JAC Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Jharkhand Board JAC Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव Textbook Exercise Questions and Answers.

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Jharkhand Board Class 11 History संस्कृतियों का टकराव In-text Questions and Answers

पृष्ठ 170

क्रियाकलाप 1 : अरावाकों और स्पेनवासियों के बीच पाए जाने वाले अन्तरों को स्पष्ट कीजिए। इनमें से कौनसे अन्तरों को आप सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मानते हैं और क्यों?
उत्तर:
अरावाकों और स्पेनवासियों के बीच पाए जाने वाले अन्तर –
(1) कैरीबियन द्वीप-समूहों में रहने वाले अरावाक शान्तिप्रिय थे तथा लड़ने की बजाय वार्तालाप द्वारा झगड़े निपटाना चाहते थे। दूसरी ओर स्पेनवासी अच्छे योद्धा तथा साम्राज्यवादी थे। वे अपनी सैन्य शक्ति के बल पर अमेरिका में अपने उपनिवेश स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील रहते थे।

(2) अरावाक लोगों के पास एक शक्तिशाली तथा प्रशिक्षित सेना का अभाव था जबकि स्पेनवासियों के पास घोड़ों के प्रयोग पर आधारित एक शक्तिशाली सेना थी।

(3) अरावाक लोग सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। उन्हें यदि यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके दे देते थे, तो वे प्रसन्न हो जाते थे। इसके विपरीत स्पेनवासी सोना-चाँदी प्राप्त करने के लिए लालायित रहते थे। वे उचित- अनुचित सभी प्रकार के तरीकों द्वारा अधिकाधिक सोना-चाँदी प्राप्त करना चाहते थे।

(4) अरावाक लोगों का व्यवहार बहुत उदारतापूर्ण होता था और वे सोने की तलाश में स्पेनी लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। इसके विपरीत स्पेनी लोग बड़े स्वार्थी, लालची तथा क्रूर होते थे। उन्होंने सोना-चाँदी प्राप्त करने के लिए अऱावक लोगों पर भारी अत्याचार किये। उन्होंने अराबाक लोगों को गुलाम बनाकर सोने-चाँदी की खानों में काम करने के लिए बाध्य किया।

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(5) अरावाक लोग अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी थे। परन्तु स्पेन के लोग अभिजात वर्ग, पादरी वर्ग तथा कृषक वर्ग तथा व्यापारी वर्ग आदि में विभाजित थे।

(6) अरावाक लोगों के पास बन्दूकों, बारूद और उत्तम घोड़ों का अभाव था परन्तु स्पेन के पास एक शक्तिशाली सेना थी। उनके सैनिकों के पास बन्दूकें, गोला-बारूद और उत्तम घोड़े थे।

पृष्ठ 177

क्रियाकलाप 3 : आपके विचार से ऐसे कौनसे कारण थे, जिनसे प्रेरित होकर यूरोप के भिन्न-भिन्न देशों के लोगों ने खोज यात्राओं पर जाने का जोखिम उठाया?
उत्तर:
खोज – यात्राओं के कारण – यूरोप के भिन्न-भिन्न देशों के लोगों द्वारा खोज – यात्राएँ करने के निम्नलिखित कारण थे –
(1) 1380 ई. में कुतुबनुमा का आविष्कार हो चुका था। 15वीं शताब्दी में इसका प्रयोग समुद्री यात्राओं में होने लगा।

(2) 1477 में टालेमी की ‘ज्योग्राफी’ नामक पुस्तक प्रकाशित हुई। इस पुस्तक के अध्ययन से यूरोपवासियों को संसार के बारे में काफी जानकारी मिली जिसे उन्होंने तीन महाद्वीपों अर्थात् यूरोप, एशिया और अफ्रीका में बँटा हुआ समझा। यूरोपवासियों को इस बात का कोई अनुमान नहीं था कि अटलान्टिक के दूसरी ओर भूमि पर पहुँचने के लिए कितनी दूरी तय करनी होगी। उनका विचार था कि यह दूरी बहुत कम होगी, इसलिए अनेक साहसिक लोग समुद्रों में यात्रा करने के लिए उत्सुक रहते थे।

