JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

Jharkhand Board JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास Important Questions and Answers.

JAC Board Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न-दिए गए चार वैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर चुनकर लिखो

1. विकास का अर्थ है
(A) गुणात्मक परिवर्तन
(B) ऋणात्मक परिवर्तन
(C) गुणों में कमी
(D) साधारण परिवर्तन।
उत्तर:
(A) गुणात्मक परिवर्तन

2. आरम्भिक काल में विकास के माप का क्या मापदण्ड था ?
(A) औद्योगिक विकास
(B) कृषि विकास
(C) आर्थिक विकास
(D) जनसंख्या वृद्धि।
उत्तर:
(C) आर्थिक विकास

3. मानवीय विकास का कौन-सा अंग नहीं है ?
(A) अवसर
(B) स्वतन्त्रता
(C) स्वास्थ्य
(D) लोगों की संख्या।
उत्तर:
(D) लोगों की संख्या।

4. मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन कब किया गया ?
(A) 1980
(B) 1985
(C) 1990
(D) 1995.
उत्तर:
(C) 1990

5. मानव विकास का कौन-सा मूल बिन्दु नहीं है ?
(A) संसाधनों तक पहुंच
(B) उत्तम स्वास्थ्य
(C) शिक्षा
(D) उद्योग।
उत्तर:
(D) उद्योग।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

6. समता की राह में कौन-सी बाधा नहीं है ?
(A) लिंग
(B) प्रजाति
(C) जाति
(D) स्वतन्त्रता।
उत्तर:
(D) स्वतन्त्रता।

7. कितने देशों का उच्च विकास सूचकांक है ?
(A) 37
(B) 47
(C) 57
(D) 67
उत्तर:
(C) 57

8. कितने देशों में निम्न सूचकांक है ?
(A) 12
(B) 22
(C) 32
(D) 42.
उत्तर:
(C) 32

9. उच्च विकास सूचकांक का स्कोर क्या है ?
(A) 0.6 से ऊपर
(B) 0.7 से ऊपर
(C) 0.8 से ऊपर
(D) 0.9 से ऊपर।
उत्तर:
(C) 0.8 से ऊपर

10. भारत का सन् 2003 के अनुसार विश्व में मानव सूचकांक के आधार पर स्थान है
(A) 107
(B) 117
(C) 126
(D) 137
उत्तर:
(C) 126

11. कौन-सा देश मानव विकास सूचकांक में विश्व में पहले स्थान पर है ?
(A) कनाडा
(B) नार्वे
(C) आइसलैंड
(D) ऑस्ट्रेलिया।
उत्तर:
(D) ऑस्ट्रेलिया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

प्रश्न 1.
समाज के किस वर्ग से मानव विकास की अवधारणा सम्बन्धित है ?
उत्तर:
राष्ट्रों तथा समुदायों से।

प्रश्न 2.
दक्षिण पूर्वी एशिया के दो अर्थशास्त्रियों के नाम लिखो जिन्होंने मानवीय विकास की अवधारणा प्रस्तुत की ?
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक तथा प्रो० अमर्त्य सेन।

प्रश्न 3.
किसने मानव सूचकांक का विचार प्रस्तुत किया ?
उत्तर:
पाकिस्तान के अर्थशास्त्री डॉ० महबूब-उल-हक ने 1990 में।

प्रश्न 4.
धनात्मक वृद्धि से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
जब धनात्मक रूप से गणों में वद्धि होती है। यह वर्तमान दशाओं में वद्धि से होती है।

प्रश्न 5.
विकास का क्या मापदण्ड था ?
उत्तर:
आर्थिक वृद्धि।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 6.
मानव विकास के चार स्तम्भों के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. समता
  2. सतत् पोषणीयता
  3. उत्पादकता
  4. सशक्तिकरण।

प्रश्न 7.
भारत के किस वर्ग के लोगों के बच्चे विद्यालयों से विरत होते हैं ?
उत्तर:
सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग।

प्रश्न 8.
सशक्तिकरण के दो आवश्यक तत्त्व बताओ।
उत्तर:
सुशासन तथा लोकोन्मुखी नीतियां।

प्रश्न 9.
संसाधनों की पहुंच का मापदण्ड बताओ।
उत्तर:
क्रय शक्ति एवं मानव ज्ञान शक्ति।

प्रश्न 10.
ILO को विस्तृत करो।
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour or Organisation)।

प्रश्न 11.
UNDP को विस्तत करो।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme)।

प्रश्न 12.
GNH को विस्तृत करो।
उत्तर:
सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (Gross National Happiness)।

प्रश्न 13.
किस देश ने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता की अवधारणा प्रस्तुत की ?
उत्तर;
भूटान।

प्रश्न 14.
कितने देशों में उच्च मानवीय विकास सूचकांक है ?
उत्तर:

प्रश्न 15.
भारत का विश्व में सन् 2005 के अनुसार मानव विकास सूचकांक में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर:
126.

