JAC Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

Jharkhand Board JAC Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से Important Questions and Answers.

JAC Board Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. पृथ्वी पर होमिनिड (मानव जैसे) प्राणियों का प्रादुर्भाव हुआ –
(अ) 8,000 ई. पूर्व
(ब) 2,40,000वर्ष पूर्व
(स) 1,40,000 वर्ष पूर्व
(द) 56,00,000 वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(द) 56,00,000 वर्ष पूर्व।

2. ‘ऑन दि ओरिजन ऑफ स्पीशीज’ नामक पुस्तक का रचयिता था –
(अ) टायनबी
(ब) प्लूटार्क
(स) चार्ल्स डारविन
(द) न्यूटन।
उत्तर:
(स) चार्ल्स डारविन

3. होमिनॉइड प्राणियों का उदय हुआ –
(अ) 56 लाख वर्ष पहले
(ब) 240 लाख वर्ष पहले
(स) 360 लाख वर्ष पहले
(द) 35 लाख वर्ष पहले।
उत्तर:
(ब) 240 लाख वर्ष पहले

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4. होमिनिडों का उद्भव हुआ –
(अ) अमेरिका में
(ब) अफ्रीका में
(स) एशिया में
(द) यूरोप में।
उत्तर:
(ब) अफ्रीका में

5. होमो का शाब्दिक अर्थ है –
(अ) वानर
(ब) जानवर
(स) वृक्ष
(द) आदमी।
उत्तर:
(द) आदमी।

6. ‘होमो सैपियन्स’ से क्या अभिप्राय है –
(अ) प्राचीन मानव
(स) वानर
(ब) प्राज्ञ या चिन्तनशील मनुष्य
(द) मध्यकालीन मानव।
उत्तर:
(ब) प्राज्ञ या चिन्तनशील मनुष्य

7. पत्थर के औजार बनाने और उनका प्रयोग किये जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य मिलता है-
(अ) फ्रांस
(ब) इंग्लैण्ड
(स) इथियोपिया तथा केन्या
(द) चीन तथा जापान।
उत्तर:
(स) इथियोपिया तथा केन्या

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8. हादजा कौन थे –
(अ) चित्रका
(स) शिल्पकार
(ब) कृषक
(द) शिकारी तथा संग्राहक।
उत्तर:
(द) शिकारी तथा संग्राहक।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

1. यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्म होमो हाइडल बर्गेसिस और होमो …………… के हैं।
2. सामान्यतः आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क ……………… होता है।
3. पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल किए जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य …………… और …………… के पुरास्थलों से प्राप्त होता है।
4. जीवित प्राणियों में ……………. ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है।
5. मानव का विकास ……………… रूप से हुआ है।
उत्तर:
1. निअंडरथलैसिस
2. बड़ा
3. इथियोपिया, केन्या
4. मनुष्य
5. क्रमिक।

सत्य/असत्य कथन छाँटिये –

1. आज हमें आदि मानव के इतिहास की जानकारी मानव के जीवाश्मों, पत्थर के औजारों और गुफाओं की चित्रकारियों की खोजों से मिलती है।
2. मानव का क्रमिक विकास हुआ इस बात का साक्ष्य हमें बाइबिल के ओल्ड टेस्टामेंट में मिलता है।
3. चार्ल्स डार्विन के अनुसार मानव बहुत समय पहले जानवरों से ही क्रमिक रूप से विकसित होकर अपने वर्तमान रूप में आया है।
4. होमिनाइड की उत्पत्ति 56 लाख वर्ष पहले हुई।
5. होमिनिडों का उद्भव यूरोप में हुआ।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. असत्य
5. असत्य

निम्नलिखित स्तंभों के सही जोड़े बनाइये –

1. किलोंबे के खनन स्थल (अ) चार्ल्स डार्विन
2. लेजरेट गुफा (ब) औजार बनाने वाली मानव प्रजाति
3. ऑन दि ओरिजन ऑफ स्पीशीज (स) दक्षिण फ्रांस
4. होमो हैबिलिस (द) चिंतनशील मनुष्य
5. होमो सैपियंस (य) केन्या

उत्तर:

1. किलोंबे के खनन स्थल(य) केन्या (य) केन्या
2. लेजरेट गुफा  (द) चिंतनशील मनुष्य
3. ऑन दि ओरिजन ऑफ स्पीशीज (अ) चार्ल्स डार्विन
4. होमो हैबिलिस (ब) औजार बनाने वाली मानव प्रजाति
5. होमो सैपियंस (स) दक्षिण फ्रांस

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1.
पृथ्वी पर मानव जैसे प्राणियों का प्रादुर्भाव कब हुआ ?
उत्तर:
सम्भवतः 56 लाख वर्ष पहले।

प्रश्न 2.
होमिनाइड प्राणियों का उद्भव कब हुआ ?
उत्तर:
होमिनाइड प्राणियों का उद्भव 240 लाख वर्ष पहले हुआ।

प्रश्न 3.
होमिनाइड प्राणियों का उद्भव कहाँ हुआ था ?
उत्तर:
अफ्रीका में।

प्रश्न 4.
होमिनिडों की दो प्रमुख शाखाओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) आस्ट्रेलोपिथिकस
(2) होमो

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प्रश्न 5.
आधुनिक मानव द्वारा शिकार करना कब शुरू हुआ?
उत्तर:
लगभग 5,00,000 वर्ष पहले।

प्रश्न 6.
आदिकालीन गुफाओं में पाये गए चूल्हे किसके द्योतक हैं?
उत्तर:
आग के नियन्त्रित प्रयोग के।

प्रश्न 7.
सबसे पहले किन होमिनिडों ने पत्थर के औजार बनाए थे?
उत्तर:
सम्भवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने।

प्रश्न 8.
जानवरों को मारने के तरीकों में सुधार लाने वाले दो नये औजारों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) भाले तथा
(2) तीर-कमान।

प्रश्न 9.
सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य कितने वर्ष पुराना है?
उत्तर:
21,000 वर्ष पुराना।

प्रश्न 10.
बोलचाल की भाषा का विकास कब हुआ?
उत्तर:
सम्भवतः 20 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 11.
आल्टामीरा कहाँ स्थित है?
उत्तर:
आल्टामीरा स्पेन में स्थित एक गुफा -स्थल है।

प्रश्न 12.
आल्टामीरा क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:
यहाँ की गुफा की छत पर जानवरों के अनेक चित्र उत्कीर्ण हैं।

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प्रश्न 13.
अफ्रीका में पाए जाने वाले एक शिकारी-संग्राहक समाज का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कुंगसेन।

प्रश्न 14.
होमो सैपियन्स से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
होमो सैपियन्स चिन्तनशील तथा प्राज्ञ मानव नामक प्रजाति है।

प्रश्न 15.
संजातिवृत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संजातिवृत में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन होता है।

प्रश्न 16.
योजनाबद्ध तरीके से सोच-समझकर बड़े स्तनपायी जानवरों का शिकार करने के सबसे पुराने स्पष्ट दो साक्ष्यों उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
(1) दक्षिण इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव से
(2) जर्मनी में शोनिंजन से।

प्रश्न 17.
यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्मों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
होमो हाइडलबर्गेसिस तथा होमो निअंडरथलैसिस।

प्रश्न 18.
चार्ल्स डार्विन की पुस्तक का नाम लिखिये।
उत्तर:
आन दि ओरिजन ऑफ स्पीशीज’।