(3) 14वीं शताब्दी के मध्य से 15वीं शताब्दी के मध्य तक यूरोप की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ गई। वहाँ व्यापार में मंदी आ गई तथा सोने और चाँदी की कमी आ गई। 1453 में तुर्कों ने कुस्तुन्तुनिया पर अधिकार कर लिया। यद्यपि इटलीवासियों ने तुर्कों के साथ व्यवसाय करने की व्यवस्था तो कर ली, परन्तु उन्हें व्यापार पर अधिक कर देना पड़ता था। अतः अब यूरोपवासी पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने हेतु नये समुद्री मार्ग खोजने लगे।

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(4) यूरोप के धर्मपरायण ईसाई विभिन्न देशों की खोज करके वहाँ ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे

(5) धर्म-युद्धों के कारण एशिया और यूरोप के बीच व्यापार में वृद्धि हुई। अब यूरोपवासियों की एशिया के उत्पादों, विशेषकर मसालों के प्रति रुचि बढ़ गई।

(6) यूरोपवासी सोने और मसालों की तलाश में नए-नए प्रदेशों की खोज करने लगे। इस प्रकार स्पेनवासियों ने मुख्यतः आर्थिक कारणों से प्रेरित होकर नये-नये देशों की खोज करना शुरू कर दिया।

पृष्ठ 181

क्रियाकलाप 4: दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों पर यूरोपीय लोगों के सम्पर्क से क्या प्रभाव पड़ा ? विश्लेषण कीजिए। यूरोप से आकर दक्षिणी अमेरिका में बसे लोगों और जेसुइट पादरियों के प्रति स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों पर यूरोपवासियों के सम्पर्क से प्रभाव –
(1) यूरोपवासियों की मार-काट के कारण दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई, उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया और उन्हें गुलाम बनाकर खानों, बागानों तथा कारखानों में उनसे काम लिया जाने लगा।

(2) वहाँ दास प्रथा को प्रोत्साहन मिला। दक्षिणी अमेरिका के पराजित लोगों को गुलाम बना लिया जाता था।

(3) वहाँ उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली का प्रादुर्भाव हुआ। अधिक से अधिक धन कमाने के लिए यूरोपवासी यहाँ के स्थानीय लोगों का शोषण करते थे जिससे उनकी स्थिति अत्यन्त शोचनीय हो गई।

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(4) दक्षिणी अमेरिका में नई-नई आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गईं। जंगलों का सफाया करके प्राप्त की गई भूमि पर पशु-पालन किया जाने लगा। 1700 में सोने की खोज के बाद खानों का काम चल पड़ा और इन सभी कामों के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। अतः बड़ी संख्या में गुलाम अफ्रीका से मँगवाये गए।

(5) स्पेनी अभियानों के कारण भारी संख्या में एजटेक लोग मारे गए। इसके अतिरिक्त स्पेनियों के साथ आई चेचक की महामारी से भी हजारों एजटेक लोग मौत के मुँह में चले गए।

(6) अमेरिकी लोगों की पाण्डुलिपियों तथा स्मारकों को निर्ममतापूर्वक नष्ट कर दिया गया।

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लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एजटेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक लोगों की सभ्यता की विशेषताएँ –

  1. एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। समाज में अभिजात, योद्धाओं, व्यापारियों, शिल्पियों, किसानों व दासों में विभाजित था। प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को आदर की दृष्टि से देखा जाता था।
  2. एजटेक लोगों ने मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाये। राजधानी में बने हुए राजमहल और पिरामिड झील के बीच में खड़े हुए बड़े आकर्षक लगते थे।
  3. साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। ये लोग मक्का, फलियाँ, कद्दू, कसावा, आलू आदि की फसलें उगाते थे।
  4. एजटेक लोग अपने बच्चों को स्कूलों में भेजते थे।
  5. दास-प्रथा प्रचलित थी। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को भी गुलामों के रूप में बेच देते थे।
  6. एजटेक लोगों की लिपि चित्रात्मक थी।
  7. एजटेक लोग अच्छे भवन निर्माता थे। उन्होंने अनेक भव्य मन्दिरों का निर्माण किया। उनके सर्वाधिक भव्य मन्दिर भी युद्ध के देवताओं और सूर्य भगवान की समर्पित थे।
  8. एजटेक लोगों उनके देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य, युद्ध का देवता आदि उनके प्रमुख देवता थे।
  9. एजटेक लोग इस बात का पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ।