प्रश्न 16.
सन् 2018 की मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट में भारत का क्या स्थान है ?
उत्तर:
130 वां।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
विकास से क्या अभिप्राय है ? इसके तीन मूल बिन्दु बताओ।
उत्तर:
विकास का अर्थ है गुणात्मक परिवर्तन। इसके तीन मूल बिन्दु हैं –
(1) लोगों के जीवन की गुणवत्ता
(2) अवसरों तक पहुंच
(3) लोगों की स्वतन्त्रता।

प्रश्न 2.
डॉ० हक द्वारा प्रस्तुत मानव विकास अवधारणा का वर्णन करो।
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक के अनुसार मानव विकास लोगों के उत्तम जीवन के विकल्पों में वृद्धि करता है तथा उनके जीवन में सुधार लाता है। सभी प्रकार के विकास का केन्द्र बिन्दु मानव है। इनके विकल्प स्थिर नहीं हैं बल्कि परिवर्तनशील हैं। विकास का मूल उद्देश्य सभी दशाओं को उत्पन्न करना है जिसमें लोग सार्थक जीवन व्यतीत कर सकते हैं। लोग स्वस्थ हों, अपने विवेक और बुद्धि का विकास कर सके तथा अपने उद्देश्य को पूरा करने में स्वतन्त्र हों।

प्रश्न 3.
एक सार्थक जीवन की प्रमुख विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
सार्थक जीवन की प्रमुख विशेषताएं हैं –

  1. दीर्घ तथा स्वस्थ जीवन
  2. ज्ञान में वृद्धि
  3. एक सार्थक जीवन के पर्याप्त साधन।
  4. संसाधनों तक पहुंच।

प्रश्न 4.
कुछ लोगों में आधारभूत विकल्पों को तय करने की क्षमता और स्वतन्त्रता नहीं होती। क्यों ?
उत्तर:
कुछ लोगों में क्षमता तथा स्वतन्त्रता नहीं होती कि वह अपने विकल्प तय कर सकें क्योंकि

  1. उनमें ज्ञान प्राप्त करने की अक्षमता
  2. भौतिक निर्धनता
  3. सामाजिक भेदभाव
  4. संस्थाओं की अक्षमता।

उदाहरण:
एक अशिक्षित बच्चा डॉक्टर बनने का विकल्प नहीं चुन सकता। एक निर्धन बीमारी के लिए चिकित्सा उपचार नहीं चुन सकता क्योंकि उसके संसाधन कम होते हैं।

प्रश्न 5.
प्रो० अमर्त्य सेन के अनुसार मानव विकास की अवधारणा क्या है ?
उत्तर:
अमर्त्य सेन ने विकास का मुख्य ध्येय स्वतन्त्रता में वृद्धि के रूप में देखा। स्वतन्त्रता में वृद्धि ही विकास लाने वाला सर्वाधिक प्रभावशाली माध्यम है। इनका कार्य स्वतन्त्रता की वृद्धि में सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं तथा प्रक्रियाओं की भूमिका का अन्वेषण करता है।

प्रश्न 6.
वृद्धि और विकास में अन्तर स्पष्ट करो।
उत्तर:
वृद्धि और विकास दोनों समय के संदर्भ में परिवर्तन को प्रकट करते हैं। वृद्धि मात्रात्मक तथा मूल्य निरपेक्ष है। यह धनात्मक तथा ऋणात्मक दोनों हैं। इसमें वृद्धि तथा ह्रास दोनों हो सकते हैं। विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तन है। यह मूल्य सापेक्ष होता है। विकास का अर्थ है वर्तमान दशाओं में वृद्धि का होना। विकास का अर्थ है सकारात्मक वृद्धि।