प्रश्न 19.
किस उपसमूह में वानर अर्थात् एप शामिल थे?
उत्तर:
होमिनाइड।

प्रश्न 20.
होमोनिडों का उद्भव कहाँ हुआ था?
उत्तर:
अफ्रीका में।

प्रश्न 21.
‘जीवाश्म’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
जीवाश्म अत्यन्त पुराने पौधे, जानवर या मानव के अवशेष होते हैं जो एक पत्थर के रूप में बदल कर चट्टान में समा जाते हैं तथा फिर लाखों वर्ष तक सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 22.
हमें किस साक्ष्य से ज्ञात होता है कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ?
उत्तर:
मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ, इस बात का साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों के जीवाश्मों से मिलता है, जो अब लुप्त हो चुकी हैं।

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प्रश्न 23.
जीवाश्मों की तिथि का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
जीवाश्मों की तिथि का निर्धारण प्रत्यक्ष रसायनिक विश्लेषण द्वारा या उन परतों अथवा तलछटों के काल का परोक्ष रूप से निर्धारण करके किया जाता है जिनमें वे दबे हुए पाए जाते
हैं।

प्रश्न 24.
आदिकालीन मानव की जानकारी में सहायक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मानव के जीवाश्म, पत्थर के औजार तथा चित्रकारियाँ जैसे तत्त्व आदिकालीन मानव की जानकारी में सहायक सिद्ध होते हैं।

प्रश्न 25.
चार्ल्स डार्विन ने किस पुस्तक की रचना की थी? यह कब प्रकाशित हुई ?
उत्तर:
(1) चार्ल्स डार्विन ने ‘ऑन दि ओरिजन ऑफ स्पीशीज’ नामक पुस्तक की रचना की थी।
(2) यह पुस्तक 24 नवम्बर, 1859 को प्रकाशित हुई।

प्रश्न 26.
मानव के विकास के सम्बन्ध में चार्ल्स डार्विन ने क्या खोज की थी ?
उत्तर:
मानव के विकास के सम्बन्ध में चार्ल्स डार्विन ने यह तर्क दिया कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से ही क्रमिक रूप में हुआ।

प्रश्न 27.
स्तनपायी प्राणियों की प्राइमेट नामक श्रेणी का उद्भव कहाँ हुआ और कब हुआ?
उत्तर:
स्तनपायी श्रेणियों की प्राइमेट नामक श्रेणी का उद्भव एशिया तथा अफ्रीका में 360 लाख वर्ष पहले हुआ था।

प्रश्न 28.
प्राइमेट्स से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्राइमेट्स स्तनपायी प्राणियों के एक बड़े समूह के अन्तर्गत एक उप-समूह है जिसमें वानर, लंगूर तथा मानव सम्मिलित हैं।

प्रश्न 29.
होमिनाइड किसे कहते हैं? इनका उद्भव कैसे हुआ?
उत्तर:
लगभग 240 लाख वर्ष पूर्व प्राइमेट श्रेणी में एक उप-समूह उत्पन्न हुआ जिसे ‘होमिनाइड’ कहते हैं। इस में वानर शामिल थे।

प्रश्न 30.
होमिनिड प्राणियों के अफ्रीका में उद्भव होने के दो साक्ष्य दीजिए।
उत्तर:
(1) अफ्रीकी वानरों का समूह होमिनिडों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
(2) सबसे प्राचीन होमिनिड जीवाश्म पूर्वी अफ्रीका में पाए गए हैं।

प्रश्न 31.
होमिनिडों की तीन प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) होमिनिडों के मस्तिष्क का आकार बड़ा होता है।
(2) ये पैरों के बल सीधे खड़े हो सकते हैं।
(3) ये दो पैरों के बल चलते हैं।

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प्रश्न 32.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच अन्तर बताइए।
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस के मस्तिष्क का आकार होमो की अपेक्षा बड़ा होता है, जबड़े अधिक भारी होते हैं तथा दाँत भी अधिक बड़े होते हैं।

प्रश्न 33.
‘आस्ट्रेलोपिथिकस’ शब्द की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है?
उत्तर:
‘आस्ट्रेलोपिथिकस’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘आस्ट्रिल’ अर्थात् ‘दक्षिणी’ तथा यूनानी भाषा के शब्द ‘पिथिकस’ अर्थात् ‘वानर’ से मिलकर हुई है।

प्रश्न 34.
‘आस्ट्रेलोपिथिकस’ की मानव के आद्य रूप में वानर अवस्था के कौनसे लक्षण पाये जाते थे?
उत्तर:
होमो की तुलना में मस्तिष्क का अपेक्षाकृत छोटा होना, पिछले दाँत बड़े होना, उसमें सीधे खड़े होकर चलने की अधिक क्षमता न होना।

प्रश्न 35.
आस्ट्रेलोपिथिकस के किन शारीरिक लक्षणों के कारण वे अपना अधिकांश समय पेड़ों पर जीवन बिताते थे?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस अपने आगे के अवयवों के लम्बा होने, हाथ और पैरों की मुड़ी हुई हड्डियों तथा टखने के घुमावदार जोड़ों के कारण अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर बिताते थे।

प्रश्न 36.
‘होमो’ शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
होमो लैटिन भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है-आदमी। इसमें पुरुष और स्त्री दोनों सम्मिलित हैं।

प्रश्न 37.
होमो को किन प्रजातियों में बाँटा गया है?
उत्तर:
होमो को तीन प्रजातियों में बाँटा गया है-
(1) होमो हैबिलिस
(2) होमो एरेक्टस
(3) होमो सैपियन्स।

प्रश्न 38.
होमो हैबिलिस के जीवाश्म कहाँ से प्राप्त किये गए हैं?
उत्तर:
होमो हैबिलिस के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो और तंजानिया में ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त किये गए हैं।

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प्रश्न 39.
ऐसे दो उदाहरण दीजिए जिनसे ज्ञात होता है कि कुछ जीवाश्मों का नामकरण उन स्थानों के आधार पर किया गया है जहाँ उस विशेष प्रकार के जीवाश्म सर्वप्रथम प्राप्त हुए थे
उत्तर:
(1) जर्मनी के शहर हाइडलबर्ग में पाए गए जीवाश्मों को होमो हाइडलबर्गेसिस तथा
(2) निअंडर घाटी में पाए गए जीवाश्मों को होमों निअंडरथलैंसिस कहा गया है।

प्रश्न 40.
यूरोप में पाये जाने वाले सबसे पुराने जीवाश्मों का उल्लेख कीजिए। ये किस प्रजाति के हैं?
उत्तर:
यूरोप में प्राप्त सबसे पुराने जीवाश्म होमो हाइडलबर्गेसिस तथा होमो निअंडरथलैंसिस के हैं। ये दोनों ही होमो सैपियन्स प्रजाति के हैं।

प्रश्न 41.
आधुनिक मानव के उद्भव – स्थल के बारे में प्रचलित मतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) क्षेत्रीयता निरन्तर मॉडल के अनुसार अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग मनुष्यों की उत्पत्ति हुई।
(2) प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ।

प्रश्न 42.
आदिकालीन मानव किन तरीकों से अपना भोजन जुटाता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन जुटाता था, जैसे- संग्रहण, शिकार, अपमार्जन तथा मछली पकड़ना।

प्रश्न 43.
आदिकालीन मानव की संग्रहण की क्रिया का उल्लेख कीजिए जिससे वह अपना भोजन जुटाता था।
उत्तर:
आदिकालीन मानव पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य-पदार्थों, जैसे-बीज, गुठलियों, बेर, फल एवं कंदमूल इकट्ठा करता था।

प्रश्न 44.
आदिकालीन मानव की अपमार्जन या रसदखोरी क्रिया का उल्लेख कीजिए जिसके द्वारा वह अपना भोजन जुटाता था।
उत्तर:
आदिकालीन मानव उन जानवरों के शवों से मांस-मज्जा खुरचकर निकालते थे जो जानवर अपने आप मर जाते थे या किन्हीं अन्य हिंसक पशुओं द्वारा मार दिये जाते थे।