मेसोपोटामिया की सभ्यता की विशेषताएं –

  1. मेसोपोटामियावासी गेहूँ, जौ, मटर, मसूर की खेती करते थे। खेतों की सिंचाई की जाती थी। ये लोग भेड़, बकरी आदि अनेक जानवर पालते थे।
  2. मेसोपोटामिया के लोगों ने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। उनकी लिपि ‘क्यूनीफार्म’ कहलाती थी।
  3. ये लोग काँसा, टिन, ताँबा आदि धातुओं से परिचित थे।
  4. मेसोपोटामियावासी लकड़ी, ताँबा, राँगा, चाँदी, सोना, सीपी आदि तुर्की, ईरान आदि से मँगाते थे तथा वे अपना कपड़ा, कृषि जन्य उत्पाद उन्हें निर्यात करते थे।
  5. इनका समाज उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग और दास वर्ग में विभक्त था।
  6. मेसोपोटामिया में अनेक मन्दिर बने हुए थे। मन्दिरों में अनेक देवी-देवताओं की उपासना की जाती थी। उर तथा इन्नाना प्रमुख देवी – देवता थे।
  7. कुम्हार चाक से बर्तन बनाते थे।
  8. युद्ध-बन्दियों और स्थानीय लोगों को अनिवार्य रूप से मन्दिर का अथवा शासक का काम करना पड़ता था। उन्हें काम के बदले अनाज दिया जाता था।
  9. समाज में एकल परिवार की प्रथा प्रचलित थी।
  10. उन्होंने चन्द्रमा के आधार पर एक पंचांग बनाया। उन्होंने एक वर्ष को 12 महीनों में, एक महीने को 30 दिनों में, एक दिन को 24 घण्टों में, एक घण्टे को 60 मिनट में विभाजित किया।

प्रश्न 2.
ऐसे कौनसे कारण थे जिनसे 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली?
उत्तर:
यूरोपीय नौचालन – 15वीं शताब्दी में निम्नलिखित कारणों से यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली –
(1) 1380 ई. में कुतुबुनुमा अर्थात् दिशा सूचक यन्त्र का आविष्कार हो चुका था। इससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिलती थी।

(2) समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण होने लगा था, जो विशाल मात्रा में माल की ढुलाई करते थे। ये जहाज आत्म-रक्षा के अस्त्र- -शस्त्रों से भी सुसज्जित होते थे ताकि शत्रुओं के आक्रमण का मुकाबला किया जा सके।

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(3) 15वीं सदी के अन्तर्गत यात्रा – – वृत्तान्तों और सृष्टि-वर्णन तथा भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने यूरोपीय लोगों में समुद्री खोजों के प्रति रुचि उत्पन्न की।

(4) 1477 में टालेमी की पुस्तक ‘ज्योग्राफी’ प्रकाशित हुई । टालेमी ने विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति को अक्षांश और देशान्तर रेखाओं के रूप में व्यवस्थित किया था। इसके अध्ययन से यूरोपवासियों को विश्व के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली। टालेमी ने यह भी बताया कि पृथ्वी गोल है।

(5) 1453 में कुस्तुन्तुनिया पर तुर्कों का अधिकार हो जाने से यूरोपवासियों को नये समुद्री मार्ग खोजने की प्रेरणा मिली।

(6) स्पेन और पुर्तगाल के लोग महत्त्वाकांक्षी थे तथा नये देशों की खोज कर वहाँ अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते थे। स्पेन तथा पुर्तगाल के शासक सोना तथा धन-सम्पत्ति के भण्डार प्राप्त करना चाहते थे। वे नये-नये प्रदेशों की खोज करके वहाँ अपने साम्राज्य स्थापित करके यश और सम्मान प्राप्त करने हेतु लालायित थे।

(7) यूरोपीय लोग बाहरी विश्व के लोगों को ईसाई बनाना चाहते थे। इसने भी यूरोप के धर्मपरायण ईसाइयों को इन साहसिक कार्यों की ओर उन्मुख किया।

प्रश्न 3.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पन्द्रहवीं शताब्दी में. सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया?
उत्तर:
स्पेन और पुर्तगाल द्वारा अटलांटिक महासागर के पार जाने के कारण –
(1) स्पेन में आर्थिक कारणों ने लोगों को ‘महासागरीय शूरवीर’ बनने के लिए प्रोत्साहन दिया। धर्म- युद्धों की स्मृति और रीकां क्विस्टा (ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन द्वीप पर प्राप्त की गई विजय ) की सफलता ने स्पेन के लोगों को उत्साहित किया और इकरारनामों को प्रारम्भ किया। इन इकरारनामों के तहत स्पेन का शासक नये विजित क्षेत्रों पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित कर लेता था और उन्हें जीतने वाले अभियानों के नेताओं को पुरस्कार के रूप में उपाधियाँ और विजित देशों पर शासनाधिकार प्रदान करता था।