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प्रश्न 7.
सार्थक जीवन की विशेषताएं बताओ।
उत्तर:
सार्थक जीवन केवल दीर्घ नहीं होता। जीवन का कोई उद्देश्य होना आवश्यक है।

  1. लोग स्वस्थ हो।
  2. लोग अपने विवेक और बुद्धि का विकास कर सके।
  3. वे समाज में प्रतिभागिता करें।
  4. अपने उद्देश्य की पूर्ति में स्वतन्त्र हों।

प्रश्न 8.
समता से क्या अभिप्राय है ? इसकी आपूर्ति में क्या रुकावटें हैं ?
उत्तर:
समता का अर्थ है सबको समान अवसर उपलब्ध कराना। यह अवसर समान हों। परन्तु इसके मार्ग में कई अवरोध हैं। जैसे

  1. लिंग
  2. प्रजाति
  3. आय
  4. जाति।

प्रश्न 9.
सतत पोषणीयता का अर्थ क्या है ? इसके लिए किन-किन साधनों का उपयोग आवश्यक है ?
उत्तर:
सतत पोषणीयता का अर्थ है अवसरों में निरन्तरता रखना। प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर प्राप्त हों। इसके लिए निम्न संसाधनों का उपयोग आवश्यक है –

  1. पर्यावरणीय संसाधन
  2. वित्तीय संसाधन
  3. मानव संसाधन।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
उत्पादकता से क्या अभिप्राय है ? इसमें किस प्रकार वृद्धि की जा सकती है ?
उत्तर:
उत्पादकता का अर्थ है मानव श्रम सेवाओं या सामग्री द्वारा उत्पादन करना अथवा मानव कार्य के सन्दर्भ में उत्पादन क्षमता को बढ़ाना। इसमें वृद्धि करने के उपाय हैं –

  1. लोगों में क्षमताओं का निर्माण करना
  2. लोगों के ज्ञान में वृद्धि करना
  3. बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करके
  4. कार्यक्षमता बेहतर करके।

प्रश्न 2.
सशक्तिकरण से क्या अभिप्राय है ? लोगों को कैसे सशक्त किया जा सकता है ?
उत्तर:
सशक्तिकरण का अर्थ है-अपने विकल्प चुनने के लिए शक्ति प्राप्त करना। ऐसी शक्ति से स्वतन्त्रता और क्षमता बढ़ती है। लोगों को सशक्त करने के उपाय हैं –

  1. सुशासन
  2. लोकोन्मुखी नीतियां
  3. बढ़ती स्वतन्त्रता
  4. बढ़ती क्षमता।

प्रश्न 3.
मानव विकास के चार उपागम बताओ।
उत्तर:

  1. आय उपागम
  2. कल्याण उपागम
  3. आधारभूत आवश्यकता उपागम
  4. क्षमता उपागम।

प्रश्न 4.
Human Development Index (HDI) किन तत्त्वों द्वारा मापा जाता है ? इसका स्कोर क्या है ?
उत्तर:
HDI के मूल सूचक हैं –

  1. स्वास्थ्य
  2. शिक्षा
  3. संसाधनों तक पहुंच इसका स्कोर 0-1 तक है।

प्रश्न 5.
Human Development Index (HDI) सर्वाधिक विश्वसनीय माप नहीं है। क्यों ?
उत्तर:

  1. यह मानव ग़रीबी का सही मापक नहीं है।
  2. यह बिना आय वाला माप है।
  3. प्रौढ़ निरक्षरता तथा ग़रीबी सूचकांक मानव विकास का अधिक उद्घाटित करने वाला है।

प्रश्न 6.
सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) से क्या अभिप्राय है ? इसके प्रमुख तत्त्व बताओ।
उत्तर:
भूटान विश्व में अकेला देश है जिसमें (GNH) की अवधारणा प्रस्तुत की जोकि विकास का मापक है। प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं होती। (GNH) हमें विकास के आध्यात्मिक, भौतिकता, गुणात्मक पक्षों के सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 7.
मानव विकास के मापन के तीन प्रमुख क्षेत्रों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास के मापन के क्षेत्र
1. स्वास्थ्य- यह सूचक जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को दर्शाता है। विश्व की औसत जीवन प्रत्याशा 65 वर्ष है।
2. शिक्षा-प्रौढ़ साक्षरता दर पढ़ और लिख सकने वाले व वयस्कों की संख्या और विद्यालयों में नामांकित बच्चों की संख्या दर्शाती है।
3. संसाधनों तक पहुंच को क्रय शक्ति तथा प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में मापा जाता है।

निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
मानवीय विकास से क्या अभिप्राय है? इस विचारधारा को प्रष्ट करो। मानवीय विकास के निर्धारकों का वर्णन करो।
उत्तर:
मानवीय विकास (Human Development):
विकास एक प्रगतिशील विचारधारा है। यह किसी प्रदेश के संसाधनों के विकास के लिए अधिकतम शोषण की प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी प्रदेश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इस सन्दर्भ में भूगोल वेत्ता विकसित देशों तथा विकासशील देशों के शब्द प्रयोग करते हैं। मानव भूतल पर सर्वोत्तम प्राणी है। मानव ने भूतल पर अनेक परिवर्तन किए हैं। विज्ञान, शिक्षा तथा प्रौद्योगिकी में बहुत विकास हुआ है।

फिर भी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक क्षेत्र में अन्तर-प्रादेशिक विभिन्नताएं पाई जाती हैं। विकास से अभिप्राय एक ऐसे वातावरण की रचना करना है जिसमें प्रत्येक शिशु को शिक्षा प्राप्त हो, कोई भी मानव स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न हो, जहां प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं को पूरा कर प्रयोग कर सके। मानवीय विकास के सूचक (Indicators of Human Development) विश्व बैंक प्रति वर्ष विश्व विकास करके प्रस्तुत करता है।

इसमें उत्पादन, खपत, मांग, ऊर्जा, वित्त, व्यापार, जनसंख्या वृद्धि, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के 177 देशों के आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं। यह रिपोर्ट कुछ सूचकों पर आधारित होती है। मानवीय विकास के तीन मूल घटक हैं –
(1) जीवन अवधि
(2) ज्ञान
(3) रहन-सहन का स्तर।

सन् 2018 में भारत का विश्व में मानवीय विकास में 130वां स्थान है जबकि नार्वे का पहला स्थान है। मानवीय विकास के प्रमुख सूचक निम्नलिखित हैं –
(1) जन्म पर जीवन अवधि
(2) साक्षरता
(3) प्रति व्यक्ति आय
(4) जनसंख्यात्मक विशेषताएं जैसे कि शिशु मृत्यु-दर, प्राकृतिक वृद्धि दर, आयु वर्ग आदि।

1.जन्म पर जीवन अवधि (Life expectancy at Birth):
जीवन अवधि से अभिप्राय है कि एक नवजात शिश के कितने वर्ष तक जीने की आशा है। यह विभिन्न देशों में विभिन्न है। विकसित तथा विकासशील देशों के लोगों की जीवन अवधि में अन्तर मिलते हैं। विश्व में औसत रूप से यह आयु 65 वर्ष है। उत्तरी अमेरिका में जीवन अवधि 77 वर्ष है जो कि सबसे अधिक है।

अफ्रीका में सबसे कम जीवन अवधि 54 वर्ष है। विकसित देशों में शिक्षा, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा तथा रहन-सहन स्तर अधिक होने से जीवन अवधि अधिक है। भारत में यह 69 वर्ष हैं। विकासशील देशों में कम जीवन अवधि, बीमारियों, अशिक्षा, बेकारी तथा निर्धनता के कारण हैं। विकसित देशों में सीनीयर नागरिकों का प्रतिशत अधिक है जबकि विकासशील देशों में 65 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों की संख्या कम है।

2. साक्षरता (Literacy):
किसी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक विकास का साक्षरता एक विश्वसनीय तथा महत्त्वपूर्ण सूचक है। निर्धनता को दूर करने के लिए साक्षरता अनिवार्य है। साक्षरता जनसांख्यिकीय विशेषताओं जैसे जन्म-दर, मृत्यु-दर, व्यवसाय आदि पर प्रभाव डालती है। विकसित देशों में साक्षरता दर 90% से अधिक है जबकि विकासशील देशों में साक्षरता दर 60% से भी कम है। अधिकतर विकासशील देशों में स्त्रियों की साक्षरता दर कम है तथा समाज में स्त्रियों का स्थान निम्न है। स्त्रियों के लिए रोज़गार के अवसर भी कम हैं। भारत में स्त्रियों की साक्षरता दर 54% है जबकि पुरुषों की साक्षरता दर 75% है।

3. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income):
किसी देश में प्रति व्यक्ति आय के मापदण्ड GDP तथा GNP मानवीय विकास के प्रमुख सूचक हैं। उच्च प्रति व्यक्ति आय के कारण देश में अधिक विकास होता है। विकसित देशों में श्रमिक विकासशील देशों के श्रमिकों की अपेक्षा अधिक कमाते हैं। यूरोप के कई देशों में GDP का मूल्य $2000 अधिक है जबकि एशिया तथा अफ्रीका के कई देशों में यह मूल्य $100 से भी कम है। विकासशील देशों में कम GDP मूल्य के कारण वस्तु-उत्पादन निम्न है तथा सेवाएं कम प्राप्त हैं।

4. जनसांख्यिकीय विशेषताएं (Demographic Characteristics):
किसी देश के जनसांख्यिकीय लक्षणों पर देश के आर्थिक विकास का विशेष प्रभाव पड़ता है। इसीलिए विकसित तथा विकासशील देशों की जनसंख्या में विशेष अन्तर पाए जाते हैं।
(क) शिशु मृत्यु दर विकासशील देशों में अधिक होती है। लोगों को भोजन तथा दवाइयों की प्राप्ति नहीं होती। कम साक्षरता दर भी एक कारण है।
(ख) जनसंख्या वृद्धि दर-जन्म-दर तथा मृत्यु-दर में अन्तर के कारण जनसंख्या वृद्धि दर भी विकासशील देशों में अधिक होती है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। अफ्रीका के देशों में जन्म-दर 40 प्रति हजार से भी अधिक है। जबकि विकसित देशों में जन्म-दर 10 प्रति हज़ार से भी कम है।
(ग) आयु वर्ग (Age Group)-विकासशील देशों तथा विकसित देशों के आयु वर्गों में भी अन्तर मिलता है। विकासशील देशों में आश्रित वर्ग (बच्चों) का अनुपात अधिक होता है। परन्तु विकसित देशों में आश्रित वर्ग की जनसंख्या कम होती है। – इस प्रकार उपरोक्त कारकों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि विश्व में मानवीय विकास असमान है।

इससे विभिन्न प्रकार के समाज तथा आर्थिकता का जन्म होता है, इसलिए दो प्रकार देश पाए जाते हैं –
(1) विकसित देश
(2) विकासशील देश।

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प्रश्न 2.
प्रवास से क्या अभिप्राय है ? इसके क्या कारण हैं ? इसके विभिन्न प्रकार बताओ।
उत्तर:
प्रवास (Migration):
जनसंख्या की गतिशीलता का एक महत्त्वपूर्ण घटक प्रवास है। यह जनसंख्या तथा संसाधनों में एक सन्तुलन स्थापित करने का प्रयत्न है। सामान्यतः प्रवास मानव को अपने निवास स्थान से किसी दूसरे स्थान पर जा कर निवास करने से होता है। प्रजननता (Fertility) तथा मृत्यु क्रम (Motality) की अपेक्षा जनसंख्या संरचना में प्रवास का महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्रवास स्थायी अथवा अस्थाई हो सकता है।

प्रवास की धाराएं (Streams of Migration):
प्रवास के निम्नलिखित प्रकार हैं –

  1. ग्रामों से नगर की ओर।
  2. नगर से ग्राम की ओर।
  3. ग्राम से ग्राम की ओर।
  4. नगर से नगर की ओर।

इसके अतिरिक्त प्रवास के सामान्य प्रकार अग्रलिखित हैं –
1. मौसमी प्रवास (Seasonal Migration):
अस्थायी प्रवास मौसमी होता है। गहन कृषि में श्रमिकों की आवश्यकता के लिए श्रमिक प्रवास कर जाते हैं। कई बार एक मौसम से अधिक समय के प्रवास स्थायी रूप धारण कर लेता है।

2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास (International IvMigration):
यह प्रवास अन्तर्राष्ट्रीय होता है। यह थोड़े समय में जनसंख्या संरचना में परिवर्तन कर देता है। पिछले दशकों में अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास में बहुत वृद्धि हुई है। युद्धों के कारण कई क्षेत्रों में शरणार्थी प्रवास कर रहे हैं। इस शताब्दी के शुरू में U.N.O. के अनुसार 12 करोड़ लोग विदेशों में बस गए हैं जिनमें 1.5 करोड़ शरणार्थी हैं।