प्रश्न 45.
योजनाबद्ध तरीके से बड़े स्तनपायी जानवरों के शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना साक्ष्य किन दो स्थलों से मिलता है?
उत्तर:
(1) दक्षिणी इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव नामक स्थान से 5,00,000 वर्ष पहले का साक्ष्य
(2) जर्मनी में शोनिंजन नामक स्थान से 4,00,000 वर्ष पहले का साक्ष्य।

प्रश्न 46.
आदिकालीन मानव की गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्रों के दो साक्ष्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(1) दक्षिण फ्रांस में स्थित लजरेट गुफा
(2) दक्षिणी फ्रांस के समुद्र तट पर स्थित टेरा अमाटा में झोंपड़ियाँ।

प्रश्न 47.
आग के नियन्त्रित प्रयोग के दो लाभ बताइए।
उत्तर:
(1) आग के नियन्त्रित प्रयोग से गुफाओं में प्रकाश तथा उष्णता मिलती थी।
(2) इससे भोजन भी पकाया जा सकता था।

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प्रश्न 48.
गुफाओं, झोंपड़ियों में रहने वाले आदिमानव का जीवन पेड़ों पर रहने वाले होमिनिडों के जीवन से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर:
गुफाओं में रहने वाले लोग वर्षा, तूफान, आँधी, हिंसक जानवरों आदि से सुरक्षित रहते थे परन्तु पेड़ों पर रहने वाले होमिनिड इनसे सुरक्षित नहीं थे

प्रश्न 49.
मनुष्य में औजार बनाने की ऐसी कौनसी विशेषता है जो वानरों में नहीं पाई जाती?
उत्तर:
शारीरिक तथा स्नायुतन्त्रीय अनुकूलनों के कारण मनुष्य हाथ का कुशलतापूर्वक प्रयोग कर सकता है, परन्तु जानवर ऐसा नहीं कर सकते।

प्रश्न 50.
पत्थर के औजार बनाने तथा उनका प्रयोग किये जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य किन पुरा – स्थलों से मिलता है ?
उत्तर:
पत्थर के औजार बनाने तथा उनका प्रयोग किये जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथियोपिया और केन्या के पुरा – स्थलों से मिलता है।

प्रश्न 51.
फेंककर मारने वाले भाले के दो लाभकारी उपयोग बताइए।
उत्तर:
(1) शिकारी अधिक लम्बी दूरी तक भाला फेंकने में सफल हुए।
(2) शिकारी हिंसक जानवर से भाले के प्रयोग से अपनी रक्षा कर सकते थे।

प्रश्न 52.
छेनी या रुखानी जैसे औज़ारों की क्या उपयोगिता थी?
उत्तर:
इन नुकीले ब्लेडों से हड्डी, सींग, हाथीदाँत या लकड़ी पर नक्काशी करना अथवा कुरेदना अब सम्भव हो

प्रश्न 53.
स्वर – तन्त्र का विकास कब हुआ ? इसका सम्बन्ध विशेष तौर पर किससे रहा है ?
उत्तर:
(1) स्वर-तन्त्र का विकास लगभग 2 लाख वर्ष पहले हुआ था।
(2) इसका सम्बन्ध विशेष तौर पर आधुनिक मानव से रहा है।

प्रश्न 54.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकाक्स तथा शोवे की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं ।

प्रश्न 55.
फ्रांस तथा स्पेन की इन गुफाओं में किन जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं?
उत्तर:
फ्रांस तथा स्पेन की इन गुफाओं में गौरों, घोड़ों, हिरनों, गैंडों, शेरों, भालुओं, तेन्दुओं, लकड़बग्घों के चित्र शामिल हैं।

प्रश्न 56.
हादजा लोग कौन हैं? ये लोग कहाँ रहते हैं ?
उत्तर:
हादजा शिकारियों तथा संग्राहकों का एक छोटा समूह है जो ‘लेक इयासी’ नामक एक खारे पानी की विभ्रंश घाटी में बनी झील के आस-पास रहते हैं ।

प्रश्न 57.
हादजा लोगों के शिविरों के आकार तथा स्थिति में मौसम के अनुसार परिवर्तन क्यों होता है ?
उत्तर:
हादजा लोगों के शिविरों के आकार तथा स्थिति में परिवर्तन पानी की उपलब्धता के आधार पर होता है।

प्रश्न 58.
होमिनाइड एवं बन्दरों में दो अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
(1) होमोनाइडों का शरीर बन्दरों से बड़ा होता है। उनकी पूँछ नहीं होती है।
(2) होमोनाइडों का विकास धीरे-धीरे होता है।

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प्रश्न 59.
आदिकालीन मानव के दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण क्या लाभ हुए?
उत्तर:
(1) विभिन्न प्रकार के काम करने के लिए हाथ स्वतन्त्र हो गए।
(2) शारीरिक ऊर्जा की खपत कम होती गई।

प्रश्न 60.
प्रजाति किसे कहते हैं ?
उत्तर:
प्रजाति जीवों का एक ऐसा समूह होता है जिसके नर और मादा मिलकर बच्चे उत्पन्न कर सकते हैं और उनके बच्चे भी आगे सन्तान उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं।

प्रश्न 61.
मानव विज्ञान से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
मानव विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसमें मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वैज्ञानिकों के अनुसार मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ। इस बात का प्रमाण हमें मानव की उन प्रजातियों के जीवाश्मों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। उनके शारीरिक लक्षणों के आधार पर मानव को भिन्न- भिन्न प्रजातियों में बाँटा गया है। जीवाश्मों का काल-निर्धारण प्रत्यक्ष रसायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का परोक्ष रूप से काल-निर्धारण करके किया जाता है जिनमें वे दबे हुए पाए जाते हैं। चार्ल्स डारविन ने अपनी पुस्तक ‘ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज’ में यह बताया है कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से क्रमिक रूप में हुआ।

प्रश्न 2.
प्राइमेट्स के बारे में आप क्या जानते हैं? इनकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
लगभग 360 लाख वर्ष पूर्व एशिया तथा अफ्रीका में स्तनपायी प्राणियों की ‘प्राइमेट’ नामक श्रेणी का उद्भव हुआ।‘प्राइमेट’ स्तनपायी प्राणियों के एक बहुत बड़े समूह के अन्तर्गत एक उप-समूह है। इस प्राइमेट उप-समूह में वानर, लंगूर तथा मानव सम्मिलित हैं।

प्राइमेट्स की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
(1) इनके शरीर पर बाल होते हैं।
(2) पैदा होने वाला बच्चा अपेक्षाकृत लम्बे समय तक माता के गर्भ में पलता है।
(3) माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रन्थियाँ होती हैं
(4) प्राइमेट्स के दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।
(5) इनमें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने वाली क्षमता होती है।

प्रश्न 3.
होमिनिड तथा होमिनाइड में अन्तर बताइए।
उत्तर:
होमिनिड का विकास होमिनाइड से हुआ। होमिनिड तथा होमिनाइड में निम्नलिखित अन्तर पाये जाते हैं –
(1) होमोनाइड के मस्तिष्क का आकार होमोनिड की तुलना में छोटा होता था।
(2) होमोनाइड चौपाये होते थे और चारों पैरों के बल चलते थे, परन्तु उनके शरीर का अगला हिस्सा और अगले दोनों पैर लचकदार होते थे। इसके विपरीत होमिनिड सीधे खड़े होकर पिछले दो पैरों के बल चलते थे।
(3) होमिनिड के हाथ विशेष प्रकार के होते थे जिनकी सहायता से वे औजार बना सकते थे तथा उनका प्रयोग कर सकते थे। परन्तु होमिनाइडों के हाथों की रचना ऐसी नहीं होती थी।