(2) स्पेन और पुर्तगाल के शासक नई समुद्री खोजों के लिए सदैव धन जुटाने को तैयार रहते थे। वे नाविकों और साहसी यात्रियों को नये-नये देशों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित करते थे और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करते थे। स्पेन के शासक ने कोलम्बस को नई समुद्री खोजों के लिए प्रोत्साहित किया। पुर्तगाल का राजकुमार हेनरी नाविक के नाम से प्रसिद्ध था। उसने पश्चिमी अफ्रीका की तटीय यात्रा की और 1405 में सिउटा पर अधिकार कर लिया।

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(3) चौदहवीं शताब्दी के मध्य से पन्द्रहवीं शताब्दी के मध्य तक यूरोप की अर्थव्यवस्था में गिरावट आ गई थी।. व्यापार में मन्दी आ गई तथा वहाँ सोने-चाँदी की कमी आ गई।

(4) स्पेन और पुर्तगाल के धर्म-परायण ईसाई बाहरी दुनिया के लोगों को ईसाई बनाने के लिए लालायित थे।

(5). स्पेनी और पुर्तगाली सोने और मसालों की खोज में नये-नये प्रदेशों में जाने के लिए उत्सुक रहते थे।

(6) 1453 में तुर्कों ने कुस्तुन्तुनिया पर अधिकार कर लिया। इससे व्यापार करना कठिन हो गया। अतः यूरोपवासियों ने पूर्वी देशों से व्यापार के लिए नये समुद्री मार्गों की तलाश करना शुरू कर दिया।

(7) स्पेन और पुर्तगाल के लोग बाहरी दुनिया के लोगों को ईसाई बनाने के लिए लालायित थे। इस कारण भी वे नवीन समुद्री मार्गों की खोज के लिए उन्मुख हुए।

प्रश्न 4.
कौनसी नई खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमेरिका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका से मक्का, आलू, कसावा, कुमाला, तम्बाकू, गन्ने की चीनी, ककाओ, रबड़, लाल मिर्च आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया को भेजी जाती थीं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 5.
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करें।
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा – ब्राजील पर पुर्तगालियों का अधिकार था। ब्राजील में इमारती लकड़ी बड़े पैमाने पर उपलब्ध थी। पुर्तगालियों ने स्थानीय लोगों को गुलाम बनाना शुरू कर दिया। 1540 के दशक में पुर्तगालियों ने बड़े – बड़े बागानों में गन्ना उगाना और चीनी बनाने के लिए मिलें चलाना शुरू कर दिया। यह चीनी यूरोप के बाजारों में बेची जाती थी।

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बहुत ही गर्म तथा नम जलवायु में चीनी मिलों में काम करने के लिए पुर्तगाली लोग स्थानीय लोगों पर निर्भर थे। परन्तु जब उन लोगों ने इस थकाने वाले नीरस काम को करने से इनकार कर दिया तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण करवाकर उन्हें गुलाम बनाना शुरू कर दिया। इस पर स्थानीय लोग इन गुलाम बनाने वाले मिल मालिकों से बचने के लिए जंगलों में भागने लगे। विवश होकर मिल मालिकों ने अफ्रीका से गुलाम प्राप्त करने का निश्चय किया। अतः अंगोला से एक 17 वर्षीय अफ्रीकी को गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील लाया गया।

इस सत्रह वर्षीय लड़के की ब्राजील – यात्रा बड़ी कष्टदायक थी। उसे सैकड़ों अन्य गुलामों के साथ पकड़कर एक जहाज द्वारा ब्राजील लाया गया था। इस यात्रा में उसे किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी गई थी। उसे पशुओं की भाँति जहाज में ठूंस कर लाया गया। उसकी गतिविधियों पर कठोर नजर रखी जाती थी।

उसे बेड़ियों में जकड़ कर रखा जाता था ताकि वह भागने का प्रयास न करे। उसे भर पेट भोजन नहीं दिया जाता था। उससे जहाज पर कठोर परिश्रम करवाया जाता था और साधारण-सी गलती करने पर उसे कोड़ों से पीटा जाता था। पुर्तगाली लोग बड़े क्रूर थे और वे गुलामों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार करते थे। उससे बेगार ली जाती थी। उसे काम के बदले में कुछ भी पारिश्रमिक नहीं दिया जाता था। इस प्रकार उसके साथ कई दिनों तक अमानवीय व्यवहार किया गया और उसे अमानुषिक यातनाएँ सहनी पड़ीं।