3. आन्तरिक प्रवास (Internal Migration):
यह प्रवास व्यापक रूप से होता है। लाखों लोग ग्राम रोज़गार की तलाश में प्रवास करते हैं। यह आकर्षक कारक (Pull Factors) तथा प्रत्याकर्षक कारकों (Push factors) द्वारा होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता, बेरोजगारी, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं जहाँ उच्च वेतन. सस्ती भमि. रहन-सहन तथा विकास की उच्च सेवाएं प्राप्त होती हैं। नगरों में कई झुग्गी-झोंपड़ी क्षेत्र बन जाते हैं।

4. ग्रामीण प्रवास (Rural Niigatiers):
कई बार एक ग्रामीण क्षेत्र से दूसरे ग्रामीण क्षेत्र में प्रवास होता है जहां उन्नत कृषि होती है तथा नई तकनीकों के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक होता है।

प्रश्न 3.
विकसित तथा विकासशील देशों में विकास की तुलना करो।
उत्तर:

विकासशील देश (Developing Countries) विकसित देश (Developed Countries)
(1) इन देशों में प्रति व्यक्ति आय कम है तथा पूंजी की कमी है। (1) इन देशों में प्रति व्यक्ति आय अधिक है तथा पूंजी सुविधापूर्वक प्राप्त है।
(2) प्राथमिक उद्योग जैसे कृषि वानिकी, खान खोदना, मत्स्यन राष्ट्रीय आर्थिकता में प्रमुख हैं। (2) निर्माण उद्योग प्रमुख हैं।
(3) कृषि में लगभग 70% लोग कार्य करते हैं। (3) लगभग 10% जनसंख्या कृषि में लगी है।
(4) निर्वाह कृषि प्रचलित है जिसमें छोटे-छोटे खेत हैं तथा प्रति हेक्टेयर उपज कम है। (4) व्यापारिक कृछि प्रचलित है, खेतों का आकार बड़ा है तथा उपज अधिक है।
(5) लगभग 80% जनसंख्या ग्रामीण है। (5) 80% जनसंख्या नगरीय है।
(6) जन्म-दर तथा मृत्यु-दर उच्च है, जीवन प्रत्याशा अवधि कम है तथा जनसंख्या वृद्धि दर अधिक (6) जन्म-दर तथा मृत्यु-दर कम है, जीवन प्रत्याशा अवधि अधिक है तथा जनसंख्या वृद्धि दर कम
(7) असन्तुलित भोजन के कारण भुखमरी है। (7) सन्तुलित भोजन प्राप्त है।
(8) बीमारियों की अधिकता है तथा चिकित्सा सुविधाएं कम हैं। (8) उत्तम चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हैं।
(9) आवास की कमी तथा सफ़ाई की कमी के कारण सामाजिक हालत अच्छी नहीं है। (9) सामाजिक हालत अच्छी हैं क्योंकि सफ़ाई तथा आवास सुविधाएं हैं।
(10) शिक्षा की कमी है तथा वैज्ञानिक उन्नति कम है। (10) शिक्षा का अधिक प्रसार है तथा विज्ञान तथा तकनीकी ज्ञान अधिक है।
(11) स्त्रियों को समाज में उत्तम स्थान प्राप्त नहीं है। (11) स्त्रियों तथा पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 4.
मानव विकास के चार स्तम्भों के नाम लिखो। प्रत्येक का उदाहरण सहित वर्णन करें।
उत्तर:
मानव विकास के चार स्तम्भ
(Four Pillars of Human Development)
जिस प्रकार किसी इमारत को स्तम्भों का सहारा होता है उसी प्रकार मानव विकास का विचार भी
(1) समता
(2) सतत् पोषणीयता
(3) उत्पादकता और
(4) सशक्तिकरण की संकल्पनाओं पर आश्रित है।

1. समता (Equity):
समता का आशय प्रत्येक व्यक्ति को उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुंच की व्यवस्था करना है। लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग, प्रजाति, आय और भारत के सन्दर्भ में जाति के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिए।
उदाहरण:
भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों के व्यक्ति बड़ी संख्या में विद्यालय से विरत होते हैं।