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प्रश्न 4.
होमिनिडों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा
होमिनिड कौन थे? इनकी उत्पत्ति कहाँ हुई थी? सप्रमाण बताइए।
उत्तर:
‘ होमिनिड’ ‘होमिनिडेइ’ नामक परिवार के सदस्य होते थे। इस परिवार में सभी रूपों के मानव प्राणी सम्मिलित थे।

होमिनिडों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –
(1) इनके मस्तिष्क का आकार बड़ा होता था।
(2) इनमें पैरों के बल सीधा खड़े होने की क्षमता होती थी। ये दो पैरों के बल चलते थे।
(3) इनके हाथों की बनावट ऐसी होती थी जिससे वे औजार बना सकते थे तथा उनका प्रयोग कर सकते थे। होमिनिड की उत्पत्ति – होमिनिड की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई।

इसके दो प्रमाण हैं –
(अ) अफ्रीकी वानरों का होमिनिडों से संबंध और
(ब) प्रारंभिक होमिनिड जीवाश्म का अफ्रीका में पाया जाना।

प्रश्न 5.
होमिनाइड तथा बन्दरों में अन्तर बताइए।
उत्तर:
होमिनाइड तथा बन्दरों में निम्नलिखित अन्तर पाये जाते हैं-
(1) होमिनाइडों का शरीर बन्दरों से बड़ा होता है।
(2) होमिनाइडों की पूँछ नहीं होती।
(3) उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता है।
(4) उनके बच्चे बन्दर के बच्चों की अपेक्षा लम्बे समय तक उन पर निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 6.
आस्ट्रेलोपिथिकस से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
होमोनिडों की दो प्रमुख शाखाएँ हैं –
(1) आस्ट्रेलोपिथिकस तथा
(2) होमो। ‘आस्ट्रेलोपिथिकस’ दो शब्दों से मिलकर बना है – लैटिन भाषा के शब्द ‘आस्ट्रल’ अर्थात् ‘दक्षिणी’ और यूनानी भाषा के शब्द ‘पिथिकस’ अर्थात् ‘वानर’। यह नाम इसलिए दिया गया, क्योंकि मानव के प्राचीन रूप में उसकी ‘वानर’ अवस्था के अनेक लक्षण पाये जाते थे।

ये लक्षण निम्नलिखित थे-
(1) होमो की तुलना में उनके मस्तिष्क का आकार छोटा था।
(2) उनके पिछले दाँत होमो की तुलना में बड़े थे।
(3) उनके हाथों की दक्षता सीमित थी।
(4) उनमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता भी अधिक नहीं थी क्योंकि वे अभी भी अपना बहुत-सा समय पेड़ों पर गुजारते थे। उनमें पेड़ों पर जीवन बिताने के लिए आवश्यक विशेषताएँ अब भी विद्यमान थीं जैसे उनके आगे के अवयव लम्बे थे, हाथ और पैरों की हड्डियाँ मुड़ी हुई थीं तथा टखने के जोड़े घुमावदार थे।

प्रश्न 7.
आदिकालीन मानव के दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण क्या लाभ हुए?
उत्तर:
(1) आदिकालीन मानव के दो पैरों पर खड़े होकर चलने की क्षमता के कारण उसके हाथ मुक्त हो गए। कालक्रम में मानव के हाथों में लचीली उंगलियों और नमनीय अंगूठों का विकास हुआ।
(2) अब वह हाथों का प्रयोग बच्चों या चीजों को उठाने के लिए कर सकता था। हाथों के अधिकाधिक प्रयोग से मानव की दो पैरों पर खड़े होकर चलने की कुशलता भी बढ़ती गई। इसके फलस्वरूप मानव का हाथ विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए स्वतन्त्र हो गया।
(3) अब मानव वस्तुओं को पकड़कर अपनी आँखों के निकट लाने में समर्थ हो गया। इससे उसकी बुद्धि का विकास हुआ और वह औजार बनाने लगा तथा शिल्पी बन गया।
(4) इसके अतिरिक्त चार पैरों की बजाय दो पैरों पर चलने से शारीरिक ऊर्जा भी कम खर्च होने लगी।

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प्रश्न 8.
‘होमो’ के बारे में आप क्या जानते हैं? इन्हें किन प्रजातियों में बाँटा गया है?
अथवा
होमो की विभिन्न प्रजातियों और उनके आवास-स्थलों के बारे में बताइये।
उत्तर:
‘होमो’ लैटिन भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’। इसमें पुरुष और स्त्री दोनों सम्मिलित हैं। वैज्ञानिकों ने होमो को उनकी विशेषताओं के आधार पर अनेक प्रजातियों में बाँटा है यथा –
(1) होमो हैबिलिस (औजार बनाने वाले)।
(2) होमो एरेक्टस (सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले)।
(3) होमो सैपियन्स (प्राज्ञ अथवा चिन्तनशील मनुष्य)। होमो हैबिलास के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो और तंजानिया में ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका और एशिया दोनों महाद्वीपों में पाए गए हैं जैसे कूबीफोरा और पश्चिमी तुर्काना, केन्या, मो जोकर्ता और संगीरन, जावा।

प्रश्न 9.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच अन्तर बताइए।
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच निम्नलिखित अन्तर पाये जाते हैं –
(1) आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा होता था।
(2) होमो के जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए थे तथा दाँत छोटे होते थे।
होमो के मस्तिष्क का बड़ा आकार उसके अधिक बुद्धिमान होने एवं उसकी बेहतर स्मृति का द्योतक है। जबड़ों तथा दाँतों में हुआ परिवर्तन सम्भवतः उनके खान-पान में हुई भिन्नता से सम्बन्धित था।

प्रश्न 10.
‘होमिनाइड्स’ की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लगभग 240 लाख वर्ष पहले ‘प्राइमेट’ श्रेणी में एक उपसमूह उत्पन्न हुआ जिसे ‘होमिनाइड्स’ कहते हैं। इस उपसमूह में वानर सम्मिलित थे। होमिनाइड्स की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं –
(1) होमिनाइड्स का मस्तिष्क छोटा होता था।
(2) ये चौपाए थे।
(3) इनके आगे के दोनों पैर लचकदार होते थे
(4) ये स्तनधारियों का एक समूह था।

प्रश्न 11.
आधुनिक मानव के उद्भव के प्रतिस्थापन मॉडल की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक मानव के उद्भव का प्रतिस्थापन मॉडल – प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान – अफ्रीका में हुआ।
प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव के सभी पुराने रूप, चाहे वे कहीं भी थे, बदल गए और उनका स्थान पूरी तरह आधुनिक मानव ने ले लिया। आधुनिक मानव में सभी जगह शारीरिक तथा उत्पत्ति-मूलक समरूपता पाई जाती है। यह समानता इसलिए पाई जाती है कि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे और वहाँ से अन्य स्थानों को गए।

इथियोपियां में ओमो स्थान पर मिले आधुनिक मानव के पुराने जीवाश्मों के साक्ष्य भी प्रतिस्थापन मॉडल का समर्थन करते हैं। इस मत के समर्थकों का कहना है कि आज के मनुष्यों में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं उनका कारण उन लोगों का परिस्थितियों के अनुसार निरन्तर हजारों वर्षों की अवधि में अपने आप को ढाल लेना है जो उन विशेष क्षेत्रों में गए और अन्त में वहाँ स्थायी रूप से बस गए।