प्रश्न 6.
दक्षिणी अमरीका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया?
उत्तर:
यूरोपीय उपनिवेशवाद का विकास – दक्षिण अमरीका की खोज ने यूरोपीय देशों को वहाँ अपने उपनिवेश स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस सन्दर्भ में स्पेन तथा पुर्तगाल को विशेष सफलताएँ मिलीं और उन्हें दक्षिण अमेरिका में अपने उपनिवेश स्थापित करने का अवसर मिल गया।

1. स्पेन के उपनिवेशवाद का विकास – कोलम्बस द्वारा अमेरिका की खोज के बाद स्पेन को दक्षिणी अमेरिका में अपने उपनिवेश स्थापित करने की प्रेरणा मिली। स्पेनवासी धन-लोलुप थे। वे दक्षिणी अमेरिकी से सोना-चाँदी प्राप्त कर अपने देश में लाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न प्रदेशों में जाकर बसना शुरू कर दिया। स्पेन के पास एक शक्तिशाली सेना थी। अतः उसने बारूद और घोड़ों के प्रयोग पर आधारित सैन्य शक्ति के बल पर दक्षिणी अमेरिका में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों को कर, भेंट देने तथा सोने-चाँदी की खानों में काम करने के लिए बाध्य किया।

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स्थानीय प्रधानों को नये-नये प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था। जब स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया, तो स्पेन के सैनिकों ने उनका कठोरतापूर्वक दमन किया। लम्बस के अभियानों के बाद आधी शताब्दी में ही स्पेनवासियों ने मध्यवर्ती तथा दक्षिणी अमेरिका में लगभग 40 डिग्री उत्तरी से 40 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक के समस्त क्षेत्र को खोज लिया और उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। मैक्सिको तथा इंका साम्राज्य पर अधिकार – स्पेन के निवासी कोर्टेस तथा उसके सैनिकों ने सरलता से मैक्सिको पर अधिकार कर लिया। 1519 में स्पेनी सैनिकों ने ट्लैक्सकलानों को पराजित कर टेनोक्ट्रिटलैन पर अधिकार कर लिया।

जब यहाँ के एजटेक लोगों ने स्पेन के साम्राज्यवाद का विरोध किया, तो स्पेन की सेना ने एजटेक लोगों के विद्रोह को कुचल दिया और अनेक विद्रोहियों को मौत के घाट उतार दिया। 1532 में स्पेन के निवासी पिजारों ने इंका – साम्राज्य पर अधिकार कर लिया। स्पेन के सैनिकों की दमनकारी नीति के विरुद्ध 1534 में इंका – साम्राज्य के लोगों ने विद्रोह कर दिया, जो दो वर्ष तक जारी रहा। इस अवधि में हजारों विद्रोही मारे गये। अगले पाँच वर्षों में स्पेनियों ने पोटोसी (ऊपरी पेरू) की खानों में चाँदी के विशाल भण्डारों का पता लगा लिया और उन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को गुलाम बना लिया।

2. पुर्तगाल के उपनिवेशवाद का विकास – पुर्तगाली कुशल नाविक तथा महत्त्वाकांक्षी लोग थे। दक्षिणी अमरीका की खोज के बाद पुर्तगालियों ने भी वहाँ अपने उपनिवेश स्थापित करने शुरू कर दिये। 1500 ई. में पुर्तगाल निवासी कैब्राल जहाजों का एक बेड़ा लेकर ब्राजील पहुँच गया। ब्राजील में इमारती लकड़ी बड़े पैमाने पर उपलब्ध थी। इमारती लकड़ी के इस व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों के बीच भीषण लड़ाइयाँ हुईं।

अन्त में इनमें पुर्तगालियों की विजय हुईं क्योंकि वे स्वयं तटीय क्षेत्र में बसना तथा उपनिवेश स्थापित करना चाहते थे 1534 में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवंशिक कप्तानों में बाँट दिया। उनके मालिकाना अधिकार उन पुर्तगालियों को दे दिये गये जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उन्हें स्थानीय लोगों को गुलाम बनाने का भी अधिकार दे दिया गया। 1540 के दशक में पुर्तगालियों ने बड़े-बड़े बागानों में गन्ने उगाना और चीनी बनाने के लिए मिलें चलाना शुरू कर दिया। 1549 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औपचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया ( सैल्वाडोर) को उसकी राजधानी बनाया गया।

