एवं अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगानी चाहिए।

उन्नी-मुन्नी के सवाल (पृष्ठ संख्या 85)

प्रश्न 1.
क्या इसका मतलब यह है कि लोकतंत्र में लोग सिर्फ पैसे बनाने के लिए चुनाव लड़ते हैं? पर क्या यह सही नहीं कि बहुत से राजनेता जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं?
उत्तर:
ऐसा नहीं है कि सभी लोग लोकतंत्र में सिर्फ पैसा बनाने के लिए चुनाव लड़ते हैं। हमारे देश में भी पहले कई ऐसे राजनेता हुए हैं जो जनता की भलाई के प्रतिबद्ध थे क्योंकि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है इसलिए हमें ऐसा लगता है कि सभी लोग पैसे बनाने के लिए ही चुनाव लड़ते हैं।

कार्टून से (पृष्ठ संख्या 86)

प्रश्न 1.
क्या आप इस तरह से राजनीतिक दलों को सुधारने का समर्थन करते हैं?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि यह लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। राजनीतिक दलों का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत बनाना होना चाहिए।

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