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प्रश्न 12.
35,000 वर्ष पूर्व मानव के योजनाबद्ध तरीके से जानवरों के शिकार करने के स्थलों का उल्लेख कीजिए। इन स्थलों के चुनाव के क्या कारण थे?
उत्तर:
35,000 वर्ष पूर्व मानव योजनाबद्ध तरीके से जानवरों के शिकार के लिए कुछ स्थलों का सोच-समझ कर चुनाव करता था । ऐसा एक स्थल चेक गणराज्य में दोलनीवेस्तोनाइस था, जो एक नदी के पास स्थित था। रेन्डियर तथा घोड़ा जैसे स्थान बदलने वाले जानवर बड़ी संख्या में पतझड़ और वसन्त के मौसम में उस नदी के पार जाते थे और तब उनका बड़ी संख्या में शिकार किया जाता था। इन स्थलों के चुनाव से यह पता चलता है कि लोगों को जानवरों की आवाजाही तथा उन्हें जल्दी से बड़ी संख्या में मारने के तरीकों के बारे में अच्छी जानकारी थी।

प्रश्न 13.
प्रारम्भिक मानव के रहन-सहन के बारे में किन साक्ष्यों में जानकारी मिलती है?
उत्तर:
प्रारम्भिक मानव के रहन-सहन के बारे में अनेक साक्ष्यों से जानकारी मिलती है। उदाहरण के लिए, केन्या में किलोंबे तथा ओलोर्जेसाइली के खनन – स्थलों पर हजारों की संख्या में शल्क – उपकरण तथा हस्तकुठार प्राप्त हुए हैं। ये औजार 7,00,000 से 5,00,000 वर्ष पुराने हैं।

इतने सारे औज़ारों का एक ही स्थान पर इकट्ठा होने का कारण है कि जिन स्थानों पर खाद्य-प्राप्ति के संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे, वहाँ लोग बार-बार आते रहते थे। ऐसे क्षेत्रों में लोग शिल्पकृतियों सहित अपने क्रिया-कलापों के चिह्न छोड़ जाते होंगे। जमा शिल्पकृतियाँ केवल कुछ ही क्षेत्रों में मिलती हैं और वे क्षेत्र कुछ अलग से दिखाई पड़ते हैं। जिन स्थलों पर लोगों का आवागमन कम होता था, वहाँ ऐसी शिल्पकृतियाँ कम मात्रा में मिलती हैं।

प्रश्न 14.
आदि मानव द्वारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
आदि मानव के जीवन में पत्थर के औजारों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी। आदिमानव द्वारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथियोपिया और केन्या के पुरा – स्थलों से प्राप्त हुआ है। सम्भवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने सबसे पहले पत्थर के औजार बनाए थे। यह सम्भव है कि पत्थर के औजार बनाने वाले स्त्री-पुरुष दोनों ही होते थे। सम्भवत: स्त्रियाँ अपने और अपने बच्चों के भोजन प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष प्रकार के औजार बनाती थीं और उनका प्रयोग करती थीं।

प्रश्न 15.
आदि मानव द्वारा जानवरों के मारने के तरीकों में सुधार करने के प्रयासों का उल्लेख कीजिए। उसके द्वारा बनाये गए नवीन औजारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लगभग 35,000 वर्ष पूर्व आदिमानव द्वारा जानवरों के मारने के तरीकों में सुधार किया गया।
यथा –

  • इन प्रयासों के अन्तर्गत फेंककर मारने वाले भालों तथा तीर-कमान जैसे नवीन प्रकार के औजार बनाये जाने लगे।
  • मांस को साफ किया जाने लगा। उसमें से हड्डियाँ निकाल दी जाती थीं और फिर उसे सुखाकर, हल्का सेंकते हुए सुरक्षित रख लिया जाता था। इस प्रकार, सुरक्षित रखे खाद्य को बाद में खाया जा सकता था।
  • अब समूरदार जानवरों को पकड़ा जाने लगा, उनकी रोएँदार खाल का कपड़े की तरह प्रयोग किया जाने लगा।
  • सिलने के लिए सुई का आविष्कार हुआ। सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य लगभग 21,000 वर्ष पुराना है।
  • अब छेनी या रुखानी जैसे छोटे-छोटे औजार भी बनाए जाने लगे। इन नुकीले ब्लेडों से हड्डी, सींग, हाथीदाँत या लकड़ी पर नक्काशी करना या कुरेदना अब सम्भव हो गया।

प्रश्न 16.
पंचब्लेड तकनीक के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
पंचब्लेड तकनीक – पंचब्लेड तकनीक का वर्णन निम्नानुसार है –

  • एक बड़े पत्थर के ऊपरी सिरे को पत्थर के हथौड़े की सहायता से हटाया जाता है।
  • इससे एक चपटी सतह तैयार हो जाती है जिसे प्रहार मंच अर्थात् घन कहा जाता है।
  • इसके बाद इस हड्डी पर सींग से बने हुए पंच और हथौड़े की सहायता से प्रहार किया जाता है।
  • इससे धारदार पट्टी बन जाती है जिसका चाकू की तरह प्रयोग किया जा सकता है या उनसे एक तरह की छेनियाँ बन जाती हैं जिनसे हड्डी, सींग, हाथीदाँत या लकड़ी को उकेरा जा सकता है।

प्रश्न 17.
भाषा के विकास के बारे में प्रचलित मतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवित प्राणियों में मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है। भाषा के विकास के बारे में निम्नलिखित मत प्रचलित हैं-
(1) होमिनिड भाषा में अंग – विक्षेप ( हाव-भाव ) या हाथों का संचालन हिलाना सम्मिलित था।
(2) उच्चरित भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अ – शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
(3) मनुष्य की वाणी का प्रारम्भ सम्भवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसाकि नर – वानरों में देखा जाता है। प्रारम्भिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। धीरे-धीरे ये ध्वनियाँ ही आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होंगी।

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प्रश्न 18.
आदिकालीन मानव किन तरीकों से अपना भोजन जुटाता था ?
उत्तर:
आदिकालीन मानव संग्रहण, शिकार, अपमार्जन, मछली पकड़ने आदि के विभिन्न तरीकों से अपना भोजन जुटाता था। वह पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य-पदार्थों जैसे बीज, गुठलियाँ, बेर, फल, कंदमूल आदि इकट्ठा करता था। वह अपमार्जन के द्वारा उन जानवरों के शवों से मांस-मज्जा खुरच कर निकालता था जो जानवर अपने आप मर जाते थे या किन्हीं अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। वह योजनाबद्ध तरीके से बड़े स्तनपायी जानवरों का शिकार और उनका वध करता था। मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण तरीका था।

प्रश्न 19.
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के बारे में निम्नलिखित मत प्रचलित हैं –
(1) पहले मत के अनुसार होमो हैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना सम्भव हुआ होगा। सम्भवतः भाषा का विकास सबसे पहले 20 लाख वर्ष पूर्व शुरू हुआ होगा।

(2) मस्तिष्क में हुए परिवर्तनों के अतिरिक्त, स्वर – तन्त्र का विकास भी महत्त्वपूर्ण था। स्वर – तन्त्र का विकास लगभग 2,00,000 वर्ष पहले हुआ था। इसका सम्बन्ध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है।

(3) एक मत यह भी प्रचलित है कि भाषा, कला के साथ-साथ लगभग 40,000 – 35,000 वर्ष पहले विकसित हुई। उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा का विकास कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा रहा है, क्योंकि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