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संस्कृतियों का टकराव JAC Class 11 History Notes

पाठ-सार

1. कैरीबियन द्वीप समूह और ब्राजील के जन-समुदाय – अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीप समूहों और बृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे –
(i) अरावाक – अरावाक लोग शान्तिप्रिय थे तथा बातचीत से झगड़े निपटाना अधिक पसन्द करते थे। वे खेती, शिकार और मछली पकड़कर अपना जीवन-निर्वाह करते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। वे सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। वे बुनाई में निपुण थे। उनका व्यवहार उदारतापूर्ण होता था।

(ii) तुपिनांबा – तुपिनांबा लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्री तट पर और ब्राजील नामक पेड़ों के जंगलों में बसे हुए गाँवों में रहते थे। वहाँ फल, सब्जियाँ तथा मछलियाँ बहुतायत में उपलब्ध थीं। इससे उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा।

2. मध्य और दक्षिणी अमरीका की राज-व्यवस्थाएँ – मध्य और दक्षिणी अमरीका में एजटेक, माया तथा इंका जनसमुदाय निवास करते थे। यथा –
(i) एजटेकजन – बारहवीं शताब्दी में एजटेक लोग उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात लोग अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। एजटेक लोगों ने मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाए। उनके द्वारा निर्मित राजमहल तथा पिरामिड बड़े सुन्दर थे। वे अपने बच्चों को स्कूलों में भेजते थे। कुलीन वर्ग के बच्चे सेना अधिकारी और धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षण लेते थे।

(ii) माया लोग – मैक्सिको की माया संस्कृति की ग्यारहवीं शताब्दी से चौदहवीं शताब्दी के बीच महत्त्वपूर्ण उन्नति हुई। वहाँ मक्के की खेती खूब होती थी। उनके खेती करने के तरीके उन्नत थे। माया लोगों ने वास्तुकला, खगोल विज्ञान, गणित आदि में भी प्रगति की।

(iii) पेरू के इंका लोग – दक्षिणी अमेरिकी देशों की संस्कृतियों में सबसे बड़ी संस्कृति पेरू में क्वेचुआ या इंका लोगों की संस्कृति थी। इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक 3000 मील में फैला हुआ था। राजा सर्वोच्च अधिकारी था। अनुमानतः इस साम्राज्य में 10 लाख से अधिक लोग रहते थे। इंका लोग उच्चकोटि के भवन निर्माता थे। उन्होंने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से लेकर चिली तक अनेक सड़कें नाई थीं। उनके किले शिलापट्टियों को बारीकी से तराश कर बनाये जाते थे । राजमिस्त्री खण्डों को सुन्दर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। इंका सभ्यता का आधार कृषि था। उनकी बुनाई और मिट्टी के बर्तन बनाने की कला उच्चकोटि की थी।

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3. यूरोपवासियों की खोज यात्राएँ –
(i) स्पेन और पुर्तगाल के लोग खोज – यात्राओं में सबसे आगे थे। स्पेन और पुर्तगाल के शासक आर्थिक, धार्मिक तथा राजनीतिक कारणों से समुद्री यात्राओं के लिए प्रेरित हुए। ये देश सोने-चाँदी तथा मसालों की खोज में नए-नए प्रदेशों में जाने की योजना बनाने लगे। पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी ने पश्चिमी अफ्रीका की तटीय यात्रा आयोजित की और 1415 में सिउय पर आक्रमण कर दिया। पुर्तगालियों ने अफ्रीका के बोजाडोर अन्तरीप में अपना व्यापार केन्द्र स्थापित कर लिया। अफ्रीकियों को बड़ी संख्या में गुलाम बना लिया गया।

(ii) स्पेन में आर्थिक कारणों ने लोगों को ‘महासागरीय शूरवीर’ बनने के लिए प्रोत्साहित किया। इकरारनामों के अन्तर्गत स्पेन का शासक नये विजित प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित कर लेता था।