2. सतत् पोषणीयता (Sustainability):
सतत् पोषणीय मानव विकास के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिले। समस्त पर्यावरणीय वित्तीय एवं मानव संसाधनों का उपयोग भविष्य को ध्यान में रख कर करना चाहिए। निर्वहन का अर्थ है अवसरों की उपलब्धता में निरन्तरता। इन संसाधनों में से किसी भी एक का दुरुपयोग भावी पीढ़ियों के लिए अवसरों को कम करेगा।
उदाहरण:
बालिकाओं का विद्यालय भेजा जाना एक अच्छा उदाहरण है।

3. उत्पादकता (Productivity):
यहाँ उत्पादकता का अर्थ मानव श्रम द्वारा अवसरों का उत्पादन अथवा मानव कार्य के सन्दर्भ में सेवा अथवा सामग्री का उत्पादन है। लोगों में क्षमताओं का निर्माण करके ऐसी उत्पादकता में निरन्तर वद्धि की जानी चाहिए। अंतत: जन-समदाय ही राष्ट्रों के वास्तविक धन होते हैं। इस प्रकार उनके ज्ञान को बढ़ाने के प्रयास अथवा उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में उनकी कार्यक्षमता बेहतर होगी।

4. सशक्तिकरण (Empowerment):
सशक्तिकरण का अर्थ है-अपने विकल्प चुनने के लिए शक्ति प्राप्त करना। ऐसी शक्ति बढ़ती हुई स्वतन्त्रता और क्षमता से आती है। लोगों को सशक्त करने के लिए सुशासन एवं लोकोन्मुखी नीतियों की आवश्यकता होती है। सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए समूहों के सशक्तिकरण का विशेष महत्त्व है।

प्रश्न 5.
मानव विकास के विभिन्न उपागमों का वर्णन करो।
उत्तर:
मानव विकास के उपागम-मानवक विकास की समस्या को देखने के अनेक ढंग हैं।

कुछ महत्त्वपूर्ण उपागम हैं –
(क) आय उपागम
(ख) कल्याण उपागम
(ग) न्यूनतम आवश्यकता उपागम
(घ) क्षमता उपागम।
मानव विकास का मापन-मानव विकास सूचकांक (HDI) स्वास्थ्य, शिक्षा और संसाधनों तक पहुंच जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है जो एक देश, मानव विकास के महत्त्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकार्ड से प्राप्त करता है।

JAC Class 12 Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

मानव विकास के सूचक (Indicators):
(1) जन्म के समय जीवन-प्रत्याशा।
(2) प्रौढ़ साक्षरता दर और सकल नामांकन अनुपात ज्ञान तक पहुँच को प्रदर्शित करते हैं।
(3) संसाधनों तक पहुंच को क्रय शक्ति के सन्दर्भ में मापा जाता है।

इनमें से प्रत्येक आयाम को 1/3 भारिता दी जाती है। मानव विकास सूचकांक इन सभी आयामों को दिए गए भारों का कुल योग होता है। स्कोर, 1 के जितना निकट होता है मानव विकास का स्तर उतना ही अधिक होता है। इस प्रकार 0.983 का स्कोर अति उच्च स्तर का जबकि 0.268 मानव विकास का अत्यन्त निम्न स्तर का माना जाएगा।

मानव विकास के उपागम
(Approaches of Human Development):

(i) आय उपागम (Income Approach):
यह मानव विकास के सबसे पुराने उपागमों में से एक है। इसमें मानव विकास को आय के साथ जोड़ कर देखा जाता है। विचार यह है कि आय का स्तर किसी व्यक्ति द्वारा भोगी जा रही स्वतन्त्रता के स्तर को परिलक्षित करता है। आय का स्तर ऊँचा होने पर, मानव विकास का स्तर भी ऊंचा होगा।

(ii) कल्याण उपागम (Welfare Approach):
यह उपागम मानव को लाभार्थी अथवा सभी विकासात्मक गतिविधियों के लक्ष्य के रूप में देखता है। यह उपागम शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर उच्चतर सरकारी व्यय का तर्क देता है। लोग विकास में प्रतिभोगी नहीं हैं किन्तु वे केवल निष्क्रिय प्राप्तकर्ता हैं। सरकार कल्याण पर अधिकतम व्यय करके मानव विकास के स्तरों में वृद्धि करने के लिए जिम्मेदार है।