प्रश्न 20.
फ्रांस और स्पेन की गुफाओं में पाई जाने वाली चित्रकारियों की विवेचना कीजिए।
अथवा
आल्टामीरा के गुफा चित्र पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकाक्स तथा शोवे की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में अनेक जानवरों की चित्रकारियाँ प्राप्त हुई हैं। आल्टामीरा की गुफा की छत पर बनी चित्रकारियों में रंग की बजाय किसी प्रकार की लेई (पेस्ट) का प्रयोग किया गया है। इन चित्रों का निर्माण 30,000 से 12,000 वर्ष पहले के बीच में। संजीव पास बुक्स किया गया था। इन चित्रों में गौरों, घोड़ों, साकिन, हिरणों, मैमथों (विशालकाय जानवरों), गैंडों, शेरों, भालुओं, तेन्दुओं, लकड़बग्घों और उल्लुओं के चित्र शामिल हैं। इन चित्रकारियों का सम्बन्ध धार्मिक क्रियाओं, रस्मों और जादू-टोनों से था।

जानवरों का चित्रांकन इसलिए किया जाता था कि चित्रांकन करने से शिकार में सफलता प्राप्त हो सकती थी। कुछ लोगों का कहना है कि सम्भवतः ये गुफाएँ संगम-स्थल थीं जहाँ लोगों के छोटे-छोटे समूह मिलते थे और सामूहिक क्रिया-कलाप सम्पन्न करते थे। सम्भव है कि वहाँ ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते हों अथवा शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर परस्पर चर्चा करते हों। यह भी सम्भव है कि ये चित्रकारियाँ, आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों।

प्रश्न 21.
संजातिवृत से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
संजातिवृत में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन होता है। इसमें उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधन, प्रौद्योगिकी आदि की जाँच की जाती है। समाज में स्त्री-पुरुष की भूमिका, उनके कर्मकाण्डों, रीति-रिवाजों, राजनीतिक संस्थाओं तथा सामाजिक रूढ़ियों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 22.
मिट्टी के बर्तन बनाने का आविष्कार कब व कैसे सम्भव हुआ?
उत्तर:
कृषि के आविष्कार के पश्चात् मानव ने एक स्थान पर रहना शुरू कर दिया। अब उसने अनाज तथा अन्य उपजों को रखने के लिए तथा भोजन पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाना शुरू कर दिया। वह उन्हें आग में पकाने लगा। इस प्रकार मानव ने अपने कच्चे बर्तनों को आग में पकाना और उन्हें सुदृढ़ बनाना शुरू कर दिया।

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प्रश्न 23.
आदिमानव ने किन कारणों से खेती और पशुचारण का कार्य प्रारम्भ किया?
उत्तर:
आदिमानव ने 10,000 से 4,500 वर्ष पहले खेती तथा पशुचारण का कार्य प्रारम्भ किया, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे –
(1) लगभग 13,000 वर्ष अन्तिम हिमयुग समाप्त हो गया और उसके साथ ही अपेक्षाकृत अधिक गर्म और नम . मौसम का सूत्रपात हुआ। इसके फलस्वरूप जंगली जौ तथा गेहूँ की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गईं।

(2) खुले जंगलों तथा घास के मैदानों के विस्तार के साथ-साथ जंगली भेड़ों, बकरियों, सुअरों, गधों, मवेशियों आदि जानवरों की संख्या भी बढ़ती चली गई, अब लोग ऐसे क्षेत्रों को अधिक पसन्द करने लगे जहाँ जंगलों तथा घास के मैदान और जानवरों की बहुतायत थी।

(3) अब बड़े-बड़े जन-समुदाय ऐसे क्षेत्रों में अधिक समय तक लगभग स्थायी रूप से रहने लगे।

(4) लोग कुछ क्षेत्रों को अधिक पसन्द करते थे, इसलिए वहाँ भोजन की आपूर्ति को बढ़ाये जाने का दबाव बढ़ने लगा। सम्भवत: इसी कारण से कुछ विशेष प्रकार के अनाज के पौधे उगाने तथा जानवरों को पालने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस प्रकार जलवायु परिवर्तन, बढ़ती हुई जनसंख्या, कुछ विशेष प्रकार के पौधों और जानवरों की जानकारी और उस पर मनुष्य की निर्भरता आदि अनेक कारणों से आदि मानव ने खेती तथा पशु चारण की गतिविधियों को शुरू किया

प्रश्न 24.
हादजा जनसमूह की जीवन-शैली का संक्षिप्त परिचय दीजिये।
उत्तर:
हादजा लोग अपने भोजन के लिए मुख्य रूप से जंगली साग-सब्जियों पर ही निर्भर रहते हैं। वे मांस का भी प्रयोग करते हैं । ये लोग हाथी को छोड़ कर बाकी सभी प्रकार के जानवरों का शिकार करते हैं तथा उनका मांस खाते हैं। ये लोग अपने शिविर वृक्षों तथा चट्टानों के बीच, विशेषकर वहाँ लगाते हैं जहाँ ये दोनों सुविधाएँ प्राप्त हों। ये लोग जमीन तथा उसके संसाधनों पर अपना अधिकार नहीं जमाते। सूखे के समय में भी इन लोगों के यहाँ भोजन की कमी नहीं होती क्योंकि उनके प्रदेश में सूखे के मौसम में भी वनस्पति – खाद्य – कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

प्रश्न 25.
खेती तथा पशु- चारण से आए हुए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खेती तथा पशु – चारण से निम्नलिखित परिवर्तन शुरू हुए –

  1. अब आदिमानव ने मिट्टी के ऐसे बर्तन बनाना शुरू कर दिया जिनमें अनाज तथा अन्य उपजों को रखा जा सके और खाना पकाया जा सके। इससे मिट्टी के बर्तन बनाने के व्यवसाय का विकास हुआ।
  2. अब पत्थर के नये प्रकार के औजारों का निर्माण और प्रयोग होने लगा।
  3. हल जैसे अन्य उपकरणों का खेती के काम में प्रयोग किया जाने लगा।
  4. धीरे-धीरे लोग ताँबा तथा राँगा जैसी धातुओं से परिचित हो गए।
  5. मिट्टी के बर्तन बनाने तथा परिवहन के लिए पहिए का इस्तेमाल होने लगा।
  6. खेती की प्रथा चालू हो जाने से लोगों ने एक स्थान पर पहले से अधिक लम्बी अवधि तक टिकना शुरू कर दिया। इस प्रकार गारे, कच्ची ईंटों तथा पत्थरों से भी स्थायी घर बनाये जाने लगे।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव के उद्भव के बारे में क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल एवं प्रतिस्थापन मॉडल की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक मानव का उद्भव आधुनिक मानव के उद्भव स्थल के बारे में विद्वानों में मतभेद है। इस सम्बन्ध में दो मत प्रचलित हैं जो एक- दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। इन दोनों मतों का विवेचन निम्नानुसार है-

(1) क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल – क्षेत्रीय निरन्तरता मॉडल के अनुसार विश्व के अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग मनुष्यों की उत्पत्ति हुई। इस मत के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले होमो सैपियन्स का आधुनिक मानव के रूप में विकास हुआ। उनका विकास धीरे-धीरे अलग-अलग गति से हुआ। इसीलिए आधुनिक मानव विश्व के भिन्न-भिन्न हिस्सों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया। इस तर्क का आधार आज के मनुष्य में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं। इस मत के समर्थकों का कहना है कि ये असमानताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस और होमो हाइडलबर्गेसिस समुदायों में पाई जाने वाली भिन्नताओं के कारण हैं।