4. अटलांटिक पारगमन –
(i) 3 अगस्त, 1492 को कोलम्बस ने जहाजों और नाविकों के साथ पश्चिम की ओर प्रस्थान किया। अन्त में 12 अक्टूबर, 1492 को कोलम्बस बहामा द्वीप समूह पहुँच गया। अरावाक लोगों ने नाविकों का स्वागत किया। कोलम्बस ने इस स्थान का नाम सैन सैल्वाडोर रखा और अपने आपको वायसराय घोषित कर दिया। आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं जिनके दौरान कोलम्बस ने बहामा और बृहत्तर ऐंटिलीज द्वीपों, दक्षिणी अमरीका की मुख्य भूमि और उसके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। बाद में पता चला कि इन स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप ही खोज निकाला।

(ii) कोलम्बस के द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमरीका का नामकरण फ्लोरेंन्स के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ के नाम पर किया गया जिसने उन्हें ‘नई दुनिया’ की संज्ञा दी।

5. अमेरिका में स्पेन के साम्राज्य की स्थापना –
(i) अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार बारूद और घोड़ों के प्रयोग पर आधारित सैन्य शक्ति के आधार पर हुआ । स्पेनी लोग वहाँ बस्ती बसाते थे तथा स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। सोने के लालच में स्पेनी लोग स्थानीय शान्तिप्रिय अरावाक लोगों पर अत्याचार करते थे। चेचक जैसी महामारी के कारण भी अरावाकों को बड़ी संख्या में मौत के मुँह में जाना पड़ा।

(ii) कोलम्बस के बाद स्पेनवासियों ने मध्यवर्ती और दक्षिणी अमरीका में खोज का कार्य जारी रखा। आधी शताब्दी में ही स्पेनवासियों ने लगभग 40 डिग्री उत्तरी से 40 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक के समस्त क्षेत्र को खोज निकाला और उस पर अधिकार कर लिया।

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(iii) स्पेन के दो व्यक्तियों हरमन कोर्टेस तथा फ्रांसिस्को पिजारो ने दो बड़े साम्राज्यों को जीत कर उन्हें स्पेन के अधीन किया। उनके अभियानों का ख़र्चा स्पेन के जमींदारों, नगर परिषदों के अधिकारियों और अभिजात वर्ग ने उठाया था।

6. कोर्टेस और एजटेक लोग –
(i) कोर्टेस और उसके सैनिकों ने बड़ी सरलता से मैक्सिको को जीत लिया। 1519 में कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था जहाँ उसने टाटानैक लोगों से मैत्री कर ली। स्पेनी सैनिकों ने ट्लैक्सक्लानों को पराजित कर दिया और टेनोक्ट्रिटलैन नगर पर अधिकार कर लिया।

(ii) एजटेक के शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का स्वागत किया और उसे बहुमूल्य उपहार दिए। परन्तु कोर्टेस ने सम्राट को नजरबन्द कर लिया और उसके नाम पर शासन चलाने लगा।

(iii) कोर्टेस के क्यूबा लौट जाने के बाद स्पेनी शासन के अत्याचारों के कारण सामान्य जनता ने विद्रोह कर दिया। इस पर कोर्टेस के सहायक ऐल्वारैडो ने कत्ले-आम का आदेश दे दिया। जब 25 जून, 1520 को कोर्टेस वापस लौटा तो उसे भीषण संकटों का सामना करना पड़ा और उसे विवश होकर वापस लौटना पड़ा।

(iv) इसी समय मोटेजुमा की मृत्यु हो गई। एजटेकों तथा स्पेनियों के बीच लड़ाई चलती रही। उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आई चेचक के प्रकोप से मौत के मुँह में जा रहे थे। मेक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टेस मैक्सिको में न्यू स्पेन का कैप्टन जनरल बन गया। मैक्सिको में स्पेनियों ने ग्वातेमाला, निकारागुआ और होंडुरास पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया।

7. पिजारो और इंका लोग –
(i) पिजारो एक निर्धन और अनपढ़ व्यक्ति था। वह सेना में भर्ती होकर 1502 में कैरीबियन द्वीप-समूह में आया था। स्पेन के राजा ने पिजारो को यह वचन दिया था कि यदि वह इंका प्रदेश पर विजय प्राप्त कर लेगा, तो उसे वहाँ का राज्यपाल बना दिया जायेगा।

(ii) 1532 में अताहुआल्पा ने इंका साम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। पिजारो वहां पहुँच गया और धोखे से वहाँ के राजा को बन्दी बना लिया। राजा ने अपने आप को मुक्त कराने के लिए एक कमरा – भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव किया, परन्तु पिजारो ने राजा का वध करवा दिया। पिजारो के सैनिकों ने वहाँ खूब लूट-मार की और इंका – साम्राज्य पर अधिकार कर लिया।