(iii) आधारभूत आवश्यकता उपागम (Basic Needs Approach):
इस उपागम को मूल रूप से अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित किया था। इसमें छ: न्यूनतम आवश्यकताओं जैसे-स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति, स्वच्छता और आवास की पहचान की गई थी। इसमें मानव विकल्पों के प्रश्न की उपेक्षा की गई है और पारिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

(iv) क्षमता उपागम (Capability Approach);
इस उपागम का सम्बन्ध प्रो० अमर्त्य सेन से है। संसाधनों तक पहुँच के क्षेत्रों में मानव क्षमताओं का निर्माण बढ़ते मानव विकास की कुंजी है।

प्रश्न 6.
मानव विकास सूचकांक का वितरण उच्च, मध्य तथा निम्न मूल्य के आधार पर करो।
उत्तर:
प्रदेश देश के आकार और प्रति व्यक्ति आय का मानव विकास से प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है। प्रायः मानव विकास में बड़े देशों की अपेक्षा छोटे देशों का कार्य बेहतर रहा है। इसी प्रकार मानव विकास में अपेक्षाकृत निर्धन राष्ट्रों का कोटि-क्रम धनी पड़ोसियों से ऊँचा रहा है।
उदाहरण:
अपेक्षाकृत छोटी अर्थव्यवस्थाएँ होते हुए भी श्रीलंका, ट्रिनिडाड और टोबैगो का मानव विकास सूचकांक भारत से ऊँचा है। इसी प्रकार कम प्रति व्यक्ति आय के बावजूद मानव विकास में केरल का प्रदर्शन पंजाब और गुजरात से कहीं बेहतर है।

वितरण (Distribution):
अर्जित मानव विकास स्कोर के आधार पर देशों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
मानव विकास : संवर्ग, मानदण्ड और देश-2005

मानव विकास
का स्तर
मानव विकास
सूचकांक का स्कोर
देशों की
संख्या
उच्च 0.8 से ऊपर 57
मध्यम 0.5 से 0.799 के बीच 88
निम्न 0.5 से नीचे 32

(क) उच्च मानव विकास सूचकांक मूल्य वाले देश-उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देश वे हैं जिनका स्कोर.0.8 से ऊपर है। मानव विकास प्रतिवेदन 2005 के अनुसार इस वर्ग में 57 देश सम्मिलित हैं।
सर्वाधिक उच्च मूल्य सूचकांक वाले 10 देश-2005

क्रम सं० देश
1 नार्वे
2 आइसलैंड
3 ऑस्ट्रेलिया
4 लक्ज़मबर्ग
5 कनाडा
6 स्वीडन
7 स्विट्ज़रलैंड
8 आयरलैण्ड
9 बेल्जियम
10 संयुक्त राष्ट्र।

कारण:

  1. शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
  2. उच्च मानव विकास वाले देशों में सामाजिक खंड में बहुत निवेश हुआ है।
  3. यहां सुशासन है।

(ख) मध्यम मानव विकास सूचकांक मूल्य. वाले देश-मानव विकास में मध्यम स्तरों वाले देशों का वर्ग विशाल है। इस वर्ग में कुल 88 देश हैं।
कारण:

  1. इस वर्ग के अधिकतर देश विकासशील देश हैं।
  2. कुछ देश पूर्वकालीन उपनिवेश थे।
  3. अनेक देशों का विकास 1990 ई० में तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् हुआ।
  4. इन देशों में लोकोन्मुखी नीतियां हैं तथा सामाजिक भेदभाव नहीं।
  5. इन देशों में सामाजिक विविधता अधिक है।
  6. अधिकतर देशों को राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक विद्रोह का सामना करना पड़ा है।

(ग) निम्न मानव विकास सूचकांक वाले देश-इस वर्ग में 32 देश हैं।
कारण:

  1. अधिकतर छोटे-छोटे देश हैं।
  2. इन देशों में राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध, सामाजिक स्थिरता, अकाल तथा बीमारियां होती रही हैं। इन देशों में . मानव विकास को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
  3. निम्न स्तर के लिए संस्कृति या धर्म या समुदाय को दोष देना ग़लत है।
  4. निम्न स्तर वाले देशों में सुरक्षा पर अधिक व्यय होता है।

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