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(2) प्रतिस्थापन मॉडल – प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान-अफ्रीका में हुआ। इस मत का समर्थन इस बात से होता है कि आधुनिक मानव में सब जगह शारीरिक और उत्पत्ति-मूलक समरूपता पाई जाती है । इस मत के समर्थन में यह तर्क दिया जाता है कि मनुष्यों में अत्यधिक समानता इसलिए पाई जाती है क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे और वहीं से अन्य स्थानों को गए।

इथियोपिया में ओमो नामक स्थान पर प्राप्त हुए आधुनिक मानव के पुराने जीवाश्मों के साक्ष्य भी प्रतिस्थापन मॉडल का समर्थन करते हैं। इस मत के समर्थकों की मान्यता है कि आज के मनुष्यों में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं, उनका कारण उन लोगों का परिस्थितियों के अनुसार हजारों वर्ष की अवधि में अपने आप को ढाल लेना है जो उन विशेष प्रदेशों में गए तथा अन्त में वहाँ स्थायी रूप से बस गए। इस प्रकार उनके लक्षणों में विविधता क्षेत्रीय परिस्थितियों की विविधता के कारण है।

प्रश्न 2.
आदिकालीन मानव द्वारा अपने भोजन जुटाने के विभिन्न तरीकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव द्वारा विभिन्न तरीकों से अपना भोजन जुटाना आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन जुटाता था; जैसे- संग्रहण, शिकार, अपमार्जन और मछली पकड़ना।

(1) संग्रहण – संग्रहण की क्रिया में पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य-पदार्थों; जैसे-बीज, गुठलियाँ, बेर, एवं कंदमूल इकट्ठा करना शामिल थे। संग्रहण के सम्बन्ध में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि इस बारे में प्रत्यक्ष साक्ष्य बहुत कम मिलता है। यद्यपि हमें हड्डियों के जीवाश्म तो बहुत मिल जाते हैं, परन्तु पौधों के जीवाश्म तो दुर्लभ ही हैं। पौधों से भोजन जुटाने के बारे में सूचना प्राप्त करने का एक तरीका दुर्घटना अथवा संयोगवश जले हुए पौधे से प्राप्त अवशेष हैं। इस प्रक्रिया में कार्बनीकरण हो जाता है और इस रूप में जैविक पदार्थ दीर्घकाल तक सुरक्षित रह सकता है। परन्तु अभी तक पुरातत्त्वविदों को उतने प्राचीन युग के सम्बन्ध में कार्बनीकृत बीजों के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

(2) शिकार – शिकार सम्भवतः बाद में शुरू हुआ – लगभग 5 लाख वर्ष पहले। योजनाबद्ध तरीके से सोच- समझकर बड़े स्तनपायी जानवरों का शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य दो स्थलों से मिलता है।

ये स्थल हैं –
(1) दक्षिणी इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव
(2) जर्मनी में शोनिंजन।

लगभग 35,000 वर्ष पूर्व मानव के योजनाबद्ध तरीके से शिकार करने का साक्ष्य कुछ यूरोपीय खोज – स्थलों से मिलता है। पूर्व मानव ने चेक गणराज्य में नदी के निकट दोलनी वेस्तोनाइस नामक स्थल को सोच-समझकर शिकार के लिए चुना था जब रेन्डियर और घोड़े जैसे स्थान बदलने वाले जानवरों के झुण्ड के झुण्ड पतझड़ और वसन्त के मौसम में उस नदी के पार जाते थे तथा तब उनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था। इन स्थलों के चुनाव से इस बात की पुष्टि होती है कि लोगों को जानवरों की आवाजाही तथा उन्हें जल्दी से बड़े पैमाने पर मारने के तरीकों के बारे में जानकारी थी।

(3) अपमार्जन – अपमार्जन से तात्पर्य त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है। अब यह माना जाने लगा है कि आदिकालीन होमिनिड अपमार्जन के द्वारा उन जानवरों के शवों से मांस-मज्जा खुरच कर निकालने लगे थे जो जानवर अपने आप मर जाते थे या अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। यह भी इतना ही सम्भव है कि पूर्व होमिनिड छोटे स्तनपायी जानवरों – चूहे, छछूंदर जैसे कृतकों, पक्षियों (और उनके अंडों ), सरीसृपों और यहाँ तक कि कीड़े- sita

(4) मछली पकड़ना – मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण तरीका था। इस बात की जानकारी अनेक खोज स्थलों से मछली की हड्डियां मिलने से होती है।

प्रश्न 3.
आदि मानव के गुफाओं तथा खुले स्थानों पर आवास के बारे में एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
आदि मानव का गुफाओं तथा खुले स्थानों पर आवास –
गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्रों का प्रचलन 4,00,000 से 1,25,000 वर्ष पहले शुरू हो गया था। इसके साक्ष्य यूरोप के पुरास्थलों में मिलते हैं।

(1) दक्षिण फ्रांस में स्थित लेजरेट गुफा की दीवार को 12 × 4 मीटर आकार के एक निवास स्थान से सटाकर बनाया गया है। इसके अन्दर दो चूल्हों और भिन्न-भिन्न प्रकार के खाद्य-स्रोतों, जैसे फलों, वनस्पतियों, बीजों, काष्ठफलों, पक्षियों के अण्डों और मीठे जल की मछलियों (ट्राउट, पर्च और कार्प) के साक्ष्य मिले हैं। दक्षिणी फ्रांस के समुद्रतट पर स्थित टेरा अमाटा नामक पुरास्थल में भी घास-फूँस और लकड़ी की छत वाली कच्ची कमजोर झोंपड़ियाँ बनाई जाती थीं।

ये झोंपड़ियाँ किसी विशेष मौसम में थोड़े समय के लिए रहने के लिए बनाई जाती थीं। टेरा अमाटा की झोंपड़ी-टेरा अमाटा की झोंपड़ी के किनारों को सहारा देने के लिए बड़े पत्थरों का प्रयोग किया जाता था। झोंपड़ी के फर्श पर बिखरे हुए पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े उन स्थानों के द्योतक हैं जहाँ बैठकर लोग पत्थर के औजार बनाते थे। यहाँ चूल्हे भी बने हुए थे।

(2) केन्या में चेसोवांजा और दक्षिणी अफ्रीका में स्वार्टक्रान्स में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े मिले हैं जो 14 लाख से 10 लाख वर्ष पुराने हैं। हमारे पास इस बात की निश्चित जानकारी नहीं है कि ये चीजें प्राकृतिक रूप से झाड़ियों में लगी आग या ज्वालामुखी से उत्पन्न अग्नि से जलने के परिणाम हैं अथवा ये चीजें एक सुनियोजित, सुनियन्त्रित ढंग से लगाई गई आग में पकाकर बनाई गई थीं।

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(3) दूसरी ओर चूल्हे आग के नियन्त्रित प्रयोग के परिचायक हैं। इसके निम्नलिखित लाभ थे –

  • नियन्त्रित आग का प्रयोग गुफाओं के अन्दर प्रकाश और उष्णता प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
  • इससे भोजन भी पकाया जा सकता था।
  • लकड़ी को कठोर करने में भी अग्नि का प्रयोग होता था जैसाकि भाले की नोक बनाने में।
  • शल्क निकाल कर औजार बनाने में भी अग्नि की उष्णता उपयोगी होती थी।
  • इसका उपयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में भी किया जाता था।