(iii) अगले पाँच वर्षों में स्पेन के लोगों ने पोटोसी, ऊपरी पेरू आदि की खानों में चाँदी के विशाल भण्डारों का पता लगा लिया और उन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को गुलाम बना लिया।

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8. कैब्राल और ब्राजील –
(i) 1500 ई. में पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल जहाज लेकर भारत के लिए रवाना हुआ, परन्तु वह ब्राजील पहुँच गया। ब्राजील इमारती लकड़ी के लिए प्रसिद्ध था। इमारती लकड़ी के व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों में भयंकर लड़ाइयाँ हुईं। इनमें अन्ततः पुर्तगालियों की विजय हुई 1534 में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवंशिक कप्तानियों में बाँट दिया। उन्हें स्थानीय लोगों को गुलाम बनाने का अधिकार भी दे दिया।

(ii) 1540 में पुर्तगालियों ने बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना और चीनी बनाने के लिए मिलें चलाना शुरू कर दिया। मिल मालिकों ने स्थानीय लोगों को गुलाम बनाना शुरू कर दिया। इस पर स्थानीय लोग गाँव छोड़ कर जंगलों की ओर भागने
लगे।

(iii) 1549 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औपचारिक सरकार स्थापित की गई। इस समय तक जेसुइट पादरी ब्राजील पहुँचने लगे। यूरोपीय लोग इन जेसुइट पादरियों को पसन्द नहीं करते थे क्योंकि वे मूल निवासियों के साथ दया का बर्ताव करने की सलाह देते थे। वे दास प्रथा की कटु आलोचना करते थे।

9. विजय, उपनिवेश और दास व्यापार – अमरीका की खोज के अनेक दीर्घकालीन परिणाम निकले –
(i) सोने-चाँदी की बाढ़ ने अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण का और अधिक विस्तार किया। 1560 से 1600 तक सैकड़ों जहाज हर वर्ष दक्षिणी अमेरिका की खानों से चाँदी स्पेन को लाते रहे।

(ii) इंग्लैण्ड, फ्रांस, बेल्जियम, हालैण्ड आदि देशों के व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूँजी कम्पनियाँ बनाईं। अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए और उपनिवेश स्थापित किये।

(iii) यूरोपवासी नई दुनिया में पैदा होने वाली नई-नई चीजों, जैसे- आलू, तम्बाकू, गन्ने की चीनी, रबड़ आदि से परिचित हुए।

(iv) मार-काट के कारण उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई, उनकी जीवन-शैली नष्ट हो गई और उन्हें गुलाम बनाकर खानों, बागानों, कारखानों में उनसे काम लिया जाने लगा।

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(v) अब नई-नई आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गईं। सोने की खोज के बाद खानों का काम जोरों से चल पड़ा। अफ्रीका से गुलाम बड़ी संख्या में मँगाए गए। 1550 के दशक से 1880 के दशक तक ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी गुलामों का आयात किया गया। परन्तु यह अमरीकी महाद्वीपों में आयातित अफ्रीकी गुलामों की संख्या का लगभग आधा था।

तिथि यूरोपवासियों द्वारा समुद्री यात्राएँ –
1492 कोलम्बस ने बहामा द्वीप – समूह और क्यूबा पर स्पेन की दावेदारी की।
1494 ‘अनखोजी दुनिया’ का पुर्तगाल और स्पेन के बीच बँटवारा हुआ।
1497 एक अंग्रेजी यात्री जॉन कैबोट ने उत्तरी अमरीका के समुद्रतट की खोज की।
1498 वास्कोडिगामा कालीकट / कोझीकोड पहुँचा।
1499 अमेरिगो वेस्पुसी ने दक्षिणी अमरीका के समुद्र तट को देखा।
1500 कैब्राल ने ब्राजील पर पुर्तगाल की दावेदारी की।
1513 बालबोआ ने पनामा इस्थमस को पार किया और प्रशान्त महासागर को देखा।
1521 कोर्टेस ने ऐजटक लोगों को पराजित किया।
1522 स्पेनवासी मैगलन ने जहाज में बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाया।
1532 पिजारो ने इंका राज्य को जीता।
1571 स्पेन के सैनिकों ने फिलिपीन्स को जीता।
1600 ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई।
1602 डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई।

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