प्रश्न 4.
आल्टामीरा के गुफा – चित्र की खोज का विवरण दीजिए।
उत्तर:
आल्टामीरा के गुफा – चित्र की खोज – आल्टामीरा स्पेन में स्थित एक गुफा – स्थल है। इस गुफा -स्थल में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। आल्टामीरा की गुफा की छत पर बनी चित्रकारियों की ओर मार्सिलीनो सैंज दि ओला का ध्यान उसकी पुत्री मारिया द्वारा नवम्बर, 1879 में आकर्षित किया गया था। मार्सीलीनो एक स्थानीय जमींदार तथा एक शौकीन पुरातत्त्वविद् था। वह गुफा का फर्श खोद रहा था तथा उसकी छोटी-सी पुत्री गुफा में इधर-उधर दौड़ रही थी। मारिया की नजर अचानक गुफा की छत पर बनी चित्रकारियों पर पड़ी।

उसने तुरन्त ‘चिल्लाते हुए कहा “पापा देखो बैल!” प्रारम्भ में तो मारिया के पिता ने अपनी पुत्री की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया परन्तु शीघ्र ही उसने महसूस किया कि गुफा की छत पर वास्तव में कुछ चित्रकारियाँ बनी हुई हैं जिनमें रंग की बजाय किसी प्रकार की लेई (पेस्ट) का प्रयोग किया गया है। मार्सीलोना का मन उत्साह से भर गया और इस नवीन खोज पर अत्यधिक प्रसन्न हुआ। 1880 में मार्सीलीनो ने एक पुस्तिका प्रकाशित की परन्तु लगभग 20 वर्षों तक उसकी खोज के निष्कर्षों को यूरोप के पुरातत्त्वविदों ने इस आधार पर स्वीकार नहीं किया कि ये चित्रकारियाँ इतनी अधिक अच्छी हैं कि ये उतनी प्राचीन नहीं हो सकतीं।

प्रश्न 5.
सम्प्रेषण तथा संचार के माध्यम के रूप में भाषा तथा कला के विकास की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सम्प्रेषण तथा संचार के माध्यम के रूप में भाषा तथा कला का विकास मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है। भाषा के विकास के सम्बन्ध में निम्नलिखित मत प्रचलित
(1) होमिनिड भाषा में अंगविक्षेप (हाव-भाव ) या हाथों का संचालन ( हिलाना) शामिल था।
(2) उच्चरित या बोली जाने वाली भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अ – शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
(3) मनुष्य की वाणी का प्रारम्भ सम्भवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसाकि नर – वानरों में देखा जाता है। प्रारम्भिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। धीरे-धीरे ये ध्वनियाँ ही आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होंगी।

(1) बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति – उच्चरित या बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि होमो हैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना सम्भव हुआ होगा। इस प्रकार सम्भवतः भाषा का विकास सबसे पहले 20 लाख वर्ष पूर्व शुरू हुआ होगा। मस्तिष्क में हुए परिवर्तनों के अतिरिक्त, स्वर-तन्त्र का विकास भी उतना ही महत्त्वपूर्ण था। स्वर – तन्त्र का विकास लगभग 2,00,000 वर्ष पहले हुआ था! इसका सम्बन्ध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है।

(2) भाषा का कला के साथ विकास – कुछ विद्वानों के अनुसार भाषा, कला के साथ-साथ लगभग 40,000- 35,000 वर्ष पूर्व विकसित हुई। बोली जाने वाली भाषा का विकास कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा रहा है, क्योंकि ये दोनों ही विचार – अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

(3) जानवरों की चित्रकारियाँ – फ्रांस में स्थित लैसकाक्स और शोवे की गुफाओं में तथा स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं जो 30,000 से 12,000 वर्ष पहले के बीच में कभी बनाई गई थीं। इनमें गौरों (जंगली बैलों), घोड़ों, साकिन, हिरणों, मैमथों (विशालकाय जानवरों), गैंडों, शेरों, भालुओं, तेन्दुओं, लकड़बग्घों और उल्लुओं के चित्र शामिल हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार जानवरों की चित्रकारियाँ धार्मिक क्रियाओं, रस्मों तथा जादू-टोने से सम्बन्धित थीं।

JAC Class 11 History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

लोगों का विश्वास था कि जानवरों के चित्र बनाने से शिकार करने में सफलता मिलने की सम्भावना थी। इस सम्बन्ध में यह भी कहा जाता है कि सम्भवतः ये गुफाएँ संगम-स्थल थीं जहाँ लोगों के छोटे-छोटे समूह मिलते थे और सामूहिक क्रिया- कलाप सम्पन्न करते थे। सम्भव है कि वहाँ ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते थे या शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा करते थे । यह भी सम्भव है कि ये चित्रकारियाँ आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों।

प्रश्न 6.
हादज़ा जन-समूह की गतिविधियों पर एक निबन्ध लिखिए।
अथवा
हाजा जन-समूह के रहन-सहन के बारे में आप क्या जानते हैं?
अथवा
हाजा जन-समूह के निवास स्थल, रहन-सहन, खान-पान आदि के बारे में जानकारी दीजिये।
उत्तर:
(1) हादजा जन-समूह का निवास स्थान- हादजा जन-समूह शिकारियों तथा संग्राहकों का एक छोटा समूह है जो ‘लेक इयासी’ नामक एक खारे पानी की विभ्रंश घाटी में बनी झील के आस-पास रहते हैं। पूर्वी हादजा का प्रदेश सूखा और चट्टानी है जहाँ घास (सवाना), काँटेदार झाड़ियाँ और एकासियों के पेड़ों की बहुलता है, परन्तु यहाँ जंगली खाद्य वस्तुएँ प्रचुर मात्रा में मिलती हैं।

(2) जानवर-हादजा प्रदेश में अनेक प्रकार के जानवर बड़ी संख्या में पाये जाते हैं। यहाँ के बड़े जानवरों में हाथी, गैंडे, भैंसे, जिराफ, जेब्रा, वाटरबक, हिरण, चिंकारा, खागदार जंगली सूअर, बबून बन्दर, शेर, तेन्दुए,

(i) आज के शिकारी-संग्राहक समाज शिकार और संग्रहण के साथ-साथ अनेक अन्य आर्थिक क्रियाकलापों में लगे रहते हैं। वे जंगलों में पाई जाने वाली छोटी-छोटी चीजों का विनिमय और व्यापार करते हैं अथवा पड़ोस के किसानों के खेतों में मजदूरी करते हैं।

(ii) ये समाज भौगोलिक, राजनीतिक तथा सामाजिक दृष्टियों से भी महत्त्वहीन हैं क्योंकि वे जिन परिस्थितियों में रहते हैं, वे आरम्भिक मानव की अवस्था से बहुत भिन्न हैं।

(iii) आज के शिकारी-संग्राहक समाजों में आपस में भी बहुत भिन्नता है। इनमें कई मामलों में परस्पर-विरोधी तथ्य दिखाई देते हैं। आज के सभी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं, उनके आकार भिन्न- भिन्न अर्थात् छोटे-बड़े होते हैं और उनकी गतिविधियों में भी अन्तर पाया जाता है।

(iv) भोजन प्राप्त करने के मामले में श्रम विभाजन को लेकर भी इन समाजों में कोई आम सहमति नहीं है। यह ठीक है कि आज भी अधिकतर स्त्रियाँ ही खाने-पीने की सामग्री जुटाने का काम करती हैं और पुरुष शिकार करते हैं। परन्तु ऐसे समाज भी मौजूद हैं जहाँ स्त्री और पुरुष दोनों ही शिकार और संग्रहण तथा औजार बनाने का कार्य करते हैं।

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि ऐसे समाजों में स्त्रियाँ भी भोजन जुटाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अत: हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों में स्त्री-पुरुष दोनों की भूमिका अपेक्षाकृत एकसमान ही होती है, यद्यपि इसमें समाजों के अन्तर्गत कुछ अन्तर पाया जाता है। अतः वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों की स्थिति के आधार पर अतीत के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना कठिन है।

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